इन्सेस्ट रिश्ता - Page 7 - SexBaba
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इन्सेस्ट रिश्ता

अपडेट 32

रुचिका ने मोहनलाल को अपनी बांहो में कास लिया जिससे उसके बूब्स मोहनलाल पर कोई असर डालते उससे पहले hi मोहनलाल ने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा 'चलो जल्दी, वो सब वेट कर रहे होंगे' और उसको कुछ पैसे और एक कार्ड देते हुए 'जो भी पर्चासिंग करो इससे कर लेना और पैसे की चिंता न करना और अचे से ाचा लेना और वो थीम ड्रेस भी ले लेना' रुचिका वो लेकर फिर उसके गले लग गयी तू मोहनलाल जो जल्दी से जल्दी उससे दूर होना चाहता था उसके कन्धों से पकड़ कर उससे अलग करने लगा ताकि अपनी भावो पर काबू प् सके लेकिन उसको अपने से दूर करने के चक्कर में उसके बूब्स नज़र आ गए और अपने ऊपर काबू पते हुए वो दोनों वंहा से लॉबी में आ गए. रुचिका उन दोनों के साथ चली गयी तू मोहनलाल ने चैन की सांस ली

तीनो देवियां जब बहार आयी तू बहार एक बहुत hi महंगी सुव कड़ी थी, जिसका ड्राइवर बड़े अदब से आया और दरवाजा खोलकर दिया से 'मैडम आइये' तू दिया ने रुचिका और अवनि को भी बैठने के लिए कहा तू तीनों उसमे बैठ गयी तू इ बॉडीगार्ड ने दरवाज़ा बंद किया और वो आगे ड्राइवर के साथ बैठ गया. सुव के दो कम्पार्टमेंट्स थे जिसमे एक ड्राइवर का और पीछे का पैसेंजर्स का और दोनों के बीच में सिर्फ माइक के थ्रू कनेक्शन था और ड्राइवर कम्पार्टमेंट से कोई भी पैसंजर कम्पार्टमेंट में नहीं देख सकता था.

रुचिका तू ऐसी गाड़ी देखकर hi हैरान रह गयी और दिया से कहने लगी 'ये गाड़ी आपकी है' तू उसने कहा 'पहले तू आप नहीं तुम. हाँ जब से वो हादसा हुआ है, सिक्योरिटी की वजह से ये ली थी और बॉडीगार्ड रख लिया था. अच्छा छोडो, ये बताओ कान्हा जाना है'

रुचिका 'न तू मैंने घूमने के लिए सोचा था और न hi मुझे यंहा के बारे में कुछ पता है, जंहा तुम ले चलोगी, चलेंगे'

अवनि 'ऐसा करते हैं किसी अच्छी सी मार्किट चलते है या किसी मॉल में और कुछ शॉपिंग करेंगे, किसी ब्यूटी पार्लर में अपना हुलिया ठीक करवाएंगे, फिर रेस्टोरेंट और हाँ मेडिकल शॉप तू जरूर जाना है'

दिया 'क्योँ मेडिकल शॉप की जरुरत क्योँ पद गयी, पद ख़तम हो गए हैं तू मुझसे ले लेना'

अवनि 'अरे यार वो बात नहीं हैं वो क्या है रात को ये बहुत जोश में थे और बिना प्रोटेक्शन के hi शुरू हो गए तू मुझे ी पिल लेनी है'

रुचिका तू उन दोनों की बातें सुनकर hi शर्म से गाड़ी जा रही थी और सोच रही थी की ऐसी सिचुएशन भी फेस करनी पड़ेगी. उससे तू ये दर लगने लगा की अगर इन दोनों ने उससे पूछा तू क्या जवाब देगी?

अभी रुचिका कुछ कहती की दिया भी बोल पड़ी 'अरे यार अच्छा याद दिलाया, रात को ये भी काफी जोश में थे और इन्होने तू कंडोम भी लगाया था लेकिन इनका कंडोम जोश की वजह से फैट गया था और इसलिए ी पिल तू मुझे भी चाहिए'

अवनि 'ठीक है यार ी पिल तू ले लेंगे और हाँ रुचिका के लिए भी ले लेंगे, क्योँ रुचिका, तुम्हे भी इसकी जरुरत पद जाएगी, फिर कान्हा आती रहेगी'

रुचिका जल्दी से 'नहीं नहीं मुझे जरुरत नहीं है'

दिया 'क्योँ भाई जरुरत पद जाती है, हमारे एक्सपीरियंस से फायदा उठा ले. हर रोज थोड़ी न भाई साहब सो जायेंगे.'

अवनि 'क्या कल रात कुछ नहीं हुआ तू तुझे नींद कैसे आयी होगी. सच्ची मुझे तू रात को नींद hi नहीं आती जब तक ये मुझे मसले नहीं, मेरे लिए तू ये स्लीपिंग पिल बन गए हैं'

दिया 'ये बात तू सही कही है की हमारे हस्बैंड हमारे लिए स्लीपिंग पिल hi हैं. रुचिका की भी वही बात होगी, लेकिन हम से शर्मा रही है, कोई बात नहीं शाम तक खुल जाएगी'

अवनि 'आज रात तू भाई साहब इससे बिलकुल सोने नहीं देंगे और कल ये आकर कहेगी की मुझे भी ी पिल चाहिए, प्लीज दे दो'

रुचिका 'नहीं नहीं मुझे इसकी जरुरत नहीं है और न hi प्'

दिया 'इसको इसलिए जरुरत नहीं है, क्योँकि हो सकता है ये बच्चा प्लान कर रहे होंगे'

दिया की बात सुनकर रुचिका के कान लाल हो गए और उससे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या कहे और उसने अभी कुछ न कहने का फैसला किया.

जब उसने कोई जवाब नहीं दिया तू दिया ने कहा 'देख लो मेरी बात सही है इसलिए ये चिप है'

अवनि 'ये भी कोई उम्र है बच्चा पैदा करने की, अभी तू कुछ वक़्त जिंदगी के मज़े लो, फिर तू बच्चे hi पलने हैं'

दिया 'यार तुम भी क्या तंग कर रही हो इससे, छोड़ न कोई और बात करते हैं'

अवनि 'यार शाम का जो प्रोग्राम है उसमे सदी पहननी है, लेकिन मुझे तू आती नहीं है तू मुझे सीखा देना'

रुचिका 'मुझे भी नहीं आती, मैं भी सीखूंगी

दिया 'सीखा दूंगी लेकिन आज तू मैं भी खुद नहीं बांधूगी, चलेंगे किसी अच्छे से ब्यूटी पार्लर में और वंही से तैयार होकर आएंगे, क्योँकि आज के प्रोग्राम में पक्का कम्पटीशन होगा और हम hi जीतेंगे'

अवनि 'हम में से कोई एक hi तू जीतेगा, सब तू जाट नहीं सकते'

दिया 'उससे क्या फरक पड़ेगा, हम टेंनों में से जो कोई भी जाइते लेकिन बहार का कोई नहीं जीतना चाहिए'

रुचिका 'अगर ऐसी बात है तू हम तीनो सेहलियाँ एक हैं और जिसके भी जीतने के चान्सेस जयादा होंगे उसकी मदद करेंगे और अगर कोई बहार का बीच में आएगा तू बाकि डोमों कुछ ऐसा करेंगे जिससे वो जीत न पाए'

दिया 'यार तुम में तू सरे गुण भाई साहब वाले हैं. बिज़नेस में भी वो इसी तरह की प्लानिंग करते हैं. याद है न पिछली डील उनकी प्लानिंग की वजह से सफल हुई थी और आज भी मुझे लगता है की कुछ ऐसा hi होगा. तुम दोनों की जोड़ी लाजवाब है'

अवनि 'मुझे भी ये बात पसंद आयी की हम तीन नहीं बल्कि एक हैं टीम की तरह'

रुचिका 'अगर हम एक टीम हैं तू हमें पहले तू ये पता होना चाहिए की उस पार्टी में क्या होने वाला है और हमारी स्ट्रेंग्थ्स और वीकनेस क्या हैं. हो सकता है की एक चीज़ में मैं वीक हु, उसी में तुम स्ट्रांग हो और दूसरी में मैं या अवनि स्ट्रांग हो. अगर हमें पता होगा तू जीतने के चान्सेस बढ़ जायेंगे'

अवनि 'बात तू ये बिलकुल सही कह रही है, हमें एक दूसरे को जानना जरुरी है'

दिया 'यर तू पता नहीं लग सकता की वंहा क्या होगा, लेकिन कुछ कुछ अनुमान लगा सकती हु, जैसे डांस, कपल गेम्स और पता नहीं. हो सकता है की कुछ भी न हो बस डिनर hi हो, लेकिन ये तू है की ऐसी पार्टी में सब साझ धज के आये हैं. वो तू हम जा hi रहे हैं अपना हुलिया सुधरने'

रुचिका 'हम सब ठीक तू हैं, अच्छी खासी लग रही हैं'

दिया 'हम सब एक से बढ़कर एक सुन्दर हैं लेकिन ऐसी पार्टी के लिए बहुत जरुरी है की हम ब्यूटी पार्लर चलें और सिर्फ बाहरी नहीं बल्कि अंदर की भी सफाई करवाएंगे'

रुचिका 'अंदर से मतलब'

दिया 'फुल बॉडी वैक्सिंग, मस्सगे और बहुत कुछ'

रुचिका 'फुल बॉडी वैक्सिंग, क्या वंहा के भी'

अवनि 'क्योँ कभी भाई साहब ने कहा नहीं की साफ़ किया करो'

रुचिका तू उनकी बाते सुनकर hi पगला गयी और सोचने लगी की शायद गलत फैसला कर लिया पति पत्नी बनने का, लेकिन उससे मज़ा भी आ रहा था, नयी नयी बातें सीखने को मिल रही थी. उसने बात को सँभालते हुए कहा 'वो तू मैं खुद hi थोड़ा बहुत कर लेती हु'

दिया 'अरे एक बार करवाएगी तू खुद करना भूल जाएगी और जितना अपने को मेन्टेन करके रहेगी भाई साहब तेरे दीवाने बने रहेगे'

रुचिका को फार लग रहा था की अगर वंहा के बाल हटवायेगी तू हो सकता है उन्हें पता लग जाये की वो शादीशुदा नहीं हैं बल्कि कुंवारी है तू उसकी बड़ी बदनामी होगी तू उसने कह दिया 'आज नहीं फिर कभी'

अवनि 'अरे छोड़ यार इससे इतना तंग न कर कनिह ये यही से कूद न जाये'

रुचिका 'मैं कूदने वालों में से नहीं हु, कभी मौत के मुंह में भी कड़ी होउंगी तू भी जिंदगी से लड़ने की ताकत रखती हु. इन् छोटी मोती चीज़ों से मैं नहीं घबराती'

उसकी बात सुनकर दिया और अवनि ने उससे हुग कर लिया और ये कहा 'आज के बाद मौत की बात न करना अभी तू जिंदगी के मज़े लूटने हैं'

दिया 'अभी कोई उम्र है हमारी, क्या उम्र होगी तुम्हारी'

सबने अपनी अपनी उम्र बताई तू पता चला की दिया सबसे बड़ी है और उसके बाद रुचिका सिर्फ 6 महीने छोटी है और अवनि रुचिका से सिर्फ 10 दिन छोटी है. जब ये पता चला तू उनमे प्यार कुछ जयादा hi पैदा हो गया क्योँकि वो सब हम उम्र थे.

रुचिका अवनि से 'मुझे लगा था की तुम मुझसे बड़ी हो'

दिया 'अब के बाद हम में से कोई छोटा बड़ा नहीं, सब बराबर हैं' और फिर सबने एक बार फिर हुग किया. तभी सुव रुक गयी और माइक पर आवाज आयी 'मैडम हम पंहुच गए हैं'

सब नीचे उत्तरकार मॉल में चले गए और मॉल में वो पहले तू देखते रहे की कौन कौन सी दुकाने हैं. अभी मार्किट खुल्राही थी तू उनोहोने ब्यूटी पार्लर का पता किया और वंहा चले गए और वंहा की मैडम से बात करके तीनों के लिए पैकेज ले लिया और उनसे शाम को तैयार होने की बात भी कर ली.

सुबह का वक़्त होने के कारन बेऔतीशंस खली थी तू तीनों का एक hi वक़्त में सीधे hi ब्यूटी ट्रीटमेंट्स शुरू हो गया. हर एक को अलग अलग चैम्बर में एक एक ब्यूटिशियन ले गयी और सर से लेकर पांव तक ट्रीटमेंट करने के लिए सबको नंगा होना पड़ा. रुचिका नंगी तू हो गयी लेकिन पैंटी उतरने को तैयार नहीं थी तू उस ब्यूटिशियन ने उससे आश्वासन दिया की 'आप बिलकुल चिंता न करें, आपकी प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखना हमारा धर्म है और आपकी कोई भी बात इस केबिन से बहार नहीं जाएगी, आप बेफिक्र हो कर अपने आप को रिलैक्स करें और मुझे काम करने दे, आप को शिकायत का कोई मौका नहीं मिलेगा'

उसकी बात से आश्वस्त होकर रुचिका ने पैंटी उत्तर दी और करीब चार घंटे तक उसका ट्रीटमेंट चलता रहा और बीच बीच में ब्यूटिशियन उसके साथ छेड़छाड़ भी कर्त रही जिससे उसके मन के तार झंझंट रहे. ट्रीटमेंट के दौरान उस ब्यूटिशियन को पता लग गया था की वो अभी वर्जिन है तू रुचिका ने उससे रिक्वेस्ट की थी की किसी को न बताये तू उसने कहा 'आप चिंता न करें, वैसे वो बहुत खुशनसीब होगा जो इस प्यारी सी मुनिया का उथगाथान करेगा, अगर मैं लड़का होती तू अभी इसका उथगाथान कर देती' और उसने रुचिका के गाल को चुम लिया तू रुचिका एकदम शर्मा गयी.

