सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - Page 3 - SexBaba
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सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

अपडेट 17

नीति के जाने के बाद सुप्रिया के मैं में काफी सारे सवाल चल रहे थे. नीति ने उसके और ध्रुव के बारे में उसे या चची को कुछ क्यों नहीं बोलै? नीति को क्या लग रहा था की उसके और ध्रुव के बीच में क्या है? क्या सुप्रिया को चची या ध्रुव को नीति के बारे में सावधान करना चाहिए?

इधर चची तोह बहुत hi खुश हो कर घूम रही थी, एक बेटे की माँ जैसे बहु मिलने पर खुश हो. सुप्रिया ने सोचा की उनको बोलना तोह किसी काम का नहीं होगा. और किसी को तोह वह क्या hi बताती इस सब के बारे में, और वह ऐसे hi अपनी सोच में डूबी रही. उसे कल तोह वैसे भी वापस जाना hi था. अतुल और मम्मीजी बहार गए हुए थे, अतुल उन्हें डॉक्टर को दिखने ले गया था, और फिर वापस आते हुए उसे कुछ घर का सामन भी खरीदना था.

सुप्रिया अपने कमरे में वापस आ गयी और उसे थोड़ी देर बाद ध्रुव के घर आने की आवाज़ आयी. ध्रुव जल्दी से अपने कमरे में घुस गया और उसने अपना दरवाज़ा ज़ोर से बंद कर लिया. सुप्रिया को अगर उससे बात करनी थी तोह अभी करनी होगी पर वह उसके कमरे में नहीं जाना चाहता थी. उसने ध्रुव को मैसेज किया - अगर फ्री हो तोह 5 मं के लिए यहाँ आ जायो. ध्रुव कभी उसके मैसेज का रिप्लाई नहीं करता था तोह सुप्रिया को लगा की कहीं उसने उसका नंबर ब्लॉक तोह नहीं किया हुआ.

पर थोड़ी सी देर बाद सुप्रिया के कमरे के दरवाज़े पर खत खत हुई. सुप्रिया ने दरवाज़ा खोल कर जल्दी से ध्रुव को अंदर करा. पिछली बार जब वह दोनों साथ में इस कमरे में थे तोह ध्रुव ने उसे किश के लिए मज़बूर कर दिया था. इस बार सुप्रिया ऐसा कुछ नहीं होना देना चाहती थी.

सुप्रिया - तुम सोच रहे होंगे की मैंने तुम्हे यहाँ क्यों बुलाया है. मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी.

ध्रुव चुप चाप खड़ा उसकी और देख रहा था. उसका सारा ध्यान सुप्रिया पर था.

सुप्रिया - पहली बात तोह, तुमने जो कल छत पर किया वह बिलकुल गलत था. तुम्हारी हिम्मत कैसी हुई मुझे ऐसे छूने की. अगर कोई और होता तोह मैं अब तक सब को बता चुकी होती. पर क्यूंकि तुम थे.....

सुप्रिया ने देखा की ध्रुव अभी भी चुप चाप खड़ा उसे सुन रहा था तोह - दूसरी बात, तुमने मुझे ये नीति के चक्कर में कहाँ फसा दिया है. मैंने तुम्हे तब भी बोलै था की ये कितना गलत आईडिया है. और अब वह तुम्हारी गर्लफ्रेंड है, तुमने मुझे बताया भी नहीं. पता नहीं वह क्या चाहती है मुझसे और तुमसे.

सुप्रिया का गुस्सा बढ़ता जा रहा था - तुम बोलोगे भी कुछ या ऐसे hi खड़े रहोगे.

ध्रुव - क्या चाहते हो आप?

सुप्रिया - मैं क्या चाहती हु? या तुम क्या चाहते हो? मैं तुम्हे समझाना चाहती हु की नीति तुम्हारे लिए सही लड़की नहीं है. वह बहुत चालू लगी मुझे, और तुम…

ध्रुव - तोह मेरे लिए सही लड़की कौन है? आप?

सुप्रिया उसके जवाब से हैरान रह गयी - मैं तुम्हारी भाभी हु!

ध्रुव - आप अब मुझे जानते भी हो क्या, मैं काफी बदल गया हु. नीति को मैं संभल लूंगा.. उसे मेरे लुंड की आदत पद चुकी है, और वह कुछ नहीं करेगी, अगर एहि आपका डर है तोह.

सुप्रिया को उसके मुँह से लुंड जैसा शब्द सुन्ना अजीब सा लग रहा था. आज से पहले ध्रुव ने उसके सामने ऐसे शब्द इस्तेमाल नहीं किये थे - ध्रुव पर….

ध्रुव - उसको मैं अचे से छोड़ता हु, वह मेरे लुंड भी चूसती है. आप क्या चाहते हो?

सुप्रिया - ये कैसा सवाल है.

ध्रुव - मुझे पता है भैया आपको खुश नहीं रख पाते है. आप चाहो तोह मैं आपको खुश कर सकता हूँ. अगर आपको बेबी चाहिए तोह वह भी, किसी को पता नहीं चलेगा.

सुप्रिया - ध्रुव बकवास बंद करो, तुम्हे अब बात करने की कोई तमीज नहीं रह गयी है.

ध्रुव - आपको भी पता है सच क्या है. आप भी मेरे बारे में सोचते रहते हो, तभी तोह आप मुझे मैसेज करते रहते हो. मेरे सामने तोह आप सच बोल सकते हो.

सुप्रिया एक डैम चुप सी हो गयी. वह क्या hi बोलती ध्रुव को.

ध्रुव - आप मुझे बहुत hi सेक्सी लगते हो, और उससे भी ज्यादा मैं आपसे प्यार करता हूँ. आप बोलो तोह मैं सब कुछ छोड़ कर आपके साथ भाग सकता हूँ.

सुप्रिया - पागल मत बनो. अगर सच hi बोलना है तोह हाँ मैं एक्सेप्ट करती हु की तुम्हारे भैया शायद मेरे लिए परफेक्ट नहीं है, पर हम लोग सब वर्क आउट कर लेंगे. और नहीं तोह मैं एडजस्ट कर लुंगी.

ध्रुव - एडजस्ट क्यों करना, आप मेरे साथ सब कर लो न प्लीज.

सुप्रिया - मैं किसी और के साथ शायद ये सब कर लुंगी पर तुम्हारे कभी साथ नहीं. मुझे उस दिन तुम्हे रोक लेना चाहिए था, और वह मेरी भी गलती है.

सुप्रिया ने उसे बहार जाने का इशारा किया और ध्रुव जल्दी से बहार चला गया. सुप्रिया वहीँ परेशान सी कड़ी थी और उसे काफी हर्ट फील हो रहा था जिस तरह से ध्रुव ने उसके साथ बेहवे किया था.

कुछ hi मिनट बाद अतुल कमरे में घुसा और उसने शॉपिंग का सामान नीचे रख दिया. अतुल ने उसकी और देखा और हलकी से स्माइल दी. सुप्रिया ने अपने आप को नार्मल करने की कोशिश की, वैसे भी आज शाम ग्वालियर में उसकी आखरी शाम थी.

सब लोग शाम को िक्कहट्टा हो कर बातें करने लगे. चर्चा का मैं टॉपिक नीति hi थी, और चची तोह जैसे उसकी तारीफ किये जा रही थी. बाकि सब लोग ध्रुव को उसका नाम ले कर छिड़ा रहे थे. सुप्रिया ने इस सब में ज्यादा कुछ नहीं बोलै और किचन के काम में अपने आप को बिजी रखा. रात के खाने के बाद, सुप्रिया अपने कमरे में पहुंची. अतुल बीएड पर बैठा अपने फ़ोन पर लगा था.

अतुल को देख कर वह सोचने लगी. अतुल इतना भी बुरा नहीं था, उसके परिवार वाले उसे बड़ा सीधा समझते थे पर सुप्रिया ने उसके कई अलग रूप देखे थे. उसमे भी सेक्स करने की उतनी चाहत थी जितनी किसी और मर्द में होती थी. शायद उसका स्टैमिना इतना नहीं, पर सुप्रिया ने कभी किसी और के साथ ये सब नहीं किया था तोह उसके लिए ये कहना मुश्किल था. और फिर उनके रोलप्ले से उनका सेक्स दिलचस्प हो चूका था.

पिछले 2-3 दिन में इतना कुछ हो चूका था की वह अतुल की दारु वाली बात तोह कब की भूल चुकी थी. उसने सोचा था की वह इसका जिक्र अर्पिता दीदी या मम्मीजी से करेगी पर अब वह उन दोनों को परेशां नहीं करना चाहती थी. और ऐसा भी नहीं था अतुल रोज़ रोज़ शराब पी कर घर आ रहा था. सिर्फ एक hi बार तोह उसने अब तक ये किया था.

सुप्रिया ने कमरे की कुण्डी लगा दी और वहीँ अतुल के सामने अपने कपडे बदलने लगी. वह अतुल के साथ इतनी कम्फर्टेबले तोह हो hi गयी थी. सुप्रिया रात को अक्सर एक खुली टीशर्ट और लेग्गिंग्स या पायजामा पेहेन कर सोती थी. उसने अपनी साड़ी खोली और अपना ब्लाउज उतारा. ब्रा पहने वह अपने आप को आईने में देख रही थी. शायद उसके बूब्स शादी के बाद थोड़े से बड़े हो गए थे, और थोड़ा फास के ब्रा में आ रहे थे. उसने ब्रा के ऊपर से अपने बूब्स को पकड़ा और उनको अपने हाथ से नापने की कोशिश कर रही थी.

उसने आईने में देखा तोह पाया की अतुल उसे ये करते हुए देख रहा था. पिछले 4-5 दिनों से उन्होंने सेक्स नहीं किया था और सुप्रिया अंदर से काफी गरम थी. वह आज रात अतुल के साथ सेक्स करके अपनी थोड़ी गर्मी काम करना चाहती थी. उसने सोचा की यहाँ रोलप्ले तोह नहीं हो पायेगा, पर अगर अतुल थोड़ी देर भी उसके साथ खेल लेगा तोह उसे बड़ा मज़ा आएगा.

सुप्रिया ने अपने बाल बांधे और बीएड पर आ गयी. उसने अतुल के हाथ से फ़ोन लिया और साइड रखा और उसके ऊपर बैठ गयी.

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सुप्रिया ने उसे हुग कर लिया और फिर हलके हलके उसकी गर्दन पर किश करने लगी. अतुल ने भी उसे पकड़ा हुआ था. सुप्रिया के अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी और उसने अतुल के शर्ट के बटन खोलते हुए उसकी छाती पर किश करना शुरू कर दिया.

अतुल - आज क्या हो गया तुम्हे?

सुप्रिया - कुछ भी नहीं, ाचा नहीं लग रहा आपको?

अतुल - लग रहा है पर...

सुप्रिया - तोह फिर करने दो न.

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सुप्रिया फिर अपना चेहरा उसके चेहरे के आगे ले आयी और अतुल के होंठों पर किश करने लगी. उसने शायद आज तक खुद से किसिंग शुरू नहीं की थी. वह अतुल के होंठों को ज़ोर ज़ोर से किश करने लगी. सुप्रिया इस समय एक भूकी शेरनी की तरह हो गयी थी और अतुल जैसे उसका शिकार. सुप्रिया ने खुद से अपनी टीशर्ट उतारी, और अतुल का मुँह खींच कर अपने बूब्स की तरफ कर दिया. अतुल का मुँह सुप्रिया के बूब्स की घाटियों के बीच में था और हलके हलके किश कर रहा था.

सुप्रिया - अतुल, मेरे बूब्स को ज़ोर से दबायो न.

जैसे ध्रुव ने उस दिन उसके बूब्स पर हमला किया था, सुप्रिया वही फील करना चाहती थी. पर अतुल अभी भी उसके बूब्स को हलके हलके hi दबा रहा था. शायद वह अभी भी अतुल बांके hi उसके साथ था, और जब वह कोई और बनता था तब वह और ज़ोर से ये सब करता था. अतुल की तरफ से ज्यादा जोश न होने पर सुप्रिया की फ़्रस्ट्रेशन बढ़ती जा रही थी.

उसने अपनी ब्रा उतार फेकि और अतुल का मुँह अपने निप्पल की और कर दिया. अतुल उसके निप्पल्स को बहार से किश कर रहा था पर सुप्रिया चाहती थी की वह उन्हें चूसे या काटे. अतुल का एक हाथ सुप्रिया की नंगी पीठ कर घूम रहा था.

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सुप्रिया - प्लीज करो न, अचे से....

अतुल ने उसके चूचियों को अपने मुँह में लिया और हलके से चूसने लगा. सुप्रिया के हाथ अतुल की गर्दन पकडे हुए थे, और वह अपना पूरा शरीर अतुल के शरीर के ऊपर चला रही थी. उसने नीचे हो कर अतुल की पायजामा और अंडरवियर नीचे खींचा. अतुल का लुंड अभी भी छोटा सा था और पूरी तरह खड़ा नहीं था. सुप्रिया ने अपने कपडे भी नीचे से उतार दिए और अपनी योनि अतुल के लुंड के पास ले आयी. पर अतुल का लुंड अभी भी खड़ा नहीं और वह इस हाल में अंदर नहीं जाने वाला था.

सुप्रिया ने उसको थोड़ा ज़ोर से बोलै - करो न पलासी....

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अतुल ने उसकी कमर पकड़ते हुए अंदर डालने की कोशिश करि और वह फाइनली इतना खड़ा हो गया की उसके अंदर जा सके. लुंड अंदर जाते hi सुप्रिया तोह जैसे और भी पागल हो गयी थिस, उसके मुँह खुल गया था और वह हलकी हलकी आहें भर रही थी. सुप्रिया अतुल के ऊपर बैठे हुए अपने आप को उसके लुंड के ऊपर नीचे करने लगी. अतुल के हाथ सुप्रिया की कमर पर थे और वह भी धक्के मार रहा था. फिर कुछ hi देर में अतुल का वीर्य सुप्रिया की छूट में निकल गया एंड अतुल उसे अपने ऊपर से हटा कर जल्दी से बाथरूम चला गया. पर सुप्रिया तोह अभी भी पूरी तरह गरम थी.

सुप्रिया - अतुल आप चले क्यों गए, वापस आयो न.

पर अतुल का अंदर से कोई जवाब नहीं आया. अतुल जब थोड़ी देर के बाद बहार आया, उसने अपने कपडे वापस से पेहेन लिए थे - सुप्रिया, सॉरी मैं आज थका हुआ हूँ. हम लोग सो जाते है.

सुप्रिया गुस्से में बीएड से हट गयी और बाथरूम चली गयी. उसने अपने ऊपर एक दो मग्गे पानी के डाले और फिर थोड़ी देर बाद जब उसका गुस्सा शांत हुआ वह अपने आप को सूखा कर और कपडे चेंज करके बहार आयी. जतब तक कमरे की लाइट ऑफ थी और अतुल सो चूका था. निराश हो कर सुप्रिया बीएड पर लेट गयी और पूरी रात उसके मैं में एहि चलता रहा की क्या जो ध्रुव कह रहा था वह सही था. क्या अतुल उसकी जरूरत पूरी कर पायेगा. पर फिर उसे लगा की शायद वह बस थका हुआ था और वह भी आखिर कार सो गयी.

अगले दिन वह दोनों वापस लखनऊ की और निकल गए, और वहां रेलवे स्टेशन पर राहुल उन्हें लेने आया हुआ था.
 
अपडेट 18

(ये अपडेट अतुल के पर्सपेक्टिव से शुरू होता है)

जब अतुल बाजार से वापस आया तोह वह अपने कमरे की और ऊपर गया. वह सुप्रिया को शॉपिंग का सामान दिखने के लिए एक्ससिटेड था, उसने 1-2 चीज़े ख़ास सुप्रिया के लिए ली थी. वह सीढ़ियों से ऊपर hi आ रहा था की उसने ध्रुव को उसके कमरे से निकलते देखा. पहले उसके मैं में सवाल आया की आखिर ध्रुव उसके कमरे में क्यों गया था. पर उसने फिर सोचा की आखिर ध्रुव और सुप्रिया की आपस में काफी बनती थी तोह इसमें कोई बड़ी बात तोह नहीं.

पूरी शाम उसकी नज़र सुप्रिया और ध्रुव पर hi थी, और उसने देखा की दोनों काफी खींचे खींचे से थे, जो की उनका नार्मल व्यव्हार नहीं था. उसके मैं में कुछ तोह खटक रहा था. रात को वह सुप्रिया के ऊपर आने से पहले उसका फ़ोन चेक करने लगा. उन दोनों को एक दुसरे के फ़ोन का कोड पता था, आखिर छुपाने के लिए था भी क्या.

अतुल ने इससे पहले कभी सुप्रिया के मेस्सगेस नहीं चेक किये थे. उसे सुप्रिया पर पूरा भरोसा जो था. वह अपने आप को बहुत खुशकिस्मत समझता की उसे सुप्रिया जैसी खूबसूरत बीवी मिली थी. और स्वाभाव में भी सुप्रिया बहुत hi प्यारी और सीढ़ी थी. कभी कभी उसे लगता था की शायद सुप्रिया को उससे ज्यादा स्मार्ट लड़का मिल सकता था पर सोचता की अगर वैसे होता तोह फिर वह उसे न मिल पाती.

सुप्रिया के मेस्सगेस में ऊपर hi ध्रुव को लास्ट भेजा हुआ मैसेज था - अगर फ्री हो तोह 5 मं के लिए यहाँ आ जायो. आखिर सुप्रिया ने ध्रुव को अपने कमरे में क्यों बुलाया था. वह उन दोनों के और पुराने मेस्सगेस देखने लगा, सुरपिया ने लखनऊ से भी ध्रुव को कई बार मेस्सगेस किये थे, वह नए से पुराने मेस्सगेस देखने लगा. अलग अलग दिन कुछ मेस्सगेस थे:

कैसे हो तुम. मैं ग्वालियर आ रही हु होली के लिए.

नीति से बात आगे बड़ी

वहां सब कैसे है. यहाँ सब लोग को काफी मिस करती हु.

Hello, कैसे हो ध्रुव.

Hello, तुम ठीक हो न. तुम्हे थोड़ा अपसेट देखा स्टेशन पर.

अपने आप में तोह इन मेस्सगेस में कुछ ख़ास नहीं था, पर ध्रुव का एक भी मैसेज नहीं था. अतुल ने सोचा - क्या सुप्रिया ने ध्रुव के मेस्सगेस डिलीट कर दिए थे? ध्रुव का कोई जवाब क्यों नहीं था? और क्या सुप्रिया नीति को पहले से जानती थी? उसने तोह कहाँ था की वह पहली बार नीति को कल hi मिली थी.

अतुल ने सुप्रिया का व्हाट्सप्प भी खोला, और उसमे पिछले कुछ मैसेज तोह उसकी भाभी से और अर्पिता से hi थे. एक मैसेज उसकी बॉस की वाइफ रेनू का भी था जिसमे लिखा था की जब वापस आयोगी तब मिलते है. और फिर उसे राहुल का नाम मेस्सगेस में दिखाई दिया. उसे नहीं पता था की सुप्रिया और राहुल भी एक दुसरे को मैसेज करते थे. उसका दिल एक डैम बैठ सा गया, पर जब उसने राहुल के मेस्सगेस खोले तोह उसमे सारे फ़ॉर्वर्डेड फोटो या जोक्स hi थे, कुछ भी ऐसा नहीं. उसने रहत की सांस ली, उसे पता था की राहुल सबको ये मेस्सगेस भेजता था, उसको भी. उसे किसी और लड़के के मेस्सगेस सुप्रिया के फ़ोन में नहीं दिखाई दिए.

सुप्रिया कमरे में आयी और अपने कपडे बदलने लगी. अतुल उसको पीछे से देख रहा था. अतुल को सुप्रिया की अस्स बहुत अछि लगती थी. पीछे से तोह सुप्रिया एक डैम हीरोइन जैसी लगती थी. फिर उसने सोचा, की वैसे आगे से भी वह हीरोइन hi लगती थी. उसने देखा की सुप्रिया अपने बूब्स पकडे आईने में देख रही है. उसके बूब्स एक डैम परफेक्ट थे, न ज्यादा बड़े न ज्यादा छोटे.

वह इसी सोच में डूबा था की सुप्रिया एक डैम से उसके ऊपर आ कर बैठ गयी. उसने शायद गौर भी नहीं किया था की अतुल उसका hi फ़ोन पकड़ कर बैठा है. अतुल का दिमाग इस समय सेक्स में नहीं था, वह सोच रहा था की क्या उसे सुप्रिया से साफ़ साफ़ अपने मैं के सवाल पूछ लेने चाहिए. पर सुप्रिया तोह आज कुछ अलग hi मूड में थी. आज से पहले उसने सुप्रिया का ये रूप नहीं देखा था.

सुप्रिया आगे बड़ी जा रही थी और अतुल उसका साथ देने की कोशिश कर रहा था पर आज उसका मैं पूरी तरह भटका हुआ था. किसी तरह से उसने सब कुछ किया और फिर बाथरूम में आ गया. उसे सुप्रिया की आवाज़ सुनाई दे रही थी, वह काफी अपसेट साउंड कर रही थी पर अतुल में शायद आज हिम्मत नहीं थी उसको शांत करने की. वह चुप चाप आ कर बीएड पर लेट गया और सोचने लगा. क्या वह सुप्रिया को खुश रख पायेगा? क्या सुप्रिया और मर्दो के बारे में सोचती थी? वही तोह ये रोलप्ले वाला आईडिया ले कर आयी थी. क्या वह अतुल नहीं किसी और के साथ सेक्स करना चाहती थी.

उसने आखें बंद करि और सुप्रिया के बहार आने के बाद सोने का नाटक करते हुए लेता रहा. पूरी रात उसके दिमाग में कई चीज़े चल रही थी. उसे इस सब का कोई तोह समाधान ढूंढ़ना होगा, या फिर अपना शक पक्का करना होगा. पर शक कैसा, सुप्रिया उसके साथ ऐसा कभी नहीं कर सकती थी. शायद उसे सुप्रिया को परखना होगा.

सुबह उठते उठते उसके मैं में के आईडिया घर कर चूका था. उसने ट्रैन में से राहुल को मैसेज किया की वह उसे और सुप्रिया को लेने स्टेशन आ जाये. राहुल ने अभी hi एक पुराणी सेकंड हैंड कार ली थी. वह शादी के लिए लड़की देख रहा था और इम्प्रैशन ज़माने के लिए उसने एक कार खरीद ली. ट्रैन में उसके सामने सुप्रिया बैठी चाय पि रही थी, और उसके खयालो से अनजान थी.

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स्टेशन से बहार आते hi उन्हें सामने राहुल दिख गया. सुप्रिया उसे देख कर थोड़ी सी हैरान हो गयी.

सुप्रिया - राहुल तुम यहाँ क्या कर रहे हो.

राहुल - तुम लोगो को पिक करने, और क्या. अपनी नयी गाडी में.

सुप्रिया - ारी वह. तुमने नयी गाडी ले ली. शादी भी पक्की हो गयी क्या?

राहुल - नयी मतलब नयी नहीं है. पर ठीक है मेरे लिए तोह नयी hi है. गाडी आ गयी है, बीवी भी मिल hi जाएगी. किस्मत हुई तोह बिलकुल आपके जैसी.

सुप्रिया ये सुन्न कर है पड़ी - अपने दोस्त से तोह पूछ लो पहले, वह मुझसे आलरेडी परेशान है. और तुम्हे तोह मुझसे भी अछि लड़की मिल जाएगी.

राहुल - ारी आप जैसी बीवी हो तोह कोई परेशान कैसे हो सकता है.

अतुल उन दोनों के बातें ध्यान से सुन रहा था. वह सोचने लगा की क्या राहुल और सुप्रिया एक दुसरे को पसंद करते थे, आखिर राहुल भी उससे यंग और स्मार्ट था. और राहुल की बातों से उसे ऐसा लग रहा था की उसे सुप्रिया भी बहुत अछि लगती है.

अतुल - अभी घर चले, बाद में तुम दोनों ये सब बातें कर लेना.

वह तीनो राहुल की गाडी में बैठे और घर की और चल पड़े. रास्ते भर राहुल और सुप्रिया की बातें चालू रही. और फिर फाइनली वह उनकी सोसाइटी की गेट पर पहुंचे. सोसाइटी में रहने वालो को अपने वहां के लिए स्टीकर मिला हुआ था. वॉचमन ने देखा की गाडी पर कोई स्टीकर नहीं है तोह उसने दरवाज़ा नहीं खोला. राहुल गाडी का हॉर्न मार कर उसे खोलने के लिए कह रहा था. सुप्रिया ने गाडी से बहार झक कर देखा तोह पाया की जिस वॉचमन ने उस दिन उसकी मदद करि थी अतुल को ऊपर ले जाने में वही गेट पर खड़ा है. क्या नाम था उसका, वह सोचने लगी.

सुप्रिया को नाम याद आया - इक़बाल भैया....

इक़बाल अपना लड़की के मुँह से अपना नाम सुन कर एक डैम से देखने लगा. उसने देखा की ये तोह फ्लैट 609 की सुप्रिया शर्मा थी, पूरी सोसाइटी में एक hi तोह मैडम थी जो उसे बहुत अछि लगती थी. क्या शकल थी, क्या बदन था, क्या मीठी आवाज़ थी. सुप्रिया को देख कर तोह उसकी पंत में हरकत होनी शुरू हो जाती.

इक़बाल - मैडम आप.

सुप्रिया - हांजी, ये हमारे साथ है. प्लीज हमें अंदर आने दीजिये न.

इक़बाल ने सोचा की काश मैडम उसे एक बार अपने अंदर आने दे, तोह क्या मज़ा आ जाये. पर फ़िलहाल तोह वह उसके लिए भी ये रूल नहीं तोड़ सकता था - मैडम पर गाडी पर स्टीकर नहीं है, एंट्री करनी पड़ेगी न पहले.

सुप्रिया - हाँ मैं आती हु एंट्री करने.

अतुल ने खीजते हुए बोलै - तुम यहीं रुको, मैं एंट्री करके आता हूँ.

इक़बाल अपने हाथ माल्टा रह गया, मैडम बहार आती तोह उसे उनके पूरे दर्शन होते, शायद थोड़ी और बात भी हो जाती. अब इसके पति को वह क्या hi देखे, और वैसे भी उसका पति उसे उस दिन के बाद से किसी लायक नहीं लगता था. जैसे लंगूर को कोई हूर मिल गयी हो.

अतुल ने जा कर रजिस्टर में एंट्री करि और फिर गेट खुलने पर राहुल गाडी ले कर अंदर आ गया और पार्किंग में लगा ली. वह तीनो सामान ले कर लिफ्ट की और जाने लगे. इक़बाल सुप्रिया को जाते देख रहा था, उसकी गांड कैसे मटक मटक कर चल रही थी. वह सोचने लगा की उसे शायद अभी कहीं अकेले में अपना माल निकलना पड़ेगा.

घर पहुंच कर सुप्रिया ने सामान को अंदर कमरे में रखा और वह फटाफट से चाय बनाने किचन में घुस गयी.

राहुल ने उसे किचन में जाते देख बोलै - सुप्रिया तुम अभी तोह आयी हो. थक गयी होंगी, चाय कभी और पी लूंगा. कोई फॉर्मेलिटी थोड़ी न है.

सुप्रिया - ारी नहीं, 2 मं लगेंगे. तुम बैठो अभी. वैसे भी इतने दिनों बाद मिले हो.

अतुल को वैसे सुप्रिया की खातिरदारी बड़ी अछि लगती थी, जिस तरह से वह हर किसी को अचे से पूछती थी और बिना थके काम में लगी रहती थी. पर आज उसका नजरिया कुछ अलग hi था. सुप्रिया इतना सब क्यों कर रही थी राहुल के लिए. अतुल चाहता था की राहुल उन दोनों को अकेला छोड़ के चला जाये. पर यहाँ तोह सुप्रिया चाय बनाने लग गयी.

घर आ कर उसे बराबर में रहने वाली मेघा का भी ख्याल आया. उसने कितनी बार सुप्रिया को समझाया था की मेघा अछि लड़की नहीं है और उससे दूरी बनाये रखना hi ाचा होगा. पर सुप्रिया उसकी सुनती कहाँ थी. कहीं मेघा की सांगत का असर तोह नहीं पद गया था सुप्रिया पर या उसने उसे बहकाया हो.

जल्द hi सुप्रिया चाय और उसके साथ थोड़ा नाश्ता ले आयी.

राहुल - सुप्रिया वैसे इसकी कोई जरूरत नहीं थी.

सुप्रिया - ठीक है, तुमने न हो, पर मुझे तोह थी.

दोनों हसने लगे और फिर इधर उधर की बातें शुरू हो गयी. राहुल उन दोनों को ऑफिस की खबरें बता रहा था, और अतुल और सुप्रिया ग्वालियर की.

राहुल अतुल को देखते हुए बोलै - तुझे पता है, बॉस की बेटी की शादी हो रही है.

सुप्रिया - ाचा, मुझे नहीं पता था की रेनू जी की इतनी बड़ी बेटी है. वह खुद hi 35-40 की लगती है.

राहुल - सच में, शायद 1-2 महीने में hi उनकी बेटी की शादी है.

सुप्रिया - तुमने मौका खो दिया. उनकी बेटी को hi पता लेते तोह तुम्हारे बॉस hi तुम्हारे ससुर बन जाते.

राहुल - ारी भाभी, रहने दो. मैंने कहाँ न, आपको hi अपने जैसी कोई ढूंढ़नी होगी मेरे लिए.

सुप्रिया - तुम फिर से शुरू हो गए. और ये भाभी क्यों ले आते हु बीच बीच में.

अतुल के दिमाग में एक डैम से ये बात खटकी. सुप्रिया ने पहले hi दिन राहुल को उसे भाभी बोलने से मन कर दिया था. और उसे हार बार टोक देती, जब भी वह उसे भाभी बुलाता. क्या राहुल उसे पहले hi दिन देखते hi पसंद आ गया था.

थोड़ी बातचीत के बाद राहुल वहां से निकल गया. सुप्रिया और अतुल दोनों hi काफी थके हुए थे और अगले दिन से फिर से ऑफिस था तोह दोनों hi बिना कुछ करे जल्दी सो गए. वैसे भी ऐसा नहीं था की वह रोज़ hi सेक्स करते थे.

अगले दिन सुबह फिर से भागम भाग शुरू हो गयी थी. सुप्रिया ने जल्दी से अतुल के लिए नाश्ता और खाना बनाया और अतुल ऑफिस के लिए निकल गया. आज तोह उसे जाते जाते सुप्रिया को किश भी नहीं किया. सुप्रिया भी इतनी बिजी थी की उसने गौर नहीं किया. ऑफिस आने के बाद, अतुल काम में मैं लगाने की कोशिश कर रहा था पर उसका मैं इन्ही सब बातों में जैसे अटका हुआ था.

उसने सोचा की अगर सुप्रिया कहीं मैं hi मैं राहुल को लिखे भी करती है तोह क्या हुआ, वह है तोह उसकी hi पत्नी. और उसे नहीं लगता था की राहुल और सुप्रिया दोनों hi उसकी पीठ पीछे कुछ ऐसा वैसा करेंगे. शायद ये सब उसके मैं का फितूर था. पर शाम होते होते फिर से उसके मैं में नेगेटिव ख्याल आने शुरू हो गए थे. रास्ते भर उसने सोचा और फिर कुछ तय किया. वह सुप्रिया को राहुल बन कर चोदे तोह? सुप्रिया की हमेशा से रोलप्ले में एहि शर्त थी की वह कोई ऐसा रोले नहीं करेगी जिसमे वह पहले से किसी को जानती हो. पर अतुल ने सोचा की वह सुप्रिया को इसके लिए मानाने की कोशिश करेगा.

अतुल घर पंहुचा तोह सुप्रिया किचन में कुछ बना रही थी और फ़ोन पर अपनी भाभी से बात कर रही थी. घर में घुसते घुसते उसे बस ये सुनाई दिया - शादी तोह सोच समझ कर hi करनी चाहिए. आखिर सुप्रिया किसकी बात कर रही थी.

सुप्रिया ने उसकी आवाज़ सुनते hi अपनी भाभी को bye बोलै और फ़ोन काट दिया.

सुप्रिया - आप आ गए. मैंने आपकी पसंद का खाना बनाया है आज.

अतुल सुप्रिया को कुछ भी नहीं ज़ाहिर होने देना चाहता था - ाचा, थैंक यू! तुम सच में मेरा कितना ख्याल रखती हो न.

सुप्रिया - वह तोह है. और आप?

अतुल - और मैं? मतलब?

सुप्रिया - कुछ नहीं, मजाक था.

अतुल हर बात को hi गहरी तरह से सोच रहा था. सुप्रिया उससे क्या कहना चाहती थी. दोनों ने साथ मिल कर खाना खाया और फिर वह थोड़ी देर नीचे टहलने चले गए. दोनों नीचे सोसाइटी के पार्क में टहल रहे थे. वह अक्सर खाना खाने के बाद थोड़ी देर वाक करने आते थे.

सुप्रिया को वहीँ गेट पर खड़ा इक़बाल दिखाई दिया. इक़बाल अब उसकी दो बार हेल्प कर चूका था, बल्कि 3 बार, उन दिन चाबी भी तोह इक़बाल को hi मिली थी. उसे इक़बाल बहुत hi हेल्पफुल लगता था. इक़बाल ने भी सुप्रिया को वहां घुमते देख लिया था और वह सोचने लगा की कब इसके मम्मी और गांड उसकी हाथ में आएंगे.

दोनों थोड़ी देर घूमने के बाद ऊपर आ गए, और किसी तरह हिम्मत करके अतुल ने राहुल वाली रोलप्ले की बात छेड़ दी.

अतुल - सुप्रिया, मैं कुछ सोच रहा था. अगर तुम थोड़ा आराम से बैठ कर सुनो तोह.

सुप्रिया उसके पास आ कर बैठ गयी - हाँ बताया न, क्या हुआ. मुझे आप 1-2 दिन से काफी परेशान से लग भी रहे थे.

अतुल - ारी नहीं ऐसा कुछ नहीं. अब हम वापस आ गए है तोह वह फिर से हमारे खेल शुरू कर दे.

सुप्रिया को समझने में जरा सी देर लगी - खेल??? ओह्ह, अच्छा... आप भी न. नहीं अब कोई खेल वेळ नहीं, वह कुछ ज्यादा हो जाता है.

अतुल ने सुप्रिया का हाथ पकड़ा और कहा - नहीं होगा ज्यादा. प्लीज. मेरे पास एक ाचा सा नया आईडिया है.

सुप्रिया - हम्म्म्म, आप भी न, ग्वालियर में बिलकुल अलग, यहाँ बिलकुल अलग. अगर मैं किसी को बतायूंगी तोह कोई मानेगा भी नहीं.

अतुल - तुम भी तोह ऐसी hi हो...

सुप्रिया - क्या मतलब?

अतुल - ारी मतलब, तुम्हे भी तो मज़ा आता है ये सब करने में. अब 2 दिन पहले hi कैसे मेरे ऊपर टूट पड़ी थी.

सुप्रिया एक डैम शरमाते हुए - प्लीज वह मत याद दिलाया मुझे, सॉरी उस दिन के लिए. पता नहीं क्या hi हो गया था मुझे.

अतुल - नहीं, मुझे ाचा लगा था तुम्हारा वह रूप भी देखना. सुनो, मुझे पता है तुम मन करोगी, पर फिर भी एक बार अचे से सुन लो. क्यों न मैं राहुल बन कर तुम्हारे साथ सेक्स करू?

सुप्रिया का मुँह खुला का खुला रह गया. अतुल क्यों फिर से इस टॉपिक को छेड़ रहा था, वह पहले भी इस बारे में 1-2 बार बात कर चुके थे. उसकी भौहें एकदम से तन गयी थी, जैसे उसके मैं में जो भी हो सब बता रही हो.

वह अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली - नहीं... नहीं... ये नहीं प्लीज... मुझसे नहीं होगा.

सुप्रिया कड़ी hi हो रही थी की अतुल ने उसे खींच कर फिर से बिठा दिया और उसके गालो पर अपना हाथ फेरने लगा - ये बस एक रोलप्ले hi तोह है, और क्या हो गया तोह अगर मैं राहुल बनकर तुम्हारे साथ सेक्स करता हूँ तोह.

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सुप्रिया - नहीं अतुल, ये बात पहले भी हुई थी. मैं ये नहीं कर सकती.

दोनों काफी देर तक इस बारे में बहस करते रहे, पर अतुल सुप्रिया को नहीं मन सका. दोनों एक दुसरे से रूठे सो गए. पर अतुल कहाँ हार मैंने वाला था. उस लग रहा था की राहुल बन कर जब वह सुप्रिया के साथ सेक्स करेगा तभी शायद सुप्रिया अंदर से तृप्त हो पायेगी.

अतुल सुप्रिया से 1-2 दिन बुरी तरह नाराज़ रहा, और सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा था की ये अतुल की कैसी ज़िद्द है. पर जब उसे दिखा की अतुल मैंने के लिए तैयार hi नहीं था, उसे लगा की शायद उसे hi झुक जाना चाहिए. शाम को जब अतुल घर वापस आया तोह उसने अतुल को चाय बना कर दी. अतुल अभी भी रूठा हुआ hi था.

सुप्रिया - अतुल, आप कब तक इस बात को लेकर गुस्सा रहोगे.

अतुल - तुम्हे क्या फरक पड़ता है.

सुप्रिया - पड़ता है तभी पूछ रही हु. ाचा ठीक है, मैं तरय कर लुंगी जो आपने बोलै. पर अगर आप राहुल बनेंगे तोह मैं सुप्रिया नहीं उसकी बीवी या मंगेतर बनकर आपके साथ सेक्स करुँगी. अगर आपको मंजूर है तोह ये कर सकते है.

अतुल तोह राहुल और सुप्रिया वाला hi रोले चाहता था, पर सुप्रिया ने जैसे इस बारे में बहुत सोच कर कोई तोड़ खोज लिया हो. पर अतुल को पता था की वह अब सुप्रिया को इस बात के लिए फाॅर्स नहीं कर सकता था. काम से काम वह राहुल से छोड़ने के लिए मान तोह गयी थी न.

अतुल - ठीक है, तुम उसकी होनी वाली बीवी का रोले कर लेना.

आखिर कार सुप्रिया ने थक कर हाँ कर hi दी. अतुल बहुत खुश हो गया था और अब इस रोले को और भी यादगार बनाने का सोचने लगा. उसे किसी भी तरह से सुप्रिया को इस रोले से बहुत hi ज्यादा ख़ुशी देनी थी, और उसको एक डैम सटिस्फी करना था.
 
अपडेट 19

अगले दिन अतुल के ऑफिस जाने के बाद सुप्रिया घर का काम करने के बाद बैठी hi थी की उसके घर की दुर्बल बजी. उसने देखा की बहार मेघा कड़ी थी. वह उसे देख कर बहुत hi खुश हो गयी. वह एक इंसान थी जिसे वह अपने मैं की बात बिना किसी जजमेंट के बता सकती थी. पिछले कई दिनों से उसके मैं में कई बातें चल रही थी और अब अतुल ने ये राहुल के रोलप्ले नाम की मुसीबत अलग कड़ी कर दी थी.

