फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 12 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

अपडेट - 93

मैं बीएड पे hi बैठा tha......jo भी हुआ abhi....usse खुश तो बहुत tha......par समझने की कोशिश भी कर रहा था उसको.....

मैंने जब हाथ आगे किया की उसको छू सक्कु मैं उससे दुर्र जा के गिर pada.......par वो मेरे पास आ गयी thi......aur उसने मुझे चुवा bhi......matlab अगर वो चाहे तो वो मुझे छू सकती है......

क्या ये बस इतना सा hi hai......yaa कुछ और भी है isme......kya इतने समय से मैं इस बात को गलत समझ रहा था......

जब मधु ने ये सज़्ज़ा दी थी तो मुझे लगा था की ये हम दोनों के लिए सज़्ज़ा hai.....aur ये थी bhi.....usne कभी मुझसे मिलने के बारे में सोचा hi नहीं था उस वक़्त के बाद se.....ye मुझे लगता hai.....aur मैं तो उसके पसस जा hi नहीं सकता था मिलने ko......isse हममे बातें नहीं होने लगी thi....aur उसके baad....jab बातें नहीं होती है दो लोगो के बिच तो तीसरा चौथा और paachwa.....yaa ये कहु सभी के sabhi......galatfahmiyan बढ़ने लग जाते hai......jaan बुझ के भी और कभी कभी अनजाने में भी.....

उसने मुझे chuwa....matlab वो मुझे छू सकती thi.....sayad ये बात उसको भी पता नहीं थी उस waqt......wo मेरे पास आ सकती thi.....Main इतना तो जानता हु अगर ये उसको पता होता तो वो मेरे पास आती जरूर एक बार तो मेरी बातें सुनने को आती......

" प्रतीक मौका अच्छा hai....usko कुछ याद nahi.....tum उसको अपने पास आने पे मज़बूर कर सकते हो...."

"प्रतीक पर आगे क्या karoge.....kya वो सच में हमेशा साथ रहेगी tumhare.....jab उससे सब याद आ जाएगा जैसे तुम्हे याद आया hai.....kya वो इस बात से और गुस्सा नहीं होगी......"

"प्रतीक तुम ये बस अपने प्यार के लिए कर रहे ho.....aur कोई बात नहीं hai......tum ये करने वाले ho......hai ना...."

मैं समझ नहीं पा रहा tha.....aur ये aawajein......ye मेरे सर्र में गूंज रही thi.....Main इससे परेशां हो रहा था.......

मैं लेट गया और अपने कान बंद कर लिए......

बीएड पे लेटते hi मुझे नींद आ गयी......

दक्ष मां वापस आ गए the.......unhone ये बाद पंकज तक पंहुचा दी थी की वो वापस आ गए है और अभी वो घर पे hai......to आज वो भी घर पे आ jaye.....Madhu को लेके......

निक्स कबीला टूट चुक्का था और ये बात सभी को पता चल गयी thi.......sunne में आया था ये सब मंदिर को लेके हुआ था......

जब ये बात फैली तो इस बात से और कही साड़ी बातों ने जनम ले लिया.....

क्या मधु को एअर्थ पे बस यहाँ का माहौल देखने को भेजा गया tha.....taki वो अपने लोगो को यहाँ बुल्ला sakke......aur भी ना जाने कैसे कैसे बातें चल रही thi......par इससे क्या hi फर्क पड़ता था.....

स्ट्रेंज वर्ल्ड में जो निक्स लोग रह गए थे उन् सब ने आपस में hi एक बन्दे को चुनना और उसको मंदिर की देख भल करने को कहा gaya.....par वो banda......wo भाग गया वह से दूसरे hi दिन.......

बोल रहा था मूर्ति बातें करता hai.....uski आँखों से आशु आतें hai.....wo.....wo सैतान है.....

ये बात किसी को समझ नहीं आयी ुन्नन सब mein.......par मंदिर को ऐसे hi तो नहीं छोड़ सकते the......unhone सोचा की नया बाँदा ढूंढा jaaye......par इस baar......iss बार तो सभी के मैं में एक डर था......

लगभग से अँधेरा हो गया tha......jab निकिता और रूपल दीदी मेरे कमरे में आ dhamki......pata नहीं ये दरवाजा कैसे खोला इन्होने......

रूपल दीदी - ooye....utth.....uth जा छोटू.......

निकिता - अरे उठ भी जाओ हममे देर हो जायेगी.....

मैंने देखा ये दोनों मेरे रूम में आये हुए the......Main अपने बीएड पे उठ के बैठ gaya.....apni आखें साफ़ कर रहा था......

मैं - आप यहाँ kaise.....aur darwaja.....wo कैसे......

रूपल - तुझसे पहले मैं भी यही रहा करती thi......itna तो पता है कौन सा दरवाजा कैसे खोला जाता hai.......ab ये सब छोड़ और जल्दी से तैयार hoja....ghar जाना hai.....aur किसी नए शैतान के बारे में पता चलने वाला है......

मैं - Ghar......par मैं नहीं जाना चाहता......

मैं क्या करता घर पे jaake......kyunki उससे ज्यादा जरुरी काम मुझे यहाँ पे था naa.......Mujhe देखना था मधु और मेरा ये क्या hai......matlab क्या वो मेरे पास आ सकती hai....bas इतनी सी hi बात thi.....yaa और भी कुछ बात thi.....matlab.....kya कोई ऐसा रास्ता भी था की मैं उसके पास जा सक्कु......

तभी मुझे याद aaya.......jab वो मुझसे पहली बार milli......matlab स्कूल mein.....matlab उस दिन जब उसने पानी दाल दिया था mujhpe.....tab तो हम साथ the......pass पास the......kya उस waqt.....wo छह रही थी की हम साथ हो या ये कुछ और था......

रूपल - नहीं जाना chahte......kyun नहीं जाना चाहते तुम घर वह सब वेट कर रहे होंगे......

मैं - मैंने नहीं जाना यहाँ काम है मुझे जाओ तुम सब.......

निकिता - रूपल दीदी आप एक मिनट के लिए बहार जाओगी इससे बात करनी है.......

रूपल - मैं बहार jaaun......theek hai.....pata नहीं कौन सी खिचड़ी पक्क रही है तुम दोनों में.....

इतना बोल वो बस बहार चली गयी......

मैं - क्या बात करनी है batao......aur देखो मैं पहले से कह रहा हु मैं नहीं जाना चाहता waha......mujhe काम है इधर.....

निकिता - Dekho.....agar tumne......galti से bhi......matlab गलती से भी पंकज को कुछ kiya......to समझ lena.....main.....Main खून कर dungi.....maine कहा था मैं उससे पूछ लुंगी पर मौका hi नहीं mila.....mujhe थोड़ा और वक़्त चाहिए.....

मैं - क्या बात कर रही ho.....mujhe अब नहीं जानना उससे दिम्माग में क्या hai......nahi पर फिर भी तुम पूछ hi लो अच्छा hoga.....main क्लियर रहूँगा.....

निकिता को मेरी बात समझ नहीं aayi.....Main खुद की बातें नहीं समझ पा रहा था उसको क्या hi समझाता अभी दिम्माग में बस यही चल रहा था क्या मैं भी उसको छू सकता हु.....

निकिता - क्या बोल रहे ho....kuch समझ आये ऐसा बोलो.....

मैं - देखो मैं घर नहीं जा रहा आज तो nahi.....tum सब जाओ और बुआ को बोल देना मुझे यहाँ पे थोड़ा काम है मैं कल आ jaaunga......yaa परसो......

निकिता -(आँखें दिखते हुए) ठीक hai.....par भूल के bhi.....Pankaj को कुछ मत करना.....

मैं - अरे ठीक है मेरी माँ अब जा naa.......mat करना मत karna.....pata नहीं क्या hai......ab तुम एक और बार ये बात kaho.....main अभी जाके उसको पीट के आऊंगा......

रूपल दीदी - हो गया तुम दोनों ka......bua बुला रही है जल्दी से बहार आओ......

निकिता ने मेरी ओर dekha.....apni ऊँगली मेरी तरफ की और आँखें छोटी करते हुए ऊँगली हिला रही थी......

मैं अस्स पास देखा कुछ है नहीं क्या इसको मारने के liye.....aur वो वह से चली गयी.....

रूपल दीदी - तुझे अलग से बोलू.....

निकिता - उसको काम है Didi......rahne do....kal परसो आ जाएगा वो.....

रूपल - ऐसे कैसे रह......

पता नहीं उनके दिम्माग में क्या aaya......wo एक दम से मुस्कुराने लगी.......

रूपल - ठीक है chotu.....bas ध्यान रखना अपना.....

इतना बोल दोनों चले gaye......Main ये सोच रहा था ये इतने अजीब क्यों होते है ये लोग.....

मैं उठा अपने जगह se.....aur पहले ये देखा की मधु कहा पर hai......matlab इतना तो पता लगा hi सकता था न......

वही निकिता और रूपल दीदी दोनों hi चले गए the.....Bua को जाके उन्होंने कहा की उसको कोई जरुरी काम है उसको अभी रहने देते hai.....Bua ने एक बार मुझे बुलाना चाहा पर फिर कुछ सोच के नहीं aayi.....wo बस जाके गेट के पास कड़ी हो गयी thi......taaki बहार जाने का जो प्रोसीजर है वो पूरा कर सक्के.....

सभी वही पे थे.....

रूपल दीदी ने देखा की दूसरी तरफ के लाइन में पंकज और मधु लगे हुए the......aur उन्होंने अपना सर पीट लिया.......

फिर उन्होंने सोचा की उन्होंने माफ़ी नहीं मांगी थी पंकज se......unko भी माफ़ी मांग लेनी chahiye......taaki सब सॉर्ट आउट रहे बाद में उनकी वजह से कोई दक्कत ना हो......

वो निकिता से कह के उस तरफ निकल gayi......Nikita ने भी देखा वो भी जाना चाहती थी पर वो जाके क्या kahti.....waise भी दीदी तो पहले hi निकल ली थी......

दीदी पंकज के पास गयी और.......

दीदी - पंकज......

पंकज अभी किसी चीज़ के बारे में सोच रहा tha......ki तभी उसको आवाज सुनाई di......wo भी रूपल ki......ek बार तो उसने याद करने की कोशिश hi शुरू कर दी की कही उसने गलती से कोई पन्गा तो नहीं ले लिया था......

मधु - हां बोलिये.....

रूपल - तुम मधु हो naa......waise तो मैं अभी इनसे बात karne.....sorry माफ़ी मांगने आयी thi.....wo दरअसल पीछे बहुत सी गलतफहमियां हो गयी thi.....aur ज्यादातर मेरे वजह से thi......aisa मुझे लगता है तो मैं सोच रही थी की मुझे इसके बारे में माई मांग लेना chahiye......taaki हम नयी सुरुवात कर सक्के......

मधु - यहाँ किसी को नयी......

पंकज - तुम चुप raho.......ye मुझसे बात करने आयी है......

मधु ने गुस्से में उसकी ओर देखा.....

पंकज - हां हां आप बोलो......

रूपल - वो दरअसल बात ऐसी है की तुम भी जानते हो हमारे बिच में बहुत साडी गलतफहमियां हुई है और उनके बाद बहुत सी लड़ाइयां bhi......hai naa......to मैं सोच रही हु वो सब भूल जाए और हम दोस्त बन सकते है.....

पंकज - हां सब भूल जाते hai.....aapne मेरे घर पे आके मुझे पीटा वो भूल जाते hai.....aapne मुझे बार बार पीटा है हां उसमे गलती मेरी थी मैं जानता hu.....par हर जगह सही आप भी नहीं the......to मैं बस यही kahunga.....aap आगे जाओ मुझे नहीं ,अटलब है आप क्या कहते हो और क्या नहीं.....

निकिता वैसे तो दूर thi.....par सुन्न सब रही थी.......

उसने जब सुन्ना वो पंकज रूपल दीदी की बेइज़्ज़ती कर रहा था तो उससे रहा नहीं गया.......

वो उनके तरफ गयी.....

निकिता - हिम्मत कई........

वो कुछ बोलती उससे पहले hi रूपल दीदी ने उसको रोक लिया और बस इतना कहा......

रूपल दीदी - मुझे बस माफ़ी मांगनी thi.....ab माफ़ करना ना करना ये तो तुम्हारे हाथ में है ये तुम samjho.....aur इसकी बातों का भी बुरा मत manna.....Nikita चलो यह से......

निकिता को वो खींचते हुए लेके गयी अपने साथ.......

निकिता - छोड़ो mujhe.....ye समझता क्या है खुद ko......iske हाथ पेअर तोड़ के रख दूंगी main.....aapko बोलै कैसे इसने ये सब......

रूपल - आइए pagal......chup.....main यहाँ सब ख़तम करने में लगी हु और तुम हो की सब वापस से शुरू कर रही हो......

मैं - क्या शुरू कर रहे हो आप सब......

बुआ - तू तो नहीं जाने वाला था ना फिर यहाँ क्या कर रहा है.......

मैं - वो बस मैं बदल गया.......

रूपल - और काम ka......kaam था ना तुझे.......

मैं - हम्म पर अब वो नहीं हो पायेगा.......

रूपल - हां अब काम भी तो जा रही है......

मैं - क्या बोल रही हो aap......main समझा नहीं......

रूपल - कुछ nahi.....main कहा कुछ बोल रही हु......

बुआ - तो आ गए tum.....maine तो सुन्ना था काम है कुछ तुमको......

मैं - वो तो बाद में भी हो जाएगा.....

बुआ ने आगे कुछ भी नहीं kaha.......sab बहार चले gaye......bus pe.......aur फिर वो दोनों अपने स्टॉप पे उतर गए और हम अपने स्टॉप pe.....waise मैं तो मधु वाले स्टॉप पे उतर hi जाता पर K.Bua ने पूछ लिया कहा जा रहे ho.....aur उस वक़्त बताने को कुछ था नहीं.......

हम घर पहुंच गए........

पहले खाना खाया हम सब ने उसके बाद.......

दादा जी - तुम सब ने एक सैतान को मार दिया tha......par वो कमज़ोर tha......ab आगे जो सैतान है वो उससे तो ताकतवर hi hoga.......to क्या तुम तैयार हो......

पता नहीं इनको क्या सुन्ना tha......kya हममे इस वक़्त जोर से चिलाना चाहिए था यस siir.......aise चीज़ज़ की उम्मीद में थे wo.....pata नहीं.....

पर हमने कुछ नहीं kiya......bas उनकी ओर देखते रहे......

दादा जी - प्लान तैयार hai......iss बार भी वही करना है 3 लड़कियां एक साथ और प्रतीक और निकिता एक साथ निधि और सत्य एक साथ ........पिछले hi बार की तरह करना है sab......kisi को कुछ कहना है......

निकिता - मुझे इसके साथ नहीं rahna......matlab मुझे लड़ने के लिए जाना hai......main पिछली बार भी.....

वो बस बोल hi देती की उसको पिछली बार ज्वाला के कबीले जाना पद गया था पर वो ृक्क गयी......

दादी - पर इससे प्रतीक अकेला हो जायेगा और उसको वक़्त लग जाएगा पता लगाने में वो सैतान उस जगह पे कहा है और कैसा है.....

चची वैसे भी इस बात से परेशां थी की दीदी की तबियत थोड़ी सही नहीं hai....to उनको अभी इन् सब में ना भेजा jaaye....unhone ये बाद दीदी को समझने की कोशिश करि की वो ना जाए इस बार पर वो माने तब naa.......ye मौका अच्छा था.....

चची - मुझे भी लगता है निकिता को एक मौका देना चाहिए वह pe......Aur रही प्रतीक की बात तो उसके लिए to.....Rupal चली जायेगी उसके साथ.......

रूपल - मम्मी ये क्या बोल रही ho.......Main कैसे.....

दादी को भी लगा ये सही hai......aur वो कोई जोर जबरदस्ती तो कर नहीं रही थी निकिता के साथ निकिता ने खुद कहा था वह जाने के बारे में......

दादी - मुझे भी यही लगता है.....

रूपल दीदी - दादी आप bhi.....aap तो काम से काम मेरा......

दादू - हम्म तो तय हो गया है रूपल और निकिता अपनी जगह बदल रहे hai.....to इस baar......Poonam और कविता थोड़ा ध्यान से निकिता साथ होगी तुम्हारे.......

मैं कुछ नहीं बोल रहा था मुझे बोलना hi नहीं tha.....ye पता नहीं कैसे जीव के बारे में बात कर रहे the.....isko पहले देखा hi नहीं था मैंने......

सब तै हो गया कौन कैसे jaayega.....saitaan की बातें भी कर ली gayi.....ye एक शहर के बिच का इलाका tha......koi बंद पड़ा हुआ godam......iss शैतान को सब के सब भूत समझते the.....issi वजह से उस इलाके को हुन्तेद बता दिया गया tha,.....waha कोई नहीं जाता.....

इस दौरान लीडर ये सोच रहा था की मैं हु kaun,....aur मैंने वो सब किया kaise.....matlab उन् कीड़ों को मारने का वो tarika.......waisa तरीका उसने नहीं देखा tha.....kisi ने नहीं देखा था......

घर पे अब सब सोने चले गए the.....aur मैं पहले से सो चूका था तो मैंने सोचा क्यों naa......bas एक baar.....dekh आऊं उसको.....

घर में hi पोर्टल खोला मैंने और निकल gaya......mujhe ये पता था वो दोनों एक साथ honge.....matlab पंकज के घर पे hi.......waise तो उसके घर में भी जा सकता था मैं सीधे पर दिक्कत भी हो सकती थी isse.....agar मैं गलती से मधु के ज्यादा करीब चला गया तो......

इसी लिए मैंने उससे दूर जो पार्क था पंकज के घर के पास वह जाना का फैसला kiya......raat हो चुक्की थी कोई था भी नहीं waha......Main वह चला gaya......uss जगह से पंकज का घर दिखाई देता था.......

ध्रुव - आपको याद hoga.....ye आपकी माँ का घर hai....matlab इस वक़्त की माँ ka.....waise तो हम जैसों के कोई अपने नहीं होते.....

मैं - ध्रुव तुम इन् रिश्तों में कब से भटकने लग gaye......ye सब अच्छा नहीं है......

ध्रुव - मैं तो बस आपकी बातों को देख के सीखता आया hu.....aapne भी तो रिस्ता बनाया था.....

मैं - वो बात और thi....aur तुम तो देख भी रहे ho.....uske बाद क्या क्या हो रहा hai......kya तुम इन् सब से गुजरना चाहोगे......

ध्रुव - क्या आप उन् सब में खुश the.....kya आप एक इम्मोर्टल बन के खुश the......kya आपको नहीं पता था की कितने नियम है और ना जाने कितने hi बंदिशें......

मैं - ये तुम मेरी बातें क्यों कर रहे हो Dhruv.....aur तुम क्या मेरा हाल नहीं देख रहे ho.......iske मुकाबले तो उस वक़्त hi खु.....

मैं जो बोल रहा था अगर उसके बारे में सोचु तो मैं अभी सबसे बड़ा झूट बोलने वाला tha......Main कभी भी एक इम्मोर्टल के तौर पे खुश नहीं tha......kyunki मैं बोर हो जाता था कुछ करने को बचता hi नहीं मेरे pass.......Maine चीजजें सीखना शुरू kiya....aur बस सीखता चला गया इतना ज्यादा की मैं उसमे एक्सपर्ट बन गया पर उसके बाद kya.....Main एक टीचर बन gaya......Immortals को ज्ञान बाटने लग gaya......ye था मेरा kaam......Jab तक मधु नहीं आयी थी मैं बस बोर hi होता रहता tha.....issi वजह से तो मैं दूसरे जीवों की जिंदगियों में दखल देने लग गया tha......ye जीव मुझे अच्छे लगते the....inke पास हमेसा एक ऐसा मोड़ होता tha.....jaha सब ख़तम बस सब ख़तम आगे कुछ भी nahi......haa इनमे भी दोबारा जनम लेना होता tha.....par इनकी यादें मिट जाय करती thi.....chahera नया हो जाता tha......aur तो और आस पास के लोग भी बदल जाते थे......

पर एक इम्मोर्टल ka.....uska kya.....wo तो बस सदियों से लगा हुआ होता tha......naa यादें धुंधली होती ना hi कुछ और.....

ध्रुव - क्या आप खुश थे......

मैं - नहीं तुम सही ho.....main खुश नहीं tha.....mujhe इनसब से जलन होती thi.....har किसी se.....har एक जीव से जो मर सकता tha......mujhe देखो मैं तो सायद ठीक से मर्रा भी nahi.....sab कुछ तो याद hi है mujhe.......meri बॉडी बस बदल गयी hai......chahera भी पहले जैसा hi hai.....dekho.....kya कही से अंतर दिख रहा है.....

ध्रुव - आपको मौका मिला hai.....aap वो बने हुए है जिनसे आपको जलन हो रही thi.....kya आप इसके मज़्ज़े लेना नहीं chahenge....kya आप इन् रोशों का दोस्तों का....

मैं - बस bas.....samajh गया क्या कह रहे ho.....waise ये बात भी सही है अलग मुझे रिश्तों के बारे में पता होता तो main......main सायद मधु के साथ वैसा नहीं karta.....yakkin करता उसपे......

ध्रुव - हम्म......

मैं फिर पंकज के घर के तरफ nikla......ek ऐसी जगह जगा से सब दिख sakke......Maine ध्यान दिया तो इतना समझ में आ गया घर में 3 लोग hai......aur तिण्णो hi अलग अलग कमरे mein.......sayad तिण्णो hi सो रहे थे.....

मैं मधु को देख नहीं पा रहा था......

मैंने थोड़ी और कोशिश करि पर काम नहीं बना और उसके बाद मैं वापस आ गया.......

और आते hi ध्यान लगाने बैठ gaya......Dark पावर को अब मुझे इतना ताकतवर बनाना tha.....aur उसको एक दम से कण्ट्रोल में रखना था जिससे मेरे इस सरीर को या फिर मेरे आस पास के लोगो को कोई परेशानी ना हो......

जब आखें खोली तो वह पे रूपल दीदी thi.....wo पता नहीं कब आयी thi......wo भी ध्यान लगा रही thi.....baaki के सब का सायद हो गया था......

मैंने उनकी ओर dekha......Energy लेवल्स एकदम से सही the.....matlab वो एकदम से ठीक thi.....jo बातें उनके दिम्माग में होनी चाहिए थी वो सब वह पे thi....aur जो नहीं वो नहीं थी......

मैंने फिर उनकी कुल्हाड़ी पे ध्यान lagaya.......wo और भी ज्यादा बदल गया tha.....jo बट्स उनके अंदर गए थे उन्होंने ना सिर्फ उनको बल्कि उस कुल्हाड़ी को भी बदल के रख दिया था जो मैंने दिया था......

अगर इन्होने अपने शक्तियों पे सही से काबू कर liya.....to ये खुनी घुड़सवारों की रानी के रूप से भी ज्यादा ताकतवर हो जायेगी......

मैं - ध्रुव देखो अब मैं तुम्हे क्या सीखने वाला hu.......apne अंदर की ताकत का एक टुकड़ा किसी को दे dena.....ye बहुत hi इफेक्टिव होता hai......jo देने वाला होता है वो उस टुकड़े को वापस से बना भी सकता है तो उसको ज्यादा फर्क नहीं पड़ता हां शुरू में थोड़ा sa......par जिसको वो टुकड़ा मिलता hai......wo अचानक से ताकतवर हो जाता है देखो.....

मैंने अपनी आँखें बंद kari......aur खुद के एनर्जी लेवल्स पे ध्यान लगाने laga.....aur उसके बाद अपना हाथ रूपल दीदी के सर के ऊपर rakha.....aur bas......mere हाथ से होते हुए वो टुकड़ा उनके अंदर......

जैसे hi ये हुआ वो कांपने lagi......par उनकी आँखें नहीं खुली thi......wo वैसे hi काम्पटी rahi......aur करीब 5 मिनट बाद वो शांत होने लगी......

जब आँखें खुली तो आँखें थोड़ी और काली हो गयी थी.....

रूपल - मेरे सर पे हाथ क्यों रखा हुआ है तुमने.....

मैं - कुछ नहीं......

वो उठी और वह से चली gayi.....par जाते हुए उसने मुद के मुझे देखा.......

मैं भी उनके पीछे पीछे घर में चला गया......

वह सब नास्ता कर रहे थे......

चची - तुम दोनों को सबसे पहले जाना चाहिए tha.....aur तुम dono.....chalo जाओ तैयार हो जाओ और खाना खा लो......

हमने वही kiya......aur फिर खाने के baad......waise तो हमसे कहा गया था की बस से जाए पर मैंने इस बारे में ध्यान hi नहीं दिया tha.....Main तो घर में hi पोर्टल खोल के दीदी के साथ वह सीधा उसी गोदाम में चला गया tha,......waha पहुंच के दीदी को याद आया ये क्या कर दिया unhone......wo सीधा वह आ गयी थी......

घर में सब थोड़ा गुस्सा हुए की मैं प्लान से नहीं चला मुझे बस से जाना चाहिए tha......par....unhe कहा पता था की हम गोमद में छाले गए है उनको तो यही लगा की हम बस उस इलाके के पास गए होंगे.....

रूपल - ये kya.....tu तो हममे यहाँ लेके आ गया.......

मैं - वो मैं भूल गया tha.....accha चलो हम यहाँ से निकलते है......

"कोण hai.....kon है वह....."

मैं - क्या आपने ये आवाज सुन्नी......

रूपल - हम्म क्या ये कोई इंसान है.....

मैं - हममे देखना चाहिए अगर ये इंसान है to.....wo खतरे में होगा......

रूपल दीदी - हम्म ठीक kaha.....par तैयार रहना.....

हम दोनों आगे बढे सावधानी se......aawaj की तरफ.......

"मैं यहाँ hu.....yaha....."

मैं - ये क्या hai.....koi है भी नहीं यहाँ पे...

"निचे dekho.....nicche....."

रूपल दीदी ने जब निच्चे देखा वह पे एक छोटा सा कीड़े इतना छोटा एक आँख वाला इंसान था sayad......iske पेअर 2 hi थे पर हाथ 4......ऊपर से सर थोड़ा बड़ा tha......samajh नहीं आ रहा था ये है kya......ye था वो saitaan......jisse लड़ने आये थे हम सब.....

"मुझे यहाँ से ले chalo.....main यहाँ नहीं रह सकता......"

रूपल दीदी - ये है kya......itna छोटा sa......aaahhhhhhh......isne काटा मुझे......

दीदी ने इतना बोलते हुए उसको पटक दिया वही पे.......

"wooooh........ye क्या tha.......iss बार लगता hai......insan nahi.....ye कुछ और hi हाट लगा hai......tu भी आ तुझे भी चख के देखता हु......"

मैं - ये है क्या......

रूपल - Chotu......mujhe.....mujhe कुछ अच्छा नाह.......

उनके चेहरे का रंग बदलने लगा tha......Main समझ नहीं पाया ये क्या हो गया.......

मैं - ये क्या किया tumne.....inko क्या हुआ है......

मैंने ये बोलते हुए उनकी एनर्जी लेवल्स dekhi.....jo निच्चे hi जाते जा रही thi......aisa लगा जैसे एक बार में hi इस जीव ने उनकी साड़ी एनर्जी खिंच ली हो.....

मैं अभी उनकी एनर्जी लेवल देख hi रहा था ki.......acchanak से सब बढ़ने laga......mujhe ये पता था अब क्या होने वाला hai......Maine उनको साइड में बिठा diya......par जब निच्चे देखा उस जीव के तरफ वह वो अक्केला नहीं tha.......uske जैसे हज़ारों थे वह pe.......aur सब इतने छोटे थे की मैं तलवार चला के मार नहीं सकता tha.....aur अब सायद मुझे तलवार चलने की जरुरत भी नहीं thi.....Main तो सोच रहा था ये आगे का कहा पे बैठ के देखूं.....

मैंने उन् जीवों की तरफ dekha.....aur उसके बाद एक स्माइल देके वह से थोड़ा पीछे हो गया और एक उच्ची जगह पे जाके बैठ गया......

उन् सब में से जिसने दीदी को काटा था वो हस्ता हुआ बोलै.....

"क्या लगता है हम छोटे है तो ऊपर नहीं चढ़ paayenge.....tum आये यहाँ दो ho.....par जाएगा कोई भी nahi......ek भी हड्डी नहीं बचेगी तुम दोनों की......"

मैंने ज्यादा कुछ नहीं bola.....bas पीछे जहा पे मैंने रूपल दीदी को छोड़ा था उस तरफ देखने को कहा.......

दीदी जो अभी तक निचे बैठी thi.....jinka चहेरा पीला सा हो गया tha......wo अभी एकदम अलग hi लुक में आ गयी थी.....

बट्स ने अपना काम kiya.....unhone उसके बॉडी को बचाया और खुद को एक कवच बना दिया उनके liye.....aur साथ में वो उनको हील भी कर रहे थे......

दीदी - हम्म ये खुसबू बहुत अच्छी hai.......bas थोड़ा सा भूनना और padega.....phir इन् सब को खाने में मज़्ज़ा hi आ जाएगा......

"ये उठ कैसे gayi......aaj तक ऐसा नहीं हुआ है....."

" ये इंसान नहीं है सायद इस वजह से...."

"हमारा ज़हर सिर्फ इंसान पे hi nahi.......har किसी पे काम करता hai......chahe कोई भी हो....."

मैं - zaher......ye जो है वो तुम्हारे ज़हर के 10-10 बोतल पि जाए और कुछ ना होगा इनको......

"ठीक है फिर इसी को चेक कर लेते है ना......"

वो सब के सब बढ़ने लगे दीदी की तरफ......

दीदी ने अपनी कुल्हाड़ी nikali.......aur हवा में ऊपर उछली......

मैं गेम शुरू......

ध्रुव - आपको क्या लगता है ये कण्ट्रोल में रह jaayegi....abhi तो......

मैं - अब देख hi लेते है ना ध्रुव फिर मैं तो हु hi......accha एक मदद कर सकते हो tum......aas पास किसी को आने मत देना bas......uff ये बॉडी क्यों नहीं है तुम्हारे pass.....abhi काम और आसान हो jaata.......in सब को जल्दी से निपटना hoga....isse पहले कोई घर से कोई आये......

रूपल दीदी ने अभी कुल्हाड़ी ऊपर उठायी hi तो thi....maine ये नहीं सोचा था की कुल्हाड़ी की जो शैडो बनने वाली है वो सारे के सारे बट्स होने वाले the......matlab जैसे जिस जिस जगह पे कुल्हाड़ी की शैडो बनती वह पे छोटे छोटे बट्स चले जाते और उस जगह को एकदम से साफ़ कर dete.......wo कुल्हाड़ी की परछाई से वो छोटे लोग अब दर रहे the.....ek बार जहा जहा वो gayi.....waha पैर के उनके सारे साथी hi गायब......

हां उनकी तादाद बहुत ज्यादा thi....par फिर भी जब लोग मरने लगते है तो दर hi जाते है बाकी सब......

मैंने जब ये देखा तो मैं बस बैठा hi रहा अब क्या hi जरुरत thi......ye रूपल दीदी खुद इसको कर रही thi.....par मैंने जब निच्चे उनके पैरों के पास देखा तो वह पे वही छोटे लोग दिखाई diye......wo सब वापस से उनपे हमला करने जा रहे the.....waise तो ये कुछ भी नहीं करने वाले the.....par फिर लगा मैं थोड़ा खेल सकता हु यहाँ pe.......Maine अपनी तलवार ली और निच्चे जमीं से उसको लगा di......ye तरीका पता नहीं क्यों सबसे अच्छा लग रहा था मुझे......

उन् सारे कीड़े जितने लोगो के चारो तरफ एक गोल घेरा बना दिया maine.......bijli ka......matlab वो उससे आगे नहीं जा सकते the.......agar निकलते तो वो मारे jaate.....Rupal दीदी अपने कुल्हाड़ी को बस यहाँ वह कर रही थी ताकि उसकी परछाई बस उसके पास जाए और वो khatam......aise करते करते बस कुछ hi जीव बच्चे थे......

मैं - रूक्को दीदी इतने रहने देते है......

मुझे लगा वो मेरी बात sunegi.....par वो खुद के कण्ट्रोल में नहीं thi......ye वापस से हो गया.....

दीदी अभी भी अपनी कुल्हाड़ी यहाँ वह कर रही thi....aur देखते hi देखते वो jeev.....wo बच्चे hi नहीं जैसे कभी उस जगह पे थे hi nahi.....par दीदी तो कण्ट्रोल में थी nahi.....wo कुल्हाड़ी मेरी तरफ घूमने लग gayi.....matlab अब मैं था उनका सिक्कर....

अब इनको नुकसान तो पंहुचा नहीं सकता था Main.......Main बस खुद को बच्चाता raha.....yaa कहु इस सरीर ko.....ye ख़तम हो जाता तो पता नहीं फिर कब मुझे नयी बॉडी मिलती और क्या होता उस वक़्त......

मैं - दीदी आप ठीक है naa......Didi.....

वो सुन्न hi नहीं रही thi.....wo तो बस मज़्ज़े से अपने कुल्हाड़ी यहाँ वह कर रही थी.......

ध्रुव - ये खुनी घुड़सवारों की रानी hai.....aap देखो सही hai.....isko उसी नाम से pukaro.....yaad दिलाओ इसको की ये कुल्हाड़ी आपकी दी हुई है......

मैंने ध्रुव ने जैसा कहा वैसा hi kiya.....pahle उनका नाम liya.....unko बुलाया पर वो नहीं सुन्न रही thi.....maine देखा उनके कान धक्के हुए hai.....kya ये ऐसा हो सकता है ये बट्स जान बुझ के......

मैं इतना तो जानता था मैं उनको वापस से ठीक कर hi dunga......Maine अपनी तलवार ली और उनकी ओर बढ़ गया.......

पर उन्होंने भी वही kiya.....wo लड़ना चाहती थी......

मैं उनको काम से काम नुकशान पहुंचना चाहता tha.....to मैंने बस हलके हाथों से लड़ाई शुरू की......

मैंने वार kiya....unhone उसको अपने कुल्हाड़ी से रूक liya......yahi.....yahi तो बात thi.....issi के वजह से तो इनको कुल्हाड़ी दी थी maine......inke कुल्हाड़ी को चलने का tarika.....aisa था jaise.....jaise तितली का उड़ना पंछी का chahakna.....matlab एकदम से natural.......aur साथ में जब ये अपना दिम्माग लगाने लग जाट थी तब ये एक दम से उनपरिडिक्टेबले हो जाती थी.....

हम्म थोड़ा जोर लगाना होगा.......

मैंने इस बार उसपे ऐसे वार करने शुरू कर दिया जिससे उसके कलाइयां मोड़नी pade.....ab माना वो लचीली thi....par इतनी भी नहीं की एक बार इस तरफ कलाई मोदी और उसके तुरंत बाद दूसरी तरफ वो भी पूरी तरह se.....aisa मुमकिन hi नहीं tha......bas मैंने ये 4-5 बहार kiya....jiske बाद उसकी कुल्हाड़ी पैर से पकड़ कमज़ोर हो गयी थी......

और 2 वॉर के बाद कुल्हाड़ी जमी पे गिर्री हुई थी.....

मैंने उनको उठाया......

वो बहुत भड़क गयी ये देख ke.......Main चुप चाप अपने जगह पे वो कुल्हाड़ी ुटहाए खड़ा raha......aur वो मेरी ओर दौड़ते हुए आ रही थी गुस्से mein....maine उस एक कुल्हाड़ी को दो में badla....aur अपनी तलवार को वापस बुला liya......dono हाथों में वो कुल्हाड़ी पकडे हुए था मैं.....

जैसे hi.....jaise hi वो मेरे पास आयी मैंने उनके कानो पे वो कुल्हाड़ी बस टच karai.....jisse वो जगह खुल गयी अब ये सुन्न सकती थी mujhe.....par मेरे ऐसा करने पे वो एकदम से चिलाने लग gayi.....bahut ज्यादा.....

"नयी मत मारो isko.....ye बस खेल रहा tha......ye खेल रहा था मेरे saath......khelne दो isk.oo....o "

और उनकी आवाज धीरे धीरे कमज़ोर होती जा रही thi....matlab वो एकदम से निच्चे बैठ gayi.....aur बेहोश hi हो गयी....

मैं - ये जीव अभी भी नादान hai......inn बट्स का कुछ तो करना hi hoga........RIIIAAANNN

मैंने अपने इम्मोर्टल दोस्त को bulaya......aur वो आ गया वह pe......par बस वही नहीं आया साथ में घर से लोग भी पहुंच गए the.....bas वो अंदर नहीं आये थे अभी.....

मैं - रिआन ये bats......ye भी तुम्हारे बनाये हुए है क्या......

रिआन - ये मैंने नहीं बनाये hai.....par मैं इनको बना सकता hu......tumhe चाहिए.....

मैं - nahi......kya तुम इनसे बात कर सकते हो मेरी बात इंटक पंहुचा सकते हो......

रिआन - ये भी कोई कहने की बात है बताओ क्या कहना है.......

मैं - इनसे कहो की दीदी के साथ ये रह सकते hai.....par ये मज़ाक बंद kare.....wo उनपे पूरी तरह से काबू नहीं कर sakte.....agar वापस से ऐसा किया तो मैं इनको अलग कर दूंगा......

रिआन - didi......kya क्या है.....

मैं - इस बारे में बाद में बात करेंगे पहले जो बोलै है वो करो......

रिआन - हम्म ठीक है......

फिर पता नहीं वो क्या करने लग gaya......Maine कुछ आवाज सुन्नी मुझे लगा की सायद उन् जीवों में से एक दो बचा हुआ hoga.....wahi कर रहे है ये aawaj.....par नहीं ये तो घर वाले the....abhi दोनों बुआ और निकिता अंदर आने वाले थे......

सुकर है हम दरवाजे के पास नहीं the.....unko वक़्त लग्न था.....

मैंने रिआन को देखा वो कुछ तो कर रहा था......

मैं - जल्दी करो मेरे फॅमिली वाले आते hi honge....unko क्या बताऊंगा.....

रिआन - बस हो gaya......ye ज़िद्दी है bade.......inka कहना है की इनको खेलने के लिए वक़्त चाहिए hi chahiye.....aur ye.....ye इनकी माँ है हम अलग नहीं कर सकते inhe.....ye क्या है.....

मैं - बहुत लम्बी kahani.....theek है बोलो इनको की इनको खेलने के लिए हम वक़्त denge.....par ये पूरी तरह से काबू कभी नहीं करेंगे दीदी को वर्ण सच में इनको निकल फेकूंगा main.....aur जल्दी कहो......

रिआन ने वैसा hi kiya.....par उतने में वह पे वो तिण्णो आ पहुंचे.......

बुआ - Bacchu.......Rupal.....kya hua.....ye.....ye कौन है.......

मैंने थोड़ा सोचा और फिर कहा......

मैं - बुआ ये वही सैतान hai......par ये अच्छा hai.....dekho ये अब रूपल दीदी को ठीक कर रहा है......

बुआ - बच्चू रूपल को पकड़ो और दूर हो जाओ उससे......

रिआन - Saitaan......saitaan बस यही सुन्ना बाकी रह गया था.....

