दिव्यास्त्र.[The power of five elements] - Page 2 - SexBaba
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दिव्यास्त्र.[The power of five elements]

थैंक्स भाई.......

हीरो को इसी प्रकार का मैंने रोले दिया है. की वो शांत है. लेकिन उसके अंदर बहुत आग भी है. और वो आग जिस दिन बहार आयी तबाही समझो पक्की है. इसलिए उसका shan't रहना hi बेहतर है फिलहाल तो...

और जो बात आपने कही की दानवो से लड़ते वक़्त काम आएगी वो बकै में सच है. हीरो अपने विवेक का इस्तेमाल करके hi दानवो को हरा सकता है. बाकि देखते है आगे क्या होता है...........

.कीप सपोर्टिंग.............
 
थैंक्स भाई आपको स्टोरी अभी तक पसंद आयी उसके लिए ....

.एंड जैसा आपने कहा है मैंने थोड़े छोटे फॉण्ट में स्टोरी को पोस्ट कर दिया है. अगर इससे भी छोटे चाहिए तो बता देना में कर दूंगा......

एंड रही बात हीरोइन की तो देखते है किसकी किस्मत खुलती है...... प्राची की या रेनू की.

सब आगे पता चलता जायेगा आप बस अपना साथ ु hi बनाये रखे .....

कीप सपोर्टिंग..........
 
ी टोटली एग्री विथ ु डिअर.......

कम की बेटी को बिगड़ने में उसके पेरेंट्स का कुछ तो हाथ होगा hi. लेकिन वो डायरेक्ट हाथ सायद नहीं होगा. प्राची- ने उनको एक्सामिने करके अपने अंदर ये सब किया होगा... बाकि आगे तो पता चल hi जायेगा. एंड अरेस्ट के खिलाफ तो खुद देव भी है लेकिन थोड़ा ारेन्स का नाटक तो कर hi सकते है अगर दोनों की रजामंदी हो तो. बाकि क्या करते है इस अपडेट में आपको पता चल जायेगा.........

एंड लकी- एंड दादू आगे क्या गुल खिलते है ये मटर भी आगे आएगा देखना दिलचस्प होगा की आखिर हे करते क्या है.........

कीप सपोर्टिंग...........
 
अपडेट-8



लगभग अँधेरा हो चूका था. में अभी रस्ते में hi था. की मुझे सड़क के किनारे पैर एक कार दिखी जो एक पेड़ से टकरा गयी थी. और उसमे से धुआँ भी निकल रहा था. ये सब देखकर मुझे लगा सायद कोई एक्सीडेंट हो गया है. मैंने सोचा सायद कोई अंदर फसा हुआ भी हो सकता है. इसलिए मैंने अपनी बाइक को रोक लिया. और नीच उतर कर कार के पास गया. अँधेरा बहुत था बहा पैर. और कोई भी रोड लाइट भी नहीं थी बहा पैर. इसलिए मैंने अपने मोबाइल की टोर्च को जला लिया. और जल्दी से कार के पास पहुंच गया. मैंने टोर्च से कार के अंदर झक कर देखा. तो उस कार में कोई भी नहीं था. और कार का दूसरी साइड वाला दरवाजा खुला था. मैंने सोचा सायद जो भी था वो कार से बहार निकल चुके है. इसलिए में घूम कर कार की दूसरी साइड गया. और दरवाजे के पास जेक टोर्च मरी. तो बहा पैर अब कोई नहीं था. हलाकि खून की बुँदे फैली हुई थी नीचे और कार के अंदर भी. सायद बहुत भयानक एक्सीडेंट हुआ है. इसका. लेकिन जो भी था वो गया कहा. मैंने सोचा सायद हॉस्पिटल ले गया हो koi.or अब इसको कन्फर्म भी नहीं कर सकते थे. फिर भी मैंने सोचा एक बार 108 पैर कॉल करके पूछ लेते है.

इसलिए मैंने 108 पैर कॉल किया. तो एम्बुलेंस वालो ने कॉल उठालिया.

मैं- hello क्या आप बता सकते है की अभी या 2-3 घंटे पहले आपने किसी एम्बुलेंस को मग रोड पैर भेजा था क्या. या कोई एक्सीडेंट का केस आया है क्या.

108- हम अभी चेक करके बताते है सर.

उन्होंने थोड़ी देर चेक किया और फिर बोले.

108- नहीं सर हमारे पास फ़िलहाल कोई भी इस प्रकार का केस नहीं आया है. बैसे कही एम्बुलेंस की जरुरत है क्या.

मैं- जी में इस वक़्त मग रोड पैर हु. और यहाँ पैर एक कार का एक्सीडेंट हो गया है. लेकिन कार के अंदर जो भी था वो इसवक्त नहीं है. इसीलिए मैंने आपको कॉल किया की कही किसी ने उनको होशपीटाल तो पंहुचा दिया है क्या. या फिर आपने एम्बुलेंस भेजी हो.

108- बैसे ये एक्सीडेंट कब हुआ है.

मैं- जी मुझे इसकी जानकारी नहीं है. बस इतना पता है की 6-9 के बीच हुआ है. क्युकी 6 बजे के आसपास में इसी रोड से गुजरा था तब यहाँ पैर ऐसा कुछ नहीं था. और अभी में बापिस हो रहा हु. तो मुझे ये कार दिखी है. आप एक काम कीजिये पुलिस को इसकी जानकारी दे दीजिये. सायद कोई किडनैपिंग का केस हो. जो भी कार में था उसको ढूंढ़ना होगा. यहाँ पैर बहुत खून भी बिखरा पड़ा है. उसकी हालत ख़राब हो सकती है.

108- में समाज गया सर. आप बही पैर रुकिएगा में अभी पुलिस को बहा पैर भेजती हु.

मैं- ok में यही पैर रुकूंगा आप भेजिए.

उसके बाद मैंने कॉल कट कर दिया. और आसपास देखने लगा की शायद वो यही कही झाड़ियों में गिर गया हो. मैंने टोर्च जला कर थोड़ा नीचे जाने का सोचा जो की एक जंगल था. में धीरे धीरे नीचे उतरा और आसपास देखने लगा. मैंने नीचे टोर्च मरी तो मुझे इसी रस्ते पैर कुछ खून के नीसाण भी दिखे. में समाज गया की ये इसी तरफ गया है. अभी में और आगे बढ़ता उससे पहले hi मुझे पुलिस का साईरन सुनाई दे गया. तो में बापिस से ऊपर आज्ञा

और मुझे रोड पैर देखकर उनलोगो ने कार रोक ली.

उसमे से एक इंस्पेक्टर और एक हवलदार बहार निकला.

आईएनएस- आपने hi फ़ोन किया था.

मैं- जी मैंने hi किया था.

आईएनएस- हम्म तो क्या देखा आपने.

मैं- जो इस वक़्त आप देख रहे है.

आईएनएस- मतलब

मैं- मतलब ये की में अभी यहाँ से घर जा रहा था तो मेरी नजर इस कार पैर पड़ी. तो मदद करने के लिए में यहाँ रुक गया और कार के अंदर झक कर देखा तो कोई नहीं था यहाँ पैर. इसलिए मैंने फिर 108 पैर कॉल करके जानकारी ली और उन्होंने भी कहा की आज कोई केस नहीं आया है एक्सीडेंट का तो मैंने फिर उनके द्वारा आपलोगो को बुला लिया. और आपके आने से पहले ये देखिये में नीचे तक जेक आया तो मैंने कुछ खून की बुँदे नीचे जंगल में देखि है. सायद ये आदमी या औरत जो भी था वो नीचे जंगल में गया hai.hame जल्दी पीछा करना चाहिए सायद कोई उसे उठा ले गया हो.

आईएनएस- आपकी जागरूकता की दाद देता हु में. आजके टाइम में किसी अजनबी के लिए इतनी चिंता क्या बात है. बैसे आपका नाम क्या है.

मैं- जी में देव सिन्हा.

आईएनएस- कही आप सिन्हा ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज के मालिक तो नहीं.

मैं- जी में बही हु. लेकिन अभी तक मालिक बना नहीं हु. फ़िलहाल मेरे दादाजी hi मालिक है. मर. जगदीश सिन्हा. ये सब छोड़िये और नीचे चलते है. आइये.

आईएनएस- वो सब हम देख लेंगे मर. देव. आप घर जाइये रात भी हो गयी है आपके घरवाले आपके लिए परेशान होंगे. और जंगल में सायद नेटवर्क भी नहीं मिलेगा. वो आपको फ़ोन करेंगे तो लगेगा भी नहीं. हम है न हम संभल लेंगे. Don't वोर्री.

मैं- में चलता हु न. सायद आपके कोई काम आजौ.

