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सुबह का वक़्त हो चला था हम सब hi अभी नास्ते के टेबल पे बैठे हुए the.....darasal नास्ता ख़तम हो hi गया था पर आज चाचा चची दादा दादी ये सब किसी काम से जा रहे the....aur ये होता नहीं था aisa.....aaj छुट्टी का दिन था सबको एक साथ रहना होता था पर आज काम था तो bas....wahi बात वो बता रहे थे की वो तो आ नहीं पाएंगे आज तो हम खुद का hi कुछ प्लान कर ले....
दब ने पहले hi कह दिया था वो वापस जाना चाहता hai......pata नहीं कुछ ज्यादा सीरियस हो गया था ये या कोई और बात thi.....K.Bua ने कहा उसको की ृक्क जाए पर वो जाने को बोल रहा था तो उसको अपनी सहेली के पास छोड़ने को चली गयी.....
घर पे Main,Bua रूपल दीदी और निकिता hi थे अभी की तभी ओल्ड आउल की आवाज आयी.....
ओल्ड आउल - प्रतीक यहाँ पे कुछ गड़बड़ है सायद......
मैं - क्या hua....koi मुशीबत है kya.....tum पोर्टल खोलो मैं आ रहा हु......
ओल्ड आउल - नहीं वैसी बात नहीं है मुसीबत तो नहीं लग rahi.....par सायद तुमको ये जानना चाहिए....
मैं - तो पोर्टल खोलो.....
ओल्ड आउल - मैं कोशिश कर रहा hu....par तुम जहा हो वह नहीं खुल पा रहा है......
मैं - घर की सुरक्षा बधाई थी चची और दादी ne....sayad इस वजह se.....tum रूक्को मैं बहार आके बोलता हु खोलने को.....
मैं बहार जाने लगा.....
रूपल दीदी - ुये छोटू kaha....kaha जा रहा है....
मैं - वो दीदी बस ऐसे hi.....thoda बहार....
रूपल दीदी ने निकिता की ओर dekha....Main उन् दोनों को देखने laga....Nikita मुझे और रूपल दीदी को देखने lagi.....aur इतने में बुआ aayi.....aur वो हम तिण्णो को देखने लगी....
बुआ - ये क्या कर रहे ho....aise पागलों की तरह क्या देख रहे हो एक दूसरे को.....
रूपल दीदी - निकिता बता ना ये कहा जा रहा है....
मैं - आप उससे क्या पूछ रही हो मैंने बताया ना बहार जा रहा hu....thoda टहलने.....
निकिता - वही तो मैं कैसे bataun....aur आपने पूछा भी कहा बस मुझे देख रही thi....mujhe लगा कुछ हुआ है....
रूपल दीदी - ये अच्चानक से जा रहा था तो मुझे लगा इसने किसी से बात की है और तुमको पता चल गया इस लिए तुझे देख रही थी की तू बताएगी....
बुआ - निकिता तुमको कुछ पता चला की ये कहा जा रहा है....
निकिता - नहीं बुआ मैं कैसे जानूँगी.....
मैं - ये करते रहो आप सब मैं जा रहा hu....bade अजीब हो आप सब.....
बुआ - अच्छा ठीक है जा तू.....
मैंने एक बार उनको dekha....aise जाने को बोल रही hai.....phir वह से बहार निकलने laga....aur घर के आगे के गार्डन में आके ओल्ड आउल से पोर्टल खोलने को कहा.....
पोर्टल खुल्ला वह पे और मैं वह से स्ट्रेंज वर्ल्ड में चला गया.....
ओल्ड आउल वही पे था.....
मैं - हम्म बताओ क्या हुआ है.....
ओल्ड आउल - तुमको वो खून याद है naa.......wo 4 खून ठीक उसी तरह के 2 और खून हुए है कल.....
मैं - Kya......Wapas से सोसाइटी के लोग मारे gaye......Leemo कहा hai......mujhe उससे बात करनी hogi...aur तुमको समझ नहीं आता क्या देखने को बोलै था अभी तक कोई नहीं मिला तुमको....
ओल्ड आउल - नहीं ye...ye वो नहीं the....Society का कोई नहीं मर्रा hai......jo दोनों मर्रे है वो वाटर एलिमेंट वाले है और आम लोग है....
मैं - अब ये क्या चाकर hai....tumne इसके लिए बुलाया mujhe....arre ये सब तो यहाँ के लोग भी देख सकते है naa....Elf किंग को नहीं पता क्या इसके बारे में.....
ओल्ड आउल - एल्फ किंग जानते है इसके बारे mein....aur सभी जानते hai.....Main ये इस वजह से बता रहा हु क्यूंकि ये खुनी वही है जिन्होंने उन् 4 लोगो को मारा tha.....thek उसी तरह से मारा है ये देखो....
मैं - लीमो को कुछ पता चला की उसके लोगो को किसने मारा है....
ओल्ड आउल - नहीं लीमो नहीं पता कर पाया hai.....par मैंने अपने बन्दे लगाए है यहाँ pe.....thodi बहुत जांच करने के बाद ये कह रहा हु इसमें क्रोनेड एल्फ फॅमिली का कोई हाथ नहीं है ना तो एल्फ किंग का और ना hi युवराज का जैसा तुमने कहा था पता करने को....
मैं - अच्छा और इस नतीजे पे कैसे पहुंचे tum.....matlab जांच कैसे किया....
ओल्ड आउल - जब ये दोनों खून हुए है तब एल्फ किंग और साथ hi युवराज दोनों hi महल में अपने कमरों में सो रहे थे.....
मैं - हो सकता है इनमे से किसी एक ने करवाया होगा ये खून और अब ये होने के बाद तो और पक्का सा लग रहा है ये सब.....
ओल्ड आउल - मतलब क्या है तुम्हारा.....
मैं - तुमने बताया ये दोनों hi वाटर एलिमेंट वाले hai.....water element......sayad ये एक इत्तेफ़ाक़ hi है par.....ho सकता है की ये युवराज का किया धराया हो या फिर एल्फ किंग ka.......Mahel में एक वाटर एलिमेंट वाला आता है दिन दहाड़े वो युवराज के पास से एक चीज़ज़ चुर्रा के ले जाता hai....badla लेने के बारे में ये लोग क्यों नहीं sochenge......mujhe लगता है इन् सब में थोड़ा बहुत तो इनका भी किया धराया hoga.....mahel की इज़्ज़त बचने के लिए....
ओल्ड आउल - एल्फ किंग के बारे में मुझे नहीं लगता वो ऐसा कुछ अपनी जनता के लिए karenge....haa थोड़ी बहुत खिल्ली ुड्डी होगी उनकी पर वो इस वजह से ऐसे hi खून तो नहीं करने लग गए honge....aur हम खिल्ली उड़ने की hi बात कर रहे है तो सबसे पहले तो युवराज की hi बात आती hai....par ये भी है की कल रात को वो भी अपने रूम में hi था.....
मैं - तुम इन् दोनों पे ध्यान rakho....accha और मुझे लगता है मैं निक्स समुदाय के पास जाना चाहूंगा.....
ओल्ड आउल - वह पे मेरा एक बाँदा है पहले se...tum जाओ waha....main पोर्टल खोल रहा हु.....
ओल्ड आउल ने तुरंत पोर्टल खोल दिया और मैं उससे होते hue.....Nix लोगो से बस थोड़ी दुर्री पे आ गया था....
ओल्ड आउल पोर्टल के उसी तरफ से बोलै....
ओल्ड आउल - इनको मेहमान ज्यादा पसंद नहीं aate......sambhal के जाना....
और बोल के पोर्टल बंद कर दिया.....
मैं आगे बढ़ने laga.....yaha की जमीन थोड़ी गिल्ली गिल्ली सी thi...chipchippi....
मैं - ध्रुव ये जमीन ऐसी क्यों है यहाँ की....
ध्रुव - निक्स वाटर स्पिरिट्स होते hai....to इनके आस पास पानी तो होना hi hai...ussi पानी की वजह से sayad.....waise यहाँ पे आने की क्या वजह है....
मैं - उस लड़की को बतलाना है उसकी वजह से वह लोग मारे जा रहे है अगर उसने वो पंख नहीं चुराया होता तो ये सब ना हुआ होता....
ध्रुव - एक तरह से हमारी मदद की है usne.....agar वो पंख गलती से भी लूसिफ़ेर के हाथ लग जाता और अगर उसने उसके जरिये ओल्ड आउल और बाकी सब का पता लगा लिया होता तो हो hi जाना था सब सही.....
मैं - बात में दम है tumhare.....par वो पंख चाहिए hi क्यों थे usko...aur उसको उस पंख का पता कैसे चला.....
"तुम कौन ho...aur यहाँ क्या कर रहे h......ek और इंसान...."
मैंने पीछे मदद के देखा तो वह पे एक बाँदा था हाथ में पानी की तलवार लिए hue.....pahle तो दिखने में ऐसा लग रहा था अभी के अभी मार देगा पर फिर एकदम से कन्फ्यूज्ड सा दिखने लगा....
"तुम उस लड़की के साथ यहाँ आये हो क्या....."
मैं - Ladki.....haa उसी के साथ.....
"आओ picche....kaha था पुजारी जी से मैट बनाओ उसको शिष्य apni.....par nahi....kahte है किताब में लिखा है वो आएंगे yaha....aur हमको उनको सीखना hai....pata नहीं क्या क्या बोलते रहते hai.....wo सामने वो बड़ा सा मंदिर दिख रहा hai....wahi है वो ladki....mil लो...."
मैं इसके पीछे पीछे आ रहा था और ये बाँदा एकदम से बोलते जा रहा था और बोलते हुए मुझे लेके आ गया उस जगह pe...jaha पे इसने बताया की मंदिर hai....ek बड़ा सा मोन्यूमेंट था ये.....
मैं अंदर जाने laga....par तभी पता नहीं अलबूस और कूपर को क्या hua....mere सीने में जैसे कुछ जलने सा लगा था उस waqt.....jaise जैसे करीब जा रहा था....
ध्रुव - यहाँ से निकलना hoga....Albus और कूपर दोनों परेशां लग रहे है.....
मैं - पर हुआ क्या है और ye.....aahhhh है kyaa..........Jwala पोर्टल खोलो....
क्या हुआ पता नहीं एकदम से बहुत ज्यादा जलन होने लग गयी थी.....
ज्वाला ने मेरी आवाज सुन्नी और पोर्टल खोल diya.....aur मैं उसमे चला gaya....aur वह जाते hi बेहोश....
एअर्थ में घर पे बैठे हुए बुआ, रूपल दीदी और निकिता एक दूसरे से बातें कर रहे the.....kisse सुनाये जा रहे थे अपने apne.....ki तभी निकिता को लगा की कुछ हुआ hai.....pasina आने लगा उसको अच्चानक से बोलते बोलते hi गल्ला सुख सा गया.....
बुआ ने देखा usko.....ek दम अच्चानक से ऐसे सब कैसे हो गया.....
बुआ - बच्चू ठीक हो ना tum.....Rupal पानी लेके आओ.....
बुआ जो अभी दूसरे सोफे पे थी वो निकिता वाले सोफे पे आ गयी और उसको देखने लगी कही बुखार तो नहीं hai.....wahi रूपल दीदी भी जल्दी से पानी लेके आयी.....
पानी पन्ने के बाद निकिता थोड़ी देर बैठी rahi.....pasina निकलना अब बंद हो गया था पर उसका पूरा चेहरा भीगा हुआ tha......Bua ने एक गिल्ला टॉवल दिया उसको मुँह साफ़ करने ko....aur जब उसने ऐसा करते हुए अपनी आखें बंद की तो उसको प्रतीक dikha....behosh पड़ा हुआ.....
निकिता - Prateek.....usko कुछ हुआ hai....wo बेहोश है....
बुआ - Kya.....kya बोल रही हो tum.....kaha पे है वो.....
रूपल दीदी - बेहोश hai....par वो तो बहार hi g.....main देख के आती हु....
निकिता - Nahi....wo यहाँ नहीं hai.....Jwala पोर्टल खोलो....
