दिव्यास्त्र.[The power of five elements] - Page 9 - SexBaba
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दिव्यास्त्र.[The power of five elements]

है भाई सम्बन्ध तो सीधा देव से hi है. आप ये अपडेट पद कर समाज जायेंगे. एंड रही बात बंद बजने की तो अब हर तरफ से बजने वाली है देव की. उसके माँ और दादू अलग बजायेंगे और असुर तो बजा hi रहे है. और दोनों लड़किया क्या गुल खिलाएगी ये भी देखना दिलचस्प होगा.... देखते है क्या होता है बेचारे देव का.....

कीप सपोर्टिंग............
 
अपडेट 67



मेरी नींद खुल चुकी थी. लेकिन समाज में नहीं आरहा था की क्या हुआ होगा.

इसलिए सोचा ध्यान करके देखता हु. सायद कुछ पता चल जाये.

मैंने अपनी आँखों को बंद किया. और जानने की कोसिस करने लगा की आखिर हुआ क्या है लेकिन अफ़सोस की कुछ भी पता नहीं चल प् रहा था. किसी भी प्रकार की छोटी सी भी जानकारी नहीं मिल प् रही थी मुझे. जिस बजह से मेरा भेजा फ्राई होने लगा था. अब जब पता hi नहीं चलेगा की कहा क्या हुआ है. तो में बहा पहिचूंगा कैसे. मैंने एक बार फिर से कोसिस की. अपनी आँखों को बंद किया मन को शांत किया पूरी तरह से और मंत्र का जाप करने laga.sara ध्यान अपने तीसरे नेत्र पैर केंद्रित करने लगा. जैसा मैंने पहली बार जंगल में किया tha.me कितनी देर तक ऐसा करता रहा पता नहीं. लेकिन आखिर कार मुझे सफलता मिल hi गयी. मेरी थर्ड ऑय ओपन हो गयी. जो मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी. मतलब साफ़ था की अभी भी ये काम कर रही है. बस थोड़ी म्हणत ज्यादा करनी पड़ेगी. खैर जब आँख खुली तो मैंने जानने की कोसिस की. कहा क्या हुआ है. मुझे किस चीज़ का एहसास हुआ था. बहुत देर तक कोसिस करता रहा लेकिन कोई भी साफ़ इमेज दिमाग में नहीं आरही thi.jis बजह से फिर से भेजा फ्राई होने लगा था. लेकिन कोसिस तो करनी hi थी. इसलिए मैंने जारी रखा जानने का ये सफर. और काफी मसक्कत करने के बाद आखिर कार मुझे एक साफ़ इमेज दिखाई दी. और ये देखकर में बिलकुल हैरान रह गया. मुझे समाज में नहीं आया की में कैसे रियेक्ट करू. क्या करू. कुछ समाज में नहीं आरहा था. वो इमेज रेनू की थी. जो बेहसूश पड़ी हुई thi.mujhse और नहीं देखा गया. और मैंने अपना ध्यान तोड़ दिया. और फ़ौरन hi अपना मोबाइल उठा कर रेनू का no. डायल किया. लेकिन लगते hi उसका no. बंद आने लगा. मैंने फिर से तरय किया तो फिर से बंद. मैंने सुरभि का no. तरय किया तो उसका भी मोब. बंद आने laga.ab मेरी टेंशन बढ़ने लगी. की ये दोनों का no. बंद क्यों आरहा है. क्या हुआ है. अब मुझे कन्फर्म करना था. इसलिए मैंने मां को कॉल किया सीधे.

और ये अच्छी बात थी की उनके no. पैर रिंग बज रही थी. टाइम बहुत हो गया था वो सायद सो रहे होंगे. लेकिन मेरा जानना जरुरी था. इसलिए मैंने कॉल कट नहीं kiya.or करीब लास्ट रिंग तक मां ने फ़ोन उठा लिया.

मैं- hello मां में देव बोल रहा हु.

ये सुनते hi उनकी नींद भाग गयी.

मां- है देव क्या हुआ. इतनी रात को कॉल किया सब ठीक है न.

मैं- यहाँ सब ठीक है मां. आप जरा रेनू और सुरभि को देखिये न वो ठीक है न. अपने कमरे में hi है न.

मां- क्यों क्या हुआ.

मैं- में बाद में बताता हु पहले आप चेक करिये और मुझे बताइये.

मां- ठीक है होल्ड कर में जेक चेक करता हु.

तभी ममी की आवाज आगयी mujhe.jo मां से फ़ोन के वारे में पूछ रही थी की किसका है बगेरा बगेरा. तो मां ने उन्हें बता दिया की मेरा फ़ोन है. ये सुनके ममी भी घबराने lagi.to मां ने उन्हें समझाया और वो सायद बहा से उनके कमरे की तरफ चले गए और साथ में ममी भी. और थोड़ी hi देर बाद मुझे दरवाजा खटखटाने की आवाज आने लगी. मां और ममी दोनों hi दरवाजा पीट रहे थे और दोनों का नाम चिल्ला रहे थे. लेकिन काफी देर तक कोई आवाज नहीं आई. तो उन्होंने लॉक को घुमाया तो गेट खुल गया. और जब अंदर जेक उन्होंने देखा तो वो हैरान थे.

मैं- मां क्या वो है बहा पैर.

मां- नहीं है.

मैं- ममी से पूछिए

मां ने ममी को आवाज लगा कर पूछा तो बहा पैर भी कोई नहीं था और ममी भी मां के पास hi आगयी थी. और वो कह रही थी की दोनों कमरों में नहीं है. न hi बाथरूम में.

मैं- मां बाकि के रूम चेक करवाइये आप सायद कही और सो रही हो.

मां- ठीक कहा रुको में देखता हु.

और उसके बाद वो दोनों लग गए सरे रूम खोल कर चेक करने में. जिसमे करीब 20-25 मं. लग गए.

मां- देव बीटा नहीं है पूरा घर देख लिया हमने.

मैं- वो कहा गयी है आपको बता कर गयी है क्या. या ममी को. सायद किसी फ़रिनेड्स के घर रुक गयी हो.

मां- में उन्हें फ़ोन लगता हु.

मैं- मैंने तरय किया था दोनों के फ़ोन बंद आरहे है इसीलिए आपको जगाया मैंने. आपके पास उनके कोई फ्रेंड्स के no. बगेरा हो तो उनको तरय कीजिये सायद कोई जानकारी मिल जाये.

मां- ठीक कहा में ढूंढ़ता हु. और फिर तुम्हे लगता हु में.

मैं- ok मां जल्दी बताइये.

मैंने फ़ोन कटा और सोचा की सीड से सायद कोई हेल्प मिल jaye.isliye मैंने दोनों no. को उसके पास भेज दिया और फिर उसको कॉल किया. काफी देर बाद उसने कॉल उठालिया.

सीड- hello सर.

मैं- सॉरी यार इतनी रात को डिस्टर्ब किया तुमको

सीड- कोई बात नहीं सर. क्या हुआ सब ठीक है न.

मैं- यार कुछ गड़बड़ हुई है. लेकिन समाज में नहीं आरहा है. मैंने दो no. भेजे है तुम्हे उनकी लास्ट लोकेशन पता करनी थी. की वो आखिरी बार कहा पैर थे

सीड- ठीक है सर में पता करता हु. बैसे किसके no. है ये.

मैं- यार मेरी बहनो के no. है. उनके फ़ोन बंद आरहे है. प्लस यार बताना कहा है वो. मुझे टेंशन हो रही है

सीड- don't वोर्री सर में पता करके बताता हु. मुझे बस 15 मं. Deejiye.or दोनों ने मोबाइल के मॉडल no. भी बता दीजिये.

Main-theek है में भेजता हु. एंड टेक योर टाइम. मुझे जल्दी कॉल बैक करो.

सीड- ok सर.

मैं- और है इसबारे में किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए. न्यूज़ लीक न हो.

सीड- बस क्या सर. विस्वास रखिये.

मैं- पूरा विस्वास है. बस याद दिला रहा हु की ध्यान रहे इस बात का. वर्ण प्रॉब्लम हो सकती है हमें.

सीड- में ध्यान रखूँगा सर. में करता हु फ़ोन.

उसके बाद मैंने कॉल कट कर diya.and उसकी दोनों की मोबाइल की कंपनी और मॉडल no. भी भेज दिए.

और सोचने लगा की कोण कर सकता है ऐसा. कही कोई असुर तो नहीं. जो इस समय का फायदा उठाना चाहता हो. मुझे कुछ ऐसा hi डाउट जा रहा था. लेकिन में सूरे नहीं था. क्युकी फिलहाल मेरी मंद पावर काम नहीं कर रही थी. और इस समय मेरे द्वारा बनाये गए कवच जिसके द्वारा उनकी रक्षा होती है. वो भी कमजोर पद गए होंगे. या फिर ये कोई आवारा लड़को का काम भी हो सकता है. फिलहाल में कुछ भी नहीं कह सकता था. और मुझे जल्द से जल्द सूरे होना था. वर्ण ऐसा न हो की कही ज्यादा देर हो जाये. मुझे इसीवक़्त उस जगह पैर पहुंचना tha.jaha उनकी लास्ट लोकेशन थी. बही जेक मुझे कोई क्लू मिल सकता था.

अभी में सोच hi रहा था की मां का कॉल आज्ञा.

मैं- है मां कुछ पता चला.

मां- नहीं देव. उनकी सरे फ्रेंड्स को कॉल करके देख लिया. वो शाम को किसी के साथ नहीं थी. मुझे बहुत टेंशन हो रही है. कही कुछ गड़बड़ न हो जाये. बैसे तुम्हे कैसे पता चला की वो यहाँ नहीं है

मैं- मां मुझे कुछ बुरा आभाष हुआ था. और मेरी नींद खुल गयी थी. इसीलिए मैंने उनको सीधा कॉल किया ये जानने के लिए की सब ठीक है या नहीं. लेकिन उनके फ़ोन hi बंद आरहे थे. जिससे मेरा शक यकीन में बदल गया की कुछ तो गड़बड़ जरूर है. आप टेंशन न लो में उन्हें ढूंढ लूंगा. आप जल्दी पुलिस कमिश्नर को कॉल करके सब बता दो. में भी जल्दी hi बहा पहुँचता हु. में अभी निकल रहा हु.

मेरी बाते सुनकर उनका डिल बैठा जा रहा था. जिसे में महसूस कर प् रहा था.

मां- बीटा तुम सुबह आजाना रात में आना ठीक नहीं लग रहा मुझे.

मैं- मां आप मेरी टेंशन न लो. मुझे कुछ नहीं होने वाला. आप जल्दी से पुलिस को खबर कर दो में 2-3 घंटो में पहुँचता हु.

मां- बीटा तुम्हारी माँ को मत बताना कुछ भी वर्ण वो सेह नहीं पाएंगी.

मैं- मां उनको कुछ तो बताना पड़ेगा न. में देखता हु. आप ज्यादा स्ट्रेस मत लो. में संभल lunga.me आता हु अभी.

ये कहके मैंने कॉल कट कर दिया. और बाथरूम में घुस गया. जल्दी से फ्रेश हुआ. कपडे चेंज किये और नीचे आज्ञा. अब सोचा माँ को बताने से कोई फायदा नहीं है. वो पेनिस हो जाएँगी. दादू को hi बता कर निकलता हु. इसलिए मैंने दादू के कमरे का गेट खटखटाया. और उन्होंने थोड़ी hi देर में दरवाजा खोल दिया. और मुझे ऐसे देख कर वो चौक गए.

दादू- क्या हुआ बीटा कहा जा रहे हो ऐसे रेडी होक.

मैं- दादू प्रॉब्लम आगयी है में दिल्ली जा रहा हु.

दादू- दिल्ली. क्या हुआ सब ठीक है न.

मैंने फिर दादू को अभी की बाटे बता दी की क्या हुआ है. जिसे सुनके वो खड़े खड़े hi गिरने लगे तो मैंने उन्हें संभाला और उन्हें बीएड तक लेके आया

मैं- दादू आप तो स्ट्रेस न लो. वर्ण माँ को कोण संभालेगा. आप प्लस हिम्मत रखिये. में उनको जल्दी hi ढूंढ लूंगा. आप बस माँ को सम्भालिये.

दादू- मुझसे वादा करो उन्हें सही सलामत बापिस लाओगे.

मैं- वादा करता हु आपसे. उनको बिना एक भी खरोच आये बापिस लाऊंगा में. आप विस्वास rakhiye.me निकलता हु. माँ को संभल लीजियेगा.

दादू- तुम जाओ में सुबह पहली फ्लाइट से बहा पहुंच जाऊंगा बहु को लेके. क्युकी वो बिना बहा आये मानेंगी नहीं.

मैं- ठीक है आप आजाना. लेकिन मुझे एक कॉल करदेना फ्लाइट में बैठने से पहले. याद से.

दादू- है में कर दूंगा.

मैं- ख्याल रखियेगा में करता हु फ़ोन बहा पहुंच कर.

.उसके बाद मैंने उन्हें बही छोड़ा और बहार आज्ञा. गैराज में गया अपनी कार ली और फुल स्पीड में निकल गया. गॉर्डस से गेट खुलवाया और तेज़ी से बहार निकल गया. अब मैंने सोचा प्राची को कॉल कर दू. वर्ण वो अलग जान खायेगी.

इसलिए मैंने उसे भी कॉल किया. और थोड़ी hi रिंग में उसने कॉल उठा लिया और उसके बाद मैंने उसे सब बता दिया जिसे सुनके उसका दिमाग भी हिल गया की ये कैसे हो गया. और ये सुनते hi वो मेरे साथ चलने की जिद करने लगी. और आलिआ भी उसका साथ देने लगी. तो मैंने उसे समझा दिया की अभी यही रहे. अगर जरुरत होगी तो में बुला लूंगा. आखिर यहाँ भी तो कोई होना चाहिए न. काफी समझने के बाद वो मान गयी. अब सीड से फ़ोन पैर बात किये 30 मं. हो चुके थे लेकिन उसका कॉल नहीं आया तो मैंने hi उसे कॉल लगा लिया. उसने तुरंत hi पिक किया मेरा कॉल

मैं- क्या हुआ. आधा घंटा हो गया है

सीड- सर उनकी लास्ट लोकेशन तो मिल गयी थी. में उनकी करंट लोकेशन जानने की कोसिस कर रहा था.

मैं- कैसे. उनके मोबाइल तो बंद हैना.

सीड- है सर. मैंने उनके मोबाइल कंपनी के सर्वर को हैक किया और उनके द्वारा उनके मोबाइल को ों करवाया. बस कुछ hi देर में उनकी करंट लोकेशन मिल जाएगी. में आपको साडी लोकेशन भेज दूंगा. बस थोड़ी देर रुक जाइये.

मैं- ok में दिल्ली जा रहा हु. रस्ते में हु. ये लोकेशन बही की होंगी. इसलिए मेरे बहा पहुंचने से पहले मुझे भेज देना

सीड- ok सर. बस ऑलमोस्ट हो hi गया है.

मैं- ठीक जैसे hi पता चले मुझे बता देना. में अभी ड्राइव कर रहा hu.baad में बात करता हु

सीड- ठीक है सर.

मैंने कॉल कट किया और कार की स्पीड बड़ा दी. अभी रात के 2 बज रहे थे. और मुझे जल्दी से जल्दी पहुंचना था दिल्ली. करीब 1 घंटे या उससे भी काम समय में. इसलिए मेरी कार हवा से बाटे कर रही थी. ट्रैफिक का नमो निसान नहीं था. खाकी रोड था इसलिए में बिना किसी दर के कार को भगाये जा रहा था. बही आप लोग सोच रहे होंगे की में जादू से बहा क्यों नहीं पहुंच गया. तो में जा सकता था बैसे. लेकिन फिर ये होता की सबके सवालो के जवाब में नहीं दे पता. की कैसे आये इतने जल्दी. फ्लाइट से आया नहीं उड़द में सकता नहीं तो कैसे पंहुचा यहाँ तक. इसलिए सबको दिखने के लिए कार से जा रहा था. और ये केस पुलिस के पास भी जाने वाला था इसलिए वो भी मुझसे सवाल तो करेंगे hi. इसलिए अपनी सेफ्टी के लिए मैंने कार से जाना hi बेहतर समझा. मेरे पास पावर थी इसलिए रोड पैर बहुत आगे तक में देख प् रहा था और उसी हिसाब से कार को चला रहा था. रस्ते में मुझे सीड ने दोनों लोकेशन भेज दी थी. एक उनके लास्ट लोकेशन और एक उनकी करंट लोकेशन जो उसने मोबाइल को ों करवा कर हासिल की थी. अब मुझे बस बहा जेक देखना था. और उम्मीद थी की बहा पैर मुझे वो दोनों मिल जाये. और ये कोई असुरो का केस न हो. वर्ण सबको बंद बजना तय है. खासकर मेरी….. असुरो के द्वारा नहीं. बल्कि इंसानो के द्वारा ……..



तो बे कॉन्टिनुए………………….
 
अपडेट 68



में अच्छी खासी स्पीड से अपनी कार को भागते हुए करीब 30 मं. में दिल्ली पहुंच गया. कहा रास्ता 2-3 घंटे का था और मैंने सिर्फ आधे घंटे में hi पार कर लिया. अब देखो तो आज्ञा था. अब बरी थी लोकेशन पैर पहुंचने की. मैंने करंट लोकेशन का नेविगेशन ों किया और बहा के लिए निकल गया. और रात का समय था इसलिए ट्रैफिक का नमो निशान नहीं था. वर्ण पता नहीं कितने घंटे लग जाते एक लोकेशन पैर पहुंचने में.

खैर जैसे तैसे 15 मं. में पहुंच गया पहली लोकेशन पैर. लेकिन टेंशन तो अब सुरु होने वाली थी. क्युकी जो उन मोबाइल की करंट लोकेशन थी बहा केवल एक खेत था जो सूखा पड़ा हुआ था. वो भी सेहर के बहार की तरफ. बहा दूर दूर तक कोई घर तो छोडो एक झोपड़ा भी नहीं था.

मुझे कुछ समाज में नहीं आरहा था इसलिए मैंने सीड को कॉल किया और उसने थोड़ी hi देर में उठा लिया

सीड- है सर.

मैं- सीड में करंट वाली लोकेशन पैर हु. लेकिन यहाँ तो दूर दूर तक कुछ नहीं है. सिवाय खली खेतो के. क्या तुम सुरु हो की वो लोकेशन यही की थी.

सीड- सर जहा आप खड़े है इस वक़्त लोकेशन बही है 100% और दोनों के मोब. बही कही पैर है. बाकि हो सकता है उन्होंने दोनों के मोब. फेक दिए हो.

मैं- पॉसिबल है. क्या दोनों के मोब. अभी ों है

सीड- है सर ों है.

मैं- तुम कॉल करो उनके no. पैर में यहाँ देखता हु.

सीड- ठीक है करता हु सर.

उसके बाद सीड ने लैंडलाइन से उन no. को डायल किया. और मुझे मोब. बजने की आवाज आने लगी. मैंने उस आवाज का पीछा किया तो मुझे थोड़ी hi आगे पहला मोब. मिल गया.

मैं- मिल गया. अब दूसरे पैर करो.

सीड- ok.

फिर उसने दूसरा no. डायल किया. और उसके थोड़े hi आगे मुझे दूसरा मोब. भी मिल गया. और उन मोबाइल को जिस प्रकार फेका गया था. उस दिशा के हिसाब से मैंने अंदाजा लगाया की वो इसी हाईवे पैर आगे की तरफ गए है. मतलब की आगरा की तरफ. क्युकी में इस वक़्त यमुनाएक्सप्रेस वे पैर खड़ा हुआ था. और उनके मोबाइल मुझे बही पैर मिले.

सीड- मिल गए दोनों मोब.

मैं- है मिल गए.

सीड- चेक कर लीजिये उन्ही के है न.

मैंने दोनों का पॉवरबुत्तों दबाया तो लॉकस्क्रीन पैर hi दोनों की सेल्फी सेट थी.

मैं- है उन्ही के है. ठीक है सीड में बाद में कॉल करता हु. सोच के कुछ.

सीड- ok सर.

मैंने कॉल कट किया और फ़ौरन hi मां को कॉल किया.

उन्होंने उठा लिया तुरंत hi.

मां- है देव कहा पहुंचे.

मैं- मां में इस वक़्त यमुना एक्सप्रेसवे पैर हु.

मां- बहा क्या कर रहे हो.

मैं- आपने पुलिस को बुला लिया.

मां- है वो यही है. और बाकि छानबीन कर रहे है.

मैं- मेरी बात करवाइये कम से.

मां- ठीक है.

उन्होंने कम. को फ़ोन दिया.

कम- hello

मैं- hello सर. में उन दोनों का भाई बोल रहा हु.

कम- है मर देव. हमें पता है. आप कब तक यहाँ आरहे है आपसे कुछ सवाल पूछने थे.

मैं- मुझे थोड़ा टाइम लगेगा. आपको में अभी दो लोकेशन भेज रहा हु. आप उन जगहों पैर छानबीन करवाइये.

कम- किसकी लोकेशन है वो.

मैं- एक लास्ट लोकेशन है उन दोनों की. जहा वो आखिरी बार थी. ी होप आपने भी उसका पता लगा लिया होगा. एंड एक करंट लोकेशन है. जहा में इस वक़्त खड़ा हुआ हु.