Ins-jarurat होगी तो में फाॅर्स बुला लूंगा. आप टेंशन न ले. सरे सिटी की जिम्मेदारी हम पैर है. जिसमे आप भी शामिल है. और इस जंगल में जानवर भी घूमते है रात में. अगर आपको कुछ हो गया तो मेरी नौकरी तो गयी समझो. इसलिए में ये रिस्क नहीं ले सकता. आप प्लस चले जाइये. प्लस.

मैं- ठीक है में जाता हु. लेकिन आप प्लस एक फेवर करियेगा. जैसे hi कोई इन्फो मिले मुझे जरूर इन्फॉर्म कर दीजियेगा. में भी टेंशन फ्री हो जाऊंगा. वर्ण मुझे नींद नहीं आएगी रात भर.

आईएनएस- जरूर में खुद पर्सनली आपको कॉल कर दूंगा.

मैं- अच्छा में चलता हु.

ये कहके में बहा से अपनी बाइक लेके चला गया अपने घर और वो लोग बही रुक गए. उसके बाद उन्होंने क्या किया भगवन जाने.

घर पंहुचा तो दादू और माँ दोनों hi मेरा वेट कर रहे थे.

माँ- अरे देव इतना लेट कैसे हो गया. और फ़ोन भी नहीं किया.

मैं- कुछ नहीं माँ वो रोड पैर किसी कार का एक्सीडेंट हो गया था तो बही पैर रुका हुआ था. लेकिन उस कार में कोई था hi नहीं. तो पुलिस को बुलाने में थोड़ा टाइम लग गया. अब बो लोग ढूंढ रहे होंगे उस आदमी को जिसका एक्सीडेंट हुआ है.

दादा- चलो अच्छा है तुम्हारी नजर उस पैर पद गयी तो तुमने पुलिस को बता दिया. वर्ण सबको सायद सुबह hi इसकी जानकारी मिलती.

माँ- चलो मुँह हाथ धो लो में खाना लगाती हु.

मैं- ठीक है.

में चला गया अपने कमरे में. जेक बढ़िया से मुँह हाथ धो कर. कपडे चेंज किये. और लोअर टी शर्ट पहन लिया. और नीचे आज्ञा

जहा माँ ने बढ़िया खाना लगा रखा था. मैंने और दादू और माँ ने खाना खाना स्टार्ट किया. तो दादू ने पूछ hi लिया की उस लड़की का क्या हुआ. तो मैंने साबिस्तार उनको साडी कहानी सुना दी. जिसे सुनने के बाद वो लोग भी खुस हो गए.

एंड िस्साब के बाद हम अपने अपने कमरों में चले गए सोने के लिए. लेकिन मुझे नींद hi नहीं आरही thi.lekin सोना तो था hi. इसलिए आँखे बंद करके लेट गया. और कब नींद आगयी पता भी नहीं चला.

सुबह अपना रुटीन फॉलो किया. एंड रेडी होक नीचे आज्ञा. चुकी आज संडे था तो कही जाना नहीं था. फिर भी रेडी हो गया. जेक दादू का आसीर्बाद लिया और नास्ता करने बैठ गया.

नास्ते के बाद में सोफे पैर बैठा और टीवी ों करके चैनल बदलने लगा. थोड़ी hi देर में एक न्यूज़ चैनल पैर जेक रुक गया ये देहरादून का न्यूज़ चैनल था. इसपर यही की खबरे आती रहती थी.

उस पैर कोई न्यूज़ फ़्लैश हो रही थी की देहरादून की सबसे बड़ी खबर कुछ hi देर में.

थोड़ी देर तक में देखता रहा.

मैं- दादू कोई न्यूज़ आने वाली है यहाँ की देखो तो फ़्लैश कर रहे है ये लोग.

दादा- होगी कोई फालतू की न्यूज़. बाकि इनके पास दिखने को कुछ है hi नहीं.

मैं- सायद कोई इम्प न्यूज़ हो क्या पता.

थोड़ी hi देर में एंकर आज्ञा और उसने बोलना सुरु किया

टीवी- तो दर्शको आज देहरादून में दिलदहला देने वाली घटना घाटी है. अभी ठीक तरह से कुछ पता तो नहीं चला है लेकिन जितना हमें पता है उतना हम बताते है. कल रात को एक एक्सीडेंट हुआ था मग रोड पैर. पुलिस को इसकी जानकारी मिली तो वो बहा पहुंची. और कार में देखने पैर उन्हें बहा पैर कुछ नहीं मिला तो कुल 5 पुलिस वालो ने जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया लेकिन हैरानी की बात ये है की अब वो 5 पुलिस वाले भी गायब हो गए है जंगल से. कुछ लोगो का कहना है की सायद इस जंगल में कोई जंगली जानवर है जिसने उन सब को मार दिया होगा. लेकिन फारेस्ट अधिकारीयों का कहना है की इस जंगल में कोई भी आदमखोर जानवर नहीं है. तो अब सवाल ये है की आखिर वो 5 पुलिस वाले कहा गए. और वो इंसान कहा गया जिसका एक्सीडेंट हुआ था. हमारे साथ बने रहिये हम आपको इसकी पल पल की जानकारी देते रहेंगे.

ये सुनने के बाद तो मेरा hi भेजा फ्राई हो गया

दादा- कही ये बही एक्सीडेंट तो नहीं जिसकी जानकारी तूने दी थी.

मैं- है ये बही है. लेकिन वो तो केवल 2 लोग थे ये बाकि के 3 कहा से आगये

दादा- सायद उसने बैकअप फाॅर्स बुलाई हो.

मैं- हो सकता है. लेकिन ये गायब कहा हो गए. कही सच में कोई जानवर तो नहीं आज्ञा जंगल में.

दादा- कुछ कह नहीं सकते. फ़िलहाल तुम शाम को जल्दी घर अजय karo.jab तक ये मामला नहीं सुलझ जाता.

मैं- ठीक है और आप भी दादू.

दादा- है में भी इसका ध्यान रखूँगा

इसके बाद में टीवी देखता रहा लेकिन कुछ भी काम की इन्फो उनलोगो ने नहीं दी. बस इसी बात को रिपीट करके दिखते रहे ये लोग. और मेरा सिक्स सेंस कह रहा था की जरूर कुछ तो बड़ी गड़बड़ हुई है. मुझे पता लगाना चाहिए. लेकिन प्रॉब्लम ये थी की दादू और माँ मुझे जाने नहीं देंगे. और बिना जाये मुझसे रहा नहीं जायेगा. इसलिए सोचा दिन में hi क्यों न जाया जाये. लेकिन दिन में बहा पैर पुलिस फैली हुई होगी. वो भी मुझे नहीं जाने देंगे. मैंने सोचा पहले चिराग के घर चलते है. उसके बाद देखेंगे.

लेकिन फिर सोचा उसकी जान क्यों खतरे में दालु. जो करना है मुझे अकेले hi करना है. लेकिन क्या और kaise.tabhi मुझे आईडिया आया. की रात में चुपके से जंगल में जाऊंगा. और देखूंगा की आखिर माजरा क्या है. है ये सही आईडिया है.

मैंने ये अब डीडे कर लिया था. और अब मुझे बेसब्री से रात का इन्तजार था.

बही दूसरी तरफ इंद्रदेव देव के इस फैसले से परेशां हो गए थे. उन्हें कुछ भी समाज में नहीं आरहा था की वो करे तो क्या करे

इसलिए वो फ़ौरन hi ब्रह्मदेव के पास पहुंच गए.

इंद्रदेव- ब्रह्मदेव गजब हो गया

ब्रह्मा- हमें ज्ञात है इंद्रा.

इंद्रदेव- ब्रह्मदेव अब आप hi कोई रास्ता सुझाइये. क्युकी अर्णव अगर बहा चला गया तो अनर्थ हो जायेगा. हमारे किये कराये पैर पानी फिर जायेगा.

ब्रह्मा- इंद्रा अर्णव को रोकना मुश्किल है लेकिन न मुमकिन नहीं है. अब आपको hi कोई तरीका अपनाना होगा. ताकि वो उस जंगल में न जा पाए.

इंद्रदेव- लेकिन क्या तरीका ब्रह्मदेव? में उसे कैसे रोकू.

ब्रह्मा- तुम प्रयास तो करो. उससे पहले hi अपनी हार क्यों स्वीकार कर रहे हो.

इंद्रदेव- आपने सही कहा प्रभु में किसी भी तरह अर्णव को रोक hi लूंगा. लेकिन प्रभु ये मासूम लोग जो आज मरे है उनका क्या. और आगे और भी लोग मरेंगे अगर हमने जल्दी hi कुछ नहीं किया तो.

मैं- आपने ठीक कहा लेकिन इस वक़्त हम कुछ नहीं कर सकते है. जिनकी मौत आचुकी है वो लोग hi मरेंगे. बाकि किसी को कुछ नहीं होगा. आप फ़िलहाल अर्णव को रोकने का प्रयास कीजिये. बाकि समय पैर छोड़ दीजिये.

