अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड) - Page 7 - SexBaba
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अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड)

डॉ. साहब, स्टोरी की शुरुआत तो आपने बहुत hi मर्मस्पर्शी की है. आप सच में hi बहुत ाचा लिखते है. स्टोरी में शायद माता पिता से सोनू का साथ ज्यादा लम्बे समय तक नहीं रहा है और उसे अपनी भाभी माँ का hi प्यार मिला है. देखते है की आपने आगे स्टोरी को किस किस रंग में रंगने का सोचा है. :ब्लश1:
 
अपडेट 7

मैं अभी अपने काम में hi लगा हुआ था की शोभा भाभी मुझे दौड़ते हुए आते दिखी …

“सोनू सोनू “ वो जोरो से चिल्ला रही थी

“क्या हुआ भाभी “मैं उनके पास पहुंच गया था

“सोनू तेरी भाभी को कुछ लोग उठा कर ले गए “

“क्या ..?” उनकी बात जैसे मुझे कुछ समझ में hi नहीं आयी थी …

“कुछ लोग..”

“कोण……. कोण थे वो लोग ??”

मैं बुरी तरह से सदमे में था

“पता नहीं बीटा लेकिन जब मैं और आरती काम के लिए निकले तो बिच में उन्होंने हमें रोका और अटारी को उठा कर ले गए …”

तब तक लाला भी वंहा पहुंच गया था

“जरूर ये इंस्पेक्टर पाण्ड्य की करामात होगी ..”

तभी मुझे वंहा कलवा दिखा ,वो भी बात सुन रहा था ,उसने मुझे अपनी बाइक में बिठाया और गाड़ी दौड़ा दी ..

मेरा खून जल रहा था ,चेहरा और दिल गुस्से की आगे से धधक रहे थे ,

“मुझे पता है की वो लोग कहा गए होंगे..”

उसने गाड़ी एक वीरान इलाके में कड़ी कर दी ,एक बड़े गोदाम जैसी जगह थी और बहार एक जीप कड़ी थी उसके नंबर प्लेट में पुलिस लिखा हुआ था , मैं तेजी से आगे बढ़ा और गोदाम का दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हुआ वंहा मैंने जो भी देखा उसे देख कर मेरा दिगमग hi सुन्न हो गया था …

अंदर वो इंस्पेक्टर और दो उस दिल वाले सिपाही थी जिन्हे मैंने मारा था उनके साथ hi साथ कुछ और भी लोग थे जो की किसी गुंडे जैसे लग रहे थे ..

उनकी नजर मुझपर पड़ी तो वो इंस्पेक्टर जोरो से हंस पड़ा

“देखो देखो कौन आया है , इस सेल के सामने hi इस छमिया के जिस्म की धज्जिया उड़ाऊंगा फिर इसकी चमड़ी निकाल कर सेल के अंदर की पूरी गर्मी निकलूंगा ,पकड़ो सेल को ..”

मैंने पास hi पड़ा हुआ एक रोड उठा लिया था वो गुंडे जैसे लोग मुझे पकड़ने के लिए दौड़े मैं भी उनकी और पुरे ताकत से भाग रहा था ,वही थोड़ी दूर जमीं में पड़ी हुई भाभी के जिस्म में नाम मात्र का hi कपडा रह गया था ,दोनों सिपाही उनका हाथ पकडे हुए थे और उन्हें जमीं में लिटा दिया था ,साड़ी शरीर से निकाल दी गई थी ब्लाउज भी जैसे फाड़ दिया गया हो .. एक नजर उनके ऊपर पड़ते hi मेरा खून उबाल मरने लगा था , वो लोग मेरे पास आ चुके थे मैंने जोरो से रोड घुमाया लेकिन ये क्या ,किसी ने पीछे से मुझे लात मार दी मैं लड़खड़ाता हुआ गिर गया था..

