फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 3 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

माँ बन कर रहना वो भी किसी ऐसे बच्चे की जिनके माँ बाप की वजह से िप को बहुत कुछ सुन्ना पड़ा... वो ज्यादा हो jaata...abhi वो बातें सामने नहीं आयी जो ये दिखाएंगी की कितना अकेला था प्रतीक वह पे...

स्लेयर की बात hi अलग thi....uske सामने अभी प्रतीक का की तुलना करना hi गलत हो jaayega...Prateek जब तक खुद को नहीं जानेगा तब तक वो स्लेयर के सामने बिलकुल किसी कीड़े की तरह hai...bas ये कीड़ा थोड़ा खतरनाक है..
 
स्लेयर के बारे में बस अफवाहें hi hai...koi कुछ कहता है कोई kuch...Uski सच्चाई बस कुछ hi लोगो को पता hai...aur वो लोग आगे मिलेंगे...

Taikhana.,...wo पहले से hi अजीब hai...uska भी रहस्य hai...jo इस एअर्थ पे बनने हुए मैजिक स्कूल को अलग बनता है वह सतरंगे वर्ल्ड के स्कूल se...aise hi कुछ और भी बातें है जो अलग है पर सबके सामने नहीं है..

कीप रीडिंग एंड कमेंटिंग
 
:हम्म: कलर नहीं आना और रारेवाली बात उसको खास नहीं banati....kya ऐसा हो सकता है की उसको खास दिखाया hi ना jaaye....usko बस एक बच्चा दिखाया जाए जिसको कोई भी कभी भी पीट के निकल jaaye...waise इस बात का रिलेशन है उसके रूम se....aur एक और चीज़ में...

हम्म पावरफुल कैसे बनता है ये देखना मज़ेदार होगा

कीप रीडिंग एंड कमेंटिंग
 
अरे रूक्को यार थोड़ा आराम से.....

डार्क world..aur स्ट्रेंज वर्ल्ड दोनों जगह पे कोई राजा नहीं है वह कबीले या स्टेट्स जैसे होते hai...jaha हर एक kabile...jisme एक तरह के hi लोग पाए जाते है aksar...ka एक अलग मुखिया होता है...

लूसिफ़ेर डेमोस का राजा hai.....usne इन् 10 परिवारों को भागने की प्लानिंग बहुत सोच समझ के किया था...

विराज और सोफ़िया दोनों hi उन्ही 10 परिवारों के वंसज है....

पार्थ का तो आगे दिया हुआ है फॅमिली बैकग्राउंड पर उससे भी ये कहना की वो उन् 10 परिवारों में से आता है सायद जल्दी hai...aur नीलम उसका करैक्टर अभी रहने hi देते है...
 
आत्मायों को खाना एक नशा जैसा हो गया है स्लेयर के liye....shuru में ये जरुरी था पर ab...ab ये bas...ek आदत हो गयी है....

और आदत बड़ी कम्मिनी होती है जाती hi नहीं jaldi...dekhte है स्लेयर की कब जायेगी..

हां वो निशान 10 फैमिलीज़ के hi the...aur

प्रतीक को भी मिलेगी पर वक़्त आने पे...

नफरत करने की वजहें अलग अलग hai...koi कुछ कहता है तो कोई kuch...sabko बस थोड़ा थोड़ा पता है और उन्ही के हिसाब से सबने एक मत बना लिया है दोनों बुर्रे the...aisa नहीं है बुर्रे नहीं थे wo...par कोई कारन hi नहीं जानता...
 
अपडेट - 17

अब तक

मैं अपने फॅमिली ट्री के पास गया वह पे मुझे सब कुछ बताया गया मेरे फॅमिली के बारे में सब कुछ मतलब सब kuch...waha पर फिर कुछ hua...jiske बाद सब भाग गए दर के maare...aur हमारे फॅमिली को आग के पंख वाले चील की सुरक्षा मिल gayi....hum सब वापस आये और वही सब के बारे में सोच रहे थे की रूपल दीदी मुझे बहार लेके आ गयी और एक घर के पास rukki....wo घर उनके नाना - नानी का था और ठीक सामने एक बड़ा घर था जहा के मालिक ने ना सिर्फ रूपल दीदी के नाना - नानी को अपना गुलाम बना लिया है balki...unka घर भी हड़प लिया hai...Rupal दीदी ने रोड पैर से एक पाथेर उठाया aur....fenk दिया उस घर की ओर....

अब आगे...

रूपल - बहार nikalo....dekho मैं फिर आ gayi...aao बहार....

मैं - ये क्या कर रही हो दीदी aap...hum नाना - नानी को बच्चा lenge...par अईसे नहीं....

रूपल - नहीं अब ऐसे hi hoga...tujhe नहीं पता हमने क्या क्या किया hai....Maa ने कितनी बार इससे बात की पापा ने दादा ने पर ये उन् सब को bhi....nahi इस्को मैं सबक सीखा के रहूंगी...

अभी दीद बोल hi रही थी की उस घर का दरवाजा khula....aur सामने एक ऐसा जीव था जिसका सर सुवर जैसा था और sharir....insan की tarah....bbas एक पंच अलग से लगी हुई thi....kasam से इतना भाड़ा जीव नहीं देखा था कभी maine....sayad अभी खाना खा रहा ho...uske चेहरे पे लगा हुआ था कुछ.....

मैं - ये क्या है didi...itna भद्दा सा...

दीद कुछ बोलती उससे पहले वो खुद बोलै....

"ुये लड़के कोण है tu....janta है मैं कोण hu...ye पता है किसको अभी भाड़ा bola....tujhe और तेरे पुरे खंडन को अपना गुलाम बना लूंगा....."

अभी वो मुझसे बात कर रहा था की उसकी नज़र रूपल दीदी पे गयी....

"तू तू वापस आ गयी रांड की bacchi....chal आज तुझसे भी अपना हिसाब चुक्का hi लेता हु बहुत देख लिया तुझे..."

वो भाड़ा सा जीब्व मेरे सामने रूपल दीदी को गली दे रहा tha....aise में कोण शांत rahega...par मुझसे पहले दीदी hi जवाब देने चल padi....unhone अपनी talwar....joki उनके हाथ में पहने हुए एक अंगूठी में फिट थी और साथ hi शील्ड भी उसको बड़ा किया और उसकी ओर जाने लगी....

" हहहहहहहहह आजा आजा तुझे दिखता hu...badi बहादुर बनती है ना आज देख पहले तुझे फिर तेरे बदले तेरे पुररे खंडन को यहाँ लाऊंगा और सब मेरे गुलाम hon.....ahhhhhhhhh"

वो बोल hi रहा था की दीदी ने अपने शिलेड से वाटर कैनन का हमला कर diya...matlab दीदी वाटर एलिमेंट वाली hai.....wo पानी बहुत ज्यादा फाॅर्स से उस आदमी के चेहरे पे paddi....jiska अंजाम हुआ उसका बोलना बंद हो जाना और उसकी cheekh....Par दीदी फिर भी नहीं rukki....wo तो तलवार लेके दौड़ पड़ी उसके upar......aur उसके पास पहुंच के हमला शुरू भी कर diya....par.......wo संभल चुक्का था और गुस्से में था sayad....atbhi उसने एक हाथ मारा दीदी को और दीदी गिर गयी साइड mein.....maine जब उसको देखा उस वक़्त तो चौंक gaya....uski बॉडी थोड़ी बड़ी हो गयी thi....badi और ताकतवर....

मैं दीदी के पास bhaga....aur उनको उठाया....

मैं - आप ठीक तो हो naa...aur ये...

अभी बोल hi रहा था की वो आदमी चीखँते हुए मेरे पास आया aur....mujhe एक हाथ से उठा लिया और मुझे वह से फेंक diya....bilkul किसी रुई की tarah.....jab इस बार देखा तब भी वो पिछले बार से थोड़ा बड़ा दिख रहा tha....Ye क्या हो रहा था....

मैं भी किसी कोने में गिर्रा हुआ tha...par तभी वो वापस से दीदी की ओर बढ़ा और गुस्सा तो काफी आ गया था mujhe,...abhi उसको देख hi रहा था ki...kisi ने उसके ऊपर आग से हमला kiya...assmaan se,....Aur वो वह से दूर जा गिर्रा.....

मैं दीदी की ओर देख रहा था की कही उन्हें तो कुछ नहीं हुआ पर वो ठीक थी sayad....main उठा और उनके पास gaya...unko उठाया....

मैं - आप ठीक तो ho....aur ये बड़ा कैसे हो जाता है हर बार....

दीदी - हम्म ठीक hu....ab इस कुत्ते को छोडूंगी नहीं main....tujhe मर्रा न इसने...

हम बात कर रहे थे वही की एक बड़ा सा पाथेर हमारी ओर aaya..par हममे लगता उससे पहले hi बहुत तेज़ हवाएं चली और फिर वो उड़द gayi..wapas वही जहा से आयी thi...aur जाके लगी उसी आदमी ko...ab वो और गुस्से में आ गया और हमारी ओर भागता हुआ आयी और हम्मे मारने hi वाला था ki....hamare और उसके बिच एक दिवार सी बन ggayi....thodi hi देर में वह पे वो चील आ गया.....

और उसके सामने जोर से cheekha.....uss चील की आवाज में भी इतनी ताकत थी की वो आदमी वह से कुछ दुरी पे चला gaya...aur गिर गया....

वो आदमी वापस उठा और इस बार भी उसकी बॉडी और बड़ी हो गयी थी....

मैं - दीदी ये हर बार बड़ा कैसे हो जाता है.,...

रूपल - इसकी ताकत है ye....isko जितना गुस्सा आएगा ये उतना hi ताकतवार होगा....

मैं - kya...phir अब क्या होगा...

रूपल - होना क्या है ये है ना हमारी सुरक्षा के लिए... देखते है क्या होता है,...

मैं - आप क्या पागल वागल हो...

मेरे ऐसे बोलने पे उन्होंने मेरी ओर आँखें छोटी करते हुए देखा और एक thapad....chattak...badi बहन को पागल बोलता hai....abhi टाँगे तोड़ के हाथ में दे dungi....main अपने गाल पे हाथ रखे खाद रहा...

दीदी - ये तो बस बड़ा होता जा रहा है इसका कुछ करना padega....(cheeel से) उसको हवा में ले कजाओ और निच्चे गिर्रा दो....

चील जोकि अभी उस आदमी को मारे जा रहा था रूपल दीदी की आवाज सुन के उस आदमी को अपने पँन्जे में कसता है ताकि वो हिल्ले ना और रूपल दीदी को देखने लगता hai....jaise पूछ रहा हो कोण हो भाई और मैं क्यों मानु तुम्हारी बातों को....

चील को अपने ओर ऐसे देखते hue...Didi ने फिर से उसको वैसा hi kaha...aur वो केवल वैसे hi दीदी को देखता raha...itne वक़्त में एक और चीज़ हुई व था उस आदमी का बढ़ना अब वो और ज्यादा बड़ा हो गया tha...Maine भी नोटिस किया जैसे जैसे वो बड़ा होता जा रहा है उसकी साँसे फूलती जा रही है और उसका स्किन भी लाल होता जा रहा hai...matlab अगतर इसको और गुस्सा दिलाया जाए तो इसको और परेशनीभी होगी ताकत मिलने के saath.....Rupal दीदी ने एक और बार उस चील से शामे बात कही करने को पर वो कुछ नहीं कर रहा tha...usne वापस से अपना ध्यान उस आदमी पे kiya...jo अब भरा मोटा ताज़्ज़ा हो गया tha...apne पंजे से उसने उस आदमी को अपनी चोंच ंवें दाल लिया और जातक गया usko.....yaha मैं सोचज रहा था कैसे मारा jaae...didi भी उसी में लगी थी और ये चील जो इतने देर se...lad रहा था उसने उसको ऐसे hi निगल liya...samuche...fir वो हमारी ओर badha...ab अभी जो हमने देखा था उससे दर लग्न तो तय hi tha....to हम दोनों धीरे धोइरे पीछे होते gaye....Cheel रुक गया और फिर अपना पंजा ऊपर किया और अपना एक नाख़ून दीदी की ओर badhaya....Didi को लगा ये नुकसान पंहुचा सकता hai....dari हुई थी यार wo....to उन्होंने अपना शील्ड मणिकाला और साथ hi में तलवार bhi.....uss चील ने अपना नाख़ून उनके शील्ड से टच कराई और दीदी की शोयेलद चमकने लगी और दीदी के बाल तक हवा में उड़ने lage.......uss चील ने एक बार वापस से दीदी की ओर अपनी गर्दन टेढ़ी करते हुए देखा और फिर उड़द गया वह se.....Main गया दीदी के पास....

