A wedding ceremony in village - Page 12 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

हउमै ग्रहमाला में टोटल 8 प्लैनेट्स है उनमे सुन और मून को जोड़ दे तो हो गए 10. जिनमे से 8 प्लैनेट्स के उपदटेस कम्पलीट हो गए है अब बस दो दिन बचे है और दो प्लैनेट्स क्या विनीता की स्टोरी को पसंद करने रीडर्स बता सकते है वो दो बचे हुए प्लैनेट्स कौन से है जिनके अपडेट अभी आने बाकि है. पता तो चले मेरे रीडर्स कितने इंटेलीजेंट है और विनीता को कितना पसंद करते है. इतस ा क्वेश्चन बचे हुए दो ग्रहो के नाम बताइये.
 
भाई सिद्धार्थ अग्निहोत्री तुम करना क्या छह रहे हो क्लियर करो पहले भी 8-10 मश्ग ऐसे hi भेजे फिर डिलीट मार दिए अब दुबारा वही कर रहे जो बोलना है सीधा बोलो और अगर मश्ग डिलीट hi करना तो करो hi मत मश्ग.
 
अघोरी की कुटिया

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विनीता लखन को चंद्र पूजा के बारे में समझते समय भी अघोरी को बस नीतू का hi ख़याला आ रहा था जब उसने आज सुबह उसे नदी में नहाते हुए देखा था. और यही बात उसे विचलित कर रही थी की उसने अपने गुरु के सामने ब्रह्मचर्य की शपथ ली थी वो इस तरह एक अविवाहित कुंवारी स्त्री के रूप पर कैसे मोहित हो सकता है. नीतू का यहाँ रहना अब उसे भरी लग रहा था पर उसने खुद यहाँ रहने की अनुमति दी अब जाने को कहना ठीक नहीं जल्द से जल्द उनकी ये साधना समाप्त समाप्त हो जाए ताकि वो यहाँ से चली जाए. पर अब तक तो वो ब्रह्मचारी पुरुष भी नहीं आया जिसे इस पूजा में उनका सहभागी बनना है.

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अघोरी: आपका वो सहभागी कहा है जिसे आज आपके साथ इस साधना में शामिल होना है. रात हो आई है साधना का समय हो गया है पर उसका कोई अत पता नहीं.

अब नीतू अघोरी को क्या कहती उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था. अभी अघोरी उस हद तक उसकी तरफ आकर्षित नहीं हुआ था की वो डायरेक्ट उसे इस साधना के लिए पूछ सके. और सीधे बोलने से सारा मामला उल्टा भी पद सकता था अघोरी उसे जाने के लिए भी कह सकता था.

नीतू: पता नहीं बाबा मैंने आरती से कहा था उसे लेकर यहाँ आ जाए मई उसका फ़ोन भी लगा रही पर फ़ोन नहीं उठ रहा.

अघोरी समझ गया की आरती क्यों फ़ोन नहीं उठा रही क्युकी वो तो अभय रायचंद के कब्ज़े में है और शायद इसीलिए वो उस ब्रह्मचारी को लेकर यहाँ नहीं आ पाई. नीतू ने तो यही बोल दिया था पर उसे क्या पता था उसका तीर सही निशाने पर लगा था.

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अघोरी: ठीक है हम बारह बजे तक उसका इंतज़ार करेंगे उसके बाद सोचेंगे क्या करना चाहिए.

नीतू: वैसे साधना के आज के चरण में क्या करना है. क्या आज hi हमे सम्बन्ध बनाना है.

अघोरी: नहीं आज नहीं कल उसका समय कल है. पर आज की साधना ऐसी है की वो मई नहीं कर सकता उसे वही करे जिसे आपके साथ सम्बन्ध बनाना है तो बेहतर है.

नीतू: मतलब सिर्फ वही कर सकता है. उसके बिना नहीं हो सकती.

अघोरी: आज की साधना आपकी योनि को जाग्रत करने की साधना है. पुरे . डी में केवल मादा की योनि hi एकमात्र ऐसा स्थान है जिसमे एक सृष्टि को जनम देने की छमता है. स्त्री की योनि असीम ऊर्जा का भंडार होती है. आज आपकी योनि को त्रंत्र क्रिया के माध्यम से जागृत करा जाएगा ताकि उसमे वो जीवन की असीम ऊर्जा को एकत्रित किया जा सके.

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कल उस ब्रह्मचारी के साथ सम्भोग करने का बाद इसके कौमार्य के भांग होने की और उस ब्रह्चारी के प्रथम वीर्य से उत्पन्न ऊर्जा वो सम्लित रूप में इसमें एकत्रित किया जाएगी.

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और परसो आखिरी दिन हदीस साधना के द्वारा वो ऊर्जा सीधा आपके प्रेमी राज को परावर्तित की जाएगी जिससे उसके जीवन पर आया मृत्यु योग कई वर्षो के लिए आगे बाद जाएगा.