दो लोग जो सामने से आ रहे थे और एक जिसने मुझे पीछे से लात मारी थी तीनो ने मिलकर मुझे दबोच लिया था , उन्होंने मुझे अपने काबू में कर लिया था और पकड़कर इंस्पेक्टर के पास ले गए ,भाभी के आँखों में दहसत नाचते हुए दिखाई देने लगी थी ..

“इसे छोड़ दो तुम लोग जो बोलोगे मैं करुँगी ..”

भाभी की बात सुनकर सभी जोरो से हंसाने लगे, मुझे बुरी तरह से मारा गया था , आँखों के सामने अँधेरा छ गया था लेकिन भाभी की बात सुनकर मुझे फिर से एक झटका लगा ..

मैंने अपना पूरा जोर लगाया था अपनी आँखों को खोलने के लिए लेकिन नाकाम रहा था , सामने की हलकी हलकी सी तस्वीर मुझे दिखाई दे रही थी ,लेकिन सब कुछ धुंधला धुंधला सा hi था ,

“तेरे साथ हो सब करूँगा मेरी जान और एक एक कर सभी करेंगे लेकिन थोड़ा रुक तो जा ,इस सेल को बहुत hi गर्मी चढ़ी थी ना तो पहले उसे तो उतरने दे ,पानी डालो रे इसके ऊपर आंखे खुलवाओ इसकी इसके सामने hi इसकी छमिया की इजाजत उतारते है ..”

तभी मेरे ऊपर किसी ने थोड़ा पानी डाला मेरी आंखे थोड़ी और खुली , इंस्पेक्टर मेरे पास hi कड़ा हुआ था उसने अपने हाथो से मेरे मुँह को दबोच लिया था ..

“क्यों बे मादरचोद बहुत अकड़ थी न तेरे अंदर अब देख तेरा और इस आइटम का क्या हाल करता हु “

“रुक जा मादरचोद “ मेरे पास इतनी ताकत नहीं बची थी की मैं कुछ जोर से बोल पाटा ,मैंने धीरे से hi कहा

“अभी भी जान है सेल में “ वो इंस्पेक्टर हँसाने लगा ,

“कोई बात नहीं जान होनी चाहिए तभी तो ये सब देख पायेगा ..”

वो भाभी तक पहुंच चूका था ,भाभी के रोने की आवाज मेरे कानो में स्पष्ट थी ..

“प्लीज उसे छोड़ दीजिये उसे जाने दीजिये, आप जो बोलोगे मैं वो करुँगी ..”

वो फिर से गिड़गिड़ाई

“जाने दूंगा मेरी जान पहले तेरे मजे तो ले लू “

इंस्पेक्टर ने भाभी के स्तनों को मसलना शुरू कर दिया था ,मुझे बस भाभी के रोने की आवाज आने लगी ,दिमाग पूरी तरह से सुनी हो चूका था ,मैंने आंखे बंद कर ली और अपने आप से hi बाटे करने लगा

“क्या तुझे ऐसी नामर्दो वाली जिंदगी चाहिए ,क्या तेरी भाभी के साथ कोई कुछ करे उसे तकलीफ दे और तू यु hi आंखे बंद करके बैठा रहेगा ,क्या तू एक नामर्द है , क्या इसके बाद तू जी पायेगा … “

और इन सबका एक hi उत्तेर आया नहीं ..

मेरी आंखे झट से खुली सामने इंस्पेक्टर भाभी के जिस्म से साड़ी को हटा चूका था और पुरे हवस के आगोश में आकर उनके पेट पर अपना मुँह चला रहा था ..

