फंतासी ऐटिटूड.....( मैजिक + रोमांस )(कम्प्लेटेड) - Page 5 - SexBaba
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फंतासी ऐटिटूड.....( मैजिक + रोमांस )(कम्प्लेटेड)

अब तक आपने पढ़ा की विक्रम रोनित और अंजलि मिलकर नवीन और उसके आदमियों को सबक सिखाते हैं....

अब आगे:-

CHAPTER- 1

अपडेट -40

मई- aaahhhh.nanu....dukh रहा है......

सुबह का वक़्त hai.......hum सब जस्ट नाश्ता ख़त्म करके बहार आँगन में बैठे hi थे की अचानक नानाजी ने मेरे कान पकड़ लिए....

नानाजी- ाचा दुःख रहा hai...kal जो इतने लोगों को उठा उठा कर फेक रहा था तब दुःख नहीं रहा था.......

मई- इसीलिए आपने कान पकडे hain....!!!!ye कोई इतना बड़ा काम तोह है नहीं की आपको मेरे कान पकड़ने के लिए पूरा एक दिन वेट करना पड़ा...

जहाँ मेरी फॅमिली मेरी बात पर है दी वहीँ नानाजी ने मेरे सर पर एक तपली बजा दी....

नानाजी- बातें खूब बनता hai.kyun!!!

रोनित- वैसे नानू इसके कान मरोड़ते देख मज़ा तोह खूब आया पर ऐसा करने का रीज़न तोह बताइये?

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मैंने घर के रोनित को देखा..

रोनित- घर क्या रहा hai,hamesha मेरे की कान पकडे जाते hain,tu तोह हमेशा खिसक लेता hai,aaj पहली बार कुछ उल्टा हो रहा है तोह मई ख़ुशी भी न मानों क्या?

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AHHHHHHH......nanu,maine क्या किया.....

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अभी रोनित खुश हो hi रहा tha,itne में नानाजी ने उसके कान भी पकड़ liye.....aur अब हसने की बारी मेरी थी.....

नानाजी- तुम तीनो ने हमे उल्लू बनाया hai.......kal क्या बोल रहा था tu,ki मुझे क्या देने के लिए तूने वो सब कहा की चले jao,papers मिल जाएंगे...

अंजलि- मोरल बूस्ट ननु....

मई मन में- कामिनी माँ के पास बैठी hai,isiliye इसके कान बचे हुए हैं.....

नानाजी- haan,moral boost....yahi बोलकर हमें उल्लू बनाया था ना.

मई- भगवन के किये को मुझपे क्यों थोपते हो nanu..kaun क्या बन कर पैदा hoga,ye तोह गॉड hi डीडे करते है ना.....

सभी मेरी बात सुनकर ज़ोर ज़ोर से हसने lage...nanaji को पहले तोह मेरी बात समझ में नहीं aayi,par जब आयी तोह मेरे सर पर उनके हाथों के द्वारा एक और तपली का दस्तक हुआ..

माँ- papa,aap इससे बातों में नहीं जीत sakte.....bohot चालाक है ye.sabko अपनी बातों में फसा लेता है.....

एक्सक्यूज़ में

हम अभी बात कर hi रहे थे की हमारे सामने कोई आया जिससे देखकर मई रोनित और अंजलि शॉकेड हो गए.....

वहीँ दूसरी तरफ:-

अननोन- क्या ये kaam,sach में इतना बड़ा है....

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ी मैं ये ****************

अननोन 2- मई तुम्हारा सुरप्रीसेड होना समझ सकता hun.......par यकीं maano,ye तुम्हारी सोच से भी ज़्यादा खतरनाक है..

अननोन- इस पोजीशन में मई ऐसे hi नहीं पहुंचा हूँ *****.....यहाँ पहुँचने के लिए जितनी लाशें मैंने बिछाई hain,tumne उतने ज़िंदा इंसान नहीं देखे honge...par मेरे माफिआ किंग होने का सबसे बड़ा कारण है की मई किसीको भी काम नहीं aankta.......maza आता है मुझे चैलेंजेज फेस करने में.....

अगर तुमने जो भी कहा hai,wo सच hai,toh आगे चलकर ये हमारे लिए भी खतरा हो सकता hai....aur मैडोक्स हर खतरे को शुरू होने से पहले hi ख़त्म कर देता है....

(मैडोक्स HORAN----MAAFIA KING.....NAJANE कितने HI देशों के मोस्ट वांटेड क्रिमिनल्स की लिस्ट का टॉपमोस्ट NAAM.....KHASIYAT- ताकतवर होने के साथ साथ बेहद CHALAAK.....BY हुक और बी CROOK,KAISE भी मिले बस जीत मिलनी CHAHIYE,YE इसका स्लोगन है....)

अननोन- जो भी karna,kuch वक़्त के बाद karna.abhi वो अलर्ट होगा..

चटककककहहहहहह......

मैडोक्स- क्या करना hai,kaise करना hai,ye तू मुझे batayega......dobara अगर मैडोक्स के सामने अपनी बकवास राय राखी न तोह तेरी बीवी के पास तेरे इस सादे से सर का गिफ्ट पहुंचा dunga....samjha....chal निकल...

वो अनजान शक्श आँखों में दर और अपने गाल पर जिसमे मैडोक्स के उँगलियों के निशाँ छाप चुके the,wahan हाथ रखे बाहर निकल गया........

बैक 2 हीरो:-

अवंतिका- क्या मई तुमसे कुछ बात कर सकती हूँ......

मैडम की आवाज़ से हम होश में आये...

मई- bolo.....jo बोलना है?

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एक- यहाँ nahi,bahar.....

मैंने डैड की तरफ dekha.dad ने आँखों से hi जाने की परमिशन दे दी..

मई- चलो.......

हम तीनो अवंतिका के पीछे पीछे बाहर चले गए......

ा स्माल फ्लैशबैक:-

अवंतिका- ड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़.......

अवंतिका सामने सोफे पर बैठ कर मोबाइल में कुछ देख रही thi....juton की आहात सुन जब उसने सामने देखा तोह उसकी चीख निकल gayi.awaaz इतने ज़ोर की थी की सभी घर वाले बाहर आ gaye....aur नवीन की हालत देख सभी सकते में आ गए.....

नवीन की हालत थी भी ऐसी की कोई भी घबरा jaaye.ek हाथ कमर me,utha कर फेका जो था हमारे हीरो ne,jhatka लग गया hoga,ek हाथ गाल pe,joki एक तरफ से सूझ चूका tha,shirt पे खून के dhabbe...inshort नवीन इस वक़्त ऐसा लग रहा था जैसे कोई भिकारी ने किसी रहिस आदमी के कपडे पहने हो....

अवंतिका रट हुए- क्या हुआ dad.aapko इतनी चोट कैसे लग gayi.aur आपका chehra,itna सुजा हुआ क्यों है.....

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अवंतिका की माँ और दादी तोह बस रो रहे the.....par दादाजी को कुछ शक हो गया था...

दादाजी- NAVEEN,jo सुबह में लड़का आया tha,kya तू उससे भिड़ने गया था.....

नवीन अपने डैड की बात सुन घबरा गया जो दादाजी ने नोट कर ली...

दादाजी- सच सच बता NAVEEN....ussi से मार खाकर आ रहा है न तू....

नवीन डरते डरते- जी पिताजी...

दादाजी- अगर तेरी हालत ठीक होती तोह मई तेरा जबड़ा तोड़ देता....

दादीजी- ये क्या कह रहे हैं aap...ek तोह उस लड़के ने मेरे बेटे को इतनी बुरी तरीके से मारा और उसके ऊपर आप भी दांत रहे hain......bade छोटे की तमीज़ भी नहीं है उस लड़के ko.apne बाप की उम्र के आदमी पर भी भला कोई हाथ उठता hai...lagta है उसके माँ बाप ने उससे संस्कार hi नहीं दिए....

(अब हमारी दादीजी को क्या pata,ki शराफत की गंगा का सबसे ज़्यादा शोर्तज उन्ही के घर पर है)

दादाजी- साड़ी गलती तुम्हारे इस लाडले की hai..jab मैंने मन किया था की उससे मत भिड़ना तोह गया hi kyun.ab भुगत.....

बहु डॉक्टर को फ़ोन lagao.usse तुरंत आने को कहो....

A/MOM- जी पिताजी....

ौनतीजी तुरंत भागी फ़ोन करने पर इधर अवंतिका की आँखों में आंसू और चेहरे पर बोहोत ज़्यादा ग़ुस्से के भाव आ चुके the.....sab नवीन को hi घेरे खड़े हुए the,AVANTIKA धीरे से उठी और बहार की तरफ चली गयी...

फ्लैशबैक एंड्स:-

हमारे बहार निकलने के बाद अंदर:-

नानाजी- ये तोह वो नवीन की बेटी है ना....!!!

डैड- जी पापा.

नानाजी- इससे मेरे पोतों से क्या बात करनी है....

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डैड- पापा ये सब क्लास्स्मेटिस भी hain.hogi कोई बात उनके बीच की.....

नानाजी- हाँ पर कल hi मेरे बच्चों ने उसके बाप को मारा tha,aur आज ये यहाँ आ gayi...mujhe तोह इसमें भी इसके बाप की कोई साजिश लगती है.....

डैड- mummy,aapko अभी भी लगता है की आपके पोते को कोई बेवकूफ बना सकता hai.!!!!agar उन लोगों में ज़रा भी बुद्धि बची होगी तोह कोई भी नया ड्रामा करने से पहले हज़ार बार sochenge....aap टेंशन फ्री हो jaiye,kuch नहीं होगा......

वहीँ बहार:-

मई- boliye,aaj मैडम को हमसे क्या ख़ास काम पद गया....

पर अवंतिका कुछ बोल नहीं paayi....ghar से निकलने के बाद जो आंसू कण्ट्रोल करके रखे हुए the,ab वो तेज़ी से बहार निकलने लगे.....

मैंने उसकी आँखों में jhanka,ab मुझे पता चल गया था की उसके घर में क्या सन हुआ है और वो यहाँ क्यों आयी है......

अवंतिका- आखिर क्या बिगाड़ा है मैंने और मेरी फॅमिली ने tumhara....maine स्कूल में तोह तुमसे कह दिया था न की अब हम दोनों एक दूसरे के रास्ते में कभी नहीं aayenge....fir भी ये सब....

रोनित- अब्बे....

अभी रोनित आगे कुछ kehta,par मैंने हाथ दिखाकर उससे चुप रहने को kaha.mai चाहता था की पहले अवंतिका के दिल का पूरा गुब्बार निकल जाए.....

अवंतिका- चलो माना उस रात पार्टी में मामाजी ने तुम्हारे डैड के साथ बतमीज़ी की thi....isiliye तुमने उन्हें maara....fir मैंने भी दोस्ती का झूठा नाटक kiya,isiliye तुमने हमें पुनीश kiya,par अब मेरे डैड ने तुम्हारा क्या बिगड़ दिया जो तुमने उन्हें इतने बुरी तरीके से maara.unki उम्र भी तुम्हारे डैड जितनी hi hai.....apne डैड के उम्र के आदमी पे तुम्हे हाथ उठाते हुए शर्म नहीं aayi.....tumme थोड़े से भी मैनर्स है भी या नहीं.....

मई- हो गया या और कुछ भी बचा है.....

चलो अंदर...

मैंने उसका हाथ पकड़ा और उससे खींचते हुए अंदर ले gaya.usne छूटने की कोशिश की पर कामियाब नहीं हो पायी....

रोनित- ये gayi....ab जो शुद्ध वाणी का इसके कानो से संगम hoga,wo कभी भूल नहीं पाएगी ये...

ANJALI-abbe आराम se.haath न उखड जाए कहीं.......

मई अवंतिका को खींचते हुए आँगन में ले आया जहाँ सब अभी भी बैठे हुए the.mujhe इस तरह अवंतिका को खींच कर लाते हुए देख सभी शॉक होकर खड़े हो गए......

माँ- ये क्या तरीका है विक्की.. किसी लड़की को ऐसे खींचते है क्या....

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आज पहली बार था जब माँ ने मुझसे इतनी तेज़ आवाज़ में बात की थी.......

मई- mom,ye मुझे उल्टा सीधा बोल रही थी...

माँ- तोह क्या इस्पे ज़ोर आज़माइएश karega....yahi सिखाया है मैंने tujhe!!!!!ek लड़की के ऊपर अपनी ताकत आज़माना...

मई- manners,haan.!!!!!tehzib,sanskar,isse कहते hain....aaj पहली बार मेरी माँ ने मुझसे चिल्ला कर बात ki,aur वो भी किसके liye,us लड़की के लिए जिसका बाप कल शाम मेरी पूरी फॅमिली को मारने आया था....

अवंतिका फटी आँखों से मेरी तरफ देख मेरी बात सुनाने लगी.....

मई- यू क्नोव what,abhi जो तुम जस्टिफिकेशन्स दे रही थी naa,ki चलो वो तुमने इसीलिए किया वगैरा वगैरा (अब साड़ी बात तोह नहीं बता सकता था naa.AVANTIKA की झूटी फ्रंशीप और उसके बाद के काण्ड के बारे में .घर पर किसीको पता नहीं था)

तुम सिर्फ अपने आप को सही दिखने के लिए कह रही thi.ki dekho,hum इतने भी बुरे नहीं hain.......agar मैंने कल तुम्हारे घर में घुसकर तुम्हारे पूज्यनीय डैड को धमकाया tha,toh सिर्फ इसीलिए क्यूंकि अगर मई ऐसा नहीं karta,toh मेरे ननु और डैड को वो पेपर्स कभी नहीं देते....

जाकर अपने डैड के रूम का लाकर kholo,aur dekho,najane कितने hi मासूम लोगों की म्हणत की कमाई से खरीदे हुए प्लॉट्स के पेपर्स मिलेंगे wahan....tumhara जो आलिशान बांग्ला है naa,usse बनाने के लिए सिर्फ आईटी और सीमेंट नहीं लगा hai,logon के आंसू और दर्द भी मिले हुए है उस ईमारत की दीवालों में....

और तुम मुझे मैनर्स का ज्ञान देने आ gayi......agar कोई तुम्हारे घर में घुसकर तुम्हारी फॅमिली को जान से मारने की कोशिश करे तोह क्या तुम चुप चाप बैठ कर देखती रहोगी.....

अपने बाप से जाकर बोल dena,ki अगर ऐसी ओछी हरकत दोबारा करने की कोशिश ki,toh कल जो धमकी मैंने सुबह तुम्हारे घर में घुस कर उससे दी thi,usse सच होने में वक़्त नहीं लगेगा....

और तुम तोह बोहोत अचे से जानती हो....

रोनित- V.J जो कहता है....

अंजलि- वो हो जाता है.....

अवंतिका के बॉडी में एक सार्ड लेहेर दौड़ गयी क्यूंकि वो अब तक मुझे इतना तोह जान hi चुकी थी की मई जो भी कहता hun,wo किसी भी हाल me,kar भी देता हूँ.....

वो मुड़ी और तेज़ी से बाहर निकल गयी...

मई- माँ sorry.wo मई...

माँ- उसकी ज़रुरत नहीं hai...i ऍम प्राउड ऑफ़ ु.....

सब- galat....we अरे प्राउड ऑफ़ ु...

माँ- तू jaa,thodi देर आराम कर ले.

माँ को पता था की इस वक़्त मेरा मूड थोड़ा ऑफ हो चूका है और मुझे कुछ वक़्त अकेले रहना hai...aakhir माँ जो थी....

मई भी चुपचाप अपने रूम चला गया....

वहीँ दूसरी तरफ:-

पुजारीजी- (मन में)- ये मिटटी इतनी शीतल कैसे हो gayi....!!!!iska अर्थ है की वो समय शिग्रह hi आने वाला hai.......aur इसका एक छोटा सा भाग बनाने का मौका मुझे मिला hai........hey prabhu,tera कोटि कोटि धन्यवाद की तूने मुझे इस लायक समझा.....

पुजारीजी जो की आँख बंद कर धवली झील की मिटटी को हाथ में पकड़ ये सब सोच रहे the,unhone आँखें खोल दी.....

1सत आदमी- क्या हुआ pujariji????bataiye naa,ye सिर्फ एक संजोग है या कोई चमत्कार....

पुजारीजी ने आस पास dekha,saikdon लोग उन्हें घेरे खड़े the....kal उनके साथ साथ आस पास के सभी लोगों को धवली झील की मिटटी के रंग में आये बदलाव के बारे में पता चल गया tha...ab ये कोई छोटी बात तोह थी nahi,ki छुप jaati......par शाम ढल जाने की वजह से पुजारीजी ने अगले दिन यहाँ आकर देखना सही समझा...

पुजारीजी- कोई चमत्कार नहीं हुआ hai.ye सब मात्रा एक संजोग hai....(JHOOTH)....najane कितने युगो से ये मिटटी यहाँ पर hai..rang में बदलाव आना कोई बड़ी बात नहीं..

पुजारीजी की बात सुनकर जो लोगों में एक एक्ससिटेमेंट जाग गयी thi,wo ख़त्म हो gayi...par कुछ की अब भी खुजली बची थी......

आदमी- पर pujariji,aaj तक तोह इस मिटटी ने रंग नहीं badla,yun अचानक कैसे इसका रंगा बदल गया...!!!!!

पुजारीजी- अब मई कोई शोधकर्ता तोह हूँ nahi,bhala इसका मई कैसे जवाब दे सकता hu.agar कोई चमत्कारिक प्रभु से जुडी बात hoti,toh मई अवश्य batata.par ऐसा तोह कुछ भी नहीं है.......

फिर किसीने कुछ भी नहीं कहा और धीरे धीरे वो जगह खाली होइ गयी और रह गए सिर्फ पुजारीजी....

पुजारीजी- मुझे अब अपना काम शुरू कर देना chahiye.vilamb करना ठीक नहीं.......

पुजारीजी उठे और तेज़ी से चलते हुए अपने मकान की तरफ बढ़ गए.......

बैक तो हीरो:-

रोनित- क्या सोच रहे हैं सर?

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मई रूम में लेता कुछ सोच रहा था की इतने में रोनित और अंजलि रूम में आये..

मई- सोच रहा हूँ की क्या सोचूं!!!!

रोनित- hain,soch रहा है की क्या soche....matlab!!!!

मई- बिना मतलब के कोई बात का मतलब नहीं निकलता kya.soch रहा हूँ की अगर मई ऐसा सोचूं तोह मेरी सोच कुछ गलत न सोचने लग जाए.......

रोनित को लगा मैंने कोई सीरियस बात की है तोह मैंने क्या बोलै वो समझने की कोशिश करने लगा....

HAHAHAHAHA...HAHAHAHAHAHA.......

रोनित ने साइड में देखा जहाँ अंजलि पेट पकड़ कर है रही thi.....fir उसने मेरी तरफ dekha,mere चेहरे पर भी मुस्कराहट थी...

रोनित- कमाल hai...abhi तक ये समझ नहीं आया की ये साला आखिर बोलै क्या उसके ऊपर ये भी हसने लग gayi...abbe तू है क्यों रही है..

अंजलि- तेरे पोपट होने पे....

रोनित- मतलब?

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अंजलि- अब्बे वो तुझे अपनी बातों में फसकर पोपट बना रहा है और तू सोच रहा है जैसे वो तुझसे पज़ल्स में बात कर रहा hai.....V.J ने जो भी बोलै उसका कोई मतलब नहीं है दुफर..............

रोनित- saale,tu मेरा पोपट कर रहा था और मई साला जितना गणित आता था सब लगा दिया तेरी बात का मतलब समझने में.....

अंजलि- तोह ये कौनसी नयी बात hai....wo सब छोड़ पहले जो बोलने आया tha,wo बोल लें

रोनित- अब्बे haan,iski गोल गोल बातों में मई असली बात तोह भूल hi gaya...wo मामाजी बोल रहे थे यहाँ एक होटल hai,wahan राबड़ी कमल की मिलती hai..chal न चलते हैं...

मैंने रोनित को घर कर dekha.wo इधर उधर देखने लगा....

अंजलि- अब्बे नहीं जाना है तोह मन कर देना......

मई- नहीं जाना hai...ho गया....

रोनित- साले फिटनेस freak.thode से मीठे से कुछ नहीं होता..

मई- जब कुछ नहीं होता तोह खाना hi क्यों hai....j

अंजलि- रहने de,ye नहीं maanega.chal हम दोनों hi चलते हैं....

दोनों निकल gaye....baat दरअसल ये है की मुझे मीठा पसंद नहीं hai....isiliye साले घुमा फिरकर बात कर रहे the......khair उनके जाने के बाद मई फिर कल रात के बारे में सोचने laga......chaliye इस बार आपको भी दिखता हूँ कल रात मेरे साथ क्या हुआ....

लास्ट नाईट:-

रोनित- जल्दी खोल yaar.dekhen toh,aakhir क्या क्या लिखा है उस झील के बारे में.....!!!!

नानाजी के धवली झील की हिस्ट्री बताने के बाद उसके बारे में जानने के लिए हम तीनो बोहोत एक्ससिटेड the.humne सबको g.n विश किया और मेरे रूम में आ गए....

अंजलि- क्या बात hai,somebody इस लुकिंग वैरी excited..haan!!!!!

रोनित- और नहीं तोह kya,kissa hi इतना इंटरेस्टिंग hai...aur जानना तोह बनता है न..

मैंने भी मुस्कुराते हुए फर्स्ट पेज खोला और......

हम तीनो- ओह शीट्ट्ट्ट्ट......

रोनित- ये किस लैंग्वेज में लिखा है यार..

अंजलि- रूक मई गूगल में चेक करती हूँ.

एक्चुअली वो किताब किसी अलग hi लैंग्वेज में लिखी गयी थी......

अंजलि- अरे यार इस लैंग्वेज का तोह कोई सोर्स hi नहीं है...

रोनित- मतलब???

मई- मतलब गूगल बाबा के हिसाब से ये कोई लैंग्वेज hi नहीं है.....

रोनित- तोह फिर ये सब लिखा क्या hai....kisine अपना क्रैकेड दिमाग चाप दिया है क्या?

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मई- अब ये मई कैसे बताऊँ???

अंजलि- क्या yaar,pura मूड hi ऑफ हो gaya.chhodo,mai चली नावेल पढ़ने.....

रोनित- और मई चला लप्पी में मूवी देखने.......

दोनों बहार निकल गए और मई रह गया अकेला....

मैंने बुक साइड में राखी और वाशरूम चला gaya.wapas आकर मई क्या करूँ ये सोच hi रहा था की मई चौंक gaya.us बुक से हलकी हलकी रौशनी निकल रही thi..maine बुक उठायी और जैसे hi खोला......

मई- अरे ये पलाइन कैसे हो गया.....

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??

दरअसल अब उस किताब में कुछ भी नहीं लिखा tha...wo खाली thi.maine तेज़ी से पैन पलटाये.

मई- अरे ये क्या लिखा है....!!!!!

मई पैन पलटा hi रहा था की मुझे बीच में कुछ लिखा हुआ सा दिखा.....

BOOK-MUJHE पढ़ा नहीं जा सकता........

उस पैन पर ये लिखा हुआ था....

MAI-ab साला इसका क्या मतलब हुआ.....

मैंने पैन को देखा तोह फिर चौंक gaya.jo लिखा था वो मिट रहा था और उसकी जगह कुछ नया लिखा आ रहा था....

बुक- पर देखा जा सकता है......!!!!!!!

मई- पर kaise..mere मुँह से अपने आप hi निकल गया.....

लिखी हुई लाइन फिर मिट गयी और उसके जगह कुछ नया लिखने लगा..

बुक- मुझे अपने माथे से लगाओ और कहो ''मस्तिष्क प्रविशति''.......

पहले मैंने उठकर अपना रूम बंद किया और वापस बीएड पर आकर बैठ गया...

मैंने बुक को अपने माथे पर लगाया और कहा....

मई- मस्तिष्क प्रविशति.....

मंत्र कहते hi मेरी आँखें अपने आप बंद हो गयीं.....

बुक से एक तेज़ रौशनी nikli....roshni इतनी ज़्यादा थी की अगर मैंने रूम बंद नहीं किया होता तोह रौशनी बहार भी सब कुछ रोशन कर deti.....kuch देर तक वो रौशनी लगातार बढ़ती रही और फिर एक झटके में बंद हो gayi...arre................mai कहाँ gaya........!!!!!!room में बस वो किताब hi thi,mai गायब था......

मई- अब्बे ये कौन सी जगह hai..aur ोये टेरिइइइइइइइ मई पानी के ऊपर खड़ा hun....saala हो क्या रहा है..

मैंने अपने चारो तरफ निगाह ghumai.......is वक़्त मई एक झील जैसी जगह के ठीक ऊपर खड़ा tha....matlab पानी मेरे पेअर से कुछ एक फ़ीट hi नीचे hoga....chaaro तरफ पानी hi पानी tha.maine अपनी नज़र तेज़ ki...mujhe उस झील के बाद के जंगल दिखने lage....jitni दूर भी मैंने देखने की कोशिश ki,mujhe या तोह पानी दिखा या जंगल.......

मई- ये आवाज़ कैसी...!!!!!

मैंने जैसे hi अपने राइट की तरफ dekha,meri आँखें बड़ी हो gayi....mere तरफ तेज़ी से एक आग का गोला आ रहा tha.....maine उससे रोकने के लिए अपने हाथ आगे kiye.par ये kya,wo गोला रूका नहीं और मेरे आर पार हो गया,

मई- ओह तेरी की अब ये क्या जादू hai.maine अपने पीछे पलट कर देखा तोह एक नया झटका laga.ye झटका कुछ ज़्यादा hi बड़ा tha.....mujhse थोड़ी hi दूर बोहोत साड़ी परछाइयां कड़ी thi......unke चेहरे पर सूर्य सा तेज tha.wo दो भाग में बाटे हुए थे.

एक भाग में जो परछाइयां thi,unhone लम्बे सफ़ेद कपडे पहने हुए the,aur दूसरे भाग की परछाइयों ने भी सफ़ेद कपडे hi पहने the,par उन कपड़ों के ऊपर ब्लैक स्ट्राइप्स यानी काली पत्तियां लगी हुई थी......

वो आग का गोला उनकी तरफ hi जा रहा tha....par उन्होंने उस गोले को बेकार कर diya.aur फिर उनकी तरफ से हुम्ला हुआ.

मुझे कुछ समझ नहीं आया क्यूंकि ये हमला भी मेरी तरफ हुआ था और इस बार भी उनका छोड़ा अस्त्र मेरे आर पार हो गया tha.maine दूसरी तरफ देखा जहाँ उनका अस्त्र जा रहा tha....mujhe दूर पुरे ब्लैक कपडे में एक साया खड़ा हुआ दिखा...

मई- साला इसका चेहरा धुंदला क्यों दिख रहा है..

मैंने अपनी इन्द्रियों को तेज़ किया ताकि उससे देख सकूँ पर कोई फायदा नहीं हुआ.

पर अब तक मई समझ चूका था की मई उस बुक की दुनिया में hun......yahan मुझे कोई देख नहीं सकता....

मई- ओह shit...matlab ये सब वो हौली स्पिरिट्स हैं और ये जिसका चेहरा नहीं दिख रहा है ये वही डेविल hai,jisne उन्हें मारा tha....iska मतलब मई जिसके ऊपर खड़ा hun,yahi धवली झील hai.....aur ये वक़्त भी मेरे वक़्त से लाखों साल पुराण है.....

मुझे एक झुरझुरी सी महसूस hui....ab आप hi sochiye,apne वक़्त से लाखों साल पहले पहुँच jana,jis वक़्त इंसान छोडो हमारा प्लेनेट भी नया नया बना tha,wo फीलिंग कैसी होगी!!!!!!

कुछ वक़्त लगा पर फिर मई नार्मल हो गया...

अब वो वक़्त आ गया था जिसके बारे में नानाजी ने बताया था.

उस डेविल ने अपने हज़ार रूप कर लिए थे और छल से उन स्पिरिट्स से लड़ रहा tha.mai उस डेविल के हर मूव ko,uski हर चाल को बड़े ध्यान से देख रहा tha.aur उसके हर हमले पर मेरे मुँह से वाह निकल जाता tha.wo था hi इतना tez..bhale hi उसने हज़ारों रूप ले लिए the,par दिमाग तोह एक hi का चल रहा था न इसके पीछे...

MAI-arre bacho...shittttt.gaye काम से....

डेविल ने धोके से एक स्पिरिट पर वो स्पीयर घुसा दिया था और देखते hi देखते सारे हौली स्पिरिट्स उस स्पीयर के अंदर जाने लगे..........

.............BOOOMMMMMMMMMMM...............

जैसे hi सभी हौली स्पिरिट्स उस स्पीयर में saamye,ek ज़ोर का ब्लास्ट hua.wo डेविल उड़ता हुआ दूर जा gira.uske सारे रूप भी गायब हो गए......

वो स्पीयर ऊपर आसमान की तरफ जाने लगा और एक ऊंचाई पर पहुंचकर वापस तेज़ी से नीचे झील की तरफ आने लगा...

उस डेविल को बोहोत चोट आयी thi.par अपनी चोट की परवाह न करके वो उड़ते हुए उस जगह जाने लगा जहाँ वो स्पीयर गिरने वाला tha.par उसके पहुँचने से पहले hi वो स्पीयर झील में समां gaya.SPEAR के पीछे पीछे वो डेविल भी झील के अंदर घुस गया.

BOOOMMMMMMMMMMMMMMMMMM

झील के बीच में जहाँ पर स्पीयर गिरा tha,ek ज़ोर का धमाका hua....kuch 10 सेकंड में hi उस झील का पूरा पानी सुख कर ज़मीन के नीचे चला gaya....aur उस झील की सतह जो सफ़ेद थी काली पद gayi.....wo डेविल वहीँ सतह पर खड़ा tha,apne घुटनो पर बैठ गया....

डेविल- nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii......

इधर मई बुरी तरीके से चौंक गया क्यूंकि उस डेविल के मुँह से जो आवाज़ निकली thi,wo मेरी थी...............

मई उस डेविल के पास आगे बढ़ने को हुआ hi था की मेरे चारो तरफ तेज़ रौशनी फैले गयी और अगले hi पल मई अपने कमरे में था........

वहीँ हेवन में:-

ST.CECILIA-mujhe आज तक समझ नहीं आया, विक्रम और ास्मोडियस की आवाज़ एक सी क्यों?

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??

सत सेबेस्टियन- एक hi पिता के

दो बेटे हैं......

बस करवट बदल

कर लेते हैं.....

आज के लिए इतना HI

आपका अपना V.J
 
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम धवली झील में हुए DEVIL'S और हौली स्पिरिट के बीच हुए फाइट को देखता है.....

अब आगे........

CHAPTER-1

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )

अपडेट- 41:-

दादाजी- क्या हुआ bacha.....mai देख रहा hun,jabse तू आयी hai,bujhi बुझी सी hai....kya अपने दादू से नाराज़ है........

सुबह का वक़्त hai,nashte के बाद अवंतिका चुपचाप उठी और अपने बैडरूम में आकर कुछ पढ़ने lagi.....ye और किसीने तोह नहीं पर दादाजी ने नोट कर लिया tha.wajah जानने के लिए वो अवंतिका के पीछे पीछे उसके रूम में आ गए थे....

अवंतिका- dadu,maine आपको ये पहले भी कहा है की मई आपसे नाराज़ हो hi नहीं सकती......

दादू- नाराज़ नहीं है पर उदास तोह है na.apne दादू को नहीं batayegi,ki क्यों उदास है......!!!!!

अवंतिका एक फीकी स्माइल के साथ- बस ऐसे hi dadu.....maine इतनी लक्सेरियस ज़िन्दगी जी hai,jo भी चाहिए hota,wo मांगने से पहले hi आप या डैड मेरे सामने रख देते hain,par.....

दादू- पर क्या पुत्र......!!!!!!

अवंतिका- कल मुझे पता चला की जो कुछ भी हमारे पास hai,wo हमारा होकर भी हमारा नहीं hai..ye ghar,gaadiyan,paise,sab कुछ हमारी म्हणत से हमें नहीं mila,ye सब तोह नजाने कितने लोगों की म्हणत से कमाए पैसो को चीन के बना hai.....ye सब जानने के बाद मई खुश कैसे रह सकती हूँ.....

दादाजी- beta,maine और तेरे पापा ने जो भी kiya,sab तेरे अछि भविष्य के लिए किया है........

अवंतिका बस अपने दादाजी की बात सुनकर है दी....

दादाजी- क्या हुआ putar,tujhe मेरी बात पर विश्वास नहीं है क्या???

अवंतिका- dadu,aaj ज़िन्दगी में पहली बार आप अपने आप को मेरे सामने जस्टिफाई करने की कोशिश कर रहे hain...bas इसीलिए हसी आ गयी...

DADAJI-beta मई तोह बस्स्स.........

अवंतिका- dadu,ek झूट को छुपाने के लिए और कई झूट बोलने पड़ते hain..toh please,ye सब मत बोलिये...

दादाजी- beta,maine क्या झूठ बोलै???

अवंतिका- सच hi क्या बोलै है आपने dadu......aap कहते हैं की मेरे लिए आपने और डैड ने गलत रास्ता chuna...jabki जिस वक़्त आपने गलत रास्ता चुना tha,us वक़्त मई तोह kya,dad भी आपके ज़िन्दगी में नहीं आये थे....

याद है उस दिन विक्रम ने आपसे क्या कहा tha...ki एक वक़्त के बाद जब गलत काम करके hi sahi,par आपके पास अचे पैसे आ चुके the,agar आप चाहते तोह गलत रास्ता छोड़ कोई छोटा मोटा बिज़नेस कर सकते थे पर आपने नहीं kiya.ulta और बड़े बड़े इल्लीगल कामो में हाथ डालने लगे.....

और dad,wo तोह पैदा hi रिच हुए the.unhe क्या ज़रुरत थी इल्लीगल काम करने ki...uske ऊपर आपने उन्हें ये कहा की धवलगढ़ की साड़ी ज़मीन हमारी होनी chahiye...aakhir किसलिए दादू.......

पता है dadu,kal जब मुझे पता चला की उस विक्रम ने डैड पर हाथ उठाया hai,toh मई उसके घर गयी थी उससे बात karne.....pata है तब क्या hua,VIKRAM मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने घर के आँगन में ले gaya,jahan उसकी फॅमिली कड़ी thi....uski माँ ने सबके सामने उसपर चिल्ला diya.kiske liye.jiske डैड उसके पूरी फॅमिली को मारने गए the,uske लिए.....

ज़िन्दगी में इतना छोटा मैंने कभी महसूस नहीं किया दादू जितना उस वक़्त कर रही thi.....ya अब कर रही हूँ.......

ये बोलते बोलते अवंतिका के आंसू निकल gaye.wo भगति हुई कमरे से बाहर निकल गयी.......

दादाजी- विक्रममममम जयराज SINGHHHHHHHHHHH.........bas कुछ दिन की और ज़िन्दगी बची है तेरे paas,jitna जीना है जेएलएएएएए.......

वहीँ दूसरी तरफ:-

पुजारीजी- इस धागे को ड़याँ से pakadna.....jab तक हम इस जगह को पूरा बांध न de,is धागे का कोई भी सिरा छूटना नहीं चाहिए..........

पुजारीजी एक लाल धागे को निकलकर उसका एक सिरा अपनी बीवी को पकड़ते हुए बोले....

PUJARIJI'S वाइफ- ठीक है...

पर ये कहते हुए पुजारीजी की बीवी की आँखों में आंसू आ गए थे.....

पुजारीजी- नहीं नहीं bhaagwati....ye दुःख की नहीं ख़ुशी की बात hai.....tumhe इस बात से प्रसन्न होना चाहिए की सदियों पूर्व परमेश्वर द्वारा जो ज़िमेदारी हमारे कुल को मिली थी उससे तुम्हारे सुहाग को पूरा करने का मौका मिला hai....afsos मत karo,garv महसूस karo.....aur इसके बाद तुम्हे क्या करना hai,wo भी तुम्हे ज्ञात है.....

पुजारीजी की वाइफ ने बस भीगी आँखों से अपना सर हाँ में हिला दिया....

क्यूंकि ये रात का वक़्त था और दोनों धवली झील के पास the,jo की धवलगढ़ की बाहरी सीमा में tha,toh इस वक़्त वह किसी और का होना या अचानक आना संभव नहीं था...

पुजारीजी लाल धागे के एक सिरे को पकडे पकडे कुछ मंत्र उच्चारण करते करते आगे बढ़ने lage.....unke पीछे उस धागे के दूसरे सिरे को पकडे हुए उनकी बीवी चल रही thi...wo कुछ दूर hi गए थे की उनकी शरीर में गर्मी बढ़ने लगी......

पर पुजारीजी रुके nahi.wo आगे बढ़ते gaye.......jaise जैसे वो आगे बढ़ रहे the,unke शरीर में गर्मी बढ़ती जा रही thi.unka शरीर गर्मी से पैदा हुए जलन की वजह से लाल होने laga.....par इससे उनके चलने में कोई रुकावट नहीं aayi..wo लगातार आगे बढ़ते hi जा रहे the.......garmi की जलन के वजह दसे उन्हें असहनीय दर्द हो रहा tha,par उनके चेहरे पर मुस्कराहट thi..maano ये दर्द उनका कोई बिचड़ा हुआ दोस्त हो जिसका उन्होंने ज़िन्दगी भर इंतज़ार किया है.....

भले hi पुजारीजी मुस्कुरा रहे the,unhone चलना बंद नहीं किया था नहीं मंत्र उच्चारण एक सेकंड के लिए भी रोका tha,par उनके आवाज़ की कम्पन से उनके पीछे चलती वाइफ को उनकी स्तिथि का एहसास हो गया था...

उनका पूरा चेहरा आंसुओं से भर गया tha,par वो चुपचाप अपने हस्बैंड के पीछे पीछे चल रही थी......

धीरे धीरे वक़्त बीतने laga.....pujariji और उनकी वाइफ धवली झील की परिक्रमा करते रहे और कुछ 1 घंटे के बाद पुजारीजी ने जहाँ से ये परिक्रमा शुरू की thi.....wahan वापस पहुँच gaye...parikrama ख़त्म होते hi वहां की मिटटी का कलर फिर से पहले की तरह काला हो gaya.aakhri बार मंत्र बोलते वक़्त पुजारीजी की आवाज़ बोहोत धीरे निकली thi....parikrama ख़त्म होते hi पुजारीजी की वाइफ धागे को छोड़कर तुरंत पुजारीजी को देखने के लिए उनके सामने आकर कड़ी हो गयी....

NAHHIIIIIIIIIIIIIIII....................

पुजारीजी को देखकर उनकी वाइफ के मुँह से चीख निकल गयी.....

पुजारीजी का पूरा chehra,pura शरीर जल गया tha.......bas उनकी आँखों की पुतलियां और होंठ थोड़े से ठीक the,par देखते hi देखते वो भी जल गए....

धम्म्म्म.......

भागवती वहीँ गिर gayi....wo एक तक सामने अपने पति के जले चेहरे को देख रही thi.....achanak उस जले चेहरे पर एक तस्वीर बनाने लगी और कुछ देर बाद गायब हो gayi.......pujariji का शरीर देहने लगा और देखते hi देखते भगवती के सामने पुजारी जी की राख पड़ी थी.....

आवाज़- रो मत putri........is सच से तोह तुम पहले से अवगत थी naa...tumhare पति ने अपना बलिदान सहर्ष स्वीकार किया hai....agar वो चाहते तोह स्त्री स्नेह या पुत्र स्नेह में बांधकर इस बलिदान को देने से मन कर सकते the......par उन्होंने अपने कर्त्तव्य को सांसारिक रिश्तों से ऊपर rakha.iske लिए उन्हें स्वर्ग में सर्वोच्च सम्मान और उचित स्थान प्राप्त होगा...

भागवती- मई बस उन्हें आखरी बार देखना चाहती थी.

उस दिव्या आवाज़ को सुनकर भगवती के जो आंसू रूक गए थे ये बोलते बोलते एक बार और चालक pade...usne अपना सर झुका लिया...

भगवती.................

आवाज़ सुनकर भगवती ने तुरंत अपना चेहरा उठाया अपने सामने जो था उससे देख उनके आँखों में जो दर्द था वो आश्चर्य में बदल गया.....

पुजारीजी- BHAAGVATI.rokar तुम मेरी आत्मा को कष्ट पहुंचा रही ho......yahi मेरी नियति thi...na मई इससे भाग सकता tha,na tum....ab यूँ उदास होना chhodo,aur जो तस्वीर अभी तुमने dekhi,unke पास चली जाओ...

उनके साथ रहना hi तुम्हारी मंज़िल है और मेरे बलिदान का तुम्हे मिलने वाला पुरस्कार भी.......

ये बोलकर पुजारीजी की आत्मा गायब हो gayi...tabhi एक तेज़ रौशनी हुई और जब घाटी तोह भागवती के पैरों के पास एक कलश tha.BHAAGWATI ने अपने पति की राख उस कलश में डाला और अपने घर की तरफ चल दी....

वहीँ दूसरी तरफ:-

A/DAD- बीटा इतनी जल्दी जा रही hai.....kuch दिन और रूक जाती......

अवंतिका- dad,holidays थोड़ी न hain..mai तोह लीव पर आयी hun.....jitne दिन rookungi,padhayi का उतना ज़्यादा लोस्स होगा....

डैड- चल ठीक hai.par जब भी दिल kare,aise hi सरप्राइज देते rehna...beech बीच में आकर....

अवंतिका- पक्का डैड...

अवंतिका अपने डैड के गले लग गयी...

दादाजी- पर नेक्स्ट time,with security.....ok....!!!!

अवंतिका- हाँ dadu,pakka.aur कितनी बार बोलूं!!!!.....

दादाजी- बीटा जब तू दादी बनेगी naa,tab तुझे पता चलेगा....

अवंतिका- lai.....apbhi पढ़ाई पूरी भी नहीं hui,meri शादी भी नहीं hui,aur dadu,last लेवल की बात कर रहे हैं...

सभी अवंतिका की बात पर है दिए..

दादाजी- ऐसे hi हमेशा खुश रहा कर बचा.....

अवन्तिक ने भी अपने दादाजी को स्माइल देकर हुग kiya,fir बारी बारी सब से मिलकर कार में बैठ निकल गयी गई.....

अवंतिका कार में- थैंक god.ab थोड़ा ाचा laga....itne दिनों से जो कुछ हो रहा tha,usse घर में तोह मुझे घुटन सी लग रही thi.par अब जो हुआ सो hua,mumbai जाकर एक फ्रेश स्टार्ट करुँगी.......

पर मैडम को नहीं मालुम था की वो जिस लीचड़ खानदान से hain,unki जड़ें इतनी आसानी से अपने किसी भी ब्रांच को छोड़ेगी nahi....ek और काण्ड हमारी मैडम का मुंबई में इंतज़ार कर रहा था....

बैक तो हीरो:-

नानाजी- अरे बीटा ये क्या कर रहा है?

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ये बोहोत भरी hai....ek आदमी से नहीं uthega.maine कुछ आदमी बुलाये hain.wo रख देंगे.....

डैड- अरे papa,mai कर रहा हूँ naa.mai रख दूंगा....

नानाजी- नहीं बोलै naa.tu वो सब बैग्स रख दे....

तोह दोस्तों आप सब तोह सन समझ hi गए honge....jo नहीं समझे hain,unhe बता देता हूँ की अभी शाम का वक़्त है और हम सब मुंबई के लिए निकल रहे hain...hamara तोह कुछ और दिन रूकने का प्लान था पर कल रात की वजह से मेरा मन खट्टा हो गया था और मैंने आज hi जाने का फैसला कर लिया tha.....ab कल रात ऐसा क्या हुआ tha,ye मई आपको कुछ देर में बताता hun...filhal के लिए अभी के चल रहे सन में वापस चलते हैं.....

मई- क्या naanu...ek बक्से को उठाने के लिए आदमी बुलाये हैं आपने...

नानाजी- beta,size तोह देख iska....aadmi तोह लगेंगे ना.

मई- नहीं लगेंगे....

मैंने बक्से के हुक को पकड़ा और ऊपर करते हुए नीचे हाथ रख बक्से को उठा लिया....

और नानौ और डैड के चेहरे पर शॉकिंग लुक्स को मुस्कुराकर देखते हुए बक्सा पकडे बस की तरफ बढ़ गया........

नानाजी- ये एक 16 साल का लड़का hi है naa...kitni ताकत है isme.is बक्से का वजन 200 कग से ज़्यादा है और इसने इससे ऐसे उठा लिया जैसे बक्सा न होकर कोई तकिया हो......

डैड- गुरूजी ने सच hi कहा था.....

NANIJI...guruji....kaun guruji.aur क्या कहा था उन्होंने?

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नानीजी जो माँ और मौसी के साथ डैड और नानाजी जे पास पहुँच चुकी thi,unhone डैड की बात सुनली थी.....

पर डैड से पहले माँ ने सबको मेरे जन्म के समय क्या क्या हुआ tha,aur नाम कारन के दिन गुरूजी ने मेरे बारे में क्या क्या कहा tha,wo nana,naani और मौसी को बता दिया...

मेरे जन्म के वक़्त माँ की जान को खतरा था ये जानकार नानाजी और नानीजी शॉकेड रह गए और काफी दुखी हो गए.....

नानाजी- कैसा बाप हूँ mai....apni बच्ची को खुद से अलग कर diya.jab वो खुद एक माँ बनाने वाली thi,uski ज़िन्दगी मौत के दरवाज़े पर कड़ी thi,usse हौसला देने के लिए भी मई मौजूद नहीं था...

