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- Dec 5, 2013
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अब तक...
राहुल अपनी चारो बहनो से घिरा हुआ था. आज वो सभी उसकी ढाल बनकर उसकी रक्षा के लिए कड़ी हुई थी.
"यह! थिस फीलिंग! आईटी फीलस सो गुड तो बे लव्ड", राहुल ने शांत मैं से सामने सभी को देखा जिनकी आखें फटी की फटी थी और मुँह खुले के खुले.
अब आगे...
ललिता और मुकेश जो की अभी तक विराजमान थे, जब उनकी खुद की बेटी के मुँह से भी यही सुना, की वो भी राहुल से प्यार करती है वो दोनों भी एक झटके में अपनी जगह से उठ खड़े हुए और भौचक्के होते हुए तानिया को देखने लगे.
राजेश जिससे झटके पे झटके लग रहे थे, उससे आखिरी झटका इतना तेज़्ज़ लगा की वो लड़खड़ा कर सोफे पर गिर पड़ा. उससे विश्वाश hi नहीं हो रहा था की ये सब असल में घटित हो रहा है. निशा ये देख फौरन उसके पास आयी और कड़ी रही.
रुपेश जो की नेहा के अकस्माक विकराल रूप से थोड़ा शांत हुआ वो फिरसे आगे बढ़ने की कोशिश करने लगा पर तभी एक बार फिरसे नेहा की आवाज़ कमरे में गूँज गयी,
"खबरदार!!! जो भी बात करनी है, वही से कीजिये! मेरे भाई को कोई छियेगा भी नहीं"
रुपेश का गुस्सा बढ़ तोह रहा hi था पर उसने अपने आप को जैसे तैसे नियंत्रण में किया, "देखो नेहा! सामने से हट जाओ, मुझे अपनी दोनों बेटियों से बात करनी है. तुम्हारा इसमें कोई काम नहीं है, सामने से हट जाओ. वंशिका! सामने आओ!!"
रुपेश की दहाड़ सुनते hi वंशु जो राहुल के पीछे से उससे जकड़ी हुई थी वो और भी डर गयी और उसने राहुल को और कस के जकड लिया.
अभी रुपेश एक कदम और आगे बढ़ाता की तभी विनीता उसकी ब्याह पकड़ उससे रोक लेती है, "ृक्क जाइये!!!"
रुपेश : विनीता? तुम अभी बीच में मत आओ.
विनीता : मेने कहा न रुकिए...
विनीता के विरोध में रुपेश उससे सवालिया नज़रो से देखने लगता है,
विनीता : वो दर्री हुई है, क्या आपका गुस्सा आप पे इतना हावी हो गया है की आपको आपकी बेटी की नाज़ुक हालत तक दिखाई नहीं दे रही? क्या करेंगे आप यदि बेचारी का वो पुराना डर फिरसे शुरू हो गया? बड़ी मुश्किल से वो उस दलदल से बाहर निकली है. आप तोह ड्यूटी चले जाते थे, आपको क्या इतना डिटेल में पता भी है जितना मुझे पता है? मुझसे पूछिए! कैसे बेचारी कमरे में बंद रहती थी, हमेशा दर्री हुई. क्या आप चाहते है की वो फिरसे उसी दलदल में डूब जाए? बोलिये!?
रुपेश : wo...mein...
विनीता की बात सुन्न रुपेश के मुँह से कोई उत्तर नहीं निकलता. उससे भी एहसास हुआ की वो क्या करने जा रहा था. यदि आज उसकी ये हरकत से उसकी बेटी का वो पुराना डर फिरसे बैठ जाता तोह रुपेश अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाटा. अच्छा हुआ विनीता ने उससे जो रोक लिया. गुस्सा अपनी जगह है, पर अपनी बेटी को दुःख दर्द में देखना अपनी जगह. वो गुस्से के चलते, अपनी बेटी को दुःख दर्द में कभी नहीं देख सकता. वो भी अपनी पहली और सबसे बड़ी बच्ची को.
रुपेश शांत होक कुछ कदम पीछे लेते हुए विनीता के बगल से खड़ा हो जाता है.
इधर मुकेश और ललिता उनके बाद आगे बढ़ते है. मुकेश रुपेश की तरह गुस्से वाला व्यक्ति नहीं था. शुरू से hi उसका व्यवहार विनम्र और शांत प्रवत्ति का था. राहुल तोह उसका जैसे पसंदीदा मित्र था. तनीषा की पढ़ाई के लिए जब राहुल ने अपने हाथ फैलाये थे तोह मुकेश ने ख़ुशी ख़ुशी उसकी मदद की थी, राहुल ने भी सक्सेसफुल होते hi वो पैसे दुगुने भाव में लौटा भी दिए थे.
पर ये क्या? जिस राहुल पे उससे इतना भरोसा था वो ऐसा निकला?
आगे बढ़ते हुए मुकेश ने अपने हाथ खोल लिए, जैसे मानो भीख मांग रहा हो.
मुकेश : राहुल बीटा!? क्या यही फायदा उठाया तूने मेरा!? क्यों किया ये सब? हां? सब जानते हुए भी की ये कितना बड़ा पाप है, उसके बाद भी तुमने ऐसा किया? क्यों?? एक दिन तुम आए थे न मेरे पास? तनीषा की पढ़ाई के लिए मुझसे मदद मांगने? आज में यहाँ तुम्हारे सामने अपने हाथ फैलाये हुए हु बीटा... मुझे मेरी बच्ची लौटा दे, मत कर ऐसा कुछ भी जिसके चलते सारे समाज के सामने हम गिर जाए, मत कर ऐसा कुछ की सबके बीच हमारी ठु ठु हो जाए, में तेरे हाथ जोड़ता हु बीटा...
मुकेश को ऐसे देखते हुए राहुल को बोहत बुरा लगने लगा. वो कभी भी अपने मां को ऐसे नहीं देखना चाहता था. पर वो क्या करे अब? क्या वो मुकेश की विनती सुन्न कर तानिया को लौटा सकता है? नहीं! तानिया भी राहुल से प्यार करती है और राहुल भी तानिया से उतना hi प्यार करता है जितना वो बाकी सभी से करता है.
राहुल : मां जी...
"राहुल का इसमें कोई दोष नहीं है, आपको कुछ कहना है तोह मुझसे कहिये पापा. में hi थी जिसने राहुल को पहले प्रोपोज़ किया. में hi उसके प्यार में पहले पड़ी... तोह मुझसे बात kariye...jo भी करनी है", बगल में कड़ी तानिया ने फौरन hi राहुल के आगे बढ़ते हुए सवालों का प्रहार अपने सर ले लिया.
मुकेश : तानिया!? तू जानती है न तू क्या कह रही है? देखो बीटा! में फ़ालतू का गुस्सा कर के मामला नई बिगाड़ना चाहता, गुस्से से कुछ भी हासिल नहीं होता. इसलिए शान्ति से कह रहा हु, मेरी बात मानो और अभी के अभी चलो यहाँ से बीटा
तानिया : नहीं पापा! प्यार तोह प्यार है. यदि मुझे राहुल से हो गया तोह इसमें क्या बुराई है?
मुकेश : तानिया तुम दोनों भाई बहिन हो. ये घनघोर पाप है. तुम राखी बांधती हो उससे, अब इस से पहले की में भी भाई साहब की तरह गुस्से में आके कुछ अनर्थ कर दू, चल दो हमारे साथ
तानिया : मम्मी!! पापा!! में कही नहीं जाने वाली. में राहुल से hi प्यार करती हु. और... और आप चाहे जो करले, मेरा फैसला नहीं बदलेगा...