मेरा दिमाग शांत हो चूका था एक बार मैंने भाभी के चेहरे को देखा , उनकी आँखों से दर्द साफ साफ झलक रहा था , वो बेचारी मेरी जान बचने के लिए चुप हो चुकी थी और अपने जिस्म का इस्तमाल करने की इजाजत दे चुकी थी , हमारे नजरे मिली उनकी आँखों में मेरे लिए अब भी वही प्यार था और उसी प्यार ने मेरे अंदर एक हिम्मत और ताकत का संचार कर दिया ,मैंने नजर घुमाई तो मुझे इंस्पेक्टर के कपडा एक और पड़े हुए दिखाई दिए , वही उसका रिवाल्वर भी रखा हुआ था , बाकि के लोग भाभी के जिस्म की नुमाइस का मजा उठा रहे थे यही समय था और मैं तुरंत hi उठा और पूरी ताकत लगा कर उस रिवाल्वर को पकड़ने के लिए झपटा ,बस जैसे पालक सी झपकी हो और मेरे हाथो में एक पिस्तौल थी इससे पहले कोई भी कुछ समझ पता मैंने दो गोलिया सीधे इंस्पेक्टर पर चला दी …

धाय धाय

गोलिया सीधे उसके माथे पर लगी और उसकी खोपड़ी hi खुल गई ,वो सीधे भाभी के ऊपर गिर गया ,भाभी का चेहरे में बस खून hi खून दिखाई देने लगा था ,उसके बाकि के साथी कोई हरकत करते उससे पहले hi मैंने अपनी बंदूख तान दी ..

“खबरदार अगर कोई हिला तो भून कर रख दूंगा “

सभी सकते में आ चुके थे ,लेकिन वो त्रिनेड लोग थे एक ने तुरंत अपनी पिस्तौल निकाली और तभी किसी ने उसे पीछे से उसके सर पर एक रोड दे मारा , वो कोई नहीं बल्कि कलवा hi था जो मेरे साथ आया हुआ था , उसने उसके हाथो से पिस्तौल ले ली और बाकियो पर तान दी ,

“तुम ये ठीक नहीं कर रहे हो कलवा , इसका साथ देकर तुम भी नहीं बचोगे , जानते हो न इंस्पेक्टर किसका आदमी था ,और पुलिस वाले को मरने के कारण ये तो जायेगा hi जायेगा लेकिन तुम भी इसके साथ जाओगे यद् रखना ..”

एक सिपाही चिल्लाया

“सब जानता हु की ये किस नेता का कुत्ता था और उसके hi डैम में उछलता था , लेकिन मादरचोद मैंने इसे पहले भी समझाया था की मजदूरों से पन्गा ना ले इस सेल ने मेरी बात नहीं सुनी .. सोनू “

कलवा ने मुझे एक इशारा किया और मैंने दो गोली और चला दी दोनों सिपाहियों को गोली लगी के के माथे पैर और दूसरे के साइन पर ,भाभी भी अब कड़ी हो चुकी थी लेकिन उनके आँखों में खौफ साफ साफ दिखाई दे रहा था , उनका प्यारा सोनू अब एक कातिल बन चूका था वो भी पुलिस वालो का ..

“अब तुम किसके साथ हो बे , पुलिस वाले के साथ मरोगे या फिर भागो गए “

कलवा ने वंहा आये बाकि के 3 लोगो से कहा

“कलवा भाई वो सब तो ठीक है लेकिन तुम जानते हो दया संकर तिवारी मंत्री है और ये इंस्पेक्टर पंड्या उसका खास आदमी था , पूरी ताकत लगा देगा इस लड़के को खोजने में और साथ में तुम भी पीस जाओगे ..”

“तू मेरी फ़िक्र मत कर बीटा तू अपनी फ़िक्र “

“भाई हम किसी को कुछ नहीं बताएँगे हमें जाने दो , हम भी तो हामिद के hi आदमी है तुम तो हमें पहचानते हो “

उनमे से एक ने कहा , कलवा थोड़ी देर के लिए सोच में पद गया और मुझे देखने लगा

“कलवा भाई अगर इन लोगो को छोड़ दिया तो ये तो जाकर सभी को बता देंगे “

मेरा दर भी स्वाभाविक था

“फ़िक्र मत कर ये लोग मुँह नहीं खोलेंगे ये हामिद के आदमी है और हामिद मेरा दोस्त है , लेकिन तुम लोग जाकर हामिद को ये बता देना की इंस्पेक्टर पाण्ड्य को किसने मारा है “

उसके होठो में एक अर्थपूर्ण मुस्कान खिल गई थी जिसे मैं समझ नहीं पा रहा था, वो लोग भागे , भाभी तब तक अपनी साड़ी पहन चुकी थी ..

