अपडेट 66
रानी के बयां पर भाभी को छोड़ दिया गया था , मैं नेहा , भाभी, कोमल और भुवन के साथ बैठा हुआ था ..
“बीटा आखिर ये क्या और कैसे हो गया ??” भुवन ने भाभी से प्रश्न किया
“पापा असल में बात तब की है जब तिवारी का सबसे खास सहयोगी और वफादार भवानी एक लड़की को उठा कर ले आया था , लड़की के घर वालो ने जब इसका विरोध किया तो उसके घर वालो को hi मार दिया गया , तिवारी ने सब चीजों में पर्दा डालने के लिए उस लड़की की शादी भवानी से कर दी , लेकिन वो महज नाम की भवानी की बीबी थी असल में वो भवानी और तिवारी के दोस्त मल्होत्रा के लिए महज एक सेक्स स्लेव बनकर रह गयी थी ..
नेहा की माँ महिमा तिवारी को पसंद थी और जब वो करीम के साथ मुसीबत में फांसी तो तिवारी ने करीम को एक नयी लड़की दिलवाने का वडा किया और उसने ये परेशानी भवानी को बताई भवानी ने अपनी बीबी को hi ले जाने को कहा, ऐसे भी वो लोग अब नयी लड़की के तलाश में थे और इससे बोर हो गए थे ..
तिवारी ने उस लड़की को करीम को सूप दिया और नेहा और महिमा को बचा ले आया ..
वो लड़की कोई और नहीं बल्कि रानी थी …
करीम और उसके साथियो ने रानी को नोच डाला था , और तभी उसने कसम खा ली थी की अगर वो जिन्दा बची तो वो उन सबसे बदला लेगी जिसने जिसने उसकी जिंदगी को बर्बाद किया है …
और रानी की शायद भगवन ने सुन ली क्योकि तिवारी जैसे hi रानी को करीम को सूप कर आया उसने भी कसम खा ली थी की वो करीम को ख़त्म करेगा ..
महिमा और नेहा को सेफ जगह पंहुचा कर उसने जीवा को फ़ोन लगा दिया और करीम का ाड़ड्रेससी देकर उसके साथ एक डील की , इस डील के मुताबिक तिवारी अपनी राजनीती करेगा और करीम का इलाका और धंधा जीवा ले लेगा , ये भी तिवारी की एक चल hi थी ..
तिवारी ने करीम के कुछ लोगो को भी भड़का दिया था और यही समय था जब जीवा और तिवारी के लोग मिलकर करीम पर हमला कर दिए थे और करीम को मार दिया गया ..
रानी की किस्मत थी की वो उस नर्क से बच गयी , और जब सम्पत ने उसे देखा तो अपने साथ ले गया … बस ऐसे रानी सम्पत के पास पहुंच गयी ..
जीवा और सम्पत को लगा था की अब वो लोग इस शहर पर राज करेंगे लेकिन तिवारी ने करीम के पुराने लोगो को अपने साथ करके करीम एक मर्डर वाले गंगवार का इल्जाम जीवा और सम्पत के सर पर फोड़ दिया , अपनी राजनीतिक पंहुचा का इस्तमाल करके पुलिस से जीवा के ऊपर दबाव बनाने लगा …
कुछ hi दिनों में hi जीवा टूट चूका था , तिवारी के पास बहुत hi पावर आ चुकी थी लेकिन लड़ाई में किसी का फायदा होता नहीं है, ऐसे hi तिवारी को भी बहुत नुक्सान हो रहा था , इधर जीवा और सम्पत दोनों hi गायब हो चुके थे …
तिवारी भी अपने खेत्र में निकल गया था , कुल मिलकर कोई भी एक दूसरे पर हमला नहीं करने के एक मौन सहमति से बांध चुके थे ..
लेकिन रानी के अंदर तो तिवारी से बदला लेने की आग जल hi रही थी , वो बस मौके के तलाश में थी , वो सम्पत को बाहड़काया करती थी लेकिन सम्पत उसे ये बोलकर चुप करवा देता था की सही मौका आने दे .. ऐसे भी जीवा गैंग को अपना खुद का धंधा चलने में प्रॉब्लम हो रही थी ..