नीतू: तो जब आज मेरा और उसका सम्बन्ध नहीं होना है तो क्या ये साधना सिर्फ उसीके द्वारा होना ज़रूरी है.

अघोरी: ये साधना शुद्ध हाथो से होनी चाहिए और ब्रह्चारी के हाथो से शुद्ध हाथ नहीं हो सकते. इसलिए ये साधना एक ब्रह्मचारी hi करेगा.

नीतू: एक बात कहु बुरा तो नहीं मानेगे.

अघोरी: बोलो

नीतू: ब्रह्मचारी तो आप भी है और क्षुधा भी तो क्या आज की साधना आप नहीं कर सकते.

अघोरी ने नीतू को घूर कर देखा नीतू को लगा की वो गुस्सा हो गए है. पर अघोरी काफी शांत व्यक्तिवा व्यक्ति थे उन्होंने खुद पर संयम रखा.

अघोरी: दरअसल ये साधना एक निर्वस्त्र साधना है जिसमे साधना करने वाले के सामने निर्वस्त्र होकर आना होगा और साधक भी पूरी तरह निर्वस्त्र होकर आपके त्रिमुखो की साधना करेगा. ऐसे में जिस व्यक्ति के साथ आपको सम्भोग करना है उसीके सामने hi निर्वस्त्र होना ठीक रहेगा. मेरे सामने आप कैसे निर्वस्त्र हो सकती है.

नीतू: पर जब इसके अलावा कोई विकल्प न हो तो भी क्या हम ये नहीं कर सकते.

अघोरी: जी नहीं मैंने कभी स्त्री को निर्वस्त्र नहीं देखा है और न खुद कभी स्त्री के सामने निर्वस्त्र हुआ हु इसलिए ये संभव नहीं है.

नीतू: पर जब मुझे इसमें दिक्कत नहीं तो आप क्यों मन कर रहे मेरी स्थिति को समझने की कोशिश करिये.

अघोरी: पर वर कुछ नहीं जो संभव नहीं उस बारे में मई बात नहीं करना चाहता.

अघोरी की झोपडी में एक ख़ामोशी छ गई. नीतू ने नहीं सोचा था की अघोरी उसे यु साफ़ साफ़ मन कर देगा. उसे समझ नहीं आ रहा था की वो अब क्या करे. उसने तो अघोरी को सडके करने का प्रयास भी कर लिया पर नतीजा सिफर hi रहा. कुछ देर वही चुपचाप खड़े रहने के बाद नीतू बिना कुछ बोले अघोरी की कुत्तिया से बहार निकल गई. अघोरी को भी बड़ा बुरा लग रहा था की उसने एक स्त्री जो अपने प्रेम को बचने के लिए इतना सब कर रही है उसके साथ इतनी निष्ठुरता के साथ बात करि.

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अघोरी खड़ा ये सोच hi रहा था की अचानक नीतू दुबारा उसकी कुत्तिया में दाखिल हुई इस बार उसके चेहरे के भाव कुछ अलग थे उनमे विनती की जगह गंभीरता का भाव ज्यादा था. नीतू जो सदी पेहेन कर कुत्तिया से बहार गई थी वो अब बस उसके बदन को एक चद्दर की तरह ढके हुए थी. अघोरी को समझ नहीं आ रहा था की नीतू ने अपनी साडी से इस तरह खुद को क्यों धक् रखा है. और इससे पहले उसे कुछ समझ अत नीतू ने साडी अपने बड़ा से नीचे गिरा दी.

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उस साडी के नीचे नीतू के बदन पर कपडे का नामोनिशान तक नहीं था न ब्लाउज न पेटीकोट न ब्रा न पंतय. अब नीतू अघोरी के सामने पूरी तरह नग्न मुद्रा में कड़ी थी. कहते है सावले लोगो का अंग प्रत्यंग उनके सावले स्वरुप में और ज्यादा उभर कर अत है. यही नीतू के साथ था वो अपनी सहेलियों के सामान गोरी चिट्टी नहीं थी पर सावला रंग hi उसके आकर्षण में चार चाँद लगा रहा था. गोर लोगो के निप्पल गुलाबी या भूरे होते है पर सावले लोगो के निप्पल गहरे काळा. नीतू के भी गहरे काले निप्पल उसके स्तनों पर अलग से चमक रहे थे. और उसकी बिना बाल की कासी हुई टाइट छूट और उन पर हलके हलके बाल वो तो उनकी वजह वो अलग hi सुन्दर और आकर्षक लग रही थी.

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अघोरी तो उसे इस रूप में देख चौक पड़ा उसने सोचा भी नहो था की नीतू अचानक से यु इस रूप में उसके सामने आ जाएगी. जीवन में पहली बार कोई स्त्री उसके सामने इस तरह बिना कपड़ो के आई थी. अघोरी के होंठ थरथरा गए उसे समझ नहीं आ रहा था क्या कहे.

