A wedding ceremony in village - Page 9 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

नाउ ी ऍम क्रिएटिंग इंडेक्स ऑफ़ थिस स्टोरी.

जिसमे 70 पेज तक की इंडेक्स बना चूका हु.

इससे नए जुड़ने वाले रीडर्स को स्टोरी पड़ने में आसानी होगी.

इसके अलावा जिनको जो चैरेक्टर पसंद है केवल उसके अपडेट पड़ने में आसानी होगी क्युकी मई इंडेक्स उनके नाम से बना रहा हु.

ी थिंक इससे रीडर्स को आसान रहेगा अपने हिसाब से अपने किरदार के अपडेट पड़ने में.

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आरती को वही छोड़ने के बाद नीतू और अघोरी शमशान भूमि की तरफ चल पड़े अघोरी के निवास की तरफ जहा अगले कुछ दिन उन्हें राज की जिंदगी के लिए एक तंत्र साधना करनी थी. रस्ते भर दोनों के मन में alag-alag विचार जन्म ले रहे थे. नीतू के मन में यही चल रहा था की वो अघोरी से ये कैसे कहे की उसे कोई ब्रह्मचारी नहीं मिला और जिसे वो अपना कौमार्य देना चाहती है वो और कोई नहीं खुद अघोरी है क्या अघोरी इसके लिए तैयार होगा अगर तैयार न हुआ तो वो उसे कैसे मनाएगी. दूसरी तरफ अघोरी के मन में आरती के साथ हुई घटनाओ ने अनेको सवाल पैदा कर दिए थे वो दो परछाईया किनकी थी उस दिव्या रुद्राक्षा का आरती से क्या सम्बन्ध है इन सवालों ने उनके मन को व्याकुल कर दिया था.

Apne-apne विचारो में खोया नीतू और अघोरी कब शमशान भूमि तक पहुँच गए उन्हें पता hi नहीं चला. वो दोनों अघोरी के घर में दाखिल हुए जहा उन्हें वो कामसाधना करनी थी.

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अघोरी- हम अपने साधना स्थल पर आ गए पर अभी तक तुम उस ब्रह्मचारी को नहीं ला पाई नियमानुसार तो उस ब्रह्मचारी को भी आज की विधि में भाग लेना चाहिए था.

नीतू- माफ़ करदे बाबा कल वो जरूर इस विधि में शामिल होगा बस मुझे कल तक का वक़्त दे दीजिये.

अघोरी- ठीक है आओ इस हवं कुंड के सामने बैठ जाओ.

नीतू और अघोरी ने उस हवन कुंड के पास बैठ गए. अघोरी ने उसमे अग्नि प्रज्वलित कर दी.

अघोरी- पहले हमने इस साधना का संकल्प किया की हम ये साधना अवश्य करेंगे किसी भी परिस्थिति में इस साधना को बीच में नहीं रोकेंगे और कल हमने शिव का रुद्राभिषेक करके काल साधना में महाकाल का आशीर्वाद लिया.

नीतू- जी

अघोरी- पर जब हम किसी जगह पर कोई काम करते है तो काम शुरू करने से पहले उस जगह के मालिक से उसकी अनुमति लेनी पड़ती है. है की नहीं

नीतू- जी बाबा वो तो है.

अघोरी- तो ये एक शमशान भूमि है यहाँ अनेको आत्माए वास करती है ये उनका निवास स्थान है वो यहां की मालिक है और हम यहाँ साधना करने जा रहे है वो भी एक काम साधना जिसमे एक स्त्री पुरुष का मिलान होगा. ऐसी जगह पर इस तरह की क्रिया के लिए इन आत्माओ की अनुमति होना बहुत जरूरी है.

नीतू- जी बाबा तो उनकी अनुमति लेने के लिए हमे क्या करना पड़ेगा.

अघोरी- आवाहन, उस हर आत्मा का आवाहन जो पिछले कई सालो से इस शमशान भूमि में निवास कर रही है उस हर आत्मा को हमें यहाँ बुलाना होगा. वो हर आत्मा इस हवन कुंड में आहुति डालेगी. ये आहुति एक अनुमति होगी उस क्रिया के लिए जो हम यहाँ करने वाले है.

आत्मा बुलाने की बात सुनते hi नीतू के रौंगटे खड़े हो गए. एक आत्मा hi हालत ख़राब करने के लिए काफी है और अघोरी शमशान की साड़ी आत्माओ को बुलाने की बात कर रहा था जिसे सुनकर किसी के रौंगटे खड़े हो जाना स्वाभाविक था.

नीतू- बाबा आत्मा बुलाएंगे आप ये जरूरी है क्या.

अघोरी- हां बहुत जरूरी है बिना उनकी अनुमति लिए तुम यहाँ ऐसा काम कैसे कर सकती हो अगर उस क्रिया के दौरान कोई आत्मा तुम पर मोहित हो गई या गुस्सा हो गई तो इसमें बीच में व्यवधान दाल सकती है. आत्मा बुलाने की बात सुनकर तुम्हे दर लग रहा है क्या.

नीतू- जी बाबा

अघोरी- चिंता मत करो मई तुम्हारे साथ हु यहां की हर आत्मा से मई परिचित हु मेरे रहते उनमे से कोई तुम्हे नुक्सान नहीं पहुंचाएगी भरोसा रखो.

नीतू- जी बाबा.

अघोरी- पर तुम्हे अपना कलेजा मजबूत करना होगा साधना का ये चरण बिलकुल भी आसान नहीं है जब वो आत्माए यहाँ आएंगी तो उन्हें देखकर मजबूत से मजबूत व्यक्ति को भी दर लग सकता है पर तुम्हे हिम्मत रखनी होगी मेरे रहते उनमे से कोई तुम्हे कुछ नहीं करेगी बस तुम हिम्मत मत हारना.

नीतू- जी बाबा.

नीतू ने अघोरी की हां में हां तो मिला दी की वो हिम्मत नहीं हारेगी पर वो hi जानती थी की अंदर से उसकी बुरी तरह फटी पड़ी थी. अघोरी ने हवन कुंड में आहुति डालना शुरू करदी.

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अघोरी- मशान में निवास करने वाली अच्छी बुरी सभी आत्माओ यहाँ आओ मैं तुम्हारा आवाहन कर रहा हु मेरे पास आओ यहाँ आकर हमें इस कामसूत्र साधना की अनुमति प्रदान करो. तुम सब जहा भी हो जिस हालात में भी हो मेरे पास आओ मई तुम सबका यहाँ आवाहन करता हु.

नीतू कभी हवन कुंड की जलती अग्नि को कभी आँख बंद करके उसमे आहुति डालते अघोरी तो कभी idhar-udhar के माहौल को देखती दर के मारे उसका बुरा हाल था उसका दिल jor-jor से dhak-dhak कर रहा था. भूत प्रेत पर विशवास ना करने वाली नीतू इस वक़्त भूतो की आहात से खौफजदा थी. जल्द hi उसका खौफ सच का आकर लेने लगा उस कमरे के माहौल बदलने लगा था वहां हवा का दबाव भारी होने लगा था कमरे का माहौल सार्ड होने लगा ठंडक बढ़ने लगी. कमरे के बहार कुत्ते और सियारो के भौकने रोने की आवाज़े आने लगी. कौवे jor-jor से काव काव करने लगे थे. कुत्ते और कौवो की आवाज़ों ने माहौल को और ज्यादा खौफनाक बना दिया था. अब नीतू को लग रहा था की यहाँ रहने आने का फैसला करके उसने कोई गलती तो नहीं करदी. दूर कही कुत्तो का एक झुण्ड ने आरती को चारो तरफ से घेर लिया था और उस शमशान में बरसो से निवास करने वाली एक आत्मा आरती और कुत्तो के बीच आकर कड़ी हो गयी थी.

अघोरी लगातार आहुति डाले जा रहा था और उस शमशान की निवासी सब आत्माओ का आवाहन कर रहा था. और उसके आवाहन पर आत्माओ का आना शुरू हो गया था.

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कुछ आत्माए धुए के आकर में थी कुछ का अक्सा धुंधला था तो कुछ का एकदम साफ़, कुछ आत्माए सौम्य थी तो कुछ उग्र.

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उस झोपडी में राखी चीजे हिलने लगी थी, नीतू की हालत पतली हो गई थी दर के मारे उसके मुंह से आवाज भी नहीं निकल पा रही थी. आत्माए उसके करीब से गुजर गुजर कर उस हवन कुंड के ऊपर आकर उसमे आहुतिया दाल रही थी.

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ज़िन्दगी भर भूतो पर भरोसा ना करने वाली नीतू ने सपने में भी नहीं सोचा था की एक रात में उसे इतने सारे भूतो के एक साथ दर्शन हो जाएंगे.

जिन आत्माओ के अक्सा साफ़ थे उन्हें देखना ज्यादा भयानक था किसीके माथे पर गोली लगी थी तो किसी का हाथ गायब, किसी के पेअर टूटे थे तो किसी के पेट में खंजर गदा था ऐसे वीभत्स रूप नीतू ने सपने में भी नहीं देखे थे.

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होर्रर फिल्मो की शौक़ीन नीतू के सामने आज जीती जागती होर्रर फिल्म चल रही थी.

ऐसा खौफनाक मंजर देख नीतू को उलटी आने को थी उसका दिमाग चकराने लगा था वो बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू रखे थी. अचानक एक आत्मा ने उसके बगल में आकर हवन कुंड में आहुति डाली. नीतू ने सर घुमाकर उसे देखा उसका सर गायब था गर्दन पर मांस का लोथड़ा नजर आ रहा था.

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Neetu kaa dimaag bhannaa gayaa isse jadaa vo khud par kaaboo nahi rakh sakti thi vo vahi havan kund ke bagal me ludak gai. Is maahaul ko dekh vo behosh ho gayi thi. Aghori aankh band kare ab bhi aahvan me vyast thaa shamashan ki lagabhag har aatmaa ne vaha aakar aavaahan kar diyaa thaa par abhi bhi koi thaa jiskaa aahuti denaa abhi baaki tha. Us shamashan se kaafi door abhai raichand un kutto ko kaal banaa huaa thaa aur rudraakshaa me kaid us aatmaa ko lalkaar rahaa tha. Abhai behosh aarti ko uthaakar vahaan se nikal gayaa pichhe chhod gayaa vo bajarangi rudraakshaa jisme kaid vo saayaa baahar aane ke lie chhatpataa rahaa tha.