“यंहा से जल्दी निकलना होगा और साथ hi ये इलाका भी छोड़ना होगा , खबर तुरंत फ़ैल जायेगी की तुमने पाण्ड्य को मारा है और फिर तुम्हारे लिए बच पाना आसान नहीं होगा ..”

कलवा की बात सुनकर भाभी की हालत ख़राब हो गई थी वही मेरे दिल में जरा भी दर नहीं था ..

“लेकिन कहा जायेंगे ??”

कलवा मुस्कुरा उठा

“अगर तिवारी से कोई बचा सकता है तो एक hi आदमी है यंहा के भगवन जीवा के गैंग का लेफ्ट हेड सम्पत ..”
 
आखिर जो नहीं होना चाहिए था वो हो गया .. मुज़हे तो ये सब इस कलवा का hi करा धरा लगता है .. क्यों की जब सोनू रोड से उन दो बदमाशों पर मरने के लिए बढ़ा था .. तब किसी ने पीछे से सोनू की कमर पर लात मार दी थी .. कौन हो सकता है .. पक्का ये कलवा ही होगा .. उसको ही शुरुआत से सोनू को अपने साथ मिलाने की खुजली लगी थी .. उसी ने फस्वय है सोनू को इस झमेले में और उसकी भाबी को भी उसके ही इशारे पे उठवाया गया था ...
 
:नाना: जिसने लात मरी थी वो आदमी अलग tha...dhayan से पदों तो उसमे लिखा हुआ है की जिसने लत मरी उसको मिलकर 3 लोग थे ...

और रही बात कलवा का किया धरा होने की तो मैंने इससे इंकार नहीं करूँगा :हिंतहिंट:

लेकिन क्यों :?: , और कलवा का काम नहीं भी हो sakta,iska जवाब स्टोरी देगी आराम से :अप्प्रोवे:
 
यू हैवे सुरप्रीसेड में फ्रॉम थे बिगनिंग ऑफ़ उप्दतिंग, भाभी है बीन किडनैपेड बी ठोस बास्टर्ड्स. सोनू इस ट्राइंग हिज बेस्ट बूत कुड नॉट दो एनीथिंग, फाइनली सोनू मुस्तेरेद उप करेज एंड किल्ड थे पुलिसमें. सोनू दीद नॉट वांट तो दो एनीथिंग रॉंग, बूत सरकमस्टान्सेस मेड हिम ा किलर, सोनू वास् ा गुड बॉय बूत टुडे हे गोत सौगत, व्हाट विल सोनू दो नाउ? एंड इन थे मिड्स्ट ऑफ़ आल थिस, यू हैवे नॉट टोल्ड अबाउट थे Bhabhi's मंद.

अस ऑलवेज थे अपडेट वास् ग्रेट, यू अरे राइटिंग वैरी वेल, नाउ let's सी व्हाट हप्पेंस नेक्स्ट, टिल थें वेटिंग फॉर थे नेक्स्ट part ऑफ़ थे स्टोरी. थैंक You...❤️❤️❤️
 
भाई डॉ जी काली दुनिया का रूप काजल -1 व् 2 में दिखाया और ज़िन्दगी का कड़वा रुख रंडी से प्यार वाली काजल में दिखा दिया अब ये यहॉँ कोन सा सिक माइंडेड तज़ुर्बा कर रहे हो जब से कहानी चालू हुई है आधा अपडेट भी मनोरंजक/सामान्य नहीं आया अगर यहाँ सेंसरशिप नहीं है तो सेल्फ सेंसरशिप ही लागू कर लो

कहानी में उतार चढ़ाव आते रहे तो इंटरेस्ट बना रहता है यहाँ तो एक ही ढर्रे पर कहानी चल रही है