मैं - आप ठीक तो ho...aur ये ये क्या था...

दीदी - element....Earth element...mujhe एअर्थ एलिमेंट मिला hai...main 2 एलिमेंट वाली hu....nahi...par ये kaise...main दो एलएम.....

अभी दीदी बोल होइ रही थी की उस आदमी के घर से कुछ लोग बहार आने lage....umar उन् सब की hi ज्यादा thi....aur सायद उन्ही में से किसी के upar...didi की नज़र गयी और वो भाग के गयी उनके pass.....Main वही दूर से देखता raha.....waha एक कपल था उन्ही के पास गयी did...aur उनको देखने lagi.....Wo कोपल भी दीदी को देखने लगे और पहचानने की कोशिश करने लगे par..sayad पहचान नहीं पाए तो उन्होंने पूछ hi liya..."beta कोण हो आप कुछ कुछ पहचानी हुई सी लगती हो...."

दीदी ये सुन के अपने आँखों को रोक न पेयी बहने से और बस वही पे khadi..rone lagoi....Main गगया उनके पास और वो मुझे देख के मुझसे लिपट gayi.....main समझ सकता था की वो जिनके लिए आयी यहाँ वो hi उनको नहीं पहचान रहे है तो दुःख तो होगा hi....maine उनको चुप करने की कोशिश ki....par वो नहीं हो रही thi.....wah उस घर से निकले हुए और भी लोग यहाँ वह की बातें कर रहे थे वो सब भी बहुत खुश थे हो भी क्यों ना न जाने कितने सालो बाद आज़ादी मिली थी....

उनमे से एक मेरे पास आया और अपने बेटे के घर का पता ucha....par अमिन अहा से batata.....fir दीदी ने अपने आशु पोंछे और उनको bataya.....saare लोग आते रही और दीदी उनको उनके रिश्तेदारों के बारे में बताती rahi......wahi तब तक दीदी के नाना नानी अपने घर को देख रही the....fir जब उन्होंने हमारी तरडफ देखा तो हमने लगभग सबको hi वह से अपने रिश्तेदारों के पास भेज दिया था.....

नानी - Beta....kya हमें भी हमारी बेटी का पता बता सकते ho....Nidhi नाम है उसका....

मैंने दीदी की ओर dekha...to वो बस एक बार मुस्कुरायी और हां में गर्दन हिलाया....

मैं - हां चलिए हम आपको उनके यहाँ ले चलते hai...didi चले अब...

उन्होंने हां कहा और हम चल दिए वह se....thodi देर में हम घर के बहार the......abhi हम अंदर जाते उससे pahle....darwaja khula....chachi बहार aayi...aur उनके सामने दीदी thi....main और नाना नानी धीरे धीरे आ रहे थे वही दीदी उछलते कूदते जा रही thi....bas इसी में हम उनसे थोड़ी दुरी पर थे....

चची - कहा गयी थी और प्रतीक कहा hai.....itna लेट कोई करता है kya....pata है हम कितने देर से इंतज़ार कर रहे hai...ab देखो आज ...खाना तो मिलेगा hi नहीं tumhe....kaha है वो प्रतीक...

चची शुरू हो गयी bas....daantne लगी unko....wahi हम जो बस थोड़ी hi दुरी पे थे चची की आवाज सुन पा रहे the....Nana और नानी को उनकी आवाज पहचाने में जर्रा भी देर नहीं लगी और wo...turant hi तेज़ कदमो से उस ओर बढ़ने lage....main भी धीरे धीरे आ रहा था.....

चची - बल्टी क्यों नहीं कहा है वो..

नानी - निधि...

चची जो अभी तक दांत रही थी रूपल दीदी को वो अपनी माँ की आवाज सुन के चौंक gayi....aur फिर उसके ठीक बाद उनके पापा ने भी उनका नाम liya....wo समझ hi नहीं paayi...aur फिर जब सामने देखा तो उनके माँ पापा वह the....Chachi इस वक़्त एक दम शॉक में the...unko समझ hi नहीं आए रहा था कैसे रियेक्ट kare.....tab tak...waha पे दादा दादी भी आ गए थे साथ hi...Chacha और बुआ bhi....unka भी कुछ वैसा hi हाल tha...wo तो बुआ कुछ हद तक ठीक थी तो उन्होंने चची को हिलाया aur...wo होश में आयी...

चची - मा..... पापा....

इतना निकल उनके मुँह से और फिर आंसू बहने lage....wo दौड़ के गयी वह उनके पास और उनके गले लग के रोने lagi.....bahut वक़्त बाद मिले है ये सब तभी ये आशु hai...Main जो अभी तक पीछे था वो अब जाके रूपल दीदी के बगल में खड़ा हो gaya.....Chachi रोये जा रही थी तो चाचा गए उनके पास unko...chup करने के liye....chachi कुछ देर में चुप हुई और fir....unhione रूपल दीदी की ओर देखा और उनको बुलाया अपने pass....Rupal दीदी भी गयी...

चची - माँ पापा ये है हमारी beti...Rupal...apki नातिन...

बहोत रोना धोना हो गया था और इन् सब को थोड़ा काम करने के लिए रूपल दीदी ने अपना मुँह खोला...

रूपल - हां नाना जी मैं hi हु आपकी वो बेचारी नातिन जिसको हर वक़्त दांत कहानी होती hai,....subah दन्त शाम को दांत कभी कभी तो मार भी पढ़ती है...

ऐसे hi और भी ना जाने क्या क्या कहती चली गयी चची के बारे mein....jisko सुन के सबको हसी आ gayi....aur fir..Dada जी ने सबको घर में चलने को kaha...sab घर में aaye.....Aur सबके पास एक hi सवाल था की ये दोनों बहार कैसे आये उस घर के...

नाना जी - पता नहीं क्या hua.....aaj किसी ने उस आदमी को ललकारा सायद लड़ाई के liye...aur फिरहररा भी diya....aur उसके मरने के बाद हमारे जिस्म पर जो जादुई हथकड़ियां और जंजीर लगे थे जो हममे उसके गुलाम बनाते थे वो खुद बा खुद गायब हो गए और हम उस घर से बहार आ gaye.....jisne भी उस निर्दयी को maara.....wo बहुत hi नेक hoga...sath में बहादुर भी....

बुआ - आपको ये दोनों कहा मिले...

नानी - ये दोनों ये तो वही पे मिले जैसे hi हम सब बहार आये ये वही पर the....aur इन्होने hi तो सभी को उनके घर वालो के पास पहुंचाया.,...

अब आयी हमारे पकडे जाने की baari....jab नाना - नानी ने ये बातें कही तो सब हममे देखने lage...aur देखने लगे तो उनको अब हमारे गंदे kapde....aur शरीर पे लगे हुए चोट भी दिखे.....

चची - तुम dono....kaha गए the...aue ये सब क्या hai...kapde chot...kya कर रहे थे...

रूपल - वो main...wo हम wo...haa हम दुकान जा रहे थे naa...to isko...iss छोटू का पेअर एक पाथेर में लग गया और ये गिर gaya...haa और फिर जब उठा तो उस पाथेर को फेंक diya..aur फिर

मैं (मैं में) - ये क्या बोले जा रही hai....kahani भी बनानी नहीं आती इनको...

चची समझ गयी थी कुछ तो गड़बड़ थी तो सीधा कान पकड़ लिया दीदी ka....aur पूछने लगी की क्या हुआ tha...par पूछ नहीं paayi.....kyunki नाना जी ने उनको डांटे हुए कहा की ऐसे बचो से बात करते है kya..aur वो चुप हो ggayi....fir नानी ने पूछा humse...to हमने बताया diya...ki हम जा रहे थे तभी दीदी वह उस घर के पसस रुक्की और फिर जो कुछ भी हुआ सब बता diya.....iske बाद दांत तो पड़नी hi thi....Haa पर बाद में सबसि भी milli....Didi ने ये नहीं बताया किसी को की उनके पास 2 एलिमेंट्स आ चुक्के hai....ghar में अब 2 लोग है 2 एलिमेंट्स वाले...

खाना खाने के बाद हम सब अपने अपने रूम में वापस चले gaye...mera तो पता hi है अजीब सा रूम बीएड पे जाओ तुरंत नींद आ jaayegi...bas वही हुआ...

नेक्स्ट डे...

अगली सुबह जब मैं उठा तो शरीर पे एक खरोच तक नहीं tha...yahi होता आ रहा है पहले से bhi....Master ट्रेनिंग देती मुझे चोट लगता दर्द होता पर सुबह उठने के बाद बिलकुल ऐसा लता की कुछ हुआ hi नहीं hai....main एकदुम्म से सही रहता था....

मैं निच्चे gaya...sab नास्ते के लिए रेडी the...aaj मैं अपना मेदितिओं मिस कर दिया tha...ye अच्छी बात नहीं थी par...ghar का खाना खाने के बाद नींद hi ऐसी आयी...

अब निच्चे आया तो सब नास्ता कर रहे थे तो मैं भी बैठ गया नास्ता करने ko...Nasta करते वक़्त no baat....rule है ये सायद यहाँ का...

आज संडे tha...aaj hi हममे वापस जाना tha...bus दोपहर की करवाई थी बुआ ने मेरे कहने पे क्यूंकि शाम को मुझे उस दक्कन से वो अंगूठी भी लेने जाना था वो चील वाली अंगूठी...

नास्ता करने के baad...aaj सभी ने तय किया था की हम सब नाना - नानी के यहाँ जाएंगे और वह उनका घर साफ़ करेंगे और जरुरत के सारे सामान वह ले jaayenge.....Aisa नहीं था नाना नानी को चची ने या फिर किसी और ने मन्ना नहीं किया जाने se...yaha इस घर में भी रूम्स की कोई कम्मी नहीं thi....par नाना - नानी नहीं माने उनका अलग कहना था की हम तो पास में hi रहेंगे ना जब भी मान होगा हम चले आएंगे जब तुम लोगो का मान हो तुम चले aana...aur वैसे भी वो ghar...bahut सी यादें जुड़ी हुई है उससे....

तो इन् सब दलीलों को सुनके सबको ना चाहते हुए भी मानना hi padda...hum सब चल दिए सब सामान लेके उनके ghar.....sab कुछ साफ karne.....par जब वह पहुंचे तो एक चीज देख हैरान रह gaye.....wo जो उस आदमी का घर था उसको वह के लोगो ने hi तोड़ दिया tha...wo पूरी जगह जला दी लोगो ne....gussa थे वो bhi...naa जाने कितने hi लोगो को गुलाम बनना के रखा था इसने...

हम सब नाना नानी के घर में gaye....puri जगह धूल से बरी पड़ी thi...sab ने अपना अपना झाड़ू उठाया और लग गए सब साफ़ करने ko....ye वक़्त ऐसे hi बीत गया सबने 3-4 घंटे में hi काम ख़तम कर दिया घर को एकदम से चमका diya...aur फिर जो भी सामान आया था उन्ही में से लंच बनाया गया और फिर साब्ने खाया usko....ab बारी आयी हमारे जाने ki...Maan टी नहीं था पर जान अभी जरुरी tha...to हम सबसे विदा लेके साथ में कुछ गिफ्ट्स लेके निकल गए घर से बस पर से होते हुए स्कूल tak....ab ये बस से मुझे ज्यादा दिक्कत नहीं hoti...sayad...

स्कूल में aaye....aur हम दोनों अपने अपने जगह चल diye...main अपने रूम में बुआ apne....Gifts और सामान पहले hi रूम में पहुंच गए थे...

मैं थोड़ा फ्रेश hua...fir जब घडी देखि तो शाम का टाइम हो गया था और मुझे अब जान अतः वापस से उस दक्कन mein...par अब मैं ये सोच रहा था की ये शील्ड चेंज कराऊँ या nahi...maine उसको वही पे छोड़ दिया और बुआ के दिए hue....card को लेके चल दिया मार्किट की oor...Card बोले तो पैसे इससे से आते the...ye दक्कन वाला कार्ड नहीं है....

मैं थोड़ी देर में पहुंच गया उसी दक्कन में आज भी वह पे मालिक नहीं tha...main गया मैंने बेल्ल bajayi...aur वही बौना कुछ सामान क गिरने के आवाज के साथ मेरे पास आया....

बौना - अरे aap...aapka hi इंतज़ार tha...aapki अंगूठी मैंने धुंध राखी hai...aap बैठिये ,में लाता हु यहाँ....