मैंने उसको नाटक का इशारा किया पर एक नंबर का चुटिया था वो.......

उसने पोर्टल खोला और वह से चला gaya....bc नाराज़ होक चला gaya.....par वापस आएगा hi वो......

बुआ - वो कहा gaya......wo अपने साथियों को लेने गया hoga.....Nikita सभी को यहाँ bulao....kavita चेक करो रूपल को.....

इतने में रूपल दीदी खुद उठ गयी.....

रूपल दीदी - मैं नहीं भरा आप सब का अब क्या रोज़ रोज़ चेक करोगे मुझे......

बुआ - रूपल तू ठीक है ना......

रूपल - haa......bas ye....ye हाथ में थोड़ा......

उनको उस जीव ने जहा काटा था वह पे बस थोड़ी सी जलन हो रही thi.....kapde भी पहले जैसे हो गए थे उनके......

K.Bua - वो सैतान कहा गया......

मैं - K.Bua वो अच्छा वाला tha.....usko बस मदद चाहिए था ताकि वो पोर्टल खोल के निकल sakke....aur मैंने और दीदी ने वही kiya.....wo चला gaya.....hai न दीदी.....

दीदी अपना सर पकड़ते हुए......

रूपल दीदी - अब तू कह रहा है तो सही hi होगा ना......

नेक्स्ट अपडेट में मधु से मिलने को पंकज के घर में घुसना hai.....par वह मां भी honge.....to थोड़ा फॅमिली ड्रामा......
 
अपडेट - 94

हम घर पे the.......Main और रूपल दीदी बिच में बैठे the.......aas पास सभी खड़े थे और बैठे थे......

चची - दोनों के दोनों अंदर गए hi kyun.......kya जरुरत थी जाने की......

दीदी - वह पे आवाजें आ रही thi.......humme laga.......sayd कोई मुसीबत में hai.......hum ऐसे kaise.....usko रहने देते.....

उन्होंने मुझे बचने को झूट बोल diya.......Maine ऐसा तो नहीं सोचा था.......

चची - क्या तुम्हे नहीं लगा वो वही सैतान hoga.......kya मिला था अंदर koi.......wo इंसान मिला था क्या......

चची - उसी के वजह से तो बेहोश हुई main......tu चुप क्यों बैठा है बता जल्दी.......

मैं -main.....wo.....hmmm......haa उसी se.....ussi हुआ tha.....ye सब उसी की वजह से हुआ था......

दादी - तो वो इंसान कहा gaya......kahi उसको.......

दीदी - नहीं वो तो वह से भाग gaya........ander की taraf........wo कैमरा लेके आया था सायद वो भूत देखने आया ho.....aur हमको देख के वो भाग gaya.....par जाने से पहले उसने...... तू चुप क्यों है bolega.......baitha है ऐसे hi......Mummy मैं जा रही हु मेरा सर दर्द कर रहा hai......Mujhe सोना है......

चची - बैठो चुप चाप क्या लगता है सब मैं लुंगी main......Kavita इसको चेक करो जर्रा......

दीदी - हां ये सही hai......har वक़्त चेक करते जाओ ये डॉक्टर को इसी के लिए तो रखा है घर में naa........thoda देर हुआ रूपल को चेक karo......mujhe नहीं करना कुछ......

वो झूठा गुस्सा दिखा के वह से निकल li........ab मैं बचा था सिर्फ.......

चची - इसको मैं बाद में dekhungi.....tum batao.....kya क्या हुआ था वह pe........aur ध्यान rahe......jo भी बोलोगे वो सब उससे कन्फर्म karaungi.....agar दोनों की बातें अलग hui.....to समझ लेना......

मैंने बस उनकी hi बातें बताई थोड़ा बढ़ा चढ़ा ke......aur फिर मैं भी वह से खिशक लिया.......

बुआ - कविता तू उसकी बातों का बुर.......

K.Bua - क्या बोल रही hai......uski बातों का बुरा कैसे लग सकता hai......wo भी तो अपनी hi है naa......tu bhi.....Bhabhi इसको चेक करू kya.....mujhe इसमें भी दिक्कत लग रही है......

बुआ - ज्यादा उड़द mat......samjhi.....

मैंने देखा ये लोग खुद में लगे हुए है मैं वह से निकल गया.......

बहार आया था main.......mujhe इस वक़्त उस रिआन से बात करना tha.......uss ओल्ड आउल के बारे में उसका काम किया या नहीं........

मैंने उसको एक दो बार आवाज di......par आया hi नहीं wo........ek नंबर का चुटिया है ये bhi.......Immortals में सायद ये सबसे बेवक़ूफ़ ho......par जितना ये बेवक़ूफ़ है इसकी मुँहबोली बहन :फैंट: वो उतनी hi चालक थी.......

अब ये आया नहीं तो मैं चल दिया ऐसे hi आस पास घूमने को वो भी बिन्ना किसी को बताये.........

घर पे बुआ सबको वो सब बता रही थी जो कुछ दिन पहले हुआ tha.......hamara स्ट्रेंज वर्ल्ड में चले जाना वह पे निक्स लोगो का अलग हो jaana......ye सब.......

उन्होंने इसके बारे में बहुत सोचा की बताया जाए या ना jaaye......par जब उन्होंने मेरा बेहेवियर देखा तो एक तरह से उनको लगा की सायद इससे प्रॉब्लम हो सकती hai.......to आगे कुछ बुरा ना हो इसके लिए वो सबको बताना hi सही samjhi.......par बस उतना ह जो पता होना chahiye.......haa मधु के बारे में भी बता दिया इन्होने जो भी इनको पता था.......

चची - मतलब क्या hai......ye पिछले जनम जैसा है क्या कुछ......

बुआ - पुजारी जी ने जैसा कहा था उससे तो मुझे भी यही लगता है Bhabhi.......bas आप सब थोड़ा उसको अब बड़ो जैसा ट्रीट करना.......

दादी - वो लड़की कौन hai......usko देखा है ना टुन्ने.......

बुआ - हां मैं usko.......ye आप अभी से क्या लेके बैठ गयी......

दादी - क्या लेके बैठ गयी से क्या मतलब hai......ab खुद की भी आगे dekho......kya पता अगर तुम्हारे भतीजे की शादी हो जाए तो तुम्हारा दिम्माग खुले की तुमको भी कर लेना चाहिए......

बुआ - Maaa........kya कभी भी कुछ भी शुरू कर देती हो.......

K.Bua - क्या बोल रही hai......sahi तो कहा inhone.......ab उम्र हो गयी है तेरी.......

चची चाय का प्याला अपने होंठों से लगते हुए......

चची - वैसे उम्र तो तुम्हारी भी हो गयी hai.......kaho तो तुम्हारे यहाँ इसकी खबर दे दू.......

K.Bua की आँखें एक दम से बड़ी हो gayi......wo एकदम चची को देखने लगी.......

बुआ - हम्म ये भी सही है भाभी......

यहाँ ये सब चल रहा tha,......Main आज वापस से जाके बैठा हुआ था पार्क mein......ab घर जा नहीं सकता था main......to बस वैसे hi बैठा उसके घर के तरफ देख रहा था की sayad.......galti se......bas एक baar......wo दिख jaaye.....aur मैं उसको dekhu......kass वो ृक्क jati......waise hi किसी मूरत की tarah....aur मैं बस उसको देखता रहता........

"आई बच्चे तुम यहाँ......"

पता नहीं कौन tha......pahle तो मैंने इग्नोर maara.......par वो मेरे पास आ gaya.....jab देखा उसको तो वो लीडर था.......

लीडर - तुम यहाँ क्या कर रहे हो......

मैं - तुमसे मतलब.......

लीडर - देखो उस दिन जान ना बचाई होती तो अभी यही पे.....

मैं - मुझे तुमसे कोई लड़ाई नहीं करनी मैं बस यहाँ पे बैठ.......

बोल hi रहा था की उसके दूसरे तरफ se......Madhu और वो पंकज आते हुए दिखे.......

धड़कने एकदम से तेज़्ज़ हो gayi......sar पे पसीना आ gaya......waha हवा अच्छी खस्सी चल रही thi....aur मैं तो चाव में बैठा था......

मैं - अगर वो आ रही है तो मैं बिन्ना दर्रे यहाँ रह सकता hu.......mujhe कुछ नहीं hoga......main उसको इतने पास से वापस से देख पाऊंगा......

मैं बस यही तो सोच रहा tha......aur वो दोनों आये.....

पंकज - आप यहाँ हो हम उस तरफ देख रहे थे.....

लीडर - अरे मैं वही tha.....wo तो इसको dekha........sach कहते थे tum......ye लोग..... :सिघ:

वो बात पूरी करता उससे पहले मुझे कहना था कुछ वर्ण ये लीडर मेरी इमेज और ख़राब कर देता मधु के सामने......

मैं - पंकज मेरे bhai......wo main......mujhe माँ की याद आ रही thi.....yaad है तुमने मुझे कहा था वो यही रहती thi.....unka एक कमरा tha......Main बस उसी के बारे में सोच रहा था......

मधु - ये क्या बोल रहा है पंकज......

पंकज तो पहले बस मुझे देखे जा रहा tha.......ekdum से शॉकेड........

मधु - Pankaj....kya hua......ye क्या बोल रहा है.....

पंकज - इसने मुझे भाई kaha......tumne सुन्ना naa......aapne सुन्ना भाई कहा इसने मुझे.....

मैं - अब भाई को तो भाई hi कहेंगे ना......

पंकज - पर मैं कहा तुम्हारा भाई hu......tumhi ने कहा था पहले दोस्त बनेंगे और फिर bhai....main तो दोस्त भी नहीं बन सक्का भाई तो दूर की बात hai.....isko रहने देते है.....

मैं तो किया अभी यही पे अपनी तलवार से इसको 1000 टुकड़ों में काट दू.......

मधु - rukko.....isne कहा इसकी माँ यहाँ रहती thi.....to क्या......

पंकज - मैंने तुम्हे ये सब बताया तो था......

मधु - हम्म मैं इस बारे में भूल gayi......Iska नाम क्या था......

:रेडफास: नाम भूल गयी.... :सुसाइड: मेरा नाम भूल gayi.....kyun.....

जब उसने पूछा मेरा नाम क्या tha......main बस अपने जगह से utha.......aas पास क्या है कौन है क्यों है किसी चीज़ज़ से मतलब नहीं रहा था mera......maine पोर्टल खोला और वह से निकल गया......

मैं नहीं जानता था मैं कहा जा रहा hu.......bas खोला और निकल गया वह से......

ये भी सायद एक पार्क hi tha......Main बैठ गया एक तालाब के सामने.....

बहुत अजीब लग रहा था मतलब क्या hi कहु isko........naa अच्छा कह सकता हु ना burra......gussa tha.....par दुःख उससे ज्यादा था.....

वही बैठा तालाब में छोटे छोटे बिजली के टुकड़े फेंकने लगा मैं.......

वही वह मधु के पास.......

उन्होंने देखा की मैंने पोर्टल खोला और उसके अंदर चला gaya.......wo भी इस waqt.....jab पार्क भरा हुआ tha......Madhu को इतना तो पता था की ये सब इंसानो के सामने नहीं करते है......

वो तीनो आस पास देखने लग gaye.......ki कही किसी ने देखा तो नहीं अभी जो hua.......karib 10 मिनट तक वो देखते rahe......aur जब उनको लगा किसी ने नहीं देखा तब वो वह से वापस अपने घर जाने lage.....inka प्लान कुछ और था पर हो कुछ और गया......

मधु - उसको ऐसा नहीं करना चाहिए tha......agar किसी इंसान ने देखा होता तो परेशानी हो jaati......aare एक दो होते तो हम संभल सकते the.....usne पुररे पार्क के सामने ये किया था......

पंकज को थोड़ा थोड़ा समझ आ रहा था प्रतीक ने ऐसा क्यों kiya.....aur अभी वो थोड़ा सा घबरा भी रहा tha......Pujari जी के कहे anusar.......kisi भी किम्मत पे मधु और प्रतीक के बिच नहीं आना hai.....aur वो आ चूका tha......ab उसको पता नहीं था आगे क्या हो सकता है....

पंकज - हममे इसके बारे में घर में बताना hoga.....Papa को ये सब बताना hoga.....wo इन् सबको थोड़ा और बारीख़ी से देखेंगे...

लीडर - मैं इसमें मदद कर सकता था पर अगर मैंने अपनी पावर्स उस अमाउंट में बहार निकले तो दिक्कत हो सकती hai......Head ऑफिस को पता चल जाएगा और फिर main....wapas चला जाऊँगा सायद......

मधु - हममे बस जाके ये तुम्हारे पापा को बोलना hai......par इसमें तुम्हारी गलती है पंकज......

पंकज ने जब ये सुन्ना उसकी फट गयी thi......wo इतने देर से बस यही तो सोच रहा tha......Pujari जी की baat.......dono के बिच में नहीं आना hai.....aur अब मधु ने उसको गलत बोल diya......ho सकता है ये अभी काबू से बहार जाए aur.....kaam ख़तम......

पंकज - nahi.....nahi.....dekho मैं गलत tha....par तुम बस इसके लिए मुझे कुछ नहीं कर sakti......Main बता रहा हु tumko.....main उसको यहाँ लेके aaunga....tumhare saamne.....tumse मिलने ko......bas कुछ करना मत मुझे......

मधु को समझ नहीं आया इसका matlab....wo अपना सर खुजाने लग गयी.......

मधु - ये क्या बोल रहे ho.....maine कब कहा मैं कुछ करने वाली hu......maine कहा तुम्हारी गलती thi......uski माँ रहती थी तुम्हारे yaha.....aur उसको उसकी माँ की याद आ रही thi.....usko आने देना tha....baaki बातें बाद में कर सकते the....par उसको आने तो देना था......

लीडर - मैं भी सायद यही कहूंगा.....

पंकज - haa....usko आने देना चाहिए tha.....main खुद लेके आऊंगा usko......tum bas....bas मुझे कुछ मत karna.....main लेके आऊंगा उसको......

मधु - पागल हो kya,......main क्या करुँगी tumko......bekkar में कुछ भी बोले जा रहे ho......chalo घर और जाके बताओ सब कुछ......

पंकज कांप रहा था इस waqt......usne अपनी आखों से देखा था दरवाजा उखड़ते हुए......

वो जल्दी से घर में gaya.....Daksh को ढूंढा और सब कुछ bataya......naa सिर्फ ये sab,.......balki स्ट्रेंज वर्ल्ड वाला किस्सा bhi.....wo किस्सा जो स्कूल में सब समझ नहीं पा रहे थे की क्या tha.......School के हिसाब से मधु बस वह चली गयी और उसके बाद जब वो वापस आयी तो उसके साथ साथ आधे से ज्यादा निक्स भी यहाँ आ गए......

सबको ऐसा लगा वो बस अपने लोगो की मदद करने गयी thi.....yaa ऐसा hi kuch......par जब साड़ी सचाई पंकज ने दक्ष को बताई तो wo.....wo परेशां हो gaye......wo समझ नहीं पा रहे थे की क्या करना chahiye......matlab ऐसा कुछ उन्होंने पहली बार सुन्ना था......

और जिस तरह से सब उनको बताया गया वो समझ रहे थे सब सच hi होना चाहिए......

उन्होंने इसको बड़ो की तरह हैंडल करने का socha.......pahle तो वो उस पार्क में gaye.....aur वह पे उस पोर्टल के टुकड़े देखने lage......kyunki वो सबसे पहले प्रतीक को ढूँढना चाहते थे.....

पर कुछ भी नहीं मिला waisa......wo वह से वापस aaye......dekha लीडर मधु और पंकज वही है......

दक्ष - पंकज घर पे रहो मधु के saath.....aur आपको मैं थोड़ा परेशन करना चाहता hu.....kya आप मेरे साथ मेरी बहन के यहाँ chalenge......mujhe लगता है हममे उनसे बात करनी होगी इसको लेके......

पंकज - मैं भी chalunga......main यहाँ पे.....

दक्ष को पता था वो क्या सोच रहा hai......unhone मन्ना कर दिया......

पंकज को घर पे hi रहना था मधु के saath.......aur उसको बस यही लग रहा था ना जाने kab......wo वापस से अपना आप खो देगी और usko.......agar ये नहीं करेगी तो वो प्रतीक आ जाएगा और wo......yaa फिर सायद दोनों मिलके......

पंकज - पापा मैं पुजारी जी के pass.....haa उनके पास चला जाता hu.....sayad......

मधु को ये बड़ा अजीब लग रहा था मतलब इतनी सी बात हुई और ये पंकज उससे इतना डर रहा tha....usne कुछ कहा भी नहीं उसको ज्यादा......

मधु - मैं जा रही हु waha........Daksh सर आपने मुझे अपने साथ रखा बहुत बहुत आभार uska.....par.....par अब सायद मैं इस जगह के लिए सही नहीं hu......waise भी मेरे कबीले के लोग यहाँ आ चुक्के hai.....Main उनके साथ hi रहना पसंद करुँगी......

दक्ष - अभी के लिए इस बात को यही रहने देते है Madhu......tum एक काम karo......apne इस डरपोंख भाई को लेके जाओ अपने पुजारी जी के pass......aur tum.......darr क्या रहे ho.......aaj तुम्हारी माँ यहाँ होती to....pata नहीं क्या सोचती वो......

पंकज दर्रा हुआ tha......usne देखा था क्या हुआ था दरवाजे के saath.....iss वजहसे वो दर्रा हुआ tha.....par अपने पिता की बात सुन्न के उसको खुद से शर्म आने लगी......

पंकज - मैं यही rahunga.....madhu के saath.....aap जाओ......

मधु - मैं जा रही हु पुजारी जी के पास......

दक्ष - बीटा कुछ देर ृक्क jaao......nahi तो ये......

मधु - ये मेरी वजह से तो डर रहा hai.....aur मैंने कहा कुछ किया इसके sath....maine कुछ बोलै tumko.....jo डर रहे हो.....

यहाँ ये सब चल रहा था वही घर पे अब सभी मुझे ढूंढ रहे the.....kyunki मैं बहुत देर से बहार tha......Nikita ने ज्वाला को बुलाना सही नहीं समझा सभी के saamne......par उसको पता था मैं कहा हो सकता हु........

तो उसने सबको बता diya......aur उसकी बात से लगभग सब संतुस्ट थे......

निकिता - वो पक्का मधु के पास hoga......School में भी उसको देखता रहता है बस.......

बुआ - हम्म्म मुझे भी यही लग रहा hai....par क्या humme....waha जाना चाहिए......

चची - मैं बात करती हु दक्ष se......sayad उनको पता हो मधु कहा है फिर वह जाके देख लेंगे.....

चची ने ये कहा और कॉल लगा दिया......

वह दक्ष समझा रहे थे घर पे hi raho....par मधु मैं नहीं रही थी......

चची - Hello......Daksh जी.......

दक्ष - Hmm....bataiye नित्य क्या कर सकता हु मैं आपके लिए......

चची - एक minute........(ye दक्ष जी को भी पता है ये सब या सिर्फ हममे hi पता है...)

बुआ - पंकज था वह पे पता नहीं उसने बताया है या नहीं.....

हलाकि फ़ोन को धक् रखा था पर आवाज चली गयी......

दक्ष - नित्य जी मुझे इन् सब के बारे में अभी hi पता चला hai......hum इस बारे में बाद में बात karenge.....waise मुझे आपसे एक बात पूछनी थी.....

चची - हम्म इस बारे में मिलके एक साथ बात करना hi सही hoga.....aur हां पूछिए क्या पूछना है उसके बाद मैं भी पूछ लुंगी.....

दक्ष - वो क्या प्रतीक वह पे है अभी....

चची - नहीं तो यहाँ नहीं hai......Mujhe लगता है आपके घर के पास होगा वो मधु आपके यहाँ hi है ना......

दक्ष मां को समझ आ गया था की वो घर तो नहीं गया hai......to पहले वो बाकी सब से थोड़ा दूर हो गए......

दक्ष - जी दरअसल बात ऐसी hai.......Prateek था यहाँ pe.....par बच्चो में कुछ बातें हो gayi.....aur वो यहाँ से चला gaya......mujhe लगा आपके पास होगा तो मैं आने वाला tha.....par आपने कॉल कर diya....wo यहाँ नहीं hai.....aur ना hi उसके पोर्टल का कोई टुकड़ा मुझे मिला है जिससे मैं बता पाऊं वो कहा है....

चची - Hmm.....ye तो चिंता की बात hai.....Hum आ रहे है वह पे.......

कॉल कट और चची ने ये बात सभी को बताई...

चची की बात सुनने के बाद सभी जाने को रेडी हो gaye.....par बुआ ने निकिता को घर पे रुकने को kaha......ek तो दीदी थी अपने कमरे में इस वजह से और dusra....wo चाहती थी निकिता वह पे ज्वाला को बुलाये और उसको ढूंढने कहे......

सभी को ये सही लगा की निकिता घर में रही तो अगर प्रतीक वापस आया तो वो बता degi.....saath में रूपल को भी देख legi......sab उसको वह छोड़ के निकल गए.......

निकिता ने भी सबके जाने के बाद जल्दी से ज्वाला को bulaya......aur उसको प्रतीक को ढूंढने को बोलै......

ज्वाला भी चल दिया......

सब मुझे धुंध रहे the......par मैं एक तालाब के पास बैठा तालाब में बिजली के छोटे छोटे टुकड़े पानी में फेंक रहा tha.....usse वह पे वो पानी गरम होता जा रहा tha......aur आस पास बादल जैसा बन गया था.......

"आई लड़के ......क्या कर रहे हो yaha......band करो ये बदल बनाना......"

मैंने मदद के dekha......ek budha.....haa बूढ़ा hi tha.....yaa पता नहीं मतलब बाल ऐसे सफ़ेद की उसके सामने दूध भी गन्दा lage......aur चेहरा भी बहुत अट्रैक्टिव tha......ek पल को लगा की ये ओरियन का hi बाँदा hoga.....par phir.....uske कपडे देख के लगा नहीं ये नहीं है वह ka....ye कोई और hi है.....

"जाओ यहाँ se.....mera मूड सही नहीं hai.....bhago...."

मैंने ऐसे hi उसको कह दिया.......

जाने के वजाये वो मेरे बगल में आके बैठ gaya......maine एक बार उसकी तरफ dekha....phir लगा बक्कर में क्या karna......main अब पत्तर उठा के फेंकने वाला था की......

"बिजली ख़तम हो गयी kya.....jo पत्थर उठा लिया....."

मैं - तो तुम भी कोई जादुई जीव हो.....

"हम्म main.......haa मैं भी हु....."

अजीब tha......aisa लगा पहले वो कुछ और कहने वाला था और फिर सोचा क्या समझाना mujhe.....usne बस हां कह diya......ye मुझे बेवक़ूफ़ समझ रहा है.....

मैं - तुम जाओ कही और जाके baitho.....main यहाँ अकेला रहना चाहता हु......

नदी के ऊपर बदल बनने हुए the.....meri वजह se......usne अपना हाथ आगे kiya....aur एक तेज़्ज़ हवा का झुनका आया और उससे वो पूरी जगह साफ़ हो gayi.....bas रहा to.......paani के ऊपर मछलियां.....

ये मछलियां पानी के ऊपर क्यों थी पता नहीं.......

" ये सब देख रहे ho......tumne इन् सब को मार diya.....inko मैंने बनाया tha.....ye सब तुमने ख़तम कर दिया......."

मैंने जब सुन्ना वो साड़ी मछलियां मर्री हुई है मुझे बुरा laga......main यहाँ अपने दुःख को मिटने आया था ये तो दुसरो को मिटता बैठा.....

मैं - माफ़ करना मुझे पता नहीं था ऐसा कुछ हो jayega.......Main चला जाता हु यहाँ से......

वो - sunno.....baitho.....chalo बातें करते है kuch....thoda बहुत तुम batao....thoda बहुत मैं बताऊंगा......

मैं - तुम मुझे नहीं जानते और ना मैं tumko......humme क्या बात होगी......

वो - तो जान लेते है naa......Main विराज हु.....

नेक्स्ट अपडेट में इनकी बातें sunenge......Viraj बताने वाला है कैसे उसको सोफ़िया न झूट बोलै और स्लेयर को बना diya.....Matlab स्लेयर का पूरा इतिहास पता चलने वाला है usko.....aur साथ hi वो किश जगह पे है वो bhi.....insano को लाने का वक़्त भी हो गया है.....
 
अपडेट -95

विराज ने अपना नाम बताया और मेरी तरफ देखने लगा सायद इस आस में की मैं भी उसको अपना नाम bataun......ye पता नहीं कौन सा पागल hai.....aise थोड़ी ना होती है जान pahchan.........Mood पहले से ख़राब tha......par.....naam बताने में क्या जाता hai.......Maine उसकी ओर देखा.....

मैं - मेरा नाम प्रतीक hai......isse ज्यादा जानने की जरुरत नहीं है tumhe.......Main चला जाता हु यहाँ से.......

विराज - ये machliyan........pata है ये क्या hai.......Khud से बनाया था इनको मैंने.......

मैं - माफ़ करना पर अब कुछ हो नहीं सकता........

मैं वह से जाने को आगे बढ़ा......

विराज - हर एक मछली मेरी हर एक याद से बननी हुई thi.......tumhari वजह से मेरी हर एक yaad........wo जाने वाली hai.......main इस जगह pe.....bas इनके सहारे tha......aur और तुमने इन्हे भी ख़तम कर दिया.........

अब थोड़ा बुरा लगने लगा था mujhe......matlab पता नहीं ये क्या बोल रहा था पर जैसे बोल रहा था उस हिसाब से मैंने इसका बहुत बड़ा nuksaan.......machli.......yaadein....kya ये.....

मैं अभी सोच hi रहा था की मैंने उसकी मछली वाली बात पे गौर kiya........ye chizz........ye तो हम किया करते थे waha.....apne जगह pe........ye यहाँ कैसे......

मैं - तुमने कहा तुम्हारी यादों से ये मछलियां बननी हुई thi.......Kaun हो तुम.......

विराज - Main........maine नाम बताया तो apna......aur भी जानना है kuch......to सुनने मैं वो हु जो टूट चुक्का tha.......bahut मेहनत से मैंने खुद को संभाला था और tum.....tumne आज वापस आके मुझे तोड़ diya.......Main वो hu......jisko हर जगह पे धोखा hi मिला hai......par ab.....sayad ये ठीक hi किया tumne.......main अब सब भूल jaaunga.....sab kuh.....kyunki मेरी यादों से ये मछलियां बननी हुई thi......aur tumne......tumne इन् सब को मार diya.....sayad मेरी ये यादें bhi.....aaj hi ख़तम हो जाए.......

मैं - माफ़ करना मैंने ऐसा सोचा नहीं tha.....par....par ये tarika...ye यहाँ का नहीं है......

विराज - हम्म वो थोड़ी सी साडी रंग की मछली देख रहे ho.......wo मेरी तब की याद से बना हुआ है jab......jab मैं पहली बार उससे मिला था.......

मैं उससे पूछना तो कुछ और चाहता tha......par वो कुछ और hi बता रहा tha.......Main समझ सकता था isko......Log चले जातें है उनको तो जाना hi होता hai....par ये yaadein......jo उनके साथ की होती hai......jab वो चली जाती है तब तो पता hi नहीं होता क्या था क्या नहीं tha......par जब वो जाती होती है उस waqt.....uss वक़्त एक अलग hi दर्द होता है......

विराज - wo.....wo वाली देख रहे ho.......pile रंग wali........wo तब की hai......jab मैंने उसके लिए अपने लोगो से लड़ाई की thi........mere लोग कहते थे वो काबिल नहीं है hamare........main कहता था मैं काबिल नहीं हु uske......hmm मैं सच में नाकाबिल hi था......

मैं बस उसको देखता raha......wo मुझे वह पड़े हुए मछलियों को दिखा दिखा के बता रहा था उससे रिलेटेड yaadein.......usne उसी तरह मुझे बहुत कुछ bataya........Sofia से milna........Sofia से प्यार hona.......kaise उसने उसको अपने दिल की बात बताई thi.....Kya हुआ जब सोफ़िया मान gayi.......Fir दोनों का वह से भाग jaana.......aur फिर वो भी बताया की कैसे सोफ़िया की सच्चाई पता चली isko......par.....par ये क्या karta.......isne सोचा सायद वो बदल jaayegi.......aur इसने कोशिश भी kari.......aur सोफ़िया बदल भी रही thi......par फिर से कुछ hua......wo वापस से पहले की तरह हो gayi.......wo यहाँ एअर्थ पे aaye........Viraj को उसने पाथेर का एक पुतला बना दिया tha......aur वो लग गयी थी अपने काम mein........kaise वो लोगो को पकड़ के लाती और unko.....unko खा जाती thi.....aur कुछ हिस्सा उनके सरीर का वो अपने पास रख लेती thi......phir उसने वो भी bataya......wo रात जब उसने सोफ़िया को आमने सामने आखिरी बार देखा tha......Sofia ने उसका हाथ काट दिया tha.....aur उसके खून से usne......usne एक मांस का पुल्टा बनाया उसको जिन्दा kiya.......aur......naa जाने कैसे कैसे शक्तियां उसमे दाल दी थी usne.......Uske बाद कैसे विराज वह से भाग गया tha.....aur फिर चुप चुप के उनपे नज़र रखने लगा tha.......har वो याद बता रहा था wo.......aakhiri yaad.......aakhiri याद तब की thi......jab सोफ़िया को स्लेयर ने अपने hi हाथों से मार दिया tha......aur.....aur usko......uske बाद की कोई याद hi नहीं थी वह पे.......

मैं सब सुन्न रहा tha......hamari कहानी एक जैसी तो नहीं thi......par एक वो अहसास होता है naa......wo एक जैसी thi.......ye भी दर्द में डूबा था मैं भी दर्द में डब्बा tha.......hum दोनों hi एक hi सड़क के रही थे........

विराज - तुम कौन हो waise........pata नहीं क्यों तुम्हे देख ke......laga......jaise.....

मैं - जैसे हम दोनों जुड़े हुए hai.....haa अब मुझे भी लग रहा है......

विराज - hmm.....accha अगर तुम मुझे अपनी कहानी नहीं सुनना चाहते तो कोई बात nahi......waise भी ab.....iske बाद सायद hi मुझे कुछ याद रहने वाला hai.....ek बार ये साड़ी machliyan.....gayab होने lage......meri यादें भी.......

मैं - विराज इस जगह के बारे में बताओ कुछ......

विराज - मेरी कहानी तो तुम्हे पता hi चल गयी hogi......ab तो बहुत वक़्त हो gaya......jab.....jab मैं सोफ़िया का पीछा किया करता tha.....uske पास से भागने के baad......tab की बात hai......Main किसी से मिला था उससे pahle......usne.....mujhe इस जगह के बारे में बताया tha......kaha था ये जगह उसने बनायीं thi....ussi ने मुझे इन् सब के बारे में बताया tha......ye मछलियां मेरी यादें सब उसी ने बताया था.....

मैं - तुम्हे याद है वो कैसा था.......

विराज - मैंने उसकी यादों का भी मछली बनाया tha......par उसने खुद उसको मार diya.......aur....main उसको भूल gaya......kuch बातें कही थी usne......par वो क्या थी ये याद नहीं ठीक से मुझे.....

मैं - क्या मैं इस जगह pe......aa जा सकता हु......

विराज - इस जगह pe......hmm वैसे भी सायद मेरा वक़्त ख़तम हो गया है ab......meri यादें thi.....to मैं tha.....ab वो nahi.....to sayad.....Main भी नहीं......

मैं - यादें चली जाना ाचा भी होता hai......jo कुछ भी तुम्हारे साथ hua.....wo सब भूल के तुम आगे जी सकते ho.......tum ओरियन वाले hi लगते ho....tum सब की उम्र भी लम्बी होती है......

विराज - लम्बी hai......issi बात का तो दुःख hai......dekh नहीं rahe.......kaise जी रहा हु मैं......

मैं - क्या मैं किसी तरह तुम्हारी मदद कर सकता हु......

विराज - हम्म तुमने मेरी कहानी सुन्नी naa......wo Slayer.......usko बस किसी tarah......agar तुम ख़तम कर सक्के तो main.....main समझूंगा मेरी वजह से जो कुछ भी हुआ उसका एक अंतत तो आ hi गया......

मैं - मैं उस स्लेयर को मारूंगा nahi.....kyun की वो मर्डर नहीं sakta......par उसके अंदर मैं किसी और को डालने वाला hu......sayad इससे सब सही हो जाए.......

विराज - पता नहीं तुम ये कर पाओगे या nahi.......par अगर ना कर paaye......to......to उसको कैद कर देना कही भी.......

मैं - फ़िक्र मत करो मैं देख lunga......mujhe लगता hai......tumhe.....

विराज - haa......mujhe भी नींद आ रही hai......ye सबसे अच्छा तरीका है अपनी यादों को भूलने ka......agar मैं अभी जाएगा raha......to sayad.....sayad किसी को नुकसान पंहुचा du.......Main सो जाता hu.......sunno वह दुर्र उस तरह वो पेड़ हम्म उसके पास से hi तुम यहाँ से निकल सकते ho......aur कोई जगह नहीं है.......

मैंने उस ओर देखा......

मैं - हम्म ठीक है तुम आराम karo......aur फ़िक्र मत करना .....

विराज - hmm......waise तुमने अपना नाम hi बताया है सिर्फ कहानी नहीं बताई.......

मैं - फिर कभी मिलेंगे तब बता दूंगा........

मैंने उसको वही छोड़ दिया और उस तरफ चल दिया जहा के बारे में इसने बताया tha.....waha गया तो पहले से hi एक पोर्टल खुला हुआ था........

मैं - कहा jaaun.....kass कोई ऐसी जगह ho......jaha पे मुझे मधु से मिलना का मौका मिल जाए........

मैंने ये बोलै और उस पोर्टल में चला गया.......

जब दूसरी तरफ pahucha......to waha......waha पे एक पुराण सा बोर्ड लगा हुआ tha......Bhanupur....ye लिखा हुआ था वह पे.......

मैं - ये कहा पहुंच gaya.......Maine सोचा था मधु के पास आ jaaunga.....aur ये तो...... :सिघ:

मैं आस पास देख रहा tha.......ki सायद यहाँ कुछ ho......tabhi तो यहाँ पे आया था Main......aise hi नहीं आ सकता था yaha.......aur मेरा ये ख्याल सही hi निकला........

ये इंसान :सिघ: मैं अपनी लाइफलाइन के हिसाब से देखु तो सायद इनकी लाइफलाइन 1 दिन की भी ना hai......tab भी ना जाने कितने पन्गा होते रहते है इनके लाइफ में.......

एक कार आ रही thi.......aur उसके पीछे 3-4 बाइक पे लोग the......aur उन् सब ने हॉकी स्टिक्स और ना जाने क्या क्या ले रखे the.......wo सब उस कार के पीछे the......aur जब भी उसके पास पहुंचते उसको हॉकी स्टिक्स से या फिर जो भी उनके पास था उससे मार रहे थे......

वैसे तो मुझे घंटा इंटरेस्ट नहीं था isme.......Main क्यों hi इसमें padu.....par पता नहीं ऐसा लग रहा था इसको बच्चन chahiye.....ander यही koi......ab क्या कहु उम्र के बारे mein......meri उम्र हज़ारों सालो से ज्यादा की hai.....iss इंसान को कैसे कहु मुझसे बड़ा था ye........dekhne में मुझसे काफी बड़ा लग रहा था वो.......

अभी देख hi तो रहा था की उस कार वाले बन्दे की कार बंद हो gayi.....aur वो log.....jo बाइक पर थे उन्होंने उसके कार को घेर लिया.......

"betichod.......paas नहीं करेगा humko........itna लम्बा चौदह आंसर लिखवा के लिए तब भी फ़ैल करता है Madarchod.....jaaanta नहीं क्या कौन हु मैं......."

"भाई आज इसको सही से पेलते hai.......main तो बोलता हु इसके घर चलते है सभी को पेल देंगे एक hi बार में......"

"बीआरओ yaar......kya hi पलोगे isko......Randwa है sala......Biwi भाग गयी थी इसकी :lol: खड़ा नहीं होता होगा इसका....."

"t......tuut....tumm ये sah....hi नहीं कर rahe.......main कल कल कम्प्लेन कर दूंगा....."

"बीआरओ मार hi देते है ना isko......phir तेरे बाप से बोल के नया मास्टर रखवा लेंगे....."

मैं समझने की कोशिश कर रहा था ये नमूने कर क्या रहे थे waha.....matlab मार रहे थे ये ठीक है पर ये बातें किस बारे में कर रहे the.......Main धीरे धीरे उनकी तरफ जाने लगा.....

मैंने देखा उन् बाइक वाले में से एक ने उस कार वाले आदमी का कालर पकड़ के उसको बहार निकल रहा था.......

कार वाला बाँदा चिल्लाने लग gaya......Bachaao बच्चाओ........

अब कौन आये उसको बचने इस काली अँधेरी रात में वो भी इस जगह :सिघ:

यही बात उन् लड़को ने kahi........ki यहाँ इस वक़्त कोई भी नहीं आने वाला है......

मैं - aee......kya कर रहे हो छोड़ो उनको.......

"भेनचोद ये कौन आ गया be......jaake देख किसकी माँ छोड़ने के लिए इतनी तड़प रही है....."

वैसे मुझे इनकी गलियों से फर्क नहीं पड़ता पर कुछ hi तो वक़्त हुआ है की मुझे समझ में आया है की मुझे होने रिश्तों के बारे में सोचना chahiye......unko सम्मान देना chahiye......aur ye.....ye इंसान अब मेरी माँ को गली दे रहा था.....

"बीआरओ अकेला है ye......isko भी पेल देते hai......sabut भी नहीं बचेगा......"

"बीटा बच्चाओ mujhe.....ye log.....ye मार देंगे मुझे......."

मैं - सुनने जाने दो इनको.......

"तू कौन hai......yaha का कोई नेता हो रहा है तू जो तेरी बात मान le.....nikal यहाँ से मादरचोद लास्ट वार्निंग दे रहा hu......nahi गया तो मुझे मत बोलना "

ध्रुव - ये लोग कौन है और हम यहाँ कैसे आ gaye.....mujhe कुछ याद क्यों नहीं आ रहा है......

मैं - ोू तो जाग गए आप सायद तुम उस जगह पे जाने के बाद से बेहोश हो गए the......yaa पता नहीं......

ध्रुव - कहा जाने पे.......

"ू भेनचोद तू नहीं जाएगा तो मैं भेज दूंगा तुझे वो भी सीधा ऊपर....."

मैं - भासा बहुत ख़राब है tumhari......abhi भी बता रहा hu......soch समझ के बोलो.......

"तू मुझे sikhayega......aee जाओ इसको पकड़ के लेके आओ....."

ध्रुव - ये क्या हो रहा है.......

मैं - चुप raho......aur ख्याल रखना ज्यादा जोर से ना मार दू इनको मैं.......

ध्रुव - aap....aap in....insano ko.....ye मर जाएंगे.....

मैं - इसी लिए तो कहा tumko.......main चाहता हु ये जिन्दा रहे बस दर्द sahe.....gali दे रहे है मुझे ये......

