Adultery BHABHI MAA - SexBaba
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Adultery BHABHI MAA

hotaks

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Dec 5, 2013
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दोस्तों ये मेरी रोमन फॉण्ट में पहली स्टोरी है ,मुझे देवनागरी में लिखने की आदत है लेकिन देवनागरी बहुत से लोग नहीं पद पाते जिनमे से कुछ दोस्तों ने मुझसे ये कहा था की मैं रोमन में लिखू तो ये उन दोस्तों के लिए जो देवनागरी नहीं पद पते ...

ये एक सामान्य सी स्टोरी होगी जिसमे थोड़ा सा रोमांस , थोड़ी अडुल्टेरी , थोड़ा थ्रिल और सस्पेंस होगा ..

आगे की बाटे तो स्टोरी पद कर hi पता लगेगी तो एन्जॉय थे स्टोरी ..

BHABHI-MAA-2.jpg
 
भाभी माँ





अपडेट 1


कभी वो मुझे मेरी माँ से लगती थी तो कभी बहन का प्यार देती थी ,वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी थी जिससे मैं दिल खोलकर अपनी बाटे कर सकता था ,माँ बाप के जाने के बाद वही तो थी जिसने मुझे सम्हाला था ,हर दर्द में साथ थी वो और हर ख़ुशी उससे hi शुरू होती थी ,जिस भाई से मैं इतना डरता था वो उसकी पत्नी थी , लेकिन मुझे अभी उनसे कोई भी दर नहीं लगता ,असल में तो उनके होते मैं ऐसा होता की मुझे कोई भी दर कभी छू भी नहीं सकता ,वो थी मेरी भाभी माँ …

माँ इसलिए क्योकि उन्होंने मुझे माँ वाला प्यार भी दिया था ,मैं अभी अभी तो अपनी जवानी की दहलीज में कदम रख रहा था जब मेरे एकलौते भाई ने अपने पसंद से और घर वालो के विरुद्ध जाकर शादी कर ली थी ,मेरे परिवार ने उन्हें अपने से अलग hi कर दिया था ,मेरी माँ का रो रो कर बुरा हाल कर दिया था, मुझे नहीं पता था की समाज के ये बंधन आखिर क्यों है लेकिन एक लड़की जिसने मेरे भाई को अपनाने के लिए अपने परिवार को छोड़ा था वो मेरे लिए बेहद खास hi थी …

उनकी शादी को एक साल हो चुके थे, मैं उस समय स्कूल में hi था कभी कभी स्कूल से छूटकर तो कभी स्कूल ना जाकर मैं उनके पास पहुंच जाता था, वो बड़े प्यार से मुझे अपने पास बिठाती दुनिया भर की बाटे करती और फिर आखिर में उनकी आंखे hi भर जाती ..

“सोनू काश मम्मी पापा भी मुझे अपना पते जैसे तूने मुझे अपना लिया “

मैं क्या कहता, मैं तो उनके हाथो से बने खाने के लिए वंहा चला जाता था और फिर खाने के बाद मिलने वाली मिठाई के लिए, मैं चुप hi रहता लेकिन जब वो रोने लगती तो उनकी पायरी आँखों में आया आंसू मुझे मेरा दुशमन hi लगता था

“अरे भाभी माँ आप भी क्यों मम्मी पापा की टेंशन ले रहे हो ,वो कुछ भी बोले आपका ये सोनू हमेशा आपके साथ है ..”

मैं बस इतना hi बोलता था और भाभी के चेहरे में ख़ुशी खिल सी जाती जैसे उन्हें कोई जन्नत मिल गई हो ,वो मुझ पर और भी प्यार लुटाती थी ,भाभी पास के hi गांव की थी, भाई के कॉलेज के पास एक छोटा सा दुकान चलती थी ,बेहद hi गरीब घर की थी पता नहीं कैसे लेकिन भाई का उनपर दिल आ गया ,जाट अलग थी तो भाई को भी शादी करने में परेशानी हुई ,भाभी एक गरीब परिवार की थी वही हम थे अपने गांव के पंडित ,दूर दूर तक हमारे परिवार के चर्चे थे ये मेरे बापू मुझे बोलै करते थे..

“तू कही अपने भाई जैसे जाट के बहार की लुगाई ना ले आना “

कभी कभी बोलते हुए उनकी आंखे पता नहीं कहा खो जाती थी

“अरे बापू भाभी बहुत hi अच्छी है आप लोग उन्हें क्यों इतनी नफरत से देखते हो “

मैं बोल उठता था ..

और फिर बापू का लेक्चर हो जाता था चालू, जाट पैट के कई कहानिया शुरू हो जाते थे ..

“मैं तो उस रैंड के हाथो से पानी तक ना पीयू “

बापू का इस तरह भाभी के लिए बोलना मुझे कभी सोभा नहीं देता

“बापू वो मेरी भाभी माँ है उन्हें ऐसा कुछ मत कहा करो “

“तेरी इतनी मजाल तू मुझसे जुबान लड़ता है वो भी उस रैंड के लिए ,तेरे भाई को तो खा गई है मादरचोद अब तुझे भी अपने बस में कर लिया है क्या उसने “

बापू की बात से मेरा दिल hi भर जाता, मुझमे समझ hi थी की आखिर मेरी प्यारी सी भाभी ने ऐसा क्या अपराध कर दिया है ,लेकिन मैं उनके लिए लड़ जाता था और बदले में मुझे मिलती थी जोरदार मार …

कभी बापू से तो कभी माँ से ..फिर मैं अपना चेहरा लटकाये हुए पहुंच जाता था अपनी पैरी भाभी के पास …

भाई तो मुझसे 10 साल का बड़ा था उससे कुछ बोलते मेरी हालत hi खास्ती हो जाती थी लेकिन भाभी मुझे समझती थी मेरी एक एक राग का उन्हें पता था ..

“क्या हुआ सोनू फिर से पापा ने तुझे मारा “

मैं दौड़ता हुआ जब गांव से दूर बने उनके घर में जाता वो मेरा चेहरा देख कर hi बता देती थी की मैं आज मार खा कर आया हु ..

“देखो ना पापा आपको रैंड बोल रहे थे ,मुझे अच्छा नहीं लगता अगर आपको कोई कुछ भी बोले “

पता नहीं मेरी मासूमियत थी या मेरा भोलापन लेकिन मुझे रैंड शब्द की असलियत उस समय नहीं पता थी मुझे बस इतना hi पता था की ये एक गाली है ..

वो बेचारी मेरी बात सुनकर थोड़ी उदास सी हो जाती ..

“तू क्यों उनसे बहस करता है, आखिर जनता है ना की उनसे बहस करने से मार खायेगा “

वो धीमी सी आवाज में बोलती थी

“तो क्या आपको वो गली देंगे तो मैं सुनूंगा “

मैं थोड़ा गुस्सा हो जाता

“अरे तो क्या हुआ सुन लिया कर ना “

“कैसे सुनु आप मेरी भाभी माँ हो “

मेरी बात सुनकर वो हंस पड़ती थी, कभी कभी मेरे गलो को खींच लेती ..

“तू इतना प्यार करता है अपनी भाभी माँ से “

वो मुझे अपलक निहारती

“प्यार का तो नहीं पता लेकिन मुझे पसंद नहीं की आपको कोई कुछ भी बोले “

“अच्छा तो अपने भाई से क्यों नहीं कहता जो पापा ने कहा “

भाई की बात सुनकर hi मैं घबरा जाता था..

“उन्हें क्यों बिच में लाती हो “

“अरे क्या हुआ ??”

वो मुस्कुराते हुए कहती थी

“उनसे मुझे दर लगता है “

और वो जोरो से हंस पड़ती, मेरे बालो को प्यार से सहलाती

“भला क्यों ...??”

“पता नहीं बस लगता है “

“अच्छा और मुझसे ??”

वो फिर से मेरे चेहरे को बड़े hi प्यार से देखती थी

“आप तो मेरी भाभी माँ हो, आपसे क्यों डरूंगा “

वो मुझे कभी कभी खींचकर अपने साइन से लगा लेती ,तो कभी सिर्फ मेरे गलो में एक प्यारा सा चुम्मन दे देती

“अच्छा मेरा प्यारा सोनू ..”

मैं खुश हो जाता था ,ऐसा प्यार तो मेरी माँ hi मुझे करती थी ,माँ जैसा प्रेम और बहन जैसी केयर करने वाली ये अद्भुत सी ायरत एक वो hi तो थी मेरी भाभी माँ ………..

 
अपडेट 2

बात तब की है जब मैं स्कूल से निकला था और तभी माँ पापा की एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गई ,कहते है ना की जब दुःख आता है तो हर तरफ से आता है मेरे साथ भी वही हुआ था..

माँ पापा का साया छीन जाने से मुझे लगा की मैं अनाथ हो गया लेकिन तभी भाई सामने आया और उसने पापा का पूरा कारोबार खुद के अंदर ले liya,lekin पता नहीं उसके दिल में क्या था वो मुझसे ठीक से बात भी नहीं करता ,लेकिन भाभी का साया hi था जिसने मुझे कभी अनाथ होने नहीं दिया था ..

मैंने अभी कॉलेज जाना शुरू hi किया था ,एक दिन मैं कॉलेज से आया hi था की लगा की भाभी और भैया जो की अब हमारे पुराने घर में रहते थे उनके बिच कोई बहस सी हो रही है ..मैं बस ध्यान लगा कर सुनता रहा ..

“अरे कमाऊ मैं और वो बैठा बैठा बस खायेगा क्या ??”

ये मेरे भाई की आवाज थी जो की बहुत hi गुस्से में लग रहे थे

“वो अभी बच्चा hi है अभी अभी तो स्कूल से निकला है ,उसे पड़ने दीजिये ना ,वो कहा ये सब काम कर पायेगा..”

मेरी भाभी ने भाई को समझने की कोशिस की थी

“तुम उसका जयदा सपोर्ट मत करो ,आखिर मैंने भी तो उस उम्र में काम करना शुरू कर दिया tha,uske उम्र में मैंने परिवार की पूरी जिम्मेदारी ले ली थी ,पापा मुझे सर आँखों में बिठाते थे लेकिन फिर ..जीवन hi बर्बाद हो गई “

भाई के आवाज में एक अलग hi बात थी जो मुझे उस समय तो समझ नहीं आई

“क्या बर्बाद हो गया आपका जीवन “

भाभी की आवाज थोड़ी डाब सी गई

“क्या बर्बाद हुआ ,साली तुझे पता नहीं क्या की मैं किसलिए बरदाद हुआ हु ..तेरी छूट के चक्कर में मेरा पूरा जीवन hi बर्बाद हो गया ,मेरे माँ बाप ने मुझे छोड़ diya,Sali बापू सही था तू थी hi रैंड जिसने अच्छे परिवार का अच्छा मर्द देखा तो बस फंस aliya,Sali मेरे भाई को भी अपने चुद के चक्कर में फंसना चाहती है क्या ..”

भाई की बात सुनकर मैं बिलकुल hi स्तब्ध था ,मैं इतना तो बड़ा हो चूका था की मुझे रैंड और छूट जैसी बातो का मतलब पता था और ये भी की वो क्या बोल रहा है वो भी उस लड़की से उसने उसके साथ इतना बुरा समय भी बिताया था जब भाई को घर से धक्के मार्कर निकाल दिया गया था..