अघोरी: ये क्या है मैंने आपको कहा की मई ये साधना नहीं कर सकता.

नीतू: मई आपको अपने साथ सम्बन्ध बनाने को नहीं कह रही बस आज की साधनना पूरी करने को कह रही. आपको लग रहा था मई आपके निर्वस्त्र होने में असहज महसूस करुँगी तो लीजिये मई आपके सामने बिना शर्माए बिना कपड़ो के आ गई. अब तो आप कर सकते है न.

अघोरी: पर उसके लिए मुझे भी निर्वस्त्र होना होगा और मई इसे सहज नहीं हु.

नीतू: क्या आपकी सहजता किसी के जीवन से ज्यादा महत्वपूर्ण है.

अघोरी: मुझे इस बारे में कोई बात नहीं करनी.

इतना कह कर नीतू को वह नंगा खड़ा छोड़कर अघोरी वह से बहार निकल गया. नीतू की साडी उम्मीद टूट गई, उसे लगा था उसे नंगा देख कर अघोरी साधना के लिए तैयार हो जाएगा पर वो तो बहार चला गया. बेबसी के साथ उसे अंदर hi अंदर बहुत गुस्सा भी आ रहा था ये कहना मुश्किल था की ये गुस्सा उसे राज के लिए की जारी साधना के पुराण न होने की वजह स्व था या एक मर्द के सामने नंगा हो जाने के बावजूद खुद के ठुकराए जाने की वजह से था. अग्गौरी के इस तरह चले जाने में उसे अपनी इंसल्ट महसूस हो रही थी. और जब अघोरी आज उसके सामने निर्वस्त्र होने को तैयार नहीं था तो कल उसके सम्भोग करने का तो सवाल hi नहीं था. घडी के काटे चले जा रहे थे और नीतू को अब एक कब्रिस्तान में अपने नंगे होने का एहसास भी नहीं था. रात के बारह बजने को आए थे और नीतू अब भी वह उदास सी बैठी थी और अघोरी का कही कोई अत पता hi नहीं था.

पर अचानक दरवाज़े पर किसी की आहत हुई नीतू ने दरवाज़े पर देखा तो वह अघोरी एक हाथ में एक पोटली और दुसरे हाथ में एक कटोरा लिए खड़ा था. नीतू और अघोरी की नज़रे एक पल को एक दुसरे से मिली, पर अघोरी बिना कुछ बोले चुपचाप अंदर आ गया. उसने वो पैकेट और वो कटोरा ज़मीन पर रख दिए और अपने सामान में कुछ ढूंढ़ने लगा. नीतू को समझ नहीं आ रहा था की अघोरी क्या ढून्ढ रहा है. अघोरी ने अपने सामान में से एक शराब की बोतल और एक लाल पैकेट निकला और साथ में दो बड़ी सी थाल निकली. नीतू को समझ नहीं आ रहा था की अघोरी कर क्या रहा है जी वो इस गंभीर स्थिति में शराब और चखना निकल रहा है. अघोरी ने पहले वो लाल पैकेट खोल कर उसे एक थल में खली कर दिया वो लाल सिन्दूर था फिर जो पैकेट वो अपने साथ लाया था उसकी सामग्री भी दूरी थाल में खली करदी वो रख थी जिसे नीतू चखना समझ रही पर उसे कटोरे में क्या है ये अभी नहीं समझ आ रहा था.

अघोरी: उस घेरे में जाकर लेट जाइये.

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बिना नीतू की तरफ देखे उसकी तरफ पीठ करे करे hi अघोरी ने नीतू को उस घेरे में जाकर लेटने का इशारा करा जहा अब तक उनकी साधना होती आ रही थी. नीतू को समझ नहीं आ रहा था की अघोरी की मंशा क्या है एक तरफ तो वो इस बारे में बात करने को भी तैयार नहीं थे और अब उसे उस तंत्र घेरे में लेटने को कह रहे है.

नीतू: जी पर अपने तो इस साधनना के लिए मन कर दिया था.

अघोरी बिना कुछ बोले बस चुपचाप यही नीतू की तरफ पीठ करे करे उठ कर खड़े हो गए. और अपनी अगली प्रतिक्रिया के रूप में अघोरी ने कमर के नीचे बंधा एक मात्रा कपडा उतर कर नीचे ज़मीन गिरा दिया. अघोरी की ये हरकत देख नीतू का मुँह खुला का खुला रह गया. नीतू खुद तो बिना झिझक अघोरी के सामने नंगी आ गई थी पर अब जब अघोरी उसके सामने नंगा हुआ तो उसकी सास हलक में आ गई. सादे सात फुट का आदम कद शरीर मादरजात पूरा नंगा रंग इतना काला की कोयला भी उसके सामने गोरा लगे और नीतू की तरफ पीठ होने की वजह से वो कपडा उतरने के बाद नीतू की नज़र सबसे पहले अघोरी के कूल्हों पर गई. क्या बड़े बड़े और विशाल कूल्हे थे उनके.