यहाँ अपने कबीले में ज्वाला अभी प्रतीक को वैद्यों के पास लेके गया था और वो देख रहा था की वो बेहोश hai....par फिर भी उसको सुनाई दिया की पोर्टल खोलने बोलै जा रहा hai.....Jwala ने एक बार वापस से देखा प्रतीक की ओर....
कुछ समझ ना आया तो उसने पोर्टल खोलना चाहा पर खुला नहीं....
ज्वाला - कौन हो तुम.....
निकिता - मैं निकिता hu.....jaldi से पोर्टल kholo....humko पता है प्रतीक को कुछ हुआ है....
ज्वाला थोड़ा कंफ्यूज हुआ की आखिर कैसे ज्वाला की आवाज wo....aur उसकी आवाज ज्वाला सुन पा रहे the....wo बात कैसे कर रहे थे ऐसे में......
निकिता - ज्वाला जल्दी से पोर्टल खोलो....
ज्वाला - Nahi.....portal खुल नहीं रहा आप जहा पे है वह पे नहीं खोल पा रहा मैं पोर्टल....
निकिता - बुआ ज्वाला के यहाँ है प्रतीक और वो बेहोश है....
रूपल दीदी - वो वह चला gaya....wo भी झूट bolke....Jwala को बोलो पोर्टल खोलने को....
निकिता -न उससे नहीं हो रहा hai....maine बोलै पर वो बोल रहा है यहाँ पे नहीं खुल रहा पोर्टल....
बुआ - कल hi घर की सुरक्षा बधाई hai....Bahar चलना hoga....garden mein.....wo बेहोश है naa.....Kavita को बुलाती हु मैं....
बुआ ने तुरंत K.Bua को कॉल किया और अपने पास आने को bola.....K.Bua वह पे अपनी फ्रेंड के साथ बातें कर रही थी जब उनका फ़ोन बज्जा.....
बुआ की आवाज सुन के वो समझ गयी बात सीरियस hi hogi....to उन्होंने जल्दी से वह से निकलने का रास्ता सोचा और निकल भी gayi....agle 10 मिनट में वो बुआ के पास थी....
बुआ - निकिता अब bolo...ab हम बहार है वो कर लेगा अब....
निकिता ने वापस से ज्वाला को पोर्टल खोलने को kaha...aur इस बार खुल गया क्यूंकि वो सब बहार थे...
सभी पोर्टल से सीधा वह वैद्यजी के पास आये....
K.Bua - इसको क्या hua....ye ऐसे क्यों पड़ा है....
बुआ - ये बेहोश हो गया hai....isko देखो क्या हुआ hai.....Aur तुम ज्वाला तुमको हममे बताना चाहिए था अगर कुछ हो गया इसको तो क्या करेंगे हम....
बुआ ज्वाला को पूरा झड़ने लग गयी....
वही K.Bua प्रतीक को देख रही thi.....unhone पहले तो पल्स dekha....wo नार्मल तो बिलकुल भी नहीं the....phir उन्होंने और सब देखना शुरू kiya.....sab कुछ hi अजीब सा था इस वक़्त तो....
K.Bua ने फिर स्किन को देखना शुरू kiya....Prateek के हाथ का स्किन थोड़ा अजीब सा लग रहा tha....aur वो उसको देखने लगी....
K.Bua - पूनम यहाँ आ to....ye dekh.....ye इसके स्किन को ऐसा क्या हो गया है....
K.Bua ने आवाज सिर्फ बुआ को लगायी थी पर आ सभी गए the.....ur सभी ने देखा जैसे प्रतीक के स्किन पे कुछ बनना हुआ tha....ajeeb सा....
K.Bua - Kainchi.....poonam कैंची देना.....
अब कैंची थी नहीं उनके पास तो उन्होंने जादू से mangwaya.....aur दे दिया K.Bua के पास.....
K.Bua ने उस कैची से कलाई काटना शुरू kiya.....aur कलाई से होते hue.....pura ऊपर जो t-shirt पहनी हुई थी मैंने वो काट दिया unhone......aur कपडे को हटाने के बाद जो देखा उन्होंने वो देख के तो सभी चहुँक gaye....par 10 सेकंड बाद जब वो चीज़ज़ धीरे धीरे गायब हो रही थी उस चीज़ज़ को देख के तो सब और ज्यादा चौंक गए
वो सब गायब हुआ और प्रतीक की आँखें खुली.....
सामने सभी को उसको घूरता देख वो समझ नहीं पाया आखिर क्या चल रहा hai....Usko तो ये भी समझ नहीं आ रहा था की ये लोग वह आये कैसे.....
K.Bua - अरे सब पीछे hatto.....Prateek अभी ठीक लग रहा है....
मैं - हम्म्म पता नहीं थोड़ा ajeeb.......mere kapde......Main ऐसे क्यों hu.....aur आप सब यहाँ कैसे.....
ज्वाला अभी भी मुझे देखे जा रहा था सिर्फ वही नहीं sabhi......K.Bua उसके पास में hi थी तो उसको एक बार धीर्रे से maara.....kyunki मैं उसी को देख रहा था....
ज्वाला जैसे अभी नींद से जाएगा हो....
ज्वाला - haa....kya....kya कहा तुमने....
मैं - ये सब यहाँ कैसे तुमने बुलाया....
ज्वाला - woo....haa मैंने hi वो तुम to....tum बेहोश हो गए थे ना......
मैं - मेरे kapde....ye किसने कर दिया और क्यों.....
K.Bua - अरे वो तुम जब बेहोश हुए ना उस वक़्त उसमे कुछ लग गया tha...aur तुमको उठा के उसको निकल नहीं सकते थे ना तो ऐसा करना pada....tum चिंता मत करो नया लेके दे denge....ab ये बताओ कैसा लग रहा है....
मैं (मैं में) - हम्म अब कोई जलन नहीं हो रही hai.....ab तो सब सही hi है....
K.Bua - प्रतीक ठीक हो ना....
मैं - हां बुआ अब ठीक hu,.....wo पता नहीं क्या हुआ था और मैं बेहोश हो गया.....
K.Bua - हम्म चिंता मत karo....ye बस ऐसे hi tha.....sayad तुम्हारा एलिमेंट थोड़ा और ताकतवर हो रहा hoga......hmm अच्छा ये तुम्हारा स्पिरिट एनिमल क्या था प्रतीक बताना जर्रा....
मैं - (मैं में) स्पिरिट एनिमल के बारे में क्यों पूछ रही है ये इनको तो पता hi है मैंने एक चुहा बताया tha.....kuch तो हुआ है....
मैं - बुआ आप तो जानती hi हो वो एक चूहा है....
बुआ - कविता ये ठीक है ना.....
K.Bua - हम्म ठीक hai...par सायद आराम चाहिए होगा इसको थोड़ा....
बुआ - नहीं इसको कोई आराम नहीं chahiye.....Jwala हम सब को स्कूल जाना है abhi.....iske मेडिकल सेंटर में....
बुआ एकदम से गुस्से में लग रही thi...pakka कुछ तो हुआ था मेरे बेहोश होने पे.....
ज्वाला ने पोर्टल खोला और सारे उससे होते हुए पहुंच गए K.Bua के मेडिकल डिपार्टमेंट mein.....wo Jwala.....wo बिन्ना बुलाये आ गया वह पे.....
बुआ - इसका स्पिरिट एनिमल चेक करो abhi....mujhe देखना है क्या है....
मैं - बुआ आपको तो .....
बुआ - तुमसे पूछा kuch......Kavita.....dhyaan रहे कोई भी ऐसा मैजिक जो इसके स्पिरिट एनिमल को छुपाने की कोशिश करे वो बक्कर हो जाना चाहिए....
K.Bua - पूनम शांत हो जाओ कोई तो वजह रही होगी ना.....
बुआ - wahaj......nahi....pahle तो चेक करो tum.....aur tum....tum क्या कर रहे हो यहाँ पे.....
ज्वाला - Main....wo..wo मैं भी देखने आया tha.....wo....
बुआ - तुम जुड़े हुए हो ना isse.....ye कोई भी मैजिक नहीं कर पाए ध्यान रखना इसका....
मैं - ध्रुव अब kya.....ye तो अलबूस कूपर सब जान जाएंगे....
ध्रुव की आवाज hi नहीं aayi....wo साला था hi नहीं जैसे वह....
बुआ - निकिता बच्चू ध्यान रखना तुम bhi....koi जादू नहीं होना चाहिए....
निकिता को समझ नहीं आ रहा था वो कैसे समझाए की मैं कोई जादू करू तो उसको पता नहीं चलने वाला......
K.Bua तो लग भी गयी थी अपने काम pe.....aur रूपल दीदी मुझे देखे जा रही thi.....chup चाप....
मैं यहाँ ध्रुव से बात करने की कोशिश कर रहा था पर वो कुछ बोल hi नहीं रहा tha.....pata नहीं इसको हुआ क्या था....
K.Bua ने मेरा हाथ पकड़ा और उसको अपने साथ लेके आये हुए एक पत्र पे रख दिया.....
K.Bua - हाथ मत हटाना....
मैं - बुआ आप जानती हो ना पह.....
रूपल दीदी - तेरी to.....itni बातें नहीं बताई है इसने.....
वो ऐसे hi बोलते हुए यहाँ वह देखने लगी जैसे कोई चीज़ दूध रही ho.....nicche एक डंडा जैसा कुछ मिला उनको.....
K.Bua - अरे रूपल रूक्को tum....ye क्या मार डौगी उसको अब.....
बुआ - जोर से रूपल.....
मैं - Didi.....ye क्या कर रही हो....
बहुत ज़ोर से डंडे से मुझे मारा tha....par डंडा टूट गया और मुझे कुछ नहीं हुआ....
K.Bua - पागल हो गयी हो dono.....aur तुमको भी अकाल नहीं है पूनम रूकने के वजयी और ज़ोर से मारने बोल रही ho...kuch हो जाता to....jaruri थोड़ी होता है जो दिख रहा है वही hoga.....Prateek दर्द तो नहीं हो रहा है ना....
बुआ - कुछ नहीं हुआ है isko....tum वो देखो इमेज तैयार हुई या nahi......bas एक बार जो हम सोच रहे है वो सही निकल jaaye.....isko फिर मैं....
मैं - मेरा स्पिरिट एनिमल एक ड्रैगन hai.....theek है ना ab....ab बस भी karo...aap सब....
निकिता - ek....sirf एक.....
मैं (उसको घूरता हुआ) - 2 है 2 ड्रैगन्स है वो.....
बुआ - तो पहले क्यों नहीं bataya.....Main कितनी उद्दस थी इस बात को लेके और tumne....tumne झूट बोल दिया था...
मैं - बुआ मैं नहीं बोलना चाहता था पर मैं खुद समझ नहीं पा रहा tha....maine मास्टर तक को नहीं बताया है इसके बारे में....
रूपल दीदी - इसमें चुप्पाने वाली क्या बात thi...ye तो और बताने वाली बात है पागल तुम्हारे पास ड्रैगन्स है 2 ड्रैगन्स....
K.Bua - हम्म मुझे नहीं लगता रूपल ये बताने वाली बात hai.....ek तरह से ये अच्छा hi hai.....kuch चीजजें चुप्पी हुई होती है तो अच्छा होता है....
अभी वो कुछ आगे बोलती उससे पहले K.Bua का फ़ोन बज्जा....
K.Bua - भाभी का कॉल है.....
K.Bua ने कॉल एक्सेप्ट किया.....
K.Bua - kya.....aap स्कूल में हो....
....................................
K.Bua - wo....wo तो स्टाफ रूम में hi honge....aapne किसी से पूछा नहीं....
...................................
K.Bua - ऐसा kaha.....kisne kaha....aap एक काम karo....aap....medical डिपार्टमेंट में आओ हम यही है....
इतना बोल के उन्होंने कॉल कट कर दिया.....
K.Bua - ये भाभी यहाँ पे प्रोफ. दक्ष से मिलने को क्यों आयी hai.....aur तुम सब का फ़ोन क्या hua....wo कब से तरय कर रही थी.....
रूपल दीदी ने अपना फ़ोन देखा तो वो नहीं था वह पे वो सायद घर पर छोड़ आयी थी वैसे hi निकिता का भी tha....aur बुआ का डिस्चार्ज हो चूका था.....