हम भी काम धंदे वाले सामान्य लोग यहाँ कुछ मनोरंजन को आते है और तुम यहाँ संघर्ष के नाम पार के के बाद एक फंतासी परोस रहे हो
 
:बात: :बात:

पहले मुझे इसका मतलब समझाओ की मनोरजक/ सामान्य किसे कहते हो ,

दूसरा की चाहिए क्या ये भी बताओ ..ऐसे छुपा छुपा के बात मर करो सीधे बोलो न कैसा अपडेट chahiye..:cowboy1::cowboy1:

आपके ऐसे hi अपडेट के कारण जादुई लकड़ी में 3-4 सेक्स सन बैक तो बैक दिया था उसके बाद मुझे hi बोलते हो की स्टोरी को आगे नहीं बड़ा रहे :asw1::asw1:

तो अच्छे से सोचकर बताना की क्या chahiye:fight:
 
अरे यार सैंडी इतने सालो से साथ हो आज अचानक क्या हो गया bhai:what1:

मुझे तो लग रहा है की तुम्हारे अंदर भी नैना की आत्मा आ गयी है , जब से वो गयी है कबि राहुल नैना जैसे बोलने लग जाता है तो कभी आप ..:डोह:

जो बोलना चाहते हो क्लियर बोल दो न भाई मैं कौन सा कभी बुरा मन हु जो अब मानूंगा :डेड:

कोई प्रॉब्लम हो तो बताओ और थ्रेड छोड़ कर ना जाओ वर्ण मैं चंडीगढ़ पहुंच जाऊंगा :डोंटगो:

तुसी तो दोस्त हो यार अपने :दोस्त:
 
अपडेट 8

कलवा मुझे और भाभी को सम्पत के पास ले गया, शहर से दूर एक वीरान सी जगह थी, लेकिन एक बड़ी सी हवेली थी, हमें एक कमरे में बैठने के लिए बोलकर कलवा कही चला गया …

“सोनू मेरे कारण तुझे कितनी मुसीबतो का सामना करना पड़ेगा रे, जी करता है की खुद को मार hi दालु “

भाभी की बात सुनकर मैं सकते में आ गया था

“खबरदार अगर ऐसा सोचा भी तो , आपको एक खरोच भी आये तो मेरी जान निकल जाती है और आप मरने की बात कर रही हो , अगर आपको कुछ हो गया तो सोचा है मेरा क्या होगा , मैं तो जीते जी hi मर जाऊंगा, आप मेरी भाभी माँ हो अब आंसू पोछो और एक मुस्कान मुझे दिखाओ .”

उन्होंने प्यार से मेरे गलो पर अपना हाथ फेरा..

“ये दुनिया जिस्म की भूखी है बीटा , यंहा लोग प्रेम का मतलब भी नहीं समझते , सभी को जिस्म की चाहत है भले hi वो प्यार से मिले या फिर छीन कर लिया जाए , तेरा भाई भी वैसा hi था , पता नहीं तू किस मिटटी का बना है जिसने मुझे प्रेम किया ना की मेरे जिस्म से “

वो बेहद hi इमोशनल हो गई hi , मैंने उनकी आँखों में देखा वो प्रेम का पूरा दरिया था , भीगी हुई आंखे रो रो कर लाल हो गई थी , चेहरे की रंगत भी उड़ गई थी लेकिन मजाल है की उनकी खूबसूरती में थोड़ी भी कमी आयी हो … वो चाँद की तरह थी अगर दाग भी लग जाए तो दाग hi सूंदर हो जाता है , चेहरे में लगे कुछ चोट के निशान भी वैसे hi सूंदर हो गए थे , उन छोटो से थोड़े थोड़े खून का रिसाव तो हो रहा था लेकिन वो वही जैम से गए थे , उनके ब्लाउज के कुछ भाग फैट चुके थे और साड़ी भी जल्दबाजी में पहनी गई थी ,इन सबके बावजूद वो मेरे लिए किसी देवी की तरह सूंदर थी और उनकी सुंदरता से उनका मातृत्व झलक रहा था उन्हें देखकर hi मेरे आँखों में आंसू आ गए लगा की अभी उनके पैरो में गिर जाओ उनके शरण में अपना पूरा जीवन बिता दू ..

