Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 117 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

नयना : (मुस्कुराते) बेटा.. ये मेरी बेटी हे.. नेहा.. उनकी सादी होगइ हे.. वो ओर उनके पतीके साथ केनेडामे रहेती हे.. पती पत्नी दोनो सोफ्टवेर इन्जीनीयर हे.. ओर केनेडामे खुदकी फार्म चलाते हे..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन आंटी येतो बीलकुल भावुकी हम सकल हे.. जैसे दोनो जुडवा बहेने हो.. हें..हें..हें..

नयना : (थोडी जेंपते बातको सम्हालते) हें..हें..हें.. इन्होने भी मेरा दुध पीया हे.. कभी कभी होता हेना कुदरतका करीस्मा.. नेहा नाम हे इनका.. वो ओर भावीका बचपनमे खुब साथ खेले हे.. जब ये होस्टेल चली गइ.. तब मुजसे लीपटकर खुब रोइ थी.. बचपनसे ही दोनो अ‍ेक जैसी दीखती हे.. मेभी कभी कभी धोखा खा जाती थी.. हें..हें..हें..

पंकजभाइ : (मुस्कुराते) हां लखनजी.. डीनरके बाद बात करवाता हु उनसे.. वोभी भावु बीटीयाके बारेमे कइ बार पुछ चुकी हे.. दोनो बचनकी खास सहेलीया जो थी..

कहातो भावीका भी तसवीरको देखती हे.. देखते ही चोंक जाती हे.. जो हुबहु उनकी सकलकी हे.. भावीकाको बचपनकी धुंधली याद आती हे.. जो उनके मम्मी पापा उसे होस्टेलमे छोडने जा रहे थे तब अ‍ेक लडकी अपनी मम्मीसे लीपटकर उसे रोकनेके लीये कहेते रो रही थी.. भावीका अ‍ेक नजरसे देखती रही..

याद आतेही भावीकाकी आंख गीली हो जाती हे.. ओर वो आंसु पोछती हे.. फीर सबने मीलकर डीनर कीया.. तब पंकजभाइ अपनी बीवीको लखनके बारेमे उनके खानदानके बारेमे बताते रहे.. जीसे सुनकर नयना भी लखनको अपने दामादके रुपमे देखते गर्वातीत महेसुस करती हे..

फीर सबलोग सोफेपे बैठ गये.. तो पंकजभाइने अपना मोबाइल टीवीसे कनेक्ट कीया.. ओर अपनी बेटी नेहाको वीडीयो कोल कीया.. जैसे ही नेहाने भावीकाको देखा उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. फीर सबने उनके साथ बातकी.. तब नेहाने भावीकाको अपने पतीके साथ केनेडा आनेका बहुत आग्रह कीया..

ओर वो जब भारत आयेगी तब उनको मीलनेका वादा कीया.. फीर कुछ देर बाते करते लखन ओर भावीका वहासे नीकलने लगे.. तब नयना बार बार भावीकाको फीरसे घरपे आनेका आग्रह करती रही.. फीर लखन ओर भावीका देर रात वापस घरपे आगये..

इस रात लखनने फीरसे सृती राधीका भावीका ओर नीलमको संतुस्ट कीया.. तो नीलम अपनी बारी खतम करके अपने रुममे चली गइ.. ताकी चंदाको पता ना चले.. आखीरमे सृतीकी कुटाइ होने लगी.. तब बीचमे ही सृती लखनको अपने उपरसे हटाके मुहपे हाथ रखते बाथरुममे चली गइ..

तो साथमे भावीका भी मनमे खुस होते पीछे चली गइ.. देखा तो सृती उल्टीया कर रही थी.. फीब अपना मुह साफ करते दोनो बहार आगइ तो सृतीके चहेरेपे कुछ अलगही चमक थी.. वो सरमाकर मुस्कुराते लखनकी बाहोमे समा गइ.. फीर सब लोग सोगये..

सुबह जब सृती जागी तो अ‍ेक टेस्ट कीट लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर उसने अपनी प्राइमरी प्रेगनन्सी टेस्ट कीया.. तो रीजल्ट पोजीटीव देखकर खुसीके बारेमे बाथरुममे उछलने लगी.. ओर उसने बहार आकर ये बात भावीकाको बताइ.. ओर भावीकाने चाइ नास्तेके वक्त सबको बताया..

तो लखन खुसीके मारे सृतीको गोदमे उठालेता हे.. ओर घरमे दोडने लगा.. घरपे सबलोग खुस होते हसने लगे.. ओर भावीकाने फोन करके ये बात पुनमको बताइ.. तो मंजुके जानेके बाद फीरसे घरमे खुसीओकी बहार आगइ.. फीर सृती ओर भावीका क्लीनीकपे चली गइ..

वहा भावीकाने कायदेसे सृतीको चेक करके प्रेगनेन्ट होनेकी पुष्टीकी.. तभी अनायास भावीकाने भी खुदको सृतीको टेस्ट करनेको कहा.. ओर रीजल्ट देखकर भावीकाकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. क्युकी वोभी लखनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर ये बात हवेलीपे भी सबको पता चल गइ..

तो पुनमने इस सेटरडे सन्डेको सबको सेलीब्रेट करनेके लीये हवेलीपे बुला लीया.. ओर सृतीसे फोनपे अकेलेमे बात करली.. ओर पुनमने गांवमे भी देवायतकी सभी बीवीया.. ओर लखनके दोस्तके परीवारको हवेलीपे बुला लीया.. ओर साथमे भानुके परीवारको भी न्योता दीया..

तो सेटरडे सुबह ही सबलोग गांव जानेके लीये तैयार होगये.. सबलोग वहेली सुबह ही घरको ताला लगाकर नीकल गये.. चंदा वीजयको लेकर आगे लखनके पास ही बैठ गइ.. रास्तेपे लखनने कारको जंगलकी ओर जानेदी.. तो सबलोग खुसीसे मुस्कुराने लगे.. लेकीन भावीका आस्चर्यसे सबके सामने देखती रही..

भावीका : (सामने देखते) अरे..? हम लोग इधर कीधर जा रहे हे..? सृती.. क्या हम गांव नही जा रहे..?

सृती : (जोरोसे हसते) कमीनी हम गांव ही जा रहे हे.. तु चुपचाप बैठ.. थोडी देरमे तुजे सब पता चल जायेगा.. हें..हें..हें..

सबलोग भावीकाकी ओर देखकर हसने लगे.. तो भावीका भी मुस्कुराते चीडने लगी.. ओर उसने सृतीकी पीठमे मुका जड दीया.. आखीर सबलोग जंगलके बीच उनके पुर्खोके पुराने मंदीरपे आ गये.. फीर सबने मीलकर वहा कुछ साफ सफाइ करली.. ओर मंदीरमे चले गये..

वहा अगले ही दीन राधीका ओर नीलमने छुपकेसे तैयारीया करली थी.. तो राधीकाने दो फुलोका हार नीकाला.. फीर लखन ओर भावीकाको अ‍ेक अ‍ेक हार थमा दीया.. तो भावीका अभी भी असमजमे सबकी ओर मुस्कुराते देखती रही.. तब सृतीने हसते कहा..

सृती : (हसते) कमीनी सबको देख क्या रही हे..? अब अपने होने वाले पतीको हार पहेनादे.. आज तुम दोनोका गांधर्व विवाह हे..

भावीका : (सरमाकर धीरेसे) क्या..? हमारी सादी..? वो मंजुदीदीने कहा था वो..?

चंदा : (मुस्कुराते) हां वोही सादी.. लखनकी ज्यादातर बीवीओने उनसे अ‍ैसे ही सादी कीहे.. सृतीने भी..

इतना सुनतेही भावीका इमोस्नल होगइ.. उनकी आंख गीली होगइ.. ओर उसने सरमाते लखनको हार पहेना दीया.. तो लखनने भी भावीकाके गलेमे हार डाल दीया.. फीर सृतीने दोनोको सादीकी कसमे खीलवाइ.. ओर आखीरमे लखनने भावीकाको मंगलसुत्र पहेना दीया..





फीर जब उनकी मांग सींदुरसे भरदी.. तब भावीका सृतीसे लीपटकर फुटफुटके रोने लगी.. उसने कभी लखनके साथ सादीकी कल्पना नही कीथी.. ओर जब मंजुने उसे सादीका कहा था तो भावीकाने उसे मजाक समजके हल्केमे लीया था.. आज उनकी सचमे लखनसे सादी होगइ..

भावीका आज बहुत खुस थी.. क्युकी अब उनके गर्भमे पल रहा लखनका बच्चा नाजायज नही कहेलायेगा.. सबलोग वहासे बाबाके आश्रमपे चले गये.. तो बाबा सबको देखकर खुस हो गये.. फीर सृती चंदाने बाबाको भावीकाका परीचय करवाया.. ओर लखनसे सादीकी बात करली..

सृती : (मुस्कुराते) बाबा.. आज इस महासयकी अ‍ेक ओर सादी करवादी.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां बेटी.. सही कीया तुमने.. लगता हे तुमने मंजु बीटीया ओर पुनम बीटीयाका काम बखुबी सम्हाल लीया हे.. बहुत अच्छा कर रही हो..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) बाबा.. सब आपहीकी कृपा हे..

बाबा : (चंदाकी ओर देखते) बेटी.. क्या अब तो तुम खुस होनां..?

चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) जी बाबा.. मे बहुत खुस हु.. आपको तो सब पता हे.. क्या मे कुछ गलत तो नही कर रही..?

बाबा : (मुस्कुराते) कोइ गलती नही बेटा.. बस.. तेरी आखरी मंजील यही थी..

फीर सबलोग बाबाको दक्षीणा देकर उनका आशीर्वाद लेकर वहासे नीकल जाते हे.. ओर सीधे हवेलीपे आगये.. तो सबके आस्चर्यके बीच पुनमने उनके स्वागतकी सभी तैयारीया करली थी.. लखनने देखा तो देवायतकी सभी बीवीया उनके सभी दोस्तके परीवाल वाले.. ओर भानुका परीवार मोजुद था..

सबने खुसीसे तालीया बजाते लखन ओर भावीकाका स्वागत कीया.. तो भावीकाकी आंख खुसीके मारे गीली होगइ.. फीर नीर्मलाने भावीका ओर लखनका कलश घुमाते स्वागत कीया.. तो लखन ओर भावीकाने मीलकर नीर्मला ओर देवायतके पांव छुअ‍े.. तब देवातने गीली आंख करते दोनोको आशीर्वाद दीया..

आज पुनम सबके सामने खुलकर लखनको गले मीली.. फीर वो सृती सब लेडीस भावीकाको लेकर अंदर चली गइ.. भावीका आज नइ दुल्हकी तराह बहुत ही सरमा रही थी.. फीर सभी लेडीसने मीलकर भावीकाको दुल्हनकी तराह सजाया.. फीर होलमे लखन ओर भावीकाको साथ बीठाया..

पुनमने लखन ओर भावीकाकी सादीकी सबके सामने घोसणा करदी.. तो वहा सबने दोनोको आशीर्वाद ओर उपहार दीये.. फीर पुनमने सबको सृती ओर भावीकाकी प्रेगन्सीकी खबर सुनाइ.. जीसे सुनकर सृती ओर भावीका दोनो ही सरमा गइ.. तभी ब्रीन्दा सबसे छुपकर अपने पेटपे हाथ घुमाते लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी..

तो लखन हसने लगा.. तो आज रमा भी लखनसे बहुत सरमा रही थी.. इस बातपे सरला दोनोके बीच नजर गडाये लखनकी ओर ललचाइ नजरोसे देख रही थी.. उनका ध्यान बार बार लखनके पेन्टकी उभारकी ओर जा रहा था.. लेकीन सरलाको पता नही चला की लखनने सरलाकी नजरको पहेचान लीया..

इस दीन नाच गान खाना पीना सबकुछ हुआ.. सामका प्रोग्राम चल रहा था.. तब अचानक जरीनाकी तबीयत बीगड गइ.. ओर वो खडी होकर अपने मुहपे हाथ रखते पुनम वाले रुममे दौडकर चली गइ.. सब लोग उसे अ‍ैसे जाते देखकर बहुत कुछ समज गये.. पीछे सलमा पुनम ओर सृती भी चली गइ.. देखा तो जरीना उल्टीया कर रही थी.. ओर सृतीने उसे चेक कीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९७

इस दीन नाच गान खाना पीना सबकुछ हुआ.. सामका प्रोग्राम चल रहा था.. तब अचानक जरीनाकी तबीयत बीगड गइ.. ओर वो खडी होकर अपने मुहपे हाथ रखते पुनम वाले रुममे दौडकर चली गइ.. सब लोग उसे अ‍ैसे जाते देखकर बहुत कुछ समज गये.. पीछे सलमा पुनम ओर सृती भी चली गइ.. देखा तो जरीना उल्टीया कर रही थी.. ओर सृतीने उसे चेक कीया.... अब आगे

सृती : (मुस्कुराते) भाभी.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. सायद आप मां बनने वाली हे.. परसो मेरी क्लीनीकपे आइअ‍ेगा.. वहा अच्छेसे चेक कर लेगे.. अभी आपको दवाइ देती हु आप ठीक होजायेगी..

कहेते सृती ओर पुनम दोनो बहार चली गइ तो सलमा ओर जरीना खुसीके मारे अ‍ेक दुसरेके गले लग गइ.. दोनो देरतक अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडी रही.. क्युकी दोनोको पता थाकी ये बच्चा साहीलका हे.. आज सलमाने जरीनाके गले मीलते कुटील मुस्कान करदी..

जरीना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. आज मे बहुत खुस हु.. ये बच्चा.. हमारे साहीलके प्यारकी नीशानी.. इसे मे जन्म दुगी..

सलमा : (मुस्कुराते) हां जरीना.. लेकीन ये बात कीसीको पता नही चलनी चाहीये की ये बच्चा साहीलका हे.. चल बहार.. अबतकतो सबको पता चल गया होगा.. बस.. फीरोजको यकीन दीलाना हेकी ये बच्चा उनका हे..

जरीना : (मुस्कुराते बहार नीकलते) इनमे कौनसी बडी बात हे.. वोतो अ‍ैसे मान जायेगा.. हमने जो योजना बनाइ हे.. जबसे कमीनेकी तारीफ करना सुरु कीया हे तबसे कुछ ज्यादा ही हमपे महेनत करने लगा हे.. हें..हें..हें..

सलमा : (हसते फुसफुसाते) लेकीन उनको अभी तक पता नही उनका भतीजा उनकी बीवीयोपे कीतनी महेनत करता हे.. मेतो जब तुम दोनोने पहेली बार सुहागरात मनाइ तब ही समज गइ थी.. क्युकी तब मुजे भी पेटसे करदीया था.. मेरी भी हालत तुम्हारे जैसी करदी थी.. मुजे तो दो दीन तक बुखार रहा.. अब तो मेरी तराह तुम्हे भी दिनमे हर रोज मीलने लगा हे..

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. लेकीन हमे मजे भी तो बहुत देते हे.. आज भी हमे कुआरी लडकी जैसा अहेसास करवाते हे.. जो मजा साहीलमे हे वो उस कुतेमे कहा.. मेरी सबुतो साहीलसे सादी करके धन्य होजायेगी..

दोनो खुसीके मारे फुसफुसाते बहार आगइ.. तबतक सबको पता चल गया की जरीना प्रेगनेन्ट हे.. तो सबलोग फीरोजको बधाइ देने लगे.. तो फीरोज खुसीसे मुस्कुराते सरमा गया.. लखनके सभी दोस्तो भी अपने परीवारके साथ थे.. लेकीन साहील मन ही मन खुस हो रहा था..

क्युकी उनको यकीन थाकी ये बचा उनका ही हे.. वो अपनी काबीलीयत ओर जरीनाने कीये वादेको अच्छी तराह जानता था.. अबतक घरकी सभी ओरते उनके नीचे लेट चुकी थी.. ओर साहीलसे सारीरीक सुख भोगने लगी थी.. नतीजेके फल स्वरुप सबानाके अलावा तीनोकी कोखमे साहीलका बच्चा पल रहा था..

बहार नीकलते जरीनाको वो सबकुछ याद आने लगा.. साहीलके साथ पहेला मीलन.. उस दिन उनको साहीलने अ‍ेक कुआरी लडकी जैसे सुहागरातकी फीलीन्गस दिलवाइ थी.. फीर तो ये मीलनेका सीलसीला चल पडा.. अब लगभग हप्तेमे तीन दिन साहीलसे सारीरीक सुख भोगने लगी थी.. ओर साहीलसे ओर नजदीक आने लगी..

उसे पता ही नही चलाकी वो अब सचमे साहीलसे प्यार करने लगी थी.. तो दुसरी ओर सलमा साहीलसे सारीरीक सुख हर दिन पालेती.. जीसे जरीनाको मनमे सलमासे ज्वेलेसी फील होने लगी.. वोभी सलमाकी तराह साहीलके लीये सज सवरने लगी.. ओर साहीलको ओर रीजानेकी कोसीस करने लगी..

फीर वो दिन आया जीनमे दोनो सौतनोने(बहेनो) मीलकर अपने पती फीरोजके साथ बारी बारी सोनेका तैय कीया.. ताकी साहीलको भी हर दिन अ‍ेकका प्यार मील सके.. उस दिन फीरोजके साथ सलमाके सोनेकी बारी थी.. तब जरीना बहुत ही खुस ओर अक्साइटेड थी.. क्युकी आज वो देर रात साहीलके साथ सोने वाली थी..

जरीनाने अपने आपको देर रात अ‍ेक दुल्हकी तराह सजाया.. आज वो बहुत ही कामुक ओर छोटी दीख रही थी.. साहीलका हथीयार जरीनाको देखते ही जटके मारने लगा.. वो जल्दसे जल्द जरीनाके साथ संभोगके लीये बैचैन होने लगा.. ओर उसने आज जरासी भी देरी नही की.. पुरे रुम जरीनाकी कामुक सीसकीयोसे गुंजने लगा..

जरीनाके खुले बाल बीस्तरमे बीखरे हुअ‍े थे.. साहीलका तगडा ओर बडा हथीयार वो अपनी बच्चेदानीपे ठोकर मारते महेसुस कर रही थी.. वो साहीलसे अपनी कामुक नजरे चुराते बार बार साहीलके सामने देखते अपनी कामुक मुस्कार बीखेर रही थी.. जीसे साहील आज बहुत ही जोसमे उनकी चुदाइ कर रहा था..



जरीनाको साहीलसे वो सुख मील रहा था जो आजतक उसे अपने पती फीरोज ओर अपने बडे बेटे कादीरसे भी नही मीला था.. ओर जबसे वो साहीलसे मीली तबसे वो बहुत ही कामुक होगइ गइ थी.. साहीलभी उनका ही खुन था.. उनका छोडा बेटा.. फीरभी आज वो खुलकर साहीलसे अपने प्यारका इजहार करना चाहती थी..

अबतक साहीलने जरीनाको दो बार जडा दीया था.. ओर अभी दोनो ही आखरी चरणपे थे.. साहील जोरोसे कमर हीलाते जरीनाको रगड रहा था.. ओर जरीनाभी साहीलका साथ देते सातवे आसमानपे थी.. ओर आखीर दोनोने अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर साहील कमरको जटकते जड गया तब वो उनकी पीठ सहेलाते साहीलसे नजरे चुराने लगी.. तभी..

साहील : (होंठ चुमते) चाची.. आप यहा खुसतो हेनां..?

जरीना : (कामुक नजरोसे मुस्कुराते) नही साहील.. क्युकी तुमको अपनी चाचीसे ज्यादा अपनी अम्मा अच्छी लगती हे.. मत भुलो मेही तुम्हारी असली अम्मां हु.. क्या मुजेभी अपनी मां मानके प्यार नही कर सकते..? तुम सभी दोस्तोको अपनी मां अच्छी लगती हेनां..?

साहील : (मुस्कुराते) हां.. सही कहा आपने.. लेकीन आप मेरी होने वाली सास भी हे..