उसकी इस तरह की छेड़छाड़ जिसमे वो कभी उसके शरीर के किसी अंग को सहलाना, चुटकी काटना और कभी कभी चूमना ने रुचिका का हाल बुरा कर रखा था. खैर जब ट्रीटमेंट ख़तम हुआ तू रुचिका ने अपने बेदाग बदन को ऊपर से नीचे सामने लगे शीशे में देखा तू वो हैरान रह गयी. उसका बदन कुंदन की भांति चमक रहा था, उसके पुरे शरीर पर सर को छोड़ कर कनिह पर भी बाल नहीं थे, बाल तू छोडो कोई रत्न भी नहीं था. उससे अपने बदन पर नाज़ होने लगा. फिर कपडे पेहेन कर बहार आयी तब तक इन दोनों का भी काम ख़तम हो गया था, वो दोनों भी बहुत चमक रही थी और ऐसा लग रहा नथा की तीन परिया िक्खत्ते धरती पर उत्तर आयी हो.

वंहा से निकलकर वो एक कॉस्मेटिक की दूकान पर गयी, जंहा पर दिया और अवनि ने साधारण कास्मेटिक के साथ साथ ऐसे कास्मेटिक लिए जिससे पति को उत्तेजन में भर दे. जैसे की ऐसा परफ्यूम अगर लगा लिया जाये तू कोई भी उस लेडी को सूंघे बिना रह नहीं सकता. कई तरह की लिपस्टिक जो अगर लगी हो और अगर कोई किश करेगा तू किश करने वाले को ऐसा लगता है की वो फ्रूट्स खा रहा हो. क्रीम जिसको लगाने से चूचियां सख्त होकर कड़ी हो जाती हैं, जिससे पुरुष को आकर्षित करना आसान हो जाता है और भी बहुत कुछ.

उन दोनों ने वो सब तीन जगह पैक करवाया और एक पैकेट रुचिका को भी दे दिया और उससे कहा की उसे करोगी तू मज़े पाओगी. उसने बोलै की उससे जरुरत नहीं है तू उनोहोने कहा 'एक बार उसे करोगी तू फिर बार बार मांगोगी'

वंहा से निकल कर एक लिअनगरी की दूकान पर गए और कई तरह की ब्रा, पैंटी, स्विम सूट, बिकिनीज़ और पता नहीं क्या क्या देखा और उन दोनों ने काफी शॉपिंग की, लेकिन रुचिका ने जब कुछ नहीं ख़रीदा तू दिया ने उससे एक बहुत अच्छी सी नेट वाली ब्रा पैंटी जबरदस्ती खिर्द्वा दी और कहा ये पहनेगी तू 'भाई साहब तुझ पर फ़िदा हो जायेंगे' रुचिका उसको कैसे समझाए की वो पति नहीं उसके पापा हैं इसलिए इन् सब की कोई जरुरत नहीं है लेकिन हर बार जब भी वो ऐसी बातें करती तू वो तड़प उठती.

फिर वो सब एक गारमेंट्स की दूकान पर गए और वो रुचिका से पूछने लगे की क्या लेगी तू वो मन करने लगी तू दिया 'क्या बात है भाई साहब ने मन किया है कुछ लेने से, जब भी हम कुछ लेने के लिए कहते है तुम मन कर देती हो'

रुचिका 'नहीं नहीं मुझे इन् सब की जरुरत नहीं है और मैं जब तक जरुरत न हो तू नहीं लेना चाहिए, इसमें विश्वास करती हु इसलिए मन कर रही हु'

दिया 'अरे यार किस चीज़ की कब जरुरत पद जाये पता नहीं होता. घर में तू वक़्त मिलता नहीं है तू जब टूर पर आओ तू खूब शॉपिंग कर लो बाकि तुम्हारी मर्जी है '

रुचिका 'मुझे तू बस एक नाईट ड्रेस लेनी है'

अवनि 'एक क्योँ, अलग अलग डिज़ाइन की सेक्सी नाईट ड्रेसेस लो न, भाई साहब को तडपाओगी तू मजा भी खूब आएगा'

रुचिका 'नहीं नहीं मुझे तू एक नार्मल ड्रेस लेनी है'

अवनि 'क्या यार तुम इस ज़माने की हो या बूढी दादी अम्मा हो, अभी मजे नहीं लोगिनतु फिर कब लोगो, चलो मैं तुम्हे कुछ इरोटिक नाईट ड्रेसेस दिलवाती हु, तुम भी क्या याद रखोगी'

फिर सब ने कुछ न कुछ लिया और अपने अपने हस्बैंड के लिए भी ड्रेस ली और वंहा से बहार आ गए तू वो थक गए थे तू ड्राइवर को बुलाकर सरे पैकेट्स उसको दे दिए और वंहा से एक रेस्टोरेंट में बैठकर कुछ आर्डर दिया तू दिया ने कहा 'मैं अभी आयी और कोई दस मिनट बाद उसने आकर दो बहुत hi कीमती मोबाइल फ़ोन लेकर रुचिका को दिए और कहा की ये हमारी तरफ से तू रुचिका ने कहा की उससे जरुरत नहीं है तू उसने कहा की 'इससे शादी का गिफ्ट समझ कर रख लो'

रुचिका ने बहुत मन किया लेकिन वो नहीं मणि और साथ में ये भी कहा की इन फ़ोन के साथ प्रे एक्टिवेटिड नंबर्स भी है तू उन्हें चालू कर लेना. रेस्टोरेंट से फारिग होने के बाद वो एक मेडिकल शॉप में गए और वंहा से ी पिल, कंडोम्स, शक्ति वर्धक दवाइयां और पैन किलर्स खरीदी और एक पैकेट रुचिका को भी पकड़ा दिया जो वो फिर से मन करने लगी.

उन दोनों ने ज़िद करके उससे पकड़ा दिया और कहा की इन् सब की तुम्हे इस टूर पर पक्का पड़ने वाली है और हाँ पेनकिलर जरूर खा लेना ताकि मज़े जायदा ले सको नहीं तू दुखी होगी. बेचारी रुचिका क्या कहती.

इसके बाद डीडे हुआ की अब वक़्त काम रह गया है तू तैयार होकर hi जायेंगे. अब थीम ड्रेस दिया और अवनि की तू गाड़ी में hi थी तू ड्राइवर से माँगा ली. रुचिका ने उस गारमेंट्स शॉप से कलेक्ट कर ली और वो सब ब्यूटी पार्लर में चले गए. वंहा पर उन तीनो को तैयार करने के लिए उन्ही बेऔतीशंस ने तैयार का दिया. रुचिका को जब वो तैयार करने लगी तू उसकी ब्रा ब्लाउज की बैक बहुत काम होने की वजह से दिकहि दे रही थी तू उस ब्यूटिशियन ने उससे ब्रा बदलने के लिए कहा लेकिन उसके पास दूसरी ब्रा नहीं थी. तब उसने सलेसगिरल को फ़ोन करके बताया तू उसने मैचिंग नयी ब्रा वंही भिजवा दी और रुचिका को नयी ब्रा बहुत अच्छी लगी. ब्यूटिशियन ने जब उससे तैयार कर दिया तू कहा 'मैडम यू अरे लुकिंग गौर्जियस' रुचिका ने उससे सिर्फ थैंक्स hi नहीं कहा बल्कि उससे अछि खासी टिप भी दी.

बहार आने पर वो दोनों पहले से hi तैयार होकर वेट कर रही थी. फिर तीनों हुस्नपरियाँ जो एक से बढ़ाकर एक लग रही थी सुव में आ गयी और रस्ते में दोनों रुचिका को छेड़ने लगी की आज तू भाई साहब की खैर नहीं. रुचिका पहले तू शर्मा गयी लेकिन फिर उसने इन दोनों को भी कहा 'आज आपके पति लोग भी तुम दोनों के हुस्न के जादू से बच नहीं पाएंगे'
 
सबसे पहले तू मुझे ये जानकर बहुत ख़ुशी हुई की आप इस फोरम पर इस कहानी की वजह से आये हैं, आपका तहे दिल से शुक्रिया.

आपने इस कहानी को सराहा ये और जयादा ख़ुशी की बात है क्योंकि आपकी ख़ुशी देखकर और जयादा अच्छा लिखने की इच्छा होती है.

साथ बनाये रखिये.

अगला अपडेट पोस्ट कर दिया है. पढ़ कर बतिये कैसा लगा.

धन्यवाद्.
 
व्हाट ा डिटेल्ड रिव्यु!

योर रिव्यु पोर्ट्रेस हाउ गुड ा राइटर यू अरे. यू हैवे रेविएवेद थे व्हिले स्टोरी अंडरलाइंग नॉट ओनली थे फाइनर पॉइंट्स बूत व्हाट इस थे पॉसिबल थिंकिंग ऑफ़ थे राइटर. थिस डेप्थ कैन ओनली बे सौगत बी ा ग्रेट राइटर लिखे यू हु है क्रिटिकल्ल्य अनलिज़्ड एच एंड एव्री अपडेट राथेर एच पैराग्राफ.

रियली इंडेब्टेड विथ सुच ा फाइन रिव्यु.

होप माय स्टोरी केस तो थे लेवल ऑफ़ योर एक्सपेक्टेशंस.

थैंक्स सो मच
 
अपडेट 33

बहार आने पर वो दोनों पहले से hi तैयार होकर वेट कर रही थी. फिर तीनों हुस्नपरियाँ जो एक से बढ़ाकर एक लग रही थी सुव में आ गयी और रस्ते में दोनों रुचिका को छेड़ने लगी की आज तू भाई साहब की खैर नहीं. रुचिका पहले तू शर्मा गयी लेकिन फिर उसने इन दोनों को भी कहा 'आज आपके पति लोग भी तुम दोनों के हुस्न के जादू से बच नहीं पाएंगे'

मोहनलाल आज सारा दिन परेशान था और अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनकर वो अपने आप को रुचिका के लिए दोषी मान रहा था और वो इस गलती को सुधारना चाहता था लेकिन कैसे. आज सारा दिन वो यही सोच सोच कर परेशान था क्योँकि न तू वो उससे अभी काम से काम दो दिन और दूर जा सकता था और न hi अलग रह सकता था.

इतना hi नहीं अभी शाम को कपल्स पार्टी है तू उसमे वो कैसे बचेगा और सबसे बड़ी बात ये थी की उससे रुचिका से प्यार हो गया था तू क्या वो इस भावना को उससे छुपा सकता है और अपने ऊपर नियंत्रण रख सकता है. उसने खुद से वादा किया की उससे दूर रहने की कोशिश करेगा जबकि वो खुद जनता था की रुचिका के सामने आते hi सरे वाडे भूल जाता है.

तभी दूर बेल्ल बजी तू देखा की रुचिका आयी है और वो भी सदी में. उसको देखकर मोहनलाल का खुद से किया गया प्राण एक पल में hi छू मंतर हो गया. उसका चेहरा खिला हुआ था, आँखों में काजल, गलो पर हलकी सुर्खी, होंठों पर बहुत प्यारी करने से लगी हुई लिपस्टिक, कानों में बहुत hi छोटे टॉप्स और गले में मोहनलाल की दी हुई चैन जिसका लॉकेट उसके बूब्स के बीच में सदी के पल्ले में से भी दिखाई दे रहा था.

रुचिका ने बहुत hi छोटा बिना बाजु का डीप गले का ब्लाउज पहना हुआ था. ब्लाउज में से उसकी गोरी गोरी बाजुएं बहुत प्यारी लग रही थी और हाथों में ब्रेसलेट्स. ब्लाउज में उसके बूब्स बिलकुल कैसे हुए परफेक्ट बॉल्स लग रहे थे. उसकी सदी उसकी नाभि से काम से काम 3 इंच नीचे बंधी हुई थी. सदी बहुत hi अच्छे से बंधी हुई थी, ब्लाउज और सदी के बीच में से उसका गोरा पेट और पतली कमर बहुत hi अच्छे से साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे. सदी में वो कुछ जयादा hi लम्बी लग रही थी.

वो अंदर आयी और मोहनलाल के पास आकर पूछने लगी 'कैसी लग रही हु' मोहनलाल तू उसके शरीर से आने वाली परफ्यूम की सुगंध के नशे में खो गया और जैसे सब कुछ भूल गया लेकिन उसने इतना hi कहा 'बहुत प्यारी लग रही हो' उसने एक पैकेट मोहनलाल को पकड़ाया और उससे तैयार होने के लिए कहा तू मोहनलाल ने कहा की इसकी क्या जरुरत थी तू रुचिका उसके साथ ऐसे बेहवे करने लगी जैसे की एक पत्नी अपने पति के साथ करती है.

रुचिका ने बहुत hi प्यारा सा नाराज होने वाला मुंह बनाया तू मोहनलाल 'अच्छा अच्छा' तू रुचिका खुश हो गयी और मोहनलाल उससे बचने के लिए जल्दी से बाथरूम में चला गया और कपडे बदलने लगा. उसने देखा की वो एक बहुत hi उत्तम क्वालिटी का पेंट शर्ट था तू वो रुचिका की पसंद की मन hi मन में दाद देने लगा और उससे अच्छा भी लगा की वो उसके लिए ड्रेस लेकर आयी है. लगता भी क्योँ नहीं उसके लिए कोई पहली बार ड्रेस लेकर आया था, आज तक तू उसने सबको दिया hi था और अपने लिए खुद hi लता था. इसलिए इन् कपड़ो का महत्व बढ़ गया था और उस पर फिर से प्यार आने लगा तू उसके दिमाग़ ने उससे एक बार फिर चेतावनी दे दी. वो बेचारा चुपचाप बहार आ गया.

रुचिका ने मोहनलाल को देखकर कहा 'आप बहुत हैंडसम लग रहे हैं' तू मोहनलाल ने कहा 'थैंक्स नहीं कहुगा' तू रुचिका ने स्माइल करते हुए कहा 'मैं बुरा नहीं मानूंगी अगर आप कह भी डोज तू'

अभी बात कुछ और आगे बढ़ती सूरज ने फ़ोन करके kah.a की आ जाओ देर हो रही है. दोनों नीचे लॉबी में आ गए जंहा पर वो दोनों कपल्स उनका वेट कर रहे थे. सच्ची बात तू ये है की तीनों कपल्स में ये नहीं कह सकते थे की कौन सी जोड़ी जयादा अच्छी लग रही थी क्योँकि सब एक से बढ़कर एक.