मैं उससे बात कर रहा था तभी एक बाँदा आया और उसने अपने हाथ से पकडे हुए हॉकी स्टिक से मेरे पैरों पे maara.....sayad ये सोच रहा होगा की मैं गिर जाऊँगा और bas.....ye मुझे लेके जाएगा वह......

मैं हिल्ला तक nahi....aisa नहीं था कुछ महसूस नहीं हुआ tha......Mehsoos तो हुआ tha......ye दर्द tha......par ज्यादा nahi........Maine उसको dekha........wo मुझे देख रहा था और अपने हाथ में पड़े उस हॉकी स्टिक ko......uske हिसाब से मुझे अभी चिल्लाते रहना चाहिए tha......aur निच्चे जम्मीं पे होना चाहिए था......

मैंने हलके से बस उसके गालों को chuwa......aur वो मेरे से दुर्र जाके जमीं पे गिर gaya......do दांत टूट गए थे उसके......

वो पहले तो समझ नहीं पाया आखिर हुआ tha......wo क्या वह पे कोई भी समझ नहीं paaya......wo कार वाला बाँदा वो बाइक वाले बाकी के सारे सब बस आखें बड़ी करके देख रहे the.....ki आखिर ये हुआ तो हुआ क्या,,,,

कभी मुझे देखते तो कभी usko.......Unka ध्यान तब टूटा जब वो बाँदा चिल्लाने लगा दर्द से.......

ध्रुव - आपको कण्ट्रोल करना hoga........ye बहुत ज्यादा है......

मैं - Uff.......ye नाज़ुक से insan.....Maine बस उसको चुवा था........

ध्रुव - आपको अपनी पावर्स लॉक करनी hogi.....warna ये बचने वाले नहीं है चाहे आप छूटे hi क्यों ना रहे इनको......

मैं - ठीक hai......Meri स्ट्रेंथ को 20 % पे कर do......tum कर पाओगे ये......

ध्रुव - जब आपको कुछ याद नहीं था तब मैं hi संभालता था sab....main ये कर dunga......bas आप ध्यान रहना तब भी आप इनके लिए जानलेवा hi होंगे.......

"b....bbrro....ye ये भूत तो नहीं है ना......."

"भाई मैंने भी सुन्ना hai.....aise.....aise सुनसान जगहों pe.....bhooot होते hai.....dekho इसको चोट ना लगी और wo......uske तो दांत तक टूट गए....."

"बीआरओ मैं तो कहता hu......hum भाग जाते है यहाँ इस बुड्ढे को छोड़ ke.....ye भूत खुद इसको मार dega.....hamara काम आसान होगा....."

मैं इनकी बातें सुन्न रहा था और देखते hi देखते वो सारे धीरे धीरे पीछे जाने लग गए.......

मैं - कहा जा रहे हो.....

"इसको खा जाओ मैं तुम्हे पैसे दूंगा...."

"बीआरओ भूत पैसे का क्या करेगा....."

मैं - मैं तुम्हे भूत लग रहा हु.......

मैंने देखा उन् सब में से एक ने किसी को फ़ोन किया tha......aur उनको यहाँ आने को बोल रहा था......

वीओ बाँदा सामने आया और कहा.....

"भाई ये भूत वोट नहीं hai.....wo होते hi नहीं hai.....bas रुको 2 minute......log आ रहे है apne.....aaj ये भी जाएगा इस बुड्ढे के साथ......"

ये बहुत बोरिंग हो रहा tha.......Main उनकी ओर चल pada.....wo पीछे जा रहे थे पर तब भी मेरी स्पीड उनसे ज्यादा thi......Main उनके पास पहुंच गया aur.......pahle तो उसको मारा जिसने भूत बोलै था मुझे......2 thapad.....aur होठ फट गए uske.....Itne मकें मौका देख के पीछे से किसी ने मेरे सार पे मारने की कोशिश kari.......inko कहा पता मैं कौन hu......Maine अपना हाथ पीछे kiya.....aur उसका बात पकड़ लिया......

मैं - सुनने भागने की सोचना भी मत मैं जरररा इससे बात कर लू पहले.....

मैं उसकी ओर mudda.....aur दूसरे हाथ से उसकी कलाई को पकड़ लिया......

थोड़ी सी ताक़त क्या लगायी वो चिल्लाने लग गया.......

मैं - पीछे से नहीं मारते देखो तुम्हारे दोस्तों को कितने अच्छे hai...maine कहा और बैठे हुए है.......

मैंने ये कहा और पीछे की ओर देखा वो सब बैठे थे पर मौका देख रहे थे मुझे मारने ka......isse मुझे वो याद आ gaya.......maine देखा था किसी ko.......issi तरह से अपने दुश्मनों को डरा के मारते hue......ab मैं मारने तो वाला नहीं था पर डरा तो सकता था ना.......

तो मैंने उसकी कलाई पे थोड़ा जोरर lagaya.....aur वो और चिल्लाने लग gaya......uska चेहरा लाल हो गया था.......

मैं - ध्रुव ये इंसानो के सरीर के बारे में मुझे सब जानकारी chahiye.......kaha पे क्या करना है की उसको ज्यादा दर्द हो.....

ध्रुव - इस बारे में अभी तो कुछ नहीं कर sakte.....par मैं इसका कुछ करूँगा aage.....iss वक़्त आप hi करो जो करना है.....

मैंने उस इंसान का हाथ और मदद दिया वैसे hi उसके दोस्तों को देखते hue.....yaha वो चिल्ला रहा था और वही दूसरी ओर उसके दोस्तों के पंत गिल्ले हो रहे थे......

"भाई जाने दो usko.......aur हममे भी भाई हम कभी यहाँ नहीं aayenge.....jaane दो इस बार बस...."

मैं - पहले ये बताओ यहाँ चल क्या रहा hai.....aur.....

मैंने उस कार वाले बन्दे को dekha......wo वही पे बैठा हुआ बस मुझे घूर रहा था.....

मैं - aap......aap ठीक है naa......choot तो ना लगी आपको.....

वो तो जैसे कही खोये हुए the......meri आवाज से उनको होस आया......

वो - ha.......haa मैं ठीक hu......sukiriya बीटा tumhara.......aur तुम sab......bas देखते jaao.......jail में जाओगे फ्यूचर बर्बाद ना कर दिया तुम सब का तब कहना......

"सर माफ़ कर दो sir......humse भूल हो gayi....aage से कभी नहीं करेंगे aisa......bas माफ़ कर do....isko बोलो हममे जाने दे..."

मैं - इनके कहने से मैं तुम्हे क्यों जाने dunga....sapna देख रहे हो क्या.....

सायद उनको लग रहा था मैं यहाँ पे इन् कार वाले साहब को बचने आया hu.....haa पहले तो यही सोचा tha.....par गालियां तो मुझे भी पड़ गयी naa.....ab ऐसे कैसे चला जाऊं बिन्ना समझाए inko......ye कार वाला बाँदा भी अगर मुझे बोलता की छोड़ दो इनको तब भी ना छोड़ू में

वो मुझे देख रहे the......maine अभी तक उस बन्दे की कलाई पकड़ राखी थी......

मैं - चलो सब इस तरफ aao......aur ये बताओ गाली किसने दी थी

"भाई माफ कर do......aage से कभी नहीं करेंगे......"

उनमे से एक ने बोलै और मैंने जिसकी कलाई पकड़ी हुई थी उसपे थोड़ा और जोरर लगाया और वो चिल्लाते हुए इस बार निच्चे गिर गया पर उसका हाथ मेरे हाथ में hi tha......maine देखा उसकी आँखें बंद हो गयी थी.....

दुर्ब - ये बेहोश हो गया है.....

मैंने उसका हाथ छोड़ diya....aur जैसे hi पीछे मुद्दा वो सब के सब कामप रहे थे.......

"isne.....isne गाली दी थी aapko.....ye है वो....."

"हां यही hai.....issi ने दी थी गाली....."

"n....nahi.....main.....main nahi......main kaise.....main.....main तो बोलै hi नहीं....."

वो बोल रहा था की किसी का फ़ोन bajja......Maine देखा ये वही कार वाला बाँदा था........

वो इशारे से पूछ रहा था की वो फ़ोन उठाये या नहीं......

मैंने उसको उठाने को कहा......

वो - मैं ठीक hu......main आ रहा हु बस थोड़ी देर में......

.................

वो - ठीक hai......hmm.....

..........

कॉल कट......

वो - घर से कॉल आया tha.......mujhe जल्दी जाना है वह.......

मैंने उनकी बात सुन्नी और फिर से इन् सब को देखने लग गया.......

मैं - हम्म कौन था वो......

ुन्नन सब ने वापस से उस लड़के की ओर इशारा किया......

मैं - ध्रुव ये लोग क्या डार्क पावर को सह पाएंगे......

ध्रुव - आप जानते है डार्क पावर का छोटा सा भी हिस्सा अगर इनके अंदर गया तो ये दर्द से तड़प तड़प के यही पे......

मैं - हम्म मरने नहीं dunga.....par वो दर्द मुझे इनको देना hai........Mujhe लगता है मैं कण्ट्रोल कर लूंगा डार्क पावर को अपना काम निकलने के लिए........

ध्रुव - ये इंसान hai...aap एक बार और.....

मैं - मैंने सोच liya......chalo......

मैंने अपनी आखें बंद करि आस पास पहले से hi अंदर था तो डार्क पावर को थोड़ा भी वक़्त नहीं laga......wo मेरे अंदर से बहार आया और मेरे उँगलियों के इशारे pe.....unn सब में चला gaya.......Dhruv सही tha........kitni भी काम डार्क एनर्जी लगाऊं मैं ये लोग मर्डर hi jaate......par मैंने भी कैलकुलेट किया tha.....agar मैं बहुत काम वक़्त दू isko.....to ये बस दर्द denge....aur कुछ नहीं......

सायद 1 सेकंड से भी काम वक़्त हुआ hoga......aur मैंने उन् सब से डार्क पावर वापस खिंच भी liya......par उसके बाद जो वह पे आवाजें हुई thi.......unke बारे में मैं क्या hi kahu.......kaan बंद करने पड़े थे तब भी उनके दर्द भरी चीखें सुनाई दे रही थी.......

इतने में वह पे कुछ गाड़ियों की लाइट आने लग gayi.......Jab कार वाले बन्दे ने देखा वो तो वो घबरा गया......

वो - हममे जाना chahiye.....ye लोग यही आ रहे है.....

मैं - आप जाओ मैं चला जाऊँगा.....

उस बन्दे को वैसे भी सायद मुझसे डर लग रहा tha......to मेरे कहते hi वो कार में बैठा और फुर्रररर से भाग गया वह se.......wahi मैं उन् लाइट्स के तरफ देख रहा था की तभी.......

"प्रतीक चलो यहाँ से"

ये चची thi......pata नहीं यहाँ कैसे पहुंची ye.....par मुझे कुछ बोलने भी नहीं दिया और मेरा हाथ पकड़ा और वह पे खुले पोर्टल से होते हुए मुझे घर पे लेके आ गयी......

आगे देखते है.....

इंसानो के बिच में कैसे जाता है Hero......aur मधु क्या करने वाली है अब
 
अपडेट - 96

चची आयी और मुझे वह से पोर्टल में लेके चली gayi.......aur हम दोनों सीधे पहुंच gaye.....ghar pe.........waha पे अभी सब इक्कठा हुए the.......Daksh मां पंकज और साथ में मधु भी आयी हुई थी......

जब घर पहुंचे तब जाके चची ने पूछा.......

चची - कहा गए the........hum कितना परेशां थे पता है तुम्हे......

अब मैं क्या बोलू इनको की मैं कहा गया tha......ye वह जा नहीं sakti.......aur क्यों चला गया था ये मैं बताने वाला नहीं tha.......Mujhe लग रहा था इस वक़्त मैंने ज्यादा hi कर दिया kuch........ek वो विराज hai........uss बन्दे ने ना जाने क्या क्या देखा tha......matlab उसकी लवर उसको मारने वाली thi.....aur वो तब भी उसको प्यार करता tha.....uski यादें उसने संभल के राखी हुई thi.......aur Main......Mera नाम भूल गयी Madhu......Haa बात बड़ी hai......par......Mujhe ऐसे नहीं जाना चाहिए था......

अब मैं चुप चाप खड़ा खुद में hi खोया हुआ tha......to चची ने वापस से पूछा........

मैं - मैं बस परेशां tha......to कही चला गया tha......ab आ गया ना.......

बुआ - Prateek......theek से बात karo......warna.....

मेरे पास जवाब नहीं था इस वजह से वैसा कहा था Maine......nahi तो क्या मैं नहीं समझता चची को फिकर है मेरी इस वजहसे ऐसे पूछ रही thi.....par मैं बता भी तो नहीं सकता......

चची - रूक्को Poonam......sahi तो कह रहा है ye.....wapas आ तो गया है ye......ab क्या hi puchna......aur मैं कौन होती हु इससे पूछने वाली......

K.Bua - भाभी आप......

इतने में मधु आगे आती है......

मधु - :सिघ: बड़े अजीब हो tum.......ajeeb नहीं क्या बोलते है उसको Pankaj......jo लोगो की फीलिंग्स ना समझता हो बस खुद में hi लगा हुआ होता है......

पंकज - खुदगर्ज......

मधु - Haa.....bade खुदगर्ज हो तुम to.......chalo ये अच्छा है आगे से ध्यान रहेगा की किस्से दुर्र रहना hai........pata भी है ये तुम्हारे घर wale......sab के सब कितना परेशां the.......ye सब के sab.......naa जाने कब से तुम्हे ढूंढने में लगे हुए hai.......Wo (रूपल दीदी की ओर देखते हुए) वो बीमार thi.......kaisa लग रहा है आपको रूपल ji......aap जिसके लिए बीमार होने के बाद भी अपने हालत को नज़रअंदाज़ करते हुए उसको ढूंढने निकली thi......uski ये baat.....kaisi lagi......ab तो आ hi गया हु naa.....ab क्या.....

पंकज - माढ़हुऊ ृक्क जाओ......

मधु - 1 मिनट अभी कहा पूरा हुआ hai.......ye इसको जानते हो naa.....Bhai है ना ये tumhara.....ye भी धुंध रहा tha.....wo सब भूल ke......jab तुमने इसकी बजती की thi......kya कहा था की ये तुम सब के साथ नहीं रह sakta.......Pankaj तुम क्यों गए थे ढूंढने को isko.....Wo प्रोफ. पूनम वो भी यहाँ वह घूम रही thi......aise hi घूम रही होगी naa........yaha waha.......ye सब के sab.....pagal होंगे...

दक्ष - Madhu.....chalo चुप हो jaao......hum चलते है यहाँ se.........Prateek वापस आ गया है अब हममे यहाँ रहने की कोई जरुरत नहीं है......

मधु - बस थोड़ा सा aur.......Haa तो प्रतीक ये जो परिवार वालो ko.......tumne ऐसे hi छोड़ दिया naa......pata नहीं क्या कारन था तम्हारा यहाँ से चले जाने ka.......wo तो मैं नहीं jaanti.....par तुम इतना तो समझ hi जाना chahiye......ye लोग बहुत फिकर करते है tumhari......hadd से ज्यादा तभी परेशां थे ये sab.....aur तुम्हे ऐसे जवाब नहीं देना चाहिए tha......Mujhe पक्का पता hai......inn सब में से अभी कोई आके मुझे चुप रहने को बोल dega.......kyun......kyunki ये लोग अभी bhi......abhi भी तुम्हारी बुराई नहीं सुन्न सकते.......

उसके बाद वो चुप हो gayi........ek बार सभी की ओर देखा.......

मधु - मेरा भी एक परिवार hai.....par मैं उनके पास नहीं जा पा रही hu.......sayad मेरी किस्मत ख़राब thi......yaa जो भी kaho.......par जिस दिन वह जा पाउंगी naa......kabhi bhi......kabhi भी उनको ऐसे जवाब नहीं dungi.......Chaliye अब हम चलते hai......aur हां हो सक्के तो माफ़ कर देना मैंने आपके घर के किसी के बारे में इतना कुछ बोल दिया.......

उसके बाद वो बस वह से मुद्दि aur......ghar से निकल gayi.......aur उसके पीछे पंकज......

दक्ष - माफ़ करियेगा ये सायद thoda......pata नहीं क्या बोल रही थी ये ऐसे.....

दरअसल मधु इंसान है ये बात किसी को नहीं पता थी यहाँ पे सिवाय प्रतीक के और बुआ और रूपल दीदी ke........par ये बात बस प्रतीक को पता है की उसका परिवार भी hai......lekin वो ये नहीं जानता कौन है वो सब.......

दक्ष भी इतना बोल के वह से निकल gaye.......Main वैसे hi खड़ा रहा......

हां मुझे ऐसे तो नहीं कहना चाहिए tha.....par मैं और क्या hi kahta,,,,,,,sayad दिन hi ख़राब है आज ka.....itna सब कुछ हुआ......

मैं वैसे hi खड़ा रहा सोचता hua.....aur पता भी नहीं चला कब सब के सब वह से चले gaye......ajeeb है naa.......ye akelapan.......Main खुद हर बार इसको चुनन लेता hu.....pichli बार भी यही हुआ था.....

रिआन और मेरे और कुछ दोस्त थे वह pe......mujhe समझा रहे थे वो की मैं वो कदम ना उठाऊं par.......par मैंने नहीं sunna......ulta उन् सब को बुरा भला कहा और वह से भगा दिया tha......Rian से बाद में बातें होने लगी thi....par बाकी sab.......wo सब तो जैसे भूल hi गए mujhe.....ya सायद मैंने hi उनको भुला diya......ye अकेलापन हर बार मैं खुद hi चुनता hu.....iss बार bhi....to क्या इस बार भी Main.....Main अकेला hi रह jaaunga.....Madhu जो अभी मुझे मिली भी नहीं hai....kya वो ऐसे hi चली jaayegi......aur मैं अपने अकेलेपन के साथ रह जाऊँगा यहाँ पे.....

ये सब सोचते हुए जब मैं आखिरी पॉइंट पे आया तो खुद से hi मुँह से निकल गया......

मैं - Nahi............ye नहीं hoga.....iss बार नहीं.....

तब जेक तो अस्सपस्स देखा था Maine......Sab जा चुक्के थे....

मैं - मुझे कुछ करना hoga.....main वापस से अकेला नहीं हो sakta.......Main सभी को इस बारे में बता du.....kya वो याक्किन करेंगे.....

ध्रुव - पिछली बार मैं भी नहीं था आपके saath.......aur बुरा मत मानियेगा अगर इस बार भी मौका होता मेरे पास तो मैं चला hi jaata......aapko उन् सब को बता देना hoga......ye ना बता सकते की कहा गए थे तो ये तो बता hi दो की क्यों गए थे.....

मैं - हम्म सही कहा......

मैं - चची बुआ चाचा दादी दादा रूपल didi......Mujhe बात करनी है आप सब से.....

मैं बोलै और घर में कोई हिल्ला तक नहीं.....

मैं थोड़ी देर रुक्का raha.....par कुछ नहीं hua......sab शांत

ध्रुव - अभी सब नाराज़ honge.....kal बात कर लेंगे

मैं - हम्म ये सही है......

इसके बाद मैं अपने रूम में चला gaya.....aur बीएड पे लेता hi था ki.....bahar ओल्ड आउल दिखा mujhe........jo थोड़ा बदला सा लग रहा था......

और वो जिस पेड़ के डाली पे बैठा था उसी पेड़ के निच्चे कोई खड़ा tha......Rian था वह पे.......

मैं तुरंत अपने घर से बहार nikla......aur वह पे चला गया.....

रिआन - ये लो कर दिया तुम्हारा kaam.......iski काबिलियत इतनी बढ़ा दी है की ये किसी के सर पे भी बैठा रहे तो उसको पता नहीं चलेगा........

मैं - सुकरिया दोस्त तुमने मेरे कहने पे ये kiya......aur उस दिन के लिए माफ़ कर dena.....main शर्मिंदा हु......

रिआन आँखें फाड़ फाड़ के मुझे देख रहा tha......pata नहीं उसको क्या हो गया था.......

मैं - जानता हु एक सॉरी से काम नहीं होने वाला ना जाने कितनी hi बार मैंने अपने लोगो को बुरा भला कह डाला hai.....par कभी माफ़ी नहीं मांगी unse......tum फिर भी मेरे बुलाने पे वापस aaye.....mujhe माफ़ कर दो पिछली साड़ी बातों के liye.....aur इस बार भी मेरे साथ रहना मुझे अकेला मत chodna.....Main.....Main समझ गया हु जब जब मैं अकेला हुआ hu......sab बुरा hi हुआ है मेरे साथ.....

रिआन को सायद अभी भी अपने कानो पे यक्की नहीं हो रहा tha.......Maine ओल्ड आउल की ओर dekha......tum भी dost......agar गलती से कुछ बुरा भला कह दिया हो तो माफ़ कर देना.....

ओल्ड आउल को ये सब कहने के बाद मैंने उसको मुद्दे की बात बताई.......

मैं - ओल्ड आउल तुम इतने दिन यहाँ नहीं the.....pahle तो तुम अपने घर जाओगे कुछ दिन आराम karo......uske baad.....uske बाद तुम फोमोस jaaoge......waha पे स्लेयर नाम का एक कैदी hai....uspe नज़र रखना है tumhe.....wo क्या करता है उसके साथ क्या होता है सब बताना है तुम्हे......

ओल्ड आउल - हम्म ठीक hai......To मैं जाता हु.......

ओल्ड आउल इतना बोल के वह से चला गया.......

अब वह मैं और रिआन थे.....

रिआन - क्या बात है आज कुछ परेशां से लग रहे ho.....kuch हुआ है kya.....tum माफ़ी नहीं माँगा करते the....aur aaj......aaj तुम माफ़ी मांग रहे हो.....

मैंने उसको सब बताया आज जो कुछ भी हुआ था वो सब बताया usko......wo ध्यान से सुनता raha.....aur जब उसने अपना मुँह खोला तो मैं किया की उसके मुँह में मिटटी भर के यही पे मर दू उसको.....

रिआन - तुम्हे क्या लगता है मछलियां और yaadein.....ye बात उसको कैसे पता चली hogi.....ye chizzen....ye हमारी जगह से कभी बहार गयी hi nahi......ye बस हम इम्मोर्टल्स करते hai.......bas hum....aur कोई नहीं......

मैं - मैंने तुझे इतना कुछ बताया और तूने ये पॉइंट चुनना बोलने के लिए......

रिआन - बुरा मत मान par.....ye बहुत hi गंभीर विषय hai......mujhe इसके बारे में सभी को बताना hoga......hamari कलाएं कोई बहार के लोगो को दे रहा है.......

मैं - :सिघ: तू jaa......jaa यहाँ से......

रिआन - हम्म जा रहा hu......par ध्यान से rahna.......agar ये कलाएं सच में यहाँ hai.....to क्या और कलाएं यहाँ नहीं हो sakti.....aur वो स्लेयर के बारे में जो टुन्ने bataya.......uska पता laga.....uss बारे में मैं कुछ नहीं बता रहा हमारे लोगो ko......kyunki तूने उसका उसे करने का सोचा है......

मैं - हम्म सुक्रिया.....

उसके बाद वो चला gaya.....aur मैं अपने घर आने लगा की वो वापस से आया.......

रिआन - और हां सुनने ये फॅमिली वमिली जो भी बताया टुन्ने मुझे समझ तो नहीं aaya.....par एक बात kahunga.....saath में रहो inke....kyunki तुम भी जानते हो जब जब अकेले पड़े हो तुम सब बस बुरा hi हुआ hai......ye सब कदर करते है तुम्हारी तो ठीक से रहो.....

उसने ये कहा और वह से चला gaya.....aur मैं घर की ओर जाने लगा.......

जब दरवाजे पे पंहुचा तो देखा चची अपने रूम के खिड़की से बहार की ओर देख रही thi......Sayad उन्होंने रिआन को देख लिए hoga......par उनको ये थोड़ी पता चलेगा वो इम्मोर्टल है.....

मैंने उनकी ओर देखा तो उन्होंने पर्दा बंद कर दिया.....

मैं वापस से अपने कमरे में चला गया और सो गया......

सुबह नींद दरवाजे पे खत खत की आवाज से khuli......aaj मैं खुद से जाग नहीं paaya.....maine आज ध्यान भी नहीं लगाया......

जब दरवाजा खोला तो वह पे कोई नहीं था......

मैं फ्रेश हुआ और उसके बाद वह से निच्चे चला gaya......sab खाना खा रहे the......par दिंनिंग टेबल पे मेरी कुर्सी hi नहीं thi......balki एक प्लेट खाना रखा हुआ था वह सोफे के पास......

मैंने उन् सब की ओर देखा उनको फर्क hi नहीं पड़ा sayad......ye नाटक सही कर लेते hai.....agar इनको नाटक में डेल तो अच्छा रेस्पॉन्स ा जाएगा......

मैंने थाली उठायी और उसी ओर चला गया......

बुआ - देखो वापस आ गया ये......

K.Bua - हां देख रही hu......Bhabhi कुछ बाकी रह गया था क्या dena......ab यहाँ क्यों आ रहा है ये......

चची - दोनों चुप raho......Rupal उसकी कुर्सी कहा hai......lagawo वापस से.......

रूपल - मुझे क्या पता कहा hai....Main थोड़ी लेके चल रही हु.......

चची - तुम तिण्णो ना......

दादी - कुछ गलत नहीं किया है उन् तिण्णो ne......aur तुम चुप चाप बैठी रहो......

चची - माँ आप bhi......(mujhe देखते हुए) कल रात को बहार क्या कर रहे the.....ye बता सकते hi yaa.....ye भी नहीं.....

मैं - वो एक दोस्त tha......wo यहाँ पे आया tha....mujhse मिलने ko......kuch बातें करनी थी उसको.....

रूपल दीदी - रात mein......Dost......yaha कौन सा दोस्त बना लिया तुमने......

निकिता - वो दब तो नहीं hoga......aur कौन सा दोस्त है तुम्हारा....

चची - Ruko......usko बोलने दो......

मैं - वो रिआन नाम था uska......hum कुछ वक़्त पहले hi मिले थे......

चची - यहाँ का नहीं था wo.....kaha पे मिले थे.....

मैं - स्टंज वर्ल्ड mein......waha पे मिला था usse.......aur वही दोस्ती हुई......

बुआ - वह कब....

मैं - जब हम वह गए थे तब......

अब इनको सच बता नहीं सकता वो इम्मोर्टल है और कहा से आया hai......to झूट बता diya....sayad कल भी ये कर सकता था तो इतना कुछ तो नहीं hi hota.......par अच्छा hi हुआ जो हो गया.....

चची - मुझे पता है तुम कल कहा थे......

ये एक बम था मेरे liye......inko कैसे पता मैं कहा था......

चची - हममे पता hai......Tum मधु को पसंद करते हो और कल कुछ हुआ जिसकी वजह से तुम चले gaye......aur ये भी पता है कल तुम क्यों कुछ नहीं बोल रहे the.....tum डर रहे थे कही उसको सब पता चल जाएगा तो क्या hoga.....Kya वो वापस से मिलेगी या नहीं ये सब.....

बुआ - पर फिर भी वैसे बात नहीं करनी चाहिए थी इसको भाभी.......

चची - चुप rah......kal उसने पता नहीं क्या क्या बोल दिया बेचारे ko.......waise अब तू क्या karega....wo तो और नाराज़ हो गयी सायद......

निकिता - नाराज़ कहा :सिघ: कोई फीलिंग hi नहीं बच्ची इसके लिए usme.....wo तो सायद आज hi पंकज के यहाँ से भी निकलने वाली है.....

मैं - क्या मतलब निकलने वाली है.......

निकिता - उसने कहा था कल hi वो अब वह नहीं रह paayegi......yaa तो वो पुजारी जी के पास चली जायेगी या फिर सभी से दुर्र......

रूपल - तुझे बड़ा पता है.....

निकिता - वो मैंने सुन्ना tha.....bas बता diya......waise पंकज ने समझाया पर वो समझी nahi.....aur जा रही है अब......

मैं - पर वो रहेगी kaha.......aur....aise कैसे चली जाएगी.....

बुआ - हममे क्या पता जाके पूछो उइससे......

निकिता - मुझे लगता है अगर वो वह पुजारी जी के पास नहीं गयी naa.....to पक्का वो भानपुर jaayegi.......uss जगह के बारे में मैंने बात करते हुए सुन्ना था उसको.....

K.Bua - तुम तो सच में बहुत सुनने लगी हो......

मैं - भानपुर.....

यहाँ ये सब चल रहा था वही बाकी जगहों पे हंगामा मच्चा हुआ tha.....Dark पावर वापस से दिखा tha.....aur इस बार अच्छी तरह se......naa सिर्फ डेमोस बल्कि ओरियन और टाइटन में भी इस बात को लेके बातें चल रही थी......

लूसिफ़ेर ने अपने कुछ लोगो ko.....Earth पे जाने को कह दिया tha......ye वो लोग the.......jo यहाँ पे आ जा सकते the.....usne खास तौर पे कहा था की बस पता करना है कहा है ये power.....usse यदा कुछ नहीं.......

लूसिफ़ेर ने वापस से सपने देखने शुरू कर दिए the.....ki पहले वो स्लेयर की बॉडी में जस्टिन की सोल डालेगा और साथ hi डार्क पावर को bhi.....jisse जस्टिन बहुत ताकतवर हो जाएगा......

पर इस बार सिर्फ वही तो था नहीं बहुत से लोग the.......upar se.......Immortals में भी ये बात पता चल गयी thi......ki हमारे तरीके बहार किसी को पता चल चुक्के है......

और सब कुछ एअर्थ पे hi हो रहा था.......

एअर्थ इन सब का एपिसेंटर बना हुआ tha......aur सारे लोग यहाँ पे नज़र गड़ाए बैठे the.......log टाइटन और ओरियन से भी निकले थे इन् सब की जांच करने ko.......Wahi स्ट्रेंज वर्ल्ड से वह से 2 तरह के लोग निकले the......ek तो बस जांच करने के लिए और दूसरे वो थे वो निक्स कबीले के लोग जो वही पे रह गए थे.......

वही पे अपने सो कॉल्ड देवता के लिए रुक्के हुए the.......jab तक पुजारी जी मंदिर में होते the.....tab तक तो वो मूर्ति में कैद हुआ बाँदा बस उससे hi बात कर पाटा tha.....par जब से वो गए hai......tab से उसके पास जो बच्चे कुछे निक्स थे वह के वो आया करते the......wo भी रोज कोई एक नहीं आता tha.....har रोज कोई अगल hi होता tha........to इस वजह से उसके पास बात करने के लिए लोग बढ़ गए the......aur इसी का फायदा उठा के उसने वह के निक्स लोगो को बहकना शुरू कर दिया था सिर्फ बहकना hi नहीं बल्कि उनको कुछ ऐसी चीज़ें बता रहा था जिससे वो ज्यादा ताकतवर हो jaaye......par ये निक्स सब ये नहीं समझ पा रहे थे की ये सब उस मूर्ति में कैद बन्दे के गुलाम बनते जा रहे hai.......Ab उन्होंने फलफूल चढ़ाना बंद कर दिया tha.......Jalphool बस उस बन्दे को आराम hi नहीं देता tha.....balki उसकी शक्तियों को बढ़ने से रोकता भी tha......aur जब से ये फलफूल उसको मिलना बंद हुआ hai.....tab से वो थोड़ा दर्द में तो रहता है लेकिन इस वजह से उसकी powers......wo बढ़ती जा रही thi......ye जैसे किसी ड्रग की तरह था उसके liye....jiski आदत पड़ चुक्की थी usko......aur अब वो उस आदत को छुड़ा रहा था.....

वही मधु के पास......

मधु को रात से बार बार समझा रहे थे दक्ष मां और साथ hi पंकज bhi.....par मधु सुनने को तैयार hi नहीं thi......waise सच कहु तो एक बार उसने सोचा tha......ki ृक्क जाते hai.....par फिर सायद ध्यान से सोचने के बाद उसको समझ aaya......ki वो अगर यहाँ रही तो बस इस मृगतृष्णा में hi फांसी रहेगी.......

अगर उसको अपने परिवार के पास जाना है तो उसको खुद hi करना होगा kuch.......issi वजह से तो उसने भानपुर जाने का तय कर लिया था.......

एक बार वो वह पहुंच गयी तो कोई ना कोई रास्ता निकल hi लेगी......

मधु - पंकज अब इन् सब का कोई फायदा नहीं है मैंने अपना मैं बनना लिया hai........aur तुम्हे इसमें खुद को दोष देने की जरुरत भी नहीं hai......Mujhe तो तुम्हे सुक्रिया कहना chahiye.....kyunki तुम्हारी वजह से hi मेरे दिमाग में ये ख्याल आया और मैंने ये करने का सोचा है.......

पंकज अभी भी कोशिश कर रहा था पर nakam.........usko बुर्रा लग रहा था अगर उसने डर के मारे वो सब ना कहा होता तो सायद वो जाने के बारे में सोचती भी नहीं.......

पंकज - पर तुम वह रहोगी कहा pe.....aur kaise.....Main भी तुम्हारे साथ चलूँगा......

मधु - पागल मत banno.......tumhe अभी स्कूल में पढ़ना hai.......Main in...mera मैं नहीं है ये सब करने का अगर मैं ना भी पढू तब भी कुछ नहीं होने वाला......

मधु अभी बस बोल hi देती की वो इंसान है और वो जादू पढ़े या ना पढ़े उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला usko......par पंकज उसको तो पढ़ना hi था......

पंकज - क्या बोल रही हो tum.....Tum निक्स राजकुमारी हो अगर तुम नहीं पढ़ोगी तो.......

मधु - वही तो मुझे जितना कुछ सीखना tha.....Main सीख चुकी हु अपने लोगो se.......aur अब मुझे स्कूल जाने की कोई जरुरत नहीं है......

ये दोनों बात कर रहे थे तभी घर की घंटी बज्जी दरअसल दक्ष मां ने पुजारी जी को बुल्ला लिया tha......sayad वो समझा पाए......

पुजारी जी अंदर आये........

दक्ष ने उनको सब कुछ samjhaya.....har एक cheez.......Pujari जी इस वक़्त किसी और hi चिंता में the.......lekin जब उन्होंने सुन्ना की मधु जा रही hai.....to उनको एक आशा की किरण दिखी.....

पुजारी जी - ये अच्छी बात hai.....Mujhe उससे मिलना है कहा है वो.....

दक्ष मां को समझ नहीं aaya.......aakhir क्या hi अच्छा है isme......par उन्होंने पुजारी जी को बता दिया की वो कहा पे है......

मधु अभी समझा रही थी पंकज को की वो नहीं आ सकता उसके sath.....kyunki उससे पंकज को परेशानी हो सकती थी......

पुजारी जी - हम्म सही kaha......Pankaj तुम उससे मिलने जा सकते हो पर उसके साथ नहीं रह सकते......

मधु - आप yaha.......Main आपके पास hi आने वाली thi......Maine आगे बढ़ने का फैसला किया है......

पुजारी जी - हम्म मैंने सुन्ना और मुझे अच्छा लगा जान के ye.......par तुम्हे मेरी एक बात माननी होगी......

मधु - कौन सी बात.......

पुजारी जी - तुम वह जा सकती ho......aaram से raho.....aur किसी भी चीज़ की जरुरत पड़े मुझे batao.....Main देख lunga.....par मैं तुम्हारी सुरक्षा के लिए किसी को वह भेजने वाला hu......Wo तुम्हारे साथ तो नहीं rahega.....par आस पास रहेगा wo......aur तुम इस बात के लिए ना नहीं कहोगी.....

मधु - आप कैसी बातें कर रहे hai......aapne मुझे सिखाया है और आप मेरे लिए किसी और को भेज रहे hai......Meri रक्षा के लिए.....

पुजारी जी - अगर तुम खुद की रक्षा करने लगी तो सबको पता चल जाएगा की क्या हो रहा है यहाँ pe.....aur उस waqt.....uss वक़्त चीज़ें और बिगड़ जायेगी......

मधु - आप किश बारे में बात कर रहे है......

पुजारी जी - कुछ nahi......Maine कहा है तुम्हे ये बात माननी hi होगी.....

मधु - ठीक है मैं तैयार हु बताइये कौन होगा मेरी रक्षा करने wala.....main भी देखु कौन है वो......

पुजारी जी - तुम्हे अभी देखने की जरुरत नहीं है तुम जाओ जहा जा रही ho........Daksh जी आप इसके लिए क्या वह पे रहने का बंदोबस्त कर देंगे.......

दक्ष - ये भी कोई कहने की बात है मैं अभी कर दूंगा......

पुजारी जी - तुम्हे तो डाक्यूमेंट्स भी चाहिए होंगे ना तुम्हारे काम के liye.......Tum कुछ दिन रुकना hoga........Main इस बारे में बात करता हु

मधु ये जान के खुश हो gayi.....aakhir उसको अब मौका मिलने वाला था अपने परिवार वालो से मिलने ka.....aur अब उससे रुक्का नहीं जा रहा था......

पंकज ने जब ये जनन लिया की अब तो ये जायेगी hi तो वो रूम से बहार गया और लाइब्रेरी में चला गया और वह से वो किताब उठा laya......wahi किताब जिससे ये दोनों भानपुर गाँव को धुंध रहे थे......

वो उस किताब को लेके आया और उसको मधु को दे diya.......Daksh के सामने......

दक्ष ने देखा की ये कौन सी किताब hai.....par उसने भी सोचा की ये किताब अभी उसके किसी काम की नहीं hai......aur सायद ये मधु के काम आ जाए.......

दक्ष - वो किताब मुझे do.....tumhe जाने से पहले मैं इसके बारे में सब बता देता hu......isse तुम ना सिर्फ किसी जगह के बारे में जान पाओगी बल्कि अगर किसी खास को ढूँढना भी हो तो ये किताब तुम्हारी मदद कर देगा....

मधु - पर मैं ये किताब kaise.....ye तो......

दक्ष - मुझे इसकी जरुरत नहीं है और मैंने ये पंकज के लिए रखा हुआ tha......ab जब उसने तुम्हे देने का सोचा है तो मैं क्या कह सकता हु isme.....chalio आओ मैं बता देता hu.....aur हां पुजारी जी आप जब तक डाक्यूमेंट्स बनवाते है तब तक तो ये यहाँ रह hi सकती hai.....waha जाके क्या hi करेगी ये......

मधु - मैं वह लोगो से मिलूंगी मुझे जो जानना है उसके बारे में पता करुँगी......

दक्ष - हम्म ठीक hai......phir आज के लिए बस ृक्क जाओ और समझ लो इस किताब ko......waise भी मुझे भी तो वक़्त लगेगा ना घर के लिए......

मधु ने सोचा ये तो सही बात hai......to उसने रहने के बारे में कह दिया.......

मधु - हम्म्म ऐसी बात है तो डाक्यूमेंट्स आने तक मैं यहाँ रह सकती hu......aur आप भी घर का बंदोबस्त कर सकते है इतने वक़्त में.....

दक्ष - हां 2-3- दिन में मैं सब कर dunga.......uske बाद चली जाना......