मैं भी जाके सोफे पे बैठ gaya...thodi hi देर में वो एक पुराण सा बॉक्स लेके aaya...jisme बहुत सी अंगूठियां thi...ab वो क्या थी ये पता nahi...usne मुझे मेरी कही हुई चील वाली अंगूठी निकल के di....maine अंगूठी ली हाथ में और हाथ में लेते hi बड़ा अजीब फील hua....kaano में एक पाल को चील की आवाज सुनाई di...fir और उसकी वजह से अंगूठी मेरे हाथ से निच्चे दिर gayi....Baune ने अंगूठी उठा के वापस mujhe..di...iss बार हाथ में लेने पे कुछ नहीं hua....main उस अंगूठी की अपने पॉकेट में रखा,...

मैं - ये इतनी साड़ी angutiyan...inki फोटो तो नहीं थी वह....

बौना - हां इनकी नहीं thi...main मालिक से इसके बारे में बायत भी करने वाला hu...aakhir इसकी फोटो क्यों नहीं hai...ek तो ये चीज़ें बिकती नहीं है और अब अगर ऐसे hi कोने में राखी रही तो कैसे bikegi...aapko कुछ और भी चाहिए तो बताये...

मैं - अरे नहीं नहीं मैं तो bas...aap पैसे लेलो मुझे भी जाना है...

मैंने ौसे पाय किये और वह से निकल gaya...aur फिर वापस school...waha पंहुचा श दब मिला मुझे...

दब - कहा गए थे भाई tum....kal दिखे नहीं आज भी अभी दिखे ho..aur रूम में भी टाला लगा हुआ था...

मैं - वो main....(maan में) क्या बोलू इसको...

अभी मैं कुछ बोलता उससे पहले वह बुआ आ गयी...

बुआ - Tum...ab ठीक हो naa..tabiyat सही है अब...

मैं - main....haa मैं तो...

दब -(धीरे से) क्या हुआ था बे tujhe...tu हॉस्पिटल गया था kya...yaar बता देता मैं भी आता तेरे साथ...

मैं - वो जल्दी में बस...

बुआ - तुम आओ मेरे केबिन mein...aur ऍफ़ प्रिंस कभी पढ़ाई भी कर लिया karo...Prof. सूरज बुला रहे थे किसी वजह से...

दब - अरे मैं फिर भूल gaya..thanks प्रोफ... मैं जाता हु वर्ण आज मुझे मर hi देंगे..

वो भागता हुआ चला गया वही मैं बुआ के साथ उनके केबिन में...

बुआ - क्या ख़रीदा...

मैं - वो बस एक अंगूठी थी अच्छी लगी तो लेली.....

बुआ - हम्म ठीक hai...aur अब यहाँ थोड़ा सावधान rahna...waise मुझे पड़ना तो नहीं चाहिए इसमें पर बता देती hu....wo पंकज वो तुमसे और तुम्हारे दोस्त को सबक सीखना चाहता hai....ab मेरी बात sunno...jab भी कुछ हो नेक्स्ट time...uske मुँह पे जो ग़ुस्से मरने है तुझे samjha...aankh के nicche...agar नहीं मारा तो तुझे मैं मरूंगी...

मैं - Kya....ye बताने के लिए बुलाया आपने....

बुआ - हां 2 ग़ुस्से याद rakhna...aur हआ दिखा जरा क्या पसंद आया है तुझे मैं भजि तो देखु....

मैं अभी वो अंगूठी दिखने वाला hi था की केबिन में कविता मैडम आ गयी...

कविता - ू तो दोनों बुआ भतीजा साथ में hai...aur प्रतीक कैसी रही छुटियाँ...

मैं - बहुत acchi....main तो हर बार जाऊंगा अब...

बुआ - हां जान यही hoga...nahi गया तो टंगे तोड़ dungi...accha तू जा रूम में हममे मीटिंग में जानहै...

मैं रूम ेमिन आ gaya..anguthi नहीं दिखा पाया...

रूम में आया तो वह फिर से वो गिफ्ट्स dikhe...to उनको खोल के देखने laga....ek फॅमिली फोटो thi...jisme सब the...fir एक अलग फोटो थी जिसमे माँ डैड और मैं the...jab मैं सायद बहुत छोटा था तब की फोटो थी ye....ek बॉक्स था उसमे चची ने कल्हण भर के दिया tha....waha से खा के आया था मैं फिर bhi....saath में एक चिट्ठी भी thi....usko पढ़ा तो पता चला ये खाने का डिब्बा बहुत ज्यादा खास hai....iske रहते हुए मैं हर रोज चची और दादी के हाथ का खाना खा सकता हु....

गिफ्ट्स देखते हुए टाइम बीत गया और फिर जब भूख लगी तो बहार ना जाके रीओम में hi चची के दिए हुए बॉक्स से खाना खा लिया..

फिर वही रात हुई और मैं सो गया...

अज्ज के लिए इतना hi... ट्रैवेलिंग के चक्कर में अपडेट लेट हो गया....

बनने रहिये
 
अपडेट - 18

अब तक

नाना - नानी वापस आ गए the...main भी वह से अब स्कूल आ चूका था और फिर स्कूल से शाम के वक़्त मार्किट गया और वह से वो anguthi....wo चील वाली अंगूठी वो भी ले आया tha....aur फिर अपने रूम में चला गया एक बार बुआ से मिलने के bbaad......uhone कहा था जब भी पंकज से पन्गा हो तो तू पंचेस उसके आँखों के निच्चे जरूर मारु...

अब आगे

मैं बीएड पर लेता और नींद आ गयी थी...

सुबह हुई मैं jaga...aur अपने रूम से बहार गया रेडी होक मेडिटेट करने ko....par जैसे hi मैंने अपने रूम का दरवाजा खोला मैं बुरी तरह से चौंक gaya......main बिलकुल किसी ज्वालामुखी के ऊपर खड़ा था उसके मुँह के pass....uske अंदर लावा tha....uss लावा की गर्मी को मैं महसूस कर पा रहा tha....jaldi से मैं अपने रूम में आने के लिए hua....to रूम hi gayab....abhi मैं हवा में उस लावा के ऊपर खड़ा हुआ tha.....room मेरा गायब हो चूका tha......aur फिर अच्चानक से मैं गिरने laga....fatt के चार हो गयी meri....Main छिलने laga...aur तभी किसी ने मुझे पकड़ लिया और उड़ते हुए कही और ले जाने laga.....ye वही tha...wo cheel...aagg वाले पंखों wala...wo मुझे अपने साथ कही और ले जाने laga.....main उसके पंजो में tha....wo तेज़ी से उड़द रहा tha...maine अपनी आँखें बंद कर ली thi......aur आँखें तब खोली जब वो कही निच्चे उतरने laga....maine देखा वो मुझे सायद अपने घोसले में ले जा रहा tha.....jo उसी ज्वालामुखी के ठीक ऊपर था....

उसने मुझे वह पे रख diya...apne घोसले में और फिर खुद वह से उड़द के चला गया....

मैंने आस पास देखा तो कुछ कंकाल पड़े हुए थे वह pe...aur एक टूटता हुआ anda...jiska साइज मेरे जितना hi hoga....main बढ़ा उसके oor....ki तभी मेरे पीछे से किसी पंछी के चिल्लाने की आवाज आयी और मैं दर gaya...fir वह देखा तो वह वही चील जो मुझे लेके आया था वो hi बैठा हुआ tha....par इस बार इसका साइज छोटा लग रहा था....

मैंने उसको देखा उसने मुझको देखा मैं उसकी ओर badha...wo हिल्ला भी नहीं वैसे hi नंबैठा रहा .....मैं थोड़ा और आगे गया और अपना हाथ उसकी ओर badhaya...to मुझे दिखा की मेरे हजात में वो कल वाली अंगूठी hai....maine उसको पेहेन रखा tha....par कैसे मैंने तो उसको पहना भी नहीं फिर ये कैसे hua.....abhi मैं वो hi देख रहा था की उस चील ने उस अंगूठी पे अपने चोंच से marra...aur वो अंगूठी चमकने lagi......bahut ज्यादा चमकने lagi......fir जो ईगल उसमे बना हुआ tha.....jiske पंख एक तरफ हुए हुए थे वो अलग अलग hue....aur उस अंगूठी se......ek छोटा सा हर्रा जैसा कुछ nikla......aur वो हिर्रा जाके उस चील के सर पे लग gaya.....jiski वजह से वो बहुत चिल्लाने laga....sayad दर्द हो रहा हो usko......haa दर्द hi hoga....wo बहुत ज्यादा चिल्ला रहा tha....main कुछ कर भी नहीं पा रहा tha.....abhi मैं उसको देख रहा था की वह पे और भी चील आने लगे जो की उससे बहुत बड़े बड़े the.....aur ये सारे के सारे एक hi जैसे तो दीखते थे तो पता करना भी मुश्किल था की कोण कोण है....

उन् सब ने उस छोटे से चील को घेर liya....bilkul hi धक् liya....main तो देख भी नहीं पा रहा था usko....pata नहीं क्या कर रहे थे ye....main थोड़ा पीछे हुआ और mera...pair वही पड़े एक कंकाल में फसा और मैं निच्चे गिरने laga....ussi लावा में और वापस से चिल्लाने laga......aankhen खुद बंद हो गयी thi.........ki तभी किसी ने मुझे pakda......ye वही चील था जिसके सर पे वो हर्रा लगा हुआ tha....matlab जिसको सबने घी के रखा था wahi......usne मुझे पकड़ा और फिर मुझे leke...chal diya...wapas ऊपर...

इस बार भी वही उस जगह रख diya....wo ghosla....waha पहुंच के देखा तो सब के सब वही the...aur झुकके हुए थे मेरे saamne....sayad...

मुझे कुछ समझ नहीं aaya.....main अभी उन्हें देख रहा था की वो चील जिसने मुझे अभी बचाया वो आगे आया और वो भी मेरे सामने झुक गया....

मैं (मान में) - बचाया इसने है मुझे तो मुझे और फिर भी झुक्का हुआ hai....ye चल क्या रहा है.....

"आपने मुझे इस काबिल samjha...maine कभी नहीं सोचा था की मैं इस समूह का राजा बनूँगा और आपका प्रधानसेवक...."

मैं यहाँ वह देखने लगा ये कोण bola.....aur जब कंफर्म हो गया की ये कोई और नहीं ये चील hi है तो दिम्माग हिल गया mera.....ye बोल कैसे रहा है...

मैं - तुम बोल सकते हो par,..kaise...

वो - आपने hi तो मुझे बोलने की शक्ति di....shukriya आपका....

मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा tha....wahi वो मुद्दा और वही पे एक चील के पास गया aur...uske चोंच में अपने चोंच से chuwa.....aur उस चील के आँखों से आशु गिरने lage...wahi इस चील के साथ भी hua...sayad दोनों एक दूसरे को जानते ho.....fir कुछ देर बाद दोनों hi मेरे पास आये....

H.Cheel(herre वाला) - ये मेरी माँ hai.....inhone hi आपको बचाया tha....aur आपको यहाँ मेरे पास लायी thi......ye इस कबीले की रक्षक है...

मैं क्या bolta....yaar समझ hi नहीं आ रहा एक तो इतने बड़े बड़े चील सब के बिच में हु और उनमे से एक बात कर रहा है और बाकी सारे nahi....aur अब वही मुझे अपनी माँ से मिला रहा है जिसने मुझे बचाया था.....

मैं - जी सुक्रिया आपने मुझे bachaya...aur सायद आप वही है ना जो उस दिन मुझे और रूपल दीदी को बचने आयी thi....uss आदमी से

मेरी इस बात को सुन के वो हर्रे वाले चील को देखने लगी और सायद कुछ कहा भी उससे....

H.Cheel - नहीं माँ कह रही है वो माँ नहीं थी वो इसी कबीले का कोई और था जिसको माँ ने भेजा था उस din...Maa ने बस आज बचाया है aapko...aur उस दिन आपके हाथ से आग लिया था...

मैं - मतलब उस दिन वह कोई आया था और वो ये थी....

फिर वही हुआ उसने अपने बेटे को देखा फिर बेटे ने मुझे जवाब दिया....

H.cheel - नहीं वो माँ नहीं टी वो मेरे पिता the....jo अब नहीं rahe....apke अंदर बढ़ी हुई उस एनर्जी को अब्सॉर्ब करने में वो चल basse....unke जाने के बाद hi माँ को इस कबीले की रक्षक बनाया गया...

मैं ये सुन के शॉकेड रह गया की इसका पिता मेरी वजह से मारा gaya....wo मेरे लिए आया था वह...

मैं - मुझे माफ़ कर दो मुझे पता नहीं था ये....

H.cheel - माफ़ी मत मांगिये ये उनका काम था और उन्होंने पूरी निस्ता से इसको पूरा किया hai.....aur अब मेरी बारी hai....ab मैं आपके साथ hi रहूँगा hamesha...jab भी आपके ऊपर कोई खतरा हो उसको मुझसे होक जाना होगा....