नानीजी तोह बस माँ को गले लगाकर रोने लगी...

मौसी जी के आँख में भी आंसू थे.....

नानीजी- हमें माफ़ कर देना मेरी bachi.hum अचे माँ बाप नहीं बन पाए.....

माँ- ऐसा कभी सोचना भी मत maa.maine मेरे बेटे को वही संस्कार दिए hain,jo आपने मुझे दिए the...aapse बेहतर माता पिता हो hi नहीं सकते हैं.

हम- और नाही बेहतर naana,naani....

सबने सामने की तरफ देखा जहाँ हम तीनो कमर में हाथ रख ग़ुस्से वाले लुक के साथ खड़े थे......

मई- आप लोगों के पास आंसुओं का कोई नल है kya,jo जब चाहो ों हो जाता hai....aur ये सब क्या बातें लेकर बैठ जाते हैं आप log..........na ज़िन्दगी हमारे हाथ में है और न mout....toh फिर इसकी पॉसिबिलिटीज के बारे में क्यों sochna...filhal,is मोमेंट में हम सब साथ hain,khush hain,kya इतना काफी नहीं hai.....aur naanu,aapne एक बेटी को जन्म दिया और उनकी वजह से इ और बीटा भी मिल गया मेरे डैड के रूप me....agar आप अचे नहीं होते तोह ईश्वर आपको इतना सब कुछ क्यों देते.....

अंजलि- right.....toh अब no मोरे सीरियस discussions.aur रोना तोह अब से बन है......

रोनित- इसीलिए ये सब छोड़िये और एक बार रे- चेक कर lijiye,sab सामान बस में रखा गया है या कुछ बाकी है......

मामाजी- बिलकुल सही bhanje.....ab कोई और बात nahi...mai तोह इतना एक्ससिटेड हूँ मुंबई जाने के लिए की बता नहीं सकता......

मामाजी भी मुंबई शिफ्ट होने के नाम से बच्चों की तरह झष हो गए the.wo पुरे धवलगढ़ में सुबह से घूम घूम कर बता रहे थे की वो मुंबई शिफ्ट हो रहे हैं......

नानीजी- अरे BHAGWATI.....aao बीटा.........

जी हाँ doston,ye वहीँ भागवती आंटी hain...pujariji की बीवी.....

मैंने पलट कर देखा तोह मेरे पीछे भागवती आंटी अपनी बेटी के साथ कड़ी थी.....

मई उनके पास गया और उनकी गुड़िया को गोद में उठा लिया....

मई- अरे मेरी gudiya,aa गयी........

ाशी ने अपना सर हाँ में हिला diya.maine उसके गाल पे किश कर diya.mujhe ाशी को गोद में पकडे देख कोमल भी भागकर मेरे पास आयी और मेरी जीन्स खींचने lagi..maine उससे भी गोद में उठा लिया.....

सभी कोमल की हरकत देखकर है दिए......

मई- रोनित, छोटी माँ के बैग्स बस में रख दे..

रोनित ने भगवती जी से उनके बैग्स लिए जो सिर्फ नाम के hi the........aur बस की तरफ चला गया....

डैड- क्या बात है choti.....Teri नज़रें क्यों नीची है....

भागवती- कहाँ bhaiya....mai तोह बस ऐसे hi.....

मई- छोटी माँ को शर्म आ रही है की उनके पास इतना काम सामान hai.haina छोटी माँ....!!!!!

डैड- भागवती तुझे मेरे बेटे ने छोटी माँ कहा hai,aur मैंने अपनी बेहेन माना hai,toh दोबारा खुदको काम कभी मत समझना.....

माँ- और नहीं तोह kya.......SWATI के रूप में मुझे एक बेहेन मिल gayi,aur तेरे रूप में एक nanad....hume इतना रहिस बनाकर खुदको काम कैसे समझ सकती है तू.....

छोटी माँ- अब से ऐसा कुछ नहीं सोचूंगी.......

रोनित- आल set.ab चलें.......

डैड- papa,chalen!!!!!

नानाजी- चलो.....

हम सब घर से बहार aaye.nanaji ने घर को ताला lagaya.bahar बोहोत से लोग आये हुए थे नानाजी को अलविदा kehne.nanaji और नानीजी सबसे mile...bus में चढ़ने से पहले नानाजी और नानीजी ने एक बार पलट कर अपने घर की तरफ dekha...itni यादें जो जुडी थी इस घर से उनकी.....

डैड- papa,sad क्यों होते hain.hum हर साल छुट्टियों ने यहाँ आया करेंगे.....

नानाजी ने डैड के सर पर हाथ फेरा और बस में चढ़ gaye.sabhi नानाजी के पीछे पीछे बस में चढ़ gaye.....sabse आखिर में नै चढ़ा....

मई- आज तोह मई कोमल और ाशी के साथ बैठूंगा.....

बस में चढ़ते hi.maine कहा.

रोनित- तोह फिर लास्ट सीट में चला jaa.wahan जगह भी बोहित bain.ye दोनों खेलेंगी तोह भी जगह kam.nahi पड़ेगी....

मई- ठीक है....

मई जाकर आखरी सीट पर बैठ gaya.driver ने बस आगे बढ़ा di....KOMAL और ाशी मेरे राइट साइड में बैठे खेल रहे थे और मई खिड़की से बाहर देखते हुए कल रात जो hua,book ने जो भी मुझे bataya,un बातों में फिर खो गया......

फ्लैशबैक ऑफ़ यस्टरडे नाईट:-

मई- क्या yaar....thodi देर और रूकने देता तोह तेरा क्या जाता.....!!!!

उस डेविल की आवाज़ मुझे अपनी आवाज़ सी लगी thi...mai उसके पास जाने के लिए उठा hi था की बुक ने मुझे वहां से निकालकर वापस रूम में ला दिया था.......

मई- chalo,ye तोह पता चल गया की धवली झील में आखिर हुआ क्या tha.....par मुझे ये सब ये बुक क्यों बता रही hai????kya मेरा कोई रिश्ता है इस झील से...!!!!

मई ये सब अपने आप से hi बोल रहा tha.par ये बोलने के बाद मेरी नज़र उस बुक पे चली गयी जिसके कोरे पैन पर हाँ लिखा हुआ था....

मई- हाँ मतलब!!!!!!!!!

उस पैन पर फिर कुछ लिखने लगा....

बुक- तुम्हे उस स्पीयर को हासिल करना है!!!!

मई ये सुनकर शॉकेड हो गया और थोड़ा नर्वस bhi...shocked इसीलिए क्यूंकि मई कुछ देर पहले वहां मौजूद था जहाँ ु स्पीयर ने उन हौली स्पिरिट्स को निगला था और फिर गायब हो gayi.aur नर्वस इसीलिए क्यूंकि मैंने उस डेविल और उन हौली स्पिरिट्स की लड़ाई देखि thi......aur दोनों तरफ की शक्तियां शायद इस ब्रम्हांड की सबसे खतरनाक ताकतें thi..jab स्पीयर उनके हाथ में नहीं आया तोह मेरे हाथ में कैसे आता......

यहाँ मेरी सोच ख़त्म hui,wahan उस पैन में कुछ लिखने लगा......

बुक- वो स्पीयर तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही hai,aur इसका सबसे बड़ा सुबूत मई hun....mai सिर्फ उससे hi मिल सकता था जो उस स्पीयर का हक़दार हो....

मई- okkkk...toh,kabse शुरू करूँ मई उस स्पीयर की तलाश!!!! अभी से...!!!!!

उस पैन में फिर कुछ लिखने लगा पर इस बार जो likhaya,usse देखकर मई फिर चौंक गया...

बुक- सुपरगुप्त प्रगतं........

बुक में मेरे अंदर जो बुक thi,usse बहार निकलने का मंत्र लिखा हुआ tha.maine वहां का लिखा रिपीट कर diya......ek तेज़ रौशनी के साथ वो बुक मेरे अंदर से बहार आ गयी...

बुक- तुम अभी इतने शक्तिशाली नहीं हो की उस स्पीयर की ऊर्जा को संभल सको...

मई- तोह फिर मुझे क्यों ये सब बताया गया है....!!!!

बुक- ताकि तुम उसके लायक हो जाओ....

मई- क्या मुझे फिरसे किसी ट्रेनिंग में जाना पड़ेगा!!!!!

बुक- जो ट्रेनिंग तुमने ली thi,wo इसीलिए नहीं ली थी की तुम युद्ध कला और मन्त्रों का इस्तेमाल सिख pao.wo ट्रेनिंग तुम्हे सिर्फ खुदके इन्द्रियों को जगाने के लिए और खुद को पहचानने के लिए दी गयी थी.....

इन्द्रियां तोह तुम जगा चुके ho,bas तुम्हारी असली ताकत सोई हुई है जो एक वक़्त के बाद जागने lagengi.....aaj तक मेरे द्वारा तुमने जितने भी प्राणघाती और विध्वंशक मंत्र सीखे hain,wo सब तुम तभी इस्तेमाल कर पाओगे जब तुम्हारी शक्ति मेरे मंत्रो के ऊर्जा को झेलने के लायक हो जाएगी......

मई- एक बात batao,god के बाद सबसे ताकतवर कौन है?

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बुक- जो तुम्हे मार सकता है?

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मई- मुझे मार सकता है मतलब......

बुक- बस इतना समझ लो की शक्तिशाली होने की कोई हद नहीं hoti....kyunki शक्ति अनंत hai.par हर शक्ति का श्रोत परम पिता परमेश्वर hain.....tumhari शक्ति वहीँ तक सिमित है जहाँ तक तुम्हारी सोच जाती hai...soch khatm,shakti ख़त्म.....

मई- तोह उस स्पीयर को हासिल करने के लिए मुझे और शक्तिशाली होना पड़ेगा....

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बुक- उतना काफी नहीं hai....wo समय आने वाला है जब तुम अपने शक्ति के एक ख़ास भाग को प्राप्त karoge.par उस स्पीयर को हासिल करने के लिए वो शक्ति पर्याप्त नहीं hai....HOLY स्पिरिट्स के अंदर भी असीम शक्तियां hain,par फिर भी वो उस स्पीयर से बाहर नहीं आ पा रहे hain,kyunki उस स्पीयर के अंदर हर एहसास कैद हो जाता है और पिछले लाखों सालों से वो स्पीयर अपने अंदर कैद हौली स्पिरिट्स को बेइंतहा दर्द दे रहा है जिसकी वजह से वो ध्यान नहीं लगा पा रहे hain.aur तुम्हे तोह पता hai,bina ध्यान के कोई भी स्पेल्स काम नहीं karte.....us स्पीयर के पास पहुँचते hi तुम्हे भी वही दर्द होगा और तुम कोई भी स्पेल नहीं बोल पाओगे...

मई- तोह फिर मई कैसे उस स्पीयर को हासिल कर सकूंगा...

बुक- पीड़ा AVLOKYATI...(absorve पैन)..

आज से हर वक़्त तुम्हे इस मंत्र का जाप अपने मन में करना hai...isse तुम्हारी सेहेन शक्ति कई गुना बढ़ jayegi....uske बाद भी तुम उस स्पीयर द्वारा दिए गए दर्द को बर्दाश्त कर paoge,ye कहा नहीं जा sakta,kyunki वहां तुम्हारी इच्छा शक्ति का भी उतना hi योगदान रहेगा जितना इस मंत्र का होगा.

मई- ठीक है.......

ेंचन्त्मेन्त बुक- एक आखरी दृश्य है जो मई तुम्हे दिखाना चाहता हूँ.....

मई- मस्तिष्क प्रविशति......

एक तेज़ रौशनी के साथ मेरे सामने एक नया सीन आ gaya.jaise जैसे वो सन आगे बढ़ रहा tha,meri आँखों से आंसूं बहने लगे the.mai इस बार भी मई धवली झील के सामने hi था और वक़्त भी अभी का hi tha....mere सामने एक पुजारीजी थे जो पुरे झील की परिक्रमा कर रहे थे.....

उनके पीछे पीछे उनकी पत्नी thi,kuch hi देर में वो पुजारीजी मेरे आँखों के सामने जल कर राख हो gaye,aur रह गयी उनके peeche,roti,bilakhti हुई उनकी पत्नी....

पर उसके बाद कुछ ऐसा हुआ की मई फिरसे चौंक gaya.raakh में बदल चुके पुजारीजी की राख के ऊपर मेरी तस्वीर और डिटेल्स दिखने lage......mai और नहीं देख paaya.maine अपनी आँखें बंद की और जब खोली तोह मई अपने कमरे में hi था.....

बुक- उस पुजारी का वो हाल उस स्पीयर की वजह से हुआ है....

मई- पर वो वहां कर क्या रहे the,aur जब उन्हें जलन शुरू हुई तब वो रुके क्यों नहीं..

बुक- यही उसकी नियति थी VIKRAM......ab वो झील पूरी तरीके से सुरक्षित hai....koi भी बुरी शक्ति अब वहां नहीं आ sakti.jab तुम यहाँ वापस आने के लिए तैयार hoge,tab कोई भी बाहरी बाधा तुम्हारे रास्ते में नहीं आएगी.....

पुजारी की पत्नी और उसकी बची की ज़िम्मेदारी अब तुम्हारी है विक्रम.....

मेरे चेहरे पर बस एक फीकी सी मुस्कान आ गयी...

MAI-mere ज़िम्मेदारी लेने से क्या उनके पति जिन्होंने सिर्फ मेरा रास्ता आसान करने के लिए खुद की जान दे di,kya वो वापस आ jaate...???anjaan होकर भी कितना बड़ा बोझ दाल गए मेरे ऊपर.....

बुक- सत्य की राह पर बोहोत सी कुर्बानी देनी होती है VIKRAM.....tum कोई साधारण मनुष्य नहीं ho,in जस्बाती बातों से बहार निकलो...

मई- अगर जस्बात न होते तोह इंसान और शैतान में फर्क hi क्या hota......khair ये आप नहीं समझेंगी............

बुक- मई जिस चीज़ से बानी हूँ विक्रम जिस दिन तुम्हे उस राज़ का पता chalega,tumhari सोच बदल जाएगी.....

वो ेंचन्त्मेन्त बुक उसी वक़्त गायब हो गयी और मेरी बुक वापस मेरे अंदर चली गयी....

मई- नमस्ते......

आज सुबह जब मई बहार आया तोह मैंने नानीजी और माँ के साथ एक लेडी को खड़ा paaya.ye और कोई नहीं उन्ही पुजारीजी की पत्नी thi.maine सीधे जाकर उनके पेअर छू लिए..

भगवती (मन में)- क्यों मुझे पापी बना रहे हैं aap....mai तोह आपके चरों किम धुल भी नहीं......

मई (मन में)- आपने जो किया वो कोई आम इंसान नहीं कर sakta.aap मेरी नज़र में मेरी माँ से काम नहीं...

माँ- beta,kya तू जानता है इन्हे?

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मई- नहीं mom.bas मेरा दिल किया तोह मैंने पेअर छू लिए.....

नानीजी- भागवती ,बीटा जो हुआ उससे बदला तोह नहीं जा sakta...ab भगवान् के आगे किसीकी चली है.

मई- क्या हुआ?

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माँ- beta,kal रात इनके घर में आग लग gayi.......ye और इनकी बची बहार आँगन में सोये the.ghar के अंदर इनके पति hi the,jo बहार नहीं आ पाए और जल gaye...unki मौत हो गयी....

नानीजी- बीटा जाकर अपने पापा को बुला ला तोह...

मई डैड को बुलाकर ले आया....

नानीजी- बीटा ये भागवती है.

फिर उनके साथ जो हुआ वो नानी ने डैड को बता दिया जिससे सुनकर डैड भी काफी साद हो गए....

नानीजी- मई क्या कह रही hun,iska इस दुनिया में कोई नहीं hai.kya हम इससे भी अपने साथ ले चलें.....

डैड- ये आप मुझसे पूछ रही hain...mummy,permission हम आपसे lenge,aapka काम तोह फैसले सुनाने का है..

डैड की बात सुन नानीजी का सीना गर्व से फूल गया.

नानीजी- तोह ठीक है fir,BHAAGWATI तू हमारे साथ मुंबई चल रही hai.ab से तू वहीँ rahegi,hamare साथ.

मई- क्या मई आपको छोटी माँ बुला सकता हूँ???

सभी मेरी बात सुनकर शॉकेड हो gaye.kyunki मई किसीसे भी आसानी से रिश्तें बनता नहीं tha.....BHAGWATI का तोह आश्चर्य का ठिकाना नहीं था.

मई- क्या हुआ बताइये naa.bula सकता हूँ की नहीं....

भागवती आयी और मेरे गले लग कर रोने लगीं..

डैड- अरे waah,maza ा gaya.mujhe पहले पता होता की मुझे इस गांव में आते hi इतने सारे रिश्ते मिल जाएंगे तोह मई कब का आ jaata.aaj से तुम मेरी छोटी बेहेन......

माँ- अरे waah,yaani की ये मेरी नानन्द बन गयी.....

ऐसे hi कुछ hi देर में एक साद वाला माहौल ख़ुशी में बदल गया...

मैंने सबको मुंबई आज hi चलने के लिए कहा जिससे पहले तोह कोई नहीं मान रहा था पर मेरे पढ़ाई की बात बोलते hi सब मान गए और इस तरह हम अभी बस में बैठे मुंबई के लिए निकल चुके थे.......

वहीँ हेवन में:-

सत अल्फ़्रिक- वो वक़्त दूर नहीं जब विक्रम अपने पहले पड़ाव को पार करेगा.....

सत सेबेस्टियन- पर खतरा अभी टाला नहीं hai....us पुजारी की तरह हमें भी एक काम सौंपा गया है.....

सत सकिलिअ- हाँ सही kaha,hame जल्द से जल्द कुछ करना hoga....VIKRAM के धवलगढ़ वापस आने से pehle.ek बार विक्रम ने हौली स्पिरिट्स को उस स्पीयर से आज़ाद कर diya,toh वो स्पीयर बेकाबू हो jayegi....HOLY स्पिरिट्स की वजह से उसकी आधी शक्ति ************* में जाकर रूक गयी hai..HOLY स्पिरिट्स के बहार आते hi वो तेज़ी से अपने स्पीयर में समाने के लिए niklegi.hume उस्का रास्ता बांधना hoga...warna अपनी ऊर्जा से वो जहाँ से भी guzregi,wahan विनाश होगा.........

सत सेबेस्टियन- अभी हम कुछ नहीं कर sakte......aur तुम इसका कारण भी जानती ho....unke वहां से निकलने के बाद hi हम अपना काम कर सकते हैं.....

आज के लिए इतना HI

आपका अपना V..J..
 
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम अपनी फॅमिली के साथ मुंबई के लिए निकल जाता है.......

अब आगे:-

CHAPTER-1:-

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट्स )

अपडेट-42:-

भैयाआआआ.................

रियांश- finally........meri गुड़िया आ गयी.....

रात के करीब 10 बजे

अवंतिका की कार मामाजी के लॉन में एंटर hui....AVANTIKA घर में घुसते hi अपने सामने अपने बड़े भाई को देख कर सुरप्रीसेड और खुश हो गयी

अवंतिका दौड़ कर गयी और अपने भाई के गले लग गयी....

अवंतिका- व्हाट ा प्लेअसेन्ट सुप्रिसे बिग bro........yun achanak.....aap ...yahan....kaise?

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?

रियांश- बस अपनी गुड़िया की याद आ gayi,toh आ गया......

अवंतिका- न न न na..something इस fishing........chaliye,bataiye क्या बात है....!!!!!!

अपने मछली पकने पकाने में मुझे तोह तू भूल hi गयी...........

अवंतिका- ओह माय god....aap भी आये हैं......

आवाज़ सुन जैसे hi अवंतिका ने अपनी साइड में dekha.toh अपने सामने देवांश को खड़े पाया.....

अवंतिका झट से देवांश के गले लग गयी.......

अवंतिका- पहले तोह मुझे सिर्फ शक tha,par आप दोनों को एक साथ यहाँ देख कर मेरा शक यकीं में बदल चूका है की कुछ तोह गड़बड़ hai..........toh कौन बता रहा hai,ki क्या बात है?

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देवांश- ये भला क्या बात hui...apne भाइयों से

न dua,na सलाम,

सीधे सवाल,

की क्या है काम.....

थिस ी नॉट फारे यार.........

(रियांश आहूजा- सोन ऑफ़ नितिन ahuja.DEVANSH आहूजा- चाचाजी के suputr......dono साथ hi कनाडा से बिज़नेस मैनेजमेंट की पढाई कर रहे हैं...)

अवंतिका- मुझे अपनी बातों में आप फसा नहीं sakte,samjhe....

शनाया- थोड़ा बोहोत हमसे भी मिल ले...

अवंतिका ने सामने देखा जहाँ शनाया और वाणी खड़े the.....AVANTIKA ने जाकर दोनों को हुग किया.....

अवंतिका- kaminiyon,dono भैया आएं hai,ye कॉल करके बता नहीं सकते थे.....

शनाया- अरे आज मॉर्निंग मैंने घर में कॉल किया tha,toh पता चला की तू यहाँ के लिए निकल गयी hai...toh हमने सोचा की क्यों न तुझे सरप्राइज दें.....

AVANTIKA-oh...toh भैया......

रियांश- अरे बताते hain,sab बताते hain,pehle डिनर तोह karle.......tu आ रही है इस चक्कर में हममे से भी किसीने अभी तक नहीं खाया.

अवंतिका- ओह haan,sahi kaha,bhook तोह मुझे भी ज़ोरों की लग रही hai..chaliye पहले डिनर करते hain...waise मेरी priyu,mamaji और मामीजी कहाँ hain..!!!!koi भी दिख नहीं रहा.....

वाणी- अरे प्रीयू तोह सो gayi.kal उसका टेस्ट है तोह मॉर्निंग जल्दी उठकर padhungi,bol रही thi.......aur माँ डैड तोह दिल्ली गए हुए hai.dad की कोई मीटिंग थी और कोई फंक्शन भी tha,toh माँ को भी साथ ले गए......

अवंतिका- चलो fir,hum सब तोह डिनर कर लें....

फिर सभी ने बैठ कर इधर उधर की बातें करते हुए डिनर किया....

अवंतिका- हाँ तोह अब bataiye......aur सच हाँ......

!!!!!!!

डिनर के बाद सब वहीँ सोफे में बैठ गए तोह अवंतिका ने अपना इतनी देर से जो क्वेश्चन हैंग करके रखा गया tha,wo पूछा.....

रियांश- पहले तू bata,tum सब के साथ इतना सब कुछ हो गया और तूने हमें कुछ बताना भी ज़रूरी नहीं समझा......

अवंतिका- क्या हो गया हमारे साथ...!!!!!

!!!!

शनाया- विक्रममममम.........

विक्रम का नाम सुन अवंतिका का दिमाग ghuma.wo समझ गयी की उसके दोनों भाई क्यों आये हैं....

अवंतिका सीरियस टोन में- भैया वो मटर सॉर्ट आउट हो चूका hai.ab उस बात को खींचने का कोई मतलब नहीं.......

सभी अवंतिका की बात सुनकर शॉकेड हो गए....

देवसंश- ये तू बोल रही है AVNI..jo कभी खुदके ऊपर कोई ऊँगली भी उठाये तोह बर्दाश्त नहीं करती thi,aaj उसपर किसीने हाथ उठा दिया है फिर खामोश है......

वाणी- तू होश में तोह है न babes.kya तू हमारी और हमारी फॅमिली का बदला उस विक्रम और उसके दोस्तों से नहीं लेना चाहती......

अवंतिका- haan,mai नहीं चाहती कुछ भी karna.....in सब की शुरआत कैसे हुई thi,ye तू भी बोहोत अछि तरीके से जानती है VAANI.PRIYU ने उस रात पार्टी का सारा सच हमे बता दिया tha.....fir भी tu......khair,ab इस बारे में कोई डिस्कशन नहीं hogi....mera सर दर्द कर रहा hai,mai सोने जा रही हूँ....

अवंतिका उठ कर जाने लगी पर फिर अचानक वो रूक गयी और पलट कर कहा.....

अवंतिका- भैया, प्लीज हो सके तोह इन दोनों ने जो भी आप दोनों को बताया है उससे भूल jaiyega......jis लड़के से बदला लेने के लिए इन्होने आपको बुलाया hai,usse हम जितना दूर rahenge,utna hi हमारे लिए बेहतर होगा.....

अवंतिका फिर पलटी और बिना रुके अपने कमरे में चली गयी.

शनाया- मई उससे देख कर आती हूँ.....

अवंतिका और शनाया के जाने के बाद.....

वाणी- इसका दिमाग ख़राब हो गया है.....

यहाँ रियांश और देवांश जो अवंतिका की बातों के बारे में सोच रहे the....VAANI की आवाज़ सुन वो होश में आये..

वाणी- अब हम क्या करेंगे bhaiya....AVNI तोह मन कर रही है...

रियांश- मुझे तोह ये समझ नहीं आता की मेरी बेहेन जो हमेशा ये कहती थी की मेरे भाइयो से कोई भी नहीं जीत sakta,wo आज ये कह रही है की हम उससे लड़ने के काबिल नहीं हैं....

देवांश- हाँ yaar.....iska मतलब उस लड़के ने हमारी बेहेन को इतना डरा दिया है की उससे अब हम पर भी भरोसा नहीं रहा.....

रियांश- उस साले की toh.....ab तक तोह सोचा था की उस लड़के को बस थोड़ा बोहोत मारकर दरकार चले jaayenge...par अब nahi,ab तोह साले की ऐसी हालत करेंगे की साले को सपने में भी हम उससे मारते दिखाई देंगे.....

देवांश- कल तुम्हारे स्कूल के बाद उस विक्रम से एक मुलाकात हो hi जाए.....

वाणी- नहीं bhaiya.wo तोह कुछ दिनों से स्कूल hi नहीं आ raha.uske दोनों फर्न्स भी गायब हैं......

रियांश- ठीक hai..kuch दिन इंतज़ार कर लेंगे.......

वहीँ अवंतिका के रूम में:-

शनाया- क्या हुआ है AVNI...tu नीचे वो सब क्यों बोल रही thi.....kya तू सच में विक्रम से बदला नहीं लेना चाहती.......

AVANTIKA-kis बात का badla.apne डैड को प्रोटेक्ट करने ka.mamaji के धमकी का जवाब देने ka...kis बात का..... या पापा ka,jo उसके पुरे फॅमिली को मारने चले the,aur उसने इस के बदले डैड और उनके आदमियों को पीटा....

शनाया- what.dad ko...par क्यों और कहाँ?

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फिर अवंतिका ने शनाया को गांव में हुए साड़ी घटनाओ के बारे में bataya...ye भी की उनके पास इतनी दौलत कहाँ से आयी....

शनाया- यार इतना सब कुछ हो गया और तू मुझे अब बता रही है?

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अवंतिका- बता भी देती तोह क्या हो जाता babes....jo होना था वो हो चूका hai...ab बस इतना samajh,ki जो भी हमारे साथ हुआ है उसमे विक्रम का कोई कसूर नहीं hai,hamari फॅमिली का hai....toh इस बात को खींचना बंद करते hain...that sit......yaar मई काफी टायर्ड फील कर रही hun...mai सोने जा रही hun.g.n.

शनाया- g.n.........

जहाँ ऊपर इन दोनों बहेनो के मन में विक्रम के लिए ग़ुस्सा काम हो रहा tha,wahin नीचे उनकी तीसरी बेहेन दोनों भाइयों के मन में विक्रम के लिए ग़ुस्सा बढ़ा रही thi......dekhte है इनका क्या होता है.......

वहीँ दूसरी तरफ:-

1सत ब्लैक सोल- उसका भी हममे से एक बनाने का वक़्त आ गया.....

2ंद ब्लैक सोल- तुम्हे ये आसान लगता hai....wo पृथ्वी वासी hai.......uske शरीर की सरचना ऐसी नहीं हुई है की वो हम्मे से एक बन पाए.

1सत ब्लैक्सोल- मुझे ये बात बोहोत अचे से पता hai.par मैंने उससे तराशा hai..usse ऐसी ट्रेनिंग दी है जो किसी पृथ्वीवासी ने कभी नहीं li..uske शरीर को मैंने हर दर्द को सहने योग्य बना दिया है.....

3रद ब्लैक्सोल- एक बार फिरसे सोच lo.ek तरीके से देखा जाए तोह तुम अपने बेटे का बलिदान दे रहे हो......

1सत ब्लैक्सोल- हम्मे से एक बनाना hi उसका मकसद hai.....bhale hi उसका शरीर इंसानो का hai,par उसका दिमाग हम devil's जैसा hi है....

मुझे पूरा यकीं है की वो भी एक डेविल बनाने में कामियाब hoga...mujhe बस इतना बताओ की क्या तुम सब मेरे साथ ho....tumhe पता है ये मई अकेले नहीं कर सकता........

सब सोल्स- हम तुम्हारे साथ हैं.......

वहीँ दूसरी तरफ:-

मई- nanu,welcome होम..............

नानाजी- अरे ये sab.........iski क्या ज़रुरत थी बीटा....

डैड- बिलकुल ज़रुरत थी papa....aaj पहली बार आप अपने घर आये hain.itna तोह बनता है naa.aayiye मम्मी.....

सुबह के 9 बज रहे the...hamari बस जस्ट अभी हमारे घर के लॉन में आकर रुकी hai.bahar निकलते hi नानाजी और नानाजी शॉकेड हो गए......

पूरा घर दुल्हन की तरह सजा हुआ tha......lawn से घर के एंट्रेंस तक के रास्ते में फूल बिछे हुए the.....aur उन फूलों के दोनों साइड लाइन से कुछ लड़के और लड़कियां कड़ी thi...bas के नीचे अंजलि की माँ आरती की थाल लिए कड़ी thi.....unke साथ अंजलि के डैड और रोनित के पेरेंट्स खड़े थे.....

डैड- papa,inse miliye,ye अंजलि के पेरेंट्स हैं और ये रोनित के...

दोनों के hi माँ दादस ने ननु और नानी के पेअर छुए.

आकाश अंकल- पहले एक बात क्लियर कर देता hun...aap सिर्फ जयराज और मीनू भाभी के माँ डैड नहीं ho,hamare भी ho..aur वो भी बराबर ke....koi काम ज़्यादा nahi...bolo मंज़ूर है.......!!!!!

आकाश अंकल की बात सुन हम सब हैं दिए...

नानाजी- बिलकुल beta.....isme पूछने वाली कौन सी बात है......

डैड- papa,mummy,chaliye,ghar के अंदर चलते हैं...

नानाजी और नानीजी उन फूलों से बने रस्ते पर चलकर आगे बढ़ने lage...jo लड़के और लड़कियां दोनों तरफ खड़े the,wo उनपर फूल बरसाने लगे....

नानाजी और नानीजी को तोह जो भी हो रहा था उसपे विश्वास hi नहीं हो रहा tha...same हालत मामाजी और मामीजी और छोटी माँ की भी thi..aashi और कोमल तोह मेरी गोद से उतरने का नाम hi नहीं ले रहे the...aditya को रोनित ने गोद में उठाया हुआ था....

हम चलते हुए अंदर आ gaye.hamare बंगलो को देखकर nanaji,naniji,mousi.choti maa,aur बचे बोहोत खुश हो गए.....

डैड- आज फाइनली हमारा घर पूरा हो गया....

मई-- वो सब तोह ठीक hai,par सबसे इम्प बात!!!!

डैड- कौन सी बात!!!!

हम सब- partyyyyyyyyyy...............

डैड- ये भी कोई कहने की बात hai......maine गाओं से hi आपके उंक्लेस को कॉल करके बोल दिया tha...HARPRRET और आकाश ने तोह सारे अरेंजमेंट्स की बात भी कर ली है.....

आकाश- bilkul........abhi तोह आप सब जाइये और रेस्ट kijiye.....shaam को सभी शॉपिंग पर चलेंगे.....

फिर कुछ ख़ास नहीं hua.humne नाना नानी को मामा मामी ko,choti माँ को उनके कमरे दिखाए और दूसरे कामो में बिजी हो गए..

वहीँ दूसरी तरफ:-

मैडोक्स- इतना वक़्त क्यों लग रहा है?

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?

हैकर- फुटेज मिल गया है sir...par क्लियर नहीं hai.wahi क्लीन कर रहा हूँ....

इस वक़्त मैडोक्स अपने घर जो की किसी किल्ले से काम नहीं tha,uske कंप्यूटर रूम में बैठा tha...MADOX ने विक्रम के बारे में हर तरफ से इनक्विरिएस करना शुरू कर दिया tha.issi दौरान उससे पता चला की उसकी ाहूजास के साथ भी रोड के पास भिड़त हुई hai....usne उस जगह की छानबीन करवाई तोह पता चला की जहाँ विक्रम ने फाइट की थी वहां एक ट्रैफिक सिग्नल था.

मैडोक्स ने अपने कंप्यूटर एक्सपर्ट से उस ट्रैफिक कैमरा से उस फाइट को फुटेज निकलने के लिए कहा था....

HACKER-ye ...bas.....ho gaya....done sir......ye रही उस फाइट की footage.....aap स्क्रीन पर देख सकते हैं.....

मैडोक्स के सामने एक बड़ा सा स्क्रीन लगा हुआ tha.uspe उस दिन की विक्रम की फाइट दिखने lagi....jaise जैसे फाइट आगे बढ़ रही thi,MADDOX की आँखें बड़ी होते जा रही थी....

हैकर- wowww.....sososorry सर......

फाइट देखकर हैकर के मुँह से ये अपने आप निकल गया पर अब उससे दर लग रहा था की कहीं मैडोक्स ऐसा बोलने पर उससे मार न दे....

मैडोक्स- तुम दर क्यों रहे ho!!!!!tumne कुछ गलत तोह नहीं bola.aur वैसे भी टैलेंट और taakat,dono की कदर और तारीफ़ होनी chahiye........(man me)......ye सब करना किसी इंसान के बस की बात nahi...par ये वाइट एनर्जी है या ब्लैक एनर्जी!!!!! ये कैसे पता लगाऊं.

फिर कुछ सोच कर मैडोक्स के आँखों में एक दर्द आ गया......

हैकर- ओह माय god...ye क्या हो रहा है!!!!!!

आवाज़ सुनकर मैडोक्स ने अपने सामने dekha.saare कम्प्यूटर्स जिनमे पूरी बिल्डिंग के लाइव वीडियोस दीखते the,wo अचानक बंद हो गए the.....ek पल के लिए तोह मैडोक्स chownka,par फिर शांत हो गया.

हैकर- सर ये अचानक क्या hua...aur मई प्रॉब्लम को ट्रेस भी नहीं कर पा रहा हूँ.....

मैडोक्स- तुम कर भी नहीं पाओगे bache...........ye जो भी हो रहा है वो तुम्हारी सोच से परे है...

तभी कमरे में हल्का हल्का अँधेरा छाने laga,aur पूरा रूम बर्फ की तरह ठंडा हो gaya......abhi कोई कुछ समझता की तभी एक के बाद एक 10 लोग जो सर से पाऊँ तक काले कपडे में पहने हुए the,kamre में एंटर हुए.....

उनमेसे किसी का भी शरीर या चेहरा नहीं दिख रहा tha,ye सब देखकर हैकर अपनी जगह पर जड़ होकर बैठ गया.

मैडोक्स मेरे bacche,kaisa है!!!!!!

आवाज़ सुन मैडोक्स ने अपने सामने dekha.saamne जो बड़ी सी कंप्यूटर की स्क्रीन लगी थी वो अब शुरू हो गयी thi...parde पर भी एक काले कपडे पहना शक्श बैठा tha.uska चेहरा भी गायब था.....

मैडोक्स- ठीक हूँ ब्लैक SHADOW.......aaj आपने अपने इस नाकारा बेटे को कैसे याद कर लिया.....

तुम्हारा वक़्त आ चूका है..........

जहाँ अब तक मैडोक्स काफी उदास सा दिख रहा tha,BLACK शैडो की बात सुनकर ख़ुशी से उछाल पड़ा....

मैडोक्स- कहीं ये कोई सपना तोह nahi....mera बरसो पुराण ख्वाब क्या सच में पूरा होगा....!!!!!!

ब्लैक शैडो- ये सब तुम्हे मेरे पास लेने hi आये hain...chale आओ....

और वो स्क्रीन बंद हो गयी......

मैडोक्स ख़ुशी से- चलें!!!!!!

ब्लैक सोल- क्या ये ज़रूरी है....

एक ब्लैक सोल ने उस हैकर की तरफ ऊँगली दिखाकर मैडोक्स से पूछा.

मैडोक्स उस ब्लैक सोल की बात का मतलब समझ गया और मुस्कुराते हुए ना में गर्दन हिला दी.....

सारे ब्लैक सोल्स ने अपने हाथ आगे कर दिए...

और पूरे कमरे में एक दर्दनाक चिकज गूंज गयी...

उस हैकर का पूरा शरीर गलती हुए ब्लैक सोल्स में सामने लगा.

सारे ब्लैक सोल्स मैडोक्स को लेकर गायब हो गए.....

बैक तो हीरो:-

रोनित- यार मई कुछ सोच रहा था....!!!!

अपनी साड़ी एक्सरसाइजेज ख़त्म करके हम एक बेंच पर बैठे hi थे की रोनित भाईसाहब ने मुँह खोला....

अंजलि- अरे waah.ye टैलेंट तुझमे कब से आया...!!!!!

रोनित- kyun,jab तुझे बकवास करना आ सकता hai,toh मुझे सोचना नहीं आ सकता क्या?

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मई- अरे बस करो तुम dono.....mouka मिलता नहीं की एक दूसरे की लेने में लग जाते ho..haan तोह sir,aap bataiye,kya सोच रहे थे आप....!!!

रोनित- मई क्या सोच रहा tha,arre haan,mai सोच रहा था की dekh,tune जितने भी फाइटिंग techniques,exercises हमें sikhaye,humne सब सीख लिए... तू न hame,aur हार्ड ट्रेनिंग kara......ab तोह इतनी एक्सरसाइजेज के बाद भी मुझे थकन hi नहीं लगती..

अंजलि- मुझे bhi.......din भर मुझे फ्रेश लगता hai.chahe कितना भी padhun,ghumu,ya कुछ भी karun,thakan तोह लगता hi नहीं है....

मई- देखो yaron,tumhe ये सब सीखने की दो वजह thi.ek,toh यही की तुम दोनों अपनी रक्षा खुद कर सको,

रोनित- ये वाली तोह मालूम है. दूसरी कौन सी वजह है?

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मई- उससे बताने का अभी वक़्त नहीं aaya...par जो भी रीज़न hai,wo है बोहोत इम्पोर्टेन्ट.......

अंजलि- चल ठीक hai........jo भी रीज़न ho,pata तोह आखिर में लग hi jaayega....abhi घर चलते hain......aaj की पार्टी की साड़ी ज़िम्मेदारी भी हम तीनो क सर पर hi है.....

मई- हाँ वो तोह hai......chalo फिर घर चलते हैं...

हम तीनो अपने अपने घर निकल gaye...fir दिन भर कुछ ख़ास नहीं hua....hum सब पार्टी के डोरशंस में लग gaye.....party किशोप्पिंग तोह हमने कल शाम hi कर ली thi......nana नानी का ये मुंबई या फिर ये kahun,kisi भी शहर मेर फर्स्ट टाइम tha.sheher की आधुनिकता को देखकर वो काफी शॉकेड और प्रभावित थे..

शामे हालत मामी और छोटी माँ का भी tha....humne सबकी जैम के शॉपिंग karwayi...aashi काजल और आदित्य को तोह मैंने इतने गैजेट्स और खिलोने लेकर दिए की उन्हें ले जाने के लिए डैड को कॉल करके एक ट्रक बुलवाना पड़ा.

इनसब के बीच डैड ने नानाजी और नानीजी को अपने साथ hi रखा था. जहाँ से भी मेरे डैड गुज़रते लोगों के सर डैड की इज़्ज़त में झुक jaate.....har कोई डैड से हाथ जोड़कर hi बात कर रहा था जिससे देखकर नानाजी और नानीजी बोहोत खुश हो रहे the.unhe अपने दामाद लव वाटर बेटे पर गर्व महसूस हो रहा था......

ऐसे hi पार्टी ओर्गनइजिंग करते हुए पूरा दिन कब निकल गया पता hi नहीं chala.......aaj के पार्टी के लिए मैंने एक ब्लू शेरवानी ली थी जो अभी मई पेहेन चूका था....

रोनित- वाह bhai...aaj तोह लड़कियां फ्लैट....

मई- तू कुछ मत बोल saale.last टाइम जब तूने ऐसा बोलै था तोह मुझे थप्पड़ पड़ा था....

रोनित- अब्बे वो तोह उन मनहूस लोगों की वजह se.har बार ऐसा थोड़ी न hoga....bhagwaan के घर में देर hai,andher nahi.dekhna,aaj ज़्यादा से ज़्यादा तुझे गाली padegi,lekin मार नहीं पड़ेगा...

मई- जब शकल अछि ना hona,toh काम से काम बातें अछि करनी chahiye....samjha...

तुम लोगों का हो गया तोह चलें!!!!

हमने दरवाज़े की तरफ देखा तोह हमारी नज़र ठहर hi gayi..jisse शब्दों में पिरोया नहीं जा sakta,kuch ऐसी खूबसूरती लिए हमारी अंजलि कड़ी thi...aur एक बार फिर हमारे रोनित भाईसाहब फ्लैट हो गए.....

मई- एक बार फिर se,shabd हमारे होंगे पर फीलिंग्स हमारे भाई साहब के.....

की तेरा ये बेपनाह हुस्न

हमसे सहा नहीं जाता...

जस्बात तोह बोहोत है मगर...

जुबां से कुछ कहा नहीं जाता....

रोनित मेरी बात सुन हड़बड़ा गया और अंजलि शर्मा...

अंजलि- तू कभी नहीं सुधरेगा naa.chalo अब नीचे चलते हैं..

रास्ते में...

रोनित- अब्बे saale,har बार मुझे क्यों फसा देता है तू.....

मई- मई फसता hu.saale फत्तू..

रोनित- फत्तू कैसे?

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मई- तुझे जब इसका जवाब मिल जायेगा तोह मुझे भी बता देना.....

रोनित- तू और तेरी उलटी सीधी बातें....

हम ऐसे hi मस्ती करते हुए लॉन में आ गए जहाँ लगभग सारे मेहमान आ चुके the......saala सभी मुझे ऐसे घर रहे थे जैसे पहली बार किसी बन्दे को देख रहे hon...khair मुझे kya,hum तीनो अपने घरवालों के पास पहुंचे जो स्टेज के पास hi खड़े थे..

नानाजी- आ गया मेरा शेर...

नानीजी- नज़र न लगे मेरे बचे ko.kitna सुन्दर दिख रहा है.

नानीजी ने एक काला टिका लगते हुए कहा..

माँ- दिख तोह मेरी अंजलि भी बोहोत खूबसूरत लग रही है.......

डैड- मेरा दूसरा बीटा भी किसीसे पीछे नहीं है...

ऐसे hi कुछ देर हम बात करते रहे फिर डैड स्टेज में चढ़ गए.

डैड- लेडीज एंड gentleman..aaj की ये पार्टी मैंने आप सब को मेरे डैड और माँ से मिलाने के लिए राखी है.....

प्लीज mom,dad आईये naa.ek फ़्लैश लाइट नानाजी पर गयी और एक नानीजी par.mom दोनों को लेकर स्टेज पर आ gayi.kaafi सारे फोटोग्राफर्स और मीडिया आयी हुई thi.sabne नाना नानी माँ डैड के स्नैप्स लिए...

डैड- एक और अनाउंसमेंट बाकी hai....aap सबको तोह पता है की मई अब होटल्स की एक चैन खोलने वाला hun.aaj और अभी मई आप सब के सामने अपने पहले होटल का और उसके ओनर का नाम अन्नोउंस करूँगा.

मीडिया- owner!!!!sir ओनर तोह आप hi होंगे ना....

डैड- haan,par पूरी अथॉरिटी मेरी नहीं hogi........toh लेडीज एंड जेंटलमैन ी प्रेजेंट तो यू थे मॉडल एंड नाम ऑफ़ माय फर्स्ट hotel,i.e

हमारे पीछे hi एक पर्दा लगा हुआ tha.dad के हाथ दिखते hi वो पर्दा हैट गया और जो नाम सामने आया उससे देखकर माँ के आँखों में आंसू आ गए.....

डैड- अमरीश PALACE....yahi है हमारे पहले होटल का naam.aur इसके ओनर hai,mere साले साहब मर राजेंद्र सहगल....

ये दूसरा झटका था सबके लिए....

नानाजी- बीटा ये सब की...

डैड- प्लीज dad......ye बिलकुल ज़रूरी था....

मामाजी तोह डैड के गले लग gaye.maamiji के भी आँख में आंसू आ गए......

माँ डैड के कान में- थैंक्स.....

डैड बस मुस्कुरा दिए..

अंजलि- ok then.....no मोरे इमोशनल स्टफ्फ्स now..pichle बार की हमारी पार्टी अधूरी रह गयी थी और उसके साथ साथ हमारी एक फरमाइश भी जो आज पूरी होगी....

नानाजी- क्या फरमाइश बेटी...

पर अंजलि कुछ बोली नहीं और मेरी तरफ देखने lagi.maine आँखों से हाँ कह दिया.....

रोनित- सबको पता चल jaayega...chaliye हम सब नीचे बैठते हैं.