पुजारी जी को इस बात का पता चल गया था की वो मूर्ति में जो कोई भी है उसको अब फलफूल नहीं मिल रहा hai.......aur इससे वो खतरनाक हो सकता hai......ek बार वो अपनी शक्तियां पाने लग जाएगा तो वो वापस से प्रतीक और मधु के बिच में आने की कोशिश karega.....aur अभी to......abhi तो ये दोनों साथ क्या आस पास भी नहीं the......agar ऐसे में कुछ हो गया तो सब बिगड़ jaayega.......Immortals की तबाही निश्चित हो jaayegi......aur उसके baad.......sab कुछ ख़तम......

अगर सब बच्चन है तो उसको रोकना hi hoga.......Pujari जी सोच रहे थे की वो वापस से स्ट्रेंज वर्ल्ड चले jaaye.....par अगर वो चले गए तो यहाँ पे जितने भी निक्स आये है वो सब के सब यहाँ पे सही से नहीं rahenge........ye वजह बहुत परेशां कर रही थी unko.......aur वो जल्दी से प्रतीक को इस बारे में बताना चाहते the.....par वो पूरी बात बता भी नहीं सकते the......Jis तरह का दिम्माग प्रतीक का hai......unko लग रहा था अगर सब कुछ उसको बता दिया जाए तो वो सब बर्बाद करदेगा वो भी अपने हाथों से......

ये परिवार रिश्ते naate.....ye सब इसी के लिए था की ये बांध जाए इन् सब se.....aur समझ सक्के... की अकेले रहना हमेशा सही नहीं hota......dusro की भी चिंता करनी चाहिए.......

:सिघ: मैं इस दौरान कुछ बिजी सा हो गया हु और मुझे वक़्त नहीं मिल पा रहा है इसी वजह से उपदटेस इतने लेट आ रहे है......

थोड़ा सा और वेट करलो फ्री होने के बाद डेली ना सही वीक में 4-5 उपदटेस आने शुरू हो जाएंगे

नेक्स्ट अपडेट में मधु इंसानो के बिच जायेगी और साथ hi एअर्थ पे बहार से लोग आने वाले hai......bahut जगहों से.......
 
अपडेट - 97

यहाँ पुजारी जी मधु से बातें कर रहे थे और वही दूसरी तरफ सभी जगहों से लोग यहाँ आने की तैयारी कर रहे the......ek रात गुजर चुक्की तह ये सब hue........Demos की बात kare......to वह से तो लोग सुबह hi आ चुक्के the......aur कुछ आने बाकी the......Pujari जी घर से दक्ष मां के घर से निकले मेरी तलाश mein......unko अब बस जल्दी से मुझे इन् सब के बारे में बताना था पर उनको कोई और मिल गया.......

जब वो दक्ष मां के यहाँ से निकल रहे थे उस वक़्त फोमोस का leader.....wo जा रहा था दक्ष मां के घर pe.......Fumos के लीडर के यहाँ होने की खबर किसी को भी नहीं thi.........aur जब पुजारी जी ने उसको dekha.....usko नहीं उसके अंदर से आ रही ेनेर्गीएस ko......to वो एकदम से चौक gaye......aur घर से बहार आने के बाद भी वो मुद के उसके पीछे चले gaye......aur जब उन्होंने ये देखा की लीडर भी दक्ष मां के यहाँ जा रहा है तो वो थोड़ा घबरा gaye.......yaha पे बात डार्क पावर की रही hi नहीं thi.....seedhe गोल्डन पावर पे चली गयी thi......Golden पावर मतलब Madhu.......Pujari जी को लगा सायद किसी तरह इसको पता चल गया है इस बारे mein......aur अगर ये सच है तो मुशीबतें और भी बढ़ने वाली hai.......par वो इस वक़्त कुछ भी नहीं कर सकते the......wo जानते थे अगर वो यहाँ पे इससे लड़ने लग gaye......aur उनको कुछ हो गया तो डाव पे बहुत सी चीजजें लगी हुई thi.......yaha पे सबसे अच्छा उनको यही सुझा की वो किसी तरह उसको अलग रखे मधु से पर वो चुके तब जब दक्ष मां उससे है है के बातें कर रहे the........Ye सब पुजारी जी दरवाजे पे से देख रहे थे........

दक्ष - अरे aap.....aaiye आइये....

लीडर - वो बस यहाँ से गुजर रहा था to.......aur कल इतना कुछ hua......Main बस ये जानने को आ गया वो ladka......Prateek मिला या नहीं.....

दक्ष - हम्म मिल तो गया wo.....par उसकी वजह से bhag-daud करनी पद गयी.......

लीडर - Haa......waise पंकज बता रहा था वो भांजा है आपका......

दक्ष - हां भांजा hai......par अकाल से सायद अपने बाप पे गया hai.......ek मेरी बहन thi.....samajhdaar......aise कभी किसी को परेशां नहीं किया करती thi......aur एक ये hai......arre पुजारी जी aap.....aap यही पे है.....

दक्ष की नज़र दरवाजे के पास गयी और उसने देखा वह पे पुजारी जी the......jab दक्ष ने बोलै तब जाके लीडर की भी नज़र उनके ऊपर padi......Leader को नहीं लग रहा था की ये बाँदा उसकी असली पहचान पता कर paayega....to वो तो पुरे बेफिक्र होक बैठे थे......

पुजारी जी को लगा सायद दक्ष से पता चल जाए ये यहाँ पे क्यों आया हुआ है और क्या जो वो सोच रहे है वो भी एक वजह है इसके यहाँ होने ki.....waise उनको तो वही एक मुख्या वजह लग रही थी......

पुजारी जी - वो मैं सायद कुछ बताना भूल गया था मधु ko.....bas इसी वजह से......

दक्ष - अरे मैं अभी उसको बुल्ला देता hu.......Madhu......aur आप वह क्यों खड़े है अंदर आइये......

पुजारी जी अंदर आ जाते hai.........aur लीडर को देखते hai......Daksh को लगा उनको इन् दोनों की पहचान करनी चाहिए......

दक्ष - पुजारी ji.....ye यहाँ पे अपनी कोई चीज़ ढूंढने को आये hai......aur ये है निक्स समुदाय के पुजारी जी......

लीडर - Hmm.....accha तो ये है wo......maine मधु से सुन्ना था इनके बारे में par.....mil नहीं सक्का......

पुजारी जी - तो आप मधु से मिल चुक्के है......

लीडर - हम्म मिल चुक्का hu......usne तो आप कह सकते है मेरी जान बचाई है एक baar.......waise निक्स लोगो से मिलना बहुत बड़ी बात hai.....aur मैं to.....Main तो निक्स राजकुमारी के साथ साथ निक्स समुदाय के पुजारी जी से मिल लिया आज.....

पुजारी जी को एक बार तो लगा ये बाँदा सब जान चुक्का hai......par वो इस बात को कन्फर्म करना चाहते the......sath hi वो baat....ki ये कोई अपनी चीज़ज़ धुंध रहे hai.....ye वाली बात उनको थोड़ी थेड़ी lagi......Yun लीडर की कहानी सभी को नहीं पता thi.....par कुछ लोग थे जो ये सब जानते the.....aur उनमे से एक ये पुजारी जी भी the......par अभी वो ये अंदाज़ा नहीं लगा पा रहे थे ऐसी कौन सी अपनी चीज़ है इसकी.....

इतने में मधु निच्चे आ जाती है......

मधु - हम्म अरे aap.....aap भी यहाँ है......

लीडर - हआ वो बस मिलने चला aaya.......waise ये पंकज नहीं दिख रहा उसकी तबियत तो ठीक है ना.......

इतने में वह पंकज भी आ गया tha......Madhu को ये बात समझने में देर नहीं लगी की लीडर यहाँ पे ऐसे hi नहीं आया hai.....pichle दिन भी वो किसी काम से hi आया था पर उस वक़्त प्रतीक का वो नाटक शुरू हो गया और उसकी वजह से कुछ हो नहीं paaya.......yaha पे आज लीडर उसी के लिए आया hoga.....lekin यहाँ पे और भी लोग है जिनके सामने वो ये बातें खुल के नहीं बता सकता.......

दक्ष - नहीं पंकज भी ठीक hi hai.......arre हां मधु वो पुजारी जी को तुमसे कुछ और बात करनी थी.......

दक्ष को भी लग रहा था सायद बात कुछ प्राइवेट होगी तो उसने सीधा कह दिया उनक स्टडी रूम में लेके जाओ वह बात karo.......Madhu भी पुजारी जी को लेके चली गयी स्टडी रूम में......

पुजारी जी - मधु तुम उस आदमी को जानती हो.......

मधु - हम्म वो लीडर hai.....Fumo......ooooooooo

गलती से इसके मुँह से वो बात निकल गयी जो इसको छुपानी thi.....Jaise hi पुजारी जी ने ये बात सुन्नी वो चौक गए......

पुजारी जी (मैं में) - क्या इस लीडर ने कोई पट्टी पढ़ाई है मधु ko......kahi वो धोखे से इसको फोमोस तो नहीं लेके जाना चाहता.......

पुजारी जी - हां मैं जानता हु वो फोमोस का लीडर है ये बात छुपाने की जरुरत नहीं hai......par....par वो यहाँ क्यों hai......kya वो तुम्हे कही ले जाने को आया है......

मधु को लगा अब जब इनको ये पता है की वो लीडर hi है तो क्या hi chupana.....haa बस ये लड़ाई की बात को छुपा लुंगी तो कोई बखेड़ा नहीं होगा.......

मधु - हां वो मुझे और पंकज को अपने साथ लेके जाने को आये hai......hum उनकी बेटी को धुंध रहे है.......

पुजारी जी ने जैसे hi ये बेटी वाली बात सुन्नी उनके दिम्माग में सब क्लियर हो gaya......aakhir क्यों वो यहाँ पे hai......par वो मधु से कैसे milla.....ye बात अभी भी पता नहीं थी usko......aur सबसे जरुरी क्या वो जानता है मधु कौन hai.......jab उन्होंने इस बारे में socha......to उनको लगा ये सब बक्कर hai......aisa कोई भी तरीका नाह की वो जान सक्के इस बात ko.......Madhu के पास गोल्डन पावर है ये बात खास लोग जानते थे और वो सब कभी bhi....kisi भी तरह से इस बात को बहार नहीं लाने वाले.......

मधु - क्या hua......aap कुछ बताने वाले थे........

पुजारी जी - नहीं कुछ nahi.......waise मिल गयी क्या उसकी बेटी.......

मधु - Nahi....abhhi nahi.....hum कोशिश कर रहे है par.....humme नहीं मिल रही वो........

पुजारी जी - क्या तुम्हे पता है क्या हुआ जो वो अपने परिवार से बिछड़ गया.......

मधु - हां मुझे बताया था unhone......pahle उनके साथ बुरा हुआ फिर वो ताक़त की तलाश में gaye....aur उन्होंने बदला liya.....par वो ताक़त महंगी पद गयी.......

पुजारी जी - hmm.......baat सही है tumhari.....waise वो यहाँ है तो फोमोस का क्या......

मधु - ये मुझे नहीं पता......

पुजारी जी - तुम एक काम karo......aaj उनको लेके आओ मेरे pass.......ussi आश्रम में जहा हम सब रहते है......

मधु - आप यही हो उनको साथ में लेके चलो......

पुजारी जी - नहीं मुझे उसके बारे में पहले बात करनी है किसी se......aur अगर सब सही रहा तो सायद Main....uski मदद कर सकता हु.......

मधु ये जान के खुश हो गयी और उसने बोल दिया वो लेके आएगी उसको......

पुजारी जी के दिम्माग में इस वक़्त कुछ और hi चलने लग गया tha.......ab उनको पहले तो सब बातें प्रतीक को बताना tha......aur उसके बाद गुरूजी के साथ मिलके ये सब डिसकस भी करना tha.....aur waqt.....wo तो था hi नहीं.......

पुजारी जी वह से निकल gaye..........iss वक़्त मैं घर पे hi tha......sabhi घर पे hi the......darasal चची ने सबको बता दिया था की कल मैंने कुछ इंसानो पे हमला किया tha......aur इस बात को लेके सब परेशां the......darasal यहाँ पे प्रोब्लेम्स हो सकती thi.....headoffice ने नियम बनाये हुए the......hum इंसानो के बिच रह तो सकते है पर ऐसे मैजिकल पावर्स से उनपे हमला करना ये सही नहीं hai.....aur अगर ऐसा होता है तो सज़्ज़ा भी था इसमें......

अभी मुझे सब ये समझा hi रहे थे की पुजारी जी आये.......

पुजारी जी - मुझे प्रतीक से कुछ बात करनी है......

मैं - हम्म जी boliye.....kya बात है......

पुजारी जी - अकेले में.......

मैं - वैसे भी मैं वो बात सभी को बताऊंगा hi तो इससे अच्छा है आपके मुँह से hi सब सुन्न le.....aap बतिये......

पुजारी जी ने एक बार सभी की ओर dekha....waise उनको भी लग रहा था ये बात सबको पता होनी hi chahiye.....aakhir मेरा स्कूल छूटने वाला tha.....aur साथ hi सायद यहाँ से मैं दूर भी जाने वाला था......

पुजारी जी - Haa......ye बात सभी को बतानी hi hogi.......Main चाहता हु की तुम मधु की सुरक्षा करो.......

पहले मुझे लगा मेरे कान बज्ज रहे hai.....kya इसने सच में ये बात कही......

दादी - पर इसके स्कूल का क्या hoga.....aur बाकी सब......

पुजारी जी - आपको इस बात की फ़िक्र करने की जरुरत नहीं hai......isko जितना सीखना था ये उससे कही ज्यादा सीख चुक्का है......

सबने एक बार मेरी तरफ dekha......waise ये सब ना कह भी देते तो भी सायद मैं चला hi jaata.....par हां ये कुछ दिन में जो भी हुआ hai......ek बार कोशिश करता इनको मन्नने की ताकि मुझे वह जाने de........lekin ये उल्टा hua......Maine नहीं सोचा था चची खुद कहेगी की मैं जा सकता hu....aur उसके बाद बुआ ने भी कहा मैं जा सकता hu.......Haa Dadi......wo मन्ना कर रही थी......

बुआ - माँ ये आता rahega.....hamesha के लिए थोड़ी जा रहा है ye......Bacchu आएगा ना.....

मैं - हां आऊंगा.....

पुजारी जी - आप फ़िक्र मत kariye......iska ध्यान रखने के लिए वह पे लोग hai.....aur मैं आपसे वड्डा करता हु वह पे आप कभी भी जा सकते है कोई आपको नहीं rokega.......aur ये आपसे मिलने भी आता रहेगा......

दादी - तो मैं भी इसके साथ jaaungi.......wahi रहूंगी इसके साथ......

दादा जी - ये बड़ा हो गया hai.....isko अब अकेले रहने दो.......

दादी - आपने तब भी यही कहा tha.....jab पार्थ जा रहा tha.......aur देखो wo....wo वापस नहीं आ सकता अब......

इतना बोल के वो रोने लग gayi.......ye अलग hi था मेरे liye.....family ड्रामा टाइप......

मैं - Dadi.......Dadi मैं आऊंगा आप देख लेना रात का खाना मैं घर इ आके hi khaunga.....roj pakka......waaise भी मेरे पास पोर्टल hai.....Main जब चाहे तब आ सकता हु यहाँ......

पुजारी जी - प्रतीक वह पे इंसान honge.....to तुम्हे अपनी मैजिकल पावर्स को बहुत संभल के उसे करना hoga......kisi को bhi.....gatli से भी पता नहीं चलना चाहिए.......

मैं - हम्म मैं कोशिश करूँगा......

रूपल दीदी जो अभी तक चुप बैठी हुई thi.......wo बोली.....

रूपल दीदी - दादी आप चिंता मत karo......main इसके साथ rahungi.......aapko इसकी चिंता करने की जरुरत नहीं hai.......Papa यहाँ पे भी हमारे होटल्स है ना........

चाचा जी - ये भानपुर जा रहा होगा ना वही पे मधु जा रही hai......uss जगह पे तो होटल नहीं है hamara.......haa उससे थोड़ी दुरी पे एक होटल hai.......sunna है उसका मालिक उसको बेचना चाहता hai.....waha पे कुछ गुंडे और पॉलिटिशंस का कुछ hai.....wo परेशां करते रहते है unko....iss वजह से.......

रूपल दीदी - आप उसको खरीद lo.......Main वही rahungi......aur वह से इस्पे नज़र रखूंगी......

पुजारी जी - हम्म मुझे भी ये बात सही लगती hai.....Prateek को मैं सीधा मधु के पास भी नहीं भेज sakta........tum अगर वो होटल खरीद पाओ तो वह पे प्रतीक rahega.......Prateek क्या तुम वह से नज़र रख पाओगे मधु पे....

मैं तो कही से भी नज़र रख लूंगा uspe.....par ये उससे ना मिल पाना ये मुझे अच्छा नहीं लग रहा था......

मैं - हां.......

दीदी - हां तो फिर पापा मैं उस होटल को संभल lungi.......Spain के होटल को आप किसी और को दे सकते है......

चाचा - पर रूपल वो प्रोजेक्ट्स जो तुमने और निकिता ने बनाये थे उनका kya......wo तो वैसे hi......

रूपल दीदी - हां ये तो और सही है ना पापा आप एक काम karo....shuru हम स्पेन वाले से hi करते है ab......ye एक होटल होने में काम से काम 6-7 महीने लग जायेंगे तब तक उस जगह को वो देख लेगा जिसने प्रोजेक्ट का आईडिया दिया tha.......aur मैं या निकिता कभी कभी चले जाएंगे काम देखने को......

चाचा ने भी सोचा ये भी ठीक hai.....to उन्होंने मंजूरी दे दी.......

चाचा - ये होटल मैं रूपल और निकिता के नाम से ले रहा hu......aur तुम दोनों को hi देखना hai.....waha के प्रोब्लेम्स को समझे....

निकिता जो इस वक़्त बस सबकी बातें सुन्न रही थी जब उसका नाम इसमें आया तो वो एकदम से चौक गयी.........

निकिता - पर मैं कैसे.......

चाचा - हम इस बारे में पहले से सोच रहे the....aur अब जब मौका है तो हम ये ले रहे hai......tumhe बस वह पे जाना है और अगर कोई परेशानी है तो देखनी hai........itna तो तुम कर hi सकती हो.......

यहाँ ये सब चल रहा था वही दूसरी तरह.........

लोग आ चुक्के थे एअर्थ पे........

वैसे पहले तो किसी इम्मोर्टल को आना चाहिए था :सिघ: पर वो नहीं aaye........waha पे रिआन की बात पे किसी ने याक्किन hi नहीं किया tha........aur डार्क पावर के बारे में रिआन ने बताया hi नहीं tha.....aur ना वो लोग यहाँ एअर्थ पे नज़र रखे हुए the.....ki उनको पता चले ये सब.......

हां ओरियन और टाइटन से लोग निकल चुक्के थे पर पहुंचे वो भी नहीं the.........Strange वर्ल्ड से पहुंचे थे log.........kuch निक्स the......jo अभी उस मूर्ति में कैद बन्दे के काबू में the.......aur कुछ बस पता करने आये थे की क्या हो रहा hai......wo सारे ऐसे hi स्कॉलर्स की एक टीम थी........

डार्क वर्ल्ड से भी लोग आये the......waha pe......waha पर से जो आये थे वो बस एक उम्मीद के साथ आये the.....unhe अभी भी दर tha.....klisi दिन स्लेयर वापस उनके पास ना चला जाए और उसके बाद wo.....to वो लोग यहाँ पे इस उम्मीद से आये थे की जिसके पास भी ये अजीब सी शक्ति है उससे मदद मांग sakke........Fumos को ये बात पता चली thi.....par उसके पास कोई था nahi......jisko वो भेज sakke........Fumos की बात कुछ ऐसी थी उससे बातें बस लीडर कर सकता tha.......Leader एक मध्यम tha......uske बिन्ना वो कुछ कर नहीं सकता tha.....aur लीडर अभी एअर्थ पे tha.....aur फोमोस उसको वापस बुल्ला भी नहीं सकता tha.......aur Slayer.....wo अभी तैयार नहीं था उसके हिसाब se........Demos से लूसिफ़ेर ने लोगो को भेज दिया tha......aur वो पहुंचने वाले थे......

कुल मिला के यहाँ पे अभी स्ट्रेंज वर्ल्ड से आये लोग और डार्क वर्ल्ड से आये हुए लोग hi the.......baaki सब रस्ते में hi थे......

एअर्थ के हेड ऑफिस में ये बात जब पता चली यहाँ पे बहुत से लोग आ रहे hai......to उन्होंने सारे इंतेज़ाम करने का socha......aur इंसानो की सुरक्षा के बारे में भी......

हेड ऑफिस के लोगो को भी पा चला था इस बारे में की एअर्थ पे कुछ हुआ hai......yaha पे कुछ ऐसा hai......jiske बारे में वो नहीं jaante......aur इन् लोगो का मन्ना था की हम ये सोच के चले की ये जो भी है बस हमारा दोस्त ho.....aur किसी को नुकशान ना pahuchaye.....par तैयारी उस हिसाब से करनी है की अगर ये दोस्त ना होक दुसमन निकला तो हम इसको ख़तम कर सक्के.......

पता सबको चल गया tha.......aur जहा पे ये सब हुआ था उस जगह के बारे में bhi.....par जब लोग वह पे पहुंचे तब तक कोई था hi नहीं वह pe.......darasal जैसे hi चची प्रतीक को लेके गयी थी उसी वक़्त उन् लड़को के दोस्त आ गए थे waha.....aur उन् सब को दर्द में तड़पते हुए देख वो सब के सब उनको वह से लेके चले gaye........jo वो कार वाला बाँदा था उसने ये बात बताई अपने घर वालो को पर किसी ने याक्किन hi नहीं kiya.......koi कहता की शारब पिने की वजह से ऐसा है तो कोई काम के प्रेशर की वजह से ऐसा लगा होगा tumko....ye बोल रहा था.......

उस जगह पे सबसे पहले पहुंचे डार्क वर्ल्ड wale........ek तो ये सब यहाँ आये बड़े मुश्किल से the......matlab इनको चुनना बहुत कठिन tha.......Earth पे वो सुरक्षा कवच जो tha....usko पारर कर पाना आसान नहीं tha....iss लिए डार्क वर्ल्ड से सबसे सरीफ सरीफ लोगो को यहाँ पे भेजा गया tha.....aur उनको ढूंढने में मुश्किल हुई थी.......

ये लोग अभी भानपुर गाओं के पास आये हुए the.....aur आस पास जांच कर रहे the......par ज्यादा कुछ मिल नहीं रहा tha.....ulta इन् सब ने आके यहाँ पे चीजजें ख़राब कर di....Dark पावर के थोड़े बहुत जो अंश यहाँ पे होने the......wo सब bhi.....inn सब की वजह से यहाँ वह चले गए.......

थोड़ी देर देखने के बाद जब कुछ भी नहीं मिला इनको तो ये वह से निकल gaye......aur अस्स पास कही रहने का ठिकाना देखने लग गए.......

वही पुजारी जी अब जा चुक्के थे और वक़्त शाम का हो चला tha.....waise तो लीडर आज आया था मधु के पास की वो कही और जा सक्के par......aaj जब उसको पता चला वो जाने वाली है वह से तो उसने ये आज ना करने के बारे में socha.......wo वह से निकलने hi वाला था की मधु ने उसको रोक liya.......aur ऐसे hi मधु और पंकज उसके बारे में उससे और डिटेल में पूछने लगे......

जब शाम हुई तब पंकज को मधु ने कहा की पुजारी जी ने उसको बुलाया है और कहा है लीडर को भी वह लेके जाए........

पंकज ने भी हां कह दिया उसको क्या hi पता था क्या होना है क्या नहीं......

लीडर को लेके दोनों hi निकल गए पुजारी जी के पास जाने को मतलब गुरूजी के आश्रम में......

आश्रम में अब दब की बहुत चलती thi.....darasal बात ये हो गयी थी उसको समझना मुश्किल हो रहा था ab....aur साथ hi उसकी बातों को bhi......par वो जो भी कहता वो सच hi होता था.......

उसके एलिमेंट की वजह से ये सब हो रहा tha......aur तो और दब अब आश्रम में रह रहे लोगो को ट्रेनिंग दे रहा था बहुत सी चीज़ज़ों mein.....bas यही सब कुछ कारन थे उसकी बातें सब मैंने लगे the.....aur अगर नहीं मानते थे तो काम से काम 2-3 बार उसकी बातों को समझने के लिए सोचते जरूर थे......

दब लगा हुआ था ऐसे hi की वह पे पंकज और मधु लीडर को लेके आ गए.........

पुजारी जी और गुरूजी इस वक़्त आपस में बात कर रहे थे आश्रम में hi

दब ने देखा पंकज वह hai......to वो मुस्कराते हुए उसके पास चला gaya.......waise दब और पंकज की ज्यादा बननी नहीं है अभी tak......par कौन जाने कब क्या हो जाए.......

पंकज ने उसको देखा तो पहले तो उसने थोड़ा मुँह बनाया फिर वो भी मुस्कुराते हुए वही खड़ा रहा......

दब - आप sab...yaha.....koi बात है क्या......

पंकज कुछ बोलता उससे पहले मधु ने बोलै......

मधु - हममे पुजारी जी से मिलना है उन्होंने बुलाया है हममे......

दब ने उसकी बातें सुन्नी और फिर उनको अपने पीछे आने को kaha.....par जाने से पहले hi उसका ध्यान लीडर पे पड़ा tha.......aur वो कुछ सोचते हुए वह से जा रहा था.......

लीडर यहाँ आया था और पूछ रहा था मधु और पंकज से आखिर उसको यहाँ क्यों लेके आये hai.......yaha पे वो क्या karega.......waise उसको ऐसा लगने लगा था सायद किसी तरह से यहाँ के लोगो को उसके असलियत के बारे में पता चल गया hai........aisa होना नहीं चाहिए पर अब क्या hi kahe........wo इसी को लेके थोड़ा सा परेशां सा था.......

दब ने उन् तिण्णो को hi गुरूजी के पास pahuchaya.....aur खुद जाके वही पास में बैठ गया........

गुरूजी ने ये dekha.....par उन्होंने कुछ कहा nahi.......wo परेशां हो गए थे इस दब se.......yaa ये कहु दब उनको परेशन किया करता था ऐसे hi बातें.....

वो अक्सर कुछ ना कुछ कहता था जिसका मतलब गुरूजी को पता करने में वक़्त लग जाता tha.....aur ये उनको अब थोड़ा परेशां करने लगा था.......

गुरूजी ने अपना ध्यान उससे हटाया और लीडर की ओर dekha.......aur मुस्कुराते हुए कहा......

गुरूजी - स्वागत hai......tum यहाँ आये और हममे मौका भी नहीं मिला तुम्हारा स्वागत करने का......

दब - आप कर तो रहे है स्वागत उनका......

गुरूजी ने एक बार दब की ओर dekha....aur फिर से लीडर से कहा......

गुरूजी - हां तो मैं कहा था........

पुजारी जी - मधु पंकज तुम दोनों क्या मेरे साथ चलोगे यहाँ पे ये लोग कुछ बातें करने वाले hai........hamari जरुरत नहीं है yaha........DB तुम भी चलो......

दब - मेरी जरुरत padegi......Main तो कहूंगा सभी को यही रहना chahiye.....ye अच्छा hoga....aage के लिए......

गुरूजी - पुजारी जी इन् दोनों को लेके जाइये ये यहाँ से नहीं जाने वाला......

मधु और पंकज ने एक बार देखा लीडर की ओर और गुरूजी की ओर उनको ये लग रहा था सायद यहाँ पे कुछ गड़बड़ होने वाली hai.......par अभी वो कुछ भी नहीं कर सकते the....kya करते वो क्या मधु पुजारी जी पे हमला करती ......नहीं वो इसके बारे में सोच भी नहीं sakti.......unn दोनों को लीडर ने खुद जाने का इशारा किया तब वो दोनों गए.......

लीडर - हम्म तो आपको मेरे बारे में पता है......

दब - मैं तो कहता हु मुद्दे पे आते है यहाँ सबको एक दूसरे के बारे में पता hai......wo सब दोषरा के कुछ नहीं होने वाला......

गुरूजी - राजकुमार क्या आप हममे बात करने denge.......yaa हम कही और चले जाए.......

दब - जाहा जाओगे वह मुझे तो आना hi hoga......waise कोई बात नहीं मैं उस वक़्त तक चुप रहूँगा जब तक मेरा बोलना जरुरी नहीं हो......

गुरूजी - हम्म ठीक hai........To फोमोस के लीडर इस जगह pe.....kyun है......

दब - जाहिर सी बात hai......ab उसके पास शक्तियां hai.......lekin किश liye......wo अभी बस एक पुतला hi बांके रह गया hai.......Mujhe कुछ दिन पहले hi पता चला मेरे जो पिताजी hai.....unhone कोई राज़ की बात किसी को बताई thi......kya थी वो.....

लीडर - ये सब इसको कैसे पता और क्या ये जानता है ये मेरी बेइज्जती कर रहा है मुझे एक पुल्टा बुल्ला के.......

गुरूजी - दब ये हमारे मेहमान है तुम इनसे ऐसे बात नहीं karoge........Leader क्या ये सच है तुम यहाँ अपनी एकलौती बेटी को ढूंढने आये हो.......

लीडर - हां ये सच hai.....Main उसको ढूंढने आया हु.......

दब - वो ठीक hai.....aur जहा तक मैंने sunna.......abhi वो बहु ज्यादा खुश hai.......Guruji आपको पता है कोई होटल ले रहा है उसके नाम pe.....bataiye इतना कौन hi करता है.......

लीडर - क्या तुम मेरी बच्ची के बारे में जानते ho......Kya ये जानता है मेरी बची के बारे में.....

गुरूजी - मैं ये नहीं जानता क्यूंकि मैंने तुम्हारी बच्ची का पता नहीं लगाया है अभी tak......DB अभी मुझे मेरी बात पूरी करने do......Leader क्या लगता है tumhe.....kya तुम्हारी बेटी तुम्हे अपना paayegi......kya तुम उसको समझा पाओगे की तुम उस वक़्त कहा थे जब उसकी माँ ने उसको बचने के लिए किसी और के जरिये एअर्थ पे भेज दिया tha........kya तुम उसको समझा पाओगे की जब जब वो परेशां thi......darri हुई thi......tum कहा the.....kya तुम ये सब समझा पाओगे.......

लीडर को सच में इन् सब के बारे में क्या बताना है ये समझ में नहीं आ रहा tha......wo नहीं जानता था की वो क्या समझायेगा अपनी बेटी को या फिर kaise....ye जो सवाल अभी उससे किये गए थे वो किसी बम की तरह the.....jo बस उसको तोड़ते जा रहे थे.......

लीडर एक दम से चुप रहा बस खुद में hi सोचता raha........abhi थोड़ी देर पहले एक ख़ुशी मिली थी की दब उसकी बेटी को जनता है और अभी तुरंत सब ख़तम........

दब - गुरूजी की बातों से मैं भी सहमत hu.....ye सवाल तो वो कर सकती hai......aur करेगी bhi......par क्या aap.....aap जोकि एक कटपुतली hai......wo इनका जवाब दे पायेगा........

लीडर - तो क्या मैं उससे ना millu......Main उसको सब बताना चाहता hu.....par......uske बाद वो मुझसे नफरत kareegi......haa मैं सच में एक कटपुतली hi हु......

गुरूजी - लीडर क्या तुम्हे लगता है की तुम्हे अपनी बेटी से मिलना chahiye......agar तुम हां kahoge....Main राजकुमार से तुम्हे उसका पता और पहचान बताने को kahunga....aur तुम उससे मिल सकते ho.....par ये sawal.....ye होंगे वह उस वक़्त......

दब - गुरूजी फोमोस का वक़्त ख़तम हो चला है सायद.......

गुरूजी - क्या बोल रहे हो tum.......kya लगता है tumhe.....uss चीज़ज़ को ख़तम कर देना आसान hai......wo तब से है जब तुम्हारे परिवार का अस्तित्वा भी नहीं था......

दब - वो बस इंतज़ार में था mere.......chalo ये कहानी मेरे hi हाथों ख़तम hogi......Leader आप यहाँ रहेंगे और इन् सवालों के बारे में sochenge.......Main आपसे वडा करता हु आपको ना सिर्फ आज़ाद karaunga.....balki आपको आपकी बेटी के साथ रहने का मौका भी dunga.....hamesha के liye....jab तक आप रह सक्के.......

लीडर इस बात को समझ नहीं पा रहा था ना hi Guruji.......kya मतलब था दब का क्या ये फोमोस को ख़तम करने वाला hai.......ye मुमकिन hi नहीं है........

दब क्या सोच रहा था वो वही जानता tha......Leader बस परेशां tha.....usne नहीं सोचा था की उसको सच में ऐसे सवाल भी मिल सकते the......haa उसने सोचा था की वो सब कुछ अपनी बेटो को batayega.....par उसके बाद क्या होगा उसका अहसास आज उसको हुआ tha.....wo नहीं जानता था की इन् सब के बाद उसकी बेटी उससे नफरत करना शुरू कर de......agar ऐसा है तो वो उसके सामने जाएगा hi nahi.......uski बेटी को खुश रहने dega.....ye सोचते हुए की उसका पिता कोई ाचा बाँदा होगा......

गुरूजी दब की बातों के बारे में सोच रहे थे आखिर उसका मतलब क्या hai......par दब वो तो बोल के निकल गया वहासे.........

लीडर - मैं यही रहूँगा to......to परेशानी हो jaayegi.......Fumos मुझसे मेरी साड़ी ताक़त चीन lega......aur तो aur......wo मुझे सजा भी dega.....ye खतरनाक hai.....main यहाँ नहीं रह सकता.....

गुरूजी - वह वापस जाने के लिए कितना वक़्त है आपके पास आप उतने वक़्त तक तो यहाँ रह hi सकते है.....

लीडर - waqt........abhi कुछ वीक्स hai......Main तब तक यहाँ रह hi सकता हु......

यहाँ ये सब बातें कर रहे थे.....

वही चाचा जी अपने कॉन्टेक्ट्स से ये पता लगा रहे थे की वो जो होटल है जिसके बारे में बात हुई thi.....uska मालिक कहा पे hai....aur क्या वो ये सब इतनी जल्दी करेगा........

होटल का मालिक परेशां हो चुक्का था उसने जैसे hi सुन्ना कोई उससे वो होटल खरीदना चाहता hai.....wo भी सही कीमत पे तो उसने तुरंत हां कर diya......wo बाँदा खुद मिलने को चला गया था चाचा जी के ऑफिस mein.......par चाचा जी आज ऑफिस गए hi नहीं the....wo घर पे the....unko फ़ोन आया तब उन्हें ये पता चला और वो तुरंत रूपल दीदी और निकिता को लेके चल दिए........

डील इतनी जल्दी हुई की पूछो hi mat....haa पेपर्स ट्रांसफर में वक़्त लगने वाला था kuch......lekin वो हो hi जाता एक दो दिन में.......

जब होटल के मालिक ने dekha.....ki होटल दो लड़कियों के नाम पे लिया जा रहा है तो वो थोड़ा परेशां हुआ पर सिग्न करने से पहले उसने अपना मुँह नहीं khola.....aur जब सिग्न कर दिया तब बोलना शुरू किया.......

मालिक - वैसे आपको वह पे संभल के काम करना होगा वो क्या है ना वह के कुछ लोकल पॉलिटिशंस है और कुछ उनके पालतू कुत्ते hai......jo आये दिन वह हंगामा करते रहते hai......Ab जब आपने पेपर्स इन् बच्चियों के नाम पे करवाया है to.......aapko इनके लिए सिक्योरिटी अर्रंगे करना होगा......

चाचा - हम जानते है ye....aur आपने ये बताया इसके लिए बहुत बहु सुक्रिया पर चिंता करने की बात नहीं hai......wo जो कोई भी ho......inhe छू भी नहीं सकता......

मालिक को लगा चाचा ने सिक्योरिटी अर्रंगे कर राखी है पर फिर भी इतना कॉन्फिडेंस......

मालिक - वो लोग रूलिंग पार्टी के hai.....aapko संभल के रहना chahiye.......chaliye मैं तो ये शहर छोड़ के जा रहा hu......bas अब अपने घर का डील कर लू आज उसके बाद यहाँ से चला jaaunga.....ye जगह मेरे लिए मनहूस है......

चाचा जी - ठीक hai.....phir कभी मौका मिला तो मुलाकात होगी हमारी.......

वो होटल ओनर वह से चला गया......

चाचा जी - तुम दोनों ने सुन्ना यहाँ पे क्या होता hai.....ab ध्यान से सोचो की क्या करना hai.....inn सब से बहार निकलने के लिए......

इसके बाद सब घर चले gaye.......Par एअर्थ पे रात में बहुत कुछ hua.......bahut से लोग आये.......

नेक्स्ट अपडेट में देखते है क्या hua.....aur क्या कोई पहुंच पायेगा प्रतीक tak.....ye देखने वाली बात hogi.....kyunki डार्क वर्ल्ड वालो ने आके पूरा कबाड़ा कर दिया था........
 
अपडेट - 98

"nahi......yaha पे कुछ नहीं मिलने wala........sab कुछ तो बिखरा पड़ा है यहाँ pe.......dekh रहे हो......"

"क्या आपको लगता है ये जानबूझ के उस अजीब सी शक्ति वाले ने किया है ताकि हम ुस्तक ना पहुंच पाए......"

"पहली बात इसको डार्क पावर कहते hai......usko अजीब सी पावर मत kaho......aur दूसरी baat.....pata nahi.....Main नहीं जानता ये सब उसने किया है या किसी और ने....."

"मुझे लगता है ये सब उसी का किया हुआ hai.....wo इतने वक़्त से यहाँ पे hai......usne अपने आप को सभी से छुपा के रखा पर इस बार कुछ हुआ और उससे एक गलती हो gayi......wo इस गलती के कारण सबके सामने आ jaata......isse बचने के लिए उसने ये किया....."

"आखिर क्यों कोई छुपेगा अगर उसके पास ऐसी कोई शक्ति ho.....wo आधे यूनिवर्स को जीत सकता है कुछ hi वक़्त mein......tumhe अब भी लगता है वो चुप्पा हुआ hoga......Tum बताओ अगर तुम्हारे पास ऐसा कुछ होता तो क्या करते......"

"Main......Main तो राजा बन jaata.......aise छुपता नहीं मैं......"

ओरियन से आये हुए कुछ लोग बातें कर रहे थे वही पे जहा पे वो सब हुआ tha........inko कुछ मिल नहीं रहा tha.......haa थोड़े बहुत बिखरे हुए टुकड़े मिले थे ेनेर्गीएस के पर उनसे कुछ खास पता नहीं चल रहा tha.......aisa नहीं था की ये उस काबिल नहीं थे की इन् चीज़ज़ों से पता लगा सक्के की यहाँ हुआ क्या tha......par बात ऐसी थी की इनको अभी रिजल्ट्स जल्दी चाहिए thi........aur वो मुमकिन नहीं हो पा रहा था.......

"एक काम karo......jo भी hai.....unko उठाओ और लॉन्ग प्रोसीजर वाले तरीके को apnao......hum पता लगा hi लेंगे कौन है क्या है सब कुछ......."

"पर उसमे बहुत वक़्त लगेगा क्या सब इन वक़्त तक......."