जरीना : (जोरोसे बाहोमे भीचते होंट चुम लेती हे) तो क्या हुआ..? तुम्हारा बडा भाइ भी अपनी बडी बहेनसे सादी करके उसे चोद रहा हे.. तो तुम सबानासे सादी करोगे उनमे कोनसी बडी बात हे..? हम मां बेटीको यु सुख देते रहेना..

साहील : (मुस्कुराते) चाची.. फीर भी ये थोडा अजीब लगता हे.. मे अपनी ही सासके साथ.. मतलब..

जरीना : (बीचमे ही बात काटते) साहील.. मत भुलो.. सभी रीस्तोसे पहेले हमारा रीस्ता अ‍ेक मां बेटेका भी हे.. ओर सच कहु..? मुजे अब तुमसे सच्चा प्यार हो गया हे.. अब मे तेरे बीना नही रेह सकती.. मे तेरे चाचाको दुसरे दर्जेपे रखना चाहती हु.. ओर वादा कर.. अब तुम मुजे चाची नही.. अपनी मां मानकर प्यार करोगे..

साहील : (मस्तीके मुडमे मुस्कुराते) चाची.. लेकीन अम्मातो मुजे हरदिन प्यार देती हे.. सोचलो.. अगर मां बेटेका रीस्ता रखना चाहती होतो मुजे हर चुदवाना.. मतलब.. हर दिन प्यार देना पडेगा..

जरीना : (कामुक नजरोसे मुस्कुराते) हां.. चोदलेना.. मुजे मंजुर हे.. मेभी तो यही चाहती हु की मेरा साहील मुजे हर दिन प्यार करे.. जीस दिन मेरी तेरे चाचाके साथ सोनेकी बारी होगी.. उस दिन हम दिनमे मीलनेका जुगाड करलेगे.. लेकीन मुजे हर दिन तुम्हारा प्यार चाहीये.. मुजे सचमे तुमसे प्यार हो गया हे.. आइ लव यु साहील..

साहील : (होंट चुमते) आइ लव यु टु अम्मी.. आजसे हम जबभी प्यार करगे मे आपको अम्मी मानकर प्यार करुगा.. ओर आजसे हम हर दिन मीलेगे.. आसा करता हु मेरा ओर सबुका रीस्ता हमारे बीच नही आयेगा..

जरीना : (होंट चुमते) नही आयेगा साहील.. मेरी सबुतो अपने भाइका प्यार पाकर धन्य हो जायेगी.. वो सादीके बाद अपनी जोबपे होगी.. ओर तेरे चाचा हमारे खेतोपे होगे.. तो हमे मीलन करनेका पुरा समय दिनमे मील जायेगा.. हमारा रीस्ता अ‍ैसे ही रहेगा.. आजसे ये तेरी अम्मा हमेसाके लीये तेरी होगइ.. मुजे हमारे प्यारकी अ‍ेक नीशानी भी चाहीये.. ओर मे वादा करती हु जल्दही वो प्यारकी नीशानी आपको दुगी.. आइ प्रोमीस..

इनके बाद लगभग हर दिन जरीना ओर साहील दिनमे मीलने लगे थे.. ओर इनके लीये सलमाने भी उन दोनोके मीलनमे साथ दीया.. ओर आज नतीजा इनके सामने था.. उसी नतीजेके फल स्वरुप साहीलने अपनी सगी मांको प्रेगनेन्ट करदीया था.. जरीनाको पुरा घटनाक्रम अ‍ेक फील्मकी माफीक याद आने लगा.. वो साहीलके प्यारमे बीलकुल पागल हो चुकी थी..

आज वोही साहील उनकी ओर देखकर मुस्कुरा रहा था.. यही जरीनाने साहीलको जन्म दीया था.. ओर आज यही साहीलके बच्चेकी मां बनने वाली थी.. जैसे ही साहीलकी नजर सलमा जरीनाकी ओर गइ.. तो दोनो कातील नजरोसे खुस होते उनकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. तभी सलमाने साहीलको आंखोसे कुछ अ‍ैसा इसारा कीया जीसे साहील सबकुछ समज गया..
 
सरला काकीने सलमा ओर साहील दोनो मांबेटेकी आंख मीचोली देखली.. तो उनको दालमे कुछ काला लगा.. उनकी कामाग्नी ओर भडक गइ.. जबसे देवायतने उनको सारीरीक सुख देना बंध करदीया तबसे उनकी कामाग्नी कुछ ज्यादा ही भडकी हुइ थी.. फीर गांवके मां बेटेके रीस्तोके बारेमे सुन सुनकर उनकी आगको ओर हवा लग गइ..

ओर नतीजेके फल स्वरुप उसने अपने ही बेटे भानुपे कइ दिनोसे डोरे डालना सुरु करदीया था.. अ‍ेक दो बार उसने भानुसे बाते करते उनको खुलकर हीन्ट भी दी.. लेकीन भानुने उसे मजाकमे ले लीया था.. फीर जबसे लखनसे बात हुइ तो उनको लखनसे अ‍ेक आस दीखी.. ओर उसने तैय करलीया की अब वो लखनपे ट्राइ करेगी..

फीर रातमे बहार ही टेबलपे खाना रख दीया.. ओर सबलोग अपना अपना खाना लेकर खाने लगे.. ओर खाते हुअ‍े अ‍ेक दुसरेको मीलकर हस हसके बाते करने लगे.. लखन खाना ले रहा था तब आगे सरला भी खाना ले रही थी.. सरलाने खाना लेते धीरेसे लखनको अकेलेमे बात करनेको कहा..फीर दोनो खाना लेकर अ‍ेक जगह चले गये..

कइ दिनोसे सरला लखनसे बात करना चाहती थी.. लेकीन लखनसे अकेले मीलनेका मौका ही नही मीलता था.. ओर लखन भी अब सरलाके घरपे बहुत कम जाता था.. तो आज सरलाको लखनसे अकेलेमे बात करनेका मौका मील ही गया.. ओर वो लखनको लेकर थोडी दुर खाना लेकर बैठ गइ..

सरला : (थोडी मायुसीसे धीरेसे) लखन.. जबसे लताने देवुसे सादी करली हे तबसे तो तुमने घर आना ही छोड दीया.. क्या इतना नाराज होगये हो हमसे..? मेतो तुजे आज भी अपना दामाद मानती हु.. कमसे कम अपनी चाचीको तो मीलने आया करो..

लखन : (पास चेयरमे बैठते धीरेसे) नही चाची.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. मे नाराज नही हु.. बस.. अब टाइम ही कम मीलता हे.. सोरी.. अब आउगा..

सरला : (सरमाकर मुस्कुराते बातकी सुरुआत करते धीरेसे) उस दिन तुम कुछ केह रहा था.. मतलब.. क्या तुमने मेरे बारेमे अपनी बीवीसे जान लीया..?

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हां चाची.. सब कुछ जान लीया.. आप बहुत पहोची हुइ चीज हो.. हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) चल हट बदमास.. धीरे बोल.. कोइ सुनलेगा.. वैसे पुनो बीटीयाने मेरे बारेमे क्या क्या बताया तुजे..?

लखन : (सरलाकी ओर जुकते धीरेसे) क्या सब कुछ यही बतादु..? यहा सबलोग हे.. कोइ सुन लेगा तो गडबड होजायेगी..

सरला : (सरमाते धीरेसे) नही नही.. यहा नही.. घर आना.. अकेला.. हम दोनो अकेले होगे.. तब बताना.. वहा हमारे घरपे कोइ नही होगा.. लेकीन लगता हे तेरी चाचीसे तेरा मन भर गया हे.. आता ही नही.. कहासे आयेगा..? मे बुढी जो होगइ हु..

लखन : (मुस्कुराते) नही चाची.. आप कहासे बुढी हो..? आप तो अभी भी होट लगती हो.. आज भी बाजारसे नीकलोगी तो दो तीनको तो गीरा ही दोगी.. हें..हें..हें..

सरला : (लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते मुस्कुराते) चल हट बदमास.. अच्छा मे होट हु..? तो फीर क्यु नही आता..? मे इतनी बुरी नही हु तो अकेले मीलने आया करोनां..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) अकेला..? चाची.. आना तो चाहता हु.. लेकीन घरपे तो रमा भाभी होती हे..

सरला : (लखनकी ओर जुकते धीरेसे) तो क्या हुआ..? तुजे रमाके होनेसे कबसे फर्क पडने लगा..? मुजसे ज्यादा तो वो होट हे.. हें..हें..हें.. वैसे मुजे भी तेरे बारेमे कुछ पता हे..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) क्या..?

सरला : (मुस्कुराते धीरेसे) तेरे ओर रमाके बारेमे..?

लखन : (थोडा गभराते आस्चर्यसे) मेरे ओर रमा भाभीके बारेमे..? क्या पता हे आपको..?

सरला : (रहस्य मुस्कानसे धीरेसे) क्या सबकुछ यही जान लेगा..? कल अकेला घरपे आना.. वहा आरामसे बैठकर सब बाते करेगे.. तुजे सबकुछ बता दुगी.. वैसे भी मुजे तुमसे ओर भी बात करनी हे..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) हम वहा थोडीना अकेले होगे..? रमाभाभी भीतो होगी.. तो हम अकेले बात कैसे करेगे..?

सरला : (सर्मसार होते धीरेसे) तु अ‍ेक काम कर.. नीलु यहा हे.. कल रमाको कीसी भी बहाना बनाकर भानुके साथ यहा भेज दुगी.. तभी तुम कोइ भी बहाना बनाकर अकेले घरपे आजाना.. समज गयानां..? मे इन्तजार करुगी तेरा.. कल बताती हु तेरी चाची कीतनी होट हे.. मे वादा करती हु तुजे नीरास नही करुगी.. तु रमाको भुल जायेगा.. तुजे जडीबुटी पीलाइ हेनां..? मेभी तो देखु तु क्या चीज हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) क्या..? सचमे आजाउ..?

सरला : (सामने देखते धीरेसे) तो क्या मे मजाक कर रही हुं..? कल आना.. मे इन्तजार करुगी तेरा..

सरलाकी बाते सुनकर लखनका हथीयार भी ठुमकी मारने लगा.. क्युकी अबतकमे सबसे बडी उमरकी ओरतने उनको खुला नीमंत्रण देदीया था.. सरलाने बडी ही सावधानीसे लखनको अपने घर बुला लीया.. खानेके बाद हवेलीपे पार्टी समाप्त होगइ.. सबलोग अपने अपने घर चले गये.. इस रात लखन ओर भावीकाकी सादी थीतो सृती नीलम सबने मीलकर लखनका उपर वाला रुम फुलोसे सजा दीया था..

अ‍ेक ओर लखन भावीकाकी सुहागरातकी तैयारीया चल रही थी.. वही नीचे पुनमके कमरेमे लता आंसु बहा रही थी.. ओर पुनमको लखनकी नाराजगकी बाते करती रही.. पुनमने उसे समजाती रही.. लेकीन इस बार लता बहुत दुखी ओर नीरास थी.. तो आखीर पुनमने लखनको अपने रुममे बुला लीया..

लखन : (अंदर आते ही) हां पुनोदी.. कुछ काम था..?

पुनम : (लताकी ओर इसारा करते) भाइ.. सुबहसे रो रही हे.. कबतक इसे इग्नोर करते रहोगे..? अब इसे माफ भी करदो.. बहुत रुला लीया..

लता : (रोते हुअ‍े) दीदी.. मे अपनी मरजीसे थोडीना गइ थी.. मंजुमोमके कहेनेपे गइ थी.. ओर क्यु जाना पडा वोतो आपको भी पता हेनां..? तो इसमे मेरी क्या गलती..?

लखन : (सामने देखते धीरेसे) प्यार करती थीनां मुजसे..?

लता : (रोते हुअ‍े) हां करती थी.. ओर अब भी करती हु.. जाना मेरी मजबुरी थी.. क्या मेने आपको कीसी ओरसे प्यार करते हुअ‍े कभी रोका हे..? ओर नाही मे कभी आपसे नाराज हुइ.. तो फीर मुजे ही इतनी बडी सजा क्यु..? ओर तब आप इतने सक्षम भी नही थे की मुजे बच्चा दे सके.. ये सब मंजु मोमकी प्लानींग थी.. ओर क्यु ये आपको भी पता हे..

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हां भाइ.. ये सच केह रही हे.. तब सीर्फ तीन ओरत ही थी जो सीर्फ भाइसे ही प्रेगनेन्ट हो सकती थी.. मोम.. मे.. ओर लता.. लेकीन अब वो समस्या नही हे.. अब आप भी इतने सक्षम हो गये होकी हमे भी प्रेगनेन्ट कर सकते हो.. हमे क्या कीसी भी बांज ओरतको.. आप माफ करदो लताको.. क्युकी आगे चलकर आपको ही हम सबको सम्हालना होगा..

लखन : (चलकर लताको बाहोमे लेते) लता.. आइ अ‍ेम सोरी.. चल जा.. माफ करदीया..

लता : (जोरोसे बाहोमे भीचते) आप माफी मत मांगो.. मेरे लीये माफ करदीया वोही काफी हे.. लखन.. आइ लव यु..

लखन : (मुस्कुराते) लव यु टु..

पुनम : (खुस होते मुस्कुराते) हंम.. लता.. होगइ सुलह..? चल तुजे अ‍ेक खुसखबर सुनाती हु.. सीर्फ तेरे लीये..

लता : (लखनकी बाहोमे पुनोकी ओर मुस्कुराते धीरेसे) क्या..?

पुनम : कुछ सालो बाद तुने लखन भैयासे अ‍ेक बच्ची होगी.. वोही हमारे पोतेकी चहीती बीवी होगी.. जो उस जमानेमे वो राजाकी बडी बहेन ओर उनकी चहीती रानी हुआ करती थी.. नेनु.. जो उसने अभी तक जन्म नही लीया हे..

लता : (सामने देखते) लेकीन दीदी.. उस कीताबमे तो लीखा हे वो इस जन्मसे अपाहीज होगी..

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन अपाहीज होनेकी वजहसे तु दुखी मत होनां.. क्युकी इस जन्ममे वो हम सबमेसे खुबसुरत लडकी होगी.. ओर वो इस जन्ममे अपने पतीको इतनी आसानीसे नही मीलेगी.. इसके लीये उनके भतीजेको कइ पापड बेलने पडेगे.. तब जाके वो मीलेगी.. हें..हें..हें..

लता : (लखनके होठ चुमते धीरेसे) लखन.. सोरी.. अब मे सीर्फ तुम्हारी हु..

लखन : (सामने देखते) सीर्फ मेरी..? तो फीर बडे भैया..? आइ मीन..

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) भाइ.. मोमके जानेके बाद बडे भैयाने अपनी सभी बीवीओको मीलना छोड दीया हे.. अब उनको सीर्फ नीर्मला आंटी ही सम्हाल रही हे.. तो अब नीर्मला आंटीके सीवा भाइ की सभी बीवीओको आपको ही सम्हालना पडेगा.. अब आप जाइअ‍े उपर भावीका आपका इन्तजार करती होगी..

इस रात लखन ओर भावीकाकी सुहागरात हुइ.. ओर दोनो सुबह चार बजे तक जमकर प्यार करते रहे.. सुबह तक लखनने भावीकाका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया था.. तो देवायत ओर नीर्मला भी दो बजे तक चुदाइ करते रहे.. फीर दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सो गये..

तो दुसरी ओर आज फीरोजके साथ सलमाकी बारी थी.. तो देर रात जरीना साहीलके कमरेमे चली गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. तब जरीनाने साहीलको बता दीयाकी ये बच्चा हमारे प्यारकी नीशानी हे.. ओर इस रात साहीलने जरीनाको खुब रगड रगडके प्यार कीया..



अब गांवमे ज्यादातर ओरते अपने पाटर्नरसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. बस.. सीर्फ अ‍ेक जागृती ही थी.. जो अभी तक अपना वादा नीभाते लखनकी आस लेकर बैठी थी.. लेकीन अब वो लखनसे ज्यादा अपने भाइको प्यार करने लगी थी.. फीर लखनने भी तैय करलीया था.. की वो अब अपने कीसी भी दोस्तको धोखा नही देगा.. लेकीन उनकी मर्जी कहा चलने वाली थी..? जो सामनेसे आयेगी उनका सन्मान तो उन्हे करनाही पडेगा..
 
दुसरे दीन सुबह हवेलीपे सभी इकठा होकर चाइ नास्ता कर रहे थे.. आज भावीका नइ नवेली दुल्हनकी तराह अब भी सरमा रही थी.. उसे तो पता ही नही थाकी परीवार क्या होता हे.. उनको अब भी यकीन नही हो रहाथा की वो इस खानदानकी बहु होचुकी हे.. वो अपने आपको बहुत ही गर्वातीन्त महेसुस करते सरमा रही थी..

तभी भानु ओर रमा आगये.. तो देवायतने उन दोनोको भी चाइ नास्तेपे बीठा दीया.. तभी रमाको यहा देखकर लखनको कल सरलाकी कही बात याद आ गयाकी कल सरला काकीने रमाको यहा भेजनेकी बात कही थी.. ताकी वो घरपे अकेली होजाये.. लखन सबकुछ समज गयाकी सरलाकाकी क्या चाहती हे..

फीर चाइ नास्तेके बाद रमा दया रजीयाके साथ काममे हाथ बटाने लगी.. तो भानु ओर लखन बाइक लेकर अपने खेतोकी ओर चले गये.. वहा भानुके साथ कुछ देर रीटाकी बाते करते भानुका मन बहेलाया.. फीर दवाइकी बातकी तो पता चला भानुकी सेहतमे काफी सुधार हो रहा हे.. फीर बात करके दोस्तोसे मीलनेका बहाना बनाकर लखन वहासे भानुके गांवकी ओर चला गया..

भानुके घर पहोंचतेही जैसे ही लखनने दरवाजा खटखाया सरलाने दरवाजा खोल दीया.. लखनको देखतेही सरला बीना कुछ बोले कामुक स्माइल करते साइडमे हट गइ.. लखन बाइकके साथ ही अंदर चला गया.. ताकी बहार कीसीको पता ना चले.. तो सरलाने दरवाजा बंध करदीया.. लखन बाइक रखते वही खटीयापे बैठ गया..

सरला : (अपने रुमकी ओर जाते) लखन.. यहा बहार नही.. चल मेरे रुममे आरामसे बैठकर बात करते हे.. आज मेभी सुनु तुम मेरे बारेमे क्या क्या जानते हो..

लखन : (मुस्कुराते पीछे चलते) चाची.. पता तो हेना मेरी बीवी कौन हे..?

सरला : (मुस्कुराते) हां सब पता हे.. तेरी सभी बीवीयोके बारेमे.. गांवके बारेमे.. ओर तुम्हारे बारेमे भी.. आज मेभी सुनु उनकी बातमे कीतनी सचाइ हे.. चल आजा..

फीर रुममे जाकर सरला लखनसे सटकर बैठ गइ.. ओर लखनने सरलाको उनकी पुरी कहानी बतादी.. कहानी सुनाते वक्त लखनने खुलकर कुछ अ‍ैसे सब्दका प्रयोग कीया जीसे सरला सर्मीन्दा होते उतेजीत होगइ.. उसने अपनी सारीका पलु जान बुजके गीरा दीया.. ओर अ‍ैसे ही रखे बैठे बाते सुनती रही..



लखन उनके क्लेवेजको देखते कहानी सुनाता रहा.. की कैसे बचपनमे सरलाने अपने छोटे भाइको सेट करते उनके साथ वासनाका खेल खेलती रही.. ओर उनसे प्रेगनेन्ट भी होगइ.. फीर वीरजीके साथ सादीके बाद उनहोने अपने पीताजीसे अपनी प्यास बुजाइ.. ओर उनसे दो बच्चे भी पैदा करलीये..