सब नीचे उतर gaye.stage में अँधेरा कर दिया गे और कुछ देर बाद एक फ़्लैश लाइट स्टेज के बीच में गिरी जहाँ मई गिटार लिए स्टूल पर बैठा हुआ tha....jisse देखकर सबने हूटिंग स्टार्ट कर दी....

मई- ये गाना मेरे दिल के बोहोत करीब है.....

मैंने अपनी आखें बंद की और गाना शुरू किया...

जिसे ज़िन्दगी ढूंढ रही है

क्या ये वह मकाम मेरा है

यहां चैन से बस रुक जाऊं

क्यों दिल ये मुझे कहता है

जज़्बात नए से मिले हैं

जाने क्या असर ये हुआ है

इक आस मिली फिर मुझको

जो क़ुबूल किसी ने किया है

हाँ…

किसी शायर की ग़ज़ल

जो दे रूह को सुकून के पल

कोई मुझको यूँ मिला है

जैसे बंजारे को घर

नए मौसम की सेहर

या सार्ड में दोपहर

कोई मुझको यूँ मिला है

जैसे बंजारे को घर

हम्म…

अचानक मेरे आँखों के सामने एक चेहरा आ गया जिससे देख कर मेरा गाना रूक गया और मेरी आँखें खुल gayi.par फिर मैंने तुरंत कुछ नया म्यूजिक इम्प्रोविसे किया और गाना आगे बढ़ाया...

गाना ख़त्म होते hi पूरा लॉन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज utha.....jab मई नीचे उतरा तोह मीडिया वालों ने मेरी काफी साड़ी क्लिक्स si.kuch लड़कियों ने मेरे साठग सेल्फीज़ भी ली...

नानाजी- क्या बात है putar....mujhe नहीं पता था की मेरा पोता इतना ाचा गाना जाता है...!!!!

अंजलि- nanu,abhi आपने देखा hi क्या hai...dheere धीरे पता चलेगा आपको...

ऐसे hi हस्ते गाते हुए हमारी ये रात गुज़र gayi....ek तरफ जहाँ हम ख़ुशी मन रहे the,wahin दूर कहीं कुछ अनोखी चीज़ हो रही थी.......

सेक्रिला जंगल-

मैडोक्स- ये कौन सी जगह है....

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पर ब्लैक सोल्स जो मैडोक्स को गायब कर यहाँ लाये the,unhone कुछ नहीं बोलै और गायब हो गए....

मैडोक्स- अरे अब ये कहाँ गए.......

उनका यहाँ कोई काम नहीं है......

मैडोक्स को अपने पीछे से आवाज़ aayi,jab उसने पीछे पलटा तोह फिर से वही पुराण दर्द उसकी आँखों में दिखने लगा.....

मैडोक्स- मुझे लगा इस बार भी आप हर बार की तरह सामने नहीं aayenge.sirf आपकी आवाज़ सुनाई देगी मुझे.....

ब्लैक शैडो- ये dard,MERE बेटे के चेहरे पर ाचा नहीं लगता.

मैडोक्स- beta,kaun सा beta.........!!!!aapne मुझे बीटा माना hi kab...maa के, भाई के होते हुए भी मैंने एक अनाथ की ज़िन्दगी जी hai.....maa को chhodiye,aaj तक तोह मैंने aapka,apne पितः का भी चेहरा नहीं dekha...aap मेरे सामने होकर भी हमेशा गायब hi रहते आये ho.mai तोह आपके लिए एक प्रोजेक्ट की तरह hun,jisse आप बस कम्पलीट कर रहे हैं....

ब्लैक शैडो- आज मई तुम्हे तुम्हारे हर सवाल का जवाब dunga.....tumhare हर तकलीफ के पीछे की वजह भी बताऊंगा....

तुम मुझे या किसी भी ब्लैक सोल को इसीलिए नहीं देख सकते क्यूंकि तुम एक इंसान ho.insaano को हमें देखने की इजाज़त नहीं है..

मैडोक्स- पर मई इंसान kaise???mai तोह आपका बीटा हूँ naa...fir!!!!

ब्लैक SHADOW-haan पर तुम्हारी आत्मा इंसानो की है.

मैडोक्स- पर कैसे?

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ब्लैक शैडो- तुम्हारे भाई के जन्म के वक़्त मैंने तुम्हारी माँ को बशोष कर मांसलिकेल ले गया tha...MONSLIKEL हम डेविल्स का घर hai.tumhare भाई का जन्म वहां हुआ hai,isiliye उसकी आत्मा काली hai.wo पूरी तरह से डेविल है......

पर तुम्हारे जन्म दैव्य मुहूर्त के समय हुआ tha,jis वक़्त हर डेविल कमज़ोर होता hai.isiliye मई तुम्हारी माँ को तुम्हारे जन्म के वक़्त मांसलिकेल नहीं ले जा पाया.

और तुम्हारा जन्म यहीं धरती पर hua....isiliye तुम्हारा दिमाग एक डेविल की तरह hai....par तुम्हारा शरीर और तुम्हारी आत्मा अभी भी एक इंसान की hai....isiliye मैंने तुम्हारे पैदा होते hi तुम्हे तुम्हारी माँ से अलग कर दिया और तुम्हारी जगह एक मरे हुए बचे को रख diya.jab तुम्हारी माँ जाएगी तोह उससे लगा की उसका बचा मारा हुआ पैदा हुआ है.....

मैडोक्स- अगर मई इंसान hi hua,toh भी मुझे माँ से अलग करने की क्या ज़रुरत thi.maa भी तोह इंसान है ना.

ब्लैक शैडो- हाँ hai.par तुम आधे इंसान ho....burai करना तुम्हारे खून में hai.tumne अपने ज़िन्दगी का पहला मर्डर 6 साल की उम्र में किया tha.agar तुम अपनी माँ के पास rehte,toh तुम्हारी हरकतों को वो बर्दाश्त नहीं कर पाती और मर jaati.maine जो किया वो तुम दोनों की भलाई के लिए किया.

मैडोक्स- तोह अब......!!!!

ब्लैक शैडो- अब वक़्त आ गया है की तुम हमारी hi तरह पुरे डेविल में बदल jao.....kya तुम तैयार हो....!!!

मैडोक्स- taiyar!!!!!maine तोह बचपन से hi इस दिन का सपना देखा है.....

ब्लैक शैडो- इसमें तुम्हारी जान भी जा सकती hai.devil बनाने के प्रोसेस में तुम्हे इतना दर्द हो सकता है जो शायद तुम बर्दाश्त न कर पाओ...

मैडोक्स- मुझे हर दर्द मंज़ूर hai.aapke जैसा बनाने के लिए मरना भी.....

ब्लैक शैडो ने अपना हाथ ऊपर kiya,zor की बिजली कड़की और मैडोक्स के सामने उसके पितः की hi तरह तीन और डेविल्स खड़े थे.

ब्लैक शैडो- शुरू करें...!!!!

तीनो ने हाँ में सर हिला दिया.

ब्लैक शैडो ने अपना हाथ आगे kiya,sabke बीच ज़मीन पर एक बोहोत बड़ा प्याला आ gaya...chaaron डेविल उस प्याले के पास गए और अपने अपने हाथ पे एक कट लगा diya.....cut लगते hi चारों के हाथों से खून निकलकर उस प्याले में जमा होने लगा.

मैडोक्स को चारों के हाथ तोह दिखे nahi,par हाथों की जगह से जो खून निकल कर उस प्याले में जा रहा tha,wo दिख रहा tha...kuch hi देर में वो प्याला पूरा खून से भर gaya.khoon का रंग काला था.....

ब्लैक शैडो- तुम्हे इस खून को पीना पड़ेगा MADDOX.pura पीना पड़ेगा....

मैडोक्स अपने बाप की बात सुनकर एक पल के लिए शॉकेड हो gaya.par वो आगे बढ़ा और उस प्याले को उठा लिया..

ब्लैक शैडो- एक बात याद rakhna.isse तुम्हे पूरा पीना hai..isse पीते वक़्त तुम्हे अपने गले में बोहोत जलन महसूस hogi,tumhare आँखों से भी खून आने lagega,tumhari अतड़ियां मोरोद खाने lagengi.tumhare शरीर का हर ang,kat जाने जितना दर्द karega.par तुम्हे रूकना नहीं hai.isse पूरा ख़त्म करना है.....

मैडोक्स ने बिना कुछ जवाब दिए एक लम्बी सांस ली और उस प्याले को मुँह से लगा liya...aur वैसा hi हुआ जैसा ब्लैक शैडो ने कहा tha......MADDOX को ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसके गले को अंदर से धीरे धीरे काट रहा hai......koi उसके शरीर में हज़ारो सुइयां चुभो रहा hai.par वो रूका nah,peeta चला गया.

मैडोक्स- aaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh................

प्याला ख़त्म करते hi मैडोक्स ज़मीन पर गिर गया और चीखने laga.uski आंखों से लाल खून निकल रहा था जो अब बदल कर काला हो चूका tha....uske शरीर पर काले धुंए से बने कपडे आ गए the...kuch देर यूँही तड़पने के बाद धीरे धीरे मैडोक्स नार्मल होने लगा....

और जब उसका दर्द गायब हुआ तोह उसने सामने dekha.wo चौंक gaya..kyunki अब उससे चारों डेविल्स दिखने लगे the....teen चेहरों को देखकर तोह वो नार्मल hi था पर चौथे चेहरे को देखकर जोकि उसके डैड की thi,wo थोड़ा शॉकेड हो गया था.

मैडोक्स- क्या आप hi मेरे........

ब्लैक शैडो- हाँ beta.mai hi तुम्हारा डैड हूँ...

मैडोक्स उठा और अपने डैड के गले लग गया.

ब्लैक शैडो- तुम मुझे देखकर चौंके थे ना???

मैडोक्स- आपसे मिलता जुलता चेहरा मैंने देखा है......

ब्लैक शैडो मुस्कुराते हुए- जिससे तुमने देखा hai,wo मई hi हूँ

मैडोक्स- what.....!!!!!!!aap.aap तोह........

ब्लैक शैडो- हाँ बीटा mai.DEVIL'S की दुनिया में मुझे वालेफ़ोर कहते हैं और धरती पर बलबीर सिघ बग्गा.......

आज के लिए इतना HI......

आपका अपना V.J
 
अब तक आपने पढ़ा की बलबीर ुर वालेफ़ोर मैडोक्स को भी डेविल बना देता है..

अब आगे:-

CHAPTER-1:-

(DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट)

अपडेट-43

प्रिन्सी- ु डोंट हैवे तो वोर्री अबाउट ा थिंग मर रियांश AHUJA.....ST जोसफ इस थे बेस्ट स्कूल ऑफ़ मुंबई...

रियांश आहूजा- ी क्नोव तहत sir....infact ी ऍम वैरी प्राउड तहत माय sister's हैवे गोत थे चांस तो स्टडी here.it's जस्ट that,first टाइम मेरी सिस्टर्स घर से इतनी दूर वो भी मुंबई जैसे शहर में रहने आयी hain.mai और मेरा भाई कनाडा में रहते हैं तोह यू क्नोव जो भी मैंने पूछा है इतस जस्ट ा ब्रोठेर्स anxiety.nothing ेल्स....

प्रिन्सी- ी अंडरस्टैंड beta..but ु कैन बे सूरे तहत ुर सिस्टर्स अरे इन गुड hands.....atleast व्हेन थे अरे इन school.school के bahar,aap तोह जानते hi hain,aaj कल के youngster,how थे बेहवे एंड डील विथ situations.so ी कन्नोत से एनीथिंग अबाउट तहत....

रियांश- sir,hamari सिस्टर्स यहाँ स्कूल में जितनी डिस्कॉपलीनेड रहती hai,bahar भी उतनी hi रहती हैं....

प्रिन्सी- ु डोंट हैवे 2 वोर्री फॉर ा थिंग थान.....

रियांश- सर हमने सुना है की आल इंडिया टोपर भी इसी स्कूल में पढता है.....

प्रिन्सी- yes....VIKRAM जयराज SINGH.thats थे नाम ऑफ़ थे बेस्ट स्टूडेंट ऑफ़ आवर country..we अरे प्राउड 2 हैवे ा स्टूडेंट ऑफ़ हिज कैलिबर इन आवर स्कूल....

ये बोलते वक़्त प्रिन्सी बोहोत खुश लग रहे थे....

रियांश- कैन वे मीट him.....hum भी इतने ब्राइट स्टूडेंट से एक बार मिलना चाहते हैं....

प्रिन्सी- ya,ya व्हाई नॉट....! बस 10 मिनट्स में रेसस्स हो jaayega.....us टाइम आप विक्रम से मिल लीजियेगा..........

रियांश- ok.thanks सर.....

आफ्टर 10 मं:-

प्रिन्सी- इन्हे विक्रम जयराज सिंह से मिला देना..

प्रिन्सी ने पेओन को बुलवाकर कहा..

पेओन- जी sir...aayiye.....

रियांश और देवांश ने प्रिन्सी से थैंक्स कहा और पेओन के पीछे पीछे चल दिए...

रास्ते में:-

देवांश- वाणी ने ठीक hi कहा था bhai...ye प्रिन्सी तोह काफी इम्प्रेसेड है उस विक्रम से.....

RIYANSH-hmm...chal एक बार देख लेते hain,aakhir है क्या चीज़ ये विक्रम.........!!!!!!

पेओन- विक्रम beta,ye तुमसे मिलना चाहते हैं.

मई रोनित और अंजलि कैंटीन में जस्ट आये hi the,itne में पेओन अंकल हमारे सामने आ गए....

मैंने पेओन अंकल के पीछे dekha,jahan दो स्मार्ट से बन्दे खड़े the....unhe देखते hi मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी......

पेओन अंकल उन्हें मेरे सामने खड़ा कर चले गए.....

Hi,my नाम इस........

मई- रियांश AHUJA......aur आप हैं देवांश AHUJA.....inke चाचा के ladke...canada में मैनेजमेंट की पढाई कर रहे hain,right!!!!!

रियांश के खुद को इंट्रोडस करने से पहले hi मैंने उससे उसके और उसमे भाई का इंट्रो दे दिया....

दोनों आँखें फाड़े मेरी तरफ देख रहे थे....

दूसरी तरफ मेरे दोनों बुडडीएस नार्मल the,ab उन्हें मेरी ज़्यादातर बातों पर झटका नहीं लगता tha...aadat सी हो गयी थी......

रोनित- ाहूजास!!!!!! अवंतिका के ब्रोठेर्स.!!!!!!

रियांश और देवांश अब भी शॉक में थे. रोनित की बात सुन दोनों ने बस मुंडी हां में हिला दी.....

रोनित- अवंतिका के भाई होने के बावजूद आप इससे मिलने आये hain,iska मतलब आप इससे धमकी देने आये hain,haina.....

मई- क्या बात है रोनित, तू तोह समझदार हो गया भाई.....

अब तक रियांश और देवांश शॉक से बहार आ चुके थे....

रियांश- जितना सुना tha,tum उससे भी ज़्यादा चालाक nikle.....aur तुम्हारे दोस्त की बात से पता चलता है की तुम खुदको कोई टॉप समझते ho.....par इस बार गलत पन्गा ले लिया तुमने......

देवांश- अरे bhai,ye तोह दर gaya...kuch बोल भी नहीं रहा.......

रियांश की बात ख़त्म होने के बाद भी जब मई चुप hi खड़ा रहा तोह देवांश ने कहा.

देवांश की डरने वाली बात सुनकर अंजलि और रोनित है दिए....

मई- देख bhai,jitna बोलना है एक बार में hi बोल ले. तुम दोनों जैसे jha*****on के लिए मई अपने अनमोल डायलॉग्स वास्ते नहीं कर sakta.waise भी तुम्हारी बेहेन के ऊपर मैं अपने दिआलॉगस का काफी स्टॉक वास्ते कर चूका hun....tum दोनों एक काम karo,puri प्लानिंग वाननिंग करके डायरेक्ट हुम्ला hi करो....

अभी मई और कुछ कहता इतने में रेसस्स ओवर का बेल्ल बज गया........

रोनित- lai.,inke चक्कर में साला हम कुछ खा भी नहीं paaye.....niklo बे यहाँ se,dobara जब हमसे भिड़ना ho,apni शकल तभी दिखाना.....

रियांश- बोहोत शौक है मार पीट का kyun.....chalo तुम सब का सारा शौक एक बार में पूरा कर देंगे...

अभी के लिए जाते हैं...

ये बोलकर रियांश ने अपना हाथ आगे कर diya.maine मुस्कुराते हुए उससे हैंड शेक कर liya.par साला यहाँ भी होशियारी दिखने से बाँदा बाज़ नहीं aaya.usne मेरे हाथ को अपने हाथ से कसना शुरू कर diya.uske चेहरे पर मुस्कराहट थी....

पर जैसे hi मेरे चेहरे पर मुस्कराहट aayi,uski गायब हो gayi..smile की जगह उसके चेहरे पर दर्द दिखने lagi.....aur फाइनली

Aaahhhhhhhhhhhhhh............

रियांश के मुँह से दर्द भरी आवाज़ निकल गयी....

देवांश- क्या हुआ bhaiya...eeee छोड़ मेरे भाई का हाथ...

उम्मम्मम्मम्म.....

जैसे hi देवांश आगे बढ़ा मेरी साइड से रोनित आगे badha,aur अगले hi पल देवांश के गर्दन में रोनित का हाथ tha...wo भी नीचे बैठ गया.....

मई- मैंने कहा tha,puri तयारी से aana..chal अब निकल....

मैंने रियांश का और रोनित ने देवांश का गाला छोड़ diya.ek अपने हाथ को झटकते और दूसरा और गर्दन को मसलते हुए निकल gaye....hum भी क्लास की तरफ निकल गए...

वहीँ दूसरी तरफ

मैडोक्स- hmm,toh इसके पास माया दृष्टि भी है.....

बलबीर- मुझे भी ऐसा hi लगता है.......

इस वक़्त दोनों बाप बेटे बलबीर के फार्म हाउस में बैठे अपनी आंतरकिट दृष्टि से विक्रम को देख रहे थे. इनके सामने वहीँ सन चल रहा था जिसमे विक्रम आहूजा ब्रोठेर्स से बात कर रहा था.....

मैडोक्स को डेविल बनाने के बाद बलबीर उससे अपनी बीवी यानी मैडोक्स के माँ के पास ले गया था.

(बलबीर को बीवी का ज़्यादा रोले नहीं है इसीलिए उसका नाम नहीं लिखूंगा)

बलबीर ने एक झूटी कहानी अपनी बीवी को बताई की मैडोक्स के पैदा होने से पहले एक गुरूजी ने बलबीर को बताया था की उनके पुत्र की जान को 21 वर्ष की उम्र तक खतरा rahega.agar वो उससे बचाना चाहते हैं तोह उन्हें अपने बचे को खुदसे 21 वर्षों तक दूर रखना hoga...aur ये बात किसी को भी पता नहीं चलनी chahiye,unki पत्नी को भी नहीं....

बलबीर के बीवी बोहोत भोली thi,uske ऊपर पूजा पाठ में बोहोत विश्वास रखती thi,unhone अपने पति की बात पे तुरंत यकीं कर liya......apni पहली संतान को पहली बार अपने सामने देख कर वो बोहोत इमोशनल हो gayi...kaafi देर तक इनका इमोशनल ड्रामा chala......fir बलबीर और मैडोक्स कुछ काम का बोलकर फार्म हाउस में आ गए.....

मैडोक्स- और कुछ पता है आपको इसके बारे में....!!!!

बलबीर- ग्लेज़र, रिद्दीक.......

बलबीर के नाम पुकारते hi ग्लेज़र और रिद्दीक तुरंत प्रकट हुए........

बलबीर- विक्रम के बारे में कुछ और पता चला!!!!!

दोनों ने अपने अपने हाथ आगे कर diye.dono के हाथों से काली रोशनियां निकली और सामने हवा में एक पिक्चर चलने lagi....is पिक्चर में विक्रम ने अब तक जो भी किया tha,jitni भी लड़ाई की थी वो सब दिखने लगा.

(सिवाए बुक और धवली झील वाले सन के...)

मैडोक्स- adbhudh.........taakat,dimag सब कुछ है इसके पास.......

बलबीर- वह तोह सब ठीक hai,par एक इंसान के पास इतनी ताकत और इतना सशख्त सुरक्षा kawach...in सब का श्रोत क्या hai!!!!!!!....ek बार ये पता चल जाए तोह साड़ी परेशानियां जड़ से ख़त्म हो जाएंगी........

मैडोक्स- dad,bhale hi इंसानो में दैविक या आसुरी ताकत नहीं होती पर उनका दिमाग किसी भी एंजेल या डेविल से ज़्यादा तेज़ चलता है.... हमे इसके श्रोत का पता लगाने की ज़रुरत hi नहीं है....

बलबीर- मतलब!!!!!

मैडोक्स- हमें बस इससे मारना है और इसके ताकत का जो भी श्रोत hoga,wo खुड़बा खुद सामने आ जायेगा.....

बलबीर- वही तोह समस्या hai...iska सुरक्षा कवच अभेद है........

मैडोक्स- क्यूंकि उसका हौसला अभेध hai...kamsekam अब tak........ek बार उसका gurror,uska हौसला टूट jaaye,uska सुरक्षा कवच भी कमज़ोर पद jaayega......tab हम उससे मारेंगे..........

बलबीर- ये सब ितमा आसान नहीं है beta...hum डेविल्स खुलकर इस दुनिया के सामने नहीं आ sakte.aur बिना अपने असली रूप में आये हमारी ताकत अधूरी होती hai.aise में हम उससे नहीं हरा सकते.......

मैडोक्स- आप नहीं आ सकते तोह क्या hua,mai तोह आ सकता hun.bhooliye mat,mat आधे डेविल होने के साथ साथ आधा इंसान भी hun.mujhpe आपके नियम लागू नहीं होते....

बलबीर- पर तुम्हारा भी उसके सामने यूँ अचानक जाना ठीक नहीं.

MADDOX-shatranj की बाज़ी सीधी नहीं खेली जाती dad....hai तोह वो एक इंसान hi,aur हर इंसान की तरह उसकी भी कमज़ोरी hai......uski फॅमिली और इसके वो दो dost..........hum उन्हें todenge,toh वो भी अपने आप टूट jaayega.............par सबसे पहले मई एक बार उससे मिलना चाहता हूँ.....

बलबीर- उसके स्कूल चले जाओ....

मैडोक्स- उसमे कैसा maza.....aur वहां जाकर क्या कहूंगा उससे mai......aise नहीं मिल सकता usse....ek आईडिया hai...suniye..........

वहीँ दूसरी तरफ:-

वाणी- तोह कैसा रहा....

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??मिल लिए उससे...

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?

शाम का वक़्त hai.....RIYANSH और देवांश अपने रूम में बैठे किसी टॉपिक पर बात कर रहे थे इतने में वाणी आ गयी......

देवांश- हाँ मिल liye.......aur जितना तूने बताया था उससे ज़्यादा घमंडी है साला...

वाणी- वही तोह तोडना है भैया....

रियांश- वो तोह तोड़ hi denge.aur वो भी आज hi.......

वाणी- आज hi......sach.........

रियांश- और नहीं तोह kya.matter है hi कितना बड़ा जो हमे रुकना पड़े या इंतज़ार करना pade.......aaj hi साले का गेम ओवर कर देते हैं....

वाणी- जो भी karna,soch समझ कर करना bhaiya.....bande में दिमाग बोहोत है....

रियांश- पर अकड़ तोह दिमाग से भी ज़्यादा hai....aur यही अकड़ आज उससे मरवाएगा....

रियांश ने अपना फ़ोन निकला और एक कॉल लगाया....

मई रोनित और अंजलि बैठ कर ग्रुप स्टडी कर रहे the.itne में मेरा फ़ोन baja.ye एक अननोन नंबर था......

मई- hello.......

आवाज़- पहली मिलकत में हमारे बारे में बता दिया था तूने ,अब आवाज़ सुनकर अंदाज़ा लगा की कौन बोल रहा है.....

मई- देख भाई रियांश AHUJA,agar फिर से कोई सदा सा डीएलओगे चिपकाने के लिए तूने कॉल किया है तोह यार अभी मेरा मूड नहीं है......

इधर मेरे मुँह से रियांश नाम सुनकर अंजलि और रोनित भी सीधे बैठ गए the.maine फ़ोन स्पीकर पे रख दिया....

रियांश- वाह क्या बात hai......pehchaan liya.aur फ़िक्र मत kar,koi डीएलओगे बोलने के लिए nahi,teri स्कूल की बात का जवाब देने के लिए hi कॉल किया hai.....toh आज शाम मिलें कहीं.......

मई- अड्रेस बता दे bhai,pohonch जाएयेंगे......

रियांश- अरे waah,ye हुई न baat....tere स्कूल के पीछे hi एक फुटबॉल ग्राउंड hai,wahan 6 बजे aaja.....aur haan,agar नहीं भी आया naa,toh भी मई बुरा नहीं मानूंगा.......

मई- चल ठीक hai,waise भी काफी दिनों से फुटबॉल नहीं kheli.......aaj खेल लेंगे......

मैंने कॉल काट दिया...

रोनित- ये साले AHUJA'S सुधरते hi नहीं....

मई- इस बार आहूजा नहीं है अरोरा है.....

अब्बे ये साले सब एक hi थाली के छत्ते बट्टे hain......aaj इन दो भाइयों का भी फुल & फाइनल कर dunga.....aur sun,aaj तू कुछ नहीं karega...jo करना है वो मई और अंजलि करेंगे..

अंजलि- haan,maza aayega.jabse ये ताकत मिली hai,kahin न कहीं इससे आज़माने का मन करता hi रहता है........

मई- ठीक hai..tum लोग उन्हें हैंडल karna,mai तोह बस फुटबॉल खेलूंगा.......

रियांश फ़ोन रखने के बाद:-

रियांश- देखा बोलै था naa.ghamand अकाल को ख़त्म कर देती hai...maan गया साला आने के liye....aaj साले के हाथ पेअर तोड़ देंगे.....

देवांश- पर bhai,hume भी तैयार रहना padega..kahin साले ने फील्डिंग सेट कर के राखी होगी तोह.....

वाणी- नहीं karega...usse पाने आप पर कुछ ज़्यादा hi भरोसा hai...apne आप को ओने मन आर्मी समझता है...

देवांश- और उसके वो दोस्त!!!!!

वाणी- अरे भाई उससे तोह मेरे दोस्त ने hi अकेला पीट दिया tha....jo भी है वो विक्रम hi है.......

विक्रमं....!!!!!!! तुम लोग अभी भी उसके बारे में बात कर रहे हो...

VAANI,RIYANSH और देवांश से सामने dekha,jahan अवंतिका और शनाया खड़े थे..

तीनो उन्हें देखकर हड़बड़ा गए....

रियांश- अरे नहीं gudiya,wo हम......

अवंतिका- मैंने कल आप लोगों को मन किया tha,fir भी आप log!!!!!mai दादू को सब बता रही hun.wahi आप लोगों से बात करेंगे........

दादाजी का नाम सुनकर रियांश और देवांश दर गए.......

वाणी- अरे babes,tu भी naa,bina पूरी बात सुने कुछ भी बोलने लगती hai....ye dekh,aaj विक्रम की फोटो पेपर में चप्पी hai...mai वही भैया को दिखा रही थी...

अवंतिका ने नेवसपपेर देखा जिसमे विक्रम के घर में कल रात हुई पार्टी की फोटोज छपी थी........

रियांश- हाँ गुड़िया हम इसी के बारे में बात कर रहे the...itne में तू आ gayi.....acha chal,mujhe कुछ काम hai,mai आता hun..DEBU...tu साथ चल.....

देवांश- जी भैया...

रियांश और देवांश निकल गए.....

और तीनो बेहेने अपने बातों में मस्त हो गए..........

बैक तो हीरो:-

मई- लीजिये sir,tumne पुकारा और हम चले आये........

रोनित- जान हथेली पर ले आये रे............

अंजलि- तुमने पुकारा और हम चले आये..................

रोनित- बड़े खड़ूस हो yaar.itna ाचा ताल diya,kuch ताली वाली तोह बजाओ........

रियांश- बजायेंगे beta,zaroor bajyenge.par ताली नहीं tumhe....waise बड़े बेगैरत हो यार तुम VIKRAM.....maar से बचने के लिए लड़की साथ लाये ho...tumse ऐसी उम्मीद न थी...

मई- अब्बे मई पेट से हूँ क्या जो तू मुझसे उम्मीद लगाए बैठा है......

और सालों तुम जैसे ga****u चरक्टेर्स की वजह से एक सन जो पांच मं में पूरा हो सकता tha,tumhare इन सादे हुए डायलॉग्स की वजह से उससे लिखने के लिए V.J को 30 मं लग जाते हैं......

रोनित- तू कौन से सीन लिख रहा है भाई..

V.J- लिख नहीं रहा hun,mai तोह खुद सीन में hun.....khair तू वो सब chhod,jo करने आये hain,wo करते हैं और निकलते hain,maine इवनिंग स्नैक्स भी नहीं खाये आज..

रियांश- अब्बे तुम लोग पागल हो गए हो kya.ya इतने लोगों को देखकर पहात गयी है इसीलिए उल्टा सीधा बोल रहे ho........waise ज़्यादा बन्दे तोह नहीं ले आया मई.....

रियांश के साथ इस वक़्त करीब 50 बन्दे थे...........

वहीँ पास में hi एक पोल था जिसके पास एक फुटबॉल पड़ा था जिससे शायद कुछ देर पहले यहाँ बच्चे खेल रहे थे जिनको इन्होने दरकार भगा दिया tha........mai चलते हुए उस पोल की तरफ गया और उस फुटबॉल को उठा लिया.....

मई- रोनित ANJALI..........what अरे ु गाइस वेटिंग फॉर.....

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?या तुमने इरादा बदल दिया...!!!!!!!!

देवांश- अब्बे तू बोल kya...aaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

पर सिरजी आगे कुछ बोल नहीं paaye...RONIT सर ने उन्हें उठा कर नीचे पटक diya.....aur जब तक कोई संभालता रोनित और अंजलि ने दो बन्दों की हॉकी छीनकर घूमना शुरू कर diya..dono की तेज़ी काबिले तारीफ़ थी.....20 सेकंड में 20 बन्दे ज़मीन पर पड़े कराह रहे थे......

पर अब बाकी के 30 बन्दे संभल चुके the.....sabhi एक साथ रोनित और अंजलि की तरफ badhe......RONIT ने आगे बढ़ते हुए एक स्लाइड मारी और कुछ बन्दों के बीच में से आगे निकल gaya.par जाते जाते रोनित ने एक एक बन्दे के पेअर को पकड़ कर उठा diya.dono अपने साइड के बन्दों से टकराकर गिर गए...

दूसरी तरफ अंजलि ने सुम्मेरसाल्ट मारते हुए दो बन्दों के मुँह पर लाठ मार di..dono उड़ते हुए पीछे से आ रहे बन्दों से टकरा gaye....par अंजलि इतने में नहीं ruki...ek बन्दे ने अंजलि के ऊपर अपना हाथ ghumaya.ANJALI ने उसका हाथ पकड़ कर घुमा दिया.

कट्ट्ट्ट की आवाज़ के साथ उसकी हड्डी टूट gayi.......uski दर्द नाक आवाज़ हर तरफ गूंज gayi.....par अंजलि ने बिना इस बात पे ध्यान दिए उसका दूसरा हाथ पकड़ा और उसके सहारे उससे गोल घुमा diya.uski लाठ 3,4 बन्दों के मुँह पर padi...wo इतनी ज़ोर से घुमा था की उसके लाठ का इम्पैक्ट बोहोत ज़्यादा tha.padne वालों के दांत शहीद हो गए...

दूसरी तरफ रोनित ने देवांश को पकड़ liya.....ek मुक्का देवांश के पेअर पर pada,jaise hi वो झुका दूसरा मुक्का उसके पीठ par,wo ज़मीन में गिर गया......

यहाँ मई आराम से फुटबॉल खेल रहा tha.itne में मुझे सामने से अपनी तरफ दो बन्दे आते दिखे..

मई- ले दो को संभाल नहीं पा रहे हैं और मुझसे भिड़ने आ रहे हैं....

मैंने फुटबॉल को एक किक maari.football सीधे जाकर एक बन्दे के नाक में लग कर मेरे पास वापस आ gayi......uska नाक फैट gaya.wo ज़मीन पे लेता तड़पने laga.maine एक और किक maari,football तेज़ी से जाकर दूसरे बन्दे के मैं पॉइंट में lagi.......wo खड़े खड़े डांस करने लगा......

मई- दुकान के चक्कर में घर के अंडे फोड़ diye.......abbe जल्दी करो be.......raat भर मारते रहोगे क्या...

अब तक लगभग सारे बन्दे ज़मीन पर गिर चुके the.kuch 5 या 6 बचे थे जिनकी पूरी तरीके से पहात चुकी thi.......jinme से एक हमारे रियांश भाईसाहब भी थे....

चटखह्ह्ह्हह्ह....

अंजलि का एक ज़ोर का छाता रियांश के गाल पर पड़ा.....

मई चलते हुए उनकी तरफ hi आ रहा tha....RIYANSH सीधे मेरे पेअर के पास hi गिरा.....

मई- उठ जाओ सेठ ji......already गिरे हुए ho,aur कितना giroge.....saale,tumhare खानदान की प्रॉब्लम क्या hai,bina पीते किसीको चैन नहीं आता kya....aur भी कोई बचा है तोह बोल दियो उससे bhi....uska अकाउंट भी सेटल कर देंगे.......

अंजलि के एक थप्पड़ से hi रियांश के मुँह का जियोग्राफी बिगड़ गया था....

विक्रमममममम.........

मैंने अपनी राइट में देखा जहाँ AVANTIKA,SHANAYA और वाणी कड़ी थी.....

अवंतिका की आँखें भीगी हुई थी......

रोनित- आईये madam........aap hi की कमी thi...bhaisahab ताकत दिखने आये the,ab आप अपनी बुद्धि दिखाइए....

मई- रोनित.........

मैंने अपना सर ना में हिला diya.RONIT चुप हो गया....

अवंतिका ने मेरे आगे हाथ जोड़ दिए......

वाणी- AVNI,tu ये क्या......

अवंतिका- chuppppp....ekdum chupppp..ye सब तेरी वजह से हुआ hai......maine मन किया था naa,fir भी तूने भैया को bhadkaya......galti सिर्फ हमारी और हमारी फॅमिली की hai.......aur tu.....chiiiiii....

विक्रम मेरे भैया की तरफ से मई माफ़ी मांगती हु.......

मई- ठीक hai...le जाओ अपने भाइयों को..

अवंतिका और शनाया ने रियांश और देवांश को सहारा देकर उठाया और कार में बैठा कर घर चली गयीं......

अंजलि- अब ये क्या tha......!!!!!zarror कुछ नया प्लान कर रही है ये लड़की....

मई- नहीं yaar...aaj पहली बार उसके आंसू जेन्युइन the,sacche the.......khair chalo,kaafi टाइम हो gaya,ghar चलते हैं....

हम घर की तरफ निकल गए....

वहीँ हेवन में:-

सत सकिलिअ- nahi......ye नहीं होना चाहिए tha.iski सजा वालेफ़ोर को मई देकर hi रहूंगी.....

सत सेबेस्टियन- तुम कुछ भी नहीं karogi.....agar तुमने वालेफ़ोर को कुछ भी kiya,toh हमारा और डेविल्स का संधि टूट jaayega....uske बाद ास्मोडियस जो karega,wo तुम अचे से जानती हो....

सत सकिलिअ- तोह क्या हम हाथ पर हाथ धरें बैठे rahen...aapko पता है ना वो अभी तैयार नहीं hai...kahin उससे kuch.....nahi नहीं हमें कुछ करना hi पड़ेगा...

सत सेबेस्टियन - इस मामले में कुछ करने के लिए हमे सामने आना होगा और वो हो नहीं sakta...ye युद्ध विक्रम को अपने दिमाग के बल पर जितनी होगी जितनी बरबल उसकी ीचा शक्ति hogi,utni hi प्रबल उसके मंत्र काम karenge...maine पहले hi कहा था की ये कहानी खुद hi खुद को लिख रही hai....VIKRAM की नियति अब खुद उसके हाथ में है.....

यह कह कर सत सेबेस्टियन चुप तोह हो gaye,par उनके चेहरे पर टेंशन साफ़ देखि जा सकती thi....jo होने वाला tha,uska आभास उन्हें हो चूका था.....

मीनाक्षी मेन्शन:-

डैड- इतस ok beta.par तुम्हारे डैड नहीं आये!!!!!!

अननोन- एक्चुअली उन्हें ुरगेंटली दिल्ली जाना pada.aur वो सीधे संडे को hi aayenge.isiliye उन्होंने मुझे कहा की मई खुद आकर आपको और आपकी फॅमिली को इन्विते करूँ......

डैड- ok.......thats रियली स्वीट ऑफ़ him......lo मेरा बीटा भी आ gaya......beta एक सेकंड इधर आना...

मई- यस डैड........

डैड- बीटा इनसे मिलो......

अननोन- sir,mai अपना इंट्रो खुद देता हूँ.......

अननोन- hi...

मई- hi...i ऍम विक्रम...

UNKNOWN-national टोपर को कौन नहीं jaanta.kaafi सुना है तुम्हारे बारे me.waise मई यहाँ तुम्हे और तुम्हारी पूरी फॅमिली को अपनी पार्टी में इन्विते करने आया हूँ....

मई- ok..par अपना नाम तोह बताओ...

अननोन- ओह sorry.my नाम इस मैडोक्स..........

आज के लिए इतना HI

आपका अपना V..J...
 
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम & फ्रंज AHUJA'S बरोथेर को सबक सिखाते हैं वहीँ जब विक्रम घर पहुँचता है तोह मैडोक्स उससे अपने पार्टी में आने के लिए इन्विते करता है......

अब आगे:-

CHAPTER-1:-

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )

मेगा अपडेट-44

1सत पर्सन- सत SEBASTIAN........mujhe तोह अपनी आँखों पर विश्वास hi नहीं हो रहा.....

वो बाँदा अपने घुटनो के बल झुक गया और उसके साथ साथ जितने भी लोग थे वो भी......

सत सेबेस्टियन- उठ जाइये ******.......

वो बाँदा खड़ा हो गया पर उसका सर अब भी झुका हुआ था.....

1सत पर्सन- क्या मई अपनी खुशकिस्मती की वजह जान सकता हूँ...... जो आज आपने मुझे दर्शन दिए.......

सत सेबेस्टियन- मई ******** से भेट करना चाहता हूँ......

उस बन्दे ने अपने एक आदमी से ****** को तुरंत उनके सामने उपस्थित होने के लिए कहा...

वो आदमी गया और जब वो वापस आया तोह उसके साथ वो थे जिनसे सत सेबेस्टियन भेट करना चाहते थे......

जिन्हे बुलाया गया tha,wo भी अपने सामने सत सेबेस्टियन को देखकर बोहोत ज़्यादा आश्चर्यचकित थे....

सत सेबेस्टियन- क्या मई एकांत में आपसे बात कर सकता हूँ.....

1सत पर्सन- हमसे निवेदन करके हमे पाप का भागी मत बनाइये..

वो बाँदा सबको लेकर बहार चला गया.....

सत सेबेस्टियन- मुझे आपकी मदद की आवश्यकता है.....

सत ने सीधे सपाट तरीके से अपनी बात सामने वाले से कह दी पर इस बात को सुनकर सामने वाला और सुरप्रीसेड हो gaya....aur होता भी क्यों naa...GOD'S मैसेंजर को उसकी मदद की ज़रुरत hai,ye कोई छोटी बात तोह थी nahi.....par ये बात भी उतनी hi सच थी की सत. मज़ाक तोह करते नहीं थे.....

2ंद पर्सन- ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी की मई आपके किसी काम आ सकूँ...

सत सेबेस्टियन- पर उससे पहले आपको ये वादा करना होगा की जो भी सहायता मई आपसे maangunga,aap उस विषय में बिना कोई प्रश्न पूछे मेरी मदद करेंगी....

2ंद पर्सन- GOD'S मैसेंजर से कैसे कोई सवाल पूछा जा सकता hai!!!!!.....fir bhi,aap जैसा चाहते hain,waisa hi होगा.....

फिर सत सेबेस्टियन उन्हें अपने आने का रीज़न बताते हैं और ये भी की उन्हें सामने वाले से कैसी मदद चाहिए जिससे सुनने के बाद सामने खड़े शक्श की आँखें बड़ी हो जाती है....

2ंद पर्सन- आपने मुझे इस काम के लायक samjha,isse बड़ी बात मेरे लिए कुछ भी नहीं हो sakti......aapne जैसा कहा वैसा हो जाएगा...

सत सेबेस्टियन सामने वाले को आशीर्वाद देकर गायब हो जाते हैं....

वहीँ दूसरी तरफ:-

रियांश- प्लीज gudiya,maaf कर दे naa.kab तक यूँही नाराज़ rahegi......hum दोनों कल से तुझसे माफ़ी मांग रहे हैं.

देवांश- और गलती तोह हमारी है naa,tu खुद को क्यों पुनीश कर रही hai......!!!!!!kal से तूने एक निवाला नहीं khaaya....jo सजा देनी है हमे de,yun भूके रहकर खुदको तोह मत तड़पा.....!!!!

अवंतिका- क्यूंकि मुझे पता है की मेरे भूके रहने से बड़ी सजा आप दोनों के लिए नहीं हो sakti....aur आपको मेरी फ़िक्र hi क्यों hai,kya hoga,kamzor पद जाउंगी या ज़्यादा से ज़्यादा मर.......

रियांश- gudiiyaaaaaaa........kyun दिल दुखने वाली बात करती hai......bas एक बार माफ़ कर दे ना.....

अवंतिका- किस बात के लिए bhaiya....aap माफ़ी इसीलिए नहीं मांग रहे क्यूंकि आपने गलत किया tha,aap इसीलिए माफ़ी मांग रहे हैं क्यूंकि मैंने आपको गलत करते हुए देख लिया था.......

क्या सोच कर गए थे विक्रम से ladhne.....!!!jaayenge,aur उससे मार कर आ jayenge....maine आपसे कहा था naa,ki उससे न टकराने में hi आपकी भलाई है.......

और एक बात bataiye,kis बात का बदला लेने गए थे आप usse.....VAANI,kya कहा तहा तूने इन दोनों ko....ki उसने हमपे हाथ uthaya...haan uthaya,toh क्या गलत kiya.usne हमारे साथ वही किया जो हम डेसेर्वे करते हैं.....

और क्या बोलती रहती है tu...bohot घमंड है उससे अपने आप pe...babes उससे घमंड नहीं ऐटिटूड कहते hai...ghamand वो है जो हम दिखा रहे the.jo कल हमारे दोनों भैया दिखने गए थे.....

रियांश- gudiya,kal जब तूने उसके सामने हमारे लिए हाथ jode,hum तब hi समझ गए थे की हमसे बोहोत बड़ी गलती हो गयी hai....par हम माफ़ी मांग रहे है naa.please माफ़ karde..aainda से ऐसा नहीं होगा..

देवांश- प्लीज न गुड़िया.......

अवंतिका- ठीक hai.....par अब मई कभी भी ये झगड़ा वाग्दा नहीं देखना chahti.khaas कर उससे......

दोनों- दोने.....

वाणी- मुझे भी माफ़ कर दे babes,please!!!!

अवंतिका- kyun,tu कोई अलग है kya...jab इन्हे कर दिया तोह तुझे भी कर दिया ना....

वाणी ने अवंतिका को हुग कर लिया...

वाणी- चलो सब नार्मल हो gaya,kyun न इसी ख़ुशी में एक पार्टी हो जाए.....

शनाया- bas,ho गयी ये शुरू.......

वाणी- अरे वो बात नहीं है yaar.dekh,bhaiya लोग कल वापस कनाडा जा रहे hain.toh मैंने सोचा की क्यों ना उससे पहले एक पार्टी हो जाए...

अवंतिका- bhaiya,aap लोग जा रहे ho,aur वो भी kal...kyun?

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देवांश- gudiya,hum तोह आज hi जाने वाले the.par तुझे उदास छोड़कर कैसे जा सकते the....isiliye आज रूक गए...

रियांश- हाँ gudiya..wo क्या है ना की हमारे फाइनल एक्साम्स पास आ रहे hain......toh ज़्यादा दिन तक लीव नहीं ले सकते.....

अवंतिका- स्टडीज की बात hai,isiliye छोड़ रही hun.....par नेक्स्ट टाइम इतनी जल्दी नहीं जाने दूंगी...

रियांश- वो तोह पॉसिबल नहीं है गुड़िया!!!!

अवंतिका- क्यों!!!!!

रियांश- वो इसीलिए क्यूंकि इसके बाद हम वापस जाएंगे hi nahi...ye हमारे लास्ट सेमेस्टर्स है naa...bas एक्साम्स तक की बात hai..fir तोह हम यहीं रहकर डैड का बिज़नेस संभालेंगे....

अवंतिका- sach....wow,tab तोह मज़ा आएगा......

वाणी- उस मज़े को उसी वक़्त एन्जॉय कर lenge......filhal अभी की बात करें....!!!!

अवंतिका- व्हाई not....toh बताओ fir,kahan चलना है?

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शनाया- बोहोत दिन हुए स्लूब्बिंग नहीं ki...wahin चलते हैं......

वाणी- no babes.....plan तोह आलरेडी फिक्स हो चूका है......

शनाया- कैसा plan???aur कब फिक्स हुआ???

वाणी ने एक कार्ड उठाकर सबके सामने रख दिया.....