रानी को उम्मीद की किरण तब दिखानी शुरू हुई जब main(aarti) और सोनू उनके पास पहुंचे …. इससे उनके गैंग में भी एक उत्त्साह का संचार हो रहा था , लोगो को भरोषा था की जैसे कोमल के रहते गैंग अपने चरम पर पंहुचा वैसे hi आरती भी गैंग को उद्धार करेगी , सबसे जयदा भरोषा तो सम्पत और जीवा को था ..
फिर सोनू की दोस्ती तिवारी की बेटी से हो गयी , इससे सम्पत को और भी भरोषा हो गया की तिवारी से ये लोग जरूर बदला ले पाएंगे और उसे ख़त्म कर देंगे ..
तभी रानी को मौका मिला , उसने शुरू से कोमल उर्फ़ सकती के किस्से सुन रखे थे , उसे पता था की आरती सकती की बेटी है , और साथ hi उसे एक नाम भी मिल गया था वो था शिवा का नाम …
और अब सम्पत उस पर जयदा ध्यान भी नहीं देता था उसका पूरा ध्यान बस आरती को उसके प्यार से मिलकर उसकी सकती को जगाना था..
रानी को पहला मौका तब मिला जब भवानी ने mujhe(aarati को) सम्पत के साथ देख लिया , भवानी ने मुझे maa(komal) समझ लिया , लेकिन सम्पत की नजर भवानी पर पद गयी , वो नहीं चाहता था की भवानी जाकर तिवारी को कुछ भी बताये इसलिए अपने लोगो के साथ मिलकर भवानी का पीछा किया और उसे किडनेप कर लिया ,रानी के कहने पर भवानी को रानी को सूप दिया गया ,
अब रानी के सामने वो इंसासन था जिसने उसकी जिंदगी बर्बाद की थी , एक हसती खेलती लड़की को उठा कर अपनी रखैल बना लिया था ,
रानी ने उसे इत्मीनान से तड़फा तड़फा कर मारा , लेकिन अब दिक्कत थी की अगर तिवारी को पता चल जाता की सम्पत ने उसके आदमी को उठाया था तो तिवारी फिर से भड़क जाता इसलिए रानी ने सम्पत को दिमाग दिया की क्यों न सकती के मरने के स्टाइल और शिवा का नाम दोनों को मिक्स कर दिया जाए , इससे तिवारी भी कंफ्यूज हो जायेगा … और फिर जो हुआ वो दुनिया के सामने था , रानी ने खून से शिवा लिख दिया जो की सकती का स्टाइल था , तिवारी भी दर गया की कही सकती वापस तो नहीं आ गयी लेकिन वो कंफ्यूज इसलिए था की आखिर komal(sakti) उसके आदमी को क्यों मार रही है , उसे लगा की अगर ये सकती होती तो सकती लिखती ये कोई दूसरा hi है , इस तरह से शिवा नाम का सफर शुरू हुआ “
कमरे में सन्ति छ गयी
“ोूह तो क्या आपको ये पहले से पता था “
आखिर मैंने पूंछ hi लिया
“नहीं ये तो मुझे रानी ने बाद में बताया … “
“लेकिन रानी ने विजय को क्यों मारा ??” ये सवाल नेहा का था , ये शिवा के नाम से हुआ दूसरा कतल था
“असल में विजय उसी मल्होत्रा का बीटा था जिसने भवानी के साथ मिलकर रानी के साथ कई बार बलात्कार किया था , रानी विजय को नहीं मरना चाहती थी लेकिन मल्होत्रा तक उसकी पहुंच नहीं थी ,न hi उसकी पहुंच तिवारी तक थी , और उनके जिगरे में खौफ बढ़ने के लिए कोई तो चाहिए hi था …?? और विजय सही मोहरा था क्योकि वो सस का बर्फ भी था , इससे हलचल और तेज होती .. ऐसे भी वो अपने बाप की तरह जिस्म का भूखा था , और जिस्म का नशा सरे नशे की तरह hi इंसान को कमजोर बना देता है ,
