अपडेट - 83
अब तक...
मुकेश (निशा के भाई) : अरे निशा बोलो! क्या हुआ? क्या बताने सभी को बुलाया है?
विनीता (अंशु वंशु की माँ) : निशा? कहो भी!
निशा (गहरी सास लेते हुए) : आज मेने आप सभी को वो सच बताने के लिए बुलाया है जिससे में 7 साल से छुपाती आ रही थी...
अब आगे...
ललिता (मुकेश की पत्नी) : कहो न निशा! कोनसी बात?
इस से पहले की निशा कुछ कहती उतने में दरवाज़े पर एकदम से कोई अंदर आता है,
"में लेट तोह नहीं हुई न??"
सामने तनीषा थी, जल्दबाज़ी में वो आयी और अभी बोहत हाफ रही थी.
निशा : सही टाइम पर आयी हो बीटा! आ जाओ! बैठ जाओ!
अंशु (मैं में) : यही सही टाइम है... सॉरी राहुल भैया! सॉरी नेहु! बूत ये ज़रूरी है.
मुकेश : ये कोण है निशा?
निशा : ये... तनीषा है! राहुल की डॉक्टर.
तनीषा को समझ आ गया था की निशा ने उससे अभी बहु कहके क्यों नहीं बुलाया. शायद अभी परिवार में सभी क्वेश्चन करने लगते इसलिए निशा ने अभी तनीषा को अस ा डॉक्टर hi बताया.
तनीषा इस बात से बिलकुल भी दुखी नहीं थी उससे पता था की क्या चल रहा है. उससे पहले hi निशा की जुबां मिल चुकी थी की वो इस घर की बहु बनेगी तोह उससे बाकी बातो से कोई लेना देना नहीं था. उससे पता था निशा की कोई मजबूरी होगी और इस वक़्त उससे निशा की मदद करनी चाहिए हां में हां मिला के.
तनीषा : जी में तनीषा. में राहुल को ट्रीट करती हु जब भी उससे चोट लगती है. I'm ा सर्जन ात क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स हॉस्पिटल.
रुपेश (राहुल के ताऊ जी) : सर्जन? क्या बात है! काबिलियत तारीफ! क्या उम्र है बीटा तुम्हारी?
तनीषा : j..jii?? में...28 की होने वाली हु.
रुपेश : वाह! 28 की उम्र में hi एक सर्जन!?
निशा : वो दो साल पहले hi सर्जन बन गयी थी जेठ जी.
रुपेश : क्या बात है!
मुकेश : पर ये यहाँ पर क्यों?
निशा : क्युकी वो हमारी फॅमिली मेंबर जैसी है और राहुल को वो 7 साल पहले से hi जानती है.
मुकेश : ओह्ह्ह!!
तानिया : जी बुआ! आप कुछ बताने वाली थी?
तानिया को तोह पता hi था सच. वो बस सबके सामने न जान ने की एक्टिंग कर रही थी.
वंशु : हां चची! हम सब सुन्न रहे है. कहिये!
निशा (गहरी सास लेकर) : हां! तोह में शुरू करती हु...
अब निशा की ज़ुबानी हम फ्लैशबैक के थ्रू देखेंगे...
*फ्लैशबैक*
बात 7 साल पुरानी है, राहुल ग्यारवी क्लास में था और नेहा आठवीं क्लास में. इन् दोनों के बीच बोहत प्यार था. एक नार्मल भाई बहिन से थोड़ा ज़्यादा. खासकर की नेहा... वो राहुल से चिपकी hi रहती थी. हर्र वक़्त उसके आगे पीछे घूमना, उससे तंग करना, लाढ़ करना, सब करती थी वह. कुछ ज़्यादा hi ऑब्सेस्सेड थी राहुल से. राहुल भी कुछ काम नहीं था ,बेशुमार प्यार देता था वह नेहा को. उसके लिए चीज़े लाना, गिफ्ट्स लाना, उसको घुमाने ले जाना, हर्र काम में उसकी मदद करना. एक आइडियल भाई की तरह था वह नेहा की नज़रो में.
पर न जाने इन् दोनों के प्यार को किसकी नज़र लग गयी. यहाँ ये दोनों तोह अपनी ज़िन्दगी में टेंशन फ्री थे पर राजेश की ज़िन्दगी कुछ सही नहीं चल रही थी.