"और कोई रास्ता नहीं hai.....agar ये जो कोई भी hai.....kal को हमारा दुसमन बन गया to......to हमे कोई नहीं बच्चा paayega.......Chizzen समेत lo.....aur ध्यान से कुछ भी बचना नहीं चाहिए यहाँ pe......wo सब लेके जाओ हमारे ठिकाने पे......"

"नए आदेश आये hai......humse कहा गया है की हम टाइटन से आये हुए हमारे दोस्तों की मदद ले और उनकी मदद करे......."

"यही बात स्ट्रेंज वर्ल्ड के लिए भी कही गयी है......"

"उफ़ अब वापस से ये सब करना hoga.......theek है साड़ी चीज़ीं हमारे ठिकाने पे लेके चलो और हां उन् दोनों प्लैनेट्स से जो भी आये है उनको लेके आओ हमारे ठिकाने pe......unse बात कर लेनी चाहिए......"

ये लोग इस जगह से दूर और हेड ऑफिस के पास में रहने वाले the......saare इन्तेज़ामात हेड ऑफिस ने खुद कर रखे the.......unka सोचना भी सही tha........isse काम से काम वो एक बात तो तय कर सकते थे कौन शांति बनाये रखना चाहता है और कौन यहाँ पे किसी और hi मकसद से आया हुआ है.......

इस वक़्त तक सब के सब आ चुक्के the......Demos वाले जसस bhi......par वो सब के सब यहाँ पे नहीं रह सकते the......to उनमे से कुछ ने इंसानो के बिच रहने का फैशला kiya......par लूसिफ़ेर ने उन्हें अच्छे से समझाया था खुद पे काबू rakhe......tab तक किसी के नज़र में ना आये जब तक वो उस डार्क पावर के बारे में कुछ पता न कर ले.......

पर बस यही नहीं थे जो सबसे चुप के रह रहे थे डार्क वर्ल्ड वाले भी ऐसे hi the......ye बात अलग थी उनके यहाँ आने के बारे में हेड ऑफिस को उनके यहाँ पहुंचने के कुछ घंटो बाद पता चल गया tha......aur जो कोई भी आया था उन् सब के रिकार्ड्स साफ़ the.....to उन्होंने उनको अपने हिसाब से रहने diya......Lekin स्टंज वर्ल्ड से जो दूसरा ग्रुप आया था उसके बारे में पता नहीं था किसी ko.......wo सब चुप के यहाँ आये the......saare के सारे उस मूर्ति में कैद बन्दे के इशारो पे चल रहे थे.......

यही सुबह की hi बात होगी........

पुजारी जी हर सुबह की तरह आज भी आश्रम से थोड़ी दूर के एक तालाब के पास पहुंच gaye....wo हर रोज वह जाय करते थे और उस तालाब के पानी में कुछ किया करते the.....unko लगता था की जब वो सब यहाँ एअर्थ पे रहने आ hi गए है तो यहाँ पे एक ऐसी जगह होनी hi चाहिए जहा पे सारे निक्स खुद को ठीक कर sakke....par उनको पता नहीं था की आज उनके पीछे कोई लगा हुआ है....

कोई नहीं कुछ log.......Nadi अभी थोड़ी दुरी पे थी की उनपे हमला हुआ......

हमला करने वाले भी सारे निक्स hi the.....ye वही सब थे जो स्ट्रेंज वर्ल्ड से आये the.......aur अभी उस मूर्ति में कैद बन्दे के काबू में थे......

पुजारी जी आगे की ओर जा hi रहे थे की उनके ऊपर किसी ने गंदे पानी से हमला किया......

पुजारी जी ने जब उस ओर देखा जहा से पानी आया था तो वह पे कोई नहीं tha......par उसी वक़्त दूसरे तरफ से वापस से हमला hua.......jab खुद को संभल के दूसरे तरफ देखा तो वह पे भी कोई नहीं tha.......ye 2 बार और hua........uske बाद पुजारी जी ने अपने पास पड़ी हुई बोतल से कुछ पानी निकला और उसको अपने चारो तरफ फैला liya......ye बोतल वाला पानी खास होता hai.......Jalphool का बहुत सारा रास इसमें मिलाया हुआ होता है जिससे ये और ज्यादा ताक़तवरर हो जाता है......

पुजारी जी यहाँ के तालाब में वही फूल के लिए तो जाते the......unko यहाँ एअर्थ पे भी फलफूल उगना था और बस एक वही तालाब था जहा पे ये उगने के चान्सेस थे.......

पुजारी जी - कौन हो तुम sab.......Main कहता हु सामने आओ वर्ण अच्छा नहीं होगा......

कोई भी सामने नहीं aaya....balki इस बार वापस से गंदे पानी से हमला hua......aur जिस बोतल के पानी से पुजारी जी ने खुद को बच्चा के रखा tha......uss पानी में थोड़ा कालापन आ gaya.......jaise hi पुजारी जी ने इसको dekha.........unki आँखें हैरानी से चौड़ी हो गयी.........

ये हो hi नहीं सकता था उनके हिसाब se..........jiss तरह के पानी से उनपे हमला हो रहा tha......wo कोई आम पानी नहीं tha.......usme फलफूल के रास के साथ साथ वही काली शक्तियां थी जो उस मूर्ति में कैद बन्दे के पास hai.......to क्या वो बाँदा आज़ाद हो गया hai........agar नहीं तो फिर ये सब क्या tha.......ye पानी ऐसा कैसे हो सकता है.......

अभी ये सोच hi रहे थे की वापस से एक और वार hua.......iss बार उनके पानी से बनने हुए शील्ड में दरार सी बन गयी थी......

पुजारी जी अब मुशीबत में the........sayad उनकी किस्मत अच्छी thi.......uss वक़्त लिमि की नज़र उस ओर चली gayi......wo सायद कही जा रही थी या पता nahi......usne देखा की कुछ ऐसा हो रहा hai........par सायद उसको ये जाके किसी को बताना चाहिए tha........wo खुद वह चली गयी.......

लिमि ने देखा की कुछ लोग पेड़ों के पीछे चुप्पे हुए है और पुजारी जी पे हमला किये जा रहे है......

लिमि एक पेड़ के पास गयी और उसने अपना खंजर बहार निकला और उससे उस पेड़ के पास खड़े बन्दे पे हमला करने hi वाली थी ki........kisi ने उसपे हमला कर diya.........ek वार हुआ उसपे वैसा hi जैसा अभी तक पुजारी जी पे हो रहा tha.........Leemi के पास कोई शील्ड नहीं थी की वो उससे बच paati.........usko जैसे hi वो वार लगा एक धमाका सा hua......aur उसकी आवाज सभी तरफ gayi.......Aasram में भी.......

आश्रम के पास में कुछ ऐसा हुआ tha........Aasram में जितने भी योद्धा थे वो सब सतर्क हो gaye......kuch को बहार भेजा gaya......dekhne को की क्या चल रहा hai...........Tab तक वो निक्स जो अभी तक हमला कर रहे थे वो वह से निकल gaye.......pata नहीं क्यों पर सायद वो सब किसी एक को hi नुकसान पहुंचने आये the....jaise hi उनका काम हुआ वो सब के सब एकदम से जैसे नींद से जाग गए ho........aur ऐसा होने के बाद वो सब के सब वह से निकल लिए........

पुजारी जी ने जब ये देखा तो वो हैरान रह gaye......Leemi ने उनकी मदद करने के लिए अपनी जान दे दी.......

हां उस वक़्त उनको वही लग रहा tha.......Leemi की साँसे ना के बराबर thi.....aur उसका सरीर काला पड़ता जा रहा था.......

वो भाग के उसके पास gaye......aur तब तक वह पे आश्रम से निकले हुए योद्धा भी पहुंच गए the....Unhone भी देखा की लिमि वह जमीं पे पढ़ी हुई hai......uska खून तो नहीं निकल रहा par.......par उसका सरीर काला होता जा रहा tha.........aur साँसे भी उखड़ती जा रही थी........

वो कुछ करते उससे पहले वह पे दब आ gaya.......aur उसके साथ लीडर भी था.......

दब -इनको वापस आश्रम में ले चलो jaldi.......Pujari जी आपको मेरे दोस्त को बुलाना hoga......uski रूपल दीदी के साथ में.......

लीडर - ये इतनी बड़ी मात्रा में शक्तियों का prayog.......kya यहाँ पे इतने ताकतवर लोग भी है.......

पुजारी जी - मैं उन्हें लेके आता hu......par क्या ये.....

दब - जितनी जल्दी आप करेंगे उतना अच्छा hoga.....aap jaaiye.......Leader आप मेरी मदद kariye......mujhe खून chahiye.......aapka.......

लीडर ने जब ये सुन्ना तो वो दब को देखने laga.....par दब का चेहरा एकदम सीरियस tha......usko सच में ये चाहिए था.......

लीडर - हम्म ठीक है......

दब - यहाँ नहीं हममे आश्रम में जाना होगा......

लिमि को जल्दी से आश्रम में ले जाय gaya........ye बात जब गुरूजी को पता चली उन्होंने सबसे पहले लिमि की बेटी को आश्रम के दूसरे तरफ भेज diya.....wo नहीं चाहते थे अभी वो ये सब dekhe.......Leemi की हालत ख़राब हो रही थी......

मैं घर में tha......bas बहार निकले hi वाला tha.......Mujhe जाना था bahar......uss होटल में जो चाचा ने अभी लिया था.......

दीदी और निकिता भी साथ चलने वाले the.......ki तभी घर में पुजारी जी आ गए और वो परेशां लग रहे थे......

पुजारी जी - प्रतीक रूपल मेरे साथ चलो.......

मैं - क्या बात है पुजारी जी कोई परेशानी है kya.....aur आप.........

मैं कुछ और बोलता उससे पहले मुझे किसी चीज़ के होने का अहसास hua........ye......ye वही hai.......wahi शक्ति.......

मैंने एक नज़र अच्छे से पुजारी जी को देखा.......

मैं - वो आज़ाद हो गया.......

पुजारी जी को समझ में आ गया मैं किसकी बात कर रहा हु.......

वो - Nahi......pata नहीं mujhe......par usne.....usne हमला किया mujhpe......aur मुझे बच्चन में लिमि घायल हो गयी hai........DB ने मुझे यहाँ भेजा है तुम्हे और रूपल को बुलाने के लिए........

हम घर में थे वही पास में दोनों बुआ और चची भी thi......Dadi सायद ऊपर होगी.......

उन् सब ने भी ये बात सुन्नी.......

K.Bua तुरंत कड़ी हो गयी........

K.Bua - मैं भी chalungi.......Main उसको चेक कर सकती hu......sayad इससे मदद मिले........

बुआ भी आ गयी हमारे saath.....aur साथ में चची भी.......

मैं समझ रहा था ये कैसा मामला hai.......main इससे पहले भी गुजर चुक्का hu........naa जाने कितने बार इसके चक्कर में मुझे सज़्ज़ा मिलने वाली होती थी.....

मैंने वक़्त ना गवाते हुए खुद पोर्टल खोला और उसमे से चल diya......wo सब भी पीछे पीछे आ gaye......aur हम सब पहुंच गए आश्रम में........

हम सब जल्दी में लिमि के पास चले gaye.....waha पे लीडर tha.......aur DB.........Leader के हाथ से खून निकल रहा tha.....aur दब उस खून में कुछ कर रहा tha.......pata नहीं क्या कर रहा था.......

चची ने जब लिमि की हालत देखि तो वो घबरा गयी thi......pura सरीर अजीब तरह से काला होने लगा tha.....aur सूखता जा रहा था.......

उनको लिमि की बेटी का ध्यान aaya.......usko ये सब नहीं देखना चाहिए tha.........Unhone आस पास dekha......koi नहीं था वह पे......

चची - इसकी बेटी कहा hai......kya उसने....

गुरूजी - नहीं मैंने उसको दूसरे तरफ भेज दिया hai.....wo वही है....

चची - मैं उसके पास जाती हु.......

चची वह से निकल गयी.....

दब - प्रतीक अच्छा हुआ तुम आ gaye.......tum तो जानते hi हो ये क्या है.......

मैं जनता हु ये क्या है अच्छी तरह se..........ye मेरे डार्क पावर के जैसा hi दीखता tha.....par असर उसके जैसा नहीं उससे भी दर्दनाक था ye.........agar किसी के अंदर ये चला jaaye......to हालत तो आप देख hi रहे hai.....sarir काला होने लग जाता hai....aur सरीर का सारा मांस जैसे सद्द के सुख जाता hai.....aur ये सब जिन्दा रहते हुए hi होता hai.......ye इतना दर्दनाक है की मैं इसको अच्छे से बता नहीं sakta..........iska उसे उस मूर्ति में कैद बन्दे ने बहुत बार किया था मेरे khilaaf........chukki ये देखने में ऐसा लगता है की मेरा hi डार्क पावर उसे हुआ hai......isko देख के इम्मोर्टल्स मुझपे ऊँगली उठाया करते the.......par जाँच के बाद पता चल जाता था की ये क्या है.......

ये बात दब को कैसे पता की मैं जानता हु इस चीज़ज़ ko.......Maine इसके बारे में सोचा hi नहीं.......

दब - रूपल दीदी क्या आप मुझे कुछ दे सकती है........

रूपल दीदी को समझ नहीं आया ये क्या मांग रहा hai.......waise अगर बाकी सब नहीं आते तो यहाँ पे काम और आसान हो जाता........

दब को वो बट्स चाहिए the.......yaa उनमे से कुछ........

यूँ तो बट्स खून पीटते hai.....par रूपल दीदी अगर उनसे कह देती की उनको खून डालना है सरीर में तो वो ये कर hi देते.....

रूपल दीदी - किस चीज़ज़ के बारे में बात कर रहे हो तुम.......

रूपल दीदी के इस पावर के बारे में किसी को पता नहीं था सिर्फ मेरे........

मैं - उसकी जरुरत नहीं padegi.......Main ये कर dunga.......par उसके लिए मुझे ये पूरी जगह खाली chahiye......abhi......

गुरूजी और पुजारी जी वही the.....unn दोनों ने एक दूसरे को dekha.....aur फिर बहार जाने का सोचा........

गुरूजी - सब बहार चलते hai.....ye प्रतीक खुद कर सकता है.......

K.Bua - अरे मुझे चेक तो करने दीजिये.....

पुजारी जी - वक़्त काम hai......abhi के लिए बहार चलते है........

उन् दोनों ने सबको बहार भेज diya.....DB और लीडर को भी और वो खून का कटोरा उसको भी मैंने बहार ले जाने को kaha.......pata नहीं वो कर क्या रहा था......

जब सब बहार gaye......Main उसके पास गया.......

मैं साड़ी पावर्स को खिंच leta.....aur खुद के अंदर दाल leta......mere अंदर की डार्क पावर उस चीज़ज़ को आराम से संभल leti.......haa ये इंसानी शरीर है तो इसमें थोड़ा दर्द जरूर होगा मुझे पर ज्यादा नुकसान नहीं होने वाला......

मैंने अपना हाथ उस जगह पे rakha.......jaha पे लिमि को वो वार लगा tha.......uska कन्धा.......

वह पे हाथ रखने के बाद मैंने अपना दूसरा हाथ उस हाथ के ऊपर रखा और उससे उसके अंदर गयी हुई वो खतरनाक ेनेर्गीएस को बहार खींचने लगा......

इस दौरान मेरा वो हाथ जो उसके कंधे पे tha.....wo जल रहा tha......bahut jyada......aur dard.......wo तो पूछो hi mat.......aisa लग रहा था मेरी हड्डियों के बिच में कुछ रेंग रहा hai......aur वो अंदर से बहार आना चाहता hai........saari हड्डियों को टॉड के.......

मैं चिल्लाने laga.......meri आखें सायद बंद होने वाली थी......

पर उस waqt.......kuch hua.......Maine वो सुनहरी रोशनी dekhi.......Madhu.......

वो रौशनी मेरे अंदर चली aayi........aur इससे jaise.....jaise मुझमे बहुत ज्यादा ताकत आ गयी thi.........ab वो दर्द जैसे गायब हो गया था.......

मैंने अपने हाथ को देखा तो वह पे एक एनेर्जीबाल tha........wahi खतरनाक शक्तियां जो लिमि के अंदर थी वो सब बहार आ चुक्की थी और मेरे हाथ में थी.......

ये इंसानी sarir......ye मेरी ताकतों को रोक लेता hai.......aur साथ hi मुझे दर्द भी होता hai.......Main उस शक्ति को अपने अंदर नहीं रख सकता था.....

वो एनर्जी बॉल मेरे हाथों में tha......par Leemi......haa उसका सरीर अब पहले जैसे रंग का हो गया tha.....par बहुत कमज़ोर tha.....aur सूखा हुआ tha.......Ye ऐसे नहीं रह sakti.......Maine पहले तो वो एनर्जी बॉल को वह से दुर्र फेंक diya.......khidki से

मैं इस चीज़ज़ में कुछ कर भी नहीं सकता tha.......kya hi karta.......meri पावर्स सिर्फ डेसट्रक्टिवे है.....

मैं ये सोच hi रहा था की मेरे अंदर से वही सुनहरी रोशनी का एक छोटा सा टुकड़ा बहार aaya.....aur वो लिमि के अंदर चला गया.......

मैंने उसको देखा वो ठीक हो रही thi........uska सरीर वापस से पहले जैसा हो रहा tha.....nahi सायद उससे भी अच्छा.......

अब बस उसकी आँखें बंद thi.....aisa लग रहा था जैसे वो बस सो रही ho.........Jab मैं चीख रहा था तब बहार आवाज जा रही thi....aur वो सब अंदर आने को बोल रहे थे पर दब ने उनको नहीं आने diya.......saath में गुरूजी और पुजारी जी भी मन्ना कर रहे थे........

मैंने जाके अब दरवाजा khola......Main भी चेक कर सकता था पर इस वक़्त दिम्माग में कुछ और hi चल रहा tha......wo सुनहरी roshni........kya वो सच में मधु थी.......

दरवाजा खोलते hi सब मुझे देखने lage......maine किसी को कुछ नहीं कहा बस K.bua को छोड़ के......

मैं - K.Bua आप चेक कर लो उनको.....

K.Bua ने जब ये सुन्ना तो वो अंदर चली gayi......bas वही नहीं बाकी सब bhi.........Main दरवाजे पे tha......apne ख्यालों में खोया hua..........waise बस मैं hi नहीं था aisa..........Leader का हाथ कट्टा हुआ था दब ने K.Bua को ना कहके निकिता से कहा उसका हाथ देखने को.......

आज पता नहीं लीडर को क्या hua.......jab ये सब हो रहा था और वो बहार गया था तब उसकी नज़र निकिता पे पड़ीं thi......aisa नहीं था उसने उसको पहले नहीं देखा hai......dekha है पहले भी par.......aaj सायद ध्यान से देख रहा था........

लीडर को उसमे कुछ जाना पहचाना सा लग रहा tha......par वो इस वक़्त दर्रा हुआ भी tha.......usko समझ नहीं आ रहा tha.....ki अगर जो उसको लग रहा है वो सच hai.....to वो खुद को रोक पायेगा उसके पास जाने se.......aur अगर वो उसके पास गया और उसने वही सवाल पूछे तो क्या वो जवाब दे पायेगा.........

वो इसी में खोया था की मैंने दरवाजा खोला tha.......wo अंदर नहीं गया वो बहार hi रहा........

और वो दब हाथ में अभी भी कटोरा लिए हुए खड़ा tha......ander.......Main इसको समझ नहीं पा रहा था ये क्या कर रहा tha......Mujhe नहीं पता इस खून से भरे कटोरे से क्या hi होगा........

मैं अभी भी अपने ख्यालों में खोया था की तभी K.bua ने आके कहा......

K.Bua - wo.......wo बस सो रही hai........tumne ऐसा क्या किया.......

मैं - बस उसके अंदर जो खतरनाक शक्तियां चली गयी थी उनको बहार निकल लिया........

K.Bua - तुम ठीक ho......rukko मैं चेक करती हु तुम्हे.......

मैं कुछ कहता उससे पहले वो शुरू हो गयी.........

मुझे चेक करने एक बाद वो मुझे देख रही थी.......

मैं - क्या hua......aap ऐसे क्यों देख रही हो.......

K.Bua - तुम्हारा सरीर खुद से ठीक हो रहा है......

मैं - वो तो सबका होता है naa.....isme क्या आप भी.....

K.Bua - बहुत जल्दी हो रहा hai.......tumne कौन सी मैजिक उसे किया था.......

मैं - ये मेरा नहीं hai........sayad ये किसी और का hai.........par मुझे ये समझ नहीं आ रहा ये मेरे पास कैसे aaya.......kya जो मैं सोच रहा हु वो सही हो सकता है.......

K.bua - क्या बोल रहे हो.......

मैं - नहीं कुछ nahi......lagta है मैं थक गया hu........Aap यहाँ इनको देख लो मैं थोड़ा बहार से आता हु.......

मैं उनका जवाब सुनने बिन्ना वह से निकल गया.........

क्या ये सच में हो सकता hai......Kya मधु को सब याद hai.....kya वो ये सब बस नाटक कर रही है.......

नेक्स्ट अपडेट में देखते hai.......Nix समुदाय के लोगो के साथ लड़ाई और ये गोल्डन पावर क्यों और कैसे आया प्रतीक की मदद करने को.......
 
अपडेट - 99

यहाँ पे लिमि को बचने के बाद मैं बहार सोच रहा था आखिर kyun........kyun मधु नाटक करेगी.......

मुझसे नाराज़ है इस वजह se......agar नाराज़ होती तो जहा तक मैं उसको जानता हु wo.......sayad मैं उसको जानता hi nahi......agar जानता होता समझता होता तो आज हम ऐसे तो ना hi होते.......

इस सुनहरी रोशनी ने ना जाने कितने hi सवाल पैदा कर दिए थे मेरे दिल में बस सवाल hi नहीं एक डर भी.......

पुजारी जी - प्रतीक मुझे तुमसे कुछ बात करनी है......

मैं - हम्म kahiye......waise आपके ऊपर हमला कहा हुआ था उस जगह को देखना है मुझे........

पुजारी जी - हम्म मैं उसी के बारे में बात करने वाला tha.........Ye सब कुछ उस मूर्ति वाले ने किया hai........wo sayad......sayad हममे......

मैं - जानता हु usko......wo हममे दर्रा रहा hai......wo फ़साने वाला था mujhe.......aapko अगर अभी कुछ हो जाता तो मधु मेरे पीछे लग जाती........

पुजारी जी - हम्म अगर ऐसा है to......Main अभी आश्रम में hi rahunga.....yaha पे लोग है जो एकदूसरे को उससे बच्चा सकते है.......

मैं - हम्म बच्चा सकते hai......par सबसे बड़ी बात ये है वो यहाँ तक पहुंच चूका hai......Mujhe डर है कही उसको......

पुजारी जी - हां ये बात मुझे भी सत्ता रही thi........Madhu मुझ अनजान के लिए उस दिन सतरंगे वर्ल्ड पहुंच गयी thi.....agar उसके किसी अपने को कुछ hua.....to वो.......

मैं - हां वो चल चलने में बहुत अच्छा hai.....usne अपने कैद होने का भी फायदा उठाना शुरू कर दिया hai..........Meri डार्क पावर की तरह hi उसने भी एक शक्ति बनायीं thi.....haa वो शक्तियां बनाया करता tha.......par वो मेरे जैसा नहीं tha........jab वो उस शक्ति को बना रहा था तो वो बस मुझे दर्द देने के बारे में सोच रहा था और सायद यही वो वजह है की उसकी शक्तियां बहुत कष्ट देती hai.......Maine महसूस किया इस इंसानी शरीर में......

मैं फ्लो फ्लो में सायद ज्यादा बोल gaya.....jab इस बात का मुझे पता चला तो मैंने अपना मुँह बंद किया और उनकी ओर dekha.....par वो नार्मल the.....jaise सब जानते hai.......pata नहीं जानते है या नहीं मैं नहीं जानता......

मैं - मैं इन् सब का ध्यान रख lunga....par क्या आप आश्रम से कुछ लोगो को भिजवा देंगे मधु के परिवार को देखने के liye.......unse कहियेगा बस नज़र रखे दूर से.......

मैं इन् सब में ओल्ड आउल को लेके आ सकता था par......uske लिए अभी एक जरुरी काम tha.....aur उसके लोगो को तैयार रहना tha.....kyunki अकेले में ये होने वाला नहीं था......

पुजारी जी - हम्म ठीक है मैं इस बात का ध्यान रखूँगा......

मैं - और आपको भी अभी संभल के रहना hoga......ek बात सुनिए आप वो फलफूल वो आश्रम के अंदर hi क्यों नहीं बना लेते.......

पुजारी जी - वो दरअसल बात ये है मैं उसको वही बनाना चाहता था par.....uske वजह से आश्रम में रह रहे लोगो को दिक्कत हो सकती hai.......wo पानी हमारे लिए hi अच्छा है bas......agar उसको कोई इंसान या कोई और पीये ो वो उनको नुकशान पहुँचता hai......wo एक नशे की तरह hai......uski आदत लग जाए तो......

मैं समझ गया क्या बात thi.......Haa तभी तो वो फूल हमेशा मूर्ति के सामने चढ़ाया जाता tha....uske रस से उस मूर्ति को धोया जाता था......

मैं - हम्म फिर आपके लिए मुझे एक खास तालाब बनवानी hogi......aapne इस बारे में वह पे किसी से बात की है क्या......

पुजारी जी - मैं पहले hi अपने बहुत से लोग लेके यहाँ पे आ चुक्का hu......aur अब और चीज़ज़ों में लिए इनको परेशां karna.......mujhe सही नहीं लग रहा था........

मैं - आपको बात करनी चाहिए thi.......aur मैं मदद करवा dunga......to काम जल्दी हो jaayega......humme आश्रम में hi एक नया तालाब बनाना hoga......jalphool के liye......accha यहाँ आश्रम में कोई वैद्य है जो उस फलफूल के ऊपर शोध कर सक्के......

पुजारी जी - फलफूल के ऊपर shodh.....iski क्या जरुरत है.........

मैं - आपको क्या उस चीज़ज़ के बारे में सब पता hai.......nahi आप सब नहीं jaante......mujhe उसके बारे में हर एक चीज़ज़ जाननी hai.....aur उसके बाद मुझे उसका इस्तेमाल करना है......

अभी मैं उनसे बात कर hi रहा था की वह पे पीछे से मधु की आवाज aayi.....uske साथ दब और पंकज भी थे........

वो लगभग से भगति हुई वह पे आ रही thi.........Ab मैं जो अभी पता नहीं क्या बोल रहा tha......main भूल गया की मैं क्या बोल रहा tha.....bas उसको hi देखने लगा.......

पुजारी जी भी मदद गए और उन्होंने देखा मधु को........

पुजारी जी - Madhu......tum yaha.....kya बात है......

मधु - Wo....wo....wo paani......khatam हो गया.....

पुजारी जी - कौन सा paan........Mera दिया हुआ paani.......wo कैसे ख़तम हो gaya........agar वो गिर भी जाता तब भी तुम उसको वापस से बोतल में रख सकती ho.......phir ये कैसे....

मधु ने सब bataya......ki अचानक से उसको चक्कर आ गया और पंकज ने पास पड़े हुए बोतल का पानी उसको पिल्ला दिया......

पुजारी जी ने जब ये सुन्ना की वो पानी मधु ने पि लिया है तो उनके पसीने निकलने लग gaye......Madhu कोई सच मच की निक्स नहीं thi.....wo इंसानी शरीर में thi.....aur इस शरीर में फलफूल के रास का मिला हुआ पानी pinna......matlab दर्द hai.....betahasha दर्द.......

पुजारी जी - तुम ठीक तो ho.....kuch अजीब तो नहीं लग रहा कही दर्द........

मैंने अभी hi तो सुन्ना था की वो पानी सबके लिए सही नहीं hai.....aur जब मैंने सुन्ना पंकज ने वो पानी मधु को पिल्ला diya..........Dark पावर जैसे मेरे अंदर जलने लग गयी thi.........Main बस मधु की वजह से रुक्का हुआ tha.....warna उस पंकज को इतना दर्द देता ki.....ki मौत भी उसको उस दर्द से अलग नहीं कर पाती........

दब - अरे मैं चेक कर लेता हु naa......itna घबराने की क्या बात है पुजारी ji......paani hi तो था.....

दब मधु के पास गया और उसको अपना हाथ आगे करने को bola........Madhu ने पहले तो एक बार उसको dekha......aise कैसे अपना हाथ देदे किसी को.......

पुजारी जी - मधु इसको चेक कारण......

मैं - मैं कर लेता हु चेक उसको करने की जरुरत नहीं है.......

मेरी बात सुन्न के उसने झट से अपना हाथ उसके सामने कर diya.....ye अलग hi था कुछ.......

मधु - करो चेक.......

दब कमीना मेरी ओर देख के उसका हाथ पकड़ रहा tha........aise कौन टॉर्चर करता है भला.......

उसने सायद उसके नॉब्स देखें.......

दब - सब ठीक hai....nahi ठीक से भी अच्छा hai.......aisa लग रहा है जैसे इसके अंदर बहुत साड़ी ऊर्जा है.......

पुजारी जी और मैं इस बात को सुन्न के थोड़ा शॉक हो gaye.......Mujhe वापस से वही लगने लगा इसको सब याद है ये बस यहाँ पे नाटक कर रही hai........par सरीर तो ये इंसान का hi hai.......isme कुछ कैसे नहीं हुआ.......

मधु - पुजारी जी मैंने वो पानी खू diya.....kya मुझे वो और मिल सकता है......

पुजारी जी - मैं क्या कहु इस बारे mein......Main यहाँ पे उसी फलफूल के लिए hi भटक रहा था.......

मैं - की इनपे किसी ने हमला कर diya......tumko पता चली क्या ये baat......inpe हमला हुआ था वो तो लिमि ने इनको अपनी जान डाव पे लगा के bacchaya......aur फिर उसको मैंने......

मधु - Kya.......Pujari जी आपके ऊपर हमला हुआ tha......aur आपने ये baat......aur लिमि अब ठीक hai......kya उसी को लेके आश्रम में सब itna.......tumne मुझे बताया क्यों नहीं यहाँ क्यों लेके आ गए मुझे......

दब - अब तुमने कहा मुझे पुजारी जी से मिलना है तो पुजारी जी तो पुजारी जी hi होंगे ना लिमि थोड़ी न पुजारी जी है.......

मधु ने उसकी बातों पे ध्यान hi नहीं दिया......

मधु - आप ठीक तो hai.....aur किसने आपके upar.....kiski इतनी हिम्मत हो गयी.......

पुजारी जी - शांत हो जाओ Madhu......dekho मैं ठीक hu......wo बस स्ट्रेंज वर्ल्ड से कुछ निक्स यहाँ आये the....sayad मुझे देखा तो मुझे खुद का गुनेहगार समझ के मुझपे हमला कर दिया.......

मधु - उनकी इतनी हिम्मत हो gayi.....aur आप उनके गुनेहगार नहीं वो खुद बेवक़ूफ़ hai.....aapne उनको सब कुछ बताया और वो नहीं माने यहाँ आने को.......

पुजारी जी - अरे शांत हो jaao........Haa वो तुम्हे फलफूल के रास वाला पानी चाहिए था naa.......Main उसी के बारे में बात कर रहा था प्रतीक se......usne कहा है वो मेरी मदद कर dega......humme आश्रम के अंदर hi एक नया तालाब बनाना hoga......par उसका paani....wo किसी के पिने के लिए नहीं होगा......

मधु - इसको क्या hi पता है उस फूल के बारे में.....

दब - मुझे पता hai......main जानता हु उसके बारे में......

ये कुछ ज्यादा hi टांग अड्डा रहा था........

पुजारी जी - तुम्हे क्या पता है उसके बारे mein......batao

दब - पुजारी ji........aapko ये पता है मैं कौन hu.......phir भी आप ये पूछ रहे है......

पुजारी जी - तुम एल्फ प्रिंस हो पर इससे क्या......

दब - ये मेरी पहचान नहीं hai........ab तो बिलकुल नहीं मैंने पहले hi तय कर लिया है मैं नहीं बनने वाला वह का raja.........Meri पहचान है मेरा नेचर element.......aur ये फलफूल ये भी तो नेचुरल hi है naa.......to मुझे इसके बारे में सब पता है......

मैं - सब पता है......

दब - हम्म लगभग सब पता hai.......Main इसमें मदद कर सकता हु पुजारी जी की.......

पुजारी जी - हम्म ये सही कह रहा hai.......iska नेचर element.......usse हममे मदद milegi.......tumhe पता नहीं पर उस किताब में नेचर एलिमेंट का भी जीकर tha.......sayad इसके पूर्वजो ने hi हममे ये फूल दिया था......

मुझे नाह पता था इन् सब के बारे mein........gussa आ रहा था पर ये काम का बाँदा था मुझे इससे काम निकलवाना hi tha......hum यहाँ पे तालाब बनना सकते the......par उस फूल को वह पे लाने जाना होता humme.......agar किसी तरह ये दब हमारे बिन्ना वह जाए हुए hi काम कर दिया तो ये अच्छा होगा.......

यहाँ ये सब चल रहा था वही कुछ insan.......inn नमूनों को पता hi नहीं था की ये जो करने वाले है उसका नतीजा क्या होने वाला है...........

वह रूपल दीदी लिमि के पास thi.....sabhi के साथ की उनका फ़ोन बज्जा.........

ये फ़ोन होटल से आया tha.......naye वाले होटल से.........

हमने होटल क्रीड़ा tha.......par वर्कर्स जो the.....wo पुराने वाले hi the......ab सबको निकल नहीं सकते मैनपावर की जरुरत तो होती hi है....

उस होटल के मैनेजर का कॉल था.........

मैनेजर - मिस वो कुछ खास लोग आने वाले hai........mujhe लगता है अगर ओनर्स खुद उनसे मिले तो अच्छा होगा.......

रूपल दीदी - मैं अभी बिजी hu.....inn चीज़ज़ों को तुम खुद देख सकते हो.......

मैनेजर - मिस ये बड़ा आर्डर hai....waise भी आप दोनों को सिग्न तो करना hi होगा तो जितना जल्दी हो उतना सही है ना.......

रूपल दीदी - मुझे अभी प्रोजेक्ट के बारे में नहीं पता और तुम सिग्न करने की बात कर रहे ho........kaun आ रहा है बताओ

मैनेजर - मिस ये एक व्विप hai......aapko इसके लिए यहाँ पे आना hi hoga.....agar ये हमारे दोस्त बन गए तो होटल बहुत अच्छा chalega.......par अगर ये आपके ना आने से नाराज़ हो गए तो फिर दिक्कत हो सकती है.......

रूपल दीदी कुछ बोलती उससे पहले चची ने उनको dekha......aur पूछा कौन है.......

रूपल दीदी ने बताया नए होटल का मैनेजर है वो बोल रहा है हममे वह पे जाना होगा एक मीटिंग के liye........koi खास बाँदा आने वाला है ऐसा कुछ.......

चची - तो तुम जाती क्यों नहीं.......

रूपल दीदी - इसके लिए क्या जाना मम्मी वो मैनेजर इसी काम के लिए तो hai......ab क्या उसका काम हम करे.....

चची - तुम्हारे पापा ने बक्कर hi तुम्हारे नाम किया है होटल ko......tum दोनों jaaogi......owners हो तुम dono.....aur यहाँ पे बिज़नेस करना है तुम दोनों ko.......hum एअर्थ पे रहते hai......paise हमे भी चाहिए होते है इंसान.......

रूपल दीदी - ठीक hai.....aap भी लेक्चर देने लग जाती हो बात बात पे......

चची - Lecture......theek hai......Main तेरे पापा से बोलके ये होटल प्रतीक के नाम करवा देती hu......uske बाद तुझे वह जाने भी नहीं दूंगी.....

रूपल दीदी - बोलै ना चली jaaungi.....Main जाके निकिता को बोलती हु........

चची - हम्म jaao.......Kavita अब ये ठीक है naa.......kab तक होश में आएगी ये......

K.Bua - होश mein.....Bhabhi ये सो रही hai......isko उठाएंगे तो ये अभी उठ jaayegi.......par हमे इसको आराम करने देना chahiye......iske ेनेर्गीएस कुछ डिस्टर्बेद the.....uss वक़्त

चची - हम्म तो इसको सोने देते hai.......Tum एक काम करो तुम यही ृक्क जाओ मैं घर चली जाती hu.......mujhe सब बताते रहना सब ठीक है ना.......

K.Bua - ठीक है भाभी......

बुआ - मैं बह चलती हु भाभी मुझे काम है स्कूल का कुछ.....

गुरूजी - Poonam......aap कुछ देर रुक जाएंगी क्या मुझे आपसे बात करनी है......

बुआ ने गुरूजी की ओर dekha.....aur फिर हां कह diya......sayad वो जानती थी किस बारे में बात करनी है उनको......

वही रूपल दीदी निकिता से बातें करने बहार चली gayi......wo बहार थी इस वक़्त.......

वही होटल में.........

"जा रात को तेरी बेटी वापस मिल जायेगी तुझे......"

मैनेजर - पर मैंने तो वही किया ना जो आपने कहा tha......ab आप मेरी बेटी को छोड़ दो........

"छोड़ de......wo क्या है ना तेरी बेटी पसंद आ गयी है mujhe......aur मेरे लोगो को bhi.....to कुछ वक़्त उसके साथ बिताना hai......ab जब तक वो दो नयी आइटम नहीं आएगी तब तक तेरी बेटी से hi तो काम चलना होगा......."

मैनेजर - देखिये ये आप सही नहीं कर rahe.......maine वो सब किया जो आपने कहा tha......phir क्यों आप......

"आइए ले जाओ रे isko.......mera सर्र गरम हो रहा है इसके बातों se.......aur सुन्न जब मेरा सर गरम होता है ना तो मैं जितना बोलता हु उससे कुछ ज्यादा hi कर देता hu.........abhi रात को वापस भेजने का बोलै ना Maine......agar ज्यादा बोलै to......wo कभी नहीं aayegi.......usse बेच दूंगा जाके किसी रंडीखाने mein.......aur फिर तेरी बीवी को bhi....bhag यहाँ से...."

मैनेजर कोई बुर्रा इंसान नहीं tha........theek थक सा आम इंसान था wo......apna काम बहुत ईमानदारी से करता tha.......par आज उसको ये सब करना पद रहा tha......apni बेटी के लिए........

सुबह जब उसकी बेटी सोल्लगे को nikli......tabhi उसको किडनैप कर लिया था कुछ लोगो ne......aur फिर उसको फ़ोन करके मिलने को bulaya.....aur फिर ये सब......

वो रट हुए उस मक्कन से बहार nikla......wo कुछ नहीं कर सकता था ab........usne ना सिर्फ अपनी बेटी को मुसीबत में डाला बल्कि अब 2 और लड़कियों को bhi......wo ना तो होटल की तरफ गया और ना hi अपने घर की तरफ जाहा उसकी बीवी का रो रो कर बुरा हाल हो चूका tha......wo बस सड़क के किनारे चल रहा था......

वही रूपल दीदी और Nikita......dono निकल गए थे होटल की oor.....warna उनको और सुन्ना पड़ता......