मेघा - क्या बात है भाई, न कोई कॉल न मैसेज न तुम आयी वापस आने के बाद. ऐसी क्या नाराज़गी.

सुप्रिया - ारी मेघा, क्या बतायु यार, इतना कुछ चल रहा था न. पर सच में मैं आपको hi याद कर रही थी 1-2 दिनों से.

मेघा - बराबर में तोह रहती हु. जब जी चाहे घंटी बजा देती. या तुम्हारे पति ने फाइनली तुम्हे कन्विंस कर दिया की मैं बदचलन हु.

सुप्रिया ने अपने कान पकडे और बोलै - सोर्रीयययय! सच में.

मेघा हस्ते हुए घर के अंदर आ गयी और वह दोनों बातों में लग गए. सुप्रिया ने वैसे तोह उसे सब कुछ बता रखा था सिवाए कुछ चीज़ो के. अभी वह ध्रुव वाली कहानी छेड़ने के मूड में नहीं थी. वैसे भी उसके लिए वह chapter अब क्लोज हो चूका था. अब तोह ये नयी समस्या कड़ी हो गयी थी. सुप्रिया ने मेघा को सब कुछ बताया.

सुप्रिया - तोह अब आप hi बताया, मैं क्या करू. अतुल तोह जैसे पीछे hi पद गया था और मुझे उसे खुश करने के लिए हाँ करनी पड़ी.

मेघा - वैसे तुम कुछ ज्यादा नहीं सोचती. और सच बोलू तोह….

सुप्रिया - बोलो न सच… वही तोह सुन्ना है.

मेघा - सुन्ना नहीं है वैसे तुम्हे. कितनी बार तोह पहले हिंट भी दिया है.

सुप्रिया - प्लीज बोलो न…

मेघा - तुम्हारा पति न मुझे एक नंबर का इडियट लगता है.

सुप्रिया - बस्सस इतनी सी बात, वह तोह आप मुझे पहले भी बता चुकी हो.

मेघा - ाचा ये बताया, ये राहुल दिखने में कैसा है.

सुप्रिया - उम्म्म्म… ठीक hi है…

मेघा - सिर्फ ठीक या ाचा?

सुप्रिया - हम्म्म मुझे नहीं पता और मैं उसके बारे में ऐसे सोचती नहीं हु.

मेघा - एहि तोह तुम्हारी प्रॉब्लम है. तुम्हे सब को देख कर सोचना चाहिए. ारी सोचने में क्या जाता है. क्या पता सोच के कब कौन समझ आ जाये.

सुप्रिया - प्लीज ये वाली फलसफा मत शुरू करो. जो पुछा है उसकी एडवाइस दो न.

मेघा - ारी यार रोलप्ले में तोह क्या hi प्रॉब्लम है. बस इमेजिन करो की राहुल तुम्हारे साथ वह सब कर रहा है जो तुम्हारा पति नहीं करता.

सुप्रिया - एहि बोल कर आपने मुझे पहले फसाया था.

मेघा - पर काम किया था न. तुम्हारी सेक्स लाइफ बेटर हो गयी थी न.

सुप्रिया - हम्म्म्म

मेघा - और देखो तुम्हारी बातों से लगता है की राहुल तुम्हारे पति से तोह बेटर hi है. तो रियल भी हो जाये तोह क्या प्रॉब्लम है.

सुप्रिया - नहीं रियल कुछ नहीं करना मुझे. बस ये रोलप्ले तक hi ठीक है. ाचा ठीक है मैं सोचती हु थोड़ा और.

मेघा - सोचो मत, बस एन्जॉय करो.

मेघा के जाने के बाद सुप्रिया पहले से थोड़ा बेटर फील कर रही थी. शायद मेघा से बात करके उसका मैं का बोझ हल्का हो गया था. और आखिर ये रोलप्ले hi तोह था, कुछ रियल थोड़ी न.

रोलप्ले के निर्धारित दिन पर सुप्रिया अचे से तैयार हो गयी. उसने एक नयी ब्रा और पंतय पेहेन ली और अपने बगल और नीचे से बाल साफ़ कर लिए. उसने अपने पेअर पर भी वैक्सिंग करके बाल हटा लिए. वह अतुल को बिलकुल अपनी फर्स्ट नाईट वाला एहसास देना चाहती थी. वह चाहती थी की उनका ये वाला सेक्स इतना ाचा हो की पिछले कुछ बार की लड़ाई वह बिलकुल भूल जाये.

अतुल भी शेव करके और परफ्यूम लगा कर रेडी हो गया. उन्होंने तय किया था की रोलप्ले को थोड़ा रोमांटिक hi रखेंगे और राहुल और उसकी होने वाली बीवी, जिसका नाम उन्होंने स्वीटी रखा था, एक होटल के कमरे में मिल रहे है और एक दुसरे के साथ सेक्स कर रहे है.

सुप्रिया और अतुल दोनों hi काफी एक्ससिटेड थे, और वह एक साथ बैडरूम में घुसे जैसे किसी होटल रूम में घुस रहे हो.

सुप्रिया - राहुल, हम यहाँ क्यों आये है.

अतुल - तुम्हे पता तोह है जान, प्यार करने.

अतुल ने अपनी उंगलियां सुप्रिया के बालों में फेरनी शुरू करि और दूसरा हाथ उसकी कमर पर रख दिया. सुप्रिया के हलके से आउच से जैसे उसकी एक्ससिटेमेंट और भी बाद गयी थी. उधर सुप्रिया को राहुल का नाम लेते हुए थोड़ा अजीब लग रहा था पर उसे भी ऐसा लग रहा था की जैसे वह सच में अपने होने वाली पति के साथ किसी होटल रूम में hi हो.

सुप्रिया ने हलके से कहा - राहुल शादी से पहले ये सब करना गलत है….

अतुल - कुछ गलत नहीं है, कुछ hi दिनों में हमारी शादी हो जाएगी न.

अतुल ने अपने दोनों हाथ उसके गालों पर रखे और उनको हलके हलके मसलने लगा. सुप्रिया ने भी अपने हाथ उसकी कमर पर रख दिए. अतुल ने अपने होंठ पास ला कर उसके होंठों पर रख दिए. जैसे hi उनके होंठ मिले, सुप्रिया को ऐसा लगा की आज वह अतुल नहीं किसी और को hi किश कर रही हो. अतुल हमेशा किश के मामले में जल्दी करता था, पर आज की ये सॉफ्ट किश तोह जैसे क्या कमाल थी.

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अतुल उसके होंठों पर होंठ रखे हुए अपने एक हाथ से सुप्रिया के कमर पर रख दिया और उसे अपने और करीब ले आया. जैसे hi उनकी होंठ अलग हुए, उन दोनों के सर एक दुसरे से लगे हुए थे और वह दोनों एक दुसरे के सांसें अपने ऊपर महसूस कर रहे थे. अतुल उसे ऐसे hi पकडे धीरे धीरे पीछे चलता ले गया और जब सुप्रिया के पेअर बीएड से टकराये तोह वह बीएड पर गिर का बैठ गयी.

अतुल वहीँ उसके सामने खड़ा था. अतुल से फिर से उसका चेहरा पकड़ा और सुप्रिया के माथे पर किश कर दी. सुप्रिया फिर सरक कर पीछे होने लगी और अतुल भी बीएड पर छेड़ते हुए उसके पीछे आने लगा.

सुप्रिया बीएड के सिरहाने तक आ कर रुकी, और अब पीछे जाने की जगह नहीं थी - राहुल क्या कर रहे हो. प्लीज सुनो न, रुक जायो न.

अतुल को उसकी सेक्सी आवाज़ में उसकी ना में हाँ सुनाई दे रही थी - बेबी, कुछ नहीं करूँगा, बस यहाँ आयो न.

अतुल ने सुप्रिया को खींचते हुए अपने नीचे दबोचा और फिर सुप्रिया को घूमते हुए अपने आगे कर लिया. अतुल ने सुप्रिया के बूब्स को पीछे से पकड़ा और उन्हें कपड़ो के ऊपर से गोल गोल दबाने लगा.

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सुप्रिया - अह्ह्ह.... मममममम.... राहुल....

अतुल भी पता नहीं क्यों राहुल न नाम सुनकर और एक्ससिटेड हो रहा था, उसका लुंड खड़ा हो कर सुप्रिया के पीछे टकरा रहा था. अतुल उसकी सिसकियाँ सुन कर उसके बूब्स को मसलता रहा. और सुप्रिया आँखें बंद करके मज़ा लेती गयी.

सुप्रिया रोलप्ले में अपना part बखूबी निभा रही थी - ओह्ह्ह राहुल, तुम कितने गंदे हो, ouchhhh....mere बूब्स दर्द कर रहे प्लीज, अह्हह्ह्ह्ह.

अतुल ने जल्दी से उसका टॉप और ब्रा उतरा और फिर से उसके बूब्स पर टूट पड़ा. उसका लुंड अब पूरी तरह खड़ा था और उसे लगा की उसका वीर्य किसी भी पल निकल जायेगा. उसने जल्दी से अपने कपडे उतारे और सुप्रिया की पंतय को नीचे खींचा. अतुल ने देखा की सुप्रिया के नीचे बाल hi नहीं थे, बिलकुल जैसे वह शादी के शुरू में थी.

अतुल - बेबी तुमने लिए मेरे लिए नीचे के बाल हटाए है.

सुप्रिया को उसे अपनी छूट को घूरते देख बहु शर्म सी आ रही थी - हाँ, और क्या.

अतुल उसके गालो की लाली और छूट का गुलाबीपन देख कर अपने आप को और नहीं रोक पा रहा था. उसने अपना लुंड उसकी छूट के बहार सेट किया और फिर वह उसे अपने नीचे करके उसे छोड़ने लगा.

सुप्रिया को इस समय बहुत मज़ा आ रहा था, और आखिर उसे अचे से सेक्स किये 2-3 हफ्ते हो चुके थे - अहह, अह्ह्ह, अहह, उफ्फ्फ. राहुल.....

सुप्रिया ने आँखें बंद कर ली और उसे लगा जैसे सच में अभी राहुल hi उसके साथ हो. सुप्रिया के अपने उंगलियां कास के अतुल की पीठ में गदा ली, और उसे जोर के पकड़ लिया.

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अतुल समझ गया था की सुप्रिया को भी बहुत मज़ा आ रहा है. वह और जोर से धक्के मारने लगा. सुप्रिया के अंदर धक्के मारते मारते जल्द hi अतुल का काम पूरा हो गया.

अतुल - ओह सुप्रिया.…… मज़ा hi आ गया आज toh....Kabse मैं था तुम्हारे साथ ये सब करने का...

सुप्रिया भी झाड़ चुकी थी - मममम... ahhhh…..Rahul... सच में...

एक डैम से सुप्रिया को रीलीज़ हुआ की अतुल तोह उसे सुप्रिया बुला रहा था, क्या उसने अतुल बनकर उसे सुप्रिया बुलाया था या राहुल बनकर. वह तोह अभी रोले में डूबी उसे राहुल hi बुला रही थी. उधर अतुल भी समझ गया की सुप्रिया की सोच में इस समय राहुल hi चल रहा था.

सुप्रिया - ओह्ह्ह सॉरी, मुझे पता नहीं चला की तुमने रोले ख़तम कर दिया था..

अतुल - नहीं मैंने रोले ख़तम नहीं किया था, मैंने तोह अपनी सुप्रिया भाभी के साथ hi किया है सब.

सुप्रिया ने उस एक हल्का सा मुक्का मारते हुए कहा - ये क्या बात है, हमने कुछ और तय किया था न. ये तोह बिलकुल गलत है.

अतुल ने सुप्रिया को पकड़े हुए कहा - पर तुम्हे मज़ा तोह आया न.

सुप्रिया ने चुप चाप हाँ में सर हिला दिया और वहीँ उसकी बाहों में लेती रही. अतुल उसे पकडे पकडे गहरी सोच में पद गया - क्या अगर सच में राहुल इसके साथ कुछ करना चाहेगा तोह ये करेगी? क्या किसी और के साथ भी अब तक?

सुप्रिया थोड़ी देर में ऐसे hi सो गयी और अतुल की सोच भरी रात थोड़ी लम्बी रही. उसने सोचा की शायद उसे सुप्रिया को और आजमाना होगा, पर वह ये सब करे कैसे. और अगर बात बिगड़ गयी तोह? उसके दिमाग में कुछ तोह खिचड़ी पाक रही थी.

अगले दिन बैंक में, अतुल और राहुल साथ बैठे लंच कर रहे थे. राहुल अक्सर अतुल का लंच खाता था और अतुल बहार का खाना मंगवा के.

अतुल - कैसा है खाना?

राहुल - ये भी कोई पूछने वाली बात है. सुप्रिया तोह हमेशा hi बड़ा ाचा खाना बनती है. मैं अगर तुम्हारी जगह होता तोह किसी और को ये खाना कभी नहीं देता.

राहुल की बात सुनकर अतुल को लगा की शायद इसको मानना इतना मुश्किल न हो. ये तोह अभी से सोचा है की काश ये मेरी जगह होता.

अतुल - अगर तुम मेरी जगह होते तोह और क्या करते?

राहुल - अगर मैं तुम्हारी जगह होता तोह? एक तोह ऑफिस से रोज़ टाइम पर घर निकल जाता. दूसरा, रोज़ सुप्रिया के लिया कुछ न कुछ लेकर घर जाता. और तीन.... क्यों क्या हुआ, तुम लोगो का फिर से झगड़ा हो गया क्या?

अतुल - नहीं नहीं, ऐसा कुछ नहीं. ऐसे hi सोचा की तुमसे टिप्स लू की क्या करना चाहिए.

राहुल - Haha...tips तोह मुझे तुमसे लेनी चाहिए की सुप्रिया जैसी बीवी को कैसे ढूंढा जाये.

अतुल - वह भी मिल जाएगी तुम्हे, चिंता मत करो. वैसे तुम्हे सुप्रिया में क्या ाचा लगता है?

राहुल - क्या नहीं ाचा लगता.. वैसे ये कैसा सवाल है?

अतुल - ारी ताकि मुझे पता तोह लगे की तुम ढून्ढ क्या रहे हो.

राहुल को थोड़ा अजीब लग रहा था की अतुल आज उससे ये सवाल कर रहा था - ः, आज इतने सवाल जवाब क्यों भाई. तुम काफी लकी हो की तुम्हे सुप्रिया जैसी वाइफ मिली है.

अतुल - जैसा तुम सुप्रिया के बारे में सोचते हो, सुप्रिया भी तुम्हारे बारे में सोचती है.

राहुल - क्या मतलब? क्या सोचती है सुप्रिया.

अतुल - तुम्हारे बारे में, और क्या. अगर उसे मैं न मिला होता, तोह शायद वह तुम्हे पसंद कर लेती.

राहुल - क्या बोल रहे हो यार.... तुम्हे सुप्रिया ने ऐसा कहा.

अतुल ने देखा की राहुल के चेहरे का रंग बदल गया था और उसकी आवाज़ में उत्सुकता बाद गयी थी - कहने की जरूरत नहीं है, पता चल जाता है. कई बार वह कहती है की मेरे साथ राहुल बनकर सेक्स करो.

अतुल पहले राहुल को अपनी सेक्स लाइफ के बारे में थोड़ा कुछ बता चूका था, उसमे से काफी कुछ तोह झूठ hi था. और राहुल को ये सब सुन्ना बड़ा ाचा लगता था, पर आज जो अतुल ने कहा, उसे सुनकर तोह जैसे उसके होश उड़ गए थे.

राहुल - क्या.... राहुल बनकर???

अतुल - हाँ... कल रात hi हमने ऐसा किया....

थोड़ी hi देर में लंच ख़तम हो गया और राहुल बहुत सारे सवाल लेकर अपनी सीट पर वापस चला गया - क्या सुप्रिया सच में उसके बारे में सोचती है? अतुल उसे ये सब क्यों बता रहा है?

अगले कुछ दिन, अतुल ऐसे hi धीरे धीरे राहुल को तड़पता रहा. वह उसे अपने और सुप्रिया के बीच की सेक्स की बातें बताता रहा.

अतुल - सुप्रिया तोह सेक्स में हमेशा न न hi करती है, पर उसका मतलब हाँ hi होता है. उसे पसंद है की कोई उसे अचे से कण्ट्रोल करे.

राहुल - ाचा, तोह वह चाहती है की तुम उस पर डोमिनाते करो.

अतुल - हाँ, बिलकुल. वह तोह बिलकुल मासूम सी बन जाती hai...Aur फिर उसके साथ जो चाहे कर lo...par मज़ा उसे भी पूरा आता है.

राहुल ये सब सुन कर और भी ज्यादा उत्तेजित होता जा रहा था. राहुल को पहले भी ये लगता था की अतुल उसे अपनी सेक्स लाइफ के बारे में कुछ ज्यादा hi बताता था, और अब ये सब बताना शायद उसकी नादानी थी या राहुल पर उसका गहरा ट्रस्ट. उसकी सोच के घोड़े दौड़ते रहे की आखिर सुप्रिया क्या चाहती है. उसे भी लगने लगा की शायद सुप्रिया को समझ आ गया था की उसकी शादी एक गलत इंसान से हो गयी है, और उसे राहुल जैसा साथी मिल सकता था.

उधर अतुल को लग रहा था की वह जो भी कह रहा है, वह शायद कुछ हद्द तक सच भी है, और बस थोड़ा सा बड़ा चढ़ा कर है. वह देखना चाहता था की अब राहुल क्या करेगा, और उससे भी ज्यादा सुप्रिया क्या करेगी. पर शायद ये प्लान आगे बढ़ाने के लिए उसे hi सब कुछ आगे बढ़ाना पड़ेगा.

शनिवार के दिन, अतुल ने सुबह उठ कर सुप्रिया से बात करि.

अतुल - सुप्रिया प्लीज गुस्सा मत करना पर एक बात बतानी थी.

सुप्रिया - क्या हुआ?

अतुल - राहुल और मेरा आज घर में पीने का प्रोग्राम है.

सुप्रिया - अतुल... ये क्या बात हुई... आपने तोह कहा था की वह बस एक बार था...

अतुल - यार प्लीज... राहुल का बहुत मैं था, और वैसे भी घर में hi पी रहे है न... बहार तोह नहीं.

सुप्रिया - राहुल भी पीटा है? मुझे नहीं पता था.

अतुल - हाँ, ज्यादा नहीं, पर थोड़ी सी. प्लीज यार, मान जायो न. नहीं तोह वह कहीं बहार जाकर पियेगा.

सुप्रिया उसे मन करना चाहती थी, पर वह ये भी नहीं चाहती थी की वह और राहुल बहार जाकर शराब पिए - हम्म्म, ठीक है, पर बस एक बार अल्लोव कर रही हु.

अतुल - तुम बेस्ट हो बिलकुल.

अतुल ने दारु का इंतज़ाम कर लिया और राहुल का वेट करने लगा. उसने राहुल को ये बोल कर बुलाया था की उसका बहुत मैं था पीने का, और राहुल बस उसका थोड़ा सा साथ दे दे, ताकि सुप्रिया उस पर गुस्सा न हो. राहुल वैसे तोह शायद इस बात के लिए हाँ नहीं भरता, पर आज वह खुद सुप्रिया का चेहरा पड़ना चाहता था. शाम को राहुल उनके घर आ गया.

अतुल - आ गए राहुल. मैंने सब रेडी कर लिया है तुम्हारे लिए. अतुल ने उसे आँख मारते हुए कहा.

राहुल - हांजी, थैंक यू.

सुप्रिया वहीँ किचन के बहार थोड़ा गुस्से में कड़ी उन दोनों को देख रही थी. राहुल ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा, वह साड़ी में क्या कमाल लग रही थी. उसने कई बार चोरी छुपे सुप्रिया को देखा था, पर एक ऐसे तारे की तरह जिसे बस देख सकते है पर कभी छूने की हिम्मत भी नहीं कर सकते. पर आज शायद कुछ अलग था.

अतुल ने बोतल और गिलास को टेबल पर रखा और राहुल को बैठने का इशारा किया - चलो शुरू किया जाये. सुप्रिया अगर तुम्हे भी लेना हो तोह ले सकती हो.

सुप्रिया - नहीं... मुझे कोई शौक नहीं है... मैं अंदर हु अगर कुछ चाहिए तोह.

सुप्रिया वहां बैठ कर उन दोनों को पीते नहीं देखना चाहती थी. अतुल को तोह उसने एक बार पीते देखा था पर राहुल से उसे बिलकुल ऐसी उम्मीद नहीं थी.

अतुल ने जल्दी hi पीने का सिलसिला शुरू किया. ऐसा नहीं है की राहुल बिलकुल नहीं पीटा था, पर बहुत hi काम. उसने हलके हलके एक ांध घूंठ भरे और बाकि कोल्ड ड्रिंक उठा कर पीने लगा. अतुल के गिलास तोह जल्दी से बन कर ख़तम भी होते जा रहे थे. एक बार वह पीना शुरू करता था तोह उससे रुका नहीं जाता था.

अतुल की आँखें आधी बंद हो चुकी थी, और वह राहुल से बोलै - देख जरा... क्या कर रही है सुप्रिया किचन में....

राहुल थोड़ा हिचकिचाता हुआ खड़ा हुआ और किचन की तरफ बड़ा. उसने पीछे मुद कर देखा तोह अतुल के आँखें लगभग बंद hi थी. उसने आज से पहले सुप्रिया के साथ किचन में खड़े हो कर बातें करि थी, पर आज उसका मैं साफ़ नहीं था, तोह उसकी दिल की धड़कन भी बड़ी हुई थी. वह किचन में हलके से घुसा, और देखा सुप्रिया वहां कड़ी आता गूंध रही थी. साइड से उसे उसकी फिगर साफ़ दिखाई दे रही थी. वह हलके हलके कोई तूने गुनगुना रही थी.

सुप्रिया ने उसे आते देखा - क्या हुआ? कुछ चाहिए क्या?

राहुल - नहीं, मैंने सोचा की पूछ लू अगर तुम्हे कोई हेल्प चाहिए.

सुप्रिया ने थोड़ा गुस्से में कहा - नहीं, तुम जायो, दारु पियो.

राहुल - तुम गुस्सा हो क्या...

सुप्रिया ने उसे टॉन्ट मारते हुए कहा - नहीं, मैं तोह काफी खुश हु, गुस्सा क्यों होंगी...

राहुल उसके और पास आ कर खड़ा हो गया. उसे आता गूंधते देख वह और भी सेक्सी लग रही थी. जैसे उसके हाथ किसी के लिंग को मसल रहे हो. सुप्रिया ने उसे पलट कर तीखी नज़रो से देखा.

राहुल - सॉरी सुप्रिया... मैं तोह बस....

सुप्रिया - मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी, मुझे लगा था की तुम तोह समझदार हो.

राहुल - पर इसमें मेरी क्या गलती? मैं तोह ज्यादा पीटा भी नहीं हु...

सुप्रिया अब थोड़ी इमोशनल होना शुरू हो गयी थी - तोह फिर ये प्लान क्यों बनाया पीने का... तुम्हे पता था न की अतुल से कण्ट्रोल नहीं होता...

राहुल उसकी शकल देख कर समझ गया था की वह रोने वाली है, उसने अपना हाथ हलके से उसके कंधे पर रखा. राहुल का हाथ लगते hi सुप्रिया के ासु निकलने शुरू हो गए और वह धीरे धीरे सुबक रही थी.

राहुल - शहहहहह... रोयो मत प्लीज....

राहुल ने उसकी पीठ को सहलाना शुरू किया. मामला काफी इमोशनल था पर राहुल उसे छू कर काँप सा गया, उसका बदन उसकी सोच से भी ज्यादा कोमल और मुलायम था. राहुल ने अपने हाथ उसके गाल पर लगते हुए उसके आंसू पोछने शुरू किये. सुप्रिया को जैसे इस समय एक कन्धा मिल गया हो रोने के लिए, उसने पास आ कर राहुल को हलके से हुग कर लिया. राहुल का एक हाथ सुप्रिया की पीठ पर था और दूसरा हाथ अभी भी उसके ासु पॉच रहा था. उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की सुप्रिया इस समय उसकी बाहों में थी.

राहुल ने अपना हाथ उसकी थोड़ी पर रखा और उसका मुँह अपनी और ऊपर किया. सुप्रिया के मासूम से चेहरे को देख कर राहुल बेहटा जा रहा था. सुप्रिया की आँखें अभी भी नीचे देख रही थी.

राहुल ने हिम्मत करके उसके गाल पर किश करते हुए उसके ासु पी गया. सुप्रिया एक डैम से ठिठक सी गयी, उसने राहुल को ये करते तोह नहीं सोचा था. राहुल ने फिर जल्दी से से उसे होंठों के पास के ासु को पोछने के लिए वहां भी किश की.

सुप्रिया ने पीछे होने की कोशिश करते हुआ कहा - राहुल! ये क्या कर रहे हो...

उसके मुँह से ये शब्द निकले hi थे की कुछ दिने पहले किया रोलप्ले उसकी आँखों के सामने तैर गया.

जैसे hi सुप्रिया दूसरी तरफ मुड़ी, राहुल ने उसे पीछे से उसकी कमर को पकड़ लिया, और हाथ उसके बूब्स से थोड़ा सा नीचे. राहुल ने उसके गाल पर एक और किश कर दी - कुछ भी तोह नहीं, बस ासु hi तोह पोछे है.

सुप्रिया उसकी जकड से आज़ाद होने की कोशिश कर रही थी. पर राहुक का एक हाथ उसे पकडे हुए उसके बूब्स को छू रहा था और दूसरा हलके से उसकी पीठ पर ब्लाउज के ऊपर घूम रहा था. ये सब सुप्रिया को भी काफी उत्तेजित कर रहा था.

राहुल ने अपनी जकड हलकी करते हुए कहा - मुझे पता है की तुम मुझे लिखे करती हो. नहीं तोह मुझसे अपने इमोशंस न शेयर करता है.

सुप्रिया उसकी जकड से छूती hi थी की जैसे hi वह पीछे हटी तोह उसकी पीठ फ्रिज पर टकराई. राहुल ठीक उसके सामने था और अब वह उससे बच कर कहीं नहीं जा सकती थी. राहुल ने अपना मुँह आगे करके उसके होंठों को हलके से किश किया. सुप्रिया के पेअर जैसे कमज़ोर पड़ने शुरू हो गए थे. वह चीखना चाहती थी पर उसके गले से आवाज़ hi नहीं निकल रही थी.

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राहुल - मुझे पता है तुम एहि चाहती हो.

सुप्रिया - राहुल... रुको प्लीज.. अतुल बहार hi बैठे है...

राहुल को लगा तीर सही निशाने पर लगा है, वह बस अतुल से hi डर रही थी - फ़िक्र मत करो, अतुल को पता नहीं chalega...usne काफी पी ली है

सुप्रिया अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी - प्लीज राहुल... ये गलत कर रहे हो तुम... पीछे हटो...

राहुल के हाथ अब सुप्रिया की पीठ पर बिना रुके घूम रहे थे, जैसे वह अपने होश में न हो. पर उसे एक डैम से अतुल की हलकी आवाज़ बहार से आयी, और वह अपने होश में आया.

सुप्रिया उसके हाथ से छुटथे hi जल्दी से किचन से निकल कर अपने रूम में चली गयी और अपने कमरे की कुण्डी लगा ली. राहुल बहार आया और देखा की अतुल बैठे बैठे hi सो गया था. उसने अंदर जाकर सुप्रिया का कमरा खोलने की कोशिश करि पर वह लॉक्ड तहत.

राहुल ने हलके से कहा - सुप्रिया प्लीज दरवाज़ा खोलो न...

सुप्रिया दरवाज़े के पास hi कड़ी थी और दरवाज़े का हैंडल हिलते देख रही थी. उसे पता था की अगर उसने अभी राहुल को कमरे में आने दिया तोह पता नहीं क्या hi हो जायेगा.

सुप्रिया - प्लीज राहुल तुम अभी जायो.. तुमने कुछ ज्यादा hi पी ली है...

राहुल ने ek-do बार और दरवाज़ा खोलने की कोशिश करि, पर वह अचे से बंद था. शायद आज उसकी बात नहीं बनने वाली थी, पर वह सुप्रिया को किश करके hi बहुत खुश था. उसने वापस ड्राइंग रूम में आ कर देखा तोह अतुल सोया पड़ा था. उसने अतुल को हलके से हिलाया और उसको बोलै की वह जा रहा है. अतुल सच में होश में नहीं था, और वह वापस सो गया.

अंदर कमरे में सुप्रिया की दिल की धड़कन बहुत तेज़ थी. उसने कभी सोचा भी नहीं था की उसके और राहुल के बीच ऐसा कुछ हो जायेगा, और उसने राहुल को और सख्ती से मन क्यों नहीं किया. क्या वह अब अतुल को ये सब बताये? ये सब सोचते सोचते उसकी भी आँख लग गयी.
 
अपडेट 20

सुबह अतुल की आँख खुली तोह उसने अपने आप को सोफे पर पाया. उसे रीलीज़ हुआ की उसने कुछ ज्यादा hi पी ली थी रात को. जागते hi उसे फिर से राहुल और सुप्रिया का ख्याल आया. क्या उनके बीच कुछ हुआ था कल रात? उसे तोह कुछ भी याद नहीं आ रहा था.

अतुल उठ का अपने बैडरूम की तरफ गया, और उसने जब दरवाज़ा खोलने की कोशिश करि तोह उसने पाया की दूर लॉक्ड तहत. उसके मैं में घबराहट शुरू हो गयी. अगर दरवाज़ा खुला और राहुल अंदर हुआ तोह? उसने दरवाज़े को ज़ोर ज़ोर से खटकना शुरू किया.

अतुल - सुप्रियाआ.... दरवाज़ा खोलो....

अंदर से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी, पर एक डैम से hi सुप्रिया ने अपनी आखें मलते हुए दरवाज़ा खोला.

सुप्रिया - उठ गए आप?

अतुल - हाँ, पर तुमने दूर क्यों लॉक किया था.

सुप्रिया को एकदम से कल रात को राहुल की हरकत याद आ गयी. उसने कभी नहीं सोचा था की राहुल उसके साथ ऐसा करेगा. पर शायद इसमें उसकी भी गलती थी, की वह उसके कंधे पर सर रख कर रोने लगी थी. शायद राहुल ने भी कुछ ज्यादा hi पी ली थी. पर वह अतुल को कुछ नहीं बता सकती थी, उसे उम्मीद थी की राहुल भी इस बात का कोई जिक्र न करे.

सुप्रिया - हाँ वह आप लोग पी रहे थे तोह मैं दरवाज़ा लॉक करके सो गयी.

अतुल कमरे के अंदर झाँक रहा था जैसे अभी भी राहुल को ढून्ढ रहा हो - ाचा... ठीक है.

जब उसे तस्सली हो गयी की अंदर कोई नहीं था उसने सुप्रिया को हुग किया.

सुप्रिया उसे पीछे हटते हुए - आप में से कभी स्मेल आ रही है, प्लीज नाहा के आ जायो.

अतुल - ाचा मेरी जान.

अतुल जल्दी से नहाने घुस गया और उसकी थोड़ी देर बाद सुप्रिया भी नाहा कर आ गयी. वह अपने गीले बाल सूखा hi रही थी की उसके फ़ोन पर एक कॉल आने लगा.

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सुप्रिया - यह तोह नीचे वॉचमन का कॉल है.

सुप्रिया ने फ़ोन उठाया तोह दूसरी और इक़बाल था.

इक़बाल - मैडम जी, गुड मॉर्निंग.

सुप्रिया - गुड मॉर्निंग.

इक़बाल - मैडम जी, यहाँ 2 लोगो की एंट्री करनी है जो आपसे मिलने आये है. कह रहे है की आपके रिश्तेदार है.

सुप्रिया - ाचा, क्या नाम बताया उन्होंने.

इक़बाल उनसे नाम पूछने के बाद - अप्रीता और विनीत.

सुप्रिया एक डैम से हैरान हो गयी की दीदी और जीजू यहाँ क्या कर रहे थे - हांजी, प्लीज उनको आने दीजिये.

इक़बाल - हांजी मैडम, मैं खुद पर्सनली उन्हें ऊपर ले कर आता हूँ आपके फ्लैट पर.

सुप्रिया ने अतुल को बताया की दीदी और जीजू आये है. वह फटाफट से ड्राइंग रूम को साफ़ करने में लग गए. और फिर 2-3 मिनट बाद उनके घर की घंटी बाज़ी.

जैसे hi दरवाज़ा खुला, अर्पिता ज़ोर से चिल्लाई - सुरप्रीसीई!!!

सुप्रिया उन्हें देख कर बहुत hi खुश हो गयी - दीदी ये तोह सच मैं बहुत बड़ा सरप्राइज है. इक़बाल भैया, थैंक यू आपने इन्हे यहाँ तक छोड़ दिया.

इक़बाल - कोई बात नहीं मैडम जी.

वह सोचने लगा की इस बहाने उसे मैडम को गीले बालो में देखने को मिल गया. सच में क्या टाइट माल थी ये.

अर्पिता और विनीत घर में आये, और सुप्रिया ने इक़बाल को bye करते हुए दरवाज़ा बंद कर लिया. अर्पिता का पेट अब थोड़ा बहुत दिखना शुरू हो गया था, हालाँकि अभी वह सिर्फ 4 महीने hi प्रेग्नेंट थी.

विनीत - ारी भाई, क्या बढ़िया घर है तुम लोगो का.

सुप्रिया - वह तोह आप ऐसे hi बोल रहे है जीजू. छोटी सी जगह है.

विनीत - ारी उसमे क्या हुआ, दिल तोह बड़ा है न.

अर्पिता - हमने सोचा की अभी लखनऊ घूम के आ जाते है, बाद में तोह पता नहीं कब आना हो.

सुप्रिया - बहुत ाचा किया आपने.

अतुल - पर पहले कॉल करके बता देते तोह मैं स्टेशन आ जाता लेने.

विनीत - ारी कोई नहीं साले साहब. आ गए न.

सुप्रिया ने जल्दी से उनके लिए चाय नाश्ता बनाना शुरू कर दिया. उधर विनीत और अतुल घूमने का प्रोग्राम बना रहे थे. अतुल ने एक कैब वाले को फ़ोन किया और पूरे दिन के लिए एक गाडी बुक कर ली.

विनीत - अतुल तुम्हे भी अब एक गाडी ले लेनी चाहिए. कब तक सुप्रिया को अपने 2 व्हीलर पर घुमाओगे.

अतुल - हांजी जीजू, मैं जल्दी hi लेता हूँ. मुझे भी चलनी सीखनी पड़ेगी पहले.

उन लोगो ने चाय नाश्ता पूरा hi किया था की नीचे गाडी भी आ गयी. नीचे आ कर देखा तोह पाया की गाडी बहार कड़ी थी, शायद वॉचमन ने उसे अंदर नहीं आने दिया था.

इक़बाल ने सुप्रिया को गाडी की तरफ जाते देखा - मैडम, ये आपकी गाडी है क्या बहार. अगर मुझे पता होता तोह मैं इसे अंदर आने देता. ऐसा कुछ न हो कभी तोह आप मुझे कॉल कर सकते हो.

गाड़ी थोड़ी छोटी थी, विनीत आगे बैठ गए और बाकि तीनो लोग किसी तरह से फास कर पीछे बैठ गए. उन्होंने ड्राइवर को पहले पुराने लखनऊ की और जाने के लिया बोलै. वहां उन्होंने इमामबाड़ा और रूमी दरवाज़ा देखा और फिर वहीँ लोकल मार्किट में थोड़ी बहुत शॉपिंग करि. और देख साड़ी फोटोज भी खींची.

फिर शाम होते होते वह लोग हज़रतगंज में सहारा गंज मॉल की और चल दिए. वहीँ उन लोगो ने खाना खाया और थोड़ी बहुत शॉपिंग करि. सुप्रिया पहली बार लखनऊ में अतुल के इलावा किसी और के साथ मॉल आयी थी. उसे बहुत hi ाचा लग रहा था क्यूंकि अतुल तोह हमेशा की चलने की जल्दी मचाते थे. मॉल से निकलते निकलते 8 बज चुके थे.

गाडी पर पहुंचते hi ड्राइवर ने उन्हें कहा - सर जी मैं थोड़ा नया हु, रात को इतने अचे से नहीं पता रास्ते.

अतुल - कोई नहीं, मैं बताता हूँ आपको. आप चलो.

विनीत - अतुल ऐसा करो की तुम आगे बैठ जायो उसको रास्ता बताने के लिए.

अतुल आगे बैठ गया और फिरसे तीन लोग पीछे बैठ गए. अर्पिता एक साइड पर, विनीत दूसरी साइड पर और सुप्रिया बीच में. अर्पिता की पूरे दिन घूम कर हालत थोड़ी ख़राब हो गयी थी तोह वह थोड़ी और जगह लेकर बैठी थी. सुप्रिया का एक साइड से पूरा शरीर विनीत को छू रहा था. विनीत अपने हाथ क्रॉस करके बैठा हुआ था, तोह जब भी गाडी थोड़ा ऊपर नीचे होती, उसकी कोहनी सुप्रिया के बूब्स से टकरा रही थी. सुप्रिया को काफी अजीब लग रहा था पर अब वह क्या hi करती.

अर्पिता - सुप्रिया थोड़ा सा और उधर हो जायो न प्लीज, मुझे अपने पेअर फ़ैलाने है.

सुप्रिया - बिलकुल जगह नहीं है दीदी.

अतुल - क्या हुआ दीदी, आप ठीक तोह हो न.

अर्पिता - नहीं, काफी उनकंफर्टबले लग रहा है.

अतुल - सुप्रिया तुम ऐसा करो जीजू की गोदी में बैठ जायो.

अर्पिता - हाँ ये ठीक रहेगा.

सुप्रिया किसी की गोदी में तोह नहीं बैठना चाहती थी, पर वह देख पा रही थी की अर्पिता दीदी की हालत थोड़ी ख़राब थी.

अतुल - थोड़ी देर का hi रास्ता है. प्लीज सुप्रिया कर लो न मैनेज.

सुप्रिया - ठीक है.

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सुप्रिया ने अपने आप को उठाया और विनीत की गोदी में बैठ गयी. उसे काफी अजीब लग रहा था विनीत की गोदी में ऐसे बैठे हुए. उसकी पीठ विनीत की छाती को छू रही थी, और उसके पेअर थोड़ा खुले हुए विनीत के पैरों पर थे, विनीत के पेअर उसकी टांगो के बीच में से निकलते हुए.

गाडी जैसे hi किसी गड्ढे से टकराती, सुप्रिया पूरा हिल जाती और विनीत के ऊपर पीछे गिर जाती. विनीत ने उसे गिरने से रोकने के लिए अपने हाथों से उसके हलके से पकड़ लिया. विनीत का मुँह सुप्रिया की गर्दन के काफी पास था और उनकी सांसें उसे अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थी.

अर्पिता ने उन्हें ऐसे बैठे देखा और उसे थोड़ी जलन सी हुई - सुप्रिया इतनी भी कम्फर्टेबले नहीं हो जाना अपने जीजू की गोदी में.

सुप्रिया - नहीं दीदी… मैं तोह बस आपके लिए hi …..

