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- Dec 5, 2013
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अपडेट-12
जब नाहा धोकर नीचे गया तो माहौल बिलकुल नार्मल tha.na दादा और न hi माँ ने कुछ ऐसा पूछा जिससे मुझे कुछ डाउट हो. और ये मेरे लिए एक बहुत बड़ी रिलीफ थी.
दादा- क्या हुआ जनाब आज तो सूरज दादा पहले जाग गए आपसे.
मैं- है बही तो. कुछ समाज में hi नहीं आया दादू. आज मेरी नींद hi नहीं खुली.
माँ- कोई बात नहीं. थक गया होगा इसलिए नहीं खुली. और बैसे भी संडे के दिन तुझे आराम से उठना चाहिए लेकिन तू उस दिन भी जल्दी उठ जाता है. जिस बजह से तेरी बॉडी को कम्पलीट रेस्ट सायद नहीं मिला होगा. अब छोड़ ये सब. और आजा नास्ता करले.
मैंने भी यही ठीक समझा और बैठ गया नास्ता करने.
माँ- बैसे रेनू को कॉल किया तूने वो कब आरही है. कह रही थी की एक हफ्ते बाद आरही हु. आज तो एक हफ्ता हो भी गया
मैं- है माँ मैंने उठते hi उसे कॉल किया. तो उसने बताया की वो सायद शाम तक यहाँ पहुंच जाएगी.
माँ- तू उनको लेने चले जाना. बैसे भी आजकल माहौल कुछ ख़राब सा चल रहा है यहाँ का.
मैं- मैंने उन्हें बोल दिया है की मुझे डिटेल्स मश्ग कर दे. और आज बैसे भी सलग तो जा नहीं पाया. तो अब उनको लेने hi चला जाऊँगा आराम से.
दादू- में भी साथ चलूँगा. थोड़ी सेर हो जाएगी.
मैं- है क्यों nahi.sath में चलेंगे दोनों. और उनको सरप्राइज देंगे.
दादा- है मजा आएगा.
उसके बाद दिन भर में बस सोचता hi रहा. न hi मेरे अंतर्मन से कोई आवाज आई न कही और से. जिससे मुझे सब सपने जैसा hi लगने लगा था. और इसको चेक करने का अब एक hi तरीका था. जो में कल सुबह आजमाने वाला था. बाकि देखते है क्या होता है…….
रेनू का मश्ग आचुका था. उसकी फ्लाइट ठीक 5 बजे एयरपोर्ट पैर लैंड करने वाली थी. और हमारे घर से एयरपोर्ट करीब 30 मं. की दुरी पैर था. तो हमने 4:30 पैर निकलने का फैसला किया.
मैंने दादू को भी टाइम बता दिया ताकि वो रेडी रहे ..
जब जाने का टाइम हुआ तो हम दादा पोता निकल गए दोनों को लेने के liye….or हम उस जंगल से होक hi गुजरे. जहा अभी भी शांति छै हुई थी. हम टाइम पैर एयरपोर्ट पहुंच गए .
हमने कार को पार्किंग में लगाया एंड अंदर चले गए जहा पैर हम उनका वेट करने लगे. तभी दूर से वो मुझे दिख गयी तो मैंने दादू को छिपा दिया और उनको कार में जाने को कहा. जिसे सुनकर वो फ़ौरन hi कार की तरफ चले गए. एंड मैंने अपना हाथ दिखाकर उनको मेरे पास बुला लिया.
और अब सच कहु तो दोनों को देखकर ऐसा लग रहा था की जैसे कोई फिल्मस्टार आई हो. क्या बॉडी को मेन्टेन रखा था दोनों ने. और मुझे कहना तो नहीं चाहिए लेकिन इनको देखकर hi लग रहा था की सलग में इनके कितने दीवाने होंगे. में इक्दुम खो सा गया था दोनों की खूबसूरती में. जिसे रेनू ने चुकती बजा कर ढूंढ liya.or में अपनी चेतना से बहार आज्ञा.
