अपडेट 4
वो रात का समय था जब मैं और भाभी शहर के बस स्टैंड में पहुंचे थे ,कुल जमा पैसो के नाम पर वही था जो की सोहन और हरिया ने मिलकर दिया था ,वही भाभी और मेरा एक बैग था जिसमे हमारे कुछ कपडे hi थे ,हम कहा जायेंगे उसकी खबर हम दोनों को hi नहीं थी ,यात्रियों के बैठने की जगह में हम दोनों बैठे हुए थे, मेरे पुरे शरीर पर अब भी छोटो के निशान थे पूरा शरीर दर्द से भरा हुआ था लेकिन असली दर्द तो दिल में लगा था ,बदले की आग भड़क रही थी लेकिन उस मासूम से चेहरे को देखकर सब कुछ ख़त्म हो जाता था जो की अभी भी बदहवाशी की स्तिथि में थी …
भाभी के मासूम से चेहरे में आंसू अचानक से hi आ जाते ,मैं उनकी मनोदशा को समझ सकता था या फिर शायद नहीं ?,उन्होंने कभी एक इंसान पर जान से भी जयदा भरोषा करके अपना सब कुछ छोड़ा था आज भी वो उसी हाल में आ गई थी ,लेकिन फर्क इतना था की तब वो वफ़ा में आकर सब छोड़ आयी थी और आज बेवफाई के कारण ..
मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा और वो फुट पड़ी ,वो मेरे कंधे पर सर रखे रोने लगी थी ,दिल का गुबार जितना खली हो जाए उतना hi अच्छा होता है ,मैंने भी उन्हें रोने hi दिया, आंसू तो मेरे भी आ रहे थे लेकिन ये आंसू उन्हें देखकर hi आ जाते थे ..
रात बताती गई और वंहा सन्नाटा पसारता गया, दो पुलिस वाले हमें ध्यान से देख रहे थे, दोनों की hi नजरो को मैं पहचान सकता था मैं अब बड़ा हो चूका था, कॉलेज में पढ़ने लगा था, वो मेरी भाभी के जिस्म को देखकर एक दसरे से बात कर रहे थे कभी हलके हलके हंस भी लेते थे, जानकर भी मैं चुप था,
आदमी एक जानवर hi है और कहते है की ये जानवर अकेले में hi निकलता है, वही शायद उनके साथ भी हुआ जब पूरा स्टैंड hi सुना हो चूका था कुछ भिखारियों के अलावा वंहा कोई भी नहीं था वो दोनों हमारे पास आये ..
“ये यंहा क्या कर रहे हो घर से भागे हो क्या “
एक पुलिस वाले ने बेहद hi कड़ाई से कहा
“अरे घर से क्या बह्गे होंगे सेल इसे देख, मांग में सिंदूर ,गले में मंगलसूत्र और अपने से छोटे लड़के के साथ रत में घूम रही है साली रैंड होगी और ये इसका ग्राहक या फिर दल्ला “
उसके होठो में एक शैतानी हंसी आयी
“तमीज से बात करो ये मेरी भाभी है “
उनकी बात से मैं भी जोश में आ चूका था, वही भाभी थोड़ी घबरा सी गई थी, उन्होंने मेरा हाथ खींचा, लेकिन मैं था जो झुकने को तैयार hi नहीं था
“अरे मादरचोद… लौंडे का भाव तो देखो ,चलो हमारे साथ स्टेशन ,सेल तेरी इस आइटम को अभी रंडी बना कर अंदर कर दूंगा और तुझे उसका दल्ला बना कर, सेल तेरा हाथ पेअर तोड़ दूंगा “
पहला गरजा और उसकी गरज का असर भाभी पर पड़ा ..
“नहीं नहीं हम तो बस यंहा बैठे थे, इसे माफ़ कर दीजिये ये तो नादाँ है “
भाभी की बात सुनकर दोनों hi जोरो से हांसे, वही वंहा बचे कुछ भिखारी बस तमाशा hi देख रहे थे
“है साली माफ़ कर देंगे चल उधर कोने में चल, थोड़ा तेरा रास तो निचोड़ ले .”
एक ने भाभी के जिस्म को देखकर कहा
“मादरचोद “
मैं उठ खड़ा हुआ था और उसके कालर को पकड़ चूका था ,मेरी आंखे गुस्से में लाल थी ,
“पुलिस वाले का कालर पकड़ता है सेल “
दूसरा चिल्लाया
अब पता नहीं दिन भर का गुस्सा था या क्या था मैंने एक खींच कर झापड़ उसके गलो पर जड़ दिया …सभी बस मुँह फाडे मुझे hi देख रहे थे ..
