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मैं बीएड पे hi बैठा tha......jo भी हुआ abhi....usse खुश तो बहुत tha......par समझने की कोशिश भी कर रहा था उसको.....
मैंने जब हाथ आगे किया की उसको छू सक्कु मैं उससे दुर्र जा के गिर pada.......par वो मेरे पास आ गयी thi......aur उसने मुझे चुवा bhi......matlab अगर वो चाहे तो वो मुझे छू सकती है......
क्या ये बस इतना सा hi hai......yaa कुछ और भी है isme......kya इतने समय से मैं इस बात को गलत समझ रहा था......
जब मधु ने ये सज़्ज़ा दी थी तो मुझे लगा था की ये हम दोनों के लिए सज़्ज़ा hai.....aur ये थी bhi.....usne कभी मुझसे मिलने के बारे में सोचा hi नहीं था उस वक़्त के बाद se.....ye मुझे लगता hai.....aur मैं तो उसके पसस जा hi नहीं सकता था मिलने ko......isse हममे बातें नहीं होने लगी thi....aur उसके baad....jab बातें नहीं होती है दो लोगो के बिच तो तीसरा चौथा और paachwa.....yaa ये कहु सभी के sabhi......galatfahmiyan बढ़ने लग जाते hai......jaan बुझ के भी और कभी कभी अनजाने में भी.....
उसने मुझे chuwa....matlab वो मुझे छू सकती thi.....sayad ये बात उसको भी पता नहीं थी उस waqt......wo मेरे पास आ सकती thi.....Main इतना तो जानता हु अगर ये उसको पता होता तो वो मेरे पास आती जरूर एक बार तो मेरी बातें सुनने को आती......
" प्रतीक मौका अच्छा hai....usko कुछ याद nahi.....tum उसको अपने पास आने पे मज़बूर कर सकते हो...."
"प्रतीक पर आगे क्या karoge.....kya वो सच में हमेशा साथ रहेगी tumhare.....jab उससे सब याद आ जाएगा जैसे तुम्हे याद आया hai.....kya वो इस बात से और गुस्सा नहीं होगी......"
"प्रतीक तुम ये बस अपने प्यार के लिए कर रहे ho.....aur कोई बात नहीं hai......tum ये करने वाले ho......hai ना...."
मैं समझ नहीं पा रहा tha.....aur ये aawajein......ye मेरे सर्र में गूंज रही thi.....Main इससे परेशां हो रहा था.......
मैं लेट गया और अपने कान बंद कर लिए......
बीएड पे लेटते hi मुझे नींद आ गयी......
दक्ष मां वापस आ गए the.......unhone ये बाद पंकज तक पंहुचा दी थी की वो वापस आ गए है और अभी वो घर पे hai......to आज वो भी घर पे आ jaye.....Madhu को लेके......
निक्स कबीला टूट चुक्का था और ये बात सभी को पता चल गयी thi.......sunne में आया था ये सब मंदिर को लेके हुआ था......
जब ये बात फैली तो इस बात से और कही साड़ी बातों ने जनम ले लिया.....
क्या मधु को एअर्थ पे बस यहाँ का माहौल देखने को भेजा गया tha.....taki वो अपने लोगो को यहाँ बुल्ला sakke......aur भी ना जाने कैसे कैसे बातें चल रही thi......par इससे क्या hi फर्क पड़ता था.....
स्ट्रेंज वर्ल्ड में जो निक्स लोग रह गए थे उन् सब ने आपस में hi एक बन्दे को चुनना और उसको मंदिर की देख भल करने को कहा gaya.....par वो banda......wo भाग गया वह से दूसरे hi दिन.......
बोल रहा था मूर्ति बातें करता hai.....uski आँखों से आशु आतें hai.....wo.....wo सैतान है.....
ये बात किसी को समझ नहीं आयी ुन्नन सब mein.......par मंदिर को ऐसे hi तो नहीं छोड़ सकते the......unhone सोचा की नया बाँदा ढूंढा jaaye......par इस baar......iss बार तो सभी के मैं में एक डर था......
लगभग से अँधेरा हो गया tha......jab निकिता और रूपल दीदी मेरे कमरे में आ dhamki......pata नहीं ये दरवाजा कैसे खोला इन्होने......
रूपल दीदी - ooye....utth.....uth जा छोटू.......
निकिता - अरे उठ भी जाओ हममे देर हो जायेगी.....
मैंने देखा ये दोनों मेरे रूम में आये हुए the......Main अपने बीएड पे उठ के बैठ gaya.....apni आखें साफ़ कर रहा था......
मैं - आप यहाँ kaise.....aur darwaja.....wo कैसे......
रूपल - तुझसे पहले मैं भी यही रहा करती thi......itna तो पता है कौन सा दरवाजा कैसे खोला जाता hai.......ab ये सब छोड़ और जल्दी से तैयार hoja....ghar जाना hai.....aur किसी नए शैतान के बारे में पता चलने वाला है......
मैं - Ghar......par मैं नहीं जाना चाहता......
मैं क्या करता घर पे jaake......kyunki उससे ज्यादा जरुरी काम मुझे यहाँ पे था naa.......Mujhe देखना था मधु और मेरा ये क्या hai......matlab क्या वो मेरे पास आ सकती hai....bas इतनी सी hi बात thi.....yaa और भी कुछ बात thi.....matlab.....kya कोई ऐसा रास्ता भी था की मैं उसके पास जा सक्कु......
तभी मुझे याद aaya.......jab वो मुझसे पहली बार milli......matlab स्कूल mein.....matlab उस दिन जब उसने पानी दाल दिया था mujhpe.....tab तो हम साथ the......pass पास the......kya उस waqt.....wo छह रही थी की हम साथ हो या ये कुछ और था......
रूपल - नहीं जाना chahte......kyun नहीं जाना चाहते तुम घर वह सब वेट कर रहे होंगे......
मैं - मैंने नहीं जाना यहाँ काम है मुझे जाओ तुम सब.......
निकिता - रूपल दीदी आप एक मिनट के लिए बहार जाओगी इससे बात करनी है.......
रूपल - मैं बहार jaaun......theek hai.....pata नहीं कौन सी खिचड़ी पक्क रही है तुम दोनों में.....
इतना बोल वो बस बहार चली गयी......
मैं - क्या बात करनी है batao......aur देखो मैं पहले से कह रहा हु मैं नहीं जाना चाहता waha......mujhe काम है इधर.....
निकिता - Dekho.....agar tumne......galti से bhi......matlab गलती से भी पंकज को कुछ kiya......to समझ lena.....main.....Main खून कर dungi.....maine कहा था मैं उससे पूछ लुंगी पर मौका hi नहीं mila.....mujhe थोड़ा और वक़्त चाहिए.....
मैं - क्या बात कर रही ho.....mujhe अब नहीं जानना उससे दिम्माग में क्या hai......nahi पर फिर भी तुम पूछ hi लो अच्छा hoga.....main क्लियर रहूँगा.....
निकिता को मेरी बात समझ नहीं aayi.....Main खुद की बातें नहीं समझ पा रहा था उसको क्या hi समझाता अभी दिम्माग में बस यही चल रहा था क्या मैं भी उसको छू सकता हु.....
निकिता - क्या बोल रहे ho....kuch समझ आये ऐसा बोलो.....
मैं - देखो मैं घर नहीं जा रहा आज तो nahi.....tum सब जाओ और बुआ को बोल देना मुझे यहाँ पे थोड़ा काम है मैं कल आ jaaunga......yaa परसो......
निकिता -(आँखें दिखते हुए) ठीक hai.....par भूल के bhi.....Pankaj को कुछ मत करना.....
मैं - अरे ठीक है मेरी माँ अब जा naa.......mat करना मत karna.....pata नहीं क्या hai......ab तुम एक और बार ये बात kaho.....main अभी जाके उसको पीट के आऊंगा......
रूपल दीदी - हो गया तुम दोनों ka......bua बुला रही है जल्दी से बहार आओ......
निकिता ने मेरी ओर dekha.....apni ऊँगली मेरी तरफ की और आँखें छोटी करते हुए ऊँगली हिला रही थी......
मैं अस्स पास देखा कुछ है नहीं क्या इसको मारने के liye.....aur वो वह से चली गयी.....
रूपल दीदी - तुझे अलग से बोलू.....
निकिता - उसको काम है Didi......rahne do....kal परसो आ जाएगा वो.....
रूपल - ऐसे कैसे रह......
पता नहीं उनके दिम्माग में क्या aaya......wo एक दम से मुस्कुराने लगी.......
रूपल - ठीक है chotu.....bas ध्यान रखना अपना.....
इतना बोल दोनों चले gaye......Main ये सोच रहा था ये इतने अजीब क्यों होते है ये लोग.....
मैं उठा अपने जगह se.....aur पहले ये देखा की मधु कहा पर hai......matlab इतना तो पता लगा hi सकता था न......
वही निकिता और रूपल दीदी दोनों hi चले गए the.....Bua को जाके उन्होंने कहा की उसको कोई जरुरी काम है उसको अभी रहने देते hai.....Bua ने एक बार मुझे बुलाना चाहा पर फिर कुछ सोच के नहीं aayi.....wo बस जाके गेट के पास कड़ी हो गयी thi......taaki बहार जाने का जो प्रोसीजर है वो पूरा कर सक्के.....
सभी वही पे थे.....
रूपल दीदी ने देखा की दूसरी तरफ के लाइन में पंकज और मधु लगे हुए the......aur उन्होंने अपना सर पीट लिया.......
फिर उन्होंने सोचा की उन्होंने माफ़ी नहीं मांगी थी पंकज se......unko भी माफ़ी मांग लेनी chahiye......taaki सब सॉर्ट आउट रहे बाद में उनकी वजह से कोई दक्कत ना हो......
वो निकिता से कह के उस तरफ निकल gayi......Nikita ने भी देखा वो भी जाना चाहती थी पर वो जाके क्या kahti.....waise भी दीदी तो पहले hi निकल ली थी......
दीदी पंकज के पास गयी और.......
दीदी - पंकज......
पंकज अभी किसी चीज़ के बारे में सोच रहा tha......ki तभी उसको आवाज सुनाई di......wo भी रूपल ki......ek बार तो उसने याद करने की कोशिश hi शुरू कर दी की कही उसने गलती से कोई पन्गा तो नहीं ले लिया था......