Idhar aghori kaa aavaahan use shamashan ki taraf khinch rahaa tha. Aghori ke mantro ki shakti ne us bajarangi rudraakshaa ko apni taraf kheenchna shuru kar diya. Wo rudrakshaa hava me udtaa huaa us shamashan bhoomi ki taraf khichha chalaa jaa rahaa thaa aur saath me usme kaid vo saayaa bhi.

Aghori us aakhiri aahuti ko apni taraph kheench rahaa thaa aur vo rudraakshaa khichhaa huaa aghori ki taraph chalaa jaa rahaa thaa। aghori ne havan kund me ek aur aahuti daali aur achaanak se koi cheej uske hatheli par aakar giri. Aghori ne apni aankhen kholi aur us bajarangi rudraakshaa ko apne haatho me dekh vo chaunk pada.

Aghori- Ye rudraakshaa ye to mainne us kanya aarti ko diyaa thaa uski rakshaa ke lie, ye is tarah apne aap mere paas kaise aa gaya. Mai to is shamashan ki nivaasi aatmaao kaa aavaahan kar rahaa thaa matalab jaroor is rudraaksha me koi aisi aatmaa kaid hai jo is shamashan ki nivaasi hai. Shaayad yahi vo saayaa hai jo aarti ke peechhe padaa thaa jiskaa mujhe aabhaas ho rahaa thaa aur shaayad raaste me isne aarti par hamlaa karaa hogaa aur aarti ne bachaav me ye rudraaksha is par phenk maara aur ye aatma isme kaid ho gayi. Achhaa huaa ab mai is aatmaa ko baahar nikalakar ise iski uddandta kaa achha sabak sikhaa dunga.

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Aghori ki najar saamne behosh padi neetu par padi vo samajh gayaa ki un aatmaao ke aavaahan par unke vibhatsaa roop dekhakar neetu behosh ho gai. Par abhi aakhiri aahuti baaki thi aur uske lie is aakhiri aatmaa ko is rudraakshaa se aazad karnaa jaruri tha. Aghori ne zameen par ek tantraa ghera banaaya aur us rudraakshaa ko us ghere me rakh diyaa aur phir kuchh mantraa budbudaane lagaa aur phir ek phoonk us rudraakshaa par maari। us rudraakshaa me kampan hone lagaa aur ek jhatke ke saath vo rudraakshaa do khand me vibhaajit ho gayaa aur usme kaid saayaa us rudraakshaa se baahar aa gaya.

Par us rudraakshaa ki kaid se baahar aate hi vo ek doosri kaid me fas gaya. Us tantra ghere ki kaid me jo aghori ne zameen par banaaya tha. Wo saaya vaha se nikaalne ki bharasak koshish kar rahaa thaa par har koshish bekaar thi. Ek siddha aghori ke banae hue tantra ghere ko tod kar baahar aana us aatmaa ke lie aasaan kaam nahin tha.

Aghori- Teri baahar aane ki har koshish bekaar hai dusht aatmaa. Kaun hai tu, tu vahi hai naa jo us kanyaa aarti ke pichhe pada thaa use pareshaan kar rahaa tha.

Sayaa- Jaane de mujhe aghori jaane de apni maut ko daavat mat de. Jaane de mujhe jald se jald kahi pahunchnaa hai jaane de mujhe varnaa tujhe mujhse koi nahi bachaa paegaa.

Aghori- Tu mujhe maregaa lagtaa hai tune mujhe koi chhotaa motaa gali kaa baaba samajh liyaa hai mai aghori hun aghori aur abhi main tujhe dikhataa hu ki kaun kise khatam kartaa hai.

Aghori ne mutthi me bhabhoot uthaakar us sae par phenki vo saayaa dard se tilamilaa utha.

Aghori- Kyaa huaa nikal gai saari hekdi. Bahut badi-badi baate kar rahaa thaa kyaa huaa ab nahi maregaa mujhe maar naa mujhe.

Saayaa- Kyaa bigaada hai maine tumhaara kyo baandh rakhaa hai tumne mujhe. Jaane do mujhe, mujhe kisiko bachaane jaanaa hai koi saalo se intejaar kar rahaa hai mera.

Aghori- Hai kaun tu tujhe pehle to kabhi is shamshaan me nahi dekhaa main saalo se is shamshan me reh rahaa hun yaha rehne vaali har aatmaa ko jantaa hun tumse kabhi kaise nahin mila.

Saya- Kyuki main barso se kisi ke tanraa jaal me kaid tha. Is shamashan ke kone me rakhi vo chattaan barso se mujhe apne andar kaid kare hue the isilie tum kabhi mujhe dekh nahin pae.

Aghori- Kaid the kabse kaid the aur kisne kaid karaa tumhe ho kaun tum, aur us ladki ke peechhe kyon pade ho.

Saayaa- Main uske peechhe nahi padaa thaa balki use ek bahut bade khatre se bachane ki koshish kar rahaa thaa aur agar tumhaara vo rudraakshaa beech me naa aataa to main use bachaa bhi leta.

Aghori- Bachanaa chaahte the par kisse.

Sayaa- Bataaungaa sab bataaungaa main jantaa hu tum ek nek bande ho par tumhe bhi mujh par bharosaa karnaa hogaa aur mujhe is tantraa se aajaad karnaa hoga.

Aghori- Theek hai par meri bhi ek shart hai tumhe is havan kund me aahuti daalni hogi is ladki ke premi ki rakshaa ke lie main yaha saadhnaa karne vaalaa hu jiske lie mujhe is shamashan ki har aatmaa se aahuti chaahie kyuki tum bhi barso se yahaan kaid ho to tum bhi yahaan ke nivaasi hue isilie tumhe bhi isme aahuti daalni hogi.

Saayaa- Daalunga mai jaroor isme aahuti daalungaa par pahle mujhe aazad karo.

Aghori- Theek hai mai tumhe aazad kar rahaa hu par dhyan rakhnaa koi hoshiyaari mat karna. Dhyaan rakhnaa jab mere haath me bandha ek rudraakshaa tumhe kaid kar saktaa hai to mai khud kyaa kar saktaa hu.

Saayaa- bharosaa rakho mujh par.

Aghori- Theek hai

Aghori ne phirse kuchh mantraa jaap karaa aur vo gheraa zameen se majtaa diya. Wo saayaa us kaid se aajaad ho gaya.

Aghori- Chalo ab pehle is hawan kund me aahuti daalo uske baad tumhaare baare me baat karte hai.

Us sae ne havan kund me aahuti daal di. Aahuti yagya purna ho gayaa aghori ko neetu ki kaam saadhna ke lie vahaa maujood har aatmaa ki sehamati mil gai. In sabse bekhabar neetu vahaan behosh padi thi. Par is waqt neetu se bhi jaadaa mahatvapurnaa shakshaa aghori ke saamne thaa vo saayaa aarti abhai ki trikoni kahaani kaa tisraa kon.

Aghori- Ab bataao mujhe apne baare me kaun ho tum. Par usse pehle mai tumhaara chehraa dekhnaa chaahta hu tumhaari vaastavik shakla. Isilie tumhe is parachhaai se baahar laanaa hoga.

Aghori ne bhabhoot ko haath me lekar kuchh mantraa pade aur vo bhabhoot us sae par phenk di. Ab tak ek havaa banaa aur kaali parachhaai saa dikhtaa vo saaya apnaa vaastavik aakar lene laga, Tha to vo ab bhi ek aatmaa par ab vo aatmaa vo roop leti jaa rahi thi jo uskaa marne se pehle kaa roop tha. Pairo se hote hue dheeme dheeme us aatmaa kaa asli roop saamne aataa jaa rahaa tha.

Aghori- Ab bataao tumhaaraa naam kyaa hai.

Wo saayaa ab apne asli roop me aghori ke saamne khdaa tha.

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“अजय, मेरा नाम है अजय, अजय थे स्टार”
 
नीतू का ये सन सोस्सिप की कहानी का लिखा जा चूका सन है तो जो लोग वह ये सन पहले hi पद चुके है कृपया इस सन से दूर रहे और बेवजह ये पुराणी पोस्ट क्यों डाली रीडर को बेवकूफ बना रहे हो ये सब करके अपना हुए मेरा समय वास्ते न करे.

इसके लिए मई आपका ह्रदय से आभारी रहूँगा.
 
लालू के कमरे में

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शबाना आज साडी दुनिया को भूलकर तन मन से खुद को लालू को सौप कर उसी के आगोश में उसके ऊपर लेते लेते सो रही थी. जीवन में पहली बार उसे किसी मर्द ने उससे एक औरत होने का असली एहसास दिया था उसे अंदर तक पूरी तरह संतुष्ट कर दिया था. इस संतुष्टि के एहसास की वजह से शबाना वो साडी बर्बरता वो साडी घिनौनी हरकते जो लालू ने उसके साथ की थी वो सब भूल गई और अपना सब कुछ लालू को सौप दज्य.

लालू शबाना को अपनी बहो में जकड़े था उसके दोनों हाथ शबाना की पीठ पर थे अचानक शबाना को अपने नंगे चूतड़ों पर एक हाथ सहलाता महसूस हुआ. शबाना इस कदर चुदाई और नींद की खुमारी में डूबी थी की उसे ये लालू के hi हाथ लगे. अगले पल उसे दो हाथ अपने दोनों चूतड़ों पर घुमते महसूस हुए.

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जिसे महसूस करते hi शबाना ने आँखे खोल दी. लालू के हाथ अब भी उसकी पीठ पर थे दो हाथ नीचे उसके चूतड़ों पर घूम रहे थे. शबाना ये सोच hi रही थी की एक तीसरा हाथ शनाना के चूतड़ों की दरार में अपनी ऊँगली दाखिल करने लगा. अब ये तै था की ये लालू नहीं कर रहा कोई और है जो उसके पीछे खड़ा है. और ये पता चलते hi शबाना अचानक से हड़बड़ा कर उठ बैठी. शबाना के अचानक से यु हड़बड़ा कर उठने से लालू की भी आँख खुल गई.

