फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 5 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

अपडेट - 29

अब तक

मैंने ओल्ड आउल से बात करि उसने मुझे बताया की उसकी कुछ परेशानियां है अगर मैं उनको सुलझा दू तो वो हमेशा के लिए मेरा और ज्वाला के कबीले का साथ dega..main तैयार हो gaya....wahi उसके जाने के बाद मैं अलबूस और कूपर के पास gaya...main भूल गया था की आज कोई मुझे ट्रैन करने आने वाला tha...main तो लगा हुआ था अपने नन्हे से दोस्तों के साथ की tabhi..kisi ने मुझपे हमला kiya...wo तो अलबूस ने मुझे बचा liya...fir उसके बाद जो hua...Cooper और अलबूस ने उस हमला करने वाले पे हमला कर diya....thodi देर में ध्रुव की आवाज आयी उसने मुझे उसको रोकने को कहा मैंने उनको रोका और फिर उस हालमा करने वाले को उठाया वो hi मुझे ट्रैन करने आये the...unse बातें हुई और

अब आगे...

मैं सुबह उठा और रेडी होक चला गया मेडिटेट करने ko..syad आज भी थोड़ी देर बाद बुआ वह आ gayi...Main ध्यान के वक़्त वही कर रहा था अपने थंडर एलिमेंट को मज्बूओत कर रहा tha...jab मैं ध्यान से उठा तो वह पे ना सिर्फ बुआ थी बल्कि निकिता भी thi...abhi वो ध्यान में hi बैठी हुई thi...Bua भी वैसे hi thi...main वह एक बार उन् दोनों को देखा और फिर वह से चला गया अपने रूम में वह गया और फिर जल्दी से रेडी होक चल दिया ब्रेकफास्ट के liye....bahar आया तो दब का ध्यान aaya.....maine सोचा की उसके साथ hi चल देता hu....Main उसके रूम के दरवाजे पे गया और दरवाजा khatkhataya...darwaja खुला हुआ tha....Maine देखा की वो वही फर्श पे बैठा हुआ था ध्यान pe...par मेरे दरवाजा खोलते hi वो उठ gaya....iska मेडिटेट करने का तरीका बड़ा hi कमजोर लगा मुझे...

दब - अरे प्रतीक tum...kya बात है...

मैं - क्या बात है ??? क्लासेज नहीं करनी क्या टाइम देखो क्या हो रहा है..

दब - नहीं आज मैं नहीं जा रहा hu....mujhe आज स्ट्रेंज वर्ल्ड जाना है पापा ने बुलाया है...

मैं - आज पर आज तो वीकेंड से पहले की आखिरी क्लासेज है आज क्यों जाना है कल चले जाना....

दब - नहीं यार वो पापा ने कहा है वह जल्दी आने ko...sayad कुछ काम hai...aur मैं ऐसे मौके नहीं छोड़ sakta...pata है मेरे और मेरे पापा में ज्यादा बनती nahi...Main हमेशा से कोशिश करता आया हु की उनसे मेरी जो बॉन्डिंग है वो मजबूत हो पर किसी ना किसी वजह से ऐसा नहीं हो paata...to अब मैं कपि भी मौका नहीं छोड़ता...

मैं समझ गया की इसके और इसके पिता के बिच की क्या कंडीशन है तो मैंने बस उसको आल थे बेस्ट बोलै और वह से बहार आ gaya...main ब्रेकफास्ट करने चला gaya....waha पे मैं आज अकेला बैठा हुआ tha....koi मेरे या दब के पास नहीं आया करता tha...karan भी था हम दोनों ने पंगे hi ऐसे लोगो से ले रखे the....wo दो दोस्त जिनको दब ने बचाया था वो भी हमारे साथ नहीं रहते थे अब...

मैं अकेला hi बैठा ब्रेकफास्ट कर रहा tha...ki तभी वह निकिता आती hai...aur आके बैठ जाती hai...waise भी जगह खाली hi thi...baithne के बाद वो भी खाना खाने लगती है apna...main एक पल के लिए उसको hi देखता रह जाता हु समझ hi नहीं आता मुझे ये यहाँ पे क्यों hai...matlab..ye तो दूसरे जगह बैठा करती थी...

निकिता - अपना खाना ख़तम करो मैं यही पे hu...baad में भी देख सकते ho..yaa फिर क्लास में..

मैं - तुम यहाँ क्यों....

निकिता - क्यों नहीं आ सकती kya...yaha पे बस तुम दोनों को बैठने की इज़्ज़ज़त मिली है kya...waise दिख नहीं रहे हमारे एल्फ प्रिंस कहा गए वो...

मैं - नहीं ऐसा नहीं है वो तो कोई हमारे साथ बैठता nahi..bas इसीलिए pucha...aur दब अभी अपने पिता से मिलने जाने वाला है वो क्लास भी नहीं करेगा आज...

निकिता - आज पर आज तो वीकेंड के पहले की लास्ट क्लास है naa...Fir आज kyun..kal जाना था ना..

मैं - नहीं उसने बोलै कोई जरुरी काम है तो चला गया...

निकिता - हम्म ठीक hai...waise क्या मैं भी तुम दूनो के ग्रुप में आ सकती हु kya...waise भी हममे तो एक साथ hi रहना है ना ab....wo प्रोफ. पूनम ने कहा था ना...

मैं - हां हां वैसे कोई ग्रुप नहीं है hamara.....aur तुम दोस्त बन सकती हो...

निकिता - thanks....waise मैं ना यहाँ कुछ पूछना चाहती थी तुमसे....

मैं - हां पूछो

निकिता - वो तुम नाराज़ तो नहीं ना वो कल मैंने तुम्हारी लड़ाई के बारे में बता दिया...

मैं - हां शुरू में थोड़ा गुस्सा आया था पर कोई बात nahi...chalo चलते है क्लास का भी टाइम हो गया है...

हम दोनों वह से थे और क्लास में चले gaye...par क्लास में जाने के बाद वह पे कोई असिस्टेंट प्रोफ. आ गया और वो क्लास लेने laga....hamare पूछने पे बताया गया की प्रोफ. सूरज किसी जरुरी काम से बहार गए hai....class हुई आधे यतीमे तक hi सिर्फ थ्योरी hi पढ़ाई गयी प्रक्टिकल्स नहीं hue..aur हम हाफ टाइम में hi फ्री कर दिए gaye....Main क्लास से निकला और अपने रूम में जाने laga...par तभी निकिता की आवाज आयी.....

निकिता - अरे कहा जा रहे ho...chalo लाइब्रेरी चलते है वह बहुत मज़्ज़ा आता है...

मैं - लाइब्रेरी में मज़्ज़ा ???? वो भला kaise....waha तो किताबें hi होती है ना और मुझे किताबें रूम पे hi मिल जाती है....

मैंने ऐसा कहा और निकिता मुझे घूरने lagi...jaise मैंने कोई बहुत बड़ा जुर्म कर दिया हो....

मैं - क्या हुआ ऐसे क्यों घूर रही हो...

निकिता - तो तुम भी उन्ही लोगो जैसे ho...library की अहमिययत अलग होती hai....aur उसको ये पोर्टेबल लाइब्रेरी कभी काम नहीं कर sakti....library में वो चीजजें भी मिल जाती है जिनको हम ढूंढ नहीं रहे होते है....

मैं - हां पता है पर मैं यहाँ के लाइब्रेरी में नहीं गया हु अभी तक...

निकिता - तो आज चलो मेरे साथ वह पे सच में बहुत अच्छी अच्छी किताबें है सभी चीज़ों के बारे में...

मैं एक बात समझ गया था अभी तक ज्वाला के कबीले और पोलर बेयर के कबीले के बारे में अगर कुछ भी पता लगाना हो तो मुझे पोर्टेबल लाइब्रेरी से नहीं पता चल sakta....kyunki उसमे से वही निकलता है जो मैं उससे मांगता hu..aur मैं ये hi नहीं जानता वो है कॉमन तो मैं क्या मांगू पोर्टेबल लाइब्रेरी se...aur कैसे पता करू उसके बारे mein....to मुझे अगर कुछ जाना हो या पता करना हो तो वो रैंडम्ली hi हो पायेगा sayad...haa वक़्त बहुत लगने वाला है इसमें पर तरय करने में क्या जाता है और वैसे भी लाइब्रेरी जाना कोई बुरी बात तो है nahi...to बस मैंने भी मैं बना लिया वह जाने का और निकल पड़ा निकिता के saath...hum थोड़ी देर में लाइब्रेरी में थे....

क्या लाइब्रेरी थी ye...matlab अगर मैं यहाँ पे किताबें hi गिनने बैठु तो भी मुझे 10 साल लग जाने है...

निकिता - यहाँ की किताबें रोज अपडेट होती hai...aur नयी किताबें हमेशा आती रहती hai...yaha पे हर तरह की किताबें मिल jaayegi...kadhe के लिए जादू के लिए लड़ाई के liye....yaa अपने स्पिरिट को ताकतवर बनाने के लिए...

लास्ट वाली बात पे उसने कुछ ज्यादा hi जोर दिया था और मुझे देख भी रही थी वो उस waqt....kal से hi मुझे ऐसा लग रहा है की वो जानती है सायद की मैंने उसको बचाया और साथ hi उसके स्पिरिट एनिमल को भी पावर्स दी है...

मैं - ये तो बहुत अच्छी बात है..

निकिता - हां अच्छा है तुम्हारी वो पोर्टेबल लिरार्य से बहुत अच्छा hai...usme बुक्स अपडेटेड नहीं hote...naye बुक्स भी लेट आते है...

मैं - उह मुझे ये पता नहीं टी...

मैं आगे बढ़ hi रहा था की एक बुक शेल्फ पे मुझे एक किताब dikhi....maine उसको उठाया और देखने लगा...

निकिता - हम्म अच्छी चॉइस है आते hi मर्लिन की लिखी हुई kitab,,,waise तुमने तो पढ़ी हुई होगी ये वाली ना...

मैं - नहीं तो क्यों...

मैंने ये कहा और निकिता के चेहरे पे एक स्माइल आ gayi...usne वो किताब मुझे ली और उसको मुझे dikhaya...maine उसको देखा और याद करने लगा इसको कही और भी देखा था मैंने...

निकिता - ये वही किताब है जिसमे लिखी हुई नबात दिखा के तुम और दब काढ़े वाली क्लास से निकलने से बच्चे the....tumne तो पेज नंबर तक बता दिया tha...aur अब कहते हो पढ़ी हुई नहीं है...

मैं शॉकेड रह gaya....mujhe याद नहीं था ये और इसको याद था ये sab...par क्या करे पकड़ा गया था अब बचें के लिए कुछ ना कुछ तो करना hi होगा ना...

मैं - हां मैंने पढ़ही हुई है वो बस याद नहीं रहा था...

निकिता - अच्छा फिर ये बताओ इस किताब की वो पेज कोण सी है जिसको मर्लिन ने नहीं लिखी...

मैं - ऐसा थोड़ी ना होता है किताब जब मर्लिन के नाम कीहै तो उन्होंने hi पूरी किताब लिखी होगी ना फिर क्या ऐसे hi....

निकिता- तुमने नहीं पढ़ी है ना ये किताब मुझे पता है तुमने नहीं पढ़ी है isko...agarr पढ़ी होती तो ये बात जरूर पता होती तुम्हे...

मेरी समझ में नहीं आ रहा था kuch...Main कुछ बोलता उससे पहले उसी ने उस टॉपिक को वही पे बंद कर दिया और कहा की नेक्स्ट क्लास शुरू होने वाली है तो चलो...

मैं भी खुद को बचने के लिए चल दिया वह se...aur हम दोनों जा पहुंचे काढ़े वाली क्लास में वह पे ज्यादा कुछ नहीं हुआ बस क्लास hui....Haa आज होड़ साहब भी आये थे par...aisa लगा नहीं की वो मेरे में थोड़ा सा भी इंटरेस्टेड hai..wo बस आये और क्लास ली और चले gaye...haa ये अजीब सा लगा कुछ की वो हमारे क्लास में आये the...jaisa सुन्ना था उनके बारे में उस हिसाब से तो उनका हमारे क्लास में आना ये किसी चमत्कार से काम नहीं था...

इस क्लास के बाद हम चल दिए प्रोफ. नमन के पास वह गए तो वह भी ज्यादा कुछ नहीं hua...bas क्लासेज hi हुई जैसे नोर्मल्ली होती है शामे बुआ के क्लास में भी hua...Ye सब होने के ठीक बाद में तुरंत hi अपने रूम में चला गया...

मैं आया और तुरंत hi ज्वाला को याद kiya...saath में ध्रुव को bhi...aaj उसकी आवाज भी नहीं सुनी और शाम तक हो गयी थी...

ध्रुव की आवाज तो नहीं आयी पर ज्वाला आ गया...

मैंने ज्वाला से ओल्ड आउल के जगह ले जाने को कहा और उसने वैसा hi kiya..mujhe ले गया ओल्ड आउल के इलाके में.....

इस जगह के बारे में क्या कहु समझ नहीं आ रहा tha...mausam से शुरू करता hu...yaha पतझड़ का मौसम tha...pedo से भरा हुआ ये इलाका अभी रंग बिरंगे पत्तो से भरा हुआ tha....dekh के एक पल को तो लगा इतना भी सुन्दर कोई जगह होता है kya...main तो यहाँ के खूबशूरती में hi खो गया वो तो ध्रुव की आवाज आयी और मैं होश में आया...

ध्रुव - याद किया था मुझे क्या तुमने...

मैं - अरे हां वो आज एक बार भी बात तक ना हुई अपनी तो bas...aur फिर यहाँ आना भी था ना...

ध्रुव - वो मैं आज उन दोनों को समझा रहा tha...unke पास पावर्स आ गए है अब उसको संभालना थोड़ा परेशानी भरा hai...bas उसी वजह से मैं बात नहीं कर पाया...

मैं - तो तुम भी उनको ट्रैन कर सकते हो naa...to तुम hi उनको मेरे लिए ट्रैन क्यों नहीं करते...

मैंने ये बस ऐसे hi पूछा tha...yaa यूँ कहो तो मजाक किया था पर ध्रुव तो मेरे ऊपर hi चढ़ गया...

ध्रुव - मैं यहाँ पे बस तुम्हे गाइड करने को आया हु ना की उनको तुम्हारे लिए तैयार करने के liye...aur अगर कर भी दिया ना पिछली बार की तरह तो वापस से वही hoga....main फिर से इन्ही के साथ चला जाऊंगा और तुम तुम....

मैं एक पल को तो समझ hi नहीं पाया की ये बोल क्या रहा है पिछली बार से क्या मतलब है इसका मैं उससे इसके बारे में पूछता उससे पहले hi हमारे सामने एक उल्लू आ गया.....

उल्लू - स्वागत है आपका आउल टाउन mein,..Aap होंगे ज्वाला (ज्वाला की ओर देखते हुए कहा...) और आप (मेरी ओर देखते हुए) आप होंगे हमारे मसीहा प्रतीक ji....aap दोनों से मिलके बहुत अच्छा लगा...

जब ये उल्लू आया ध्रुव ने वो साड़ी बातें hi बदल दी प्रतीक के दिम्माग se...wo नहीं चाहता था अभी वो सवाल उसके सामने आये जिनका जवाब अभी देना सही नहीं है...

मैं - अरे ऐसी कोई बात नहीं है मैं कोई मसीहा नहीं मैं तो दोस्त हु bas...Old आउल जी ka...waise आप कोण...

वो - Main...main यहाँ की एक निवासी hu...Old आउल ने मुझे hi आपका स्वागत करने का जिम्मा दिया tha....so बस मैं आ gayi...ab आप चले...

मैंने नोट किया की वो बोलते वक़्त कुछ थोड़ा हिचकिचा रही thi...haa ये लड़की thi...uske पंख भी थोड़े बिखरे हुए the...main समझ नहीं पाया कुछ...

ध्रुव - नहीं आगे नहीं जाना है पहले इससे उस कीड़े के बारे में पूछो...

कल मैंने चाहे कितना hi ध्रुव की बातों को नज़र अंदाज़ किया था पर उसके बातों में लॉजिक तो था hi...Maine उसकी बात मानी और इससे पूछा उस कीड़े के बारे में.....

मैं - है है चल लेंगे पहले ये बताइये वो कीड़ा जिसके बारे में ओल्ड आउल ने बताया tha...uske बारे में कुछ बता दे तो...

उस्सने अपना एक पंख तोडा और मुझे दे दिया और खुद वह से चली gayi...Main बस देखता raha...aisa कोण करता hai..abhi स्वागत करने आयी थी और अब भाग गयी...

ज्वाला - पीछे dekho...ye क्या है...

मैंने पीछे देखा तो वह से धुल की एक लहर आ रही thi...par वो धुल नहीं थी वो छोटे छोटे कीड़े the...Jwala ने तुरंत hi एक पोर्टल खोला जिससे होते हुए मैं अपने रूम में आ गया और वो सायद अपने कबीले में जा pahucha....ye क्या था मेंसमझ hi नहीं पाया...

ध्रुव- मैंने कहा था जान लो किश चीज़ के बारे में बात चल रही है....

मैं - अरे पर वो था kya....aur वो उसका ऐसे चले जाना पंख देके और ज्वाला का ऐसा karna..kya था ये सब...

ध्रुव - वो जो कीड़े थे अगर हमसे टच भी होते ना तो अलबूस और कूपर दोनों की hi हालत ख़राब हो जानी थी....

मैं - क्या मतलब hai...unko कैसे कुछ हो झाता वो तो स्पिरिट्स है मेरे...

ध्रुव - हां वही तो बात है वो स्पिरिट्स है और ये जो कीड़े थे वो स्पिरिट्स को hi मारते hai..abhi तक तो अलबूस और कूपर का...

मैं - बकवास बंद करो मैं कभी ऐसा नहीं होने दूंगा...

ध्रुव - अभी ये होने वाला tha...agar ज्वाला ने सही वक़्त पे ये नहीं किया hota...aur वो उल्लू वो कोण थी ये पता लगाओ pahle...mujhe तो इस्पे भी शक है वो उल्लू hi थी naa...uske पंख तो देखे ते ना...

मैं - वो उल्लू hi थी इतना पता है mujhe..par जैसे hi उसने वो पंख मुझे दिया तुरंत hi वो धुल का आना मुझे भी उसपे शक करने पे मजबूर कर रहा है....

ध्रुव - हम्म ओल्ड आउल से बात करनी होगी पर अभी नहीं रात में पर उसको खबर करा दो...

मैं - हां मैं करा देता हु...

मैंने ज्वाला को बोल दिया की उससे बोले की वो रात में मुझसे मिले साथ में ये भी तो जानना था उससे की ये प्रोफ. सूरज कहा है आज...

ये करने के बाद मैं वो पंख देखने लगा पर उसमे कोई चीज़ दिखी नहीं mujhe....maine उसको अपंने पास hi रख लिया और फिर रूम से बहार nikla...dinner को थोड़ा वक़्त tha..aur अभी कुछ करने का मूड नहीं tha...Main बहार निकला और मुझे निकिता वापस से मिल गयी...

निकिता - कहा चले गए थे मैं कब से धुंध रही थी चिम्को...

मैं - मुझे पर क्यों...

निकिता - वो बस ऐसे hi...accha एक बात batao...tum क्या घर जा रहे हो इस वीकेंड भी..

मैं - हां जा रहा हु बुआ के साथ..

मैं (मां में) ये क्या बोल दिया...

निकिता - बुआ के साथ तो तुम्हारी बुआ तुम्हे ेने आ रही है...

मैं - हां हां वही to..wahi लेने आ रही है mujhe...sayad आज hi निकल जॉन...

मैं उससे बात कर रहा था की तभी बुआ आ गयी वह पे....

बुआ - वो भी चल रही है हमारे साथ उसको पता है sab...maine बता दिया...

मैं - Kya...matlab इसको पता है की मैं आपका भतीजा हु...

बुआ - अभी क्या किसी और भासा में कहा maine...ab जल्दी से भागो और रेडी होक आओ हममे निकलना है बस आती hi होगी...

मैं - हम आज ही जा रहे है क्या...

बुआ - तूने hi तो बोलै ना बच्चू की तेरी बुआ आज लेने आएगी tujhe...to अब आ गयी जल्दी रेडी हो और chal...Nikita तुम जाओ और कविता को देखो वो तैयार हुई या नहीं..

मैं - क्या कविता मैडम भी जा रही है हमारे साथ...

बुआ - हां क्यों कोई दिक्कत है क्या...

मैं - नहीं पर...

बुआ नहीं ना फिर रेडी होक आ जल्दी...

मैं क्या बोलता बुआ तो अलग ही फॉर्म में चल रही थी तो बस मैं भी चल दिया वह se...room में गया रेडी हुआ और बहार आ gaya...Bua वही पे थी साथ में निकिता और कविता मैडम bhi...Main वह खड़ा हुआ hi था की बस आ गयी और हर बार की तरह इस बार भी बस पे जाना था और हम पहुंच भी gaye....jab हम चारो बस से उतरे तो वह पे पहले से रूपल दीदी कड़ी thi...mujhe देखती hi वो मेरे पास आयी और मेरे गाल खींचने lagi....tabhi उनकी नज़र बाकी के दो लोगो पे गयी...

रूपल - उह तो फिर आ गयी आप...

कविता - क्या करे ab..hum तो आपके दीवाने है आना hi pada..judayi बर्दास्त नहीं होती ना...

रूपल - इस बार देखो बस आप कैसे हारती हु आपपको..

कविता - अल्ले ले ली ले मेला बचा मुझे हलायेगा.....

बुआ - कविता Rupal...abhi शुरू नहीं होना है बाद मनें दोनों को मौका milega...aur संडे उसी के हिसाब से चलेगा जो jitega...pahle की तरह...

रूपल - हां ठीक hai...ye कोण है...

बुआ - अरे हां ये ये है Nikita....Bacchu की क्लासमेट है मेरी स्टूडेंट है और अभी के लिए यहाँ पे हमारी मेहमान है ये...

रूपल - Oo...chalo सब फिर वैसे भी माँ और बाकी सब वेट कर रहे है...

सभी अपना अपना सामान उठा के चल दिए वह pe...waha पहुंचे तो सभी खाने के टेबल पे बैठे हुए the...sayad बुआ ने कविता मैडम और निकिता के आने का नहीं बताया था पहले तो वह पे चेयर्स नहीं थी पर उनको देखते hi चची ने चेयर्स का बंदोबस्त कर diya...aur फिर सबने खाना khaya...sabki जान पहचान भी हुई निकिता se...unko उनका रूम दिया गया और सारे सोने चले gaye....Main सोने आया रूम तो वही था पहले वाला,,,,

सोने के बाद तुरंत hi पहुंच गया उसी जगह pe...Albus और कूपर के pass...unko देखा तो उनको कही दूर खाना दिया हुआ tha...wah एक परछाई सी कोई चीज आयी...

वो - पहला lesson....speed बढ़ाना hoga.......Ab सुनने यहाँ से स्पीड तो बढ़ेगी नहीं तो ट्रेनिंग पैहसिकलली hi करना होगा ना...

मैं - हां तो क्या अब कल से शुरू करे...

वो - अरे नहीं बात बस ये है की मैं..

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में ट्रेनिंग आगे जायेगी और साथ hi वो ओल्ड आउल aayega...aur कीड़ो के बारे में पता छाए...
 
अपडेट - 30

अब तक

मैं गया था वह ओल्ड आउल के यहाँ पर वह पे कुछ बड़ा hi अजीब hua...ek माद्दा उल्लू आयी और उसने अपना पंख मुझे दे दिया और उसके ठीक बाद वह पे उन्ही कीड़ो की फ़ौज आ gayi...ye वही थी जो नं लोगो को परेशां कर रही thi...wo तो वह से ज्वाला ने निकल लिया mujhe...waha से निकलने के बाद मैं जब स्कूल आया तो बुआ ने नया बम fod...ye तो पता था मुझे की मैं घर जाऊंगा पर निकिता bhi...ye पता नहीं था और बुआ ने उसको हमारे बारे में बता भी दिया tha...par kyun...ghar में आके जब मैं सोने गया तो पहुंच गया अलबूस और कूपर के pass...par वो नहीं थे waha...waha अभी एबीएस वही था जो मुझे सीखने आया tha....unhone कहा की यहाँ पे फिजिकल ट्रेनिंग नहीं हो सकती....

आगे

मैं - तो क्या अब कल से शुरू करना है ये सब...

वो - अरे नहीं वो तो main...main ये कह रहा था की मैं तुम्हे यहाँ पे कुछ टिप्स डूंगा और उन्ही के हिसाब से tumhe...dhyaan लगाने के बाद एक्सेसिसे करना hoga...usse ना सिर्फ स्टैमिना बढ़ेगा बल्कि बॉडी मजबूत भी hogi....waise भी तुम्हारी बॉडी बहुत कमजोर सी लगती है...

मैं - नहीं ऐसा नहीं है मैं पहले से hi बहुत से आर्ट्स जानता हु मुझे मेरे मास्टर ने बहुत कुछ सिखाया है और मेरा बॉडी सायद उतना भी कमज़ोर नहीं जितना आप समझ रहे है.,...

वो - हम्म तो फिर ठीक है मैं भी देख लूंगा...

ध्रुव - बॉडी स्ट्रांग नहीं है tumhari...haa स्टैमिना तो है तुममे पर स्ट्रांग सच में नहीं hai...tum खुद देख सकते हो...

मैं - अच्छा ठीक है बताओ क्या करना होगा बॉडी को स्ट्रांग बनाने के लिए....

वो - वो भी बता dunga...ab अपनी तलवार nikalo...aur सामने जो वो पेड़ है उसको काटो 2 वार में....

पहले तो मैंने सामने देखा कुछ दिखा hi नहीं कुछ था hi नहीं waha...fir देखते hi देखते वह पे एक छोटा सा पौधा ugga...aur वो बड़ा होने laga...pahle एक टाहली फिर dusri...aise hi करते करते वो एक बहुत hi बड़ा पेड़ बन gaya....iss पेड़ की शाखएँ इतनी मोती थी की उनको एक वार में नहीं कटा जा सकता और ये मुझे पूरा पेड़ एक वार में काटने को कह रहे थे...

मैं - इसको एक वार में वो कैसे हो गए...

वो - क्यों नहीं hoga...tum तो स्ट्रांग हो naa...jao काट के आओ उसको...

मैं समझ गया ये कहा पे hai...ye मुझे समझा रहे है की अभी ना मुझमे वो स्टैमिना है और ना hi मेरी बॉडी स्ट्रांग है...

मैं - मैं समझ गया आप क्या कहना चाहते है आगे से ऐसा नहीं होगा...

वो - जल्दी समझ gaye...chalo ठीक है पर पेड़ अब आ गया है तो काटना तो पड़ेगा ना देखो कैसे सुख गया है वो...

मैंने पेड़ की ओर देखा तो उसके सारे पत्ते निचे गिर चुक्के थे और वो पूरा सुख भी चूका tha...par अभी भी मेरे से एक वार में काट जाए ये मुमकिन नहीं tha...maine एक बार और उनकी ओर देखा और उन्होंने बस आँखों से इशारा किया की जाओ और काट के आओ...

मैं भी अपनी तलवार को दोनों हाथों से पकड़ के तेज़ी से दौड़ता हुआ गया और उस पेड़ पे दे maara...par उसके बाद मैं जमीं पे था मेरी तलवार पेड़ में फांसी हुई thi...aur मुझे 2 लोगो के हसने की आवाजें आ रही थी...

ध्रुव - एक बार और तरय karo...mujhe लगता है इसको मौके देने चाहिए जब तक ये तलवार से इस पेड़ को ना तोड़े तब तक हम चलते है बात करेंगे...

वो - हां चलो वैसे भी कुछ चीज़ें बतानी thi...sayad इससे इसको भी मदद मिल जाए...

वो डॉन hi वह से चले गए और मुझे वो पेड़ काटने को कह gaye...main भी लगा raha....naa जाने कितने hi वार किये मैंने पर पेड़ को ज्यादा कोई फर्क hi नहीं पद रहा tha...ek पल को तो मैंने भी हार मान li...par पता नहीं अगले hi प् क्या hua...mujhe वो पेड़ चिढ़ाने laga....bada hi ाजी था वो...

पेड़ - क्यों बे हार गया mujhse...hahaaha कहा हारेगा भी क्यों नहीं तू तो है hi darpookh...tu क्या तेरा तो पूरा खंडन hi दरपुख है ना.....

वो पेड़ अभी उसी सुवर के सार वाले की तरह बाटें कर रहा था जिससे मेरा और रूपल दीदी का सामना हुआ tha....aur अभी वो मेरे फॅमिली पे जाए रहा tha....gussa आने लगा mujhe...wo फिर भी सांत नहीं hua...wo बोलता hi गया और बस बोलता hi गया और फिर मेरा गुस्सा बी बढ़ता गया और अंत में मैंने सच में उस पेड़ को एक hi वार में काट diya...gusse में पता नहीं कैसे मैं उस एंगल में वार किया उस पेड़ पे की वो बस निच्चे hi गिर gaya...makhan की तरह मेरी तलवार उस पेड़ से होते हुए गुजरी thi...waha पेड़ गिरा और उसी के साथ वो वह पे वो आये...

वो - कुछ समझ में आया क्या...

मैं - गुस्से को सही समय पे और सही तरके से उसे करने से बहुत ज्यादा फायदा होता है...

वो - जल्दी सीख रहे ho...par एक बात ये भी सच है की कोई भी काम हम जितना अच्छा शांत मान से करते है उतना गुस्से में या फिर किसी चीज़ के बारे में सोचते हुए नहीं कर सकते hai...samjh रहे हो ना

मैं - हां समझ गया...

फिर उन्होंने मुझे कुछ टिप्स दिए एक्सरसाइज के और साथ hi डाइट भी बताई जिससे मेरी बॉडी स्ट्रांग h...uske बाद वो चले gaye...aur मैं भी जाने को हुआ की मुझे अलबूस और कूपर की याद आयी...

मैं - ध्रुव कहा है वो दोनों...

ध्रुव - आवाज दो वो खुद hi आ जाएंगे...

मैं - Albus....cooper...

मेरा आवाज देना था की दोनों hi मेरे सामने आ गए भागते hue...unki स्पीड बहुत तेज़ thi...kuch hi सेकण्ड्स में वो बहुत दूर से मेरे पास आ गए the...aur मेरे ऊपर कूद गए थे...