मधु - हां बोलिये.....
रूपल - तुम मधु हो naa......waise तो मैं अभी इनसे बात karne.....sorry माफ़ी मांगने आयी thi.....wo दरअसल पीछे बहुत सी गलतफहमियां हो गयी thi.....aur ज्यादातर मेरे वजह से thi......aisa मुझे लगता है तो मैं सोच रही थी की मुझे इसके बारे में माई मांग लेना chahiye......taaki हम नयी सुरुवात कर सक्के......
मधु - यहाँ किसी को नयी......
पंकज - तुम चुप raho.......ye मुझसे बात करने आयी है......
मधु ने गुस्से में उसकी ओर देखा.....
पंकज - हां हां आप बोलो......
रूपल - वो दरअसल बात ऐसी है की तुम भी जानते हो हमारे बिच में बहुत साडी गलतफहमियां हुई है और उनके बाद बहुत सी लड़ाइयां bhi......hai naa......to मैं सोच रही हु वो सब भूल जाए और हम दोस्त बन सकते है.....
पंकज - हां सब भूल जाते hai.....aapne मेरे घर पे आके मुझे पीटा वो भूल जाते hai.....aapne मुझे बार बार पीटा है हां उसमे गलती मेरी थी मैं जानता hu.....par हर जगह सही आप भी नहीं the......to मैं बस यही kahunga.....aap आगे जाओ मुझे नहीं ,अटलब है आप क्या कहते हो और क्या नहीं.....
निकिता वैसे तो दूर thi.....par सुन्न सब रही थी.......
उसने जब सुन्ना वो पंकज रूपल दीदी की बेइज़्ज़ती कर रहा था तो उससे रहा नहीं गया.......
वो उनके तरफ गयी.....
निकिता - हिम्मत कई........
वो कुछ बोलती उससे पहले hi रूपल दीदी ने उसको रोक लिया और बस इतना कहा......
रूपल दीदी - मुझे बस माफ़ी मांगनी thi.....ab माफ़ करना ना करना ये तो तुम्हारे हाथ में है ये तुम samjho.....aur इसकी बातों का भी बुरा मत manna.....Nikita चलो यह से......
निकिता को वो खींचते हुए लेके गयी अपने साथ.......
निकिता - छोड़ो mujhe.....ye समझता क्या है खुद ko......iske हाथ पेअर तोड़ के रख दूंगी main.....aapko बोलै कैसे इसने ये सब......
रूपल - आइए pagal......chup.....main यहाँ सब ख़तम करने में लगी हु और तुम हो की सब वापस से शुरू कर रही हो......
मैं - क्या शुरू कर रहे हो आप सब......
बुआ - तू तो नहीं जाने वाला था ना फिर यहाँ क्या कर रहा है.......
मैं - वो बस मैं बदल गया.......
रूपल - और काम ka......kaam था ना तुझे.......
मैं - हम्म पर अब वो नहीं हो पायेगा.......
रूपल - हां अब काम भी तो जा रही है......
मैं - क्या बोल रही हो aap......main समझा नहीं......
रूपल - कुछ nahi.....main कहा कुछ बोल रही हु......
बुआ - तो आ गए tum.....maine तो सुन्ना था काम है कुछ तुमको......
मैं - वो तो बाद में भी हो जाएगा.....
बुआ ने आगे कुछ भी नहीं kaha.......sab बहार चले gaye......bus pe.......aur फिर वो दोनों अपने स्टॉप पे उतर गए और हम अपने स्टॉप pe.....waise मैं तो मधु वाले स्टॉप पे उतर hi जाता पर K.Bua ने पूछ लिया कहा जा रहे ho.....aur उस वक़्त बताने को कुछ था नहीं.......
हम घर पहुंच गए........
पहले खाना खाया हम सब ने उसके बाद.......
दादा जी - तुम सब ने एक सैतान को मार दिया tha......par वो कमज़ोर tha......ab आगे जो सैतान है वो उससे तो ताकतवर hi hoga.......to क्या तुम तैयार हो......
पता नहीं इनको क्या सुन्ना tha......kya हममे इस वक़्त जोर से चिलाना चाहिए था यस siir.......aise चीज़ज़ की उम्मीद में थे wo.....pata नहीं.....
पर हमने कुछ नहीं kiya......bas उनकी ओर देखते रहे......
दादा जी - प्लान तैयार hai......iss बार भी वही करना है 3 लड़कियां एक साथ और प्रतीक और निकिता एक साथ निधि और सत्य एक साथ ........पिछले hi बार की तरह करना है sab......kisi को कुछ कहना है......
निकिता - मुझे इसके साथ नहीं rahna......matlab मुझे लड़ने के लिए जाना hai......main पिछली बार भी.....
वो बस बोल hi देती की उसको पिछली बार ज्वाला के कबीले जाना पद गया था पर वो ृक्क गयी......
दादी - पर इससे प्रतीक अकेला हो जायेगा और उसको वक़्त लग जाएगा पता लगाने में वो सैतान उस जगह पे कहा है और कैसा है.....
चची वैसे भी इस बात से परेशां थी की दीदी की तबियत थोड़ी सही नहीं hai....to उनको अभी इन् सब में ना भेजा jaaye....unhone ये बाद दीदी को समझने की कोशिश करि की वो ना जाए इस बार पर वो माने तब naa.......ye मौका अच्छा था.....
चची - मुझे भी लगता है निकिता को एक मौका देना चाहिए वह pe......Aur रही प्रतीक की बात तो उसके लिए to.....Rupal चली जायेगी उसके साथ.......
रूपल - मम्मी ये क्या बोल रही ho.......Main कैसे.....
दादी को भी लगा ये सही hai......aur वो कोई जोर जबरदस्ती तो कर नहीं रही थी निकिता के साथ निकिता ने खुद कहा था वह जाने के बारे में......
दादी - मुझे भी यही लगता है.....
रूपल दीदी - दादी आप bhi.....aap तो काम से काम मेरा......
दादू - हम्म तो तय हो गया है रूपल और निकिता अपनी जगह बदल रहे hai.....to इस baar......Poonam और कविता थोड़ा ध्यान से निकिता साथ होगी तुम्हारे.......
मैं कुछ नहीं बोल रहा था मुझे बोलना hi नहीं tha.....ye पता नहीं कैसे जीव के बारे में बात कर रहे the.....isko पहले देखा hi नहीं था मैंने......
सब तै हो गया कौन कैसे jaayega.....saitaan की बातें भी कर ली gayi.....ye एक शहर के बिच का इलाका tha......koi बंद पड़ा हुआ godam......iss शैतान को सब के सब भूत समझते the.....issi वजह से उस इलाके को हुन्तेद बता दिया गया tha,.....waha कोई नहीं जाता.....
इस दौरान लीडर ये सोच रहा था की मैं हु kaun,....aur मैंने वो सब किया kaise.....matlab उन् कीड़ों को मारने का वो tarika.......waisa तरीका उसने नहीं देखा tha.....kisi ने नहीं देखा था......
घर पे अब सब सोने चले गए the.....aur मैं पहले से सो चूका था तो मैंने सोचा क्यों naa......bas एक baar.....dekh आऊं उसको.....
घर में hi पोर्टल खोला मैंने और निकल gaya......mujhe ये पता था वो दोनों एक साथ honge.....matlab पंकज के घर पे hi.......waise तो उसके घर में भी जा सकता था मैं सीधे पर दिक्कत भी हो सकती थी isse.....agar मैं गलती से मधु के ज्यादा करीब चला गया तो......
इसी लिए मैंने उससे दूर जो पार्क था पंकज के घर के पास वह जाना का फैसला kiya......raat हो चुक्की थी कोई था भी नहीं waha......Main वह चला gaya......uss जगह से पंकज का घर दिखाई देता था.......
ध्रुव - आपको याद hoga.....ye आपकी माँ का घर hai....matlab इस वक़्त की माँ ka.....waise तो हम जैसों के कोई अपने नहीं होते.....
मैं - ध्रुव तुम इन् रिश्तों में कब से भटकने लग gaye......ye सब अच्छा नहीं है......
ध्रुव - मैं तो बस आपकी बातों को देख के सीखता आया hu.....aapne भी तो रिस्ता बनाया था.....
मैं - वो बात और thi....aur तुम तो देख भी रहे ho.....uske बाद क्या क्या हो रहा hai......kya तुम इन् सब से गुजरना चाहोगे......
ध्रुव - क्या आप उन् सब में खुश the.....kya आप एक इम्मोर्टल बन के खुश the......kya आपको नहीं पता था की कितने नियम है और ना जाने कितने hi बंदिशें......
मैं - ये तुम मेरी बातें क्यों कर रहे हो Dhruv.....aur तुम क्या मेरा हाल नहीं देख रहे ho.......iske मुकाबले तो उस वक़्त hi खु.....
मैं जो बोल रहा था अगर उसके बारे में सोचु तो मैं अभी सबसे बड़ा झूट बोलने वाला tha......Main कभी भी एक इम्मोर्टल के तौर पे खुश नहीं tha......kyunki मैं बोर हो जाता था कुछ करने को बचता hi नहीं मेरे pass.......Maine चीजजें सीखना शुरू kiya....aur बस सीखता चला गया इतना ज्यादा की मैं उसमे एक्सपर्ट बन गया पर उसके बाद kya.....Main एक टीचर बन gaya......Immortals को ज्ञान बाटने लग gaya......ye था मेरा kaam......Jab तक मधु नहीं आयी थी मैं बस बोर hi होता रहता tha.....issi वजह से तो मैं दूसरे जीवों की जिंदगियों में दखल देने लग गया tha......ye जीव मुझे अच्छे लगते the....inke पास हमेसा एक ऐसा मोड़ होता tha.....jaha सब ख़तम बस सब ख़तम आगे कुछ भी nahi......haa इनमे भी दोबारा जनम लेना होता tha.....par इनकी यादें मिट जाय करती thi.....chahera नया हो जाता tha......aur तो और आस पास के लोग भी बदल जाते थे......
पर एक इम्मोर्टल ka.....uska kya.....wo तो बस सदियों से लगा हुआ होता tha......naa यादें धुंधली होती ना hi कुछ और.....
ध्रुव - क्या आप खुश थे......