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नीतू की तरफ से कोई हरकत होती न देख अघोरी ने दुबारा अपनी बात को दोहराया पर इस बार थोड़ा सख्त लहज़े में.

अघोरी: क्या बात है अभी तो आप मुझसे कह रही थी की मई आपकी आज की साधना संपन्न करा दू और अब जब मई आपको उस तंत्र घेरे में लेटने को कह रहा हु तो आप वह बैठी है.

अघोरी के यु दुबारा कहने पर नीतू उठकर उस तंत्र घेरे में जाकर लेट गई.

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पर अब तक अघोरी नीतू की तरफ नहीं पलटा था और नीतू तो अघोरी का लुंड देखने लो व्याकुल थी. एक 7.5 फुट के काले हब्शी अफ्रीकन मर्द का लुंड कितना लुम्बा होगा वो देखने को एक्ससिटेड थी. पर शायद अघोरी अब भी इसमें थोड़ा झिझक रहा था.

नीतू: जी बाबा मई लेट गई हु इस घेरे में.

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नीतू के बोलने पर अघोरी उसकी तरफ घूम गया. अघोरी के अपनी तरफ घुमते hi नीतू की नज़र सीधा उसके उसी अंग पर गई जिसे देखने के लिए वो हद से ज्यादा एक्ससिटेड थी उसके लुंड पर. नीतू समझ रही थी की अघोरी का रंग hi कला है पर उसका लुंड की कालिमा देख उसका ये वहां दूर हो गया उसका लुंड तो उसके जिस्म से भी ज्यादा काला था. लुंड पर बालो का इतना ज्यादा गुच्छा की मनो सादिया बीत गई हो वह के बाल साफ़ करे. वो लुंड इस वक़्त अपनी झुकी हुई यानि मुझे हुई अवस्था में था पर इस हालत में भी उसकी लम्बाई 7-8 इंच कम नहीं होगी जितनी एक आम मर्द के तने हुए लुंड की होती है. नीतू साधना तो सब भूल hi गई थी अघोरी को अपने सामने नंगा खड़ा देख उसके दिमाग में बस यही चल रहा था की जब ये लुंड अपने पूर्ण अकार में आएगा तो कितना लुम्बा होगा. और जब वो विकराल लुंड उसके अंदर जाएगा तो वो कैसे उसे झाले पाएगी. पर अभी तो अघोरी बस आज की साधना के लिए तैयार हुआ है कल उसे सम्भोग के लिए तैयार करना तो बाकि है. पहले वो तैयार तो हो उसके बाद झेलने की बात आएगी. अघोरी यही सब सोच रही थी की अघोरी ने वो सिन्दूर और रख से भरी दोनों थाल उठाई और उन्हें लेकर नीतू की तरफ आने लगा. इस नग्न मुद्रा में चलते हुए आने पर उसका लुंड इधर उधर हिल रहा था जो नीतू के एक्ससिटेमेंट को और भी ज्यादा बड़ा रहा था. अघोरी वो दोनों थाल लेकर नीतू की योनि के समीप आकर बैठ गया, नीतू बिना झिझक एक हब्सी अघोरी के सामने अपनी छूट खोल कर लेती थी.

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साधना आरमभ करने से पहले नीतू को साधना के बारे में बताना आरम्भ करा.

अघोरी: साधना शुरू करने से पहले आपको इस साधना के बारे बताना ज़रूरी है. किसी शुद्ध पवित्र पूजा में हम पांच पवित्र चीज़ो का प्रयोग करते है दूध दही शहद जल और चीनी पर आज जो हम करने जा रहे है वो कोई पूजा नहीं है एक तांत्रिक क्रिया है जिसमे हम पटल के अंधकारमय शक्तियों की साधना कर रहे है इसलिए इसमें इन शुद्ध पवित्र चीज़ो का प्रयोग वर्जित है. पर इस तांत्रिक क्रिया में भी 5 चीज़ो का hi प्रयोग किया जाएगा. पर ऐसी 5 चीज़े जो सिर्फ तांत्रिक क्रिया में hi प्रयोग की जा सकती है. और उन 5 चीज़ो में पहली चीज़ है सिन्दूर और दूसरी है एक ताज़ी नै चिटा की रख. इस थाल में ये लाल सिंडोर है जिसका तंत्र क्रिया में विशेष महत्व है और ये राख मई एक ताज़ी चिटा में से लेकर आया हु. और इन दोनों चीज़ो को बारी बारी आपके योनि पर लगाया जाएगा अंदर बहार हर जगह और मई मंत्रो द्वारा आपकी योनि में हदीस की शक्तियों का आवाहन करूँगा.