कम- आपको करंट लोकेशन कैसी मिली. उनके फ़ोन तो बंद है न.

मैं- है मेरे एक दोस्त की मदद से उसने कुछ जुगाड़ करके उनके ऑफ मोब. को ों करवा दिया कंपनी से. और फिर हमें लोकेशन मिल गयी. लेकिन टेंशन वाली बात ये है की ये लोकेशन पैर कुछ नहीं है. ये एक खाकी खेत है. बस. यहाँ दूर दूर तक कोई घर या फार्महाउस कुछ नहीं है. सायद उन लोगो ने मोबाइल को रस्ते में hi फेक दिया है. इसलिए आप जल्दी से यमुना एक्सप्रेसवे पैर चेकिंग लगवाइये.

कम- क्या वो लोकेशन बही की है.

मैं- है में अभी उनके मोब. को हाथो में लेके hi खड़ा हुआ हु.

कम- ठीक है मर. देव हम चेकिंग लगवाते है. लेकिन रोड काफी लुम्बा है वो इस बीच कही भी जा सकते है.

मैं- इस रोड पैर कितने टोल नाके hai.or दिल्ली के सबसे करीब कोनसा है

कम- टोटल 2 है. जिनमे से दिल्ली के सबसे करीब वाला 25 कम. दूर है.

मैं- ठीक है में कुछ करता हु. आप लास्ट लोकेशन और फिर उससे पहली की लोकेशन का पता लगाइये की वो कहा गयी थी और वो किस ट्रांसपोर्ट से बहा से निकली थी. और मुझे बताइये में टिल नाके पैर उसको चेक कर लूंगा.

कम- लेकिन आप क्यों परेशान हो रहे है. हम है न हम कर लेंगे.

मैं- सर वो मेरी बहने है. आप प्लस वो करिये जो कहा गया है.

कम- ok आप मुझे वो लोकेशन भेज दीजिये.

उसके बाद मैंने उन्हें दोनों लोकेशन भेज di.and अपनी कार में बैठ कर में निकल गया पहले टोल नाके को तरफ. जो मेरे से करीब 4-5 कम. दूर hi होगा. तभी मुझे ख्याल आया की पुलिस को टाइम लग सकता है. सायद सीड जल्दी पता कर ले. इसलिए मैंने उसे कॉल किया.

सीड- यस सर.

मैं- सीड तुम ये पता लगा सकते हो की वो अपनी लास्ट लोकेशन से पहले कहा थी. और बहा से किसके साथ या किस ट्रांसपोर्ट से लास्ट लोकेशन तक पहुंची. मुझे उस ट्रांसपोर्ट का no. चाहिए.

सीड- में उसी पैर काम कर रहा था सर. वो एक क्लब में थी. बहा के कक्तव में उन्हें डिटेक्ट किया. और ये भी की वो कोई 2 लड़को के साथ थी. उसके बाद वो दोनों लड़के उन्हें लेके बहार आये और उनकी कार में बैठा कर ले गए. उनकी लास्ट लोकेशन tak.lekin बहा कोई कक्तव नहीं था इसलिए बहा क्या हुआ मुझे नहीं पता. और फिर उनके सेलफोन भी ऑफ हो गए बहा से.

मैं- वो किस कार में थे. उसका no. मुझे दो. और तुम उसकी कुंडली निकालो वो किसकी कार hai.or हो सके तो उन लड़को की भी.

सीड- में उसी में लगा हुआ हु. उसका एक एड्रेस मिला है. जो सायद फेक हो. या फिर नहीं बहा जेक hi पता चलेगा. और उन लड़को का कुछ पता नहीं. अभी तक. बाकि में लगा हुआ हु.

मैं- ठीक है वो एड्रेस मुझे भेजो में पुलिस को देता हु. वो पता कर lenge.or no. भी भेज दो.

सीड- ok सर.

थोड़ी hi देर में उसने मुझे वो इन्फो भेज दी. और मैंने बही की बही मां के no. पैर भेज दी. और उनको ये भी लिख दिया की इसकी जाँच करे उनका पता लगवाए पुलिस से कह दो. बाकि में उस कार का no. लेके पंहुचा सीधा टोल नाके. मैंने कार को साइड में रोका. और पंहुचा उस केबिन के पास जहा रेसिपी कटी जाती है. और मैंने कम को कॉल भी कर दिया.

कम- है ये no. किसका है.

मैं- ये बही कार का no. है जिसमे दो लड़के उन दोनों को अपने साथ ले गए थे. आप उसकी डिटेल निकालिये. और है ये टोल वाले से बात करके इसको कहिये की मुझे सुपरटे करे.

कम- ठीक है दो उसे फ़ोन.

में उसके पास गया और उसे फ़ोन दे दिया. उसने काम से लगाया और फिर उनमें जो बात हुई हो पता नहीं थोड़ी hi देर में उसने मुझे बापिस दे दिया.

मैं- बोल दिया.

कम- है वो मदद कर देगा.

मैं- ठीक है में आपको कॉल बैक करता हु. कोई जानकारी मिलते hi.

मैं- हिय क्या नाम है तुम्हारा

सर रमेश नाम है.

मैं- है रमेश बीआरओ. जरा ये कार no. लो और चेक करो. इस no. की कार यहाँ से क्रॉस हुई है या नहीं.

रमेश- सर कोई टाइम बगेरा.

मैं- कन्फर्म नहीं है. तुम 10 से अभी तक की साडी फुटेज चेक कर डालो.

रमेश- ठीक है सर ाजैये आप भी देख लीजियेगा

मैंने केबिन. में गया

मैं- यहाँ से दूसरा टोल कितना दूर है

रमेश- सर करीब 50 कम दूर.

मैं- मतलब ज्यादा से ज्यादा 1 घंटा hi लगेगा बहा तक पहुंचने में अगर नार्मल स्पीड से चले तो. ठीक है लगाओ फुटेज

रमेश ने फुटेज प्ले की. और मैंने बैठा और लगा फ़ास्ट फॉरवर्ड में देखने. ताकि जल्दी मिले वो. मेरी आँखे इस वक़्त किसी कंप्यूटर से काम नहीं थी. सभी कार्स को स्कैन करती जा रही थी. उनकी no. प्लेट को भी. मैंने 2 मं. में hi करीब 12 बजे तक की फुटेज चेक कर ली. रमेश पगला रहा था.

रमेश- सर इतनी फ़ास्ट में कैसे पता चलेगा उस कार का.

मैं- don't वोर्री मुझे चल जायेगा.

मैं आगे देखता गया. और एक जगह पैर आके मैंने पॉज किया. और स्क्रीन पैर नहीं no. की कार कड़ी हुई थी. टाइम था. 1:20 मं. मैंने कार को ध्यान से देखा तो उसमे मुझे 3 लोग दिखाई दिए. लेकिन चेहरा साफ़ नहीं दिखा. और मुझे रेनू और सुरभि भी नहीं दिखी. तो लगा सायद उन्हें डिक्की बगेरा में रखा हो. या फिर कुछ कह नहीं सकते

मैं- रमेश क्या दूसरे टोल का no. है तुम्हारे पास.

रमेश- है सर है.

मैं- उन्हें कॉल करो. और उनसे कहो की 1:40 से लेके फुटेज को चेक करे और देखे की ये कार बहा से निकली है या नहीं.

रमेश- ठीक है सर बोलता हु.

रमेश बहा फ़ोन करने लगा और मैंने उस कार की एक फोटो खेच ली मोबाइल में. और उसे तुरंत hi भेज दी कम को. और ये भी की पुलिस से कहो की ये कार जहा भी दिखे फ़ौरन एक्शन ले.

रमेश- सर बोल दिया है. बोल रहे है थोड़ी देर में पता करके बताते है.

मैं- ठीक है. कुछ पीने का पानी बगेरा है क्या.

Ramesh-vha सर ये लीजिये.

उसने मुझे पानी की बोतल दी. और मैंने उसमे से पानी पिया. और बही बैठ के इन्तजार करने लगा. और सोचा की कैसे ढूंढो उनको. सायद आलिआ मेरी कुछ मदद कर सके. इसलिए मैंने प्राची को कॉल किया.

उसने थोड़ी hi देर में उठा लिया.

प्राची- क्या हुआ कुछ पता चला.

मैं- अभी तक नहीं. जरा आलिआ को फ़ोन देना. सायद वो उन्हें ढूंढ सके.

प्राची- मेभी कर सकती हु.

मैं- देखो इस समय हमारी शक्तिया कमजोर है. लेकिन आलिआ की नहीं. इसीलिए तो मुझे उसकी मदद चाहिए. वर्ण कबका में उन्हें ढूंढ लेता. तुम समझो बात को.

प्राची- ठीक है.

उसने आलिआ को जगाया और उसे फ़ोन दिया.

आलिआ- है देव क्या हुआ.

मैं- तुम यहाँ आजाओ अभी.

आलिआ- किस भेष में.

मैं- इंसानो वाले.

आलिआ- ठीक है आती हु. क्या प्राची को साथ लौ.

Main-vusko अभी बही रहने दो. उसको फ़ोन दो में उसको बोल देता हु.

प्राची- है मैंने सुन liya.theek है में यही रूकती हु.

मैं- that's लिखे माय स्वीटहार्ट.. लव यू बेबी.

प्राची- लव यू तू.

मैं- उसे जल्दी पंहुचा दो. में इन्तजार कर रहा hu.or उससे कहना की मेरी कार में hi पहुंचे सीढ़ी. यहाँ लोग है कुछ उनकी नजरो से बच के आना.

प्राची- ठीक है.

मैंने कॉल कट कर दिया. और रमेश को बोलै की में कार में हु. फ़ोन आये तो मुझे बतादेना.

उसने ok बोलै और में कार में चला गया. और उसके कुछ hi देर में आलिआ सीढ़ी कार में प्रगट हो गयी. अच्छा हुआ कार अँधेरे में राखी हुई थी.

आलिआ- क्या हुआ कुछ पता चला.

मैं- नहीं इसीलिए तुम्हे बुलाया है. ये फोटो देखो और बताओ की क्या उन्हें ढूंढ सकती हो तुम. फिलहाल मेरी मंद पावर काम नहीं कर रही है.

आलिआ- लेकिन ऐसा कैसे संभव हुआ

मैं- वो में बाद में बताऊंगा तुम इसपर ध्यान दो.

आलिआ- ok में ढूंढ़ने की कोसिस करती हु.

आलिआ ने उन दोनों की फोटोज को देखा उन्हें अपने दिमाग में बैटःए और अपनी शक्तियों से उन्हें ढूंढ़ने लगी आप पता नहीं उसके दिमाग में क्या क्या दिख रहा था में बस बैठा देख hi सकता था. थोड़ी देर बाद मुझे रमेश की आवाज aai.to में कार से बहार निकल कर उसके पास गया.

मैं- है रमेश

रमेश- सर वो कार ने टोल क्रॉस किया है. करीब 2:10 पैर. शामे यही कार. No. भी शामे और कार bhi.maine खुद उनसे मॉडल no. बगेरा कंफर्म किया है.

मैं- उसके आगे और कोनसा टोल है.

रमेश- सर वो टोल तो आगरा के पास है. उस बीच मथुरा वृन्दावन और भी पता नहीं कोण कोनसे गाओं और सेहर पड़ते है. वो इनमे से कही भी जा सकते है. और अभी तक सायद hi वो उस टोल तक ोाहुचे होंगे. वो नॉर्मल स्पीड से जा रहे है. तो मतलब उन्हें बहा तक पहुंचने में मिनिमम 3 घंटे तो लगने hi है. अभी सिर्फ 2 hi हुए है.

मैं- तुम्हारा कहना सही है. रमेश. लेकिन अगर वो कही और नहीं गए और सीधे रोड पैर hi गए तो काम से काम उस टोल वालो को हमें बता तो देना चाहिए की उस कार को आते hi रोक ले.

रमेश- है ये तो मैंने सोचा hi नहीं. लेकिन सर उनका no. नहीं है मेरे पास

मैं- don't वोर्री में पता लगाकर उनको कॉल कर दूंगा. एंड थैंक्स यार तुमने बहुत मदद की मेरी. ये लो.

मैंने उसे कुछ पैसे दिए. जिसे उसने लेने से साफ़ मन कर दिया.

मैं- लेलो यार कुछ काम जायेंगे.

रमेश- नहीं सर में अपनी सेल्लरी में hi कुश हु. थैंक्स आपने मुझे ये दिए. बाकि में इन्हे ले नहीं सकता.

मैं- ठीक है रमेश में तुम्हे फाॅर्स नहीं करूँगा. एंड थैंक्स फॉर योर हेल्प.

मैंने उसे bye बोलै और कार में आज्ञा. आलिआ अभी भी लगी हुई थी. में उससे कुछ पूछता उससे पहले hi उसने झटके से अपनी आँखों को खोल दिया.

मैं- क्या हुआ.

आलिआ- देव मुझे पूरा शक है की इसके पीछे किसी खतरनाक आसुरी शक्ति का हाथ है.

मैं- ये कैसे कह सकती हो तुम.

आलिआ- में जब भी उनके करीब पहुंचने लगती कोई अदृश्य शक्ति मुझे रोक देती. कोई अदृश्य दीवार है जिसने उन्हें धक् लिया है. और जिसे मेरी शक्तिया पार नहीं कर प् रही है. इस दीवार को तुम hi तोड़ सकते हो.

ये सुनके मेरी टेंशन और बाद गयी. अभी ये शक्तिया काम नहीं कर रही और अभी ये सब होना था. मुझे गुस्सा आरहा था और साथ में बेबसी भी महसूस हो रही थी.. समाज नहीं आरहा था की क्या करू और कैसे.



तो बे कॉन्टिनुए………………..
 
अपडेट 69



में काफी कंफ्यूज था की ये सब आखिर हो क्या रहा है. और आलिआ की बात से तो कन्फूसिओं और बाद गयी थी.

आलिआ- क्या सोच रहे हो

मैं- यही की जरा तुम बताओ की तुम्हारे पास काफी शक्तिया है और ऐसे में तुम अपने किसी दुश्मन को किडनैप करते हो. तो क्या तुम ऐसे hi इतने सरे साबुत छोड़ते हुए आगे बडोगे. बल्कि जादू से एक hi झटके में कही गायब हो जाओगे. ये सब का झंझट क्यों करोगे.

आलिआ ने मेरी बात सुनी और समझी.

आलिआ- तुम्हारा कहना सही है. अगर ये असुर है तो ऐसे गाड़ी में क्यों भाग रहे है. ये तो जादू से कही भी जा सकते है न.

मैं- में भी यही कह रहा हु. पिछली बार कुछ असुरो ने प्राची को किडनैप किया tha.bahut बुरी तरह से. उसे जादू से डराया और उसे फिर गायब करके वो ऐसी जगह ले गए जो थी पृथ्वी पैर hi लेकिन उस कोई देख नहीं सकता. और उसके बाद उन्होंने मुझे चुनौती दी की उसे बचाना है तो ाँस उनके हवाले कर दू. लेकिन प्राची ने मुझे आवाज दी जिस बजह से में उस तक पहुंच गया. और उसे किसी तरह बचा लिया. लेकिन इस बार सब अलग हो रहा है. ये अगर असुर है तो इंसानो की तरह काम क्यों कर रहे है. मुझे बस यही बात परेशान कर रही है.

आलिआ- में तुम्हारी हालत समझ सकती हु. लेकिन तुम्हे ऐसे हिम्मत नहीं हारना चाहिए. वो जो कोई भी हो. फिर चाहे इंसान या शैतान. उसे उसके किये की सजा तुम्हे देनी होगी. उसे जल्द से जल्द ढूंढ़ना होगा.

मुझे उसकी बात सही लगी. लेकिन किसी तरह में उसकी नेक्स्ट चल को समाज पता तो इन्हे पकड़ने में आसानी होती. लेकिन फिलहाल एक काम था जो जरुरी था. इसलिए मैंने लगाया कॉल कम को.

उसने जल्द hi उठा लिया.

कम- क्या पता चला तुम्हे.

मैं- उसने दोनों टोल नाके क्रॉस कर लिए है. और अगर वो सीधे जा रहे है तो अगले तक भी पहुंचने वाले होंगे. इसलिए में चाहता hi की आप तीसरे वाले को कॉल करके उसे साडी जानकारी दे दो. और उनसे कहो को वो कार अगर गुजरे तो उसे रोकने की कोसिस करे. और हो सके तो पुलिस वालो को भी बहा पैर खड़ा कर दो. में उनके पीछे जा रहा हु.

कम- ठीक है में उन्हें इन्फॉर्म कर देता हु.

मैं- आपको कोई जानकारी मिली उनकी. उनके एड्रेस पैर या कही और से.

कम- वो एड्रेस नकली है. और जिन लड़को की फोटोज उस क्लब में दिखी थी. उनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है. सलग की फ्रेंड्स से पता करने की कोसिस की तो उन्हें भी उनको जानकारी नहीं है. यही बात समाज में नहीं आरही है की इनकी जानपहचान कैसे हुई है उन दोनों se.unke नाम तक नहीं पता चल प् रहे है.

मैं- आप लगे रहिये. में जाता हु पीछे. बहा इन्फॉर्म कर देना सबको.

कम- है में अभी करता हु.

मैंने फ़ोन कटा.

मैं- तुम उस कार को ढूंढ़ने की कोसिस करो. फोटो है न तुम्हारर पास. और हो सके तो उड़द कर जाओ. और तेज़ी से.

में कार से hi आऊंगा.

आलिआ- ठीक है.

आलिआ बहा से उड़द गयी एंड मैंने कार को भगाया फुल स्पीड में. मुझे लगभग 75 कम का रास्ता जल्द से जल्द पार करना था. लिखे कुछ hi मिंटो में. मेरी आँखे रोड पैर हर कार को पहचानने की कोसिस कर रही थी. करीब 3 मं. में मैं पंहुचा दूसरे वाले टोल के पास. बहा मैंने उनसे बात की. और फिर कार को भगा दिया आगे की तरफ. अगले 10 मं. से भी काम में मुझे उस टोल तक पहुंचना tha.isliye कार उड़द रही थी. वो तो अच्छा है की पेट्रोल फुल था वर्ण हालत ख़राब हो जनि थी. खैर आधा रास्ता पार करने के बाद एक ढाबे पैर मुझे बही कार दिखाई दी. मैंने तुरंत hi कार को स्लो किया और ु टर्न लेके पीछे आया. क्युकी स्पीड में आगे निकल गया था में. कार को आराम से ढाबे पैर पार्क किया और बहार निकला. वो कार मेरे सामने कड़ी हुई थी. और उसके अंदर फिलहाल कोई नहीं tha.keval डिक्की चेक करना बाकि था. में आराम से कार के पीछे गया और डिक्की को पकड़ कर जोर से ऊपर की तरफ खींच liya.uska लॉक टूट गया और डिक्की खुल गयी. एंड जैसे hi अंदर नजर मरी तो डिक्की खली थी. एंड अब मेरा भेजा फिर से फ्राई हो गया. क्युकी एक यही उम्मीद थी की सायद वो इसी कार में है. लेकिन नहीं मिली. और इसी फ़्रस्ट्रेशन में मैंने डिक्की को जोर से पटक दिया. और उसकी आवाज सुनके सबकी नजर मेरी तरफ आगयी. जिनमे सायद इस कार को जो ले कर आये थे वो भी शामिल थे. और मुझे देखते hi वो बहा से भागने की कोसिस करने लगे. जिसे देखकर मुझे शक हुआ की. ये मुझे जानते कैसे है. लेकिन भले hi वो भागे लेकिन मुझसे ज्यादा दूर नहीं भाग सकते थे.

वो पीछे के रस्ते से भागने लगे. और में उनके पीछे. जल्दी hi मैं दोनों के बराबर पैर आज्ञा. और एक एक पंच दिया दोनों के थोबड़ो पैर. दोनों गिरे नीचे. और में अगला पंच मारता उससे पहले hi उन्होंने बस बोल दिया.

मैं- इतनी जल्दी. अभी तो मैंने स्टार्ट किया है.

लड़का- हम सब बताते हैना. मारने को जरुरत नहीं है.

मैं- तो बोलो जल्दी.

लड़का- सर हमें किसी ने काम सपा था उनसे दोस्ती करने का और फिर उन्हें बहा से एक जगह पैर लेन का. उसके बाद बहा से वो उन्दोनो को ले जाते. और यही हुआ है.

मैं- किसने दिया था kaam.naam क्या है

लड़का- सर उसका नाम है समीर. वो कोण है क्या है हमें कुछ नहीं पता है.

मैं- मुझे कैसे जानते हो.

लड़का- सर उसने हमें फोटोज दिखाई थी उन दोनों की जिनमे आप भी थे. हमने उनसे पूछा तो उन्होंने बताया की आप उनके भाई हो.

मैं- अच्छी कहानी है. अब मुझे ये बताओ की पहले और दूसरे टोल पैर तुम तीन लोग थे कार में. लेकिन अभी सिर्फ 2 हो. बाकि का बचा हुआ वो कहा है. और मुझे पूरा यकीन है की दोनों उसी के पास है.

वो अभी कुछ बोलते उससे पहले hi मेरे कानो में कुछ आवाज पड़ी.

लड़का3- वो यहाँ है. छोड़ दो दोनों को. वर्ण तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा.