देवांश- ये तोह कोई इन्विते लगता hai...kiske यहाँ का है!!!!

वाणी- डैड के फर्न hai,unke यहाँ से आया है.....

शनाया- lai,fir तोह पक्का कोई ओल्ड बोरिंग बिज़नेस पार्टी होगी....

वाणी- नहीं yaar,theme का नाम तोह dekh.......DEVIL'S FIRE....aur ये dekh,kya लिखा hai...mumbai के बेस्ट D.J को बुलाया hai....full ों स्लूब्बिंग वाला सन होगा..

शनाया- वाओ yaar......ye तोह हमारी अब तक की सबसे हप्पेनिंग पार्टी होगी......

वाणी- और पता hai,ye पार्टी डैड के जो फर्न है naa,unka बीटा होस्ट कर रहा hai..ye पार्टी उसीने थ्रो की है....

अवंतिका- होस्ट का नाम तोह होगा hi इन्विते में.....

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वाणी- haina,.........MADDOX.........

बैक 2 हीरो:-

रोनित- काफी टाइम से देख रहा hun,tu किस सोच में गुम है?

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अंजलि- हाँ yaar,agar तेरा मूड नहीं hai,toh पार्टी में जाना कैंसिल करते hain!!!!!waise भी हम कौन सा उससे पर्सनली जानते हैं......

मई- नहीं yaar.usne खुद घर आकर इन्विते किया tha,nahi जाएंगे तोह उससे बुरा lagega.....aur मई तोह बस इस साल जो हमारे लगातार झगडे हो रहे hain,ussi के बारे में सोच रहा hun...(jhooth)......

रोनित- हाँ yaar...sahi bola,ye साले AHUJA'S जब से आये hain,tabhi से हमारे साथ इतने सारे काण्ड होना शुरू हुए hain...warna हम कितने मस्त थे अपने लाइफ में......

अंजलि- haan,par सिर्फ मई और V.J...tu ये

शांत वाली सातगोरी में नहीं आटा hai...tera तोह हर 2,4 दिन में कोई न कोई लफड़ा होते hi रहता है.

अब हमारी अंजलि मैडम ने आग को हवा दे दी thi.....aag तोह तोह भड़कना hi tha...dono की बेहेस शुरू हो गयी और मई वापस कल मैडोक्स से हुई मुलाकात के बारे में सोचने लग गया.....

YESTERDAY'S कन्वर्सेशन फ्लैशबैक:-

मई- सॉरी yaar,par ये नाम बोलते वक़्त कुछ ावक्वार्ड सा नहीं lagta.......MADDOX सिंह बग्गा..... मैंने अपनी लाइफ में फर्स्ट टाइम ऐसा कोई नाम का मिक्सचर सुना है...

मैडोक्स- अभी तुम्हारी उम्र hi क्या हुई है VIKRAM....ye दुनिया जितनी अजीब दिखती hai,usse कई गुना ज़्यादा अजीब है....

मैडोक्स ने मेरे आँखों में झांकते हुए ये बात कही......

मई- haan,aur इसका एक और एक्साम्प्ले आपकी लाइफ स्टोरी भी है..... ी mean,aapki लाइफ तोह मुझे किसी फिल्म की स्क्रिप्ट की तरह लगती है....

मैडोक्स ने मुझे अपने बारे में वही बताया जो बलबीर ने उसकी बीवी को बताया था.....

मैडोक्स- वो स्टोरी नहीं हक़ीक़त है brother...khair,wo सब chhodo,tum कल अपने फॅमिली और फर्न्स के साथ पार्टी में आ रहे हो...

डैड- beta,kal शाम को मेरी एक मीटिंग hai....office से आते आते hi मुझे काफी लेट हो jayega....aur मीनू मेरे बिना जाएगी nahi....toh हम तोह नहीं आ पाएंगे पर haan,VICKY अपने फ्रंज के साथ ज़रूर आएगा......

मैडोक्स- कोई बात नहीं uncle....toh VICKY...kal तुम्हे अपने फ्रंज के साथ पक्का आना hai,ok!!!!!

मई- अब डैड ने हाँ कह दी hai,toh मई कैसे मन कर सकता hun...mai और मेरे फ्रंज आ जाएंगे.....

हम दोनों ने हाथ milaya.MADDOX चला गया और छोड़ गया मुझे टेंशन में....

मेरे टेंशन में होने की दो वजह थी.....

1सत- मैडोक्स ने अपने लाइफ के बारे में जो बताया tha,wo मुहे सरासर एक झूठ laga,asliyat जानने के लिए मैंने जब उसकी आँखों में झाँका तोह मुझे अपना पहला झटका लगा.....

क्यूंकि मई उसके दिमाग और सोच को पढ़ नहीं पा रहा tha.aur जब मई ये कर रहा था तोह मैडोक्स ने मुझे एक ईविल स्माइल दी जैसे की वो जानता हो की मई क्या करने की कोशिश कर रहा हूँ.....

2ंद- उससे हाथ मिलते hi मुझे उसके अंदर से एक नेगेटिव एनर्जी फील हुई जो बोहोत ज़्यादा पॉवरफुल थी और मई उसके सोर्स का भी पता नहीं लगा पा रहा tha......aur ये कोई छोटी बात तोह थी nahi.......mai इनसब के बारे में सोचते हुए अपने रूम की तरफ चल पड़ा...

फ्लैशबैक एंड्स:-

रोनित- lai,ye तोह फिर अपनी सोच में खो gaya.wapas आजा bhai,hum पोहोंच गए.....

रोनित के हिलने से मई होश में आया...

मई- haa,kya हुआ?

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रोनित- अब्बे तेरा दिमाग खिसक गया है क्या aaj!!!!ek बार में तुझे कुछ सुनाई भी नहीं दे raha...maine कहा हम पोहोंच गए....

मई- haan,toh नीचे उतर naa.ki तेरे नाचने के लिए यहीं दज बुलवा दूँ.....

हम तीनो कार से उतर कर पार्टी हॉल की तरफ चल दिए...

अंजलि- ववव yaar,scene तोह एकदम सही है.....

पार्टी हॉल में पहुँचते hi वहां का माहौल देखकर अंजलि के मुँह से ये अपने आप निकल gaya....waise माहौल था भी काफी हप्पेनिंग.......

अछि खासी क्राउड thi,aur सबके सब यंग the....mumbai का बेस्ट दज अपना टैलेंट दिखा रहा tha,saare बन्दे उसकी बीट्स पे ग्रूव कर रहे the....charon तरफ ड्रिंक्स सर्वे हो रहे the.red और ब्लू कलर की लाइट्स से पूरा हॉल जगमगा रहा tha...ki अचानक हम तीनो शॉकेड हो गए.....

हम तीनो अभी आगे बढे hi थे की एक फ़्लैश लाइट मुझपर आकर पड़ी......

अभी हममे से कोई कुछ samajhta,usse पहले एक आवाज़ आयी.....

आवाज़- बॉयज & girlzzz....its 9.45 पं & V.J जस्ट स्टेप्पेड इन थे रूम........

सब हमारी तरफ देखकर हूटिंग करने lage..humne आवाज़ की तरफ देखा तोह हमे D.J के साथ hi मैडोक्स खड़ा हुआ dikha.....jo हमारी तरफ वेव करता हुआ आ रहा था....

रोनित- क्या बात hai...bande ने तेरे लिए ख़ास अनाउंसमेंट करवाई......

अभी मई कुछ कहता उससे पहले hi मैडोक्स हमारे पास आ चूका था...

अंजलि- ज़्यादा मीठा ाचा नहीं होता...

मैडोक्स- हे guyzz..thanks 4 किंग यार.......

मई- थैंक्स 4 इंविटिंग us..well,inse milo,they अरे माय बेस्ट frnzzzzz...he इस रोनित & शी इस अंजलि........

मैडोक्स- तुम्हारे बेस्ट फ्रंज मतलब मेरे बेस्ट फ़रंज़जज़ पर सिर्फ तुम RONIT...inse मई दोस्ती नहीं कर सकता...

मैडोक्स ने अंजलि की तरफ पॉइंट करते हुए कहा......

मई- क्यों bhai,inse क्या खता हो गयी...!!!

अंजलि भी अपने चेहरे पर सवाल लिए मैडोक्स की तरफ देख रही थी......

मैडोक्स- इतनी खूबसूरत लड़की से भी भला कोई सिर्फ दोस्ती करता hai.....jin नज़रों को इनसे इश्क़ न hua,wo नज़ारे किस काम की.......

अंजलि मैडोक्स की बातों से ब्लश करने लगी पर दो लोग थे जिनकी जल रही थी.....

मई- इश्क़ नज़रों की जागीर नहीं,

नज़रें सिर्फ भड़कना जानती हैं...

मोहोब्बत दिल की सल्तनत है...

क्यूंकि बस दिल hi है,

जो धड़कना जानती है......

मैडोक्स- वाह क्या बात है yaar.ab ये मेरे लिए एक सरप्राइज hai..india का सबसे टैलेंटेड बाँदा सिर्फ दिमाग की hi nahi,dil की बातें भी समझता hai,ye मैंने कभी नहीं सोचा था...

मैंने कुछ कहा नहीं बस मुस्कुरा दिया...

मैडोक्स- अगर तुम दोनों की इजाज़त हो तोह क्या मई इनके साथ एक डांस कर सकता हूँ...

मई- हमारी इजाज़त kyun!!!!jinke साथ तुम्हे डांस करना hai,unse पूछ लो......

मैडोक्स- ma'am,mai ी हैवे थे प्लेअसुरे तो डांस विथ u....ye बोलकर मैडोक्स ने अपना हाथ अंजलि की तरफ बढ़ा दिया....

अंजलि ने भी मुस्कुराते हुए मैडोक्स का हाथ थाम liya......aur दोनों हमसे कुछ दूर hi फ्लोर पर चले गए...

मैडोक्स- dj..change थे मूड.....

मैडोक्स के बोलते hi दज ने एक रोमांटिक नंबर प्ले कर diya.MADDOX और अंजलि एक दूसरे को पकड़ डांस करने लगे.....

रोनित- saala,isne हमे बुलाया था की सिर्फ अंजलि ko..pehli बार मिला hai,aur चिपक चिपक के नाच रहा है....

मई- ऐसा hi होता है dost.....sahi वक़्त पर सही बात नहीं बोली जाए तोह अक्सर बातें बिगड़ जाती है......

रोनित- अब्बे कौन सी सही baat...mai तोह......

मैंने रोनित को घर के dekha,wo सकपका कर चुप हो गया....

वहीँ हमसे कुछ hi दूर कोई और भी था जिससे मैडोक्स और अंजलि का डांस करना ाचा नहीं लग रहा था...

देख toh,kamini कितना चिपक चिपक कर डांस कर रही है मैडोक्स से.....

तुझे क्यों जलन हो रही है वाणी......

जी हाँ doston,ye जलने वाली और कोई नहीं वाणी thi..jo इसवक्त AVANTIKA,SHANAYA रियांश और देवांश के साथ हमारी लेफ्ट साइड में हमसे कुछ hi दूर कड़ी थी....

वाणी- जले माय foot....mai तोह ये कह रही हूँ की बाँदा कितना हॉट है और बंदी बंदी न होक बंदरिया दिख रही है.....

रियांश- कहाँ से यार!!! लड़की भी तोह कितनी हॉट है......

अवंतिका- ये गलत बात है VAANI...har किसी की अपनी परफेरेंस होती hai..ab मैडोक्स को तू नहीं वो पसंद आयी इसमें उसकी क्या गलती.....!!!!!!!

मई- नॉट बाद......

अवंतिका ने पलट कर देखा तोह मई उससे क्रॉस करके आगे बढ़ रहा था...

हुआ यूँ की मेरी नज़र घूमते घूमते अपनी लेफ्ट साइड पर गयी जहाँ अवंतिका एंड फॅमिली कड़ी थी और इस वक़्त उन सब की नज़र अंजलि पर thi.maine अपने तेज़ सुनाने की शक्ति जागृत कर ली और उनकी बात सुनते हुए उनकी तरफ बढ़ gaya..AVANTIKA की बात सुन मेरे मुँह से नॉट बाद निकल गया...

अवंतिका कुछ देर तक मेरी तरफ देखती रही फिर अपने फॅमिली के साथ बातों में मशूल हो गयी.....

मैडोक्स- so,u गुइज़ अरे एंजोयिंग ना....

हमे अभी काउच पर बैठे एक मं भी नहीं हुआ था की मैडोक्स और अंजलि हमारे पास आ गए.....

मई- या bro,we अरे गुड...

मैडोक्स- पर आपके दोस्त को देख कर तोह ऐसा नहीं lagta...kya हुआ bhai,kuch प्रॉब्लम हो गयी क्या!!!!

मैडोक्स ने रोनित को पूछा पर मुझे पता था की सिरजी भरे बैठे hain,kahin फैट न जाएँ इसीलिए मैंने तुरंत जवाब दिया...

मई- नहीं yaar,ye ऐसा hi hai...wo क्या है naa,hum तीनो नोर्मल्ली ऐसे पार्टीज में आते नहीं hain,ek दूसरे के साथ hi हमारा ज़्यादा वक़्त बीतता hai...isiliye ये थोड़ा उनकंफर्टबले hai.....aur कुछ नहीं...

मैडोक्स- पर जब मई अंजलि से शादी करके उससे ले जाऊंगा तब ये कैसे करेगा!!!!

मैडोक्स की बात सुनकर अंजलि और रोनित शॉकेड हो गए....

मई- इसकी टेंशन नहीं hai..ANJALI जिससे भी शादी karegi,usse इस बात का ख्याल रखना होगा की वो हम तीनो के बीच न aaye...warna उसका पत्ता cut....kyun अंजू.....

अंजलि- बिलकुल........

मैडोक्स- रिलैक्स guys,tum सब तोह सीरियस हो gaye..mai तोह मज़ाक कर रहा था....

रोनित- पता है yaar.ANJALI से शादी करने की बात मज़ाक में hi की जा सकती hai,seriously इस बात को बोलने का हक़ हमने किसीको दिया नहीं है....

मैडोक्स- मानना पड़ेगा... क्या दोस्ती है.....!!! एक काम करते hain,ander लाउन्ज में बैठते है.....

मई- अरे यहाँ क्या प्रोपलें hai!!!!yahin बैठते है ना...

मैडोक्स- अरे ये तोह कॉमन स्पॉट hai.aap ख़ास hai.please यार चलो naa,i इंसिस्ट....

हम तीनो भी मैडोक्स के पीछे पीछे अंदर लाउन्ज एरिया में चल दिए जहाँ पहुंचकर हम एक बार और शॉकेड हो gaye......kyunki हमारे सामने अवंतिका & फॅमिली बैठी थी....

मैडोक्स- इनसे मिलो frnzz,ye भी मेरे ख़ास मेहमानो में से एक हैं.....

मैडोक्स ने हमारा एक दूसरे से इंट्रो karaya,hum भी उसके सामने कोई सन नहीं करना चाहते थे इसीलिए नोर्मल्ली एक दूसरे से मिले.....

कुछ देर जो हम वहां बैठे the,us दौरान मैडोक्स ने अंजलि के साथ बोहोत फ़्लर्ट kiya......ANJALI भी इससे एक कासुअल बात समझ कर उसका साथ देती rahi.is बीच मैंने नोट किया की अवंतिका की नज़र रह रह कर बार बार मेरी तरफ जा रही थी....

अवंतिका (मन में )- ये जब भी मेरे सामने रहता है (मई) मुझे इतनी बेचैनी क्यों होती hai......kya सोच रहा होगा मेरे बारे me.....!!!!par मई क्या karun,mai अपने आप को इससे देखने से रोक hi नहीं पा रही hun.....aisa लग रहा है जैसे हम दोनों के बीच कोई ब्रिज सी है जो मुझे इससे जोड़ रही hai.......kya karunnn.........!!!!!!ghar hi चली जाती हूँ.......

अवंतिका- मैडोक्स- थैंक्स 4 इंविटिंग us..par अब हमें चलना chaiye.kaafi लेट हो गया hai..kal स्कूल के लिए अर्ली मॉर्निंग उठना भी है....

वाणी तोह वैसे भी मैडोक्स और अंजलि को साथ देख जाली बैठी thi...usne भी अवंतिका का साथ दिया......

वाणी- हाँ yaar.hum आलरेडी लेट hain..hume अब चलना चाहिए.....

मैडोक्स- बात स्टडी की hai,isiliye रोकूंगा nahi......par नेक्स्ट टाइम भी अगर ,मैंने bulaya,toh आना पड़ेगा.....

वाणी- वे वोउल्ड लव तू....

रोनित- हमें भी चलना chahiye...humara भी तोह कल स्कूल है....

मैडोक्स- ठीक है तुम jao.ANJALI को मई बाद में छोड़ दूंगा....

मैडोक्स की बात सुनकर रोनित का दिमाग घूम gaya.....par इससे पहले की हमारे सर मैडोक्स पे भड़कते...

मई- है ha..nice जोके......

मैडोक्स- ी ऍम सीरियस yaar.kyun,kya हुआ!!! मुझपे भरोसा नहीं है क्या!!!

मई- बिलकुल भरोसा है brother..sage न sahi,ho तोह तुम भी अंजलि के भाई जैसे hi naa...ab एक भाई के होते बेहेन को कोई प्रॉब्लम हो सकती है क्या!!!!

मेरी बात सुनकर रोनित ज़ोर ज़ोर से हसने लग गया वही मैडोक्स का मुँह उस बचे जैसा हो गया जिसके हाथों से उसकी फव चॉकलेट किसीने चीन ली हो......

हसी सिर्फ रोनित को hi नहीं आयी thi,meri बात पे अंजलि और उसके साथ साथ पूरी आहूजा फॅमिली हसने लग गयी थी..

अवंतिका (मन में )- बातों में इससे कोई नहीं जीत सकता......

मैडोक्स के चेहरे पर एक पल के लिए बे इन्तहा ग़ुस्सा आ गया tha,par उसने तुरंत अपने आप को नार्मल कर लिया.....

पर वो एक पल का ग़ुस्सा मुझे झटका देने के लिए काफी था......

मैडोक्स- नीस जोके सर ji........bhai बनकर hi sahi,kamsekam इनका साथ तोह मिलेगा.....

हम सब हस्ते हुए मैडोक्स से हाथ मिलकर निकलने लगे...

मैडोक्स- जितना हसना है है le,isse मई तुम सब से चीन कर hi रहूँगा...

जब रोनित मैडोक्स से हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ा तोह मैडोक्स ने रोनित की कान में ये kaha...ghussa तोह रोनित को बहुत आया पर वो कोई सन क्रिएट नहीं करना चाहता था इसीलिए चुप चाप आगे निकल गया......

हमारे जाने के बाद:-

बलबीर- मिल लिए usse.ab क्या सोचा है...!!!

पार्टी हॉल के खली होते hi बलबीर मैडोक्स के सामने प्रकट हुआ.....

मैडोक्स- आपने क्या सोचा की मैंने ये पार्टी सिर्फ उससे मिलने के लिए दी thi...mujhe तोह बस कुछ सूरे करना था जो मई कर chuka...ab bas,thida सा intazar,aur फिर विक्रम के दिल को मई ऐसा दर्द दूंगा की वो खुद भी जीना नहीं चाहेगा.....

बलबीर- जो भी karna,soch समझ कर kana....wo बोहोत शातिर hai....agar उससे तुम्हारे प्लान की भनक भी लग गयी तोह बोहोत बुरा hoga...aur तुम्हे तोह पता hi hau,humme से कोई भी इस काम में तुम्हारी मदद नहीं कर सकता...

मैडोक्स- रिलैक्स dad.jab अब तक नहीं पड़ी तोह आगे कैसे padegi....waise उसने कोशिश तोह बोहोत ki,mera दिमाग पढ़ने की पर afsos,padh नहीं paaya.....usse ये नहीं पता की अगर मन की बात जानने की कला होती है तोह मन की बातों को छुपाने की भी कला होती है....

और जब तक वो हमारी अगली चाल को samjhega,hum उससे चोट पहुंचा चुके होंगे...

मैडोक्स और बलबीर ज़ोर ज़ोर से हसने लगे.......

नेक्स्ट डे इन स्कूल:-

मई- बस करो तुम dono......kal रात से देख रहा hun....kutte,billi की तरह लड़ रहे हो dono......aur तू ANJALI,jab भी मई इससे नाराज़ होता tha,toh तू hi मुझे समझती थी naa,ki ये है तोह काम akal.kuch भी बोलता hai..toh आज खुद इस बात को कैसे भूल गयी....

हम इस वक़्त अपने स्कूल की पार्किंग में खड़े the..kal रात मैडोक्स के पार्टी से निकलने के बाद से hi रोनित और अंजलि के बीच तू तू मई मई चालू हो चुकी थी जो अब तक चल रही है.....

अंजलि- अरे कल रात से ये मुँह फुलाए बैठा hai.kuch भी बोलो तोह उल्टा जवाब hi देता है....

रोनित- haan,sahi kaha.mai उलटे जवाब hi देता hun.saare सही जवाब तोह वो मैडोक्स देता hai.....jaa उसी के साथ जाके कौन बनेगा मेरा पति खेल......

अंजलि- देखा V.J...ghuma फिरके फिर वही baat.....arre वो बस मस्ती कर रहा tha.us बात को इतना सीरियसली लेने का क्या मतलब!!!

रोनित- haan,tabhi तोह इतना ज़्यादा दांत दिखा रही थी तू उसके जोक्स me....oh गॉड MADDOX,u अरे सो funny........hamari बातों पे तोह तेरे आंसू निकल जाते hai,kyun????tu एक काम kar,ussi के साथ रहा kar......hamare साथ तेरा टाइम वास्ते हो जाता है.....

अंजलि- ु क्नोव what???u र right.tere साथ हैंग आउट करने से ाचा उसके साथ hi घूमना chahiye.wo कमसेकम तेरी तरह साडू तोह नहीं hai....thanks 4 थे advice...bye...

मई दोनों को समझते रह गया पर दोनों अलग अलग निकल gaye.....claas में भी आज हम साथ नहीं बैठे the.total तीन रौस thi.hum तीनो hi अलग अलग रौस में बैठे the.khair,jaise तैसे सारे क्लासेज ख़त्म hue.......par अब एक नयी प्रॉब्लम थी...

वो ये की दोनों अब साथ घर भी नहीं जाना चाहते थे....

मई- रोनित yaar,saath चलने में क्या प्रॉब्लम hai.baat मत करना तुम दोनों....

अंजलि- nahi,mai इसके साथ नहीं jaungi....tum दोनों jao,mai ऑटो ले लुंगी....

मई- ज़्यादा होशियारी दिखाई na,toh एक थप्पड़ maarunga....tu मेरे साथ चल रही है समझी..

रोनित- यार तू nikal,mai आता हूँ....

मई- अब तू कहाँ चला बे...

रोनित- आज थोड़ा फुटबॉल खेलने का मूड hai..tu nikal,mai बाद में आता हूँ..

हमारे स्कूल में क्लासेस के बाद डेली फुटबॉल प्रैक्टिस होती thi...maine भी सोचा की कुछ वक़्त तक अगर ये दोनों अलग hi रहें तोह ठीक रहेगा....

मई- चल fir.mai अंजू को लेकर निकलता hun,tu शाम को सीधे घर आ जइयो.....

रोनित- ठीक hai....bye..........

मई और अंजलि घर की तरफ निकल gaye,aur रोनित फुटबॉल ग्राउंड की taraf...par मुझे ये नहीं पता था की रोनित को यूँ अकेला छोड़ना मेरी कितनी बड़ी भूल थी......

मीनाक्षी मेन्शन:-

माँ- विक्की!!!!

मई- यस माँ.......

स्कूल से आने के बाद फ्रेश वगैरह होकर मैंने लंच किया और जस्ट रोनित के घर जाने के लिए अपने रूम से निकलने hi वाला था की माँ ने मुझे आवाज़ दिया....

माँ- बीटा कविता का फ़ोन hai...puch रही है रोनित अभी तक घर क्यों नहीं आया!!!

मई- माँ वो फुटबॉल प्रैक्टिस के लिए स्कूल में रूक गया tha.aata hi होगा....

मैंने जैसा kaha,mom ने वैसा कविता आंटी से कह दिया.....

मई अपने आप से- मई भी naa.acha हुआ माँ ने रोनित के बारे में पूछ liya.mai तोह भूल hi गया था की वो तोह अब भी स्कूल में hoga..par कुछ यदा लेट नहीं हो gaya.saala,pakka कहीं न कहीं बैठकर कुछ ठूस रहा hoga...saala भुक्कड़...

मई वापस अपने रूम में जाने के लिए मुदा hi था की मुझे एक तेज़ झटका laga.....maine तुरंत अपनी आँखें बंद कर ली और कुछ ढूंढ़ने लगा पर मुझे कुछ भी नहीं दिखा..

मैंने मोबाइल निकला और कॉल लगाया पर no response......mera दिमाग ख़राब होने hi लगा था की मेरे अंदर से आवाज़ आयी.

बुक- VIKRAM,tumhari सबसे बड़ी कमी तुम्हारा उतावलापन hai.....dhairya rakho,bhale hi परिस्तिथि कितनी भी विपरीत क्यों न ho,dhairya रखने से hi तुम्हे उचित मार्ग मिलेगा.....

मैंने अपने मन को शांत किया और सोचने लगा की मुझे क्या करना chahiye....maine दोबारा अपनी आँखें बंद की और इस बार कुछ और देखने laga...kuch 5 सेक् में hi मेरी आँखें खुल gayi......mujhe एक अंदाज़ा हो चूका था की मुझे पहले कहाँ जाना है....

मैंने अपनी आँखें फिर बंद की और जहाँ मुझे पहुंचा था उस जगह को याद कर गायब हो gaya....un काली शक्तियों के रक्षको को मारने के बाद जो मुझे मैजिकल पावर्स मिली thi,uske बाद ये पहली बार था जब मई उनमे से एक का इस्तेमाल कर रहा था....

अगले hi पल मई उस जगह पर खड़ा था जहाँ पहुँचने की मैंने सोची thi.mai अब भी इनविजिबल hi था......

मैंने एप हाथ फैला diye.mere दोनों हाथों से इनविजिबल रौशनी निकली और उस जगह के चारो तरफ फैले gayi.....mujhe पिछले 5 मिनट में यहाँ क्या क्या हुआ है वो सब दिखने लगा....

मुझे इस जगह पर एक सुरक्षा कवच जिसका असर अब धीरे धीरे गायब हो रहा tha,uska भी आभास हो gaya.issi सुरक्षा कवच की वजह से मई कुछ भी डिटेक्ट नहीं कर पा रहा था....

मैंने उस सुरक्षा कवच को अपनी शक्ति से जोड़ diya.ye भी एक स्पेल था जो मुझे किताब ने सिखाई thi...ab मुझे पता था की मुझे कहा जाना hai.mai फिरसे गायब हो गया....

वहीँ दूसरी तरफ:-

बस कुछ साँसे बची है तेरे paas....tere ज़िन्दगी के सारे ख़ास लोगों को याद कर le......khaas कर के विक्रम ko.........arre क्या hua,tere तोह आंसू निकल aaye....miss कर रहा है क्या usse....tention मत le,bohot जल्द उससे भी तेरे पास भेज दूंगा......

शैतान भगवान् के फैसले नहीं करते मद्दोक्सक्सक्स..................

आवाज़ सुन जैसे hi मैडोक्स palta,saamne मुझे देख एक पल के लिए उसका दिमाग घूम gaya.....usse यकीं नहीं हो रहा था की मैंने उससे खोज निकला है......

वहीँ मेरी नज़र जैसे hi उसके पीछे ज़मीन पर पड़े रोनित पर padi,toh मेरे आँखों से आंसू निकल आये...

रोनित का चेहरा दोनों तरफ से फैट चूका tha......uske होठ से खून बहकर उसके शर्ट पर जैम चुके the.RONIT उल्टा लेता हुआ था और उसके दोनों हाथ भी उलटे घूमे हुए the..iska मतलब उसके दोनों हाथों को तोड़ दिया गया था.....

मैडोक्स- मान गए VIKRAM......sach में यार तू कमल की चीज़ hai....itne सेफ्टी मेझस लेने के बाद भी तू मुझ तक पहुँच gaya....akhir kaise????marne से पहले मेरी क्यूरोसिटी ख़त्म करते जा यार....

इस वक़्त हम बलबीर के hi एक गोडाउन में थे जो शहर से बाहर थी....

मई- मैंने कहा naa,bhagwaan के फैसले शैतान नहीं करते MADOXX.aur कौन jiyega.kaun marega,ye सिर्फ भगवान् के hi हाथों में है.....

और जहाँ तक सवाल मेरे तुझ तक पहुँचने का है toh,yaad है जब तू मुझसे पहली बार मिला tha,toh तूने क्या कहा tha.national टोपर को कौन नहीं jaanta....fir तू कैसे ये भूल गया की मुझे बेवकूफ बनाना तेरे बस की बात नहीं है....

जब मई तेरा दिमाग नहीं पढ़ पाया तोह मई समझ चूका था की तू कोई छोटी मोती चीज़ तोह हो नहीं sakta....mai ये भी समझ गया की तू मुझे नुक्सान पहुंचाने के लिए hi आया है...

तेरा सच जानने के लिए hi मई तेरी पार्टी में गया....

जब तू अंजलि के साथ डांस कर रहा tha,toh मई रोनित के साथ उस पार्टी हॉल के चक्कर लगा रहा tha.maine वहां के सभी कोनो में छुपकर ट्रांसमीटर और कामर्स लगा दिए the.....aur हमारे जाने के बाद जब तेरा बाप तेरे सामने प्रकट हुआ और फिर तुम दोनों के बीच जो भी बात चित hui,wo सब मैंने सुन ली थी....

जब मैंने अंजलि को तेरी बेहेन बुलाया जिसपे सब हसने lage,tab एक पल के लिए तेरी आँखें पूरी काली हो गयी thi,mujhe पता चल गया की तू कोई डेविल hi है....

बस एक चूक हो गयी mujhse...mujhe लगा की तू बस मुझे आंक रहा hai.anylize कर रहा hai..mere बारे me,meri ताकत के बारे में जानकार तू मुझपे अटैक karega...mai ये भूल गया की डेविल्स और सांप में ज़्यादा फर्क नहीं hota...wo किसीको भी दस सकते हैं.....

मैडोक्स- वाह bhai,maan gaye..maine सोचा था की पहले मई तेरे इस जिगरी को maarunga,aur इसी गम में जब तू मानसिक टूर पर कमज़ोर हो jayega,tab मई तुजपे हमला karunga.....par यहाँ आकर तूने मेरे प्लान को फ़ैल कर diya...aur इसकी सजा तुझे अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी......

मैडोक्स ने अपने हाथ failaye,dekhte hi देखते उसके शरीर पर काले धुंए आकर कपड़ो का आकर लेने lage...kuch hi पलों में मैडोक्स मेरे सामने अपने असली रूप में था.....

मैडोक्स- तैयार हो विक्रम!!!!!

मई- हमेशा.....

मैडोक्स- वो तोह तुम होंगे hi...agar हिम्मत है तोह अपने चारो तरफ फैले हुए सुरक्षा कवच को हटा कर लड़ो.......

मई मुस्कुराते hue-fir मेरे सामने दिमाग लगाया tumne.khair,tumhari आखरी ख्वाहिश समझकर तुम्हारी बात मान लेता हूँ..

( गुरु विशाखत ने मुझे मेरे चारो तरफ फैले सुरक्षा कवच के बारे में बता दिया था )

मैंने अपनी आँखें बंद की और...

ाकर्मीका

मेरा सुरक्षा कवच गायब हो गया.....

मई- रोनित मेरे bhai.bus कुछ देर वेट kar.fir घर चलते है..

रोनित इतने दर्द के बावजूद मुझे आँख फाड़े देख रहा था......

अगले hi पल मैडोक्स के हाथों से काली रेज़ निकलकर मेरी तरफ lapki,maine भी अपना हाथ आगे कर diya.mere हाथों से वाइट रेज़ निकलकर ब्लैक रेज़ से takraaye...dono hi रेज़ नष्ट हो गए.....

मैडोक्स ने अपनी आँखें बंद की और अपनी उँगलियों को घूमने लगा... देखते hi देखते मैडोक्स के सामने एक पानी का दीवाल बन gaya....abhi मई कुछ समझता उससे पहले hi उस दीवाल से एक के बाद एक हथियार तेज़ी से निकलकर मेरी तरफ आने लगे......

मैंने भी तेज़ी से अपना हाथ गोल गोल घूमना शुरू कर diya....mere हाथों से मेरे आगे एक हवा का बवंडर बनाने लगा

मैडोक्स द्वारा छोड़े गए सारे हथियार मेरे बनाये गए बवंडर के अंदर चले गए......

सारे हथियारों को नष्ट करके मैंने बवंडर को भी ख़त्म कर दिया पर यहीं मुझसे गलती हो गयी...

मैडोक्स ने अपने हाथ को जोड़कर सामने की तरफ एक झटका diya..paani का दीवाल एक ज़ोरदार ब्लास्ट के साथ फैट gaya...paani ने तेज़ धार नुकीले बर्फ का रूप ले लिया और मेरी तरफ आने लगे...

मैंने अपने दोनों हाथों को जोड़ कर एक को ऊपर और दूसरे को नीचे कर diya..mere आगे एक रबर की दीवाल बन gayi.....par दीवाल के पुरे बनाने से पहले एक तेज़ धार बर्फ आकर मेरे शोल्डर में घुस गयी.....

मई- aaahhhhhhhhhhhh.....

रोनित- V..JJJJJJJJ.....

मेरी चीख के साथ साथ रोनित की भी चीख निकल गयी......

मैडोक्स- hahahahaaaaa...bas इतना hi दम tha.......kya yaar,dad तोह फालतू में टेंशन ले रहे थे......

मैडोक्स ने अपना हाथ उठाया और कुछ मंत्र पढ़ने laga.....us गौड़ों के अंदर hi काले बदल बनाने लगे....

MAI-aaaahhhhhhhh.........

उन बादलों में से बीजी निकल मेरे ऊपर गिरने lagi...maine अपने ऊपर एक सुरक्षा कवच बना लिया था पर दर्द में होने की वजह से सुरक्षा कवच कमज़ोर tha....par फिर भी उसी की वजह से बिजलियों का असर मुझपर काम हो रहा था....

मेरे कपडे फैट गए the..sharir से खून निकलने लगा tha.....mujhe अपना आखरी वक़्त दिखने लगा था.....

मैडोक्स- अरे yaar...tu तोह बड़ा hi कमज़ोर nikla...maza hi नहीं आया तुझसे ladke...khair मज़े के लिए तेरी वो फर्न तोह है hi..ussi से काम चला lunga....mai....ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मैडोक्स आगे कुछ बोल नहीं paaya....jin बिजलियों से वो मुझपर वार कर रहा tha,unme से एक उसीके ऊपर आकर giri....wo दूर जाकर गिरा....

हुआ ये की जैसे एक और बिजली मेरी तरफ badhi,maine अपना हाथ अग्गे कर उसके असर को उल्टा करने का मंत्र पढ़ा...

इस दर्द भरी हालत में स्पेल को मोड़ना मेरे लिए बोहोत मुश्किल tha.par मैडोक्स के अंजलि के ऊपर किये कमैंट्स से एक पल के लिए मेरा दर्द गायब हो गया और इतना काफी था उसके स्पेल को मोड़ने के लिए.....

मई अपनी पूरी ताकत समेटकर खड़ा हो गया......

वहीँ मैडोक्स भी अब तक खड़ा हो चूका था.....

मैंने अपनी आँखें बंद की और अपने हाथ जोड़े और जब तक मैडोक्स कुछ सोच या समझ पाटा मैंने मंत्र पढ़ लिया था....

मेरे सीने वाले हिस्से के आगे रौशनी चमकने lagi....aur देखते hi देखते मेरे चारों तरफ रौशनी से बानी लम्बी लम्बी नुकीली सुइयां निकलने lagi.achanak hi उस गोडाउन में तेज़ हवा चलने लगी और हर चीज़ मेरी तरफ खींचने लगी....

मैडोक्स और रोनित भी मेरी तरफ खींचा कर आने lage....maine एक हाथ आगे कर diya..RONIT के नीचे की ज़मीन उखड gayi....RONIT का थोड़ा सा शरीर उस ज़मीन के अंदर चला gaya.wo जगह फिर से भर गयी..

अब रोनित सेफ था पर मैडोक्स लाख कोशिशों के बाद भी मेरी तरफ खींचा चला आ रहा था........

मैडोक्स को जब लगा की वो खुदका मेरे पास आने से नहीं रोक पायेगा तोह उसने एक नयी चाल चली.....

मैडोक्स ने ताली बजने की अंदाज़ में अपने दोनों हाथ जोड़ दिए...

aaaahhhhhhhhhhh.....mere इस चीख के साथ मेरा स्पेल भी बेकार हो gaya...hua ये की मैडोक्स के ताली बजाते hi दो अदृश्य फोर्सेज ने मुझे दोनों तरफ से टक्कर मारी जिससे मुझे काफी दर्द hua.yahan मेरा कंसंट्रेशन टूटा ,वहां मेरा स्पेल बेकार हुआ....

मैडोक्स ने मेरी तरफ एक तक देखते हुए अपने दोनों हाथों को मलना शुरू kiya....jaise जैसे उसके हाथ गरम hue,mera जिस्म भी गरम होने लगा......

कुछ hi देर में मेरे शरीर के कुछ अंग जल कर काले पड़ने lage...........itne दर्द में भी मुझपे बेहोशी छाने लगी थी....

पर जैसे hi मेरी आँख बंद hui,mujhe रोनित की माँ का रोटा हुआ चेहरा दिखने laga.agar मौ अभी मर जाता तोह मैडोक्स रोनित को भी मार deta.maine झट से अपनी आँखें खोली और एक झटके में खड़ा हो गया....

मैडोक्स जो पूरा ध्यान लगाकर मुझे जला रहा tha,mere अचानक उठने से हड़बड़ा गया जिससे उसका कंसंट्रेशन और स्पेल दोनों टूट गए....

मई- बस बोहोत hua...tu मुझे मारना चाहता था naa.toh ठीक hai....mai मरने के लिए तैयार hun....par अकेले nahi,tu भी मेरे साथ मरेगा........

रोनित मेरे bhai.........maine तुझे अपना सागा भाई hi माना hai...par एक कसक हमेशा rahi,ki काश हम दोनों एक hi माँ के कोख से जन्मे hote..agar दोबारा हम दोनों ने जनम लिया naa,toh हम दोनों एक hi माँ के कोख से जनम लेंगे...

रोनित चुपचाप मेरी बातों को सुनता गया.....

मैंने मैडोक्स की तरफ देखा......

संपूर्ण विनाशते अनुविधेय.......

मैडोक्स- नाहीईईई..............

मेरे मंत्र बोलते hi हम जहाँ मौजूद थे उस पूरी जगह पर कम्पन शुरू हो गयी....

मई- AKARMIKA.......maine रोनित की तरफ हाथ आगे कर मंत्र बोल diya.jo सुरक्षा कवच बचपन से आज तक मेरे चारो तरफ रहती thi,wo अब रोनित के चारो तरफ फैले gayi.......us कवच की वजह से धीरे धीरे उसके घाव भी भरने लगे और उसकी टूटी हड्डियां भी जुड़ने लगी....

वहीँ मेरे और मैडोक्स के शरीर कांपने lage.....hamare शरीर में जितनी भी ऊर्जा थी वो निकल कर बहार आने lagi....hum दोनों की hi शक्तियों ने हम दोनों के बीच आकर एक गोले का रूप ले लिया.....

मैडोक्स ने गायब होने की कोशिश की पर कुछ भी नहीं hua.khud को गायब न होते देख वो बाहर की तरफ भागने को हुआ पर उसके पेअर जैम gaye.wo हिल भी नहीं पा रहा था..

मैंने एक आखरी बार रोनित की तरफ dekha.mere आँखों से आंसूं निकल aaye.RONIT को कुछ समझ तोह नहीं आ रहा था की हो क्या रहा है पर मेरी आँखों में आंसू देख वो समझ गया की कुछ बोहोत बुरा होने वाला है......

और BOOOOOOOOMMMMMMMMMMMMMM......

एक तेज़ धमाका hua.............aur फिर सब कुछ शांत.................

धमाके में गोदोम तोह पूरा गायब hi हो gaya......wahin मैडोक्स उड़ता हुआ नजाने कहा जाकर gira.par गिरने के बाद उसका सर एक तरफ लुढ़क गया..

वहीँ दूसरी तरफ मई भी पीछे की तरफ थोड़ी दूर जाकर gira...meri पूरी बॉडी जगह जगह से फैट गयी thi........yaha तक की मेरे बाज़ू और घुटने की हड्डी भी दिखने लगी thi.....mere पुरे शरीर से खून निकल रहा था....

ब्लास्ट की वजह से हर तरफ धुआं धुआं हो गया tha.dhuan छटते hi मेरी नज़र जो लगभग बंद हो hi गयी thi,RONIT पर gayi..usne भी मुझे देख लिया था.....

जहाँ एक तरफ इतने दर्द में भी रोनित को सही सलामत देख मेरे चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कराहट थी वहीँ मेरी हालत देखकर रोनित बर्दाश्त न कर पाया और बेहोश हो गया.....

तभी:-

मेरे ठीक ऊपर आसमान में एक तेज़ रौशनी चमकी और उस रौशनी के बीच एक वर्ल्ड दूर खुल gaya......us दूर के अंदर से एक और रौशनी निकली और सीधे नीचे मेरे ऊपर padi..mera शरीर हवा में उठने लगा और कुछ hi पल में मई उस दूर के अंदर चला gaya.....mere अंदर जाते hi वो दूर बंद हो गया.......

आज के लिए इतना HI....

आपका अपना V.J....
 
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम अपनी ज़िन्दगी की फर्स्ट सुपरनैचरल फाइट मैडोक्स के साथ करता है जिसमे दोनों HI क दूसरे से नहीं जीत पाते है

अब आगे:-

CHAPTER-1:-

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )

अपडेट 45:-

NAHIIIIIIIIIIII..........................

कविता की आवाज़ सुनकर सारे नौकर भागते हुए आते है.......

हेड सर्वेंट- ma'am....ma'am....................

जल्दी से पानी लेकर आओ........

दूसरा नौकर भागते हुए जाता है और किचन से एक गिलास पानी लेकर आता है....

कविता जो चीखने के साथ hi बेहोश हो गयी thi,head सर्वेंट उसके चेहरे पर पानी छटता है जिससे कविता हड़बड़ाकर उठ जाती है........

हेड सेवेंट- ma'am मई डॉक्टर को बुलाता हूँ....

कविता- रोणिततटत मेरा बचा......

कविता को डॉक्टर सुनते hi याद आजाता है की वो क्यों बेहोश हुई thi...wo तुरंत अपने मोबाइल से एक नंबर डायल करती है......

KAVITA-suniye जी..............

पर कविता आगे नहीं बोल पाती और रोने लगती है......

हरप्रीत- क्या हुआ KAVITA...tum रो क्यों रही हो....

अपनी पत्नी का यूँ अचानक रोना सुन हरप्रीत टेंशन में आ जाता hai.....HARPREET के पास hi आकाश और जयराज भी बैठे हुए the....teeno भी हरप्रीत की बात सुन शॉक हो जाते हैं....

जयराज- फ़ोन स्पीकर में दाल......

हरप्रीत फ़ोन स्पीकर में रख देते हैं...

हरप्रीत- क्या हुआ कविता!!!! प्लीज रोना बंद करो और बताओ मुझे.....

कविता- वो वो रोणीततततततत..........

कविता आगे नहीं बोल पाती और फिरसे रोने लगती है....

हरप्रीत- RONIT...kya हुआ मेरे बचे ko......ek बार में बताओगी तुम....

आखरी लाइन बोलते बोलते हरप्रीत की आवाज़ कड़क हो जाती hai...aakhir बात उनके बेटे से रिलेटेड जो थी..

जयराज- हरप्रीत आराम se.bhabhi क्या हुआ रोनित को....!!!!

कविता- भैया,****** हॉस्पिटल से फ़ोन आया tha...mera बीटा वहां एडमिट है और बेहोश पड़ा है.......

कविता सिसकते सिसकते बता देती है...

पर ये सुन तीनो दोस्तों को झटका लगता है.........

हरप्रीत के आँखों से भी आंसू निकल जाते hain.....taklif तोह जयराज को भी बोहोत हुई thi,aakhir रोनित भी उनके लिए विक्रम से काम नहीं tha.....jab भी रोनित को कुछ भी चाहिए hota,toh वो अपने डैड से पहले जयराज को hi बोलता था.......

पर जयराज में सयम बोहोत ज़्यादा tha.wo आराम से बोले....

जयराज- bhabhi......aap टेंशन मत lijiye..hum तीनो यहाँ से हॉस्पिटल के लिए निकलते hain...mai मीनू को कॉल कर देता hun,aap मीनू और नेहा भाभी के साथ आ jaiye....aur प्लीज ककले मत निकलिएगा.....

जयराज जानते थे की इस वक़्त कविता मानसिक टूर पर काफी कमज़ोर hogi.aise में अकेले हॉस्पिटल जाना उसके लिए ठीक नहीं होगा....

फ़ोन रखने के बाद......

जयराज- यार ऐसे रोने से कुछ नहीं hoga....hume फ़ौरन हॉस्पिटल के लिए निकलना चाहिए........