वो मेरी आँखों में आये आंशुओ को अपने उंगली के सहारे से पोछने लगी ..

“अब तू क्यों रो रहा है ..”

इस बार उनके होठो में मुस्कान थी जैसे उन्हें पता हो की मेरे आँखों में आये हुए इस आंसू की वजह क्या है ,मैं भी बस हलके से मुस्कुरा गया….

तभी कमरे का गेट खुला और एक बड़े बड़े मूंछो वाला व्यक्ति वह दाखिल हुआ साथ hi कलवा भी था …

उसने एक बार मुझे देखा तो एक बार भाभी को ऊपर से निचे तक देखा और फिर कलवा को देखने लगा ..

उसके आँखों में कुछ ऐसा था जो मुझे समझ नहीं आ रहा था की आखिर बात क्या है ..

“तो लड़के तुमने मार दिया पाण्ड्य को “

“जी ..”

“सही किया, साला था hi हरामी, क्या नाम है तुम्हारा “

“जी सोनू “

“सोनू…?? नाम से hi बच्चा लग रहा है और काम बड़े बड़े , और तुम्हारा नाम? “

उसने भाभी की और देखा, भाभी थोड़ी सहम सी गई थी सम्पत का चेहरा था hi ऐसा खूंखार वो तो चेहरे से hi कोई छटा हुआ बदमाश लगता था ..

“आरती “

“आरती .. ः तभी वो पाण्ड्य तुम्हारी आरती उतरने ले गया था “

वो एक गन्दी सी हंसी हंसा, कलवा भी मुस्कुरा उठा लेकिन मेरे आँखों में आग आ गई थी, सम्पत ने मेरी आँखों को देखा ..

“सही कहता था तू कलवा इस सेल की आँखों में hi आग है.. ठीक है जब तक मामला शांत नहीं हो जाता तुम दोनों यही रहो और तुम लड़के अपना नाम बदल लो और मेरे गैंग में शामिल हो जाओ क्या है न मैं मुफ्त में किसी के लिए कुछ भी नहीं करता ..

मैंने सर हिलाकर हामी भरी..

“फ़िक्र मत कर मेरे रहते तुम दोनों को तिवारी तो क्या उसका बाप भी छू नहीं पायेगा …”

सम्पत एक दमदार आवाज में बोलै ..

“धन्यवाद भैया “

भाभी के मुँह से निकल गया जिसे सुनकर सम्पत के चेहरे में एक मुस्कान आ गई

“भैया नहीं मां, मां बोलना अब से तुम दोनों मुझे “

सम्पत की बात सुनकर हम दोनों hi एक दूसरे को देखने लगे ..

“जी मां ..”

“गुड चलो तुम दोनों का कमरा दिखा देता हु “

सच में वो एक बड़ी सी हवेली थी , मुझे और भाभी को लेकर सम्पत आगे आगे चल रहा था वही कलवा ने हमसे बीड़ा ले लिया था , हवेली के आगाँ में कई लोग बैठे हुए थे सभी के हाथो में बड़ी बड़ी बंधुखे थी और सभी की निगाहे मेरे और भाभी के ऊपर ,मुझे ये भी शक हो रहा था की कही भाभी को यंहा लेकर मैंने कोई गलती तो नहीं कर दी ..

खैर जो भी हो जब खाई में कूद hi गए है तो देखा जायेगा और जैसे सम्पत ने हमसे बात की और हमें मां बुलाने के लिए कहा उससे मुझे थोड़ी आत्मीयता की भी फेल्लिंग हुई ..