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उठने के बाद शबाना ने तुरंत पीछे घूम कर देखा की पीछे उसके चूतड़ों को सहलाने वाला शिक्षा कौन है और पीछे देखते hi उसके होश उड़ गए. पीछे एक दो नहीं बल्कि तीन लोग थे, लालू के तीनो दोस्त देव कुंदन प्रताप उसे इस तरह लालू के सीने पर नंगा लेते देख कर मुस्कुरा रहे थे, उन तीनो के हाथ में मोबाइल और वो तीनो अपनी दांत दीखताते हुए इस नंगी हालत में शबाना का वीडियो बना रहे थे फ़्लैश मार मार कर उसकी फोटो खींच रहे थे.

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देव

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कुंदन

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प्रताप

शबाना को जैसे hi अपने नंगेपन का एहसास हुआ वो लालू के ऊपर से उठ कर कड़ी हो गई और अपने नंगेपन को ढकने के लिए कुछ ढूंढ़ने लगी. उसका बुरखा उन तीनो के पीछे ज़मीन पर पड़ा था और उनके पास जाकर वो उठाने में उसे दर लग रहा था. तो वो वही बिस्तर के बगल में अपने हाथो से अपने नंगेपन को ढकने की नाकाम कोशिश करते हुए ज़मीन पर बैठ गई.

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वो तीनो लगातार शबाना की मजबूरी पर है रहे थे उसका इस मजबूर हालत को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर रहे थे.

कुंदन: देखो देखो हवेली में रात अलग अलग मर्दो के कमरों में जाकर धंदा करने वाली ये रुंडी कैसे बड़ी शरीफ बनने की नौटंकी कर रही है.

उन तीनो को कमरे में देख लालू भी हड़बड़ा कर उठ बैठा.

लालू: तुम तीनो यहाँ तुम लोग तो फार्महाउस गए थे ये अचानक से यहाँ कैसे आ गए.

प्रताप: वाह लालू यार दिखा दिया न अपनी असली रंग हमे वह फार्महाउस में भेज दिया उस नाचने वाली चांदनी के पास और यहाँ खुद इस नै रुंडी के साथ मज़े कर रहा था. हमे भूल गया.

देव: ऐ लालू आज तक गांव के हर नए माल के उद्घाटन में हम साथ रहे हर रुंडी की चुदाई साथ में करि और आज तू अकेले अकेले ये मज़ा लूट रहा था. वो तो बीच रस्ते में हमे उसका फ़ोन आया की उसके पेअर में मोच आ गई है इसलिए वो आज मुजरा नहीं कर पाएगी तो वापस आ गए वर्ण हमे ये सब पता hi नहीं चलता.

लालू: चुप रहो तुम सब ये कोई बाज़ारू रुंडी नहीं है एक शरीफ औरत है.

कुंदन: कितनी शरीफ है वो तो दिख रहा है तेरे कमरे में अपने सारे कपडे उतर कर नंगी तेरे लोडे पर लेती थी सच में बड़ी शरीफ है कसम से शराफत तो टप्प टप्प टपक रही है.

अचानक परतप की नज़र बिस्तर पर बने खून के धब्बो पर पड़ी.

प्रताप: ओह भाई लोग ये देखो इसकी शराफत का सबूत देखो बिसयार पर पड़ा है वो देखो.

कुंदन: ओह तेरी ये तो सील बंद बोतल थी अपने भाई ने ओपनिंग करि है इसीलिए हमे यहाँ से तर्क दिया, पर ये ठीक बात नहीं थी तुझे ओपन करना था तो तू ओपन कर लेता हम मिडिल आर्डर में खेल लेते भाई.

देव: ऐसा मस्त चिकता गदराया बदन देख कर मई तो टैलेन्डर में भी खेलने को तैयार था.

कुंदन: था था क्या कर रहा है, अभी कौन सी रात बीत गई है अब खेल लेते है.

वो तीनो अपने लुंड मसलते हुए शबाना की तरफ बड़े, शबाना दर के सेहम गई की जो काम पहले नहीं हुआ वो अब उसे अब होता नज़र आ रहा था उसका गैंगबैंग. वो तीनो शबाना की तरफ बड़े hi थे की लालू उनके सामने आकर खड़ा हो गया.

लालू: रुक जाओ मेरे रहते तुम ये सब नहीं कर सकते.

शबाना लालू का ये रूप देख कर हैरान थी की लालू उसे बचने के लिए अपने hi दॉतो के खिलाफ जा रहा है.

कुंदन: देख भाई लालू बहुत हुआ तूने हमे बेवकूफ बना कर यहाँ से भेज दिया चल कोई बात नहीं पर अब हमारे और इसके बीच मत आ.

लालू: शबाना सिर्फ लालू की है प्यार करता हु मई इसे और मेरे अलावा कोई इसे कोई हाथ भी नहीं लगाएगा.

लालू के मुँह से ये अलफ़ाज़ सुन कर शबाना को अपने कानो पर यकीन नहीं हो रहा था की कल रात को उसका बंग करने वाला आज उसे बचने के लिए खड़ा है अपने प्यार की बात कर रहा है.

देव: नहीं नहीं भाई ऐसे नहीं चलेगा ये तय नहीं हुआ था हमारे बीच. तूने कहा था की ख़रबूज़ा कटेगा तो सबमे बटेगा. अब तू अपनी बात से पलट रहा है.

लालू: है कहा था पर अब मुझे इससे प्यार हो गया है और अब मई इसके साथ और गलत नहीं कर सकता.

शबाना चुपचाप खुद को छुपाए उनकी बाटर सुन रही थी और लालू की बाते सुनकर उसके बारे में उसके विचार भी अब बदल रहे थे.

प्रताप: ये नहीं चलेगा जो पहले डीडे हुआ था वही होगा.

लालू: मेरे रहते हुए तो नहीं.

देव: देख तूने उसके वीडियो के दम पर उसे ब्लैकमेल करा है और अब इसकी फोटो वीडियो हमारे पास भी है तो हम भी बहार सबको बता देंगे.

देव की बात सुनकर शबाना दर गई की कही ये तीनो उसके वीडियो बहार न दिखा दे.

लालू: उस वक़्त उसे बचने वाला कोई नहीं था पर अब इसे बचने के लिए मई हु. और क्या तुम तीनो में मिलकर इतनी हिम्मत है की तुम मुझे हटाकर इस तक पहुंच पाओ. ये तो तीन चार दिन में चली जाएगी उसके बाद तुम्हे मेरे साथ hi रहना है. क्या चार दिन की चांदनी के लिए तुम मुझसे दुश्मनी मोल लोगे.

लालू की ये धमकी सुन वो तीनो एक दुसरे का मुँह देखने लगे क्युकी लालू को क्रॉस करने की हिम्मत उन तीनो में नहीं थी.

कुंदन: अरे भाई लालू तू तो बुरा मान गया भाई क्या करे चांदनी का डांस देखने गए थे और उस साली का पेअर मुद गया तो मूड ऑफ हो गया अब यहाँ इसे नंगा देखा तो नियत ख़राब हो गई.

लालू: तो अपनी नियत को काबू में रखो.

कुंदन: चल हम इसके साथ कुछ नहीं करेंगे न इसकी फोटो वीडियो बहार दिखाएंगे पर इसके बदले में कुछ तो हमे भी मिलना चाहिए, थोड़ा तो हमारे बारे में भी सोचो.

लालू: ये घुमा फिरा कर मुझसे मत बोलो जो कहना है साफ़ साफ़ कहो.

कुंदन: तो भाई साफ़ साफ़ सुनले हम इसे हाथ भी नहीं लगाएंगे पर इसे भी हमारी गर्मी शांत करनी होगी अब चांदनी तो मुजरा करने की हालत में है नहीं तो इसे एक रात के लिए हमारी चांदनी बनना होगा. उसकी तरह हमारे सामने मुजरा करना होगा.

कुंदन की बात सुनकर शबाना का कलेजा धक् करके रह गया. वो उसे एक नाचने वाली की तरह मुजरा करने को कह रहा था. लालू ने नज़रे घुमा कर दरी सेहमी बैठी शबाना को देखा जो लालू को बड़ी उम्मीद से देख रही थी.

लालू: इसे मुजरा करना नहीं अत.

देव: उसकी फिक्र तू मत कर चांदनी है न उसके मोच आई है पेअर नहीं टूटा वो इसे सीखा देगी ये कल का पूरा दिन उसके यहाँ चली जाए तो वो रात तक उसे अच्छा खासा मुजरा करना सीखा देगी.

लालू: ये उसके यहाँ कैसे जाएगी यहाँ सबको क्या कहेगी.

देव: वो हम नहीं जानते अब ये तू सोच अब इतना तो करना पड़ेगा.

लालू ने आगे बाद कर ज़मीन पर पड़ा वो बुरखा उठाकर शबाना को लेकर दे दिया. शबाना ने बिना देर किये उस बुरखे से अपने जिस्म के नंगेपन को धक् लिया.

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लालू: जा तू बाथरूम में जाकर अपने पहले वाले कपडे पेहेन ले मई इन लोगो को समझने की कोशिश करता हु.

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शबाना चुपचाप बाथरूम में चली गई और वह अपना अभी का पहना हुआ बुरखा उतर कर टांग दिया और पहले वाला गाउन पहने लगी. गाउन पेहेन्ने के दौरान भी उसे बहार से लालू और उसके तीनो दोस्तों के बीच होती बेहेस की आवाज़े साफ़ सुनाई दे रही थी. लालू लगातार उन्हें समझने की कोशिश कर रहा था पर वो तीनो अपनी बात पर अड़े थे. अपने पहले वाले कपडे पेहेन कर शबाना बाथरूम से बहार आ गई, उसके बहार आते hi कमरे में ख़ामोशी छ गई. इस ख़ामोशी को तोड़ते हुए लालू उसके करीब आया और उसके हाथ को अपने हाथ में लेकर बड़े प्यार और अपनेपन से उसे समझने लगा.

