फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 7 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

अपडेट - 48

अब तक

दब मेरे घर में tha....usko जितना कुछ जानना चाहिए था उतना पता चल चुक्का tha....wahi मैं निकिता और रूपल दीदी को लेके ज्वाला के कबीले में आया tha...taaki रूपल दीदी की कुल्हाड़ी वाली समस्या ख़तम हो जाए और साथ hi निकिता की नयी पावर्स मिल jaaye....jiske बाद ना सिर्फ वो पोलर बेअर्स की मदद कर sakegi...balki एल्फ कंट्री में जो बच्चो के साथ हो रहा था उसके लिए भी वो कुछ कर सकती thi....par कभी bhi...jaisa सोचो वैसा होता hi नहीं hai....Rupal दीदी की समस्या तो ख़तम हो गयी थी par...jo पावर्स निकिता को मिलनी चाहिए thi....wo उसको ना milke....Rupal दीदी को मिल gayi....aur ऐसा इस लिए हुआ क्यूंकि वो पावर्स निकिता के काबिल hi नहीं thi....agar निकिता को वो पावर्स मिलती तो वो पावर्स hi ख़तम हो जाती....

अब आगे...

अभी भी पावर्स ट्रांसफर हो रही thi....aur main....main समझ नहीं पा रहा था करना क्या hai....upar से ये ध्रुव ये अलग hi लगा हुआ tha...ye मुझसे पूछ रहा था की निकिता क्यों स्पेशल hai...aisa क्या है usme...ab मुझे क्या पता hoga...uske बारे में देखा तो था उसने bhi....hum दोनों ने देखा tha...ek बच्ची thi....jisko लेके कोई भाग रही thi...Maa hi होगी उसकी और फिर वो उसको एअर्थ पे भेज देती है जहा एक औरत उसका ख्याल रखती है पर वो औरत भी ज्यादा समय तक जी नहीं पाती उसको मार दिया जाता hai.....aur फिर उसको मारने वाला hi बच्ची को प्रोफ. सूरज के गिरोह में लेके चला जाता है जहा वो बड़ी होती hai....inn सब में मुझे स्पेशल वाली बात समझ नहीं आती kuch....haa अब अगर कुछ और भी हो जो हममे दिखा hi नहीं तब बात अलग है....

मैं - ध्रुव देखो अब ये ख़तम होने वाला hai.....ab क्या होगा...

ध्रुव - ऐसा बहुत वक़्त बाद हो रहा है जब चीजजें समझ नहीं आ रही mere.....ye सब ऐसा होना hi नहीं चाहिए tha.....par ये ऐसा हुआ hai.....aur इसके पीछे का कारन मेरी समझ में तो नहीं आ रहा है....

मैं - एक hi बात को 2 तरह से बोल रहे हो tum...sahi तो ह ना...

ध्रुव - हां sayad.....par अब जो भी हुआ hai...isme हम कुछ नहीं कर sakte...tum देखो ध्यान se......powers ऐसे सूट कर रही hai...yaa तो ये पावर्स इसमें उस वक़्त भी thi...yaa वो सही वक़्त नहीं था की ये पावर्स इसको दिया jaata...haa आखिर तब ये खुनी घुड़सवारों की रानी thi...ye hi मुमकिन hai....par निकिता के बारे में kya....uska अभी तक कुछ समझ नहीं आ रहा है...

मैं - एक बात बताओ ये खुनी घुड़सवारों की रानी है kya.....baar बार बोलते रहते हो aisa.....kon थे ये log....aur दीदी को उनकी रानी क्यों बताते हो तुम....

ध्रुव - मैं अभी खुद सब समझने की कोशिश कर रहा hu....par सायद अगर में तुम्हे ये बातें समझों तो मैं खुद भी समझ jaun...samjhe कुछ...

मैं - हां समझ gaya...mujhe कुछ नहीं समझना samjhe....ab बस ये समझाओ की मुझे आगे करना क्या hai....kya इन् पावर्स से दीदी ऑउटफ कण्ट्रोल होने वाली है जैसे उस कुल्हाड़ी की वजह से हुई थी....

ध्रुव - नहीं ऐसा नहीं hoga.....tum सायद देख नहीं पा रहे पर ये पावर इन्ही के लिए बननी thi...isse इनको कुछ नहीं होने wala....aur रही बात कुल्हाड़ी ki...to अगर वो असल वाली कुल्हाड़ी होती तो कुछ भी नहीं hota...ye तो बस डेमोस के खास मेटल से बननी हुई कुल्हाड़ी थी इस वजह से थोड़ी सैतानी थी ये.......

मैं - तो हम ऐसा मान के चले की सब सही होगा...

ध्रुव - और कोई रास्ता hi नहीं है हम बस यही मान सकते है...

मैं उससे बातें कर रहा था और उतनी देर में ये पावर ट्रांसफर का काम पूरा हो gaya....aur इसी के साथ रूपल दीदी के बाद जो अभी तक काले the....wo थोड़े थोड़े ब्राउन से होने लग gaye....aur वो वही पे गिर gayi...behosh हो गयी...

मैंने उनको उठाया और वह पे खड़े वैद्यों को उन्हें चेक करने के लिए bola....main उस रानी से पूछना चाहता था की ऐसा कैसे hua...par जब उसकी ओर देखा तो वह पे बस एक अजीब सा ढांचा पड़ा हुआ था हडियों ka....Wo अपने पावर्स देने के साथ hi सायद मर चुकी तह.....

मैं - ध्रुव अब kya....wo तो मर गयी और उसकी पावर्स कैसे उसे करनी है ये कैसे पता chalega.....Didi कैसे उन् जीवों को पोलर बेअर्स वाले जगह से जाने को kahegi...kya वो बात मानेंगे...

ध्रुव - इन् सब के बारे में तो मुझे भी पता नहीं hai...humme इन् जीवों के बारे में पता करना hoga....aur साथ hi इन् पावर्स के उसे करने के तरीके के बारे में bhi....aur सिर्फ इतना hi नहीं हममे निकिता के बारे में भी जानना hoga....main समझना चाहता हु की आखिर वो क्यों स्पेशल है...

Vaidya(Jwala) - ये होश में आने वाली है...

उसने ऐसा बोलै hi था की दीदी होश में आ gayi.....aur आते hi यहाँ वह देखने लगी.....

मैं - आप ठीक हो ना....

दीदी - nahi.....main ठीक नहीं hu.....mujhe अभी घर जाना है....

मैं - हां ये सही hoga....waise भी अब यहाँ कोई काम नहीं बच्चा hai....Nikita चलो हम चलते है.....

मैं इतना बोल के उसकी ओर mudda....par वो वह थी hi nahi....matlab अभी तक वो वही thi......main उसको देख रहा था और एक पल बाद जैसे hi मैं दीदी से बात कर रहा tha.....wo गायब हो गयी...

मैं - ये कहा gayi...Jwala कहा गयी वो.....

ज्वाला - अरे अभी तो यही थी.....

मैं - ध्रुव कहा गयी वो....

ध्रुव - पता नहीं.....

दीदी - मुझे घर जाना है abhi.....mujhe घर जाना है....

मैं - ज्वाला मैं जा रहा hu...portal kholo....aur ब्लैक आउल से बोलो निकिता को dhunde....aur जब वो मिले उसको वापस से घर भेजने....

ज्वाला - हां ठीक है....

उसने फिर पोर्टल खोला और हम उससे होक घर आ gaye.....main वह पे रुकना चाहता tha...mujhe भी ढूँढना था usko....par दीदी को अभी सायद वह रखना सही नहीं hota....upar से नयी शक्तियां thi....kuch भी हो सकता है...

दीदी को घर पे हम सीधा उनके रूम में लेके आये the.....aur वह आते hi वो फिर से बेहोश हो गयी पता नहीं kaise.....Maine उनको बीएड पे लिटा दिया...

मैं - ध्रुव ये दीदी बार बार ऐसे कब तक चलता rahega...tumne तो कहा था सब सही होगा....

ध्रुव - ये सायद आखिरी बार tha....inki बॉडी एडजस्ट कर रही है उस पावर ko.....to ये सब नार्मल है....

मैं - और निकिता का क्या वो कहा gayi....humme उसको ढूँढना होगा....

ध्रुव - हां मैं भी यही सोच रहा hu....dhundhna होगा उसको पर वो गयी कहा इतनी जल्दी और क्या उसको पता था की वो स्पेशल hai...matlab ऐसे गायब हो जाना वो भी इतनी जल्दी...

मैं - मुझे नहीं पता उसको क्या पता था क्या nahi....mujhe बस उसको ढूँढना है ओल्ड आउल के लोग उसको ढूंढने में लगे ुए है पर हममे भी कुछ करना चाहिए....

वही दूसरी taraf.....Elf वर्ल्ड में एल्फ किंग जो अभी अपने सिंघासन पे बैठे हुए the....aur किसी पे चिल्ला रहे थे....

ेल्फ़किंग - मैंने कहा था की उसका पता लगाओ यहाँ लाने नहीं कहा tha...tumhare पास दिम्माग नहीं है क्या....

वो - पर मुझे लगा सायद आपको इसको सज़्ज़ा देनी hai.....to मैं पकड़ लाया isko.....aur मुझे लगा की आप खुश होंगे....

एल्फ किंग - मैंने ऐसा कुछ कहा था क्या tumse....maine बस कहा की पता करो ये जो भी है वो किस हालत में है और कैसी hai.....aur तुम कामकल इसको यहाँ ले aaye.....isko इसके सही जगह पे pahuchao....aur हां ध्यान रहे इसको याद भी नहीं रहना चाहिए की ये यहाँ लायी गयी thi....isne कुछ देखा तो नहीं है ना यहाँ पे....

वो - नहीं इसने कुछ नहीं देखा है और ना किसी ने isko.....main तो बस आपको दिखाना चाहता था इसका चेहरा...

एल्फ किंग - नहीं देखना mujhe...ab बस इसको लेके जाओ जहा से इसको लाये थे और धायण रहे इसको कुछ भी याद नहीं रहना चाहिए....

वो - ठीक है जैसा आप कहे....

वो वह से चला जाता है और फिर वह पे एक एल्फ आता है और कौंरटय में हो रही सभी घटनाओं को बताता है....

एल्फ - महाराज प्रजा की हालत कुछ ठीक नहीं hai....bacche मरते जा रहे hai.....aur अब तो उनकी बॉडीज भी गायब होती जा रही है...

एल्फ किंग - Kya.....bodies गायब हो रही है मतलब क्या hai...ek तो इस महामारी का पता नहीं चला रहा है ऊपर से अब बॉडीज चोरी कर रहा है कोई....

एल्फ - महाराज वैद्य लगे हुए है पता करने में की ये कोण सी महामारी आ गयी hai....aur हमने सैनिकों को भी बोल दिया है ये बॉडीज की चोरी का पता करे....

एल्फ किंग - पता नहीं क्यों ये सब हो रहा hai....Yuvraj कहा hai....unse कहो की हममे अभी कही निकलना है तो वो इन् सब का ध्यान रखे...

एल्फ - जी महाराज...

एल्फ किंग अपनी जगह से उठे और पहले अपने कमरे में gaye....uske बाद वह से अच्चानक से गायब हो गए....

प्लेनेट - फोमोस

यहाँ पे वो लोग लाये जा चुके थे एल्फ वर्ल्ड se.....yaha के लीडर ने अपना वडा पूरा किया था अब बारी किसी और की thi....aur वो बस इंतज़ार में थे की कब वो आये और उसको सब कुछ bataye....aur उसका इंतज़ार ज्यादा लम्बा नहीं चला.....

लीडर- एल्फ king....aapko आने की जरुरत नहीं thi....aap किसी और को भी भेज सकते थे.....

एल्फ किंग - नहीं मैं इन् सब के बारे में और किसी को नहीं बताना चाहता tha....mujhe पता चल गया है उसके बारे mein.....par ये समझ नहीं आया की वो रहती कहा है....

लीडर- क्या मतलब है aapka.....wo ठीक तो है ना....

एल्फ किंग - हां वो ठीक thi.....par मेरे लोग ये नहीं पता कर पाए की उसका ठिकाना कहा hai.....sayad कोई मैजिक hoga....(isko अगर ये बता दिया की मेरे लो उसको मेरे पास लेके आ सकते है तो मैं मुसीबत मरें पद सकता hu...isko उतना hi बटांना चाहिए जीने से काम चले)

लीडर ये बात सुनके बहुत दुखी हुआ....

लीडर - ये सब मेरी hi वजह से हुआ tha.....kaas वो सब मैंने ना किया होता तो आज मैं भी अपने परिवार के साथ एक अच्छी जिंदगी बीतता रहा hota...iss जगह से dur....inn सब से dur...apne परिवार के साथ....

एल्फ किंग - मैं समझ सकता हु तुमपे क्या बीत रही hogi....par तुम चिंता मत करो मैं उसका ध्यान रखूँगा....

लीडर - हां बस उसका ध्यान अच्छे से rakhna....aur मैं तुम्हारे कैदियों को यहाँ भेजते रहने की मंजूरी देता रहूँगा....

एल्फ किंग फिर वह से गायब हो गया......

(एल्फ किंग वह कभी गए hi नहीं the......waha पे बस उनका एक प्रतिबिम्भ गया था जिसके थ्रू वो बातें कर रहे थे उससे.....)

वापस चलते है.....

ओल्ड आउल और बाकि सब को निकिता को ढूंढने का बोल के जब ज्वाला वापस से वह आता है वैद्य से मिलने तो वो जो सामने देखता है वो समझ नहीं पाटा ऐसा कैसे हो गया....

उसने देखा की निकिता वह पे वापस आ गयी थी पर वो बेहोश पड़ी हुई थी.....

उसने जल्दी से वैद्यों को कहा निकिता को देखने के liye.....aur खुद पोर्टल खोल के प्रतीक को वह लेके आ गया....

मैं - कहा मिली ये और ये बेहोश क्यों है....

ज्वाला - ये यही पे thi....aur बेहोश thi...pata नहीं कई....

वो बोल hi रहा था की वह पे एक सैनिक आ गया.....

सैनिक - महाराज यहाँ पे कोई आया था...

मैं - क्या मतलब है कोई आया था...

ज्वाला - अच्छे से बताओ....

सैनिक - महाराज कोई जीव tha....wo यहाँ पे आया था abhi.....aur एक बार नहीं 2 बार....

ज्वाला - kya...koi जीव यहाँ पे आ गया और तुमलोग क्या कर रहे थे....

सैनिक - महाराज पोलर बेअर्स और बाकियों के आने के कारन हमने बाहरी सिक्योरिटी को थोड़ा काम कर दिया है और अंदरूनी सिक्योरिटी पे ध्यान दे रहे hai....sayad इसी का फायदा उठा के कोई यहाँ आ गया tha.....par वो बस आया और चला गया...

ज्वाला - जो भी tha...uska पता लगाओ और अगर वो खतरनाक है तो ख़तम करो उसको.....

मैं - इतना गुस्सा क्यों हो रहे हो....

ज्वाला - ये जगह सबके लिए नहीं hai....tumko नहीं पता यहाँ सिर्फ तुम और वो लोग hi आ सकते है जिनको तुम लाना chaho....aur कोई nahi....iss जगह के बारे mein....aur यहाँ के लोगो के बारे में किसी को भी पता नहीं होना chahiye...ye बहुत खतरनाक है.....

मैं - ठीक है जो करना है karo.....ek मिनट पर वो जीव कहा से आया था जिसने इतना कुछ किया....

ज्वाला - उन्ही वजहों से तो इस जगह को हम किसी के नज़रों में नहीं आने देना चाहते...

हम बात कर रहे थे और निकिता को होश आ जाता है....

निकिता - मैं कहा हु.....

मैं - कही नहीं चलो घर चलते hai.....baatein करनी है कुछ....

मैंने ज्वाला की और देखा उसने पोर्टल खोला और हम चल दिए वह से...

सवाल बहुत से थे मेरे मान में पर निकिता की हालत ख़राब thi,...aisa लग रहा था जैसे किसी ने इसको बेहोशी का दवा दे दिया हो...

खैर ये रात बड़ी अजीब thi....aur बस काट hi gayi....lekin अगले कुछ दिन मुझसे मेरे दोस्त छीनने वाले थे ये बात मुझे पता नहीं थी....

नेक्स्ट डे...

सुबह सब जागे और सभी निच्चे aaye....Rupal दीदी के बाल अब पहले जैसे काले hi the....sab नार्मल सा hi लग रहा tha....DB भी रूम से बहार aaya....Chachi ने खाना लगाया tha.....hum खा hi रहे थे की दादा दादी वापस आ गए.....

वो भी फ्रेश होक खाने के लिए बैठ gaye....aur फिर से दरवाजा नॉक हुआ.....

इस बार दरवाजा खोलने पे वो इंसान था वह जो कल आया था......

वो - अच्छा है सभी यही मिल gaye.....mujhe मदद चाहिए थी इस परिवार से....

दादा जी - Tum....tum यहाँ कैसे....

वो - बस कुछ काम आ गया tha.....aana पड़ा yaha...tum बताओ कैसे हो....

दादाजी - अभी तक सब सही था अब आगे का पता नहीं....

वो - hahahaa...sab सही होगा पर मुझे तुमसे बात करनी hai...tum सब से....

दादाजी - हां बताओ.....

वो - पहले में तुम्हे वो सब बता दू जो तुम्हे जानना chahiye.....jo सायद अभी तक बताया नहीं गया है तुम्हे...

उसने दादाजी को कल की साड़ी बातें बताई दब के बारे में बताया उसका उसके घर से बहार निकले जाने के बारे में बताया और भी बाकी सब.....

दादा दादी ये सब सुन्न रहे थे और उनको दब के लिए बुरा लग रहा था और साथ hi उसके लोगो के लिए bhi.....DB ने भी जब सुन्ना की उसके लोगो की हालत इतनी ख़राब हो गयी है तो वो बहुत दुखी हुआ.....

दादी जी - ये सब तो बहुत बुरा hua....ab बताओ हम कैसे मदद करे.....

वो - मैंने इनके स्कूल में अपना एक प्रोफ भेजा है वो वह पे इनका ध्यान rakhega....par मुझे नहीं लगता की उससे काम chalega....maine जितना सोचा था ये सब उससे कही जल्दी हो रहा hai.....Mujhe अभी उसकी जरुरत है....

दादाजी - किसकी बात कर रहे हो tum....saaf साफ़ बोलो....

वो - मुझे क्लोनिंग की जरुरत hai....Main चाहता हु दब बस मेरे साथ hi rahe...aur यही अच्छा hoga....aur तुम लोग इसका एक क्लोन बनाओ और उसको स्कूल में लेके jaao....waha पे मेरा वो आदमी ध्यान रखेगा की किसी को पता ना चले की वो क्लोन है दब नहीं.....

मैं - पर आपने तो कहा था.....

वो - बचे मैं जानता हु मैंने क्या कहा tha...par जैसे हालत वह पे बनते जा रहे है उसको देखते हुए ये करना जरुरी hai.....Maine कल hi बात की थी लीमो se.....usne बताया लोग उदास है उनके बचे मरते जा रहे hai....mere कहने पे वो अब उन् बच्चो की बॉडीज को प्रेज़रवे कर रहा है जिनको बचने की उम्मीद hai.....aur मैं नहीं चाहता की वो सब bhi....Mujhe इसक ट्रेनिंग जल्दी से शुरू करनी hai.....aur काम से काम उतना काबिल तो बनाना है की ये उस महामारी को रोक paaye....fir धीरे धीरे इसकी ट्रेनिंग चलती rahegi....aur ये वापस आ जाएगा....

मैं कुछ बोलता उससे पहले दब बोलै.....

दब - मैं तैयार हु....

अब मैं क्या बोलता ये उसके लोगो के लिए जरुरी tha....main जितना मदद कर सकता था वो मैं करने के लिए तैयार था....

दादा जी - हां ठीक है हम तैयार है....

चची - पापा मुझे लगता है प्रतीक को भी.....

दादी - मैं भी इस बारे में सोच रही thi...ye यहाँ आया है लोग इसको देख रहे hai....par किसी को भी इसके बारे में पूरा सच नहीं पता hai.....aur ना hi पता चले तो अभी के लिए अच्छा hoga....hum इसको भी देख lenge....main और तुम्हारे पापा इसके लिए कुछ लेके भी आये hai.....Poonam जाओ दोनों को तैयार करके आओ.....

दादाजी -(इंसान से) अब आपको थोड़ी देर के लिए जाना hoga...aap समझ रहे है ना...

वो - मैं बहार हु....

निकिता - क्या होने वाला है...

कविता मैडम - कुछ नहीं तुम एक काम करो रूम में जाओ और वही रहो मैं भी आ रही हु....

जो घर के लोग थे वो सभी अब वही दिंनिंग टेबल के पास the....Mujhe और दब को बुआ लेके गयी रूम में और हममे तैयार kiya....pata नहीं क्या कर रही thi....koi पानी था जिसको हमपे छिड़का जा रहा था और फिर कुछ मंत्र बड़बड़ा रही थी वो.....

उन् सब के बाद वो हममे बहार लेके आयी जहा पे एक बड़ा सा घेरा बना हुआ tha....aur उसकी लीनिंग्स पे मेरे घर वाले खड़े थे....

दादाजी - दब पहले तुम....

दब को धीरे के बिच में खड़ा किया गया और वो लोग कुछ मंत्र पड़ने लगे और उसके पाद वह पे थोड़ी सी रौशनी हुई और उससे दब की एक परछाई बन gayi....aur वो परछाई फिर कड़ी hui....aur उसका रूप बदलने लग gaya....aur वो दब की तरह बन gaya.....Main ये देख के हैरान था.....

दादाजी - प्रतीक अब तुम...

और फिर मैं वह जायके खड़ा हुआ...

ध्रुव - बेकार में ये सब कर रहे है ye....waise भी मेरे रहते तुम्हे कोई नहीं पहचान पायेगा पर चलो करने देते है...

मैं वह खड़ा हुआ और वो सब वापस से वही मंत्र आंत्र पढ़ने lage......aur उनके ऐसा करने से मेरे चारो ओर कुछ आ गया और bas.....aur कुछ नहीं हुआ....

दादाजी - काम हो गया hai....ab बुलाओ उसको बहार se....DB beta...kabhi भी किसी चीज़ की जरुरत हो तो हममे कहना हम हमेसा होंगे मदद के लिए समझे.....

दब - जी दादाजी

वो इंसान अंदर आया और वो दब को लेके चला गया अब वह पे हम लोग hi रह गए थे और वो दब का क्लोन....

तभी ऊपर से कविता मैडम और निकिता आयी...

कविता मैडम - आप लोगो को कुछ दिखाना है...

बुआ - क्या hua....tum परेशां लग रही हो....

कविता मैडम - पता नहीं par.....ye देखो....

कविता मैडम ने निकिता का हाथ आगे करते हुए हममे dikhaya....mujhe तो घंटा कुछ समझ नहीं आया पर सायद बाकी सब समझ गए the....koi निशान बना हुआ था उसके हाथ p...ajeeb सा....

दादी - बीटा तुम एल्फ वर्ल्ड में कब gayi...aur ये निशान क्यों है तुम्हारे हाथ पे....

बुआ - माँ हम गए थे ये नहीं गयी थी और वो सब सही तरीके से tha....aur ये निशान होना hi नहीं चाहिए tha.....aur ये देखो ये तो नया लग रहा hai.....(Madam के साथ जाने वाली बात नहीं बतानी चाहिए और वैसे भी उस टाइम तो ये निशान था hi नहीं)

दादाजी - नया हो या पुराण बात वो नहीं है पर ये यहाँ है kyun....Nikita बीटा तुमको पता है ये निशान क्यों लगाया जाता है...

निकिता - नहीं और मैंने तो अभी देखा isko.....pata नहीं कैसे आ गया....

दादाजी - तुमको नज़रबंद किया हुआ है एल्फ वर्ल्ड के लोगो ne....par क्यों....

मैं - नज़र बंद...

निकिता - नज़रबंद...

दादा जी - कुछ तो गड़बड़ है ऐसे hi किसी को नज़रबंद नहीं किया जा सकता hai....(Chacha जी से) बुलाओ usko...humme ये बातें ऊपर तक बतानी hogi....kuch तो चल रहा है एल्फ वर्ल्ड में.....

चाचा जी - जी पापा मैं अभी बुलाता हु....

थोड़ी hi डॉ में वही मोटा आदमी हमारे घर में वापस आ गया....

दादाजी को देख के वो थोड़ा घबरा रहा tha....par दादाजी ने आराम से पूछा...

दादाजी - ये निशान इस बच्ची के हाथ पे क्यों है.....

उसने उस निशान को अच्छे से dekha....aur वो भी अपना सर खुजाने laga....isko तो मैंने नहीं भेजा था...

वो - पता नहीं कैसे हो गया ye.....sayad कुछ गलती हुई hai...main वह पे इस बात को उठता hu....aur तब तक के लिए ये निशान मैं मिटा देता हु....

दादाजी - निशान हम भी मिटता सकते the...aur तुम ये जानते हो पर इसके बाद बहुत कुछ हो jaata....mujhe इस बारे में साड़ी जानकारी चाहिए समझे...

वो - जी समझ गया...

वो वह से निकल जाता है निशान हटा ke....par सवाल तो अभी भी था निशान आये क्यों...

ध्रुव - पता है मुझे लगता है हममे स्कूल वापस चलना चाहिए कुछ बातें भी हो जायेगी कुछ लोगो se....jinki वजह से ये सब शुरू हुआ था...

मैं - Pankaj....haa मुझे भी यही लगता hai....main अब उससे बात करना चाहता hu.....kyun उसने ऐसा किया और किसके कहने पे किया...

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखझते है पंकज से बात कैसे होती hai....aur दब का इंसानों के बिच रहने का पहला दिन भी...
 