राजेश अपनी नौकरी करके जब भी घर वापस आता तोह काफी चिढ चिढ़ा व्यवहार रहता उसका. राजेश शराब नहीं पीटा था उसके बाद भी ये चिढ चिढ़ापन किस लिए था ये निशा समझ नहीं पा रही थी. राजेश भी अपने मुँह से कुछ नहीं बोलता था बस सीधे मुँह बात नहीं करता था.
निशा ने कुछ दिन ये सोच के इस बात पर ज़्यादा नहीं टोका क्युकी हो सकता है काम का टेंशन हो और मूड चिढ चिढ़ा हो गया हो. पर जब दिन बा दिन ये होना शुरू हुआ तोह निशा को टेंशन होने लगी.
नेहा इस बात से पूरी तरह अनजान थी की घर में क्या चल रहा है. पर राहुल ने भांप लिया था की उसके डैड कुछ दिनों से सही से बेहवे नहीं कर रहे. राहुल एक डिस्कॉपलीनेड लड़का होने के नाते पेरेंट्स के बीच में नहीं बोलता था और साड़ी बातें अपने अंदर hi रखता था.
एक दिन राजेश जब अपनी नौकरी पर गए, इस वक़्त वो मैनेजर नहीं थे, केवल एक एम्प्लोयी थे बैंक में. स्ट्रेस, वर्क लोड, फ़्रस्ट्रेशन, इन्ही सब से रोज़ झूझना पड़ता था राजेश को.
राजेश बैठा हुआ काम कर रहा था और कुछ सोच रहा था, की कैसे नौकरी में आगे बढ़ा जाए वो केवल एम्प्लोयी बांके तोह नहीं रह सकता न हमेशा!?
तभी उसके बगल में उसके hi बैंक में एक और एम्प्लोयी जो काम करता रहा वो आके बैठ गया और राजेश से बात करने लगा.
"और भाई मिश्रा साहब क्या चल रहा है?"
राजेश : अरे क्या बताऊ अब शुक्ल जी! रोज़ रोज़ वही पंचायत. काम करो, लोगो की समस्याए सुनो, कंप्यूटर में दिमाग खपाओ और घर चले जाओ. कुछ रहा hi नहीं है ज़िन्दगी में.
शुक्ल : भाई ये तोह हर्र शादी शुदा व्यक्ति की समस्या है. खासकर हम मर्दो की.
राजेश : ......
शुक्ल : वैसे... तुमको पता है अभी जो खबर फेल रही?
राजेश : किसी खबर?
शुक्ल : अरे तुम्हे नहीं पता? अरे... वो पांडेय की बेटी है न? भाग गयी कल एक लौंडे के साथ...
राजेश (शॉकेड) : क्या बात कर रहे हो?
शुक्ल : अरे सुबह से उसके hi चर्चे हो रहे है सबमे... पांडेय की भी तोह गलती है.
राजेश : इसमें पांडेय की क्या गलती?
शुक्ल : अरे इतना छूट देके रखा था पांडेय ने उससे. लड़कियों को इतनी छूट नहीं देनी चाहिए. मेरी तोह तीन लड़किया है पर वो सपने में भी ऐसी हरकते करने की नहीं सोच सकती. मेने इतना दर्रा के रखा है उनको.
राजेश : हां पर हमारी बच्चिया ऐसा कभी नहीं करेंगी...
शुक्ल : मेरी का तोह मुझे पता है पर अपनी बेटी पर भी ध्यान दो ज़रा. ये लड़किया बोहत hi चिकल्लस होती है. मेरे घर में तीन तीन पैदा हो गयी. अब एक न एक दिन उन्हें जाना hi है घर चोरर के. उनकी शादी का खर्चा अलग, ऊपर से शादी के पहले उनके किसी ऐरे जर्रे लड़के के प्यार में पद जाने का डर, कही कुछ गड़बड़ न हो जाए उसका डर.
शुक्ल और राजेश की बातें यदि अभी कोई सुनता तोह वो आसानी से देख के ये बता देता की शुक्ल अभी राजेश को भड़का रहा था.
राजेश : मतलब?
शुक्ल : मतलब यही की लड़किया बोहत चिकल्लस होती है. मेरी सोचो... में तोह लूट hi जाऊंगा
तीन तीन लड़कियों की शादी. लड़कियों को हमेशा सख्ती से रखो.
राजेश : पर मेरी नेहा बोहत अच्छी है. उसमे कोई खराबी नहीं है. मेरी प्यारी बच्ची है वह.