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लालू: देख मैंने इन तीनो को समझने की बहुत कोशिश की पर ये मैंने को तैयार नहीं है.

लालू की बाते शबाना की बेचैनी बड़ा रही थी.

लालू: देख अगर मैंने इनपर ज्यादा दबाव डाला तो कही ये गुस्से में बहार सब कुछ न बक दे तेरे फोटो वीडियो बहार न दिखा दे.

शबाना की धड़कने तेज़ तेज़ चल रही थी.

लालू: देख सुन बस एक डांस की बात है अगर तू इनके सामने मुजरा करदे तो ये बात यही ख़तम हो जाएगी.

शबाना: पर....

लालू: देख समझा कर बस एक रात के डांस की बात है फिर तू अपने रास्ते ये अपने रास्ते और ये तेरे साथ कुछ नहीं करेंगे इसकी गारंटी मई लेता हु. और रही तुझे मुजरा सीखने की बात तो वो हमारी एक फवौरीते नाचने वाली है चांदनी वो तुझे मुजरा करना सीखा देगी. बस तुझे मेरे साथ उसके यहाँ चलना होगा वो तुझे एक दिन मर परफेक्ट मुजरा सीखा देगी. और नाचना तो तुझे पहले से आता है डांस पार्टी में क्या गज़ब नाचा था.

शबाना: बात अगर सिर्फ नाचने की hi है तो उसके लिए नाचने वाली के यहाँ जाने की क्या ज़रूरत मई ऐसे hi डांस कर दूंगी.

लालू: तू समझी नहीं यहाँ डांस की बात नहीं हो रही मुजरे की बात हो रही. तुझे पता है चांदनी किस टाइप का मुजरा करती है.

शबाना: किस टाइप का.

लालू: स्ट्रिप मुजरा. जिसमे नाचने वाली पहले तो पुरे कपडे पेहेन कर आती है पर एक एक करके अपने कपडे उतरती जाती है जब तक की वो पूरी तरह नंगी न हो जाए.

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लालू की ये बात सुनकर शबाना के पैरो टेल ज़मीन खिसक गई, एक बार मुजरा करना था तब भी ठीक था उसने खुद को मेंटली तैयार कर भी लिया पर स्ट्रिप मुजरा की बात सुन कर उसके होश उड़ गए.

शबाना: नहीं नहीं मई ये नहीं कर सकती.

लालू: देख फिर अगर ये लोग कुछ उल्टा सीधा करदे तो मुझे मत कहना. मई इन्हे जितना समझा सकता था समझा चूका तूने देखा है. ये तेरे साथ कुछ नहीं करेंगे मई ज़बान देता हु. जैसे अभी इन्हे कुछ नहीं करने दिया कल भी नहीं करने दूंगा. और नंगा तो तुझे अभी भी देखा है. चल फिर भी तुझे नंगे होने की टेंशन है तो एक बार बात करता हु इनसे.

लालू वापस उन तीनो से मुकजातिब हुआ.

लालू: देखो ये मुजरा करने को तैयार है पर कपडे उतरने में नंगा होने इसे दिक्कत है.

कुंदन: नहीं नहीं नहीं ये तो करना hi पड़ेगा नहीं तो फिर वो मुजरा कहा रह जाएगा. अगर बात सिर्फ डांस देखने की hi है तो पुरे साल टीवी में कई डांस शो आते रहते है वो देख लेंगे. अपने को मुजरा देखने का है मुजरा, नंगा वाला मुजरा जिसमे नाचने वाली हिला हिला कर अपने दूध हिलती है अपनी गांड दिखती है वो वाला मुजरा. अगर इसे चलता है तो ठीक वर्ण अभी साडी हवेली को यही इकठ्ठा करते है.

लालू: देख समझा कर पहली बार है उसका थोड़ा तो समझो तुम लोग.

कुंदन देव प्रताप आपस में बात करते हुए: चल ठीक है तू अपुन का भाई है तो सिर्फ तेरे लिए इसे पूरा नंगा नहीं करेंगे अपनी जन्नत का खज़ाना ढकी रह ये. यानि अपनी छूट चड्डी नहीं उतरवाएँगे इसकी पर बाकी सारे कपडे उतरने होंगे एक एक करके. पर हम इसे ये छूट मुफ्त में नहीं देंगे इसके बदले में इसे भी कुछ करना होगा.

लालू: क्या

कुंदन: इसे हम तीनो को दारू पिलानी होगी वो भी हमारे स्टाइल में.

लालू: हुए ये तुम्हारा स्टाइल क्या है.

कुंदन: साड़ी बाते यही जान लोगे तो कल के लिए क्या छोड़ोगे, कुछ बाते कल के लिए भी छोड़ दो. पूछ लो अपनी आइटम से मंजूर है ये या बुलाए हवेली वालो को यहाँ.

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लालू फिर शबाना से मुखातिब हुआ.

लालू: तूने सुन लिया न इनकी बाते चल तुझे नंगा होने की टेंशन थी तो वो भी बात कर्ली तुझे चड्डी नहीं उतरनी होगी. अब ज्यादा मत सोच मान जा भरोसा कर मुझ मई भी रहूँगा वह तेरे साथ मेरे रहते ये तेरे साथ कुछ नहीं कर पाएंगे.

शबाना के पास कुछ कहने को बचा hi नहीं सरे फैसले तो लालू और उसके दोस्तों ने आपस में मिलकर hi कर लिए थे.

लालू: फिलहाल तू अपने कमरे में जा कल देखते है क्या करना है तुझे चांदनी के पास किस तरह ले जाना है. ज्यादा टेंशन मत ले सारा टेंशन मुझ पर छोड़ दे.

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लालू शबाना को लेकर दरवाज़े तक आया और दरवाज़ा खोल दिया. शबाना चुपचाप कमरे से निकल कर अपने कमरे की तरफ चल दी. सब तरफ सन्नाटा था सब सो चुके थे. वो अपने कमरे तक पहुंची उसने दरवाज़े को हल्का सा धक्का दिया hi था की दरवाज़ा खुल गया. अंदर नेहा बिस्तर पर नहीं थी. नेहा को बिस्तर पर न पाकर शबाना ने उसे आवाज़ लगाई. अंदर बाथरूम में उस गहरी चुदाई के बाद वही पर नंगी लेती शबना की आवाज़ सुन कर हड़बड़ा कर उठ बैठी. इतनी देर में उसका दर्द भी कुछ कम हो गया था. नेहा ने वही बाथरूम में तांग्ज टॉवल से खुद को पोछा और वही टॉवल लपेट कर बहार आ गई.

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नेहा को यु रात के 3 बजे बाथरूम से नहाकर निकलता देख शबाना भी हैरान थी.

शबाना: तू इस वक़्त नाहा रही थी.

नेहा: है वो गर्मी लग रही थी तो सोचा नाहा लू.

नेहा शबाना दोनों कपडे चेंज करके बिस्तर पर एक दुसरे की तरफ पीठ करके लेट गए क्युकी वो दोनों अपने मन के भाव एक दुसरे को नहीं दिखाना चाहते थे.

नेहा: शबाना दी कैसा रहा सब.

शबाना: नेहा फिलहाल मई बहुत थक गई हु इस बारे में कल बात करे.

नेहा: है थक तो वैसे मई भी बहुत गई हु चलिए कल बात करते है फिर.

शबाना: तू तो यही कमरे लेती थी तू किस्मे थक गई.

नेहा ने मन में सोचा: अब क्या बताऊ मई इन्हे मई किस चीज़ में थक गई. आपके धमाकेदार अपडेट को टक्कर देने के लिए एक धमाकेदार परफॉरमेंस वाला अपडेट दिया था पर साला सेंसर बोर्ड ने उस पर कैची चला दी. मेरी तो इस वक़्त वो हालत है की खाया पिया कुछ नहीं और गिलास तोडा बारह आना. ढंग से चलने की हालत में भी नहीं रही और अपडेट भी काट पीट दिया गया. (खैर मेरे रीडर्स जिन्होंने मेरा अपडेट पड़ा था वो तो जानते HI है की मई क्यों थकी हु. मई उन बिजली के झटको और उस बड़े वाले डिलडो की बात कर रही हु क्या आप लोग भी कुछ भी सोचते रहते हो).

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नेहा: कुछ नहीं वो आपके जाने के बाद थोड़ा योग एक्सरसाइज कर्ली थी उसी वजह से थक गई थी.

Shabana:Achha चलो ठीक है सो जाओ कल बात करते है. गुड नाईट

नेहा: Ok गुड नाईट

उन्हें नहीं पता था की उन्होंने अपने पिछले दो उपदटेस कितने लोगो की नाईट गुड की थी. कितने लुँडो ने उनके उपदटेस पड़के अपना दही बहार निकला होगा. अगर उन लुँडो की ज़बान होती तो उनके पिछले से असीम संतुष्टि पाने के बाद उनके अंदर से बस यही आवाज़ आती.

लुँडो की दुआए लेती जा

जा तुझको मस्त चुदाई मिले

तेरी छूट का भोसड़ा बन जाए

और पीछे से गांड मरै मिले

उन दोनों ने एक दुसरे को गुड नाईट तो कह दिया पर वो दोनों hi अपने अपने विचारो में खोई थी. नेहा जहा उस स्ट्रेंजर के बारे में सोच रही थी जो कुछ उसके साथ हुआ उसके बारे में सोच रही थी वही शबाना अपने कल के आने वाले दिन के बारे में सोच रही थी कल के मुजरे के बारे में सोच रही थी धामु से जो कहानी शुरू हुई थी वो लालू से होते हुए अब उसे तीनो दोस्तों तक पहुंच गई थी इस बारे में सोच रही थी. पता नहीं आने वाला दिन उन्हें और क्या क्या दिखने वाला था.

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दूसरी तरफ शबाना के जाने के बाद लालू के कमरे में

शबाना के निकलने के बाद लालू जैसे hi दरवाज़े की कुण्डी लगाकर वापस पलटा उसके तीनो दोस्त गायब थे, उसने नज़रे नीचे करके देखा तो तीनो उसके पैरो में सर झुकाए बैठे थे.

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लालू: अबे अब ये क्या नया ड्रामा है.