अपडेट - 49

अब तक

दब जा चुक्का था उस इंसान के साथ उसको पता चल गया की उसके जाने के बाद क्या क्या हुआ एल्फ कंट्री में और कैसे वह के bacche....to उसने जाने का तय kiya.....wahi उसके जाने के कुछ देर बाद हममे निकिता के हाथ पे एक निशान milla....mujhe नहीं पता था उसका मतलब पर जब बड़ो ने देखा तो कहा की वो एल्फ कंट्री का निशान है जो उनको लगाया जाता है जिनपे वो नज़र रखते hai...wo निशान एक जीपीएस की तरह होता जिसे सब पता चलता रहता hai....par उसका निकिता के हाथ पे होना ये बहुत बड़ी बात thi....manna वो गयी थी waha...aur जेल भी गयी thi...par वह पे ऐसा कुछ नहीं हुआ tha...aur ये निशान उसके बाद का था तो हमने उस मोठे आदमी को वापस से बुलाया और उसने वो निशान हटा दिया और उसकी जांच के लिए भी kaha....Main अब उस चीज़ पे ह्यां देना चाहता था जिसके वजह से ये सब शुरू हुआ और दब के साथ ये सब hua....to बस एक नाम आया saamne...Panjak...wahi था waha...jisne हमला किया था दब की पिता पे...

अब आगे

दोपहर का वक़्त tha...jab....Main बुआ और बाकी सब को बोल के वापस स्कूल के लिए nikla...unlogo ने पूछा की अभी तो एक और दिन है छुट्टी तो अज्ज क्यों jaana...maine बस जरुरी काम का बल के वह से निकल gaya.....Nikita बुआ और बाकी सब के साथ आने वाली thi...main बस अकेला hi बस से स्कूल पहुंच गया....

स्कूल में सब कुछ पहले जैसा hi tha....Main आते hi पहले अपने रूम में गया और वह पे जाते hi मैंने ओल्ड आउल के उस बन्दे को बुलाया जो पंकज के ऊपर नज़र रखे हुए था....

थोड़ी देर में वो मेरे सामने था.....

मैं - बताओ कैसा है Pankaj.....uss दिन में कुछ जल्दी में tha...aur कोई मिल गया था जिस वजह से उसपे ध्यान नहीं गया...

वो - वो यहाँ नहीं hai...wo अभी अपने घर में है अपने पिता के साथ....

मैं- हम्म प्रोफ. के saath...mujhe याद है तुमने ये भी कहा था की वो उसको मन्ना कर रहे the....yaa ऐसा hi कुछ....

वो - जी हां मैंने कहा tha...aur फिर आपने कहा था की मैं किसी की मदद लेलु और उन् दोनों पे hi नज़र रखा jaaye....par

मैं - हां पर क्या....

वो - मैंने मदद ली thi....par पता नहीं कैसे वो चंक gaya....kuch वक़्त के लिए वो उनपे नज़र नहीं रख पाया....

मैं - हम्म ठीक hai...waise अभी कहा है प्रोफ. यही स्कूल में या फिर अपने घर पे....

वो - एक मिनट....

उसने अपनी आखें बंद की और पता नहीं क्या kiya..thodi देर बाद आँखें खुली और उसने बताया...

वो - वो यही hai...School में

मैं - हम्म अब ये बताओ की घर कहा है inka....main मिलना चाहता हु पंकज se....baatein जो करनी है कुछ

उसने मुझे अपना एक पंख दे diya....maine उसकी ओर सवालियां नज़रों से देखा...

वो - मैं आपको टेलिपोर्ट नहीं कर sakta...par मेरा पंख आपके लिए एक टिकट की तरह काम कर सकती hai...app पोर्टल खोले और पहले इसको अंदर daale....ye आपको वह तक का रास्ता बना के देगा....

मैं- हम्म interesting...chalo ठीक hai...tum एक काम karo...apne उस दोस्त के पास जाओ जो अभी प्रोफ पे नज़र रख रहा hai...aur....jaise hi वो अपने घर आने वाले हो मुझे बता देना....

वो - ठीक है....

और वो चला gaya.....wahi मैंने भी ध्रुव से बोलके वो पोर्टल खुलवाया और उसमे वो पंख दाल diya....aisa करने से उसके कोर्स में चंगेस aaye...par फिर वापस पहले जैसा हो गया सब....

मैं उसके अंदर चला गया और एक घर के सामने बहार aaya....Maine आस पास देखा तो यहाँ और भी घर the....pata नहीं क्यों पर ये घर इंसानो के इलाके में tha...main सोच में पद गया आखिर क्यों प्रोफ. अपना घर इंसानो के बिच banayenge....koi भी वजह नज़र नहीं आ रही थी मुझे.....

एक पल को तो लगा कोई गलती हो गयी है mujhe....tabhi पास से एक इंसान गुजरता हुआ dikha.....Main पहले भी इन् जैसो से बात कर चुक्का hu...main रहा करता था इनके साथ par...ab पता नहीं क्यों जब से मुझे मेरे बारे में पता चला hai....ye मुझे कमज़ोर लगते hai...bahut kamzor...khai वो इंसान जा रहा tha....Maine उसको आवाज लगायी..

वो - हां बीटा बोलो क्या मदद कर सकता हु मैं....

मैं - जी मुझे जानना था ये ghar....ye सामने वाला घर किसका hai....kon रहता है यहाँ....

वो - ये ghar...ye तो Mr.Daksh का hai....par वो कभी कभी hi आते है यहाँ...

मैं - मर. Daksh...(yahi नाम था प्रोफ. ka....matlab सायद मैं सही जगह पे आया हु पर ये बात तो और भी अजीब hai...aakhir वो क्यों रहते होंगे इंसानो के बिच...) थैंक्स

वो वह से चला gaya.....aur मैं उस घर को देखने laga...sochne लगा आखिर kyun....par फिर याद आया की इसके लिए यहाँ नहीं आया tha.....mere सवाल कुछ और the....aur एक अलग मकसद के लिए यहाँ आया था मैं तो bas.....Main दरवाजे की ओर badha...aur दूर बेल्ल बजायी....

दरवाजा नहीं khula....maine वापस से बजायी दरवाजा फिर भी नहीं khula...Maine सोचा aise...bekar में टाइम पास क्यों करना इससे अच्छा मैं पोर्टल से सीधा अंदर hi चला जॉन....

मैं - ध्रुव पोर्टल kholo....mujhe अंदर जाना है....

ध्रुव ने पोर्टल खोला और मैं उसके अंदर gaya.....par मैं वापस जहा पे था वही पे आ गया....

मैं - ध्रुव ये क्या है मुझे अंदर जाना है....

ध्रुव - मैंने पोर्टल खोला पर अंदर नहीं जा सके tum....saayad यहाँ कोई सुरक्षा कवच है...

मैं - तो तोड़ दो उसको....

ध्रुव - तुम इंसानो के पास ho....yaha मैजिक उसे नहीं कर sakte....aur ये सुरक्षा कवच आसान नहीं लग रहा

मैंने उसकी बात सुन्नी और दफर से बेल्ल को बजने laga...lagatar....par कोई जवाब नहीं मिल रहा tha....ki तभी किसी का हाथ मेरे कंधे पे आया....

वो - तुम yaha....kaise...

मैंने पीछे मुद के देखा तो वह पे प्रोफ दक्ष the....hamare मैजिकल मेडिसिन्स वाले HOD...Pankaj के पिता....

मुझे उनको ऐसे अपने सामने देख के समझ नहीं आया की क्या kahu...upar से मुझे गुस्सा आने लगा उन् दोनों pe.....Old आउल के वो log.....maine कहा था जैसे hi ये यहाँ आने लगे मुझे बता de.....par पता नहीं वो कहा है....

वो - बताया नहीं की तुम यहाँ कैसे....

मैं कुछ बोलता उससे पहले वही इंसान जिससे मैंने थोड़ी देर पहले उस घर के बारे में पूछा था वो प्रोफ. दक्ष को देख के हाथ हिलता hai.....aur वह आ जाता hai....Prof भी मुस्कुरा के वापस हाथ हिलाते है और जब वो वह आता है तो उसको hello बोलते है....

इंसान - अरे आप आ गए मैं आपसे hi मिलने आने वाला tha...accha इस बचे से मिल लिए aap.....ye आपके घर के बारे में पूछ रहा था....

प्रोफ. दक्ष - हां मैंने sunna...wo ये मेरी बहन का लड़का hai....dur से आया है yaha....aap चलिए हम अंदर बातें करते hai....issi के साथ एक कप चाय की भी हो जायेगी....

इंसान - अर्र्रे नहीं nahi....apka भांजा आया है आप उससे बात करिये मैं तो बाद में मिल लूंगा...

प्रोफ दक्ष - नहीं नहीं ये तो यहाँ रुकने वाला hi hai...aap chaliye...aapki बात जरुरी लग रही है...

इंसान ने प्रोफ के इतने जोर देने पे अंदर चलने का socha....Main अभी ये सोच रहा था की ये मुझे अपना भांजा क्यों बता रहे hai...aur ये सब...

प्रोफ. दक्ष ने दरवाजा खोला और इंसान और वो अंदर चले gaye....main बहार hi था तो वो पीछे मदद के बोले...

प्रोफ दक्ष - अरे अंदर aao...bahar क्यों खड़े हो...

मैं समझ नहीं पा रहा था इन् सब का matlab....abhi मैं समझने की कोशिश hi कर रहा था की उन्होंने ने मुझे वापस आवाज di...aur मैं भी अंदर चला गया इस बार....

ये बिलकुल वैसा hi घर था जैसा इंसानो का होता hai....kuch भी मैजिकल नहीं tha....main तो सोच में पद गया ये देख के....

प्रोफ दक्ष - तुम भी baitho...main दोनों के लिए चाय लेके आता hu....tab तक बातें करो...

मैं बैठ गया वह और वो इंसान भी...

वो -और बीटा पढ़ाई ठीक थक चल रही है ना....

मैं क्या बोलता isko.....ye बोलता की हां अंकल सही hi चल रही है बस जादुई काढ़ा बनाने में थोड़ी परेशानी होती hai....Applied मैजिक में भी कुछ दिक्कतें आ रही है पर ध्रुव है तो सब ठीक थक हो जाता hai....aisa कोई जवाब देता usko...bas इसी वजह से मैं चुप रहा...

वो - लगता है अजनबी लोगो से बातें नहीं karte....par मैं अजनबी नहीं हु beta....main तुम्हारे मां को बचपन से जानता hu....aur तुम्हारी माँ उनको bhi.....acchi इंसान थी वो....

मैं अब और कंफ्यूज हो रहा tha....ek इंसान मेरे सामने बैठा है वो मुझसे बोल रहा है की वो मेरी उस माँ के बारे में जानता है जिसको अभी अभी प्रोफ दक्ष ने मेरी माँ बना दिया hai.....aur वो भी मरी हुई hai...main बस उसकी तरफ देखता रहा....

वो अपनी जगह से उठा और मेरे पास आ gaya....aur मेरे बगल में बैठ गया.....

वो अभी कुछ और बोलता उससे पहले वह पे पंकज आ gaya....dekhne में बीमार सा लग रहा tha....aate hi उसने पहले तो उस इंसान को Hi bola...aur फिर मेरी ओर देखने लगा...

इंसान - अरे पंकज beta...theek तो ho...tabiyat सही नहीं लग रही....

पंकज - हां अंकल वो फीवर आ गया tha...bas उसी वजह se...aap बताइये चाय लेंगे या कॉफ़ी...

इंसान - अरे वो तू....

तभी प्रोफ. एक ट्रे में चाय की 4 प्यालियाँ लेके आ gaye....aur सामने के टेबल पे रख diya....Pankaj भी आके बैठ गया wahi...Mujhe लगा जैसे सायद इनमे कुछ मिलाया हुआ ho...jisko पन्ने के बाद मैं बहस हो जॉन या ऐसा कुछ......

प्रोफ. दक्ष - हां तो बताइये क्या बात करनी थी...

इंसान - आप तो जानते है mujhe...maine कभी कोई कानून नहीं थोड़ा hai....par...kal

प्रोफ दक्ष - पर कल kya...arre खुल के बताइये आप जानते है मैं मदद करूँगा hi....

इंसान - हां इसी लिए तो आया hu....wo दरअसल कल कुछ पोलिसवाले आये और मुझे परेशां करने lage....ye सब एक जमीं को लेके hai....aapko तो पता है गाओं में मेरी जमीं है पुस्तैनी jamin....uspe किसी नेता की नज़र है अब वो अपने लोग और पुलिस दोनों को hi मुझे परेशां करने के लिए भेज रहा है ताकि मैं जल्दी से उस जमीं को बेच du...main नहीं बेचना चाहता usko...aapke तो कॉन्टेक्ट्स है ऊपर तक अगर आप...

प्रोफ. दक्ष - बस इतनी सी baat....aap चिंता मत करिये मैं देख lunga...aap चाय ख़तम करिये...

वो चाय पन्ने लगा और मैं समझने की कोशिश आखिर यहाँ चल क्या रहा hai....tabhi वो इंसान मेरी ओर देखने लगा और फिर बोलै...

इंसान - दक्ष जी चेहरा काफी मिलता है इसका अपनी माँ se....main उसी के बारे में बात कर रहा था....

प्रोफ दक्ष - हां चेहरा hi मिलता है bas...baaki harketein...wo तो बिलकुल अपने पिता वाली आयी hai....hahaha...

मैं - ध्रुव ये क्या बोले जा रहे hai....mujhe कुछ समझ नहीं आ रहा दोस्त...

ध्रुव - अब क्या bataun....yaa तो ये सब कुछ एक ढोंग है या एक बहुत bada...bahut hi बड़ा राज़ खुलने वाला hai....wo इंसान देख रहे ho...wo झूट नहीं बोल रहा...

मैं - क्या matlab...meri सकल सच में प्रोफ की बहन से मिलती hai...par ये कैसे हो सकता है....

इंसान ने अपनी चाय ख़तम की और वह से चला gaya....Pankaj उसको दरवाजे तक छोड़ने गया था.....

मैं - ये सब क्या hai...aap मुझे अपना भांजा क्यों बता रहे the.....aur वो insan....wo क्या बोल रहा था...

प्रोफ दक्ष - पंकज यहाँ aao...aur तुम बीटा बैठ जाओ पहली बार आये हो हमारे यहाँ...

मैं - वो सब chodiye...kya आप जानते थे की पंकज हमला करने वाला है एल्फ किंग के ऊपर...

प्रोफ. दक्ष - पहले एक बात को पूरा करलेते है बाद में दूसरे बात पे जाते hai....par tum...khair छोड़ो वो sab....haa मैं जानता था वो हमला करने वाला है और मैंने उसको roka.....par वो रुक्का nahi...aur फिर मैंने उसके हमले को roka....main नहीं चाहता था किसी को कुछ हो....

मैं - पर इसके वजह से बहुत कुछ हो gaya....DB उसको उसके देश से निकल दिया गया और अब वो यहाँ है...

प्रोफ दक्ष- यहाँ hai....aur वो भी इंसानो के bich....apne एलिमेंट के बारे में जानने के liye....ye तो अच्छी बात है naa.....waise जान बुझ के नहीं किया था कुछ humne....sab खुद बा खुद हुआ पर उसकी नियति उसको यहाँ लायी है....

मैं - तो आप अपने बेटे को बचने के लिए ये दलील दे रहे है...

प्रोफ. दक्ष - अब इसको जो भी samjho...waise अगर तुम चाहो तो उसको लेके जा सकते ho....aaj नहीं rokunga...jo सज़्ज़ा देनी है देदो....

मैं - हां wo....ek मिनट आज नहीं रोकेंगे से क्या मतलब आपने पहले मुझे कब रोक्का है...

मेरी ये बात सुन के प्रोफ. दक्ष को जैसे मुक्ति सी मिल गयी ho.....wo उतने ज्यादा कुश हो gaye...ar मैं तो था hi पहले से कन्फ्यूज्ड इसके बाद और ज्यादा हो गया....

प्रोफ. दक्ष - Aakhirkaar...thodi बहुत बुद्धि मेरी बहन की भी है tumme....warna मुझे तो ऐसा लगा जैसे तुम बस अपने पिता पार्थ की तरह hi हो..

मैं अब इतना कन्फ्यूज्ड था की अगर गलती से किसी इंजीनियर ने कभी कन्फूसिओं मैसूर करने के लिए कोई डिवाइस बनायीं hoti...to आज मुझे देख के वो डिवाइस ख़राब हो जाती...

मैं - आप मेरे डैड को कैसे जानते ho...aur आप मेरी माँ को अपनी बहन क्यों बता रहे हो....

प्रोफ. दक्ष - अब बहन थी तो बहन hi कहूंगा naa...Bua या चची तो नहीं kahunga....haa सौतेली बहन thi....par अपनी से ज्यादा प्यार करता था usse....par वो तुम्हारे Pita.....naa जाने कहा से वो आ गया और fir...kaash में उस वक़्त स्ट्रेंज वर्ल्ड के जगह यहाँ पे होता....

मैं - Kya...ye कैसे हो सकता है आप मेरे मां हो...

प्रोफ दक्ष - Haa...Mama hu....aur इस बात से मैं कभी खुश नहीं tha....main कभी नहीं चाहता था की नीलम पार्थ से शादी kare....Main उसकी शादी कही और karata...par...tumhare पिता आ gaye...aur फिर मेरी बहन हमसे दूर हो gayio....wo बस उसी के साथ रहा karti....Jab तक मैं स्ट्रेंज वर्ल्ड से वापस आया तब तक तो शादी भी होने वाली थी दोनों ki....aur tum...tum उस waqt...Pankaj...iske साथ jao....ye जो बोले वो karo...abhi इसको लेके जाओ यहाँ se....main खुद को संभल नहीं पा रहा कही गुस्से में कुछ ह गया तो मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाउँगा....

पंकज ने अपने पिता की बात सुन्नी और मेरे पास आया

पंकज - चलो अभी यहाँ से जाना hi सही है...

मैं - एक मिनट मुझे पूछना hai...bahut से सवाल है...

पंकज - हां बाद में पूछ lena......abhi नहीं...

मेरे ना चाहते हुए भी वो मुझे वह से बहार लेके gaya....meri समझ में कुछ नहीं आ रहा tha....kaha मैं यहाँ पूछ टाच करने आया था और ऐसी बातें बिन्ना पूछे पता चल गयी जिसके बाद तो बस क्या hi कहने....

मैं कुछ समजह नहीं पा रहा था....

पंकज - चलो चाट पे चलते है थोड़ी देर में दादा सही हो jaayenge....aisa अक्सर होता है....

यहाँ का छोड़ के अब हम निकलते है अपने दब के pass....wo इस वक़्त एक आश्रम में tha...yaha पर इंसान the...bahut सारे insan....aur दब इन् सब को बस देखे जा रहा tha...wo समझ नहीं पा रहा था की ये इंसान क्या hi सिखाएंगे usko....usko अभी भी लग रहा था की इन् इंसानो में कोई एक बहियत बड़ा जादूगर जैसा होगा कोई जो उसको अपने एलिमेंट के बारे में बताएगा....

पर ऐसा कुछ नहीं होने वाला tha....wo बढ़ता गया और उसको एक कमरे दिखते हुए एक इंसान वह से चला gaya....ek छोटा सा कमरा था जहा पे उसको अब रहना tha....itna सा कमरा तो सायद उसके यहाँ पे नौकरों को भी नहीं मिलती थी....

अभी वो ये सब देख hi रहा था की एक आदमी वह आता है और वो दब को एक मल्ला पहना देता hai...aur वह से चला जाता है....

दब - ये क्या hai....main ये सब नहीं पहनता...

वो लॉकेट को बहार निकलने वाला था पर निकल hi नहीं पाया वो उसके स्किन से बिलकुल चिपक सी गयी thi...WO गुस्से में वह से निकला और यहाँ वह देखने लगाउसको सामने से वो इंसान आता दिखा जिसके साथ वो यहाँ इस आश्रम में आया था...

दब - ये सब क्या है इसको निकालो...

इंसान - ये आपके प्रशिक्षण के बाद खुद hi निकल jaayegi....tab तक नहीं निकलेगी ye....ab चाहिए आपके ध्यान का वक़्त हो गया है...

दब - पर मैं ये नहीं पहना chahta....mujhe नहीं पेहेनना ये सब...

इंसान - अब कुछ नहीं हो sakta...aur अगर आपने कोई जबरदस्ती की तो आपकी ट्रेनिंग को और कठिन बनाया jaayega...aur जब तक आप ट्रेनिंग नहीं करते तब तक आपको कुछ खाने को नहीं milega...par ये सब मायने नहीं rakhta....abhi बस ये सोचिये की आपके लोग कैसे होंगे...

दब ने ये बात सुन्नी और सीरियस हो गया....

दब - कहा ध्यान लगाना है मुझे...

वो इंसान उसको एक तालाब के पास लेके गया वह कीचड़ hi कीचड़ tha....aur बदबू अलग आ रही थी....

इंसान - यहाँ pe...yahi पे आपको ध्यान लगाना है

दब - इतनी बदबू mein...main नहीं कर सकता...

इंसान - नेचर एलिमेंट है aapka...aapko नेचर के हर पहलु को अपनाना hoga...accha...bura....sundar....badsurat सब kuch...warna आप काबू नहीं पा सकोगे और ना अपने लोगो को बच्चा सकोगे...

दब ये बात सुनके वह बैठ गया और ध्यान लगाने की नाकाम कोशिश करने लगा.....

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखते है प्रतीक के लगे इस झटके के बाद क्या होता hai....saath में रूपल दीदी की नयी पावर्स की एक झलक
 
अपडेट - 50

अब तक

मुझे ोाता चला की पंकज मेरा भाई है.... :सिघ: और उसके पिता प्रोफ दक्ष मेरी माँ के सौतेले भाई hai....manne तो नहीं छह रहा था पर जैसे उन्होंने बताया और उससे पहले उस इंसान की कुछ बातों से वैसा hi laga....wahi दब खुद को इंसानो के साथ एडजस्ट करने में लगा हुआ था

अब आगे

मुझे पंकज के साथ भेज दिया प्रोफ दक्ष ne....main आना नहीं चाहता था पर पंकज ने कहा की वो अभी ठीक नहीं गुस्से में कुछ हो भी सकता है तो मैं वह से आ गया उसके साथ upar...kuch भी समझ नहीं आ रहा था....

पंकज - उन् सब के लिए सॉरी मुझे पता नहीं था की तुम...

मैं - क्या ये सब सच है या तुम दोनों मुझे बेवक़ूफ़ बना रहे हो....

पंकज - मुझे पापा ने बताया tha....abhi कुछ दिन पहले hi...tab से मैं तुमसे दूर hu...warna सायद hi कोई होगा जो मुझसे बच्चा हो...

मैं - ू तो तुम अभी भी लड़ना चाहते हो...

पंकज - नहीं नहीं ऐसा नहीं है मैं गलत था मैं समझ गया हु....

मैं - Galat...Elf किंग को मारने की कोशिश ki...tum गलत नहीं बहुत गलत ho...mann तो कर रहा है मुँह तोड़ दू तुम्हारा....

प्रोफ. दक्ष - कोई कुछ नहीं todega....aur तुम तुम जाओ यहाँ se...apne घर

मैं - हां चला जाऊंगा पर पहले आप ये क्लियर करे की आप मेरे लगते क्या है और कैसे....

प्रोफ. दक्ष - मैंने निच्चे जो कुछ भी कहा था सब सही tha...aur ab...ek सब्द नहीं निकलो यहाँ से....

मैं - नहीं आपको बताना होगा सब kuch....aap कैसे मुझे अपना भांजा बता सकते hai...aur आप ऐसे इंसानो के बिच में क्यों रहते है....

प्रोफ. दक्ष - ये jagah....ye मुझे याद दिलाता है मेरी माँ ki....tumhari नानी ki....wo भी इंसान thi....meri अपनी माँ की मौत स्ट्रेंज वर्ल्ड में hi हो गयी thi.....waha से पापा को यहाँ एक दत्त की हैसियत से भेजा गया tha...phir एक दिन वो माँ से मिले और उनको प्यार हो गया और फिर उन्होंने शादी कर li.....mujhe किसी भी चीज़ के बारे में खबर नहीं thi...kyunki मैं वह अपनी मैटरनल फॅमिली के साथ tha...apni पढ़ाई कर रहा tha....Papa ने मुझे शादी होने के बाद यहाँ bulaya...aur पहले कुछ बताया नहीं tha....Maa अच्छी thi...bahut अच्छी थी उनके होने से मेरे अंदर जो मेरे माँ के जाने के बाद खालीपन बन गया था वो ख़तम हो गया tha....fir पापा ने मुझे सब bataya...mujhe कोई भी ऐतराज़ नहीं hua...hota भी kyun...wo अछि थी मेरा ध्यान रखती thi....phir एक दिन मुझे वापस जाना pada...apni पढ़ाई के liye...aur उसके बाद एअर्थ पे मैं तुम्हारी माँ से मिलने आया tha...wo उसके छोटे छोटे haath...wo ungliyan...maine जब उसको गॉड में उठाया था तब मैं बहुत खुश tha...meri भी एक बहन आ गयी थी अब.... उस वक़्त मेरी छुट्टियां लम्बी समय के लोए thi...upar से यहाँ भी स्कूल खुला था तो मैंने पापा से बोल के कुछ साल यही पढ़ने का तय kiya...aur यह अपनी फॅमिली के साथ raha...issi घर mein...main दिन भर खेलता रहता अपनी बहन के साथ नीलम के saath....Neelam नाम ममा ने रखा था uska...kyunki मेरी अपनी माँ का नाम था ye...jab वो बड़ी हुई और स्कूल जाने के लायक हो गयी तब पापा ने मुझे भी वापस भेज diya...aage की पढ़ाई के लिए वापस स्ट्रेंज वर्ल्ड जाने का मान नहीं था पर जाना pada...waha से मैं आता रहता था मिलने सभी se....mere यहाँ से वह जाने में किसी को कोई दिक्कत नहीं थी क्यूंकि सब लीगल tha....mera जनम वही हुआ tha...to मैं वह वापस जा सकता था आसानी se....kheer फिर वो दिन भी आया जब तुम्हारे पिता से मिला main.....waise तो कोई और भी आने वाला tha...par वो नहीं आ पाया कुछ काम की वजह se...mujhe तुम्हारे पिता कभी भी पसंद नहीं aaye....wo बुरे the....galat काम किया करते the.....meri बहन की भी बिगड़ दिया था उसने.... पापा से मैंने कहा भी की इससे दूर रखो नीलम को पर पापा की बात भी नहीं सुनती थी wo....kuch कहो तो मुँह पहला लेती.... उसने किसी तरह पापा और माँ को राज़ी कर hi लिया शादी के लिए और फिर शादी कर ली उन दोनों ने... मैं अब आया तब पता चला mujhe...dukh तो बहुत हुआ परसोचा सायद इसी में वो खुश rahegi...par nahi.....kuch hi वक़्त के बाद वो रात भी आयी जब मेरा सब kuch....sab कुछ तबाह हो गया माँ पापा नीलम सब के सब... बस एक ये घर hai...aur यहाँ आस पास के लोग जो याद दिलाते है unki...unn दिंनो ki....issi वजह से रहता हु यहाँ मैं.... बहुत बातें हो गयी अब जाओ यहाँ से....