बुआ - पर टुन्ने उनको यहाँ पे क्यों बुल्ला लिया pagal.....wo भी जान जायेगी ये सब....
चची - क्या sab....aur पागल किसको कहा पूनम मुझे पागल बोल रही है.....
वो तो अच्छा हुआ ज्वाला ने खुद को गायब कर लिया था वर्ण वो भी देख लिया जाता.....
चची - Ye....ye ऐसे क्यों लेता हुआ hai...iske कपडे कहा गए....
रूपल दीदी - मम्मी वो इसको चक्कर आ गए थे वापस से तो चेक करने को यहाँ आ गए.....
चची - क्या.....
K.Bua - अब ठीक है Bhabhi....waise आप यहाँ पे....
चची - अरे वो पंकज से बात करलु सोचा था आखिर क्या माज़रा है की वो तुम सब के साथ नहीं रहता वो मिला नहीं घर पे तो उसके पापा से बात करने का सोचा ताकि वो समझा सक्के usko....waise िन्न्न सब में मुझे तुम सब का hi हाथ लग रहा है,,,,,
बुआ - नहीं भ hi ऐसा कुछ नहीं hai....rukko आपको प्रोफ. दक्ष से मिलना है ना मैं ले चलती हु aapko....unse कर लेना बात वैसे ऑफिस में hi होंगे वो....
चची - अरे नहीं जाने दिया mujhe....maine कहा तुम्हारी भाभी हु तो बोलता है जब तुम आओगी तब आना.....
बुआ - ये नया आया होगा koi.....aap चलो मैं देखती hu.....Rupal इसको कपडे दे dena....aur घर जाओ वह बात करेंगे...
वही पंकज अभी लीडर के साथ tha....Pankaj ने उससे कहा था सायद कोई और भी रास्ता हो उसकी बेटी को ढूंढने ka....aur वो रास्ता होक्के जाता था एअर्थ पे मैजिकल क्रीचर्स के हेडोफ़्फ़िए se.....ye एक ऐसी जगह थी जहा पे लगभग सभी मैजिकल क्रीचर्स की एंट्री होती thi.....chahe वो कोई इंसान और मैजिकल क्रेअटुरे का खून hi क्यों ना ho....isse कोई मतलब नहीं होता tha....aur इन् सब की देख रेख स्ट्रेंज वर्ल्ड से आये हुए वो मोटा आदमी करता था जो हमारे घर आया tha.....yaha पे इसके बहुत से कनेक्शंस थे....
पंकज भी यहाँ पे स्ट्रेंज वर्ल्ड से hi आया हुआ था उसके पापा यानी दक्ष मां के साथ तो इन् जनाब से एक दो बार मुलाकात हो चुक्की थी इसकी....
लीडर - पर बेटे वो मुझे यहाँ देख के hi समझ जाएगा मैं किसी चीज़ज़ को लेके आया हु यहाँ पे....
पंकज - sayad....par क्या वो ये जान पायेगा की आप यहाँ पे अपनी बेटी को ढूंढने के लिए आये हो....
लीडर - वही तो बात hai....ab मैं उससे मिलने गया तो वो पक्का है की मुझसे पूछेगा क्यों आये ho...aur मैं किसी भी चीज़ज़ या कोई भी बन्दे का नाम लूंगा ये लोग उसपे नज़र रखना शुरू कर देंगे....
पंकज - तो मैं चला जाता हु naa....waha पे बस आपके एनर्जी सिग्नेचर कको देके बोलना hi है की इससे मैच करने वाली एनर्जी सिग्नेचर के बारे में पत्ता करना है....
लीडर - मैं भी यहाँ रह चुक्का hu....unko पता चल जाएगा...
पंकज - मैं बोल दूंगा स्कूल का प्रोजेक्ट hai.....unhone एक एनर्जी सिग्नेचर दिया है और बोलै है पता लगाने की किसका है ye....yaa इस जैसे और कितने है और उन् सब की जानकारी.....
लीडर - पर वो कुछ पूछेंगे नहीं की किसने दिए है ऐसा प्रोजेक्ट और सिर्फ तुम hi क्यों aaye.....koi और क्यों नहीं...
पंकज - हम्म ये समस्या hai....haa ये सही rahega.....par मुझे किसी प्रोफ से मिलना होगा जो ये कर दे.....
लीडर - तुमने बताया था तुम्हारे पापा भी प्रोफ है तो फिर उनसे करा लो.....
पंकज - पापा इसमें साथ नहीं देने वाले mera....koi और chahiye.....jo आसानी से कर दे ये....
लीडर - करना क्या है....
पंकज - पनिशमेंट मांगनी है.....
लीडर - तो तुम बोलने वाले हो की तुमको पनिशमेंट मिली हुई hai....aur इस वजह से तुम ये सब करने जा रहे हो वह pe....sahib दिम्माग लगाया hai....ab प्रोफ ढूँढना है ना बस....
पंकज - hmm...waise 1 है to....par उनके पास जाने का मैं नहीं hai....wo log....wo समझते hi नहीं है......
लीडर - ये कोई ek.....log कब से कहे जाने लग गए....
पंकज - प्रोफ तो एक hi hai....Prof पूनम पर उनके साथ 3 और लोग होते hai.....unn तिण्णो को मैं गलत लगता hu.....manna मैं गलत tha....par वो पहले की बात थी ना अब मैं चेंज होने लगा हु naa....aap hi बताओ मैं अच्छा नहीं हु क्या...
लीडर - मेरे लिए तो अच्छे hi ho....meri मदद कर रहे ho....par बीटा ये duniya...ye यहाँ के log....ye बड़े hi अजीब होते hai.....ek बार इन्होने आपको देख के जो डीडे कर लिया ना वो सोच बड़ी मुश्किल से बदल पाती hai....ab मेरे बारे में lelo....Maine तुमको अपने बारे में बताया तुम दर्रे थे naa.....par क्या मैं ऐसे hi सबको मारता फिरता hu......wo darr....wo सोच है सबकी मुझे leke....aur मैं अब सायद hi इस सोच को कभी बदल paaunga......lekin tum....tum बदल सकते ho...aur इतने में हार तो मत मानो...
पंकज - हां इस बारे में कभी बात karenge...abhi तो प्रोफ पूनम के पास चलते hai.....unke पास जाने के कुछ फायदे तो है hi.....agar पापा को पता भी चला की मुझ पनिशमेंट इन्होने दी है तो वो ना तो प्रोफ से कुछ कहेंगे और ना hi mujhse....haa एक बार बस थोड़ा समझा देंगे.....
लीडर - अभी कहा होंगी ये आपकी Prof.....kaho तो अभी ले चलता hu....aaj तुमको मैं कुछ खास दिखता हु....
पंकज - क्या आपके pass....koi उड़ने वाला जीव है जिसपे बैठ के जाएंगे hum.....yaa कुछ aur.....Aap लीडर हो फोमोस के आपके पास तो बहुत कुछ खास होगा ना....
लीडर - :रेडफास: पोर्टल से जाने को बोल रहा tha...aur तुम तो पता नहीं कहा कहा के सपने लिए बैठे ho....batao कहा है वो....
पंकज - एक मिनट अभी पता करता hu....ye प्रतीक को तो पता होगा hi....
पंकज ने मुझे कॉल किया पर कॉल लगी नहीं....
पंकज - सायद इसने भी मुझे ब्लॉक कर दिया hai....Kavita मैडम होती है हमेशा उनके साथ सायद उनको पता हो....
पंकज ने फिर K.Bua को कॉल किया.....
K.Bua - Hello कौन.....
पंकज - मैं पंकज बोल रहा hu....kya आपको पता है प्रोफ पूनम कहा है....
K.Bua - Poonam....haa haa...wo यही है मेरे pass.....tum आ जाओ यहाँ pe....ye मेरे डिपार्टमेंट में....
पंकज - Accha....par मैं अकेला नहीं hu...aur इनको आने नहीं देंगे अंदर....
K.Bua - पंकज hi बोल रहे हो naa.....ye ऐसी बातें तो नहीं करता था wo.....naa जाने कितनो को यूँ hi स्कूल में लेके आया हुआ है वो..
पंकज - हम्म ठीक है मैं आता हु....
पंकज - चलिए पता चल गया hai....aap भी साथ में चलो....
लीडर - पर बीटा किसी ने पहचान लिया to....dikkat हो जायेगी....
पंकज - आपको यहाँ पे ज्यादा लोग नहीं पहचानते और रूप बदल लो नहीं to...bas इससे आपको और भी नहीं पहचान पायेगा koi....chalo अब खोलो अपना portal.....waha के लिए जहा पे हम मिले थे....
ये दोनों आने को रेडी थे वही पंकज के स्वागत के लिए रूपल दीदी रेडी हो गयी thi......Isske वजह से 2-3 बार उनको दांत सुन्नी पड़ीं थी....
दरअसल जैसे hi फ़ोन पे पता चला की ये पंकज है रूपल दीदी ने K.Bua से उसको यहाँ आने को बोलने बोलै.....
कुछ देर हुई और वो आ गया वह पे पर उसके साथ कोई और भी tha....pata नहीं कौन था ye.....dekhne से hi लग रहा था इसकी दाढ़ी नकली hai....aur कान भी एल्फ के तो बिलकुल नहीं the.....Goblin सायद गॉब्लिन हो पर इसको गॉब्लिन कहा से मिल गया....
पंकज आया और बिन्ना कोई देर kiye...usne पूछा....
पंकज - कविता मिस कहा पे है प्रोफ पूनम मुझे उनसे जरुरी काम है....
रूपल दीदी - जर्रा हमसे भी मिल लो बुआ से थोड़ी देर में मिल लेना....
पंकज अपना सर खुजाने लग गया की ये इनको हुआ क्या है आज तक ऐसे तो कभी नहीं कहा......
पर रूपल दीदी तो फुल रेडी थी उन्होंने अपना हाथ पीछे से आगे किया और एक चुटकी bajayi.....yaha पे होना ये चाहिए था की पंकज थोड़ी दूर जाके girta.....par असल में हुआ ये की रूपल दीदी गिर गयी.....
K.Bua - arre....ye क्या hua....tum गिर कैसे गयी....
लीडर - कभी कभी दूसरों को गिराने के चक्कर में लोग खुद गिर जाते hai....Bete मुझे नहीं लगता ये कोई मदद करने वाले hai....chalo यहाँ से....
पंकज - Rukiye....ek minute....Rupal मैं तो यहाँ पे बस प्रोफ से बात करने आया tha......isme इतना गुस्सा क्या hona....ab क्या उनसे कोई सवाल भी नहीं कर सकता main....kya चाहती हो स्कूल छोड़ du...taaki तुम और तुम्हारे इस गैंग से दूर रह सक्कु....
रूपल दीदी - तुम समझते क्या हो खुद ko......jyada जुबान चलायी तो समझ लेना....
लीडर - समझ आप जाए beta....ye अभी मेरी मदद कर रहा hai....aur इस waqt....ek चिट्टी तक इसको काट नहीं sakti....samjhe...chalo यहाँ se....ye लोग काबिल नहीं है तुम्हे...
निकिता - आप होते कौन हो ये सब बोलने wale...aur ये हमारा आपस का मामला है आप क्यों बिच में आ रहे हो....
पंकज - आपस का maamla.....kaun सा maamla.....maine तुम सब में किसी को कुछ नहीं kaha.....jo पिछली बातें हो चुक्की थी उन् सब की माफ़ी मांगी hai....aur फिर भी ये कर रहे हो तुम sab....aapsi maamla....tum सब तो बस मुझे इग्नोर करने में लगे रहते ho....aisa जैसे मैं तुम सब को बिगड़ dunga....kitni बार कहु बदल रहा हु main...main कोशिश करता जा रहा हु और बेहतर बनने की पर तुमको इन् सब से कुछ है hi nahi....to ठीक है तुम अपने जगह रहो मैं अपने jagah.....Aur हां आंटी से बोल देना की अब तुम सब के साथ कोई जबरदस्ती करने की जरुरत नहीं hai....mujhe अपने साथ रखने ki....Main अकेला hi ठीक hu.....chaliye यहाँ se....aapne सही कहा ये मेरे लिए सही नहीं है....