मैं- जी आप कोण.
रेनू- क्या छछूंदर नहीं पहचाना.
मैं- देखो ये वर्ड से मुझे केवल एक चुहिया hi बुलाती है. और वो आप नहीं हो. इसलिए अपना रास्ता नाप लो. जल्दी से.
रेनू- देख तू ज्यादा नाटक मत कर. वर्ण यही से मरते हुए घर ले जाउंगी तुझे.
मैं- चल हैट हवा ाँ दे. बड़ी आई मुझे मारने वाली.
सुरभि- लगता है इसने हमें पहचाना नहीं है. देव में सुरभि तेरे मां की लड़की. और ये रेनू है. सच्ची.
मैं- सुरभि दी. आपको तो में एक hi नजर में पहचान गया था. लेकिन इसको नहीं. ये रेनू हो hi नहीं सकती है.
सुरभि- और तुम ऐसा किस आधार पैर कह रहे हो.
मैं- दी याद करो. हमने रेनू को गोलमटोल करके पहुंचाया था. ये तो सुकड़ी हो के आयी है. अब इस हिसाब से तो मां पैर शक होता है की इसको खाने को दिया भी है या नहीं. और ये सवाल में अपने मां से कर नहीं सकता क्युकी वो हमें अपनी जान से ज्यादा प्यार करते है. और इसको भूका तो रहने hi नहीं दिया होगा. बल्कि जबरदस्ती खाना खिलाया होगा. और उस हिसाब से इसको दोगुना होजाना चाहिए था. लेकिन ये तो आधी होकर आयी है. इसलिए मुझे डाउट आरहा है. अब जल्दी से उस चुहिया को बुलाओ. मुझे उससे गले मिलना है.
सुरभि- और मुझसे नहीं मिलेगा.
मैं- दोनों से साथ में मिलूंगा.
सुरभि- अब नाटक बंद कर. क्युकी में अच्छे से समाज गयी हु की तू बस नाटक कर रहा है.
ये कहके दोनों hi मुझसे कास के गले लग गयी. और मैंने भी अपनी पूरी बहे खोल कर उनका स्वागत किया.
रेनू- कैसा है तू.
मैं- एक दम फिट न फाइन. तुम लोग बताओ. बैसे बताने की जरुरत नहीं है. जिस हिसाब का फिगर मेन्टेन रखा है. उस हिसाब से तो लगता है फुल ों ऐश चल रही है दिल्ली में.
रेनू- झापड़ खायेगा बड़ा आया ऐश करवाने बाला. अब चल जल्दी मुझे माँ और दादू से मिलना है.
मैं- है तो चलो.
हम कार तक जा रहे थे तब मैंने एक बार और उसे छेड़ा.
मैं- सुरभि दी. आप बताओ और सच बताना. सलग में क्या करती है ये.
रेनू- तू फिर सुरु होगया. और सुरभि तूने अगर मेरी एक भी बात इसको बताई तो तेरी खैर नहीं समझी.
मैं- मतलब मेरा शक सही है. दाल में कुछ तो कला जरूर है. बैसे अगर मामला सीरियस हो तो मुझे बता सकती हो. माँ और दादू को पटाने की जिम्मेदारी मेरी.
रेनू- शट उप यार. अब कुछ घर के लिए भी बचा ले.
यही सब में हम कार तक पहुंच गए. और जैसे hi दोनों कार के अंदर बैठी. दोनों hi चिल्ला पड़ी. क्युकी अंदर दादू एक हॉरर मास्क लगाकर बैठे थे. जिसे देखकर दोनों में होश उड़ गए. और दोनों चिल्लाती हुई बहार निकल आई. और उनके पीछे हस्ते हुए दादू. और में भी.
और जब उन्होंने दादू को देखा तो दोनों की जान में जान आई.
रेनू- ये जरूर इस छछूंदर का hi आईडिया होगा. सेल में तुझे छोड़ने नहीं वाली.