फीर सरलाने देवायतको सेट करलीया.. ओर अबतक उनसे चुदवाती रही.. सरला सुनकर आस्चर्यसे सोक्ट होते उतेजीत भी होगइ.. लखन अ‍ैसे सब्दोका इस्तमाल करते सरलाके बुब्सपे हाथ रख देता हे ओर उसे सहेलाते मसलने लगता हे.. तो सरला मदहोसीमे आंख बंध करते लखनके हाथपे हाथ रख देती हे.. ओर अपने बडे बुब्सको ओर जोरोसे कस लेती हे..



लखन : (मुस्कुराते) चाची.. आपने तो हमारे खानदानके सभी मर्दोको लपेट लीया..

सरला : (कामुक मुस्कानसे धीरेसे) लखन.. सभी मर्दोको नही.. सीर्फ दो मर्दोको.. तेरे पीता ओर देवुको.. अ‍ेक मर्द अभी बाकी हे.. तुम.. इसीलीये तो तुजे आज यहा अकेला बुलाया हे..

लखन : (मुस्कुराते) जब हमने पहेली बार इस बारेमे बातकी तब ही मे आपके इरादे समज गया था.. क्या सचमे आप अ‍ैसा चाहती हे..?

सरला : (सरमाते धीरेसे) हां लखन..तु जानता हेनां मे बहुत कामी ओर अ‍ैसे प्यारकी सौकीन ओरत हु.. पुरे गांवमे रीस्तोमे बदलाव आगया.. बस.. सीर्फ हमारा घर ही बाकात रेह गया..

लखन : (मुस्कुराते) मतलब..?

सरला : (लखनके गलेमे हाथ डालते) मतलब बादमे समजाउगी.. चल पहेले मेरी प्यास बुजादे.. मे कइ दिनोसे प्यासी हु.. फीर हम आरामसे बैठकर बात करेगे.. इतनी उमर होगइ.. फीर भी ये साली आग बुजनेका नाम ही नही लेती..

कहेते सरलाने लखनके होठोपे होठ रख दीये.. उनकी आंखमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. वो जोरोसे लखनके होठोको चुमने लगी.. ओर चुमते अपनी सारी नीकालने लगी.. उनकी चुत पनीयाने लगी.. फीर लखनकी आंखोमे देखते उनका टीसर्ट खीच लीया.. ओर लखनका हाथ पकडते उसे अपने उपर खीचते लेट गइ..



सरला : (कामुक्तासे) आजा मेरे लाल.. आज अपनी काकीको भी जनतकी सेर करादे..

फीर बाकीका काम लखनने सम्हाल लीया.. कुछ ही देरमे दोनो बीलकुल नंगे थे.. ओर लखन सरलाके उपर छागया.. उनके दोनो हाथ कसके पकड लीये ओर सरलाके होठोको चुमने लगा.. आज लखन अबतक की सबसे बडी उम्रकी ओरतको चोदने जा रहा था..

जीनकी वजहसे लखनके तन ओर मनपे भी अ‍ेक अलग नसा था.. लेकीन सरलाको पता नही थाकी अबतक के सभी मर्दोके मुकाबलेमे लखन सबसे भारी अकेला मर्द था.. जो उनकी हालत बीगाडने वाला था.. सरला इस उम्रमे भी लडकीको मात देने वाली लग रही थी.. वो ललचाइ नजरोसे लखनके हथीयारको देखने लगी..

उन्होने लखनके घरपे पार्टी थी तब ही बीना कोइ लाग लपेट सीधा ही लखनको सेक्सके लीये नीमंत्रण दे दीया था.. ओर इसके लीये लखन रमाको उनके घर चोदकर गया तब ही लखनसे चुदवानेकी योजना बना रही थी.. ओर आखीर वो दिन भी आगया.. लखनका हथीयार रोडकी काफीक सख्त हो गया..

लखनका बडा ओर तगडा लंड सरलाकी चुतपे ठोकरे मारते चुतमे घुसनेकी कोसीस कर रहा था.. तभी कमरेमे सरलाकी जोरोकी चीख गुंज उठी.. लखनने फौरन उनके होठोपे होठ रख दीये.. ओर उनके बुब्सको मसलने लगा.. सरला बेडपे पैर पटकते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती रही..



इस उमरमे भी उनकी बडी आंखसे आंसु टपक रहे थे.. लेकीन आज लखनने कोइ रहेम नही कीया.. ओर वो जोरोसे कमर हीलाते सरलाको चोदने लगा.. सरला अपना मुह इधर उधर करते छटपटाने लगी.. सरलाने लखनको बहुत हल्केमे लीया था.. ओर कइ दीनोसे उनके पेन्टके उभारको देखते चुदवानेका प्लान बना रही थी..

इतनी उम्र होनेके बावजुद भी सरला बार बार जड रही थी.. ओर आखीर लखनने उनकी चुतको अपने पानीसे लबालब भरके हरी भरी करदी.. दोनो अपनी सास दुरस्त करते रहे.. सरला अपना मुह इधर उधर करते लखनसे नजरे चुराती रही.. उसे अभी भी अपनी चुतमे सख्त लंड जटके मारते महेसुस हो रहा था..



लखन : (मुस्कुराते) कहो चाची.. कैसी लगी कहानी..? सब सच थानां..?

सरला : (कातील नजरोसे) हां सब सच था.. कमीने.. भाडमे जाये कहानी.. सोचाथा कहानीके बहाने तुमसे मजे करुगी.. लेकीन इस कहानीने तो मेरी हालत खराब करदी.. इतनी बेहरमीसे कोइ चोदता हे..? तुमने तो अ‍ेक ही बारमे मुजे पुरी नीचोडली.. इतनी बेहरेहमीसे तेरे बाप ओर देवुने भी मुजे कभी नही चोदा.. अब उपरसे उतरना नही हे क्या..? हट उपरसे..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) नही चाची.. नाराज क्यु हो रही हे..? अभी तो अ‍ेक राउन्ड हुआ हे.. दुसरा बाकी हे.. तैयार रहीयो..

सरला : (मनते करते) नही लखन.. अब ओर नही.. अगर चोदना हे तो फीर कभी आजाना.. अब मेरी उम्र नही की मे तुजे दुसरी बार जेल पाउ.. मुजे नही पता थाकी तुम्हारा हथीयार इतना दमदार हे..

लखन : (मुस्कुराते कमर हीलाते) नही चाची.. मेरी आदत हे.. मे दो बार चोदनेसे पहेले हथीयारको बहार ही नही नीकालता.. सीर्फ अ‍ेक बार.. फीर पता नही हमे दुबारा कब मौका मीले..

सरला : (सामने देखते) क्यु नही मीलेगा..? दुबारा मीलने नही आओगे क्या..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे क्यु नही आउगा..? बुलाओगी तो जरुर आउगा.. पता नही था आप इतनी उमरमे भी इतनी होट हे.. वरना हमतो कबसे मील चुके होते.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बार..

सरला : (सरमाकर मुस्कुराते) कमीना तुभी देवुकी तराह हे.. मानेगा नही.. चोदले अपनी चाचीको.. लगता हे आजतो मुजे पुरी नीचोड लेगा.. मुजे तो आज बीस्तरमे ही आराम करना पडेगा..



फीर लखनने दुसरी बार सरलाकी धमाके दार चुदाइ करली.. सरलाका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रखदीया.. इस बार भी सरलाको दो दो बार जडाते तीसरी बारमे उनकी चुतको पुरी भरदी.. दोनोका काम रस जगा बनाते बहार टपकने लगा.. लखन सहारा देकर सरलाको बाथरुममे ले गया..



वहा भी लखनने सरलाको फीरसे उतेजीत करते खडे खडे चुदवानेमे मजबुर कर दीया.. फीर दोनो सावर लेकर बहार आगये.. सरला थोडा लंगडाते चल रही थी.. तो लखनने उसे सहारा दीया.. तब सरलाने जुठमुठ नाराज होते लखनकी पीठमे मुका जड दीया.. फीर दोनो अंदर आगये.. ओर बाते करते कपडे पहेनने लगे..

सरला : (मुस्कुराते) अच्छा हे इस उमरमे पेरा पीरीयड बंध हो गया हे.. वरना आज तो तु पका मुजे पेटसे करदेता.. कीतना लोटा भर भरके पानी नीकालता हे..

लखन : (मुस्कुराते) चाची.. ये सब जडीबुटीका कमाल हे.. अच्छा अब बताइअ‍े.. आप बदलावके बारेमे क्या केह रही थी..?

सरला : (मुस्कुराते) ओह.. बदलाव..? देख लखन.. मे बहुत कामी ओर चुदाइकी सौकीन ओरत हु.. पता नही इतने दिन मे बीना चुदाइ कैसे रेह पाइ.. तेरे दो दोस्तोने अपनी मांसे भी सादी करली हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. दो नही.. तीन दोस्तोने.. अपनी मांसे भी ओर अपनी बहेनसे भी.. क्यु..?

सरला : (सरमाते धीरेसे) क्यु क्या..? इतनीसी बात अपने भाइ (भानु)को नही समजा सकता..? सारा दीन बहारकी रंडीओमे लगा रहेता हे.. उसे कहे कभी घरकी ओरतोपे भी थोडा ध्यान दीया करे.. थोडी जडीबुटी हेतो उनको भी देदे..

लखन : (जोरोसे हसते) क्या..? अरे काकी जडीबुटीतो मुजे बाबाने दीथी.. अब नही हे.. आप खुद ही भानुभाइको क्यु सेट नही कर लेती.. आपतो इस काममे काफी माहीर हो.. हें..हें..हें..

सरला : (सरमाकर हसते धीरेसे) कमीने.. तुजे क्या लगता हे मेने ट्राइ नही की होगी..? जब देवुने आना बंध करदीया तब मेने दो तीन बार ट्राइ कीया.. तो कुतेने बातको मजाकमे टाल दीया.. मोटी बुध्धीको इतनी भी समज नही हे की उनकी मां क्या चाहती हे.. वरना रमा तुम्हारे बच्चेकी मां थोडीना बनती..?

लखन : (सोक्ट होते सामने देखते) व्होट..? क्या आपको हमारे बारेमे सब पता हे..? कबसे..?

सरला : (मुस्कुराते) अरे मेने तुजे कहा थानां मेभी तेरे ओर रमाके बारेमे जानती हु.. इतना गभराता क्यु हे..? खुन तो अ‍ेक ही हे.. तुजे भी पता हे मेरा भानु ओर लता तेरे बापुकी ही ओलाद हे.. क्या फर्क पडता हे बच्चा भानुका हो या फीर तेरा.. मुजे तो उसी दिन पता था जब तुम उनको छोडने यहा आये थे.. ओर उसी दीन दोपहोरको मेने तुम दोनोको चुदाइ करते देख लीया था..

लखन : (पास आते हाथ थामते धीरेसे) चाची.. प्लीज.. खयाल रखीयेगा की इस बारेमे भानु भाइको पता ना चले.. वरना उनको बुरा लगेगा.. ओर हमारे सबंध भी बीगड जायेगे..

सरला : (मुस्कुराते बाहोमे भरते) मेरा बच्चा.. कीतना डरता हे.. भला अ‍ैसी बाते भी बताइ जाती हे क्या..? मे इस मामलेमे बहुत खुली सोच वाली हु.. ओर मुजे भी तो तुमने वो सुख दीया हेनां..? मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस.. मेरी रमा ओर लताको सम्हाल लेना.. ओर कभी कभी आकर मुजे खुस करते रहेना..

लखन : (होठ चुमते धीरेसे) चाची.. अगर आप चाहोतो मे इनडारेक्टली भानु भाइसे बात करलु..? आप भी थोडी कोसीस करते रहो.. वो सेट हो जायेगे.. क्युकी उसे बडी उम्रकी ओरते बहुत पसंद हे..

सरला : (सरमाकर मुस्कुराते) अच्छा..? मुजे तो पता ही नहीथा की भानुको बडी उमरकी ओरत पसंद हे.. वरना मे उनको पहेले ही सेट करलेती.. चलो ठीक हे.. अब मे दुबारा कोसीस करके उसे सेट कर लुगी.. मेरे लीये कोइ बडी बात नही हे.. लेकीन याद रहे.. उनको हमारे बारेमे ओर देवुके बारेमे कभी पता ना चले..

फीर लखन वहासे नीकल गया.. ओर सरला बीस्तरपे गीर गइ ओर आराम करने लगी.. उनकी चुत अब भी हल्कीसी फडफडा रही थी.. सामको खानेके बाद रमा ओर भानु घर चले गये.. पुनमने दया ओर रजीयाको भी अपना सामान पेक करनेको कहा.. ताकी अगली बार लखन आयेतो दोनो उनके साथ जा सके..
 
रवीवार साम सब लोग वापस सहेर चले गये.. रजीया दयाके पास ही रुक गइ.. अब स्कुल कोलेज फीरसे खुलने लगे.. नीलमका अ‍ेडमीशन वही कोलेजमे होगया.. विजय भी अब चलने ओर बोलने लगा था.. तो चंदा लखनने मीलकर वीजयका भी नर्सरीमे दाखला दीलवा दीया.. ओर वीजय स्कुल वेनमे जाने लगा..

लखन अब हर तीसरे दिन दो दीनके लीये गांव चला जाता ओर दो दीन वहा रुककर वापस सहेर आजाता.. दुसरी बार वो अकेला ही गया.. वहा दो दिन रुककर पुनमको खुब प्यार दीया.. लताका भी पेट थोडा बहार नीकल गया था.. फीर भी सावधानी बरतनेका कहेकर पुनमने लता लखनको मीलनेका मौका दीया..

उस दिन दो पहोरको सबलोग आराम कर रहे थे.. तब पुनमने लता लखनको उपरकी मंजीलपे अपने पुराने कमरेमे भेज दीया.. वहा लखनने बडी ही सावधानीसे उस दिन लताको फीरसे चोद लीया.. दो बार अपनी चुतमे लखनका पानी लेकर लता बहुत ही संतुस्ट होगइ थी..



वहा लताने लखनसे वादा कीया की अब जीतनी भी बच्चे होगे सीर्फ आपसे होगे.. तो लखनने जोसमे आकर लताको खडी करके जुका दीया.. ओर पीछसे लंड डालकर लताको अ‍ेक बार ओर चोद लीया.. फीर सामको दया ओर रजीयाको लेकर वापस सहेर आगया.. दोनोका सामान सीधा ही राधीकाके घरपे लोड कर दीया..

वहा रजीया ओर दया लखनसे लीपटके खुब रोइ.. ओर रजीया बार बार लखनकी माफी मांगती रही.. लखनकी बात मंजुसे हुइ तब ही लखनने रजीयाको माफ करदीया था.. ओर रजीयाने हीमत करके लखनको यहा उनसे मीलनेके लीये कहा.. तो लखनने हां कहेदी.. सुनकर दया भी सरमाके हसने लगी..

सामानमे सीर्फ दोनोके कपडे ही थे.. राधीकाने अपना सामान दोनोको अ‍ैसे ही इस्तमाल करने देदीया था.. बस.. अपना कुछ जरुरछ नीजी सामान ओर कुछ दस्तावेज वहासे लेलीया.. अब दया ओर रजीया दोनोने बारी बारी होस्टेलपे जाना सुरु करदीया था.. राधीकाने उन दोनोको सबकुछ काम समजा दीया..

अ‍ेक दिन सुबह दया होस्टेलपे ओर रजीया घरपे थी तो उसने लखनको फोन करके घरपे बुला लीया.. जब लखन उनके घर पहोंचा तो रजीयाने लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर आंसु बहाने लगी.. फीर उसने लखनको उनकी ओर दयाकी पुरी कहानी बतादी.. की कैसे दोनोके बीच लेस्बीयन रीलेशन हुआ..

दयाने लखनको अ‍ेक तसवीर नीकालके दीखाइ.. जीनमे दया ओर रजीया अ‍ेक दुसरेको हार पहेना रही थी.. फीर उनकी भवीस्यकी योजना ओर अ‍ेक दुसरेको कीये हुअ‍े वादे ओर कसमेकी बात कही.. लखन सबकुछ समज गया.. फीर दोनो बेडरुममे चले गये.. तो आज रजीया बहुत ही जोसमे लखनका खुलकर साथ दे रही थी..



लखन : (रजीयाको चोदते) रजु.. तुमने दोनोकी सादी वाली तसवीर दीखाइ तो उनमे पती पत्नी कौन हे..?

रजीया : (जोरोसे सीसकारीया करते मदहोसीमे) ल..ख..न.. सीइइइइ आह.. आह..आह.. पहेलेकी तराह थोडा ओर जरसे चोदीयेनां.. बताती हु.. हम दोनोमे अ‍ेक समजोता हुआ हे.. अ‍ेक दिन मे पतीका रोल नीभाती हु तो अ‍ेक दिन दया.. हमारे पास बेल्ट वाला डील्डो हे.. लगभग आपके हथीयारकी साइजका.. बस.. उसीसे हम अपने आपको संतुस्ट करती हे..

इस दिन लखनने रजीयाकी बडी ही सावधानीसे तीन बार धमाकेदार चुदाइ करली.. रजीया बहुत ही खुस थी.. फीर दोनो बाथरुममे अ‍ेक साथ नहाने चले गये तो वहा भी लखनने रजीयाको खडे खडे चोद लीया.. फीर दोनो कंपलीट होकर बहार आगये.. ओर रजीया लखनसे सटकर बेडपे बैठ गइ..

रजीया : (सरमाते धीरेसे) लखन.. आप मेरा पहेला प्यार हो.. मे आपकी पहेली पत्नी हु.. मे आपको कभी नही भुलुगी.. बस.. अ‍ेक ही बीनती हे..

लखन : (मुस्कुराते) क्या..?

रजीया : (सरमाते धीरेसे) लखन.. जो प्यार अभी आपने मुजे दिया.. मे चाहती हु वही प्यार अब आप दया बहेनको भी दीजीये..

लखन : (सामने देखते) लेकीन.. बहेनके साथ वो मेरी भाभी भी हे..

रजीया : (मुस्कुराते) कोइ लेकीन बेकीन नही.. मुजे पता हे वो आपकी बडी बहेन हे.. पुनोदी भी बहेन हेनां..? हमारे खानदानमे पहेली पसंद बहेन ही होती हेनां..? इसीलीये इस बारेमे आपसे बात करनेके लीये हीच कीचा रही हे.. उनको आपसे बहुत सरम आ रही हे.. बस.. हम दोनोने अ‍ेक दुसरेकी जरुरतोका खयाल रखा इसीलीये साथमे हे..

लखन : (सामने देखते) रजु.. वो बडे भैयाकी अमानत..

रजीया : (बात बीचमे ही काटते मुस्कुराते) जानती हु मे.. जबसे जो बडे भैयासे गर्भवती हुइ ओर मंजुदीदी चली गइ तबसे बडे भैयासे काफी दुर हो गइ हे.. इसीलीये तो मे वहा रुकी हुइ थी.. पुनोदीने कहा हेकी अब भाइकी सभी बीवीअीकी आप ही सम्हालने वाले हे.. तो मे चाहती हुकी मेरे साथ आप दया बहेनको भी सम्हाल लीजीये..

लखन : (मुस्कुराते) क्या पुनोने सबको बतादीया हे..?

रजीया : (मुस्कुराते) हां.. अब दया बहेन भी आपके साथ रीलेशनमे आना चाहती हे... लेकीन इस बारेमे वो आपसे खुलकर बात करनेके सरमा रही हे.. इसीलीये मे उनकी बात करनेके लीये आज घरपे हु.. वो आपसे मीलन करनेके लीये पुरी तराह तैयार हे.. बस.. पहेल आपको करनी होगी.. वो मना नही करेगी..

लखन : (मुस्कुराते) क्या ये बात खुद उसने कही हे..?

रजीया : (मुस्कुराते) हां.. हम दोनो अ‍ैसी बातोकी चर्चा खुलकर करते हे.. उनकी बात कहेनेके लीये ही आज उसने मुजे घरपे रहेनेके लीये कहा हे.. ताकी मे आपसे मील भी लु.. ओर उनके दिलकी बात भी केह सकु.. कल सीर्फ मे ही होस्टेलपे जाउगी.. वो घरपे रहेगी.. लेकीन पहेल आपको करनी पडेगी.. वो मना नही करेगी.. आप राधीका दीदीको छोडकर यही चले आना.. वो घरपे होगी.. आप समज गयेनां..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. अ‍ेक ओर भाभी.. ठीक हे.. मे आजाउगा..

