फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 10 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

अपडेट - 75

सुबह का वक़्त हो चला था हम सब hi अभी नास्ते के टेबल पे बैठे हुए the.....darasal नास्ता ख़तम हो hi गया था पर आज चाचा चची दादा दादी ये सब किसी काम से जा रहे the....aur ये होता नहीं था aisa.....aaj छुट्टी का दिन था सबको एक साथ रहना होता था पर आज काम था तो bas....wahi बात वो बता रहे थे की वो तो आ नहीं पाएंगे आज तो हम खुद का hi कुछ प्लान कर ले....

दब ने पहले hi कह दिया था वो वापस जाना चाहता hai......pata नहीं कुछ ज्यादा सीरियस हो गया था ये या कोई और बात thi.....K.Bua ने कहा उसको की ृक्क जाए पर वो जाने को बोल रहा था तो उसको अपनी सहेली के पास छोड़ने को चली गयी.....

घर पे Main,Bua रूपल दीदी और निकिता hi थे अभी की तभी ओल्ड आउल की आवाज आयी.....

ओल्ड आउल - प्रतीक यहाँ पे कुछ गड़बड़ है सायद......

मैं - क्या hua....koi मुशीबत है kya.....tum पोर्टल खोलो मैं आ रहा हु......

ओल्ड आउल - नहीं वैसी बात नहीं है मुसीबत तो नहीं लग rahi.....par सायद तुमको ये जानना चाहिए....

मैं - तो पोर्टल खोलो.....

ओल्ड आउल - मैं कोशिश कर रहा hu....par तुम जहा हो वह नहीं खुल पा रहा है......

मैं - घर की सुरक्षा बधाई थी चची और दादी ne....sayad इस वजह se.....tum रूक्को मैं बहार आके बोलता हु खोलने को.....

मैं बहार जाने लगा.....

रूपल दीदी - ुये छोटू kaha....kaha जा रहा है....

मैं - वो दीदी बस ऐसे hi.....thoda बहार....

रूपल दीदी ने निकिता की ओर dekha....Main उन् दोनों को देखने laga....Nikita मुझे और रूपल दीदी को देखने lagi.....aur इतने में बुआ aayi.....aur वो हम तिण्णो को देखने लगी....

बुआ - ये क्या कर रहे ho....aise पागलों की तरह क्या देख रहे हो एक दूसरे को.....

रूपल दीदी - निकिता बता ना ये कहा जा रहा है....

मैं - आप उससे क्या पूछ रही हो मैंने बताया ना बहार जा रहा hu....thoda टहलने.....

निकिता - वही तो मैं कैसे bataun....aur आपने पूछा भी कहा बस मुझे देख रही thi....mujhe लगा कुछ हुआ है....

रूपल दीदी - ये अच्चानक से जा रहा था तो मुझे लगा इसने किसी से बात की है और तुमको पता चल गया इस लिए तुझे देख रही थी की तू बताएगी....

बुआ - निकिता तुमको कुछ पता चला की ये कहा जा रहा है....

निकिता - नहीं बुआ मैं कैसे जानूँगी.....

मैं - ये करते रहो आप सब मैं जा रहा hu....bade अजीब हो आप सब.....

बुआ - अच्छा ठीक है जा तू.....

मैंने एक बार उनको dekha....aise जाने को बोल रही hai.....phir वह से बहार निकलने laga....aur घर के आगे के गार्डन में आके ओल्ड आउल से पोर्टल खोलने को कहा.....

पोर्टल खुल्ला वह पे और मैं वह से स्ट्रेंज वर्ल्ड में चला गया.....

ओल्ड आउल वही पे था.....

मैं - हम्म बताओ क्या हुआ है.....

ओल्ड आउल - तुमको वो खून याद है naa.......wo 4 खून ठीक उसी तरह के 2 और खून हुए है कल.....

मैं - Kya......Wapas से सोसाइटी के लोग मारे gaye......Leemo कहा hai......mujhe उससे बात करनी hogi...aur तुमको समझ नहीं आता क्या देखने को बोलै था अभी तक कोई नहीं मिला तुमको....

ओल्ड आउल - नहीं ye...ye वो नहीं the....Society का कोई नहीं मर्रा hai......jo दोनों मर्रे है वो वाटर एलिमेंट वाले है और आम लोग है....

मैं - अब ये क्या चाकर hai....tumne इसके लिए बुलाया mujhe....arre ये सब तो यहाँ के लोग भी देख सकते है naa....Elf किंग को नहीं पता क्या इसके बारे में.....

ओल्ड आउल - एल्फ किंग जानते है इसके बारे mein....aur सभी जानते hai.....Main ये इस वजह से बता रहा हु क्यूंकि ये खुनी वही है जिन्होंने उन् 4 लोगो को मारा tha.....thek उसी तरह से मारा है ये देखो....

मैं - लीमो को कुछ पता चला की उसके लोगो को किसने मारा है....

ओल्ड आउल - नहीं लीमो नहीं पता कर पाया hai.....par मैंने अपने बन्दे लगाए है यहाँ pe.....thodi बहुत जांच करने के बाद ये कह रहा हु इसमें क्रोनेड एल्फ फॅमिली का कोई हाथ नहीं है ना तो एल्फ किंग का और ना hi युवराज का जैसा तुमने कहा था पता करने को....

मैं - अच्छा और इस नतीजे पे कैसे पहुंचे tum.....matlab जांच कैसे किया....

ओल्ड आउल - जब ये दोनों खून हुए है तब एल्फ किंग और साथ hi युवराज दोनों hi महल में अपने कमरों में सो रहे थे.....

मैं - हो सकता है इनमे से किसी एक ने करवाया होगा ये खून और अब ये होने के बाद तो और पक्का सा लग रहा है ये सब.....

ओल्ड आउल - मतलब क्या है तुम्हारा.....

मैं - तुमने बताया ये दोनों hi वाटर एलिमेंट वाले hai.....water element......sayad ये एक इत्तेफ़ाक़ hi है par.....ho सकता है की ये युवराज का किया धराया हो या फिर एल्फ किंग ka.......Mahel में एक वाटर एलिमेंट वाला आता है दिन दहाड़े वो युवराज के पास से एक चीज़ज़ चुर्रा के ले जाता hai....badla लेने के बारे में ये लोग क्यों नहीं sochenge......mujhe लगता है इन् सब में थोड़ा बहुत तो इनका भी किया धराया hoga.....mahel की इज़्ज़त बचने के लिए....

ओल्ड आउल - एल्फ किंग के बारे में मुझे नहीं लगता वो ऐसा कुछ अपनी जनता के लिए karenge....haa थोड़ी बहुत खिल्ली ुड्डी होगी उनकी पर वो इस वजह से ऐसे hi खून तो नहीं करने लग गए honge....aur हम खिल्ली उड़ने की hi बात कर रहे है तो सबसे पहले तो युवराज की hi बात आती hai....par ये भी है की कल रात को वो भी अपने रूम में hi था.....

मैं - तुम इन् दोनों पे ध्यान rakho....accha और मुझे लगता है मैं निक्स समुदाय के पास जाना चाहूंगा.....

ओल्ड आउल - वह पे मेरा एक बाँदा है पहले se...tum जाओ waha....main पोर्टल खोल रहा हु.....

ओल्ड आउल ने तुरंत पोर्टल खोल दिया और मैं उससे होते hue.....Nix लोगो से बस थोड़ी दुर्री पे आ गया था....

ओल्ड आउल पोर्टल के उसी तरफ से बोलै....

ओल्ड आउल - इनको मेहमान ज्यादा पसंद नहीं aate......sambhal के जाना....

और बोल के पोर्टल बंद कर दिया.....

मैं आगे बढ़ने laga.....yaha की जमीन थोड़ी गिल्ली गिल्ली सी thi...chipchippi....

मैं - ध्रुव ये जमीन ऐसी क्यों है यहाँ की....

ध्रुव - निक्स वाटर स्पिरिट्स होते hai....to इनके आस पास पानी तो होना hi hai...ussi पानी की वजह से sayad.....waise यहाँ पे आने की क्या वजह है....

मैं - उस लड़की को बतलाना है उसकी वजह से वह लोग मारे जा रहे है अगर उसने वो पंख नहीं चुराया होता तो ये सब ना हुआ होता....

ध्रुव - एक तरह से हमारी मदद की है usne.....agar वो पंख गलती से भी लूसिफ़ेर के हाथ लग जाता और अगर उसने उसके जरिये ओल्ड आउल और बाकी सब का पता लगा लिया होता तो हो hi जाना था सब सही.....

मैं - बात में दम है tumhare.....par वो पंख चाहिए hi क्यों थे usko...aur उसको उस पंख का पता कैसे चला.....

"तुम कौन ho...aur यहाँ क्या कर रहे h......ek और इंसान...."

मैंने पीछे मदद के देखा तो वह पे एक बाँदा था हाथ में पानी की तलवार लिए hue.....pahle तो दिखने में ऐसा लग रहा था अभी के अभी मार देगा पर फिर एकदम से कन्फ्यूज्ड सा दिखने लगा....

"तुम उस लड़की के साथ यहाँ आये हो क्या....."

मैं - Ladki.....haa उसी के साथ.....

"आओ picche....kaha था पुजारी जी से मैट बनाओ उसको शिष्य apni.....par nahi....kahte है किताब में लिखा है वो आएंगे yaha....aur हमको उनको सीखना hai....pata नहीं क्या क्या बोलते रहते hai.....wo सामने वो बड़ा सा मंदिर दिख रहा hai....wahi है वो ladki....mil लो...."

मैं इसके पीछे पीछे आ रहा था और ये बाँदा एकदम से बोलते जा रहा था और बोलते हुए मुझे लेके आ गया उस जगह pe...jaha पे इसने बताया की मंदिर hai....ek बड़ा सा मोन्यूमेंट था ये.....

मैं अंदर जाने laga....par तभी पता नहीं अलबूस और कूपर को क्या hua....mere सीने में जैसे कुछ जलने सा लगा था उस waqt.....jaise जैसे करीब जा रहा था....

ध्रुव - यहाँ से निकलना hoga....Albus और कूपर दोनों परेशां लग रहे है.....

मैं - पर हुआ क्या है और ye.....aahhhh है kyaa..........Jwala पोर्टल खोलो....

क्या हुआ पता नहीं एकदम से बहुत ज्यादा जलन होने लग गयी थी.....

ज्वाला ने मेरी आवाज सुन्नी और पोर्टल खोल diya.....aur मैं उसमे चला gaya....aur वह जाते hi बेहोश....

एअर्थ में घर पे बैठे हुए बुआ, रूपल दीदी और निकिता एक दूसरे से बातें कर रहे the.....kisse सुनाये जा रहे थे अपने apne.....ki तभी निकिता को लगा की कुछ हुआ hai.....pasina आने लगा उसको अच्चानक से बोलते बोलते hi गल्ला सुख सा गया.....

बुआ ने देखा usko.....ek दम अच्चानक से ऐसे सब कैसे हो गया.....

बुआ - बच्चू ठीक हो ना tum.....Rupal पानी लेके आओ.....

बुआ जो अभी दूसरे सोफे पे थी वो निकिता वाले सोफे पे आ गयी और उसको देखने लगी कही बुखार तो नहीं hai.....wahi रूपल दीदी भी जल्दी से पानी लेके आयी.....

पानी पन्ने के बाद निकिता थोड़ी देर बैठी rahi.....pasina निकलना अब बंद हो गया था पर उसका पूरा चेहरा भीगा हुआ tha......Bua ने एक गिल्ला टॉवल दिया उसको मुँह साफ़ करने ko....aur जब उसने ऐसा करते हुए अपनी आखें बंद की तो उसको प्रतीक dikha....behosh पड़ा हुआ.....

निकिता - Prateek.....usko कुछ हुआ hai....wo बेहोश है....

बुआ - Kya.....kya बोल रही हो tum.....kaha पे है वो.....

रूपल दीदी - बेहोश hai....par वो तो बहार hi g.....main देख के आती हु....

निकिता - Nahi....wo यहाँ नहीं hai.....Jwala पोर्टल खोलो....

यहाँ अपने कबीले में ज्वाला अभी प्रतीक को वैद्यों के पास लेके गया था और वो देख रहा था की वो बेहोश hai....par फिर भी उसको सुनाई दिया की पोर्टल खोलने बोलै जा रहा hai.....Jwala ने एक बार वापस से देखा प्रतीक की ओर....

कुछ समझ ना आया तो उसने पोर्टल खोलना चाहा पर खुला नहीं....

ज्वाला - कौन हो तुम.....

निकिता - मैं निकिता hu.....jaldi से पोर्टल kholo....humko पता है प्रतीक को कुछ हुआ है....

ज्वाला थोड़ा कंफ्यूज हुआ की आखिर कैसे ज्वाला की आवाज wo....aur उसकी आवाज ज्वाला सुन पा रहे the....wo बात कैसे कर रहे थे ऐसे में......

निकिता - ज्वाला जल्दी से पोर्टल खोलो....

ज्वाला - Nahi.....portal खुल नहीं रहा आप जहा पे है वह पे नहीं खोल पा रहा मैं पोर्टल....

निकिता - बुआ ज्वाला के यहाँ है प्रतीक और वो बेहोश है....

रूपल दीदी - वो वह चला gaya....wo भी झूट bolke....Jwala को बोलो पोर्टल खोलने को....

निकिता -न उससे नहीं हो रहा hai....maine बोलै पर वो बोल रहा है यहाँ पे नहीं खुल रहा पोर्टल....

बुआ - कल hi घर की सुरक्षा बधाई hai....Bahar चलना hoga....garden mein.....wo बेहोश है naa.....Kavita को बुलाती हु मैं....

बुआ ने तुरंत K.Bua को कॉल किया और अपने पास आने को bola.....K.Bua वह पे अपनी फ्रेंड के साथ बातें कर रही थी जब उनका फ़ोन बज्जा.....

बुआ की आवाज सुन के वो समझ गयी बात सीरियस hi hogi....to उन्होंने जल्दी से वह से निकलने का रास्ता सोचा और निकल भी gayi....agle 10 मिनट में वो बुआ के पास थी....

बुआ - निकिता अब bolo...ab हम बहार है वो कर लेगा अब....

निकिता ने वापस से ज्वाला को पोर्टल खोलने को kaha...aur इस बार खुल गया क्यूंकि वो सब बहार थे...

सभी पोर्टल से सीधा वह वैद्यजी के पास आये....

K.Bua - इसको क्या hua....ye ऐसे क्यों पड़ा है....

बुआ - ये बेहोश हो गया hai....isko देखो क्या हुआ hai.....Aur तुम ज्वाला तुमको हममे बताना चाहिए था अगर कुछ हो गया इसको तो क्या करेंगे हम....

बुआ ज्वाला को पूरा झड़ने लग गयी....

वही K.Bua प्रतीक को देख रही thi.....unhone पहले तो पल्स dekha....wo नार्मल तो बिलकुल भी नहीं the....phir उन्होंने और सब देखना शुरू kiya.....sab कुछ hi अजीब सा था इस वक़्त तो....

K.Bua ने फिर स्किन को देखना शुरू kiya....Prateek के हाथ का स्किन थोड़ा अजीब सा लग रहा tha....aur वो उसको देखने लगी....

K.Bua - पूनम यहाँ आ to....ye dekh.....ye इसके स्किन को ऐसा क्या हो गया है....

K.Bua ने आवाज सिर्फ बुआ को लगायी थी पर आ सभी गए the.....ur सभी ने देखा जैसे प्रतीक के स्किन पे कुछ बनना हुआ tha....ajeeb सा....

K.Bua - Kainchi.....poonam कैंची देना.....

अब कैंची थी नहीं उनके पास तो उन्होंने जादू से mangwaya.....aur दे दिया K.Bua के पास.....

K.Bua ने उस कैची से कलाई काटना शुरू kiya.....aur कलाई से होते hue.....pura ऊपर जो t-shirt पहनी हुई थी मैंने वो काट दिया unhone......aur कपडे को हटाने के बाद जो देखा उन्होंने वो देख के तो सभी चहुँक gaye....par 10 सेकंड बाद जब वो चीज़ज़ धीरे धीरे गायब हो रही थी उस चीज़ज़ को देख के तो सब और ज्यादा चौंक गए

वो सब गायब हुआ और प्रतीक की आँखें खुली.....

सामने सभी को उसको घूरता देख वो समझ नहीं पाया आखिर क्या चल रहा hai....Usko तो ये भी समझ नहीं आ रहा था की ये लोग वह आये कैसे.....

K.Bua - अरे सब पीछे hatto.....Prateek अभी ठीक लग रहा है....

मैं - हम्म्म पता नहीं थोड़ा ajeeb.......mere kapde......Main ऐसे क्यों hu.....aur आप सब यहाँ कैसे.....

ज्वाला अभी भी मुझे देखे जा रहा था सिर्फ वही नहीं sabhi......K.Bua उसके पास में hi थी तो उसको एक बार धीर्रे से maara.....kyunki मैं उसी को देख रहा था....

ज्वाला जैसे अभी नींद से जाएगा हो....

ज्वाला - haa....kya....kya कहा तुमने....

मैं - ये सब यहाँ कैसे तुमने बुलाया....

ज्वाला - woo....haa मैंने hi वो तुम to....tum बेहोश हो गए थे ना......

मैं - मेरे kapde....ye किसने कर दिया और क्यों.....

K.Bua - अरे वो तुम जब बेहोश हुए ना उस वक़्त उसमे कुछ लग गया tha...aur तुमको उठा के उसको निकल नहीं सकते थे ना तो ऐसा करना pada....tum चिंता मत करो नया लेके दे denge....ab ये बताओ कैसा लग रहा है....

मैं (मैं में) - हम्म अब कोई जलन नहीं हो रही hai.....ab तो सब सही hi है....

K.Bua - प्रतीक ठीक हो ना....

मैं - हां बुआ अब ठीक hu,.....wo पता नहीं क्या हुआ था और मैं बेहोश हो गया.....

K.Bua - हम्म चिंता मत karo....ye बस ऐसे hi tha.....sayad तुम्हारा एलिमेंट थोड़ा और ताकतवर हो रहा hoga......hmm अच्छा ये तुम्हारा स्पिरिट एनिमल क्या था प्रतीक बताना जर्रा....

मैं - (मैं में) स्पिरिट एनिमल के बारे में क्यों पूछ रही है ये इनको तो पता hi है मैंने एक चुहा बताया tha.....kuch तो हुआ है....

मैं - बुआ आप तो जानती hi हो वो एक चूहा है....

बुआ - कविता ये ठीक है ना.....

K.Bua - हम्म ठीक hai...par सायद आराम चाहिए होगा इसको थोड़ा....

बुआ - नहीं इसको कोई आराम नहीं chahiye.....Jwala हम सब को स्कूल जाना है abhi.....iske मेडिकल सेंटर में....

बुआ एकदम से गुस्से में लग रही thi...pakka कुछ तो हुआ था मेरे बेहोश होने पे.....

ज्वाला ने पोर्टल खोला और सारे उससे होते हुए पहुंच गए K.Bua के मेडिकल डिपार्टमेंट mein.....wo Jwala.....wo बिन्ना बुलाये आ गया वह पे.....

बुआ - इसका स्पिरिट एनिमल चेक करो abhi....mujhe देखना है क्या है....

मैं - बुआ आपको तो .....

बुआ - तुमसे पूछा kuch......Kavita.....dhyaan रहे कोई भी ऐसा मैजिक जो इसके स्पिरिट एनिमल को छुपाने की कोशिश करे वो बक्कर हो जाना चाहिए....

K.Bua - पूनम शांत हो जाओ कोई तो वजह रही होगी ना.....

बुआ - wahaj......nahi....pahle तो चेक करो tum.....aur tum....tum क्या कर रहे हो यहाँ पे.....

ज्वाला - Main....wo..wo मैं भी देखने आया tha.....wo....

बुआ - तुम जुड़े हुए हो ना isse.....ye कोई भी मैजिक नहीं कर पाए ध्यान रखना इसका....

मैं - ध्रुव अब kya.....ye तो अलबूस कूपर सब जान जाएंगे....

ध्रुव की आवाज hi नहीं aayi....wo साला था hi नहीं जैसे वह....

बुआ - निकिता बच्चू ध्यान रखना तुम bhi....koi जादू नहीं होना चाहिए....

निकिता को समझ नहीं आ रहा था वो कैसे समझाए की मैं कोई जादू करू तो उसको पता नहीं चलने वाला......

K.Bua तो लग भी गयी थी अपने काम pe.....aur रूपल दीदी मुझे देखे जा रही thi.....chup चाप....

मैं यहाँ ध्रुव से बात करने की कोशिश कर रहा था पर वो कुछ बोल hi नहीं रहा tha.....pata नहीं इसको हुआ क्या था....

K.Bua ने मेरा हाथ पकड़ा और उसको अपने साथ लेके आये हुए एक पत्र पे रख दिया.....

K.Bua - हाथ मत हटाना....

मैं - बुआ आप जानती हो ना पह.....

रूपल दीदी - तेरी to.....itni बातें नहीं बताई है इसने.....

वो ऐसे hi बोलते हुए यहाँ वह देखने लगी जैसे कोई चीज़ दूध रही ho.....nicche एक डंडा जैसा कुछ मिला उनको.....

K.Bua - अरे रूपल रूक्को tum....ye क्या मार डौगी उसको अब.....

बुआ - जोर से रूपल.....

मैं - Didi.....ye क्या कर रही हो....

बहुत ज़ोर से डंडे से मुझे मारा tha....par डंडा टूट गया और मुझे कुछ नहीं हुआ....

K.Bua - पागल हो गयी हो dono.....aur तुमको भी अकाल नहीं है पूनम रूकने के वजयी और ज़ोर से मारने बोल रही ho...kuch हो जाता to....jaruri थोड़ी होता है जो दिख रहा है वही hoga.....Prateek दर्द तो नहीं हो रहा है ना....

बुआ - कुछ नहीं हुआ है isko....tum वो देखो इमेज तैयार हुई या nahi......bas एक बार जो हम सोच रहे है वो सही निकल jaaye.....isko फिर मैं....

मैं - मेरा स्पिरिट एनिमल एक ड्रैगन hai.....theek है ना ab....ab बस भी karo...aap सब....

निकिता - ek....sirf एक.....

मैं (उसको घूरता हुआ) - 2 है 2 ड्रैगन्स है वो.....

बुआ - तो पहले क्यों नहीं bataya.....Main कितनी उद्दस थी इस बात को लेके और tumne....tumne झूट बोल दिया था...

मैं - बुआ मैं नहीं बोलना चाहता था पर मैं खुद समझ नहीं पा रहा tha....maine मास्टर तक को नहीं बताया है इसके बारे में....

रूपल दीदी - इसमें चुप्पाने वाली क्या बात thi...ye तो और बताने वाली बात है पागल तुम्हारे पास ड्रैगन्स है 2 ड्रैगन्स....

K.Bua - हम्म मुझे नहीं लगता रूपल ये बताने वाली बात hai.....ek तरह से ये अच्छा hi hai.....kuch चीजजें चुप्पी हुई होती है तो अच्छा होता है....

अभी वो कुछ आगे बोलती उससे पहले K.Bua का फ़ोन बज्जा....

K.Bua - भाभी का कॉल है.....

K.Bua ने कॉल एक्सेप्ट किया.....

K.Bua - kya.....aap स्कूल में हो....

....................................

K.Bua - wo....wo तो स्टाफ रूम में hi honge....aapne किसी से पूछा नहीं....

...................................

K.Bua - ऐसा kaha.....kisne kaha....aap एक काम karo....aap....medical डिपार्टमेंट में आओ हम यही है....

इतना बोल के उन्होंने कॉल कट कर दिया.....

K.Bua - ये भाभी यहाँ पे प्रोफ. दक्ष से मिलने को क्यों आयी hai.....aur तुम सब का फ़ोन क्या hua....wo कब से तरय कर रही थी.....

रूपल दीदी ने अपना फ़ोन देखा तो वो नहीं था वह पे वो सायद घर पर छोड़ आयी थी वैसे hi निकिता का भी tha....aur बुआ का डिस्चार्ज हो चूका था.....

बुआ - पर टुन्ने उनको यहाँ पे क्यों बुल्ला लिया pagal.....wo भी जान जायेगी ये सब....

चची - क्या sab....aur पागल किसको कहा पूनम मुझे पागल बोल रही है.....

वो तो अच्छा हुआ ज्वाला ने खुद को गायब कर लिया था वर्ण वो भी देख लिया जाता.....

चची - Ye....ye ऐसे क्यों लेता हुआ hai...iske कपडे कहा गए....

रूपल दीदी - मम्मी वो इसको चक्कर आ गए थे वापस से तो चेक करने को यहाँ आ गए.....

चची - क्या.....

K.Bua - अब ठीक है Bhabhi....waise आप यहाँ पे....

चची - अरे वो पंकज से बात करलु सोचा था आखिर क्या माज़रा है की वो तुम सब के साथ नहीं रहता वो मिला नहीं घर पे तो उसके पापा से बात करने का सोचा ताकि वो समझा सक्के usko....waise िन्न्न सब में मुझे तुम सब का hi हाथ लग रहा है,,,,,

बुआ - नहीं भ hi ऐसा कुछ नहीं hai....rukko आपको प्रोफ. दक्ष से मिलना है ना मैं ले चलती हु aapko....unse कर लेना बात वैसे ऑफिस में hi होंगे वो....

चची - अरे नहीं जाने दिया mujhe....maine कहा तुम्हारी भाभी हु तो बोलता है जब तुम आओगी तब आना.....

बुआ - ये नया आया होगा koi.....aap चलो मैं देखती hu.....Rupal इसको कपडे दे dena....aur घर जाओ वह बात करेंगे...

वही पंकज अभी लीडर के साथ tha....Pankaj ने उससे कहा था सायद कोई और भी रास्ता हो उसकी बेटी को ढूंढने ka....aur वो रास्ता होक्के जाता था एअर्थ पे मैजिकल क्रीचर्स के हेडोफ़्फ़िए se.....ye एक ऐसी जगह थी जहा पे लगभग सभी मैजिकल क्रीचर्स की एंट्री होती thi.....chahe वो कोई इंसान और मैजिकल क्रेअटुरे का खून hi क्यों ना ho....isse कोई मतलब नहीं होता tha....aur इन् सब की देख रेख स्ट्रेंज वर्ल्ड से आये हुए वो मोटा आदमी करता था जो हमारे घर आया tha.....yaha पे इसके बहुत से कनेक्शंस थे....

पंकज भी यहाँ पे स्ट्रेंज वर्ल्ड से hi आया हुआ था उसके पापा यानी दक्ष मां के साथ तो इन् जनाब से एक दो बार मुलाकात हो चुक्की थी इसकी....

लीडर - पर बेटे वो मुझे यहाँ देख के hi समझ जाएगा मैं किसी चीज़ज़ को लेके आया हु यहाँ पे....

पंकज - sayad....par क्या वो ये जान पायेगा की आप यहाँ पे अपनी बेटी को ढूंढने के लिए आये हो....

लीडर - वही तो बात hai....ab मैं उससे मिलने गया तो वो पक्का है की मुझसे पूछेगा क्यों आये ho...aur मैं किसी भी चीज़ज़ या कोई भी बन्दे का नाम लूंगा ये लोग उसपे नज़र रखना शुरू कर देंगे....

पंकज - तो मैं चला जाता हु naa....waha पे बस आपके एनर्जी सिग्नेचर कको देके बोलना hi है की इससे मैच करने वाली एनर्जी सिग्नेचर के बारे में पत्ता करना है....

लीडर - मैं भी यहाँ रह चुक्का hu....unko पता चल जाएगा...

पंकज - मैं बोल दूंगा स्कूल का प्रोजेक्ट hai.....unhone एक एनर्जी सिग्नेचर दिया है और बोलै है पता लगाने की किसका है ye....yaa इस जैसे और कितने है और उन् सब की जानकारी.....

लीडर - पर वो कुछ पूछेंगे नहीं की किसने दिए है ऐसा प्रोजेक्ट और सिर्फ तुम hi क्यों aaye.....koi और क्यों नहीं...

पंकज - हम्म ये समस्या hai....haa ये सही rahega.....par मुझे किसी प्रोफ से मिलना होगा जो ये कर दे.....

लीडर - तुमने बताया था तुम्हारे पापा भी प्रोफ है तो फिर उनसे करा लो.....

पंकज - पापा इसमें साथ नहीं देने वाले mera....koi और chahiye.....jo आसानी से कर दे ये....

लीडर - करना क्या है....

पंकज - पनिशमेंट मांगनी है.....

लीडर - तो तुम बोलने वाले हो की तुमको पनिशमेंट मिली हुई hai....aur इस वजह से तुम ये सब करने जा रहे हो वह pe....sahib दिम्माग लगाया hai....ab प्रोफ ढूँढना है ना बस....

पंकज - hmm...waise 1 है to....par उनके पास जाने का मैं नहीं hai....wo log....wo समझते hi नहीं है......

लीडर - ये कोई ek.....log कब से कहे जाने लग गए....

पंकज - प्रोफ तो एक hi hai....Prof पूनम पर उनके साथ 3 और लोग होते hai.....unn तिण्णो को मैं गलत लगता hu.....manna मैं गलत tha....par वो पहले की बात थी ना अब मैं चेंज होने लगा हु naa....aap hi बताओ मैं अच्छा नहीं हु क्या...

लीडर - मेरे लिए तो अच्छे hi ho....meri मदद कर रहे ho....par बीटा ये duniya...ye यहाँ के log....ye बड़े hi अजीब होते hai.....ek बार इन्होने आपको देख के जो डीडे कर लिया ना वो सोच बड़ी मुश्किल से बदल पाती hai....ab मेरे बारे में lelo....Maine तुमको अपने बारे में बताया तुम दर्रे थे naa.....par क्या मैं ऐसे hi सबको मारता फिरता hu......wo darr....wo सोच है सबकी मुझे leke....aur मैं अब सायद hi इस सोच को कभी बदल paaunga......lekin tum....tum बदल सकते ho...aur इतने में हार तो मत मानो...

पंकज - हां इस बारे में कभी बात karenge...abhi तो प्रोफ पूनम के पास चलते hai.....unke पास जाने के कुछ फायदे तो है hi.....agar पापा को पता भी चला की मुझ पनिशमेंट इन्होने दी है तो वो ना तो प्रोफ से कुछ कहेंगे और ना hi mujhse....haa एक बार बस थोड़ा समझा देंगे.....

लीडर - अभी कहा होंगी ये आपकी Prof.....kaho तो अभी ले चलता hu....aaj तुमको मैं कुछ खास दिखता हु....

पंकज - क्या आपके pass....koi उड़ने वाला जीव है जिसपे बैठ के जाएंगे hum.....yaa कुछ aur.....Aap लीडर हो फोमोस के आपके पास तो बहुत कुछ खास होगा ना....

लीडर - :रेडफास: पोर्टल से जाने को बोल रहा tha...aur तुम तो पता नहीं कहा कहा के सपने लिए बैठे ho....batao कहा है वो....

पंकज - एक मिनट अभी पता करता hu....ye प्रतीक को तो पता होगा hi....

पंकज ने मुझे कॉल किया पर कॉल लगी नहीं....

पंकज - सायद इसने भी मुझे ब्लॉक कर दिया hai....Kavita मैडम होती है हमेशा उनके साथ सायद उनको पता हो....

पंकज ने फिर K.Bua को कॉल किया.....

K.Bua - Hello कौन.....

पंकज - मैं पंकज बोल रहा hu....kya आपको पता है प्रोफ पूनम कहा है....

K.Bua - Poonam....haa haa...wo यही है मेरे pass.....tum आ जाओ यहाँ pe....ye मेरे डिपार्टमेंट में....

पंकज - Accha....par मैं अकेला नहीं hu...aur इनको आने नहीं देंगे अंदर....

K.Bua - पंकज hi बोल रहे हो naa.....ye ऐसी बातें तो नहीं करता था wo.....naa जाने कितनो को यूँ hi स्कूल में लेके आया हुआ है वो..

पंकज - हम्म ठीक है मैं आता हु....

पंकज - चलिए पता चल गया hai....aap भी साथ में चलो....

लीडर - पर बीटा किसी ने पहचान लिया to....dikkat हो जायेगी....

पंकज - आपको यहाँ पे ज्यादा लोग नहीं पहचानते और रूप बदल लो नहीं to...bas इससे आपको और भी नहीं पहचान पायेगा koi....chalo अब खोलो अपना portal.....waha के लिए जहा पे हम मिले थे....

ये दोनों आने को रेडी थे वही पंकज के स्वागत के लिए रूपल दीदी रेडी हो गयी thi......Isske वजह से 2-3 बार उनको दांत सुन्नी पड़ीं थी....

दरअसल जैसे hi फ़ोन पे पता चला की ये पंकज है रूपल दीदी ने K.Bua से उसको यहाँ आने को बोलने बोलै.....

कुछ देर हुई और वो आ गया वह पे पर उसके साथ कोई और भी tha....pata नहीं कौन था ye.....dekhne से hi लग रहा था इसकी दाढ़ी नकली hai....aur कान भी एल्फ के तो बिलकुल नहीं the.....Goblin सायद गॉब्लिन हो पर इसको गॉब्लिन कहा से मिल गया....

पंकज आया और बिन्ना कोई देर kiye...usne पूछा....

पंकज - कविता मिस कहा पे है प्रोफ पूनम मुझे उनसे जरुरी काम है....

रूपल दीदी - जर्रा हमसे भी मिल लो बुआ से थोड़ी देर में मिल लेना....

पंकज अपना सर खुजाने लग गया की ये इनको हुआ क्या है आज तक ऐसे तो कभी नहीं कहा......

पर रूपल दीदी तो फुल रेडी थी उन्होंने अपना हाथ पीछे से आगे किया और एक चुटकी bajayi.....yaha पे होना ये चाहिए था की पंकज थोड़ी दूर जाके girta.....par असल में हुआ ये की रूपल दीदी गिर गयी.....

K.Bua - arre....ye क्या hua....tum गिर कैसे गयी....

लीडर - कभी कभी दूसरों को गिराने के चक्कर में लोग खुद गिर जाते hai....Bete मुझे नहीं लगता ये कोई मदद करने वाले hai....chalo यहाँ से....

पंकज - Rukiye....ek minute....Rupal मैं तो यहाँ पे बस प्रोफ से बात करने आया tha......isme इतना गुस्सा क्या hona....ab क्या उनसे कोई सवाल भी नहीं कर सकता main....kya चाहती हो स्कूल छोड़ du...taaki तुम और तुम्हारे इस गैंग से दूर रह सक्कु....

रूपल दीदी - तुम समझते क्या हो खुद ko......jyada जुबान चलायी तो समझ लेना....

लीडर - समझ आप जाए beta....ye अभी मेरी मदद कर रहा hai....aur इस waqt....ek चिट्टी तक इसको काट नहीं sakti....samjhe...chalo यहाँ se....ye लोग काबिल नहीं है तुम्हे...

निकिता - आप होते कौन हो ये सब बोलने wale...aur ये हमारा आपस का मामला है आप क्यों बिच में आ रहे हो....

पंकज - आपस का maamla.....kaun सा maamla.....maine तुम सब में किसी को कुछ नहीं kaha.....jo पिछली बातें हो चुक्की थी उन् सब की माफ़ी मांगी hai....aur फिर भी ये कर रहे हो तुम sab....aapsi maamla....tum सब तो बस मुझे इग्नोर करने में लगे रहते ho....aisa जैसे मैं तुम सब को बिगड़ dunga....kitni बार कहु बदल रहा हु main...main कोशिश करता जा रहा हु और बेहतर बनने की पर तुमको इन् सब से कुछ है hi nahi....to ठीक है तुम अपने जगह रहो मैं अपने jagah.....Aur हां आंटी से बोल देना की अब तुम सब के साथ कोई जबरदस्ती करने की जरुरत नहीं hai....mujhe अपने साथ रखने ki....Main अकेला hi ठीक hu.....chaliye यहाँ se....aapne सही कहा ये मेरे लिए सही नहीं है....

पंकज इतना बोल वह से निकल gaya....Inn सब के दौरान ज्वाला वही पर tha....par उसको कुछ करने की कोई जरुरत hi नहीं thi.....usne खुद देखा की यहाँ पे गलती किसकी thi....aur इन् छोटी छोटी बाटों में वो थोड़ी आएगा बिच में.....

K.Bua - तुम ठीक हो Rupal......chott तो नहीं लगी....

रूपल दीदी - मैं ठीक hu.....par.....isko अब नहीं छोड़ने वाली main....isko मार hi dungi....mujhse ऐसे बात करने की हिम्मत कैसे हुई इसकी....

K.Bua - पागल हो kya....shant हो jaao.....sayad ये परेशां होगा किसी कारण से.....

रूपल दीदी - nahi....isko बुआ से बात करनी है ना मैं करौंगी बात iski....Nikita चलो तुम....

बिन्ना कुछ sunne...Nikita का हाथ पकड़ा और खींचते हुए उसको लेके चली गयी वो......

वही बहार आने के बाद लीडर पंकज को देख रहा tha.....wo समझ रहा था की ये बाँदा सच में कोशिश कर रहा है......

लीडर - कोई बात नहीं Bacche....hum बाद में मिल लेंगे तुम्हारी उस प्रोफ se....abhi तुम ठीक नहीं लग rahe....chalo मेरे saath,....tumhe कुछ सिखाया जाए आज....

पंकज - Nahi...aap जाओ मेरा मूड ख़राब हो गया hai....aapne देखा naa....maine कुछ किया kya....main तो उनकी बात समझ के उनके पास भी नहीं जा रहा tha.....main नहीं चाहता मेरी वजह से वो सब वो ना कर पाए जो उनको करना hai....main तो बस....

लादेरर - अरे कोई बात nahi....bas यही लोग थोड़ी है यहाँ pe......tumko दोस्त बनाने hai...main हु ना dost.....aur भी बहुत से लोग मिल जाएंगे यहाँ पे जो दोस्त बन जाएंगे tumhare....bhul जाओ उनको....

पंकज - हम्म सही kaha....par अभी हमको जाना है प्रोफ पून....

वो बात पूरी करता उससे पहले hi वह पे रूपल दीदी और निकिता पहुंच गयी.....

रूपल दीदी - बुआ से मिलना है ना तुम्हारे पापा से hi मिलने गयी है wo.....par याद rahe.....ab कोई मदद नहीं करने वाली वो....

लीडर - बच्ची शांत raho.....jo भी अंदर हुआ hai...agar वो तुम्हे अपनी बेइज़्ज़ती लग रही है तो वो खुद कराई है तुमने.....

रूपल दीदी - उम्र में बड़े हो aap....issliye अच्छे से बात कर रही hu.....hamare बिच में मत aao.....accha नहीं होगा वर्ण.....

पंकज - चलिए aap.....hum प्रोफ से मिल आते है.....

पंकज लीडर को लेके अपने पापा के केबिन की ओर चल pada.....wahi रूपल दीदी जो आते वक़्त K.Bua का फ़ोन लेके आयी थी उन्होंने बुआ को मैसेज कर दिया की पंकज की मदद ना करे....

पंकज ने लीडर को अपने पापा के केबिन के बहार रुकने को कहा और खुद अंदर आने की परमिशन मांगी.....

अंदर अभी चची , बुआ और साथ में दक्ष मां भी the....aur वो बातें कर रहे थे...

दक्ष - हां आओ ander....tumhare बारे में hi बातें हो रही है....

चची - बीटा तुम आये नहीं the.....aur मैंने भी कॉल किया तुमने कॉल नहीं पिक kiya....kya बात है किसी ने कुछ कहा क्या....

पंकज - नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं hai....wo दरअसल मैंने देखा है जब मैं उन् सब के साथ होता हु तो अच्छे से नहीं रह पाते सायद वो मुझे पसंद भी नहीं karte....to बस मैंने सोचा क्यों बेकार में उन् सब को परेशां किया jaaye.....main ऐसे hi सही hu....Papa आपको भी चिंता करने की जरुरत नहीं hai.....main अब कोई गलत काम तो नहीं hi करूँगा.....

चची - पर बीटा ऐसा नहीं hai.....wo तुम्हारे होने से परेशां नहीं होते....

पंकज - आंटी मैं रहता हु उनके साथ और इतनी समझ तो है कौन मेरे मौजूद होने से खुस है और कौन nahi....Prof मुझे आपसे कुछ बात करनी थी....

बुआ - हम्म बोलो.....

पंकज यहाँ वह देखने लगता है.....

चची - पूनम जाओ इसके साथ बहार जाओ और देखो क्या बात hai.....main....main भी निकलती हु दक्ष ji.....aur माफ़ करियेगा मैं अपना वडा पूरा ना कर सककी...

दक्ष - हम्म ठीक है.,...

चची वह से चली gayi....aur जाते हुए एक बार वापस से पंकज की ओर देखा.....

वही बुआ पंकज को लेके बहार aayi.....bahar लीडर बैठा हुआ था....

बुआ - तुम पहले अपनी बात बताओ उससे पहले मेरी भी बात सुन्न lo....maine सुन्ना वह अंदर क्या कहा tumne....pata नहीं क्यों तुमको ऐसा लगा पर ये सही नहीं hai....koi तुम्हारे होने से परेशां नहीं था....

पंकज - प्रोफ इस बारे में ना hi बात करे तो सही hai....abhi निच्चे जो कुछ हुआ उससे जो थोड़ा थोड़ा लग रहा था अब वो पुर्रा पक्का हो चुक्का hai...aur अगर वो मुझसे परेशां नहीं थे तो फिर क्यों निकिता वो गायब होनेवाली अंगूठी पेहेन के रखती thi.....aur वो उसको अपने hi दिया होगा naa.....sab मुझसे परेशां hi रहते hai....yaha तक की मेरे पापा bhi....aap सब से क्या कहना इसके बारे mein.....aap बस मेरी एक मदद कर dijiyega....iske बाद क्लास के अलावा सायद hi कभी आपको या आपके साथ रहने वाले लोगो को अपनी सकल दिखाऊंगा....

बुआ - ऐसी कोई बात नहीं है pankaj.......aur तुम ये सब क्या सोच रहे.....

पंकज - प्लीज Prof....ab और नहीं बस आप मेरी बात सुनने और अगर हेल्प कर सक्को तो ठीक है नहीं तो आप बता दो मैं अभी से चला जाऊँगा....

बुआ - ठीक है बताओ क्या मदद चाहिए तुमको....

पंकज - एक पनिशमेंट चाहिए मुझे.....

बुआ - पंकज तुम ठीक हो naa......dekho ये सब चलता रहता है पर इन् सब की वजह से इतना डिप्रेस नहीं हो जाते की खुद को दर्द देना शुरू कर दे......

पंकज - आपको जो समझना है आप samjho....mujhe बस आप एक कागज़ पे लिख के ये देदो की आप मुझे एनर्जी सिग्नेचर पे एक प्रोजेक्ट दे रही हो अस punishment.....reasons की कम्मी तो है nahi.....agar काम pade....to कुछ भी लिख दीजियेगा मुझे मतलब नहीं है....

बुआ - पंकज तुम समझ नहीं rahe.....tum इस वक़्त ठीक नहीं ho....tum चलो अभी मेरे साथ....

पंकज - मैंने अंदर hi कह दिया था जो कहना था मुझे अब आपके साथ या उन् सब के pass......main नहीं आ sakunga....aap बस ये बताइये आप मुझे ये पनिशमेंट डोज या नहीं......

बुआ ने कुछ देर तो socha......energy सिगनतिरेस पे एक प्रोजेक्ट वैसे तो ये कोई दर्दनाक काम नहीं hai....unko लगा सायद ये खुद को बिजी करना चाहता है इस वजह से ऐसा कुछ काम मांग रहा hai.....Bua ने एक पेपर पे लिख के दे दिया उसको.....