दूसरे मंजिल पर हमें आजु बाजु के दो कमरे दिखाए गए, दोनों कमरे हमारे झोपडी से बड़े थे

“तुम दोनों अपना कमरा साफ़ कर लेना, और कल से तुम ओउरतो के साथ काम करोगी और तुम मेरे साथ चलना तुम्हे थोड़ी ट्रेनिंग की जरुरत होगी ,और है नाम बदल लेना जिसे सुनकर लोग डरे ना की हंस दे ..”

वो बड़ी hi आत्मीयता से मुस्कुराया, ना hi मुझे और ना hi भाभी को कुछ समझ आ रहा था, सम्पत का हमारे लिए ये आत्मीय व्यवहार दोनों को hi समझ नहीं आ रहा था ..

हम अभी भाभी के कमरे में जाकर बैठे थे, सभी चीजे अपनी सही जगह पर राखी हुई थी , एक बिस्टेर लगा हुआ था एक इंसान के रहने के लिए बहुत जगह थी , उसी कमरे से सत्ता हुआ एक दूसरा दरवाजा भी था जो की मेरे कमरे की और खुलता था , मैं भी अपने कमरे में चला गया था दोनों दरवाजा बंद कर लेते थे भविष्य की छह में लेकिन मुझे अपने पास भाभी की कमी खाल रही थी ,वो झोपड़ी इतने छोटी थी की हमें एक दूसरे के पास रहने की आदत सी लग गई थी , मैंने दोनों कमरे के बिच के दरवाजे को खोल दिया , मैंने देखा की भाभी की आंखे बंद थी और वो अपने बिस्टेर में लेती हुई थी लेकिन उनके चेहरे से लग रहा था की वो किसी बहुत hi गहरे सोच में डूबी हुई है , मैं उनके पास जा कर बैठ गया ..

वो चौक गई

“तू कैसे अंदर आ गया “ उन्होंने देखा की उनके कमरे का दरवाजा अभी भी बंद था ..

मैंने मुस्कुराते हुए हमारे कमरे के बिच के दरवाजे की और इशारा किया , पता नहीं उन्हें क्या हुआ वो थोड़ा सा उठी और मेरे गले में अपनी बांहे डालकर झूल गई , इसका असर ये हुआ की मैं भी उनके साथ बिस्टेर में गिर गया , मैं उनके ऊपर था और वो मेरे निचे वो मुझे कास कर जकड़े हुए थी ..

“अरे भाभी ये क्या कर रही हो “

उनके ऐसा करने से तो मैं भी चौक गया था ,लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं कहा बल्कि मुझे अपने से और जोरो से सताने लगी ..

मैंने भी उनसे अलग होने के लिए कोई जोर नहीं दिया बल्कि बस उनके ऊपर hi लेता रहा , थोड़ी hi देर में उन्होंने अपना बंधन थोड़ा ढीला किया और प्यार से मेरे बालो को सहलाने लगी ,

मैंने अब अपना चेहरा थोड़ा ऊपर किया …

उनकी आँखों में आंसू के दो तीन कतरे थे जो उनके गलो से होते हुए लुढ़क रहे थे , मेरे होठ उनके उन आंसुओ को अपने अंदर सामने लगे थे , मैं हलके हलके उनके गलो पर अपने होठो को चला रहा था , उनका लाल चेहरा और भी खिल गया था , होठो में एक बड़ी सी मुस्कान खिल गई थी लेकिन अब भी आँखों से एक दो आंसू टपक hi जाते थे , उनके चेहरे मेरे लार और उनके आंसू से गिला हो रहा था , लेकिन इन सबमे मेरे अंदर एक उत्तेजना ने जन्म ले लिया , वो उत्तेजना थी और अधिक की कामना की उत्तेजना ..

मैं थोड़ा उत्तेजित होने लगा था , मेरे होठ प्रेम से आंसुओ को पिने की बजाय थोड़ा गलो को काट भी रहे थे , ऐसा लग रहा था की मैं इन गलो को खा hi जाओ , और मेरे अंदर क्या हो रहा था शायद भाभी ने उसे समझ लिया था उन्होंने मुझे खुद से अलग किया ..