“मादरचोद पुलिस वाले पर हाथ उठता है “
दूसरा कुछ करता उससे पहले एक लात उसके पेट पर पद चूका था ,वो बिलकुल hi बेहाल सा निचे पड़ा था, तभी एक घुसा पहले के पेट में भी लगा दिया ,वो भी एक hi ग़ुस्से में तडफता हुआ निचे पड़ा हुआ था ..
ये सब देख कर भाभी की हालत भी ख़राब हो चुकी थी उन्होंने मेरा हाथ खींचा जैसे बोल रही हो की भागो यंहा से ..
मुझे भी मेरी गलती समझ आने लगी थी लेकिन अब देर हो चुकी थी क्योकि एक पुलिस की गाड़ी तभी हमारे पास आयी …और दोनों की हालत देखकर वही रुक गई
“ये क्या हो रहा है ..”
एक इंस्पेक्टर वंहा से निकला उसे देख कर दोनों hi उठ खड़े हुए, दोनों ने उसे सलाम ठोका ..
“साहब ये साली रंडी है और ये उसका दल्ला है, दोनों यंहा ग्राहक खोज रहे थे “
एक सिपाही बोल उठा उसकी बात सुनकर मेरा माथा फिर से खनक गया था, मैं उसे एक और घुसा लगा देता लेकिन भाभी ने मेरा हाथ थाम लिया ..
वही इंस्पेक्टर ने एक बार भाभी के जिस्म को गौर से देखा, पता नहीं ऐसा क्या था उनके जिस्म में जो हर कोई उन्हें hi घर रहा था, उसने अपनी जीभ अपने होठो पर चलाई ..
“वाह ये रैंड तो मस्त लग रही है, कितना लेती है रे एक रत का “
उसकी आवाज में कुछ ऐसा था की मैं काबू से बहार होने लगा था , मेरा मन किया की सेल का मुँह तोड़ दू ,वही भाभी ये सब सुनकर भी मेरा हाथ जोरो से जकड़े हुए थी ..
वो इंस्पेक्टर मुझे देखने लगा
“क्यों बे बहुत डैम दिखा रहा है, ले चलो सेल को ठाणे इसका डैम निकलते है वही इस रंडी के भी मजे लेंगे इसी के सामने “
उसका इतना कहना hi था की मैंने जोर लगाया और मेरा बाजु जो की अभी तक भाभी के हाथो में था वो छूट गया मैं आगे बढ़ने hi वाला था की एक आवाज आयी ..
“ये इंस्पेक्टर, सालो चोर उचक्कों को तो पकड़ते नहीं हो और सीधे साढ़े लोगो को परेशां करते हो ..”
हम सभी उसी आवाज की और देख रहे थे, एक कला कलूटा, लम्बा चौड़ा आदमी सामने खड़ा था, चेहरे में हलकी दाढ़ी थी वही बड़ी बड़ी मूंछे …
“कलवा, ये तेरा मामला नहीं है इसमें मत पद “
इंस्पेक्टर गरजा
“मैं बहुत देर से इन लोगो को देख रहा हु, बेचारे परेशां लगते है और पुलिस वाले मदद करने की बजाय इनका इस्तमाल करना चाहते हो ..”
“देख कलवा ..”
“तू देख इंस्पेक्टर गरीब लोगो को छेड़ा न तो तेरे सभी छेड़ बंद कर दूंगा समझ ले “
कलवा की आवाज में वो बात थी की वंहा खड़ा हुआ हर शख्स चुप हो गया, पुलिस वाले भी बस इंस्पेक्टर पर नजर जमाये हुए थे वही इंस्पेक्टर को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे जैसे वो कुछ सोच रहा था…
“कलवा बोलै न की ये तेरा मामला नहीं है, तू क्यों भगवन बनने की कोशिस कर रहा है, साला पूरा शहर तो भूखे नंगो से भर गया है “
“यही भूखे नंगे तुम अमीरो का काम करते है समझ लेना, मजदूरों की सर्कि ना तो फिर क्या होगा तू जनता है, छोड़ उसे और जा अपने रस्ते “
कलवा की आवाज में एक दृढ़ता थी, इंस्पेक्टर ने मुझे गौर से देखा फिर एक नजर भाभी के जिस्म पर डाली ..