“आप पागल हो गए हो kya,aap तो मुझसे प्यार करते थे फिर इन सालो में क्या बदल गया है आपके अंदर ,ना तो आप मुझे पहले जैसा प्यार करते है ना hi मेरी कोई इज्जत है ,और सोनू तो मेरे भाई जैसा है उसके लिए आप ऐसा बोल रहे है “

वो फुट फुट कर रो रही थी लेकिन भाई के दिल में थोड़ी भी रहम ने जमन नहीं लिया

“साली रैंड मैं भी तेरे हुस्न का अँधा हो गया था ,साली 2 साल हो गए शादी को एक बच्चा भी नहीं दे पा रही है मुझे और कहती है की प्यार क्यों काम हो गया ,साली तुझसे शादी करना मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती थी ,मुझे फुटपात में लाकर छोड़ दिया था ,वो तो अच्छा हुआ की ये माँ पापा मर गए वर्ण आज भी दो वक्त की रोटी के लिए इधर उधर दौड़ता रहता ,साली गरीब घर की लड़की है ना तू अपनी ावुकत तो दिखाएगी hi ,जब मैं काम में जाता था तब सोनू को बुलाती थी ,साली उसका भी लौड़ा अपने चुद में लेती रही होगी मजा तो आता होगा न रंडी साली तुझे भी ,भागकर मुझसे शादी कर ली शादी से पहले hi अपनी चुद मुझे दे दिया था तूने यद् है naa,sala मेरा भी भेजा ख़राब था जो तेरे जैसी रैंड से शादी कर लिया ..”

भाई की बात से मैं पूरी तरह से टूट सा गया था ,वो मेरी भाभी माँ के बारे में ऐसे कैसे बोल सकता था ,है वो उसकी बीवी थी लेकिन हमारा रिस्ता बहुत hi पवित्र था ,मैं दरवाजा खोलकर अंदर चला गया था ..

“भाई आप भाभी के बारे में ऐसा कैसे बोल सकते हो ,उन्होंने हमेशा मुझे बेटे जैसा पैर दिया है आप उनपर hi इल्जाम लगा रहे हो “

मेरी आँखों में उस भाई के लिए गुस्सा था जिसके सामने मैं अच्छी आवाज में बात भी नहीं करता था

मुझे देखकर वो जोरो से हंसा ,वही भाभी अब भी रो रही थी और मुझे देखकर उनकी आँखों में बस एक दहसत hi थी शयद भाई की दहसत ..

“वह देखो कैसे इस रैंड का आशिक़ फड़फड़ा रहा है ,सेल निकल जा इस घर से अगर फिर से दिखा न तो तेरे हाथ पेअर तोड़ दूंगा “

मैं तो बिलकुल hi निश्छल सा हो गया था आखिर मेरे भाई को आज हुआ क्या था ,उसने मेरी भाभी पर इल्जाम लगाया था वही वो मुझे मेरे hi घर से निकाल रहा था ..

“भाग मादरचोद यंहा से “

उसने सामने आकर मेरे गलो में दो तीन झापड़ भी लगा दिया ,मैं कुछ समझ पाटा उससे पहले मुझे बचने के लिए भाभी सामने आयी लेकिन भाई पता नहीं किस नाशी में था उसने भाभी के बालो को खींचा और उन्हें भी घर से बहार निकाल diya,ghar की इज्जत आज तमाशा बन कर रह गयी थी ,और आस पड़ोस वाले बस देखने वाले थे ..भाई ने हम दोनों को घर से बहार कर दिया था

“सेल मादरचोद अपने hi भाई की बीवी से नाजायज सम्बन्ध रखता है और ये साली रंडी जंहा अच्छा लड़का देखा नहीं की मुँह मरना शुरू कर दिया “

मुझे अब भी समझ नहीं आ रहा था की भाई ऐसा क्यों कर रहा है लेकिन उसने मुझे और भाभी को घर से भहर कर दिया था और सभी के सामने हमारे ऊपर ऐसा इल्जाम लगा रहा था ..

“ये सब आप क्या कर रहे हो दुनिया वाले देख रहे है “

भाभी उनके पैरो में गिर कर गिड़गिड़ा रही थी

“तो देखने दो इन्हे भी तो पता चले की साला मेरे घर में क्या हो रहा है देवर भाभी के बिच का ये असलील सम्बन्ध ..”

“प्लीज चुप हो जाइये ये आप क्या कह रहे है ..”

भाभी बस रोये जा रही थी वही मैं अभी भी स्तब्ध hi था ये सब मेरे दिमाग के पार हो रहा था ..लेकिन आखिर आस पड़ोस वाले बिच में आये उन्होंने भाई को समझाया लेकिन वो चाहता था की हम दोनों तुरंत hi उसका घर जो की मेरा भी घर था उसे छोड़ कर चले जाए ,उसने भाभी के मुँह पर उस घर की चाबी फेक दी जिसमे की वो लोग पहले रहते थे और साथ hi हमारा सामान भी बहार फेक दिया ,भाभी गिड़गिड़ाती रही मैं उनसे लड़ने लगा और बदले में मुझे सब ने मिलकर मारा ,पता नहीं वो कोण लोग थे जो मुझे मार रहे थे ,भाई ने एक दो हाथ भाभी पर भी उठाया था ,अखर शाम हो चुकी थी मुझे इतना मारा गया था की मैं अपने पैरो में खड़ा भी नहीं हो प् रहा था ,जैसे तैसे मुझे कुछ जानकार लोगो ने छुड़ाकर भाभी और भैया के पुराने घर में लेकर पटक दिया था ……..

मैं जैसे बेहोश hi हो गया था …

 
अपडेट 3

ऐसा लगा जैसे कोई मेरे माथे पर कुछ लगा रहा है ,मैंने तुरंत hi आँखे खोली सामने सिसकती हुई भाभी बैठी थी …

“अब कैसा है मुन्ना “

उन्होंने बड़े hi मुश्किल से ये बोलै था ,आँखों के आंसू रह रह का रूण नाजुक से गलो में उतर जाते थे ,साड़ी के पल्लू से अपना मुँह छुपा छुपा कर वो रो रही थी

मैं बिलकुल hi आश्चर्यचकित होकर उन्हें देख रहा था इतना सब कुछ होने के बाद भी वो मेरा धयान रख रही थी ,मैंने पास hi खड़े सोहन को भी देखा ,सोहन मेरे बचपन का दोस्त था लेकिन दुनिया दरी में मुझे कही आगे था ..

“सोनू भाई तुम्हारे भाई का चक्केर तुम्हारे पड़ोस की उस लड़की चंचल से है ,मैं कई दिन से उन्हें देख रहा हु लेकिन कुछ बोलै नहीं सोच की सब ठीक हो जायेगा ,वो साली बहुत hi गन्दी लड़की है भाई उसके चक्कर में भैया ने भाभी को घर से निकाल दिया ताकि उनका रास्ता साफ हो जाए और पूरी जैजात खुद हड़पने के लिए तुझे भी निकाल दिया, भाभी और तेरे रिश्ते के बारे में बुरा भला बोलकर ..”

मैं अब भी मुँह फाडे उसकी बात सुन रहा था, मुझे मेरे कानो पर यकीं नहीं था मेरा भाई ऐसे कैसे कर सकता था, जिस भाभी को मैंने अपनी माँ समझा था अपनी बड़ी बहन समझा था उसके hi बारे में वो ऐसे कैसे बोल सकता tha…lekin ये हुआ था और पुरे गांव ने देखा भी था…

“भाभी आप फ़िक्र मत करो हम पंचायत बुलाएँगे और देखते है की भैया कैसे जैजात का बटवारा नहीं करते “सोहन फिर से बोलै ,वो गुस्से में था ,मुझे भी गुस्से में होना था लेकिन मैं बस बेसुध था मुझे कुछ समझ hi नहीं आ रहा था की ये आखिर हो क्या रहा है ..

तभी भाभी बोल उठी

“नहीं भैया, मैं कुछ भी नहीं करुँगी , मैं ये गांव hi छोड़कर चली जाउंगी ,सोनू को उसका हक़ मिल जाए बस ..जिसके सहारे घर परिवार सब छोड़कर आयी थी वो hi ऐसा निकल गया तो अब मेरे पास बचा hi क्या है जीने के लिए ,मैं कही भी चली जाउंगी ,कुछ भी करके गुजरा कर लुंगी “

भाभी को ऐसी हालत में मैंने आज तक नहीं देखा था….. पहले माँ पापा के बुरा भला कहने को भी मैंने देखा था ,गांव वालो की तरह तरह की बातो को भी मैंने सुना था लेकिन ये ...भाभी कभी नहीं टूटी थी लेकिन आज उन्हें देखकर ऐसा लगा जैसे वो टूट चुकी है ,जिससे प्यार किया था उसने hi जब इल्जाम लगा दिया, वो hi जब नहीं रहा तो उनकी दुनिया में आखिर और क्या बचा था ……..

“भाभी आपके बारे में कोई ऐसे कैसे कुछ भी बोल सकता है , जब तक मैं हु तब तक आप यही रहोगी और मैं देखता हु की कैसे भाई उस लड़की को घर में लाता है और आपकी जगह देता है सेल को वही काट दूंगा ..”

मेरा भी खून आखिर खोलने लगा था मुझे भी समझ आ चूका था की बात क्या हुई है ..

“नहीं सोनू तुझे मेरी कसम है तू कुछ भी नहीं करेगा , आखिर जब प्यार hi नहीं रहा तो उनके साथ रहना भी किसी लाश के साथ रहने जैसा hi होगा ..”

उनकी बात मुझे समझ नहीं आ रही थी

“भाभी उस आदमी ने आप पर इतना बड़ा इल्जाम लगाया है मैं उसे जिन्दा नहीं छोडूंगा “

मैं अभी खड़े होने की हालत में भी नहीं था लेकिन जैसे तैसे खड़ा हो गया ..

“सोनू तुझे मेरी कसम तू ऐसा कुछ भी नहीं करेगा, उसने गांव के लोगो को अपने पक्ष में कर लिया है, और गांव के सभी गुंडों को अपनी तरफ कर लिया है तू वंहा जायेगा तो वो लोग तुझे नहीं छोड़ेंगे “

भाभी ने मेरा हाथ अपने सर में रख दिया, मेरा खौलता हुआ खून ठंडा तो हो hi नहीं रहा था लेकिन भाभी की कसम ने कही न कही मुझे थोड़ा ठंडा जरूर कर दिया था ..

“भाभी लेकिन ..”

“लेकिन वेकिन कुछ नहीं तू कही नहीं जायेगा बस ,और रही बात मेरी तो मैं आज hi ये गांव छोड़कर चली जाउंगी ,और कल तू पंचायत बुलकर अपने हिस्से की जमीं ले लेना “

उनकी बात ऐसी लगी जैसे दिल में कोई तलवार सी चल गई हो ..

“भाभी आप मुझे छोड़कर चली जाएँगी ??”

मेरा गाला hi भर गया था ,माँ तो छोड़कर चली गई थी ,बहन थी hi नहीं जिसके अंदर ये दोनों रूप देखा करता था जो मेरे लिए प्रेम की जीती जगती प्रतिमा थी वो भी मुझसे दूर जाने वाली थी..

“हां बाबू मैं इस अपमान के साथ नहीं जी सकती ,जिसे मैंने अपना छोटा भाई समझा ,अपने बेटे की तरह जिसे प्यार दिया उसके साथ मेरा नाम बदनाम किया जा रहा है ,मैं ऐसी जगह नहीं रह सकती “

वो फिर से फुट फुट कर रोने लगी थी ,पास खड़ा सोहन भी कुछ भी बोल रहा था…

“अगर आप की यही इक्च्चा है तो मैं भी आपके साथ जाऊंगा “

आखिर कार मैंने कहा ,भाभी और सोहन दोनों hi मुझे देख रहे थे

“तू पागल हो गया है ये तेरा घर है ,वो तेरी जमीं है जिसपर तेरे भाई ने कब्ज़ा किया हुआ है तू ये सब छोड़कर कैसे जा सकता है “

भाभी की बात स्वाभाविक थी लेकिन मैं अपने दिल से जनता था की मेरे लिए क्या जरुरी है ..