पंकज इतना बोल वह से निकल gaya....Inn सब के दौरान ज्वाला वही पर tha....par उसको कुछ करने की कोई जरुरत hi नहीं thi.....usne खुद देखा की यहाँ पे गलती किसकी thi....aur इन् छोटी छोटी बाटों में वो थोड़ी आएगा बिच में.....
K.Bua - तुम ठीक हो Rupal......chott तो नहीं लगी....
रूपल दीदी - मैं ठीक hu.....par.....isko अब नहीं छोड़ने वाली main....isko मार hi dungi....mujhse ऐसे बात करने की हिम्मत कैसे हुई इसकी....
K.Bua - पागल हो kya....shant हो jaao.....sayad ये परेशां होगा किसी कारण से.....
रूपल दीदी - nahi....isko बुआ से बात करनी है ना मैं करौंगी बात iski....Nikita चलो तुम....
बिन्ना कुछ sunne...Nikita का हाथ पकड़ा और खींचते हुए उसको लेके चली गयी वो......
वही बहार आने के बाद लीडर पंकज को देख रहा tha.....wo समझ रहा था की ये बाँदा सच में कोशिश कर रहा है......
लीडर - कोई बात नहीं Bacche....hum बाद में मिल लेंगे तुम्हारी उस प्रोफ se....abhi तुम ठीक नहीं लग rahe....chalo मेरे saath,....tumhe कुछ सिखाया जाए आज....
पंकज - Nahi...aap जाओ मेरा मूड ख़राब हो गया hai....aapne देखा naa....maine कुछ किया kya....main तो उनकी बात समझ के उनके पास भी नहीं जा रहा tha.....main नहीं चाहता मेरी वजह से वो सब वो ना कर पाए जो उनको करना hai....main तो बस....
लादेरर - अरे कोई बात nahi....bas यही लोग थोड़ी है यहाँ pe......tumko दोस्त बनाने hai...main हु ना dost.....aur भी बहुत से लोग मिल जाएंगे यहाँ पे जो दोस्त बन जाएंगे tumhare....bhul जाओ उनको....
पंकज - हम्म सही kaha....par अभी हमको जाना है प्रोफ पून....
वो बात पूरी करता उससे पहले hi वह पे रूपल दीदी और निकिता पहुंच गयी.....
रूपल दीदी - बुआ से मिलना है ना तुम्हारे पापा से hi मिलने गयी है wo.....par याद rahe.....ab कोई मदद नहीं करने वाली वो....
लीडर - बच्ची शांत raho.....jo भी अंदर हुआ hai...agar वो तुम्हे अपनी बेइज़्ज़ती लग रही है तो वो खुद कराई है तुमने.....
रूपल दीदी - उम्र में बड़े हो aap....issliye अच्छे से बात कर रही hu.....hamare बिच में मत aao.....accha नहीं होगा वर्ण.....
पंकज - चलिए aap.....hum प्रोफ से मिल आते है.....
पंकज लीडर को लेके अपने पापा के केबिन की ओर चल pada.....wahi रूपल दीदी जो आते वक़्त K.Bua का फ़ोन लेके आयी थी उन्होंने बुआ को मैसेज कर दिया की पंकज की मदद ना करे....
पंकज ने लीडर को अपने पापा के केबिन के बहार रुकने को कहा और खुद अंदर आने की परमिशन मांगी.....
अंदर अभी चची , बुआ और साथ में दक्ष मां भी the....aur वो बातें कर रहे थे...
दक्ष - हां आओ ander....tumhare बारे में hi बातें हो रही है....
चची - बीटा तुम आये नहीं the.....aur मैंने भी कॉल किया तुमने कॉल नहीं पिक kiya....kya बात है किसी ने कुछ कहा क्या....
पंकज - नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं hai....wo दरअसल मैंने देखा है जब मैं उन् सब के साथ होता हु तो अच्छे से नहीं रह पाते सायद वो मुझे पसंद भी नहीं karte....to बस मैंने सोचा क्यों बेकार में उन् सब को परेशां किया jaaye.....main ऐसे hi सही hu....Papa आपको भी चिंता करने की जरुरत नहीं hai.....main अब कोई गलत काम तो नहीं hi करूँगा.....
चची - पर बीटा ऐसा नहीं hai.....wo तुम्हारे होने से परेशां नहीं होते....
पंकज - आंटी मैं रहता हु उनके साथ और इतनी समझ तो है कौन मेरे मौजूद होने से खुस है और कौन nahi....Prof मुझे आपसे कुछ बात करनी थी....
बुआ - हम्म बोलो.....
पंकज यहाँ वह देखने लगता है.....
चची - पूनम जाओ इसके साथ बहार जाओ और देखो क्या बात hai.....main....main भी निकलती हु दक्ष ji.....aur माफ़ करियेगा मैं अपना वडा पूरा ना कर सककी...
दक्ष - हम्म ठीक है.,...
चची वह से चली gayi....aur जाते हुए एक बार वापस से पंकज की ओर देखा.....
वही बुआ पंकज को लेके बहार aayi.....bahar लीडर बैठा हुआ था....
बुआ - तुम पहले अपनी बात बताओ उससे पहले मेरी भी बात सुन्न lo....maine सुन्ना वह अंदर क्या कहा tumne....pata नहीं क्यों तुमको ऐसा लगा पर ये सही नहीं hai....koi तुम्हारे होने से परेशां नहीं था....
पंकज - प्रोफ इस बारे में ना hi बात करे तो सही hai....abhi निच्चे जो कुछ हुआ उससे जो थोड़ा थोड़ा लग रहा था अब वो पुर्रा पक्का हो चुक्का hai...aur अगर वो मुझसे परेशां नहीं थे तो फिर क्यों निकिता वो गायब होनेवाली अंगूठी पेहेन के रखती thi.....aur वो उसको अपने hi दिया होगा naa.....sab मुझसे परेशां hi रहते hai....yaha तक की मेरे पापा bhi....aap सब से क्या कहना इसके बारे mein.....aap बस मेरी एक मदद कर dijiyega....iske बाद क्लास के अलावा सायद hi कभी आपको या आपके साथ रहने वाले लोगो को अपनी सकल दिखाऊंगा....
बुआ - ऐसी कोई बात नहीं है pankaj.......aur तुम ये सब क्या सोच रहे.....
पंकज - प्लीज Prof....ab और नहीं बस आप मेरी बात सुनने और अगर हेल्प कर सक्को तो ठीक है नहीं तो आप बता दो मैं अभी से चला जाऊँगा....
बुआ - ठीक है बताओ क्या मदद चाहिए तुमको....
पंकज - एक पनिशमेंट चाहिए मुझे.....
बुआ - पंकज तुम ठीक हो naa......dekho ये सब चलता रहता है पर इन् सब की वजह से इतना डिप्रेस नहीं हो जाते की खुद को दर्द देना शुरू कर दे......
पंकज - आपको जो समझना है आप samjho....mujhe बस आप एक कागज़ पे लिख के ये देदो की आप मुझे एनर्जी सिग्नेचर पे एक प्रोजेक्ट दे रही हो अस punishment.....reasons की कम्मी तो है nahi.....agar काम pade....to कुछ भी लिख दीजियेगा मुझे मतलब नहीं है....
बुआ - पंकज तुम समझ नहीं rahe.....tum इस वक़्त ठीक नहीं ho....tum चलो अभी मेरे साथ....
पंकज - मैंने अंदर hi कह दिया था जो कहना था मुझे अब आपके साथ या उन् सब के pass......main नहीं आ sakunga....aap बस ये बताइये आप मुझे ये पनिशमेंट डोज या नहीं......
बुआ ने कुछ देर तो socha......energy सिगनतिरेस पे एक प्रोजेक्ट वैसे तो ये कोई दर्दनाक काम नहीं hai....unko लगा सायद ये खुद को बिजी करना चाहता है इस वजह से ऐसा कुछ काम मांग रहा hai.....Bua ने एक पेपर पे लिख के दे दिया उसको.....
पंकज भी ख़ुशी ख़ुशी उस पेपर को लेके थैंक्स बोलके वह से निकल गया लीडर को leke.....wahi बुआ उसको देखती रही....
बुआ निच्चे हम सब के पास आयी तो वह चची भी thi.....thodi हॉटश सी बैठ हुई थी मेरे बगल में.....
बुआ - भाभी आप जैसा समझ रही हो वैसा कुछ भी नहीं है.....
चची - मैं अब कुछ समझना hi नहीं chahti.....sab ठीक hai....log खुदगर्ज़ होते है पता होना चाहिए था मुझे चाहे वो मेरे अपने hi क्यों ना ho....wo भी खुदगर्ज़ होंगे hi....khair छोड़ो इन् सब ko......mujhe कही काम से जानना hai...sham को खाना खाने आ जाना सभी....
चची भी इतना बोल के वह से निकल गयी....
बुआ - क्या हुआ था यहाँ पे.....
रूपल दीदी - पता नहीं मम्मी बहुत अजीब बातें कर रही थी आपने भी सुन्ना ना.....
बुआ - वो नहीं उससे पहले क्या हुआ tha...aur पंकज यहाँ पे आया था न.....
रूपल दीदी - आपने उसकी हेल्प नहीं की naa......wo मेरे साथ बतमीज़ज़ी कर रहा था मुझे सुन्ना रहा था....
K.Bua - गलती भी तुम्हारी थे.....
K.Bua ने जो भी हुआ जैसे भी हुआ वो सब उनको bataya.....aur उसके बाद बुआ ने जो ऊपर हुआ वो सब यहाँ सबको बताया.....
रूपल दीदी - dekha...iss बार भी इसकी वजह से मम्मी नाराज़ हो गयी hai.....isko छोडूंगी.....
बुआ - तुमको समझ नहीं आ raha......kab तक बच्चो की तरह बातें करती rahogi.....jaise वो बात कर रहा था ऐसा लग रहा था जैसे एकदम से टूट गया है wo....aur उसके इस हालत में लाने में हम सब का हाथ hai....mera हाथ है...
K.Bua - मुझे लगता है हमको उससे बात करनी चाहिए....
निकिता - जब वो जा रहा है तो क्यों उसके पीछे जाना रहने देते है ना उसको अपने हाल pe....aur हम खुद में खुश रहते है....
बुआ - जब तुम बेहोश पड़ी हुई थी ना तब मैंने ये कविता naa....wo तुम्हारी didi....Rupal ने या ये प्रतीक ने नहीं ढूंढा था tumko.....wo पंकज था जिसने ढूंढा था tumko....usne ऐसा सोचा होता ना तो अभी क्या होता वो तुम सोच भी नहीं sakti...ussi हाल में छोड़ देते hai.....sach में इतने खुदगर्ज़ है हम sab....maine सोचा भी नहीं था....
मैं - बुआ मैं बात करके देखूंगा usse....aap चुनता मत karo....waise भी वो मुझसे बात करने को पागल हुआ रहता hai.....mera ख्याल रखने के लिए कोई बच्चो वाली किताब पढ़ के आया था वो....
K.Bua - उसके साथ एक आदमी tha...usko भी देखा था क्या तुमने पूनम.....
बुआ - हां देखा tha.....uska क्या,...
K.Bua - पंकज बोल रहा था वो उसी की मदद कर रहा hai....kahi वो कोई गलत काम तो नहीं करा रहा ना उससे....
बुआ - लगा तो नहीं था aisa.....Tum सब रहो यहाँ मैं देखती हु उसको....
मैं - अरे बुआ ओल्ड आउल के लोगो को भेज देता हु naa...yaa फिर ज्वाला के लोग...
बुआ - कभी कभी कुछ खुद भी करना होता hai.....tum समझ नहीं पाओगे.....
बुआ वह से चली gayi.....ye पता नहीं क्या हो रहा tha.....Pankaj को लेके इतना सीरियस हो जाना मज़्ज़ाक़ जैसा लग रहा था.....