रजीया : (मुस्कुराते) हंम.. भाभी नही.. बहेन.. आपकी पहेली पसंद अपनी बहेन ही हे.. हेनां..? हमे पता हे आप भावना दीदी ओर चंदा दीदीको भी मील चुके हो.. ओर अब आपकी सभी भाभीया आपके नीचे लेटनेके लीये आतुर हे.. वहा पुनोदीदीने सबसे बात करते समजा दीया हे..

दुसरे दिन रजीया दयाको घरपे छोडकर होस्टेलपे चली गइ.. तब दयाकी दिलकी धडकन बहुत ही तेज चलने लगी.. वो बडी बेसब्रीसे लखनका इन्तजार करने लगी.. दरवाजा बंध करके वो अपने आपको आयनेके सामने बैठकर सवारने लगी.. जैसे पहेली बार अपने बोयफ्रेन्डके साथ डेटपे जा रही हो..

ठीक साडे दस बजे दरवाजेपे हल्कासा दस्तक हुआ.. सुनकर दया अ‍ेक पल सांस लेना भुल गइ.. वो सर्मसार होने लगी.. ओर जटसे दरवाजेकी ओर आने लगी.. उसने धडकते दिलसे दरवाजा खोला तो सामने लखन मुस्कुराते खडा था.. दयाने सरमाके स्माइल कीया ओर अ‍ेक तरफ हट गइ..

लखन अंदर चला गया तो दयाने दरवाजा बंध करके लोक करदीया.. वो बहुत ही सरमा रही थी.. की लखनसे वो बात कैसे करे..? तभी लखनने कुछ अ‍ैसा कीया जीनकी दयाको उमीद नही थी.. लखनने सीधा ही दयाको अपनी गोदमे उठा लीया.. ओर बैडरुमकी ओर चल पडा जहा कल उसने रजीयाको चोदा था..

दया सरमसे पानी पानी होगइ.. वो कुछ नही बोली ओर नजरे जुकाते लखनके गलेमे बाहोका हार पहेना दीया.. फीर लखनके सीनेपे सर छुपालीया.. लखनने रुममे जाकर दयाको बेडपे लीटा दीया.. ओर खुद भी उनके उपर लेटते छा गया.. फीर दयाकी आंओमे देखने लगा तो दया मुस्कुराते सरमा गइ.. ओर नजरे जुकाली..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. इतना क्यु सरमा रही हो..?

दया : (सरमाते धीरेसे) भैया.. दीदीके साथ आपकी भाभी भी हु.. आप मेरे देवरके साथ छोटे भाइ भी हो..

लखन : (मुस्कुराते) पता हेनां आपको.. मेरी पहेली पसंद मेरी बहेन ही होती हे..

दया : (सर्मसार होते धीरेसे) हां पता हे.. तो फीर आज बहेन समजकर ही प्यार.. मीन्स..

सुनते ही लखनने दयाके होठोपे अपने होठ रखदीये.. दयाके तनसे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. लखन दयाके होठोको चुमते उनके ब्लाउसके बटन खोलता गया.. फीर ब्राको उची करदी.. तो दयाके दोनो कबुरत बहार आकर फडफडाने लगे.. लखनने दयाके होठोको छोडकर उनके बुब्स मुहमे लेलीया ओर चुसने लगा..



जीसे दयाकी कामाग्नी ओर भडक गइ.. वो मदहोस होते आधस आंख चडाते लखनके सरको सहेलाने लगी.. लखनको पता थाकी स्त्रीको कैसे वसमे करना हे.. ओर आज तो अ‍ेक नइ चुत मील रही थी.. वोभी सौतेली बहेन.. जीसे लखन ओर भी जोसमे आगया.. लखन दयाको अ‍ैसे प्यार करने लगाकी दयाको सम्हलनेका मौका ही नही मीला.. उसे पता भी नही चलाकी उनके तनसे कब सभी कपडे गायब होगये..
 
दयाका तन कीसी कांचकी पुतलीकी तराह चमक रहा था.. दोनो इतने अतंगर होगये की दया अांख बंध करते फोरप्लेयका आनंद ले रही थी.. वो तब उछली जब उसे अपनी चुतपे लखनका मुह महेसुस हुआ.. दया मछलीकी तराह छटपटा रही थी.. ओर आखीर उनसे रहा नही गया.. वो अचानक बैठ गइ..

ओर लखनका सर ओर हाथ पकडकर उसे लेटते हुअ‍े अपने उपर खीच लीया.. फीर लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. तभी दयाको अपनी चुतपे लखनका लंड ठोकर मारते कहेसुस हुआ.. लखनने दयाके दोनो हाथ कसके पकड लीये.. ओर दयाको लीपलोक करलीया.. दयाने जोरोसे अपनी आंख भीचते बंध करदी..

तभी कमरेमे अ‍ेक जोरोकी चीख सुनाइ दी.. जो लखनके मुहमे ही दब गइ.. दया दोनो पैर बैडपे पटकपे आंसु बहाते मुहको इधर उधर करते लखनसे छुटनेकी कोसीस करती रही.. फीर कुछही पलोके बाद वो सांत होने लगी.. तब लखनने उनका कुह छोडकर बुब्सको मुहमे लेलीया.. ओर बारी बारी दोनो बुब्सको चुमने लगा..



दया : (आंसु बहाते) भैया.. धीरेसे.. पेटमे बच्चा हे.. ओर आपका बहुत बडा हे.. तो ध्यानसे..

लखन : (होंठ चुमते) दीदी.. फीकर मत करो.. मुजे पता हे..

कुछ देरके बाद दया लखनसे नजरे चुराते उनकी पीठ ओर सरको सहेलाते अपने बुब्सपे दबाव बढाने लगी.. तो लखन समज गयाकी दया अब चुदवानेके लीये रेडी हे.. फीर वो धीरे धीरे कमर हीलाते दयाको चोदने लगा.. तो अब दया भी सरम त्यागके लखनका साथ अपनी कमर हीलाते देने लगी..



इस दिन बीना नीचे उतरे लखनने तीन बार दयाको धमाके दार तरीकेसे चोद लीया.. ओर दयाका अ‍ेक अ‍ेक अंग जंजोरके रख दीया.. बेडपे दोनोके कामरसके साथ खुनके हल्के धबे भी हो गये थे.. फीर लखन दयाको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. तो जाहीरहे लखनने अपनी आदतके मुताबीक वहा भी दयाको खडे खडे चोद लीया..

दया बहुत ही सर्मसार होगइ.. दोनो बहार आगये.. दया थोडा लंगडाते चल रही थी.. फीर दोनो कपडे पहेनने लगे.. तब दया टेडी नजरसे लखनकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. कीतने दिनोके बाद आज वो संतुस्ट हुइ थी.. इतनी चुदाइके बाद भी दया लखनसे बात करनेमे सरमा रही थी.. ओर आखीर हिंमत करते पुछ ही लीया..

दया : (मुस्कुराते) लखन भैया.. बुरा मत मानना.. मे रजुसे बहुत प्यार करती हु.. ओर हम सुरुसे ही अ‍ेक दुसरेका सहारा हे.. लेकीन पता नही थाकी हमारी सादी इसी खानदानमे हो जायेगी.. मे मंजुदीदीके इस फैसलेकी सराहना करती हु.. ओर हम दोनोने आपके साथ आगे बढनेका फैसला करलीया हे..

लखन : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. आप दोनोकी पुरी कहानी.. आप फीकर मत करो.. मे आपके फैसलेके साथ हु.. आप भाभी के साथ मेरी बहेन भी हे.. ओर रजु मेरी पहेली बीवी..

दया : (कातील नजरोसे देखते मुस्कुराते) लखन भैया.. तो अब आप अपनी इस बहेन ओर बीवीको मीलने आओेगेनां..?

लखन (ममुस्कुराते) हां.. आज मे अपनी बहेनको मीलनेके लीये आया था.. लेकीन अब दुबारा बहेनको मीलने नही.. मेरी इस खुबसुरत भाभीको मीलने आउगा.. ओर हमेसा मे आप दोनोका खयाल अ‍ैसे ही रखुगा..

दया : (सर्मसार होते धीरेसे) थेन्क्यु भैया.. हां जरुर आना.. अब मुजे बहेन मानो या भाभी.. इस घरके दरवाजे आपके लीये हमेसा खुला ही हे.. बस.. हम दोनोका अ‍ैसे ही खयाल रखीयेगा..

कहेते दया दोडकर लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर अ‍ेक बार फीर दोनोके होंठ मील गये.. फीर लखन वहासे चला गया ओर दया आराम करने लगी.. दिन बीतने लगे.. इसी दौरान लखन अ‍ेक बार ओर दया ओर रजीयाको बारी बारी मीलकर उनकी धमाकेदार चुदाइ करके आगया..

फीर तीनोने आपसमे तैय करलीया.. की अब हप्तेमे दोनोको दो बार मीलनेके लीये लखन आयेगा.. ओर वादेके मुताबीक लखन मौका मीलते दया ओर रजीयाको मीलने भी जाने लगा.. कभी कभी तो तीनो अ‍ेक ही साथ अ‍ेक ही बीस्तरमे मीलने लगे.. ओर लखन बारी बारी दोनोको चोद लेता..



सहेरमे अब सृती राधीका भावीका चंदा ओर नीलम ही रहेती थी.. जो पांचोको लखनका भरपुर प्यार मील रहा था.. अब लखनका काम ही यही रहे गया था की वो अपनी ओर देवायतकी सभी बीवीयोको संतुस्ट करता रहे.. नीलम ओर लखनके बारेमे अभी तक चंदाको कुछ पता नही था.. नीलम अब रेग्युलर हर रात लखनसे उनकी बीवीओके साथ चुद रही थी.. जीसे उनका तन भी काफी भर गया था..

उनके बुब्स अब अ‍ेक सादी सुध्धा ओरतकी तराह बडे हो गये थे.. ओर पीछवाडा थी काफी भरावदार हो गया था.. वो हर सेटरडे सन्डे धिरेनके घर चली जाती.. तो वहा भी धिरेन उनको वायग्रा खाकर खुब जमकर पेलता.. जीसे धिरेनको भी लगने लगाकी वो नीलमको पेलता हे इसीलीये नीलमका तन अ‍ैसे भरावदार होगया हे..

उधर गांवमे भी सबकुछ सही चल रहा था.. भानुका घर लगभग कंपलीट होगया था.. ओर अभी कलरका काम चल रहा था.. तबतक भानु नये घरमे आनेकी तैयारीया कर रहा था.. तो अब स्कुलका ओर होस्पीटलका काम खतम होनेकी कगारपे था.. पुनम रश्मी चारु सबने मीलकर गांवका खुब वीकास कीया..

गांवके लीये कइ योजनाअ‍े पुरी करदी.. इसके लीये सरपंचकी ग्रांट ओर देवायतके नीजी पैसे भी लगे थे.. गांवमे हर गलीमे पकी सडक.. पानीकी टंकी.. हर घरपे पानीका नल.. गांवके लीये बडी गौशाला.. फसलके लीये बडे बडे गोडाउन.. सब मीलाके देवायतका गांज अब अ‍ेक आदर्श गांव बन गया था..

अब इस गांवकी आबादी भी बढने लगी थी.. जीनमे ज्यादातर यंग जोडे ही रहेने आये थे.. जीनके घरमे अब भी आपसी रीस्तोमे सादीकी मना थी.. इसीलीये वो लोग घरसे भागकर सादी करके यहा रहेने लगे.. जीनको देवायत ओर पंचायतका भी संरक्षण मील रहा था.. इनके लीये लखनने अपने दोस्तो ओर गांवके कुछ ओर लडकोकी पुरी फोज बनाइ थी.. जो इस जोडेकी रक्षा कर रही थी..

बीचमे अ‍ेक दीन तीन दीनकी छुटी थी तब लखन दया रजीयाको छोडकर घरके सभी लोगोको लेकर गांव चला गया.. वहा सृती भावीका ओर वसुधाने मीलकर होस्पीटलके लीये जरुरी इन्स्टुमेन्ट ओर मशीनकी लीस्ट बनाली.. जो सभी मशीनोका खर्चा भावीका देने वाली थी..

गांवके वीकासके साथ अब सेक्सका भी लोग भरपुर आनंद ले रहे थे.. इसी दौरान अ‍ेक दिन सरलाने भी मौका देखकर भानुसे खुलकर बात करली.. ओर भानु बडी ही आसानीसे सरलाके साथ सेट होगया.. उस दिन नयहा घर दीखानेके बहाने भानु सरलाको लेकर गांव आ गया..

जैसे ही साम होते कारीगर चले गये उस दिन भानुने वायग्रा खाकर सरलाको नये घरपे ही चोद लीया.. तो दुसरी ओर भावना ओर चंदाका समय भी नजदीक आने लगा था.. दोनोका पेट काफी बहार नीकल गया था.. तो पुनमने अब दोनोको ट्रावेल करनेको मना कर दीया.. ओर लखन चंदाके साथ भावनाको भी सहेर भेज दीया..

भावना अपनी बच्चीको लेकर लखनके साथ सहेर आगइ.. भावना बहुत खुस थी.. क्युकी अब कुछ दिन वो लखनके साथ ही रहेने वाली थी.. भावनाको भी चंदाके बगल वाले रुममे नीचे ही रहेनेको कहा.. ताकी उनको कोइ तकलीफ ना हो.. सृती चंदा ओर भावनाकी रेग्युलर जांच करती ओर उनका खयाल रखती..

अ‍ेक दिन लखनके फोनपे अ‍ेक मेसेज आया.. देखा तो वो मेसेज वसुधाका था.. उन्होने तारीख.. होटेलका नाम.. कमरा नंबर.. ओर साम पांच बजेका समय लीखा था.. मेसेज देखते ही लखन मुस्कुराने लगा.. ओर उसने वो मेसेज सृतीको दीखाया.. तो सृती पढकर हसने लगी.. फीर सृतीने लखनको वसुधाको मीलनेकी परमीशन देदी..

लखन : (मुस्कुराते) सृतीदी.. क्या करु..?

सृती : (मुस्कुराते) क्या करु मतलब..? जाओ जाकर मीललो.. भाइ.. उस दिन उसी होटेलपे मुजे ओर भावुको भी जाना हे.. हमारी मेडीकल कोन्फरन्स हे.. लेकीन ये अ‍ेक दिन सुबह १० दो पहोर दो बजे तक ही हे.. लंच करके सबलोग चले जायेगे.. तो इसने दो दिनके लीये होटेल बुक कीया हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. सायद ये उनका लडकी बननेके बाद पहेली बार हे.. दुसरे दिन तक वो यही आराम करना चाहती होगी.. उसे भी पता हे उनकी क्या हालत होगी.. कहोतो मे पुनोसे बात करलु..?

सृती : (मुस्कुराते) नही भाइ.. पुनोदीको पुछनेकी जरुरत नही हे.. अब यही सब जीम्वेवारी पुनोदीने मुजे दी हे.. आप आरामसे जाओ.. ओर उनकी जरुरतको पुरी करो..

उस दिन वसुधाने उसी होटेलमे अ‍ेक कमरा दो दिनके लीये बुक करलीया था.. सुबह दस बजे कोन्फरन्समे उसे सृती ओर भावीका भी मीली.. तीनोने साथ बैठकर लंच भी कीया.. लेकीन सृती ओर भावीकाने उनके सामने लखनका जीक्र नही कीया ताकी वसुधाको सर्मीन्दा ना होना पडे..

सृती ओर भावीका दो बजे घरपे आगइ.. लखन चार बजे होटेलपे पहोंच गया.. देखा तो वसुधा कंपलीट सींगार करके तैयार थी.. उन्होने होटेल वालोको केहकर बेडको भी फुलोसे कंपलीट सजाया था.. जैसे ही लखन आया.. दरवाजा खोलकर सरमाके मुस्कुराते साइडमे होगइ.. फीर दरवाजा बंध करदीया..

उस दिन बंध कमरेमे मानो वसुधाकी सुहागरात मन रही थी.. लखनने वसुधाको पहेली बार अ‍ेक लडकीका अहेसास करवा दीया.. दोनो फोरप्लेयके बाद अ‍ेक हो गये.. वसुधाने पहेली बार कीसी मर्दका लंड अपनी चुतमे गहेराइओ तक महेसुस कीया.. ओर सांत होते लखनसे नजरे चुराते इधर उधर मुह करते लखनका वजन अपने तनके उपर महेसुस कर रही थी..

जब लखनका लंड उनकी चुतको चीरते हुअ‍े अंदर घुसा तब वो बहुत चीखी चीलाइ.. ओर लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करते अपने पैर बेडपे पटकती रही.. उसने आज अ‍ेक कुआरी लडकीका अ‍ेहसास हुआ.. चुतसे थोडा खुन भी नीकला.. ओर लखनने उसे बखुभी सम्हाला.. ओर आखीर सांत कीया..



फीर तो होटेलके पुरे कमरेमे वसुधाकी मदहोसीमे सीसकारीया सुनाइ देती रही.. तो आज अ‍ेक कुआरी लडकी नही.. अ‍ेक बडी उमरकी कुआरी ओरतका सीलभंग करते लखन भी बहुत उत्साहीत था.. अ‍ैसी ओरत जो पहेले अ‍ेक लडका थी.. लखनने बीना लंड बहार नीकाले लगातार वसुधाको तीन बार चोदलीया.. ओर तीनो बार अपने गाढे पानीसे वसुधाकी चुतको भरता रहा..



ओर आखीरमे वसुधाको गोदमे उठार बाथरुममे ले गया.. वहा उसने जसुधाकी चुतकी सीकाइ की.. फीर दोनो बहार आकर कंपलीट हो गये.. ओर खाना ओर्डर कीया.. इस रात वसुधाने लखनको सुबह फीरसे मीलने आनेका वादा लेकर लखनको घरपे जाने दीया.. ओर लखन देर रात घरपे चला गया.. ओर वसुधा पेइन कीलर ओर आइपीलकी गोली खाकर सो गइ..

उस रात जब लखन देरसे घर पहोंचा तो सबलोग सो चुके थे.. लखन चुपचाप चेन्ज करते सृतीको पीछेसे बाहोमे भरते लीपटर सो गया.. ओर अ‍ेक हाथ सृतीके बुब्सपे रख दीया.. उसी पल सृतीकी आंख खुल गइ.. ओर वो पलटकर लखनकी बाहोमे समा गइ.. फीर सर उचा करते रुममे देख लीया..

तो भावीका सो रही थी.. चंदा भावना नीचेके रुममे सोइ थी.. ओर नीलम अपने कमरेमे.. तब सृतीने अपना गाउन नीकाल दीया.. ओर लखनका पैजामा नीचे खीचकर लखनके उपर आके पैर पसारके उनकी कमरपे बैठ गइ.. फीर धीरेसे लखनका लंड अपनी चुतकी गहेराइओमे उतरके लखनके उपर जुकते होंठ चुमने लगी..



फीर धीरे धीरे अपनी कमर हीलाते लखनको चोदने लगी.. जब वो अ‍ेक बार जड गइ तो लखनके उपर लेट गइ.. ओर उनके होठोको चुमते लखनकी आंखोमे देखने लगी.. फीर अ‍ेक बार भावीकाकी ओर देखती हे.. फीर लखनको बाहोमे भीचते पलट जाती हे तब लखनने मोर्चा सम्हाल लीया.. ओर सृतीकी दो बार धमाकेदार चुदाइ करडाली.. फीर दोनो कंपलीट होते अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे लेट गये तब..
 
सृती : (धीरेसे फुसफुसाते) भाइ.. मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे..

लखन : (होठको चुमते धीरेसे) हां दीदी.. बोलो.. इतनी रात..? जरुरी बात हे क्या..?

सृती : (कामे फुसफुसाते) हां भाइ.. बहुत जरुरी हे.. अच्छा हे कमरेमे सीर्फ हम तीनो ही हे..