सब जोड़ियों उस हॉल की तरफ गए जंहा पर कपल्स पार्टी अर्रंगे की गयी थी. वंहा जाने पर पता लगा की हर जोड़ी को एक नंबर दिया गया है और उन्हें उसी नंबर के हिसाब से अलग अलग टेबल पर बैठने का अरेंजमेंट था. हर टेबल पर सिर्फ एक hi जोड़ी बैठ सकती थी. मोहनलाल और रुचिका भी अपने नंबर की टेबल पर जाकर बैठ गए.

थोड़ी देर में वंहा पर अनाउंसमेंट होने लगी. सबसे पहले उन सब जोड़ियों का अभिवादन किया गया और बताया गया की ये पार्टी उस डील का hi एक हिस्सा है. इस पार्टी में डिनर के आलावा 10 गेम्स होंगी और सबसे जयादा गेम्स जीतने वाली जोड़ी को 10 लाख का कॅश इनाम और कंपनी की तरफ से काम से काम 10 करोड़ का आर्डर मिलेगा. लेकिन इस में शर्त ये है की जिस भी कंपनी को आर्डर लेना हो उस कंपनी के मालिक, पार्टनर्स या डायरेक्टर्स सिर्फ और सिर्फ कपल्स होंगे, किसी भी इंडिविजुअल की कंपनी को आर्डर नहीं दिया जायेगा. इसके अलावा हर इंडिविजुअल गेम के विनर को 50,000 रस. और सेकंड विनर को 25000 रस. अलग से मिलेंगे. जो भी तीन जोड़ियां सबसे जयादा पैसा जीतेंगी उन्हें वर्ल्ड के किसी भी कोने में 3 दिन का टूर फ्री मिलेगा. अगर कोई जोड़ी पार्टिसिपेट न करना चाहे तू कोई जबरदस्ती नहीं है.

किसी ने खड़े होकर पूछा की अगर कंपनी कपल के नाम नहीं है तब क्या होगा तू उन्होंने जवाब दिया की आपको 6 महीने दिए जायेंगे जिसमे कपल्स के नाम कंपनी खोल सकते हैं और अगर कंपनी पार्टनरशिप या किसी और तरह की हो उनमे जीतने वाले कपल का होना जरुरी है. इसके बाद छोटे मोठे प्रशनो के बाद सबको कहा गया की जो भी कपल्स पार्टिसिपेट करना चाहते हैं वो अपना नाम लिखवा दे.

रुचिका मोहनलाल से बोली चलो हम भी नाम लिखवा देते हैं तू मोहनलाल ने उससे कहा 'नहीं हमें नहीं लिखवाना चाहिए'

रुचिका को तू उसकी बात पर विश्वास hi नहीं हुआ. उसने कहा 'इतना बड़ा इनाम है, उससे छोड़ देना कोई समझदारी तू नहीं है और ऊपर से इतना बड़ा आर्डर भी है. रुचिका ने मोहनलाल का हाथ पकड़कर कहा 'प्लीज लिखवा दो न' मोहनलाल ने उसको अपने पास खींचकर धीरे से कहा 'तुम समझो ये गेम कपल्स के लिए हैं और तुम जानती हो...'

रुचिका 'आप उस की बिलकुल भी चिंता न करो और सिर्फ हम खेलेंगे hi नहीं बल्कि फर्स्ट आएंगे और इनाम और आर्डर दोनों हर हालत में जीतेंगे'

मोहनलाल कुछ बोलता उससे पहले hi रुचिका ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखकर उससे आश्वासन दे दिया की चिंता की कोई बात नहीं है. अब बेचारा मोहनलाल क्या करे वो उससे जितना दूर जाना चाहता था किस्मत उससे उसके और पास धकेल रही थी. इसलिए वो वंहा से उठा और भगवन का नाम लेकर गया और नाम लिखवाकर वापिस आ गया और रुचिका को कहने लगा 'देखो तुम्हारे कहने से मैंने नाम तू लिखवा दिया है लेकिन पहली hi गेम में हार कर हम बहार होने के लिए कह देंगे'

रुचिका 'अब अगर हरने की बात की तू मैं आपसे नाराज़ हो जाउंगी. अब सिर्फ और सिर्फ जीतने की बात करनी है और अगर आप मुझसे थोड़ा सा भी प्यार करते हो तू हम इस गेम को जीत कर hi रहेगे'

मोहनलाल ने कहा 'ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी, अब सिर्फ और सिर्फ जीत' रुचिका भी उसकी बात सुनकर बहुत खुश हो गयी और उसने मोहनलाल के दोनों हाथों को अपने हाथों में ले लिया.

थोड़ी देर बाद अनाउंसमेंट हुई और उसमे पता लगा की सभी जोड़ियों जो भी आयी थी सबने नाम लिक्वाया था तू रुचिका अपनी आँखों से पलके उठा उठा कर जैसे कह रही हो देख लिया न. मोहनलाल को हंसी आने लगी की तभी अन्नोउंस हुआ की ये गेम इसलिए राखी गयी है ताकि वो देखना चाहते थे की कपल कैसे मुश्किल की घडी में िक्खत्ते काम करेंगे ताकि उनको सही कंपनी चुनने को मिले ताकि जो आर्डर दिया जायेगा वो पूरा हो जायेगा की नहीं. ये सुनकर हर तरफ खुसर फुसर होने लगी जैसे सब जोड़ियों में जोश भर गया हो. रुचिका, दिया और अवनि में आपस में आँखों के इशारे शुरू हो गए और एक दूसरे को जीतने के लिए हिम्मत दे रहे थे.

अब गेम शुरू हो गयी और पहली गेम थी पोलो कैंडी गेम

इस गेम में हर कपल को आमने सामने खड़ा होना था और उन सब के मुंह में टूथ पिक दे दी गयी और हर टेबल पर पोलो कैंडीज और एक प्लेट राखी हुई थी. करना ये था की पुरुष कैंडी को उठाकर अपनी टूथ पिक में डालेगा और उससे उसे अपनी महिला के टूथ पिक में डालना था. जब वो कैंडी महिला की टूथ पिक में आ जाएगी तू वो इससे प्लेट में डालेगी. ये गेम एक मिनट की थी और इसमें हाथ उसे करना मन था, सिर्फ शुरू में पुरुष अपनी पिक में कैंडी डालने के लिए उसे कर सकता था. सबसे जयादा कैंडी िक्खत्ते करने वाला विनर होगा.

गेम शुरू हुई, सब जोड़ियों की तरह मोहनलाल और रुचिका भी आमने सामने खड़े थे और बहुत hi नजदीक खड़े थे तू बेचारे मोहनलाल को उसकी सुंदरता देखकर अपने ऊपर नियंत्रण रख पाना बिलकुल hi असंभव हो गया था और ऊपर से उसकी इरोटिक परफ्यूम ने उसका जीना मुहाल कर रखा था. हर जोड़ी के साथ एक आदमी खड़ा था ताकि कोई हेराफेरी न कर सके.

जैसे hi टाइम स्टार्ट हुआ तू मोहनलाल ने एक पोलो कैंडी (जिसके बीच में बड़ा सा चीड़ होता है) उठाया और अपने मुंह में पकड़ी टूथ पिक में दाल ली तू वंहा खड़े आदमी ने उससे बताया की अब हाथ नहीं लगा सकते. वो रुचिका के मुंह के पास अपना मुंह लाया तू कैंडी उसकी पिक में नीचे होकर उसके होंठों तक पंहुच गयी थी तू उसने सोचा की रुचिका की पिक के साथ अपनी पिक मिलाने की कोशिश की लेकिन इस कोशिश में उसके मुंह से निकलने वाली गरम साँसे रुचिका के मुंह पर पड़ती है तू वो अपना मुंह एक तरफ कर लेती है जिससे मोहनलाल के होंठ रुचिका के गलो से छू जाते हैं और दोनों को करंट लगता है और मोहनलाल पीछे होने लगता है.

फिर से कोशिश करता है तू पिक रुचिका के मुंह पर लग जाती है और पीछे होकर फिर आगे होता है और मुंह से पिक को निचली तरफ करता है तू कैंडी नीचे गिर जाती है और उससे लगता है की वो हार गए तू वंहा खड़े आदमी ने कहा दूसरी कैंडी दाल लीजिये.

मोहनलाल दूसरी कैंडी उठाते हुए सोचता है की क्या करे. उससे याद आता है की इस गेम को जीतना है तू वो याद करता है की कैसे हो सकता है तू उसके दिमाग़ में आईडिया आता है की जब तक पिक मुंह से ज्यादा बहार रहेगी तू ये होना मुश्किल है तू वो जैसे hi नै कैंडी दाल रहा होता है तू वो रुचिका को इशारे से समझाता है की पिक को जयादा मुंह के अंदर रखे.

रु हिला को पहले तू इशारा समझ नहीं आया लेकिन जब मोहनलाल ने कैंडी पिक में डालकर पिक का जयादा हिस्सा मुंह में ले लिया तू रुचिका को बात समझ आयी तू उसने भी ऐसे hi किया. मोहनलाल मुंह को आगे बढ़ाते हुए रुचिका के मुंह की तरफ गया तू दोनों के नथुनों से निकलने वाली गरम गरम साँसों ने एक दूसरे पर नशा करना शुरू कर दिया और दोनों के होंठ इतने नजदीक आ गए थे की थोड़ी दूर खड़े आदमी को यही लगेगा की वो दोनों किश कर रहे हैं. खैर नशे पर काबू पते हुए मोहनलाल ने कैंडी को अपनी पिक में से उसकी पिक में दाल दी लेकिन इस क्रिया में दोनों की नाक ने आपस में स्पर्श किया और मोहनलाल के होठों ने भी हल्का सा रुचिका के गलो पर उसके होंठों के बिलकुल पास स्पर्श हुआ तू दिल की धड़कन बढ़ गयी.

रुचिका की पिक में आते hi जल्दी से उसने वो कैंडी प्लेट में डाली तू वो बड़ी खुश हुई. मोहनलाल ने दूसरी कैंडी उठाकर जैसे hi पिक में डालने वाला था तू टाइम ख़तम हो गया. वंहा अनाउंसमेंट हुआ की सिर्फ 6 जोड़ियां hi काम से काम एक कैंडी प्लेट में दाल पायी हैं तू रुचिका की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था और उसने मोहनलाल को हुग कर लिया.

फिर अनाउंसमेंट हुई की फर्स्ट आने वाली जोड़ी ने 3 कैंडी डाली हैं और सेकंड आने वाली जोड़ी ने 2 और बाकि 4 जोड़ियों ने एक एक. रुचिका थोड़ा उद्दस हो गयी लेकिन मोहनलाल ने उससे सान्तवना देते हुए कहा 'चिंता न करो, आगे जीतेंगे'. सेकंड आने वाली जोड़ी थी सूरज और दिया की तू रुचिका ने उससे थम्ब्स उप किया

अगली गेम शुरू होने वाली थी. वो गेम थी 'रोल उप थे बैलून'. हर जोड़ी को एक बड़ा सा बैलून दिया जायेगा जो उनके शारिओं के बिच में रखा जायेगा और उस बैलून को रोल करके बिना हाथ लगाए ऊपर मुंह की तरफ ले जाना था और सबसे पहले मुंह की तरफ पंहुचने वाली जोड़ी विनर होगी. अगर बैलून फैट गया या गिर गया तू वो जोड़ी बहार हो जाएगी. अब सब जोड़ियां को वंहा एक लाइन के पास बुलाया गया.

रुचिका ने मोहनलाल से कहा 'इस गेम को जीतना है' तू मोहनलाल ने कहा देखो इसमें अगर दोनों एक साथ बैलून को ऊपर करेंगे तू या तू वो फैट जायेगा नहीं तू गिर जायेगा. इसलिए हम दोनों में से एक वक़्त में एक खड़ा रहेगा और दूसरा उसको ऊपर करने की कोशिश करेगा तू जीत पक्की है. रुचिका ने कहा 'आप बैलून को लेकर खड़े रहना और मैं उससे ऊपर करुँगी' मोहनलाल ने कहा 'अगर थक जाओ तू तुम कड़ी हो जाना फिर मैं करूँगा' वे दोनों स्ट्रेटेजी बनाकर लाइन पर आ गए.

सब जोड़ियों को लाइन पर आमने सामने खड़ा कर दिया और एक एक बड़ा बैलून सब को दे दिया और सब जोड़ियों के पीछे पहले की तरह एक एक आदमी खड़ा था जिसके पास स्टॉप वाच थी. बैलून को हर जोड़ी ने अपने शरीरो के बीच रख लिया और म्यूजिक शुरू होने पर सब जोड़ियां तरय करके बैलून को ऊपर ले जाने लगी. म्यूजिक बहुत hi रोमांटिक धुन पर था.

मोहनलाल और रुचिका ने भी बैलून अपनी बॉडीज के बीच रखा जो थोड़ा सा डाब गया तू दोनों की बॉडीज बहुत पास आ गयी थी और दोनों हे एक दूसरे के शरीर से उठाने वाली सुगंध को सूंघ सकते थे दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा और एक दूसरे को आँखों के इशारे से जीतने के लिए प्रेरित किया. गेम शुरू होते hi स्त्रतत्ज्ञ के अनुसार रुचिका को बैलून को ऊपर करना था तू उसने धीरे धीरे नीचे होकर बैलून को अपने बूब्स से बैलून को प्रेस करने लगी. वो झुकी हुई थी और उसके बूब्स का ऊपरी हिस्सा मोहनलाल की आँखों के सामने आ गया और वो उत्तेजित होने लगा लेकिन उसने अपने आप को नियंत्रित किया और बैलून पर ध्यान देने लगा लेकिन बार बार उसकी नजर वंहा चली जाती.

रुचिका ने नीचे होकर बैलून को अपने बूब्स पर ले लिया तू बैलून अब रुचिका की गर्दन और मोहनलाल के पेट के बीच में था और रुचिका के बूब्स उसके पेट के निचले हिस्से से स्पर्श कर रहे थे और मोहनलाल के धयान को भटकने की कोशिश कर रहे थे. उधर रुचिका के मन में सिर्फ एक hi बात थी की किसी भी तरह बैलून को मुंह तक पंहुचाया जाया. इसलिए अपने बूब्स को बैलून के नीचे रखकर धीरे धीरे ऊपर को पुश करने लगी. इस तरह करने से उसके बूब्स मोहनलाल के पेट और छथि पर कहर ध रहे थे और उसको अपना प्राण चूर चूर होता साफ़ साफ़ नजर आ रहा था.