शुक्ल : बच्ची सब प्यारी hi रहती है मिश्रा. पर जब ये बड़ी हो जाती है न तोह इनकी हरकते शुरू हो जाती है. पलट के जवाब देना, छोटे छोटे कपडे पहन न, रात में पार्टी में जाना, और न जाने क्या क्या. इस से पहले की हाथ से निकल जाए इन्हे अपने कण्ट्रोल में रखना.
राजेश : ........
शुक्ल : बेचारा पांडेय! मेरा करीबी है वो तोह. में जाता रहता हु उसके घर. कुछ दिन पहले गया था तोह उसकी लड़की मेरे सामने hi पांडेय से ज़बान लड़ा रही थी अब बताओ.
और कल बताओ एक ऐरे जर्रे लौंडे के साथ भाग गयी. पूरे आस पड़ोस में ठु ठु हो रही है पांडेय की. खर्र! यदि वो खुद hi थोड़ी सख्ती बरकता तोह ये अंजाम नहीं देखना पड़ता आज उससे... क्यों है न?
राजेश : हँ? Haa...haaa!
राजेश जो खयालो में खोया हुआ था एकदम से हां में हां मिलाते हुए कहा.
शुक्ल : काम से कभी आराम भी ले लिया करो राजेश. क्या कहते हो? काम के बाद चलोगे? थोड़ा खाने पीने बोले तोह?
राजेश : में शराब नहीं पीटा...
शुक्ल : अरे मत पीना, बस खा लेना कुछ. कुछ और भी लोग चल रहे है. चल दो, थोड़ा अच्छा महसूस होएगा.
राजेश ने भी सोचा की दिन बा दिन काम की वजह से उसका दिमाग वैसे hi खराब रहता है, थोड़ा घूम लेगा तोह अच्छा महसूस होएगा उससे.
राजेश : अच्छा ठीक है!
शाम हुई, बैंक में एम्प्लाइज ने अपना अपना काम ख़तम किया और सभी खाने पीने के लिए एक अच्छे से होटल गए जहा ड्रिंक्स भी सर्वे करि जाती रही.
सब हस्सी मज़ाक करते हुए स्नैक्स का लुत्फ़ लिए, राजेश ने घर पर फ़ोन करके बता दिया की वो लेट आएगा.
शुक्ल : लो भाई राजेश! पीयो!
राजेश : में नहीं पीटा शुक्ल साब बताया था आपको.
शुक्ल जो की पहले hi थोड़े नशे में था आके बगल में बैठ गया और ज़बरदस्ती आधा गिलास भर दिया.
शुक्ल : थोड़ा सा hi पी लो राजेश. ये जड़ीबूटी है. यही तोह हम सब की ज़िन्दगी को मज़े से भर्ती है. यदि ये न होये तोह हम सब तोह परिवार और काम के बोझ के नीचे डाब के मर्डर hi जाए.
राजेश : अच्छा!?
शुक्ल (नशे में) : पी के तोह देखो! में बोहत लाचार हु राजेश... मुझे साला... साला तीन तीन लड़किया हो गयी. एक भी लड़का नहीं. काश... काश मेरी बेतिया न होती
राजेश : ye...ye क्या बात कर रहे हो शुक्ल साब?
शुक्ल : हां राजेश! ये बात तुम्हे तब समझ आएगी जब तुम इसको ध्यान से देखोगे. कभी अपनी बेटी को ध्यान से परखा है? किस के साथ उठती बैठती है स्कूल में? कोण उसके दोस्त है? किस से बात करती है फ़ोन पर? एक दिन भाग गयी तोह क्या करोगे राजेश? बोलो?
राजेश (थोड़ा गुस्से में) : ये क्या बकवास कर रहे हो आप? नेहा मेरी बच्ची है! मेने उससे क्या संस्कार दिए है ये में जानता हु अच्छे से.
शुक्ल : अच्छा? तोह मेरा जवाब दो न? यदि... यदि वो भाग गयी तब तुम क्या करोगे?
राजेश : में...
शुक्ल : हाहाहा! नहीं है न जवाब? ये लो अब पियो थोड़ी सी. ऐसे समय में सिर्फ यही मदद करती है.
राजेश ने एक बार गिलास को देखा कुछ सोचा और फिर उठा के पीने लगा, उसके ऐसा करते hi शुक्ल के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी.