मैं - नहीं तुम सही ho.....main खुश नहीं tha.....mujhe इनसब से जलन होती thi.....har किसी se.....har एक जीव से जो मर सकता tha......mujhe देखो मैं तो सायद ठीक से मर्रा भी nahi.....sab कुछ तो याद hi है mujhe.......meri बॉडी बस बदल गयी hai......chahera भी पहले जैसा hi hai.....dekho.....kya कही से अंतर दिख रहा है.....
ध्रुव - आपको मौका मिला hai.....aap वो बने हुए है जिनसे आपको जलन हो रही thi.....kya आप इसके मज़्ज़े लेना नहीं chahenge....kya आप इन् रोशों का दोस्तों का....
मैं - बस bas.....samajh गया क्या कह रहे ho.....waise ये बात भी सही है अलग मुझे रिश्तों के बारे में पता होता तो main......main सायद मधु के साथ वैसा नहीं karta.....yakkin करता उसपे......
ध्रुव - हम्म......
मैं फिर पंकज के घर के तरफ nikla......ek ऐसी जगह जगा से सब दिख sakke......Maine ध्यान दिया तो इतना समझ में आ गया घर में 3 लोग hai......aur तिण्णो hi अलग अलग कमरे mein.......sayad तिण्णो hi सो रहे थे.....
मैं मधु को देख नहीं पा रहा था......
मैंने थोड़ी और कोशिश करि पर काम नहीं बना और उसके बाद मैं वापस आ गया.......
और आते hi ध्यान लगाने बैठ gaya......Dark पावर को अब मुझे इतना ताकतवर बनाना tha.....aur उसको एक दम से कण्ट्रोल में रखना था जिससे मेरे इस सरीर को या फिर मेरे आस पास के लोगो को कोई परेशानी ना हो......
जब आखें खोली तो वह पे रूपल दीदी thi.....wo पता नहीं कब आयी thi......wo भी ध्यान लगा रही thi.....baaki के सब का सायद हो गया था......
मैंने उनकी ओर dekha......Energy लेवल्स एकदम से सही the.....matlab वो एकदम से ठीक thi.....jo बातें उनके दिम्माग में होनी चाहिए थी वो सब वह पे thi....aur जो नहीं वो नहीं थी......
मैंने फिर उनकी कुल्हाड़ी पे ध्यान lagaya.......wo और भी ज्यादा बदल गया tha.....jo बट्स उनके अंदर गए थे उन्होंने ना सिर्फ उनको बल्कि उस कुल्हाड़ी को भी बदल के रख दिया था जो मैंने दिया था......
अगर इन्होने अपने शक्तियों पे सही से काबू कर liya.....to ये खुनी घुड़सवारों की रानी के रूप से भी ज्यादा ताकतवर हो जायेगी......
मैं - ध्रुव देखो अब मैं तुम्हे क्या सीखने वाला hu.......apne अंदर की ताकत का एक टुकड़ा किसी को दे dena.....ye बहुत hi इफेक्टिव होता hai......jo देने वाला होता है वो उस टुकड़े को वापस से बना भी सकता है तो उसको ज्यादा फर्क नहीं पड़ता हां शुरू में थोड़ा sa......par जिसको वो टुकड़ा मिलता hai......wo अचानक से ताकतवर हो जाता है देखो.....
मैंने अपनी आँखें बंद kari......aur खुद के एनर्जी लेवल्स पे ध्यान लगाने laga.....aur उसके बाद अपना हाथ रूपल दीदी के सर के ऊपर rakha.....aur bas......mere हाथ से होते हुए वो टुकड़ा उनके अंदर......
जैसे hi ये हुआ वो कांपने lagi......par उनकी आँखें नहीं खुली thi......wo वैसे hi काम्पटी rahi......aur करीब 5 मिनट बाद वो शांत होने लगी......
जब आँखें खुली तो आँखें थोड़ी और काली हो गयी थी.....
रूपल - मेरे सर पे हाथ क्यों रखा हुआ है तुमने.....
मैं - कुछ नहीं......
वो उठी और वह से चली gayi.....par जाते हुए उसने मुद के मुझे देखा.......
मैं भी उनके पीछे पीछे घर में चला गया......
वह सब नास्ता कर रहे थे......
चची - तुम दोनों को सबसे पहले जाना चाहिए tha.....aur तुम dono.....chalo जाओ तैयार हो जाओ और खाना खा लो......
हमने वही kiya......aur फिर खाने के baad......waise तो हमसे कहा गया था की बस से जाए पर मैंने इस बारे में ध्यान hi नहीं दिया tha.....Main तो घर में hi पोर्टल खोल के दीदी के साथ वह सीधा उसी गोदाम में चला गया tha,......waha पहुंच के दीदी को याद आया ये क्या कर दिया unhone......wo सीधा वह आ गयी थी......
घर में सब थोड़ा गुस्सा हुए की मैं प्लान से नहीं चला मुझे बस से जाना चाहिए tha......par....unhe कहा पता था की हम गोमद में छाले गए है उनको तो यही लगा की हम बस उस इलाके के पास गए होंगे.....
रूपल - ये kya.....tu तो हममे यहाँ लेके आ गया.......
मैं - वो मैं भूल गया tha.....accha चलो हम यहाँ से निकलते है......
"कोण hai.....kon है वह....."
मैं - क्या आपने ये आवाज सुन्नी......
रूपल - हम्म क्या ये कोई इंसान है.....
मैं - हममे देखना चाहिए अगर ये इंसान है to.....wo खतरे में होगा......
रूपल दीदी - हम्म ठीक kaha.....par तैयार रहना.....
हम दोनों आगे बढे सावधानी se......aawaj की तरफ.......
"मैं यहाँ hu.....yaha....."
मैं - ये क्या hai.....koi है भी नहीं यहाँ पे...
"निचे dekho.....nicche....."
रूपल दीदी ने जब निच्चे देखा वह पे एक छोटा सा कीड़े इतना छोटा एक आँख वाला इंसान था sayad......iske पेअर 2 hi थे पर हाथ 4......ऊपर से सर थोड़ा बड़ा tha......samajh नहीं आ रहा था ये है kya......ye था वो saitaan......jisse लड़ने आये थे हम सब.....
"मुझे यहाँ से ले chalo.....main यहाँ नहीं रह सकता......"
रूपल दीदी - ये है kya......itna छोटा sa......aaahhhhhhh......isne काटा मुझे......
दीदी ने इतना बोलते हुए उसको पटक दिया वही पे.......
"wooooh........ye क्या tha.......iss बार लगता hai......insan nahi.....ye कुछ और hi हाट लगा hai......tu भी आ तुझे भी चख के देखता हु......"
मैं - ये है क्या......
रूपल - Chotu......mujhe.....mujhe कुछ अच्छा नाह.......
उनके चेहरे का रंग बदलने लगा tha......Main समझ नहीं पाया ये क्या हो गया.......
मैं - ये क्या किया tumne.....inko क्या हुआ है......
मैंने ये बोलते हुए उनकी एनर्जी लेवल्स dekhi.....jo निच्चे hi जाते जा रही thi......aisa लगा जैसे एक बार में hi इस जीव ने उनकी साड़ी एनर्जी खिंच ली हो.....
मैं अभी उनकी एनर्जी लेवल देख hi रहा था ki.......acchanak से सब बढ़ने laga......mujhe ये पता था अब क्या होने वाला hai......Maine उनको साइड में बिठा diya......par जब निच्चे देखा उस जीव के तरफ वह वो अक्केला नहीं tha.......uske जैसे हज़ारों थे वह pe.......aur सब इतने छोटे थे की मैं तलवार चला के मार नहीं सकता tha.....aur अब सायद मुझे तलवार चलने की जरुरत भी नहीं thi.....Main तो सोच रहा था ये आगे का कहा पे बैठ के देखूं.....
मैंने उन् जीवों की तरफ dekha.....aur उसके बाद एक स्माइल देके वह से थोड़ा पीछे हो गया और एक उच्ची जगह पे जाके बैठ गया......
उन् सब में से जिसने दीदी को काटा था वो हस्ता हुआ बोलै.....
"क्या लगता है हम छोटे है तो ऊपर नहीं चढ़ paayenge.....tum आये यहाँ दो ho.....par जाएगा कोई भी nahi......ek भी हड्डी नहीं बचेगी तुम दोनों की......"
मैंने ज्यादा कुछ नहीं bola.....bas पीछे जहा पे मैंने रूपल दीदी को छोड़ा था उस तरफ देखने को कहा.......
दीदी जो अभी तक निचे बैठी thi.....jinka चहेरा पीला सा हो गया tha......wo अभी एकदम अलग hi लुक में आ गयी थी.....
बट्स ने अपना काम kiya.....unhone उसके बॉडी को बचाया और खुद को एक कवच बना दिया उनके liye.....aur साथ में वो उनको हील भी कर रहे थे......
दीदी - हम्म ये खुसबू बहुत अच्छी hai.......bas थोड़ा सा भूनना और padega.....phir इन् सब को खाने में मज़्ज़ा hi आ जाएगा......
"ये उठ कैसे gayi......aaj तक ऐसा नहीं हुआ है....."
" ये इंसान नहीं है सायद इस वजह से...."
"हमारा ज़हर सिर्फ इंसान पे hi nahi.......har किसी पे काम करता hai......chahe कोई भी हो....."
मैं - zaher......ye जो है वो तुम्हारे ज़हर के 10-10 बोतल पि जाए और कुछ ना होगा इनको......
"ठीक है फिर इसी को चेक कर लेते है ना......"
वो सब के सब बढ़ने लगे दीदी की तरफ......
दीदी ने अपनी कुल्हाड़ी nikali.......aur हवा में ऊपर उछली......
मैं गेम शुरू......
ध्रुव - आपको क्या लगता है ये कण्ट्रोल में रह jaayegi....abhi तो......
मैं - अब देख hi लेते है ना ध्रुव फिर मैं तो हु hi......accha एक मदद कर सकते हो tum......aas पास किसी को आने मत देना bas......uff ये बॉडी क्यों नहीं है तुम्हारे pass.....abhi काम और आसान हो jaata.......in सब को जल्दी से निपटना hoga....isse पहले कोई घर से कोई आये......
