Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 42 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Update likhneper to focus kar hi raha hu dost, kyuki agar aisa nahi hota ki main kewal like ke ya comment ke liye hi likhta to kabhi kabhi band kar deta, halanki kaafi baar man me aaya, per sath me ye bhi socha ki aap jaise 2-3 pakke Reader hain jo meri story ke liye aate hain, unke sath na insaafi na ho, is liye likh hi raha hu, and aapko jaankar khusi hogi ki maine 250 tak Update likh liye hain. Aur time mila to aaj raat hi ek aur post karunga.

Bilkul sahi kah rahe ho bhai. Yahi ho raha hai. Aajkal jyadatar ko bas sex chahiye. 😐 main wo sab likhta nahi, kyuki ye sab to koi bhi likh leta hai, but aise story har koi nahi likh sakta.

Thank you very much for your appreciation bhai. Haan maanta hu ki Reader kam hain, lekin 2 saal ki mehnat ko adhuri nahi chhodunga,

Thank you bhai. Hum tab tak likhenge jab tak aap sath ho, don't worry about Update :hug:

Aisa mat bolo bhai, aap bhi likho, and apni story ko complete karo. Site ke halaat sudharte hi readers bhi laut aayenge. Hum sab kosis kar rahe hain day by day.🫡
 
#216.

अगाध प्रेम: (20,100 वर्ष पहले......पोसाईडन महल, ऐजीयन सागर, ग्रीक प्रायद्वीप)

नीले रंग के समुद्र के जल में नोफोआ, अपने मगरमच्छ पर बैठा, तेजी से पोसाईडन महल की ओर जा रहा था।

नोफोआ, पोसाईडन का एक जलीय गुप्तचर था, जो सागर में घटने वाली किसी भी अजीब घटना को पोसाईडन तक पहुंचाता था। इसलिये पोसाईडन, नोफोआ को सागर की आँख भी कहता था।

देखने में हल्के हरे रंग का नोफाआ, कई जलीय जंतुओं से बना विचित्र जीव लगता था।

उसके हाथ की उंगलियों के बीच मेढक के समान जालीदार संरचना व कान के पीछे मछलियों की भांति गलफड़, उसे पानी में भी आसानी से साँस लेने में मदद करते थे।

पानी के बड़े से बड़े जीव भी नोफोआ को देख अपना रास्ता बदल देते थे। कुछ ही देर में नोफोआ, समुद्र की तली में बने पोसाईडन महल तक जा पहुंचा।

पोसाईडन महल पूरी तरह से मूंगे, मोतियों और कुछ सुनहरी धातुओं से बना हुआ था। उस विशालकाय महल की भव्यता, समुद्र में भी ग्रीक देवताओं की शक्ति का बखान कर रही थी।

नोफोआ मगरमच्छ से उतरकर, हर बार की तरह घंटा बजाकर, पोसाईडन के दरबार में पहुंच गया।

इस समय पोसाईडन अपने समुद्री रत्न जड़े सिंहासन पर विराजमान था। पोसाईडन के घुंघराले बाल पानी में लहरा रहे थे। पोसाईडन की पोशाक भी पानी में अपनी स्वर्णिम चमक बिखेर रही थी। नोफोआ, पोसाईडन के सामने सिर झुकाकर खड़ा हो गया।

“आज तो बहुत दिनों के बाद आये नोफोआ। बताओ क्या समाचार लाये हो?” पोसाईडन की तेज आवाज वातावरण में गूंजी।

पोसाईडन की आवाज सुन नोफोआ ने अपना सिर ऊपर उठाया और फिर धीरे से बोला - “ऐ समुद्र के देवता, कल जब मैं दक्षिण अटलांटिक महासागर में घूम रहा था, तो मैंने एक स्थान पर पानी में कुछ हलचल होते महसूस किया। उस तेज हलचल की तरंगें तो मेरे शरीर से स्पर्श कर रहीं थीं, परंतु मुझे उस स्थान पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था? मैंने उस स्थान को छूकर देखा, तो मुझे बिजली का एक तेज झटका लगा।.....मुझे महसूस हुआ कि वहां पर कोई अदृश्य गोल चीज उपस्थित है, जिसमें अपूर्व शक्ति भरी हुई है।