अर्पिता - ारी मजाक कर रही हु यार…

सुप्रिया को अब काफी उनकंफर्टबले लग रहा था और वह चाहती थी की जल्दी से वह घर पहुंच जाये. थोड़ी देर के बाद वह घर पहुंचे, और पहले अतुल और अर्पिता बहार निकले, और फिर सुप्रिया विनीत की गोदी से नीचे उतरी और बहार निकली.

विनीत ने उसे बहार निकलते हुए हस्ते हुए कहा - तुम इतनी भी हलकी नहीं हो जैसे दिखती हो.

सुप्रिया हस्ते हुए झेप गयी - तोह आप कह रहे हो की मैं मोती हूँ.

विनीत - ारी नहीं भाई, मेरी कहाँ इतनी हिम्मत. और वैसे मोती तोह बिलकुल नहीं हो.

जल्द hi वह घर में आ गए, और फिरसे बात चीत शुरू कर दी. अर्पिता अंदर बीएड पर लेट गयी थी और सुप्रिया उसके साथ बैठी थी, और विनीत और अतुल बहार बैठे बात कर रहे थे.

अतुल - जीजू आप कल शाम को hi क्यों चले जाओगे. थोड़े दिन और रुकते.

विनीत - तुम अब कल की छुट्टी ले रहे हो, और कितने दिन की लोगे. और वैसे भी हम यहाँ करेंगे क्या.

अतुल - आराम से घर पर बैठ कर बात करेंगे.

विनीत - ाचा वैसे एक बात बताया, तुम्हारे और सुप्रिया के बीच में सब ठीक है न.

अतुल - हाँ, सब ठीक है. आपने ये क्यों पुछा.

विनीत - ऐसे hi, बस लगा आज तुम दोनों को देख कर. तुम्हे पता है न तुम मुझसे कुछ भी शेयर कर सकते हो.

अतुल - हाँ बिलकुल जीजू.

विनीत - तोह फिर बताया न, क्या मामला है.

अतुल थोड़ा हिचकिचाया, अब वह क्या बताये जीजू को, एहि की उसे शक है सुप्रिया किसी और को पसंद करती है. नहीं वह ये किसी को नहीं बता सकता था. पर अगर उसने नहीं बताया तोह शायद उसका सर न फट जाये ये सब सोचते सोचते. आखिर जीजू से ाचा कौन होगा ये सब बताने के लिए.

अतुल - आप दीदी को नहीं बताओगे कुछ भी, प्लीज प्रॉमिस करो.

विनीत - ारी बिलकुल, पक्का प्रॉमिस.

अतुल ने विनीत को सब बताना शुरू किया की कैसे उसने ध्रुव को सुप्रिया के कमरे से निकलते देखा था, और कैसे उसे शक था की सुप्रिया और उसका दोस्त राहुल एक दुसरे को पसंद करते थे. उसने इस सब में कुछ बातें छोड़ दी जैसे उसने राहुल को उकसाने के लिए जो भी किया और उसको दारु पिलाने के लिए घर पर बुलाया.

साड़ी बातें ध्यान से सुनने के बाद, विनीत ने हस्ते हुए कहा - बस एहि बात थी? सॉरी मैं है रहा हूँ. पर सच में साले साहब आप कुछ ज्यादा hi सोचते हो.

अतुल चुप चाप उनकी शकल देख रहा था.

विनीत - तुम्हे पता hi है की ध्रुव और सुप्रिया की आपस में बहुत बनती है. और रही दोस्त की बात, मुझे नहीं लगता की सुप्रिया ऐसा कुछ कर सकती है. पर मेरी तुम्हे एहि सलाह रहेगी की दोस्तों को घर से थोड़ा दूर hi रखे.

विनीत - मेरे ख्याल से तुम कुछ ज्यादा hi नेगेटिव सोच में चले गए पिछले कुछ दिनों से. तुम्हे ये सब अपने दिमाग से निकल देना चाहिए नहीं तोह किसी के लिए भी ाचा नहीं होगा.

अतुल को ये सब सुनकर ऐसा लगा की उसके सर से जैसे कोई भारी भोज हट गया हो. सच में, वह कुछ ज्यादा hi सोचने लगा था ये सब. और पिछले कुछ दिनों में उसने जो भी किया था वह काफी गलत था. वह सुप्रिया पर शक भी कैसे कर सकता था.

अतुल - थैंक यू जीजू, आपने सच में मेरे दिमाग में भरे इस कचरे को साफ़ कर दिया.

विनीत - तुम ऐसा करो, किसी बहाने से अपनी दीदी को घर से ले जायो कल. मैं सुप्रिया से भी बात करता हूँ.

अतुल - पर आप सुप्रिया से क्या बात करोगे?

विनीत - बिफिकर रहो, मैं उसे तुम्हारे मैं की बात नहीं बतायूंगा. बस उसके मैं की बात सुनने की कोशिश करूँगा.

अतुल को लगा की शायद जीजू ये अचे से कर पाए तोह वह इसके लिए तैयार हो गया.

उधर अंदर सुप्रिया और अर्पिता भी बातों में लगे थे.

अर्पिता - तुम्हारे और अतुल के बीच में सब ठीक तोह है न.

सुप्रिया - हाँ दीदी, सब ठीक है.

अर्पिता - ऐसा लगा नहीं आज, तुम दोनों थोड़े अलग अलग दिखाई दिए.

सुप्रिया - नहीं ऐसा कुछ नहीं.

अर्पिता - तुम लोगो की सेक्स लाइफ तोह ठीक है न. अब तोह वैसे 6 महीने हो गए तुम्हारी शादी को. मुझे पता है शुरू में शायद तुम खुश नहीं थी, तुमने अपनी भाभी से भी बात की थी.

सुप्रिया को नहीं पता था की अर्पिता ने उस दिन उनकी आपस की बात सुन ली थी - सब ाचा है दीदी हमारे बीच.

अर्पिता - कुछ भी हो तोह मुझसे शेयर कर सकती हो. मैं भी शेयर कर डीटी हु, विनीत और मैं तोह अब तक सेक्स करते है, उनसे तोह रुका hi नहीं जाता सेक्स के बिना.

सुप्रिया को थोड़ी हैरानी हुई की दीदी प्रेग्नेंट थी पर अभी सेक्स करती थी.

अर्पिता - और गुड न्यूज़ कब दे रहे हो, या अभी अपनी ये फिगर ख़राब नहीं करना.

सुप्रिया के गाल लाल हो गए, उसने और अतुल ने अब तक कोई प्रसौतिओं तोह नहीं लिया था, अगर बच्चा होता तोह उसे कोई प्रॉब्लम नहीं होती. पर शायद अब वह थोड़ा वेट करना चाहती थी बच्चा करने से पहले.

सुप्रिया - जब होगा तोह हो जायेगा.

इतने में अतुल एंड विनीत दोनों कमरे में आ गए.

विनीत - क्या खुसर फुसर हो रही है भाई.

सुप्रिया ने हस्ते हुए कहा - हमारी आपस की सीक्रेट बात है जीजू, आपको क्यों बताये.

विनीत - चलो मत बताया हमें. कभी न कभी तोह पता चल hi जायेगा.

अतुल - ाचा दीदी, मैं क्या सोच रहा था की यहाँ एक जाने माने बाबाजी का आश्रम है. मैं आपको उनसे आशीर्वाद दिलाने ले चलूँगा कल. उससे आपका होना वाला बेबी बहुत hi सुन्दर और हेअल्थी होगा.

अर्पिता - ारी वह ये तोह बड़ा ाचा आईडिया है.

अतुल - पर मेरे स्कूटर पर सिर्फ आपको hi ले जा पायूँगा.

विनीत - मुझे तोह वैसे भी इन बाबा लोगो पर भरोसा नहीं होता. तोह मैं तोह वैसे भी नहीं जाने वाला था.

अर्पिता - आप भी न.... चलो अतुल, बस तुम और मैं चलेंगे.

थोड़ी देर के बाद सब लोग सो गए. और सुबह जल्दी जल्दी तैयार हो कर अर्पिता और अतुल घर से निकल पड़े. अर्पिता भी नहाने के लिए घुस गयी.

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वह नाहा hi रही थी की उसे दरवाज़े के बहार एक हलकी सी आवाज़ आयी.

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उसे लगा की शायद उसका वेहम होगा और वह फिरसे नहाने में लग गयी. अगर वह घर में अकेली होती थी तोह वह कई बार सिर्फ ब्रा और पंतय में भी बहार आ जाती थी, अतुल के सामने वह ब्लाउज और पेटीकोट पेहेन कर निकलती थी. पर आज जीजू घर पर थे, तोह वह अपनी साड़ी भी अंदर ले कर गयी थी. उसने अपनी साड़ी बाँधी और वह बहार आयी. जैसे hi उसने बहार एक कदम रखा उसका पेअर किसी पानी जैसी चीज़ पर फिसल गया और वह एक डैम से गिर गयी.

सुप्रिया ज़ोर से चिल्लाई - Ouchhhh...uffff.

विनीत भागता हुआ ड्राइंग रूम से आया - क्या हुआ सुप्रिया, तुम ठीक तोह हो.

विनीत ने देखा की सुप्रिया ज़मीर पर लेती हुई थी.

सुप्रिया - Jiju...main शायद पानी पर फिसल गयी. ोुछः... बहुत दर्द हो रहा है पेअर में..

सुप्रिया ने उठने की कोशिश करि पर उसका टखना शायद गिरने पर मुद गया था.

विनीत - रुको रुको, मैं हेल्प करता हु.

विनीत ने झुक कर सुप्रिया को अपनी गोदी में उठाया और उसके बैडरूम की और ले गया. विनीत का एक हाथ उसके सर पर था और दूसरा हाथ उसकी कमर पर था. सुप्रिया ने अपने आप को सहारा देने के लिए विनीत के कंधो पर रख दिए और बीएड पर लिटाते hi उसके जल्दी से अपने हाथ पीछे खींच लिए. उसने देखा की विनीत के चेहरे पर एक मंद मंद मुस्कान थी.

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विनीत ने उसके पैरो के और जाते हुए कहा - सुप्रिया दिखायो जरा अपना पेअर. मैं थोड़ी मस्सगे करता हूँ.

इससे पहले की सुप्रिया कुछ बोल पाती विनीत ने अपने हाथों से उसके पैरो को हलके हलके छूने लगा.

सुप्रिया - जीजू कोई नहीं आप छोड़ दो, ठीक हो जायेगा.

विनीत - नहीं सुप्रिया, चेक करने दो मुझे. तुम्हारा पेअर काफी मुद गया था.

विनीत ने उसका पेअर नीचे से पकड़ा और हल्का सा घुमाया. पेअर घूमते hi सुप्रिया की चीख निकल गयी.

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विनीत - शायद यहीं लगी है तुम्हारे. तभी तोह दर्द हो रहा है. मैं थोड़ा और ऊपर भी चेक करता हूँ.

विनीत अपना हाथ धीरे धीरे और ऊपर ले जाने लगा, और अब उसका हाथ उसकी सारे में था.

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सुप्रिया को काफी अजीब लग रहा था जिस तरह से जीजू उसके पेअर छू रहे थे - जीजू ठीक है अब. आप छोड़ दो अब.

विनीत - चेक hi तोह कर रहा हूँ.

विनीत ने उसका पेअर ऊपर उठाया और उसके पेअर को घूरने लगा. फिर एकदम से उसने सुप्रिया के पेअर को चूमा और फिर काँटा.

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सुप्रिया एकदम से भौचक्की रह गयी - ोुछः.... और उसने अपना पेअर पीछे खींच लिया.

विनीत - क्या हुआ? करने दो न.

सुप्रिया - जीजू आप क्या कह रहे हो... आपको पता भी है..

विनीत - पता है, तभी तोह कर रहा हूँ.

सुप्रिया का चेहरा अब तमतमाया हुआ सा था - क्या पता है?

विनीत - इतनी भोली मत बनो... मुझे सब पता है... ध्रुव.... राहुल....

सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा था की जीजू को ये सब कैसे पता हो सकता था. क्या ध्रुव ने जीजू को सब बताया था. और राहुल, उसके बारे में कैसे पता हो सकता था.

विनीत - क्यों पकड़ी गयी न तुम.

सुप्रिया - मुझे समझ नहीं आ रहा आप क्या बोल रहे हो.

विनीत - बनो मत...

विनीत ने फिर से अपना हाथ बड़ा कर उसका पेअर खींचा और उसे दोनों हाथों से मसलने लगा - बहुत hi सॉफ्ट पेअर है तुम्हारे.

सुप्रिया की आँखों से आंसू निकलने लगे थे. विनीत उसके पेअर मसलते हुए उसके पैरो पर छूती काट रहा था. उसने सुप्रिया की साड़ी को थोड़ा ऊपर किया और उसके हाथ ऊपर बढ़ते बढ़ते उसकी जांघ तक पहुंच गए थे. वह बीच बीच में उसके पैरो को किश भी कर रहा था.

विनीत उसकी जांघो को देख कर काफी एक्ससिटेड हो गया - वाओ यार, क्या गोर गोर पेअर है तुम्हारे.

सुप्रिया अपने आप को ढकने के कोशिश कर रही थी, पर उससे ाचा से हिला भी नहीं जा रहा था - जीजू प्लीज आप क्या कर रहे हो.

विनीत - ऐसा कुछ नहीं जो तुमने पहले न किया हो… चुप चाप मुझे सब करने दो.

विनीत फिर से सुप्रिया के पैरो पर टूट पड़ा. शायद उसे पेअर कुछ ज्यादा hi पसंद थे. वह सुप्रिया के पैरूं को हर जगह अचे से किश कर रहा था. सुप्रिया बस बेबस होकर अंदर कसमसा रही थी.

विनीत - वैसे मुझे याद है की जब हम तुम्हे शादी के लिए देखने आये थे तोह तुम मुझे कैसे देख रही थी. तुम्हे लगा था न तुम्हारी शादी मुझसे हो जाये, तोह अब एहि समझ लो की वह ख्वाइश भी पूरी हो गयी.

सुप्रिया हैरान रह गयी की विनीत की नज़र उस पर तभी से थी.

विनीत - और कल जब तुम मुझपर बैठी तोह इतना ाचा लगा था न, मैं बता नहीं सकता. दिल तोह करा रहा था की तुम्हे अचे से छू लू पर….

तभी घर के दरवाज़े की घंटी बजी.

विनीत - ओह, यह लोग तोह काफी जल्दी वापस आ गए. हमारे बीच जो भी हुआ, वह हमारे बीच hi रहना चाहिए, अतुल और अर्पिता को कुछ नहीं पता लग्न चाहिए. नहीं तोह मैं अतुल को तुम्हारे बारे में सब बता दूंगा. जब तुम ग्वालियर आयोगी तब बाकी सब पूरा करेंगे.

सुप्रिया काफी फसा हुआ सा फील कर रही थी, उसने अपना सर हाँ में हिलाया.

विनीत दरवाज़ा खोलने गया और विनीत ने अतुल और अर्पिता को बताया की कैसे सुप्रिया फिसल गयी थी और अब बीएड पर है. अतुल भागता हुआ सा कमरे में आया और उसने सुप्रिया को हुग कर लिया. सुप्रिया भी उसके गले लगते hi रोने लगी, पर उसने एक नज़र विनीत की और डाली और वह समझ गयी थी की विनीत की हरकत के बारे में अतुल को कुछ नहीं बता सकती थी.

बचे हुए दिन में सबने सुप्रिया का काफी ख्याल रखा. सुप्रिया में भी किसी तरह से नार्मल होने की एक्टिंग करि. और फिर शाम होते hi अतुल उन्हें स्टेशन छोड़ने चला गया.

सुप्रिया अब थोड़ा सा हिल पा रही थी. उनके जाने के बाद सुप्रिया ने अपना फ़ोन उठाया तोह उस पर राहुल का एक मैसेज आया हुआ था - सुप्रिया, आज अतुल ऑफिस नहीं आया. कहीं तुमने उसे सब बता तोह नहीं दिया?

सुप्रिया ने उसे वापस जवाब दिया - नहीं, और प्लीज तुम भी कुछ मत बताना.

राहुल - बिलकुल वह हमारा सीक्रेट रहेगा. मैं तुमसे अकेले मिल मिलना चाहता हूँ.

सुप्रिया - राहुल उस दिन जो हुआ वह एक गलती थी, और ाचा होगा की तुम वह सब भूल जायो.

राहुल - सुप्रिया, मैं तुम्हे मिलकर सब समझायुंगा…

सुप्रिया ने उसका कोई जवाब नहीं दिया और जल्दी से सारे मेस्सगेस डिलीट कर दिए.

वह अब कभी भी राहुल के बारे में ये सब नहीं सोचना चाहती थी. वह सोचने लगी की क्या उसका खूबसूरत होना इतना बड़ा गुनाह है की हर मर्द उसे छूना चाहता है. उसके पति के इलावा अब तक ध्रुव, राहुल और अब विनीत उसे छू चुके थे. उसे ये सोचते hi अपने पूरे शरीर पर जैसे कई मर्दो के हाथ महसूस हो रहे थे. सोचते सोचते उसकी आँख लग गयी और उसे पता hi नहीं चला की कब अतुल घर वापस आ गया.
 
अपडेट 21

अगले कुछ दिन वैसे तोह कुछ ख़ास नहीं हुआ. सुप्रिया के मैं में कई साड़ी बातें चल रही थी. उसे अभी भी विनत के छुई जाने से अंदर से गन्दा महसूस हो रहा था. वह किसी से ये बात शेयर भी तोह नहीं कर सकती थी. मेघा भी कहीं बहार गयी हुई थी कुछ दिनों के लिए.

अतुल के सामने वह थोड़ा नार्मल होने की कोशिश करती, पर उसके ऑफिस जाने के बाद, जब उसे सब कुछ याद आता तोह उसे रोना आ जाता. उसने कभी भी विनीत जीजू से ये उम्मीद न की थी. ऐसी उम्मीद तोह उसने राहुल और ध्रुव से भी नहीं थी, पर उन्होंने भी मौका पा कर उसे किश कर hi दिया था. उसे लगने लगा था की हार्ड मर्द शायद मौके की hi तलाश में होता है.

अतुल भी ऑफिस काम में काफी बिजी था, तोह वह भी ऑफिस से लेट आ रहा था. पर वह फिर भी अब पहले से ज्यादा सुप्रिया पर ध्यान देने लगा. उसके मैं में एक अपराध बोध था की उसने अपनी भोली सी बीवी पर शक किया. सुप्रिया भी अपना अलग बोझ लिए उसके साथ खुश रहने की कोशिश करती थी. पर अगर अतुल सेक्स की शुरुवात करता तोह सुप्रिया उसे मन कर देती. अभी उसे छुई जाने से भी डर लगता था.

एक शाम को सुप्रिया का फ़ोन बजा, एक अननोन नंबर से फ़ोन कॉल थी. सुप्रिया ने फ़ोन उठाया तोह पाया की सामने से अतुल के बॉस की वाइफ रेनू थी.

रेनू - सुप्रिया, कैसी हो तुम?

सुप्रिया - मैं ठीक हु रेनू जी, आप कैसी हो?

रेनू - बहुत hi टेंशन में हु.

सुप्रिया - क्यों, क्या हुआ?

रेनू ने हस्ते हुए कहा - तुम्हे पता hi होगा की मेरी बेटी की शादी 1 हफ्ते बाद है. बस उसी सब के काम में लगी हु.

सुप्रिया को याद आया की राहुल ने इस बात का जिक्र किया था, पर उसे ये नहीं पता था की शादी कब की है.

सुप्रिया - आपको बहुत बहुत बधाई हो.

रेनू - जब शादी हो जाये न, तब बधाई देना. अभी तोह रोज़ नयी टेंशन बानी रहती है.

सुप्रिया - आप बताइये मैं कुछ हेल्प कर सकती हूँ तोह.

रेनू - इसीलिए तोह मैंने फ़ोन किया है. मैं चाहती हु की तुम 3-4 दिन के लिए हमारे यहाँ आ जायो और मेरी थोड़ी हेल्प कर दो.

सुप्रिया - क्या हेल्प करनी है?

रेनू - वैसे तोह कुछ छोटे मोठे काम है. पर मैं एक काम है, मैं चाहती हु तुम मेरी बेटी निकिता के साथ रहो, और उसे थोड़ी समझ दो. तुम लोग एक hi उम्र के हो, तोह शायद वह तुम्हारी बात सुन ले.

सुप्रिया - मैं अतुल से बात करती हु. 3-4 दिन तोह बहुत ज्यादा हो जायेंगे पर शायद वह मुझे 2 दिन के लिए आने दे.

रेनू - अतुल से सक्सेना जी बात कर लेंगे. बस तुम आ रही हो. 2 दिन बाद मेरा ड्राइवर तुम्हे लेने आ जायेगा.

सुप्रिया अब क्या hi कहती, पर उसे ये ाचा लगा की रेनू जी की नज़र में वह इतनी अछि थी की उनकी बेटी को समझ दे सके. शाम को अतुल घर आया तोह पता चला की उसके बॉस ने भी उससे बात कर ली थी.

अतुल - सुप्रिया तुम्हे बिलकुल जाना चाहिए, बॉस पर ाचा इम्प्रैशन पड़ेगा.

सुप्रिया - और आप कैसे मैनेज करोगे मेरे बिना?

अतुल - तुम्हारे आने से पहले भी मैं अकेले hi मैनेज कर रहा था मैडम. सिर्फ 3-4 दिन की तोह बात है. हो जायेगा.

सुप्रिया को अतुल की तरफ से तस्सली हुई तोह उसने जाने की तैयारी शुरू कर दी. उसने अपने सारे अचे अचे कपडे पैक कर लिए. पर उसे लग रहा था की शादी के फंक्शन्स के हिसाब से उसके पास इतने अचे कपडे नहीं थे. पर इतनी जल्दी अभी वह कपड़ो का इंतज़ाम कैसे करती. वह शादी के फंक्शन को अटेंड करने के लिए काफी एक्ससिटेड थी, जैसे उसे अपना ध्यान भांग करने के लिए कुछ मिल रहा हो.

2 दिन बाद, उसे लेने रेनू की गाडी नीचे आ गयी थी, और सुप्रिया अपना सूटकेस ले कर चल पड़ी.

इक़बाल वहीँ नीचे खड़ा था और उसे देख रहा था - मैडम जी, कहीं जा रहे हो?

सुप्रिया - हाँ इक़बाल भैया, 3-4 दिनों के लिए बहार जा रही हु.

इक़बाल सोचने लगा की ये ऐसा क्या काम करती है जो इसे अलग अलग गाड़ियां लेने और छोड़ने आती है. इक़बाल उसे देखता रहा जब तक वह गाडी में नहीं बैठ गयी.

गाडी थोड़ी देर बाद एक होटल पर आ कर रुकी. सुप्रिया को लगा था की वह रेनू जी की घर जा रही है, पर वह तोह अब किसी होटल के बहार कड़ी थी. सुप्रिया ने अपना सामान लिया और होटल के अंदर घुसी. होटल काफी महंगा लग रहा था, सुप्रिया पहले कभी इतने महंगे होटल में नहीं ठहरी थी. वहीँ नीचे hi उसे रेनू दिखाई दे गयी.

रेनू - सुप्रिया… थैंक गॉड, तुम आ गयी.

सुप्रिया - हांजी, थैंक यू आपने मुझे इन्विते किया.

रेनू - ारी नहीं, तुम क्यों थैंक यू बोल रही हो. चलो ऊपर चलते है, मैं तुम्हे तुम्हारा कमरा दिखा देती हूँ.

वह दोनों लिफ्ट लेकर ऊपर के फ्लोर की और चल दिए.

रेनू - तुम सोच रही होगी की यहाँ होटल में क्यों है. एक्चुअली लड़के वाले लखनऊ के बहार से है और फिर हमारे भी काफी गेस्ट्स हो रहे थे तोह हमने होटल में hi रूम्स बुक कर लिए सबके लिए. और फिर शादी के सारे फंक्शन्स यहीं एक जगह हो जायेंगे, कहीं जाना नहीं पड़ेगा.

सुप्रिया उसकी बात को ध्यान से सुन रही थी. उसके लिए तोह सब काफी नया नया सा hi था. जल्द hi लिफ्ट रुकी और वह दोनों बहार आ गए.

रेनू - ये लो, आ गए तुम्हारे रूम पर. तुम अपना सामान अंदर रख लो और फिर मैं तुम्हे निकिता से मिला देती हूँ. हम लोग प्यार से उसे निक्की बुलाते है. उसका कमरा तुम्हारे साथ hi है.

रेनू ने एक कार्ड से कमरा खोला और वह कार्ड सुप्रिया को दे दिया. सुप्रिया कमरे में घुसी, कमरा छोटा था और घुसते hi बाथरूम था और उसके बाद एक डबल बीएड था, और साइड में एक सोफे लगा हुआ था. पर कमरे की खिड़की से नीचे स्विमिंग पूल का काफी ाचा व्यू था. सुप्रिया ने जल्दी से अपना सामान रखा और बहार आ गयी.

और फिर रेनू उसे बराबर के कमरे में ले गयी. रेनू ने बिना नॉक करे कमरे का दरवाज़ा खोल दिया. अंदर एक लड़की किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी. उस लड़की की कद काठी काफी हद्द तक सुप्रिया जैसी hi थी, बस उसकी शकल पर काफी अकड़ सी थी.

निक्की ने फ़ोन नीचे रखा और फिर रेनू से कहा - माँ मैंने आपको कितनी बार बोलै है की मेरे रूम में नॉक करके आयो करो.

रेनू - सॉरी बीटा. ाचा ये सुप्रिया है, मैंने बताया था न तुम्हे. ये अब तुम्हारे साथ hi रहेगी जब तक शादी नहीं हो जाती.

निक्की ने सुप्रिया को ऊपर से नीचे तक देख, जैसे वह उसे परख रही हो. उसे थोड़ा सा मुँह बनाते हुए स्माइल किया. सुप्रिया को उसे ऐसा करते देख एक अछि सी फीलिंग नहीं आयी, जैसे उसे पहले से hi पता हो की उनकी बनने नहीं वाली थी. अगर ऐसा हुआ तब तोह वह अजीब सी जगह फास जाएगी, उसने सोचा.

निक्की - माँ, मैंने आपको कहा था न की मुझे एक नैनी नहीं चाहिए.

रेनू - वह नैनी नहीं है, अपनी फ्रेंड समझो उसे.

निक्की - फ्रेंड?? मेरे पास आलरेडी फ्रेंड्स है.

रेनू - ाचा अभी बहस मत करो, तुम जल्दी से तैयार हो कर नीचे आ जायो. हल्दी का फंक्शन शुरू करना है.

निक्की - ठीक है, मेरी ये नयी "फ्रेंड" यहीं रुक कर मुझे चेंज करते हुए देखेगी या बहार वेट करेगी?

रेनू ने उसे आँखें दिखते हुए कहा - निक्की, थोड़ा अचे से बात कर लो. चलो सुप्रिया बहार चलते है.

वह दोनों कमरे से बहार आ गए.

सुप्रिया - शायद निक्की नहीं चाहती की मैं उसके साथ राहु, तोह आप क्यों…

रेनू - उसकी बात का बुरा मत मानो, आज कल पता नहीं क्यों वह कुछ ज्यादा hi चिड़चिड़ी हो गयी है. पहले तोह इतना खुश खुश रहती थी हमेशा. शायद उसे भी शादी का hi स्ट्रेस होगा.

सुप्रिया - पर मुझे क्या करना है?

रेनू - बस तुम उसके साथ रहना और कुछ भी अगर गलत लगे तोह मुझे तुरंत बता देना. बस 3 दिन की तोह बात है. चलो आयो, हम लोग अभी नीचे चलते है, वह आ जाएगी.

वह दोनों लिफ्ट से नीचे आकर होटल के पीछे एक बड़े से लॉन में आ गए. वहां काफी लोग पहले से थे और जगह जगह शादी की डेकोरेशन हो राखी थी. बीच में एक स्टेज भी था.

जैसे hi वह नीचे आये, रेनू काफी सारे रिश्तेदारों से सुप्रिया को मिलवाने लगी. जो कोई सुप्रिया से मिलता, उसकी सुंदरता की तारीफ करता. कई लोग तोह उसे निक्की की छोटी बेहेन hi समझ रहे थे. वहीँ सब से बातों में सुप्रिया को पता चला की लड़के वाले तोह कल आने वाले थे.

थोड़ी देर बाद निक्की भी तैयार हो कर नीचे आये गयी. निक्की नीचे बैठ गयी और सब लोग उसे हल्दी लगाने लगे. ये सब देख कर सुप्रिया को अपनी शादी से पहले के फंक्शन याद आ गए. उसकी शादी इतनी ठाट बात से तोह नहीं हुई थी पर उसके लिए तोह वही सब काफी ख़ास था. अपनी भाभी और बाकी सारे रिश्तेदारों के साथ हसी मजाक के पल.

एक डैम से उसे रेनू ने आवाज़ दी - सुप्रिया, आयो तुम भी तोह हल्दी लगा दो.

सुप्रिया हिचकिचाते हुए वहां आयी और अपने घुटनो पर नीचे बैठ गयी. उसने थोड़ी सी हल्दी अपने हाथ में ली और निक्की की बाहों पर लगा दी. निक्की का मुँह अभी भी उसके लिए काफी सदा हुआ सा hi था. हल्दी लगा कर सुप्रिया वहां से तुरंत hi हट गयी.

बाकी शाम ऐसे hi नीचे सबके साथ गुज़र गयी. सुप्रिया को बार बार लग रहा था जैसे कैमरा मन उस पर कुछ ज्यादा hi फोकस रख रहा था. और बाकी कुछ लड़के और मर्द भी. उसने मैं में सोच रखा था की अब वह काफी सतर्क हो कर चलेगी और ऐसे की किसी को अपना फायदा नहीं उठाने देगी.

रेनू ने उसे बताया की कल रात को संगीत की रात होनी थी जिसमे सब को डांस करना पड़ेगा. रेनू तोह पहले hi सुप्रिया का डांस देख चुकी थी तोह वह चाहती की सुप्रिया फिर से एक बार डांस करके संगीत को और भी मज़ेदार बना दे.

सुप्रिया - रेनू जी, पर मेरे पास इतने कपडे नहीं है शायद, डांस के लिए और बाकी फंक्शन्स ले लिए.

रेनू - कोई नहीं, तुम्हे निक्की के कपडे आ जायेंगे. उसके पास कुछ एक्स्ट्रा कपडे है, मैं तुम्हे वह दे दूंगी.

सुप्रिया के पेअर में अभी भी हल्का सा दर्द था - एक्चुअली कुछ दिन पहले मैं फिसल के गिर गयी थी, तोह अभी भी पेअर में दर्द है.

रेनू - कोई बहाना नहीं चलेगा, डांस तोह तुम्हे करना hi पड़ेगा.

सुप्रिया को लगा की वह रेनू से जीते वाली तोह है नहीं तोह उसने हाँ में सर हिला दिया.

कुछ देर बाद वह फिर से निक्की के आस पास जा कर कड़ी हो गयी. निक्की जयादातर अपने फ़ोन पर hi लगी हुई थी. सुप्रिया ने उससे थोड़ी बहुत बात करने की कोशिश करि, पर निक्की ने उससे बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाया. रात होने पर सब अपने अपने कमरे में जाने लगे. सुप्रिया भी अपने कमरे में आ गयी और अतुल से बात करके सो गयी.

अगले दिन सुबह उठ कर सुप्रिया अचे से तैयार हुई. उसने अपने आप को आईने में देखा, वह बहुत hi सुन्दर लग रही थी.

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उसने अपनी एक सेल्फी खींची और अतुल को भेज दी.

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फिर सुप्रिया नीचे ब्लशनाशते के लिए चली गयी. सुप्रिया ने नाश्ता ख़तम hi किया था की तभी उसने देखा की निक्की बहार की और जा रही थी. वह जल्दी से उसकी पीछे पीछे बहार की और गयी. उसने देखा की निक्की एक कार में बैठ रही थी.

सुप्रिया ने जोर की आवाज़ लगायी - निक्की!!

निक्की ने उसे पीछे मुद कर देखा और उसके चेहरे पर गुस्सा hi था.

सुप्रिया - आपकी माँ ने बोलै है मैं आपके साथ राहु. आप कहाँ जा रहे हो.

निक्की - मैं एक पर्सनल काम से जा रही हु. तुम्हारे जाने की जरूरत नहीं है.

सुप्रिया - ठीक है मैं एक बार आपकी माँ को बता देती हूँ.

निक्की ने उसे काफी फ़्रस्ट्रेटेड हो कर देखा - अह्ह्ह्हह, माँ को कॉल मत करो. तुम्हे चलना है तोह चलो मेरे साथ, पर बाद में मत बोलना की कहा ले आयी हो.

सुप्रिया - मैं चल रही हूँ.

सुप्रिया और निक्की दोनों गाडी में बैठ गए. ड्राइवर ने कार चला दी, शायद उसे पता था की निक्की को कहाँ जाना है. सुप्रिया और निक्की बिना एक दुसरे से कुछ भी कहे चुप चाप बैठे रहे.

थोड़ी सी देर बाद निक्की के फ़ोन पर उसकी माँ का कॉल आया. सुप्रिया को रेनू की आवाज़ साफ़ नहीं सुनाई दे रही थी.

निक्की - हाँ माँ, मैं एक ड्रेस आल्टर करने निकली हु.

निक्की - हाँ, सुप्रिया भी मेरे साथ है.

निक्की - मैं आ जयुंगी वापस 1 बजे तक. तरय करुँगी और जल्दी का.

निक्की ने फिर फ़ोन रखने के बाद सुप्रिया से कहा - हम जहाँ भी जा रहे है, इसका जिक्र तुम माँ से नहीं करोगी.

सुप्रिया - प्रॉमिस, मैं उन्हें बिलकुल नहीं बतायूंगी.

सुप्रिया ने वैसे तोह रेनू को हर बात बताने का वादा किया था पर उसने सोचा की अगर इस छोटे से झूठ से उसके और निक्की के बीच का तनाव काम हो जाये तोह वही ाचा होगा.

सुप्रिया ने थोड़ी देर बाद गाडी से बहार झाँक कर देखा तोह उसे ऐसा लगा की वह लोग किसी गंदे से इलाके में आ गए हो. यहाँ सड़क काफी पतली थी और काफी भीड़ भी थी. सुप्रिया पहले कभी ऐसी जगह नहीं आयी थी. गाडी भीड़ में से धीरे धीरे निकलते हुए आखिर एक जगह रुकी.

निक्की - भैया आप यहीं गाडी के साथ रुकना. पिछली बार की तरह कहीं चले मत जाना. हम लोग अभी थोड़ी देर में आते है.

निक्की गाडी से उत्तरी और एक पुराणी सी बिल्डिंग में घुस गयी. सुप्रिया भी जल्दी जल्दी उसके पीछे चल पड़ी. वह दोनों सीढ़ियां चढ़ते हुए 2ंद फ्लोर तक पहुंचे. सीढ़ियां काफी hi गन्दी थी और हर जगह कूड़ा फैला हुआ था. बीच में उन्हें काफी लोग दिखाई दिए जो उन्हें घूर घूर कर देख रहे थे. सुप्रिया को ये जगह काफी असुरक्षित लग रही थी. पर अब पीछे मुड़ने का कोई सवाल नहीं था. वह सोचने लगी की क्या वह रेनू जी को मैसेज दाल कर बता दे वह कहाँ है, पर उसे निक्की तो दिए हुए वाडे की याद आ गयी.

निक्की ने ऊपर पहुंच कर एक फ्लैट के पुराने से दरवाज़े को खटखटाया. दरवाज़ा एक 20-22 साल के लड़के ने खोला.

निक्की ने उससे गुस्से में पुछा - फैज़ल कहाँ है?

लड़का - भाई अपने कमरे में हैं अंदर…

निक्की दनदनाती हुई अंदर घुस गयी, और सुप्रिया भी उसके पीछे पीछे अंदर आ गयी. निक्की ने फिर एक कमरे का दरवाज़ा खोला और उसमे अंदर चली गयी. उसने घुसने के बाद कमरे का दरवाज़ा बंद करने के लिए पुश किया पर दरवाज़ा पूरी तरह से बंद नहीं हुआ.

सुप्रिया को उस कमरे में जाने की हिम्मत नहीं हुई तोह वह वहीँ बहार hi कड़ी रही. उसे वैसे भी वहां से कमरे के अंदर सब कुछ दिखाई और सुनाई दे रहा था.

निक्की - फैज़ल… तुम मेरा फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे…

फैज़ल - निक्की!! तुम यहाँ क्या कर रही हो.

सुप्रिया ने देखा की फैज़ल एक काफी हैंडसम सा नौजवान लड़का था.

निक्की - तुमने फ़ोन नहीं उठाया तोह मुझे यहाँ आना पड़ा.

फैज़ल - निक्की तुम्हारी शादी होने वाली है, तुम्हे यहाँ नहीं आना चाहिए था.

निक्की - गॉड दमन आईटी, मैं तुमसे प्यार करती हु.

फैज़ल - निक्की, हमारे बीच सब ख़तम हो चूका है.

निक्की ने आगे बढ़कर फैज़ल को किश करने की कोशिश करि, पर फैज़ल ने उसे पीछे कर दिया.

निक्की - प्लीज मेरे साथ ऐसा मत करो.

फैज़ल - निक्की तुम चाहती क्या हो.

निक्की - तुम्हे! काम से काम एक आखरी बार तोह...

निक्की फिर से किश के लिए आगे बड़ी और इस बार वह दोनों अचे से किश करने लगे. उन दोनों के होंठ एक दुसरे के होंठों को चूसते हुए. सुप्रिया ने इतनी हॉट किश पहले कभी नहीं देखि थी. वह तोह जैसे एक लाइव शो देख रही थी.

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किश करते हुए निक्की ने फैज़ल की टीशर्ट के बटन खोल दिए और वह उसकी छाती पर पागलो की तरह किश करने लगी.

फैज़ल - निक्की, हमे ये सब नहीं करना चाहिए अब.

निक्की - प्लीज फैज़ल, बहुत दिन हो गए ये सब करे. मैं तुम्हे नहीं भुला पा रही हूँ.

फैज़ल भी अब उसकी किश से गरम हो चूका था और उसने निक्की के गालो को पकड़ते हुए उसे एक लम्बी सी किश दी. और फिर उसने निक्की को दीवार की तरफ धकेलते हुए उसकी पूरे शरीर को चूना शुरू किया.

सुप्रिया बहार कड़ी ये देख hi रही थी की उसे किसी की आवाज़ आयी - आप यहाँ बैठ जाये.

सुप्रिया तोह जैसे भूल hi गयी थी की उसके इलावा कोई और भी इस कमरे में था. उसे काफी शर्म सी आ रही थी की वह किसी अनजान के साथ किसी और को सेक्स करते देख रही थी.

लड़का - मेरा नाम हैदर है, और आपका?

सुप्रिया - मैं सुप्रिया….

हैदर - आप निक्की की दोस्त है क्या? वह तोह अकेले hi आती है यहाँ.

सुप्रिया - हाँ दोस्त hi समझ लो.

हैदर - ाचा, आप क्यों आये वैसे यहाँ?

सुप्रिया - क्यों, नहीं आना चाहिए था क्या?

हैदर - इन लोगो का तोह ये सब लगा hi रहता है....

सुप्रिया - ओह ाचा... कितने टाइम से...