अब इंसानो के पास जाना है तो पोर्टल से तो जा नहीं sakte......jaao और जाके आइए ठप्पा बोल do......insan है दर के मारे पता नहीं क्या हाल हो जाए उनका.....

दोनों कार से जा रहे the.....car रूपल दीदी चला रही thi......aur दोनों आपस में बातें भी कर रहे the.......ki तभी वह पास में कुछ लोगो की भीड़ लगी हुई थी जिससे उनको कार रोकनी padi.....car आगे नहीं जा सकती थी ऐसे में......

रूपल - अब ये क्या हो गया यहाँ pe.......lagta है एक्सीडेंट हुआ है कोई......

निकिता - Haa......ab हममे घूम के जाना hoga.....dusre रस्ते से......

रूपल दीदी - वह से देर हो jaayegi.....ek काम करते है आगे चल के देखते है की जाम छूटने में कितना वक़्त lagega......koi बड़ी गद्दी तो दिख नहीं रही है के ज्यादा वक़्त लगे......

निकिता - हम्म ये भी सही है आप यही रूक्को मैं देख के आती हु......

निकिता इतना बोल के कार से उतरी और चल दी उस तरफ जहा पे भेद लगा हुआ था.......

निकिता - क्या हुआ bhaiya.......ye भीड़ क्यों लगा राखी hai.....usne भेद के बहार खड़े एक आदमी से पूछा.......

"अरे ये बुद्धा aadmi....iska एक्सीडेंट हो गया है और मरने वाला है "

निकिता - kya......aur यहाँ सब के सब उसको देख रहे है.......

"ू madam.......police केस hai.....kaun जाए इन् सब लफड़ों में......"

निकिता उनको छोड़ के भीड़ को चीरते हुए आगे pahuchi.......aage उसने जो देखा वो हैरान रह गयी.......

ये उनके नए होटल का मैनेजर tha.....par ये यहाँ होटल से इतनी दूर......

निकिता के दिम्माग में ये सब आया to.....par उसने इन् सब को अपने दिम्माग से निकला क्यूंकि abhi......abhi उसकी जान बचाना ज्यादा जरुरी था.....

निकिता - मैं इनको जानती hu.......tum सब मदद नहीं कर सकते तो हत्तो यहाँ se......main इनको लेके जाती हु हॉस्पिटल.......

पहले तो निकिता ने रूपल को कॉल किया और जल्दी से कार को आगे लाने को kaha.......waise निकिता को भी थोड़ा बहुत आता था इलाज करना उसने सीखा था K.bua se......par वो यहाँ पे सबके सामने कोई चमत्कार नहीं करना चाहती thi.....wo जो करती वो इनको चमत्कार hi लगता.....

रूपल दीदी को पता नहीं था क्या हुआ hai....par निकिता के कहने पे वो कार आगे लेके आ gayi......car के आते hi सब साइड हो gaye.....Rupal दीदी ने भी देखा की कोई जमीन पे पड़ा हुआ hai....to वो बाहर आयी गाड़ी se.....wo भी अपने मैनेजर को यहाँ देख के चौक गयी thi.....wo भी इस हाल mein......abhi तो बात हुई थी उससे.......

निकिता - दीदी इनको हॉस्पिटल लेके जाना hoga.....aap मदद करो.......

निकिता ने जान बुझ के किसी और से मदद नहीं li.......Rupal उसके पास गयी और दोनों ने उस मैनेजर को उठा के कार में rakha......aur कार चालू करके निकल ली......

निकिता पीछे बैठी हुई थी.......

रूपल - ये यहाँ कैसे आ gaya.......abhi तो कॉल किया था isne......Mujhe लगा ये होटल में hi hoga.....theek है ना ये देखो पहले....

निकिता वही चेक कर रही थी......

निकिता - हम्म ये बच jayega......kuch पसलियां टूटी hai.....aur सर पे चोट लगा hai........khoon निकला है थोड़ा बहुत तो कमज़ोरी hogi......haa ये इसका पेअर भी टुटा हुआ है......

रूपल - क्या kare.......isko होश में लेके आये अभी या रहने दे हॉस्पिटल के लिए......

निकिता - अब इसको हम मिले है तो इसकी किस्मत तो अच्छी hi होनी चाहिए ना Didi......jo चीजजें टूट गयी है ुका तो कुछ नहीं पर जो यहाँ वह हो गयी है वो तो ठीक कर hi सकती हु Main......sayad अभी होश में भी आ जाए.....

रूपल - हां होश में लेके आओ isko.......mujhe इससे पूछना है ये होटल से इतनी जल्दी यहाँ पे कैसे आ पंहुचा.....

निकिता - ठीक है......

रूपल दीदी कार चलती रही वही निकिता अपने काम में लग गयी thi......wo पसलियां जो अपने जगह से यहाँ वह हो गयी थी झटके के कारण उनको वापस से सही जगह पे करने lagi......ladkiyon के पर्स के बारे में तो पता hi hai.....usme से कुछ भी निकल जाता hai......bas निकिता ने भी अपने पर्स में कुछ दवाइयां रख हुई thi......par वो इंसानो के लिए नहीं thi.......insan उन्हें लेंगे तो थोड़ी गड़बड़ हो जायेगी......

निकिता ने एक शीशी nikali....usme गोली थी ek....usne उस गोली को मसल के उसका पाउडर बना diya.....aur फिर एकदम थोड़ा sa.....bahut थोड़ा सा उसको उठाया और वो मैनेजर के मुँह में दे diya......Ye एनर्जी लेवल्स को सही करने की दवा thi.....utne से मात्रा में दी गयी उस दवा ने अपना काम शुरू kiya......jo मैनेजर अभी बेहोश पड़ा हुआ था उसके शरीर में हलचल होने लगी.....

निकिता - दीदी कार रोक दो थोड़ी देर के liye....isko होश आ रहा है.....

रूपल ने कार रोक्की और पीछे मदद के उसको देखने लगी......

थोड़ी hi देर में उस मैनेजर की आँखें खुली और उसी के साथ उसके आशु निकलने lage.......wo रोने लग गया......

मैनेजर - मेरी beti......meri बेटी.....

उसने देखा भी नहीं था वो कहा tha......kiske साथ tha....bas रो रहा tha.....wo तो मरने के लिए hi कूड़ा था एक गाडी के saamne.....aakhir क्या hi जवाब देता वो अपनी बेटी को वो उसको नहीं बचा paaya.....aur तो और......2 और लड़कियों को भी फसवा दिया....

रूपल दीदी - मैनेजर क्या हुआ आपकी बेटी को....

रूपल की आवाज सुन्नी तो उसने उस ोूर dekha.......ab 2 मुलाकात में आवाज पहचान नहीं जाते log......par चेहरे याद होते hai.....aur अगर चेहरा अपने बॉस की हो तो और भी jyada.....yaha तो पता नहीं और कितने सारे फैक्टर्स थे......

वो हैरान रह gaya.....usko बच्चन वाले कोई और नहीं वही है जिसको उसने अभी फसाया था........

निकिता - आप ठीक है naa....aur क्या हुआ आपकी बेटी ko.....kya वो बीमार hai......hum आपकी मदद कर सकते है इसमें.....

मैनेजर ने सब कुछ सच सच बताने के बारे में socha......uske हिसाब से उसकी बेटी अब बचेगी nahi......aur इससे बाद वो और कोई पाप अपने सर नहीं लेना चाहता था......

मैनेजर ने सब बताना शुरू kiya......kaise आज सुबह जब उसकी बेटी सोल्लगे को निकली तो उसको किडनैप कर लिया लोगो ne......aur फिर उसके बाद की साड़ी ghatnayein.....aur फिर वो सब हार के यहाँ आ गया सड़क के kinare.....khud को ख़तम करने को......

ये बात सुन्न के रूपल दीदी को पहले तो मैनेजर पे गुस्सा aaya.......par जब उन्होंने खुद को ऐसे किसी मुशीबत में पड़ा हुआ सोचा तो वो समझ गयी की वो भी सायद कुछ ऐसा hi karti.....apno को बचने के लिए दुसरो की जान दे देती......

निकिता भी गुस्से में thi.....par उन् लोगो पे........

निकिता - दीदी आप इनको हॉस्पिटल लेके जाओ मैं मुझे कुछ काम है......

रूपल को पता था क्या hi काम है usko.......par यहाँ पे सोचना tha.....wo दोनों डायरेक्ट जाके हमला नहीं कर सकते थे उन् इंसानो pe.......Prateek बच्च गया था क्यों की वह पे साबुत नहीं थे की किसने क्या किया hai......par ये दोनों ऐसे नहीं बचने wale.....Head ऑफिस इनके खिलाफ कुछ न कुछ जरूर एक्शन लेंगे.......

रूपल - तुम आगे aao.....aur कार chalao......main थक गयी हु.......

निकिता को समझ नहीं आया ye....par वो आगे चली गयी ड्राइविंग सीट pe......aur रूपल दीदी पीछे.......

रूपल - हॉस्पिटल की तरफ लो gaadi.....yaa छोटा मोटा क्लिनिक भी चलेगा......

मैनेजर कुछ नहीं बोल रहा tha......wo बस रो रहा tha.......ye काफी बुर्रा tha.......wo खुद के बेटी के साथ ये सब होने वाला है जान रहा था पर वो कुछ कर नहीं पा रहा tha.....itna लाचार......

रूपल दीदी पीछे आके चाचा से चाट करने lagi.....unko सब बताने लगी......

चाचा ये सब पढ़ रहे थे और रिप्लाई कर रहे the......wo भी जानते थे इंसानो के बिछ जाना बक्कर hai......Head ऑफिस उनको नोटिस दे dega......par इस waqt......notice से मतलब नहीं था unko......Manager पे गुस्सा उनको भी आ रहा था पर उसका dard......wo भी मह्सुश कर रहे थे वो......

चाचा ने रिप्लाई दिया.....

चाचा - पता करो कहा रखा है लड़की ko......aur जाओ वह pe........unko बताओ कुछ अच्छी baatein......Main सब देख लूंगा.....

दीदी को बस इसी की तो जरुरत थी.......

रूपल दीदी - Manager......kya आपको पता है आपकी बेटी को कहा रखा hai......yaa वो लोग कहा रहते है जिन्होंने आपको बुलाया था......

मैनेजर - हां मुझे पता है......

मैनेजर ने पत्ता bataya......unn लोगो का जिन्होंने उसको बुलाया था मिलने ko......par अपनी बेटी के बारे में वो नहीं जानता था.....

रूपल - अब हम आपको एक ऑटो पे छोड़ देंगे वो आपको हॉस्पिटल लेके jaayega.....Nikita कार rokko.....aur एक ऑटो बुलाओ.....

ऑटो नहीं थी टैक्सी थी एक उसको बुलाया और मैनेजर को उसमे बिठा के ड्राइवर को ज्यादा पैसे देके भेज दिया हॉस्पिटल की तरफ.......

निकिता - तो अब हम वह जाएंगे......

रूपल - हां पर जैसे वो चाहते है waise......kapde सही करो apne.....ye एड्रेस पास का hi hai......sayad हम लेट ना हो......

निकिता ने गद्दी को घुमाया और चल दिए उस मक्कन की ओर जहा से मैनेजर निकला था थोड़ी देर पहले......

10 मिनट लगे होंगे वह तक पहुंचने mein......Manager पैदल आ रहा था तो उसको ज्यादा वक़्त लगा था......

दोनों ने कपडे सही कर लिए the......Waise तो चाचा ने कहा था वो सब देखन lenge......par रूपल दीदी के दिम्माग में कुछ और भी tha.....agar िन्न्न इंसानो ने पहले हमला kiya....to हेड ऑफिस क्या स्ट्रेंज वर्ल्ड या ओरियन से आये हुए लोग भी कुछ नहीं बोल सकते......

निकिता को कार में hi समझा दिया tha......jab तक वो कुछ ना kare......humko कुछ नहीं करना है......

प्रतीक जो अभी उस जगह पे पंहुचा हुआ था जहा पे निक्स लोगो ने हमला किया tha......wo पता करने आया था वो सब है kaha......kyunki अगर एक बार ये सब उसके बस में आ सकते है तो दोबारा आना कोई बड़ी बात नहीं thi.......aur इससे पहले कुछ हो वो खुद उनको सबक सीखना चाहता था.......

प्रतीक उनके निशान देख रहा tha....aur हो ना हो वो यहाँ आस पास में किसी पानी वाले जगह पे hi honge.....Nix पानी वाली जगहों में रहना hi पसंद करते है.......

प्रतीक - ज्वाला यहाँ आओ......

ज्वाला तुरंत वह चला गया........

प्रतीक - Jwala.......Earth पे कुछ निक्स आये हुए hai.......jo यहाँ के लोगो के लिए खतरनाक hai......mujhe उनका पता चाहिए........

ज्वाला ने कुछ नहीं कहा उसने उसकी बात सुन्नी और वह से निकल गया अपना काम करने को.......

प्रतीक खुद भी निशानों को देख रहा tha......ki वह पे मधु आ gayi.......Pankaj के saath.......sukar है दब नहीं aaya......wo इस वक़्त पुजारी जी के साथ था......

पङकज - प्रतीक यही है सायद इसको कुछ पता चला हो वो कहा गए hai......hum उनतक जल्दी पहुंच जाएंगे.......

मधु - मैं खुद धुंध lungi......mujhe उसकी मदद नहीं चाहिए......

पंकज - :सिघ: वो भी यही काम कर रहा है हम भी वही करने वाले है अगर एक दूसरे की मदद करे तो काम आसान हो jaayega......tumhe याद है इसने हुम्म्मे उन् कीड़ों से बच्चया था.....

मधु - तो kya....bacchaya था उससे इस बात का क्या लेना देना......

पंकज - वो तुरंत हुमतक पहुंच गया था सायद आज भी वो जल्दी hi उनतक पहुंच जाये......

मधु - वो वही पास में tha....tab आया था jaldi.....aur इसको देख के तो यही लगता है इससे कुछ नहीं hoga......dekh रहे ho.....kaise घूर रहा है जमीन को.....

पंकज - वो निशान देख रहा है जो हम भी देखने आये hai.......tumhe नहीं जाना मत जाओ मैं जा रहा हु उसके पास......

मैं अपना काम कर रहा था की एक निशान पे वो पंकज आके खड़ा हो gaya......ye साला बस काम बिगड़ता है मेरा.......

मैं कुछ बोलता उससे पहले वो बोलै......

पंकज - प्रतीक हम भी उनको hi धुंध रहे hai......hum तुम्हारी मदद करे क्या.......

मैंने बस उसको hi देखा था मधु को नहीं........

मैं - नहीं मैं अकेला hi कर lunga......tum जाओ.....

"ये क्या तुम्हारी जमीं है तो जाओ कहा isko......hum यही rahenge.....aur तुमसे पहले उनको dhundhenge......dekh लेना...."

किस्मत hi ख़राब hai.....ye जब भी मेरे पास आती है नाराज़ होक hi जाती है......

मैं कुछ कहता उससे पहले मेरे पास जो फ़ोन था वो bajja.......Chacha का फ़ोन था......

मैं - हां hello.....

चाचा - बीटा वो उस दिन हेड ऑफिस से वो आदमी घर आया था याद है वो आदमी......

मैं - हेड ऑफिस se.......wo मोटा आदमी....

चाचा - हां wahi.......Tumhe उसके पास जाना है अभी.....

मैं - पर चाचा अभी मैं किसी काम में फसा हुआ हु......

चाचा - बीटा जरुरी नहीं होता तो तुमसे नहीं कहता मैं और तुम्हारे दादा बिजी है और चची कॉल नहीं उठा रही hai......tum चले jaao.....bas उससे मेरी बात करनी है तुमको......

मैं - मैं कुछ समझा नहीं आप इसके लिए कॉल कर सकते हो ना उसको......

चाचा - Nahi.....ye थोड़ा अलग मटर hai.....tum जाओ वह pe......aur वह पहुंच के मुझे कॉल करो फिर मैं सब बताता हु.....

मैं - ठीक है.....

अब मुझसे काम करने को कहते नहीं ye.....iss बार कहा है कोई तो वजह होगी तो मैं भी चल diya......waise भी ज्वाला देख hi रहा था उसको......

वह पे मधु और पंकज को वैसे hi छोड़ मैं उस मोठे आदमी के पास पहुंच गया......

वही रूपल दीदी और निकिता जो अभी पहुंच चुक्की थी उस मक्कन mein.....wo वह बैठी हुई थी सोफे pe......waha के लोग थोड़े चौके जरूर the......meeting होटल में होने वाली थी और ये दोनों इस मक्कन में आये हुए the.....ye अजीब नहीं है क्या......

पर अजीब के साथ साथ अच्छा भी तो hai.....Hotel में लोग देख सकते थे केस वगेरा hote......yaha पे सब अपने hi है.......

"आप दोनों yaha.......meeting तो होटल में......"

निकिता - वो मैनेजर ने कहा की आप कुछ जल्दी में hai.......to उन्होंने इस जगह के बारे में बताया और हम यहाँ आ गए......

"मैनेजर ne......(muskurate हुए) हां जल्दी में तो है hum.....par मुझे ना ये मीटिंग वगेरा नहीं आटा करना ये सब हमारे बड़के भैया का काम hai.......MLA है यहाँ ke......jaanti hi होंगी उनको....."

रूपल - तो क्या हममे उनसे मिलने जाना होगा ab......Humme भी काम hai....agar हो सक्के तो आप hi बता de.....kya करना है हम सोचेंगे उसके बारे में.....

"करना hai.....haa करना hi तो hai.......aeee पेपर्स लेके आओ रे....."

एक आदमी तुरंत पेपर्स लेने चला गया.......

निकिता - Papers.....kaise पेपर्स.....

"अरे मैडम रूक्को to.....aa hi तो रहा hai.....pahle आप उसपे सिग्न कर दो फिर हम आप दोनों पे अंगूठा लगा देंगे....."

रूपल - क्या मतलब hai......hum कही सिग्न नहीं करने वाले.......

"बिन्ना मालिक के सिग्न के प्रॉपर्टी बिकती नहीं है naa......to सिग्न तो करना hi होगा....."

निकिता - तो तुम वो होटल के लिए आये ho.......hum नहीं बेचने वाले usko......chalo दीदी यहाँ से.....

"ू Didi......chalo यहाँ से बोलके यहाँ से निकल जाना आसान नहीं hai......aap अपनी मर्जी से यहाँ तक आये hai....ab जब तक हमारा मैं नहीं भर जाता यहाँ से नहीं जा सकती....."

रूपल - मैं नहीं भर jaata.....kya चाहते हो tum.....tumhe पता नहीं हम कौन है......

"आपको पता नहीं हम कौन hai.....aap जो यहाँ पे अपने मैनेजर के कहने पे आयी है naa......uski बेटी उठा ली humne.....aur अब आप भी उसी के साथ रहोगी....."

निकिता - तो क्या वो यही है.....

"हां यही है बैडरूम mein.....Main बस जाने hi वाला था की तुम दोनों आ gayi......ab म्हणत थोड़ी ज्यादा लग jaayegi.....par कर लेंगे...."

निकिता - हां म्हणत तो लगेगी थोड़ी jyada......par हम मेहनती hai.......leke चले जायेंगे usko.....Didi मैं देख आऊं उसको आप इनको देख लेना.......

रूपल - हां जाओ jaao......yaha मैं देखती hu.......ab कोई भी आएगा उसको ये तो दिखेगा hi शुरुवात इसने करि है.....

निकिता - पर ये तो बातें hi कर रहा है ना.....

रूपल - हां तो हम भी रेस्पेक्टेड लोग hai.....inki बातें कैसे sunle.....inhone हमे ऑफेंड किया hai......tum जाओ जाके देखो वो ठीक है की नहीं इनको मैं डेक्टि हु.......

"aaeeii......dono की डुबो पागल है sayad.......pakdo इनको "

निकिता तो चल दी आगे रूम्स की तरफ देखने को की कहा है मैनेजर की beti......tabhi एक बाँदा उसके सामने आ गया उसको पकड़ने को.......

निकिता - मुझे pakdoge......accha......itni ताक़त है तुममे.....

वो बाँदा आगे बढ़ा उसको पकड़ने के लिए की तभी निकिता ने अपने पेअर से उसके पेअर पे मार diya....jisse उसका बैलेंस बिगड़ gaya......lekin वो गिर्रा nahi......uska चेहरा जमीं से 8-9 इंच ऊपर रहा hoga.....picche से निकिता ने उसके बाल पकड़ लिए थे जिसकी वजा से वो नहीं gira.....par फिर आवाज आयी.....

निकिता ने एक हाथ से उसका हाथ पकड़ा हुआ था और दूसरे हाथ से एक जोर का मुक्का उसके पीठ पे diya.....jiske बाद उस बन्दे के बाल निकिता के हाथ में रह गए और वो निच्चे गिर gaya....force काफी ज्यादा tha.......to सर फट गया था और हड्डी भी टूट गयी थी......

"देख क्या रहे ho.....ab क्या लड़कियों से pitoge.......kya मुँह दिखाऊंगा मैं बड़के भैया ko.......ye दोनों पकड़ी नहीं गयी तो तुम सब को मैं मार दू......"

रूपल दीदी ठीक उसके सामने चली gayi.....wo भी पालक झपकते hi.......

रूपल दीदी - बहुत बोलता है तू.......

फिर उसकी आँखों में देखते hue......usko कहा की तू अपने हाथ से अपनी जीभ काट के उसको खायेगा.......

ये हिप्नोटिस्म की तरह tha......par यहाँ आपको सब पता होता है आप क्या कर रहे hai.....aur आप लाख कोशिश करने के बाद भी वो चीज़ज़ करने से खुद को रोक नहीं sakte.......pass में सरब की बोतल पड़ी हुई thi......uss बन्दे ने खुद अपने हाथों से वो बोतल todda.......kuch लोग थे जो सोच रहे थे वो लड़की को मार dega.....unki आँखें फटी रह गयी जब एक हाथ में बोतल लिए वो बाँदा दूसरे हाथ से अपना मुँह डब्बा रहा tha.....ki बोतल उसके मुँह में ना चला jaaye.....par अगले hi pal.....dusra haath.....wo उसका मुँह खोलने लग gaya.....aur उसके जिन्ह को बहार खिंच liya......fir दूसरे हाथ में पकडे हुए सरब की बोतल के टुकड़े से उसने अपना जीभ काट liya......wo चीख रहा tha.....par उसके हाथ लगे हुए थे काटने mein......Waha पे सब के सब स्कॉकेड the......jinke पास हथियार the....unnn सब ने तो ये देख के उन् हथियरों को फ़ेंक diya.....kahi इस लड़की ने उन्हें ऐसा करने कह दिया तो......

निकिता आराम से हर एक कमरे को देख रही thi.......kuch hi कमरे बच्चे हुए the.......ki तभी उन् गुंडों में से एक खुद एक कमरे में चला गया और उस लड़की को लेके आ gaya.....sayad उसने सोचा होगा उसको अपनी ढाल बना के यहाँ से निकल jaayega.....par अगर रूपल ने उसको बोल दिया चक्कू खुद को मार lo....to wo....wo क्या करता......

"ये lijiye....ye रही ladki.....humme jaane.....nahi मुझे जाने dijiye.......main किसी को कुछ नहीं बताऊंगा......"

रूपल - वो तो इसको यहाँ लाने से पहले सोचना था ना.......

वह मैं जा पंहुचा था मोठे आदमी के pass........wo मुझे देख के चौक गया.......

वो - क्या बात है आज तुम यहाँ आये हो.......

मैंने कुछ नहीं kaha.....apna फ़ोन निकला और चाचा को कॉल किया.......

मैं - Hello chacha.....lijiye बात करिये......

मोठे आदमी ने फ़ोन लिया.......

वो - हां Hello....aapne इस्को यहाँ......

...........

वो - जी कुछ हुआ है क्या.......

,,,,,,,,,,,,,,

वो - पर इसमें.......

...........

पता नहीं क्या कह रहे थे चाचा उसको उसकी हालत ख़राब सी होती जा रही थी......

वो - ठीक hai......Main जांच करने वालो को संभल लूंगा......

उसके बाद उसने फ़ोन मुझे देदिया.....

मैं कुछ बोलता उससे पहले hi......

चाचा - काम हो गया hai......ek एड्रेस दे रहा hu.....waha पे चले jaao....aur रूपल और निकिता की थोड़ी मदद कर देना......

मैं - कुछ हुआ है क्या Chacha.....wo दोनों ठीक है ना.....

चाचा - अरे वो ठीक hi hai......wo बस वह से पिक करना है तुम्हे unko......aur घर लेके जाना hai......Main वही मिलूंगा......

मैं - ठीक है.....

मैं वह से निकलने लगा......

मोटा आदमी - सुनने Prateek......aage से कोई बात हो तो मुझे फ़ोन करना यहाँ पे आने में परेशानी होगी ना......

उसने अपना कार्ड मुझे दे diya.......maine ले लिया और वह से निकल gaya......ab मुझे एक कार चाहिए thi......pick करने के लिए दोनों ko......par एड्रेस के साथ साथ ये भी लिखा था कार वही पे है.......

ये मुझे वह भेज hi क्यों रहे the.....bada अजीब hai....jab कार वही है तब क्यों.......

मैं गया वह pe.......portal se......aur जब पंहुचा तो वह पे एक मक्कन से निकिता और रूपल दीदी बहार आ रहे the.....dono ने एक बेहोश लड़की को उठा रखा था......

मैं - ये क्या कर रहे हो तुम दोनों....

रूपल - तू यहाँ क्या कर रहा है.......

मैं - मुझे चाचा ने भेजा आपको सीधे घर ले जाने के लिए......

रूपल दीदी और निकिता एक दूसरे को देखने lage......sayad वो इस लड़की के बारे में सोच रहे the.....waise मैं भी सोच रहा tha,....par उन्होंने कहा था सीधे घर लेके aao.....sayad वो इस लड़की को देखना चाहते the......yaa पता नहीं क्या......

मैं - चलिए ab......isko भी लेके चलते है वैसे भी बेहोश hi है......

दोनों को सही लगा ये और बैठ गए वो कार mein......main कार चलने laga....aur हम सीधा घर जाके रुक्के.......

घर पे पहले से hi सब आ चुक्के the....Leemi जाग गयी thi......ab वो पहले से भी ठीक thi.....usne लगभग मौत को छू लिया tha....aur जिन्दा बच्च आयी थी......

ये बात स्ट्रेंज वर्ल्ड में भी पहुंची thi.....Lemmo लिमि का भाई जब उसने ये सुन्ना तो वो वह से यहाँ आने को निकल गया था.......

नेक्स्ट अपडेट में निक्स की लड़ाई और साथ में डार्क वर्ल्ड वालो से mulakat.......abse पहले वही मिलेंगे इन् प्रत्येक से
 
अपडेट - 100

हम घर आ चुक्के थे मैनेजर की लड़की हमारे साथ thi........Chacha जी को इस बात की चिंता थी की कही इसने वह कुछ सुन्न ना लिया हो या देख ना लिया ho.......iss वजह से उसको यहाँ पे लेके आने को कहा गया था humko.......usko चेक करना था की सब सही है या नहीं.......

K.Bua लिमि के पास से घर आ चुक्की thi......Chachi पहले से घर में thi.....unhone भी जो कुछ हुआ उसके बारे में sunna.......unko गुस्सा आ रहा था पर उन् लोगो से ज्यादा उस मैनेजर पे जिसने उन् लोगो को मदद करि.......

मज़बूरी चाहे कैसी भी रही ho......par उसने जो kiya......wo चची के नज़र में गलत hi था.......

चची - उस इंसान को नौकरी से निकल दिया jaayega......aur आगे se.....usko हमारे किसी भी तरह के बिज़नेस में नहीं रखा jaayega........usne मेरी बेटियों का सौदा किया है.......

रूपल दीदी - मम्मी आप क्या बोल रही ho........uski अपनी बेटो भी to.......haa मैं भी जानती हु उसने गलत किया par......aise.....

चची - कोई ऐसे वैसे nahi......wo अपने काम के प्रति ईंमानदार नहीं raha......kal को उसके घर कोई और परेशानी हो रही होगी तो वो हमारे होटल को बेच dega......yaa वह के सम्मान को......

रूपल - आप कुछ ज्यादा नहीं सो.......

चाचा - नहीं तुम्हारी मम्मी सही कह रही hai......hum माफ़ नहीं कर सकते usko......usne तुम्हे सब कुछ बता दिया और तुमने वह जाने का फैसला लिया उसकी बेटी को बचने के लिए इस वजह से मैंने भी इस बात को आगे बढ़ने नहीं diya.....agar तुम उसी वक़्त उसकी बेटी को वैसे hi छोड़ने का सोचती तो मैं कुछ भी नहीं kahta.....haa थोड़ा बुरा लगता पर मैं कुछ भी नहीं kahta.....kyunki इन् सब से डायरेक्टली हमारा कोई लेना देना नहीं tha.......Naukri से तो वो जाएगा hi....chahe कुछ भी हो......

हम सब सुन्न रहे थे उनकी baatein.....aur कही ना कही मुझे भी ऐसा hi लग रहा tha.......usne एक तारतः से अपने मालिक को धोखा दिया tha......ab अगर कभी ज्वाला मेरे साथ ऐसा कुछ karta......Main उसकी बात सुनता और अगर वजह जायज होती तो सायद उसकी मदद karta.....par उसके बाद सज़्ज़ा भी देता.......

यहाँ चाचा चची अपनी बातें बता रहे थे वही उस लड़की को K.Bua चेक कर रही thi........jab उनको पक्का याक्किन हो गया की उस लड़की को कुछ नहीं हुआ hai.....bas बेहोशी की दवा के कारण बेहोश है तो उन्होंने उस हेड ऑफिस वाले मोठे आदमी को कॉल kiya.....aisa करने को चाचा ने hi कहा था unse......unki सायद इसको लेके भी बात हुई थी.......

थोड़ी hi देर में घर की घंटी बजी और दरवाजा खलने पे कुछ लोग दिखे......

K.Bua - 2 लोग काफी honge.....mahilayein hi bas.......isko चेक कर लिए hai......koi गड़बड़ नहीं hai.......hamari वजह से इसके साथ कुछ बुरा भी नहीं हुआ hai......Isko इसके घर के पास छोड़ dena.....aur रूक्को.....

K.Bua ने एक पर्ची भी दी unko.....usme कुछ लिखा हुआ था.......

K.Bua - मैंने इसके यादों के साथ कुछ किया hai.....to उस हिसाब से hi ये जवाब degi.....agar कुछ गड़बड़ लगे तो इसको देख लेना........

K.bua ने सबको सब bataya.....uske बाद दो लेडीज अंदर आयी और उस बेहोश लड़की को उठा के चल दिए वह से.......

चची - Rukko....ek minute........Rupal......Nikita......jaao जाके पेपर्स बनवाओ और इसको लेके इसके घर jaana.......aur तुम sab....uss घर को साफ़ karao.......koi साबुत नहीं होना चाहिए waha.......Pata नहीं उसने तुम सब को यहाँ पे इस लड़की के लिए क्यों भेज diya.....usko तो पहले वो घर साफ़ करना था......

चची उस मोठे आदमी के बारे में बोल रही thi.......aur वो रुक्की नहीं उन्होंने कॉल कर दिया usko.....aur उससे पूछा की क्या वो घर साफ़ हुआ hai......waha पे किसी अजीब चीज़ज़ होने का सुराग तो नहीं है......

मोठे आदमी ने बताया वह पे काम चालू hai......par उसमे थोड़ा वक़्त लगेगा.......

चची ने जब ये सुन्ना तो उन्होंने उसको एक सलाह di.....aur अपनी बात बताई की उसको वह पे इन् सब को भेजना चाहिए काम जल्दी हो जाएगा और इस लड़की को रूपल और निकिता खुद पंहुचा देंगे वह पे.......

मोठे आदमी ने अपने कुछ लोगो को हमारे यहाँ इस वजह से भेजा था की कही हमारी वजह से उसको कोई नुकसान ना पहुंच jaaye......par अब जब चची ऐसा कह रही थी तो उसने अपने लोगो में से एक को छोड़ के बाकी सब को वह से जाने को कह diya.....ye एक बस सब चेक करने के लिए था.......

वही रूपल दीदी ने होटल के फाइनेंसियल सेक्टर को कॉल किया और उनको मैनेजर को बहार निकलने की तैयारी करने को kaha.......kuch नियम होते है जैसे.....6 महीने की सैलरी और पता नहीं क्या kya......wo सब करने को kaha......waise ये सब मैजिक से हो सकता tha.....par बेकार में क्यों hi करे मैजिक use......aur भी वजह थी मैजिक ना उसे करने की.....

वह सारे पपरवर्क्स होने लग gaye.....wahi रूपल दीदी और निकिता खुद भी मेरे साथ होटल की ओर चल di.....uss लड़की को लेके.....

वह पे पहले तो हम तिण्णो hi ऑफिस में gaye......aur उस लड़की को उठा के मैंने एक रूम में सुल्ला diya....aur वह पे एक लेडी को रुकने को bola.....ki जब वो जागे तो हममे बता दे......

हम तिण्णो ऑफिस में आके बैठे हुए थे......

रूपल दीदी - तो आगे का क्या सोचा है प्रतीक.......

मैं - Aage.......bahut कुछ सोचा है और वो सब करना भी hai.....par सबसे पहले तो इन् निक्स लोगो को सबक सीखना hai.......ye जो यहाँ पे आये हुए hai......inhone आज पुजारी जी पे हमला करने के बारे में सोचा hai.......kal ko.....kal को कही हममे से एक पे या फिर मधु के फॅमिली पे किया to.......Hum तो संभल lenge......par.....wo कैसे.....

रूपल - हम्म ये सोचने की बात hai......tumhe उनको भी प्रोटेक्ट करना होगा.......

हम सब फिर ऐसे hi बातें करने लगे.......

Wahi......yaha से dur......matlab सहर तो यही tha........Dark वर्ल्ड के log......wo बहुत निराश the......unke हिसाब से अगर ये नयी और ताकतवर शक्ति वाला जो कोई भी tha....agar उनसे दोस्ती कर le....unki मदद कर de....to डार्क वर्ल्ड एक बार फिर से अपने अच्छे दिंनो में वापस जा सकता tha....jaha पे वह के बच्चो को कहने के लिए लड़ना नहीं hoga.....aur वह के हालत भी अच्छे हो जाएंगे......

वो लोग वापस से उसी जगह पे जा पहुंचे थे जहा पे प्रतीक ने अपनी पावर का उसे किया tha.......par इस baar.....iss बार उनको कुछ और भी मिला tha.....ab इसको क्या कह सकते है संजोग......

जो इतनी दुर्र से मैंने लिमि के अंदर से वो खतरनाक एनर्जी बॉल बहार निकल के खिड़की से बहार फेंका tha......wo जाके उसी जगह के पास में गिरा जाहा pe......jaha पे मैंने अपनी पावर्स उसे करि thi......aur उसी जगह पे वापस से डार्क वर्ल्ड के लोग आ पहुंचे the.....wo लोग यहाँ वह देख रहे थे की उन्हें कुछ नया सा महसूस hua.....koi नयी urja.....aur वो सब उसके पास जाने लगे......

उस एनर्जी बॉल के एक पेड़ पे लगने से वो ped......ekdum से सुख गया tha......agar कोई बच्चा भी एक मुक्का उसको मार देता तो वो टूट जाता waisa........wo सब उस पेड़ के पास जा pahuche.......ab इसको भी संजोग hi कहेंगे naa.......wo पेड़ बिलकुल उस जहाज से 4 कदम दूर था जहा पे चची ने पोर्टल खोला tha.......wahi पोर्टल जिससे वो वह आयी थी और मुझे अपने साथ लेके गयी थी..........

पोर्टल के ुकदे वही पैर the.....par चुक्की ये उस जगह से थोड़ा दूर था जहा मैंने पावर उसे किया था तो वो सब के सब वह नहीं गए थे देखने को .....ना तो ओरियन वाले और ना hi टाइटन wale.....yaa कोई भी aur.....kyunki उसके टुकड़ो से ज्यादा एनर्जी नहीं निकल रहा था तो पता नहीं चल रहा tha.......wahi जब वो लिमि वाली एनर्जी बॉल वह गयी तो उसकी एनर्जी के वजह से ये वह आपहुचे और इनमे से एक को उस पोर्टल का एक टुकड़ा मिला......

वो उस टुकड़े को देख रहा था की उनमे से hi किसी एक ने उस पेड़ को हलके से चुवा और वो टूट के निच्चे गिर gaya......jisse बाकी के tukde......yaha वह बिखर gaye.....wo तो अच्छा था एक टुकड़ा उन्होंने अपने पास रख लिया था......

उस एक बन्दे ने सबको ये बात बताई......

वो सब उस टुकड़े को लेके वह से चल diye......Ye लोग जितनी बार भी कही पहुंचते the.....waha पड़े सारे सबरतों को ख़तम कर देते the......nahi बिखेर देते the.....jisse दुसरो को कुछ ज्यादा पता नहीं लग पता tha.......pata नहीं जान बुझ के करते थे या

यहाँ ये लोग प्रतीक से मिलने के लिए एक और कदम पास आ चुक्के थे वही हम तिण्णो अभी भी बातें कर रहे थे........

रूपल दीदी पूछ रही थी की मैं यहाँ करूँगा क्या.......

मैंने उनको अपने सारे प्लान्स बताये की मैं भी सोल्लगे में उसके साथ रहूँगा और मौका ढूंढूंगा उसके और करीब जाने का.......

हम बातें कर hi रहे थे की वो लेडी ने इण्टरकॉम पे कॉल kiya........wo बता रही थी की वो लड़की जाग चुक्की है पर बहुत दर्री हुई है और रो रही है......

हम तिण्णो उसके रूम की ओर चल पड़े......

जब वह पहुंचे तो मैंने देखा वो लेडी उसकी पीठ सहला रही thi.....aur वो लड़की कांप रही थी सायद डर के maare.......Humme नहीं पता था उसको कैसे लेके गए थे वो log......aur ना hi इस लड़की के बारे में कुछ पता था की ये कैसी है ये sab......bas यही तो जानते थे की ये मैनेजर की लड़की है बस.......

उसको वैसी हालत में देख के दीदी सबसे पहले उसके पास gayi.....aur उस लेडी को जल्दी से पानी और खाने के लिए कुछ हल्का फुल्का लाने को कहा......

लेडी तुरंत वह से चली गयी......

रूपल दीदी - आराम se......tum ठीक ho.....kisi ने कुछ नहीं kiya.....tum बिलकुल ठीक हो......

वो लड़की हद्द से ज्यादा दर्री हुई thi.......usne एक बार भी खुद को देखा hi नहीं था बस रोने लग गयी थी......

रूपल - तुम हमारे होटल में ho......yaha पे तुम्हारे पापा काम करते hai.....dekho.....sab सही है.....

इतने में वो लेडी पानी और जूस दोनों लेके आ गयी thi....saath में कुछ फल और नमकीन था.....

निकिता ने वो लिया और उस लड़की के पास जाने lagi......Ladki ने जब अपने पापा के बारे में सुना तो वो और रोने लग गयी.......

जब उसको किडनैप कर रहे थे तब उसके पापा के बारे में hi तो बात कर रहे the.......usko सायद ऐसा लग रहा था िन्न्न सब ने उसके पापा को मार diya.....yaa कुछ कर दिया है......