थोड़ी देर उनके साथ खेलने के बाद मैं चल दिया wapas...jab जाएगा तो यही कोई 4 बजे honge....room से बहार nikla..aur गार्डन की ओर चला गया और वह जाके मेडिटेट करने laga...ghar में 2 गार्डन थे एक तो घर के आगे की ओर और एक पीछे की oor...main आगे की ओर गया था मेडिटेट करने ko...jyada वक़्त नहीं हुआ था की किसी ने कोई पाथेर फेका हमारे घर की oor...aur वो पाथेर मुझे laga....meri आँखें खुल गयी सामने देखा तो कोई नहीं tha...sar पे चोट लगी थी मेरे ko....main उठा और बहार जाके आस पास देखने laga...koi नहीं dikha...main वापस से घर में गया तो वह पे चची मिल gayi...unhone देखा की मुझे चोट लगी हुई hai...wo घबरा gayi...aur जल्दी से सबको आवाज देने लगी...

मैं - चची कुछ नहीं हुआ है ये बस ऐसे hi गर गया था...

चची ने एक बार मुझे देखा और फिर दवाई लेके आयी और मुझे लगाने lagi...tab तक वह पे बाकी के लोग भी आ गए the...Bua और निकिता साथ में रूपल दीदी और कविता मैडम तो पीछे के बगीचे की ओर ध्यान लगा रहे the...wo भी आ गए साथ hi दादा दे और चाचा hi आ gaye....Chachi ने सायद उनको कोई इशारा kiya...jiske बाद चाचा जी को बहुत गुस्सा आया और वो बहार चले gaye...wahi दादा जी थोड़े शांत rahe...Dadi भी मुझे दवाई लगाने lagi...Bua बहार चली गयी थी रूपल दीदी के saath...Main समझ नहीं पा रहा था वह हो क्या रहा hai....thodi देर में आसमान में पूरा अँधेरा चा gaya...main समझ नहीं पाया ये कैसे हुआ...

मैं - चची ये क्या हो रहा है...

चची - कुछ नहीं तू बस baith...Maa जी इसको देखो जर्रा मैं भी आती हु...

कविता - भाभी मैं भी आती हु...

चची - हां chalo....Nikita बीटा आप यही रहना समझी...

निकिता - जी

और इस बार दादा चची और कविता मैडम भी बहार चले gaye....thodi देर बाद मैंने देखा की आसमान साफ़ हो गया है वापस से...

मैं - वो सब कहा गए दादी...

दादी - कही नहीं बस बहार गए hai...kuch काम याद आ गया होगा naa..tu बस आराम कर...

मैं - अरे बस ठोकर लग के गिर्रा hi तो hu...aur आप लोग तो बस...

दादी (आँखें दिखते हुए) - ठोकर लग के गिरा hai....tu बिलकुल अपनी माँ पे गया hai...waise तो उसके साथ ज्यादा रही नहीं हु main..par वो जब घर आयी थी तो देखा था usko...dusro को बचने के लिए झूट बोलना...

मैं - अरे मैं झूट नहीं बोल रहा...

दादी - हां बस हमारा वहम hai...jyada होसियार मत बन्नो...

मैं समझ गया इनको सब पता है इनको क्या बाकी सब को भी पता है किसी ने पत्थर फेका मेरे upar...par क्यों फेका...

मैं - दादी माँ पापा के बारे में बताओ ना kuch...Master ने कहा था वक़्त आने पे मुझे पता चलेगा...

दादी - मास्टर ने कहा था ना मेरे बच्चे तो वक़्त आने पे वो खुद hi बता degi...chalo अब फेश हो jaao...aur फिर खाना khayege...Nikita बीटा आप भी जाओ फ्रेश हो जाओ...

निकिता - जी..

हम दोनों ऊपर जाने lage..upar hi तो हमारे रूम्स थे..

निकिता - क्या तुम्हारे माँ डैड भी नहीं है...

मैं - नहीं है मैं बचपन से अपने मास्टर के साथ रहा hu...school में आया तब बुआ का पता चला फिर पता चला की एक परिवार भी hai...waise तुम्हारे माँ डैड कहा है...

निकिता - Wo...wo...Main अपने आउंट के साथ रहती thi...mujhe पता नहीं मेरे माँ डैड कहा hai...jab तक पचने की उम्र आयी ता आउंट भी नहीं rahi....aur मुझे एक ओर्फनेज में भेज दिया गया....

मैं - Ooh.chalo फ्रेश हो जाते है..

मैं उसको कोई सहानुभूति नहीं दिखाना चाहता था क्यूंकि इतने वक़्त में इतना तो समझ गया था इसको सहानुभूति बिलकुल भी पसंद nahi...aur अभी मैं उसको और परेशां नहीं करना चाहता था तो हम चल दिए अपने अपने रूम्स में तैयार होने ko..Main रूम में गया तो खिड़की से बहार की ओर dekha....aur जो देखा उससे तो मैं दांग hi रह gaya...hamare घर के सामने बहुत से लोग खड़े the...aur बुआ chachu..Dadu और बाकी sab..unko देखे जा रहे the...wo सारे सच में दर्रे हुए the...main समझ नहीं पाया यहाँ हो क्या रहा hai...abhi कुछ कहता उससे पहले hi वो सब ऐसे भागे जैसे उनके पीछे किसी ने पागल कुत्तों की फ़ौज छोड़ दी हो...

उनके जाने के बाद बाकी सब भी वापस आ गए और मैं निच्चे जाने की सोचने laga..par फिर सोचा की फ्रेश होक hi जाय jaaye...Main जल्दी से फ्रेश हुआ और फिर निच्चे gaya...niche गया तो माहौल एकदम से शांत tha....abhi रूपल दीदी के नाना नानी भी यही आये हुए थे...

मैं जैसे hi निचे गया...

नानी - कैसे हो प्रतीक beta...sab ठीक है ना..

मैं - है नानी जी मैं ठीक hu...Rupal दीदी वो अभी बहार...

रूपल - Bahar...arre वो कुछ नहीं वो कुछ लोग आये थे yaha...ab चले गए तुम चिंता मत करो....

दीदी ने ऐसे जवाब दिया जैसे वो जानती हो की मैंने देख लिया था सब कुछ और वो जानती है की मैं क्या कहने वाला hu...jawab के बाद अब कुछ बच्चा hi नहीं मेरे पास बोलने के लिए..

चची - अरे चलो सब नास्ता karlo...fir रूपल और कविता की लड़ाई भी तो देखनी है...

कविता - अरे भाभी क्यों अपनी फूल सी बच्ची को परेशां करती हो...

रूपल - फूल सी बच्ची हां आज ना मैं आपको बतातुई हु फूल सी bacchi...aaj तो हराऊंगी hi आपको..

दादी - हां हां हरा लेना पर उससे पहले सब खाना खाएंगे...

अभी बातें hi हो रही थी की निकिता भी ऊपर से निच्चे आयी...

नानी - ये बच्ची कोण है देखने में तो बड़ी प्यारी लग रही है...

बुआ- Ye...ye मेरी स्टूडेंट है निकिता नाम है इसका...

नानी - नाम भी बड़ा प्यारा है...

चची - चलो सब आ जाओ...

सभी नास्ते के टेबल पे जा बैठे और फिर खाना खाने lage...abhi हम खाना खा hi रहे थे की ाकनक से मुझे लगा की सब के सब रुक गए hai....Main समझ नहीं पाया ये क्या हो रहा hai..maine सबको dekha...Bagal में रूपल दीदी बैठी हुई थी उनको हिलाया भी पर कुछ हुआ hi नहीं....

मैं - ध्रुव ये क्या हो रहा है...

ध्रुव - समय रुक्का हुआ है कोई बड़ी बात हुई hai...koi कुछ बताने आया है सायद...

मैं यहाँ वह देखने laga...ki तभी एक पोर्टल खुला और उसमे से ओल्ड आउल समें आया...

ओल्ड आउल - आपने आने को कहा था...

मैं - हां कहा tha...par ये सब क्या तुमने किया है..

ओल्ड आउल - हां मैंने किया है ताकि कही पीछे ना हो jaun...meri कुछ शक्तियों में ये भी आती hai....ab ये बताइये हुआ क्या कैसे याद किया मुझे...

मैंने उसको सब बातें बताई की कैसे क्या क्या हुआ वह pe..jab मैं और ज्वाला उसके इलाके में gaye....meri बातें सुन के उसने अपना सर निचे कर लिया...

ओल्ड आउल - मुझे पता नहीं था की वो भी अब उन् कीड़ो के बस में चली गयी hai...ye सब उन् कीड़ो ने करवाया है उनसे...

मैं - कीड़ो ने karwaya...to क्या ये सब उन्ही का किया धरा है...

ओल्ड आउल - जी हां वही बात hai...wo कीड़े दिम्माग पे भी काबू कर लेते है...

ध्रुव - मैंने कहा था सब पता कर लो उसके बाद कुछ karenge...ab सब कुछ पूछो उन् कीड़ो के बारे में...

मैं - मुझे उन् कीड़ो के बारे में सब batao..old आउल...

ओल्ड आउल - वो kidde...pata नहीं कहा से आये the...shuru में तो एक बच्चे को उसकी शिकायत हुई thi...fir देखते hi देखते बहुत से log...jinko भी वो कीड़े लग जाते है वो अपने काबू में नहीं rahta...ek तो उनके पंख बिखरे हुए होते है और दूसरा वो हमेशा हिचकिचते हुए रहते है...

मैं - हम्म और भी कोई बात है क्या...

ओल्ड आउल - नहीं और कोई बात नहीं है हमारे बहुत से लोग है जिन्होंने उनको रोकने के उपाय ढूंढने की कोशिश की पर कोई कामियाब नहीं hua...haa पर एक बात है उन् सब ने किसी पैधे का ज़िक्र जरूर किया hai...par वो पौधा है hi नहीं यहाँ पे...

ध्रुव - Paudha...waise तो इन् कीड़ो के बारे में सुन्ना सु न लग रहा रहा hai...inko हथियार के रूप में उसे करते ते लोग pahle...yaad है तुमने कैसे उनको सबक सिखाया था...

मैं - मैंने सबक सिखाया tha...kya बोल रहे हो मैं तो जानता भी नहीं इनको...

ध्रुव - अरे हां वो लगता है मैं कुछ और सोच रहा tha...Old आउल से पूछो क्या वो रेड ड्रैगन पौधे की बात कर रहा है...

मैं - क्या तुम रेड ड्रैगन पौधे के बारे में बोल रहे हो...

ओल्ड आउल - हां वही paudha..ussi के बारे mein..par वो मिलता hi नहीं है kahi....maine सुन्ना है वो बस किस्से कहानियों में होते है असल जिंदगी में नहीं होते वो...

ध्रुव - इसको जाने bole...aur बोलो चिंता ना करे हम ले आएंगे वो paudha...ab लगता है उन् कीड़ो को जल्दी hi ख़तम करना hoga...kahi वो अपने मालिक तक पहुंच गए तो दिक्कत हो जायेगी...

मैं - तुम जानते हो क्या उनके मालिक के बारे में...

ध्रुव - हां जनता hu...aur इसीलिए ये जल्दी करना hoga...warna ओल्ड आउल के सारे लोग उसी के लिए काम करने लगेंगे...

मैंने ओल्ड आउल को जाने के लिए बोल diya...aur उसके जाते hi सब सही हो gaya...sab खाना खाने लग gaye...wahi मैं सोचने लगा की प्रोफ. सूरज के बारे में नहीं पूछा isse...unka भी पूछ लेना था...

ध्रुव - अब यहाँ से निकलना hoga...body से निकलो और ज्वाला को बुल्ला lo...main तुम दोनों को गाइड करता हु...

मैं - हम्म ठीक है...

मैंने ज्वाला को बुलाया और हम दोनों मर्ज हो gaye....apni बॉडी को वही ध्रुव के हवाले छोड़ में चला गया ज्वाला के साथ...

ध्रुव - मर्लिन की किताब याद hai...usne एक छोटे से प्लांट का पत्ता बताया tha..wahi प्लेनेट जो डेमोस वर्ल्ड के बाद था...

मैं - हां पर वो तो बहुत दूर है ना...

ध्रुव - तुमको पता भी है अभी जिस रूप में तुम ho...agar चाहो तो अभी के अभी पूरा यूनिवर्स घूम आओ...

मैं - थोड़ा ज्यादा नहीं बोल दिया...

ध्रुव - :सिघ: नहीं सच कह रहा hu...agar इस रूप को अच्छे से काबू करने लग गए तो स्पीड बहुत है tumme...par हमेशा इसी रूम में रहना ये गलत hoga...ab jao...Jwala इसको वह लेके jao...shurakshit..

ज्वाला - हां बिलकुल...

और इसी के साथ मैं चल दिया डेमोस वर्ल्ड के पास की एक छोटे से प्लेनेट पे जहा से मुझे कुछ चीजजें लेनी थी...

आज के लिए इतना hi...Deemos वर्ल्ड में कुछ होने वाला hai...next अपडेट मेंसाथ hi में रूपल और कविता की वो ladayi...bhi देखनी hai...kuch और भी बातें होंगी...

सभी को हैप्पी diwali...late हो गया ना :lol:
 
अपडेट - 31

अब तक

एक पौधा है रेड ड्रैगन करके मुझे वो लाना है डेमोस वर्ल्ड के पास के एक छोटे से प्लेनेट se...iss पौधे के मदद से हम उस कीड़े को रोकने वाले थे जो ओल्ड आउल के लोगो को परेशां कर रहे the...Maine ज्वाला को बुलाया ध्रुव के कहने पे और फिर हम दोनों एक हुए और जाने को रेडी हो गए...

अब आगे...

ज्वाला ने उड़ना शुरू kiya....aur देखते hi देखते हम एअर्थ से बहार थे...

मैं - पोर्टल से भी तो जा सकते है ना...

ज्वाला - पोर्टल हर जगह नहीं ले जा sakti...aur उस जगह पोर्टल से जानना मतलब मौत को बुलाना होगा....

मैं - क्या मतलब...

ज्वाला - वह पे गॉब्लिन्स रहते hai.....aur वो एनर्जी के भूखे होते hai...jaise ी उनक पोर्टल के एनर्जी का पता चलेगा वो हमारे पास आ जाएंगे और फिर बेमतलब की लड़ाई hogi....unki तादात बहुत ज्यादा होती है जिस वजह से जीत पाना मुश्किल होता hai....upar से बगल में hi डेमोस भी है अगर डेमोस में ये खबर फैली तो वह से भी लोग aayenge...aur अंत में हमें बंदी बना लिया जाएगा...

मैं - अच्छा ऐसा है फिर तो इसी तरह से जाना सही है.....

ज्वाला अपने स्पीड में जाता raha....main बस ीउसके बॉडी में था कोई काम नहीं कर रहा tha...kuch hi देर में हम डार्क वर्ल्ड के ऊपर से gujre....upar से देखने में सब शांत hi लग रहा tha....uske बाद हम गए फोमोस के ऊपर से वह पे भी वही हाल था ऊपर से देखने में बिलकुल shant....aur उसके बाद डेमोस के ऊपर se...waha पे कुछ अलग tha....jwalamukhi तो पीछे वाले प्लैनेट्स पे भी the..par इतने ज्यादा nahi...ye तो पूरा प्लेनेट hi ज्वालामुखी से भरा पड़ा tha....Main निच्चे की ओर सब देख रहा था..

ज्वाला - वो देखो वो रहा planet.....humme वही जाना है..

उसकी बाटों ने मेरा ध्यान खिंचा और मैंने उस ओर देखा जहा वो मुझे दिखा रहा tha....samne एक छोटा सा बहुत hi छोटा सा प्लेनेट tha...dekhne में तो वो डेमोस का चाँद लग रहा था पर ऐसा नहीं था वो एक अलग प्लेनेट था....

मैं - ये है वो प्लेनेट...

ज्वाला - हां यही है अब हम एक बार ऊपर से hi चाकर लगा लेते hai.....waise उस पौधे के बारे में पता है ना तुम्हे...

मैं - नहीं मुझे नहीं पता है मैंने तो देखा भी नहीं hai....kya तुमने कभी देखा है उसको...

ज्वाला - नहीं मैंने बस उसके बारे में सुन्ना है दूर से hi उसकी खुसबू लोगो को खिंच लेती है पर वो बस एक जाल होता है जैसे hi उसके पास जाते है उसके पास के एक दानवी बौद्धा हमपे हुम्ला कर देता hai....wo दानवी पौधा उसी रेड ड्रैगन पौधे के पास होता hai...aur हां दिखने में रेड ड्रैगन पौधा नार्मल पौधों जैसा hi लगता hai...bas उसके फूल उसको अलग करते hai...unke फूल लाल रंग के होते है और देखने में ड्रैगन्स जैसे लगते है...

मैं - हम्म इतने से तो काम चल jaayega...agar और कोई कन्फूसिओं हुई तो ध्रुव है hi....hai आ ध्रुव..

कोई जवाब hi नहीं aaya...sayad कनेक्शन कट चूका था..

मैं - लगता है मैं ध्रुव से कनेक्ट नहीं कर पा raha...chalo कोई नहीं हम दोनों hi ले आते है वो paudha...chalo ज्वाला

मैंने उसको कहा और हमने फिर ऊपर से hi प्लेनेट का एक चक्कर mara...humme कही कोई गॉब्लिन नहीं dikha....dikhe तो बस paudhe...rang बिरंगे पेड़ paudhe...aur कुछ नहीं था वह पे...

एक खली जगह को देख के हम उतरे...

हम एक ओर जाने लगे क्यूंकि हममे वह पे कुछ तो दिखा था हवा se...jo सायद वही पौधा ho...hum उसी ओर जा रहे the...aur जाते हुए हममे खुसबू भी आने lagi...jaisa की ज्वाला ने बताया tha...par अब हममे सावधान भी रहना था वो दानवी पौधा भी वही पे होने वाला था... मैंने अपने तलवार को याद किया और वो हमारे पास आ gaya....aur फिर हम धीरे धीरे आगे की ओर बढ़ने lage...sab कुछ देखते हुए...

कुछ hi देर में वो खुसबू बहुत तेज़्ज़ हो गयी थी मतलब हम उस पौधे के बहुत पास the....par तभी जम्में हिलने lagi...aur जमीन के अंदर से पौधों के जड़े निकलने लगी और वो हमारे पैरों में फसने lagi....hum जल्दी से वह से निकलने वाले थे पर तभी पेड़ों की डालियाँ भी हममे पकड़ने लगी...

ज्वाला उड़ने की कोशिश कर रहा था पर परिणके बंधे होने की वजह से नहीं हो पा रहा tha...usne फिर वह पे आग से हमला kiya...aur आग से वो सारे जड़े जल gaye....par ये सायद हमारी भूल thi...ussi आग के कारन वह पे गॉब्लिन्स आने lage...shuru में तो बस एक hi aaya...par आने के साथ hi वो चिल्लाने laga...apne साथियों को बुलाने लगा...

हम पहले hi उन् पेड़ों से परेशां the...aur अब ये गॉब्लिन्स अलग hai...agar हम जल्दी यहाँ से पौधा लेके ना निकले तो दिक्कत हो जाता...

मैं - ज्वाला आग से वॉर कर चरो taraf....inn पेड़ों से आज़ाद होते hi हम उस पौधे को लेके यहाँ से निकल jaayenge...isse पहले की ये गॉब्लिन्स यहाँ आये...

ज्वाला ने भी वैसा hi kiya..sabse पहले हमरे चारो ओर आग की लपटे छोड़ी जिसके बाद वो सारे जल gaye....uske बाद हम थोड़ा आगे गए और तुरंत hi सामने दिख रहे पौधों में से कुछ को लेके वह से उड़द gaye...hamara उड़ना था और वह पे गॉब्लिन्स का एक बहुत बड़ा झुण्ड आ gaya...hum बच गए ये hi काफी tha...maine उन् पौधों की ओर dekha...humne ना सिर्फ वो रेड ड्रैगन पौधा लिया था साथ hi में गलती से 2 और तरह के भी पौधे आ गए थे हमारे हाथ mein....ye क्या थे पता नहीं...

हम जब वह से निकल रहे थे वो पूरा प्लेनेट hi गॉब्लिन्स के चिल्लाने की आवाज से ुंज उठा tha.....hum अभी डेमोस के करीब hi the....Jwala कुछ टक्का हुआ महसूस कर रहा tha...ye सब उन् पेड़ों की वजह से tha....unhone हम दोनों की hi एनर्जी को खींचना शुरू कर दिया tha...ab हममे थोड़ी देर कही ना कही आराम करना hi tha...aur सामें डेमोस tha....Jwala नहीं चाहता था वह rukna...par मैंने hi कहा की वह पे थोड़ी देर आराम कर lo...shuru में तो वो नहीं मन्ना पर थोड़ा हां ना करने के बाद वो मान गया..

हम वह पे गए और एक जंगल में चले gaye....waha पे सहर जैसे कुछ इलाके दिख तो रहे थे हममे जब हम उसके ऊपर से जा रहे the...par वह जाना हमारे लिए सही नहीं hota....Jwala यहाँ रुकने के लिए भी इसी शर्त पे मन्ना था की हम जंगल में hi रहे...

हम दोनों थोड़ी देर वह पे आराम करने lage...main उस वक़्त उसके बॉडी से निकल गया और यहाँ वह देखने laga....thoda ऊपर गया तो पास में hi एक गुफा जैसा कुछ dikha....Main भी उसके अंदर चला gaya...pahle तो सोचा मैंने की ना jaun..par मैं नहीं मन्ना और मैं वह चला hi gaya...ander गया तो वह पे कुछ सैनिक the...haa सैनिक hi लग रहे the...paar उनमे से कोई भी मुझे देख नहीं paya...bas इसी वजह से तो मैं अंदर गया था की कोई मुझे देख hi नहीं पायेगा...

जैसे जैसे अंदर जाता रहा वैसे वैसे वह पे सैनिकों की शंख्या बढ़ती gayi...ye गुफा सायद कही से कनक्टेड tha...matlab कोई ख़ुफ़िया रास्ता टाइप tha...main आगे बढ़ता गया बढ़ता gaya...aur फिर एक जगह पे pahucha....waha पे भी बहुत से सैनिक the....aur वह पे कोई मीटिंग जैसा कुछ चल रहा tha....ek अजीब सा दिखने वाला आदमी बैठा था चेयर pe...aur उसके सामने 2 लोग और the...dono ने hi कला लिबास ूढ़ रखा tha....pata नहीं क्यों पर उनमे से एक मुझे बहुत पहचाना हुआ सा लग रहा tha...main उस तक जाता उससे पहले hi वो अजीब सा आदमी जो वह बैठा था वो मेरी ओर देखने laga...mujhe ऐसा लगा जैसे वो ुझे देख सकता hai.....main दर गया और तुरंत hi वह से निकल gaya...main ऊपर की ओर से गया tha...aur जब वह से ऊपर की ओर पंहुचा तो मैं अभी किसी महल में tha...jaha पे ये मीटिंग चल रही thi...maine यहाँ वह dekha...aur फिर उसी ओर चल दिया जहा पे ज्वाला को छोड़ा था maine.....wo अभी भी आराम कर रहा tha...main भी वह पे बैठ gaya.....thodi देर में मुझे ऐसा लगा जैसे कोई हमारी ओर आ रहा hai...uss हलचल से ज्वाला भी जाग गया और उसने तुरंत hi मुझसे मर्ज किया और उन् पौधों को उठाया और हम निकल गए वह se....par मेरे दिम्माग में बस वही सब चल रहा tha....jo मैंने उस कर्म में सुन्ना tha....agar वो लोग सच में वैसा करने वाले थे तो हमारा स्कूल मुकिल में tha...Haa अभी कुछ वक़्त था हमारे pass...par वो हमारे यहाँ भी जरूर आएंगे...

ज्वाला इस बार जो उड़ा तो मुझे सीधा एअर्थ पे hi ले aaya...Hum वह से सीधा घर पे gaye...ghar पे आया तो वह कोई था hi नहीं...

मैं - ध्रुव कहा है सभी...

अब मैं ध्रुव से कनेक्ट हो सकता ता...

ध्रुव - हम सब ग्राउंड में hai...ghar के पास hi एक मैदान है वही पे आ जाओ...

मैं - क्या मैदान hai...par मुझे कहा पता इन् सब के बारे में.,..

ध्रुव - तो ऊपर जाके देखो और आ jao...match बस शुरू hi होने वाला है...

मैं - Match...kaisa मैच...

मैंने वो पौधे अपने रूम में rakhe....Jwala को जाने को kaha...aur खुद घर से बहार आके थोड़ी उचाई पे जाके देखने लगा की मैदान है kaha....Ghar से थोड़ी hi दुरी पे एक मैदान दिखा mujhe..jaha पे अभी घर के सभी लोग the...bahar के भी कुछ लोग आये हुए the..inme से ज्यादातर वही बुजुर्ग लोग थे जिनको मैंने और रूपल दीदी ने बचाया tha...saath hi एक स्टेज भी बनना हुआ था जहा पे रूपल दीदी और कविता मैडम खड़े the....Main जल्दी से वह गया और तुरंत hi अपने बॉडी में चला गया...

मैं - ये सब क्या हो रहा है...

ध्रुव - अरे कल hi तो कहा था इन् लोगो ने और आज भी तो बोलै था की दोनों के बिच मुकाबला होगा...

मैं - अरे हां मैं भूल गया tha...to अभी तक क्या हुआ यहाँ...

ध्रुव - होना क्या tha...bas ऐसे hi हम यहाँ आये ये साड़ी तैयारियां ki...aur अब जाके मैच शुरू होने वाला hai...tumne अपना काम किया...

मैं - हां किया naa...aur बस एक पौधा नहीं बल्कि तीन तरह के पौधे लेके आया हु main...ek और बात है जो तुम्हे बताना है...

ध्रुव - हम्म ठीक है हम बाद में इस्पे बात करते है अभी मैच dekho....aur हो सके तो इनसे भी sikho..inke मूव्स को प्रेडिक्ट करने की कोशिश करो...

मैं - हम्म ठीक है..

मैच शुरू hua....Rupal दीदी अपने नए शील्ड के साथ वह पे कड़ी थी वही कविता मैडम bhi...saath hi उन् दोनों के हाथों में अभी तलवार था....

कविता - शील्ड नया लिया kya...accha लग रहा hai...par अफ़सोस हारने वाले के पास है ये...

रूपल - आपको मैं नहीं छोड़ने वाली इस बार....

कविता - अल्ले लेले मेला बच्चा चल तुझे मौका दिया पहला वॉर तो कर...

रूपल दीदी भी आगे बढ़ी तलवार लेके दौड़ते hue...aur वॉर kiya...par कविता मैडम ने बहुत hi अच्छा डिफेंड kiya...Rupal दीदी वॉर करती रही और कविता मॉडल डिफेंड कार्त्ति रही...

कविता - मन्ना पड़ेगा पिछले बार से तो बहुत ताकत बढ़ गयी hai..par मुझे हारने के लिए काफी नहीं है...

रूपल दीदी ने इस्पे कुछ बोलै नहीं बल्कि वॉर करती रही और इस बार वार करने की स्पीड और साथ hi पावर भी बढ़ा di....jisse अब कविता मैडम आसानी से डिफेंड नहीं कर पा रही thi...defend करने में उनको मुश्किल हो रही thi....To उन्होंने बिहि अब वार करना शुरू kiya...aur ये लड़ाई तब तक चली जबतक दोनों hi थक नहीं gaye...aur जब ऐसा हुआ तो चची ने इसको ड्रा घोषित कर diya...haa वही थी जज....

कविता - यार तू तो बड़ी तेज़्ज़ हो गयी hai....barabar की तकर दे डाली मुझे...

रूपल - और नहीं तो kya...ab आपसे लड़ना है तो तेज़्ज़ तो होना hi padega...agli बार देखो मैं हर्रा hi दूंगी...

कविता - है है देखते hai...waise अब ये बता करना क्या है आज और संडे ko...match तो ड्रा हो गया ना...

रूपल ने इस बात पे एक बार मेरी ओर इशारा किया और कविता को भी सायद कुछ समझ में आ गया और वो दोनों hi मुझे देखने लगे और फिर मुस्कुराने lage.....main समझ नहीं पाया ये क्या करने वाले है अब...

मैच कहत्म हो गया tha...par यहाँ तो एक बार भी मैजिक का उसे hi नहीं किया इन् दोनों ने ना hi अपने एलेम्नेट ka...Bua मेरे hi पास बैठी हुई थी...

मैं - बुआ इन् दोनों ने ना कोई मैजिक किया ना hi कोई एलिमेंट का use...ye कैसा मुकाबला है बस तलवारबाजज़ी...

बुआ - बच्चू ध्यान से dekho...aas पास क्या दिख रहा है...

मैंने यहाँ वह देखा मुझे कुछ खास नहीं दिखा बस लोग dikhe...aur इसी वजह से मैं अजीब सा मुँह बना के बुआ को देखने लगा...

बुआ - अरे बच्चू लोग hi तो hai...agar मान लो मैजिक से इनको कुछ हुआ to....waise भी लोग हमसे मिलना नहीं चाहते और अगर ऐसा हुआ तो फिर और भी परेशानी हो सकती hai...issi वजह से यहाँ पे मुकाबले में ये सब नहीं किया karte...par अगर मुकाबला देखना है तो यहाँ से थोड़ी दूर एक स्टेडियम है वह पे बहुत से मुकाबले होते hai...Rupal भी उसी की तैयार करती रहती है टाइम मिलने pe....wo मुकाबला जितने के बाद कुछ इनाम मिलते है जो खास होते है...

मैं - तो क्या दीदी अभी रेडी नहीं हुई है...

बुआ - नहीं अभी नहीं नेक्स्ट ईयर hi वो रेडी होगी और तब hi वो वह पे लड़ सकती है उम्र की पाबंधी जो है वह pe...waha पे हर तरह की फाइट मिलेगी...

बुआ अभी बात hi कर रही टी की निकिता को उन् दोनों ने अपने पास बुल्ला लिया...

अब जब ये सब ख़तम हो गया था और दोपहर भी हो गयी थी तो हम सब को घर चलने के लिए बोलै गया और वही पे तय होना था आज और कल का दिन कैसे कट्टा जाएगा...

हम सभी घर pahuche...Nana नानी भी हमरे साथ hi the...humne लंच kiya...par इस दौरान मुझे तीन लोग बड़े अजीब तरह से देख रहे थे...