मैं- जरा दिखाओ मुझे की कैसे मेरे लिए अच्छा नहीं होगा.

मैंने ये बोलै और अचानक पता नहीं कहा से मेरे चारो तरफ लोगो की भीड़ सी लग गयी. सायद 30-40 लोग होंगे.

मैं- क्या ये रोकेंगे मुझे.

लड़का3- है रोकेंगे. अब फैसला तुम्हे करना है.

मैं- वो में कर लूंगा लेकिन पहले ये बताओ की तुम हो कोण. क्या तुम समीर हो. सिर्फ एक बार कन्फर्म कर दो

लड़का3- नहीं में समीर नहीं हु. है लेकिन उसके किये काम जरूर करता हु.

मैं- कैसा काम.

लड़का3- क्या करोगे जानकार.

मैं- जो करना है वो में कर लूंगा. फिलहाल मेरे सवालो के जवाब दो. और बताओ की ये कोण है और इसने मेरी बहनो को क्यों किडनैप किया है. वो क्या चाहता है.

लड़का3- सच कहु तो उसके बारे में हमें कुछ नहीं पता है. सिवाय इसके की उसने तुम्हारी बहनो को किडनैप किया है. अब उसने ये क्यों किया है. उसकी तुम्हारे साथ क्या दुश्मनी है. में नहीं जानता.

मैं- ठीक है तो बताओ की ये समीर महासय कहा मिलेंगे मुझे. में खुद hi पूछ लूंगा usse.or मेरी बहाने कहा है.

लड़का3- उसी के पास है. और दिल्ली में वो उन्हें लेकर चला गया और हमें भेज दिया इस रस्ते पैर. अब कहा गया है पता नहीं.

मैं- कैसे गया है वो. किसी कार में या किसी और ट्रांसपोर्ट में. उसका no. दो मुझे.

लड़का3- नहीं जानता. हमने उसे उन दोनों के साथ दिल्ली में hi एक जगह पैर छोड़ा था. और उसमे बाद हम यहाँ आगये. अब वो बहा से कहा गया पता नहीं.

मैं- लोकेशन दो मुझे.

मैंने उसे मेरा no. दिया और उसने मुझे वो लोकेशन भेज दी.

मैं- एक बात बताओ तुमने मुझे साडी जानकारी इतनी आसानी से क्यों दे दी. क्या ये भी उसके प्लान का हिस्सा था.

लड़का3- बिलकुल ठीक पहचाना तुमने. और उसने खास ये कहने को कहा है की तुम बहा अकेले जाओ.

मैं- में अकेला hi जाऊंगा. लेकिन तुम सब जाओगे अब जेल.

मैंने ये कहा और आलिआ ने होनी छड़ी घुमा कर बहा मौजूद सभी को बेहोश कर दिया. आलिआ बहा मुझसे पहले पहुंच चुकी थी. और मैंने उसे देख लिया था. और मेरा इशारा मिलते hi उसने बही किया जिसमे वो माहिर thi.uske बाद मैंने लगाया फ़ोन.

कम- है बोलो

मैं- सर वो कार और उसमे बैठने वाले तीनो लोग मिल चुके है लेकिन उनके पास वो दोनों नहीं है. ये किसी चौथे आदमी के लिए काम कर रहे थे. और वो दोनों उसी के पास है. आप इन तीनो को ******** ढाबे से उठवा लो. में उसकी तलाश में जा रहा हु

कम- रुको

वो बस इतना hi कह पाए और मैंने फ़ोन लास्ट दिया. मैंने उन तीनो को उठाया और उनकी कार पैर पटक diya.or ढाबे बाले को बोलै की पुलिस के आने तक इन्हे यहाँ से जाने मत देना. वो समझदार था मेरी बात समाज गया. मैं बैठा अपनी कार में और आलिआ को इशारा कर दिया. वो चाकी गयी बहा के लिए. और मैंने अपनी कार को भगा दिया फिर से. और करीब 20 मं. में मैं पहुंच गया उसी लोकेशन पैर. दिल्ली तक तो जल्दी आज्ञा लेकिन अंदर रास्ता मिलना बहुत मुश्किल हो रहा था. बहुत hi छोटी गालिया थी बहा पैर. लेकिन जैसे तैसे पहुंच गया. बहा पहुंचकर देखा तो एक बिल्डिंग थी जो आधी अधूरी पड़ी हुई थी. बहा कोई नहीं रहता है इतना तो में जानता था. आलिआ- यहाँ पहुंच चुकी थी और उसने पता लगा लिया की वो कोनसे फ्लोर पैर है और दोनों किस फ्लोर पैर है. मैंने आलिआ को भेजा उन दोनों को छुड़ाने के लिए. और में गया उससे मिलने. आखिर पता तो चले की ये क्या चीज़ है.

बिल्डिंग के 10तह फ्लोर पैर वो था और लगभग 15तह फ्लोर पैर वो दोनों थी. और सबसे मजे की बात ये थी की ये बिल्डिंग केवल 8 फ्लोर की थी. खैर मैंने पैदल सीडिया चढ़ना सुरु किया और ऊपर जाने लगा 10तह फ्लोर per.kuch देर में पहुंच गया. और जैसे hi अंदर आया मुझे आवाज आई.

समीर- क्या बात है देर से hi सही काम से काम ऑटो गए

मैं- है ऑटो गया. लेकिन मुझे समाज में नहीं आरहा है की में यहाँ कैसे पंहुचा. मुझे यहाँ आने पैर मजबूर क्यों किया गया है.

समीर- है समाज सकता हु तुम्हारी मनोयस्थिति. खैर तुम्हे तुम्हारे सरे जवाब मिल जायेंगे.

मैं- यही सबके लिए अच्छा होगा. तो चलो बताओ की तुम कोण हो और ये सब करने के पीछे क्या मकसद है तुम्हारा.

समीर- बैसे तुम्हे क्या लगता है. कोण हु में.

मैं- में अपना दिमाग खर्च नहीं करना चाहता जब मेरे सामने पूरी डिक्शनरी राखी हुई हो तो. इसलिए तुम hi सुरु करो. में बस यहाँ सुनने आया हु.

समीर- बढ़िया जवाब दिया. लेकिन में तुम्हे कुछ बताऊ उससे पहले में कुछ जानना चाहता हु.

मैं- क्या.

समीर- यही की फिलहाल तुम कैसा फील कर रहे हो. तुम्हारी शक्तिया कमजोर है. सभी तुम पैर घाट लगाए बैठे हुए है. और ये सब जानते हुए भी तुमने इस तरफ बिलकुल भी ध्यान क्यों नहीं दिया.

ये सुनके में चौका तो लेकिन में अब मामले को कुछ कुछ समझने लगा था.

समीर- क्या सोच रहे हो.

मैं- यही की मेरे वेयर में इतना सब जानते हुए भी तुमने ये सब करने की हिम्मत की. तो जरूर कोई बहुत बड़ी बजह होगी. वर्ण कोई पागल hi होगा जो ये सब करेगा. और इस दौरान मेरा भी एक सवाल है की. इतने सरे लूप होल क्यों रखे थे. इसको थोड़ा मुश्किल भी बना सकते थे तुम.

समीर- है तुमने सही कहा. लेकिन तुम्हारी असली मुश्किल अब सुरु होने वाली है. तुम्हे क्या लगता है. जो पारी ऊपर उन्हें छुड़ाने गयी है. क्या वो ऐसा करने में सक्षम है. या कही ऐसा न हो जाये की वो मेरे जाल में फास जाये. क्या तुम उसे बचा सकते हो.

ये सुनके मेरी धड़कने बढ़ना सुरु हो गयी. मेरे हावभाव बदलने लगे.

मैं- में उसे तो किसी न किसी तरह बचा hi लूंगा लेकिन मुझे ये समाज में नहीं आरहा है की तुम्हे मुझसे किन बचाएगा.

समीर- तुम्हे बकै ऐसा लगता है की मुझे किसी की मदद की जरुरत पड़ेगी.

मैं- सायद पद जाये.

ये बोलके मैंने एकदम से उड़ते हुए उसके पास गया और एक पॉवरफुल पंच उसकी मारने का प्रयास किया. लेकिन जैसे hi में उसे टच करने वाला था. मेरे हाथ को उसने रोक लिया. जिसे देखकर में काफी हैरान रह गया. मुझे समाज नहीं आरहा था की ये आखिर है कोण.

समीर- अच्छा प्रयास था. एक बार फिर से करो.

उसने ये बोलै और मुझे झटके से थोड़ी दूर फेक दिया.

मैं जल्दी से खड़ा हुआ.

मैं- तुम्हे नहीं लगता की इस लड़ाई को सिर्फ हाथ और पेअर तक hi सीमित रखना चाहिए. और अगर शक्ति का प्रयोग करना है तो अभी बोल दो.

समीर- हआ आईडिया अच्छा है. में भी यही चाहता हु. इसको ऐसा hi बनाते है. में भी तो देखु की तुम्हारे अंदर ऐसी क्या खास बात है.

मैं- ठीक है जैसा तुम कहो.

मैंने उसकी तरफ आगे बड़ा और वो मेरी तरफ. जैसे hi हम पास पहुंचे उसने मुझे एक जबरदस्त पंच जड़ दिया. मुझे पता भी नहीं चला की कब मुझे ये लगा. एंड में इससे संभालता उससे पहले hi दूसरा और उसके बाद तो लगातार मेरे ऊपर पंचेस की बरसात होने लगी. मेरे हाथ उसके प्रहारों को रोकने की कोसिस कर रहे थे लेकिन नहीं वो मुझसे ज्यादा ताकतवर था. या इस वक़्त हो गया था. उसके करीब रहते hi मुझे सॉलिड इंस्टिंक्ट आगयी थी की ये असुर hi है. लेकिन कोनसा ये मुझे नहीं पता था. मेरे पुरे चेहरे पैर लगातार हमला करने के बाद वो मुझसे दूर हैट गया.

समीर- क्या हुआ देव. तुम तो बकै में काफी कमजोर पद गए हो. मेरे इन साधारण हमलो को भी नहीं रोक प् रहे हो. क्या हो गया है तुम्हे.

ये सुनके मेरा दिमाग सटक रहा था. लेकिन में जानता था की ये समय गुस्सा करने का नहीं बल्कि दिखने का है.

मैं अपनी हालत को सही करता हुआ फिर से खड़ा हुआ. मेरा चेहरा कई जगह से काट गया था. खून बहने लगा था. इसलिए खड़े होते hi मैंने ढेर सारा ठोका जिसमे 98% खून शामिल था. और में जानता था की ये इस समय ज्यादा ताकतवर है. जिसकी दूसरी बजह ये थी की में इस वक़्त एक मयाबी जगह पैर hi जो उसने बनाई है. और इसका प्रभाव मुझपर ज्यादा पड़ेगा. लेकिन मैंने भी थान लिया था की अब चाहे कुछ भी हो जाये इसकी बंद बजाये बिना में यहाँ से हिलने नहीं वाला.

समीर- क्या हुआ. हिम्मत नहीं बची क्या. खामखा hi लोग तुमसे डरने लगे है. लेकिन सच्चाई तो ये है की तुम इस शक्ति के काबिल हो hi नहीं. और अब में तुम्हारे लिए इसे आसान बना देता हु. मुझे दोनों ाँस दे दो. और अपनी जिंदगी को आसान बना lo.tumhari बहने और तुम्हारे बाकि परिवार के लोगो की जान बचालो. क्युकी इस समय मेरे से बलवान इस पोरे संसार में कोई नहीं है और में चहु तो इसी पल तुम्हारा अंत कर सकता हु.

मैं- एक बार कोसिस करके तो देखो की ऐसा कर सकते हो या नहीं. में जानता हु की तुम्हे वो ाँस चाहिए. लेकिन ये तुम्हारी बदकिस्मती है की तुम मुझे मार नहीं सकते. लेकिन है मेरे परिवार को नुकसान जरूर पहुंचा सकते हो. मुझे तोड़ने के लिए. और में बस इतना hi कहूंगा की तुम्हे जो सही लगे तुम वो करलो. लेकिन आखिर में तुम्हारे हाथ कुछ नहीं लगेगा. चाहे मेरे पुरे परिवार का अंत कर दो. चाहिए तो इस पुरे संसार का अंत कर दो. लेकिन तुम मुझसे वो ाँस कभी नहीं ले पाओगे. तुम मुझे कभी भी इतना मजबूर नहीं कर सकते की में तुम्हे खुद वो ाँस दे दू. अब फैसला तुम्हे करना है.

ये सुनके उसके चेहरे के हावभाव पूरी तरह से बदल गए. उसे समाज नहीं आया की अब आगे वो क्या कहे. और इसी कन्फूसिओं का मैंने उठाया फायदा. और बिजली की तेज़ी से उसके थोबड़े पैर एक चमकता पंच जड़ दिया. वो गिरा नीचे और उसके बाद वो संभालता मैं उछाल कर अपने पुरे सरीर का बजन लेके गिरा उसके पेट पैर. और इसका असर ये हुआ की हम डायरेक्ट 10तह से 9तह फ्लोर पैर आगये. उसकी हालत अब ख़राब होने लगी. और मैंने बिना कोई मौका उसे दिए उसके हाथ को मजबूती से पकड़ा और घुमा दिया. एक hi झटके में उसका हाथ टूट gya.or फिर मैंने बैठा उसके सीने पैर और लगाड़िये उसके ऊपर पंचेस की झड़ी. मेरे पंचेस बिजली की तेज़ी से उसपे हमला कर रहे the.uski आँख नाक मुँह सब फॉर दिया मैंने.

तभी मेरे सीने पैर एक साथ दो बार हुए लातो के. और में उड़ता हुआ एक दीवार से जा लगा. दीवार टूट कर बिखेर गयी एंड में पथरो में डाब गया.



तो बे कॉन्टिनुए………………..
 
अपडेट 70



में पथरो में फसा हुआ था. मुझे नहीं दिख रहा था की मुझे आखिर लात मारी किसने है. मेरा अंदाजा जा रहा था की सायद ये बही पृथ्वी वाले असुर है. जो की अब 4 बचे हुए है. और एक मेरी क़ैद में है. क्युकी 3 मुझे बहा कार में मिले थे और एक यहाँ. जो सायद शुम्भ्कासुर है. है सायद यही है वो चारो असुर. यही सोचते हुए में पथरो को हटाता हुआ फिर से खड़ा hua.or सामने देखा तो बहा 4 लोग खड़े हुए थे. एक तो वही समीर और बाकि तीनो कोई अलग थे. ये वो नहीं थे जो कार में थे. ये देखकर में थोड़ा कंफ्यूज हुआ की फिर वो तीनो कोण थे.

समीर- क्या हुआ अब क्या सोचने लगे

मैं- सोच रहा हु कही तुम वही तो नहीं जिसके एक साथी को मैंने क़ैद करके रखा है. और अगर तुम लोग बकै वो hi हो तो एक मुफ्त का सुझाव देना चाहूंगा की अभी मौका है निकालो यहाँ से. वर्ण तुम सबको तुम्हारे साथी के पास पहुंचने में मुझे बहुत कृषि मिलेगी. बैसे भी वो तुम सभी को बहुत याद कर रहा है आजकल. वो सोच रहा है की सायद तुम उसे बहा से बचा सकते हो. तो क्या कहते हो जाना है बहा.

समीर- बैसे तुम्हे ये जानकार बहुत हैरानी होगी की वो साथी आज़ाद हो चूका है. और ये काम इतनी सफाई से हुआ की तुम्हे इसकी भनक भी नहीं लगी है.

मैं- क्या बात है. बहुत सही जा रहे हो. कितनी सफाई से झूट बोलते हो मन्ना पड़ेगा. और ये मत समझाना की तुम्हारे ऐसा कहते hi में चेक करूँगा की वो बहा है या नहीं. तो में बता दू तुम्हे की वो बहा पैर अगर सास भी लेता है तो मुझे उसका पता होता है. बाकि बहा से भागना तो दूर की बात है. इसलिए में कहूंगा की ये घटिया दिमागी खेल मेरे साथ न hi खेलो तो बढ़िया है. क्युकी इसमें तुम्हारी हार होना तय है.

समीर- क्या बात है बहुत खूब. लेकिन क्या तुम अपनी बहनो और उस पारी को बचा सकते हो. हमारे मायाजाल se.jisme बो कब से क़ैद है और तुम्हे पुकार रही है.

मैं- मुझे तो ऐसा नहीं लगता है.

समीर- अच्छा और वो भला क्यों.

मैं- क्युकी वो इस वक़्त ठीक तुम्हारे पीछे है वो भी सही सलामत. जरा देख कर तसल्ली कर लो. बही है न.

ये सुनकर समीर का दिमाग ठनका लेकिन उसे भी लगा की में तुक्का मार रहा हु. इसलिए उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा. लेकिन उसके साथियो से रहा नहीं गया और उन्होंने पीछे मुद कर देख लिया. और जैसे hi उन्होंने पीछे देखा उन सभी के होश उड़द गए. क्युकी बकै में चारो उनके पीछे कड़ी हुई थी. हलाकि रेनू और सुरभि बेहोश थी. लेकिन आलिआ और प्राची सही सलामत उनके पीछे थी. और उससे पहले वो कुछ कहते या करते. प्राची ने बही बॉल बनाना स्टार्ट किया. और उसमे मैंने उसका साथ दिया और मैंने अपने बॉल बनाये और फिर हमने एक साथ उनके चारो के ऊपर छोड़ दिए. और वो कुछ समझते उससे पहले hi चारो हमारे कब्ज़े में आगये. हलाकि बॉल कमज़ोर थे. लेकिन इतने नहीं की ये आसानी से तोड़ सके.

मैं- क्यों कैसा लगा मेरा मजाक.

समीर- तुमने चीटिंग की है. तुमने कहा था की केवल हाथ और पैरो का इस्तेमाल करना है. शक्तियों का नहीं.

मैं- है मैंने कहा था. और मैंने वो निभाया भी. मैं तुमसे अपने शारीरिक बल से hi लड़ा लेकिन उसने ऐसा कोई वादा नहीं किया था. और बस उसने तुम सभी को पकड़ा है. जिसमे मैंने उसकी छोटी से मदद की है.

समीर- तुम धोकेबाज़ हो. देव.

मैं- में नहीं धोकेबाज़ तुम सभी हो. जो मेरे पर बस नहीं चला तो मेरे परिवार को बीच में ले आये. क्या में गया तुम्हारे परिवार को नुकसान पहुँचाने के लिए. नहीं न. लेकिन तुम असुरो की बूढी hi ऐसी होती है. और गुनाह किया था तो सजा तो मिलनी hi थी सो मिल गयी. है अगर तुम सीधे मुझपर हमला करते और मुझे लड़ने के लिए ललकारते तो में तुमसे बैसे hi लड़ता जैसा तुम कहते. लेकिन जब इसकी शुरुवात hi कपट से हुई तो बाकि कोई क्या करेगा.

ये कहके मैंने अपने हाथो को जोड़ा और पुरे मन से महादेव का स्मरण किया. और ऐसा करते hi मेरी तिरदये तुरंत hi खुल गयी. और जैसे hi वो खुली हमारा बनाया कवच बाजरा का बन गया. और उसके बाद मैंने अपने हाथो के इशारे से उन चारो को बही पंहुचा दिया जहा उनका एक साथी पहले से था. लेकिन मैंने उन सभी को अलग अलग जगह पहुंचाया. लिखे एक को दिल्ली दूसरे को मुंबई तीसरे को कोलकाता. मैंने उन सभी को अपने मायाजाल में ऐसे hi दूर दूर क़ैद कर दिया. अब बस वो अपनी मौत का इन्तजार करने के शिव कुछ नहीं कर सकते the.or आपलोग सोच रहे होंगे की प्राची यहाँ कब आई तो में बाटाडू की इस बिल्डिंग में घुसने से पहले hi मैंने प्राची को कांटेक्ट किया मंद के जरिये और उसे यहाँ बुला लिया था अस ा बैकअप. की अगर कुछ गड़बड़ हो तो वो संभल सके. और जैसे hi ऊपर आलिआ उनके जाल में फांसी. प्राची ने अपनी पावर से न सिर्फ उनके जाल को तोडा और सबको बहार भी निकाल लिया. और इस दौरान में उनका ध्यान भटकता रहा यहाँ नीचे लड़ाई के जरिये. बस हो गया मेरा काम.

अभी उनके जाने के बाद में अपनी आँखे खोलने hi वाला था की पता नहीं क्या हुआ हम पांचो hi बहा से अचानक गया हो गए. है आपने सही पड़ा हम पांचो. मतलब की मेरी बहने भी.

अब या आया एक नया ट्विस्ट.

जैसे hi हम अगली जगह पैर पहुंचे. बहा से गायब होक. बहा आज्ञा उन दोनों को होश.

प्राची- ये हम कहा आगये है देव.

आलिआ- कही ये कोई नया मायाजाल तो नहीं

मैं- नहीं ये कोई मायाजाल नहीं है. में महसूस कर सकता हु. ये जगह कोनसी है पता नहीं लेकिन में इतना जरूर कह सकता हु की हमारे भाग्य खुलने वाले है

रेनू- मतलब.

ये आवाज में अच्छे से पहचानता था. जो मेरे पीछे से अभी आई थी. और इसको सुनके एकसाथ हम तीनो hi शॉक थे की ये क्या नया चक्कर है.