मैं उनकी ये कहानी अपने दिम्माग में सेट hi कर रहा था की उन्होंने इस बार मुझे वह से टेलिपोर्ट hi कर diya....aur मैं वापस से अपने घर में पहुंच गया हॉल mein....jaha सभी थे.....

चची - प्रतीक tum...tum टेलिपोर्ट होक क्यों aaye...abhi अच्छे से नहीं आता ना तुम्हे मैंने कहा था ना पहले प्रैक्टिस करो जब सब सही हो तब ऐसे ट्रेवल करो.....

बुआ - एक मिनट bhabhi....Bachhu कहा थे tum...school से टेलिपोर्ट तो हो नहीं sakte...yaha कैसे aaye..aur कहा थे....

मैं समझ नहीं पा रहा था की क्या kahu....kya इन सभी को पता था वो जो अभी मुझे पता चला पता तो होना hi chahiye...maine सोचा की पूछ के क्लियर कर लेता हु....

मैं - वो मैं प्रोफ. दक्ष के यहाँ tha.....waha एक बात पता चली मुझे की वो mere....mere..

दादाजी - हां वो तुम्हारे क्या....

मैं - वो मेरे मां है...

मैंने ऐसा बोलै और सभी एक दूसरे को देखने लगे....

मैं - तो क्या वो सच में मेरे मां hai....mujhe पहले क्यों नहीं बताया....

बुआ - तुमको खुद बताया क्या उन्होंने अपने बारे mein...aur क्या क्या बताया है...

मैं - नहीं आप लोग पहले ये बताओ की मुझे उनके बारे में क्यों नहीं बताया आपने...

चाचा - वो तुम्हारे मां hai...par उन्होंने hi हमसे और तुमसे कोई रिस्ता ना रखने का फैशला किया tha....Jab पार्थ और नीलम की शादी हुई तभी से वो नाराज़ the....fi...

दादाजी - उनको पार्थ पसंद नहीं और फिर जब उन् दोनों की मौत हुई तो उसने पार्थ को hi दोषी मान लिया और फिर हमसे भी कोई नट्टा नहीं rakha....bas यही बात है और कुछ nahi..aur ये बात तुम्हे नहीं बताय गयी क्यूंकि इसके जानने या ना जानने से सायद hi कुछ फर्क पड़ने वाला था...

मैं - फर्क नहीं पड़ता पर आप ये कैसे कह सकते ho....abhi और भी बातें होंगी ना जिनके बारे में आपको यही लगता hai....mujhe पता ह या ना हो क्या hi फर्क पड़ता hai...aaj एक मां आ गए मेरे samne....kal को कोई और रिस्तेदार आ jaayega...aur main....mujhe क्या है मुझे तो फर्क hi नहीं padta...Main जानू या ना जणू सब एक सम्मान hai...kass मुझे ये भी पता ना चकला होआ की मेरा एक परिवार है मैं मास्टर के साथ hi सही tha....sayad इससे भी कुछ फर्क नहीं पड़ता है ना...

सायद कुछ ज्यादा बोल गया मैं परए सब अंदर hi अंदर मुझे खाये जा रहा tha....naa जाने में खुद के बारे में और कितना कुछ नहीं जानता.... पर अभी तो बहुत कुछ बोल दिया था maine...aur इसका फल भी मिलना tha...aur वो मिला एक चटटा.... बुआ के हाथों से....

बुआ - ये क्या बोल रहे हो तुम....

मैं इस वक़्त थोड़ा कन्फ्यूज्ड थोड़ा ज्यादा गुस्से में और दुखी भी tha...upar से ये chatta....gussa और बढ़ गया और मैंने भी यहाँ वह नहीं dekha...bas दरवाजे से बहार चला गया... इससे पहले कोई बहार आता मैंने ज्वाला को याद किया और उसको पोर्टल खोलने को बोलै उसके कबीले तक के liye.....aur उसने खोल diya....Main पोर्टल से होते हुए वह पहुंच गया....

यहाँ पर भी सायद कुछ प्रॉब्लम चल रही thi....Jwala परेशां सा दिख रहा था....

मैं - तुम क्यों रारेषण लग रहे हो ज्वाला....

ज्वाला - वो याद है tumhe...jo यहाँ आया tha...wo मिल गया है पर...

मैं - कोण वो जिसके बारे में सिपाही ने बताया था जो चुप के यहाँ आया था....

ज्वाला - हां wahi...humko वो मिल गया hai....par वो एक एल्फ है और कोई आम एल्फ नहीं बहुत hi पावरफुल एल्फ hai...waise भी कोई एल्फ हमारे यहाँ नहीं आ sakta....elf क्या कोई भी लेकिन उसकी पावर्स इतनी ज्यादा है की वो यहाँ पहुंच गया...

मैं - तुम कहना क्या छह रहे हो साफ़ साफ़ बताओ...

ज्वाला - वो एल्फ किंग का खास आदमी था...

मैं - एल्फ king....DB के dad...yaha bhi...ye एल्फ वर्ल्ड की बातें कुछ समझ से बहार जा रही hai.....pahle निकिता फिर यहाँ ka....aur इन् सब में कही ना कही से एल्फ किंग जुड़े हुए hai....ek काम karo...Elf किंग पे नज़र रखने bolo...aur क्या यहाँ आस पास कोई ऐसी जगह है जहा मैं आराम से रह saku...kuch वक़्त के लिए...

ज्वाला - तुम यही raho...koi परेशां नहीं कर्जा....

मैं नहीं यहाँ nahi....koi ऐसी जगह बताओ जहा मुझे शांति mille.....main कुछ वक़्त ध्यान लगाना चाहता हु....

ज्वाला - ठीक है मैं एक जगह जानता hu....waha कोई आता जाता नहीं और जंगल के बीचो बिच होक भी वो सेफ है....

मैं - मुझे वह pahuchao...aur याद से ओल्ड आउल को खुद एल्फ किंग पे नज़र रखने बोलो.....

ज्वाला - सब ठीक है ना...

मैं - हां सब ठीक hai....ek और baat....koi भी यहाँ आने ना पाए samjhe...koi भी नहीं..

ज्वाला - उसकी फ़िक्र मत karo....maine खुद सब वापस से सही कर दिया है..

उसने एक पोर्टल खोला और मैं उसमे से hoke....bade बड़े पेड़ो के बिच चला gaya....mann बहुत hi ज्यादा असंत था होता भी क्यों nahi....aise हर रोज कोई भी रिलेटिव पैदा होने लगे तो होगा hi...aur ऊपर से वो मेरे किसी एक पैरेंट की बुराई करे तो और बुरा लगता hai....aur मुझे अभी तक ये भी नहीं पता के माँ पापा करते क्या the....Haa मुझे दादाजी ने बताया था kuch...par जी हुआ उसके बाद उनकी बातों पे भरोषा करना :सिघ:

मैं वही पे एक पेड़ के पास बैठ गया और ध्यान लगाने लगा....

ध्रुव - तुम्हे ऐसे नहीं आना चाहिए tha....tumare जाने के बाद क्या हुआ होगा....

मैं - शांत रहो मुझे ध्यान लगाने दो....

ध्रुव - तुम सब खो डोज वापस से....

मैं - वापस se....kya मतलब है तुम्हारा.....

ध्रुव - M....mmm..matlab पहले की तरह जैसे बचपन से तुम अकेले थे वैसे hi....

मैं - अगर सही नहीं बता सकते ना तो मुझे गलत रस्ते पे भी मत धकेलो samjhe....ab चुप रहो...

ध्रुव - देखो ये जगह सही नहीं है तुम्हारे liye...tumhare अंदर की डार्क पावर जाग रही है....

मैं - तो उनको बांधो यही काम है ना tumhara...aur तो कोई काम है nahi...jab भी कुछ पूछो तो ये मुझे पता नहीं hai....main नहीं बता sakta...bas ऐसे hi जवाब मिलते hai...ab चुप चाप उसको काबू में रखो...

इसके बाद उसकी आवाज नहीं aayi....main बैठ रहा ध्यान में ....

अंदर बहुत कुछ चल रहा tha....maine अपने थंडर एलिमेंट पे फोकस करना शुरू किया....

वही दूसरी ओर मेरे जाने के बाद...

दादी - ये क्या किया Poonam...dimmag ख़राब है तुम्हारा...

बुआ - आपने नहीं dekha...kaise बात कर रहा था wo...aur ..और उसने कहा की हम उससे ना मिलते तो अच्छा होता...

इतना बोल वो रोने लगी....

चची - वो परेशां hoga....par तुम्हे थोड़ा धैर्य रखना चाहिए था....

बुआ - पर भाभी आपने सुन्ना naa...wo क्या बोल रहा tha...ye sab...sab कुछ उन् दोनों की वजह से हुआ hai.....iss बार नहीं छोडूंगी उन्हें...

चाचा - पूनम याद है ना हमारे बिच सौदा हुआ tha...naa हम कुछ करेंगे ना wo....unko छोड़ो और प्रतीक को ढूंढो पता नहीं कहा चला गया होगा....

रूपल दीदी जो मेरे बहार जाने पे मेरे पीछे आई thi....wo अभी वापस घर में आती है...

चची - कहा गया वो....

रूपल दीदी - पता नहीं वो पोर्टल से गया है kahi....(Sayad वही गया ho...jaha हम गए थे उस din....par वह कैसे जाते है...)

चाचा - पोर्टल se.....isko इतना कुछ इतनी जल्दी कैसे समझ आ जाता hai.....Portal खोलना वो भी अभी अभी स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए मुमकिन नहीं hai....par ये..

दादी - रूपल बीटा कहा था वो पोर्टल वो जगह दिखाओ जहा से वो गया ....

रूपल दीदी सबको बहार लेके आयी और गार्डन के पास वाले पेड़ की ओर इशारा kiya....sab बड़े वह देखने lage....wahi निकिता रूपल दीदी के पास जाती है...

निकिता - आपको भी वही लग रहा है क्या....

रूपल दीदी - हां सायद वो वही गया hoga....jaha हममे लेके गया tha...par वह जाते कैसे है...

निकिता - पता नहीं कैसे जाते है waha...main तो आपके साथ hi पहली बार गयी थी...

रूपल दीदी - मैं भी पहली बार hi गयी thi...par हममे कोई रास्ता निकलना होगा वह जाने का....

निकिता - सायद हम उनको बुलाये तो वो यहाँ aayenge...aapko नाम याद है उसका जिससे प्रतीक बात कर रहा था...

रूपल दीदी - हां Jalwa...Jalwa नाम था uska...Jalwa पोर्टल खोलो.....

कुछ नहीं hua....hota भी कैसे एक तो वो बस मेरी सुनता tha....aur ऊपर से नाम गलत ले रही थी ye...jab कुछ वक़्त तक कुछ नहीं हुआ तो..

निकिता - जलवा नहीं दीदी ज्वाला नाम था ज्वाला से तरय करो...

रूपल दीदी - ज्वाला पोर्टल खोलो...

इस बार नाम सही था पर फिर भी नहीं खुला पोर्टल...

रूपल दीदी - ऐसे तो नहीं हो रहा कुछ....

वही वह सभी बड़े पोर्टल के बच्चे हुए हिस्सों को धुंध रहे the....Jab भी कोई पोर्टल खुलता है तो वह आस पास उसकी एनर्जी फ़ैल जाती hai...aur काफी वक़्त तक वही पे रहती है वो energy....par ये पोर्टल ज्वाला का बनाया हुआ tha.....aur इसकी एनर्जी को सायद hi ये लोग पहचान पाते...

बुआ - यहाँ पे तो वैसा कुछ भी नहीं hai...pata नहीं कहा चला गया होगा वो....

चची - हां कुछ नहीं मिला yaha....sayad हममे स्कूल और बाकी जगह देखना chahiye...wo कही मिल jaaye....aakhir कहा गया होगा वो...

दादाजी - हां ये भी सही hai.....waise भी उसको यहाँ ज्यादा जगहें पता नहीं है....

कविता मैडम - हो सकता है वो इंसानो के बिच चला गया हो.....

दादाजी - एक काम karo...tum और बहु वह jao...Pooonam तुम अपने भाई के साथ स्कूल के लिए niklo....aur हम दोनों दक्ष के यहाँ से होक आते hai....sayad प्रतीक वह गया ho....apne सवालों को लेके...

सबने हामी bhari...aur निकलने को हुए....

रूपल दीदी - पता चला क्या की कहा है वो...

बुआ - नहीं पोर्टल की ेनेर्गीएस नहीं मिल रही hai....wo सायद यहाँ नहीं hai.....tum दोनों एक काम karo...Madam के पास जाओ और उनको सब कुछ बताओ....

रूपल दीदी - ठीक है...

बुआ के जाने के बाद...

रूपल दीदी - अब तो पक्का है वो वही गया होगा.....

निकिता - Sayad....chaliye हम िप मैडम को सब बताते है सायद वो मदद कर दे....

रूपल दीदी - हां वैसे भी पोर्टल तो खुल नहीं रहा है...

रूपल दीदी और निकिता ने पहले तो ये पता किया की मास्टर है कहा क्यूंकि पिछली बार वो स्ट्रेंज वर्ल्ड से आयी hi नहीं thi....sayad वही रह गयी thi...matlab उसके बाद उनसे बात hi नहीं हुई....

पता करने पे पता चला वो वापस आयी hi नहीं है...

निकिता - अब क्या करे...

रूपल दीदी - पता नहीं कुछ समझ नहीं आ रहा है....

थोड़ी देर सोचने के बाद दीदी को पता नहीं क्या हुआ और वो मुस्कुराने lagi...wahi निकिता ये देख के समझ नहीं पायी की इनको हुआ क्या है....

रूपल दीदी - निकिता तुझे लड़ना आता है क्या...

निकिता - हां आता hai...par क्यों...

रूपल दीदी - मार मुझे..

निकिता - Kya...par क्यों...

रूपल दीदी - अरे मार to...tujhe खुद पता चल जाएगा..

निकिता - पर मैं क्यों मारु aapko...aap ठीक hona....chinta मत करो वो वापस आ jaayega...aap बस ठीक रहो...

रूपल - तुझसे नहीं hoga...hmm....ab क्या करी.....

निकिता - आप बात क्या कर रहे है...

रूपल - पता है उस दिन ना जब हम स्ट्रेंज वर्ल्ड में लड़ रहे थे ना तब वह पे जब मुझपे हुम्ला हुआ था तब वो सब आये the...sayad आज भी aaye....aur हम उनसे पूछ सकते है की प्रतीक कहा hai....aur सायद वो हममे लेके भी चले जाए...

निकिता - हां बताया था आपने पर मैं देख नहीं पायी thi....main तो प्रतीक के साथ थी ना...

रूपल - हम्म कोई बात नहीं आज देख lena....par उससे पहले एक ऐसी जगह बता जहा मुझे कोई मारे....

निकिता - ऐसी jagah...hmm..ek जगह है पर मैं पक्का नहीं बता सकती....

रूपल - वैसे एक मेरे दिम्माग में भी है पर वह समझ नहीं आ रहा वो आएंगे या nahi....issliye तुझसे पूछ रही hu...tu बता अपनी जगह...

निकिता - आपको मार्किट पता है naa....wahi पीछे जहा पुराणी दक्कन है वह पे मेरे साथी रहते hai....mere वह से आने के बाद मैंने आज तक उनका हाल नहीं puccha....sayad वो हममे मारने के लिए आये...

रूपल - हां ये उस लीग वाली जगह से तो अच्छा hi hai....waise भी वह पे वो बचने नहीं आने वाले honge...chalo वही चलते है फिर...

बस आयी और दोनों बस से स्कूल गए और स्कूल से होते हुए मार्किट में पहुंच गए....

रूपल - वैसे इसके बारे में हमारी बात नहीं हुई है ना....

निकिता - हां ज्यादा बात नहीं हुई hai....waise भी अभी तो हमारे बिच में बहुत सी चीजजें है जिसकी बातें नहीं हुई है...

रूपल - हां सही kaha....ab सुनने इस छोटू के मिलने के बाद ना हममे बहुत सी बातें करनी hai....tum अपने किस्से सुनना और मैं तुम्हे अपने कारनामे bataungi....waise भी नाउ वे अरे सीस...

निकिता - ठीक है....

दोनों आगे बढ़ते गए और पहुंच गए वही मार्किट के पुराने हिस्से में जहा पे अब उन् लोगो का कब्ज़ा था....

निकिता - कहा गए सब...

रूपल दीदी - यार टुन्ने तो कहा था काम बन जाएगा यहाँ तो कोई है hi नहीं....

निकिता - दीदी वो यही honge...chupe hue...thoda और आगे चलते है....

दोनों थोड़ी आगे गए और फिर कुछ hi देर में खुद को घिर्रा हुआ पाया...

"Nikita....tum तो भूल गयी humme....apno को...."

निकिता - मैंने अपनी बात कह दी thi...aur अब ये तुम सबपे है की तुम क्या चाहते हो.....

"तुमने तो कह दिया पर हमारा जवाब कोण सुनेगा.." इतना बोलते hi 2 लोग आगे आये और हुम्ला किया....

रूपल दीदी - मेरी बहन से दूर raho....Nikita...tu जा जाके baith...aur तुम sab.....mujhse निपटो पहले...

"Bahen....waah नए नए रिश्ते बना रही हो Nikita.....par इससे पुराने रिश्ते मिट नहीं जाते samjhi....aur इस बहन को हम समझते है...."

इसी के साथ जो 2 पहले से थे वो और 3 और एक साथ 5 लोगो ने दीदी पे वार kiya...Didi चाहती तो वो कुल्हाड़ी निकल सकती thi...kulhadi में पावर्स अभी भी thi....par उनको तो ज्वाला के लोगो को बुलाना था तो कुल्हाड़ी नहीं nikali...bas मैजिक से लड़ने का socha...aur अपने चारो taraf...barf जमा di....Water एलिमेंट और एअर्थ एलिमेंट था इनके पास...

बर्फ पे फिलहाल के वो सब गिर जाते है....

अभी तो दीदी बस गुस्सा दिला रही थी इन् सब ko....taaki ये और हमला kare....aur वो सब वह से जल्दी मदद भेजे....

उनके गिरते hi वो हसने लगी...

इससे उन् सब को गुस्सा आ गया...

"निकिता हमने ये तो नहीं सोचा था par....ab इसको नहीं छोड़ने वाले hum....baccha सकती है तो बच्चा ले...."

निकिता ने तो जैसे सुन्ना hi नहीं वो आराम से बैठी rahi....wahi दीदी और हसने lagi...inn सब का गुस्सा बढ़ता जा रहा tha.....unn लोगो ने दीदी पे मिलके वार kiy...kuch ने मैजिक से और कुछ ने physically....apne वेपन्स se....Weapons से तो दीदी खुद बच गयी पर वो agic...uski वजह से उनको चोट लगने वाली thi.....ki तभी वह पे उनके आस पास एकदम से अँधेरा हो गया.....

रूपल दीदी - ये क्या हो रहा है....

वो andhera....jaise कोई दीवार thi....jo उन् सभी के वारों को सोख रही thi...aur दीदी को कुछ नहीं हो रहा था....

निकिता - दीदी क्या ये वही है...

रूपल - पता nahi....par लगता नहीं ये वही hai....aas पास देखो कही तुम्हे उन् जैसा कोई दिख रहा है क्या....

निकिता ने आस पास देखा पर कोई दिखा hi नहीं.....

निकिता - नहीं दीदी उनमे से कोई नहीं है yaha...par ये क्या है....

रूपल - मुझे नहीं pata....par अब लगता नहीं वो आने वाले है....

निकिता.- तो अब क्या करे....

रूपल - मैं कुछ और सोचती hu...par उससे पहले इनको सबक सीखा दू....

दीदी ने अपनी कुल्हाड़ी nikali.....unki कुल्हाड़ी पे अब बट्स बने हुए the...aur रंग भी बदल गया था उसके मेटल एन्ड का....

दीदी ने दोनों हाथों में अपनी कुल्हाड़ी पकड़ी और उन् सब को धोना शुरू कर diya...Par किसी को मार नहीं रही थी....

जब सभी का मार खाना हो गया तो उन्होंने सभी को एक जगह इक्कठा किया,...

दीदी - अब सुनने ध्यान se.....ye मेरी बहन है samjhe.....isko कभी कुछ hua....to आज तो बस पित्त hai...uss दिन बचोगे नहीं...

निकिता - दीदी अब क्या kare....kaha से ढूंढे उसको....

रूपल - पता नहीं yaar.....aur ये हुआ क्या mujhe....agar ये जो भी था वो नहीं आया होता तो सायद वो आ गए होते....

निकिता - सायद यही आपकी नयी पावर hai....jo उस दिन आपको मिली थी....

रूपल दीदी - पता nahi.....par इसकी वजह से हमने मौका गवा दिया.....

निकिता - पता है aapko....Prateek ने ना मुझे भी एक पावर दी thi....sayad उससे कुछ पता chale....aur हम उस तक पहुंच जाए....

रूपल दीदी - कोण सी power...aur पहले क्यों नहीं बताया....

निकिता - ये खतरनाक पावर है didi...Dark power....ispe उसका खुद काबू नहीं hai...lekin इसकी वजह से हम दोनों hi जुड़े हुए hai...agar उसको कुछ होता hai...to मुझे भी होता है...

रूपल दीदी - hmm....ye तो अलग hi किसम की पावर लगती hai.....to क्या तुम उससे कांटेक्ट कर सकती हो...

निकिता - पता nahi...par सायद ध्यान लगाने से कुछ पता चले...

रूपल - sayad...par इसमें वक़्त बहुत ज्यादा लगेगा.....

निकिता - तो फिर क्या kare....aur कोई रास्ता नहीं है.....

रूपल दीदी - पता है नीलम चची ने एक बार एक कहानी सुनाई थी mujhe...tab छोटी थी मैं पर मुझे याद है अभी bhi....School में एक जगह thi....jaha पे लोगो का जाना मन्ना tha.....kyunki वह पे कुछ ऐसा है जो....

निकिता - जो ???

रूपल दीदी - जो आपके कंसंट्रेशन लेवल को बहुत ज्यादा बढ़ा देती hai....waha पे कोई भी क्रिया किया जाए उसका प्रभाव कई लाख गुणा बढ़ जाता है....

निकिता - तो क्या हम वह चले...

रूपल दीदी - Sayad....tum बताओ....

निकिता - हम चल के देख सकते है पर वो जगह है कहा...

रूपल दीदी - मैंने भी नहीं सुन्ना है और स्कूल में बहुत सी जगह है जहा स्टूडेंट्स का जाना मन्ना है हमे बहुत वक़्त lagega....hum कुछ और सोचते है..

िप मैडम - क्या सोचते hai.....mujhe पता चला तुम दोनों मुझे धुंध रही thi....kya बात है....

अच्चानक से मैडम वह आ गयी जिसकी वजह से दोनों hi घबरा गयी....

रूपल दीदी ने उनको सब कुछ bataya....IP मैडम ने सब सुन्ना....

"मुझे ऐसा नहीं लगा था की ये सब hi jaayega....Poonam को थोड़ा सोचना चाहिए tha....Prateek कोई आम लड़का नहीं hai....maine उसको इतने वक़्त तक अपने पास ऐसे hi नहीं रखा tha....ab पता नहीं वो कहा hai...mujhe नहीं भेजना चाहिए था उसको तुम सब के पास.."

रूपल दीदी - ये आप क्या कह रही hai...wo भाई है mera.....aap उसको मुझे दूर नहीं रख सकती....

मैडम - शांत हो jao.....maine उसको बताया था ना तुम सब के बारे mein.....ab ये बताओ उसको ढूंढने का कोई तरीका सोचा है या नहीं.....

रूपल दीदी - हमने सोचा tha...par वो काम नहीं आया...

मैडम - हां तो फिर रहने do....thoda भरोषा रखो uspe...wo आ hi जाएगा....

निकिता - अभी अभी आप परेशां थी और अब कह रही हो आराम करो....

मैडम - मुझे बस ये देखना था की वो खुद आएगा या nahi....aur मुझे पता चल गया है वो आएगा...

रूपल दीदी और निकिता को कुछ समझ नहीं आया...

मैडम - रूपल ने जिस तरह से उसपे हक़ के साथ कहा hi वो मेरा भाई se.....usse पता चलता है तुम सब के बिच सब सही hai.....aur उसको मैंने पल्ला hai....wo आ hi jaayega.....haa बाकियों से वो थोड़ा नाराज़ होगा पर रूपल तुम्हारे लिए वो आ hi jaayega...abhi उसको वक़्त दो कुछ...

रूपल दीदी - कब तक वापस आ जाएगा वो...

मैडम - पता nahi....sayad 2 घंटे में....2 साल में ...अब ये वही jaane....par वो आएगा ये तय hai...lekin तुम्हे एक काम करना hoga...dono को...

रूपल दीदी - क्या....

मैडम - टेलिपाथी सुनना है ना दोनों se....bas वही करना hai....Nikita उससे जुड़ी हुई hai....ye मुझे पता hai....aur tum....tum भी जुड़ी हुई ho...dono तरय करते रहो ध्यान लगते वक़्त उससे बात करने ki....jab बात होगी तो वो आ jaayega...Main चलती hu...kabhi जरुरत pade...to ुआड़ कर lena...tum दोनों पे नज़र होगी मेरी....

इतना यह के वो वापस चली गयी...

रूपल दीदी - अब क्या...

निकिता - हममे उससे बात करने की कोशिश करनी होगी.....

रूपल दीदी - Haa....aur इस बार वो आये उसको पैरों में रस्सी बाँध दूंगी मैं.....