हैदर - हो गए 2 साल तोह...

सुप्रिया - ाचा, तोह तुम क्या फैसल के भाई हो?

हैदर - हाँ. वैसे एक बात कहु… आप बुरा मत मन्ना, आप अपनी दोस्त से भी ज्यादा खूबसूरत हो.

सुप्रिया के गाल अब और भी लाल हो गए थे. सुप्रिया को लग रहा था की हैदर पता नहीं क्या hi क्या सोच रहा था उसके बारे में. वह निक्की जैसी तोह बिलकुल भी नहीं थी, और वह यहाँ ऐसा वैसा कुछ नहीं करने आयी थी.

सुप्रिया - थैंक यू…

हैदर भी शायद सुप्रिया की शकल देख कर समझ गया था - आप बैठो, मैं आता हूँ अभी.

सुप्रिया ने रहत की सांस ली. थैंक गॉड वह लड़का उसके सामने से चला गया था.

सुप्रिया ने इधर उधर देखा और फिर से कमरे के अंदर झाँका तोह पाया की निक्की अपने घुटनो पर बैठी फैज़ल का लुंड चूस रही थी. फैज़ल खड़ा हुआ उसके बाल पकडे हुए थे और अपने लुंड उसके मुँह में पूरा अंदर तक दाल रहा था. जब उसका लुंड निक्की के मुँह से बहार निकला तोह सुप्रिया उसका साइज देख कर हैरान हो गयी. उसने रियल में तोह सिर्फ अतुल का लुंड hi देखा था और ये उससे कमसे काम 2 गुना बड़ा था.

फैज़ल से फिर से अपना लुंड निक्की के मुँह में दाल दिया और अब तोह और ज़ोर से उसके मुँह में अंदर बहार करने लगा, जैसे उसके मुँह को hi फ़क कर रहा हो. काफी देर ऐसे hi वह उसके मुँह के हर कोने में अपने लुंड को डालता रहा.

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फैज़ल ने फिर निक्की को धक्का दे कर नीचे गिराया और उसके ऊपर लेट गया. वह फिर उसे ज़ोर ज़ोर से फ़क करने लगा. उसकी रफ़्तार और स्टांईना देख कर सुप्रिया दांग रह गयी थी. बीच बीच में वह निक्की के बूब्स पर थप्पड़ भी मार रहा था और गालियां भी दे रहा था.

फैज़ल - साली तेरी शादी होने वाली, फिर भी तू मुझसे यहाँ छुड़वाने आ गयी…

निक्की - अह्हह्ह्ह्ह…. अह्ह्ह्हह… और वह भी तुमसे अचे से नहीं हो रहा…

फैज़ल - साली kutiya….ye ले तू…

फैज़ल उसे और ज़ोर से छोड़ने लगा. निक्की भी दर्द से चीख रही थी और उसकी शकल देख लग रहा था की उसकी हालत ख़राब है. और आखिर किसी की भी इतने बड़े लुंड को अंदर ले कर एहि हालत होती. पर साथ hi ऐसा भी लग रहा था की उसे बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था.

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फिर फैज़ल ने निक्की को दूसरी और पलटा और वह उसके बाल पकड़ कर उसे पीछे से छोड़ने लगा. यह सब तोह आज तक सुप्रिया ने सिर्फ वीडियोस में होते देखा था. निक्की जैसे एक कुटिया बानी हुई हो फैज़ल के लिए. फैज़ल की एक टांग बीएड पर थी और दूसरी जमीन पर, और वह निक्की के बाल खींच खींच कर उसे जोर जोर से छोड़ रहा था. निक्की की तेज आवाज़ें उसे साफ़ साफ़ सुनाई दे रही थी. क्या निक्की इसी सब के लिए यहाँ आयी थी.

काफी देर वह अलग अलग पोज़ में ये सब करते रहे, और फिर आखिर उन दोनों का पानी निकल गया. सुप्रिया सोचने लगी की जब वह अतुल के साथ ये सब करती है तोह अतुल तोह 1 मिनट में hi झाड़ जाता है. और इन दोनों का तोह काफी देर तक ये खेल चला.

सब होने के बाद निक्की और फैज़ल ने अपने कपडे पेहेन लिए.

निक्की ने अपने बाल ठीक करते हुए कहा - एहि सब तोह मैं इतना मिस कर रही थी…

फैज़ल - तोह क्या तुम मुझसे बस छोड़ने आयी थी.

निक्की - नहीं, मैं तुमसे प्यार करती हूँ.

फैज़ल - निक्की मैं तुम्हे कई बार समझा चूका हूँ की मैं तुमसे प्यार नहीं करता, और वैसे भी 2 दिन बाद तुम्हारी शादी है.. प्लीज अब मुझे भूल जायो…

निक्की - मैं तुम्हे नहीं भूल सकती यार. तुम कहो तोह मैं आज hi तुम्हारे साथ भाग जायु.

फैज़ल - मैं नहीं भाग सकता तुम्हारे साथ. मेरा छोटा भाई भी है, मुझे उसे भी देखना है…

दोनों कमरे से बहार आये और सुप्रिया भी उन्हें देख कर कड़ी हो गयी. फैज़ल ने जैसे hi सुप्रिया को देखा उसकी आँखें उस पर रुक गयी.

फैज़ल - ये कौन है?

निक्की - कोई भी नहीं… इसको ऐसे मत घूरो.

फैज़ल उसे घूरे जा रहा था.

सुप्रिया भी नहीं चाहती थी की फैज़ल उसे ऐसे देखे, वह फैज़ल की टाइप की तोह कभी हो भी नहीं सकती थी. जब उसने पास से फैज़ल को देखा उसे रीलीज़ हुआ की फैज़ल सच में काफी हैंडसम था. वह सोचने लगी कोई कैसा इतना हैंडसम होने की बावजूद इतनी गन्दी बातें कर सकता है.

निक्की - मैं तुम्हे कॉल करुँगी जब मौका लगेगा, इस बार मेरी कॉल उठा लेना.

फैज़ल - मैं नहीं उठाने वाला. हमारे बीच सब ख़तम है अब.

निक्की फिर सुप्रिया को लेकर बहार की और चल पड़ी. सुप्रिया ने एक नज़र पीछे देखा तोह उसे लगा की जैसे फैज़ल उसे hi देख रहा हो.

वह दोनों सीढ़ियों से नीचे आ गए और गाडी में बैठ गए. ड्राइवर ने उनके आने पर गाडी चला दी. सुप्रिया ने देखा की निक्की की आँखों में ासु थे.

थोड़ी देर बाद सुप्रिया ने हिम्मत करके पूछा - निक्की, क्या तुम ये शादी नहीं करना चाहती हो?

निक्की ने गुस्से में कहा - उससे क्या फरक पड़ता है, होगा तोह वही जो माँ डैड चाहेंगे.

सुप्रिया - तुम और फैसल एक दुसरे को प्यार करते हो? तुमने कभी उनसे फैज़ल के बारे में बात की है?

निक्की - कोई फायदा नहीं, वह कभी नहीं मैंने वाले.

सुप्रिया ने सोचा की उसके माँ बाप भी गलत नहीं थे. वह बस अपनी बेटी का भला hi चाहते थे.

निक्की - प्लीज तुम किसी को इस बारे में नहीं बताना.

सुप्रिया ने पहली बार उसके मुँह से प्लीज सुना था - मैं किसी को कुछ नहीं बतायूंगी.

वह निक्की के थोड़ा पास आयी और उसका सर अपनी गोदी में रख लिया. उसे लगा था की शायद निक्की उसे पीछे धकेल देगी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. थोड़ी देर ऐसे hi निक्की सुप्रिया की गोदी में लेती सुबकती रही. सुप्रिया उसके सर पर हलके से हाथ फेर रही थी. जो कुछ निक्की ने किया उसे पूरी तरह तोह समझ नहीं आया था पर वह ये महसूस कर सकती थी फिलहाल वह काफी डिस्टर्बेद थी.

सुप्रिया - अगर बुरा न मानो तोह एक बात कहु?

निक्की ने उसकी आवाज़ सुनते hi अपना सर उसकी गोदी से हटा लिया - बोलो.…

सुप्रिया - अगर तुम्हे पता है की तुम फैज़ल के साथ नहीं हो सकती और अपने माँ डैड के पसंद के लड़के से शादी hi करनी पड़ेगी, तोह तुम क्यों न सब भूल कर उसी बारे में अपने आगे की लाइफ के बारे में सोचो. इस सब को आगे जारी रख के तोह कुछ नहीं मिलेगा.

सुप्रिया - मुझे पता है ये काफी मुश्किल होगा तुम्हारे लिए पर शायद इसी में तुम्हारी खुशियां छुपी हो…

निक्की से उसका कोई जवाब नहीं दिया, जैसे किसी गहरी सोच में डूबी हो. थोड़ी देर बाद गाडी वापस होटल के बहार पहुंच गयी थी. 2 बज चुके थे और ऐसा लग रहा था की होटल में चहल पहल और भी बाद गयी हो.

जैसी hi वह दोनों होटल में अपने फ्लोर पर पहुंचे, वहीँ बहार हॉल में उन्हें रेनू दिख गयी.

रेनू - कहाँ थे तुम दोनों. इतना टाइम लगा दिया. लड़के वाले आ चुके है. सब लोगो तुम्हे पूछ रहे थे निक्की. जायो जल्दी से तैयार हो कर आ जायो.

निक्की बिना कुछ कहे अपने कमरे में घुस गयी.

रेनू - तुम लोग कहाँ गए थे, सच बोलना.

सुप्रिया - सच में रेनू जी, एक ड्रेस का अल्टरेशन और कुछ शॉपिंग के लिए hi गए थे.

रेनू - चलो ाचा है तुम उसके साथ थी. जायो तुम भी रेडी हो जायो. मैंने तुम्हारे रूम में कुछ कपडे रखा दिए है.

सुप्रिया - थैंक यू रेनू जी.

सुप्रिया भी अपने कमरे में घुस गयी. आज तोह वह क्या कुछ hi देख कर आयी थी. वह सोचने लगी की क्या निक्की को उसकी बात समझ में आयी होगी? पर ये तोह उसके हाथ में नहीं था, और उसे तोह अभी जल्दी से तैयार होना था.

उसने देखा की उसके बीएड पर 3-4 अलग अलग लेंगे और साड़ी राखी हुई है. सभी ड्रेसेस बहुत अछि थी पर सुप्रिया की नज़र एक सिल्वर रंग की साड़ी पर जा कर रुकी. उसे पता था की ये रंग उस पर बहुत hi ाचा लगता है. सुप्रिया ने उसी साड़ी को पेहेन कर देखा. साड़ी का ब्लाउज जैसे उसके नाप के हिसाब से बानी हो. पर एक प्रॉब्लम थी, ब्लाउज काफी छोटा था, और ऊपर सपोर्ट के नाम पर दोनों साइड एक पतली सी डोरी थी. साड़ी का मटेरियल भी काफी पतला था जैसे तेषां की बानी हो. सुप्रिया ने कभी इतना छोटा ब्लाउज पहना नहीं था, उसे लग राग रहा था ये डोरी कहीं टूट तोह नहीं जाएँगी. पर जब उसने अपने आप को आईने में देखा तोह उसके होश उड़द गए.

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वह इस साड़ी में बहुत hi हॉट लग रही थी. सिर्फ एक छोटे ब्लाउज की वजह से वह चेंज नहीं करना चाहती थी, और वैसे भी उसने सोचा यहाँ तोह सभी लड़कियों ने इसी टाइप के कपडे पहने हुए है, और ये भी तोह निक्की का hi ब्लाउज है.

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सुप्रिया ने देखा की रेनू मैचिंग ज्वेलरी और संदल भी इसी साड़ी की दे कर गयी थी. उसने जल्दी से कानो में झुमके पहने और वह अपने पैरों में संदल पेहेन hi रही थी की रूम पर किसी ने खटखटाया.
 
अपडेट 22

दरवाज़े पर आवाज़ सुन कर सुप्रिया चौंक गयी. वह तोह किसी को अपने रूम पर एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी. उसने दरवाज़ा खोला तोह बहार निक्की कड़ी थी.

निक्की - सुप्रिया क्या तुम मेरी help............ek मिनट, ये तोह मेरी साड़ी है.

निक्की के चेहरे पर सुप्रिया को थोड़ा सा गुस्सा दिखा, सुप्रिया को लगा की निक्की अभी उसे ये साड़ी चेंज करने के लिए बोलेगी.

निक्की से तभी अपने सीरियस चेहरे पर हलकी सी मुस्कान लायी - पर सच बोलू तोह तुम पर ज्यादा अछि लग रही है. ाचा ज़रा पीछे से मेरे लेंगे की दूरी बाँध डौगी?

सुप्रिया उसके मुँह से अपनी तारीफ़ सुनकर थोड़ी हैरान हो गयी. ये वह निक्की तोह नहीं लग रही थी जो अब तक उससे मुँह सदा कर बात कर रही थी. निक्की सुप्रिया के रूम में घुस गयी, और सुप्रिया उसका ब्लाउज पीछे से ठीक करने लगी. निक्की ने काफी ाचा मेकअप किया हुआ था और उसका चेहरा एक डैम खुश और निखरा हुआ सा लग रहा था. उसके बदन में से एक बहुत hi अछि खुशबू आ रही थी. ब्लाउज की डोरी बांधते बन्द्ठे, सुप्रिया का चेहरा उसकी पीठ के काफी पास आ गया था.

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सुप्रिया - तुम काफी ज्यादा हॉट लग रही हो. ये कलर तुम पर काफी सूट करता है...

निक्की ने उसकी और देखा और कहा - पर तुमसे तोह काम hi हॉट हु....

दोनों एक दुसरे की और देख कर है पड़े. पिछले 1-2 दिनों की साड़ी लड़ाई मानो कुछ hi पालो में ख़तम हो गयी हो. शायद सुप्रिया का उससे कार में प्यार से बात करना काम आया.

सुप्रिया - चले फिर नीचे? आपका बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है...

निक्की ने हाँ में सर हिलाया और फिर वह दोनों एक दुसरे का हाथ पकडे हुए नीचे की और चल पड़े. नीचे पहुंच कर सुप्रिया ने देखा आज तोह कल से कई ज्यादा लोग थे और साड़ी नज़रे उन दोनों पर थी. किसी तरह से साड़ी नज़रो से बचते हुए वह दोनों जा कर रेनू के पास खड़े हो गए.

रेनू - आ गए तुम दोनों फाइनली... कितनी देर लगा दी...

वहां एक आदमी रेनू के पास खड़ा था. निक्की ने उसे देखते hi नमस्ते करि और उनके पेअर छुए. सुप्रिया नहीं जानती थी की ये कौन है. आदमी 50 से तोह ऊपर hi होगा, उसकी हाइट एवरेज थी - 5'8, और हल्का सा पेट निकला हुआ था, पर वैसे अपनी आगे के हिसाब से फिट hi लग रहा था. उसके चेहरे पर एक एक अचे से मैनटिनेंड मूछ और दादी थी जो उसका रॉब और बड़ा रही थी. उसके कपडे और तेवर देख कर सुप्रिया समझ गयी की ये कोई ख़ास hi था.

सुप्रिया इतनी हड़बड़ी में वहां आयी थी की उसकी सारे का पल्लू नीचे गिर गया, और वह उसे ठीक करने लगी.

उस आदमी ने सुप्रिया को अपनी साड़ी ठीक करते हुए देखा और फिर रेनू से बोलै - आपने बताया नहीं की आपकी दूसरी बेटी भी है.

रेनू हस्ते हुए - यह मेरी बेटी नहीं है, पर मेरी बेटी जैसी hi है. सक्सेना जी के ऑफिस में एक एम्प्लोयी की वाइफ है, सुप्रिया. सुप्रिया ये निक्की के ससुर है - प्रताप जी. काफी बड़ा बिज़नेस है इनका कानपूर में. हम लोगो सालो से जानते है इनको. निक्की का हाथ तोह इन्होने सालो पहले hi मांग लिया था.

प्रताप ने रेनू को मुस्कुरा के देखा और कहा - आप तोह मुझे शर्मिंदा कर रहे हो.

रेनू थोड़ा घबराई हुई - मैं आपको कैसे शर्मिंदा कर सकती हु.

प्रताप ने सुप्रिया का हाथ पकड़ा और कहा - बहुत ाचा लगा आपसे मिलकर सुप्रिया जी. सच कहु तोह ये दोनों बहने hi लग रही है.

प्रताप जी हलके हलके सुप्रिया का हाथ मसल रहे थे और सुप्रिया को देख कर मुस्कुरा रहे थे. सुप्रिया को ाचा लग रहा था की रेनू उसे अपनी बेटी जैसा hi समझती थी, और निक्की के कपड़ो में तोह वह और भी अछि लग रही थी.

रेनू ने उन्हें इशारा किया - बीटा आप दोनों जायो, यहाँ खड़े बोर हो जाओगे. संगीत के फंक्शन की तैयारी करो.

प्रताप ने सुप्रिया का हाथ छोड़ दिया. रेनू की तरफ से इशारा मिलते hi सुप्रिया और निक्की वहां से अलग हैट कर अपनी उम्र के लोगो के पास चले गए. सब लोग शाम के डांस की बातें कर रहे थे. अब तोह जैसे निक्की का चेहरा भी खिला हुआ था और वह सबसे है कर बात कर रही थी. सुप्रिया को लग रहा था की अब शायद निक्की अपनी शादी को लेकर एक्ससिटेड थी, जैसे एक लड़की होती है. जो होना था, वह चूका था, और अब उस बारे में सोच कर कोई फायदा नहीं था.

सुप्रिया को भी सब लोग काफी अचे से सारे प्लान्स में शामिल कर रहे थे, तोह उसे भी काफी ाचा लग रहा था. सुप्रिया अब तक निक्की के होने वाले पति से नहीं मिली थी तोह वह उसकी नज़रें भीड़ में उसे hi ढून्ढ रही थी.

सुप्रिया, निक्की और बाकी सब लड़की वाले एक अलग कमरे में जा कर डांस की तैयारी करने लगा. उस में सुप्रिया के कौसिन्स भी शामिल थे, जिसमे कुछ लड़के भी थी. सब लोग बारी बारी से अपने स्टेप्स करके दिखा रहे थे. जैसे hi सुप्रिया ने उन्हें हल्का सा डांस करके दिखाया, उस पर कई साड़ी सीटियां बज गयी, और सब उसकी काफी तारीफ करने लगे. सुप्रिया ने देखा की निक्की के कौसिन्स तोह जैसे उसके डांस में कुछ ज्यादा hi इंटरेस्ट ले रहे थे, और उनका लीडर बना हुआ था निक्की का सबसे बड़ा कजिन - कारन. वह और निक्की और सुप्रिया शायद एक hi उम्र के थे.

कारन - सुप्रिया, तुम ऐसा करो, ये वाला स्टेप करते हुए जरा सा गोल घूम जायो और फिर मैं तुम्हे ऐसे पकड़ लूंगा.

कारन जैसे हर बहाना ढून्ढ रहा था सुप्रिया को छूने का. सुप्रिया ने भी सोच रखा था की इस बार वह किसी को अपना फायदा नहीं उठाने देगी.

सुप्रिया - नहीं, ी थिंक सोलो डांस hi ठीक रहेगा मेरा. या फिर गर्ल्स वाले ग्रुप में.

सुप्रिया ने निक्की की और देखा, जैसे उसे कह रही हो की वह कारन को उससे पीछे हटाए.

निक्की भी शायद कारन को अचे से जानती थी - हाँ कारन, सुप्रिया ठीक कह रही है. तुम लोगो का डांस ाचा नहीं लग रहा.

कारन ये सुन कर थोड़ा सा अपसेट सा हो गया और पीछे हैट गया. डांस की प्रैक्टिस करते करते पति नहीं कब 2 घंटे बीत गए थे. सुप्रिया अब काफी थका हुआ सा महसूस कर रही थी.

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सुप्रिया थकी हुई अपनी गर्दन को मसल hi रही थी की एक डैम से पीछे से किसी ने आकर उसके कंधो पर हाथ रखा और दबाने लगा. सुप्रिया ने एक डैम से आँख खोल कर ऊपर देखा तोह कारन था. सुप्रिया ने हड़बड़ा कर उसके हाथ हटाने की कोशिश करि, पर कारन ने हाथ नहीं हटाए. इस समय रूम में सिर्फ वह दोनों hi थे.

कारन - सुप्रिया आराम से बैठो. लगता है तुम थक गयी हो, तोह मैंने सोचा क्यों न थोड़ी मस्सगे कर दू...

सुप्रिया - थैंक्स कारन, पर मैं ठीक हु, प्लीज हटायो न हाथ...

कारन - मस्सगे hi तोह है, इसमें क्या प्रॉब्लम है... अगर यहाँ उनकंफर्टबले न हो तोह मेरे रूम चल सकते है....

कारन ने ये कहते हुए सुप्रिया के कंधो को ज़ोर के दबाया. सुप्रिया ने एक पतली डोरी सा ब्लाउज पहना था तोह कारन का हाथ उसके नंगे शरीर को छू रहा था.

कारन ने जैसे hi सुप्रिया के कंधो को ज़ोर से दबाया, सुप्रिया के मुँह से हलकी सी अह्ह्ह्ह निकल गयी. वह सुनकर कारन और भी ज्यादा मूड में आ गया, और अपने हाथ उसके गले में और नीचे कर दिया. वह सोचने लगा - क्या सॉफ्ट स्किन है... बिलकुल माखन जैसी...

सुप्रिया ने उसका हाथ पकड़ा ताकि वह और नीचे न जा सके - प्लीज कारन, हाथ हटायो. मैं कोई तमाशा नहीं बनाना चाहती....

कारन ने अपना एक हाथ उसकी गिरफ्त से छुड़ाया और उसको और नीचे करते हुए उसकी बूब्स पर लगा दिया. तभी वहां निक्की आ गयी, और उसे देख कर कारन के हाथ रुक गए . निक्की को देख कर सुप्रिया ने जैसे रहत की सांस ली हो.

निक्की - कारन... ये क्या कर रहे हो... सुप्रिया को छोडो..

कारन - तुम्हे क्या प्रॉब्लम है... तुम अपना काम करो न...

निक्की ने पास आ कर कारन को हाथों को सुप्रिया से अलग किया - सुप्रिया हमारी मेहमान है, तुम्हे इतनी भी तमीज नहीं है की लड़कियों से कैसे बेहवे करते है...

कारन ने उसकी और गुस्से से देखा और वह रूम से बहार चला गया...

सुप्रिया - थैंक गॉड निक्की तुम आ गयी.... ये कारन तोह कुछ ज्यादा hi....

निक्की ने उसकी और देखा और कहा - कोई nahi....Waise उसका कसूर नहीं है. उसकी जगह मैं भी अगर लड़का होता न तुम्हारी कमर के तुमको से पागल hi हो जाती. और तुम्हे पकड़ कर....

निक्की ने पीछे से उसके बूब्स पकड़ लिए थे, सुप्रिया को अजीब लग रहा था पर वह हस्ते हुए बोली - बस, अब कुछ ज्यादा hi हो गया.

निक्की ने उसे पीछे से पकडे हुए आईने के सामने करके दिखाया - देखो तोह ज़रा सामने, क्या हॉट लग रही हो.

सुप्रिया ने आँखें ऊपर करके देखा तोह पाया की वह सच में काफी हॉट लग रही थी. उसके बूब्स हलके से ब्लाउज के बहार आ रहे थे, जिससे उसका क्लीवेज और भी बड़ा लग रहा था. उसे यकीं hi नहीं हुआ की वह ये पेहेन कर पूरे दिन घूम रही थी. निक्की के हाथ अभी भी उसके बूब्स से थोड़ा सा नीचे उसे पकडे हुए थे.

निक्की ने उसके पास आ कर उसके कान में हलके से कहा - और वैसे कारन इतना बुरा भी नहीं है... बस थोड़ा हॉर्नी रहता है हमेशा... मैं किसी को बतायूंगी नहीं अगर तुम उसके साथ कुछ...

सुप्रिया - पागल हो क्या... तुम्हे पता है न मैं मैरिड हु.

निक्की - तोह क्या हुआ... और अगर नहीं होती मैरिड तोह?

सुप्रिया - तोह भी कुछ नहीं.... चलो टाइम हो गया है... ऊपर जा कर संगीत के लिए चेंज कर ले.

सुप्रिया ने अपने आप को निक्की से अलग किया, वह अभी भी उसे घूर रही थी. वह दोनों फिर संगीत के लिए चेंज करने ऊपर चले गए. और आधे एक घंटे बाद चेंज करके बहार निकले. सुप्रिया ने इस बार निक्की का hi एक लेंघा पहना हुआ था और निक्की एक बहुत hi रॉयल स्टाइलिंग लेंगे में गज़ब लग रही थी. दोनों hi बहुत अचे लग रहे थे.

जब वह नीचे पहुंचे तोह संगीत का प्रोग्राम शुरू हो hi रहा था. बारी बारी सब डांस के लिए स्टेज पर आ रहे थे. पहले लड़को वालो की तरफ से डांस हुआ, वह काफी नार्मल सा hi था, बिना किसी एनर्जी के. उन्हें देख कर निक्की और सुप्रिया काफी खुश हो गए की उनका डांस तोह इससे काफी बेहतर होने वाला था. लड़को वाले के उस डांस में hi सुप्रिया को पहली बार निक्की का होने वाला पति दिखाई दिया. उसने कपडे तोह काफी अचे पहने हुए थे पर उसकी कद काठी सब काफी नार्मल hi थी. पर शायद वह निक्की के परिवार से काफी ज्यादा अमीर था, और इसी लिए उनकी शादी हो रही थी.

उसके बाद लड़की वालो का डांस शुरू हुआ. पहले निक्की की कजिन बहनो ने डांस किया. उसके बाद निक्की के घर के बड़ो लोगो ने डांस किया, जिसमे निक्की के मम्मी पापा भी थे. और फिर आखिर में निक्की, सुप्रिया और उसकी एक फ्रेंड डांस करने उतरे. उन्होंने 2-3 बॉलीवुड गांव पर मस्त हो कर डांस किया.

केहदो न केहदो न, यू अरे माय माहिया...

आज के लड़के ी तेल्ल यू, इतने लल्लू व्हाट तो यू.... कभी कोई मुझसे न कहे, ओह माय डार्लिंग ी लव यू...

उनके डांस से जैसे पूरी पार्टी में जान आ गयी हो. सब लोग तालियां और सीटियां बजा रहे थे. प्रताप जी भी स्टेज पर आये गए और उन तीनो पर नोट वार कर फैकने लगे. सुप्रिया को लगा की जैसे उस पर तोह उन्होंने सबसे ज्यादा पैसे उड़ाए, पर शायद ये उसका ब्रह्म भी हो सकता था.

स्टेज पर एक डैम वेटर्स की भीड़ िक्खता हो गयी नोट उठाने के लिए और सुरपिया और बाकि सब जल्दी से स्टेज से नीचे आ गए.

सुप्रिया एक साइड में कड़ी अपनी सांस वापस ला hi रही थी की उसे एक जानी पहचानी आवाज़ ने पीछे से बुलाया.

विक्रम - Supriya....Great डांस वन्स अगेन...

सुप्रिया ने पलट ते हुए देखा की यह तोह विक्रम सर थे - ओह... hello सर...

विक्रम - लगता है तुमने करियर चेंज करके डांस को चुन लिया है. जब भी तुमसे मिलता हूँ कोई न कोई डांस hi हो रहा होता है.

सुप्रिया - नहीं नहीं ऐसा नहीं है. बस इत्तेफाक है. वैसे आप यहाँ आज?

विक्रम - हाँ, मैं कल सुबह hi कुछ दिनों के लिए बहार जा रहा हु, तोह सोचा आज hi इस कपल को हैप्पी मैरिड लाइफ विश कर दू.

सुप्रिया - ओह ाचा....

विक्रम - वैसे तुमने क्या सोचा जॉब के बारे में? हम एक एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बिज़नेस शुरू कर रहे है, अगर तुम इंटरेस्टेड हो तोह जॉब काफी इंटरेस्टिंग रहेगी, काफी सीखने को मिलेगा..

सुप्रिया - सच बतायु तोह मुझे टाइम hi नहीं मिला इस बारे में सोचने का. पर मुझे लगता है जॉब तोह मुझे शुरू करनी चाहिए फिर से.

विक्रम - सोचो सोचो, और जब रेडी हो तोह मुझे मैसेज कर देना. मेरा कार्ड तोह है हो तुम्हारे पास.

सुप्रिया - सॉरी अगर आप एक बार और अपना नंबर दे दे तोह.…

विक्रम हस्ते हुए - तोह उस पार्टी से निकलते hi कार्ड डस्टबिन में.

सुप्रिया - नहीं नहीं, ऐसा नहीं था. उस दिन बस जल्द बाज़ी में कहीं गिर गया था. सच.

सुप्रिया को याद आया उस दिन अतुल की हालत ख़राब थी पार्टी में और कैसे उन्हें जल्दी से घर जाना पड़ा था. वहीँ जल्दबाज़ी में कार्ड कहीं गिर गया होगा. पर शायद सच तोह ये भी था की ek-do दिन के बाद उसने कभी विक्रम के बारे में सोचा भी नहीं था. इतना कुछ जो चल रहा था उसकी लाइफ में.

विक्रम - चलो ी बिलीव यू. ये लो मेरा नंबर - 9871क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स. इस बार मत खोना…

सुप्रिया - थैंक यू सर, मैं आपको इस शादी के बाद पक्का मैसेज करुँगी…

विक्रम - चलो मैं बाकी लोगो से मिलता हु और फिर मुझे यहाँ से निकलना है. नीस तो मीट यू अगेन, मिस झाँसी की रानी.

सुप्रिया को इसकी इस बात से हसी सी आ गयी. उसे काफी इम्प्रेससिवे लगा की विक्रम को उस दिन की बातें याद थी, की वह झाँसी से थी. उसने देखा की विक्रम दूसरी तरफ जा कर प्रताप जी से बात कर रहा था. विक्रम के सामने तोह जैसे प्रताप जी भी थोड़ा झुक कर hi बात कर रहे थे. उसे ये देख कर लगा की विक्रम का तोह लेवल hi अलग था.

सुप्रिया फिरसे रेनू के साथ मेहमानो की खातिरदारी में लग गयी. रात को वह अपने कमरे में काफी लेट पहुंची. उसने अपना फ़ोन कमरे में hi छोड़ दिया था. फ़ोन पर अतुल की 2 मिस्ड कॉल थी और कुछ मेस्सगेस. साथ hi राहुल की भी एक मिस्ड कॉल थी. उसे समझ नहीं आ रहा था की राहुल आखिर उससे चाहता क्या था. रात के 12 बज चुके थे तोह उसने अतुल को वापस कॉल करना ठीक नहीं समझा. उसने बस उसे मैसेज करके बता दिया की उसका फ़ोन कमरे में रह गया था और बाकी सब बढ़िया चल रहा था.

तभी सुप्रिया के कमरे पर किसी ने खटखटाया. सुप्रिया ने सोचा की इतनी रात को कौन हो सकता था.

वह दरवाज़े के पास आयी और उसने हलके से पूछा - कौन है?

बहार से कारन की आवाज़ आयी - सुप्रिया... दरवाज़ा खोलो... मैं हु.

सुप्रिया कारन की आवाज़ सुन कर घबरा गयी. बड़ी मुश्किल से उसने आज कारन से पीछा छुड़ाया था, और अब वह फिर यहाँ आ गया था. उसे पता था कारन यहाँ क्यों आया है और वह उसके लिए दरवाज़ा बिलकुल नहीं खोलना चाहती थी. कारन ने थोड़ा और ज़ोर से दरवाज़े को बजाना शुरू किया.

सुप्रिया की दिल की धड़कने तेज़ हो चुकी थी, अभी इतना शोर हो रहा था रात को, अगर किसी ने भी देख लिया तोह उसके बारे में क्या सोचेंगे. पर वह दरवाज़ा खोल देगी तोह कारन शायद कुछ किये बिना न माने. दिन में उसके हाथ उसके बूब्स तक तोह पहुंच hi गए थे.

सुप्रिया ने जल्दी से निक्की को मैसेज किया - निक्की प्लीज एक बार बहार आयो.

निक्की उस टाइम सोने hi जा रही थी और उसने सुप्रिया का मैसेज देखते hi अपना दरवाज़ा खोला और बहार कारन को पाया.

निक्की - कारन तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

कारन - तुमसे फिर से बीच में आ gayi...why डोंट यू मंद योर बिज़नेस....

निक्की समझ गयी थी की कारन ने पि हुई थी और वह क्यों सुप्रिया के कमरे में घुसना चाहता था - कारन, मैं अभी चाचू को फ़ोन लगयूंगी और फिर तुम्हारी खैर नहीं होगी. अभी की अभी यहाँ से जायो.

कारन - यू बीच... तुम खुद तोह जो चाहे कर सकती हो और mujhe....I क्नोव आल अबाउट यू...

निक्की ने अपनी आवाज़ ुचि की - मंद योर लैंग्वेज एंड गेट आउट ऑफ़ here...nahi तोह अभी तुम्हे होटल से बहार करवा दूंगी..

कारन उसकी ुचि आवाज़ सुन कर थोड़ा होश से में आया - It's नॉट ओवर... तुम देखना अब.

कारन फाइनली वहां से चला गया. निक्की ने सुप्रिया के दरवाज़े पर हलके से नॉक किया - सुप्रिया, वह चला गया यहाँ se...tum सो जायो आराम से...

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोला और निक्की को देख कर उसके गले लग गयी. वह कारन के शोर से काफी घबरा गयी थी, आखिर उसकी इज़्ज़त का सवाल था. पर निक्की ने उसे बचा hi लिया था. उसकी हालत देख कर निक्की सुप्रिया के कमरे में आ गयी और उसे शांत करने के लिए उसे पानी पिलाने लगी.

सुप्रिया को धीरे धीरे पानी पीते हुए सांस वापस आयी - निक्की.. थैंक यू यार...

निक्की - इसमें थैंक यू की क्या बात है... सॉरी अगेन कारन के लिए... तुम्हे लगेगा की हमारी फॅमिली में सभी लोग काफी अजीब है...

सुप्रिया हसने लगी - हाँ लग तोह रहा था मुझे...

निक्की - पर सच कहु तोह तुम्हे थोड़ा और स्ट्रांग बनना पड़ेगा.. नहीं तोह तुम ऐसे सर्वाइव नहीं कर पयोगी...

सुप्रिया - हम्म्म्म... तुम पहली पर्सन नहीं हो जिसने मुझे ये कहा हो...

निक्की - चलो, अब आराम करो.

निक्की बहार hi जा रही थी की सुप्रिया ने उसे कहा - निक्की... अगर वह बाद में दुबारा आ गया तोह?

निक्की - नहीं आएगा.

सुप्रिया - तुम यहीं सो जायो न प्लीज...

निक्की - Ummm...par....

सुप्रिया - प्लीज यार... बस आज रात के लिए...

निक्की ने सुप्रिया की और देखा, सुप्रिया ऐसे प्यार से गिड़गिड़ाते हुए कितनी मासूम सी लग रही थी. सच में कोई इस लड़की को बताये की इतनी भी मासूम न बना करे. कोई न कोई तोह इसका फायदा उठा hi लेगा.

निक्की - ाचा ठीक है...

निक्की वहीँ डबल बीएड पर सुप्रिया के बराबर में आ कर लेट गयी. दोनों एक दुसरे को देख रहे थे, और सुप्रिया के चेहरे पर अब डर नहीं था की अब उसे कोई परेशान नहीं करने वाला था. दोनों ऐसे hi एक दुसरे को देखते हुए एक दुसरे का हाथ पकडे हुए लेते रहे. बहार की रौशनी सुप्रिया के चेहरे पर पद रही थी जिससे वह और भी खूबसूरत लग रही थी...

निक्की के दिल में हल चल हो रही थी, उसे शायद सुप्रिया को पहले hi बता देना चाहिए था की वह Bi-sexual थी, उसे लड़कियों के साथ सोने में उतना hi मजा आता था जितना लड़को के साथ. और पहले hi दिन से सुप्रिया को देख कर उसके दिल में कई ख्याल चल रहे थे. पर क्या सुप्रिया इस सब के बारे में जानती थी. इस समय तोह सुप्रिया को ये बताना गलत होता, क्यूंकि वह पहले से दरी हुई थी.

सुप्रिया भी निक्की की नज़रों में अपने लिए कुछ अलग hi महसूस कर रही थी. उसने सुना तोह था लड़कियों को लड़कियों के साथ ये सब करते हुए पर पहले कभी एक्सपीरियंस नहीं किया था... पर ये भी तोह सब गलत hi hoga...shayad वह कुछ ज्यादा hi सोच रही थी....

दोनों ऐसे hi कुछ देर लेते रहे और फिर निक्की ने hi उसके पास आ कर उसके बालो में हाथ फेरने शुरू कर दिए. सुप्रिया को उसके हाथ अपने बालो में बहुत अचे लग रहे थे. दुसरे हाथ से निक्की ने उसके चेहरे को सोफ़्त्ल्य मसलना शुरू किया. वह सुप्रिया के चेहरे पर आये बालो को अपनी उँगलियों से हटा रही थी. इतनी प्यार से तोह कभी अतुल ने भी उसे छुआ नहीं था. निक्की के हाथों में जैसे कोई जादू था जिससे सुप्रिया के पूरे शरीर में एक अलग सी हरकत होनी शुरू हो गयी थी.

निक्की - अगर आज कारन तुम्हारे कमरे में आ जाता तोह…

सुप्रिया - Toh…tum बताया फिर… तुम्हारा भाई है…

निक्की - मेरा दूर का कजिन है वह… भाई कहना शायद कुछ ज्यादा hi पर्सनल होगा…

सुप्रिया - ाचा जो भी… पर तुम उसको अचे से जानती हो शायद…

निक्की - Haan…agar वह अंदर आ जाता तोह तुम्हे फ़क किये बिना तोह वह नहीं मानता…

सुप्रिया उसके मुँह से ये सुनकर थोड़ी हैरान सी हो गयी - क्या तुम और कारन भी….

निक्की - नहीं… नेवर… वह फैसल को जानता था… और इसीलिए उसकी मुझसे फट टी है…

सुप्रिया - ओह ाचा….

निक्की के हाथ और बेकाबू होते जा रहे थे और अब सुप्रिया के होंठों से खेल रहे थे…

सुप्रिया का मैं बहुत hi विचलित हो रहा था पर वह अपने आप को किसी तरह से काबू में रखने की कोशिश कर रही थी. उसने करवट ले कर अपने आप को दूसरी और किया. निक्की एक पल के लिए तोह रुकी पर फिर उसने सुप्रिया की टीशर्ट को कंधे से नीचे किया और उसके कन्धों पर किश करने लगी.

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सुप्रिया ने आज तक ऐसी सॉफ्ट किश महसूस नहीं की थी. भाभी ने मजाक में ek-do बार उसके बूब्स तोह पकडे थे पर ऐसा कुछ नहीं... निक्की की किश बढ़ती जा रही थी, और सुप्रिया के चेहरे पर एक मुस्कान सी आ गयी thi...Par उसे याद आया की ये सब भी तोह गलत hi था, उसके साथ कोई लड़का नहीं था पर एक लड़की तोह थी. उसे किसी तरह से निक्की को रोकना होगा...