रूपल दीदी ने अभी कुल्हाड़ी ऊपर उठायी hi तो thi....maine ये नहीं सोचा था की कुल्हाड़ी की जो शैडो बनने वाली है वो सारे के सारे बट्स होने वाले the......matlab जैसे जिस जिस जगह पे कुल्हाड़ी की शैडो बनती वह पे छोटे छोटे बट्स चले जाते और उस जगह को एकदम से साफ़ कर dete.......wo कुल्हाड़ी की परछाई से वो छोटे लोग अब दर रहे the.....ek बार जहा जहा वो gayi.....waha पैर के उनके सारे साथी hi गायब......
हां उनकी तादाद बहुत ज्यादा thi....par फिर भी जब लोग मरने लगते है तो दर hi जाते है बाकी सब......
मैंने जब ये देखा तो मैं बस बैठा hi रहा अब क्या hi जरुरत thi......ye रूपल दीदी खुद इसको कर रही thi.....par मैंने जब निच्चे उनके पैरों के पास देखा तो वह पे वही छोटे लोग दिखाई diye......wo सब वापस से उनपे हमला करने जा रहे the.....waise तो ये कुछ भी नहीं करने वाले the.....par फिर लगा मैं थोड़ा खेल सकता हु यहाँ pe.......Maine अपनी तलवार ली और निच्चे जमीं से उसको लगा di......ye तरीका पता नहीं क्यों सबसे अच्छा लग रहा था मुझे......
उन् सारे कीड़े जितने लोगो के चारो तरफ एक गोल घेरा बना दिया maine.......bijli ka......matlab वो उससे आगे नहीं जा सकते the.......agar निकलते तो वो मारे jaate.....Rupal दीदी अपने कुल्हाड़ी को बस यहाँ वह कर रही थी ताकि उसकी परछाई बस उसके पास जाए और वो khatam......aise करते करते बस कुछ hi जीव बच्चे थे......
मैं - रूक्को दीदी इतने रहने देते है......
मुझे लगा वो मेरी बात sunegi.....par वो खुद के कण्ट्रोल में नहीं thi......ye वापस से हो गया.....
दीदी अभी भी अपनी कुल्हाड़ी यहाँ वह कर रही thi....aur देखते hi देखते वो jeev.....wo बच्चे hi नहीं जैसे कभी उस जगह पे थे hi nahi.....par दीदी तो कण्ट्रोल में थी nahi.....wo कुल्हाड़ी मेरी तरफ घूमने लग gayi.....matlab अब मैं था उनका सिक्कर....
अब इनको नुकसान तो पंहुचा नहीं सकता था Main.......Main बस खुद को बच्चाता raha.....yaa कहु इस सरीर ko.....ye ख़तम हो जाता तो पता नहीं फिर कब मुझे नयी बॉडी मिलती और क्या होता उस वक़्त......
मैं - दीदी आप ठीक है naa......Didi.....
वो सुन्न hi नहीं रही thi.....wo तो बस मज़्ज़े से अपने कुल्हाड़ी यहाँ वह कर रही थी.......
ध्रुव - ये खुनी घुड़सवारों की रानी hai.....aap देखो सही hai.....isko उसी नाम से pukaro.....yaad दिलाओ इसको की ये कुल्हाड़ी आपकी दी हुई है......
मैंने ध्रुव ने जैसा कहा वैसा hi kiya.....pahle उनका नाम liya.....unko बुलाया पर वो नहीं सुन्न रही thi.....maine देखा उनके कान धक्के हुए hai.....kya ये ऐसा हो सकता है ये बट्स जान बुझ के......
मैं इतना तो जानता था मैं उनको वापस से ठीक कर hi dunga......Maine अपनी तलवार ली और उनकी ओर बढ़ गया.......
पर उन्होंने भी वही kiya.....wo लड़ना चाहती थी......
मैं उनको काम से काम नुकशान पहुंचना चाहता tha.....to मैंने बस हलके हाथों से लड़ाई शुरू की......
मैंने वार kiya....unhone उसको अपने कुल्हाड़ी से रूक liya......yahi.....yahi तो बात thi.....issi के वजह से तो इनको कुल्हाड़ी दी थी maine......inke कुल्हाड़ी को चलने का tarika.....aisa था jaise.....jaise तितली का उड़ना पंछी का chahakna.....matlab एकदम से natural.......aur साथ में जब ये अपना दिम्माग लगाने लग जाट थी तब ये एक दम से उनपरिडिक्टेबले हो जाती थी.....
हम्म थोड़ा जोर लगाना होगा.......
मैंने इस बार उसपे ऐसे वार करने शुरू कर दिया जिससे उसके कलाइयां मोड़नी pade.....ab माना वो लचीली thi....par इतनी भी नहीं की एक बार इस तरफ कलाई मोदी और उसके तुरंत बाद दूसरी तरफ वो भी पूरी तरह se.....aisa मुमकिन hi नहीं tha......bas मैंने ये 4-5 बहार kiya....jiske बाद उसकी कुल्हाड़ी पैर से पकड़ कमज़ोर हो गयी थी......
और 2 वॉर के बाद कुल्हाड़ी जमी पे गिर्री हुई थी.....
मैंने उनको उठाया......
वो बहुत भड़क गयी ये देख ke.......Main चुप चाप अपने जगह पे वो कुल्हाड़ी ुटहाए खड़ा raha......aur वो मेरी ओर दौड़ते हुए आ रही थी गुस्से mein....maine उस एक कुल्हाड़ी को दो में badla....aur अपनी तलवार को वापस बुला liya......dono हाथों में वो कुल्हाड़ी पकडे हुए था मैं.....
जैसे hi.....jaise hi वो मेरे पास आयी मैंने उनके कानो पे वो कुल्हाड़ी बस टच karai.....jisse वो जगह खुल गयी अब ये सुन्न सकती थी mujhe.....par मेरे ऐसा करने पे वो एकदम से चिलाने लग gayi.....bahut ज्यादा.....
"नयी मत मारो isko.....ye बस खेल रहा tha......ye खेल रहा था मेरे saath......khelne दो isk.oo....o "
और उनकी आवाज धीरे धीरे कमज़ोर होती जा रही thi....matlab वो एकदम से निच्चे बैठ gayi.....aur बेहोश hi हो गयी....
मैं - ये जीव अभी भी नादान hai......inn बट्स का कुछ तो करना hi hoga........RIIIAAANNN
मैंने अपने इम्मोर्टल दोस्त को bulaya......aur वो आ गया वह pe......par बस वही नहीं आया साथ में घर से लोग भी पहुंच गए the.....bas वो अंदर नहीं आये थे अभी.....
मैं - रिआन ये bats......ye भी तुम्हारे बनाये हुए है क्या......
रिआन - ये मैंने नहीं बनाये hai.....par मैं इनको बना सकता hu......tumhe चाहिए.....
मैं - nahi......kya तुम इनसे बात कर सकते हो मेरी बात इंटक पंहुचा सकते हो......
रिआन - ये भी कोई कहने की बात है बताओ क्या कहना है.......
मैं - इनसे कहो की दीदी के साथ ये रह सकते hai.....par ये मज़ाक बंद kare.....wo उनपे पूरी तरह से काबू नहीं कर sakte.....agar वापस से ऐसा किया तो मैं इनको अलग कर दूंगा......
रिआन - didi......kya क्या है.....
मैं - इस बारे में बाद में बात करेंगे पहले जो बोलै है वो करो......
रिआन - हम्म ठीक है......
फिर पता नहीं वो क्या करने लग gaya......Maine कुछ आवाज सुन्नी मुझे लगा की सायद उन् जीवों में से एक दो बचा हुआ hoga.....wahi कर रहे है ये aawaj.....par नहीं ये तो घर वाले the....abhi दोनों बुआ और निकिता अंदर आने वाले थे......
सुकर है हम दरवाजे के पास नहीं the.....unko वक़्त लग्न था.....
मैंने रिआन को देखा वो कुछ तो कर रहा था......
मैं - जल्दी करो मेरे फॅमिली वाले आते hi honge....unko क्या बताऊंगा.....
रिआन - बस हो gaya......ye ज़िद्दी है bade.......inka कहना है की इनको खेलने के लिए वक़्त चाहिए hi chahiye.....aur ye.....ye इनकी माँ है हम अलग नहीं कर सकते inhe.....ye क्या है.....
मैं - बहुत लम्बी kahani.....theek है बोलो इनको की इनको खेलने के लिए हम वक़्त denge.....par ये पूरी तरह से काबू कभी नहीं करेंगे दीदी को वर्ण सच में इनको निकल फेकूंगा main.....aur जल्दी कहो......
रिआन ने वैसा hi kiya.....par उतने में वह पे वो तिण्णो आ पहुंचे.......
बुआ - Bacchu.......Rupal.....kya hua.....ye.....ye कौन है.......
मैंने थोड़ा सोचा और फिर कहा......
मैं - बुआ ये वही सैतान hai......par ये अच्छा hai.....dekho ये अब रूपल दीदी को ठीक कर रहा है......
बुआ - बच्चू रूपल को पकड़ो और दूर हो जाओ उससे......
रिआन - Saitaan......saitaan बस यही सुन्ना बाकी रह गया था.....
मैंने उसको नाटक का इशारा किया पर एक नंबर का चुटिया था वो.......
उसने पोर्टल खोला और वह से चला gaya....bc नाराज़ होक चला gaya.....par वापस आएगा hi वो......
बुआ - वो कहा gaya......wo अपने साथियों को लेने गया hoga.....Nikita सभी को यहाँ bulao....kavita चेक करो रूपल को.....
इतने में रूपल दीदी खुद उठ गयी.....
रूपल दीदी - मैं नहीं भरा आप सब का अब क्या रोज़ रोज़ चेक करोगे मुझे......
बुआ - रूपल तू ठीक है ना......
रूपल - haa......bas ye....ye हाथ में थोड़ा......
उनको उस जीव ने जहा काटा था वह पे बस थोड़ी सी जलन हो रही thi.....kapde भी पहले जैसे हो गए थे उनके......
K.Bua - वो सैतान कहा गया......
मैं - K.Bua वो अच्छा वाला tha.....usko बस मदद चाहिए था ताकि वो पोर्टल खोल के निकल sakke....aur मैंने और दीदी ने वही kiya.....wo चला gaya.....hai न दीदी.....
दीदी अपना सर पकड़ते हुए......
रूपल दीदी - अब तू कह रहा है तो सही hi होगा ना......
नेक्स्ट अपडेट में मधु से मिलने को पंकज के घर में घुसना hai.....par वह मां भी honge.....to थोड़ा फॅमिली ड्रामा......