इंद्रदेव- जैसा आप कहे ब्रह्मा dev.ab आज्ञा दीजिये.

ये कहके इंद्रा देव बहा से सीधे पृथ्वी पैर आगये. और अपना वश भी बदल लिया उन्होंने. शाम तक वो अर्णव पैर नजर जमाये hi रखे जो घर में hi था. जैसे hi रात हुई. और सबका खाना पीना होगया. उसके बाद इंद्रदेव की परीक्षा सुरु होने वाली थी. इंद्रदेव फिलहाल घर में अंतर्ध्यान होक घूम रहे थे. किसी को भी वो नजर नहीं आने वाले थे. करीब रात के 12 बजे अर्णव ने अपने कमरे का दरवाजा खोला और बहार निकल aaya.vo चारो तरफ देख रहा था की कोई है तो नहीं. तभी उसको पीछे से किसी ने पकड़ लिए.

और अर्णव की हालत ख़राब होगयी.



तो बे कॉन्टिनुए…………….
 
बिलकुल सही कहा आपने बीआरओ...

इतने लम्बे भासन से सच में किसी का भी डिल बदल जाये फिर तो ये बस एक लड़की है. लेकिन ऐसा भी हो सकता है की डिल न भी बदले और सिर्फ बदलने का नाटक करे.

बाकि देखते है आगे की क्या सच में डिल बदला है या फिर कोई और साज़िस रची जा रही है........

.कीप सपोर्टिंग. ......
 
सही कहा आपलोगो ने. देव ने अपने दिमाग का इस्तेमाल करके सही गेम खेला है. प्राची को भनक भी नहीं लगी और कदम भी होगया. और काम होने के बाद उसे प्यार से सच भी बता दिया और समझा भी दिया...

अब देखना ये है की इसका असर क्या होता है प्राची पैर.

आगे जानने के लिए साथ बने रहे....

कीप सपोर्टिंग........
 
आपने सही कहा की 10 ों 10 के बाद और क्या बाद सकती है. बस आप सभी के दिलो में इसे और ज्यादा प्यार और जगह मिले ताकि में आप सबके लिए लिखता राहु.

और रही बात प्राची की तो जैसा आपने कहा है कुछ कुछ बैसा तो होना hi है. लेकिन किस प्रकार से होता है ये देखने वाली बात है. और होता भी है या नहीं. या कोई और मुसीबत आती है इनदोनो के बीच.

एंड आपने जिस खूबसूरती से स्टोरी को आरहा है उसे पढ़कर मुझे लगता है की मेरी म्हणत सफल हो रही है. जिससे मुझे जल्दी जल्दी अपडेट लिखने का हौसला मिलता है. ताकि में किसी को भी निराश न होने दू इस स्टोरी से.

थैंक्स फॉर योर सपोर्ट.....

एंड

कीप सपोर्टिंग..........
 
अपडेट-9



पीछे से किसी ने मेरे कंधे पैर हाथ रखा और ये ाबश होती hi की में अब पकड़ा गया हु. मेरी हालत ख़राब होने लगी.

अब आगे

अर्णव ने पीछे मुड़कर देखा तो सामने उसके दादा जी खड़े थे.

दादा- कहा जा रहे हो बीटा जी

मैं- वो दादू में तो बस पानी पीने नीचे आया था. वो कमरे में ख़त्म हो गया है.

दादा- अच्छा आओ मुझे भी प्यास लगी है. साथ में hi पि लेते है पानी.

दादू मुझे अपने साथ किचन में ले गए. जहा उन्होंने मुझे पानी दिया. और खुद भी पिया. और एक बोतल मुझे दे दी.

दादा- इसे साथ ले जाओ अगर रात में और प्यास लगे तो पी लेना

मैं- ठीक है दादू. आप भी अब सो जाइये.

दादा- वो बीटा आज नींद नहीं आरही है. थोड़ा यही पैर टहल लूंगा तो सायद आजायेगी नींद. या ऐसा करता हु तुम्हारे साथ तुम्हारे कमरे में चलता हु. जब तक तुम सो नहीं जाते हम बाटे करेंगे.

अब में कुछ कह भी नहीं सकता था.

मैं- दादू मुझे तो बहुत तेज़ नींद आरही है. में बाटे नहीं कर पाउँगा. और आपको तो पता hi है में सुबह जल्दी उठजाता hu.isliye मुझे जल्दी hi सोना पड़ेगा.

दादा- ठीक है बीटा जी आप सो जाओ.

उसके बाद दादू ने मेरे सर पैर हाथ फेरा और वो बही खड़े रहे और में अपने कमरे में आज्ञा. जहा पहुंचते hi मुझे जोर की नींद आने लगी. और में कब सो गया मुझे भी पता नहीं चला.

सुबह में अपने टाइम पैर उठा और अपना रुटीन फॉलो करने लगा. और सच कहु तो मुझे कल रात की कोई भी बात अब याद hi नहीं आरही थी. मेरे दिमाग में इतनी बात फिट थी की मैंने कल खाना खाया और जेक सो गया. अपने रूम में. अब में ये सोच सोच कर परेशान था की मुझे तो कल रात में जंगल में जाना था तो में गया क्यों नहीं. और में सोया कब. मुझे कुछ भी समाज में नहीं आरहा था.

काफी देर तक जब कुछ याद नहीं आया तो मैंने इस बात को छोड़ दिया. और सोचा सायद कल लेते लेते hi नींद आगयी होगी. इसमें जाने का रह गया होगा.

यही सब सोचते सोचते कब मेरी एक्सरसाइज पूरी हो गयी पता hi नहीं चला. उसके बाद में रेडी होक नीचे गया दादू और माँ का आसीर्बाद लिया. नास्ता किया और अपनी बाइक लेके सलग निकल गया. रातसे में चिराग को पिक किया. और हम निकल गए.

चिराग- अबे कल की न्यूज़ देखि क्या तूने.

मैं- है देखि थी. इनफैक्ट में hi वो सख्स था जिसने पुलिस को उस एक्सीडेंट की खबर दी थी.

चिराग- व्हाट. फिर क्या हुआ था बहा पैर.

मैं- बहा पैर दो पुलिस वाले आये थे और उन्होंने मुझे घर भेज दिया था. उसके बाद सुबह की न्यूज़ देखि तो मेरे तो पसीने निकल गए. की 5 पुलिस वाले गायब हुए है. और उस आदमी का भी कोई पता नहीं चला जिसका एक्सीडेंट हुआ था.

चिराग- अच्छा हुआ तू उनके साथ नहीं गया. और घर आज्ञा. वर्ण तू भी आज गायब हो गया होता

मैं- अबे मुझे गायब कर सके ऐसा कोई नहीं है इस पृथ्वी पैर. और मैंने तो बहुत कहा भी था उनलोगो को की मुझे साथ ले चलो. सायद अगर में उनके साथ जाता तो उनलोगो को गायब नहीं होने देता.

चिराग- जैसे तू कोई सुपरमैन है और तू उन्हें बचा लेता. बीटा मत भूल तू सिर्फ एक इंसान है. और अगर उस जंगल में कोई भयानक जानवर हुआ होगा तो तेरा वो बढ़िया से डिनर करते. और तेरी साडी होसियारी बही पैर धरी रह जाती.

मैं- अबे बहा पैर कोई जानवर नहीं है. न्यूज़ में hi दिखाया है की इस इलाके में किसी भी जानवर के होने की कोई आशंका नहीं hai.isi लिए मुझे लग रहा है. बहा पैर जरूर कोई इंसान hi है. सायद कोई सेरिएल किलर. जिसने सभी को मार दिया होगा. और लाश न मिले इसलिए सायद जमीन में गाड़ दिया होगा.

चिराग- कैसी बात कर रहा है तू. अबे वो 5 पुलिस वाले थे. अगर कोई एक सेरिएल किलर होता तो वो लोग उसे मार देते.

मैं- ये भी बात है. तो फिर कोई गैंग होगी सेरिएल किलर्स ki.lekin कोई जानवर नहीं होगा ये बात तो पक्की है.

चिराग- जो भी होगा जल्द hi पता चल जायेगा. तू कोई भी होसियारी न hi करना तो बेहतर है

मैं- कोसिस करूँगा

चिराग- यही बहुत है. अच्छा ये बता उस प्राची का क्या किया तूने कोई सबक बगेरा सिखाया या नहीं

मैं- है सिखाया न. और ऐसा सिखाया है की अब वो भूल कर भी ऐसी हरकत दोबारा नहीं करेगी

चिराग- ऐसा क्या किया तूने.

फिर मैंने उसको कल की साडी कहानी सुनाई. जिसे सुनने के बाद चिराग भी कुश हो गया.

