अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड) - Page 5 - SexBaba
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अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड)

अपडेट 5


बिस्टेर तो हामरे पास नहीं था हम दोनों फारस में hi लेट गए the,sharir की थकन इतनी थी की नींद कब आयी पता hi नहीं chala,diwar से सात कर भाभी सो गयी थी वही मैं उनके बाजु में hi सोया था ,कमरा इतना बड़ा भी नहीं था की हम कही दूर दूर सो sakte,do लोगो के सोने के बाद थोड़ी जगह और बची थी ,उसमे हमें अपने बाकि के सामान को रखना है ,खैर अभी तो हमारे पास कुछ था hi नहीं ….

मेरी नींद किसी के दरवाजा खटखटाने से खुली ,मेरे साथ भाभी भी जाग गई थी ,आवाज देने वाली कोई ायरत thi..maine दरवाजा खोला ..और वो हमें देखकर मुस्कुराई ..

“तो तुम लोग हो जिन्हे कलवा रत में लाया “

मैंने हां में सर हिला दिया

“ओह देखने में तो अच्छे घर के लगते हो भाग कर आये हो क्या ..”

अब मैं उनसे क्या कहता ,मैं कुछ जवाब देता उससे पहले hi वो बोल पड़ी ..

“अरे छोकरी तेरा नाम क्या है..”

“जी जी आरती ..”भाभी ने बड़े hi शैब्य तरीके से कहा

“ओह्ह तो चल यंहा सुहब सुबह hi पेट साफ कर ले वर्ण फिर भीड़ हो जाएगी ,सरकारी सुलभ है पास hi ,पूरी बस्ती वही आती है तो भीड़ लग जाता है ,सभी ओउरते सुबह जल्दी hi जाती है वंहा ,वही से नाहा कर भी आ जाना ..”

भाभी ने है में सर हिलाया और अपने बैग से कुछ कपडे निकल कर उसके साथ चली गई ,मैं फिर से वही सो गया था लेकिन इस बार मुझे फारस के कठोरता का आभास होने लगा था ..

1 घंटे बाद वो वापस आ गई ,उनके चेहरे में एक मुस्कान थी,

मुझसे नजर मिलते hi उन्होंने कहा

“यंहा की एयरटे तो हमारे गांव जैसी hi है ,लगता है मैं यंहा अच्छे से रह लुंगी ,यंहा एयरटे मिलकर एक सहकारी समूह चलती है जिसे सरकारी मदद भी मिलती है ,वो लोग मिलकर कपडे सिलने का काम करती है “

उनके आँखों में आयी चमक से मुझे बहुत राहत मिली ,थोड़ी देर में कलवा भी आ गया ,मैं उसके साथ चला gaya,sach में मुझे मेरे गांव की hi यद् आ गयी लोग कुछ ऐसे hi थे लेकिन यंहा के सभी लोग बस मजदुर hi थे मुझसे मिलने और मेरी कहानी जानने का कौतुहल सभी के अंदर था ,वंहा मुझे पता चला की कलवा एक तरह से यंहा का डॉन hi है और जो ायरत सुबह आयी थी वो उसकी बीवी थी ..

कलवा ने मुझे 9 बजे तक अपने साथ चलने को kaha,khana भी कलवा के घर से आ गया था ,

“देख जंहा ले जा रहा हु वो यंहा के बाप है ,उनके सामने जयदा बोलना मत समझा “

कलवा ने जाते हुए मुझसे कहा

‘जी भाई “

थोड़ी देर में बाकि के लोग भी साथ हो लिए ,हम फिर से उसी स्टेशन के पास the,bus स्टैंड के पीछे एक गोदाम था कलवा वही मुझे काम दिलवाने वाला था ,मुझे बहार hi रुकवा कर कलवा अंदर गया थोड़े देर में मुझे भी बुला लिया गया ..

“लाला साहब यही लड़का है जिसके बारे में मैंने बताया था “

लाला ने मुझे ऊपर से निचे तक देखा ..

“हुम्म्म दिखने में तो खुश खास नहीं है फिर भी पुलिस वाले को मार दिया “

उन्होंने मुझे घूरते हुए कहा

“साहब मरने के लिए शरीर नहीं बल्कि जिगर चाहिए “

मैंने बहुत hi शालीनता से जवाब दिया ,वही कलवा मुझे घूरने लगा था जैसे मुझसे कोई गुनाह हो गया हो ,लेकिन शायद लाला को मेरी बात पसंद आ गयी थी ..

“हम्म बढ़िया ,चलो ठीक है इसे लोडिंग वाले काम में लगा दे ..”