मैं बीएड पे hi बैठा tha......jo भी हुआ abhi....usse खुश तो बहुत tha......par समझने की कोशिश भी कर रहा था उसको.....
मैंने जब हाथ आगे किया की उसको छू सक्कु मैं उससे दुर्र जा के गिर pada.......par वो मेरे पास आ गयी thi......aur उसने मुझे चुवा bhi......matlab अगर वो चाहे तो वो मुझे छू सकती है......
क्या ये बस इतना सा hi hai......yaa कुछ और भी है isme......kya इतने समय से मैं इस बात को गलत समझ रहा था......
जब मधु ने ये सज़्ज़ा दी थी तो मुझे लगा था की ये हम दोनों के लिए सज़्ज़ा hai.....aur ये थी bhi.....usne कभी मुझसे मिलने के बारे में सोचा hi नहीं था उस वक़्त के बाद se.....ye मुझे लगता hai.....aur मैं तो उसके पसस जा hi नहीं सकता था मिलने ko......isse हममे बातें नहीं होने लगी thi....aur उसके baad....jab बातें नहीं होती है दो लोगो के बिच तो तीसरा चौथा और paachwa.....yaa ये कहु सभी के sabhi......galatfahmiyan बढ़ने लग जाते hai......jaan बुझ के भी और कभी कभी अनजाने में भी.....
उसने मुझे chuwa....matlab वो मुझे छू सकती thi.....sayad ये बात उसको भी पता नहीं थी उस waqt......wo मेरे पास आ सकती thi.....Main इतना तो जानता हु अगर ये उसको पता होता तो वो मेरे पास आती जरूर एक बार तो मेरी बातें सुनने को आती......
" प्रतीक मौका अच्छा hai....usko कुछ याद nahi.....tum उसको अपने पास आने पे मज़बूर कर सकते हो...."
"प्रतीक पर आगे क्या karoge.....kya वो सच में हमेशा साथ रहेगी tumhare.....jab उससे सब याद आ जाएगा जैसे तुम्हे याद आया hai.....kya वो इस बात से और गुस्सा नहीं होगी......"
"प्रतीक तुम ये बस अपने प्यार के लिए कर रहे ho.....aur कोई बात नहीं hai......tum ये करने वाले ho......hai ना...."
मैं समझ नहीं पा रहा tha.....aur ये aawajein......ye मेरे सर्र में गूंज रही thi.....Main इससे परेशां हो रहा था.......
मैं लेट गया और अपने कान बंद कर लिए......
बीएड पे लेटते hi मुझे नींद आ गयी......
दक्ष मां वापस आ गए the.......unhone ये बाद पंकज तक पंहुचा दी थी की वो वापस आ गए है और अभी वो घर पे hai......to आज वो भी घर पे आ jaye.....Madhu को लेके......
निक्स कबीला टूट चुक्का था और ये बात सभी को पता चल गयी thi.......sunne में आया था ये सब मंदिर को लेके हुआ था......
जब ये बात फैली तो इस बात से और कही साड़ी बातों ने जनम ले लिया.....
क्या मधु को एअर्थ पे बस यहाँ का माहौल देखने को भेजा गया tha.....taki वो अपने लोगो को यहाँ बुल्ला sakke......aur भी ना जाने कैसे कैसे बातें चल रही thi......par इससे क्या hi फर्क पड़ता था.....
स्ट्रेंज वर्ल्ड में जो निक्स लोग रह गए थे उन् सब ने आपस में hi एक बन्दे को चुनना और उसको मंदिर की देख भल करने को कहा gaya.....par वो banda......wo भाग गया वह से दूसरे hi दिन.......
बोल रहा था मूर्ति बातें करता hai.....uski आँखों से आशु आतें hai.....wo.....wo सैतान है.....
ये बात किसी को समझ नहीं आयी ुन्नन सब mein.......par मंदिर को ऐसे hi तो नहीं छोड़ सकते the......unhone सोचा की नया बाँदा ढूंढा jaaye......par इस baar......iss बार तो सभी के मैं में एक डर था......
लगभग से अँधेरा हो गया tha......jab निकिता और रूपल दीदी मेरे कमरे में आ dhamki......pata नहीं ये दरवाजा कैसे खोला इन्होने......
रूपल दीदी - ooye....utth.....uth जा छोटू.......
निकिता - अरे उठ भी जाओ हममे देर हो जायेगी.....
मैंने देखा ये दोनों मेरे रूम में आये हुए the......Main अपने बीएड पे उठ के बैठ gaya.....apni आखें साफ़ कर रहा था......
मैं - आप यहाँ kaise.....aur darwaja.....wo कैसे......
रूपल - तुझसे पहले मैं भी यही रहा करती thi......itna तो पता है कौन सा दरवाजा कैसे खोला जाता hai.......ab ये सब छोड़ और जल्दी से तैयार hoja....ghar जाना hai.....aur किसी नए शैतान के बारे में पता चलने वाला है......
मैं - Ghar......par मैं नहीं जाना चाहता......
मैं क्या करता घर पे jaake......kyunki उससे ज्यादा जरुरी काम मुझे यहाँ पे था naa.......Mujhe देखना था मधु और मेरा ये क्या hai......matlab क्या वो मेरे पास आ सकती hai....bas इतनी सी hi बात thi.....yaa और भी कुछ बात thi.....matlab.....kya कोई ऐसा रास्ता भी था की मैं उसके पास जा सक्कु......
तभी मुझे याद aaya.......jab वो मुझसे पहली बार milli......matlab स्कूल mein.....matlab उस दिन जब उसने पानी दाल दिया था mujhpe.....tab तो हम साथ the......pass पास the......kya उस waqt.....wo छह रही थी की हम साथ हो या ये कुछ और था......
रूपल - नहीं जाना chahte......kyun नहीं जाना चाहते तुम घर वह सब वेट कर रहे होंगे......
मैं - मैंने नहीं जाना यहाँ काम है मुझे जाओ तुम सब.......
निकिता - रूपल दीदी आप एक मिनट के लिए बहार जाओगी इससे बात करनी है.......
रूपल - मैं बहार jaaun......theek hai.....pata नहीं कौन सी खिचड़ी पक्क रही है तुम दोनों में.....
इतना बोल वो बस बहार चली गयी......
मैं - क्या बात करनी है batao......aur देखो मैं पहले से कह रहा हु मैं नहीं जाना चाहता waha......mujhe काम है इधर.....
निकिता - Dekho.....agar tumne......galti से bhi......matlab गलती से भी पंकज को कुछ kiya......to समझ lena.....main.....Main खून कर dungi.....maine कहा था मैं उससे पूछ लुंगी पर मौका hi नहीं mila.....mujhe थोड़ा और वक़्त चाहिए.....
मैं - क्या बात कर रही ho.....mujhe अब नहीं जानना उससे दिम्माग में क्या hai......nahi पर फिर भी तुम पूछ hi लो अच्छा hoga.....main क्लियर रहूँगा.....
निकिता को मेरी बात समझ नहीं aayi.....Main खुद की बातें नहीं समझ पा रहा था उसको क्या hi समझाता अभी दिम्माग में बस यही चल रहा था क्या मैं भी उसको छू सकता हु.....
निकिता - क्या बोल रहे ho....kuch समझ आये ऐसा बोलो.....
मैं - देखो मैं घर नहीं जा रहा आज तो nahi.....tum सब जाओ और बुआ को बोल देना मुझे यहाँ पे थोड़ा काम है मैं कल आ jaaunga......yaa परसो......
निकिता -(आँखें दिखते हुए) ठीक hai.....par भूल के bhi.....Pankaj को कुछ मत करना.....
मैं - अरे ठीक है मेरी माँ अब जा naa.......mat करना मत karna.....pata नहीं क्या hai......ab तुम एक और बार ये बात kaho.....main अभी जाके उसको पीट के आऊंगा......
रूपल दीदी - हो गया तुम दोनों ka......bua बुला रही है जल्दी से बहार आओ......
निकिता ने मेरी ओर dekha.....apni ऊँगली मेरी तरफ की और आँखें छोटी करते हुए ऊँगली हिला रही थी......
मैं अस्स पास देखा कुछ है नहीं क्या इसको मारने के liye.....aur वो वह से चली गयी.....
रूपल दीदी - तुझे अलग से बोलू.....
निकिता - उसको काम है Didi......rahne do....kal परसो आ जाएगा वो.....
रूपल - ऐसे कैसे रह......
पता नहीं उनके दिम्माग में क्या aaya......wo एक दम से मुस्कुराने लगी.......
रूपल - ठीक है chotu.....bas ध्यान रखना अपना.....
इतना बोल दोनों चले gaye......Main ये सोच रहा था ये इतने अजीब क्यों होते है ये लोग.....
मैं उठा अपने जगह se.....aur पहले ये देखा की मधु कहा पर hai......matlab इतना तो पता लगा hi सकता था न......
वही निकिता और रूपल दीदी दोनों hi चले गए the.....Bua को जाके उन्होंने कहा की उसको कोई जरुरी काम है उसको अभी रहने देते hai.....Bua ने एक बार मुझे बुलाना चाहा पर फिर कुछ सोच के नहीं aayi.....wo बस जाके गेट के पास कड़ी हो गयी thi......taaki बहार जाने का जो प्रोसीजर है वो पूरा कर सक्के.....
सभी वही पे थे.....
रूपल दीदी ने देखा की दूसरी तरफ के लाइन में पंकज और मधु लगे हुए the......aur उन्होंने अपना सर पीट लिया.......
फिर उन्होंने सोचा की उन्होंने माफ़ी नहीं मांगी थी पंकज se......unko भी माफ़ी मांग लेनी chahiye......taaki सब सॉर्ट आउट रहे बाद में उनकी वजह से कोई दक्कत ना हो......
वो निकिता से कह के उस तरफ निकल gayi......Nikita ने भी देखा वो भी जाना चाहती थी पर वो जाके क्या kahti.....waise भी दीदी तो पहले hi निकल ली थी......
दीदी पंकज के पास गयी और.......
दीदी - पंकज......
पंकज अभी किसी चीज़ के बारे में सोच रहा tha......ki तभी उसको आवाज सुनाई di......wo भी रूपल ki......ek बार तो उसने याद करने की कोशिश hi शुरू कर दी की कही उसने गलती से कोई पन्गा तो नहीं ले लिया था......