चिराग- बढ़िया किया तूने. बड़ी अकड़ भरी थी usme.ab सब निकल गयी होगी.

हमारी इन्ही बातो में सलग भी आज्ञा. हमने बाइक पार्क की और बहार निकल आये. तो लकी हमारा वेट कर रहा था बहा पैर.

लकी- और मेरे शेरो कैसे हो

चिराग- बढ़िया है तू सुना.

लकी- में भी. अच्छा कल फिर क्या किया था तूने.

मैं- बही जो तय किया था.

फिर मैंने इसे भी साडी कहानी बता दी. और ये भी कुश हो गया

लकी- बढ़िया किया. चलो कुछ कहते है.

चिराग- अबे कितना खता है. किसी दिन फैट जायेगा …

लकी- अबे नजर मत लगा. बैसे भी आजकल काम hi खा रहा हु. ऊपर से तू टोक रहा है.

चिराग- अच्छा ये काम खाना है. तो ज्यादा किसे कहते है.

तो इसके जवाब में लकी ने हमें अपनी पुराणी फोटो दिखा दी. जिसमे वो किसी हठी के बचे की तरह दिख रहा था.

चिराग- अबे ये कोण है.

मैं- लगता है किसी हठी का बचा खो गया है. तूने फारेस्ट वालो को खबर दी या नहीं.

लकी- सालो ुदलो मेरा मजाक. लेकिन ये फोटो एक साल पहले की है. स्कूल में मैं ऐसा दीखता था. लेकिन जब 12तह में पंहुचा तो सोचा सलग में सब मजाक उड़ाएंगे. इसलिए वेट लोस्स करना स्टार्ट कर दिया. और आज रिजल्ट तुम्हारे सामने है

मैं- बकै में यार तूने तो कमाल hi कर दिया. बैसे कितना वेट लोस्स किया है.

लकी- पोरे 40 किलो.

पहले पोरे 100 किलो का था और अब केवल 60 किलो का.

चिराग- कमाल कर दिया तूने तो. बकै में.

मैं- बही तो अब तो एबीएस बगेरा भी बना लिए होंगे क्यों.

लकी- है थोड़े bahut.kam से काम अब शर्ट निकलने में शर्म तो नहीं आएगी मुझे

मैं- ये भी ठीक है. लेकिन एक बात कहना चाहूंगा तुम्हे आज. की खुद को दुसरो की नजर से नहीं बल्कि खुद की नजर से देखना चाहिए. दूसरे चाहे हम पैर हसे या कुछ भी करे. हमें उन पैर ध्यान नहीं देना चाहिए. बस खुद को अगर तुम अच्छे लगते हो तो फिर दुनिआ जाये भाड़ में. समझे.

लकी- कस तू पहले मिला होता. तो इतनी म्हणत नहीं करता me.khair अब हो गयी तो हो गयी. लेकिन आगे से इस बात का ध्यान रखूँगा में.

मैं- है रखना लेकिन अब दोबारा से बजन मत बढ़ाने लग जाना.

लकी- सेल डबल ढोलकी. अभी इतना लुम्बा चौड़ा भाषण दे रहा था की खुद को खुद की नजर से देखना चाहिए और अभी खुद कह रहा है की बजन मत बड़ा लेना.

चिराग- इसका ऐसा hi है. पल में तौला तो पल में मासा. कभी कुछ कहता है तो अगले hi पल खुद की बात को गलत भी साबित खुद hi कर देता है. बड़ा hi कन्फुसिंग बाँदा है ये.

. मैं- अब में जैसा हु तो हु. मैंने ऐसा hi भासन प्राची को भी दिया था. जिसमे एक टाइम पैर में खुद कंफ्यूज हो गया था की मैं आखिर कहना क्या चाहता हु. लेकिन आखिर कार बात संभल गयी और सब सोरतूत हो गया

चिराग- मुझे लगा hi था

हम लोग कैंटीन में पहुंचे बहा पैर बढ़िया कॉफ़ी पे. तभी बहा पैर प्राची आगयी.

प्राची- hi देव. कैन ी सीट हेरे.

मैं- है क्यों नहीं. बैठ जाओ. बैसे कुछ लोगी चाय कफ या समोसा.

. प्राची- no थैंक्स में नास्ता करके आयी हु.

चिराग- अच्छा हुआ. वर्ण बेचारे लकी का बिल बाद जाता और उसे पहले से hi काम पॉकेट मनी मिलती है

ये सुनकर लकी ने चिराग के पैरो पैर अपना पेअर पटक दिया. जिससे चिराग साहब चिल्ला उठे

प्राची- क्या हुआ

चिराग- कुछ नहीं.

लकी- इसको छोड़िये. आप बताइये की कल ऐसी क्या खुराफात सूझी की आपने इसकी कार को फोड़ डाला.

प्राची- ी म सॉरी यार वो बस थोड़ा ईगो और गुस्से की बजह से कर दिया मैंने.

मैं- कोई बात नहीं. लेकिन अब तो सब ठीक है न.

चिराग- है कही तुमने इसकी बाइक को भी तो नहीं तोड़ दिया. कल की दूसरी खुन्नस निकलने के लिए

प्राची- वैरी फनी.

चिराग- है न.

मैं- अबे shan't रहा कर थोड़ा. कल की बात भूल गया क्या.

लकी- है बे कल तो तूने कसम खाई थी की अबसे बक बक बंद. फिर क्या हुआ आज.

प्राची- अच्छा ऐसा क्या हो गया था. जरा बताना तो.

चिराग- वो तो बस ऐसे hi. कुछ खास नहीं था.

मैं- क्या सच में.

लकी- है बे. लेकिन देव इसने कुछ और नहीं बताया था हमें. और कह रहा था की बहुत खास है.

चिराग- (धीरे से) अबे सालो मरूंगा बहुत. अगर मुँह खोला तो.

मैं- है यार कहो तो बता दू प्राची को.

प्राची- है बताओ न प्लस.

चिराग- नहीं बिलकुल नहीं. और प्राची ये मटर यही ख़त्म होता है. चलो हमारी क्लास सुरु होने वाली है

ये कहके वो उठा और लकी को अपने साथ खींच ले गया. जो अपने मुँह में आधा समोसा दबाये हुए था. और कह रहा था की काम से काम खाने तो दे सेल. लेकिन चिराग किसी की सुने तब न.

प्राची- तुम्हारे फ्रेंड काफी फनी है.

मैं- है बो तो है. तभी तो मेरा टाइम पास हो जाता है आराम से.

प्राची- मुझे भी यही लगता है. बैसे में कहना छह रही थी की क्या तुम मुझे अपना फ्रेंड बनाना चाहोगे.

मैं- क्या अब मेरे नाम की धुस जमनी है सलग में.

प्राची- को यार अब बंद भी करो ये सब कहना. मुझे अब अच्छा नहीं लग रहा है ये सब.

मैं- ok ok अब नहीं कहूंगा. और रही बात फ्रेंड की तो. वो तो तुम कल hi बन गयी थी. तब hi तो तुम मेरे बाजु में बैठी हो.

प्राची- सच्ची

मैं- है

प्राची- ओह्ह देव थैंक यू वैरी मच.

मैं- अब छोडो ये कहना. तुमने देखा न मेरे दोस्त मुझे थैंक्स और सॉरी नहीं कहते. बल्कि कह कर मेरी ले लेते है. इसलिए अब ये सब बंद करो और क्लास में चलो.

प्राची- है लेकिन क्या ले लेते है

मैं- बही जो अभी तुम ले रही हो. फिरकी.

प्राची- सही कहा चलो.

उसके बाद हम क्लास में गए और सलग एन्ड होने तक पड़ते रहे और थोड़ी बहुत मस्ती भी चलती रही.

सलग के बाद हम सभी bye बोलके घर निकल गए. रस्ते में मैंने चिराग को उसके घर छोड़ा और निकल गया. और जाते वक़्त बही जगह देख कर कल का पूरा वाक़्या याद आज्ञा. और मैंने अपनी बाइक को अपने आप hi रोक दिया बहा पैर. और बही खड़ा हो गया और जंगल के अंदर देखे लगा. और सोचने लगा की आखिर ऐसा क्या आज्ञा इस जंगल में जो कल इतने लोग गायब हो गए यहाँ से. और मेरे अंदर अब ये विचार चल रहा था की क्या में जंगल में जाऊ या नहीं.

काफी सोच विचार करके मैंने जाने का फैसला किया और जैसे hi बाइक से नीचे उतरा मेरा मोबाइल बज उठा. और मैंने स्क्रीन पैर देखा तो वो माँ का कॉल था.

मैं- है माँ.

माँ- कहा है तू अभी तक घर नहीं आया.

Main-mom रस्ते में hi हु. बस 5 मं. में पहुंच रहा हु.