निकिता - हां ये सही है फिर कही नहीं जा पायेगा वो...

दोनों वह से वापस स्कूल में जाते है....

निकिता - दीदी मैं यही रुक जाती hu..waise भी कल से क्लासेज है...

रूपल दीदी - नहीं कल वापस आए जाना आज चलो साथ में तरय करेंगे.....

निकिता - ठीक है चलिए.....

दोनों वह से घर वपा सजाते hai.....waha पे अब तक सभी आ चुक्के the....bas दादा दादी नहीं थे....

बुआ - कुछ पता चला तुम दोनों को...

रूपल दीदी - Nahi...Pahle तो मैडम नहीं मिली पर बाद में वो आयी और उन्होंने कहा वो वापस आ jaayega...chinta ना करे...

इतने में वह दादा जी और दादी आ जाती है.....

दादाजी - हममे अब उसको सब सच बताना chahiye....sayad वक़्त आ गया है....

दादी - पर आप समझ नहीं रहे वो बच्चा है कैसे समझ पायेगा ये sab....aur फिर कही वो.....

दादाजी - नहीं ऐसा नहीं hoga....hum उसको सब आराम से batayenge....aur उस बारे में बताएँगे hi nahi....tumne सुन्ना ना दक्ष ने भी उसको वो पूरी बात नहीं बताई है...

दादी - पर बाद में पता चलने पे तो वो...

चची - माँ हममे बताना तो होगा hi.....

दादी - तुम समझ नहीं rahi....hum खुद पूरी बात नहीं जानते हम कैसे भला सब उसको batayenge,.....humme इंतज़ार करना चाहिए...

चची - ये बात भी सही है par...kab तक..

दादी - जब तक वो सब समझने के लिए तैयार ना हो jaaye....ab इस बारे में बात नहीं होगी yaha...aur जब वो आये सब नार्मल होना चाहिए....

सबने उनकी बात मान ली....

वही मैं जब ध्यान में बैठा था और अपने ठंढेर पावर पे फोकस कर रहा था तभी मुझे एक नीले रंग की रौशनी dikhi.....choti सी hi थी पर thi....main उसपे फोकस करने लगा तो मैं कही और hi पंहुचा gaya....aur यहाँ पे भी वैसे hi बॉल्स thi...aur सायद मुझे इनको एक साथ करना था जैसा थंडर पावर के साथ किया tha.....ye सायद मेरी नयी एलिमेंट thi.....maine उनपे फोकस करना शुरू कर दिया.....

अभी के लिए इतना hi....

दोस्तों अभी बहुत काम वक़्त मिल पा रहा है अपडेट देने का तो सायद कुछ वक़्त तक ऐसा hi rahe...par जब वक़्त मिलने लग जाएगा तो अपडेट रेगुलर हो जाएंगे...
 
अपडेट - 51

प्रतीक घर से चला गया tha...aur जाके जंगल में ध्यान करने laga...wahi....sab उसको ढूंढने में लग gaye....issi बीच रूपल को अपनी नयी पावर्स के बारे में थोड़ा बहुत पता chala...par उससे प्रतीक के मिलने में कोई मदद नहीं होने वाली thi...wahi प्रतीक ने ध्यान में जाने से पहले ज्वाला से कहा था की ओल्ड आउल को खुद बजे एल्फ किंगडम में वह पे जो भी चल रहा है उन् सब का पता लगाने को....

अब आगे...

रूपल दीदी और निकिता दोनों घर आ चुक्के the...unn दोनों को जैसा मास्टर ने बताया था की टेलिपाथी से प्रतीक से बात करने की कोशिश kare....wo बस उसी में लग गयी थी.....

निकिता - दीदी अब सब सही hai....hum तैयार है....

रूपल - निच्चे बता दिया ना हम्म सोने वाले hai....koi ऊपर ना आये....

निकिता - हां बोल दिया है....

रूपल - हम्म ये सही hai...kyunki अगर हमारे कोशिश करते वक़्त कोई आया और हमारा ध्यान टूटता तो हममे वापस से शुरू करना hoga....aur ऐसे में बस वक़्त hi कट्टा जाएगा....

निकिता - हां समझ गयी...

दोनों hi वही जम्में पे बैठ गए और अपनी आँखें बंद करके लग गए ध्यान में....

वही मैं भी ध्यान में बैठा tha....aur अपने नए एलिमेंट को देख रहा था समझने की कोशिश कर रहा tha...ye दिखने में तो नीला tha...par इसका rang....wo बदल जा रहा tha...shuru में बस नीला tha...aisa लगा जैसे वाटर एलिमेंट ho....par कुछ बॉल्स मिलाने पे इसका रंग चेंज होने laga....lekin...bas कुछ hi देर के liye..aur उसके बाद वो वापस से नीला हो jaata.....maine ध्यान diya....par इसको समझ नहीं paaya...tabhi अच्चानक से मैं उस जगह से hi गायब हो गया और पंहुचा गया एक अँधेरी जगह में जहा कुछ भी नहीं tha...ye पहले जैसा नहीं था जहा पे मुझे बॉल्स एकता करने होते थे jisse.....meri पावर्स कंसन्ट्रेट होती रहे और मजबूत होती rahe....iss बार कुछ अलग tha....iss बार बॉल थे hi nahi...aur मुझे भी यहाँ थोड़ा अजीब सा लग रहा था थोड़ी घुटन सी हो रही thi....main ध्यान से उठना चाहता tha...par उठ नहीं पा रहा tha....kuch था ो मुझे रोकक रहा tha....kuch ऐसा जो सायद चाहता था मैं उसको अनलॉक karu.....aur सायद ये हो भी जाता अगर मुझे पहले निकिता और रूपल दीदी की आवाज ना आयी hoti.......pata नहीं कितना वक़्त गुजरा tha...yaa क्या हुआ tha....main बस एकदम से रुक सा गया tha.....aur उन् दोनों की आवाजें उन्होंने जैसे मुझमे जान hi दाल दी थी.....

मैंने अपनी आखें kholi....Main जंगल में hi tha...ussi jagah.....par आस पास की चीजजें बदल गयी thi....waha पे जो पेड़ पौधे the....wo जैसे सुख गए थे.....

मैं - ये सब कैसे हुआ...

ध्रुव - तुम पागल ho.....pata है क्या हो जाता अभी....

मैं - क्या हुआ hai....aur मैंने क्या किया....

ध्रुव - तुम 2 दिन से ऐसे hi बैठे हो ध्यान में बिन्ना कुछ खाये पिए हिल्ले दुल्ले....

मैंने ये सुन्ना और चौक gaya.....kyunki मेरे हिसाब से सायद....6 घंटे पहले में यहाँ आया था...

मैं - क्या बार कर रहे हो 2 दिन से.....

ध्रुव - हां 2 दिन se.....aur इस वजह से तुमने अपने चारो ओर एक घेरा बना रखा था जिसकी वजह से देखो क्या हो gaya...agar आज उन् दोनों की आवाज से तुम होश में ना आते तो डार्क एनर्जी तुमपे काबू पा लेती और तब मैं भी कुछ नहीं कर सकता था...

मैं - एक minute...maine कहा था तुमसे की डार्क एनर्जी का ध्यान रखना और तुमने मुझे क्यों नहीं रोक्का....

ध्रुव - ये सब बहुत जल्दी से hua....main तुम्हारे कहे अनुसार लगा हुआ था डार्क एनर्जी को सँभालने में पर फिर अच्चानक से ये सब हुआ और वो बढ़ने laga....wo बहार आने की कोशिश कर रहा tha....maine आवाज lagayi....koshish की पर कुछ फायदा नहीं hua....fir मैंने पूरी ताकत उस डार्क एनर्जी क रोकने में लगाने का फैसला किया....

मैं - इन् सब के कारन निकिता या ज्वाला को तो कुछ नहीं हुआ ना....

ध्रुव - नहीं मैंने सब संभाले रखा tha....aur अब मुझे आराम chahiye....main जा रहा hu....kuch वक़्त बाद hi सुनाई दूंगा तुम्हे....

मेरे और सवाल पूछने से पहले उसने ऐसा kaha....uski आवाज से भी लग रहा था बहुत थका हुआ है तो मैंने भी उसको जाने diya...aur यहाँ वह देखने laga...tabhi वापस से एक बार रूपल दीदी की धीमी सी आवाज सुनाई दी....

मैं - ये दीदी की और निकिता की आवाज कैसे सुनाई दे रही है mujhe....ye क्या बात hai....kahi कोई मुसीबत तो nahi...mujhe चेक करना चाहिए.....

मैंने तुरंत ज्वाला को bulaya....wo मुझे वह से बहार निकला और फिर पोर्टल से मुझे घर के बहार छोड़ दिया.....

मैं जल्दी से दरवाजा खोल के अंदर gaya...ander बुआ थी और चची bhi....mujhe देखा दोनों ने...

मैं - दीदी और निकिता कहा है......

बुआ कुछ बोलने वाली थी पर चची ने बस ऊपर की ओर इशारा किया और मैं तुरंत ऊपर चला गया....

ऊपर मैं पहले दीदी के कमरे में गया वह कोई नहीं tha....fir उस कमरे में जहा निकिता को रहने के लिए कहा गया था वह भी कोई नहीं tha....maine सोचा की कुछ बुरा हुआ है और मैं तुरंत वह से निकलने वालन tha...par तभी उस रूम के दरवाजे पे दीदी कड़ी dikhi.....aur उनके साथ निकिता भी थी...

मैं - दीदी आप ठीक हो naa...aur तुम निकिता तुम भी ठीक हो ना....

मैंने उनसे पूछा पर उन्होंने जवाब नहीं दिया बल्कि एक छठा मार दिया मुझे...

चटककक...

दीदी - कहा गया tha....bata नहीं सकता tha....aur 2 दिन से घर क्यों नहीं आया tu...tujhe पता है सब कितना परेशां थे

चटककक...

दीदी - बोलेगा yaa...aur मार कहानी है....

मैं - आप ठीक हो...

दीदी - nahi.....abhi nahi....abhi ruko....Nikita याद है रस्सी का कहा tha....leke आओ इसको बांध hi देते है आज...

निकिता - ये लो didi....waise एक दो मैं भी लगा du....iski वजह से बहुत परेशां हुई हु मैं भी....

दीदी - एक दो kya....isko बाँधने de...isko आज पंचिंग बैग बना देंगे....

चची - हो गया तुम दोनों का.....

चची की बात सुनके दोनों साइड हो गयी.....

मैं समझ नहीं पा रहा था की इनसे क्या kahu...haaa...gussa tha....par अब nahi....sayad गुस्सा संत हो gaya....yaa समझ में आ गया की मुझे ना बताने के पीछे जरूर कोई ना कोई वजह रही होगी....

चची ने मुझे dekha....sayad वो समझ गयी मैं क्या सोच रहा था....

चची - खाना खाने आ jao....taiyaar है खाना....

कुछ भी और नहीं bola....naa hi पूछा कहा गया था क्या kiya....bas खाने के बारे में कहा और वह से चली गयी....

निकिता - दीदी इनको क्या हुआ....

दीदी - मम्मी को... अब बस देखो कैसे इस छोटू की बंद बजती है बहुत सुख है ना इसको जाने ka..ab dekho....isko सच में निकल देंगे यहाँ से....

मैं - दीदी क्या बोले जा रही हो कुछ bhi....Chachi ने कहा ना निचे आना है चलो सब...

मैं निच्चे गया अभी भी बुआ वही बैठी हुई thi....khane के टेबल pe....main भी एक चेयर पे बैठने लगा पर उनसे dur....abhi समझ नहीं आ रहा tha...unke पास जाके क्या कहु...

मेरे वह चेयर पे बैठते hi वो उठ गयी और वह से अपने रूम में चली gayi....mujhe अच्छा नहीं laga....chachi आयी उन्होंने मेरे सामने खाना रखा और वह से चली gayi....Maine सीढ़ियों के पास dekha....naa तो दीदी और ना hi निकिता निच्चे आ रही thi...ab हॉल में मैं और चची थे बस...

मैं यहाँ वह देख रहा था....

चची - कोई नहीं hai...khana खाओ चुप चाप...

मैं - वो चची main...wo....

चची - kya...main वो कर रहे ho....pahle खाना खाओ उसके बाद बात करते है.....

बिलकुल ठन्डे लहज़े में कहा unhone....binna किसी इमोशन के....

भूख लगी होने के बावजूद मैं खाना नहीं खा प् रहा tha...khana सामने था पर फिर भी नहीं...

मैं - आपने खाया खाना....

चची - तुमको matlab....chup चाप खाना खाओ....

मैं वह से उठा और उनके पास gaya....wo मेरी ओर पीठ करके कड़ी थी....

मैं - चची आपने खाना क्यों नहीं खाया....

चची - तुमने नहीं खाया ना रूपल ने खाया और ना hi निकिता ne...naa तुम्हारी बुआ ने तो मैं कैसे khati.....kisi ने नहीं khaya...par तुम्ह इससे kya...tum खाना खाओ और यहाँ से चले jaao....fir 2-3 दिन में एक बार वापस आना और खाना खा के चले जाना ठीक है naa...aur हां अगर कोई गलती हो जाए हमसे तो एक दो दिन और लेट aana...ye सही रहेगा ना...

मैं - चची मैं गुस्से में था उस वक़्त...

चची - हां गुस्सा तो बस तुम लोगो को hi आता है naa....humko क्या है हम तो बस ऐसे hi hai....tumhare पापा घर छोड़ के चले गए the....humsab वेट करते रहे की कल aayege....parso आएंगे पर वो नहीं aaye.....naa तुम्हारी माँ aayi....haa वो कभी कभी बहार मिल लेती thi....mujhse रूपल se....par घर नहीं aayi....tum भी तो उनके जैसे hi हो naa....ghar छोड़ना तो जैसे खेल hai....to अब से हमने उम्मीद ना लगाए रखने के बारे में सोच लिया hai...tum आओ ना आओ हममे मतलब hi नहीं होगा...

मैं - CHachi...aisa मत कहो ना...

चची - क्यों ना kahu...ek छत्ता मार दिया पूनम ने तो घर से चले gaye....abhi रूपल ने भी मर्रा naa....khana खा के वापस से चले jaana...theek है ना....

मेरी समझ में नहीं आ रहा था अब कैसे इनको sambhalu.....aaj तो चची जैसे मुझे सुन्ना सुन्ना के hi रुलाने वाली thi...ek आखिरी कोशिश करने का सोचा मैंने और उनका हाथ पकड़ा निच्चे जमीं पे बैठ गया और उनकी ओर देखने लगा....

मैं - आपको मारना है तो मार lo...par ऐसी बातें मत karo...main कही नहीं जाऊंगा...

चची ने मुझे dekha....aur उठने को कहा और बस खाना खाने को कहा और वह से चली गयी बिन्ना कुछ bole....matlab जहा से शुरू किया वही पे ख़तम...

ये सब यहाँ हो रहा था वही आज डेमोस पे अलग hi कुछ चल रहा tha....Lucifer को अच्चानक से कोई ऐसी शक्ति का पता चला जिसकी वो उम्मीद भी नहीं कर सकता tha....naa सिर्फ उसको बल्कि और भी लोगो को ये पता चला...

लूसिफ़ेर ने अपने लोगो को bulaya...apne सिपाहियों ko....saath hi अपने गुप्तचरों को भी...

लूसिफ़ेर - आज hi किसी ऐसी शक्ति का पता चला मुझे जो यहाँ होनी चाहिए thi....wo कोई आम शक्ति नहीं hai....wo डेमोस की अपनी शक्ति hai...aur वो कही और भी hai.....mujhe वो शक्ति chahiye....jaha भी है वो वो जगह तबाह कर do.....wo शक्ति वापस यहाँ आ जायेगी...

लूसिफ़ेर ना सिर्फ सबको ये बता रहा था बल्कि खुद को याद भी दिला रहा था इस चीज़ज़ के बारे mein....ek गलती जो बहुत पहले उससे हुई thi....jiska ये नतीजा tha....aur अब वो उस गलती को सुधारना चाहता था....

आज के लिए इतना hi मिलते है वेडनेसडे को नए अपडेट के saath....jaha dekhneg....Kaise हर जगह डार्क पावर के होने की बात का पता चलते बातें शुरू हो जाती hai...aur साथ hi हीरो कैसे नार्मल करता है अपने घर के लोगो ko....aur फिर उनका स्कूल वापस जाना....

छोटा अपडेट है नेक्स्ट बड़ा hoga...aur दिए गए दिन पे hi आएगा..
 
अपडेट - 52

प्रतीक घर तो पंहुचा गया था पर उससे सब नाराज़ the...waise अभी तो सबको पता भी नहीं चला tha...wo बस अपनी चची को मानाने में लगा हुआ tha...khair...wahi दूसरी तरह डेमोस पे बहुत हलचल हो रही thi....kyunki सबसे पहले उन्ही लोगो को पता चला था की ये कोण सी एनर्जी पावर है जिसका आभास सभी को हुआ था....

अब आगे

हुआ ये था की जब पिछले 2 दिन से प्रतीक ध्यान में बैठा हुआ tha....tab उसके अंदर की डार्क power...uski बॉडी पे कण्ट्रोल पाने की कोशिश करने lagi...uar वो सायद कर भी लेती अगर रूपल और निकिता की आवाज ना आयी hoti...khair...inhi सब में डार्क पावर की मौजूदगी का पता सभी को लग गया tha...par अभी ये स्पस्ट नहीं कर पाए थे लोग की ये कोण सी पावर hai...Dark पावर की बात hi ऐसी hai...iske बारे में बस कहानियों में बताया गया hai...aur कही नहीं...

खैर..

लूसिफ़ेर को सबसे पहले इस बारे में पता चला क्यूंकि डार्क पावर कुछ ऐसा था जैसे उसी की चीज़ज़ हो जिसका उसने सौदा किया tha...lekin उसने अपने हिसाब से उस पावर को ना जाने कितने सौ साल पहले hi नस्ट भी कर दिया tha...saath में उस पावर वाले को bhi.....lekin उसको वापस से उस पावर के वह होने का आभास हुआ hai...aur इसी वजह से उसने अपने लोगो को सबसे पहला काम उसका पता लगाने और उसको ख़तम करने को कहा है...

वो जानता है उसके ये लोग कभी भी उस पावर के सामने टिक नहीं sakte...wo इन् लोगो को बस उस पावर को परखने के लिए hi भेज रहा tha....wo देखना चाहता था की जिसके पास भी है ये पावर कही उसने उसपे काबू तो नहीं पा लिया hai...agar ऐसा हुआ होता तो uske...aur ना जाने कितने hi लोगो का एक नया दुसमन सामने आने वाला था वो भी बहु hi ताकतवर...

वही बाकी प्लैनेट्स पे भी इस पावर के होने की बातें होने lagi....ye बिलकुल उसी तरह का था जैसा की उन् बच्चो की कहानियों में बताया जाता tha....par बच्चो की कहानियों पे कोण hi याक्किन करता hai....issliye सभी प्लैनेट्स ने जांच के आदेश दे diye...wo तो अच्छा था ये पावर एअर्थ पे एक्टिव नहीं हुई thi....ye एक्टिव हुई थी ज्वाला के yaha....aur वो jagah.....wo भी बस बच्चो की कहानियों में hi थी मतलब उसके होने के सबूत बहुत hi काम the...lekin पावर का आभास तो हुआ था तो पता भी लगाना tha.....sab लग चुक्के थे ऐसा करने में...

वही एअर्थ पे भी इस बारे में बातें फैलनी लगी मैजिकल क्रीचर्स के बिच में...

अपना हीरो अभी भी लगा हुआ था चची से बात करने में और wo...wo उसको इग्नोर कर रही thi...ab रूपल दीदी भी निच्चे आ गयी थी निकिता के साथ....

प्रतीक - दीदी मैं क्या karu...chachi तो बहुत गुस्से में है....

रूपल - मैंने तो पहले भी कहा था तू गया chotu...gaur मैं इसके बिच में आयी ना तो मेरा भी पत्ता saaf...tujhe तो खाने को दे भी रही hai...mujhe वो भी नहीं मिलेगा...

मैं - तो क्या आप मदद भी नहीं करोगी...

रूपल - मैं क्यों करू madad....tunne मुझे बताया था तू कहा जा रहा hai...tu तो bas...gayab हो gaya.....tujhe पता भी है घर में सब कितना परेशां the....Mummy कको dekho...aur अभी तो पापा दादाजी और दादी बाकी hai...aur बुआ तो...

मैं - मुझे पता hi नहीं चला की कैसे 2 दिन बीत गए वर्ण मैं क्यों भला 2 दिन वह rahta....aur उस वक़्त मैं समझ नहीं पा रहा tha...aap हेल्प करो ना....

रूपल - ये बता तू गया कहा tha...wahi ना उस जगह जहा हम दोनों को लेके गया था...

मैं - हां वही गया था...

निकिता - दीदी छोड़ो fir....issi ने कहा होगा उनसे मदद करने ना आने ko.....jisse हम वह ना जा paaye....ab आप भी हेल्प मत करना

मैं - Kya...maine ऐसा कुछ नहीं कहा tha.....aur क्यों कहूंगा मैं bhala.....apni फॅमिली पे कुछ भी खतरा आये तो क्या मैं नहीं आऊंगा.....

रूपल - तो वो क्यों नहीं आये थे....

मैं - मुझे कैसे पता मैं तो खुद उनके पास नहीं था....

निकिता - अभी तो कहा वही the...ye झूट बोल रहा है दीदी....

मैं - निकिता वो कोई छोटी जगह नहीं hai....aur वह सिर्फ ज्वाला और उसके लोग hi नहीं रहते hai...aur मैंने किसी को मन्ना नहीं किया....

रूपल - हां हां ठीक है मान liya...waise भी तू ऐसा नहीं कर sakta...haa तो अब sun...Mummy को मन्नान है ना तो पहले बुआ को manao...bua ने 2 दिन से खाना नहीं खाया hai...aur मम्मी इसको लेके तुझसे बहुत गुस्सा है और ये खाना देना इसी के लिए tha...par तू कहा समझेगा

मैं - Kya....bua ने 2 दिन से खाना नहीं खाया...

निकिता - Haa...wo सायद तुम्हारे जाने की वजह खुद को मान रही thi...bas इसी लिए सायद....

रूपल - सायद नहीं यही सच hai...aur छोटू मम्मी मुझसे ज्यादा उनको मानती hai...ab सोच lo...jaao और उनको मनाओ मम्मी भी मान जायेगी....

चची - Nikita....Rupal खाना हो गया हो तो अपने कमरे में जाओ....

रूपल दीदी - हां मम्मी....

निकिता - मेरा अभी बाकी है....

रूपल - पागल है kya....yaha जो होने वाला है वो यहाँ से देखना सेहत के लिए सही नहीं hai...upar chal...upar से देखेंगे

निकिता - हम्म ठीक है.....

दोनों उठी और ऊपर chaldi.....jaate जाते दीदी ने मुझे आल थे बेस्ट bola....par मेरी समझ नहीं आ रहा था बुआ को कैसे मनौ ab...Chachi तो मन्ना सामने तो आयी थी naa...wo तो मेरे आते hi रूम में चली गयी थी....

मैं किचन में गया चची वही पे थी...

चची - कुछ चाहिए....

मैं- वो बुआ के लिए खाना.....

चची - वो नहीं खायेगी....2 दिन से भूखी है अब भी नहीं खायेगी....

मैं - आप थाली दो मैं उनसे मिलने जा रहा हु.....

चची ने मुझे एक बार dekha....aur फिर थाली में खाना दाल के मुझे दे दिया....

मैं जब जाने लगा तब उन्होंने कहा....

चची - अगर उसने खाना नहीं खाया तो समझ लेना.....

मैं बिन्ना कुछ बोले सर निच्चे किये हुए उनके रूम के सामने चला गया....

मैंने दरवाजा पे दस्तक दी...

बुआ - भाभी मुझे भूख नहीं है आप जाओ....

मैं -b....bbb..bbua मैं hu...main अंदर आ सकता हु....

उनकी तरफ से कोई आवाज नहीं आयी...

मैं - Bua....main अंदर आ रहा हु...

पहले तो लगा ये दरवाजा बंद करके बैठी hogi....maine दरवाजे पे हाथ लगाया तो दरवाजा खुल गया...

मैं अंदर gaya...wo बीएड पे बैठी thi....accha रूम था तस्वीरों से और ट्रॉफीज से भरा hua.....maine एक नज़र उन् चीज़ों पे डाली और फिर वापस से बुआ को देखने लगा जो मुँह घुम्मा के बैठी हुई थी बीएड पे.....

मैं - Bua...aapne खाना क्यों नहीं खाया....

No आंसर.....

मैंने 2 बार और ऐसे hi घुम्मा फिर्रा के पूछा पर कुछ भी नहीं बोली wo....wo तो देख भी नहीं रही थी मुझे....

मैं आगे बढ़ रहा था तभी गलती से पेअर की ऊँगली पे बीएड का किनारा लग gaya....aur छोटी ऊँगली पे जब चोट लगती है तो दर्द तो होता hai.....mujhe भी हुआ और बोलते वक़्त मेरा दर्द भी उसमे सदफ जाहिर हो रहा tha.....jisko सुन के बुआ मेरी ओर palti....main एक हाथ में थाली liye...aur जिस पेअर पे चोट लगी थी उसको हवा में उठाये खड़ा था....

बुआ - क्या hua...kaha चोट लगी..

मैं - वो पेअर mein....bed के कार्नर से...

बुआ मेरे पास आयी...

बुआ - दिखाओ mujhe....aur खड़े क्यों ho....baitho जल्दी.....

मैं बैठ गया उनके बीएड pe....wo मेरे पेअर को देखने lagi.....ye छोटी सी चोट मुझे लगी थी और बुआ परेशां हो gayi...aur मैंने क्या kiya....pahle उनका दिल dukhaya....unka hi नहीं sabka...aur उसके बाद वह से चला भी gaya...wo भी इस तरह से की बुआ को लगे उनकी hi गलती है isme...aur अब वही मेरे लिए परेशां हो रही थी....

मैं - रहने दो कुछ नहीं हुआ है...

बुआ - चुप चाप बैठा रह मुझे देखने दे....