पंकज भी ख़ुशी ख़ुशी उस पेपर को लेके थैंक्स बोलके वह से निकल गया लीडर को leke.....wahi बुआ उसको देखती रही....

बुआ निच्चे हम सब के पास आयी तो वह चची भी thi.....thodi हॉटश सी बैठ हुई थी मेरे बगल में.....

बुआ - भाभी आप जैसा समझ रही हो वैसा कुछ भी नहीं है.....

चची - मैं अब कुछ समझना hi नहीं chahti.....sab ठीक hai....log खुदगर्ज़ होते है पता होना चाहिए था मुझे चाहे वो मेरे अपने hi क्यों ना ho....wo भी खुदगर्ज़ होंगे hi....khair छोड़ो इन् सब ko......mujhe कही काम से जानना hai...sham को खाना खाने आ जाना सभी....

चची भी इतना बोल के वह से निकल गयी....

बुआ - क्या हुआ था यहाँ पे.....

रूपल दीदी - पता नहीं मम्मी बहुत अजीब बातें कर रही थी आपने भी सुन्ना ना.....

बुआ - वो नहीं उससे पहले क्या हुआ tha...aur पंकज यहाँ पे आया था न.....

रूपल दीदी - आपने उसकी हेल्प नहीं की naa......wo मेरे साथ बतमीज़ज़ी कर रहा था मुझे सुन्ना रहा था....

K.Bua - गलती भी तुम्हारी थे.....

K.Bua ने जो भी हुआ जैसे भी हुआ वो सब उनको bataya.....aur उसके बाद बुआ ने जो ऊपर हुआ वो सब यहाँ सबको बताया.....

रूपल दीदी - dekha...iss बार भी इसकी वजह से मम्मी नाराज़ हो गयी hai.....isko छोडूंगी.....

बुआ - तुमको समझ नहीं आ raha......kab तक बच्चो की तरह बातें करती rahogi.....jaise वो बात कर रहा था ऐसा लग रहा था जैसे एकदम से टूट गया है wo....aur उसके इस हालत में लाने में हम सब का हाथ hai....mera हाथ है...

K.Bua - मुझे लगता है हमको उससे बात करनी चाहिए....

निकिता - जब वो जा रहा है तो क्यों उसके पीछे जाना रहने देते है ना उसको अपने हाल pe....aur हम खुद में खुश रहते है....

बुआ - जब तुम बेहोश पड़ी हुई थी ना तब मैंने ये कविता naa....wo तुम्हारी didi....Rupal ने या ये प्रतीक ने नहीं ढूंढा था tumko.....wo पंकज था जिसने ढूंढा था tumko....usne ऐसा सोचा होता ना तो अभी क्या होता वो तुम सोच भी नहीं sakti...ussi हाल में छोड़ देते hai.....sach में इतने खुदगर्ज़ है हम sab....maine सोचा भी नहीं था....

मैं - बुआ मैं बात करके देखूंगा usse....aap चुनता मत karo....waise भी वो मुझसे बात करने को पागल हुआ रहता hai.....mera ख्याल रखने के लिए कोई बच्चो वाली किताब पढ़ के आया था वो....

K.Bua - उसके साथ एक आदमी tha...usko भी देखा था क्या तुमने पूनम.....

बुआ - हां देखा tha.....uska क्या,...

K.Bua - पंकज बोल रहा था वो उसी की मदद कर रहा hai....kahi वो कोई गलत काम तो नहीं करा रहा ना उससे....

बुआ - लगा तो नहीं था aisa.....Tum सब रहो यहाँ मैं देखती हु उसको....

मैं - अरे बुआ ओल्ड आउल के लोगो को भेज देता हु naa...yaa फिर ज्वाला के लोग...

बुआ - कभी कभी कुछ खुद भी करना होता hai.....tum समझ नहीं पाओगे.....

बुआ वह से चली gayi.....ye पता नहीं क्या हो रहा tha.....Pankaj को लेके इतना सीरियस हो जाना मज़्ज़ाक़ जैसा लग रहा था.....

आज के लिए इतना hi रखते है आगे के अपडेट में देख लेंगे निकिता क्या क्या बताती है शैतानो के बारे में और ये प्रतीक मंदिर तक पहुंचा तो उसको ऐसा क्या हो gaya.....aur साथ hi dekhenge.....Strange वर्ल्ड की एक छोटी सी लड़ाई
 
अपडेट - 76

स्ट्रेंज वर्ल्ड में इस वक़्त निक्स समुदाय के लोगो के बिच बातें हो रही थी.....

मंदिर में लोग आये हुए थे और बातें कर रहे the.....devta की मूर्ति की आखें आज चमक रही thi....sabhi उसी को देखने आये the....Pujari जी इस वक़्त उस लड़की को कही लेके गए हुए थे ट्रेनिंग के liye....iss बात की खबर किसी को नहीं thi....wo जब यहाँ पे थोड़ी देर में पहुंचे तो उन्होंने देखा की कैसे सभी लोग मंदिर के पास आके खड़े हुए the....Ladki उनसे थोड़ी पीछे thi....jab उन्होंने भी सुन्ना की मंदिर में देवता की मूर्ति की आँखें चमक रही hai.....wo तुरंत वह देखने चले गए उस चीज़ज़ ko....aur जैसे hi वो वह पे पहुंचे और उनकी नज़र उन् चमकती हुई आँखों पे padi....thodi देर में hi वो नार्मल ह gayi.....wo पीछे मुद्दे और वो लड़की वह पे मौजूद थी...

लड़की - क्या hua.....log तो बोल रहे थे मूर्ति की आखें चमक रही hai....ye तो ठीक है....

पुजारी -(मैं में) वो इस वक़्त यहाँ पे आया tha.....par तैयार नहीं है wo.....hamare देवता ने अपना वड्डा निभाया है....

लड़की - क्या hua.....kaha खो गए आप.....

पुजारी जी - नहीं कुछ nahi......ab सब ठीक hai.....(thoda ृक्क के) लगता है कोई मिलने आया था tumse......chalo पता कर आते है.....

लड़की - मुझसे यहाँ कौन मिलने aayega.....ek जो मुझे जानता था वो जेल में है जहा से वो निकल नहीं सकता और तो कोई बच्चा नहीं जो जानता हो मुझे.....

पुजारी जी - कभी कभी मिल जाते है लोग जिनसे अनजाने में जान पहचान हो जाती hai.....chalo देख आते है....

लड़की - chaliye......main भी देखती हु कौन मुझसे यहाँ मिलने आ गया था.....

पुजारी - हम्म्म अच्छा मेरी एक बात सुनने इस मूर्ति के पास थोड़ी सफाई कर दो और पीछे के बगीचे से कुछ Jal-Phool चढ़ा दो वह पर....

लड़की - जी ठीक है....

पुजारी जी लड़की को काम पे लगा के वह से निकल जाते है जहा पे लोग बातें कर रहे थे.....

पुजारी जी - सब ठीक hai....hamare देवता अपनाकिया हुआ वड्डा पूरा कर रहे the....abhi सब सही है....

उनकी बात सुनने के बाद एक पल को सब शांत हुए और उसके तुरंत बाद hi सारे एक दूसरे से धीरे धीरे बातें करने लगे....

पुजारी जी - कोई बहार से आया था kya....kisi को इस बारे में कोई खबर hai......kabile की ृसाक्षा कौन कौन कर रहे थे....

उनके ऐसा पूछने पे वो बाँदा सामने आ गया जिसने प्रतीक को उस मंदिर को दिखाया था....

वो - जी पुजारी जी मैंने देखा tha.....ek इंसानी लड़का था उसने कहा की उस लड़की से मिलने आया है....

पुजारी जी - उसने कहा और तुमने मान लिया.....

वो - पुजारी जी आप hi ने कहा था किताब में लिखा है की हमको इंसानो की मदद करनी hai.....aur वो भी इंसान hi था और उसने कहा वो जानता है लड़की को और उससे मिलने आया है....

पुजारी जी - हम्म पर आगे से जब भी कोई इंसान आये तो उसको पहले मुझसे मिलवाना वो भी मंदिर से दूर samjhe.....mandir के पास नहीं लेके जाना है और ना hi भगा देना है....

वो - ठीक है पुजारी जी अब जैसा आप कहे वही करेंगे....

उतने में वो लड़की भी बहार आ गयी....

लड़की - चलिए पुजारी जी देखते है कौन मिलने आया था मुझसे....

पुजारी जी - हम्म ये देखो इससे ने देखा था usko.....chalo अब तुम हम दोनों को उसकी तस्वीर दिखाओ....

वो बाँदा तालाब के पास जाता है अपना हाथ तालाब के पन्नी में रखता है और धीरे से धूमता है और आखें बंद करके कुछ बोलता है जिसके बाद पानी थोड़ा हिलने लग जाता है और उसमे एक आकृति बन जाती है....

लड़की - ye....ye तो वो है....

पुजारी जी - अभी कुछ देर पहले कहा था तुमको कौन hi जानता hai...aur देखो तुम भी इसको जानती हो और वो भी जानता है तुमको....

लड़की - नहीं मैं नहीं जानती isko...ye बस मिल गया था mujhe,....aapko पता है इसके पास,....

पुजारी जी - अरे अंदर चल के बातें कर lenge....aur आप sab....aap अपने अपने कामों पे लग jaaiye....jab तक ये लड़की यहाँ hai....ye जगह हमारे लिए सबसे सुरक्षित hai....ab जाइये आप सब...

सभी लोग वह से चले गए पर उनके दिम्माग में ये भी चलने लगा आखिर पुजारी जी ने आखिरी बात ये क्यों कही जब तक ये लड़की यहाँ है सब सुरक्षित है.....

वही लड़की को लेके पुजारी जी वापस से मंदिर में चले गए.....

पुजारी जी - हम्म Jal-Phool एक दम सही चुनन के लाती हो tum....tumse अच्छा कोई नहीं लाता इतने ताज़े Jal-Phool....tumhe पता है हमारे देवता को जल फूल सबसे अधिक इसी तरह का अच्छा लगता है....

लड़की - अब मैं कैसे जानूँगी इस बात को आपने बताया hi नहीं kabhi....khair मैं क्या कह रही थी उस बन्दे के पास naa......bahut बड़ा सा उल्लू था....

पुजारी जी - हम्म hoga....rukko....yaha आओ....

पास में hi एक कटोरा जैसा कुछ बना हुआ था दिवार से सट्टे hue...usme भी ोानी रखा हुआ था और एक Jal-Phool रखा हुआ था.....

पुजारी जी ने उस जल- फूल को होने हाथ से थोड़ा सा साइड kiya....aur लड़की को पानी में देखने को बोलै.....

लड़की ने जैसे hi पानी में देखा उसकी आखें बड़ी हो gaye.....wo एकदम से शॉकेड हो gayi....wo कुछ बोलने को हुई पर तभी पुजारी जी ने उसको चुप रहने का इशारा किया और मुस्कुराने लगे

पुजारी जी ने उसको अपने साथ आने को कहा.....

वो लड़की उनके साथ चली gayi...aur जाने के साथ hi कहा....

लड़की - वैसा hi पर उससे और bada....usse और बड़ा था वो उल्लू.....

पुजारी जी - हम्म मैं पता कर रहा हु ये सब है कौन और कहा से आये hai....par इतना तय है ये सब उसी लड़के के साथ hai....tumpe नज़र रखने को इसको भेजा है यहाँ पे...

लड़की - मुझपे नज़र पर क्यों मैं to.....maine किया hi क्या है उसके लिए.....

पुजारी जी - क्या किया है क्या karogi....wo वक़्त पे पता चल jaayega....abhi इसको परेशां मत करना उसको पता नहीं चलना चाहिए हमको उसके बारे में पता है....

लड़की - कब से है ये मेरे पीछे...

पुजारी जी - कब से है इसका पता नहीं hai....par ये वाला जो hai....ye यही को 2 दिन पहले आया hai...accha अब ये सब छोड़ो और ध्यान पे baitho....bahut बातें हो गयी...

चलिए इनको चोदे हम एक बार बुआ के पास चलते है.....

बुआ बन गयी थी jaasos....wo जब से हमारे पास से निकली तब से बस पंकज को ढूंढने में लगी हुई thi....par वो मिल नहीं रहा tha....milta कैसे लीडर ने पोर्टल से उसको वह से निकला tha...aur दोनों जा पहुंचे थे मैजिकल क्रीचर्स के हेड ऑफिस की taraf......uske ठीक पास नहीं जा [ाहुचे थे वो वो उससे थोड़ा बहुत दूर आ गए the.....phir लीडर से थोड़ी देर बात करने पे पंकज चल पड़ा उस ऑफिस की oor.....latka हुआ मुँह लेके और थोड़ा गुस्से में.....

कुछ गार्ड्स खड़े हुए थे वह उन्होंने उसको roka....par उसने अपना स्कूल का ईद और साथ hi मैजिकल क्रीचर्स की स्पेशल ईद दिखा di.....jiske बाद उसको अंदर जाने दे दिया गया....

वो अंदर आया तो अंदर बहुत से लोग the.....puri भरी हुई थी ये jagah....koi अपनी ईद के वैलिडिटी को बदलवाने आया हुआ tha....koi अपने बचो का बिरथ सर्टफिकेटे लेने आया हुआ था कोई कुछ कोई kuch....bhara पड़ा था पूरा का पूरा जगह........

पंकज चुक्की पहले भी आ चूका था तो वो जानता था वो मोटा आदमी कहा बैठता है जो यहाँ का हेड कहा जाता hai.....wo उसके पास जाने laga....par वह पे अभी कोई मीटिंग चल रही थी तो उसको रुकना pada.....jab तक मीटिंग ख़तम हुई तब तक ऑफिस बंद होने का टाइम हो चुक्का tha....wi आदमी निकला bahar...aur उसने देखा पंकज बैठा हुआ hai....naam से तो नहीं याद था पर चेहरे से पहचान गया वो......

वो - tum....iss बार भी कोई गड़बड़ कर दी क्या.....

पंकज लटका हुआ मुँह उसकी ओर घुम्मा के बोलै

पंकज - नहीं sir.....wo एक प्रोफ है ना स्कूल mein....naraz हो गयी और.....

कागज़ उनको दिखने लगा.....

पंकज - ये पनिशमेंट में दे दिया है...

वो - :lol: इसी वजह से मुँह लटका हुआ hai....kya नाम है ye....Pankaj haa.....to पंकज बीटा आज तो बंद करने का टाइम हो गया hai....aur कल से क्लासेज होनी है तुम्हारी है naa.....to एक काम करना शाम के वक़्त आ जाना मैं किसी को यहाँ बोल दूंगा तुम्हारी हेल्प कर देगा फाइल्स निकलने mein....kitabein निकलने mein....par सब वापस ठीक से खुद रखना hoga...agar नहीं तो इससे भी खतरनाक सज़्ज़ा में dunga....Prof दक्ष के बेटे हो ना तुम.....

पंकज - Haa....par सर क्या आपके यहाँ पे वो इंसान जो कंप्यूटर उसे करते है उससे नहीं कर सकता मैं इससे जल्दी हो जाएगा मेरा kaam....aapko तो पता है मुझ जैसे स्टूडेंट के लिए कितना वक़्त लग जाएगा इनसब mein...aur इससे आप सब को भी परेशानी होगी...

वो - चालक ho....par बेटे अभी वो टेक्नोलोय को मंजूरी नहीं मिली है स्ट्रेंज वर्ल्ड की ऑर्डर se....aur ओरियन और टाइटन पे तो बात hi नहीं पहुंची hai....to ऐसे में मदद नहीं hi कर पाऊंगा koi...tumko फाइल से hi करना होगा जो करना है...

पंकज - ठीक है sir.....aapka बहुत बहुत sukriya....madad के liye....main कल आता हु फिर....

वो - हां हां जरूर आना....

पंकज इस बार सच में मुँह लटकाये वापस आ गया tha....usko लगा था की कंप्यूटर ना सही कोई ओरियन का बाँदा दे दिया जाएगा उसको मदद के liye....wo माजिशन्स उसका काम सायद थोड़ा जल्दी कर dete....par यहाँ पे भी वही हाल है....

लीडर ने देखा पंकज मुँह लटकाये हुए आया है वह पे...

लीडर - अरे क्या बात hai....nahi अल्लोव किया क्या....

पंकज - अल्लोव तो कर दिया है पर यहाँ भी वही कागज़ वलसिस्टम hi है मैंने सोचा कंप्यूटर होगा यहाँ pe....khabar आयी थी कंप्यूटर को लेके बातें चल रही hai....jisse ओरियन से आने वालो को भी सहूलियत हो jaayegi.....saath में उन् इंसानो को भी यहाँ पे काम दिया जा सकता था जो मैजिकल क्रीचर्स से जुड़े हुए hai....par मैजिक ये सब नहीं आता unko....khair अब यहाँ भी खुद hi ढूँढना होगा...

लीडर - अरे कोई बात नहीं देखते है सायद कुछ मिल jaaye....accha चलो अब कुछ सीखने के बारे में कहा था वो बता देता hu....kisi के जादू को मोड़ना आता है तुमको....

पंकज - जादू मोड़ dena.....ye सुन्ना है पर कभी देखा नहीं और किसी ने बताया भी नहीं अभी तक....

लीडर - वो इस वजह से क्यूंकि अभी तुम उस लेवल तक पहुंचे नहीं ho....par मेरे हिसाब से मैजिक लेवल के हिसाब से नहीं लेवल को मैजिक के हिसाब से रखना chahiye....jitna ज्यादा आपको आता है उतने ऊपर के लेवल पे आप rahoge....wo सही hota....maine सोचा था ये सब अपनी बेटी को sikhaunga....par tum....tum बहुत अच्छे हो bete....merin इतनी मदद कर रहे हो तो मेरा भी कुछ करने का मैं करने laga...aur अब मैं तुमको इसका ट्रिक बताता हु.....

पंकज पूरा एक्सीटेंड होक सुनने लगा....

लीडर - आयने को देखा है कैसे वो हमको हमहि से मिलवा देता hai.....uss आईने की तरह बन सक्को तो बन jaao......dusre के मैजिक को उसी से मिलवा डोज tum.....dimmag एकदम खली कर लेना होता है isme....fir खुद को और अपने सामने वाले को एक hi samjho....kahte है मैट्रन में भी अकाल होती hai...unko बेवकूफ बना दिया तो सब जीत जाओगे tum.....jab भी कोई मैजिक करता है तो निशाना सही लगाने को अपने दिम्माग में निशाने के बारे में hi सोचता hai....aur तुमको उस सोच को बदल देना hai.....telepathy का उसे karo....uske दिम्माग में उसी की तस्वीर दाल do....wo मैजिक करेगा और मैजिक खुद उसी पे hoga....par ये किसी मुकाबले में करना मुश्किल होता hai....isko हम धीमे रफ़्तार वाली लदायिओं में उसे कर सकते है....

लीडर ने और भी बहुत कुछ बताया उसके बारे mein....wahi Bua.....Bua पंकज की तलाश में यहाँ वह घूम रही थी उसके घर gay....Prof. दक्ष के पास गयी पर उन्होंने कोई मदद नहीं ki....wo भी थोड़े गुस्से में the....unhone देखा था उनका बीटा बदल रहा था अपर इन् लोगो की वजह से अब सायद वो वापस से बुराई की तरफ चला जाए इसका दुःख था unko.....haa पंकज ने कहा था वो नहीं jaayega....par कहा बस चलता है ऐसे चीज़ज़ों mein...aise चीज़ों में तो बस लोग बढ़ते चले जाते है अगर अकेले हो तो.....

जब बुआ दक्ष मां के पास आयी तो उन्होंने उनसे अस ा कलेग hi बात ki.....jab बुआ ने उनसे पूछा पंकज कहा हो सकता है तो उन्होंने बात को ताल दिया tha.....aur खुद भी वह से निकल गए....

शाम होने को आयी thi.....sab घर को निकल गए the....K.Bua हमारे साथ थी bas....par होक्के भी नहीं थी वो भी किसी और सोच में hi दुब्बी हुई thi....Main ये सोच रहा था आखिर मैं बेहोश कैसे हुआ और इन् सब को कैसे पता चला मेरे स्पिरिट एनिमल्स के बारे mein....Rupal दीदी गुस्से में थी की उनको खुदगर्ज़ कहा गया वो भी उस पंकज के वजह se....wahi निकिता थोड़ी चुप चाप थी....

हम जब घर पहुंचे खाना लगा हुआ tha....Chacha और दादा दादी भी आ चुक्के the....sab खाना खा रहे थे....

दादी - कविता ये पूनम कहा है वो दिख नहीं रही.....

K.Bua - वो आंटी वो आ jaayegi....bola है स्कूल का कुछ काम है उसी में बिजी रहेगी....

हम सब के सामने झूट बोल दिया उन्होंने दादी se.....aisa कुछ भी नहीं हुआ था....

निकिता - मैं जाती हु नाना नानी के यहाँ....

चची - बीटा खाना खा lo....phir चली jaana....mujhe भी वह थोड़ा काम है मैं भी चल लुंगी.....

चाचा - इस बार नाराज़ होक तो नहीं जा रही ना....

धीरे से बोलै था पर सुन्न सबने लिया था.... :lol:

चची ने आँख दिखते हुए नहीं कहा और वापस से किचन में चली gayi....hum सब भी फ्रेश होक आ गए डिनर ko....par K.Bua जा चुक्की थी जब हम वापस आये तब tak......puchne पे कहा की उनको भी काम है कुछ बुआ के saath....iss वजह से वो चली गयी....

चची बिलकुल ऐसे बेहवे कर रही थी जैसे कुछ हुआ hi नहीं tha...Main खुद में खोया हुआ था निकिता का भी कुछ ऐसा hi हाल tha......wahi रूपल दीदी वो नार्मल thi....unhone देखा चची नार्मल है तो वो भी नार्मल hi हो गयी...

खाना ख़तम हुआ और उसके बाद चची निकिता के साथ नाना नानी के यहाँ चली गयी....

मैं अपने रूम में आ गया और ध्रुव से बात करने की कोशिश करने laga.....par वो बोले तब naa.....kabhi कभी तो ऐसा लगने लगता है जैसे वो है hi nahi...Main कब से उसको आवाज दे रहा था पर वो है की जवाब hi नहीं दे रहा था.....

मैंने अलबूस और कूपर को बोलै उसको ढूंढने के liye......thodi देर में उसकी आवाज आयी.....

ध्रुव - ये क्या हो गया tha.....main बेहोश कैसे हो गया था....

मैं - Behosh.....tum bhi......main भी बेहोश हो गया tha....aur अलबूस और कूपर के बारे में पता चल गया उनको....

ध्रुव - वो अभी इम्पोर्टेन्ट नहीं hai....wo पता लग hi जाना था कभी ना kabhi....par हम बेहोश कैसे hue....tum बेहोश होते तो चिंता की ज्यादा बात नहीं thi....par मैं भी बेहोश हो गया tha....ye कही कोई हमला तो नहीं था....

मैं - क्या बोले जा रहे ho...hamla कैसा hamla....ek मिनट कही ये डार्क पावर का तो काम नहीं ना......

ध्रुव - उसका नहीं हो sakta....ye कुछ और hi था....

मैं - कही वापस से कोई शैतान तो nahi....agar कही ये वो हो तो....

ध्रुव - ये हो सकता hai....par स्ट्रेंज वर्ल्ड में शैतान नहीं hote.....unka तो एअर्थ पे भी आना मन्ना है वो यहाँ पे कैसे आये ये भी सोचने की बात है....

मैं - अच्छा अब ठीक हो ना तुम या कुछ अलग सा लग रहा है....

ध्रुव - नहीं वही समझ नहीं आ raha....ye बिलकुल ऐसा था jaise....jaise मुझे किसी ने बंद कर दिया ho....par मैं कोई मशीन नहीं hu.....ye जो भी था अजीब था....

मैं - हम्म वो तो hai....accha एक बार देख लो अलबूस और कूपर ठीक है naa...aur इस बारे में भी पता लगा लेना की क्या हुआ tha....Uske बाद मैं सो gaya...waise भी कल स्कूल जाना था....

नेक्स्ट मॉर्निग आफ्टर ध्यान...

हम खाना खा रहे थे ना बुआ thi....naa hi K.Bua...

मैं - चची बुआ नहीं आयी क्या...

चची - नहीं वो उसने कहा था ना काम है तो बस चली gayi....aur हां वो निकिता ने कहा वो बस के पास मिलेगी और महारानी तुमको भी बुला रही थी वो....

रूपल - Mujhe.....haa सायद कोई काम hoga...theek hai....tera खाना नहीं हुआ अभी तक चल वो वेट कर रही होगी....

मैं - हम्म चलो....

हम दोनों निकल pade.....Nikita बस के पास hi खड़े the.....wo थोड़ा घबराई हुई लग रही थी....

रूपल दीदी - क्या हुआ छोटी तुन aise.....koi परेशानी है क्या.....

निकिता - ज्वाला पोर्टल खोलो.....

उसने कहा और ज्वाला ने खोल भी diya....main ज्वाला को देख रहा था और वो mujhe.....Nikita ने मेरा और रूपल दीदी का हाथ पकड़ा और हमको खिंच के अंदर लेके चली गयी....

हम तिण्णो अभी ज्वाला के कबीले में थे....

मैं - ज्वाला तुम इसके कहने पे....

ज्वाला - वो तुमसे जुड़ी है मैं भी तुमसे जुड़ा हु हम दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए hai....ye सब डार्क पावर के वजह से भी hai....main इनकी बात को मन्ना नहीं कर पाटा.....

मैं - इसका क्या मतलब हुआ अब....

निकिता - वो सब छोड़ो और मेरी बात sunno....aap सब खतरे में हो.....

रूपल दीदी - हम खतरे में hai....kisse खतरा है हमको....

निकिता - आपके बड़ों की कुछ गलतियों का खतरा hai.....aap नहीं jaante......Earth पे जो शैतान आये हुए है उनके वह होने के पीछे हमारे घर वालो का हाथ hai....aur.....aur अब नित्य आंटी को लग रहा है jaise....wo सब आप सब से बदला लेने आ रही है...

रूपल दीदी - तुम क्या बोल रही हो तुम समझ भी रही हो naa.....ye बहुत बड़ा इलज़ाम है....

निकिता - मैं सच बता रही हु Didi......Aunty ने बताया था मुझे ये sab....wo जब घर से नानी के यहाँ आयी thi....uski वजह यही सब tha.....unko लगने लगा था उनकी ग़लती से बहुत कुछ हो गया hai...aur वो अब कुछ कर भी नहीं पा रही hai......unhone वापस जाके उन् शैतानो को एअर्थ से भागने की बात भी करि थी sabse....par....par सब इस बात पे राज़ी नहीं hue.....bado का मन्ना था की अब उनसे उलझना कोई अक्लमंदी की बात नहीं hai.....kal रात वो नानी से इसी बारे में बात कर रही thi....puch रही थी की क्या करे wo.....ghar को सुरक्षित तो कर दिया है par....par फिर भी दर तो लगा hi रहेगा....

मैं - और तुमने ये सब कैसे sunna...kaise पता है इतना कुछ....

निकिता - कुछ बातें उन्होंने खुद batayi....aur कुछ मैंने कल सुन्नी हुई hai....humko कुछ करना होगा....

रूपल दीदी - मुझे याक्किन नहीं हो raha.....ye सब हमारे घर mein....aur मम्मी पापा भी...

निकिता - आंटी और uncle....to िन्न्न सब से आगे निकलना छह रहे hai....aur निकले हुए भी थे पर ये तो पास्ट है जो वापस से आ गया hai......hum जानते है वो कैसे आया था पर ये उनक बता नहीं sakte.....aur अब वो सब उन् सैतानो के पीछे लगने वाले hai.....unko खतरा होगा उनसे....

मैं - ज्वाला है हमारे साथ वो कभी कुछ नहीं होने देगा....

रूपल दीदी - हमे भी कुछ करना hoga.....humko पता लगाना होगा वो सब कहा hai.....aur अगर पॉसिबल हो तो उनको वह से भगा देंगे....

निकिता - हां ये कर सकते hai.....kyunki हमारे पास बहुत से पावर्स hai......Jwala है ओल्ड आउल hai.....ye पोलर बेअर्स hai....par उनके pas.....wo तो अकेले लड़ने जाएंगे...

मैं - मैं इस बारे में कुछ करता hu.....Old आउल यहाँ आओ.....

ओल्ड आउल वह पे आ गया....

ओल्ड आउल - हां बताओ....

मैंने उसको सब bataya....aur वो ध्यान से सुनता जा रहा था.....

ओल्ड आउल - हम्म तो तम चाहते हो मैं एअर्थ पे शैतानो का पता lagaun.....theek है पर वक़्त lagega....kyunki एक तो मेरे बहुत से लोग स्ट्रेंज वर्ल्ड में hai....aur शैतानो को ढूंढने के लिए सभी लोग काबिल नहीं hai.....mujhe उनको ट्रैन करना होगा....

मैं - इसमें कितना वक़्त लग जाएगा....

ओल्ड आउल - ये सीख तो जल्दी जाते है पर फिर भी वक़्त तो लग्न hi है....

मैं - ठीक है तुम jaao......Nikita दीदी हमको खुद करना होगा ye.....main एक तरीका जानता hu.....aur उससे पता भी लग जाएगा क्यूंकि इससे पहले वाला भी उसी से मिला tha.....Bua को ये सब बताना hoga....taki वो भी सब जान sake.....Nikita वोन जानती है ये सब या नहीं....

निकिता - nahi....Bua नहीं जानती इनके बारे में.....

मैं - हम्म तो उनको हम अभी जाके batayenge....aap चलोगी वह पे.....

रूपल दीदी - मुझे मम्मी से बात करनी है मुझे क्यों नहीं बताया ये सब...

मैं - अपनी सुन्ना nahi...ye सब बुआ तक को पता नहीं hai.....Nikita को पता चला क्यों की वो उस वक़्त अकेली थी चची के pass....aur चची से रहहा नहीं gaya......dekha ये वाली बात उन्होंने इससे भी नहीं कहा...

रूपल दीदी - मैं फिर भी उनसे बा....

मैं - दीदी ये ख़तम करके बात कर लेना naa....uss वक़्त सायद वो खुद hi हमको बता दे ये सब अभी इन् सब की जरुरत नहीं hai.....aap बताओ आप आओगी साथ या कही और जाना है आपको.....

रूपल दीदी - होटल में इस वक़्त काम नहीं hai.....Polar बेयर से बोलो मुझे उन् जीवों के पास लेके जाए....

मैं - आप पागल हो अकेले में ये कैसे करोगे आप....

रूपल दीदी - मुझे अकेले hi करना है वो चीज़ज़ तुम भी जानते हो और अभी बस देखना है मुझे....

मैंने पोलर बेयर किंग को बुला diya.....aur उसको बता भी दिया की जैसे hi लगे कोई खतरा है या ये दीदी कुछ गड़बड़ करने वाली हो इनको लेके वापस आ jaana.....sirf उसको नहीं maine....ye ज्वाला से भी बोल diya....pata था ये अभी गुस्से में hogi....aur कुछ ना कुछ करेंगी....

मैंने ज्वाला से बोल के पोर्टल खुलवाया ek.....school के liye....aur उससे हम दोनों hi वह से स्कूल चले आये....

इन् सब के चक्कर में एक क्लास मिस कर चुक्के थे hum....aur जब हम दोनों बुआ के केबिन के पास पहुंचे तो वह पे लॉक लगा हुआ tha.....routine में देखा तो पता चला बुआ ने छुट्टी ले राखी hai....mujhe लगा इस बारे में सायद K.Bua जानती hogi....unke पास जब गए तो वो अपने डिपार्टमेंट में नहीं the.....pata नहीं वो कहा thi......ye मिले नहीं और क्लास अब दक्ष मां की thi....humne सोचा थोड़े वक़्त बाद तक वो आ jaayenge....aur हम क्लास में चले gaye....class में आये तो वह पे ये मां जी को हमसे थोड़ा ज्यादा लगाव हो gaya.....bas 2 मिनट लेट होंगे हम और हमको क्लास में नहीं आने diya....bhadass निकल रहे होंगे ye....ab क्लास में जाना नहीं था तो हम गार्डन के पास चले gaye....waha पे मैंने dekha....ke सीनियर्स के क्लास के बहार K.Bua चुप्प के कड़ी हुई थी....

मैं - निकिता K.Bua....wo देखो....

निकिता - पर ये ऐसे क्यों कड़ी hai.....chip के....

मैं - मुझे क्या pata....humko जाना चाहिए उनके पास उनको बताना भी hai....aur बुआ के बारे में भी पूछना है....

निकिता - अभी वह नहीं जा sakte....thoda ृक्क जाते है फिर जब वो वह से वापस आने लगेगी तब उनसे बात कर लेंगे....

मैंने सोचा ये भी सही hai....par इसके बाद जब क्लास ख़तम हुई और हम उस तरफ जाके उनका वेट करने लगे तो वो मिली hi nahi.....waha पे मिला तो बस Pankaj....usne एक बार हम दोनों की ओर dekha...aur सायद हमारे तरफ आने भी लगा tha....par फिर वो मदद गया और वह से चला गया....

निकिता - ये K.bua तो आयी hi nahi....abhi ऊपर चल के देख आते है....

हम दोनों ऊपर गए पर वह कही भी नहीं मिली wo.....uske बाद हमने उनको बहुत ढूंढा पर वो मिली hi nahi.....naa बुआ का पता hala.....iske बाद हम क्लास में चले गए.....

वही एल्फ कौंरटय के पास कुछ छोटे छोटे कसबे the.....jaha पे कुछ एल्फ या कोइन और प्रजाति के लोग रहा करते the....aaj उस जगह पे किसी ने हमला कर दिया tha.......waha पे 2 वाटर एलिमेंट्स वालो को मार दिया गया tha......iss बात का पता ओल्ड आउल या उनके लोगो को नहीं चला tha....kyunki उन्होंने अपना फोकस एल्फ कौंरटय पे लगा रखा tha.....naa की कही bahar......par इस बारे में लीमो की सोसाइटी को चल गयी थी और उसने कुछ लोगो को वह भेजा tha.....dekhne को की क्या ये सब बिलकुल वैसा hi था या किसी और तरह ka......par हुआ ये की उसके लोगो पे हमला कर दिया उस कसबे के लोगो ne.....unka कहना था की ये वही है जो आये थे और उनके यहाँ के लोगो को मार gaye.....bas खुद को किसी तरह से बेगुनाह साबित करने के लिए और मदद बुलाने को उन्होंने अपने तरीके से मैसेज kiya....aur वह पे लीमो आ pahucha.....bas लीमो hi नहीं लीमो के साथ ओल्ड आउल भी.....

लीमो ने उस कसबे के हेड से बात करने के लिए kaha.....aur लोगो ने थोड़ा ना नुकुर के बाद हां कर diya....aur वह पे आ गए उस कसबे के हेड....

लीमो - आपने गलत लोगो को पकड़ रखा है ये मेरे साथी है और हम इन् हत्याओं के बारे में जांच कर रहे hai....bas यहाँ के बारे में पता चला तो हम आ गए देखने की ये भी वैसा hi है या अलग....

हेड- मेरे लोगो ने देखा है वो एक एल्फ hi tha....aur कपडे भी ऐसे hi पहने हुए थे.....

लीमो - पर एल्फ तो और भी है ना वह pe....aur आप सब भी तो एल्फ के परिवार से hi आतें hai....aur रही बात इन् कपड़ों की तो ये वह के सैनिकों के kap......aapne कहा आपके लोगो ने देखा है usko.....kisi ने उनका चेहरा dekha...yaa वो कितने थे ये सब देखा....

हेड - 1 hi था....1 hi था wo....wo aaya.....aur उसने पहले देखा कौन वाटर एलिमेंट का hai....aur उसके baad....uske बाद उनसे मार दिया unko.....par.....par हम ऐसे hi किसी को अपने लोगो पर हमला करने पे छोड़ नहीं sakte....Main...Main खुद लड़ा usse......ye चोट देख रहे ho....ussi का तौफा hai.....Inn सब को खोल दो और जाने do....ye वो नहीं hai.....aur तुम तुम मेरे साथ आओ.....

लीमो - तो आप बस मुझसे मिलना चाहते the....aisa था तो इनसे कह देते मैं आ जाता यहाँ पे.....

हेड - सायद ना भी aate.....jo मारे गए hai....unn सब का बदला चाहिए मुझे.....

लीमो - ये जो कोई भी है वो एल्फ कंट्री में भी खून कर चुक्का है और उसने ठीक ऐसा hi किया सबके साथ हाथ काट के उलटे करके रख दिए...

हेड - ये वाटर एलिमेंट वालो की बेइज़्ज़ती करना hai....wo....wo जो भी hai.....water एलिमेंट वालो को चुनौती दे रहा है....

लीमो - आपने कहा आपने उससे लड़ाई ki.....to क्या वो बह....

हेड - हां वो भी जख्मी hai.....uska दाहिना pair.....usme चोट आयी thi....aur कंधे के पास भी.....

लीमो - जी sukriya...agar और बह कुछ पता हो तो आप मुझे बताइये मैं उसको खुद पकडूँगा और सज़्ज़ा दूंगा....

हेड ने बहुत कुछ बताया जैसे कपड़ों के बारे में चेहरे पे लगे मास्क के बारे mein....aur भी सब कुछ पर चेहरा तो देखा नहीं था,,,,,,,

लीमो भी सब सीओंने के बाद अपने लोगो को लेके वह से चला gaya.....aur इस बारे में सबको बता दिया की कोई भी इस तरह का जख्मी एल्फ अगर कही इलाज करने गया हो तो उसका पता lagaye....par ओल्ड आउल उसके दिम्माग में तो कुछ और hi आ गया tha.....jab उसने हाइट के बारे में सुन्ना था तो वो थोड़ा परेशां हो gaya......Elf किंग और युवराज की हाइट लगभग से शामे hi thi....usko लग रहा था की उसने ये पक्का किया हुआ था की वो दोनों नहीं हो सकते पर ये एक बार और कन्फर्म करने में कोई हर्ज़्ज़ नहीं tha...to वो गया waha.....pahle एल्फ किंग के pass......ELf किंग अभी रेडी हो रे थे और उतने में उनके दाहिने पेअर में चोट लग गयी thi....aur वो पेअर पकड़ के बैठे हुए the.....Old आउल ने सोचा यही होंगे जिसने खून किया hai.....phir उसने क बार युवराज को भी चेक करना chaha....aur जब वह गया तो उसके पेअर पे भी पट्टी बंधी हुई thi.....ab ओल्ड आउल थोड़ा कंफ्यूज था....

आज के लिए इतना रखते hai....kal देखते है पंकज कैसे बचता है वापस से निकिता ko.....saath में बुआ और K.Bua क्या कर रही है वो bhi.....aur रूपल didi....wo क्या कर रही है wo.....wo उन् जीवों के पास गयी है कुछ तो कार्नेगी hi,,,
 
अपडेट - 77

रूपल दीदी पोलर बेयर किंग के साथ उनके ठिकाने के पास गयी हुई thi....pura का पूरा कबीला जैसे सद्द गया ho....waha की घरें वह की galiyan......sab जैसे सदियों से सुन्नी रही ho...aur अब खँडहर में बदल गयी ho.....Polar बेयर किंग पहले तो रोज जाय करता था यहाँ pe....par फिर उससे ये सब देखा नहीं जाने लगा और उनसे सब प्रतीक के भरोशे छोड़ने का फैसला लिया सामने आज ये सब वापस से देख उसको बहुत बुरा लगा रहा था.....

रूपल दीदी - यहाँ की हालत तो बहुत ख़राब है.....

पोलर बेयर किंग - हम्म आप देख रही हो naa.......ye पहले बहुत सुन्दर जगह हुआ करती thi....ab बस आपसे उम्मीद है आप कुछ करोगे और ये जगह इन् सब से मुक्त हो jaayegi.....aur फिर हम यहाँ पे अपना कबीला बना पाएंगे....

रूपल दीदी - तुम यही रूक्को मैं थोड़ा अंदर से होक आती हु....

किंग - Nahi....aap ऐसे अंदर नहीं जा sakti....apko खतरा है इन् सब se.....aur मुझे प्रतीक ने आपका ध्यान रखने को कहा है...

रूपल दीदी - :डोह: अब मैं अंदर नहीं जाउंगी तो कहा से इन् सब को समझ paaungi....kaise इनको यहाँ से जाने को कहूँगी.....

किंग - हम्म ये तो सही hai.....par प्रतीक ने कहा है आपका ध्यांन रखने ko....main नहीं जाने दे सकता हु.....

ज्वाला - और मैं भी nahi.....aapko सब देखना था आपने देख लिया अब चलिए यहाँ से.......

रूपल दीदी - उह तो तुमको भी बोल के गया है wo......tumko पता नहीं मैं उसकी बड़ी बहन hu.....to उसको मेरी बात माननी chahiye...naa की मुझे उसकी....

ज्वाला - उसने कहा आपका ध्यान रखा hai.....matlab साफ़ है अंदर नहीं जाने दे सकते हम आपको....

रूपल दीदी - hmm..theek hai...ek काम karo......mere होटल के लिए पोर्टल खोल दो फिर मैं यही से चली जाउंगी....

ज्वाला - हम्म ये ठीक है......

उसने एक पोर्टल khola.....par दीदी उसमे गयी नहीं......

रूपल दीदी - अच्छा एक काम karo.....mujhe ना घर जाना है तो इसको बदल do....aur मुझे घर के लिए पोर्टल खोल दो....

ज्वाला - हम्म ये भी ठीक है.....'

ज्वाला ने वो भी कर दिया पर दीदी वापस से बस कड़ी hi रही......

ऐसे hi उन्होंने 3-4 बार और kiya....jisse ज्वाला थोड़ा गुस्सा हो गया और कन्फ्यूज्ड bhi.....Wo पोलर बेयर भी थोड़ा गुस्सा हो गया था......

ज्वाला - आपको कहा जाना है ये एक बार सोच लो फिर batao....aise में मैं बेकार में खुद की एनर्जी ख़तम कर रहा हु.....

रूपल दीदी - अच्छा ठीक hai....hmm घर के लिए hi कर दो.....

ज्वाला ने एक बार उनको dekha....aur फिर घर के लिए पोर्टल खोल diya....Portal आधा hi खुला होगा की दीदी ने उसके अंदर छलांग लगा दी.....

किंग - ye.....ye क्या hua.....wo ऐसे क्यों गयी....

ज्वाला - पता नहीं :सिघ: दिम्माग ख़राब कर दिया था इन्होने to.....chalo अच्छा हुआ चली gayi.....chali हम भी चलते है....

किंग - Par.....wo अगर नहीं पहुंची होगी तो.....

ज्वाला - तुमको यहाँ वो दिख रही hai....nahi naa....matlab वो चली गयी है....

किंग - अरे मेरा मतलब है वो kahi...portal में तो ना खू जायेगी....

ज्वाला - नहीं ऐसा नहीं hoga.....aur हुआ भी तो जैसे hi वो मुशीबत में पड़ेगी हमको पता चल hi जाएगा...

किंग - हम्म फिर तो ठीक है चलो.....

दीदी - हां जाओ dono....ufff.....iss ज्वाला को उल्लू बनाना तो मुश्किल hai......chalo अब इन् सब को देख के आती हु.....

वो पास के पेड़ से निच्चे उतरती है......