माँ- ठीक है जल्दी आजा. और सुन उस जंगल के यहाँ पैर रुकना मत. तूने देखा था न कल न्यूज़ में.

मैं- माँ मुझे पता है. में आता हु. ठीक है चिंता मत करो. में आता हु

ये कहके मैंने कॉल काट दिया. और सोचा बाद में देखते है इस जंगल को. और बापिस से घर चला गया

तो बे कॉन्टिनुए……………...

 
अपडेट-10



इसी तरह एक हफ्ता निकल चूका था. और इस एक हफ्ते में करीब 30 लोग उस जंगल में गायब हो चुके थे. जिनमे कुछ पुलिस वाले भी शामिल थे. और बाकि बहा से गुजरने वाले कुछ आम लोग. और में रोज बहा जाने का तय करता हु. लेकिन ऐन वक़्त पैर कोई न कोई मुझे रोक लेता है. पूरा देहरादून अब इस रोड से गुजरने में डरने लगे थे. कोई भी यहाँ से नहीं गुजरना चाहता था. बही पुलिस की भी रातो की नींद और दिन का चैन दोनों hi उड़ चुके थे. रोज मीडिया में पुलिस और सर्कार की ठु ठु हो रही थी. और वो कुछ कर भी नहीं प् रहे थे. मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही thi.mujhe किसी भी तरह उस जंगल में जाना था. और पता लगाना था की आखिर ये सब कोण कर रहा है और क्यों. इसलिए मैंने डीडे किया की आज रात फिर से बहा जाने की कोसिस करूँगा. ये सोचकर में सलग से घर चला गया. शाम को डिनर किया और अपने रूम में घुस गया और बहार जाने का प्लान सोचने लगा.

बही दूसरी तरफ इंद्रदेव अब टेंशन में आने लगे थे. क्युकी उन्हें रोज hi देव को बहा जाने से रोकना पद रहा था.

लेकिन ये क्यों रोक रहे थे देव को बहा जाने से. ऐसा क्या था उस जंगल में जिसके लिए इंद्रदेव दर रहे थे.

इंद्रदेव सीधे ब्रह्मा जी के पास गए.

इंद्रदेव- ब्रह्मदेव अर्णव को रोकना मुश्किल होता जा रहा है. वो रोज कोई न कोई रास्ता ढूंढ़ता hi रहता है बहा जाने का. ऐसा कब तक चलेगा.

ब्रह्मा- इंद्रदेव इसमें अर्णव की कोई गलती नहीं है. दरअशल ये सब उसके विचारो की बजह से हो रहा है. उसके मन में दुसरो के प्रति जो प्यार और अपने पैन के विचार आते है वो hi उसे उस जंगल में जाने को कह रहे है. वो सोच रहा है की. वो सायद ये सब रोक सकता है और बाकि लोगो को बचा सकता है. और अब वो समय आज्ञा है जब उसे हमें उस जंगल में जाने देना होगा.

इंद्रदेव- लेकिन ब्रह्मदेव आप तो जानते hi है की बहा पैर क्या है. कही अर्णव की जान को कोई खतरा न हो..

ब्रह्मा- हम ये जानते है इंद्रा देव. की आपको अर्णव की काफी चिंता है लेकिन अब परिस्थिति बदलने लगी है. और अब हमने तय किया है की अर्णव को अब सबके सामने आजाना चाहिए. और ये जिम्मेदारी में आपको सप्त हु इंद्रदेव. जब तक अर्णव की साडी शक्तिया जागृत नहीं हो जाती. जिसमे अब ज्यादा समय सेष नहीं है. तब तक आप उसकी रक्षा करेंगे. छिप कर. उसे मार्गदर्शित करेंगे. ताकि वो भटके नहीं.

इंद्रदेव- में समाज गया ब्रह्मदेव. दरअशल में भी कुछ दिनों से यही सोच रहा था की अर्णव को अपनी शक्तियों का परिक्षण करना चाहिए. वर्ण कही ऐसा न हो जब समय आय तो उसे पता hi न हो की वो क्या कर सकता है और क्या नहीं.

ब्रह्मा- आपने सही कहा इंद्रदेव. और ये कार्य आपको hi करना होगा. उसे सही मार्ग दिखाना होगा.

इंद्रदेव- में ऐसा hi करूँगा ब्रह्मदेव. किसी को कानो कान भनक भी नहीं लगेगी और में अर्णव की रक्षा भी करता रहूँगा और उसे मार्गदर्शित भी करता रहुगा.

अब आज्ञा दीजिये प्रभु.

ब्रह्मा- कल्याण मस्तु.

ये सुनकर इंद्रदेव सीधे स्वर्ग आगये. और अब लाइव देखने लगे की अर्णव आखिर कर क्या रहा है.

बही रात में 12 बजे में अपने कमरे से बहार निकला और चुपचाप नीचे आज्ञा. जहा मैंने चारो तरफ अच्छे से देखा. जब मुझे कोई नहीं दिखा तो में सीधा दरवाजे की तरफ चला गया और आराम से दरवाजे को खोला और बहार आज्ञा. और दरवाजा बैसा hi बहार से लगा दिया. ताकि हवा में दरवाजा आवाज न करे. उसके बाद में पैदल hi अपने लोन को पार करते हुए अपने घर की बॉउंड्री वाल तक पहुंच gya.baha मैंने चारो तरफ देखा जब मुझे गार्ड्स नहीं दिखे तो मैं झट से दीवार पैर चढ़ गया. और अगले hi पल दूसरी तरफ कूद गया. और बहा से मैंने दौड़ लगा दी उसी जगह की तरफ जहा उस दिन वो एक्सीडेंट हुआ था.

में दौड़ लगता हुआ कब बहा पहुंच गया मुझे पता hi नहीं चला. मैंने बहा पहुंच कर चारो तरफ देखा. सभी तरफ घोर अँधेरा चाय हुआ था. हलकी सी चाँद की रौशनी आ रही थी बस. मैंने अपने मोबाइल की टोर्च जलाई और नीचे जंगल में उतर गया. और में टोर्च का सहर लेकर आगे बढ़ने लगा. चारो तरफ से कीड़े मकोड़ो की आवाजे आरही थी. और बाकि मेरे कदमो की आहात आरही थी. और कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था. में चारो तरफ टोर्च कर के देख रहा था और आगे बाद रहा था. ये जंगल काफी बड़ा था. और इसको पूरा देखने में मुझे काम से काम 3-7 दिन भी लग सकते थे. इसलिए मैंने ये तय किया की. 4 बजे तक जंगल में देखूंगा कुछ मिला तो ठीक वर्ण जहा तक पंहुचा बही से बापिस हो जाऊंगा.

ये सब मेरे दिमाग में चल रहा था. तभी मुझे एक बात याद आई.

मैं- न्यूज़ में दिखाया था की रोड से 100 मीटर दूर कुछ पुलिस वालो के मोबाइल मिले थे और उसके आगे उनके कपडे के टुकड़े जो झाड़ियों में फसे हुए थे.

तो में अंदाजा लगते हुए आगे बड़ा और देखने लगा की झाड़ियों में कहा पैर कपडे मिले होंगे और कहा पैर मोबाइल. में काफी अंदर आज्ञा था लेकिन अभी तक न तो मुझे कुछ सुराग मिला था और न hi कुछ और. में परेशां होने लगा था. की ऐसे काम नहीं चलने वाला. इतना बड़ा जंगल है में कैसे यहाँ सबूत ढूंढूंगा. कोई इंसान के भी होने के कोई संकेत नहीं मिले है अभी तक.

मैं- सायद सब सही कह रहे थे. कोई आदमखोर जानवर hi है इस जंगल में. जिसने सबको खा लिया होगा. तो उसको पकड़ने का मुझे एक रास्ता सुझा.

मैंने अपने पास रखे एक चाकू से अपने हाथ पैर एक छोटा सा काट लगा दिया. मुझे मालूम था की जानवरो की सुघने की सकती बहुत तेज़ होती है. और जब उन्हें ताज़े खून की खुशबु आएगी तो दौड़े चले आएंगे वो यहाँ पैर.

इसलिए मैंने अपनी कुछ खून की बूंदों को निचे गिराया और झट से हाथ पैर रुमाल बांध लिया. और जल्दी जल्दी बही पैर मौजूद एक पेड़ पैर चढ़ गया और उसके पत्तो में छिप गया. और अपने मोबाइल को साइलेंट कर लिया और उसकी टोर्च को भी भुजा लिया. अब बस मुझे इस जानवर का इन्तजार था.