मैं बैठा रहा उनको देखता रहा ऐसे उनको अपने लिए परेशां होता देखना और मैंने जो किया वो सब सुन के मुझे रोना आ रहा tha....ek दो आशु तो निकल भी गए थे आँखों से....

बुआ ने मुझे पूछने के लिए मेरी ओर देखा और उनको वो आशु दिख गए.....

बुआ - बच्चू बहुत दर्द हो रहा है kya....Bhabhi....isko चोट लग गयी hai....aap बर्फ लेके आओ....

मैं कुछ बोलू उससे पहले वो भी वह आ गयी....

चची - क्या हुआ isko....aur ये रो क्यों रहा है...

बुआ - वो इसको चोट लग गयी....

चची - खाना देने आया था तुमको और ये भी सही से नहीं हुआ इससे...

बुआ - Bhabhi....aap क्या बोल रही हो इसको चोट लगी हुई है और आप....

मैं -कुछ नहीं हुआ hai....aap पहले बैठो यहाँ....

बुआ ने मेरी ओर देखा फिर चची की oor...aur फिर मेरे बगल में बैठ गयी बीएड पे....

मैं - आपने खाना क्यों नहीं खाया....

बुआ - पागल है kya....Bhabhi इसके लिए कुछ लेके आओ इसको चोट लगी है और ये ये सब पूछ रहा है....

मैं - अरे चोट नहीं लगी hai...aap ये बताओ खाना क्यों नहीं खाया आपने....

बुआ - मेरा मैं नहीं था....

मैं - अब है मैं या अब भी नहीं है...

बुआ - नहीं है mann...aur तुझे kya....tu जा यहाँ se....Bhabhi इसको अंदर क्यों आने दिया आपने ये तो घर छोड़ के गया था ना....

मैं - मैं जा सकता हु क्या अपनी bua....apni चची और बाकियों को छोड़ ke....wo तो उस वक़्त मेरा दिम्माग ख़राब था...

चची - कुछ ज्यादा देर तक ख़राब नहीं रहा क्या दिम्माग.....2 दिन बाद आया तू वापस....

मैं- वो मैं कही फंस गया था CHachi.....warna मैं क्यों भला नहीं आता...

बुआ - फंस गया tha....kya matlab...tu ठीक है ना....

मैं - हां ठीक hu...aur अभी ये जरुरी नहीं है अभी खाना खाओ aap.....agar नहीं खाया तो मैं सच में चला जाऊंगा.....

बुआ - हां तो ja....aur इस बार वापस भी मत aana....aur आया तो मैं नहीं मिलूंगी....

निकिता - ये लोग तो बहुत इमोशनल hi रहे है दीदी....

रूपल दीदी - मैंने कहा था वह रहना सही नहीं है abhi....abhi तो कुछ हुआ hi नहीं hai....jab तक छोटू को बुआ 3-4 थपड ना लगा de....nicche नहीं जा सकते.....

निकिता- पर देखने से तो नहीं लग रहा की इसको मार पड़ेगी...

रूपल दीदी - वो बुआ hai....aur उनके साथ अभी मम्मी भी है...3 पक्के hai.....dekh लेना...

वो दोनों ऊपर से ये सब देख रही थी और बातें कर रही thi...wahi मैं बुआ को खाना खाने के लिए मन्ना रहा था पर वो नहीं मान रही thi....ulta वो तो और मुझे बहार चले जाने को बोल रही थी....

मैं - मैं कही नहीं jaunga.....main भी खाना नहीं khaunga...jab तक आप नहीं कहती....

पता नहीं चची को क्या hua...ek थपड मार दिया मुझे ऐसे hi....Main अपने गाल पे हाथ रखे खड़ा tha...unki ओर देख रहा था....

बुआ - भाभी आपने मारा क्यों इसको....

चची - चेक कर रही थी अभी भी दिम्माग वैसा hi है या अब सब सही है...

बुआ - तो क्या आप मारोगी इसको.....

चची - देखो ये अब सही है अब ये नहीं jaayega....tum खुद तरय कर lo...hai ना प्रतीक....

मेरा नाम लेके मेरे ओर देखते हुए उन्होंने हां बोलने का इशारा kiya...maine हां बोल दिया....

चची - Dekha....ab तुम तरय कर के dekho...lagao 2-3 ये कही नहीं जाएगा....

मैं - Kya....Chachi आप.....

चची - क्या चची aap....hum कैसे मान ले तुम अब सही ho....kya पता फिर किसी दिन ऐसे hi भाग jao.....Poonam लगाओ लगदी se...nahi तो मैं मारती हु...

बुआ - भाभी आप क्या पागल हो गयी ho....ye कही नहीं jaayega...aur इसको मारने की कोई जरुरत नहीं है....

चची - तरय करना बनता hai...saath में ये इसके लिए सज़्ज़ा भी हो jaayegi...agli बार से ऐसा करने का सोचेगा भी नहीं ये....

मैं - मैं नहीं जाऊंगा kahi....aur आप चाहो तो मार भी सकती ho...waise भी सभी का दिल दुखाया है maine...bas जोर से मत मारना....

मुझे लगा बुआ नहीं maaregi....unhone एक के बाद एक 3 थपड मार diye....main दोनों गालो पे हाथ लगा के बैठा रहा...

बुआ - भाभी खाना lao..ab सही है सब....

मैं - हां अब सही है सब बस मेरे गालो को छोड़ ke....maine तो ऐसे hi कहा था आपने तो मार hi diya....aur आप चची ...आप भी

बुआ - क्या आप bhi.....agli बार ऐसा कुछ करने का सोचा भी ना तो समझ लेना...

मैं - नहीं karunga....aap खाना खाओ pahle....aur बाकी सब कहा है उनसे भी तो मार कहानी है....

चची - डरो मत और कोई नहीं है तुमको मारने के liye....haa अगर पूना, का मैं करे तो एक दो baar....accha वैसे तुम ए कहा the...aur तुमने कहा तुम फंस गए the...kahi पोर्टल के अंदर तो नहीं

मैं - नहीं चची वह nahi....main ध्यान कर रहा था 2 दिन से....

बुआ - 2 दिन se.....mazak कर रहे हो क्या...

मैं - नहीं मैं सच कह रहा hu...issi वजह से नहीं आता yaha....mujhe पता hi नहीं चला कब 2 दिन बीत गए...

बुआ और चची मेरी बात सुन रही thi....tabhi दरवाजे पे दादी आ गयी...

दादी - प्रतीक बीटा कहा चला गया था tu....humne कितना ढूंढा तुझे...

मैं बोलता उससे पहले उनकी नज़र मेरे गालो पे गयी जो अभी लाल हुए पड़े थे.....

दादी - बीटा ये चोट कैसे लग gayi....kisi ने मर्रा kya.....kya किसी ने तुझे पकड़ के रखा tha....bata मुझे,...

उन्होंने तो दादा जी और चाचा जी को भी बुल्ला लिया वही और उनको दिखने लगी मेरे gaal....wahi ये सब देख ke...Chachi और बुआ थोड़ा घबरा गयी....

मैं - नहीं ऐसा कुछ नहीं है वो तो बुआ ने.....

मैं बोलने hi वाला था की बुआ ने आखें बड़ी करके मेरी ओर देखा.....

चाचा - पूनम ne...poonam ने क्या beta...batao....

मैं - वो चची ने....

अब बारी मेरी thi...inn दोनों ने मुझे ऐसे मारा था जैसे मेरे गाल ना हो कोई खिलौना ho...waise हॉट नहीं लगी thi....par अब मस्ती करनी थी जिससे सब नार्मल सा हो जाए....

चची का नाम लिया तो उन्होंने मेरी ओर dekha...akhne बड़ी करके...

मैं - वो इन् दोनों ने मेरे गाल खिंच खिंच कर ऐसे कर दिए है....

दादी - तुम दोनों ने किया aisa....dekho तो कैसे लाल हो गया है इसका gaal.....aisa कोण करता है...

थोड़ी देर फिर यहाँ वह की बातें hui...aur सब नार्मल सा होने लग गया था....

दादा जी जो चाचा से कुछ बातें कर रहे the...wo उसी डार्क पावर को लेके thi...wo बता रहे थे की किसी ख़ास ताकत के होने का पता चला है....

मैं उनकी बातें सुनने लगा....

उनसे बस यही पता चला है की किसी अनोखे टक्कट का पता चला है...

हमने एक दिन और घर पे hi बिताने का तय kiya....par दब के उस क्लोन को स्कूल भेज दिया tha....aur अगले दिन फिर हम सब भी स्कूल में वापस चले gaye....waha पहुंचे तो वह पे भी इसी डार्क पावर की बातें चल रही thi....master अभी यहाँ नहीं thi....wo कही और गयी हुई थी.....

नेक्स्ट अपडेट में मिलते है देखते है दक्ष मां जी के साथ अब कैसा रिस्ता रहता है और पंकज के saath.....wo भी स्कूल वापस आया tha.....saath hi कुछ और बातें
 
अपडेट - 53

अब तक

घर में लगभग सब सही हो गया था लगभग इस्सलिये क्यूंकि कोई भी चीज़ कभी पूरी तरह से सही नहीं hoti...khair...ye सब होने में मुझे पीटना भी पड़ा tha...wahi दूसरी तरफ हर जगह बस उस डार्क पावर के चर्चे हो रहे the...Lucifer ने अपने लोगिओ को बोल दिया था वो पावर जहा भी दिखा था वो जगह ढूंढने और साथ hi...jiske पास वो पावर है उससे भी ढूंढने ko...dusre प्लैनेट्स पे अभी इतना कुछ नहीं हो गया था...

अब आगे...

डार्क पावर का जब पता चला उस वक़्त फोमोस पे भी लोगो को पता चला था उसके बारे mein....Slayer को bhi....wo इतने दिन में खुद को वह एडजस्ट करने में लगा हुआ tha...wo जगह उसको सूट नहीं कर रही thi...kyunki वह वो ध्यान लगा नहीं पा रहा tha....aatmayein भी बहुत सीमित थी waha...jo उसको मिलती thi....wo कमज़ोर होता जा रहा tha....kuch दिन तो उसने फोमोस के लीडर को hi चुनौती देने के बारे में socha....par वो दिखे तो ना उसको कोई चुनौती de.....wo वह पे लड़ाई के वक़्त होता hi नहीं tha...aur जैसे hi लड़ाई ख़तम होती वो वापस आ jaata....Slayer ने बहुत कोशिश की पर उसके हाथ कुछ लगा hi nahi....jab तक वह पे एल्फ कंट्री से वह के लोगो को ना भेजा गया tha....ELf country...Strange वर्ल्ड का एक hissa....jaha के क्रीचर्स के आत्माओं में ज्यादा शक्ति होती thi....Slayer ने उनका भी सीकर kiya....par सायद ये उसकी भूल thi....jinhe वो शीदी बना के ऊपर जा सकता था उसको उसने खा liya...sayad वही लोग the.....jo उसको ज्यादा शक्ति दे सकते थे जिससे वो धययन में बैठ सक्के और ध्यान लगा sakke...warna तो फोमोस hi आपकी एनर्जी लेवल इतनी काम कर देती है की आप उस हालत में hi नहीं रहते की ध्यान लगा sakko....aur ये सबके साथ होता था....

खैर ये सब तो पहले की बातें thi.....usko जब डार्क पावर के होने का अहसास हुआ तो वो चौक gaya...buri तरह चौक गयाए उन् पावर्स में से एक था जिनके बारे में वो सोफ़िया से सुन्ना करता tha....jo अगर उसके पास होती तो वो बहुत पावरफुल hota....aur अभी तक उसने ना जाने कितने hi प्लैनेट्स तबाह कर दिए hote....par लाख ढूंढने के बाद भी ना तो सोफ़िया को और ना hi स्लेयर को उस पावर का पता chala...aur आज जब वो इस हालत में था तब उसको पता चला इसके होने के बारे mein....jab वो कुछ नहीं कर सकता था...

स्लेयर को खुद पे गुस्सा आ रहा tha...usne पास पड़े एक पाथेर पे एक मुक्का maara...aur पाथेर टूट गया पर साथ hi उसके हाथों से खून भी निकलने laga....wo खून फोमोस की धरती पे दिर रही thi.....usne अपने हाथ को देखा जो थोड़ी देर में ठीक हो गया और वो वह से चला gaya....par उसने वो नहीं देखा जो उसको एक नयी उम्मीद दे सकती thi....yaa सायद उसको परेशां कर सकती थी...

उसका खून जम्में पे गिर्रा और गायब हो gaya....aur ऐसा होते hi.....Waha के लीडर जो अभी अपने कमरे में बैठा अपने बेटी के बाजरे में सोच रहा था उसको झटका सा laga...par वो समझ नहीं पा रहा था वो खुस्स हो या dukhi...aaj इतने सालों बाद उसको उस जगह से मुक्त करने वाला आया tha....par उसकी मुक्ति का एक hi जरिया था और वो मौत thi.....lekin अभी वो मरना नहीं चाहता था वो अपनी बेटी को देखना चाहता था उसको बताना चाहता था अपने बारे में उसके बारे mein...aur वो सब जो वो जानता tha.....par...

वो अपने कमरे से बहार गया और किसी को फोमोस पर की मिटटी और पानी लाने को kaha....aur खुद एक खली शीशी लेके उसको हवा में घूमने लगा जैसे हवा भर रहा हो usme.....fir उसने आसमान की और dekha.....thodi देर में आज भी लड़ाई का वक़्त होने वाला tha....wo वह से गायब हो गया....

वही एअर्थ पे स्कूल में

प्रेजेंट टाइम...

हम स्कूल में the...aur हमारी क्लास शुरू होने वाली thi....wo दब का क्लोन उसको मेरे साथ रहने को बोलै गया था तो वो मेरे साथ hi रहता ताकि किसी को कोई शक न ho...aaj पहली क्लास में एक असिस्टेंट प्रोफ hi आया tha...par उसने बताया की कल से नए प्रोफ आने वाले है उस सब्जेक्ट के लिए जिनको खास ओरियन से बुलाया गया hai.....jadugaron के प्लेनेट se....uss इंसान ने जैसा बताया था उस हिसाब से तो वो उसी का साथी होना चाहिए पर एक मामूली insan...mamuli तो nahi...ek खास insan...par फिर भी वो इंसान hi था गंदे बदबूदार इंसान जो ऐसी बातों पे लड़ते रहते है जिनका कोई मतलब hi nahi....unhi में से ek...Orion world...jadugaron का प्लेनेट वह के एक बन्दे को जानता ho....aur वो बाँदा उस इंसान के लिए काम करता hai.....ab या तो वो बाँदा बहुत hi बेकार tha....yaa ये इंसान सच में बहुत खास tha....khair....humne पहला क्लास किया और फिर दूसरे क्लास के लिए निकल gaye....ye क्लोन साला कुछ बोलता hi नहीं tha....aisa लगता था जैसे कोई छीजज़ हो जो चल रही है bas.....Main और निकिता दोनों hi उसके साथ उनकंफर्टबले महसूस कर रहे the.....wo किसी भी तरह दब की जगह नहीं ले सकता था.....

2ंद क्लास प्रोफ दक्ष का था यानी मामाजी ka.....ghar से तो भगा दिया tha.....yaha से कैसे भगा सकते है wo....yaha पे उनको मेरे सामने आना hi hoga....haa ये बात और है मैं अपने सवाल नहीं पूछ सकता यहाँ unse...jinke बारे में मैं जानना चाहता हु.....

मैं अपनी माँ के बारे में और जानना चाहता hu....aur डैड के बारे में bhi....haa डैड के बारे में सायद बस बुरा hi बताये ye....par माँ के बारे में तो पत्ता चलेगा hi inse....ghar पे माँ के बारे में ज्यादा पता यही चल पता वह तो मकम डैड की बातें भी बहुत काम होती है....

मैं निकिता और उस क्लोन के साथ अंदर gaya...Prof दक्ष पहले से क्लास में the....hum अंदर गए अपने सीट्स पे बैठ gaye...aur उन्होंने क्लासेज शुरू कर di.....jaise पहले होती thi......aisa लग रहा था मेरे यहाँ होने से उनको कोई फर्क hi नहीं पद raha....aur ये मुझे अजीब लग रहा tha....maine पढ़ते वक़्त 2-3 क़ुएस्तिओन्स भी पूछे उनसे ताकि मैं अपनी मौजूदगी के बारे में उनको बता सकू पर उन्होंने आंसर दिया और bas....khatam....

कहा मैं ये सोच रहा था की सायद मुझे यहाँ देखने के बाद वो चिढ़ jaaye....fir मुझे अपने पास बुल्ला के daante...par ऐसा कुछ हुआ hi नहीं.....

क्लास ख़तम हुई मैं थोड़ा निराश सा था....

निकिता - क्या hua...aise क्यों हो गए....

मैं - मैंने सोचा था मामाजी से बात करूँगा उनसे माँ के बारे में कुछ पता करूँगा वो कैसी थी ये sab....par इनको मेरे यहाँ होने से कोई फर्क hi नहीं पड़ा जैसे....

"waah...kya बात है...."

निकिता - तुम यहाँ क्या कर रहे हो.....

मैं - पंकज तुम क्या कर रहे हो यहाँ....

हां ये पंकज था जो सायद मेरी बात सुनके अभी हिस्से जा रहा था....

पंकज - मैं भी यही पढता hu....to यही रहूँगा naa.....aur हां tum...koi भी परेशां करे मेरे पास aana...samjhe...

निकिता - :अप्प्लायसे: जो परेशां करता है वही बोल रहा है अगर कोई परेशां करे तो उसके पास चले आना और परेशां होने के liye....niklo यहाँ se.....nahi तो....

मैं - निकिता रूक्को yaar....aur पंकज तुम ऐसा क्यों कह रहे हो...

पंकज - क्या मतलब क्यों कह रहा hu.....tum भाई हो mere.....tumhara बड़ा भाई होने के नाते मुझे तुमको बचाना चाहिए इन् सब से....

मैं - क्या....

पंकज - मैंने किताब में पढ़ा है....2 दिन से पढ़ रहा hu...."I ऍम ा नई बिग बरोथेर" उसमे बताया है कैसे अपने छोटे भाई का ध्यान rakhe....par सायद वो इंसानो के लिए hai....aur हम तो नसान है नहीं टी मैंने कुछ अपने नियम बनाये है....

मैं - क्या बोले जा रहे हो tumm....mujhe समझ नहीं आ रहा है....

निकिता - (हस्ते हुए) ये बच्चो वाली किताब पढ़ के आया है कैसे एक छोटे बच्चा जो बड़ा भाई बनता है उसको अपने छोटे भाई का ध्यान रखना chahiye...Maine देखा था ये बुक एक बार.....

पंकज - वही एक किताब मुझे मिली मैंने वो पढ़ ली hai....aur अब मैं अपने भाई का ध्यान रखूँगा....

मैं - नहीं मुझे कोई जरुरत नहीं है िन्न्न सब की मैं ठीक hu....tum जाओ....

पंकज - देखो यार मैं ना यहाँ बहुत अकेला hu....aur तुम तो ये भी जानते हो मैं तकुछ कुछ बिगब भी गया hu...kuch नहीं थोड़ा ज्यादा hi....Dad मुझपे ज्यादा ध्यान नहीं dete....ab तुम मिलहो मैं बस तुम्हारे साथब रहना चाहता hu....sayad हम अच्छे दोस्त बन जाए....

मैं - पता नहीं क्या बोले जा रहे हो तुम...

निकिता - एक मिनट यहाँ आना

निकिता ने मुझे पदक और खींचते हुए एक तरफ लेके गयी....

मैं - ये क्या तरीका है....

निकिता - चुप रहो और मेरी बात sunno....tumko अपनी माँ के बारे में जानना है ना तो इससे अच्छा मौका और क्या hoga....Pankaj भी तो बता सकता है ना जो उसको पता hoga...aur sayad....Prof.Daksh भी पिघल जाए...

मैं थोड़ी देर सोचने के बाद...

मैं - वाह तुम तो सही कह रही ho....matlab मुझे इसके साथ रहना चाहिए....

निकिता - हां और इससे यहाँ भी हममे कोई परेशां नहीं करेगा....

मैं - वैसे भी कोई नहीं करता परेशां पर तुम्हारी बात सही hai...thik है फिर.....

मैं और निकिता दोनों hi उसके पास वापस गए....

मैं - ठीक है मैं रेडी hu.....par पहले दोस्त hi बनते है भाई बाद में...

पंकज - ठीक hai.....aur हां निकिता तुमने मेरी हेल्प की naa....ab तुम्हे भी अगर कोई परेशां करे तो मुझे batana....main देख लूंगा उसको...

निकिता - मैं खुद हैंडल कर lungi...Prateek नेक्स्ट क्लास का वक़्त हो रहा है....

हम दोनों वह से जाने लगे तो पंकज ने पीछे से आवाज देते हुए कहा की खाने के टेबल पे मिलते है....

हमने बाकि के 2 क्लासेज kiye....aur उसके बाद फिर अपने अपने रूम में चले gaye.....Room में मैं hi गया था वो तो कविता मैडम के पास चली गयी थी हमेशा की तरह....

मैं वही बैठा हुआ था की तभी ओल्ड आउल के कुछ लोग मेरे पास आ गए....

मैं - क्या बात है तुम सब यहाँ.....

वो - हममे ओल्ड आउल की ओर से सन्देश मिला hai....wo अभी यहाँ आने में अशमर्थ hai...iss वजह से सन्देश भेजा है...

मैं - पर वो मुझे भी बता सकता था....

वो - उन्होंने तरय किया tha...par सायद आपको सुनाई नहीं दिया....

मैं - ये क्या बोल रहे ho.....mujhe सुनाई नहीं दिया.....

मैंने ध्यान hi नहीं दिया था आज तो मुझे ध्रुव ने भी कुछ नहीं कहा था और पूरा दिन बीतने वाला था....

मैं - ध्रुव तुम सुन रहे हो...

ध्रुव की आवाज नहीं आयी....

मैंने उन् सब से मैसेज के बारे में पूछा.....

वो - वह पे काफी हलचल मच्छी हुई है ना सिर्फ वह पे फैली उस बीमारी के कारन बल्कि 2-3 और भी बातें hai....ek तो कोई पावर की बातें चल रही है और उन् सब का मन्ना है इससे उन् जैसो का खत्म हो jaayega....aur एक वह के युवराज के एक फैसले को लेके hai....usne इस वक़्त वह पे कर बढ़ा दिया hai....Maharaj को इस बारे में पता चला है और अभी इस्पे चर्चा होने वाली है....

मैं - उस एनर्जी के बारे में कुछ और भी पता है क्या....

वो - बस इतना hi बताया गया हममे बताने ko....ab हममे इजाजत दीजिये...

मैं - हम्म ठीक है....

मैं - ध्रुव तुम सुन रहे ho....tum ठीक हो ना....

मुझे समझ नहीं आ रहा था वो जवाब क्यों नहीं दे रहा ऊपर से उस ओल्ड आउल से भी बात नहीं हो paayi...sayad कुछ गड़बड़ हुई है....

मैं तुरंत hi ध्यान में बैठ गया.....

मैं वही पहुंच गया उस नए एलिमेंट के pass...abhi तक मुझे पता नहीं चला था ये है kya....waha पंहुचा और मैं ध्रुव को पुकारने लग गया....

मैं - ध्रुव सुन्न रहे हो...

थोड़ी देर में उसकी आवाज आयी....

मैं - तुम जवाब क्यों नहीं दे रहे थे....

ध्रुव - आराम कर रहा था main.....aur तुमको भी आराम करवा रहा था....

मैं - मतलब....

ध्रुव - तुम्हारी बॉडी पे कुछ असर हुआ है डार्क पावर के karan....aur अभी ये होना नहीं चाहिए था बस इसी वजह से मैंने उन् सब को आराम करने के लिए बंद कर दिया है....

मैं - क्या मतलब है तुम्हारा...

ध्रुव - अभी कुछ वक़्त तक तुम किसी से कांटेक्ट नहीं कर पाने wale...kal से सब सही हो जाएगा...

मैं - kYa....to वो तुम हो जिसकी वजह से ऐसा hua....Old आउल मुझसे बात करना छह रहा था....

ढहरुव - Ooo....mujhe पता नहीं chala....par अभी कुछ नहीं हो सकता....

मैं - हां बात हो गयी है पर अगर ज्वाला भी बात करना छह रहा होगा तो....

ध्रुव - हां सायद छह रहा hoga....par वो यहाँ खुद भी आ जाता....

मैं - आगे से ऐसा कुछ करने से पहले बता dena......ab और भी कुछ है जो तुम्हे मुझे बताना चाहिए.....

ध्रुव - हां अलबूस और कूपर भी अभी आराम कर रहे है और वो सायद 2-3 दिन बाद hi utthe....wo बहुत थक्के हुए है...

मैं - क्या हुआ unko...aur इस बारे में मुझे क्यों नहीं बताया....

ध्रुव - हुआ कुछ नहीं है बस नयी एलिमेंट की वजह से वो थक गए hai.....tumhare एलिमेंट्स उनके अंदर भी जाते hai....aur वो थक जाते है....

मैं - एलिमेंट से याद aaya...mujhe मेरे एलिमेंट के बारे में पता नहीं है बताओ क्या है ये....

ध्रुव - खुद पता karo...aur अब जाओ यहाँ se...mujhe आराम करना है...

मैं कुछ बोलता उससे पहले मेरा ध्यान टूट गया tha...aur मैंने अपनी आखें kholi....waqt देखा तो खाने का वक़्त हो चूका था...

मैं जल्दी से उठा और फ्रेश होक चल दिया खाना खाने के लिए वह पंहुचा तो पंकज निकिता के पास बैठा tha.....wahi जहा मैं दब और वो बैठा करती thi....DB का क्लोन आया hi नहीं था वह....

मुझे उन् दोनों ने देखा तो मुझे भी वह बुल्ला liya....main भी अपना खाना लेके वही पे बैठ gaya....aur खाना खाने लगा...

पंकज - तो तुम्हे और क्या पसंद है....

मैं - क्या....

पंकज - अरे मतलब तुम और भी कुछ करते होंगे न...

मैं - हां करता हु ना अभी तो यहाँ पढ़ाई करता hu.....aur किसी चीज़ज़ के बारे में ज्यादा पता नहीं है....