रुचिका के इस तरह करने से मोहनलाल के शरीर का तापमान बढ़ने लगा, रक्त परवाह अपने से दुगनी गति पर विचरण करने लगा और उसका रक्त लिंग में पंहुच कर उसमे तनाव लेन लगा जिससे मोहनलाल को ये चिंता होने लगी की कहीं उसका लिंग रुचिका को स्पर्श न कर जाये इसलिए वो थोड़ा सा पीछे हुआ तू उस एक पल में बैलून पर दबाव काम होने से वो नीचे जाने लगा तू अगले hi पल मोहनलाल ने अपने आप को थोड़ा सा धनुष की तरह झुककर बैलून को गिराने से बचा लिया और पेट पर ले लिया तू रुचिका की अब तक की साडी म्हणत जीरो हो गयी और जंहा से चले थे वहीँ वापिस आ गए तू रुचिका की साँसे एकदम बहुत तेज हो गयी लेकिन मोहनलाल ने उससे दिलासा देते हुए कहा 'बच गए फिर से करते हैं और इस बार मैं करता हु'

मोहनलाल की बात सुनकर रुचिका ने कहा नहीं आप इससे बस संभल कर रखिये मैं करती हु. उसने फिर से वही क्रिया दोहराई और इस बार मोहनलाल ने रुचिका के बूब्स की रगड़ से अपने आप को विचलित होने से रोक लिया और दिल को पक्का कर लिया तू बैलून धीरे धीरे ऊपर तक आ गया अब बैलून रुचिका की गर्दन और मोहनलाल की छाती के बिच था तू मोहनलाल ने कहा अब मैं करता हु तुम संभल कर रखो और वो ैहस्टा ैहस्टा मुंह को नीचे लेकर फिर बैलून को ऊपर करने लगा तू जैसे hi उन दोनों के मुंह तक आ गया तू वंहा खड़े आदमी ने बैलून ले लिया और स्टॉपवॉच को बंद करके कहा की आपने कर दिखाया.

बैलून तू हैट गया लेकिन टास्क पूरा होने की ख़ुशी में रुचिका उसके गले लग गयी तू मोहनलाल ने भी उससे अपनी बांहों में ले लिया. जब गेम ख़तम हो गयी तू परिणाम आने पर पता लगा की वो फर्स्ट आये हैं और दीपक और अवनि सेकंड आये हैं. रुचिका तू फर्स्ट आने की ख़ुशी में बिना कुछ सोचे मोहनलाल के गले लग गयी और उसके गलो से अपने गाल रगड़ दिए तू मोहनलाल के हाथ उसकी पीठ पर पंहुच गए तू पता लगा की उसकी पीठ तू बिलकुल नंगी है तू उसकी भावनाओं को भड़काने से अब कोई बात नहीं रोक सकती थी तू उसने पीठ को अच्छे से सेहला दिया.
 
सब कुछ कहकर कहते हो की कुछ नहीं कहना.

ज्ञानी व्यक्ति hi धीरज रखता है विस्तृत व्याख्यान को झेलने का जो आपमें है.

मेरा व्याख्यान कई लोगों को दुखी करने लगता है और वो चाहते हैं की जल्दी से जल्दी कहानी को आगे बढ़ाऊ.

लेकिन मुझमे ये कमजोरी है की विवरण पर ध्यान रहता है और मेरी कमजोरी भी आपको मेरी ताकत लगती है.

आपकी इस प्रशंसा को दिल से ग्रहण करते हुए सिर्फ

शुक्रिया
 
अपडेट 34

बैलून तू हैट गया लेकिन टास्क पूरा होने की ख़ुशी में रुचिका उसके गले लग गयी तू मोहनलाल ने भी उससे अपनी बांहों में ले लिया. जब गेम ख़तम हो गयी तू परिणाम आने पर पता लगा की वो फर्स्ट आये हैं और दीपक और अवनि सेकंड आये हैं. रुचिका तू फर्स्ट आने की ख़ुशी में बिना कुछ सोचे मोहनलाल के गले लग गयी और उसके गलो से अपने गाल रगड़ दिए तू मोहनलाल के हाथ उसकी पीठ पर पंहुच गए तू पता लगा की उसकी पीठ तू बिलकुल नंगी है तू उसकी भावनाओं को भड़काने से अब कोई बात नहीं रोक सकती थी तू उसने पीठ को अच्छे से सेहला दिया.

मोहनलाल असल में भी उसकी पीठ सेहला रहा था और फ्लाइट की अनाउंसमेंट होने पर उसने रुचिका को उठाया और चलने के लिए कहा तू वो कुनमुना कर अंगड़ाई लेने लगी और फिर दोनों फ्लाइट की तरफ बढ़ गए और सीट पर जाकर बैठ गए. फ्लाइट ने टेक ऑफ किया और रुचिका दवाई की वजह से फिर से मोहनलाल के कंधे पर सर रखकर सपनो की दुनिया में चली गयी और मोहनलाल अपने विचारो को गति देते हुए याद करने लगा की उस टूर पर क्या क्या हुआ था.

दिया और अवनि ने रुचिका को thumbs-up किया तू रुचिका ने उन दोनों का भी आँखों से हौंसला बढ़ाया. तभी नेक्स्ट गेम का अनाउंसमेंट होने लगा.

नेक्स्ट गेम था 'कपल्स सेल्फी' इसमें हर जोड़ी को एक एक मोबाइल और सेल्फी स्टिक दी गयी थी जिसमे हर जोड़ी को डिफरेंट पोज़ में सेल्फी खींचनी थी. सबसे जयादा एक मिनट में अलग पोज़ की सेल्फीज़ खींचने वाले को विनर मन जायेगा.

रुचिका ने मोहनलाल से कहा की सेल्फी वो लेगी. पहले पोज़ में रुचिका और मोहनलाल अगल बगल खड़े होकर जिसमे मोहनलाल का हाथ रुचिका के कंधे पर और रुचिका का एक हाथ मोहनलाल की कमर पर.

दूसरा पोज़ लिया जिसमे रुचिका ने मोहनलाल के पीछे जाने को कहा तू मोहनलाल पीछे चला गया लेकिन थोड़ा डिस्टेंस बना कर खड़ा हो गया तू रुचिका ने कहा की बिलकुल नजदीक आओ तू मोहनलाल रुचिका से बिलकुल चिपक गया तू बेचारे मोहनलाल की हालत ख़राब होनी hi थी. तीसरे पोज़ में रुचिका घूमकर मोहनलाल के गले लग गयी और सेल्फी ली hi थी की वक़्त ख़तम हो गया.

रिजल्ट्स अन्नोउंस हुए तू पता चला की फर्स्ट आने वाली जोड़ी के 10 सेल्फी हैं और इनाम सब बहार वाली जोड़ियां को मिला. मोहनलाल ने रुचिका का फिर से ढांढस बढ़ाया.

अगली गेम में हर जोड़ी को एक दूसरे से उलटे खड़ा कर दिया गया और ज़मीन पर बहुत सरे स्कार्फ पड़े हुए थे और जोड़ी में से किसी कोई भी उन स्कार्फ को एक एक करके उठाना था और दोनों को कमर से बांधना था. ये गेम भी एक मिनट का था और जयादा स्कार्फ बांधने वाली जोड़ी विजेता होगी

मोहनलाल ने पहला स्कार्फ उठाया और उसको रुचिका के पीछे से ले जाने के लिए आपने हाथ को पीछे की तरफ किया तू वो हाथ रुचिका की नंगी कमर से छू गया जिससे उससे जोर का करंट लगा जिससे वो थोड़ा पीछे हुई तू उसका नितम्ब मोहनलाल के नितम्ब को दबाने लगा जिससे दोनों के दिल में हलचल होने लगी. रुचिका ने अपने हाथ से स्कार्फ पकड़ कर उससे मोहनलाल के दूसरे हाथ में दे दिया जिससे मोहनलाल ने अपने आगे करके बांध दिया. अब दोनों के नितम्ब एक दूसरे के नितम्बों से जुड़े हुए थे और एक अलग hi एहसास का अनुभव कर रहे थे. अब दूसरा स्कार्फ उठाना था लेकिन पहला स्कार्फ बंधा होने की वजह से झुकना मुश्किल हो रहा था तू दोनों hi बेंड होने लगे जिससे दोनों की कमर रगड़ खाने लगी और झुककर अगला स्कार्फ रुचिका ने उठाया और दोनों हाथ अपने पेट के दोनों तरफ ले जाकर मोहनलाल को पकड़ाया तू जैसे hi स्कार्फ बंधा टाइम ख़तम. रिजल्ट्स आने पर फर्स्ट कोई अलग जोड़ी थी और सेकंड आये थे सूरज और दिया तू मोहनलाल और रुचिका ने उन्हें थम्ब्स उप किया और मोहनलाल ने रुचिका का भी ढांढस बंधाया.

अगली गेम में हर जोड़ी को एक दूसरे की तरफ मुंह करके खड़ा कर दिया गया और उनके दोनों हाथों को एक दूसरे के हाथों से अच्छे से बांध दिया गया. मतलब की पुरुष का दांया हाथ महिला के बांये हाथ से और बांया दांये से और दोनों एक दूसरे के बहुत नजदीक स्टार्टिंग लाइन पर खड़े कर दिया गए. हर जोड़ी को चलते हुए फिनिश लाइन को पार करना था और चलते हुए जो भी फिनिश लाइन पर सबसे पहले पंहुचेगा वो जोड़ी विनर होगी.

मोहनलाल ने कहा की वो उल्टा चलेगा और रुचिका सीढ़ी चलेगी, मतलब की फिनिश लाइन रुचिका को दिखाई देगी. गेम शुरू होते hi मोहनलाल ने एक कदम पीछे रखा और रुचिका उसका अनुसरण करती हुई अपने कदम को आगे बढ़ती है तू मोहनलाल दूसरा कदम उठा कर थोड़ा पीछे करता है तू रुचिका भी ऐसे hi करती है. ऐसा करने से उसके बूब्स मोहनलाल की छाती में जा टकराते हैं तू मोहनलाल फिर कदम पीछे करता है और रुचिका आगे. जैसे hi वो आगे आती तू दोनों के शरीरों में हिरशन होता और दिल मचलने लगते.

रुचिका ने देखा की दो तीन जोड़ियां आगे निकल गयी हैं तू मोहनलाल ने जैसे hi कदम उठाया तू उसने भी जल्दीबाजी में अपना पेअर उठा लिया तू वो दोनों गिरने वाले होने लगे लेकिन मोहनलाल ने अपने आप को सँभालते हुए रुचिका को भी बचते हुए जोर से उससे अपनी और खींचा तू वो जोर से मोहनलाल के गले लग गयी और उससे लगा की उसके बूब्स बिलकुल कुचल गए हो और उसके होंठों ने मोहनलाल की गर्दन को स्पर्श किया तू मोहनलाल का हाल बुरा हो गया और वो रुचिका को क्या संभालता उससे तू अपने आप को संभालना भी मुश्किल हो गया.

रुचिका ने मोहनलाल से कहा की लोग आगे निकल रहे हैं तू मोहनलाल ने तरकीब निकली की अगर सीधे उलटे चलेंगे तू गिराने के चान्सेस जयादा थे और वक़्त भी जयादा लगता तू उसने रुचिका के कान में कहा की दोनों साइड में 90 डिग्री घूमकर एक तरफ होकर िक्खत्ते hi एक एक कदम उठाएंगे तू न तू गिराने के चान्सेस होंगे और वक़्त भी बहुत काम लगेगा. हुआ भी यही वो दोनों सबसे पहले फिनिश लाइन पर पंहुच गए तू उनके हाथ तू बंधे हुए थे लेकिन ख़ुशी में बार बार अपनी छाती को एक दूसरे की छाती से टकरा कर हाथ की बजाये छाती से Hi फि कर रहे थे और दोनों hi जीत की ख़ुशी में भूल चुके थे की वो दोनों बाप बेटी हैं न की कपल.

उन दोनों के जब हाथ खोले गए तू सबकुछ भूल कर एक दूसरे को बहुत जोर से हुग कर लिया और एक दूसरे की पीठ को सहलाने लगे की तभी अनाउंसमेंट हुई की 10 मिनट्स का ब्रेक है और आप सब कुछ भी खा पि सकते हैं. ये भी बताया गया की अभी तक के परिणाम के हिसाब से मोहनलाल और रुचिका की जोड़ी दो गेम में फर्स्ट आकर पहले नंबर पर थी.

ये सुनकर रुचिका इतनी खुश थी की मोहनलाल का हाथ पकड़ कर उससे एक जूस के स्टाल पर ले गयी और दो जूस लिए और अपने हाथों से एक गिलास उसने मोहनलाल को पकड़ाया और दूसरा खुद ले लिया और पिने लगे. आधा गिलास ख़तम हुआ तू उसने अपना गिलास मोहनलाल को दे दिया और उसका गिलास खुद ले लिया और एक कुटिल मुस्कान के साथ पिने का इशारा किया. इस वक़्त रुचिका बिलकुल भूल चुकी थी की वो असल में मोहनलाल की बेटी है, उसके दिमाग़ में जीतने की इतनी ललक थी की वो ऐसे बेहवे कर रही थी की जैसे मोहनलाल उसका असल में पति हो. मोहनलाल ने जब रुचिका का झूठा गिलास पकड़ा तू उससे भी शैतानी सूझी और गिलास को घुमक्कड़ जंहा लिपस्टिक लगी थी वंहा से पिने लगा जो की रुचिका ने भी देख लिया तू उससे भी एक अलग फीलिंग आने लगी और फिर कुछ सोचकर शर्माने लगी.