सुप्रिया ने सोफ़्त्ल्य कहा - निक्की... तुम थक गयी होंगी न... और कल और भी फंक्शन्स है... सो जाते है प्लीज...

निक्की एक डैम से रुक गयी, शायद उसका ये सब करना ठीक नहीं था, उसे तोह पता भी नहीं था की सुप्रिया ये करना भी चाहती है या नहीं. वह वहीँ पीछे मुद कर लेट गयी. सुप्रिया को लगा की निक्की शायद उसकी बात का बुरा मान गयी, और उसने खुद निक्की को पीछे से पकड़ लिया और वह दोनों ऐसे hi एक दुसरे को स्पून करते हुए सो गए. सुप्रिया के पेअर निक्की के पैरो के ऊपर, दोनों एक दुसरे में उलझे हुए..

सुबह जब वह उठे, तोह सफ़ेद चादर में लिपटे हुए वह एक दुसरे की बाहों में थे. इतनी अछि नींद सुप्रिया को पहले कभी नहीं आयी थी, और उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी. पर उसे याद आया की निक्की की शादी सिर्फ एक दिन दूर थी और आज बहुत सारे काम बाकि थे.

सुप्रिया - गुड मॉर्निंग निक्की...

निक्की - गुड मॉर्निंग, तुम्हे डिस्टर्ब तोह नहीं हुआ न रात को?

सुप्रिया बहुत सोफ़्त्ल्य बोली - नहीं... मुझे ाचा लगा तुम यहाँ रुक गयी..

निक्की ने उसकी आँखों में देखा- तोह फिर मुझे कल रात रोका क्यों.....

सुप्रिया ने आंखें नीचे कर ली, उसके पास कोई जवाब नहीं था...

निक्की - मुझे ाचा लगा वैसे तुमने मुझे जैसे रात को हुग कर लिया tha....kaash हम लोग.... चलो जाने दो..

सुप्रिया - हाँ जाने देते है प्लीज... तुम जा कर तैयार हो न.. तुम्हारी सगाई है आज...

निक्की - हाँ, मैं जाती हूँ अपने रूम...

दोनों एक दुसरे की और ऐसे देख रहे थे जैसे उनके बीच कुछ अधूरा रह गया हो. सुप्रिया को लगा पता नहीं वह क्यों इतना सोच रही थी निक्की के बारे में, आज से पहले उसने कभी किसी लड़की के साथ ऐसा कुछ करने का नहीं सोचा था. उसने जल्दी से अपने मैं से सारे ख्याल निकले और तैयार होना शुरू हो गयी.

आज दोपहर में सगाई का फंक्शन था और फिर शाम को मेहँदी की रस्म. सगाई के लिए सुप्रिया ने अपनी hi एक अछि सी साड़ी निकल कर पेहेन ली. वह उसमे भी काफी सुन्दर लग रही थी. सगाई के फंक्शन में सुप्रिया स्टेज पर सबके बीच में hi थी. अब तोह उसे ऐसा लग रहा था की जैसे ये परिवार उसका hi परिवार हो. और वह सब कामो में अपना पूरा हक़ जाता रही थी. जैसे hi उसकी नज़रें निक्की से मिलती वह उन्हें फटाफट से हटा लेती. निक्की भी बीच बीच में सुप्रिया की और देख रही थी...

सगाई के फंक्शन के बाद निक्की और उसका होने वाला पति बैठ कर एक साथ खाना खा रहे थे. सुप्रिया ने उन दोनों को अकेला छोड़ना hi सही समझा. आज कारन भी उससे दूर hi रह रहा था. उसे दूर एक कोने में रेनू जी और प्रताप जी किसी गहरी चर्चा में दिखे. रेनू के चेहरे पर काफी टेंशन बानी हुई थी और प्रताप भी थोड़े गुस्से में लग रहे थे. उसने सोचा की उसे बाद में जाकर पूछना चाहिए की क्या बात हो गयी थी.

शाम को सब लोग नीचे hi मेहँदी के लिए इखट्टा थे. सबसे पहले दुल्हन को hi मेहँदी लगाई गयी. और फिर धीरे धीरे करके सबका नंबर आने लगा. सुप्रिया ने शादी के बाद से अपने हाथों पर मेहँदी नहीं लगाई थी तोह वह काफी एक्ससिटेड थी. उसका नंबर आने hi वाला थी की रेनू ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे अपने साथ चलने के लिए कहा.

सुप्रिया को लगा की कुछ जरूरी hi होगा तोह वह भी चुप चाप रेनू के साथ चल दी. रेनू उसे अपने कमरे में ले गयी. रेनू का कमरा उसके कमरे से बहुत बड़ा था.

सुप्रिया - क्या हुआ रेनू जी, आप काफी टेंशन में लग रहे हो.

रेनू - बात hi कुछ ऐसी है, मुझे समझ hi नहीं आ रहा मैं क्या करू?

सुप्रिया - क्या बात है, आप मुझे बताये. क्या प्रताप जी ने आपसे कुछ कहा?

रेनू ने चौंकते हुए उसे देखा - तुम्हे कैसे पता?

सुप्रिया - मैंने आप लोगो को सगाई के बाद कुछ बहस करते देखा था. पर पता नहीं क्या बात कर रहे थे आप.

रेनू थोड़ी चुप सी पद गयी - कैसे बतायु तुम्हे. पर बताये बिना कुछ होगा भी नहीं.

सुप्रिया - क्या वह आपसे दहेज़ की डिमांड कर रहे है?

रेनू - डिमांड तोह कर रहे है, पर दहेज़ की नहीं. दहेज़ तोह वैसे भी हम दे hi रहे है.

सुप्रिया - फिर किस चीज़ की डिमांड कर रहे है…

रेनू - तुम्हारी…

सुप्रिया भौचक्की सी रह गयी - क्या?????? मेरी????

रेनू - मैंने उन्हें बहुत समझाया पर वह मैंने को तैयार hi नहीं है. मुझे कभी इस घर में रिश्ता नहीं जोड़ना चाहिए था.

रेनू अब रोने लगी थी.

सुप्रिया - पर वह मुझसे चाहते क्या है?

रेनू - वह चाहते है…. वह चाहते है… की आज रात तुम उनके कमरे में चली जायो.

सुप्रिया हैरान रह गयी थी और उसकी आवाज़ में गुस्सा भी आ गया था - क्या बकवास है ये…

रेनू - मैंने एहि उनको कहा था, पर फिर उन्होंने मुझे कुछ फोटोज दिखाई.

रेनू ने उसके आगे अपना फ़ोन कर दिया जिसमे फैसल एंड निक्की के साथ की फोटोज थी. ये कल की फोटोज तोह नहीं थी पर शायद उससे पहले की कभी की होंगी. इन फोटोज में वह दोनों नंगे थे और एक दुसरे के साथ बहुत साड़ी चीज़े कर रहे थे. सुप्रिया ये देख कर एक डैम से चुप हो गयी.

रेनू - तुमने भी तोह मुझसे झूठ बोलै. मैंने तुम्हे कहा था न की कुछ भी ऐसा वैसा लगे तोह मुझे तुरंत बताना. मुझे एहि डर था की उसे अगर ये सब पता चल गया तोह... पता नहीं उसे ये पता भी कैसे चला...

सुप्रिया के जैसे अब जान में जान hi न हो.

रेनू - वह कह रहे है वह ये रिश्ता आज रात hi तोड़ देंगे और ये साड़ी फोटो न्यूज़ में दे देंगे. अगर तुम उनके कमरे में न आयी तोह.

सुप्रिया - पर ये कैसी शर्त हुई उनकी.

रेनू - तुम जानती नहीं हो उसे, एक नंबर का ठरकी इंसान है वह. अगर उसने तुम पर नज़र दाल दी है तोह वह तुम्हे पाए बिना नहीं मानेगा…

सुप्रिया रेनू की आवाज़ में सुन सकती थी की उसने अपने सारे बंद परदे खोल दिए थे. अब वह प्रताप जी को भी तू तड़के से बोल रही थी, जैसे वह उसके बारे में अचे से जानती हो.

रेनू ने एक डैम से अपना आप को शांत करते हुए अपनी आवाज़ धीमी की, जैसे उस बंद कमरे में भी डर हो - मैंने बहुत समझाया पर वह नहीं माने. सुप्रिया…. निक्की तुम्हारी बेहेन जैसी है, तुम उसकी जिंदगी बर्बाद होते देख सकोगी?

सुप्रिया - और मेरी जिंदगी का क्या.

रेनू - मेरी बात सुनो, तुम्हे डरने की जरूरत नहीं है. एक तोह वह बुद्धा है, उसका अब खड़ा भी नहीं होता सही से, दूसरा मेरे पास एक आईडिया है.

सुप्रिया - नहीं, पर मैं ऐसे कैसे मैं किसी के भी कमरे में चली जायु.

रेनू का चेहरा गुस्से में लाल हो गया था - समझो बात को जरा. तुम भी तोह एक छोटा सा ब्लाउज पेहेन कर घूम रही थी नीचे. मैं तोह उसी समय समझ गयी थी की कुछ तोह काण्ड होगा जब वह तुम्हारा हाथ पकडे हुए था.

सुप्रिया को ये बात सुन कर अपने ऊपर hi शर्म आने लगी. सच में, क्या वह अपने जिस्म की नुमाइश कर रही थी सब के सामने…

रेनू ने फिरसे अपने गुस्से पर काबू किया - देखो बीटा, मैंने कहा न एक प्लान है मेरे पास.

सुप्रिया की आँखों में ासु भर आये थे - क्या प्लान?

रेनू - वह कमरे में शराब तोह जरूर पियेगा. तुम उसके गिलास में ये गोली दाल देना, इससे उसे नींद आ जाएगी.

सुप्रिया - और अगर ये प्लान काम नहीं किया तोह… उसने शराब न पि या ये गोली काम नहीं करि…

रेनू - बिलकुल काम करेगी, मैंने खुद कई बार…. वह कहते कहते रुक गयी

रेनू - और फिर मैंने बयाया न, अब उसका खड़ा नहीं होता. ज्यादा से ज्यादा वह तुम्हे इधर उधर थोड़े हाथ मार लेगा, उससे ज्यादा कुछ नहीं कर पायेगा.

सुप्रिया तोह ये सोच कर hi घबरा गयी थी. एक बुद्धा इंसान उसके शरीर को कहाँ कहाँ छुएगा.

रेनू - बस उसके सामने थोड़ा दिखावा सा कर लेना और जब वह सो जाये तोह तुम उसके बराबर में सो जाना, ताकि उसे लगे की उसने सब कर लिया.

सुप्रिया - मुझसे नहीं होगा ये सब… रेनू जी.. आप समझो.. मैं ऐसी लड़की नहीं हु…

रेनू - मेरे पास कोई भी और विकल्प होता तोह मैं वह कर लेती, चाहे मुझे खुद सोना पड़ता उसके साथ. पर तुम्हारे सामने मेरी जैसी अधेड़ उम्र की औरत के साथ कौन सोना चाहेगा.

सुप्रिया को उसकी बात सुन कर लगा की वह शायद अपनी बेटी के लिए कुछ भी कर सकती थी. और आखिर कार अब उसकी और निक्की की भी अछि दोस्ती हो गयी थी, दोस्ती से शायद थोड़ा ज्यादा hi. क्या उसे निक्की की जिंदगी के बारे में नहीं सोचना चाहिए.

रेनू - और सुनो, किसी को कुछ नहीं पता चलेगा. ये बात हम तीन लोगो के बहार कभी नहीं जाएगी. वैसे मैं सक्सेना जी से बात करुँगी की वह अतुल की थोड़ी हेल्प कर दे. पर उनको भी कुछ नहीं बतायूंगी.

सुप्रिया अब इन सब बातों से पिघलती जा रही थी. उसे निक्की की भलाई के लिए ये करना hi होगा. निक्की कितनी खुश थी अब, अगर वह साड़ी फोटो बहार आ गयी तोह उसकी तोह पूरी लाइफ hi ख़राब हो जाएगी….

रेनू उसकी चुप्पी से समझ गयी थी अब ये मन नहीं करेगी - चलो थोड़ा चेहरा ठीक कर लो, मेक उप लगा लो, फिर मैं तुम्हे उनके कमरे तक छोड़ देती हु.

रेनू ने जिस हिसाब से ये बात कही, सुप्रिया को लगा जैसे रेनू उसकी दलाल हो और उसे एक कमरे में सेक्स के लिए बेचने जा रही हो. उसने किसी तरह से अपने ासु पोछे और थोड़ा मेक उप लगाना शुरू किया. रेनू ने पीछे से आकर उस पर एक ाचा सा परफ्यूम लगा दिया.

फिर वह दोनों प्रताप के कमरे की तरफ चल पड़े. सुप्रिया के पेअर मानो लोहे के बन गए हो, वह उठ hi नहीं रहे थे. रेनू उसे एक हाथ से पकडे हुए किसी तरह से प्रताप के कमरे के बहार ले आयी.

सुप्रिया के अंदर जाने से पहले, रेनू ने उसे एक आखिरी बात कही - ाचा सुनो, उनका गुस्सा काफी तेज़ है, जैसे कहे वैसा कर लेना. और ज्यादा बोलना मत उनके आगे…

सुप्रिया ये सुन कर और भी घबरा गयी. अब तक उसके दिमाग में एक बुड्ढे आदमी की छवि थी जो उसे शायद थोड़ा बहुत छुयेगा और फिर या तोह उसका जल्दी से निकल जायेगा या वह नींद की गोली खा कर सो जायेगा. पर रेनू तोह अब कुछ और hi कह रही थी. अंदर अगर कुछ और मामला निकला तोह वह कैसे सब संभालेगी.

इससे पहले सुप्रिया कुछ कह पाती, रेनू ने दरवाज़ा खोला और सुप्रिया को अंदर धकेलते हुए कमरा बंद कर दिया. अंदर कमरे में अँधेरा था, पर बहार से काफी रौशनी आ रही थी जिससे सुप्रिया को सब कुछ साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था. ये कमरा काफी ज्यादा बड़ा था, बीच में एक बड़ा सा डबल बीएड था जो अचे से सजा हुआ था, जैसी किसी की सुहागरात हो. और साथ hi एक सोफे और एक झूला सा भी था. बीएड को इस तरह सजा हुआ देख सुप्रिया का पूरा शरीर काँप उठा, पता नहीं वह कहाँ hi फास गयी थी.

तभी किसी ने पीछे से आ कर उसकी गांड दबायी और अपना हाथ उसकी पीठ पर रखा.

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प्रताप - सुप्रिया... आ गयी तुम फाइनली...

सुप्रिया ने देखा की प्रताप जी के चेहरे पर एक हसी थी जैसे उसे उसका पसंदीदा खिलौना मिल गया होगा. प्रताप के हाथ एक डैम कड़क थे और सुप्रिया की कमर को हलके हलके मसल रहे they…Supriya की शकल पर उसकी घबराहट साफ़ थी.

प्रताप - क्या हुआ.. इतनी घबराई हुई क्यों लग रही हो...

सुप्रिया नीचे देख रही थी, क्या प्रताप जी को नहीं पता की वह क्यों घबरा रही थी - सर... वह....

प्रताप - सर नहीं.... आज रात मुझे प्रताप जी बुलायो... बस अपना पति hi समझो मुझे आज रात tum...dekho कैसे बीएड भी सजवाया है तुम्हारे लिए….

सुप्रिया को लगा ये कैसा इंसान है, वह उसकी बेटी की उम्र को थी और उसने उसके लिए ये बीएड सजवाया था - सर वह....

प्रताप ने गुस्से से सुप्रिया की और देखा - रेनू ने बताया नहीं तुम्हे की मुझे गुस्सा आता है तोह मैं क्या करता हूँ...

सुप्रिया ने गले में आवाज़ hi नहीं थी - बताया था प्रताप जी...

प्रताप ने उसका हाथ पकड़ लिया - और क्या बताया रेनू ने...

सुप्रिया थोड़ा झटपटा सी रही थी - बस... जो आप कहे...

प्रताप - गुड girl…Haan तोह शुरू करे…. रात पता नहीं कब बीत jaye...Main बहुत देर से तुम्हारा वेट कर रहा था...

प्रताप ने सुप्रिया का हाथ खींचते हुए उसे कमरे में आगे ले गया. फिर झूले पर बैठ कर सुप्रिया को अपनी गॉड में बिठा लिया और उसकी बाहों को मसलने लगा.

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प्रताप - वाओ... क्या सॉफ्ट हाथ है तुम्हारे... सच में जब तुम्हे कल देखा था तभी से मैं था की तुम्हे अचे से दबोच लू...

प्रताप ने सुप्रिया को अपनी बहून में भरा और उसे कास के जकड़ने लगा. सुप्रिया अपने से डबल आगे के आदमी की जांघ पर बैठी थी और वह उसे ऐसे छू रहा था, उसे काफी गन्दा लग रहा था. वह नहीं चाहती थी की ये आदमी उसे ऐसे छुई या जरा भी टच करे. उसे अपने आप पर भी गुस्सा आ रहा था की उसने अपने आप को ऐसी सिचुएशन में फसने कैसे दिया. इससे ाचा होता की वह कभी इस शादी में आती hi न.

सुप्रिया के हाथ मसलते मसलते प्रताप ने उसे अपनी गॉड में और पास खींच लिया और उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया.

प्रताप - साड़ी का क्या काम है वैसे अब... हटा दो न इसे...

सुप्रिया - प्लीज रहने दीजिये न...

सुप्रिया ने उसकी और देखा और उसकी शकल में छिपे हुए गुस्से को भी.

प्रताप ने सुप्रिया का मुँह ज़ोर से पकड़ा - साड़ी फाड़ दू या उतारेगी….

सुप्रिया का मुँह इस तरह दबाने से दर्द कर रहा था, उसने न चाहते हुए भी जल्दी से अपनी सारे उतारनी शुरू करि, और फिर उतार कर साइड में रख दी.

प्रताप - हाँ ये हुई न बात... ऐसे hi अचे से बात सुनोगी तोह सब प्यार से हो जायेगा... नहीं तोह मुझे गुस्सा आता है न तोह ाचा नहीं होता...

प्रताप ने फिर से उसे अपनी गोदी में बिठा लिया और अब साड़ी के बिना उसे उसका गाला और क्लीवेज साफ़ दिखाई दे रहा था. उसने अपने होंठ उसके गले पर लगा दिए और उन्हें हलके हलके किश करने लगा. और दूसरा हाथ उसके पेट पर चलने लगा.

सुप्रिया हलके हलके ाँहें भर रही थी - अह्ह्ह... ahhh.....mmmm

प्रताप उसकी हलकी हलकी आवाज़ सुन कर और जोश में आ गया, और उसके होंठों पर किश करने लगा. उसका लुंड भी अब हरकत में आना शुरू हो गया था.

सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा था वह क्या करे, उसके हाथ हवा में झूल रहे थे, वह कैसे इस हैवान को अपने आप को किश करने से रोके. उसे अपनी गांड के नीचे कुछ महसूस होना शुरू हो गया था. क्या प्रताप का लुंड खड़ा होना शुरू हो गया था, रेनू जी ने तोह बोलै था की उनका लुंड इतना खड़ा नहीं hota...Kya रेनू ने उससे झूठ बोलै था?

सुप्रिया ने एक दो बार अपना मुँह पीछे करने की कोशिश करि पर प्रताप ने पीछे से उसका सर पकड़ का उसका मुँह फिर से अपनी और कर दिया.

प्रताप ऐसे hi थोड़ी देर सुप्रिया को किश करता रहा, सुप्रिया के सॉफ्ट रसीले होंठ बने hi किश करने के लिए थे. झूले पर बैठे बैठे उसकी कमर अकडनी शुरू हो गयी थी, और ऊपर से सुप्रिया उसके ऊपर बैठी थी - ऐसा करते है, बीएड पर चलते है...

सुप्रिया - बीएड पर क्यों...

प्रताप हस्ते हुए - इतनी भी नासमझ न बनो... आयो चलो पहले तुम जरा मेरी मालिश कर दो... पूरा शरीर अकड़ा हुआ है….

प्रताप ने अपने कपडे उतारने शुरू किये और एक के बाद एक सारे उतार दिए. सुप्रिया ने कोशिश करि की वह प्रताप की और न देखे पर वह जानना चाहती थी की क्या प्रताप का लुंड पूरा खड़ा था. उसने देखा की प्रताप जी का लुंड पूरा तोह नहीं खड़ा था, पर फिर भी काफी मोटा और काला था. प्रताप ने उसे अपना लुंड लो देखते हुए पकड़ लिया.

प्रताप ने अपना लुंड पकड़ा और बोलै - छुप छुप के क्या देख रही हो इसे, इससे भी पूरा खेलने को मिलेगा, बस थोड़ा सब्र करो…

उसके ये बोलते hi सुप्रिया ने दूसरी और नज़र फेर ली. वह इस काले लुंड से क्यों खेलेगी, ये आदमी उससे क्या करवायेगे अभी…

प्रताप बीएड पर उल्टा लेट गया और बोलै - सुप्रिया... जरा मेरी पीठ की मालिश कर दो...

सुप्रिया धीरे धीरे वहां बीएड पर आयी, उसकी पीठ पर काफी निशाँ थे और उसकी गांड एक डैम काली गन्दी सी थी. सुप्रिया अपने गोर गोर हाथों से उसकी पीठ को छूना नहीं चाहती थी, पर अभी उसके पास कोई और चारा नहीं था. उसने डरते हुए अपनी ऊँगली प्रताप की पीठ पर राखी, उसकी पीठ एक डैम सख्त थी पर कई जगह से उसका शरीर का मोटापा बहार लटक रहा था. सुप्रिया ने एक और ऊँगली पीठ के बीच में राखी, ौड दो उँगलियों से हलके हलके मसलना शुरू किया.

प्रताप ने लेते हुए कहा - ये क्या गुदगुदी सी कर रही ho....poore हाथ से मालिश करो…

सुप्रिया ने किसी तरह से नाक मुँह सिकोड़ कर अपना पूरा हाथ प्रताप की पीठ पर रखा और हलके हलके मसलने लगी…

प्रताप - अह्ह्ह्ह… क्या सॉफ्ट हथेली है tumhari…ahhhhh… और दम लगाया जरा… मैं भी दम लगयूंगा फिर बाद में….

सुप्रिया अभी भी हलके हलके हाथ चला रही थी, पीठ इतनी खुरदुरी सी थी की उसका हाथ hi नहीं चल रहा था, और फिर ये काली सी पीठ पर उसके गोर से हाथ…

प्रताप ने अपना हाथ पीछे करके उसकी कलाई पकड़ी और ज़ोर के दबायी - दम नहीं है क्या…. ज़ोर के करो नहीं तोह मैं तुम्हारी मालिश करके दिखता हूँ.

सुप्रिया उसकी बात सुन कर घबरा सी गौ और उसके हाथ और ज़ोर से चलने लगे. क्या पता मालिश से hi ये सो जाये, सुप्रिया ने सोचा. वह साइड में बैठ कर और ज़ोर से उसकी पूरी पीठ पर हाथ चलने लगी. डैम लगते लगते उसका चेहरा पीठ के और पास आ गया था.

प्रताप - अह्ह्ह... बिलकुल ऐसे hi...Ye बढ़िया है…

तभी बिना कुछ बोले, प्रताप ने एकदम से करवट ली और सीधा हो कर लेट गया. सुप्रिया का चेहरा अब प्रताप के लुंड के ठीक सामने था. लुंड अभी भी पूरा खड़ा नहीं था पर एक मोटा सा कला सा लुंड ठीक उसके मुँह के सामने था.

सुप्रिया एक डैम से डर के चिल्लाई और अपनी आँखें बंद कर ली - उउउउउउइइइइइइइ.....

प्रताप - ारी क्या हुआ… इससे क्यों डर रही हो.. पहले कभी लुंड नहीं देखा क्या...

सुप्रिया ने अब तक सिर्फ अतुल का hi लुंड देखा था रियल लाइफ में, और उस दिन फैसल का थोड़ी दूर से. पर ये इतनी पास उसके, ये मोटा सा काला लुंड… और वह भी किसी पराये मर्द का…

प्रताप ने सुप्रिया की आँखें बंद देख कर जल्दी से उसका हाथ पकड़ा और अपने लुंड पर लगा दिया. लुंड जैसी hi सुप्रिया के हाथ में आया, वह हल्का हल्का हिलने लगा….

सुप्रिया के हाथ में एक आधा खड़ा लुंड था, उसकी आँखें बंद थी पर उसे महसूस हो गया था की उसने क्या पकड़ा है - ुह्ह्ह्ह... ये क्या....

सुप्रिया अपना हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी, पर प्रताप का हाथ उसके हाथों के ऊपर था, और वह उसके हाथों को कहीं जाने नहीं दे रहा था.

प्रताप - चलो.. मसलो इसे अब.….

प्रताप ने उसका हाथ पकडे हुए अपने लुंड पर चलवाना शुरू किया. सुप्रिया के हाथ उसके लुंड पर चलते हुए काँप रहे थे. उसने अपनी आखें धीरे धीरे खोली, उसके दोनों हाथ प्रताप के लुंड पर थे, और प्रताप उन्हें अछि तरह पकडे अपने लुंड पर घुमा रहा था. सुप्रिया सोचने लगी की वह कैसे आप को इस मुसीबत से निकले, शराब तोह उसे कहीं दूर दूर तक नहीं दिख रही थी, वह कैसे उस गोली को प्रताप को खिलाएगी.

प्रताप के तोह आनंद की कोई सीमा नहीं थी, उसने आज तक अपने लुंड पर ऐसे हाथ महसूस नहीं किये थे. जिसके हाथ इतने सॉफ्ट हो उसका मुँह कैसा होगा, ये सोच कर hi प्रताप के मुँह में पानी आने लगा - अह्ह्ह… सुप्रिया…. चलो अब इसे अपने मुँह में लो...

सुप्रिया - मुँह में!!

प्रताप - हाँ, और क्या… अपने पति का भी तोह मुँह में लेती होगी?

सुप्रिया - Nahi…maine कभी मुँह में नहीं liya...please… ये नहीं…

ये सुन कर प्रताप की एक्ससिटेमेंट और भी बाद गयी. क्या सच में इसने कभी किसी का मुँह में नहीं लिया, यानी एक वर्जिन मुँह उसके सामने था. कैसा नामर्द पति था इतनी खूबसूरत लड़की का. उसके गुलाब जैसे होंठों पर प्रताप की नज़र पड़ी तोह उसका लुंड और भी टाइट हो गया.

प्रताप - फिर तोह बहुत मज़ा आएगा तुम्हे... लो ise...shabaash....

प्रताप ने सुप्रिया का चेहरा अपने लुंड की तरफ धकेला... सुप्रिया को इतनी दूर से hi उसके लुंड से एक बदबू सी आ रही थी... वह इसे अपने मुँह में बिलकुल नहीं लेना चाहती थी..

सुप्रिया - प्लीज प्रताप जी... ये नहीं प्लीज... मैं और मालिश कर देती हूँ….

प्रताप - मुझे मन मत करो.. चुप चाप से इसे अपने मुँह में लो...

सुप्रिया अपना पूरा डैम लगा कर अपने आप को लुंड से दूर करना छह रही थी पर प्रताप भी उतना hi दम लगाए उसका चेहरा अपने लुंड पर धकेलने की कोशिश कर रहा था.

सुप्रिया - प्लीज… मुझे नहीं ाचा लग रहा ये सब….

प्रताप ने सोचा की ये ऐसे नहीं मानेगी, इसे औकात में लाना hi पड़ेगा. उसने एक डैम से सुप्रिया के मुँह पर एक खींच के थप्पड़ मारा...

प्रताप - ले न इसे चुप चाप से... क्या नौटंकी कर रही है साली...

सुप्रिया उसके चांटे से सेहम सी गयी और उसने ज़ोर लगाना बंद कर दिया. आज तक उसे किसी ने ऐसा नहीं मारा था. उसका चेहरा आगे की और गया और प्रताप का लुंड उसके होंठों पर रगड़ खाने लगा. उसके होंठ लुंड के रगड़ते hi हलके से खुल से गए थे. जो बदबू उसे अब तक दूर से आ रही थी अब उसके होंठों पर थी…

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प्रताप से अब रुका नहीं जा रहा था, सुप्रिया के कोमल होंठों पर उसका लुंड रगड़ खा रहा था और उसके अंदर हलचल बढ़ती जा रही थी - चल अब मुँह खोल और इसे मुँह के अंदर ले…

प्रताप ने सुप्रिया का मुँह पकड़ा और लुंड को थोड़ा और अंदर घुसा दिया. सुप्रिया का मुँह अभी भी थप्पड़ से गूँज रहा था, इससे पहल वह अपने आप को संभल पाती, लुंड का ऊपर का हिस्सा उसके होंठों के बीच में था. सुप्रिया को ये सब बहुत hi गन्दा लग रहा था, बिल्किल उलटी करने का मैं कर रहा था. सुप्रिया एक और थप्पड़ नहीं खाना चाहती थी पर वह लुंड को और अंदर अपने मुँह में भी नहीं लेना चाहती थी. वह ऐसे hi वहां जैम गयी थी, और प्रताप अपना लुंड और अंदर घुसाने की कोशिश कर रहा था…

प्रताप - चलो चलो... और अंदर लो इसे….

प्रताप ने उसका सर पीछे से पकड़ कर और अपना लुंड उसके मुँह में और अंदर घुसा दिया. लुंड अभी भी पूरी तरह सख्त नहीं था पर प्रताप को सुप्रिया के कोमल से मुँह में अपना लुंड बहुत hi ाचा लग रहा था.

प्रताप - अह्ह्ह... क्या मुँह है तुम्हारा Supriya....jaise बना hi इस चीज़ के लिए हो…

प्रताप अब काफी बेकाबू हो चूका था और उसने सुप्रिया का मुँह नीचे धकेल कर लुंड पूरा उसके मुँह में दाल दिया था. सुप्रिया को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, और प्रताप के नीचे के बाल उसके चेहरे पर लग रहे थे, जो उसे और गन्दा महसूस करा रहे थे. सुप्रिया ने अपनी आँखें बंद कर ली ताकि उसे प्रताप के बाल न दिखे, प्रताप तोह जैसे उसकी गर्दन को छोड़ hi नहीं रहा था. सुप्रिया ने अपना एक हाथ वहीँ बालो के बीच में रखा और अपने आप को पीछे धकेलने की कोशिश करती रही. सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था वह और क्या करे.

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प्रताप का लुंड सुप्रिया की जीब को छू रहा था जो उसे और भी एक्साइट कर रहा था. वह चाहता था की उसका लुंड थोड़ा और खड़ा हो जाये ताकि वह उसकी सुप्रिया के मुँह में गले तक पंहुचा दे, उसनी अपनी जवानी में कई बार ऐसे किया था. पर लुंड तोह जैसे और खड़ा hi नहीं हो रहा था. जैसे hi प्रताप ने सुप्रिया पर अपनी पकड़ को ढीला किया, सुप्रिया ने अपना मुँह उसके लुंड से पीछे कर लिया. लुंड अब उसके थूक से गीला हो चूका था, ये देख कर सुप्रिया और भी घिनोना महसूस करने लगी.

सुप्रिया ने ऊपर प्रताप की और देखा तोह उसके चेहरे पर काफी एक्ससिटेमेंट और हवस छड़ी हुई थी, वह शायद अपना लुंड सुप्रिया के मुँह में फिर से ठूसना चाहता था.

प्रताप बीएड पर अपने घुटनो पर बैठा और उसने सुप्रिया को बीएड पर नीचे लिटाया. वह सुप्रिया की ऊपर टाँगे फैला कर बैठा और अपना लुंड उसके मुँह के ठीक सामने ले आया. उसका पूरा भर सुप्रिया पर नहीं था, पर सुप्रिया को उसका ऐसे अपने ऊपर बैठना बहुत hi भयानक सा लग रह था.

सुप्रिया बस उसकी और देख कर अपनी आँखों से उसे रुकने के लिए कह रही थी पर प्रताप तोह रुकने का नाम नहीं ले रहा था. प्रताप में ऐसे बैठे हुए फिर से सुप्रिया के मुँह में अपना लुंड घुसा दिया, और जैसे hi वह अपने मुँह इधर उधर करती, वह अपने शरीर का और भार उस पर दाल देता.

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सुप्रिया दर्द से बीच बीच में कराह रही थी. प्रताप को उसकी आवाज़ों से और हिम्मत मिल रही थी. प्रताप उसके गाल पर हलके हलके थप्पड़ मार रहा था और बीच में ब्लाउज के ऊपर से उसके बूब्स दबा रहा था…

प्रताप का एक पोजीशन में ज्यादा डेट बैठना मुश्किल था, उसके पेअर मुद से रहे थे - मज़ा आ गया सच में… अब ऐसा करो... अपने बाकी कपडे भी उतार दो.….

प्रताप सुप्रिया के ऊपर से हटा, और सुप्रिया ने अपने मुँह को दर्द में पकड़ा. इतनी देर से प्रताप का मोटा लुंड अपने मुँह में लेकर उसका मुँह दर्द करने लगा था. उसने किसी तरह से अपने आप को बीएड से उठाया और थोड़ा दूर जा कर कड़ी हो गयी. ऐसे तोह वह पूरी रात उसके साथ खेलता रहेगा… क्या वह अभी इस कमरे से भाग जाये..

प्रताप - अब कड़ी हो hi गयी हो तोह वहां से मेरा व्हिस्की का गिलास भी दे दो.

प्रताप ने जैसे hi सुप्रिया को गिलास लाने का इशारा किया, सुप्रिया की थोड़ी सी आशा बड़ी की शायद वह अभी भी प्रताप को रोक पाए. वह गिलास लेने टेबल पर गयी और उसने चुपके से अपनी ब्रा में से गोली निकल कर उसके गिलास में दाल दी. गोली एकदम से hi घुल भी गयी.

प्रताप बीएड से गुर्राया - क्या hua....wahan क्यों कड़ी है.. यहाँ वापस आ जल्दी से….

सुप्रिया गिलास ले कर वापस बीएड पर गयी और उसके हाथ में गिलास दे दिया.

प्रताप - ये लो, एक गूथ पियो...

सुप्रिया उसकी और देखनी लगी, वह ये गिलास से सिप नहीं ले सकती थी, ये तोह उसने सोचा hi नहीं था - नहीं, मैं शराब नहीं पीती...

प्रताप - Ek-do सिप में कुछ नहीं होगा, मैंने कहाँ न मुझे मन करने वाली लडकियां बिलकुल पसंद नहीं..

प्रताप गिलास सुप्रिया के पास ले गया और जबरदस्ती उसको 2-3 घूंठ पीला दिए. और फिर वह खुद पीने लगा. व्हिस्की काफी कड़वी थी और सुप्रिया को बिलकुल अछि नहीं लगी, सिप लेते hi उसका दिमाग एक बार के लिए तोह जैसे पूरा hi घूम गया था. पर उसके बाद फिलहाल तोह सुप्रिया को कुछ महसूस होना शुरू नहीं हुआ था.

प्रताप - अब अपने बाकी कपडे उतार....

सुप्रिया की घबराहट अब और भी बढ़ती जा रही थी... अगर वह गोली काम न की तोह. पर फिलहाल तोह उसके पास और कोई चारा नहीं था. उसने अपना ब्लाउज और पेटीकोट धीरे धीरे उतारा, और अब वह ब्रा और पंतय में प्रताप के सामने कड़ी थी.

प्रताप - रुक क्यों गयी... पूरा उतारो न...

सुप्रिया को लग रहा था की अब तक ये क्यों नहीं बेहोश हुआ, उस पर तोह हल्का हल्का नशा होना शुरू हो चूका था... उसने धीरे धीरे अपनी ब्रा खोलनी शुरू करि.

प्रताप - जल्दी कर न... पूरी रात नहीं है...

सुप्रिया ने अपनी ब्रा उतार के फेकि और अपने हाथों से अपने बूब्स धक् लिए. उसे बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी, इस बुड्ढे इंसान को अपने बूब्स दिखते हुए.

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प्रताप उसके ब्रा से बहार निकले मम्मी देख कर पागल सा हो गया - क्या चीज़ हो तुम… ढकने की जरूरत नहीं है... चल... पंतय भी उतार....

सुप्रिया ने अपनी पंतय को नीचे सरकाया. उसकी छूट के ऊपर हलके हलके बाल थे, जो लास्ट उसने अतुल के लिए शेव हटाए थे.

प्रताप उसके पूरे शरीर को घूरे जा रहा था - ओह गॉड... यहाँ आयो जल्दी से...

प्रताप को अब हल्का हल्का नशा होना शुरू हो गया tha...Supriya अभी भी बीएड से दूर कड़ी थी... वह ऐसे नंगे हो कर प्रताप के पास नहीं जाना चाहती थी..

प्रताप उसकी और देख कर जोर से चिल्लाया - यहाँ आ जल्दी से हरामज़ादी......

सुप्रिया डर के उसके पास चली गयी, और प्रताप ने उसे खींच के अपने नीचे दबा लिया. वह उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.

सुप्रिया के नंगा शरीर के नीचे फूल थे और ऊपर प्रताप - अहह. ोुछ... प्लस प्रताप जी ... रुकिए…. उम्मम्मम्म

प्रताप कहाँ उसकी सुनने वाला था - सुप्रिया... पूरा मजा दूंगा तुझे आज raat...aaj रात तुम्हारी दूसरी सुहागरात…

प्रताप उसके बूब्स जानवरो की तरग काट रहा था और उसके निप्पल्स को चाट रहा था... सुप्रिया भी अब ये सब करते करते पागल हो चुकी थी और उसके मुँह से भी ज़ोर ज़ोर की सिसकियाँ निकल रही थी. वह नीचे से पूरी तरह गीली हो चुकी थी और प्रताप का आधा खड़ा लुंड उसकी जाँघों पर टकरा रहा था.

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कब ये सब करते करते प्रताप बेहोश को कर सुप्रिया के ऊपर कब सो गया उसे पता hi नहीं चला. सुप्रिया के अंदर भी अब इतनी हिम्मत नहीं थी की उसे अपने ऊपर से हटाए, उसकी भी आँखें बंद होती जा रही थी. आँखें बंद होते होते भी उसके दिमाग में बस एक बात चल रही थी की कैसे वह एक सीढ़ी साधी सी हाउस वाइफ आज किसी और मर्द, और वह भी अपने से उम्र में बहुत बड़े मर्द, के बिस्तर में उसके साथ नंगी सोई पड़ी है. नशे ने जल्द hi उसकी भी आँखें बंद कर दी और वह दोनों ऐसे hi एक दुसरे की बाहों में नंगे सो गए.
 
सॉरी इस अपडेट में काफी टाइम लग गया मुझे... एक तोह मैं बिजी चल रही थी और दूसरा सोस्सिपि पर इमेजेज / गिफ्स ऐड करनी भी एक बड़ी मुसीबत सी है. अभी फिलहाल के लिए मैंने अपडेट पोस्ट कर दिया क्यूंकि काफी टाइम हो गया था. मैं एक बार दुबारा पद कर शायद कुछ उपदटेस करू.

मुझे इस अपडेट में ये भी पता चला की एक पोस्ट पर 10 images/gif की लिमिट है.
 
