अपडेट 8
कलवा मुझे और भाभी को सम्पत के पास ले गया, शहर से दूर एक वीरान सी जगह थी, लेकिन एक बड़ी सी हवेली थी, हमें एक कमरे में बैठने के लिए बोलकर कलवा कही चला गया …
“सोनू मेरे कारण तुझे कितनी मुसीबतो का सामना करना पड़ेगा रे, जी करता है की खुद को मार hi दालु “
भाभी की बात सुनकर मैं सकते में आ गया था
“खबरदार अगर ऐसा सोचा भी तो , आपको एक खरोच भी आये तो मेरी जान निकल जाती है और आप मरने की बात कर रही हो , अगर आपको कुछ हो गया तो सोचा है मेरा क्या होगा , मैं तो जीते जी hi मर जाऊंगा, आप मेरी भाभी माँ हो अब आंसू पोछो और एक मुस्कान मुझे दिखाओ .”
उन्होंने प्यार से मेरे गलो पर अपना हाथ फेरा..
“ये दुनिया जिस्म की भूखी है बीटा , यंहा लोग प्रेम का मतलब भी नहीं समझते , सभी को जिस्म की चाहत है भले hi वो प्यार से मिले या फिर छीन कर लिया जाए , तेरा भाई भी वैसा hi था , पता नहीं तू किस मिटटी का बना है जिसने मुझे प्रेम किया ना की मेरे जिस्म से “
वो बेहद hi इमोशनल हो गई hi , मैंने उनकी आँखों में देखा वो प्रेम का पूरा दरिया था , भीगी हुई आंखे रो रो कर लाल हो गई थी , चेहरे की रंगत भी उड़ गई थी लेकिन मजाल है की उनकी खूबसूरती में थोड़ी भी कमी आयी हो … वो चाँद की तरह थी अगर दाग भी लग जाए तो दाग hi सूंदर हो जाता है , चेहरे में लगे कुछ चोट के निशान भी वैसे hi सूंदर हो गए थे , उन छोटो से थोड़े थोड़े खून का रिसाव तो हो रहा था लेकिन वो वही जैम से गए थे , उनके ब्लाउज के कुछ भाग फैट चुके थे और साड़ी भी जल्दबाजी में पहनी गई थी ,इन सबके बावजूद वो मेरे लिए किसी देवी की तरह सूंदर थी और उनकी सुंदरता से उनका मातृत्व झलक रहा था उन्हें देखकर hi मेरे आँखों में आंसू आ गए लगा की अभी उनके पैरो में गिर जाओ उनके शरण में अपना पूरा जीवन बिता दू ..
वो मेरी आँखों में आये आंशुओ को अपने उंगली के सहारे से पोछने लगी ..
“अब तू क्यों रो रहा है ..”
इस बार उनके होठो में मुस्कान थी जैसे उन्हें पता हो की मेरे आँखों में आये हुए इस आंसू की वजह क्या है ,मैं भी बस हलके से मुस्कुरा गया….
तभी कमरे का गेट खुला और एक बड़े बड़े मूंछो वाला व्यक्ति वह दाखिल हुआ साथ hi कलवा भी था …
उसने एक बार मुझे देखा तो एक बार भाभी को ऊपर से निचे तक देखा और फिर कलवा को देखने लगा ..
उसके आँखों में कुछ ऐसा था जो मुझे समझ नहीं आ रहा था की आखिर बात क्या है ..
“तो लड़के तुमने मार दिया पाण्ड्य को “
“जी ..”
“सही किया, साला था hi हरामी, क्या नाम है तुम्हारा “
“जी सोनू “
“सोनू…?? नाम से hi बच्चा लग रहा है और काम बड़े बड़े , और तुम्हारा नाम? “
उसने भाभी की और देखा, भाभी थोड़ी सहम सी गई थी सम्पत का चेहरा था hi ऐसा खूंखार वो तो चेहरे से hi कोई छटा हुआ बदमाश लगता था ..
“आरती “
“आरती .. ः तभी वो पाण्ड्य तुम्हारी आरती उतरने ले गया था “
वो एक गन्दी सी हंसी हंसा, कलवा भी मुस्कुरा उठा लेकिन मेरे आँखों में आग आ गई थी, सम्पत ने मेरी आँखों को देखा ..
“सही कहता था तू कलवा इस सेल की आँखों में hi आग है.. ठीक है जब तक मामला शांत नहीं हो जाता तुम दोनों यही रहो और तुम लड़के अपना नाम बदल लो और मेरे गैंग में शामिल हो जाओ क्या है न मैं मुफ्त में किसी के लिए कुछ भी नहीं करता ..