आज के लिए इतना hi रखते है आगे के अपडेट में देख लेंगे निकिता क्या क्या बताती है शैतानो के बारे में और ये प्रतीक मंदिर तक पहुंचा तो उसको ऐसा क्या हो gaya.....aur साथ hi dekhenge.....Strange वर्ल्ड की एक छोटी सी लड़ाई
सुबह का वक़्त हो चला था हम सब hi अभी नास्ते के टेबल पे बैठे हुए the.....darasal नास्ता ख़तम हो hi गया था पर आज चाचा चची दादा दादी ये सब किसी काम से जा रहे the....aur ये होता नहीं था aisa.....aaj छुट्टी का दिन था सबको एक साथ रहना होता था पर आज काम था तो bas....wahi बात वो बता रहे थे की वो तो आ नहीं पाएंगे आज तो हम खुद का hi कुछ प्लान कर ले....
दब ने पहले hi कह दिया था वो वापस जाना चाहता hai......pata नहीं कुछ ज्यादा सीरियस हो गया था ये या कोई और बात thi.....K.Bua ने कहा उसको की ृक्क जाए पर वो जाने को बोल रहा था तो उसको अपनी सहेली के पास छोड़ने को चली गयी.....
घर पे Main,Bua रूपल दीदी और निकिता hi थे अभी की तभी ओल्ड आउल की आवाज आयी.....
ओल्ड आउल - प्रतीक यहाँ पे कुछ गड़बड़ है सायद......
मैं - क्या hua....koi मुशीबत है kya.....tum पोर्टल खोलो मैं आ रहा हु......
ओल्ड आउल - नहीं वैसी बात नहीं है मुसीबत तो नहीं लग rahi.....par सायद तुमको ये जानना चाहिए....
मैं - तो पोर्टल खोलो.....
ओल्ड आउल - मैं कोशिश कर रहा hu....par तुम जहा हो वह नहीं खुल पा रहा है......
मैं - घर की सुरक्षा बधाई थी चची और दादी ne....sayad इस वजह se.....tum रूक्को मैं बहार आके बोलता हु खोलने को.....
मैं बहार जाने लगा.....
रूपल दीदी - ुये छोटू kaha....kaha जा रहा है....
मैं - वो दीदी बस ऐसे hi.....thoda बहार....
रूपल दीदी ने निकिता की ओर dekha....Main उन् दोनों को देखने laga....Nikita मुझे और रूपल दीदी को देखने lagi.....aur इतने में बुआ aayi.....aur वो हम तिण्णो को देखने लगी....
बुआ - ये क्या कर रहे ho....aise पागलों की तरह क्या देख रहे हो एक दूसरे को.....
रूपल दीदी - निकिता बता ना ये कहा जा रहा है....
मैं - आप उससे क्या पूछ रही हो मैंने बताया ना बहार जा रहा hu....thoda टहलने.....
निकिता - वही तो मैं कैसे bataun....aur आपने पूछा भी कहा बस मुझे देख रही thi....mujhe लगा कुछ हुआ है....
रूपल दीदी - ये अच्चानक से जा रहा था तो मुझे लगा इसने किसी से बात की है और तुमको पता चल गया इस लिए तुझे देख रही थी की तू बताएगी....
बुआ - निकिता तुमको कुछ पता चला की ये कहा जा रहा है....
निकिता - नहीं बुआ मैं कैसे जानूँगी.....
मैं - ये करते रहो आप सब मैं जा रहा hu....bade अजीब हो आप सब.....
बुआ - अच्छा ठीक है जा तू.....
मैंने एक बार उनको dekha....aise जाने को बोल रही hai.....phir वह से बहार निकलने laga....aur घर के आगे के गार्डन में आके ओल्ड आउल से पोर्टल खोलने को कहा.....
पोर्टल खुल्ला वह पे और मैं वह से स्ट्रेंज वर्ल्ड में चला गया.....
ओल्ड आउल वही पे था.....
मैं - हम्म बताओ क्या हुआ है.....
ओल्ड आउल - तुमको वो खून याद है naa.......wo 4 खून ठीक उसी तरह के 2 और खून हुए है कल.....
मैं - Kya......Wapas से सोसाइटी के लोग मारे gaye......Leemo कहा hai......mujhe उससे बात करनी hogi...aur तुमको समझ नहीं आता क्या देखने को बोलै था अभी तक कोई नहीं मिला तुमको....
ओल्ड आउल - नहीं ye...ye वो नहीं the....Society का कोई नहीं मर्रा hai......jo दोनों मर्रे है वो वाटर एलिमेंट वाले है और आम लोग है....
मैं - अब ये क्या चाकर hai....tumne इसके लिए बुलाया mujhe....arre ये सब तो यहाँ के लोग भी देख सकते है naa....Elf किंग को नहीं पता क्या इसके बारे में.....
ओल्ड आउल - एल्फ किंग जानते है इसके बारे mein....aur सभी जानते hai.....Main ये इस वजह से बता रहा हु क्यूंकि ये खुनी वही है जिन्होंने उन् 4 लोगो को मारा tha.....thek उसी तरह से मारा है ये देखो....
मैं - लीमो को कुछ पता चला की उसके लोगो को किसने मारा है....
ओल्ड आउल - नहीं लीमो नहीं पता कर पाया hai.....par मैंने अपने बन्दे लगाए है यहाँ pe.....thodi बहुत जांच करने के बाद ये कह रहा हु इसमें क्रोनेड एल्फ फॅमिली का कोई हाथ नहीं है ना तो एल्फ किंग का और ना hi युवराज का जैसा तुमने कहा था पता करने को....
मैं - अच्छा और इस नतीजे पे कैसे पहुंचे tum.....matlab जांच कैसे किया....
ओल्ड आउल - जब ये दोनों खून हुए है तब एल्फ किंग और साथ hi युवराज दोनों hi महल में अपने कमरों में सो रहे थे.....
मैं - हो सकता है इनमे से किसी एक ने करवाया होगा ये खून और अब ये होने के बाद तो और पक्का सा लग रहा है ये सब.....
ओल्ड आउल - मतलब क्या है तुम्हारा.....
मैं - तुमने बताया ये दोनों hi वाटर एलिमेंट वाले hai.....water element......sayad ये एक इत्तेफ़ाक़ hi है par.....ho सकता है की ये युवराज का किया धराया हो या फिर एल्फ किंग ka.......Mahel में एक वाटर एलिमेंट वाला आता है दिन दहाड़े वो युवराज के पास से एक चीज़ज़ चुर्रा के ले जाता hai....badla लेने के बारे में ये लोग क्यों नहीं sochenge......mujhe लगता है इन् सब में थोड़ा बहुत तो इनका भी किया धराया hoga.....mahel की इज़्ज़त बचने के लिए....
ओल्ड आउल - एल्फ किंग के बारे में मुझे नहीं लगता वो ऐसा कुछ अपनी जनता के लिए karenge....haa थोड़ी बहुत खिल्ली ुड्डी होगी उनकी पर वो इस वजह से ऐसे hi खून तो नहीं करने लग गए honge....aur हम खिल्ली उड़ने की hi बात कर रहे है तो सबसे पहले तो युवराज की hi बात आती hai....par ये भी है की कल रात को वो भी अपने रूम में hi था.....
मैं - तुम इन् दोनों पे ध्यान rakho....accha और मुझे लगता है मैं निक्स समुदाय के पास जाना चाहूंगा.....
ओल्ड आउल - वह पे मेरा एक बाँदा है पहले se...tum जाओ waha....main पोर्टल खोल रहा हु.....
ओल्ड आउल ने तुरंत पोर्टल खोल दिया और मैं उससे होते hue.....Nix लोगो से बस थोड़ी दुर्री पे आ गया था....
ओल्ड आउल पोर्टल के उसी तरफ से बोलै....
ओल्ड आउल - इनको मेहमान ज्यादा पसंद नहीं aate......sambhal के जाना....
और बोल के पोर्टल बंद कर दिया.....
मैं आगे बढ़ने laga.....yaha की जमीन थोड़ी गिल्ली गिल्ली सी thi...chipchippi....
मैं - ध्रुव ये जमीन ऐसी क्यों है यहाँ की....
ध्रुव - निक्स वाटर स्पिरिट्स होते hai....to इनके आस पास पानी तो होना hi hai...ussi पानी की वजह से sayad.....waise यहाँ पे आने की क्या वजह है....
मैं - उस लड़की को बतलाना है उसकी वजह से वह लोग मारे जा रहे है अगर उसने वो पंख नहीं चुराया होता तो ये सब ना हुआ होता....
ध्रुव - एक तरह से हमारी मदद की है usne.....agar वो पंख गलती से भी लूसिफ़ेर के हाथ लग जाता और अगर उसने उसके जरिये ओल्ड आउल और बाकी सब का पता लगा लिया होता तो हो hi जाना था सब सही.....
मैं - बात में दम है tumhare.....par वो पंख चाहिए hi क्यों थे usko...aur उसको उस पंख का पता कैसे चला.....
"तुम कौन ho...aur यहाँ क्या कर रहे h......ek और इंसान...."
मैंने पीछे मदद के देखा तो वह पे एक बाँदा था हाथ में पानी की तलवार लिए hue.....pahle तो दिखने में ऐसा लग रहा था अभी के अभी मार देगा पर फिर एकदम से कन्फ्यूज्ड सा दिखने लगा....
"तुम उस लड़की के साथ यहाँ आये हो क्या....."
मैं - Ladki.....haa उसी के साथ.....
"आओ picche....kaha था पुजारी जी से मैट बनाओ उसको शिष्य apni.....par nahi....kahte है किताब में लिखा है वो आएंगे yaha....aur हमको उनको सीखना hai....pata नहीं क्या क्या बोलते रहते hai.....wo सामने वो बड़ा सा मंदिर दिख रहा hai....wahi है वो ladki....mil लो...."
मैं इसके पीछे पीछे आ रहा था और ये बाँदा एकदम से बोलते जा रहा था और बोलते हुए मुझे लेके आ गया उस जगह pe...jaha पे इसने बताया की मंदिर hai....ek बड़ा सा मोन्यूमेंट था ये.....
मैं अंदर जाने laga....par तभी पता नहीं अलबूस और कूपर को क्या hua....mere सीने में जैसे कुछ जलने सा लगा था उस waqt.....jaise जैसे करीब जा रहा था....
ध्रुव - यहाँ से निकलना hoga....Albus और कूपर दोनों परेशां लग रहे है.....
मैं - पर हुआ क्या है और ye.....aahhhh है kyaa..........Jwala पोर्टल खोलो....
क्या हुआ पता नहीं एकदम से बहुत ज्यादा जलन होने लग गयी थी.....
ज्वाला ने मेरी आवाज सुन्नी और पोर्टल खोल diya.....aur मैं उसमे चला gaya....aur वह जाते hi बेहोश....
एअर्थ में घर पे बैठे हुए बुआ, रूपल दीदी और निकिता एक दूसरे से बातें कर रहे the.....kisse सुनाये जा रहे थे अपने apne.....ki तभी निकिता को लगा की कुछ हुआ hai.....pasina आने लगा उसको अच्चानक से बोलते बोलते hi गल्ला सुख सा गया.....
बुआ ने देखा usko.....ek दम अच्चानक से ऐसे सब कैसे हो गया.....
बुआ - बच्चू ठीक हो ना tum.....Rupal पानी लेके आओ.....
बुआ जो अभी दूसरे सोफे पे थी वो निकिता वाले सोफे पे आ गयी और उसको देखने लगी कही बुखार तो नहीं hai.....wahi रूपल दीदी भी जल्दी से पानी लेके आयी.....
पानी पन्ने के बाद निकिता थोड़ी देर बैठी rahi.....pasina निकलना अब बंद हो गया था पर उसका पूरा चेहरा भीगा हुआ tha......Bua ने एक गिल्ला टॉवल दिया उसको मुँह साफ़ करने ko....aur जब उसने ऐसा करते हुए अपनी आखें बंद की तो उसको प्रतीक dikha....behosh पड़ा हुआ.....
निकिता - Prateek.....usko कुछ हुआ hai....wo बेहोश है....
बुआ - Kya.....kya बोल रही हो tum.....kaha पे है वो.....
रूपल दीदी - बेहोश hai....par वो तो बहार hi g.....main देख के आती हु....
निकिता - Nahi....wo यहाँ नहीं hai.....Jwala पोर्टल खोलो....