छूट के अंदर सिन्दूर और चिटा की रख लगाने की बात सुनकर नीतू को थोड़ा अजीब लगा क्युकी वो साइंस की स्टूडेंट थी और इस तरह की चीज़े छूट के अंदर लगाने से इन्फेक्शन का खतरा था इसलिए उसने अघोरी के सामने अपनी चिंता ज़ाहिर करदी.

नीतू: बाबा मई आपकी साडी बात मानूगी पर बहार लगाना तो ठीक है पर ये सिन्दूर और किसी की चिटा की राख को छूट के अंदर लगाने से उसमे इन्फेक्शन तो नहीं हो जाएगा.

अघोरी: तंत्र में ऐसी बहुत सी चीज़े होती है जो विज्ञान की नज़र में गलत है पर तंत्र और विज्ञान दो विरोधाभासी चीज़े है तुम एक साथ उन दोनों पर विश्वास नहीं कर सकती. विज्ञान तंत्र को नहीं मंटा और तंत्र को विज्ञान के नियमो से कोई सरोकार नहीं है. इसलिए यदि तुम्हे तंत्र पर पूरी तरह विश्वास और आस्था हो तभी इस साधना को आगे बढ़ाओ वर्ण ये विज्ञान का ज्ञान मत दो.

नीतू: माफ़ करदे बाबा मई तो बस पूछ रही थी. आप करिये आपको जो सही लगता है.

अघोरी ने उस सिन्दूर की थल से पूरा मुट्ठी भर सिन्दूर उठा लिया और हाथ में नरमुंड लेकर उन्हें ऊपर उठा कर हदीस का आवाहन करने लगा और मन hi मन कुछ मंत्र बड़बड़ाते हुए उस सिन्दूर को नीतू की योनि के ऊपर फ़ेंक दिया.

अघोरी: ऐ हदीस अन्धकार की दुनिया के बेताज बादशाह, सिन्दूर सुहाग का प्रतिक है जो स्त्री उसीके नाम ला लगाती है जिसे वो अपना कौमार्य देती है. मई आपके नाम का ये सिन्दूर इसकी योनि पर लगा रहा हु जो इस बात का प्रतिक है की ये अपना कौमार्य आपको अर्पित कर रही है. इसका कौमार्य दान को स्वीकार करके इसकी योनि को जागृत करे हदीस.

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अघोरी ने वो अपना हाथ सीधा नीतू की योनि पर रख दिया और अपनी हथेली से उस पर बिखरा सिन्दूर उसके चारो तरफ मलने लगा. अघोरी की खुरदुरा हथेली का स्पर्श नीतू को उत्तेजित कर रहा था. ऊपर मलते मलते अघोरी ने अपनी ऊँगली उसकी छूट के अंदर दाल दी.

अपनी छूट में इतनी मोती ऊँगली दाखिल होते hi उत्तेजना में नीतू की आँखे बंद और मुँह खुल गया. अघोरी ने वो सिन्दूर नीतू की छूट की दीवारों तक में मॉल दिया. जीवन में पहली बार कोई चीज़ उसकी छूट में दाखिल हुई थी और ये उनकी उत्तेजना बढ़ाने के लिए काफी था. नीतू यही सोच रही थी की जब ऊँगली की मोटाई इतनी ज्यादा है तो लुंड की क्या होगी. नीतू की योनि पर सिंदुर लगाने के बाद अघोरी ने थल का बचा हुआ सिन्दूर नीतू के पुरे बदन पर उड़ेल दिया. नीतू का पूरा बदन सिन्दूर से लाल हो गया था.

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सिन्दूर के बाद अघोरी ने वो चिटा की राख वाली थल में से मुट्ठी भरके राख उठाई.

अघोरी: कहते है चिटा जलने के बाद भी कुछ वक़्त तक उसकी राख में आत्मा का वास होता है और वो आत्मा इस दुनिया और उस दूसरी दुनिया को आपस में जोड़े रखती है. मई ये ताज़ी चिटा की राख इस कुंवारी कन्या की योनि पर लगा रहा ताकि इसकी योनि का उस दूसरी दुनिया से संपर्क जुड़ जाए. और वो अँधेरी दुनिया की आत्माए इस योनि को जागृत करने में मेरी मदद करा. ऐ अँधेरी दुनिया की आत्माओ मेरा आवाहन स्वीकार करो.