मैंने सर हिलाकर हामी भरी..
“फ़िक्र मत कर मेरे रहते तुम दोनों को तिवारी तो क्या उसका बाप भी छू नहीं पायेगा …”
सम्पत एक दमदार आवाज में बोलै ..
“धन्यवाद भैया “
भाभी के मुँह से निकल गया जिसे सुनकर सम्पत के चेहरे में एक मुस्कान आ गई
“भैया नहीं मां, मां बोलना अब से तुम दोनों मुझे “
सम्पत की बात सुनकर हम दोनों hi एक दूसरे को देखने लगे ..
“जी मां ..”
“गुड चलो तुम दोनों का कमरा दिखा देता हु “
सच में वो एक बड़ी सी हवेली थी , मुझे और भाभी को लेकर सम्पत आगे आगे चल रहा था वही कलवा ने हमसे बीड़ा ले लिया था , हवेली के आगाँ में कई लोग बैठे हुए थे सभी के हाथो में बड़ी बड़ी बंधुखे थी और सभी की निगाहे मेरे और भाभी के ऊपर ,मुझे ये भी शक हो रहा था की कही भाभी को यंहा लेकर मैंने कोई गलती तो नहीं कर दी ..
खैर जो भी हो जब खाई में कूद hi गए है तो देखा जायेगा और जैसे सम्पत ने हमसे बात की और हमें मां बुलाने के लिए कहा उससे मुझे थोड़ी आत्मीयता की भी फेल्लिंग हुई ..
दूसरे मंजिल पर हमें आजु बाजु के दो कमरे दिखाए गए, दोनों कमरे हमारे झोपडी से बड़े थे
“तुम दोनों अपना कमरा साफ़ कर लेना, और कल से तुम ओउरतो के साथ काम करोगी और तुम मेरे साथ चलना तुम्हे थोड़ी ट्रेनिंग की जरुरत होगी ,और है नाम बदल लेना जिसे सुनकर लोग डरे ना की हंस दे ..”
वो बड़ी hi आत्मीयता से मुस्कुराया, ना hi मुझे और ना hi भाभी को कुछ समझ आ रहा था, सम्पत का हमारे लिए ये आत्मीय व्यवहार दोनों को hi समझ नहीं आ रहा था ..
हम अभी भाभी के कमरे में जाकर बैठे थे, सभी चीजे अपनी सही जगह पर राखी हुई थी , एक बिस्टेर लगा हुआ था एक इंसान के रहने के लिए बहुत जगह थी , उसी कमरे से सत्ता हुआ एक दूसरा दरवाजा भी था जो की मेरे कमरे की और खुलता था , मैं भी अपने कमरे में चला गया था दोनों दरवाजा बंद कर लेते थे भविष्य की छह में लेकिन मुझे अपने पास भाभी की कमी खाल रही थी ,वो झोपड़ी इतने छोटी थी की हमें एक दूसरे के पास रहने की आदत सी लग गई थी , मैंने दोनों कमरे के बिच के दरवाजे को खोल दिया , मैंने देखा की भाभी की आंखे बंद थी और वो अपने बिस्टेर में लेती हुई थी लेकिन उनके चेहरे से लग रहा था की वो किसी बहुत hi गहरे सोच में डूबी हुई है , मैं उनके पास जा कर बैठ गया ..
वो चौक गई
“तू कैसे अंदर आ गया “ उन्होंने देखा की उनके कमरे का दरवाजा अभी भी बंद था ..
मैंने मुस्कुराते हुए हमारे कमरे के बिच के दरवाजे की और इशारा किया , पता नहीं उन्हें क्या हुआ वो थोड़ा सा उठी और मेरे गले में अपनी बांहे डालकर झूल गई , इसका असर ये हुआ की मैं भी उनके साथ बिस्टेर में गिर गया , मैं उनके ऊपर था और वो मेरे निचे वो मुझे कास कर जकड़े हुए थी ..
“अरे भाभी ये क्या कर रही हो “
उनके ऐसा करने से तो मैं भी चौक गया था ,लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं कहा बल्कि मुझे अपने से और जोरो से सताने लगी ..