में करीब 20 मं. तक इस पेड़ पैर बैठा रहा लेकिन कोई भी जानवर आने के मुझे संकेत नहीं मिले. जिससे में एक बार फिर से निरास हो गया. और मैंने सोचा की अब आगे जाने से कोई फायदा नहीं है. और 4 भी बजने वाले है तो अब घर बापिस चल लेना चाहिए. ये सोचकर में नीचे उतरने hi वाला था की मुझे झाड़ियों के हिलने की आवाज आने लगी. और में चौकन्ना हो गया सायद वो जानवर यहाँ आज्ञा था. मेरी नजर उन झाड़ियों पैर hi बानी हुई thi.me देखना छह रहा था की आखिर ये है कोनसा जानवर.

की तभी झाडिया का हिलना बंद हो गया. और अचानक से hi पता नहीं कैसे 3-4 लोग उस जगह पैर पहुंच गए. जहा मेरा खून गिरा हुआ था.

प1- यही से खुसबू आयी थी. लेकिन अब नहीं आरही है. कहा गयी वो खुशबु

प2- लगता है वो आगे चला गया है.

प3- लेकिन खुशबु तो आती.

प4- सायद उसने अपने खून का बहना रूक दिया होगा. इसलिए अब खुसबू नहीं आरही है.

प1- लेकिन यहाँ आया कोण है. अपनी मौत के पास

प4- सायद कोई राहगीर होगा. जिसे यहाँ के बारे में पता नहीं होगा. वर्ण इस सेहर के लोगो ने तो इस रस्ते का उपयोग करना hi बंद कर दिया है.

प2- सही कहा तुमने. इसीलिए कई दिनों से हमें कोई नया शिकार नहीं मिला है. और इस चक्कर में मेरा तो दिमाग hi घूमने लगा है. लगता है हमें अब नै जगह जाना होगा. जहा हम शिकार कर सके.

ये सब बाटे मेरे दिमाग के ऊपर से जा रही थी. मुझे कुछ भी समाज में नहीं आरहा था की आखिर ये किस प्रकार के लोग है जो लोगो का शिकार कर रहे है.

में अभी सोच hi रहा था की मुझे नीचे से कुछ आवाज आई.

प1- रुको मुझे कुछ ाबास हो रहा है.

ये कहके उसने चारो तरफ अपनी नाक को घूमना सुरु कर दिया. जैसे वो हवा में कुछ सूंघ रहा हो.

प1- मुझे किसी इंसान की खुशबु आरही है. और खून की भी.

प2- है मुझे भी.

ये सुनते hi मैंने अपना हाथ देखा तो पाया की जो रुमाल मैंने हाथ पैर बंधा था. वो उस जगह पैर पूरा खून से भीग गया था. और उसमे से खून नीचे गिरने भी लगा था. सायद एक दो बूँद नीचे गिर भी गयी होंगी

अभी में सोच hi रहा था की अचानक से मेरे बगल से आवाज आई.

प1- ओह्ह तो तू यहाँ छिपा हुआ है.

ये सुनते hi मैंने उसकी तरफ देखा तो वो बिलकुल मेरे बगल में पहुंच गया था. और में कुछ करता उससे पहले hi उसने मुझे नीचे की तरफ धक्का दे दिया. और में धड़ाम से नीचे जा गिरा. जहा वो तीनो पहले से hi मौजूद थे. और मेरे पीछे से वो चौथा भी नीचे कूद गया. लेकिन वो आराम से नीचे पहुंच गया.

में झट से खड़ा हुआ.

मैं- कोण हो तुम लोग

प1- हम वो है जो आज तेरा डिनर करेंगे.

मैं- व्हाट

प2- ये क्या बोलै इसने.

प3- इंग्लिश में बोलै है. क्या.

प2- अरे वह ये तो अंग्रेजी झाड़ता है.

प1- ये सब छोड़ और बचे रेडी होजा.

मैं- एक मं. रुको जरा.

प4- अब क्या हुआ.

मैं- मुझे मारना hi है तो मार दो लेकिन ये तो बताओ की आखिर तुम लोग हो कोण और ये लोगो को मर क्यों रहे हो.

प4- चल तू भी क्या याद रखेगा. तेरी अंतिम इक्छा हम जरूर पूरी करेंगे. चलो भाइयो उसे अपना असली चेहरा दिखा दो.

ये कहके उन चारो ने अचानक से एक बहुत hi खतरनाक सा रूप ले लिया. उनके ये बड़े बड़े दन्त. नीचे केवल एक कपडा लगाया हुआ था. बाकि पोरे नंगे hi थे ये लोग. और इनका आकर भी काफी बाद गया था. पहले ये मेरी hi हिघ्त के थे. लेकिन अब हर कोई काम से काम 10 फुट का हो गया tha.or इनके हाथ तो इतने मोठे थे की हल्क भी शर्मा जाये. एक तरह से ये हल्क का hi कोई दानव वर्शन लग रहे थे. इनके आगे के दांत काफी नुकीले और लम्बे थे लिखे वैम्पायर. लेकिन ये उन जैसे नहीं दिख रहे थे. जैसे हम अक्सर फिल्मो में देखते है.

में अभी इन चारो को गौर से देख hi रहा था. और सोच रहा था की ये कोनसा उड़ता हुआ तीर मैंने खुद पैर ले लिया. लेकिन अब ले लिया तो ले लिया. इतनी आसानी से तो इनका खाना नहीं बनने वाला था में. अच्छी खासी मेहनत कराऊंगा इनसे में.

ये सोचकर मैंने एक दिशा में भागना सुरु कर दिया.

और मुझे यु भागता देखकर वो चारो हसने लगे और बोले की कहा तक भागेगा बचे. आज तेरी मौत तय है.

और ये कहके वो भी मेरे पीछे पीछे भागने लगे. लेकिन वो अपने असली रूप में नहीं भागे बल्कि उन्होंने अपना बही मानव बाला रूप फिर से ले लिया. ताकि भागने में आसानी हो. ये सब मैंने थोड़ा पीछे झक कर देखा.

और मैंने देखा की जैसे hi उन्होंने भागना सुरु किया. वो लोग लगभग 100 की स्पीड में भाग रहे थे. मतलब की चुटकी में मुझे ये लोग पकड़ लेंगे.

अब देखना ये था की क्या होता है मेरा……



तो बे कॉन्टिनुए……………...
 
अपडेट-11



में आगे भागता जा रहा था और वो लोग बिजली की तेज़ी से मेरा पीछा कर रहे थे. चारो लोग चारो दिशाओ में फ़ैल कर मुझे घेरने की तैयारी कर रहे थे. अब मेरा बचना मुश्किल लग रहा था. तो मैंने थोड़ी देर सास लेने के लिए एक घनी झाड़ियों में जेक छिप गया. और अँधेरा था तो सायद उनलोगो का इस पैर ध्यान नहीं गया और वो मुझसे थोड़ा आगे निकल गए. लेकिन में जनता था की वो मुझे सूंघ सकते है. और जल्दी hi यहाँ पैर पहुंच जायेंगे

मैं- यार अब क्या किया जाये. ये सेल पिशाच कहा से आगये. मैंने तो सोचा था कोई इंसान या जानवर होगा तो संभल लूंगा. लेकिन अब इन दानवो से कैसे निपटु

है भगवन कोई रास्ता सुझाव.

मैंने अपने दोनों हाथो को जोड़ा और भगवन का िस्मरण करने लगा. क्युकी अब बही मुझे कोई रास्ता दिखा सकते थे.

अभी में ध्यान में बैठा hi था की करीब 5 मं. बाद मुझे मेरे मन में कुछ आवाज सुनाई दी.

मन- अर्णव तुम घबराओ मत. तुम इन चारो पिशाचो को आराम से हरा सकते हो. बस अपने आत्मबल का स्मरण करो.

इस आवाज ने मुझे चुका दिया और मैंने अपनी आँखे तुरंत hi खोल ली. और आजु बाजु देखने लगा की कहा से आई है ये आवाज.

मैं- (धीरे से) कोण है.

मन- पुत्र मुझे यहाँ बहा क्यों ढूंढ रहे हो. में तो तुम्हारे अंदर हु.

मैं- मेरे अंदर. कैसे. आप जो भी है मेरे सामने आये.

मन- पुत्र मेरा कोई आकर नहीं है. न hi कोई रूप. में तुम्हारी अंतरात्मा हु.

मैं- तो इतने दिन से आप कहा थे.

मन- तुम्हारे अंदर hi था. और देख रहा था की तुम क्या करते हो. और जब आज तुम्हे यहाँ आने का मौका मिला तो तुम भाग रहे हो.

मैं- में भाग नहीं रहा हु. में रास्ता तलाश कर रहा हु. क्युकी में किसी इंसान से तो लड़ सकता हु. लेकिन इन पिशाचो से कैसे लाडू.

मन- तुम इतने निर्बल नहीं हो जो इन पिशाचो का सामना न कर पाओ. तुम अद्भुद और अनोखे हो. तुम इन पिशाचो का सामना आसानी से कर सकते हो और इन्हें हरा सकते हो

मैं- लेकिन कैसे. में इनके बारे में कुछ नहीं जनता हु. इन्हे कैसे हराना है ये भी नहीं जनता हु. न hi इनकी कमजोरी के बारे में जनता हु. तो कैसे में इनका सामना करू. ये मुझे पल में मसल कर रख देंगे.