दरअशल हुआ ये था की जब पोर्टल खुल hi रहा था तभी रूपल दीदी बड़ी तेज़्ज़ी से उसके निच्चे से होते हुए कुद्द के एक पेड़ पे छड्ड गयी thi.....aur ये चीज़ज़ कन्फ्यूज्ड और गुस्से में आये हुए ज्वाला और किंग को दिखा nahi.....aur अब वो उस पेड़ से उतर के चल दी वह.....

वो इस वक़्त पोलर बेयर कबीले के ठीक सामने कड़ी थी....

दीदी - हम्म ये जगह सच में बुरी हालत में hai...waha से इतना पता नहीं चल रहा tha......par......par वो जीव कहा है वो नहीं दिख रहे.....

ये बोलते हुए उन्होंने अपने कदम आगे badhaye....aur जैसे hi उनके कदम कबीले में pade.....waha पे उन् जीवों ने हलचल मच्चा दी......

बहुत ज्यादा आवाज करने लगे वो sab....itna की दीदी को अपने काम बंद करने pade......par आवाज तो बढ़ती hi जा रही थी......

दीदी की आखें तक बंद हो गयी thi....aur जब वो खुली तो आँखें पूरी kaali.....ekdum से काली हो गयी thi.......kaan के पास से अपना हाथ hataya....aur दोनों हाथ ऊपर हवा में कर liya.....aur जोर से एक बार ताली बजायी......

उनका ताली बजाना था और ठीक उसी waqt.....unke हाथों के बिच से जैसे बहुत तेज़्ज़ आवाज aayi.....itni की उन् जीवों की आवाजें डाब गयी usse......aur जो यहाँ वह उड़द रहे थे वो सब एकदम से ृक्क गए.....

इससे पहले कुछ और वो karti.....waha पे ज्वाला और पोलर बेयर किंग आ पहुंचे.......

ज्वाला - मैं उन् सब को देखता hu....tum इनको यहाँ से निकालो....

किंग - हम्म ठीक hai......Jwala उन् सब के और दीदी के बिच में चला gaya.....aur वही पीछे से पोलर बेयर किंग aaya.....aur दीदी को अपनी पीठ पे बिठा के वह से भाग गया.....

ज्वाला देख रहा था वो जीव कोई हरकत नहीं कर रहे the....aisa लग रहा था जैसे वो है hi नहीं वह pe.....par जैसे hi.....Didi उस जगह से थोड़ी दूर gayi....wo सारे जैसे सपने से बहार आ गए honge...aur फिर से वही आवाजें.....

ज्वाला को उनसे लड़ने की कोई जरुरत नहीं padi.....aur वो वह से निकल गया.....

पोलर बेयर इस वक़्त वही पे था जहा से वो सब देख रहे थे उस जगह ko.....Rupal दीदी निच्चे उतर चुक्की थी और अपना सर पकड़ के जमीं पे बैठी thi.....Jwala भी वह आ जाता hai....usne देखा पोलर बेयर किंग रूपल दीदी के पास hi है और उनको देख रहा hai.....aur वो अपना सर पकड़ के बैठी हुई थी.....

ज्वाला ने पोर्टल खोला और रूपल दीदी को लेके चला गया अपने वैद्यों के पास......

वही दूसरी तरफ......

हम क्लास से निकले.....

निकिता - ये बुआ गयी कहा और ऊपर से क. Bua......arre वो dekho.....wo रही वो....

मैंने सामने देखा वो वही पे बैठी हुई थी एक डेस्क pe....aur सामने की ओर देख रही thi.....aur उस जगह पे बहुत से स्टूडेंट्स the....ab क्लास ख़तम होती है तो स्टूडेंट्स तो होते hi है.....

हम उनके पास जाने hi लगे थे की वो उत् gayi.....aur वह से जाने lagi.....wo आगे हम उनके picche.....aisa लग रहा था जैसे वो किसी का पीछे कर रही thi.....par किसका ये समझ नहीं आ रहा tha....waha पे बहुत से लोग the....samajh भी नहीं आ रहा tha....issi पकड़म पकड़ाई में निकिता की तकर हो gayi....aur वो गिर गयी.....

निकिता - उफ़ dekhke...ooh तुम हो....

मैं - अरे वो जा रही है....

पंकज - कौन जा rah......sorry लगी तो नहीं ना तुमको.....

वो बोल कुछ और रहा था और जैसे कुछ याद आ गया हो उसको और उसने बात बदल दी.....

निकिता - मैं ठीक hu.....wo मेरी भी गलती थी मैं कही और देख रही थी.....

मैं - पंकज बाद में मिलते है अभी हमको काम है......

पंकज ने मेरी ओर dekha.....ek फिक्की सी स्माइल दी और वह से चला gaya....humne यहाँ वह देखा पर कही भी K.Bua नहीं dikhii....sayad वो चली गयी थी....

मैं - लगता है वो चली गयी....

मैं उससे बात कर रहा था की तभी ज्वाला ने मुझे आवाज लगायी.....

ज्वाला - रूपल दीदी को कुछ हो गया hai....tum यहाँ आ jaao.....aur अपनी बुआ को लेते आना.....

मैं - kya.......kaise....kya हुआ unko....maine कहा था की कुछ नहीं होना चाहिए.....

ज्वाला - तुम यहाँ आओ तब बताता हु....

निकिता ने मेरा हाथ पकड़ा और वह से थोड़ी दूर लेके गयी जहा पे कोई नहीं था......

निकिता - ज्वाला पोर्टल kholo....Prateek तुम वह जाओ मैं K.Bua को ढूढ़ती hu....aur उनको लेके आती हु.....

मैं - par......theek है rukko......Albus...Cooper बहार aao......K.Bua को dhundho.....aur इसके साथ rahna......Nikita जैसे hi K.Bua मिले इनको लेके वह आ जाना....

निकिता - किनको यहाँ तो कोई है hi नहीं......

अभी तक वो दोनों लाइट ोर्ब्स में थे इस वजह से नहीं दिख रहे the....bas यही वजह थी......

मैं - Rukko......Albus कूपर जब बुआ या K.Bua मिले इंसान बन के इसके पास आ जाना और इसको वह पे लेके jaana.....tum पोर्टल से वह लेके आ जाना उनको.....

निकिता ठीक hai.....wo दोनों एक बार इंसान बन गए और निकिता को खुद को दिखा दिया ताकि आगे कोई कन्फूसिओं ना हो.....

उसके बाद दोनों वह से चले gaye....aur मैं चला गया वह ज्वाला के pass....Rupal दीदी को देखने को......

यहाँ पंकज स्कूल से बहार आ गया था और वेट कर रहा tha.....Leader के आने ka....wo वह आने वाला था और फिर वो दोनों वह से ऑफिस की ओर जाने वाले the......Nikita भी बहार चली gayi......usne सोचा एक बार घर पे देख आती hu.....Wo वह से घर पे गयी पर वह तो वो दोनों थे nahi......phir वो वह से निकली और बस में बैठी hi थी की अगले स्टॉप पे उसने देखा पंकज और उसके साथ वाला वो अजीब बाँदा बस से उतर रहे the......pahle ध्यान नहीं दिया usne.....par उसके बगल से जो पीछे उतर रहा था उसकी ओर देखा तो वो समझ नहीं पायी की ये यहाँ क्या कर रही hai......K.Bua थी वह पे और वो उन् दोनों का पीछे करने में लगी हुई thi.....isse पहले निकिता उनको रोक पाती वो निच्चे उतर गए थे और बस अगले स्टॉप के लिए निकल चुक्की थी.....

निकिता खुद को कोष रही थी अगर उसने थोड़ी फुर्ती दिखाई होती तो अभी K.Bua उसके पास होती और वो वह रूपल दीदी के पास hote.....par ये K.Bua क्यों पीछा कर रही थी इनका.....

निकिता को पता था की वो बस उसको वह पे वापस लेके जा सकती hai,....usne कंडक्टर से बात करि और उसने बस को उसी जगह वापस से रोक्का जहा पे K.Bua उतरी thi.....par इसमें थोड़ा वक़्त लग गया था और इतने वक़्त में hi वो वह से जैसा गायब हो गयी thi....ab ना तो वह पे K.Bua थी और ना hi वह पे वो पंकज या उसके साथ का आदमी था......

निकिता यहाँ वह देखने lagi.......usko ये पता नहीं था वो कहा पे है abhi.....to वो थोड़ा आगे बढ़ने लगी इस सोच में की कोई ना कोई मिल hi जाएगा.....

वही दूसरी oor......Leader को किसी तरह ऐसा लगने लगा था की कोई उनका पीछा कर रहा hai.....usko लगा ये सायद उसकी वजह से ho.....sayad एअर्थ पे पता चल गया होगा की फोमोस का लीडर कुछ दिंनो से वह पे आया हुआ tha.....issi वजह से वो ऑफिस के पास ना ृक्क के कही और उतरा tha.....aur उसके पीछे K.Bua....aur उनके पीछे ये निकिता.....

पंकज को लीडर ने अपने मैं में चल रही बात batayi.....usne उसको कहा की सायद उसके यहाँ होने के बारे में पता चल गया है लोगो को इस वजह से उसके पीछे लोग पड़े hai......agar उन् लोगो को लीडर और पंकज साथ में मिल जाते है तो ये उनके लिए परेशानी बन सकती है......

लीडर - मुझे लगता है अभी मुझे तुमसे थोड़े वक़्त के लिए अलग होना hoga.....aisa ना हो मेरी मदद करते हुए तुम फस्स जाओ.....

पंकज - हम्म तो ठीक hai....aap एक काम karo..aap यहाँ से jaao.....Main बस से पहले हेडोफ़्फ़िस चला जाता hu.....aur आप मुझे मेरे घर के पास इंसानी लोगो के बिच में मिल lena.....waha पे ज्यादा खतरा नहीं होने वाला.....

लीडर - हम्म ठीक है.....

लीडर को अपना पता दिया पंकज ne.....aur लीडर वह से पोर्टल से जाने laga......par जाते वक़्त एक बार उसने मदद के देखा था उस जगह ko.....usko वो जगह सही नहीं लग रही thi.....par अभी अगर उसको और पंकज को साथ में देखा जाता है तो बहुत परेशानी हो जायेगी उसको इस वजह से वो वह से चले जाते hai.....aur पंकज पीछे मदद के वापस जाने लगता hai.....ki तभी उसको कुछ ऐसा दीखता है जो देख वो थोड़ा हैरान और परेशां हो जाता है,,,,

K.Bua जो अभी इन् दोनों के पीछे आयी थी यहाँ पे वो इन् दोनों को खो चुक्की thi.....kyunki लीडर को बचना आता था ऐसे जासूसी करने वालो se.......par उनको थोड़ी देर में पंकज सामने दीखता hai....aur वो एक पेड़ के पास खड़ा उनकी ओर hi देख रहा होता है.....

पंकज को खुद को ऐसे देखते हुए पा के उनको लगता है अब ये पीछा करने से कुछ नहीं hoga......iss पंकज ने उनको पकड़ लिया hai.....yaha के बारे में बहाना भी नहीं बना सकती वो क्यूंकि दूर दूर तक कोई था नहीं वह पे.....

उन्होंने सोचा की उससे बात hi कर le.....bol दे उसको की वो गलत समझ रहा hai....aur उसको अपने साथ लेके challe.....aur वो ये करने आगे बढ़ी भी.....

पंकज अभी भी बस उनको देख रहा tha.....aur एक अजीब सी स्माइल लाये हुए था अपने चेहरे pe.....pata नहीं जैसे क्या छह रहा था वो......

बुआ - पंकज मैंने सुन्ना तुम्हारे बारे में मुझे सब बताया है पूनम ne....dekho इस वक़्त तुमको अकेला नहीं रहना chahiye....hmmm तुम चलो मेरे साथ.....

पंकज अभी भी वैसा hi खड़ा था और मुस्कुरा रहा tha.....K.Bua उसके और पास गयी की उसको समझा सक्के.....

पंकज - Ma'am वो मैं नहीं hu....waha से पीछे हत्तो.....

निकिता - K.Bua......

दरअसल हुआ ये जब K.Bua आगे बढ़ रही थी तभी एक पेड़ की टहनी उनके पीछे से आने lagi.....fir dusri....fir tisri.....aur ये सब पंकज देख रहा tha...aur शॉकेड खड़ा tha.....wo समझ नहीं पा रहा था ठीक उसके जैसा दिखने वाला बाँदा वह पे कैसे हो सकता hai....par जैसे hi उसने पीके से टहनियों को आते हुए dekha.....usne आवाज lagayi.....aur ठीक उसी वक़्त निकिता भी वह पे पहुंच गयी थी और उसने भी K.Bua को आवाज लगायी.....

वो देख रही थी की पंजक सामने खड़ा मुस्कुरा रहा था और K.Bua के पीछे से पेड़ों की टहनियां आती जा रही thi.....usko समझते देर नहीं लगी अब क्या होने वाला था....

K.Bua ने दोनों की आवाज sunni....Pankaj ने निकिता की आवाज सुन्नी निकिता ने पंकज ki....par यहाँ पे K.Bua और निकिता दोनों hi कन्फ्यूज्ड थे की पंकज तो मुस्कुरा रहा है वो बोलै hi nahi......Pankaj ने देखा की निकिता के पीछे भी टहनियां आने लग गयी है.....

ये टहनिया एक घेरे में आती thi....aur अगर आप उसके अंदर ho...to आप उस शैतान के मायाजाल में ho.....aapko वो दिखेगा जिसको आप ढूंढ रहे हो....

K.Bua का समझ में आता है वो पंकज को धुंध रही थी पर Nikita.....haa उसका मोटो भी तो वैसा hi tha.....K.Bua को ढूँढना और वो पंकज के पास milti....matlab पंकज को ढँढ़ना....

अभी दोनों hi बस जाल में the....K.Bua के बारे में तो ज्वाला को कोई खबर नहीं जाती थी पर Nikita...ab उसके बारे में पता चल जाता tha.....kyunki वदारक पावर का मटर hai.....iska उससे कनेक्शन स्ट्रांग हो गया तो अब पता चल जाने लगा :सिघ:

हां तो कुल मिला के अभी ज्वाला को खबर पहुंच गयी थी की निकिता जाल में फँस चुक्की thi.....par.....jab तक वो आता तब तक यहाँ पे गेम ख़तम होने का डर tha....wo tahniyan....inko खुद में सामने को बेटाब thi......aur ये सब उस शैतान की वजह से हो रहा था जो की अभी पंकज के भेष में tha......Pankaj ने देखा ये दोनों hi खतरे में है वो वह पे बिच में कुद्द gaya....jo मुस्कान अभी उस शैतान के चेहरे पे thi.....wo अच्चानक से गायब हो gayi....har किसी की कमज़ोरी होती है इसकी भी thi.....ye अपने सीकर को फसाने के लिए जिस रूप में होता है अगर वो चीज़ज़ या वो बाँदा वह खुद आ जाए तो इसका ये जाल टूट जाता है और जो इसके माया में फसे होते हो वो बहार निकल जाते hai....aur ये भी अपने असल के रूप में आ जाता है......

ठीक यही hua......Anjaane में hi सही पर पंकज ने जान बचा ली थी दोनों ki......aur साथ hi उस शैतान को उसके असल रूप में ला दिया था.....

जैसे hi ये वो दोनों देखती है उनके मुँह खुले के खुले रह जातें है....

K.Bua खुद को सँभालते hue.....Pankaj के पास दौड़ के जाती है और उसको पकड़ के साइड में कुद्द जाती hai....taaki वो शैतान कुछ कर ना पाए.....

तभी वह पे एक पोर्टल खुलने लग जाता है पर इससे पहले वो khule.....wo शैतान अपने सामने कड़ी निकिता पे हमला कर चुक्का होता hai.....Pankaj जो अभी भी निच्चे गिर्रा हुआ था वो बहुत तेज़्ज़ी से खड़ा होता है उनके बिच में चला जाता hai....aur वो जादू उसे करता है जो लीडर ने उसको सिखाया tha.....par ये जादू भी मैथ्स की तरह होते hai.....aapko थ्योरी पता होने से अच्छे मार्क्स मिलने की उम्मीद होती है पर अगर आपने प्रैक्टिस भी किया हो तो बात hi अलग होती hai.....uss वक़्त आपसे मिस्टेक्स होने की बहुत काम चान्सेस होते है....

पंकज का भी शामे केस tha....nayi चीज़ थी ye....usne उसका उसे kiya.....aur वो काम कर gayi.....Uss शैतान ने जो हमला निकिता पे किया tha.....wo वापस उसी को लग gaya......ye काम कर गया था....

पंकज ने देखा वो कमज़ोर हो गया है अपना hi वार खाने के baad.....usne सोचा क्यों ना इसको मज़्ज़ा चखाया jaaye....usne फाटक से उसपे हमला करने का मैं बनाया और कर भी diya.....par वो हमला पंकज को खुद लग gaya......dimmag शांत था नहीं उस वक़्त uska.....bas उसी के वजह से खुद के वार से वो बेहोश हो चुक्का tha.....wahi वो शैतान वह से भाग गया tha....wo कमज़ोर था वह पे उससे लड़ने को लोग the...bhagna उसने सही समझा.....

इस वक़्त तक ज्वाला खुद यहाँ पे पहुंच चूका tha.....saath में प्रतीक भी tha....usne देखा पंकज बेहोश पड़ा हुआ hai....Nikita आखें फाड़ें कड़ी हुई thi....aur K.Bua भग्ग के पंकज के पास आ गयी thi....aur उसको चेक कर रही थी.....

मैं - ये क्या हुआ yaha....Nikita इसने परेशां किया क्या tumko.....aur K,.Bua आप उसके पास ho......chodo usko.....kuch लोग कभी नहीं सुधर सकते......

K.Bua इस वक़्त उसको चेक कर रही थी तो कोई जवाब नहीं diya...aur निकिता इस हालत में नहीं थी की वो जवाब दे paaye....wo कन्फ्यूज्ड thi....Pankaj ने हमला kiya...aur फिर वो पंकज बदल गया किसी और चीज़ mein....aur फिर पंकज ने bachaya....pata नहीं क्या चल रहा था दिम्माग में उसके.....

मैं - K.Bua छोड़ो isko....aap चलो वह पे दीदी ठीक नहीं है....

K.Bua - बस दो मिनट....

उन्होंने अपने बैग से एक शीशी निकली और उसमे से कुछ goliyan....aur थोड़ा सा cream.....uss क्रीम को उन्होंने पंकज के हाथों पे लगा diya....aur गोलियां उसको खिला di.....aur वो कड़ी हो gayi....saamne देखा ज्वाला था.....

K.Bua - ज्वाला आप इसको इसके घर तक पंहुचा डोज क्या.....

ज्वाला ने इस बात पे मेरी ओर dekha....Mujhe बड़ा गुस्सा आया इस बन्दे ने जो खुद को मेरा भाई बताता है मेरी दोस्त पे हमला kiya....aur ये K.Bua उसकी मलहम पट्टी कर रही hai....aur तो और अब ज्वाला से बोलती है उसको घर पे पहुंचने को.....

मैं - आपको पता है वह रूपल दीदी कब से परेशां hai....pata नहीं क्या हुआ है उनको.....

उन्होंने मेरी ओर देखा और कहा की ज्वाला से कहे इसको इसके घर पे पहुंचने को.....

मैंने भी बोल दिया उसको और ज्वाला ने पोर्टल से वैसा hi kiya....jab तक हम वो कर रहे the....tab तक K.Bua ने 2 कॉल्स भी कर लिए the....pata नहीं किस किस को......

इतने में वही पे मेरे अलबूस और कूपर आ gaye....Bua का पता बताने ko.....ye दोनों hi बुआ के पीछे लगे हुए the....maine कहा था की एक बुआ को और एक K.Bua को वैसा...

खैर वो आ गए और आतें hi मुझमे सम्मा गए और मुझे बताया वो कहा है.....

मैं - K.Bua अब तो chalo....waha दीदी परेशां है....

साथ hi मैंने ज्वाला को भी बोलै उस जगह को पोर्टल खोलने को जहा पे बुआ hogi.....Usne खोला और बुआ खुद आ गयी हमारे pass.....jaise वो जानती thi....main उन् तक पहुंचने वाला hi हु...

फिर ज्वाला ने पोर्टल खोला अपने कबीले के liye....aur हम चल दिए waha....Nikita पूरी कन्फ्यूज्ड thi....wo अब भी सही से आकलन नहीं कर पा रही थी उसने देखा क्या tha.....waise बात ये थी की वो मानना नहीं चाहती थी की जो भी देखा था वो सही hi tha.....ab आपने किसी को बुरा समझ लिया है तो आपको लाख बार वो अच्छा काम करते दिख जाए आपके दिम्माग में ये जरूर आएगा की वो ये खुद के लिए कर रहा hai....burayi के liye.....aisa कुछ आपका दिम्माग आपको बोलता hi रहेगा....

सायद निकिता को अभी कोई चाहिए था जो उसको समझाए की ये सच है.....

हम सब रूपल दीदी के पास pahuche....wo अभी भी लेती हुई थी आखें बंद karke....haath उनका अपने सर पे था जैसे बहुत तेज़्ज़ दर्द हो रहा हो...

K.Bua - क्या हुआ है इसको.....

ज्वाला ने पूरी कहानी सुनाई और माफ़ी भी maangi.....par इससे जैसे K.Bua को कोई खास फर्क नहीं पड़ा था.....

उन्होंने उनको चेक किया......

K.Bua - इसको सर दर्द हो रहा hai....aur उन् जीवों के पास जाने से इसका एनर्जी लेवल थोड़ा उप डाउन हो गया hai.....Poonam इसको सायद बुखार आ जाए aaj.....par कल तक ठीक हो जायेगी ye.....main ये दवा दे रही हु.....

उन्होंने उनको एक दवा दी....

K.Bua - मुझे अभी जाना है यहाँ se.....Jwala मुझे वापस भेज doge....hmmm पंकज के यहाँ hi ठीक होगा.....

मैं - आप वह पे क्यों jaaoge.....aapne देखा नहीं उसने लड़ाई की फिर से निकिता से....

K.Bua -(मुश्कुराते हुए) बातें पूरी जान लिया करते है तब कुछ कहते है uspe.....Nikita से पूछ लेना ठीक hai.....ab इसको बोलो मुझे वह भेजने को.....

मैं - ज्वाला ये जहा कह रही है इनको वह छोड़ आओ.....

बुआ - हम्म चली अब यहाँ क्या करना है शम्म होने को hai.....tum दोनों तो स्कूल में रहना hi नहीं चाहते अब sayad.....ghar chalo.....aaj वही डिनर करके निकल जाना.....

मैं - ज्वाला हमारे जाने का भी प्रबंध करो.....

उसने वैसा hi किया हम सब घर पे आ gaye....ghar पे आते hi हमने पहले तो दीदी को उनके रूम में choda....aur उसके बाद वह से निच्चे aaye.....aaye hi थे की देखा चची बहार से आ रही थी....

आते hi उन्होंने सबसे पहले तो निकिता को देखना शुरू किया की कही कुछ हुआ तो नहीं hai.....wo बार बार उसके हाथ पेअर चेहरा ये सब देख रही थी....

चची ने सायद इशारे में कुछ तो पूछा tha...aur निकिता ने भी इशारे में हां में जवाब दिया था.....

चची ने ये सुन्ना और वही पे बैठ gayi....aur फिर थोड़ी देर में अपना फ़ोन निकला और किसी को कॉल करने lagi.....aur फिर वैसे hi बात करते हे किचन में चली गयी.....

मैं - क्या हुआ निकिता चची को रूपल दीदी का पता चल गया kya....iss वजह से परेशां है वो....

निकिता ने ना में गर्दन हिलायी.....

बुआ - वह पे क्या हुआ था Nikita....aur याद है वो कौन था जिसने हमला किया था.....

निकिता कुछ बोलती उससे पहले चची वह पे आ गयी.....

चची - पूनम खाना बना dena.....main थोड़ा बहार जा रही hu.....tumhare भैया के साथ hi aaungi....Maa जी और पापा जी नहीं आने वाले aaj.....wo बहार किसी काम से गए हुए hai....aur हां इन् सब का ध्यान रखना.....

मैं - चची रूपल दीदी बीमार है.....

चची ने मेरी ओर dekha......aur फिर बुआ की ओर बुआ ने बस हां में गर्दन hilayi....aur कहा की वो देख legi....aur चची भी ठीक है बोल के वह से निकल गयी.....

मैं - ये क्या tha....wo रूपल दीदी को छोड़ के कहा चली गयी.....

निकिता - वो शैतान.....

पूनम - तुम दोनों मुझे धुंध रहे the....ab बताओ क्या बताना है.....

मैं - एक मिनट bua......Jwala.....yaha आओ....

ज्वाला हमारे घर से बहार आके खड़ा हो gaya.....jaisa इससे पहले भी उसने पोर्टल खोला था घर से बहार की ओर hi....

मैं - ज्वाला अपने लोगो को कहो ध्यान से rahe.....sayad आज भी कोई शैतान मिलने वाला है humse......Chachi के पास भेजो किसी ko....yaa तुम खुद चले जाओ......

ज्वाला खुद hi चला गया उस ओर.....

मैं - बुआ हमको आपसे इसी बारे में बात करनी है......

हमने बुआ को सब कुछ बताया कैसे हमारे घर के लोगो की वजह से एअर्थ पे कुछ शैतान आ गए the....aur अब वो हमको बता भी नहीं रहे थे और उनसे लड़ने का सोच रहे थे.....

मैं - बुआ मुझे लगता है चची वही गयी है.....

पहले तो वो कुछ बोली nahi.....phir खुद को सँभालते हुए कहा.....

बुआ - वो वह नहीं गयी hai,....Kavita के पास गयी hai.....Pankaj का ध्यान रखने ko....usko चोट आयी है.....

मैं - Kya....Rupal दीदी को छोड़ के उसके pass....usne निकिता पे हमला किया था........

निकिता - नहीं ऐसा नहीं hai.....usne हमको बचाया था.....

वही स्ट्रेंज वर्ल्ड mein.....Old आउल पता लगाने की कोशिश किये जा रहा था आखिर है कौन दोनों में se....chacha है या फिर भतीजा या वापस से दोनों मिल चुक्के है......

आज को इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखेंगे kaise...Leader को जब पता चलेगा की पंकज के साथ ये सब हो गया तो वो क्या karega.....Strange वर्ल्ड का सन
 
अपडेट -78

स्ट्रेंज वर्ल्ड से शुरू करते है ओल्ड आउल अपने सोच में खोया हुआ tha....aisa नहीं था की बैठ गया हो wo.....usne अपने सबसे अच्छे बन्दे को युवराज के रूम के पास भेजा हुआ था वही खुद जाके महाराज के रूम के पास बैठा हुआ tha......wo देखना चाहता था की इन् दोनों में से आखिर कौन है जो रात को निकलता hai......Old आउल ने अपनी पलके तक ना झपकाई thi....aur यही उम्मीद उसने अपने बन्दे से भी लगा राखी थी....

आधी रात का पहर सायद निकल चूका tha....ki तभी....

"ओल्ड आउल दो और वाटर एलिमेंट वालो की हत्या हुई है......"

ओल्ड आउल नज़र लगाए बैठा था की ये आवाज उसके कानो में aayi....aur उसने सोचा की हो ना हो वो युवराज hoga.....usne उस बन्दे से बात करने से पहले युवराज के रूम में जाने का तय kiya....aur वो वह पंहुचा bhi.....par वो युवराज अपने रूम में hi tha.......aaram से सो रहा tha.....uska चेहरे दिखाई दे रहा था....

ओल्ड आउल अब समझ नहीं पा रहा था इन् दोनों में से कोई नहीं है फिर कौन.....

वो वह से निकल के पहुंच गया उस जगह पे जहा पे खून हुई thi......iss बार भी पास के एक कसबे में hi खून हुआ tha.....pichle वाले से अलग.....

ओल्ड आउल वह पे जा पंहुचा उसने देखा दोनों लाशों के हाथ बिलकुल उसी तरह उलटे किये हुए the....maarne का तरीका शामे tha...ho ना हो वही होगा....

वह पे जो उसका बाँदा था ओल्ड आउल उसके पास गया.....

ओल्ड आउल - तुमने देखा कौन था वो....

वो - जी nahi......maine बस सुन्ना और यहाँ पे कन्फर्म करने आ gaya.....ye मेरी जगह नहीं थी......

ओल्ड आउल - हां ये किंगडम से बहार hai.....humne बस किंगडम पे नज़र रख रखा tha.....tumne कहा सुन्ना इसके बारे mein....aur क्या किसी ने देखा कौन था वो.....

वो - मैं अपने जगह पे tha......waha पे अच्छे से अपना काम कर रहा था की तभी कुछ लोग आते हुए dikkhe......ek थोड़ा जख्मी tha......aur उसको उहाके लेके आ रहे थे कुछ log......wo बोल रहा था मार दिया वह पे मार diya.....Maine उसकी बातें सुन्नी और फिर उसके पीछे gaya....thodi देर में पता चल गया वो कहा की बात कर रहा था और मैं यहाँ आके आपको बता दिया......

ओल्ड आउल - और कुछ पता चला और वो बाँदा कहा है abhi.....agar उसने खुनी को देखा हो अच्छे से तो सायद उसको खतरा हो....

वो - मैंने इसके लिए उस जगह पे अपने दोस्त को लगा दिया tha.....wo ड़याँ दे रहा है अगर ऐसा कुछ हुआ तो हमको बता देगा वो.....

ओल्ड आउल - ठीक hai.....bahut अच्छा काम किया है tumne.....jaao अब मैं देखता हु.....

ओल्ड आउल वही पे रहा और देखता raha......kuch तो और था जो कॉमन tha.......pahle वाटर एलिमेंट वाले मारे गए अब भी वही मारे जा रहे है पर किंगडम से बहार ke.....kya किसी को पता है की किंगडम में नज़र राखी जा रही hai.....ye हो नहीं Sakta......Old आउल ने इस बारे में किसी को नहीं बताया और ना hi प्रतीक से ऐसी कोई उम्मीद thi....to आखिर बात क्या थी...

ओल्ड आउल इस बारे में सोचने लगा.......

वही एअर्थ पे.....

चची और K.Bua दोनों hi अभी दक्ष मां के यहाँ पे the.......wo भी वही पे the......aur सुन्न रहे थे जो K.Bua बता रही thi......ki तभी उनका दरवाजा खटखटाया किसी ने......

ये लीडर tha.....Leader से बात हुई thi.....pankaj की की वो उससे मिलने आएगा अपने घर के pass.....par अभी तक वो आया hi नहीं tha.....to उसने सोचा भेष बदल के जाके देखे उसके घर mein.....waise भी उसको बताया गया g=tha घर पे बस वही होने वाला है......

दरवाजा दक्ष मां ने खोला.....

दक्ष - जी आप......

पहले तो लीडर थोड़ा घबरा gaya......agar इस बन्दे को पता चला उसका बीटा फोमोस के लीडर के साथ गम रहा है तो पक्का वो उसको सज़्ज़ा dega......Leader अभी कोई बहाना भी बना देता par...usne देखा पीछे K.Bua कड़ी हुई thi....aur उन्होंने देखा हुआ था usko....ab ये कोई बहाना बना के निकल भी नहीं सकता था.....

लीडर - वो main....main पंकज से मिलने आया tha......wo उसने मिलने को कहा था.....

K.Bua (धीरे से) - भाभी ये वही hai......issi के साथ घूम रहा है आज कल पंकज.....

चची - accha...waise कौन है ye....aur इसके साथ क्यों घूम रहा है पंकज......

K.Bua - वो बोल रहा था इसकी मदद कर रहा hai.....aur पता नहीं क्या kya......aur आप जानती ho.....uss जगह जहा ये सब हुआ tha...waha पे ये भी tha......par दिखा hi नहीं हमको......

दक्ष मां - जी अंदर आइये......

लीडर भी ना चाहते हुए अंदर चला जाता hai....ab ऐसे भाग तो सकता नहीं था वो......

चची - आप कौन hai....aur यहाँ पे कैसे.....

लीडर - जी Main..main एक मुसाफिर hu.....apni एक खोयी हुई चीज़ धुंध रहा hu.....aur पंकज मेरी मदद कर रहा hai.....ussi ने बुलाया tha.....aap उसको बुला दो....

दक्ष - Accha.....par बात ये है वो अभी बेहोश hai....usko चोट लगी है

लीडर - चोट लगी hai....par उस वक़्त तक तो सही hi......

K.Bua - हां उस वक़्त tak.....tum ये बताओ तुम कहा चले गए the.....Maine देखा था तुम और पंकज साथ में गए थे उस जंगल में और फिर तुम वह से गायब हो गए थे.....

लीडर - Wo....wo दरअसल मैं वह पे अपनी चीज़ hi ढूंढने गया tha.....par वक़्त ज्यादा लगने वाला था तो पंकज को जाने को बोल diya....mujhe नहीं पता वह पे क्या हुआ......

K.Bua - हाथ दिखाओ अपने.....

लीडर - जी.....

K.Bua - तुम हाथ दिखाओ अपने....

दक्ष मां - ये क्या hai.....haath से क्या पता chalega.....aur तुम dono.....maine बता दिया ना अब ना तो मुझे और ना hi मेरे बेटे को जरुरत है तुम सब ki.....jao यहाँ se.....aur नित्य ji.....ek और बात अपनी beti.....yaa फिर अपने घर के उन् बच्चो को दूर रखियेगा मेरे बेटे se....ye सब उनकी वजह से हुआ है.....

K.Bua - आप समझ नहीं रहे.....

दक्ष - मैं सब समझ रहा हु Kavita.....aur सुक्रिया तुमने मेरे बेटे का इलाज kiya.....par अब आगे का मैं खुद देख lunga.....ab सायद जाना चाहिए तुमको घर पे लोग इंतज़ार कर रहे होंगे ना....

सपाट लहजे में ये सब बोल दिया दक्ष मां ne.....par K.Bua.....

K.Bua - हम चले जाएंगे पर बस एक बार मुझे इस आदमी के हाथ देखने है.....

लीडर ने अपना हाथ आगे kiya...,kuch भी नहीं था usme.....K.Bua ने अच्छे से dekha....wo जो दूध रही थी वैसा कुछ भी नहीं मिला वह पे......

दक्ष - हो gaya.......ab सायद यहाँ आने की जरुरत ना पड़े आप सब ko....Nitya ji.....ab कोई मदद नहीं चाहिए mujhe.....naa मेरे बेटे ko.....aap भी अब आराम से रह सकती है मैंने आपके लिए जो कुछ भी किया हो आज tak....unn सब का हिसाब बराबर हो चूका है ऐसा समझ लीजियेगा.....

चची बस सुन रही thi.....wo कुछ भी बोल नहीं रही thi....par K.Bua को ऐसा लगने लगा था जैसे अब दक्ष मां कुछ ज्यादा hi बोल रहे थे.....

K.Bua - आपको नहीं लगता आप अपनी हद्द पार कर रहे ho....bhabhi यहाँ पे बस उसके लिए आयी hai.....aapko पता भी hai.....Rupal भी बीमार hai....par ये यहाँ आयी है आपके बेटे के लिए अउ.....

चची - चलो कविता.....

बात पूरी हो उससे पहले hi K.Bua को लेके वो वह से निकल gayi.....wo घर को नहीं आयी बस वही पास में एक पार्क बना हुआ था छोटा सा इंसानो का वह पे एक टेबल पे जाके बैठ गयी.....

K.Bua - भाभी आप उदास क्यों हो रही ho.....dekh लेना वो वापस से आपसे आके पंकज के बारे में बात karenge.....aur माफ़ी अलग से मांगेंगे....

चची - नहीं अब ऐसा कुछ नहीं होने wala......Main थक गयी hu....bahut jyada.....inn सब से....

K.Bua - Bhabhi....aap ये क्या बोल रही ho.....aur यहाँ पे क्यों बैठे है हम चलो घर चलते है....

चची - पता hai.....jab रूपल छोटी thi.....ek बार उसको बहुत तेज़्ज़ बुखार आ गया tha.....ye कोई आम बुखार नहीं tha....pata नहीं कैसे पर उसके पावर्स जो थे वो काबू में नहीं रह गए the....wo आते जाते रहते the.....aur स वजह से हालत बिगड़ती जा रही thi....tab इन् लोगो ने मदद की थी hamari......aur main.....mujhe बस भूल जाना आता hai.....aur मैं इस भूल जाने से थक गयी hu.....log मुझे जैसों को अहसानफरामोश कहते hai....aur ये अब मैं नहीं सह पा रही हु.....

K.Bua वह पे बैठी बातें सुन्न रही थी उनको थोड़ा थोड़ा समझ में आ गया आखिर क्यों चची पंकज और दक्ष मां की मदद करना चाहती hai.....aur ये भी समझ आ गया वो क्यों भड़क जाती थी....

K.Bua - भाभी ये सब घर में पता है सबको....

चची - जो जानती थी वो अब रहे nahi....ab बस मैं जानती हु ye....aur साथ में तुम्हारे Bhaiya......bas हम दोनों जानते hai.....humne ये सब किसी को नहीं बताया जरुरत hi नहीं padi.....par.....ab इन सब से kya.....Kavita एक काम करोगी mera.....thodi देर अकेला छोड़ दो mujhe,.....Main घर पे आ jaungi....tum जाओ

K.Bua - पर भाभी आप यहाँ पे अकेले....

चची - मैं आ jaungi.....aur तुम्हारे भैया पूछे तो बोल देना काम से कही गयी है...

K.Bua उनको वही छोड़ के घर को निकल जाती hai.....wahi दक्ष मां के यहाँ अभी लीडर बैठा हुआ था और बातें कर रहा था दक्ष मां के साथ.....

मां - तो पंकज किस चीज़ज़ को लेके मदद कर रहा है aapko....agar आप कहो तो मैं कर देता हु मदद....

लीडर - जी मुझे तो बहुत ख़ुशी होगी इससे par......aapke बेटे से वादा किया hai.....kisi और की मदद ना लेने ka....wo बोल रहा था उसको खुद को शाबित करना है और भी बहुत kuch.....aap बुरा ना मानू तो एक बात बोलू,......

मां - जी बताइये....

लीडर - आपका बीटा बहुत अच्छा hai....par सायद अकेले रहने के वजह से या [हीर बुरी सांगत के वजह से....

मां - हां मैं समझ रहा hu......darasal जब से इसकी Maa.....uske मौत के बाद ना मैं होश में था और ना hi ये......2 साल तो मैं इस्पे क्या खुद पे भी ड़याँ नहीं दे पा रहा tha.....aur इन् दो सालो में इसके लिए सब बदल सा गया tha....main आज भी इन् सब को अपनी hi गलती मानता hu.....iske दोस्त बनने पर वो ठीक नहीं the......sab बस इस वजह से थे क्यों की ये मेरा बीटा tha.....ye जो शाबित करने वाली बात आपने कही naa....ye खुद को शाबित करना चाहता hai.....isne और भी कोशिशें ki.....kuch अच्छी और कुछ buri.....par कामियाब न हो सक्का अपने दोस्तों की वजह se.....ab मैं इसके दोस्तों को कैसे कण्ट्रोल कर सकता tha.....iss बार इसने कुछ बहुत बड़ा कर दिया tha......aur उसके बाद मुझे इसको इसके दोस्तों से अलग करना pada.....iske समझ में भी आ गयी थी जो कुछ हुआ वो बुरा tha.....isne खुद उन् सब का साथ छोड़ diya......Phir मुझे एक मौका dikha...isko सही रस्ते पे लाने ka....kuch नए दोस्त देने ka....par सायद मैं hi गलत tha....jab से उन लोगो के साथ इसको रहने को बोलै hai....ye बस उदास hi रहता hai....ye जो दोनों आये हुए थे yaha......khair....main कहा की बातें करने लग gaya.....aap और कुछ logo.....Main थोड़ा पंकज को देख के आता हु......

लीडर - जी nahi.....Main भी चल सकता हु क्या.....

दक्ष - जी chaliye....agar जाग रहा हो तो आपको देख के उसको अच्छा लगेगा....

लीडर - जी...

लीडर को लेके दक्ष मां पंकज के रूम में चले जाते hai.....wo अभी भी नींद में hi tha.....dawayi का असर था ये.....

लीडर ने उसके हाथों को देखा जहा पे वो जखम आ गए थे.....

लीडर - आपके बेटे ने मुकाबला किया उससे वो जो भी tha.....yee आगे जाके आपको गर्व महसूस कराएगा.....

दक्ष - मुझे अब भी है इस्पे garv.....aap यही रूक्को मैं जर्रा आता हु....

लीडर ने जैसे hi देखा दक्ष मां कही जा रहे the....usne तुरंत hi पंकज के हाथ से थोड़ा सा जला हुआ स्किन अलग कर liya...aur साथ में एक दो बाल उसके निकल लिए.....

लीडर - bete....jisne भी ये किया hai.....wo कहर dekhega.....wo कल की सुबह देख सक्के इसके लिए नहीं bachega....ye वडा है फोमोस के लीडर ka......agli बार जब हम milenge.....to मेरे पास उस कमीने का सर होगा और वो तुमको गिफ्ट करूँगा मैं.....

इतने में वह पे वापस से मां आ जाते है....

लीडर - जी अब मुझे चलना chahiye......aasha करता hu...ye जल्दी ठीक हो jaayega....Main आता रहूँगा....

दक्ष - जी बहुत अच्छी बात hai.....waise मैं पूछना भूल गया aap....aap कहा से हो...

लीडर - बहुत दूर से hu.....agli बार मिलूंगा तो आपको अपनी पूरी कहानी बता dunga......abhi मुझे किसी जरुरी काम से जाना है....

दक्ष - जी ठीक है.....

लीडर वह से निकल गया.......

K.Bua वह से घर पे gayi.....ghar पे हम सब तो थे hi चाचा भी आ गए the....Bua सबको खाना खिला रही थी की तभी K.Bua भी आ जाती है....

चाचा - अरे कविता भाभी नहीं aayi....ye सब बोल रहे थे तुम दोनों साथ में हो.....

K.Bua - वो भैया वो उनको थोड़ा काम tha.....to मुझे यहाँ भेज diya.....kal स्कूल भी है ना....

चाचा - हम्म पता नहीं कौन सा काम आ गया isko.....Prateek चची ने कहा था पंकज को लेके आने को आज भी नहीं laaye......jab आ hi रहे थे ले आते उसको.....

मैं - Wo....usko कुछ काम था ना इस वजह से नहीं आया वो....

चाचा - अगली बार लेते आना usko......Poonam ये रूपल को दवाई दे दी थी maine.....jagana मत usko.....pata नहीं ये भी कहा कहा चली जाती है और बीमार होक आ जाती है....

K.Bua - वो ठीक है भैया बस थोड़ा सा सर दर्द है उसको....

चाचा - हां बताया पूनम ने mujhe...Chalo तुम सब खाना खाओ मैं थोड़ा बहार से आता हु.....

चाचा जी बहार चले gaye......sayad कोई काम ho....unke जाते hi

बुआ - भाभी कहा hai....aur वो आयी क्यों नहीं....

निकिता - पंकज को क्या ज्यादा चोट आयी है....

K.Bua - भाभी कुछ वक़्त अकेला रहना चाहती thi.....waha जो कुछ भी हुआ उसके baad......aur निकिता पंकज ठीक है पर नींद में hai.....dawaiyon का असर है.....

बुआ - ऐसा क्या हुआ वह जो भाभी ने तुमको जाने को बोल diya.....wo ठीक है ना.....

K.Bua - उद्दस है bas......pata है वह पे वो आदमी भी आया tha....wahi जिसके साथ पंकज घूम रहा tha....mujhe एक पल को लगा कही वो hi तो नहीं है ना जिसने हमपे हुम्ला किया ho.....par ये वो नहीं tha.....agar वो होता तो उसके haath......khair....Tumse एक और बात करनी है....