“अभी मैं उसके बारे में सोच ही रहा था कि तभी मुझे उस स्थान पर, लहरों में कुछ अजीब सी आकृतियां बनती-बिगड़ती दिखाई दीं। उन आकृति यों को देखकर मैं हैरान रह गया क्यों कि सभी आकृतियां वाद्य यंत्रों की थीं। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अदृश्य स्थान किसी संगीतज्ञ का है और वह वहां पर अलग-अलग प्रकार के वाद्य यंत्रों की रचना कर रहा है। मेरे लिये यह सभी घटनाएं किसी आश्चर्य से कम नहीं थीं, इसलिये मैं यह सब आपको बताने चला आया।” इतना कहकर नोफोआ चुप हो गया और सिर झुकाकर पोसाईडन के अगले आदेश की प्रतीक्षा करने लगा।

नोफोआ के शब्द सुन पोसाईडन के चेहरे पर भी आश्चर्य के भाव उभर आये।

“ठीक है नोफोआ, मैं तुम्हारे साथ स्वयं उस स्थान पर चलता हूं। जरा मैं भी तो मिलूं, उस विचित्र संगीतज्ञ से।” यह कहते हुए पोसाईडन अपने स्थान से खड़ा हो गया।

पोसाईडन अब चलता हुआ, दरबार में एक ओर रखे एक बड़े से ग्लोब के पास पहुंच गया। वह ग्लोब पूर्णतया पानी से बने पृथ्वी के एक मॉडल जैसा था, जो कि पानी में होकर भी अपनी अलग ही उपस्थिति दर्ज कर रहा था।

उस पानी के ग्लोब के पास, एक छोटी सी सोने की टेबल पर, लकड़ी में लगे कुछ लाल रंग के फ्लैग रखे थे। अब पोसाईडन ने एक बार नोफोआ की ओर देखा।

नोफोआ ने पोसाईडन का इशारा समझ, टेबल से एक फ्लैग को उठाया और उस पानी के ग्लोब पर, ध्यान से देखते हुए एक स्थान पर लगा दिया।

“यही वह जगह है देवता, जहां मैंने उस अद्भुत स्थान को देखा था।” नोफोआ ने कहा।

पोसाईडन ने ध्यान से उस जगह को देखा और फिर अपना त्रिशूल उठाकर पानी में घुमाया।

अब पोसाईडन के सामने उस ग्लोब का एक बड़ा रुप दिखाई देने लगा, जिसमें नोफोआ के चिन्हित स्थान पर एक जलद्वार दिखाई दे रहा था।

पोसाईडन ने नोफोआ को पीछे आने का इशारा किया और स्वयं उस जल द्वार में प्रवेश कर गया। पोसाईडन के जाने के बाद नोफोआ भी उस जल द्वार में प्रवेश कर गया।

उस जल द्वार का दूसरा हिस्सा, ठीक उसी स्थान पर निकला, जहां नोफोआ ने उस अद्भुत वाद्य यंत्रों को देखा था। अब नोफोआ और पोसाईडन ने उस स्थान का निरीक्षण करना शुरु कर दिया।

तभी पोसाईडन और नोफोआ को, समुद्र के अंदर किसी स्थान से, किसी वाद्य यंत्र की मधुर ध्वनि सुनाई दी।

उस मधुर ध्वनि को सुन दोनों ही चौंक गये। परंतु जैसे ही नोफोआ उस ध्वनि की दिशा में चलने को हुआ, पोसाईडन ने नोफोआ का हाथ पकड़कर उसे रोक लिया।

नोफोआ ने आश्चर्य से पोसाईडन की ओर देखा, परंतु पोसाईडन कुछ बोलने की जगह, अपने होंठो ही होंठो में कुछ बुदबुदाया। पोसाईडन के ऐसा करते ही पोसाईडन और नोफोआ दोनो ही पानी में अदृश्य हो गये।