मैंने अपने दिल्ली को मजबूत करके पीछे मुद कर देखा. और मेरे साथ उन दोनों ने भी. तो हमारा दिमाग हिल गया ये सब देखकर की ये दोनों यहाँ कैसे.

रेनू- देव में कुछ पूछ रही हु. ये दोनों कोण है और हम कहा है. और तुम अभी क्या कह रहे थे हमारे भाग्य के बारे में.

मेरे मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा था कैसे बोलता हिम्मत hi नहीं हो रही थी.

तब प्राची ने पहल की.

प्राची- ही दी में प्राची. आप सायद जानती हो मुझे.

ये सुनकर उसका ध्यान हटा.

रेनू- है में जानती हु तुम्हे. लेकिन एक मं. क्या तुम दोनों डेट कर रहे हो.

तो प्राची ने है में अपनी गर्दन हिला दी.

रेनू- कमीने देव मुझे बताया भी नहीं. है.

मैं- में मेमे बताने hi वाला था आपको. वो तो वो ध्यान से hi निकल गया.

रेनू- है है मेरा ध्यान अब क्यों रहेगा तुझे. बैसे ये कोण है. और ये पारी की तरह क्यों कपडे पहने हुए है. और इसके पास तो छड़ी भी है.

इस बात पैर फिर से साइलेंस छ गया.

तभी रेनू के पीछे से आवाज आज.

सुरभि- अरे कोई है. में कहा हु. बचाओ मुझे. रेनू कहा हो तुम.

ये आवाज सुनकर हम थोड़ा पीछे को गए तो सुरभि एक पेड़ पैर लटकी हुई थी. वो भी दूसरी तरफ.

जैसे hi उसने मुझे और रेनू को देखा उसकी जन्मे जान आई.

सुरभि- थैंक गॉड रेनू तुम यहाँ हो. अरे देव तुम भी यहाँ हो. प्लस मुझे बचाओ में फास गयी हु.

ये सुनकर आलिआ एकदम से उड़ती हुई ऊपर गयी और सुरभि को जादू से छुड़ा लिया और उसे नीचे लेके आगयी. और ये देखकर रेनू और सुरभि की आँखे फटी की फटी रह गयी.

रेनू- तुमने देखा ये उड़द रही थी. क्या देखा तुमदोनो ने .

सुरभि- है मैंने देखा है.

रेनू- अरे तू नहीं में इन दोनों से बोल रही हु.

मैं- है हमदोनो ने देखा है.

रेनू- ये कैसे संभव है. ये उड़द रही थी. क्या कोई नै टेक्नोलॉजी आई है मार्किट में. या इन कपड़ो में. की पारी की तरह उड़द भी सकते है.

ये सुनके हमें हसी आरही थी. लेकिन में तो कण्ट्रोल किये हुए था

आलिआ- नहीं दीदी. में सच में एक पारी हु. और में उड़द भी सकती हु. और जादू भी कर सकती हु.

रेनू- रहने दो. ये सब केवल काल्पनिक कहानिया है और कुछ नहीं.

मैं- बैसे आपलोग कहा थी में कब से दोनों को ढूंढ रहा हु.

सुरभि- हमें ठीक से याद नहीं. हम क्लब में थे. बहा से किसी अनजान जगह पहुंचे. बहा किसी ने हमें बचाया लेकिन हम समझ गए घी की ये सब एक नाटक था. और उसमे बाद क्या हुआ हमें पता nahi.ham बेहोश हो गए थे.

मैं- एक मं. मैंने मन किया था न. क्लब बगेरा जाने को. और तुम दोनों ने भी वादा किया था. फिर भी गयी बहा पैर.

रेनू- दरअशल हमने उस दिन के बाद से बहा जाना छोड़ दिया था. लेकिन पता नहीं क्या हुआ. अचानक से हमारा मन किया बहा जाने का. हमने बहुत कोसिस की अपने मन को समझने की लेकिन हम कण्ट्रोल नहीं कर प् रहे थे. ऐसा लग रहा था जैसे हमें वो क्लब अपनी तरफ खींच रहा हो. इसलिए हम बहा चले गए. बहा हमने कुछ नहीं पिया. न hi कुछ लिया. तभी 2 लड़के आये हमारे पास जो बकै में काफी हैंडसम थे. और सरीफ भी. हमने बाटे की. उन्होंने हमें जूस ऑफर किया. पहले तो कुछ और hi ऑफर किया था लेकिन हमने उन्हें मन कर दिया. तो उन्होंने हमें जूस माँगा दिया. तभी मेरी नजर गयी को उनमे से एक जूस में कुछ मिला रहा है. इसलिए मैंने सुरभि को बताया और उसके बाद हमने वो जूस बही फेक दिया और उनके सामने ऐसा नाटक किया जैसे हमने उसे पी लिया है. फिर हमें बेहोश होने का नाटक किया. उसके बाद वो हमें अपने साथ ले गए. हमने सोचा जहा भी ये कुछ उलटी सीढ़ी हरकत करेंगे दोनों को बही गाड़ देंगे. लेकिन उससे पहले hi कोई तीसरा आज्ञा. उसने अपना नाम बताया था कुछ. है याद आया समीर. लेकिन कार में हमने उनकी बाटे सुनी थी. जो वो किसी समीर से कर रहे थे. इसलिए हमें उसपर शक हुआ. और हम उसके आगे कुछ करते उससे पहले hi हम बेहोश हो गए. पता hi नहीं चला कैसे हो गए. न उन्होंने हमें कुछ सुंघाया न कुछ or.bas जब जगे तो यहाँ थे तुम्हारे पीछे. और अब तुम बताओ की हम कहा है.

ये सब सुनने के बाद हाँ तीनो hi थोड़े कंफ्यूज थे की आखिर उन्होंने ऐसा किया क्यों. वो घर से भी इनको उठा सकते थे. लेकिन उन्होंने अलग तरीका अपनाया जिसका जवाब मुझे अभी तक नहीं मिला था.

मैं- तुम दोनों एक no. की बेबकूफो हो इतना आज साबित हो गया. तुम्हारी पहली बेबकूफो की तुम दोनों क्लब गयी वो भी अकेली. दूसरी गलती की तुम्हे जब सब पता था फिर भी तुम दोनों जांभोज कर उनके साथ गयी बेहोशी का नाटक करके. अरे बही सालो को फोड़ देती और घर को निकल लेती. लेकिन नहीं हीरो बनना था. अब बब्लो हीरो.

ये कहके मैंने उनसे मुँह फेर लिया. और उन्हें समाज में आया की बकै ऐसे हीरो बनना कभी कभी खतरनाक भी हो सकता है. उन्हें अपनी गलतियों का एहसास होने लगा था. और में जानता था की ये सब इसलिए हुआ क्युकी मेरा कवच कमजोर पड़ा और ये दोनों चली गयी क्लब में. इन्हे अपने ऊपर कण्ट्रोल करना चाहिए था.

मेरे इस प्रकार मुँह मोड़ लेने से दोनों का चेहरा एक दम से उतर gya.unke मुँह से एक शब्द नहीं निकल प् रहा था.

दोनों मेरे अजु बाजु में आई और प्राची और आलिआ बस देखने लगी की अब क्या होता है. जैसे ये कोई डेली शो हो.

दोनों ने मेरे एक एक हाथ को पकड़ा

रेनू- सॉरी मेरे भाई. हम तेरी कसम की बजह से hi बहा नहीं जाते थे. और उस दिन भी नहीं जाना था. लेकिन पता नहीं हमें क्या हो गया था. हमारे कदम खुद हमें बहार ले जा रहे थे. और इसमें इतना सा भी झूट नहीं है. मैंने हम दोनों को कमरे में बंद तक कर लिया था और चाबी को कमरे से बहार फेक दिया था. और फिर हम बहार नहीं जा प् रहे थे. लेकिन अगले hi पल दरवाजा अपने आप खुल गया. हम ये देखकर काफी हैरान थे. और अपने आप को रोकने की कोसिस कर रहे थे. लेकिन हमसे नहीं हो पाया और हम बहा चले गए. लेकिन बहा पहुंचने के बाद हमने एक घुट पानी तक नहीं पिया. तेरी कसम भाई.

सुरभि- है देव. मानती हु की हमें उनके साथ नहीं जाना चाहिए था. और इसके लिए तुम हमें जो चाहे सजा दे सकते हो. लेकिन प्लस हमसे ऐसे मुँह न मोड़ो. हम अपनी हालति मानती है. प्लस भाई एक आखिरी मौका दे दो हमें. अगर इसके बाद हमसे ऐसी गलती हो तो बेशक हमसे जिंदगी भर बात न करना. हम इसे hi अपना भाग्य समझ कर स्वीकार कर लेंगे. लेकिन प्लस भाई इस बार माफ़ कार्डो. हमारा वश नहीं चल प् रहा था. पुरे दिमाग में बस एक hi बात चल रही थी की क्लब जाना है. ऐसा काग रहा था जैसे किसी ने हिप्नोटिक करके हमें ये आर्डर दे दिया हो. और वो दरवाजे का खुलना हमें कुछ समाज में नहीं आरहा था की ये क्या और क्यों हो रहा है हमारे साथ.

उनकी बातो को सुनकर मुझे भी एहसास होने लगा था की सायद उसमे इनकी गलती नहीं है. उन असुरो के प्रभाव से hi इनलोगो ने ऐसा किया. सायद उनके साथ जाने का फैसला भी ऐसे hi लिया होगा. लेकिन कण्ट्रोल नाम की भी कोई चीज़ होती है. इन्हे करना चाहिए था. खैर अब जो होगया सो हो गया.

मैं- तुम दोनों को में माफ़ कर दूंगा. लेकिन अपनी बात पैर अडिग रहना. अगर फिर से कभी तुम्हारे साथ ऐसा हो तो फ़ौरन hi घर में बने मंदिर में चले जाना. फिर देखना कैसे सरे बुरे खयालो का अंत होता है. अगर मंदिर नहीं जा सकते तो मोबाइल में कोई भजन सुन लिया करो. मन तुरंत hi shan't हो जायेगा.

रेनू- हम वादा करते है. आगे से ऐसा hi करेंगे. जैसा तुमने कहा है.

सुरभि- है

मैं- ठीक है एक आखिरी बार तुम दोनों को माफ़ कर रहा हु. इसके बाद अगर ऐसा कुछ किया तो याद रखना में कभी भी तुम दोनों की शक्ल तक नहीं देखूंगा. जैसा तुमने अभी कहा था. याद है न.

सुरभि- अच्छी तरह से. और में वादा करती हु की ऐसा मौका अब कभी नहीं आएगा.

रेनू- में भी. क्युकी हम दोनों hi तुम्हारे बिना अधूरे है मेरे छोटू भाई.

मैं- ठीक है अब ज्यादा लाड दिखने की जरुरत नहीं है.

रेनू- कैसा न दिखाए. ये हमारा हक़ है

मैं- हमेशा मुझे इमोशनल करके मन लेती हो. दोनों. बहुत चतुर हो गयी हो. लेकिन ज्यादा नहीं.

सुरभि- वो तो हम है hi. अब हमें ये बताओ की ये पारी का क्या चक्कर है. और हम ये है कहा.

मैं- उसका कोई चक्कर नहीं है. वो बकै में एक पारी है. और हम इस वक़्त कहा है ये तो मुझे भी नहीं पता है. बाकि इतना जानता हु की जहा भी है सुरक्षित है.

रेनू- क्या सुरक्षित है. यहाँ देखो दिर दूर तक एक इंसान नहीं दिख रहा. हम घर कैसे पहुंचेंगे. और जो तुमने कहा की ये पारी है. इसपर हमें बिलकुल भी यकीन नहीं है.

जैसे hi रेनू ने ये कहा अचानक से वो हवा में लटक गयी. जिसे देखकर एक वार फिर से दोनों की आँखे फटी की फटी रह गयी.

रेनू- ये में ऊपर कैसे आगयी.

सुरभि- है रेनू क्या तू उड़द सकती है.

रेनू- पागलो जैसी बात क्यों कर रही है तू. में भला कैसे उड़ सकती हु.

सुरभि- तो फिर तू ऊपर कैसे पहुंची.

आलिआ- मैंने पहिचाया है उन्हें ऊपर

रेनू- कैसे.

ये सुनकर आलिआ ने अपनी छड़ी को सामने किया और उसे थोड़ा ऊपर किया जिससे रेनू भी ऊपर को जाने लगी. एंड फिर आलिआ ने छड़ी को नीचे किया जिससे रेनू नीचे जमीन पैर आगयी. और ये देखकर उन्हें कुछ हद तक यकीन हो गया की ये वाकई में एक पारी हो सकती है.

आलिआ- बैसे में और बहुत कुछ कर सकती हु. अगर अभी भी यकीन न हो तो करके दिखाऊ.

ये सुनके रेनू तो एकदम से बोल उठी. नहीं मुझे नहीं जानना है. मुझे पूरा यकीन है की तुम एक पारी हो.

एंड सुरभि ने भी उसी के सुर में सुर मिला दिया.

मैं- अब हमें चलना चाहिए.

प्राची- लेकिन हमें जाना कहा है. ये जगह है कोनसी.

मैं- मेरा मन इस तरफ चलने को कर रहा है. बही चलते है. अगर कुछ होगा तो हम संभल लेंगे.

रेनू- जहा भी चलना है चलो मुझे बहुत ठण्ड लग रही है.

मैं- ठीक है चलो.

उसके बाद हम लोग एक दिशा की और बड़े गए. चारो तरफ ऊँचे ऊँचे पहाड़ थे जिनपर बर्फ जमी हुई थी. जिस बजह से बहा का मौसम एक डैम जबरदस्त हो गया था. हम तो फिर भी ठीक थे लेकिन सुरभि और प्राची की हालत ख़राब हो रही थी. उनसे ज्यादा चला नहीं जा रहा था. उन्हें इन सब की आदत नहीं थी. लेकिन दोनों काफी स्ट्रांग थी. और वो हमारे पीछे पीछे चलती हुई आरही थी. रस्ते में उनकी और प्राची और आलिआ की गप्पे भी चालू रही. जैसे उन्होंने पूछा की ये कहा से और कब आई है और यहाँ क्या कर रही है. जैसे कई सवाल उन्होंने पूछे जिनका जवाब आलिआ देती गयी. आगे चलकर हमारे सामने एक ऊँचा पहाड़ aagya.ye पहाड़ तो सीधे बदलो में घुसा हुआ था. और इसे देखकर दोनों की हिम्मत जवाब दे गयी.

मैंने बहुत कहा लेकिन वो नहीं मणि. तो मैंने दोनों को अपने दोनों तरफ बैठा लिया. एक तरफ रेनू को और दूसरी तरफ सुरभि को. हलाकि काफी भरी थी दोनों लेकिन ये बजन सहना तो पड़ेगा hi. यही सोचकर और महादेव का स्मरण करते हुए में आगे बढ़ने laga.or अब हमें सीधा पहाड़ चढ़ना tha.jisme मेरी बंद बजने वाली थी. लेकिन पता नहीं क्यों न hi में थक रहा था. और न hi मुझे दोनों का बजन का अनुभव हो रहा था. में बस अपने कदमो को आगे बढ़ाता जा रहा था. और आराम से इस पहाड़ की चढ़ता हुआ जा रहा था. बाकि आलिआ और प्राची दोनों भी आराम से चढ़ती हुई जा रही थी. ये अच्छा था की जिस तरफ से हम चढ़ रहे थे. बहा पैर सीढ़ी ऊंचाई नहीं थी. इसलिए हमें ज्यादा मुश्किल नहीं थी. लेकिन आगे आसक्ति थी सीढ़ी ऊंचाई भी. हम कब से सफर कर रहे थे ये तो हमें पता भी नहीं था. बस मन खींचा चला जा रहा था इस पहाड़ की तरफ. और इसी लालसा में हम चलते जा रहे थे. यही हाल सबका था. प्राची आलिआ और रेनू और सुरभि का भी. लेकिन उनका शरीर उनका साथ नहीं दे रहा था इसलिए में hi उनको लेके चढ़ रहा था. और मुझे ु बहुत देर से उठाया देखकर उन्हें लगने लगा की कैसे में उन्हें इतनी आसानी से उठा कर ऊपर चढ़ रहा हु. सायद मुझे तकलीफ हो रही होगी. इसलिए आये चलकर वो एक जगह उतर गयी और खुद से चलने लगी. रस्ते भर सबकी पातर पातर चालू hi रही. आगे जेक हमारे सामने आई एक बड़ी समस्या. क्यों अब इक्दुम सीधा पहाड़ आज्ञा था हमारे सामने. जिसपर चढ़ना लगभग न मुमकिन सा था. तभी मुझे एक आईडिया आया.

मैं- आलिआ अपने जादू से एक बहुत hi लुम्बी रस्सी और बहुत सरे हुक lao.or उन्हें ठोकने के लिए हथोड़ा bhi.chhota वाला.

आलिआ- ठीक है.

आलिआ ने अपनी छड़ी घुमाई और अगले hi पल हमारे रस्सी हुक सब कुछ tha.hook काफी बड़े बड़े थे. जैसे मुझे चाहिए थे. उसके बाद मैंने एक छोर से सबसे पहले आलिआ को बंधा और उसके ऊपर प्राची को और उसके ऊपर रेनू को और उसके ऊपर सुरभि को. और उन सबके ऊपर मुझे. मैंने हम सभी की कमर में अच्छे से रस्सी को बांध दिया. मैंने रस्सी की जाँच की वो बकै मर मजबूत थी.

उसके बाद मैंने हुक के बेग को उठाया और हथोड़े को फसाया अपनी कमर में. और फिर उसने से एक हुक लिया और सामने पहाड़ी पैर एक जगह उसे थोड़ा diya.or उसके बाजु मैं मैंने एक हुक और थोक दिया. बाकि चारो बस मुझे देख रही थी की में क्या कर रहा हु. उसके बाद मैं चढ़ा उन दोनों हुक पैर. मैंने एक हाथ को पहाड़ में जगह बना कर फसाया और दूसरे हाथ से हुक निकाल कर ऊपरी सतह पैर ठोकने लगा. बहा दोनों हुक ठोकने के बाद मैं फिर उनके ऊपर चढ़ा और फिर बैसा hi किया.

मैं- अब सुनो जैसे में ऊपर चढ़ा तुम सभी एक के बाद एक चङो और जहा मैंने अपने हाथ को फसाया था बही तुम फसाओ.

रेनू- काफी जोखिम है इसमें देव. हम गिर सकते है.

मैं- नहीं गिरेगी. तुम सभी मेरे से बंधी हुई हो. और में किसी को गिरने नहीं दूंगा. मुझ पैर विस्वास है न.

रेनू- सबसे ज्यादा

मैं- तो बाद चलती जाओ महादेव का नाम लेके.

उसके बाद वो चारो एक एक करके ऊपर चढ़ने लगी हुक पैर लातो को जमा कर और हाथो को फसा कर. और में ऊपर हुक को लगता हुआ ऊपर चढ़ने लगा. मेरे पीछे वो चारो भी बैसे hi करती हुई ऊपर चढ़ने lagi.man में महादेव का नाम और हौसले बुलंद. हमें भला कोण रोक सकता था. में साथ में रस्सी को जगह जगह पैर बांधता जा रहा था ताकि अगर किसी का बैलेंस बिगड़े भी तो भी रस्सी की बजह से वो बही पैर लटके रहे. और ये काम कर रहा था.

हलाकि हम उड़द कर जा सकते थे. लेकिन उसमे वो मजा कहा जो इसमें आरहा था. पहाड़ कितना ऊँचा था ये बातपना मुश्किल था. लेकिन हम चढ़ते जा रहे थे. हम बहुत ऊंचाई पैर आगये थे. अब हमें नीचे की जमीन दिखना लगभग बंद हो गयी थी. ऐसा लग रहा था जैसे हम बदलो के ऊपर आगये ho.ye नजारा बकै में बहुत खूबसूरत था. बदलो के ऊपर सूरज अपनी अलग hi चमक बिखेर रहे the.or अब हमें पहाड़ को छोटी दिखने लगी thi.isliye में और जल्दी जल्दी ऊपर चढ़ने लगा और मेरे साथ बाकि सब भी. हलाकि रेनू और सुरभि की हालत ख़राब होने लगी थी. क्युकी यहाँ हवा बहुत पतली थी. जिस बजह से उन्हें सास लेने में तकलीफ हो रही थी. जिसके लिए मैंने अपनी आँखों को बंद किया और अपने सरीर से बायु को प्रबहित करने लगा. जिसका पता उन दोनों को बिलकुल भी नहीं चला. और इससे उन्हें अब सास लेने में जो दिखात आरही थी वो अब दूर हो गयी थी. ये बायु सीधे मेरे मस्तिष्क से निकल रही थी. जिससे सभी आराम से ससे ले प् रहे थे. जिसमे प्राची भी शामिल थी. बाकि मुझे और आलिआ को कोई दिखात नहीं होता hi थी. इसलिए हम आराम से चढ़ते जा रहे थे. और मैंने आलिआ को इसीलिए नीचे रखा था ताकि अगर कोई गिरे भी तो आलिआ उसे संभल ले. बाकि ऊपर में सबको खींच hi रहा था. ऐसे hi करके हम आखिर कार पहाड़ की छोटी तक पहुंच hi गए. मैंने एक एक करके सभी को ऊपर खींचा और हम जैसे hi ऊपर पहुंचे. हमारे कानो में एक आवाज पहुंची जिसे में अच्छे से जनता था. बाकि चारो कंफ्यूज थी की ये किसकी आवाज है.