मुकेश : तनियाआ...
ललिता : क्यों बीटा? क्यों?? क्यों किया तूने ऐसा? देख! तेरे माँ बाप को कितनी तकलीफ हो रही है. अभी भी समय है बीटा, मान बात और चल हमारे साथ और भूल जा ये सब.
तानिया : नहीं मम्मी! आप समझ नहीं रही है मेरा प्यार ऐसा वैसा नहीं है. मेने अपने आप को पूरा समर्पित कर दिया है राहुल को. में उस से बोहत ज़्यादा प्यार करती हु मम्मी. और क्या बुराई क्या है राहुल में? क्या में उसकी कजिन हु केवल इसलिए में उस से प्यार नहीं कर सकती?
ललिता : हां! तू उसकी बहिन है और इसलिए तू उस से प्यार नहीं कर सकती
तानिया : क्यों नहीं कर सकती??
ललिता : क्युकी ये समाज के खिलाफ है और...
तानिया : तोह भाड़ में गया ये समाज. मुझे क्या लेना देना समाज से? मुझे तोह केवल मेरे प्यार से लेना देना है. सिर्फ वही चाहिए मुझे. और यदि समाज बीच में आया तोह में उस समाज को अपने रास्ते से हटा दूंगी...
ललिता : तानिया...
नेहा : मां जी! ममी जी! शायद आप अब भी समझ नहीं रहे है. हमने आपको यहाँ ये राज़ बताने के लिए बुलाया न की आपको फैसला लेने के लिए...
ललिता : नेहा तुम...
नेहा : में एक बार फिरसे स्पष्ट तरीके से समझात हु. ममी जी! आप बताइये आप मां जी से प्यार क्यों करती है?
ललिता : हँ?
नेहा : आपकी अरेंज्ड मैरिज हुई पर उसके बाद भी आप दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे, क्यों??
ललिता : kyuki...kyuki इन्होने मेरा बोहत ख़याल रखा, हर्र बुरे वक़्त में मेरा साथ दिया, हर्र ख्वाइश पूरी की, इसलिए...
नेहा : एक्साक्ट्ली! भाई ने भी यही किया है हमारे साथ. सच कहु, तोह मुझे भाई से बचपन से hi प्यार था पर मुझे उस वक़्त पता नहीं था की ये प्यार है. में तोह बस वो सब करती थी जो मेरे मैं में आता था. भाई के साथ चिपकी रहती थी बस. फिर धीरे धीरे मुझे रीलीज़ हुआ की ये तोह प्यार है और मेने अपनी फीलिंग्स भाई के सामने रख दी...
ललिता : बीटा पर ये गलत है. निशा तुम समझाती क्यों नहीं अपनी लड़की को...!?
निशा सर झुकाए बस कड़ी रहती है पर उससे पता था की अब उससे सन में आने hi पड़ेगा वर्ण ऐसा न हो की प्लान बिगड़ जाए,
"भाभी! आप सभी को सचाई पता चलने से पहले ये साड़ी सच्चाई मुझे पता चला थी और जहा तक में समझ पायी हु, बेहतर यही है की बच्चो को अपनी मैं की करनी दी जाए"
ललिता : निशाआअ!???
राजेश : निशा?? ये क्या कह रही हो तुम? इतनी बड़ी बात हो गयी और तुमने मुझे बताया तक नहीं? ये सब क्या हो रहा है घर में? हमारे बच्चे आपस में भाई बहिन होते हुए प्यार करने लग गए? बाहर किसी को खबर होगी तोह क्या मुँह दिखाएंगे हम? क्या जवाब देंगे?
नेहा : समाज! समाज! समाज!... बस इसी का डर है न आप सबको? अंत में आप सब भी समाज के नौकर hi निकले... क्या ज़रूरी है आप सब के लिए? समाज या अपने बच्चो की ख़ुशी?? क्या ये समाज आया है कभी आपकी मदद करने? जब आप परेशानी में रहते हो तोह क्या समाज आता है आपसे पूछने की आप को कोई परेशानी तोह नहीं? कोण मदद करता है मुश्किल में आप सबकी? कितनी बार मेरे भाई ने आप सबकी मदद की है?? वो समाज जो आपको केवल मौका मिलते hi बुरा भला कहने लगे उस समाज की फिक्र कर रहे है आप? केवल आपको उठने बैठने मिले समाज में इसलिए आप अपनी बच्चो की ख़ुशी तक छीनने के लिए तैयार हो गए? प्यार तोह किसी से भी हो सकता है न? तोह समाज ने कह दिया की भाई बहिन में प्यार नहीं होता तोह आप सब मान लिए? कल को समाज कहेगा अपनी बीवी को तलाक देके दूसरी शादी कर लो तोह क्या आप वो भी करेंगे? बोलिये???
नेहा की ुचि आवाज़ सुनते hi सभी एकदम शांत पद गए. उसका हर्र एक प्रश्न ऐसा था जिसका जवाब देना मुश्किल था.
ललिता : बेटा... तुम...
नेहा : मेरे सवाल का उत्तर दीजिये ममी...
राजेश : neha...beta ये गलत है...
नेहा जैसे इस मौके का इंतज़ार hi कर रही थी, राजेश के बोलते hi उसने फौरन राजेश पे निशाना साध दिया,
"ओह्ह्ह!! में सोच hi रही थी की आप जबसे क्यों चुप है? कुछ बोल क्यों नहीं रहे है...
आपको ये गलत लग रहा है?? आप सब सुन्न रहे हो न? इन्हे ये गलत लग रहा है... इन्हे तब गलत नहीं लगा था, जब इनके मुँह से ये निकला था की काश नेहा पैदा नहीं हुई होती... तब इन्हे गलत नहीं लगा था... जब मेरे भाई ने सारा इलज़ाम अपने सर्र ले लिया और हमेशा मेरा क्रूर व्यवहार सेहत रहा, तब इन्हे ये गलत नहीं लगा... जिस भाई ने मुझे सच्चाई से दूर रखा ताकि में अपने माँ बाप न खो दू उस भाई के लिए किसी ने भी नहीं सोचा की वो केसा है, उसके दिल में क्या है, तब किसी को कुछ गलत नहीं लगा...
जब मुझे सचाई पता चली की जिस भाई से में नफरत कर रही हु वही है जो मेरी हर्र ख़ुशी के लिए अपने आप को दर्द देता जा रहा है तोह ऐसी कोण सी बहिन होगी जिसके अंदर अपने भाई के लिए प्यार नहीं उमड़ेगा?? बोलिये?? और अब जब में फाइनली अपने भाई के साथ प्यार कर सकती हु तब अचानक से मेरे पिता जी और बाकी घरवाले आ जाते है और कहने लगते है ये गलत है... तोह में पूछती हु... कहा थे आप सब जब ये सब हो रहा था?? कहा थे आप सब जब मेरा भाई साड़ी ज़िम्मेदारिया ले रहा था?? बोलिये...
और एक बार फिर सभी के नज़रे नीचे झुक गयी. हो न हो, उन्हें अपनी गलती का एहसास हो रहा था.
ललिता : बीटा पर... हमे खुद तुम्हारी सच्चाई नहीं पता थी... निशा ने मन कर के रखा था ki...samay आने पर सब पता चल जाएगा
नेहा : और आपने मान लिया? ज़रा सा भी प्रयास नहीं किया की कैसे भी करके सच्चाई का पता लग सके?