दादा- वो सब बाद में करलेना. फ़िलहाल मुझसे मिल तो लो.
रेनू- नहीं मिलना है मुझे. कोई ऐसे डरता है क्या
दादा- अरे ये तो कह रहा था की तू करते बगेरा सीख कर आई है. और बड़ी बहादुर बन गयी है. और तेरी इतनी बड़ाई सुनकर मैंने इससे शर्त लगा ली की तुम दोनों नहीं दरोगी मुझसे. लेकिन सब बेकार गया. क्या फायदा हुआ करते सीखने का. खामखा मुझे 2000 का चुना लगवा दिया.
सुरभि- क्या दादू ऐसे में कोई कितना भी बहादुर क्यों न हो दर hi जायेगा न.
दादा- वो सब छोडो अब काम से काम इस बूढ़े से मिल तो लो.
रेनू- दादू बूढ़ा होगा कोई और. अभी तो आप जवान हो.
ये कहके दोनों दादू से गले मिल गयी. और दादू ने दोनों को भर भर कर आसीर्बाद दिए.
उसके बाद हम चारो कार में बैठे और सीधे घर की तरफ निकल गए. रस्ते में दोनों ने देहरादून के हाल के बारे में पूछ लिया की ये न्यूज़ में क्या दिखा रहे थे. तो दादू ने उन्हें सब समझा दिया और ये भी कह दिया की शाम तक घर पहुंच जाओ.
और में मन में सोच रहा था की अगर कल जो हुआ वो सच है तो अब चिंता की कोई बात नहीं है. लेकिन वो सब सपना है तो चिंता की बात है.
यही सब में हम घर पहुंच गए. जहा माँ ने दोनों की आरती उतरी और फिर उन्हें घर में घुसने दिया. और दोनों की खूब बलए ली. और उसके. बाद mom's का एक फेमस डाइलोगे बोलै. जो सभी जानते hi होंगे….
और अगर नहीं जानते तो में बता देतेहु.
माँ- कितनी दुबली हो गयी है तू. ठीक से कहती नहीं थी क्या. देख तो सुख कर कटा हो गयी है. रुको में भैया से बोलूंगी की मेरी लड़कियों को क्या खाना नहीं देते थे.
सुरभि- बुआ ऐसा कुछ नहीं है. दरअशल बहुत म्हणत की है हमने तब जेक अपना बजन घटा पाए है.
माँ- क्या जरुरत है बजन घटने की. इतनी प्यारी लगाती थी दोनों. लेकिन अब खम्भे की तरह दिखलने लगी हो.
ये सब सुनके मुझे हसी आने लगी. और में जोर से है पड़ा.
माँ- तुझे क्या हुआ.
मैं- माँ आप यकीन नहीं करोगी. एयरपोर्ट पैर मैंने सबसे पहले यही कहा था इनदोनो को की सायद मां ने ठीक से खाने को नहीं दिया है. देखो तो कैसे सुख गयी है dono.lekin ये दोनों बही पैर चढ़ गयी मुझपर. आप जरा समझाओ इनको
माँ- सही तो कहा मेरे बचे ने.
रेनू- माँ आप नहीं समझोगी. अगर में मोती दिखती तो सभी सलग में मेरा मजाक उड़ाते. इसलिए हमने डिटिंग करके अपना बजन काम कर लिया.
माँ- बड़ी आई मुझे समझने वाली. भूल मत में तेरी माँ हु. तुझसे ज्यादा दुनिआ देखि है मैंने. खैर अब कर लिया तो कर लिया. अब में यहाँ से दोनों को फिर से गोलमटोल करके hi बापिस भेजूंगी.
मैं- ये हुई न बात.
रेनू- माँ बहुत म्हणत लगी है सब बेकार चली जाएगी. आप प्लस ऐसा न करना.
माँ- में ऐसा नहीं करुँगी बल्कि तुम दोनों खुद ऐसा करोगी. क्युकी जब रोज तुम दोनों का मनपसंद खाना में बनाउंगी तब तुम्हारी डिटिंग सब धरी रह jayegi.or उसकी शुरुवात आज से hi होगी.