मन- अर्णव क्या तुम्हे बकै लगता है की ये तुम्हे मसल देंगे. क्या तुम्हे लगता है की तुम निर्बल ho.apne सलग के पहले दिन के हादसे को याद करो. जब तुमने अपने एक hi हाथ से उस चलती कार को रोक दिया था. वो जो भी बहा पैर हुआ था. वो एक संयोग नहीं था. बल्कि तुम्हारे बल की परीक्षा थी. और जो भी बहा पैर हुआ था वो तो मात्रा तुम्हारी शक्तियों के एक मामूली ाँस के बराबर भी नहीं था. तुम तो एक चलती हुई ट्रैन या प्लेन को भी रोक सकते हो. बस अपने मन को एकाग्र करो. और ये सोचो की तुम्हे आज इन चारो को मारकर जिन्दा घर बापिस जाना है. और अपना ध्यान भटकने मत देना.

अपना सारा ध्यान अपनी तिरदये पैर केंद्रित करो. और फिर देखो क्या होता है.

ये सब सुनकर मुझे लग रहा था की में पागल हो गया हु. अपनी मौत को dekhkar.mujhe कुछ भी समाज में नहीं आरहा था की में क्या करू और क्या नहीं.

मन- तुम बिचलित क्यों हो रहे हो. जैसा मैंने कहा है बैसा करो. और जल्दी करो क्युकी वो अब तुम्हारी ओरे बढ़ने लगे है.

ये सब सुनकर मुझे लगा अगर आज मरना तय है तो कोई नहीं रोक सकता. और अगर मेरा जीना तय है तो उसे भी कोई नहीं रोक सकता. इसलिए मैंने तय किया की अब जैसा मेरे मन की आवाज कहेगी में बैसा hi करूँगा...

मैं- जैसा आप कहे.

ये कहके मैं बही पैर पालथी मार कर बैठ गया. और अपना सारा ध्यान अपने ललाट के बीचो बीच केंद्रित करने लगा. और मन में ॐ का उच्चारण करने लगा. में अब सब कुछ भूल गया था की में कहा हु. और मेरे आस पास कोण है. मेरा सारा ध्यान बस अपनी थर्ड ऑय पैर था. हलाकि ये बहुत hi मुश्किल काम होता है. सबका ध्यान भटक hi जाता है. लेकिन मेरे मन में दृढ़ निश्चय था की आज में यहाँ से जिन्दा बापिस जाकर hi रहूँगा. फिर चाहे कुछ भी हो जाये. और उसी निश्चय की बजह से मैंने अपने मन को बिलकुल भी भटकने नहीं दिया. और थोड़ी hi देर में मुझे ऐसा आभास होने लगा था जैसे मेरी थर्ड ऑय ओपन हो रही है. में इस ऑय से देख भी रहा था. लेकिन जो मुझे दिख रहा था वो मुझे समाज में नहीं आरहा था की आखिर ये है क्या. तभी मेरे विज़ुअल्स आगे बड़े. और मेरे सामने कुछ चेहरे आये जिन्हें में तुरंत hi पहचान गया. क्यों की ये इन चारो पिशाचो के hi चेहरे थे. मुझे उनकी अभी तक की जीवन लीला दिखने लगी थी. उन्होंने अभी तक क्या किया है कैसे किया है. सब कुछ जिसमे उन लोगो की मौते भी शामिल थी जिनको इन लोगो ने कुछ दिन पहले hi मारा है इसी जंगल में. और ये सब देखकर मुझे गुस्सा आरहा था. मेरी थ्रीड ऑय मुझे इन लोगो की साडी शक्तियों के बारे में बता रही थी. और साथ में इनकी कमजोरियों के बारे में भी.

बही ये सब मेरे मन में चल रहा था. लेकिन जहा मेरा सरीर था. बहा पैर कुछ और hi हो रहा था.

वो चारो ने मुझे ढूंढ लिया था और चारो hi मेरे चारो तरफ खड़े हुए थे. और कुछ बाटे कर रहे थे. जब काफी देर तक मेरा कोई रिप्लाई उन लोगो को नहीं मिला तो उनलोगो ने मेरी जीवन लीले समाप्त करने का फैसला किया. और जो पहले no. का पिशाच था वो धीरे धीरे मेरे करीब आने लगा. और जैसे hi उसने मुझे चुने की कोसिस की. मेरे सरीर से इतनी भयानक बिजली उसे लगी की वो बही पैर रख में बदल gya.or एक पिशाच का बही पैर अंत हो गया. ये देख कर वो तीनो काफी चौक गए और दर भी गए.

प2- लगता है ये भी कोई मयाबी है. जिसने एक hi झटके में हमारे साथी को रख में बदल दिया.

प4- मुझे तो ये कोई देवताओ की चल लगती है. जरा तुम hi सोचो. वो लड़का अभी हमसे दर कर भाग रहा था. और अचानक से इसमें इतनी शक्ति कहा से आगयी. अगर इसमें पहले से शक्ति होती तो ये हमसे बही लड़ने लगता. हमसे दर कर भागता क्यों.

प3- ऐसा संभव हो सकता है. जरूर ये कोई देवता है. जो उस लड़के का रूप लेके यहाँ बैठ गया है ताकि हम यहाँ उलझे रहे और वो लड़का यहाँ से भाग जाये. और ये हमारा अंत कर दे.

प2- तो फिर अब हम क्या करे. तुम दोनों ने देखा hi की जैसे hi इसे छूने की कोसिस करेंगे बैसे hi हम रख में बदल जायेंगे. और इसे बिना छुए हम कैसे मरेंगे.

प3- याद है दैत्य गुरु ने हमें कुछ शक्तिया दी थी. जिससे हम अपने चारो तरफ एक सुरक्षा कवच बना सकते है. जिसे कोई नहीं भेद सकता. हम उसी कवच का इस्तेमाल करेंगे फिर इसकी शक्तिया हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगी. और हम इसे मार देंगे

प4- बिलकुल सही कहा तुमने.

उसके बाद इन तीनो ने hi अपने हाथ जोड़े और कुछ मंत्रो का उच्चारण करने लगे. और थोड़ी hi देर में इन तीनो के आसपास एक आवेद सुरक्षा कवच बन गया. इसके बाद ये तीनो धीरे धीरे मेरे करीब बढ़ने लगे. में अभी भी ध्यान में था और ये सब अब मुझे लाइव दिखने लगा था. की ये लोग क्या कर रहे है. लेकिन में बस देखता hi रहा.

वो लोग जैसे hi मेरे करीब पहुंचे. उन तीनो को बहुत hi पावरफुल झटका लगा मेरी आत्मशक्ति ka.jisne मेरे चारो तरफ एक घेरा बना लिया था. उस शक्ति से टकराते hi ये तीनो उड़ते हुए दूर जेक पेड़ो में लगे सीधे. जिससे कुछ पेड़ तो टूट hi. गए. और साथ में इनका ये आवेद सुरक्षा कवच भी.

और जैसे hi ये हुआ तीनो का गुस्सा बाद गया और वो अपने असली दानवो वाले रूप में आगये. और जोर जोर से दहाड़ने लगे. इतना जोर से की पूरा जंगल इनकी इस दहाड़ को सुन कर कम्प गया. वो तीनो दौड़ते हुए मेरे पास आये और अपने हाथो में उन्होंने कुछ अस्त्र ले रखे थे जैसे तलवार भला फरसा. और उन तीनो ने hi जोर से अपने हथियार मेरी तरफ फेक दिए. लेकिन अगेन बही हुआ वो तीनो हथियार मुझसे टकराते उससे पहले hi वो जल कर रख में बदल गए. जिस बजह से वो और भी गुस्से में आने लगे. और उनमे से एक ने अपनी पूरी ताकत लगा कर एक पेड़ को उखड लिया और उसे मेरी तरफ फेक दिया. लेकिन इस बार जैसे hi पेड़ मेरे से टकराया वो जला नहीं बल्कि टकरा कर बापिस हो गया एंड इतनी स्पीड में बापिस हुआ की जिसने वो पेड़ फेका था उसी के सर को फाड़ कर वो पेड़ दूर जा गिरा और उस पिशाच का पूरा सर किसी फाटे हुए वाटर मेलों की तरह जमीन पैर बिखर गया. और इसका भी काम तमाम हो गया. और ये देखकर बाकि के दोनों बहुत hi दर गए. और उन्होंने लड़ने का मूड बदल दिया और बहा से भागने का प्लान किया.