नोफोआ समझ गया कि क्यों पोसाईडन ने उसे रोका था? अब दोनो ही उस ध्वनि की दिशा में चल दिये।

कुछ ही देर में दोनों को पानी में बहुत से विशाल वाद्य यंत्र तैरते हुए दिखाई दिये।

वह सभी वाद्य यंत्र आकार और प्रकार में साधारण वाद्य यंत्रों से कुछ अलग थे।

कोई बांसुरी, कोई शहनाई, कोई वायलिन, तो कोई पियानो जैसा प्रतीत हो रहा था। कुछ वाद्य यंत्र तो कई वाद्य यंत्रों का मिला जुला प्रतिरुप दिखाई दे रहे थे।

“यह तो बहुत ही विचित्र वाद्य यंत्र हैं....ऐसे वाद्य यंत्र तो हमने कहीं भी नहीं देखे?” पोसाईडन ने उन वाद्य यंत्रों को पास से जाकर देखा।

तभी उन्हें सुनाई देने वाली ध्वनि थोड़ी और तेज हो गई। उसे सुन पोसाईडन और नोफोआ, फिर से उस ध्वनि की दिशा में आगे बढ़ने लगे।

कुछ आगे जाने के बाद, दोनों को एक मछली का झुण्ड दिखाई दिया। सभी मछलियां अलग-अलग रंग और आकार की थीं।

उन सभी ने इस प्रकार वहां भीड़ लगा रखी थी, मानों कि दर्शक ओलंपिक के खेलों का आनंद उठाने आये हों।

वह वाद्य यंत्र की मधुर ध्वनि उन मछलियों के झुण्ड के बीच से ही आ रही थी। पोसाईडन और नोफोआ बिना किसी प्रकार की ध्वनि उत्पन्न किये धीरे-धीरे उस स्थान की ओर बढ़े।

पास पहुंचकर दोनों ने ही मछलियों के झुण्ड के बीच में झांककर देखा। बीच में देखते ही वह हैरान हो गये।

मछलियों के झुण्ड के बीच, एक गिटार सरीखा वाद्य यंत्र स्वयं पानी में बज रहा था और उसकी मधुर ध्वनि पर एक जलपरी और एक जलपुरुष नृत्य कर रहे थे।

उस अद्भुत नृत्य को देख, एक पल के लिये तो पोसाईडन भी कल्पनाओं में सागर में खो गया।

वह दोनों मेघवर्ण और लावण्या थे, जो कि इन अंजान नजरों से बेखबर, अपनी ही दुनिया में खोए हुये थे।

कभी पानी में एक दूसरे का हाथ पकड़कर गोल-गोल नाचना, तो कभी अपनी पूंछ को जल में पटककर बड़े बुलबुले बनाना। बड़ा ही विचित्र था उनका नृत्य, पर जो भी हो, दोनों इस नृत्य और वाद्य यंत्र की मधुर ध्वनि से बहुत ही आनंदित हो रहे थे।

आखिरकार पोसाईडन और नोफोआ ने प्रकट होकर, इस अद्भुत नृत्य का पटाक्षेप किया।

पोसाईडन और नोफोआ को देख सबसे पहले सभी दर्शक वहां से भाग गये। वह एक पल में समझ गये कि अब वहां रुकना खतरे से खाली नहीं है।

अब मेघवर्ण और लावण्या की निगाह भी पोसाईडन और नोफोआ पर पड़ चुकी थी। दोनों ही पोसाईडन को नहीं पहचानते थे, इसलिये आश्चर्य से उन्हें देख रहे थे।

सभी वाद्य यंत्र अब हवा में गायब हो गये। मेघवर्ण ने खतरा भांपते हुए लावण्या को अपने पीछे कर लिया।

“कौन हो तुम दोनों? क्या तुम्हें पता नहीं कि तुम इस समय किसके सामने खड़े हो?” नोफोआ ने आगे बढ़ते हुए कहा।

नोफोआ के शब्द सुन मेघवर्ण ने ‘ना’ में सिर हिला दिया।

नोफोआ और पोसाईडन दोनों के लिये ही ये आश्चर्य भरी बात थी, क्यों कि पानी में रहने वाला जीव और पोसाईडन को नहीं जानता। यह बात कहां दोनों के गले से उतरनी थी?