अपडेट 23

सुबह जब सुप्रिया की आँख खुली तोह उसे ऐसा लगा की वह अपने घर पर अतुल के साथ बीएड पर लेती हुई है. उसके नंगा शरीर एक मर्द से शरीर से चिपका हुआ, उसके नंगे पेअर उस मर्द के पैरो के बीच में दबोचे hue...unke ऊपर का कम्बल बीएड पर थोड़ा नीचे हो गया था, शायद रात भर वह ऐसे hi एक दुसरे के गर्म शरीर से चिपक कर सो गए थे.

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सुप्रिया की आँख अभी पूरी तरह खुली नहीं थी, उसने नींद में से hi कहा - अतुल... क्या टाइम हो गया....

सुप्रिया को जरा भी होश नहीं था वह कहाँ थी. कल जैसे एक बुरे सपने जैसा था जो उसे अब याद भी नहीं था. सुप्रिया की जांघ पर कुछ छू रहा था, जैसे कोई छोटी सी नरम सी चीज़ हो, शायद ये अतुल का लुंड hi था. एक हाथ सुप्रिया के नीचे के बालों में घूम रहा था और दूसरा उसके बूब्स पर था.

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लगता है अतुल को बहुत hi शरारत सूझ रही थी आज सुबह सुबह. सुप्रिया ने अपने पैरो को हिला कर उसके लुंड को अपने पैरो के बीच में दबा दिया. सुप्रिया के चेहरे पर एक मुस्कान थी. तभी एक हाथ ने उसके नीचे के बालों को पकड़ कर खींच दिया.

सुप्रिया दर्द में चीख उठी - अहह…. ोुछ…

प्रताप - उठ गयी… राजकुमारी…

प्रताप की आवाज़ सुनकर सुप्रिया को मानो सब याद आ गया हो. कल रात कैसे प्रताप ने उसके मुँह में लुंड दिया था और फिर उसे नंगा करके उसके बूब्स चूसे थे. और फिर शायद वह नशे में वहीँ उसके साथ ऐसे hi सो गयी थी. ओह गॉड, उसे तोह लगा था वह अभी अतुल के साथ सोई हुई थी, पर ये तोह...

सुप्रिया ने फटाफट से अपने आप को प्रताप से अलग किया और एक पतली से चद्दर खींचते हुए अपने आप को ढाका. उसके मैं में सवाल आ रहे थे की प्रताप कब से जगा हुआ था, और क्या उसने उसके साथ कुछ और तोह नहीं किया था.

प्रताप - क्या नशा छडा था तेरा रात को… इतनी अछि नींद तोह मुझे सालो में नहीं आयी…

प्रताप उसका हाथ पकड़ कर उसी अपनी और खींच रहा था. अब तोह सुबह हो चुकी थी और प्रताप को सुप्रिया का गोरा शरीर साफ़ दिख रहा था, उसकी गोरी गोरी मसीली बाहें उसके अंदर सुबह सुबह hi हवस चढ़ा रही थी…

सुप्रिया ने एक चद्दर अपने ऊपर खींच कर अपने बूब्स और बगल के बीच में दबाया ताकि उसके नंगे बूब्स प्रताप को न दिखे. उसे अपने आप पर गुस्सा आने लगा था की वह क्यों कल रात को इस कमरे से निकल नहीं गयी थी. अब इस सिचुएशन के लिए तोह उसके पास कोई प्लान hi नहीं था, वह कैसे अपने आप को इस कमरे से बहार निकालेगी. उस अपने मुँह से भी बदबू आ रही थी, जैसे प्रताप के शरीर की बदबू उसके अंदर भर गयी हो.

उसे रेनू की बात याद आयी, प्रताप को लग्न चाहिए की उनके बीच सब हो गया था रात को, नहीं तोह वह उसे जाने नहीं देगा.

सुप्रिया - प्रताप जी… रात को आपने सब तोह कर लिया था.. अब प्लीज मुझे जाने दे…

प्रताप ने अपना लुंड छू कर महसूस किया, इस समय उसका लुंड आधा खड़ा हुआ था, शायद सुबह की वजह से, या फिर सुप्रिया के कोमल पैरो से छू कर. क्या सच में उसने सुप्रिया के साथ रात को सब कुछ कर लिया था. उसे कुछ याद क्यों नहीं आ रहा था. उसने सोचा की सब कर hi लिया होगा, तभी तोह वह ऐसे उसके साथ लेती हुई थी और अपने पैरो से उसका लुंड सेहला रही थी.

प्रताप - बड़ा मज़ा आया तुम्हारे साथ करने में… मैं ज्यादा रफ़ तोह नहीं था न तुम्हारे साथ...

सुप्रिया को रात का झापड़ भी याद आ गया, और कैसे प्रताप उसे बूब्स को जानवरो की तरह कान्त रहा था. पर अभी तोह उसका मकसद बस यहाँ से निकलना था - नहीं, ज्यादा कुछ नहीं. मैं चालू क्या अब?

प्रताप उसके नंगे कंधे देख कर उन पर किश करने लगा - अभी जाने की क्या जल्दी है, थोड़ा और साथ में रहते है न…

सुप्रिया प्रताप को अपने से दूर करने के कोशिश कर रही थी - प्रताप जी आप समझिये प्लीज... आज आपके घर शादी भी है...

सुप्रिया को अब सुबह की रौशनी में प्रताप का अधेड़ शरीर साफ़ दिख रहा था, कई जगह से उसका मांस लटका हुआ था. वह अब यहाँ एक पल भी नहीं रुकना चाहती थी…

प्रताप - जानेमन, तुम कहो तोह आज रात मैं तुमसे भी शादी कर लू, मेरी पत्नी को तोह गुज़रे हुए कई साल हो चुके hai…Aur तुम जैसा को मुझे आज तक नहीं मिला...

सुप्रिया - प्रताप जी प्लीज… आप क्या बोल रहे है.. मैं शादी शुदा हूँ..

प्रताप - और तब भी नंगी मेरे बिस्तर में hi लेती हो na...lagta है तुम्हारा पति तुम्हे खुश नहीं कर पाटा है...

सुप्रिया को एक बार अपनी हालत किसी गिरी हुई औरत से काम नहीं लगी, और उसकी आँखें भर आयी. अब ये हैवान उससे क्या hi करवा के मानेगा सुबह सुबह. उसका फ़ोन भी तोह नहीं था उसके पास जो वह रेनू को कॉल कर लेती.

प्रताप बिस्तर से खड़ा हुआ. उसका मोटा भद्दा शरीर अब सुप्रिया को साफ़ दिख रहा था. क्या इसी इंसान के साथ वह पूरी रात सोई थी. उसका कला मोटा लुंड थोड़ा सा नीचे झुका हुआ था, पर फिर भी थोड़ा खड़ा था. सुप्रिया ने अपनी आँखें दूसरी और कर ली.

प्रताप - मैं जरा टॉयलेट हो कर आता hoon...fir आगे का प्लान डीडे करेंगे...

उसके बाथरूम में घुसते hi सुप्रिया ने जल्दी से अपने कपडे ज़मीन से उठाये और पेहेन्ने शुरू किये. पहले ब्रा और पंतय, फिर ब्लाउज और पेटीकोट. उसने साड़ी अपने पेटीकोट पर जल्दी से बाँधी, पर साड़ी अचे से पेहेन्ने का टाइम नहीं था, उसे जल्दी से रूम से बहार निकलना था. उसने बीएड से टॉयलेट की और झाँक कर देखा की प्रताप अभी बहार तोह नहीं आया था.

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प्रताप को न आता देख, वह जल्दी से कमरे के दरवाज़े की और बड़ी. तभी बाथरूम का दरवाज़ा खुला और प्रताप एक तौलिया लपेटे बहार आया. उसको देख कर सुप्रिया दरवाज़े पर hi रुक गयी.

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प्रताप - Supriya...kahan जा रही हो...

सुप्रिया एक डैम से प्रताप को बहार देख कर चौंक गयी - प्रताप ji...mujhe टॉयलेट जाना है...

प्रताप - हाँ तोह खली हो गया न toilet...jayo...tumne तोह कपडे भी पेहेन लिए...

सुप्रिया - हाँ... वह थोड़ी ठण्ड लग रही थी...

प्रताप हस्ते हुए बोलै - ारी.. मैं हूँ न ठण्ड के लिए..

सुप्रिया ने अपने एक पेअर को दुसरे पेअर पर चढ़ा लिया जैसे वह अपना टॉयलेट रोके कड़ी हो - प्लीज मुझे टॉयलेट जाना है..

प्रताप ने उसे टॉयलेट की और इशारा किया - तुम कहो तोह मैं भी तुम्हारे साथ बाथरूम में चालू, अब आखिर हमारे बीच क्या शर्म.

सुप्रिया ने उसकी और देख कर अपने चेहरे पर एक झूठी मुस्कान लायी और बोली - अभी नहीं...

सुप्रिया जल्दी से टॉयलेट में घुस गयी. वह तोह अभी भी इस कमरे से निकलने में न कामयाब थी, अब वह कैसे यहाँ से बहार निकल पाएगी. तभी उसे बहार फ़ोन बजने की आवाज़ आयी. प्रताप ने फ़ोन उठाया और किसी से फ़ोन पर बात करना शुरू किया.

प्रताप - कारन.. बोलो...

प्रताप - Haan...ho गया मेरा kaam...poori रात साली को मसला है अपने नीचे...

प्रताप - तुमने ाचा किया जो मुझे बता दिया निक्की के बारे में सब और वह फोटोज तोह पता नहीं कहाँ से ढून्ढ के ले कर आये तुम...

सुप्रिया ये सुन कर हैरान रह गयी, तोह ये सब कारन का किया दिया था. उसने अपनी बेहेन के बारे में प्रताप को बता दिया और फिर उसकी फोटोज भी भेज दी उसे. क्या ये सब बस उसने सुप्रिया को फ़साने के लिए किया था... अगर प्रताप को सब पता था तोह वह अभी निक्की की शादी अपने बेटे से क्यों कर रहा था..

प्रताप - हाँ, अभी भी मेरे बाथरूम में है...

प्रताप - नहीं कारन, मैं सुप्रिया को तुम्हारे साथ नहीं शेयर कर सकता... हाँ मैंने बोलै था पर... ये अलग hi चीज़ है...

प्रताप - देखो, समझा करो बात को... बाद में ये सब बात करते है..

प्रताप - नहीं तुम ऐसा कुछ मत करो... ाचा ऐसा करो तुम मुझे नीचे milo...main तुम्हे तुम्हारे काम का सही इनाम दूंगा...

प्रताप ने फ़ोन रखा - क्या साला, सुबह सुबह दिमाग ख़राब कर दिया इसने मेरा...

प्रताप बाथरूम की और आया और उसने खत खता कर बोलै - सुप्रिया, मैं थोड़ी देर के लिए नीचे जा रहा हूँ, तुम यहीं मेरा वेट करना.

सुप्रिया ने अंदर से हाँ में जवाब दिया. उसे दरवाज़ा खुले और बंद होने की आवाज़ आयी. वह झट से टॉयलेट से बहार निकली और दौड़ते हुए बहार निकल गयी. बहार ek-do वेटर खड़े तोह जिन्होंने उसे इस हालत में बहार निकलते देखा. सुप्रिया ने उन्हें अनदेखा करते हुए लिफ्ट की और दौड़ी और जल्दी से नीचे का बटन दबाया, उसका रूम कुछ फ्लोर नीचे था. वह बार बार लिफ्ट का बटन दबा रही थी जैसे ये करने से लिफ्ट जल्दी आ जाएगी. लिफ्ट जैसे hi खुली वह अंदर घुस गयी, खुशकिस्मती से कोई भी और लिफ्ट में नहीं था.

अपने फ्लोर पर लिफ्ट रुकते hi वह दौड़ कर अपने रूम के पास पहुंची, वह अपना रूम का कार्ड ढूंढ़ने लगी जो उसे कहीं नहीं मिल रहा था, शायद वह तोह कल रात रेनू के कमरे में रह गया था. ओह गॉड, अब वह क्या करे...

बराबर में निक्की का कमरा खुला, और वह काफी परेशान सी बहार निकली.

निक्की - सुप्रिया... तुम कहाँ गायब हो गयी थी कल रात और फिर अपना फ़ोन भी नहीं उठा रही thi...tumhe पता भी है मैं कितनी परेशान थी...

निक्की ने सुप्रिया की और देखा, उसके बाल और कपडे काफी बिखरे हुए से थे, जैसे वह किसी के साथ सो कर आयी हो. पर सुप्रिया किसके साथ.... निक्की के मैं में सवाल चल रहे थे…

निक्की - सुप्रिया तुम कहाँ थी रात bhar…kya तुम और कारन…

सुप्रिया - निक्की ऐसा कुछ भी नहीं है जो तुम समझ रही हो...

निक्की - तोह फिर क्या है, समझायो न..

सुप्रिया किस मुँह से निक्की को ये साड़ी कहानी बताती, आखिर उसने निक्की के लिए hi तोह अपनी इज़्ज़त को कल रात प्रताप के हवाले किये था. अब निक्की को वह ये सब बता देगी तोह पता नहीं वह क्या करेगी. नहीं वह उसे कुछ नहीं बता सकती थी, अभी तोह उसकी शादी हो जाए, ये hi जरुरी था...

सुप्रिया - मैं कुछ नहीं समझा सकती...

निक्की - क्यों नहीं समझा सकती… ये सब नाटक किस लिए…

आते जाते लोग उन दोनों को घूर कर देख रहे थे... तभी वहां रेनू भी आ gayi..usne दूर से सुप्रिया और निक्की को बहार खड़े बहस करते हुए देख लिया था.

रेनू - निक्की beta...tum अभी भी यहाँ हो... वैक्सिंग और थ्रेडिंग के लिए वह तुम्हारा वेट कर रहे है मेरे रूम में, रूम 602. जायो तुम...

निक्की गुस्से में सुप्रिया को घूरते हुए वहां से चली गयी. सुप्रिया अपने आपको किसी तरह से टूट के गिरने से रोक रही थी.

रेनू - सुप्रिया beta...chalo अंदर चले.. मेरे पास है तुम्हारे रूम का कार्ड...

रेनू सुप्रिया को लेकर उसके रूम में घुस गयी. अंदर घुसते hi सुप्रिया के आंसू बहने लगे और वह ज़ोर ज़ोर से रोने लगी. रेनू ने उसे पकड़ा और बीएड पर बिठाया. रेनू चुप चाप उसे पकडे बैठी रही, और सुप्रिया रोटी रही... थोड़ी देर के बाद सुप्रिया का रोना थोड़ा काम हुआ...

रेनू - सुप्रिया बीटा, सब प्लान के हिसाब से हो गया था न रात को...

सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था वह क्या बोले और क्या बताये रेनू को, पर अब वह किसी और से तोह ये बात नहीं शेयर कर सकती थी न. उसने जो भी उसके और प्रताप के बीच हुआ सब रेनू को बता दिया और कैसे वह सुबह कमरे से बहार निकल पायी. पर उसने कारन वाली बात अभी अपने तक hi राखी... उसे समझ नहीं आ रहा था वह कैसे बिना पक्का सबूत के कारन का नाम ले...

रेनू - सुप्रिया, तुमने जो हमारे लिए वह कोई भी और नहीं करता. मैं हमेशा तुम्हारी कर्ज़दार रहूंगी...

सुप्रिया चुप चाप लेती हुई थी.

रेनू - वैसे तुम लकी hi रही की ऐसा कुछ ख़ास नहीं हुआ, अब तुम ये सब भूल कर आगे बड़ो, तुम नाहा धो कर तैयार हो जायो, मुझे भी शादी के काफी काम देखने है.

रेनू की ये बात सुन कर सुप्रिया को गुस्सा आने लगा. क्या कुछ ख़ास नहीं हुआ था उसके और प्रताप के बीच. ऐसा कुछ हुआ था जो उसने आज तक नहीं किया था. और अब वह क्यों तैयार हो इस शादी के लिए, उसे तोह बस यहाँ से अपने घर जाने था...

रेनू - ठीक है बीटा, थोड़ी देर में नीचे मिलते है. और जैसे मैंने कहाँ था न, ये सब बस हमारे बीच रहना चाहिए...

रेनू के आखरी के शब्द जिस टोन में कहे गए थे वह सुन कर सुप्रिया भी काँप उठी, जैसे रेनू उसे कोई धमकी दे रही हो.

रेनू - चलो, बे ा गुड गर्ल, एंड गेट रेडी... ये कह कर रेनू कमरे से बहार निकल गयी.

सुप्रिया उसके जाने के बाद भी ऐसे hi बीएड पर लेती रही जैसे उसके शरीर में कोई जान hi न हो. वह अब कुछ भी नहीं करना चाहती थी, पर वह यहाँ से निकल कर अपने घर भी जाना चाहती थी. थोड़ी देर बाद उसने बीएड के साइड की टेबल पर रखे फ़ोन को उठाया.

फ़ोन पर 2 मेस्सगेस अतुल के थे, कल रात के.

कैसे हो जानू, बिजी हो क्या

मैं कल शाम को ायूँगा सीधे मैरिज में, तुम मेरे साथ hi चलोगी न घर

कई सारे मेस्सगेस थे निक्की के.

सुप्रिया, कहाँ हो यार

सो गयी क्या? मैं सोच रही थी की अगर फ्री हो तोह...

सुप्रिया, मैं नॉक कर रही थी तुम्हारे रूम पर, कहाँ हो मैडम?

सुप्रिया जो कल अधूरा रह गया था...

Ek-do मेस्सगेस राहुल के भी थे. और फिर ऐसे hi उसकी भाभी के रेगुलर मेस्सगेस या ऐसे hi कुछ पुराने दोस्तों के. सुप्रिया ने उन्हें नहीं खोला.

सुप्रिया शाम तक अतुल का वेट नहीं कर सकती थी, उसने जल्दी से अतुल को कॉल लगाया.

अतुल - Hello, याद आ गयी मेरी...

सुप्रिया - अतुल, तुम प्लीज मुझे अभी यहाँ से पिक कर सकते हो क्या...

अतुल - अभी?? क्यों, क्या हुआ?

सुप्रिया - कुछ नहीं, मुझे बस घर की बहुत याद आ रही है, मुझे प्लीज घर जाना है...

अतुल - ारी पगली हो तुम भी... शाम को आ तोह रहा हूँ, तब चलते है साथ में...

सुप्रिया - नहीं प्लीज, मुझे अभी आ कर ले जायो न...

अतुल - यार अभी तोह बॉस भी नहीं है आज क्यूंकि तुम्हे तोह पता है. और फिर कुछ hi घंटो की तोह बात है, 10 तोह बज भी गए है. शादी भी तोह अटेंड करनी hi है न...

सुप्रिया - नहीं कोई जरूरी नहीं है शादी अटेंड करना..

अतुल - क्या हुआ, किसी से लड़ाई हुई क्या? तुम भी न, ओवर सेंसिटिव हो. ऐसे बीच में शादी छोड़ कर जायेगी तोह बॉस को कैसा लगेगा.

सुप्रिया - पर...

अतुल - पर वॉर कुछ नहीं, शाम को मैं आता हूँ. अभी मैं ऑफिस में बिजी हूँ.

अतुल ने ये कह कर फ़ोन काट दिया. सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था वह अब क्या करे, वह अतुल को कुछ बता भी तोह नहीं सकती थी. कुछ देर ऐसे hi लेते रहने के बाद वह उठ कर बाथरूम गयी और ब्रश करने लगी. उसे अभी भी ऐसा लग रहा था की प्रताप के लुंड की बदबू उसकी साँसों में भर गयी हो. वह और तेज़ से ब्रश करने लगी, ताकि उसकी बदबू बहार निकाल सके.

उसने अपने सारे कपडे उतारे और अपने शरीर को आईने में देखने लगी. उसके अपने पूरे शरीर से जैसे नफरत सी हो रही थी. हर जगह तोह जैसे प्रताप ने उसे छुआ था.

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और फिर वह नहाते हुए हर उस जगह जहाँ प्रताप ने उसे छुआ था वहां रगड़ रगड़ कर साबुन लगाने लगी. वह छह कर भी अपने दिमाग से कल रात को नहीं निकाल पा रही थी. वह किसी तरह से नाहा कर बहार निकली और तैयार हुई. उसकी आँखों में अभी भी रोना था.

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पर उसे किसी तरह से अपने आप को संभाले रखना था. वह किसी तरह से अपने कमरे से बहार निकली और नीचे जाने के लिए लिफ्ट की और गयी. वहीँ लिफ्ट के बहार दो वेटर खड़े थे, जो उसे घूर रहे थे और आपस में फुस फूसा रहे थे.

वेटर 1 - एहि मैडम थी न, जो उस बुड्ढे के कमरे से निकली थी सुबह..

वेटर 2 - हाँ वही है...

वेटर 1 - देखने में तोह अचे से घर से लगती है...

वेटर 2 - कुछ नहीं पता होता इनका.... जहाँ पैसा देखा नहीं...

वेटर 1 - अगर मेरे पास भी इतने पैसे होते न तोह इसे कुछ घंटो के लिए पूछ लेता..

उनकी आवाज़ धीमी थी पर सुप्रिया को सब कुछ साफ़ सुनाई दे रहा था. वह तोह जैसे जमीन में गाड़ी जा रही थी, क्या सब कल रात के बारे में जान गए थे. वह लिफ्ट में घुसी और नीचे पहुंच गयी. अब तक 11-12 बज गए थे, और रात को शादी से पहले आखरी कुछ रस्मे हो रही थी. वहीँ भीड़ में सुप्रिया को रेनू के साथ प्रताप भी दिखाई दिया. दोनों के चेहरे पर हसी और ख़ुशी थी, जो सुप्रिया को लग रहा था की उन्होंने उस से चीनी है. निक्की उसे कहीं नहीं दिख रही थी, शायद वह रात के लिए मेकअप ेट्स करवा रही होगी.

सुप्रिया सब से थोड़ा दूर hi कड़ी हुई थी, वह प्रताप के पास बिलकुल नहीं जाना चाहती थी. उसने सोचा की उसे शायद वापस ऊपर अपने कमरे में hi चले जाना चाहिए. तभी वहां निक्की के पापा - मर सक्सेना, सुप्रिया के सामने आये.

सक्सेना - सुप्रिया, तुम जा कर देखो जरा की निक्की की साड़ी तैयारी ठीक चल रही है न..

सुप्रिया की अब तक मर. सक्सेना से ज्यादा बात नहीं हुई थी, और वह उनका कहा नहीं ताल सकीय. उसे पता था निक्की उससे गुस्सा है, पर वह उसकी तरह रूम 602 में चल पड़ी.

उसने रूम 602 पर पहुंच कर नॉक किया तोह अंदर एक लड़की ने दरवाज़ा खोला. अंदर निक्की के पैरो के वैक्सिंग चल रही थी. निक्की उसे वहां देख कर ज्यादा खुश नहीं थी. निक्की एक छोटी सी शॉर्ट्स में बैठी थी जिससे उसकी लम्बी टाँगे सुप्रिया को साफ़ दिख रही थी. बाल हटने से वह और भी गोरी हो गयी थी.

निक्की ने उसके साथ की लड़कियों को बहार जाने का इशारा किया - तुम लोग बहार जायो थोड़ी देर... मैं कर रही हूँ...

उनके बहार जाते hi सुप्रिया बोली - निक्की वह... तुम्हारे पापा ने भेजा था मुझे... सब ठीक चल रहा है न...

निक्की - तुम बताया.. सब ठीक रहा तुम्हारा कल रात...

सुप्रिया - निक्की, तुम किस बारे में बात कर रही हो. तुम्हे पता भी नहीं है कल रात क्या हुआ था...

निक्की - तुम्हे बताने की जरूरत नहीं है, मुझे सब पता चल गया है...

सुप्रिया एक डैम से घबरा गयी, पर उसने फिर भी अपने आप पर नियंत्रण रखते हुए बोलै - क्या पता है?

निक्की - बनो मत... और वैसे ये सब ड्रामा करने की जरूरत क्या थी अगर तुम्हे कारन के साथ hi सोना था तोह...

सुप्रिया - कारन के साथ???

निक्की - हाँ और क्या? मुझे सब पता चल चूका है... शायद कारन सही था तुम्हारे बारे में, यू अरे ा बीच...

सुप्रिया - मुझे नहीं पता की तुम्हे क्या पता है, पर ऐसा कुछ नहीं जो तुम सोच रही हो...

निक्की - एनीवे, मेरी शादी है आज, एंड यू अरे फ्री तो फ़क व्होएवेर यू वांट... सो जो भी तुम करना चाहो... पर उस रात सटी सावित्री बनने का नाटक नहीं करना चाहिए था तुम्हे...

सुप्रिया गुस्से में रूम से बहार निकल गयी, वह बहुत सुन चुकी थी अब. शायद कभी निक्की को सच पता लगे तोह उसको ये सब कहने का पछतावा होगा. उसे समझ नहीं आ रहा था की कौन ये बात फैला रहा था की वह और कारन एक दुसरे के साथ सोये थे कल रात. वह बस अब अपने रूम जा कर शाम तक का वेट करना चाहती थी, बहुत हो चूका था..

वह लिफ्ट की और वापस बड़ी hi थी की उसे वहां कारन दिखाई दिया जो शायद लिफ्ट से नीचे जा रहा था.

जैसे hi वह लिफ्ट में घुसा और पलटा उसे सुप्रिया दिखाई दी, और उसके चेहरे पर एक गन्दी सी स्माइल आ गयी.

कारन - सुप्रिया... आयो न... ऊपर hi जा रही है ये लिफ्ट...

कारन ने हाथ से लिफ्ट को बंद होने से रोक लिया. सुप्रिया ने कोशिश किया की वह अपने चेहरे को नार्मल बना कर रखे - नहीं ठीक है, मैं नेक्स्ट लिफ्ट में चली जयुंगी...

कारन - ारी आयो na...saath में चलते है.. कल रात के बारे में भी कुछ बात करनी है...

सुप्रिया ये सुन कर थोड़ा सा सकपका गयी. वह नहीं चाहती थी कारन ऐसे खुले में और कुछ भी बोले. वह जल्दी से लिफ्ट में घुस गयी और कारन से दूर दूसरी और कड़ी हो गयी. लिफ्ट बंद होते hi, कारन उसके पास आया और अपना हाथ उसके कंधे के थोड़ा ऊपर लिफ्ट की दिवार पर रख दिया और सुप्रिया के सामने खड़ा हो गया.

कारन - तोह कैसी रही कल रात....

सुप्रिया ने अनजान बनने का नाटक किया - मुझे नहीं पता तुम क्या बोल रहे हो...

कारन - उस बुड्ढे की जगह तुम मेरे साथ सो सकती थी... पर ठीक है तुम्हे सबक सीखना जरूरी था.

सुप्रिया ने उसकी और गुस्से में देखा - और तुम सब को ये बोलते फिर रहे हो की मैं और तुम कल रात... मुझे तोह सोचते hi घिन्न आती है...

कारन - पर करते हुए तोह नहीं आयी... लुंड चूसने का इतना शौक है तोह मेरा चूस लेती...

सुप्रिया अब हैरान कड़ी थी, कारन को तोह कल रात की पूरी खबर थी. क्या प्रताप ने उसे सब कुछ इतनी डिटेल में बता दिया था...

कारन - मैंने सुना तुम एक थप्पड़ में hi सब कुछ करने के लिए मान गयी थी...

सुप्रिया इससे पहले वह कुछ और बोल पाती, कारन ने अपना हाथों से उसके बाल पकड़ लिए और उसे किश करने लगा. सुप्रिया अपने आप को उसकी किश से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, पर वह नहीं कर पा रही थी. कारन अपने होंठ उसके होंठों पर दबा रहा था और ज़ोर की किश कर रहा था.

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कुछ सेकंड किश करने के बाद, कारन ने hi अपने होंठ उसके होंठों से हटाए - अभी मुझे काम नहीं होता तोह अभी तुम्हे किसी कमरे में ले जाकर अचे से फ़क करता. पर अभी शायद किश से hi काम चलना होगा. बेफिक्र रहो, मैं किसी को कुछ नहीं बतायूंगा...

लिफ्ट का दरवाज़ा खुला और कारन लिफ्ट से उतर गया. सुप्रिया को तोह अब ऐसा लग रहा था की यहाँ कोई भी जब चाहे उस पकड़ कर उसके साथ कुछ भी कर सकता था, जैसे वह कोई रंडी हो. वह वापस लिफ्ट से ऊपर अपने रूम में चली गयी और बीएड में लेट कर सो गयी.

दिन से शाम कब हुई सुप्रिया को पता hi नहीं चला. जब वह उठी तोह बहार अँधेरा होना शुरू हो गया था और उसे शादी के बंद की आवाज़ आने लगे थी. शायद वह कुछ ज्यादा hi देर सो गयी. उसने अपना फ़ोन देखा तोह उस पर कई मिस्ड कॉल्स थी, रेनू की, एक अननोन नंबर से, अतुल की, और भी लोगो की. वह अभी किसी से भी बात नहीं करना चाहती थी. अब बस वह जल्दी से यहाँ से निकल कर अपने घर जाना चाहती थी. उसने किसी तरह से अपने आप को उठाया और शादी के लिए तैयार करना शुरू किया.

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उसने अपने hi कपड़ो में से सबसे सुन्दर एक भारी सी ब्लू साड़ी निकाली. ये साड़ी उसकी फवौरीते थी, इसमें वह बहुत सुन्दर लगती थी. पार आज वह इतना सुन्दर भी नहीं लग्न चाहती थी. उसका मेक उप लगाने का बिलकुल मैं नहीं था पर किसी तरह से उसने अपने आप को अचे से तैयार किया. वह नहीं चाहती थी लोग उससे कोई सवाल पूछे. उसने घडी में टाइम देखा को 8 बज चुके थे. वह तैयार हो कर नीचे आयी और किसी तरह से अपने चेहरे पर एक झूठी स्माइल ले कर कड़ी हो गयी.

थोड़ी hi देर में अतुल का फ़ोन आ गया - सुप्रिया, तुम कहाँ हो?

सुप्रिया को अतुल की आवाज़ सुन कर जैसे रहत मिली हो - अतुल यहीं हु अंदर, आ जायो आप...

सामने से अतुल सूट पहने आ रहा था. शादी में बाकी मर्दो के आगे अतुल के कपडे काफी हलके लग रहे थे, पर सुप्रिया को तोह बस उसे देख कर hi अपने अंदर एक अलग शान्ति सी महसूस हो रही थी. अतुल के सामने आते hi सुप्रिया अतुल के गले लग गयी. नोर्मल्ली वह ऐसे पब्लिक में अतुल के गले कभी नहीं लगती थी, तोह अतुल भी ये देख कर हैरान हो गया. वह सोचने लगा की शायद सुप्रिया ने उसे पिछले 3-4 दिनों में काफी मिस किया है.

सुप्रिया - अतुल... चले अब घर...

अतुल - ारी यार, अभी तोह आया हूँ.. पहले बरात तोह आ जाये, और कुछ खा तोह ले इतनी बड़ी पार्टी में.. फिर चलते है.. तुम्हे क्या जल्दी है?

सुप्रिया - नहीं कोई जल्दी नहीं है, पर बस यहाँ काफी शोर है तोह मैं नहीं था रुकने का...

अतुल - कोई नहीं, थोड़ी देर में चलते है...

सुप्रिया - प्रॉमिस करो आप आज यहाँ ड्रिंक नहीं करोगे...

अतुल - ाचा बाबा, प्रॉमिस, नहीं ड्रिंक करूँगा, तुम कहो तोह पानी भी न पीयू?

सुप्रिया - नहीं, पानी पी सकते ho..aapko पता है मैं क्या कह रही हु.

सुप्रिया पूरे टाइम अतुल के साथ hi चिपकी हुई कड़ी रही. अब अतुल के साथ वह थोड़ी बहुत नार्मल हो गयी थी और उसके चेहरे पर मुस्कान भी वापस आ गयी थी.

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सक्सेना परिवार के सब लोग अब शादी के काम में पूरी तरह बिजी थे, तोह सुप्रिया पर किसी का ध्यान नहीं था. कुछ देर बाद, नाच गाने के साथ बरात आ गयी थी, हालाँकि लड़के वाले भी वहीँ उसी होटल में ठहरे हुए थे.

इस बीच अतुल ने स्नैक्स और खाना खा लिया. तब तक दूल्हा दुल्हन दोनों स्टेज पर पहुंच चुके थे और दोनों तरफ का परिवार वहीँ स्टेज पर था.

अतुल - चलो एक बार सब से मिल लेते है फिर घर चलते है.

सुप्रिया - सबसे क्यों मिलना... चलते है न प्लीज

सुप्रिया स्टेज पर प्रताप के सामने नहीं जाना चाहती थी, पर उसे पता था की सबसे मिले बिना तोह वह नहीं जा पायेगी.

अतुल - ऐसे थोड़ी न होता है.. और तुमने तोह यहाँ काफी काम करवाया है तोह फिर? चलो...

अतुल उसका हाथ पकड़ कर उसे शादी के स्टेज की तरफ ले गया. सुप्रिया ने देखा की शादी के जोड़े में निक्की बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. अतुल स्टेज पर छड्ड गया और सक्सेना जी और रेनू जी को बधाई दे रहा था.

अतुल - बहुत बहुत कोंग्रटुलतिओन्स आपको मैडम और सर...

सक्सेना - थैंक यू अतुल...

रेनू - हाँ अतुल थैंक यू वैरी मच. सुप्रिया को भेज कर तुमने हमारी काफी हेल्प कर दी. सुप्रिया ने बहुत सारे मुश्किल काम आसान कर दिए..

सुप्रिया को रेनू के ये शब्द सुन कर गुस्सा आ रहा था, पर वह अपना गुस्सा किसी तरह दबाये अपने आप को संभल रही थी और मुस्कुरा रही थी.

सक्सेना - यस, ी मस्ट से अतुल, थैंक यू सो मच. आयो तुम्हे निक्की के फादर इन लॉ से मिलता हु...

सक्सेना अतुल को प्रताप की और ले गया. उसे प्रताप की और जाते देख सुप्रिया की दिल की धड़कन तेज हो गयी थी. अगर प्रताप ने अतुल को कुछ भी बोल दिया तोह? उसने थोड़ा पास हो कर उनके बातें सुनने की कोशिश करि.

सक्सेना - प्रताप जी, इनसे मिलिए. ये मेरी ब्रांच में लोन अफसर है - अतुल शर्मा. ये सुप्रिया के हस्बैंड है, आप मिले होंगे शायद सुप्रिया से.

प्रताप - ारी, आप है सुप्रिया के हस्बैंड. बहुत ाचा लगा आपसे मिलकर. सच में, काफी लकी है आप जो आपको सुप्रिया जैसी बीवी मिली है..

अतुल ये सब सुन कर हमेशा की तरह मुस्कुरा रहा था. उसे तोह इस बात का जरा सा भी आईडिया नहीं था की जो व्यक्ति उसकी बीवी की तारीफ़ कर रहा था, वही कल रात उसकी बीवी के मुँह में अपना लुंड दाल रहा था.

अतुल - थैंक यू सर, ाचा लगा आप से मिलकर.

प्रताप - सक्सेना जी, एक बार सुप्रिया को बुलाना, मैं उसे एक गिफ्ट देना चाहता हूँ, उसने जो भी किया शादी में उसके लिए...

सक्सेना - हांजी जरूर. सुप्रिया... के हेरे प्लीज...

सुप्रिया न चाहते हुए भी वहां प्रताप के सामने आ गयी. उसका दिमाग और दिल जैसे दोनों hi बुरी तरह घूम रहे हो इस समय. प्रताप के चेहरे पर वही गन्दी सी मुस्कान थी जो उसने सुबह उसके कमरे में देखि थी. जैसे वह अभी भी अपनी आँखों से उसे बिना कपड़ो के देख रहा हो. सुप्रिया को बहुत hi उनकंफर्टबले लग रहा था.

प्रताप - सुप्रिया... बहुत लकी है हम की आप इस शादी में आ सकीय, मैंने आपके लिए एक ख़ास गिफ्ट मंगवाया है... आप मन मत करना प्लीज...

सुप्रिया बेबस हो कर उसकी और मुस्कुरा कर देख रही थी. प्रताप ने पास में खड़े अपने एक आदमी से एक लाल रंग का छोटा सा बॉक्स लिया, किसी ज्वेलरी का बॉक्स था. उसको खोला तोह उसमे एक गोल्ड चैन थी जिसमे एक हीरे का पेंडंट था.

प्रताप - बस ये छोटा सा गिफ्ट है आपके लिए...

सुप्रिया - मैं ये कैसे ले सकती hoon...ye तोह काफी महंगा लग रहा है…

प्रताप - आप मन करके मेरा दिल तोड़ रही hain..waise भी आपके आगे तोह ये कुछ भी नहीं है…

प्रताप ने ये बोल कर सक्सेना की और देखा.

सक्सेना - ले लो सुप्रिया, इतस नॉट गुड तो से no तो gifts...khaas कर अपने से बड़ो से... पूरे हक़ से लो तुम इस गिफ्ट को…

अतुल ने भी बीच में बोलै - हाँ ले लो न Supriya..itne प्यार से दे रहे है…

प्रताप - लगता है आप हाथ में नहीं लेना पसंद करेंगी…

सुप्रिया उसकी डबल मीनिंग बात सुन कर हैरान रह गयी थी… इतने सारे लोगो में भी उसकी इतनी हिम्मत thi…kya किसी और को कुछ समझ नहीं आ रहा था..

प्रताप - मेरा मतलब लगता है मुझे सीधे आपको ये हार बूत पहनना hi पड़ेगा हार... कोई प्रॉब्लम तोह नहीं अतुल जी अगर मैं सुप्रिया को ये हार पहना दू तोह?

अतुल - नहीं सर, मुझे क्या प्रॉब्लम होगी...

सुप्रिया ने अतुल का जवाब सुन कर उसकी और बेबसी में देखा. क्या सच में अतुल को कोई प्रॉब्लम नहीं थी की कोई पराया मर्द उसे हार पहनाये तोह?

प्रताप - ाचा यहाँ साइड में आ जायो सुप्रिया ताकि फोटोग्राफर सब की फोटोज ले सके...

प्रताप सुप्रिया का हाथ पकड़ कर उसे स्टेज के दुसरे कोने की और ले गया जहाँ सिर्फ सुप्रिया और प्रताप अकेले खड़े थे. प्रताप को यकीं hi नहीं हो रहा था की इतनी खूबसूरत लड़की का पति ऐसा हो सकता था, और वह भी एक नंबर का गधा जो किसी और मर्द को उसकी बीवी को गले में हार पहनाने de...Agar सुप्रिया उसकी बीवी होती तोह… ये सोचते hi उसका लुंड हरकत करने लगा.

प्रताप - सुप्रिया जरा पीछे मुङो...

सुप्रिया मुद गयी ताकि प्रताप उसे गले में हार पहना सके. प्रताप ने पीछे से सुप्रिया की गांड देखि, उसे लगा की वह इसको तोह कल रात अचे से देख नहीं पाया न hi इससे खेल पाया.

वह हार पहनाने के बहाने सुप्रिया के पास आ गया, उसका मुँह सुप्रिया के कान के बिलकुल पास. सुप्रिया को ये सब ाचा नहीं लग रहा था पर अभी वह सबके सामने कोई तमाशा नहीं करना चाहती थी.