“साहब कुछ काम म्हणत वाला काम दे दीजिये न नया लड़का है “कलवा ने लाला से रिक्वेस्ट किया

“अरे नया है तो क्या साला मैं कोई धर्मशाला तो खोल के नहीं बैठा हु जो है वो कर्जा तो करे वर्ण जाए यंहा से “

लाला ने साफ साफ शब्दों में जवाब देदिया था ,मुझे नौकरी करनी hi थी चाहे जो भी हो जाए ,मैंने कलवा को आँखों से hi इशारा किया की मुझे काम करने में कोई दिक्कत नहीं है …

और मैंने जीवन का पहला काम किया, बोरियो को ट्रको में उतरने चढाने का काम ,ऐसे लगा जैसे हड्डिया टूट गई ho,tab जाकर मुझे 300 रस दिए गए ,पहली बार अपनी कमाई को हाथो में लेकर मैं फुले नहीं समां रहा tha,mujhe यद् आया की घर में खाने के लिए कुछ नहीं है वही बिस्टेर भी नहीं है ,लेकिन 300 में आखिर क्या क्या आ सकता था ,

कलवा ने मुझे देसी दारू ऑफर की लेकिन मैंने उसे साफ मन कर diya,maine दारू कभी नहीं पि थी और पिने का कोई इरादा भी नहीं था ,मैं तो बस जल्दी से जल्दी जाकर भाभी के हाथो में अपनी ये कमाई देना चाहता था ,बाकि के लोग दारू पिने चले गए थे और मैं घर की और भगा ..

घर या वो एक कमरे की खोली hi अब मेरा घर थी ,वो मेरे लिए किस महल से काम भी न थी क्योकि वंहा मेरी प्यारी भाभी माँ रहती है ..

कमरे का दरवाजा खटखटाना नहीं पड़ा क्योकि वो पहले से hi खुली हुई थी ,वंहा मुझे दो महिलाये बैठी हुई दिखाई दी ..

भाभी मुझे देखते hi खुस हो गयी थी ..

“अच्छा आरती हम चलते है …”वो दोनों hi मुस्कुराते हुए निकल गए ..

मैं देखे कर हैरान था ,कोने में एक चूल्हा बना दिया गया था वही एक घड़ा भी रखा हुआ था ,कुछ बर्तन और राशन सामान के डिब्बे ..

“ये क्या है भाभी ..”

वो मुस्कुराई

“अरे यंहा के लोग दिल के बहुत अच्छे है देखने में गरीब जरूर है लेकिन दिल के बहुत hi बड़े लोग है ,पास की राशन की दुकान वाले से मेरी पहचान करवा दी उसने उधर में सामान दे दिया और ये बिछाने के लिए बिस्टेर भी पास के दुकान से उधर में ले आयी ,Shobha(kaliya की बीवी) बोली की जब तुझे पहली पगार मिलेगी तो सब लौटा देना ,जनता है यंहा पर कपडे सिलने का बड़ा सा समूह है सुपरवाइजर ने तो मुझे देखते hi काम पर रख लिया …अब सब ठीक हो जाएगा सोनू दिल लगाकर काम करुँगी और तू फिर से पड़ना शुरू कर सकता है अब “

मैं खुस था इसलिए क्यों की ये सब हो रहा था, नहीं, बल्कि इसलिए क्योकि इससे भाभी के चेहरे में चमक थी ,वो खुस थी और उनके खुसी के लिए मैं कोई भी कीमत चुकाने को तैयार था …

मैंने जेब से अपनी पहली कमाई निकाली और उनके आगे कर दिया ..

“भाभी ये मेरी पहली कमाई “

इसे देखकर वो बहुत hi भावुक हो गई लेकिन जैसे उन्होंने मेरे हाथो को छुआ उन्होंने इसे ध्यान से देखा ..

“तेरे हाथो में तो छले पद गए है..”

उनके आँखों से पानी गिरने लगा था..

“हां आदत नहीं है न इसलिए कुछ दिन में आदत हो जाएगी “

उन्होंने खींचकर मुझे अपने साइन से लगा लिया..