मधु - हां बोलिये.....
रूपल - तुम मधु हो naa......waise तो मैं अभी इनसे बात karne.....sorry माफ़ी मांगने आयी thi.....wo दरअसल पीछे बहुत सी गलतफहमियां हो गयी thi.....aur ज्यादातर मेरे वजह से thi......aisa मुझे लगता है तो मैं सोच रही थी की मुझे इसके बारे में माई मांग लेना chahiye......taaki हम नयी सुरुवात कर सक्के......
मधु - यहाँ किसी को नयी......
पंकज - तुम चुप raho.......ye मुझसे बात करने आयी है......
मधु ने गुस्से में उसकी ओर देखा.....
पंकज - हां हां आप बोलो......
रूपल - वो दरअसल बात ऐसी है की तुम भी जानते हो हमारे बिच में बहुत साडी गलतफहमियां हुई है और उनके बाद बहुत सी लड़ाइयां bhi......hai naa......to मैं सोच रही हु वो सब भूल जाए और हम दोस्त बन सकते है.....
पंकज - हां सब भूल जाते hai.....aapne मेरे घर पे आके मुझे पीटा वो भूल जाते hai.....aapne मुझे बार बार पीटा है हां उसमे गलती मेरी थी मैं जानता hu.....par हर जगह सही आप भी नहीं the......to मैं बस यही kahunga.....aap आगे जाओ मुझे नहीं ,अटलब है आप क्या कहते हो और क्या नहीं.....
निकिता वैसे तो दूर thi.....par सुन्न सब रही थी.......
उसने जब सुन्ना वो पंकज रूपल दीदी की बेइज़्ज़ती कर रहा था तो उससे रहा नहीं गया.......
वो उनके तरफ गयी.....
निकिता - हिम्मत कई........
वो कुछ बोलती उससे पहले hi रूपल दीदी ने उसको रोक लिया और बस इतना कहा......
रूपल दीदी - मुझे बस माफ़ी मांगनी thi.....ab माफ़ करना ना करना ये तो तुम्हारे हाथ में है ये तुम samjho.....aur इसकी बातों का भी बुरा मत manna.....Nikita चलो यह से......
निकिता को वो खींचते हुए लेके गयी अपने साथ.......
निकिता - छोड़ो mujhe.....ye समझता क्या है खुद ko......iske हाथ पेअर तोड़ के रख दूंगी main.....aapko बोलै कैसे इसने ये सब......
रूपल - आइए pagal......chup.....main यहाँ सब ख़तम करने में लगी हु और तुम हो की सब वापस से शुरू कर रही हो......
मैं - क्या शुरू कर रहे हो आप सब......
बुआ - तू तो नहीं जाने वाला था ना फिर यहाँ क्या कर रहा है.......
मैं - वो बस मैं बदल गया.......
रूपल - और काम ka......kaam था ना तुझे.......
मैं - हम्म पर अब वो नहीं हो पायेगा.......
रूपल - हां अब काम भी तो जा रही है......
मैं - क्या बोल रही हो aap......main समझा नहीं......
रूपल - कुछ nahi.....main कहा कुछ बोल रही हु......
बुआ - तो आ गए tum.....maine तो सुन्ना था काम है कुछ तुमको......
मैं - वो तो बाद में भी हो जाएगा.....
बुआ ने आगे कुछ भी नहीं kaha.......sab बहार चले gaye......bus pe.......aur फिर वो दोनों अपने स्टॉप पे उतर गए और हम अपने स्टॉप pe.....waise मैं तो मधु वाले स्टॉप पे उतर hi जाता पर K.Bua ने पूछ लिया कहा जा रहे ho.....aur उस वक़्त बताने को कुछ था नहीं.......
हम घर पहुंच गए........
पहले खाना खाया हम सब ने उसके बाद.......
दादा जी - तुम सब ने एक सैतान को मार दिया tha......par वो कमज़ोर tha......ab आगे जो सैतान है वो उससे तो ताकतवर hi hoga.......to क्या तुम तैयार हो......
पता नहीं इनको क्या सुन्ना tha......kya हममे इस वक़्त जोर से चिलाना चाहिए था यस siir.......aise चीज़ज़ की उम्मीद में थे wo.....pata नहीं.....
पर हमने कुछ नहीं kiya......bas उनकी ओर देखते रहे......
दादा जी - प्लान तैयार hai......iss बार भी वही करना है 3 लड़कियां एक साथ और प्रतीक और निकिता एक साथ निधि और सत्य एक साथ ........पिछले hi बार की तरह करना है sab......kisi को कुछ कहना है......
निकिता - मुझे इसके साथ नहीं rahna......matlab मुझे लड़ने के लिए जाना hai......main पिछली बार भी.....
वो बस बोल hi देती की उसको पिछली बार ज्वाला के कबीले जाना पद गया था पर वो ृक्क गयी......
दादी - पर इससे प्रतीक अकेला हो जायेगा और उसको वक़्त लग जाएगा पता लगाने में वो सैतान उस जगह पे कहा है और कैसा है.....
चची वैसे भी इस बात से परेशां थी की दीदी की तबियत थोड़ी सही नहीं hai....to उनको अभी इन् सब में ना भेजा jaaye....unhone ये बाद दीदी को समझने की कोशिश करि की वो ना जाए इस बार पर वो माने तब naa.......ye मौका अच्छा था.....
चची - मुझे भी लगता है निकिता को एक मौका देना चाहिए वह pe......Aur रही प्रतीक की बात तो उसके लिए to.....Rupal चली जायेगी उसके साथ.......
रूपल - मम्मी ये क्या बोल रही ho.......Main कैसे.....
दादी को भी लगा ये सही hai......aur वो कोई जोर जबरदस्ती तो कर नहीं रही थी निकिता के साथ निकिता ने खुद कहा था वह जाने के बारे में......
दादी - मुझे भी यही लगता है.....
रूपल दीदी - दादी आप bhi.....aap तो काम से काम मेरा......
दादू - हम्म तो तय हो गया है रूपल और निकिता अपनी जगह बदल रहे hai.....to इस baar......Poonam और कविता थोड़ा ध्यान से निकिता साथ होगी तुम्हारे.......
मैं कुछ नहीं बोल रहा था मुझे बोलना hi नहीं tha.....ye पता नहीं कैसे जीव के बारे में बात कर रहे the.....isko पहले देखा hi नहीं था मैंने......
सब तै हो गया कौन कैसे jaayega.....saitaan की बातें भी कर ली gayi.....ye एक शहर के बिच का इलाका tha......koi बंद पड़ा हुआ godam......iss शैतान को सब के सब भूत समझते the.....issi वजह से उस इलाके को हुन्तेद बता दिया गया tha,.....waha कोई नहीं जाता.....
इस दौरान लीडर ये सोच रहा था की मैं हु kaun,....aur मैंने वो सब किया kaise.....matlab उन् कीड़ों को मारने का वो tarika.......waisa तरीका उसने नहीं देखा tha.....kisi ने नहीं देखा था......
घर पे अब सब सोने चले गए the.....aur मैं पहले से सो चूका था तो मैंने सोचा क्यों naa......bas एक baar.....dekh आऊं उसको.....
घर में hi पोर्टल खोला मैंने और निकल gaya......mujhe ये पता था वो दोनों एक साथ honge.....matlab पंकज के घर पे hi.......waise तो उसके घर में भी जा सकता था मैं सीधे पर दिक्कत भी हो सकती थी isse.....agar मैं गलती से मधु के ज्यादा करीब चला गया तो......
इसी लिए मैंने उससे दूर जो पार्क था पंकज के घर के पास वह जाना का फैसला kiya......raat हो चुक्की थी कोई था भी नहीं waha......Main वह चला gaya......uss जगह से पंकज का घर दिखाई देता था.......
ध्रुव - आपको याद hoga.....ye आपकी माँ का घर hai....matlab इस वक़्त की माँ ka.....waise तो हम जैसों के कोई अपने नहीं होते.....
मैं - ध्रुव तुम इन् रिश्तों में कब से भटकने लग gaye......ye सब अच्छा नहीं है......
ध्रुव - मैं तो बस आपकी बातों को देख के सीखता आया hu.....aapne भी तो रिस्ता बनाया था.....
मैं - वो बात और thi....aur तुम तो देख भी रहे ho.....uske बाद क्या क्या हो रहा hai......kya तुम इन् सब से गुजरना चाहोगे......
ध्रुव - क्या आप उन् सब में खुश the.....kya आप एक इम्मोर्टल बन के खुश the......kya आपको नहीं पता था की कितने नियम है और ना जाने कितने hi बंदिशें......
मैं - ये तुम मेरी बातें क्यों कर रहे हो Dhruv.....aur तुम क्या मेरा हाल नहीं देख रहे ho.......iske मुकाबले तो उस वक़्त hi खु.....
मैं जो बोल रहा था अगर उसके बारे में सोचु तो मैं अभी सबसे बड़ा झूट बोलने वाला tha......Main कभी भी एक इम्मोर्टल के तौर पे खुश नहीं tha......kyunki मैं बोर हो जाता था कुछ करने को बचता hi नहीं मेरे pass.......Maine चीजजें सीखना शुरू kiya....aur बस सीखता चला गया इतना ज्यादा की मैं उसमे एक्सपर्ट बन गया पर उसके बाद kya.....Main एक टीचर बन gaya......Immortals को ज्ञान बाटने लग gaya......ye था मेरा kaam......Jab तक मधु नहीं आयी थी मैं बस बोर hi होता रहता tha.....issi वजह से तो मैं दूसरे जीवों की जिंदगियों में दखल देने लग गया tha......ye जीव मुझे अच्छे लगते the....inke पास हमेसा एक ऐसा मोड़ होता tha.....jaha सब ख़तम बस सब ख़तम आगे कुछ भी nahi......haa इनमे भी दोबारा जनम लेना होता tha.....par इनकी यादें मिट जाय करती thi.....chahera नया हो जाता tha......aur तो और आस पास के लोग भी बदल जाते थे......
पर एक इम्मोर्टल ka.....uska kya.....wo तो बस सदियों से लगा हुआ होता tha......naa यादें धुंधली होती ना hi कुछ और.....
ध्रुव - क्या आप खुश थे......