प्रताप ने धीरे से उसके कान में कहा - सुबह कहाँ गायब हो गयी थी, मैंने बोलै था न रूम में वेट कर...

सुप्रिया के बूब्स दर के मारे ऊपर नीचे हो रही थी.

प्रताप - और ये है तेरा पति, अब समझ में आया सब, इसमें तोह कोई डैम नहीं लगता मुझे...

प्रताप ने उसे पहनना शुरू किया, उसने हार ले कर सुप्रिया के गले में पीछे से वरमाला की तरह डाला. हार सुप्रिया के बालों में उलझ गया, तोह सुप्रिया अपने बालों को आगे करने लगी. प्रताप ने भी हार निकलने के बहाने उसके बालों में अपनी उंगलियां घुसा दी. बालों के अंदर उसकी उंगलियां सुप्रिया की गर्दन को छू रही थी.

अगर अभी यहाँ इतने लोग नहीं होते तोह शायद वह और हिम्मत करके सुप्रिया के गले पर चूम hi लेता. प्रताप के एक हाथ आगे आ कर सुप्रिया के नंगे गले पर फेर दिया. उसने थोड़ी और हिम्मत करके अपने एक ऊँगली उसके बूब्स की गेहरियों के बीच में दाल दी.

जिस एंगल पर वह खड़े थे, अतुल को ये सब दिखाई नहीं दे रहा था. पर सुप्रिया तोह प्रताप का हाथ वहां लगते hi काँप उठी, और उसने उसकी ऊँगली को रोकने के लिए पकड़ लिया.

सुप्रिया - क्या कर रहे है आप प्रताप जी.. यहाँ खुले में कोई देख लेगा..

प्रताप - तोह फिर कमरे में चले…

सुप्रिया - नहीं please…aapki बेटी की शादी है..

प्रताप - आज तुमसे शादी तोह न हो सकीय हमारी, पर हार तोह मैंने पहना hi दिया. मैं कॉल करूँगा तुझे जब भी मैं लखनऊ aayunga...samjhi न...

सुप्रिया ने डर के मारे अपना सर हाँ में हिला दिया.

प्रताप ने हार पीछे से बाँध दिया और अपने हाथ पीछे कर लिए. सुप्रिया धीरे धीरे वापस अतुल के पास स्टेज के दूसरी और पहुंच गयी.

अतुल - बहुत ाचा लग रहा है नेकलेस...

सुप्रिया ने अतुल की और देखा, सच में उसका पति कितना बड़ा गधा था. कोई और मर्द वहीँ उसके सामने उसकी पत्नी को हार पहना रहा था और छू रहा था और वह यहाँ खड़ा एक हार के लिए खुश हो रहा था.

सुप्रिया ने मुँह बना कर बोलै - हाँ... ाचा hi hai...shayad

अतुल - ारी इतना तोह ाचा है, काफी महंगा लग रहा है. वैसे क्या कह रहे थे प्रताप जी?

सुप्रिया ने एक डैम सोचा की क्या अतुल ने प्रताप को उसके बूब्स को छूटे हुए तोह नहीं देख लिया था? पर उसे लगा की ऐसा नहीं हुआ होगा, नहीं तोह अतुल इतना खुश नहीं होता - कुछ ख़ास नहीं, बस थैंक यू बोल रहे थे... अब चल सकते है क्या हम लोग घर...

अतुल को तोह अभी पार्टी में मज़ा ाँ शुरू हुआ था, इतनी हाई फि पार्टी, और ऐसे मस्त छोटे छोटे ब्लाउज पहने हुए लडकियां और औरते - जल्दी नहीं है अभी….

सुप्रिया ने अतुल की और गुस्से में देखा. अतुल क्यों और देर इस शादी में रुकना चाहता tha…usne गौर किया था की अतुल की नज़र भी हर और भटक hi रही थी. वह अपनी इतनी सुन्दर बीवी को छोड़ कर दूसरी लड़कियों को कैसे ताड़ सकता था.

अतुल उसकी शकल देख कर समझ गया - ाचा बाबा, चलते है…

सुप्रिया ने वहीँ दूर से आँखों से निक्की को bye बोलै. सब लोग अब शादी के माहौल में पूरी तरह व्यस्त थे. सुप्रिया अपना सामान कमरे से ले कर नीचे आ गयी. अतुल ने एक टैक्सी बुला राखी थी और वह दोनों टैक्सी में बैठ कर अपने घर की और निकल पड़े. सुप्रिया के मैं में काफी हलचल थी, पिछले कुछ दिनों में जो भी हुआ था वह उससे हिल चुकी थी, और वह ये सब शायद अपने मैं में दबा कर ज्यादा दिन नहीं रख सकती थी. उसे किसी से तोह इस सब के बारे में बात करनी hi पड़ेगी.
 
अपडेट 24

(थोड़ा नार्मल रिसेट अपडेट है, पिक्स मैं बाद में ऐड कर दूंगी अगर कोई लगे तोह)

सुप्रिया घर तोह वापस आ चुकी थी पर 3-4 दिन पहले जो सुप्रिया उस शादी में गयी थी, वह वाली सुप्रिया शायद वापस नहीं आयी थी. वह अपने दिमाग से जो कुछ हुआ था उसे नहीं निकाल पा रही थी. अतुल अगर उसे छूने की भी कोशिश तोह वह उससे दूर हो जाती. अतुल को लगा शायद वह अभी भी थकी हुई है.

रात को सोने पर भी उसे प्रताप का कला मोटा लुंड किसी भयानक सपने की तरह दिखाई दे रहा था, जैसे वह उसे अभी भी जबरदस्ती उसके मुँह में ठूस रहा हो. सुप्रिया इस सपने को तोड़ने के लिए पसीने में तर बीच रात में उठ जाती, और फिर उसे घंटो नींद नहीं आती. साथ में लेता अतुल तोह जैसे घोड़े बेच कर सो रहा था, उसे तोह किसी बात की खबर भी नहीं थी. ऐसा एक रात नहीं, पिछली 3-4 रातों से हो रहा था.

अब तोह सुप्रिया घर से बहार निकलने से भी घबरा रही थी, और घर में कैद उसका दिमाग पूरे दिन बस उसी सब पर घूमे जाता. जब उसका फ़ोन बजता तोह वह सेहम सी जाती, जैसे प्रताप या कोई और उसे फ़ोन करके और जलील करना चाहता हो. पहले जैसे सुप्रिया ख़ुशी ख़ुशी खाना बनती थी यार घर के बाकी सब काम करती थी, अब कुछ भी करने का उसका मैं hi नहीं होता था. वह बस घंटो बीएड पर गुमसुम सी लेती रहती. वह किसी से बात करना भी पसंद नहीं करती थी.

अपने फ़ोन के मेस्सगेस तोह उसने देखने hi बंद कर दिए थे. पता नहीं उसका नंबर किस किस के पास था और उसे कई सारे अश्लील मेस्सगेस भी आते रहते.

4-5 दिनों बाद, ऐसे hi दिन में अकेले लेते हुए उसके फ़ोन बजा. उसने देखा तोह उसकी भाभी का कॉल आया हुआ था.

भाभी - गोलू... कैसी hai...bahut दिनों से कॉल नहीं किया tune...mere मैसेज का भी जवाब नहीं दिया… इतनी कितनी बिजी हो गयी…

सुप्रिया ने दबी आवाज़ में रुखा सा जवाब दिया - ठीक हु bhabhi...woh बस ऐसे hi…

भाभी - क्या हुआ?? तेरी तबियत तोह ठीक है??

सुप्रिया - हाँ सब ठीक है...

भाभी - तोह इतना लौ क्यों साउंड कर रही है...

सुप्रिया - ऐसे hi... कुछ nahi...thoda सर दर्द है. आप सब कैसे हो?

भाभी - हम तोह सब ठीक है यहाँ बूत तू ठीक नहीं लग रही मुझे.

सुप्रिया थोड़ी सी चिड़चिड़ी होना शुरू हो गयी थी - ठीक हु न भाभी, आप क्यों बार बार एक hi बात बोल रहे हो...

भाभी - सुप्रिया.. तू शादी से अब तक घर नहीं आयी है, मैं तेरे भैया को बोल कर तेरी टिकट बनवा रही हु, ऐसा कर तू घर आजा.

सुप्रिया को पता था की जब भाभी उसको सुप्रिया कह कर बुलाती थी तोह वह बहुत सीरियस होती थी, और उस टाइम उनसे बहस करने का कोई फायदा नहीं था. उसका भी मैं था बहुत दिनों से घर जाने का, आखिर 6-7 महीने हो चुके थे उसकी शादी को. पर उसे लग तोह ऐसा रहा था की जैसे सालो बीत गए हो.

सुप्रिया - ठीक है भाभी... मैं आ जाती हु... अतुल टिकट कर लेंगे आप भैया को परेशां मत करो... मैं उनको भी साथ ले कर आने का कोशिश करुँगी.

सुप्रिया अब कहीं भी अकेले नहीं जाना चाहती थी. वह एक बार अकेले जा कर भुगत चुकी थी.

भाभी - ठीक है, जैसे hi टिकट हो जाये मुझे बता दियो... बस तू जल्दी से घर आ जा...

घर जाने का सोच कर जैसे सुप्रिया के शरीर में थोड़ी जान आ गयी थी. कितना ाचा लगेगा वह सबसे मिलेगी, और यहाँ से दूर हो जाएगी. जब से ये शादी हुई थी, तब से वह परेशान hi तोह हुई थी. कितने सारे मर्द उसे हाथ लगा चुके थे. शादी से पहले तोह अपने घर में कितनी सुरक्षित थी, जैसे उस पर उसके घर वालो का कोई कवच हो.

शाम को अतुल घर वापस आया तोह सुप्रिया किचन में खाना बना रही थी. आज तोह वह फिर से कोई हलकी सी तूने भी गुनगुना रही थी, पहले की तरह. उसे लगा शायद उसकी थकन अब काम हो गयी है.

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अतुल - क्या बात है मैडम, आज तोह बड़ी खुश लग रही हो...

सुप्रिया ने चहक कर अतुल को देखा - हाँ, आज मैं काफी दिनों बाद खुश हु. आज भाभी का कॉल आया था, वह मुझे घर आने के लिए बोल रही थी...

अतुल - घर... झाँसी...? इस टाइम?

सुप्रिया - इस टाइम मतलब? जब से शादी हुई है मैं एक बार भी अपने घर नहीं गयी.... प्लीज अतुल चलते है न...

अतुल - ऐसा करो.. तुम चली जायो...

सुप्रिया - अकेली...?

अतुल - हाँ और क्या? ऐसे कह रही हो जैसे अकेले कहीं जा नहीं सकती...

सुप्रिया - नहीं प्लीज आप भी मेरे साथ चलो न... आप भी तोह नहीं गए वहां तब से...

अतुल - अभी नहीं जा पायूँगा सुप्रिया, अभी सच में बहुत बिजी पीरियड है...

सुप्रिया - आपका तोह हमेशा hi बिजी होता है... मैं भी तोह आपके घर में अकेले रही थी...

अतुल - वह और बात थी यार... मेरा यकीं करो... बॉस मेरे प्रमोशन की बात कर रहे थे... बस ये कुछ बड़े क्लाइंट्स का लोन क्लोज करना hai...Abhi मेरे लिए काफी इम्पोर्टेन्ट है ये सब..

सुप्रिया को याद आया की रेनू ने उसे बोलै था की वह मर सक्सेना से बात करके अतुल का प्रमोशन करवा देगी. पर ऐसे प्रमोशन का फायदा क्या जिसमे इंसान के पास टाइम hi न हो.

सुप्रिया अब थोड़ा गुस्से में आ गयी थी - और मैं इम्पोर्टेन्ट नहीं हु?

अतुल - हो यार, तुम बहुत इम्पोर्टेन्ट हो, बूत प्लीज समझा करो... ाचा ऐसा करते है की मैं तुम्हे लेने आ जायूँगा. सैटरडे आ कर संडे वापस आ जायेंगे.

सुप्रिया के अंदर अतुल से और बहस करने की हिम्मत नहीं थी, जो भी हो, वह तोह जा रही थी.

सुप्रिया - ठीक है, मेरी टिकट बुक करा देना जल्दी से जल्दी की..

अतुल - तुम कर लो न खुद से टिकट बुक.. कितना तोह सिंपल है, सब कुछ ऑनलाइन है अब तोह... तुम्हे इतना भी नहीं आता...

सुप्रिया ये सुन कर थोड़ा शॉकेड सी हो गयी. सच में वह कितना डिपेंडेंट हो गयी थी अतुल पर. शादी से पहले अपने घर में वह खुद hi ये सब इंटरनेट के काम तोह खुद hi कर लिया करती थी. उसने अपने आप को कैसे किसी पर इतना डिपेंडेंट बना दिया.

सुप्रिया ने गुस्से में कहा - ठीक है, मैं बुक करा lungi...aur फिर खाना भी खुद hi बना लेना...

अतुल - तुम्हारे आने से पहले बना hi रहा था मैं khana...tum हमेशा लड़ती क्यों रहती हो...

अतुल को भी लड़ाई होने पर चुप होना नहीं आता था. उसे हर बात का बस जवाब देना होता था, ज्यादातर तोह सुप्रिया को hi चुप हो कर बात ख़तम करनी पड़ती थी. पर आज तोह अतुल उसे गैलीगत कर रहा था, ये शब्द उसने ऑनलाइन hi सीखा था, जहाँ कोई इंसान किसी दुसरे की बात को ऐसे झुटला देता था की सामने वाले को लगे बस वह hi गलत है.

सुप्रिया रट हुए अपने कमरे में चली गयी. उसे इतना तनाव हो चूका था की उसे सच में इस घर से एक ब्रेक चाहिए था...

दोनों ऐसे hi एक दुसरे से गुस्सा सो गए. अगले दिन भी सुबह अतुल गुस्से में hi ऑफिस चला गया. उसने सुप्रिया को सॉरी नहीं बोलै, वैसे वह उसकी आदत भी नहीं थी.

सुप्रिया ने किसी तरह से ट्रैन की टिकट को अपने फ़ोन पर बुक किया. उसके पास अभी भी एक बैंक अकाउंट था जिसमे थोड़े पैसे थे. वह दो दिन बाद hi अपने घर जा रही थी. उसे घर जाने की एक्ससिटेमेंट तोह थी पर थोड़ा डर और थोड़ी शर्म भी थी. उसे लग रहा था की वह कैसे सबको अपना मुँह दिखाएगी, जैसे उन लोगो को पता hi हो की उस के साथ क्या हुआ था. चलो उन्हें नहीं पता था, पर फिर क्या वह अपनी भाभी को कुछ बता पायेगी. उसने दिन भर सोचा की वह उनसे क्या कहेगी और कैसे कहेगी.

अगर उसने कुछ ज्यादा बता दिया तोह भाभी उसके बारे में क्या सोचेंगी. और फिर क्या वह मम्मी को या भैया को सब बता देंगी. फिर तोह वह किसी से भी नज़रें मिलाने के लायक hi नहीं रहेगी. पर क्या उसने कुछ गलत किया था या उसके साथ गलत हुआ था. मेघा तोह अभी भी वापस नहीं आयी थी अपने घर से, नहीं तोह वह उससे hi बात करके अपना मैं हल्का कर लेती. पर फिर उसे लगा की मेघा के आइडियाज तोह हमेशा hi कितने फालतू से होते है.

शाम को जब अतुल घर आया तोह सुप्रिया ने उसे बता दिया - ेहममम... मैंने टिकट बुक कर दी है... परसो घर जा रही हु...

अतुल ने उसकी और देखा, उसे लगा नहीं था की सुप्रिया टिकट बुक कर लेगी - ाचा, मैं टिकट बुक करने hi वाला था आज... पर चलो तुमने कर ली.

सुप्रिया - आप हम दोनों की वापस आने की टिकट कर लेना.. अगर चाहते तोह मैं वापस आयु तोह...

अतुल - यार तुम भी न, हर बात का बुरा मान जाती हो... मैं सैटरडे को ायूँगा और फिर हम साथ में वापस आ जायेंगे.. ठीक है...

सुप्रिया को लगा उसने अभी भी सॉरी तोह नहीं बोलै उससे, पर चलो ठीक है वह आने के लिए तोह मान hi गया था. दोनों ने साथ खाना खाया और एक दुसरे को हुग करके सो गए. अभी भी किसी मर्द का स्पर्श सुप्रिया को काफी अजीब सा लग रहा था, और वह जल्द hi करवट बदल कर दूसरी और सो गयी.

परसो सुबह, अतुल ने जल्दी जल्दी सुप्रिया को स्टेशन पर छोड़ा. उसे जल्दी hi ऑफिस पहुंचना था, उसकी एक जरूरी मीटिंग थी. उसने सुप्रिया का सामान ट्रैन में रखा और उसे bye बोल कर ट्रैन चलने से पहले hi निकल गया. सुप्रिया ट्रैन में खिड़की पर बैठी बहार देख रही थी. उसे अभी भी ऐसा लग रहा था की लोग उसे hi गन्दी नज़रों से देख रहे थे. इससे पहले उसे कभी इसका इतना एहसास नहीं हुआ था. एक लड़की को शायद हमेशा पता होता की लोग उसे घूर रहे है, पर शायद उसे कहीं अपनी सुंदरता का घमंड भी होता है. पर जो कुछ हुआ था उसके बाद तोह सुप्रिया सब से छुप जाना hi बेहतर समझती थी.

उसका 6 घंटे का ट्रैन का सफर ठीक hi गुज़रा. उसके साथ एक फॅमिली बैठी थी और थोड़ी दूर कुछ कॉलेज के स्टूडेंट्स. सब कुछ नार्मल सा गया, उसने ट्रैन में अपने साथ लाया हुआ खाना खाया और उसे फिर से थोड़ा थोड़ा कॉन्फिडेंस वापस आने लगा.

झाँसी पास आते hi जैसे उसकी स्माइल और बड़ी हो गयी थी. वह अपने घर वापस जा रही थी इतने दिनों बाद. एक ऐसा शहर जहाँ वह पाली बड़ी हुई थी, जहाँ का चप्पा चप्पा उसे पता था, जहाँ उसे किसी चीज़ का डर नहीं था. झाँसी का स्टेशन लखनऊ जितना बड़ा तोह नहीं था, पर फिर भी इतना छोटा भी नहीं था की सिर्फ एक hi प्लेटफार्म हो. पर लउकीली उसे उतारते hi सामने भैया दिख गए. वह बहुत hi खुश हो कर भैया के गले लगी, और भैया ने उसका सामान ले लिया. वह दोनों फिर घर की और चल पड़े.

रास्ते में भैया ने उसका हाल चाल और उसके रोज़ की लाइफ के बारे में पूछा. सुप्रिया ने उन्हें काम hi शब्दों में सब कुछ बढ़िया बता दिया. घर सामने देख कर सुप्रिया और भी खुश हो गयी पर साथ hi उसके पेट में जैसे तितलियाँ हो. वह थोड़ी सी नर्वस हो कर घर में घुसी, और जल्दी से hi सब ने उसे घेर लिया. रट रट हस्ते हस्ते वह सबसे गले मिली और काफी देर के बाद सब नार्मल से हुए.

रात का खाना होने के बाद वह अपने कमरे की और गयी. उसे लग hi नहीं रहा था की उसने अपने इतने सारे साल यहाँ बिताये थे. उसका घर अब उसको कितना पुराण सा लग रहा था, कई जगह से पेंट उतरा हुआ, दीवारों में थोड़ी सीलन. जहाँ वह अब रहती थी उसके मुकाबले तोह उसका घर सच में काफी पिछड़ा हुआ सा लग रहा था. और ये क्या, अब इस कमरे में खिलोने फैले हुए थे, उसका सारा सामान कहाँ गया?

सुप्रिया ये सब देख hi रही थी की पीछे से एकदम से भाभी आ गयी - ये कमरा तोह तुम्हारे जाने के बाद अन्य (उनकी बेटी) ने ले liya...ab वह अपना सारा सामान यहीं रखती है.

सुप्रिया - ओह ाचा... और मेरा सामान?

भाभी - वह सब मैंने संभल के रख दिया है ऊपर के स्टोर में...

सुप्रिया - मैं देख सकती हूँ क्या...

भाभी - हाँ देख लेना न.. पर अभी तोह रात हो गयी na...Tum आज रात मेरे साथ सोना, तुम्हारे भैया वन्य के कमरे में सो जायेंगे...

सुप्रिया - ठीक है.. मैं तोह कुछ लायी भी नहीं उसके लिए... सब कुछ इतना जल्दी हो गया न...

भाभी - वह सब छोडो, मुझे तुमसे सब जानना है... सब कैसा चल रहा है, और तुम्हे क्या परेशानी खाये जा रही है.

सुप्रिया ने भाभी की और देखा. पहले वह कैसे अपनी भाभी को सब कुछ बता देती थी. अपने कॉलेज की हर बात, अपने ऑफिस की हर बात. और आज वह इतना क्यों हिचकिचा रही थी.

भाभी - चलो आ जायो रूम में...

भाभी ने रूम में सुप्रिया को अंदर किया और कमरे की कुण्डी लगा दी. दोनों बीएड पर लेट गए और एक दुसरे से बात चीत शुरू हो गयी. भाभी ने उसे कम्फर्टेबले करने के लिए पहले अपने घर की साड़ी खबर दी, की रिश्तेदारी में क्या चल रहा था. फिर धीरे धीरे उन्होंने उसका मैं टटोलना शुरू किया.

भाभी - तोह तुम्हारे और अतुल के बीच सब कैसा चल रहा है...

सुप्रिया - सब ठीक है... अतुल ठीक हैं...

भाभी - वह तोह मुझे पता है, पर सेक्सुअली भी सब ठीक है न... मुझे पता है की फ़ोन पर ये सब बातें खुल कर नहीं हो पाती.

सुप्रिया - हाँ वह सब भी ठीक hi है. शुरू में थोड़ा सा अजीब सा लगा था पर अब सब ठीक हो गया. हम लोग कर लेते है हफ्ते 2-3 बार...

भाभी - बास.... 2-3 बार... अभी तोह तुम लोगो को ऑलमोस्ट रोज़ hi करना chahiye...tere भैया और मैं तोह...

कहते कहते भाभी रुक गयी. अब वह सुप्रिया को अपनी सेक्स लाइफ के बारे में बता कर परेशान नहीं करना चाहती थी. उसकी भाभी तोह अभी तक हफ्ते में 3-4 बार सेक्स करती थी.

सुप्रिया - हाँ वह शुरू में वैसे hi था, पर अभी वह थोड़े बिजी चल रहे है...

भाभी - ाचा, वह सब ठीक है और वह भी ठीक hi है, तोह परेशान क्यों है इतना...

सुप्रिया को पता था अब वह उस टॉपिक पर आ रहे है जिससे वह घबरा रही थी. अपने मैं में उसने कितनी बार तोह प्रैक्टिस करि थी की वह ये सब कैसे बताएगी, पर अब उसके अंदर से शब्द hi नहीं निकल रहे थे - Bhabhi...main आपको कैसे बतायु...

भाभी - बोल कर... और कैसे.. ाचा घबरा मत, ये बस हमारे बीच की बात रहेगी...

सुप्रिया - भाभी... क्या आदमी लोग बस खूबसूरत लड़की को देख कर उसके साथ कुछ भी करने का सोचते है..

भाभी को उसकी बात समझ नहीं आयी पर उसकी नादान से चेहरे पर थोड़ी हसी जरूर आ गयी - कहना क्या चाहती है...

सुप्रिया - बस एहि की, मैंने पहले तोह कभी भी ये महसूस नहीं किया पर शादी के बाद ऐसा लगता है की बस लोग मुझे घूर रहे है या छूने की कोशिश कर रहे है...

भाभी - ारी पगली, मैंने समझाया था न तुझे कई बार इस सब के बारे में. तू सुनती कहाँ थी. देख मर्द लोग ऐसे hi होते है, और ख़ास कर शादी शुदा लड़कियों को तोह और ज्यादा देखते है. और फिर तू है भी तोह इतनी सुन्दर, तेरे ये पर्वत हर किसी को अपनी और hi खींच लेते है...

सुप्रिया का शकल थोड़ी उतर सी गयी थी - तोह आप क्या कह रहे हो....

भाभी - मैं ये कह रही हु की लोगो को देखने से तोह तू नहीं रोक सकती.. इसके बारे में इतना क्यों परेशान होना, और फिर तुझे तोह शादी से पहले भी लड़के घूरा करते they...tujhe hi नहीं पता था ऐसा लगता है...

सुप्रिया - पर अगर वह देखने से आगे तोह हिम्मत कर ले तोह. जैसे मेरा देवर... होली के बहाने उसने तोह मुझे पकड़ hi लिया था...

भाभी - तुझे याद है, जब मैं शादी हो कर आयी थी, और मेरी पहली होली थी. इनके दोस्त और भाई वैगेरा आये हुए थे, सबने रंग लगाने के बहाने मुझे कहाँ नहीं छुआ. ये सब थोड़ा बहुत तोह चलता है...

सुप्रिया - मुझे तोह याद नहीं ये बात...

भाभी - तू सच में नादान hi थी तब भी, और अब भी...

सुप्रिया - और फिर क्या हुआ था...

भाभी - कुछ नहीं, बस वह लोग थोड़े नशे में थे, उन्होंने यहाँ वहां थोड़ा हाथ fera...aur थोड़ा दबा दिया...

सुप्रिया - आपने कुछ बोलै नहीं उन्हें या भैया को..

भाभी - अब तेरे भैया भी कोई दूध के धुले तोह है न... और मैं किसी को क्या hi बोलती... ऐसे hi होता है...

सुप्रिया अपने भैया के बारे में ये सुन कर थोड़ी हैरान हो गयी, भाभी का क्या मतलब था इससे. पर अभी तोह सब पूछने का टाइम नहीं था. उसे वैसे भी लग रहा था शायद भाभी उसकी बात को समझ नहीं रही थी या फिर वह अपनी बात अचे से भाभी को समझा नहीं पा रही - भाभी आप समझ नहीं रहे हो...

भाभी - देख गोलू, लोग तोह तुझे घूरना बंद नहीं करेंगे, पर तू अपनी एक सीमा बना कर लोगो के साथ चल सकती है... तुझे याद है न, तेरा बॉयफ्रेंड था कॉलेज में और तूने उसके साथ एक सीमा बना कर राखी थी...

सुप्रिया - Haan...par वह एक काफी ाचा लड़का भी तोह था…

भाभी - तभी तोह तेरा बॉयफ्रेंड था.. ऐसे hi रहना है लाइफ में.... पर ये बता, किसी ने कुछ किया क्या... जो तू बता नहीं प् रही?

सुप्रिया - नहीं... ऐसा कुछ नहीं... बस लोग यहाँ वहां छू रहे थे...

भाभी - हर लड़की को ये सब सहना hi पड़ता है, पर अपने आप को कमज़ोर न पड़ने दे और अगर कोई हद्द पार करे तोह उसे अचे से जवाब दे दे. पर हर लड़की को स्ट्रांग तोह खुद hi बनना पड़ता है न.

सुप्रिया को लगा की शायद वह भाभी को और कुछ नहीं बता या समझा पायेगी. भाभी और उसकी लाइफ में शायद काफी फरक था, और भाभी तोह उसे जैसे लेक्चर देने में hi लगी थी. पर हाँ वह अब अपने आप को शायद इतना कमज़ोर न पड़ने दे. वह लोग ऐसे hi बातें करते करते सो गए.

अगले दिन, सुप्रिया ने ऊपर स्टोर में जाकर अपना सामान देखा, उसके पुराने कपडे, उसका सारा सामान, उसकी डायरी. उसने अपनी डायरी उठायी और अपने साथ रख ली. वह अपनी पुराणी स्कूटी लेकर भी बहार निकल गयी और कुछ पुराने फ्रेंड्स से मिल कर आयी. ये सब उसे जैसे वापस से नार्मल कर रहा था. अपने कॉलेज की गालियां, अपने पुराने ऑफिस के पास, और भी बहुत साड़ी जगह.

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कैसे 3-4 दिन बीत गए उसे पता भी नहीं चला, दिन भर बहार घूमना, शॉपिंग करना, घर का और बहार का टेस्टी खाना खाना, देर तक सोना, और बिना किसी फ़िक्र के जीना. क्या मस्त लाइफ थी. पर फिर सैटरडे भी जल्दी आ hi गया, और शाम होते होते अतुल भी सुप्रिया के घर पहुंच गया था. नाश्ते और खाने के बाद भाभी, सुप्रिया और अतुल बैठ कर बात कर रहे थे.

भाभी - अतुल जी, लगता है आप सुप्रिया पर तोह बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रहे हो...

अतुल - नहीं ऐसा कुछ नहीं, पूरा ध्यान दे रहा हूँ सुप्रिया पर...

भाभी - लग नहीं रहा है use...kafi परेशां है वह...

सुप्रिया - भाभी आप भी na...kuch भी बोलते हो...

अतुल - ारी नहीं, उन्हें बोलने दो न...

भाभी - वह इतने बड़े शहर में अकेली रहती है पूरे दिन, और आप रात को लेट ऑफिस से आते हो...

अतुल - हाँ वह आज कल काफी बिजी हूँ काम में...

भाभी - पर आपको सुप्रिया का भी सोचना चाहिए न... आप उसे भी जॉब क्यों नहीं करने dete...Is बहाने वह भी घर से बहार निकल पायेगी..

अतुल - हाँ... मुझे तोह कोई दिक्कत नहीं है... मुझे लगा सुप्रिया hi....

सुप्रिया - नहीं, मैंने कब कहा ऐसा...

अतुल - पर तुम्हे खुद hi जॉब ढूंढ़नी होगी...

उन दोनों की जैसे फिर से लड़ाई शुरू होने वाली थी, पर भाभी ने बीच में पद कर दोनों को शांत किया - ाचा, आपकी बात भी ठीक है. सुप्रिया, तुम ढून्ढ लोगी न अपने आप जॉब?

सुप्रिया - हाँ, मैं ढून्ढ लुंगी...

अतुल - और फिर घर और सब...

भाभी - वह सब हो जायेगा.. आप लोग मिल कर मैनेज कर लेना न सब. अब अकेले रह रहे हो तोह सब मिल कर करना hi पड़ेगा न... और सुप्रिया जब बेबी होने वाला हो तोह तुम जॉब छोड़ देना... ठीक है...

सुप्रिया और अतुल दोनों के hi ये सुन कर गाल लाल हो गए थे. उन दोनों ने अभी भी बेबी करने के बारे में तोह सोचा भी नहीं था. पर सब तरफ से उन पर प्रेशर तहत इस चीज़ का. रात को अतुल और सुप्रिया दोनों उनकी भाभी के कमरे में सो गए. अतुल को लग रहा था की सुप्रिया ने अपनी भाभी को बोल कर ये जॉब वाली बात शुरू करवाई. उधर सुप्रिया खुश तोह थी की अतुल उसकी जॉब के लिए मान गया पर साथ hi उसे गुस्सा भी था की अभी भी उसका रवैया उसकी तरफ ाचा नहीं था.

अगले दिन सुप्रिया ने रट हुए सबको bye बोलै और फिर अतुल के साथ वापस घर की तरफ चल पड़ी. सुप्रिया जिस डिप्रेशन में घर आयी थी, उससे तोह वह बहार hi निकल गयी थी. उसे शायद अपने सारे सवालो के जवाब तोह नहीं मिले थे, पर शायद वह उसे खुद hi ढूंढ़ने होंगे.

घर पहुंचते hi सुप्रिया को लगा वह फिर शायद वहीँ फास गयी है. अगले दिन, नार्मल रूटीन की तरह अतुल ऑफिस चला गे. सुप्रिया बैठी hi हुई थी की उसे बराबर वाले फ्लैट से ज़ोर ज़ोर चीखने की आवाज़ें आ रही थी. लगता है मेघा वापस आ गयी थी, और आवाज़ें सुन कर तोह ऐसा लग रहा था की जैसे वह काफी तकलीफ में हो. सुप्रिया सोच रही थी वह क्या करे... क्या पता सब ठीक hi हो बस उसे लग रहा हो की मेघा मुसीबत में है.. पर उससे रहा नहीं गया, और वह थोड़ी देर बाद उसके घर के बहार पहुंच गयी.

उसने दुर्बल बजायी और बेसब्री से इंतज़ार करने लगी. थोड़ी देर बाद मेघा अपने कपडे ठीक करते हुए बहार आयी. उसने एक टीशर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे.

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मेघा - क्या हुआ सुप्रिया... तुम ठीक तोह हो?

सुप्रिया - हाँ मैं ठीक हु, आपके चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी... मैं इसलिए...

मेघा - ओफ्फो, तुम भी न. मैंने तुम्हे देख कर hi दरवाज़ा खोला, नहीं तोह मैं किसी के लिए नहीं खोलती. और तुम्हारी शकल पर इतनी घबराहट थी न...

सुप्रिया - वह बस आपके लिए...

सुप्रिया ने अंदर झाँक कर देखा तोह एक आदमी सिर्फ अंडरवियर में था और अपने कपडे पेहेन रहा था. ओह तोह शायद ये कहानी थी...

सुप्रिया - मैं चलती hoon...sorry...mujhe लगा..

मेघा - ारी वह जा रहा है अभी, तुम आ जायो अंदर... बहुत दिन हो गए तुमसे बात किये हुए वैसे. मैंने तुम्हारा मैसेज तोह देखा था, पर रिप्लाई करने का टाइम नहीं मिला....

सुप्रिया - हाँ वह उस टाइम कुछ ज़रूरी था..

वह आदमी तभी बहार निकलता हुआ आया और मेघा के होंठों पर किश करता हुआ चला गया. सुप्रिया को अजीब लगा की उसने ये भी परवा नहीं करि की कोई और लड़की सामने कड़ी थी.

मेघा - चलो आ जायो अंदर...

सुप्रिया - वैसे आप इतने गंदे से क्यों चीख रहे थे...

मेघा से उसे एक अजीब सी हसी से देखा - तुम रहने दो.. तुम्हारे मतलब की बात नहीं है...

सुप्रिया की जिज्ञासा तोह अब बाद गयी थी - बताया न प्लीज...

मेघा - ाचा ठीक है... उसने एक डैम से मेरी अस्स में घुसा दिया था...

सुप्रिया - अस्स में??? क्या घुसा दिया था... ओह... ाचा... ओह गॉड, ऐसे कौन करता है...

मेघा - तुम न... सच mein...tumhara कुछ नहीं हो सकता...

सुप्रिया को लगा की हो क्यों नहीं सकता, हो hi गया था, अब वह मेघा को कैसे बताये.

मेघा - तोह बताया न, क्या अर्जेंट था उस दिन... तुमने मैसेज किया था 2 हफ्ते पहले... काफी परेशान लग रही थी...

सुप्रिया - परेशान तोह थी... अब कैसे बतायु...

मेघा - सुप्रिया ये नाटक मेरे साथ मत किया करो...

सुप्रिया - ाचा ठीक है, बताती हूँ.

सुप्रिया ने हिम्मत करके शादी की साड़ी बात मेघा को बता दी. वह शायद इतना कम्फर्टेबले तोह अपनी भाभी को भी ये बात बताने में नहीं हुई थी, पर मेघा उसे जज नहीं करने वाली थी शायद. उसने निक्की / फैसल का अफेयर, कारन का उस के पीछे पद जाना, प्रताप का ब्लैकमेल, रेनू का गिड़गिड़ाना, और फिर प्रताप ने जो उसके साथ कमरे में किया सब बता दिया.

मेघा - हम्म्म... ये तोह गंभीर समस्या थी.. सॉरी यार मैंने तेरे मैसेज का जवाब नहीं diya...tu ठीक तोह है न..

सुप्रिया के आँखों में हल्का सा पानी आ गया था - हाँ मैं ठीक हु...

मेघा - मुझे तोह तेरी बातों से ऐसा लगता है की इस सब में रेनू भी कहीं न कहीं मिली हुई थी...

सुप्रिया - नहीं, पर वह kaise...uski तोह खुद की बेटी की शादी थी….

मेघा - तू सच में बहुत भोली hai...log तुझे ऐसे hi उसे करते रहेंगे अगर तूने कुछ न किया तोह...

सुप्रिया - तोह क्या करू मैं... मुझे समझ नहीं आ रहा...

मेघा - पहली बात तोह तुझे और स्ट्रांग बनना padega...tujhe कितनी बार तोह बोलै है तेरे चेहरे पर सब कुछ आ जाता है...

सुप्रिया - हाँ भाभी ने भी एहि बोलै था..

मेघा - मेरी बात सुन... देख तेरी ब्यूटी hi तेरा सबसे बड़ा हथियार है... तू देख रही है न कैसे लोग तुझ पर लट्टू हो रहे है...

सुप्रिया - हाँ तोह? किस काम की ऐसी ब्यूटी फिर?

मेघा - एहि तोह... तुझे उन्हें अपने बस में करना सीखना पड़ेगा... न की उनके बस में होना...

सुप्रिया - मतलब?

मेघा - तू उनको अपने कण्ट्रोल में रख, थोड़ा सत्ता थोड़ा जला, पर हाथ न लगाने दे अपने आप को...

सुप्रिया - ये कैसी एडवाइस हुई? पहले उन्हें hi सतयु और फिर जब वह मेरे पीछे पद जाये तोह कैसे बच्चू?

मेघा - तुझे ये सीखना होगा... देख वैसे भी तू माने या न माने, अतुल तेरे लायक नहीं है...

सुप्रिया - उसके बारे में अभी बात नहीं करते है...

मेघा - ाचा ठीक है... अगर इस मर्दो भरी दुनिया में जीना है न... तोह मर्दो की तरह hi सोचना पड़ेगा और उनसे दो कदम आगे चलना पड़ेगा... वह तोह आँखों से तुझे हर जगह फ़क करते hi रहेंगे... पर तुझे अपने आपको ऐसा बनाना है की तेरा काम भी निकल जाये और तुझ पर आंच भी न aaye...mardo का दिमाग उनकी पंत में होता है, और तुझे उन्हें कण्ट्रोल करना सीखना पड़ेगा...

सुप्रिया - ये कैसे होगा मुझसे ....

मेघा - वह पंत वाला दिमाग न, इतना भी बड़ा नहीं होता जितना मर्द समझते है... सब सीख jayegi….aur ाचा ये hi होगा की जॉब शुरू करने से पहले hi सीख ले तोह... यहाँ जॉब करना इतना आसान नहीं होता, बहुत सारे मर्द मिलते है जो बस तुम्हे अपनी टांगो के नीचे दबाना चाहते है..

सुप्रिया को ये सुन कर प्रताप ने जिस तरह उसे अपने नीचे दबा रखा था याद आ गया और वह गहरी सोच में पद गयी. क्या मेघा जो कह रही थी वह सही था, क्या वह ये सब कर पायेगी... पर अगर जॉब में भी उसे ऐसे hi लोग मिले तोह? नहीं तोह वह तोह हमेशा घर में डर के कैद hi हो जाएगी...

सुप्रिया - ठीक है, मैं सोचूंगी इस सब के बारे में...

मेघा ने एक डैम से उसे शरारत से कहाँ - वैसे तुझे मुँह में ले कर कैसा लगा...

सुप्रिया - आप भी न... की कितना गन्दा था.. और वह बुद्धा आदमी इतना ठरकी था... मैं बता नहीं सकती...