ललिता : प्रयास किया था बीटा... बोहत प्रयास किया पर... निशा ने नहीं बताया...
नेहा : में वो सब कुछ नहीं जानती. केवल इतना जानती हु की... में और मेरी दिदिया मेरे भाई से प्यार करती है और कुछ नहीं. और आप सभी को ये बता रही हु, आप से निवेदन नहीं कर रही हु...
रुपेश कुछ देरर सब कुछ सोचता है और साइड में सोफे पर विराजमान हो जाता है. राजेश तोह नेहा के तीखे बोल सुन्न के पूरा ग्लानि से भर चूका था और सर झुकाए बस उदास बैठा हुआ था.
मुकेश : देखो बीटा राहुल! तुम भी जानते हो ये सब गलत है... तुम जानते हो की हम सब समाज में ये सब नहीं दिखा सकते, सभी का उठना बैठना है, यदि तुम सब के लिए हम राज़ी हो भी जाते है पर समाज से कैसे छुपाएंगे? ये सरासर गलत है बीटा. तुम तानिया को समझाओ... .
राहुल : मां जी! ऐसा पहली बार हो रहा है जब मुझे आपको निराश करना पड़ेगा. क्युकी.. में तानिया से प्यार करता हु और वो भी मुझसे करती है... पर... में आपकी समस्या को सुलझा सकता हु...
मुकेश : क्या मतलब ??
राहुल : बड़े पापा आपका क्या फैसला है? क्या आप राज़ी है? वंशु और अंशु को मुझे सौपने के लिए...
रुपेश : में तोह कुछ कहने लायक hi नहीं बचा... गुस्सा नहीं कर सकता, क्युकी ये दो फूल मेरी जान है. किसी को भी दुःख में नहीं देख सकता पर समाज के खिलाफ जाके ये सब करना ये बोहत बड़ा पाप है, अनर्थ है ...
विनीता... कुछ कहो... आज में कमज़ोर पद गया हु... क्या कहु में... इन्होने मुझे ऐसी स्थिति पर लाके चोरर दिया है जहा एक तरफ खायी है तोह दूसरी तरफ कुआ... जाऊ तोह जाऊ कहा?
विनीता : क्या में एक बात कहु?
विनीता ने अपनी नम्म आँखों से रुपेश को देखते हुए कहा,
रुपेश : कहो विनीता
विनीता : में सिर्फ इतना चाहती हु, की मेरी दोनों बच्चिया खुश रहे और कुछ नहीं! किसके लिए हमने ये सब कमाया है? किसके लिए हम दिन रात प्रार्थना करते है? सब कुछ हमारे बच्चो के लिए hi तोह है
रुपेश : तोह तुम्हारा कहना ये है की हम राज़ी दे दे?
विनीता : हम्म्म
रुपेश : पर ऐसे कैसे विनीता? तुम...
राहुल : क्या आप समाज के लिए चिंतित है? क्या आप ऐसा चाहते है की बाहर किसी को भी ये पता न चले?
रुपेश : क्यों? क्या ये मुमकिन है?
राहुल : बिलकुल है! उसी के लिए तोह में हु यहाँ पर... तोह आप सब यही चाहते है न की समाज को इस बात की कानो कान खबर न हो?
विनीता : हम्म्म
राहुल : उसका हल है मेरे पास
ललिता : केसा हल?
राहुल : ऋचा!!! मेरी शादी ऋचा से होएगी. और उसके बाद इन् सभी से...
रुपेश : ye...ye क्या बकवास है?
राहुल : समझाता हु. बैठिये! ऋचा मुझसे प्यार करती है और में उस से. हमारी शादी श्री लंका में होएगी. क्युकी... वह पॉलीगम्य अल्लोवेद है. मतलब सरल भाषा में, एक से ज़्यादा पत्नी रखना अल्लोवेद है. अब समाज के सामने मेरी शादी हो चुकी है और पत्नी है ऋचा. उसके बाद में इन् सब से वही शादी करूँगा, न hi किसी को कुछ पता चलेगा और न hi कोई दिक्कत आएगी, क्युकी श्री लंका की सिटीजनशिप है हमारे पास. तोह में एक से ज़्यादा पत्नी रख सकता हु. ऐसा करने से, ना hi आपको कोई तकलीफ होगी और न hi हमको... आप तोह यही चाहते है न? की आपके बच्चे खुश रहे? घर की बात घर में hi रहेगी... आप मुझपर पूरा भरोसा करिये... किसी को भी दुःख नहीं पोहुंचाउंगा और किसी पे भी आंच तक नहीं आने दूंगा... हमेशा खुश रखूँगा. इसलिए आप सभी से आपकी बेटियों का हाथ मांगता हु आज में...
राहुल की बात ख़तम होते hi बाकी सब उससे ऐसे देख रहे थे जैसे ज़ू में कोई अजीब जानवर आया हो. क्या बाके जा रहा है ये? पर जो भी था, राहुल की तरफ से अत्यंत सच था. यही उसने प्लान करके रखा था.
हॉल के साइड में ऊपर जाती सीडिया के पास बाकी चारो लड़किया झांक के सब कुछ सुन्न रही थी. ये थी मोनिका, तनीषा, प्रीती और ख़ुशी...
प्रीती से रहा नहीं गया और वो ज़िद्द करके सबको अपनी बातो में फसा के नीचे ले आयी. हालांकि मोनिका और तनीषा ने मन किया था पर बाद में वो दोनों भी उसकी चिकनी चुपड़ी बातो में फस्स गयी, क्युकी जिज्ञासा तोह उन्हें भी थी.
प्रीती : तोह ये है राहुल का प्लान??
तनीषा : हम्म्म्म
मोनिका : मुझे तोह अभी भी बोहत गुस्सा आ रहा है... राहुल को थप्पड़ कैसे मारा...
ख़ुशी : ी... ी रियली लिखे नेहा... शी हांडलेड आईटी सो वेल...
मोनिका : हम्म? हां! उसने बोलती hi बंद करदी सबकी...
तनीषा : आखिर बहिन किसकी है?
मोनिका : हहै! मेरे राहुल की...
तनीषा : हमारे राहुल की... न की मेरे...
मोनिका : ughhh...okay!
रुपेश : ये सब क्या है? ये ऋचा बीच में कहा से आ गयी?
ललिता : राहुल! में समझ गयी हु तुम क्या कहना चाह रहे हो पर क्या ऋचा इस सब के लिए राज़ी होगी?
ऋचा : j..jii! में राज़ी हु. मुझे कोई दिक्कत नहीं हु. Infact...I... I'll बे हैप्पी. ी लव हिम.
ऋचा की बात सुनकर किसी को विश्वाश hi नहीं हो रहा था की कोई लड़की इतना सब जान ने के बाद भी राहुल से प्यार कर सकती है..
विनीता : ऐसी कोण सी जड़ीबूटी खिलाई हो राहुल तूने इन् सबको? ज़रा मुझे भी तोह बता में भी इन्हे 2-4 खिला दू...
अंशु : कोई जड़ी बूटी नहीं है मम्मी! यदि भाई जैसा आपका भाई हो तोह प्यार तोह होना hi है.
विनीता : मेरी लड़किया... आज यहाँ तक आ गयी की मुझे समझाने लगी है...
ठीक है! मेरे और इनकी तरफ से हां है बीटा. अब कुछ किया भी नहीं जा सकता है, बेहतर है की हम तुम्हारे हिसाब से hi चले, काम से काम मेरी दोनों बच्चिया तोह खुश रहेंगी...