तीनो हॉस्पिटल के लिए निकल gaye......raaste में जयराज ने मीनू को कॉल लड़के सब बता दिया जिससे सुनकर मीनू के आँखों में भी आंसू आ gaye...JAIRAJ ने मीनू को कविता और नेहा को लेकर हॉस्पिटल आने को कहा....

मीनू- VICKYYYY,VICKYYYY..........martha जा कर देखो तोह विक्की बाबा क्या कर रहे हैं....

मरथा जब ऊपर गयी तोह विक्रम उससे वहां नहीं मिला...

मरथा- ma'am विक्की बाबा तोह नहीं है....

मीनू- विक्की तोह बिना बताये कहीं नहीं jaata.....kahin वो भी रोनित के saath..nahi nahi......usne तोह खुद बताया था की रोनित स्कूल ग्राउंड में है....

मीनू ने नेहा को कॉल करके सब बता दिया और तुरंत कविता को लेकर घर आने को कहा....

नेहा- ANJALI.....ANJALI...

अंजलि- क्या हुआ माँ....!!!!!!

पर जैसे hi ाबजली अपनी माँ के सामने aayi,apni माँ को रोटा देख भाग कर उनके गले लग गयी....

अंजलि- क्या हुआ mom!!!!aap रो क्यों रही हैं!!!!!

A/MOM- beta,RONIT हॉस्पिटल में एडमिट है..

अंजलि- क्या?

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?

अंजलि के आँखों के आगे अँधेरा सा च gaya........wo एकटक अपनी माँ को देखने लगी..

A/MOM- ANJU.....ANJU......

अंजलि की माँ ने अंजलि को ज़ोर से झिंझोड़ा जिससे उससे होश aaya........uske आँखों से भी बरसात होने लगी...

नेहा- बीटा संभल अपने आप ko....chal,hame जल्दी से जल्दी हॉस्पिटल पहुंचना है......

इतने में बहार कार का हॉर्न बजने laga...ANJALI और उसकी माँ भागते हुए बाहर gaye....ye कविता thi....NEHA ने उनको हिम्मत दी और तीनो मीनू के घर पोहोंच उससे पिक कर हॉस्पिटल की तरफ निकल गए...

अंजलि- आंटी V.J....kahan hai....!!!!hospital में है क्या?

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मीनू- नहीं beta....par वो घर पर भी नहीं hai.pata नहीं कहाँ चला गया.....

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?

नेहा- गया होगा kahin???aa जायेगा.

मीनू- हम्म्म...

पर अंदर hi अंदर मीनू के मन में भी एक दर बैठ गया था........

इन हॉस्पिटल:-

जयराज- एक्सक्यूज़ me.......which रूम इस इन रोनित सिंह बल!!!!!

रेसप्शनिस्ट- रूम 402 सर........

मीनू- जीईई...

जयराज हरप्रीत और आकाश आवाज़ सुन palte..unke सामने मीनू नेहा कविता और अंजलि खड़े the...sab एक दूसरे से मिल लिफ्ट में घुस gaye.....ghar से अभी तक कविता लगातार रोये hi जा रहे thi.aansu तोह सभी के आँख में the,par सभी ने अपने आप को कण्ट्रोल करके रखा हुआ था.

कुछ hi देर ंव सभी रूम 402 के सामने the....sabhi एक साथ अंदर रूम में चले gaye...apne बेटे को बेहोश देख कविता के साथ साथ हरप्रीत के भी आंसू निकल गए.....

मीनू कविता को और आकाश हरप्रीत को सँभालने में लग gaye.JAIRAJ रोनित के पास गए और उससे ध्यान से देखने lage..RONIT के शरीर पर या सर पर कहीं कोई चोट नहीं दिख रहा था.....

नर्स- अरे इतने ारे लोग एक साथ अंदर नहीं रह sakte...chaliye,sab बाहर चलिए....

जयराज- बिलकुल रह सकते hain.....aap जाइये और डॉक्टर को बुला कर laaiye..turant.......

इतनी साद सिचुएशन में भी सभी जयराज की बात सुनकर शॉकेड हो गए क्यूंकि जयराज कभी भी किसीसे रूडली बात नहीं करते थे ख़ास कर किसी लेडी से....

नर्स भी जयराज की सख्त आवाज़ सुन दर कर डॉक्टर को बुलाने चली gayi......aur कुछ hi देर में डॉक्टर आ गया..

डॉक्टर- अरे इतने सारे log....aap सब...

जयराज- चुपपपपपप.........

डॉक्टर जयराज को पहचानता tha....uski बाकी की बात हलक के अंदर hi रह गयी.....

डॉक्टर- सॉरी sir..mujhe नहीं पता था की ये आपकी फॅमिली है......

जयराज- ये तोह पता hi होगा ना की मेरे बेटे को क्या हुआ है!!!!!

जयराज के मुँह से ये सुन की पेशेंट उनका बीटा है डॉक्टर की हवा और टाइट हो गयी....

डॉक्टर- यस sir.....isse टक्स कहते hain.....TEMPORARY कोमा स्टेज.......

कोमा वर्ड सुन सभी को एक ज़ोर का झटका laga........KAVITA फिर से ज़ोर ज़ोर से रोने लगी........

जयराज- पर kaise..iske बॉडी पर तोह एक भी निशान नहीं है.....

डॉक्टर- sir.inki ये कंडीशन शॉक की वजह से हुई hai....zaroor इन्होने अपने सामने कुछ बोहोत बुरा होते हुए देखा hai.....aur ma'am आप डरिये mat....ye कोमा टेम्पेरोरी hai.....jaise hi इनके दिमाग से वो घटना हटनी शुरू hogi,inhe होश आ जायेगा....

जयराज- इसमें कितना वक़्त लगेगा....

डॉक्टर- ी दिन से मैक्सिमम 1 hafta.....par डरने की कोई बात नहीं है......

पर डॉक्टर की बात से एक इंसान था जो अब बोहोत ज़्यादा दर गया था........

मीनू- विकीयययययय..............

मीनू के मुँह से अपने आप hi निकल गया.....

मीनू के मुँह से विक्की सुन सबका ध्यान इस बात पे गया की मई वहां मौजूद नहीं हूँ...

जयराज- विक्की kya!!!!!!aur वो हैं कहाँ???

मीनू- पता nahi....wo घर पर भी नहीं tha....aisa पहली बार हुआ है की वो बिन बताये कहीं गया हो और ऊपर से वो यहाँ भी नहीं है और न hi अंजलि के साथ था.....

अब जयराज का माथा thanka.....apne बेटे को उन अचानक बिना किसीको बताये गायब hona,ussi वक़्त रोनित का शॉक की वजह से गायब hona,ye सब कोई कोइंसिडेन्स तोह हो नहीं सकता......

जयराज- फ़िक्र मत karo....kuch नहीं होगा हमारे बेटे ko....ANJALI beta,ek बार अपने सरे फर्न्स को कॉल करके pucho,kahin विक्की उनके साथ तोह नहीं है!!!!

अंजलि- जी अंकल....

अंजलि जानती थी की विक्रम किसी और के साथ कभी हैंगऑउट नहीं करता पर फिर भी एक उम्मीद के चलते उसने अपने सरे क्लास्स्मेटिस

को कॉल लगाया...

पर हुआ वैसा hi जैसा की अंजलि को उम्मीद tha...VIKRAM किसी के साथ भी नहीं था.

अंजलि- अंकल V.J किसी के भी साथ नहीं है..

ये सुन मीनू का रोना तेज़ हो गया.

कविता- ये हो क्या रहा है हमारे saath.pichle कुछ वक़्त से कोई न कोई बे वजह हमसे उलझ रहा hai..aur आज मेरा एक बीटा बेहोश है और दूसरे का पता nahi...kahi ये सब भी उनलोगों ने hi तोह......

JAIRAJ-humne एक शेर को पैदा किया hai.aur शेर को गीदड़ो से कोई दर नहीं hota....AKASH,chal...HARPREET तू यही रह...

हरप्रीत- मई क्यों rooku...RONIT बस बेहोश hai..aaj नहीं तोह कल उससे होह आ hi jaayega.par मेरा दूसरा बीटा लापता hai...jab तक उसका पता नहीं चल jaata,mai चुप चाप नहीं बैठ सकता.....

जयराज- चल fir..MINU,himmat rakho.hamare बेटे को कुछ नहीं होगा......

जयराज हरप्रीत और आकाश बहार आ गए...

जयराज ने अपना मोबाइल निकला और कुछ कॉल्स kiye.....teeno हॉस्पिटल से बहार आकर अपनी कार से कहीं निकल गए..........

वहीँ दूसरी तरफ:-

एक लड़का एक आलिशान बीएड पर सोया हुआ tha....uske शरीर पर एक भी कपडा नहीं tha.....par ये क्या उस लड़के की पूरी शरीर पर सुइयां चुभी हुई thi....us लड़के के सिरहाने एक लड़की बैठी हुई थी.....

लड़की- सारे जहाँ की मासूमियत छलकती है इसके चेहरे pe...aisa क्या ख़ास है इसमें की सत सेबेस्टियन ख़ास इसके लिए मुझसे मिलने आये थे.......

ये लड़का ख़ास नहीं बोहोत ख़ास है.....

आवाज़ सुनकर वो लड़की चौंक gayi...aur जब पलटी तोह उसके सामे सत सेबेस्टियन the..par आज वो अकेले नहीं the,unke साथ सत सकिलिअ और सत अल्फ़्रिक भी थे....

पर असली झटका उस लड़की को तब लगा जब जब तीनो सेंटस उस लड़के के आगे झुक गए...

वो लड़की तोह आँख फाड़े इस सन को देख रही थी.....

सत सकिलिअ- ऐसे क्या देख रही हो *****..और इतनी अचंभित क्यों हो???

लड़की- GOD'S मेसेंजर्स एक मामूली से लड़के के आगे झुक रहे hain....wo भी एक पृथ्वी वासी के aage.....jo सभी प्लैनेट्स से बोहोत पीछे hai...ye आश्चर्य की बात नहीं तोह और क्या है?

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सत सेबेस्टियन- तुम जिसके बाजू में बैठी ho,wo कोई मामूली लड़का नहीं hai,LORD ऑफ़ एंजेल hai.....swayam ोड का ansh,pure ब्रम्हांड का मार्ग दर्शक.......

इस खुलासे से तोह उस लड़की को 440 वाल्ट का झटका लगा.....

लड़की- क्या ये वही है जिसके बारे में भविष्यवाणी हुई थी......

सत अल्फ़्रिक- हाँ putri,ye वही है...

लड़की- अगर ये सच है तोह फिर ये उस युद्ध में कैसे इतना चोटिल हो gaya.ek डेविल को तोह लार्ड ऑफ़ एंजेल के सामने खड़े होते hi जल जाना चाहिए tha...par उसने तोह इससे बराबर की टक्कर di...ya फिर ये कहा जाए की उसने इससे हरा दिया था.....

सत सेबेस्टियन- वो इसीलिए की अभी इसकी शक्ति सोई हुई hai.....aur उसकी शक्ति का मात्रा एक भाग कितना शक्तिशाली hai,ye तोह तुम अचे से जानती हो......

लड़की- जी bilkul.....par इसका मतलब वो बात भी......................

सत सेबेस्टियन- हाँ putri......ye सच है.....

उस लड़की की आँखों से आंसू निकल आये....

सत सकिलिअ- नहीं putri........tum इतनी कमज़ोर नहीं हो sakti...aaj तुम्हारी वजह से hi लार्ड ऑफ़ एंजेल की शक्ति का वो भाग ास्मोडियस छुपा हुआ hai.....warna ब्रम्हांड का एक चौथाई भाग अब तक उसके अधीन हो चूका होता.....

लड़की- मुझे शमा करें सत CECILIA....ye सच अचानक आज मेरे आगे फिर से खुल gaya,isiliye थोड़ा जस्बाती हो गयी थी...

सत सेबेस्टियन- कोई बात नहीं putri...hum तोह बस इन्हे एक बार सामने से देखने आये the......tum नहीं जानती की तुम कितनी सौभाग्य शाली ho,jo तुम्हे इनके पास रहने का मौका मिल रहा hai,aur आगे चलकर भी ये तुम्हारे इस गृह में आकर इससे पावन करेंगे....

लड़की- इससे बड़ी बात मेरे और मेरे लोगों के लिए नहीं हो sakti....mai अभी जाकर इनके बारे में पिताजी को बताती हूँ...

सत सेबेस्टियन- नहीं putri.....aisa कभी मत karna....ye मत भूलो की इसका सामना किस्से होने वाला hai....yahan की खबर जानने के लिए उससे यहाँ आने की ज़रुरत नहीं hai...uske अनगिनत आँख और कान हैं putri......isiliye ये बात तुम्हे अपने आप तक रखनी होगी.....

लड़की- जो आज्ञा.....

तीनो गॉड ऑफ़ मेसेंजर्स ने उस लड़की को आशीर्वाद दिया और गायब हो गए....

वहीँ दूसरी तरफ:-

वाणी- अरे yaar,tum मीणा कुमारी बानी क्यों बैठी हो.......

डिनर के बाद साड़ी बेहेने बहार पूल के पास बैठी हुई थी.......

अवंतिका- भैया की याद आ रही है यार....

शनाया- हाँ yaar,is बार तोह हम दोनों के साथ ठीक से टाइम भी सपिण्ड नहीं कर पाए.....

वाणी- अरे चिल yaar.kuch hi महीनो की तोह बात hai..fir तोह हमारे दोनों भाई हमेशा के लिए यही आ जायेंगे ना.

धङाममममममम.............

अभी कोई और कुछ कहता उससे पहले hi घर का एंट्री गेट एक ज़ोरदार आवाज़ के साथ टूट gaya......aur एक 407 ट्रक तेज़ी से अंदर aaya...us ट्रक के पीछे लाइन से गाड़ियां लॉन में आने lagi......abhi कोई कुछ समझता उससे पहले घर के ऊपर 2 हेलिकोप्तेर्स मडराने लगे......

ऐसा लग रहा था जैसे कोई फिल्म की शूटिंग चल रही ho......itni आवाज़ सुन कर घर के अंदर से सतीश और अनुकृति बहार aaye.......jitni भी गाड़ियां आयी थी सबमे से एक के बाद एक हथियारबंद लोग उतरने lage......waise तोह सतीश खुद अंडरवर्ल्ड डॉन था पर इतने सारे हथियारबंद लोगों को देखकर उसकी पूरी फैट गयी थी....

अभी वो कुछ समझ या बोल पाटा इससे पहले एक और बंव पोर्च में एंटर hui.....aur 3 आदमी बहार निकले जिससे देखकर सतीश के साथ साथ अवंतिका और बाकी सिस्टर्स भी शॉकेड हो गए....

SATISH-ye सब क्या है जयराज....!!!!

chataakkkkkkhhhhh,chataakkkhhhhhh,chatakkkhhhhhhhh......chatakkkkhhhhhhhhh......

एक के बाद एक जॉर्डन के चार थप्पड़ सतीश के गाल पर pade..SATISH की हालत पतली हो गयी..

जयराज- जयराज नहीं सर बोल sir...........kya बोल!!!!!!

सतीश डरते हुए- सिररररररर.........

जयराज- haan....tere जैसे ch***yon की प्रॉब्लम क्या है पता hai,tum सब साले अपने आप को बोहोत बड़ी टॉप समझते ho....beta तुम सब की औकाद तभी तक है जब तक हम जैसो का दिमाग नहीं घूम jaata.aur तेरी बदकिस्मती की आज मेरा घूम गया है.....

वाणी- ये क्या बत्तमीज़ी है.....

आकाश- shhhhhh................ek और आवाज़ और तुम्हारे पुरे खानदान को साफ़ कर denge........samajh आयी baat.nahi आयी तोह एक और बार मुँह खोल के दिखा......

अनुकृति- भाई sahab,aakhir हमारा कुसूर क्या है?

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?

जयराज को अनुकृति की आवाज़ में वही सच्चाई दिखी जो विक्रम को दिखी थी....

जयराज- इतने घटिया आदमी को इतनी शरीफ बीवी कहाँ से मिल gayi.....behenji,aapke पूज्यनीय हस्बैंड अंडरवर्ल्ड डॉन hain......naajane कितने घरों को उजड़ा है inhone.toh कुसूर की बात तोह आप करें hi मत.......

सतीश- नहीं ANUKRITI,ye झूठ बोल रहा hai..mai....CHATAKKKKHHHHH...

जयराज- साले तेरी दलीले अकेले में sunaiyo,abhi बस ये बता की मेरा बीटा कहाँ है.......

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??

विक्रम की बात सुनकर अवंतिका को झटका लगा.....

सतीश- मुझे क्या मालुम!!!!

जयराज- साले तुम लातों के bhooth,baaton से नहीं maanoge.right......

अभी जयराज कुछ करते उससे पहले अवंतिका उनके सामने आ गयी...

अवंतिका- uncle...mamaji सच कह रहे hain.....inhe विक्रम के बारे में सच में नहीं maalom.ye तोह बाहर गए हुए the..shaam को hi लौटे hain...aur uncle,aap विक्रम को तोह जानते hi hain,uska कुछ bigadna,hamare बस की बात नहीं hai.....uski ताक़त और उसका dimaag,hum सब से कहीं आगे है......

जयराज को अवंतिका की बात सही लगी....

जयराज- ये सच hi हो तोह ाचा है SATISH....warna तुझे ऐसी मौत दूंगा की अगली बार पैदा होने से भी डरेगा.....

ये बोल जयराज और उसके दोनों दोस्त पलट गए पर हमारे सतीश भाई साहब और कुत्ते में ज़्यादा फर्क तोह था nahi,bina भोंके इनका खाना जो हज़म नहीं होता.......

सतीश- तू जानता नहीं तूने किसके घर में घुसके उससे धमकाया hai...tujhe ये बोहोत मेहेंगा पड़ेगा....

JAIRAJ-lagta है तूने मेरी बात ध्यान से सुनी nahi...maine कहा था ना की तुम जैसो की औकाद सिर्फ तभी तक है जब तक हम जैसे लोग अपनी औकाद में नहीं aajaate.....chal,tujhe दूसरे तरीके से समझाता हूँ.....

अपने टॉपमोस्ट कनेक्शंस में से किसीको भी फ़ोन लगा और बता की यहाँ क्या हो रहा hai???chal भाई जल्दी kar,mere पास टाइम नहीं है....

सतीश ने अपना मोबाइल निकला और C.M को फ़ोन लगाया..

जयराज ने सतीश के हाथ से उसका मोबाइल ले लिया....

C.M- हाँ सतीश bhai,aaj हमे कैसे याद कर लिया???

जयराज- जयराज बोल रहा हूँ......

C.M- अरे जयराज सर aap...aur ये तोह सतीश अरोरा का नंबर है naa..aap इस नंबर से कैसे?

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जयराज- जी C.M sahaab.wo क्या है ना की सतीश साहब मुझे मारना चाहते hain..ab आप hi bataiye,mai क्या करू???

सतीश- WHATTTT!!!!uska दिमाग ख़राब हो गया है kya!!!!JAIRAJ जी आप उससे उदा dijiye,yahan मई सब सम्हाल lunga.....ya फिर एक काम करते hain,mai कमिशनर से उसके एनकाउंटर ऑर्डर्स निकल देता हूँ......

कमिशनर की बात सुनकर सतीश का मुँह खुल गया..

जयराज- चलिए मई देखता hun,kya करना है....

जयराज ने कॉल काट दिया...

अगर मुझे पता चला की मेरा बीटा तेरे पास hai,ya तूने उससे कोई नुक्सान पहुँचाया hai,toh C.M ने जो भी कहा hai,usse सच होने में वक़्त नहीं लगेगा....

जयराज ने सतीश को उसका मोबाइल पकड़ाया और निकल gaya.uske पीछे पीछे उसके सारे आदमी भी चले गए...........

बैक तो हीरो:-

संपूर्ण विनाशते अनुविधेय......

BOOOOOMMMMMMMMMMM...............

ये धमाका मेरे दिमाग में हुआ tha......meri आँख एक झटके में खुल गयी.......

मई लम्बी लम्बी साँसें ले रहा tha....mujhe कुछ वक़्त लगा ये समझने के लिए की मई ज़िंदा hun......par जैसे hi मैंने सामने देखा....

MAI-ohhhh teriiiiiiiiiii.ye सब क्या है.....

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?साला मई कहीं ऑपरेशन थिएटर में तोह नहीं hun.........nahi nahi,operation थिएटर ऐसा थोड़ी न होता hai....fir ये sab,aur ये jagah,saala ये ये क्या रहा है......

हुआ ये की जैसे hi मैंने सामने dekha,toh पाया की मई पूरा नंगा hun.bas मेरे वैस्ट के नीचे का एरिया एक कपडे से ढाका हुआ था.....

पर मेरे शॉक होने का रीज़न ये था की मेरे पुरे शरीर पर नुकीली सुइयां घुसी हुई thi....par मुझे दर्द बिलकुल भी नहीं हो रहा था......

मैंने अपना चेहरा अपनी दायी और घुमाया तोह मई फिर से चौंक gaya.mere पास hi एक बोहोत hi खूबसूरत लड़की बैठी हुई thi....par मेरे चौंकने की वजह दो thi.ek तोह उसका चेहरा और दूसरा उसके पहने हुए कपडे the....uska चेहरा किसीसे काफी मिलता था और जिस तरह के कपडे उसने पहने the,aise कपडे तोह पौराणिक कथाओं में राजकुमारियां पहना करती थी.......

पर एक बात और thi.jaise मई उससे देखकर सुरप्रीसेड tha,waise hi उसके चेहरे पर भी सुर्प्रिसिंग एक्सप्रेशंस थे....

मई- hello...ma'am.....aap कौन hai.aur मई कहाँ हूँ.....

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मेरी आवाज़ सुनकर वो लड़की होश में आयी......

लड़की- निश्चिन्त rahiye.....aap जहाँ भी hain,bilkul सुरक्षित हैं.......

आह्ह्ह्हह्ह...........

मई उठने को हुआ तोह मेरे शरीर में एक दर्द की लहार दौड़ गयी.....

लड़की- आप उठिये mat.abhi आपका शरीर कमज़ोर hai.........aap जितनी ताकत lagayenge,aapko उतना कष्ट होगा.....

मई- दर्द तोह होगा hi naa,ye सुइयां जो घुसा राखी हैं आपने मेरे बॉडी में.......

लड़की- इन सुइयों ने hi आपके शरीर में उठने वाले दर्द को रोक कर रखा हुआ hai....agar इन्हे निकल दिया तोह आप अपने शरीर की पीड़ा सेह नहीं पाएंगे.....

मई- ये कैसा ट्रीटमेंट hai!!!!khair जो भी ho,aap एक काम karen,mujhe हरिगरॉक काढ़ा पीला dijiye,usse मई तुरंत ठीक हो जाऊंगा..

अगर मई ठीक होता तोह मई खुद बना leta....aap एक काम kijiye,mai आपको सभी चीज़ो की लिस्ट दे देता hun,aap ले aayiye..arre यार ये मई क्या बोल रहा hun,wo सब सामान मार्किट में थोड़ी न मिलता है...

लड़की- जिस मंत्र का आपने प्रयोग किया tha,uski वजह से अभी आपके शरीर पर कोई भी काढ़ा काम नहीं करेगा....

मई- oh........par इस इलाज से मई कब तक ठीक हो जाऊंगा.....

लड़की- कमसेकम एक महीना........

मई- kyaaaaaa................itne din.........fir मई अपने घर में क्या kahunga.........waise घर से याद aaya,mai कितने वक़्त से यहाँ हूँ.....!!!!

लड़की- 24 घंटों से...

मई- अरे मेरे घरवालों ने तोह अब तक पुरे मुंबई को सर पर उठा लिया hoga....abhi हम मुंबई से कितनी दूर हैं.....

लड़की मुस्कुराते हुए- बोहोत दूर.......

मई- नहीं nahi,aap मुझे मेरे घर छोड़ dijiye.baaki की ट्रीटमेंट मई वहीँ ले लूंगा.......

लड़की- इस इलाज को बीच में रोका नहीं जाता अन्यथा ये निष्प्रभाव हो जाएगा.....

मई- अरे yaar,kahan फास gaya.....koi तोह तरीका होगा!!!!!!

लड़की- एक तरीका hai,jisse आप तुरंत ठीक हो जाएंगे....

मई- तोह आपने मेरा वही इलाज क्यों नहीं kiya.......in सब सुइयों को हटाइये और तुरंत ठीक करने वाला इलाज कीजिये.....

लड़की- उसके लिए भी इन सुइयों की hi ज़रुरत padegi.......bas फर्क ये होगा की अभी ये सुइयां आपके शरीर के ऊपर चुभी हुई hai,us इलाज के लिए आपको ये सुइयां अपने शरीर के अंदर घुसनी hogi.....puri andar..isse ये सुइयां आपके शशरीर की साड़ी कोशिकाओं को कुछ hi देर में ठीक कर देंगी....

पर इस क्रिया में आपको असहनीय दर्द hoga....shayad आप बर्दाष्त न कर paayen.....aap पर बेहोशी भी चा सकती hai..par अगर आप बेहोश हुए तोह सुइयां बाहर आ जाएँगी और आप ठीक नहीं हो पाएंगे.....

मई- ये दर्द उस दर्द के आगे कुछ नहीं होगा जो इस वक़्त मेरे parents,mere दोस्त महसूस कर रहे honge......mai तैयार hun......aap शुरू करें........

लड़की- जैसी आपकी मर्ज़ी........

उस लड़की ने अपने हाथ आगे kiye..mere ठीक ऊपर मेरे hi हाइट के साइज की स्टील की परत बन gayi......us लड़की ने अपने हाथ नीचे कर दिए...

AAAAAHHHHHHHHH.UMMMMMMMMMMMMM

उस लड़की के हाथ नीचे करते hi वो स्टील की परत तेज़ी से नीचे आयी और मेरे ऊपर गिर gayi.....jitni भी सुइयां थी सब एक झटके में मेरे अंदर चली गयी.....

मेरी आँखें एक दम बड़ी हो gayi....dard इतना ज़्यादा था की मुझे kya,meri आत्मा तक दर्द से हिल gayi...mere आँखों से धार धार आंसूं निकलने lage........dard इतना ज़्यादा था की मेरी आँखें बंद होने lagi........mai बेहोश होने लगा...

पर तभी अचानक मेरे आँखों के आगे माँ का रोटा हुआ चेहरा आ gaya..maine एक झटके में अपनी आँखें खोल di......aur जबड़ा भींचे दर्द को सेहेन करने की कोशिश करने लगा......

कुछ देर तक मई ऐसे hi दर्द सेहत बीएड पर पड़ा रहा पर धीरे धीरे मेरा दर्द काम होने laga.kuch 10 मिनट के बाद मई नार्मल हो gaya.mai एक झटके में उठ कर बैठ gaya.ab मुझे बिलकुल भी दर्द नहीं हो रहा था......

मैंने सामने देखा तोह वो लड़की कड़ी मुस्कुरा रही thi.mai तोह एक पल के लिए उसकी ख़ूबसूरती में खो hi गया...

लड़की- awishwaniya....bohot काम लोग हैं जो इस दर्द को सेह पाते हैं.....

मई उसकी आवाज़ सुनकर होश में आया.....

मई- thanks,meri इतनी हेल्प करने के लिए......

लड़की- ये तोह मेरा फ़र्ज़ था...

मई- कमाल hai.....ek जैसी सूरत पर सीरत कितनी अलग.....

लड़की- एक जैसी surat!!!!kiski बात कर रहे हैं......!!!

MAI-hai एक खूबसूरत bala....AVANTIKA..agar आप दोनों को कोई साथ देख ले तोह उससे लगेगा आप दोनों सगी बेहेने ho....waise एक बात पूछूं!!!!

लड़की- आपको मुझसे कुछ भी पूछने के लिए इजाज़त की ज़रुरत नहीं है....

मई- आप कौन है और हम अभी कहाँ है!!!!

लगकी- मेरा नाम अलेसेन्द्र है और इस वक़्त आप धरती पर नहीं इस्ला गृह में हैं.......

आज के लिए इतना HI......

आपका अपना V...J....
 
अब तक आपने पढ़ा की जयराज सतीश को वार्निंग देकर निकल जाता HAI....WAHIN दूसरी तरफ विक्रम को इस्ला की राजकुमारी अलेसेन्द्र ठीक कर देती है.....

अब आगे:-

CHAPTER-1:-

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )

अपडेट-46:-

सतीश- hello dad......mujhe लगता है मैडोक्स ने अपना काम कर diya.......VIKRAM कल से लापता है.......

गुलशन- क्या खबर सुनाई है bete......waah,maza आ gaya....mai मैडोक्स को खुद फ़ोन करके थैंक्स कहता हूँ......

सतीश- ठीक है dad..mai रखता हूँ....

चटकककहहहहहह......

सतीश कॉल डिसकनेक्ट कर पलटा hi था की उसके गालो पर पांच उँगलियों के निशाँ चाप गए....

और जैसे hi सतीश ने सामने वाले का चेहरा dekha,uski आँखें हैरत से फैले गयी.....

सतीश- ये क्या हरकत है ANUKRITI.....tumhara दिमाग तोह ठीक hai...tum अपने पति पर कैसे हाथ उठा सकती हो.......

अनुकृति- पति पर nahi,maine एक खुनी पर हाथ उठाया hai.....chiii,mujhe तोह तुम जैसे इंसान को पति बोलने में भी शर्म आती है....

सतीश और अनुकृति का बैडरूम हॉल के साइड में hi tha...ANUKRITI ने ये बात इतनी ज़ोर से बोली की हॉल में बैठे वाणी और बाकी सिस्टर्स ने सुन li.....sabhi दौड़ते हुए कमरे में आ gaye....apne बचो को सामने देख सतीश नर्वस हो गया....

सतीश धीरे se-is बारे में बाद में बात करते हैं अनु.....

अनुकृति- kyun,gandagi फैला सकते ho.....par दिखा नहीं sakte.....kaash की वो भाईसाहब जो कुछ देर पहले घर आये the,maine उनके सामने तुम्हारे लिए हाथ न फैलाये hote............tumhe जीने का कोई हक़ नहीं.....

सतीश चिल्ला के- तुम होश में तोह ho???kya बोले जा रही हो...

अनुकृति- चिल्लाओ mat.......aur मैंने कोई गलत बात नहीं kahi....dusro की जान लेने वाले को जीने का कोई हक़ नहीं...

वाणी- माँ आप ये क्या बोले जा रही....

चत्ताककककहहहहह.

अनुकृति- chup.bilkul chup....aaj तक मई तेरी साड़ी बदमाशियों को तेरी नादानी समझ कर माफ़ करती rahi.....tujhe क्या लगता hai,mujhe नहीं पता की कैसे तूने रियांश और देवांश के कान कैसे भरे थे उस लड़के के khilaaf...mai तोह बस दोनों के जाने का वेट कर रही thi.....par इससे पहले की मई तुझसे कुछ पूछती ये सब हो गया......

तू भी पूरी अपने बाप पर गयी hai...apne आप को सबसे ऊपर समझती hai........kis बात का घमंड है tujhe,zara बता toh.na तू पढाई में अछि hai,na hi किसी और चीज़ me..tere शरीर पर जो कपडे हैं naa,wo भी तेरे कमाए पैसो के नहीं hain......fir कैसे तू किसीसे भी आगे हुई!!!!!!

बस बोहोत hua...ab मई इस घर में और नहीं रह sakti..mai अपने मइके जा रही हूँ.....

अनुकृति की बात सुन सतीश को एक और झटका laga.shaadi के इतने साल बाद आज पहली बार अनुकृति ने मइके जाने की बात कही थी.....

सतीश- अनु plzzzz,meri बात तोह सुनो....

सतीश ने जैसे hi अनुकृति का हाथ pakda,ANUKRITI ने अपना हाथ झटक दिया....

अनुकृति- दूर रहो mujhse....ye जानने के बाद की तुम एक खुनी ho,darinde ho,mai नहीं चाहती की तुम मुझे हाथ भी लगाओ.....

SATISH,AVANTIKA सबने अनुकृति को रोकने की बोहोत कोशिश की पर वो नहीं रुकी और अपना सामान पैक कर कार में बैठ निकल गयी.....

वही दूसरी तरफ गुलशनजी ने मैडोक्स का नंबर डायल किया पर मैडोक्स का नंबर नॉट रचाबळे आया......

गुलशनजी- बाद में सामने से मिलके उनका शुक्रिया अदा कर दूंगा........

बैक तो हीरो:-

मई- आपका बोहोत बोहोत shukriya,aaj आपकी वजह से hi मई ज़िंदा हूँ.....

अलेक्सांद्र- आपको शुक्रिया कहने की ज़रुरत नहीं hai....ye मेरा सौभाग्य है की मई आपके कुछ काम आयी......

मई- एक राजकुमारी के लिए इतना सरल hona,bohot बड़ी बात है.....

अलेक्सांद्र- राजकुमारी में भाग्य से बानी hun....aur जो भाग्य से मिला ho,us चीज़ पे कैसा घमंड!!!!

मई- waah.par ये बात भी अक्सर लोग भूल जाते हैं.....

अलेक्सांद्र- हर किसी की सोच अलग होती hai...kisiko अपने म्हणत पर घमंड होता hai,toh किसीको अपने भाग्य पर....

मई- पर जिस व्यक्ति को अपने भाग्य पर या फिर अपने म्हणत पर भी घमंड नहीं होता उसके सामने सर अपने आप झुक जाता है...

ये बोलकर मई अलेसेन्द्र के सामने झुक गया...

अलेसेन्द्र- अरे ये आप क्या कर रहे hain....!!!!hamare सामने झुक कर आप हमें पाप का भागिदार मत बनाइये.....

अलेसेन्द्र ने मुझे मेरे कंधो से पकड़ कर उठा लिया.....

मई- एक सवाल का जवाब देंगी!!!!

अलेसेन्द्र- मैंने आपको पहले hi बोलै था की आप मुझसे कुछ भी पूछ सकते हैं....

MAI-jahan मेरी लड़ाई हो रही थी, आप वहां कैसे पहुँच गयी?

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?.....और आपने मेरी जान क्यों बचायी?

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?

अलेसेन्द्र- मेरी नज़र आप्पे आपकी लड़ाई की शुरुआत से thi...aur मैंने आपको इसीलिए बचाया क्यूंकि मुझे ऐसा करने के लिए ऐसा कहा गया था....

अब आप ये मत पूछ लीजियेगा की किसके कहने पर मैंने आपकी जान बचायी thi.sahi समय आने पर ये आपको अपने आप पता चल जाएगा......

मई- नहीं puchunga....aap ऐसा hi कुछ जवाब dengi,iska मुझे अंदाज़ा tha.....par एक बात bataiye,mai आपका दिमाग क्यों नहीं पढ़ पा रहा हूँ!!!

अलेक्सांद्र- इस्ला की राजकुमारी का दिमाग पढ़ना आसान नहीं hai.....is पुरे ब्रम्हांड में सिर्फ एक hi ऐसा शक्श है जो मेरा दिमाग पढ़ पाया hai.par वो भी सिर्फ इसीलिए क्यूंकि मेरे मस्तिष्क और ह्रदय ने उससे ऐसा करने की इजाज़त दी थी....

और अभी तोह आप खुद से hi अनजान hai.aise में मेरे दिमाग को पढ़ना आपके लिए संभव nahi...jis दिन आप मेरे दिमाग को पढ़ने के लायक हो jayenge,mai आपको ऐसा करने की इजाज़त दे दूंगी....

मई- अरे बाप re.....ek सिंपल से सवाल का इतना टेढ़ा मेधा answer.....rehne dijiye,nahi पढ़ना मुझे आपका दिमाग.....

अलेसेन्द्र मेरी बातों सुन कर है दी..

अलेसेन्द्र- ये जो आप बीच बीच में किसी अन्य भाषा का प्रोयग करते hai,sunne में काफी दिलचस्प hai..kya ये भाषा मई आपसे ले सकती हूँ...

मई- ज़रूर....

मैंने अपना हाथ आगे कर diya.ALESENDRA ने मेरे हाथ को पकड़ लिया और अपनी आँखें बंद कर इंग्लिश सिखने लगी...

आअह्हह्ह्ह्हह.............

अभी अलेसेन्द्र को मेरा हाथ पकडे एक सेक् भी नहीं हुआ था की उससे एक ज़ोर का झटका लगा और वो पीछे की तरफ गिर गयी...

मई तुरंत उसके पास गया और उससे उठा liya......par ये देखकर मुझे राहत मिली की उससे कोई चोट नहीं आयी thi...maine उससे सहारा देकर खड़ा किया......

मई- आप ठीक तोह hain......aur ये सब क्या था???

अलेसेन्द्र- मई आपके मस्तिष्क से जुड़ नहीं paayi.........mai इस लायक नहीं की आपके अंदर से कोई hunar,koi शिस्क्षा बहार निकल sakun.......par कोई बात nahi......mai पृथ्वी के किसी भी इंसान से जुड़कर ये भाषा सिख जाउंगी.....

मई- माफ़ kijiyega,mai आपके काम नहीं आ saka.....par अब मुझे चलना chahiye.....already काफी लेट हो चूका hai.....pata नहीं मेरे घरवालों का क्या हाल हो रहा होगा.....

अलेक्सांद्र- ज़रूर.......

अलेक्सांद्र ने अपने हाथ आगे kiye,mere सामने एक वर्ल्ड दूर खुल गया.

अलेसेन्द्र- जाइये.....

मई- फिर मुलाकात hogi....maine अलेक्सांद्र से हाथ milaya.....usse मेरा ऐसा करना अजीब लगा...

मई- हमारे यहाँ hi और bye कहना का ये भी एक तरीका है.....

अलेसेन्द्र हलके से मुस्कुरा दी.....

अलेक्सांद्र ने अपना हाथ मेरी तरफ ghumaya,mere शरीर पर कपडे आ गए......

मई- ये क्या है बे......

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अलेसेन्द्र- पसंद आया naa!!!ye हमारे शाही कपडे हैं.......

मई- आपके गृह को एक कस्टम डिज़ाइनर की सख्त ज़रुरत है?

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अलेसेन्द्र- वो क्या होता है?

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मई- जब आप किसी पृथ्वी वासी से इंग्लिश का नॉलेज लेंगी तोह आपको अपने आप पता चल जाएगा....

मई- फिर मुलाकात होगी......

ये बोल मई उस वर्ल्ड दूर में घुस गया.....

वर्ल्ड दूर के दूसरी तरफ जहाँ मई इस वक़्त पहुंचा tha,ye मेरे घर के पास वाला गार्डन hi था जहाँ रोज़ मॉर्निंग में हम तीन दोस्त एक्सरसाइज करते hain....abhi रात का वक़्त tha.garden बंद हो चूका था....

मैंने पलट कर देखा तोह मुझे वर्ल्ड दूर के दूसरी तरफ अलेसेन्द्र मुस्कुराते हुए dikhi.....maine उससे वेव kiya.....thik उसी वक़्त वर्ल्ड दूर बंद हो गया....

अलेसेन्द्र- आज कुदरत हमें एक

नया करिश्मा दिखा गयी...

सामने से तू गया,

याद हमे किसी और की आ गयी...

मई- यार यहाँ तोह रात हो गयी hai....par टाइम क्या हुआ hai.....jitna भी हुआ ho,mujhe गायब हुए कमसेकम 30 घंटे तोह हो hi गए honge......pata नहीं घर में कैसा माहौल hoga....chal beta,jaldi चल...

मई चलते हुए गार्डन के दीवाल के पास आ gaya.ek जम्प और मई दीवाल के दूसरी तरफ tha.mai दौड़ते हुए (नार्मल स्पीड ) घर की तरफ निकल गया......

इन हॉस्पिटल:-

A/MOM- MINU,kab तक यूँही बैठी रहेगी, कल से तूने कुछ भी नहीं खाया hai,please कुछ khaale....tu बिलकुल टेंशन मत le,dekhna भाई साहब हमारे विक्की को कहीं से भी ढूंढ निकालेंगे....

ये बोलते वक़्त नेहा के आँखों से आंसू निकल आये....

पर मीनू चुपचाप एक तक शुन्य को घूरती हुई बैठी रही...

A/MOM- KAVITA,tune भी कल से कुछ नहीं khaaya,please yaar,koi तोह मेरी बात samjho...VICKY और रोनित जब हमारे सामने आएंगे तोह मुझे बोलेंगे की मैंने उनकी मॉम्स का ख्याल नहीं रखा......

पर नेहा की बात का दोनों पर कोई असर नहीं pada.padta भी kaise.ek का बीटा बेहोश पड़ा हुआ tha,aur दूसरे का laapata,aise में दोनों कैसे नार्मल रह सकती हैं....

नेहा- भाई साहब आ गए.....

नेहा की बात सुन मीनू ने झट से अपना चेहरे uthaya,saamne से जयराज आकाश और हरप्रीत आ रहे the....MINU भगति हुई गयी और जयराज के सामने कड़ी हो गयी......

मीनू- कहाँ है मेरा बीटा.....

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???आपके साथ नहीं आया क्या!!!!!!

मीनू अपने चेहरे पर एक आस एक उम्मीद लिए बोली......

पर जयराज कुछ नहीं बोले बस चेहरा नीचे कर लिया....

जयराज के सर नीचे करते hi मीनू की उम्मीद भी टूट गयी......

मीनू- ऐसे सर को नीचे मत jhukaiye...mai कुछ नहीं jaanti,mujhe हर हाल में मेरा बीटा chahiye.....agar मुझे मेरा बीटा नहीं मिला तोह मई भी अपनी जान दे दूंगी....

जयराज- मीनऊउउउउउ.................

जयराज इतने ज़ोर से चीखे की मीनू के साथ साथ वहां खड़े सब दर गए......

जयराज- या क्या मेरा बीटा मेरा बीटा बोल रही हो tum...kya वो मेरा बीटा नहीं hai......ya सिर्फ इसीलिए की तुम्हारे आँखों में आंसू है और मेरे nahi,toh इसका मतलब की तुम उससे मुझसे ज़्यादा प्यार करती हो......

आंसू बहाना सब से आसान होता है MINU...kyunki ये लाचारी की निशानी hai.....bas रो दिए और कहानी khatm.....par तुम नहीं samjhogi,maa hona,ek बाप के दर्द को नहीं समझ sakti......kal जब से पता चला है की मेरा बीटा गायब hai,mai एक सेकंड के लिए भी शांत नहीं baitha.....gali गली घूम रहा हूँ mai...jahan भी मेरे बेटे की मिलने की ज़रा सी भी उम्मीद hi,har उस जगह पर जा चूका हूँ mai......tumhe ज़रा भी अंदाज़ा है की जब बीटा गायब ho,aur आप उससे हर जगह पागलों की तरह ढूंढ रहे hon,aur फिर भी वो ना mile,toh खुदको समझा कर फिर से कोशिश करने के लिए कितनी हिम्मत लगती hai....pichle 24 घंटों में 24 मौत मारा हूँ mai...mere दिल का हाल क्या है ये सिर्फ मई hi जानता hun....par तुम नहीं समझोगी.....

ये बोल जयराज तेज़ी से वापस बाहर की तरफ निकल गए....

मीनू भी एक तक अपने पति को जाते देखती रही....

हरप्रीत- आकाश, तू जयराज के पीछे जा.

आकाश तेज़ी से जयराज जिस तरफ गए the,us तरफ चला गया.....

हरप्रीत- bhabhi,aap टेंशन मत lo.humne कमिश्नर से लेकर C.M तक को विक्की की फोटो दे दी hai....pure स्टेट में नाकाबंदी जार दी गयी गए

Mhai.....police हर तरफ हमारे विक्की को ढूंढ रही hai....bhabhi यकीं karo,hamare विक्की को कुछ नहीं होगा, वो ज़रूर मिल जाएगा...

हरप्रीत की बात सुन मीनू को थोड़ा हौसला आया पर साथ में वो ये सोच कर दुखी भी हो गयी की आज अनजाने में hi sahi,usne अपने पति के दिल को ठेस पहुंचाई है....

हरप्रीत नेहा से- bhabhi,ab रोनित कैसा है?

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नेहा- अभी भी बेहोश hai.par डॉक्टर्स कह रहे थे की जल्दी hi उससे होश आ जाएगा......

हरप्रीत- थैंक god...waise भाभी आप सब तोह यहीं hain,fir अंदर रूम में कौन है?

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नेहा- अंजलि hai...wo तोह एक सेकंड के किये भी रोनित से दूर नहीं गयी है......

हरप्रीत- मई एक बार रोनित को देख कर आता hun....HARPREET रोनित के रूम की तरफ चल दिए....

बैक तो हीरो:-

MAI-uncle गेट खोलिये.....

मैंने गेट माइक पर बोलै....

गार्ड अंकल अंदर मॉनिटर रूम में the.....awaaz सुनकर जैसे hi उन्होंने स्क्रीन पर मुझे dekha,wo झट से बाहर आये और गेट खोल दिया....

गार्ड- विक्की बाबा aap!!!!aap कहाँ चले गए थे?

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?और ये आपने क्या पहना हुआ है!!!!

दरअसल अलेसेन्द्र मैडम के हिसाब से जो शाही कपडे हैं उससे हमारी दुनिया में बाथरोब बोलते hain.....ab ये पेहेन के घूमूँगा तोह लोग सवाल तोह करेंगे hi....

मई- शाही कपडे....

गार्ड- क्या!!!!!

मई- कुछ नहीं uncle....aap ये बताईये की माँ डैड कहाँ hai???andar hi है क्या???

गार्ड- नहीं baba.wo रोनित बाबा बेहोश है ना तोह सब हॉस्पिटल में हैं.....