लखन : (बातकी गंभीरता समजते) दीदी.. कोइ चीन्ताकी बात तो नही..? बोलो..

सृती : (सामने देखते धीरेसे) भाइ.. सायद चीन्ताकी बात ही हे.. खाना खानेके बाद हम सोनेके लीये उपर आये.. भावुतो हमारे कमरेमे चली गइ थी.. लेकीन आज नीलु कुछ परेसान दीख रही थी.. जब मे उनके कमरेमे गइ तो अ‍ेक अजीबसी आवाज सुनी वो बाथरुममे थी.. मेने वहा जाकर देखा तो वो उल्टीया कर रही थी..

लखन : (थोडी चीन्तासे) ओह गोड.. कुछ गडबड हे क्या..? क्युकी आजकल वो कुछ ज्यादा ही हमारे साथ सोने लगी हे..

सृती : (सामने देखते धीरेसे) वही तो.. भाइ.. मुजे भी उनकी टेन्शन होने लगी हे.. मेने उसे पुछा भी.. तो कहा हर बार आपसे मीलनके बाद वो आइपील लेती हे.. ओर वो आइपील लेना कभी नही भुलती.. मेने उनकी आइपील देखी.. तो उनके पास ढेर सारी आइपीलकी स्ट्रीप थी.. उनकी डेट देखी तो सब अ‍ेक्सपायर होचुकी थी..

लखन : ओह गोड क्या मुसीबत हे..? आपने उसे चेक कीया क्या..?

सृती : (सामने देखते धीरेसे) हां भाइ.. मेने उसे हाथ देखकर चेक कीया.. तो उनकी पल्स कुछ असामान्य लगी.. जैसे प्रेटनेन्ट लेडीकी होती हे.. भाइ.. सायद नीलु प्रेगनेन्ट हो गइ हे.. पका तो क्लीनीकपे रीपोर्टके बाद ही होगा..

लखन : (थोडा डरते धीरेसे) दीदी.. तब तो गडबड होजायेगी.. क्या इस बारेमे कीसी ओरको पता हे..?

सृती : (सामने देखते) नही भाइ.. ये सब अभी कुछ देर पहेले ही हुआ हे.. इस बारेमे हम दोनोके अलावा कीसीको नही पता..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) अच्छा हुआ.. अभी कीसीको बताना भी मत.. दीदी.. तो अब हम क्या करे..? इसे तो अभी ओर पढना हे.. उनकी सादी भी धिरेनसे हो चुकी हे.. ओर अभी उनके पास भेजना भी ठीक नही.. तो आपने कुछ सोचा हे..?

सृती : (सामने देखते) भाइ.. मेने उनकी आइपीलकी स्ट्रीप देखी.. उनके पास ढेर सारी थी.. लेकीन आउट ओफ डेटकी.. अक्सपायर हो चुकी थी.. पुछा तो कहा मे जब यहा आइ तब मेरी मम्मीने दी थी.. पता नही उनकी मम्मीने उसे यहा पढनेके लीये भेजाहे की चुदवानेके लीये.. आप समज गयेनां..?

लखन : (थोडा जोरोसे मुस्कुराते) दीदी.. पहेले वो यहा आइ तब कुछ ओर मक्सदसे आइ थी.. आपको सब पता हे.. ये लडकी भीनां.. मेने कहाथा हप्तेमे सीर्फ अ‍ेक बार.. लेकीन आपने ही उनकी आदत बीगाडी हे.. क्या जरुरत थी उनको हमारे साथ सामील करनेकी..? अब उसे हर रात हमारे साथ सोना हे.. अब क्या करे..?

सृती : (सरमे हाथ घुमाते धीरेसे) भाइ..मुजे क्या पता वोभी अपनी मांकी तराह चुदकड होगी.. कल मे उसे कोलेज तो भेजुगी.. लेकीन उसे कहुगीकी वो कोलेज नही.. सीधे मेरी क्लीनीकपे आजाये.. वहा उनकी रीपोर्ट करुगी.. अगर रीपोर्ट पोजीटीव आइ तो इस कमीनी(भावीका)को कहुगी.. ये कुछ करदेगी.. इस काममे ये कमीनी माहीर हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. अब तो इस गाली मत दो.. आपकी सौतन होगइ हे..

सृती : (मुस्कुराते) सौतन होगइ हे इसीलीयेतो गालीया सुनती हे.. कमीनी आपके पीछे तो पागल होगइ हे.. सारा दिन आपके नामकी माला ही जपती रहेती हे.. हमारा लखन अ‍ैसा.. हमारा लखन वैसा हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. वो सचमे मुजे बहुत प्यार करने लगी हे.. ओर हो सके तो ये कीसीको बताना नही.. आप दोनो ही इसे नीपटालो.. अब हमे नीलुका भी कुछ करना पडेगा.. आइपील लेनेके बाद भी वो प्रेगनेन्ट होगइ हे.. अब ध्यान रखना पडेगा.. बस.. खासकर चंदा भाभीको इनका पता ना चले..

दुसरे दिन सुबह सबलोग चाइ नास्तेपे बैठे थे तब नीलम थोडी चींतीत थी.. ओर सबके सामने जबरदस्ती मुस्कुराने नाटक करते नोर्मल होनेकी कोसीस करती रही.. अब चंदाका दिन बहुत ही नजदीक था.. तो सृती गभरा रही थी.. की चंदा वहा क्लीनीकपे आये इनसे पहेले ही नीमलका नीपटारा होजाये.. तभी..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. तेरी मम्मीका फोन आया था.. वो लोग हमारे गांवमे सीफ्ट हो रहे हे.. ओर सब सामान पेकींग कर रहे हे.. तो तुजे अ‍ेक दो दिन मददके लीये बुलाया हे..

चंदा : (मुस्कुराते) हां नीलु.. वैसे भी रमा पेटसे हे.. उसे काम करनेके दिकत होगी.. चली जाओ..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) जी.. आज ही चली जाती हु.. जीजु.. छोडने आओगेनां..?

लखन : (सृतीकी ओर मुस्कुराते) हां.. नास्ता करले.. फीर चेन्ज करके आजा..

राधीका : आज मेभी घरपे बहुगी.. अब चंदादीदी ओर भावनादीदी का खयाल रखना बहुत जरुरी हे.. वहा अब रजुदीदी ओर दया बहेनने सबकुछ अच्छेसे सम्हाल लीया हे.. अब होस्टेलकी चीन्ता नही हे..

सृती सबकुछ समज गइ.. वो कुछ नही बोली.. ओर फटाफट चाइ नास्ता करके वो भावीकाको लेकर क्लीनीक पे चली गइ.. राधीका घरका काम करने लगी.. तो चंदा ओर भावना बच्चेको लेकर होलमे बैठ गइ.. नीलम चेन्ज करने उपर चली गइ.. तो लखनने कीचनमे जाकर राधीकाको अपनी बाहोमे भर लीया..

तो वो पलटके लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोके होठ मील गये.. अब अ‍ैसी बाते सामान्य हो गइ थी.. फीर लखन होलमे चला गया.. ओर भावनाकी बच्ची ओर विजयके साथ खेलने लगा.. फीर लखनने बारी बारी चंदा ओर भावनाके होठोको भी चुम लीया.. जीसे दोनोही सरमा गइ.. ओर अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर हसने लगी...

तभी नीलु चेन्ज करके ओर अ‍ेक कपडेकी छोटी बेग लेकर नीचे आगइ.. वो राधीका चंदा ओर भावनाके गले मीली.. फीर दोनो कार लेकर घरसे नीकल गये.. बहार नीकलते ही नीलम कारमे ही लखनसे लीपट गइ.. ओर आंसु बहाने लगी.. लखनने कारको अ‍ेक सुमसान जगाहपे खडी करदी.. तो..

नीलम : (लीपटर रोते) लखन.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजसे गलती होगइ.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट..

लखन : (उनके आंसु पोछकर सांत करते) चुप होजा.. इसमे तेरी कोइ गलती नही हे.. लेकीन तुजे देखना चाहीये.. की ये दयाइ अ‍ेक्सायरी डेटकी तो नही.. नीलु.. तेरी मंजील अभी थोडी दुर हे.. वरना ये सब नही करना पडता..

नीलम : (आंसु पोछते) आइ नो लखन.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. मेभी चाहती हु की हम दोनोकी अ‍ेक नीशानी हो.. लेकीन अभी नही.. क्युकी मेरे भी कुछ लक्सय हे.. बस.. अ‍ेक बार उसे हासील करलु.. फीर हम दोनो जरुर हमारा बच्चा पैदा करेगे..

फीर इसके बाद दोनो सृतीकी क्लीनीकपे पहोंच गये.. तो भावीकाकी रीसेपनीस्ट आरती लखनकी ओर देखकर मुस्कुराइ.. फीर लखन ओर नीलमको लेकर सृतीकी केबीनमे चली गइ.. वहा सृती ओर भावीका चाइ पी रही थी.. सृतीने आरतीको कहेकर लखनके लीये भी चाइ मंगवाइ.. जब आरती चली गइ तो..

भावीका : (आस्चर्यसे देखते) अरे नीलु.. गांव जानेकी तैयारीया करली..? लखन छोडने आ रहे हे..?

सृती : (थोडा जीजकते) भावु.. नीलु गांव नही जा रही.. वो चंदादीदीके सामने हमने जुठ बोला.. दरसल.. सा..य..द.. सी इस प्रेगनेन्ट.. अभी रीपोर्ट करते हे.. अगर पोजीटीव आया तो इनका अ‍ेबोर्सन करना पडेगा.. तु समज गइनां..

भावीका : (जोरोसे हसते) कमीनी अब ये काम फीरसे करना पडेगा..? चल ठीक हे घरका मामला हे.. (नीलुकी ओर देखते हसते) चुदकड कहीकी.. कैसे उछल उछलके हमारे पतीका ले रही थी.. प्रेगनेन्ट नही होगी तो क्या होगी.. इनकी वजहसे तो हमारी भी दुसरी बार कुटाइ होजाती थी..

लखन : (गरदन दबोचते) ओ.. इनका जो करना हे करो.. ज्यादा चपड बपड करनेकी जरुरत नही हे..

भावीका : (गरदन छुडाकर अ‍ेक मुका मारते) सालीकी बडी दया आ रही हे..? जब उनको ठोकते थे तब पता नही था..? तब तो उछल उछलके मजे ले रहे थे.. ओर ये कमीनी भी कैसी आवाज नीकालती थी.. हमे फीरसे आपके नीचे आना पडता था..

सृती : (हसते) ओ.. चुप होजाओ दोनो.. भावु.. सुन.. तुजे कुछ कहेना हे..

भावीका : (लखनकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) बोल.. क्या..?

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) दरसल.. नीलु लखनकी सीक्रेट बीवी हे.. तेरी तराह इन दोनोने भी गांधर्व सादी करली हे.. बस.. धिरेनसे सादी तो सीर्फ दिखावेकी हे.. अ‍ेक औपचारीक.. ओर ये सब हमे चंदादीदीसे छुपाके रखना हे.. क्युकी इनके भी कुछ रीजन हे..

भावीका : (मुस्कुराते) अरे तु टेन्शन मतले.. मेतो मजाक कर रही थी.. ये सब बाते पुनोदीदीसे हो गइ हे.. बस.. इतना पता नही थाकी नीलु भी इनकी बीवी हे.. तु इनकी प्रेगनन्सी चेक कर तबतक मे हमारे पतीसे कुछ जरुरी बात करती हु..

फीर सृती नीलमको लेकर अंदर चली गइ.. तभी आरती लखनके लीये चाइ लेकर आगइ.. तो भावीकाने सरारतसे आंखे नचाते लखनको आरतीकी ओर इसारा कीया.. तो आरती सरमसे पानी पानी होगइ.. फीर भावीकाने धीरेसे लखनको आरतीका भी खयाल रखनेको कहा.. तो आरती सरमाकर मुस्कुराते बहार चली गइ..

तभी सृती ओर नीलम बहार आ गये.. ओर रीपोर्टका इन्तजार करने लगे.. तो कुछ ही देरके बाद रीपोर्ट आगइ.. तो पता चला नीलुको अभी दुसरा महीना चल रहा था.. फीर भावीका नीलुको लेकर ओपरेशन थीअ‍ेटरमे चली गइ.. तो सृती लखनको चेक करने वाली केबीनमे खीचकर चली गइ..

अंदर भावीकाने नीलुको कुछ दवाइ पीलाइ.. जीसे नीलु थोडा बेहोसीमे चली गइ.. फीर कुछही देरके बाद उसे नीचेसे ब्लीडींग होने लगी.. बाकीका काम भावीकाकी दो नर्सोने सम्हाल लीया जो अपने साथ लेकर आइ थी ओर इस काममे माहीर थी.. भावीका हाथ साफ करके फीरसे केबीनमे आगइ..



तब उसे पेसन्ट चेक करनेकी जगाहसे हल्कीसी सीसकारीया सुनाइ दी.. वो अंदर देखने गइ तो लखन वही टेबलपे सृतीको चोद रहा था.. जब भावीका आइ तो सृती उनकी ओर देखकर सरमा गइ.. फीर हसने लगी.. तो भावीकाने दांत पीसते जुठे गुस्सेसे लखनकी पीठमे मुका मारदीया ओर बहार चली गइ..

दो पहोर तक नीलुको अ‍ेक स्पेसीयल रुममे सीफ्ट करदीया.. लखन नीलुके पास ही रुक गया.. ताकी घरपे चंदा ओर भावीकाको लगेकी लखन नीलुको गांव छोडने गया हे.. भावीका आरतीको नीलमका खयाल रखनेको कहेकर सृतीको लेकर घर चली गइ.. नीलु कमजोरीकी वजहसे सो गइ थी..

दो पहोरके समय ज्यादातर स्टाफ भी खानेके लीये चला गया था.. तभी लखन आरतीके पास चला गया तो आरती सरमा गइ.. फीर दोनोने बाते करते मीलनेक तैय कर लीया.. ओर आरती लखनको लेकर उपरकी मंजीलपे अ‍ेक खाली रुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही लखनने आरतीको अपनी बाहोमे दबोच लीया..

फीर दोनोके होठ मील गये.. ओर प्यारका खेल खेलने लगे.. जब आरतीने लखनका लंड देखा तो अ‍ेक पलके लीये तो वो गभरा गइ.. फीर लखनने उसे तसली दीकी वो दोनो अभी नही मीलेगे.. क्युकी लखनको पता था की अ‍ेक बार मीलनके बाद आरतीकी हालत खराब हो जायेगी..



फीर आरतीने लखनको वही ब्लुजोब दीया ओर लखनने भी आरतीकी चुतके रसको मुह लगाकर नीकाल दीया.. दोनोने अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कीया.. आरती बहुत खुस होगइ.. फीर दोनोने कंपलीट होते कपडे पहेन लीये तब आरती लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोने मीलनके लीये समय तैय करलीया..

फीर दोनोने साथमे खाना खाया.. खाना खाते आरतीने अपने बारेमे सबकुछ लखनको बता दीया.. फीर सृती भावीकाके आनेके बाद देर साम लखन घर चला गया.. तीनोने नीलमका मामला बखुबी सम्हाला.. नीलमको तीन दिन तब वहा आराम करने दीया.. जब नीलम आखीर घर आइ तो वो बीमारीका बहाना बनाकर अ‍ेक हप्ते तक आराम करती रही.. जब नोर्मल होगइ तो उसने फीरसे कोलेज जाना सुरु करदीया..

इसी बीच साहील कइ बार सहेरमे सायराको मीलने चला जाता.. तो कभी कादीर ही उसे टुरकी वजहसे दो तीन दिनके लीये बुला लेता.. तब साहील ओर सायराका मीया बीवीकी तराह रहेते ओर खुब जमकर चुदाइ करते.. सायरा अब साहीलके साथ दोहरी जींदगी जीने लगी थी.. सायराकी प्रेगनन्सीकी वजहसे साहीलने सायराकी पीछवाडेका भी उद्घाटन करलीया था ओर आजतक सायरा ओर साहीलनेअपने बारेमे कादीरको पता नही चलने दीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९८

इसी बीच साहील कइ बार सहेरमे सायराको मीलने चला जाता.. तो कभी कादीर ही उसे टुरकी वजहसे दो तीन दिनके लीये बुला लेता.. तब साहील ओर सायराका मीया बीवीकी तराह रहेते ओर खुब जमकर चुदाइ करते.. सायरा अब साहीलके साथ दोहरी जींदगी जीने लगी थी.. सायराकी प्रेगनन्सीकी वजहसे साहीलने सायराकी पीछवाडेका भी उद्घाटन करलीया था ओर आजतक सायरा ओर साहीलनेअपने बारेमे कादीरको पता नही चलने दीया.... अब आगे

तो दुसरी ओर श्रीधर ओर वृन्दाके बीच भी अफेर गहेरा हो गया.. वोभी सहेरमे जाकर उनकी मौसी.. यानीकी उनकी सासको कइ बार चोद चुका था.. अब श्रीधरका वृन्दाके साथ सास दामादसे ज्यादा अ‍ेक मीया बीजी जैसा रीस्ता होगया था.. वो वृन्दाका भी अ‍ेक बीवीकी तराह खयाल रखने लगा.. दोनो काफी नजदीक आ गये थे..

दोनो अब जीतुलालके सामने भी खुलकर हस हसके बाते करते ओर आपसमे हल्कीसी मजाक भी कर लेते.. जीसे जीतुलालको भी कुछ अजीब लगा.. ओर वो असुरक्षाकी भावनासे अपने ही बेटेसे जलने लगा.. लेकीन इस बातसे वृन्दाको कोइ फर्क पडने वाला नही था.. क्युकी वो पहेलेसे ही अ‍ेक बीन्दास्त ओरत थी..

उनको पता थाकी अब जीतुलालका उनकी पत्नीसे डीवोर्स हो चुका हे.. इसीलीये अब जीतुलालको उनके अलावा कोइ सम्हालने वाला नही हे.. इस बातसे वृन्दा बहुत ही लापरवाह हो चुकी थी.. ओर इसी वजहसे उन्होने श्रीधरकी मम्मी ओर अपनी कजीन ब्रीन्दासे भी मेल जोल बढा लीया था.. ताकी वो ज्यादासे ज्यादा श्रीधरकी नजदीक रेह सके..

दुसरी ओर श्रीधर भी सावधानीया बरतता.. वो आते ही पहेले अपनी बीवी जयश्रीके पास चला जाता ओर उनके होठ चुमलेता.. फीर बच्चेके साथ खेलता.. ओर जयश्रीके दोनो बुब्सके साथ हल्केसे छेडखानी करता.. जीसे जयश्री भी बहुत खुस होती.. तब कुछ देर दोनो पती पत्नीको अकेलेमे मीलनेका मौका देनेके बाद वृन्दा भी इन दोनोके साथ सामील हो जाती..

ओर वृन्दा श्रीधरके साथ बातोसे मस्तीया करने लगती.. ओर मोका मीलते ही वो जयश्रीसे छुपकर आंखोसे श्रीधरको दुसरे कमरेमे अकेलेमे मीलनेका इसारा करती.. जयश्री भी उनकी मां वृन्दा ओर अपने पतीके नजदीकीयासे बहुत खुस थी.. क्युकी उनको लगाकी उनकी मम्मीने दामादके रुपमे श्रीधरको पुरी तराह अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे..

लेकीन उनको नही पता थाकी दोनो सास दामादके बीचमे क्या खीचडी पक रही हे.. डीलीवरीके बाद जयश्रीको भी मायकेमे ओर डेढ महीना हो गया था.. तो अ‍ेक दिन ब्रीन्दा ओर श्रीधर सहेरमे आकर जयश्री ओर उनके बच्चेको लेकर वापस गांव चले गये.. तो वृन्दाने राहतकी सास ली.. क्युकी अब बीना कोइ डर वो ओर श्रीधर घरपे आसानीसे मील सकते थे..