सबने लंच किया और सभी चल दिए अपने रूम्स mein...aaram करने..

मैं रूम में आया दरवाजा बंद किया और उन् प्लांट्स को देखने आगा..

ध्रुव - रेड ड्रैगन सही hai...par ये दोनों paudhe...dekhe हुए तो लग रहे है पर याद नहीं आ रहा कहा देखा है....

मैं - याद करलो उसमे क्या hai...par उससे पहले ये बताओ इस पौधे का करना क्या है...

ध्रुव - इससे हमे इसका रास निकलना है और फिर उसी को वह ओल्ड आउल के यहाँ हवा में फैला देना hai...isse वो सारे कीड़े या तो मार jaayenge...yaa भाग jaayenge...par हममे उनको भागने नहीं देना है हममे सभी को मरना hai...aur इसके लिए हममे चाहिए एक बकरा...

मैं - Bakra...ab वो कोण banega...aur ये काम तो करेगा ना कही ऐसा नहीं हुआ तो दिक्कत हो सकती है...

ध्रुव - ये काम करेगा जरूर karega...ab इसको बनाने की तैयारी करे है...

मैं - हम्म बताओ क्या क्या चाहिए...

मैंने बोलै hi था की उसने पहले hi सारे चिज्जे वह माँगा ली थी...

मैं - वाह सब आ गया चलो अब बताओ क्या करना है मुझे...

ध्रुव - एक काम करो तुम अभी अपंने बॉडी से निकल जाओ मैं खुद ये बना lunga...aur जब काम हो जाए तो तुम्हे वापस बुल्ला lunga...abhi तुम जाओ घुम्मो...

मैं - तुम मुझे मेरे hi बॉडी से निकलने को कह रहे हो...

ध्रुव - हां अब जाओ...

मैं अपने बॉडी से निकला और यहाँ वह घूमने laga....kuch मज़्ज़ा नहीं आ रहा tha...waise मैं उसको बताना चाहता था जो कुछ भी मैंने डेमोस में सुन्ना tha...par अभी chodo....maine ज्वाला को पोर्टल खोलने के लिए kaha...aur उसने खोल भी diya...aiur मैं उसके कबले में चला गया....

ज्वाला - बताओ क्या बात है,,

मैं - अरे कोई बात नहीं है वो तो मैं बस ऐसे hi घूमने चला aaya...tum रहो यही मैं यहाँ वह होता हु...

ज्वाला - हम्म ठीक है पर ज्यादा दूर मत जानना और वो बर्फ की जो शरहद है वह तो जानहि मत...

मैं - हां ठीक hai..tum आराम करो...

वो भी अपने काम में लग गया वही मैं उसका कबीला घूमने laga......jwalamukhi के ऊपर बना हुआ था wo....waha पे बहुत से घोसले बनने हुए थे जहा पे वो सब रहते थे

मैं उन्ही सब को देखता raha...tabbhi मेरी नज़र एक घोसले पे padi...jisme 3 अंडे the....abhi वह और कोई था naahi..unn तिण्णो में से एक अंडा हिलने लगा सायद वो टूटने वाला tha...main उसको ध्यान से देखने laga....wo अंडा लुढ़कता लुढ़कता गोसले के किनारे पे पहुंच गया तभी उसमे एक क्रैक hua...aur उससे एक पंजा nikal...par अभी और कुछ होता उससे पहले वो अंडा hi निच्चि ज्वालामुखी में गिरने laga.....Mujhe कुछ समझ नहीं आया मैंने जल्दी से अपना थंडर पावर उसे kiya...aur उसको हवा में hi रोक liya...par सायद यहाँ पे कुछ गलत कर दिया maine...uss अंडे में जो भी था उसने मेरी थंडर एनर्जी को सोखना शुरू कर diya...jis वजह से मुझसे वो अंडा छूट गया और वो जाके ज्वालामुखी में गिर gaya...ab मेरी समझ में नहीं आ रहा था की मैं क्या karu...main उसको बचा सकता था अगर हड़बड़ी में कदम ना उठाये होते to...par नहीं...

वह पे सभी लोग आ gaye...kyunki ज्वालामुखी में कुछ बहुत hi अजीब हलचल होना शुरू हो गयी thi....Jwala भी वह पे आ गया...

ज्वाला - क्या हुआ है यहाँ पे....

मैंने उसको सब कुछ bataya...aur उसके बाद वो बस मुझे देखता hi raha...kuch बोलै nahi...wo शॉकेड tha...aur इसके बाद जो हुआ उससे सिर्फ वो hi नहीं बल्कि बाकी के सब भी शॉकेड रह गए....

ज्वालामुखी के अंदर से एक चील nikla....aam तौर पे इसको बच्चा होना था पर ये बच्चा था nahi...ye बड़ा tha...aur सभी से अलग tha....iske पंखों में ना सिर्फ आग की लपटे थी बल्कि बिल्जी भी तैर रही थी....

उसको देख के सभी ने अपना सर निचे झुका लिया सिवाय ज्वाला ke...wo वैसे hi खड़ा raha....wo चील जो अभी अभी वह से आया था उसने ज्वाला के आगे सर झुक्का लिया...

चील - महाराज की जय हो...

ज्वाला - तुम आज़ाद हो gaye....jwalamukhi ने तुम्हे आज़ाद कर दिया...

चील - जी maharaj....Jwalamukhi ने मुझे आज़ाद कर diya...meri आत्मा को इस शरीर में जाने की इज्जाजत दे di...ab मैं आज़ाद हु और मैं भी बहार रह सकती हु...

ज्वाला - हां पर बिजली तुम्हे इस बार ऐसा कुछ भी नहीं करना है जिसकी वजह से तुम्हे वापस से यहाँ बंद करना पड़े....

बिजली - आप निश्चिंत रहे महाराज ये शरीर बिलकुल सही है मेरे liye...main अब काबू मैं भी हु तो ऐसा कोई कार्य नहीं करुँगी जिससे किसी को दिखात हो...

ज्वाला - तो फिर ठीक hai...ab बताओ तुम पहले अपना कार्यभार संभालोगी या फिर अपने मालिक को ढूंढने जाओगी...

बिल्जी - जैसा आप कहे Maharaj...agar आप मुझे मेरा कार्यभार सौपना चाहते है तो मुझे वो भी मंजू है और अगर आप मुझे अपने मालिक को ढूंढने जाने देना चाहते है तो वो भी सही है

ज्वाला - मुझे लगता है अभी तुम्हे थोड़ा आराम करना चाहिए उसके बाद hi कुछ बात karenge...Bijli के रहने का प्रबंध karao...aur इसके खाने पन्ने का bhi....Prateek तुम मेरे साथ आओ..

सभी अपने अपने काम पे लग गए वही मैं चल दिया ज्वाला के साथ...

ज्वाला - ये क्या कर diya...ab इस बिजली को कैसे सम्भालूंगा main...isko अभी आज़ाद करना सही नहीं होगा..

मैं - अरे वो अंडा निच्चे गिरें वाला था तो bas...aur ये बिजली तो अच्छे से hi बात कर रही थी और तुम्हारे साथ hi है वो देखने में तो ऐसा hi लगता है...

ज्वाला - तुम्हे नहीं पता बिजली की kahani...usko गुस्सा बहुत जल्दी आता है और जब भी आता है वो सब तबाह करने पे चली जाती hai...usko रोकना मुश्किल होता है और मैं तो अभी नया हु...

मैं - अरे मुझे नहीं पता था कुछ ऐसा भी hai...main तो bas....par तुम कर लोगो चिंता मत करो..

ज्वाला - :सिघ: देखो अब क्या होता hai..main पूरी कोशिश करूँगा इस नयी मुशीबत को सम्भाने का आखिर मेरे ऊपर hi इसका ज़िम्मा आना था...

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखते है ओल्ड आउल के इलाके में कीड़ो का खत्म साथ hi डेमोस पे जो भी प्रतीक ने सुन्ना वो सब बताएगा wo..aur भी कुछ बातें
 
पाथेर मारने वाले वह के लोग the...unme से बहुत से ऐसे है जो नफरत करते है प्रतीक के फॅमिली se...bas उन्ही में से किसी ने किया hoga...wahi सच ना बताना ये सायद इसलिए किया गया क्यूंकि जैसे एक झूट को छुपाने के लये 100 झूट बोलने पड़ते है उसी तरह से एक सच सामने आने के बाद और भी सच बहार आने को छटपटाने लगते है और अभी वो वक़्त नहीं आया की साड़ी बाटें प्रतीक को पता चले...

ध्रुव बहुत कुछ जनता है और हर बार गलती कर रहा है वो भी...

थैंक्स फॉर रीडिंग

कीप रीडिंग एंड कमेंटिंग
 
अपडेट - 32

अब तक

मैंने पौधे ला दिए the.....aur जब उससे वो मेडिसिन बनाने का वक़्त आया जिससे ओल्ड आउल के लोग ठीक होने वाले the...wo बनाने के वक़्त मुझे वह से जाने को कह diya...main भी वह से निकल के ज्वाला के कबीले में आ गया और यहाँ आने के बाद घूमने लगा par...kuch हुआ जिसके कारन से कोई बिजली करके जाग gayi...mujhe पता चला की उसको ज्वालामुखी ने कैद कर रखा tha..aur अब वो मेरी वजह से जाग गयी...

अब आगे...

ज्वाला परेशां था की वो इस बिजली को आखिर संभाले kaise....usko पता था उसके बारे mein....bachpan से कहानियों में बहुत बार उसका नाम जो आया हुआ tha....aur जिस तरह आया था उस तरह से वो बस मुशीबत hi लगी थी ज्वाला ko...par अब कुछ किया नहीं जा सकता था तो...

मैं वही था ज्वाला के pass....uski बातें सुन रहा tha...ki तभी ध्रुव ने मुझे बुलाया और मैं वह चला gaya...waha पंहुचा तो उसने दवाई बना ली thi...aur उसको एक स्प्रे की बोतल में दाल दिया था....

मैं - इससे क्या सबको स्प्रे करते रहेंगे hum...aise तो बहुत वक़्त लग जाएगा...

ध्रुव - ये सिर्फ हमारे बकरे के लिए है उसको भी तो बचाये रखना है उन् कीड़ों se.....aur उन् सभी के लिए मैंने कुछ और सोच रखा है....

मैं - क्या..

ध्रुव - BAarish....hum उस इलाके में जाएंगे और बादलों में ये दवा मिलला denege....fir तुम अपनी थंडर पावर से उन् बादलों को चरेड़ कर डोज और फिर वह बारिश hogi....barish के साथ hi हमारी ये दवाई भी hogi.....jiski वजह से वो सारे hi ख़तम हो जाएंगे...

मैं - हम्म पर ये हो तो सकता है naa....maine ऐसा कुछ सुन्ना नहीं है कभी..

ध्रुव - हवा की जरुरत भी hogi....aur उसके लिए सायद ज्वाला सही होगा......

मैं - नहीं ज्वाला अभी बहुत बिजी है उसको वही रहने देते है किसी और को ढूंढते है...

ध्रुव - बिजी है...??? मैं तो उसी तो अपना बकरा बनाने की सोच रहा tha....wo हमें मन्ना भी नहीं करेगा और वो सबसे अच्छा है इसके लिए....

मैं - क्या matlab....main उसको मुसीबत में नहीं डालने wala....tumhe पता भी है...

ध्रुव - पता तुम्हारी वजह से उसके पिता की मौत hui.....par वो होना hi tha....usko रोका नहीं जा सकता tha....aur अब अगर ुम उस्सको मुसीबत में नहीं डालते तो कुछ वक़्त बाद ना सिर्फ वो बल्कि उसका पूरा कबीला hi मुशीबत में होगा अगर ये तुम्हे सही लग रहा है तो ठीक है मत bulao..usko....

मैं - पर उसको अभी नहीं बुला सकता वो पहले से परेशां है मेरी वजह se.....maine गलती से किसी बिजली को जगा दिया है...

ध्रुव - क्या क्या कहा Bijli...wo जाग गयी hai...bulao उसको यहाँ पे...

मैं - मैं बुलाऊँ उसको...???

ध्रुव - हां उसको और ज्वाला दोनों को bulao.....mujhe दोनों से बात करनी है....

मैं - ठीक है...

मैं ज्वाला को आने के लिए कहा पर बिजली के saath...humne कुछ देर वेट किया और फिर वो वह आ gaye...Jwala पहले की तरह hi परेशां दिख रहा था वही Bijli...wo बस यहाँ वह देखे जा रही थी सब चीज़ों को.....

ज्वाला ने आते hi उसको कहा की मैं hi हु उसका malik...to बिल्जी मेरे सामने भी झुक गयी...

मैं - अरे नहीं नहीं इसकी कोई जरुरत नहीं है...

मैं - ध्रुव तुम बात कैसे करोगे inse...Jwla का तो पता है वो मेरे अंदर होता है तब वो तुमको सुन पता है और उसके बाद जब हम अलग होते है तो उसको यही लगता है सब कुछ मैं hi कह रहा tha...par बजली के केस में क्या होगा...

ध्रुव - मैं जो भी बोलू वही बोलना bas....nahi तो तुम कुछ बोलो hi मत मैं हैंडल कर लेता हु isko...waise सही समय पे आयी है ye...ab ज्वाला नहीं ये होगी हमारे साथ वह पे ज्वाला के jagah...ye बारिश भी तुरंत करवा सकती है...

मैं - ठीक है कर लो बात...

ध्रुव - बिजली इतने वक़्त बाद बहार आने के बाद कैसा लग रहा है....

आवाज मेरे hi मुँह से आ रही थी पर बोल तो ध्रुव रहा था और बिजली ने जब ये सुन्ना तो उसको यही लगा की मैं उसके बारे में सब जनता हहु...

बिजली - आज़ाद होने के बाद अच्छा किस्से नहीं lagega...waha ज्वालामुखी में बैठी हुई मैं कब से ध्यान लगा रही थी मुझे खुद याद नहीं tha...wo तो आज ये सब हुआ और मैं आज़ाद हो gayi...waise सब कुछ वैसा hi hai...Maine महाराज को भी देखा है उस वक़्त भी...

ध्रुव - बस बस सब अभी hi नहीं बताना hai...ab ये बताओ तुम अपंने मालिक को ढूंढने का काम कब से शुरू करने वाली हो....

बिजली - वो तो मैं महाराज से पूछ रही hu...agar कबीले में अभी मेरे बिन्ना काम चल जाए तो मैं अपने मालिक की तलाश में निकल जाउंगी...

ध्रुव - तुम्हारा क्या कहना है ज्वाला...

ज्वाला - मैं क्या kahu...maine तो ये फैसला इसी पे छोड़ दिया है अब ये जब चाहे जा सकती है और आ भी सकती है...

ध्रुव - हां बिलकुल पहले के hi tarah....par बिजली इस बार जो भी करना सही तरीके से karna....har बार मौके नहीं मिलते है सबको...

ज्वाला - पहले की तरह मैं कुछ समझा नहीं और को...

बिजली - मैं समझ रही हु आप क्या कह रहे hai...iss बार में कोई भूल नहीं karungi....kuch भी करने से पहले 2 बार सोचूंगी...

ध्रुव - ये सही hai...accha मुझे तुम्हारी मदद चाहिए...

ज्वाला - रुको ruko...ek मिनट मुझे पहले तो ये बताओ यहाँ चल क्या रहा hai...ye पहले की बातें कहा से आ गयी यहाँ प्रतीक क्या तुम पहले से जानते होबिजली को,...

ध्रुव - मैंने भी इसके बारे में सुन रखा है जैसे की tumne...wo छोड़ो तुम जा सकते हो मैंने बस बिजली को यहाँ लाने के लिए तुम्हे बुलाया था अब वो आ गयी है हमारा काम हो जाएगा...

ज्वाला - हम्म ठीक है फिर मैं चलता hu...Bijli जो भी ये कहे वही करना कोई गड़बड़ नहीं होनी chahiye....Prateek मैंने पहले hi बताया था इसके बारे में अब ये तुमपे है....

ध्रुव - है है ठीक है तुम जाओ...

ज्वाला वह से चला gaya...wahi ध्रुव ने बिजली को सब bataya....Bijli भी समझ गयी सब kuch...Main भी प्लान समझ रहा था और मैं अपंने काम के लिए रेडी tha...Mujhe ऊपर रहना था आसमान में और वह से काम थंडर एनर्जी का उसे करके बादलों को बरसाना tha...par उससे पहले मुझे और बिजली को ऊपर वो दवाई छिडकनी thi....Hum दोनों गए वह पे और ये सब kiya....fir मैंने बिजली पे वो दवाई स्प्रे kiya....aur फिर बिजली को वह निचे ओल्ड आउल के इलाके में भेज diya....Main ऊपर से सब देख रहा tha...iss बार भी कुछ वैसा hi hua....Bijli वह कड़ी thi....koi उल्लू वह पे आया और उसको अपने साथ ले जाने को hua....Plan भी यही था हममे उसके साथ जाना था उसके बाकी के साथियों के पास और हमने वही kiya......Maine देखा वो उल्लू बिजली को लेके उस घने जंगल में गयी जहा पे बहुत ज्यादा पेड़ पौधे the....kuch देर के बाद तो मुझे वो दिखने भी नहीं लगे थे इतने पेड़ पौधे थे वह पे par....tabhi मुझे छिलने की आवाज aayi....aur उसी वक़्त ध्रुव ने मुझे अपना काम करने को कहा और मैंने वही kiya....Barish करवा दी maine.....jisse वो पूरा का पूरा जुनले hi कवर होने वाला tha....aur वैसा hi hua......Barish शुरू hui....aur जंगल चिन्खो से गूंजने laga...syaad ये उस कीड़े की वजह से tha...wo आसानी से अपने होस्ट को नहीं छोड़ने वाला था वो उनको दर्द दे रहा tha...jis वजह से बाकी के उल्लू चिल्ला रहे the...Ye चिल्लम चिल्ली चलती hi rahi....par मेरे पास वक़्त नहीं tha....Bijli वह से ऊपर आ गयी थी..

ध्रुव - सारे वही पर थे या कोई बच्चा हुआ भी था...

बिजली - मुझे नहीं पता वह पे कितने थे par....sabhi के सभी भींगे hai...aur सभी कीड़े भागने को है...

मैं - क्या वो मर्रे नाह...

ध्रुव - वो मर jaayenge...par उसमे वक़्त लगेगा...

मैं - हममे चलना hoga....koi ना कोई अभी तक रूम के पास आ गया होगा और वो मुझे धुंध रहे honge....aawaj दे रहे होंगे...

ध्रुव - हां ये भी सही है चलो चलते hai.....Bijli तुम भी चली jao...yaha का काम वैसे भी ख़तम हो गया hai.....jao मज़्ज़े करो.....

बिजली - जरूर...

बिजली वह से चली गयी और मैं और ध्रुव भी अपने रूम में आ gaye...Room में आते hi मुझे दरवाजा खटखटाने की आवाज आयी...

मैं सबसे पहले तो रूम में जो वो दवाई बनाने का सामान था उसको गायब kiya....aur जाके दरवाजा khola....waha पे चची थी....

चची- कितनी देर से दरवाजा खटखटा रही hu....chal रेदय hoja....bahar जाना है...

मैं - बहार कहा...

चची - वो तो वो दोनों hi batayegi...tu चल रेडी होक आ जा...

इतना बोल के चची चली गयी niche...main भी रेडी हुआ और वह से निच्चे चला गया जहा पे सभी the....aur सभी के सभी एक hi तरह के t-shirts में the,,,,pata नहीं क्या था ये मैं पंहुचा तो मुझे भी एक t-shirt दे दी gayi....Rupal दीदी ने दी thi..aur पहनने को kaha...main भी रेडी होक चल diya....Hum सब कार में बैठे और कार चलने lagi...mujhe पता नहीं था हम कहा जा रहे hai...par इतना समझ आ रहा था की हम कोई गेम देखने जा रहे है या फिर खेलने ....पर कोण सा ये समझ नहीं आया था

थोड़ी hi देर बाद हम सब उस इलाके से बहार निकल gaye...aur पहुंच गए एक इंसानो के सहर mein....ab यहाँ बता du...ye जो सहर था जहा से हम अभी निकले the...wo बाकी सब से छुपा हुआ hai....aur हम अब वह से निकल के इंसानो के एक सहर में पहुंच गए....

रूपल - छोटू तू टी यही रहता था ना तो यहाँ का सब पता होगा तुझे....

मैंने कुछ देर तो सोचा और फिर हां बोल diya....sochne की भी एक वजह थी अब मुझे कहा पता था की ये लोग मुझे यहाँ किस लये लेके आ गए है मैं कहा जानता था की यहाँ पे क्या होने वाला hai....bas इन्ही सब के कारन मैं सोच में पद गया tha....khair छोड़ो इसको...

मैंने हां कह तो दिया पर उसके तुरंत बाद hi मुझे समझ नहीं आने लगा ये रूपल दीदी बात किस बारे में कर रही thi....abhi सोच hi रहा था की बहार एक सिग्न बोर्ड dikha....jaha पे बुल्ल्ड़िंग लिखा था....

रूपल - इसके बारे में तो पता hi होगा naa...hum आज यही देखने जा रहे है...

मैं - Bullring....nahi मुझे इसका कुछ पता नहीं वैसे हम है कहा....

जब मैंने सैंबोर्ड़ को देखा था तो आस पास की चीज़ें भी दिखी और देखने से ऐसा लग रहा था जैसे हम किसी रेगिस्तानी इलाके में है

कविता - स्पेन ये स्पेन hai....aur तुम यहाँ बैल फाइट करोगे...

रूपल - अभी क्यों बताया बाद में बटांना था नमा आप भी ना...

दादी - क्या बैल fight...nahi ये नहीं करेगा ऐसा कुछ....

रूपल - अरे दादी सोचो आप नार्मल इंसान कर लेते है ये तो क्या अपना छोटू नहीं कर पायेगा इसको... क्या आप भी...

मैं तो बस ये सुन के hi चक्क्र गया tha...ye मुझे यहाँ पे बैल फाइट करने के लिए कलेके आयी thi...aisa नहीं है की मैं जीत नहीं सकता par...ye पहली बार होने वाला है मेरे साथ मुझे तो कुछ पता भी नहीं है और ये सब अच्चानक से....

चची - हां ठीक है वो जाएगा पर उसके साथ तुम सब भी jaoge....tum तुम्हारी ये Bua...Ye कविता तिण्णो....

दादी - क्या बोल रही ho....kahi इन् लोगो ने जादू उस किया इन् इंसानो के बिच तो गड़बड़ हो जायेगी...

चची - नहीं करेंगे ये sab....aur अगर किया तो फिर ये सब hi जाने....

चाचा - तुम लोग जाओ मुझे यहाँ के अपने होटल में कुछ काम है...

मैं - यहाँ पे अपना होटल है....

रूपल - हां छोटू अपना होटल है यहाँ pe....aur हम यहाँ उसी के लिए आये hai....Papa आप सब तैयारी कर के रखो...

चाचा - हां ठीक है तुम सब jao....Papa आप यहाँ रहिएगा या होटल में...

दादा जी - नहीं मैं यही देखता हु इन् लोगो को तुम जाओ...

थोड़ी देरर में कार एक बैल रिंग के पास रुक्की और हम सब निच्चे उत्तर gaye...wahi चाचा चले गए वह से...

अब हम 10 लोग थे वह pe....yaha पार्टिसिपेट करने के लिए वैसे तो कुछ नियम the.....par पता नहीं kaise...Kavita मैडम ने कोई तिगड़म चलाया और हम 5 लोगो का पार्टिसिपेट करने का रास्ता खुल gaya....Nikita के लिए bhi...baaki सब के लिए वह का टिकट लिया गया...

बैल फाइट के बारे में बता du...ye स्पेन का नेशनल गेम है और इसमें प्लेयर को बैल से बचना होता है या उसको बेवक़ूफ़ बनाना होता है...

सबसे पहले रिंग में कविता मैडम gayi....aur हम सब देख रहे the....waise इनको देख के तो लग रहा था ये यहाँ पहले भी आ चुकी hai...pata nahi.....wo gayi...unhone हाथों में एक लाल कपडा पकड़ा हुआ tha...aur वो वह जाके हमारी ओर देखने lagi...Bua और रुप्पल दीदी उनको आल थे बेस्ट बोल रही thi.....thodi देर में बैल वाला दरवाजा खुला और उसमे se...wo बड़ा सा बैल बहार आया....

सच में बड़ा भयानक था wo....aur उसके सिंह वो तो पूछो hi mat....wo वह पे थोड़ी देर यहाँ वह देखता है और फिर उसकी नज़र जाती है उस लाल कपडे pe...aur फिर कविता मैडम p...aur वो तेज़्ज़ी से सांस लेते hue...gusse में बढ़ जाता है उनकी oor......Kavita मैडम वही पे कड़ी thi...hil भी नहीं रहो थी wo....aur जैसे hi वो बैल उनको खूंने वाला tha...unhone एक जम्प मारा aur...waha बैठे सभी के होश उड़द gaye....ab थोड़ी ना सारे इंसान ये सब रोज़ देखते honge....Kavita मैडम कुछ ज्यादा hi ऊपर उछाल gayi...aur बस इतने पर hi नहीं रुक्की wo....unhone बैल पे hi छलांग लगा di....jiske तुरंत बाद वो बैल जमीं पे ढेर हो gaya...aur किसी को समझ में hi नहीं आया की हुआ kya....itni जल्दी ऐसा हुआ kaise...isko देख ke...Bua और रूपल दीदी ने अपना सर पीट लिया....

रूपल - चलो निकलने का वक़्त हो gaya...inse एक काम ठीक से नहीं hota....kitni बार कहा है काम ताकत लगाया karo...par नहीं सुनती ye,...Bua आप कुछ कहती क्यों नहीं इनको...

बुआ - आने दे इसको मैं समझती hu...itna अच्छा प्लान था सब ख़राब कर दिया इसने...

निकिता - मतलब अब नहीं होगा वो सब...

बुआ - नहीं hoga....par हम कुछ और सोच लेंगे...

मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था par...accha जरूर लग रहा था की यहाँ पे कुछ करना नहीं padega..thodi देर में हम सारे के सारे वापस से बहार mille..Pahle तो जैम के सबने कविता मैडम को sunaya...phir सभी निकल लिए हमारे हॉटेल की oor....jo यहाँ से ज्यादा दूर नहीं था...

चची - रूपल क्या करने गए है तेरे पापा कोण सी तैयारी के बारे में बातें चल रही थी तुम दोनों की...

रूपल - माँ wo...naa पापा मुझे यहाँ से स्टार्ट करने के लिए कह रहे the...bas वही बात hai...aur अभी वो यहाँ मुझे इंट्रोडस कराएँगे...

चची - अच्छा ठीक hai....par याद रहे रोज रात का खाना घर पे सब साथ hi karenge....samjhi ना...

रूपल - हां समझ gayi....ab चले...

हम सारे वह से निकल लिए होटल की oor....jab हम वह पहुंचे तो एक बड़ा सा विला जैसा होटल tha....naam था "वीजा फुएरते" मतलब पुराण Killa......Ajeeb नाम था ये...

हम सब वह बहार hi खड़े थे की अंदर से कुछ लोग आये....

(वैसे तो सारे स्पेनिश hi बोल रहे थे पर यहाँ समझने लायक भाषा में hi लिखा जाएगा..)

2 लड़के और 2 लड़कियां थी वह pe...wo आये और हममे अंदर चलने को kaha...Hum लड़कियों के साथ अंदर चले गए वही ladke...kahi बहार चले गए the...Ander एक बड़ा सा हॉल tha...jaha पे चाचू बैठे हुए the...unke पास कुछ लोग बैठे the,...unme से एक तो वकील था वही बाकी के जो दो लोग थे वो सायद कोई धर्मगुरु the...dono के कपड़ो से तो वही लग रहा tha....pata नहीं इन् दोनों का यहाँ क्या काम tha..matlab होटल को रूपल दीदी को सौपने के लिए प्रीस्ट को bulana..ajeeb था...

वकील ने पेपर्स nikale..aur अपना काम करने laga...thodi देर में जब उनका काम हो gaya...sign ले लिया उन्होंने tab.wo वह से चले gaye....Main उसको देखता raha....Wo बहार गया और दोनों hi प्रीस्ट खड़े हो गए...

प1- Rupal...mujhe उम्मीद है तुम अपने परिवार का नाम यहाँ उसी तरह बनाये रखोगी जैसे पहले hai...tumhe नियम तो पता है सारे...

रूपल - जी मैं जलनि hu..aur आपको याक्किन दिलाती hu...ki हर एक नियम का पालन होगा...

प2 - एक और बात है वैसे तो हम ये बात आपके पिता से करने वाले the..aur उनकी मदद लेने वाले थे इस विषय में par...ab जब आप यहाँ की ओनर है तो आपको hi इसको हल करना होगा..

चाचू- हां Rupal..ab जो भी इनकी परेशानी है वो तुम खुद सोल्वे karogi...par ये मत समझना की तुम अकेली ho...jab भी जरुरत pade...humme आवाज दे dena..hum पहुंच जाएंगे..

रूपल - जी पापा आप चिंता मत karo..ab मैं यहाँ सब संभल lungi...aaap सब औ अपने रूम्स में आराम karo...main इनसे बात करके आती हु...

सायद इन् दोनों को hi हमारे बारे में पता tha...tabhi ये ऐसे बातें कर रहे the...par मैं कन्फर्म नहीं tha..aur अभी तो सायद उन् दोनों का ध्यान मेरे ुओंपर गया hi नहीं tha..naa hi निकिता के upar...wo दोनों खुद hi परेशां लग रहे the...Hum सब अपंने रूम्स में जाने लगे...

मैं - बुआ ये लोग कोण है और क्या ये...

बुआ - हां ये सब जानते hai...humara जहा भी बिज़नेस है ना वह pe..kuch आम लोगो को पता होता है हमारे बारे में...

मैं - पर हम क्यों बताते है उन्हें...

चची- बाद में कभी बताएँगे इसके बारे में samjhe...ab chalo...waise भी इतना घुम्मे hai...thakaan हो रही है मुझे...

मैं - हम्म ठीक है बाद में batana...Mera रूम कहा है मुझे नींद आ रही है...

बुआ- हां नींद तो हममे भी आ रही hai..ye इनका पेपर वोर्लक बहुत देर तक चला hai...aur इस कविता के कारन hamara..plan भी ख़राब हो गया है...