हॉस्पिटल सुनकर मुझे झटका लगा क्यूंकि मैंने तोह रोनित के चारो तरफ शील्ड बिछा दिया tha,fir उससे चोट कैसे लग gayi....ye सोचते सोचते मई घर अंदर आ gaya.....maine ड्रेस चेंज की और अपनी बाइक निकलकर हॉस्पिटल की तरफ निकल गया.....

कपडे पेहेनते वक़्त मैंने अपनी सेंसेस से पता लगा लिया था की रोनित हॉस्पिटल में क्यों hai...aur मेरे जाने के बाद क्या क्या हुआ.

एक तरफ जहाँ मई खुश था ये जानकार की रोनित बस शॉक की वजह से बेहोश हुआ है वहीँ माँ और डैड की हालत का पता चलने पर मुझे बोहोत दुःख हुआ था.......

पर अब जो हुआ सो hua,mai तेज़ी से बाइक भागते हुए हॉस्पिटल की तरफ निकल पड़ा....

बैक तो हॉस्पिटल:-

आकाश अंकल- यार तू कबसे भाभीजी से नाराज़ होने लगा?

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इस वक़्त डैड और आकाश अंकल होपितल के ग्राउंड फ्लोर के लॉबी में खड़े थे.....

डैड- मई नाराज़ नहीं हूँ yaar...bas अपसेट hun......beta उसका नहीं हमारा खोया hai.....mai जानता हूँ और मेरा रब जानता hai,is वक़्त मुझे कैसा लग रहा है.......!!!!

आकाश- oye,wo मेरा भी बीटा hai......jitna दुःख तुझे hai,utna मुझे भी hai.....par मुझे रब पर पूरा भरोसा hai.....dekhna रब हमारे बचे को हर तकलीफ से बचा कर ले आगेया.......

आपकी दुआ क़ुबूल हुई अंकल........

आवाज़ सुन जैसे hi डैड और अंकल palte,unki आँखें हैरत से फैले gayi......unki ख़ुशी का ठिकाना नहीं था.....

मई जो उनके पीछे मुस्कुराता हुआ खड़ा था.....

डैड दौड़ कर आये और मेरे गले लग gaye......aur दबी हुई आवाज़ में रोने लगे.......

उनके रोने की शिद्दत से मेरे लिए उनके प्यार का अंदाज़ा लगाया जा सकता tha....log तोह बेकार hi माँ के प्यार का बोलबाला करते hain..par एक बाप की chaahat,uski shiddat,uske समर्पण जितनी पवित्रता किसी भी रिश्ते में नहीं मिल सकती....

मैंने भी डैड को हुग कर liya.koshish तोह बोहोत ki,par मेरे भी आँखों से आंसू निकल आये.....

आकाश- ोये khoteya,hame भी गले लगा ले yaar.bhale hi रोया nahi,par तकलीफ मुझे भी तेरे बाप जितनी hi हुई थी.....

मई डैड से अलग हुआ और आकाश अंकल के गले लग गया...

मई- मुझे पता है uncle.aur आप कहीं से भी मेरे लिए मेरे पेरेंट्स से काम नहीं हैं.......

कुछ देर तक यूँही सेवंती माहौल रहा पर फिर आयी मुद्दे की बात.......

डैड- beta,tu कहाँ गायब हो गया tha....aur dekh,sach batana,mujhe मालुम है की तू अपनी प्रोब्लेम्स खुद हैंडल कर सकता hai,par मेरा भी ये जानना ज़रूरी है....

मई- ओफ़्कौर्से डैड........

मैंने घर पर जो बताने का सोचा tha,kuch सच और कुछ झूठ वो बताना शुरू किया..

मई- dad,yaad है उस शाम को हमें इन्विते करने एक लड़का आया tha..MADDOX...ye सब किया धरा उसी का है.

मेरी बात सुन डैड और अंकल शॉकेड हो गए....

डैड- पर उसकी तुझसे क्या दुश्मनी.....

मई- वो तोह पता नहीं dad..par उसने मुझे और रोनित दोनों को टारगेट किया tha.....kal शाम को मई रोनित के घर जाने के लिए निकला hi था की माँ की बात से मुझे याद आया की रोनित तोह स्कूल में हैमै अपने रूम पहुंचा hi था की मुझे एक कॉल आया.

ये कॉल मैडोक्स का tha.....usne मुझे बोलै की अगर रोनित की ज़िन्दगी बचाना चाहते हो तोह इस पते पर आ jao.mom को बताने का टाइम नहीं था तोह उन्हें बिन बताये hi मई तुरंत वहां के लिए nikla...jahan मैडोक्स ने मुझे बुलाया tha,ye उसके डैड का hi कोई गोडाउन था...

मई जब वहां पहुंचा तोह देखा रोनित एक चेयर से बंधा हुआ tha..par उससे कोई चोट नहीं आयी थी...... मेरा ध्यान रोनित की तरफ था इसीलिए मैंने आजु बाजू ध्यान नहीं दिया...

मई उससे खोलने के लिए आगे बढ़ा hi था की इतने में पीछे से मेरे सर पर किसीने रोड मार दिया....... मुझे रोड पड़ते hi रोनित की चीख निकल गयी और वो बेहोश हो gaya....maine पलट कर देखा तोह मैडोक्स हाथ में रोड लिए खड़ा मुस्कुरा रहा था.....

इससे आगे मई कुछ देख नहीं पाया और बेहोश हो gaya..meri बेहोशी आज दोपहर को tuti...maine देखा मई किसी अलग कोठरी टाइप जगह में बैठा हुआ tha.par मेरे हाथ पाऊँ नहीं बंधे थे...

मेरे चारो तरफ बोहोत से लोग खड़े the..shayad उन्हें लगा की इतने लोगों के सामने मई कुछ नहीं कर पाउँगा इसीलिए उन्होंने मेरे हाथ पाऊँ नहीं बांधे थे.....

मेरे सर में तब भी काफी दर्द था पर मैंने अपने दर्द को कण्ट्रोल किया और भीड़ गया une..kuch hi देर में आधे से ज़्यादा बन्दे गिर चुके थे और बाकी के आधे भाग गए the.bhaagne वालों में से एक मैडोक्स भी था.....

फिर क्या tha,wahin बहार एक बाइक कड़ी thi....shayad उन्ही में से किसीकी thi.mai उसपे बैठा और घर निकल gaya.ghar पर पता चला की आप सब यहाँ है इसीलिए मई भी यहीं आ गया......

मेरे सर पर रोड से मारा गया था ये जानकार डैड मेरे सर के पीछे हाथ लगाकर देखने लगे.....

मई- डैड कुछ नहीं hai..aapko मेरा टॉनिक याद है naa,uski एक शीशी मेरे पास हमेशा रहती hai..maine उससे वहां से निकलते वक़्त hi पिली thi.....thodi देर में hi मेरा घाव भर गया था.....

(ये सब मैंने इसीलिए बोलै क्यूंकि मुझे ये पता लगाना था की मैडोक्स भी मेरी hi तरह बच तोह नहीं गया..)

डैड- उस साले बलबीर के लड़के की तोह...

डैड अपना मोबाइल निकलकर किसीको कॉल करने लगे....

मई- dad,dad...ye सब बाद में कर lena,abhi माँ के पास चलते hain.aur फिर मुझे रोनित को भी तोह देखना है....

डैड- हाँ yaar,jaldi chal,teri माँ का तोह सबसे ज़्यादा बुरा हाल है...

हम लिफ्ट में घुस gaye.........aur कुछ hi देर में हम माँ वाले फ्लोर पर थे......

मई डैड के पीछे चल रहा tha.saamne से कोई भी मुझे नहीं देख सकता था.....

डैड को आते देख माँ दौड़ कर उनके गले लग गयी..

माँ- मुझे माफ़ कर dijiye..mai ग़ुस्से में नजाने क्या क्या बोल गयी......

डैड- अगर नाराज़ होने के बाद आप यूँही हमसे हर बार गले lagengi,toh आप जितनी बार चाहे उतनी बार नाराज़ हो सकती हैं.....

डैड की बात सुन माँ ने उनकी तरफ dekha....par अब डैड के चेहरे पर दर्द नहीं ख़ुशी झलक रही थी जिससे देखकर माँ सुरप्रीसेड हो गयी........

माँ- ये आपको अचानक क्या हुआ?

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डैड- तुम्हारे लिए एक सरप्राइज hai...dekhogi!!!!!

माँ ने कुछ कहा नहीं बस आँखों में सवाल लिए डैड की तरफ देखने लगी....

डैड ने माँ को कंधे से पकड़ हल्का साइड कर दिया.....

विकीययययय........

मुझे देख माँ मेरा नाम चीखते हुए मेरे गले लग गयी......

वहां बैठे सभी दौड़ते हुए हमारे तरफ आये और मुझे अपने सामने देख सभी के आँख में ख़ुशी के आंसू आ गए.....

माँ- कहाँ चला गया था tu........tujhe एक पल के लिए भी अपनी माँ का ख्याल नहीं आया.....

मई कुछ देर तक माँ को मनाता raha..fir बारी बारी सभी ने मुझसे शामे शिकायत ki.NEHA आंटी ने अस उसुअल मेरे कान पकडे...

फिर आखिर में ये सवाल आया की मई कहाँ चला गया था जिसका जवाब डैड ने वही दिया जो मैंने उन्हें बताया था बस हमला करने वाले को गुमनाम बताया.....

मई- अब आप लोगों के सवाल ख़त्म हो गए तोह मई रोनित से मिल आऊं.....

रोनित नाम सुनते hi कविता आंटी जो मुझे सही सलामत देखकर एक पल के लिए अपने बेटे को भूल hi गयी thi,unke आँखों में फिर से आंसू आ गए जो मैंने देख लिया...

मई- aunty,RONIT को कुछ नहीं हुआ hai....aap रोना बंद करिये वर्ण मई आपसे बात नहीं करूँगा..

आंटी- जिसका तेरे जैसा दोस्त हो उससे कुछ हो भी नहीं सकता beta.....aur बात मत करके तोह dikha,haath पेअर तोड़ दूंगी समझा..

मैंने आंटी को साइड से हुग किया और रूम के अंदर चला गया....

मई- इतने प्यार से मत dekh..kahin उसका दिल धड़कना न बंद कर दे....

मेरी आवाज़ सुन जैसे hi अंजलि palti,mujhe अपने सामने देख दौड़ कर आयी और मेरे लग गयी.....

मई- बस kar.......aur अपना प्यार इस गधे के लिए बचा कर रख.......

अंजलि- चुप kar.....kuch भी बोलता है.....

मई- hahaha......dekhte hai,dekhte हैं....

अरे waah,hamare आते hi रोनित को होश आ गया....

मेरी बात सुन अंजलि तुरंत palti,RONIT होह में आ चूका tha.hua ये की जब अंजलि मेरे गले लगी हुई thi,toh मैंने अपना एक हाथ रोनित की तरफ कर diya...mere हाथ से रौशनी निकल रोनित के सर में घुस गयी और उसकी आँखें खुल गयी...

भाई साहब हमें hi देख रहा tha...actually mujhe..kal इतना हिट शो जो दिखाया था साले को......

अंजलि तुरंत गयी और रोनित के ऊपर कूद gayi.....RONIT ने भी उससे बाहों में भर लिया पर उसकी नज़र अब भी मेरी तरफ थी...

मई- RONIT,kal जो हुआ वो किसी को बताना mat....mai साड़ी सचाई तुझे बाद में बताऊंगा....

रोनित मेरी आवाज़ सुन फिर से चौंक गया क्यूंकि ये बात मैंने मंद तो मंद उससे कही थी.....

पर कल की वजह से उसके लिए अब ये सब ज़्यादा शॉकिंग नहीं tha.usne आँख नीचे कर के हामी भरी....

मैंने मुस्कुराते हुए पलटा और बहार जाकर सबको रोनित के होश आने की खबर दे दी.....

सब ख़ुशी से उछाल पड़े और रूम के अंदर चले गए........

वहीँ दूसरी तरफ:-

1सत AADMI-mera नाम ****** hai....mujhe बलबीर जी ने मिलने के लिए बुलाया है..........

सिक्योरिटी- एक मं रुकिए.....

सिक्योरिटी गार्ड ने अंदर फ़ोन किया और आने वाले के बारे में कन्फर्म किया....

सिक्योरिटी- आप जा सकते हैं........

उस आदमी ने अपनी कार अंदर ले li.......ye एक बड़ा सा फार्म हाउस था जो की शहर से बाहर था........

बलबीर- आइये aaiye......mai आप hi का वेट कर रहा था......

आदमी- ****** नज़र नहीं आ रहे........

उस आदमी के मुँह से *****नाम सुन बलबीर जो अपने को शांत रखने की कोशिश कर रहा tha,uska दिमाग ख़राब हो gaya...usne जेब से गन निकल और धाययययययआननननननन......

वो गोली उस आदमी के सर के बीचो बीच lagi........aur ये जानने से पहले hi की आखिर हुआ क्या hai,wo आदमी मर चूका था....

बलबीर- saale,ye सब तेरी वजह से hi हुआ hai........mil गया तुझे तेरा जवाब

MR...GULSHAN आहूजा............

आज के लिए इतना HI

आपका अपना V..J...
 
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम को सही सलामत अपने सामने देख जयराज और मीनू की जान में जान आती है वहीँ बलबीर गुलशन आहूजा को गोली मार देता है.....

अब आगे:-

CHAPTER:-1

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )

अपडेट- 47:-

uncle,nanu और नानी इतने नार्मल कैसे हैं......

जयराज- नार्मल matlab!!!!tere कहना का मतलब है की माँ डैड एब्नार्मल हैं....

सुबह का वक़्त hai....breakfast के बाद हम सब बाहर पूल के पास बैठे हुए hain....aaj रोनित और अंजलि ने भी हमारे साथ hi नाश्ता किया tha.mom का जो आर्डर tha.....ye सवाल भी रोनित के तरफ से hi आया था.....

हम सब को कल रात होपितल से लौटते लौटते काफी देर हो गया tha....ghar पर सिर्फ नाना नानी थे जो सो चुके the.....unse मई आज सुबह hi मिला tha.....dad ने मामाजी को अपने नए प्रोजेक्ट के काम से बैंगलोर भेजा था....

मांजी कभी भी कही घूमने नहीं गयी thi,isiliye डैड ने उन्हें और बचो को भी मामाजी के साथ भेज दिया tha.....nanu और नानी को डैड और माँ ने कुछ भी नहीं बताया tha.....parso हॉस्पिटल पहुँचने के बाद डैड ने घर पर फ़ोन कर नानाजी को ये बोलै था की उन्हें अर्जेंट मीटिंग के लिए चेन्नई निकलना पढ़ रहा है....

और मीनू की किसी फर्न का एक्सीडेंट हो गया hai,isiliye वो एक दिन उसकी फर्न के पास hi रुकेगी. इसीलिए नाना नानी इतने नार्मल बेहवे कर रहे थे.....

ये साड़ी बातें डैड ने रोनित और अंजलि को बतादि.......

डैड- समझे बरखुरदार...

रोनित- समझ gaya......par थोड़ा थोड़ा तोह बता देना था naa,issi बहाने नानी मुझे थोड़ा लाड करती...

आह्ह्ह्ह...

यहाँ रोनित का बोलना ख़त्म hua,wahan मेरी और अंजलि की तरफ से उसके सर पर एक एक तपली पड़ी....

मई- इतना लाड काफी है की और चाहिए.

रोनित अपना सर सहलाते हुए- saalon,tum दोनों मुझसे जलते हो.....

अंजलि- वो और किसलिए भला!!!!

रोनित- क्यूंकि ननु और नानी मुझसे ज़्यादा प्यार जो करते हैं....

रोनित की बात सुन माँ डैड है दिए और हमने उसके सर पर एक और तपली बजादि.....

मई- हम भी तुझसे बोहोत प्यार करते hain..ye तपलियाँ हमारे प्यार की निशानी है......

रोनित- नहीं चाहिए तुम दोनों का pyar....naanu और नानी का प्यार hi काफी है.

रोनित ने अपने सर को सहलाते हुए kaha....hum सब फिरसे है दिए...

मई- क्या dad!!!!aapne हमे आज स्कूल जाने से क्यों रोक diya....ab सारा दिन हम क्या करेंगे......!!!!

जयराज- lai,tum लोग तोह अभी से बूढ़े हो गए ho......bache तोह छुट्टी मिलने पर खुश होते hain,aur तू अफ़सोस कर रहा है....

माँ- अरे बच्चों,2 दिन हम सब कितने स्ट्रेस्ड the...aur तुम दोनों ने कितना कुछ saha..aur मेरी बची भी दो दिन से कितने टेंशन में thi....isiliye इन्होने तुम तीनो को आज स्कूल जाने से रोका....

जयराज- exactly...ab तुम तीनो भागो यहाँ se,ghumo firo,enjoy karo,aur शाम से पहले अपना मुँह मत दिखाना.....

अंजलि- मतलब फूलों पार्टी वो भी दिन bhar..wowwww,maza आ गया....

रोनित- हाँ yaar,mai भी सोये सोये थक गया tha..chalo,kuch तोह एंटरटैंग होगा...

आह्ह्ह्हह...

और रोनित सर के इसी डीएलओगे के साथ hi उनके सर पर हमारे पाक साफ़ हाथों के द्वारा एक और तपली का स्वागत हुआ....

और तीनो हस्ते ,मस्ती करते हुए निकल गए....

मई- तोह पहले कहाँ चलें?

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?

अंजलि- अभी तोह कोई मॉल भी नहीं खुला होगा....

रोनित- जुहू में एक नया गार्डन खुला hai.suna है बोहोत ाचा hai...wahin चलते hain.....fir भाईसाहब को हमें कुछ जवाब भी देने हैं....

अंजलि- कैसे जवाब?

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रोनित- गार्डन तोह चल pehle...sab पता चल जाएगा......

मई जानता था की ये कमीना पूरा सच जाने बिना नहीं maanega,aur वैसे भी इन दोनों को सच बताने का वक़्त आ गया tha,atleast जितना मुझे पता था....

क्यूंकि आगे जो इन दोनों के साथ होने वाला tha,uske लिए इन्हे मेंटली प्रेपरेड़ होना ज़रूरी tha....isliye मैंने भी रोनित की बात पे हाँ में सर हिला diya...aur हम निकल पड़े गार्डन की तरफ....

वहीँ दूसरी तरफ:-

सतीश- ये आप क्या बकवास कर रहे हैं.........

सतीश इस वक़्त फ़ोन पे इंस्पेक्टर से बात कर रहा था....

इंस्पेक्टर- dekhiye,mai जानता हूँ की ये सुनना आपके लिए कितना मुश्किल hai,par यही सच hai.....maine पूरी शिनाख्त करने के बाद hi आपको फ़ोन लगाया hai.....aap जितनी जल्दी हो सके ******* हॉस्पिटल आ जाइये...

सतीश आनन फानन में हॉस्पिटल के लिए nikla.inspector निचे रिसेप्शन के पास hi खड़ा tha....SATISH के हॉस्पिटल पहुँचते hi उसकी नज़र सतीश पर चली गयी....

वो सतीश को लेकर मार्ग की तरफ निकल pada..dekhiye....ye गुलशन आहूजा hi हैं ना....

मार्ग पहुंचकर इंस्पेक्टर ने एक कोल्ड स्टोरेज खुलवाया जिसके अंदर एक लाश राखी हुई थी और उसकी हालत बोहोत ख़राब thi..maathe के ठीक बीचो बीच गोली लगी thi...chehra काफी बिगड़ गया था पर फिर भी पहचान में आ रहा था....

INSPECTOR-aur ये रहा ड्राइविंग लाइसेंस जो हमे इनके पर्स से मिला था......

पर लाश देखने के बाद से hi सतीश का दिमाग फ्यूज हो चूका tha......usse इंस्पेक्टर की बात सुनाई hi नहीं di..wo वहीँ बैठकर रोने लगा......

ऊपर वाले का इन्साफ dekhiye,ye वही हॉस्पिटल था जहाँ एक दिन पहले रोनित एडमिट tha.....aur इसके पीछे कही न कहीं गुलशन ज़िम्मेदार tha...aur आज उसी हॉस्पिटल के मार्ग में गुलशन की डेड बॉडी पड़ी हुई थी....

कुछ देर लगा सतीश को नार्मल होने में......

सतीश- मेरे डैड पर किसने गोली चलाई...

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?

ये बात सतीश ने बोहोत ग़ुस्से में कही थी....

इंस्पेक्टर- छानबीन जारी hai.....jaise hi हमें कुछ पता चलता hai,hum आपको खबर कर denge......aap अपने सभी रिश्तेदारों को कॉल करकर बुला len....inki मौत को एक दिन हो चूका hai....aapko इनका अंतिम संस्कार कर देना चाहिए.....

सतीश ने बुझे मन से सब घरवालों को कॉल करके बता दिया.....

वहीँ अवंतिका & सिस्टर्स अपनी क्लास में थी जब पेओन ने आकर उन्हें बताया की प्रिन्सी उन्हें बुला रहे हैं....

और जैसे hi चारो बेहेन प्रिन्सी के ऑफिस pahunche,unhe एक ज़ोर का झटका लगा जब प्रिन्सी ने उन्हें बताया की उनके दादाजी गुज़र चुके हैं और उन्हें हॉस्पिटल बुलाया गया है......

चरों आनन् फानन में स्कूल से nikle.princi ने उन्हें अपनी कार से हॉस्पिटल ड्राप करवाया.......

और जैसे hi हॉस्पिटल पहुंचकर अवंतिका ने अपने दादू को dekha,wo चक्कर खाकर गिर गयी......

सभी उससे होश में लाने में लग गए.....

कुछ देर बाद जब अवंतिका को होश आया तोह वो अपने दादू की बॉडी से लिपटकर रोने लगी......

आज अवंतिका के रोने में वो दर्द tha,ki शायद कोई डेविल भी सुनले तोह उसके भी आँखों से आंसू निकल जाए....

शाम तक हॉस्पिटल AHUJA'S और अरोरस से भर चुकी thi.......ANUKRITI को भी गुलशन की मौत के बारे में पता चल गया tha.wo भी हॉस्पिटल पहुँच गयी थी पर उसने सतीश और वाणी दोनों से hi कोई बात नहीं की थी....

पर उन्होंने सतीश से बात ki,aur वो भी ऐसी की सतीश का अंतर्मन एक बार में हिल गया....

शाम का वक़्त tha.....DADAJI की बॉडी को अंतिम विदाई देकर उनकी राख समेत सब अभी अभी घर पौहंचे थे.....

सतीश फ़ोन पर- 24 घंटों के अंदर पता लगाओ की ये सब किसने किया hai,warna तेरे घर में भी मेरे घर जैसी hi चिटा जलेगी....

ये बोल कर सतीश ने कॉल काट diya.par उसकी बात पास hi कड़ी अनुकृति ने सुन ली.....

अनुकृति- क्या बात hai....itna ग़ुस्सा वो भी सिर्फ एक मौत pe....ye तोह गलत बात है?

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दोनों के पास में hi आवण्टिएक और उसके डैड खड़े the..ANUKRITI की बात सुन वो भी शॉकेड हो गए.....

सतीश- तुम्हारा दिमाग तोह कहरब नहीं हो gaya.dad थे वो mere...aur तुम इससे बस एक मौत कहती हो.....

अनुकृति- ाचा!!!! डैड the!!!!.aur जितना की जान तुमने ली hai,wo सब लावारिस थे kya!!!!unke bhai,behen,maa,baap,bache वगैरह नहीं थे?

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?या उनकी ज़िन्दगी तुम्हारी ज़िन्दगी जितनी महँ नहीं thi.unke जीवन का कोई अर्थ नहीं था.....

दुनिया गोल है मर SATISH....jo boyega,wahi paayega.....jis दिन तुमने पहली बार किसीका घर उजड़ा था na,ussi वक़्त तुमने अपने परिवार की बर्बादी भी लिख दी thi....isiliye भड़कना छोडो और सच को मान लो.....

वही हुआ hai,jo होना चाहिए था.....

ये बोलकर अनुकृति चली गयी और पीछे रह गए आँख में आंसू भरे हुए सतीश और NAVEEN.par इस बार के आंसू उनके पिता के लिए नहीं the,balki उन सभी कुकर्मो के लिए the,jo आज तक उन्होंने किये थे.......

और इन्ही पश्चाताप के आंसुओं के साथ 1सत CHAPTER के पहले नेगेटिव सब्जेक्ट्स (AHUJA"S फॅमिली) सुधर गए...

बैक तो हीरो:-

अंजलि- मतलब कुछ भी naa..kuch भी.....

तू फेकते jaa,mai लपेटती जाती हूँ.....

हम इस वक़्त जुहू के गार्डन में the.....RONIT ने ांजलि को उस दिन क्या क्या हुआ tha,wo सब कुछ बता दिया था और जिससे सुनकर अंजलि मैडम ऐसा रिस्पांस दे रही थी....

रोनित- V.JJJJ... साले मई hi बोलता rahu,tu भी तोह कुछ बोल......

अंजलि- ोये V.J तेरी तरह फेकू नहीं है समझा........

मई- ये सच बोल रहा है.

अंजलि- तू bhi......aaj 1सत अप्रैल तोह है nahi,fir तुम वो मुझे उल्लू बनाने पे क्यों tuleeeeeeeeeeeeeeee .......................

अंजलि मैडम और कुछ बोल नहीं paayin,madam हवा में जो उठ चुकी थी......

अंजलि- ये कैसा ट्रिक hai....V.J मुझे ऐसा मज़ाक बिलकुल पसंददददददद

मैडम आगे बोल नहीं paayin.kyunki अगले hi पल मई और रोनित भी हवा में थे....

रोनित- वाओ yaar,maza आ गया.....

अंजलि- चुप be..aur VJ,mujhe उचाई से दर लगता hai,plz मुझे नीचे उतर...

अंजलि के ऐसा बोलते hi हम तीनो नीचे आ गए...

रोनित- kyun,mai तोह फेक रहा था naa..ab लपेट.....

पर अंजलि मैडम के मुँह जैसे जाम हो गया tha.wo बस आँखें फाड़े मेरी तरफ देख रही थी......

रोनित के हिलने से वो होश में आयी..

अंजलि- ऐसा कैसे हो सकता है.....

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?ी मैं ये सब तोह साइंस फिक्शन मूवीज में होता है ना....

मई- पहले मई भी ऐसा hi सोचता tha,jab तक मैंने भी अपनी आखों से ये सब नहीं देख लिया...

रोनित- अब आया न मैं पॉइंट pe...wahi तोह मुझे जानना hai,ki तूने ये सब कहाँ से सीखा.....!!!!!

अंजलि- मुझे नहीं hume.....bol न yaar,mujhse और सस्पेंस बर्दाश्त माहि होगा....

फिर मैंने जो भी मेरे साथ हुआ hai,wo सब बता दिया.....

रोनित- wow,kya स्टोरी है yaar...mere तोह रोंगटे खड़े हो गए.....

अंजलि- और इसका मतब वो धवली झील वाली कहानी भी सच hai,aur इतना hi नहीं वो सच भी तुझसे जुड़ा हुआ है....

मैंने बस मुंडी हाँ में हिला दी......

रोनित- वाह yaar,maza aayega......hum भी तेरे साथ जाएंगे...

मई- तेरा दिमाग तोह कहरब नहीं हो gaya,tum दोनों वहां नहीं जा सकते...

रोनित- जाएंगे तोह हम तेरे saath,warna तुझे भी नहीं जाने देंगे...

मई- मई अपनी नियति से नहीं भाग sakta...aur तुम दोनों मेरे साथ जाने की ज़िद छोड़ do,kyunki ऐसा करके तुम दोनों गॉड की मर्ज़ी के खिलाफ जा रहे हो....

रोनित- बस bas,itni बड़ी बड़ी बात मेरे समझ में नहीं aati....thik hai,hum नहीं jaayenge..par साले अगर तू

अंजलि- सही सलामत उस झील से वापस नहीं आया ना तोह हम तेरी जान ले लेंगे...

रोनित की बात अंजलि ने पूरी कर दी.....

मई कुछ कहता उससे पहले hi मेरे दिल में एक दर्द सा उठा... आँखों से अपने आप आंसू निकलने lage.....mujhe कुछ समझ नहीं आया की ये अचानक मेरे साथ क्या हो रहा है....

मई अपनी आँखें बंद कर इसका रीज़न पता लगाने hi वाला था की मेरे अंदर चुप्पे बुक ने मुझे ऐसा करने से रोक दिया....

विक्रम नहीं जान सकता तोह क्या hua,mai आपको विक्रम के आंसुओं के पीछे का रीज़न बता देता हूँ....

( ये वही वक़्त था जब अवंतिका अपने दादू की डेड बॉडी से लिपटकर रो रही thi.VIKRAM के दिल ने अवंतिका के दिल के दर्द को महसूस कर लिया tha,isiliye विक्रम के आँखों में आंसू आ गए थे.. )

अंजलि- अब तुझे क्या hua...humne कुछ ज़्यादा सेंटी बात कर दी क्या.....

मई- तेरी बातों से जो पेट में दर्द पैदा हुआ naa,ye उसीके आंसू hain.......aise hi मस्ती करते हुए हम गार्डन में घूमने लगे......

फिर कुछ ख़ास नहीं hua.hum दिन भर घूमते रहे और ऐसे hi एक और दिन निकल गया..

नेक्स्ट डे इन स्कूल:-

मई- क्या बात hai....aaj पूरी ाहूजास फॅमिली hi गायब है.....

हम जस्ट क्लास में आये the...maine नज़र घुमाई तोह आहूजा सिस्टर्स गायब thi..ye बातें मेरे मुँह से अपनेआप निकल गए...

रोनित- तुझे बड़ी फ़िक्र हो रही है.....

मई- haan,bohot zyada...utni hi जितनी तुझे पढाई की फ़िक्र हो रही है.....

रोनित- अब्बे तू ये हर बार मेरे पढाई को hi बीच में क्यों लाता hai...dekhna,is बार ऐसे नंबर लाऊंगा की तेरे होश उड़ जाएंगे......

मई- मेरे तोह अभी से होश उड़ gaye......kahin मई पागल न हो जाऊं.....

अंजलि- तुम दोनों चुप karo....saamne देखो ma'am आ गयी हैं....

हमने सामने dekha,saamne सच में ma'am thi....fir हम भी चुप चाप बैठकर पढाई में ध्यान देने लगे....

और ऐसे hi दिन बीतने lage...par कुछ दिन बाद मुझे एक शॉक laga.....ab ऐसी क्या बात हो gayi,toh chaliye,khud देख लीजिये........

DARSHANA-(CLASS मात)- तुझे पता hai,AVANTIKA और उसकी बहेनो ने स्कूल छोड़ दिया hai.....kal मई प्रिन्सी के ऑफिस गयी थी तोह उनके यहाँ से कोई t.c लेने आया था......

ये बात दर्शन ने अंजलि को बताई थी और अंजलि ने हमें बताई.....

ये बात वाकई शॉकिंग thi.....kyunki आधा साल तोह निकल गया tha....aur अगले साल हमारे बोर्ड एक्साम्स the.aise यूँ अचानक स्कूल छोड़ देना वो भी अवंतिका जैसी ब्रिलियंट स्टूडेंट के लिए बोहोत बड़ी बात थी....

एक पल के लिए तोह मेरा मन किया की माजरे का पता lagaun,par फिर मैंने सोचा की मुझे kya....jo मन आये वो karen.....aur कुछ hi दिनों में मई अवंतिका के chapter को भुला चूका था.....

वक़्त इतनी तेज़ी से बीतता है की पता hi नहीं chalta.....dekhte hi देखते हमारा 11तह और फिर 12तह भी पूरा हो गया..... मई 12तह में भी नेशनल टोपर raha...par एक नयी बात hui,hamare रोनित भाई साहब क्लास में 3रद आये the....aur साले की ख़ुशी देखते hi बनती थी......

यहाँ तक की मेरे माँ डैड भी मेरे फर्स्ट आने से ज़्यादा रोनित के थर्ड आने से खुश the.....saale ने पहली बार कुछ ढंग का काम जो किया था.....

वकेशंस में हम सब इस बार ऑस्ट्रेलिया gaye....naache gaaye,dhoom machaye...humne खूब धमाल kiya......sab कुछ बैक तो नार्मल हो गया tha....par जैसा की मैंने कहा था की जो नार्मल rahe,wo हमारी लाइफ तोह हो नहीं सकती....

मुझे ये तोह पता था की मुझमे कुछ तोह ख़ास hai,par ये नहीं मालुम था की मेरे साथ कुछ ऐसा होने वाला hai,ki मेरा अस्तित्व hi बदल जाएगा

इसकी शुरुवात मेरे 18तह बर्थडे से ठीक 1 महीने पहले hui.....mai रात को सोया हुआ था की अचानक मुझे मेरे सपने में एक सपेरे दिखाई diya........mujhe अपने सीने में एक तेज़ दर्द hua...mai एक झटके में उठ का बैठ गया....

मेरे सीने में अब भी काफी दर्द हो रहा था.......

की तभू एक तेज़ रौशनी मेरे सीने के ऊपर उभरी और बुक बहार आ गयी.....

बुक- पहला दर्द मुबारक हो विक्रम.....

मई- waah.insaano की दुनिया में रह कर तुम भी ताना मारना सिख gaye.....waise तुम्हारा पहले दर्द से क्या मतलब है.....!!!!!

बुक- अब तुम्हे ये दर्द हर रात को होगा......

मई- ऐसा क्यों?

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?क्या उस सपेरे ने मुझे पहचान लिया है....!!!!!

बुक- nahi..ye दर्द मैंने तुम्हे दिया hai...ab तक जिस मंत्र का तुम जाप करते आ रहे ho,mujhe ये देखना है की तुम इसका उपयोग करने मेंकितने कामियाब हुए ho...ab वो समय ज़्यादा दूर नहीं है जब तुम्हारा सामना उस सपेरे से होगा....

तुम्हे तैयार होना होगा VIKRAM...jo दर्द तुम्हे अभी हुआ hai,isse ये साबित हो गया है की तुम अभी उस मंत्र को प्रयोग में लाने में कामियाब नहीं हुए ho.....tumhe अधिक ध्यान लगाना hoga...anyatha हौली स्पिरिट्स की मुक्ति chhodo,tum स्वयं हमेशा के लिए उस सपेरे में कैद हो जाओगे........

मई- ठीक hai.mai अबसे ज़्यादा ध्यान lagaunga....waise क्या मई तुमसे कुछ पूछ सकता हूँ!!!!

बुक- अवश्य....

मई- मेरी हर गलती या प्रॉब्लम के बारे में तुम मुझे बताते ho.kya मई कभी खुद भी कभी भी तुम्हारे जितना shaktishaali,itna बुद्धिमान बन पाऊंगा!!!!!

बुक- बोहोत जल्द तुम्हे पता चल जाएगा....

और इसी के साथ बुक गायब होकर मेरे अंदर चली गयी......

मई- 2 साल में 2 हज़ार बार ये डायलाग सुन चूका hun....pata नहीं वो वक़्त कब आएगा....

मुझे पता नहीं था की मेरा वक़्त बस आने hi वाला है....

ऐसे hi दिन बीतने लगे...........

वहीँ दूसरे तरफ:-

अवंतिका भी पुरे स्टेट में 5 तह रैंक पर आयी thi.....usne पेपर में देखा था की विक्रम फिर से इंडिया टोपर बना है....

अवंतिका अपने आप से- काश हमारी कहानी कुछ और hoti....kaash हम किसी और तरीके से मिले hote....kaash.........

ये मई क्या सोच रही hun.........jo हुआ नहीं उसके बारे में क्या sochna.....chhodo,ek अछि सी कॉलेज ढूंढ फॉर्म भर देती हूँ..

एक बात जो की काफी अजीब thi,wo उसकी लाइफ में होनी शुरू हो गयी थी....

उसके सपनो में डेली एक साधु बाबा आते थे जो उससे देखकर मुस्कुराते रहते the...par अवंतिका इस्पे ज़्यादा ध्यान नहीं देती थी...

अवंतिका ये नहीं जानती थी की उसकी ज़िन्दगी में भी कुछ naya,kuch anokha,kuch गलत और कुछ सही होने वाला है....

24तह MAY....HERO के 18तह बर्थडे से एक दिन पहले:-

नानाजी- अरे मई तुम सबको एक बात बताना भूल गया...

लंच के बाद हम सब को ननु ने अपने कमरे में बुलाया......

डैड- क्या पापा?

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?

नानाजी- धवली झील याद है!!!!!

डैड- ऑफ़ कोर्स dad...kaafi इंटेरसेटिंग किस्सा बताया था आपने वहां का.....

मई मन में- ये किस्सा आपके बेटे की ज़िन्दगी की कहानी है डैड.....

नानाजी- haan,toh माना जाता है की धवली झील में जो भी हुआ tha,wo ब्रम्हा मुहूर्त में हुआ tha....aur ब्रम्हा मुहूर्त 25 वर्षो में एक बार आती hai.....har ब्रम्हा मुहूर्त में धवली झील के पास के मैडम में धवली महोत्सव मनाया जाता hai.jo पुरे 7 दिन तक चलता hai....aur अगला ब्रम्हा मुहूर्त कल है.....

तोह कल से धवलगढ़ में धवली महोत्सव मनाया जा रहा hai...aur हम सब इससे देखने धवलगढ़ जा रहे हैं.....

माँ- व्हाट ा coincidence....kal विक्की का बर्थडे भी है......

नानाजी- वही toh.....hamare पोता कितना भाग्यशाली है जो उसका जन्मदिन ब्रम्हमुहूर्त में आ रहा है.....

यहाँ मई कुदरत के खेल के बारे में सोचते सोचते अंदर hi अंदर मुस्कुरा रहा tha..jisse जहाँ पहुँचाना चाहती hai,usse ये कोई न कोई बहाने से पहुंचा hi देती है..........

ये तय हो गया की हम कल सुबह hi धवलगढ़ के लिए निकल रहे hain......maine कॉल करके अंजलि और रोनित को बुलाया और सब बता दिया..

अंजलि- ये कोई कोइंसिडेन्स नहीं हो sakta....mujhe लगता है तेरा बुलावा आ गया है...

मई- मुझे पता hai.ab जैसे भी ho,is किस्से को ख़त्म तोह करना hi है......

डैड ने इस बार रोनित और अंजलि के पेरेंट्स को भी मन लिया हमारे साथ जाने के लिए......

मई मन में- चल beta,aakhri रात आराम से soja,kal से तोह तेरी परेड शुरू होने वाली है...

पर मुझे क्या पता था की आज रात hi मुझे अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सरप्राइज मिलने वाला है......

रात 11.45 को:-

Mai-kya बात hai!!!!!!abhi तक कोई भी मेरे कमरे में नहीं aaya..naahi रोनित या अंजलि ने फ़ोन किया hai..warna दोनों कम्पटीशन करके आधे घंटे पहले hi फ़ोन कर लेते हैं की दूसरा पहले विश ना कर paaye......dekhta हूँ....

मैंने आँखें बंद की और ध्यान lagaya,aur जैसे जैसे मई सबके कमरे को देखता gaya,shock होता gaya.sab जे सब घोड़े बेच जार सो चुके the...yahan तक की रोनित और अंजलि bhi...kahin कुछ गलत तोह नहीं हो गया सोचकर जब मैंने सबके अंदर झाँका तोह पता चला की सब बस सोये हुए hain,aur कुछ नहीं......

मई- अजीब चुतियापा hai..itni जल्दी सो gaye....fir मई जाग कर

क्या karunga....mai भी सो जाता हूँ.....

मई बीएड पर लेट gaya..aur ये मेरी खूबियों से बेस्ट खूबी है की मुझे लेटते साथ नींद आ जाती है...

पर अभी मुझे सोये कुछ 10 मं hi हुए थे की मेरी बॉडी हवा में उठ gayi.......meri बुक निकलकर मेरे सामने आ gayi.ab वो एक खूबसूरत लड़की थी जो सर झुकाये कड़ी हुई थी.....

इधर मई नींद में एक अँधेरी जगह पर खड़ा था और इधर उधर देख रहा tha....tabhi अचानक मेरे सामने 2 बड़ी बड़ी लाल आखें आ gayi...ye वही आँखें थी जो मैंने 2 साल पहले सपने में देखि thi......wo आँखें धीरे धीरे और बड़ी होती जा रही thi...iska.matlab साफ़ था की वो जो कोई भी tha,mere करीब आ रहा था....

पता नहीं ज्यूँ पर मई अपनी जगह से हिल भी नहीं पा रहा tha.....mai एक तक उन आँखों को देखे जा रहा tha.....par तभी वहां कुछ hua.........kuch ऐसा जो मई शायद शब्दों में बयां न कर पाऊं पर मई कोशिश करता हूँ.....

ठीक मेरे और उन आँखों के बीच एक छोटी सी लाल रौशनी ubhri.us रौशनी का आकार बोहोत काम था पर उसके अंदर से निकलता प्रकाश 100 सूर्य के प्रकाश से भी ज़्यादा tha..dekhte hi देखते वो लाल रौशनी बड़ी होने lagi.jaise जैसे वो बड़ी होने लगी उन दो आँखों में जो मेरे सामने थी, उनमे दर्द झलकने laga.wo आँखें उस रौशनी के प्रकाश को नहीं झेल पायीं और गायब हो गयी....

पर एक बात अजीब thi,mujh पर उस रौशनी की tivrata,uski इंटेंसिटी का कोई गलत प्रभाव नहीं पद रहा tha.ulta जैसर जैसे वो रौशनी बड़ी हो रही thi,aur उसकी किरणे मुझपे पढ़ रही tbi,mujhe अपने अंदर बोहोत hi ज़्यादा ताकत महसूस हो रही थी जो लगातार बढे hi जा रही थी......

मुझे इतनी तेज़ रौशनी में भी सामने देखने में कोई प्रॉब्लम नहीं हो रही thi.mujhe ऐसा लग रहा था की mai.khud इस रौशनी का एक हिस्सा hun.ya यु कहूं की ये रौशनी मेरा एक हिस्सा है...

और जैसे hi मैंने उस रौशनी को ध्यान से dekha,mai चौंक gaya..kyunki वो सिर्फ एक रौशनी नहीं thi,wo एक लाल मणि thi....(kuch याद आया दोस्तों)

और रौशनी उसमे से hi आ रही thi......ek झटके का असर ख़त्म नहीं हुआ था की मुझे एक और झटका लगा......

मैंने जैसे hi उस रौशनी के श्रोत (मणि) को pehchana,roshni काम हो गयी और वो मणि एक झटके में मेरे अंदर समां गयी....

इधर मेरे कमरे में मेरे शरीर के ऊपर वही लाल मणि चमक रही thi...idhar सपने में वो मणि मेरे अंदर samayi,thik उसी वक़्त मेरे उड़ते हुए शरीर में वो मणि समां गयी.....

एक सेकंड के लिए पूरा ब्रम्हांड हिल gaya...ek साथ हर प्लेनेट में तेज़ बारिश होने lagi,yahan तक की मांसलिकेल में भी....

इधर मेरी बॉडी को तेज़ झटके लगने lage.....meri बॉडी पर अपने आप वाइट गाउन जैसे कपडे आ gaye....saari सृष्टि कांप गयी thi,par मेरे घर पर किसीको कुछ पता नहीं chala..sab वैसे hi बेसुध सोये रहे.......

कुछ देर तक मेरी बॉडी यूँही हवा में तैरती rahi,phir धीरे धीरे मई नीचे आ गया.....

बीएड पर आते hi मेरी आँख खुल gayi.......aur मई खड़ा हो गया......

सिर्फ मेरे कपडे hi नहीं बदले the,mera dimag,mera dil,sab कुछ पानी की तरह साफ़ हो चुके the....mera दिमाग अब सेकंड के सौवे हिस्से में करोड़ो vichaaro,samasya और उनके हल निकलने में सक्षम हो चूका था.....

हाँ एक बात thi,ki अब भी मेरे अंदर इंसानो जैसी hi फीलिंग्स मौजूद thi,par सही और गलत की परख करने का तरीके में बोहोत फर्क आया tha....maine अपने सामने देखा,

मेरे सामने का नज़ारा ऐसा था जिसकी शायद hi किसीने कल्पना की ho.......agar मई पुराण विक्रम होता तोह अब तक मेरी आँखें शॉक से फैट चुकी hoti,par अब मुझे ये सब नार्मल लग रहा tha,par हाँ मई खुश बोहोत था....

वहीँ दूसरी तरफ:-

यहाँ विक्रम की आँख khuli,wahin दूसरी तरफ ग्लूटो में 4 आँखें और खुल गयी....

एक दिग्विजय की और

दूसरी निष्कलिका की.......

दोनों तुरंत खड़े hue,ek दूसरे की तरफ dekha,aur गायब हो गए.....

बैक तो हीरो:-

मेरा कमरा अब एक 10 एकर की साइज जितना बड़ा हो गया था..

ये सब एक माया थी जो मेरे सामने मौजूद एंगेल्स में से hi किसीने किया था.

जी हाँ doston,is वक़्त मेरे सामने हज़ारो की गिनती में एंगेल्स अपने घुटनो पर बैठे थे....

और उन सब से आगे ठीक मेरे सामने थे थ्री गोड्स मैसेंजर सर झुकाये बैठे the.unke बाजू में मेरी बुक जो अभी एक लड़की के रूप में thi,wo कड़ी thi,par उसका भी सर झुका हुआ था........

उठ जाइये एंगेल्स.....

मेरी आवाज़ सुन सभी एंगेल्स खड़े हो गए........