इतना कह कर अघोरी ने वो चिटा की राख भी नीतू की योनि पर मॉल दी. और फिर पहले वाली प्रक्रिया दोहराते हुए वो राख नीतू के योनि के अंदर लगाई और वो थल भी नीतू के बदन पर उड़ेल दी. नीतू का पूरा बदन सिन्दूर और राख से सराबोर था. साधना में दो चीज़ो के प्रयोग के बाद अघोरी पुनः अपने स्थान से उठा और वापस बची सामग्री की तरफ चल दिया. नीतू वही लेते लेते उसे जाते हुए देख रही थी पीछे से उसके बड़े बड़े काळा काळा कूल्हे एक दुसरे से घर्षण करते बड़े आकर्षक लग रहे थे. अघोरी जब वो शराब की बोतल और कटोरा उठाने को झुका तो उसके नितम्ब थोड़ा खुल गए और उनके बीच का छोटा सा छेड़ नीतू को नज़र आ गया. शरीर कितना भी विशाल हो गांड का छेड़ सामान hi होता है. अघोरी वो शराब की बूटले और वो बड़ा से कटोरा लेकर पुनः नीतू के समीप आकर बैठ गया. आते वकग नीतू ने अघोरी के लुंड को देखा था इस बार उसमे हल्का तनाव साफ़ नज़र आ रहा था. और ये तनाव इस बात का प्रमाण था की कही न कही न एक स्त्री के योनि के स्पर्श का असर उस ब्रह्मचारी अघोरी पर भी हो रहा था और ये इस बात का संकेत भी था की ागत नीतू अपने प्रयास जारी रखे तो इस ब्रह्मचारी को अपना ब्रह्मचर्य भांग करके सम्भोग के लिए तैयार कर सकती है.

अघोरी: सिन्दूर और रख के बाद अब समय साधना में एक अगली दो चीज़ो के प्रयोग का. साधना में प्रयुक्त होने वाली तीसरी चीज़ है शराब. शराब का अन्धकार की दुनिया से विशेष सम्बन्ध है शराब तामस को अपनी तरफ आकर्षित करती है इसीलिए तनयरा साधनाओ में शराब का विशेष रूप से प्रयोग होता है. साधना में प्रयोग होने वाली चौथी वास्तु और वो चीज़ जिसकी महक की तरफ काली शक्तिया सबसे ज्यादा आकर्षित होती है वो है राखत यानि खून.

खून शब्द सुनकर नीतू की सिटी पित्ती गम हो गई उसका सारा एक्ससिटेमेंट दर में बदल गया. यानि उस बड़े से कटोरे में खून है मगर किसका किसी इंसान का या जानवर का.

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और क्या ये खून भी उसकी योनि के अंदर जाएगा. ये सोच कर hi नीतू को उबकाई सी आ रही थी. पर पहले उसके लिए ये जानना ज़रूरी था की ये खून है किसका.

नीतू: अघोरी बाबा मतलब उस कटोरे में खून है.

अघोरी ने वो कटोरा नीतू के आगे कर दिया वो पूरा गाड़े लाल खून से भरा था. नीतू को तो उसे देखने में hi सर घूम सा रहा था.

नीतू: ये खून किसका है. किसी आदमी का या जानवर का.

अघोरी ये खून मुर्गे का है.

नीतू: मुर्गे का खून, और और क्या ये खून मेरी छूट मेरा मतलब है योनि के अंदर डाला जाएगा.

अघोरी: बेशक जब काली शक्तियों को आपकी योनि की तरफ आकर्षित करना है तो सभी वस्तुए भी वही डाली जाएगी. क्यों क्या फिर आपका विज्ञानं इसके बीच में आ रहा है. या तो आप अपनी समस्या का हल विज्ञान से करवा ले या तंत्र से फैसला आपको करना है.

नीतू: नहीं मई तो बस यही पूछ रही थी आप करिये आपको ठीक लगे.

अघोरी ने वो शराब की बोतल खोली अपनी उंगलियों के दबाव से नीतू की योनि का मुख थोड़ा खोला और शराब को नीतू की योनि के अंदर डालना शुरू कर दिया. कुछ पल में hi शराब नीतू की योनि से बहार ओवरफ्लो होने लगी. नीतू की योनि के शारब से भर जाने के बाद अघोरी ने उसमे शराब डालना बंद कर दिया और उस बोतल में बची शेष शराब नीतू के जिस्म पर खली कर दिया. नीतू की योनि से काफी शराब बह कर बहार आ चुकी और उसकी योनि फिर खली हो चुकी थी.

शराब की विधि पूरी होने के बाद अघोरी ने रखता से भरा कटोरा उठाया. अघोरी के हाथो में खून से भरा प्याला देख नीतू ने घिन के मरे आँखे बंद कर ली. हलाकि वो बंगाली थी और मछली कहती थी पर खून को अपनी छूट में डालना अलग बात है. नीतू के सरे एक्ससिटेमेंट की ैया लग गई थी जब अघोरी उसके सामने नंगा हुआ था तब उसे लगा था की इस नग्न अवस्था में पता नहीं क्या क्या होगा पर ये सब होगा इसकी तो उसने कल्पना भी नहीं की थी. नीतू ने एक बार फिर अपनी योनि पर अघोरी की उंगलियों का दबाव महसूस करा और अगले hi पल उसे अपनी योनि के अंदर कुछ गरम गरम गीला गीला सा महसूस हुआ. नीतू समझ गई की अघोरी ने वो खून उसकी योनि के अंदर डालना शुरू कर दिया है. योनि से राखत के ओवरफ्लो होने पर अघोरी ने रखता डालना भी बंद कर दिया और प्याला का बाकि सारा राखत नीतू के बदन पर खली कर दिया.