मैं - नहीं तुम सही ho.....main खुश नहीं tha.....mujhe इनसब से जलन होती thi.....har किसी se.....har एक जीव से जो मर सकता tha......mujhe देखो मैं तो सायद ठीक से मर्रा भी nahi.....sab कुछ तो याद hi है mujhe.......meri बॉडी बस बदल गयी hai......chahera भी पहले जैसा hi hai.....dekho.....kya कही से अंतर दिख रहा है.....
ध्रुव - आपको मौका मिला hai.....aap वो बने हुए है जिनसे आपको जलन हो रही thi.....kya आप इसके मज़्ज़े लेना नहीं chahenge....kya आप इन् रोशों का दोस्तों का....
मैं - बस bas.....samajh गया क्या कह रहे ho.....waise ये बात भी सही है अलग मुझे रिश्तों के बारे में पता होता तो main......main सायद मधु के साथ वैसा नहीं karta.....yakkin करता उसपे......
ध्रुव - हम्म......
मैं फिर पंकज के घर के तरफ nikla......ek ऐसी जगह जगा से सब दिख sakke......Maine ध्यान दिया तो इतना समझ में आ गया घर में 3 लोग hai......aur तिण्णो hi अलग अलग कमरे mein.......sayad तिण्णो hi सो रहे थे.....
मैं मधु को देख नहीं पा रहा था......
मैंने थोड़ी और कोशिश करि पर काम नहीं बना और उसके बाद मैं वापस आ गया.......
और आते hi ध्यान लगाने बैठ gaya......Dark पावर को अब मुझे इतना ताकतवर बनाना tha.....aur उसको एक दम से कण्ट्रोल में रखना था जिससे मेरे इस सरीर को या फिर मेरे आस पास के लोगो को कोई परेशानी ना हो......
जब आखें खोली तो वह पे रूपल दीदी thi.....wo पता नहीं कब आयी thi......wo भी ध्यान लगा रही thi.....baaki के सब का सायद हो गया था......
मैंने उनकी ओर dekha......Energy लेवल्स एकदम से सही the.....matlab वो एकदम से ठीक thi.....jo बातें उनके दिम्माग में होनी चाहिए थी वो सब वह पे thi....aur जो नहीं वो नहीं थी......
मैंने फिर उनकी कुल्हाड़ी पे ध्यान lagaya.......wo और भी ज्यादा बदल गया tha.....jo बट्स उनके अंदर गए थे उन्होंने ना सिर्फ उनको बल्कि उस कुल्हाड़ी को भी बदल के रख दिया था जो मैंने दिया था......
अगर इन्होने अपने शक्तियों पे सही से काबू कर liya.....to ये खुनी घुड़सवारों की रानी के रूप से भी ज्यादा ताकतवर हो जायेगी......
मैं - ध्रुव देखो अब मैं तुम्हे क्या सीखने वाला hu.......apne अंदर की ताकत का एक टुकड़ा किसी को दे dena.....ye बहुत hi इफेक्टिव होता hai......jo देने वाला होता है वो उस टुकड़े को वापस से बना भी सकता है तो उसको ज्यादा फर्क नहीं पड़ता हां शुरू में थोड़ा sa......par जिसको वो टुकड़ा मिलता hai......wo अचानक से ताकतवर हो जाता है देखो.....
मैंने अपनी आँखें बंद kari......aur खुद के एनर्जी लेवल्स पे ध्यान लगाने laga.....aur उसके बाद अपना हाथ रूपल दीदी के सर के ऊपर rakha.....aur bas......mere हाथ से होते हुए वो टुकड़ा उनके अंदर......
जैसे hi ये हुआ वो कांपने lagi......par उनकी आँखें नहीं खुली thi......wo वैसे hi काम्पटी rahi......aur करीब 5 मिनट बाद वो शांत होने लगी......
जब आँखें खुली तो आँखें थोड़ी और काली हो गयी थी.....
रूपल - मेरे सर पे हाथ क्यों रखा हुआ है तुमने.....
मैं - कुछ नहीं......
वो उठी और वह से चली gayi.....par जाते हुए उसने मुद के मुझे देखा.......
मैं भी उनके पीछे पीछे घर में चला गया......
वह सब नास्ता कर रहे थे......
चची - तुम दोनों को सबसे पहले जाना चाहिए tha.....aur तुम dono.....chalo जाओ तैयार हो जाओ और खाना खा लो......
हमने वही kiya......aur फिर खाने के baad......waise तो हमसे कहा गया था की बस से जाए पर मैंने इस बारे में ध्यान hi नहीं दिया tha.....Main तो घर में hi पोर्टल खोल के दीदी के साथ वह सीधा उसी गोदाम में चला गया tha,......waha पहुंच के दीदी को याद आया ये क्या कर दिया unhone......wo सीधा वह आ गयी थी......
घर में सब थोड़ा गुस्सा हुए की मैं प्लान से नहीं चला मुझे बस से जाना चाहिए tha......par....unhe कहा पता था की हम गोमद में छाले गए है उनको तो यही लगा की हम बस उस इलाके के पास गए होंगे.....
रूपल - ये kya.....tu तो हममे यहाँ लेके आ गया.......
मैं - वो मैं भूल गया tha.....accha चलो हम यहाँ से निकलते है......
"कोण hai.....kon है वह....."
मैं - क्या आपने ये आवाज सुन्नी......
रूपल - हम्म क्या ये कोई इंसान है.....
मैं - हममे देखना चाहिए अगर ये इंसान है to.....wo खतरे में होगा......
रूपल दीदी - हम्म ठीक kaha.....par तैयार रहना.....
हम दोनों आगे बढे सावधानी se......aawaj की तरफ.......
"मैं यहाँ hu.....yaha....."
मैं - ये क्या hai.....koi है भी नहीं यहाँ पे...
"निचे dekho.....nicche....."
रूपल दीदी ने जब निच्चे देखा वह पे एक छोटा सा कीड़े इतना छोटा एक आँख वाला इंसान था sayad......iske पेअर 2 hi थे पर हाथ 4......ऊपर से सर थोड़ा बड़ा tha......samajh नहीं आ रहा था ये है kya......ye था वो saitaan......jisse लड़ने आये थे हम सब.....
"मुझे यहाँ से ले chalo.....main यहाँ नहीं रह सकता......"
रूपल दीदी - ये है kya......itna छोटा sa......aaahhhhhhh......isne काटा मुझे......
दीदी ने इतना बोलते हुए उसको पटक दिया वही पे.......
"wooooh........ye क्या tha.......iss बार लगता hai......insan nahi.....ye कुछ और hi हाट लगा hai......tu भी आ तुझे भी चख के देखता हु......"
मैं - ये है क्या......
रूपल - Chotu......mujhe.....mujhe कुछ अच्छा नाह.......
उनके चेहरे का रंग बदलने लगा tha......Main समझ नहीं पाया ये क्या हो गया.......
मैं - ये क्या किया tumne.....inko क्या हुआ है......
मैंने ये बोलते हुए उनकी एनर्जी लेवल्स dekhi.....jo निच्चे hi जाते जा रही thi......aisa लगा जैसे एक बार में hi इस जीव ने उनकी साड़ी एनर्जी खिंच ली हो.....
मैं अभी उनकी एनर्जी लेवल देख hi रहा था ki.......acchanak से सब बढ़ने laga......mujhe ये पता था अब क्या होने वाला hai......Maine उनको साइड में बिठा diya......par जब निच्चे देखा उस जीव के तरफ वह वो अक्केला नहीं tha.......uske जैसे हज़ारों थे वह pe.......aur सब इतने छोटे थे की मैं तलवार चला के मार नहीं सकता tha.....aur अब सायद मुझे तलवार चलने की जरुरत भी नहीं thi.....Main तो सोच रहा था ये आगे का कहा पे बैठ के देखूं.....
मैंने उन् जीवों की तरफ dekha.....aur उसके बाद एक स्माइल देके वह से थोड़ा पीछे हो गया और एक उच्ची जगह पे जाके बैठ गया......
उन् सब में से जिसने दीदी को काटा था वो हस्ता हुआ बोलै.....
"क्या लगता है हम छोटे है तो ऊपर नहीं चढ़ paayenge.....tum आये यहाँ दो ho.....par जाएगा कोई भी nahi......ek भी हड्डी नहीं बचेगी तुम दोनों की......"
मैंने ज्यादा कुछ नहीं bola.....bas पीछे जहा पे मैंने रूपल दीदी को छोड़ा था उस तरफ देखने को कहा.......
दीदी जो अभी तक निचे बैठी thi.....jinka चहेरा पीला सा हो गया tha......wo अभी एकदम अलग hi लुक में आ गयी थी.....
बट्स ने अपना काम kiya.....unhone उसके बॉडी को बचाया और खुद को एक कवच बना दिया उनके liye.....aur साथ में वो उनको हील भी कर रहे थे......
दीदी - हम्म ये खुसबू बहुत अच्छी hai.......bas थोड़ा सा भूनना और padega.....phir इन् सब को खाने में मज़्ज़ा hi आ जाएगा......
"ये उठ कैसे gayi......aaj तक ऐसा नहीं हुआ है....."
" ये इंसान नहीं है सायद इस वजह से...."
"हमारा ज़हर सिर्फ इंसान पे hi nahi.......har किसी पे काम करता hai......chahe कोई भी हो....."
मैं - zaher......ye जो है वो तुम्हारे ज़हर के 10-10 बोतल पि जाए और कुछ ना होगा इनको......
"ठीक है फिर इसी को चेक कर लेते है ना......"
वो सब के सब बढ़ने लगे दीदी की तरफ......
दीदी ने अपनी कुल्हाड़ी nikali.......aur हवा में ऊपर उछली......
मैं गेम शुरू......
ध्रुव - आपको क्या लगता है ये कण्ट्रोल में रह jaayegi....abhi तो......
मैं - अब देख hi लेते है ना ध्रुव फिर मैं तो हु hi......accha एक मदद कर सकते हो tum......aas पास किसी को आने मत देना bas......uff ये बॉडी क्यों नहीं है तुम्हारे pass.....abhi काम और आसान हो jaata.......in सब को जल्दी से निपटना hoga....isse पहले कोई घर से कोई आये......