बुआ - हम्म batao....kya बात है.....

K.Bua ने मेरे और निकिता की ओर देखा hi था की ओल्ड आउल की आवाज आ गयी.....

ओल्ड आउल - प्रतीक मुझे सायद थोड़ी मदद chahiye......main थोड़ा कंफ्यूज hu.....tum यहाँ आ सकते हो.....

मैं - मुझे अभी बहार जाना है थोड़ी देर में आ jaunga.....(old ोल्व से) बहार पोर्टल खोलो...

ओल्ड आउल ने वैसा hi किया और मैं उसके पास चला गया.....

K.Bua अब निकिता की ओर देख hi रही थी की......

बुआ - पागल है kya....jo बोलना है bol....usko क्या देख रही है.....

K.Bua - तुमको पता नहीं है ये जाके रूपल को बोल degi......hmm वैसे उसको पता चला तो अच्छा hi hai.....sunno phir.....pata भी है तुमको भाभी क्यों उस पंकज को लेके इतना सोचती रहती hai....aur भैया भी कुछ नहीं bolte....Daksh सर ने मदद की थी इन् दोनों की उस वक़्त जब रूपल बीमार हो गयी thi.....tab दक्ष सर ने मदद की thi.....aur जैसा भाभी बता रही थी ये कोई पहली या आखिरी मदद भी नहीं लगी mujhe......wo बस चाहती थी की वो भी पंकज की मदद कर sakke.....par हम सब की वजह se.....wo इसी वजह से उद्दस hai....au वही पार्क में बैठी हुई है अकेले....

बुआ - :रेडफास: पता नहीं मुझे अपने hi घर के लोगो के बारे में क्या क्या नहीं पता hai......ab तो ऐसा लगता है जैसे इस घर की मैं हु hi nahi......koi कुछ बताता hi नहीं mujhe......Bas एक पार्थ के बारे में सायद सब पता hai.....wo भी अब बमहज एक ग़लतफहमी hi लग रही है मुझे.....

K.Bua - ये क्या बोल रही हो तुम.....

बुआ - निकिता बताओ इसको सब कुछ....

निकिता ने K.Bua को सब बताया उन् शैतानो के बारे में वो किस तरह यह उनकी फॅमिली के वजह से आये और अब यही रह रहे hai....wagera वगेरा....

K.Bua - सायद वो नहीं चाहते थे तुमको इन् सब में लाना.....

बुआ - :रेडफास: मेरी खुद की भतीजी बीमार thi.....iss बारे में भी नहीं पता चलने दिया मुझे.....

K.Bua - उस वक़्त हम ट्रेनिंग पे गए हुए थे स्ट्रेंज वर्ल्ड में याद भी है tumko....wo कैसे बताते.....

बुआ - क्यों और साड़ी खबरें नहीं भेजते थे mujhe....aur बातें नहीं बताते the...wo बेकार के चिट्ठियां वो नहीं आती थी mujhe.....mujhe इन् सब के जवाब चाहिए......

निकिता - बुआ आप कुछ भी करोगे तो अभी बात बिगड़ने वाली hai......Dadi को लगेगा सब आंटी ने बताया आपको और फिर वो उनपे गुस्सा करेंगी.....

बुआ थोड़ी देर वही पे बैठी rahi......aur फिर अच्चानक से उठी और अपने रूम में चली गयी.......

निकिता - K.Bua पंकज ठीक है naa.....kya मैं उससे मिल सकती हु....

K.Bua - तुमने नहीं sunna.......uske पापा ने कहा hai.....humme से कोई भी उसके आस पास नहीं जाना chahiye.....ab कुछ नहीं हो सकता......

निकिता - उसने 2 बार जान बकहयि है मेरी.....

K.Bua - और तुम सब ने उसको भगा diya.....arre मैं अपना नाम कैसे भूल गयी मैं भी तो थी ना तुम सब के साथ......

इनको रहने देते है और हम चलते है स्ट्रेंज वर्ल्ड में वह पे ओल्ड आउल सब कुछ बता रहा था mujhe......aur मैं सुन्न रहा tha.....uski पूरी बात सुनने के बाद तो मैं भी थोड़ा कंफ्यूज हो गया.....

मैं - लीमो कहा hai,....usko कुछ पता चला या nahi.....kya उसको कोई कनेक्शन मिला है इन् मरने वालो में या फिर इन् जगहों में जहा पे मौतें हुई hai....yaa फिर कुछ और.....

ओल्ड आउल - अभी तक तो बस यही की ये लोग वाटर एलिमेंट वाले hai.......ek और बात जिसकी वजह से इन् वाले खून का पता चला है सायद उसने देखा है usko......maine वह पे अपने कुछ लोगो को लगा रखा है वो मुझे बताते रहेंगे......

मैं - ये ठीक hai.....agar ना संभाले तो ज्वाला से मदद lo....aur haa.....Leemo से बात करनी hogi.....wo यहाँ का लोकल है और लोगो से बात भी कर सकता hai......mujhe इन् सब में कोई और कनेक्शन भी लग रहा hai.....bas ये वाटर एलिमेंट की बात हॉट तो यहाँ पे और भी है उनको क्यों नहीं बस ये दोनों hi क्यों......

ओल्ड आउल - मैं इस बारे में पता करने का काम शुरू कर चूका hu......Aur लीमो इस वक़्त सायद hi मिलेगा.....

मैं - ऐसा क्यों....

ओल्ड आउल - लीमो इस वक़्त यहाँ होता hi नहीं hai.....wo इस वक़्त आर्चरी सोसाइटी के मीटिंग्स में होता hai....aur वह ऐसे जाना सायद सही नहीं hoga.....jab वो अकेले मिलेगा मैं मिलवा दूंगा तुमको उससे......

मैं - हम्म ठीक है ये bhi.....aur कोई चीज़ चाहिए तो बता dena.....ek काम हो सकता hai....Albus कूपर बहार आओ.....

मैंने ये कहा और वो दोनों hi बहार आ गए......

मैं - एल्फ बन jaao.....aur जो ओल्ड आउल कहे जैसे कहे वो karo.....aur कोई गड़बड़ मत कर dena.....tumko सायद इस बार ज्यादा वक़्त के लिए बहार और मुझसे दूर रहना पड़े.....

दोनों ने hi हां में गर्दन हिलायी....

मैं - ओल्ड आउल ये तुम्हारी बात maanege....isse आसानी हो जायेगी ढूंढने में......

ओल्ड आउल - हम्म ठीक है.....

मैं - अब पोर्टल खोलो मुझे हर भी जाना है.....

उसने पोर्टल खोला और मैं घर के बहार चला gaya.......waha पंहुचा hi था की देखा बुआ अपना सामन बस में रख रही thi....abhi बस तक पहुँचता उससे पहले बस hi निकल गयई.....

मैं - :शॉकिंग: ये क्या tha.....Bua.....Bua कहा जा रही हो......

मैं ऐसे चिल्ला रहा था जैसे वो सच में सुन्न legi.....tabhi पीछे से निकिता और K.Bua आयी.....

मैं - वो कहा जा रही है अपना सामान लेके......

K.Bua - :सिघ: घर छोड़ के......

मैं - पर kyun.....aisa क्या हो गया अभी तो सब ठीक hi था.....

निकिता - उन्होंने कहा कोई उनको कुछ नहीं बताता तो अब वो भी बिना बताये जा रही है....

मैं - पागल हो क्या.....

तभी एक बस वापस आयी और उसपे se.....Chacha और चची निच्चे उतरे.....

K.Bua - ये दोनों साथ mein....Bhaiya को कैसे पता chala...wo कहा पे है.....

वो दोनों हमारे पास आये....

चाचा - तुम सब बहार क्यों ho.....chalo अंदर चलते है....

मैं - चाचू बुआ घर छोड़ के चली गयी.....

चची - Kya.....kya बोल रहे हो.....

K.Bua - वो मैंने उसको बता दिया की आपने घर में किसी को नहीं बताया था रूपल के बीमार होने वाली बात ko.....aur फिर वो गुस्सा हुई और बैग पैक करके निकल गयी....

चची - पर तुमने बताया hi kyun......aur ये पागल इस बात को लेके घर से चल.....

वो बोल hi रही थी की उनकी नज़र निकिता पे पड़ी....

चची - तुमने भी कुछ बताया है क्या किसी को......

K.Bua - हां सब kuch.....aur आपको ये सब पहले बताना चाहिए tha....kab तक अकेले लड़ोगे aap.....aapko पता भी है हम आपकी कितनी मदद कर सकते है.....

चची - चुप raho.....aur aap....aap देख क्या रहे हो उसको वापस लेके aao......pata नहीं कौन से जगह पे फस गयी हु mein.....ek से एक नमूने भरे पड़े hai......Kaha जा रही है ये भी बताया क्या....

निकिता - वो बोली उनको सब कुछ नहीं बताते तो वो भी बिना बताये जायेगी....

मैं - मैं पता करता हु.....

चाचा - आज रहने देते है वो स्कूल hi गयी hogi....kal उसके पास जाके सब क्लियर कर lenge..ab घर चलो सब..... :सिघ:

चची - बहन है आपकी वो....

चाचा - तभी तो कह रहा हु आज रहने do....usko कुछ होने वाला नहीं hai....ulta उससे खतरा होता है लोगो को.....

इनको छोड़ देते है अजीब फॅमिली है ये :सिघ:

लीडर इस वक़्त उसी जंगल में tha.....wahi पे जहा वो और पंकज आये the....jaha पे वो सब हुआ tha......wahi पे एक पेड़ के पास वो बैठ जाता hai.....ek कुटकी बजता है वो और जमीं पे अजीब सा घेरा बन जाता hai......wapas से बजने pe....usme आग लग जाती hai.....fir वो ऊपर की ओर देख के चुटकी बजता hai.....aur जैसे वह पे हवा hi ृक्क gayi......uske आस पास एक अदृश्य दीवार बन गयी thi......usne अपने पास से पंकज के बाल nikale.......unko....uss आग में दे diya.......uske आस पास बहुत सारा धुवां फैल gaya......kuch दिखाई नहीं दे रहा tha......usne फिर उसी आग में पंकज के हाथ की स्किन को भी दे diya....jisse दूसरे रंग का धुवां फैल गया वह पे....

कुछ देर फिर जैसे सन्नाटा चाय रहा वह पे

फिर वह पे वो सारा धुवां शपेस लेने लग gaye.....kul 6 पंकज थे वह pe....unme से एक थोड़ा जख्मी सा लग रहा था पर बाकी 5 एकदम से सही लग रहे the.....asli वाले से भी ज्यादा पावरफुल लग रहे थे वो.....

लीडर - उसको धुंध के लाओ.......

लीडर का ऐसा कहना था वो वापस से धुवां बन gaye......aur यहाँ वह चले gaye.......Leader उसी जगह पे आराम से बैठा रहा......

थोड़ी देर बाद वह पे उसके सामने एक शैतान को लेके आते है वो log.......wo सब के सब उसको पकडे होते hai.....dekhne में ये शैतान किसी पेड़ की तरह लग रहा tha.....aisa पेड़ जो रूप बदल ले.....

लीडर - हम्म तो तू है wo.......yaha का तो न लगता tu.......kya कर रहा है यहाँ पे.....

वो कुछ ना बोलै बोलने की हालत में नहीं था wo...agar होता तो बोल भी deta......par वो उस हालत में नहीं tha......unn सब ने उसको बहुत मारा tha.....aur उसके ऊपर से वो पहले से hi जख्मी भी था....

लीडर - हम्म बहुत मर दिया इसको लगता hai......chalo अब शुरू तुम सब ने शुरू कर hi दिया है to....khatam भी कर do....maar दो isko....par हां सर मुझे चाहिए इसका......

लीडर का ऐसा कहना था वो सारे वापस से धुवां बन गए और उस शैतान के सरीर के अंदर चले गए.....

लीडर - खोखला कर दो isko......isko पता चलना चाहिए इसने किसपे हमला किया tha......tum सब को ये रूप ऐसा hi नहीं दिया hai.....isko आने वाले जन्मों में भी ये सकल याद रहनी चाहिए.....

लीडर ऐसा hi बोलता जा रहा था वही उस शैतान का sharir.....wo तो बस फूलता hi जा रहा tha.....uske गले के पास जैसे कुछ लाल सी लाइनिंग बन गयी थी सायद ये उन् सब का hi काम tha....Leader ने कहा था की सर चाहिए सही सलामत इस वजह से सायद ऐसा कर रहे the.....kuch देर और रुकने के बाद उस शैतान का शरीर फट जाता hai......wo पूरी जगह उसके अजीब से खून से गन्दी हो जाती hai......par ये ज्यादा वक़्त के लुए नहीं tha......Leader ने देखा की जहा जहा पे भी उसका कौन गया था वह पे छोटे छोटे पौधे पैदा हो गए the......Leader झुक के उनको देखने लग गया कही ये सब जिन्दा तो नहीं hai....kahi वो शैतान वापस से रेगेनेराते तो नहीं हो रहा है......

जब लीडर को लगा की ऐसा कुछ नहीं hai.....usne वह पे पड़ा हुआ सर ऊपर उठाया......

लीडर ने देखा जैसे वो अभी भी हिल रहा था जिन्दा था वो......

लीडर - बड़ा अजीब जीव hai......marne के बाद भी इसका सर हिल रहा hai.....aakhir ये है क्या.....

उसके सर से अभी भी उस जीव का अजीब सा खून बहता जा रहा tha......Leader ने आस पास देखा तो वह पे एक छोटा सा तालाब जैसा बना हुआ tha......Leader ने उस शैतान के सर को पानी में डालने के बारे में socha...jisse वो अजीब सा जो खून था वो थोड़ा साफ़ हो जाता.......

जैसे hi पानी में लीडर ने सर daala.......wo सिकुड़ने laga......aur सिकुड़ते हुए एक छोटे से पौधे में बदल gaya....Leader उसको देखता रहा......

लीडर - ये एअर्थ pe......aur किसी को इसके बारे में पता नहीं hai......aisa कैसे हो सकता है....

उसने अपना हाथ आगे kiya....aur मिटटी से बना हुआ एक गमला आ गया उसके हाथ में.....

उसने उस छोटे से पौधे को उस गमले में rakha.....aur अच्छे से उसमे मिटटी भर दी........

लीडर - ये सही रहेगा मेरी बेटी के liye....pahla तौफा इससे बेहतर क्या hi hoga......ek पालतू shaitaan......par मैंने तो इसको पंकज को देने के बारे में सोचा tha....aur वड्डा भी किया था.......

वो सोच में पढ़ gaya......Usne उस गमले को फिर गायब कर दिया......

लीडर - अभी ये तैयार नहीं hai.....aur जंगली भी hai.....isko पहले ठीक करूँगा उसके बाद किसी को दूंगा.....

आज का यही रखते है नेक्स्ट अपडेट में देखेंगे स्ट्रेंज वर्ल्ड में अलबूस और कूपर क्या करते hai.....aur उसके बाद देखेंगेबुआ को कैसे घर लेके आते है ये sab.....aur कुछ सीन्स
 
अपडेट - 79

स्ट्रेंज वर्ल्ड में......

नेक्स्ट मॉर्निंग.......

लेममो को सुबह सुबह hi पता चला था इस बारे में......2 और खून हुए थे बहार किसी कसबे mein.....aur तरीका वही tha.....iss बार उसने खुद वह जाना सही समझा......

वही कूपर और अलबूस दोनों को लेके चल दिया था ओल्ड Owl......Wo उस बन्दे के घर के पास पहुंचे हुए थे जो कल बेहोश हो गया tha.....jiski वजह से ओल्ड आउल को उन् दोनों हत्याओं के बारे में पता चला था.....

ओल्ड आउल - तुम dono....sainik बन jaao.....aur जैसा जैसा मैं कहूंगा वैसा वैसा hi करते jaana......humko बस ये पता करना है ये क्या क्या जानता hai.....isne उस खुनी का चहेरा देखा था या नहीं.......

अलबूस और लीमो दोनों hi उसकी बात मान के बन गए थे एक एक sipahi.....aur दोनों चल दिए उस बन्दे के घर में.....

घर में बस वही पड़ा हुआ था बिस्तर pe....aur कोई नहीं tha....ghar कहना भी ज्यादा होगा इसके liye....ye तो बस एक कबाड़खाना लग रहा था......

होश आ गया था isko.....usne देखा सामने 2 सिपाही खड़े हुए है तो वो भागने को hua.....usko लगा ये लोग उसको पकड़ने को आ रहे hai.....par अलबूस और कूपर ने संभल लिया दोनों को......

वो - छोड़ो mujhe.....maine इस बार कोई चोरी नहीं की hai......tum ऐसे hi नहीं पकड़ सकते मुझे.......

ओल्ड आउल - उह तो ये चोर hai.....Albus इसको शांत रहने को bolo.....aur कूपर आस पास dekho....isko याक्किन होना चाहिए तुम दोनों सैनिक hi ho....Albus तुम इससे कल के बारे में पूछोगे.....

ओल्ड आउल के कहे अनुशार कूपर वह आस पास ऐसे hi देखने लगा चीज़ों ko....aur वो चोर उसको देख रहा था और घबरा रहा था.......

अलबूस - सुनने में आया है कल कुछ देखा था तुमने......

अलबूस की बात ने उसका ध्यान कूपर की ओर से खिंच liya.....wo समझ गया ये दोनों यहाँ सायद उसी के बारे में बात करने आये है.....

वो - Ji.....maine देखा था kal.......kal 2 खून होते हुए देखे मैंने......

अलबूस - कौन थे वो.....

वो - मेरे sathi.......mere साथ मिलके चोरियां किया करते थे......

अलबूस -न किसने मारा उनको देखा तुमने......

वो - आप यकीं नहीं करोगे.....

कूपर अभी कुछ देख रहा था की एक सम्मान उसके हाथ से निच्चे गिर गया और वो चोर उसकी ओर देखने laga......aur बहुत दर गया था......

अलबूस - उसको chodo.....aur साफ़ साफ़ बताओ क्या देखा tha......kaun था khooni.....tumne देखा था ना उसको.....

कूपर अभी उस सामन को उठा रहा था जो अभी गिर्रा था......

वो - मैं सब bataunga.....par आप दोनों मुझे जेल में मत दाल dena......main इस बारे में आर्चरी सोसाइटी तक बात पहुंचने hi वाला tha......koi राज परिवार का था जिसने खून किया था.......

ओल्ड आउल - क्या बक्क रहा है ye.......wo दोनों मेरे सामने the.....aur राज परिवार में यहाँ पे कोई भी मेल नहीं hai......khooni कोई फीमेल यहाँ पे हो hi नहीं sakti.......Albus ठीक से पूछो isse......aur ये कैसे कह रहा है ये sab......Cooper वो चीज़ज़ जो अभी उठायी है उसको लेके इसके पास जाओ और इसके सामने रखो......

ओल्ड आउल के कहे अनुशार दोइनो ने वैसा hi किया.....

अलबूस - तुम ये कैसे कह सकते ho.....aur पता है ना ये क्या कह रहे हो तुम......

अलबूस ने अपनी बात राखी और उसके बाद वह पे कूपर वो सामन लेके उस बन्दे के सामने खड़ा हो गया और उसके ठीक सामने रख diya.....Wo बाँदा समझ चुक्का था अब वो फँस चुक्का hai.....ab ये लोग वैसे भी पकड़ने hi वाले है उसको......

वो - उसके kapde......wo राज परिवार के hi the.....aur वो मेल hi tha.......sayad वो राजकुमार दब honge......waise भी उनको यहाँ से निकल दिया hai.....to सायद वो खुद को शाबित करने आये हो यहाँ pe......aur चोरों को मारते जा रहे hai......par ये सही नहीं hai......Chor भी उनकी जनता के लोग hi hai.....ye सही नहीं हप रहा hai.......aap मुझे कैदखाने लेके chalo.....main वह पे आवाज uthaunga.....sabko बताऊंगा की क्या चल रहा है यहाँ पे.......

ओल्ड आउल - ये कैसे हो सकता hai......DB एअर्थ पे hai....wo यहाँ खुद से आ नहीं sakta......aur एल्फ किंग और युवराज पे नज़र थी hamari......phir ये कौन आ gaya.......kya कोई उनके कपडे पेहेन के निकल रहा hai......kuch समझ में नहीं आ raha......Albus कूपर चाओ यहाँ se.....ye अब कुछ और नहीं बताने wala......aur इसका सम्मान वापस dedo....aur bolo....dyaan से रखे इसको पकड़ा जाएगा ऐसे mein.....aur ये बात वह आर्चरी सोसाइटी तक भी पहुचानी है.....

कूपर ने ठीक वैसा hi कहा और फिर वो तिण्णो hi वह से निकल gaye.....Wo बाँदा बस इनको देखता raha......usko याक्किन नहीं हो रहा था उसको छोड़ कैसे दिया इन् सब ने.

अलबूस और कूपर के साथ बहार आने के बाद......

ओल्ड आउल - दब हो नहीं sakta......wo वह एअर्थ पे hai.....wo यहाँ कैसे आ jaayega......aur ye......wo लोग भी नहीं हो sakte........Elf किंग सो रहे थे मैं खुद देख रहा tha......Yuvraj को आते वक़्त देखा था maine.....wo अपने बिस्तर पे hi the......phir ye......sayad ये jhoot.....nahi...nahi.....aise में कौन hi झूट bolega.....usne कहा की दब यहाँ पे चोरों को मार रहा hai......ye क्या था.....

ओल्ड आउल वैसे hi सोचता रहा थोड़ी der.......phir उसने अलबूस और कूपर को अपने साथ चलने को kaha......waise ये काम वो खुद कर सकता था पर वो बिलकुल से कन्फर्म होना चाहता था......

वही एअर्थ पे......

रूपल दीदी सुबह से पूछ रही thi....aakhir हुआ क्या जिस वजह से बुआ घर छोड़ के चली gayi.......Chachi भी बार बार बोले जा रही thi....ki उसके पास चलेंगे तब पूछ lenge.....Sab रेडी हो गए the...hamare क्लास का टाइम भी हो गया tha......aur हम सब चल दिए स्कूल......

वह पे आने के बाद मुझे और निकिता को सबसे पहले िन्न्न सब ने क्लास में भेज दिया :सिघ: ये कोई बात होती है.....

हम दोनों भी मुँह बनाते वह से चल देते है अपने क्लास की oor....wahi बाकी के सारे बुआ के केबिन की oor......par सायद वो भूल गए थे की बुआ के भी क्लासेज होते hai.......waha जाके उनको जब बुआ नहीं मिली तो उन् सब ने सोचा क्लास लेने गयी hogi......to थोड़ा वेट कर लेते hai.....jab आएगी तब सब बातें क्लियर कर लेंगे.....

रूपल दीदी - हुआ kya.....ab तो बताओ आप सब.....

चची - ये लड़की भी ना :डोह: उसको कुछ बातें हमने नहीं बताई थी वो सब उसको पता चल गया इस वजह से नाराज़ होक चली गयी वो घर छोड़ के.......

रूपल - तो गलती भी तो आप सब की hi है naa.....kyun नहीं बताया unko.....iss बात को लेके तो मैं भी घर छोड़ के चली jaaungi.....aapne हमको नहीं बताया उन् शैतानो के बारे में हम अभी उतने बड़े नहीं हुए है इस वजह se.......par bua....unko क्यों nahi......ye सब जान के बुरा तो लगेगा hi न....

चची - पर बीटा उस वक़्त सब हमारे हाथ में नहीं tha......hum दोनों ने तो कहा भी tha.....inn सब को छुपाया नहीं जा sakta.....par....

रूपल दीदी - पर क्या.....

चाचा - पर तुम्हारे दादा दादी का मन्ना था की ये सब किसी को पता नहीं chalega.....aur अगर चल गया तो जो लाइफ हमारी पहले से ख़राब हो राखी थी वो और ज्यादा ख़राब हो जानी thi.....bas इसी वजह से उन्होंने मन्ना कर दिया बताने ko.....aur पूनम तो वैसे भी उस वक़्त वह स्ट्रेंज वर्ल्ड में अपने प्रोफ. के पोस्ट के लिए ट्रेनिंग पे thi....hum बता नहीं सकते थे usko.....isse वो सब छोड़ छड्ड यहाँ आ जाती.....

K.Bua - भैया फिर भी बाद में बता देना चाहिए था......

चाचा - हमने इस बारे में बात kari.....par माँ ने मन्ना कर diya....wo नहीं चाहती थी इन् सब के बारे में और किसी को पता चले par.....ab to.....khair.....Kavita अभी उसको आने में वक़्त है ना......

K.Bua ने घडी की ओर देखा.....

K.Bua जी भैया अभी तो थोड़ा और वक़्त lagega.......aap सब baitho....main कुछ मंगवा देती हु यहाँ पे.....

चाचा - nahi.....humko कुछ नहीं chahiye......Nitya......humko वो गलती नहीं करनी चाहिए जो माँ पापा ने करि hai......jitni देर बाद सच सबको पता चलेगा उतना hi उनको बुरा lagega.......jo हमारफे हाथ में है वो तो हम बता hi सकते है चुप्पा के क्या hi मिलेगा.....

चची - हम्म मैं समझ रही hu......main भी इसी बारे में सोच रही थी......

रूपल दीदी - और भी कुछ चुप्पा के रखा है क्या बुआ से..... :सिघ: आप सब भी naa......batao अब.....

चची - उससे nahi......tumse.....

रूपल दीदी - Mujhse.......Mujhse क्या चुप्पा सकते हो आप sab.....main सब जानती hu,.....jo आपको लगता है मुझे पता नहीं चलेगा वो सब bhi.....Mujhe पता है सब kuch......ulta आप सब नहीं जानते मैं क्या क्या चुप्प्पा के रखती हु,,,,

चची - तुम हमसे बातें छुपाती हो...... :स्लैप: इस्सलिये इतना बड़ा किया है तुमको की हमपे hi याक्किन ना karo......humse बातें छुपाओ.....

चाचा - नित्य ये कहा जा रही ho....ye सब छोड़ो और इसको वो बताते है जो इसको जानना चाहिए.....

रूपल - हम्म बताओ मैं भी देखती हु वो कौन सी बात है आप दोनों की जो आपको लग रहा है आपने मुझसे चुप्पा के रखा है.....

चची - तुमको पता है मैं क्यों पंकज को तुम सब के साथ रखने को बोलती रहती हु......

रूपल दीदी - हम्म बस ye.......maine उसको पीटा tha.....aur आपने उसके पापा के साथ डील की है की वो मेरे अगेंस्ट कोई एक्शन नहीं लेंगे और उसके बदले वो हमारे साथ रह सकता hai.....par वो इस लायक hi नहीं hai.....aap नहीं जानती wo....kitna बिगड़ा हुआ है......

चची - तुमको सच में लगता है दक्ष जी तुम्हारे अगेंस्ट या फिर हम सबमे किसी के अगेंस्ट कोई कार्रवाई karayenge.......haa वो गुस्सा hai.....hona भी chahiye,....par फिर भी वो ये सब तो नहीं hi करेंगे......

रूपल दीदी - तब फिर आप क्यों उस पंकज को हमारे गल्ले भांधने पे लगी हुई हो.....

चची - क्यूंकि उसी के डैड ने तुमको ठीक करने में मदद की thi.......Tum बचपन में कमज़ोर thi......khana नहीं कहती thi.....kuch बीमारियां भी थी tumko......humko समझ नहीं आता था की क्या kare......humne बहुत जगह दिखाया पर कोई फायदा नहीं hua......aur किसी अच्छी जगह लेके जा नहीं सकते थे तुमको उस waqt.....kyunki वो वक़्त hi ऐसा tha......uss वक़्त दक्ष जी ने हमारी मदद करि thi......uss वक़्त भी नाराज़ थे wo.....par तब भी उन्होंने मदद की thi.....tum आज ठीक ho....uske पीछे उनका भी हाथ hai....Main चाहती थी जैसे उन्होंने हमारी मदद की हम भी उनकी थोड़ी मदद कर de......Pankaj थोड़ा बिगड़ गया hai...galat रस्ते पे जाने लगा hai.....sayad तुम सब क साथ रह के सही हो jaaye.....ye सोचा था maine......par tum......tum सब के सब बस खुद के बारे में सोचते ho......kal भी कविता और निकिता को बचते हुए घायल हुआ था wo.......par तुम sab....tum लोगो का तो यही मन्ना है की वो हमला कर रहा tha......Nikita से पूछा है tumne.....yaa कविता से पूछा की आखिर हुआ क्या tha.....maine पूछा है......

चाचा को लगा ये थोड़ा ज्यादा हर्ष होता जा रहा hai.....unhone चची को चुप karaya.....par तब तक रूपल दीदी मुँह बाए सब सुन के समझने की कोशिश कर रही thi.......wo सब कुछ याद कर रही thi.....kaise पहली बार उनका और पंकज का सामना हुआ tha....kaise उन्होंने उसको मज़ा चखाया tha.......aur फिर बस ये चलता hi gaya.....phir जब वो हम सब के साथ आने को हुआ तो हमने उसको साथ रखना सही नहीं samjha.....waqt नहीं दिया usko.....humne पहले से तय कर रखा था की वो hi गलत hai.....hum सही है.....

रूपल दीदी - पर आपने ये सब बताया क्यों nahi......unka अहसान है mujhpe.....aur मैं.....

चची - हां अहसान hai....kabhi इसके बारे में बताया tumko.....tum पंकज को भगा रही thi.....ek बार भी दक्ष जी ने कहा kuch......wo बच्चा सुधारना चाहता hai.....par तुम सब उसको मौयका नहीं दे रहे हो.......

वो बोल hi रही थी की पहली क्लास ख़तम हो gayi.....aur दरवाजा खुल्ला केबिन ka....aur वह पे बुआ कड़ी thi.......Chachi और चाचा बैठे हुए थे वह पे एक सोफे pe.....Chacha उनके कंधे पे हाथ रखे हुए the......Rupal दीदी निच्चे देख रही thi.....K.Bua बुआ की ओर देख रही थी.....

बुआ को पता नहीं क्या laga......wo तुरंत से चची के पास aayi.....unko dekha....aur उनके पास बैठ गयी.....

बुआ - भाभी आपको क्या hua....aap ऐसे क्यों बैठे हो....

चाचा - तुम जो बिन्ना कुछ कहे आ गयी थी yaha.....ussi के वजह se.....dekh रही हो isko.....kal दोपहर से एक निवाला तक ना खाया है इसने......

चची ने जब चाचा की बात सुन्नी तो उनके ओर देखने lagi......bas वही nahi.....sab उन्ही को देख रहे the.....bas बुआ को छोड़ के....

बुआ - भाभी ये भैया क्या कह रहे है,......

चाचा - क्या कह रहा hu......isne क्या किसी ने भी खाना नहीं खाया hai.....tum ऐसे कैसे जा सकती हो घर se.......pata भी है रात भर हम कहा कहा घूमते रहे है तुम्हारी तलाश mein......wo तो इस कविता को पता चल गया तुम यहाँ ho....to यहाँ आ गए हम सब......

बुआ - आप sab......sab चलो पहले खाना khao.....uske बाद बातें hongi......Wo दोनों कहा है....

रूपल दीदी - क्लास करने गए थे दोनों.....

अभी रूपल दीदी ने ऐसा कहा hi था की हम दोनों पहुंच gaye.......hatyiyaar चला के आये थे तो थड़ा पसीना आ रहा था.....

बुआ - तुम सब रुको मैं मंगवाती हु खाना....

मैं - नहीं बुआ अभी nahi....abhi मैं नहीं कर रहा hai....baad में कर लेंगे.....

बुआ - ज्यादा बोलने की जरुरत नहीं hai.....jitna कहा है उतना karo.....samjhe.....aur कविता तुमको अकाल नहीं hai.....ye सब हो रहा था तुम कॉल नहीं कर सकती थी......

चाचा - अब उसको क्या दांत रही हो....

चची - बस भी karo.....pareshan करना है बस usko......yaha आओ पूनम तुम पहले......

बुआ - Pareshan......kya बात कर रही है अप्प्प.....

चची - ये सब छोड़ो और ये बताओ तुम यहाँ क्यों आ गयी......

बुआ - आपको नहीं pata.....main उस घर में बस एक किरायेदार thi......mann किया अपना थिककाना बदल दिया.....

चची - एक लगाउंगी ना सारा किराया निकल jaayega......sab पता है mujhe.....par इन् सब में हम क्या karte.....hamari भी कुछ मजबूरियां thi.....tum वो बिन्ना जाने hi यहाँ आ गयी......

बुआ - अच्छा तो क्या आप सब मुझे बताने वाले थे इन् सब के बारे mein.....aur अगर हां तो kab.....aap नहीं बताने वाले the.......kuch भी nahi......aur जिस घर में रहते हुए मुझे उस घर में चल क्या रहा है ये सब ना पता हो तो मैं आखिर क्यों जाऊं उस घर में.....

चाचा - पूनम तुमको तो पता है माँ पापा ka....wo सब कुछ चुप्पा के करने वाले hai.......kya लगता है हमने बात नहीं करि होगी इस बारे mein,......kuch दिन पहले नित्य ने माँ से जब ये सब बताने को कहा तुमको तो इसी को दांत के चुप करा दिया उन्होंने.....

बुआ - Kyun.....aisa क्यों kiya....main उस घर की नहीं hu....isliye क्या....

चची - आई क्या बोल रही हो.....

बुआ - क्या kya.....sach बोल रही hu......aapko पता भी है कैसा लगा मुझे जब इन् सब के बारे में पता chala....kya उनको मेरे ऊपर थोड़ा भी याक्किन नहीं है.....

बुआ ये सब बोलते हुए रोने लग गयी.....

इनको यहाँ छोड़ हम लीडर के पास चलते hai.....wo अभी इस सोच में डब्बा हुआ था आखिर वो कैसे पता लगाए अपनी बेटी के बारे में पंकज तो जख्मी hai.....usse मदद मांगना सही नहीं hoga....aur खुद वो जा नहीं sakta.....ek जगह पे बैठ के वो सोचने लग गया.....

लीडर - जहा तक मुझे पता tha.....ye इस तरह के जीव एअर्थ पे तो नहीं आ sakte.....yaha पे कोई शील्ड लगी हुई thi.....phir ये यहाँ kaise......aur ये अकेला hi था yaa.....Sayad यहाँ पे कुछ और भी ho....agar उनका पता लगा के यहाँ के ऑफिशल्स को बता दिया तो वो मेरी मदद कर देंगे सायद......

लीडर ने ऐसा socha.....aur इसके बदले उनको मदद मिलेगी ऐसा भी उम्मीद लगा liya.....ab बस उसको पता करना था की उस जैसे और भी शैतान है क्या वह pe.....aur है तो वो सब कहा पे है.......

लीडर ने ये तै किया की वो इस बारे में पता lagayega.....par फिर ये सोच के उद्दस हो गया की ये अकेले वो कर नहीं paayega.....agar बात फोमोस पे ऐसा कुछ करने की होती तो वो अब तक कर चूका होता पर अभी नहीं कर सकता था वो......

लीडर - सायद सिखर करना होगा इन् सब ka......main ये अकेला कर hi लूंगा जब तक वो पंकज ठीक नहीं होता मैं ये कर लेता hu......yaa फिर वपा से फोमोस चला jaaun......kuch दिन वह रह लूंगा फिर यहाँ वापस आ jaunga.....ye भी ठीक hi लग रहा है.....

अभी के लिए बस इतना hi..... नेक्स्ट अपडेट में स्ट्रेंज वर्ल्ड पे चोरों को कौन मार रहा है ये पता चलेगा और साथ hi वह से वो लड़की एअर्थ पे आने वाली hai.....aur बुआ का घर वापस आना.....
 
अपडेट - 80

डेमोस में......

आज की शम्म इस जगह और लूसिफ़ेर के लिए सायद कुछ बहुत hi बुरा लेके आयी थी.....

जस्टिन की बॉडी जोकि अभी भी उस मशीन में पड़ी हुई थी जहा उसके सेल्स रेगेनेराते हो रहे the.......aur उसकी soul.....wo लूसिफ़ेर ने अपने पास संभल के राखी हुई थी.......

सायद hi लूसिफ़ेर को कभी याक्किन हो इस बात ka.....par आज उसको वो धोखा देने वाला tha.....jiske ऊपर उसने थोड़ा याक्किन किया tha........jisse लूसिफ़ेर बहुत hi ज्यादा खुश था......

डेमोस का नया Senanayak.......apne हाथों से अपने पिता को मारने के बाद वो वापस कभी अपने परिवार से मिलने नहीं गया tha.....par आज subah.....aaj सुबह वो अपने घर गया tha.....apne उस परिवार से मिलने को जिसको बचने के लिए उसने अपने पिता को मार दिया था.....

दोपहर से शुरू करते है.......

लूसिफ़ेर जानता था की ये जो तरीका उसने अपना रखा है अपने बेटे को जिन्दा रखने के लिए वो सही नहीं hai.....kabhi नहीं था सही ye.......isse वो बस कमज़ोर hi होता जा रहा tha......par कोई और रास्ता उसको दिखाई नहीं दे रहा tha.....wo यहाँ वह से जानकारी हासिल करता पर कोई भी काम का नहीं tha.......usne ना जाने क्या क्या नहीं किया अपने बेटे को इन् सब से बहार निकलने ko.....par सब बेकार hi था.....'

आज भी वो ऐसी hi एक बेकार कोशिश में लगा हुआ tha.....kuch किताबों की कपीस ढूंढी थी उसने जो की सिर्फ और सिर्फ टाइटन की लाइब्रेरी में the......badi मुश्किल से जुगाड़ की थी usne.....par उसमे उसको वो नहीं मिल रहा था जिसकी जरुरत थी......

कुछ चीजजें मिली थी जैसे किसी आत्मा को दूसरे के सरीर में दाल dena.....ye sab.....par इन् सब से उसको कोई मतलब नहीं था इस waqt.....wo कुछ कर नहीं सकता था इससे....

अभी वो उन्ही किताबों में खोया हुआ था की महल में शोर सा मच गया.......

सारे पहरेदार एक ओर भागने lage.......Studyroom में बैठे लूसिफ़ेर ने जब ये देखा तो वो भी अपने रूम से बहार nikla.....aur उसने देखा सभी के सभी जस्टिन के रूम की ओर जा रहे थे.....

जस्टिन का रूम स्टडी रूम से दूर tha....Lucifer तुरंत वह पे पंहुचा और जब पंहुचा तो उसको याक्किन नहीं हो रहा था......

जस्टिन की बॉडी वह रखे मशीन से बहार पड़ी हुई thi......uske पास hi सेनानायक बैठा हुआ tha.....aur उसको देख के है रहा था......

उसने देखा की लूसिफ़ेर वह पे आ चुकक्का है.....

सेनानायक - Mahamahim.....aaiye.....aaiye.....aapka hi इंतज़ार कर रहे थे हम dono.......Justin.....justin देखो पापा आये hai......justin.....

लूसिफ़ेर ने जब देखा की उसके बेटे के बॉडी के साथ कोई ऐसा कर रहा है आग बबूला हो गया wo......aur उसने अपने हाथ ऊपर किये और एनेर्जीबाल सेनानायक की ओर fenka,....par वो वह नहीं gaya.......wo टकरा के वही ख़तम हो गया एक अदृश्य दीवार से......

सेनानायक - ohho.....Justin देखो पापा तो गुस्से में hai.....Papa को बोलो शांत रहे वर्ण.....

chattak.....chaaattttaak.....

लूसिफ़ेर - तुम ये सही नहीं कर rahe......iska अंजाम क्या होगा तुम सोच भी नहीं सकते......

सेनानायक - Justin.....apne पापा से पूछो क्या होगा anjaam.....puccho.....

लूसिफ़ेर - इसके परिवार के सभी log.....iske dost.....sabhi को यहाँ लेके aao.....aaj उन् सब की मौत ये अपने आखों से देखने वाला है.....

सेनानायक - Arre......Justin पापा से बोलो वो थोड़ा लेट हो gaye.....wo लोग तो निकल गए यहाँ se......kahi dur......ab क्या करेंगे तुम्हारे पापा जस्टिन....

लूसिफ़ेर - अपने हाथ मेरे बेटे से दूर रखो.....

सेनानायक - बहुत मज़्ज़ा आया था naa.......wo.....uss din.....jab मैंने अपने बाप ko.....apne इन्ही हाथों से maara.....mazza आया था naa......ussi वजह से मैं सेनान्नायक बनना na.....Main उस दिन के बाद se......ghar नहीं जा paaya......kaise जाता घर pe......main यहाँ जो बिजी tha......mujhe.....mujhe बदला लेना tha....aur उससे पहले तुम्हारा याक्किन जीतना tha.....phir ये भी जानना था सबसे ज्यादा दर्द कैसे होगा tumko.....main ऐसा क्या karu.....ki तुम तड़पते raho......itne दिन तुम्हारे साथ रहने के baad.....main समझ gaya.....tumko अपने बेटे से बाहत प्यार hai....ye....Justin.....iske बस में कुछ भी नहीं hai......Lucifer का बीटा Justin.....Strange वर्ल्ड से पीट के आता hai.....lucifer का बीटा Justin.....aaj तक एक प्लान कामियाब नहीं हुआ iska.....khud को सभी करने की लाखों कोशिशें की par....nakamiyab......

सेनानायक ये सब बोल रहा था और लूसिफ़ेर का गुस्सा बस बढ़ता hi जा रहा tha......wo जानता था की उसके सामने एक अदृस्य दीवार लगी हुई hai......Lucifer ने एक बड़ा सा एनेर्जीबाल बनाया और उसको उस देववर पे फ़ेंक diya....ye सोच के की वो दीवार कमज़ोर हो जायेगी और वो सेनानायक को पकड़ के मार dega....par...

वो एनर्जी बॉल सीधा जाके सेनानायक और उसके बगल में लेटते hue....Justin की बॉडी को lagi.......wo दीवार कब की वह से हटाई जा चुकी थी.....

एनर्जी बॉल में इतना दम था की जस्टिन की बॉडी पूरी रख हो गयी थी वही सेनानायक में थोड़ी सी जान बाकी बच्ची हुई थी.....

सेनानायक - hihhihihi......mazza आया....

इतना बोल वो भी ख़तम हो gaya.....wahi.....Lucifer को याक्किन नहीं हो रहा tha......usne क्या कर दिया hai......abhi सामने उसका बीटा tha.....aur अब बस राख थी वह पे.......

एअर्थ पे

वही स्कूल में......

बुआ ने कह दिया की वो तब तक नहीं घर जाने वाली जब तक वो खुद बात ना करले दादा दादी se.......wo उनसे बात करना चाहती थी पूछना चाहती थी आखिर क्यों उनसे सब छुपाया जाता रहा......

चाचा - पर पूनम उसके लिए भी घर तो चलना hi होगा ना.....

बुआ - Nahi.....main नहीं जा रही ghar.....iss बार वो दोनों खुद aayenge.....aur मेरे सवालों का जवाब denge......aap बस जाके उनको ये बताओ मुझे पता चल गया है सब कुछ और मैंने घर छोड़ दिया है.......

चाचा - तुम सच में ये चाहती ho.....ye सब यही पे रफ्फा दफा हो सकता है.....

बुआ - आपने नहीं सुन्ना मैंने जो कहा वो karo.....unko बोलो यहाँ aaye......main तब तक घर नहीं जाने वाली जब तक मुझे सब बता नहीं दिया जाता.....

अभी वो कुछ बोल hi रही थी की तभी केबिन का दरवाजा नॉक हुआ.....