“आपके बिना मुझे ये सब मिल भी जाए तो क्या ?? आप जंहा रहोगी मैं भी वही रहूँगा ,आप कहती थी ना की आप मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो ,तो सुनो मैं भी आपके लिए कुछ भी कर सकता हु ,”

भाभी मुझे बस देखती hi रह गई थी ,जिसे उन्होंने एक बच्चा hi समझा था वो आज अचानक से बड़ा हो गया था ……

तभी कोई और भी उस घर में आया ,वो हरिया था मेरे बचपन का दोस्त ,ऐसा लग रहा था जैसे वो दौड़ते हुए आया हो उसकी सांसे तेज थी ..

“सोनू ,भाभी …..”

“क्या हुआ हरिया ऐसे हांफ क्यों रहा है..” उसे देखते hi सोहन ने कहा

“राजू भैया (मेरा भाई ) आप लोगो को मरने के लिए आ रहा है ,मैंने सुना है की वो लोग इस घर को आग लगाने वाले है और आप दोनों को जान से मरने की बात कर रहे थे ..”

उसकी बात सुनकर हम तीनो hi स्तब्ध थे …तभी भाभी अचानक से उठी और मेरा हाथ पकड़ लिया ..

“चल सोनू ..”

“मैं आपको आपका हक़ दिला कर hi जाऊंगा, मैं मरने से नहीं डरता “

मेरी बात सुनकर उनके चेहरे में चिंता की लकीरे और भी बाद गई थी

“वो तू दिला सकता है ,लेकिन आज नहीं बीटा ,अगर तुझे मेरी वजह से कुछ हो गया तो मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगी चल जल्दी से चल..”

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खिंचा ..

“लेकिन कहा “सोहन ने कहा था ..

“जंहा किस्मत ले जाए ..”

भाभी ने कहा ,हमारे लिए अभी यही सही रास्ता था और हरिया और सोहन की मदद से हम गांव के बहार चले आये ,उन्होंने हमें शाम की आखिरी बस में बैठा दिया था जो शहर को जा रही थी, वो बस आखिर कहा जा रही थी मुझे नहीं पता था और उसका अंतिम ठिकाना कहा था वो भी नहीं, लेकिन वो जंहा भी जा रही थी वही हमारा ठिकाना होने वाला था ………

 
अपडेट 4


वो रात का समय था जब मैं और भाभी शहर के बस स्टैंड में पहुंचे थे ,कुल जमा पैसो के नाम पर वही था जो की सोहन और हरिया ने मिलकर दिया था ,वही भाभी और मेरा एक बैग था जिसमे हमारे कुछ कपडे hi थे ,हम कहा जायेंगे उसकी खबर हम दोनों को hi नहीं थी ,यात्रियों के बैठने की जगह में हम दोनों बैठे हुए थे, मेरे पुरे शरीर पर अब भी छोटो के निशान थे पूरा शरीर दर्द से भरा हुआ था लेकिन असली दर्द तो दिल में लगा था ,बदले की आग भड़क रही थी लेकिन उस मासूम से चेहरे को देखकर सब कुछ ख़त्म हो जाता था जो की अभी भी बदहवाशी की स्तिथि में थी …

भाभी के मासूम से चेहरे में आंसू अचानक से hi आ जाते ,मैं उनकी मनोदशा को समझ सकता था या फिर शायद नहीं ?,उन्होंने कभी एक इंसान पर जान से भी जयदा भरोषा करके अपना सब कुछ छोड़ा था आज भी वो उसी हाल में आ गई थी ,लेकिन फर्क इतना था की तब वो वफ़ा में आकर सब छोड़ आयी थी और आज बेवफाई के कारण ..

मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा और वो फुट पड़ी ,वो मेरे कंधे पर सर रखे रोने लगी थी ,दिल का गुबार जितना खली हो जाए उतना hi अच्छा होता है ,मैंने भी उन्हें रोने hi दिया, आंसू तो मेरे भी आ रहे थे लेकिन ये आंसू उन्हें देखकर hi आ जाते थे ..

रात बताती गई और वंहा सन्नाटा पसारता गया, दो पुलिस वाले हमें ध्यान से देख रहे थे, दोनों की hi नजरो को मैं पहचान सकता था मैं अब बड़ा हो चूका था, कॉलेज में पढ़ने लगा था, वो मेरी भाभी के जिस्म को देखकर एक दसरे से बात कर रहे थे कभी हलके हलके हंस भी लेते थे, जानकर भी मैं चुप था,

आदमी एक जानवर hi है और कहते है की ये जानवर अकेले में hi निकलता है, वही शायद उनके साथ भी हुआ जब पूरा स्टैंड hi सुना हो चूका था कुछ भिखारियों के अलावा वंहा कोई भी नहीं था वो दोनों हमारे पास आये ..

“ये यंहा क्या कर रहे हो घर से भागे हो क्या “

एक पुलिस वाले ने बेहद hi कड़ाई से कहा

“अरे घर से क्या बह्गे होंगे सेल इसे देख, मांग में सिंदूर ,गले में मंगलसूत्र और अपने से छोटे लड़के के साथ रत में घूम रही है साली रैंड होगी और ये इसका ग्राहक या फिर दल्ला “

उसके होठो में एक शैतानी हंसी आयी

“तमीज से बात करो ये मेरी भाभी है “

उनकी बात से मैं भी जोश में आ चूका था, वही भाभी थोड़ी घबरा सी गई थी, उन्होंने मेरा हाथ खींचा, लेकिन मैं था जो झुकने को तैयार hi नहीं था

“अरे मादरचोद… लौंडे का भाव तो देखो ,चलो हमारे साथ स्टेशन ,सेल तेरी इस आइटम को अभी रंडी बना कर अंदर कर दूंगा और तुझे उसका दल्ला बना कर, सेल तेरा हाथ पेअर तोड़ दूंगा “

पहला गरजा और उसकी गरज का असर भाभी पर पड़ा ..

“नहीं नहीं हम तो बस यंहा बैठे थे, इसे माफ़ कर दीजिये ये तो नादाँ है “

भाभी की बात सुनकर दोनों hi जोरो से हांसे, वही वंहा बचे कुछ भिखारी बस तमाशा hi देख रहे थे

“है साली माफ़ कर देंगे चल उधर कोने में चल, थोड़ा तेरा रास तो निचोड़ ले .”

एक ने भाभी के जिस्म को देखकर कहा

“मादरचोद “

मैं उठ खड़ा हुआ था और उसके कालर को पकड़ चूका था ,मेरी आंखे गुस्से में लाल थी ,

“पुलिस वाले का कालर पकड़ता है सेल “

दूसरा चिल्लाया

अब पता नहीं दिन भर का गुस्सा था या क्या था मैंने एक खींच कर झापड़ उसके गलो पर जड़ दिया …सभी बस मुँह फाडे मुझे hi देख रहे थे ..

“मादरचोद पुलिस वाले पर हाथ उठता है “

दूसरा कुछ करता उससे पहले एक लात उसके पेट पर पद चूका था ,वो बिलकुल hi बेहाल सा निचे पड़ा था, तभी एक घुसा पहले के पेट में भी लगा दिया ,वो भी एक hi ग़ुस्से में तडफता हुआ निचे पड़ा हुआ था ..

ये सब देख कर भाभी की हालत भी ख़राब हो चुकी थी उन्होंने मेरा हाथ खींचा जैसे बोल रही हो की भागो यंहा से ..

मुझे भी मेरी गलती समझ आने लगी थी लेकिन अब देर हो चुकी थी क्योकि एक पुलिस की गाड़ी तभी हमारे पास आयी …और दोनों की हालत देखकर वही रुक गई

“ये क्या हो रहा है ..”

एक इंस्पेक्टर वंहा से निकला उसे देख कर दोनों hi उठ खड़े हुए, दोनों ने उसे सलाम ठोका ..

“साहब ये साली रंडी है और ये उसका दल्ला है, दोनों यंहा ग्राहक खोज रहे थे “

एक सिपाही बोल उठा उसकी बात सुनकर मेरा माथा फिर से खनक गया था, मैं उसे एक और घुसा लगा देता लेकिन भाभी ने मेरा हाथ थाम लिया ..

वही इंस्पेक्टर ने एक बार भाभी के जिस्म को गौर से देखा, पता नहीं ऐसा क्या था उनके जिस्म में जो हर कोई उन्हें hi घर रहा था, उसने अपनी जीभ अपने होठो पर चलाई ..

“वाह ये रैंड तो मस्त लग रही है, कितना लेती है रे एक रत का “

उसकी आवाज में कुछ ऐसा था की मैं काबू से बहार होने लगा था , मेरा मन किया की सेल का मुँह तोड़ दू ,वही भाभी ये सब सुनकर भी मेरा हाथ जोरो से जकड़े हुए थी ..

वो इंस्पेक्टर मुझे देखने लगा

“क्यों बे बहुत डैम दिखा रहा है, ले चलो सेल को ठाणे इसका डैम निकलते है वही इस रंडी के भी मजे लेंगे इसी के सामने “

उसका इतना कहना hi था की मैंने जोर लगाया और मेरा बाजु जो की अभी तक भाभी के हाथो में था वो छूट गया मैं आगे बढ़ने hi वाला था की एक आवाज आयी ..

“ये इंस्पेक्टर, सालो चोर उचक्कों को तो पकड़ते नहीं हो और सीधे साढ़े लोगो को परेशां करते हो ..”

हम सभी उसी आवाज की और देख रहे थे, एक कला कलूटा, लम्बा चौड़ा आदमी सामने खड़ा था, चेहरे में हलकी दाढ़ी थी वही बड़ी बड़ी मूंछे …

“कलवा, ये तेरा मामला नहीं है इसमें मत पद “

इंस्पेक्टर गरजा

“मैं बहुत देर से इन लोगो को देख रहा हु, बेचारे परेशां लगते है और पुलिस वाले मदद करने की बजाय इनका इस्तमाल करना चाहते हो ..”

“देख कलवा ..”

“तू देख इंस्पेक्टर गरीब लोगो को छेड़ा न तो तेरे सभी छेड़ बंद कर दूंगा समझ ले “

कलवा की आवाज में वो बात थी की वंहा खड़ा हुआ हर शख्स चुप हो गया, पुलिस वाले भी बस इंस्पेक्टर पर नजर जमाये हुए थे वही इंस्पेक्टर को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे जैसे वो कुछ सोच रहा था…

“कलवा बोलै न की ये तेरा मामला नहीं है, तू क्यों भगवन बनने की कोशिस कर रहा है, साला पूरा शहर तो भूखे नंगो से भर गया है “

“यही भूखे नंगे तुम अमीरो का काम करते है समझ लेना, मजदूरों की सर्कि ना तो फिर क्या होगा तू जनता है, छोड़ उसे और जा अपने रस्ते “

कलवा की आवाज में एक दृढ़ता थी, इंस्पेक्टर ने मुझे गौर से देखा फिर एक नजर भाभी के जिस्म पर डाली ..

“सेल आज तू बच गया लेकिन कभी मेरे हाथ आया न तो देख तेरी गर्मी कैसे निकलता हु और इस रैंड की तो ..”

“ये…. लड़की से इज्जत से बात कर “

कलवा फिर से चिल्लाया, इंस्पेक्टर बिना कुछ बोले hi वंहा से चला गया था …..

इस बार कलवा हमारे सामने था ..

‘क्या रे इतनी रत को यंहा क्या कर रहे हो “

मैंने अपनी पूरी की पूरी स्टोरी उसे सुना दी ,कलवा ने एक बार भाभी पर ऊपर से निचे नजर डाली , ये आदमी भी अनजान hi था, उसके मुँह से शराब की बदबू भी आ रही थी , लेकिन फिर भी मुझे कलवा में एक अजीब सा भरोसा हो गया था वो यंहा हमारे लिए किसी संकटमोचन जैसा साबित हुआ था ..