ललिता : मेरी और इनकी तरफ से भी हां है... अब ऐसे मोड़ पे आ गए है जहा से वापस नहीं जाय जा सकता. और... सही कहा... बच्चो की ख़ुशी पहले है... यदि इसी में तुम्हारी ख़ुशी है तोह... हमे अपने ऐतराज़ को बीच में नहीं लाएंगे... खुश रहो तुम सब!
तानिया (रट हुए) : थैंक यू माँ... थैंक यू सो मच... आप बिलकुल चिंता मत कीजिये, में राहुल के साथ बोहत खुश रहूंगी...
निशा : आप को कुछ कहना है क्या?
राजेश : क्या कहु निशा? सही hi तोह कहा नेहा ने... में उसका गुनेहगार हु... मेरा क्या हक़ है उस से उसकी ख़ुशी छीन ने का...
निशा : आप उसके पिता है...
राजेश : वो pita...jo अपनी बच्ची का जन्म नहीं चाहता था...
निशा : आप नशे में थे...
राजेश : नशे में आदमी सच बोलता है न!?
निशा : आपको बहकाया गया था... और फिर आप नशे में थे... जिसका परिणाम वो ना चाहने वाले शब्द आपके मुँह से निकले
राजेश : हां तोह गलती तोह मेरी hi है न...
निशा : हां! पर इतनी भी नहीं... की... आप अभी तक उस बात के लिए भुगते...
राहुल : गुड़िया... डैड की गलती थी... पर... उनको बहकाया गया था... उनके एक फ्रेंड ने... वो सब बाते उनके मैं में दाल दी थी और उन्हें शराब पिलवाई थी... जिसके चलते... उस रात वो सब गलती से हो गया...
नेहा : ......
राहुल : डैड?? क्या आपकी इजाज़त है हमे? क्या आप राज़ी है???
राजेश : में... क्या कहु!? कुछ कहने लायक नहीं हु... जहा भी रहो तुम सब... खुश रहो... मेरी नेहा को खुश रखना... मुझसे गलती हुई है... मुझे उसके लिए माफ़ी नहीं माँगना क्युकी में माफ़ी के क़ाबिल नहीं हु...
राहुल पीछे से नेहा के पीठ पर हल्का धक्का देता है और उससे राजेश के पास जाने के लिए कहता है. नेहा भी धीरे धीरे आगे बढ़ती है और एकदम पास में जाके कड़ी हो जाती है.
अपने पिता के ासु देख उसके दिल पसीज जाता है और वो गले से लग जाती है. राजेश जो की अपनी बेटी को बाहो में लेते hi जैसे उसका बाँध टूट गया और वो रोने लगा.
बगल में कड़ी निशा भी रोने लगी, आज इस मौके पर आखिर कार दोनों बाप बेटी का मिलान हो hi गया और सब कुछ सुलझ गया...
राजेश : में तेरा दोषी हु बीटा...
नेहा : न्यू... में भी गलत थी... आपने कभी भी मुझ पर हाथ तक नहीं उठाया बूत मेने हमेशा आप से बुरा व्यवहार किया, आपसे बात भी नहीं की...
निशा : अब तोह तुम समझ गयी न बेटी? वो सब गलती थी एक... जिसकी सजा तुम्हारे डैड को मिल गयी. तोह अब तोह तुम नाराज़ नहीं हो न?
नेहा : न्यू माँ! I'm हैप्पी!
निशा : देखा आप सबने!? मेने कहा था न, बच्चे बड़े हो गए है. वो जो कर रहे है उन्हें करने दीजिये. आज इसी ख़ुशी के मौके पर क्यों न हम इनकी ख़ुशी में शामिल होक इन्हे प्रोत्साहन दे? बड़े होने के नाते हमारा तोह ये कर्त्तव्य है की हम रिश्तो को टूटने से बचाये और वैसे भी... बेतु हम सब को ध्यान में रख कर hi ये सब कर रहा है ताकि घर की बात घर में hi रहे...
ललिता : निशा की बात सही है. बच्चे है तोह हम है. उनकी खुशिया छीन के क्या हम खुश रह पाएंगे? नहीं न...
विनीता : हां! मेरे ख्याल से... राहुल से बेहतर मेरी बच्ची के लिए कोई नहीं है. क्युकी राहुल ने hi उसका फोबिया ठीक किया था, राहुल के पास hi मेरी बच्ची सबसे ज़्यादा सेफ फील करेगी...
ललिता : हां! और ऋचा बेटी... हम सबकी तरफ से तुम्हे बोहत बोहत धन्यवाद्!! तुम्हारा ये उपकार हम कभी नहीं भूलेंगे... इतना सब जानते हुए भी तुम राहुल से शादी के लिए तैयार हो गयी...
ऋचा : नहीं आंटी... इनफैक्ट I'm लकी... की में राहुल की पत्नी बन्न पा रही हु
ललिता ये सुन्न राहुल को आश्चर्य जनक भाव से देखने लगती है. राहुल? क्या खिला के लाया है तू इससे?
राहुल : जो भी अन्न बन्न हुई, उसके बारे में सोचना बंद कर दीजिये. वो तोह होना hi था. मामला hi ऐसा था. पर... अब सब कुछ ठीक है, सभी की आज्ञा भी मिल गयी है, तोह अब हम सभी को आशीर्वाद दीजिये ताकि हम सभी जल्द से जल्द ये सब कर सके...
उसके बाद सभी ने थोड़ी देरर यही बातें करि, जैसे जैसे समय बीता, सभी के मैं ने ये बात को अपनाना शुरू कर दिया. और सभी वापस पहले की तरह घुलने मिलने लगे.
ऋचा : umm...toh? आगे क्या करना है?
राहुल : ऑफ़ कोर्स तुम्हारे घर जाना है मेरी रीचु... तुम्हारा हाथ मांगने...
ऋचा (ब्लश) : हम्म्म...
और राहुल आगे बढ़कर ऋचा के मीठे होंठ अपने होंठो में भर लेता है की तभी...
"बोहत हो गयी किश इस चलिए हटिये", नेहा आके एकदम से दोनों को अलग कर देती है...
ऋचा (ब्लश) : नेहा! थिस इस रॉंग...
नेहा : सॉरी ऋचा दी! बूत मुझे भाई से बात करनी है कुछ...
ऋचा : अरे पर...
नेहा : बाद में, बाद में... जाइये बाहर मेरे रूम में, बाकी सभी वही पर है...
और नेहा ऋचा को धकेलते हुए धीरे धीरे कमरे के बाहर कर देती है और कमरा अंदर से लॉक करके दरवाज़े पर पीठ टिका के राहुल को देखने लगती है,
राहुल : गुड़िया?
नेहा : don't यू थिंक भाई... ी डेसेर्वे ा क्रेडिट? मतलब मेने इतना कुछ कहा नीचे... तोह कुछ रिवॉर्ड तोह बनता है न?
राहुल : हम्म? हां रिवॉर्ड तोह बनता है. बोलो? क्या चाहिए मेरी गुड़िया को?
नेहा आगे आकर राहुल के गले में अपने हाथ डालती है और उसके कान के पास आकर नशीली सी आवाज़ में कहती है,
"आप"
और अगले hi पल नेहा राहुल के होंठ अपने मुँह में भर लेती है.
दोनों hi एक मीठी सी किश में डूब जाते है.
आज भले hi मामला ऊपर नीचे हुआ पर अंत में सब कुछ सुलझ गया. पर क्या अब आगे भी सही जाएगा या कोई परेशानी कड़ी होएगी? ये तोह वक़्त hi जाने.