तभी वंहा पर वो दोनों जोड़ियां भी आ गयी और उन्हें मुबारकबाद देने लगी तू मोहनलाल ने कहा की अभी सफर लम्बा है तू उन्होंने शुभकामनाये दी तू मोहनलाल ने भी उन दोनों को शुभकामनाये देते हुए कहा की आप दोनों के चान्सेस भी अच्छे हैं. तभी फिर से गेम शुरू होने की अनाउंसमेंट हुई तू रुचिका ने फिर से मोहनलाल का हाथ पकड़ लिया और सिर्फ पकड़ा hi नहीं बल्कि उसकी उँगलियों में अपनी उँगलियाँ डालकर कास लिया और अपनी टेबल के पास आ गए.

रुचिका ने मोहनलाल से कहा की 'अब और जोर लगाने की जरुरत है' और उसको हुग कर लिया. मोहनलाल ने उससे आश्वासन दिया की पूरी कोशिश करेंगे.

अगली गेम थी पेपर वाक. हर जोड़ी को दो दो ा4 साइज के पेपर दिए गए और करना ये था की पुरुष पहले एक पेपर ज़मीन पर रखेगा और महिला उस पर अपना पेअर रखेगी तब तक पुरुष दूसरा पेपर उसके आगे रख देगा तू महिला अपना दूसरे पेअर को उस पर रखेगी. अब महिला उस पेअर को ऊपर उठाएगी जिस पर पहला पेअर रखा था तू पुरुष उस पेपर को उठाकर आगे कर देगा ताकि महिला उस पर पेअर रख कर आगे बड़े. ये सिलसिला चलता रहेगा जब तक की वो फिनिश लाइन पर न पंहुच जाएँ. अगर कोई महिला लड़खड़ा कर गिर गयी या पेअर पेपर की बजाये ज़मीन पर पड़ा तू वो जोड़ी गेम से बहार हो जाएगी.

गेम शुरू हुई तू मोहनलाल ने पहला पेपर रखा तू रुचिका ने अपना पेअर आगे बढ़ाया तू मोहनलाल उसके पैरों की खूबसूरती में इतना खो गया की अगला पेपर रखना hi भूल गया तू रुचिका ने दो तीन बार पुकारा और कहा की अगला पेपर तू मोहनलाल को होश आया और अगला पेपर रखा तू उसने दूसरा पेअर भी रख दिया तू फिर से पैरों की खूबसूरती में खो गया. रुचिका ने अपना पहले वाला पेअर उठाते हुए उस पेपर को आगे रखने को कहा लेकिन मोहनलाल तू बेचारा कनिह और hi खोया हुआ था तू रुचिका को जोर से बोलना पड़ा की मैं गिर जाउंगी तू मोहनलाल को होश आया की ये गेम खेल रहे हैं तू पेपर उठाकर आगे रख दिया तू रुचिका आगे हुई और इस तरह पेपर बदलने का सिलसिला चलने लगा. अभी आधा रास्ता hi चले होंगे की पता लगा की फर्स्ट और सेकंड आने वाले पंहुच गए हैं तू उन्हें आभास हुआ की ये गेम वो दोनों हार गए हैं.

रुचिका हार से बहुत दुखी थी और ये जानकार और जयादा दुखी हो गयी की इस गेम में फर्स्ट आये दीपक और अवनि और सेकंड आने वाली जोड़ी और कोई नहीं बल्कि सूरज और दिया थे. उससे उनके जीतने की ख़ुशी तू थी और उन दोनों को Thumbs-up भी किया लेकिन मन hi मन वो छह रही थी की फर्स्ट उनकी जोड़ी आये.

मोहनलाल इस हार का दोषी खुद को मान रहा था लेकिन उसमे इतनी हिम्मत नहीं थी की वो रुचिका को बता सके की उसके पैरों की खूबसूरती के नशे में सब कुछ भूलकर उसकी वजह से ये गेम हार गए हैं. उसने प्राण किया की आगे की गेम वो जीतेंगे.

अगली गेम सातवीं गेम है इसलिए ये गेम होगी सात फेरे. इसमें हर जोड़ी को एक चैन, दो टॉप्स, दोनों हाथों के लिए 12 चूड़ियां, एक कमर बांध, एक नोज रिंग और एक फिंगर रिंग दी जाएगी जोकि पुरुष महिला को पहनायेगा, लेकिन महिला खुद नहीं पहन सकती. गहने पहनाने के पुरुष और महिला दोनों एक दूसरे को फूलों की माला पहनाएंगे उसके बाद हर टेबल पर एक मोमबत्ती जलाई जाएगी और उनके कपड़ो को बांध दिया जायेगा. फिर टेबल के चारो तरफ पुरुष अपनी महिला के साथ सात फेरे लेगा. उसके बाद पुरुष महिला को गॉड में उठाकर अपनी जगह पर गॉड में बैठकर कप में से आइसक्रीम खिलयेगा और अगर महिला भी खिलाना चाहे तू वो भी पुरुष को खिला सकती है लेकिन पुरुष खुद नहीं खा सकते. जो जोड़ी सबसे पहले ये करेगी वो विनर होगी. अगर किसी महिला ने गहने पहने हुए हैं तू वो उत्तर कर रख ले क्योँकि सरे गहने सबको एक जैसे दिए जायेंगे. सबने अपने अपने गहने उत्तेर दिए.

गेम शुरू हुई तू मोहनलाल तू पहले सी hi रुचिका को गहने पहना चूका था इसलिए उससे इस बात में जयादा दिक्कत नहीं थी. मोहनलाल ने सबसे पहले उसके एक कान में एक टॉप्स पहनया और फिर दूसरे कान में दूसरा और गले में चैन पहनाने के लिए उसने रुचिका के बाल जैसे hi हटाए तू उससे देखकर उसकी जान हलक में अटक गयी.

रुचिका की पूरी पीठ नंगी थी सिवाए इसके की गर्दन के पास ब्लाउज बहुत hi पतली दूरियों से बंधा हुआ था और ब्लाउज की एक पतली सी पट्टी कमर में ब्रा को बड़ी मुश्किल से धक् प् रही थी. मोहनलाल ने इतनी पतली पट्टी पहली बार देखि थी और मोहनलाल के खड़े होने की वजह से उस पट्टी के अंदर बहुत hi पतली पट्टी की ब्रा भी दिखाई दे रही थी. वो सोचने लगा की ऐसी ब्रा भी रुचिका के पास है या उसने अब खरीदी है. अगर खरीदी हैं तू कब? क्या उसने आज खरीदी है, वो भी इस पार्टी के लिए तू ये सोचको hi उससे आनंद आने लगा की रुचिका इस पार्टी के लिए ख़ास तौर पर तैयार हुई है तू क्या उसके दिल में भी मेरे लिए कुछ है? जब वो थोड़ी देर तक उससे निहारता रहा तू रुचिका ने कहा 'जल्दी करो नहीं तू फिर से हार जायेंगे' मोहनलाल ने उससे जल्दी से चैन पहनाई और घूमकर आगे आ गया और नाक में नोज रिंग पहनाने के लिए उसके नजदीक गया तू रुचिका के नथुनों से निकलने वाली गरम हवा से बचने के लिए पीछे हुआ और जल्दी से उसकी रिंगफिंगर में रिंग पहना दी.

अब बारी थी चूड़ियों की तू उसने रुचिका का एक हाथ पकड़ा तू पाया की उसका हाथ बहुत hi गोरा और नरम है तू उसके दिल में कुछ बजने लगा. खैर उसने रुचिका के हाथ में जैसे hi चूड़ियां पहनाने लगा तू रुचिका को दर्द होने लगा. मोहनलाल ने उससे आँखों में देखने के लिए कहा और जैसे hi रुचिका ने उसकी आँखों में देखा तू उससे कुछ ऐसा दिखाई दिया जिससे उससे नशा चने लगा. मोहनलाल ने इसका फायदा उठा कर बहुत धीरे धीरे सहलाकर उसको एक हाथ में चूड़ियां पहना दी और फिर यही क्रिया दूसरे हाथ में दोहरा कर चूड़ियां पहनाने का कार्यक्रम ख़तम किया लेकिन रुचिका तू अभी तक नशे में थी.

अब सबसे मुश्किल था कमर बांध पहनना. मोहनलाल ने रुचिका से कमर बांध दिखा कर पहनाने के लिए कहा तू रुचिका भी शर्माने लगी, लेकिन मन पक्का करके कड़ी हुई और सदी का पल्लू एक साइड किया तू रुचिका का स्पॉट पेट और उसके बीचो बिच की गहरी नाभि ने भी मोहनलाल के होश उदा दिए, लेकिन अपने को सँभालते हुए कंपते हाथों से कमर बांध को उसके पेट पर ले गया और पेट से हाथ ले जाते हुए कमर के पीछे से घुमक्कड़ कमर बांध को आगे ले आया और उसके हुक को लगाने लगा, लेकिन इस सबमे रुचिका को बहुत गुदगुदी भी हुई और उसके अरमान इतने भड़क चुके थे की वो एक ऐसे एहसास के नशे में खो गयी जिससे उसने जिंदगी में कभी महसूस नहीं किया था.

मोहनलाल ने उसका नशा ये कहकर तोड़ दिया की जीतना है की नहीं तू वो होश में आयी. उसके बाद मोहनलाल ने वंहा राखी फूलों की माला उसके गले में दाल दी और रुचिका ने भी उसके गले में दाल दी. ऐसे लग रहा था जैसे की वरमाला हो गयी हो. अब वंहा खड़े आदमी ने मोहनलाल को एक स्कार्फ दिया जो उसने गले में दाल लिया और उससे रुचिका की सदी के पल्लू से बांध दिया.

फिर उस आदमी को इशारे से मोमबत्ती जलने के लिए कहा तू उसने जला दी. अब मोहनलाल और रुचिका ने टेबल के चारो और फेरे लेने शुरू किये तू उन दोनों को ऐसा लग रहा था जैसे की वो असल में शादी के फेरे ले रहे हो. फेरे ख़तम हुए तू उसने रुचिका की उठाकर अपनी गॉड में ले लिया तू मोहनलाल का एक हाथ रुचिका की पीठ के नीचे से होता हुआ उसके बूब्स के बिलकुल पास आ गया और दूसरा हाथ टांगो के नीचे था. उसकी बाजु पर रुचिका के नरम नरम नितम्बों का एहसास हो रहा था.

मोहनलाल ने अब तक जो भी प्राण किये थे वो सब भूल चूका था, उससे तू ये लग रहा था की जैसे रुचिका जैसा प्यारा सा फूल उसकी गोदी में आ गिरा हो जिसकी सुगंध लेने के लिए भगवन ने उससे उसकी झोली में डाला हो.

रुचिका ने अपनी बांहों का घेरा मोहनलाल के गले में दाल दिया जिससे उसके बूब्स मोहनलाल की छाती में आ गए और रुचिका ने मोहनलाल के कान में बड़े hi प्यार से कहा 'जल्दी से Ice-cream खिलाओ न'

मोहनलाल उससे लेकर एक कुर्सी पर उसको गॉड में लेकर बैठ गया और वंहा रखे कप में से Ice-cream निकल कर उससे खिलने लगा और दोनों के चेरे इतने नजदीक थे की एक दूसरे के गाल बहुत बार स्पर्श हो रहे थे. मोहनलाल की गॉड में इतना हसीं फूल था और वो उत्तेजित न हो ऐसा कैसे हो सकता है. उसके लिंग में तनाव आने लगा तू उससे फार लग रहा था की कनिह रुचिका को इसकी खबर हो गयी तू क्या होगा. रुचिका ने भी उसको ice-cream खिलाई ताकि जल्दी से ख़तम हो सके. हुआ भी यही की ice-cream ख़तम हो गयी और वंहा खड़े आदमी ने कहा 'आपने कर दिखाया, आप पहली जोड़ी हैं जिसने इससे पूरा किया है, आपको मुबारक हो' उसको धन्यवाद् किया.

ये सुन्ना था की रुचिका तू मोहनलाल के गले लग गयी और अपने हाथों के घेरे को टाइट करके मोहनलाल को अपने बूब्स के एहसास का मज़ा देने लगी तू मोहनलाल के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल होने लगा तू उसने रुचिका को उठा कर बगल के नीचे से हाथ डालकर उससे गोल गोल घुमा लिया तू उसने मन किया तू मोहनलाल रुक गया लेकिन उसके हाथों का एहसास रुचिका के बूब्स की साइड में हुआ तू उसके शरीर में सुसुरहट होने लगी और इस नशे में उसने मोहनलाल को कसकर हुग कर लिया और उसकी गर्दन को चुम लिया तू मोहनलाल कान्हा पीछे रहने वाला था तू उसने भी रुचिका के नंगे कंधे पर गर्दन के पास चुम लिया और दोनों ने एक दूसरे को कास लिया.
 
अपडेट 35

ये सुन्ना था की रुचिका तू मोहनलाल के गले लग गयी और अपने हाथों के घेरे को टाइट करके मोहनलाल को अपने बूब्स के एहसास का मज़ा देने लगी तू मोहनलाल के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल होने लगा तू उसने रुचिका को उठा कर बगल के नीचे से हाथ डालकर उससे गोल गोल घुमा लिया तू उसने मन किया तू मोहनलाल रुक गया लेकिन उसके हाथों का एहसास रुचिका के बूब्स की साइड में हुआ तू उसके शरीर में सुसुरहट होने लगी और इस नशे में उसने मोहनलाल को कसकय हुग कर लिया और उसकी गर्दन को चुम लिया तू मोहनलाल कान्हा पीछे रहने वाला था तू उसने भी रुचिका के नंगे कंधे पर गर्दन के पास चुम लिया और दोनों ने एक दूसरे को कास लिया.

रिजल्ट ाणोंके हुआ तू पता लगा की फर्स्ट तू मोहनलाल, रुचिका थे hi और सेकंड थे दीपक और अवनि. तभी अगली गेम की भी अनाउंसमेंट होने लगी.