पंकज - मतलब.....

मैं - मतलब मैं नहीं जानता यहाँ और क्या कुछ है करने को पढ़ाई के अलावा....

पंकज - मज़ाक कर रहे ho....Nikita तुम बताओ तुमको क्या पसंद है....

निकिता - Mujhe....Main बस कविता मैडम के साथ उनका काम सीखती hu....kaise वो इलाज करती है लोगो का.....

पंकज ने अपना हाथ सर पे मारा....

पंकज - तुम दोनों मजाक कर रहे हो naa......ek को कुछ पता hi nahi.....nahi दोनों को कुछ पता नहीं hai....tum दोनों को पता है यहाँ पे गेम्स भी होती है....

मैं - हां पता है उसके लिए hi तो हममे उड़ने के बारे में बताया जाता है....

पंकज - Kya...udna इस्सलिये सिखाया जाता है ताकि हम खुद को बच्चा sakke.....tum दोनों को कुछ नहीं pata....mujhe याक्किन नहीं हो रहा....

मैं - तुम बताओ क्या होता है यहाँ....

पंकज - क्या नहीं होता ये puccho....tum दोनों hi पढ़ाकू लग रहे ho...tum पढ़ाकू लोगो वाले क्लब ज्वाइन कर सकते ho...yaa फिर नार्मल क्लीयबस में जाओ वह कम्पीटीशन्स होती रहती hai....tum सायद स्ट्रेंज वर्ल्ड में भी चले जाओ वह के स्कूल्ज में अपने स्कूल को दर्शाने के liye.....main भी गया था waha.....aur.....Rupal भी तो गयी thi....usne कुछ नहीं बताया है तुमको....

मैं - तुम रूपल दीदी को जानते हो....

पंकज -वो हमारी सुपर सीनियर thi,hamare टाइम की सबसे स्मार्ट स्टूडेंट thi...unke नाम के बहुत से अवार्ड्स hai...main इसीलिए तो सोच रहा hu..ki तुमको पता कैसे नहीं है जबकि तुम उन्ही के साथ रहे आये हो...

मैं - नहीं मैं पहले उनके साथ नहीं रहता था मैं कही और रहता था....

पंकज - कही और रहते थे मतलब....

मैं - ये सब किसी और दिन बताऊंगा आज nahi.....waise भी खाने का टाइम ख़तम होने वाला है....

पंकज - ठीक hai...kal मिलते है phir...aur तुम दोनों को मैं कुछ क्लब्स में इंट्रोडस करवा देता हु.....

इतना बोल के वो निकल liya....Main और निकिता भी वह से उठ के चले गए....

निकिता - क्या हममे क्लब्स ज्वाइन करने चाहिए.....

मैं - पता nahi....aur दीदी ने इसके बारे में तो कभी बताया hi नहीं....

निकिता - हां मैंने बस इसके बारे में पढ़ा था यहाँ के गाइड में पर मुझे कभी वक़्त hi नहीं milla.....aur मैं जाना भी नहीं चाहती thi....par....

मैं - पर kya....ab जाना है तो जा सकती हो तुम....

निकिता - हां जाना है mujhe....main इस स्कूल में उन् सब से दूर इसीलिए तो आयी थी ताकि आगे बढ़ते jaun.....aur मैं ऐसे मौको को नहीं छोडूंगी....

मैं - हां ये सही है तब तुम्हे जाना hi चाहिए...

निकिता - मैं अकेले नहीं जा रही तुम भी चल रहे हो...

मैं - हम्म ठीक hai.....main भी chalunga.....issi बहाने वह के स्कूल को भी देख लेंगे....

आज के लिए इतना hi कल मिलते है नए अपडेट के saath...Raat में..... जहा हम dekhenge....clubs के बारे mein...aur वो नया prof....Orion wala....sath में कुछ और बातें Heroine....sayad आ जाए कुछ उपदटेस में अब :सिघ:

नोट - वह यूएससी में स्टोरीज है उनको भी पढ़लो कभी :क्राई2:
 
अपडेट - 54

अब तक

मैं और निकिता बातें करते हुए अपने अपने रूम्स में जा रहे the...Clubs के बारे में जिनके बारे में पंकज ने बताया tha....wahi फोमोस को अपना नया लीडर मिल गया था पर ये बात उस लीडर यानी स्लेयर को पता hi नहीं tha...wo जान hi नहीं रहा था इस बारे में वही जो अभी लीडर था उसको समझ नहीं आ रहा था वो इस जहह से मुक्त होने की खुसी मनाये या अपने बेटी से ना मिल पाने का dukh....wo समझ hi नहीं पा रहा था इस बारे में....

अब आगे...

वो अपने रूम में चली गयी और मैं अपने रूम mein....room में आया मैंने आज पुरे दिन के बारे में सोचा जैसा क्या कुछ हुआ tha...ye sab....uske बाद मैं सोने के लिए चल diya....waise भी आज कुछ था नहीं करने ko....main सो gaya.....aur सोते hi आज कही और hi पहुंच गया मैं

पता नहीं कोण सी जगह थी ye....saamne एक दरवाजा था बड़ा सा darwaja....uske सामने मैं बहुत छोटा लग रहा tha....maine उस दरवाजे को chuwa....aur दरवाजा थोड़ा सा खुला उसमे से तेज रौशनी आयी और मैं जाग गया.....

उठके देखा तो सुबह होने वाली thi....ye अजीब tha....maine घडी में वक़्त देखा तो 4 बजने वाले the....main जल्दी से फ्रेश होक चल दिया वह जहा पे हम ध्यान लगाया करते the...waha जाके मैं ध्यान लगाने लग गया आज सबसे पहले मैं hi वह आया tha....fir सायद बाकी लोग भी आये the.....DB का वो क्लोन bhi....khair.....aaj मैं अपने नए एलिमेंट पे ध्यान दे रहा था उसको कंसन्ट्रेट करने की कोशिश करता जा रहा था....

काफी वक़्त तक ऐसा करने के बाद मैं अपनी जगह से utha....waha देखा तो सब आये हुए the.....Bua भी थी और कविता मैडम bhi....ye सही मौका लगा मुझे बुआ से क्लब्स के बारे में जानने ka....waise भी उनसे पूछना तो था hi....

मैंने थोड़ा वेट किया क्यूंकि वो अभी भी ध्यान लगा रही थी....

मैं - बुआ ये क्लब्स के बारे में कुछ बात करनी थी....

बुआ - Clubs....kon सी क्लब्स...

निकिता - हम्म वो बुआ हमने सुन्ना है स्कूल में क्लब्स है जहा पे कम्पीटीशन्स होती है और हम भी भाग लेना चाहते है....

बुआ - हम्म मैं देखती हु इसके बारे mein....waise तुम दोनों को इन् सब में क्यों जाना है ऐसे भी तो तुम दोनों सही hi ho...aur उनसे ज्यादा काबिल भी हो...

मैं - आप मन्ना क्यों कर रही ho....Rupal दीदी भी तो थी इनमे...

बुआ - उसकी बात और thi....tum...main देखती हु क्या कर सकती hu....Nikita तुम कर सकती हो participate....main सब देख लुंगी.....

मैं - Buaaaa.....ye क्या बात हुई...

बुआ - क्या क्या बात हुई मैंने कहा ना मैं इस बारे में सोचती hu....aur निकिता तुम चिंता मत करो मैं सब देख लुंगी...

निकिता - बुआ फिर रहने do....ye नहीं जाएगा तो मैं भी नहीं jaungi....aur क्या मैं भी आपको बुआ बोल सकती हु....

बुआ - हां बोल सकती हो क्यों नहीं बोल सकती par...baccchu इसके जाने में सायद कुछ दिक्कत hongi....main मास्टर से और घर पे इस बारे में बात किये बिन्ना नहीं बोल सकती कुछ....

मैं - हां तो करो ना बात...

बुआ - फिर से थपड खाने का मैं है kya....sahi से बात करो...

मैं - पर आप मुझे क्यों नहीं जाने दे rahi...aur पूछ ा है तो जल्दी से पूछो...

बुआ - घर में मैं अभी मैसेज पंहुचा dungi....waha से सायद शाम तक खबर भी आ जाए भेजना है या नहीं पर मैडम का क्या उसने भी पूछना hoga....aur निकिता बच्चू तुम क्यों नहीं जा रही अब...

निकिता - मैं इसी के साथ जाउंगी नहीं तो मैं भी नहीं जा रही...

कविता मैडम - सह hai...acchi खस्सी ज़िद्दी है ये bhi...Rupal से काम नहीं है ये...

बुआ - हां देख रही हु main....accha मैं घर पे बात करती हु और मैडम से भी कांटेक्ट करने.....

मास्टर - क्या बात है पूनम मुझे याद किया....

बुआ बोल hi रही थी की मास्टर ठीक उनके पीछे आ gayi....aur ऐसे hi bola....jis वजह से बुआ चौक gayi....saath में हम सब भी...

बुआ - मैडम aap....aap ऐसे.....

मास्टर - तुमने याद किया तो मैं आ gayi..,.batao क्या बात है...

बुआ ने मास्टर को सब बताया..

मास्टर - इसको रोक नहीं sakte....tumhare यहाँ से सभी इन् क्लब्स के हिस्से बनने है तुम खुद bhi.....aur अच्छी खस्सी परफॉरमेंस थी तुम्हारी bhi.....tumhara रिकॉर्ड टूटता या नहीं अभी तक.....

बुआ - हां मैडम रूपल ने hi तोड़े है मेरे सारे records.....aur अभी सायद उसी के रिकार्ड्स चले आ रहे है...

मास्टर -हां तो अब उनके टूटने का भी वक़्त आ गया hai...bhejo दोनों ko....Nikita...acche से रिकार्ड्स थोड़ेगी saare....aur तुम तुम वह इस्सलिये नहीं जाओगे की jeeto...tum वह सीखने जा रहे ho...kuch पाने जा रहे ho...samjhe....

बुआ - मैडम में घर में भी एक बार पूछ लेती हु फिर...

मास्टर - हां ठीक है उनकी भी राइ लेना सही hoga...waise मेरे तरफ से दोनों को hi छूट है वह जाने की और हिस्सा लेने की बाकी तुम अपने घर का देख lo.....Kavita अभी कुछ काम है क्या तुम्हे....

कविता मैडम - नहीं बस थोड़ा सा काम है मैं बाद में कर लुंगी आपको कुछ काम है क्या.....

मास्टर ने उनको अपने साथ चलने को कहा वही मैं निकिता और वो क्लोन वापस चले गए रेडी होने और बुआ अपने वबीन में वह से मेरे बारे में पूछने. ..

मैं तैयार hua....aur 1सत क्लास के लिए निकला....

मुझे याद आया इस ध्रुव के बारे में मैंने उसको आवाज लगायी चेक करने के लिए की आज भी आराम कर रहा है या अब सही है ये....

मैं - Dhruv.....aaj कैसे हो....

ध्रुव - मैं सही hu...aur तुम्हारी बॉडी भी लगभग से सही है.....

मैं - चलो ये अच्छी बात है....

मैं आगे जा रहा था की निकिता ने मुझे ज्वाइन कर liya....hum दोनों क्लास में गए वह पे एक नया चेहरा था जो सभी स्टूडेंट्स के सामने खड़ा tha....lamba चौड़ा sarir....rang का सावला कह सकते hai....aur बाल कुछ नीले रंग के the...aankhon पे एक चस्मा लगा हुआ था....

हमने उसका इंट्रोडक्शन मिस कर दिया tha...darasal वो hi पहले आ गए थे और शुरू हो गए थे....

हम दोनों बैठे हुए उनकी बातें सुनने lage....wahi सब की वो ओरियन में कुछ बच्चो को पढ़ाया करते थे स्कूल के बाद की padhayi.....unhone एअर्थ का भी जिक्र किया 2-3 बार वो एअर्थ की और यहाँ के लोगो की बहुत तारीफ कर रहे थे.....

आधी क्लास तो इसी में निकल दी उन्होंने उसके बाद फिर शुरू हुआ प्रैक्टिकल क्लास जिसमे उन्होंने नए नए टेक्निक्स सिखाये पर मैं उन् सब को पहले से जानता था....

निकिता और बाकी सब वो सब सीख रहे the...main बस देख रहा था.... ये क्लास ख़तम hui....aur मैं और निकिता वह से nikle..aur हम अभी मामाजी के क्लास में जाने वाले थे की पता चला वो आज नहीं आने wale.....aur ना hi उन्होंने किसी असिस्टेंट प्रोफ को अपनी क्लास लेने कहा hai....unhone क्लास ऑफ कर दी थी bas....hum सब का ऑफ था अब हम ऐसे hi यहाँ वह घूम रहे the...ki तभी पंकज आ गया हमारे पास...

पंकज - तो तैयार हो चलने के लिए

निकिता - आज nahi.....aaj बुआ पहले घर में बात करेंगी उसके बाद hi हम आ पाएंगे सायद.....

पंकज - kya....itni paabandhi.....ye तो सही नहीं लगता....

निकिता - तुम बहकाने की कोशिश मत करो हममे samjhe...ye बताओ क्या चाहिए....

पंकज - अरे गुस्सा क्यों कर रही हो मैं तो बस यहाँ तुम दोनों को क्लब में इंट्रोडस करने के लिए आया था पर तुम मन्ना कर रहे ho....ab जब आना हो ना तो बता देना मैं आ जाऊंगा....

मैं - ठीक है पंकज

पंकज - Pankaj....main बड़ा हु tumse.....thodi तो इज्जत करो....

मैं - वो ये सब नया है ना बस issiliye....aadat दाल लूंगा....

पंकज - अरे मैं मज़ाक कर रहा था यार तुम नाम से भी बुला सकते ho....waise भी हम दोस्त hai....chalo मैं चलता हु कुछ चाहिए तो बता देना ठीक है....

मैं - हम्म....

वो चला गया.....

मैं - तुमको क्या हुआ तुम उसपे क्यों भड़की हुई हो....

निकिता - पता नहीं ये जब भी दीखता है अजीब सा लगने लगता है mujhe....aisa लगता है इसको यही पे पटक पटक के मारु....

मैं - क्या... :शॉकिंग: ये क्या बोल रही हो....

निकिता - पता नहीं इसको देख के ना ऐसा hi लगता है bas....ki इसको बहुत मारु....

मैं - तुम ठीक हो ना......

निकिता - हां मैं ठीक hu...waise मैंने ना क्लब्स के बारे में पता किया hai...waise तो 8-10 क्लब है यहाँ पर उनमे से 3 मुझे सही lage....ek तो काढ़े वाली club.....jaha हममे खड़ा बनाना hoga..dusra है वो हथियारों वाला club....isme हममे सारे हथियारों के बारे में पता होना चाहिए साथ hi उनको चला भी आना chahiye...aur 3रद है हिस्ट्री को leke....isme हम लिटरेचर और हिस्ट्रोए के बारे में jaanege.....alag अलग जगह के लोगो के अलग अलग भाषाओं के बारे में भी jaanege.....ye सबसे अच्छा है....

मैं - हम्म ये सब तो सच में सही hai.....ton तुम बाकियों में नहीं बस इनमे hi जाओगी....

निकिता - हां इनमे hi सोचा है maine....agar तुम किसी और को ज्वाइन करना चाहो तो वो भी कर सकते हो....

मैं - मैंने अभी पता नहीं किया है मैं पता करूँगा उसके बाद बताऊंगा इन् तीनो के अलावा और कहा पे जाना है....

ऐसे hi बातें करते करते 3रद क्लास की बारी आ गयी हम वह गए वह की पढ़ाई की फिर 4तह में bhi....aur उसके बाद बुआ ने हम दोनों को hi अपने पास बुल्ला liya.....sayad घर से जवाब आ चुक्का था....

मैं और निकिता चले गए बुआ के केबिन में जहा अभी कविता मैडम भी थी...

बुआ - आ जाओ dono....aur बैठो....

हम दोनों अंदर गए और बैठ गए चेयर्स पे....

कविता मैडम - तुम दोनों पार्टिसिपेट कर सकते हो पर चुक्की तुम दोनों hi थोड़े बहुत स्पेशल ho....to ये goli....isko खा के जाना होगा.....

मैं - ये क्या hai.....isse क्या होगा...

कविता मैडम - तुम्हारी मास्टर ने hi बनवाया है खास तुम दोनों के liye...jab भी ट्रेनिंग करनी हो एक गोली ले लेना ये तुम्हे उस वक़्त कमज़ोर बना देगा जिससे तुमको ज्यादा प्रैक्टिस करनी hogi....aur जब असल एग्जाम आएगा तब तुम दोनों और भी अच्छा बहित अच्छा कर paoge..samjhe....

निकिता - हम्म मैं समझ गयी और मुझे कोई दिक्कत नहीं है.....

मैं - ठीक है मैं भी रेडी हु उसे करने को...

मैं - ध्रुव इससे कुछ प्रॉब्लम नहीं होगी ना...

ध्रुव - नहीं होगी चाहिए पर एक बार मैं उन् गोलियों को देखना chahunga....tab मैं और क्लियर रहूँगा....

मैं - हम्म मैं बोलता हु.....

मैं - हम वो गोली अभी देख सकते है न....

कवीता मैडम - हां क्यों nahi....unhone हममे एक एक गोली देदी....

मैं - ध्रुव देखो और बताओ....

वो सायद उसको चेक करने लग गया और थोड़ी देर में उसने सब क्लियर है बोल diya....Maine उस गोली को खा liya....aur निकिता ने भी....

कविता मैडम - चलो अब तुम दोनों इस वक़्त से सबसे कमज़ोर बन गए ho....yahi कुछ 4 घंटो के liye....agar गोली खाने के बाद भी तुम ताकतवर रहे मतलब तू, बाहत अच्छा कर रहे ho...warna ये गोली तुको कमज़ोर hi करती जायेगी....

हमको समझ आ गया ये सब....

बुआ - अब तक पता तो चल hi गया होगा घर से क्या फीअसला आया hai.....tum दोनों जा सकते ho....aur हां अभी ये गोली ली है naa...kuch ज्यादा मत करना बस सो जाना आज jaake.....khana तो नहीं खाया होगा अभी ना....

हम दोनों ने ना में सर हिलाया...

बुआ ने एक एक पैकेट्स हमारी ओर बढ़ई....

बुआ - घर से आया hai....jao खा लेना और फिर सो जाना और कुछ नहीं समझे ना...

हम दोनों हां बोल वह से निकल लिए....

वही रूपल दीदी जो कुछ दिन पहले पुरे स्पेन के बुरे लोगो को ख़तम करने वाली थी वो आज बिलकुल नार्मल thi....aur उनके वो दोनों pagal....unko unhone....hotel में काम करने के लिए कह दिया था अभी के लिए आगे जरुरत पड़ती तो उनका उसे वो कर सकती थी...

इन् सब के बिच एक और चीज़ हो रही thi.....pure यूनिवर्स में अब अलग अलग प्लैनेट्स के खोजी दाल निकल चुके थे उस डार्क पावर की तलाश में पर वो किसी को मिले तब naa....par कुछ ऐसे भी दाल the....jo उस गुप्त जगह तक पहुंचे हुए थे जहा से ज्वाला के कबीले में जाय जा सकता tha.....par वो अभी उसको धुंध नहीं पाए the.....wahi अंदर से ज्वाला और उसके लोग वो सब देख रहे the....wo देख रहे थे कैसे बहुत से लोग उनके घर के पास घूम रहे hai....agar गलती से भी किसी को उनके बारे में पता चला तो बहुत बुरा हो सकता है...

ज्वाला ने सिक्योरिटी और भाड़ा दी...

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखते है ये फोमोस का लीडर क्या करने वाला था ab....kya वो मुक्ति को चुनेगा या फिर थोड़ा और इंतज़ार करेगा अपनी बेटी ka.....wahi हम लूसिफ़ेर से भी मिलने चलेंगे उसके अंदर की उत्शुकता को dekhne.....aur फिर एक नज़र स्ट्रेंज वर्ल्ड के स्कूल पे भी मारेंगे.... :केओ:
 
अपडेट -55

अब तक

बुआ ने हममे परमिशन दे दी thi....sabki ओर se.....ab हममे बस कल का वेट करना था क्लब्स ज्वाइन करने के लिए par....yaha भी उन्होंने एक शर्त rakhi...ek गोली दी हम दोनों ko....jisse हम दोनों hi कमज़ोर हो जाते है खाने के baad.....isse हमको दुसरो का सामना करने के लिए ज्यादा म्हणत करनी पड़ती hai...isse हम और ताकतवर बनेगे ऐसा hi कहा tha.....wahi दूसरी ओर फोमोस pe....waha का लीडर वह के तत्वों को इक्कठा कर रहा था कुछ करने के liye....aur साथ hi कुछ प्लैनेट्स के खोजी दस्ते उस तरफ जा पहुंचे थे जहा से ज्वाला के कबीले में जाने की जगह thi....isko देखते हुए ज्वाला ने सिक्योरिटी काफी बढ़ा दी थी....

अब आगे....

पहले तो हम फोमोस chalenge....raat का वक़्त tha.....saamne नीली आग की लपटें जल रही thi....Leader उसके ठीक सामने बैठा tha...usne अपने पास बहुत सी सीसियां राखी हुई thi...unme कुछ भरा हुआ था....

उसने उस नीली आग में उन् सीसियों को खली kiya.....ek तो वैसे hi खली thi.....aisa करने के बाद उसके सामने जो आग था वो नीले रंग से लाल रंग में बदलने लग गया...

"मैं जानता हु सायद मेरा वक़्त आ गया हाउ पर मैं इससे खुश भी होता पर अभी मैं मुक्त नहीं होना चाहता..."

उसने ऐसा bola...aur उस आग की लपटें कुछ अजीब तरह से हिलने लगी.....

" हां ये मेरे खुद का फैसला hai....main अभी कुछ वक़्त तक और यहाँ रहना चाहता हु...."

वापस से वो आग की लपटें थोड़ी हिल्ली...

" मुझे पता है नया लीडर यहाँ आ चूका है पर अभी तक उसने मुझसे ये प्लेनेट नहीं maanga....aur जब तक ये ना हो मैं उसको अपना भार नहीं दे sakta...aur ना hi मैं मुक्त हो सकता हु"

फिर से वही लपटें हिल्ली...

"ठीक है अगर उसने माँगा तो मैं ये प्लेनेट उसको देने में देरी नहीं करूँगा..."

वो लाल आग वापस से नीली हो gayi....Leader वह से उठा और गायब हो गया...

वही दूसरी taraf......Demos पे आज भी वही खबर आयी की अभी तक कुछ हाथ नहीं लगा par......saath में एक और भी बुरी खबर आयी थी उनके खोजी दस्ते में से कुछ लोग गायब हो गए the....unka कुछ पता नहीं चल रहा tha....ye बात जब लूसिफ़ेर ने सुन्नी तो वो खुश हो gaya.....usko ऐसा लगने लगा जैसे वो उस पावर के बहुत करीब आ गया है उसी पावर ने उनके लोगो को गायब किया hai....par अभी वो पक्का नहीं था इस बात को लेके.....

उसने तुरंत अपने लोगो को बोलै जहा भी उसके लोग गायब हुए थे उसके आस पास एक घेरा banao....aur उसी घेरे के अंदर ढूँढना शुरू karo....aur जैसे जैसे ये घेरा छोटा होता जाएगा वो लोग उस पावर वाले के पास पहुंच जाएंगे....

उसके लोग डर तो रहे थे क्यूंकि वो एक ऐसे पावर की तलाश में थे जिससे बचना मुश्किल tha...ye भी नहीं पता की वो कैसा hi सकता hai....kitna दुःख दे सकता है वो power....par वो ये भी जानते थे अगर खली हाथ वापस गए तो उनको लूसिफ़ेर के गुस्से का सामना करना पद jaayega....aur ये सच में उनके लिए भयानक था....

उन् लोगो ने पहले तो ये पता किया की कहा से उनके लोग गायब होना शुरू हुए the....aur फिर एक घेरा बनाया उसके चारो taraf....ek बड़ा सा ghera....aur वह सब कुछ देखना शुरू किया...

जो लोग गायब हुए the......wo दरअसल ज्वाला वाली जगह पे पहुंच गए the....par ये जान बुझ के किया गया था....

ये सब करने के लिए सायद ज्वाला के लोगो को बस कुछ hi मिनट लगे honge.....aur पोलर बेअर्स और ओल्ड आउल के लोगो की थोड़ी सी मदद.....

उन् सभी ने मिलके उन् सब रास्तों पे नज़र रखना शुरू किया जहा से वह जाय जा सकता tha.....aur फिर उन् सभी ने वह वह पे पोर्टल्स kholi.....Old आउल के लोगो ने पोर्टल्स khooli....Jwala के लोग उनको एनर्जी दे रहे थे ताकि पोर्टल एक सेकंड के लिए भी बंद ना ho......aur पोलर bears...wo सब सुरक्षा के लिए the.....agar कुछ बुरा हुआ तो वो उन्हें संभल सक्के....

पोर्टल से होते हुए अगर कोई अंदर आने की कोशिश करता तो पोर्टल्स उन्हें सीधा पंहुचा देती पोलर बेअर्स के इलाके में जहा अभी तक वो जीव उत्पात मच्चा रहे the...kyunki रूपल को पावर्स तो मिल गयी thi....par सको अभी उसे करना नहीं आया tha...aur ना वो उससे उन् जीवों को काबू में कर सकती थी....

ये पूरी तैयारी करके बैठे हुए थे वह पे sab....naa सिर्फ लूसिफ़ेर के लोगो के लिए बल्कि हर किसी के liye.....wo किसी भी कीमत पे किसी अनचाहे मेहमान को अंदर नहीं आने देना चाहते थे.....

इन् सब से dur.....Prateek सो रहा tha.....haa आज वो सो रहा था एक तो उन् गोलियों की वजह से कमजोर हो गया था वो और बहुत थक सा गया था जिससे वो तुरंत hi सोने चला गया वही ध्रुव के लिए ये और भी अच्छा tha....agar प्रतीक ऐसे आराम करता है तो अलबूस और कूपर बहुत hi जल्द सही हो jaayenge....aur साथ hi...Prateek के एलिमेंट्स में एक स्थिरता बनेगी....