तो बे कॉन्टिनुए……………….

 
बिलकुल ठीक कहा आपने. छल और कपट से हासिल की गयी पावर कभी न कभी अपना साथ छोड़ hi देती है. और इसका जीता जागता एक्साम्प्ले है महारथी करना. महाभारत से. बाकि इस समय देखते है की अपने देव बाबू इस सिचुएशन को कैसे हैंडल करते है. और कैसे वो सभी को बहा से बहार निकलते है. और अब आगे क्या होना है सब जानने के लिए साथ बनाये रखे.....

कीप सपोर्टिंग............
 
अपडेट 71



हम ऊपर पहुंच चुके थे. और बर्फ पैर लेते हुए थे

रेनू- हम आखिर जा कहा रहे hai.or क्यों.

मैं- हमें नहीं पता. बस इतना पता है की हमें जाना है. अब कहा जाना है ये पता नहीं है.

प्राची- ये जगह है कोनसी. कही हम हिमालय पैर तो नहीं हैना.

मैं- हो सकता है. कुछ कह नहीं सकते.

हमारी बाटे ऐसे hi चलने लगी. तभी मेरे कानो में एक आवाज पड़ी

गुरुदेव- आखिर पहुंच हु गए. कैसे हो वत्स.

मैंने उस तरफ देखा तो मुझे मेरे सामने साक्षात गुरुदेव खड़े दिखे.

मैं जल्दी से खड़ा हुआ और फिर पूरा दण्डवत प्रणाम किया उनको

गुरुदेव- खड़े हो जाओ वत्स. मुझे पूरा भरोसा था की तुम यहाँ तक पहुंच जाओगे.

मैं- जब आपका आसीर्बाद साथ हो तो कोई काम मुश्किल नहीं है गुरुदेव.

गुरुदेव- मेरा आसीर्बाद तो हमेशा तुम्हारे साथ hi रहता है. वत्स.

मैं- क्या आप हमें बहा से लेके आये थे.

गुरुदेव- नहीं में नहीं लाया. कोई और तुम सभी को यहाँ लाया है.

मैं- आप सत्य कह रहे है गुरुदेव

गुरुदेव- तुम्हारा अंदाजा बिलकुल ठीक है वत्स.

मैं- परन्तु वो तो यहाँ थे hi नहीं. अज्ञात वश में गए थे न वो.

गुरुदेव- ये सब तो मिथ्या है वत्स. सत्य केवल बही है. इस पोरे ब्रह्माण्ड के कद कद में उनका वश है. वो कभी भी यहाँ से कही नहीं जाते है. भले hi उनका साक्षात रूप कही और रहे लेकिन उनका ह्रदय हमेशा अपने भक्तो पैर कृपा बनाये रखता है. और वो जब जहा चाहे बहा जा सकते है. उन्हें कोण रोक सकता है. ये बात तो तुम भी जानते हो न.

मैं- आपने सही कहा गुरुदेव. में hi मूरख हु को इतनी सी बात समझ नहीं पाया.

गुरुदेव- तुम मूरख नहीं हो. बल्कि बहुत hi होशियार हो. तुमने बिना अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किये. अपनी बहनो को ढूंढा उन्हें बहा से छुड़ाया और फिर बिना अपनी शक्ति का प्रयोग किये तुमने इस पहाड़ की चढ़ाई छड़ी. तुम चाहते तो आराम से ऊपर आसक्ति थे. लेकिन तुमने बैसा नहीं किया. और यही वो बात है जो महादेव तुम्हारे अंदर देखना चाहते थे. और तुमने उन्हें वो दिखा भी दिया अपने शौर्य से.

मैं- ये सब तो आपकी और प्रभु की कृपा का कमाल है भगवन. अगर ये कृपा हैट जाये तो में सिवाय एक मति के पुतले के कुछ नहीं रहूँगा. जिसमे प्राण तो है. लेकिन जिसका कोई आधार नहीं है. उसका होना या न होना किसी के लिए कोई मायने नहीं रखता है. में बहुत hi खुशकिस्मत हु जो मेरे जीवन को एक महान उद्देश्य से साथ जोड़ा गया है.

गुरुदेव- ये तुम्हारा बड़प्पन है वत्स. बैसे हमारा परिचय नहीं करवाओगे सबसे.

ये सुनके में तो भूल hi गया की बाकि सभी यही है.

मैंने पीछे मुड़कर देखा तो चारो अपने हाथो को जोड़कर बैठी हुई थी.

मैं- गुरुदेव आप तो सबको जानते hi है. और आप सभी जान ले.

एक ब्रह्मांड ऋषि जो भगवन विष्णु के छठे अवतार है. जिन्होंने इस समस्त पृथ्वी को 21 बार क्षत्रियों से बिहीन कर दिया. और जिनके कठोर तप से भगवन श्री राम ने उन्हें कल्पांत पर्यन्त तपस्यारत इस भूलोक में रहने का आसीर्बाद diya.aise परम कृपालु भगवन श्री परसुराम.

जिन्होंने मुझे जैसे एक तुच्छ बालक को अपना सिस्य स्वीकार किया. धन्य है आप गुरुवार.

ये सब कहके मैंने फिर से उन्हें प्रणाम किया. और बाकि चारो तो आँखे फाडे उन्हें बस देखती hi जा रही थी. खासकर रेनू और सुरभि. उन्हें यकीन नहीं हो रहा था की जिस किरदार को उन्होंने रामायण महाभारत जैसे टीवी शोज में देखा है वो आज भी सत्य है.

मैं- में रेनू सुरभि प्रणाम करो. ऐसे देख क्या रही हो.

मेरी बात से वो हिली और फिर बैसे hi अपना माथा तक कर उनको प्रणाम करने लगी.

गुरुदेव- आयुष्मान भाव कन्याओ. उठो.

सभी अपने अपने स्थान पैर कड़ी हुई.

रेनू- मुझे विस्वास नहीं हो रहा है. पता नहीं मेरे कोनसे ऐसे पुण्य है जिसका फल मुझे इतना मीठा मिल रहा है. भगवन में और मेरी बहन नादाँ है अगर हमसे कोई भूल हो जाये तो हमें शमा करे.

गुरुदेव- हम ये बात अच्छे से जानते है. इसलिए आप सभी चिंतित न हो. इतने वर्षो से तप कर रहा हु. जिससे पहले जो मेरे अंदर क्रोधाग्नि भरी हुई रहती थी. वो अब ठंडी हो गयी है. इसलिए अब डरने जैसी कोई बात नहीं है.

सुरभि- भगवन आप कबसे देव के गुरुदेव है.

गुरुदेव- क्यों वत्स तुमने इन्हे बताया नहीं.

मैं- बताने का मौका hi नहीं मिला गुरुदेव.

गुरुदेव- ठीक है में hi बतादेता hu.me पिछले कई महीनो से देव का गुरु हु. और उसे हर सही गलत की शिक्षा देता आ रहा hu.isne ये बात सिर्फ इन दोनों को hi बताई है. बाकि तुम्हारे परिवार में किसीको भी इसके बारे में कुछ भी जानकारी नहीं.

रेनू- में समाज सकती हु. लेकिन में समाज नहीं प् रही हु. की ऐसा क्या हो रहा है देव के जीवन में. जिसके बारे में हमें तक पता नहीं है. एक के बाद एक हमारे सामने अविश्वसनीय घटनाये आरही है. पहले आलिआ. जो एक पारी है. फिर हमारा इस पहाड़ पैर चढ़ना और अब आप. कृपा मुझे गलत न समझे गुरुवार.

गुरुदेव- हम तुम्हारे प्रतयेक प्रश्नो के उत्तर देने hi यहाँ आये है. लेकिन यहाँ नहीं. आओ हमारे पीछे.

उसके बाद गुरुदेव आगे आगे और हम उनके पीछे पीछे. रस्ते में रेनू और सुरभि दोनों hi मुझे घूरती रही और मेरी कमर में चुटकी काट तो रही. कभी दये तरफ रेनू तो बाये तरफ surbhi.or में दोनों के बीच सैंडविच बन गया था. अब जो गलती की थी उसकी सजा तो मिलनी hi थी.

खैर हम गुरुदेव के पीछे चलते गए. और काफी चलने के बाद हम एक बहुत hi सुखद जगह पहुंचे जो गुरुदेव का आश्रम था. बहा का वातावरण इतना सुखदायक था की उसका वर्णन नहीं किया जा सकता tha.charo तरफ कबूतर उड़द रहे थे. और एक कुटिया बानी हुई थी. और उसके बहार एक यज्ञ कुंड और एक बेदी जिस पैर बैठ कर गुरुदेव ध्यान करते होंगे.

हमने अंदर पेअर रखने से पहले उस जगह को प्रणाम किया और बहा की राज को अपने माथे से लगाया. उसके बाद हमने अंदर पेअर रखा. जैसा जैसा में कर रहा था वैसे hi बाकि की चारो कर रही थी. और इस आश्रम का मौसम बिलकुल नार्मल था. जानकी चारो तरफ बर्फ छै हुई थी. और इस आश्रम पैर सूर्य देवता अपनी किरणे बिखेर रहे थे. आश्रम के पीछे से गंगा नदी प्रवाहित हो रही थी. बिलकुल दूध और कंचन जल.

गुरुदेव- वत्स यही है मेरा आश्रम कहा में निवास करता हु.

मैं- गुरुदेव ये हमारे किये किसी तीर्थ स्थल से काम नहीं है. हम प्रणाम करते है.

गुरुदेव- जाओ और अपने आप को स्वच्छ करलो. माँ गंगा में स्नान करलो

मैं- गुरुदेव हमारे पास और वस्त्र नहीं है.

आलिआ- में हु न.

ये कहके आलिआ ने छड़ी घुमाई और हमारे लिए और कपडे ले आई.

गुरुदेव- और कोई समस्या.

मैं- नहीं गुरुदेव. आओ सब

हम सब आश्रम के पीछे गए. और सबसे पहले मैंने स्नान किया गंगा जी में डुबकी लगा कर और बहार आके आलिआ के लेट हुए कपडे पहन लिए. जिसमे धोती कमर बांध और एक तन को ढकने के लिए शुअल था.

उन्हें मैंने पहना और में आश्रम में चला गया. उसके बाद एक एक करके उन चारो ने स्नान किया और कपडे पहन कर आश्रम में आगयी. उन चारो ने एक भगवा रंग की सदी और ब्लाउज पहना हुआ था. जिसमे चारो बहुत प्यारी लग रही थी. उसके बाद गुरुदेव ने हमसे शिवलिंग का अभिसेक करवाया और हमने बेलपत्र chadhaya.or शिवलिंग को प्रणाम किया. और उसके बाद हम बही नीचे बैठ gye.gurudev के सामने. गुरुदेव अपनी बेदी पैर बैठ हुए थे और हाँ उनके सामने.

गुरुदेव- तुम सभी के मन में कई प्रश्न उठ रहे होंगे की तुम सभी यहाँ क्यों और कैसे आये. और जो कुछ हुआ था बहा पैर वो क्यों हुआ था. तो में सबको विस्तार से समझाता हु.

गुरुदेव- वत्स. जब मैंने तुमसे कहा था की महादेव तुम्हारी परीक्षा ले रहे है. तब उनके अज्ञात वश में जाने की खबर सुनकर असुरो को एक अच्छा मौका मिल गया तुम पैर घाट लगाने का. हलाकि गुरु शुक्राचार्य ने सभी असुरो को मन किया था कुछ भी करने से. क्युकी वो खुद अभी ध्यान में विलीन hai.or तुम्हे काबू में करने का उपाय सोच रहे है. परन्तु अधीरा से सब्र नहीं हुआ और उसने पृथ्वी असुरो को तुम्हारी दोनों बहनो के द्वारा हमला करने को कहा. अब प्रश्न ये था की उन्होंने इतना सब पीछे होने के बाद भी अपनी शक्तियों का इस्तेमाल ज्यादा क्यों नहीं किया. तो में बाटाडू की उनको लगा की तुम अब पूरी तरह से कमजोर हो इसलिए उन्हें ये लगा की तुम्हे वो अब आसानी से फसा सकते है और काबू में कर सकते है. जो उनकी सबसे बड़ी भूल साबित hui.unhone ये सोचा था की तुम केवल शक्तियों से hi एक योद्धा बने हो. अगर शक्तिया हैट जाये तो तुम कुछ नहीं कर सकते. और आलिआ और प्राची की शक्तिया उतनी नहीं है की उनका सामना कर सके. इसलिए उन्होंने तुम्हारे लिए आसान रस्ते पीछे छोड़े ताकि तुम उन तक पहुँच जाओ और फिर वो तुम्हे अपने जाल में फसा ले. और कुछ हद तक वो कामयाब भी रहे. लेकिन इस दौरान तुमने अपनी बूढी का पूरा इस्तेमाल किया और उनकी हर चल का बखूबी मुकाबला kiya.sabse पहले तुमने आलिआ की शक्तियों का सही इस्तेमाल किया और उन असुरो के साथियो को सुला दिया. उसके बाद तुमने खुद को सरीरिल क्षमता का इस्तेमाल करते हुए शुम्भ्कासुर को परास्त किया. वो मर hi जाता अगर उसके साथी तुम्हे टोकते नहीं तो. बही प्राची ने अपनी शक्तियों के इस्तेमाल से उनके मायाजाल को तोडा और रेनू और सुरभि को बहा से आज़ाद करवाया. और उसी के साथ प्राची और तुमने अपनी शक्तियों को मिला कर उन सभी को अपनी क़ैद में कर लिया. और उसकी उम्मीद उनमे से किसी को नहीं थी. और इस तरह तुम हम सभी की उम्मीदों पैर खरे उतरे. अगर तुम दिमाग की जगह पैर अपनी शक्तियों के पीछे भागते तो सायद hi तुम्हे इस अभियान में सफलता milti.balki तुम सब कुछ हार जाते. अपने एंड भी और अपने परिवार को भी. लेकिन तुमने मेरी बात को समझा और उसका बखूभी पालन किया. जिस बजह से इस कार्य के होते hi तुम्हारी तीस्रीआँख तुरंत hi खुल गयी. ये एक परीक्षा थी जिसमे तुम अब्बल आये हो. और साथ में प्राची और आलिआ भी. जिन्होंने तुम्हारा बखूबी साथ दिया और अपनी शक्तिया का सही समय पैर इस्तेमाल किया.

ये सब सुनकर रेनू और सुरभि का तो मुँह hi खुला रह गया.

रेनू- क्या हमारा असुरो ने अपहरण किया था.

गुरुदेव- है पुत्री. लेकिन तुम्हारे भाई की बजह से तुम आज आज़ाद हो. और अब तुम्हारे ऊपर कभी कोई संकट नहीं आएगा.

सुरभि- क्या सरे असुर समाप्त हो गए गुरुदेव.

गुरुदेव- नहीं पुत्री सरे असुर कभी भी नस्ट नहीं हो सकते. भले hi उनका सरीर मिट जाये. लेर उनके विचार हमेशा किसी न किसी में जीवित रहते hi hai.bhale फिर वो कोई आम इंसान हो या फिर कोई भयानक राक्षस

रेनू- गुरुदेव देव को ये शक्तिया क्यों और कैसे मिली है.

गुरुदेव- पुत्री

उसके बाद गुरुदेव ने पूरी कहानी विस्तार से उन सभी को सुनाई की किस मकसद के लिए मुझे शक्तिया मिली और मेरा कार्य क्या hai.or अभी तक मैंने क्या क्या किया है. सब कुछ विस्तार से गुरुदेव ने उन्हें बता दिया.

जिसे सुनने के बाद रेनू और सुरभि बोली.

रेनू- हम धन्य हो गए जो भगवन हमें तुम्हारी बहन बनाया है देव. आज मुझे कितना गर्व हो रहा है तुमपर में बता नहीं सकती. में तुमसे बड़ी हु. लेकिन मैंने हमेशा तुम्हारे विचारो का पालन करने की कोसिस की है. क्युकी मुझे लगता था की तुम सही कह रहे हो. और इस बात पैर मुझे आज गर्व हो रहा है की मैंने सही निर्णय लिया.

मैं- ये तो आपका बड़प्पन है दीदी. वर्ण मुझसे ज्यादा आप समझदार है और हमेशा hi आप दोनों मेरी प्रेरणा रही हो. आप दोनों को देखकर में सीखता हु. है आपने कुछ गलतिया भी की. लेकिन सबसे बड़ी बात ये की आपने उन्हें काबुल किया. और सही राह पैर चलने का निर्णय भी लिया. और इस बजह से मुझे आप दोनों पैर कितना गर्व है ये में शब्दों में बयां नहीं कर सकता. बस इतना hi कहूंगा की थैंक्स मेरी जिंदगी में बहन बनकर आने के लिए.

ये सुनकर उन दोनों के ासु छलक गए. और दोनों कड़ी हुई और मेरे गले लग गयी. मैंने दोनों को सांत्वना di.or चुप कराया. और बापिस से उनकी जगह पैर बैठाया.

गुरुदेव- बहुत खूब बचो. तुम्हारा आपसी प्रेम hi है जो तुम्हे इस संसार में सबसे ताकतवर बनता hai.ye प्रेम ऐसे hi बनाये रखना. मेरा आसीर्बाद हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा.

मैं- धन्यबाद गुरुदेव.

प्राची- गुरुदेव अब हमें क्या करना है.

गुरुदेव- तुम लोगो की कुछ शिक्षा बाकि है जो यही रहकर संपन्न कराऊंगा में.

मैं- परन्तु गुरुदेव हमारे ऐसे अचानक गायब हो जाने से हमारे परिजन चिंतित हो रहे होंगे. और हमारे पीछे अधीरा ने कुछ और कर दिया तो क्या करेंगे हम.

गुरुदेव- तुम इसकी चिंता मत करो वत्स. अधीरा को उसका सबक मिल चूका है. अब वो उसके गुरुदेव के उठने तक कुछ नहीं करेगा. बही रही बात तुम्हारे मित्र और परिवार की तो उनकी भी चिंता मत करो तुम सभी. जब यहाँ से बापिस जाओगे तब सब समाज जाओगे.

मैं- जैसी आपकी आज्ञा गुरुवार.

उसके बाद गुरुदेव ने अगले 4 दिनों तक हमें ट्रेनिंग दी. बहा उन्होंने हमें सस्त्र विद्या ध्यान करना और कई ग्रंथो के पथ कराये. प्राची और आलिआ को उनकी शक्तियों को सही तरीके से इस्तेमाल करना सिखाया कैसे वो अपनी शक्तियों के सही इस्तेमाल से विषम से विषम परिस्थिति से भी निकल सकती है. रेनू और सभी को उन्होंने तलवार बाज़ी में इतना निपुण बना दिया की में खुद हैरान था की इतने काम समय में ये तो 1000 पैर भरी पड़ेंगी. ये सब गुरुदेव की कृपा थी जो हम सभी इतने काम समय में इतना सब कुछ आराम से सीख गए. रेनू और सुरभि को उन्होंने ध्यान लगाना सिखाया और कैसे ध्यान को लम्बे समय तक रखना है ये कण्ट्रोल भी बताया उन्होंने. और गुरुदेव ने अपनी कुछ गुप्त कलाओ और शक्तियों के बारे में प्राची रेनू और सुरभि को सिखाया. और ये उन्ही की म्हणत का फल था की जब भी वो ध्यान करती थी उनके सरीर की ऊर्जा चारो तरफ खुशकिस्मती बिखेर देती थी. रेनू और सुरभि के सरीर में इतनी फुर्ती आगयी थी की शास्त्र अभ्यास में वो मुझे आसानी से परास्त कर देती थी. इसका मतलब ये नहीं की में स्लो था. नहीं. बल्कि वो कुछ ज्यादा hi फ़ास्ट हो गयी थी. कब आती और कब वर करती पता भी नहीं चलता था. हमारी ट्रेनिंग ख़त्म होने के बाद गुरुदेव ने एक बात बताई जिसे सुनकर हम सभी हैरान थे.

गुरुदेव- वत्स. अब आज में तुम सभी को एक बात बताता हु. जिसपर तुमने सायद hi गौर किया हो. तुम पांच हो और दिव्यास्त्र के ाँस भी पांच hi है. इसका मतलब समझते हो

ये सुनके में चौका और सोचा की है यार ये तो मैंने सोचा हु नहीं

गुरुदेव- वत्स क्या सोच में पद गए हो.

मैं- गुरुदेव में आपका इशारा समाज रहा हु. परन्तु आप अच्छे से बता सकते है. की कही में गलत तो नहीं समाज रहा हु.

गुरुदेव- नहीं वत्स. तुम सही समाज रहे हो. तुम पांचो संसार में रहित पंचतत्वो के प्रतीक हो. सबसे पहले देव तुम. तुम अडिग हो बिलकुल इस धरती की तरह. चाहे कोई कुछ भी करले तुम्हारा निर्णय नहीं बदल सकता कोई.

आलिआ तुम आकाश की प्रतीक हो. जो विशाल है. और जिसमे सभी वश करते है. तुम सबको अपना समाज कर अपनाती हो. सबको अपने अंदर िस्थान देती हो.