कविता मैडम- अरे यार मैं तो bas..khul के खेलना चाहती thi...par...

बुआ - हां पता है खुल के खेलना चाहती thi..ab chal..waise भी कल जल्दी निकलना होगा humme...School डिनर से पहले hi पहुंचना hoga..matlab.,...yaha से निकलना होगा और पहले ताकि घर जा सके...

इतने में वह पे रूपल दीदी भी आ गयी...

रूपल दीदी - अरे बुआ आप लोग यही से चले जाना naa...ghar वापस क्यों जाना मैं सामान यहाँ मंगवा देती हु...

चची - वो कल जाने वाले है आज nahi...tum भी आराम कर लो...

चाचा - हां रूपल अब आराम karlo...aaj से यहाँ काम भी संभालना hai...maine सबको बता दिया hai...ki तुम आज से यहाँ सब हैंडल karogi...waise तो यहाँ का मैनेजर है hi..wo तुम्हारी मदद करेगा काम सिखने में...

रूपल - हां पापा मैं समझ गयी..

फिर क्या था सारे के सारे चल दिए अपने अपने रूम्स mein,...Main भी अपने रूम में gaya...ye सायद hi वो पहला रूम hoga..jaha वो सबकुछ भी नहीं tha...jo मेरे हर रूम में होता tha...wo sab...designs और बाकी की chizzen...Maine इस बात पे ज्यादा गौर नहीं kiya..aur बीएड पे जाकले सोने की कोशिश करने laga....par.....

मैं जैसे hi आँखें बंद karta...mere सामने कुछ परछाईयाँ आ जाती परछाईयाँ नहीं ये कोई धुंधली सी तस्वीर thi....jisme कुछ लोग दिख आहे the...saaf साफ़ नहीं par..itna पता चल रहा था की वो sab..log hi hai....Main उनकी ओर देखता और मेरी आँखें खुल जाय karti...aisa 3 बार hua....aur उसके baad.....uske बाद जब मेरी आँखें खुली तो main...ghar पे tha...apne रूम mein....pata नहीं क्या हुआ tha....main अपने रूम में tha..waha पे घडी राखी हुई थी जिसमे दिन भी बताते hai.....maine उसको देखा तो पता चला की नया दिन आ गया hai...aur वक़्त भी बहुत ज्यादा हो गया hai...abhi 11 बजने वाले थे सुबह ke...rooom में कोई और नहीं tha...sirf मैं hi tha...main जल्दी से utha...aur रूम से बहार निकला...

बहार आते hi...sabse पहले mujhe..Chachi dikhi...jo दरवाजे के पास hi thi...unhone भी मुझे देखा....

चची - तुम ठीक हो ना बीटा...

मैं - पता nahi...hum तो वह थे naa...phir यहाँ पे...

चची - बाद में बात करेंगे उसके बारे mein..abhi चलो नास्ता karo...thodi देर में तुम्हारी मास्टर आने वाली है स्कूल में तो तुम्हे वह जाना होगा...

मैं - मास्टर वापस आ रही है...

बुआ - Haa...chalo अब जल्दी से तैयार हो जाओ और फिर हममे नइकालना है...

मैं - पर...

बुआ - पर वार कुछ नहीं जल्दी karo...agar मास्टर के पास जाने में लेट किया तो वो आने भी नहीं देगी...

बुआ ने और भी बातें कही जिनसे main...jo भी सोच रहा hu...wo सब भूल के जल्दी से मैं तैयार होक स्कूल के लिए निकल jaun...aur हुआ भी वैसा hi...

मैं जल्दी से तैयार हुआ और नास्ता कर के निकल गया वह se...par निकिता और कविता मैडम नहीं आ रही thi...wo दोनों पहले hi वह से जा चुक्के the..aisa मुझे बुआ ने hi bataya...Hum जल्दी से बस पे बैठे और स्कूल के लिए निकल गए और वह पहुंच भी gaye...waha पहुंचते hi बुआ ने मुझे अपने रूम में भेज diya..aur आराम करने को कहा....

मैं आया यहाँ pe...ur यहाँ आते hi मैंने सबसे pahle...Dhruv को कुछ बातें batayi...wahi बातें जो मैंने सुन्नी थी डेमोस प्लेनेट pe....lekin..Dhruv ने ऐसे जवाब दिए जैसे उसको इनसब से ज्यादा मतलब hi ना ho..wo काम बोल रहा tha...aur उसकी बोली से ये पता चल रहा था की वो परेशां है और बहुत hi ज्यादा थका हुआ भी...

आज के लिए यही तक रखते है नेक्स्ट अपडेट में देखेंगे की स्पेन में क्या hua...unn प्रीस्ट्स ने रूपल दीदी को क्या kaha...aur मेरे साथ क्या हुआ था वह रूम mein...kya थी वो parchayiyan...aur क्यों परेशां है Dhruv...saath में ये मास्टर अच्चानक से कैसे आ gayi...To बनने रहिये..

ब्रेक के बाद आया hu...to अगर थोड़ा ऊपर निचे हो तो समझ रहे हो naa...maaf कर dena...baaki अब उपदटेस रेगुलर होंगे
 
अपडेट - 33

अब तक

मैं स्पेन गया था वह पे रूपल दीदी को वह की जिम्मेदारी चाचा जी ने सौंप दी thi...par कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद का मुझे कुछ याद hi nahi....ek दिन मेरे लाइफ से hi गायब हो गया tha....jaise किसी ने मिटता दिया हो usko....jab आखें खुली थी तो मैं घर में tha...aur सबसे पूछने पे भी कोई जवाब नहीं milla...humme जल्दी से वह से निकलना पड़ा क्यूंकि हममे स्कूल जाना tha...waha पे मास्टर वापस आ गयी thi...acchanak se...saath hi ये भी पता चला की कविता मैडम और निकिता वह से अहले hi जा चुके है...

अब आगे

क्लास में बैठा हुआ था mein...class थी प्रोफ. सूरज ki....yaha आये 3 दिन हो गए the...DB का कुछ पता नहीं tha.....wo वापस आया hi नहीं tha...baaki स्टूडेंट्स से पता चला की वो किसी पूजा के लिए वही रुक्का हुआ hai..aur सायद hi इस वीक आये wo....wahi Nikita....wo भी मुझे इग्नोर कर रही thi...par हमेशा hi साथ rahti...main जहा जाता वह वो aati...par...par जैसे hi मैं उसके पास जाता वो वह से भाग jaati...aur मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा tha...yahi हाल ध्रुव के साथ भी thi...wo बस मुझे गाइड कर रहा tha...koi और बात नहीं हो रही थी हमारे bich...ye सब हमारे यहाँ आने के बाद और मेरे उसको डेमोस वर्ल्ड की बातें बताने के बाद से शुरू hua....aisa मुझे लगता hai....usne वो सब सुनने के baad..mujhe कहा था की वो इसके बारे में सोचेगा par,...ab मुझे उससे सवाल नहीं पूछना hoga....jaisa वो कहे वैसा hi करना होगा...

इन् 3 दिंनो में ना hi मैं ज्वाला से बात कर पाया ना हो ओल्ड आउल se...bas ट्रेनिंग ki...aur कुछ वक़्त बिताया करता था अलबूस और कूपर के साथ थोड़ा टाइम स्पेंड kiya...Master आ तो गयी thi....par वो मुझसे बस एक बार hi milli...wo भी बस उसी दिन जब हम वापस स्कूल आये the...aur उसके baad,....mujhe पता नहीं वो कहा चली गयी thi...yaha तक की बुआ वो भी बिजी हो गयी thi....wo भी टाइम नहीं निकल रही थी मेरे liye...kul मिला kar...main एकदम से अकेला हो गया tha...ye 3 दिन आते आते मैं समझ नहीं पा रहा tha...ki ऐसा क्या हुआ की सब एक दम से बदल गया...

प्रोफ. सूरज - Prateek.....Prateek...dhyaan कहा है तुम्हारा....

मैं अपने hi ख्यालों में इतना खो गया था की मैं कहा पे बैठा हु और क्या कर रहा हु सब भूल गया tha.....Prof. की आवाजों से भी मैं अपने ख्यालों से बहार नहीं आया tha...wo तो पता नहीं किस ne...mere पीठ पे कुछ marra...jiski वजह से मैं अपने ख्यालों से बहार आया...

मैं - Wo..wo मैं बस कुछ सोच रहा था...

प्रोफ. सूरज - हम्म तो बताओ क्या सोच रहे the...kya इस टॉपिक में कुछ समझ में कुछ ऐसा है जो तुम्हे सोच में दाल रहा है या कुछ और है...

मुझे पता भी नहीं था की ये पढ़ा क्या रहे hai...aur मेरे चेहरे पे आये हुए एक्सप्रेशन से वो समझ गए ये baat...aur उन्होंने मुझे वह से जाने को कह diya....maine भी बस अपने सामान उठाये और निकल पड़ा क्लास se...Room में जाने का मान नहीं हो रहा था तो bas...field में hi एक बेंच पे जाके बैठ gaya....Classes चल रहे the..to कोई था नहीं वह पे बस मैं hi tha...aise hi बैठे baithe..main सोचने लगा की सब अच्छा tha..aur अब तुरंत hi ये sab...jaise वो सब कोई अच्छा सपना हो मेरे liye....bas मैं ये सोच hi रहा था की रूपल दीदी की आवाज आयी...

रूपल दीदी - Chotu...jaldi से आ मेरे पास..

पहले तो आगा की ये मेरा वहम hai...par इसके बाद फिर से उनकी आवाज आयी और इस बार जैसे वो मुझे दांत रही ho..par मुझे पता नहीं था कैसे जानना है उनके pass...aaj तक बस से जब भी गया hu..ticket तो बुआ या मास्टर ने hi ली thi..mujhe पता भी नहीं था कैसे लेते है टिकट...

रूपल दीदी - टिकट तुझे बस में भी मिल jaayegi...bas..tu स्कूल से बहार nikal...gate के पास jaa..bus आती hi hogi..hamesa आती रहती है buses...par हां संभल ke...waha तक जाना आसान नहीं hai..agar पकडे गए छोटू तो...

इस वक़्त मुझे बस वह से निकलना tha..baat करनी थी मुझे किसी अपने se....Bua तो कुछ ज्यादा hi बिजी चल रही thi...to रूपल दीदी hi सबसे बेस्ट ऑप्शन थी मेरे liye..abhi...

मैं - आप बताओ मैं कैसे बहार निकलू यहाँ se...mujhe बहार आना है आपसे मिलना है आप...

रूपल दीदी - छोटू सब ठीक है ना...

मैं - हां सब ठीक है आप बस बताओ कैसे बहार आऊं मैं...

रूपल दीदी - हम्म ठीक है एक सीक्रेट रास्ता hai..par इसके बारे में किसी को भी नहीं batayega...Bua को भी nahi...warna बहुत से स्टूडेंट्स के बहार आने का रास्ता बंद हो जाएगा...

मैं - आप बताओ to..main किसी को कुछ नहीं बताने वाला...

रूपल दीदी - तू सच में ठीक है ना...

मैं - हां मैं ठीक हु अब आप जल्दी बताओ...

रूपल दीदी - हम्म ठीक hai...Medical सेंटर के पास jaa...waha पे एक पेड़ hoga...jiske पत्ते कुछ कुछ सफ़ेद honge....barf की tarah....bas उसके पास jaa..uss पेड़ में एक छोटा सा बिल बना हुआ hai...wo गिलहरियों का बिल होता है ना उसी तरह ka....uss बिल में अपना हाथ डालना aur..bas..

मैं - Bas...matlab...

रूपल दीदी - बस matlab..uske बाद तू बहार hoga...gate के bahar...aur वह पे बस आएगी तू उसपे चढ़ जाना aur...jab तक टिकट का puche..to उसको स्पेन के लिए बोल dena...wo तुझे यहाँ सीधा होटल के बहार ले aayega..aur पैसे है ना तेरे पास...

मैं - हां थोड़े बहुत है...

रूपल दीदी - हम्म ठीक है अब जल्दी से आजा yaah...aur हां सुन वो पेड़ का किसी प्रोफ. को पता नहीं चलना चाहिए...

इसके बाद उनकी आवाज hi नहीं aayi...wo जा चुकी thi.....main भी जल्दी से मेडिकल सेंटर की ओर bhaga...bas जल्दी से यहाँ से निकलना था और बात करना था मुझे किसी से bhi....Main वह pahucha...par वह पे पहले से hi कोई tha...uss पेड़ के pass..pata नहीं कोण tha...Ab मैं उसके सामने से तो जा नहीं सकता tha..to मैं थोड़ा पीछे रुक gaya...maine देखा की वो कविता मैडम hai...aur वो उसी पेड़ के पास थी...

मैं - हो गया kaam...sayad इनको पता चल गया है इस रस्ते के बारे mein...aur ये इसको बंद कर रही hai...kismat hi ख़राब है मेरी...

पर ऐसा कुछ हुआ nahi...ulta जो हुआ वो देख के तो मैं शॉकेड रह gaya...Kavita मैडम खुद उस रस्ते को उसे कर रही थी बहार जाने के liye....maine देखा उन्होंने अपने हाथ बिल में डाला और उस बिल से थोड़ा धुवा जैसा कुछ निकला जो उनके आस पास फैल गया aur.....aur वो वह से गया हो gayi...main थोड़ा शॉकेड hua..par जल्द hi खुद को संभल liya..aur मैं भी उसी पेड़ के पास जा pahucha..au जैसा दीदी ने बताया था ठीक वैसा hi kiya...aur मैं वह से बहार निकल aaya...wahi हुआ था वो धुवा निकला और मेरे आस पास phail;a..aur फिर bas...main बहार निकल गया वह se..aur आ pahucha...School के गेट pe...par...kismat वो तो ख़राब hi है meri....Main बहार आया लेकिन ठीक कविता मैडम के बगल mein...qur बस वही नहीं थी वह pe....waha पे 3 और भी लोग the...ek तो मेरा कोई सीनियर स्टूडेंट tha....ek स्कूल का माली tha..wahi tisra..wo पता नहीं कोण tha...par उसको भी देखा हुआ था कही मैंने...

इस सिचुएशन में मैं एक दम से घबरा gaya....aur bas...Kavita मैडम से सॉरी बोलने hi वाला tha....ki उन्होंने इशारे में चुप रहने को कहा..

मैं फिर से शॉकेड रह gaya..thodi देर में बस आयी और हम सब चढ़ गए उसपे...

बस पे आने के बाद...

कविता मैडम - तुम कहा जा रहे हो प्रतीक और इस रस्ते के बारे में किसने bataya....Poonam तो बताएगी nahi...uss रूपल ने बताया ना..

मैं - Nahi.....wo to,,,,wo तो मैं खुद आ गया यहाँ pe...pata नहीं kaise....wo मैं गया था एक जगह और वह से यहाँ आ gaya...par पता hi नहीं चला कैसे...

कविता मैडम - अरे शांत हो jao...main तुम्हे डांटने वाली नहीं hu...bas इस रस्ते के बारे में खुल के बातें मत karna...waise ज्यादातर लोगो को पता है इसके बारे में पर कोई कुछ नहीं bolta..accha वो छोड़ो और ये batao..kaha जा रहे हो..

मैं- वो मैं रूपल दीदी के पास जा रहा hu....unhone बुलाया है मुझे...

कविता - पता tha..ussi ने बताया होगा तुम्हे...

अभी बात hi कर रहे थे की वह पे तक आ gaya...aur टिकट का बोलने laga....Maine अपने पॉकेट से पैसे निकले और उसको स्पेन के लिए bola....usne मुझे टिकट diya....joblank tha....par मेरे हाथ मेंआते hi उसके upar...hotel का अड्रेस आ gaya....wahi कविता मैडम ने उसको एक पास दिखाया और उसको देख के तक वह से चला गया....

कविता - हां तो उसने क्यों बुलाया है तुम्हे कोई अंदाज़जा है...

मैं- नहीं मैं नहीं जानता मुझे भी उनसे कुछ बात करनी थी तो मैं भी बस जल्दी से निकल गया...

कविता - हम्म सही है...

मैं - ये क्या tha,...jo आपने दिखाया usko...ticket तो नहीं है ये..

कविता - हां टिकट नहीं है ye....ye पास hai....mujhe रोज hi काम होता है ना तो मैंने पास बनवा लिया hai...ye देखो..

उन्होंने मुझे वो पास diya....par उसपे उनका नाम नहीं tha..haa फोटो उन्ही की thi...par नाम कुछ और था...

मैं - इसमें तो आपका नाम हो नहीं hai...ye तो किसी और के नाम से है..

कविता - हां वो इस्सलिये ताकि मैं कही पे फंस ना jaun...Chalo मेरा स्टॉप आ गया है मैं चलती हु....

मैंने बहार देखा तो हम किसी होस्पिटल के पास खड़े the..aur ये इंसानो का हॉस्पिटल tha..main इसके बारे में कविता मैडम से पूछता उससे पहले hi वो उतर गयी thi....aur जब मेरी नज़र उनके ऊपर वापस पड़ी तो वो भी डॉक्टर्स के कपड़ों में thi..Bus वापस से शुरू hui...aurr कुछ hi देर में हम स्पेन में the...theek होटल के samne....Main जल्दी से उतरा और सामने hi रूपल दीदी कड़ी थी....

बस चली gayi...aur मैं रूपल दीदी के पास चला gaya...Main बहुत खुश था उनसे मिल ke....jyada दिन नहीं हुए थे पर फिर bhi..main सीधा उनके गल्ले लग गया....

रूपल दीदी - चलो अंदर चलते है और बताओ क्या बात है...

हम दोनों होटल के अंदर gaye...aur रूपल दीदी के ऑफिस में चले gaye....waha उन्होंने मुझे बिठाया और...

रूपल दीदी - हां तो bata...kya बात है क्यों परेशां है तू...

मैं - मैं कहा परेशां हु...

रूपल दीदी - सच में naa...kyunki अगर इसके बाद कोई परेशानी बताई ना तो तेरे गाल होंगे और मेरे haath...fir समझ जाना...

मैं - Wo....wo मुझे बहुत अकेला अकेला लग रहा है...

मैंने उनको सब कुछ bataya...kaise यहाँ से जानने के बाद सब बदल सा gaya...Nikita बात नहीं कर rahi...Bua कुछ ज्यादा hi बिजी है और bas..itna hi बता paya..main unko..Dhruv के बारे में नहीं बता सकता था...

रूपल दीदी - निकिता बात नहीं कर rahi...aisa क्या हो गया usko...aur रही बात बुआ ki..to वो मुझसे भी बात नहीं कर रही hai.....aur अक्सर ऐसा हो जाता tha...ye सब सायद तुम्हारे मास्टर की वजह से hai...Bua बता रही thi..ki उन्होंने कहा था उनसे की तुम दोनों के बिच का रिस्ता अभी बहार नहीं आना chahiye....par बुआ कुछ आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो गयी aur....sayad उन्हें दांत पड़ी हो तुम्हारे मास्टर se.....ye निकिता का समझ नहीं आ रहा hai...par वो भी ठीक हो जायेगी...

मैंने थोड़ा socha..inn चीज़ों के बारे में और ये कुछ कुछ तो सही laga...par..khair मैंने इन् बातों को अभी वही छोड़ दिया और दीदी से पूछा की मुझे वह क्यों बुलाया..

रूपल दीदी - अरे वो एक बात पता करनी thi....tum तो इन् इंसानो के बिच में hi रहा करते थे naa.....to इनके बारे में थोड़ा बहुत जानते छपोगा hi...

मैं - हां जनता hu....par सभी गेम्स और बाकी चीज़ों के बारे में नहीं...

इतना बोल के हसने लगा क्यूंकि यही सवाल पहले भी पूछा था मुझसे और उसके बाद बैल फाइट के लिए लेके आ गए थे...

रूपल - अरे गेम वामे नहीं chotu....wo बस कुछ इंसान है jo...yaha पे कुछ बुरे काम कर रहे hai...aur यहाँ के प्रीस्ट्स ने मुझे उनसे निपटने के लिए मदद मांगी hai..Main पापा से पूछने वाली thi...par फिर लगा तू मेरी मदद कर सकता है तो बुला लिया तुझे...

मैं - क्या काम कर रहे है वो यहाँ..

रूपल - वो यहाँ पे लोगो को परेशां करते है उनको लूट लेते hai,,,maine सोचा की सीधे मारर के hi ख़तम कर देते है par...aisa नहीं कर sakte...agar ऐसा किया तो पापा मुझे छोड़ेंगे नहीं...

मैं - हां मैंने भी देखा था ऐसे लोगो ko...wo बुरे इंसान होते है जो अच्छे लोगो को परेशां किया करते hai...aap पुलिस की मदद ले सकते ho....par..

रूपल - हां पता hai...Police से मदद मांगी थी प्रीस्ट्स ने पर कोई ज्यादा मदद नहीं milli...issi वजह से मेरे पास आये है wo...Ab मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करू...

मैं - मुझे लगता है एक बार चाचू से बात करनी चाहिए aapko....wo पहले भी ये सब कर चुके honge...unse मदद मिलेगी aapko....Main इंसानो के साथ रहा तो हु par...jyada कुछ पता नहीं ऐसे में कैसे डील करनी है...

रूपल - हम्म ठीक hai..main तुमसे बाद में मिलती hu...aur हां अब जब भी अकेले लगे आ जाय करो yaha..samjhe....main हमेशा रहूंगी यहाँ,,,

मैं - हम्म ठीक है

मैं फिर वह से निकल गया क्यूंकि वक़्त हो गया अब तक ना सिर्फ सारे क्लासेज ख़तम हो गए होंगे balki....dinner का वक़्त हो गया tha....to मैंने बस लिया और जल्दी से स्कूल पहुंच gaya....ander जाने के लिए मुझे रूपल दीदी ने बता दिया था एक रास्ता main...main गेट से नहीं जा सकता था तो बस उसी रस्ते से वहासे चला gaya...aur सीधा अपने रूम में चला gaya...waha जाने के बाद थोड़ा देर बैठा और फिर वह से बहार aaya....aur डिनर करने चला गया....

जब मैं वह pahucha...to निकिता पे नज़र गयी meri...sayad वो किसी को धुंध रही thi...Maine सोच लिया था की आज इससे पूछ hi लूंगा की आखिर बात क्या hai...kyun ये मुझे इग्नोर कर रही है bas...fir क्या था मैंने भी प्लेट उठायी खाना लिया और उसी के पास चला gaya...wo अभी भी किसी को धुंध hi रही thi...aur जैसे hi मैं उसके पास baitha...wo डर गयी...

मैं - Kya...ab बैठ भी नहीं सकता क्या...

वो कुछ नहीं boli..wo बस अपने प्लेट को देखने लगी और उससे खाना खाने लगी...

मैं - क्या प्रॉब्लम है...

निकिता - कुछ नहीं मुझे क्या प्रॉब्लम होगी.,..

मैं - तो इग्नोर क्यों कर रही हो,...3 दिन से देख रहा hu...nazar रखती हो पर जब भी मैं पास आता हु भाग जाती हो...

निकिता - नहीं कुछ नहीं...

मैं - देखो मैं बहुत परेशां हु इस बात को leke...tum दोनों hi तो दोस्त हो mere...aur अभी दब है नहीं yaha...aur तुम भी aise...tum मुझे बता सकती ho...main तुम्हारी मदद कर सकता हु...

निकिता - तुम्हे बिकलुक भी याद नहीं की क्या हुआ tha...nahi ना

मैं - क्या baa.....tum उस दिन के बारे में बोल रही हो naa...mujhe याद नहीं है क्या हुआ tha...ye भी याद नहीं की मैं घर कैसे pahucha...batao क्या हुआ था...

निकिता- नहीं मैं नहीं बता sakti...kya प्रोफ. पूनम ने नहीं बताया कुछ...

मैं - वो सायद अभी कुछ बिजी hai...tum बता दो...

निकिता ने एक बार आस पास dekha...aur फिर बाद में मिलने के लिए kaha...wahi तालाब के पास...

मैंने भी ठीक है कह दिया और खाना खाने लगा...

खाने के बाद हम निकल गए रूम्स के liye...main पहले तो सबके सात गया फिर बाद में वह से निकल के चला गया तालाब के pass.....jaha पे पहले से hi निकिता बैठी थी...

मैं - हां अब बताओ...

निकिता - तुममे डार्क पावर्स hai...wo भी बहुत ज्यादा...

मैं - डार्क पावर्स क्या बात कर रही हो...

वो बस इतना बोल के वह से भाग gayi...main पूछता रह गया par...wo मुद्दि भी नहीं बस वह से भाग गयी....

मैं - ध्रुव ये डार्क पावर्स क्या है....

ध्रुव से कोई जवाब नहीं मिला...

मैं रूम में आया और जल्दी से सोने की तैयार करने लगा क्यूंकि ट्रेनिंग में तो वो आएगा hi...aur तब सायद वो मुझे बताये ये sab...Par यहाँ भी मैं गलत हो gaya...training में भी वो नहीं आया tha...bas मेरा ट्रेनर आया tha...jiske साथ ट्रेनिंग करि मैंने और थोड़ा टाइम अलबूस और कूपर के साथ स्पेंड किया और मैं वह से निकल gaya...Subah hui...main जल्दी से ध्यान में बैठने के लिए निकल gaya...waha पंहुचा तो आज वह 3 और लोग the...Master भी थी वह pe...saath में बुआ और निकिता bhi...wo तिण्णो ध्यान में बैठी हुई thi...aane में मुझे थोड़ी सी देरी हो गयी thi...main इन् तिण्णो से बात करना चाहतरा था पर अभी ये तिण्णो hi ध्यान में थे तो कोई चांस hi नहीं tha...phir क्या मैं बस बैठ गया ध्यान mein....waqt बीतता और उसके बाद जब आँखें खुली तो जैसा सोचा tha...koi नहीं था वह pe...aur इससे बहुत गुस्सा आया mujhe....par...tabhi वह पे एक किताब नज़र aayi...kitab पुराणी लग रही thi....ajeeb से लैंग्वेज में लिखी हुई thi....wo किताब मास्टर जहा पे थी वह पे रखा हुआ tha...maine किताब उठायी और निकल पड़ा उसको मास्टर को वापस देने के liye...saath hi उनसे बात करने के लिए bhi....par जैसे hi उनके ऑफिस में pahucha.....waha पे कोई नहीं था....

ऑफिस से निकला तो वह पे कोई आदमी tha...school का hi था koi..maine उससे मास्टर के बारे में पूछा तो वो बोल गया की वो कही बहार गयी hai....maine सच्चा वो किताब उनके ऑफिस में hi रख दू और निकल जॉन वह se....mujhe ब्रेकफास्ट भी करना tha...par ब्रेकफास्ट से याद आया मैं ये किताब बुआ को दे सकता hu...saath hi उनसे बात भी कर lunga..aur ब्रेकफास्ट तो हो hi जाएगा waha...main जल्दी से उनके ऑफिस में gaya....wo वह पे पहले से hi 2 प्लेट्स में खाना मंगवा के बैठी हुई थी...

मैं वह पंहुचा और उनके चेहरे पे एक स्माइल आ गयी...

बुआ - आज बुआ की याद कैसे आयी बच्चू...

मैं - वो मैं मास्टर की किताब देने आया था वो नहीं थी वह pe...to सोचा आपको दे दू...

मैंने किताब रखा और वह से बहार जाने लगा,....

बुआ - ये दूसरा प्लेट तुम्हारे लिए hi रखा hai...itna नहीं खाया जात्ता मुझसे...

मैं - मुझे भूख नहीं है आप खुद hi खाओ...

इतना बोल मैं बहार जाने लगा...

बुआ - बच्चू मैं थोड़ी बिजी थी bas....aur कोई बात नहीं hai...chalo अब माफ़ कर दो और आओ यहाँ खाना खाओ...

भूख लगी थी अब ज्यादा नखरे करने से खाना तो हाथ से जाना hi tha...koi भरोषा नहीं बुआ मुझे कोई सज़्ज़ा भी dede...to मैं बस मुद्दा और जाके टेबल पे बैठ गया और खाना खाने लगा...

बुआ - अब सब पहले जैसा hi रखेगा...

मैं - पहले jaisa...matlab ???

बुआ - मतलब?? वो छोड़ो पहले ये बताओ कल कहा भाग गए the...kaha कहा नहीं ढूंढा तुम्हे....

मैं - वो मेरा मान नहीं था तो रूम में....

बुआ (आँखें दिखते हुए) - रूम में...

मैं - नहीं रूपल दीदी की पास गया tha...unhone बुलाया था...

बुआ - बिन्ना बताये गए अगली बार तो टाँगे तोड़ दूंगी samjhe...pata भी है कितने परेशां थे hum....aur तुम्हारे वजह से हमारा ट्रिप भी ख़राब हो गया...

मैं - ट्रिप कोण सा ट्रिप...

बुआ - Bataungi..abhi nahi...uss रूपल को भी यहाँ आने के बाद...

मैं- अरे आप गुस्सा मत हो उनको कोई प्रोब्ले थी बस इसी वजह से बुलाया tha...par अब वो चाचू से बात कर लेग उनको डांटना मत...

बुआ - तुम दोनों भाई बहन को ना अच्छे से सबक सीखना hoga...main भाभी को बताने वाली हु ये sab...bas फिर वो जाने और तुम दोनों भाई बहन..

मैं चुप हो गया मतलब अब क्लास लगने वाली थी हम दोनों की...

बुआ - नास्ता करो और क्लासेज में jao...humme फिर तुम्हारी मास्टर के साथ ट्रिप पे भी जाना hai..tab तक वो रूपल भी आ जाएगी...

मैं चुप चल नास्ता करने लगा और नास्ते के बाद निकल liya...kaha मैं गुस्से में था और अब ये सब..

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट में देखते है ये ट्रिप का क्या चाकर है और मास्टर के यहाँ आने का भी पता उसी में lagega...aur ये डार्क पावर का क्या नया chapter है...
 