“नहीं नहीं तू कल से ऐसे काम में नहीं जायेगा मैं कैसे भी करके कुछ कमा लुंगी तू बस पड़े कर, ये दिन देखने के लिए तो नहीं आया था न मेरे साथ “

“ओहो भाभी आप भी न, दोनों मिलकर कमाएंगे तब तो यंहा से निकल पाएंगे ,वर्ण क्या साडी जिंदगी यही रहना है “

“नहीं सोनू तुझे मेरी कसम है तू ऐसा काम नहीं करेगा “

मैंने उसने चेहरे को अपने हाथो से जकड लिया ,उसनका वो प्यारा सा चेहरा उनके hi आंसुओ से भीग चूका था ,बड़ी बड़ी आंखे अभी भी नाम थी ,मुझे अपने भाई की किस्मत पर दुःख होता है की उसने इन्हे छोड़ दिया था ,इतनी सूंदर, ममता से भरी हुई थी मेरी भाभी ,मैंने बड़े hi प्यार से उनके गलो में एक किश किया ,मेरे होठो में उनके आंसू भी लग गए थे थोड़ा सा नमकीन सा स्वाद मेरे जीभ में लगा ..

“भाभी मैं अब बच्चा नहीं हु पूरा मर्द बन गया हु ,आप क्यों फिक्र करती हो ,मैं पढूंगा भी और कमाऊंगा भी ,और अपनी भाभी को रानी बनाकर रखूँगा “

मेरे बात से उनके होठो में एक मुस्कान तो तेरी लेकिन आंखे अभी भी गीली hi थी ,उन्होंने मेरे गलो पर अपना हाथ रख दिया और बड़े hi ममता से सहलाया ..

“इतना पैर क्यों करता है तू अपने भाभी से “

मैंने उन्हें पास बिछे हुए बिस्टेर में बिठा दिया और उनके गॉड में सर रखकर लेट गया …

“क्योकि आपने मुझे जितना पैर दिया उतना तो मेरी माँ ने भी मुझे नहीं diya,aap मेरे लिए मेरी माँ हो मेरी बड़ी बहन भी हो ,और मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी …”

वो बड़े hi प्यार से मेरे बालो को सहला रही थी और थोड़ा झुक कर उन्होंने मेरे माथे पर एक किश किया ..

“चल अब प्यार जाताना हो गया हो तो कुछ खाने के लिए बना दू बहुत भूख लग रही है “

मैं भी उनके गॉड से उठ गया था…

“भूख तो मुझे भी बड़ी तेज लगी है लेकिन खाएंगे क्या ???”

वो थोड़ी देर सोची फिर ध्यान से राशन की और देखने लगी

“सब्जिया तो है नहीं आज खिचड़ी hi खा लेते है “

जब सोने का समय आया तो मैं थोड़ा असमंजस में फंस गया था ,बिस्टेर एक hi था जो की जमीं में बिछा हुआ था और भाभी उसमे सो नहीं रही थी ..

“मुझे कुछ नहीं पता बिस्टेर में तू सोयेगा मैं फारस में hi सोऊंगी “

उन्होंने जिद की

“क्या भाभी आप भी आप बिस्टेर में सोइये मैं फारस में सोऊंगा “

“अरे तू इतनी म्हणत कर रहा है तेरे शरीर को जयदा आराम की जरुरत है “

उन्होंने मुझे लगभग डाँटते हुए hi कहा ..

“अच्छा अगर आप बिस्तर में नहीं सोवोगी तो मैं भी नहीं सोता जाओ “

मैंने झूठमूठ hi सही अपना मुँह फुला लिया था ..वो मेरे गलो को अपने हाथो में भर ली .और जोरो से हिला दिया

“बदमाश कही का …चल ठीक है दोनों hi सो जाते है “

मैंने एक बार उन्हें देखा, वो बस मुस्कुरा रही थी , उन्होंने बिस्टेर बिछाया और फिर कोने में सो गई बिस्टेर में थोड़ी सी hi जगह बची थी ..

“आजा यंहा सो “

मैं थोड़ा घबरा रहा था ..

“अरे इतना बड़ा हो गया है अभी भी मुझसे घबराता है ,चल आ “

मैं उनके बाजु में जाकर लेट तो गया था लेकिन उनका जिस्म मेरे जिस्म से छू रहा था और वही मुझमे थोड़ी अजीब सी फेल्लिंग का जन्म हो रहा था ,उन्होंने मेरा चेहरा अपनी और किया और मेरे माथे में एक किश कर दिया ..

“सजा बेटे …”

उनके चेहरे में आयी वो प्यारी सी मुस्कान इतनी प्यारी थी की मैं बस उसे देखता हुआ खो hi गया था ..