K.Bua जो सबसे नज़दीक थी उन्होंने दरवाजा khola....bahar एक वर्कर था....

वो - प्रोफ. Poonam......aapko प्रिंसिपल ने बुलाया है......

बुआ - हम्म जाओ तुम मैं आती हु.....

चची - पूनम एक बार और सोच लो.....

बुआ - भाभी मैंने कह दिया naa.....ab आप सब भी जाओ यहाँ se......mujhe और भी काम है.....

इतना बोल बुआ खुद अपने केबिन से बहार निकल गयी......

चची - अब kya.....Maa पापा को क्या बताये की इसको सब कैसे पता चला है.....

चाचा - वो मैं देख lunga....chalo अब यहाँ se.....inn सब को भी काम hoga....aur तुम tinno.....aaj भी घर पे आ jaana.....Rupal क्या हुआ ऐसे क्या सोच रही हो......

रूपल - मुझे ऐसे ट्रीट नहीं करना चाहिए था उससे......

चची - हां सही कहा पर अब कुछ नहीं हो sakta.....tum सब माफ़ी तक नहीं मांग सकते usse.....abhi तो बिलकुल nahi......wo अपने घर पे है जख्मी hai.....aur दक्ष ने कहा hai.....tum सब को उससे दूर रखने को अगर तुम सब उसके पास गए तो इस बार वो नहीं रुकेगा....

रूपल दीदी - हां ये सही rahega.....mujhe उससे माफ़ी मांगनी chahiye.....isse मुझे अच्छा lagega.....phir बाकी वो jaane....aur एक बात बुआ ने घर छोड़ के जाने की धमकी hi दी है naa.....mujhe कभी और ऐसा कुछ पता चला की मुझसे कोई बड़ी बात छुपाई hai.....main ये प्लेनेट छोड़ के भाग जाउंगी फिर रहना ढ़ंढते....

चची - चली जाना हम नहीं ढूंढने आएंगे तुमको.....

कुछ देर बाद सब अपने अपने काम पे लग जाते है चाचा चची और रूपल दीदी जा चुक्के the....wahi मैं और निकिता क्लास में चले गए थे....

बुआ भी थोड़ी देर बाद वापस से केबिन में आयी तो वह पे बस K.Bua थी......

K.Bua - क्या hua....Principle ने बुलाया था.....

बुआ - यार पता नहीं क्या है इन् सब ko.....mujhe एक नए स्टूडेंट की जिम्मेदारी दे दी hai.....abhi आयी नहीं है वो यहाँ pe....kuch दिन बाद आने वाली है और मुझे उसकी मदद करनी hai.....Main hi क्यों....

K.Bua - अच्छा इस वजह se.....kaun आने वाली है waise....aur इतना लेट....

बुआ - है कोई श्रंगे वर्ल्ड se.....Nix कबीले से है ऐसा कहा है......

K.Bua - Nix.......wo सब कब से यहाँ आने लग gaye.....school में नहीं जाते वो sab.......unki पढ़ाई लिखाई तो उनके उस बड़े से मंदिर में होती है.....

बुआ - हां पता hai.....aur वो पहली होने वाली है जो वह से आने के बाद स्कूल में आना चाहती hai.....pata नहीं यहाँ के स्कूल में kyun....Strange वर्ल्ड का स्कूल इससे बेहतर है पुराण है वह रह jaati.....par उसको यहाँ आना है और मुझे hi उसकी जिम्मेदारी मिलनी थी.....

K.Bua - कोई बात nahi.....dekh लेंगे कौन है wo.....aur मैं तो हु hi....

K.bua उसके बाद थोड़ी देर और बात करती है उनसे और वह से चली जाती है.....

वही स्ट्रेंज वर्ल्ड में......

निक्स कबीले के पास.....

पुजारी जी - तुमने जो किया था उसके वजह से लोग मारे जा रहे है.....

लड़की - पर वो सब चोर है.....

पुजारी जी - चोर तो तुम भी हो.....

लड़की - अब nahi......wo पहले की बात thi.....aur अगर आप चाहते है मैं खुद को उसके हवाले कर du.....to मैं इसके लिए भी तैयार हु.....

पुजारी जी - अगर मुझे ऐसा करना होता तो तुम अभी तक यहाँ नहीं hoti,,,,,,,ab उसको ज्यादा वक़्त नहीं लगने वाला ये पता करने में की इन् सब में किसी निक्स का हाथ था.....

लड़की - पर मैं कहा निक्स hu.....aur अगर वो यहाँ आता है तो मैं रहूंगी आपके साथ......

पुजारी जी - हर चीज़ज़ लड़ाई से नहीं जीती jaati.....aur वैसे भी वक़्त हो चला है हम सब के जगह बदलने का......

लड़की - मैं समझी नहीं आप क्या कह रहे hai......kya आप मेरी वजह से इस जगह को छोड़ने की बात कर रहे है......

पुजारी जी - मैं अपनी नहीं तुम्हारी बात कर रहा hu.....waqt करीब है जब तुमको एअर्थ पे भेजा jaaye.......Maine इस बारे में बात कर ली hai.......waha के मैजिक स्कूल में तुम्हारे रहने का प्रबंध हो जाएगा....

लड़की - पर मैं वह क्या karungi....matlab अगर मुझे जानना hi है तो मैं उस सोल्लगे में क्यों ना जॉन जहा पे पापा hai.....Magic क्यों सीखना.....

पुजारी जी - उस सोल्लगे में भी जाओगी तुम पर अभी nahi....pahle तो एअर्थ पे कुछ दोस्त banao....uske बाद उनकी मदद से तुम उस सोल्लगे में jaaogi....seedha वह तुमको भेजना सही नहीं है....

लड़की - आप ये क्या बोल रहे hai.....matlab मैं एअर्थ पे jaaun....aur वह अपने परिवार को ढूंढने के वजाये मैजिक स्कूल में दोस्त dhundhu.....ye क्या बात हुई....

पुजारी जी - तुमको यहाँ से निक्स समुदाय की राजकुमारी बना के भेजा जा रहा है उस जगह pe....aur ऐसे hi तुम किसी सोल्लगे में चली गयी तो वह के ऑफिशल्स को शक jaayega......iss वजह से स्कूल जाना है और वैसे भी बहुत सो चीजजें सीखनी बाकी है tumko....tumko क्या लगता है बस अपने परिवार को पाना hi तुम्हारा मकसद है.....

लड़की - ठीक है जैसा आप kaho....kab जाना है मुझे.....

पुअरी जी - बस......3 दिन ृक्क jaao...waha पे मैंने कुछ काम बोले है करने को तुम्हारे liye.....wo हो जाने do.....uske बाद तुम वह rahogi......jab कभी मेरी मदद चाहिए तुमको पता है कैसे मुझसे बात करनी है....

लड़की - जी मैं जानती hu.....par ये इस उल्लू का kya.....ye कब तक पीछे पड़ा रहेगा मेरे.....

पुजारी जी - इस उल्लू का मालिक वही मिल जाएगा tumko....uss स्कूल में उससे खुद बात कर lena.....ye बस आदेशों का पालन कर रहा है.....

बात करने के बाद दोनों hi अपने अपने कामों में लग जाते है......

अच्चानक से पुजारी जी ने ये फैसला इस वजह से लिया kyunki.......ek तो इसके यहाँ रहने का वक़्त ख़तम हो रहा था वही दूसरी बात एअर्थ पे इसकी जरुरत पड़ने वाली थी......

वही कूपर और अलबूस अभी भी ओल्ड आउल के साथ hi थे......

ओल्ड आउल ने पूरा कन्फर्म होने के लिए दोनों को hi उन् सब के बारे में पता करने को भेजा था जिनकी मौत हुई thi....usne उस एल्फ की एक बात को पकड़ लिया tha.....Jitne भी लोगो को मारा गया वो सब के सब चोर hi the......aur ये दूसरा कनेक्शन था उन् सब mein.....pahla तो ये की वो सब वाटर एलिमेंट वाले थे.....

वो दोनों अंदर गए हुए the.....aur पता कर रहे थे इस बारे mein.....aur ओल्ड आउल का शक सही nikla....wo सब के सब चोर hi थे.....

अब उसके पास कुछ फैक्ट्स पड़े हुए the......usko देखना था वो जुड़ते है या nahi....aur अगर जुड़ते है तो कैसे जुड़ते है....

ओल्ड आउल - हमारे पास कुछ डाटा hai....ab बस उसको देखना hai.....Cooper तुम वो ho....wo बंदी जिससे मुझे पता चला की खुनी के पेअर पे चोट लगी hai.....aur चोट तुम्हारी वजह से लगी hai....saath में ये भी की उसने सैनिक के कपडे पहन रखे the.....agar इस हिसाब से dekhe......to वो कोई साइकिक हो सकता hai.....jiske पेअर में चोट लगी होनी chahiye.....paar मैंने इस तरह से नहीं socha....mujhe लग रहहा था ये हो ना ho.....Elf किंग या युवराज honge.....Albus अगर तुम ेल्फ़किंग होते तो क्या तुम खुद किसी को चिप के मारने के बारे में सोचते......

अलबूस - अगर मैं एल्फ किंग hota.....mujhe ये पता करना होता कौन महल में ग़ुस्सा tha.....to मैं सभी चोरों को पकड़वा leta.....khud से मारने के बारे में क्यों सोचता.....

ओल्ड आउल - हां यही to......yahi मेरे दिम्माग में भी aaya.....par.....par चोट तो तुम्हारे पेअर में भी लगी हुई thi.....maine खुद dekha.....accha अब अगर मैं युवराज hota.....to क्या karta....Cooper बताओ.....

कूपर - अगर आप युवराज होते to....tab भी आप सैनिको को बोल के ऐसा कर hi dete...sabhi चोरों को पकड़वा देते.....

ओल्ड आउल - नहीं तुम गलत ho.....yaha पर मैं वो युवराज hu...jiske पास से दिनदहाड़े किसी ने कोई सामान चुरा लिया hai......main खुद hi सज़्ज़ा देता उसको और वो भी ऐसी की लोग डरे मुझसे......

अलबूस - अगर डरना hi था तो चिप के kyun.....khul के क्यों नहीं....

ओल्ड आउल - यही तो बात hai.....chup के kyun...kya मुझे ऐसा लग रहा है की कोई मेरे पीछे पड़ा हुआ hai......Mere पीछे कौन पड़ा हुआ हो सकता hai.....ek minute...mujhe कही पता तो ना चल गया की ओल्ड आउल के लोग मेरे पीछे पड़े हुए hai......ye तो हो नहीं sakta......Old आउल के लोग स्मार्ट है छिपना जानते hai.....The आर्चरी society.......iske बारे mein......haa सायद इसके बारे में पता ho......par फिर भी मैं क्यों chupunga...badla लेना hi है तो सबके सामने से लूंगा ना....

कूपर - क्या आपको नहीं लगता वो बस हाथ पेअर मार रहा है अँधेरे mein....agar उसको पता होता तब ना वो सामने से वार karta.....agar उसने इस तरह से लोगो को मारना शुरू kiya.....to गद्दी तो ऐसे hi चली जायेगी उसके हाथ से....

ओल्ड आउल - ये सही है Cooper.....aur पैरों में चोट तो लगी hi thi...sainik के कपडे भी इनको मिल सकते है आराम se.....wajah भी hai....aur कुछ फैक्ट्स पे ये सटीक बैठ भी रहा hai.....chalo ठीक hai.....ab दूसरे पे चलते है वैसे तो जरुरत नहीं लगती मुझे इसकी पर फिर भी देखते hai....Humko उस आदमी से पता चला हो ना हो उस बन्दे ने जिसने उसके दोस्तों का खून किया सही कपडे पेहेन रखे the.....Cooper....sahi कपडे कौन पेहेन सकता है.....

कूपर - साही घर के log.....aur इस केस में तो बस मलेस hi....uss बन्दे ने ये भी तो कहा था मलेस hi होंगे.....

अलबूस - वैसे कपडे अगर देखा जाए तो sayad.....koi नौकर पेहेन के निकल गया hoga....aur वो चोट जो युवराज के पेअर में लगी है वो किसी और वजह से लगी हो.....

ओल्ड आउल - बात तो सही है Albus.....aur इस बात को भी नाकारा नहीं जा सकता जब वो सो रहा था तब मैंने खुद उसको देखा tha.....sayad कोई नौकर होगा.....

कूपर - ये तो हम वापस से वही पहुंच रहे hai....abhi तो आपने कहा था की वो hi हो सकता hai.....aur अब फिर से.....

ओल्ड आउल - ऐसा hi होता है हर एक पॉइंट को देख के हमको कहानी सोचनी पड़ती hai.....bahut से एंगल्स बनते hai.....par एक बात फिक्स हो गयी है एल्फ किंग नहीं है वो......

अलबूस - वो क्यों नहीं हो sakte.....mahel में कोई चोरी kare.....to वो क्यों नहीं.....

ओल्ड आउल - पहले hi इस बारे में बात हो गयी hai.....aur वो पॉइंट ज्यादा सटीक लग रहा hai....ek राजा भला ऐसा क्यों karega....accha एक काम करना hoga.....prome सस्पेक्ट के नाम पे हमको अब युवराज को hi रखना hai....aur आज रात तुम दोनों को सायद यहाँ रुकना pade......Mujhe एक बार प्रतीक से पूछना होगा इस बारे में.....

ओल्ड आउल ने पोर्टल खोला और मुझे अपने पास बुल्ला लिया....

ये वो वक़्त था जब मैं और निकिता ऐसे hi बैठे बातें कर रहे the.....baatein नहीं वो बस अपनी बता रही thi....kaise उसने गलती कर दी पंकज के साथ और अब वो समझ नहीं पा रही कैसे उससे माफ़ी मांगे....

वैसे कुछ तो मैंने भी गलती करि उसको समझने में पर मैं इसके तरह ये सब नहीं सोच रहा tha......acchanak से पोर्टल खुला और मुझे अंदर बुल्ला लिया उसने....

मैं निकिता को वही छोड़ आ गया ओल्ड आउल के पास.....

ओल्ड आउल - मुझे ये दोनों आज रात के लिए chahiye.....kal इनको लेके जा सकते हो....

मैं - इसमें मुझसे क्या पूछ रहे ho....unn दोनों से puccho....wo हां कह दे तो सही है.....

उन् दोनों ने हां कर दिया....

मैं - और बताओ क्या पता चला यहाँ पे.....

ओल्ड आउल - कुछ बातें है बताने को पर अभी पूरी नहीं hai.....aur उनको पूरा करने को hi इन् दोनों को यहाँ रोका है.....

मैं - हम्म ठीक hai....kuch हो तो बता देना.....

ओल्ड आउल - अरे हां एक न्यूज़ है wo.....wo लड़की निक्स wali......sunne में आ रहा है वो एअर्थ पे जा रही hai.....par पूरी बात समझ नहीं aayi......ye सब कुछ मिसकम्युनिकेशन के कारन हो रहा है....

मैं - मतलब....

ओल्ड आउल - अरे पता नहीं वह पे उन् लोगो की आवाजेऊन कभी आती है कभी nahi......iss बारे में ध्यान नहीं दे पा रहा हु main....ye खून के चक्कर में.....

मैं - कोई बात नहीं वैसे भी एअर्थ पे आएगी तो पता चल hi jaayega....tumko पता है वो ऐसे है इस वक़्त यहाँ पे इसके पीछे मेरे परिवार वालो की गलती hai.....main बस उसकी मदद करना चाहता हु.....

ओल्ड आउल - किस्मत भी एक चीज़ज़ होती hai....wo इंसान है और स्ट्रेंज वर्ल्ड में है वो भी निक्स कबीले mein......ye भी तुम्हारे परिवार के वजह से हुआ hai.....khair उसके बारे में कुछ ना kahunga.....mujhe बस ये इन् दोनों की जरुरत थी वही ोूचना था,,,,,

मैं - अच्छा मुझे एअर्थ पे भी एक बन्दे का पता लगाना hai....agar तुम इसमें मदद कर सक्को तो.....

ओल्ड आउल - Jarur.....main कुछ लोग भेज देता हु वह pe.....tum उनको बता दो किसके बारे में क्या पता करना है वो कर देंगे....

मैं - हम्म ये सही hai.....isse उस पंकज के साथ वाले बन्दे का पता चल jaayega....pata नहीं वो है कौन....

ओल्ड आउल - चलो ठीक हो.....

उसने पोर्टल खोला और मैं वापस से निकिता के पास पहुंच गया......

निकिता - तुम ऐसे कैसे चले गए the....bata तो देते मैं भी चलती वह पे.....

मैं - अरे वो बस ऐसे hi कुछ बातें कर रहे the.....waise मैं ये सोच रहा hu....wo बाँदा कौन था जो पंकज के साथ tha.....uske बारे में हमको पता नहीं है kuch....aakhir किश चीज़ के बारे में मदद मांग रहा है वो,.....

निकिता - तुम अभी भी उसको गलत समझ रहे ho....usne जान बचायी मेरी, K.Bua की.....

मैं - मैं पंकज की नहीं उस बन्दे की बात कर रहा hu....khair chodo.....tumne आज कौन से क्लब में जाना है....

निकिता - मैं काढ़े वाले क्लब में जा रही hu....tum चलोगे....

मैं - हां थोड़ी देर में आता हु वह तुम जाओ.....

यहाँ पे वो गयी और उसके बाद तुरंत hi ओल्ड आउल के लोग आ गए......

मैंने उनको पंकज के बारे में bataya...aur फिर उस बन्दे के बारे में जो अभी कुछ दिन से उसके साथ घूम रहा tha.....aur उसको ढूंढने को कहा unse......wo सब भी सब समझ के यहाँ वह फैल गए.....

लीडर जो इस वक़्त एक जगह बैठा यही सोच रहा था की क्या करे wo.....usko किसी तरह ऐसा लगा जैसे कोई वापस से पीछा कर रहा है uska.....nazar रख रहा है उसपे......

लीडर - ये इस जगह पे हर वक़्त लोग मेरे पीछे hi पड़े रहते hai.....mujhe लगता है अभी कुछ दिन वापस जाने का hi प्लान सही hai.....Pankaj के लिए कुछ लेके भी आ जाएंगे वह फोमोस se.....jisse उसकी ताकत badhe.....yaha से निकलना hi सही होगा.....

ओल्ड आउल का बाँदा ुस्तक पहुँचता उससे पहले hi वो एअर्थ से hi निकल गया......

वही डेमोस pe.....abhi से कुछ घंटे पहले की घटना के बाद तो टूट सा गया था Lucifer.....khud के बेटे को खुद के हाथों से मार वो बहुत दुखी tha.....usne सभी को वह से चले जाने को कहा था.....

आज वो लूसिफ़ेर खुद से गुस्सा tha......usko समझ नहीं आ रहा था वो अब क्या kare......usne अपने बेटे के सरीर के राख को एक जगह पे रख लिया tha.....iss आशा में की कोई आएगा और उसको वापस से जिन्दा कर देगा.....

तभी वह वो डॉक्टर्स आ जाते है......

डी1 - Mahamahim.....humne सुना जो कुछ भी हुआ hai......humko बहुत दुःख हुआ ये जान के.....

लूसिफ़ेर - अंदर कैसे आ गए तुम सब निकलो यहाँ से.....

डी2 - महामहिमहुम बस ये बताने आये है सायद हम जस्टिन की बॉडी को तो नहीं ठीक कर सकते पर उसके सोल के लिए एक बॉडी धुंध सकते है.....

लूसिफ़ेर - क्या उससे मेरा बीटा वापस आ जाएगा.....

डी1 - महामहिम ये उसपे hoga......agar उसने अपने नए बॉडी पे कण्ट्रोल कर liya....to वो उसका hi होगा.....

लूसिफ़ेर - मेरा बीटा है wo.....wo कर hi lega......aur नहीं किया तो हम होंगे उसके saath......tum तैयारी karo.....kis तरह का व्यक्ति चाहिए तुमको जिसमे मुझे अपने बेटे की आत्मा डालनी होगी....

डी1 ये उसको चुनने देंगे hum.....aas पास में जो सबसे ताकतवर उसको lagega....uske अंदर वो जा sakega......par इसमें कुछ वक़्त लगेगा....

लूसिफ़ेर - और मुझे कैसे पता चलेगा किसके अंदर है मेरे बेटे की सोल......

डी2 - वो आपको हम बता denge.....aap इन् सब की चिंता मत करिये.....

लूसिफ़ेर - जो करना है karo.....par याद रहे मुझे मेरा बीटा चाहिए.....

डी1 - आप चिंता ना kare,.....hum कर देंगे ऐसा.....

लूसिफ़ेर इस बात को सुन्न के खुश हो गया tha....aur उसने परमिशन भी dedi.....par जस्टिन के सोल को जिस बोतल में रख रखा था वो नहीं diya.....wo जब सब तैयार हो जाता तब खुद वो देता ये ऐसा उसने कहा tha.....Doctors को भी इससे कोई खास परेशानी नहीं थी वो भी मान gaye......aur phir....sab तैयारी करने लग गए......

डॉक्टर्स का कहना था 3-4 दिन में उनकी तैयारी पूरी हो जायेगी उसके बाद hi ये सब हो सकता hai....Lucifer खुश tha......par उसको कहा पता था क्या होने वाला है......

फोमोस पे....

स्लेयर अभी यहाँ पे अच्छे से अपने काम mein.....yaani लड़ाई में लगा हुआ रहता tha....Fumos तो जैसे उसको तैयार कर रहा tha......wo उसको तैयार कर रहा था ताकि वो उसका अच्छा गुलाम बन sakke.....Leader से भी अच्छा gulam.....Slayer को गुलाम बनाने में एक और अच्छी बात thi.....uska कोई अपना नहीं tha....jiski वजह से वो इमोशनल हो जाए या पजीर फवोर्स maange.....wo वही करेगा जो फोमोस उससे bolega.....bas यही सब चल रहा था......

फोमोस रोज लड़ाई के वक़्त उसके पावर्स को खिंच लिया करता था ताकि जान सक्के की इसकी हदें कहा तक hai.....aur क्या वो उनको पार कर पायेगा या nahi.....aur स्लेयर भी उनको पार कर hi लेता tha.....ek तरह से ये उस वक़्त कमज़ोर तो होया था पर साथ hi उतना hi ताकतवर भी....

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट update.....aatma को सरीर milegi....Ladki को naam....aur हीरो को वापस से चुटिया का टैग :lol:
 
अपडेट - 81

3 दिन होने को आये the.....Dada दादी का कुछ पता hi नहीं tha.....pata नहीं कहा गए थे wo.....Chacha ने ढूंढने की कोशिश ki....bahut कोशिश की ताकि उनको बता सक्के घर में क्या हुआ hai.....par वो दोनों तो ऐसे गायब हुए पड़े थे जैसे यहाँ थे hi nahi......unse कम्यूनिकेट करने के सारे तरीके तक नाकामियाब हो गए the......Bua को इस बारे में बताया पर उनको लगा जान बुझ के ऐसा कर रहे है wo......aur इस बात से उनका गुस्सा और बढ़ gaya.....aur उन्होंने कह दिया जब तक दादा दादी नहीं आते उनसे बात करने वो आने वाले नहीं है वह पे......

डेमोस पे डॉक्टर्स न पूरी तैयारी कर ली thi......ab बस कुछ चीजजें hi बाकी बच्ची thi.....jisme एक था आत्मा की शुद्धि karna.....isko करने के पीछे ये लॉजिक बताया गया था की अगर किसी कारण से आत्मा की पिछली बॉडी में कोई दिक्कत हो तो वो दिक्कत आने वाली बॉडी में ना रहे इस वजह से करते hai....yaa ऐसा hi कोई लॉजिक डॉक्टर्स दे रहे थे.....

वही Lucifer.......jis दिन जस्टिन के साथ ये सब हुआ था उस din......uss दिन वो एक किताब पढ़ रहा था उसमे भी इन्ही सब के बारे में बताया गया tha....pahle तो इंन्पे उतना ध्यान नहीं दिया था उसने पर ab.....abhi 3 दिंनो से वो इन्ही चीज़ज़ों के बारे में बिलकुल बारीख़ी से पढ़ रहा tha.....aakhir उसके बेटे का सवाल tha....body ख़तम हो चुक्की thi.....wo अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहता tha.....usne उस किताब के उस chapter को सायद 20 बार पढ़ लिया hoga.....aur तब भी उसको संतुष्टि नहीं मिली thi....wo एक बार और पढ़ hi रहा था की.....

डी1 - Mahamhim......aatma शुद्धि का वक़्त हो गया है.....

लूसिफ़ेर उस किताब को पढ़ने में कुछ इस तरह से खोया हुआ था की उसको ये सुनाई भी ना दिया.....

डी1 - Mahamahim.....Mahamahim....humko आत्मा शुद्धि करनी है....

लूसिफ़ेर को 2-3 बार में आवाज आ hi gayi.....aur उसका ध्यान टूटा.....

लूसिफ़ेर - ाहः हहा हां अभी aaya......saari तैयारियां हो चुक्की है naa......sab सही होना चाहिए वर्ण अच्छा नहीं होगा.....

डी1 - हमे पता है इसीलिए सभी चीज़ज़ों को दोबारा चेक किया है Mahamahim.....ab बस आप उसके सोल को लेके वह इ aaiye.....aur इसमें आपके खून की भी जरुरत होगी थोड़ी सी.....

लूसिफ़ेर - हां मैंने इस विषय में थोड़ा पढ़ा hai.....to कुछ कुछ मैं भी जानता hu.....tumne वो खास चक्कू मंगवा लिया है ना.....

डी1 - जी mahamahim.....humne वो मंगवा रखा है अब बस आपको वह आना है और हम इस चीज़ज़ को पूरा कर लेंगे.....

लूसिफ़ेर - मैंने कुछ सोचा hai.....main चाहता हु मेरे बेटे की सोल सबसे ताकतवर के बॉडी पे काबू kare.....to इसके लिए क्या कर सकते हो तुम सब.....

डी1 - महामहिम माफ़ करियेगा पर सायद आपसे समझने में थोड़ी भूल हो गयी hai....agar सबसे ताकतवर के पास आत्मा गयी और उसने आत्मा पे काबू कर liya.....jo मेरे हिसाब से करना आसान होगा उसके लिए तो हम जस्टिन क पूरी तरह से खू denge.....sayad 1 परसेंट से भी काम उम्मीद होगी उसको वापस पाने की.....

लूसिफ़ेर - ऐसा नहीं hoga....hum जस्टिन के सोल को ट्रेस karenge....aur जिसमे भी वो जाएगा उसको पकड़ के यहाँ ले आएंगे......

डी1 - Mahamahim.....aap सायद समां......

लूसिफ़ेर - समझ तुम नहीं रहे ho......main उस चीज़ज़ के पीछे hu......jo मेरे बेटे का hi होना tha.......sabse ताकतवर कौन hoga.....wahi जिसमे डार्क एनर्जी hogi......abhi उसके अंदर की पावर्स तैयार नहीं hai.....matlab जस्टिन काबू कर सकता hai.....maan लो ना कर पाया तो हम वह से उसको यहाँ उठा ले आएंगे और फिर उसको इतना दर्द देंगे की वो हार मान jaayega....aur tab....tab मेरा beta....mera बीटा उसकी बॉडी pe.....Dark ेनेरगु पे काबू कर lega....jo उसका था वो उसको मिल जाएगा......

डी1 - Par....Maha......

लूसिफ़ेर - जितना कहा है और जैसा कहा है वैसा karo.....waha पे तैयारी dekho....Main आ रहा हु सोल लेके.....

कहते है लालच सब कुछ तबाह कर देती है पर कभी कभी बहुत कुछ दे भी जाती hai.....yaha लूसिफ़ेर के साथ क्या होता है वो देखने लायक होगा.....

स्ट्रेंज वर्ल्ड में.......

3 दिन pahle.......raat का वक़्त

ये वही दिन था जिस दिन मुझसे अलबूस और कूपर को अपने पास रखने के लिए परमिशन मांगी थी ओल्ड आउल ने और में भी हां कह दिया tha,,......Par एअर्थ पे घर पे जाने के बाद रात में मुझे लगा की एक नज़र यहाँ पे देख लू की क्या कर रहे है ये sab......to मैंने ज्वाला से बोल के यहाँ के लिए एक पोर्टल खुलवाया और वह पे आ गया.......

यहाँ पे आने के बाद मैंने अलबूस के थ्रू देखना शुरू किया की वो कहा पे है और क्या कर रहा है......

वो इस वक़्त किसी अँधेरे कमरे में tha....pata नहीं क्या कर रहा था.....

मैं - अलबूस ऐसे जगह पे क्या कर रहे हो.....

मेरे ऐसे बोलने से उसने सुन्न लिया और वो वापस से लाइट ओर्ब में बदल गया और तुरंत hi मेरे पास आ gaya......par सिर्फ वही नहीं आया उसके साथ ओल्ड आउल भी आ गया था वह पे हां उससे थोड़ा लेट आया था वो......

ओल्ड आउल - तुम yaha.....accha वो छोड़ो अलबूस को वापस से बहार nikalo.....aur हमारे साथ chalo......kahi कूपर को भी तो नहीं बुल्ला लिया न.....

मैं - नहीं कूपर को nahi....Main अभी hi आया tha.....waise ये कर क्या रहा था उस अँधेरे कमरे में......

ओल्ड आउल - खुद से देख lena....abhi बस इसको बहार nikalo....aur मैं पोर्टल से लेके चलता हु तुमको वह......

मैं - अलबूस बहार aao......jis काम में लगे थे वो पुर्रा करो.....

अलबूस मेरे कहने से वापस से बहार आया और वो चला गया.....

उसके जाते hi ओल्ड आउल ने भी पोर्टल kholi......aur मैं उससे होते हुए अंदर चला गया......

जब दूसरे ओर बहार आया तो देख के मैं एक दम से चौक gaya.........Main अभी बैडरूम में tha.......saamne बीएड पे वो युवराज लेता पड़ा था......

मैं (धीरे से) - पागल हो kya......ye उठ गया तो क्या होगा पता नहीं तुमको......

ओल्ड आउल - अरे ये ये नहीं है ये कुछ और है.....

मैं - क्या बकवास कर रहे ho.....ye ये नहीं तो क्या मैं hu......niklo यहाँ se.....aur वो अलबूस कहा gaya......Albus....Albus.....

ओल्ड आउल - अरे ये बस एक लिविंग डमी बॉडी hai......par ये समझ नहीं आ रहा है ये यहाँ पे कैसे पहुंच गया.....

मैं - क्या क्या लिविंग बॉडी डमी ये क्या होता है.....

ओल्ड आउल - अरे ये बस पुतला जैसा है जो असली लगता hai.....agar जिसने इसको बनाया है वो इसको यहाँ पे चलने को बोल देता तो ये चलता rahta.....par उसने इसको बस सोने को बोलै है और ये सो रहा है.....

मैं - तो ये युवराज ने बनाया hai....Khooni वही है क्या.....

ओल्ड आउल - लग तो ऐसा hi रहा hai......aao मेरे पीछे दिखता हु अलबूस कहा पैर है.....

मैं उसके पीछे गया तो वो ालमिरह को सरकने को bola......maine वैसा किया और मुझे एक दरवाजा दिखा waha....maine उसको खोला तो अंदर थोड़ी रोशनी hui......Albus वही पे tha......Main थोड़ा सा अंदर गया hi था की दरवाजा बंद हो आज्ञा और अंदर पूरा अँधेरा हो गया था.....

थंडर एलिमेंट का एक फायदा ये भी है की आप अँधेरे में छोटा सा थंडर का एक part बना सकते है जो आस पास लाइट phailayegi.....Maine ठीक वैसा hi किया.....

रोशनी में ये जगह और भी अजीब लग रही thi......tarah तरह की चीजजें राखी हुई थी वह pe.....kuch जीव के बॉडी पार्ट्स जार्स में रखे हुए थे कही हथियार पड़े हुए the.....kah पे सोने की ईटें पड़ी हुई thi....par jamin....jamin थोड़ा सा चिपचिपा लग रहा था जैसे पानी गिर्रा दिया हो किसी ne.....maine दीवार पे हाथ रखा तो वह पे भी ऐसा लगा जैसे पानी पड़ा हुआ था....

मैं - ये कैसे जगह बना राखी है isne....aur ye....chipchipa क्यों है इतना...

ओल्ड आउल - वाटर एलिमेंट के लोग ऐसे hi नहीं मारे जा रहे है.....

मैं - क्या मतलब है.....

ओल्ड आउल - मैं तब से जो ये सोच रहा था की ये जो खून है वो माहे का कोई इस वजह से करा रहा है या कर रहा है क्यों की महल के इज़्ज़त पे बात आयी हुई thi.....par ऐसा नहीं है......

अलबूस - मिल gaya.....wo क्रिस्टल यही पे था.....

मैं - क्रिस्टल ये क्या है अब.....

ओल्ड आउल - ये युवराज या तो पागल hai...yaa बहुत chalak....khud पे एक्सपेरिमेंट कर रहा है ye......Nature एलिमेंट को ये खुद बना रहा है यहाँ पे......

मैं - एलिमेंट बना रहा है.....

ध्रुव - kya......element बना रहा hai.....Albus.....kaun सा क्रिस्टल था वो....

ध्रुव और अलबूस बातें कर सकते थे.....

अलबूस - वाटर stone.......par यहाँ पे ऐसे ऐसे 4 और सॉकेट्स बना रहे थे isne.....matlab ये सायद.....

ध्रुव - ये सच में एलिमेंट बना रहा tha......pagal है ये sayad.....koi और एलिमेंट स्टोन होने के साबुत है क्या यहाँ पे

अलबूस - मैंने और ओल्ड आउल ने चेक किया है बस यही था एक.......

ओल्ड आउल - वो वाटर लेमेंट स्टोन tha.....tum जानते हो कितनी मुश्किल से मिलता है वो.....

मैं - Nahi......main तो एलिमेंट बनाते है ऐसा भी पहली बार hi सुन्न रहा हु.....

ओल्ड आउल - ऐसा होता hai....par ये बनाने वाले पे होता है उसका एलिमेंट कैसा बनता है और वो किस हद्द का होता hai.....natural वाले से अच्छा या फिर बस ऐसे hi.....

ध्रुव - अलबूस यहाँ पे क्या क्या हुआ सब जानना है मुझे.....

ध्रुव ने ऐसा कहा और अलबूस मेरे अंदर चला गया ओर्ब बन के.....

ओल्ड आउल - अरे ये kya.....accha जाने दो थक गया होगा ये भी वैसे भी इसका काम हो hi गया है....

मैं - तुम ये बताओ की तुम क्या बोल रहे the....kya तुम ये बता रहे थे की उस स्टोन के लिए मर्डर हो रहे है.....

ओल्ड आउल - और नहीं तो kya......uss दिन वो इंसानी लड़की जो यहाँ पे आयी thi....usne hi चोरी की thi....usse पहले वो यहाँ इस जगह भी आयी और अपने पावर्स से कुछ ढूंढने की कोशिश कर रही thi....issi में सायद उसने पुरे रूम को hi पानी से भर diya....aur इसी में ये सीक्रेट रूम भी पानी से भर गया......

मैं - तो क्या उसने वो स्टोन भी चुरा लिया.... :सिघ:

ओल्ड आउल - ऐसा नहीं hai.......usne चुराया है पर उसको खुद पता नहीं है इस बारे mein.....ye वाटर स्टोन tha...uske पानी में घुल गया होगा टूट ke.....wo जो दीवार पे और जम्मीं पे थोड़ा गिला गिला अभी भी लग रहा था ना वो उसी के वजह से tha.....jab भी ऐसे स्टोन घुलते है तो उनके ट्रेसेस कुछ वक़्त तक रह जाते hai....abhi उस लड़की में होंगे वो पावर्स उस स्टोन के.....

मैं - और ये बात उसको पता नहीं hai.....waise ये स्टोन्स कॉमन है या रेयर hai....matlab ययुवराज उसको वापस से भी ले आ सकता था कोई और पीेछे....

ओल्ड आउल - इस बारे में क्या kahu......sayad वो स्टोन स्पेशल hoga....ab चलना chahiye.....wo यहाँ आने hi वाला hoga.....Cooper को भी बुल्ला लो अब.....

मैं - हां पोर्टल kholo....hum बहार चलते hai....aur ये कूपर को कहा भेज दिया है तुमने....

ओल्ड आउल - वो अभी तो युवराज पे नज़र रख रहा होगा.....

मैं - तो क्या वो आज भी निकला है किसी को मरने को.....

ओल्ड आउल - हां और नहीं तो kya.....wo उसी के लिए निकला hai.....par चिंता मत karo.....aaj कोई नहीं मरने wala.....Cooper ने सब संभल लिया होगा.......

मैं - तब तो हमको उसके पास जानना chahiye.....portal खोलो मुझे देखना है वो कहा है.....

ओल्ड आउल ने मेरे कहने पे पोर्टल खोला और हम पहुंच गए उस जगह pe.....jaha पे युवराज किसी से लड़ाई कर रहा था......

मैं - ये kya.....tumne कहा था wo......ye तो कूपर hi है......

ओल्ड आउल - मैंने कहा था वो देख lega.....ab इसको वापस बालाओ और जाने दो इस युवराज को.....

मैं - मज़्ज़े सिर्फ तुमको hi करने hai......Cooper वापस aao.....isse मैं ladunga....Albus......rupp badlo....Cooper सोर्ड रेडी karo.....Old आउल थोड़ा पीछे हटो और देखते रहना कोई आये ना यहाँ pe.....aaj इसको थोड़ा मज़्ज़ा चखते है.....

मैंने तिण्णो को उनका काम बताया और वो लग भी गए काम pe......Albus ने मुझे एक अजीब सा मास्क वाला ड्रेस दे diya....wahi कूपर जो अभी तक लड़ रहा था वो अच्चानक से युवराज के सामने लाइट ओर्ब बना और उसके चारो तरफ जोर जोर से चक्कर लगाने laga.....jisse उसका ध्यान बैठत gaya....aur उसके तुरंत बाद वो मेरे पास आ गया और उन् दोनों की दी हुई सोर्ड को रेडी kiya.....aur वो मेरे हाथ में आ गया.....

अभी वो युवराज कुछ समझ पता उससे पहले hi मैं उसके सामने आ गया tha.....wo कभी मुझे देखता तो कभी मेरे आजु baaju.....ab अच्चानक से बाँदा hi बदल जाए तो ऐसा होता है.....

मैं - ऐसे क्या देख रहा hai.....tu वही है naa......jo अपने hi लोगो को धोखा देता hai......apni hi जनता को परेशां करता है....

वो - कौन है tu.....jo भी hai...tu तो गया.....

वो आया दौड़ता हुआ तलवार ऊपर किये hue.......waise भी पहले से बहुत थक्का हुआ लग रहा था wo.....Main बस खड़ा raha......jab उसने तलवार और ऊपर कर के मुझपे वार किया तो मैंने अपने ड्रेस में कलाई के ऊपर लगे मेटल से उसको rokka.....Dress में दोनों हाथों के निचले हिस्सों में मेटल का गार्ड बना हुआ tha.....ussi से मैंने रोक्का था उसको.....

वो मार रहा था मैं बस डिफेंड कर रहा था.....

मैं - सुन्ना है कुछ खू गया है tumhara.......stone....

मेरी बात सुन्न वो एक पल को ृक्क gaya....aur मुझे देखने laga.....aur फिर से थोड़ी देर में गुस्से में आके मेरे ऊपर वार करने लग गया मैं भी इस बार थोड़ा बहुत तलवार चला रहा tha......Main एक्सपर्ट था isme.....haa मन्ना वो सेना नायक है अपने देश का पर फिर भी मुझे उस ज्यादा पता tha.....upar से थक्का हुआ था वो और गुस्सा अलग से.....

वो - तो टुन्ने लिया मेरा stone......ab तो तुझको मरना hi hoga.....tujko मारे बिन्ना वो मिलेगा नहीं मुझे.....

मैं - वो तो इस वक़्त पॉसिबल नहीं है......

इतना बोल मैंने अटैक kiya....jisse वो पीछे जाके girra.....Cooper ने वैसे तो पावर काम कर दी थी सोर्ड की पर फिर भी इतनी तो थी की युवराज 20 फ़ीट दूर जाके गिर्रा था....

वो उठा एकदम गुस्से mein.....uska कान लाल हो चूका था.....

उसने अपना तलवार ऊपर kiya....jiske बाद उसके तलवार पे काली आग आ गयी thi....element फायर था iska.....mujhe पता था बस एक तो होगा नहीं इसके pass.....aur भी honge....par इसने बस ये फायर hi निकला tha....par इसका फायर कला टाइप लग रहा था.....

इसके बारे में पढ़ा था maine.....jab आपका एलिमेंट बहुत पावरफुल हो जाए तब उसके कलर के शेड्स भी डार्क होने लग जाते hai.....ye वही tha.....iska फायर एलिमेंट सच में बहु पावरफुल होने वाला था.....

उसने तलवार मेरी ओर किया और उसके तलवार से आग के गोले मेरी ओर आने lage.....maine अपना चहेरा बचने को हाथ ऊपर kiya....jisse वो मुझे दिखने नहीं laga.....aur इसी का फायदा उठा वो बिलकुल मेरे पास आ आगे और उसने हालमा कर दिया.....

ताकत तो थी बन्दे mein......main खुद 10 फ़ीट दूर जाके गिर्रा था.......

वो - अब बता आसान मौत मारनी है या.....

मैं उठा और खड़ा हुआ.....

मैं - मैंने नहीं सोचा था तू इतना पावरफुल होगा.....

मैंने भी अपनी तलवार उठायी और थंडर power.....ek हद्द तक hi.....leke चल दिया उसके taraf.....aur अटैक kiya.....usne डिफेंड तो करना चाहा पर कर नहीं पाया सही hai......jyada पावर थी डिफेंड कर hi नहीं पाया aur...picche जा गिरा.....

मैं उसके पास जाने लगा की तभी

ध्रुव - यहाँ से निकलना hoga....Old आउल से बोलो पोर्टल खोलने ko.....jaldi से....

मैं - अरे अभी तो मज़्ज़ा.......

ध्रुव - चलो अभी यहाँ से वैसे भी तुम्हारा सीकर नहीं है ye.....isko सज़्ज़ा देने का हक्क किसी और का है....

मैं - ये तो सही कहा तुमने पर.....

मैंने आगे कुछ कहने से पहले तलवार को जमीं में गाड़ दिया और मेरे ऐसा करने से आस पास मेरा थंडर एलिमेंट बिखरने laga...jisse हुआ ये की वो बेहोश हो गया....

मैं - ओल्ड आउल पोर्टल kholo.....humko घर जाना है....

ओल्ड आउल ने एक बार देखा मेरी ओर और फिर बिन्ना कुछ कहे hi उसने पोर्टल खोल दिया.....

मैं - इसको महल पंहुचा देना.....

इतना बोल मैं वह से निकल gaya....ghar के बहार आ पंहुचा.....

मैं - क्या हुआ था ध्रुव तुम एक दम से ऐसे.....

ध्रुव - ये डार्क पावर के बारे में hai.......ye दोनों कुछ ज्यादा hi देरर यूमसे अलग रह चुक्के hai......energy बहुत बढ़ी हुई है तुम्हारे बॉडी ki.....agar ऐसे hi बढ़ती रही तो तुम कण्ट्रोल नहीं कर paaoge.....ab 2 hi काम हो सकते है या तो कण्ट्रोल करना seekho....yaa एनर्जी की मात्रा पे एक लिमिट लगा दो.....

मैं - बड़ी अजीब बात hai.....jyada हो जाए तो भी दिक्कत है काम हो तो भी दिकत है......