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नीतू ने तो कास कर अपनी आँखे बंद कर्ली थी अघोरी को नंगा देखना का सारा एक्ससिटेमेंट उड़न छू हो गया था. खून की महक को बर्दाश्त करना भी उसके लिए मुश्किल हो रहा था 4 चीज़ो में hi उसकी हालत ख़राब हो गई थी और अभी तो पांचवी वास्तु का प्रयोग बाकि था.

अघोरी: दुर्गन्ध और काली आत्माओ का आपस में विशेष नाता है इसी लिए जहा इस तरह की काली आत्माए होती वह से अजीब सी दुर्गन्ध अति है. इस साधना के पांचवी वास्तु में आपके शरीर को दुर्गन्ध से भरा जाएगा ताकि उसकी महक उन काली आत्माओ को आकर्षित करे. इसलिए इस साधा में प्रयोग होने वाली पांचवी और आखिरी वास्तु है मानव मूत्र यानि पेशाब.

नीतू: जी मतलब

अघोरी: मतलब मई आपके शरीर पर पेशाब करूँगा.

नीतू को पहले hi उबकाई सी आ रही थी और अब अघोरी उसके ऊपर मूतने वाला था. वो एक सोफेस्टिकेटेड हाइजीनिक बैंकर थी उसने सोचा भी नहीं था की उसे एक दिन ऐसी घिनौनी स्थिति का सामना करना होगा. नीतू कभी उन पब्लिक टॉयलेट्स में भी नहीं जाती थी जहा पेशाब की हद से ज्यादा बदबू आती थी. और यहाँ तो वो पूरा पेशाब से नहाने वाली थी.

अघोरी: आप तैयार है.

नीतू के पास कोई विकल्प नहीं था उसने हां में सर हिला दिया. नीतू के हां करते hi अघोरी उठ कर खड़ा हो गया. अब तक अपनी आँखे बंद करे लेती नीतू ने पल भर को अपनी आँखे खोली सामने वो आदम कद अघोरी पुरतः नग्न उस पर पेशाब करने को तैयार खड़ा था. नीतू ने एक बार अघोरी के बदन के सबसे आकर्षक अंग उसके लिंग को देखा जो अब काफी फूल चूका था पर अब भी वो अपने पूर्ण आकर में नहीं था. पर इतना तै था की नीतू का नग्न शरीर अपना असर दिखा रहा था. अघोरी ने अपने काले नाग को अपने हाथो में थम लिया और उसका निशाना नीतू पर कर दिया. नीतू ने भी फिर अपनी आँखे बंद कर अपने जबड़ो को कास कर भींच लिया और अगले hi पल अघोरी के लिंग से पेशाब की मोती धार निकल पड़ी जो सिद्घा नीतू के जांघो के बीच उसकी योनि पर आकर गिरी. योनि पर मूतने के बाद अघोरी ने पेशाब की धार को नीतू के पुरे बदन पर घुमाया और नीतू के जिस्म एक एक हिस्सा अपने मूत्र में सराबोर लार दिया उसका पेट उसके स्तन गाला यहाँ तक की उसका चेहरा भी.

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न जाने कितना पेशाब भरा था अघोरी के अंदर करीब 10 मं तक वो नीतू पर मोटा रहा जब तक पेशाब की आखिरी बूँद तक खली नहीं हो गई. मूतने के बाद अघोरी दुबारा अपनी जगह पर बैठ गया और कुछ मंत्रो का जाप करने लगा.

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अघोरी मॉस मदिरा का सेवन भी करता था इसलिए उसके पेशाब से हद से ज्यादा बदबू आ रही थी. उसका बदन की महक में शराब खून और पेशाब की बदबू का अजीब सा कॉकटेल सा बन गया था. नीतू के लिए एक एक पल काटना मुश्किल हो रहा था. नीतू के दिमाग में यही चल रहा था की ये साधना कब ख़तम हो गई और कब उसे इस बदबू भरे माहौल से मुक्ति मिलेगी. कुछ पल तो नीतू बर्दाश्त करती रही पर बदबू बर्दाश्त के बहार हो जाने पर नीतू बोल पड़ी.

नीतू: बाबा अभी मुझे कितनी देर इसी तरह लेता रहना होगा.

अघोरी: साड़ी रात

अघोरी के ये दो शब्द नीतू के कानो में गरम लोहे की उतारते चले गए.