मैंने भी उनसे अलग होने के लिए कोई जोर नहीं दिया बल्कि बस उनके ऊपर hi लेता रहा , थोड़ी hi देर में उन्होंने अपना बंधन थोड़ा ढीला किया और प्यार से मेरे बालो को सहलाने लगी ,
मैंने अब अपना चेहरा थोड़ा ऊपर किया …
उनकी आँखों में आंसू के दो तीन कतरे थे जो उनके गलो से होते हुए लुढ़क रहे थे , मेरे होठ उनके उन आंसुओ को अपने अंदर सामने लगे थे , मैं हलके हलके उनके गलो पर अपने होठो को चला रहा था , उनका लाल चेहरा और भी खिल गया था , होठो में एक बड़ी सी मुस्कान खिल गई थी लेकिन अब भी आँखों से एक दो आंसू टपक hi जाते थे , उनके चेहरे मेरे लार और उनके आंसू से गिला हो रहा था , लेकिन इन सबमे मेरे अंदर एक उत्तेजना ने जन्म ले लिया , वो उत्तेजना थी और अधिक की कामना की उत्तेजना ..
मैं थोड़ा उत्तेजित होने लगा था , मेरे होठ प्रेम से आंसुओ को पिने की बजाय थोड़ा गलो को काट भी रहे थे , ऐसा लग रहा था की मैं इन गलो को खा hi जाओ , और मेरे अंदर क्या हो रहा था शायद भाभी ने उसे समझ लिया था उन्होंने मुझे खुद से अलग किया ..
“सोनू इतना अधीर होना सही नहीं है , ये तेरे अंदर के प्रेम को मार देगा और …”
वो चुप हो गयी और मैं उनके बातो को समझने की कोशिस करने लगा ..मेरी आंखे hi बोल रही थी की मुझे उनकी बाटे समझ नहीं आयी है ..
उन्होंने प्यार से मेरे बालो को सहलाया
“बीटा प्रेम अधीर नहीं होता वासना होती है , प्रेम में अधीरता वासना को जन्म दे सकती है “
मैं बुरी तरह से चौक गया था
“भाभी आप ये क्या कह रही हो मैंने कभी आपको गन्दी नजरो से नहीं देखा है “
“मुझे पता है सोनू, लेकिन जिस्म की वासना भी तो कुछ पाने की वासना से hi जन्म लेती है न , जैसे अभी तू मेरे गलो को काटने की िक्षा कर रहा था …”
उनकी बातो को सुनकर जैसे मुझे मेरी गलती का आभास हुआ ..
“मुझे माफ़ कर दो भाभी मैं …”
उन्होंने मेरे होठो पर अपनी उंगली रख दी
“मैं समझती हु तुझे खुद hi नहीं पता था की तू क्या कर रहा था , लेकिन अब तू जवान हो गया है बीटा अब तुझे एक गर्ल फ्रेंड की जरुरत है “
उनके होठो में के शरारती सी मुस्कान खिल गई
“क्या भाभी आप भी मेरी गफ तो एक hi है और वो हो आप ,मेरी बहन, मेरी माँ, मेरी भाभी और मेरी गफ भी सब कुछ आप hi हो “
भाभी के बुझे हुए चेहरे में अचानक से हंसी आ गई वो जोरो से हंस पड़ी ..
“चल बदमाश…”
“भाभी आपको ये सम्पत कैसा लगा ??”
मेरी बात सुनकर जैसे वो फिर से उसी मनोस्तिथि में पहुंच गयी जंहा वो पहले थी , उनका चेहरा फिर से गंभीर होने लगा था ..
“ये इतना बड़ा गुंडा होकर जिस तरह से हमारी मदद कर रहा है और जिस भाषा में हमसे बात कर रहा है वो सच में थोड़ा अजीब सा है .. “
मैंने भी सहमति में अपना सर हिलाया..
“सोनू अगर वो लोग तुझसे कोई गलत काम करवाए तो साफ़ मन कर देना बीटा , मैं नहीं चाहती की तू गलत राह पर चल पड़े जंहा से वापस आना hi मुश्किल हो जाए और तुझे अपना कॉलेज भी फिर से शुरू करना होगा शायद अलग नाम से तू कुछ बन जायेगा तो हम कही भी आराम से रह लेंगे..”
मैंने हां में सर हिलाया तभी मुझे यद् आया की सम्पत ने मुझे एक नया नाम सोचने के लिए कहा था..
“भाभी आप मेरे लिए एक नया नाम सोचो ..”
वो थोड़ी देर सोचने लगी
“ हम्म अंकित कैसा रहेगा ..”
मैं भी खुस हो गया
“वाह क्या बात है ऐसे अंकित hi क्यों..??”
“बस ऐसे hi मैं आरती और तू अंकित “
हम दोनों hi जोरो से हंस पड़े थे