दरअसल सच्चाई तोह ये थी की शुक्ल की तीन बेतिया ज़रूर थी और वो उनसे परेशां भी था की उनका खर्चा आगे चल के शादी में बोहत लगेगा. पर उस से ज़्यादा उससे इस बात से जलन रहती थी की राजेश के पास राहुल जैसा लड़का था.
राहुल अक्सर बैंक आया करता था, बैंक में राजेश के सभी दोस्त राहुल को जानते थे और उससे एक बोहत hi अच्छे लड़के का टाइटल दिए हुए थे. राजेश को बड़ा प्राउड होता था जब भी वो राहुल को अपने दोस्तों के बीच खड़ा करता था.
पर शुक्ल इसी बात से और जल भून जाता. एक तोह उसका कोई लड़का नहीं था और ऊपर से तीन तीन लड़किया, उसका दिमाग सही से काम करना बंद हो गया था. आज उसने सोचा की यदि वो मैनेजर बन गया तोह आगे चल के अपनी लड़कियों की शादी करने के बाद उसके पास काम से काम कुछ तोह बचेगा. पर यदि सिर्फ एम्प्लोयी hi रहा तोह बेशक वो तोह लूट जाएगा फ्यूचर में.
और उसके रास्ते में सबसे बड़ा काटा था राजेश.
राजेश को हटा तोह नहीं सकता था शुक्ल पर उसको मानसिक रूप से उससे तनाव में ज़रूर दाल सकता था और आज वो यही करने का सोच के आया था.
अपनी बातो से उसने राजेश को शराब पीला पीला कर उसके मैं में एक नया विचार घुसेड़ दिया की लड़किया एक बोझ की तरह है. राजेश भी न चाहते हुए उसका ध्यान बार बार नेहा और उसके फ्यूचर पर hi जा रहा था और फिर पांडेय की बेटी भाग गयी उस बात से उसका सर और दुखने लगा.
सारे एम्प्लाइज खा पी कर होटल से जा चुके थे पर राजेश और शुक्ल अभी तक बैठे हुए थे. शुक्ल कान भरता और शराब का गिलास भी... राजेश ने काफी शराब पी ली थी.
और अभी वो गाडी चलाने की हालत में नहीं था. इस वक़्त राजेश के पास कोई कार नहीं थी. सिर्फ बाइक थी. कार तोह राजेश ने मैनेजर बन्न ने के बाद ली थी.
शुक्ल ने उसको हिदायत दी की वो कुछ देरर यही रहे और जब नशा काम हो जाए तोह वो घर चला जाए.
शुक्ल होटल के मैनेजर को बता गया की राजेश को यही पर रुकने दिया जाए और रात में उससे उठा कर घर भेज दिया जाए.
यहाँ राजेश का दिन तोह कुछ इस प्रकार गुज़रा पर घर में शाम से लेकर रात तक क्या हुआ वो भी जान लेते है...
जब शाम का वक़्त था, थोड़ी थोड़ी आंधी चल रही थी, पत्ते और धुल उड़द के घर के द्वार से अंदर की और आ रही थी, नेहा ने उठ के फौरन गेट को बंद किया.
नेहा : भाई! आज कितनी आंधी चल रही है...
नेहा ने दूर लॉक करते हुए राहुल से कहा जो की वही सोफे पर बैठा हुआ लैपटॉप में कुछ काम कर रहा था,
राहुल : ......की : भाई???
नेहा के कई बार कहने पर भी जब राहुल ध्यान नहीं देता तोह नेहा चिढ़ते हुए आती है और उसकी गोदी में उसकी तरफ मुँह कर के बैठ जाती है, और उसका चेहरा अपने हाथो में ले लेती है,
राहुल को भी महसूस हो रहा था की अब उसकी बहिन बड़ी होने लगी है, उसकी छथि पे नेहा के हलके उभरे हुए स्तन जो ठीके थे.
नेहा : भाई???
राहुल : गुड़िया! क्या कर रही हो तुम? में काम कर रहा हु न...
नेहा : तुम ये बार बार ताऊ जी का तोह कही डैड का काम क्यों करते रहते हो? तुम अभी सिर्फ स्कूल में hi हो. तुमको ये सब काम तोह बड़े होक करना चाहिए न, फिर डैड लोग तुमको इतना काम क्यों देते है?
राहुल : अब में बड़ा हु तोह मुझे तोह करना hi पड़ेगा न?