प्राची तुम हवा की तरह हो जो निरंतर बहती रहती hai.jise न तो कोई रोक सकता है. न hi क़ैद कर सकता hai.vjaisa तुम्हारा स्वाभाव है. तुम अपने मन की करती हो. लेकिन जो बात सही लगे उसका साथ भी कभी नहीं छोड़ती हो जैसे देव तुम्हे सही लगा और तुमने उसका हाथ थम लिया. पहले तुम बबंडर की तरह थी. जो सब कुछ अस्त व्यस्त कर सकता है. लेकिन अब तुम एक सीतल लहर की तरह हो जिसके आने का सभी को इन्तजार रहता है.

रेनू- तुम अग्नि की तरह हो. जल्दी भड़क जाती ho.or तुम्हारा तू भड़कना सर्वनाश का प्रतीक है. लेकिन तुम्हारा एक धरा साइड भी है की तुम इस अग्नि की तरह भी हो जो ठण्ड में अलगाव से उत्पन्न होती है. जो सभी के सरीर की ठंडी को दूर करती है. तुम उस दिए की लो की तरह हो जो एक अँधेरे कक्ष में उजाला का देता है.

और सुरभि- तुम हो जल की तरह निर्मल और पवन जो निरंतर बेहटा रहता है और सरे संकर का कल्याण करता है. तुम सबकी प्यास बुझती हो. सुखी जमीन पैर हरियाली लती हो. और कही अगर पाप बाद जाये तो प्रलय भी लती हो.

तुम पांचों को मिलकर hi दिव्यास्त्र बनता है. जिसकी शक्तिया देव के अंदर समाहित होती है. और तुम सभी उस दिव्यास्त्र के पांचों मोती जिसके बिना वो दिव्यास्त्र भी कोई काम का नहीं. मतलब की तुम्हारे बिना देव का कोई बजूद नहीं और देव के बिना तुम सभी का कोई बजूद नहीं. तुम पांचों को एक साथ इस संसार का कल्याण करना है. यही तुम सबकी नियति है. रेनू और सुरभि का देव से जन्म सम्बन्ध है. परन्तु प्राची और आलिआ का नहीं. और ये सम्बन्ध बनाने के लिए देव का विवाह तुम दोनों से होगा. इस तरह तुम पांचों एक दूसरे से जुड़ जाओगे और तुम्हारा रिश्ता अटूट हो जायेगा. भाई बहन का रिस्ता कभी नहीं टूट ता. बैसे hi पति पत्नी का रिश्ता भी हमेशा बना रहता है. अगर रेनू और सुरभि का विवाह किसी और से भी हो जाता है तब भी तुम तीनो रहोगे भाई बहन hi. और यही रिश्ता और तुम्हारे बीच का प्रेम तुम्हे मजबूती प्रदान करेगा इस युद्ध को जीतने के लिए. ये सब पूर्वनिहित है. और आज वो संपूर्ण हुआ.

बही ये सुनके की मेरी शादी आलिआ से भी होगी प्राची का मुँह लटक गया और मुझे टेंशन हो गयी की अब में क्या करू. और आलिआ एक तरफ बहुत कुश थी और दूसरी तरफ वो भी परेशान थी को मैं और प्राची उसे स्वीकार करेंगे या नहीं.

तो बे कॉन्टिनुए………………….

 
अपडेट 72



हमारी शादी की बात सुनकर लगभग सभी शोक में थे की ये कैसे संभव होगा. लोगो से एक तो संभालती नहीं में 2-2 कैसे सम्भालूंगा और ये दोनों कितनी बार एक दूसरे के बाल नोचेंगी.

रेनू- गुरुदेव ये कैसे संभव हो पायेगा.

गुरुदेव- पुत्री ये संभव करना इन तीनो के hi हाथ में है. अगर इनमे आपसी प्रेम और एकता रही तो ये कार्य बहुत hi सरल है. बाकि आलिआ पुत्री तुम्हारा क्या विचार है इसपर.

आलिआ इक दम से हड़बड़ा सी गयी और फिर संभल कर बोली.

आलिआ- गुरुदेव में ये फैसला अकेले नहीं ले सकती हु. इसमें मेरी माँ और पिताजी का समर्थन होना जरुरी है और उससे भी जरुरी है प्राची और देव का निर्णय. क्युकी ये दोनों पहले से प्रेमी है. और दोनों कुश है ेल दूसरे से. ऐसे में अगर में इनके बीच में आई तो दोनों की कुशिया छीन जाएगी जो में होने नहीं दे सकती. बाकि आप हमसे बेहतर जानते है गुरुदेव.

गुरुदेव- तुम्हारा कहना सही है पुत्री. तो प्राची अब तुम्हारा क्या विचार है इस बात पैर.

प्राची गहरी सोच में डूबी हुई थी उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था को उसके आसपास क्या हो रहा है. गुरुदेव के पुकारने पैर उसका ध्यान टुटा और उसने ऊपर देखा और ऐसा मुँह बनाया जैसे पूछ रही हो की सवाल क्या था.

गुरुदेव- पुत्री तुम्हारा क्या विचार है इस बात पैर. अगर आलिआ और तुम्हारा विवाह देव से हो जाये तो क्या तुम आलिआ को अपना पाओगी. क्युकी आलिआ का यही कहना है की अगर तुम दोनों को दिक्कत नहीं तभी वो कुछ सोचेगी वर्ण वो कुछ नहीं करेगी.

प्राची- गुरुदेव में क्या कहु मुझे समाज में नहीं आरहा है. मुझे आलिआ पसंद है बिलकुल एक बहन की तरह. लेकिन जब बात देव की आती है तो में उसे बात नहीं सकती किसी और के साथ. ये संभव नहीं है किसी भी तरह. आप तो जानते hi है. लड़कियों की यही फितरत होती है. वो सब चीज़े बात सकती है लेकिन पति नहीं. आलिआ मेरी बात का बुरा मत मन्ना लेकिन सचाई यही है. बाकि और मुझे कुछ नहीं कहना है.

गुरुदेव- तुम्हारा कहना भी उचित है पुत्री. तुमने जो कुछ भी कहा है वो एक साधारण स्त्री की टूर पैर बिलकुल सही है. लेकिन एक योद्धा के टूर पैर बहुत hi गलत है. पुत्री में जानता हु की तुम दोनों आपस में प्रेम करते हो. और ये रिश्ता तुम दोनों का पहले से hi तय है. लेकिन एक सत्य ये भी है की आलिआ भी देव की hi संगिनी बनेगी. ये बात भी सात प्रतिसत सत्य है. तुम एक योद्धा हो. तुम सभी का जन्म महँ उद्देश्य को पूरा करने के लिए हुआ है. और तुम ये बात अच्छे से जानती हो की महँ कार्यो को करने में कुर्बानिया तो देनी hi पड़ती है.

अभी गुरुदेव बोल hi रहे थे की आलिआ बीच में hi बोल पड़ी.

आलिआ- शमा करे गुरुवार. आपको बीच में रोकने के लिए. लेकिन में भी ऐसे जबरदस्ती के रिश्ते को नहीं निभा सकती hu.aap चाहे कितनी hi दलीलें दे लेकिन जब तक हमारे दिल्ली नहीं मिलेंगे तब तक ये सब बेकार है. प्राची मुझे में प्राची को और देव हम दोनों को दिल्ली से अपनाये तब ये रिश्ता मजबूत बनेगा. अगर सिर्फ इसलिए की हमें साथ में रहना और जबर्दस्ती हमारा विवाह होता है तो हमसे कोई भी कभी भी कुश नहीं रह पायेगा. इसलिए मेरा आपसे निवेदन है की कृपा कर इस बात को यही विराम दे. अगर हमारा मिलना तय है तो हम अवश्य hi मिलेंगे. महादेव सब जानते है वो हमारा अहित कभी नहीं चाहेंगे.

ये सब बाटे सुनकर गुरुदेव के चेहरे पैर एक मुस्कान बिखर गयी.

गुरुदेव- ठीक है पुत्री हम इस विषय में और बाटे नहीं करेंगे. तुमने सही कहा महादेव सब सही करेंगे.

मैं- गुरुदेव मेरा एक प्रश्न है.

गुरुदेव- है पूछो वत्स.

मैं- गुरुदेव आपने हम पांचो को पंचतत्व के प्रतीक बताया. तो क्या जो जो ाँस मिलने वाले है या मिल गए है. उनकी शक्तिया इनमे आएगी. मगर कैसे.

गुरुदेव- वत्स उत्तम प्रश्न है तुम्हारा. वत्स जो ाँस तुम्हे मिले है या मिलने वाले है उनकी शक्तिया तब विभाजित होंगी जब दिव्यास्त्र पूरी तरह से बन जायेगा. उसके पांचों ाँस जब मिल जायेंगे और वो अपना रूप ले लेगा. तब hi ये संभव होगा. तब तक तो ये जैसी है बैसि hi रहेंगी.

मैं- लेकिन ये कैसे होगा गुरुवार.

गुरुदेव- वत्स जब दिव्यास्त्र पूरी तरह से बन जायेगा तब उसकी कुछ कुछ शक्तिया इन चारो में बात जाएगी. और ऐसा इसलिए होगा क्युकी तुम्हारा सरीर उन शक्तियों को संभल नहीं पायेगा. इसलिए उनका विभाजन होना जरुरी है. इन चारो में पृथ्वी ाँस को छोड़ कर बाकि चारो ांसो की थोड़ी थोड़ी शक्तिया आ जाएँगी. हलाकि ाँस तुम्हारे अंदर निवेश कर रहे है इसलिए उनकी शक्तियों का ज्यादा स्त्रोत तुम्हारे अंदर hi रहेगा और बाकि के हिस्से इनमे बात जायेंगे. ताकि उन शक्तियों का संतुलन बना रहे और तुम्हारा सरीर उस उसमे को सेहन कर सके. तो मुश्किल समय में इन चारो की शक्तिया तुम्हारे काम आएगी. और ये कैसे होगा जब वो समय आएगा तब में खुद सबको बतादूँगा की ये कैसे होगा. तब तक के लिए इन्तजार करो और सरे ांसो को असुरो से पहले हासिल करो. बाकि कार्य अपने आप हो जायेगा.

मैं- ठीक है गुरुवार जैसा आप कहे. अब हमें क्या करना है

गुरुदेव- आज यही विश्राम करो कल प्रातः तुम सभी अपने घर के लिए प्रस्थान कर जाना. अब तुमसबकी शिक्षा संपूर्ण हो गयी है. बस उसे याद रखना और सही से इस्तेमाल करना.

सभी- हम याद रखेंगे गुरुवार और जैसा आपने कहा है हम बैसा hi करेंगे.

मैं- गुरुदेव हमारी शिक्षा संपूर्ण हो गयी है तो अब हमें गुरुदक्षिणा देना होगा. आपने कहा था की जब समय आएगा तब आप मांगेंगे. तो क्या वो समय आज्ञा है गुरुवार.

गुरुदेव- नहीं वत्स अभी नहीं आया है वो समय. तुम्हारी शिक्षा जरूर पूरी हुई है. परन्तु मेरा कार्य अभी बाकि है. जब वो पूर्ण हो जायेगा तब में मांगूंगा गुरुदक्षिणा.

मैं- ठीक है गुरुवार.

उसके बाद हमने गुरुदेव को प्रणाम किया और गुरुदेव ने हमें आसीर्बाद दिया और उसके बाद वो अपने ध्यान में बैठ गए. और हम पांचों बहा से उठ कर गंगा माँ के किनारे पैर आके बैठ गए

सुरभि- देव तुम्हारा क्या कहना उस बारे में.

मैं- किस बारे में.

सुरभि- विवाह के बारे में.

ये सुनके आलिआ और प्राची दोनों hi मुझे देखनी लगी. में आलिआ के डिल की बात बहुत पहले से जनता था लेकिन में ये भी जनता था की प्राची कभी उसे ावायेगी नहीं. इसलिए मैंने उसे आगे नहीं बढ़ने दिया. लेकिन उसका प्रेम दिन बा दिन बढ़ता hi जा रहा है. लेकिन जो प्रेम वो करती है बैसा में भी नहीं कर सकता use.usne मुझे पाने का अभी तक रत्ती भर भी प्रयास नहीं किया है. बल्कि वो भी ये बात जानती है की प्राची सायद hi उसे काबुल करे. और उसने इसके लिए खुद को रेडी भी कर लिया है. बही बात अगर मेरी आये तो में कंफ्यूज हु. और सायद हमेशा रहूँगा. में प्राची से प्यार करता हु. और आलिआ भी मुझे पसंद है लेकिन मैंने उसे अभी तक एक दोस्त की तरह hi देखा है ये सब बाटे जानते हुए भी. बाकि सिर्फ इतना hi कहूंगा की

NO कमैंट्स………….

सुरभि- कहा खो गए.

उसकी आवाज सुनकर में होश में आया और उसको तरफ देखकर उसे मैंने चुपके से आँखे दिखा दी और रेनू तो समाजधर है उसने भी सुरभि को एक हलकी सी चुटकी काट ली. जिससे वो समाज गयी की उसने गलत समय पैर ये सवाल पूछ लिया है.

प्राची- मुझे भी जानना है देव. इस बारे में तुम्हारी क्या रे है.

मैं- प्राची में इस बारे में कुछ नहीं कह सकता हु. बस इतना कहूंगा की में हमेशा तुम्हारे साथ हु. लेकिन गुरुदेव ने जो भी कहा है वो भी एक ऐसा सत्य है जो कभी न कभी हमारे सामने आएगा hi. फिर चाहे दुनिआ इधर की उधर हो जाये. इसलिए मेरा बस इतना hi कहना है की इसको समय पैर छोड़ दो. और आलिआ ने कहा की महादेव जो करेंगे हमारे भले के लिए hi करेंगे. इसलिए उसको उन्ही पैर छोड़ दो. और इस बारे में सोचना बंद कर do.or ऐसा न करने से तुम्हारी सेहर पैर hi असर पड़ेगा जो मुझे मंजूर नहीं है.

मेरी बाटे सुनकर उसे कुछ हद तक तो चैन मिला hi होगा लेकिन उसके मन में ये बात ये बैठ चुकी है की हम तीनो की शादी होकर hi रहेगी. जिस बजह से वो अब काफी सोचने लगी thi.or इस बारे में मैं उसकी कोई मदद नहीं कर प् रहा था. क्युकी अगर मैंने प्राची के लिए ये कह भी दिया की में उसी से सिर्फ शादी करूँगा तब भी उसके मन से ये दर कभी नहीं जायेगा. और उल्टा वो आलिआ को अपना दुश्मन मैंने लगेगी और अभी से मैंने लगी है. जो में नहीं देख sakta.use ये दर है की कही आलिआ उससे मुझे छीन कर न ले जाये. बाकि आलिआ का ऐसा कोई इरादा नहीं है जो बात सिर्फ में जनता हु. लेकिन मेरी दुविधा ऐसी है की में आलिआ का किसी भी प्रकार से साथ नहीं दे sakta.kyuki मैंने अगर थोड़ा सा भी आलिआ का फवौर लिया तो प्राची हमसे हमेशा के लिए दूर हो सकती है. जो में हरगिज़ नहीं होने दे सकता. और मैंने यही बात शामे तो शामे आलिआ को ब्बि समझा दी. मन के थ्रू. जिसे सुनकर उसने मुझे एक प्यारी सी मुस्कान पास कर दी. लेकिन इस मुस्कान के पीछे एक उदासी भी छै हुई थी जिसे में आसानी से देख सकता था. लेकिन कुछ कर नहीं सकता था. और अब मुझे केवल महादेव से hi उम्मीद है की बही इसका कोई हल निकाल सकते है. इसलिए मैंने उन्हें मन में प्रणाम किया और उनसे विनती की. की इस मुसीबत का कोई हल बताये हमें.

बही दूसरी तरफ शुक्राचार्य अपने ध्यान से उठ चुके थे. और उनके चेहरे पैर कुछ मिल जाने की खुसी थी.

बही अधीरा को जब ये समाचार मिला तो वो तुरंत hi गुरुदेव के आश्रम की तरफ निकल पड़ा और थोड़ी hi देर में वो बहा पहुंच गया. उसने शुक्राचार्य को प्रणाम किया. और शुक्राचार्य उसे इस वक़्त देखकर काफी चौके.

शुक्राचार्य- क्या हुआ अधीरा इस समय कैसे आना हुआ.

अधीरा- बस आपके दर्शन करने चला आया गुरुदेव और आप उठ गए है तो आपने कोई न कोई रास्ता जरूर ढूंढ लिया होगा देव को हटाने का. बस बही जानने आया हु.

शुक्राचार्य- है लेकिन ये सब जानने के लिए तुम कल सुबह भी आसक्ति थे. अभी क्यों आये हो.

अधीरा- मुझसे रहा नहीं जा रहा था इसलिए गुरुदेव.

शुक्राचार्य- मुझसे झूट बोलने माँ प्रयास न hi करो तो बेहतर है तुम्हारे लिए अधीरा. सत्य बताओ क्या किया है तुमने मेरे ध्यान में बैठने के बाद.

ये सुनकर अधीरा ने होनी गार्डन को तुरंत hi नीचे कर लिया.

अधीरा- मुझे शमा करे गुरुवार. मुझसे भूल हो गयी है.

शुक्राचार्य- विस्तार से बताओ.

अधीरा- आपके ध्यान में जाते hi. खबर मिली की महादेव अज्ञात वश में चले गए है. और आओ तो जानते hi है की ये समय हमारे लिए हमेशा hi लाभदायक रहता hai.isliye मैंने शुम्भ्कासुर और उसके साथियो को देव पैर हमला करने को कहा था. क्युकी उसकी शक्तिया काफी कमजोर हो गयी थी. मैंने सोचा इस बार उसे आसानी से वो हरा देंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उसने बिना अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किये hi उन सभी को क़ैद कर लिया उसके माया जाल में जहा हम कभी नहीं पहुंच सकते उन्हें छुड़ाने के लिए.

ये सुनके शुक्राचार्य की आँखे एक दम से लाल हो गयी उन्हें भयंकर क्रोध आने लगा था. जिसका प्रभाव शुक्र गृह पैर दुखने लगा था. बहा जगह जगह ज्वालामुखी फूटने लगे थे. और बहा की साडी धरती कम्पनी लगी थी. और बहा मौजूद सरे असुर ः कार करने लगे थे. जिनमे अधीरा भी शामिल था.

ये सब देखकर अधीरा ने तुरंत hi शुक्राचार्य के पैरो को पकड़ लिया और उनसे माफ़ी मांगने लगा. लेकिन शुक्राचार्य उसकी एक बात सुनने को रेडी नहीं थे. न hi उनका क्रोध काम हो रहा था. और इसके कारण पुरे गृह पैर प्रलय जैसा माहौल बनने लगा था. गृह अपनी दिशा से भटकने लगा tha.uska अपनी धुरी पैर घूमना रुकने लगा था धीरे धीरे जिस बजह से सरे ब्रह्माण्ड का संतुलन बिगड़ने लगा था. और इसका प्रभाव पृथ्वी पैर भी देखने को मिलने लगा था. यहाँ भी कई जगह भूकंप के झटके आने लगे थे. कई जगहों पैर बर्फ पिघलने लगा था. और सरे देवता परेशान होने लगे थे की इसे कैसे रोका जाये. बही पृथ्वी के साइंटिस्ट्स लोग हैरान थे प्रकृति की इस घटना को देखकर. उन्हें सेटटेलिते से मच इमेजेज मिल रही थी. लेकिन उनके पल्ले कुछ नहीं पद रहा था की ये सब आखिर क्यों हो रहा है.

अधीरा ने उनको कई दुहाई की लेकिन वो नहीं मान रहे थे. तब उन्होंने शुक्राचार्य को असुरो का वास्ता दिया और उन्हें वो सब याद दिलाया जब उन्होंने असुरो की भलाई के लिए उनके गुरुपद का चुनाव किया था. और ये भी की उनके इस क्रोध से सिर्फ ये गृह hi नहीं बल्कि सारा ब्रहमद नस्ट हो जायेगा.

और रही सही कसार महादेव ने पूरी कर दी. वो सीधे उनके मन में आये और उन्हें समझने लगे की ये क्रोध से किसी का भी हिट नहीं होगा. बल्कि चारो तरफ केवल और केवल सर्वनाश hoga.or महादेव की बात कोई कैसे ताल सकता है. जैसे hi उनकी बात ख़त्म हुई शुक्राचार्य का गुस्सा एक दम से shan't होने लगा. और साडी परिस्थिति फिर से नार्मल होने लगी.

जैसे hi शुक्राचार्य नार्मल हुए उन्होंने अधीरा को खींच कर एक लगा diya.or अधीरा बही पैर नीचे गिर कर धूल चाटने लगा

शुक्राचार्य- मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी अधीरा. तुम एक राजा हो. और ऐसी लापरवाही. तुम्हारी बजह से हमारे 5 मुख्या साथी आज उसकी क़ैद में है. जिन्हे हम छुड़ा नहीं सकते. जैसे hi दिव्यास्त्र सम्पूर्ण होगा सबसे पहले वो उन्हें मारेगा फिर कुछ और करेगा. और उससे भी बड़ी गलती तुमने ये की है की मेरा आदेश नहीं मन है.