अपडेट -34

अब तक

घर से आने के बाद सब बदल गया था एक पल को ऐसा लगा जैसे जो भी मुझे मिला एक pariwar..kuch दोस्त वो सब वापस से चीन गया ho..kyunki वो मेरे पास नहीं आते the,,,Nikita मुझसे दर रही थी पता नहीं kyun...Bua के पास टाइम नहीं tha..Master वापस आयी थी पर मुझसे मिली nahi..bas एक बार hi मिली thi...DB भी अभी नहीं था yaha...Dhruv वो भी ज्यादा बात नहीं कर रहा tha...naa hi ज्वाला से कोई बात हो पा रही thi...bas अलबूस और कूपर hi the...jo साथ होते the...fir रूपल दीदी ने बुलाया और उसके बाद सब चेंज hua..sayad...Nikiyta ने बात की पर उसने सीधा मुझे डार्क पावर का कुछ बताया और चली gayi...wahi बुआ से भी बात हुई और उन्होंने बुलाया और बताया की मास्टर के कामो की वजह से वो नहीं मिल रही thi..aur साथ में एक ट्रिप का भी बताया..

अब आगे

मैं उनसे मिलने के बाद क्लासेज में चला gaya...wahi प्रोफ. सूरज का क्लास था abhi..main वही चला aya...Aaj बड़े खुश दिख रहे थे प्रोफ. Suraj...aur साथ hi अजीब bhi...class शुरू hui...aur उन्होंने एक खास तरह के भले के बारे में बताना शुरू kiya....jisme एक पंख लगा होता hai...pankh वाले भले वैसे तो आम है पर इसको चलने की कल्ला अब वैसी नहीं rahi...pahle की बातें और thi..pahle ये प्रमुख हथियारों की सूचि में आया करता था पर ab...ab ये नहीं aata...iske जगह पे बहुत सी आधुनिक चीजजें आ गयी hai...lekin इसके सामने वो सब कुछ भी नहीं hai...Pankh वाला Bhala..apke अंदर के ऊर्जा को एक सही दिशा देता है अगर सही से उसे किया जाये...

ऐसे hi बहुत सी बातें वो बता रहे the...fir आयी बारी प्रक्टिकल्स ki...par...tabhi उन्होंने क्लास बंद कर दिए..

प्रोफ. सूरज - Students....aaj के लिए इतना hi आपकी क्लास ख़तम हो गयी है...

हर क्लास में एक होता hi है जो ऐसे मौको पे सवाल करता है और यहाँ भी थे कुछ waise...unhone पूछा और जवाब में बस इतना पाया की प्रोफ. सूरज को कही बहार जानना tha....kuch काम के लिए..

सभी क्लास से बहार निकल लिए मैं bhi...aur क्लास से निकलते hi एक जगह पे मुझे ओल्ड आउल dikha...Main साइड में गया जहा कोई ना हो और वह पे उसको bulaya...thodi देर में वो आ गया...

मैं - कहा थे तुम इतने वक़्त से...

ओल्ड आउल - मैं तो यही था इस प्रोफ का पीछा कर रहा था जहा जहा ये जाता वह मैं भी जात्ता यही तो आपका आदेश था..

मैं - हां था पर इसके बारे में बताने को भी कहा tha..mujhe कब बताने वाले थे तुम...

ओल्ड आउल - ऐसा नहीं की मैंने कोशिश नहीं ki...main तो रोज hi आपके पास आता tha..aapko बताने के liye..par आप ध्यान नहीं देते the...maine इस बारे में ज्वाला से भी बात kari...par वो बीमार है अभी

मैं - Kya.....wo बीमार है क्या हुआ है उसको...

ओल्ड आउल - उसका रंग कल्ला होता जा रहा hai..aur वो कमज़ोर होता जा रहा है..

मैं - क्या तुम मुझे उसके पास लेके जा सकते हो...

ओल्ड आउल - हां क्यों नहीं पर....

मैं - पर क्या...

ओल्ड आउल - पर मैं एक hi साथ ये नहीं कर paunga...yaa तो आपको वह ले जा सकता हु या प्रोफ. सूरज का पीछा,,,

मैं - इसका पता तुम बाद में भी लगा loge...abhi मुझे ज्वाला के पास जानना है...

ओल्ड आउल ने किसी तरह एक पोर्टल khola..par हम अभी ज्वाला के पास नहीं the...hum पता नहीं कहा पे थे..

मैं - ये क्या है मैंने तुम्हे ज्वाला के पास ले जाने को कहा tha..aur तुम मुझे...

ओल्ड आउल - Malik...kuch कणों है जिनको मन्ना मेरे लिए जरुरी hai..agar मेरी बात होती तो मैं चिपटे छिपाते वह चला जात्ता पर आपको किसी मुशीबत में नहीं दाल sakta..ye वो इलाका है जहा पे पोलर बेयर और ईगल्स के बिच यद्ध होता था..

उसने एक साइड ुइशारा किया और कहा की उसी दिशा में जाने से मैं ज्वाला के कबीले में पहुंच जाऊंगा...

मैं - कितना वक़्त लग जाएगा...

ओल्ड आउल - ये तो अप्पे है की आप कितनी देर में पहुंचते ho...Ab मैं चलता hu...mujhe उसका पता भी लगाना hai..iss वक़्त वो किसी बहुत बड़े शाजिश का हिस्सा बना हुआ है..

इतना बोल वो गायब hi हो गया और मैं चलने laga...mujhe जल्दी से जानना था वह अपने दोस्त के pass...dimmag में और कुछ चल hi नहीं रहा था बस यही था की किसी तरह जल्दी उसके पास पहुंचना hai...Old ऑल के बताये हुए डिसा में मैं आगे बढ़ता raha...kuch देर बाद मुझे किसी के कराहने की आवाजें सुनाई देने lagi...aisa लग रहा था जैसे कोई दर्द से तड़प रहा ho..aur मदद के लिए लोगो को बुल्ला रहा ho..par धीरे dhire..ajeeb था ये...

मैंने आस पास dekha..kuch दिखा nahi..main वापस से उसी दिशा में पर वापस से वो आवाज सुंई di..aur इस बार थोड़ी ज़ोर se....main इस बार फिर से गया उस दिशा mein...waha गया तो एक सफ़ेद पेअर बस वही दिखा मुझे...

वह pe..sayad किसी तरह से कुछ हुआ और मिटटी गिर्री हॉपर se..jiski वजह से ये जो कोई भी था वो उसके निचे फस्स गया tha...Maine मिटटी हटाना शुरू kiya...aur कुछ देर में पूरी मिटटी हत्ता di..aur फिर मुझे वह पे दिखा एक छोटा सा पोलर Bear...jo जख्मी लग रहा था....

मैं - कोण हो तुम और यहाँ ऐसे..

वो - ghar...ghar..

इतना बोलने के बाद वो बेहोश हो gaya...Main उसको होश में लाने के की कोशिश करने laga...parye भालू tha...wo भी बच्चा पता नहीं कैसे मैं इसको होश में laun...aas पास कही पानी भी नहीं दिख रहा tha...ab इसको ऐसे hi छोड़ना गलत tha....Mujhe लगा सायद ज्वाला के कबीले में मुझे कुछ मदद मिल jaaye...aur मैं चल दिया भालू को लेके wahi...kuch देर में मैं ...कबीले के बाहिरि हिस्से में pahucha...jaha पे कुछ पहरेदार the...wo मुझे जानते the..ab यहाँ सब मुझे जानते थे...

पहरेदार 2 - आप यह इस तरह से....

मैं - ज्वाला की तबियत हरब hai..main उससे मिलने आया tha...par ओल्ड आउल ने मुझे वही पे छोड़ दिया..

पहरेदार 1 - Kya...usko आपके साथ ये करने की जरुरत नहीं thi...aap तो महाराज के मालिक hai..aapko वो यहाँ पे लेके आ सकता था..

मैं - वो सब छोड़ो और ये बताओ ज्वाला कहा है....

पहरेदार - वो कबीले के वैद्य दी के यहाँ है abhi..kal से उनको कुछ आराम मिलने लगा है..

मैं - कहा रहते है ये वैद्यजी लेके चलो मुझे...

मैंने सोचा वह पे उस भालू के बचे को भी दिखा denge,...unn पहरेदारों में से एक मुझे अपने साथ आने को बोलै..

मैं भी चाल्डिया उसके साथ और कुछ hi देर में पहुंच गया वह pe...Jwala अभी बैठा हुआ था और एक बूढ़ा सा दिखने वाला चिल उसकी जांच कर रहा था..

मैं - ज्वाला - क्या हुआ था तुम्हे और तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कुछ...

मेरी आवाज सुन के वो चौंक gaya...wo पहरेदार जो मेरे साथ आया था वो तो पहले hi वह पे घोसना करवाने वाला था पर मैंने उसको रोक दिया था..

ज्वाला - आप यहाँ..

मैं - हां मैं अब बताओ क्या हुआ था tumnhe...aur अब कैसे हो...

वैद्यजी - सायद कोई शक्ति thi...jo इनके अंदर आना चाहती है पर आ नहीं पा रही hai...aur वही इनको कमज़ोर करने में लगी हुई thi...par किसी तरह अभी वो शक्ति गायब हो गयी hai...aisa पहले भी देखा है maine...par इस बार बात अलग टी..

ज्वाला - प्रतीक आप चलो हम महल में बात करते है...

मैं - रूक्को मुझे एक काम है वैद्य जी से...

मैंने उनके सामने वो छोटा पोलर एअर rakha...apne पदों से निकल ke...aur उसको देखते hi वह सब चौंक gaye..Jo पहरेदार मुझे वह लेके आया था अब वही मेरे सामने खड़ा हो गया था..

ज्वाला - ये क्या hai..aapne एक पोलर बेयर को यहाँ लाने का गुन्नाह किया है..

मैं - ये मर जात्ता वह pe...isko बचाना जरुरी था...

ज्वाला - नाह...

वैद्यजी - महाराज ये तो राजकुमार hai...Polar बेअर्स के rajkumar..dekhiye इनके पंजो पे वही निशानी है..

ज्वाला - तुमने ये क्या कर diya..main अभी स्वस्थ भी नहीं hu..aur अगर इस वक़्त वो लोग हमपे हमला करने आये तो बहुत नुकसान hoga...pahredaar..isko ठिकाने लगा दो....

मैं - Kya..thikane लगा do..nahi...Vaidyaji आप इसका इलाज karo...aur tum..tum मेरे गुलाम हो अभी चलो मुझे तुमसे बात करनी hai...aur पहले इस पहरेदार को हटाओ..

ज्वाला ने इशारा किया और वो हैट gaya...wahi वैद्यजी भी उस पोलर बेयर के साथ कुछ करने lage...aur मैं ज्वाला के साथ बहार आ गया....

मैं - ये सब कुया tha,...wo एक बच्चा है उसको ठिकाने लगादो से क्या मतलब था tumhara...marna चाहते हो उसको..

ज्वाला - अगर हमारे यहाँ का कोई होता वह तो वो भी यही करते..

मैं - शांत हो jao..aur मेरी बात को sunno...ye एक अच्छा मौका है उनसे दोस्ती करने के लिए...

ज्वाला - नहीं ऐसा कुछ नहीं होने वाला हम दुसमन है और रहेंगे...

मैं - ये मेरा आदेश hai..aur तुम इसका विरोध नहीं करना चाहोगे...

ज्वाला - हां बस यही बाकी रह गया tha...ek तो तुम्हारी वजह से ये हालत है मेरी और अब....

मैं - ये क्या बोल रहे ho...meri वजह se...maine क्या किया है...

ज्वाला - कुछ nahi...mujhse गलती हो गयी...

मैं - ज्वाला बताओ mujhe...ye मेरा हुकुम है..

ज्वाला - डार्क power...ye वही tha....tumse जुड़े हुए हर एक चीज़ के साथ ऐसा hi होने वाला hai....jab तक तुम तैयार नहीं होते हम सब की हालत ख़राब होती rahegi.....tum उस शक्ति को अपना नहीं पाए इस वजह से मेरी ये हालत है...

मेरी समझ में नहीं आ रहा था ये क्या बोल रहा hai..aur ये डार्क पावर है kya...Nikita ने भी ऐसा hi बोलै था और अब ये भी...

मैं - उस पोलर बेयर के बच्चे को सही सलामत तुम्हे उसके कबीले में छोड़ना hoga...aur ये तुम खुद karoge..ye मेरा आदेश hai..aur अभी मुझे स्कूल जाना है....

उसने कुछ नहीं बोलै बस एक पोर्टल खोल दिया जिससे मैं स्कूल में वापस आ gaya...aate hi मैं अपने रूम में चला gaya...mujhe कुछ चीजजें समझनी thi...Abhi सभी क्लासेज में बिजी the..meri भी जादुई दवाई वाली क्लास थी पर मैं लेट हो चूका tha..aur अब जाने का भी मैं नहीं था...

रूम में आने के बाद में सोचने लग गया आखिर ये है kya...meri वजह से कैसे उसको कुछ हो सकता hai...aur क्या ऐसा कुछ निकिता के साथ भी हुआ tha....kya इसी वजह से वो मुझसे दर्री हुई thi..yaa भाग रही thi...main समझ नहीं पा रहा tha..aur ये Dhruv..uske साथ भी कुछ वैसा hi तो....

मैं - ध्रुव तुम सुन रहे ho..tum ठीक हो ना...

पहले तो कोई जवाब hi नहीं aaya...kuch देर बाद जवाब आया...

ध्रुव - हां मैं ठीक हु..

मैं - क्या हुआ था tumhe....kya ये सब मेरी वजह से हुआ tha...kya तुम भी..

ध्रुव - नहीं ये मेरी गलती thi...agar मैं तुम्हे पहले hi बता देता तो सायद ये सब नहीं hota..maine ध्यान नहीं दिया उस वक़्त और फिर अचानक से ये सब हो गया aur...main कुछ कर नहीं सक्का

मैं - पर ये था kya...aur क्या ज्वाला को मेरी वजह से...

ध्रुव - हां ज्वाला को भी और निकिता को bhi...Nikita ो ज्यादा नुकशान नहीं पहुंचने दिया मैंने par...Jwala को नहीं बच्चा saka...aur वो उस शक्ति के कारन..

मैं - हम्म थी है अब ये बताओ की है क्या ये डार्क power...aur मैं hi क्यों..

ध्रुव - डार्क पावर क्या है ये तो मैं बता दूंगा पर तुम्हारा ये दूसरा question..wo मैं नहीं बता paunga..usko तुम्हे खुद hi पता करना होगा...

मैं - क्या..

ध्रुव - डार्क पावर कहा से आया इसका पता नहीं है पर वो तुमसे जुड़ गया और फिर कभी अलग नहीं huaa...wo हिस्सा बन गया था तुम्हारे सोल ka...aur अभी भी hai..par वो एक्टिव नहीं hai..wo अभी सो रहा hai...usko सोने देना hi सही है अभी के liye..taaki कोई नुकसान ना हो tumhe...jab तुम उसके काबिल हो जाओगे तो वो खुद jaagega..dhire dhie...par ऐसे नहीं..

मैं - ये क्या hai...inn बातों से क्या hi पता chalega..wo मुझसे जुड़ा कब और कैसे...

ध्रुव - देखो प्रतीक मेरी कुछ हड्डी है जिनको पार किया तो हम दोनों का नुकसान hoga....mujhe अपनी फ़िक्र नहीं है पर tum..tumk मैं कुछ होने नहीं दे sakta...iss लिए अभी मैं उन् हाड्डो में hi सही hu....isse ज्यादा मैट पूछो मुझसे..

मैं अभी बोलने hi वाला था की मास्टर की आवाज आयी...

मैं बहार gaya..dekha तो वह pe...Nikita, रूपल दीदी, बुआ और मास्टर खड़े थे...

मास्टर - क्लास में नहीं गए थे तुम...

मैं - वो मास्टर मैं वो...

मास्टर - बाद में ात करेंगे ispe...abhi चलो यहाँ se....Poonam वो कहा है...

बुआ - वो आ रही है...

मैंने पीछे देखा तो वह से कविता मैडम भी आ रही thi...wo भी उन्ही के साथ कड़ी हो गयी...

मास्टर - हममे एल्फ कंट्री जाना होगा...

मैं/ निकिता - एल्फ कंट्री मतलब दब के देश में..

मास्टर - हां वही पे...

निकिता - पर वह तो हम जैसे...

मास्टर - कोई भी कही भी जा सकता है बस रस्ते का पत्ता होना chahiye...Rasta मैं बता रही hu...ab चलो..

मास्टर ने अपने पाउच में से कुछ निकला और उसको जमीं पे फेंक diya...aur देखते hi देखते वह पे एक पेड़ उग्ग gaya..jisme एक दरवाजा लगा हुआ था....

मास्टर - सभी अंदर chalo...aur कपडे चेंज करो...

हम सब अंदर gaye,...ye किसी घर जैसा tha..aur बड़ा भी tha...Master ने हममे कुछ कपडे दिए और उनको पेहेन्ने को kaha..aur हमने चेंज कर liya....jab हम सब वापस से दरवाजे के पास aaye...to ये कुछ अलग tha...maine नोटिस किया की हम सब जब आये थे तो दरवाजा दूसरे तरफ tha..aur अभी ठीक उसके उलटे साइड mein...par बाकी की चीज़ें बिलकुल वैसी hi थी...

मैं - मास्टर ये दरवाजा तो...

Master(muskurate हुए) - हां ये दरवाजा तो क्या...

मैं - ये तो वह था ना सायद,,,

मास्टर - मिरर के थ्रू ट्रवेल karna...aasan है और किसी को पता भी नहीं chalta...ye सबसे अच्छा तरीका hai...haa वो दरवाजा दूसरे साइड hi tha....Par ये सब हम बाद में देखेंगे अभी हममे देखना है यहाँ की प्रॉब्लम को...

बुआ - प्रॉब्लम आपने कल hi कहा था कुछ होने वाला है yaha...par कल आप नहीं आयी क्यूंकि बच्चू नहीं था यहाँ...

मास्टर - देखो पूनम ये जो परेशानी है ना ये इन् दोनों की hai,....aur इन्ही दोनों को इससे निपटना है और तीसरे को बुलाना है...

मास्टर मेरी और निकिता की ओर इशारा कर रही thi...aur हममे कुछ पता hi नहीं था..

निकिता - मुझे क्या करना है...

मास्टर - तुम्हे नहीं तुम दोनों ko...dekho जब तक दोनों साथ में नहीं आते तब तक तीसरे को बचा नहीं paoge..aur वो तीसरा बहुत जरुरी होने वाला है...

कविता - kya...Madam आप सच में उस भविस्यवाणी की बात कर रही hai..mujhe याक्किन नहीं हो रहा है...

पूनम - Bhavis...nahi kya..par...madam इसके पास तो चूहा है...

मास्टर - थंडर एलिमेंट है इसके pass...aur रही इसके स्पिरिट की बात तो वो बाद में पता चल जाएगा...

बुआ - पर ये kaise..ye तो..

मास्टर - तुम्हे क्यों लगता है मैं किसी आम से बचे के साथ रहूंगी इतने saal...wo भी चुप के...

मैं - क्या बात कर रहे हो आप sab...mujhe कुछ समझ नहीं आ रहा है...

निकिता - इसके अंदर डार्क पावर्स है और मैं नहीं जाउंगी इसके साथ...

बुआ / कविता - Kya...Dark पावर...

मास्टर - हां डार्क power...tumhe क्या लगता है क्या हुआ था इसके साथ उस दिन स्पेन में....

बुआ - हममे लगा इसकी थंडर एलिमेंट की स्टेबिलिटी का कोई प्रॉब्लम hai...tabhi तो घर लेके आ गए थे isko..waha इंसानो के बिच ये sab...mushibat हो जाती...

मास्टर - हां स्टेबिलिटी की hi कमी thi...aur ये उसी की वजह से हुआ tha...aur यही वजह थी की मैं सीधा एअर्थ पे आ gayi..Mujhe देखना था ये ठीक है या nahi...par ये ठीक हो गया था...

कविता - इसके पास डार्क पावर है मतलब समझ रहे ho..ye ये...

मास्टर - ये अभी काबू नहीं कर पाया hai..issi वजह से तो ये ऐसा hai...ye सब chodo...Nikita sunno...tumhe जानना hoga...abhi यहाँ कुछ तो होने वाला hai...main इसी बारे में पता लगा रही थी यहाँ पे पर ये सब हुआ और मुझे एअर्थ पे जानना pada..aur वह तुम मिली mujhe...tumhe जानना hi hoga...tum hi कर सकती हो ये काम...

निकिता - पर वो ब्बहुत डरावना है...

मास्टर - निकिता तुम जानती ho..ki उससे भी ज्यादा डरावना क्या hai..agar ये नहीं किया to...fir उसमे मैं भी कुछ नहीं कर paungi..main क्या कोई भी nahi...iske 3 टुकड़े होने hi hai...agar नहीं हुए तो सब वापस से शुरू होगा..

मैं - मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा hai..aakhir बातें क्या कर रहे हो आप स....

मैं बोल hi रहा था की वह पे ओल्ड आउल उड़ता हुआ दिखा मुझे...

मैं - मैं अभी आता हु...

बिन्ना किसी की बात सुनने मैं वह से निकल gaya...darwaja खोला और bahar...Baha देखा तो हम किसी जंगल जैसे इलाके में थे....

मैं - ओल्ड Owl...samne आओ..

थोड़ी देर में वो मेरे सामने था...

मैं - तुम यहाँ पे kaise..strange वर्ल्ड में...

ओल्ड आउल - मैं आपकी hi बात मान रहा hu....yaha पे है वो प्रोफ. सूरज..

मैं - क्या पर वो यहाँ पे kyun...aur हम भी इसी जगह पे क्यों आये है...

ओल्ड आउल - आपका दोस्त मुसीबत में hai...yaha से ये सीना जाने वाली है एल्फ कंट्री mein..aur हमला karegi....ussi सेना के प्रमुख है प्रोफ. Suraj...waha अंदर भी लोग है जो गद्दी के लिए ऐसा कर रहे है...

मैं - दब कहा है वो ठीक है...

ओल्ड आउल - अभी ठीक है पर आगे का पता nahi...agar ये सेना वह पहुची तो सायद उन्हें बंधी बना लिया जाए...

मैं - नहीं ऐसा नहीं hoga...nere रहते हुए तो नहीं...

मैं जल्दी से वह से nikla..Old आउल को उनपे नज़र रखने का बोल ke..aur जा पंहुचा वही मास्त्वर के pass..jo की अब घर से बहार निकल गए थे...

मैं - वह सेन्ना है वो एल्फ कंट्री पे हमला करने वाले है aur...aur प्रोफ. सूरज उनके लीडर है...

बुआ - सूरज वो waha....par क्यों..

मास्टर - इस क्यों का जवाब देने का वक़्त नहीं hai....taiyaar रहो तुम dono...aur Prateek...Nikita..niklo यहाँ से तुम्हे एल्फ कॉन्ट्रय जानना है और वह के गद्दार को सबके सामने लेके जानना hai...hum तब तक यहाँ देखते है...

मैं - पर मास्टर यहाँ पे बहुत से लोग है...

मास्टर - हम तैयार hai..tum दोनों jao...Nikita याद rahe...maine जो बोलै है...

निकिता ने हां में सर हिकया और हम दोनों चल पड़े....

कविता मैडम - अरे नक्सा तो lelo...rasta पता है क्या...

मैं जल्दी से गया और नक्शा लिया उनसे और फिर हम दोनों चल दिए वह se....wahi...Bua मास्टर और कविता मैडम तिण्णो hi रेडी हो गयी अपने काम के लिउए....

हम जंगल वाले रस्ते से जा रहे the...ye आसान होने वाला tha...sipahi..yaa वह के पहरेदार जो नहीं मिलते humme...par जंगली जीवों से बचना ये तो मुश्किल था hi...upar से ये निकिता अभी भी बात नहीं कर रही थी..

मैं - निकिता मुझे बाद में पता चला की मेरी वजह से तुम्हे परेशानी हुई...

निकिता - तुमने मुझे पावर्स di...kyun..

मैं - उस वक़्त वो जरुरी tha...nahi तो तुम्हारा स्पिरिट एनिमल नहीं बच pata...aur मुझे तुम्हे उस किल्ले से भी निकलना था..

निकिता - हां वह से निकल के यहाँ पे फसा diya..tumhe पता भी hai...ab मुझे हमेशा तुम दोनों के साथ रहना hoga..kyun...kyun...

मैं - क्या matlab..kya तुम नहीं रहना चाहती हमारे saath...hum दोस्त है...

निकिता - अरे पूछना तो था naa..aur दोस्त क्या दोस्त को ऐसी मुशीबत में दाल देते है जिसमे जान hi चली जाए...

मैं - है मुझे पता नहीं था उस waqt...aur ना hi अभी पता hai...main बस मदद करना चाहता था...

उसने कुछ नहीं बोलै बस आगे चली गयी..

मैं - ध्रुव ये सा क्या हो रहा hai..aur ये भविष्यवाणिओ का क्या चकलार है...

ध्रुव - मैंने कहा था हड्डी पार नहीं कर sakta...sabr रखो सब पता चल जाएगा...

मैं - क्या मैं उसको इन् सब से दूर कर सकता hu...wo खुश नहीं है इन् सब से...

ध्रुव - अगर वो चाहे तो वो तुम्हे तुम्हारी दी गयिओ पावर्स वापस कर सकती है पर उसके लिए उसको बहुत ध्यान लगाना hoga...aur इसमें वक़्त लगेगा...

मैं - मतलब ये मुमकिन hai..hai ना..

ध्रुव - सब कुछ मुमकिन hai...bas छह होने chahiye...tumne वह ज्वाला के कबीले में जो किया वो अच्छा था....

मैं - हां पर सायद इससे ज्वाला और उसके कबीले वाले मुझसे नाराज़ रहे...

ध्रुव - ये एक कड़वी दवाई है उनके liye...aur तुम्हारे लिए bhi..sab ठीक हो jaayega..bas देखते जाओ..

मैं - hmm...waise तुम मुझसे बात नहीं कर रहे थे क्यों..

ध्रुव - मैं सर्मिन्दा tha...auur मुझे बुर्रा भी लग रहा था...

मैं - अगर फिर कभी कुछ ऐसा हो तो बात ना करने का आईडिया दिम्माग में मत लाना..

ध्रुव - हां ठीक है..

हम जा hi रहे थे की अचानक से मुझे कुछ hua...ek अजीब सी फीलिंग aayi...jaise पता नहीं kya...matlab कुछ अच्छा hi था par...kaise बताऊँ..

ध्रुव - लगता है वो भी यही है...

मैं - कोण है यहाँ....

ध्रुव - कोई नहीं बस खुद पे काबू रखना समझे...

मैं - हां वो तो मैं रखूँगा hi...par ऐसा क्यों बोलै..

निकिता ने एक बार पीछे मदद के dekha....main उससे बहुत पीछे रह गया था...

निकिता - ऐसे hi चले तो देर हो jaayegi...jaldi जल्दी चलो...

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट में देखते है सेना के साथ बुआ मास्टर रूपल दीदी और कविता मैडम की ladayi..aur एल्फ कंट्री में हमारा जानना
 
अपडेट - 35

अब तक

ये ट्रिप स्ट्रेंज प्लेनेट की कुछ बदल सी गयी thi...yaha आने पे पता चला की हममे दब को बचाना है बस उससे hi नहीं उसके पुरे राज्य को hi...Prof. सूरज भी यही the...aur वो hi थे जो दब के राज्य पे हमला करने वाली सीना के सीना नायक the....Master ने मुझे और निकिता को एक साथ एल्फ कंट्री जाने के लिए कह दिया wahi...Wo चारो खुद वह पे उस सेना को सँभालने वाली thi..Nikita मुझपे गुस्सा थी की क्यों मैंने उसको पावर्स दे di...aur वो यहाँ पे फंस गयी hai...par मैंने तो उसकी मदद करने के लिए ऐसा किया था और अब ye.....par ध्रव ने मुझे बताया की ये वापस से पहले जैसी हो सकती hai....thodi देर चलने पे मुझे कुछ अजीब सा लगा और उसपे ध्रुव ने कुछ तो कहा पर समझ नहीं सक्का मैं...

अब आगे

हम आगे बढ़ने lage...aur मेरी बेचैनी भी बढ़ती जा रही thi...par मैं चलता जा रहा था क्यूंकि ये जरुरी tha...mujhe वह पहुंचना hi tha....Nikita से बात कर नहीं सकता था क्यूंकि वो तो बस गुस्से में बड़बड़ाती हुई जा rahithi..to ध्रुव से hi बातें करते हुए आगे जा रहा था...

चलिए एक नज़र मास्टर ऑन टीम पे भी डालते hai....wo सब ठीक सूरज के सीना के पास चिप्पी हुई thi....abhi सेन्ना में भी कोई हलचल नहीं हो रही thi...wo सब इंतज़ार में the....sayad कोई सिग्नल था जिसका वो वेट कर रहे थे...

बुआ - रूपल मुझे पता नहीं था यहाँ ये सब होना hai...tum एक काम करो तुम ना यही पे रहना हम संभल लेंगे...

रूपल - बुआ क्या बोल रही हो aap...Mai...

मास्टर - Poonam...wo भी जानती है ladna...aur ये बात तुम्हे भी पेट hai..ab उसपे भरोषा रखो और हम जो करने आये है वो करते है समझे...

बुआ - हां par...Rupal तू थोड़ा ध्यान रखना समझी..

कविता - हां थोड़ा ध्यान रखना मन्ना तुम्हे लड़ना आता है पर फिर भी ये लोग बहुत खतरनाक है..

ये सब बातें कर रहे थे और रूपल दीदी को बहुत चिढ़ हो रही थी isse...Bua और कविता मैडम उनको बहुत काम आंक रहे the...sayad अभी बुआ ये भी भूल चुक्की थी की हमारे फॅमिली को ज्वाला के कबीले वालो से सुरक्षा मिलने वाली hai..Ab दीदी को गुस्सा आ रहा था तो वो बस उठी और बिन्ना देखे सुनने जाके उस सीना के सामने कड़ी हो gayi...waha पे सभी सैनिक पोसिशन्स में the..wo बस इंतज़ार कर रहे the..aur जैसे hi दीदी उनके सामने गयी वो सब चौंक gaye..au सबसे ज्यादा चौंके प्रोफ. सूरज....

प्रोफ. सूरज - Tum...Rupal तुम यहाँ क्या कर रही हो...

बुआ - रूपल पागल हो क्या...

प्रोफ. सूरज - पूनम तुम bhi....ye कोई फॅमिली पिकनिक है क्या तुम लोगो ka....aur यहाँ स्ट्रेंज वर्ल्ड में कैसे आना हुआ तुम सब ka..yaha तो...