देव: आपका आशीर्वाद ले रहे है महाप्रभु. आप महँ हो शक्तिमान हो, आप ज्ञानी hi अन्तर्यामी हो, मई तो कहता हु आप पुरुष hi नहीं हो महापुरुष हो महापुरुष.

लालू: ड्रामा बंद करो और चुपचाप खड़े हो.

तीनो उठ कर खड़े हो गए.

लालू: और ध्यान रहे मई उससे प्यार करता हु मई तुम तीनो को उसके साथ कुछ नहीं करने दूंगा.

कमरे में अचानक से सन्नाटा छ गया लालू गुस्से में उन्हें घूर रहा था और वो तीनो एक दुसरे का मुँह टाक रहे थे. दो मिनट वह ऐसे hi ख़ामोशी छै रही फिर अचानक वो चारो खिलखिला कर है पड़े. चारो पेट पकड़ कर हसे जा रहे थे.

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देव: हाहाहाहा सेल ये क्या था भाई.

प्रताप: हेहेहेबेहे भाई बन्दे ने इतनी ज़बरदस्त एक्टिंग करि की एक बार तो मुझे भी लगने लगा की लगता है अपना लालू सुधर गया है.

देव: हहाहाबा भाई वो क्या बोलै था इसने माँ इससे प्यार करने लगा हु और मेरे रहते तुम लोग इसे कुछ नहीं कर सकते. भाई क्या सच में प्यार करने लगा है उसे.

लालू: अगर मई लाइफ में एक लड़की को प्यार करूँगा तो बाकियो का क्या होगा बाकि बुरा नहीं मान जाएगी.

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देव: हाहाहाहा भाई पता रीडर्स ने तो तुझे देव मानुस मान लिया था. बवाल मच गया था इस स्टोरी में की इस स्टोरी का एक इकलौता विल्लन भी सुधर गया अच्छा बन गया. पसंद करने लगे थे वो तुझे.

लालू: इतना hi पसंद आ गया हु मई उन्हें तो मेरा लुंड मुँह में ले ले.

कुंदन: अब तू अपने यार की तरह बात कर रहा है.

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लालू: अरे हम तो इस कदर बिगड़े है की हमे सुधरने वाले खुद बिगड़ जाएंगे. मई वो दूध नहीं हु जिसे लोग जब चाहे एक नया रूप दे दे कभी खोया कभी पनीर कभी मक्खन कभी लस्सी, मई तो वो एक चम्मच दही हु जो किसी दूध के भरे भगौने में गिर जाए तो पूरा दूध फाड़ कर अपने जैसा बना दे.

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कुंदन: पर भाई फिर ये सब था क्या तूने क्यों सुधरने का ड्रामा करा.

प्रताप: है ये हम भी जानना चाहते है और सारे रीडर्स भी.

देव: हम्म पहले तूने हमे यहाँ से भेजा और कहा की कुछ देर बाद तू जब हमे मिस्स्कॉल दे तब हम यहाँ आ जाए और यहाँ आकर ये सब ड्रामा करे. पर क्यों तुझे उसके सामने अच्छा बनने की क्या ज़रूरत थी वो तो वैसे भी तेरे सामने घुटनो पर थी तू जो कहता वो करती फिर ये सब.

लालू: अबे चुतियो तुम लोगो ने मेरे साथ इतनी औरते छोड़ी है फिर भी आज तक तुम किसी औरत को समझ नहीं पाए. हम ज़ोर ज़बरदस्ती करके ब्लैकमेल करके किसी औरत के तन को तो चुदाई के लिए मज्ब्बूर कर सकते है पर उसके मन को नहीं. और चुदाई का असली मज़ा तब hi मिलता है जब उसमे तन और मन दोनों की सहमति हो. तुम लोगो को पता है कल रात जब मैंने उसका बंग करा तो मई चाहता तो वही उसकी चुदाई कर सकता था पर मैंने नहीं की आज सुबह जब मैंने उसके ऊपर मोटा उससे ज़बरदस्ती अपना लुंड चुसवाया तब भी मुझे वो मज़ा नहीं आया जो मज़ा मुझे इस बार की चुदाई में मिला क्युकी इस बार वो तन और मन दोनों से मुझसे चूड़ी है. तुम लोगो को पता है आज उसने खुद मेरे चेहरे को अपने मुम्मो पर दबाया खुद अपनी मर्ज़ी से अपने मम्मी मुझसे चुस्वाए, खुद अपना बुरखा ऊपर करके मुझस अपनी गांड पर मुट्वाया और सबसे बड़ी बात खुद से अपनी मर्ज़ी से नंगी होकर मेरे लुंड पर आकर बैठी और उछाल उछाल कर मेरा लुंड अपनी छूट में लिया मई बस बादशाहो की तरह उसके नीचे लेता रहा और फिर पूरी तरह संतुष्ट होकर मेरे सीने पर सर रख कर सो गई. अब जरा सोचो क्या अगर मई उसे मजबूर करके उसे छोड़ता तो क्या मुझे चुदाई का वो मज़ा मिलता जो अभी मिला.

देव: है बात तो तेरी सही है मज़ा तो औरत को उसकी मर्ज़ी से छोड़ने में hi है पर फिर तूने हमे वापस क्यों बुलाया और उसको छोड़ लेने के बाद ये सब एक्टिंग करने की वजह. चुदाई तो तू कर hi चूका था फिर अब उसके सामने अच्छा बनने की क्या ज़रूरत थी.

लालू: तुम लोगो ने कभी शिकार करा है पता है शिकार करने का असली मज़ा कब अत है शिकार को भगा भगा कर उसका शिकार करने में. पहले उसे ये यकीन दिलाया जाए की उसकी जान बच सकती है और जब उसे यकीन हो जाए की वो सेफ है तब उसका शिकार करने का. मैंने भी उसे यकीन दिलाया है की मई उसे बचा लूंगा और जब उसे मुझ पर यकीन हो जाएगा मई उसके पैरो टेल की ज़मीन खींच लूंगा. मैंने उसके आंसू इसलिए पोछे है ताकि उसे इससे भी ज्यादा बुरी तरह रुला सकू.

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एक बार फिर कमरे में सन्नाटा छ गया. लालू की ये सोच ये विकृत मानसिकता को देख उसके दोस्तों को भी दर लगने लगा था.

प्रताप: भाई तू उसे इतना ज्यादा टॉर्चर कर रहा है तुझे दर नहीं लगता की कही उसने कुछ कर लिया तो.

लालू: करती है तो कर ले मुझे न उसके जीने से फ़र्क़ पड़ता है न उसके मरने से. पता है क्यों, क्युकी मई इंसान नहीं हु मई हैवान हु. और जिन लोगो को लगता है की हैवान सुधर सकता है अच्छा बन सकता है उनकी सोच को इक्कीस तोपों की सलामी. और वैसे भी तुम लोगो ने कहा था न की ख़रबूज़ा कटेगा तो सबमे बटेगा तो कल रात ये ख़रबूज़ा तुम लोगो का. कल मई उसके और तुम लोगो के बीच नहीं आऊंगा तुम लोग जो चाहे उसके साथ कर सकते हो. बस ध्यान रहे उसके चीखने की आवाज़े रुकनी नहीं चाहिए. और है उस नचनिया चांदनी को बोल देना कल तैयार रहे कल उसे एक शरीफ ज़हीन औरत को एक पक्की रुंडी बनाना है.

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लालू: सबके सामने झापड़ मारा था न उसने मुझे वो झापड़ उसे कितना मंहगा पड़ेगा इस बात का उसे अंदाजा भी नहीं है. कुछ भी करने का था रे सिंघम जयकांत शिकडे का ईगो हर्ट नहीं करना था. अब कल रात वो साली रोएगी चीखेगी चिल्लाएगी और हम सब करेंगे.

ो सकीय सकीय रे सकीय सकीय

आ पास आ रह न जाए कोई ख्वाहिश बाकी

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शबाना बेशक कल के बारे सोच कर थोड़ा चिंतित थी पर लालू के इस बदले हुए रूप ने कही न कही उसके मन में आशा की एक उम्मीद भी जगा दी थी, उसे लगने लगा था की शायद सच में लालू के दिल में उसके लिए एक सॉफ्ट कार्नर बन गया है. और वो सच में उसे कुछ नहीं होने देगा. शबाना का दिल बड़ा मासूम था और इसी मूमियत की वजह से वो शराफत का नक़ाब के पीछे छुपे लालू के हैवानी चेहरे को नहीं देख प् रही. शबाना थोड़ा hi सही पर लालू पर भरोसा करने लगी थी उसे अंदाज़ भी नहीं था की उसी लालू ने उसके लिए कितनी खौफनाक योजना बना राखी है. लोगो पर बड़ी जल्दी भरोसा कर लेने वाली मसोसम शबाना खान का कल जीवन की कठोर सच्चाई से सामना होने वाला था की औरत को बस एक उपभोग की चीज़ और अपने पेअर की जूती समझने वाले विक्रत मानसिकता वाले इंसान की ंजयात और फितरत इतनी आसानी से नहीं बदलती और ऐसे लोगो पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता.

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अब तक शबाना का हर तरह से शोषण करने वाले लालू ने अब शबाना को तश्तरी में सजा कर अपने दोस्तों के सामने परोस दिया था. लालू ने शबाना के गैंगबैंग की पूरी रूपरेखा तैयार कर्ली थी अब देखना ये था की इस योजना को वो शातिर शिकारी किस तरह अमल में लता है और क्या शबाना एक बार फिर खुद पर होने वाले इस शारीरिक और मानसिक आघात को बर्दाश्त कर पाएगी. इन सभी सवालो का जवाब इस कहानी सातवे दिन में मिलने वाला था.
 
कब्रिस्तान में

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वो साया अपने असली रूप में उस अघोरी के सामने था.

अघोरी: अजय स्टार ये किस तरह का नाम है. भला स्टार भी किसी का उपनाम होता है.

अजय: ये मुझे नहीं पता की मेरा ये नाम क्यों पड़ा पर ये मेरा नाम है ये मुझे याद है.