“तुम दोनों इस समय समुद्र के देवता, महाशक्तिशाली पोसाईडन के सामने खड़े हो। तुरंत झुककर इनका अभिवादन करो।” नोफोआ ने पोसाईडन के सम्मान में कसीदे पढ़ते हुए कहा।

पोसाईडन के शब्द सुन मेघवर्ण समझ गया कि खतरा बड़ा है। अतः उसने खतरे को भांपते हुए पानी में झुककर पोसाईडन का अभिवादन किया। मेघवर्ण को ऐसा करते देख लावण्या ने भी ऐसा ही किया।

“मेरा नाम मेघवर्ण और इसका नाम लावण्या है। हमें क्षमा करें देवता, हम सच में आपके विषय में नहीं जानते थे, अन्यथा हम आपका अपमान नहीं करते।” मेघवर्ण ने विनम्रता से कहा।

अब जाकर पोसाईडन को थोड़ा बेहतर महसूस हुआ।

“तुम दोनों के पास कौन सी शक्तियां हैं? जिससे तुमने इन वाद्ययंत्रों का निर्माण किया था।” पोसाईडन ने मेघवर्ण को देखते हुए पूछा।

“मेरे पास कोई शक्ति नहीं है देवता और इसका जन्म अभी होने के कारण इसे भी अपनी शक्तियों के बारे में कुछ पता नहीं है?” मेघवर्ण ने कहा।

मेघवर्ण के शब्द सुन अब पोसाईडन का ध्यान पूरा का पूरा लावण्या पर आ गया। अब वह लावण्या को देखते हुए बोला- “तो तुम्हें भी नहीं पता कि तुम्हारे पास क्या शक्ति है?...कोई बात नहीं, मैं स्वयं तुम्हारी

शक्तियों का स्रोत जान लेता हूं।”

यह कहकर पोसाईडन ने अपने हाथ में पकड़े त्रिशूल को पानी में गोल-गोल घुमाया। ऐसा करते ही उस स्थान का पूरा पानी, किसी भंवर की भांति गोल-गोल नाचने लगा और उस पानी के मध्य रखा, वह चमत्कारी सीप, काला मोती सहित नजर आने लगा।

पानी का नाचना अब बंद हो गया, परंतु पोसाईडन और नोफोआ की निगाहें अब काला मोती पर थीं, जो कि पानी में अपनी अद्भुत छटा बिखेर रहा था।

अब नोफोआ, काला मोती की ओर बढ़ा, पर जैसे ही वह कुछ आगे गया, उसे बिजली का तेज झटका लगा। इस तेज झटके से नोफोआ कुछ दूर जा गिरा।

“देवता, इस काला मोती के चारो ओर एक अदृश्य दीवार है, जिसे मैं पार नहीं कर पा रहा।” नोफोआ ने उठते हुए कहा।

अब पोसाईडन ने गुस्से से अपना त्रिशूल, मेघवर्ण के गले पर रखते हुए, लावण्या से कहा- “अब तुम स्वयं हमें लाकर वह काला मोती दोगी। समझ गई?....और अगर तुमने जरा सी भी चालाकी की तो मैं मेघवर्ण को मार दूंगा।”

मेघवर्ण के गले पर त्रिशूल देख, लावण्या की आँखें गुस्से से जल उठीं और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, हवा में एक विशाल दीवार उत्पन्न हुई और नोफोआ के ऊपर जा गिरी।

यह देख पोसाईडन ने गुस्से से अपने त्रिशूल की नोक, मेघवर्ण के गले में चुभा दी। मेघवर्ण के गले से एक तेज चीख निकली और खून की एक पतली लकीर, पानी में घुलने लगी।