कविता - मैडम हममे भी चलना chahiye...warna पतानहीं क्या हो जाएगा...

मास्टर - हां दिख रहा hai...maine कहा था तुम दोनों से वो कोई बच्ची नहीं है जो उसका ध्यान रखने के लिए बैठे थे तुम दोनों अब चलो..

मास्टर और कविता मैडम भी उनके सामने जाके खड़े हो गए..

प्रोफ. सूरज - नहीं ये फॅमिली पिकनिक तो नहीं hai...aur ye...yaad नहीं आ रहा देखा है कही इसको..

बुआ - ये हमारे स्कूल की चाणक्य....

सैनिक- सेना नायक ये वही औरत hai...jo हमारे पीछे लगी हुई थी..

Prof.Suraj - हां याद आया ये वही hai..par ये हमारे स्कूल की क्या hai...Poonam जी जरा बताओगी aap...wo क्या है ना तुम सब को मरने के बाद पता नहीं चल पायेगा ना...

मास्टर - वो तो देख लेंगे कोण मरता है और कोण बचता hai...sab तैयार हो ना...

सभी ने अपने अपने हथियार निकल लिए....

मास्टर के pass...ek स्टिक thi...ye स्टिक हमेशा से hi उनके पास hi रही hai...Wahi बुआ ने अपनी तलवार nikali...jisme ब्लू फ्लेम thi...aur एक सुनहरा हैंडल jispe...lomdi का मुँह बना हुआ tha....wahi..Kavita मैडम ने भला nikala...ye वही भला यथा जिसके बारे में प्रोफ. सूरज आज हममे बता रहे the...par इसमें पंख नहीं बल्कि 4 पंख लगे थे और 3 दांत लगे हुए the...kisi बड़े जानवर के नुकीले daant.....Rupal दीदी ने भी अपनी तलवार hi nikali...jo सिंपल सी thi...unki apni...ab वो कहा इन् तिण्णो की तरह एक्सपर्ट thi...jo उनको भी कोई खास तरह का हथियार मिलता ...वो कैसे मिलता है ये आगे पता चलेगा...

वही प्रोफ. सूरज ने एक कुल्हाड़ी जैसा हतियार निकला...2 सिर्रे वाली kulhadi..jo अलग अलग भी हो जाती thi..agar चलने वाला चाहे to...baaki सैनिक the..wo भी ऐसे hi नार्मल से हतियार लेके खड़े हो गए...

बुआ - रूपल थोड़ा बच के...

बस बुआ का ये कहना था और रूपल दीदी चिल्लाते हुए दौड़ गयी उन् लोगो की ओर....

प्रोफ सूरज ने भी अपने सीना की धनुष वालो को तीन चलने को bola....par...

बुआ - इसके पास एअर्थ एलिमेंट कहा से आया वो भी इतना powerful...iske पास तो वाटर एलिमेंट था...

कविता - देखो ये तो बहुत नजदीक पहुंच गयी...

हुआ ये की जब तीर दीदी की तरफ आ रहे थे तो उन्होंने अपने एअर्थ एलिमेंट की मदद se...waha पे पड़े बहुत से पत्थरों को उन् तीरों की ओर फेंक diya..naa सिर्फ पाथेर बल्कि जमीं के टुकड़े भी..

मास्टर - हम्म बात तो इसमें भी hai...tum दोनों क्या यहाँ प्रोग्राम देखने आयी ho...aage जाओ...

बुआ और कविता दोनों hi ये सुनने के आड़ आगे जाने lage..aur भी तीर आ रहे the..kuch को बुआ ने संभाला तो कुछ को कविता आदम ne...Bua के पास वाटर और फायर दोनों एलिमेंट the...saath में ये मैजिक ट्रिक्स जानती thi...jisse ये लोगो को िल्लुसिओं में फसा देती और भी बहुत कुछ करती thi...wahi कविता madam...waise तो ये एक हीलर thi....par इनके पास भी काम पावर्स नहीं thi....naa सिर्फ हील करना साथ hi ये दुसमन की बॉडी को बस देखने भर से इतना दर्द दे सकती थी की वो खुद को hi मार le...aur इनका हथियार वो अगल hi था...

बुआ और कविता मैडम बढ़ती जा रही थी वही रूपल दीदी अलग hi अपने में लगी हुई thi..talwar तो नार्मल थी दीदी ki...par उससे अब वो ना सिर्फ वो वाटर बल्कि एअर्थ एलिमेंट भी हैंडल कर रही थी...

अभी तक जो भी किया था इन् तिण्णो ने उसको हमला तो नहीं कह sakte..ye तिण्णो hi बस बचाओ किये जा रही thi...aur अभी तो बस तीर वालो को hi इशारा किया था पोर्फ, सूरज ने..

प्रोफ. सूरज - रुक jaao...aise तो सारे तीर hi ख़तम हो जाएंगे...

उनसे आगे वालो को इशारा kiya..jaha पे भला लिए लोग खड़े the...wo सब भी अपने अपने एलिमेंट का उसे करते हुए आगे आने lage...sabse आगे अभी रूपल दीदी hi थी तो सप्से पहल उन् सब की एक ग्रुप ने उनको hi ghera...wo सब भले से उनपे हमला करने लगे वही दीदी भी अपने एलिमेंट और तलवार बाज़ी के दम पे उनसे लड़ रही थी...

बुआ - कविता देख रूपल को पकड़ लिया...

कविता - यार मुझे लगता है वो संभल legi...aur उसमे हम उसकी बहुत हेल्प karenge...bas उसको गुस्सा दिलाना है...

ये दोनों आगे बढ़ते जा रहे थे और बातें भी किये जा रहे थे...

बुआ - batao....ye सेल आते hi जा रहे hai...waise मैंने नहीं सोचा था ये सूरज ऐसा निकलेगा...

कविता - मुझे तो पहले से शक tha...wo निकिता वाला ष्कसे नहीं देखा tha..humne तो उसको छुपा के रखा था फिर इसने कैसे बता दिया था दब और प्रतीक को की अब वो ठीक है बस बेहोश hai...main तो तब से डूबत कर रही थी...

बुआ - हां याद aaya...tunne बताया tha...accha अब ये बता इस रूपल की मदद कैसे करे...

कविता - वैसे hi जैसे अब तक करते आये hai,...gussa दिलाओ usko...Bhabhi को देखा है गुस्सा होने पे क्या कलारण्टी hai...ye तो बस सैनिक hai...aur ये भाभी की बेटी इनको कच्चा खा जायेगी...

बुआ - ये बात भाभी को बताने वाली हु main...(Zor से) रूपल बच्चू संभल ke...gir मत जानना...

रूपल दीदी -(गुस्से में ) Buaaaaaaaaaaaa...chup रहो...

कविता - बाप re...dekha isko...ye तो बम जैसी hai....dekho तो jarra...rukko इस बार main...(zor से) रूपल वो देख वो वह पे तुझे देख के है रहे hai...aur वो देख वो बोल रहा है किस बच्ची को लेके आ गए है ये...

इन् दोनों की बातों से रूपल दीदी को गुस्सा आता जा रहा था और गुस्सा होने पे उसकी स्पीड ना जाने कैसे पर बहुत बढ़ जा रही thi...jiskoi वजह से सैनिको को पता भी नहीं चल पा रहा था की कब उसके हाथ से उनका हतियार गिर्रा और कब उनके सरीर से उनका सर अलग हुआ...

सूरज - ये तिण्णो तो सब बर्बाद कर degi....mujhe अपने पत्ते खोलने होओगे....

सूरज ने पहले तो और सैनिको को आगे जाने को कहा और खुद होंडा पीछे चले गए जहा पे सैनिक ज्यादा the....usne अपने हथियार को अलग अलग किया और एक कुहाड़ी से 2 में बदल लिया और अपने आस पास खड़े कुछ लोगो को खुद hi मार दिया...

और फिर ऊपर आसमान की ओर देखने लगा...

जो सैनिक उसको देख पा रहे थे वो वह से भागने lage..ab खुद का hi सीना नायक अगर अपने सीना को मरने लगे तो और क्या करे बेचारे sainik...wo सब जानते थे की सूरज को मारना उनके बस की बात नहीं thi..to वो सब के सब वह से भागने lage.....jo बच सके वो तो बच के निकल गए par...saare nahi...aasaman अच्चानक से लाल सा हो gaya..aur वही पे एक काली बिजली kadki...jo सीधा उन् लाशो पे thi..jinko सूरज ने मर्रा tha....aur उसके बाद वह पे धुंध चा gaya..jis वजह सेसभी ृक्क gaye...Bua और कविता तब तक रूपल दीदी के पास चले gaye...thodi देर में वह से धुंध हत्ता तो सामने एक अजीब सा दानव tha,,,jo उन्ही बॉडीज के टुकड़ों से बना हुआ था देखने में इतना भाड़ा की देख के hi कमज़ोर दिल वालो को उलटी आ जाए....

रूपल - ये क्या है चींईईई...

बुआ और कवियता एक दूसरे की ओर देख रहे थे...

कविता - ये वो है...

बुआ - पर सीतरंगे वर्ल्ड में ये नहीं हो सकता...

कविता - पर ये हमारे सामने है....

रूपल - क्या है ye...chii..dekha भी नहीं जा रहा मुझसे ये...

बुआ - रूपल पीछे jao..isko हम दोनों dekhenge..tumne बहुत लड़ाई लड़ ली...

इस बार गुस्सा नहीं आया रूपल दीदी को वो सच में पीछे चली gayi...wahi बुआ और कविता मैडम दोनों तैयार हो गए...

बुआ- तुम इन् जैसो से लड़ी हो क्या...'

कविता - हां एक बार सामना हुआ tha...ta मैं डार्क वर्ल्ड के सफर पे thi....aur तुम...

बुआ - फोमोस mein...school की ओर से एक असाइनमेंट मिला tha...waqt पे किया नहीं तो पनिशमेंट दे diya....aur गलती से हममे से कुछ लोग एक वर्म होल से होते हुए वह पहुंच gaye...wahi पे मिला था ye...isse काम भाड़ा था वो..

यहाँ ये सब चल रहा था वही Prof.Suraj लगे पड़े the..khud के hi सैनिकों को मरने mein..aur जब लाशें इकठा होती तो वो आसमान की ओर देखते और उसके बाद काली बिजली उनपे गिरती और वो लाशें दानव बन जाती थी..

मास्टर - रूपल अब इससे लड़के दिखाओ...

रूपल - इनसे छी ये तो...

मास्टर - इनसे नहीं इनको बनाने वाले se...tumhara काम ये है की अब सूरज और ज्यादा दानव ना बना पाए..

इतना बोलने के बाद मास्टर वह से आगे बढ़ gayi..aur वो खुद भी अपने स्टिक के साथ 2 दानव के सामने कड़ी हो गयी...

वो दोनों hi उनकी ओर badhe...Master वैसे hi कड़ी rahi....jab दोनों के दोनों बहुत नजदीक आ गए तो उन्होंने अपना स्टिक ऊपर kiya...aur bas...phir पीछे मुईद gayi..uske बाद वो दोनों hi पटाखों की तरह फात gaye..har जगह खून hi खून tha...bas...

यहाँ पे ये लड़ाई चल रही थी वही निकिता और main....pahuch चुक्के थे एल्फ कौंरटय के सरहद pe...waha पे एक गेट tha...bas गेट hi लगा हुआ था जो अजीब tha..matlab कोई दीवार नहीं बस एक गेट खड़ा कर रखा hai...isse बड़ा मज़ाक और क्या होगा...

मैं - ये सिर्फ एक गेट क्यों खड़ा कर rakhaaaaaaaaaaaaa......

मैंने बोलते हुए स गेट के बगल से जाने जो खली जगह थी वह से आगे जाने की कोशिश की और मैनपाट नहीं kaise..par....aisa लगा jaise...bahut hi काम समय में मैंने बहुत hi ज्यादा सफर तय कर लिया ho..aur ऐसा हुआ भी hoga..kyunki मैं अब कही और खड़ा था और वह पे भी एक गेट tha...waha भी कुछ लोग the....aur m,ain बहुत ज्यादा चौंक गया tha..theek से खड़ा हुआ नहीं जा रहा था....

वही मेरी ऐसी हालत देख के वह पे खड़े कुछ लोग हसने lage....paar मुझे कुछ समझी नहीं आ रहा tha...ki ये चल क्या रहा है...

मैं वही पे जमीन पे बैठ गया tha....tabhi एक छोटी सी बच्ची aayi...lambe kaan...naak भी थोड़ी तो लम्बी थी hi...green aankhen..aur प्यारा सा chahra...haa थोड़ा सा गन्दा tha...mitti लगी हुई थी उसके चेहरे pe..wo मेरे पास आयी और उसने मुझे पन्नी diya...maine उसकी ओर dekha...aur देखता raha...jab मैंने पानी नहीं लिया तो उसने एक बार पीछे की ओर dekha....waha सायद उसकी माँ कड़ी thi..unki हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं लग रही thi..saathon में कुछ थैलियां thi...aur आँखें ऐसी जैसे बहुत रोई ho...Bacchi ने अपनी माँ की ओर देखा और फिर वह से जाने lagi...panni लेके...

मैंने पानी की बोतल उससे ले li...to वह के दरवाजे पे खड़े हुए पहरेदार ने मुझे देखा और अजीब सा मुँह बनाने laga...fir अपना काम करने लगा...

मैं - सुक्रिया...

सायद उस बच्ची को मेरी बात का मतलब समझ नहीं aaya..par मेरी आवाज निकलते hi उसके कान जो पहले थोड़े जुक्के हुए थे वो अच्चानक से खड़े हो gaye..aur आँखें बड़ी आश्चर्य se...aur वो वह से अपनी माँ के पास भाग गयी..

मेरी समझ में कुछ नहीं aaya...par पानी पन्ने के बाद कुछ कुछ सही लग रहा था मैं उठा और मैं भी इस बार दरवाजे के पास चला गया..

मैं - ध्रुव ये क्या था और निकिता कहा है...

ध्रुव - Ye...ye है एल्फ कंट्री की सुरक्षा के लिए मायावी deewar...yaha पे अंदर जानना हो तो बस और बस दरवाजे से hi जा सकते hai...aur कोई रास्ता नहीं hai..agar कोई दीवार से आने की कोशिश kare...to वो अंदर नहीं बहार चला जाता hai...jaise की tum...Nikita अब तक यहाँ नहीं आयी मतलब वो तुमसे वही milegi...wo अंदर चली गयी hogi...samajhdaar है वो..

मैंने देख वो लड़की अभी भी मुझे देख रही thi...aur जब मैंने उसको देखा तो वो अपनी माँ के पीछे चुप गयी...

मैंने देखा की वो दोनों सबसे अलग खड़े the...side mein...pata नहीं kyun...thodi देर ंबाद मेरा नंबर आया...

P1(ye वही था जो मुँह बना रहा था) - क्या काम है क्यों जानना है अंदर..

मैं - मुझे अपने दोस्त से मिलना है...

प1 - दोस्त तुझ जैसो के भी दोस्त होते है kya..naam बता...

मैं - मुझ जैसे से क्या मतलब है tumhara....DB नाम है उसका...

प1 - है है थोड़ी देर में महाराज को hi अपना दोस्त बता dena...jao वह खड़े हो jao...pata नहीं कहा कहा से आ जाते है...

मुझे भी उन् दोनों माँ बेटी के पास भेज दिया....

औरत - ये ऐसे नहीं जाने देंगे...

मैं - पर मेरा उनसे मिलना बहुत जरुरी hai..wo सच में दोस्त है मेरा...

औरत - नहीं जाने देते है ye...mujhe भी नाह जाने दे रहे है अपने भाई सी मिलने...

मैं - भाई....

बच्ची - मम्मी मम्मी चलो ना..

औरत - हां बीटा चलते hai...tum चाहो तो हमारे साथ आ jao...kuch देर बाद इनकी बदली hogi..jab नए पहरेदार आये तब उनको मेले में जाने के बारे में कहना वो तुम्हे जाने दे देंगे...

मैं - हम्म ठीक है पर ये मेरी बात क्यों नहीं मान रहे...

औरत ने बस एक फिक्की सी मुस्कान पास की और वह से जाने lagi...wo बच्ची भी उसके साथ जा रही थी मैं भी उनके पीछे चल diya...wo मुझे जंगल के पास लेके gayi....wahi पे एक छोटा सा गुफा जैसा बनना हुआ था जहा वो दोनों माँ बेटी चले गए...

मैं - ध्रुव अब क्या करना है...

ध्रुव - इंतज़ार और क्या,,,

वही दूसरी taraf...Nikita को सच में पता था इस देवर के बारे में तभी तो उसने मेरे जैसी गलती नहीं ki..aur सायद उसको लगा की मैं वह पहुंच hi जाऊंगा बस इसीलिए उसने ज्यादा कुछ नहीं kiya...wo बस अंदर चली गयी मेले वाली बात कह के..

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखते है मैं कैसे अंदर जाता hu..aur वह मास्टर एंड टीम के साथ क्या होता है साथ hi..Kya निकिता अकेले hi पहुंच पायेगी दब के pass...aur उसको सब बता पाएगी...
 
अपडेट - 36

अब तक

मास्टर और उनकी टीम लगी हुई थी सूरज की सीना को सँभालने mein.....aur देखने से तो ऐसा लग रहा था सब उनके काबू में hai....wahi दूसरी ओर मैं और निकिता गए थे एल्फ कंट्री के oor....hum वह पे एक गेट के पास pahuche...jaa मैं गलती से दीवार से होता हुआ दूसरे साइड पहुंच गया और वह मुझे एक औरत और एक बच्ची milli...Aurat अपने भाई से मिलना चाहती थी par...waha पे जो पहरेदार था वो उसको जाने नहीं दे रहा tha...aur जब मैंने उस पहरेदार को बताया की मैं दब का दोस्त हु और उससे मिलने आया hu...to मुझे भी साइड में कर दिया था usne....Uss औरत ने मुझे अपने साथचलने को कहा और मैं उसके साथ चला gaya...wahi निकिता जो जानती थी इन् सब दीवारों के बारे में वो एल्फ कंट्री में पहुंच गयी thi..aur वो वह दब तक पहुंचने के रस्ते के बारे में सोच रही थी..

अब आगे

चलिए पहले हम चलते है मास्टर एंड टीम के पास...

मास्टर ने वैसे तो उन् दो दानवों को पटाखे की तरह फ़ूड दिया tha...par सायद उनको ऐसा होने का कोई अंदाज़जा hi नहीं tha....wo दानव फत्ते और पुर्रा यहाँ वह बिखर gaye...par थोड़ी hi देर बाद वो दोनों वापस से इक्कठा होने लगे और एक बार फिर से खड़े हगो गए...

बुआ और कविता मैडम लगे हुए थे दो दानवों के साथ लड़ने mein....aur उनके सामने भी यही परेशानी thi....wo ख़तम, hi नहीं हो रहे the...agar कही चोट आये तो वो खुद से ठीक हो जाती और मवेस अलग से जान जाते थे ये दानव..

रूपल दीदी मास्टर के कहने पे प्रोफ सूरज के पीछे पद gayi...Prof सूरज खुद hi खुद के सेना के बन्दों को मारे जा रहा tha...sayad प्लान hi यही था unka...yaa कुछ aisa...jisko भी वो मारते वो marta...magar उसका sharir....dusre मरे हुए लोगो के साथ मिल के एक नया दानव बना deta....aur इन् दानवों की टूलि में इतना दाम तो था की ये हड़कंप मच्चा de....Abhi तक ना तो मास्टर से और ना hi बुआ या कविता मैडम से एक भी दानव ख़तम हुआ tha...aur ये सूरज भाई साहब लगे हुए थे नए दानव बनाने में....

रूपल दीदी उसको रोकने की कोशिश कर रही thi....wo जहा जाता वह वो भी जाती par...Suraj वह से भाग जाता और अपने लोगो को मार deta...fir वो दानव बन जाते....

रूपल दीद - ये तो हाथ hi नहीं आ रहा है....

उन्होंने यहाँ वह dekha...to एक बात बड़ी अजीब लगी unko...jin लोगो को उनलोगो ने मारा था उनकी बॉडीज वैसे hi पड़ी हुई thi....daanav बस वही बॉडीज बन रहे थे जिनको खुद प्रोफ. सूरज ने मर्रा ho....par ऐसा कैसे हो सकता है ये समझ में नहीं आया दीदी ko...par इतना वो समझ गयी अगर उन्होंने प्रोफ. से पहले बाकी लोगो को मार दिया तो वो दानव नहीं बन paayenge...Didi को यही करना सही लगा और वो निकल गयी बचे हुए सैनिको को मरने mein...Sainikon की किस्मत hi ख़राब थी यहाँ pe...arre कोई और लड़ाई होती तो दुस्मन के हाथों मरते पर yaha...yaha पे तो जिनके लिए लड़ने आये थे वही मारने में लगा हुआ tha...dusmano की तो बात hi ना करे तो अच्छा...

रूपल दीदी ने भी उन् लोगो को मारना सुरु कर diya...aur देखते hi देखते वह पे बस लाशें hi बची thi...aur एक सिपाहीओं का samuh...jiske दोनों साइड mein...Didi और प्रोफ. खड़े थे...

सिपाही 1 - इसके हतियार की वजह से दानव बन रहे ha...wo लेल.....

बस इतना hi बोल पाया था वो सिपाही की उसकी गर्दन उड़ा दी प्रोफ. ne...apne कुल्हाड़ी के एक वार se...par ये काफी tha....uske सब्द पहुंच गए थे waha...jaha पे जाना the...Master ने वो बात सुन ली thi....par वो अभी 3 दानवों से घिर्री हुई thi...jo मर्डर hi नहीं रहे थे....

मास्टर - रूपल उसकी kulhadi....usko जीतना होगा tumhe...wo मिल गयी तो ये सब ख़तम हो जाएंगे...

सूरज - ये जीतेगी इन् कुल्हाड़ियों ko...iske बॉस की नहीं है मुझे हां पन्ना... इतना बोल के वो हसने लगा...

रूपल दीदी को गुस्सा आया और वो तलवार लेके बढ़ गयी प्रोफ. सूरज की oor...par वो कोई आम सैनिक तो थे nahi....wo भी मैजिक स्कूल के एक प्रोफ. थे.... दीदी अपने तलवार से हालमा करती ुर प्रोफ. तो बस उनसे खेल रहे the...sayad hi उन्होंने अपनी कुल्हाड़ी का उसे किया एक भी baar....wo bas...apne बॉडी मूवमेंट्स से hi रूपल दीदी को थका रहे the...Rupal दीदी वार पे वार किये जा रही थी पर एक भी वार प्रोफ. सूरज को नहीं लगता था...

वही दूसरी ओर मैं.....

मैं अभी उस औरत और बच्ची के साथ उनके गुफा के बहार बैठा tha...dekhne से hi लग रहा था की इन् दोनों की हालत बहुत ख़राब है...

मैं - आप यहाँ रहती hai...apni बच्ची के साथ..

औरत - हां वह से निकले के बाद और कोई जगह मिली hi nahi....ye एक भालू की गुफा thi...maine उसको मार दिया और यहाँ रहने लगी...

मैं - भालू को मार diya....kaise..

औरत - भूख se....bhukh लगी थी मेरी बच्ची ko....agar उस भालू को ना मार पाती तो अपनी बच्ची ko....bas यही दिम्माग में था और सामने वो bhalu...aur मैंने उसको मार दिया...

मैं - पर आप यहाँ क्यों रहती है akele...mera मतलब...

औरत - इसके पिता के मरने के baad...humko कबीले से निकल diya...Main बहार की थी naa....aur जब मैं अपने घर आने को hui...taaki इसका ख्याल रख सकू to.....to ये लोग मुझे जाने नहीं dete...maine कितनी बार कहा है की मेरे भैया को खबर पंहुचा दो मेरे बारे mein....wo भी नहीं करते ye....mere भैया वह की सीना में hai...agar उनको पता होता तो जरूर मुझे अंदर बुल्ला लेते par...ye लोग खबर hi नहीं pahuchate...main 3 महीनो से यही hu...iss जंगल में अपनी बेटी के saath...roj वह पे गेट के पास जाती hu...iunn लोगो से विनती करती हु पर वो नहीं जाने देते मुझे...

ये सब सुन्न के मुझे भी बुर्रा लगा...

मैं - आप चिंता मत कीजिये main...ander जाके आपके भैया को आपके बारे में बता dunga...aap मुझे बताइये उनतक कैसे पहुंचना है...

औरत- उनका नाम लीमो hai...wo तुम्हे हेडक्वाटर में milenge...agar वो नहीं मिले तो वह पे वो कहा है इसका पता तो चल hi jaayega...tu उन्हें मेरे बारे में बताना..

मैं - हम्म ठीक है...

हम बातें करते rahe..thodi देर बाद बेल्स बजने की आवाज आयी...

औरत - लगता है शिफ्ट बदलने का वक़्त हो गया hai...humme गेट के पास चलना chahiye....aur हां इस बार राज कुमार के दोस्त हो ऐसा ात कहना वर्ण इस बार भी जाने नहीं देंगे...

मैं - पर मैं सच में दोस्त हु uska...hum एक hi जगह पढ़ते है...

औरत - पता nahi...agar दोस्त है भी तब भी ऐसा बिलकुल मत kahna....inn पहरेदारों को आदेश मिला हुआ है की जो भी खुद को राज परिवार के सदस्यों का दोस्त या जान्ने वाला बता के अंदर आने की कोशिश करे उन्हें नहीं आने दिया जाए खस्स्स कर खास दिंनो pe....aur आज तो खास दिन hi hai...aaj पूजा का दिन hai...tumhe अंदर जाना हो तो सबसे अच्छा है पूजा देखने आये है बोल do...wo तुम्हे एक पास देंगे और तुम अंदर जा सकते ho....par हां वो पास कोई आम पास नहीं hoga..usse वो तुमपे नज़र rakhenge...tum जहा जहा जाओगे उनको पता चल jaayega...aur अगर तुम राज महल के अस्स पास भी दिखे तो तुम्हे बहार कर दिया जाएगा...

मैं - राज महहल के आस पास क्यों नहीं जानना है ??

औरत - तुम कौन हो जो ये सब नहीं jaante...arre आज के दिन वो क्रोनेड एल्फ परिवार वाले सबसे कमजोर होते hai...issiliye तो उनके पास किसी को जाने नहीं दिया jaata...yahi तो वजह है की तुम अभी यहाँ हो...

मैं - कमजोर होते है का क्या मतलब...

औरत - कमजोर का मतलब उनकी शक्तियां उनके पास नहीं hoti...jab तक पूजा ख़तम ना हो जाए...

मैं (मान में) - सायद इसी वजह से आज के दिन प्रोफ. हमला करने वाले hai...wo जानते होंगे ये सब...

औरत- एक किस्सा भी तो है उनके साथ ऐसा होने के karan...wo कभी और मिलोगे तो सुन्ना dungi..abhi chalo...aur हां नाम याद रखना Leemo...Bhaiya से कहना की मैं यहाँ hu...iss गुफा में...

उस औरत ने अपना नाम लिमि बताया और उसी के साथ में गेट तक पंहुचा और फिर वह से इस बार पूजा के बारे में बोल के मैं एल्फ कौंरटय में पहुंच gaya....ye जगह काफी अच्छी थी देखने mein....building बननी हुई thi...par लकड़ियों ki....sadke भी सही the...Main इन्ही सब को देख रहा tha....fir याद आया की यहाँ घूमने नहीं आया hu....wo तो कभी और भी कर लूंगा अभी यहाँ पे जो करने आया हु वो करता hu...Maine आस पास पूछना सुरु क्या वह के हेडक्वाटर के बारे mein...ye वो जगह थी जहा पे सैनिक रहा करते the...saat में जेल भी यही पे था जहा पे कैदियों को रखा जाता tha...Jyada पूछना नहीं pada...mujhe तुरंत hi पता मिल गया उस जगह ka...saath में एक सवारी भी जिसपे बैठ के में वह के लिए निकल gaya....ye जो सवारी थी वो कैदियों को लेके जाने वाली गाडी thi...aur मैं अभी इसी पे बैठ के हेडक्वाटर की ओर जा रहा tha...aisa करने के लिए मुझे बस लीमो का नाम बताना padda...Maine कहा की मैं लीमो का दोस्त hu...dur से आया hu..ussi से milne..aur पूजा देखने ko...pahle तो मुझसे मेरा पास माँगा gaya...aur मैंने भी उसको दिखा diya..jisme साफ़ साफ़ लिखा था की पूजा देखने आया hu...aur इस गाडी में बैठा हुआ एक सैनिक भी लीमो को जानता था तो उसी ने लिफ्ट dedu-i...aur मैं भी चल दिया...

पीछे कुछ कैदी the....jo सायद अभी hi पकडे गए the...aur उनको लेके अब जेल जाया जा रहा था...

सैनिक - नाम क्या बताया तुमने अपना...

मैं - Preeko...preeko नाम है मेरा...

प्रीको... ये नाम उस औरत ने hi कहा था बोलने ko...kyunki वह पे ऐसे hi नाम कॉमन the...agar असली नाम बोलता तो सायद यहाँ तक नहीं पहुंच पता...

सैनिक - अच्छा...

"छोड़ो mujhe...Prateek तुम हो kya...bahar निकालो mujhe....Main दब की दोस्त हु.."

ये आवाज मुझे पीछे से aayi..aur ये आवाज निकिता की थी..

Main(maan में)- ये यहाँ कैसे पहुंच गयी..

सैनिक - अरे चुप कराओ isko...ye लोग भी ना जाने यहाँ पे क्या सोच के आ जाते hai...manna आज राज परिवार कमजोर होता है तो क्या कोई भी ऐसे hi पहुंच जाएगा untak...arre हम है अपना काम करने के lliye...pata है दोस्त आज ये तीसरी है जो खुद को राज परिवार वालो की जान्ने वाली बता रही hai...par पागल है ye...isne नाम भी लिया तो राज कुमार ka..arre वो तो उस नीले प्लेनेट पे पढ़ते है और वह से यहाँ आने वाले कुछ hi लोग है bas...aur ये उन् सब में से नहीं hai...koi और नाम लेना चाहिए था इसको..

हम थोड़ी देर में हेडक्वाटर में पहुंच गए जहा मुझे गाडी से उतरने को kaha...aur फिर उस गाडी से सभी कैदियों को निकला जाने laga...aur उन्ही में निकिता भी nikli...usne मुझे देखा पर मैंने उसको चुप रहने का इषारा kiya..aur वो चुप hi रही...