“क्या हुआ ?? ऐसे क्यों देख रहा है “

“आप बहुत hi पैरी हो भाभी “

मैं अब भी उन्हें देख रहा था ..वो बस मुस्कुराई

“चलो सो जाओ “

वो पलट कर सो गई ,

उन्होंने अभी एक पुराणी साड़ी पहनी थी और ब्लाउज, उनकी पीठ का कुछ हिस्सा मुझे दिख रहा था लेकिन उनके लम्बे बल बिखरे हुए the,pata नहीं मेरे अंदर क्या हुआ मैं उनसे सात गया और बालो को एक तरफ करके उनके खुले हुए कंधे पर एक किश कर दिया …

“सोनू ..”

भाभी ने हलके से खा लेकिन वो पलटी नहीं मैंने अपने हाथ को उनकी कमर से लपेट लिया और उनसे बिलकुल hi सात कर सोने लगा …

मेरे पुरे शरीर में काम की वजह से आज तगड़ा दर्द था और बिस्टेर कोमल तो नहीं लेकिन फारस से तो बेहतर था मेरी नींद लगने लगी थी और मेरा एक पेअर भाभी के कमर को घेर चूका था ,नींद में अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे हाथो को पकड़ा है ,शायद मेरे हाथ भाभी के पेट से उठाते हुए उनके वक्ष sthalo(boobs) तक पहुंचने वाले थे इसलिए भाभी ने बड़े hi प्यार से उसे पकड़कर निचे कर दिया था ,मेरे चेहरे में बस एक मुस्कान थी और आँखों में अब गहरी नींद….

 
बहोत बाध्य लिखा है भाई.

साला पुलिस वाले भी भाबी को प्रोस्टीटूटे समझने लगे?

किआ सबको एक प्रोस्टीटूटे दिख जाए तो वैसे hi टूट पड़ते हैं किआ? साला मैं तो छूवूँगा भी नहीं धंदे वालियों को तरह तरह की बीमारियां पालते हैं.... और यह लोग भाबी को धंदे वाली समझे, तो किआ अगर सच में एक वेहशया होती तो सारे मर्द उसस्के साथ सेक्स करना चाहते किआ? साला कभी औरत नहीं चोदे होंगे सालों ने के किसी को भी रात क अँधेरे में रंडी समझ के छोड़ना चाहते हैं.....

राहु बात भाबी जी की, तो अगर मेरे सामने वो हादसा हुआ होता तो कलवा तो कूल था मैं होता पुलिस समेत इंस्पेक्टर सब का धुलाई कर देता.

चलो सोनू भाबी को किसी भी तरह कलवा क हेल्प से सुरक्षित जगह तो ले आया.

अब देखते हैं किआ होता है. प्यार तो कर बैठना लाज़मी है.

उत्तम अपडेट भाई.
 
बाध्य अपडेट भाई.

तो अब शरीर से शरीर टकराये. भाबी को भी कुछ फील हुआ होगा जब सोनू ने उसस्के काँधे पर किश किया. क्यूंकि उस्सने कुछ ज़्यादा तो नहीं कहा बुसस "सोनू" कहकर छुप हो गयी.

और फिर सोनू का हाथ उस जगह चला गया जहाँ नहीं पहुंचना था तो भाबी ने उस्का हाथ पाकर लिया.

मगर कब तक पकड़ेगी? कितने रातों तक खुद को संभालेगी?

आगे मज़ा आने वाला है कहानी में.

भाई मेरी सुझाव है क इस्को फुल स्लो सेडक्टिव रखो. जल्दी मत जाओ, सब कुछ दिन बा दिन आहिस्ते आहिस्ते होने दो. इस में प्यार रोमांस की जगह भी है. हो सके तो उस और भी सोचो.

आगे आप जैसा बेहतर समझो.

अपडेट पसंद आया मुझे भाई.
 
बहोत बाध्य डॉ साहब ,,,,,,,,,,बुरे समय में भी लोग ाचा सोचते है ..,,,,..,.,और उस में खुश रहना भी सीखा जाते है ,,.......,इस hi का नाम जिंदगी hai......jindagi का एक महत्वपूर्ण पहलु दर्शाया है apne.........aage चलते जाना है इस hi का नाम जिंदगी है ........... ऐसे hi लिखते रहिये.
 
अवेसमे अपडेट डॉ साहब,

बेहद hi शानदार, लाजवाब और अमेजिंग अपडेट है भाई,

कलुआ ने सोनू को नौकरी दिलवा दी है,

और उसकी बीवी ने भाभी की मदद की है घर के सामान दिलवाने में,

अब यंहा से सोनू भाभी की और आकर्षित हो रहा है,

देखते है अब आगे क्या होता है,

वेटिंग फॉर नेक्स्ट अपडेट
 
आईटी डस नॉट टेक टाइम तो चेंज थे सिचुएशन, बूत िफ़ वे डरे, एवरीथिंग गोज वेल. कलवा इस शेविंग सिम्पथी विथ सोनू, बूत व्हेदर आईटी इस Kalwa's ट्रिक और Kalwa's heart's गुड, नथिंग कैन बे साइड राइट नाउ. यू हैवे प्रेसेंटेड वैरी वेल थे फीलिंग्स ऑफ़ भाभी एंड सोनू इन फ्रंट ऑफ़ उस.