ये सुनके दोनों को कुछ समाज नहीं आया. दोनों क्या कहे उन्हें सूझ hi नहीं रहा था.
आखिर थक हार कर रेनू और सुरभि ने है कह दिया.
उसके बाद दोनों अपने अपने कमरे में गयी. और बढ़िया से फ्रेश हुई. और कपडे चेंज करके आगयी नीचे. जहा माँ ने दोनों का मनपसंद खाना बनाया था. जिसे देखकर hi दोनों के मुँह में सैलाब आज्ञा था.
उसके बाद सबने मिलकर खाना खाया. और फिर बही पैर बैठ गए और गप्पो का दौर सुरु हो गया. माँ और दादू ने सबकी जानकारी जब तक ठीक तरह से नहीं ले ली. तब तक दोनों को हिलने भी नहीं दिया. और में तो आराम से खिसक कर अपने कमरे में आज्ञा. क्युकी में बोर होने लगा था. लेकिन जब कमरे में भी टाइम नहीं कटा तो मैंने मोबाइल पैर मूवी लगा ली और देखने लगा. और देखते देखते कब नींद लग गयी पता भी नहीं चला
सुबह में रोज की तरह 4 बजे उठा. फ्रेश हुआ. और गयम में पहुंच गया. लेकिन मैंने सोचा शुरुवात ध्यान से hi की जाये. जिससे सब कन्फर्म हो जाये….
और में बही एक चटाई बिछाकर बैठ गया.
और ॐ का उच्चारण करने लगा मन में. और तिरदये पैर कंसन्ट्रेट करने लगा. और करीब 20 मं. के धयान में hi मुझे एहसास हो गया की जो भी जंगल में हुआ था वो कोई सपना नहीं था. क्युकी मेरी थर्ड ऑय खुल गयी थी. और मेरे अंदर में असीमित ऊर्जा को महसूस कर रहा था. चारो ओरे इतना सुखमयी उजाला था की बहा से जाने का किसी का मन hi नहीं करे.
में पता नहीं कब तक बैसा hi बैठा ध्यान करता रहा. और आखिर कार मेरा ध्यान टूट गया. क्युकी मुझे कुछ आवाज आने लगी थी. और जब मैंने अपनी आँखों को खोल कर देखा तो दोनों चुहिया एक्सरसाइज कर रही थी. और साथ में बाटे भी. और मैंने जब अपनी घडी में टाइम देखा तो 7 बज गए थे. मतलब में 3 घंटो तक ध्यान में बैठा था.
और अब ये जानकार मुझे बहुत खुसी हो रही थी की जंगल का प्रॉब्लम अब सोल्वे हो चूका है. और अब इस सिटी पैर कोई खतरा नहीं है…… और साथ में ये भी की मेरे अंदर कुछ शक्ति तो है………. और इसी सब के साथ एक सवाल भी की ये शक्तिया मेरे अंदर आई कैसे. और रही बात तिरदये की तो मैंने ऐसा सुना है की इसको तो बड़े बड़े ऋषिमुनि नहीं खोल पते है. तो फिर में इसे इतनी आसानी से कैसे कण्ट्रोल कर लेता हु. ये सब बातो ने मुझे घेर लिया था. और अब मुझे इतना पक्का हो गया था की मेरी जिज्ञासा बढ़ने वाली थी इन शक्तियों को लेकर.
देव की ये सोच तो सही hi थी. लेकिन उसका ये मन्ना बिलकुल गलत था की अब इस सिटी पैर कोई और खतरा नहीं है. क्युकी इन पिशाचो को मारने के बाद उसने बहुत hi बड़े बड़े खतरों को बुलावा भेज दिया था.
अब देखना ये था की जब देत्यो को इन सब के बारे में पता चलेगा तब वो क्या करेंगे.