सैनिक - चलो दोस्त तुम उनके साथ चले jao...wo तुम्हे लीमो तक पंहुचा देंगे मैं इन् कैदियों को जेल में दाल के आता हु...

मैं - पर इनको तो निकल दिया जाता है naa...naya कानून आया है क्या koi...wo मैंने सुन्ना था बस..

सैनिक - अरे हां दोस्त पता नहीं kyun..inn लोगो को जेल में रखना इनको बस बहार निकल देने वाला क़ानून hi सही tha...par पता नहीं क्या hua...aur हमारे सीना प्रमुख ने ऐसे आदेश दे दिए....

मैं - सीना प्रमुख वही है ना महाराज के भतीजे..

सैनिक - हां वही hai...wo भी आज वही महल में hi hai...ab आदेश है तो पालन तो करना hi होगा ना dost..chalo मैं चलता hu..tum उनके साथ चले जाओ वो तुम्हे पंहुचा देंगे तुम्हारे दोस्त के पास...

उसने वापस से दो लोगो की ओर इशारा kiya..aur मैं उन् लोगो की तरफ बढ़ गया...

मैं - लीमो से मिलना है...

उनमे से एक ने मुझे सीढ़ी दिखाई और फ्लोर नंबर बताया...

मैं भी सीढ़ियों से होते हुए बताये गए फ्लोर पे पहुंच गया पर यहाँ अब उसको पहचानू कैसे इसमें दिक्कत thi...iss फ्लोर पे सायद कैंटीन tha...Main भी ांफडर चला gaya...aur एक टेबल पे बैठे कुछ लोगो से लीमो के बारे में pucha...unhone एक टेबल की ओर इशारा kiya...waha पे एक पहलवान टाइप बाँदा बैठा हुआ tha...akele...aur गुस्से में लग रहा था

जिनसे पूछा था उनमे से एक ने कहा - गुस्से में है वो तो थोड़ा संभल के...

मैं भी धीरे धीरे उस टेबल की ओर चला gaya...aur वह पे जाके बैठ gaya....mera बैठना था और उसका मुझे घूरना शुरू हो gaya...aur इतनी बुरी तरह से घीर रहा था ये मुझे की एक बार तो ऐसा लगा जैसे अभी सामने padi...sauce के साथ कच्चा खा जाएगा मुझे...

मैं - लिमि ने भेजा है mujhe...aapko कुछ बताना है...

अभी जो नज़रे मुझे खाने को हो रही थी वो अच्चानक से hi बादक gayi....aur लीमो ने एक बार तो अपने टेबल के आस पास dekha....ki कोई हममे सुन्न तो नहीं रहा hai..uske बाद भी सायद उसको याक्किन नहीं hua..to उसने मुझे अपने पीछे आने को kaha...Main भी उसके पीछे हो liya...wo मुझे सीढ़ियों के पास लेके gaya...aur तब मुझसे पूछा लिमि के बारे mein....Maine भी उसको सब बता दिया की वो 3 महीनो से कैसे उस गुफा में रह रही है अपनी बेटी के saath...wo यहाँ आयी थी उससे मिलने पर उसको अंदर नहीं आने diya...naa hi उसकी कोई खबर पहुचायी गयी तुम tak..aur बाकी की साड़ी बातें...

लीमो की आँखें भर आयी मेरी बातें सुन ke....wo तुरंत hi वह से निकलने को हुआ अपनी बहन को अंदर लेके आने के लिए...

मैं - लीमो rukko...sayad अभी तुम्हारी बहन से भी बड़ी दिक्कत आने वाली है इस जगह pe....main तुम्हे जो बताने वाला हु उसको ध्यान से सुनने और मुझे अब तुम्हारी मदद चाहिए इन् सब को रोकने के लिए....

लीमो - क्या hua..kya मुसीबत आने वाली hai....aur मैं क्या मदद करू...

मैंने उसको सब कुछ bataya...ki कैसे एक आर्मी कड़ी हुई है बहार जो किसी के इशारे के इंतजार में hai...ishara मिलते hi वो अंदर आ जाएंगे और fir...par ये नहीं बताया की इन् सब के पीछे महाराज के भतीजे मतलब की एल्फ सौंरय के सीना के सीना प्रमुख का हाथ hai....ek तरह से इसको मिलिट्री कूपे कहा जा सकता tha...Maine उसको उतना hi बताया जितना वो पाछा sake....aur मेरा काम बन gaya...usne भी कुछ अफवाहें सुन्न राखी thi...afwaahein की आज के दिन कुछ बड़ा होने वाला है और नया सूरज आने वाला है जो सभी पुराने चीज़ज़ों को जल्ला dega...aisi ऐसी बातें चल रही थी वह पे...

लीमो - तुम मेरे साथ chalo...agar तुम सही बोल रहे हो तो अब बस वही लोग है जो हमारी मदद कर सकते है और राज परिवार को बचा सकते है...

मैं - कोण log..kaha जाना है humme...aur रूक्को मेरी एक साथी जेल में बंद है यहाँ मुझे उसे भी निकलना है...

लीमो - क्या वो बहुत जरुरी है क्यूंकि मुझे लगता है वक़्त काफी काम है हमारे पास....

मैं - हां वो जरुरी hai....wo हमारी मदद कर सकती है...

लीमो ने एक कागज़ लिया और उसपे कुछ likha...aur मुझे दे दिया....

लीमो ये लो और जेल में jao..waha पे तुम्हे ये कागज़ दिखाना है वो तुम्हे इस बन्दे तक पंहुचा denge,...usko मेरा नाम बताना वो तुम्हारा काम कर dega...tab तक में ये बात उन् लोगो को बता के आता hu....aur सुन्निओं हम यही milenge...kuch देर बाद...

मैं कुछ बोलता उससे पहले वो निकल गया वह से...

वही दूसरी ओर..

रूपल दीदी लगी हुई थी प्रफ. सूरज के साथ पर वो तो बस खेल रहे थे उनके saath....wahi बुआ और कविता मैडम दोनों hi अब 2 2 दानव संभल रहे थे और मास्टर 3 को...

अभी वो सब ये कर hi रहे थे की वह पे घंटियों की आवाज aayi....(ye दूसरी घंटियां thi...wo वाली नहीं जनसे शिफ्ट चेंज होने का पता चलता है..) आवाज आते hi प्रोफ सूरज के कान खड़े हो गए....

प्रोफ. सूरज - बहुत खेल लिया तुम्हारे saath.....waise तो प्लान ख़राब कर hi दिया है तुम लोगो ने par..abhi भी मौका है हमारे pass...aur मैं इसको गवा नहीं सकता तो अब ये खेल ख़तम करते hai...itna बोल के उन्होंने अपनी कुल्हाड़ी से एकक वार kiya...aur वो वार रूपल दीदी ने शील्ड से रोक liya....par वार दमदार था जिस वजह से उनका शिर्ल्ड hi टूट गया वो भी 2 टुकड़ों mein...Ab दीदी के पास केवल अपनी तलवार थी और अपने ेलेमेंटल powers...Prof वापस से हमला करने hi वाले थे की अचानक से वह पे बहुत ज्यादा आवाजें आने lagi...chidiyin की aawajein...cheel की aawajein...aur देखते hi देखते वो पूरा का पूरा इलाका hi चीलों से भर gaya....wo सभी ज्वाला के कबीले वाले the....wo सारे यहाँ आये हुए the...aur उनकी लीडर बिजली बन के आयी थी....

उन् आवाजों की वजह से कुछ देर के लिए प्रोफ. रुक गए...

बुआ - ये तो उसी के जैसे है...

मास्टर ने भी ऊपर की ओर dekha...aur बस देखती रह gayi....sayad उनको भी पता नहीं था इन् सब के बारे में...

उन् चिल्लों ने उस पुररे इलाके को hi घेर लिया tha....waha पे उनकी वजह से अँधेरा सा हो गया tha....aur फिर Bijli...apni hi स्पीड में utri..theek रूपल दीदी के saamne...uske पीछे hi अभी प्रोफ. सूरज खड़े थे अपने हाथों में वो कुल्हाड़ी लिए hue...Bijli ने एक बार रूपल दीदी की आँखों में dekha...uske बाद वो पीछे को muddi....dhire dhire...aur उसको नज़र एकताक प्रोफ. सूरज को hi देखे जा रही thi...Prof. को समझ hi नहीं आ रहा था ये है kya...ek तो इतना बड़ा साइज ऊपर से ापंखों में आग लगी hui...saath में बिजलियाँ अलग से तैर रही थी उस आग में...

प्रोफ ने वार करने का सोचा और किया भी पर यही सायद उनकी गलती thi....abhi तक बिजली समझने में लगी हुई थी की बचाना किस्से है रूपल दीदी ko...waha पे कोई था नहीं जो उनपे हमला कर रहा hai...par जब सूरज को वार करते देखा तो वो समझ गयी और उसके वार करने के दौरान hi एक जोर दार चींख maari..aawaj इतनी तीज की सामने खड़े रहने वाले के कान क्या आँखों से भी खून निकल aaye...aur ऐसा hi hua....Prof. का हाथ वही का वही रह gaya...wo हिल भी नहीं पा रहे the....unki आँखों से खून निकल रहा tha...Bijli ऐसा करने के बाद पीछे ह gayi...wahi बाकी के जो चील थे उनमे से कुछ तो बैठ गए और कुछ उन् दानवों को मरने में लग gaye...par बस वही दानव जिनसे बुआ लड़ रही thi....baaki के दानवों से जैसे इनको मतलब hi नहीं था kuch...Par ये दानव तो मर hi नहीं रहे the..aur इसी liye...ye चील भी कुछ काम नहीं the...unme से कुछ ने मिल के पोर्टल खोला और सीधा दानव को उठा के ज्वालामुखी में फींक aaye...jaha पे वो बहार नहीं आ पाए और जल gaye...Bua ने पहले तरय कर रखा था अपने फायर एलिमेंट se...par कुछ भी नहीं हुआ tha...daanav की बॉडी वापस से जुड़ जा रही thi...sayad वो हीट काफी नहीं था जितन्नी हीट ज्वालामुखी से मिली उनको...

जब ऐसा हुआ उसके बाद तो चीलों ने दूसरे दानव के साथ भी वही kiya..aur फिर सारे बैठ gaye...bas इतना hi करना था unko...unke हिसाब से अब बुआ और रूपल दीदी दोनों सेफ the...Rupal दीदी इस तरह से क्यूंकि अभी प्रोफ. हिल भी नहीं पा रहे थे...

बुआ को लगा सायद ये चील इनकी बात मानेंगे तो उन्होंने उनसे कहा की बाकी सब को भी ख़तम karo...par किसी के कण में जू भी ना रेंगी सारे चील वैसे के वैसे hi बैठे रहे...

बुआ ने वापस से कहा पर कोई कुछ सुन hi नहीं रहा tha...fir बुआ खुद चल दी कविता मैडम के पास उनकी मदद करने ko...aur जैसे hi वो उनतक पहुंची...2 चील उड़ते हुए आये और वह पे खड़े दानव को उठा ले gaye...aur उनके पीछे से दो और चील aaye...aur दूसरे वाले को भी...

कविता - वाह ये तो कम्मल hai...waise ये है क्या...

बुआ - पता नहीं यार ये है क्या पर अभी मदद कर रहे hai...tu रूपल के पास जा मैं मैडम को फ्री कराती हु...

कविता - पर कैसे...

बुआ - देखा नहीं मैं तेरे पास आयी तो इन् लोगो ने तेरे पास वाले दानवों को ख़तम कर diya...ab वह जाउंगी तो उनको भी ख़तम कर देंगे...

इतना बोलने के बाद वो मास्टर की ओर चली गयी वही कविता मैडम रूपल दीदी के paas...wo वह गयी तो बिजली उनको देखने lagi...aur वो तो उनपे भी चीखने वाली thi...wo तो रूपल दीदी ने नहीं बोलै तो वो रुक gayi...ajeeb था बुआ मदद मांगे जा रही थी तब तो नहीं सुन्नी और यहाँ पे ृउकने बोलै तो सुन liya...chalo अच्छा है..

कविता - रूपल तू ठीक है ना और ये...

रूपल - मैं ठीक हु...

इतना बोलने के बाद रूपल दीदी आगे badhi...Prof. की oor...Prof. अभी भी बस खड़े the...unke हाथ में उनकी वो कुल्हाड़ियाँ थी जो अब हिल नहीं रही thi...Rupal दीदी उनके पास गयी और अपनी तलवार नीचे की और एक ग़ुस्सा मारा...

:सिघ: मार देना था सीधा तलवार से क्यों बेकार में ये सब करना...

रूपल दीदी के ग़ुस्सा मरने से पता नहीं क्या हुआ पर प्रोफ. एक बार फिर से हिलने लगे the...aur ऐसा देखते hi बिजली ने वापस से एक सीख maari...aur इस बार प्रोफ. के हाथ से उनकी कुल्हाड़ियाँ निच्चे गिर गयी और वो अपने जगह से बहुत ज्यादा पीछे जाके गिर्री...

कविता मैडम तो देखती रह gayi...Rupal दीदी को अपने पंख से साइड में कर दिया था बिजली ने ऐसा करने से pahle...Rupal दीदी भी एक दम हैरान थी ये देख ke...wahi बिजली की नज़र निच्चे पड़े हुए कुल्हाड़ी पे gaya...usne देखा की उससे कुछ कला कला सा निकल रहा hai...aur ये कला जो भी था उसको पसंद नहीं aaya...usne उसकी ओर देखा और अपने मुँह से आग और बिजली का एक गोला उसके ऊपर दे marra..jiske बाद वह पे बस धुवा धुवा hi tha...dhuwa हटा और कुल्हाड़ी वही पे thi..wo बिलकुल वैसी hi लग रही thi...Bijli ने एक बार आस पास dekha...sab सही लग रहा था उसने अब वह पे ना तो कोई दानव बच्चा था और ना hi कुछ और जिनसे अभी रूपल दीदी या बुआ को कोई खतरा ho...Usne एक ोर्टल खोला बड़ा sa...aur उससे होते हुए चली गयी अपने कबीले में मतलब ज्वाला के कबीले mein....Yaha पे सभी के सभी यही सोचने में लगे हुए थे की आखिर हुआ क्या यहाँ pe...Master तक को समझ नहीं आ रहा था की ये जीव थे kya...wahi बुआ को पता था की ये भी उन्ही में से एक है जो उस दिन आया था हमारे फॅमिली ट्री के पास...

वो कुल्हाड़ी वही पे thi...baaki सभी के पास अपने पाने स्पेशल हथियार the...bas एक रूपल दीदी के पास hi नहीं tha..unka शील्ड टूट चूका था और उनकी तलवार की भी हालत बहुत अच्छी नहीं लग रही थी...

रूपल दीदी ने उन् कुल्हाड़ियों की ओर dekha....wo उनको चमकती हुई दिखी और उन्होंने उनको उठा liya...kulhadi उठाने के बाद hi उनको कुछ झटके लगे... बुआ उनकी ओर जाने को हुई तो मास्टर ने उनको रोक diya...ye कह के की वो इसको सह लेगी तो अच्छा hoga...aur ऐसा hi hua...kuch देर बाद झटके ख़तम हो gaye...aur रूपल दीदी के गर्दन के पास 2 निशान उभर aate...jab बुआ ने उनको अच्छे से देखा श वो कुल्हाड़ी की तरह दिख रहे the...matlab साफ़ tha...kulhadi ने उनको अपना मालिक चुन लिया hai...par अभी यहाँ पे कोई नहीं जानता था की बिजली की वजह से कुछ चंगेस आये है इन् कुल्हाड़ियों mein....aur वो चंगेस अच्छे है या बुर्रे ये तो आगे hi पता चलेगा...

ये सब हुआ तब जाके कविता मैडम को याद आया की यहाँ पे अभी प्रोफ. सूरज को भी होना चाहिए tha....unhone उस ओर देखा जहा बिजली ने उनको फेंका tha...par वो वह पे नहीं the...waha पे प्रोफ. सूरज नहीं the...naa hi उनकी बॉडी अगर वो मार गए होते तो... मतलब साफ़ था वो वह से निकल गए थे...

कविता मैडम ने ये बात सबको बताई....

बुआ - पर अब इससे क्या ही फर्क padega...uske पास कोई सीना तो है नहीं वो कैसे कुछ कर paayega...mujhe तो लगता है बच्चू को भी बुल्ला के निकल लेते है यहाँ से...

मास्टर - पूनम आज के दिन एक छोटा सा कीड़ा भी एल्फ किंग को मार सकता है और ये सूरज तो फिर भी सूरज है मुझे लगता है वह पे भी कोई तो होगा जो उसकी मदद कर रहा है हममे जानना चाहिए वह और देखना चाहिए की क्या होता है..

सबने यही सही समझा और सभी के सभी निकल लिए वह जाने के लिए...

वही दिस्री ओर मैं अभी जेल में था और मेरे सामने एक आदमी खड़ा था जो मेरा दिया हुआ कागज़ देखे जा रहा tha....wo कभी कागज़ देखता तो कभी mujhe....sayad उसको याक्किन hi नहीं हो रहा था की ये कागज़ मेरे पास था....

वो - बस एक कैदी को निकलने के लिए लाये हो ये...

मैं - हां मैं कब से यही बात तो बोले जा रहा hu...ab जल्दी करो...

उसने मेरी बात सुन्नी एक बार और कागज़ को dekha...aur उसके बाद मुझे dekha...aur कुछ बड़बड़ाने लगा....

मैं - क्या हुआ...

वो - होना क्या है चलो ab...tumhari दोस्त को बहार निकलना hai...accha चलो एक और मौका देता hu...koi और काम भी बता दो...

मैं - क्या...

वो - देखो ये जो कागज़ है ये बहुत hi ज्यादा खास है और इससे किसी कैदी को बहार निकलने जैसा काम लिया जाए ये मुझे अच्छा नहीं लग रहा hai...tum कहो तो मैं कुछ पैसे दे du..yaa और भी कोई मदद...

मैं - बड़े अजीब हो yaar....ye क्या बात hui.....accha अभी के लिए बस मेरी दोस्त को निकल दो उसके बाद का मैं बाद में बताता हु..

वो - हां अब सही है....

वो मुझे अपने पीछे आने को बोलै और एक और लेके गया जहा पे लड़कियों को बंद करके रखा गया tha....main गया वह और मुझे उन् सभी को दिखा के पूछा कोण है तुम्हारी दोस्त...

मैंने हर ओर देखा कही पे निकिता दिख hi नहीं रही थी..

मैंने उसको pukara,...to वो एक कोने में बैठी हुई boli....yaha हु मैं...

मैंने उसकी ओर इशारा किया और उसको निकलने को कहा....

जिसके साथ में यहाँ आया था उसने उसको निकल diya...Nikita बहार आयी और उसने एक बार पीछे की ओर dekha....jaise उन् सब को खा जायेगी..

मैं - क्या हुआ ऐसे क्यों देख रही हो इनको....

निकिता - किसी को नहीं chodungi..sabhi को सबक sikhaungi...yaad रखना तू सब...

वो गुस्से में जेल के अंदर वाली सभी लोगो को ऐसा कह रही thi...pata नहीं इतनी देर में क्या हो गया जो मैडम इतना गुस्सा हुई पड़ीं है...

हम्म तिण्णो फिर वह से बहार निकले...

मैं - निकिता तुम ठीक हो ना...

निकिता - ठीक तुमको पता नहीं ये लोग कैसे hai....aur कौन hai...mera बास चले तो इन् सब को मार दू...

मैं अरे आराम से हुआ क्या वो बताओ पहले....

निकिता - वो chodo....humme जल्दी से राज महल जानना hoga...waha हममे बताना होगा की यहाँ एक बहुत बड़ी साज़िश होने वाली है.....

आदमी - Saazish..kya मतलब है इसका...

निकिता - ये कोण hai...isko कहा से उठा लाये...

मैं - इसने hi तुम्हे जेल से निकला hai....aur किस शाजिश की बात कर रही हो तुम....

निकिता - राज महल पे कब्ज़ा करने की saazish..humme जल्दी जाना होगा waha...warna देर हो जायेगी....

आदमी - नहीं राज महल में नहीं जा सकते तुम लोग...

मैं - वो कागज़ याद है उसके बदले ये काम..

आदमी - नहीं ऐसा कुछ नहीं होने वाला hai..main मेरे राजा और उनके परिवार को कभी खतरे में नहीं डालूंगा....

निकिता - अरे पागल वो है खतरे mein...aur ये जो इतने वक़्त से जेल भर रहे हो ना तुम sab...ye सारे सैनिक है दुसमन ke....jo भेष बदल के आये hai....aur कुछ देर बाद यही तुम सबको मारने वाले है....

मैं - क्या...

आदमी- तुम्हारी दोस्त तो पागल है लगता hai...isko जेल में hi दाल देना चाहिए...`

निकिता - मैं सच कह रही hu....Main जब जेल में thi...to उन् लोगो ने मुझे अपनी hi ग्रुप का समझ लिया और ये सब बताया hai...humme जल्दी hi कुछ करना होगा...

मैं - तुम जानती हो वो कौन the...kya तुम उन्हें पहचान लोगी...

निकिता - मैं उनके हेड को जानती hu...usko तुरंत पहचान lungi....jab वो आर्डर देने वाला था तभी उसके साथी सब शुरू करने वाले the...mujhe लगता है उसको मरने से काम रुक जाएगा...

मैं - हम्म ये भी सही है...

मैंने आदमी की ओर dekha...aur पूछा - क्या ये काम हो सकता hai..iss कागज़ के badle...usne थोड़ा socha...aur उसके बाद मुस्कुराता हुआ हां बोलै...

निकिता - ये इतना खुश क्यों हो रहा है और कोण ा पेपर....

मैं - बाद में बताता hu...tum अब ये बताओ लीडर कोण था...

निकिता हममे लीडर के पास लेके gayi....waha उस आदमी के हमारे साथ होने की वजह से हममे कोई परेशानी नहीं हो रही थी जेल mein....Nikita ने उसको लीडर के बारे में बताया और उसको दिखाया की वही है leader...Uss आदमी ने अपने कुछ सिपाही भेज के लीडर को बहार निकला और अपने पास बुल्ला liya....hum भी वही the....Leader ने निकिता को देखा और गद्दार कहा उससे...

उसका ऐसा कहना था और आदमी ने अपनी खंजर उसके गर्दन पे चला di..jisse उसकी गर्दन उसके सार से अलग हो गयी और वो निच्चे जम्मीं पे गिर गया...

मैं - हममे चलना चाहिए लीमो इंतज़ार कर रहा होगा

निकिता - अब ये लीमो कोण है...

आदमी - लीमो उन्होंने दिया था वो kagaz.....pahle क्यों नहीं बताया....

मैं - बताता तो क्या हो jaata...kya माहे में जाने देते तुम...

आदमी - नहीं पर मैं आपके लिए और भी काम कर सकता tha...khair छोड़िये...

निकिता - अरे मुझे तो बताओ ये लीमो कौन है....

मैं - लीमो लिमि का भाई है...

आदमी - तुम लिमि को भी जानते ho...pahle बताना था ना..

मैं - उससे क्या हो jatta...pahle बताना था naa...kya करना था उससे....

निकिता - ये लिमि कोण है अब...

मैं -चुप raho...leemo कोण है लिमि कोण hai..shant रहो...

लीमो - मैं हु लीमो और लिमि मेरी बहन hai...aur सुनने एक बार और अगर मेरी बहन के बारे में ऐसा बोलै तो मैं भूल जाऊंगा की तुम कोण हो...

मैं -अरे यार मैंने hi उसके बारे में बताया था...

निकिता - ये लीमो hai...waah बॉडी तो अच्छी है इसकी...

मैं - लीमो हममे कागता है हमने सब संभल लिया है हमने लीडर को मार दिया है...

लीमो - कोण लीडर...

मैंने उसको सब bataya...uske साथ कुछ और भी लोग the...jo मेरी बातें सुन रहे the....aur मेरी बातें ख़तम होने पे उन् सभी का चेहरा hi उत्तर गया...

लीमो - मुझे लगता है जो खबर मिली है वो सही hai...aur अब हममे इस्पे कड़े कदम उठाने hi होंगे...

उसके साथ जो आये थे उन् सभी ने कुछ देर आपस में बात ki....fir उनमे से एक बोलै...

"महाराज के सामने ये सब साबित करने के लिए हममे कुछ ठोस chahiye..jisse उनको याक्किन हो जाए वर्ण हममे छोड़ेंगे नहीं वो......"

मैं - क्या बात है...

लीमो - हममे लग रहा है ये सब हमारे सीना नायक का किया धरा है वो सायद गद्दी हड़पना चाहते है...

मैं - हां तो फिर उन्हें पकड़िए और ख़तम करिये इन् सब को..

लीमो - वो खुद राज परिवार के सदस्य है और उनको पकड़ना एक बहुत बड़ी बात हो jaayegi...iske लिए हममे साबुत चाहिए....

मैं - तो अब kya...ab हम उसको ऐसे hi छोड़ तो नहीं सकते...

लीमो - नहीं हम उसको ना तो छजोंद सकते है और ना hi उसके खिलाफ कोई कदम उठा सकते है हममे बस इंतज़ार करना hoga...aur उनपे नज़र रखना hoga...abhi के लिए बस यही कर सकते है hum...fir जैसे hi हममे साबुत मिले हम महाराज को दिखा के उनके ऊपर छोड़ देंगे की क्या फैसला लेना है....

निकिता - ये क्या बक्व्वास hai....mujrim सामने है उसको पदको और सज़्ज़ा दो...

लीमो - हम ऐसा नहीं कर सकते है...

हम बातें कर रहे थे की अचानक से गेट के पास कुछ धमाका hua....hum सब उस ओर bhage....ye सामने वाला गेट था.....

मैंने देखा सामने रूपल दीदी कड़ी हुई thi....haathon में कुल्हाड़ी liye...aur उनके पीछे मास्टर और बाकी के दोनों....

मैं - ये हमारे साथ hai...ye मदद करने आये है....

लीमो ने अपने साथ आये लोगो को dekha...aur उनमे से एक ने उन् सभी को अंदर आने देने का हुकुम diya,....uska बोलना था की उन् पहरेदारों ने उनको अंदर आने दिया...

ये भी अजीब tha...jaisa लिमि ने बताया था उस हिसाब से तो लीमो एक सिपाही hi tha...haa रैंक अच्छा था पर इतना अच्छा नहीं की उसके एक इशारे पे गेट खुल jaaye...ye कुछ अलग hi था...

मैं - (आदमी से) वो कोण है जिसने अभी अंदर आने की इज्जाजत दी...

आदमी - wo..wo हेड मजिस्ट्रेट है यहाँ के...

मैं - पर वो लीमो की बातें क्यों सुन रहे hai...Leemo तो बस एक सिपाही है...

आदमी - हां वो सिपाही तो है पर सिर्फ सिपाही hi नहीं hai...uske एक इशारे पे मैं ..ये मजिस्ट्रेट यहाँ तक की कौंसिल के मिनिस्टर्स भी उसका कहा maanege....wo कोई आम सिपाही नहीं hai....wo थे आर्चरी सोसाइटी का हेड है...

मैं - ये क्या है अब...

आदमी - जितना बताना था बता diya....isse ज्यादा बताने की मेरी हैसियत नहीं hai....agar पूछना hi है तो लीमो से पूछो समझे...

मैं - हां समझ गया..

बुआ , मास्टर , कविता मैडम और रूपल दीदी सभी आ गए the...main और निकिता उनके पास gaye..aur उनसे बातें करने लगे...

कविता मैडम - सूरज बच के भाग गया है पर हां वो जख्मी है लगता तो नहीं की वो यहाँ aayega..par हम कोई चांस नाहिलेना चाहते थे तो आ गए यहाँ पे....

मैं - भाग गए मतलब...

इस्पे हमको साड़ी कहानी बताई गयी....

लीमो - तुम सब यही रूक्को और सभी पे नजर rakho...Preeko तुम चलो मेरे साथ मुझे अपनी नबहेन को लाना है....

रूपल दीदी - बहन ??

मैं आपको निकिता सब बता देगी अभी हममे जानना है वो बहुत वक़्त से इंतज़ार में है...

रूपल दीदी - मैं भी चलती hu....aur कहानी तू hi सुन्ना देना...

वो भी मेरे साथ chaldi...Hum तिण्णो hi एक गाडी से पीछे के गेट की ओर जा pahuche...waha गए तो वह पे बहुत से लोग पहले से hi लाइन में लगे हुए the....ander आने के liye...aur साइड में कड़ी थी Leemi..apni बच्ची के साथ...

लीमो - Leemi....leemi...

वो वह से तुरंत hi उसके पास pahucha...aur उसको गले लगा liya...Leemi की आँखों से ासु गिरने lage..Leemo का भी वही हाल tha...aur वो बची वो समझने की कोशिशकर रही थी की हो क्या रहा है क्यों रू रही है उसकी माँ...

लीमो और लिमि में कुछ देर बातें hui..aur उसके baad..Leemo उन् दोनों को लेके वापस से अंदर आने को hua...tabhi उसको वो पहरेदार dikhe....jo ना तो उसकी बहन को अंदर आने दे रहे थे और ना hi उसके दिए हुए सन्देश भेज रहे the...gusse से उन् सभी को देखा उसने और वह से अंदर आया....

मैं और रूपल दीदी ये सब देख रहे the...raste में hi मैं उनको पूरी कहानी सुआए जा रहा था की मैं यहाँ कैसे पंहुचा और ये सब कैसे hua...wahi...unhone भी मुझे चीलों के बारे में bataya...aur बिजली के बारे में भी...

मुझे लगा मैंने कुछ ज्यादा hi बोल दिया था ज्वाला से aaj...mujhe उससे वापस से बात करनी चाहिए यहाँ से वापस जाने के बाद...

हम सब वह से लीमो के घर में pahuche...ghar पे कोई नहीं tha...Leemo ने शादी नहीं की थी अभी tak..wahi उसके पेरेंट्स बहुत पहले hi गुजर चुक्के थे तो वो अकेला hi रहता tha...Master और बाकी सब भी वह पे आ geye..unn सब ने तय किया था की आज का दिन ख़तम होने तक हम सब वही रहने वाले hai..aur कल हम निकलेंगे वह se...magar इन् सब के बारे में किसी को भी पता नहीं चलना chahiye...kisi को इस बात की खबर नहीं पड़नी चाहिए की हम वह आये भी थे...