“सेल आज तू बच गया लेकिन कभी मेरे हाथ आया न तो देख तेरी गर्मी कैसे निकलता हु और इस रैंड की तो ..”
“ये…. लड़की से इज्जत से बात कर “
कलवा फिर से चिल्लाया, इंस्पेक्टर बिना कुछ बोले hi वंहा से चला गया था …..
इस बार कलवा हमारे सामने था ..
‘क्या रे इतनी रत को यंहा क्या कर रहे हो “
मैंने अपनी पूरी की पूरी स्टोरी उसे सुना दी ,कलवा ने एक बार भाभी पर ऊपर से निचे नजर डाली , ये आदमी भी अनजान hi था, उसके मुँह से शराब की बदबू भी आ रही थी , लेकिन फिर भी मुझे कलवा में एक अजीब सा भरोसा हो गया था वो यंहा हमारे लिए किसी संकटमोचन जैसा साबित हुआ था ..
“हुम्म्म तो बीटा तुम्हारी स्तिथि तो बहुत hi गंभीर है, रहोगे कहा कुछ सोचा है “
मैंने ना में सर हिलाया
“देखो इस शहर में कोई भी किसी के लिए मुफ्त में कुछ भी नहीं करता, मैं तुम्हे सस्ते में एक खोली दिलवा दूंगा वही रह जाओ, लेकिन अभी तुम्हे उसके लिए कुछ पैसे देने होंगे, कुछ पैसे है तुम्हारे पास ..
“जी है लेकिन थोड़े hi है ..”
“कोई बात नहीं, झोपड़ पट्टी की खोली सस्ती hi होगी, एक महीने का किराया आज दे दो, बाकि दूसरे महीने के लिए मैं तुम्हे कल hi किसी काम में लगवा दूंगा, अब तुम जवान हो तो इससे तो काम नहीं करवाओगे, खुद म्हणत करो और इसे भी पालो ..”
मैंने उसकी बात में सर हिलाया, हम उसके पीछे पीछे जाने लगे ,एक hi घंटा हुआ होगा उसने हमारे हाथ में एक चाबी थमा दी और कुछ पैसे ले लिए …उसके जाने के बाद हम कमरे में आ गए ,उसे देखकर मेरे आँखों से आंसू hi निकल गए थे, वही हाल भाभी का भी था ……
“तुम्हे कहा महलो में रहना था और मेरे कारण तुम इस झोपड़े में रहना पद रहा है, दुनिया की साडी मुसीबते मैंने तुम पर दाल दी, अब भी वक़्त है सोनू तू चले जा मुझे छोड़कर “
भाभी फफक पड़ी थी ..मैंने पुरे कमरे में नजर डाली ,एक hi कर्मा था वो भी टुटा फूटा सा, जर्जर होती सी दीवारे थी ,हलकी रोशनी वाला एक बल्ब लगा था वो hi पुरे कमरे को प्रकाशित करने के लिए काफी था, कोई सामान वंहा नहीं था, जमीं फर्श की थी ,मैंने एक कोने में अपना सामान डाला ,भाभी अभी भी बूत बने हुए वही कड़ी थी ..
मैंने उनकी बांहो को अपने हाथो में पकड़ा..
“भाभी अब यही हमारी जिंदगी है ,अगर आप के साथ रहने के लिए मुझे स्वर्ग छोड़कर नर्क में जाना पड़े तो मैं खुसी ख़ुशी वंहा चले जाऊंगा क्योकि मैंने जनता हु जंहा आप जैसी ायरत हो वो वही स्वर्ग बना देगी ,मेरा भाई चुटिया था जिसने आपकी क़द्र नहीं की मैं उसके जैसा चुटिया नहीं हु …”
भाभी नाम आँखों से कुछ देर मुझे यु hi देखती रही और फिर मुझे खुद के बांहो में घेर लिया, वो मेरे साइन में सर रखकर रोने लगी …
“तू कितना बड़ा हो गया रे, अपनी भाभी से इतना प्यार करता है मेरा सोनू ,जब मैं आयी थी तो तू एक मासूम सा बच्चा था और आज एक पुरे मर्द जैसे मेरी इजाजत की रक्षा कर रहा है ..”
मैंने भी अपनी बांहो में उन्हें समा लिया था, मैंने उन्हें अपने से और भी जोरो से चिपकाया जैसे मैं नहीं चाहता की वो मुझसे दूर चले जाए …
ये एक नए सफर की शुरुवात थी और एक पुराने सफर का अंत भी