तो बे कॉन्टिनुए…………….
जब नाहा धोकर नीचे गया तो माहौल बिलकुल नार्मल tha.na दादा और न hi माँ ने कुछ ऐसा पूछा जिससे मुझे कुछ डाउट हो. और ये मेरे लिए एक बहुत बड़ी रिलीफ थी.
दादा- क्या हुआ जनाब आज तो सूरज दादा पहले जाग गए आपसे.
मैं- है बही तो. कुछ समाज में hi नहीं आया दादू. आज मेरी नींद hi नहीं खुली.
माँ- कोई बात नहीं. थक गया होगा इसलिए नहीं खुली. और बैसे भी संडे के दिन तुझे आराम से उठना चाहिए लेकिन तू उस दिन भी जल्दी उठ जाता है. जिस बजह से तेरी बॉडी को कम्पलीट रेस्ट सायद नहीं मिला होगा. अब छोड़ ये सब. और आजा नास्ता करले.
मैंने भी यही ठीक समझा और बैठ गया नास्ता करने.
माँ- बैसे रेनू को कॉल किया तूने वो कब आरही है. कह रही थी की एक हफ्ते बाद आरही हु. आज तो एक हफ्ता हो भी गया
मैं- है माँ मैंने उठते hi उसे कॉल किया. तो उसने बताया की वो सायद शाम तक यहाँ पहुंच जाएगी.
माँ- तू उनको लेने चले जाना. बैसे भी आजकल माहौल कुछ ख़राब सा चल रहा है यहाँ का.
मैं- मैंने उन्हें बोल दिया है की मुझे डिटेल्स मश्ग कर दे. और आज बैसे भी सलग तो जा नहीं पाया. तो अब उनको लेने hi चला जाऊँगा आराम से.
दादू- में भी साथ चलूँगा. थोड़ी सेर हो जाएगी.
मैं- है क्यों nahi.sath में चलेंगे दोनों. और उनको सरप्राइज देंगे.
दादा- है मजा आएगा.
उसके बाद दिन भर में बस सोचता hi रहा. न hi मेरे अंतर्मन से कोई आवाज आई न कही और से. जिससे मुझे सब सपने जैसा hi लगने लगा था. और इसको चेक करने का अब एक hi तरीका था. जो में कल सुबह आजमाने वाला था. बाकि देखते है क्या होता है…….
रेनू का मश्ग आचुका था. उसकी फ्लाइट ठीक 5 बजे एयरपोर्ट पैर लैंड करने वाली थी. और हमारे घर से एयरपोर्ट करीब 30 मं. की दुरी पैर था. तो हमने 4:30 पैर निकलने का फैसला किया.
मैंने दादू को भी टाइम बता दिया ताकि वो रेडी रहे ..
जब जाने का टाइम हुआ तो हम दादा पोता निकल गए दोनों को लेने के liye….or हम उस जंगल से होक hi गुजरे. जहा अभी भी शांति छै हुई थी. हम टाइम पैर एयरपोर्ट पहुंच गए .
हमने कार को पार्किंग में लगाया एंड अंदर चले गए जहा पैर हम उनका वेट करने लगे. तभी दूर से वो मुझे दिख गयी तो मैंने दादू को छिपा दिया और उनको कार में जाने को कहा. जिसे सुनकर वो फ़ौरन hi कार की तरफ चले गए. एंड मैंने अपना हाथ दिखाकर उनको मेरे पास बुला लिया.
और अब सच कहु तो दोनों को देखकर ऐसा लग रहा था की जैसे कोई फिल्मस्टार आई हो. क्या बॉडी को मेन्टेन रखा था दोनों ने. और मुझे कहना तो नहीं चाहिए लेकिन इनको देखकर hi लग रहा था की सलग में इनके कितने दीवाने होंगे. में इक्दुम खो सा गया था दोनों की खूबसूरती में. जिसे रेनू ने चुकती बजा कर ढूंढ liya.or में अपनी चेतना से बहार आज्ञा.