“हुम्म्म तो बीटा तुम्हारी स्तिथि तो बहुत hi गंभीर है, रहोगे कहा कुछ सोचा है “

मैंने ना में सर हिलाया

“देखो इस शहर में कोई भी किसी के लिए मुफ्त में कुछ भी नहीं करता, मैं तुम्हे सस्ते में एक खोली दिलवा दूंगा वही रह जाओ, लेकिन अभी तुम्हे उसके लिए कुछ पैसे देने होंगे, कुछ पैसे है तुम्हारे पास ..

“जी है लेकिन थोड़े hi है ..”

“कोई बात नहीं, झोपड़ पट्टी की खोली सस्ती hi होगी, एक महीने का किराया आज दे दो, बाकि दूसरे महीने के लिए मैं तुम्हे कल hi किसी काम में लगवा दूंगा, अब तुम जवान हो तो इससे तो काम नहीं करवाओगे, खुद म्हणत करो और इसे भी पालो ..”

मैंने उसकी बात में सर हिलाया, हम उसके पीछे पीछे जाने लगे ,एक hi घंटा हुआ होगा उसने हमारे हाथ में एक चाबी थमा दी और कुछ पैसे ले लिए …उसके जाने के बाद हम कमरे में आ गए ,उसे देखकर मेरे आँखों से आंसू hi निकल गए थे, वही हाल भाभी का भी था ……

“तुम्हे कहा महलो में रहना था और मेरे कारण तुम इस झोपड़े में रहना पद रहा है, दुनिया की साडी मुसीबते मैंने तुम पर दाल दी, अब भी वक़्त है सोनू तू चले जा मुझे छोड़कर “

भाभी फफक पड़ी थी ..मैंने पुरे कमरे में नजर डाली ,एक hi कर्मा था वो भी टुटा फूटा सा, जर्जर होती सी दीवारे थी ,हलकी रोशनी वाला एक बल्ब लगा था वो hi पुरे कमरे को प्रकाशित करने के लिए काफी था, कोई सामान वंहा नहीं था, जमीं फर्श की थी ,मैंने एक कोने में अपना सामान डाला ,भाभी अभी भी बूत बने हुए वही कड़ी थी ..

मैंने उनकी बांहो को अपने हाथो में पकड़ा..

“भाभी अब यही हमारी जिंदगी है ,अगर आप के साथ रहने के लिए मुझे स्वर्ग छोड़कर नर्क में जाना पड़े तो मैं खुसी ख़ुशी वंहा चले जाऊंगा क्योकि मैंने जनता हु जंहा आप जैसी ायरत हो वो वही स्वर्ग बना देगी ,मेरा भाई चुटिया था जिसने आपकी क़द्र नहीं की मैं उसके जैसा चुटिया नहीं हु …”

भाभी नाम आँखों से कुछ देर मुझे यु hi देखती रही और फिर मुझे खुद के बांहो में घेर लिया, वो मेरे साइन में सर रखकर रोने लगी …

“तू कितना बड़ा हो गया रे, अपनी भाभी से इतना प्यार करता है मेरा सोनू ,जब मैं आयी थी तो तू एक मासूम सा बच्चा था और आज एक पुरे मर्द जैसे मेरी इजाजत की रक्षा कर रहा है ..”

मैंने भी अपनी बांहो में उन्हें समा लिया था, मैंने उन्हें अपने से और भी जोरो से चिपकाया जैसे मैं नहीं चाहता की वो मुझसे दूर चले जाए …

ये एक नए सफर की शुरुवात थी और एक पुराने सफर का अंत भी

 
अपडेट 5


बिस्टेर तो हामरे पास नहीं था हम दोनों फारस में hi लेट गए the,sharir की थकन इतनी थी की नींद कब आयी पता hi नहीं chala,diwar से सात कर भाभी सो गयी थी वही मैं उनके बाजु में hi सोया था ,कमरा इतना बड़ा भी नहीं था की हम कही दूर दूर सो sakte,do लोगो के सोने के बाद थोड़ी जगह और बची थी ,उसमे हमें अपने बाकि के सामान को रखना है ,खैर अभी तो हमारे पास कुछ था hi नहीं ….

मेरी नींद किसी के दरवाजा खटखटाने से खुली ,मेरे साथ भाभी भी जाग गई थी ,आवाज देने वाली कोई ायरत thi..maine दरवाजा खोला ..और वो हमें देखकर मुस्कुराई ..

“तो तुम लोग हो जिन्हे कलवा रत में लाया “

मैंने हां में सर हिला दिया

“ओह देखने में तो अच्छे घर के लगते हो भाग कर आये हो क्या ..”

अब मैं उनसे क्या कहता ,मैं कुछ जवाब देता उससे पहले hi वो बोल पड़ी ..

“अरे छोकरी तेरा नाम क्या है..”

“जी जी आरती ..”भाभी ने बड़े hi शैब्य तरीके से कहा

“ओह्ह तो चल यंहा सुहब सुबह hi पेट साफ कर ले वर्ण फिर भीड़ हो जाएगी ,सरकारी सुलभ है पास hi ,पूरी बस्ती वही आती है तो भीड़ लग जाता है ,सभी ओउरते सुबह जल्दी hi जाती है वंहा ,वही से नाहा कर भी आ जाना ..”

भाभी ने है में सर हिलाया और अपने बैग से कुछ कपडे निकल कर उसके साथ चली गई ,मैं फिर से वही सो गया था लेकिन इस बार मुझे फारस के कठोरता का आभास होने लगा था ..

1 घंटे बाद वो वापस आ गई ,उनके चेहरे में एक मुस्कान थी,

मुझसे नजर मिलते hi उन्होंने कहा

“यंहा की एयरटे तो हमारे गांव जैसी hi है ,लगता है मैं यंहा अच्छे से रह लुंगी ,यंहा एयरटे मिलकर एक सहकारी समूह चलती है जिसे सरकारी मदद भी मिलती है ,वो लोग मिलकर कपडे सिलने का काम करती है “

उनके आँखों में आयी चमक से मुझे बहुत राहत मिली ,थोड़ी देर में कलवा भी आ गया ,मैं उसके साथ चला gaya,sach में मुझे मेरे गांव की hi यद् आ गयी लोग कुछ ऐसे hi थे लेकिन यंहा के सभी लोग बस मजदुर hi थे मुझसे मिलने और मेरी कहानी जानने का कौतुहल सभी के अंदर था ,वंहा मुझे पता चला की कलवा एक तरह से यंहा का डॉन hi है और जो ायरत सुबह आयी थी वो उसकी बीवी थी ..

कलवा ने मुझे 9 बजे तक अपने साथ चलने को kaha,khana भी कलवा के घर से आ गया था ,

“देख जंहा ले जा रहा हु वो यंहा के बाप है ,उनके सामने जयदा बोलना मत समझा “

कलवा ने जाते हुए मुझसे कहा

‘जी भाई “

थोड़ी देर में बाकि के लोग भी साथ हो लिए ,हम फिर से उसी स्टेशन के पास the,bus स्टैंड के पीछे एक गोदाम था कलवा वही मुझे काम दिलवाने वाला था ,मुझे बहार hi रुकवा कर कलवा अंदर गया थोड़े देर में मुझे भी बुला लिया गया ..

“लाला साहब यही लड़का है जिसके बारे में मैंने बताया था “

लाला ने मुझे ऊपर से निचे तक देखा ..

“हुम्म्म दिखने में तो खुश खास नहीं है फिर भी पुलिस वाले को मार दिया “

उन्होंने मुझे घूरते हुए कहा

“साहब मरने के लिए शरीर नहीं बल्कि जिगर चाहिए “

मैंने बहुत hi शालीनता से जवाब दिया ,वही कलवा मुझे घूरने लगा था जैसे मुझसे कोई गुनाह हो गया हो ,लेकिन शायद लाला को मेरी बात पसंद आ गयी थी ..

“हम्म बढ़िया ,चलो ठीक है इसे लोडिंग वाले काम में लगा दे ..”

“साहब कुछ काम म्हणत वाला काम दे दीजिये न नया लड़का है “कलवा ने लाला से रिक्वेस्ट किया

“अरे नया है तो क्या साला मैं कोई धर्मशाला तो खोल के नहीं बैठा हु जो है वो कर्जा तो करे वर्ण जाए यंहा से “

लाला ने साफ साफ शब्दों में जवाब देदिया था ,मुझे नौकरी करनी hi थी चाहे जो भी हो जाए ,मैंने कलवा को आँखों से hi इशारा किया की मुझे काम करने में कोई दिक्कत नहीं है …

और मैंने जीवन का पहला काम किया, बोरियो को ट्रको में उतरने चढाने का काम ,ऐसे लगा जैसे हड्डिया टूट गई ho,tab जाकर मुझे 300 रस दिए गए ,पहली बार अपनी कमाई को हाथो में लेकर मैं फुले नहीं समां रहा tha,mujhe यद् आया की घर में खाने के लिए कुछ नहीं है वही बिस्टेर भी नहीं है ,लेकिन 300 में आखिर क्या क्या आ सकता था ,

कलवा ने मुझे देसी दारू ऑफर की लेकिन मैंने उसे साफ मन कर diya,maine दारू कभी नहीं पि थी और पिने का कोई इरादा भी नहीं था ,मैं तो बस जल्दी से जल्दी जाकर भाभी के हाथो में अपनी ये कमाई देना चाहता था ,बाकि के लोग दारू पिने चले गए थे और मैं घर की और भगा ..

घर या वो एक कमरे की खोली hi अब मेरा घर थी ,वो मेरे लिए किस महल से काम भी न थी क्योकि वंहा मेरी प्यारी भाभी माँ रहती है ..

कमरे का दरवाजा खटखटाना नहीं पड़ा क्योकि वो पहले से hi खुली हुई थी ,वंहा मुझे दो महिलाये बैठी हुई दिखाई दी ..

भाभी मुझे देखते hi खुस हो गयी थी ..

“अच्छा आरती हम चलते है …”वो दोनों hi मुस्कुराते हुए निकल गए ..

मैं देखे कर हैरान था ,कोने में एक चूल्हा बना दिया गया था वही एक घड़ा भी रखा हुआ था ,कुछ बर्तन और राशन सामान के डिब्बे ..

“ये क्या है भाभी ..”

वो मुस्कुराई

“अरे यंहा के लोग दिल के बहुत अच्छे है देखने में गरीब जरूर है लेकिन दिल के बहुत hi बड़े लोग है ,पास की राशन की दुकान वाले से मेरी पहचान करवा दी उसने उधर में सामान दे दिया और ये बिछाने के लिए बिस्टेर भी पास के दुकान से उधर में ले आयी ,Shobha(kaliya की बीवी) बोली की जब तुझे पहली पगार मिलेगी तो सब लौटा देना ,जनता है यंहा पर कपडे सिलने का बड़ा सा समूह है सुपरवाइजर ने तो मुझे देखते hi काम पर रख लिया …अब सब ठीक हो जाएगा सोनू दिल लगाकर काम करुँगी और तू फिर से पड़ना शुरू कर सकता है अब “

मैं खुस था इसलिए क्यों की ये सब हो रहा था, नहीं, बल्कि इसलिए क्योकि इससे भाभी के चेहरे में चमक थी ,वो खुस थी और उनके खुसी के लिए मैं कोई भी कीमत चुकाने को तैयार था …

मैंने जेब से अपनी पहली कमाई निकाली और उनके आगे कर दिया ..

“भाभी ये मेरी पहली कमाई “

इसे देखकर वो बहुत hi भावुक हो गई लेकिन जैसे उन्होंने मेरे हाथो को छुआ उन्होंने इसे ध्यान से देखा ..