बैक तो प्रेजेंट......

एअर्थ pe......hum अभी स्कूल में थे.....

आज कुछ देर पहले एकदम से अजीब सा लगने लगा था mujhe....aisa जैसे कुछ खिंच रहा हो मुझे अपनी oor......par कोई ऐसा भी था जो वह जाने नहीं दे रहा tha....matlab दो चुम्बक के बिच में फसा हुआ loha....aisa लग रहा था मुझे....

मैं - ये बुआ तो सुन्न नहीं रही hai....aur दादा दादी का भी पता नहीं चल रहा hai.....pata नहीं कहा गए हुए है वो दोनों.......

निकिता - तुमने ओल्ड आउल से बोलै क्या देखने ko.....nahi ना.....

मैं - अरे उसके कुछ लोग यहाँ पे मेरा काम कर रहे hai.....par वो भी नहीं हो रहा है unse......mujhe लगता है ये काम तो कर hi देंगे wo.....waise एक बात batao....yaha पे कर क्या रहे है हम....

निकिता - यहाँ pe.....yaha पे इंतज़ार कर रहे है हम.....

मैं - और किसके लिए...

स्कूल से बहार आये हुए थे hum....pata नहीं क्यों मुझे यहाँ पे लेके आ गयी थी ye.....kal भी लेके आयी thi....aise hi खड़े थे हम dono.....kal भी कोई नहीं आया tha.....aaj भी नहीं आने वाला था.....

निकिता - तुम्हारे भाई ka......Pankaj अब ठीक हो गया है मैंने सुन्ना तो वो आएगा सायद स्कूल तो मैं उसको सॉरी बोलना चाहती हु और थैंक्स भी.....

मैं - पागल हो kya....uske लिए मुझे यहाँ पे खड़ा करवा रखा hai.....aur तुमको किसने बोल दिया वो ठीक hai....abhi ठीक नहीं हुआ है wo.....usko वक़्त लगने वाला है.....

निकिता - तुमको ऐसा किसने कह diya.....bol तो ऐसे रहे हो जैसे उससे मिल के आये ho......Milne गए थे क्या.... :हँ:

मैं - nahi...main क्यों jaunga....wo तो वह पे ओल्ड आउल के लोग the......uss बन्दे के लिए वह छोड़ा है उनको.....

निकिता - तो ये बात बता नहीं सकते थे tum......aur अभी भी याक्किन नहीं है तुमको uspe.....wo सच में बदल गया hai....dekha नहीं था उसने मेरी जान बचायी थी.....

रूपल दीदी - और नहीं तो kya.....mujhe भी अब लगता है वो बदल गया hai....maine उससे अपने पहले की मुलाकातों के बारे में socha.....wo सच में बदल गया है.....

मैं - आप यहाँ क्या कर रही हो....

रूपल दीदी - Kya.....main भी इंतज़ार करने आयी hu.....tum जाओ यहाँ se....Choti इस्को लेके hi नहीं आना hai....ye नहीं समझ सकता ये सब.....

मैं - पता नहीं क्या करते रहते हो आप सब bhi.....Main जा रहा हु......

अभी अंदर आया hi था की तभी दक्ष मां दिखाई diye.....aur साथ में और भी प्रोफेस्सोर्स the....Bua भी thi.....sayad कोई बात hogi.....Main उस ओर जाने लगा और बुआ ने मुझे देख लिया और नहीं आने को bola.....ab तो जानना था hi.....to मैं भी चल diya....School में जो तालाब था वह पे वो सब पहुंच गए the....aur तो और मैंने देखा मास्टर भी वह पे तुरंत आ gayi.....pata नहीं चल क्या रहा था वह pe....Principle सर, मास्टर और बाकी के Prof....sab वह पे तालाब के पास किसी चीज़ज़ को घिरे हुए खड़े थे.....

मैंने देखा की पीछे से K.Bua क सम्मान लेके कोई आ रहा tha......sayad कोई घायल हुआ था यहाँ pe.....par किसी एक के लिए सब आ गए :शॉकिंग: इतना तो एल्फ किंग के टाइम में भी नहीं हुआ था सायद.....

उसके बाद मैसे बस किसी को K.Bua के डिपार्टमेंट में लेके जाते हुए देखा किसी ko....bas बाल hi दिख रहे थे लम्बे लम्बे बाल सायद लड़की thi....pata nahi.....par थी विप वर्ण सब क्यों आते....

मुझे भी अजीब सा लग hi रहा था तो मैंने सोच ा K.Bua के पास चलता hu.....waha पे ये भी पता चल जाएगा की ये कौन थी या था जिसके लोइये सब आ गए थे....

मैं उधर पंहुचा और अंदर जाने hi वाला था की वह से मास्टर बहार nikli.....wo बड़ी जल्दी में लग रही thi....jaise धुंध रही हो किसी ko....par मुझे देखते hi वो शांत हो गयी.....

मास्टर - मैं तुम्हारे लिए hi आयी thi...chalo मेरे साथ कुछ बातें करनी है

मैं चल दिया उनके साथ वो मुझे पास में hi बनने हुए एक बेंच पे लेके गयी....

मास्टर - कुछ अजीब सा लगा था aaj.....kuch भी अजीब

मैं - हां...

फिर मैंने उनको बताया....

मास्टर - आज उच्च भी हो जाए यहाँ से बहार नहीं जाना hai....Earth से बहार नहीं जाना aaj....aur ना hi पोर्टल का उसे....

मैं - ठीक है जैसा आप kaho.....waise वो कौन थी....

मास्टर - बाद में पता चल jaayega.....abhi जाओ यहाँ se......Poonam.....Principle sir........yaha aao.....tum जाओ जल्दी से......

मैं वह से निकल gaya.....wahi वह पे वो दोनों आ गए थे....

मास्टर - ये सब कैसे hua.....mujhe सब बताओ....

प्रिंसिपल सर - आप तो जानती है वह से ये निकली तो ठीक thi....aur यहाँ पे आयी है तो ऐसी hai.....raste में hi कुछ हुआ होगा naa......isme हम क्या कर सकते है.....

मास्टर - आप भूल तो नहीं गए वो जो अंदर है वो कितनी बड़ी जिम्मेदारी hai.....aapne अगर यही बात निक्स समुदाय के लोगो को बताई तो वो क्या karenge......Poonam तुम उसका ध्यान rakhogi....usko घर लेके jaao....acche से रखो उसको.....

प्रिंसिपल - मैडम आपको सायद ये पता नहीं hai......Poonam को ये काम नहीं करना hai...aur निक्स समुदाय के पुजारी का भी कहना है की उनकी राजकुमारी को इंसानो के बिच में जाने की अनुमति दी jaaye.....Maine सोचा है क्यों ना दक्ष को इसकी जिम्मेदारी दे दी जाए.....

मास्टर - आपको नहीं लगता की दक्ष जी को खुद इसके लिए वक़्त नहीं मिलने wala.....waise भी वो स्कूल के बाकी के कामो में hi लगे रहते haii......ghar पे जाने का वक़्त नहीं मिलता unko....sunne में आया है पंकज उनका बीटा अभी कुछ बीमार है और फिर भी ये यहाँ hai....aise में हम कैसे उनके भरोसे छोड़ सकते है इसको....

प्रिंसिपल - मैडम वही तो मैंने भी सोच रखा hai.....kabhi कभी hi तो वक़्त मिलेगा दक्ष ko....aur तब hi तो वो लेके जाएगा उसको इंसानो के भींच अपने yaha...uske अलावा तो वो यही रहेगी हमारे saamne.....hum अच्छे से देख भ करेंगे उसका...

मास्टर - बात तो सही है tumhari.....theek hai....Daksh यहाँ आइये aap.....Poonam तुम जा सकती हो....

बुआ वह से चली गयी वही दक्ष मां आ गए वह pe.....aur उनको ये जिम्मेदारी दे दी gayi....waise तो वो मन्ना कर रहे थे पर जबरन दे hi दिया गया.....

यहाँ ये सब हो रहा था वही फोमोस पे.......

वह पे स्लेयर लगा हुआ tha....ye वक़्त लड़ाई की thi.....aur वो लगा हुआ था लड़ने mein......Fumos भी उसकी पावर्स खींचता जा रहा tha.....taaki वो और मजबूत हो sakke.....Wahi लीडर इस वक़्त अपने कमरे में tha.....jaha पे कोई नहीं जा सकता tha......wo आराम से बैठा सोच रहा था की आगे कैसे क्या करना है एअर्थ पे.....3 दिन उसको यहाँ आये हुए हो गए the.....Fumos के अनुसार अगर वो 7 दिन रहता है यहाँ पे तो उसके बाद वो यहाँ से वापस से 1 महीने को जा सकता था.....

सब जैसा चलता था वैसा hi चल रहा था यहाँ पैर की स्लेयर को कुछ दिखाई दिया....

एक धुंधली सी परछाई जैसी कोई तो चीज़ thi......aur वो चीज़ज़ यहाँ वह देख रही थी जैसे किसी को धुंध रही हो......

स्लेयर जिससे अभी लड़ रहा था उसको मार देता है और उस परछाई की तरफ bhaga......aur उसके पीछे से आके उसको दोनों हाथों से जकड़ने की कोशिश ki.....par वो चीज़ज़ वह पे रही hi नहीं......

स्लेयर यहाँ वह देखने लगा पर वह पे कोई था hi nahi.....SLayer ने आस पास dekha.....kuch और लोग मिले usko.....wo उनसे लड़ने को चला गया.....

वही जैसे hi ऐसा हुआ....

डेमोस पे तो जैसे लूसिफ़ेर पागल hi हो गया tha......pahle से hi आग बबूला हुआ लूसिफ़ेर इतने गुस्से में आ गया की उसने आव देखा ना taaw......jo भी वह पे थे सभी पे हमला कर दिया.......5 डॉक्टर्स थे वह pe.....saare पहले से hi दर्रे हुए the.....aur इस हमले में वो सब के सब hi ख़तम हो गए the.....par लूसिफ़ेर का गुस्सा शांत hi नहीं हो रहा था.......

लूसिफ़ेर - nahi..........ye नहीं हो sakta......itne कोशिश के बाद मिला भी तो kya....ye कमज़ोर sarir........ye नहीं हो sakta.......Main.....main उसके सरीर से अपने बेटे की सोल बहार निकल lunga.......khatam कर दूंगा......

लूसिफ़ेर अपने महल से nikla.....aur वह से सीधा निकल pada......aur जाके रुक्का वो फोमोस के ठीक saamne.....aur बस अंदर जाने hi वाला था की उसके सामने लीडर आ गया.......

लीडर - तुम यहाँ क्या कर रहे ho.......iss वक़्त तुम यहाँ नहीं आ सकते.....

लूसिफ़ेर - मैं किसी को चुनौती देने आया hu,....aur नियम मुझे पता hai.....ye वक़्त उच्चित है उसके liye.....ab हत्तो मेरे सामने से.....

लीडर ने थोड़ी देर लूसिफ़ेर की ओर dekha....asaal में वो फोमोस से बात कर रहा tha.....aur उसके बाद उसको आने को कहा......

पर जैसा नियम tha.....Leader को अपने रूम में जाना tha......aur वो वह पे चला gaya.....wahi लूसिफ़ेर चला गया मैदान mein......wo यहाँ वह ढूंढ रहा था स्लेयर ko......par स्लेयर दूसरे तरफ tha......Fumos पूरी कोशिश कर रहा था की दोनों की मुलाकात hi ना ho.....par हज़ार कोशिश के बाद भी हो hi गयी मुलाकात.......

फोमोस - लीडर मैं तुम्हारी साड़ी पावर्स कुछ वक़्त के लिए ले रहा हु.....

लीडर के हां ना कुछ कहने से पहले hi उसने ये कर भी diya....aur वो साड़ी power.....usne स्लेयर के अंदर दाल di....aur साथ hi और भी पावर्स थी वो भी.....

लूसिफ़ेर ने जैसे hi स्लेयर को dekha....wo किसी और से लड़ रहा था तो लूसिफ़ेर उसकी ओर बढ़ा उसको मारने ko.....par वो मार पाटा उससे पहले hi पावर्स आ गए थे स्लेयर mein......aur लूसिफ़ेर का वो waar......agar अभी कोई और hota.....sayad वही डैम तोड़ दिया होता usne.....par यहाँ पे स्लेयर tha.....uske पास अपनी पावर्स है ऊपर से अभी फोमोस ने पावर्स दी वो अगल se.......uss वार से उसको बस एक धक्का सा laga......WO वह से utha.....aur लूसिफ़ेर पे हमला करने hi वाला था ki.....waqt ख़तम हो gaya.....waqt ख़तम मतलब लड़ाई kagatam....Slayer इतने टाइम से यहाँ था वो समझ चुक्का था मर के कुछ होगा नहीं उल्टा उसको hi प्रॉब्लम होगी तो वो बस उठा और लूसिफ़ेर को एक लू दिया और वह से चलता बना.....

उसका जाना था फोमोस ने साड़ी दी हुई पावर्स वापस से लेली और लीडर को भी उसकी पावर्स वापस कर दी......

फोमोस - इस लीडर को यहाँ से सम्मान के साथ विद्दा कर aao......isko शक तो हो hi गया होगा.....

लीडर - पर ये यहाँ आया क्यों tha....aur इतना गुस्सा.....

फोमोस - इसने अपने बेटे के सोल को खो दिया hai......wo सोल अब मेरे पास hai......aur मेरे पास hi rahegi.....wo खुद आया था यहाँ pe......Slayer ने उसको पकड़ा और उससे होते हुए वो सोल मेरे पास आ गया hai.....ab ये लूसिफ़ेर कभी कुछ नहीं कर पायेगा मेरा और ना hi मेरे लोगो ka.....tum जाओ उसको भेजो यहाँ से.....

लीडर - ठीक है....

लीडर अपने रूम से बहार निकलता है और उस जगह पे चला जाता है जहा पे लूसिफ़ेर था.....

लीडर - तो अब क्या ख्याल है aapka.....aap यहाँ और रुकना पसंद करेंगे या आपके जाने की तयारी करि जाए.....

लूसिफ़ेर - wo.....wo कौन था जिसको मैंने अभी मारा था.....

लीडर - नियम आप जानते hai.....main कोई खबरि नहीं hu....jo ऐसे hi किसी के बारे में खबर देता rahu.....wo यहाँ का एक बाँदा hai....bas यही काफी है......

लूसिफ़ेर - बहुत अकड़ दिखा रहे हो....

लीडर - मैं कहा ये सब करता hu.....main तो बस ये पूछ रहा था आप यही रहना पसंद करोगे या जाने की तैयारी karaun....agar 1 दिन यहाँ पे टिक गए aap.....to आप भी जानते hai.....Niyam तो पता hi है aapko....aap भी यही के हो जाएंगे और आपका प्लेनेट भी यही का हो जाएगा....

लूसिफ़ेर - मैं aaunga.....baad में aaunga.....abhi जा रहा hu....par अपना सम्मान लेने आऊंगा....

लीडर - जी जरूर aaiyega....main यही पे आपकी सेवा के लिए बैठा rahunga.....dhanyawad....

लूसिफ़ेर गुस्से में और कन्फूसिओं में वह से बहार चला जाता है और जैसे आया था वैसे hi बहार भी चला जाता है अपने प्लेनेट pe....par ab....ab वह पे इसके महल में बस लाशें hi the.....wo डॉक्टर्स जिनको सायद पता था ऐसे किसी मौके पे क्या करना chahiye....unn सब को खुद hi मार दिया था लूसिफ़ेर ne.....ab मतलब जो करना था खुद hi करना था उसको.....

आज के लिए इतना hi....naam नहीं बताया है अभी तक लड़की ka....next में बता dunga.....aur साथ में देखेंगे की क्या हुआ जो वो जख्मी हो gayi....aur साथ में एल्फ किंगडम चलेंगे वह पे देखने की ये युवराज अब कैसा hai....saath hi दादा दादी का भी पता karenge.....hai कहा वो दोनों :सिघ:
 
अपडेट - 82

स्ट्रेंज वर्ल्ड में.....

पहले तो उस वक़्त में चलते है जब वो लड़की वह से निकली थी.....

उसको एअर्थ पे भेजने के लिए पुजारी जी ने पुरे एक दिन उससे तैयारी कराई thi.....alag से सेशन चला था की कैसे वो निक्स समुदाय की राजकुमारी hi lage....pahle तो उसका चेहरा, रंग, रूप ये सब बदला गया उसके baad...ek ऐसे ढग्गे से बानी हुई ड्रेस दी गयी उसको पेहेन्ने के liye....jo बिलकुल बर्फ जैसी दिखती thi......wo कपडा भी बहुत hi ठंडा tha.....saath hi उसके और भी फायदे the.....wo इस लड़की के इंसानी शरीर को उसके स्किन को बदल दे रहा tha....thanda होने के वजह से bhi...aur साथ hi कुछ और भी कारण थे....

इतनी तयारी काफी नहीं thi....usko स्ट्रेंज वर्ल्ड के हेड ऑफिस में ले जाय गया जहा पे पुजारी जी ने पहले से hi बात कर राखी thi.....waha पे उससे कुछ सवाल किये gaye.....insano के बिच रहने के बारे में बताया गया और भी बहुत kuch......inn सब में वो लड़की बड़ी बोर हो गयी थी पर नियम तो नियम hi होते hai......aur यहाँ पे तो ये एक राजकुमारी के हैसियत से आयी हुई thi.....to हेडोफ़्फ़िस की भी जिम्मेदारी थी जब ये वह जाए तो सुरक्षित रहे.....

अब यहाँ आयी थी तो नाम भी चाहिए tha......waise तो जिसके साथ ये रहा करती थी उसने नाम दिया था ek....par वो किसी भी एंगल से राज कुमारी का नाम तो नहीं tha.....to पुजारी जी ने उसको एक नाम diya......wo नाम जो निक्स समुदाय के देवता को बहुत पसंद था.......

लोककथाएं थी ऐसी की एकतरफा प्यार था उस नाम के लड़की से उन् देवता ko......par उस लड़की को कोई और hi भा गया tha......iss लाइन में चले गए तो बहुत दुर्र जाना होगा.....

नाम था Madhu.....aur यही नाम इस लड़की को भी दिया गया था.......

इन् सब के बाद पुजारी जी से पूछा गया की इनको कैसे भेजा jaye.....tarike बहुत से थे.......

पुजारी जी वह से लेके मधु को वापस से निक्स मंदिर में आ gaye......aur वही पे पुजारी जी ने कुछ चीजजें और दी usko....aur फिर उसको अपने पीछे आने को कहा.......

वो दोनों मंदिर के hi एक पुराने से दरवाजा के पास आके खड़े हो गए....

पुजारी जजी - ये darwaja.....ye बहुत पहले से बंद hai.....logo ने कोशिश kari....par ये खुल्ला hi nahi.....Maine भी करि थी koshish......to मुझे कुछ दिखा था.....

मधु - क्या दिखा tha....ander क्या है आपको पता चला क्या.....

पुजारी जी - अंदर क्या है वो nahi.....ye दिखा था की अंदर कौन जा सकता hai....ek परछाई दिखाई दी thi.....chalo अब इसको खोलो....

मधु - हद्द हो आप bhi....aapne कहा सबने कोशिश kari....par ये खुल्ला नहीं फिर मैं कैसे......

पुजारी जी - सबने कोशिश की hai.....par उनमे तुम कहा thi.....ab जो कहा है वो karo....warna एअर्थ भूल jaao.....mandir में hi किसी कमरे में बंद कर दूंगा......

मधु - :सिघ: ठीक है....

इतना बोल के मधु ने अपना हाथ आगे किया उस दरवाजे की taraf......aur उसको धक्का diya.....Darwaje पे कोई कुण्डी ये सब नहीं था जिसको पकड़ा jaaye......wo दरवाज बिन्ना देर kiye.....ekdum आराम से खुल gaya....purane दरवाजों में बहुत आवाज होती है पर yaha....aisa कुछ नहीं हुआ.....

मधु अपने हाथों को hi देखे जा रही thi.....aur कभी कभी पुजारी जी ko.....Pujari जी जो वही पे मुस्कुरा रहे थे......

पुजारी जी - चलो बहुत देख लिया अपने हाथों ko.....ab अंदर क्या है वो देखते है.......

दोनों अंदर gaye.....ander बहुत कुछ tha.....Madhu सभी चीज़ज़ों को देख रही thi.....par पुजारी जी की नज़र किसी एक चीज़ज़ को hi देख रही thi.....wo यहाँ वह बस उसी को देख रहे the......aur फिर उनको वो दिख hi gaya......ek छोटा सा यन्त्र पानी की एक बून्द के आकर जैसा था wo.....chota नहीं था उतना पर दीखता वैसा hi tha.....Pujari जी अपने साथ मंदिर का hi कुछ पानी लेके आये the......unhone उसपे थोड़ा सा पानी dala.....aur वो यन्त्र चमकने लग गया.....

मधु जो अभी बाकी के चीज़ज़ों को देख रही थी जैसे में वह पे रही हुई टावरें वो kawacch.....ye सब तभी उसको रोशनी दिखाई di......aur वो उस ओर देखने लगी.....

उसने देखा की एक चीज़ज़ चमक रही थी और उसकी चमक बस बढ़ती hi जा रही thi......chamak इतनी बढ़ने लगी की उसको आँखें बंद करनी पड़ी.....

उसकी आँखें तब खुली जब वो खुद चमक रही thi....aur पुजारी जी उसके पास आके निचे झुकके हुए the.....usko कुछ समझ नहीं aaya....usne अपने हाथों को देखा वो चमक रहे the....aur देखते hi देखते उसकी आँखें खुद से बंद हो gayi......jab आँखें खुली पूरा रूम hi बदल चुक्का tha.....wo जगह खली हो चुक्की thi.....Pujari जी उसका सर अपने गॉड पे रखे हुए थे......

मधु - hmm.....ye....ye क्या hua......main तो.....

पुजारी जी - कुछ नहीं हुआ hai......chalo अब जाना भी है तुमको....

मधु - Par.....wo मैं wo.....main....

पुजारी जी - मैं वो मैं वो यहाँ नहीं करना hai....samjhi अब चलो यहाँ se.....aur तैयार हो jaao.....dekho बाल ख़राब हो गए है tumhare....tum राजकुमारी hi यहाँ ki.....accha दिखना होगा तुमको.....

मधु उठती hai....aur यहाँ वह देखती hai....wo कुछ बोलने को होती है पर उसको लेके चले जाते है पुजारी जी बहार.....

जब वो दोनों बहार निकलते है तो वो किसी दूसरे hi दरवाजे से बहार निकले the.....ye देख के मधु वापस से हैरान हो gayi.....wo समझ hi नहीं पा रही थी आखिर ये सब चल क्या रहा है.....

पुजारी जी - चलो तैयार हो jaao....tumko जाना भी है....

मधु वह से तैयार होने चली जाती hai.....Pujari जी ने उसके रूम में कुछ लड़कियों को भेज दिया था जो उसको अच्छे से तैयार करते है.....

थोड़ी देर बाद वो बहार आती है अपने उन्ही कपड़ों में जो पुजारी जी ने उसको दिया था....

पुजारी जी - chalo.....ab जाने की बारी hai.....aao तुम मेरे साथ मैं तुमको एक खास जगह दिखता hu......ye रास्ता तुमको कही पे भी लेके जा सकता है....

मढ़ी - अभी और भी चीजजें है देखने को :फैंटेड: मेरा इतने से hi हो गया hai.....ye सर क्यों दर्द कर रहा है मेरा.....

पुजारी जी - वो कुछ नहीं hai....sayad आज तक रह जायेगी फिर ठीक हो jaayegi....ab चलो

मधु को लेके वो पीछे तालाब की ओर आते hai.....Old आउल का बाँदा उनको वही से देख रहा tha....wo सब देख रहा था जितना उसको dikha....kaise उस मधु को एकदम से बदल दिया इन् सब ने....

पुजारी जी - जाने से पहले इस उल्लू का कुछ करना है तो कर सकती ho.....par उसको नुकशान ना हो इसका ध्यान रखना....

पुजारी जी की बात सुनके मधु एकदम से मुस्कुराने lagi.....Old आउल का बाँदा समझ नहीं पाया ये दोनों उल्लू किसको बोल रहे hai.....wo बेचारा यहाँ वह देख रहा था की कोई होगा जिसको ये ऐसा बोल रहे है......

वो देखता hi रहा और पन्नी की बौछार उसके ऊपर आ gayi....wo एकदम से हड़बड़ा gaya......par इतना hi नहीं tha.....wo पानी धीरे धीरे जमने लग gaya....aur उसको बर्फ ने पूरा धक् लिया.....

वो जिस टहनी पे बैठा था वह से वो खुद से निच्चा आ गया.....

मधु - और उल्लू mahasay.....bada सुख है तुमको जासूसी करने का :बात: अब जम्मे रहो ऐसे hi....

पुजारी जी - चलो ये भी हो gaya....ab देखो तुम यहाँ पे.....

उन्होंने उस तालाब के पानी को ऊपर हवा में उठा diya.......Madhu को लगा की सायडतालाब के निच्चे से कोई रास्ता hoga....wo निच्चे की ओर देखने lagi.....par असल रास्ता तो वह था जहा पे अभी पानी था......

पुजारी जी - निच्चे नहीं ऊपर देखो.....

जैसे hi मधु ने ऊपर की ओर देखा वो वापस से हैरान हो gayi.....aaj का दिन hi सायद उसके हैरान होने के लिए था...

वह ऊपर हवा में जैसे कुछ गुफाओं का समूह tha......jo ऐसे नहीं दिख सकता tha.....par पानी के ऊपर जाने से उनका आकर उभर के आ रहा tha....bahut सी गुफाएं थी वह पे.....

पुजारी जी - यही से जाओगी तुम.....

मधु - par..ye ऐसे कैसे hai.....hawa mein......sabse चुप्पी हुई.....

पुजारी जी - इसको किसी ने चुप चुप के मिलने को बनाया tha.....par वो हो ना sakka....to अब तुम्हारे काम aayegi......tumko बस इसके पास जाना है और बताना है की कहा जाना चाहती हो tum......wo खुद रास्ता धुंध के देगा tumko....aur वह पहुचायेगा.....

मधु - पर क्या ये ऐसे सुरक्षित है मतलब ऐसे में तो कोई भी इससे जा सकता है......

पुजारी जी - हां जा सकता hai....par उसके पास इस तालाब का पन्नी होना chahiye.....aur साथ hi निक्स लोगो का अप्पर ज्ञान उनके अंदर होना chahiye......jab तक ये ना हो कोई भी इसका उसे नहीं कर sakta......ab तैयार हो naa.....jaana भी है.....

मधु - हम्म मैं तैयार हु......

मधु ने पानी की एक सीधी बनायीं और वो उससे उन् गुफाओं में से एक के सामने कड़ी हो गयी.....

पुजारी जी - बताओ उसको की तुम कहा जाना चाहती हो......

मधु - मुझे एअर्थ पे जाना है......

पुजारी जी - :डोह: उसको बताओ एअर्थ पे कहा जाना hai......bolo उसको मुझे एअर्थ के मैजिक स्कूल में जाना है.....

मधु - हां हां बोलती hu....Mujhe एअर्थ के मैजिक स्कूल जाना है...

मधु ने ऐसा बोलै और वो गुफा जिसके सामने वो थी वो थोड़ी चमकने lagi....usse थोड़ी रोशनी आने लगी......

पुजारी जी - ये देखो खुल गया rasta.....ab इससे होक अंदर जाना hai.....aur तुम उस par....kisi तालाब या नदी के पास पहुंच जाओगी.....

मधु - क्या ये ओने वे hai....matlab बस वह जा सकती hu...isse वह से यहाँ नहीं आ सकती क्या मैं.....

पुजारी जी - ज्यादा दिम्माग लगाने की जरुरत नहीं hai......jab कोई मदद चाहिए या मिलना हो मुझे बोल देना मैं आ jaunga....iska उसे जरुरत पड़ने पे hi किया जाएगा समझी....

मधु - हां समझ gayi.....theek है तो मैं चलती hu......Miss करना मुझे.....

इतना बोलके वो अंदर की ओर चल देती है पर तभी कुछ तो हुआ था वह pe.......pata नहीं क्या tha......wo उस गुफा के अंदर गयी और तभी ऐसा लगा जैसे अंदर से hi कुछ उसके पास आ रहा ho.....Guffa के अंदर se......Pujari जी ने भी देखा isko....par जब तक वो पूरी तरह से देख पाते वो बंद हो चुक्का था.......

हुआ ये था की जस्टिन की सोल इस वक़्त अपने लिए एक पावरफुल बॉडी धुंध रही थी और उसने पहले प्रतीक पे तरय किया पर वो कर नहीं पाया kuch......iske बहुत से कारण the....aur सबसे बड़ा तो Dhruv....jab ये नहीं हो पाया उससे तो वो किसी और की तलाश में निकला hi था की उसको कोई और उतनी hi बड़ी पावर का अहसास हुआ और वो उसकी तरफ बढ़ चला और किसी तरह उस गुफा में पहुंच gaya....aur वह पे मधु की बॉडी में आने की कोशिश करता है वो....

पर यहाँ भी वो सफल नहीं हो paaya......par उसके तरय करने में मधु के अंदर की गोल्डन power.....wo एक्टिव हो गयी thi......uske कारण hi मधु बेहोश हो गयी thi.....aur जब वो एअर्थ पे पहुंची तो बेहोश hi हुई पड़ी थी......

जब स्कूल वालो को पता चला कोई तालाब के पास बेहोश हो गया है और उसके बाद ये पता चला की मधु बेहोश हो गयी है तो सभी के सभी पहुंच गए वह पे.....

प्रेजेंट में आ जाते है......

मैं इस वक़्त ओल्ड आउल के उन् लोगो से बात कर रहा था जो यहाँ एअर्थ पे आये थे लीडर को ढूंढने के liye....uske बारे में पता लगाने को पर वो नाकामियाब रहे थे.....

मैं - तुमको मेरे दादा दादी को ढूँढना है.....

वो - पर हम पहले से hi एक काम पे लगे हुए है.....

मैं - हां पर उसमे कुछ हो नहीं रहा hai....aur अभी उससे ज्यादा जरुरी ये काम hai.....maine वो काम दिया था अब मैं hi मन्ना कर रहा हु उसको पूरा करने se......ab नए काम पे लग जाओ.....

वो - क्या हमको एअर्थ तक hi ढूँढना है पिछल बार की तरह या फिर बहार भी जाना होगा.....

मैं - मुझे नहीं लगता वो बहार गए हुए honge.....apna सर्चिंग सर्किल एअर्थ तक hi rakho....aur मुझे इसका नतीजा जल्दी से चाहिए.....

वो - हम्म ठीक है मैं काम पे लग जाता हु अपने लोगो के saath......aapko जल्द hi खबर देदूंगा.....

वो चला जाता hai.....aur उसके जाने के बाद hi मुझे ओल्ड आउल की आवाज आती है.....

ओल्ड आउल - मेरे पास कुछ खबर है तुम्हारे लिए.....

मैं - हां batao......kya वो युवराज से रिलेटेड है या कुछ और.....

ओल्ड आउल - ये निक्स कबीले में रह रही उस लड़की से रिलेटेड hai.....pata नहीं kaise......par उनको पता चल गया था हम नज़र रख रहे है उनके upar......usne मेरे बन्दे को बर्फ में जम्मा दिया था.....

मैं - उसको पता कैसे चला और वो तुम्हारा बाँदा ठीक है ना......

ओल्ड आउल - वो ठीक है कोई भरी नुकशान नहीं हुआ है usko,.....haa बर्फ के अंदर रहने से थोड़ी कमज़ोरी हो गयी hai.....par वो ठीक हो jaayega......aur पता कैसे चला हमारे बारे में इस बारे में मैं अभी नहीं बता पाऊंगा......

मैं - ठीक है तो किसी और को उसके पीछे भेजो और तरय करना इस बार नज़र में ना आये वो.....

ओल्ड आउल - वो लड़की एअर्थ पे जा चुक्की hai.....aaj hi पहुंची होगी वह पे वो.....

मैं - एअर्थ पे आ gayi....aur हुंजने उसको खो दिया....

ओल्ड आउल - वो मैजिक स्कूल में hi आयी है तुम्हारे स्कूल mein.....to हमने उसको खोया तो नहीं hai.....aur हां wo.....wo बदल गयी थी ऐसा मेरे बन्दे का कहना hai......wo बोल रहा है की वो अब निक्स hi बन गयी थी.....

मैं - अब ये क्या hai....insan निक्स कैसे बन jaayega.....barf से दिम्माग तो नहीं जैम गया uska.....uska ध्यान rakho.....main यहाँ पे देखता हु......

ओल्ड आउल - ठीक है.....

मैं - अच्छा ओल्ड आउल वैसे तो मैंने तुम्हारे बन्दे को बोलै है मेरे दादा दादी को ढूंढने ko......par अगर तुम भी यहाँ आ जाते इसमें तो.....

ओल्ड आउल - मैं आ जाता hu.....par मेरी जरुरत hi क्या है वह pe......tum तो अलबूस या कूपर को इस काम में लगा सकते ho.....wo धुंध लाएंगे उनको.....

मैं - नहीं वो दोनों अभी बहार नहीं आ sakte.....ye थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड है......

ओल्ड आउल - ठीक है मैं वह खुद आ जाता hu.......accha और मुझे कुछ वक़्त के लिए अपने लोगो के पास भी जाना hoga......bahut वक़्त हो गया है उनसब के ट्रेनिंग को देखे hue.....aur भी कही काम है....

मैं - तुम बस ये काम कर do....uske बाद आराम कर लेना तुम भी.....

ओल्ड आउल वह से सीधा मेरे hi पास आ gaya.....aur फिर थोड़ी देर मुझसे बात करि और वह से निकल गया दादा दादी को ढूंढने को.......

दूर कही एक छोटा सा गाओं tha......Earth पे hi......waha पे बहुत से लोग the.....kuch इंसान भी थे वह पे पर सारे नहीं......

वही एक कोने में एक कपल बैठा हुआ tha......kisi का वेट कर रहा था वो जैसे......

थोड़ी hi देर हुई होगी की उस जगह पे कोई आता hai....waha पे जो भी बातें चल रही थी सब एकदम से बंद हो जाती है उसको देख kar......sab शांत हो जाते hai....Wo बाँदा यहाँ वह देखता hai.....aur फिर आगे की ओर बढ़ जाता hai.......jab बाकी सब देखते है आज ये किसी को मारने नहीं आया hai.....agar आया होता तो अभी तक मार चुक्का होता वो.....

तो जब सबने देखा ये तो सभी बातें करना वापस से शुरू कर देते है......

वो बाँदा जाके उस कपल के पास वाली टेबल पे बैठ जाता है......

"क्या काम हो गया हमारा....."

वो - तुम दोनों का अहसान इसी काम के साथ ख़तम होता hai.....ab से मैं तुम्हारी कोई भी मदद नहीं करने वाला hu....naa तुम मुझे जानते हो ना मैं तुमको.....

"रिस्ता तुमने ख़तम किया hai.....hum अभी भी तुम्हारी मदद करेंगे तुम चाहो या ना चाहो....."

वो (गुस्से में) - मैंने जो कहना था मैंने कह दिया hai......ab isse......Koi आ रहा है इस जगह pe......jaao यहाँ se.....aur वापस आने के बारे में सोचना भी mat.....warna तुम दोनों को मैं खुद ख़तम कर दूंगा......

इतना बोल के वो बाँदा वह से खड़ा हुआ और एक छोटी सी चीज़ उन् दोनों कपल की ओर फ़ेंक दिया.......

वो - सब निकलो यहाँ se.......hum बंद कर रहे है.......

उसने जोर से ये बात kahi.......aur उसका कहना था की सभी वह से निकलने lage....bas एक को छोड़ के.....

"तुम ऐसा कैसे कर सकते ho.....main जीत रहा tha......aur तुम्हारी वजह से वो पैसे लेके भाग gaya......ab तुम पैसे डोज मुझे...."

जिस बन्दे ने सब बंद करने को बोलै था उसने इस बन्दे की बात सुन्नी और अपना बड़ा सा मुँह उसकी ओर घुम्मा के देखा......

वो दोनों कपल्स जो वह थे वो अभी भी वही पे the....uss सामान को देख रहे थे की उन्होंने ये सब होते हुए dekha.......Aurat को समझ आ गया था अब क्या होने वाला tha.....Wo वह से कड़ी hui....aur जिसको पैसे चाहिए थे उसका हाथ पकड़ा और खींचते हुए होने पटनेर के पास लेके आयी......

"सब ठीक है....."

"सब ठीक है अब चलते hai.....ye नमूना कौन है...."

"नमूना hi hai....isko अपनी जान प्यारी नहीं है sayad......isko बहार तक लेके चलते है वर्ण...."

" हेय्य छोड़ो mujhe......main अपने पैसे नहीं छोड़ने wala.....mujhe मेरे पैसे चाहिए......"

उस कपल ने एक दूसरे का हाथ pakda.....aur उस बन्दे को भी पकड़ liya.....jiske बाद वो वह से गायब हो gaye.......abhi वो गायब हुए the.....aur उसके बाद वो जगह hi बदल सी गयी thi......ekdum से शांत हो गयी थी वो jagah.....jungle में बदल गयी thi.....waha पे जो कुछ भी था वो जैसे गायब सा हो गया था.....

ओल्ड आउल वह पे पंहुचा उसने यहाँ वह dekha.....ek दो बार चक्कर भी लगाया पर कुछ भी नहीं मिला usko......wo बस वह से वापस लौट आया......

नेक्स्ट डे.....

घर में सुबह सुबह hi किसी ने बेल्ल बजाय था......

उस वक़्त वह पे सब ध्यान में बैठे हुए the.....Chachi उठती है और जाके दरवाजा खोलती है तो सामने दादा दादी थे.....

चची - आप दोनों आ gaye.....hum आपको कब से धुंध रहे थे.....

दादी - अंदर चल के बात करते hai.....Satya को भी बुलालो.....

चची जाती उससे पहले hi वो आ चुक्के थे.....

चाचा - माँ आप दोनों को कहा कहा नहीं ढूंढा maine......aapko पता भी है यहाँ क्या हुआ......

दादा जी - अभी ये सब chodo......humne पता कर लिया है कहा कहा पैर कौन कौन से शैतान है एअर्थ pe......ab बस हमको बिन्ना हेडऑफ़ीस के नज़र में आये इन् सब से निपटना होगा.....

चची - पूनम घर छोड़ के जा चुक्की है.....

दादी - तुम दोनों तैयारी karo.....hum aaj.....kya kaha......Poonam घर छोड़ के चली गयी.....

चाचा - उसको पता चल गया है इन् सैतानो के बारे mein,......jab आप दोनों यहाँ नहीं थे तो बहुत कुछ हो गया यहाँ पे.....

दादा - उसको पता चल gaya.....par kaise......aur ऐसा क्या हो गया यहाँ पे हमारे ना होने पे....

चाचा ने उन् दोनों को सब शुरू से बताया kaise.....K.Bua और निकिता पे एक शैतान ने हमला किया tha.....aur किस्मत से पंकज ने उन् दोनों को बचा लिया tha.....uske बाद कैसे सब पता चला पूनम बुआ को और बाकी सब bhi.....jaise उनका घर छोड़ के जाना और उनको वापस लाने के लिए दादा दादी को उनसे मिलना होगा ये सब maang....sab कुछ बताया गया उनको.....

दादी - ये सब अच्छा नहीं हुआ hai.....aur ये निकिता और कविता वह पहुंचे kaise.......uss जगह पे जाने की क्या hi जरुरत थी.....

चची - उनको थोड़ी ना पता था वह पे कोई शैतान होगा जिसको हम एअर्थ पे लेके आये है....

दादी - तुम क्या कहना चाहती हो ये सब हमारी वजह से हुआ है.....

चची - कुछ तो हमारी भी गलती है ना isme......naa जाने आज तक कितने hi लोगो को मार चुक्के होंगे वो Shaitaan......inn सब के पीछे हमारा हाथ नहीं है क्या....

दादी कुछ बोलती उससे पहले दादा जी ने बोलै.....

दादाजी - निधि तुम उससे कहो हम आ गए है यहाँ pe....wo आ जाए wapas.....aur tum....tum जाओ फ्रेश हो जाओ.....

चची - आपने सुन्ना नहीं sayad....usne कहा है आप दोनों को वह जाना hoga.....wo यहाँ पे नहीं आने वाली है......

दादी - फ़ोन करो usko.....main देखती हु कैसे नहीं आती वो......

चची ने भी फ़ोन उठाया और कॉल कर diya.....par दादी को नहीं diya....Speaker पे कर दिया था.....

बुआ अभी ध्यान लगाने के बाद अपने केबिन में hi गयी थी की कॉल आया था......

बुआ - हां bhabhi.....dekho अगर घर आने की बात आप सुबह सुबह करोगी तो समझ lena.....main आपका कॉल उठाना भी बंद कर दूंगी.....

चची - नहीं वो माँ पापा आ गए hai.....Maa तुमको यहाँ बुल्ला रही.....

बुआ - मैंने पहले hi आपको और भैया को बता दिया hai.....main तब तक नहीं आने वाली जब तक वो यहाँ पे आके मुझसे बात ना करे......

इतना बोल उन्होंने कॉल कट कर diya....Yaha दादी पूरी लाल पिल्ली हुई पड़ी thi......par बोले तो बोले क्या......

दादाजी - जाओ तैयार हो jaao.....usko वापस लाना hai.......ye बातें और किस किस को पता चली है......

चची - सभी ko......ab सभी को इन् सब के बारे में पता है.....

दादाजी - बस यही बात की और भी बातें पता है unko......Parth और......

चची - Nahi.....wo साड़ी बातें नहीं पता hai....aur वक़्त आने से पहले पता भी नहीं chalegi......aap फ़िक्र मत करिये.....

सब अपने अपने कामों में लग gaye.....wahi थोड़ी देर बाद वह पे रूपल दीदी अपने ड़याँ से उठ के aayi.....unko यहाँ जो भी बातें हुई कुछ पता नहीं था......

वही दुरसी तरफ स्कूल में......

मैं जब से उस ओल्ड आउल ने बताया वो लड़की यहाँ आ गयी है और स्कूल में hi hai....ussi को धुंध रहा tha.....yaha वह सभी जगह dhundha.....par मिल्ली hi nahi......Bua से अभी बात करना मतलब था पेअर पे कुल्हाड़ी मारना ये अभी तो एकदम चिढ़ी हुई hi रहती थी...... :सिघ: तो उनसे पूछा नहीं kuch....wahi K.Bua दिखी hi नहीं thi.....sayad वो जो कोई भी उनके डिपार्टमेंट में कल आया था उसको देख रही होगी वो.....

क्लास का वक़्त हो चला tha.....to मैं चल दिया था क्लास की oor......wo निकिता नहीं आयी थी :सिघ: आज भी गेट के पास कड़ी थी wo....pata nahi.....arre जब वो पंकज आता तो अंदर hi आता ना वह देख लेना tha.....maafi मांग लेनी थी थैंक्स बोल देना था पर नहीं इसको गेट पे रहना है......

प्रतीक क्लास में जाता है और तभी स्कूल में सभी बड़े आ जाते है रूपल दीदी आज अपने होटल में गयी हुई thi.....waha भी काम होते है.....

निकिता गेट पे थी और तभी वह पे वो सब पहुंचते hai....Sabse पहले चची की नज़र गयी थी उसपे.....

चची - ये बहार क्या कर रही hai.....iske तो क्लास का टाइम हो रहा है.....