रूपल दीदी ने अभी कुल्हाड़ी ऊपर उठायी hi तो thi....maine ये नहीं सोचा था की कुल्हाड़ी की जो शैडो बनने वाली है वो सारे के सारे बट्स होने वाले the......matlab जैसे जिस जिस जगह पे कुल्हाड़ी की शैडो बनती वह पे छोटे छोटे बट्स चले जाते और उस जगह को एकदम से साफ़ कर dete.......wo कुल्हाड़ी की परछाई से वो छोटे लोग अब दर रहे the.....ek बार जहा जहा वो gayi.....waha पैर के उनके सारे साथी hi गायब......
हां उनकी तादाद बहुत ज्यादा thi....par फिर भी जब लोग मरने लगते है तो दर hi जाते है बाकी सब......
मैंने जब ये देखा तो मैं बस बैठा hi रहा अब क्या hi जरुरत thi......ye रूपल दीदी खुद इसको कर रही thi.....par मैंने जब निच्चे उनके पैरों के पास देखा तो वह पे वही छोटे लोग दिखाई diye......wo सब वापस से उनपे हमला करने जा रहे the.....waise तो ये कुछ भी नहीं करने वाले the.....par फिर लगा मैं थोड़ा खेल सकता हु यहाँ pe.......Maine अपनी तलवार ली और निच्चे जमीं से उसको लगा di......ye तरीका पता नहीं क्यों सबसे अच्छा लग रहा था मुझे......
उन् सारे कीड़े जितने लोगो के चारो तरफ एक गोल घेरा बना दिया maine.......bijli ka......matlab वो उससे आगे नहीं जा सकते the.......agar निकलते तो वो मारे jaate.....Rupal दीदी अपने कुल्हाड़ी को बस यहाँ वह कर रही थी ताकि उसकी परछाई बस उसके पास जाए और वो khatam......aise करते करते बस कुछ hi जीव बच्चे थे......
मैं - रूक्को दीदी इतने रहने देते है......
मुझे लगा वो मेरी बात sunegi.....par वो खुद के कण्ट्रोल में नहीं thi......ye वापस से हो गया.....
दीदी अभी भी अपनी कुल्हाड़ी यहाँ वह कर रही thi....aur देखते hi देखते वो jeev.....wo बच्चे hi नहीं जैसे कभी उस जगह पे थे hi nahi.....par दीदी तो कण्ट्रोल में थी nahi.....wo कुल्हाड़ी मेरी तरफ घूमने लग gayi.....matlab अब मैं था उनका सिक्कर....
अब इनको नुकसान तो पंहुचा नहीं सकता था Main.......Main बस खुद को बच्चाता raha.....yaa कहु इस सरीर ko.....ye ख़तम हो जाता तो पता नहीं फिर कब मुझे नयी बॉडी मिलती और क्या होता उस वक़्त......
मैं - दीदी आप ठीक है naa......Didi.....
वो सुन्न hi नहीं रही thi.....wo तो बस मज़्ज़े से अपने कुल्हाड़ी यहाँ वह कर रही थी.......
ध्रुव - ये खुनी घुड़सवारों की रानी hai.....aap देखो सही hai.....isko उसी नाम से pukaro.....yaad दिलाओ इसको की ये कुल्हाड़ी आपकी दी हुई है......
मैंने ध्रुव ने जैसा कहा वैसा hi kiya.....pahle उनका नाम liya.....unko बुलाया पर वो नहीं सुन्न रही thi.....maine देखा उनके कान धक्के हुए hai.....kya ये ऐसा हो सकता है ये बट्स जान बुझ के......
मैं इतना तो जानता था मैं उनको वापस से ठीक कर hi dunga......Maine अपनी तलवार ली और उनकी ओर बढ़ गया.......
पर उन्होंने भी वही kiya.....wo लड़ना चाहती थी......
मैं उनको काम से काम नुकशान पहुंचना चाहता tha.....to मैंने बस हलके हाथों से लड़ाई शुरू की......
मैंने वार kiya....unhone उसको अपने कुल्हाड़ी से रूक liya......yahi.....yahi तो बात thi.....issi के वजह से तो इनको कुल्हाड़ी दी थी maine......inke कुल्हाड़ी को चलने का tarika.....aisa था jaise.....jaise तितली का उड़ना पंछी का chahakna.....matlab एकदम से natural.......aur साथ में जब ये अपना दिम्माग लगाने लग जाट थी तब ये एक दम से उनपरिडिक्टेबले हो जाती थी.....
हम्म थोड़ा जोर लगाना होगा.......
मैंने इस बार उसपे ऐसे वार करने शुरू कर दिया जिससे उसके कलाइयां मोड़नी pade.....ab माना वो लचीली thi....par इतनी भी नहीं की एक बार इस तरफ कलाई मोदी और उसके तुरंत बाद दूसरी तरफ वो भी पूरी तरह se.....aisa मुमकिन hi नहीं tha......bas मैंने ये 4-5 बहार kiya....jiske बाद उसकी कुल्हाड़ी पैर से पकड़ कमज़ोर हो गयी थी......
और 2 वॉर के बाद कुल्हाड़ी जमी पे गिर्री हुई थी.....
मैंने उनको उठाया......
वो बहुत भड़क गयी ये देख ke.......Main चुप चाप अपने जगह पे वो कुल्हाड़ी ुटहाए खड़ा raha......aur वो मेरी ओर दौड़ते हुए आ रही थी गुस्से mein....maine उस एक कुल्हाड़ी को दो में badla....aur अपनी तलवार को वापस बुला liya......dono हाथों में वो कुल्हाड़ी पकडे हुए था मैं.....
जैसे hi.....jaise hi वो मेरे पास आयी मैंने उनके कानो पे वो कुल्हाड़ी बस टच karai.....jisse वो जगह खुल गयी अब ये सुन्न सकती थी mujhe.....par मेरे ऐसा करने पे वो एकदम से चिलाने लग gayi.....bahut ज्यादा.....
"नयी मत मारो isko.....ye बस खेल रहा tha......ye खेल रहा था मेरे saath......khelne दो isk.oo....o "
और उनकी आवाज धीरे धीरे कमज़ोर होती जा रही thi....matlab वो एकदम से निच्चे बैठ gayi.....aur बेहोश hi हो गयी....
मैं - ये जीव अभी भी नादान hai......inn बट्स का कुछ तो करना hi hoga........RIIIAAANNN
मैंने अपने इम्मोर्टल दोस्त को bulaya......aur वो आ गया वह pe......par बस वही नहीं आया साथ में घर से लोग भी पहुंच गए the.....bas वो अंदर नहीं आये थे अभी.....
मैं - रिआन ये bats......ye भी तुम्हारे बनाये हुए है क्या......
रिआन - ये मैंने नहीं बनाये hai.....par मैं इनको बना सकता hu......tumhe चाहिए.....
मैं - nahi......kya तुम इनसे बात कर सकते हो मेरी बात इंटक पंहुचा सकते हो......
रिआन - ये भी कोई कहने की बात है बताओ क्या कहना है.......
मैं - इनसे कहो की दीदी के साथ ये रह सकते hai.....par ये मज़ाक बंद kare.....wo उनपे पूरी तरह से काबू नहीं कर sakte.....agar वापस से ऐसा किया तो मैं इनको अलग कर दूंगा......
रिआन - didi......kya क्या है.....
मैं - इस बारे में बाद में बात करेंगे पहले जो बोलै है वो करो......
रिआन - हम्म ठीक है......
फिर पता नहीं वो क्या करने लग gaya......Maine कुछ आवाज सुन्नी मुझे लगा की सायद उन् जीवों में से एक दो बचा हुआ hoga.....wahi कर रहे है ये aawaj.....par नहीं ये तो घर वाले the....abhi दोनों बुआ और निकिता अंदर आने वाले थे......
सुकर है हम दरवाजे के पास नहीं the.....unko वक़्त लग्न था.....
मैंने रिआन को देखा वो कुछ तो कर रहा था......
मैं - जल्दी करो मेरे फॅमिली वाले आते hi honge....unko क्या बताऊंगा.....
रिआन - बस हो gaya......ye ज़िद्दी है bade.......inka कहना है की इनको खेलने के लिए वक़्त चाहिए hi chahiye.....aur ye.....ye इनकी माँ है हम अलग नहीं कर सकते inhe.....ye क्या है.....
मैं - बहुत लम्बी kahani.....theek है बोलो इनको की इनको खेलने के लिए हम वक़्त denge.....par ये पूरी तरह से काबू कभी नहीं करेंगे दीदी को वर्ण सच में इनको निकल फेकूंगा main.....aur जल्दी कहो......
रिआन ने वैसा hi kiya.....par उतने में वह पे वो तिण्णो आ पहुंचे.......
बुआ - Bacchu.......Rupal.....kya hua.....ye.....ye कौन है.......
मैंने थोड़ा सोचा और फिर कहा......
मैं - बुआ ये वही सैतान hai......par ये अच्छा hai.....dekho ये अब रूपल दीदी को ठीक कर रहा है......
बुआ - बच्चू रूपल को पकड़ो और दूर हो जाओ उससे......
रिआन - Saitaan......saitaan बस यही सुन्ना बाकी रह गया था.....
मैंने उसको नाटक का इशारा किया पर एक नंबर का चुटिया था वो.......
उसने पोर्टल खोला और वह से चला gaya....bc नाराज़ होक चला gaya.....par वापस आएगा hi वो......
बुआ - वो कहा gaya......wo अपने साथियों को लेने गया hoga.....Nikita सभी को यहाँ bulao....kavita चेक करो रूपल को.....
इतने में रूपल दीदी खुद उठ गयी.....
रूपल दीदी - मैं नहीं भरा आप सब का अब क्या रोज़ रोज़ चेक करोगे मुझे......
बुआ - रूपल तू ठीक है ना......
रूपल - haa......bas ye....ye हाथ में थोड़ा......
उनको उस जीव ने जहा काटा था वह पे बस थोड़ी सी जलन हो रही thi.....kapde भी पहले जैसे हो गए थे उनके......
K.Bua - वो सैतान कहा गया......
मैं - K.Bua वो अच्छा वाला tha.....usko बस मदद चाहिए था ताकि वो पोर्टल खोल के निकल sakke....aur मैंने और दीदी ने वही kiya.....wo चला gaya.....hai न दीदी.....
दीदी अपना सर पकड़ते हुए......
रूपल दीदी - अब तू कह रहा है तो सही hi होगा ना......
नेक्स्ट अपडेट में मधु से मिलने को पंकज के घर में घुसना hai.....par वह मां भी honge.....to थोड़ा फॅमिली ड्रामा......