नेहा : वही तोह बोल रही हु मेरे भाई!! तुम अभी सिर्फ 11तह क्लास में हो, फिर ये लिस्ट वगैरह बनाना डैड तुमको क्यों देते है? तुम्हारी उम्र अभी पढ़ने की है, ये सब करने की नहीं. पिछली बार ताऊ जी ने तुम्हे दूसरे शहर भेज दिया था काम के लिए और वो भी अकेले.
राहुल : वो तोह छोटा सा काम था गुड़िया और वैसे भी वो शहर कोई बोहत दूर नहीं था.
नेहा : ओह्ह अच्छा? कोण से पेरेंट्स एक 11तह क्लास के स्टूडेंट को दूसरे शहर भेजते है अपने काम के लिए? और वो भी ताऊ जी ने भेजा. डैड ने मन तक नहीं किया उनको. हम्फ!!
राहुल : अच्छा मेरी गुड़िया मुझे माफ़ कर दे...
नेहा : तुम अब से इनके काम नहीं करोगे... मुझे अच्छा नहीं लगता. समझ गए न?
राहुल : जैसी आपकी आज्ञा मेरी माँ...
नेहा : हीहीही...
नेहा आगे बढ़ के राहुल के गालो पर किश कर देती है और उस से गले लग के उसकी छाती में अपना सर रख के चिपक जाती है,
नेहा : आज बोहत आंधी चल रही है भाई...
राहुल उसका सर सहलाते हुए कहता है,
राहुल : हम्म!!
नेहा : आज कुछ बुरा होएगा क्या?
राहुल : तू फ़ालतू बातें मत सोच! बस एन्जॉय कर.
नेहा : हम्म!!
नेहा : भाई???
राहुल : हम्म!?
नेहा (ब्लश) : यू लव में न??
राहुल (स्माइल्स) : ये भी कोई पूछने की बात है गुड़िया?
नेहा : हीहीही! ी लव यू तू!!
रात को नेहा सोने चली जाती है 9 बजे hi, थोड़ी बोहत बातें निकिता से करती है उसके बाद सोने चली जाती है.
इधर निशा और राहुल सोफे पर बैठे बात कर रहे थे,
राहुल : डैड अभी तक नहीं आए माँ? रोज़ तोह वो 8 बजे आ जाते है.
निशा : हां बीटा! मेने फ़ोन किया था, कह रहे थे की 10-11 बजे तक आएँगे.
राहुल : 10:30 तोह बज hi गया है माँ.
निशा : हां! तू अब सजा. वो आ जाएंगे. में भी अपने कमरे में थोड़ी देरर लेट लेती हु.
राहुल : बस अभी चला जाऊंगा, ये काम होने hi वाला है.
निशा उठ के अपने कमरे में चली जाती है, राहुल भी काम करते करते कब वही सोफे पर हलकी नींद में चला जाता है उससे पता hi नहीं चलता.
इधर 10:45 पे होटल में मैनेजर आके राजेश को टटोल के हिलाता है तोह राजेश होश में आता है.
मैनेजर : सर! अब आपको घर जाना चाहिए! क्या आप पहले से रेफ्रेशेड फील कर रहे है? ये पानी आपके लिए...
राजेश : हँ?? ओह्ह!! हां...
पानी पिके राजेश अपना चेहरा थोड़ा धोता है पर अभी भी नशा उसमे बचा हुआ था. उसने गाडी उठायी और तेज़्ज़ तूफ़ान में गाडी चलते हुए राजेश घर की और निकलने लगा.
जब राजेश घर पहुचा तोह काफी गीला हो चूका था. निशा ने दरवाज़ा खोला और देख के चौंक गयी. राजेश ऊपर से नीचे तक गीला था. तेज़्ज़ बदल गरज रहे थे, बिजली चमक रही थी. निशा ने फौरन बैग लेके उससे अंदर आने दिया.
सामने सोफे पे राहुल सोया हुआ था हलकी नींद में. राजेश ने एक नज़र उससे देखा और अंदर बैडरूम में कपडे बदलने चला गया.
निशा ने टॉवल दी और राजेश अपने बाल hi सूखा रहा था...
निशा : आज क्या हुआ? आप इतना लेट आए? कल नेहा का बर्थडे है पता है न आपको?
नेहा का नाम सुनते hi शुक्ल की बातें फिरसे राजेश के मैं में मंडराने लगी. हल्का नशा तोह उससे अभी भी चढ़ा हुआ था क्युकी उसने पहली बार जो पी थी. हैंगओवर अभी हटा नहीं था.