अघोरी: मई इस शमशान में कई वर्षो से यहाँ रहने वाली हर आत्मा को महसूस कर सकता हु पर कभी तुम्हारी मौजूदगी का मुझे एहसास नहीं हुआ किस कब्र में दफ़न थे तुम.

अजय: वो बड़ी सी चट्टान जो इस कब्रिस्तान के आखिरी कोने में राखी थी मई उसी में कैद था.

अघोरी: वो चट्टान जो उस रात बिजली से दो खंड में विभाजित हो गई.

अजय: है वही चट्टान.

अघोरी: भला कोई आत्मा किसी चट्टान में कैसे कैद हो सकती है और तुम्हे कैद किसने करा और क्यों.

अजय: ये मुझे याद नहीं की मई वह कैसे कैद हुआ किसने कैद करा मुझे. ऐसा लगता है जैसे मेरी यादो पर भी किसीने कोई भरी चट्टान रख दी लाख कोशिश के बावजूद भी मुझे कुछ याद नहीं आ प् रहा.

अघोरी: खैर तुम उस लड़की के पीछे क्यों पड़े थे क्या यहाँ देखकर मोहित हो गए थे उसपर.

अजय: नहीं बात सिर्फ मोहित होने की नहीं है बात इससे कुछ अलग है मई उसे जनता हु.

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अघोरी: अभी तुमने कहा की तुम्हे कुछ याद नहीं फिर तुम उसे कैसे जानते हो.

अजय: कुछ चीज़े यादो से परे होती है अभी आपने कहा की आप यहाँ रहने वाली आत्माओ को महसूस कर सकते है उसके साथ वो प्यार वो अपनेपन वो मुहोब्बत का रिश्ता मई महसूस कर सकता हु.

अघोरी: वो यहाँ की है hi नहीं बहार की है तो तुम उसे कैसे प्यार कर सकते हो.

अजय: मई इस जनम की बात नहीं कर रहा पिछले जनम की बात कर रहा हु.

अघोरी: एक तरफ तुम्हे कुछ याद नहीं और दूसरी तरफ तुम्हे ये याद है तुम उसे पिछले जनम से प्यार करते हो. वाह

अजय: हम्म सुनने में अजीब है पर यही सच है मुझे पहले का कुछ याद नहीं पर मुझे ये याद है की मेरा नाम अजय स्टार था मुझे ये याद है की उस लड़की का नाम पिछले जनम में मंजरी था और इसके अलावा बस एक नाम मेरे ज़हन में घूमता रहता है.

अघोरी: कौनसा नाम

अजय: अभय, अभय रायचंद

अघोरी: अभय रायचंद कौन है ये अभय रायचंद.

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अजय: मई नहीं जनता मई कुछ नहीं जनता मई जितना उसके बारे में याद करने की कोशिश करता हु उतना मई दर्द से तड़प उठता हु. बस मुझे इतना याद है की अभय रायचंद hi वो वजह था जिसके कारन मई और मंजरी पिछले जनम में अलग हुए और अब वो फिर से वापस आ गया है. आज़ाद होने के बाद मैंने उसकी मानसिक तरंगो को आरती की तरफ बढ़ते हुए महसूस करा था और मैंने उन्हें रोकने की हर संभव कोशिश भी की थी पर आपकी वजह मेरी हर कोशिश बेकार हो गई आपकी वजह से मई अपनी मंजरी को उस अभय रायचंद से न बचा सका.

अघोरी: मेरी वजह से मैंने क्या करा.

अजय: आपका ये रुद्राक्ष इसने मुझे अपने अंदर कैद कर लिया हुए जब वो अभय मेरी आँखों के सामने मेरी मंजरी को ले जा रहा था मई कुछ न कर सका.

अघोरी: ले गया कहा ले गया कब अभी कुछ देर पहले तो हम उसे सही सलामत छोड़ कर आए थे.

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और अजय अघोरी को कुछ देर पहले घाटे उस कुत्तो वाले पुरे घटनाक्रम को बताता चला गया जिसे सुनकर अघोरी का मुँह खुला का खुला रह गया. और उसे अफ़सोस भी हो रहा था की क्यों उसने आरती को वह अकेला छोड़ा. काश वो आरती को हवेली तक छोड़ अत तो ऐसा न होता. इसके अलावा अजय ने उस अभय का जैसा वर्णन करा था वो समझ से परे था क्युकी जो कुछ अजय ने बताया वो एक आम इंसान के लिए नामुमकिन था. हुए अभय जैसे किसी असाधारण व्यक्ति के बारे में अघोरी ने यहाँ कभी नहीं सुना था. पर अघोरी भी एक महँ तांत्रिक था जिसने यहाँ बैठे राज का एक्सीडेंट महसूस कर लिया था तो अभय रायचंद को ढूंढ़ना उसके लिए क्या बड़ी बात थी. और इससे उस साए अजय की सच्चाई भी सामने आ जाएगी. इसलिए अघोरी ने अपनी तंत्र शक्ति से अभय का पता लगाने का सोचा. अघोरी ने ज़मीन में एक तंत्र घेरा बनाया और अजय को उसमे खड़ा होने को कहा.

अघोरी: तुम यहाँ खड़े हो जाओ.

अजय: क्यों क्या आप फिर कैद करना चाहते है.

अघोरी: नहीं जैसा तुम बता रहे हो मई उस अभय को देखना चाहता हु उसका पता लगाना चाहता हु ताकि हमे आरती का पता चल सके. इस घेरे के अंदर मई तुंहारी कुछ पल पहले की यादो को टटोलुंगा और देखूंगा जैसा तुम कह रहे हो वो सच है की नहीं. अगर तुम झूट बोल रहे हो तो दुबारा इस घेरे से बहार नहीं आ पाओगे और अगर तुम सच बोल रहे हो तो तुम्हारी यादो में वो अभय भी मौजूद होगा और एक बार तुम्हारी यादो के ज़रिये मई उस अभय तक पहुंच गया तो वो आरती को कहा ले गया है उअका पता भी कर लूंगा. और आरती मिलने के बाद hi ये फैसला करेंगे की वो तुम्हारी मंजरी है की नहीं. बोलो है हिम्मत इस घेरे में खड़े होने की.

अजय: मई सच बोल रहा हु और साबित करने के लिए मुझे किसी घेरे में खड़े होने की ज़रूरत नहीं पर अगर बात मंजरी को ढूंढ़ने की है मई कुछ भी करने को तैयार हु.

अजय उस घेरे में खड़ा हो गया और अघोरी ने अजय पर भभूत फेकते हुए कुछ मंत्र पड़ना शुरू कर दिया. अघोरी अजय की यादो को टटोलने लगा जब वो आरती को जंगल में छोड़ कर आया था और आरती पर कुत्तो ने हमला करा और अजय ने बीच में आकर आरती को बचाया पर आरती ने दर के मारे उसे hi रुद्राक्ष में कैद कर दिया. यहाँ तक तो सब ठीक था पर जैसे hi उन यादो में वो उस मुकाम पर पंहुचा जहा अभय रायचंद आया था अघोरी को तेज़ झटका लगा की लड़खड़ा कर ज़मीन पर गिर पड़ा. अघोरी का दिमाग उस झटके से घूम गया कुछ पल तो उसे उठा भी नहीं गया जब वो थोड़ा नार्मल हुआ और वापस खड़ा हुआ तब उसने अजय को उस घेरे से बहार निकला. अभय को देखने के हलके से प्रयास ने उसका ये हाल करा तो उसे ढूंढा तो उसके बस के बहार की बात है. पर इस झटके ने उसे इतना यकीन दिला दिया की अजय जो कह रहा है वो सच है. और अभय रायचंद नाम का ये शिक्षा कोई मामूली शिक्षा नहीं है और आरती उसीके पास है. और उस ढूंढ़ने और आरती को बचने के लिए उसे कुछ गैरमामूली करना होगा जिसके लिए उसे किसी असाधारण शिक्षा की ज़रूरत होगी.

अघोरी: ये अभय रायचंद जो कोई भी है मेरी पहुंच से बहार है इस ढूंढ़ने और इसे काबू करने के लिए तुम्हे मुझसे भी बेहतर तांत्रिक चाहिए और अकेले तो उससे भिड़ने का सोचना भी मत. वो कोई साधारण शिक्षा नहीं है.

अजय: भला ऐसा तांत्रिक मुझे कहा मिलेगा.

अघोरी: इन जंगलो के दुसरे छोर पर उन आदिवासियों के कबीले में. वो आदवासी तंत्र विद्या के महँ ज्ञाता है मैंने खुद तंत्र ज्ञान उन्हीसे सीखा है. पर आम जनमानस उनसे डरने लगा था इसलिए उन आदिवासियों ने प्राण लिया की वो कभी आम लोगो के छेत्र में नहीं आएँगे और न यहाँ से कोई वह जाता है. इस मामले में वो hi तुम्हारी मदद कर सकते है. मई खुद तुम्हारे साथ चलता पर मैंने इस कन्या के साथ ये साधना पूरी करने का संकल्प करा है इसलिए मई नहीं जा सकता िसलजये तुम्हे hi वह जाना होगा.

अजय: ठीक है मई अभी वह जाता हु.

अघोरी: ठहरो उनके छेत्र में प्रवेश इतना भी आसान नहीं होगा खासकर एक आत्मा का. वो तुम्हे एक पल में तंत्र जाल में फसा लेंगे.

अजय: फिर मई क्या करू.

अघोरी: तुम ये खंडित बजरंगी रुद्राक्ष ले जाओ, ये मुझे उस कबीले के सबसे बड़े तांत्रिक और मेरे गुरु ओसका ने दिया था. ये रुद्राक्ष उन्हें दिखा देना वो सब समझ जाएंगे और तुम्हारी मदद भी करेंगे.

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अजय: आपका बहुत बहुत शुक्रिया.

अघोरी: एक बात का ख्याल और रखना.

अजय: क्या

अघोरी: सूर्य के प्रकाश में उनके छेत्र में प्रवेश मत करना वर्ण सूर्य और तंत्र के सम्मिलित प्रभाव से तुम भस्म भी हो सकते हो इसलिए वह रात में प्रवेश करना.

अजय: पर अभी तो सूर्योदय होने वाला है इसका मतलब मुझे रात तक इंतज़ार करना होगा.