अगली गेम थी 'ब्लैंडफोल्डेड लव' इस गेम में महिला को अलग ले जाया जायेगा और उसकी आँखों पर पट्टी बांध दी जाएगी और पुरुष एक लाइन पर खड़े हो जायेंगे और उनके कपड़ो के ऊपर आगे और पीछे की तरफ कपडे टांगने वाली चिमटियां लगा दी जाएँगी. जब चिमटियां लग जाएँगी तो उनकी जोड़ी की महिला जिनकी आँखों पर पट्टी बंधी होगी को उनके सामने लेकर खड़ा कर दिया जायेगा. म्यूजिक स्टार्ट होते hi उनको अपने पुरुष के कपड़ों से चिमटियां हटानी होंगी और सबसे पहले करने वाली जोड़ी विजेता होगी. इस दौरान अगर किसी भी पुरुष ने बोलकर या अपने हाथ के इशारे से या और किसी तरह अपनी महिला को बताने की चेष्टा की तू वो जोड़ी प्रतियोगिता से बहार मणि जाएगी.

गेम शुरू हुई तू रुचिका को आँखों पर पति बांध कर मोहनलाल के सामने खड़ा कर दिया तू रुचिका ने हाथ आगे बढ़ा कर मोहनलाल को पकड़ा और उसके सामने आकर सबसे पहले उसने सामने की शर्ट पर हाथ फेरा तू मोहनलाल को गुदगुदी होने लगी तू उसके मुंह से हंसी चटनी लगी और वंहा पर सभी पुरुषों का ऐसा hi हाल था, जब भी कोई महिला पुरुष को अपने हाथ इधर उधर फेरती तू गुदगुदी की वजह से हंसने लगते.

रुचिका ने मोहनलाल की पूरी कमीज पर ऊपर से नीचे हाथ से चेक करने लगी तू उसके हाथ मोहनलाल के कंधे, छथि, बगल, छाती पर हाथ फिरते हुए उसके निप्पल्स पर भी हाथ लगाया तू मोहनलाल छिङक उठा और थोड़ा पीछे हो गया. रुचिका को ये आभास हुआ तू वो थोड़ा आगे हुई और मोहनलाल की कमीज को पकड़ कर दोनों हाथों से उसकी जेब के नीचे उसके पेट पर हाथ फिरने लगी तू गुदगुदी बढ़ गयी लेकिन रुचिका को एक चिमटी मिल गयी और वो उसने निकल दी. फिर उसने मोहनलाल की बाजुओं पर ऊपर नीचे हाथ फिरने लगी तू उससे एक और चिमटी मिल गयी. मोहनलाल रुचिका की आँखों पर पट्टी बंधी होने से वो बेजिझक उसके बूब्स को बड़े गौर से इतने नजदीक से निहारते हुए उनका अवलोकन कर सकता था और किया भी. उसके बूब्स की इतनी अच्छी शेप देखकर उसकी भावनाओं का भड़काना वाजिब था और वो उनका आनंद लेता रहा. उधर रुचिका ने मोहनलाल के गले लगकर उसकी पीठ पर हाथ फिरने लगी तू उससे एक और चिमटी मिल गयी तू वो बहुत खुश हुई. रुचिका का मोहनलाल के गले लगकर उसकी पीठ को सहलाना उसके रक्त परवाह को बढ़ा रहा था और उसका मन कर रहा था की वो भी उससे अपनी बांहों में भर ले लेकिन वो ऐसा कर नहीं सकता था.

अभी कुछ और सोचता की शोर होने लगा की किसी ने गेम पूरी कर ली थी तू रुचिका में जोश आने लगा की काम से काम सेकंड पोजीशन तू मिले, इसलिए अपने हाथों को जल्दी जल्दी चलने लगी और अब उसके हाथ मोहनलाल की टांगों पर आ गए और वो जल्दी जल्दी हाथ चलने के साथ साथ खुद भी ऊपर नीचे होने लगी और एक चिमटी और मिली लेकिन अभी साडी चिमटियां नहीं मिली थी तू उसने सोचा की कनिह टांगों पर पीछे की तरफ न लगी हो तू वो कड़ी हुई और मोहनलाल के नितम्बों पर हाथ फिरते हुए नीचे की और जाने लगी. जैसे hi मोहनलाल के नितम्बों पर उसके हाथ चले तू उसका लिंग तनाव में आ गया और रुचिका को न पता लगे इसलिए वो थोड़ा पीछे होने लगा लेकिन रुचिका ने उससे पकड़ रखा था और नीचे होते हुए टांगो की पिछली साइड में हाथ चलती हुई नीचे आते हुए एक चिमटी और मिली तू वो खुश हो गयी थी.

अब एक चिमटी और रह गयी थी उसने अपने हाथ हर तरफ चला लिए उससे चिमटी कनिह नहीं मिली तू वो प्रसहन हो गयी तू उसने याद किया और अपने हाथों को मोहनलाल की पेंट पर आगे की तरफ पॉकेट्स के ऊपर से होते हुए नीचे जाने लगी तू उसका हाथ मोहनलाल के लिंग पर पड़ा तू उसके होश उड़द गए लेकिन आँखों पर पट्टी बंधी होने की वजह से कोई भी उसके चेहरे के भावों को नहीं देख सकता था. उसने जल्दी से वंहा से हाथ हटा लिया और सोचने लगी की क्या करू, फिर हिम्मत करके हाथ आगे बढ़ाया तू वो मोहनलाल के पेट पर लगा तू उसने सोचा की बैठ कर टांगो के अंदर वाली साइड चेक करके ढूंढती हु, अभी सोच hi रही थी की शोर मच गया की किसी और का भी हो गया. इसलिए अब कोई फायदा नहीं था तू गेम रोक दी गयी और जब आँखों से पट्टी हटाई तू देखने पर पता लगा की चिमटी मोहनलाल की पेंट पर दांयी तंग के अंदर वाली साइड पर थी और वंहा पर हाथ ले जाने पर लिंग से स्पर्श होने से कोई नहीं बचा सकता था. ये सोचते हुए रुचिका को पसीना आ गया.

परिणाम आने पर पता लगा की फर्स्ट वो कपल आया है जिसने तीसरी गेम भी जीती थी और सेकंड आये थे दीपक और अवनि. परिणाम सुनकर रुचिका ने पहले तू अवनि को Thumbs-up किया और उससे लगा की अब कम्पटीशन बढ़ गया है और अगर इस कम्पटीशन को जीतना है तू थोड़ी शर्म छोड़नी पड़ेगी.

उसको उद्दस देखकर मोहनलाल ने उससे हिम्मत बांधते हुए कहा चिंता न करो अगली बजी हम जीतेंगे'

अगली गेम अन्नोउंस हुई तू वो थी एक मिनट की. इसमें हर कपल की टेबल पर एक प्लेट में 6-6 अंगूर रखे होंगे. दोनों कपल्स को अपने हाथ कमर पर रखने थे और उन्हें बिलकुल भी उसे नहीं करना था. पुरुष अपने मुंह से अंगूर को उठाकर महिला के मुंह में डालेगा और उसके खा लेने पर दूसरा उसके मुंह में डालेगा. एक वक़्त में सिर्फ एक hi अंगूर मुंह में दाल सकते थे. एक मिनट में जयादा अंगूर खाने वाली जोड़ी विजेता होगी. अगर एक से जयादा जोड़ियां कर लेती हैं तू सबसे पहले करने वाली जोड़ी विजेता होगी.

मोहनलाल इस गेम को सुनकर परेशान हो गया क्योँकि इस गेम में उसके होंठों का रुचिका के होंठों से स्पर्श होगा और ऐसा होते hi मोहनलाल अपने होश खो देगा. वो तू सोच सोचकर hi परेशान हो रहा था तू रुचिका ने बस इतना hi कहा 'जीतना है'

गेम शुरू हुई तू मोहनलाल ने पहला अंगूर उठाया और उसको ऐसे पकड़ा की जयादा से जयादा हिस्सा मुंह से बहार रहे और वो अपने मुंह को रुचिका की तरफ ले जाने लगा तू उसकी गरम सांसों ने मोहनलाल के दिल की धड़कन बड़ा दी और जैसे hi अंगूर रुचिका ने पकड़ा तू मोहनलाल ने अपना मुंह पीछे कर लिया और जब तक वो कहती तू उसने दूसरा अंगूर अपने मुंह से उठा लिया ताकि वक़्त बचे और इस बार जैसे hi अपने मुंह से उसके मुंह में डालने लगा तू न चाहते हुए भी होठों का स्पर्श हो hi गया. इससे उससे इतना करंट लगा की उसके लिंग में पंहुचे रक्त ने उससे सलामी देने की मुद्रा में ला दिया.

मोहनलाल ने इस आभास को एक तरफ रखकर अगला अंगूर उठाया और वो जैसे hi रुचिका का मुंह उसके मुंह के पास आया तू उसने जल्दी से अंगूर को छोड़ दिया ताकि फिर से होंठों का स्पर्श न हो तू वो अंगूर फिसल कर नीचे चला गया.

मोहनलाल ने जल्दी से उस अंगूर को मुंह में डालकर रुचिका के मुंह के पास ले गया तू रुचिका ने इस बार सोच लिया था की वो अंगूर को नीचे नहीं गिराने देगी इसलिए उसने मोहनलाल के मुंह से निकलने से पहले hi अपना मुंह लगा दिया. इस क्रिया में दोनों के होंठ मिल गए और दोनों को झटका लगा लेकिन दोनों hi इस आभास से जल्दी hi उभरकर गेम पर ध्यान देने लगे.

रुचिका अंगूर खाने लगी और मोहनलाल अगले अंगूर की तरफ बाद गया, लेकिन तभी टाइम उप हो गया तू दोनों का चेहरा उत्तर गया और जो उत्तेजक आभास हुआ था वो भी गायब हो गया. मोहनलाल उठकर रुचिका के पास गया और उसके कंधे पर हाथ रखकर उससे हिम्मत देने लगा तू उसने अपने हाथ में मोहनलाल की बाजु पकड़ ली और इस तरह से पकड़ लिया की जैसे उससे छोड़ेगी नहीं.

परिणाम आया तू पता लगा की फर्स्ट आये हैं सूरज, दिया और सेकंड वो जोड़ी आयी थी जो पहले दो बार फर्स्ट आ चुकी थी उस जोड़ी का नाम था अशोक, रिद्धि. रुचिका ने परिणाम पता लगते hi दिया को Thumbs-up किया.

अब आगे का मुक़ाबला बहुत कठिन हो चूका था. सिर्फ एक गेम बची थी और मोहनलाल रुचिका की जोड़ी अभी तक सबसे आगे थी लेकिन अगर आखिरी गेम में कुछ न किया तू वो फर्स्ट नहीं होंगे. रुचिका परिणाम सुनकर मोहनलाल को याद दिलाने में लग गयी की अब नहीं जीते तू सब गया. मोहनलाल उससे आश्वासन देने लगा की पूरी कोशिश करूँगा.

अगली गेम ऐसी थी की हर जोड़ी में पुरुष को महिला को अपनी पीठ पर उठकर एक लाइन से दूसरी लाइन तक जाना था और वापसी में अपनी पीठ से अपनी गोदी में लेकर वापिस स्टार्टिंग लाइन पर आना है. सबसे पहले करने वाली जोड़ी विजेता होगी. अगर कनिह भी महिला को नीचे उत्तर दिया तू वो जोड़ी गेम से बहार हो जाएगी. मोहनलाल इस गेम के बारे में सुनकर उम्मीद से भर गया और रुचिका को ढांढस बांधने लगा क्योँकि मोहनलाल को अपनी बॉडी पर गर्व था और ये कार्य उसको बहुत आसान लग रहा था.

गेम शुरू होने से पहले पुरुष को महिला को अपनी पीठ पर लेना था तू मोहनलाल ने भी रुचिका को अपनी पीठ पर ले लिया और रुचिका ने अपने हाथ मोहनलाल के गले में दाल कर आगे उसकी छाती पर रख लिए. मोहनलाल अपने हाथों को अपनी पीठ पर लेजाकर उसने रुचिका को कमर से पकड़ लिया. मोहनलाल की पीठ पर रुचिका का सीना पूरी तरह से दबा हुआ था उसकी गर्दन मोहनलाल के कंधे पर और उसका गाल मोहनलाल के गाल को छू रहे थे. उसका पेट कमर पर और टंगे उसने पीछे की और मोदी हुई थी जिससे जंघे और घुटने नितम्बों पर स्पर्श कर रहे थे. दोनों को एक दूसरे के शरीरों का एहसास हो रहा था. मोहनलाल तू नशे में था लेकिन रुचिका भगवन से मन रही थी की किसी तरह ये गेम जीत जाएँ.

गेम शुरू हुई और मोहनलाल ने चलना शुरू किया. रुचिका का वजन जयादा नहीं था लेकिन उसके शरीर की गर्मी और उसके शरीर का मोहनलाल के शरीर से हिरशन उसको एक अलग hi मज़ा दे रहे थे. गेम जितनी है ये सोचकर जल्दी से जल्दी पंहुचना चाहता था लेकिन रुचिका के शरीर को याद करके वो चाहता था की समय यही रुक जाये और कभी आगे न बड़े तू धीरे चलने में फायदा था. इसी उधेड़बुन में रुचिका ने उससे बताया की बहुत साडी जोड़ियां आगे निकल गयी हैं तू vo.apane लम्बे लम्बे डेग भरता हुआ दूर वाली लाइन पर पंहुचा और हाथ पीछे लेजाकर रुचिका को आगे करने लगा तू उसका हाथ रुचिका की काँखो और बूब्स पर पड़ा तू वो बेख्याली में स्पर्श हो गए तू मोहनलाल को रुचिका के बूब्स का एहसास बहुत hi ानडदयक लगा लेकिन इस वक़्त गेम जितनी थी तू सब भूलकर रुचिका को आगे करने लगा. ऐसा करने के चक्कर में उसका मुंह रुचिका के सीने पर आ गया और वंहा की सुगंध ने मोहनलाल को एक बार फिर भड़का दिया.