जयश्रीके चले जानेके बाद तीसरे ही दिन सुबह जब उनका पती ओर जीतुलाल अपने धंधेपे चले गये तब वृन्दाको उल्टीया हुइ.. उनको मनमे आंसकाअ‍े हुइ तो मेडीकल स्टोरसे दो तीन प्रेगनन्सी टेस्टकी कीट लेकर आ गइ.. ओर दुसरे दिन सुबह टेस्ट करलीया.. तो रीजल्ट पोजीटीव देखकर वो मन ही मन बहुत खुस होगइ..

क्युकी जो काम अबतक सरेहमे आकर जीतु नही करपाया वो काम श्रीधरने उसे प्रैगनेन्ट करके करदीया था.. सुबह चाइ नास्ताके बाद जैसे ही उनका पती ओर जीतुलाल अपने बीजनेसपे चले गये.. वृन्दा बनठनके तैयार होगइ.. ओर सीधे ही सृतीकी क्लीनीकपे चली गइ.. सृती उनको पहेचान गइ..

फीर भावीकाने वृन्दाको चेक करलीया ओर रीपोर्ट मंगवाइ.. तो पता चला वृन्दा प्रेगनेन्ट थी.. रीपोर्ट देखते ही वृन्दाकी आंखोमे खुसीके मारे आंसु आगये.. फीर वो सृतीसे दवाइया लेकर वापस घर आगइ.. ओर सोचने लगीकी इस बातकी वो श्रीधरको कैसे खबर दे.. ओर आखीर उसने श्रीधरको फोन लगा ही दीया..

श्रीधर : (मुस्कुराते फोनपे) हांजी डार्लींग सासुमा.. कहो कैसे याद कीया..? सब ठीक तो हेनां..?

वृन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे) सासुमांके बच्चे पहेले देख आजु बाजु कोइ हे तो नही..?

श्रीधर : (मुस्कुराते धीरेसे) क्यु..? नही.. मे बहार हु.. तभी तो आपको डार्लींग बोला.. कहीये..

वृन्दा : (सरमाते धीरेसे) श्रीधर.. थेन्कयु वेरी मच.. अभी मे क्लीनीकसे ही आ रही हु.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. हमारी महेनत रंग लाइ.. सब तुम्हारी वजहसे मुमकीन हुआ.. थेन्क्यु सो मच.. आइ लव यु जान..

श्रीधर : (चौकना होते धीरेसे) क्या..? आर यु स्योर..? मीन्स ये हमारा..

वृन्दा : (धीरेसे) हां श्रीधर.. ये हमारा बच्चा हे.. क्युकी जबसे हम यहा सहेरमे आये तबसे मेने ओर जीतुने बहुत ट्राइ कीया.. अब तो मुजे ठीकसे संतुस्ट भी नही कर पाता.. कइ महीने होगये.. तेरे बापसे तो कुछ नही हुआ.. बस.. तुमसे ही आस थी.. जो उपर वालेने मेरी सुनली.. मे इस बच्चेको जन्म दुगी.. चाहे कुछ भी हो.. लडका या लडकी.. अब ओर रीस्क नही लेना..

श्रीधर : (धीरेसे) डार्लींग.. क्या मे अभी घरपे बताउ..?

वृन्दा : (धीरेसे) नही श्रीधर.. कुछ दिन इन्तजार करो.. फीर मे खुद ब्रीन्दाको फोन करके बता दुगी.. ओर याद रहे.. इस बच्चेके बारेमे अभी कीसीको कुछ पता ना चले.. मे सबको बोल दुगी.. की ये बच्चा मेरा ओर जीतुका हे..

श्रीधर : (धीरेसे) क्या बडे पापा मान जायेगे..?

वृन्दा : (धीरेसे) बस उसीकी टेन्शन हे.. मुजे ओर उनको.. हम दोनोको पता हेकी वो अब बच्चा देनेमे सक्षम नही हे.. जब मेरा पेट नीकलने लगेगा तब तेरे मौसाजीको भी जवाब देना पडेगा.. लेकीन तु फीकर मत कर.. मे सब सम्हाल लुगी.. ओर याद रहे.. ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही हेना चाहीये.. की बच्चा तेरा हे.. ठीक हे..? चल बाय..

श्रीधर : (मुस्कुराते धीरेसे) ठीक हे डार्लींग.. बाय..

तब वृन्दाको पता नही थाकी सहेरमे आनेके बाद पीछले कइ दिनोसे जीतुलाल ठीकसे सेक्स नही करपाता था.. तो उसने वृंन्दासे छुपकर अपनी चांज करवाली थी.. तब डोक्टरने वही कहा जो भानुको कहा था.. की उनकी सेक्स करनेकी क्षमता खतम हो रही हे.. ओर वो अब कभी बच्चा पैदा नही कर सकता.. ओर जीतुने ये बात वृन्दासे छीपाइ..

डोक्टरने जीतुलालको वही दवाइआ दी जो भानुको दी थी.. फीर जीतुलालको अब डोक्टरने वायग्रा खाकर अपनी पत्नीको सेक्स करनेकी सलाह दी.. ताकी वो जींदगीका आनंद उठा सके.. तबसे जीतुलाल हर दिन वायाग्रा खाकर वृन्दाके साथ चुदाइ करता.. लेकीन वृन्दा ओर श्रीधरके बीच बढते रीस्तेने उनकी चीन्ता ओर बढादी थी.. भानु ओर जीतुको कभी पता नही चलाकी उनकी ये हालत कैसे हुइ..

वृन्दा उस रात जीतुसे बच्चेके बारेमे बात करनेके लीये बहुत ही उत्साहीत थी.. ओर साथमे थोडी डरी हुइ ओर नर्वस भी थी.. ओर उसी नर्वसेसकी वजहसे उसे पता भी नही चला की वो आज रात अपने पती जवेरीलालको रातमे सोते समय दुधमे जो नींदकी गोलीया मीलाकर पीलाती थी वो नींदकी गोलीया डालना भी भुल गइ..

सहेरमे आकर जीतुलतके साथ छुपकेसे सादी करलेनेके बाद वृन्दा दोनो पतीको सम्हालते दोहरी जींदगी जी रही थी.. रातको वृन्दाने सोनेसे पहेले अपने पहेले पतीको दुध पीलाया.. फीर सभी लाइट दरवाजा अच्छेसे बंध करदीया.. ओर अ‍ेक आदर्श पत्नीकी तराह चेन्ज करके अपने पती जवेरीलालके साथ सो गइ जो वो हमेसा सोजाती थी..

जब देर रात उनके पती गहेरी नींदमे खर्राटा मारने लगते तब वो चुपकेसे उठकर जीतुलालके पास सोने चली जाती.. अब तो नींदकी गोलीयोकी वजहसे वो अपने रुमका दरवाजा बहारसे लोक करनेकी भी जहेमत नही उठाती.. बस.. हल्कसे दरवाजा बंध कीया ओर जीतुलालके कमरेमे चली जाती..

जीतुलाल भी वायग्रा खाकर वृन्दाका इन्तजार करता.. फीर सुरु होता दोनोका नंगा नाच.. जब वृन्दा संतुस्ट होजाती तो दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे वही सो जाते.. फीर सुबह पांच बजे अपने पतीसे जागनेसे पहेले जाग जाती ओर अपने पतीके रुममे चली जाती.. ये अब हर दिनके लीये रुटीन हो गया था..

आज रात उत्साहकी वजहसे वृन्दा सो नही पाइ.. उसने अ‍ेक नजर अपने पतीकी ओर डाली.. जो उनकी ओर मुह करते सोया था.. वृन्दाको लगा अब गोलीयोकी वजहसे गहेरी नींद सोगये हे.. तब वो चुपकेसे खडी हुइ.. ओर आज जीतुके कमरेमे जानेसे पहेले ड्रेसींगके सामने बैठ गइ.. ओर हल्कासा शृंगार करने लगी..

शींगारके कुछ डीबोकी आवाजसे जवेरीलालकी आंख खुल गइ.. उसने देखा वृंन्दा उनकी बगलमे नही हे.. ओर उसने सोते सोते ही आवाजकी ओर आंख घुमाइ.. देखा तो वृन्दा आइनेके सामने बैठकर अपने आपको सवार रही थी.. जीसे देखकर जवेरीलालको आस्चर्य हुआ.. उसे लगाकी इतनी देर रात वृन्दाको सजनेकी क्या आव्यसक्ता होगइ..? ओर तभी उनके मनके कीडे सतर्क होगये..

वो चुपचाप सोनेका नाटक करते आधी आंखसे वृन्दाकी हरकतको देखने लगे.. तो कुछ ही देरमे वृन्दा खडी होगइ.. ओर अ‍ेक बार फाइनल आयनेमे देखते अपने बालोको ठीक कीया.. फीर दरवाजेकी ओर जानेसे पहेले जवेरीलालकी ओर देखती हे.. तो जवरेलालने अपनी आंखे जटसे बंध करदी.. वृन्दा मुस्कुराते बहारकी ओर जाने लगी..

जवेरीलालने दरवाजा खुलने ओर बंध होनेकी आवाज सुनी.. तो वो आंख खोलकर जटसे बेडपे बैठ गये.. उनके मनमे वृन्दाको लेकर संकाये जागने लगी.. तो उनकी सांसे तेज चलने लगी.. वो धीरेसे खडे हो गये.. ओर दबे पांव दरवाजेकी ओर चल पडे.. बहार आकर देखा तो जीतुलालके रुममे लाइट जल रही थी..

जवेरीलाल दबे पांव वहा चले गये.. ओर थोडासा दरवाजा खुला था तो अंदर जांकने लगे.. जैसे ही अंदरका नजारा देखा.. देखकर दंग रेह गये.. वृन्दा जीतुलालकी बाहोमे थी ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होंठ चुम रहे थे.. जीसे देखकर अ‍ेक पलतो जवेरीलाल सास लेना चुल गये.. उसे पसीना आने लगा ओर सीनेमे जकडन महेसुस हुइ.. फीर वो वापस अंदर देखने लगे.. तभी..

जीतुलाल : (धीरेसे) डार्लींग.. क्या बात हे..? आज तो पुरा सज सवरके आइ हो.. कोइ खास बात हे क्या..? बहुत होट लग रही हो..

वृन्दा : (मुस्कुराते हाथ पकडकर बेडकी ओर लेजाते) हां जीतु.. आज बहुत ही खास बात हे.. क्या तुमने वो गोली बोली खाइ हेकी नही..?

जीतुलाल : (मुस्कुराते बेडपे अपने उपर खीचते) अरे वोतो तुमने खानेके टाइम इसारा कीया तब ही मे समज गया था.. गोली खाकर कबसे तुम्हारा इन्तजार कर रहा हु.. देख नीचे फटा जा रहा हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते सीना सहेलाते) क्या करु..? वो बुढा सोये तब आउनां.. मेभी कबसे तुमसे मीलन करनेके लीये तडप रही हु.. चल.. पहेले अ‍ेक राउन्ड लगाके मेरी प्यास बुजा.. फीर हम आरामसे बात करते हे.. आज तो मे तुजे पुरी रात सोने नही दुगी.. क्युकी बात ही कुछ अ‍ैसी हे..

जीतुलाल : (होंठ चुमते) डार्लींग पहेले बताओनां आज क्या खास बात हे.. फीर आरामसे करते हेनां..

वृन्दा : (जीतुका हथीयार सहेलाते) नही जीतु.. पहेले अ‍ेक बार मुजे ठंडी करदे.. जबथक अ‍ेक बार तुमसे नही चुदवाती तबतक मुजे चेइन नही मीलता.. ओर आजतो बहुत जोस चढा हुआ हे.. फीर तुजे अ‍ेक खुस खबर सुनाती हु..

सुनकर जवुरीलालकी आंखोमे आंसु छलक गये.. उन्होने अपने दोनो हाथ सीनेपे रख दीये.. उनको उमीद नही थी की अपनी ही पत्नी उसे प्यार करने ओर वफादार रहेनेका नाटक करते उनको इतना बडा धोखा दे रही हे.. तभी रुमसे वृन्दाकी जोरोकी सीसकारीयोकी आवाज आने लगी.. तो जवेरीलाल फीरसे अंदर जांकने लगे..

देखा तो वृन्दा पीठके बल जीतुलालके नीचे नंगी लेटी हुइ थी.. उनके दोनो पैर जीतुलालके कंधे पे थे.. ओर जीतुलाल हाथके बल उचा होते जोरोसे कमर हीलाते वृन्दाको चोद रहा था.. जवेरीलाल ये सब देखते दंग रेह गये.. दिलतो चाहता थाकी अभी कमरेमे जाकर दोनोकी जमकर पीटाइ करे..

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लेकीन कुछ सोचते चुप रहे.. क्युकी वो देखना चाहते थेकी ये दोनोकी रासलीला कीतने समयसे चल रही थी.. ओर वृन्दा आज जीतुलालको कोनसी बात कहेने वाली थी.. कुछ देरके बाद दोनोने अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर वृन्दा अपनी कमरको आडी टेडी करते जटके मारने लगी.. फीर दोनो सांत हो गये तो जवेरीलाल चोकने हो गये.. ओर कान लगाकर सुननेकी कोसीस करने लगे..

जीतुलाल : (अपनी सांसको दुरस्त करते) हां डार्लींग.. अब बोल.. तु क्या कहेने वाली थी..

वृन्दा : (मुस्कुराते जीतुलालकी पीठ सहेलाते) जीतु.. लगता हे भगवानने हमारी सुनली.. हमारी महेनत रंग लाइ.. मे फीरसे.. मी..न्स.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. मे आज ही क्लीनीकपे चेक करवाके आइ.. मे गर्भवती हु.. अ‍ेक महीना हो गया हे.. मे फीरसे तुम्हारे बच्चेकी मां बनने वाली हु..

इतना सुनते ही जीतुलालको अ‍ेक जटका लगता हे.. वो आंखे फाडके वृन्दाकी ओर देखने लगा.. ओर अ‍ेक जटकेसे लंडको चुतमेसे खीचकर वृन्दाके उपरसे उतर गया.. तब वृन्दा आस्चर्यसे जीतुकी ओर देखने लगी.. वो अपनी चुतको कपडेसे साफ करते बेडपे बैठ गइ.. तो बहार जवेरीलाल भी सुनकर सोक्ट हो गये..

वृन्दा : (आस्चर्यसे देखते धरीेसे) क्या हो गया..? अंदर ही रहेने देता.. कीतना मजा आ रहा था..

जीतुलाल : (धीरेसे वृन्दाके पास बैठते) नही वृन्दा.. ये नही हो सकता.. कहेदो ये जुठ हे.. कही तुम मजाक तो नही कर रही होनां..?

वृन्दा : (थोडा चीडते) जीतु.. ये तुम क्या बकवास कर रहे हो..? ये हमारा बच्चा हे.. मे जुठ क्यु बोलुगी..? ओर ये कोइ मजाक नही.. मे सचमे प्रेगनेन्ट हु.. ओर ये हमारा बच्चा हे..

जीतुलाल : (खडे होते मनमे) यार तुजे कैसे समजाउ.. की अब मे बच्चा देनेमे सक्षम नही हु.. अब इनको सबकुछ सच बताना ही पडेगा..

जीतुलाल खडे होकर अपनी अलमारीसे अ‍ेक फाइल नीकालता हे.. ओर वृन्दाके पास बैठते उनमेसे अ‍ेक रीपोर्ट नीकालकर वृन्दाको पढनेके लीये देता हे.. तो वृन्दा डोक्टरका नाम पढते ही जीतुकी ओर आस्चर्यसे देखने लगती हे.. तब दोनोको पता नही थाकी दो आंखे अंदर देखते दोनोकी बात सुन रही हे..
 
वृन्दा : (आस्चर्यसे) जीतु.. क्या हे ये सब.. सेक्सोलोजीस्ट..? तु कब गया था इनसे मीलने..? क्या हुआ हे तुजे..?

जीतुलाल : (नजरे चुराते धीरेसे) वृन्दा.. जबसे हम गांव छोडकर इधर सहेरमे आये तबसे मुजे नीचे कुछ अजीब फील हो रहा था.. मीन्स.. थोडा थोडा दर्द.. ओर मे ठीकसे तुमको चोदभी नही पा रहा था.. तो मेने इनके डोक्टरको दीखाया.. तो पता चला मेरी सेक्स करनेकी क्षमता खतम हो रही हे.. ओर मे बच्चा पैदा करनेमे भी सक्षम नही रहा.. इसीलीये तो मुजे हर दिन वायग्रा खानी पडती हे.. देख ये मेडीसीन..

वृन्दा : (आस्चर्यसे थोडी उची आवाजमे) क्या बकवास कर रहे हो..? तुमने मुजे पहेले क्यु नही बताया..? तुम मुजे ठीकसे तो चोदते हो.. कीतने जोसमे.. तो क्या मे जुठ बोल रही हु..? अगर तुम बच्चा देनेमे सक्षम नही रहे तो फीर ये कहासे आया..?

जीतुलाल : (नजरे चुराते) वृन्दा.. वो सब मुजे नही पता.. यार तु समज..

वृन्दा : (थोडी उची आवाजमे) क्या नही पता..? क्या समजु..? तो क्या मे बहार कीसी ओरसे पेटसे होकर आइ हु..? मेरी उमरतो देखो.. क्या अब इस उमरमे मे कीसीके साथ अफैर करुगी..? जीतु.. जबसे मे सादी करके आइ हु तबसे तुजे ही मेने प्यार कीया हे.. ओर तुजे ही अपना असली पती माना हे.. तुम जानते होनां जयश्री हम दोनोकी बच्ची हे..?

जीतुलाल : (सामने देखते धीरेसे) आइनो.. वृन्दा मुजे पता हे जयश्री हम दोनोकी बच्ची हे.. मेतो बस..

वृन्दा : (थोडी सखतीसे) बस जीतु.. मुजे तुमसे ये उमीद नही थी.. जयश्रीके बाद भी मे कइ बार तुमसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हु.. मे अ‍ेक लडका चाहती थी.. लेकीन हर बार लडकी होनेसे तुम्हारे कहेनेसे मेने अ‍ेबोर्सन करवाया.. ओर बार बार अ‍ेबोर्सनसे अपनी बच्चेदानी तक खराब करली.. ओर फीर भी तु केह रहा हे ये बच्चा तुम्हारा नही हे..?

जीतुलाल : (नजरे चुराते थोडी उची आवाजमे) वृन्दा बातको पहेले समज.. जब हम गांजमे थे तब अ‍ैसी कोइ प्रोबलेम नही थी.. पता नही क्यु जबसे हम सहेर आये तबसे ये प्रोबलेम हुइ हे.. मे सचमे बच्चे पैदा करनेमे सक्षम नही रहा..

वृन्दा : (थोडा गुस्सेसे) तो क्या मे जुठ बोल रही हु..? जीतु अब मे तुम्हारी बीवी हु.. मेने तुमसे वादा कीया था.. हमने यहा आकर बाकायदा सादी भी करली हे.. ओर तुम हर बार ठीकसे तो करते हो.. कीतना मजा देते हो तुम.. अ‍ेक मीनीट.. कही तु मुजपे सक तो नही कर रहा..?

जीतुलाल : (नजरे चुराते धीरेसे) नही डार्लींग.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. मे तो बस.. मेरे बारेमे सब जानता हु.. बाकी सब तुजे पता.. मे सचमे बच्चा देनेमे सक्षम नही रहा..

वृन्दा : (अ‍ेक नजरसे देखते) ओह.. समज गइ.. मतलब तु मुजपे सक कर रहा हे.. लेकीन अ‍ेक बात खान खोलकर सुनले.. इस बार मे अ‍ेबोर्सन नही करवाउगी.. ये बच्चा तो मे पैदा करके ही रहुगी.. चाहे कुछ भी हो.. सारा मुड खराब करदीया..

जीतुलाल : (सामने देखते) अ‍ैसा नही हे यार.. तु मुड खराब मत कर.. बात ये नही हे.. लेकीन ठंडे दिमागसे सोच.. जब पेट बढेगा तब तु बडे भैयासे क्या कहोगी..?