अघोरी: इसके अलावा तुम्हारे पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है. अगर तुम भस्म हो गए तो उस कन्या को कैसे बचाओगे. और बिना आदिवासियों की मदद के तुम उस अभय का सामना नहीं लार पाओगे. इसलिए किसी पेड़ पर बैठ कर रात होने का इंतज़ार करो और सूर्यास्त के बाद उनके छेत्र में प्रवेश करना.

अजय: ठीक है मई सूर्यास्त तक का इंतज़ार करूँगा. चलता हु मदद के लिए शुक्रिया.

अघोरी को धन्यवाद कर अजय वह से निकल गया और उस शिव मंदिर के पास hi एक पीपल के पेड़ पर बैठ कर सूर्यास्त होने का इंतज़ार करने लगा.

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वही साधना स्थल पर अघोरी बेहोश पड़ी नीतू को होश में लाया पर उसने उसे जानबूझ कर आरती के बारे में नहीं बताया वर्ण वो परेशां हो जाती जिससे आगे की पूजा में विघ्न पद जाता.

नीतू: माफ़ करियेगा बाबा उन आत्माओ को देख कर मई बेहोश हो गई.

अघोरी: मई समझ सकता हु ऐसे दृश्य रोज़ रोज़ हमारे सामने नहीं आते खैर हमारी आहुति साधना संपन्न हुई उस कब्रिस्तान की साडी आत्माओ ने इस साधना में आहुति दाल दी है. अब तुम यही दरी बिछाकर आराम करो मई बहार लेट जाऊंगा.

अघोरी बहार जाने को हुआ पर नीतू ने उसे आवाज़ देकर रोक लिया.

नीतू: बाबा रुकिए इस डरावनी सढ्ना के बाद मई यहाँ अकेले नहीं लेट सकती मुझे दर लगेगा.

अघोरी: मैंने तुम्हे पहले hi कहा था की यहाँ रुकने में तुम्हे दिक्कत होगी चलो ठीक है मई तुम्हे हवेली तक छोड़ अत हु.

नीतू: जी नहीं बाबा मुझे यहाँ रुकने में दिक्कत नहीं है यहाँ अकेले लेटने में दर लग रहा है बस. वो भी आत्माओ की वजह से.

अघोरी: डरने की कोई बात नहीं है मई बहार hi हु मेरे रहते कोई अंदर नहीं आएगा.

नीतू: आपके लिए कोई बात नहीं है आपके लिए ये एक आम बात है पर मेरे लिए नहीं.

अघोरी: फिर बताओ मई इसमें क्या कर सकता हु.

नीतू: अगर आप बुरा न मने तो क्या आप यही मेरे साथ मेरे पास लेट सकते है. आप मेरे करीब होंगे तो मुझे दर नहीं लगेगा.

नीतू की ये बात सुन कर अघोरी को समझ नहीं आया वो क्या कहे. उसने आज तक कभी किसी स्त्री को अपने करीब नहीं आने दिया था और नीतू ने उससे अजीब रिक्वेस्ट की थी.

अघोरी: ये आप क्या कह रही है मई एक अघोरी हु और आप एक कुंवारी कन्या मई आपके साथ कैसे लेट सकता हु.

नीतू: क्या सोच रहे है बाबा मई आपसे कुच्ग गलत नहीं कह रही hi बस आपसे अपने करीब लेटने की रिक्वेस्ट कर रही हु वो भी सिर्फ इसलिए क्युकी कुछ देर पहले हुई बातो की वजह से मुझे अकेले में दर लगेगा. आप मेरी तरह से सोच कर देखिये जिसने आज तक एक भूत न देखा हो उसे एक साथ इतने भूत देखने को मिले तो उसका डरना स्वाभाविक है.

अघोरी को भी नीतू की बात सही लगी की उसका डरना स्वाभाविक है. और थोड़ा सकुचाते हुए उसने भी हामी भर दी.

अघोरी: ठीक है आप उधर लेट जाओ मई यहाँ लेट जाता हु.

अघोरी अपनी दरी झोपडी के दुसरे कोने में बिछाने लगा पर नीतू ने उसे ऐसा करने से भी रोक दिया.

नीतू: अगर आप उतनी दूर लेटेंगे तो बात तो वही रहेगी यहाँ साधना के दौरान तो आप मेरे सामने बैठे थे तब भी दर के मारे मई बेहोश हो गई. अगर कही रात में मुझे ज्यादा दर लगा तो कही दर के मारे मेरे दिल की धड़कन hi न रुक जाए और सुबह आपको मेरा बेजान शरीर मिले.

नीतू की इस बात से अघोरी चिंतित हो गया की कही सच में ऐसा हो गया तो वो खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाएगा. इसलिए बड़े भरी मन के साथ अघोरी अपनी दरी लेकर नीतू के करीब आ गया. और नीतू की दरी के बगल में hi अपनी दरी बिछा ली. नीतू भी खुश थी की अघोरी इसके लिए मान गया क्युकी उसे तो ये पूजा उसके साथ hi पूरी करनी थी और वो भी अघोरी जैसे शिक्षा को सडके करके. और अगर उसे ऐसा करना है तो उसे ये सब आज hi से शुरू करना होगा. अघोरी के मन में प्रेम के बीज का बीजारोपण आज रात से hi करना होगा.

नीतू: बाबा गर्मी बहुत है अगर आप बुरा न मने तो मई साड़ी उतर दू इतने कपड़ो में मुझे बहुत गर्मी लग रही है.

अघोरी नीतू की बात से सकपका उठा पर गर्मी तो वास्तव में बहुत थी और हवन की अग्नि ने कमरे का तापमान और बड़ा दिया था इसलिए नीतू का परेशान होना स्वाभाविक था और वो खुद भी तो बस एक लंगोट में था फिर वो नीतू से इतने सरे कपडे पेहेन्ने की उम्मीद कैसे कर सकता था. इसके अलावा अपनी नेक नियत की वजह से वो नीतू की मंशा नहीं समझ रहा था या उसने समझने का प्रयास hi नहीं किया.

अघोरी: ठीक है जैसा आपको ठीक लगे.

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अघोरी से सहमति मिलते hi नीतू ने साड़ी को अपने जिस्म से उतर कर वही ज़मीन पर रख दिया, अब वो अघोरी के सामने बस पेटीकोट ब्लाउज में थी. थोड़ा संकोच और झिजक तो अब नीतू के मन में थी क्युकी वो राज के अलावा पहली बार किसी पुरुष के बारे में ऐसा सोच रही थी.

नीतू चुपचाप बिना कुछ बोले वही दरी पर लेट गई. अघोरी भी नीतू के बगल में चुपचाप लेट गया. कुछ देर दोनों यही पीठ के बल चुपचाप लेते रहे फिर अघोरी करवट लेकर नीतू की तरफ पीठ करके लेट गया. नीतू के तो सारे अरमानो पर पानी फिर गया. उसने सोचा की अगर अघोरी यही उसकी तरफ पीठ करके लेता रहा तो वो उसे अपनी तरफ आकर्षित करने की शुरुआत कैसे करेगी. इसके अघोरी का उसे देखना उसे छूना बेहद ज़रूरी है.

नीतू: बाबा मेरी तरफ करवट कर लीजिये न आप इस तरफ करवट करके लेटेंगे तो मुझे भी फील होगा की आप मुझे देख रहे है और मई सेफ हु.

अघोरी नीतू की ये बात भी चुपचाप मान गया और उसने नीतू की तरफ करवट कर्ली और नीतू भी उसकी तरफ करवट करके लेट गई. अब अघोरी और नीतू का चेहरा एक दुसरे के सामने था. अपनी बात मानने पर नीतू अघोरी की तरफ देखकर हलके से मुस्कुरा दी अघोरी ने प्रत्युत्तर में स्माइल देदी. मुस्कुराते हुए नीतू ने अपनी आँखे सोने को बंद करि जिस पर अघोरी ने अपनी आँखे बंद कर्ली. दोनों ने आँख बंद करि hi थी की अचानक नीतू हड़बड़ा कर उठ बैठी. नीतू को हड़बड़ाता देख अघोरी भी उठ बैठा.

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अघोरी: क्या हुआ आप इस तरह हड़बड़ा क्यों गई.

नीतू: आँखे बंद करते hi वो दृशय डेबरा मेरा सामने आ जाते है.

अघोरी: अब तो मई आपके करीब लेता हु बिलकुल आपके बगल में अब किस बात का दर.

नीतू: है आप मेरे बगल में लेते है पर आँखे बंद करने के बाद मुझे इसका एहसास नहीं रहता शायद इसलिए वो दृश्य मुझ पर हावी हो जाते है.

अघोरी: फिर आपको किस तरह आराम मिलेगा.

नीतू: क्या मई आपके हाथ रखकर लेट सकती हु आपको स्पर्श करके सोऊंगी तो हर वक़्त आपका एहसास मुझे मिलता रहेगा आँखे बंद करने के बाद भी. इसलिए वो डरावने दृश्य मुझ पर हावी नहीं होने पाएंगे.

साफ़ दिल अघोरी ने नीतू को इसके लिए भी हां कर दिया.

अघोरी: ठीक है अगर आपको इसमें सुकून मिलता है तो ऐसा कर लीजिये मेरे ऊपर हाट रखकर सो ले.

नीतू सरक कर अघोरी के और करीब आ गई और अपनी बहे अघोरी की छाती के ऊपर रख दी. अघोरी के लिए ये एक अलग अनुभव था. जीवन में प्रथम बार वो किसी महिला के इतने करीब आया था. पर अब भी अघोरी का अपनी भावनाओ और विचारो पर सयम था गाँव की अनेको महिलाओ ने अघोरी के मर्दाने हब्सी बदन पर मोहित होकर उसके करीब आने की कोशिश की थी पर अघोरी ने कभी किसी महिला को अपने समीप नहीं आने दिया. पर इस वक़्त हालात कुछ और थे. नीतू ने अघोरी को दर की वजह से अपने करीब लेटने को कहा था हलाकि इसके पीछे उसकी वास्तविक इच्छा सिर्फ वही जानती थी. पर त्रिया चरित्र को समझना तो बड़े बड़े विद्वानों के लिए भी मुश्किल था फिर ये तो नारी से दूर रहने वाला एक अघोरी था.