रुचिका को भी इस सब का एहसास हुआ लेकिन उसके दिमाग़ में बस एक hi धुन थी जीत और सिर्फ जीत, उसने कहा 'जल्दी कीजिये, हमें जीतना है' मोहनलाल ने ये सुना तू उसको अपनी गोदी में ऐसे उठकर अपने शरीर से कास लिया जैसे एक बच्चे को उठते हैं और अपने लम्बे लम्बे कदम बढ़ाने लगा. उसने देखा की 4 जोड़ियां उसके आगे हैं तू वो लम्बे लम्बे कदम रखता हुआ आगे बाद रहा था और एक के बाद एक तीन जोड़ियों को पार कर गया तू लाइन भी दिखाई देने लगी और जैसे hi उस लाइन पर पंहुचा तू शोर मच गया. वंहा पर खुसीर फुसर होने लगी की कौन सी जोड़ी जीती है? कुछ कह रहे थे की मोहनलाल की जोड़ी जीती है और कुछ कह रहे थे की अशोक की जोड़ी जीती है. ये सब इसलिए हो रहा था क्योंकि दोनों जोड़ियां लगभग एक hi वक़्त पर पंहुची थी.

वंहा पर एक बड़ी सी स्क्रीन भी लगी हुई थी तू परिणाम के लिए समझ नहीं आ रहा था की कौन जीता है तू रीप्ले देखा जा रहा था और पता लगा की अशोक की जोड़ी का पेअर लाइन के पार पहले पड़ा जबकि मोहनलाल का पेअर हवा में ज़मीन से कोई 6 इंच ऊपर था. निर्णय हुआ की फर्स्ट अशोक की जोड़ी और सेकंड मोहनलाल की जोड़ी है.

फाइनल रिजल्ट्स के लिए साडी गेम्स को देखने पर परिणाम आया की मोहनलाल, रुचिका की जोड़ी और अशोक, रिद्धि की जोड़ी, दोनों ने तीन में फर्स्ट और एक में सेकंड स्थान प्राप्त किया है जिससे दोनों की जीत की राशि भी बराबर है और इसके बाद सूरज, दिया और दीपक, अवनि की जोड़ी ने भी एक में फर्स्ट और तीन में सेकंड आकर सेकंड पोजीशन पायी है. अब फर्स्ट पोजीशन पर दो जोड़ियां हैं और सेकंड पर दो जोड़ियां हैं.

ये डीडे हुआ की एक गेम और होगी जिसमे फर्स्ट और सेकंड पोजीशन को डीडे किया जायेगा और थर्ड पोजीशन कंबाइंड सूरज, दिया और दीपक, अवनि की जोड़ियां को दिया जायेगा. अब गेम सिर्फ दो जोड़ियों ने खेलनी थी तू हर तरफ शोर मचा शुरू हो गया और दोनों जोड़ियों के लिए वंहा मौजूद जोड़ियों में से कुछ मोहनलाल, रुचिका की जोड़ी को और कुछ अशोक, रिद्धि की जोड़ी का उत्साह बढ़ाने लगे.

इधर मोहनलाल अपने आप को दोषी मान रहा था की उसकी वजह से वे सेकंड आये हैं, जिस गेम को वो आसानी से जीत सकते थे. रुचिका को सिर्फ इतना hi संतोष था की अभी गेम में हैं.

जिस गेम से डीडे होना था वो ये था की दोनों जोड़ियों को एक चॉकलेट दी जाएगी और दोनों तरफ से पुरुष और महिला खाना शुरू करेंगे और जिसकी चॉकलेट पहले ख़तम हो जाएगी वो विनर होगा. इस गेम में दोनों को हाथ पीछे रखने थे और मुंह पर कनिह भी चॉकलेट नहीं लगी होनी चाहिए.

रुचिका मोहनलाल को एक साइड में ले गयी और कहने लगी 'ये गेम हमें हर हाल में जितनी है और आपको मेरी कसम की आप कोई भी कसार नहीं छोड़ोगे इस गेम को जीतने में. प्लीज.' मोहनलाल ने उससे हुग किया और कहा 'जीतेंगे'

गेम शुरू हुई और चॉकलेट मुंह में राखी और स्टार्ट कहते hi दोनों जोड़ियों ने खाना शुरू किया और बाकि जोड़ियां इन दोनों का उत्साह बढ़ा रही थी. इस बार मोहनलाल के मन में भी अब सिर्फ जीत थी न की कुछ और, इसलिए वो जल्दी जल्दी खाने लगा और जल्दी जल्दी खाने के चक्कर में चॉकलेट बीच में से टूट गयी तू मोहनलाल और रुचिका परेशान हो गए, लेकिन तभी मोहनलाल के दिमाग़ में तरकीब आयी और उसने वो चॉकलेट जो उसके मुंह में थी वो रुचिका की तरफ कर दी और उसके मुंह वाली चॉकलेट को अपने मुंह में कर ली, मतलब की दोनों टुकड़े अब दोनों के मुंह में थे. खाने में दिक्कत तू हो रही थी लेकिन खाना तू था hi और टुकड़े छोटे होते गए और जयादा स्पीड से छोटे होने से दोनों के मुंह भी एक दूसरे के पास आ गए और चॉकलेट ख़तम होती जा रही थी और दोनों के होंठ इतने नजदीक आ गए की अब एक दूसरे के होंठों को टच कर रहे थे, लेकिन दोनों ने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखा हुआ था और जल्दी hi चॉकलेट ख़तम हो गयी और उनके होंठो ने एक दूसरे के होंठों को पहली बार चुम लिया और अलग हुए तू रुचिका ने देखा की मोहनलाल को मुंह पर होठों के साइड में चॉकलेट लगी हुई थी तू उसने जल्दी से उसको चाट कर साफ़ कर दी, अब मोहनलाल की भावनाओं ने फिर से उड़ान भरी लेकिन जब उसने देखा की रुचिका के होंठों के आसपास भी चॉकलेट लगी है तू उसने भी अपनी जीभ निकल कर उसके होंठों के आसपास के हिस्से को साफ़ करने लगा. उससे तू चॉकलेट से जयादा मजा उसके होंठों के नजदीक चाटने में आ रहा था. अभी और कुछ करता लोगों ने शोर मचा दिया की मोहनलाल और रुचिका की जोड़ी जीत गयी है क्योंकि अभी दूसरी जोड़ी की चॉकलेट थोड़ी सी बची हुई थी जो जल्दी hi समाप्त होने वाली थी.

तभी किसी महिला ने कहा की मोहनलाल, रुचिका की जोड़ी की चॉकलेट का एक टुकड़ा बच गया है, जिससे सुनकर मोहनलाल और रुचिका के दिल की धड़कन बढ़ गयी की तभी किसने कहा 'छोटा सा टुकड़ा है उससे खा लो जल्दी से' मोहनलाल ने देखा की वो टुकड़ा रुचिका की सदी में वंहा अटका हुआ था जंहा पर उसके दो बूब्स मिलते थे. मोहनलाल तू वो जगह देखकर hi परेशान होने लगा और रुचिका की तरफ देखा तू उसने खाने का इशारा किया तू मोहनलाल अपनी भावनाओं को काबू करता हुआ अपने मुंह को वंहा ले जाने लगा. पहले तू उसके गलों ने उसके बूब्स को स्पर्श किया तू नरम नरम बूब्स का एहसास उससे दूसरी दुनिया में ले जाने लगा की तभी रुचिका ने कहा 'जल्दी करो' तू उसने अपने होंठों को उसके बूब्स के बिच में रखा तू वो टुकड़ा थोड़ा खिसक कर अंदर जाने लगा तू जल्दी से जीभ निकल कर उससे पकड़ लिया और खा गया लेकिन ऐसा करने से थोड़ी सी चॉकलेट वंहा लगी रह गयी थी और उससे लगा की हार गए क्योँकि दूसरी जोड़ी की भी चॉकलेट ख़तम होने वाली थी तू मोहनलाल ने उसकी सदी को एक तरफ करके अपने होंठों को उसके बूब्स के ऊपर के हिस्से पर रखकर जल्दी से जीभ निककर सब चाट गया लेकिन इस सबने रुचिका की हालत ख़राब कर दी. मोहनलाल ने जैसे hi मुंह हटाया की तभी शोर मचा की दूसरी जोड़ी की चॉकलेट भी ख़तम हो गयी है. अब लगा की पता नहीं क्या होगा.

परिणाम घोषित होने में वक़्त लग रहा था और सबके दिल की धड़कन बढ़ रही थी क्योंकि दोनों जोड़ियों ने करीब करीब एक hi वक़्त में चॉकलेट खायी थी. सबको लग रहा था की शायद दोनों को जॉइंट फर्स्ट दिया जायेगा या फिर एक गेम और होगी.

परिणाम घोषित हुआ और अन्नोउंस हुआ की अशोक और रिद्धि की जोड़ी (ये सुन्ना था की रुचिका की आँखों में नमी आ गयी) ने सेकंड पोजीशन प्राप्त की है. इस जोड़ी ने चॉकलेट लगभग उसी वक़्त में पूरी की है जिस वक़्त में मोहनलाल और रुचिका ने लेकिन रिद्धि के होंठों और उसके आसपास के हिस्से में चॉकलेट अभी भी लगी हुई है इसलिए फर्स्ट पोजीशन जाती है मोहनलाल और रुचिका को. ये सुन्ना था की रुचिका जो अभी तक दुखी लग रही थी उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं था और वो सबकुछ भूलकर मोहनलाल के गले लग गयी और उसके होंठों को चुम लिया लेकिन फिर अपने आप को अलग करके शर्माने लगी.

लोगों ने उन दोनों को घेर लिया और मुबारकबाद देनी शुरू कर दी. दिया और अवनि दौड़ कर आयी और रुचिका के गले लग गयी तू रुचिका की ख़ुशी का कोई ठिकाना न था. मोहनलाल तू जीत से जयादा रुचिका के होंठों के चूमने और जो कुछ गेम में हुआ था जैसे होंठों के आसपास के हिस्से को चाटने और सबसे जयादा बूब्स को चाटने के नशे में खोया हुआ था की तभी सूरज और दीपक आ गए और दोनों ने मोहनलाल को गले लगाया और कहा 'भाई साहब बहुई बहुत मुबारक हो, इस आर्डर की जरुरत आपको बहुत जयादा थी, इसलिए हमें आपके जीतने की ख़ुशी इतनी है की जितनी हमें अपने जीतने की भी नहीं होगी'

मोहनलाल 'देखो तुम दोनों मेरे छोटे भाइयों जैसे हो और ये आर्डर मेरा नहीं बल्कि हमारा है, इससे हम मिलकर काटेंगे'

सूरज 'भाई साहब जब हमने आपको अपने साथ मिलाने की कोशिश की तू आपने हर बार मन कर दिया'

मोहनलाल कुछ जवाब देता उससे पहले hi अन्नोउंस हुआ और जीतने वाली सभी जोड़ियों को स्टेज पर बुलाकर इनाम दिया गया तू मोहनलाल और रुचिका को दस लाख एक और एक लाख पिछत्तर हज़ार एक दिए गए और आर्डर की कॉपी भी दी गयी. साथ में तीन दिन का टूर चार जोड़ियों को दिया गया. उसके बाद शैम्पेन की बोतल मोहनलाल और रुचिका को दी गयी तू उनके खोलते hi सबको थोड़ी थोड़ी बनती गयी.

रुचिका ने तू पहले कभी ली नहीं थी, लेकिन मोहनलाल ने कहा कुछ नहीं होगा और उसने भी ले ली. उससे तू इसका कोई अनुभव नहीं था तू मोहनलाल ने कहा धीरे धीरे लेना तू उसने पहला सिप लिया तू उससे अजीब सा खट्टा खट्टा टास्ते आया. धीरे धीरे करके उसने पि ली. उससे तू इससे जयादा जीत की ख़ुशी थी.

मोहनलाल से जयादा रुचिका खुश थी. फिर अन्नोउंस हुआ की 'आप सब यंहा आये आपका बहुत बहुत धन्यवाद्. जो जोड़ियां जीती हैं उनको मुबारकबाद और बाकि सब को सिर्फ इतना hi कहेगे की मौके और भी आएंगे. आप सबसे रिक्वेस्ट है की आप सब जोड़ियां डांस फ्लोर पर काम से काम एक बार आएं और जो भी जोड़ी आने से पहले ड्रिंक्स लेने चाहे ले सकती हैं. डिनर भी रेडी है और डांस फ्लोर पर आने के बाद आप डिनर लेकर hi जाएँ.'

अनाउंसमेंट के बाद कुछ लोग ड्रिंक्स लेने लगे तू दिया और अवनि ने रुचिका को भी वंहा चलने के लिए कहा तू वो मोहनलाल की तरफ देखने लगी तू उसने कहा 'इसने कभी ली नहीं है और ध्यान रखना की अगर ले तू बहुत hi लाइट' सूरज और दीपक ने कहा की हम भी चलते हैं तू उन्होंने कहा 'जैसे आपकी मर्ज़ी' और वंहा जाकर एक छोटा सा पेग लिया और फिर सब डांस फ्लोर पर आ गए.

रुचिका तू बहुत hi जयादा खुश थी और ऊपर से उससे ड्रिंक्स का भी सुरूर चढ़ने लगा. बहुत hi रोमांटिक धुन पर म्यूजिक चलने लगा. मोहनलाल और रुचिका भी डांस के पोज़ में आ गए तू मोहनलाल ने पूछा की कभी डांस किया है तू उसने कहा की 'कभी नहीं लेकिन टीवी देखकर पता है की कैसे होता है' डांस शुरू हुआ और जोड़ियों के बढ़ने से जगह काम होने लगी जिससे इन दोनों की नजदीकी बढ़ने लगी और इतने नजदीक आ गए की मोहनलाल की बाजु जिससे उसने रुचिका को कमर से पकड़ा हुआ था अब उसके बूब्स को दबाने लगी तू रुचिका के दिल में भी खलबली मचने लगी और दोनों के चेहरे इतने नजदीक थे की एक दूसरे की साँसों को महसूस करके उत्तेजित हो रहे थे. रुचिका को अब तक जीतने की ललक थी लेकिन जीतने के बाद अब उसका दिल कुछ और hi कह रहा था और वो मोहनलाल की तरफ आकर्षित होने लगी.

वो गेम के दौरान हुई बातों को याद करके बहुत उत्तेजित हो गयी और डांस करते करते उसके गले लग गयी और कसकर उसके गले लगे लगे hi गलो को चूमकर कहा 'थैंक्स' मोहनलाल ने उसकी आँखों में देखकर कहा 'क्या' तू उसने कुछ न कहकर उसके होंठों पर अपने होंठो को चिपका दिया और फिर एकदम उससे अलग हो गयी.