हां तो वो सो रहा था और आज भी वही सपना देख रहा था wo....wo बड़ा सा दरवाजा और आज भी उसने उसको खोलने के लिए हाथ आगे kiya....aur उसकी आँखें खुल गयी....

सुबह के 3 baje...Main उठ जाता hu....aas पास देखने में सब एक पल के लिए अजीब सा लग रहा था सायद उन् गोलियों का असर हो....

मैंने एक बार वापस से घडी की ओर देखा फिर फ्रेश होने चला गया नींद तो अब आणि नहीं thi.....main तैयार हुआ और वह से निकला और पहुंच गया ध्यान लगाने वाली जगह pe....aaj तो कल से भी पहले वह पहुंच गया था मैं....

मैं बैठ के ध्यान लगाने लगा की tabhi.....Jwala की आवाज आयी मेरे पास....

ज्वाला - यहाँ पे बाहरी लोग घूम रहे hai....humne सुरक्षा के लिए कुछ बदलाव किये है....

मैं - बाहरी लोग वह पर kyun...aisa क्या हुआ है....

ज्वाला - मैं भी नहीं जानता क्या हुआ hai......par सायद हममे मदद लगेगी तुम्हारी...

मैं - बस बता देना मैं आ जाऊंगा वह.....

मैं - ध्रुव तुम सुन रहे ho.....Jwala क्या बोल रहा है ये सब.....

ध्रुव - मैंने मन्ना किया tha....par तुमने सुन्ना नहीं tha....ab देखो सबको इस बारे में पता है ...अब क्या लगता है वो चुप रहेंगे....

मैं - मैं समझा नहीं कुछ....

ध्रुव - ये सब तुम्हारी वजह से हो रहा hai.....yaad है वो जंगल आस पास के ped......wo डार्क पावर की वजह से वैसे हो गए the......kuch hi पल के लिए पर तुम्हारे अंदर से वो बहार निकले the....aur उसके बाद सबको पता चल गया उनके बारे mein....aur अब वो धुंध रहे है उन्हें...

मैं - पर वो ज्वाला के पास क्यों जा रहे है जबकि पावर मेरे पास है...

ध्रुव - हां पावर तुम्हारे पास है पर वो पावर अभी एक्टिव नहीं है पर जब एक्टिव हुई थी तब तुम उस जंगल में थे और वो लोग भी उसी जंगल के आस पास तुम्हे ढूंढेंगे.....

मैं - ये तो बुरा hua....hum इसमें कुछ कर सकते है क्या.....

ध्रुव - वह पे अलबूस और कूपर को bhejo....wo वह पे संभल lenge...main उनपे नज़र रखूँगा यहाँ से.....

मैं - पर वो तो आराम कर रहे थे ना...

ध्रुव - हां कर रहे थे पर कल रात तुमने अच्छे से रेस्ट किया है जिससे वो सब भी ठीक है abhi.....to वो वह जा सकते है.....

मैं - ठीक hai...bhejo उनको वह और ध्यान रखना

मैंने ऐसा कहा और फिर मेरे अंदर से 2 लाइट बॉल्स निकले.....

ध्रुव - ज्वाला को पोर्टल खोलने बोलो...

मैंने वैसा hi kiya....Jwala ने पोर्टल खोला और वो लाइट्स अंदर चले gaye....par उसको इस बारे में पता नहीं चला.....

ज्वाला - क्या बात है.....

मैं - अपना धययन रखना और कोई मदद चाहिए तो मुझे बताना....

मैंने ये कहा जिसको सुनके वो मुझे घोरने लगा पर कुछ कहा नहीं पोर्टल बंद किया और चला गया.....

मैंने एक बार वापस से ध्रुव से बात की उससे पूछा वो उन् दोनों को संभल लेगा की nahi...uske बाद मैं बैठ गया ध्यान लगाने.....

थोड़ी देर में सायद बाकी सब भी आ गए और वो भी ध्यान लगाने लग gaye....baaki सब नार्मल सा hi चल रहा था आज.....

साड़ी क्लासेज नार्मल सी gayi....haa निकिता कुछ एक्सीटेंड लग रही थी उन् क्लब्स को ज्वाइन करने के बारे में सोच सोच ke.....usko...

सारे क्लासेज ख़तम होने के बाद बुआ ने हममे अपने पास बुलाया था ताकि वो हममे इंट्रोडस करवा सक्के उन् क्लब्स में पर और इसी के लिए दीदी भी आयी हुई thi....par एक पंकज भी था जो हममे इंट्रोडस करवाना चाहता था....

जब पंकज को पता चला की हममे इंट्रोडस बुआ और दीदी करने वाली है तो वो भी बुआ के केबिन में आ गया....

पंकज - प्रोफ. मैं इन् दोनों को इंट्रोडस करवा देता हु क्लब्स में...

बुआ - नहीं इसकी जरुरत नहीं है मैं हु अभी यहाँ और देखो रूपल भी आयी हुई है ...इसको तो जानते hi होंगे....

पंकज ने रूपल दीदी की ओर देखा और हां में सर हिलाया....

रूपल दीदी - पंकज बड़े दिंनो बाद मिले ho....maine सूना है तुमने इन्हे परेशां किया tha...ye सही है क्या.....

ये बात पता नहीं उनको कब और कैसे पता chali.....par वो ये बोलते हुए थोड़े गुस्से में लग रही थी....

पंकज - उस वक़्त मैं नहीं जानता था ये कौन है पर अब जानता हु और मैं खुद इस बात का ध्यान रखूँगा की कोई इन्हे परेशां ना करे....

रूपल दीदी - जरुरत नहीं है ये मेरे भाई बहन है इनको किसी की देख भल की जरुरत नहीं है samjhe....ab जा सकते हो यहाँ se....Bua इसको जाने बोलो

पंकज - नहीं मैं जाता hu....par हां ये लड़का मेरा भी भाई hai....isliye थोड़ी जिम्मेदारी तो मेरी भी बनती है....

रूपल दीदी उसके पास जाके....

रूपल दीदी - तो तुम जिम्मेदारी उठाओगे iski....hmmm सही है वो लड़का जो 1सत ईयर में आते के साथ अपने पिता जी का हवाला देके दूसरों को डरता tha.....aaj मेरे भाई का ध्यान rakhega....wo लड़का जिसको भरी क्लास में.....

बुआ - रूपल क्या कर रही हो tum....chup raho.....Pankaj इसकी तरफ से मैं माफ़ी मांगती hu....tum अभी jao....aur हां तुम इनका ध्यान रख सकते ho....par रूपल बस इनको इंट्रोडस करने के लिए hi आयी है तो ये उसको hi करने देते है....

पंकज अपना सर निच्चे किये खड़ा रहता है और हां बोलता है....

इतने से ये तो समझ आ गया था की रूपल दीदी को ये बिलकुल पसंद नहीं tha.....par कल जब ये उनकी बातें कर रहे थे तब तो बड़े अदब से इनका नाम ले रहे the....pata नहीं क्यों...

पंकज वह से निकल गया और निकिता रूपल दीदी को देख के हसने लगी....

बुआ - निकिता घर पे कहा था ना भैया ne......naa तो प्रोफ. दक्ष और ना hi उनके बेटे को हम कुछ kahenge....ye सब खुद प्रतीक देखेगा...

मैं - Main.....matlab क्या है इसका...

बुआ - देखो हममे और उनमे जो रिस्ता है उसकी कड़ी तुम ho.....ab ये तुमपे है की तुम कैसे रहते हो उनके साथ हमारे साथ और यही बात हमारे रिश्ते को तय करने वाली hai....Papa का कहना है हममे एक साथ रहना होगा...

मैं - हम्म ठीक है..

रूपल - क्या ठीक है उनकी बात मत सुन्ना खास कर के उस पंकज की वो ाचा नहीं hai....khud प्रोफ. दक्ष भी उसके कारण फंस चुक्के है मैं नहीं चाहती तुम उसके पास रहो....

बुआ - Rupal....ye सब छोड़ो और चलो इसको इंट्रोडस karao....tum दोनों ने कौन कौन से क्लब्स चुनने है....

निकिता ने उनको वो 3 क्लब्स के बारे में बताया..

बुआ - हम्म अच्छी चॉइस hai....chalo अब चलते है वह के हेड्स से भी मिलना hoga...aur हां इसके बाद ना तो मैं और ना hi रूपल हम दोनों में से कोई भी तुम्हारे लिए उस क्लब का काम कर सकते है....

निकिता - हां पता है वह के नियम मैंने सब पढ़ लिए है..

मैं - नियम ....

बुआ - निकिता इसको भी समझा देना अब चलो....

हम दोनों को लेके वो दोनों चल दी पहले क्लब में जो था वो काढ़े वाला क्लब था ये मेरे बहुत काम आने वाला tha....iss क्लब के केयरटेकर प्रोफ. दक्ष खुद the.....to यहाँ आने से मुझे उनसे बात करने का मौका मिल सकता tha....fir हम दूसरे क्लब में गए हथियारों के क्लब में वह के केयरटेकर वैसे तो प्रोफ. सूरज थे पर अब नए प्रोफ हो गए the.....aur उसके बाद तीसरा क्लब लिटरेचर एंड हिस्ट्री ka....isme हेड कोई और hi प्रोफ. the....jinke बारे में आगे पता चलेगा...

तिण्णो जगह hi हमारा इंट्रोडक्शन करवा के रूपल दीदी जाने को hui......par वो अकेली नहीं gayi.....Nikita भी उनके साथ चली गयी जब की कल भी क्लास thi...Maine पूछा तो कुछ बताया नहीं मुझे.....

मैं अब अपने रूम में बैठा tha....aur सोच रहा था कुछ की तभी ध्रुव की आवाज आयी....

ध्रुव - सायद तुम्हे भी वह जाना पड़े....

मैं - कहा....

ध्रुव - ज्वाला के पास उन् दरवाजों का पता लग चुक्का hai....par लोग अब उसके अंदर नहीं जा रहे बल्कि उसके बारे में बताने जा रहे है अपने प्लैनेट्स पे......

मैं - इससे क्या होगा...

ध्रुव - इससे सेना वह आ जायेगी उन् प्लैनेट्स ki...aur ज्वाला और वह के लोग सब खतरे में पद जाएंगे....

मैं - ये तो बहुत बुरा hoga...kuch करना होगा मुझे.....

मैं - ज्वाला पोर्टल खोलो...

ज्वाला ने पोर्टल खोला और फिर मैं अंदर चला गया....

ज्वाला - अच्छा हुआ तुम आ gaye....ye लोग अब और लोगो को लाने जा रहे hai....isse मुसीबत हो सकती है ये जगह तबाह कर देंगे ये log.....aur हम बेघर हो जाएंगे....

मैं - नहीं ऐसा नहीं होगा कोई रास्ता होगा जिससे ये सब ना हो....

ज्वाला - या तो हममे इन् सब को मारना होगा या फिर किसी तरह इन्हे धोखा देना hoga...maarne से बात बिगड़ेगी बस.....

मैं - हां ये सही है हम मार नहीं सकते कुछ और hi करना होगा....

ध्रुव - कहते है की ऐसी जगहों पे दानव चुप के रहा करते the...aur पोर्टल्स का एक जाल बिछाये हुए रहते the.....taaki वो और उनके बच्चे आराम से रह सके....

मैं - Daanav.....main समझ गया तुम क्या कहना चाहते हो.....

मैं - ज्वाला वो दानव याद hai...jiske बच्चे ने तुम्हे पकड़ लिया था.....

ज्वाला - हां याद है पर उससे क्या....

मैं - उसने मदद करने का वडा किया tha....usko यहाँ bulao.....saare portal.....bas एक जगह khulegi....uss दानव के pass....sabhi सुन्न रहे है,....

ध्रुव - कुछ कुछ ठीक hai.....par एक दानव से कुछ नहीं hoga.....hume और दानव चाहिए होंगे....

मैं - और दानव कहा से लॉन सायद वो जानती हो वो लेके आ जाए कुछ aur...haa

मैं - ज्वाला उसको अकेले आने मत बोलना ऐसा लग्न ये जगह उसका और उस जैसों का घर hai....humme और भी दानव चाहिए...

ज्वाला - हम्म मैं करता हु कुछ...

ज्वाला वह से चला जाता है तभी वह बिजली आ जाती hai....uski हालत कुछ ठीक नहीं लग रही थी mujhe.....aaj बहुत वक़्त बाद मिला था उससे और वो देखने में कमज़ोर लग रही थी....

मैं - क्या हुआ बिजली तुम ठीक नहीं लग रही.....

बिजली - नहीं मैं ठीक हु.....

उसी के साथ साथ वह पे ज्वाला की माँ भी thi....jo सायद उसका hi ख्याल रखने के लिए थी waha.....warna ऐसे हालत में वो यूँ यहाँ नहीं hoti....wo ज्वाला के साथ होती उसकी मदद करते hue....abhi ये मुझे कुछ नहीं बताना चाहती थी तो मैं क्या करता....

थोड़ी hi देर बाद उस जगह पे दानव आ pahuche....wo बच्चा भी आया था जिसने ज्वाला को पकड़ा था उस दिन....

ज्वाला - ये आ गए hai.....aur मेरे लोगो ने बिलकुल वही माहौल बना दिया है जो ये इनके घर में होता है...

मैं - चलो अब सही है sab....ab बस पोर्टल्स को खोल दो और उनको अंदर आने do....(Daanav से) आपको बस उनको याक्किन दिलाना है ये आपका ठिकाना है यहाँ और कुछ नहीं hai....ek बार वो ये मान लेंगे उसके बाद वो वह आयेंगे hi नहीं....

ज्वाला - दानवों से दुरी बनके रखते है sab.....taaki उनको कोई खतरा ना हो....

मैं - हां बिलकुल यही...

बस इसके बाद क्या था सब सेट हो गया था अब बस इंतज़ार करना tha....aur वो भी ज्यादा वक़्त तक nahi.....thodi देर में hi अलग अलग प्लैनेट्स से लोग वह पहुंच गए और उन् पोर्टल्स से अंदर आने lage....ander आते hi उनको दीखते है तो बड़े बड़े daanav...bahut बड़े दानव देखने में भद्दे से....

जब सबने ये सब देखा तो उनको घिन्न आने लग gayi....Daanavon को सब बुरा hi मानते the....yaha तक की डेमोस के लोग bhi....ye दानव देखने में hi अजीब नहीं थे बल्कि इनके कारनामे भी अजीब होते the....khair ये सब देखने के बाद वो सब वह से जाना चाहते the...kyunki वो नहीं चाहते थे वह एक और सेकंड रहना अगर वो वह रहे और उन् दानवों को इस बारे में पता चला तो दिक्कत हो जायेगी

वो ना सिर्फ उनको मसल denge....bali खा भी jaayenge....aur इससे बत्तर मौत और क्या होगी....

वो सब वह aaye....hum सब उनसे दूर चुप्पे हुए the...aur देख रहे थे......

बाकी सभी प्लैनेट्स के लोग तो वह से चले गए par...Demos के लोग नहीं गए वो वही rahe....kyunki उनको पता करना था आखिर वो था क्या.....

वो सब आगे बढ़ते गए संभल संभल ke....ye वो वक़्त था जब अलबूस और कूपर को सामने आना pada....wo दोनों hi ड्रैगन्स के रूप में वह आये और unhone....unn सिपाहियों को दर्रा diya...wo सब वह से भाग गए.....

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट कल आएगा रात में.....

जहा हम ज्वाला और बाकियों के लिए नयी जगह dhundhenge....saath में अपनी हीरोइन को लाएंगे yaha....dekhte है कैसे मिलती है वो प्रतीक से....
 
अपडेट -56

अब तक

क्लब्स में इंट्रो हो गया था हम दोनों का par.....isme भी एक बार दीदी और पंकज के बिच थोड़ी कहा सुन्नी hui...khair इसके बाद निकिता दीदी के साथ घर चली gayi....wahi मैं ज्वाला के पास जा पंहुचा क्यूंकि अब उसके ठिकाने के बारे में पता चल चुक्का था लोगो ko....humne एक प्लान बनाया की उस जगह को दानवों का ठिकाना दिखा देंगे जिसके बाद सब चले jaayenge...par डेमोस के लोग कुछ ज्यादा hi जिद्दी निकले और उनको भागने के लिए मुझे ालबस और कूपर की मदद लेनी पड़ी....

अब आगे

ये आसान नहीं होने वाला tha....humko तुरंत hi वह से निकलना padega...Dragon की खबर आग की तरह failegi....upar से वो डार्क पावर की baatein...ab तो वह रहने का कोई मतलब hi नहीं था.....

धुर्व -सबको यहाँ से निकलना होगा....

मैं - हां जानता हु main.....par ये सब जाएंगे क्या.....

ध्रुव - जाएंगे जरूर jaayenge.....tum बात करो इनसे....

मैं - ज्वाला सायद तुम भी समझ रहे होंगे अब क्या होने वाला है....

ज्वाला अभी अपने आस पास अपने लोगो को hi देख रहा tha.....pata नहीं क्या सोच रहा था वो....

मैं - ज्वाला तुम सुन रहे हो ना...

इतने में ज्वाला की माँ वह आती है...

J.Mom - हां वो समझ रहा है sab....bas थोड़ा परेशां hai.....humme यहाँ से निकलना hoga.....sabko....

मैं - हां सबको निकलना hoga....aur इसमें ज्वाला को hi सबको बताना होगा.....

J.Mom ज्वाला के पास जाती hai....wahi मैं थोड़ी देर उनकी ओर देखता हु फिर आगे के बारे में सोचने लगता हु.....

Main(mann में) - ओल्ड आउल के लोग उसके कहे बिन्ना सायद ना जाए यहाँ se.....mujhe उसको यहाँ बुलाना होगा....

मैंने ओल्ड आउल को bualaya....par वो आया नहीं...

ओल्ड आउल - Bataiye...kya बात है...

मैं - तुम्हे अभी यहाँ आना चाहिए.....

ओल्ड आउल - नहीं मैं नहीं आ सकता abhi...aap बताइये क्या काम है मैं किसी को भेज देता हु....

मैं - ये बस तुमसे hi होगा...

ओल्ड आउल - अरे मेरे लोग बहुत काबिल hai.....aap बताइये तो....

मैंने उसको यहाँ जो कुछ भी हुआ सब बता diya.....isko सुनने के बाद वो कुछ देर तो चुप रहा फिर उसने कहा....

ओल्ड आउल - सभी को हटाना होगा वह se.....jungle में भी बहुत से जीव hai....unko भी....

मैं - पर उनको kaise...hum वह जा भी नहीं सकते.....

ओल्ड आउल - पूरा जंगल हटा do...par कोई भी प्रजाति ख़तम नहीं होनी चाहिए और ना hi किसी बाहरी को दिखनी चाहिए.....

मैं - तुम्हे यहाँ आना chahiye....hum कुछ करेंगे....

ओल्ड आउल - तुम उन् सब को dekho....main कोई जगह ढूंढता hu....jaha सबको रखा जा सक्के......

ध्रुव - उसकी बात भी सही है पर दिक्कत ये है की ये हो नहीं sakta....hum कैसे पुरे जंगल को यहाँ से हटा denge.....aur वो जगह जहा से तुम्हारे अंदर से वो डार्क पावर निकली थी उसका क्या...

मैं - मैं क्या बताऊँ कुछ समझ आये तब ना....

पोलर बेयर किंग - हममे यहाँ से जाना होगा.....

मैं - हां मैं जानता hu...aur मैं इसी बारे में सोच रहा हु की कैसे जाए....

किंग - तुमने हमारे बारे में सुन्ना तो होगा hi....agar हम और ये फिओनिक्स मिल जाए तो बहुत कुछ कर सकते है....

मैं - हां जानता hu.....par तुम सब मिलोगे hi नहीं kabhi....to इस बारे में सोचना hi बेकार है..

किंग - मैं तैयार hu....aur मुझे वो तरीका भी पता है जिससे हम अपने लिए एक नया घर बना सकते है....

मैं - क्या मतलब है इसका.....

किंग - क्या लगता है इस जगह को कैसे बनाया गया tha....humne बनाया था मतलब हमारे पूर्वजों ne...aur अब जब ये ख़तम होने जा रहा है तो हमको इसको और इसके साथ साथ बाकी के जीवों को भी यहाँ से निकलना hoga...aur वो भी उनको बिन्ना पता चले.....

मैं - कैसे होगा ये.....

किंग - कबीले के सरदार को बुलाओ.....

मैं - ज्वाला यहाँ आओ ये हमारी मदद कर सकते है....

ज्वाला अपनी माँ से बात कर रहा tha....usne मेरी ओर dekha...aur फिर मेरे पास आया...

ज्वाला - हां बताओ....

मैं - ये बोल रहा है अगर तुम दोनों चाहो तो ये पूरी जगह hi कही और चली जायेगी....

ज्वाला - पूरी जगह के साथ साथ वो जंगल का हिस्सा भी जिसक्के लिए ये सब यहाँ आये है.....

पोलर बेयर किंग - हां ठीक वैसा hi hoga....bas तुम्हे मेरा साथ देना होगा....

ज्वाला - बताओ क्या करना है मुझे......

किंग - अपने कुछ लोगो को जाके बोलो जंगल के उस हिस्से के पास जाए और वह पे एक घेरा banaya.......mere लोग भी वह पहुंचते honge.....tumhe उनसे कहना है की जब मेरे लोग बर्फ का उसे करे तब वो फायर का उसे karee....isse वह के वातावरण में असंतुलन आ जाएगा पर ये बस उसी भाग में होना chahiye...jab ये हो रहा होगा तब तुम और मैं वो करेंगे जिससे ये पूरी जगह hi यहाँ से कही और चली jaayegi....aur रही बात उन् जीवों की तो वो उसी जगह से वह पे पहुंच जाएंगे अहा पे हमारे लोग असंतुलन पैदा करने वाले hai.....wo एक बड़ा सा पोर्टल बन जायेगा जो सभी चीज़ों को खिंच लेगा अपनी तरफ....

मैं - कही इससे ऐसा कुछ तो नहीं होगा ना की जंगल के जीव वह से बहार आ जाएंगे........

किंग - नहीं उनको पता भी नहीं चलेगा कुछ और ये पोर्टल भी कोई आम पोर्टल नहीं होने वाला इससे वेव्स निकलेंगी और उसके चपेट में जैसे hi कोई आएगा वो वह से गायब हो जाएगा मतलब टेलिपोर्ट हो जाएगा..

ज्वाला - फिर वो जगह क्यों नहीं होगी जिसकी वजह से ये सब हो रहा है.....

किंग - मशाल के निच्चे hi अँधेरा होता hai......wo पोर्टल उस जगह पे होगा इसी वजह से वो वैसा का वैसा hi रहेगा......

मैं - इन् दानवों का क्या......

किंग - ये इनपे है जैसा ये चाहे....

ज्वाला - तुम उनसे बात करो मैं इसके साथ साड़ी तैयारी करता hu........par हम जाएंगे कहा.......

किंग - यही सवाल मेरा भी tha...hum कही भी जा सकते है पर अच्छा होगा कोई शांत जगह ढूंढे जहा कोई आता जाता ना हो.....

मैं - ओल्ड आउल इसी काम में लगा हुआ hai.....main उससे बात करता रहूँगा जैसे hi उसको को जगह मिलेगी तुम ये शुरू कर देना......

मैं इतना बोलने के बाद उन् दानवों के पास gaya.....aur वो सब अपना काम करने लगे......

मैं - सुनिए हम सब यह से जाने वाले hai.....kya आप यहाँ रहोगे या हमारे साथ जाओगे......

डी- हम कही भी रह सकते hai....waise भी ये जगह हममे पसंद आ गयी hai...hum यही रहना चाहते है.....

मैं - ठीक है पर इसके लिए आप सब को कुछ वक़्त के लिए यहाँ से जाना होगा....

डी - जैसा तुम कहो.......

वो यहाँ रहने को तैयार थे और ये एक तरह से अच्छा भी tha.......Bahar के लोगो ने दानवों को देखा था यहाँ तो अगर ये यही रहे तो अच्छा होगा..

सब अपने अपने काम में लगे हुए the......humme इसी रात को सब काम ख़तम करना था.......

ओल्ड आउल से मेरी बात हो रही थी वो स्ट्रेंज वर्ल्ड के आस पास hi देख रहा था नयी जगह ko......aur कुछ देर में उसको वो मिल gayi....waha पास में hi एक खली जगह थी जिसके चारो तरफ उल्कापिंड the....waha कोई आता जाता भी नहीं tha.....aur अगर गलती से कोई चला भी जाए तो हम तो अदृश्य hi रहेंगे ना तो उनको दिखेंगे hi नहीं.......

ओल्ड आउल ने जैसे hi मुझे उस जगह का पता बताया मैंने भी उसको सब समझा दिया....

ओल्ड आउल - मैं पोर्टल खोल रहा hu.........waha से कुछ लोगो को इधर भेज dena...yaha भी वो काम में लग जाएंगे.....

मैंने वैसा hi kiya......aur फिर क्या था सबसे पहले तो दानवों को उस जगह से बहार kiya....taaki वो भी ना टेलिपोर्ट hi jaaye....fir ज्वाला और पोलर बेयर किंग ने अपना काम शुरू kiya....aur देखते hi देखते एक बहुत बड़ा सा पोर्टल ंबन गया पर वो हॉरिजॉन्टल था मतलब जमीन pe....theek जंगल के उस हिस्से में जहा पे डार्क पावर रिलीज़ हुई थी मुझसे......

कुछ hi देर में उसके अंदर से तरंगें निकलने लगी और देखते hi देखते चारो तरफ फैलने लगी.....

मैं - ये पेड़ पौदे क्या ये भी वह चले जाएंगे...

ध्रुव - ऐसा कुछ मैंने पहले कभी नहीं देखा तो मैं बता नहीं सकता......

किंग - सारे nahi.......bas वो जिनके अस्स पास कोई जीव ho...nayi जगह पे जंगल हममे खुद बनाना hoga....yaa फिर इ काम ये जीव खुद कर लेंगे.....

मैं - इसमें कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना.....

किंग - Nahi....aur वैसे भी बाहरी लोगो को कहा पता है की यहाँ जंगल thi....agar पूरा जंगल चला भी जाए तो कोई परेशानी नहीं होगी.....