राजेश : पता है न निशा! बार बार क्यों लगी हो उसी बात के पीछे?
निशा : अरे!? पर में तोह आपको सिर्फ याद दिला रही थी. आप लेट क्यों हो गए?
राजेश : अब हो गया लेट! हर्र चीज़ बताऊ क्या तुम्हे?
निशा : अरे?? में तोह सिर्फ पूछ रही हु न?
राजेश : यही तोह प्रॉब्लम है. नौकरी करने जाओ वह सर थपाओ, घर आओ तोह यहाँ तुम सर खाती हो, आदमी जाए तोह जाए कहा. क्या में बिना बताए कही घूमने फिरने भी नहीं जा सकता क्या?
निशा (बॉहे सिकोड़ते हुए) : पर में तोह आपसे सिर्फ पूछ रही थी. बाहर बारिश इतनी हो रही है. चिंता लगी थी इसलिए पूछा मेने...
राजेश : मुझे पता है क्या करना है. चिंता के नाम पे हर वक़्त पीछे पद के मुझसे सवाल जवाब नहीं किया करो...
निशा : अरे... पर... वो तोह नेहा का कल बर्थडे है इसलिए मेने पूछा की आप इतनी लेट क्यों आए? क्या आप बात करने गए थे क्या होटल में? उससे सरप्राइज देना है क्या? या फिर कुछ और काम था? बस इतना hi तोह पूछ रही हु में.
राजेश : कोई सरप्राइज देने के लिए नहीं गया था. दोस्तों के साथ गया था एन्जॉय करने... क्या गलत किया?
निशा जो देख रही थी की राजेश बोलते वक़्त थोड़ा लड़खड़ा रहा था वो समझ गयी की राजेश आज पी के आया हुआ है.
निशा (शॉकेड) : आपने शराब पी??
राजेश : हां पी है! क्या कर लोगी तुम?
निशा : क्यों पी आपने?
राजेश : मेरा मैं! तुम और तुम्हारी लड़की...
निशा : नेहा कहा से आ गयी बीच में?
राजेश : अरे! कहा से नहीं आयी ये पूछो? हर्र वक़्त एन्जॉय करना, किसके साथ उठती है बैठती है स्कूल में हमे क्या पता? वो लकी हरामखोर उस दिन पेरेंट्स टीचर मीटिंग में घर के देख रहा था इसको...
निशा (शॉकेड) : अरे तोह? तोह आप किसी की भी बात का क्या मतलब निकाल रहे हो?
राजेश : किसी की भी बात का? अरे! कल वो पांडेय की लड़की भाग गयी किसी लफंगे के साथ.
निशा (शॉकेड) : k..kya??
राजेश : हां! अपनी लड़की को ज़रा कण्ट्रोल में रखो! समझी?
निशा (ुचि आवाज़ में) : हमारी लड़की ऐसी नहीं है. आपने सोच भी कैसे लिया...? छी! आपके मैं में ख़याल भी कैसे आया नेहा के लिए ऐसा...
इन् दोनों की बहस में राहुल की नींद खुल चुकी थी. वो फौरन उठा और बैडरूम में जाके देखना चाह रहा था की चल क्या रहा है पर दोनों की आवाज़ सुनकर उसने अपने कदम गेट के बाहर hi रोक लिए और सुन्न ने लगा.
राजेश : बस यही तोह दिक्कत है तुमलोगो के साथ, कभी अपनी गलती मान न hi नहीं है!
निशा : क्या गलती? किसी गलती? आप होश में तोह हो?
राजेश : यदि नेहा एक दिन भाग गयी तोह क्या करोगी?
निशा (तेज़्ज़ स्वर में) : आप वाहियात बातें कर रहे है. आप नशे में है.
राजेश : जवाब नहीं है न? सही कहा मेने एकदम! लड़किया सही में चिकल्लस होती है
निशा (गुस्से में) : आप...
राजेश : काश नेहा पैदा hi न हुई होती.
राजेश की बात सुनके न केवल निशा बल्कि बाहर खड़ा राहुल भी स्तब्ध था.
राहुल : (डैड? क्या बोल रहे है ये? माँ की बात से लगता है डैड होश में नहीं है. पर अभी रात में ये सब? कल गुड़िया का b'day है. ये सब क्यों हो रहा है? मुझे लगा hi था डैड के साथ कुछ गड़बड़ चल रहा है...)