मोहनलाल उसकी हालत समझकर उससे डिनर के ले गया और एक प्लेट में दोनों के लिए कुछ कुछ दलका उससे लेकर एक टेबल पर ले आया और तब तक सूरज और दीपक भी अपनी बीवियों के साथ खाना लेकर आ गए और सबने नोकझोंक करते हुए खाना खाया और फिर सब खाना खा कर अपने अपने रूम के लिए जाने लगे की दिया और अवनि रुचिका को कुछ इशारा करने लगी.
 
आपको पसंद आया बहुत ख़ुशी हुई.

थोड़ा सा सांस लेने दो. अभी तू आपको मेगा अपडेट दिया है.

दोस्त, लिखने में वक़्त लगता है और बहुत वक़्त लगता है.

अगर आप चाहते हो की कुछ लाइन्स लिख कर पोस्ट कर दू तू कर सकता हु लेकिन ाको मज़ा नहीं आएगा.

अचे अपडेट के लिए थोड़ा वक़्त दो, लिख रही हु और जैसा की मैंने पहले भी कहा है तैयार होते hi पोस्ट कर दूंगी.

आप मेरी बात को समझेंगे.

धन्यवाद्
 
आपकी सोच अपनी जगह है. ये बात तू आपकी ठीक है की आपको संध्या और आदित्य वाली जोड़ी अच्छी लग रही है, कुछ रीडर्स को मोहनलाल रुचिका की जोड़ी और कुछ को दोनों जोड़ियां पसंद हैं.

आप चिंता न करें जैसा की मैं बहुत बार कह चुकी हु सभी पातर मैं रोले में हैं और आपकी जानकारी के लिए ये भी बता दू की अभी तक जो कहानी की आत्मा है वो तू आयी hi नहीं है

अभी तू सिर्फ और सिर्फ भूमिका है.

दूसरी बात की फलाहबाक डिटेल में क्योँ है तू आपको एक बात बता दू की हर अपडेट बका अपना एक महत्व है और उसमे जिस चीज की जितनी जरुरत है उतनी hi दी गयी है और उन सब बातून का आने वाली कहानी में महत्व है और उसको ऐसे hi नहीं लिखा जा रहा है.

आप से बाद इतना hi कंहूगी की थोड़ा धैर्य रखिये आउट आप को सब कुछ मिलेगा.

धन्यवाद्
 
अपडेट 36

मोहनलाल उसकी हालत समझकर उससे डिनर के ले गया और एक प्लेट में दोनों के लिए कुछ कुछ दलका उससे लेकर एक टेबल पर ले आया और तब तक सूरज और दीपक भी अपनी बीवियों के साथ खाना लेकर आ गए और सबने नोकझोंक करते हुए खाना खाया और फिर सब खाने खा कर अपने अपने रूम के लिए जाने लगे की दिया और अवनि रुचिका को कुछ इशारा करने लगी.

जब वो दोनों कमरे में पंहुचे तू मोहनलाल ने कमरे में पंहुच कर उससे अंदर से लॉक कर दिया और जैसे hi पलटा तू रुचिका ने बनने फैलाकर उससे अपनी बांहों में ले लिया और कहा 'हमने कर दिखाया'

मोहनलाल भी अपने आप को रोक नहीं पाया और उसने भी रुचिका को अपनी बांहों में समेत कर उसके माथे को चूमते हुए 'हाँ कर दिखाया, लेकिन इसको करने में पूरा पूरा श्रेय तुम्हारा है'

रुचिका 'मैं अकेले कैसे कर सकती थी, वो तू आप थे तू हो गया नहीं तू संभव hi नहीं था'

मोहनलाल 'मैं तुम्हे कैसे बताऊँ की मेरी वजह से तू हम हारते हट्टे बचे हैं'

रुचिका 'मैं हमेशा जीतने में hi विश्वास रखती हु, इसलिए बचपन से लेकर आज तक जीतने के लिए दिल लगाकर पूरी म्हणत की है और आज की जीत तू सिर्फ सुर सिर्फ आपकी वजह से है' ये कहकर उसने मोहनलाल को अपनी बांहों में जोर से कास लिया.

मोहनलाल 'रुचिका, ये तुम इसलिए कह रही हो क्योँकि गेम कपल्स के लिए थी और तुम अकेले नहीं कर सकती थी, लेकिन तुम ये क्योँ भूलती हो की मैं भी तू वंहा अकेला नहीं जा सकता था'

रुचिका ने अपना चेहरा मोहनलाल के चेरे के सामने करके 'चलो ठीक है ये जीत न आपकी न मेरी बल्कि हम दोनों की' और उसने अपनी नाक से मोहनलाल की नाक को स्पर्श किया.

मोहनलाल 'नहीं, ये जीत सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी है, अगर तुम मुझे कसम नहीं देती तू शायद हम गेम हार जाते'

रुचिका 'वो तू मैंने आपकी हिम्मत बढ़ने के लिए कहा था लेकिन असल में अगर आप नहीं करते तू हम हाट जाते'

मोहनलाल 'तुम शायद भूल रही हो की मैं नहीं चाहता था की हम इस होटल में आये और हमें पति पत्नी बनना पड़े. वो तू तुम्हारी ज़िद थी की हम यही आएगा. इतना hi नहीं यंहा आने के बाद भी मैं नहीं चाहता था की हम पति पत्नी बने लेकिन तुमने बहुत हिम्मत का काम करके न सिरहफ खुद को बल्कि मुझे भी पति पत्नी बनने के लिए मेंटली तैयार किया'

रुचिका 'क्योँ आप को अच्छा नहीं लगा क्या?'

मोहनलाल 'जब कपल्स पार्टी में गए तू मैंने तुम्हे गेम खेलने से मन किया लेकिन तुमने वंहा भी ज़िद करके मुझे नाम लिखवाने पर मजबूर किया. अब अगर तुम पति पत्नी बनने की ज़िद नहीं करती, गेम खेलने की ज़िद नहीं करती तू जीतते कैसे. इसलिए ये जीत सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी है'

रुचिका 'अगर आप मुझे लाये hi नहीं होते तू फिर मैं तू पिक्चर में थी hi नहीं'

मोहनलाल 'मैं जनता हु तुम बहुत समझदार हो और मुझे तुम कुछ भी समझा कर शांत कर देती हो, लेकिन ये बाग़ बिलकुल पक्की है की ये जीत सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी है और ये इनाम का सारा पैसा तुम्हारा'

रुचिका 'क्या सच्ची' और ये कहकर वो इतना खुश हो गयी की उससे होश hi नहीं रहा और उसने मोहनलाल के चेहरे पर चुम्बनों की कड़ी लग दी तू मोहनलाल हक्का बक्का रह गया. लेकिन जैसे hi रुचिका को होश आया तू वो मोहनलाल से छूट कर शरमाते हुए उसकी तरफ पीठ करके कड़ी हो गयी और ये सोच सोच कर hi उसकी सांस इतनी तेज हो गयी की उसके बूब्स ऊपर नीचे डांस कर रहे थे.

मोहनलाल उसके पीछे गया और जाकर जैसे hi उसके कंधे पर हाथ रखे तू उसकी ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की नीचे और जैसे hi उसको अपनी और घुमाया तू वो मोहनलाल के गले लग गयी और शर्म से अपने मुंह को उसकी छाती में छुपा लिया और कहा 'आप बार बार क्योँ कह रहे थे की ये सिर्फ मेरी जीत है'

मोहनलाल 'सच्ची बात तो सच्ची hi जोति है उसको कहने में क्या हिचकिचाना'

रुचिका 'चलो एक बार मैं आपकी बात मान भी लू तू आप hi कहते हो न की हम दोनों में कोई फरक नहीं है तू फिर यंहा फरक कैसे? अगर ये जीत मेरी भी है तू भी हमारी है न की सिर्फ मेरी'

मोहनलाल 'तुम बहुत hi होशियार हो, मुझे अपनी बातों में फसा hi लेती हो'

रुचिका 'मैंने तू सिर्फ वही कहा है जो नियम आपने बनाये थे'

मोहनलाल 'कौनसे नियम'

रुचिका 'यही की पति पत्नी एक सिक्के के दो पहली होते हैं और उन दोनों में कोई फरक नहीं होता'

मोहनलाल 'ये कोई नियम मेरा नहीं है बल्कि ये संसार का बनाया हुआ नियम है, वो तू हर पति पत्नी को पता होता hai,emon तुमने जब पत्नी बनने का फैसला किया तू मैंने सोचा की तुम्हे अवगत करा दू'

रुचिका 'अगर ये बात ठीक है तू क्योँ न हम हमारी जीत को सेलिब्रेट करें'

मोहनलाल 'जीत अभी तू सब के साथ सेलिब्रेट कर के आये हैं'

Ruchika'Vo कोई सेलिब्रेशन थोड़ी न था, न तू मैं आपको खुल कर कुछ कह सकीय और न hi आपके साथ कुछ खा या पि सकीय'

मोहनलाल 'तुम क्या करना चाहती हो'

रुचिका 'एक एक पेग लेंगे और चॉकलेट खाएंगे, फिर डांस करेंगे'

मोहनलाल ने मन में सोचा 'ये इसको क्या हो गया है, अगर ये पेग लेगी तू चढ़ जाएगी क्योँकि पहले hi दो पेग ले चुकी है और कुछ उल्टा सीधा हो गया तू बहुत बदनामी होगी. क्या करूँ, इससे मन करके देखता हु' और उसने प्रत्यक्ष में कहा 'देखो मैं थक गया हु और कल भी मीटिंग है तू चलो सोते हैं'

रुचिका वंहा से जाती और जाकर बीएड पर बैठकर कहने लगी 'सो जाइये आपको तू मेरी फीलिंग्स का तू कोई ख्याल hi नहीं है'

मोहनलाल जाकर सोफे पर बैठ गया और अपने जुटे उतरते हुए 'तुम कुछ भी कह देती हो, अगर तुम्हारी फीलिंग्स का ख्याल नहीं होता तू मैं ये गेम कभी नहीं खेलता'

रुचिका 'इतनी बड़ी जीत हुई है और आप हो की उससे सेलिब्रेट भी नहीं करना चाहते'

मोहनलाल 'मेरे हिसाब से तू हमने सेलिब्रेट कर लिया है, बाकि अगर तुम्हे कोई कमी लगती है तू उससे कल पूरा कर लेंगे'

उसकी बात सुनकर वो उन्ही कपड़ो में बीएड पर औंधे मुंह लेत गयी और उसकी आधी टंगे हवा में hi लटकी हुई थी क्योंकि उसने अपने हाई हील्स को भी नहीं उत्तरा था.

मोहनलाल उसकी नाराजगी देखकर सोच में पद गया की क्या करूँ, अगर इसको मनाता हु तू ये ड्रिंक्स के बाद कुछ उल्टा सीधा न कर दे और इसको नाराज मैं देख नहीं सकता. वो रुचिका के पास गया और उसके सर पर हाथ फेरकर 'क्या तुम भी न छोटी सी बात पर नाराज हो जाती हो' रुचिका एक डैम से सर उठाते हुए गुस्से में 'ये छोटी सी बात है की हमने गेम जीती है और इतना बड़ा इनाम मिला है और आप मेरे साथ सेलिब्रेट भी नहीं कर रहे और अगर आप कहते है की ये छोटी सी बात तू आप मेरी छूट सी बात भी नहीं मान सकते'

मोहनलाल 'तुम्हे पता है की मैं तुम्हारी कोई बात नहीं टालता, चलो जो कहोगी करेंगे, लेकिन पहले ड्रेस बदलकर इजी हो जाते हैं'

मोहनलाल का इतना कहना था की रुचिका एकदम उठकर उसके गले लग गयी और कहा 'थैंक्स मेरी बात मैंने के लिए' बेचारा मोहनलाल जो उससे बचने की सोच रहा था और फंस गया तू उसने कहा की 'जाओ जल्दी से चेंज कर लो'

रुचिका 'चेंज करने से पहले एक दो सेल्फी ले ले, प्लीज'

मोहनलाल ने कहा ठीक है तू रुचिका जल्दी से कड़ी हो गयी और बड़े hi जोर से मोहनलाल के गले लग गयी और इस तरह से कड़ी हुई की उसका दांया बूब मोहनलाल की छथि में धंस सा गया और अपने दांये हाथ को मोहनलाल की कमर पर ले गयी और बांये हाथ से सेल्फी ली, फिर वो थोड़ा सा और मोहनलाल की तरफ घूम गयी. ऐसा करने से उसका बांया बूब भी मोहनलाल की छथि से जा टकराया तू फिर एक स्नेप लिया. अब वो मोहनलाल से कहने लगी की वो उसके पीछे आ जाये तू मोहनलाल ने ऐसा हो किया तू उसने मोहनलाल के हाथ पकड़ कर अपने कन्धों पर रखवा दिए. कंधे तू नंगे जैसे hi थे क्योँकि दोनों कन्धों पर ब्लाउज की पट्टी बहुत hi पतली थी तू मोहनलाल का तापमान बढ़ना hi था, खैर इस पोज़ में भी उसने एक स्नेप लिया.

उसके बाद मोहनलाल के हाथों को पकड़ कर आगे कर लिया, इससे उसके बाजु बूब्स को चुने लगे. रुचिका ने उसके दोनों हाथों पर अपना दांया हाथ रख लिया और बांये हाथ से स्नेप लिया तू अब मोहनलाल से बर्दाश्त नहीं हो रहा था तू उसने कहा 'चलो बस अब कपडे बदल लेते हैं'

रुचिका ने कहा की 'बाथरूम में सदी गीली हो जाएगी' तू मोहनलाल ने कहा 'मैं बहार घूम आता हु, तब तक तुम चेंज कर लो' तब रुचिका ने कहा 'आपकी पत्नी हु तू आपको जाने की क्या जरुरत है आपके सामने hi चेंज कर लेती हु'

मोहनलाल को पता नहीं एकदम से गुस्सा आ गया और उसने बगैर कुछ सोचे एक थप्पड़ रुचिका के गाल पर चिपका दिया और वो थप्पड़ काफी जोर का था जिससे रुचिका जाकर सीधे बीएड पर गिर गयी.
 
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