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद्!!
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राहुल अपनी चारो बहनो से घिरा हुआ था. आज वो सभी उसकी ढाल बनकर उसकी रक्षा के लिए कड़ी हुई थी.
"यह! थिस फीलिंग! आईटी फीलस सो गुड तो बे लव्ड", राहुल ने शांत मैं से सामने सभी को देखा जिनकी आखें फटी की फटी थी और मुँह खुले के खुले.
अब आगे...
ललिता और मुकेश जो की अभी तक विराजमान थे, जब उनकी खुद की बेटी के मुँह से भी यही सुना, की वो भी राहुल से प्यार करती है वो दोनों भी एक झटके में अपनी जगह से उठ खड़े हुए और भौचक्के होते हुए तानिया को देखने लगे.
राजेश जिससे झटके पे झटके लग रहे थे, उससे आखिरी झटका इतना तेज़्ज़ लगा की वो लड़खड़ा कर सोफे पर गिर पड़ा. उससे विश्वाश hi नहीं हो रहा था की ये सब असल में घटित हो रहा है. निशा ये देख फौरन उसके पास आयी और कड़ी रही.
रुपेश जो की नेहा के अकस्माक विकराल रूप से थोड़ा शांत हुआ वो फिरसे आगे बढ़ने की कोशिश करने लगा पर तभी एक बार फिरसे नेहा की आवाज़ कमरे में गूँज गयी,
"खबरदार!!! जो भी बात करनी है, वही से कीजिये! मेरे भाई को कोई छियेगा भी नहीं"
रुपेश का गुस्सा बढ़ तोह रहा hi था पर उसने अपने आप को जैसे तैसे नियंत्रण में किया, "देखो नेहा! सामने से हट जाओ, मुझे अपनी दोनों बेटियों से बात करनी है. तुम्हारा इसमें कोई काम नहीं है, सामने से हट जाओ. वंशिका! सामने आओ!!"
रुपेश की दहाड़ सुनते hi वंशु जो राहुल के पीछे से उससे जकड़ी हुई थी वो और भी डर गयी और उसने राहुल को और कस के जकड लिया.
अभी रुपेश एक कदम और आगे बढ़ाता की तभी विनीता उसकी ब्याह पकड़ उससे रोक लेती है, "ृक्क जाइये!!!"
रुपेश : विनीता? तुम अभी बीच में मत आओ.
विनीता : मेने कहा न रुकिए...
विनीता के विरोध में रुपेश उससे सवालिया नज़रो से देखने लगता है,
विनीता : वो दर्री हुई है, क्या आपका गुस्सा आप पे इतना हावी हो गया है की आपको आपकी बेटी की नाज़ुक हालत तक दिखाई नहीं दे रही? क्या करेंगे आप यदि बेचारी का वो पुराना डर फिरसे शुरू हो गया? बड़ी मुश्किल से वो उस दलदल से बाहर निकली है. आप तोह ड्यूटी चले जाते थे, आपको क्या इतना डिटेल में पता भी है जितना मुझे पता है? मुझसे पूछिए! कैसे बेचारी कमरे में बंद रहती थी, हमेशा दर्री हुई. क्या आप चाहते है की वो फिरसे उसी दलदल में डूब जाए? बोलिये!?
रुपेश : wo...mein...
विनीता की बात सुन्न रुपेश के मुँह से कोई उत्तर नहीं निकलता. उससे भी एहसास हुआ की वो क्या करने जा रहा था. यदि आज उसकी ये हरकत से उसकी बेटी का वो पुराना डर फिरसे बैठ जाता तोह रुपेश अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाटा. अच्छा हुआ विनीता ने उससे जो रोक लिया. गुस्सा अपनी जगह है, पर अपनी बेटी को दुःख दर्द में देखना अपनी जगह. वो गुस्से के चलते, अपनी बेटी को दुःख दर्द में कभी नहीं देख सकता. वो भी अपनी पहली और सबसे बड़ी बच्ची को.
रुपेश शांत होक कुछ कदम पीछे लेते हुए विनीता के बगल से खड़ा हो जाता है.
इधर मुकेश और ललिता उनके बाद आगे बढ़ते है. मुकेश रुपेश की तरह गुस्से वाला व्यक्ति नहीं था. शुरू से hi उसका व्यवहार विनम्र और शांत प्रवत्ति का था. राहुल तोह उसका जैसे पसंदीदा मित्र था. तनीषा की पढ़ाई के लिए जब राहुल ने अपने हाथ फैलाये थे तोह मुकेश ने ख़ुशी ख़ुशी उसकी मदद की थी, राहुल ने भी सक्सेसफुल होते hi वो पैसे दुगुने भाव में लौटा भी दिए थे.
पर ये क्या? जिस राहुल पे उससे इतना भरोसा था वो ऐसा निकला?
आगे बढ़ते हुए मुकेश ने अपने हाथ खोल लिए, जैसे मानो भीख मांग रहा हो.
मुकेश : राहुल बीटा!? क्या यही फायदा उठाया तूने मेरा!? क्यों किया ये सब? हां? सब जानते हुए भी की ये कितना बड़ा पाप है, उसके बाद भी तुमने ऐसा किया? क्यों?? एक दिन तुम आए थे न मेरे पास? तनीषा की पढ़ाई के लिए मुझसे मदद मांगने? आज में यहाँ तुम्हारे सामने अपने हाथ फैलाये हुए हु बीटा... मुझे मेरी बच्ची लौटा दे, मत कर ऐसा कुछ भी जिसके चलते सारे समाज के सामने हम गिर जाए, मत कर ऐसा कुछ की सबके बीच हमारी ठु ठु हो जाए, में तेरे हाथ जोड़ता हु बीटा...
मुकेश को ऐसे देखते हुए राहुल को बोहत बुरा लगने लगा. वो कभी भी अपने मां को ऐसे नहीं देखना चाहता था. पर वो क्या करे अब? क्या वो मुकेश की विनती सुन्न कर तानिया को लौटा सकता है? नहीं! तानिया भी राहुल से प्यार करती है और राहुल भी तानिया से उतना hi प्यार करता है जितना वो बाकी सभी से करता है.
राहुल : मां जी...
"राहुल का इसमें कोई दोष नहीं है, आपको कुछ कहना है तोह मुझसे कहिये पापा. में hi थी जिसने राहुल को पहले प्रोपोज़ किया. में hi उसके प्यार में पहले पड़ी... तोह मुझसे बात kariye...jo भी करनी है", बगल में कड़ी तानिया ने फौरन hi राहुल के आगे बढ़ते हुए सवालों का प्रहार अपने सर ले लिया.
मुकेश : तानिया!? तू जानती है न तू क्या कह रही है? देखो बीटा! में फ़ालतू का गुस्सा कर के मामला नई बिगाड़ना चाहता, गुस्से से कुछ भी हासिल नहीं होता. इसलिए शान्ति से कह रहा हु, मेरी बात मानो और अभी के अभी चलो यहाँ से बीटा
तानिया : नहीं पापा! प्यार तोह प्यार है. यदि मुझे राहुल से हो गया तोह इसमें क्या बुराई है?
मुकेश : तानिया तुम दोनों भाई बहिन हो. ये घनघोर पाप है. तुम राखी बांधती हो उससे, अब इस से पहले की में भी भाई साहब की तरह गुस्से में आके कुछ अनर्थ कर दू, चल दो हमारे साथ
तानिया : मम्मी!! पापा!! में कही नहीं जाने वाली. में राहुल से hi प्यार करती हु. और... और आप चाहे जो करले, मेरा फैसला नहीं बदलेगा...