मैं- जी आप कोण.
रेनू- क्या छछूंदर नहीं पहचाना.
मैं- देखो ये वर्ड से मुझे केवल एक चुहिया hi बुलाती है. और वो आप नहीं हो. इसलिए अपना रास्ता नाप लो. जल्दी से.
रेनू- देख तू ज्यादा नाटक मत कर. वर्ण यही से मरते हुए घर ले जाउंगी तुझे.
मैं- चल हैट हवा ाँ दे. बड़ी आई मुझे मारने वाली.
सुरभि- लगता है इसने हमें पहचाना नहीं है. देव में सुरभि तेरे मां की लड़की. और ये रेनू है. सच्ची.
मैं- सुरभि दी. आपको तो में एक hi नजर में पहचान गया था. लेकिन इसको नहीं. ये रेनू हो hi नहीं सकती है.
सुरभि- और तुम ऐसा किस आधार पैर कह रहे हो.
मैं- दी याद करो. हमने रेनू को गोलमटोल करके पहुंचाया था. ये तो सुकड़ी हो के आयी है. अब इस हिसाब से तो मां पैर शक होता है की इसको खाने को दिया भी है या नहीं. और ये सवाल में अपने मां से कर नहीं सकता क्युकी वो हमें अपनी जान से ज्यादा प्यार करते है. और इसको भूका तो रहने hi नहीं दिया होगा. बल्कि जबरदस्ती खाना खिलाया होगा. और उस हिसाब से इसको दोगुना होजाना चाहिए था. लेकिन ये तो आधी होकर आयी है. इसलिए मुझे डाउट आरहा है. अब जल्दी से उस चुहिया को बुलाओ. मुझे उससे गले मिलना है.
सुरभि- और मुझसे नहीं मिलेगा.
मैं- दोनों से साथ में मिलूंगा.
सुरभि- अब नाटक बंद कर. क्युकी में अच्छे से समाज गयी हु की तू बस नाटक कर रहा है.
ये कहके दोनों hi मुझसे कास के गले लग गयी. और मैंने भी अपनी पूरी बहे खोल कर उनका स्वागत किया.
रेनू- कैसा है तू.
मैं- एक दम फिट न फाइन. तुम लोग बताओ. बैसे बताने की जरुरत नहीं है. जिस हिसाब का फिगर मेन्टेन रखा है. उस हिसाब से तो लगता है फुल ों ऐश चल रही है दिल्ली में.
रेनू- झापड़ खायेगा बड़ा आया ऐश करवाने बाला. अब चल जल्दी मुझे माँ और दादू से मिलना है.
मैं- है तो चलो.
हम कार तक जा रहे थे तब मैंने एक बार और उसे छेड़ा.
मैं- सुरभि दी. आप बताओ और सच बताना. सलग में क्या करती है ये.
रेनू- तू फिर सुरु होगया. और सुरभि तूने अगर मेरी एक भी बात इसको बताई तो तेरी खैर नहीं समझी.
मैं- मतलब मेरा शक सही है. दाल में कुछ तो कला जरूर है. बैसे अगर मामला सीरियस हो तो मुझे बता सकती हो. माँ और दादू को पटाने की जिम्मेदारी मेरी.
रेनू- शट उप यार. अब कुछ घर के लिए भी बचा ले.
यही सब में हम कार तक पहुंच गए. और जैसे hi दोनों कार के अंदर बैठी. दोनों hi चिल्ला पड़ी. क्युकी अंदर दादू एक हॉरर मास्क लगाकर बैठे थे. जिसे देखकर दोनों में होश उड़ गए. और दोनों चिल्लाती हुई बहार निकल आई. और उनके पीछे हस्ते हुए दादू. और में भी.
और जब उन्होंने दादू को देखा तो दोनों की जान में जान आई.
रेनू- ये जरूर इस छछूंदर का hi आईडिया होगा. सेल में तुझे छोड़ने नहीं वाली.