रात हुई हम सब ने खाना khaya...aur फिर सभी सोने को जाने लगे....

मुझे नींद आने hi वाली थी की मास्टर वह आयी और मुझे उठा diya....sirf मुझे ी नहीं बल्कि सभी ko...Nikita कुछ परेशां लग रही थी...

मास्टर - हममे जानना होगा..

मैं - अभी इस वक़्त...

निकिता - हां यही सही होगा...

बुआ ने भी ऐसा hi kaha..aur फिर bas...hum साब रात के अँधेरे में hi वह से गेट के पास gaye...ab बहार कैसे जाए ये सोचने वाली बात thi...hum सब वह पे खड़े सोच hi रहे थे की पीछे से लीमो की आवाज aayi....aur उसने मुझे bulaya..aur मुझे वापस से वो कागज़ का टुकड़ा diya..aur उसको पहरेदारों को देने के लिए कहा....

मैंने वैसा hi किया और हम सब को बहार जाने दिया gaya...hum बहार आये और उसके बाद वापस से जंगल में उसी घर में जिससे हम यहाँ आये the...aur मिरर से होते हुए हम वापस से स्कूल में आ गए the...Rupal दीदी उन् सफ़ेद पत्ते वाले पेड़ की मदद से बहार गयी फिर बस से घर चली गयी वही main...apne रूम में चला gaya...raat काफी हो गयी थी और तो मैं स्पॉ gaya...sone के साथ hi मैं पहुंच गया वापस से अपने ट्रेनिंग के लिए..

आज के लिए इतना hi...abhi कुछ ज्यादा hi गैप हो जा रहे hai...inn गैप्स को काम करने की कोशिश होगी और अपडेट रेगुलरली आये इसकी भी कोशिश की jaayegi...tab तक के लिए :केओ: नेक्स्ट अपडेट रात को आ जाएगा या अगले सुबह..
 
अपडेट - 37

अब तक

एल्फ वर्ल्ड में बहुत कुछ हुआ था पिछले din...ek हमला जो होने वाला था वो टालल gaya....ek बहन जो अपने भाई से मिलना छह रही थी वो भी बहुत वक़्त से वो उससे मिल gayi...kisi को हथियार मिला तो कोई बुरी तरह से हार gaya..par इन सब के बारे में अभी तक राज परिवार को भनक भी नहीं लगी thi...wo तो अपने महल में सुरक्षित the..ye सब हुआ उसके बाद हम सब वापस भी आ गए...

अब आगे

नेक्स्ट डे...

सुबह जल्दी उतना फिर तैयार होक जल्दी से ध्यान के लिए जाना सब वैसा hi tha....Main गया वह पे जहा में ध्यान लगता hu...waha पे बुआ , निकिता , मास्टर हुए साथ में कविता मैडम भी thi....wo चारो मेडिटेट कर रही thi...main भी बैठ गया मेडिटेट करने के liye...meditae करते वक़्त मैं अपने थंडर एलिमेंट को मजबूत कर रहा tha...aur इसका वही तरीका tha...jo बॉल्स मुझे यहाँ वह जाते दिख रहे थे उन् सब को एक जगह पे एक साथ laana...aur जैसे जैसे वक़्त बीत रहा था मैं इसमें अच्छा होता जा रहा tha...ab ये मैं आसानी से कर रहा था...

जब मेरा ध्यान टुटा तो आस पास कोई नहीं tha...main अकेला hi था वह pe...charo जा चुक्के the...Main भी जल्दी से उठा और क्लास के लिए तैयार होने laga....room में गया फ्रेश हुआ और फिर वह से सीधा दिंनिंग हॉल में वह पे ब्रेकफास्ट करने के liye....waha पंहुचा तो देखा की निकिता भी वही है और वो खाना खा रही thi...main भी उसके पास चला gaya....main उसके साथ हुई अपनी बातों के बारे में सोच रहा था...

मैं उसी के टेबल पे जाके बैठ गया उसके बगल mein...usne मुझे देख कर भी अनदेखा कर दिया...

मैं - मैं वो सोच रहा था तुम्हारे कही हुई बातों के बारे mein...tumne कहा था की पावर्स नहीं होती तो अच्छा होता...

मैंने जैसे hi ये बोलै जो खाना उसके मुँह में था वो उसके गल्ले में अटक गया और वो उसको अपने गले के निच्चे करने की कोशिश करने lagi....maine भी उसके पीठ पे थपकी दी जिससे या तो वो बहार निकल जाए या अंदर चला jaaye...aur पान भी दिया usko....paani पन्ने के बाद जब उसको थोड़ा अच्छा लगने लगा तो उसने मेरी ओर dekha...aur क्या देखा tha...aisa लग रहा था अभी मुझे मार के खा जायेगी कच्चा hi...uske बाद उसने अपनी प्लेट उठायी और वह से चली gayi...meri समझ में नहीं आ रहा था की ये हुआ तो हुआ kya...matlab मैंने ऐसा क्या कह दिया की उसको मेरे पास से जाना pada....baat समझ में नहीं आयी meri...to मैंने भी खाने पे कंसन्ट्रेट किया और खाना खाने के बाद क्लास के लिए चला gaya...waise तो क्लास हमारे प्यारे प्रोफ. सूरज का था जिनकी कल अच्छे से पिटाई हुई thi...aur मुझे लग नहीं रहा था की वो aayenge....par हममे तो जानना hi था क्लास के लिए अब ये बात अलग है वह पे कोई और क्लास लेता या कुछ और होता इसका पता वही पे चलने वाला tha.....to पता करने के लिए मैं भी चला गया वह pe....aaj क्लॉस में खुद मास्टर आयी हुई thi...ye देख के मैं दांग रह गया...

मास्टर ने सभी को पहले तो अपना इंट्रो diya...waise सब बस उनका नाम hi जानते the..yaa सायद कोई उनको और अच्छे से जानता होगा पता nahi...par ये hi प्रोटोकॉल होता है और उन्होंने बस वही फॉलो किया अपना इंट्रो diya...aur फिर सबको खबर सुनाई...

मास्टर - आप सभी के प्रोफ. कुछ समय के लिए छुट्टी पे hai...to तब तक आपके क्लास अस्सिस्टेंट prof.s lenge....aur हां प्रक्टिकल्स भी उन्ही के द्वारा लिया jaayega...iss बीच अगर किसी को भी किसी तरह की पढ़ाई में दिक्कत हो तो बिन्ना किसी झिझक के आप सब अपने लीडर को bataye...aur वो आपकी ओर से आपकी बातों को हमारे टीचर्स कौंसिल में रखेंगे... आज कोई क्लास नहीं है आज आप जा सकते hai....par अगर कोई क्वेश्चन है तो उसके बाद...

लड़का 1- Ma'am हमारा लीडर कोण है...

मास्टर - आप लोगो के बैच में कोई लीडर नहीं है ??? मैंने सभी टीचर्स से बोलै है हर बैच हर क्लास सभी के लीडर्स होने chahiye...sayad प्रोफ. सूरज भूल गए ho...ab ये आप सब पे छोड़ा जाता है की आप किसे अपना लीडर बनाते ho....aur कोई सवाल..

कुछ और सवाल पूछे गए पर वो उतने खास नहीं hai..class ख़तम हुई और सभी निकल गए क्लास se....Main निकिता को ढूंढने laga...usse बात करने के लिए की आखिर वो चाहती क्या hai..par वो मुझे कही मिली hi nahi....fir अच्चानक से वो मुझे मास्टर के साथ dikhi..Market जाने वाले रूम के pass...wo वह मास्टर के साथ थी और बातें कर रही thi....Main भी उनकी ओर जाने laga..par इससे पहले में पहुंच पता मास्टर वह से चली गयी और निकिता मार्किट के अंदर चली gayi....Pata नहीं क्या बात कर रहे थे ये दोनों...

ध्रुव - इससे भी ज्यादा जरुरी काम बाकी hai...Polar बेयर प्रिंस 2 दिन से लापता hai..ab तक वो लोग उसको ढूंढ़ने में पूरी तरह से लगे हुए honge.....agar गलती से भी ऐसी कोई खबर उनतक पहुंची की प्रिंस ज्वाला के कबीले में है तो लड़ाई शुरू हो jaayegi...aur ये हो इससे पहले तुम्हे वो वह पंहुचा या नहीं इसका पता लगाना होगा...

मैं - हां मैं तो भूल hi गया वैसे भी मुझे ज्वाला से बात करनी है usne..Bijli और बाकियों को भेज के हमारी मदद भी की thi...shukriya तो बनता है...

ध्रुव - और इसके लिए वह जाना hoga...jiske लिए तुम्हे ज्वाला को बुलाना होगा...

मैं - हां पता है....

मैंने ज्वाला को याद किया और उसको पोर्टल खोलने को kaha...aur तुरंत hi पोर्टल खुल gaya...wo अभी अपने घर में tha...Main कुछ बोलता उससे पहले वो hi शुरू हो गया,..

ज्वाला- पोलर बेयर प्रिंस अभी पूरी तबाह से स्वस्थ नहीं है और हम अपने किसी मेहमान ko....chahe वो बिन बुलाया हुआ hi क्यों ना ho...aise जख्मी हाला में नहीं जाने दे sakte...aur वैसे भी अगर अभी उसको इस हालत में उसके घर लेके जाता तो वो गलत समझ सकते the..aur फिर मैं आपके आदेश का पालन नहीं कर पता..

मैं - कोण सा आदेश..

ज्वाला - आपने कहा था कोई लड़ाई नहीं hogi....aur अगर मैं इसको इसी हालत में लेके जाता तो जरूर लड़ाई होती...

मैं हम्म ठीक hai...aur शुक्रिया कल तुमने बिजली को और बाकियों को भेजा मदद के लिए...

ज्वाला - madad....nahi वो मदद नहीं thi......hum बस अपना किया हुआ वडा पुर्रा कर रहे the...Kabile ने कहा था की हमारा कबीला आपके परिवार की रक्षा karega...hum बस वही कर रहे थे उससे ज्यादा कुछ नहीं....

ध्रुव - ये तो अभी भी गुस्से में hi लग रहा है...

मैं - हां यार बात तो सही kahi...chalo देखते कब तक गुस्सा रहेगा...

ध्रुव- वैसे ये गुस्सा हो या ना हो इससे मतलब नहीं hai..isko अब वही करना होगा जो तुम.....

इतना बोल के ध्रुव चुप हो गया जैसे मैं क्या सोच रहा hu..wo जाने के लिए एक दम से शांत...

मैं - नहीं yaar...ek दोस्त किसी गुलाम से लाख गुणा ज्यादा अच्छा होता hai...aur मुझे इसकी दोस्ती chahiye..gulami nahi...aur वो तो मैंने उस वक़्त इसलिए कह दिया था क्यूंकि ये और किसी तरह से मानने वाला hi नहीं था....

ध्रुव - चलो ये सही है फिर इसको अब बताओ ये सब...

मैं - haa....(Jwala से) वडा निभा रहे थे पर मैडम तो मदद होती है काहे जैसी भी ho...aur अगर तुम चाहते तो तुम बिजली को नहीं आने देते पर तुमने ऐसा नहीं kiya...Bijli को भेजा वह जो बहुत ताकतवार hai..aur उसकी वजह से सब सुरक्षित hai..to थैंक्स ज्वाला...

ज्वाला ने एक बार मेरी ओर देखा और bas..fir वो अपने काम में लग गया जो वो कर रहा tha....kuch पढ़ रहा था सायद...

मैं - मैं एक बार उस प्रिंस से मिल आता hu...thoda घूम भी लूंगा..

उसने पोर्टल खोल diya...jo सीधा वैद्य के घर में जा रही थी...

मैं - अरे नहीं इसकी जरुरत नहीं है मैं ऐसे hi ठीक hu...aise hi चला jaunga..pata है उनका घर....

उसने पोर्टल बंद कर दिया और मैं भी वह से निकल गया...

वही दूसरी jagah.....Market में...

(निकिता के रेस्पेक्ट में)

मैं - अजीब से पावर्स दे दिए hai...pata नहीं कैसे पावर्स है ye...use करना चाहो तो होते नहीं ऊपर से दर्राते अलग है ye...mujhe चाहिए hi नहीं ye.....bas एक बार मेरा काम हो जाए पावर मुँह पे मारूंगी उसके...

ये ऐसी hi बड़बड़ाते hue...kaale कपड़ों में मार्किट में चली जा रही थी ांडीर की oor...isne चेंज कर लिया था अंदर आने के बाद....

कुछ दूर और जाने के बाद मुझे लगा की कोई मेरा पीछा कर रहा hai...aur यही तो मैं चाहती thi...main और अंदर की ओर जाती rahi....ab मैं पुराणी दुक्खों के इलाके में आ गयी thi...yaha पे दक्कन है जो पुराणी hai...yaha लोग ज्यादा आते नहीं है क्यूंकि इन्ही दुकानों के के नए ब्रांच बोलो या मॉडिफाइड दुकाने आगे के साइड में खुल चुक्की hai...inn जगहों पे अब बस कुछ hi लोग आते जाते hai...Main अभी भी आगे की ओर बढ़ी जा रही thi...aur जैसे जैसे जा रही थी वैसे वैसे लग रहा था पीछा करने वालो की दिनति बढ़ती जा रही hai...aur जब मुझे लगा की इतने काफी है तो मैं रुक गयी....

मैं रुक्की और उसके तुरंत बाद hi एक ओर से किसी ने एक काले रंग के एनर्जी बॉल से मुझपे हमला kiya...wo मुझे लग hi जाती अगर मुझे पता नहीं होता इस बारे mein...waise ये सही बात थी इन पावर्स की जो मुझे उस प्रतीक से मिल्ली thi....mujhe ना पता चल जाता tha...yaa कहु की वक़्त मिल जा रहा tha...pahle तो ये कण्ट्रोल में नहीं tha...par kal...kal कण्ट्रोल पा hi लिया था maine....jab ुन्नन वाहियात सी जेल में thi...mujhe इतना गुस्सा आ रहा था की मैं उन् सब को मार daalti...par मैं जानती थी ऐसा नहीं हो sakta...par गुस्सा बस बढ़ता hi जा rahatha...tabhi ऐसा लगा जैसे कोई बुल्ला रहा हो mujhe...mujhe उस अँधेरे से कोई बुल्ला रहा tha..aur मैं वह गयी और fir...fir मैं वह पे बैठ गयी और गुस्से को काबू करने की कोशिश करने lagi..aur कामियाब hui....aur उसी के साथ ये पावर भी कण्ट्रोल में आ gayi...khair ये बाद में भी बताया जा सकता hai...abhi मुझपे किसी ne...black एनर्जी बॉल से हमला kiya..main बच gayi...par ये सिर्फ एक वार tha.....iske बाद और भी कई सारे वार आने शुर हो gaye...black एनर्जी बॉल्स की तो जैसे बरसात hi हो गयी mujhpe..par मैं हर एक बाल से बच रही thi....wo भी बिन्ना ज्यादा कुछ kiye...mujhe बस अपने जगह से आराम से साइड हो जाना होता tha..aur बॉल चली jaati...iss वक़्त कई बार तो में एनर्जी बॉल्स को अपने सामने से गुजरने diya..aur उनको ध्यान से देख रही थी..

जो हमला कर रहे the...unki एनर्जी काम होती जा रही thi..aur वो सायद समझ गए थे की मुझमे अब कुछ नया hai...to सभी ृक्क गए....

मैं - क्या hua...sabhi के सभी थक gaye...arre कोई तो वार करो...

इतने में एक लड़की वह पे आ gayi...aur उसके आने baad...uske पीछे और भी कुछ लोग आये..

मैं इन् सब को जानती thi...jaanti कैसे नहीं इन्ही सब के साथ तो रहती थी यहाँ आने से pahle...school जाने से पहले...

लड़की - तुम यहाँ क्या कर रही हो...

मैं - Main....main यहाँ अपनी जगह लेने आयी हु...

लड़की - jagah....wo तो तुम उसी दिन खू चुक्की thi...jis दिन तुमने स्कूल जाने का फैसला लिया tha..tumko मन्ना किया गया था पर तुम नहीं maani...tumne अपने दिल की की और वह चली गयी...

मैं - हां गयी और dekho...dekho क्या हुआ mujhe...tum सब कितने हो....1..2...3..8 लोग हो naa...aur तुममे से कितनो की एनर्जी बॉल लगी mujhe..1..2...3...ek की भी nahi..samajh में aaya...mainn सही थी और वो गलत tha...wo बस हम सब का उसे कर रहा tha...yahi वजह है वो नहीं चाहता था की मैं स्कूल जॉन दुनिया dekhu...aur sikhun....tumne जब भी बुलाया मैं aayi...aayi या nahi..par फिर भी तुम लोगो को यकीन नहीं hua...hota भी कैसे वो जो खेल रहा था तुम सब के दिम्माग se....waise है कहा वो abhi...wo खुद नहीं aaya..kyun दार लग रहा था उसको मुझसे...

लड़की - ज्यादा जुब्बण ना chalao...ek बार को छोड़ दिया tha...iss बार nahi...agar वो आ गए तो तुम तो gayi...aur इस बार कोई है भी नहीं बचने वाला तुम्हे....

मैं - बचने wala...main अकेली हु यहाँ पे और तुम 8 ho...tumne हमला किया मुझपे और मैं अब भी दो पैरों पे अच्छे से कड़ी hu...aur जिसकी बात कर रही हो naa...usko जानते भी हो तुम sab....pata है कोण है wo..kya करता है यहाँ से जाने के बाद....

लड़की क्या मतलब..

मैं - मतलब ये की वो तो यहाँ हमारे पास बस अभी कभी hi आता था हमारी ट्रेनिंग देखने और हममे काम बताने ko.....uske अलावा वो क्या करता था ये पता hai....usne हमसे क्या क्या कराया है ये सिचा है कभी...

लड़की - इससे हममे kya...hum बस ये जानते है वो अच्छे है बहुत अच्छे है तभी तो हम जैसों को अपने पास रखते है...

मैं - वो उसी स्कूल में पढ़ता था जहा मैं पढ़ती hu...Suraj नाम था उनका...

लड़की - क्या बक्ति ho..tu म अपनी बातों से हममे बहका नहीं पाओगी...

मैं - मैं बस सच बता रही hu..aur याक्किन ना हो तो ये dekho....ye कपडे उन्ही के है naa...ye सब saman....ye सब मुझे वही से मिला hai....aur ये भी पता चला है की तुमलोगो ने मुझे मरने का प्लान क्यों और कैसे बनाया tha...kya ये झूट है की उन्होंने hi नहीं कहा था की मैं अब खतरा बन गयी hu...tum सब को नुक़सानन पंहुचा सकती हु अपने फायदे के liye..uyahi सब्द कहे थे ना usne.....aur...aur तुम सब ने मान भी liye...ye जानते हुए भी की मैं ऐसा कभी नहीं karungi....tum सब के अलावा कोई और है hi नहीं mera...to ऐसा क्यों करुँगी मैं भला...

इतना बोल के मैं चुप हो gayi...aur प्रोफ. के सारे सामन उन् सभी की ओर फेंक diya...mujhe पहले hi पता चल गया था की वो वही है जो मुझे और मेरे जैसे बहुत से बच्चों को पाल रहे the..par मैंने इसके बारे में ना तो उनसे बात की और ना hi किसी और se...mauka hi नहीं मिला tha...aur उसके बाद ये सब हो गया tha...jiske बाद मुझे समझ नहीं आ रहा था की आखिर क्यों किया ये सब मेरे saath...wo तो ये नयी मैडम आयी thi...inhone सब bataya...aur तब जाके मुझे कहानी समझ में आने lagi....inhone ना सिर्फ ये सब बताया बल्कि मुझे उसका असली चेहरा भी dikhaya....wo उन् सभी बच्चों को अपने पास रखता था जिनके पेरेंट्स को या तो उसने या उसके लोगो ने मारा ho....uski ये सचाई सबको पता नहीं thi...aur जिनको पता थी वो कुछ कर नहीं रहे the...unn नयी मैडम से पूछा तो कहा की वक़्त नहीं आया था ऐसा करने ka...waqt नहीं आया tha....agar उन्हें पता था श वो प्रोफ. को पहले hi मार सकती थी और सायद इसी वजह से मेरे अपने आज जिन्दा hote...par कोई बात नहीं अब जो बीत गयी वो बात gayi....ab मुझे ये पता tha...aur मुझर जैसे hi मौका मिला मैं ये सब ख़तम करने आ गयी....

मैं चुप चाप सभी को देख रही thi...waha पे और भ्ही लोग आये वो सब हमारे hi ग्रुप के the...aur सभी के सभी अब उन् सामानो को देख रहे the...aur उनको यकीन तो नहीं हो रहा था par..ye hi सच था...

थोड़ी देर बाद मैं उन् सब को वही छोड़ के वह से निकल gayi...pata नहीं kyun...mujhe अभी और भी बहुत सी बातें कहनी thi..unse जवाब मांगना tha..par घुटन सी होने लगी मुझे waha...aur मैं वह से बहार आ gayi...uss मार्किट से bahar..school कैंपस mein...aur मैं चली गयी कविता मैडम के पास...

ये सब बातें रही एअर्थ ki....waise और भी है पर वो आगे milegi....ab चलते है स्ट्रेंज वर्ल्ड mein....Elf counrty.....ek और आम सा दिन सभी लोगो के liye...par कुछ ऐसे थे जिनके लिए कुछ भी आम नहीं था ab.....unme पहला नंबर आता है दब के कजिन ka...seena नायक है ये जनाब यहाँ के सीना ke...Raj परिवार से भी तालीख रहते hai....waise तो इन्हे खाने के टेबल पे अभी खुश होना चाहिए tha....par इनकी सकल ऐसी थी की देख के समझ hi ना आये की बाँदा सोच क्या रहा hai...khud भी कन्फ्यूज्ड और साथ में चेहरा पढ़ने वाले को भी कंफ्यूज करेगा...

सुबह हुई और ये भाईसाहब uthe....uthte hi सिद्ध निकल लिए रूम se....jaante थे ये की इनका प्लान सक्सेसफुल hi रहा hoga....sab बहुत अच्छे से हो गया hoga....aur आज hi ये यहाँ के नए राजा बन jaayenge....par....par ये तो जिंदगी है साली शॉक देती रहती hi....ye जनाब उठे थे और सीधा चल दिए थे दब के पिता के रूम की oor...jisme इसको कब्ज़ा करना tha......jaate hi दोनों हाथों से दरवाजे को ज़ोर से khola...aur खोलने के बाद जो सामने dekha..uske बाद तो मुँह खुला का खुला hi रह गया inka....Saamne दब के पिता श्री the...jo तैयार हो रहे the...apna मुकुट अपने सार पे रख रहे the...aur ऐसे अचानक से दवाजा खुलने की वजह से वो भी चौक gaye....unhone सामने देखा...

वो - क्या बात hai.....iss तरह से आने की वजह....

सेना नायक hi लिखूंगा अभी...

सेना नायक - चाचाजी aap....aa

वैसे तो बोली निकल नहीं रही थी पर फिर भी इमोशन को किसी तरह कण्ट्रोल करके बोलने hi वाला था की बगल से एक सियनिक आ gaya...aur उसने कुछ कहा...

सैनिक - Maharaj...Seena नायक जी कुछ लोग है जिनको आपके दरवार में पेश करना है राष्ट्र सुरक्षा का मसला है...

अगर कोई और बात होती तो ये सैनिक अभी दांत खाने वाला tha...par रस्त्रशुरक्षा की बात थी तो महाराज ने अपना मुकुट सही किया और जल्दी से निकल लिए अपने दरवार की oor...par जाने से पहले...

महाराज - तुम भी तैयार होक आओ जल्दी देखते है क्या बात हो गयी...

सेना नायक को समझ में hi नहीं आ रहा था आखिर हुआ क्या जो कुछ हुआ hi nahi...uska प्लान फुलप्रूफ tha...sab सही hi होना चाहिए tha....uske साथ बहुत अच्छे अच्छे लोग थे इस काम के liye....prof सूरज और फिर डेमोस वर्ल्ड से भी तो मदद मिलने वाली thi...phir ऐसा कैसे....

वो ये सब समझने की कोशिश करता रहा पर समझ कुछ नहीं aaya...to वो नहाने चला गया और उसके बाद दरबार में pahucha..aur जो लोग सामने थे उनसब को देख के तो उसको बहुत बड़ा झटका laga....ye वही लोग the...jinko उसने उसकी मदद करने को कहगे tha...aur उसके badle....jab वो राजा बनता तो उन् सभी को सब अलग अलग पोस्ट deta...abhi वो सारे सामने खड़े हुए the.....unsabhi के हाथों में हथकड़ियां लगी हुई थी...

सीना नायक को अब भी समझ नहीं आ रहा था की क्या हुआ hai...wo और कंफ्यूज hi गया था....

दरबार में एक आदमी आया और उसने बताना शुरू किया...

Aadmi(elf hi है ये भी) -महाराज कुछ दिंनो से तरह तरह की बातें सुनने में आ रही thi.....baatein ऐसी थी जिनसे ये पता चला की कुछ लोग है एल्फ कंट्री में जो आपसे और आपके परिवार से खुश नहीं hai...aur इन्ही लोगो के साथ मिलके किसी ने एक बहुत बड़ा सडयंत्र रचा hai...(ye बोलते हुए उसने सीना नायक की ओर dekha)...sadiyantra ये था की कल पूजा वाले दिन जब आप और आपका पूरा परिवार कमजोर हो जाते है शक्तिहीन हो जाते है तब आप सभी को मार दिया jaaye....maaf करिये महाराज पर ये सच hai...unka यही प्लान था आप सभी की हत्या कर एल्फ कंट्री को अपने कब्ज़े में lena....aur ये सब ऐसा कर भी लेते Maharaj....magar...unki ये बातें हममे पता चल gayi...ek कैदी ने हमारी मदद ki.....ussi ने सब bataya...aur साथ hi साबुत भी diye....aur उन्ही के बदौलत आज हम आपके सामने इसी दरवार में सभी गद्दारों को लेके आये hai...ab आप hi इनका न्याय करे....

महाराज ने उसकी बात सुन्नी और सोच में पद gaye....darbaar में भीड़ थी सभी भुनभुन्नाने लगे थे...

महाराज ने थोड़ा सोचने के बाद अपना फैसला सुनाया....

महाराज - पहले तो इन् सब से वो वजह पता की जाए और उन् सभी वजहों को मेरे समक्ष पेस किया जाए जीन वजहों से ये मुझसे इतने खफा है की मुझे मारने तक को राजी हो gaye...uske baad..inn सब को फोमोस पे छोड़ दिया जाए....

महाराज ने जब अपना फैसला सुनाया तो सब हैरान हो gaye...Strange वर्ल्ड में आज बहुत समय बाद फोमोस प्लेनेट का नाम आया tha....ek अरसा हो गया जब किसी गुनेहगार को वह भेजा गया हो....

महाराज ने फैसला सुनाया और उसके बाद आगे की कारवाही करने lage....thodi देर बाद एक ब्रेक हुआ और सभी ब्रेकफास्ट करने चले gaye...wahi बैठा अपना सीना नायक सोच रहा था की ये सब हुआ kaise...ki दब बोलै....

दब - पापा आपने उनको वह भेजने की सज़्ज़ा kyundi..aiso को तो मौत की सज़्ज़ा देना चाहिए....

महाराज - बीटा यही तो अंतर होता hai....jab मुकुट आपके सार पे हो तो ये जो जज्बात से लिए गए फैसले है ना उनको दबा देना पड़ता है और कोई ऐसा उपाय निकलना पड़ता है जो सही ho....agar मौत को hi सज़्ज़ा बना देता तो बहुत से ऐसे लोग है जो मरने को भी तैयार rahenge....yaa कराये जाएंगे मजबूरियों के karan....mujhe ये नहीं चाहिए tha...ELf कंट्री को एक ऐसा रास्ता चाहिए था जिससे लोग ऐसा करने का सोचे भी nahi...aur फोमोस एक ऐस hi रास्ता hai,,,,,(sena नायक से) बीटा बात करो फोमोस mein...unse कहो की हम कुछ कैदी भेज रहे है...

सीना नायक - जी चाचा जी...

महाराज - हां दब तुम ये बताओ वह स्कूल में क्या चल रहा hai...padhayi hi कर रहे हो या यही की tarah...agar एक भी कंप्लेंट आयी तो तुम्हे भी फोमोस के एक दौरे पे भेज denge...hahahaha..

ये सब राज महल में चल रहा था वही थे आर्चरी सोसाइटी में अलग hi हलचल मच्छी हुई thi....waise तो किसी को भी लीमो के फैसले से कोई आपत्ति नहीं thi....par उनको एक बात सही नहीं लग रही thi...aur वो था सीना नायक के साथ कुछ ना करने ka....Leemo भी अपनी जगह सही tha...agar सीना नायक के साथ कुछ kiya...to महाराज बिन्ना किसी साबुत के उसको राज परिवार पे हमला मान lenge...Maharaj hi नहीं बाकी सब bhi....jo सही नहीं hoga...to उसने अपने सोर्सेज से उन् सभी का पता लगाया जिन लोगो ने उनका साथ दिया tha...aur उन् सब को गिरफ्तार karaya...aur राजा के सामने पेश kiya...saath hi एक कहानी भी banayi...wahi एक कैदी ने मदद की वगेररा वगेररा......

सोसाइटी में बस कुछ hi लोगो को ये बात पता थी की प्रतीक एंड टीम वह आयी थी और जिनको पता था ये बात उनको चुप रहने को कह दिया गया था...

लीमो अभी अपने घर में tha...apni बहन और भांजी के saath...wo उनसे उनकी कहानियां सुन्न रहा था और अपनी भी सुन्ना रहा था....

आज के लिए ितं hi नेक्स्ट अपडेट में देकते है रूपल दीदी की प्रॉब्लम का क्या hua...saath hi दब का वापस aana....aur निकिता के लाइफ के बारे में भी कुछ कुछ jaanege...saath hi हमारे प्यारे प्रोफ. सूरज जी कहा गए और किस हाल में है ये भी देख lenge...aur एक बार अपने दोस्त स्लेयर जी के भी दर्शन हो जाएंगे इसी बहाने...

बनने रहिये...
 
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