“तेरे हाथो में तो छले पद गए है..”

उनके आँखों से पानी गिरने लगा था..

“हां आदत नहीं है न इसलिए कुछ दिन में आदत हो जाएगी “

उन्होंने खींचकर मुझे अपने साइन से लगा लिया..

“नहीं नहीं तू कल से ऐसे काम में नहीं जायेगा मैं कैसे भी करके कुछ कमा लुंगी तू बस पड़े कर, ये दिन देखने के लिए तो नहीं आया था न मेरे साथ “

“ओहो भाभी आप भी न, दोनों मिलकर कमाएंगे तब तो यंहा से निकल पाएंगे ,वर्ण क्या साडी जिंदगी यही रहना है “

“नहीं सोनू तुझे मेरी कसम है तू ऐसा काम नहीं करेगा “

मैंने उसने चेहरे को अपने हाथो से जकड लिया ,उसनका वो प्यारा सा चेहरा उनके hi आंसुओ से भीग चूका था ,बड़ी बड़ी आंखे अभी भी नाम थी ,मुझे अपने भाई की किस्मत पर दुःख होता है की उसने इन्हे छोड़ दिया था ,इतनी सूंदर, ममता से भरी हुई थी मेरी भाभी ,मैंने बड़े hi प्यार से उनके गलो में एक किश किया ,मेरे होठो में उनके आंसू भी लग गए थे थोड़ा सा नमकीन सा स्वाद मेरे जीभ में लगा ..

“भाभी मैं अब बच्चा नहीं हु पूरा मर्द बन गया हु ,आप क्यों फिक्र करती हो ,मैं पढूंगा भी और कमाऊंगा भी ,और अपनी भाभी को रानी बनाकर रखूँगा “

मेरे बात से उनके होठो में एक मुस्कान तो तेरी लेकिन आंखे अभी भी गीली hi थी ,उन्होंने मेरे गलो पर अपना हाथ रख दिया और बड़े hi ममता से सहलाया ..

“इतना पैर क्यों करता है तू अपने भाभी से “

मैंने उन्हें पास बिछे हुए बिस्टेर में बिठा दिया और उनके गॉड में सर रखकर लेट गया …

“क्योकि आपने मुझे जितना पैर दिया उतना तो मेरी माँ ने भी मुझे नहीं diya,aap मेरे लिए मेरी माँ हो मेरी बड़ी बहन भी हो ,और मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी …”

वो बड़े hi प्यार से मेरे बालो को सहला रही थी और थोड़ा झुक कर उन्होंने मेरे माथे पर एक किश किया ..

“चल अब प्यार जाताना हो गया हो तो कुछ खाने के लिए बना दू बहुत भूख लग रही है “

मैं भी उनके गॉड से उठ गया था…

“भूख तो मुझे भी बड़ी तेज लगी है लेकिन खाएंगे क्या ???”

वो थोड़ी देर सोची फिर ध्यान से राशन की और देखने लगी

“सब्जिया तो है नहीं आज खिचड़ी hi खा लेते है “

जब सोने का समय आया तो मैं थोड़ा असमंजस में फंस गया था ,बिस्टेर एक hi था जो की जमीं में बिछा हुआ था और भाभी उसमे सो नहीं रही थी ..

“मुझे कुछ नहीं पता बिस्टेर में तू सोयेगा मैं फारस में hi सोऊंगी “

उन्होंने जिद की

“क्या भाभी आप भी आप बिस्टेर में सोइये मैं फारस में सोऊंगा “

“अरे तू इतनी म्हणत कर रहा है तेरे शरीर को जयदा आराम की जरुरत है “

उन्होंने मुझे लगभग डाँटते हुए hi कहा ..

“अच्छा अगर आप बिस्तर में नहीं सोवोगी तो मैं भी नहीं सोता जाओ “

मैंने झूठमूठ hi सही अपना मुँह फुला लिया था ..वो मेरे गलो को अपने हाथो में भर ली .और जोरो से हिला दिया

“बदमाश कही का …चल ठीक है दोनों hi सो जाते है “

मैंने एक बार उन्हें देखा, वो बस मुस्कुरा रही थी , उन्होंने बिस्टेर बिछाया और फिर कोने में सो गई बिस्टेर में थोड़ी सी hi जगह बची थी ..

“आजा यंहा सो “

मैं थोड़ा घबरा रहा था ..

“अरे इतना बड़ा हो गया है अभी भी मुझसे घबराता है ,चल आ “

मैं उनके बाजु में जाकर लेट तो गया था लेकिन उनका जिस्म मेरे जिस्म से छू रहा था और वही मुझमे थोड़ी अजीब सी फेल्लिंग का जन्म हो रहा था ,उन्होंने मेरा चेहरा अपनी और किया और मेरे माथे में एक किश कर दिया ..

“सजा बेटे …”

उनके चेहरे में आयी वो प्यारी सी मुस्कान इतनी प्यारी थी की मैं बस उसे देखता हुआ खो hi गया था ..

“क्या हुआ ?? ऐसे क्यों देख रहा है “

“आप बहुत hi पैरी हो भाभी “

मैं अब भी उन्हें देख रहा था ..वो बस मुस्कुराई

“चलो सो जाओ “

वो पलट कर सो गई ,

उन्होंने अभी एक पुराणी साड़ी पहनी थी और ब्लाउज, उनकी पीठ का कुछ हिस्सा मुझे दिख रहा था लेकिन उनके लम्बे बल बिखरे हुए the,pata नहीं मेरे अंदर क्या हुआ मैं उनसे सात गया और बालो को एक तरफ करके उनके खुले हुए कंधे पर एक किश कर दिया …

“सोनू ..”

भाभी ने हलके से खा लेकिन वो पलटी नहीं मैंने अपने हाथ को उनकी कमर से लपेट लिया और उनसे बिलकुल hi सात कर सोने लगा …

मेरे पुरे शरीर में काम की वजह से आज तगड़ा दर्द था और बिस्टेर कोमल तो नहीं लेकिन फारस से तो बेहतर था मेरी नींद लगने लगी थी और मेरा एक पेअर भाभी के कमर को घेर चूका था ,नींद में अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे हाथो को पकड़ा है ,शायद मेरे हाथ भाभी के पेट से उठाते हुए उनके वक्ष sthalo(boobs) तक पहुंचने वाले थे इसलिए भाभी ने बड़े hi प्यार से उसे पकड़कर निचे कर दिया था ,मेरे चेहरे में बस एक मुस्कान थी और आँखों में अब गहरी नींद….

 
अपडेट 6


अगले दिन जब मैं काम पर गया तो मुझे वह वो इंस्पेक्टर दिखा जो उस दिन बस स्टैंड में था ,मैं सामान से भरे हुए बोर उठा कर एक ट्रैक में दाल रहा था ,वो इंस्पेक्टर लाला के साथ कुछ बाटे कर रहा था ,मैंने उसे देखते हुए भी अनदेखा कर दिया लेकिन ना जाने कैसे उसकी नजर मुझपर पद hi गई ..





थोड़ी देर में hi वो मेरे पास पंहुचा साथ में लाला भी था ,





“तू वही है ना जो उस रात बस स्टैंड में मिला था “





वो थोड़ी दूर खड़े मुझे घर रहा था, मैंने बस हां में सर हिलाया ..





“लाला जनता है उस रात ये और इसकी एक छमिया मुझे मिले थे सेल ने दो कांस्टेबल को मार दिया था वो तो कलवा वंहा आ गया वर्ण ,इसकी उस माल को नंगा करके नाचता “





उसकी बात सुनकर मेरा दिमाग खनकने लगा था मैंने उस इंस्पेक्टर को घुरा ..





“क्या घर रहा है बे मारेगा मुझे “





वो आगे आ hi रहा था की लाला ने उसे रोक दिया ..





“अरे पण्डे साहब जाने भी दीजिये नया लड़का थोड़ी गर्मी जयदा है इसमें “





“सेल की गर्मी तो मैं निकलूंगा, मेरे हथ्थे चढ़ा तो फिर देखना क्या हालत करता हु सेल की “





इतना बोलकर वो तो चला गया फिर लाला मुझे घूरने लगा, मैं अपना काम hi कर रहा था की उसने मुझे अपने पास बुलाया ..





“क्यों बे शहर में नया नया आया है और इतनी गर्मी दिखा रहा है ,जनता है की ये इंस्पेक्टर क्या कर सकता है “





“जनता हु साहब लेकिन ये साला नहीं जनता की मैं अपनी भाभी के लिए क्या कर सकता हु ..”





वो मुझे और भी अजीब निगाहो से घूरने लगा था





“क्या कर सकता है “





“जान से मार दूंगा सेल को अगर उनपर नजर भी डाली तो “





लाला कुछ समझने की कोशिस कर रहा था तभी कलवा की आवाज आयी ,





“बोलै था न इस लड़के को कोई दूसरा काम दो आग है सेल में “





कलवा वही थोड़ी दूर खड़े हुए हमारी बाटे सुन रहा था ..





“हम्म आग तो है ,चल टेस्ट भी कर लेते है ,ले जा इसे हामिद के पास ,वो देख लेगा “





कलवा ने सर हिलाया वही लाला ने किसी को फ़ोन लगाया और कलवा मुझे लेकर एक बाइक में बैठा कर कही ले गया ,मुझे दो तीन चीजे अभी भी समझ नहीं आ रही थी पहला की कलवा के पास ये बाइक कहा से आयी दूसरा की ये साला कलवा जब दूसरी जगह पर काम करता है तो फिर यंहा आया कैसे ..





और मैंने ये पूछ hi लिया





“अरे छोटे मैं तो लाला के पास आया था काम से और ये मेरे सेठ की बाइक है…”





“आपका सेठ कोण है “





“है एक कभी ले चलूँगा तुझे वंहा पर साला चुटिया आदमी है वो पुरे का पूरा, चल अभी हामिद से मिल ,तू उसको पसंद आ गया तो तुझे गैंग में शामिल कर लेगा “





“गैंग भाई ये कैसा धंधा है ..”





“सेल इस शहर में अगर किसी भी चीज में सबसे जदया पैसा है तो यनही है ,पैसे से नहायेगा तू “





“भाई मुझे पैसे उतने hi चाहिए जीयत्न में मैं अपनी और अपनी भाभी की जिनगी बेहतर कर सकू ,हम सुकून से जी ले यही बहुत है “





कलवा ने गाड़ी में अचानक से ब्रेक मार दिया ..





“सेल मतलब तुझे जीवन भर मजदूरी hi करना है “





“भाई मुझे कोई गलत काम नहीं करना है “





कलवा ने मुझे ध्यान से देखा





“चल ठीक है तुझे अगर यही करना है तो यही कर ,तुझे फिर से छोड़ देता हु लाला के पास, कभी अगर जरूरत पड़ी तुझे मेरी तो बताना मैं तुझे हामिद से मिलवा दूंगा “





“जी भाई “





मैं गरीब था मेरे पास पैसो की जरूरत भी थी लेकिन मैं किसी भी कारण से ऐसा काम नहीं कर सकता था जिससे मेरी भाभी को कोई परेशनी हो आखिर गलत काम करके मैं उनके सामने कैसे जाता..





शाम जब मैं घर पंहुचा तो फिर से शरीर का अंग दर्द दे रहा था और कल से ज्यादा दर्द दे रहा था ,पूरा शरीर hi टुटा हुआ लग रहा था, भाभी मुझे देखते hi समझ गई थी की मेरे शरीर में दर्द हो रहा है , उन्होंने मुझे बिस्टेर में लेटने के लिए कहा और अपनी शर्ट भी उतरने की हिदायत दे दी , उन्होंने सरसो का तेल गर्म करके मेरे शरीर पर मलना शुरू कर दिया ..