“तुम काला मोती लाती हो कि मैं इसे मार दूं?” अब पोसाईडन ने अपना भयंकर क्रोध दिखाते हुए कहा।

लावण्या के चेहरे पर छाये क्रोध के भाव, मेघवर्ण का खून देखकर अब दर्द में परिवर्तित हो गये। लावण्या की आँखों से अब अश्रुधारा निकलकर समुद्र के पानी में मिलने लगी।

अद्भुत चमत्कार था, लावण्या के हर एक आँसू पानी में घुलते ही सफेद मोती में परिवर्तित हो जा रहे थे।

उधर नोफोआ भी किसी प्रकार से दीवार के नीचे से निकल आया था। नोफोआ को काफी चोट आई थी, फिर भी वह खड़ा हो गया।

लावण्या के चेहरे के आँसू देख, पोसाईडन ने एक बार फिर अपने त्रिशूल का दबाव मेघवर्ण के गले पर बढ़ाया। मेघवर्ण की एक बार फिर चीख निकल गई।

इस बार लावण्या पूरी तरह से घबरा गई। उसने पोसाईडन को रुकने का इशारा किया और आँसू बहाती हुई, काला मोती की ओर बढ़ गई।

लावण्या ने सीप के अंदर से फुटबाल के आकार का काला मोती उठा लिया। काला मोती के सीप से उठाते ही, वह अदृश्य सुरक्षा कवच स्वतः ही गायब हो गया।

सुरक्षा कवच को गायब होते देख, नोफोआ ने शीघ्रता दिखाते हुए लावण्या के हाथ से वह काला मोती ले लिया, पर जैसे ही काला मोती, पूरी तरह से नोफोआ के हाथ में गया, नोफोआ पत्थर का बन गया। यह देख पोसाईडन चौंक गया।

“लगता है कि तुम ऐसे नहीं मानोगी ....मुझे मेघवर्ण को मारना ही पड़ेगा।” पोसाईडन ने लावण्या को घूरते हुए कहा।

“नहीं ऽऽऽऽऽऽऽऽ रुक जाओ।” लावण्या ने चीखकर कहा और कातर दृष्टि से, दर्द से कराह रहे मेघवर्ण को देखने लगी।

लावण्या ने काला मोती को नोफोआ के हाथों से ले लिया। काला मोती को लेते ही नोफोआ फिर से अपने असली शरीर में आ गया, पर इस बार वह लावण्या से थोड़ा डरा-डरा सा दिखाई देने लगा।

अब लावण्या ने रोते हुए अपने हाथ में पहनी अंगूठी को नोफोआ को दे दिया और उसे इस अंगूठी को अपने हाथ में पहनने का इशारा किया। नोफोआ कुछ समझा तो नहीं, परंतु उसने उस सुनहरी अंगूठी को

अपने हाथ में पहन लिया।

जब नोफोआ ने अंगूठी को पहन लिया तो लावण्या ने फिर से काला मोती को नोफोआ के हाथ पर रख दिया, परंतु इस बार नोफोआ को कुछ नहीं हुआ? यह देख पोसाईडन समझ गया कि इस चमत्कारी अंगूठी को पहनने वाला इंसान ही इस काला मोती को धारण कर सकता है।

अब पोसाईडन ने मेघवर्ण के गले से अपना त्रिशूल हटा लिया और उसे लावण्या की ओर धकेल दिया।

लावण्या ने झपटकर मेघवर्ण को संभाल लिया और उसके गले पर बने जख्मों पर अपना हाथ रख दिया।

लावण्या की आँखों से अभी भी आँसुओं की अविरल धारा बह रही थी। इस समय उसे काला मोती के जाने का दुख नहीं था, उसे तो बस अपने मेघवर्ण की जान बच जाने की खुशी थी।

अब लावण्या ने आखिरी बार पोसाईडन को देखा और फिर मेघवर्ण को लेकर पानी में तैरती हुई, उस स्थान से दूर अनन्त सागर की गहराइयों में चली गई।