Today's अपडेट वास् वैरी ब्यूटीफुल एंड फुल ऑफ़ लव. यू अरे राइटिंग वैरी वेल, नाउ let's सी व्हाट हप्पेंस नेक्स्ट, टिल थें वेटिंग फॉर थे नेक्स्ट part ऑफ़ थे स्टोरी. थैंक You...❤️❤️❤️
 
डॉ भैया बिलकुल सही दिखाया अपने कुछ पुलिस वाले ऐसे hi होते है चोरो चक्को को नहीं आम आदमी को जरूर परेशान करेंगे .... ाचा मारा सोनू ने :बात1: और अचे टाइम पे कलवा आ गया ....लगता है ये भोत मदद करेगा सोनू की इस सेहर में ...

और भाभी वैसे hi एक सदमे से नहीं उभरी की कुछ देर पहले उन्होंने जिसके साथ 7 जनम के लिए 7 कस्मे खायी थी उसने उन्हें न सिर्फ घर से निकला बल्कि चरित्र पे दाग भी लगा दिया ....और सेहर में आते hi ये सब .....क्या दिन देखने पद रहे है .....ाचा हुआ कलवा मिल गया ...और ये भी सही है की जिनके घर बड़े नहीं होते उनका दिला बड़ा होता है ....कलवा ने उन लोगो को रूम दिलाया चलो देखते है अब क्या होगा आगे कैसे इन दोनों का सफर आगे बढ़ेगा ...........भोत ाचा लिख रहे हो डॉ. भैया .......थैंक यू इतनी अछि अछि कहानी हम तक लाने के लिए :happy::happy::happy:
 
डॉ साहब, मैंने सरे अपडेट पढ़ लिए आपके. बहुत hi खूबसूरती से लिखा है आपने. स्टोरी का प्लाट पुरानी हिंदी फिल्मो जैसा hi है मगर जिस खूबसूरती से आपने इसकी भूमिका बनायी है वो काबिले तारीफ़ है.

सबसे बढ़िया बात ये है की हर बात को विस्तार से और भरपूर भावनाओ को डालते हुए लिखा है आपने. लास्ट के अपडेट में ऐसा लगा जैसे स्पीड थोड़ा ज़्यादा हो गयी हो. स्पीड से मेरा मतलब ये है की भाभी की तरफ देवर का आकर्षण. मैं बस इतना कहना चाहुगा की होना तो वही है एक दिन जो कदाचित हम सभी जानते हैं या समझते हैं मगर वो सब जल्दबाज़ी में हो जाये ये अच्छा नहीं लगेगा. भाभी माँ और देवर के रिश्ते के बीच शुरू से hi आदर सम्मान वाली बात थी तो इसे बरकरार रखना होगा. यहाँ पर ऐसा बिलकुल भी नहीं लग्न चाहिए की प्रेम के ऊपर हवस ने फतह हासिल कर ली या हवस ने प्रेम को जड़ से नेस्तनाबूत कर दिया.
 
बहुत ाचा अपडेट दिया हे भाई. सोनू ने अपनी जिंदगी की पहली कमाई कर ली. भाभी भी सिलाई केंद्र में गयी थी जहा के सुपरवाइजर ने उन्हें देखते hi काम पर रख लिया. साहूकार ने भी उधर में सामान देदिया. लगता हे की आगे जाके ये दोनों अपनी मेहरबानियों का फायदा उठाना चाहेंगे. और अभी तो सायद वो इंस्पेक्टर भी वापस आएगा.

वेटिंग 4 नेक्स्ट अपडेट
 
बस इसी अंदाज पर कायम रहना................. वक़्त के साथ बदलाव तो आते हैं.............

लेकिन उन बदलाव से खुद को nahi..............halaat को बदलने का जज्बा होना चाहिए

देवर भाभी की जिंदगी के उतर चढाव तो अब शुरू हुए हैं....................

बहकना नहीं सम्हालना होगा ..................एक दूसरे को

डॉ साहब आपकी इस कहानी का अंदाज बहुत पसंद aya.................abhi तक

देखते हैं आगे..................... क्या होगा
 
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