मैं - नहीं तुम यही rahoge...apni माँ के pass......jab भी मुझे जरुरत पड़ेगी मैं बुला लूंगा tumhe....tum यही raho....apne कबीले का ध्यान रखो और अपनी माँ का भी...

मैं कैसे उसको लेके जाता अपने साथकीटने hi दिन हुए ना उसके पिता को मर्रे हुए और अब उसको भी अपनी माँ से दूर करना ये मुझसे नहीं hoga...maine उसको मन्ना कर diya.....mera उसको मन्ना करना था और मेरी आँखों के सामने बहुत तेज़ रोशनी हुई और उसकी वजह से आखें बंद करनी पड़ी mujhe....aur जब लगा की रोशनी ख़तम हो गयी है ार मैंने आँखें खोली तो main....main अपने रूम में था अपने बीएड pe....pata नहीं यहाँ कैसे आ gaya....main तो अभी कही और tha....kya वो सब सपना tha.....maine अपना हाथ देखा वो अंगूठी अभी भी मेरे हाथ में thi....jiko मैंने पहना नहीं tha....agar वो सपना था जो मैं देख रहा था तो उसमे ंभी अंगूठी मेरे हाथ में tha....aur अब bhi....samajh में कुछ नहीं aaya....main चारो ओर देखने लगा तो एक चीज़ dikha.....mere रूम के दीवारों pe...kuch चमक ा रहा tha....wo सारे पैटर्न्स और ड्रॉइंग्स जो भी बनने हुए थे वह पे वो सब चमक रहे the....ye पहले तो कभी नहीं देखा था maine....main उन्ही सब को देखता raha....aur सोचता रहा वो सपना था या कुछ aur....jab तक बुआ की आवाज नहीं aayi.....bua अभी वह पहुंच गयी थी ध्यान लगाने वाले जगह pe...aur वही से टेलिपाथी के जरिये मुझे बुला रही थी....

बुआ - या बच्चू एक दिन दिन में hi आदत ख़राब कर li....agar मैडम को पता चला तो वो मुझे नहीं ले जाने देगी तुझे घर pe....chal जल्दी से आजा...

मैंने तब जाके घडी देखा तो वक़्त यही कुछ 5 हो रहा tha...main जल्दी से रेडी हुआ और फिर चल दिया वह ध्यान पे बैठने...

वह पंहुचा तो बुआ स्टार्ट कर चुकी थी मैं भी बैठ गया वही pe...aankhen बंद की तो वही मोती दिखाई दिया जो उस चील के ऊपर गया tha....thoodi देर में वो चील भी दिखाई diya....aur मैं दर गया....

चील - मालिक आपने मेरा कोई नाम नहीं diyta...kripya नाम देके मुझे पूर्णतः स्वीकार करे....

मैं - टी क्या वो सब सच था जो भी मैंने देखा....

चील - हां मालिक उतना hi सच जितना अभी आप ध्यान में बैठे हो और मैं आपके नज़रों के सामने hu....ab आप जल्दी से मेरा नाम रख दे....

मैं - मं क्या नाम दू तुम्हारे माता पिता क्या बुलाते है तुम्हे...

चील - वो तो बस बीटा कह के बुलाते है आप नाम दे दे mujhe...main उसी नाम से जानना जाऊंगा...

मैंने उसको एक बार ध्यान से dekha..to उसके पंख से वही आग की लपटे निकल रही थी एयर ये लपटे बहुत ज्यादा thi....baaki सभी से सायद उस हर्रे का असर ho....usko देख बस एक hi नाम समझ मेंआया और वो था ज्वाला.....

मैं - तुम्हारा नाम ज्वाला hai....thik है ना...

चील - जी मालिक ठीक है...

मैं - मालिक नहीं मैं दोस्त हु tumhara....mujhe प्रतीक कहा karo......ab जाओ और जब मैं बुलाओ तो hi आना...

ज्वाला - जी जो आज्ञा...

इतना बोलै उसने और वो चला gaya...aur मेरी आँख भी खुल gayi....Bua का भी हो गया था ध्यान लगाया hua.....waqt देखा तो 8;30 हो रहे the....main बुआ को बोल के जल्दी से रूम में गया रेडी हुआ वह दिंनिंग हॉल जाने के लिए...

मैं रूम से निकलने लगा तो वो किताब दिखी वो अननोन वॉररीओर वाली तो उसको भी ले liya....main वो किताब पढ़ ली थी तो अब दब को वापस भी देना tha...main रूम से निकला और दब के रूम की ओर गयवाहा गया और दरवाजा नॉक किया...

दब ने दरवाजा khola.....wo अभी रेडी हो रहा था मैंने उसको उसका बुक diya...usne मुझे थोड़ा वेट करने को बोलै ताकि हम साथ में जा सक्के मैं भी बैठ गया वाघा फिर वो रेडी हुआ और हम दोनों चल दिए दिंनिंग हॉल में....

दिंनिंग हाल में पहुंचे तो हम दोनों एक जगह बैठ गए खाना leke....maine एक बात नोटिस की बहुत से लोग हमारी ओर देख रहे थे और बातें कर रहे थे....

मैं - दब ये सब क्या हो रहा hai...humme ऐसे क्यों देख रहे है सुब....

दब - अरे ये सब वो पंकज ने हममे धमकी दी थी ना उसी की वजह से hai....hum लोग यहाँ पे बहुत फेमस हो गए ghai.....wo दोनों गधे नज़र नहीं आ रहे है....

दब उन्ही दोनों की बात कर रहा था जो पंकज के बन्दों की पिटाई वाले दिन हमारे साथ the...unse मेरी ज्यादा बात चीत नहीं हुई है नाम भी नहीं पता है मुझे अभी उनका...

दब ने एक बार चारो तरफ देखा वो दोनों कही नहीं dikhe...waqt हो गया तो हम सारे पहुंच गए वह से क्लास के लिए....

प्रोफ. Suraj...ne आज भी पहले थ्योरी की क्लास ली फिर शुरू हुआ प्रक्टिकल्स ka.....Practicals के वक़्त भी हमने दोनों को ढूंढा पर साले मिले hi nahi.....humme लगा दोनों के दोनों कही गए honge.....DB ने भी बताया जकी मेरे साथ वो दोनों भी गायब the...aaj क्लासेज की टीमिंग काम कर दी गयी थी पहले से कुछ और रूटीन भी बदला हुआ था....2 और क्लासेज जो शुरू हुई थी pahli....magical मेडिसिन्स ki.....bole तो जादुई खड़े ki......jiska होड़ पंकज के बाबूजी the...wahi दूसरा क्लॉस था एनिमल स्पिरिट का...

ये दोनों hi क्लासेज अब बुआ के क्लॉस से पहले होनी thi.....to हम सारे भी मुँह उठाये चल diye.....jaduyi कधों की क्लास mein.....jaha आज होड़ जी भी आये the......generally ऐसा नहीं होता tha......1st ईयर और 2ंद ईयर के स्पेशल बैच वालो को सर जी का चहेरा भी देखना नसीब नहीं होता tha......unme तो bas....assistant प्रोफ. hi आते the...aur ये हाल स्पेशल क्लास बैच का tha...normal क्लास में ये जनाब bas....4th ईयर बोले तो लकसत ईयर में hi पहुंचते the....usse पहले nahi...aur आज ये 1सत ईयर के स्पेशल क्लास में आये थे...

सबका ीनंतरोदुक्शन hua...sabne अपने नाम बताये अपनी ब्रीड batayi....aur इसको लेके प्रोफेसर साहब ने सबका मज़ाक भी banaya....wo सबको वही अपने हाफ ब्लड और ेट्स वाले ताने सुन्ना रहे the....ye बता रहे थे पुरे ब्लड hi सबसे काबिल hai..sab ये सुनते रहे...

क्लॉस के नाम पे कुछ नहीं हुआ वह बस वही sab.....aur फिर सबको ग्रुप में बांटा गया मुझे और दवब को इस बार भी साथ रखा गया...

इस क्लास के कम्पलीट होते hi हम चल दिए स्पिरिट एनिमल वाले क्लास mein....ye एक नया सब्जेक्ट tha....aur बहुत hi intresting.....sabse एहम बात तो ये होत्ती है की आप अपने स्पिरिट एनिमल को कैसे और कितना जानते ho....fir उसका और आपका कैसे सम्बन्ध hai....dost है या बनती nahi....agar नहीं बनती तो क्यों नहीं banti....aur उसको कैसे उसे किया जाए खुद को ताकतवर बनाने mein.....generally सब्बके अंदर hi स्पिरिट एनिमल होता hai....par किसी में ज्यादा शक्तिशाली तो किसी में काम shaktishali....kamzoor कोई भी नहीं hota....aur उनके शक्तिशाली होने का या सब कुछ आपको hi देखना होता है...

प्रोफ. नमन यही नाम है इस सजेस्ट के टीचर ka.......ye टाइटन गृह से आये है मतलब देवताओं में से एक माने जाते hai...inke अंडर में 3 और असिस्टेंट प्रोफ. है जो ओरियन और स्ट्रेंज वर्ल्ड से है.....

आज हम सब के स्पिरिट्स को जाना jaayega....to इसके लिए हममे क जादुई सफर के पास जाना है और उसके ऊपर अपना हाथ रखना होगा....

आज के लिए इतना hi

नेक्स्ट अपडेट mein....pankaj से एक और mulakat....saath hi स्पिरिट एनिमल का पता लगाएंगे...
 
अपडेट - 19

अब तक

मैं ज्वाला से milla.....uske कबीले से bhi....aur फिर वापस aaya...fir क्लासेज की... जिसमे आज 2 नयी क्लासेज थी एक जादुई काढ़ा की और एक स्पिरिट एनिमल्स के बारे में थी जिसमे हममे स्पिरिट एनिमल के बारे में बताया जाएगा और साथ हिउँको ककैसे ताकतवर banaye...class में कुछ देर सबको स्पिरिट एनिमल के बारे में बताया गया और फिर हमारे सामने एक सफर रखा गया और कहा गया वही हमें हमारा स्पिरिट एनिमल देगा...

अब आगे

फिर क्या था एक लम्बा सा लाइन लग गया और हम सारे बारी बारी से उसको चुनने lage....kisa का खरगोश तो किसी का saanp....yaa किसी का कुछ और ऐसा hi सब आ रहा tha....fir बारी आयी वो वपमीरे लड़की ki.....wo गयी अपनी आँखें बंद की और फिर उस गोले को chua....uska स्पिरिट एनिमल एक घोडा था Horse...fir 2 लोगो के बाद दब की बारी आयी उसने छुआ तो एक सफ़ेद लोमड़ी aaya....fir बारी आयी meri....main गया और मैंने छुआ तो वह पे एक गोल चीज थी bas....kisi अंडे की तरह... उस सफर के पास खड़े असिस्टेंट प्रोफेसर ने जब उसको dekha....to मुझे वापस से उस सफर को चुने के लिए कहा गया मैंने भी वापस छुआ तो फिर से वही था बस एक अंडा जैसा कुछ tha....usss असिस्टेंट प्रोफेसर न्र ये बात प्रोफ. नमन से कही जो की क्लास में hi थोड़ी दुरी पे बैठे हुए थे...

प्रोफेसर नमन ने भी जब ये सुन्ना तो चौंक गए और मेरे पास aaye...unhone सबसे पहले तो उस स्प्रे को चेक किया फिर मुझे देखने लगे....

नमन - नाम क्या बताया आपने अपना....

मैं - जी प्रोफ. मैं प्रतीक हु...

उन्होंने मुझे अच्छे से देखा....

नमन - अभी तक तुम्हारा स्पिरिट एनिमल बहार नहीं aaya....strange...ye तो बहुत hi रेयर hai....bacche एक बात batao...tumne आज तक कभी मेडिटेट किया है या नहीं....

मैं - जी प्रोफेसर मैं करता हु रोज करता हु....

नमन - हम्म लग तो नहीं रहा क्यूंकि अगर तुम करते तो अभी तक तुम्हारा स्पिरिट एनिमल बड़ा भी हो jaata...par ये तो अभी अपने शैल से भी नहीं निकला है....

अस्सी. प्र्रोफ. 1 - सर इसमें आपको ार भी अजीब नहीं द्दिखा kuch...aap dekhiye...iske स्पिरिट एनिमल के शैल के साइज को और फिर ये इसके आस पास कुछ चमकता हुआ भी तो दिख रहा है....

नमन ने ध्यान से देखा usko...fir किसी गहरे सोंच में चले gaye....wahi अस्सी. प्रोफ. ने मुझे साइड में कर दिया और फिर बाकी के बच्चे हुए लोगो को देखने लगे...