सत सेबेस्टियन- इस दिन का हमने नजाने कितने युगों तक इंतज़ार किया hai......aaj आपको अपने सामने देखकर नजाने क्यों मई भी एक मानव की तरह भावुक हो गया हूँ.....

मई- तोह इसमें बुरा क्या hai....maanav गॉड के बनाये गए सबसे अमूल्य रत्न hai......maanav होना अपने आप में एक सम्मान की बात है.....

ANGELS...mujhe ख़ुशी हुई की आप सब मुझे मेरी शक्ति मिलने के वक़्त मेरा सम्मान करने के लिए यहाँ aaye...par इस ब्रम्हांड में अच्छी बनाये रखने की ज़िम्मेदारी आपके कंधो पर hai...aap सब कृपा अपने काम में पुनः लौट जातें......

सभी एंगेल्स इन्क्लूडिंग गोड्स मैसेंजर ने मेरे आगे सर झुकाया और गायब हो गए....

मई- एक बात bataiye,mujhe इस ब्रम्हांड के बारे में सब कुछ पता चल gaya,par उन आँखों के मालिक के बारे में नहीं जिससे मैंने सपने में देखा tha....mujhe बस उसका एक साया hi नज़र आता hai....aisa क्यों?

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?क्या आप मुझे अब सच बताएंगी या अब भी मुझे सही समय का इंतज़ार करना होगा...

बुक- मई विक्रम से बातें छुपा सकती thi.LORD ऑफ़ एंगेल्स से नहीं....

जिस दिन आप उस स्पीयर से हौली स्पिरिट्स को मुक्त कर denge,aapko उन आँखों के मालिक के बारे में पता चल jaayega...maine आपके दिमाग के उस हिस्से को अभी भी बाँधा हुआ है जो आपको उसके बारे में बता सकती है....

क्यूंकि अगर आपने उसके बारे में jaana,toh उससे भी आपके बारे में पता चल jaayega...aur माफ़ kijiyega,par शक्ति मणि पाने के बाद भी अभी आप उसके जितने शक्तिशाली नहीं हुए hain..uske सामने आने के लिए आपको और शक्तियां प्राप्त करनी होंगी....

मई- hmm.acha एक सवाल का जवाब और दे dijiye........ek बार मैंने आपसे कहा था की अगर आप इंसान होती तोह हमारे इमोशंस samajhti...tab आपने कहा था की अगर मुझे पता चल जाए की आप किस जिस से बानी hain,toh मई ऐसा कभी नहीं kehta..toh अब आप बताएंगी की आप किस चीज़ से बानी हैं....

बुक- गॉड के आंसुओं से.............

आज के लिए इतना HI

आपका अपना V..J...
 
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम को उसकी शक्ति मिल जाती HAI,WAHIN दूसरी तरफ दिग्विजय और निष्कलिका की भी आँख खुल जाती है और होश में आते HI वो दोनों गायब हो जाते हैं.......

अब आगे:-

CHAPTER-1

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )

अपडेट-48:-

क्लाइमेक्स-1

दिग्विजय- मई तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ पर समझ नहीं आ रहा है की कैसे कहूं!!!!!

निष्कलिका- मुझे भी कुछ कहना hai......ab हम साथ नहीं रहा सकते......

दिग्विजय निष्कलिका की बात सुनकर शॉकेड हो गया.....

निष्कलिका- dekho.mai तुम्हारी दिल की हालत समझ सकती hun.....par मई क्या karun,pata नहीं कैसे पर अब मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई प्रेम नहीं है....

तुम्हारे क्या मेरे मन में इस ब्रम्हांड के किसी भी जीव के लिया प्रेम तोह क्या हमदर्दी भी नहीं hai.....pata नहीं क्यों ऐसा हुआ hai!!!par यही सच है.....

दिग्विजय- मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई hai.balki मई तोह खुश हूँ की तुमने मेरी टेंशन दूर कर di....mai खुद तुमसे यही कहने वाला था की मेरे मन में अब तुम्हारी वो छवि नहीं रही जो कभी हुआ करती thi.....isiliye हम अलग हो जाते hain.par मुझसे पहले तुमने ये बात बोल दी....

और रही बात की ऐसा क्यों hua,toh मुझे ऐसा लगता है की ये उन शक्तियों की वजह से हुआ है जो उन डायमंड्स ने हमे दी hai.mujhe अपने अंदर के हर जस्बात बनते बिगड़ते से महसूस हो रहे हैं....

निष्कलिका- तोह अब!!!!

दिग्विजय- तुम ग्लूटो sambhalo,mai चला पृथ्वी waapas...pata नहीं क्यों पर मुझे ऐसा आभास हो रहा है जैसे मेरे अपनों के साथ कुछ गलत हुआ है.....

फिर बिना निष्कलिका की कोई बात सुने दिग्विजय गायब हो गया.....

निष्कलाईका- मुझे दिग्विजय के अंदर असीम शक्तियों का आभास हो रहा tha....hum दोनों साथ hi उस गुफा में गए the,un डायमंड्स ने हम दोनों की आत्मा को सोखा tha,hum दोनों को एक साथ इतनी शक्तियां मिली थी.....

पर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है जैसे दिग्विजय मुझसे अधिक शक्तिशाली हो गया hai....kahin उन डायमंड्स ने मेरे साथ भेद भाव तोह नहीं किया....

पर वो ऐसा क्यों karengi.....mujhe एक बार और उस गुफा में जाना chahiye.....ho सकता है मुझे और शक्तियां प्राप्त हो जाएँ..

निष्कलिका तुरंत गायब हो gayi......par वो ये नहीं जानती थी की उसके और दिग्विजय के गायब होने के बाद सत सकिलिअ उस गुफा के बहार प्रकट हुई thi...unhone अपने हाथ आगे किये और

परमेश्वर अच्छेद्य कवचं....

(GOD'S ुंब्राकेबले आर्मर ) इस मंत्र के साथ वो गुफा बांध गया........

जिस मंत्र के उपयोग से सत सकिलिअ ने गुफा को बाँधा tha,wo कोई साधारण मंत्र नहीं था....

अब उस कवच को वो खुद भी नहीं तोड़ सकती thi.yahan तक की तीनो GOD'S मैसेंजर भी अगर कोशिश कर len,toh भी वो सुरक्षा कवच नहीं टूटता....

गुफा को बांधते hi सत सकिलिअ के चेहरे पर संतुष्टि भरी मुस्कान thi,par वो ये नहीं जानती थी की एक गड़बड़ पहले hi हो चुकी थी.....

सत सकेलिए गायब हो gayi.aur ठीक उनके गायब होने के बाद निष्कलिका वापस उस गुफा के सामने प्रकट hui....aur जैसे hi निष्कलिका ने अपने कदम गुफा के अंदर रखने के लिए badhaye,usse एक तेज़ झटका laga,aur वो दूर जाकर गिरी...

निष्कलिका को यकीं नहीं हुआ की उसके साथ ऐसा भी कुछ हो सकता hai...itni शक्ति प्राप्त करने के बाद भी....

उसने फिर कोशिश की पर नतीजा वही nikla....NISHKALIKA ने कई मंत्र padhe,par उसके बाद भी जब निष्कलिका गुफा के अंदर नहीं जा पायी तोह निराश होकर वो गायब हो गयी......

बैक तो हीरो:-

अंजलि- wowwww.nanu,yahan तोह काफी बड़ा मेला लगा है....

रोनित- haan,hum इतने सारे एम्यूजमेंट पार्क्स गए hai,fun वर्ल्ड गए hain.par इस मेले को देख एक अलग hi एक्ससिटेमेंट फील हो रही है....

आज 26तह मई tha.kal मॉर्निंग में hi मैंने केक काट लिया tha.dopehar को हम तीनो फैमिलीज़ एक लक्ज़री बस से जो की डैड ने सुबह hi आर्डर कर के खरीद ली थी, धवलगढ़ के लिए निकल गए थे.

हम सुबह करीब 3 बजे ननु के घर पहुंचे the.nanu अपने घर को देखकर शॉकेड हो गए थे...

बात दरअसल ये थी की नाना नानी के मुंबई शिफ्ट होने के बाद डैड ने मुंबई के बेस्ट आर्किटेक्चर को हिरे करके देहवालगढ़ वाले घर को रेनोवेट करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था....

और अब हमारे ननु का घर किसी पैलेस से काम नहीं लग रहा tha....nanu डैड का खुद के लिए प्यार देख काफी इमोशनल हो गए थे....

लेट सोने की वजह से आज सबकी नींद काफी देर से खुली (सिवाए mere....POWER स्टोन मिलने के बाद से hi मुझे neend,bhuk,pyaas और ऐसे hi कोई भी इंसानी शरीर की ज़रुरत महसूस नहीं हो रही थी....)

हमारे घर से कुछ दूर पर hi चौक tha,jahan दो बड़े बड़े स्पीकर्स लगे हुए the....aur उसमे लगातार धवली महोत्सव का अद्वेर्तिसेमेन्ट हो रहा था....

हम सभी उस स्पीकर में हो रहे अद्वेर्तिसेमेन्ट को सुनकर काफी एक्ससिटेड हो gaye...hum सब फटाफट रेडी hue,kyunki अब लंच का टाइम हो गया था इसीलिए हम सब ने लंच किया और मेले वाली जगह पर पहुँच गए....

डैड- मई तोह आकाश झूले पर बैठूंगा....

डैड किसी बचे की तरह एक्ससिटेड होकर बोले....

ननु- bilkul.tu kya,ham सब baithenge.....aur सिर्फ आकाश झूले पर hi nahi,yahan जितनी भी राइड्स hain,un सब में बैठेंगे......

हम सब आकाश झूले की तरफ चल पड़े......

chaliye,jab तक सब राइड्स एन्जॉय कर रहे hain,mai आपको बताता हूँ की जब तक सभी उठ नहीं gaye,maine क्या किया.

सब के उठने तक मई ध्यान में बैठा raha.....un कुछ hi घंटों में मैंने पुरे ब्रम्हांड में फैले सभी एंगेल्स को उन्हें आगे क्या क्या करना hai,har गृह का बैलेंस कैसे बनाये रखना है, उसके निर्देश diye....kuch वक़्त तक गोड्स मेसेंजर्स से भी बात की.......

मैंने धवली झील के रहस्य का संपूर्ण ज्ञान लेनी की भी कोशिश ki,par जैसे hi मेरा दिमाग झील की सतह तक jaata,mujhe वो स्पीयर दिखाई देने lagta,jisse मेरे पुरे शरीर में एक दर्द की लकीर दौड़ जाती और मेरा ध्यान टूट जाता....

एक बात तोह मई समझ गया था की उस स्पीयर की ताकत मुझसे कहीं ज़्यादा है और इसका कारण है उसके अंदर फसे 1000 हौली स्पिरिट्स जिनकी पूरी शक्ति उस स्पीयर ने सोख ली hai.......mujhe बिना किसी तयारी के hi स्पीयर से भिड़ना tha.ab जो भी होना tha,wo रात को होना था....

वहीँ दूसरी तरफ:-

अवंतिका- ी ऍम सो प्राउड ऑफ़ ु dad.....finally आपने सारे इल्लीगल काम बंद कर diye.....ab हम भी एक रेस्पेक्टेबले ज़िन्दगी जियेंगे.....

अवंतिका भी धवली महोत्सव देखने के लिए घर आयी हुई thi...wo आना तोह नहीं चाहती thi,par उसकी दादी की आंसुओं ने उससे मजबूर कर diya,ghar आने पर...

जबसे अवंतिका के दादू गुज़रे the,tabse अवंतिका ने अपने डैड से और मामा से बात नहीं को thi...wo अपने दादू की मौत का ज़िम्मेद्दार डैड और मामाजी के गलत कामो को मानती थी....

पर घर पहुँचते hi जब उससे ये मालूम पड़ा की उसके डैड और मामाजी ने सारे गलत काम बंद कर दिए हैं और अब वो मुंबई में रेस्टुअरंत की एक चैन खोल रहे hain,toh उसके दिल के सारे गीले शिकवे मिट गए और वो अपने डैड से गले लग गयी......

नवीन- हाँ बीटा.

ये बोलते वक़्त नवीन के आवाज़ में एक दर्द था जिसका एहसास अवंतिका को हो गया था.....

अवंतिका- क्या हुआ dad!!!!!kya आप खुश नहीं है......

NAVEEN-aaj 1.30 साल बाद मेरी बेटी मेरे गले लगी hai....mai साद कैसे हो सकता हूँ!!!!! मुझे बस इस बात का अफ़सोस है बीटा की अगर हमने ये रास्ता पहले hi चुन लिया होता तोह आज डैड हमारे साथ होते.......

अवंतिका भी अपने दादू को याद करके साद हो गयी पर फिर तुरंत नार्मल होते हुए बोली......

अवंतिका- ओफ्फो dad.....aap नेगेटिव hi क्यों सोचते hain....aap ये सोचिये ना की दादू जहाँ भी honge,aapke इस फैसले पर गर्व कर रहे honge........ab आप साद होना छोड़िये और हमारे नए रेस्टुरेन्ट्स को बनाने ka,unke दसिग्नस के बारे में सोचिये....

मई जा रही हूँ मेला चेक आउट karne..aane के बाद मुझे सब इंफोस चाहिए......

NAVEEN-beta दसिग्नस तोह रेडी hai.unmese कौन सा फाइनल करना है ये तू डीडे karna.aur रही बात मेला जाने ki,toh तू hi क्यों हम सब चल रहे हैं.......

रियांश, देवांश, सबको आवाज़ dedo.....mele के लिए निकलना है...

रियांश और देवांश की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी और ये रेस्टोरेंट्स का आईडिया भी इन्ही दोनों का था....

दोनों ने सबको बुलाया और पूरी आहूजा फॅमिली मेले के लिए निकल गयी....

वहीँ दूसरी तरफ:-

अब तक आपने पढ़ा की विक्रम को उसकी शक्ति मिल जाती HAI,WAHIN दूसरी तरफ दिग्विजय और निष्कलिका की भी आँख खुल जाती है और होश में आते HI वो दोनों गायब हो जाते हैं.......

अब आगे:-

CHAPTER-1

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट )

अपडेट-48:-

क्लाइमेक्स-1

दिग्विजय- मई तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ पर समझ नहीं आ रहा है की कैसे कहूं!!!!!

निष्कलिका- मुझे bhi......ab हम साथ नहीं रहा सकते......

दिग्विजय निष्कलिका की बात सुनकर शॉकेड हो गया.....

निष्कलिका- dekho.mai तुम्हारी दिल की हालत समझ सकती hun.....par मई क्या karun,pata नहीं कैसे पर अब मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई प्रेम नहीं है....

तुम्हारे क्या मेरे मन में इस ब्रम्हांड के किसी भी जीव के लिया प्रेम तोह क्या हमदर्दी भी नहीं hai.....pata नहीं क्यों ऐसा हुआ hai!!!par यही सच है.....

दिग्विजय- मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई hai.balki मई तोह खुश हूँ की तुमने मेरी टेंशन दूर कर di....mai खुद तुमसे यही कहने वाला था की मेरे मन में अब तुम्हारी वो छवि नहीं रही जो कभी हुआ करती thi.....isiliye हम अलग हो जाते hain.par मुझसे पहले तुमने ये बात बोल दी....

और रही बात की ऐसा क्यों hua,toh मुझे ऐसा लगता है की ये उन शक्तियों की वजह से हुआ है जो उन डायमंड्स ने हमे दी hai.mujhe अपने अंदर के हर जस्बात बनते बिगड़ते से महसूस हो रहे हैं....

निष्कलिका- तोह अब!!!!

दिग्विजय- तुम ग्लूटो sambhalo,mai चला पृथ्वी waapas...pata नहीं क्यों पर मुझे ऐसा आभास हो रहा है जैसे मेरे अपनों के साथ कुछ गलत हुआ है.....

फिर बिना निष्कलिका की कोई बात सुने दिग्विजय गायब हो गया.....

निष्कलाईका- मुझे दिग्विजय के अंदर असीम शक्तियों का आभास हो रहा tha....hum दोनों साथ hi उस गुफा में गए the,un डायमंड्स ने हम दोनों की आत्मा को सोखा tha,hum दोनों को एक साथ इतनी शक्तियां मिली थी.....

पर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है जैसे दिग्विजय मुझसे अधिक शक्तिशाली हो गया hai....kahin उन डायमंड्स ने मेरे साथ भेद भाव तोह नहीं किया....

पर वो ऐसा क्यों karengi.....mujhe एक बार और उस गुफा में जाना chahiye.....ho सकता है मुझे और शक्तियां प्राप्त हो जाएँ..

निष्कलिका तुरंत गायब हो gayi......par वो ये नहीं जानती थी की उसके और दिग्विजय के गायब होने के बाद सत सकिलिअ उस गुफा के बहार प्रकट हुई thi...unhone अपने हाथ आगे किये और

परमेश्वर अच्छेद्य कवचं....

(GOD'S ुंब्राकेबले आर्मर ) इस मंत्र के साथ वो गुफा बांध गया........

जिस मंत्र के उपयोग से सत सकिलिअ ने गुफा को बाँधा tha,wo कोई साधारण मंत्र नहीं था....

अब उस कवच को वो खुद भी नहीं तोड़ सकती thi.yahan तक की तीनो GOD'S मैसेंजर भी अगर कोशिश कर len,toh भी वो सुरक्षा कवच नहीं टूटता....

गुफा को बांधते hi सत सकिलिअ के चेहरे पर संतुष्टि भरी मुस्कान thi,par वो ये नहीं जानती थी की एक गड़बड़ पहले hi हो चुकी थी.....

सत सकेलिए गायब हो gayi.aur ठीक उनके गायब होने के बाद निष्कलिका वापस उस गुफा के सामने प्रकट hui....aur जैसे hi निष्कलिका ने अपने कदम गुफा के अंदर रखने के लिए badhaye,usse एक तेज़ झटका laga,aur वो दूर जाकर गिरी...

निष्कलिका को यकीं नहीं हुआ की उसक साथ ऐसा भी कुछ हो सकता hai...itni शक्ति प्राप्त करने के बाद भी....

उसने फिर कोशिश की पर नतीजा वही nikla....NISHKALIKA ने कई मंत्र padhe,par उसके बाद भी जब निष्कलिका गुफा के अंदर नहीं जा पायी तोह निराश होकर वो गायब हो गयी......

बैक तो हीरो:-

अंजलि- wowwww.nanu,yahan तोह काफी बड़ा मेला लगा है....

रोनित- haan,hum इतने सारे एम्यूजमेंट पार्क्स गए hai,fun वर्ल्ड गए hain.par इस मेले को देख एक अलग hi एक्ससिटेमेंट फील हो रही है....

आज 26तह मई tha.kal मॉर्निंग में hi मैंने केक काट लिया tha.dopehar को हम तीनो फैमिलीज़ एक लक्ज़री बस से जो की डैड ने सुबह hi आर्डर कर के खरीद ली थी, धवलगढ़ के लिए निकल गए थे.

हम सुबह करीब 3 बजे ननु के घर पहुंचे the.nanu अपने घर को देखकर शॉकेड हो गए थे...

बात दरअसल ये थी की नाना नानी के मुंबई शिफ्ट होने के बाद डैड ने मुंबई के बेस्ट आर्किटेक्चर को हिरे करके देहवालगढ़ वाले घर को रेनोवेट करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था....

और अब हमारे ननु का घर किसी पैलेस से काम नहीं लग रहा tha....nanu डैड का खुद के लिए प्यार देख काफी इमोशनल हो गए थे....

लेट सोने की वजह से आज सबकी नींद काफी देर से खुली (सिवाए mere....POWER स्टोन मिलने के बाद से hi मुझे neend,bhuk,pyaas और ऐसे hi कोई भी इंसानी शरीर की ज़रुरत महसूस नहीं हो रही थी....)

हमारे घर से कुछ दूर पर hi चौक tha,jahan दो बड़े बड़े स्पीकर्स लगे हुए the....aur उसमे लगातार धवली महोत्सव का अद्वेर्तिसेमेन्ट हो रहा था....

हम सभी उस स्पीकर में हो रहे अद्वेर्तिसेमेन्ट को सुनकर काफी एक्ससिटेड हो gaye...hum सब फटाफट रेडी hue,kyunki अब लंच का टाइम हो गया था इसीलिए हम सब ने लंच किया और मेले वाली जगह पर पहुँच गए....

डैड- मई तोह आकाश झूले पर बैठूंगा....

डैड किसी बचे की तरह एक्ससिटेड होकर बोले....

ननु- bilkul.tu kya,ham सब baithenge.....aur सिर्फ आकाश झूले पर hi nahi,yahan जितनी भी राइड्स hain,un सब में बैठेंगे......

हम सब आकाश झूले की तरफ चल पड़े......

chaliye,jab तक सब राइड्स एन्जॉय कर रहे hain,mai आपको बताता हूँ की जब तक सभी उठ नहीं gaye,maine क्या किया.

सब के उठने तक मई ध्यान में बैठा raha.....un कुछ hi घंटों में मैंने पुरे ब्रम्हांड में फैले सभी एंगेल्स को उन्हें आगे क्या क्या करना hai,har गृह का बैलेंस कैसे बनाये रखना है, उसके निर्देश diye....kuch वक़्त तक गोड्स मेसेंजर्स से भी बात की.......

मैंने धवली झील के रहस्य का संपूर्ण ज्ञान लेनी की भी कोशिश ki,par जैसे hi मेरा दिमाग झील की सतह तक jaata,mujhe वो स्पीयर दिखाई देने lagta,jisse मेरे पुरे शरीर में एक दर्द की लकीर दौड़ जाती और मेरा ध्यान टूट जाता....

एक बात तोह मई समझ गया था की उस स्पीयर की ताकत मुझसे कहीं ज़्यादा है और इसका कारण है उसके अंदर फसे 1000 हौली स्पिरिट्स जिनकी पूरी शक्ति उस स्पीयर ने सोख ली hai.......ab जो भी होना tha,wo रात को होना था....

वहीँ दूसरी तरफ:-

अवंतिका- ी ऍम सो प्राउड ऑफ़ ु dad.....finally आपने सारे इल्लीगल काम बंद कर diye.....ab हम भी एक रेस्पेक्टेबले ज़िन्दगी जियेंगे.....

अवंतिका भी धवली महोत्सव देखने के लिए घर आयी हुई thi...wo आना तोह नहीं चाहती thi,par उसकी दादी की आंसुओं ने उससे मजबूर कर diya,ghar आने पर...

जबसे अवंतिका के दादू गुज़रे the,tabse अवंतिका ने अपने डैड से और मामू से बात नहीं को thi...wo अपने दादू की मौत का ज़िम्मेद्दार डैड और मामाजी के गलत कामो को मानती थी....

पर घर पहुँचते hi जब उससे ये मालूम पड़ा की उसकव डैड और मामाजी ने सारे गलत काम बंद कर दिए हैं और अब वो मुंबई में रेस्टुअरंत की एक चैन खोल रहे hain,toh उसके दिल के सारे गीले शिकवे मिट गए और वो अपने डैड से गले लग गयी......

नवीन- हाँ बीटा.

ये बोलते वक़्त नवीन के आवाज़ में एक दर्द था जिसका एहसास अवंतिका को हो गया था.....

अवंतिका- क्या हुआ dad!!!!!kya आप खुश नहीं है......

NAVEEN-aaj 1.30 साल बाद मेरी बेटी मेरे गले लगी hai....mai साद कैसे हो सकता हूँ!!!!! मुझे बस इस बात का अफ़सोस है बीटा की अगर हमने ये रास्ता पहले hi चुन लिया होता तोह आज डैड हमारे साथ होते.......

अवंतिका की अपने दादू को याद करके साद हो गयी पर फिर तुरंत निर्मल होते हुए बोली......

अवंतिका- ओफ्फो dad.....aap नेगेटिव hi क्यों सोचते hain....aap ये सोचिये ना की दादू जहाँ भी honge,aapke इस फैसले पर गर्व कर रहे honge........ab आप साद होना छोड़िये और हमारे नए रेस्टुरेन्ट्स को बनाने ka,unke दसिग्नस के बारे में सोचिये....

मई जा रही हूँ मेला चेक आउट karne..aane के बाद मुझे सब इंफोस चाहिए......

NAVEEN-beta दसिग्नस तोह रेडी hai.unmese कौन सा फाइनल करना है ये तू डीडे karna.aur रही बात मेला जाने ki,toh तू hi क्यों हम सब चल रहे हैं.......

रियांश, देवांश, सबको आवाज़ dedo.....mele के लिए निकलना है...

रियांश और देवांश की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी और ये रेस्टोरेंट्स का आईडिया भी इन्ही दोनों का था....

दोनों ने सबको बुलाया और पूरी आहूजा फॅमिली मेले के लिए निकल गयी....

वहीँ दूसरी तरफ:-

अब्ब्दों- ये सब क्या था?

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?पुरे ब्रम्भाण्ड में jhatke,wo भी एक saath!!!!aisa तोह आज तक नहीं हुआ!!!!!

लिलिथ -ब्रम्हांड को chhodo,DEVIL लार्ड के इजाज़त के बिना मांसलिकेल में कैसे झटके लग सकते hain....aur यहाँ का mousam,ye तोह डेविल लार्ड के हिसाब से hi रहता hai......par यहाँ भी अचानक कुछ पलों के लिए गर्मी बढ़ गयी थी.......

अब्राक्सस- कहीं कोई अनहोनी तोह नहीं घाट gayi......aur सबसे ताजुब की बात ये है की इतना सबकुछ होने के बावजूद डेविल लार्ड की कोई खबर भी नहीं....

अब्ब्दों- डेविल लार्ड के बारे में हमें सोचने की ज़रुरत नहीं hai.....unse बेहतर कोई नहीं जानता की कब क्या और कैसे करना hai.....unke लौटने तक साड़ी ज़िम्मेदारी हमारी है....

ये जो कुछ भी घटा hai,iska पता हमे hi लगाना hoga......hum चारो ब्रम्हांड के अलग अलग हिस्से में बात कर इस राज़ का पता लगते hain.par ये वालेफ़ोर है कहाँ.....!!!!

अब्राक्सस- वो तोह अपने hi गम में डूबा हुआ है......

अब्ब्दों- ये इंसानी कमिया हम devil's में कब से आ gayi...usse जाकर कह दो की जो हुआ उससे भूल जाए और अभी की समस्या पे गौर kare,warna उसके दूसरे बेटे के का भी वही अंजाम होगा जो उसके पहले बेटे का हुआ था....

बेवकूफ ने DEVIL'S की नाक कटड़ी जो एक मनुष्य के आगे न टिक पाया....

तीनो DEVIL'S ने अपने हाथ आगे kiye,teeno के सामने वर्ल्ड डोर्स खुल gaye,teeno उसके अंदर घुस अलग अलग गृह में चले गए.....

बैक तो हीरो :-

एक्सक्यूज़ में.................

आवाज़ सुन जैसे hi हम palte,mere फॅमिली और फ्रेंड्स को शॉक laga......kyunki हमारे सामने पूरी आहूजा फॅमिली कड़ी thi.....par शॉक होने का मैं रीज़न ये नहीं tha...is वक़्त पूरी आहूजा फॅमिली ने हमारे सामने हाथ जोड़ रखे थे....

अब ये सब यूँ अचानक कैसे hua,jaanene के लिए चलिए,5 मिनट पीछे चलते हैं...

नवीन- क्या हुआ beta????tera चेहरा अचानक मुरझा क्यों गया!!!!

AHUJA'S अभी अभी मेले में पहुंचे the,pure रास्ते अवंतिका का चेहरा खिला हुआ था पर जैसे hi सब मेले के अंदर ghuse,kisi को dekh,AVANTIKA उदास हो गयी....

अवंतिका- नहीं dad.mai कहाँ साद हूँ....

नवीन जान गए की उनकी बेटी उनसे झूठ बोल रही hai,unhone सामने देखा तोह माजरा समझ gaye.meri फॅमिली सामने फ़ूड स्टाल के पास कड़ी थी.....

नवीन- beta,teri उदासी की वजह मई जान gaya....par उदास होने से क्या hoga,hum सबको उनसे माफ़ी मांगनी चाहिए.....

और फिर ारी AHUJA'S फॅमिली हमारे पास आकर हाथ जोड़ कर खड़े हो गए....

अभी हम में से कोई कुछ kehta,usse पहले hi अवंतिका की दादीजी बोल उठी.....

A/DADIJI- भाई sahab.....mere बच्चों ने आपके परिवार के साथ जो भी kiya,hum सब उसके लिए दिल से आपसे माफ़ी मांगते हैं....

नवीन- जानता हूँ की जो भी हमने किया है वो माफ़ी के काबिल नहीं hai,agar आप हमे सजा भी देना chahen,hum उसके लिए भी तैयार हैं....

नानाजी- आपको अपनी गलती का एहसास hua,itna hi काफी है....

जितने बड़े the,sab अपने gile,shikwe मिटने में लगे rahe,wahin RIYANSH,DEVANSH,AVANTIKA और शनाया हम तीनो के माफ़ी मांगे हमारे पास आये....

मई- इतस ok.....tumme से किसीको भी सॉरी कहने की ज़रुरत नहीं hai.....we अरे ओवर आईटी....

इससे पहले की उन चारों में से कोई भी कुछ kehta,maine आगे के लाइन्स बोल दिए....

अवंतिका- congrats,firse इंडिया टॉप करने के लिए....

मई- थैंक्स & कॉंग्रट्स तो ु too.....tumhari भी काफी अछि रैंक आयी है....

डैड- bachon,lets जो....

अभी हम और कुछ बात karte,usse पहले hi डैड ने हमे आवाज़ देकर बुला liya...humne एक दूसरे को bye कहा और अपने अपने रस्ते निकल गए.....

हेवन में:-

सत सकिलिअ- इन दोनों की कहानी भी अजीब है ना.....

ात सेबेस्टियन- अभी और अजीब होना बाकी hai......waise एक और अजीब बात हुई hai,jispe आपने गौर नहीं किया और जब तक मैंने kiya,der हो चुकी थी.....

सत सकिलिअ- कैसी अजीब बात!!!!!

आपने गुफा को बाँधने के समय गुफा के अंदर जाकर एक बार भी देखा nahi,haina....!!!!!

सत सकिलिअ- nahi,kyun,kya हुआ?

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सत सेबेस्टियन ने अपना राइट हैंड सामने की तरफ घुमा diya,saamne हवा में गुफा के अंदर का सन दिखने laga,jisse देखकर सत सकिलिअ का दिमाग घूम गया.

सत सकिलिअ- ye,ye कैसे हो gaya......!!!!!saare डायमंड्स में ये kaalapan,ye तोह ब्लैक एनर्जी की निशानी hai.....par ये कैसे हो सकता hai!!!!ye डायमंड्स तोह...............

सत सेबेस्टियन- आप भूल रही hain,ki ये डायमंड्स कहाँ से आयी hain,...ussi चीज़ की वजह से इन डायमंड्स ने भी ब्लैक एनर्जी को अपना लिया है....

सत सकिलिअ- पर ऐसे में तोह...................

सत सेबेस्टियन- अब हम कुछ नहीं कर sakte....ab हमे हर परिणाम के लिए तैयार होना होगा..............

धवली JHEEL...SCENE-1

gurudev,aap सामने आ सकते हैं.......

एक सफ़ेद धुंए के गुबार के बीच बाबा विशाखत प्रकट हुए और मेरे सामने झुक गए....

रात के ठीक 12 बज रहे the.........is वक़्त मई अपने घर के बहार खड़ा था......

मई- ऐसा मत kariye.....mere सर hi हमेशा से आपके आगे झुकता आया है और आगे भी झुकेगा....

ये बोल मैंने गुरुदेव के आगे अपना सर झुका लिया.....

बाबा विशाखत- ऐसा करके मुझे पाप का भागीदार मत बनाइये....

मई- आप मेरे गुरु hain...isse कोई फर्क नहीं पड़ता की मई आज किस जगह पर hun,mai अपनी शुरुआत तोह नहीं भूल सकता naa.RONIT को सही सलामत हॉस्पिटल पहुंचकर वैसे भी आपने मुझपर एक और एहसान किया है....

जी हाँ doston,RONIT को उस गोडाउन से हॉस्पिटल में बाबा विशाखत hi लेकर आये the.....unhone विक्रम की पूरी लड़ाई अदृश्य होकर अपनी आँखों से देखि thi.jaise hi अलेसेन्द्र विक्रम को लेकर gayi,thik उसी वक़्त बाबा विशाखत प्रकट हुए और रोनित को लेकर हॉस्पिटल चले गए.....

बाबा विशाखत- यह तोह मेरा फ़र्ज़ tha......aur आज आपको लार्ड ऑफ़ एंजेल बने देख मुझे इतनी ख़ुशी हो रही है जो मई बता नहीं सकता....

मई- आपके दिए ट्रेनिंग के बिना ये संभव नहीं hota....aur मई आपसे सत सेबेस्टियन की तरफ से भी माफ़ी मांगता hun....mai जानता हूँ की जिस वक़्त मुझे मेरी पावर स्टोन मिली आप मुझसे मिलना चाहते the,par सत सेबेस्टियन न ने आपको रोक दिया tha....haina!!!

बाबा विशाखत- जी.......

मई- उस वक़्त मेरे शरीर में वाइट एनर्जी का प्रभाव इतना ज़्यादा tha,ki कोई भी मनुष्य चाहे वो कितना hi ताकतवर क्यों न ho,wo उस एनर्जी को बर्दाश्त नहीं कर पाटा.....

बाबा विशाखत- मेरा एक और प्रश्न है!!

मई- यही न की अब तोह आपके सारे काम पुरे hue...toh फिर आपका जीवन चक्र समाप्त क्यों नहीं हुआ hai....woh इसलिए क्यूंकि अभी आपका एक अंतिम काम शेष hai......aapko एक और बार मेरी मदद करनी पड़ेगी......

बाबा विशाखत- ये तोह मेरा सौभाग्य होगा...

फिर मैंने गुरूजी को बताया की उन्हें क्या करना है......

मैंने अपना हाथ ा

अपने दिल पर रखा और फिर सामने कर diya.mere हाथों से निकली रौशनी के बीच कोई प्रकट हुआ....

मई- अब मुझे आज्ञा दीजिये.....

मई गुरुदेव से विदा लेकर गायब हो गया और पहुंचा ठीक झील के बीचो beech.......mere चारो तरफ सिर्फ काली रथ थी....

मई- पुस्तक प्रकटम.............

और अगले hi पल मेरे हाथ में ेंचन्त्मेन्त बुक thi.....maine उसे khola....aaj उसमे कुछ ड्राइंग सी बानी हुई थी.....

ये एक किस्म की पहेली thi....ya यूँ कहूं एक रास्ता था जिससे मई इस मिटटी के अंदर जा सकता tha....is ड्राइंग में कई साड़ी लाइन्स थी जो एक दूसरे से कनेक्टेड thi...lines हर कोने से घूम रही thi,ye कोने और कुछ नहीं झील के किनारे थे....

सैकड़ों लाइन्स जो एक दूसरे से गुथम गुथा the......maine कभी नहीं सोचा था की फ्लोसान्टो द्वारा दिया गया वरदान मेरे इतने बड़े चक्रव्यूह को तोड़ने में काम आएगा....

दृष्टि SPASHTAM...........(CLEAR विशन)

मई हर मंत्र को बस सोच कर इस्तेमाल में ला सकता था पर कुछ ख़ास बड़े मंत्र मुझे बोलने पड़ते थे.....

मेरे मंत्र बोलते hi वो लाइन्स मुझे gehri,alag अलग और साफ़ साफ़ दिखने लगी.....

हर लाइन किसी दूसरे लाइन से जुडी हुई thi,par हर लाइन में एक बात कॉमन thi...wo ये की उन साड़ी लाइन्स के एक एक स्टार्टिंग पॉइंट में एक बोहोत hi बारीक सा एरो था जो एक hi दिशा में पॉइंट कर रहा था....

जिस दिशा में हर एरो पॉइंट कर रहा tha,wahan पे एक बोहोत hi हल्का सा ऑफ वाइट धब्बा उभरा हुआ tha.kyunki ये सब एक बुक के पैन में tha,aur पैन सफ़ेद होते hain,isiliye नार्मल आँखों के लिए वो धब्बा दिखना नामुमकिन था.....

MAI-MOKSAYATI.......(PUZZLE साल्व्ड)

जैसे hi मुझे वो ऑफ वाइट धब्बा dikha,maine अपनी एक ऊँगली उसके ऊपर रख ये मंत्र कहा.......

और अगले hi पल पूरा मंज़र बदल gaya.....jis जगह मई खड़ा tha,wo जगह दो हिस्सों में बात gayi,aur मई उस काली रेट के अंदर समां gaya....ye सब 1 सेकंड से भी काम समय में हुआ tha....mere अंदर जाते hi वो जगह वापस पहली जैसी हो गयी थी....

अब मई एक अलग hi दुनिया में tha.....is जगह हर तरफ रौशनी hi रौशनी थी पर कोई सूरज नहीं tha.....thand thi,par हवा नहीं thi....door दूर तक जहाँ तक नज़र jaaye,bas एक अंतहीन रास्ता सा दिख रहा था.....

कुछ देर तक मई वहीँ खड़ा अपने आप को आगे आने वाले सुरपरिसेस के लिए तैयार करता raha.....fir एक लम्बी सांस छोड़ मई आगे बढ़ा....

मई उस रास्ते पर पैदल hi आगे बढ़ने laga...na मई uda,na hi अंतर्ध्यान hua,kyunki मई जानता था की ये जगह स्पीयर का बनाया हुआ चक्रव्यूह hai,agar मई यहाँ किसी भी तरह का जादू karta,toh स्पीयर उस मैजिक को सोख लेती....

जैसे जैसे मई आगे बढ़ रहा tha,mere पीछे का रास्ता अँधेरे में डूबता चले जा रहा tha...par मई इस अनोखी मायाजाल को देखकर भी बिलकुल घबराया nahi,aur धीरे धीरे आगे बढ़ता गया.....

मुझे कुछ hi देर हुई थी चलते hue,ki मेरे पीछे का अँधेरा आगे बढ़ता हुआ मुझसे आगे निकल gaya.aur अब मेरे चारो तरफ सिर्फ अँधेरा hi अँधेरा था की तभी.......

मई- ओह teri.........gazab..........

मेरी मुँह से ये शब्द इस नए परिवर्तन की वजह से आये थे...

मेरे चारो तरफ फिर से उजाला हो गया पर अब मई किसी रास्ते पर नहीं बल्कि किसी बोहोत hi बड़े इंडोर स्टेडियम जैसी जगह पर था....

मुझसे कुछ hi दूर उस स्टेडयम जैसी जगह के ठीक बीचो बीच एक आदमी एक वाइट चेयर पर बैठा tha....mai चलते हुए उसके पास पहुंचा.....

उसका चेहरा दूसरी तरफ था...

आदमी- वेलकम मर विक्रम जयराज सिंह.......

ये बोलते हुए वो आदमी पलट gaya....mere सामने एक 40 के आस पास का दिखने वाला आदमी खड़ा tha....bande ने थ्री पीेछे सियत पहना हुआ था.....

आदमी- नॉट bad.....tum मुझे देखकर बिलकुल भी घबराये नहीं नाही सुरप्रीसेड हुए....

मई- मेरे दिमाग की उपज हो tum.fir तुमसे कैसा घबराना....

दरअसल वो आदमी वैसा hi था जिस तरह के आदमी से मैंने यहाँ मिलने की उम्मीद की थी...

जिस जगह मई tha,is जगह की एक खासियत ये भी थी की ये आपकी इमेजिनेशन को हक़ीक़त का रूप दे सकती थी.....

मेरी बात सुन वो आदमी एक पल के लिए शॉक हुआ पर फिर मुस्कुराते हुए बोलै....

आदमी- waah,maanana padega,kabiliyat है tumme.......par इतनी भी नहीं की अपने मकसद में कामियाब हो सको.....

अब भी वक़्त hai,wapas लौट jao......warna स्पीयर तुम्हे भी हौली स्पिरिट्स की तरह हमेशा के लिए कैद कर लेगी.......

मई- एक बात तोह hai,duniya असली ho,ya mayavi,chutiye सभी जगह मिल जाते हैं.....

पर bhai,mere पास तेरी ये चूतियापे से भरी धमकियाँ सुनने का वक़्त नहीं hai........SPEAR तक पहुँचने के लिए करना क्या होगा ये बता.....

आदमी- hmm,akad,haan...chalo,maza आएगा इससे तोड़ने me....tumhe ये तोह पता चल गया की मेरा रूप तुम्हारी दिमागी उपज से बना है पर तुम ये नहीं जानते की मई हूँ कौन!!!!

मई स्पीयर द्वारा नियुक्त किया गया पहला रक्षक hun.....aage जाने के लिए तुम्हे मुझे हराना hoga....toh तैयार हो जाओ...

मई- किस चीज़ में हराना होगा मुझे तुम्हे!!!!!!

रक्षक- फाइट me......jitni भी युद्ध शैली तुम्हे आती hai,unhe याद कर lo.......aur एक baat,yudh के बीच मई मैजिक कर सकता hun,par तुम nahi....par फ़िक्र मत karna,mere मैजिक सामान्य स्टार के honge.....toh शुरू करें!!!!!

मई- बिलकुल......

वो रक्षक धीरे धीरे मुझसे 5 फ़ीट दूर आकर खड़ा हो गया....

मैंने भी एक फाइटिंग स्टान्स ले liya....aaj मुझे पता चला की मुझे गुरूजी ने ट्रेनिंग क्यों दिलवाई थी.... और सही मायनो में उस ट्रेनिंग का फाइनल टेस्ट आज था....

रक्षक ने अपनी जगह से मेरी तरफ हवा में छलांग लगाई और अपना राइट पेअर मेरे चेहरे की तरफ घुमा दिया...

आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह............

मेरी चीख उसके राइट लेग के मेरे चेहरे पर पड़ने की वजह से नहीं निकली thi...uske राइट लेग के घूमते hi मई भी नीचे झुक चूका tha,par ये एक डबल अटैक tha.jaise hi उसका राइट लेग मुझे क्रॉस hua,usne हवा में hi अपना लेफ्ट लेग जो की थोड़ा नीचे tha,usse एक झटका diya.....uska लेफ्ट फुट मेरे राइट गाल पे pada,mere मुँह से आह निकल गयी और मई नीचे गिर गया...

पर मई तुरंत उठ कर खड़ा हो gaya.RAKSHAK ने अपना लेफ्ट हाथ ज़मीं पर जमा कर मेरे सीने की तरफ अपने पेअर चला दिए.

DHAMMMMM....AAHHHHH....

ये आवाज़ मेरी nahi,RAKSHAK की आयी थी.

इस बार मेरा पूरा ध्यान उसके पैरों के तरफ hi tha,uske किक मारते hi मई एक साइड खिसक गया और उसके पेअर को पकड़ उससे घुमा के पटक दिया...

इतने ज़ोरदार वार के बाद भी रक्षक तुरंत खड़ा हो गया और मेरी तरफ तेज़ी से बढ़कर अपने हाथों और लातों से अलग अलग एंगल्स बनाकर मुझपे वार करने लगा...

पर मई उसके हर डाव को लगातार ब्लॉक करता चला gaya..wo मुझसे थोड़ी दूर खड़ा हो gaya.usse कुछ देर में hi समझ आ गया की मुझे ऐसे हराया नहीं जा सकता.

रक्षक ने अपने हाथ आगे kiye.uske हाथों में एक नान चाक़ू आ गया....

रक्षक उससे घूमते हुए मेरे पास आने laga....uske हाथों की रफ़्तार बोहोत ज़्यादा thi...naan चाक़ू ठीक से नज़र भी नहीं आ रहा tha...mujhe उसके नान चाकू मेरे ऊपर घूमने से पहले hi कुछ करना था...

मई तेज़ी से आगे badha.mai पहले उसके राइट साइड गया .उसने नान चाकू मेरे सर का निशाना लेकर एक झटका दिया पर मई तुरंत अपनी जगह बदल उसके लेफ्ट साइड पर आ गया...

जब तक वो मेरे डाव को samajhta,mera एक मुक्का उसके लेफ्ट गाल पर और दूसरा उसकी पसलियों पर पद चूका tha....RAKSHAK दर्द से दोहराते हुए एक तरफ झुकता चला गया....

मई अपनी जगह खड़े होकर उसके उठने का इंतज़ार का इंतज़ार करने laga..kuch वक़्त laga,RAKSHAK लम्बी लम्बी सांसें लेते हुए खड़ा हो गया....

रक्षक कुछ पल तक मेरी आँखों में देखता raha,fir मेरी hi तरह उसने भी एक फाइटिंग स्टान्स ले लिया और अपनी एक ऊँगली से मुझे अपने तरफ आने का इशारा किया..

मई तेज़ी से उसकी तरफ बढ़ा पर ये क्या,

DHOOM,DHAAK,DHAAK,AHHHHHHH......

मुझे उसकी मैजिक वाली बात याद नहीं thi,jaise hi मई उसके पास pahuncha,wo गायब होकर ठीक मेरे पीछे पहुँच गया और मेरे पीठ पर एक मुक्का जड़ diya,mere पलटते hi वो फिर गायब हो मेरे लेफ्ट साइड साइड पहुंचा और मेरे लेफ्ट शोल्डर पर एक पंच जड़ diya,yahi काम उसने मेरे राइट शोल्डर के साथ भी किया....