मेघा - ारी मैं मज़ाक कर रही थी, ताकि तू इतनी सोच में न पद जाए... मुझे पता है वह बहुत गलत था...

सुप्रिया ने अभी भी नाराज़गी भरा मुँह बना रखा था..

मेघा ने अपने कान पकड़ते हुए कहा - ाचा सॉरी बाबा… अब ये बता, कोई है दिमाग में जिसके साथ तू साफल्य ये नुस्खा तरय कर सके? प्रेशर नहीं है, पर ये जरूरी भी है तेरे कॉन्फिडेंस के liye…Aur अब अतुल का नाम मत लेना प्लीज…. उसके लिए तोह सच में घर की मुर्गी दाल बराबर हो गयी है… और मुर्गी बेचारी को पता भी नहीं है…

सुप्रिया को हसी आ गयी, मेघा में ये तोह बात थी की वह जो कुछ भी बोले, सुप्रिया को मन जरूर लेती थी. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था जैसे हफ्तों की जमा हुई ढूंढ आज आखिर उस पर से हटने लगी थी.

सुप्रिया ने सोचा, और अभी तोह बस उसके दिमाग में एक hi नाम था जिसे वह शायद थोड़ा हिम्मत करके तड़पा सके. सुप्रिया और मेघा काफी देर तक बात करते रहे, और सुप्रिया अपना प्लान मेघा को बताती रही. मेघा भी सुप्रिया को अपने सुझाव देती गयी, और कुछ तोह प्लान बन hi गया. थोड़ा रिस्की था, पर सुप्रिया ने अब ठान लिया था की उसे अपने आप को बदलने के लिए कुछ तोह करना hi होगा.
 
अपडेट 25

सुप्रिया के मैं में हलचल हो रही थी. जब तक वह मेघा के साथ बैठी बात कर प्लान बना रही थी तब तक तोह सब ाचा hi लग रहा था पर अब अकेले में उसे ये पूरे आईडिया hi गलत लग रहा था. बार बार उसके दिमाग में पिछली काफी साड़ी बातें hi घूम रही थी. पर मेघा ने उसे समझाया था की अपने डर पर काबू पाने के लिए उसे एक बार तोह ये करके देखना hi होगा. और कुछ ऐसा करेंगे की सुप्रिया अगर कहीं मुश्किल मैं फास जाये तोह मेघा उसे आ कर निकल ले. उससे भी ज्यादा, शायद जिसके बारे में सुप्रिया सोच रही थी, वह तोह शायद पहले से hi तड़प रहा था उससे मिलने को.

राहुल को अतुल और सुप्रिया के घर आये कई हफ्ते हो चुके थे. उस दिन सुप्रिया को किश करने के बाद उसकी हिम्मत hi नहीं हुई की वह वापस वहां जाए. पता नहीं उस पर कौन सा भूत सवार हो गया था उस दिन. वह सोचता रहता की वह ऐसा लड़का तोह नहीं है जो किसी और की वाइफ को किश कर दे, और वह भी ऐसे लड़की जो उसे बहुत अछि लगती थी. उस तरह से नहीं, पर हाँ शायद उस तरह से भी. पता नहीं वह बुरी तरह कन्फ्यूज्ड था. सुप्रिया उसकी नज़र में हर तरह से परफेक्ट थी, एक बीवी की तरह, एक दोस्त की तरह, एक खूबसूरत लड़की की तरह, हर तरह से.

पर अब न तोह वह उसका फ़ोन उठा रही थी न hi उसके मेस्सगेस का जवाब दे रही थी. शायद वह काफी गुस्सा थी उससे, और हो भी क्यों न. पर फिर वह सोचता की इस सब में पूरी तरह से उसकी गलती तोह नहीं थी, आखिर अतुल ने क्यों उसे इतना कुछ बताया और क्यों सुप्रिया उसके कंधे पर सर रख कर रो रही थी. फिर जब वह और सोचता रहता तोह जवाब भी अपने आप से hi मिल जाता, सुप्रिया तोह उसे एक ाचा दोस्त समझती थी और वह… काम से काम दोस्ती के बहाने hi सही वह सुप्रिया से पहले मिल तोह पाटा था, उसे देख तोह पाटा था. अब तोह उसका भी चांस नहीं था.

अतुल भी अब उससे थोड़ा दूर दूर रहता था, वैसे भी वह उसका सीनियर था. आज कल तोह सारे इम्पोर्टेन्ट क्लाइंट्स उसको hi मिलते थे और ऑफिस में उसके प्रमोशन की बात चल रही थी. इस सब से उसे बहुत जलन होती थी, कितनी अछि लाइफ थी उसकी - इतनी सुन्दर बीवी और जॉब में भी तर्रकी. काफी लकी थी सच में सुप्रिया उसके लिए, जब से वह उसकी लाइफ में आयी थी, अतुल की तोह किस्मत बस ऊपर की और hi थी. पिछले 3-4 हफ्तों में उसका ध्यान काम से बिलकुल हैट सा गया था. उसे तोह एक लड़की से शादी के सिलसिले में मिलने भी जाना था पर वह गया hi नहीं. लड़की एक घंटा रेस्टोरेंट में उसका वेट करके वापस चली गयी और काफी गुस्सा हुई थी मेस्सगेस पर.

पर राहुल के दिमाग में तोह बस एक hi चीज़ चल रही थी - काश वह बस एक बार सुप्रिया को मिलकर उसे सब समझा पाटा. वह बार बार अपना फ़ोन hi चेक करता रहता की जाने कब सुप्रिया का कॉल या मैसेज आ जाये. पर वह तोह शायद अब आना नहीं था, काम से काम उसे तोह ऐसा hi लगता था.

राहुल ऑफिस की कैंटीन में अकेला बैठा लंच कर रहा था की उसके फ़ोन पर एक मैसेज आया.

सुप्रिया - Hi राहुल

राहुल ये देख कर अपनी सीट से जैसे उछाल hi गया. उसने हड़बड़ा कर अपने हाथ साफ़ किये. क्या ये सच में सुप्रिया का मैसेज था.

राहुल ने जल्दी से मैसेज टाइप किया - Hi सुप्रिया, कैसी हो…

सुप्रिया - अगर फ्री हो तोह तुम्हे कॉल कर सकती हूँ क्या?

राहुल ने सोचा की ये चमत्कार कहाँ से हो गया आज, उसने जल्दी से वापस मैसेज किया - ये भी कोई पूछने की बात है...

जवाब देने के बाद वह बेसब्री से अपने फ़ोन की तरफ देखने लगा, न जाने कब सुप्रिया कॉल करेगी. या वह खुद hi कॉल कर दे? कुछ मिनट बीत गए थे, वह बार बार अपने मेस्सगेस पद रहा था, अपने आप को यकीं दिलाने के लिए की वह मैसेज सच में आये थे, न की उसका ब्रह्म था. हर सेकंड जैसे मिनट के बराबर था, और हर मिनट घंटे के.

कुछ मिनट बाद आखिर कार उसका फ़ोन बज hi गया, और सुप्रिया शर्मा का नाम उसकी फ़ोन की स्क्रीन पर था. उसने जल्दी से फ़ोन उठाया, और सामने से सुप्रिया की मीठी सी आवाज़ आयी - सॉरी, किसी और का कॉल आ गया था.

राहुल - कोई nahi...kaisi हो तुम...

सुप्रिया - मैं बढ़िया.. तुम्हारे इतने सारे मेस्सगेस आये हुए थे, सॉरी मैं जवाब नहीं दे पायी. काफी बिजी चल रहा था.

राहुल - कोई नहीं, हाँ मुझे पता है तुम बॉस की बेटी की शादी में हेल्प कर रही थी और फिर मैंने सुना था तुम अपने घर गयी हुई थी.

सुप्रिया ने सोचा की राहुल तोह उसकी पूरी खबर रख रहा था. सच तोह ये था की किसी का कॉल नहीं आया था, वह बस राहुल को वेट करा रही थी. राहुल ने पिछले 3-4 हफ्तों में उसे कई सारे मेस्सगेस और कॉल करे थे. कई बार सॉरी लिख दिया था, कई बार मिलने की मिन्नतें कर ली थी, कुछ जोक्स फॉरवर्ड किये थे. पर सुप्रिया को तोह समझ hi नहीं आ रहा था की वह उसका क्या जवाब दे. और फिर वह बिजी भी हो गयी थी. पर अब.. अब शायद टाइम आ गया था उसे कॉल करने का..

सुप्रिया ने अपनी आवाज़ में एक हसी लाते हुए बोलै - ाचा जी… जासूसी कर रहे हो मेरी पूरी…

राहुल उसकी आवाज़ में इतनी मधुरता सुन कर थोड़ा हैरान हो गया, पर साथ hi उसे रहत भी आयी की शायद सुप्रिया सब कुछ भूल चुकी थी…

राहुल - नहीं, नहीं, ऐसा कुछ नहीं… वह तोह बस मैंने ऑफिस में सुना…

सुप्रिया ने थोड़ी सी गहरी आवाज़ में बोलै - ाचा.. और क्या सुना तुमने मेरे बारे में…

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राहुल तोह ये खनकती हुई आवाज़ सुनते hi जैसे फिर से उसका दीवाना होता जा रहा था - और तोह कुछ nahi…bas एहि था...

सुप्रिया - हम्म्म्म… घर भी नहीं आये इतने दिनों से…

राहुल - हाँ वह अतुल ने बुलाया भी नहीं…

सुप्रिया - तोह क्या सिर्फ जब अतुल बुलाएँगे तभी आओगे…

राहुल को समझ नहीं आ रहा था की वह इसका क्या जवाब दे. सुप्रिया तोह ऐसे बात कर रही थी जैसे कुछ हुआ hi था न. इसके लिए तोह बिलकुल भी तैयार नहीं था.

राहुल - ेममममम… नहीं... मैं कभी भी आ सकता हूँ….

सुप्रिया - तोह आ जायो न…. कल….

राहुल - कल शाम को??

सुप्रिया - Nahi…shaam को नहीं… दिन में ऑफिस से निकल कर आ सकते हो क्या?

राहुल की तोह आवाज़ निकालनी hi बंद हो गयी थी - हाँ… हाँ… हाँ मैं आ सकता हूँ na…kuch काम था क्या?

सुप्रिया - और प्लीज अतुल को मत बताना की तुम आ रहे हो… ठीक है न?

राहुल - हाँ, उसे क्यों बतायूंगा….

सुप्रिया - ठीक है फिर.. कल मिलते है एक बजे के आस paas…theek है न?

राहुल - ठीक है, मैं एक बजे आ जायूँगा..

सुप्रिया - ब्येईईई

इससे पहले राहुल bye बोलता, सुप्रिया ने फ़ोन काट दिया था. राहुल ने तोह कभी सपने में भी नहीं सोचा था की ऐसा कुछ होगा. सुप्रिया ने उसे अभी कॉल किया था और इतने अचे से बात की थी, और फिर उसने उसे अकेले घर बुलाया था?? उसे यकीं hi नहीं हो रहा था ये सब हुआ था. उसका दिमाग बस दौड़े जा रहा था. पर सुप्रिया ने आखिर उसे अकेले घर पर क्यों बुलाया था?

उधर सुप्रिया ने फ़ोन रखा, उसके हाथ बुरी तरह काँप रहे थे. बल्कि पूरा शरीर hi काँप रहा था. उसने किस तरह से अभी राहुल से बात करि थी बस वह hi जानती थी, अपने आप को कितना स्थिर रखना पड़ा था और आवाज़ को अलग अलग तरह से बदलना पड़ा था. कुछ दिन पहले तक तोह वह राहुल से अब कभी बात भी नहीं करना चाहती थी और आज उसने इतनी स्वीट्ली उससे बात करके उसे घर पर बुला लिया था. पर अगर उसने अतुल को बता दिया तोह?

ये सवाल उसने मेघा से भी किया था, पर मेघा ने उसे समझाया था की मर्द कैसे सोचते है. जब एक लड़का किसी लड़की को कुछ न बताने के लिए बोलता है तोह समझ लो की आज शाम तक पूरी दुनिया को वह बात पता होगी. पर ठीक इसका उल्टा होता है जब कोई लड़की किसी लड़के को कुछ न बताने के लिए कहती है तोह, और खासकर अगर लड़के को लगे की उसे बात छुपाने से कुछ मिल जायेगा.

दूसरी और राहुल को तोह लग रहा था की जैसे उसकी लाटरी लग गयी हो. उसके पूरा दिमाग काफी हल्का महसूस कर रहा था. उसे लग रहा था की शायद वह कुछ ज्यादा hi सोच रहा था, सुप्रिया बस बिजी hi थी. वह ख़ुशी ख़ुशी वापस अपने डेस्क पर गया.

अब उसे बेस कोई बहाना बना कर कल ऑफिस से निकलना होगा. बॉस भी अभी वापस नहीं आये थे, तोह उसे अतुल से hi बात करनी पड़ेगी इस बारे में. वह सोच रहा था की वह कितनी देर के लिए बोले अतुल को. यहाँ से वहां 45 मं तोह कहीं नहीं गए थे, और फिर वापस भी आना था. और फिर वहां कितना टाइम लगेगा.. 1 घंटा शायद… नहीं काम से काम 2. तोह अतुल से 4 घंटे के लिए बोल देता हूँ, पर तब तक तोह 4 बज जायेंगे. पर वह सब अभी कहाँ मायने रखता था.

राहुल - अतुल, कल मुझे दिन में कुछ काम था… क्या मैं 12 बजे ऑफिस से निकल सकता हूँ.. 4 बजे तक आ जायूँगा.

अतुल ने उसे बिना देखे बोलै - कल नहीं राहुल… बहुत काम पड़ा है… तुम्हारी फाइल्स भी पूरी नहीं हुई है अब तक…

राहुल - बहुत जरूरी है अतुल नहीं तोह मैं नहीं बोलता, तुम्हे पता है न. और फाइल्स मैं कल तक साड़ी निपटा लूंगा…

अतुल - ऐसा क्या जरूरी काम है जो 4 घंटे लगेंगे…

राहुल - तुम्हे ट्रैफिक तोह पता hi है यहाँ का… टाइम लग jayega…please...

अतुल - जरूर किसी लड़की से मिलने जा रहा होगा, तभी इतना प्लीज बोल रहा है...

राहुल - हाँ, कुछ ऐसा hi समझ लो…

अतुल - चल ठीक है, पर फाइल्स कल तक साड़ी हो जानी चाहिए. आज कल तेरा काम काफी ढीला हो गया है. मैं दोस्त हु इसलिए तुझे समझा रहा हूँ, इससे पहले बॉस कुछ बोले.

राहुल - थैंक्स अतुल!!! मैं सब फिरसे लाइन पर ले ायूँगा...

राहुल बहुत खुश हो कर वापस अपनी सीट पर चला गया. वह सोच रहा था की अतुल को तोह ये भी पता भी नहीं की जिस लड़की से मिलने के लिए वह उसे जाने दे रहे है, वह खुद उसकी बीवी है. उसे हसी आ रही अतुल पर, शायद अतुल इतना भी लकी नहीं था जितना उसने सोचा था.

अगले दिन, राहुल ने अपनी सब्सि अछि शर्ट निकाल पर पहनी और अपनी गाडी में परफ्यूम भी रख लिया. उसने सोचा की ऑफिस से निकलते टाइम वह लगा लेगा. अभी तोह उसका दिमाग बस सुप्रिया के बारे में hi सोच रहा था, वह पहली बार सुप्रिया से अकेले में मिलेगा... पता नहीं क्या होने वाला था...

उसकी फाइल्स अभी भी पूरी नहीं हुई थी, पर उसने सोचा था की आज जो उसे करके एनर्जी मिलेगी उससे वह उससे सारा काम निपटा देगा. वह बार बार अपनी घडी को देख रहा था, टाइम जैसे बीत hi नहीं रहा था. पर किसी तरह से 12 बज hi गए, और फटाफट से ऑफिस से निकला. कहीं उसकी गाडी ट्रैफिक में फास जाती तोह उसका गुस्सा बाद जाता, एक एक मिनट उसके लिए कीमती था. बीच रास्ते उसे याद आया की उसने सुप्रिया के लिए तो कुछ लिया hi नहीं. क्या लेना चाहिए था उसे? सुप्रिया को क्या ाचा लगता है? ट्रैफिक सिग्नल पर उसे कोई फूल बेचता हुआ नज़र आ गया और उसने एक छोटा सा गुलाब का गुलदस्ता खरीद लिया.

गाडी आखिर कार सुप्रिया के अपार्टमेंट बिल्डिंग के बहार पहुंची. सामने वही वॉचमन था जिससे उसकी पहले बहस हुई थी. वह जल्दी से गाडी से बहार निकला.

राहुल - भैया ज़रा गेट खोलना, गाडी पार्किंग में लगनी है…

इक़बाल - किसके जाना है?

राहुल - 609….

इक़बाल ने socha….609….ye तोह सुप्रिया मैडम का फ्लैट है, और ये लड़का कौन… ाचा ये तोह आता है उनके पति के साथ कई बार, और उस दिन बदतमीज़ी से बोल रहा था mujhse..par आज ये दिन में वह भी अकेले, क्या मामला है?

इक़बाल अनजान बनते हुए है - कौन रहता है वहां?

राहुल - अतुल शर्मा…

इक़बाल - पर वह तोह ऑफिस गए है…

राहुल खीज रहा था, ये वॉचमन उससे क्यों हज़ारो सवाल कर रहा था - हाँ वह पता है, उनकी वाइफ है ऊपर…

इक़बाल - उनसे क्या काम है?

राहुल ने सोचा इसे क्या मतलब मुझे क्या काम है - उन्होंने बुलाया है किसी काम के लिए…

इक़बाल - मैडम ने बुलाया है? रुको मैं कॉल करता हूँ उन्हें…

इक़बाल ने सुप्रिया को फ़ोन लगाया, वह बेसब्री से इंतज़ार किया करता था की कब वह सुप्रिया को देख पाए या बात कर पाए. काम hi मौके मिलते थे.

इक़बाल - मैडम जी… ये भैया आये है नीचे… बोल रहे है आपने बुलाया है…

राहुल - राहुल.. बोलो राहुल आये है…

सुप्रिया को पीछे से राहुल की आवाज़ आ गयी थी - हाँ भैया मैंने hi बुलाया हैं, आप इन्हे आने दे..

इक़बाल - ठीक है मैडम, मैं इनसे एंट्री करवा लेता हूँ.

सुप्रिया ने एक डैम से काफी स्वीट सी आवाज़ में कहा - भैया पलासी, आज बिना एंट्री किये इन्हे आने दो न… देर हो रही hai…please इक़बाल…

इक़बाल उसके मुँह से अपना नाम सुन कर तोह पागल सा हो गया था, मन करने का तोह कोई सवाल hi नहीं था - मैडम जी आप प्लीज मत बोलो… मैं इनसे एंट्री नहीं करवायुंगा… पर आप देख लेना, कहीं कुछ उच्च नीच हो गयी तोह मेरी नौकरी चली जाएगी…

इक़बाल इशारे से समझना चाहता की राहुल यहाँ आया क्यों है.

सुप्रिया - कुछ नहीं होगा… आप उन्हें आने दे…

इक़बाल - ठीक है मैडम…

इक़बाल ने राहुल की गाडी के लिए दरवाज़ा खोला और उसने जल्दी से पार्किंग में अपनी गाडी लगायी. घडी में 1.10 हो रहे थे, वह थोड़ा लेट चल रहा था, उसने सोचा नहीं था की ट्रैफिक इतना खराब होगा. उसने जल्दी से गुलाब ाथाये और सुप्रिया की बिल्डिंग की लिफ्ट की और चल पड़ा. पीछे से इक़बाल उस पर नज़र रखे हुआ था.

राहुल बेसब्री से लिफ्ट का इंतज़ार कर रहा था, आखिर सुप्रिया ने भी तोह फ़ोन पर बोलै की उसे जल्दी है. आग शायद दोनों तरफ बराबर लगी थी. ऊपर पहुंच कर राहुल ने अपने कपडे ठीक किये, वह जल्दबाज़ी में परफ्यूम लगाना तोह भूल hi गया था. पर अब नीचे जाने का टाइम नहीं था. उसने 609 की दुर्बल बजायी.

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोला, उसने एक टीशर्ट और लेग्गिंग्स पहने हुई थी. राहुल ने पहली बार सुप्रिया को साड़ी, सलवार के इलावा कुछ और पहने देखा था, और उसे देखते hi उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी. T-shirt उसके शरीर से थोड़ी सी चिपकी हुई थी जिससे उसका फिगर साफ़ तरह से दिख रहा था, और उसके बूब्स बिना किसी के पल्लू या दुपट्टे के उसके सामने थे. और इस टाइट लेग्गिंग में तोह उसकी टाँगे क्या मस्त लग रही थी. क्या उसने ये कपडे ख़ास उसके लिए पहने थे आज?

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सुप्रिया ने चहकते हुए कहा - Hi Rahul…aayo न..

राहुल - Hi सुप्रिया… मैं ठीक.. तुम कैसी हो?

राहुल ने एक डैम से रीलीज़ किया की सुप्रिया ने तोह उससे पुछा भी नहीं था की वह कैसा है पर उसने फिर भी बोल दिया. वह झेप रहा था…

सुप्रिया की शकल देख कर लग रहा था जैसे वह अपनी हसी दबा रही हो इस बात पर - सॉरी मैंने पहले पुछा नहीं, कैसे हो? पर तुमने आलरेडी बता दिया है.. तोह रहने do…par ये बताया ये दादी क्यों बड़ा रही राखी है?

राहुल खुश हो गया, सुप्रिया उस पर पूरा गौर कर रही थी - बस ऐसे hi बाद गयी....

राहुल ने अपने हाथ पीछे कर गुलाब पकडे हुए थे… वह सुप्रिया को देख कर इतना खो गया था की उसे याद भी नहीं था की वह उसके लिए ये लाया था. वह मुस्कुराता हुआ घर में घुसा.

सुप्रिया - पीछे क्या hai…mere लिए कुछ है क्या?

राहुल - ारी haan…sorry… ये फ्लावर्स है तुम्हारे लिए…

सुप्रिया ने राहुल के हाथ से गुलाब लेते हुए उन्हें सूंघा - वाओ… बड़ी अछि स्मेल है…

राहुल - हाँ काफी फ्रेश और प्रीमियम है.. ख़ास तुम्हारे लिए…

सुप्रिया - अव्व्व.. थैंक you…aayo न बैठो..

राहुल सामने लिविंग रूम के सोफे पर पर बैठ गया. सुप्रिया उसके सामने वाली दीवार पर अपनी पीठ से तक लगा कर कड़ी थी. उसके एक हाथ पीछे उसकी गांड पर टिका था और दूसरा उसके बालों में था. राहुल को इस समय वह बहुत hi सेक्सी लग रही थी. अब वह आगे क्या kare...kaise करे...

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सुप्रिया - ऑफिस से निकलना मुश्किल तोह नहीं था?

राहुल - नहीं, बॉस तोह थे नहीं तोह अतुल को hi बोल कर आया हु...

सुप्रिया - ओह acha..unhe क्या बोलै?

राहुल अब थोड़ा कम्फर्टेबले होता जा रहा था, और उसकी आवाज़ में कॉन्फिडेंस वापस आ रहा था - एहि की किसी लड़की से मिलने जा रहा हूँ...

सुप्रिया - ाचा... किस लड़की से....

राहुल - बस एक बहुत hi खूबसूरत सी लड़की से, तभी तोह अतुल ने जाने दिया..

सुप्रिया हस्ते हुए - ाचा... ऐसा क्या... वैसे तुम्हारी शादी की सर्च कैसी चल रही है?

राहुल - चल रही है bas...abhi तक तोह कोई मिली नहीं...

सुप्रिया - हम्म्म, ाचा क्या पियोगे? चाय, कॉफ़ी, ठंडा?

राहुल को ये सब कहाँ चाहिए था और टाइम भी जल्दी जल्दी बीते जा रहा था - रहने दो न सुप्रिया… तुम किचन में मत hi घुसो…

सुप्रिया - पर क्यों… ओह ाचा…. जो पिछली बार हुआ था…..

राहुल ने सोचा भी नहीं था की सुप्रिया खुद hi उस बात को उठा लेगी. कल और आज के बीच में उसने कई बार सोचा था की अगर मौका मिला तोह वह hi उस बात को छेड़ देगा और फिर देखते है सुप्रिया कैसे रियेक्ट करती है. पर यहाँ तोह कुछ अलग hi हो गया था.

राहुल - नहीं वह…. ऐसा कुछ नहीं….

सुप्रिया - ओह ाचा… मुझे लगा था की तुम उस बात के बारे में अभी भी सोचते होंगे…

राहुल की बोलती बंद हो गयी थी, सामने सुप्रिया उसकी आँखों में आँखें दाल बात कर रही थी और धीरे धीरे अपनी कमर आगे पीछे कर अपने हाथ पर तक लगा रहा था. क्या चाहती थी वह, क्या वह अभी उस पर झपट पड़े..

सुप्रिया ने भोली सी शकल बनाते हुए कहा - मैं तोह बहुत सोचती हु उस बारे में...

राहुल एकदम से बोलै - सच में??

सुप्रिया - राहुल... सच ये है ki...ki...main तुम्हे बहुत लिखे करती हु...

राहुल के होश उड़द गए थे, उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की उसने अभी क्या सुना था, और झट से बीच में बोल भी - मैं भी..

राहुल खड़ा हुआ सुप्रिया की और बड़ा hi था, की सुप्रिया ने हाथ आगे करके उसे रुकने का संकेत किया - पूरी बात तोह सुन लो, मैं तुम्हे बहुत लिखे करती हु अस ा फ्रेंड... तुम्ही तोह एक फ्रेंड हो मेरे यहाँ लखनऊ में...

राहुल को समझ नहीं आया की एकदम से ये क्या हो गया.

सुप्रिया - हो न.. मेरे फ्रेंड...

राहुल ने हाँ में सर हिलाया...

सुप्रिया - और उस दिन जो नादानी हम से हुई... उसमे जितनी गलती तुम्हारी थी... उतनी hi मेरी भी थी... तोह मैं तुम्हे सॉरी बोलना चाहती थी...

राहुल - नहीं सुप्रिया, एक्चुअली ी ऍम सॉरी....

राहुल ने सोचा भी नहीं था बात ऐसे पलट जाएगी, और हफ्तों से जो सॉरी वह बोलना चाहता था आखिर उसके मुँह से निकल hi गया.

राहुल - उस दिन तुम्हारी कोई गलती नहीं थी… मैं hi बहक गया था… हो सके तोह मुझे माफ़ कर देना…

सुप्रिया - राहुल… मैंने कहा न… दोनों की गलती थी… चलो अब दोनों ने सॉरी बोल दिया और बात ख़तम हो गयी… हो गयी न ख़तम?

राहुल - हाँ, बिलकुल..

सुप्रिया ने अपने हाथ आगे करके उसकी और बढ़ाया - तोह फ्रेंड्स, पहले जैसे!

राहुल ने भी अपना हाथ आगे किया - हाँ फ्रेंड्स.

राहुल के चेहरे पास मुस्कान थी पर अंदर उसे लग रहा था उसके साथ कलपद हो गया था, खड़े लुंड पर धोका. सुप्रिया का कोमल हाथ उसके हाथों में था, बस शायद यहीं तक उसकी मंजिल थी. दोनों ने कुछ सेकंड हाथ मिला कर अपने हाथ पीछे कर लिए.

सुप्रिया - Aree..dekho न… इतना टाइम हो गया.. और मैंने तुम्हे खाने के लिए भी नहीं पुछा… तुमने लंच किया था क्या?

राहुल - हाँ, मैंने लंच कर लिया था ऑफिस से निकलने से पहले…

ये झूठ था, पर अभी उसका कुछ भी खाने का मैं नहीं था. उसके तोह सारे अरमानो पर पानी फिर गया था.

सुप्रिया - ाचा तुम्हारे पास तुम्हारा ऑफिस का लैपटॉप है क्या?

राहुल - हाँ है न, नीचे गाडी में…

सुप्रिया - एक छोटा सा काम था मुझे… प्लीज ले कर आओगे क्या….

उसकी स्वीट सी आवाज़ को वह कैसे मन कर सकता था, सामने घडी में 2 बज रहे थे. अभी तोह उसके पास थोड़ा टाइम था. काम से काम वह सुप्रिया के साथ कुछ और पल hi गुज़ार पाए.

राहुल - हाँ मैं लेकर आता हूँ न.

राहुल जल्दी से नीचे अपनी कार की तरफ गया. इक़बाल ने उसे अपनी कार की तरफ जाते देखा और सोचा - ये इतना जल्दी में क्यों है, इसका काम हो भी गया क्या? या फिर कंडोम लेने आया है गाडी में?

राहुल ने अपना बैग लिया और फिर से लिफ्ट की और तेज़ कदमो से चल पड़ा. रास्ते में उसे ख्याल आया की उसने तोह पुछा hi नहीं की लैपटॉप का क्या काम है. दरवाज़ा हल्का सा खुला हुआ था तोह राहुल हलकी सी नॉक करके अंदर घुस गया. सामने सुप्रिया अपने बाल ऊपर बाँध रही थी. क्या गज़ब लग रही थी, उसके बूब्स तोह हद्द से ज्यादा पागल करने वाले थे. और बाल ठीक करते करते उसकी टीशर्ट भी जरा सी ऊपर हो गयी थी जिससे उसका पेट दिख रहा था. और सुप्रिया बिना डरे ठीक सामने उसकी आँखों में देख रही थी.

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राहुल ने hi अपनी आखें नीचे कर ली - मैं लैपटॉप ले आया Supriya…kya काम था?

सुप्रिया के टेबल से एक कागज़ उठाया - ये मेरा बायोडाटा है, मैंने कागज़ पर लिख दिया था, तुम इसे कंप्यूटर में टाइप कर डोज क्या? मेरे पास यहाँ कंप्यूटर नहीं है…

राहुल - बस इतना सा काम.. हाँ क्यों नहीं. वैसे बायोडाटा किस चीज़ का?

सुप्रिया - वह जॉब ढूंढ़ने के लिए चाहिए…

राहुल - ाचा वह… उसे आज कल बायोडाटा नहीं कहते, रिज्यूमे या स्व कहते है…

सुप्रिया - मैं भी कितनी बुद्धू हु न….

राहुल - ारी.. इसमें क्या है… तुम सीख hi रही हो न…

राहुल वापस सोफे पर बैठ गया और अपना लैपटॉप खोल लिया. उसने वर्ड में सुप्रिया का स्व बनाना शुरू किया. सुप्रिया वहीँ पास के सोफे पर बैठी थी और उसने वो कागज़ पकड़ा हुआ था. राहुल जल्दी जल्दी टाइप कर रहा था जैसे सुप्रिया को इम्प्रेस करना चाहता हो. थोड़ा टाइम लग गया उसे वर्ड में सब कुछ अचे से फॉर्मेट करने में पर आखिर हो hi गया. बीच बीच में राहुल की नज़र सुप्रिया पर जाती तोह वह वहीँ थोड़ा बैठे उसे देख रही थी, अलग अलग अंदाज़ में.

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राहुल - देखो, ठीक है न?

सुप्रिया को अचे से नहीं दिख रहा था तोह वह सरकती हुई राहुल के बराबर में बैठ गयी. उसके पेअर राहुल के पैरो से सटे हुए, जांघ से जांघ मिली हुई. राहुल का लुंड हरकत ले रहा था पर वह पूरी कोशिश करके उसे काबू में कर रहा था. उसने अपनी आँख के कोने से सुप्रिया का क्यूट सा चेहरा देखा. सुप्रिया ने लैपटॉप में देखने के लिए अपना चेहरा उसके और पास कर दिया था. इतनी पास तोह वह उस दिन थे, जब उसने उसे किश किया था. उसके बालों की लेट उसके चेहरे पर कितनी प्यारी लग रही थी.

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पास आते आते सुप्रिया का कन्धा राहुल के कंधे को छू रहा था. राहुल ने उसकी और देखा, उसके चेहरे पर एक स्माइल hi थी, और ये देख कर उसके भी चेहरे पर स्माइल आ गयी. अब लैपटॉप दोनों की टांगो पर तिकी हुआ था ताकि सुप्रिया को भी अचे से दिख जाये. सच में इतनी पास हो कर भी इतनी दूर थी सुप्रिया उसके लिए. क्या वह अपना चेहरा और पास ले जाकर उसके गालों पर किश कर दे.

पर वह अब उसी गलती को दुबारा नहीं दोहराना चाहता था, बड़ी मुश्किल से वह आज सुप्रिया से मिल पा रहा था. क्या पता बाद में फिर कभी मौका लगे, आखिर उसने भी तोह अपनी गलती मानी थी. हो सकता है उससे फिर वह गलती हो जाये.

सुप्रिया - ारी वह.. तुमने तोह इसे काफी अचे से बना दिया.. और काफी कुछ इम्प्रूव भी कर दिया…

राहुल - हाँ, मेरा तोह रोज़ का काम है डाक्यूमेंट्स ठीक करना…

सुप्रिया - तुम्हे लगता है इससे मुझे जॉब मिल जाएगी?

राहुल - हाँ bilkul…koi बेवक़ूफ़ hi होगा जो तुम्हे जॉब न दे…

सुप्रिया - थैंक यू सोऊ much…tumne मेरी काफी हेल्प कर दी aaj…mujhe ईमेल कर डोज ये फाइल…

राहुल - पर तुम्हारे पास कंप्यूटर तोह है नहीं तोह फिर?

सुप्रिया - ईमेल तोह है न… मैं देखती हु कैसे भेजूंगी इसे आगे…

राहुल - अगर कुछ भी और हेल्प चाहिए तोह मुझे कॉल कर देना.. मैं आ जायूँगा…

सुप्रिया ने उसकी और देखा और अपना हाथ उसके हाथ पर हलके से रख दिया - और किसे कहूँगी, तुम्ही होना…

सुप्रिया - ारी, टाइम तोह देखो.. 4 बज गए… चाय बना दू अब?

राहुल टाइम सुन कर हड़बड़ा सा गया - ओह सहित… 4 बज गए.. पता hi नहीं chala…mujhe जल्दी से ऑफिस पहुंचना है…

सुप्रिया कड़ी हो गयी - ओह ाचा… हाँ वह तोह इम्पोर्टेन्ट है. थैंक यू सो मच तुम आये आज, और तुमने मेरी इतनी मदद की, नहीं तोह पता नहीं मैं ये कैसे करती...

राहुल - Aree..isme क्या थैंक यू. बल्कि थैंक यू तोह मुझे कहना चाहिए...

सुप्रिया ने भोले पैन से पुछा - किस बात के लिए..

राहुल - किसी भी बात के लिए नहीं, कभी और बताता हूँ. चलो, मैं निकलता हूँ, मुझे लेट हो गया. तुम्हारा पति hi चिल्लायेगा मुझ पर..

सुप्रिया - ः, ाचा चलो… bye फिर…

राहुल - Bye…

राहुल ने जल्दी से अपना बैग उठाया और नीचे की और चल पड़ा. अभी तोह उसे बस ऑफिस की टेंशन थी. उसने नीचे पहुंच कर ऊपर सुप्रिया की बालकनी की और देखा. सुप्रिया वहीँ बहार कड़ी थी. राहुल को देखते hi वह मुस्कुरा कर उसकी और हाथ हिलने लगी. राहुल ने भी उसकी और bye का इशारा कर दिया. और जल्दी से अपनी गाडी ले कर निकल गया.

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इक़बाल वहीँ खड़ा ये सब देख रहा था. सुप्रिया तोह आज कमाल hi लग रही थी, इतनी दूर से भी उसकी बॉडी की शेप को अचे से समझ पा रहा था. उसके बिखरे हुए बाल जैसे अभी उसने राहुल के साथ कुछ किया हो. उसके मैं में कई सवाल थे - सुप्रिया और राहुल के बीच आज हुआ क्या था? सुप्रिया ऐसे कपडे पेहेन कर मिली थी उससे, क्या चल रहा था उनके बीच, और फिर उसने रजिस्टर में एंट्री भी नहीं karwayi…kuch तोह गड़बड़ थी..

राहुल की कार निकलते hi सुप्रिया बालकनी से अंदर आ गयी और एक डैम से निढाल हो कर सोफे पर लेट गयी. आज के पूरे तमाशे ने उसकी पूरी एनर्जी खींच ली थी. बाप रे बाप, सब अचे से हो गया पर कितना मुश्किल था. उसके चेहरे पर जीत की एक ख़ुशी सी थी.

उसने जल्दी से मेघा को फ़ोन लगाया. मेघा के फ़ोन उठाते hi वह ख़ुशी में ज़ोर से बोली - मेघा.. वह चला गया abhi...oh गॉड...

मेघा उसकी आवाज़ सुन कर समझ गयी थी की सब ाचा hi हुआ था पर फिर भी पूछ बैठी - कैसा रहा सब?

सुप्रिया - बिलकुल जैसे आपने बोलै था सब वैसे hi हुआ… गज़ब हो आप भी!!

मेघा - गज़ब मैं नहीं तुम हो जो इतना कुछ हो जाने के बाद भी तुमने इतनी हिम्मत दिखाई…

सुप्रिया के सामने एक और कागज़ था जिसमे काफी सरे पॉइंट्स लिखे हुए थे - आपने बहुत अचे से समझाया था मुझे..

मेघा - ाचा, इसका मतलब फिर तोह ाचा से तड़पाया होगा तुमने अपने ासिक को…

सुप्रिया - आप भी न, फिर वही शुरू हो गए.... पर हाँ सच बोलू तोह उसकी शकल देखने लायक थी.

मेघा - Bechara...bahut गलत किया तुमने उसके साथ..

सुप्रिया - ाचा... आप किसकी साइड हो.. उसकी या मेरी?

मेघा हस्ते हुए - अब पता चला न कैसा लगता है किसी मर्द का अपनी वश में करके...

सुप्रिया - मैं तोह अभी भी नहीं समझ पा रही की मैंने कैसे कर लिया ये सब…

मेघा - हर लड़की ये कर सकती है, बस कॉन्फिडेंस चाहिए थोड़ा sa...pehli बार करके थक गयी होंगी?

सुप्रिया - सच में... अभी ऐसा लग रहा है जैसे अभी गिर जयुंगी..

मेघा - आराम करो फिर तुम अब... हम कल बात करते है...

मेघा ने फ़ोन रख दिया. सुप्रिया के चेहरे पर अभी भी एक बड़ी सी स्माइल थी. सामने कागज़ पर कुछ ऐसा लिखा था:

1. आँखों में आँख दाल कर बात करनी है

2. सामने वाले को सरप्राइज कर दो, कुछ ऐसा करो जो उसने सोचा भी न हो

3. अपनी आवाज़ कभी स्वीट और कभी सेक्सी बना कर बात करो, जैसी सिचुएशन हो

4. उसके सामने बुद्धू बन जायो, जैसे उसे hi सब आता हो

5. पर जब जरूरत हो तोह उसके साथ बिलकुल स्ट्रिक्ट भी हो जायो

और भी बहुत कुछ लिखा था, जिसने सुप्रिया की आज काफी मदद की थी. सुप्रिया ने कागज़ को मोड़ कर संभल के रख लिया. वह सच में काफी थक गयी थी और वहीँ सोफे पर उसकी आँख लग गयी. आज उसे डर नहीं लग रहा था...
 
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