मैं भी साइड में आके सोचने लगा ये क्या अब नया आ gaya....mere मान में था की सायद वो ज्वाला दिखेगा यहाँ पर ये तो कुछ और hi hai,.....matlab एक बात अभी साफ़ हुई ककी ज्वाला कोई एनिमल स्पिरिट नहीं hai...to वो कोण hai....aur ये मेरा एनिमल स्पिरिट कोण है जो अब तक अपने शैल से बहार hi नहीं आया hai....main ये सब सोच रहा था वही प्रोफ. नमन अलग कुछ सोचे जा रहे the....aur इसी बिच में सभी के एनिमल स्पिरिट्स का पता चल gaya....mujhe भी उन् लोगो ने बुला लिया और फिर कुछ टिप्स सबको बताये गए की कैसे खुद के स्पिरिट एनिमल को तैयार करे उन्हें मजबूत banaye....saath में ये भी की आपका एलिमेंट और आपका स्पिरिट एनिमल दोनों hi कनेक्टेड होते है एक बिलकुल hi पतली से धागे se....aur हममे मेडिटेट कर कर के उस धागे को मजबूत करना hai...itna की कनेक्शन स्ट्रांग ho....aur जब ऐसा होगा तो हम दोनों को एक साथ मिला के भी उसे कर सकते है जैसे में दब का एक्साम्प्ले लिया gaya...uske पास नेचर का एलिमेंट था और स्पीरिट एनिमल वाइट wolf....agar दोनों को hi अच्छे से कनेक्ट किया जाए तो वो वाइट वुल्फ बहुत hi यदा ताकतवर हो jaayega....par दोनों को कनेक्ट करना बहुत hi ज्यादा मुश्किल है...

फिर क्या क्लास ख़तम हो गयी सभी जाने लगे पर मुझे रोक लिया gaya....main वैसे भी बात करने वाला था नमन सर se....mujhe लगा सायद ये शील्ड वाली बात उनको बताऊँ तो वो कुछ और मदद कर sake.....mujhe अभी तक मेरा एलिमेंट तक पता नहीं चला था...

बस फिर क्या था मुझे रुकने को बोलै hi था तो मैं भी रुक gaya...aur फिर नमन सर मुझे अपने केबिन में ले gaye....badi ठण्ड थी उनके केबिन mein...aisa लग रहा था जैसे बर्फ पड़ी हो अभी अभी....

नमन - हां to...kya नाम बताया था तुमने अपना...

मैं प्रतीक...

नमन - हां तो प्रतीक एक baatbatao.....element कोण सी है तुम्हारी....

मैं - नहीं पपता प्रोफ.

मेरे ऐसा बोलने पे उनका मुँह खुला रह gaya....wo मुझे घूरते हुए बोले...

नमन - नहीं पपता से क्या matlab...kya तुममे कोई p[owr नहीं है और तुम यहाँ पे हो...

मैं - नहीं प्रोफ. ऐसी बात नहीं है मैं मैजिक कर सकता हु और अभी मैं एक टेस्टिंग शील्ड उसे कर रहा हु प्रोफ. सूरज के कहने पे...

नामा - हम्म सायद ये एक कारण ho...par ऐसा पहले ना तो मैंने कही देखा है और सायद सुन्ना भी नहीं की इतने बड़े होने के बाद भी ना तो एलिमेंट का पता हो और ना hi स्पिरिट एनिमल ka....waise तो ये एनिमल स्पिरिट का सब्जेक्ट पहले गुप्त रखा गया tha...ab जब जाके सबको जरुरत पड़ी है इसकी तब ये सबके लिए खुली hai...lekin एनिमल स्पिरिट्स हटी जुरूर थी पहले भी सभी में यहाँ तक की इंसानो में bhi...par तुममे नहीं है...

मुझे समझ नहीं आ रहा था ये ताना मार रहे है समझा रहे है या दिलासा दे रहे है मैं बस हां हां करता रहा....

नमन - वैसे एक दो बातें ऐसी है की उनको देख मैं थोड़ा कंफ्यूज hu...jaise वो एग का size...aur वो शैल के ऊपर चमकता हुआ wo.....sayad मैं जो अब कहूंगा वो समझ में ना आये तुम्हे...

मैं (मान में) अभी तक वैसे भी ज्यादा कुछ समझ में नहीं आ रहा है...

नमन - चलो अपना हाथ आगे करो......

मैंने भी अपना हाथ आगे किया aur....usko नमन ने पकड़ा और अपना अंगूठा मेरी कलाई के बिच में रख कर उसको प्रेस करने laga...mujhe थोड़ा दर्द हो रहा था मैंने जब उसकी ओर देखा तो उसकी आँखें बंद थी और वो कुछ बड़बड़ा रहा tha......main उसको hi देखता रहा और फिर अच्चानक से उसके चेहरे पे कुछ परेशानी दिखी और फिर तुरंत hi मुस्कान फैल गयी..... उन्होंने मेरा हाथ छोड़ा...

नमन - वाह मैं सही tha...tum कोई आम बच्चे नहीं ho...jitna डार्क उतना hi bright...jao tum..aaram karo....main तुम्हे कल क्लास में मिलूंगा....

मेरे को कुछ समझ में नहीं आया ये अभी कर क्या रहे थे और फिर अच्चानक से ये "जितना डार्क उतना ब्राइट" ये क्या होता hai...aur अब तुरंत यहाँ से जाने को कह दिया....

मैं अब क्या कुछ पूछता उन्होंने तो मुझे गेट तक छोड़ा और फिर गेट के बहार भेज दरवाजा भी बंद कर दिया...

मैं भी नेक्स्ट क्लास में जाने लगा पर ग्राउंड से होक hi जाना था न तो ग्राउंड में पंहुचा तो वह का सन देख मैं दांग रह gaya...mere क्लास के सारे बन्दे वही पे the...aur वो किसी चीज़ को देखे जा रहे the...main भी गया देखने तो वह पे दब उन् दोनों को चपड़ मार मार के सायद जगा रहा tha....ye वही थे जिन्हे हम धुंध रहे थे दिन भर se....wo उन् दोनों को hi मारे जा रहा था...

मैं - दब क्या कर रहा hai...yaar छोड़ उनको क्यों मार रहा है....

दब - अब्बे इनके आँख dekh....bilkul लाल hai.....ye पता नहीं कहा से यहाँ आ gaye...aur यही पे पड़े हुए the.....inko जल्दी से होश में लाना hai....abbe तुम सब को समझ में नहीं आ रहा इनको जगाओ वर्ण ये....

वैसे तो इस दब की बाटें अजीब थी par....wo वैम्पायर लड़की वो भी वह उनके पास गयी और उन् दोनों में से एक को पकड़ के मारने लगी...

अभी ये सब हो hi रहा था की बुआ वह आ gayi....bua क्लास में सबका वेट कर रही thi....aur क्लास में कोई गया और उनको यहाँ के बारे में bataya....Bua ने आते hi देखा की इन् दोनों पे सायद किसी चीज़ का असर हुआ hai....usne तुतरंत hi कविता मैडम को वह बलाया और उनको लेके जाने क kaha....wo दोनों चले गए वह से...

बुआ - एल्फ prince.....kya हुआ था यहाँ बताओ....

दब - मैडम हम सब आपके क्लास में जा रहे the....ki तभी मुझे ये दोनों यहाँ जमीं पे पड़े हुए mille....par ये दोनों यहाँ नहीं थे pahle....hum पाहे भी इस जगह से आ जा चुके है आज hi...par तब तक ये नहीं थे yaha...par इस बार ये the....aur जब हम इनके पास आये तो मैंने देखा इनकी आँखें बिलकुल hi लकाल हो राखी थी....

इतना बोल के वो चुप हो gaya....aur बुआ ने भी उसको आँखों से कुछ इशारा kiya...aur दब ने इशारे से पहले तो 3 अंगुलियां दिखाई और fir.....haa में धीरे से सर hilaya......ye सब मैंने और उन् वैम्पायर लड़की ने भी देखा tha....uss वैम्पायर लड़की को पता नहीं क्या हुआ की wo..turant hi वह से चली gayi.....wahi बुआ भी क्लास ऑफ का कह के वह से चली जाती है....

दब - ुये तू चल रहा है उनको देखने....

मैं - हां मैं चलता हु

हम दोनों वह गए और देखा वह पे वो वैम्पायर लड़की पहले से thi......uske होंठों पे खून लगा हुआ tha...main उसको hi देखता raha...aur फिर देखते hi देखते वो लड़की बेहोश हो जाती hai....hum दोनों अभी मेडिकल डिपार्टमेंट में hi थे तो कविता मैडम ने तुरंत hi उसको बीएड पे उठा के rakha....hum दोनों ये सब देख hi रहे थे की वह पे बुआ बहार आती है उसी रूम se...jis रूम में वो दोनों को रखा गया था....

बुआ - कविता वो दोनों ठीक hai....(ladki को देख) निकिता को क्या हुआ..

उस वैम्पायर लड़की का नाम निकिता है....

कविता - यार इसने उन् दोनों का खून पूरीफी किया hai...isse थोड़ी कमज़ोरी हुई है isko....par ठीक हो जायेगी तुरंत...

बुआ - टुन्ने इसको क्यों जाने diya...dimmag सही है ना तेरा

कविता - यार ये ये सब जानती है ये अक्सर मेरे पास आया करती थी और इन्ही सब के बारे में बात किया करती thi....isko सारे बेसिक्स पता है और इसके a;lawa अभी कोई था नहीं यहाँ पे जो मेरी हेल्प karta....help आने में वक़्त लग्न था और तब तक सायद इन् दोनों की हालत बहुत ख़राब हो जाट...

बुआ - हम्म ठीक hai...par इसके लिए निकिता को इनाम milega...aur तुम दब तुम्हे bhi....agar उस वक़्त तुम नहीं ध्यान देते दोनों पे और इनको जगाये रखने की कोशिश नहीं करते तो दिक्कत हो जाती....

दब - अरे नहीं मैडम ये दोनों तो दोस्त है mere.....waise ये पता चला कब दिया गया था ये और कैसे...

बुआ - उसी चिंता तुम मत करो एल्फ प्रिंस वो अब मैं देखूंगी और तुम्हे याकि दिलाती हु जिसने भी ये किया है उसको सज़्ज़ा मिलेगी hi...

थोड़ी देर और बातें हुई और फिर निकिता को भी होश आ gaya....Maine और दब ने उसको थैंक्स बोलै हमारे दोस्त को बच्चन के लिए तो वो ऐटिटूड दिखते हुए ये बोल के निकल ली की ये तो उसका फ़र्ज़ था...

हम दोनों उन् दोनों के पास गए और उनसे बातें करने लगे पर दोनों साले अभी भी जैसे नशे में हो उस तरह से बात कर रहे the...Bua वह आती है और हम दोनों को बहार जाने को कहती है...

बुआ - आज तो स्पिरिट एनिमल का पता लग्न था ना क्या निकला तुम दोनों का....

दब ने अपना बताया मैंने भी अपना bataya.....aur मेरा सुन के बुआ को बहुत बुरा laga....arre पहले एलिमेंट नहीं मिला और अब स्पिरिट एनिमल भी नहीं...

हम दोनों वह से निकल आये और अपने रूम में चले gaye......main रूम में जा hi रहा था की दब ने मुझे अपने रूम में बुला liy...kam होगा मैं गया तो ऊके हाथ में एक चिठ्ठी थी...

चिठ्ठी - अभी बस डेमो दिया hai.....agar बार बार सामने आये तो समझ रहे हो naa...plan तो तेरे तिण्णो साथियों का था पर वो तीसरा मिला nahi....warna तिण्णो को देखता तू...

सायद उस चिठ्ठी में तीसरा साथी से मतलब मेरा था...

दब - देख रहा hai...kya लगता है कोण होगा ये...

मैं - पंकज

दब - हां वही hoga...ab इसने पन्गा ले लिया है अब तो जवाब भी देना hi hoga....raat को milna....aaj चलते है सीनियर्स के pass...sun तू अपना शिलेदभी ले आना...

मैं - हम्म ठीक है

आज का यही तक रखते है नेक्स्ट अपडेट m,ein एक छोटा सा फाइट जिसमे कुछ होगा जिसके बाद एलिमेंट भी आएगा और ये अंडे का रज़ज़ भी खुलेगा.....

वैसे क्या लगता है क्या होगा अंडे में..