वृन्दा : (सामने देखते थोडी उची आवाजमे) जबसे सादी करके आइ हु तबसे यही तो प्रोबलेम हे.. अगर तुम्हारे बडे भैयामे इतना दम होतानां तो मे उनसे ही तीन चार बच्चे पैदा ना करलेती..? जीतु जब तु कोलेजमे था तबसे मे तुमसे प्यार करती हु.. अगर मे प्यार ना करती तो आज तक अ‍ेक रखैलकी तराह तुमसे कभी नही चुदवाती.. सोचाथा यहा आकर तुमसे सादी करके सबकुछ ठीक हो जायेगा.. ओर मे आरामसे हमारा बच्चा पैदा करुगी..

जीतुलाल : (नाकपे उंगली रखते) सी.. सी.. धीरे बोल.. कही वो जाग गयेतो हमारा भांडा फुट जायेगा..

जवेरीलाल : (जोरोसे दरवाजा खोलते अपने सीनेपे दोनो हाथ रखते) क..मी..नो.. भांडा फुट जायेगा नही फुट गया.. (सीनेमे दर्दके मारे लडखडाते अंदर आते) हरामजादो.. तुम दोनोने मुजे इतने सालो तक धोखेमे रखा..? ओर धोखा देकर ये सीलसीला दीया..? ओर वृन्दा.. मे तुजे कीतना प्यार करता था.. तुजे कीतना सरीफ समजता था..

जवेरीलालकी आवाज सुनकर दोनोकी सीटीबीटी गुल हो गइ.. दोनो ही गभराते जवेरीलालकी ओर देखने लगे.. वृन्दाने जटसे अपनी सारी लेकर अपने सीनेसे रखली.. ओर अपना नंगा तन छुपानेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तो जीतुलाल भी जटसे अपना लहेंगा पहेनने लगा.. वृन्दा जवेरीलालकी हालत देखते उनको सम्हालने उनकी ओर बढने लगी.. तभी..

वृन्दा : (आस्चर्यसे) अ‍ेजी.. क्या हुआ आपको..? सोये नही थे क्या..? वो.. हम.. आप जाग कैसे गये..?

जवेरीलाल : (बीचमे ही बात काटते गुस्सेसे) दुर रहे मुजसे.. कुलटा.. छी..ना..ल.. तु डायन हे.. हाथ मत लगाना मुजे.. अच्छा हुआ आज तुम दुधमे नींदकी गोलीया डालना भुल गइ.. सक तो मुजे उसी दिनसे था जब इसने मेरी बेटी जैसी ब्रीन्दासे नाता तोड दीया तब तुम खुस थी.. भगवान तुम दोनोको इनकी सजा जरुर.. दे..गे.. आइइइइ..

कहेते जवेरीलाल अपने सीनेपे दोनो हाथ कसते गीर पडे.. जीतुलाल सर्ट पहेनते उनको सम्हालने लगे.. तो वृन्दाने भी फटाफट अपने कपडे पहेन लीये.. दोनो जवेरीलालको दर्दसे तडपते हुदे देखते सम्हालनेकी कोसीस करने लगे.. तभी वृन्दाने जीतुलालको होस्पीटल लेजानेको कहा..

वृन्दा : (लगभग चीलाते) जी..तु.. जल्दीसे अ‍ेब्युलन्सको फोन कर..

सुबह सुबह श्रीधर ओर ब्रीन्दा अ‍ेक दुसरेसे चीपकते नंगे ही सोये हुअ‍े थे.. क्युकी जयश्री बच्चेकी वजहसे अभी अ‍ेक महीना ओर सेक्स नही कर सकती थी.. इसीलीये श्रीधर ब्रीन्दासे ही अपनी प्यास बुजाता था.. तभी श्रीधरका फोन बजने लगा.. जीसे ब्रीन्दा ओर जयश्रीकी आंख खुल गइ..

देखा तो श्रीधर फोनपे बाते करते गंभीर हो गया.. फीर उसने तुरंत ब्रीन्दा ओर जयश्रीको तैयार होनेके लीये केह दीया.. ओर लखनको फोन घुमाने लगा.. तो लखन भी नंगा सृतीसे चीपककर सोया हुआ था.. उन्होने श्रीधरसे बात करली.. तो फटाफट अपने कपडे पहेनने लगा.. ओर सृतीको श्रीधरका फोन था.. इमरजन्सी.. कहेते कार लेकर नीकल गया..

अ‍ेक घंटेके बाद श्रीधर ब्रीन्दा जयश्री ओर बच्चेको लेकर सीधे ही होस्पीटल पहोंच गया.. तो वहा लखन पहेलेसे ही पहोंच गया था.. ओर मेडीकल स्टोरसे कुछ दवाइआ ले रहा था.. ब्रीन्दा ओर जयश्री बच्चेको लेकर सीधे ही अंदर चले गये.. ओर श्रीधर लखनके पास चला गया.. तो लखनका चहेरा चीन्तासे मुरजाया हुआ लगा..

लखन : (श्रीधरको देखते ही) अरे श्रीधर.. आ गया तु..? फटाफट अंदर जा.. मे दवाइ लेकर आता हु..

श्रीधर : (सामने देखते) यार हुआ क्या हे बडे पापाको..? बस मेरी सासने इतना ही कहा बडे पापाकी तबीयत अचानक खराब होगइ हे.. ओर सबको लेकर फटाफट आजाओ.. ओर सीधा यही होस्पीटलमे आनेको कहा..

लखन : (दवाइ लेते सामने देखते) तु पहेले चल अंदर.. (दोनो जटसे जाते) श्रीधर.. तेरे बडे पापाको सवीयर हार्ट अ‍ेटेक आया हे.. बहुत ही क्रीटीकल कंडीशन हे.. आइ सी यु मे हे.. डोक्टर उनको बचानेकी पुरी कोसीस कर रहे हे.. उन्होने ये इजेक्शन मंगवाया हे.. पहेले इसे देदु फीर बात करते हे..

कहेते लखन दोडकर इन्जेक्शन देने चला गया.. अ‍ेक नर्स लखनका इन्तजार ही कर रही थी.. श्रीधरने देखा तो बहार जीतुलाल बैचेन बैठे थे.. ओर वृन्दा आंसु बहा रही थी.. तो ब्रीन्दा उसे सांत करनेकी कोसीस कर रही थी.. जयश्री भी बच्चेको लेकर आइ सी युमे आंसु बहाते सीसेसे अंदर जांकनेकी कोसीस कर रही थी..

काफी देरके बाद डोक्टर बहार आगये.. ओर जीतुलालके पास चले गये.. तो श्रीधर ओर लखन भी उनकी बात सुनने दोडकर उनके पास चले गये.. तभी डोक्टरने कहा.. की उनके पास ज्यादा समय नही हे.. पल्स गीरते ही जा रहे हे.. उसे आखरी बार देखना चाहे तो देख लीजीये.. श्रीधरने इसारेसे सबको बुलाया.. ओर सब अंदर चले गये..

सब दुरसे ही जवेरीलालको देखने लगे.. तभी जवेरीलालने जयश्री ओर श्रीधरको पास बुलाया.. ओर उसने श्रीधरको जयश्रीका खयाल रखनेको कहा.. वृन्दाको लगाकी अब उसे भी बात करनेके लीये बुलायेगे.. लेकीन जवेरीलालने श्रीधर को कहाकी सबको बहार भेजदे वो सीर्फ ब्रीन्दासे अकेलेमे बात करना चाहते हे..

तब श्रीघरने ब्रीन्दाको हाथसे इसारोसे बुलाया.. ओर खुद जयश्रीको लेकर सबके पास आ गया ओर कहाकी बडे पापा मम्मीसे अकेलेमे बात करना चाहते हे.. तो ब्रीन्दा आंसु बहाते जटसे उनके पास चली गइ.. चहेरेपे ओक्सीजन मास्क लगाया था.. तो जवेरीलालने खुद हटा दीया.. तो बाकी सबलोग उनकी ओर देखते बहार नीकलने लगे..

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जीतुलाल ओर वृन्दा समज गयेकी अब वो उनसे कभी बात नही करेगे.. क्युकी सीर्फ वो दोनोही जानते थेकी जवेरीलालकी इस हालतके जीम्वेवार वो दोनो खुद हे.. ओर जवेरीलालको दिलका दौरा कीसलीये पडा इस बारेमे दोनो कीसीसे भी बात नही करेगे.. तभी अंदरकी ओर..

ब्रीन्दा : (आंसु बहाते) जीजु.. कैसी हे तबीयत..?

जवेरीलाल : (मुस्कुराते उखडी आवाजमे धीरेसे) जीजुकी बच्ची बाप हु तेरा.. सुन.. मेरी हालतके जीम्वेवार वो दोनो हे.. आज मेने दोनोको रंगे हाथो पकडलीया.. अच्छा हुआ तुमने उसे छोडदीया.. बेटी.. वो तेरे लायक नही था.. मुजे माफ करदे.. मेने तेरी जींदगी खराब करदी..

ब्रीन्दा : (हाथ थामते आंसु बहाते) पापा.. कुछ मत बोलो.. मेरी कीस्मतमे ही यही लीखा था.. आप माफी मत मांगो.. आपने हमेसा मुजे अ‍ेक बेटीकी तराह प्यार दीया हे..

जवेरीलाल : (सामने देखते धीरेसे) सुन.. जीस दिन तुमने उसे छोडा तब ही मुजे उनपे सक था.. इसीलीये मेने सबकुछ श्रीधरके नामपे करदीया था.. तुजे आज अ‍ेक राजकी बात बताता हु.. जीतु हमारा खुन नही हे.. वो ठाकुरका खुन हे.. देवुके बापकी ओलाद.. वृन्दाकी तराह मेरी माने भी मेरे बापको धोखा दीया था.. ओर ये बात बापुको पता चली.. इसीलीये तो उसने ठाकुरोको बदनाम कीया.. फीर भी तु वृन्दाका खयाल रखना.. वो भटक गइ हे..

ब्रीन्दा : (मनमे) पापा.. मुजे भी माफ करदेना.. अब आपसे ये बात कैसे कहुकी ये राज मे पहेलेसे ही जानती थी.. श्रीधर भी उसीका खुन हे.. जीतुका.. तभी तो बाप बेटे दोनोका हथीयार इतना दमदार हे.. जो ठाकुरोकी पहेचान हे.. आज मेरे गर्भमे भी उसी ठाकुरका बच्चा पल रहा हे.. मे खुसनसीब हु.. की जबसे सादी करके आइ हु तबसे उसी ठाकुरके खानदानके मर्द मुजे संतुस्ट करते आये हे.. पहेले जीतु.. फीर मेरा अपना ही बेटा श्रीधर.. ओर अब लखन..

जैसे ही ब्रीन्दा अपनी सोचसे बहार नीकली.. देखा तो जवेरीलाल अ‍ैसे ही ब्र्रीन्दाकी ओर देखते सीथील पडे थे.. ब्र्रीन्दाने उसे हीलाया.. कुछ प्रतीक्रीया नही मीली तो उसने तुरंत वही खडे डोक्टरको आवाज दी.. ओर डोक्टरने नब्स चेक करके जवेरीलालकी आंख बंध करदी.. ओर उनपे कपडा डाल दीया..

बहार सबलोग ब्रीन्दाका इन्तजार कर रहे थे.. तभी ब्रीन्दा जोरोसे रोते हुअ‍े बहार नीकली.. सबलोग उनकी ओर दोड पडे.. ब्रीन्दा दीवालकी ओर मुह करते उनके सहारे खडी होगइ.. ओर दोनो हाथोसे चहेरा छुपाकर जोरोसे रोने लगी.. जीतु ओर वृन्दा जटसे अंदर चले गये.. देखा तो जवेरीलालके उपर सफेद कपडा डाला हुआ था..

दोनो समज गयेकी अब जवेरीलाल इस दुनीयामे नही रहे.. तब वृन्दा भी फुटफुटके रोने लगी.. फीर कुछ लीगल प्रोसीजर हुइ.. ओर सबलोग जवेरीलालकी बोडीको लेकर घर चले गये.. तबतक लखनने फोन करके घरपे ओर गांवमे अपने दोस्तोको बता दीया.. तो गांवसे ओर सहेरसे भी कुछ रीस्तेदार जवेरीलालके घरपे आगये..

दो पहोरको जवेरीलालकी अंतीम यात्रामे गांवके कइ लोग सामील थे.. श्रीधरने जवेरीलालको मुखागनी दी.. फीर साम होते सबलोग स्मसानसे वापस आगये.. ओर जीतुलाल श्रीधरको मीलकर सबलोग वापस चले गये.. रातमे लखनके सभी दोस्तोने खानेका प्रबंध कीया.. ओर खानेके बाद वो लोग भी चले गये..

जवेरीलालकी अंतीम क्रिया तक श्रीधर ब्रीन्दा ओर जयश्री वही रुकने वाले थे.. ब्रीन्दा श्रीधर ओर वृन्दाके बारेमे सबकुछ जानती थी.. क्युकी जब श्रीधर पढता था.. ओर उनके साथ पहेली बार सारीरीक सबंध बनाया.. फीर पढाइके बाद दोनोने छीपकर सहरेमे आकर मंदिरमे सादीकी तब ही ब्रीन्दाने श्रीधरसे अ‍ेक वादा लेलीया था..

की वो इनसे कभी भी कोइ बात नही छीपायेगा.. ओर अपने पीता ओर मौसीसे बदला लेगा.. ओर उसी दिन उसने वृन्दा ओर जीतुलाके बारेमे बातकी.. ओर उनसे बदला लेनेकी कसम खीलाइ.. उसी समय मुनाने भी सभी दोस्तोको सेक्स पावरकी जडीबुटीका कोर्स करवाया था.. ओर ब्रीन्दाने पहेला बदला वृन्दाकी बेटी ओर श्रीधरकी कजीन बहेन जयश्रीको ही श्रीधरके साथ सेट करके लेलीया..

फीर दुसरा बदला.. उन्होने श्रीधरकी लाइ हुइ जडी बुटी जीतुलालाको चाइमे मीलाकर पीलादी.. जीसे जीतुलालका हथीयार बेकार होने लगा.. जब जीतुसे डीवोर्सके बाद जब दोनो परीवार अलग होगये तब जयश्रीकी प्रेगनन्सीके बाद पहेली बार वृन्दा घरपे आइ.. ओर उनका श्रीधरके साथ दोस्ताना व्यवहार देखकर ब्रीन्दाके मनमे अ‍ेक ओर बदला लेनेका खयाल आया..

वो श्रीधरकी स्टेमीनाको अच्छी तराह जानती थी.. ओर उसने जान बुजकर श्रीधरको वृन्दाके करीब आने दीया.. जयश्रीके मायके चले जानेके बाद अ‍ेक रात वो अपने बेटे श्रीधरके नीचे लेटे प्यारका पल जी रही थी तब उसने श्रीधरको अपने मनकी बात बतादी.. तो श्रीधर मुस्कुराने लगा.. ओर अपनी योजनापे आगे बढने लगा..

आखीर उसने वृन्दाको सेट करलीया.. ओर जयश्रीकी डीलीवरीके दिन पहेली बार श्रीधरने वृन्दाको अपने नीचे लीटाकर अपने वसमे करलीया.. उसी रात वृन्दाके घर चले जाने ओर जयश्रीके सोनेके बाद दोनो मां बेटे होस्पीटलके बेडमे ही अ‍ेक होगये.. ओर श्रीधरने ब्रीन्दाको सबकुछ बता दीया.. तो ब्रीन्दाने अ‍ेक रहस्यमय मुसकार की..

अब ब्रीन्दाको कीसीका भी डर नही रहा.. वो अब वृन्दाको आसानीसे अपने वसमे कर सकती थी.. ओर अब जवेरीलालके नीधनके बाद अ‍ेक हप्ते तक वो यही रहेने वाली थी.. अब उसे पता थाकी वृन्दाको कैसे कंट्रोल करना हे.. ओर उसे यही समय सबकुछ अपने नीयत्रंणमे लेनेका मौका मील गया..

अ‍ेक हप्तेमे जवेरीलालका सभी कार्य नीपटाना था.. तो अ‍ेक हप्तेमे ब्रीन्दा वृन्दासे बहुत नजदीक आगइ.. वो वृन्दासे हस हसके गांवकी परंपरा ओर वहाके हर रीस्तोके बारेमे बात करती.. की श्रीधरके कीन दोस्तोने उनकी बहेन ओर उनकी मासे सादी करली हे.. जब उसे लगाकी वृन्दा अ‍ैसी बातोमे काफी दीलचस्पी लेने लगी हे.. तब ब्रीन्दाने धीरेसे अपने मनकी बात कहेनेकी ठानली..

तो दुसरी ओर जीतुके मनमे भी अ‍ेक सक हमेसाके लीये घर कर गया.. की वो अगर बच्चा देनेमे सक्षम नही हे.. तो फीर वृन्दाके पेटमे कीसका बच्चा पल रहा हे..? उसे वृन्दापे नजर रखना सुरु करदीया.. देखा तो वृन्दा श्रीधरसे कुछ ज्यादा ही चीपकके बाते कर रही थी.. ओर वृन्दा ओर ब्रीन्दा.. दोनो बहेने अ‍ेक दुसरेके काफी नजदीक आगइ थी..

जो ज्रीन्दा अ‍ेक जमानेमे अपनी बहेनको अपनी दुस्मन मानती थी वो आज हस हसके अ‍ेक पकी सहेलीकी तराह बाते करती थी.. वृन्दा ओर ब्रीन्दाकी बढती नजदीकीयासे जीतुलालके पेटमे अ‍ेक सुल चुभने लगी.. जीतुलालने गौर कीया तो उसे वृन्दा ओर श्रीधरके बीचका व्यवहार भी अजीब लगने लगा..

श्रीधर ओर वृन्दा जबभी मीलते ओर बात करते तब वृन्दाका कातीलाना नजरोसे श्रीधरको देखना.. फीर दोनो अकेलेमे बाते करते तब वृन्दाकी कातील मुस्कानसे श्रीधरसे बात करना.. दोनोके बीच हल्कासा मजाक मस्ती करना.. वो नजरे ओर मुस्कान जो भुतकालमे कभी उनके लीये हुआ करती थी..

आज वृन्दा बीलकुल अलग लग रही थी.. जीतुको अपने ही बेटे श्रीधर ओर वृन्दाके नजदीक आना उनके सकको ओर पका करदीया.. लेकीन जीतुकी मजबुरी थी.. वो वृन्दाके स्वभावको अच्छी तराह जानता था.. वो वृन्दासे थोडा डरता भी था.. क्युकी जीतुसे सादी करलेनेके बाद वो उसे अपनी उंगलीओपे नचाती थी..

जीसे जीतुकी वृन्दाके साथ बहेस करनेकी हिंमत ही नही थी.. वृन्दा ओर ब्र्रीन्दाकी बढती नजदीकीया देखकर अ‍ैसा लगता था अब वृन्दा भी ब्रीन्दासे मील गइ हे.. ओर उनसे चुनचुनके बदला ले रही हे.. क्युकी ब्रीन्दा जीतुलालके सामने देखती तक नही थी.. ओर वृन्दा ज्यादातर ब्रीन्दाके साथही रहेथी..

जीतुलालने अ‍ेक बात ओर भी नोटीसकी.. उसे अपनी पुर्व पत्नी ब्रीन्दा ओर अपने बेटे श्रीधरके बीच बात चीतका व्यवहार भी कुछ अजीब लगा.. जैसे दोनो बाते करते तब अ‍ेक मा बेटे नही.. अ‍ेक पती पत्नी बाते करते हे अ‍ैसा लगा.. ओर आखीर कार्यसे ठीक अ‍ेक दिन पहेले दोनो बहेने दो पहोरको भोजनके बाद आरम करते फुरसतसे लेटे अ‍ेक कमरेमे अकेली बात कर रही थी..