नीतू के मुँह से आती गरम गरम साँसे अघोरी के सीने को छू रही थी. कुछ पल ऐसे hi लेते रहने के बाफ नीतू ने सोने की एक्टिंग शुरू करदी. अघोरी को लगा की नीतू सो चुकी है तो इससे थोड़ा अलग होकर लेट जाऊ. पर जैसे hi अघोरी ने पीछे हटने की कोशिश की नीतू ने उसे और कास कर पकड़ लिया और ऐसे दिखाया जैसे वो ये सब नींद में कर रही है. नीतू ने अपनी टांग उठाकर अघोरी की जांघो पर रख दी.

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एक काळा हब्सी अघोरी के साथ ये सब करते हुए नीतू भी अंदर से काफी उत्तेजित हो गई थी. अपनी जांघो के बीच हल्का हल्का गीलापन उसे साफ़ महसूस हो रहा था. ये कहना मुश्किल था की अब वो ये सब सिर्फ राज के hi लिए कर रही है या अंदर से वो अघोरी की तरफ आकर्षित हो गई है. नींद का दिखावा करते करते hi नीतू ने अपने होंठ अघोरी के गले पर रख दिए और अपने होंठो को उसकी गर्दन पर घिसने लगी.

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होंठो के साथ नीतू ने अपनी टांगो से भी अघोरी को उत्तेजित करना शुरू कर दिया और अपनी टांगो को अघोरी की जांघो पर घिसना शुरू कर दिया.

मेनका जैसी अप्सरा को देख कर तो विश्वामित्र जैसे तपस्वी का भी इम्मान दोल गया था फिर अघोरी का इस माहौल में उत्तेहजीत होना स्वाभाविक था. कुछ देर पहले वो जहा आरती को लेकर चिंतित था वही अब नीतू की हरकतों से उत्तेजित था. पर फिर भी अपनी दर्द संकल्प से अपनी भावनाओ पर काबू करे हुए था. पर नीतू तो जैसे लगातार उसकी इच्छा शक्ति की परीक्षा लेने पर तुली हुई थी. होंठो और पैरो से अघोरी की उत्तेजना बढ़ाते बढ़ाते नीतू अचानक से अघोरी की छाती पर रखा अपना हाथ नीचे ले जाकर सीधा लंगोट के ऊपर अघोरी के लुंड पर रख दिया. एक तरह से नीतू ने ये बहुत बड़ा रिस्क लिया था क्युकी इस हरकत से अघोरी गुस्सा होकर उसे वापस भी भेज सकता था पर जिस तरह किसी खतरनाक गेंदबाज़ पर दबाव बनाने के लिए कई बार थोड़ा रिस्क लेकर आगे बाद कर शॉट खेलना ज़रूरी हो जाता है वैसे hi यहाँ अघोरी को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए ये रिस्क लेना ज़रूरी था.

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पर अघोरी के लंगोट के अंदर मौजूद लुंड पर हाथ पड़ते hi नीतू और अघोरी दोनों को करंट का एक ज़ोरदाई झटका लगा. अघोरी को इसलिए क्युकी जीवन में पहली बार किसी औरत का हाथ उसके शरीर के इस बाग़ पर स्पर्श हुआ था. पहली बार उसे लुंड पर एक औरत के स्पर्श से होने वाली उत्तेजना का एहसास हुआ था. पर नीतू के लिए ये लुंड का पहला स्पर्श नहीं था उसने इससे पहले भी राज के लुंड को पंत के ऊपर से सहलाया था और सहेलियों के साथ पोर्न वीडियो भी देखे थे पर लुंड का जो आकर आज उसने अपने हाथो से छुआ था वो उसकी सोच से परे था. शायद अघोरी का लुंड अभी भी पूर्ण उत्तेजित नहीं था पर इसके बावजूद उसका अकार 10 इंच होगा और पूर्ण उत्तेजित होने के बाद ये कैसा होगा. उसने जोश जोश में अघोरी को इस साधना के लिए उत्तेजित करने का फैसला कर तो लिया था पर उसे ये दर भी लग रहा था की क्या वो इतना बड़ा लुंड झेल पाएगी. जब ये विशाल लुंड अपने पूर्ण उत्तेजित अकार में उसकी कुंवारी छूट में दाखिल होगा तो उसकी छूट का क्या हाल होगा. ये सोच कर hi उसका दिमाग सुन्न पद गया उसके रोए खड़े हो गए. उसका मन उत्तेजना दर रोमांच के मिले जुले भावो से भर उठा.

वही अघोरी के लिए भी अब इस उत्तेजना को और बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था और वो इस उत्तेजना के खेल में आगे नहीं बढ़ना चाहता था क्युकी उसने खुद को मोह माया से विमुख कर लिया था और ुए उत्तेजना उसे वापस उसी मोह माया के दलदल में खींच रही थी. इसने अघोरी ने अपने आपको संयत करते हुए अपने लुंड के ऊपर रखे नीतू के हाथ को पकड़ा और उसे हटाकर परे कर दिया. नीतू ने भी इस बार ज्यादा विरोध नहीं करा क्युकी उस लुहड़ के आकर ने उसके दिमाग को भी शून्य कर दिया था. अघोरी सिर्फ उसके हाथ को हटाने तक नहीं रुका उसने नीतू की टांग को भी अपनी जांघो के ऊपर से हटा दिया और नीतू को हलके से धकेल कर अपने शरीर से थोड़ा दूर कर दिया. नीतू ने भी फिलहाल अभी ज्यादा न आगे बढ़ने का निश्चय करते हुए खुद को पीछे कर लिया क्युकी ज्यादा रिस्क लेने से डाव उल्टा पद सकता है. क्युकी उत्तेजना की आंच को धीमे धीमे हवा देनी चाहिए जल्दबाज़ी में वो आंच हमे hi जला सकती है. नीतू को अपने से दूर करके अघोरी थोड़ा पीछे सरक कर लेता गया नीतू अब भी आँख बंद करे सोने का ड्रामा कर रही थी पर अंदर hi अंदर वो इस कदर उत्तेजित थी की सिर्फ अघोरी के उस दैत्याकार लुंड को छूने भर से उसे ओर्गास्म आ गया था और उसकी चड्डी पेटीकोट के अंदर बुरी तरह गीली हो गई थी. वही अघोरी की उत्तेजना भी काफी बाद गई थी पर वो इस उत्तेजना के रस्ते पर आगे नहीं बढ़ना चाहता था इसलिए वो लेते लेते hi प्राणायाम करके अपनी उत्तेजना को संयत करने लगा और शीघ्र hi अघोरी ने अपनी उत्तेजना को काबू कर लिया. और दोनों वही लेते लेते सो गए.

पर कामदेव के कामरुस में डूबा तीर एक अघोरी के दिल में लग चूका था उसे एक स्त्री के स्पर्श और उससे होने वाली उत्तेजना का एहसास दे चूका था अब क्या सिर्फ प्राणायाम इस उत्तेजना को काबू में रख पाएगा. या बरसो से सहेज कर रखा गया एक अघोरी का ब्रह्मचर्य इस कामाग्नि की वेदी पर भस्म हो जाएगा. वही नीतू ने अघोरी को कामसूत्र का पाठ पड़ने का निश्चय ले तो लिया था पर उसके विशाल लुंड ने उसे भी शंकाओ से भर दिया था की क्या उसकी कुंवारी छूट इस विशाल लिंग को अपने अंदर ले पाएगी. पर सबसे पहले ये देखना की नीतू किस तरह एक ब्रह्मचारी अघोरी को अपनी तरफ आकर्षित करेगी और क्या इस काम में वो सफल हो पाएगी ये तो आने वाले वक़्त में hi पता चलने वाला था.

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कहानी का छठा दिन अपने अंदर बहुत कुछ समेटे हुए था. सोस्सिप पर कहानी ख़तम होने के बाद इस नै साइट पर शुरू हुआ इस छठे दिन ने एक हाउसवाइफ गरिमा को अपने से आधी उम्र के जीतू को अपनी तरफ आकर्षित करते देखा तो उसी जीतू के बाप और अपने से दुगनी उम्र के बिहारी काका की सच्चाई से पर्दा उठते हुए भी देखा. इस छठे दिन ने इस कहानी का सबसे उत्तेजक सेक्स सन शबाना को उसके जीवन की सबसे बड़ी ख़ुशी उसका प्रथम सेक्स करते देखा तो उसी शबाना के खिलाफ गाड़ी जा रही साज़िश को भी महसूस करा. इस छठे दिन ने शबाना के अपडेट के टक्कर में बने नेहा के उपडते पर इस कहानी पर बन लगते हुए भी देखा. इस छठे दिन ने आरती हुए अभय का प्रथम आमना सामना देखा तो आरती की कहानी के तीसरे अहम् किरदार अजय के अपने वास्तविक रूप को भी देखा. वही इस छाते दिन दो अलग अलग साधनाओ में दो अलग अलग औरतो को अपना लज्जा का अंचल त्यागते हुए भी देखा जहा विनीता ने अपने जीवन के पहले ब्लोजॉब का अनुबजाव पाया वही नीतू ने भी अपने कामुक सफर पर अपना पहला कदम बड़ा दिया था.

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काका की सच्चाई सामने आने के बाद गरिमा उन्हें कैसे डील करने वाली थी?

शबाना के साथ कुआ साज़िश होने जा रही थी?

नेहा का स्तनगर उससे और क्या क्या करवाने वाला था?

आरती अभय अजय की ये त्रिकोणी कहानी अब क्या नया रूप लेने वाली थी?

6 ग्रहो की पूजा के बाद अब कहानी का सातवा दिन और सातवा गृह विनीता के सामने क्या नै चुनती पेश करने करने वाला था?

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और

छठे दिन अछूती रही शोभा विक्रम की कहानी में क्या नया भूचाल आने वाला था?

इन कई सवालो के साथ डे 6 ख़तम हुआ और आरम्भ हुआ कहानी के सातवे दिन का.

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एन्ड ऑफ़ डे 6
 
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