यहाँ अपने कबीले में ज्वाला अभी प्रतीक को वैद्यों के पास लेके गया था और वो देख रहा था की वो बेहोश hai....par फिर भी उसको सुनाई दिया की पोर्टल खोलने बोलै जा रहा hai.....Jwala ने एक बार वापस से देखा प्रतीक की ओर....
कुछ समझ ना आया तो उसने पोर्टल खोलना चाहा पर खुला नहीं....
ज्वाला - कौन हो तुम.....
निकिता - मैं निकिता hu.....jaldi से पोर्टल kholo....humko पता है प्रतीक को कुछ हुआ है....
ज्वाला थोड़ा कंफ्यूज हुआ की आखिर कैसे ज्वाला की आवाज wo....aur उसकी आवाज ज्वाला सुन पा रहे the....wo बात कैसे कर रहे थे ऐसे में......
निकिता - ज्वाला जल्दी से पोर्टल खोलो....
ज्वाला - Nahi.....portal खुल नहीं रहा आप जहा पे है वह पे नहीं खोल पा रहा मैं पोर्टल....
निकिता - बुआ ज्वाला के यहाँ है प्रतीक और वो बेहोश है....
रूपल दीदी - वो वह चला gaya....wo भी झूट bolke....Jwala को बोलो पोर्टल खोलने को....
निकिता -न उससे नहीं हो रहा hai....maine बोलै पर वो बोल रहा है यहाँ पे नहीं खुल रहा पोर्टल....
बुआ - कल hi घर की सुरक्षा बधाई hai....Bahar चलना hoga....garden mein.....wo बेहोश है naa.....Kavita को बुलाती हु मैं....
बुआ ने तुरंत K.Bua को कॉल किया और अपने पास आने को bola.....K.Bua वह पे अपनी फ्रेंड के साथ बातें कर रही थी जब उनका फ़ोन बज्जा.....
बुआ की आवाज सुन के वो समझ गयी बात सीरियस hi hogi....to उन्होंने जल्दी से वह से निकलने का रास्ता सोचा और निकल भी gayi....agle 10 मिनट में वो बुआ के पास थी....
बुआ - निकिता अब bolo...ab हम बहार है वो कर लेगा अब....
निकिता ने वापस से ज्वाला को पोर्टल खोलने को kaha...aur इस बार खुल गया क्यूंकि वो सब बहार थे...
सभी पोर्टल से सीधा वह वैद्यजी के पास आये....
K.Bua - इसको क्या hua....ye ऐसे क्यों पड़ा है....
बुआ - ये बेहोश हो गया hai....isko देखो क्या हुआ hai.....Aur तुम ज्वाला तुमको हममे बताना चाहिए था अगर कुछ हो गया इसको तो क्या करेंगे हम....
बुआ ज्वाला को पूरा झड़ने लग गयी....
वही K.Bua प्रतीक को देख रही thi.....unhone पहले तो पल्स dekha....wo नार्मल तो बिलकुल भी नहीं the....phir उन्होंने और सब देखना शुरू kiya.....sab कुछ hi अजीब सा था इस वक़्त तो....
K.Bua ने फिर स्किन को देखना शुरू kiya....Prateek के हाथ का स्किन थोड़ा अजीब सा लग रहा tha....aur वो उसको देखने लगी....
K.Bua - पूनम यहाँ आ to....ye dekh.....ye इसके स्किन को ऐसा क्या हो गया है....
K.Bua ने आवाज सिर्फ बुआ को लगायी थी पर आ सभी गए the.....ur सभी ने देखा जैसे प्रतीक के स्किन पे कुछ बनना हुआ tha....ajeeb सा....
K.Bua - Kainchi.....poonam कैंची देना.....
अब कैंची थी नहीं उनके पास तो उन्होंने जादू से mangwaya.....aur दे दिया K.Bua के पास.....
K.Bua ने उस कैची से कलाई काटना शुरू kiya.....aur कलाई से होते hue.....pura ऊपर जो t-shirt पहनी हुई थी मैंने वो काट दिया unhone......aur कपडे को हटाने के बाद जो देखा उन्होंने वो देख के तो सभी चहुँक gaye....par 10 सेकंड बाद जब वो चीज़ज़ धीरे धीरे गायब हो रही थी उस चीज़ज़ को देख के तो सब और ज्यादा चौंक गए
वो सब गायब हुआ और प्रतीक की आँखें खुली.....
सामने सभी को उसको घूरता देख वो समझ नहीं पाया आखिर क्या चल रहा hai....Usko तो ये भी समझ नहीं आ रहा था की ये लोग वह आये कैसे.....
K.Bua - अरे सब पीछे hatto.....Prateek अभी ठीक लग रहा है....
मैं - हम्म्म पता नहीं थोड़ा ajeeb.......mere kapde......Main ऐसे क्यों hu.....aur आप सब यहाँ कैसे.....
ज्वाला अभी भी मुझे देखे जा रहा था सिर्फ वही नहीं sabhi......K.Bua उसके पास में hi थी तो उसको एक बार धीर्रे से maara.....kyunki मैं उसी को देख रहा था....
ज्वाला जैसे अभी नींद से जाएगा हो....
ज्वाला - haa....kya....kya कहा तुमने....
मैं - ये सब यहाँ कैसे तुमने बुलाया....
ज्वाला - woo....haa मैंने hi वो तुम to....tum बेहोश हो गए थे ना......
मैं - मेरे kapde....ye किसने कर दिया और क्यों.....
K.Bua - अरे वो तुम जब बेहोश हुए ना उस वक़्त उसमे कुछ लग गया tha...aur तुमको उठा के उसको निकल नहीं सकते थे ना तो ऐसा करना pada....tum चिंता मत करो नया लेके दे denge....ab ये बताओ कैसा लग रहा है....
मैं (मैं में) - हम्म अब कोई जलन नहीं हो रही hai.....ab तो सब सही hi है....
K.Bua - प्रतीक ठीक हो ना....
मैं - हां बुआ अब ठीक hu,.....wo पता नहीं क्या हुआ था और मैं बेहोश हो गया.....
K.Bua - हम्म चिंता मत karo....ye बस ऐसे hi tha.....sayad तुम्हारा एलिमेंट थोड़ा और ताकतवर हो रहा hoga......hmm अच्छा ये तुम्हारा स्पिरिट एनिमल क्या था प्रतीक बताना जर्रा....
मैं - (मैं में) स्पिरिट एनिमल के बारे में क्यों पूछ रही है ये इनको तो पता hi है मैंने एक चुहा बताया tha.....kuch तो हुआ है....
मैं - बुआ आप तो जानती hi हो वो एक चूहा है....
बुआ - कविता ये ठीक है ना.....
K.Bua - हम्म ठीक hai...par सायद आराम चाहिए होगा इसको थोड़ा....
बुआ - नहीं इसको कोई आराम नहीं chahiye.....Jwala हम सब को स्कूल जाना है abhi.....iske मेडिकल सेंटर में....
बुआ एकदम से गुस्से में लग रही thi...pakka कुछ तो हुआ था मेरे बेहोश होने पे.....
ज्वाला ने पोर्टल खोला और सारे उससे होते हुए पहुंच गए K.Bua के मेडिकल डिपार्टमेंट mein.....wo Jwala.....wo बिन्ना बुलाये आ गया वह पे.....
बुआ - इसका स्पिरिट एनिमल चेक करो abhi....mujhe देखना है क्या है....
मैं - बुआ आपको तो .....
बुआ - तुमसे पूछा kuch......Kavita.....dhyaan रहे कोई भी ऐसा मैजिक जो इसके स्पिरिट एनिमल को छुपाने की कोशिश करे वो बक्कर हो जाना चाहिए....
K.Bua - पूनम शांत हो जाओ कोई तो वजह रही होगी ना.....
बुआ - wahaj......nahi....pahle तो चेक करो tum.....aur tum....tum क्या कर रहे हो यहाँ पे.....
ज्वाला - Main....wo..wo मैं भी देखने आया tha.....wo....
बुआ - तुम जुड़े हुए हो ना isse.....ye कोई भी मैजिक नहीं कर पाए ध्यान रखना इसका....
मैं - ध्रुव अब kya.....ye तो अलबूस कूपर सब जान जाएंगे....
ध्रुव की आवाज hi नहीं aayi....wo साला था hi नहीं जैसे वह....
बुआ - निकिता बच्चू ध्यान रखना तुम bhi....koi जादू नहीं होना चाहिए....
निकिता को समझ नहीं आ रहा था वो कैसे समझाए की मैं कोई जादू करू तो उसको पता नहीं चलने वाला......
K.Bua तो लग भी गयी थी अपने काम pe.....aur रूपल दीदी मुझे देखे जा रही thi.....chup चाप....
मैं यहाँ ध्रुव से बात करने की कोशिश कर रहा था पर वो कुछ बोल hi नहीं रहा tha.....pata नहीं इसको हुआ क्या था....
K.Bua ने मेरा हाथ पकड़ा और उसको अपने साथ लेके आये हुए एक पत्र पे रख दिया.....
K.Bua - हाथ मत हटाना....
मैं - बुआ आप जानती हो ना पह.....
रूपल दीदी - तेरी to.....itni बातें नहीं बताई है इसने.....
वो ऐसे hi बोलते हुए यहाँ वह देखने लगी जैसे कोई चीज़ दूध रही ho.....nicche एक डंडा जैसा कुछ मिला उनको.....
K.Bua - अरे रूपल रूक्को tum....ye क्या मार डौगी उसको अब.....
बुआ - जोर से रूपल.....
मैं - Didi.....ye क्या कर रही हो....
बहुत ज़ोर से डंडे से मुझे मारा tha....par डंडा टूट गया और मुझे कुछ नहीं हुआ....
K.Bua - पागल हो गयी हो dono.....aur तुमको भी अकाल नहीं है पूनम रूकने के वजयी और ज़ोर से मारने बोल रही ho...kuch हो जाता to....jaruri थोड़ी होता है जो दिख रहा है वही hoga.....Prateek दर्द तो नहीं हो रहा है ना....
बुआ - कुछ नहीं हुआ है isko....tum वो देखो इमेज तैयार हुई या nahi......bas एक बार जो हम सोच रहे है वो सही निकल jaaye.....isko फिर मैं....
मैं - मेरा स्पिरिट एनिमल एक ड्रैगन hai.....theek है ना ab....ab बस भी karo...aap सब....
निकिता - ek....sirf एक.....
मैं (उसको घूरता हुआ) - 2 है 2 ड्रैगन्स है वो.....
बुआ - तो पहले क्यों नहीं bataya.....Main कितनी उद्दस थी इस बात को लेके और tumne....tumne झूट बोल दिया था...
मैं - बुआ मैं नहीं बोलना चाहता था पर मैं खुद समझ नहीं पा रहा tha....maine मास्टर तक को नहीं बताया है इसके बारे में....
रूपल दीदी - इसमें चुप्पाने वाली क्या बात thi...ye तो और बताने वाली बात है पागल तुम्हारे पास ड्रैगन्स है 2 ड्रैगन्स....
K.Bua - हम्म मुझे नहीं लगता रूपल ये बताने वाली बात hai.....ek तरह से ये अच्छा hi hai.....kuch चीजजें चुप्पी हुई होती है तो अच्छा होता है....
अभी वो कुछ आगे बोलती उससे पहले K.Bua का फ़ोन बज्जा....
K.Bua - भाभी का कॉल है.....
K.Bua ने कॉल एक्सेप्ट किया.....
K.Bua - kya.....aap स्कूल में हो....
....................................
K.Bua - wo....wo तो स्टाफ रूम में hi honge....aapne किसी से पूछा नहीं....
...................................
K.Bua - ऐसा kaha.....kisne kaha....aap एक काम karo....aap....medical डिपार्टमेंट में आओ हम यही है....
इतना बोल के उन्होंने कॉल कट कर दिया.....
K.Bua - ये भाभी यहाँ पे प्रोफ. दक्ष से मिलने को क्यों आयी hai.....aur तुम सब का फ़ोन क्या hua....wo कब से तरय कर रही थी.....
रूपल दीदी ने अपना फ़ोन देखा तो वो नहीं था वह पे वो सायद घर पर छोड़ आयी थी वैसे hi निकिता का भी tha....aur बुआ का डिस्चार्ज हो चूका था.....