माइक तीसों ने एक बार कहा tha,ki एव्री बॉक्सर है ा PLAN,TILL हे रइवेस ा PUNCH.....mujhe आज इस बात का मतलब पता chala....itne सारे पंचेस ने मेरे दिमाग और कॉन्फिडेंस दोनों को हिला दिया था.....

मेरे राइट शोल्डर पे उसके पंच पड़ने के बाद मई हवा में ऊपर लेग्स फुल स्ट्रेच करके एक स्पिन liya...par रक्षक अलर्ट tha.wo तुरंत झुक गया और जैसे hi मेरे एक पेअर ने उसके सर को क्रॉस kiya,usne मेरे पेट पर एक पंच जड़ diya...mere मुँह से एक दर्द भरी आह निकल गयी और मई उड़ता हुआ पीछे गिर गया.....

रक्षक- निकल गयी akad........ab भी मौका hai,nikal जा........

मुझे तोह साले की बात ठीक से सुनाई hi नहीं di.....mai तोह मेरे दोनों हाथ और पेट के दर्द को कण्ट्रोल करने में लगा हुआ था....

मई लट्टे पत्ते खड़ा हुआ....

मई मन में- साला ये ऐसे तोह हारने से raha..gayab हो होकर ये मेरे हर daav,har pucnch,har किक को डॉज दे देगा.....

कहते है डिफेंस इस थे बेस्ट ATTACK.....maine भी यही डाव अपनाने की सोची....

मैंने अपना एक पेअर आगे और एक पेअर पीछे करके स्टान्स लिया और उसी की तरह एक ऊँगली से उससे अपनी तरफ आने का इशारा kiya....par एक बात अलग thi,meri आँखें बंद थी...

लगातार मुझे कुछ पंचेस मारकर वो थोड़ा ओवर कॉंफिडेंट हो गया tha....usne एक लम्बी फ्रंट फ्लिप मारी और ठीक मेरे सामने आकर गायब हो gaya.....wo ये भूल गया था की मैजिक करने का पॉजिटिव के साथ साथ एक नेगेटिव इफ़ेक्ट भी है.....

आँख बंद होने की वजह से मई उसके बॉडी को देख नहीं रहा tha,balki उसके मैजिक करके गायब होने की वजह से निकली ऊर्जा को महसूस कर रहा था....

मुझे पता चल गया की रक्षक गायब होकर मेरे पीछे पोहोंच गया है और उसने मेरे बैक हेड की तरफ एक पंच भी घुमा दिया है....

मई तुरंत एक साइड हो गया और उसके हाथ को पकड़ liya....aur जब तक वो कुछ samajhta,maine उसके एल्बो जॉइंट्स को एक झटका diya....uska वो हाथ सुन्न पद gaya...par मई रुका नहीं....

मई तुरंत उसके पीछे पहुँच गया और पीछे से उसके दोनों कनी पॉइंट्स पर अपने कनी से एक एक झटका diya.uske पेअर सुन्न पद गए और जैसे hi रक्षक अपने घुटनो पर aaya,maine पीछे hi उसके शोल्डर्स के प्रेशर पॉइंट्स को दबा दिया....

शोल्डर के प्रेशर पॉइंट्स से दो ख़ास नस निकलते hain...ek ब्रेन में जाता है और दूसरा हार्ट me.......mere प्रेशर पॉइंट्स को दबाते hi उसकी बॉडी एक तरफ झुकती चली gayi....uski ऊपर की बॉडी को लकवा सा मार गया....

उसका कंसंट्रेशन टूट चूका था जिसकी वजह से उसका मैजिक ख़त्म हो गया और वो नज़र आने laga.....maine पीछे से उसकी गर्दन में अपने एक हाथ से फंदा बनाया और दूसरे हाथ से उसके सर को घुमा दिया......

KADAKKKKK............RAKSHAK की गर्दन टूटते hi दो चीज़े हुईं...

1सत- बिना कोई आवाज़ किये रक्षक मर चूका था...

2ंद- रक्षक के मरते hi उसकी बॉडी हवा में उठ gayi..uski बॉडी के ऊपर एक तेज़ रौशनी हुई और जब वो रौशनी घाटी तोह उसकी बॉडी की जगह हवा में एक बड़ी सी के थी.....

के- बधाई हो VIKRAM..aaj तुम्हारी वजह से मई स्पीयर की गुलामी से आज़ाद हुआ hun....aao इस चाबी को ग्रहण कर आगे बढ़ो.....

ये आवाज़ उस रक्षक की hi थी...

मई आगे बढ़ा और जैसे hi मैंने उस के chua,wo चेयर जिसपे रक्षक बैठा हुआ tha,uski जगह एक बड़ी सी संदूक आ गयी जिसपे ताला लगा हुआ था...

के- आगे बढ़ो VIKRAM,aage का रास्ता इस संदूक में से hi है...

मई आगे बढ़ा और मैंने उस के से उस संदूक का ताला खोल diya...maine जैसे hi उस संदूक को khola,us संदूक के अंदर से एक रौशनी निकली और मुझपर पढ़ी और अगले hi पल मई खुद एक रौशनी में बदल कर उस संदूक के अंदर चला गया......

वो संदूक मुझे रौशनी में बदल एक नयी दुनिया में ले गयी...

धीरे धीरे वो रौशनी नीचे की तरफ उतरने lagi.jaise जैसे वो रौशनी नीचे उतरने lagi,mai वापस अपने असली रूप में आने लगा.....

मई- ोये तेरी........

सामने का नज़ारा देखते hi मई समझ गया की ये सफर और भी मुश्किल होने वाला है....

आज के लिए इतना HI....

आपका अपना V.J......

 
अब तक आपने पढ़ा की अवंतिका और उसकी फॅमिली विक्रम की फॅमिली से माफ़ी मांगती हैं वहीँ विक्रम स्पीयर की दुनिया के पहले रक्षक को हराकर आगे बढ़ जाता है.....

अब आगे:-

CHAPTER-1:-

( DEVIL'S ेंचन्त्मेन्त & थे हौली स्पिरिट्स )

अपडेट-49:-

क्लाइमेक्स-2

मीनू- अरे ये विक्की कहाँ है?

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सुबह के 8 बज रहे the.....ghar के सभी लोग फ्रेश हो चुके the....par विक्रम को ना देख जब मीनू उसके कमरे में गयी तोह रूम का दूर खुला था और अंदर कोई भी नहीं था....

जयराज- अरे कहीं घूमने निकल गया होगा!!!!!

रोनित अंजलि (मन में)- GOD,please V.J की हेल्प karna.....usse अपने मकसद में कामियाब कर सही सलामत हमारे पास भेज देना....

कल रात विक्रम जाने से पहले रोनित और अंजलि को बता कर गया था...

रोनित- यार अभी के लिए तोह ठीक hai,par अगर विक्रम जल्दी नहीं लौटा तोह घर वाले परेशां हो jayenge.....saale को बोलै भी की किसी और दिन छुट्टी के बहाने यहाँ आ jayenge,par nahi,usse तोह कल hi जाना था उस जगह पर....

JAIRAJ-GURUJI आप..........!!!!!!!!

अभी अंजलि कुछ कहती उससे पहले hi जयराज की आवाज़ सुन अंजलि और रोनित के साथ साथ सबका ध्यान सामने की तरफ गया....

जयराज के सामने बाबा विशाखत खड़े थे...

जयराज ने तुरंत बाबा विशाखत के पेअर छू लिए......

अपने सामने बाबा विशाखत को देख मीनू भी दौड़कर आयी और बाबा के पेअर छू लिए....

बाबा विशाखत- चिरंजीवी bhava...soubhagyavati भाव....

मीनू और जयराज का रिएक्शन और एक अनजान शक्श को देख सभी उनके पास आ गए...

जयराज- papa,yahi वो गुरूजी hain,jinhone हमारे बेटे का नाम कारन किया था......

जयराज की बात सुन विक्रम के नाना और नानी ने भी बाबा से आशीर्वाद लिए और उनके बाद पुरे परिवार ने....

बाबा विषकहत- आज नहीं पूछोगे की मई अचानक कैसे यहाँ आ गया..!!!!

जयराज- नहीं guruji....itna तोह मई भी समझ गया हूँ की आपसे कुछ भी नहीं छुपता और आपके आने का हमेशा hi कोई ख़ास कारण होता है.....

बाबा विशाखत- हाँ है toh..par उस कारण को बताने से पहले मेरी आप सबसे एक निवेदन है..

जयराज- ऐसा मत बोलिये guruji....aap बस आदेश दें...

बाबा VISHAKHT-usse पहले मई आपसे किसीकी भेट करना चाहता हूँ...

ये बोल बाबा विशाखत ने पीछे पलटकर आवाज़ di.unke आवाज़ देते hi चार लोग अंदर आये....

RONIT/ANJALI- टूउऊउउउ.........

तीन लोगों को देखकर तोह सभी नार्मल रहे पर चौथे को देखकर अंजलि और रोनित शॉकेड हो gaye...kyunki वो चौथा और कोई नहीं विक्रम था.....

माँ- arre,tum लोग इतने ज़्यादा शॉकेड क्यों हो gaye.....aur तू कहाँ गया था सुबह से....!!!!

मई- मई तोह यूँही बहार टहलने गया था mom..aate वक़्त गुरुदेव के साथ इन तीनो को देखा तोह यहाँ ले aaya....waise ये हैं AKSHAANT,MOKALSAR,AUR ये हैं SHAILA......ye तीनो मेरे दोस्त हैं.....

डैड- तेरे dost..!!!par पहले तोह तूने कभी इनका ज़िक्र नहीं kiya....aur guruji,VICKY के दोस्त आपके साथ साथ कैसे.....!!!!

मई- मई बताता hun.in तीनो से मेरी मुलाकात शिमला में ीबी कम्पटीशन के वक़्त हुई thi....yahan आने से पहले मैंने इन्हे बताया था की मई धवली महोत्सव देखने जा रहा हूँ.....

इन्होने भी आने की ज़िद की तोह मैंने इन्हे यहाँ बुला liya..simple....(JHOOTH )

बाबा विशाखत- इत्तेफ़ाक़ से ये तीनो मेरे भी शिष्य hain.mai आप सब से मिलना आ रहा था तोह इन्होने बताया की ये भी यहीं आ रहे hain,toh मई इनके साथ hi चला aaya...(JHOOTH )

जयराज- ओह्ह ाचा..

मीनू- बीटा आप लोग इतना लम्बा सफर तय करके आ रहे ho....thak गए hoge..aap सब रूम्स में चलकर फ्रेश हो jao,mai नाश्ता भिजवाती हूँ....

मामी तीनो को लेकर उनके रूम्स दिखने चली गयी और उन्हें फ्रेश होने का बोल वापस बाहर आ गयी.....

बाबा विषाक्त- अब मई अपने आने का कारण बताता hun...mujhe आप सब के सर का एक एक बाल चाहिए....

गुरूजी की बात सुन सभी चौंक gaye.....ab गुरूजी ने बात hi ऐसी कही थी....

सब इस अजीब सी मांग के पीछे का कारण जानना चाहते थे पर सभी को गुरूजी की बात याद थी की कोई भी उनसे इस विषय में कोई सवाल न करे...

सभी ने अपने सर का एक एक बाल निकल कर गुरूजी को दे diya....guruji ने अपने पोटली से एक साफ़ सफ़ेद कपडा निकला और सब के बाल को उसमे रख कर कपडे को बांध दिया और वापस अपने पोटली में दाल diya.....unhone इस बात का ख़ास ख्याल रखा की वो उन बालों को डायरेक्टली न छू लें...

बाबा विशाखत- dhanyawaad..ab मई चलता हूँ......

माँ- guruji,nashta तोह कर लीजिये,,

बाबा विशाखत- फिर कभी putri..abhi मुझे कुछ काम है...

गुरूजी ने सबको आशीर्वाद दिया और निकल गए...

मई- chalo,room में चलते हैं..

गुरूजी के निकलने के बाद मैंने रोनित और अंजलि से कहा....

माँ- पहले नाश्ता कर ले...

मई- नहीं mom,bhuk नहीं hai....mai बाद में खा लूंगा...

मई रोनित और अंजलि के साथ मेरे रूम में चला गया...

इन रूम:-

अंजलि- थैंक गॉड की तू वापस आ गया....

रोनित- हाँ yaar,hum तोह दर रहे थे की अगर तुझे ज़्यादा वक़्त लग गया तोह घरवाले तोह परेशां हो जाएंगे.....

मई- मई विक्रम नहीं हूँ............

रोनित- और मई भी रोनित नहीं अमिताभ बच्चन हूँ..

मई- मई मज़ाक नहीं कर रहा hun....mai विक्रम का सिर्फ एक क्लोन hun...VIKRAM अब भी धवली झील के रहस्यमयी दुनिया में hi hai.unhone मुहे यहाँ भेजा है ताकि यहाँ कोई परेशां न हो...

क्लोन की बात सुन अंजलि और रोनित को झटका लगा....

अंजलि- whattttt.....VIKRAM ठीक तोह है ना..

V.CLONE- अब तक तोह ठीक हैं....

अंजलि- मतलब!!!!

V.CLONE- अगर उन्हें कुछ हो जाता तोह मई भी गायब हो jaata.mera अस्तित्व तोह उन्ही से hai..abhi तक मई ठीक hun,iska मतलब वो भी ठीक हैं.....

अब ये विक्रम तोह था nahi...RONIT और अंजलि इसके साथ क्या karte.dono बहार चले गए.....

अब आप ये सोच रहे होंगे की AKSHAANT,SHAILA और मोकलसर अचानक यहाँ क्या कर रहे hain.....aur ये बाल का क्या चक्कर है...

बाल के बारे में तोह बाद में पता chalega,par इन तीनो के बारे में जानने के लिए chaliye,kuch घंटे पीछे चलते हैं.......

ा स्माल फ्लैशबैक ऑफ़ लास्ट नाईट:-

नमस्कार गुरुदेव..........

बाबा विशाखत- आयुष्मान भाव........

bachho,maine तुम्हे एक और ज़िम्मेदारी देने के लिए यहाँ बुलाया है......

इस वक़्त रात के 2 बज रहे the.....VIKRAM से मिलने के बाद बाबा विशाखत ननु के घर के पीछे से जो जंगल निकलता hai,ussi के अंदर चले गए थे.

बाबा विशाखत ने कुछ नामो का आवाहन कर कुछ मंत्र पढ़ा और अपना हाथ सामने की तरफ कर दिया...

बाबा विशाखत के ठीक सामने एक वर्ल्ड दूर खुल गया और उसके अंदर से तीन लोग बहार nikle.ye और कोई नहीं AKSHAANT,SHAILA,AUR मोकलसर थे.....

अक्षांत- ये हमारे लिए सौभाग्य की बात होगी गुरुदेव.......

बाबा विशाखत- उससे पहले मई तुम्हे कुछ बताना चाहता hun,VIKRAM के बारे में...

शैला- VIKRAM!!!!!!kya हुआ gurudev!!!!!VIKRAM ठीक तोह है ना.....

जैसा की मैंने पहले hi बताया था की ट्रेनिंग के वक़्त शैला और विक्रम काफी अचे दोस्त बन गए the,isiliye यूँ अचानक गुरुदेव द्वारा विक्रम का नाम सुन शैला विक्रम के लिए थोड़ी परेशां हो गयी....

बाबा विशाखत- चिंता मत करो putri...VIKRAM सही सलामत hai....par......

अक्षांत- पर क्या गुरुदेव?

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उससे पहले मई तुम तीनो को कुछ बताना चाहता hun....tum तीनो हमेशा से ये जानना चाहते थे ना की विक्रम में ऐसा क्या ख़ास है जो मैंने तुम तीनो द्वारा उससे इतना कठिन प्रशिक्षण इतने काम वक़्त में करवाई...!!!!!

तीनो- जी.....

बाबा विशाखत ने तीनो को विक्रम की सच्चाई बताई.......

जब तीनो को ये पता चला की विक्रम लार्ड ऑफ़ एंजेल hai,toh उनके मुँह खुले के खुले रह गए.....

अक्षांत- gurudev,aapne हम तीनो पर बोहोत बड़ा उपकार किया है.......

शैला- जी हाँ gurudev.....aapne न सिर्फ हमें लार्ड ऑफ़ एंजेल से milwaya,balki उनकी शुरुआती शिक्षा में हमसे योगदान भी करवाया.........

मोकलसर- हमसे खुशनसीब इस ब्रम्हांड में शायद hi कोई hoga......waise वो अभी कहाँ hain..???kya हम एक बार उनसे मिल सकते हैं......!!!!!

बाबा विशाखत- विक्रम अभी तक के अपनी ज़िन्दगी की सबसे मुश्किल चुनौती का सामना करने गया है.....

बाबा विशाखत की बात सुन तीनो chownke,par फिर नार्मल हो गए....

शैला- लार्ड ऑफ़ एंजेल के लिए कोई भी चुनौती बड़ी कैसे हो सकती है!!!!

बाबा विषाक्त- ये तुम इसीलिए बोल रही हो क्यूंकि अभी तुम्हे ये नहीं पता की विक्रम कहाँ गया है?

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मोकलसर- ऐसी कौन सी चुनौती है जो विक्रम के लिए भी मुश्किल है...!!!!

बाबा विशाखत- धवली झील की चुनौती.......

धवली झील का नाम सुनकर तीनो बुरी तरह से चौंके और एक अंजना दर उनके चेहरे पर दिखने लगा....

अक्षांत- gurudev,kahin आप उस झील के बारे में तोह बात नहीं कर रहे जिसकी उत्पत्ति पृथ्वी एक साथ hi हुई thi.......jiske किस्से ब्रम्हांड के हर गृह में मशहूर hai.jahan डेविल के स्पीयर ने ब्रम्हांड का संतुलन बनाये रखने वाले 1000 महा शक्तिशाली हौली स्पिरिट्स को कैद कर रखा है....!!!!

बाबा विशाखत- हाँ putra.mai उसी झील के बारे में बात कर रहा hun.......aur मैंने तुम्हे यहाँ विक्रम के hi कहने पर उसका साथ देने के लिए बुलाया hai....tum तीनो को भी इस चुनौती का हिस्सा बनाना पड़ेगा......

शैला- क्या हमें भी धवली झील में जाना होगा???

बाबा विशाखत- वहां विक्रम के अलावा और कोई नहीं जा sakta.......tumhe यहीं रहकर विक्रम की मदद करनी होगी.....

अक्षांत- भले जैसे भी ho,ye हम तीनो का सौभाग्य होगा की हम लार्ड ऑफ़ एंगेल्स के कुछ काम आ पाएं...

फिर बाबा विशाखत ने तीनो को समझाया की उन्हें क्या करना है और सुबह होते hi बाबा विशाखत उन तीनो और विक्रम के क्लोन को लेकर विक्रम के घर चले gaye,aur उसके बाद क्या hua,ye तोह आप सब जान hi चुके हैं........

बैक तो हीरो:-

मई- अब साला ये क्या पन्गा hai........aur ये स्पीयर मेरे सामने सीधे क्यों नहीं aata..kaisi कैसी जगह दिखा रहा है मुझे...!!!

मई इस वक़्त एक बोहोत hi संकरे रास्ते के स्टार्टिंग पॉइंट में खड़ा tha.....raasta पतला नहीं tha,balki मेरे आगे दोनों तरफ एक लोहे की दीवाल बानी हुई थी.....

दोनों दीवाल के बीच बस इतनी hi जगह थी की सिर्फ एक बाँदा hi एक बार में गुज़र सकता था....

उस दीवाल में एक एक फ़ीट के फासले में कुछ गोल सा लोहा उभरा हुआ tha........par एक अजीब बात और thi....raasta उतना hi लम्बा tha,jitni की दीवाल बड़ी thi..aur जहाँ पर दीवाल ख़त्म हो रही thi,wahan आग जल रही thi.diwal और आग के बीच कुछ 1 फ़ीट का फासला tha.aag के आगे कुछ भी नहीं दिख रहा था....

मई मन में- यहाँ तोह कोई रक्षक भी नहीं दिख raha,bas एक रास्ता है,

और उसके आगे aag....najaane उसके आगे क्या hoga.....par बिना इन सब को पार kiye,mai आगे भी तोह नहीं जा सकता.....

मैंने अपना एक पेअर आगे बढ़ाया hi था की अचानक मई रूक गया...

मई- रूकावट सिर्फ दीवाल के आखिर की ये आग नहीं हो sakti...warna ये दीवाल की यहाँ ज़रुरत hi क्या thi....zaroor इसमें भी कुछ लोचा है.....

SOOBHHHHH.........TANNN......

मई- SHITTTTT.....ab साला इससे कैसे पार करूँ!!!!!

हुआ ये की कुछ सोचकर मैंने अपना एक हाथ आगे badhaya....ki तभी मेरे हाथ के ठीक लेफ्ट और राइट साइड वाले हिस्से में जो गोल उभरा हुआ भाग tha,usse दो तेज़ नुकीले भाले निकले और मेरे हाथ की तरफ सुभह की आवाज़ के साथ बढे..

मुझे ऐसे hi किसी खतरे का अंदेशा tha,isiliye मैंने तुरंत अपना हाथ खिंच liya....TANN की आवाज़ के साथ वो दोनों भाले एक दूसरे से टकराये और टूट गए.....

पर एक गड़बड़ हो gayi.....aisa लगता है वो सारे उभरे हुए लोहे एक दूसरे से कनेक्टेड the,yahan वो दोनों भाले टकराकर toote,wahan उस दीवाल के जितने भी उभरे हुए हिस्से the,sabse भाले बाहर आकर तेज़ी से निकल बंद होने लगे........

MAI-ab क्या karun......!!!!!tezi से भागूं...!!!

आज मुझे मेरा मतिभ्रम मैदान वाली चुनौती याद आ रही thi....wo चुनौती और इस चुनौती में वैसे तोह बोहोत फर्क था पर इस वक़्त मुझे इसमें और उसमे बस दो hi फर्क दिख रहे the.us मैदान को क्रॉस करने के लिए मेरे पास काफी जगह thi,aur यहाँ तोह आगे बढ़ने के लिए बस जो दो टूट चुकी भाले वाली जगह thi,utni hi जगह थी रफ्तरार पकड़ने के लिए.

और dusri,MATIBHRAM मैदान में फ़ैल होने से और मौके मिलते the,par ये कोई ट्रेनिंग तोह थी nahi,asli ज़िन्दगी thi....yahan पर हलकी सी भी चूक का मतलब है दर्दनाक मौत....

पर आगे तोह बढ़ना hi tha....maine अपने चित को शांत किया और सामने ध्यान से देखने laga....saare भाले एक के बाद एक लाइन से निकल रहे थे..

टाइमिंग भी इतनी काम थी सारे भालों के ऊपर से दौड़ते हुए भी नहीं निकल सकता tha....ek भाले पे चढ़ कर मुझे हल्का सा रूकना padta,par जब तक दूसरे पर कूदने की बारी aati,mere खड़े हुए भाले अंदर जा चुके होते.....

मई- अरे yaar,mai भी na,bewakuf hun.....ek एक करके पार करने की ज़रुरत hi क्या है....

मई अब तक दौड़ कर उन भालों को क्रॉस करने के बारे में सोच रहा tha,jabki मई एक जम्प में कूदकर भी उन्हें क्रॉस कर सकता tha..halaki इसमें बोहोत रिस्क tha,kyunki ये दीवाल कुछ 30 फ़ीट लम्बी थी.....

ऐसा नहीं था की मई इतने दूर कूद नहीं सकता tha,par उसके लिए मुझे भी कुछ डिस्टेंस की ज़रुरत थी ताकि मई दौड़ कर रफ़्तार पकड़ सकूँ या फिर कुछ मैजिक करूँ जो फ़िलहाल संभव नहीं था......

पर रिस्क तोह लेना hi tha.....maine जो भाले एक दूसरे से टकराकर टूट गए the,unhe सहारे के लिए pakda,zameen पर पेअर धसाये ताकि कूदने के वक़्त कुछ गृप mile,lambi सांस ली अउ अपने पुरे शरीर को हल्का कर जम्प लगा दी.......

कुछ 20 20 भाले दोनों तरफ से लाइन से निकल बंद हो रहे the.mai उनके ऊपर से निकलते जा रहा था और उन्हें गिनते जा रहा था.....

MAI-20,19,18,17,16..............5,4,3,2..........oh सहित..........

लास्ट सेकंड भालों तक पहुँचते पहुँचते मई नीचे आने लगा पर अभी भी लास्ट लाइन के दो भाले बचे the...agar मई सीधा उनके आगे गिरता तोह स्वर्ग सिधार जाता....

मैंने अपने पेअर मोड़ कर अपने दोनों हाथों से पकड़ liye.....maine अपने आप को हल्का कर रखा tha.par नीचे आते वक़्त मैंने अपना वज़न दो गुना कर लिया...

और KHAADDDDDD..........issi आवाज़ के साथ मई लास्ट के दोनों साइड के भालों के ठीक ऊपर gira....dono भाले टूट गए.......

मई- hassshhhhhhh.bach गया......

मैंने पीछे देखा तोह चौंक gaya.wo मायावी दीवाल गायब हो चुकी थी.....

पर अभी एक और मुसीबत बची थी और मेरे ठीक सामने thi...aag की दीवाल......

मई- साला लाइफ में पहली बार मेरी सांस फूल रही है.....

इस दुनिया में आते hi मुझे भी इंसानी कमज़ोरियाँ का एहसास होने लगा tha...mai ज़्यादा नहीं थका tha,par कुछ कुछ थकावट मुझे होने लगी थी...

मई- कहीं ये आग भी मायावी तोह नहीं hai....!!!!!par इसकी गर्माहट तोह मई फील कर सकता hun....chu कर देखता hun....maine अपनी ऊँगली हलकी सी उस आग में दाल कर निकल ली..

मई- साली गरम hai.....ab क्या karun!!!pehle ये थकावट कुछ काम ho,fir सोचता हूँ....

मैंने कुछ देर के लिए इस टेंशन के बारे में नहीं सोचा और अपनी साँसों को कण्ट्रोल करने laga.kuch hi पलों में मई बैक तो नार्मल tha.par एक अजीब बात हुई...

मैंने चेक करने के लिए हाथ आगे किया तोह शॉकेड रह gaya,par फिर कुछ ऐसा हुआ की तुरंत hi मुझे अपना हाथ पीछे खींचना पड़ा....

हुआ ये की कुछ der,jab मैंने उस आग के बारे में सोचना बंद kiya,toh मुझे आग की गर्मी भी महसूस होना बंद हो gayi..cheak करने के लिए की माजरा क्या है मैंने एक और बार उस आग में उंगलिओ राखी पर इस बार वो आग ठंडी thi..par कुछ hi पलों में उसकी गर्मी वापस आने लगी इसीलिए मुझे अपना हाथ पीछे खींचना पड़ा....

मई- अब ये क्या ba****di है....

मई- ohhh,toh ऐसा है......

मई कुछ देर तक जो भी अभी हुआ tha,uske बारे में अपने दिमाग के घोड़े दौड़ता रहा और अचानक मेरे दिमाग की बत्ती जाली....

मई मुस्क़ुएरते हुए थोड़ी देर तक खड़ा रहा और फिर आराम से चलता हुआ उस आग को क्रॉस कर गया.........

मई- shhhh,kitni ठण्ड है यार.

आग को क्रॉस करते वक़्त मैंने कहा....

चक्र गए naa,ki ये क्या हुआ और कैसे hua.....!!!!chaliye आपको बताता hun,darasal मेरे सामने जो आग की दीवाल thi,wo भी मायावी थी...

और उसके माया को तोड़ने का तरीका था उस आग को अपने दिमाग में अवॉयड karna.matlab वो आग तब तक hi गरम thi,jab तक मेरा दिमाग ये माने की वो आग गरम है....

मैंने अपने दिमाग को ये कहकर कन्विंस किया की ये दीवाल ठंडी hai.isiliye जब मई उस आग के अंदर से होकर guzra,toh न मई jala,nahi मुझे गर्माहट महसूस hui,balki मुझे ठण्ड लगी और मई आराम से उस आग की दीवाल को क्रॉस कर गया......

MAI-ab ये क्या है!!!!!!!!

आग के मायाजाल को पार कर मई इस वक़्त एक नए अद्भुद मायाजाल में खड़ा tha....is वक़्त मई नीले आकाश से ऊपर ब्रम्हांड के काले साम्राज्य me,jahan रौशनी भी नहीं पहुँच sakti,wahan खड़ा tha...is अँधेरी चादर के बीच हलकी हलकी रौशनी को पकडे मेरे चारो तरफ मुझसे कई लाइट इयर्स दूर sitare,grah,aur साड़ी सेलेस्टियल बॉडीज दिख रही थी...

एक तरह से कहूं तोह मई किसी गैलेक्सी के बीच आकाश में खड़ा था.....

इतने बड़े भ्रम की रचना karna,isse hi पता चल जाता है की वो स्पीयर कितनी ताकतवर है....

MAI-ADBHUDH मायाजाल.....

फिर भी तुम लड़ने आ गए........

आवाज़ सुन मई चौंक gaya..maine आवाज़ की दिशा में dekha,par वहां कोई नहीं था.....

आवाज़- तुम भूल रहे हो विक्रम की पहले रक्षक की तरह मेरा रूप भी तुम hi निर्धारित करोगे.....

मई- oh...maine कुछ सोचा और अगले hi पल मुझसे थोड़ी hi दूर एक साया प्रकट होने लगा और धीरे धीरे उस साये ने मेरी hi तरह इंसानी रूप ले लिया पर रूप लेने के साथ साथ मुझे भी एक नया झटका दे दिया......

रक्षक- क्या hua,mera रूप पसंद नहीं आया.....!!!!!

साला पसंद की बात करता hai,uske रूप को देखकर तोह एक सेकंड के लिए मेरी फैट गयी थी...

क्यूंकि मैंने जो रूप सोचा tha,is रक्षक का रूप उसका पूरा उल्टा tha....maine अपने दीमाग में एक पतले दुबले लड़के की तस्वीर बनायीं thi,par मेरे सामने खड़ा रक्षक उस तस्वीर के बिलकुल उलट था....

इस रक्षक की हैघट 8 फ़ीट से ज़्यादा thi,choudai मुझसे double,aur साले ने रूप लेने में इतने में hi बस नहीं किया tha,is रक्षक के दोनों तरफ दो दो हाथ the...jisme उसने अलग अलग शाश्त्र पकड़ा हुआ था.....

और साथ hi उसके कूल चार पेअर the...saamne के तरफ के दो पेअर इंसानो जैसे the,aur उन्ही पैरों से जुड़े हुए दोनों तरफ से साइड में दो और पेअर निकले हुए थे जिनके टेल काफी मोठे थे जैसे गृप बना रहे हों....

मई- मैंने ये रूप तोह नहीं सोचा था....

रक्षक- तुम भूल रहे हो की तुम कहाँ हो.....!!!!!

तुमने सोचा की एक साधारण व्यक्तित्व की रचना कर उससे हरा डोज पर यही तुम्हारी भूल thi....tum जितनी आसान चुनौती chunoge,tumhe उतनी hi कठिन चुनौती मिलेगी....

मई- अब्बे एक बात bata,tere ये जो दो एक्स्ट्रा चौड़े फुट वाले पेअर hain,inhe रखने का लॉजिक क्या hai...!!!inse तोह अछि गृप बन सकती hai,par अभी तोह हम आसमान में हैं...

यहाँ कैसी गृप!!!!!!

रक्षक ने मुस्कुराते हुए अपने पेअर उठाये और मुझे लगा एक और jhatka....kyunki उसके पेअर के नीचे उसके पैरों के hi साइज की ज़मीं thi......jo की उसके पेअर नीचे रखे होने की वजह से दिखाई नहीं दे रही थी.....

RAKSHAK-jahan जहाँ मेरे ये पेअर padenge,wahan अपने आप hi ज़मीं आ jayegi.....ab अगर तुम्हारे सारे प्रश्नो के उत्तर मिल गए हो तोह युद्ध शुरू करें....

मई मन में- साले को फाइव स्टार फैसिलिटी मिली हुई है और यहाँ मई फोकट चाप बने घूम रहा hun.magic का इस्तेमाल भी नहीं कर sakta....par कर भी क्या सकता हूँ.....

रक्षक से- ठीक hai,shuru करते हैं.....

मेरे बोलने बस की देर thi..RAKSHAK तेज़ी से मेरी और बढ़ा और मेरे पास पहुँच अपना सर आगे कर diya....wo मुझे अपने सर से टक्कर देना चाहता था....

मई तैयार tha,maine रक्षक के सर के ऊपर से उछलते हुए एक स्पिन lagai,mai कामियाब भी raha,par पूरी तरह से nahi....mujhe अपने ऊपर से निकलते देख रक्षक ने अपने पेअर को ऊपर की तरफ हल्का झटका diya..meri स्पीड काफी तेज़ थी फिर भी निकलते निकलते मेरी पीठ हलकी सी उसके सर से takrayi,mera बालनके बिगड़ गया और मई पेअर के nahi,muh के बल कलाबाज़ी खाते हुए नीचे गिरा

पर मई तुरंत खड़ा हो gaya....ek बात तोह माननी पड़ेगी की इस रक्षक की स्पीड काबिले तारीफ़ thi....ab मुझे और चौकन्ना रहना था...

रक्षक ने एक पल मेरी तरफ देखा और अपनी जगह से सीधी छलांग lagai...RAKSHAK की बॉडी तीर की शेप लेकर गोली की स्पीड से मेरी तरफ बढ़ी....

अब बारी थी अक्षांत गुरूजी के सिखाई गयी कला को दिखने ki.mai यहाँ मैजिक नहीं कर सकता था तोह क्या hua,apni अंदरूनी शक्ति को तोह बढ़ा hi सकता था....

मैंने अपने पेअर टाइट किये और जैसे hi रक्षक का सर मेरे पास पहुंचा, मैंने अपनी पूरी शक्ति अपने दोनों हाथों को देदी और हाथ आगे कर दिए........

रक्षक की स्पीड बोहोत ज़्यादा thi...Mere पेअर घिसटते हुए थोड़े पीछे gaye...par आखिर में मैंने उससे रोकने में कामियाब हुआ.

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.......

खुद को रूकता हुआ देख रक्षक मेरे हाथ के पावर

का hi उसे कर अपने आप को पीछे झटका देने वाला था ताकि मुझसे दूर जा sake,par इससे पहले की वो ये karta,mera राइट घुटना तेज़ी से आगे बढ़ा और उसके मुँह पे pada,ek दर्द भरी आह्ह्ह्ह के साथ वो दूर जा गिरा...

खत खत खत khat,Dhoom,aaahhh,dhaakkkkk....

मई उससे मौका नहीं देना चाहता tha....jaise hi रक्षक खड़ा hua,isse पहले की वो संभाले और अपना दूसरा दाव chalaye,mai उसके सर पर पहुँच चूका tha...mere दोनों हाथ तेज़ी से उसके चारो हाथों के कलाई के नसों पर पड़े...

भले hi उसका रूप काफी खतरनाक ho,par उसके अंग तोह इंसान के hi the,toh उनमे कमज़ोरी भी इंसानो वाली hi hogi....khat के आवाज़ के साथ hi उसकी कलाई सुन्न पद gayi....kuch पलों के लिए उसके कलाई के जॉइंट्स की शक्ति शिथिल पद गयी और उसके हाथ के सारे हथियार गिर गए.

उसके हथियार गिराने के बाद मैंने उसपे तीन वार और kiye.maine उसके दो जो एक्स्ट्रा पेअर निकला हुए the,unko पकड़ा और उन्हें ऊपर उठाते हुए दो तीन बार ज़ोर से वापस नीचे rakha..ye मैंने इसीलिए किया क्यूंकि रक्षक ने कहा था की जहाँ जहाँ उसके पेअर padenge,wahan वहां ज़मीन आ jayegi..maine अपनी पूरी ताकत से ऊके पैरों को नीचे पटका जिसकी वजह से उसके वो दो पैरों में दरार सी पड़ने लगी...

मई यही नहीं rooka,maine अपने राइट हैंड में ताकत भरी और एक पंच रक्षक के पेट में जड़ diya...aaahhh की आवाज़ के साथ उसके मुँह से खून निकल gaya.mukka पड़ने की वजह से उसका मुँह सामने की तरफ aaya,.maine सामने से hi उसकी गर्दन पकड़ी और अपनी तरफ kheenchi,wo स्पिन करता हुआ मेरे सामने gira.maine अपने राइट कोहनी से उसके सर के बीचो बीच वार किया.

धाक की आवाज़ के साथ उसका सर को एक ज़ोर का झटका laga.uske दोनों कानो से खून निकलने लगा...

मैंने उससे छोड़ा और उसके चारों हथियार जो वहीँ उसके पीछे hi पड़े थे मैंने उसमे से तलवार उठा ली और वापस अपनी जगह पर आकर खड़ा हो गया....

कुछ देर तक रक्षक लम्बी लम्बी सासें लेते हुए निचे पड़ा रहा फिर जैसे तैसे खड़ा हो gaya.uske कलाई अब तक ठीक हो चुके the..sir पर वार लगने की वजह से खून उसके पुरे मुँह को धक् चूका tha..aur कान से होते हुए भी काफी सारा खून निचे टपक रहा था....

रक्षक- तुम्हे मुझे मार देना चाहिए था VIKRAM...mouka नहीं देना tha..tum भूल रहे हो की तुम मैजिक का इस्तेमाल नहीं कर sakte,par मई कर सकता हूँ.....

पर मैंने कुछ नहीं बोलै और खड़ा raha..rakshak ने अपने बचे हुए तीनो हथियारों को जिनमे से एक गदा tha,ek khadagh,aur तीसरा धनुष बाण tha,usse uthaya,,kuch मंत्र पढ़ा और सबको एक साथ मुझपे छोड़ दिया.

मन्त्रों की वजह से उसके सारे शाष्त्रों की तादाद बढ़ gayi...ab 100 से ज़्यादा gada,baan और खडग तेज़ी से मेरी तरफ आने lage...mere पास पोहोंचे पहुँचते ये हमला और खतरनाक हो गया.....

जीतने भी शाश्त्र the,sabme आग लग गयी...

मतलब साफ़ tha,RAKSHAK मुझे तड़पा तड़पा कर जलाते हुए मारना चाहता था....

अब तक मैंने मोकलसर गुरूजी और अक्षांत गुरूजी की शिक्षा को अमल में लाया tha...ab बारी थी शैला के दी हुई प्रशिक्षण को अमल में लाने ki...jinhone मुझे हवा आग और पानी तीनो को कण्ट्रोल करना और उनसे लड़ना भी सिखाया tha...maine अपने दोनों पेअर jode,aur अपने अंगूठों के बल खड़े होकर अपनी जगह पर घूम gaya....jaise जैसे मेरी रफ़्तार बढ़ती जा रही thi..us बिना हवा वाले वातावरण में भी मेरे बॉडी के चारों तरफ आंधी उठने लगी.....

जैसे hi वो आग रूपी हथियार मेरे पास आये मेरी बॉडी से बानी आंधी के चपेट में आ gaye....jaisa की आपको पता है की आग को हवा लगे तोह वो और बढ़ती hai,abhi भी ठीक वैसा hi hua.....mere पास आते hi उन आग लगी शास्त्रों को मेरे द्वारा बनायीं गयी आंधी से हवा मिलना लगी वो भी बोहोत अधिक मात्रा में...

आग मेरे ठीक सामने आकर रूक gayi...par हल गुज़रते पल के साथ आग का दायरा बढ़ता gaya.....maine अपने घूमने की गति और बाधादि और घूमते हुए आगे बढ़ने laga...mere साथ साथ वो आग भी आगे बढ़ने lagi....aag का आकर इतना बड़ा हो गया था की रक्षक जो मुझसे थोड़ी दूर खड़ा tha,wo दर के मारे पीछे हटने लगा.

पर जब उससे लगा की वो बच नहीं पायेगा तोह उसने गायब होने की sochi...par इससे पहले की वो गायब ho,maine अपने दोनों हाथों को एक ज़ोर का झटका diya....mere चारों तरफ फैली आंधी लाइट स्पीड से अपने आगे चल रहे आग की चादर को लपेट आगे बढ़ी और रक्षक को निगल गयी......

Aaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh... रक्षक के चीखें चारो तरफ फैलती चली gayi.....mai मुस्कुराते हुए ये सब देख रहा था की अचानक मेरी मुस्कराहट बंद हो gayi..abhi तक मुझे इस जगह ने काफी बार चौंकाया था पर अबकी बार मेरे सामने जो tha,wo मेरे लिए अब तक का सबसे बड़ा सरप्राइज था.......

रक्षक के जलते hi वो आग भुज gayi.aag के भुजते hi मेरे सामने दो साये प्रकट हुए......

मई- मैंने शायद आपको कहीं देखा hai.oh shit....aap तोह......

एक साया- सबसे पहले तोह हम लार्ड ऑफ़ एंगेल्स को झुक कर नमन करते हैं....

ये बोलते हुए दोनों साये मेरे आगे झुक गए....

मई- उठ jaiye......aur ये बताइये की मई जो सोच रहा hun,kahin आप वही तोह नहीं.....

2ंद साया- आप सही सोच रहे hain...hum दोनों हौली स्पिरिट्स hi हैं.....

दरअसल ये अंदाज़ा मैंने उनके कपड़ो को देख कर लगाया tha.dono ने वही कपडे पहने थे जो मैंने उस ेंचन्त्मेन्त बुक के माध्यम से देखा tha..ek ने वाइट गाउन जैसी ड्रेस पहनी थी और दूसरे ने वाइट गाउन पर ब्लैक स्ट्राइप्स वाली ड्रेस पहनी थी.....

मई- आपको तोह स्पीयर ने कैद कर लिया था naa...fir आप उसी के रक्षक kaise???aur आपके बाकियों के साथी कहाँ हैं!!!!

1सत हौली SPIRIT-wo सब स्पीयर में hi कैद hain.....hum सब कुल 1000 हौली स्पिरिट्स हैं जो धवली झील की दो अलग अलग दिशाओं से परिक्रमा करते the.....ek तरफ से 500 और दूसरी तरफ से भी 500.मई एक तरफ के स्पिरिट्स का नेतृत्व करता था और ये एक तरफ की.....

हमारी टुकड़ी को गॉड ने इस ब्रम्हांड में फैली आचायी की पावर्स को samet,jheel की हौली वाटर से मिलकर सभी एंगेल्स को बाटने का काम दिया गया था...

2ंद हौली स्पिरिट- और हमारी टुकड़ी को ब्रम्हांड में फैली ब्लैक एनर्जी की साड़ी श्रोतों को खींच कर झील के हौली वाटर से शुद्ध कर वापस ब्रम्हांड में भेजने का काम दिया गया tha.ye जो काली पार्टी हैं, वो भी हमे उन ब्लैक ेनेर्गीएस को शुद्ध करने की वजह से मिली हैं....

1सत हौली स्पिरिट- हमे स्पीयर ने hi अपने रक्षक के रूप में नियुक्त किया hai.hame उसकी बात माननी पड़ी क्यूंकि इसके बदले वो स्पीयर हमारे अंदर की वाइट एनर्जी को अदृश्य रूप से ब्रम्हांड में फैलता है जिससे ब्रम्हांड का संतुलन बना रहता है...

मई- oh,toh अब क्या....!!!!

1सत हौली स्पिरिट- हम दोनों hi उस स्पीयर तक पहुँचने का रास्ता hain.aapne हमे हराकर ुस्तक पहुँचने का अवसर प्राप्त कर लिया hai..aap हमारे अंदर से होकर उसके सामने पहुँच jaayenge.....par उससे पहले हम दोनों आपको कुछ देना चाहते हैं....

मई- क्या!!!!

2ंद हौली स्पिरिट- ये...........

दोनों ने अपना हाथ आगे kiya,ek के हाथ में एक वाइट लाइट थी और दूसरे के हाथों में ब्लैक लाइट...

1सत हौली स्पिरिट- अब तक आप मैजिक का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे the..par इससे ग्रहण करते hi कर पाएंगे... स्पीयर का सामना करने के लिए आपको बल और चल दोनों का उपयोग करना hoga...in दोनों रोशनियों में सफ़ेद और काली दोनों शक्तियां हैं जिसकी वजह स्पीयर आपकी शक्ति को सोख नहीं paayega,par haan,SPEAR के सामने जाते hi जो कष्ट आपको होना शुरू hoga,usse आप बच नहीं सकते..

आपको उसी हालत में स्पीयर से लड़ना होगा...

मई- मुझे पता hai....mai तुम्हे ग्रहण करता हूँ...

वो दोनों लाइट्स मेरे सामने आकर रूक गयी thi.mere ऐसा बोलते hi दोनों मेरे अंदर समां gayi.mujhe कोई ख़ास फर्क नहीं pada,kyunki मेरी खुद की ताकत hi बोहोत ज़्यादा thi...par ये एहसास ज़रूर हो गया की अब मई बिना किसी परेशानी के स्पेल्स उसे कर सकता हूँ..

मई चलते हुए दोनों स्पिरिट्स के पास गया और उहने क्रॉस कर गया........

वो दोनों वाकई एक दरवाज़ा hi the....kyunki उन्हें क्रॉस करते hi मई अपने मंज़िल के सामने था.......

और अचानक 1 hi पल में मेरे मन में तीन तीन इमोशंस ने जन्म लिया....

1- एक्ससिटेमेंट.........

2- नर्वस्नेस.........

3- फेयररररररर.........

क्यूंकि इस वक़्त मेरे सामने था अपने असली रूप में पानी से भरा बेहटा हुआ

धवली झील........

आज के लिए इतना HI.....

आपका अपना V..J....
 
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