दादी - ीन्हो मटरगस्तियों के वजह से वह पहुंची होगी ye.....class का वक़्त हो रहा है और ये यहाँ पे कड़ी है....

दादा - क्या बोल रही ho....bacchi है wo....kuch काम होगा यहाँ ऐसे hi थोड़ी.....

दादी - Kaam.....kya वह पे भी काम tha.....kaise पहुंची ये वह उस शैतान के पास....

चची - आप क्या कहना चाहती ho....uss शैतान ने इस्पे हुम्ला किया उसमे साड़ी गलती इसी की hai......humari कोई गलती hi नहीं इन् सब में......

चाचा - शांत हो jaao......Maa आप भी कम्मल करती ho.....kaha की बात को कहा लेके जा रही हो aap.....aur नित्य थोड़ा shant.....chalo इससे पूछ लेते है क्या हुआ है.....

वो चारो आगे जाते hai.....Nikita यहाँ वह देख रही थी तो उसको इनके आने का पता hi नहीं chala......jab तक पता चला छर्रो ने उसको घेर लिया था.....

दादी - तुम्हारी तो क्लास का वक़्त है ना यहाँ क्या कर रही हो.....

निकिता एक तो पहले hi इन् सब को देख के यहाँ थोड़ा हड़बड़ा गयी thi....upar से ये sawal.....iska जवाब वो क्या दे ये समझ नहीं आ रहा था.....

निकिता - Wo.....wo आज क्लास hai.....par मैं जा नहीं पायी.....

चची - क्यों नहीं जा पायी कोई दिक्कत है क्या,....

निकिता - Wo.....haa wo....hmm.....Didi.....Didi आने वाली थी naa....unhone कहा की बहार रहो मैं आती hu.....Hotel जाना hai.....haa होटल जाना है..

चची - पर क्लास के बाद नहीं जा सकते क्या इसके liye.....waise भी तुम दोनों स्कूल से ज्यादा अभी घर में रह रहे ho.....padhayi पे ध्यान do....aur वो कहा है प्रतीक.....

निकिता - Wo....wo तो क्लास में gaya.....Didi ने उसको नहीं बुलाया है naa......aap जानती हो ना वो प्रोजेक्ट मैजिकल क्रीचर्स और इंसानो को एक साथ होटल में रखने wala.....wo हम दोनों का है उसमे प्रतीक का क्या काम.....

दादा - hmm...theek है अब ये बताओ तुम्हारी बुआ कहा hai.....class ले रही है क्या अभी.....

निकिता - इस waqt.....haa अभी तो क्लास में hi होंगी naa......aap उनको वापस घर ले जाने आये ho....main आपको केबिन में लेके चलती हु.....

दादी - नहीं हम चले jaayenge......Satya रूपल को कॉल करके बोलो निकिता इंतज़ार कर रही hai.....usko भी वक़्त की कदर नहीं है......

इतना बोल के वो वह से निकल गयी aage.....aur उनके पीछे बाकि sab....Haa जाते हुए चची ने एक बार मदद के देखा था निकिता ko.....ghoorna कहना सही होगा....

ये सब केबिन की ओर जा hi रहे थे की वही पास से प्रोफ दक्ष भी आ रहे the.....sabki नज़रें एक बार milli.....par कोई बात nahi.....sab अपने अपने रास्ते....

केबिन में आने के बाद......

दादी - मुझे लगता है हमको यहाँ पे बात शुरू कर देनी chahiye....wo पूनम जब आएगी तब देखेंगे....

दादा जी - थोड़ा ृक्क जाते है वो थोड़ी देर में आ hi jaayegi.....aur तुम शांत raho......uske सामने कुछ फालतू का मत बोल dena.....waise hi गुस्सा है और तुम.....

दादी - आपको क्या लगता है सिर्फ मेरी वजह से गुस्सा hai.....sirf मैंने hi नहीं कहा था की नहीं बताना chahiye.....aap भी मेरे साथ थे.....

चची जाके सोफे पे बैठ gayi.......unko इसमें पड़ना hi नहीं था......

थोड़ी देर tu...tu......main.....main हुई उनके बिच और फिर सब शांत......

क्लास ख़तम हुआ तो बुआ वह पे aayi......aur दादा दादी को देख के भी इग्नोर कर diya....aur बस चाचा चची के पास चली गयी......

बुआ - हां बताइये क्या बात है.....

चाचा - वो माँ पापा आये है.....

दादा जी - पूनम उस वक़्त हमको लगा ये सब तुम ना hi जानो तो सही hai.......agar तुम उन् सब में पड़ती तो सायद आज यहाँ ना होती.....

बुआ - बाद में भी तो बता सकती हो Bhabhi.....baad में बताने का वक़्त नहीं मिलेगा क्या की आप क्यों आये हो यहाँ...

दादी - पूनम beta......humne सोचा ये chapter यही पे ख़तम हो गया hoga.....par वो......

बुआ - भाभी के माँ पापा भी तो एक शैतान के hi कब्ज़े में the....aur वो तो हमारे सामने रहते the.....tab कैसे आपको ये नहीं लगा की ये chapter ख़तम नहीं हुआ hai......dikhta नहीं था आपको उनका दर्द.....

दादा जी - वो सब एक गलती का नतीजा tha....aur हम कोशिश कर रहे the....aur देखो आज वो आज़ाद है ना.....

बुआ - आज़ाद hai.....par कैद क्यों हु......

चची - पूनम इन् बातों को रहने देते है मैं पहले भी इस बारे में बात कर चुक्की हु तुम मुझे वापस से ये सब याद नहीं दिलाना चाहती ना....

बुआ - ठीक है आप बोल रहे हो इस वजह se......par बोलो इन् दोनों se......mujhe हर एक बात जाननी hai....aur.....aur क्या पार्थ और नीलम की बातें जो मुझे बताई गयी hai...yaa हो मैं जानती हु वो सब का सब सच hai...yaa उसमे भी....

दादी - वो बातें तुम्हारे सामने हुई thi....tum खुद हिस्सा रह चुक्की हो उन् सब का.....

दादा जी - इस बारे में कभी और बात कर lenge.....ab पूनम अपना सामन हमको दे दो हम लेके चले jaayenge....aur रात को घर आ जाना सबको leke.....kuch बातें करनी है.....

दादी - Sabko.....aap ये क्या कह रहे hai......kya सभी को शामिल करना है isme....ye सब तो.....

दादा जी - एक बार चुप्पा के देख लिया क्या होता hai....ab छुपाना नहीं hai....aur ये बच्चे है मन्ना पर इनके पास क्षमता है हमारा साथ देने ki.....wo वक़्त और था जब हम बस निकल पड़ते थे लड़ने ko....ab मैं जल्दी थकने लगता hu....aur तुम भी बूढी होती जा रही हो.....

Dadi(aankh दिखते हुए) - बूढी किसको बोल रहे हो aap.....main कोई बूढी नहीं हु.....

चची - पर पापा रूपल तक का तो समझ आता है पर ये Prateek.....aur निकिता इनका क्या....

दादा - इनका kya......kuch बातें मुझे पता चली है इन् दोनों के बारे में bhi.....Poonam जर्रा bataogi....ye स्ट्रेंज वर्ल्ड में जो लड़ाई हुई thi.....wo क्या नाम था uska....Suraj....haa सूरज से वह ये दोनों भी थे ना.....

चची - लड़ाई हुई thi....Suraj se.....par वो तो सायद कही और चले गए है न.....

बुआ - Wo....wo बस ऐसे hi tha.....aur उसमे ये दोनों the....par लड़ नहीं रहे the.....par ये लड़ भी सकते hai.....par क्या आप सब उनको आने डोज.....

दादी - पर पर क्या कर रही hai.....ab मैं bolu......mujhe इसका क्यों पता nahi.....Nitya देखो तुम्हारी लाड़ली ननद ko.....bataya क्या इसने तुमको इस बारे में....

दादा - क्या करती हो tum.....Poonam लेके आ जाना सभी ko....wahi बातें होगी....

बुआ - कविता को सायद रुकना पड़े वो दरअसल यहाँ पे एक हादसा हो गया है उसी के चक्कर में.....

चाचा - ऐसा क्या हो gaya......koi बहुत ज्यादा जख्मी तो नहीं है ना.....

बुआ - भैया वो निक्स राजकुमारी आयी है यहाँ pe.....jab हमको मिली तो जख्मी thi....ussi को देखना है......

दादी - निक्स Rajkumari.....Earth पे......

बुआ - हां वो यहाँ पे पढ़ने को आयी hai....Principle सर ने तो मुझे hi उसकी जिम्मेदारी दे दी thi.....par मैंने मन्ना कर diya.....ab दक्ष देखेंगे उसको....

दादी - :डोह: जिम्मेदारी मिल रही थी उसकी तो ले leti......water एलिमेंट पे उन् जैसा कण्ट्रोल किसी न नहीं hota......ghar में लोग सिख सकते थे उससे इस बारे में....

बुआ - नहीं उसके और भी नखरे hote....usne कहलवाया था की उसको इंसानो के बिच रहना hai....ab हम इंसानो के बिच में उसको लेके कैसे आते जाते रहते.....

दादा जी - चलो जो हुआ अच्छा hua.....ab सम्मान निकालो अपना और घर पे आ जाना शाम में....

बुआ - मैं खुद लेके आ jaaungi....aap जाओ.....

यहाँ पे ये सब चल रहा tha.....wahi स्ट्रेंज वर्ल्ड में......

वह पे लीमो और उसकी सोसाइटी वालो को एक संदेसा आया था राज महल se.......sandesha क्या उसको चेतावनी कहना सही होगा.....

एल्फ किंग के द्वारा भेजा गया था wo.....jisme लिखा था की सोसाइटी को बस साबुत इक्कठा करने को कहा गया hai.....unko किसी को bhi......chahe वो कोई भी ho.....sazza देने का हक़ नहीं है......

संदेसा तो आ गया tha....ab इसका मतलब इन् सब को समझ नहीं आ रहा tha......Lemmo सभी को बुल्ला के पूछ रहा था उनसे की अभी जड़ली में किसी को कोई सज़्ज़ा दी है क्या उन् सब ने किसी के साथ कुछ किया है या nahi.....par सभी के जवाब ना hi the......kisi ने ऐसा कुछ नहीं kiya.....kuch bada....jo एल्फ किंग के नज़र में आ जाए....

लीमो - फिर ये महाराज ने ऐसा संदेसा क्यों भेजा hai......iski जांच हुई है की nahi......ye असल में उन्ही ने भेजा है ना या कोई और है इसके पीछे.....

"हमने इसको अच्छे से जांचा hai.....siyahi , कागज़ , ये लिफाफा और वो स्टाम्प सब सही है....."

लीमो - फिर हमने ऐसा किसको सज़्ज़ा दे दिया जो महाराज ने सन्देश भेज diya.....Iske बारे में पता करना hoga.....Khair ये छोड़ो और ये batao.....Yuvraj का क्या hua.....aur खुनी का kya....kal कोई खून नहीं हुआ था.....

"सुनने में आया है युवराज कही गिर pade....aur उनको चोटें आयी है....."

" लीमो हमने भी कुछ खतरनाक सुन्ना hai.....sayad ये आपको पता होना चाहिए....."

लीमो - हम्म तो बताओ क्या सुन्ना है तुमने.....

"लीमो टाइटन की कुछ खास किताबें यहाँ पायी गयी thi.......ab वो वापस टाइटन पहुंच चुक्की है पर वो किताबें थोड़ी विचलित करने वाली है"

लीमो - ऐसा क्या है उन् किताबों में.....

"उनमे ेलेमनेन्ट्स बनाने के तरीके वाली बुक भी थी...."

"लीमो कुछ वक़्त पहले हमको खबर मिली थी महल में खोज स्टोन hai....khass स्टोन....."

लीमो - खास stone.....waha पे ऐसे चीज़ें पहले से hi hai.....ye कोई नयी बात nahi......kaun सा स्टोन था wo....aur एलिमेंट वाली बुक का नाम सुनने के बाद क्यों बोल रहे इस बारे में तुम....

"लेममो वो वाटर स्टोन है ऐसा सुनने में आया tha.....Mahel के अंदर पानी का बहार उलटी दिशा में होना शुरू हो गया tha.....aur ये सब तब hi होता....."

लेममो - तब hi होता है जब आपका एलिमेंट स्टोन काफी पावरफुल ho......Mahel में इसका होना ये अजीब hai......humko और जानकारी चाहिए इसके बारे में.....

"पर वो chizz....wo गायब हो चुक्की hai......ab वैसी कोई घटना नहीं हो रही है वह पे......"

लेममो - वो गायब हुई है या युवराज अपने काम को अंजाम दे चूका hai......wo घायल कैसे hua.....iss बात का पता lagao.....Jo लोग महाराज के करीब है वो उनको पढ़ने की कोशिश kare......pata लगाने की कोशिश करे आखिर ये सन्देश है की liye.....aur साथ hi महल में hi रहो बातों को भी बताये...

मीटिंग इसी के साथ ख़तम कर दी इन् सब ने.....

लेममो अभी भी समझ नहीं पा रहा था ये sab,......ek रफ़ आईडिया आ गया था उसके दिम्माग में की सायद ऐसा कुछ हुआ hoga.....Usne इस बारे में प्रतीक से बात करने के बारे में सोचा.....

इन् सब से dur.....apne बेटे को खोने का दुःख मन रहा था Lucifer......dukh नहीं बोले तो सही hoga....usne अपना टारगेट बना लिया tha.....Slayer......uske anusar.....Salyer में hi जस्टिन की सोल थी....

वो बैठ बस ये सोच रहा था कैसे स्लेयर की बॉडी पे कण्ट्रोल करने में जस्टिन की मदद करे......

वैसे तो वो खुश था इस बात को लेके की स्लेयर इतना पावरफुल hai....aakhir उसके वार के बाद भी उसको ज्यादा कुछ नहीं hua......par यही बात उसको परेशां भी तो कर रही thi......agar वो इतना टक्करवार है तो कैसे जस्टिन काबू कर पायेगा उसके बॉडी पे......

पहले जब उसने इस बारे में सोचा था तो उसको ऐसा लग रहा था की जस्टिन की सोल सिर्फ और सिर्फ डार्क एनर्जी वाले body.....yaani प्रतीक के बॉडी में hi jaayegi....jaha पे अभी उसके अनुसार डार्क पावर इनएक्टिव hai.....to जस्टिन आराम से काबू पा leta....thodi बहुत मदद लूसिफ़ेर खुद कर देता uska.....par यहाँ ये हो नहीं पाया......

लूसिफ़ेर को अगर जस्टिन की मदद करनी है तो वो जानता था उसके लिए उसको स्लेयर को फोमोस से निकलना hi hoga....Wo jagah.....wo leader......wo कभी भी ऐसा नहीं होने denge.....naa चाहते हुए भी वो रस्ते का रोड़ा बन hi जाएंगे......

लूसिफ़ेर को लग रहा था की बिन्ना उनको पता चले अगर वो किसी तरह निकल पाए स्लेयर को वह से तो अच्छा होगा.....

अभी लूसिफ़ेर ये सब सोच hi रहा था की एक सैनिक डरा हुआ उसके पास aaya.....wo सैनिक उसी से दर रहा था....

लूसिफ़ेर - बोलो क्या बात hai....kyun आये हो यहाँ पे.....

सैनिक- एलड कंट्री के Yuvraj......J...jju...justin को धुंध रहे hai.....unhone संदेसा भिजवाया hai......ye सिर्फ उनको hi देने को कहा है.....

लूसिफ़ेर शांत होक उससे वो सन्देश मांगता है....

सन्देश में पहले तो हाल चल पूछा गया था और उसके बाद युवराज ने अपनी परेशानी rakhi......pareshani वही thi.....stone गायब हो चुक्का है......

लूसिफ़ेर ने जब वो सन्देश पूरा padha.....usne उसको जल्ला diya....aur जो सैनिक उसको लेके आया था साथ में उसको भी जल्ला दिया.....

ये बाँदा समझ hi नहीं पा रहा था की करे तो करे kya.....Bete ने ऐसे ऐसे काम कर रखे थे जिनके बारे में इसको पता hi नहीं tha.....wo स्टोन डेमोस की धरोहर tha.....aur जस्टिन ने चुप के उसको युवराज को दे diya....ye पहली बार भी नहीं tha.....Kulhadi के साथ भी ऐसा hi किया था जस्टिन ने.....

लूसिफ़ेर को एक पल के लिए तो लगा की सही हुआ इस जस्टिन से पीछा छूट gaya.......naa जाने बिन्ना बताये क्या क्या कर रखा था usne.....par अगले hi पल उसको याद आता है वो उसका एकलौता बीटा hai....uske बाद आखिर कौन होगा डेमोस का राजा....

लूसिफ़ेर ने इसके बाद अपने मंत्रियों को bulaya....kuch खजांचियों को और उनको आदेश दिया की महल के हर एक सामन की गिनती की jaaye......wo देखना चाहता था उसके बेटे ने आखिर कितना दान पुण्य किया हुआ hai......bas ये कुल्हाफी और वो वायर स्टोन hi hai.....yaa और भी चीज़ें hai.....sath hi उसको गुस्सा आ रहा था युवराज pe.....Lucifer को ऐसा लगने लगा था की जस्टिन का उसे किया था isne......pahle वो कुल्हाड़ी और फिर ये स्टोन....

लूसिफ़ेर ने फोमोस पे उसके सर पे इनाम भी रखवा diya.....agar कोई उसको वह पकड़ के लेका आएगा तो उसको इनाम मिलने वाला था.....

आज के लिए इतना hi.....next अपडेट में देखते hai.....Ye जो वररेंट निकला गया है युवराज के नाम से उससे वो कैसे परेशानी में पड़ता है स्ट्रेंज वर्ल्ड mein.....saath hi रात में जो मीटिंग है वो भी dekhenge....aur मधु को होश भी आना है.....

एक और baat.....bc घर में रहो खाओ piyo....ye बहार रोल, चिकन चिल्ल्ली खाने जाने की जरुरत नहीं है abhi.....ghar में यूट्यूब पे देख के बना के खा लो..... :सिघ: बिन्ना मतलब के घर से निकल के खुद को और अपने परिवार को खतरे में नहीं डालने ka.....aur....haa अगर सच में रोल बनाते हो घर में तो बताना :द्रूल:

1सत लव रोल :लव:

बे safe....be अलर्ट
 
अपडेट - 83

शाम का वक़्त tha......Daksh मां ने अपने एक पड़ोस में रहने वाली इंसान को पंकज का ध्यान रखने को बोलै tha.....aur थोड़ी hi देर पहले उनको कॉल आया था की पंकज के हाथों में दर्द हो रहा hai......wo निकलने को हुए hi थे घर की ओर की तभी......

तभी प्रिंसिपल ने उनको अपने साथ आने को kaha.......Mama जी उसको समझाना चाहते the.....par वो ये भी जानते the,......jitna वक़्त उसको समझने में लगेगा उससे पहले hi वो उसकी बात सुन्न लेंगे और जल्दी से निकल लेंगे वह से......

प्रिंसिपल सर उनको लेके मेडिकल डिपार्टमेंट में जाते है.......

प्रिंसिपल - देखिये दक्ष ji......aapko पता hi hoga......RajKumari मधु की जिम्मेदारी आपको दी गयी है......

दक्ष - जी मैं इस बात को जानता हु.....

प्रिंसिपल - हम्म तो अब आप एक और बात सुन्न lo.....tum भी जानते हो पंकज के बारे mein.....main बस मदद करना चाहता हु tumhari.....maine सुन्ना वो एकदम से अकेला hai....ye राज कुमारी भी अकेली hai....ye डॉट बन सकते hai......isse तुम्हे भी काम परेशानी hogi....aur ऊपर से ये राजकुमारी hai......sayad पंकज में और अच्छे बदलाव आ जाए....

दक्ष - मैं कोशिश karunga......par ये चीजजें थोप्पी तो नहीं जा सकती naa.....maine कोशिश करि थी एक बार थोपने की पर कारगर ना हुई वो....

प्रिंसिपल - हम्म ठीक है जैसा तुम चाहो.....

दक्ष - ठीक है तो मैं चलता hu...meri जरुरत हो तो आप जानते है मुझे कैसे बुलाना है......

इतना बोल वह से दक्ष मां निकल गए.....

थोड़ी hi देर बाद हम सब भी घर को निकल liye........waha पे मीटिंग जो होने वाली थी......

पहले तो सबने खाना खाया उसके बाद दादा जी ने सभी को हॉल में आने को kaha.....Nikita नाना नानी के यहाँ जा रही थी पर उसको भी रोकक liya........jab वी ये सब कर रहे थे तब दादी उनको एक बार और सोचने के बारे में बोल रही thi.....par उन्होंने तय कर लिया था......

दादा जी - सायद तुम सब hi अब वो शैतानो वाली बात जानते ho.....humne ये सब इस वजह से चुप्पय क्यूंकि हमको लगा ये chapter कभी वापस नहीं आने वाला ab.....lekin ऐसा नहीं hua....Main मुद्दे पे आता hu......Hum सब अब उन् शैतानो के पास जाएंगे और उनको ख़तम karenge.....main तुम सब को मौका देना चाहता हु इसमें आने ka.....par ये कोई जबरदस्ती नहीं hai.......nahi आना तो मत आइये आना है तो आ जाइये....

बुआ - आपने सिद्धि ख़तम कर देना है ऐसा क्यों kaha......manna वो शैतान है पर इतना वक़्त हो चला है आपको नहीं लगता कोई बदल गया होगा.....

दादी - ये सब भी वजह thi......naa बताने ki......wo सैतान है उनका यहाँ रहना ठीक नहीं है.....

मुझे पता नहीं क्या हुआ tha......sar पे चोट लगी ho.....yaa दिम्माग ख़राब हो गया हो.......

मैं - दादी रहना तो हमारा भी ठीक नहीं है इस जगह pe......ye इंसानो की जगह hai......hum यहाँ क्यों रह रहे है.....

मैंने जैसे hi ये बोलै सभी के सभी मुझे hi देखने लग गए.......

दादा जी - चाको ठीक है हम पहले ये पता करेंगे की कौन कहा पर है और क्या कर रहा hai.....uske बाद देखेंगे की अगर वो खुद जाना चाहते तो हम उनकी मदद करेंगे उनको मारेंगे nahi.....ab dekho.....iss काम का आधा हिस्सा हमने पूरा कर लिया है......

इतना बोल के उन्होंने अपने जेब से कोई गॉड बॉल nikali.......aur उसको वही पे रखे पानी के गिलास में दाल दिया......

गिलास में जाते hi बॉल चमकने लग गया और हमारे चारो तरफ एक नीले रोशनी का घेरा बन गया......

निकिता - Kya.....ye....

दादी - हां मेरी बच्ची ये वही है जो सोच रहो हो tum......ab यहाँ से मैं बताती hu......iss नक्से pe......ye लाल डॉट्स दिख रहे hai.....yaha pe......waha pe.....aur देखो वो निच्चे भी है kuch.......ye उन सैतानो के लोकेशंस हो सकते है.....

बुआ - हो सकते है का क्या matlab......matlab आप कन्फर्म नहीं हो.....

दादी - कन्फर्म होते तो अभी यहाँ पे नहीं होते hum......ye बस प्रॉबब्ले एरियाज है जहा पे वो हो सकते hai.......ye वाला dekho........Nikita कुछ याद आया इससे.......

निकिता - ये to.....ye तो sayad.....wo जंगल है जहा पंकज.....

दादी - हां वही hai.......ye वाला सैतान वही रहता hai.....jisne ham;a किया था tumpe.....par तुम वह गयी क्यों थी.......

निकिता ने दादी को बताया कैसे वो K.Bua और पंकज का पीछा कर रही थी और वह पहुंच गयी और उसने क्या क्या देखा वह पे......

दादी - तुम दोनों hi खुशकिस्मत थी उस पंकज ने बच्चा liya.....warna....waise ये कविता नहीं aayi.....arre हां काम था ना उसको कुछ.....

अभी दादी ने बात पूरी hi करि थी की बेल्ल बजती hai......Chachi जाके दरवाजा खोलती है और वह पे K.Bua hi थी....

हम सब बस उन्ही को देख रहे थे.....

K.Bua - ऐसे क्या देख रहे ho.....pahle कभी देखा नहीं क्या.....

रूपल - आपकी बात कर रही थी अभी दादी और आप आ भी gayi.....wo कहते है naa....Naam लिया और शैतान हाज़िर....

K.Bua - आई रूपल तेरा सैतान मैं बनती हु.....

दादी - Aeeei.....chalo बैठो yaha......ab सब वापस से बताना होगा.....

दादी ने वापस से सब कहानी सुनाई और फिर हमको हमारे हिस्से का काम भी दिया गया.....

काम ये था की हमको डॉटेड जगहों के आस पास बस पता करने जाना था की वह पे कोई अजीब से घटना हो रही है या नहीं......

मीटिंग ख़तम हुई सब अपने अपने रूम में चले आये.......

मैं तो ये काम आराम से कर देता...... पर वो ओल्ड आउल छुट्टी पे चला गया tha......Strange वर्ल्ड में भी उसने अपने बस कुछ hi लोगो को रहने को बोलै tha.....baaki सभी घर चले गए थे.....

मैं सोच रहा था ये काम खुद से hi करना होगा तभी निच्चे आवाज आती hai......Chacha Dada-dadi को बुला रहे the......Main भी निच्चे चला gaya......dekha तो सभी पहुंचे हुए the....bas वो Nikita.....wo तो चली गयी थी ना.....

चाचा - एल्फ कंट्री के युवराज ki......uske नाम का वररेंट निकला है डेमोस पे......

दादी - क्या बात कर रहे ho......Demos पे warrent....aisa क्या कर दिया था usne.......Prateek......DB को इस बारे में पता है क्या.....

चाचा - अरे माँ अभी खबर आयी है ye......Strange वर्ल्ड में हंगामा मच्चा हुआ hai......kuch कह रहे है उसने जरूर कुछ अच्छा किया hoga....aur कुछ बुरा बोल रहे hai......par अब जो भी होना है कोर्ट hi करेगी......

मैं - वररेंट से क्या होना hai......aur इसको लेके इतना क्या हंगामा.....

रूपल - ारी chotu.....wo दब का cousin......Yuvraj hai......Yuvraj समझता है ना आने वाला Raja......ab उसके सम्भन्ध अगर वो डेमोस से अच्छे hue.....to भी स्ट्रेंज वर्ल्ड को फर्क पड़ेगा और बुरे हुए तो bhi....par यहाँ पे मुद्दा ये होगा की क्यों वह पे वररेंट बना है.....

मैं - वैसे ये तो अच्छा hi hua.....sayad उसको युवराज के पद से हत्ता de.....DB वापस से जा सकता है......

बुआ - तुम नहीं समझोगे ये पॉलिटिक्स hai.....Bhaiya.....iss बात से अभी तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला humko......abhi इसको रहने hi देते है.....

वही स्ट्रेंज वर्ल्ड में......

जैसे hi इस बात का पता चला की एल्फ कंट्री के युवराज के खिलाफ एक वारंट बनना है डेमोस में तो सब शॉकेड रह gaye.......Ek तो पहले ये रिकार्ड्स के हिसाब से कभी डेमोस गया नहीं tha.....dusra अगर गया bhi.....to ऐसा क्या काण्ड कर आया isne......iske काण्ड से hi दोनों प्लैनेट्स की आपसी अंडरस्टैंडिंग पे प्रभाव पड़ने वाला था......

पहले तो इसके लिए एल्फ किंग ने रात में hi सभा बुला दी......

एल्फ किंग की बात करे तो परेशां वो भी the........unhone बस सुन्ना था की उनका भतीजा उनको धोखा दे रहा tha.....ab ना चाहते हुए भी याक्किन करना पड़ रहा था unko.......Demos पे युवराज कभी गए hi नहीं the....to वह पे क्यों वारंट निकला gaya......agar एल्फ किंग को ये खबर ना होती की ये धोखा दे रहा है तो अभी वो खुद हायर कोर्ट में जाते इसके saath.....par यहाँ अभी वो खुद कन्फर्म नहीं थे.....

एल्फ किंग - क्या तुम कभी डेमोस की सीमा के उस पर गए हो.....

Yuvraj.......isko भी समझ नहीं आ रहा था आखिर kyun.......sayad उस पाथेर की वजह se.......sayad जस्टिन को इस बात का बुरा लगा की उसने वो पाथेर खो diya.....aur वो इतना गुस्सा हो गया की उसने इतना कुछ कर दिया......

एल्फ किंग - क्या तुम कभी डेमोस की सीमा पार गए ho......jawab दो......

युवराज - हां......

एल्फ किंग - और ये रिकार्ड्स में क्यों नहीं hai......tumne किसी को इसकी खबर क्यों नहीं होने di.....kya वजह थी तुम्हारी वह जाने की.....

युवराज - इस बारे में मैं नहीं बता सकता.....

एल्फ किंग - तुम अपने राजा को मन्ना कर रहे ho......iske सारे अधिकार इससे छीनने जाते hai.......isko हायर कोर्ट ले जाने की तैयारी karo.....aur ये एक गुनेहगार की तरह hi जाना chahiye.....Sabha स्थगित.......

एल्फ किंग को जैसे बस वो हां hi नहीं सुन्नी थी जो युवराज ने kaha......jaise hi उनको इस बात का पता चला ये वह जाय करता tha.....unhone ख़तम कर दिया इस बात को....

युवराज से सारे अधिक्कार छीनने जा रहे the....wo वही खड़ा tha......waise वो कुछ कर सकता था abhi.....par उसके बाद का सोच वो वैसे hi raha.....wo सायद समझना चाहता था की आखिर उसके साथ हुआ क्या hai.....kyun जस्टिन ने ऐसा किया.....

इन् सब के alawa......Strange वर्ल्ड में निक्स समुदाय में लोग परेशां the......Madhu जब से गयी थी तब से कोई खबर नहीं आयी थी uski......Pujari जी ने कांटेक्ट करने की कोशिश कृ पर कुछ पता नहीं chala.....par इसके वजह से सब परेशान नहीं the.....baaki सब के परेशां होने की वजह उनके देवता की मूर्ति के आँखों से पानी आना tha....Jaise hi मधु वह से nikli.....uske बाद से मूर्ति के आँखों से पानी गिर रहा tha......wo सब समझ hi नहीं पा रहे थे आखिर ऐसा क्यों हो रहा tha.....Pujari जी ने भी ये देखा tha.....par उन्होंने कुछ जल फूल चढ़ाये अपने देवता के मूर्ति pe.....aur वह से चले gaye.....saath hi किसी को भी अभी मंदिर में ना जाने का आदेश भी दे गए the......iss वजह से तो और भी लोग परेशां थे.....

पुजारी जी कोशिश कर रहे थे की वो पता करे कहा है Madhu.....binna किसी को पता chale....par वो कामियाब नहीं हो पा रहे the.....anntatah उन्होंने ये सोच ा की वो खुद जाएंगे वह pe......par इस जगह को भी ऐसे छोड़ वो जा नहीं सकते थे ख़ास कर इस वक़्त pe.....wo वापस से कुछ जल फूल लेके मंदिर के पास pahuche.....waha पे लोगो ने भीड़ लगा राखी थी.....

पुजारी जी - मैंने आप सब से कहा है आज अंदर नहीं जाना hai....phir भी आप सब यही पे है......

"क्या हमने जो सुन्ना वो सच है पुजारी ji......kuch लोगो ने...."

पुजारी जी - हां वो सच hai......par आप सब शांत rahe.....aur अपने अपने घरो में जाके आराम kare......Main इस बात का पूरा ख्याल रख रहा हु....

ना चाहते हुए भी उनको वह से जाना hi पड़ा.......

पुजारी जी वापस से मूर्ति के पास आते hai....abhi भी आशु आ hi रहे थे usse......Unhone वह पे अपने साथ लाये हुए जल फूल चढ़ाये.....

पुजारी जी - मधु का कोई पता नहीं चल रहा hai.....Main नहीं जानता वो ठीक भी है या nahi......kyunki अगर वो होती तो जवाब तो deti.....Main इस बात को आप्पे छोड़ता हु.....

पुजारी जी ने ये बात कही और वह से मदद गए......

जो आशु अभी उस मूर्ति के आँखों से आ रहे te....wo चमकने lage......aur मंदिर से बहार निकल gaye....fir उन्ही गुफाओं se.....jaha से मधु गयी thi.....wahi पर से वो गायब हो गए.....

पुजारी जी जो पीछे मुद्दे हुए the....unke हाथों पे भी उन् आसुंओं में से एक बूँद girra.....aur वो वापस मदद के देखने lage.....Murti से आशु आना बंद हो चुक्का tha....Pujari जी जल्दी से बहार गए और वह se.....kuch और जल फूल लेके अंदर aaye...aur उनको मूर्ति के सामने रख diya.....aur वह से निकल गए.....

ये आशु वाली बात तब की है जब प्रतीक और उसके घर वाले खाना खा रहे the......Matlab K.Bua उस वक़्त अपने डिपार्टमेंट में hi thi....aur दूसरे मरीज़ों को देख रही थी.......

वो आँशु की बुँदे जब एअर्थ पे aayi.....to कुछ लोगो को पता चल गया था unka.......Leemi जिस गुरु जी के पास रहती thi.....unko पता चला था और कुछ और लोग भी थे जिनको इसकी खबर हुई......

वो आँशु की बुँदे सिद्धि मेडिकल डिपार्टमेंट में होते hue......Madhu के पास चली gayi.......wo aashu......uske चेहरे पे पानी की बूंदों की तरह गिर्री.....

एक ladki.......ek लड़के के साथ एक बगीचे में टहल रही thi.....dono आपस में बातें कर रहे the.....picche एक बाहत बड़ा सा महल जैसा कुछ दिख रहा tha......aur आगे एक पेड़ tha......dono चलते जा रहे थे उस पेड़ की ओर......

कभी लड़का कुछ कहता और दिनों हसने लगते तो कभी ladki.....kabhi कभी लड़का कुछ ऐसा कह देता जिससे लड़की को गुस्सा आ जाता और वो लड़के को हलके से मारर deti......to कभी लड़की उसको चिढ़ाती थी.......

"तुम्हे होश आ gaya......tum ठीक हो naa......Arre sunno.......Principal सर को खबर करो इनको होश आ गया hai......aap बैठो mat.......leti raho.....paani पियोगी आप....."

मधु - ummmmm.....main.....main कहा hu,....ye ये कौन सी जगह.......

"तुम एअर्थ पे ho......Magic स्कूल तुम्हारी नयी school.....tum यहाँ पढ़ने आयी ho.....Tumko यद् है ना सब कुछ....."

प्रिंसिपल - Kavita......hosh आ गया राजकुमारी मधु ko.....aap ठीक है राजकुमारी......

K.Bua - जी sir.....abhi hi होश आया है.......

प्रिंसिपल - एक बार इसको चेक karo.....Main तब तक दक्ष को बुल्ला देता hu.....wo मिल लेगा isse......aapka ध्यान दक्ष hi rakhenge....wo यहाँ के प्रोफ है.....

मधु को पहले तो कुछ समझ नहीं आ रहा था पर फिर इतना सब सुनने के बाद वो ये समझ गयी की वो एअर्थ पे पहुंच चुक्की hai.....aur ये baat.....ye बात hi तो सबसे इम्पोर्टेन्ट थी उसके liye......wo एअर्थ पे thi....yaani इंसान आस पास hi honge.....aur मतलब उसके माँ डैड का पता लगाना और आसान hoga.......bhaad में जाए halat....wo बस खुश thi.....usko याद आया की उसको पुजारी जी ने खुद को पानी से ठीक करना भी सिखाया tha.....waise भी कोई ज्यादा चोट वोट नहीं लगी हुई थी उसको,,,,,

K.Bua उसको चेक करने के लिए दरवाजा बंद करती है.....

मधु - suniye......aap मुझे पानी dedo....uske बाद चेक कर लेना......

K.Bua - पानी chahiye....rukko देती हु......

K.Bua पास में राखी पानी का गिलास उसको दे diya.....wo पानी पन्ने के वजय अपने हाथ में पानी लेके अपनी आँखें बंद करके बैठ gayi......aur फिर जो बुआ ने देखा...... :शॉकेड: वो देखती hi रह गयी.......

वो पानी जो उसके हाथ में था वो चमकने लगा tha....aur उसके बॉडी पे एक कवर जैसा बन गया था उस पानी se......Bua को लगा कुछ गड़बड़ तो नहीं है वो आगे बढ़ने hi वाली थी ki.....ek बार और चमकने के बाद सब ठीक हो गया......

मधु वह के बीएड से कड़ी हो गयी और खुद के देखने लगी hi उसके पेअर थी है या नहीं फिर अपने हाथ gardan....sab चेक kiya.....Bua मुँह बाए उसको देखे जा रही थी......

बुआ - ye.....ye सब कैसे किया आपने.....

मधु - उह आप इस बारे में किसी को बताना मत please.......ye हमारा सीक्रेट hai.....accha ठीक है अब मैं चलती hu.....mujhe इंसानो से मिलना है.....

इतना बोल उसके दरवाजा खोला और निकल ली......

K.Bua - ooye.....arre रूक्को ऐसे नहीं जा सकती tum.....Rajkumari....Madhu.....ooye....

मधु पीछे मदद के देखती hai.....wo थोड़ी आगे निकल गयी थी मुख्या दरवाजे के पास......

मधु - अरे आप चुनता मत करो मैं चली जाउंगी......

तभी प्रिंसिपल सर और दक्ष वह आ gaye.....aur मधु को गेट पे देख लिया......

प्रिंसिपल - अरे आप यहाँ आ gaye......aapko तो आराम करना है.....

मधु - नहीं मैं ठीक हु आपका बहुत बहुत sukriya.....hmm अब मुझे चलना chahiye....main इंसानो के पास जा रही हु.....

प्रिंसिपल - बच्ची ये स्कूल है tumhara....tum यहाँ पढ़ने आयी ho.....aur मैं यहाँ का प्रिंसिपल hu....tum ऐसे hi बहार नहीं जा सकती.....

मधु - ooh.....par मुझे जहा तक याद hai.....mujhse कहा गया था मैं इंसानो के बिच में rahungi....usne मिल सकुंगी....

प्रिंसिपल - हां पर इस वक़्त नहीं ये रात का वक़्त है अभी आपको आपके कमरे में जाना hoga.....aap फिर कभी चले जाना इंसानो के बिच......

मधु - आपको पता है मैं बीमार hu.....aur ऐसे स्कूल में इस हालत में रहना मेरे लिए सही नहीं hai.....isse मैं और बीमार हो सकती hu.....mujhe कही बहार रहना चाहिए.....

मधु की इस बात को सुन्न के दक्ष को हस्सी आने लग गयी वही K.Bua भी हसने lagi.....aur प्रिंसिपल sir....wo बस उसी को देख रहे थे.....

प्रिंसिपल - तुम बिलकुल ठीक हो अभी वह से यहाँ आयी हो खुद chalke....aur कल क्लास भी......

दक्ष - सर कल क्लास नहीं hai.....waise भी आपने इनकी जिम्मेदारी मुझे दी hai.....to मैं सोच रहा tha......inko आज अपने यहाँ लेके जाऊं मेहमान की तरह.....

प्रिंसिपल - हां कल तो क्लास नहीं hai.....par फिर भी ये ऐसे बहार नहीं जा सकती है.....

मधु - आपके पास कोई कारन नहीं मुझे रोकने ka.....main तो जाउंगी....

दक्ष- सर वो वह पे मेरी जिम्मेदारी hogi....waise भी मुझे इसकी जिम्मेदारी दी hi गयी है......

मधु - मैं आपके साथ नहीं जा रही hu.....mujhe....Bhanupur जाना है.....

प्रिंसिपल - नहीं आप भानपुर नहीं जा रही hai......chuki दक्ष जी कह रहे है इस वजह से aapko.....main इंसानो के बिच जाने दे रहा hu.....par आप दक्ष जी के साथ hi rahoge,,,,,,ye 3 दिन की छुट्टियां उनके साथ hi रहना है aapko.....Daksh जी आप समझ रहे है ना....

दक्ष - मैं समझ रहा hu....Madhu आपको मेरे यहाँ कोई दिक्कत नहीं hogi....aur वह पे इंसान भी आते hai....to आप उनसे बात कर सकते हो...

प्रिंसिपल - Kavita.....inko वह भेजने की तैयारी karo....check कर लो inko....agar कोई जरुरी मेडिसिन देनी हो तो दे देना.....

फिर क्या था मधु को चेक किया गया और फिर दक्ष मां के साथ उनके यहाँ भेज दिया gaya......Daksh मां उसके बात करने के तरीके और थोड़े से जिद्दीपन को देख के नीलम से कपड़े कर रहे the......Neelam(Mom) भी वैसी hi थी सायद....

फोमोस पे......

लीडर ने सोच लिया था जब इस बार वो वापस जाएंगे वह तो सबसे पहले तो पंकज का हाल चल पूछना hai....uske बाद उनको खबर निकालनी है की सैतान कहा कहा चिप्पे हुए hai.....wo सोच रहा था की सायद हेडोफ़्फ़िस उनको मदद कर दे अगर वो उन् सैतानो को मर के उनके सामने ला दे तो.....

लीडर ने इस खबर को निकलने के लिए वह पे कुछ सोर्सेज निकली थी......

स्लेयर अभी भी एक कटपुतली की तरह वह पे दिन गुजार रहा tha.....bahar निकलने की थोड़ी सी भी उम्मीद आती तो वो तैयार हो जाता पर कामियाबी हाथ hi नहीं आ रही thi.....uske पास जो टटटस बनने हुए the....wo भी अब मिटने को आ गए the.....matlab साफ़ tha....wo टाटूस वो powers.....wo अब स्लेयर की बॉडी से जाना छह रहे the....unke हिसाब से अब वो बॉडी इस काबिल hi नहीं बच्ची की वो उनको संभल सके.....

स्लेयर din-b-din खुद को ऐसे hi देख रहा tha.....roj उठता उसके बाद काम फिर लड़ाई फिर काम फिर सो jaana.....yahi रूटीन था uska........Fumos बस अपनी सोच रहा tha.....wo ये देख रहा था की कैसे वो स्लेयर को अपने लिए बिलकुल सही बना lega.....ye एकदम उस बाप बेटे की कहानी के जैसा hi hai.....jaha बाप ओपन बेटे को बाप का सपना पूरा करने को बोल रहा hai...jiski वजह से बेटे का सपना वैसे का वैसा hi रह जाएगा.....

इसकी मदद अब बस एक लूसिफ़ेर hi कर सकता tha.....aur वो तो करना भी चाहता tha....usne थोड़ी तैयारी भी कर ली थी......

सतरंगे वर्ल्ड se.......usne अपने कुछ लोगो की बलि देने के बारे में सोच लिया tha.....Yuvraj भी तो उन्ही में से the......par kismat......kuch लोगो का फोमोस जाना तय hi हो गया tha.....waise तो कोर्ट उनको वह ना भेजती par......Elf कंट्री के प्रतिनिहि के कहने पे ये तय हुआ की अपराधियों को वह भेजा jaaye....aur किस्मत को फैसला करने दे iska.......waise भी उन् अपराधियों ने बस यही जवाब दिया था की किस्मत से उनका और डेमोस का कनेक्शन मिल गया था.....

हायर कोर्ट ने इस बात को मान liya.....par युवराज को लेके वो सब इस बात पे सहमत नहीं the......darasal कुछ लोगो को ऐसा लगने लगा की एल्फ किंग वापस से अपने बेटे दब को यिवऱज बनाना चाहते hai....aur उनका करा धराया है ये sab.....wo फसा रहे है युवराज को ताकि ऐस कुछ ho......aur इस बात को थोड़ा और पक्का कर दिया था दरबार में हुई बातों ne......kaise सिर्फ हां सुनने के बाद hi एल्फ किंग ने सब कुछ छीन लिया उससे....