“सोनू इतना अधीर होना सही नहीं है , ये तेरे अंदर के प्रेम को मार देगा और …”

वो चुप हो गयी और मैं उनके बातो को समझने की कोशिस करने लगा ..मेरी आंखे hi बोल रही थी की मुझे उनकी बाटे समझ नहीं आयी है ..

उन्होंने प्यार से मेरे बालो को सहलाया

“बीटा प्रेम अधीर नहीं होता वासना होती है , प्रेम में अधीरता वासना को जन्म दे सकती है “

मैं बुरी तरह से चौक गया था

“भाभी आप ये क्या कह रही हो मैंने कभी आपको गन्दी नजरो से नहीं देखा है “

“मुझे पता है सोनू, लेकिन जिस्म की वासना भी तो कुछ पाने की वासना से hi जन्म लेती है न , जैसे अभी तू मेरे गलो को काटने की िक्षा कर रहा था …”

उनकी बातो को सुनकर जैसे मुझे मेरी गलती का आभास हुआ ..

“मुझे माफ़ कर दो भाभी मैं …”

उन्होंने मेरे होठो पर अपनी उंगली रख दी

“मैं समझती हु तुझे खुद hi नहीं पता था की तू क्या कर रहा था , लेकिन अब तू जवान हो गया है बीटा अब तुझे एक गर्ल फ्रेंड की जरुरत है “

उनके होठो में के शरारती सी मुस्कान खिल गई

“क्या भाभी आप भी मेरी गफ तो एक hi है और वो हो आप ,मेरी बहन, मेरी माँ, मेरी भाभी और मेरी गफ भी सब कुछ आप hi हो “

भाभी के बुझे हुए चेहरे में अचानक से हंसी आ गई वो जोरो से हंस पड़ी ..

“चल बदमाश…”

“भाभी आपको ये सम्पत कैसा लगा ??”

मेरी बात सुनकर जैसे वो फिर से उसी मनोस्तिथि में पहुंच गयी जंहा वो पहले थी , उनका चेहरा फिर से गंभीर होने लगा था ..

“ये इतना बड़ा गुंडा होकर जिस तरह से हमारी मदद कर रहा है और जिस भाषा में हमसे बात कर रहा है वो सच में थोड़ा अजीब सा है .. “

मैंने भी सहमति में अपना सर हिलाया..

“सोनू अगर वो लोग तुझसे कोई गलत काम करवाए तो साफ़ मन कर देना बीटा , मैं नहीं चाहती की तू गलत राह पर चल पड़े जंहा से वापस आना hi मुश्किल हो जाए और तुझे अपना कॉलेज भी फिर से शुरू करना होगा शायद अलग नाम से तू कुछ बन जायेगा तो हम कही भी आराम से रह लेंगे..”

मैंने हां में सर हिलाया तभी मुझे यद् आया की सम्पत ने मुझे एक नया नाम सोचने के लिए कहा था..

“भाभी आप मेरे लिए एक नया नाम सोचो ..”

वो थोड़ी देर सोचने लगी

“ हम्म अंकित कैसा रहेगा ..”

मैं भी खुस हो गया

“वाह क्या बात है ऐसे अंकित hi क्यों..??”

“बस ऐसे hi मैं आरती और तू अंकित “

हम दोनों hi जोरो से हंस पड़े थे
 
वह क्या जबरदस्त अपडेट दिया हे भाई. सम्पत ने दोनों को असर तो दे दिया लेकिन उसने साफ़ क्र दिया की वो फ्री में किसी की मदद नहीं करता. अब मदद करने की उसकी फीस क्या होगी ये देखने वाली बात हे. सोनू के मन में आरफी के लिए प्यार उत्पन्न हो रहा हे जिसे आरती भी समझ गयी हे. आरती को जितना समझदार दिखाया हे उतनी हिम्मत वाली नहीं दिखाया हे आपने.

वेटिंग 4 नेक्स्ट अपडेट
 
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