रूपल दीदी ने जब देखा वो चुप हो hi नहीं रही thi.....to उन्होंने उस लेडी से मैनेजर के यहाँ फ़ोन करने को kaha......aur इसके फॅमिली को यहाँ बुलाने को कहा......

मैं उस लड़की को देख रहा tha.......wo इतनी दर्री हुई thi......ki मुझे एक पल को ऐसा लगा जैसे उसके अंदर मैंने डार्क पावर दे दिया ho.....jisse वो दर्द से तड़प रही hai.....aur डर रही है.....

मैंने अपनी पावर को बहुत उसे किया hai.....par कभी bhi......kabhi भी उसके काम करने के तरीके के बारे में नहीं सोचा tha.....naa जाने कितने लम्बे वक़्त से मैंने इसके बारे में सोचने की जरुरत hi नहीं समझी की ये किसी के अंदर जाके कैसे उसपे असर करता hai......aaj इस लड़की को देख ke......main ये सोचने पे मजबूर हो गया,,,,,,,

रूपल दीदी और निकिता ने लाख कोशिश करि उसको सँभालने की पर वो बस रोटी hi rahi......haa बस अब वो डर नहीं रही थी humse......mujhse पता नहीं पर उनसे तो नहीं डर रही थी......

रूपल दीदी ने उसको पानी पिलाया और फिर जूस भी pilaya......wo सुबकते हुए उसकी पी रही थी......

थोड़ी hi देर में वह पे मैनेजर के घर से 2 औरतें aayi....ek बुजुर्ग लग रही वही दूसरी उनसे छोटी......

जब वो वह aaye.....aur उस लड़की को वह dekha......ladki वापस से जोर जोर से रोने लग गयी और वही वो दोनों औरतें भी......

रूपल - आप दोनों......

लड़की ने बताया की वो उनकी माँ और दादी hai......aur वो दोनों उसके पास आ गए the.....aur रोना चालू hi रहा......

रूपल दीदी - ये ठीक है इसको कुछ नहीं हुआ hai....aap अब रोना बंद karo.....nahi तो ये भी रोटी रहेगी......

उसकी दादी और माँ को भी ये सही laga.....wo बस इसी बात से खुश थे की उनकी बच्ची ठीक hai......kuch नहीं हुआ है उसको....

उन् दोनों ने भी फिर उस लड़की को चुप करने में लग gaye.......ladki ने भी जब अपनों को अपने पास देखा तो वो शांत होने लग गयी thi....par ज्यादा देर नहीं......

वो यहाँ पे thi.....apne पापा के होटल mein......aur उसके पापा वह पे नहीं the.....jab ये बात उसको याद आयी तो वो हममे देखने लग गयी......

मुझसे नाह पर उसने रूपल दीदी से पूछा......

लड़की - पापा कहा hai......wo लोग बोल रहे थे उनके बारे mein.....wo ठीक है ना......

रूपल दीदी - हां वो ठीक hai......tum रुको मैं उन्हें यहाँ बुलाती हु......

रूपल दीदी ने मुझे dekha....aur बहार बुलाया......

मैं - हम्म....

रूपल दीदी - मैं उसका नंबर तुम्हे दे रही hu......uske पास जाओ उसको कुछ चोट लगी thi......usko यहाँ पे लेके aao.....agar वो आने के हालत में ना हो तो मुझे कॉल करना हम इनको वह लेके चले jaayenge.....aur किस बारे में सोच रहे ho.....ye अजीब सो सकल क्यों बना राखी है.....

मैं - नहीं मैं बस किसी चीज़ज़ के बारे में सोच रहा tha......sayad मुझे कुछ और चीज़ज़ों पे भी काम करना hoga......Main आता हु उसको देख ke.....aap जाओ अंदर......

मैंने पहले तो उस नंबर पे कॉल kiya.....aur किसी ने नहीं uthaya.......phir से तरय करने पे किसी ने उठाया.....

मैं - Hello.....

दूसरे तरफ से एक औरत की आवाज आयी......

वो - आप जिसको फ़ोन कर रहे है उनका एक्सीडेंट हुआ tha.....wo अभी एडमिट hai.....aap उसके जानने वाले है तो इस हॉस्पिटल में आ जाइये.....

ये सायद वह की कोई नर्स thi.....yaa कोई दूसरी काम करने wali......Maine उससे एड्रेस पूछा और फिर मैं चल दिया वह पे देखने को उसको.......

यहाँ डार्क वर्ल्ड वालो ने स पोर्टल के टुकड़े को अच्छे से देखना शुरू कर दिया tha.....aur वो उसको वापस से बनाने की कोशिश कर रहे the......jisse उनको पता चल जाएगा की वो पोर्टल कहा से खुल्ला और कहा पे बंद hua......tukdo से ये पता चल जाता है......

वो इसी काम में लगे हुए the......unko नहीं पता था ये सही है या galat....par वो ये तो जानते the.....kuch ना करने से अच्छा है कुछ कर के dekhna.....agar वो बाँदा जिसके पास वो अजीब सी पावर्स है वो वह पे आया था तो किसी ना किसी तरह से hi आया hoga....sayad इसी पोर्टल se.....yaa गया होगा इसका इस्तेमाल karke....isse वो उस तक पहुंच hi सकते है.....

वही दूसरी oor........wo सारे Nix......jo उस मूर्ति में कैद बन्दे के वश में the......wo वापस से उसके वश में चले गए the.......darasal जब उन् सब ने पुजारी जी पे हमला किया और लिमि घायल हो गयी थी उसी वक़्त की बात है वी मूर्ति वाला बाँदा सो गया tha......Murti के अंदर से वो अपनी पावर्स का ज्यादा उसे नहीं कर पा रहा tha.....aur थक जल्दी जा रहा tha.....ye फलफूल ना लेने के वजह से भी था......

फलफूल उसके लिए दोनों the.....zaher भी और दवाई bhi.....naa लो तो भी नुकसान है और लो तो bhi.......kyunki उसको आदत जो बननी हुई थी उसकी......

जब वो जाएगा और उसको खबर मिली की पुजारी को कुछ नहीं hua.....to उसको बहुत गुस्सा aaya.....usne फिर से अपनी शक्तियों का उसे किया और वापस से जो भी निक्स जो उसके तरफ the.....Earth पे आये थे उनको अपने वश में कर liya......aur वापस se.....unko पुजारी जी के पीछे भेज diya......usko बस यही पता था वो नकमियाब हुए the.....aur पुजारी जी के जगह किसी और पे हमला कर aaye......par इससे उसका प्लान शुरू भी नहीं हुआ......

उसने ये सब मुझे एक वार्निंग देने के लिए किया tha......ab उसको ये पता hi नहीं था की मुझे पता चला हाउ या नहीं उसके लोगो के यहाँ आने के बारे में.....

तो उसने वापस से हमला करने को कहा unse......aur वो सब भी जब उसके काबू में आ चुक्के थे तो बस तैयार हो gaye....aur कोई रास्ता तो था नहीं......

पर इस बार पुजारी जी आश्रम में hi the.....wo बहार गए hi नहीं the......to ये सब बस मौका देख रहे थे की कब वो बहार आये और कब ये सब उनपे हमला करे.........

मधु जो की उसी जगह पे थी जहा पे पुजारी जी पे हमला हुआ tha......wo तब से वही पे thi........waha पे कुछ धुंध रही थी जिससे उसको पता चल सक्के की वो लोग कहा गए.......

ज्वाला भी उन् सब को धुंध रहा tha......par वो सारे के सारे चुप्पे हुए the......koi पानी में तो कोई कही aur......jiss वजह से वो उन्हें धुंध नहीं पा रहा tha.......par जब वो सब बहार nikle.......tab झट से ज्वाला को पता चल gaya.....par उसने मुझे नहीं bataya.....wo ये देख रहा था की ये सब कही न कही जा रहे hai......to सायद वो मुझे सीधा वही के बारे में बताने वाला था......

अब ये सारे के सारे वापस से उसी जगह पे जा पहुंचे the......jaha पे इन्होने हमला किया tha.....wo जगह आश्रम से थोड़ी दुरी पर थी और वह पे आश्रम से लोग आते जाते रहते the......sayad ये निक्स जो अभी उस मूर्ति वाले के काबू में the....inka दिम्माग अटक सा गया tha......ye शुरू वाले प्लान पे hi चल रहे the.....ki वो वह वेट करेंगे और कुछ पुजारी जी का पीछा करेंगे और फिर इस जगह पे हमला कर देंगे......

आखिर क्यों कोई वापस से उस जगह जाएगा जहा पे उसपे हमला हुआ tha......aur वो भी हमले के कुछ घंटे baad.....haa अब अगर उसको बदला लेना होता तो वो जा सकता है......

ये सब जाके वैसे hi इंतज़ार कर रहे the......ki मधु की नाराज़ वह पे एक परछाई पर padi.......wo भी तो वही पे थी पंकज के साथ.....

मधु ने परछाई को dekha.....uske पास वो किसकी परछाई थी ये भी.......

ये एक निक्स tha......par ये उनमे से नहीं था जो पुजारी जी के साथ यहाँ आये the.......matlab.....matlab ये उनमे से एक है जिन्होंने आज पुजारी जी पे हमला किया था......

ज्वाला ऊपर से देख रहा था की इन् सब ने मधु को और पंकज को घेरा हुआ है.......

जो दीखता है वो होता नहीं जो नहीं दीखता वो होता hai.....yahi वाली बात थी यहाँ पे......

ज्वाला ने तुरंत hi मुझे इस बारे में bataya.......main इस वक़्त उस हॉस्पिटल में था जहा पे वो मैनेजर tha......Main उसके पास hi था की मुझे ये खबर milli......Maine उसको dekha......wo ठीक थक था......

मैं - तुम्हारी बेटी होटल में है और तुम्हारी माँ और बीवी bhi......waha jaao......Mujhe कुछ काम करना है......

मैंने उसको बस वही कहा tha....aur कुछ भी nahi......ab वो ये सुन्न के थोड़ा परेशां था एक तो मुझे वो जानता नहीं tha.....dusra उसकी बेटी किडनैप हो गयी thi......aur अब वो होटल में thi....to उसके मैं में बस एक hi दर tha......aur वो डर और बढ़ गया जब उसकी पत्नी और माँ का भी जीकर हुआ.......

मैं उस जगह से निकला और सीधा पोर्टल खोल के ज्वाला के पास जा पंहुचा.......

ज्वाला के पास इस वजह से क्यूंकि मुझे उसकी बात पे याक्किन नहीं हो रहा tha......wo मूर्ति में कैद banda......wo कभी bhi......Madhu पे हमला नहीं कर सक्क्ता tha......ye बात मैं अच्छे तरह से जानता tha.....par ज्वाला ने मुझे बताया की मधु और पंकज को निक्स लोगो ने घेर रखा hai......aur ये निक्स वही है स्ट्रेंज वर्ल्ड वाले......

ज्वाला के पास से मैंने भी देखा वो सब.......

ध्रुव - ये मुमकिन नहीं hai.......nahi है ना......

मैं - हम्म वो मेरे साथ या फिर इस पूरी दुनिया के साथ कुछ भी कर dega.....par ऐसे मधु पे hamla......nahi.....

वही मधु को समझ आ गया था की उसको घेर लिया गया hai......usko पहले एक परछाई दिखी थी फिर दूसरी और फिर tisri....aur वैसे hi बहुत साड़ी......

मधु - पंकज पास rahna.......wo सब यहाँ आ चुक्के hai.....sayad इस बार मैं निशाना हु.......

पंकज - Kya......nahi मैं तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा......

मैं - ज्वाला एक भी harkat......ek भी हरकत इनमे से किसी ने ki......tum इन् सब के ऊपर आग की बारिश कर देना......

ज्वाला - Par.....wo दोनों......

मैं - उनके लिए मैं जा रहा हु......

मैंने अपनी तलवार निकली और ज्वाला के ऊपर से वह निच्चे कुद्द gaya.......Madhu और पंकज से थोड़ी सी दुर्री pe......ab ये उनको तो पता था नहीं की मैं hu.....aur वो Pankaj.....usne मुझपे हमला कर diya......accha हुआ मैं बच गया.....

मैं - क्या कर रहे ho......ye मैं हु......

पंकज - Prateek.....tum......yaha पे हममे घेर लिया गया hai......sayad मधु के लिए वो सब आये है......

मैं कंफ्यूज tha.....wo ऐसा कैसे कर सकता hai......arre जिसने मधु के लिए खुद की बॉडी को छोड़ diya.....aur उस मूर्ति में कैद हो gaya.......wahi आज मधु को मारने के लिए लोग भेज रहा hai......nahi.....

मैं - Nahi.....usko कुछ नहीं hoga....aur ना hi तुम्हे......

मधु को अपने गोल्डन पावर के बारे में कुछ भी पता नहीं tha.......wo बस अपने कुछ पावर्स को जानती thi......aur जब उसके पास वो फलफूल वाला पानी था तो वही उसके लिए सबसे बड़ा हत्यार tha.....wo उससे अपने आप को ठीक कर सकती thi.....yaa फिर उससे हमला भी कर सकती thi......aisa नहीं था की उसके पास और हथियार नहीं the.....par उसके हिसाब से वो उसका खास हथियार था.....

खैर अब उसके पास वैसा कुछ था नहीं तो स्कूल में आने पे जो तलवार उसको मिली थी उसने उसको निकला aur......pass के पेड़ों के ऊपर से पानी की बूंदों से उस तलवार को और तेज कर दिया.....

मतलब वो भी तैयार थी.....

हम तीनो hi वह पे वैसे hi तैयार थे पर कोई हलचल नहीं हो रही थी......

पंकज - ये सब क्या हमसे दर गए hai....ye कुछ कर क्यों नहीं रहे.......

मधु - ये नहीं कर रहे तो मैं karungi....inki हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की.......

इतना बोलते hi वो अपनी तलवार लेके आगे को चल di......Maine कोशिश की की वो ना jaaye.....par कहा कुछ हुआ......

वो आगे बढ़ी और उन् निक्स में से एक पे हमला कर diya........wo सारे निक्स जैसे स्टैंड बी मोड में बैठे हुए the......ki कब उनको पुजारी जी वापस से dikhe.....aur वो उनपे हमला करे.......

पर उन्होंने ये नहीं सोचा tha......nahi वो तो सोच hi नहीं रहे the......unse बस एक काम करने को कहा गया tha.....aur वो वही कर रहे थे सोचने समझने की साड़ी काबिलियत hi खू बैठे थे जैसे वो.......

मधु ने उनमे से एक पे अपनी तलवार से वार kiya......par वो हिल्ला भी nahi......aur जब उसको चोट लगी तो जैसे वो अपने होश में आ gaya......matlab मूर्ति वाले के काबू से बहार......

मैंने देखा उसके एक्सप्रेशंस ko......wo बहुत hi अजीब the.......Main पहले नहीं समझ पाया था क्यों की वो इतना ज्यादा सरप्राइज हुआ हममे वह देख के की पूछो hi मत.....

अब जब वो अपने होश में था तब उसने मधु को रोकने के लिए अपना हथियार निकल लिया......

मैं इस वक़्त बस उन्हें देख रहा tha.....aur बाकियों ko.......abhi बाकी के सारे के सारे स्टैंड बी मोड में hi पड़े थे.......

मुझे समझ में आ गया हो ना हो ये सब के सब उसके वश में hai.....to क्या उन्होंने सच में मधु पे हमला करने को इनको भेजा था......

मैंने ज्वाला को इशारा किया की वो उन् सब के ऊपर आग barshaye.....par संभल के.......

मधु और वो जिससे वो लड़ रही थी उन् दोनों को पंकज के साथ मैंने अपने तलवार से बनने कवच के अंदर ले liya......Madhu उससे लड़ hi रही thi......aur पंकज भी अब उसकी ओर बढ़ रहा था.......

इतने में आसमान से आग की बारिश होने लग gayi......Madhu का ध्यान इससे थोड़ा सा बैठत gaya.....aur इसका फायदा उस निक्स को milla.....uska एक वार मधु को लग gaya.......ek खरोच hi तो आयी होगी सायद मधु ko.......par वो खरोश hi बहुत थी.......

मैंने उस तलवार को वैसे hi छोड़ diya.....jisse वो वह पे कवच बनाये रह jaaye......aur खुद उस निक्स के पास पहुंच गया.......

मैंने अपनी दोनों हाथों को फैलाया और मेरे दोनों हाथों से काले रंग का धुवां जैसा कुछ निकलने laga....aur फिर मैंने अपनी मुठी bandhi....hisse वो सब मेरे हाथ के चारो ओर hi जैसे बंद हो गए थे.......

और फिर अपना एक हाथ उस निक्स की ओर kiya......aur मेरे उस हाथ से वो साड़ी की साड़ी काली चीज़ज़ उसके अंदर जाने लग gayi......ye बहुत अधिक मात्रा में थी.......

मैंने इसको पहले भी बहुत बार उसे किया hai......par इस baar......iss बार कुछ अलग tha.......Main पता नहीं कैसे उसके दिम्माग से जुड़ gaya........Mujhe वह बहुत कुछ दिख रहा tha......bahut सी chizzen......jinme वो निक्स खुश दिख रहा था दुखी दिख रहा था........

बहार वो दर्द से तड़प रहा tha.....aur उसकी आवाज चारो तरफ गूंज रही thi.......Jwala अब ृक्क चूका tha......baaki के निक्स या तो जल के मर गए the.....yaa जख्मी the....par अब होश में the.......aur अपने एक साथी की चीखें सुन्न रहे थे......

क्या लगता है सबसे ज्यादा dukh......dard किश चीज़ज़ में आता hoga.......Mere हिसाब से वो आपके सभी भयानक सपनो को सच कर dena......ye नहीं hai......mujhe लगता है अगर मैं उन् हसीं यादों को ख़राब कर du.....jinse आपको ख़ुशी मिलती है तो आपके पास कुछ नहीं bachega......aap खुद बा खुद मर जाओगे.....

आज पहली बार डार्क पावर से मुझे ये करने का मौका मिला tha......Main उस निक्स के यादों को देख रहा tha.......aur अपने हाथों से उन् यादों को बात से बत्तर करता जा रहा था........

इसका bachpan......khatam कर diya.....isko जो आज तक प्यार करते आये है उन् सब को इसका दुसमन बना diya......jisko ये चाहता tha......usko किसी और का बना diya.....aur उन्होंने मिल के इसको धोखा diya.......aaj तक इसको जो भी मिला वो सब ख़तम कर दिया.......

फिजिकल टॉर्चर से ज्यादा मज़्ज़ा मेन्टल में आता hai....ye बात आज समझ आ रही थी.......

मैं बस बदलता gaya......har एक chizz.....uss वक़्त अगर वो हाथ मेरे कंधे पे नहीं आता तो sayad.....sayad ये इन् सब दर्द की वजह से hi खुद को मार deta.....aur साथ hi उसके चिल्लाने की आवाज से हम सब के कान फट जातें......

वो हाथ मधु का tha......usne एक हाथ से अपना एक कान धक् रखा था और दूसरा हाथ किसी तरह मेरे कंधे पे rakha....aur मैं उसके यादों से बहार आ गया.......

ये जो भी tha........bahut hi मज़ेदार tha.......Maine इसको आज तक कभी उसे नहीं किया था.......

जब मैंने फिर सामने dekha.......wo निक्स खुद अपने हाथों से अपना चेहरा नोच रहा था........

मधु - बस karo.......bas करो......

मैं उसकी तरफ muda......Maine देखा पंकज ने भी अपने हाथों से अपने कान बंद कर रखे the.......waha पे आश्रम से लोग आ रहे थे दौड़ते हुए......

लीमो जो आ चुक्का था यहाँ pe.....wo भी अपनी बहन के साथ वह आ रहा था.......

मैं - haa.....theek है बंद कर diya......tum ठीक हो.....

मैंने उसका हाथ देखा जहा पे वो चोट लगी होनी चाहिए thi......par वो वह नहीं thi.......Maine उसका दूसरा हाथ देखा वह भी नहीं thi.......wo खुद भी इससे हैरान थी......

मैं - कही ये उस पानी पन्ने से तो नहीं हुआ सायद अब तुम खुद को ठीक कर सकती हो खुद से.......

मधु ने कुछ नहीं कहा बस खुद का हाथ देख रही थी.......

अभी तक वो तलवार से घेरा बना हुआ hi tha......aur वो चिल्ला चिल्ला के बेहोश हो गया था सायद.......

वही आश्रम से बहुत से लोग वह आ चुक्के the.....aur आस पास देख रहे the.......waha पास में आग लगी हुई थी कही कही pe......wahi कुछ लोगो के दर्द से कराहने की आवाजें भी आ रही थी......

वो सब यहाँ वह देख रहे थे........

इसी दौराण एक और चीज़ hui.......jo मर गए थे वो तो nahi......par जो जिन्दा the......unki चीखें अचानक से शांत हो gayi....aur वो अपने हथियारों से खुद को hi मारने लग गए......

मुझे पता था ये कौन कर रहा है......

ध्रुव - क्या उसने कोई गलती कर दी है.....

मैं - हां उसने कर दी है galti......aur सज़्ज़ा हर बार की तरह उसके प्यादो को hi मिल रही hai.......mujhe लगता है उसने सोचा नहीं होगा की मधु इन् सब के बिच में आ jaayegi.....aur उसका एक प्यादा मधु को चोट पंहुचा देगा.......

सब के सब जिन्होंने ये सब देखा वो सब हैरान the......yaha पे पुजारी जी नहीं आये the......wo जानते थे अभी उनका बहार जाना सिर्फ उनके लिए hi नहीं बल्कि ना जाने किन किन चीज़ज़ों के लिए खतरनाक hai.....unko कुछ भी हुआ तो क्या होगा इसका वो सोच के घबरा रहे the......bas इसी वजह से वो बहार नहीं आये......

मैंने अपनी तलवार को वह से उठाया और वो कवच बंद हो gaya......Jwala को इशारे से वह से जाने को बोल दिया.....

मैं - अच्छा तुम यही इनके साथ रहो और Main....Main चलता हु बाद में मिलूंगा.....

मधु ने बस हां में सर हिलाया और मैं वह से पोर्टल खोल ke.....nikal gaya.......mujhe इस वक़्त अकेला रहना tha.....aur डार्क पावर के इस चीज़ज़ को समझना tha......ye मैंने पहले कभी देखा hi नहीं tha......Main यादों के साथ खेल रहा था......

मैं एक जगह पे बैठा ये सब सोच रहा था.......

वही एक बार फिर से डार्क पावर का उसे हुआ था वो भी बहुत अधिक मात्रा mein......par फिर वह पे उतने लोग पहुंच गए की वापस से सब बिखर gaya......aashram वेले सारे लोग.....

जो भी इस चीज़ज़ को ढूंढने में लगे हुए थे वो उस जगह पे जाने को निकल गए जहा पे ये सब हुआ tha......Dark वर्ल्ड वालो में से भी कुछ लोग वह को निकल गए और बाकी के सब उस पोर्टल के टुकड़े के साथ काम कर रहे थे.....

थोड़ी और म्हणत के बाद उनको ये पता चल गया की वो पोर्टल किस जगह पे खुला tha.......par वो उस जगह के लिए पोर्टल नहीं खोल पा रहे the......aur ना hi वो ये जानते थे की ये जगह है कहा की वो आस पास कही पे चले jaayenge.....haa पर वो ये पता लगा सकते the.....bas थोड़ी और म्हणत लहणे वाली thi.....aur उन्होंने हार नहीं मानी और करते रहे ये सब.......

वही घर पे जब सबको आश्रम के पास जो भी हुआ उसके बारे में पता चला और ये पता चला की मैं भी वही था तो सब मुझसे कांटेक्ट करने लग gaye....koi फ़ोन कर रहा था तो कोई कुछ aur....bua जो की स्कूल में थी वो वापस घर आ गयी थी......

रूपल दीदी और निकिता भी वापस आ गए the......Manager को काम से निकले जाने का रद्दी भर दुःख नहीं tha.....wo बस इसी बात से खुश था की उसकी बेटी ठीक hai......usko कुछ भी नहीं hua......wo बस रूपल दीदी और निकिता का सुक्रिया करता रहा.....

मैं इस वक़्त ध्यान लगा रहा tha.....itni देर se......aur जब ध्यान टूटता तो मैं पसीने से लथपथ tha......Maine वक़्त dekha.....raat हो रही thi.....Main घर की तरफ नकल gaya....aur जब वह पंहुचा तो देखा सब के सब परेशां the.....ye लोग कुछ जल्दी hi परेश्हन हो जाए है सायद.......

खैर मुझे देखते hi वो सब थोड़ा शांत hue.....aur हम अंदर चले gaye.....unhone पूछा की क्या हुआ पर मैं पहले नहाने चला गया......

नेक्स्ट अपडेट में देखते है कैसे डार्क वर्ल्ड वाले यहाँ पे आते hai.....aur प्रतीक से मिलते hai......aur प्रतीक उनकी मदद करता है या नहीं ये bhi.....saath में वो MLA......usko रहने देते है क्या hi कर लेगा वो
 
अपडेट - 101

मैं जैसे hi बहार आया सभी मुझसे सवाल करने लग gaye........kaha गए the......ab तक वापस क्यों नहीं aaye.....waha पे क्या हुआ tha.....kya तुमने कुछ किया.......

पता नहीं क्या kya........pahle तो उनको शांत कराया.......

मैं - वो जब मैं मैनेजर को लाने गया दीदी के कहने पे तो मुझे पता चला मधु पे वो सब हमला करने वाले hai.......to मैं वह चला gaya.....waha जाने के बाद हममे थोड़ी लड़ाई hui......par उसके बाद क्या हुआ पता नहीं पहले तो उनमे से एक बाँदा बहुत चीखने लगा tha......aur उसके baad......uske बाद सभी के सभी खुद hi मर गए.......

बुआ - खुद hi मर गए.....

मैं - हां खुद hi......Main तो बस देखता hi रह गया.......

मेरे ऐसे कहने पे कुछ आखें thi.....jo मुझे घूरने लग gayi.......par उधर किसी ने कुछ नहीं कहा......

चची - पर उसके बाद कहा चले गए थे तुम.......

मैं - वो उनको खुद को मरते देख मैं thoda.....thoda अजीब सा लगने लगा था mujhe....to मैं एक शांत जगह पे जाके ध्यान करने लग गया था......

रूपल - इसको घर में शांति नहीं मिलती क्या......

बुआ - हां यहाँ पे भी शांति होती है आगे से कुछ ऐसा हो तो यही आ जाना कही और जाने की जरुरत नहीं है.......

चची - हम्म ठीक hai.......chalo हो गया ab......khan खा लो सब......

मैं - रूपल दीदी वो लड़की ठीक है न.....

निकिता - तुमको बड़ी फ़िक्र हो रही hai.....uss लड़की ki...waise ये बताओ वो मधु पे हमला होने वाला है ये बात कैसे पता चला तुमको......

मैं कुछ कहता उससे पहले रूपल दीदी ने उसको पेअर पे मारा और चुप रहने को kaha.......pata नहीं इनके बिच क्या चल रहा था.......

चची - ये सब बाद में अब चलो खाना खाने......

हम सब खाना खाने चले गए......

हम खा hi रहे थे की रूपल दीदी के फ़ोन की घंटी बजी......

उनके बाद निकिता की और उसके बाद चाचा ki........phir चची ki.......hum सब बस देख रहे थे की ये क्या हो रहा hai.......Aur वो चारो एक दूसरे को देख रहे थे जैसे कन्फर्म कर रहे हो

बुआ - क्या हुआ आप सब के फ़ोन्स aise........kuch बात है क्या.....

रूपल दीदी - हम्म ये हमने जो उस लड़की को बचाया था ना उसी के बारे में hai......Wo मला गुस्से में hai....usko समझ नहीं आ रहा आखिर वह हुआ क्या tha.......aur वो उस मैनेजर के पीछे लग गए है.......

मैं - ये तो होना hi tha......sab के सब मारे gaye......wo पता लगाने के लिए उनके पास जरूर जाएगा......

चाचा - तो रूपल और Nikita.....hotel तुम्हारे नाम है वो मैनेजर तुम्हारा tha......ab जो करना है तुमको करना है समझे......

चची - आप क्या बोल रहे है.....

चाचा - Nitya......rukko to.....dekhte है ये दोनों क्या करते hai.....ab ये जाने इनको उस मैनेजर की मदद करनी hai.....yaa बस अपना होटल देखना है.....

रूपल दीदी और निकिता ने कुछ नहीं kiya......bas अपना खाना खाया जल्दी se.....aur कड़ी हो gayi........aur ऊपर चली गयी......

बुआ - भैया आपको क्या लगता है वो क्या करेंगी......

चाचा - मैं क्या bataun......tum खुद देख लेना......

मैं - मुझे लगता है जाना chahiye........wo हमारे लिए काम करता था......

चची - वो काम करता tha.....aur अब उसको निकल दिया गया है क्यों की उसने काम देने वाले को धोखा diya......samjhe.....

मैं - पर चची.....

चाचा - तुम्हारी चची सही कह रही है......

अगर मैं होता to......Main तो चला जाता.......

खैर हमने खाना पूरा kiya.....aur जाके हॉल में बैठ gaye......ki तभी वापस से चाचा और चची के फ़ोन की घंटी बजी......

चची - उस मला के लोग पहुंच गए है उस मैनेजर के घर के पास.......

K.Bua - इन् दोनों को काफी वक़्त लग रहा है सोचने mein......Kahi ऐसा ना हो ये सोचते hi रहे और वह पे काम हो जाए.......

अभी उन्होंने अपनी बात पूरी hi करि थी की वह पे वो दोनों आ गए......

मैं - तुम दोनों क्या करने वाले हो अब......

निकिता - करना क्या hai.....wo अब हमारे लिए काम नहीं करते हम क्यों उनकी फ़िक्र करे.......

ये सुन्न के चाचा थोड़ा उदास हुए the......sayad उनको कुछ और उम्मीद thi......par वो यहाँ कुछ नहीं कहना चाहते the......to वो चुप hi rahe.....par मैं और K.bua नहीं....

K.bua - तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए tha......mujhe लगता है तुम्हे वह जाना चाहिए था.......

मैं - हां मैं भी यही सोचता hu.....aur अभी भी वक़्त hai.......Main जा रहा हु वह पे......

चाचा - नहीं प्रतीक तुम वह जाओगे और ये बात हेड ऑफिस वालो को पता चली की हम बिन्ना वजह के इंसानो के बिच उलझ रहे है तो ये अच्छा नहीं hoga.......sayad इन् दोनों ने सही फैसला लिया है वह ना जाके......

मैं - पर वो हमारी वजह से.......

चाचा - हमारी वजह से कुछ नहीं hua......ulta हमने उनको बचाया hai......aur यही बात दबाने के लिए मुझे बहुत कुछ करना pada.....ab इससे आगे सायद हेड ऑफिस वाले भी नहीं मानेगे.....

K.Bua - हम कुछ इंसानो को hi भेज देते है उनकी मदद करने ko......isse तो हेड ऑफिस को कोई परेशानी नहीं होगी......

चाचा - ठीक से सोचो Kavita......insano को वह भेजने में वक़्त lagega.....aur अब तक वो वह पहुंच चुक्का hoga......mujhe नहीं लगता अब हम कुछ कर सकते hai......khair....ye इन् दोनों का फैसला tha.....ab इसके बारे में सोच के क्या hi फ......

वो बोल hi रहे थे की उनका फ़ोन वापस से बजा और फिर चची का और फिर रूपल दीदी और निकिता का.......

मुझे लगा सायद उस मैनेजर के परिवार के साथ कुछ बुरा हो चुक्का hai.....Main बस वह से ऊपर जाने को खड़ा हो गया........

चची - ये सब क्या है.......

चाचा भी बिलकुल शॉकेड the......unko समझ hi नहीं आ रहा था की वो कैसे रियेक्ट kare..........bas निकिता और रूपल की ओर देखे जा रहे थे.......

बुआ - क्या hua.....Bhaiya अब क्या आया है.......

रूपल - मला साहब मैनेजर के घर पे gaye.......aur फिर भागते हुए बहार aaye.......sayad डर गए होंगे......

निकिता - किस्से दर गए honge.....waha क्या भूत थे......

रूपल - Bhoot......nahi भूत नहीं the......lashen जो चल रही thi......arre haa.......waha तो वही लोगो की लाशें थी ना जिनको हमने आज ख़तम किया था......

निकिता - अच्छा वो सब वह the......aur मैनेजर का परिवार......

रूपल - मैनेजर का पूरा परिवार हॉस्पिटल में hai.......unke घर में गैस लीक हो रहा tha......uski वजह से......

चची - ये सब क्या है Rupal......Nikita क्या हुआ वह अच्छे से बताओ......

रूपल - हममे क्या पता........

मैं - तो तुम दोनों वह गए थे.......

रूपल - हम वह नहीं गए the......hum तो बस......

वो बोल hi रही थी की चची ने उनको चुप रहने को kaha.......Dadi थी नहीं घर pe........unhone पहले तो उनको चुप रहने को कहा और फिर बाकी सब को भी.....

हममे पता नहीं था क्या हो रहा hai......wo एकदम से सबको चुप रहने को बोलने लग gayi.........Phir उन्होंने चाचा को इशारा किया कुछ......

और चाचा किचन की ओर चले gaye......sayad बुआ को भी कुछ समझ में आ गया tha......to उन्होंने K.Bua को लिया और चुप चाप ऊपर की ओर चल दी......

चची खुद दरवाजे के पास चली गयी thi.......aur हम सब हम बस वही एक दूसरे को देख रहे थे......

चची ने दरवाजा नहीं खोला tha.....bas कीहोल से देख रही थी.........

मैं - दीदी ये सब क्या हो रहा है......

रूपल - सायद कुछ हुआ hai.....par पता नहीं.......

मैं - कही अपने जो किया उसके वजह से हेड ऑफिस से तो नहीं.......

रूपल - पागल हो kya.......wo क्यों ऐसा कुछ करेंगे और उनके काम करने का तरीका अलग होता hai.....wo ऐसे काम नहीं करते......

मैं - फिर हुआ क्या है......

ऊपर से दोनों बुआ निच्चे आ गए the.......wahi किचन से चाचा भी वापस आ रहे the......aur चची का हाथ अब दरवाजे के हैंडल पे the........sayad वो खोलने वाली थी.......

बुआ - वो चारो तरफ hai....par......wo खली हाथ hai.....aur बस खड़े है......

चाचा - हां मैंने भी dekha.....wo यहाँ के नहीं लग rahe.....sayad किसी दूसरे प्लेनेट से आये है......

चची - हममे बहार जाके देखना chahiye......Maine महसूस किया है उनकी ताक़त इतनी नहीं की वो कवच तोड़ के इस तरफ आ जाए......

मैं - क्या कोई अंदर आने की कोशिश कर रहा है......

चची - हां पर कवच के रहते hue.....wo नहीं आ sakte........Tum सब यही rahoge......Poonam Kavita.....Gate के pass.......aur आप मेरे साथ चलो......

रूपल - मैं भी आपके साथ आउंगी........

चची - जितना कहा उतना karo.....sab कण्ट्रोल में hai......hum बस देखने जा रहे है ये कौन से नए मेहमान आ गए hai......aur कोई बहेश nahi......abhi तुम्हारी दादी भी यहाँ नहीं है....

इतना बोल वो चली गयी दरवाजा खोल ke.......Dono बुआ दरवाजे के आजु बाजू खड़े the......Humm तिण्णो को कुछ लोग दिख रहे the......par वो दूर थे तो साफ़ साफ़ नहीं.......

जब चची बहार gayi......Chacha के साथ तो हमने dekha......wo लोग पहले एक दूसरे को देख रहे थे और उसके बाद सभी के सभी झुक्क gaye......unn दोनों के सामने........

ये सब यहाँ चल रहा tha.....Itne सारे लोग एअर्थ पे आये हुए the......par अभी उनमे से कोई नहीं आया tha.....immortals में se.....haa रिआन मेरे बुलाने पे आता tha.....usne कहा था वो यहाँ के हालातों के बारे में बताएगा वह pe.......par जैसी मुझे उम्मीद thi.....waha से कोई भी आने को तैयार नहीं हुआ hoga......yakkin hi नहीं होगा उनको की एअर्थ जैसी जगह पे हम सब ki......nahi इम्मोर्टल्स की कोई कला हो भी सकती hai.....unke लिए तो एअर्थ जैसा कुछ होता hi नहीं hoga......mere लिए तो नहीं tha......Maine सायद hi इस जहाज को कभी ध्यान से देखा था......

खैर जब रिआन ने उनको इम्मोर्टल्स की एक कला का एअर्थ पे पाए जाने के बारे में बताया तो वह पे किसी को याक्किन नहीं hua......jinko थोड़ा बहुत याक्किन hua......wo भी इस वजह से क्यूंकि वो रिआन के दोस्त the......unhone उससे साबुत maanga.....par रियान ने कुछ नहीं bataya......kyunki वो इस वक़्त यहाँ पे किसी ऐसे इम्मोर्टल को तो नहीं भेजना चाहता tha,......jiski मुझसे बनती ना ho....haa उसकी मुँह बोली बहन भी थी इस लिस्ट में.......

तो उसने फिर इस बात को बोलना hi छोड़ diya......aur सब सही hi चलता rahta.........agar उसकी मुँह बोली बहन ko.....time पास करते करते एअर्थ पे से डार्क पावर का अंश ना दिखा होता.......

अब जब उसको इसके बारे में पता चल गया था तो उसने और कन्फर्म होने के लिए और सबूत ढूंढने शुरू कर diye......uske बाद उसको ना सिर्फ wo...balki......balki गोल्डन पावर के भी अंश mille.....jiske बाद वो bhagi....aur भागते हुए जा पहुंची रिआन के बड़े से लैब में......

हां उसका एक बड़ा सा लैब tha.....jaha पे वो तरह तरह के जीव बनता tha......aur उनसे खेलता रहता......

आज भी वही कर रहा था wo.......par इस बार वो जीन जीवों को मिला के नया जीव बनाने की कोशिश कर रहा था वो सब एअर्थ के the.....ab वो इस बात से अनजान की उसकी मुँह बोली बहन वह आ रही hai....aaram से अपना काम कर रहा था.....

"Rian.......Rian.....kya.....Kya तुमने उसको देखा था....."

रिआन - अरे tum.....iss waqt......ye मेरे काम का वक़्त है.....30 साल बाद आना......

"रिआन मज़ाक बंद करो और मुझे बताओ तुमने उसको देखा था......"

रिआन - हां मैंने देखा tha.......usme क्या hai.....Main सबको देख सकता hu......Dekho तुम्हे भी तो देख रहा हु....."

"तो तुमने बताया क्यों नहीं........"

"अब क्या मैं जिसको भी देखूं उसके बारे में बताता फिरूं sabko....waise किसकी बात कर रही ho.....Main समझा नहीं....."

"एअर्थ pe.......waha पे Madhu.....aur वो प्रतीक...."

रिआन ने जैसे hi मधु और प्रतीक का नाम सुन्ना वो एकदम से चौक gaya.....abhi तक जो आराम से बैठा tha.....wo एक दम से खड़ा हो gaya.....par उसको ये बात नहीं बतानी है वो भी अपनी इस बहन ko.....ye पक्का परेशां करेगी.....