ऐसे इसकी एक बैक स्टोरी भी है और वो ये है की विजय सस के जिस्म के लिए पागल था , और उसे ये भी पता था की सागेर( सस का भाई) के साथ सस के नाजायज रिश्ते है , असल में वो जनता थकी सागेर सस के साथ जबरदस्ती करता है , सागेर और विजय दोनों hi दोस्त थे , और विजय सस को लाइन मारा करता था , उससे पहले hi रानी ने विजय को पता लिया था , विजय अभी अभी जवान हुआ लड़का था और उसे बहकना रानी के लिए बाये हाथ का खेल था, रानी के लिए ये जानकारी इकठ्ठा करने का एक श्रोत भी था और वो ये सम्पत के इजाजत से कर रही थी …
इधर सस भी बिगड़ने लगी थी और विजय को अपने फ़क बडी के रूप में अपना चुकी थी और इसका कारण था की विजय उसके भाई का दोस्त था और वो अपने भाई सागेर को जलना चाहती थी , क्योकि सागेर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया करता था …
विजय से hi रानी को सस और सागेर के बारे में पता चला लेकिन रानी को सस की मजबूरी की भी समझ थी इसलिए उसने ये बात सम्पत से छुपाई और खुद सस से जा मिली तब तक सस का दिल अंकित से मिलकर थोड़ा नरम भी हो चूका था , उसने अपने बारे में सस को सब बताया , सस ने उसे खुद के साथ जोड़ कर देखा, जिस तरह उसके बाप ने रानी की जिंदगी बर्बाद की थी वैसे hi सागेर ने सस की जिंदगी को ख़राब कर दिया था …
थोड़े दिनों बाद सस की मदद से रानी ने विजय को रिश्ते से हटा दिया “
“क्या सस रानी से मिली हुई है ??” जैसे मेरे ऊपर बोम्ब फूटा
भाभी मुझे देखकर मुस्कुराई
“सागेर का क़त्ल सस ने किया है , रानी ने सस से वडा किया था की सस को उसके भाई ने जो मानसिक प्रताड़ना दिया था उसका बदला भी वो लेगी और सस को अपने भाई को मरने का मौका देगी ..”
कमरे में बस शांति hi शांति छ गयी , लेकिन भाभी ने बोलना जारी रखा
“शिवा के नाम से कई क़त्ल हुए है लेकिन सभी क़त्ल अलग अलग लोगो ने किया है … भवानी और विजय का क़त्ल रानी ने किया , फिर गांव में हुए क़त्ल माँ (कोमल) ने , और जीवा गैंग के कुछ लोगो और जीवा और सम्पत का क़त्ल मैंने किया था , तिवारी का क़त्ल रानी ने किया और सस ने अपने भाई सागेर्स का क़त्ल किया , सभी क़त्ल एक hi नाम से हुए वो नाम था शिवा का ……… तो सबकी जिम्मेदारी किसी को तो लेनी hi थी …
रानी ने तो आत्समर्पण कर दिया है, उसके पास से हथियार बररामद होंगे जिससे यही लगेगा की वही शिवा है लेकिन जो कहानिया वो सुनाएगी उसपर पुलिस कभी यकीं नहीं करेगी …
वो बताएगी की कोई शिवा नाम का आदमी उससे सम्मोहित करवा कर ये सब करवाता था, इसलिए वो लोगो को मरने के बाद अपना नहीं बल्कि उसका नाम लिखती थी, जब वो इन सबसे परेशां हो गयी तो खुद को पुलिस के हवाले कर दिया क्योकि इन सबमे उसके बॉयफ्रेंड सम्पत की भी जान चली गयी ……..”
“लेकिन पुलिस उनकी बातो पर यकीं क्यों करेगी ????“
“वो सब करना वकील का काम है , झूठे गवाह से लेकर बाकि की स्टोरी वकील hi बनायेगे, कानून इस बात को कभी नहीं मानेगा लेकिन इससे रानी को पागल तो साबित किया जा सकता है , वो फांसी से बच जायेगी और शायद उसे एक अच्छी लाइफ भी मिल जाये ..