दादा- वो सब बाद में करलेना. फ़िलहाल मुझसे मिल तो लो.
रेनू- नहीं मिलना है मुझे. कोई ऐसे डरता है क्या
दादा- अरे ये तो कह रहा था की तू करते बगेरा सीख कर आई है. और बड़ी बहादुर बन गयी है. और तेरी इतनी बड़ाई सुनकर मैंने इससे शर्त लगा ली की तुम दोनों नहीं दरोगी मुझसे. लेकिन सब बेकार गया. क्या फायदा हुआ करते सीखने का. खामखा मुझे 2000 का चुना लगवा दिया.
सुरभि- क्या दादू ऐसे में कोई कितना भी बहादुर क्यों न हो दर hi जायेगा न.
दादा- वो सब छोडो अब काम से काम इस बूढ़े से मिल तो लो.
रेनू- दादू बूढ़ा होगा कोई और. अभी तो आप जवान हो.
ये कहके दोनों दादू से गले मिल गयी. और दादू ने दोनों को भर भर कर आसीर्बाद दिए.
उसके बाद हम चारो कार में बैठे और सीधे घर की तरफ निकल गए. रस्ते में दोनों ने देहरादून के हाल के बारे में पूछ लिया की ये न्यूज़ में क्या दिखा रहे थे. तो दादू ने उन्हें सब समझा दिया और ये भी कह दिया की शाम तक घर पहुंच जाओ.
और में मन में सोच रहा था की अगर कल जो हुआ वो सच है तो अब चिंता की कोई बात नहीं है. लेकिन वो सब सपना है तो चिंता की बात है.
यही सब में हम घर पहुंच गए. जहा माँ ने दोनों की आरती उतरी और फिर उन्हें घर में घुसने दिया. और दोनों की खूब बलए ली. और उसके. बाद mom's का एक फेमस डाइलोगे बोलै. जो सभी जानते hi होंगे….
और अगर नहीं जानते तो में बता देतेहु.
माँ- कितनी दुबली हो गयी है तू. ठीक से कहती नहीं थी क्या. देख तो सुख कर कटा हो गयी है. रुको में भैया से बोलूंगी की मेरी लड़कियों को क्या खाना नहीं देते थे.
सुरभि- बुआ ऐसा कुछ नहीं है. दरअशल बहुत म्हणत की है हमने तब जेक अपना बजन घटा पाए है.
माँ- क्या जरुरत है बजन घटने की. इतनी प्यारी लगाती थी दोनों. लेकिन अब खम्भे की तरह दिखलने लगी हो.
ये सब सुनके मुझे हसी आने लगी. और में जोर से है पड़ा.
माँ- तुझे क्या हुआ.
मैं- माँ आप यकीन नहीं करोगी. एयरपोर्ट पैर मैंने सबसे पहले यही कहा था इनदोनो को की सायद मां ने ठीक से खाने को नहीं दिया है. देखो तो कैसे सुख गयी है dono.lekin ये दोनों बही पैर चढ़ गयी मुझपर. आप जरा समझाओ इनको
माँ- सही तो कहा मेरे बचे ने.
रेनू- माँ आप नहीं समझोगी. अगर में मोती दिखती तो सभी सलग में मेरा मजाक उड़ाते. इसलिए हमने डिटिंग करके अपना बजन काम कर लिया.
माँ- बड़ी आई मुझे समझने वाली. भूल मत में तेरी माँ हु. तुझसे ज्यादा दुनिआ देखि है मैंने. खैर अब कर लिया तो कर लिया. अब में यहाँ से दोनों को फिर से गोलमटोल करके hi बापिस भेजूंगी.
मैं- ये हुई न बात.
रेनू- माँ बहुत म्हणत लगी है सब बेकार चली जाएगी. आप प्लस ऐसा न करना.
माँ- में ऐसा नहीं करुँगी बल्कि तुम दोनों खुद ऐसा करोगी. क्युकी जब रोज तुम दोनों का मनपसंद खाना में बनाउंगी तब तुम्हारी डिटिंग सब धरी रह jayegi.or उसकी शुरुवात आज से hi होगी.