मैं बस उनको अपना काम करते देखते raha......usme से ज तरंगे आ रही थी वो पहले तो चारो तरफ फैल रही थी उसके बाद वापस आ रही thi.....wahi ओल्ड आउल के pass....wahi तरंगें वापस से फैल रही thi....aur साथ में ला रही थी अपने साथ यहाँ की चीजजें...

देखते देखते हमारी तरफ से लोग गायब होने लग गए और उनकी तरफ पहुंचने लगे......

पहले से जो लोग वह थे वो उस इलाके को अदृश्य बनाने में लगे हुए थे....

करीब 2 घंटे तक ऐसा चला hoga....aur फिर वो पोर्टल खुद बंद हो गया और इस साइड सिर्फ मैं ज्वाला किंग और वो दानव थे जो की इन् सब से दूर खड़े हुए थे.....

मैं उनके पास गया उनको बताया की सब हो चुक्का है और उनको वापस आने को बोल diya....aur अंदर आने के बाद मैंने ज्वाला से पोर्टल खोलने को कहा और उसमे से होते हुए हम तिण्णो अपनी नयी जगह पे पंहुचा gaye........yaha सब उसी तरह का tha....kyuni जीवों के साथ साथ उनके आस पास के चीजजें भी वह से यहाँ आ गयी thi......wo ज्वालामुखी तक यहाँ आ चुक्का था और उसके ऊपर बने घोसले और उनके ऊपर के अंडे bhi...par साथ hi साथ वो सारे चमगादड़ भी आ चुक्के थे पोलर बेयर कबीले के साथ sath....matlab अभी भी वो सब अपने घर नहीं जा सकते थे...

इन् सब में ओल्ड आउल के लोगो को थोड़ी परेशानी हुई thi....unko अपने घर वापस से बनाने पद रहे the....sabhi के घर वह से यहाँ नहीं आ पाए the....wo टेलिपोर्ट होक पुराने जगह पे जाते वह से अपना सामान यहाँ लेके आ रहे थे...

मैं - ओल्ड आउल यहाँ सब ठीक है ना....

ओल्ड आउल - हां सब सही hai...iss जगह पे सायद hi कोई आता होगा और मैंने सबसे पहले इस इलाके को hi अड़...

वो ये बोल hi रहा था की मुझे सामने से एक बाँदा आता हुआ दिखा जो सायद नशे में tha....Insan तो होगा नहीं wo...pata नहीं कोण सी प्रजाति थी ye.....chahre पे अजीब से दाने थे उसके...

मैं - ये कोण है..

ओल्ड आउल - पता नहीं....

ज्वाला - इसको ख़तम करना होगा....

मैं - नहीं देखो इसको ये नशे में है इसको मैं इसके जगह तक छोड़ के आता हु....

किंग - इसने सब देख लिया है ये खतरनाक hai,,...humme वापस से जगह बदलनी पद सकती है....

मैं - वो नशे में है abhi....Jwala तुम पोर्टल kholo.....Old आउल इसको ध्यान से देखो और बताओ इस प्रजाति के लोग कहा रहते है स्ट्रेंज वर्ल्ड में...

ओल्ड आउल उसको देखने laga....Jwala ने पोर्टल खोल दिया....

ओल्ड आउल - एल्फ किंगडम से थोड़ी hi दुरी पे रहते हिअ इन् जैसे log...isko देखा हुआ है मैंने कही पे...

मैं - याद karo....hum इसको वही छोड़ आएंगे,....

ओल्ड आउल पहले इसको वह लेके चलते है अभी अच्छे से याद नहीं आ रहा कहा देखा है सायद वह याद आ जाए....

पोर्टल खुला था उसके अंडरर ओल्ड आउल ने अपना एक पंख डाला जिससे वो वही खुलता जहा ओल्ड आउल चाहता....

हम तिण्णो अंदर चले gaye......Main ओल्ड आउल और वो बाँदा...

हम यहाँ पे एक नदी के किनारे थे....

मैं - यहाँ पे रहते है ऐसे लोग....

ओल्ड आउल - हां यही कही रहते hai...maine देखा tha....aur इसको मैं जानता hu...kahi देखा था इसको....

मैं याद करो फिर....

उसने अपने दिम्माग पे जोर डाला और मुझे उससे दूर कर दिया.....

मैं - क्या कर रहे हो....

ओल्ड आउल - Ye....ye जीवों की तस्करी करता hai....yaha से waha....isko मैंने एल्फ किंगडम के जेल में देखा tha...par ये बहार कैसे निकला...

मैं - क्या ये तस्करी करता है...

ओल्ड आउल - हां यही सुन्ना था maine......ye दूसरे प्लैनेट्स से जीव उठा के लाता है और उन्हें बेच देता hai....isko वापस से जेल में भेजना सही होगा....

"ये कही नहीं jaayega....jab तक मुझे मेरे सवालों के जवाब नहीं मिल जाते.."

एक लड़की की आवाज आयी और मैं और ओल्ड आउल चौंक gaye....Old आउल चुप्प gaya...adrishya हो गया....

और फिर एक लड़की aayi.....insan यहाँ पे :शॉकिंग: वो भी इस तरह से...

मुझे ये समझ hi नहीं आ रहा था....

मैं बस उसको देखे जा रहा था....

वो मेरे पास आयी उस बन्दे को गर्दन से pakda....aur खींचते हुए लेके गयी एक पेड़ के pass....aur उसको बांध diya.......isko मैजिक भी आती है :शॉकिंग:

कुछ समझ hi नहीं आ रहा था....

मैं - तुम कोण हो और यहाँ kaise....tum to...insan लग रही हो....

मेरे मुँह से ऐसा सुनने के बाद उसने मेरी ओर देखा...

फिर उस बन्दे को मारने लगी...

"कहा से लाये थे मुझे yaha....kaha है मेरा परिवार...."

ऐसे hi बोलते हुए वो उसको मारती rahi...aur मैं देखता रहा........

अभी के लिए इतना काफी hai....next अपडेट में देखते है की ये मैडम कोण hai....aur ये यहाँ कैसे आ pahuchi....aur मैजिक कैसे आता है इसको.......

ये कल का अपडेट है आज वाला थोड़ी देर में देता हु :वेरिसद:
 
अपडेट - 57

अब तक

नयी जगह मिल गयी थी हमने स्ट्रेंज वर्ल्ड के पास में hi उल्कापिंडों के समूह के पास बनायीं थी ये नयी जगह जहा सारे जीव आ गए the....aur साथ hi उनके आस पास की छ्चीज़ीं भी जिससे उनको पता भी नहीं चलने वाला था वो कब वह aaye....paryaha पे हममे एक बाँदा मिला जो की जीवों की तस्करी करता tha...pata नहीं वो वह कैसे आ गया tha....usko जब स्ट्रेंज वर्ल्ड लेके ए तो वह एक लड़की आ जट्टी है इंसान थी वो उसको मैजिक भी आता था :शॉकिंग: मैं समझ नहीं पा रहा था वो वह कैसे आयी फिर उसने उस बन्दे को मारना शुरू किया और उससे पूछने लगा की किधर है उसका परिवार कहा रहते है wo....tab समझ आया इसको भी उठा के लेके आये होगा वो...

अब आगे

वो लड़की उसको मारे जा रही thi...Main लड़की को देखे जा रहा tha....isko देख के ऐसा लगा जैसे पहले भी मिला हु isse.....yahi आस पास कही....

निकिता के साथ एक बार जब यहाँ घूम रहा था एल्फ किंगडम में जाने के लिए tab....tab भी ऐसा hi लगा था जैसा अब लग रहा tha....par ये पता नहीं था की क्यों........

ओल्ड आउल - वो उसको मार देगी रोको उसको.....

ध्रुव - आई पागल है kya....dekh क्या रहा है वोटर सामने उसको मारे जा रही hai....pata तो कर क्यों मार रही है......

ये दोनों बोले जा रहे थे पर मुझे सुनाई hi नहीं दे रहा था......

ये insan...kitne aje...nahi नहीं सूंदर होते hai....isko hi देख lo......uss बन्दे को मारते हुए कितनी सूंदर लग रही थी ye.....gusse से लाल sakal.....aankhon में थोड़े aashu.....hawa में झूलते हुए baal..........aur उसके वो pair...jisse वो उसको मारे जा रही थी.....

ओल्ड आउल - वो मार देगी उसको.....

इस बार वो सामने आ गया tha.....aur उसकी आवाज लड़की ने भी suni...aur वो उसकी ओर देखने lagi.....sayad इसने बहुत से अजीब जीव देखे होंगे पर अभी उसके सामने एक बड़ा सा उल्लू था जो बोल रहा tha.....wo थोड़ा चौकी और पीछे चली गयी...

मैं - कोण हो tum...aur यहाँ कैसे....

सायद अँधेरा था इस वजह से उसने मुझे उस वक़्त स्ट्रेंज वर्ल्ड का hi कोई बाँदा समझ लिया hoga...waise मैं इंसानो की तरह hi दीखता hu..Mom के कारन sayad....khair...usne ध्यान से मुझे dekha...fir ओल्ड आउल ko....aur फिर वह से भाग gayi.....chilate हुए...

ये समझ में नहीं आया आखिर हुआ kya....itne देर से मेरे hi सामने उसको कूटे जा रही थी तब कुछ nahi....aur अब देखा तो ऐसे भागी जैसे पूछो mat...sayad ओल्ड आउल की वजह se.....haa और kya.....wo देखने में भी डरावना है रात को और डरावना लगता होगा ऊपर से बोलता भी है दर hi जाएगा कोई भी....

मैंने ओल्ड आउल की तरफ देखते हुए ये सब सोचा....

ओल्ड आउल - देख क्या रहे हो aise.....wo भाग gayi....aur इसको देखो कैसी हालत हो गयी है iski...iska क्या करना है.....

मैं - क्या करना है iska....tum पहले एक काम करो उस लड़की के पीछे लग जाओ या लगा दो किसी को मुझे उसके बारे में सब जानना है.....

ओल्ड आउल - और एल्फ किंग उनका क्या.....

मैं - हां तो कहा ना खुद जाओ या किसी और को भेजो पर इस लड़की के बारे में सब जानना है मुझे....

ओल्ड आउल - ठीक है....

मैं - ज्वाला पोर्टल kholo...ek मेहमान आ रहा hai....uska ध्यान रखना है....

उसने पोर्टल खोला मैं उस तस्करी करने वाले को उठा के उससे अंदर लेके गया....

ज्वाला - इसको वापस क्यों लेके आ गए....

मैं - इससे पूछ ताछ करनी hai....tumme से किसी को आता है क्या ये करना....

ज्वाला - पूछ taach...hum ये सब नहीं करते....

पोलर बेयर किंग - हम भी इन् सब में वक़्त बर्बाद नहीं करते....

मैं - पता नहीं कोण है ये sab....inko पूछ ताछ नहीं करनी aati....isko एअर्थ पे लेके जाऊं kya....yaa यही रहने दू....

मैंने कुछ देर सोचा और फिर इसको एअर्थ पे ले जाने के लिए तैयार हो गया वह पे लोग मिल hi जाएंगे जो इससे पूछ ताछ करेंगे और उनकी मदद से मैं पता कर पाउँगा उस लड़की के बारे mein....pata नहीं kyun...par उसका वो गुस्से से भरा चेहरा मेरी आखों के सामने से हैट hi नहीं रहा था....

मैं - ज्वाला मैं इसको घर लेके jaunga...waha इसकी खबर lenge....tum...ek काम करो... ओल्ड आउल से एक बार बात कर लेना मैंने उसको किसी के पीछे जाने को कहा hai....wo अगर कभी भी खतरे में हो उसको बचाना है और मुझे बताना भी है समझे...

ज्वाला - अब ये कोण नयी आ गयी....

मैं - पता नहीं उसी का पता करना hai....waise मुझे तुमसे बिजली के बारे में बात करनी hai....wo ठीक नहीं लग रही थी...

ज्वाला - Wo....wo थोड़ी प्रॉब्लम है इस वजह से...

मैं - हां तो वही तो पूछ रहा hu...kya परेशानी hai....usse मिलना नहीं हुआ बहुत वक़्त से और अभी उस दिन मिला तो वो परेशां लग रही थी...

Jwala(hadbadate हुए) मुझे पता nahi.....tumko जाना है ना मैं पोर्टल खोल रहा hu....mujhe भी यहाँ काम है....

मैं समझ नहीं पाया ये क्या था ये बता क्यों नहीं रहा कुछ और वो भी कुछ नहीं बता रही थी.... :सिघ: पता नहीं क्या हुआ है इनको....

मैं उसको लेके पोर्टल में चला गया और वह से फिर एअर्थ pe....apne घर के पास आ गया....

वैसे मैंने सोचा था दीदी के होटल में रखने के लिए isko...waha दीदी भी होगी और उनको तो आता hi होगा पूछताछ karna...par उससे पहले दीदी से पूछना होगा लेकिन अब समझ नहीं आ रहा था इसको ऐसे सड़क पे छोड़ के घर में जाके दीदी से पुछु कैसे....

मैंने एक छोटा सा पाथेर लिया और दीदी के रूम की तरफ fenka...mujhe क्या पता था इससे एक धमाका hi हो जाएगा....

छोटा सा धमाका हो gaya...aur उसकी वजह थी हमारे घर के आस पास लगा हुआ kawach....raat के वक़्त के liye....jisse कोई अंदर ना जा sake...kahi और se...siway दरवाजे के...

धमाके के कारन सब उठ gaye....aur मैं पागलों सा खड़ा अपने इस काम के बारे में सोच रहा tha...Dhruv मुझपे है रहा था...

घर से सभी बहार आ gaye...Bua थी नहीं बाकी सब घर पे hi the...sab आ गए bahar...par दीदी और निकिता नहीं आये..........

देखो तो भला जिनसे काम था उन्ही का पता नहीं हमको.....

खैर...

दादी ने सबसे पहले मुझे dekha.....wo मेरे पास aayi...aur उनके पीछे पीछे बाकी सब भी....

चची - तुम यहाँ इस वक़्त क्या कर रहे हो....

मैं - Wo....wo मैं बस ऐसे hi आ गया था.....

चाचा जी - वो कोण hai.....aur उसको बंधा हुआ क्यों है....

दादाजी - सत्य देखो जाके कौन है वो और तुम ठीक हो प्रतीक...

मैं - जी दादाजी मैं ठीक हु....

दादी - पर तुम यहाँ इस वक़्त कर क्या रहे ho...aana था तो रूपल के साथ आ jaate...Nikita तो आयी थी उसके saath...aur पाथेर क्यों फेंका तुमने अपने hi घर पे...

चची - माँ ये आज भी घर पे आया होगा अपनी दीदी से milne.....ek दिन और आया था उस दिन सीधा घर में आ गया tha...mujhe पता चला गया tha...aaj सायद इसी वजह से बहार से पाथेर फेंक रहा था जिससे किसी को पता ना chale...Ab बताओ तुम इस वक़्त क्या काम है...

मैं - हां दीदी से मिलना tha...par मुझे पता नहीं था ऐसा कुछ hoga...main बस आपको परेशां नहीं करना चाहता था....

चाचा - पापा ये to.....wahi है जिसकी फोटो लगी हुई थी उस सरकारी दफ्तर mein...ye तस्करी करता है जीवों की और इसका यहाँ आना निषेध है...

दादाजी - जल्दी से फ़ोन करो....

यहाँ दादाजी उस मोठे आदमी को फ़ोन करने की बात कर रहे the....wo एक तरह से स्ट्रेंज वर्ल्ड की तरफ से भेजा गया यह पे एक दत्त है...

मैं - Nahi.....wo मेरे साथ है...

चची - क्या मतलब तुम्हारे साथ है तुम कर क्या रहे हो आज कल...

मैं - मेरा मतलब मैंने उसको पकड़ा है मैं उसको यहाँ पूछ ताछ के लिए लेके आया हु...

दादी - बीटा क्या बोले जा रहे ho....tum ठीक तो हो ना...

समझ में नहीं आ रहा था मुझे अब कोण सी कहानी बनाऊं main....kaha मिला ये और क्या कर रहा था ये.....

थोड़ा हकलाने के बाद...

मैं - ये स्कूल के पास tha....waha पे किसी का वेट कर रहा tha.....jab वो आया इसने उसको पकड़ने की कोशिश की पर मैंने इसको देख liya....aur उसको बच्चा liya....fir इसको यहाँ लेके आ गया.....

चाचा - तो ये नशे में ये सब कर रहा था....

मैं - हां ये नशे में था तभी तो मैंने इसको पकड़ लिया....

चची - फिर पूछ ताछ क्या करनी इसको स्ट्रेंज वर्ल्ड भेज देते है वह से इसको सज़्ज़ा सुनाई जायेगी...

मैं - नहीं मैं bas...janna चाहता था इसने हुम्ला क्यों किया...

दादा जी - पर क्यों....

मैं - wo...wo..

दादी - बस बहुत हो गया तुम सब ka....Satya इसको तैखने में रख aao....Nidhi इसके पास खाना और पानी रख aana....par इससे थोड़ा dur...jaha बस ये देख पाए खा और पि ना sake...samjhi....aur आप बहुत हो गया जब से आया है मेरा बच्चा बस सवाल सवाल यही हो रहा hai.....isne इसको पकड़ा है इसको और भी जानकारी लेनी hai....ye अच्छी बात hai....Prateek तुम अभी यही रहो सुबह चले जाना wapas.....aur शाम को वापस आ जाना तब तक ये सारे सवालों का जवाब देगा...

दादाजी - क्या बोल रही हो...

दादी - बोलै ना maine....aur स्ट्रेंज वर्ल्ड को hi सौप देंगे इसको इन् सब के बाद....

दादाजी चुप हो gaye...aur मैं चाचा जी के साथ उसको उठाने चला गया और वह से उसको तैखने में लाके रख diya....pahli बार ये जगह देख रहा tha.....kya जगह thi....kulhadi....bhala talwar.....tarah तरह के kawach...kya कुछ नहीं थे वह....

मैं - चाचू ये तो कम्मल की जगह है...

चाचा - हां पर अब चलते है और जाके रूम में सो जाओ...

मैं - हम्म ठीक है...

मैं ऊपर चला गया सोने को...

क्या सोता मैं....3 बज गए थे इन् सब mein....haa आँख लगी थी थोड़ी देर के लिए और आज भी वही दरवाजा सामने था उसको चुवा और नींद खुल गयी meri....par जब वक़्त देखा तो मेरे होश hi उड़द गए....9 बज रहे the....pahle क्लास का वक़्त हो गया था mere....aur मैं घर में tha...koi उठाने तक नहीं आया था मुझे....

मैं जल्दी से तैयार हुआ और रूम से बहार निकला....

चची - अरे आराम se....ab भाग के क्या hoga....class शुरू हो चुक्की होगी....

मैं - आपने उठाया क्यों नहीं फिर...

चची -माँ ने मन्ना किया था बोल रही थी तुम रात को आये the...thakke हुए hoge...aur एक दिन स्कूल की पढ़ाई छूट जाने से थोड़ी तुम कमज़ोर हो जाओगे...

मैं - पर चची आज से क्लब में जाना था....

चची - मुझे सब पता hai....club की टाइमिंग शाम को होती hai.....aur ये बात तुम्हारी दादी भी जानती है इसीलिए उठाने से मन्ना किया था....

मैं - :डोह: निकिता तो चली गयी होगी स्कूल अकेली hi...waise वो थी kaha...Didi भी नहीं दिख रही....

चची - वो दोनों क्या यहाँ thi......wo तो मम्मी के यहाँ thi....kal घर आयी थी फिर वह का बोल के चली gayi....Nikita स्कूल गयी है या नहीं ये भी पता नहीं....

मैं - :अंगरिसद: आपको उठाना चाहिए था मुझे...

चची - और मैं माँ से दांत khati.....khana खाओ जल्दी....

मैं - बुआ का kya....wo तो मुझे hi डाँटेंगी उनको बिन्ना बताये यहाँ आया हु........

चची - इस बात के लिए तो तुमको सबसे दांत पड़नी hai...khair अभी खाना खाओ और फिर निच्चे आ जाना जो पूछना है पूछ लेना उससे....

मैं - वो बताएगा...

चची - हां बताएगा hi वैसे भी तुम्हारे चाचा ने अच्छे से खबर ली है uski....aur सायद पापाजी भी गए थे बात करने उससे....

मैं - हम्म ठीक है..

मैंने खाना खाया और फिर निच्चे जाने laga....tabhi वह दीदी आ गयी...

दीदी - छोटू तू yaha....kuch हुआ है क्या तुझे....

मैं - नहीं तो...

दीदी - तो यहाँ क्या कर रहा hai.....school क्यों में क्यों नहीं है तू....

मैं - वो main....wo....

चची ने उनको सब बताया.....

दीदी - तू स्कूल के बहार क्या कर रहा tha.....raat में....

वापस से सवाल शुरू :सिघ:

दीदी - अच्छा वो सब छोड़ कहा है वो मैं देखती हु उसको.....

मैं - निचे hai...Nikita स्कूल गयी क्या....

दीदी - वो क्यों जायेगी aaj......Bua ने बताया नहीं क्या की वो अभी 2 दिन की छुट्टी पे hai.....ab वो मंडे से जाने वाली है वह.....

मैं - Kya....par kyun....kya हुआ उसको...

दीदी - अरे वो मुझे उससे कुछ काम tha....wo मेरी मदद कर रही hai...aur कुछ नहीं...

मैं - मुझे बता देती आप....

दीदी - चुप kar.....mujhe बता deti....tujhse नहीं होता वो sab....Maa आप इसको यही रखो मई आती हु निच्चे से....

मैं - मैंने सवाल करने है उससे...

दीदी - हां तो बाद में कर lena...ab यही रूक्को...

मैं वही रुक्का रहा और वो निच्चे जाके पता नहीं क्या करने लग gayi....thodi देर बाद ऊपर aayi...aur मुझे निच्चे लेके गयी...

दीदी - पूछो जो पूछना है....

मैं - हां हां पर आप जाओ यहाँ से....

दीदी - क्या मतलब है iska....ab मैं कही नहीं जा रही जो पूछना है यही पूछो...

मैं - ठीक hai....batao वो लड़की कोण थी जो तुम्हे मार रही thi......kya वो इंसान नहीं थी.....

वो - किसकी बात कर रहे हो तुम मैं किसी को नहीं जानता जो मुझे मार रहा था...

दीदी - ये किसकी बात कर रहे हो तुम...

मैं - रूक्को दीदी पहले इससे पूछना है देखो ये जवाब नहीं दे रहा है....

दीदी ने पास पड़े एक चाकू को उठाया और उसको उसके अंगुली पे दे maara.....wo दर्द से चीखने लगा....

दीदी - अब बताओगे....

वो - हां वो इंसान है...

मैं - स्ट्रेंज वर्ल्ड में इंसान कैसे पहुंची...

वो - मैंने पहुंचाया मैं उसको लेके गया था यहाँ से.....

मैं - क्यों....

वो कुछ नहीं बोलै fir....bilkul चुप रहा.....

दीदी - ये ऐसे नहीं सुन्न रहा है.....

"रूक्को तुम dono....ab कोई इसको नहीं छुएगा samjhe....sab पीछे हत्तो..."

ऊपर से वही मोटा आदमी बोलै जिसने हुँम्मे स्ट्रेंज वर्ल्ड में भेजा tha....pata नहीं कहा से आया था ये......

"इसको लेके chalo.....isko सज़्ज़ा वही मिलेगी...."

मैं कुछ बोलता उससे पहले hi ऊपर से चची ने चुप रहने का इशारा kiya....aur हम दोनों चुप हो gaye.....usko लेके चले गए वो sab....hum वैसे hi उसको जाते हुए देखते रहे....

उनके जाने के बाद हम ऊपर गए....

दीदी - माँ ये यहाँ कैसे....

चची - कल तुम्हारे पापा ने कहा था की उस तस्करी वाले का एअर्थ पे आना मन्ना है उसके यहाँ आते hi इन् सब को पता चल गया था पर क्यूंकि वो यहाँ हमारे घर में थे इस्सलिये वो इस वक़्त आये hai...naaki रात में....

मैं - मुझे उससे और भी बातें पूछनी थी....

चची - अब कुछ नहीं हो सकता hai....bhool जाओ उसको और कोई और रास्ता निकालो पता करने ka...jiss बारे में भी पता कर रहे थे....

मैं - हां अब तो वही करना hoga.....Main स्कूल जाता हु fir....Bua के क्लास तक पहुंच hi जाऊँगा...

चची - अरे रुक जाओ आज....

दीदी - नहीं माँ मुझे भी इससे बात करनी है मैं इसको वह छोड़ के आती हु....

बिन्ना चची की बात सुनने वो लेके चल दी mujhe....sidhe बस स्टैंड के पास

दीदी - किस लड़की की बात कर रहे थे और इंसानी लड़की स्ट्रेंज वर्ल्ड में कैसे....

मैंने दीदी को बता दिया जो कुछ भी हुआ tha....jitna उनको बताना चाहिए tha....jaise की ज्वाला के कबीले के पास ये पहुंच गया था किसी तरह से फिर हम स्ट्रेंज वर्ल्ड गए और वह पे एक लड़की इसको मारने लगी मुझे देख वो भाग गयी वह se....Main उसी के बारे में पूछ रहा था इससे...

दीदी - पर क्यों...

मैं - दीदी वो खतरे में हो सकती है ना.....

दीदी - इस लिए.... :हँ:

इतने में बस आ gayi.....Main बस पे चढ़ा और उनको देखने लगा वो वही रुक्की हुई थी....

मैं - आपको नहीं चलना क्या....

दीदी - नहीं तुम jao....aur वापस से मिले वो लड़की तो मुझसे मिलवाना उसको समझे....

मैं - पर क्यों...

दीदी - जितना बोलै उतना करो....

बस चल पड़ी और मैं पहुंच गया स्कूल mein....waha से फिर अंदर चला गया और अभी क्लास चल रही थी और इसके बाद बुआ की क्लास थी मैं अपने रूम में चला गया थोड़ी देर के लिए.....

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखेंगे उस लड़की ko....aur चलेंगे एक नज़र अपने दब जी पे डालने.. साथ hi कुछ और बातें
 
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