अभी राहुल कुछ और सोचता इस से पहले hi बगल में नेहा की रूम की लाइट एकदम से जल जाती है, नेहा जो की बहस की आवाज़ से उठ चुकी थी वो यही सोच रही थी की क्या बातें हो रही है इतनी रात में डैड और माँ के बीच.
और वो आगे बढ़ के देखने जाने लगती है. बाहर खड़ा राहुल फौरन अलर्ट हो जाता है.
उससे नेहा की परछाई दरवाज़े के नीचे से पास आते हुए दिख गयी, उससे पता चल गया की नेहा इधर hi आने वाले hi और लगता है नेहा ने राजेश की बात भी सुन्न ली है.
राहुल : (ओह्ह no! गुड़िया!? लगता है गुड़िया ने सुन्न लिया है? और अब वो झगड़ने जा रही है. में ऐसा नहीं होने दे सकता. क्या बीतेगी उसपर जब उससे पता चलेगा की डैड ने उसके लिए क्या कहा है? हरगिज़ नहीं! कल गुड़िया का b'day है mein...mein ऐसा नहीं होने दे सकता. हां...)
राहुल एकदम से बैडरूम का दरवाज़ा खोल देता है और अंदर चला जाता है जिससे देख निशा सर राजेश चकित रह जाते है.
राहुल : क्या डैड? आपने मेरी बात क्यों कह दी??
नेहा उठ के आगे बढ़ती है और अपने कमरे का दरवाज़ा खोलती है, और वो माँ डैड के कमरे में जाने hi वाली थी की उसके कानो में राहुल की आवाज़ पड़ती है और वो वही ृक्क जाती है,
राहुल भी माँ डैड के कमरे में hi था?
नेहा कान लगा के सुन्न ने लगती है तोह उससे कुछ ये सब सुनाई देता है,
राहुल : ......बात क्यों कह दी??
निशा : क्या मतलब??
राहुल : मतलब सही hi तोह कहा. पर ये मेरे जज़्बात है. काश नेहा पैदा hi नहीं होती...
नेहा की आँखें चौड़ी हो जाती है अपने भाई के मुँह से ऐसी बात सुन कर...
निशा (चिल्ला कर) : राहुल!! ये क्या बोले जा रहे हो तुम? होश में हो की नहीं?
राहुल : होश में तोह अब आया हु माँ! काश! सिर्फ में होता... नेहा नहीं. तोह कितना अच्छा होता न?
निशा (गुस्से में) : तुम्हे क्या हो गया है एकदम से? आज हो क्या रहा है घर में? किसी बकवास बातें कर रहे हो?
राहुल : हां न माँ! सिर्फ में होता... तोह कितना अच्छा रहता. मुझे कोई बहिन वगैरह नहीं चाहिए थी... पर आपने मुझे एक बहिन देदी. मुझे वह बिलकुल भी पसंद नहीं है माँ...
नेहा के शरीर में रोये खड़े हो जाते है अपने भाई के मुँह से ऐसी बातें सुन कर, उससे यकीन hi नहीं हो रहा था की राहुल उसके बारे में ऐसा कह रहा है.
तभी राहुल पलट कर दरवाज़ा खोल देता है और नेहा कड़ी हुई सबको दिख जाती है, उसकी आँखों में ासु थे, उसके परर काँप रहे थे, उसका बदन सिहर रहा था.
जैसे उस से उसका सब कुछ छीन लिया हो. नेहा को देख निशा के होश hi उड़द गए, साथ hi साथ राजेश के भी.
निशा : ने... नेहा???
नेहा (कापते हुए) : माँ?? ये सब क्या चल रहा है? B..bhai?? ये... ये तुम क्या कह रहे थे अभी? हां? मज़ाक कर रहे हो? ः!! B'day सरप्राइज देने के लिए... है न??
राहुल उससे घूरते हुए आगे बढ़ता है और उसकी आँखों में आँखें दाल के कहता है,
राहुल : ओह्ह्ह्ह! तोह तुमने सब सुन्न लिया?? मुझे लगा तुम नहीं सुन्न पाओगी. खर्र अब जब तुमने सुन्न hi लिया है तोह इससे अपने दिमाग में बइठल लो... ी हेट यू!!