हिंट्स - ड्रैगन , गोरिला, पांडा, लायन

बताना सब :बात:
 
अपडेट -20

अब तक

स्पिरिट एनिमल के नाम पे एक बड़ा सा अंडा मिला जो चमक रहा tha...Prof.Naman भी अजीब सी बातें करने लगे ki..jinta डार्क है उतना hi bright...wahi बुआ के क्लास में जाते वक़्त दब को देखा वो हमारे hi शक्तियों को पिटे जा रहा tha....par बाद में पता चला वो तो बच्चा रहा था unko...Tabhi वह बुआ आती है और उन्दोनो को वह से स्कूल के हॉस्पिटल में ले जाती hai....jaaha पे वो वैम्पायर लड़की जिसका नाम निकिता होता है वो हेल्प करती है उनको बचने mein.,....bahar आते वक़्त बुआ मुझसे पूछती है मेरे स्पिरिट एनिमल के बारे में और जब मैं उन्हें ांडे के बारे में बताता हु तो वो निराश हो जाती hai....jab मैं और दब वह से रूम की ओर आते है तो हममे एक लेटर मिलती है और उससे हममे लगता है ये लेटर जरूर पंकज ने hi भेजी hogi...aur हम तय करते है आज रात उससे मिलने का...

अब आगे

रात का वक़्त...

मैं और दब दोनों ने hi जल्दी खाना खाया और अपने रूम में आ गए उस वक़्त का इंतज़ार करने लगे की कब सनता हो और हम nikle....aur पता नहीं कैसे आज ये सनता जल्दी हो गया kuch...main और वो दोनों निकल pade..Seniors के पास जाने के लिए par...wo पहले से hi हमारा वेट कर रहे थे हमारी hi जागा pe/....unme से एक ने हममे तालाब के पसस चलने को kaha....humme तो वैसे बभी बात करनी hi thi....DB ने तो सोच लिया था पन्गा लेना hai....par मैंने सोचा एक बार बात करके देख लेते hai...mere बहुत मानाने पे वो माना tha....to हम दोनों भी उन् चमचो के चाट चल दिए तालाब के pass.....waha गए तो पंकज एक चेयर पे बैठा था और तालाब की ओर देख रहा था...

हम दोनों गए और कुछ बोलते उससे पहले hi पंकज ने जादू से 2 चेयर्स वह पे मंगवा li....aur हम दोनों को बैठने बोलै....

दब - हम बैठने नहीं आये है हहम यहाँ बात करने आये है...

पंकज - कुर्सी मुँह में डालने को नहीं दी है बईठब के बात करते है इस्सलिये दी hai...arre बैठो यार dekho...kitna सुन्दर लग रहा है ये talab...isko देखते हुए बातें करते है...

दब ने मेरी ओर देखा मैंने भी उसको हां में इसरा किया और हम दोनों बैठ gaye...aur इसी के साथ उनका गेम सुरु हुआ.....

हम कुछ सोचते भी उससे पहले hi हमारे हाथ बंद gaye...aur हम दोनों hi वह ोपे किसी पिंजरे जैसे चीज़ में बंद हो gaye....ar कुछ hi सेकण्ड्स में वो किसी हगस से भर भी gaya....ye जो भी था बहुत hi जल्दी हुआ tha....itna भी टाइम नहीं मिला मुझे की मैं ज्वाला को बुल्ला सकू....

वो गैस मेरे साँसों से खून में मिलने लगा और पालक झपकते hi मेरी आँखें बंद हो गयी.....

आँखें खुली तो मैं कही और tha...ajeeb सी jagah...ek तरफ बर्फ thi...to एक तरफ सिर्फ और सिर्फ hariyaali...aur main...main जिस जगह खड़ा था वह कुछ भी नहीं tha...saamne मेरे सूरज चमक रहा tha...Maine एक बार वापस चारो ओर dekha....koi नहीं था वह pe...main सोचने लगा साला कहा पे आ gaya...mar मुरा तो नहीं गया ना इतनी jaldi....abhi कल hi तो फॅमिली मिल्ली है और इतनी jaldi...mujhe बड़ा अजीब सा लगने laga...sab खू गया हो मेरा वैसे kuch....Dil भरी सा ओने लगा मेरा....

तभी पता नहीं कहा से आवाज आयी एक...

"बच्चे तुम यहाँ क्या कर रहे हो..." ....माने यहाँ वह देखा कोई नहीं था फिर ये आवाज....

स्कूल में जब पढता था तो सुन्ना था जब अकेले रहो बिलकुल अकेले तो दिम्माग तुम्हे तरह तरह की आवाजों सुनाई देने का अहसास करता hai...sayad ये वही tha...aisa मुझे laga....ye भी सुन्ना था इससे बचने के लिए अपने मान को शांत करो दिम्माग को शांत karo...aur मैं दिम्माग शांत करने का एक hi तरीका तो जानता था जो मास्टर ने बचपन से hi सिखाया tha....Meditation...to मैं बैठ गया और मेडिटेट करने लगा....

"बच्चे तुम यहाँ क्या कर रहे हो" एक बार वापस वही आवाज पर इस बार ये कोई औरत थी sayad....Maine ध्यान नहीं दिया और बस लगा raha....kuch hi तो वक़्त बीता था की ऐसा लगने लगा जैसे कोई चीज़ मेरे अंदर चली जा रही ho....pata नहीं kya....kisi ताकत के आने का आभाष हो रहा था मुझे अपने amder....par क्या था ये ये नहीं पता tha....maine अपनी आँखें kholo....aur जब आस पास देखा तो 2 बड़ी बड़ी आँखें dikhi...ek हरियाली वाले साइड और एक बर्फ वाले side.....badi बड़ी लाल aankhen......mujhe डरने के लिए काफी थी ये...

और जब उन् आँखों में से कुछ मेरे अंदर आता दिखा तब तो दर की सीमा hi नहीं rahi....main हिलने को हुआ पर हिल ना सका....

थोड़ी देर बाद मेरे सामने कही से कोई बड़ा सा अंडा आ gaya...aur वो आँखें वो गायब हो गयी...

मैं उसी को देखने लगा एक सुनहरा anda....ye बिलकुल उसी तरह का था जैसा मैंने अपने स्पिरिट एनिमल को देखते हुए देखा tha....Jigyasha थी तो उसको चुनने के लिए हाथ badhaya...aur हाथ बढ़ाते hi वो हिलने laga...Maine अपना हाथ पीछे ले liya...par वो अंडा हिलता hi raha...fir उसमे से दरार आने की kadddd...kaddddd की आवाजें भी आने लगी......

मैं उसको ध्यान से देखता raha....abhi आवाजें hi आ रही थी की तभी उसमे से एक पंजा nikla...chota सा panja...par नाख़ून ते usme...nukile naakhun...main देख रहा था usko.....ki दूसरी ओर से भी एक पंजा nikla....ye भी वैसा hi tha....bas रंग में थोड़ा सा अंतर tha.....aur इसके बाद सीधा उस अंडे का सिर्रा टूटा और मेरे सामने एक सर tha...ek ड्रैगन का sar....jiski बड़ी बड़ी आँखें thi...dekhne में बड़ा hi प्यारा लग रहा tha....waise भी किसी भी बच्चे हमेसा प्यारे hi लगते है उसी तरह से ये भी लगा....

वो अपना सार यह वह गम्मा रहा था की वो अनंदा hi पलट gaya...matlab लुढ़क गया और वो ड्रैगन का बच्चा निच्चे गिर gaya...kuch चिपकिपपा सा लगा हुआ था उसके upar....Ab वो गिर्रा तो मैं उसके नज़दीक जाने को हुआ उसको उठाने के liye...Main उसकी पुअर अपना हाथ बढ़ा hi रहा था की उसी अंण्डे में एक और जगह से टूटने की आवाज आयी और एक और सर बहार निकला दोनों hi सर एक दूसरे से अलग थे....

मैं उसको देखने laga...sayad ये एक नहीं 2 hai....par क्या एक अंण्डे से कभी 2 बच्चे निकलते hai....phir लगा ड्रैगन है हो भी सकता है...

मैं आगे बढ़ने लगा तो देखा वो जो गिर गया था अब वो भी उत् गया एयर दोनों hi ांडे के बहार aaye....Bacche थे ये दोनों पर मेरे से बस आधे साइज के the...Dragon के बच्चे साइज तो बड़ा होना hi था...

मैंने देखा वो दोनों एक दूसरे को साफ़ करने lage....wo जो चिपचिपा सा कुछ लगा था उसको साफ़ करने lage....aur ऐसा करते हुए hi उनकी नज़र मेरी ओर gayi....unn दोनों ने पहले तो अपना सार यहाँ वह करके देखा आस पास कोई और है या नहीं या सायद कुछ और देख रहे हो wo...fir मेरिओर पेअर बढ़ाया और लुढ़क gaye...chalna नहीं आ रहा होगा...

वो गिर्री तो मैं उनके पास गया देखने ko....unko uthaya...bhari hi थे दोनों के dono....Jab मैं उनको उठा रहा था तो उनमे से किसी एक ने अपने पंजे को मेरे सीने पे रखा सायद सहेरा लेने के liye...par वो गायब हो gaya...main देखने लगा कहा गया wo...par उतने hi वक़्त में उस दूसरे वाले ने भी वैसा hi किया और वो भी गायब...

2 मिनट पहले मेरे सामने 2 डटरागों के बच्चे एक अंण्डे से nikle...aur ab...acchanak से गायब...

मैं यहाँ वह देखने लगा तो कुछ नहीं milla....bas वापस से वो hi आवाज आयी...

"बच्चे तुम यहाँ क्या कर रहे हो..."

मैं - कोण hai...aur वो ड्रैगन्स कहा gaye...kon है..

"ड्रैगन्स वो तो अपने जगह पे चले gaye.....ab तुम्हे भी जाना है..."

मैं कुछ पूछता और उससे पहले hi मैं वापस se...ussi चेयर पे बैठा tha...saamen दब था मेरे जो बेहोश हो चूका tha.....aur बाकी के वो पंकज और दूसरे लोग थे जो हिस्से जा रहे थे.,....

उनका हसना मुझे गुस्सा दिला रहा tha...aur ऊपर से वो साड़ी ghatnaye...dragon.....baccha उनका गायब hona....saar दर्द करने लगा mera....Maine गुस्से में अपना हाथ ऊपर किया और वो chair...wo टूट gaya...wahi जो बहार बैठे लड़के है रहे थे उनकी भी नज़र मेरे ऊपर गयी...

ा2 - ाब्बे ये ये साला खड़ा कैसे hua...abhiu तक टन इस ड्रग को इसको बेहोश कर देना था...

ा5 - अरे देख ये तो ये तो सीसे को भी मार रहा hai...arre शीशा टूटने वाला hai...ye हो जकया रहा है...

पंकज जो इन् सब से अनजान हमारे hi बगल में बैठा सामे तालाब को देखे जा रहा tha....wo साला बस देखे जा रहा था सायद सू गया hoga...aawaj तो सुनाई देनी थी ना उसको पर वो भी नहीं सुनाई दी उसको...

मैंने उस सिस्सू को toda...aur फिर वह से बहार aaya...aur सबसे पहले तो एक पंच में hi वो सामने वाला सीसा जिसमे दब बंद था उसको toda...taaki वो गैस और ज्यादा ना जाए उसके अंदर...

अब जाके उस पंकज को आवाज आयी और वो मेरी ओर देखने लगा...

पंकज - साले तू बच कैसे गया isse....mere बाप का बनाया बहुत hi अच्छा काढ़ा था ye..isske धुंए के अंदर जाते hi इंसान कमज़ोर होने लगता है उसकी पावर्स जाने लगती है पर तू...

वो बोले जा रहा था मैं वही दब का हाथ खुल रहा था....

पंकज - अब्बे देख क्या रहे हो पकड़ो isko.....saale को जाने नहीं देना है...

उनमे से कुछ लोग आये मेरे pass....main लगा रहा दब का हाथ खोलने mein....wo आये और उनसे मेरी शर्ट फात gayi....main ऊपर से बिलकुल नग्न हो gaya....waise तो दुबला पतला था main....par वो लोग मुझे ऐसे देखे जा रहे थे जैसे मैं कोई अजूबा hu....pata नहीं कमीनो के क्या इरादे the...aise कोण देखता है लड़के को...

मैं खड़ा हुआ और जाके एक हाथ मारा उनमे से एक ko...maara तो थपड था पर उसके गाल पे निशान किसी के पंजो के लगने के थे...

उसकी छूट को देख वह पे सभी लोग अपने हाथों को आगे करके थोड़ा chillaye...aur उनकी बॉडी कुछ कुछ बदल सी gayi...ye तरीका था अपने स्पिरिट एनिमल को बुलाने का...

पंकज - साले तू हमपे अपने स्पिरिट कजोर दिखा रहा hai....tu देखता जा इसको भी आज hi ख़तम करूँगा...

मैं (मान में ) मेरे पास कब से आया ये स्पिरिट एनिमल आज तक तो वही अंडा hi था...