उसने हम लोगो के लिए खुद को पुलिस के हवाले कर दिया , उसने जीवन में बहुत दुःख देखा है , असल में बस दुःख hi देखा है … लेकिन वो हमारी ख़ुशी को छीनने नहीं देना चाहती थी , जब मैं हॉली में घुस कर कत्लेआम कर रही थी तब वो बस खड़े होकर मुझे देख रही थी ,, जीवा और सम्पत को मरने के बाद मैं जब मैं शांत हुई तब मैंने उसे अपने पास खड़े पाया ..
उसने मुझे आराम से बिठाया और अपनी पूरी कहानी सुनाई और अपना आगे का प्लान बताया , उसने मुझे सोचने के लिए समय भी दिया , उसने कहा की वो तिवारी को भी जान से मरना चाहती है , लेकिन तिवारी की सिक्योरिटी तब तक टाइट रहेगी जब तक शिवा पकड़ में ना आ जाये , मेरे पकडे जाने से तिवारी थोड़ा शांत हो जाता …
फिर प्लान के अनुसार सस ने तिवारी को फ़ोन किया की उसे पता है की पार्टी में गोली चलने का प्लान किसका था, और उसने उसका नाम बता दिया सात hi ाड़ड्रेस्से भी जंहा वो मिलेगा …”
“व्हाट कौन था वो जिसने पार्टी में तिवारी पर गोली चलवाई थी , वो तो सम्पत था न ???” मुझे यद् आया की मैंने सम्पत को देखा था
“है वो सम्पत hi था लेकिन उसने गोली चलायी थी , चलवाने वाला तो कोई दूसरा hi था , तिवारी के घर के अंदर का hi कोई ..”
“कौन सस??” नेहा ने अपनी दुविधा राखी
“नहीं .. सस नहीं सस का भाई सागेर ..”
“व्हाट ..??” हम सभी एक बार चौक गए
“है असल में वो अपने पिता पर गोली चलवाकर सिम्पथी बनाना चाहता था , वो ऐसे भी अपने बाप से परेशां था, शिवा के नाम की दहसत का फायदा उठा कर वो अपने बाप को थोड़ा और डरना चाहता था , पहले पार्टी को गोलिया चलवाकर सिम्पथी बटोरकर चुनाव जितना फिर शिवा के नाम से अपने बाप को मारवा देना … और उसकी सीट पर खुद बैठ जाना , बस यही प्लान था , उसके लिए उसने तिवारी के सबसे बड़े दुश्मन सम्पत से हाथ मिलाया था क्योकि और किसी के अंदर इस काम को करने का गुदा भी नहीं था , सम्पत को उनकी पुराणी ताकत लौटने का दवा भी किया गया था और जीवा को पॉलिटिक्स में लेन का भी प्लान था उन लोगो का …
सस ने सागेर को भी वही बुला लिया था , दोनों बाप बेटे आमने सामने थे .. तब सस ने अपने बाप को अपने भाई के कारनामे के बारे में बता दिया , पहले दोनों में hi हाथापाई हुई और दोनों hi जख्मी हो गए थे .. तब रानी ने एंट्री मरी और तिवारी को उसके कारनामे के बारे में बताया , तिवारी गिड़गिड़ाया लेकिन …
रानी सस के सामने उसके पिता का कतल नहीं करना चाहती थी , इसलिए सस को सागेर के साथ अकेले छोड़ दिया .. सस ने अपना गुस्सा सागेर पर निकाल दिया वही रानी भी अपना अंतिम बदला ले चुकी थी ………
हर बार की तरह रानी ने साबुत सफाई से मिटाये और शिवा का नाम लिख दिया , सस को घर भेज खुद पुलिस स्टेशन चली गयी…..”
एक बार मैंने रानी के चेहरे को यद् किया , हँसता हुआ खिलखिलाता हुआ चेहरा था उसका किस्से पता था की वो अंदर कितना दर्द और नफरत लेकर चल रही थी …………..