हायर कोर्ट ने उनको राज परिवार का हिस्सा होने के नाते और साथ hi.....naa सिर्फ एल्फ नतीपन बल्कि स्ट्रेंज वर्ल्ड के लिए भी किये गए अच्छे कामो को देखते hue.....unko कोई सज़्ज़ा नहीं di,.....saath hi एक नोटिस एल्फ किंग को दी गयी की वो युवराज को उनके महल में रहने denge.....aur उनकी सभी तरह की जरुरत पूरी की jaayegi.....chukkki इस बात का पता नहीं है की क्यों एक युवराज के नाम का वररेंट जारी किया है डेमोस ने तो पता लगने tak....uspe ोी दबाव नहीं डाला jaayega....ek बाँदा भी भेजना था उनको एक कंमिती के लिए जिसका काम ये पता लगाना था की क्यों ये वररेंट निकला गया था......

वही कुछ गलतियां तो युवराज ने करि hi थी चुप के दूसरे प्लेनेट jaana......bas यही तो साबित हुआ tha.....aur कुछ nahi.....to इसको लेके उनको एक यन्त्र पहनाया गया जिससे उनकी मूवमेंट्स ट्रैक करि जाए....

आज के लिए इतना hi,,,,,,next में देखेंगे हम सैतानो के बार में कैसे पता लगते है ये sab.....saath में मधु का इंसानो से पहली बार milna....aur फिर लूसिफ़ेर का छोटा सा प्लान.....

:सिघ: अभी घर पे hi रहना सही hai.....bahar ना jaao......in केस आपको सिम्टम्स दिख रहे है कुछ वो बस सोनोरान के तो तरय kare....ghar पे hi खुद की मदद करने ki....aise hi मुँह उठा के हॉस्पिटल जाना सही नहीं hai...pahle तो वो लेंगे नहीं aapko.....phir वही ॉयजन और बीएड ये sab......to घर में hi रहो और सेल्फ कुरेन्टीने का पालन karo.....log इससे भी ठीक हो रहे है......
 
अपडेट - 84

लूसिफ़ेर बैठा हुआ था अपने महल में अपने जगह pe......samne कुछ लोग the......ek पे भरोषा अब उसके बस की बात नहीं thi.....usne उन् सब को कहा की जिन जिन को भी सतरंगे वर्ल्ड से फोमोस भेजा जा रहा है सभी को खबर पहुचाओ.....

उनसे बताया की उन् सब को इस बात से अवगत कराओ अगर वो सब लूसिफ़ेर का कहा मानेंगे तो वो उन् सब को वह से निकलवा dega......agar उन् सब ने वो किया to......warna वो भी जानते है किश जगह पे जा रहे है wo...Fumos किसी मौत के कुवें से अलग थोड़ी hai......waha टिकना है श किस्मत और साथ में खुद पे याक्किन होना chahiye.....ye दोनों होने के बाद भी चान्सेस काम hi होते है की आप बचोगे या nahi.....kya पता आज आपसे ज्यादा अच्छी किस्मत आपके सामने वाले बन्दे का है....

लूसिफ़ेर का दिया हुआ काम कुछ इस तरह tha.......usne कुछ 10 लोगो के बारे में पता करने को कहा tha...wo नहीं चाहता था ये लोग पूरी बात jaane.....aur उन् 10 में स्लेयर भी एक tha......Roj लड़ाई से पहले उन् सब को उन् 10 लोगो के बारे में जो भी जानकारी मिलती उसको लूसिफ़ेर को बताना था......

बताने का भी एक तरीका tha.....ab ऐसा तो था नहीं की वो लूसिफ़ेर को लव लेटर likhte......Priya Lucifer....hum अच्छे hai/....aasha है तुम भी अच्छे hoge......aur उसके बाद प्यार भरी baatein.....maan लो लिख भी देते तो वो भेज नहीं पाते.....

लूसिफ़ेर ने उसी के लिए तो अपनें लोगो को यहाँ पे बुलाया हुआ tha......ye लोग भाषाओं के बारे में बहुत कुछ जानते the......sanketik भासा और बोलने वाली लगभग हर एक bhasa......inn सब का काम था किसी चाँद की तरह फोमोस का चक्कर लगते रहना और वह पे ये जितने भी लोग the....unn सब की बातें लूसिफ़ेर तक pahuchana.......Lucifer ने इनको ऐसा इस लिए भी कहा था ताकि वो जो स्ट्रेंज वर्ल्ड से आये हुए लोग थे उनको लगता रहे ये लोग उनकी रक्षा के लिए है वह pe....bas एक भ्रम सा बना दिया था उन् सब के लिए.....

वो लोग लड़ाई से पहले किसी ुचे जगह पे जाते और आसमान की ओर देख सांकेतिक भाषा में या फिर अपने भासा में hi खबर दे dete.....ye प्रोसेस बहुत लम्बा जाने वाला tha.....par इसके अलावा और कोई रास्ता भी नहीं tha.......Fumos पे जो लोग पैदा हुए थे वो सब फोमोस के हिस्से hi the....aur वो गद्दारी कर नहीं सकते the.....bas ये एक रास्ता बच्चा था....

वही दूसरी तरफ......

सुबह का वक़्त था.......

वैसे तो मढ़ी जी जब से वह आयी thi.....tab hi से वो इंसानो के बारे में पूछ रही thi......par दक्ष के समझने पे की इस वक़्त ऐसे hi किसी के पास मिलने जाना सही नहीं है.......

मधु ने बात मान ली thi.....par ये भी कहा था वो सुबह होते hi निकल पड़ेगी मिलने को.....

मधु सुबह सुबह उठी thi......jis कमरे में वो सो रही थी उसके पास एक पेड़ लगा हुआ था जहा पे कुछ पंछी बैठे चहचहा रहे थे.......

मधु उनको देखने lagi....aisa नहीं था उसने पहले कोई पंछी नहीं देखा ho......dekha था उसने दूसरे प्लैनेट्स पे भी ये सब होते hi hai....par यहाँ पे उसने पहली बार देखा था तो बस उसकी खूबसूरती को देख रही thi.....usne देखा पास में hi एक खली मैदान hai....waha पे लोग टहल रहे थे......

मधु - Insann.......aakhir कार दिख hi गए ye.......mujhe उनसे बात करनी chahiye......sayad वो भानपुर के बारे में जानते हो.....

ये कुछ नहीं बहुत ज्यादा hi एक्ससिटेड thi.......Bed से उठी और दरवाजा खोल के चल दी बहार की taraf......par वह पे दक्ष मिल गए इसको......

दक्ष - अभी बहार नहीं जाना है और ऐसे कपड़ो में बिलकुल nahi......thoda ृक्क जाओ मैं इंसानो जैसा कुछ लेके आता hu......aur तुम बहार नहीं जाओगी अभी.....

मधु - इन् कपड़ो में क्या परेशानी hai.....aapko पता भी है ये बहुत ख़ास hai......main जब आ रही थी तब मु.....

दक्ष - हां हां खास है इसी लिए तो bola,....pehen के बहार मत जाओ ख़राब हो गया to....aur तुमको तैयार नहीं होना kya......thodi देर में तैयार होक आ जाओ मैं खाना लगा रहा हु......

मधु को भी ये बात सही lagi....w.aise भी कल से आयी थी कुछ खाया नहीं था usne.....aur ये उसका इंसानो वाला पहला खाना होना था sayad......to वो चली गयी अपने रूम mein.....Daksh ने कुछ पुराने कपडे जोकि नीलम के the.....wo उसके लिए निकल दिए the......kam चलने के लिए.....

दक्ष बहार आके खाना बनाने लग gaye......uske बाद ऊपर पंकज के पास gaye.....usko तैयार karne.....baaki सब तो ठीक था uska....par उसके haath.....wo अभी भी चले से भरे पड़े the.....Daksh ने कोशिश की उनको ठीक करने की पर वो ठीक नहीं कर पाया उल्टा उसकी वजह से पंकज को दर्द होने लगा tha......Daksh समझ गए थे की ये किसी बड़े जादू के वजह से हुआ hai.....isko वक़्त और निर्मल दवाओं से hi सही करना सही hoga.....aise hi कोई और तरीका थोड़ा रिस्की हो सकता था.....

ऊपर आके दक्ष ने उसके लिए पहले तो पानी तैयार kiya.....uske बाद उसको उसके हाथों को साफ़ करने लगे usse......jab दक्ष ये कर रहे थे तब पंकज सो रहा tha....aur अच्चानक से गरम पानी उसके जखम पे लगा तो उसको दर्द हुआ और वो चिक्ख पड़ा......

यहाँ मधु आराम से रेडी होक नीलम के कपडे पहन बहार आ hi रही थी की उसको ये आवाज सुनाई di......usko लगा सायद दक्ष को कुछ हुआ hai.....to वो ऊपर की ओर जाने लगी देखने ko.......kal जब रात में वो आयी थी यहाँ पे तो ऐसा कुछ बताया नहीं था उसको दक्ष ने की घर में कौन है कहा hao.....bas एक रूम दे दिया और कुढ़ पंकज के पास चले गए थे....

मधु ऊपर आयी उसने देखा एक कमरे का दरवाजा खुला हुआ tha.....waha पे दक्ष किसी का हाथ पकडे हुए था और पानी से उसका हाथ साफ़ कर रहा था कपडे se......(yaha पे जादू का उसे कर सकता था wo.....par वो बाप बेटे का lagao....wo केयर करते है एक दूसरे ki....par दिखते नहीं hai......haa शहरों की बात और hai....par हमारे यहाँ ऐसा hi होता है.....)

मधु ने दरवाजे को पूरा खोला और अंदर dekha......ek लड़का था वो बिस्तर पे लेता हुआ tha.....ab आखें खुली हुई थी uski.....wahi दक्ष पानी से साफ़ कर रहा था हाथों को.....

पंकज ने देखा दरवाजे पे कोई लड़की कड़ी हुई thi.....usne एक बार उसको dekha......phir.....

पंकज - Papa......ye.....

दक्ष ने उसकी आवाज सुन्नी और िर उन्होंने भी दरवाजे की ओर dekha....waha पे मधु कड़ी थी.....

दक्ष - अरे तुम यहाँ आ gayi.....Ye मधु hai.....Rajkumari है ये निक्स समुदाय ki.....jaante हो ना उसके बारे mein.....aur ये है मेरा beta......Pankaj......tum निच्चे जाओ मैं आता हु अभी इसको लेके....

मधु - नहीं कोई बात nahi.....aap कर लो पहले ये काम मैं वेट कर लुंगी....

दक्ष - हम्म बस थोड़ी der...iske हाथों में दवाई लगनी है बस....

मधु - वैसे इनको हुआ क्या hai.....ye हाथों में ऐसे छल्ले.....

दक्ष - किसी बड़े जादू के कारण हुआ है.....

मधु - hmm....main देखूं क्या इसको....

दक्ष - तुम िन्न्न सब में क्या karogi.....tum निच्चे चलो.....

अभी वो बोल hi रहे थे की घर का बेल्ल बजता है.....

दक्ष - लगता है पड़ोस से तुम्हे देखने के लिए आयी होगी wo......tum रूक्को मैं उनको बता के आता हु आज मैं घर पे हु तो जरुरत नहीं है.....

दक्ष वह से निच्चे चले जाते है वही मधु पंकज के हाथ देख रही थी.....

मधु - घाव तो गहरे लग रहे hai......aisa कौन सा जादू कर रहे थे.....

पंकज - हमले को उल्टा करने वाला jaadu.....bas उसी में थोड़ा भटक गया और ये हो गया......

मधु - hmm......saamne वाला सच में बहुत शक्तिशाली रहा hoga.....tabhi.....Main छू सकती हु क्या.....

पंकज - Arre.....ye क्या कर रही हो........

मधु ने सुन्ना नहीं उसने निच्चे से थोड़ा सा पानी liya.....uske हाथ पे रखा और उसके हथेली को अपने हाथों के बिच में ले लिया......

पंकज - अरे दर्द हो रहा hai.....tum रा.....

मधु - चलो एक से 10 तक की गिनती गिन्नो और देखो मेरा जादू......

पंकज - क्या बोल रही ho.......tum रहने do......kahi हाथ को कुछ और हो गया to......ye क्या हो रहा है......

पंकज बोल hi रहा था की उसकी हथेली में बहुत ठंडा ठंडा लगने लगा tha....aur बस यही नहीं उसने जब अपने हाथ की ओर देखा तो पानी चमक रहा था किसी हीरे की tarah.......wo पानी उसके सरीर के अंदर चला गया था और उसके जो नस थोड़े बहुत डैमेज हो गए थे वो भी ठीक हो गए the.....par उससे पहले छम्मक रहे थे......

मधु ने वो हाथ छोड़ दिया......

पंकज हाथ को हिल्ला पा रहा था अपनी अंगुलियां अच्छे से हिल्ला पा रहा था अपनी kalayi.....wo अपने इस वाले हाथ में hi लगा हुआ था की उसको दूसरे हाथ में भी ठंडक महसूस होने लग गयी......

तभी वह पे दक्ष आ gaye.....unhone देखा मधु ने पंकज का हाथ पकड़ रखा है.....

दक्ष - ये क्या कर रही ho.......usko चोट लगी हुई है वह pe......chodo usko.....maine कहा था ना इन् सब में मत लग.......

दक्ष जब तक अपनी बात कह रहे थे तब तक मधु का काम ख़तम हो gaya.....usne वो वाली हथेली भी छोड़ दी......

मधु ने कुछ कहा नहीं बस साइड में जाके कड़ी हो गयी.....

दक्ष पंकज के हाथ को देखने लगा और देख के चौक gaya......uske हाथ एकदम से सही the......par फिर तुरंत उसको गुस्सा आ गया.......

दक्ष - ये क्या किया tumne......ander के जो जखम है वो अब ठीक नहीं हो paayenge......ye सब करने की क्या जरुरत टी......

पंकज - Papa......sab ठीक कर दिया इसने तो ये देखो.......

वो अपने हाथ को हिल्ला के दिखा रहा tha.....uske बाद उसने पास में रखे हुए फूलों को हवा में उठा कर दिखाया.....

दक्ष को समझ नहीं आ रहा था की आखिर ये हुआ kaise......wo पंकज को देखते तो कभी मधु को जो अभी भी साइड में कड़ी थी,.....

पंकज ने जो फूल हवा में उठाया था वो फूल मधु के पास लेके गया और उसको दे दिया....

पंकज - ये lo.......thanks

मधु ने फूल ले लिया.....

दक्ष ने सोचा की अभी hi पूछ ले पर वो इस वक़्त जो जैसा था वैसा hi रहने देना चाहते the.....to उन्होंने बस दोनों को खाना खाने आने को निच्चे bola....aur खुद भी चल दिए निच्चे.....

उनके दरवाजे से बहार जाते hi.....Madhu.....

मधु - ये फूल से कोई काम नहीं चलने wala.....aapko मेरी मदद करनी होगी.....

पंकज - Main....madad....tumhari.....kaise.....

मधु - सब bataungi...abhi चलो निच्चे मुझे भूक लगी हुई है......

वो दोनों hi निच्चे चले gaye.....nicche पहुंचे तो वह पे वो लेडी पहले से thi.....jo पंकज का ध्यान रख रही thi.......Daksh ने हु उसको रुकने को बोलै था ताकि साथ में नास्ता कर ले और ाबह्र जाहिर कर sakke.....Daksh अपना....

लेडी - (मधु को देख के) ये कौन hai.....aapne अपने रिलेटिव को बुल्ला लिया क्या पंकज का ध्यान रखने को....

दक्ष - Nahi.....aisa नहीं hai.....ye ये यहाँ पे पढ़ने को आयी hai......Pankaj के साथ hi पड़ेगी ye.....abhi वह छुट्टी है तो ये यहाँ है...

मधु - आप इंसान हो.....

लेडी - हां इंसान hi तो बातें करते है naa.....dekho मैं तुमसे बात कर रही हु....

दक्ष - अरे उसका वो मतलब नहीं tha.....ye बस मज़ाक कर रही है

लेडी - हम्म ये आज कल के बच्चो के मज़ाक भी समझ नहीं aate......waise ये है kaun.....kya नाम है बीटा तुम्हारा......

दक्ष - इसका नाम मधु hai.....ye....ye मेरी दूर की भांजी hai......Pankaj की बहन है....

लेडी - accha......Pankaj रूक्को मैं तुमको खिला देती hu.....aise में कैसे खा पाओगे....

मधु - अब ठीक है wo....haath सही हो गया उनका.....

लेडी - बीटा मैं नर्स रह चुक्की hu....itni जल्दी ये ठीक नहीं होते.....

दक्ष बे पंकज को कुछ इशारा kiya.....usne जादू से अपने हाथों पे पत्तियां लगा li....aur फिर वो लेडी उसके पास आयी और खाना खिलने लगी.....

लेडी - बहुत मज़ाक करती है ये मधु....

खाना खाने के बाद वो लेडी अपने यहाँ वापस चली गयी वही मधु मुँह बना रही thi.....ye इंसान कुछ समझ hi नहीं रहे the.....aur ऊपर से वो झूटी भी बन गयी थी.....

दक्ष - ऐसे मिलोगी इंसानो से तो वो भाग jaayenge.....kuch hi इंसान जानते है मैजिक के बारे में सारे नहीं जानते समझी....

दक्ष की बात से उसको पुजारी जी की कही हुई बात भी याद आ गयी की इंसानो से चुप्पा के रखना है मैजिक को.....

मधु - हम्म आप सही कह रहे ho......main बस कुछ ज्यादा hi उत्सुक हो गयी थी......

दक्ष - आगे से ध्यान rakhna.....abhi के liye......jao कमरे में jaao....main तुम्हारे कपडे लेके आता हु.....

पंकज - पापा इसको लेके hi चलते है naa.....humko क्या पता इसको क्या पसंद है.....

दक्ष - हमको नहीं मैं जा रहा hu....tum अभी ठीक हुए हो अंदर hi rahoge.....aur बीटा मैं जानता हु मुझे क्या लेना है क्या nahi.....iss लड़की का ध्यान रखना...

दक्ष इतना बोल वह से निकल गया अब बच्चे थे बस पंकज और मधु......

पंकज - तो तुम राजकुमारी ho......sahi hai....waha तो बहुत से नौकर होंगे.....

मधु - नहीं ऐसा कुछ नहीं hai.....ab तुम बताओ मेरी मदद कैसे करोगे.....

पंकज -अरे हां तो कैसी मदद चाहिए थी tumko.....jab वो पता चलेगा तब hi कुछ कर सकते है ना.....

मधु - मुझे भानपुर के बारे में जानना hai.....tum मुझे वह लेके चलोगे....

पंकज - जानने के लिए वह जाना जरुरी है kya.....waise भी अभी मैं नहीं जा रहा kahi....par मदद कर सकता hu......aao मेरे पीछे....

पंकज आगे आगे जाने लग gaya......Study रूम में पहुंच के उसने थोड़ी देर यहाँ वह पे कुछ ढूंढा और फिर एक किताब लेके टेबल पे आ गया......

पंकज - थोड़ा पीछे हत्तो......

उसने किताब kholi......kitab खुलते hi उसके ऊपर एअर्थ बना हुआ था......

पंकज - भानपुर बोलै ना......

मधु - haa......ye क्या है वैसे....

पंकज - ये पापा ने बनाया tha.....apne किसी दोस्त के saath......rukko.....Bhanupur तो 5 दिखा रहे है यहाँ पे......

मधु - paanch.....par पांच कैसे हो सकते है....

पंकज - यहाँ ऐसा hi होता hai.......ye गाओं के नाम मैच कर जाते hai.....aur कुछ पता है तुमको उसके बारे में......

मधु - हम्म उस गाओं के पास में ना सायद एक जंगल था और अब वो पार्क बन गया hai.....usme एक तालाब है.....

पंकज - हर गाओं में तालाब होते hai......rukko....dekhta हु जैसा टीम बता रही हो वैसा कुछ है भी या नहीं.....

पंकज वापस से देखने लग गया की वैसी कोई जगह है भी या नहीं......2 जगह वैसी thi....jaha आस पास जंगल था और उसमे एक तालाब था......

मधु - अरे वो जंगल अब पार्क बन गया है वह लोग आते जाते रहते है...

पंकज - ठीक है रूक्को.......

पंकज वापस से ढूंढने लगा की तभी दरवाजा खुलने की आवाज aayi......Pankaj ने किताब बंद करि और जहा से ली थी ठीक उसी जगह रख di....aur एक आम सा मैप लेके आ गया टेबल के पास......

पंकज - ये dekho.....ye यहाँ का नक्शा hai....iski मदद से हम चीजजें धुंध सकते hai......Bhanupur....bhi मिल hi jaayega....arre आप आ गए....

मधु बस देखे जा रही थी कैसे उसने तुरंत से सब बदल दिया......

दक्ष - हां आ gaya......Madhu ये lo.....ye कुछ कपडे hai.....koi और चीज़ चाहिए तो बता देना......

मधु - अब मैं बहार जा सकती हु वह इंसानो के पास......

दक्ष - ठीक hai.....par तुमको याद रखना होगा कैसे बात करनी hai......aisa ना हो वो तुमको पकड़ ले......

मधु - हम्म ठीक hai......aur मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली.....

दक्ष - पंकज जाओ तैयार हो जाओ और इसको लेके जाओ bahar......ab तुम ठीक ho.....to मैं कुछ काम कर आता hu.......isko पार्क में लेके जाओ......

पंकज - पार्क में....

दक्ष - haa......aur ज्यादा दूर नहीं जाना hai.....Madhu अपना ध्यान रखना.....

वही दूसरी तरफ हमारे यहाँ अलग hi हिसाब चल रहा था सुबह सुबह सब रेडी hue......dyaan लगाने के बाद सब एकदम से तैयार हो गए थे की आज निकलना hai......isko फेसेस में बात गया tha......1st फेज था मेरा और निकिता का रेड डॉटेड एरिया में जाना और पता लगाना वह पे कुछ गड़बड़ हो रही है या nahi.....agar हां तो हमको वह से निकल जाना tha....aur आके बाकी सब को खबर देनी thi.....uske बाद का फेज इन् सब का tha......Dada- दादी गाइड करने वाले थे और चाचा चची उस एरिया को सिक्योर करने वाले the.....aur उस शैतान के पास K.Bua बुआ और रूपल दीदी जाने वाली thi.....iss बात को लेके ना जाने कितनी बहेश हो गयी सुबह subah......inn तिण्णो का कहना था ये खुद को प्रूफ करना चाहती थी......

इनके इतना कहने पे दादा दादी इनकी बात मान लेते hai.....aur उन्होंने जैसा पता लगाया था उस हिसाब से एक कमज़ोर सा शैतान के बारे में पता चला था किसी गाओं के pass.....jaha पे वो लोगो के जानवरों को खा जाता tha....ab तक कोई इंसान को मारा हो ऐसी कोई खबर नहीं आयी thi.....sayad ये वजह भी थी की उन् तिण्णो को जाने दे रहे थे इस प्लान के हिसाब से.....

बस हम निकल liye......gaon के पास पोर्टल से हम पहुंच gaye.....aur फिर जैसा की बताया गया था मैं और निकिता गाओं में gaye.....waha पे लोगो से बात करने को......

एक चौपाल सा बना हुआ था वही पे कुछ लोग बैठे हुए the......hum दोनों वही पे चल दिए.....

मैं - पूछो इनसे.....

निकिता - suniye....yaha आस पास कुछ अजीब होता है क्या.....

वह पे कुछ लोग थे बैठे hue......unho में से एक बोलै.....

" आप कौन....."

मैं - हम यहाँ पे रिसर्च करने आये hai.....sunna है यहाँ कुछ अजीब होता है.....

"क्या अजीब होता है हमको भी बताइये"

मैं निकिता को देख रहा था निकिता mujhe.....ab इसको क्या बताये क्या अजीब होता है हमको खुद नहीं पता था यहाँ अजीब क्या होता hai......Dada दादी ने ये बताया hi नहीं था.....

मैं - वही तो पता करने आये है.....

"गज़ब हो be.....tumko जब पता hi नहीं है की क्या अजीब है तो तुम कैसे आ गया यहाँ अजीब चीज़ ढूंढने तुम क्या ऐसे सबके घरे घुस जाओगे...."

"आई क्या हो रहा है re......tu सब को कहते है समझ नहीं aata.....sala तू लोग के चक्कर में जानवर सब चोरी हो जाता hai......kitna बार कहे hai.....dhyaan रखा karo.....par ससुर तुम हो के....."

एक आदमी पीछे से आ रहा था और वह पे बैठे सभी लोगो को बोल रहा tha.....wo वह तक पहुँचता उससे पहले hi वो सब के सब भाग गए वह से......

"का रे तू लोग कौन hai.....kaahe आये है िहः....."

मैं - Wo.....wo हम रिसर्च करने आये hai......yaha कुछ अजीब होता है ना उसी को लेके.....

"टीवी वाला है का तू लोग....."

निकिता - नहीं टीवी नहीं हम यहाँ के बारे में बस पता लगाने आये hai....aap मदद कर सकते हो क्या.....

:"हुंका पास टाइम नहीं तू लोगन के mada.......haa हम करेंगे मदद आप पूछो क्या पूछना है....."

निकिता ने उसको हिप्नोतिजे कर लिया tha.....pahle भी वो कर लेती पर सायद उतने लोग थे तो नहीं किया.....

निकिता - क्या अजीब होता है यहाँ पे बताओ......

वो - बहुत कुछ अजीब होता है इस जगह पे ऊपर एक पाथेर से पानी गिरता रहता hai.....yaha पे एक घर में भूत है....

मैं - ये किसी काम का लग रहा है देखो बस बकवास कर रहा है ये......

निकिता - चुप raho....tum भी जाके पूछो किसी से......

मैं भी वह से निकल गया उसके पास se......thoda आगे आया तो एक बुध्दि औरत बैठी हुई thi......pata नहीं क्या सोच रही थी.....

मैं - Maaji......maaji......aap ठीक हो.....

एक बहार में उनको सुनाई hi नहीं diya.....jab 2 बार आवाज लगायी तब उन्होंने सुन्ना......

वो - Haa.....kaun....kaun है तू.....

मैं - माँ जी यहाँ पे काम से आया हु कुछ पूछना tha......aap बताओगे....

वो - हां pucch......agar पता होगा तो बता दूंगी.....

मैं - ये यहाँ गाँव में कुछ अजीब सा होता है kya.....jaise लोग गायब हो gaye.....aisa कुछ....

वो - मेरा pota.....mera पोता गायब हो गया tha.....aaj तक उसको वापस नहीं दिया......

इतना बोल वो रोने लग गयी.......

मैं - उह कब की बात होगी ये.....

वो कुछ बोलने के हालत में नहीं रही thi.......Main कुछ करता उससे पहले hi सायद उसको कोई जान्ने वाला आ गया और उनको अंदर लेके चला गया......

निकिता - इसने कहा की यहाँ पे जानवर और छूटे बच्चे ये गायब हो जाते hai.....jungle के साइड में......

मैं - मुझे भी एक बच्चे के बारे में पता चला hai......hume इसके बारे में उनको बताना है......

हम थोड़ी और जानकारी लेके चल दिए wapas......portal से होते हुए उस जगह पे जहा पे सभी the......Chacha और चची तो वह से जा चुक्के the....jaisa की उनका काम tha......aas पास के इलाकों में देखना की वो शैतान बहार ना चला जाए लड़ाई के waqt......wahi दादा दादी आये नहीं थे यहाँ pe......to बाकी के 3no को हमने ये खबर दी......

वो तिण्णो पहले से hi तैयार हो रही थी......

मैं - वो शैतान बच्चे और जानवर उठता है......

रूपल दीदी - इंसानो को भी नुकसान पंहुचा रहा है wo.......sazza अच्छे से देनी होगी.....

निकिता - मुझे भी ले chalo.....main इसके साथ यहाँ क्या करुँगी....

मैं - क्या मतलब है tumhara......aur प्लान के हिसाब से हमारा काम ना चाहते हुए भी पूरा हो चूका है.....

रूपल - हां इस बार यही raho.....aage तुमको भी महिला मोर्चा में शामिल कर लेंगे....

वो तिण्णो चल दिए आगे.....

उनका जाना था की तभी ज्वाला की आवाज आयी......

ज्वाला - पोलर बेयर के कबीले पे जो वो बट्स है वो अपना इलाका बढ़ा रहे hai.....wo उस कबीले से आगे भी आ रहे hai.....jald hi कुछ करना होगा.....

मैं - क्या बात कर रहे ho......aisa कैसे हो गया......

ज्वाला - इस बारे में पता नहीं चला hai......par अगर इसका हल जल्दी ना निकला गया तो मुश्किल बढ़ती जायेगी.......

निकिता - रूपल दीदी को अपने पावर्स पे जल्दी से काबू पाना hoga......kya उन्होंने इतना काबू नहीं पा लिया की वो इन् सब को संभल सक्के......

मैं - उस दिन तो नहीं संभल पायी thi.......main उनसे बात करता hu.....kya तुम वह एक बार देख आओगी हालत कितने ख़राब hai.....Main यही rukunga.....agar किसी मदद की जरुरत पड़ी तो....

निकिता - ठीक hai.....Jwala पोर्टल खोलो.....

ज्वाला ने पोर्टल खोला और उससे होते हुए निकिता अंदर चली gayi.....par जाते जाते ज्वाला ने कहा की अभी वो यहाँ पे किसी को भी भेज नहीं paayega......wo वह पे अपने जगह को बचने में अपने लोगो को लगाना चाहता hai.....to कुछ वक़्त तक संभल क रहे.....

मैंने भी उसको ऐसा hi करने को kaha......par ander......ander जंगल में ये तिण्णो thi....aisa नहीं था की इनपे याक्किन नहीं mujhe...par फिर भी......

मैं आगे badha......Jungle के अंदर जाने laga.......kuch दूर तो गया hi था की अजीब से बदबू आने लग गयी जैसे कोई मांस सद्द रहा हो......

मैं उस ओर जाने लगा की तभी रूपल दीदी की छिलने की आवाज सुनाई दी......

मैं - अलबूस कूपर बहार aao......ye निश्चित करो उन् सब को कुछ ना हो.....

वो दोनों बहार आये और अपने काम में लग gaye.....Main भी आवाज की ओर hi जा रहा था की तभी वापस से चिक्खणे की आवाज आयी और इस बार उस बदबू वाले जगह से hi aayi.....main उसी ओर चल diya......waha पंहुचा तो कोई बकरी रही hogi.....jiski बॉडी पड़ी हुई thi.....uske सरीर में बच्चा हुआ मांस का टुकड़ा एकदम से सद्द गया था और वह बदबू मार रहा tha.....abhi उसको देख रहा था की फिर से चिल्लाने की आवाज.....

मैं आगे gaya......uss आवाज की oor.....waha पे कोई नहीं tha.....aise hi आवाजों का पीछा करते हुए मैं एक खली जगह पे पहुंच gaya......wo तिण्णो भी वही पे thi.....tinno आपस में चिपकी हुई थी और अपने हाथों में अपने अपने हथियार लिए थी......

उनके आस पास एक दो नहीं बहुत सारे कुत्ते जितने बड़े बड़े अजीब से दिखने वाले जीव the.....pata नहीं क्या थे wo.....Main उनको देख रहा था की तभी मेरे आस पास भी वो आ गए थे......

मैंने अपनी तलवार बहार bulayi.....pata नहीं ये अलबूस और कूपर कहा पे the......yaha पे तो नहीं दिख रहे थे वो दोनों......

मैं - आप सब ठीक हो ना.....

बुआ - तू यहाँ क्या कर रहा hai...ye बहुत सारे है संभल के.....

मैं - आप भी संभल के raho....main देखता हु इनको.....

मैंने अपनी तलवार को दोनों हाथों से पकड़ा और वो चमकना शुरू हो गया मतलब थंडर एलिमेंट से वो चार्ज हो रहा था.....

रूपल दीदी को देखा तो वो भी अपनी कुल्हाड़ियों को लेके कुछ तो कर रही thi.....same दोनों बुआ का भी था......

उन् सब जानवरों में से एक मेरे ऊपर कुद्द के आया और मैंने अपने तलवार से उसको 2 हिस्सों में काट diya......aur सुक्की ठुण्डीर भी tha.....to वो जल गया था.....

उसके बाद वो सब आने लग गए और हम सब अपने अपने हथियारों से उन् सब को मार रहे the.....par ये मर नहीं रहे थे sayad......aur नहीं तो इन् सब की तादात बहुत hi ज्यादा thi.....kyunki बोडियर्स तो निच्चे दिख रही थी inki.......inn सब की तादात सच में बहुत ज्यादा होगी तभी ये ख़तम hi नहीं हो रहे the....balki और आते hi जा रहे थे....

मैं - अलबूस कूपर कहा हो.....

ध्रुव - वो अपने काम में लगे हुए hai......ye जगह सही नहीं है तुम सब के liye....aur ज्वाला भी नहीं है अभी to....abhi यहाँ पे आना खतरनाक है.....

मैं - ज्ञान बाद में दे dena.....pahle इनको ख़तम करने के बारे में बताओ......

ध्रुव - तुम्हारे अंदर भी उतनी hi एनर्जी है जितना तुम्हारे ड्रैगन्स में hai.....ab बाकी तुम समझो.....

मैं उन् सब को मारता जा रहा था और सोच रहा tha.....energy बहुत ज्यादा है मुझमे.....

मैं - Bua......jab मैं कहु तो आप सब जम्मीं से ऊपर कुद्द jaana.......K.Bua आप विंड एलिमेंट वाली हो naa.......kuch देर तक आप में से कोई निच्चे जमीं को टच नहीं करना chahiye.....samjhe.....

वो लोग भी लड़ते हुए मुझे हां bole.....aur मैंने अपना एक बार बहुत तेज़्ज़ से अपना तलवार चलना शुरू kiya....jisse आस पास थोड़ी जगह खली hui....aur वो जीव थोड़ा पीछे हैट gaye....bas यही तो चाहिए tha....thoda सा waqt......maine अपनी तलवार ऊपर की ओर उठायी.....

मैं - K.Bua अभी.........

मेरा ऐसा कहना था वो तिण्णो जमीं से ऊपर कुड्डी और k.Bua ने तिण्णो को hi हवा में संभल लिया......

मैंने अपनी तलवार जमीं में गाड़ di.....aisa करने से मैं एक गोले के अंदर आ gaya.....ek gola....jisme करंट दौड़ रही thi.....kuch जीव उसके इस पार आने की कोशिश कर रहे the....par वो उनको छुट्टे hi भाफ बन जा रहे थे.....

मैंने अपनी तलवार का हैंडल पकडे रखा और K.Bua को थोड़ा और ऊपर ले जाने को कहा sabko.....unhone वैसा hi kiya......aur मैंने हैंडल को छोड़ diya......mera वैसा करना था और वो गोला जिसके अंदर मैं tha.....wo गोला बढ़ने laga......aur जो कोई भी उसके टच में आता वो सारे के सारे भाफ बन जा रहे थे......

K.Bua ने जब ये देखा तो उन्होंने और ऊपर ले लिए खुद ko.....taaki उनसे टच ना हो......

वो जीव जिनसे वो पुररी जगह भरी पड़ी thi.....wo सब के सब भाफ बनते जा रहे the......kuch पेड़ पौधे भी उसके चपेट में आये पर वो बच जा रहे the.....jab मैंने देखा की आस पास अब जगह बिलकुल खली hai......maine अपने तलवार को वापस से pakda....aur जब पकड़ा तो वो घिरा वापस से छूटा हो gaya.....aur जब उसको जम्में से बहार निकला तो वो घिरा भी गायब हो gaya.....bacchi हुई थी तो उन् सब के जलने की बदबू......

K.Bua सबको लेके निच्चे आ गयी थी......

बुआ - tu....tu ठीक hai.......itni अच्छी तरह से तलवार चलना कब सीखा टुन्ने और ye.....ye क्या था....

मैं - इसके बारे में बाद में बात करते है पहले rukko......Albus.....Cooper कहा हो dono....saamne आओ.....

मैंने बुलाया पर वो दोनों तब भी नहीं aaye.....Main वही पे आँख बंद करके खड़ा हो gaya......aur जो मैंने देखा उसकी वजह से बहुत गुस्सा aaya......ye जीन जीवों को अभी होने मारा था उनसे साइज में थोड़े बड़े बड़े जीव चाचा चची के पास उनको घेरे खड़े हुए the.......aur अलबूस और कूपर उन् दोनों की मदद कर रहे थे उन् सब को मारने में......

मैं - अलबूस दोनों को कवर karo....aur Cooper......jalla daalo.....ek भी बचना नहीं चाहिए.....

दोनों ने ठीक वैसा hi किया जैसा मैंने कहा tha.......Albus ने चाचा चची के िरर्ड गिर्र्द एक घेरा बना diya.....aur Cooper....wo तो जैसे फट गया वह pe.......aag की लपटें hi दिख रही थी बस वह pe........iss बार तो पेड़ पौधे भी नहीं बच्चे थे.....

चाचा चची को अपनी आखें बंद करनी पड़ी thi......pata नहीं कैसे ये दोनों एक hi जगह पे मिल गए थे inko.....warna दिक्कतें और भी बढ़ जाती.....

बुआ - वह पे आग लगी है sayad.,,,,,,dekho धुवां उत् रहा है वह से.....

मैं - चाचा चची है वह pe.....chalo यहाँ का काम ख़तम हो गया hai......hum सब उस ओर जाने lage....chacha चची के होने की बात सुनके ये तिण्णो जल्दी जल्दी जा रही थी......

मैं पहुँचता उससे पहले hi वो पहुंच गए वह पे और रूपल दीदी ने अपने वाटर एलिमेंट से वह लगी हुई आग को ख़तम kiya.....ghass तक पूरी तरह से जल चुक्का था.....

वह पे अब वो जीव भी बस राख बने हुए रह गए थे.....

मैं - अलबूस कूपर bas......wapas आ जाओ.....

वो दोनों वापस मर्रे पास आ gaye.....wahi चाचा चची ने जब देखा वो अब उस गोले में बंद नहीं थे तो वो भी बहार aaye....unhone हमको आते हुए देखा.....

चाचा - तुम सब ठीक हो naa.....inki तादात तो बहुत ज्यादा thi.....humne सोचा भी नहीं था इतनी hogi......agar बस हम दो आते तो गड़बड़ हो जाती.....

रूपल दीदी - चुप raho.....aur आगे से अकेले जाने के बारे में सोचना भी मत.....

चची - निकिता कहा गयी....

मैं - वो गाओं में hi hai.....thodi देर में आ jaayegi......aap दोनों ठीक हो ना....

ध्रुव - अभी जो मुख्या था वो बच्चा हुआ hai.....ye सब तो वो थे जिनको उसने बनाया था......

मैं - क्या बोल रहे ho......kaha पर है वो.....

ध्रुव - ये मैं कैसे बता सकता hu......Ablus और कूपर को bhejo.....wo उसी के पीछे यहाँ आ गए थे पर ये सब देख वो ृक्क gaye.....wo यही कही जंगल में होगा.....

मैं - अलबूस कूपर बहार aao....aur ढूंढो usko......jaise hi मिले मुझे बताना......

चची - हम ठीक है......

मैं - आप सब निकलो मैं निकिता को लेके आता हु.....

मैंने जब ये बोलै तो वो सब मुझे घूरने लगे जैसे क्या बोल दिया हो maine......par बुआ को मैंने इशारे में सबको वह से ले जाने को bola....aur वो मान भी gayi.....sayad इस वजह से की उनको लगता था ओल्ड आउल बता hi देगा अगर कोई मुशीबत हुई to....aur ये सच भी था.....

बुआ उन् सब को वह से लेके निकल गयी.....

अलबूस और कूपर उस मुख्या सैतान को धुंध रहे the.......tabhi वह पे पोर्टल खुल्ला और निकिता बहार आ गयी.....

निकिता - ये कहा आ गए tum....humko तो बहार रहने बोलै था ना.....

मैं - कुछ नहीं अभी चुप रहो.....

कूपर को उस जीव का पता चल गया tha.....wo जंगल के बिछ में tha......Albus भी उसी तरफ जा रहा था और मैं भी निकल गया उस ओर जाने ko.....par ये निकिता भी मेरे पीछे आने लग गयी.....

जब उस शैतान के पास पंहुचा hi था तभी अलबूस मेरे अंदर आ गया और मेरी ड्रेस बदल gayi....aur उसके बाद Cooper.....jiske बाद मेरे हाथ में तलवार आ gayi.....iss बार ये दोनों मेरे अंदर hi थे तो ताककट भी और ज्यादा hi थी....

मैं - कहा है वो......

कूपर ने मुझे बताया वो किसी पेड़ के ऊपर बैठा हुआ tha.....main उसी ओर जाने laga.....aur वो Nikita....wo तब भी पीछे आ रही thi....mjujhe उसको मन्ना कर देना चाहिए था.....

मैं उस पेड़ के पास pahucha......ek अजीब सा लम्बे हाथों वाला सैतान पेड़ पे बैठा हुआ tha.....uske दांत नुकीले थे.....

निकिता - ये क्या है...

मैं - tum...tum यहाँ क्या कर रही ho....wahi रहना था तुमको.....

निकिता - मैं वह अकेले क्या करती......

निकिता ने अपनी बात कही थी की वो शैतान कूद पड़ा उसके oor......par उसको छू पाटा उससे पहले hi मेरी तलवार उसके पेट के आर पारर चली गयी थी.....

मैं - क्या karti....dikhta नहीं यहाँ पे खतरा hai....aur तुम ऐसे hi निहथे आ गयी हो यहाँ पे.....

निकिता - निहथे मैं कही नहीं jaati......tumko देखना है मेरे पास क्या क्या है......

इतना बोलने के बाद तलवार चाक़ू khanjaar.....sab दिखने लगी mujhe.....wahi वो शैतान जो अभी भी मेरे तलवार में लटका हुआ था उसको किसी तरह से होश आ गया tha.....aur उसने अपने आंबे हाथों को जमीं पे रखा और सहारा लेते हुए तलवार से निकलने की कोशिश करने laga.....par निकिता ने उसको देख लिया tha....aur उसने अपने खंजर से उसका सर्र hi काट दिया....

निकिता - देखा इस्सलिये भी हु yaha......ek तो ध्यान होता नहीं तुम्हारा इन् चीज़ज़ों pe.....aur मुझे बता रहे हो......

मैंने अपने तलवार को थोड़ा मजबूरति से पकड़ा और अपने चन्दर एलिमेंट के बारे में सोचने laga.....jiske बाद उस शैतान की body.....wo उसी में जल के ख़तम हो gayi,....par सार तो इस निकिता ने पकड़ रखा था....

बॉडी जब जलने लगी तब उसने कहा इसका क्या करू.....

मैं - इसको भी जल्ला denge....ghar में दीवार पे थोड़ी ना टांगना है की देखो सैतान को मारा है.....

निकिता - टांग तो सकते hai....par कोई बात nahi.....isko मैं जला देती hu....usne उसको जला diya...aur वो भी ख़तम हो gaya.....uske बाद हम वह से निकल गए.....

आज के लिए इतना hi.....next में देखते है मधु ko......jaha वो कुछ इंसानो के साथ खेलने वाली hai....wais खुद भी इंसान hi है ये पर :सिघ: और उसके बाद निकिता से ये भी पूछना है की ज्वाला के यहाँ हालत कितने ख़राब hai.....aur भी कुछ बातें
 
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