“अरे भाभी इन सबकी क्या जरुरत है “





“देख तू काम करना चाहता है ,ठीक है मैं मन नहीं करुँगी लेकिन ,तुझे दर्द हो रहा है ये मैं नहीं देख सकती बस ,अब चुप चाप लेता रह और मुझे मालिश करने दे “





“अरे भाभी आप भी न बच्चो जैसे जिद्दी हो रही हो “





मेरी बात का उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया वो बस चुप चाप मालिश करती रही ,उन्होंने मेरे पीठ पर तेल लगाया और साथ hi साथ मेरे हाथ और पैरो में भी अच्छे से मालिश कर दी ..





“अब थोड़ा ठीक लगा”





उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा





“पहले से भी अच्छे हो गया हु मैं ,लेकिन मालिश के कारण नहीं बल्कि आपके प्यार के कारण “





उन्होंने मेरे गलो जो जोरो से खिंचा





“बहुत मस्का मरना सिख गया है ,चल खाना बना दिया है खा ले “





मैं रोटियां खता रहा और भाभी मेरे लिए गर्म गर्म रोटियां देती रही ..





“आप क्यों नहीं खा रही हो ??”





“पहले तू तो खा ले “





“नहीं आपको भी मेरे साथ hi खाना होगा”





दो तीन रोटियां खाने के बाद मैंने कहा





“अरे बाबा रुक तो जा पहले तू खाना खा ले “





“चलो आप भी खाओ “





मैंने रोटी का एक टुकड़ा उनके मुँह के पास लाया और उन्होंने अपना मुँह खोल दिया, रोटी का टुकड़ा अंदर चला गया था वो उसे चबाने लगी थी. लेकिन उनके आँखों में पानी की कुछ बुँदे आ रही थी





“क्या हुआ भाभी ??”





“इतना प्यार आज तक मुझे किसी ने नहीं किया रे , तेरे भैया ने मेरा हुश्न देख कर मुझसे प्रेम कर लिया था लेकिन वो प्रेम बस उनका वहां hi निकला , वो प्रेम नहीं शायद जिस्म की भूख थी , या फिर महज जवानी में होने वाला एक आकर्षण , उन्होंने हमेशा मेरी ख़ुशी से पहले अपनी ख़ुशी को प्राथमिकता दी , उनके लिए शरीर की संतुष्टि के hi मायने थे , जब तक उनका शांत नहीं होता तब तक तो बहुत hi प्यार दिखते लेकिन जब हो जाता तो बस ऐसे दिखते जैसे उन्होंने मुझसे शादी करके मुझपर अहसान किया हो , मैं एक गरीब घर की लड़की थी लेकिन गैरत वाली थी अगर मुझे पता होता की वो शादी के बात अपनी दौलत का रॉब मुझपर दिखाएंगे तो मैं कभी उनसे शादी नहीं करती ..”





वो रोने hi लगी थी , मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा ..





“मेरी वजह से तू भी दर दर की ठोकर खा रहा है , तेरे भैया को मुझपर गुस्सा था जो वो तुझपर भी निकाल रहे थे ,वर्ण तुझे कभी ऐसे नहीं जीना पड़ता और गांव वाले भी तेरे साथ खड़े होते “





मैं उनकी बात सुनकर थोड़ा सा हंसा , वो मुझे अजीब निगाहो से देखने लगी ..





“भाभी मुझे पता है की अगर आप नहीं होती तो मेरा क्या होता , वो तो चाहते थे की पूरी जायजाद खुद hi हड़प ले लेकिन आपके कारण नहीं कर पाए मैं जनता हु की आप मेरे लिए उनसे भी लड़ जाती थी “





वो मुझे देखने लगी





“ है भाभी मैं जनता हु , मैंने आप लोगो की बाटे भी सुनी थी जब माँ पिता जी का देहांत हुआ था ,जब वो आप से कह रहे थे की इसे कुछ भी करके रस्ते से हटाना है ताकि पूरी जायजाद पर कब्ज़ा कर लिया जाये , लेकिन आपने उन्हें मन कर दिया था यंहा तक की धमकी भी दे दी थी की अगर उन्होंने ऐसी कोई कोशिश भी की तो आप सबको उनके इरादों के बारे में बता देंगी ..”





“तूने वो सब सुना था “





भाभी आश्चर्य में थी और मैं मुस्कुरा रहा था





“है भाभी तभी से मुझे समझ आ गया था की आप कितनी अच्छी हो , अगर आप नहीं होती तो शायद मैं भी नहीं होता इसलिए अपने को ऐसा दोष मत दिया करो आप मेरे लिए क्या हो ये तो मैं बता भी नहीं सकता , ी लव यू भाभी ..”





मैंने ये उनके आँखों में देखते हुए कहा था ..





वो बस मुझे भीगी हुई आँखों से देख रही थी , उन्होंने मेरे गलो पर अपने कोमल हाथ रख दिए ,और थोड़ा आगे आकर उन्होंने मेरे गलो पर एक चुम्मन दे दिया





“मैं भी तुझसे बहुत प्यार करती हु बीटा “





जब भी वो इमोशनल होती थी तब वो मुझे बीटा कहती थी ..





मैंने ऐसा गांव वालो से सुन रखा था की मेरी भाभी एक बाँझ है , मतलब उन्हें बच्चा नहीं हो सकता , इस बारे में मैंने कभी उनसे बात नहीं की थी लेकिन शायद वो मुझे hi अपना बीटा मानती थी .. ये सोचकर hi मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ..







 
अपडेट 7

मैं अभी अपने काम में hi लगा हुआ था की शोभा भाभी मुझे दौड़ते हुए आते दिखी …

“सोनू सोनू “ वो जोरो से चिल्ला रही थी

“क्या हुआ भाभी “मैं उनके पास पहुंच गया था

“सोनू तेरी भाभी को कुछ लोग उठा कर ले गए “

“क्या ..?” उनकी बात जैसे मुझे कुछ समझ में hi नहीं आयी थी …

“कुछ लोग..”

“कोण……. कोण थे वो लोग ??”

मैं बुरी तरह से सदमे में था

“पता नहीं बीटा लेकिन जब मैं और आरती काम के लिए निकले तो बिच में उन्होंने हमें रोका और अटारी को उठा कर ले गए …”

तब तक लाला भी वंहा पहुंच गया था

“जरूर ये इंस्पेक्टर पाण्ड्य की करामात होगी ..”

तभी मुझे वंहा कलवा दिखा ,वो भी बात सुन रहा था ,उसने मुझे अपनी बाइक में बिठाया और गाड़ी दौड़ा दी ..

मेरा खून जल रहा था ,चेहरा और दिल गुस्से की आगे से धधक रहे थे ,

“मुझे पता है की वो लोग कहा गए होंगे..”

उसने गाड़ी एक वीरान इलाके में कड़ी कर दी ,एक बड़े गोदाम जैसी जगह थी और बहार एक जीप कड़ी थी उसके नंबर प्लेट में पुलिस लिखा हुआ था , मैं तेजी से आगे बढ़ा और गोदाम का दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हुआ वंहा मैंने जो भी देखा उसे देख कर मेरा दिगमग hi सुन्न हो गया था …

अंदर वो इंस्पेक्टर और दो उस दिल वाले सिपाही थी जिन्हे मैंने मारा था उनके साथ hi साथ कुछ और भी लोग थे जो की किसी गुंडे जैसे लग रहे थे ..

उनकी नजर मुझपर पड़ी तो वो इंस्पेक्टर जोरो से हंस पड़ा

“देखो देखो कौन आया है , इस सेल के सामने hi इस छमिया के जिस्म की धज्जिया उड़ाऊंगा फिर इसकी चमड़ी निकाल कर सेल के अंदर की पूरी गर्मी निकलूंगा ,पकड़ो सेल को ..”

मैंने पास hi पड़ा हुआ एक रोड उठा लिया था वो गुंडे जैसे लोग मुझे पकड़ने के लिए दौड़े मैं भी उनकी और पुरे ताकत से भाग रहा था ,वही थोड़ी दूर जमीं में पड़ी हुई भाभी के जिस्म में नाम मात्र का hi कपडा रह गया था ,दोनों सिपाही उनका हाथ पकडे हुए थे और उन्हें जमीं में लिटा दिया था ,साड़ी शरीर से निकाल दी गई थी ब्लाउज भी जैसे फाड़ दिया गया हो .. एक नजर उनके ऊपर पड़ते hi मेरा खून उबाल मरने लगा था , वो लोग मेरे पास आ चुके थे मैंने जोरो से रोड घुमाया लेकिन ये क्या ,किसी ने पीछे से मुझे लात मार दी मैं लड़खड़ाता हुआ गिर गया था..

दो लोग जो सामने से आ रहे थे और एक जिसने मुझे पीछे से लात मारी थी तीनो ने मिलकर मुझे दबोच लिया था , उन्होंने मुझे अपने काबू में कर लिया था और पकड़कर इंस्पेक्टर के पास ले गए ,भाभी के आँखों में दहसत नाचते हुए दिखाई देने लगी थी ..

“इसे छोड़ दो तुम लोग जो बोलोगे मैं करुँगी ..”

भाभी की बात सुनकर सभी जोरो से हंसाने लगे, मुझे बुरी तरह से मारा गया था , आँखों के सामने अँधेरा छ गया था लेकिन भाभी की बात सुनकर मुझे फिर से एक झटका लगा ..

मैंने अपना पूरा जोर लगाया था अपनी आँखों को खोलने के लिए लेकिन नाकाम रहा था , सामने की हलकी हलकी सी तस्वीर मुझे दिखाई दे रही थी ,लेकिन सब कुछ धुंधला धुंधला सा hi था ,

“तेरे साथ हो सब करूँगा मेरी जान और एक एक कर सभी करेंगे लेकिन थोड़ा रुक तो जा ,इस सेल को बहुत hi गर्मी चढ़ी थी ना तो पहले उसे तो उतरने दे ,पानी डालो रे इसके ऊपर आंखे खुलवाओ इसकी इसके सामने hi इसकी छमिया की इजाजत उतारते है ..”

तभी मेरे ऊपर किसी ने थोड़ा पानी डाला मेरी आंखे थोड़ी और खुली , इंस्पेक्टर मेरे पास hi कड़ा हुआ था उसने अपने हाथो से मेरे मुँह को दबोच लिया था ..

“क्यों बे मादरचोद बहुत अकड़ थी न तेरे अंदर अब देख तेरा और इस आइटम का क्या हाल करता हु “

“रुक जा मादरचोद “ मेरे पास इतनी ताकत नहीं बची थी की मैं कुछ जोर से बोल पाटा ,मैंने धीरे से hi कहा

“अभी भी जान है सेल में “ वो इंस्पेक्टर हँसाने लगा ,

“कोई बात नहीं जान होनी चाहिए तभी तो ये सब देख पायेगा ..”

वो भाभी तक पहुंच चूका था ,भाभी के रोने की आवाज मेरे कानो में स्पष्ट थी ..

“प्लीज उसे छोड़ दीजिये उसे जाने दीजिये, आप जो बोलोगे मैं वो करुँगी ..”

वो फिर से गिड़गिड़ाई

“जाने दूंगा मेरी जान पहले तेरे मजे तो ले लू “

इंस्पेक्टर ने भाभी के स्तनों को मसलना शुरू कर दिया था ,मुझे बस भाभी के रोने की आवाज आने लगी ,दिमाग पूरी तरह से सुनी हो चूका था ,मैंने आंखे बंद कर ली और अपने आप से hi बाटे करने लगा

“क्या तुझे ऐसी नामर्दो वाली जिंदगी चाहिए ,क्या तेरी भाभी के साथ कोई कुछ करे उसे तकलीफ दे और तू यु hi आंखे बंद करके बैठा रहेगा ,क्या तू एक नामर्द है , क्या इसके बाद तू जी पायेगा … “

और इन सबका एक hi उत्तेर आया नहीं ..