मुकेश : तनियाआ...
ललिता : क्यों बीटा? क्यों?? क्यों किया तूने ऐसा? देख! तेरे माँ बाप को कितनी तकलीफ हो रही है. अभी भी समय है बीटा, मान बात और चल हमारे साथ और भूल जा ये सब.
तानिया : नहीं मम्मी! आप समझ नहीं रही है मेरा प्यार ऐसा वैसा नहीं है. मेने अपने आप को पूरा समर्पित कर दिया है राहुल को. में उस से बोहत ज़्यादा प्यार करती हु मम्मी. और क्या बुराई क्या है राहुल में? क्या में उसकी कजिन हु केवल इसलिए में उस से प्यार नहीं कर सकती?
ललिता : हां! तू उसकी बहिन है और इसलिए तू उस से प्यार नहीं कर सकती
तानिया : क्यों नहीं कर सकती??
ललिता : क्युकी ये समाज के खिलाफ है और...
तानिया : तोह भाड़ में गया ये समाज. मुझे क्या लेना देना समाज से? मुझे तोह केवल मेरे प्यार से लेना देना है. सिर्फ वही चाहिए मुझे. और यदि समाज बीच में आया तोह में उस समाज को अपने रास्ते से हटा दूंगी...
ललिता : तानिया...
नेहा : मां जी! ममी जी! शायद आप अब भी समझ नहीं रहे है. हमने आपको यहाँ ये राज़ बताने के लिए बुलाया न की आपको फैसला लेने के लिए...
ललिता : नेहा तुम...
नेहा : में एक बार फिरसे स्पष्ट तरीके से समझात हु. ममी जी! आप बताइये आप मां जी से प्यार क्यों करती है?
ललिता : हँ?
नेहा : आपकी अरेंज्ड मैरिज हुई पर उसके बाद भी आप दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे, क्यों??
ललिता : kyuki...kyuki इन्होने मेरा बोहत ख़याल रखा, हर्र बुरे वक़्त में मेरा साथ दिया, हर्र ख्वाइश पूरी की, इसलिए...
नेहा : एक्साक्ट्ली! भाई ने भी यही किया है हमारे साथ. सच कहु, तोह मुझे भाई से बचपन से hi प्यार था पर मुझे उस वक़्त पता नहीं था की ये प्यार है. में तोह बस वो सब करती थी जो मेरे मैं में आता था. भाई के साथ चिपकी रहती थी बस. फिर धीरे धीरे मुझे रीलीज़ हुआ की ये तोह प्यार है और मेने अपनी फीलिंग्स भाई के सामने रख दी...
ललिता : बीटा पर ये गलत है. निशा तुम समझाती क्यों नहीं अपनी लड़की को...!?
निशा सर झुकाए बस कड़ी रहती है पर उससे पता था की अब उससे सन में आने hi पड़ेगा वर्ण ऐसा न हो की प्लान बिगड़ जाए,
"भाभी! आप सभी को सचाई पता चलने से पहले ये साड़ी सच्चाई मुझे पता चला थी और जहा तक में समझ पायी हु, बेहतर यही है की बच्चो को अपनी मैं की करनी दी जाए"
ललिता : निशाआअ!???
राजेश : निशा?? ये क्या कह रही हो तुम? इतनी बड़ी बात हो गयी और तुमने मुझे बताया तक नहीं? ये सब क्या हो रहा है घर में? हमारे बच्चे आपस में भाई बहिन होते हुए प्यार करने लग गए? बाहर किसी को खबर होगी तोह क्या मुँह दिखाएंगे हम? क्या जवाब देंगे?
नेहा : समाज! समाज! समाज!... बस इसी का डर है न आप सबको? अंत में आप सब भी समाज के नौकर hi निकले... क्या ज़रूरी है आप सब के लिए? समाज या अपने बच्चो की ख़ुशी?? क्या ये समाज आया है कभी आपकी मदद करने? जब आप परेशानी में रहते हो तोह क्या समाज आता है आपसे पूछने की आप को कोई परेशानी तोह नहीं? कोण मदद करता है मुश्किल में आप सबकी? कितनी बार मेरे भाई ने आप सबकी मदद की है?? वो समाज जो आपको केवल मौका मिलते hi बुरा भला कहने लगे उस समाज की फिक्र कर रहे है आप? केवल आपको उठने बैठने मिले समाज में इसलिए आप अपनी बच्चो की ख़ुशी तक छीनने के लिए तैयार हो गए? प्यार तोह किसी से भी हो सकता है न? तोह समाज ने कह दिया की भाई बहिन में प्यार नहीं होता तोह आप सब मान लिए? कल को समाज कहेगा अपनी बीवी को तलाक देके दूसरी शादी कर लो तोह क्या आप वो भी करेंगे? बोलिये???
नेहा की ुचि आवाज़ सुनते hi सभी एकदम शांत पद गए. उसका हर्र एक प्रश्न ऐसा था जिसका जवाब देना मुश्किल था.
ललिता : बेटा... तुम...
नेहा : मेरे सवाल का उत्तर दीजिये ममी...
राजेश : neha...beta ये गलत है...
नेहा जैसे इस मौके का इंतज़ार hi कर रही थी, राजेश के बोलते hi उसने फौरन राजेश पे निशाना साध दिया,
"ओह्ह्ह!! में सोच hi रही थी की आप जबसे क्यों चुप है? कुछ बोल क्यों नहीं रहे है...
आपको ये गलत लग रहा है?? आप सब सुन्न रहे हो न? इन्हे ये गलत लग रहा है... इन्हे तब गलत नहीं लगा था, जब इनके मुँह से ये निकला था की काश नेहा पैदा नहीं हुई होती... तब इन्हे गलत नहीं लगा था... जब मेरे भाई ने सारा इलज़ाम अपने सर्र ले लिया और हमेशा मेरा क्रूर व्यवहार सेहत रहा, तब इन्हे ये गलत नहीं लगा... जिस भाई ने मुझे सच्चाई से दूर रखा ताकि में अपने माँ बाप न खो दू उस भाई के लिए किसी ने भी नहीं सोचा की वो केसा है, उसके दिल में क्या है, तब किसी को कुछ गलत नहीं लगा...
जब मुझे सचाई पता चली की जिस भाई से में नफरत कर रही हु वही है जो मेरी हर्र ख़ुशी के लिए अपने आप को दर्द देता जा रहा है तोह ऐसी कोण सी बहिन होगी जिसके अंदर अपने भाई के लिए प्यार नहीं उमड़ेगा?? बोलिये?? और अब जब में फाइनली अपने भाई के साथ प्यार कर सकती हु तब अचानक से मेरे पिता जी और बाकी घरवाले आ जाते है और कहने लगते है ये गलत है... तोह में पूछती हु... कहा थे आप सब जब ये सब हो रहा था?? कहा थे आप सब जब मेरा भाई साड़ी ज़िम्मेदारिया ले रहा था?? बोलिये...
और एक बार फिर सभी के नज़रे नीचे झुक गयी. हो न हो, उन्हें अपनी गलती का एहसास हो रहा था.
ललिता : बीटा पर... हमे खुद तुम्हारी सच्चाई नहीं पता थी... निशा ने मन कर के रखा था ki...samay आने पर सब पता चल जाएगा
नेहा : और आपने मान लिया? ज़रा सा भी प्रयास नहीं किया की कैसे भी करके सच्चाई का पता लग सके?