बुआ - पर टुन्ने उनको यहाँ पे क्यों बुल्ला लिया pagal.....wo भी जान जायेगी ये सब....
चची - क्या sab....aur पागल किसको कहा पूनम मुझे पागल बोल रही है.....
वो तो अच्छा हुआ ज्वाला ने खुद को गायब कर लिया था वर्ण वो भी देख लिया जाता.....
चची - Ye....ye ऐसे क्यों लेता हुआ hai...iske कपडे कहा गए....
रूपल दीदी - मम्मी वो इसको चक्कर आ गए थे वापस से तो चेक करने को यहाँ आ गए.....
चची - क्या.....
K.Bua - अब ठीक है Bhabhi....waise आप यहाँ पे....
चची - अरे वो पंकज से बात करलु सोचा था आखिर क्या माज़रा है की वो तुम सब के साथ नहीं रहता वो मिला नहीं घर पे तो उसके पापा से बात करने का सोचा ताकि वो समझा सक्के usko....waise िन्न्न सब में मुझे तुम सब का hi हाथ लग रहा है,,,,,
बुआ - नहीं भ hi ऐसा कुछ नहीं hai....rukko आपको प्रोफ. दक्ष से मिलना है ना मैं ले चलती हु aapko....unse कर लेना बात वैसे ऑफिस में hi होंगे वो....
चची - अरे नहीं जाने दिया mujhe....maine कहा तुम्हारी भाभी हु तो बोलता है जब तुम आओगी तब आना.....
बुआ - ये नया आया होगा koi.....aap चलो मैं देखती hu.....Rupal इसको कपडे दे dena....aur घर जाओ वह बात करेंगे...
वही पंकज अभी लीडर के साथ tha....Pankaj ने उससे कहा था सायद कोई और भी रास्ता हो उसकी बेटी को ढूंढने ka....aur वो रास्ता होक्के जाता था एअर्थ पे मैजिकल क्रीचर्स के हेडोफ़्फ़िए se.....ye एक ऐसी जगह थी जहा पे लगभग सभी मैजिकल क्रीचर्स की एंट्री होती thi.....chahe वो कोई इंसान और मैजिकल क्रेअटुरे का खून hi क्यों ना ho....isse कोई मतलब नहीं होता tha....aur इन् सब की देख रेख स्ट्रेंज वर्ल्ड से आये हुए वो मोटा आदमी करता था जो हमारे घर आया tha.....yaha पे इसके बहुत से कनेक्शंस थे....
पंकज भी यहाँ पे स्ट्रेंज वर्ल्ड से hi आया हुआ था उसके पापा यानी दक्ष मां के साथ तो इन् जनाब से एक दो बार मुलाकात हो चुक्की थी इसकी....
लीडर - पर बेटे वो मुझे यहाँ देख के hi समझ जाएगा मैं किसी चीज़ज़ को लेके आया हु यहाँ पे....
पंकज - sayad....par क्या वो ये जान पायेगा की आप यहाँ पे अपनी बेटी को ढूंढने के लिए आये हो....
लीडर - वही तो बात hai....ab मैं उससे मिलने गया तो वो पक्का है की मुझसे पूछेगा क्यों आये ho...aur मैं किसी भी चीज़ज़ या कोई भी बन्दे का नाम लूंगा ये लोग उसपे नज़र रखना शुरू कर देंगे....
पंकज - तो मैं चला जाता हु naa....waha पे बस आपके एनर्जी सिग्नेचर कको देके बोलना hi है की इससे मैच करने वाली एनर्जी सिग्नेचर के बारे में पत्ता करना है....
लीडर - मैं भी यहाँ रह चुक्का hu....unko पता चल जाएगा...
पंकज - मैं बोल दूंगा स्कूल का प्रोजेक्ट hai.....unhone एक एनर्जी सिग्नेचर दिया है और बोलै है पता लगाने की किसका है ye....yaa इस जैसे और कितने है और उन् सब की जानकारी.....
लीडर - पर वो कुछ पूछेंगे नहीं की किसने दिए है ऐसा प्रोजेक्ट और सिर्फ तुम hi क्यों aaye.....koi और क्यों नहीं...
पंकज - हम्म ये समस्या hai....haa ये सही rahega.....par मुझे किसी प्रोफ से मिलना होगा जो ये कर दे.....
लीडर - तुमने बताया था तुम्हारे पापा भी प्रोफ है तो फिर उनसे करा लो.....
पंकज - पापा इसमें साथ नहीं देने वाले mera....koi और chahiye.....jo आसानी से कर दे ये....
लीडर - करना क्या है....
पंकज - पनिशमेंट मांगनी है.....
लीडर - तो तुम बोलने वाले हो की तुमको पनिशमेंट मिली हुई hai....aur इस वजह से तुम ये सब करने जा रहे हो वह pe....sahib दिम्माग लगाया hai....ab प्रोफ ढूँढना है ना बस....
पंकज - hmm...waise 1 है to....par उनके पास जाने का मैं नहीं hai....wo log....wo समझते hi नहीं है......
लीडर - ये कोई ek.....log कब से कहे जाने लग गए....
पंकज - प्रोफ तो एक hi hai....Prof पूनम पर उनके साथ 3 और लोग होते hai.....unn तिण्णो को मैं गलत लगता hu.....manna मैं गलत tha....par वो पहले की बात थी ना अब मैं चेंज होने लगा हु naa....aap hi बताओ मैं अच्छा नहीं हु क्या...
लीडर - मेरे लिए तो अच्छे hi ho....meri मदद कर रहे ho....par बीटा ये duniya...ye यहाँ के log....ye बड़े hi अजीब होते hai.....ek बार इन्होने आपको देख के जो डीडे कर लिया ना वो सोच बड़ी मुश्किल से बदल पाती hai....ab मेरे बारे में lelo....Maine तुमको अपने बारे में बताया तुम दर्रे थे naa.....par क्या मैं ऐसे hi सबको मारता फिरता hu......wo darr....wo सोच है सबकी मुझे leke....aur मैं अब सायद hi इस सोच को कभी बदल paaunga......lekin tum....tum बदल सकते ho...aur इतने में हार तो मत मानो...
पंकज - हां इस बारे में कभी बात karenge...abhi तो प्रोफ पूनम के पास चलते hai.....unke पास जाने के कुछ फायदे तो है hi.....agar पापा को पता भी चला की मुझ पनिशमेंट इन्होने दी है तो वो ना तो प्रोफ से कुछ कहेंगे और ना hi mujhse....haa एक बार बस थोड़ा समझा देंगे.....
लीडर - अभी कहा होंगी ये आपकी Prof.....kaho तो अभी ले चलता hu....aaj तुमको मैं कुछ खास दिखता हु....
पंकज - क्या आपके pass....koi उड़ने वाला जीव है जिसपे बैठ के जाएंगे hum.....yaa कुछ aur.....Aap लीडर हो फोमोस के आपके पास तो बहुत कुछ खास होगा ना....
लीडर - :रेडफास: पोर्टल से जाने को बोल रहा tha...aur तुम तो पता नहीं कहा कहा के सपने लिए बैठे ho....batao कहा है वो....
पंकज - एक मिनट अभी पता करता hu....ye प्रतीक को तो पता होगा hi....
पंकज ने मुझे कॉल किया पर कॉल लगी नहीं....
पंकज - सायद इसने भी मुझे ब्लॉक कर दिया hai....Kavita मैडम होती है हमेशा उनके साथ सायद उनको पता हो....
पंकज ने फिर K.Bua को कॉल किया.....
K.Bua - Hello कौन.....
पंकज - मैं पंकज बोल रहा hu....kya आपको पता है प्रोफ पूनम कहा है....
K.Bua - Poonam....haa haa...wo यही है मेरे pass.....tum आ जाओ यहाँ pe....ye मेरे डिपार्टमेंट में....
पंकज - Accha....par मैं अकेला नहीं hu...aur इनको आने नहीं देंगे अंदर....
K.Bua - पंकज hi बोल रहे हो naa.....ye ऐसी बातें तो नहीं करता था wo.....naa जाने कितनो को यूँ hi स्कूल में लेके आया हुआ है वो..
पंकज - हम्म ठीक है मैं आता हु....
पंकज - चलिए पता चल गया hai....aap भी साथ में चलो....
लीडर - पर बीटा किसी ने पहचान लिया to....dikkat हो जायेगी....
पंकज - आपको यहाँ पे ज्यादा लोग नहीं पहचानते और रूप बदल लो नहीं to...bas इससे आपको और भी नहीं पहचान पायेगा koi....chalo अब खोलो अपना portal.....waha के लिए जहा पे हम मिले थे....
ये दोनों आने को रेडी थे वही पंकज के स्वागत के लिए रूपल दीदी रेडी हो गयी thi......Isske वजह से 2-3 बार उनको दांत सुन्नी पड़ीं थी....
दरअसल जैसे hi फ़ोन पे पता चला की ये पंकज है रूपल दीदी ने K.Bua से उसको यहाँ आने को बोलने बोलै.....
कुछ देर हुई और वो आ गया वह पे पर उसके साथ कोई और भी tha....pata नहीं कौन था ye.....dekhne से hi लग रहा था इसकी दाढ़ी नकली hai....aur कान भी एल्फ के तो बिलकुल नहीं the.....Goblin सायद गॉब्लिन हो पर इसको गॉब्लिन कहा से मिल गया....
पंकज आया और बिन्ना कोई देर kiye...usne पूछा....
पंकज - कविता मिस कहा पे है प्रोफ पूनम मुझे उनसे जरुरी काम है....
रूपल दीदी - जर्रा हमसे भी मिल लो बुआ से थोड़ी देर में मिल लेना....
पंकज अपना सर खुजाने लग गया की ये इनको हुआ क्या है आज तक ऐसे तो कभी नहीं कहा......
पर रूपल दीदी तो फुल रेडी थी उन्होंने अपना हाथ पीछे से आगे किया और एक चुटकी bajayi.....yaha पे होना ये चाहिए था की पंकज थोड़ी दूर जाके girta.....par असल में हुआ ये की रूपल दीदी गिर गयी.....
K.Bua - arre....ye क्या hua....tum गिर कैसे गयी....
लीडर - कभी कभी दूसरों को गिराने के चक्कर में लोग खुद गिर जाते hai....Bete मुझे नहीं लगता ये कोई मदद करने वाले hai....chalo यहाँ से....
पंकज - Rukiye....ek minute....Rupal मैं तो यहाँ पे बस प्रोफ से बात करने आया tha......isme इतना गुस्सा क्या hona....ab क्या उनसे कोई सवाल भी नहीं कर सकता main....kya चाहती हो स्कूल छोड़ du...taaki तुम और तुम्हारे इस गैंग से दूर रह सक्कु....
रूपल दीदी - तुम समझते क्या हो खुद ko......jyada जुबान चलायी तो समझ लेना....
लीडर - समझ आप जाए beta....ye अभी मेरी मदद कर रहा hai....aur इस waqt....ek चिट्टी तक इसको काट नहीं sakti....samjhe...chalo यहाँ se....ye लोग काबिल नहीं है तुम्हे...
निकिता - आप होते कौन हो ये सब बोलने wale...aur ये हमारा आपस का मामला है आप क्यों बिच में आ रहे हो....
पंकज - आपस का maamla.....kaun सा maamla.....maine तुम सब में किसी को कुछ नहीं kaha.....jo पिछली बातें हो चुक्की थी उन् सब की माफ़ी मांगी hai....aur फिर भी ये कर रहे हो तुम sab....aapsi maamla....tum सब तो बस मुझे इग्नोर करने में लगे रहते ho....aisa जैसे मैं तुम सब को बिगड़ dunga....kitni बार कहु बदल रहा हु main...main कोशिश करता जा रहा हु और बेहतर बनने की पर तुमको इन् सब से कुछ है hi nahi....to ठीक है तुम अपने जगह रहो मैं अपने jagah.....Aur हां आंटी से बोल देना की अब तुम सब के साथ कोई जबरदस्ती करने की जरुरत नहीं hai....mujhe अपने साथ रखने ki....Main अकेला hi ठीक hu.....chaliye यहाँ se....aapne सही कहा ये मेरे लिए सही नहीं है....