नेहा का शरीर फिरसे काँप उठता है, जिस भाई से अभी वह कुछ देरर पहले प्यार करने की रे ले रही थी, वही भाई उससे कह रहा था की वो उससे हेट करता है, यहाँ तक की वो तोह चाहता hi नहीं था की उसकी बहिन पैदा होये.
नेहा : कह दो की ये झूठ है ... भाई... कह दो की ये झूठ है ... आपने अभी बहार कहा था मुझसे... की... यू लव में. यू लव में राइट? ये सब झूठ है...
राहुल एक कदम आगे बढ़ाता है तोह नेहा एक कदम पीछे चली जाती है,
निशा (चिल्ला कर) : रहलललल!!!
राहुल : नहीं! वो तोह सब नाटक था मेरी गुड़िया. काश तू पैदा hi नहीं हुई होती नेहा...
ी जस्ट हेट यू!!! या फिर तू... ः!!
राहुल फिर से एक कदम आगे बढ़ाता है, और नेहा फिरसे पीछे चली जाती है, वो पूरी तरह से घबराई हुई थी और सिहर रही थी.
पूरा चेहरा आसुओ से भीगा हुआ था. वो तोह यहाँ आवाज़ सुन्न के आयी थी, ये सोचके शायद उसके लिए सबने सरप्राइज प्रेपर किया होगा पर यहाँ तोह कुछ और hi सन था जिसकी उम्मीद शायद नेहा ने कभी नहीं की होगी.
राहुल (धीरे से कान में) : या फिर tu...swarg सिधार गयी होती??
नेहा जोरर से चिल्ला कर रोने लगती है और तभी निशा आगे बढ़ के राहुल को दो थप्पड़ रसीद देती है और चिल्ला के उससे बाहर निकाल देती है,
निशा नेहा को लेकर रूम में चली जाती है और राजेश राहुल को लेकर रूम में चला जाता है.
राजेश की आँखों में ासु थे. वो इसलिए क्युकी राहुल ने सारा इलज़ाम अपने सर लिया. राजेश राहुल की बोहत क़द्र करता था, और इसी वजह से वो अपने होश में आ गया. राहुल की आँखों में भी ासु थे.
राजेश : राहुल??
राहुल : डैड! मेने जितना हो सका उतना बचा लिया. अब आगे आपको संभालना है. दुबारा ऐसी हरकत कभी मत करना.
राजेश को अपनी गलती का एहसास फौरन हो जाता है और वो रट हुए राहुल को पकड़ते हुए खुद को कोसने लगता है.
राजेश : तुझे ये सब करने की क्या ज़रुरत थी बीटा?
राहुल : ज़रा सोचिये डैड! एक लड़की का बाप यदि ये कह दे की वो पैदा hi नहीं हुई होती तोह उससे केसा लगेगा? शुक्र मनाइये की में समय पे आ गया. नेहा ने शायद आपकी बात सुन्न ली थी और इसलिए मुझे ये कहना पड़ा की आप मेरी बात क्यों कह रहे हो? ताकि उससे यकीन हो जाए की आप नहीं बल्कि में चाहता हु की वो पैदा hi न हुई होती.
राजेश : .......
राहुल : माँ बाप का साथ रहेगा तोह गुड़िया सर्वाइव कर लेगी. मेने उससे जनम नहीं दिया है, मेरे कहने का उससे बुरा लगेगा बोहत पर धीरे धीरे वो मुझे भूल जाएगी. पर यदि एक बाप hi उससे ऐसा कहेगा तोह उसका असर कई हद्द तक ज़्यादा रहेगा. शायद वो सर्वाइव hi न कर पाए. अब आपको और माँ को कसम है. आपलोग उससे कुछ भी नहीं बताएंगे. अब ऐसा hi चलने देना. वो मुझे भूल जाएगी बूत एटलीस्ट उसकी शादी के बाद आप लोग तोह टच में रहोगे उसके. ये सही एंडिंग है.
राजेश कुछ भी बोलने लायक नहीं था वो बस अपने को hi दोष दे रहा था.
*फ्लैशबैक एंड्स*
निशा : और यही है सच्चाई...
निशा ने जैसे hi बोलना बंद किया उसकी आँखों में ासु थे, सामने बैठे सभी लोग सच जान के स्तब्ध थे, लेडीज में सभी रोने लगी, मुकेश और रुपेश जैसे तैसे खुद को संभाले हुए थे.
निकिता (रट हुए) : ये यहाँ पे hi ख़तम नहीं होता आंटी... मुझे भी कुछ कहना है!!
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद्!