ललिता : प्रयास किया था बीटा... बोहत प्रयास किया पर... निशा ने नहीं बताया...
नेहा : में वो सब कुछ नहीं जानती. केवल इतना जानती हु की... में और मेरी दिदिया मेरे भाई से प्यार करती है और कुछ नहीं. और आप सभी को ये बता रही हु, आप से निवेदन नहीं कर रही हु...
रुपेश कुछ देरर सब कुछ सोचता है और साइड में सोफे पर विराजमान हो जाता है. राजेश तोह नेहा के तीखे बोल सुन्न के पूरा ग्लानि से भर चूका था और सर झुकाए बस उदास बैठा हुआ था.
मुकेश : देखो बीटा राहुल! तुम भी जानते हो ये सब गलत है... तुम जानते हो की हम सब समाज में ये सब नहीं दिखा सकते, सभी का उठना बैठना है, यदि तुम सब के लिए हम राज़ी हो भी जाते है पर समाज से कैसे छुपाएंगे? ये सरासर गलत है बीटा. तुम तानिया को समझाओ... .
राहुल : मां जी! ऐसा पहली बार हो रहा है जब मुझे आपको निराश करना पड़ेगा. क्युकी.. में तानिया से प्यार करता हु और वो भी मुझसे करती है... पर... में आपकी समस्या को सुलझा सकता हु...
मुकेश : क्या मतलब ??
राहुल : बड़े पापा आपका क्या फैसला है? क्या आप राज़ी है? वंशु और अंशु को मुझे सौपने के लिए...
रुपेश : में तोह कुछ कहने लायक hi नहीं बचा... गुस्सा नहीं कर सकता, क्युकी ये दो फूल मेरी जान है. किसी को भी दुःख में नहीं देख सकता पर समाज के खिलाफ जाके ये सब करना ये बोहत बड़ा पाप है, अनर्थ है ...
विनीता... कुछ कहो... आज में कमज़ोर पद गया हु... क्या कहु में... इन्होने मुझे ऐसी स्थिति पर लाके चोरर दिया है जहा एक तरफ खायी है तोह दूसरी तरफ कुआ... जाऊ तोह जाऊ कहा?
विनीता : क्या में एक बात कहु?
विनीता ने अपनी नम्म आँखों से रुपेश को देखते हुए कहा,
रुपेश : कहो विनीता
विनीता : में सिर्फ इतना चाहती हु, की मेरी दोनों बच्चिया खुश रहे और कुछ नहीं! किसके लिए हमने ये सब कमाया है? किसके लिए हम दिन रात प्रार्थना करते है? सब कुछ हमारे बच्चो के लिए hi तोह है
रुपेश : तोह तुम्हारा कहना ये है की हम राज़ी दे दे?
विनीता : हम्म्म
रुपेश : पर ऐसे कैसे विनीता? तुम...
राहुल : क्या आप समाज के लिए चिंतित है? क्या आप ऐसा चाहते है की बाहर किसी को भी ये पता न चले?
रुपेश : क्यों? क्या ये मुमकिन है?
राहुल : बिलकुल है! उसी के लिए तोह में हु यहाँ पर... तोह आप सब यही चाहते है न की समाज को इस बात की कानो कान खबर न हो?
विनीता : हम्म्म
राहुल : उसका हल है मेरे पास
ललिता : केसा हल?
राहुल : ऋचा!!! मेरी शादी ऋचा से होएगी. और उसके बाद इन् सभी से...
रुपेश : ye...ye क्या बकवास है?
राहुल : समझाता हु. बैठिये! ऋचा मुझसे प्यार करती है और में उस से. हमारी शादी श्री लंका में होएगी. क्युकी... वह पॉलीगम्य अल्लोवेद है. मतलब सरल भाषा में, एक से ज़्यादा पत्नी रखना अल्लोवेद है. अब समाज के सामने मेरी शादी हो चुकी है और पत्नी है ऋचा. उसके बाद में इन् सब से वही शादी करूँगा, न hi किसी को कुछ पता चलेगा और न hi कोई दिक्कत आएगी, क्युकी श्री लंका की सिटीजनशिप है हमारे पास. तोह में एक से ज़्यादा पत्नी रख सकता हु. ऐसा करने से, ना hi आपको कोई तकलीफ होगी और न hi हमको... आप तोह यही चाहते है न? की आपके बच्चे खुश रहे? घर की बात घर में hi रहेगी... आप मुझपर पूरा भरोसा करिये... किसी को भी दुःख नहीं पोहुंचाउंगा और किसी पे भी आंच तक नहीं आने दूंगा... हमेशा खुश रखूँगा. इसलिए आप सभी से आपकी बेटियों का हाथ मांगता हु आज में...
राहुल की बात ख़तम होते hi बाकी सब उससे ऐसे देख रहे थे जैसे ज़ू में कोई अजीब जानवर आया हो. क्या बाके जा रहा है ये? पर जो भी था, राहुल की तरफ से अत्यंत सच था. यही उसने प्लान करके रखा था.
हॉल के साइड में ऊपर जाती सीडिया के पास बाकी चारो लड़किया झांक के सब कुछ सुन्न रही थी. ये थी मोनिका, तनीषा, प्रीती और ख़ुशी...
प्रीती से रहा नहीं गया और वो ज़िद्द करके सबको अपनी बातो में फसा के नीचे ले आयी. हालांकि मोनिका और तनीषा ने मन किया था पर बाद में वो दोनों भी उसकी चिकनी चुपड़ी बातो में फस्स गयी, क्युकी जिज्ञासा तोह उन्हें भी थी.
प्रीती : तोह ये है राहुल का प्लान??
तनीषा : हम्म्म्म
मोनिका : मुझे तोह अभी भी बोहत गुस्सा आ रहा है... राहुल को थप्पड़ कैसे मारा...
ख़ुशी : ी... ी रियली लिखे नेहा... शी हांडलेड आईटी सो वेल...
मोनिका : हम्म? हां! उसने बोलती hi बंद करदी सबकी...
तनीषा : आखिर बहिन किसकी है?
मोनिका : हहै! मेरे राहुल की...
तनीषा : हमारे राहुल की... न की मेरे...
मोनिका : ughhh...okay!
रुपेश : ये सब क्या है? ये ऋचा बीच में कहा से आ गयी?
ललिता : राहुल! में समझ गयी हु तुम क्या कहना चाह रहे हो पर क्या ऋचा इस सब के लिए राज़ी होगी?
ऋचा : j..jii! में राज़ी हु. मुझे कोई दिक्कत नहीं हु. Infact...I... I'll बे हैप्पी. ी लव हिम.
ऋचा की बात सुनकर किसी को विश्वाश hi नहीं हो रहा था की कोई लड़की इतना सब जान ने के बाद भी राहुल से प्यार कर सकती है..
विनीता : ऐसी कोण सी जड़ीबूटी खिलाई हो राहुल तूने इन् सबको? ज़रा मुझे भी तोह बता में भी इन्हे 2-4 खिला दू...
अंशु : कोई जड़ी बूटी नहीं है मम्मी! यदि भाई जैसा आपका भाई हो तोह प्यार तोह होना hi है.
विनीता : मेरी लड़किया... आज यहाँ तक आ गयी की मुझे समझाने लगी है...
ठीक है! मेरे और इनकी तरफ से हां है बीटा. अब कुछ किया भी नहीं जा सकता है, बेहतर है की हम तुम्हारे हिसाब से hi चले, काम से काम मेरी दोनों बच्चिया तोह खुश रहेंगी...