मेरी आंखे झट से खुली सामने इंस्पेक्टर भाभी के जिस्म से साड़ी को हटा चूका था और पुरे हवस के आगोश में आकर उनके पेट पर अपना मुँह चला रहा था ..

मेरा दिमाग शांत हो चूका था एक बार मैंने भाभी के चेहरे को देखा , उनकी आँखों से दर्द साफ साफ झलक रहा था , वो बेचारी मेरी जान बचने के लिए चुप हो चुकी थी और अपने जिस्म का इस्तमाल करने की इजाजत दे चुकी थी , हमारे नजरे मिली उनकी आँखों में मेरे लिए अब भी वही प्यार था और उसी प्यार ने मेरे अंदर एक हिम्मत और ताकत का संचार कर दिया ,मैंने नजर घुमाई तो मुझे इंस्पेक्टर के कपडा एक और पड़े हुए दिखाई दिए , वही उसका रिवाल्वर भी रखा हुआ था , बाकि के लोग भाभी के जिस्म की नुमाइस का मजा उठा रहे थे यही समय था और मैं तुरंत hi उठा और पूरी ताकत लगा कर उस रिवाल्वर को पकड़ने के लिए झपटा ,बस जैसे पालक सी झपकी हो और मेरे हाथो में एक पिस्तौल थी इससे पहले कोई भी कुछ समझ पता मैंने दो गोलिया सीधे इंस्पेक्टर पर चला दी …

धाय धाय

गोलिया सीधे उसके माथे पर लगी और उसकी खोपड़ी hi खुल गई ,वो सीधे भाभी के ऊपर गिर गया ,भाभी का चेहरे में बस खून hi खून दिखाई देने लगा था ,उसके बाकि के साथी कोई हरकत करते उससे पहले hi मैंने अपनी बंदूख तान दी ..

“खबरदार अगर कोई हिला तो भून कर रख दूंगा “

सभी सकते में आ चुके थे ,लेकिन वो त्रिनेड लोग थे एक ने तुरंत अपनी पिस्तौल निकाली और तभी किसी ने उसे पीछे से उसके सर पर एक रोड दे मारा , वो कोई नहीं बल्कि कलवा hi था जो मेरे साथ आया हुआ था , उसने उसके हाथो से पिस्तौल ले ली और बाकियो पर तान दी ,

“तुम ये ठीक नहीं कर रहे हो कलवा , इसका साथ देकर तुम भी नहीं बचोगे , जानते हो न इंस्पेक्टर किसका आदमी था ,और पुलिस वाले को मरने के कारण ये तो जायेगा hi जायेगा लेकिन तुम भी इसके साथ जाओगे यद् रखना ..”

एक सिपाही चिल्लाया

“सब जानता हु की ये किस नेता का कुत्ता था और उसके hi डैम में उछलता था , लेकिन मादरचोद मैंने इसे पहले भी समझाया था की मजदूरों से पन्गा ना ले इस सेल ने मेरी बात नहीं सुनी .. सोनू “

कलवा ने मुझे एक इशारा किया और मैंने दो गोली और चला दी दोनों सिपाहियों को गोली लगी के के माथे पैर और दूसरे के साइन पर ,भाभी भी अब कड़ी हो चुकी थी लेकिन उनके आँखों में खौफ साफ साफ दिखाई दे रहा था , उनका प्यारा सोनू अब एक कातिल बन चूका था वो भी पुलिस वालो का ..

“अब तुम किसके साथ हो बे , पुलिस वाले के साथ मरोगे या फिर भागो गए “

कलवा ने वंहा आये बाकि के 3 लोगो से कहा

“कलवा भाई वो सब तो ठीक है लेकिन तुम जानते हो दया संकर तिवारी मंत्री है और ये इंस्पेक्टर पंड्या उसका खास आदमी था , पूरी ताकत लगा देगा इस लड़के को खोजने में और साथ में तुम भी पीस जाओगे ..”

“तू मेरी फ़िक्र मत कर बीटा तू अपनी फ़िक्र “

“भाई हम किसी को कुछ नहीं बताएँगे हमें जाने दो , हम भी तो हामिद के hi आदमी है तुम तो हमें पहचानते हो “

उनमे से एक ने कहा , कलवा थोड़ी देर के लिए सोच में पद गया और मुझे देखने लगा

“कलवा भाई अगर इन लोगो को छोड़ दिया तो ये तो जाकर सभी को बता देंगे “

मेरा दर भी स्वाभाविक था

“फ़िक्र मत कर ये लोग मुँह नहीं खोलेंगे ये हामिद के आदमी है और हामिद मेरा दोस्त है , लेकिन तुम लोग जाकर हामिद को ये बता देना की इंस्पेक्टर पाण्ड्य को किसने मारा है “

उसके होठो में एक अर्थपूर्ण मुस्कान खिल गई थी जिसे मैं समझ नहीं पा रहा था, वो लोग भागे , भाभी तब तक अपनी साड़ी पहन चुकी थी ..

“यंहा से जल्दी निकलना होगा और साथ hi ये इलाका भी छोड़ना होगा , खबर तुरंत फ़ैल जायेगी की तुमने पाण्ड्य को मारा है और फिर तुम्हारे लिए बच पाना आसान नहीं होगा ..”

कलवा की बात सुनकर भाभी की हालत ख़राब हो गई थी वही मेरे दिल में जरा भी दर नहीं था ..

“लेकिन कहा जायेंगे ??”

कलवा मुस्कुरा उठा

“अगर तिवारी से कोई बचा सकता है तो एक hi आदमी है यंहा के भगवन जीवा के गैंग का लेफ्ट हेड सम्पत ..”
 
अपडेट 8

कलवा मुझे और भाभी को सम्पत के पास ले गया, शहर से दूर एक वीरान सी जगह थी, लेकिन एक बड़ी सी हवेली थी, हमें एक कमरे में बैठने के लिए बोलकर कलवा कही चला गया …

“सोनू मेरे कारण तुझे कितनी मुसीबतो का सामना करना पड़ेगा रे, जी करता है की खुद को मार hi दालु “

भाभी की बात सुनकर मैं सकते में आ गया था

“खबरदार अगर ऐसा सोचा भी तो , आपको एक खरोच भी आये तो मेरी जान निकल जाती है और आप मरने की बात कर रही हो , अगर आपको कुछ हो गया तो सोचा है मेरा क्या होगा , मैं तो जीते जी hi मर जाऊंगा, आप मेरी भाभी माँ हो अब आंसू पोछो और एक मुस्कान मुझे दिखाओ .”

उन्होंने प्यार से मेरे गलो पर अपना हाथ फेरा..

“ये दुनिया जिस्म की भूखी है बीटा , यंहा लोग प्रेम का मतलब भी नहीं समझते , सभी को जिस्म की चाहत है भले hi वो प्यार से मिले या फिर छीन कर लिया जाए , तेरा भाई भी वैसा hi था , पता नहीं तू किस मिटटी का बना है जिसने मुझे प्रेम किया ना की मेरे जिस्म से “

वो बेहद hi इमोशनल हो गई hi , मैंने उनकी आँखों में देखा वो प्रेम का पूरा दरिया था , भीगी हुई आंखे रो रो कर लाल हो गई थी , चेहरे की रंगत भी उड़ गई थी लेकिन मजाल है की उनकी खूबसूरती में थोड़ी भी कमी आयी हो … वो चाँद की तरह थी अगर दाग भी लग जाए तो दाग hi सूंदर हो जाता है , चेहरे में लगे कुछ चोट के निशान भी वैसे hi सूंदर हो गए थे , उन छोटो से थोड़े थोड़े खून का रिसाव तो हो रहा था लेकिन वो वही जैम से गए थे , उनके ब्लाउज के कुछ भाग फैट चुके थे और साड़ी भी जल्दबाजी में पहनी गई थी ,इन सबके बावजूद वो मेरे लिए किसी देवी की तरह सूंदर थी और उनकी सुंदरता से उनका मातृत्व झलक रहा था उन्हें देखकर hi मेरे आँखों में आंसू आ गए लगा की अभी उनके पैरो में गिर जाओ उनके शरण में अपना पूरा जीवन बिता दू ..

वो मेरी आँखों में आये आंशुओ को अपने उंगली के सहारे से पोछने लगी ..

“अब तू क्यों रो रहा है ..”

इस बार उनके होठो में मुस्कान थी जैसे उन्हें पता हो की मेरे आँखों में आये हुए इस आंसू की वजह क्या है ,मैं भी बस हलके से मुस्कुरा गया….

तभी कमरे का गेट खुला और एक बड़े बड़े मूंछो वाला व्यक्ति वह दाखिल हुआ साथ hi कलवा भी था …

उसने एक बार मुझे देखा तो एक बार भाभी को ऊपर से निचे तक देखा और फिर कलवा को देखने लगा ..

उसके आँखों में कुछ ऐसा था जो मुझे समझ नहीं आ रहा था की आखिर बात क्या है ..

“तो लड़के तुमने मार दिया पाण्ड्य को “

“जी ..”

“सही किया, साला था hi हरामी, क्या नाम है तुम्हारा “

“जी सोनू “

“सोनू…?? नाम से hi बच्चा लग रहा है और काम बड़े बड़े , और तुम्हारा नाम? “

उसने भाभी की और देखा, भाभी थोड़ी सहम सी गई थी सम्पत का चेहरा था hi ऐसा खूंखार वो तो चेहरे से hi कोई छटा हुआ बदमाश लगता था ..

“आरती “

“आरती .. ः तभी वो पाण्ड्य तुम्हारी आरती उतरने ले गया था “

वो एक गन्दी सी हंसी हंसा, कलवा भी मुस्कुरा उठा लेकिन मेरे आँखों में आग आ गई थी, सम्पत ने मेरी आँखों को देखा ..

“सही कहता था तू कलवा इस सेल की आँखों में hi आग है.. ठीक है जब तक मामला शांत नहीं हो जाता तुम दोनों यही रहो और तुम लड़के अपना नाम बदल लो और मेरे गैंग में शामिल हो जाओ क्या है न मैं मुफ्त में किसी के लिए कुछ भी नहीं करता ..

मैंने सर हिलाकर हामी भरी..

“फ़िक्र मत कर मेरे रहते तुम दोनों को तिवारी तो क्या उसका बाप भी छू नहीं पायेगा …”

सम्पत एक दमदार आवाज में बोलै ..

“धन्यवाद भैया “

भाभी के मुँह से निकल गया जिसे सुनकर सम्पत के चेहरे में एक मुस्कान आ गई

“भैया नहीं मां, मां बोलना अब से तुम दोनों मुझे “

सम्पत की बात सुनकर हम दोनों hi एक दूसरे को देखने लगे ..

“जी मां ..”

“गुड चलो तुम दोनों का कमरा दिखा देता हु “

सच में वो एक बड़ी सी हवेली थी , मुझे और भाभी को लेकर सम्पत आगे आगे चल रहा था वही कलवा ने हमसे बीड़ा ले लिया था , हवेली के आगाँ में कई लोग बैठे हुए थे सभी के हाथो में बड़ी बड़ी बंधुखे थी और सभी की निगाहे मेरे और भाभी के ऊपर ,मुझे ये भी शक हो रहा था की कही भाभी को यंहा लेकर मैंने कोई गलती तो नहीं कर दी ..

खैर जो भी हो जब खाई में कूद hi गए है तो देखा जायेगा और जैसे सम्पत ने हमसे बात की और हमें मां बुलाने के लिए कहा उससे मुझे थोड़ी आत्मीयता की भी फेल्लिंग हुई ..