मैं सोच रहा था की उनमे से एक आया और मुझे मारने लगा की मैंने दौच किया और उससे बच गया और के मुक्का उसके पेट पे diya....wo बहुत पीछे तकल gaya....slide करते hue......Sab उसको देखने लगे मैं खुद भी उसी को देख रहा था...

ा4- टुन्ने ुये कैसे kiya...arre उसके पास गोरिला की स्पिरिट है वो भी 3रद लेवल ki....ye कैसे हो सकता है...

मैं क्या जानू कैसे हुआ मुझे तो ये तक पता नहीं था की स्पिरिट एनिमल्स के भी लेवल होते hai....maine तो बस एक पंच मारा था..

अब फिर क्या था वही मूवीज की तरह वो सब आते और मुझे मारने लगते पर मैं hi उनको धोये जा रहा tha....waise वो लोग भी चूतिये hi the...jaadu कर लेते पर nahi...mere लिए तो ाचा hi था ये sab...Haa एलिमेंट्स का उसे किया था उन् लोगो ने पर कुछ असर नहीं हुआ मुझपे...

सारे के सारे जम्मीं पर थे वो पंकज bhi.....wo भी तो आया था मुझे मारने के liye...flying kick...maine उसके पैरों को hi पकड़ लिया और घुम्मा के फेक दिया दूसरी oor.....uski स्पीड बहुत स्लो लगी mujhe....uski hi नहीं सभी की स्पीड स्लो thi...aisa लग रहा था जैसे मैं स्लो मोशन में सब देख रहा हु....

हां तो सबको गिर्रा के मैं जाने को hua...DB के पास पंहुचा उसको जगाने लगा पर इसको कोई होश hi नहीं tha...uss चीज़ का असर होगा....

मैं - अब क्या करू...

"मैं करती hu...par उसके बाद ये बताना की ये सब कैसे किया और ye...ye बॉडी को क्या हुआ tumhare....ek hi दिन mein...nahi नहीं 4 घंटे में कोण सा काम कर लिया की इतनी अच्छी बॉडी हो गयी है..."

मैंने मुद के देखा तो वह पे निकिता कड़ी thi....Main जो अभी बिन्ना शर्ट के खड़ा था वो अपंने हाथों से अपने बदन को ढकने लगा...

मैं- तुम yaha,,,,,,iss वक़्ती क्या कर रही हो...

निकिता (हस्ते हुए) - अभी 10 hi तो बजे है मैं कविता मैडम के यहाँ से आ रही थी और तुम्हे लड़ते dekha...waise ये जो हाथों से अपने इस खूबसूरत जसीम को चिप्पा रहे हो naa....band करो बड़े hi अजीब लग रहे ho.....aur साइड हटो इसको मैं ठीक करती हु......

मैं साइड hua....wahi पे पड़े एक लड़के की शर्ट ली और उसको पेहेन liya....aaccha नहीं लग रहा था mujhe....not कम्फर्टेबले

मैं जब ये सब कर रहा था तब तक निकिता ने अपना काम कर दिया tha...usne वो gas...jo की ज्यादा मात्रा में नहीं गयी थी अभी दब के अंदर उसको उसके शरीर से चूष के निकल लिया....

दब अभी भी बेहोश था....

मैं - ये कब तक होश में आएगा...

निकिता - जब तक तुम ये ना बताओ यहाँ कुया हुआ था और ये सब है क्या...

मैंने उसको बताया उस लेटर के बारे में फिर हमारा यहाँ आना फिर ये सब hona....wo anda...Dragon वो सब नहीं बताया क्यूंकि खुद मेरे समझ में नहीं आ रहा था वो सब...

निकिता - दोनों के दोनों hi अकाल से पैदल हो na....tum दोनों 8;30 में रूम से nikle...kabhi किसी और दिन उस वक़्त सन्नाटा देखा hai,.....kuch सक नहीं hua...aur यहाँ आना जरुरी था kya...baat कर लेते किसी प्रोफ. से पर नहीं दोनों के दोनों hi...

मैं - वो हम दोनों ने सोचा नहीं tha...waise तुम के कर रही थी कविता मैडम के साथ...

निकिता- Main...main तो अक्सर जाती हु उनके pass....unse सिखने के liye....chalo अब लेट हो रहा है मैं चलती हु कल क्लास hai....waise इनका क्या करोगे...

मैं - क्या karu...saare बेहोश है छोड़ देते है यही pe....kal उठेंगे और चले जाएंगे.,..

निकिता - ये हजानते हुए भी की इन्ही सब ने तुम्हारे दोस्तों के साथ वो सब kiya...aise hi जाने डोज...

मैं सोचबने लगा बात तो सही है ऐसे कैसे जाने du...koi निशानी तो बनती hai....tab जाके सालों को कला आएगी....

मैं - हम्म करता हु मैं कुछ तुम jaao...aur हां थैंक्स वापस से हमारी मदद करने के लिए...

निकिता - कोई बात नहीं bye...

इतना बोल वो चली gayi...wahi मेरे चेहरे पे एक स्माइल आ gayi...maine अपनी तलवार को निकला जो मैं लेके आया tha...aur उससे उन् सभी के शरीर pe...alag अलग तरह के निशान बनना diye...unke हाथजों पे उनके गर्दन pe.....sambhal के की कही मर मुर्रा ना जाए...

ये सब करने के बाद मैं वह से दब को लेके जाने laga.....Hosh नहीं आया था usko..Nikita ने गलत बताया था....

उसको उसके रूम ेमिन छोड़ मैं अपने रूम में आ gaya...aur फिर फ्रेश हुआ और सोने की तैयारी करने लगा...

मैं भी सायद पागल hu...wo ड्रैगन के बच्चे वो लड़ायी सब कुछ दिम्माग से निकल के ये दिम्माग में बसा liya...ki कल कितना मज़्ज़ा aayega..jab वो सब जागेंगे...

चलिए आज का यही तक रखते है मिलते है नेक्स्ट अपडेट में...

Dekhenge...aaj जो किया उसका परिणाम क्या hoga...saath में कोई और भी आने वाला है जिसकी आवाज है बस बॉडी nahi...aur देखेंगे क्लास में क्या क्या होता है......

बनने रहिये
 
अपडेट - 21

अब तक

रात को बहुत कुछ hua....wo anda....dragons के bacche....Pankaj और उसके साथियों की pitayi....aur भी बहुत कुछ...

अब आगे

रूम में आया और सो गया main.......aur बीएड का तो पता hai....jaise hi इस्पे जाओ दिम्माग खली hi कर देता है ye....bas वही हुआ tha....main आराम से घोड़े बेच के सो गया था....

मेरी आँखें किसी चीज़ के मुझे घसीटने से khulli....aur जब खुली तो खुली की खुली hi रह गयी....

मैं घास पे लेता हुआ था और वो ड्रैगन के बच्चे मुझे खींचते हुए कही लेके जा रहे the...ab ऐसे में कोई जागे तो चिल्लायेगा hi ना मैं भी चिल्लाया और मेरे चिलकलते hi वो पूरी jagah...jo अभी घास से भरी हुई थी वो बिलकुल काली हो गयी ऐसा मानो वह पे कुछ था hi नहीं pahle...bas अँधेरा hi andhera....aur उसी अँधेरे में 4 चमकती हुई आँखें दिखी मुझे....

मैं - कोण hai...kon है waha....koi hai....koi है यहाँ...

कोई जवाब नहीं आया बल्कि वो जो चार आँखें थी वो मेरे और पास आने lagi....main पीछे की ओर होता gaya....ab अगर रोशनी होती तो पता चलता कोण है वह और उनसे लड़ा भी जा सकता था पर अभी कुछ समझ में hi नहीं आ रहा tha....sayad दर सवार हो गया था मेरे सार पे तभी तो मैजिक आते हुए भी उसे नहीं कर रहा था main.....uss बेसिक ऑफ़ मैजिक वाले किताब से इतना कुछ तो आ hi गया था की अँधेरे कमरे में आग jalana....par...nahi दार hi था बस मेरे दिम्माग में उस waqt.....aur इसी दार की वजह से मेरे मुँह से ज्वाला का नाम निकला...

मैं - Jwala....jwala....

मेरा बोलना था की वह पे पूरी तरह लाइट आ gayi...par ज्वाला नहीं आया tha...bas सब दिखने लगा tha....maine सामने देखा तो वही दो ड्रैगन्स के बच्चे थे वह पे....

मैं गया उनके pass....unko देखने laga...haa ये वही दोनों थे जो कल गायब हुए थे मुझे चुनने के बाद और अभी बह शामे साइज के दिख रहे थे...

मैं - कोण हो तुम दोनों और ये जगह कोण सी है....

"बीटा वो ड्रैगन्स है और वो भी बच्चे अभी नहीं बोलेंगे वो...."

एक आवाज आयी मेरे पीछे se...main जल्दी से पीछे mudda...koi नहीं था वह पे....

"क्या हुआ किसको ढूंढ रहे हो..."

मैं - कोण hai...kon बोल रहा है...

"मैं बोल रहा हु..."

मैं -कोण मैं ...नाम बताओ apna...warna main...main...

"अरे बाप re.....warna क्या कर loge...meri भी बॉडी पे निशान बना doge....isse घटिया सज़्ज़ा नहीं देखि थी maine...arre कुछ क्रिएटिव karte....par नहीं ऐसे निशान बनाये है जो sayad...ek दिन भी ना chale,.....haaye किसको मेरे गल्ले दाल दिया रे..."

मैं - कोण हो तुम और दीखते क्यों नहीं मुझे....

"कोण हु main...hmm ये तो तुम बताओगे naa...chalo एक नाम dedo...aur मैं उसी नाम से जानना jaaunga....par हां ध्यान रहे अच्छा नाम होना चाहिए..."

मैं - मैं भला क्यों नाम दू tumhe...aur तुम आये कहा से ho,...kya वह कोई नाम नहीं था tumhara,....aur ये जगह कोण सी है...

"एक hi बार में सब पूछ lo....main तो यही करने आया हु ना सब सवालों के जवाब dene....to sunno...Main कहा से आया hu...to वो अंडा जिससे यर दोनों चुटकु निकले है ना उसी के अंदर से मैं भी आया hu....yaar क्या bataun...kab से हम तिण्णो को कैद कर के रखा था ...ईटा लम्बा वक़्त कभी कभी तो ऐसा लगता की अब बस यही रहना hi hai...wo दोनों चुटकु तो सट्टे रहते और मैं अकेला ऐसे hi रहता waha...samajh नहीं ायता था क्या karu...kaise वक़्त गुजरू...."

मैं - ांडे से आये हो तुम भी...

"हआ बोलै तो अभी एक बार में सुणाई नहीं देता क्या..."

मैं - ये जगह कोण सी है और तुम तिण्णो यहाँ कैसे और मैं कैसे पंहुचा यहाँ पे...

"तुम्हे नहीं पता कोण सी जगह है ye....dhyaan से dekho...aur हममे यहाँ लाने वाले तुम hi हो...."

मैंने यहाँ वह dekha...to मुझे ये बिलकुल ुसस्स पार्क की तरह लगा जो मास्टर के घर के पास था जहा हम रहते the...isko पार्क कहना गलत hoga....ek तो यहाँ कोई आता नहीं था सिवाय मेरे और मास्टर ke...master इसको पार्क कहती तो मैं भी वही kahta.....ye वही जगह thi...jaha मास्टर मुझे ट्रेनिंग दिया करती थी.....

"याद आ गया naa...chalo अच्छा है..."

मैं - पर मैं कब तुम सब को यहाँ लाया और तुम हो कोण और दीखते क्यों नहीं....

"नाम नहीं दिया है अभी तक कैसे बताऊँ कोण हु main....aur तुम hi हममे यहाँ ले आये ho....abhi हम तुमसे जुड़ गए hai...wo दोनों स्पिरिट एनिमल्स है tumhare...aur main...main गाइड hu....tumko उन् दोनों को कण्ट्रोल करना सिखाऊंगा औरसाथ hi में और भी कही चीज़ें जो तुम्हे जाने की बहुत जरुरत hai...par उससे पहले मुझे मेरा नाम दे दो..."

मैं - नाम चाहिए ठीक hai....Dhruv सही नाम hoga....thik है ना...

ध्रुव - हम्म ये भी ठीक hai....chalo नाम कारण हो गया mera...ab आज तुम्हे समझा देता हु यहाँ क्या करना है और कैसे करना है...

मैं - हां बताओ...

ध्रुव - रोज रात में तुम खुद यहाँ पहुंच jaaoge...aur जैसा मैं कहु वैसा hi karoge.....yahi पे मैं तुम्हे तैयार करूँगा तुम्हे सब सिखाऊंगा...