पंकज इतना बोल वह से निकल gaya....Inn सब के दौरान ज्वाला वही पर tha....par उसको कुछ करने की कोई जरुरत hi नहीं thi.....usne खुद देखा की यहाँ पे गलती किसकी thi....aur इन् छोटी छोटी बाटों में वो थोड़ी आएगा बिच में.....
K.Bua - तुम ठीक हो Rupal......chott तो नहीं लगी....
रूपल दीदी - मैं ठीक hu.....par.....isko अब नहीं छोड़ने वाली main....isko मार hi dungi....mujhse ऐसे बात करने की हिम्मत कैसे हुई इसकी....
K.Bua - पागल हो kya....shant हो jaao.....sayad ये परेशां होगा किसी कारण से.....
रूपल दीदी - nahi....isko बुआ से बात करनी है ना मैं करौंगी बात iski....Nikita चलो तुम....
बिन्ना कुछ sunne...Nikita का हाथ पकड़ा और खींचते हुए उसको लेके चली गयी वो......
वही बहार आने के बाद लीडर पंकज को देख रहा tha.....wo समझ रहा था की ये बाँदा सच में कोशिश कर रहा है......
लीडर - कोई बात नहीं Bacche....hum बाद में मिल लेंगे तुम्हारी उस प्रोफ se....abhi तुम ठीक नहीं लग rahe....chalo मेरे saath,....tumhe कुछ सिखाया जाए आज....
पंकज - Nahi...aap जाओ मेरा मूड ख़राब हो गया hai....aapne देखा naa....maine कुछ किया kya....main तो उनकी बात समझ के उनके पास भी नहीं जा रहा tha.....main नहीं चाहता मेरी वजह से वो सब वो ना कर पाए जो उनको करना hai....main तो बस....
लादेरर - अरे कोई बात nahi....bas यही लोग थोड़ी है यहाँ pe......tumko दोस्त बनाने hai...main हु ना dost.....aur भी बहुत से लोग मिल जाएंगे यहाँ पे जो दोस्त बन जाएंगे tumhare....bhul जाओ उनको....
पंकज - हम्म सही kaha....par अभी हमको जाना है प्रोफ पून....
वो बात पूरी करता उससे पहले hi वह पे रूपल दीदी और निकिता पहुंच गयी.....
रूपल दीदी - बुआ से मिलना है ना तुम्हारे पापा से hi मिलने गयी है wo.....par याद rahe.....ab कोई मदद नहीं करने वाली वो....
लीडर - बच्ची शांत raho.....jo भी अंदर हुआ hai...agar वो तुम्हे अपनी बेइज़्ज़ती लग रही है तो वो खुद कराई है तुमने.....
रूपल दीदी - उम्र में बड़े हो aap....issliye अच्छे से बात कर रही hu.....hamare बिच में मत aao.....accha नहीं होगा वर्ण.....
पंकज - चलिए aap.....hum प्रोफ से मिल आते है.....
पंकज लीडर को लेके अपने पापा के केबिन की ओर चल pada.....wahi रूपल दीदी जो आते वक़्त K.Bua का फ़ोन लेके आयी थी उन्होंने बुआ को मैसेज कर दिया की पंकज की मदद ना करे....
पंकज ने लीडर को अपने पापा के केबिन के बहार रुकने को कहा और खुद अंदर आने की परमिशन मांगी.....
अंदर अभी चची , बुआ और साथ में दक्ष मां भी the....aur वो बातें कर रहे थे...
दक्ष - हां आओ ander....tumhare बारे में hi बातें हो रही है....
चची - बीटा तुम आये नहीं the.....aur मैंने भी कॉल किया तुमने कॉल नहीं पिक kiya....kya बात है किसी ने कुछ कहा क्या....
पंकज - नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं hai....wo दरअसल मैंने देखा है जब मैं उन् सब के साथ होता हु तो अच्छे से नहीं रह पाते सायद वो मुझे पसंद भी नहीं karte....to बस मैंने सोचा क्यों बेकार में उन् सब को परेशां किया jaaye.....main ऐसे hi सही hu....Papa आपको भी चिंता करने की जरुरत नहीं hai.....main अब कोई गलत काम तो नहीं hi करूँगा.....
चची - पर बीटा ऐसा नहीं hai.....wo तुम्हारे होने से परेशां नहीं होते....
पंकज - आंटी मैं रहता हु उनके साथ और इतनी समझ तो है कौन मेरे मौजूद होने से खुस है और कौन nahi....Prof मुझे आपसे कुछ बात करनी थी....
बुआ - हम्म बोलो.....
पंकज यहाँ वह देखने लगता है.....
चची - पूनम जाओ इसके साथ बहार जाओ और देखो क्या बात hai.....main....main भी निकलती हु दक्ष ji.....aur माफ़ करियेगा मैं अपना वडा पूरा ना कर सककी...
दक्ष - हम्म ठीक है.,...
चची वह से चली gayi....aur जाते हुए एक बार वापस से पंकज की ओर देखा.....
वही बुआ पंकज को लेके बहार aayi.....bahar लीडर बैठा हुआ था....
बुआ - तुम पहले अपनी बात बताओ उससे पहले मेरी भी बात सुन्न lo....maine सुन्ना वह अंदर क्या कहा tumne....pata नहीं क्यों तुमको ऐसा लगा पर ये सही नहीं hai....koi तुम्हारे होने से परेशां नहीं था....
पंकज - प्रोफ इस बारे में ना hi बात करे तो सही hai....abhi निच्चे जो कुछ हुआ उससे जो थोड़ा थोड़ा लग रहा था अब वो पुर्रा पक्का हो चुक्का hai...aur अगर वो मुझसे परेशां नहीं थे तो फिर क्यों निकिता वो गायब होनेवाली अंगूठी पेहेन के रखती thi.....aur वो उसको अपने hi दिया होगा naa.....sab मुझसे परेशां hi रहते hai....yaha तक की मेरे पापा bhi....aap सब से क्या कहना इसके बारे mein.....aap बस मेरी एक मदद कर dijiyega....iske बाद क्लास के अलावा सायद hi कभी आपको या आपके साथ रहने वाले लोगो को अपनी सकल दिखाऊंगा....
बुआ - ऐसी कोई बात नहीं है pankaj.......aur तुम ये सब क्या सोच रहे.....
पंकज - प्लीज Prof....ab और नहीं बस आप मेरी बात सुनने और अगर हेल्प कर सक्को तो ठीक है नहीं तो आप बता दो मैं अभी से चला जाऊँगा....
बुआ - ठीक है बताओ क्या मदद चाहिए तुमको....
पंकज - एक पनिशमेंट चाहिए मुझे.....
बुआ - पंकज तुम ठीक हो naa......dekho ये सब चलता रहता है पर इन् सब की वजह से इतना डिप्रेस नहीं हो जाते की खुद को दर्द देना शुरू कर दे......
पंकज - आपको जो समझना है आप samjho....mujhe बस आप एक कागज़ पे लिख के ये देदो की आप मुझे एनर्जी सिग्नेचर पे एक प्रोजेक्ट दे रही हो अस punishment.....reasons की कम्मी तो है nahi.....agar काम pade....to कुछ भी लिख दीजियेगा मुझे मतलब नहीं है....
बुआ - पंकज तुम समझ नहीं rahe.....tum इस वक़्त ठीक नहीं ho....tum चलो अभी मेरे साथ....
पंकज - मैंने अंदर hi कह दिया था जो कहना था मुझे अब आपके साथ या उन् सब के pass......main नहीं आ sakunga....aap बस ये बताइये आप मुझे ये पनिशमेंट डोज या नहीं......
बुआ ने कुछ देर तो socha......energy सिगनतिरेस पे एक प्रोजेक्ट वैसे तो ये कोई दर्दनाक काम नहीं hai....unko लगा सायद ये खुद को बिजी करना चाहता है इस वजह से ऐसा कुछ काम मांग रहा hai.....Bua ने एक पेपर पे लिख के दे दिया उसको.....
पंकज भी ख़ुशी ख़ुशी उस पेपर को लेके थैंक्स बोलके वह से निकल गया लीडर को leke.....wahi बुआ उसको देखती रही....
बुआ निच्चे हम सब के पास आयी तो वह चची भी thi.....thodi हॉटश सी बैठ हुई थी मेरे बगल में.....
बुआ - भाभी आप जैसा समझ रही हो वैसा कुछ भी नहीं है.....
चची - मैं अब कुछ समझना hi नहीं chahti.....sab ठीक hai....log खुदगर्ज़ होते है पता होना चाहिए था मुझे चाहे वो मेरे अपने hi क्यों ना ho....wo भी खुदगर्ज़ होंगे hi....khair छोड़ो इन् सब ko......mujhe कही काम से जानना hai...sham को खाना खाने आ जाना सभी....
चची भी इतना बोल के वह से निकल गयी....
बुआ - क्या हुआ था यहाँ पे.....
रूपल दीदी - पता नहीं मम्मी बहुत अजीब बातें कर रही थी आपने भी सुन्ना ना.....
बुआ - वो नहीं उससे पहले क्या हुआ tha...aur पंकज यहाँ पे आया था न.....
रूपल दीदी - आपने उसकी हेल्प नहीं की naa......wo मेरे साथ बतमीज़ज़ी कर रहा था मुझे सुन्ना रहा था....
K.Bua - गलती भी तुम्हारी थे.....
K.Bua ने जो भी हुआ जैसे भी हुआ वो सब उनको bataya.....aur उसके बाद बुआ ने जो ऊपर हुआ वो सब यहाँ सबको बताया.....
रूपल दीदी - dekha...iss बार भी इसकी वजह से मम्मी नाराज़ हो गयी hai.....isko छोडूंगी.....
बुआ - तुमको समझ नहीं आ raha......kab तक बच्चो की तरह बातें करती rahogi.....jaise वो बात कर रहा था ऐसा लग रहा था जैसे एकदम से टूट गया है wo....aur उसके इस हालत में लाने में हम सब का हाथ hai....mera हाथ है...
K.Bua - मुझे लगता है हमको उससे बात करनी चाहिए....
निकिता - जब वो जा रहा है तो क्यों उसके पीछे जाना रहने देते है ना उसको अपने हाल pe....aur हम खुद में खुश रहते है....
बुआ - जब तुम बेहोश पड़ी हुई थी ना तब मैंने ये कविता naa....wo तुम्हारी didi....Rupal ने या ये प्रतीक ने नहीं ढूंढा था tumko.....wo पंकज था जिसने ढूंढा था tumko....usne ऐसा सोचा होता ना तो अभी क्या होता वो तुम सोच भी नहीं sakti...ussi हाल में छोड़ देते hai.....sach में इतने खुदगर्ज़ है हम sab....maine सोचा भी नहीं था....
मैं - बुआ मैं बात करके देखूंगा usse....aap चुनता मत karo....waise भी वो मुझसे बात करने को पागल हुआ रहता hai.....mera ख्याल रखने के लिए कोई बच्चो वाली किताब पढ़ के आया था वो....
K.Bua - उसके साथ एक आदमी tha...usko भी देखा था क्या तुमने पूनम.....
बुआ - हां देखा tha.....uska क्या,...
K.Bua - पंकज बोल रहा था वो उसी की मदद कर रहा hai....kahi वो कोई गलत काम तो नहीं करा रहा ना उससे....
बुआ - लगा तो नहीं था aisa.....Tum सब रहो यहाँ मैं देखती हु उसको....
मैं - अरे बुआ ओल्ड आउल के लोगो को भेज देता हु naa...yaa फिर ज्वाला के लोग...
बुआ - कभी कभी कुछ खुद भी करना होता hai.....tum समझ नहीं पाओगे.....
बुआ वह से चली gayi.....ye पता नहीं क्या हो रहा tha.....Pankaj को लेके इतना सीरियस हो जाना मज़्ज़ाक़ जैसा लग रहा था.....
आज के लिए इतना hi रखते है आगे के अपडेट में देख लेंगे निकिता क्या क्या बताती है शैतानो के बारे में और ये प्रतीक मंदिर तक पहुंचा तो उसको ऐसा क्या हो gaya.....aur साथ hi dekhenge.....Strange वर्ल्ड की एक छोटी सी लड़ाई