ललिता : मेरी और इनकी तरफ से भी हां है... अब ऐसे मोड़ पे आ गए है जहा से वापस नहीं जाय जा सकता. और... सही कहा... बच्चो की ख़ुशी पहले है... यदि इसी में तुम्हारी ख़ुशी है तोह... हमे अपने ऐतराज़ को बीच में नहीं लाएंगे... खुश रहो तुम सब!
तानिया (रट हुए) : थैंक यू माँ... थैंक यू सो मच... आप बिलकुल चिंता मत कीजिये, में राहुल के साथ बोहत खुश रहूंगी...
निशा : आप को कुछ कहना है क्या?
राजेश : क्या कहु निशा? सही hi तोह कहा नेहा ने... में उसका गुनेहगार हु... मेरा क्या हक़ है उस से उसकी ख़ुशी छीन ने का...
निशा : आप उसके पिता है...
राजेश : वो pita...jo अपनी बच्ची का जन्म नहीं चाहता था...
निशा : आप नशे में थे...
राजेश : नशे में आदमी सच बोलता है न!?
निशा : आपको बहकाया गया था... और फिर आप नशे में थे... जिसका परिणाम वो ना चाहने वाले शब्द आपके मुँह से निकले
राजेश : हां तोह गलती तोह मेरी hi है न...
निशा : हां! पर इतनी भी नहीं... की... आप अभी तक उस बात के लिए भुगते...
राहुल : गुड़िया... डैड की गलती थी... पर... उनको बहकाया गया था... उनके एक फ्रेंड ने... वो सब बाते उनके मैं में दाल दी थी और उन्हें शराब पिलवाई थी... जिसके चलते... उस रात वो सब गलती से हो गया...
नेहा : ......
राहुल : डैड?? क्या आपकी इजाज़त है हमे? क्या आप राज़ी है???
राजेश : में... क्या कहु!? कुछ कहने लायक नहीं हु... जहा भी रहो तुम सब... खुश रहो... मेरी नेहा को खुश रखना... मुझसे गलती हुई है... मुझे उसके लिए माफ़ी नहीं माँगना क्युकी में माफ़ी के क़ाबिल नहीं हु...
राहुल पीछे से नेहा के पीठ पर हल्का धक्का देता है और उससे राजेश के पास जाने के लिए कहता है. नेहा भी धीरे धीरे आगे बढ़ती है और एकदम पास में जाके कड़ी हो जाती है.
अपने पिता के ासु देख उसके दिल पसीज जाता है और वो गले से लग जाती है. राजेश जो की अपनी बेटी को बाहो में लेते hi जैसे उसका बाँध टूट गया और वो रोने लगा.
बगल में कड़ी निशा भी रोने लगी, आज इस मौके पर आखिर कार दोनों बाप बेटी का मिलान हो hi गया और सब कुछ सुलझ गया...
राजेश : में तेरा दोषी हु बीटा...
नेहा : न्यू... में भी गलत थी... आपने कभी भी मुझ पर हाथ तक नहीं उठाया बूत मेने हमेशा आप से बुरा व्यवहार किया, आपसे बात भी नहीं की...
निशा : अब तोह तुम समझ गयी न बेटी? वो सब गलती थी एक... जिसकी सजा तुम्हारे डैड को मिल गयी. तोह अब तोह तुम नाराज़ नहीं हो न?
नेहा : न्यू माँ! I'm हैप्पी!
निशा : देखा आप सबने!? मेने कहा था न, बच्चे बड़े हो गए है. वो जो कर रहे है उन्हें करने दीजिये. आज इसी ख़ुशी के मौके पर क्यों न हम इनकी ख़ुशी में शामिल होक इन्हे प्रोत्साहन दे? बड़े होने के नाते हमारा तोह ये कर्त्तव्य है की हम रिश्तो को टूटने से बचाये और वैसे भी... बेतु हम सब को ध्यान में रख कर hi ये सब कर रहा है ताकि घर की बात घर में hi रहे...
ललिता : निशा की बात सही है. बच्चे है तोह हम है. उनकी खुशिया छीन के क्या हम खुश रह पाएंगे? नहीं न...
विनीता : हां! मेरे ख्याल से... राहुल से बेहतर मेरी बच्ची के लिए कोई नहीं है. क्युकी राहुल ने hi उसका फोबिया ठीक किया था, राहुल के पास hi मेरी बच्ची सबसे ज़्यादा सेफ फील करेगी...
ललिता : हां! और ऋचा बेटी... हम सबकी तरफ से तुम्हे बोहत बोहत धन्यवाद्!! तुम्हारा ये उपकार हम कभी नहीं भूलेंगे... इतना सब जानते हुए भी तुम राहुल से शादी के लिए तैयार हो गयी...
ऋचा : नहीं आंटी... इनफैक्ट I'm लकी... की में राहुल की पत्नी बन्न पा रही हु
ललिता ये सुन्न राहुल को आश्चर्य जनक भाव से देखने लगती है. राहुल? क्या खिला के लाया है तू इससे?
राहुल : जो भी अन्न बन्न हुई, उसके बारे में सोचना बंद कर दीजिये. वो तोह होना hi था. मामला hi ऐसा था. पर... अब सब कुछ ठीक है, सभी की आज्ञा भी मिल गयी है, तोह अब हम सभी को आशीर्वाद दीजिये ताकि हम सभी जल्द से जल्द ये सब कर सके...
उसके बाद सभी ने थोड़ी देरर यही बातें करि, जैसे जैसे समय बीता, सभी के मैं ने ये बात को अपनाना शुरू कर दिया. और सभी वापस पहले की तरह घुलने मिलने लगे.
ऋचा : umm...toh? आगे क्या करना है?
राहुल : ऑफ़ कोर्स तुम्हारे घर जाना है मेरी रीचु... तुम्हारा हाथ मांगने...
ऋचा (ब्लश) : हम्म्म...
और राहुल आगे बढ़कर ऋचा के मीठे होंठ अपने होंठो में भर लेता है की तभी...
"बोहत हो गयी किश इस चलिए हटिये", नेहा आके एकदम से दोनों को अलग कर देती है...
ऋचा (ब्लश) : नेहा! थिस इस रॉंग...
नेहा : सॉरी ऋचा दी! बूत मुझे भाई से बात करनी है कुछ...
ऋचा : अरे पर...
नेहा : बाद में, बाद में... जाइये बाहर मेरे रूम में, बाकी सभी वही पर है...
और नेहा ऋचा को धकेलते हुए धीरे धीरे कमरे के बाहर कर देती है और कमरा अंदर से लॉक करके दरवाज़े पर पीठ टिका के राहुल को देखने लगती है,
राहुल : गुड़िया?
नेहा : don't यू थिंक भाई... ी डेसेर्वे ा क्रेडिट? मतलब मेने इतना कुछ कहा नीचे... तोह कुछ रिवॉर्ड तोह बनता है न?
राहुल : हम्म? हां रिवॉर्ड तोह बनता है. बोलो? क्या चाहिए मेरी गुड़िया को?
नेहा आगे आकर राहुल के गले में अपने हाथ डालती है और उसके कान के पास आकर नशीली सी आवाज़ में कहती है,
"आप"
और अगले hi पल नेहा राहुल के होंठ अपने मुँह में भर लेती है.
दोनों hi एक मीठी सी किश में डूब जाते है.
आज भले hi मामला ऊपर नीचे हुआ पर अंत में सब कुछ सुलझ गया. पर क्या अब आगे भी सही जाएगा या कोई परेशानी कड़ी होएगी? ये तोह वक़्त hi जाने.
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद्!!