रिआन उस जगह से अपनी बहन को क्रॉस करते हुए उसके पीछे चला गया और वह पे कुछ करने लगा......

रिआन - नहीं तो मैं नहीं मिला किसी se.....aur कैसे मिल सकता हु वो तो....

"झूट तो बोलो mat.....aur वह जाके ये नाटक क्या करने lage.....yaha आके baitho......tumko हज़ारो सालों से जानती hu.....sab पता है mujhe.......agar अभी खड़े होक बैठ जाते तो मुझे शक हो जाता इस वजह से वह चले gaye......par मुझे तुम्हारे वह जाने पे शक hua.....ab छोड़ो इनको और यहाँ आओ जल्दी......

रिआन ने हार नहीं maani.....waise हार तो गया hi था वो.......

रिआन - कोई नाटक नहीं कर रहा काम hi कर रहा hu......wo देखो टेबल पे मेरे नए प्रोजेक्ट पे काम कर रहा hu......ab तुम जाओ.....

"तुम यहाँ आते हो या nahi......ye batao......warna मैं वह aaungi....aur फिर तुम कुछ भी बोल नहीं पाओगे....."

रिआन ने गर्दन मदद के उसकी ओर dekha....wo गुस्से से उसको घूर रही thi.....usko समझ में आ गया tha......ab नुकसान हो चुक्का है अब बस नुकसान को बड़ा होने से रोकना hai......to वो वह चला गया.....

"तुमको कैसे पता चला उनके बारे mein.....aur इस बारे में मुझे अभी तक क्यों नहीं बताया......"

"मैं वो वह घूम रहा था अपने नए जीव के liye.....wahi मुझे पता chala.....par मैं जानता नहीं वो कहा है....."

"तुम्हे सच में लगता है तुम मुझसे झूट बोल सकते हो....."

"मैं सच बोल रहा हु..."

"ठीक hai.......to फिर मैं सभी को इस बारे में बता देता hu.....aur सभी मिलके ढूंढेंगे unko.......aur फिकर मत karo.....iss बार मेरे पास वो है जो तुम्हारे पास नहीं था......."

"kis....kiss चीज़ज़ की बात कर रही हो....."

"सबूत ki......mere पास सबूत hai.....aur मैं इसको सबको दिखने जा रही हु....."

उन् दोनों का ये सब चल रहा tha.....aur यहाँ चची के सामने डार्क वर्ल्ड के लोग झुकके हुए the.....unn सब को ऐसा लग रहा था चची hi है wo......jinke पास वो डार्क पावर hai......akhir वो पोर्टल के टुकड़े की एनर्जी उनसे hi मिल रही थी.....

सब हैरान थे ये देख के......

"हममे बस बात करनी hai.....aap हममे बस बात करने का एक मौका de......hum किसी को नुकसान नहीं pahuchayenge.....bas एक बार बात करनी है......"

चची ने उनकी बातें सुन्नी और वो चाचा की ओर देखने लगी.....

चाचा को खुद समझ नहीं आ रहा था की ये चल क्या रहा है.....

चाचा - क्या बात hai.....jo कहना है वही से कहो.......

" हम डार्क वर्ल्ड से आये hai........hum आपसे मदद मांगने आये hai......waha पे हालत बहुत ख़राब hai.....agar आप मदद करेंगे तो सब पहले जैसा हो jaayega....hamare बच्चे मर रहे है....."

बातें और टेढ़ी होती जा रही थी bas........Chacha चची को कुछ भी समझ नहीं आ रहा tha.....aakhir वो कैसे और कौन सी मदद करेंगे की डार्क वर्ल्ड में सब सही हो जाएगा......

ध्रुव - हो ना हो ये आपके लिए hi आये है.......

मैं - हम्म सायद इनको डार्क पावर के चलते हमारा पता चला hai......par चची से क्यों मदद मांग रहे है ये......

ध्रुव - वो पोर्टल आप भूल gaye.....wo वही पे thi....sayad उससे ये यहाँ पहुंचे hai.....aur चची को डार्क पावर का मालिक समझ रहे है.......

मैं - हां ये हो सकता है......

ध्रुव - वैसे आप मदद करने वाले है क्या इनकी.......

मैं - मैं कहा से मदद karunga.....pata नहीं वह चल क्या रहा hai.....aur कैसी मदद चाहिए inko.......agar इस दौरान यहाँ कुछ हो गया to......Main मधु को ऐसे कैसे छोड़ दू......

ध्रुव - इसके लिए इनकी बात सुन्नी होगी naa.......aap देखिये ये कितनी दुर्र से आये है आपकी तलाश mein........ab आपका भी फ़र्ज़ बनता hai....aap इनकी बात सुनने काम से काम उसके बाद क्या करना है और क्या नहीं इस्पे विचार करे.......

मैं - ध्रुव तुम सही कह रहे ho......Mujhe ऐसा hi करना चाहिए.......

मैं भी बिन्ना सोचे बहार की ओर जाने लग गया......

K.Bua - ुये kaha.....ander जाओ.....

मैं - K.Bua वो मेरे लिए आये है.....

बुआ - क्या बोल रहे ho.....tumhare liye.....tumne कुछ किया है क्या......

मैं - Nahi.....par सायद ये मुझसे hi कुछ करना चाहते hai........Dark पावर की मदद से......

बुआ - पर ये भाभी के आगे क्यों झुकके हुए है phir......nahi मैं जाने नहीं दूंगी तुमको abhi......jaao अंदर......

मैं - पर बुआ.....

बुआ - कोई पर वॉर nahi.......hum नहीं जानते ये कौन hai....aur इनकी क्या मनसा hai.....kya हो अगर ये हममे नुकसान पहुंचने आये हो तो......

मैंने कोशिश kari......par उन्होंने साफ़ मन्ना कर diya......aur तो और बहार चाचा - चची को कुछ समझ नहीं आया तो उन्होंने उनको ये कह के भेज दिया की वो गलत पत्ते पे आ गए है......

वो सब भी इस वक़्त तो जाने को तैयार हो गए पर वो एअर्थ को छोड़ के नहीं जाने वाले the......wo वापस से कोशिश karte........ki डार्क पावर जिसके पास भी है उससे बात कर sakke.......usse अपनी परेशानियों के बारे में बात kare......aur उसको अपनी मदद करने को मनाये.......

चाचा चची अंदर आ गए.......

ये रात बस ऐसे hi बीत गयी पर हमारे लिए.........

नेक्स्ट अपडेट में देखते है रिआन का और उसकी मुँहबोली बहन का एअर्थ पे aana......aur साथ hi अपने परिवार के पास मधु का jaana.......waise तो मला और मैनेजर का रोले ज्यादा नहीं hai.....par ये इम्पोर्टेन्ट है......
 
अपडेट - 102

अगले दिन वैसा कुछ नहीं hua........matlab सब शांत सा hi tha.......hamare हिसाब से तो शांत hi था...........

हां रिआन अपनी बहन को सब समझा रहा था की क्या कुछ हुआ tha......aur वो कैसे मुझसे milla.......isko लेके उसकी बहन ने उसको बहुत कुछ bola.....aakhir रिआन ने नियम तोड़े the......par फिर वो बात वही पे डब्बा दी gayi......aur रिआन की बहन ने उससे बोलै की उसको जल्द से जल्द एअर्थ पे जाना hai.......uske साथ

पता नहीं वो साथ में क्यों जाना चाहती thi......wo खुद एक इम्मोर्टल thi.....uska बस चले तो वो अभी एअर्थ पे आ जाती और प्रतीक की अच्छी खस्सी धुलाई कर जाती......

हां और साथ mein....Daksh ने घर के बारे में सब देख लिया tha.....matlab अब घर ख़रीदा जा चुक्का था मधु के liye.......aur अगले दिन उसको वह जाना tha......baaki जो भी पेपर्स the.....wo सब भी बन चुक्के the.......admission की बातें शुरू हो चुक्की थी पर वो कल होने वाली थी और उसके लिए मधु को भी जाना tha......wahi मेरा admission.....haa मैंने भी करवा लिया tha.......wo हो चुक्का tha......hamari अलग hi पहचान थी इंसानो के बिच तो उसका फायदा मिला थोड़ा बहुत.....

आश्रम से अब लीमो वापस जा चुक्का tha.......DB ने उसको भी वही बात samjhai......wahi की उसकी भांजी अब वह की रानी बनने वाली hai.....aur बस वही सब कुछ देखेगी........

लीमो को पहले तो कुछ समझ hi नहीं aaya.......usne एक पल को कुछ और hi सोच लिया tha......par दब ने बताया की वो अब वापस से उस जगह तब तक नहीं जाएगा जब तक उसकी जरुरत ना ho.......haa बस एक बार वो कुछ दिन बाद वह आने वाला tha......uss बीमारी को पूरी तरह से ख़तम करने के liye.....jo सायद उस मुकुट के हीरे के गायब होने से हुआ tha......par दब को उससे पहले कही और भी जाना था......

लीमो बड़ा कंफ्यूज सा वह से निकल gaya......wo छह के भी यहाँ नहीं रह सकता tha.......wo एक सीक्रेट आर्गेनाइजेशन का हेड tha.....jiska काम राजगद्दी की हिफाज़त करना tha......ab अगर वो ज्यादा वक़्त यहाँ रहता तो खतरे के चान्सेस बढ़ जाते.......

दब ने इस दौरान लीडर को भी और परेशां कर रखा tha.....wo उसको अजीब अजीब से सीटुएशन्स इमेजिन करने को कहता tha.......jisse वो परेशां हो jaata........par अंतत में लीडर खुश हो जाता था....

दब उसके दिम्माग में नए नए सपने भर रहा tha.......aise सपने जहा उसका एक परिवार tha......aur वो उसके साथ tha.....wo किसी का गुलाम नहीं बच्चा tha.......haa पर इसकी बहुत बड़ी कीमत भी देनी पड़ी थी usko.......uski साड़ी शक्तियां साड़ी की साड़ी फोमोस को वापस मिल गयी thi.....aur अब वो कोई मैजिकल क्रेअटुरे नहीं बल्कि एक आम से इंसान की तरह बन गया था.......

हां एक और चीज़ हुई thi......Aashram सबके नज़र में आ गया tha.......Head ऑफिस हो या बहार से डार्क पावर की तलाश में आये हुए लोग ho......wo सब के सब अब आश्रम के बारे में पता कर रहे the.......Dark वर्ल्ड वालो को छोड़ के क्यूंकि उनको उनकी मज़िल साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी..... :सिघ: Chachi.....haa वो अभी तक चची को hi समझ रहे थे डार्क पावर wali......aur अब वो उनपे नज़र रखे हुए the......ye उनके लिए बहुत मुश्किल था......

बाकी मैनेजर के बारे में क्या kahe......unko पता चला था की कल रात में उनके यहाँ कुछ लोग आये the......to वो सब वह का सब छोड़ के निकल gaye.....Manager को अपने परिवार की बहु चिंता thi.....to वो उन् सभी को लेके अपने एक दोस्त के यहाँ चला gaya......paas hi में रहता था wo.....bade लोग the......wo मला उनपे हाथ डालने से पहले 2-3 बार तो जरूर सोचता......

मला की बात आयी है तो सुनने में आया था उसको बुखार आ गया था डर के मारे......

नेक्स्ट डे......

यहाँ सुबह hui.......aur मुझे पता चला की मधु आज निकलने वाली है.....

अब वो फूल थी तो मैं bhawra......jaha व जाती वह जाना hi था mujhe.....to मैंने भी तैयारी शुरू कर di......waise तो सब कम्पलीट hi tha....yaha तक की सामन भी पंहुचा हुआ था होटल में पहले se......taiyaar होने को मुझे बस नहाना था और कार लेके होटल को चले जाना tha.......wo तो सभी आ गए थे वह पे इस वजह se.......Dada - दादी वापस आ चुक्के the.....wo पता नहीं किश जगह गए हुए the.....pichli बार भी जब वो गायब हुए थे और मैंने उनकी तलाश में ज्वाला और ओल्ड आउल को भेजा तो मुझे ये पता नहीं चला था वो कहा पे रुक्के हुए the.....wo किसी जगह से आ रहे थे तब मुझे पता चला था उस जगह के बारे में पता नहीं था मुझे......

खैर बस वो hi नहीं आये the......Nana - नानी भी आये हुए the......aur स्कूल था पर कोई गया नहीं था waha......to सब के सब मुझे छोड़ने जाने वाले थे......

ये सब बड़ा hi अजीब tha.....main कही दुर्र नहीं जा रहा tha.....aur सायद मैं रोज यहाँ वापस आ भी सकता tha......par khair.....ab ये सब तो ये लोग hi जाने......

जब मैं निकलने वाला था उसी वक़्त वह पे लीडर को लेके दब आ gaya.......mujhe लगा अब और भी वक़्त लगने वाला है.......

दब - प्रतीक यार मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी......

मुझे पता नहीं था ये किश बारे में बात करने वाला hai......waise मुझे इसकी बात सुनने का मैं बिलकुल नहीं tha......Main बस अब जानना चाहता tha.....par

मैं - हां दब बोलो.....

उसने लीडर की तरफ dekha......aur मुझे अपने साथ आने को kaha......ek पल को मुझे लगा सायद वो निकिता के बारे में बात करने वाला hai.....Main सभी को वह छोड़ के दूसरे तरफ जाने लग गया.......

हम वह pahuche.......par मैंने ये नहीं सोचा था लीडर पूछेगा क्या बात hai.....Mujhe लगा वो और दब साथ है तो उसको पता होगा ये क्या बोलने वाला hai/......par ये दब ये सच में बहुत ज्यादा रैंडम हो गया था कब क्या करे पता hi नहीं......

दब - मैं कुछ वक़्त के लिए आश्रम से बहार जा रहा hu.......Kya tum.....uss जगह पे भी नज़र रख सकते हो......

मैं चौक gaya......wo कहा बहार जा रहा hoga......par मैंने पूछा nahi......pata था वो खुद से बताएगा.....

मैं - हम्म ठीक hai.....par वह पे तो पहले से hi लोग है.....

दब - लोग hai....par जो आ सकते है वो उन् सब से बहुत ताकतवर hai.......Upar से अभी फलफूल सही से नहीं ुग्गा hai......tumhe उस जगह को भी देखना hoga......main ज्यादा वक़्त नहीं lunga.....par फिर bhi.....Fumos जैसे जगह पे वक़्त लग्न लाज़मी है......

मैं - तुम फोमोस जा रहे ho.....par क्यों......

दब ने लीडर की ओर देखा......

दब - बस एक दोस्त का काम hai......aur वैसे भी मुझे मेरी चीज़ज़ वही पे मिलने वाली है.......

मैं - तुम उस जगह को नहीं jaante.....aur वह पे खतरा हो सकता है tumhe......tum...

लीडर - हां सही kaha......Fumos को अपना नया लीडर मिल चुक्का hai.....agar वो तैयार हो जाता है to.....aur मान लो नहीं भी हुआ तो तुम्हे मुझसे लड़ना hoga......Main नहीं चाहता की तुम्हे कुछ हो......

दब - मुझे कुछ नहीं hoga.....aur तुम्हे मुझसे नहीं खुद से लड़ना hoga.....Prateek बस तुम कुछ दिन इस जगह को देख lena.....Main वह पे सब संभल लूंगा....

मैं - तुम समझ नहीं rahe......waha पे स्लेयर करके कोई hai.......wo....uska शरीर तुम उससे नहीं लड़ सकते......

दब - मुझे इसके बारे में भी बात करनी hai.......tumhe वह आना hoga......kuch पल के लिए जब वो कमज़ोर hoga......aur उस waqt....tum समझ रहे हो ना......

मैं सच में समझ नहीं पा रहा tha.......isko कैसे पता की मैं wo.....kya ये ध्रुव के बारे में जानता tha.....par ये मुमकिन hi नहीं.......

मैं - ध्रुव क्या ये तुम्हारे बारे में.....

ध्रुव - नहीं ये मुमकिन नहीं hai......jab तक यहाँ पे कोई इम्मोर्टल ना ho.....kisi को इस बारे में कैसे पता chalega.......immortals को भी ऐसे नहीं पता चलने वाला की मैं और आप एक साथ hai......unhe भी म्हणत करनी होगी.....

मैं - पर ये ऐसी बातें कैसे कर रहा है......

दब - प्रतीक मैं तुम्हे वह आने को जब बोलू तुम उस वक़्त वह आ जाना......

मैं - हम्म ठीक hai......tum कब निकल रहे हो......

दब ने एक बार वापस से लीडर की ओर देखा.......

दब - बस थोड़ा काम बाकी है......

लीडर - इस आश्रम की रक्षा के लिए मैं भी कुछ करना चाहता हु.....

उसने अपना हाथ आगे hi किया था की दब ने उसका हाथ पकड़ लिया......

दब - ये किसी और के लिए hai.....usko hi सौप dena....aur उससे बोल देंगे वो भी ध्यान रखे आश्रम ka......kya कहते हो......

लीडर ने सायद कुछ वक़्त तक इस बारे में socha....aur फिर हां कह दिया......

दब - ठीक है प्रतीक हम चलते है हममे काम hai.....aur मैं जाने से पहले तुमसे एक बार और मिल lunga....tum भी जाओ अब.....

वो दोनों चले gaye.....main भी वह से अजीब सा मुँह बनाये निकल गया......

वापस सभी के पास जाने के कुछ hi देर बाद हम कार्स से निकल लिए होटल की ओर.......

ज्यादा वक़्त नहीं लगा हम सब के सब वह पहुंच गए......

Madhu......wo अपने नए घर में दक्ष और पंकज के साथ जल्दी hi आ गयी thi........usne अपने घर वालो के बारे में पता किया tha......aur उसको अपनी माँ के साथ साथ अपने पिता के बारे में भी पता चला tha.......uske pita......Principal थे.....

पहले hi बता देता हु ये वो इंसान नहीं था जिसको स्टूडेंट्स पास करना के लिए मारने को आये the........wo भी फॅमिली का hi hai......par वो मधु के पिता नहीं थे......

मधु ने सब पता किया tha.....uske Pita......pass के सहर के सोल्लगे के डीन the......unki अच्छी खासी पहचान thi......upar से उनके परिवार का नाम वो भी बड़ा tha.........bada नाम तो खैर उसके माँ के परिवार का भी tha......par अभी उसके पिता पे hi चलते है........

उसी सोल्लगे में तो एडमिशन हुई थी मधु ki.....aur मेरी bhi......aaj मधु अपने पिता से मिलने वाली thi......ek तो ये स्पेशल एडमिशन tha.....upar से खास तौर पे दक्ष ने इस बात का ख्याल रखा था की मधु के पिता वह हो.......

मधु पहले अपने नए घर में गयी थी और वह से निकलने के बाद वो सब चल दिए उसी सोल्लगे की oor....aur जब वह आये तो उन्होंने एडमिशन की तैयारी शुरू कर दी.......

पेपर्स तो सारे थे hi......bas एक इंटरव्यू देना था usko.....aur उसमे उसके पिता भी the......Madhu रेडी होक भी रेडी नहीं थी......

वो अंदर से घबराई हुई thi.......usne पता नहीं बहुत साड़ी उम्मीदें कर ली thi.....sapne जो किसी भी तरह से पुररे नहीं हो सकते थे.........

वो ये सोच बैठी थी उसके पिता उसको देखेंगे और उसको गले लगा lenge.....wo तुरंत उसको पहचान lenge.....par ये कैसे मुमकिन tha.........aur माल लो वो पहचान भी लेते ना तो वो मधु को वह से भगा dete.....manhoos जो बन गयी थी वो उनकी नज़रों mein......uss शैतान के कारण......

मधु इस वक़्त अपने पास्ट को कोष रही thi.....apne किस्मत ko......kaise उसको किडनैप कर लिया gaya......aur उसके जगह पे एक शैतान को रख दिया गया tha......wo सैतान जिसकी वजह se......jiski वजह से उसका वो छोटा सा परिवार टूट आज्ञा और उसके माँ बाप अलग हो गए......

मधु इन् सब में दोष अपने माँ बाप को भी दे रही thi.....kya उनको समझ नहीं आया उनकी बेटी को बदल दिया गया hai......Wo मैजिकल क्रीचर्स जो उसको देखने आते the......kya उनको भी समझ नहीं आया था.......

पर वो एक सच को नहीं जानती thi.....khair ये सच भी कभी ना कभी उसके सामने आ hi जाना था.......

वो सोल्लगे पहुंच चुक्की thi.......aur सच में बहुत ज्यादा नर्वस thi.......collage में एडमिशन से ज्यादा अपने पिता से मिलने को......

दक्ष - मधु आराम se.....ghabrane की कोई बात नहीं है......

मधु - आप नहीं samajhoge.......Main अभी किश चीज़ज़ से गुज़र रही हु.....

पंकज - शांत हो jaao........admission हो jayega.....aur सब सही होगा,....

मधु कुछ बोलती उससे पहले hi एक पेओन aaya.....aur उसने मधु को अंदर बुलाया........

मधु ने पंकज का हाथ पकड़ा और बिन्ना उसकी तरफ देखे उसको खींचते हुए अंदर लेके चली गयी......

दक्ष देखता raha.......aur बस देखता hi रहा......

दोनों hi अंदर चले गए......

सामने चेयर पे बैठे उसके पिता ने उसको dekha.....aur अपने चश्मे को थोड़ा ऊपर किया......

मधु तो जैसे मूरत बन गयी थी वह pe......saamne से वो कुछ बोल रहे थे पर मधु को सुनाई hi नहीं दे रहा tha.....wo खुद में hi खोई हुई thi......hosh तो तब आया जब पंकज ने उसको हिलाया और चेयर पे बैठने को कहा......

पंकज - सॉरी सर वो isko.....ye इस सोल्लगे में आने के लिए बहुत उत्साहित thi.....aur अब सायद वो डर में बदल गया है की कही ये आखिरिर दिन ना हो.....

"No....no मैंने देखा है ऐसा पहले bhi.....khair.....Madhu प्लीज टेक ा seat....aur....aap आप बाहर जाके वेट करिये मैं बातें कर लू इनसे......"

पंकज - सूरे sir.....Madhu.....Madhu मेरा हाथ छोड़ो.....

मधु ने जोर से उसका हाथ पकड़ा हुआ tha......bas इसी वजह से वो बहार नहीं जा पा रहा tha......aur अब भी वो हाथ नहीं छोड़ रही थी.....

सामने बैठे डीन ने ये सब dekha.....to उसने पानी का गिलास आगे कर दिया......

"हैवे सम water......main आपको खाने वाला नहीं hu.....aap इतना दर क्यों रही है....."

पंकज ने जोर से उसके हाथ पे छुट्टी काट li....jisse उसकी आखें बड़ी बड़ी हो gayi.....aur वो बस चिल्लाने hi वाली थी पर ृक्क gayi.....usne पंकज का हाथ छोड़ा और गिलास pakda.....aur सारा का सारा पानी पि गयी......

"वैसे आप कौन hai.....matlab मधु और आप...."

मधु - पापा....

"व्हाट???"

पंकज - पापा का beta.......wo सर वो पापा बहार है naa.....sayad इस वजह से मजूझे ऐसा कहा.....

"क्या बोल रहे ho......tum दोनों नार्मल तो हो ना..."

पंकज ने अपना सर पीट liya......Tabhi अंदर दक्ष आ gaya........aate hi उसने अपने कोट से कुछ निकला और वही जमीन पे गिर्रा diya.....jiske बाद वह पे धुवां सा फैलने laga......usne पंकज की तरफ कुछ इसरा kiya....aur पंकज ने अपना और मधु का चेहरा धक् diya......Aur देखते hi देखते वह पे डीन बेहोश पड़े हुए the......aur मधु घबराई हुई......

मधु उठ के कुछ करने hi वाली थी की दक्ष....

दक्ष - मधु ये सब क्या कर रही ho........aise में यहाँ एडमिशन नहीं होगा तुम्हारा......

पंकज - और नहीं तो kya.....tumhe खुद पे काबू करना होगा........

मधु - पर वो.....

दक्ष - पर वॉर कुछ नहीं अगर नहीं किया ना तो यहाँ रह नहीं पाओगी tum......ab लम्बी लम्बी सांसें lo.......khud को शांत करो बिलकुल शांत.......

मधु ने वही kiya....kyunki वो जानती thi.....Daksh सही कह रहे hai......agar उसने ऐसा कुछ नहीं किया तो सब ख़राब हो जाएगा......

मधु खुद को शांत करने में लागु हुई थी वही पंकज उसके पिता को चेक कर रहा था......

ये गैस यादास्त मिटने के लिए उसे होती hai......gas काम tha.....to बस कुछ देर की यादें hi गयी होगी......

पंकज - इनको होश आने वाला है......

दक्ष - चेयर पे सही से बिठाओ usko......aur सब दरवाजे के पास......

सब सेट कर वो सब दरवाजे के पास पहुंच gaye......aur उसके ठीक बाद डीन को होश aaya......aur वो यहाँ वह देखने लग गए......

जब उनकी नज़र सामने खड़े तीन लोगो पे पड़ी तो उन्होंने अपना चस्मा ठीक किया.....

"जी आप सब"

मधु - सर अपने hi बुलाया था एडमिशन के लिए.....

"Maine.....hmm....haa मस. Madhu,right.....par आप दोनों क्यों...."

दक्ष - वो पेओन ने कहा तो हममे लगा सभी को आना है......

"हम्म कोई बात नहीं आप बैठिये yaha.......mujhe बस कुछ बातें hi करनी है inse.....wo आपके सामने भी हो जायेगी....."

सभी बैठ गए.....

" मस. Madhu......admission तो हो jaayega.....par आप कुछ लेट है यहाँ pe......humne स्पेशल केस में कुछ बचो को एडमिशन देने का तय किया tha....aur आप उनमे से hi एक hai......par क्या आप इस काबिल है...."

मधु - hmm.....Main काबिल hu....aur ये आपको आगे पता चल जाएगा.....

"वेल then.....theek है....."

उसने सिग्न किया एक पेपर पे और बस हो गया admission......yahi बात करनी थी उसको :सिघ:

नहीं ऐसा नहीं tha......baat करनी तो कुछ और thi.....par वो समझ नहीं पा रहा था की वो क्या पूछने वाला tha.......yaadein मिटत गयी थी इस वजह से थोड़ा कंफ्यूज थे.....

वो सब जल्दी hi वह से निकल गए.......

मधु - अच्छा हुआ आपने आके सब संभल लिया......

दक्ष - कोई बात नहीं बस आगे से ध्यान rakhna......agar ऐसा hi किया तो.....

मधु - हां मैं ध्यान रखूंगी.....

दक्ष - तो तुम्हे सोल्लगे देखना है या फिर हम वापस चले......

मधु - मैं तक गयी हु मुझे वापस जाना hai.......collage कल देख लुंगी.....

और वो सब वापस से अपने घर में चले gaye.....Madhu जो भी हुआ उसके बारे में सोच के परेशां हो रही thi.....usne इतना वक़्त पुजारी जी के साथ बस इसी सब के बारे में तयारी करते हुए बिताया tha....aur देखो उससे वो भी नहीं हुआ......

खैर इसको यहाँ छोड़ते hai....Rian और उसकी बहन आ चुक्के थे एअर्थ पे......

अभी अभी hi आये the.......Rian पूरी कोशिश कर रहा था की वो इस वक़्त तो ना मिले प्रतीक se.......matlab जब उसकी बहन उसके पास hai......wo चाहता था एक बार उसको खबर दे दे की वो यहाँ आ चुक्का है और वो भी अपनी बहन के साथ तो तैयार रहे.......

इसी लिए वो अपनी बहन को यहाँ वह घुम्मा रहा tha.....par एक इम्मोर्टल की स्पीड को अगर देखा jaaye.....to वो सायद कुछ पलों में पुरे एअर्थ का चक्कर मार के आ जाए और सब कुछ देख ले उसी एक पल mein......to उसके लिए ये मुश्किल हो रहा tha.....aur खबर पहुंचने के लिए भी उसको वक़्त चाहिए था जो मिल नहीं रहा था......

वो उसको मधु के पास किसी भी हालत में नहीं ले जा सकती thi......usko पता नहीं था ये कैसे उसके साथ बर्ताव karegi.....aur उसके बाद उसका नतीजा क्या होगा ये भी नहीं जानता था रिआन......

इन् सब को छोड़ हम फोमोस पे चलते hai......Fumos पे अलग hi सब चल रहा tha.........Fumos के अनुसार उसका नया लीडर बिलकुल तैयार हो गया tha......par दिक्कत thi.....aur वो भरोशे की dikkat.....usko उसपे याक्किन नहीं हो रहा था......

फोमोस को इस बात की चिंता थी की क्या वो उसकी बातें sunega.....kya वो उन् सभी नियमों का पालन करेगा जो फोमोस ने बनाये थे......

ये एक सवाल बस इसी एक सवाल के कारण तो वो रुक्का हुआ tha.....warna वो अब तक लीडर की साड़ी पावर्स दे चुक्का होता स्लेयर को........

एक बात से अनजान था स्लेयर भी और वो फोमोस bhi.....Old आउल पल पल उसके साथ tha.....saare की tarah........bas उसपे नज़र रखे hue.......sayad फोमोस को जितना पता था स्लेयर के बारे में उससे ज्यादा ओल्ड आउल को पता चल चुक्का था......

ओल्ड आउल जानता tha.....ye यहाँ से निकलने की फ़िराक में hai........ye बहुत वक़्त से कोशिश कर रहा tha....par कामियाब नहीं हो पा रहा tha.....Fumos इसी बात को लेके तो इन्सेक्युरे tha......wo कोशिश ह क्यों कर रहा था......

फोमोस को लूसिफ़ेर के लोगो के बारे में नहीं पता था की वो भी नज़र रख रहे hai....darasal फोमोस को किसी के बारे में पता नहीं था जो स्लेयर पे नज़रें टिकाये बैठे the.....Haa ओल्ड आउल इस बात को जानता tha.....bas ये नहीं समझ पा रहा था आखिर क्यों......

लूसिफ़ेर ने अपने बहुत से बन्दे एअर्थ पे लगा रखे थे तो उनसे भी ज्यादा यहाँ स्लेयर के pass.........Dark पावर मान लो मिल भी जाए पर क्या हो अगर उसके बेटे जस्टिन को नया बॉडी hi ना mille......sab बक्कर है फिर......

बस इसी को लेके.......

हलाकि इतने वक़्त से बस नकमियाबी मिलने के कारण लूसिफ़ेर बहुत गुस्से में tha.......wo हर एक कोशिश कर रहा था की किसी तरह वो इन् दोनों में से किसी एक जगह पे जा सक्के और अपनी जीत सुनिश्चित कर सक्के पर ये मुमकिन hi नहीं tha......wo फोमोस पे आना छह रहा था फिर से par......Leader था नहीं yaha....iss वजह से कांटेक्ट नहीं हो पा रहा tha.....aur वो ऐसे hi यहाँ नहीं आ सकता था.....

एअर्थ पे.......

सभी के सभी हम्म तिण्णो को छोड़ के वापस जा रहे the.....tabhi मुझे उन् डार्क वर्ल्ड वालो में से कुछ लोग दिख gaye......jo चची के पीछे लगे हुए the.....ab उनको वही डार्क पावर वाली लग रही थी इसी वजह से......

मैं दीदी और निकिता को वही छोड़ के उनके पीछे चला गया.......

मैं नहीं चाहता था उनकी वजह से चची को कोई परेशानी ho.......aur अगर वो के पीछे लगे रहे तो ना छह के भी परेशानी तो होनी hi है......

वो चची के पीछे जा रहे थे और मैं unke......Ab ध्यान खींचना है तो कुछ तो करना hi होगा ना तो मैंने भी kiya.....unme से एक को पकड़ के लेकर होटल चला gaya.......jab उनको इस बारे में पता चलता वो खुद से आते उसको ढूंढते hue.....upar से मैंने साबुत भी छोड़ दिए थे जिससे वो मेरे पास hi आये......

मैं इस बन्दे को पकड़ के होटल में aaya.....aur अपने रूम में लेके आके पहले उसको छोटा कर diya.....apne एलिमेंट की मदद se.....aur फिर उसको एक बोतल में बंद कर दिया.......

वो चिल्लाता रहा......

मैं - चुप हो jaao.....tumhare दोस्त आएंगे मैं छोड़ दूंगा tumko.......mujhe बस बात करनी है.......

थोड़ी देर चुप रहके मैंने फिर से कहा......

मैं - अच्छा एक बात बताओ ये डार्क पावर वाले को क्यों धुंध रहे हो ऐसी क्या परेशानी है तुम्हारे प्लेनेट पे......

वो बोल रहा था पर एक तो छोटा था ऊपर से बोतल में तो मुझे सुनाई नहीं दे रहा tha......maine उसको बोतल से बहार निकला और वापस से बड़ा किया......

मैं - हां अब बताओ......

वो - मुझे जाने do.....main यहाँ बहुत जरुरी काम से आया hu......Mera प्लेनेट तबाह हो जाएगा......

मैं - अरे भाई आराम से मैं भी तो उसी बारे में पूछ रहा hu.....ab ऐसे डायरेक्ट एन्ड पे आने से क्या hoga.....shuru से batao....saaf साफ़ बताओ....

वो - हमारे यहाँ हालत बहुत ख़राब hai.......ek सैतान था वह pe........wo चला गया तो उसके जैसे 4-5 बन gaye......aur अब वो उसकी जगह लेना चाहते hai.....aur पुरे प्लेनेट पे कब्ज़ा चाहते है.....

मैं - मैं समझा nahi......tumhare यहाँ एक सैतान tha.....wo चला गया ये सही hua......par फिर ये बाकी के 4-5 सैतान कहा से आ गए......

वो - वो पहले से the.....par तब सैतान नहीं थे.....

मैं - तो क्या वो रूप बदल के आये थे......

वो - Nahi......wo हमारे जैसे hi the.....par अब उनको ताकत की भूख ने सैतान बनना दिया है लालच की वजह से वो हामरे बच्चो को यतीम कर रहे hai......koi भी चैन से नहीं जी पा रहा वह पे.......'

मैं - हम्म कुछ कुछ बात समझ तो आयी hai.....Cheetah चला गया तो गीदड़ उसके इलाके पे कब्ज़ा करने के फिराक में hai.....to तुम्हे इसको लेके मदद चाहिए......

वो - हां हम बस ये सब बंद करना चाहते hai.......ye बंद हो जाएगा तो हम सब मिल के एक खुशहाल जीवन जी पाएंगे......

मैं - परेशानी तो गंभीर है......

मैं उसको बोल hi रहा था की रूपल दीदी मेरे कमरे में आ गयी......

रूपल दीदी - वो log.....jo कल मम्मी के पीछे थे वो यहाँ आ गए hai......bahut सारे hai...ye यहाँ क्या कर रहा है......

मैं - वो सब इसको hi लेने आये hai.....Didi क्या उन् सब के लिए वो निच्चे के हॉल में कुछ इंतज़ाम हो सकता hai.....Mujhe बात करनी है इन् सब से......

रूपल दीदी - पर.....

मैं - ये जरुरी है दीदी

रूपल - ठीक है मैं देखती hu.....par क्या तुम्हे मधु के पास नहीं जाना.....

मैं - जानना hai.....par अभी उसको कोई परेशानी नहीं होने वाली hai.......Daksh मां है उसके साथ......

रूपल - हम्म ठीक hai.....par मैं भी वह पे rahungi.....mujhe भी जानना है ये सब यहाँ कर क्या रहे है.....

मैं - हां ठीक है.....

वो चली gayi....aur मैंने उस बन्दे को भी उनके साथ भेज diya....taaki बहार के उसके साथी कोई हंगामा न करे....

वो सब अभी बहार गए hi थे ki......Rian वह आ गया tha......aur वो भी उसकी बहन के साथ.....

मैं पहले तो उसको देख के खुश hua....par उसके बाद उसकी बहन को देखा तो मुझे समझ hi नहीं आ रहा था कैसे रियेक्ट karu......naa है पा रहा था ना शांत रहा जा रहा था.....

वो - तो यहाँ पे हो तुम.....

मैंने कुछ नहीं kaha......bas चुप रहा.....

रिआन - देखो इन् सब से किसी को क्या hi मिलने वाला है......

वो - मुझे मिलेगा बाहत कुछ milega.....Main इसको नहीं छोड़ने वाली......

मैं - जो करना है कर lena....par ये जगह सही नहीं hai......yaha पे अगर हम कुछ करते है तो ना जाने कितने मासूम लोग मारे jaayenge.....Main जानता हु ऐसी जगह जहा तुम मुझसे बदला ले सकती हो......

मेरी बात सुन्न के वो मुझे ऐसे देखने लगी जैसे उसको याक्किन hi नहीं हो रहा tha.......won कभी मुझे तो कभी रिआन को देख रही थी.......

रिआन - मैंने कहा था सब बदल चुक्का hai.......yaha पे इसका अपना परिवार है.....

वो - Kya......ye नहीं हो sakta......ye और परिवारर......

रिआन - मैं सच कह रहा हु......

वो - Sach.....main मान hi नहीं sakti........ek बार इसको मौका मिला परिवार बनाने ka.....aur हम सब ने देखा इसने क्या किया tha......inn जैसों को परिवार का मतलब hi पता नहीं hota.....ye नहीं समझते ये sab.......ye बस मतलबी होते है......

रिआन - वो सब पुराणी बात है अब ऐसा नहीं है कुछ......

अभी वो आगे कुछ बोलती उससे पजल दरवाजे पे नॉक hui......Rupal दीदी थी....

रूपल - ोइये छोटू हो गया sab.....aaja....

मैं - कुछ देर तुम दोनों यही रूक्को मैं कुछ काम शुरू करने जा रहा hu......uske बाद यहाँ आता hu......hum तब लड़ लेंगे.....

रूपल - प्रतीक अंदर किस्से बात कर रहे हो ab.....jaldi आओ.....

मैं - हां दीदी आ रहा हु.....

मैंने गेट खोला और वह से बहार चला गया.......

रिआन - देखा tumne......wo उसकी बहन है......

वो - मुझे याक्किन नहीं हो रहा इन् सब pe.....ye बदल hi नहीं सकता.......

रिआन - मैं तुम सब को न जाने कब से बता रहा hu......unn सब में प्रतीक की ज्यादा गलती नहीं थी हालत वैसे बनना दिए गए थे इस वजह से सब हुआ था.....

वो - मैं इस बात को कभी नहीं मान sakti......wo कहा गया hai.....Main खुद देखूंगी वो क्या कर रहा है waha.......ispe नज़र होगी मेरी.....

रिआन - जो करना है karo.....par मेरी एक बात ध्यान से sunno.......Madhu अभी इस हालत में नहीं की हम उससे मिल sakke.......to उसके पास जाने की कोशिश भी मत करना समझी......

वो - मैं मधु को कभी परेशां नहीं कर sakti......par अगर मुझे पता चला ये प्रतीक वापस से......

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में डार्क वर्ल्ड की समस्या को सुलझाने के लिए क्या करता है प्रतीक ये देखेंगे और साथ hi......DB का फोमोस jaana....aur डेमोस के लोगो से सामना होना......
 
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