तब ब्रीन्दाने उसे बता दीयाकी गांवकी परंपराके हीसाबसे ओर जयश्रीसे कहेनेपे उसने श्रीधरसे सादी करली हे.. ओर इस वक्त वो श्रीधरसे प्रेगनेन्ट भी हे.. जीसे सुनकर वृन्दा सोक्ट होगइ.. फीर वृन्दाने सबकुछ अ‍ेक्सेप्ट करलीया.. ओर वृन्दाने भी उसे बता दीयाकी उसने सहेरमे आकर जीतुसे सादी करली हे..

ओर वो भी इस वक्त उनसे प्रेगनेन्ट हे.. वृन्दाको ये नही पता थाकी उनके ओर श्रीधरके बारेमे ब्रीन्दा सबकुछ जानती हे.. वो बाते उसने जरुर सेरकी.. की आजकल जीतु बहुत कमजोर हो गया हे.. ओर अब उसे सारीरीक सुख देनेमे सक्षम नही रहा.. तब ब्रीन्दा मनही मन कुटील मुस्कान करती हे..

क्युकी उसे पता थाकी जीतुलालकी कमजोरी कीस वजहसे आइ हे.. ओर वोही कमजोरीकी वजहसे वृन्दा श्रीधरके नजदीक आकर उनसे सारीरीक सबंध बनाती हे.. जीनकी वजहसे आज वृन्दा प्रेगनेन्ट हे.. ब्रीन्दाको वृन्दाकी प्रेगनन्सीके बारेमे सबकुछ पता चल गया.. ब्रीन्दाने बडी ही सावधानीसे अपना बदला लेलीया था..

ओर कार्य समाप्त होते ही दुसरे दिन श्रीधर ब्रीन्दा ओर जयश्री भी गांव चले गये.. तब जाते वक्त ब्रीन्दा ओर वृन्दा खेक दुसरेको गले मीलकर खुब रोइ.. ब्रीन्दाने उसे आस्वासन दीयाकी उनकी डीलीवरीकी देखभालके लीये वो गांवमे उनके घरपे लेजायेगी.. इसके बाद जीतुलाल वृन्दाको पुछनेकी कभी हींमत नही करपाया.. की ये बच्चा कीसका हे..
 
इसी बीच लखन भी दो बार ओर टीनाको उनके घरपे मीलकर आगया.. जब तीसरी बार वो टीनाकी चुदाइ करने गया तब टीनाने उसे कहाकी वो प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. उस दिन दोनोने सेलीब्रेट करते खुब चुदाइ की.. उस दिन टीना बहुत ही खुस लग रही थी.. तब लखनने टीनाको सृतीको मीलनेके लीये कहा..

तो उधर गांवमे भी अ‍ेक दिन वसुधाने चारु ओर नीशाको बता दीयाकी वो लखनसे मीलन कर चुकी हे.. तो नीशा ओर चारु सोक्ट होते खुसीसे मुस्कुराते वसुधाकी ओर देखने लगी.. फीर चारुने लखनसे मीलनेका अ‍ेक्सपीरीन्स पुछा.. तो वसुधाने सरमाकर हसते सबकुछ बता दीया.. ओर लखन ओर उनके हथीयारकी बहुत तारीफ की..

तबसे चारु ओर नीशाकी लखनसे मीलन करनेकी प्यास ओर बढ गइ.. ओर चारु नीशाने ये बात रश्मी ओर वंदनाको भी बताइ.. तो रश्मी तो पहेलेसे ही लखनसे मीलनेके लीये तडप रही थी.. लेकीन चारु नीशाकी बात सुनकर वंदनाने भी लखनसे मीलन करनेका अपना इरादा पका करलीया.. क्युकी बच्चेकी वजहसे वोभी कइ दिनोसे सेक्स वंचीत थी.. ओर देवायत उसे मीलने बहुत ही कम आता था..

इसी दौरान सहेरमे लखनकी सोसायटीमे रहेते रमेश ओर जया भी अ‍ेक दिन सृतीकी क्लीनीकपे चले गये.. ओर वहा सृतीने जयाकी डलीवरीकी.. तो जयाने अ‍ेक सुंदर बच्चीको जन्म दीया.. ओर उसी साम चंदाको भी लेबर पेइन हुआ.. तो लखन उसे अपनी कारमे राधीकाको साथ लेकर क्लीनीकपे चला गया..

लखनने पुनमको फोन करदीया.. तो सामके वक्त पुनम नीर्मलाको लेकर देवायत भी क्लीनीकपे पहोंच गया.. मंजुला उसे कहेकर ही गइ थी.. उनके मुताबीक सामको चंदाने भी अ‍ेक सुंदर बच्चीको जन्म दीया.. तो वहा देवायतको रमेश भी मील गया.. दोनोने मीलकर गांवके बारेमे खुब बाते की..

रमेशने यहा अ‍ेक कीरानेकी दुकान लेली थी.. जो बहुत अच्छी चलने लगी थी.. वो ओर जया अपने नये संसारसे बहुत खुस थे.. रमेशको नही पता थाकी जया सांती ओर उनकी बेटी जागृती हमेसा फोनसे कोन्टेक्टमे रहेती थी.. ओर गांवकी बाते करती थी.. फीर सबने खुसी खुसी चंदा ओर जयाकी बच्चीको सगुन दीया..

दुसरे दिन दोनोको छुटी मील गइ थो सुबह सुबह ही सांती ओर जागृती बंसीसे बात करके पहेली बार जयाको मीलने ओर बच्चीको देखने सहेर आगइ.. जया अकेली बच्चीको नही सम्हाल सकती थी.. तो सांतीने दुबारा बंसीसे बात करली.. ओर कुछ दिन वो जयाकी देखभालके लीये रुकनेकी परमीशन मांगती हे..

अब सांती भी प्रेगनेन्ट थी.. ओर उनका भी पेट नीकल गया था.. जीसे बंसी उसे हाथ नही लगाता था.. फीर जया उनकी मां भी थी.. तो बंसीने सांतीको खुदका भी खयाल रखनेकी नशीहत देते वही रुकनेकी परमीन देदी.. तो सांती रुक गइ.. ओर जागृतीको पुनम देवायतके साथ वापस घर भेज दीया..

जागृतीको बंसीसे खुब प्यार मील रहा था.. लेकीन फीर भी दिलके अ‍ेक कोनेमे अबभी लखनके लीये सोफ्ट कोर्नर था.. कभी उन्होने ओर लखनने मीलकर कुछ वादे भी कीये थे.. जीनकी वजहसे वो अपने भाइसे सादी करनेके लीये राजी होगइ थी.. लेकीन बंसीसे उसे इतना प्यार दीया की उसने लखनसे कीया वादा भी भुल गइ..

जागृती पुरी तराह अपने भाइ बंसीको समर्पीत होगइ थी.. अब उसे लखनसे ना मीलनेका कोइ अफसोस नही था.. क्युकी उसे अब अपने भाइ बंसीसे ही उतना प्यार मील रहा था.. तो लखनको दिलसे बहार नीकालकर बंसीको पुरी तराह अपना लीया था.. वो अब बंसीके प्यारमे पागल होचुकी थी..

अब बंसीसे चुदवानेके बाद जो आइपील लेती थी.. वो आइपील लेना भी बंध करदीया था.. ओर बंसीसे खुलकर ओर प्यार करने लगी.. बंसी भी अपनी बहेनसे बहुत प्यार करता था.. जबतक सांती जयाके पास रही दोनो भाइ बहेनने अकेलेपनका खुब फायदा उठाया.. ओर दिन रात उसी काम (चुदाइमे) लगे रहेते..

जब भी बंसी कामसे घर आता दोनो मील जाते.. बंसीने जागृतीकी हर अ‍ेन्गलसे हर जगाह चुदाइकी.. घरका अ‍ेक कोना नही छोडा.. जागृतीने भी अपने भाइको ओर कामुक होते खुब साथ नीभाया.. ओर हर बार अ‍ेक ही मक्सदसे अपने भाइके बीजको अपने गर्भमे पहोचानेकी कोसीस करती रही..

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सांती लगभग पंद्नह दिन जयाकी देखभालके लीये सहेरमे रुकी.. फीर अ‍ेक दिन लखनके साथ गांव वापस चली गइ.. चंदाका भी सबने खुब खयाल रखा.. खास करके लखन सृती ओर राधीकाने.. जीसे चंदा बहुत खुस थी.. अब लखन सबके सामने उनके होठोको चुम लेता तब चंदा बहुत ही सरमा जाती..

बंध कमरेमे भी लखन चंदाका खुब खयाल रखता.. जब भी चंदा अपनी बच्चीको दुध पीलाती तो लखन चंदाके दुसरे बुब्सपे मुह लगाता.. ओर बच्चीके साथ ही चंदाका दुध पीने लगता जीसे चंदा हसते लखनके सरको सहेलाती.. फीर वो लखनको ब्लुजोब देते संतुस्ट करती ओर वादा करतीकी अ‍ेक दिन वोभी उनके बच्चेको जन्म देगी..

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इसी बीच अ‍ेक दिन मुना बहार घुम रहा था तो गीताका फोन आते ही उसे मीलने चला गया.. क्युकी उनका पती दो दिनके लीये बोम्बे गया हुआ था.. उस दिन दोनोने प्रेगनन्सीकी खुसीमे खुब चुदाइ की.. फीर गीताने मुनासे चुदवाते ही उनकी पुरी कहानी बीना कुछ छुपाये मुनामो सुनादी.. जीसे मुना गीतासे उनकी सचाइसे बहुत प्रभावीत हुआ..

मुना गीतासे सचमे प्यार करने लगा था.. दोनो ही नंगे बेडपे लेटकर बाते करते रहे.. ओर बीच बीचमे अ‍ेक चुदाइका दौरभी चलता.. मुना अब भी गीताके उपर लंड चुतमे डालकर लेटा हुआ था.. तब गीताने मुनाको अपने बारेमे भी बतानेको कहा.. तो मुनाने बदलेकी भावनाकी बातको छोडकर गीताको भी सबकुछ सच बता दीया..

जीसे सुनकर गीता सोक्ट होगइ.. ओर आंखसे आसुं नीकलने लगे.. क्युकी उसे ये जानकर सोक्ट लगाकी अभी जो उनकी चुदाइ कर रहा हे.. ओर वो जीनसे प्रेगनेन्ट हुइ हे वो कोइ ओर नही खुदकी भांजीका बेटा हे.. तब मुनाने अ‍ेक बार फीर प्यारका इजहार कीया.. ओर कहाकी इस बारेमे मामाको कभी पता ना चले..

फीर दोनोने अ‍ेक बार फीरसे कुछ वादे सीकवे कीये.. ओर गीता इस राजको हमेसाके लीये छुपाने राजी होगइ.. फीर इस बार दोगुना जोसमे मुनासे चुदवाने लगी.. चुदवानेके बाद गीताने उनकी मम्मीको मीलकर मांफी मांगनेकी पेसकस की.. तो मुनाने उसे कुछ दिन ओर इन्तजार करनेको कहा.. ओर इस बारेमे मामाको कभी पता ना चले.. इनका गीतासे प्रोमीस लेलीया..

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गीता आज बहुत खुस थी.. मुना देर साम तक वहा रुका.. उन्होने अपने मामाके बीजनेशके बारेमे पुछा तो इस बारेमे गीताको भी कुछ पता नही था.. वो बस अब मुनाके साथ अपनी जींदगी अ‍ैसे ही बीताना चाहती थी.. ओर वो मुनासे ओर बच्चा भी चाहती थी.. फीर कल दोबारा मीलनेका वादा करके मुना घर चला गया..

दिन बीतने लगे.. पुनमको पता थाकी अब भावनाकी डीलीवरीका वक्त आ गया हे.. उसने घरपे नीर्मलासे बात करली.. तो सब बहुत ही उत्साहमे आगये.. क्युकी सबको पता थाकी भावनाकी कोखमे मंजु पल रही हे.. सबलोग मंजुके आगमनकी तैयारीया करने लगे.. ओर डीलीवरीसे ठीक तीन दिन पहेले ही सबलोग सहेर आगये..

हवेलीपे सीर्फ चंपाकाकी अकेली थी.. अब लखन जब भी गांव जाता कभी कभी उनको भी लखनसे सुख मील जाता.. पुनमने चारु ओर रश्मीको वापस आने तक हवेलीका खयाल रखनेको केह दीया था.. देवुकी बाकी सभी बीवीया भी भावनाकी कोखसे मंजुके वापस आनेका इन्तजार कर रही थी..

तो गांवमे भी सब लोगोको पता था.. तो भावनाकी बात सुनकर अनायास ही अ‍ेक उत्सव जैसा माहोल हो गया.. सबलोग भावनाका अ‍ेक रानीकी तराह खयाल रखने लगे.. भावनाको उमीद नही थीकी मंजु उनकी गोदसे जन्म लेगी तो उसे इतना प्यार मीलेगा.. सबलोग भावनाकी वीसेस केर करने लगे..

जीसे भावना अ‍ैसे सरमा जाती जो वो हवेलीकी खास रानी हो.. उनका बेटा भावेश रमाके पास ही था.. ओर बडी बच्ची भी अब बडी होगइ थी तो वो ओर विजय साथ खेलते.. ओर कभी कभी अ‍ेक ही खीलोनेके लीये आपसमे जगडा करते.. तो पुनम भी अपनी बच्चीका बहुत खयाल रखती.. ओर उनके दुध भी अब काफी बडे ओर भरावदार हो गये थे..

ओर आखीर ये दिनभी आगया.. सुबह चार बजे भावनाको लेबर पेइन हुआ.. तो सबलोग जाग गये.. ओर लखनने तो बहार कार भी रेडी रखी थी.. नीर्मला पुनम देवायत राधीका लखनके साथ सृती ओर भावीका भी रेडी होयइ.. पुनमने लता ओर नीलमको चंदाका खयाल रखनेको कहा.. ओर सबलोग क्लीनीकपे चले गये..

भावीकाने अपने स्टाफको फोन करके बुला लीया.. ओर कीसी भी इमरजन्सीके लीये सबको कोल करके रेडी रहेनेको कहा.. ठीक ब्रह्म मुहुर्तमे भावीकाको बहुत दर्द होने लगा तो उसे ओटीमे लेजाया गया.. तो सृतीने लखनको भी इसारोसे केबीनसे अंदर आनेको केह दीया.. तो लखन सृतीकी केबीनसे ओटीमे चला गया..

लखन : (मुस्कुराते) यार मुजे क्यु अंदर बुलाया..? मुजे कहा डीलीवरी करनी हे..?

सृती : (पीठमे अ‍ेक मुका मारते) भाइ.. ज्यादा चपडबपड मत करो.. जीतना कहा जाये उतना करो.. आप अपनी भावना भाभीको सम्हालो.. हमे नोर्मल डीलीवरी करनी हे..

लखन : (सामने देखते धीरेसे फुसफुसाते) भाभीको मे सम्हालु..? पर कैसे..?

सृती : (सरारती मुस्कानसे) क्यु..? उन हिमालयकी कीताब नही पढी क्या..? कैसे वो राजा डीलीवरीके वक्त अपनी बीवीओको सम्हालते थे.. अ‍ैसे ही सुरु होजाओ.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) यार वो टोटका यहा काम थोडीना करेगा..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे मुजे विस्वास हे.. जरुर करेगा.. आप अ‍ेक बार ट्राइ तो करो.. चलो सुरु होजाओ..

कहा तो भावना दर्द होनेके बावजुद भी सरमा गइ.. ओर लखन मुस्कुराते उनके सरके पास जाकर खडा होगया.. ओर भावनाके सरको सहेलाने लगा.. भावना सरमाके लखनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. तबतक भावीकाका स्टाफ भी आ गया.. ओर लखनको वहा देखकर मुस्कुराने लगा.. सृती ओर भावीकाने लखनको इसारा करते मोर्चा सम्हाल लीया..

भावीकाको अ‍ेक इन्जेक्शन दीया तो दर्द ओर बढ गया.. सृती भावनाको ओर जोर करनेको कहेने लगी.. भावीका भावनाके पेटको पुस करने लगी.. ओर सृती भावनाके दोनो पैरोके बीच ग्लोज लगाकर बच्चेका इन्तजार करने लगी.. भावना कुछ समजे उनसे पहेले ही लखन उनके सरको सहेलाते होठोपे कीस करने लगा..

भावना दर्द होनेके बावजुद भी मदहोस होने लगी.. दोनोके होठ मीले हुअ‍े थे.. ओर चुंबन इतना गहेरा हो गयाकी बच्चेके रोनेकी आवाजसे ही दोनो होसमे आये.. देखा तो सृती बहुत ही खुस होते बच्चीको अपने हाथोमे लीये खडी थी.. ओर उसे कोटनसे पोछ रही थी.. फीर बच्चीको अंदर लेजाया गया..

भावनाकी आंखोसे हर्षके आसुं बहेने लगे.. उसने जोरोसे लखनके हाथोको थामते रखा था.. फीर लखनकी ओर देखते फुसफुसाते बस इतना ही कहा.. थेन्क्स.. आइ लव यु.. ओर लखनने अ‍ेक बार फीर उनके होठ चुम लीया.. ओर मुस्कुराने लगा.. तबतक भावीका भावनाकी चुतपे टांके लगा रही थी.. तो..

लखन : (सरारती मुस्कानसे) डार्लींग.. जरा अच्छेसे.. हें..हें..हें..

भावीका : (जुठे गुस्सेसे) कीतने कमीने हो.. अ‍ेक ज्यादा ही लगाउगी.. फीर मजे करते रहेना..

सृती : (मुस्कुराते बच्चेको बहार लाते) देखा भाइ.. वो टाटका काम कर गया.. भावना भाभीको पता भी नही चला की बच्ची आ गइ हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. ये बच्ची नही हमारी मोम हे..

फीर सृती बच्चीको अच्छेसे साफ करके भावनाको दीखाती हे.. तो भावीका भी हाथ लेकर उसे प्यार देती हे.. जब उसने बच्चीको लखनके हाथोमे दीया तो लखनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. ओर उनके मुहसे सीर्फ इतना ही नीकला.. मो..म.. हमारी फेमीलीमे आपका फीरसे स्वागत हे.. आपका दर्जा हमेसा मोमका ही रहेगा..

इतना सुनते ही सृती भी भावुक हो गइ.. ओर उनकी आंख भी गीली होगइ.. फीर सृती बच्चीको अपने पास लेलेती हे.. ओर बहार चली जाती हे.. तब लखन भावनाके होठोपे कीस करके वापस सृतीकी केबीनसे बहार चला जाता हे.. बहार देखता हेतो देवायत बच्चीको सीने लगाते खुसीसे आंसु बहाता हे..

फीर बारी बारी पुनम नीर्मला ओर राधीका भी बच्चीको प्यार देते हे.. ओर सबकी आंखे खुसीसे नम होती हे.. लखनने वही फोन करके चंदाको घरपे बता दीयाकी मोम वापस आगइ हे.. सुनकर देवायत लखनसे लीपटकर आंसु बहाने लगा.. तो नीर्मलाने देवायतको लखनसे अलग कीया ओर उसे हग करते सम्हाल लीया..

सृतीने दुसरे दिन तक भावनाको वहा रखा.. तो नीर्मला ओर देवायत वही क्लीनीकपे रुक गये.. बाकी सब लोग घर चले गये.. उस रात लखनने स्पेसीयल सीर्फ पुनम ओर लताके साथ ही सारीरीक सबंध बनाये.. दोनोको देर रात तक खुब प्यार कीया.. जीसे लता बहुत ही खुस हो गइ.. उस रात पुनमने लखनको गांवके बारेमे ओर अपडेट दीया.. खास करके बंसीके बारेमे..

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जीसे सुनकर लखन भी चौक गया.. दुसरे दिन भावनाको छुटी देदी तो लखनने सबको जबरदस्ती अ‍ेक दिन ओर रुकनेके लीये कहा.. उस रात भी सृती भावीका राधीका पुनम ओर लता.. सबलोग साथमे सोये.. सबने लखनको पुरी रात जगाया.. ओर बारी बारी सबने लखनसे खुब चुदाइ करवाली.. सुबह सबलोग देरसे जागे..
 
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