मैं - एक minute....par तुम kyun....waise भी मैं स्कूल में हु वह पे टीचर्स है उनसे सीखूंगा main...tumse क्यों....

ध्रुव - कर दी ना छोटी baat.....wo बेसिक्स सिखाएंगे tumhe....aur मैं एडवांस लेवेक की बाते समझ रहे ho.....tum कोई आम इंसान तो हो नहीं किबस उन् टीचर्स से सिख के अपना काम ख़तम कर loge...bahut मुश्किल hogi...issiliye तो मैं आया hu...tumhe सीखने को....

मैं - हम्म ठीक है मतलब तुम मेरे मास्टर हो यही ना...

ध्रुव - हां अभी के लिए मास्टर hi कह lo.....unn दोनों चटकु को bulao....aaj का काम शुरू करते है...

मैं - मैं कैसे bulaun....wo क्या जानते है मुझे...

ध्रुव - जानते hai...arre माँ हो तुमन unke....ande से निकलने के बाद तुम्हे hi तो देखा tha...tab से तुम्हे hi अपनी माँ समझ रहे है...

मैं - क्या कुछ भी बोल रहे हो ऐसा थोड़ी होता है...

ध्रुव - अच्छा छोड़ो फिर ye...seethi बजानी आती है...

मैं - हां आती hai...par क्यों....

ध्रुव - हां तो बजाओ और उन् दोनों को बुलाओ यहाँ

मैंने सीतहि bajayi....wo दोनों ड्रैगन्स के बच्चे जो अभी तक यहाँ वह घूम रहे थे वो तुरंत hi दौड़ते हुए मेरे पास आ गए,,,

ध्रुव - देखा आ गए ना अपनी माँ के बुलाने pe....Dekho प्रतीक तुम्हे इन् दोनों पे काबू पाना hai...aur इसके 2 hi रास्ते है एक आसान और एक muskil....aasan वाला जल्दी हो जाएगा पर मुश्किल वाले में वक़्त लगेगा....

मैं - पर इनपे काबू क्यों करना hai,...aur कोण कोण से रस्ते है ये भी बताओ...

ध्रुव - पहला रास्ता जाता है बल se....inn दोनों को खूब darao...aur इनको सर्कस वाला शेर बना do...aur खुद बन जाओ ringmaster...isme वक़्त काम lagega...kyunki दोनों hi अभी बच्चे hai....par हो सकता है किसी दिन जरुरत पड़े और ये दोनों hi चुहे छोड़ के चले jaaye....aur दूसरा रास्ता वो है इन् दोनों को अच्छे से खिलाओ पिलाओ और इनको अपना दोस्त बना lo....inka भरोषा jitto...waqt लगेगा इसमें पर अगर सच कहु तो ये hi सबसे अच्छा तरीका hai.....isse ये दोनों खुल के करेंगे जो भी कहोगे इन्हे....

मैं - हम्म ठीक है मैं दूसरे रस्ते में चलने को तैयार hu....waise भी मार पीट के की hi हासिल हो जाना hai....ek minute...chod के चले जाए matlab...ye तो स्पिरिट एनिमल है ना मेरे फिर कैसे छोड़ के चले जाएंगे...

ध्रुव - हां एनिमल स्पिरिट है पर कोई आम एनिमल स्पिरिट नहीं है ye...inn दोनों को अभी भेजा गयाहै तुम्हारे पास साथ में मुझे bhi...aur हम तिण्णो के पास डिसिशन लेने की शक्ति है की तुम हमारे काबिल हो या nahi...par अभी उसमे वक़्त hai....yaad रहे जिस दिन हममे लगा तुम उस काबिल नहीं हम तिण्णो चले jaayenge....aur साथ hi जायेगी वो साड़ी baatein...jo मैं तुम्हे sikhaunga....wo साड़ी पावर्स सब कुछ....

मैं - हम्म समझ gaya...main वो 2ंद रास्ता hi चुनूंगा....

ध्रुव - चलो आज का काम ख़तम बहुत अच्छे आज तुमने एक टेस्ट पास कर लिया hai...assan टेस्ट था ये तो खुश मत hona...ab जाओ जल्दी और उठ के तैयार हो जाओ और ध्यान lagana...ek और baat...dhyaaaan जितना ज्यादा लगा सको उतना accha....chalo जाओ...

उनका इतना बोलना था की मेरे आँखों के पास बहुत ज्यादा रोशनी हो गयी और मैंने उन्हें बंद liya...aur जब रोशनी काम होने का अहसास हुआ तो मैंने आँखें kholi...aur खुद को अपने रूम में paaya....aaj भी वो साड़ी ड्रॉइंग्स जो बने हुए थे रूम में वो चमक रही thi....par मुझे लगा की ये उस रोशनी के आने के वजह से ऐसा लग रहा है बस मुझे...

मैं बीएड पे hi लेता रहा कुछ der.....jab तक उस ध्रुव की आवाज वापस नहीं आयी और मुझे ये याक्किन नहीं हो गया की वो सपना नहीं सच था जो भी मैंने देखा....

मैं जल्दी से उठा और फिर तैयार होक ध्यान लगाने को चला गया.....

आज कुछ ज्यादा पहले उठ गया था main....main भी जाके ध्यान लगाने बैठ gaya...isme आज कोई अजीब बात नहीं hui...fir वही बाद में बुआ आयी और वो भी बैठ गयी....

मैं ध्यान से तब उठा जब बुआ ने मुझे उठाया....

बुआ - क्या आज क्लासेज नहीं अटेंड करनी kya...late हो रहा hai...ab तो नास्ता भी नहीं कर paaoge.....mere केबिन में आ jao....jaldi से नास्ता वही करके निकल जाना समझे..

मैं - ठीक है बुआ,.,..

मैं जल्दी से रूम में गया और वह से तैयार होक निकला बुआ के केबिन की ओर जाने को की सामने कुछ चूज़जी मिल gaye...haa वही पंकज के log....unki स्किन्स पूरी लाल हो राखी thi...sayad निशान मिटने के लिए कोई काढ़ा उसे किया होगा और उसी कला इफ़ेक्ट हो yee....dekhne में बिलकुल टमाटर जैसे लग रहे the...saath में स्किन्स सुज़्ज़ भी गयी थी कुछ....

मैंने देखा वह पे दब भी hai...aur वो अपना सर खुजाये जा रहा tha....main भी गया वह पे...

ा4 - ुये चल; तुझे पंकज भाई बुला रहे है...

दब - अरे वो छोड़ो पहले तो ये बताओ ये जो लम्बी चौड़ी कहानी सुनाई तुम सबने जिसमे मैं एल्फ प्रिंस बेहोश हो गया था और ये प्रतीक ने तुम सब को dhoya...wo सच है क्या...

सायद इसको याद नहीं रहा कल के बारे में या ये मज़्ज़े ले रहा होगा...

अभी हम कुचजः बोलते या करते उससे पहले बुआ आ गयी वह pe...main थोड़ा लेट हो गया था उनके केबिन में पहुंचने में इसीलिए वो खुद आ gayi...unhone उन् लोगो को देखा...

बुआ - हम्म क्या बात hai...kya हो रहा है यहाँ पे....

सभी ने बुआ को dekha..aur फिर थोड़ी देर woo....woo...woo...main....main....ye सब चला...

वो सारे कोई बहाना बना के वह से निकल gaye....wahi दब वापस से रूम में चला गया वो नास्ता कर आया tha...abhi कुछ सामान लेने रूम में जा रहा tha......aur मैं चल दिया बुआ के साथ उनके केबिन mein....Nasta किया और जब बहार आने लगा तो...

बुआ - और बच्चू क्या हो रहा था वह pe...bataoge...

मैं - क्या हो रहा tha...wo तो बस ऐसे hi....

बुआ - ऐसे hi naa....theek है जाओ तुम ममें खुद देख लुंगी....

मैं भी निकल गया वह से...

जल्दी से पंहुचा अपने s=1st क्लास mein.....aaj प्रोफ. सूरज आये हुए the...main लेट पंहुचा था वह pe....par ज्यादा कुछ नहीं बस कहा की जल्दी आया करो...

फिर क्लास शुरू हुई सब कुछ नार्मल hi tha....ye क्लास ख़तम हुई और फिर चल दिए हम सब काढ़े वाली क्लास में मतलब पंकज के पिताजी वाली क्लास mein...waha गए तो आज भी वो खुद आये हुए the....aur कुछ गुस्से में दिख रहे थे....

प्रोफ- बड़ी hi इंटरेस्टिंग क्लास है ye....yaha पे बहुत से विद्वान बैठे हुए hai...aise विद्वान जो कुछ भी कर सकते hai....Kyun है ना एल्फ प्रिंस,,,,

दब को समझ नहीं आया ये बोल क्या रहे थे पर दब तो दब है...

दब - हां प्रोफ.. बहुत hi कम्मल के स्टूडेंट्स है हम आप किसी को भी उठा lo...aur उससे कोई भी सवाल पूछो या कुछ भी कहो मैं जुबान देता हु वो जवाब dega...aur अगर नहीं दिया तो मैं क्लास में नहीं आऊंगा...

मैं (मान में) - ये तो बड़बोला hai....pagal कही ka...ab पता नहीं क्या होगा यहाँ...

प्रोफ. - हां तो ठीक है दब जी आज यही करते hai...Main किसी को खड़ा करूँगा और जब वो नहीं बता पायेगा मेरे सवालों का जवाब तो उसको और साथ में आपको दोनों को hi इस क्लास से निकल दिया jaayega..aur ना hi इस सब्जेक्ट की डिग्री मिलेगी आपको...

प्रोफ. की बात सुनके अब दब को थोड़ा दर लगने laga...wo फंस गया था अब अपने kaaran...ab बस वो सोचे जा रहा था की किसको खड़ा करेगा ये और क्या पूछेगा....

प्रोफ. - चिंता मत करिये एल्फ प्रिंस सवाल किताब के अंदर से hi hoga......aur जवाब देंगे आपके परम mitra....Prateek ji....Haa तो प्रतीक जी खड़े हो जाइये...

मुझे लग रहा था कुछ ऐसा hoga...par..cholo...main भी खड़ा हो गया,.,,

प्रोफ. - हां तो प्रतीक ji...maan lijiye...apke किसी दोस्त के खून में कोई जहरीला द्रव्य मिल गया ho...kisi भी कारण से किसी कीड़े ने काट लिया ho....yaa सांप ne,...to आप उसको कैसे बचाएंगे...

उनका सवाल पूछना था और सभी स्टूडेंट्स के बिच भून भून की आवाज होने lagi.....ye वो पोरशन था जिसके बारे में अभी पूरा नहीं बताया गया tha...dono hi केसेस में उस व्यक्ति को बचने के 2 अलग अलग उपाय hai...aur हम्मे बस एक hi अच्छे से बताया गया है और दूसरे का बस नाम भर बताया गया tha.....ye कल के hi क्लास में बस शुरूआती वाली बाटें thi....1st का प्रोसेस बताया था और 2ंद का बताने से पहले टाइम ख़तम हो गया tha...aur मैंने भी नहीं पढ़ा था 2ंद का.....

प्रोफ - सब शांत रहे मैंने जिससे पूछा है जवाब वही देगा कोई और नहीं

दब - पर प्रोफ. इसके बारे में पूरा कहा बताया है आपने...

प्रोफ - कल hi तो बताया tha...naam और उसकी विधि ko...ab आप नखरे कर रहे hai....ye तो आपको करना hi चाहिए था की जो बताया गया उसके रिलेटेड थोड़ी जानकारी hi ली aate...tabhi तो क्लास में मज़्ज़ा आता hai...par लगता नहीं प्रतीक जी ने ऐसा कुछ किया hai....aur अब मैं आपको क्लास से बहार जाने का याद दिलके निच्चा नहीं दिखाना chaunga...to आप खुद hi अपने परम मित्र के साथ अगर यहाँ से विद्दले तो अच्छा होगा...

उन्होंने तो बिन्ना कुछ सुनने hi अपना मात बना लिया और मुझे और दब को जाने के लिए बोल दिया..

मैं - प्रोफ. अभी मैंने बोलै भी नहीं kuch,,,bolne तो दीजिये अगर गलत हुआ तो मैं खुद चला जाऊंगा...

प्रोफ. ने एक बार मेरी ओर देखा...

प्रोफ. हम्म बोलिये अब क्या यहाँ बंद बाजे के इंतज़ार में है आप की कब वोपाये और आप शुरू करे...

मैं - नहीं मैं बता रहा हु...

आज के लिए इतना hi

नेक्स्ट अपडेट में प्रतीक का आंसर भी देख lenge...aur साथ hi प्रोफ. नमन की क्लास में क्या होता है वो और पंकज कहा यही वो भी...

बनने रहिये....
 
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