दूसरे मंजिल पर हमें आजु बाजु के दो कमरे दिखाए गए, दोनों कमरे हमारे झोपडी से बड़े थे

“तुम दोनों अपना कमरा साफ़ कर लेना, और कल से तुम ओउरतो के साथ काम करोगी और तुम मेरे साथ चलना तुम्हे थोड़ी ट्रेनिंग की जरुरत होगी ,और है नाम बदल लेना जिसे सुनकर लोग डरे ना की हंस दे ..”

वो बड़ी hi आत्मीयता से मुस्कुराया, ना hi मुझे और ना hi भाभी को कुछ समझ आ रहा था, सम्पत का हमारे लिए ये आत्मीय व्यवहार दोनों को hi समझ नहीं आ रहा था ..

हम अभी भाभी के कमरे में जाकर बैठे थे, सभी चीजे अपनी सही जगह पर राखी हुई थी , एक बिस्टेर लगा हुआ था एक इंसान के रहने के लिए बहुत जगह थी , उसी कमरे से सत्ता हुआ एक दूसरा दरवाजा भी था जो की मेरे कमरे की और खुलता था , मैं भी अपने कमरे में चला गया था दोनों दरवाजा बंद कर लेते थे भविष्य की छह में लेकिन मुझे अपने पास भाभी की कमी खाल रही थी ,वो झोपड़ी इतने छोटी थी की हमें एक दूसरे के पास रहने की आदत सी लग गई थी , मैंने दोनों कमरे के बिच के दरवाजे को खोल दिया , मैंने देखा की भाभी की आंखे बंद थी और वो अपने बिस्टेर में लेती हुई थी लेकिन उनके चेहरे से लग रहा था की वो किसी बहुत hi गहरे सोच में डूबी हुई है , मैं उनके पास जा कर बैठ गया ..

वो चौक गई

“तू कैसे अंदर आ गया “ उन्होंने देखा की उनके कमरे का दरवाजा अभी भी बंद था ..

मैंने मुस्कुराते हुए हमारे कमरे के बिच के दरवाजे की और इशारा किया , पता नहीं उन्हें क्या हुआ वो थोड़ा सा उठी और मेरे गले में अपनी बांहे डालकर झूल गई , इसका असर ये हुआ की मैं भी उनके साथ बिस्टेर में गिर गया , मैं उनके ऊपर था और वो मेरे निचे वो मुझे कास कर जकड़े हुए थी ..

“अरे भाभी ये क्या कर रही हो “

उनके ऐसा करने से तो मैं भी चौक गया था ,लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं कहा बल्कि मुझे अपने से और जोरो से सताने लगी ..

मैंने भी उनसे अलग होने के लिए कोई जोर नहीं दिया बल्कि बस उनके ऊपर hi लेता रहा , थोड़ी hi देर में उन्होंने अपना बंधन थोड़ा ढीला किया और प्यार से मेरे बालो को सहलाने लगी ,

मैंने अब अपना चेहरा थोड़ा ऊपर किया …

उनकी आँखों में आंसू के दो तीन कतरे थे जो उनके गलो से होते हुए लुढ़क रहे थे , मेरे होठ उनके उन आंसुओ को अपने अंदर सामने लगे थे , मैं हलके हलके उनके गलो पर अपने होठो को चला रहा था , उनका लाल चेहरा और भी खिल गया था , होठो में एक बड़ी सी मुस्कान खिल गई थी लेकिन अब भी आँखों से एक दो आंसू टपक hi जाते थे , उनके चेहरे मेरे लार और उनके आंसू से गिला हो रहा था , लेकिन इन सबमे मेरे अंदर एक उत्तेजना ने जन्म ले लिया , वो उत्तेजना थी और अधिक की कामना की उत्तेजना ..

मैं थोड़ा उत्तेजित होने लगा था , मेरे होठ प्रेम से आंसुओ को पिने की बजाय थोड़ा गलो को काट भी रहे थे , ऐसा लग रहा था की मैं इन गलो को खा hi जाओ , और मेरे अंदर क्या हो रहा था शायद भाभी ने उसे समझ लिया था उन्होंने मुझे खुद से अलग किया ..

“सोनू इतना अधीर होना सही नहीं है , ये तेरे अंदर के प्रेम को मार देगा और …”

वो चुप हो गयी और मैं उनके बातो को समझने की कोशिस करने लगा ..मेरी आंखे hi बोल रही थी की मुझे उनकी बाटे समझ नहीं आयी है ..

उन्होंने प्यार से मेरे बालो को सहलाया

“बीटा प्रेम अधीर नहीं होता वासना होती है , प्रेम में अधीरता वासना को जन्म दे सकती है “

मैं बुरी तरह से चौक गया था

“भाभी आप ये क्या कह रही हो मैंने कभी आपको गन्दी नजरो से नहीं देखा है “

“मुझे पता है सोनू, लेकिन जिस्म की वासना भी तो कुछ पाने की वासना से hi जन्म लेती है न , जैसे अभी तू मेरे गलो को काटने की िक्षा कर रहा था …”

उनकी बातो को सुनकर जैसे मुझे मेरी गलती का आभास हुआ ..

“मुझे माफ़ कर दो भाभी मैं …”

उन्होंने मेरे होठो पर अपनी उंगली रख दी

“मैं समझती हु तुझे खुद hi नहीं पता था की तू क्या कर रहा था , लेकिन अब तू जवान हो गया है बीटा अब तुझे एक गर्ल फ्रेंड की जरुरत है “

उनके होठो में के शरारती सी मुस्कान खिल गई

“क्या भाभी आप भी मेरी गफ तो एक hi है और वो हो आप ,मेरी बहन, मेरी माँ, मेरी भाभी और मेरी गफ भी सब कुछ आप hi हो “

भाभी के बुझे हुए चेहरे में अचानक से हंसी आ गई वो जोरो से हंस पड़ी ..

“चल बदमाश…”

“भाभी आपको ये सम्पत कैसा लगा ??”

मेरी बात सुनकर जैसे वो फिर से उसी मनोस्तिथि में पहुंच गयी जंहा वो पहले थी , उनका चेहरा फिर से गंभीर होने लगा था ..

“ये इतना बड़ा गुंडा होकर जिस तरह से हमारी मदद कर रहा है और जिस भाषा में हमसे बात कर रहा है वो सच में थोड़ा अजीब सा है .. “

मैंने भी सहमति में अपना सर हिलाया..

“सोनू अगर वो लोग तुझसे कोई गलत काम करवाए तो साफ़ मन कर देना बीटा , मैं नहीं चाहती की तू गलत राह पर चल पड़े जंहा से वापस आना hi मुश्किल हो जाए और तुझे अपना कॉलेज भी फिर से शुरू करना होगा शायद अलग नाम से तू कुछ बन जायेगा तो हम कही भी आराम से रह लेंगे..”

मैंने हां में सर हिलाया तभी मुझे यद् आया की सम्पत ने मुझे एक नया नाम सोचने के लिए कहा था..

“भाभी आप मेरे लिए एक नया नाम सोचो ..”

वो थोड़ी देर सोचने लगी

“ हम्म अंकित कैसा रहेगा ..”

मैं भी खुस हो गया

“वाह क्या बात है ऐसे अंकित hi क्यों..??”

“बस ऐसे hi मैं आरती और तू अंकित “

हम दोनों hi जोरो से हंस पड़े थे
 
अपडेट 9


“अंकित ???”

मैं सुबह सम्पत और उसके गिरोह के साथ खड़ा था

वो एक दूसरे को देखने लगे और फिर सभी एक साथ मिलकर जोरो से हंस पड़े …

मैं उन लोगो का चेहरा देखता रह गया

“अबे सेल तुझे गैंग का मेंबर बनना है न की कॉलेज में एडमिशन लेने जा रहा है .. कुछ ऐसा नाम रख जो की हमारे गैंग के हिसाब से सही लगे ..”

सभी का चेहरा सोचने वाला हो गया था

“भाई पप्पू हटेला कैसा रहेगा ..”

कोई एक बोलै, लेकिन सम्पत ने उसे घर कर देखा

“ये तेरे जैसा कोई चिन्दी नहीं है जो चिन्दी सा नाम दे रहा है , ये चमन चूतिये वाला नाम आपने गांड में घुसा ले ..”

सम्पत की बात सुनकर सभी हँसाने लगे और वो बोलने वाला भी बिना किसी शर्म के दन्त निकलने लगा ..

“साला क्या नाम रखे इसका ..”

सम्पत अपना सर खुजलाने लगा था

तभी हवेली के आँगन में बने हुए मंदिर का घंटा बजा..

मैंने देखा की भाभी शिव लिंग में पानी चढ़ा रही थी और आस्था से अपने आंखे बंद किये हुए थी…

शायद वो मेरे लिए hi कोई दुआ मांग रही थी , शायद मेरी सलामती के लिए या ये की मैं इस बुरे रस्ते में भी अपने को बचा कर राखु…

“शिवा ..”

मेरे मुख से अचानक hi निकल गया ..

सम्पत ने एक बार मंदिर की और देखा और उसके होठो में एक मुस्कान खिल गई ,

“वह ये हुई न बात तू आज से हमारा शिवा है , जो उस तिवारी की आईटी से आईटी बजा कर रख देगा , उस दानव को उसके कर्मो की सजा देगा ..

हर हर महादेव ..”

“हर हर महादेव …” सभी जोरो से चिल्ला पड़े थे ..

वही मेरी नजर भाभी पर पड़ी हम दोनों hi हैरत से सभी को देख रहे थे आखिर ये लोग मुझ जैसे बच्चे पर इतना क्यों भरोसा दिखा रहे थे ..???

दिन बिताते गए और भाभी वंहा की महिलाओ के साथ राम गई वही मुझे बड़ी hi कठिन ट्रेनिंग दी जा रही थी , 1 hi महीने में मैंने गन चलना सिख लिया था , मेरा निशाना भी बड़ा hi अच्छा था और साथ hi साथ मेरा शरीर भी अच्छा विकसित हो रहा था ,

मुझे समझ नहीं आ रहा था की आखिर ये सब क्यों, लेकिन ये हो रहा था …

एक दिन अचानक सम्पत ने मुझे बुलाया

“शिवा मैं सोच रहा था की तुम्हे कॉलेज ज्वाइन कर लेना चाहिए “

मैंने बड़े hi आश्चर्य से उसे देखा

“बात ऐसी है न की हमारे पुरे गैंग में कोई भी ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है , काम से काम तू पढ़ लिख लेगा तो हम तिवारी जैसे आदमी पर भरी पद जायेंगे …”

“लेकिन मां तिवारी से लड़ना hi क्यों है “

मां मुस्कुराने लगे

“समझ जायेगा तू फ़िक्र मत कर अभी कॉलेज जाने की तयारी कर ले और तूने जो नाम बताया था न उसी नाम से जायेगा तू कॉलेज “

“अंकित ??”

“है वही अंकित के नाम से जाना तू “

“लेकिन मेरे पास उससे रिलेटेड कोई भी डाक्यूमेंट्स नहीं है “

सम्पत जोरो से हंस पड़ा

“फ़िक्र मत कर सब एक सप्ताह में आ जायेगा, तेरा आधार कार्ड से ले कर स्कूल की साडी मार्कशीट तक सभी आ जायेगी..”

मैं बस उसे आंखे फाडे देखता रहा ,

ऐसे इस बात से भाभी बहुत hi खुस थी और दिल के किसी कोने में मैं भी , लेकिन फिर भी मुझे अब इस जीवन से भी प्यार होने लगा था , मैं सिर्फ भाभी और सम्पत के लिए कॉलेज जा रहा था क्योकि यंहा इतने दिन रहते हुए मेरे दिमाग में लोगो ने बस यही भरा था की मैं कोई स्पेशल आदमी हु जिसे कोई बहुत hi बड़ा जनहित का काम करना है …

 
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