अधीरा- शमा करे गुरुदेव में बस ये चाहता था की आपके सर की समस्या का अंत हो जाये. क्युकी उस समय उसकी साडी शक्तिया कमजोर थी. लेकिन मुझे यही चूक हो गयी. और उसमे लिए में कोई भी दंड भुगतने को तैयार हु. आप मुझे जो चाहे सजा दीजिये में.

शुक्राचार्य- सजा तो तुम्हे मिलेगी hi. तुम अब असुरो के राजा नहीं रहोगे. में तुमसे ये पद बापिस लेता hu.tum इसके बिलकुल भी काबिल नहीं ho.ye पद आजसे तुम्हारा पुत्र sambhalega.MEDHAVI. जिसके नाम का मतलब hi असुर है. वो बनेगा असुरो का नया राजा.

ये सुनकर अधीरा को बहुत गहरा धक्का लगा था. उसे इतने कठोर दंड की उम्मीद तो बिलकुल नहीं थी. उसे लगा गुरुदेव कोई छोटा मोटा दंड देगा. ये नहीं लगा था उसे की उसका राजा का पद hi छीन लेंगे. लेकिन उसी का बीटा नया राजा बना ये उसके लिए अच्छा समाचार था. वर्ण उसके खंडन की जगह शुक्राचार्य किसी अन्य को भी राजा बना सकते थे.

अधीरा- मुझे आपका फैसला मंजूर है गुरुदेव. मेधावी अवस्य hi एक महँ साधक बनेगा और असुरो को नै ऊंचाइयों तक ले जायेगा

शुक्राचार्य- अवस्य hi. वो तुम्हारा पुत्र है लेकिन दिमाग में तुमसे कई गुना बेहतर hai.apne दुश्मनो का सामना कैसे करना है उसे अच्छी तरह से आता hai.abse तुम उसकी सेना के पति रहोगे. में तुम्हे असुरो की सेना का नया सेनापति नियुक्त करता हु. और पुराने सेनापति को उपसेनापति जो तुम्हारे अधीन रहकर कार्य करेगा. में कल प्रातः महल ायूँगा तब तुम्हारे पुत्र का में राज्याभिषेक करूँगा. अब जाओ और साडी तय्यरिया karo.or सरे असुरो को इसकी सुचना दे दो. कल सुबह सरे असुर उपस्थित होने चाहिए.

अधीरा- ठीक है गुरुदेव.

उसके बाद वो बहा से चला गया. और शुक्राचार्य बही बैठ गए और सोचने लगे की इसने जो गलती की है उसे कैसे सुधारा जाये.

बही अब सब जगह का वातावरण सामान्य हो चूका था. रात में मैं और बाकि सभी सो रहे थे आश्रम में तभी मुझे नींद में hi एक मीठा एहसास hua.jis बजह से मेरी नींद खुल gyi.or में कुटिया से बहार निकला चारो तरफ चंदा मां अपनी चांदनी बिखेर रहे थे. बर्फ हेरे मोतियों की तरह चमक रही थी. खैर ये नजर बकै में मन को मोहलेने वाला था. तभी मुझे नदी के पास से कुछ आवाज आई तो में उस ओरे चला गया. जब बहा पंहुचा तो देखा की बहा तो कोई नहीं है. गंगा माँ अपनी धरा के साथ बह रही है. उनके बहने की कल कल आवाज मन को सुकून देने वाली थी. इसलिए में बही बैठ गया और आज जो कुछ भी हुआ उस बारे में फिर से सोचने लगा. और आने वाले समय के बारे में. की आने वाला समय हमारे जीवन में कोनसे नए तूफ़ान लेन वाला है. कही ऐसा न हो की इस सब में मैं अपना सब कुछ खो दू. लेकिन मुझे महादेव पैर भरोसा था की वो जो कुछ भी करेंगे उसमे कही न कही मेरी भलाई hi छिपी हुई होगी.

यही सब सोच रहा था में की मुझे पीछे से एक मधुर आवाज सुनाई दी.

वत्स नींद नहीं आरही है क्या…………

तो बे कॉन्टिनुए………………….
 
अपडेट 73



ये आवाज सुनकर मैंने पीछे मुद कर देखा तो गुरुदेव मेरे पीछे खड़े हुए थे.

मैं तुरंत hi खड़ा हुआ और उन्हें प्रणाम करने लगा.

मैं- शमा करे गुरुदेव मेरी बजह से आपकी नींद में विघ्न पद गया

गुरुदेव- कोई बात नहीं वत्स. मुझे भी नींद नहीं आरही थी तो में यहाँ चला आया. और यहाँ तुम मिल गए. चलो बैठो

मैं बैठा और मेरे बाजु में गुरुदेव बैठ गए

गुरुदेव- क्या सोच रहे हो वत्स.

मैं- बस यही की कही आपने द्वारा कही गयी बात से आलिआ और प्राची दोनों hi मुझसे दूर न हो जाये. अगर ऐसा हुआ तो न तो मेरे लिए अच्छा होगा न hi संसार के लिए.

गुरुदेव- तुम्हारा सोचना सही है वत्स. ऐसा होने के आसार मुझे भी दिखाई दे रहे है. लेकिन क्या कर सकते है यही तुम तीनो की नियति है. और तुम तीनो को इसे स्वीकार करना होगा.

मैं- आपका कहना उचित है गुरुवार में और आलिआ इसे स्वीकार करने को तत्पर है. परन्तु प्राची के मन में क्या है ये तो में भी नहीं जनता. वो इसे स्वीकार नहीं कर पायेगी. अब आपको hi इसका कोई उपाय सोचना होगा. तभी कुछ हो पायेगा.

गुरुदेव- मैंने उपाय सोचे है. और उनमे से एक या दो अच्छे से काम भी करेंगे. बस सही समय का इन्तजार है. और इसमें तुम्हे भी मदद करनी पड़ेगी.

मैं- में तत्पर हु गुरुदेव. आप आज्ञा करे.

गुरुदेव- कल प्रातः तुम्हे बताऊंगा की क्या करना चाहिए.

मैं- जैसा आप कहे गुरुवार. गुरुदेव- आज जो घटना हुई थी उसका क्या अर्थ था.

गुरुदेव- वत्स तुमने उन असुरो को अपनी क़ैद में किया और उनको हमले का आदेश अधीरा ने दिया था. ये तो तुम जानते hi हो. लेकिन शुक्राचार्य ने उन्हें कुछ भी करने से मन किया था. और वो ध्यान में बैठे हुए थे. कल वो अपने ध्यान से जागे तो अधीरा ने उन्हें साडी बाटे बताई. जिसे सुनकर उन्हें अतयधिळ क्रोध आया था. जिस बजह से उनके गृह पैर भरी नुकसान हुआ और गृह भी अपनी गति भूलने लगा था. जिसका असर बाकि सभी ग्रहो पैर दिखने लगा था. बस यही था. उनके गुस्से का नुकसान उन्हें hi ज्यादा हुआ है. परन्तु वो उसे ठीक करना जानते है. और एक बड़ी समस्या भी आगयी है इसी तूफ़ान के साथ.

मैं- कैसी समस्त गुरुदेव.

गुरुदेव- अभी तक असुरो का राजा था अधीरा. परन्तु उसके इस कार्य से नाखुश शुक्राचार्य ने उससे राजा का पद छीन लिया और उसकी जगह पैर उसके पुत्रो को बिठा दिया. जो अधीरा से भी ज्यादा करोड़ और चालाक है. और अब उसका निशाना तुम ho.or तुम्हे हारने के लिए वो हर हद पार कर सकता है.

मैं- गुरुदेव आपने जो कहा है. उस हिसाब से तो असली संकट अब आने वाला है.

गुरुदेव- सही कहा. और तुम्हे उस असुरो की जानकारी तो होगी hi जो दूसरे ाँस के बाद जागे थे.

मैं- है लेकिन उनकी कोई जानकारी नहीं है मेरे पास

गुरुदेव- है वो भी अब आने वाले है. शुक्राचार्य ने उन्हें अभी खली बैठा दिया था. और इन सबके बाद शुक्राचार्य ध्यान में बैठे थे तो ये भी संभव है की उन्हें ध्यान में तुम्हारी कोई काट मिल गयी हो. जिसे वो अब इस्तेमाल करेंगे.

मैं- मेरे लिए क्या आदेश है गुरुवार.

गुरुदेव- बस इतना की सजग रहो और उनके हमलो को नाकाम करने की कोसिस करते raho.or सबसे जरुरी की इस विवाह बलि बात को अपने दिमाग पैर हावी होने से रोक दो. और सब भविस्य पैर छोड़ दो. जो होगा अच्छा hi होगा. बस अपना कर्त्तव्य निभाते जाओ.

मैं- जैसा आप कहे गुरुवार में पूरी कोसिस करूँगा की ये बात मेरे मन पैर हावी न हो.

गुरुदेव- शाब्बास वत्स मुझे तुमसे यही उम्मीद है.

मैं- गुरुवार कल हम बापिस जायेंगे तो सभी हमसे पूछेंगे की हम कहा थे कहा गायब थे. तो हम क्या कहेंगे उनसे. बहा सभी की हालत ख़राब हो गयी होगी इतने दिनों तक.

गुरुदेव- नहीं वत्स. बहा तुम्हारे परिवार और मित्र और जो भी तुम्हे जानते है उनके लिए तुम और तुम्हारी बहने बही पैर उनके सामने hi है. तुम बहा से कही नहीं गए हो. तुमने अपनी बहेनो को बचाया और उन्हें घर छोड़ा पुलिस ने उन लोगो को पकड़ा जिन्हे आलिआ ने बेहोश किया था और मामला बही रुक गया. सुबह तुम्हारे दादू और माता दोनों hi तुम्हारे मां के यहाँ पहुंचे जहा उन्हें सभी सकुशल मिले. उसके बाद 1-2 दिन बही रुके और फिर बापिस अपने घर चले गए. अब तुम ोरची और आलिआ देहरादून में हु. बाकि तुम्हारी बहने तुम्हारे मां के यहाँ पैर. लेकिन आने वाले कुछ दिनों में इसमें बदलाव होने वाला है. जिसके बारे में तुम जब बापिस जाओगे तब तुम्हे पता चलेगा.

मैं- ये सब कैसे हुआ गुरुदेव.

गुरुदेव- मानसिक शक्ति se.un सभी के मस्तिष्क में ये बात बैठा दी की तुम सभी बही हो. तुम सभी उन्हें दीखते हो. लेकिन ये ज्यादा दिनों तक नहीं हो सकता था इसीलिए तुम्हारी और बाकिओ की शिक्षा जल्दी hi समाप्त करवाई गयी. ताकि जल्द से जल्द तुम सभी अपने अपने घर पहुंच सको.

मैं- अब समाज में आया. लेकिन मुझे लग रहा था की हम उसी समय और दिन में बापिस पहुंच जायेंगे जब हम यहाँ आये थे.

गुरुदेव- ऐसा भी हो सकता था लेकिन इस दौरान सब कुछ रुक जाता जो उचित नहीं था. हलाकि श्री कृष्णा ने महाभारत युद्ध के दौरान ऐसा किया था. लेकिन उन्हीने सिर्फ युद्ध भूमि पैर hi समय को रोका था. बाकि जगह समय अपनी चल अपने हिसाब से चलता रहा था. लेकिन यहाँ तो पूरी पृथ्वी को hi रोकना पड़ता क्युकी अब समय बदल चूका है. इंसानो ने तरक्की की है नै नै अत्याधुनिक खोजे की है जिनमे से एक है इंटरनेट जिसके द्वारा कही की भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है. और जरा तुम सोचो की अगर कुछ सेहरो में सब थम जाता तो इंसान क्या करते और क्या सोचते. पहले सब जगह की जानकारी केवल ऋषि मुनि या स्वयं भगवन hi जानते थे. लेकिन अब हर एक इंसान जनता है की उसके सेहर में उसके देश में या पूरी दुनिआ में कहा क्या हो रहा है. इसीलिए इसे करना सही नहीं था.

मैं- आपका कहना सही है गुरुदेव. आपने जो भी किया उसमे सभी की भलाई hi थी.

गुरुदेव मेरा एक प्रश्न है.

गुरुदेव- है पूछो.

मैं- गुरुदेव अब बाकि के ाँस मुझे कहा मिलेंगे. पृथ्वी पैर या उससे बहार अंतरिक्ष में कही पैर.

गुरुदेव- ये सही से तो कोई नहीं बता सकता वत्स. बाकि इतना जरूर कहूंगा की अब बाकि के तीनो ाँस पृथ्वी पैर hi मौजूद है. अग्नि बायु और जल. तीनो hi पृथ्वी पैर उपलब्ध है. अब पृथ्वी पैर कहा है ये तो वो ाँस hi जानते है. और अच्छा ह तुमने ये प्रश्न उठाया. इस बारे में तुम्हे एक महत्वपूर्ण जानकारी भी देना है मुझे.

मैं- कैसी जानकारी गुरुदेव.

गुरुदेव- वत्स अब बाकि के तीनो ाँस एक साथ जागृत होने वाले है. और उनकी तय सीमा भी एक hi होगी. अब तुम्हे उन तीनो को जल्दी hi हासिल करना होगा. अगर एक भी ाँस हाथ से निकला तो तबाही मच जाएगी. और इसी लिए इस समय पैर तुम्हारी बहेनो को सच से अवगत कराया गया है ताकि तुम सबकी मदद ले सको अच्छे से.

मैं- गुरुदेव लेकिन ये कैसे संभव होगा. क्या ऐसा हो सकता है की वो ाँस मेरी जगह कोई और धारण कर सके कुछ देर के लिए. फिर चाहे बाद में वो मेरे अंदर ाज्ये.

गुरुदेव- नहीं वत्स धारण तो तुम्हे hi करना होगा. बाकि सभी केवल तुम्हारी सहायता hi कर सकती है. उनमे उस ांसो को धारण करने की क्षमता नहीं है. उस ाँस की थोड़ी सी शक्तिया hi वो धारण कर सकती है. संपूर्ण ाँस नहीं.

मैं- गुरुदेव इस दिव्यास्त्र के संपूर्ण होने के बाद क्या होने वाला है. मतलब की असुर क्या करेंगे.

गुरुदेव- वो तुम्हारा अंत करने का प्रयास करेंगे. क्युकी तुम्हारा अंत के बाद वो दिव्यस्त्र फिर से विलीन हो जायेगा और कभी न कभी फिर से जागेगा. असुर तब की प्रतीक्षा करेंगे.

मैं- अगर ऐसा हुआ तो क्या फिर से कोई आएगा इस दिव्यस्त्र को धारण करने के लिए.

गुरुदेव- क्या पता. सायद आये या न भी आये. और असुर उसे आसानी से हासिल करले. और सायद ये भी हो की वो ये तुमसे अभी हासिल कर ले. आगे क्या होगा क्या पता.

मैं- ऐसा मेरे जीवित रहते तो संभव नहीं है गुरुदेव. भले hi मेरे प्राण चले जाये पैर उनके हाथो में ये ाँस में कभी नहीं जाने दूंगा. और ये सब में इसीलिए पूछ रहा हु क्युकी गुरुदेव में अमर तो हु नहीं. कभी न कभी मेरा अंत भी होगा hi. तब ये अस्त्र फिर से विलीन हो जायेगा और आपके कहने के अनुसार असुर इसे फिर आसानी से हासिल कर सकते है.

गुरुदेव- तुम इतने सवाल क्यों पूछते हो. कभी ख़ामोशी से काम लिया करो.

ये सुनके मुझे हसी आगयी.

मैं- आप इसका जवाब नहीं देना चाहते

गुरुदेव- मुझे देने की अनुमति नहीं है. और भविष्य में क्या होने वाला है इसकी फ़िक्र में तुम अपना आज क्यों बिगाड़ रहे हो. जो होगा वो अच्छा hi होगा. तुम बस अपने आज पैर ध्यान दो. बाकि बाटे समय पैर छोड़ दो.

मैं- ठीक है गुरुदेव. एक आखिरी प्रश्न.

गुरुदेव- और वो क्या है.

मैं- क्या इसे नस्ट किया जा सकता है हमेशा के लिए.

गुरुदेव- में तुम्हारे कहने का अर्थ समाज रहा हु वत्स. परन्तु तुम्हे खेद होगा ये जानकार की ऐसा संभव नहीं है. इस अस्त्र को नस्ट करना न मुमकिन है. ये इस संसार के साथ हमेशा जीवित रहेगा. इसलिए तुम ऐसा कुछ करने का प्रयाश मत करना. क्युकी अगर दिव्यस्त्र रूत गया तो उसे मन पाना किसी के वश में नहीं.

मैं- ठीक है गुरुदेव

गुरुदेव- अब तुम जाओ और थोड़ा विश्राम कर लो.

उसके बाद में उन्हें प्रणाम करके बापिस कुटीर में चला गया. और जैसे hi अंदर पंहुचा मेरे होश उड़द गए.

मैंने देखा की गुरुदेव तो यहाँ पैर आराम से सो रहे है. और में अकेला hi आया हु बहा से. तो फिर बहा पैर कोण थे वो गुरुदेव के वेश में. ये सोचकर hi मेरा माथा ठनका और में बापिस से दौड़ कर उस जगह पैर बापिस गया. तो बहा अब गुरुदेव नहीं थे. लेकिन जमीन पैर कुछ था जिसे देखकर मेरे चेहरे पैर मुस्कान आगयी और अफ़सोस भी. जमीन पैर मुझे दिव्या पदचिन्ह दिखे और उन्ही के बाजु में पांच रुद्राक्ष भी जो वही लाइन से रखे हुए थे. और ये देखकर hi में समाज गया की जो यहाँ थे वो कोण थे. वो साक्षात महादेव hi थे और में उनसे hi बात कर रहा था. ये सोचकर मुझे अत्यधिक ख़ुशी हुई मेरा मन इतना हर्षित होगया जिसकी कोई सीमा नहीं थी. लेकिन इसी के साथ एक अफ़सोस भी था की में उन्हें ोेहचान नहीं पाया. वो मेरे इतने नजदीक थे लेकिन मुझे इतना सा भी आभाष नहीं हुआ इस बात का. जिससे मेरा चेहरा लटक गया. और ऐसा इसलिए हुआ क्युकी में अपनी hi उलझनों में फसा हुआ था. अगर मेरा मन खली होता तो में उन्हें तुरंत hi पहचान लेता. में मायुश होने लगा था तभी मेरे मन में एक आवाज आई.

आवाज- वत्स तुम्हे निराश होने की आवश्यकता नहीं है. वो में hi था और मैंने hi तुम्हे आभाष नहीं होने दिया की ये में hi हु. क्युकी अभी हमारे साक्षात कार का सही समय नहीं आया है. परन्तु जल्दी hi आएगा. और में तुमसे बस इतना hi कहना चाहूंगा की उस पल की प्रतीक्षा करो. और इस मायूसी को हटा दो अपने मन से. और इन पांचो रुद्राक्ष के बीजो को परसुराम को दे देना वो जानते है इनका क्या करना है.

ये सुनके मुझे थोड़ा अच्छा फील हुआ और मैंने उनके पदचिन्हो को दंडवत प्रणाम किया उनकी राज को अपने माथे से लगाया और उन रुद्राक्ष के बीजो को उठा कर कुटीर में ले आया और उन्हें शिवलिंग के समीप रख दिया और उन्हें प्रणाम करके बापिस से अपनी सैय्या पैर लेट गया और इसी बारे में सोचने लगा.

और इस दौरान कब सुबह हो गयी पता hi नहीं चला.

सुबह की साडी नित्यक्रियाओं को करके हम तैयार हुए. और मैंने फिर गुरुदेव को रात की साडी घटना बता दी जिसे सुनके उन्होंने भी मुझे समझाया की इसमें मेरा कोई दोष नहीं था. और उन्होंने उन पांचो रुद्राक्ष को पांच अलग अलग धागो में पिरो दिया और हम सभी को एक एक पहनने को दे दिया और कहा की इसे अपने से अलग मत कर न. जो हम बैसे भी नहीं करते. और उसके बाद मैंने उन्हें ये बताया की महादेव ने आपके वेश में कुछ कहा था की वो आज सुबह कोई उपाय बताएँगे इनको समझने का.

ये सब मैंने गुरुदेव से अकेले में पूछा

गुरुदेव- वत्स इतना बड़ा उपाय तो बता दिया उन्होंने और क्या चाहिए.

मैं- मतलब

गुरुदेव- अरे ये रुद्राक्ष यही उनका aasirbaad,prem और उपाय है तुम्हारे सरे बिगड़े कार्यो को सही करने के किये. तुम बस इन्हे धारण करे रहो और बाकि सब उन्ही पैर छोड़ दो.

मैं- जैसा आप कहो गुरुदेव.

गुरुदेव- अब तुम सभी को जाना होगा वत्स. तुम सभी के साथ से इतने दिन बहुत hi आनंद से निकले

मैं- ये हमारा सौभाग्य था गुरुदेव.

उसके बाद हम पांचो को गुरुदेव ने अपनी शक्तियों से अपनी अपनी जगहों पैर पल भर में पंहुचा दिया. मुझे अपने घर आलिआ और प्राची को उनके हॉस्टल में. और रेनू और सुरभि को मां के यहाँ दिल्ली वाले घर पैर. और अब सभी को अच्छे से याद था की इतने दिनों तक हमने क्या क्या किया है. खास कर रेनू और सुरभि तो सुपर एक्सीटेंड थी.