ये सुनके दोनों को कुछ समाज नहीं आया. दोनों क्या कहे उन्हें सूझ hi नहीं रहा था.
आखिर थक हार कर रेनू और सुरभि ने है कह दिया.
उसके बाद दोनों अपने अपने कमरे में गयी. और बढ़िया से फ्रेश हुई. और कपडे चेंज करके आगयी नीचे. जहा माँ ने दोनों का मनपसंद खाना बनाया था. जिसे देखकर hi दोनों के मुँह में सैलाब आज्ञा था.
उसके बाद सबने मिलकर खाना खाया. और फिर बही पैर बैठ गए और गप्पो का दौर सुरु हो गया. माँ और दादू ने सबकी जानकारी जब तक ठीक तरह से नहीं ले ली. तब तक दोनों को हिलने भी नहीं दिया. और में तो आराम से खिसक कर अपने कमरे में आज्ञा. क्युकी में बोर होने लगा था. लेकिन जब कमरे में भी टाइम नहीं कटा तो मैंने मोबाइल पैर मूवी लगा ली और देखने लगा. और देखते देखते कब नींद लग गयी पता भी नहीं चला
सुबह में रोज की तरह 4 बजे उठा. फ्रेश हुआ. और गयम में पहुंच गया. लेकिन मैंने सोचा शुरुवात ध्यान से hi की जाये. जिससे सब कन्फर्म हो जाये….
और में बही एक चटाई बिछाकर बैठ गया.
और ॐ का उच्चारण करने लगा मन में. और तिरदये पैर कंसन्ट्रेट करने लगा. और करीब 20 मं. के धयान में hi मुझे एहसास हो गया की जो भी जंगल में हुआ था वो कोई सपना नहीं था. क्युकी मेरी थर्ड ऑय खुल गयी थी. और मेरे अंदर में असीमित ऊर्जा को महसूस कर रहा था. चारो ओरे इतना सुखमयी उजाला था की बहा से जाने का किसी का मन hi नहीं करे.
में पता नहीं कब तक बैसा hi बैठा ध्यान करता रहा. और आखिर कार मेरा ध्यान टूट गया. क्युकी मुझे कुछ आवाज आने लगी थी. और जब मैंने अपनी आँखों को खोल कर देखा तो दोनों चुहिया एक्सरसाइज कर रही थी. और साथ में बाटे भी. और मैंने जब अपनी घडी में टाइम देखा तो 7 बज गए थे. मतलब में 3 घंटो तक ध्यान में बैठा था.
और अब ये जानकार मुझे बहुत खुसी हो रही थी की जंगल का प्रॉब्लम अब सोल्वे हो चूका है. और अब इस सिटी पैर कोई खतरा नहीं है…… और साथ में ये भी की मेरे अंदर कुछ शक्ति तो है………. और इसी सब के साथ एक सवाल भी की ये शक्तिया मेरे अंदर आई कैसे. और रही बात तिरदये की तो मैंने ऐसा सुना है की इसको तो बड़े बड़े ऋषिमुनि नहीं खोल पते है. तो फिर में इसे इतनी आसानी से कैसे कण्ट्रोल कर लेता हु. ये सब बातो ने मुझे घेर लिया था. और अब मुझे इतना पक्का हो गया था की मेरी जिज्ञासा बढ़ने वाली थी इन शक्तियों को लेकर.
देव की ये सोच तो सही hi थी. लेकिन उसका ये मन्ना बिलकुल गलत था की अब इस सिटी पैर कोई और खतरा नहीं है. क्युकी इन पिशाचो को मारने के बाद उसने बहुत hi बड़े बड़े खतरों को बुलावा भेज दिया था.
अब देखना ये था की जब देत्यो को इन सब के बारे में पता चलेगा तब वो क्या करेंगे.
तो बे कॉन्टिनुए…………….