उन दोनों ने तुरंत hi अपना रूप बदला और जंगल से बहार की तरफ दौड़ लगा दी. और ये सब में देख रहा था. जैसे hi उन लोगो जंगल के बहार कदम रखा उन्हें तगड़ा झटका लगा और वो दोनों उड़ते हुए बापिस से मेरे पास आके गिर गए. और ये देखकर तो उनकी फैट कर हाथ में आगयी की. क्युकी दोनों hi ये सोचकर ज्यादा दर गए थे की अब इस जंगल से बहार जाना बिलकुल भी मुमकिन नहीं है. और ये सोचकर उनलोगो ने तुरंत hi अपने दोनों हाथो को जोड़ लिया. और महादेव का िस्मरण करने लगे. क्युकी बही एक ऐसे है जो किसी में भी भेदभाव नहीं करते है. फिर चाहे वो पिशाच हो या आम इंसान. लेकिन वो भी तब hi सुनते है जब हार्ट में कोई भी गंदिगी न हो. और इन लोगो के दिलो में तो गंदिगी का अम्बार था. इन्हे किसी की कोई परबह नहीं थी सिवाय खुद के. और आज भी ये केवल खुद के प्राण बचने के लिए hi महादेव का नाम ले रहे थे. लेकिन में इन्हे माफ़ नहीं करने वाला था. अगले hi पल उन दोनों में से एक के सीने में एक नुकीला और लुम्बा पत्थर उड़ता हुआ आया और उसके दिल को छेरता हुआ आगे बढ़ निकल गया. और इसी के साथ इसका भी अंत हो गया. और उसके अगले hi पल कही से पानी उड़ता हुआ आया. और वो भी नुकीले आकर में. उस पानी के आकर को मैंने देखा और वो तुरंत hi बर्फ में परिवर्तित हो गया. और वो आखिरी बचा हुआ पिसाच कुछ समाज पता उसके पहले hi वो पानी ने इसके डिल को भी चीयर दिया और इसका भी अंत जो गया. और ये सब होते hi मेरी चेतना जाग गयी और मेरा ध्यान टूट गया. और में अचानक से उठ के खड़ा हो गया. और जब मैंने अपनी आँखों को ठीक से मसल कर खोला तो सामने का नजारा बकै में बहुत hi भयानक था. सामने उन तीनो के सरीर पड़े हुए थे. जिसे देख कर बस मुझे उलटी आने लगी थी. खास कर उस बाले को देख कर जिसका सर पूरा फटा पड़ा था.

लेकिन में अभी कुछ करता या सोचता उससे पहले hi उन तीनो की बॉडी हवा में गायब हो गयी. और अब बहा पैर उन तीनो का कोई भी बजूद नहीं था.

ये सब मुझे किसी बुरे सपने की तरह लग रहा था. और मेरा सर दर्द से फटा जा रहा था. मुझे कुछ भी समाज में नहीं आरहा था की ये सब आखिर हुआ कैसे. हलाकि मुझे सब कुछ याद था एक एक सेक् का याद था की मैंने अभी क्या किया और कैसे किया. लेकिन इन सभी पैर मुझे यकीन बिलकुल भी नहीं हो रहा था. क्युकी ये सब किसी भी तरह से जस्टिफाई नहीं था. और यही सब सोचते सोचते में बेहोश होकर बही पैर गिर गया और उसके बाद का मुझे कुछ भी याद नहीं की बहा क्या हुआ…..

जब मेरी आँख खुली….

मैं अपनी आँखों को माल्टा हुआ बीएड पैर बैठ गया. और रात की पूरी घटना मेरी आँखों के सामने घूम रही थी. और अचानक से मुझे होश आया

मैं- में तो जंगल में था यहाँ कैसे पंहुचा. कही पुलिस वाले तो नहीं लाये मुझे यहाँ पैर. और जरूर उन्होंने दादाजी को सब बता दिया होगा. या फिर में कोई सपना देख रहा था. जिसमे मैंने उन चारो को मार दिया. मेरे दिमाग में कई सवाल घूम रहे थे. खासकर ये की रात को जो भी हुआ वो सपना था या सच. और अगर सच था तो में घर कैसे आज्ञा में तो बहा पैर बेहोश हो गया था. मन में बहुत सरे सवाल घूम रहे थे. और जवाब किसी एक का भी नहीं पता था मुझे.

तो थक हार कर मैंने साइड में लगी घडी की तरफ देखा. तो उसमे 9 बज गए थे. मतलब आज में लेट हो गया. तभी मुझे याद आया की आज तो रेनू और सुरभि आने वाली है. सायद.

मैं- उनको फ़ोन करके कन्फर्म कर लेता हु

मैंने रेनू को कॉल किया

थोड़ी देर रिंग जाने के बाद उसने कॉल उठालिया.

रेनू- लगता है दादू ने hi आज कॉल किया है.

मैं- नहीं आज मैंने hi किया है कॉल.

रेनू- अरे आज सूरज किस तरफ से निकला है. कही में कोई सपना तो नहीं देख रही

मैं- सायद सपना hi है. अच्छा अब में रखता हु. Bye.

रेनू- अरे रुक रुक. कहा जा रहा है. बोल भी अब कॉल क्यों किया.

मैं- मुझे ये जानना है की क्या तुम लोग आज यहाँ आरही हो या नहीं. और अगर आ रही हो तो कब तक आओगी. और कैसे आओगी.

रेनू- क्यों कही भागने का प्लान है.

मैं- है ऐसा hi कुछ. अब बोलो जल्दी.

रेनू- हम लोग शाम तक आएंगे फ्लाइट से. मई बे. 5 बजे तक पहुंच जायेंगे घर पैर

मैं- उसकी जरुरत नहीं है. में आजाऊंगा लेने. बस मुझे प्लेन की एक्सएक्ट टाइमिंग बता देना.

रेनू- अरे बड़ी फ़िक्र हो रही है.

मैं- है आजकल यहाँ कुछ पागल से लोग घूम रहे है. जो चुहियों को पकड़ कर गायब कर देते है. तूने न्यूज़ तो सायद देखि hi होगी.

रेनू- ओह्ह्ह तो ये बात है. कोई न. ये चुहिया कब शेरनी बन जाती है ये बात तो इसे खुद भी नहीं पता hai.agar कोई बीच में आएगा भी तो काम से जायेगा. और तुझे जानकार सायद ये हैरानी होगी की मैंने करते में ब्लैकबेल्ट हासिल कर लिया. फॉर खुद की सेफ्टी. और अब में अच्छे खासे पहलवान को भी पटक सकती हु एक hi देव में.

मैं- ओह्ह्ह तो इसलिए तेरे हाथ पेअर फड़फड़ा रहे है मुझे मारने के लिए. मेरी एक मुफ्त की सलाह लेलो काम आएगी. ये ब्लैकबेल्ट का जादू मेरे सामने तो चलने से रहा. अगर मैंने हाथ पकड़ लिया तो कोई भी डाव से उसे बापिस नहीं छुड़ा पाओगी. इसलिए अगर कुछ नेक ख्याल मन में आरहे हो तो उन्हें बही दिल्ली में hi छोड़ आना समझी.

रेनू- देखते है.

मैं- ठीक है तो फिर आजा देख लेंगे. और है याद से मुझे डिटेल मश्ग कर देना.

रेनू- है कर दूंगी.

मैं- ठीक है तो अब रखता हु. आज उठने में बहुत लेट हो गया है. सलग तो मिस hi हो गया आज का.

रेनू- what…..lagta है बकै में आज सूरज दादा कही और से निकले है. तेरा बरसो पुराण रुटीन टूट गया. ये चमत्कार कैसे हुआ.

मैं- घर आजा फिर बताता हु. तब तक सोचती रह.

रेनू- है मेरा देव मुझि पैर.

मैं- जैसा तू समझे. चल अब रखता हु. Bye….

रेनू- bye…..

ये कॉल कट होने के बाद में नहाने चला गया. और सोचता रहा की आखिर कल जो हुआ क्या सच था या झूट. लेकिन जब कुछ समाज में नहीं आया तो मुझे एक आईडिया आया.

मैं- अगर ये सब सच है तो में बापिस से बैसा hi करूँगा. अपनी तिरदये पैर कंसन्ट्रेट. और ये सब अगर सच है तो जरूर फिर से कुछ अलग होगा. और उससे सब साबित भी हो जायेगा….. है यही सही रहेगा. लेकिन इसको में कल सुबह ब्रह्म मुहूर्त में hi करूँगा. तब तक के लिए जैसा है बही ठीक है.

इन सब के बाद एक सवाल अभी भी मन में था की में घर कैसे पहुंच गया. और इसका जवाब तो दादा hi दे सकते थे. अगर उनको कुछ पता होगा तो. ी होप की उनको कल के बारे में कोई जानकारी न हो. वर्ण टेंशन होना तो तय है…………..



तो बे कॉन्टिनुए…………….
 
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