हम घर ोाहीचे तो हम सब नार्मल hi दिखा. माँ और दादू भी नॉर्मली बेहवे कर रहे थे और बाकि सभी भी. पता नहीं महादेव ने ये कैसे किया था. लेकिन ये सब तो उनके केवल सोचने भर से हो जाता है. बाकि कुछ करना तो दूर की बात है.

बही दूसरी तरफ

अधीरा ने सुबह से hi साडी तय्यरिया करनी सुरु कर दी और उसके बेटे को भी बता दिया जिसे सुनकर वो भी कुश हो गया. ाँस अधीरा ने सरे असुरो को इसके लिए आमंत्रित भी कर दिया था. सरे असुर जो पुरे ब्रह्माण्ड में फैले हुए थे. वो सभी सुबह से hi महल में पहुंचने लगे थे. शुक्राचार्य सरे बिधि विधान को पूरा करवा रहे थे मेधावी के द्वारा और इन सबके बाद उसका दुगदाभिषेक हुआ और फिर उसे बढ़िया से रेडी करवा कर सिंघासन पैर बैठाया गया और शुक्राचार्य ने उसके सर पैर मुकुट रखा और फिर चारो तरफ उसकी जय जय कार गूंजने lagi.jiski गूंज देवताओ को तक सुनाई दे रही थी. इंद्रदेव खासे परेशां थे ये सब होने से.

अब देखना ये था की ये मेधावी क्या गुल खिलता है राजा बनने के बाद …...और कैसे देव की मुस्किलो को बढ़ाता है……



तो बे कॉन्टिनुए………………….
 
अपडेट 74



जैसे तैसे वो दिन तो गुजर gya.raat में मुझे रेनू का कॉल आया.

मैं- है क्या हो रहा है बहा पैर.

रेनू- कुछ नहीं बस पैकिंग चल रही है

मैं- पैकिंग किस बात की. कही जा रहे हो क्या सभी

रेनू- तुम्हे नहीं पता.

मैं- नहीं.

रेनू- हम बही आरहे है देहरादून सभी मां ममी सुरभि और में.

मैं- क्या बात कर रही हो. कब आरहे हो तुम सभी.

रेनू- सरप्राइज है.

मैं- हे बताना प्लस.

रेनू- no वे में नहीं बताने वाली. गेस करते रहो.

मैं- देख थिस इस नॉट फारे

रेनू- ओह या. बूत मेरे लिए यही फारे hai.tumne मुझसे इतनी बाटे छिपाई है ये उसकी का परिणाम है.

मैं- उसके लिए मैंने सॉरी बोलै था न. और तुम्हे हालातो के बारे अच्छे से पता है.

रेनू- वो जो भी हो में नहीं बताने वाली तुम खुद पता कर लो.

मैं- ठीक है अब यही चाहती हो तो यही सही. में अभी मां का मंद रीड कर लेता हु.

रेनू- थॉट्स चीटिंग. बिना कोई पावर के पता लगा के बताओ तो मने.

मैं- अच्छा ऐसी बात है. तो फिर ठीक है में उन्हें कॉल करके पता कर लेता हु.

रेनू- कर लो. मुझे नहीं लगता की वो कुछ बताएँगे.

मैं- न बताये उसमे उन्ही का नुक्सान है. उन्हें लेने के लिए कोई पहुंचेगा hi नहीं एयरपोर्ट पैर.

रेनू- वो हम संभल लेंगे. Bye…

ये कहके उसने कॉल कट कर diya.or में सोच में पद गया की ये आखिर कब आरहे है. तभी मुझे महादेव की कही गयी बात याद आई. उन्होंने कहा था की कुछ बदलने वाला है. लेकिन क्या ये उन्होंने नहीं बताया था. ये सब सोचकर मैंने एक अंदाजा लगाया. लेकिन वो कितना सही था पता नहीं. मैंने सोचा जब आएंगे तब पता चल जायेगा.

यही सोचकर में सोने चला गया.

बही प्राची आलिआ से बहुत काम बात करने लगी थी. जैसा की देव को शक था. उनमे दूरिया बढ़ने लगी थी. प्राची इस सभी के लिए आलिआ को hi जिम्मेदार मैंने लगी थी. उसे लगने लगा था की अगर आलिआ उनकी जिंदगी में नहीं आती तो सिर्फ बही देव की पत्नी बनती. लेकिन उसके आजाने के कारण उसका कॉम्पिटिशन बाद गया. बही आलिआ उसे समझने की कोसिस करना छह रही थी लेकिन प्राची उसकी सुन्ना hi नहीं चाहती है. बल्कि उसका बस चले तो वो तो आलिआ को उसके रूम से hi भगा दे. लेकिन वो उसे बही रखे हुए थी ताकि वो उसपर नजर रख सके की कही उसके पीछे दोनों मिलते तो नहीं है. बल्कि इसमें बिलकुल भी सच्चाई नहीं है ये बात तीनो hi जानते है. बाकि इनका क्या होना है आगे पता नहीं.

बही शुक्राचार्य मेधावी ाधिरा तीनो hi उनके आश्रम में बैठे हुए थे और अपनी योजनाए बना रहे थे.

मेधावी- गुरुदेव आप ध्यान में बैठे थे. आपको कोई हल मिला उसे हटाने का.

शुक्राचार्य- ज्यादा जानकारी तो नहीं मिली बस इतना पता चला है की उसे किसी ऐसी जगह पैर हराया जा सकता है जहा पंचतत्व निबास न करते हो. और हमारी मजबूती ये है की ऐसी कोई भी जगह नहीं है इस ब्रह्माण्ड में. लेकिन ऐसी जगह बनाई जा सकती है.

मेधावी- आपका इशारा में समाज रहा hi गुरुवार. परन्तु ऐसी जगह का निर्माण करना और उसने देव को लाना आसान नहीं है. ये आप और बाकि सभी जानते है की वो ऐसे जगहों का अंत पल भर में कर सकता है. उसके कोई मायाजाल नहीं रोक सकता है. फिर ऐसे में हम उसका मुकाबला कैसे karenge.hamare सेनिको और हमारे अभी साथियो का मनोवल तो पहले hi टूट चूका hai.unhone ये बात स्वीकार कर ली है की वो सभी मिलकर ब्बि देव का मुकाबला नहीं कर सकते है.

अधीरा- है गुरुदेव यही हमारी सबसे बड़ी चिंता है. क्युकी ऐसे में हम कुछ भी करेंगे हमारे हाथ निरसा hi लगेगी.

शुक्राचार्य- हम्म्म इस समस्या का अच्छा समाधान है मेरे पास.

मेधावी- वो क्या है गुरुवार.

शुक्राचार्य- ाक्ष ाँस की क़ैद से आज़ाद हुए 3 असुर फिलहाल हमारे साथ है. तो अपनी सेना को उनके पास भेज दो. और उनसे कहो की सौरमंडल में चारो तरफ हाहाकार मचा दे. सरे ग्रहो में लूट पात मचा दे. उनका अंत फिलहाल हो नहीं सकता है. इसलिए देवता भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे और न hi वो देव. सेना उनके साथ रहेगी तो उनका मनोबल भी बढ़ेगा. ये देखकर की उन्हें कोई हरा नहीं प् रहा है.

मेधावी- ये कार्य तो आसानी से हो जायेगा गुरुवार. परन्तु देव किसी न किसी तरह उनके रस्ते में रुकावट जरूर पैदा करेगा. उसे रोकने के लिए भी हमें कोई कदम उठाना होगा. और वो मुझे पता है

शुक्राचार्य- क्या रास्ता है.

मेधावी- पिताजी.

ये सुनकर अधीरा चौका.

अधीरा- कोण में.

मेधावी- है आप. आप पृथ्वी पैर जाइये उनपर नजर रखिये. और जब भी वो आकाश में जाने की योजना बनाये या बहा पहुंच भी जाये. आप उनके पीछे पृथ्वी पैर तबाही मचाना शुरू करदे. यहाँ लोग मरेंगे उन्हें देखकर वो आपके पीछे आएगा पर आप उसे मिलोगे नहीं. बही ाक्ष में भी मासूम लोग मरेंगे लेकिन बहा उसका सामना वो तीनो करेंगे. आपको बस छिपकर काम करना है. उसकी पकड़ में नहीं आना है.

अधीरा- अगर पकड़ में आज्ञा फिर भी वो मेरा मुकाबला नहीं कर पायेगा इतना तो तुम्हे पता hi होगा

मेधावी- है में जनता हु. और आपकी इसी ताकत का हम समय पैर इस्तेमाल करेंगे. आप पृथ्वी पैर जाने से पहले पातळ लोक जाइये. और हमारे विस्वस्नीय साथियो को अपने साथ ले जाइये और पृथ्वी पैर तूफ़ान ले आइये. इससे वो परेशान होगा उसे समाज में नहीं आएगा की वो पहले कहा जये पृथ्वी पैर या सौरमंडल में. और इसी परेशानी का हम फायदा उठाएंगे. धीरे dheere.jiske बारे में उसे पता भी नहीं चलेगा.

अधीरा- बकै में तुम्हारी योजना लाजवाब है. पैर मुझे ये समाज में नहीं आरहा है की हम उससे वो ाँस कैसे हासिल करेंगे.

मेधावी- सच कहु तो ये काम बिलकुल असंभव है. अभी तक की उसकी कामयाबी का यही राज रहा है. उसके मन में दृढ़ निश्चय है की चाहे उसकी जान hi क्यों न चली जाये पैर वो ाँस हमें नहीं देने वाला किसी भी सूरत में. इसलिए अपना सारा ध्यान उसे भटकने पैर लगाना चाहिए हमें. ताकि वो इनमे फसा रहे और इस बीच हम बाकि के तीनो ाँस हासिल कर सके. उम्मीद है आप सभी अब अच्छे से समाज गए होंगे.

शुक्राचार्य- बहुत अच्छे से. और इस बार हमारे लिए एक और अच्छी खबर है.

अधीरा- वो क्या है.

शुक्राचार्य- वो ये की. अब बाकि के तीनो ाँस एक साथ जागृत होंगे. अब इसमें सोचने वाली बात ये है की वो बालक तीनो जगह एक साथ तो पहुंच नहीं सकता. तो हमें करना ये है की पहले उसे उलझाए रखो और इस बीच में पता करूँगा की बाकि के ाँस कहा है. और फिर हम तीनो जगह इक साथ जाकर उन्हें हासिल कर सकते है. और अगर वो किसी एक तक पहिच भी जाता है तब भी हमारे पास बाकि दोनों ांसो को हासिल करना का मौका रहेगा. बाकि फिर हम उसे मारकर बाकि 2 भी हासिल कर hi लेंगे. क्युकी अगर एक भी ाँस हमारे हाथ लग गया तो फिर ये होगा की उसके मरने के बाद दिव्यस्त्र विलीन नहीं होगा बल्कि उसके बाकि के ाँस बहा जायेंगे जहा उसके ाँस पहले से मौजूद है. यानि की हमारे पास. हमें आसानी से वो दिव्यस्त्र हासिल हो जायेगा. और ये सभी जानकारी मुझे ध्यान के दौरान मिली.

मेधावी- ये तो बकै में बहुत hi सुबह समाचार है गुरुवार. इस जानकारी के हिसाब से हमारे पास मौका है. अगर एक भी ाँस हमने हासिल कर लिया तो हमारे हाथ संपूर्ण दिव्यस्त्र लग जायेगा.

अधीरा- बकै में ये एक सुबह सचर है गुरुवार. और हमारे हाथ एक भी ाँस लग जाने से हम उसे मारने की योजना भी बना सकते है. क्युकी अभी तो हम उसे मारना hi नहीं चाहते है. इसलिए वो हर बार हमसे बच जाता है. अगर उसे मरने का होता तो कबका उसे ख़त्म कर दिया होता.

शुक्राचार्य- तुम्हारा कहना उचित है अधीरा. यही हमारी नाकामयाबी का सबसे बड़ा कारण है. अगर हम उसे मारने माँ प्रयास करते तो एक न एक बार तो जरूर सफल हो hi जाते. लेकिन उसमे हमारा hi नुकसान होता. लेकिन अब ये दर ख़त्म हो जायेगा बस कुछ hi दिनों की बात है.

मेधावी- सही कहा गुरुदेव. पिताजी अब आप जाने की तैयारी कीजिये. और सेना को लेजाने के लिए उन तीनो को यही बुला लीजिये. बाकि हम उन्हें समझा देंगे.

अधीरा- जैसा आप कहे सम्राट.

उसके बाद अधीरा बहा से अपने महल चला गया. सबसे पहले उसने तीनो असुरो को सन्देश पहुंचाया यहाँ आने का. और उसके बाद वो विदा लेके निकल गया सीधे पातळ लोक. बहा असुरो के कई मित्र है. जो बकै में काफी खतरनाक है. और अब उनका निशाना समस्त पृथ्वी बनने वाली थी.

बही नेक्स्ट डे देव अपने रूटीन से उठा और ध्यान लगा कर रेडी हो गया सलग के लिए. नीचे आके बढ़िया नास्ता किया.

मैं- दादू क्या आपको पता है की मां लोग यहाँ आरहे है.

ये सुनके माँ एंड दादू दोनों चौके.

माँ- क्या भैया यहाँ आरहे है. कब?

मैं- मतलब आपको पता नहीं है.

माँ- नहीं. तुझे किसने बताया

मैं- कल रेनू का कॉल आया था उसने सब बताया बस यही नहीं बताया की वो लोग कब आरहे है यहाँ. मैंने कितना पूछा usse.lekin उसने कहा की सरप्राइज hai.or फ़ोन काट दिया.

माँ- पक्का नहीं बताया उसने या तू हमसे छिपा रहा है.

मैं- पक्का माँ नहीं बताया उसने. लेकिन जरा दादू को देखो. ऐसा लगता है जैसे उन्हें साडी जानकारी पहले से hi hai.dekgo कैसे मुस्कुरा रहे है मंद मंद.

माँ- पिताजी आपको पता था और आपने मुझे भी नहीं बताया.

दादू- सॉरी बीटा वो उसने मन किया था. कह रहा था तुम दोनों को सरप्राइज देंगे वो. लेकिन अब लगता है सरप्राइज का पचका हो गया.

मैं- तो बताइये mr.dadu की वो कब आरहे है.

दादू- सॉरी माय डिअर पोते जी. में नहीं बता सकता. एंड सॉरी बहु जी आपको भी नहीं बता सकता.

माँ- क्या पिताजी बताइये न में तैयारी कर लुंगी उनके आने की. खाना बगेरा बना दूंगी उनकी पसंद का.

दादू- सॉरी वो जब आजायेंगे तब बना लेना.

मैं- माँ ये घर द्रोही हो गए है. ये नहीं बताने वाले. अब एक hi रास्ता है आपको उनको कॉल कीजिये और उन्ही से पूछ लीजिये.

दादू- क्या कहा तूने मुझे घर द्रोही.

मैं- है सही सुना आपने.

दादू- रुक तू तुझे बताता हु में.

ये कहके दादू खड़े हुए और मेरी तरफ आने लगे और मैंने यही मौका देख कर अपना बेग उठाया और दौड़ लगा दी बहार की तरफ

मैं- सॉरी फिर कभी देख लेना घर द्रोही. फिलहाल ी म लेट फॉर सलग.

ये कहके में बहार निकल गया और दादू और माँ पीछे हस्ते रह गए. अपनी कार ली और निकल गया चिराग के घर की taraf.use पिक करने

उसके घर के बहार पहुंच कर हॉर्न मारा तो आगये लाड साब बढ़िया गूगल बगेरा लगा कर. और में देख कर hi समाज गया की मामला कुछ और hi है.

मैं- अबे तू कोण है. चिराग कहा है

ये सुनके वो चौका.

चिराग- क्या हुआ तुझे में hi चिराग हु.

मैं- पागल समझा है क्या. चिराग इतना हैंडसम नहीं है. वो तो लंगूर जैसा दीखता है. और तू तो काफी हैंडसम लग रहा है. इसलिए तू चिराग नहीं हो सकता. अब जल्दी बता चिराग कहा है वर्ण पुलिस को खबर दे दूंगा.

ये सुनके उसे हसी आगयी और उसने अपना गूगल निकाल लिया.

चिराग- अब ठीक है.

मैं- है अब कागा की चिराग है tu.chal आजा बैठजा.

वो कार में बैठा और मैंने कार को आगे बड़ा दिया.

मैं- है तो अब बताएगा की ये सब क्या चक्कर है.

चिराग- क्या चक्कर.

मैं- यही गूगल बगेरा लगा कर किसे पटाने जा रहा है तू.

चिराग- ओह्ह दरअशल है एक

मैं- क्या बात है. कोण है कुछ बात हुई या नहीं.

चिराग- फिलहाल कुछ खास नहीं. बस हलकी सी जान पहचान हुई है. मुझे तो ये ताज्जुब हो रहा है की वो हमारे hi बैच की है. लेकिन अभी तक मेरी नजर क्यों नहीं हुई उस पैर. है मन क्लास अलग है लेकिन कैंटीन में या कही और वो दिखनी तो चाहिए थी.

मैं- अच्छा तो फिर कैसे दिखी वो तुझे.

चिराग- तुझे याद है परसो कैंटीन जाते समय में किसी से टकरा गया था.

मैं- है लेकिन मैंने जयदा ध्यान नहीं दिया था इस per.kya उसी से टकराया था

चिराग- बिलकुल. और टकराते hi मेरा डिल मेरा सीना चीयर कर उसके सीने में घुस गया.

मैं- क्या बात है. तेरा डिल है या कोई चाकू जो तेरे सीने को चीयर मर उसके सीने को भेद कर उसमे घुस गया.

चिराग- ये तो पता नहीं लेकिन उसकी ऐडा और निगाहे जरूर किसी तीर की तरह थी जो मेरे सेने को उन्ही से घायल कर दिया.

मैं- बस कर मेरे शायर. प्यार के मामले में तीर और घायल होने की बाते कर रहे हो.

चिराग- अब जो है सो है. यार में तो पूरा पागल hi हो गया हु.

मैं- बैसे उससे बात करने का कोई प्लान बनाया या नहीं.

चिराग- फिलहाल नहीं. बाकि देखते है.

यही सब बातो में हमारा सलग आज्ञा. और मैंने कार को पार्क किया और हम दोनों बाकिओ का इन्तजार करने लगे. थोड़ी hi देर में लकी आता हुआ दिख gya.vo हमारे पास आया

लकी- क्या हुआ इसको.

मैं- घायल होगया बेचारा किसी की निगाहो से.

लकी- अरे यु सीरियस

मैं- यस ल ऍम.

लकी- किसकी आँखे फुट गयी जो इस गधे को भाग्य ये.

मैं- तूने गलत समझा है. ये किसी को पसंद नहीं आया है बल्कि इसे कोई पसंद आगयी है.

लकी- ओह्ह्ह सॉरी माय mistake.bahi में सोचु. खैर ये देवदास जैसा हाल क्यों बना रखा है मेरे भाई.

चिराग- सेल बन्दर की शक्ल के. शक्ल अच्छी नहीं तो बाटे तो अच्छी किया कर. में और देवदास no चांस.

लकी- तो फिर इस शक्ल वाले को क्या कहते है मर. देव.

मैं- ी थिंक मजनू की औलाद.

चिराग- सालो उदा को मजाक जितना उड़ाना है. एक बार सेट हो गयी न फिर देखना कैसे दोनों के डिल जलते है. खासकर तेरे लुकीकबूतर. चलो अब.

मैं- अबे रुको प्राची को तो आजाने दो.

लकी- है वो अभी तक आई क्यों नहीं. जरा फ़ोन तो कर उसे.

मैं- है में लगता हु.

मैंने उसे कॉल किया लेकिन उसने नहीं उठाया. मैंने फिर तरय किया तो फिर उसने नहीं उठाया.

मैं- वो उठा नहीं रही है.

रुको में जेक देखता हु. तुम लोग चलो में आता हु.

चिराग- ठीक है आओ हम कैंटीन में बैठे है.

दोनों कैंटीन की तरफ चले गए और में हॉस्टल की तरफ. बहार गार्ड के पास गया और उससे प्राची में बारे में पूछा मैंने.

गार्ड- सर वो तो बहुत पहले निकल गयी सलग में.

मैं- कमाल है. अच्छा वो उसके साथ एक और रुकी हुई है न वो ठीक है न.

गार्ड- है सर लेकिन वो भी सुबह hi चली गयी अपना बेग लेके.

मैं- व्हाट. लेकिन कहा.

गार्ड- पता नहीं सर. मैंने पूछने की कोसिस की थी लेकिन उन्होंने मुझसे इतना hi कहा की में आपको ये बता दू. की वो जा रही है. बाकि मुझे कोई आईडिया नहीं की वो कहा गयी और क्यों.

ये सुनके लगा मुझे झटका. ये आलिआ आखिर जा कहा सकती है. कही परीलोक बापिस तो नहीं चली गयी. और प्राची ने मुझे इस बारे में बताया भी नहीं. लगता है मामला कुछ ज्यादा hi सीरियस हो गया है. और ये सोचते hi मेरी टेंशन और बाद गयी की अब इन दोनों लड़कियों को कैसे समझौ में.



तो बे कॉन्टिनुए………………...
 
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