उधर पोसाईडन ने एक बार फिर जल द्वार उत्पन्न किया और नोफोआ को लेकर वापस अपने महल की ओर चल दिया।

जारी रहेगा_____:writing:
 
Sahi kaha bhai, ye posidan ekdum selfish hi nikla, bechare do pyar karne walo ke prem ka fayda utha kar kaala moti hasil kar liya:sigh:

Agar aisa na hota to kya wo us se ladke hasil kar sakta tha? Kyu ki kala moti ki sakti kamaal ki hain, aur wo us jalpari ke pas thi is samay. Khair abhi un dono ke baare me jyada kuch kah nahi sakta, abhi kuch socha nahi uske baare me.:shhhh:

Thank you very much for your wonderful review and support bhai :hug:
 
Haan haan, pata tha mujhe ki aap poori tIyaari ke sath aaoge :yes1:

अद्भुत :reading:

अद्भुत , अकल्पनीय , इतना ज्ञान इस छोटे से दिमाग मे कैसे संचित कर लेते हैं सरकार 🙇

लगता है कि फूफागिरी करने के लिए पूरी रिसर्च किया है आपने।:?:

आप सब से ही सीखा है सरकार 🙏🏼

ये पेंसिल मायावन मे ही मिली थी, जहां तरह-2 के रेत से बनें जीव जंतूओं ने क्रिस्टी और सुयश की टीम पर हमला कर दिया था। और वहीं पर एक नदी की तलहटी में क्रिस्टी को ये पेंसिल मिली थी जिसमें ये यक्ष रूपी जादूई रेत, आर्यन खी यादों के साथ थी।

वो उस राक्षसी के लिए नहीं बल्कि उस हथियार के अधीन होकर आए होंगे शायद।

ऐसा ना कहो भाई, आप सब के लिए ही तो हम इधर है।, रही बात लेखक की तो एक से एक है, बस फिलहाल एक्टिव नहीं।

नही भाई, ऐसा ना करो, साइट का दिक्कत थी, लेकिन अभी बेहतर है, और हम सब कोशिश कर रहें है।

मैं अच्छा हूॅ भाई साहब, आप ओर भाभी जी कैसे है? बच्चे कैसे है? ओर वहां मन तो लग रहा है ना?

आपके इस लाजवाब रिव्यू के लिए आपका बोहोत बोहोत धन्यवाद भाई :hug:
 
Haan haan, pata tha mujhe ki aap poori tIyaari ke sath aaoge :yes1:

अद्भुत :reading:

अद्भुत , अकल्पनीय , इतना ज्ञान इस छोटे से दिमाग मे कैसे संचित कर लेते हैं सरकार 🙇

लगता है कि फूफागिरी करने के लिए पूरी रिसर्च किया है आपने।:?:

आप सब से ही सीखा है सरकार 🙏🏼

ये पेंसिल मायावन मे ही मिली थी, जहां तरह-2 के रेत से बनें जीव जंतूओं ने क्रिस्टी और सुयश की टीम पर हमला कर दिया था। और वहीं पर एक नदी की तलहटी में क्रिस्टी को ये पेंसिल मिली थी जिसमें ये यक्ष रूपी जादूई रेत, आर्यन खी यादों के साथ थी।

वो उस राक्षसी के लिए नहीं बल्कि उस हथियार के अधीन होकर आए होंगे शायद।

ऐसा ना कहो भाई, आप सब के लिए ही तो हम इधर है।, रही बात लेखक की तो एक से एक है, बस फिलहाल एक्टिव नहीं।

नही भाई, ऐसा ना करो, साइट का दिक्कत थी, लेकिन अभी बेहतर है, और हम सब कोशिश कर रहें है।

मैं अच्छा हूॅ भाई साहब, आप ओर भाभी जी कैसे है? बच्चे कैसे है? ओर वहां मन तो लग रहा है ना?

आपके इस लाजवाब रिव्यू के लिए आपका बोहोत बोहोत धन्यवाद भाई :hug:
 
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