नीतू: साड़ी रात मेरे लिए एक पल काटना भी मुश्किल हो रहा है मई साडी रात कैसे काट पाऊँगी.

अघोरी: मई इस दुर्गन्ध को तो दूर नहीं कर सकता पर आपकी तकलीफ ज़रूर ख़तम कर सकता हु.

नीतू: कैसे करिये जो संभव हो करिये पर इस बदबू से मुझे मुक्त करिये.

अघोरी ने अपने पास राखी एक पुड़िया नीतू को थमा दी.

नीतू: ये क्या है

अघोरी: इसमें एक चूर्ण है जिसे खा कर इंसान गहरी नींद में सो जाता है आप भी चाहे तो ये चूर्ण फांक सकती है इसे खाकर आप गहरी नींद में सो जाएगी और सुबह से पहले नहीं उठेगी और आपकी रात बिना दिक्कत के काट जाएगी.

नीतू को भी ये उपाय सही लगा उसने बिना देर करे वो चूर्ण अपने हलक के नीचे उतर लिया. कुछ पल बाद hi नीतू की पलके भरी भरी सी हो गई और नीतू गहरी नींद में सो गई. अघोरी यही नीतू के बगल में बैठे मंत्र जाप करते रहे.
 
नीतू की योनि जाग्रति की साधना रात भर चलने वाली थी पर आदिवासियों की बस्ती में एक साधना समाप्त होने को थी अजय के इंतज़ार की घडिया समाप्त हो चुकी थी महागुरु ओसका अपनी साधना से जाग चुके थे. अजय बेसब्री से उनसे मिलने का इंतज़ार कर रहा था की वो बलशाली आदिवासी उसके पास आया.

आदिवासी: महाहरु साधना से जाग गए है और तुम्हे बुला रहा है.

अजय महागुरु ओसका के तम्बू में दाखिल हुआ सामने धरती पर एक बहुत बुजुर्ग व्यक्ति ज़मीन पर पालथी मारे बैठे थे.

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महागुरु: अजेस्टर यही नाम है न तुम्हारा.

अजय: जी आपको कैसे पता.

महागुरु मुस्कुरा दिए.

महागुरु: तो तुम्हे यहाँ इदरीस ाबड़ा ने भेजा है.

अजय: कौन इदरीस ाबड़ा मई किसी इदरीस ाबड़ा को नहीं जनता.

महागुरु: अघोरी जिसे साडी दुनिया अघोरी के नाम से जानती है वो अघोरी बनने से पहले मेरा शिष्य इदरीस ाबड़ा था. मेरा सबसे प्रिय शिष्य जो मुझे मेरे बेटे से भी ज्यादा प्यारा है. और जो जनकल्याण के लिए हमारा कबीला छोड़ कर उस तरफ चला गया.

अजय: जी मुझे उन्होंने hi भेजा काफी अच्छे इंसान है वो. उन्होंने कहा की आप मेरी समस्या का निवारण कर सकते है.

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महागुरु: अभय रायचंद यही नाम है न तुम्हारी समस्या का. कौन है ये अभय रायचंद.

अजय: यही तो दिक्कत है मई खुद नहीं जनता कौन है ये अभय रायचंद मुझे कुछ याद hi नहीं.

महागुरु: तुम्हारी यादो कल एक शक्तिशाली तंत्र द्वारा बांड दिया गया है जसीलिये तुम्हे कुछ याद नहीं.

अजय: बांध दिया गया है पर क्यों और वो अभय रायचंद मुझे कहा मिलेगा.

महागुरु: नदी के उस पार गाँव से जाने वाले कच्चे रास्ते पर एक बरसो पुराण खँडहर है वही मौजूद है वो. पर.....

अजय: पर क्या

महागुरु: तुम उसे नहीं हरा पाओगे.

अजय: यही बात मुझे अघोरी ने कही इसीलिए मई आपके पास आया हु उन्होंने कहा की आप मेरी मदद कर सकते है.

महागुरु: वो कोई आम इंसान नहीं न कोई रूहानी ताकत वो कुछ और है मेरी समझ से परे और जिस ताकत को मई समझ hi नहीं प् रहा उसे मई कैसे हरा सकता हु. और वैसे भी हमारी सीमा की हद केवल उस मंदिर तक है हम उसके पार नहीं जा सकते.

अजय निराश होते हुए: मई यहाँ बड़ी उम्मीद से आया था पर कोई बात नहीं अगर आप मेरी मदद नहीं कर सकते तो मई अकेले सामने करूँगा उसका फिर चाहे वो कितना भी ताकतवर क्यों न हो. उस लड़की को तो मई बचा कर रहूँगा फिर चाहे इसमें मेरी ात्मना भी नष्ट हो जाए.

अजय वापस जाने लगा पर महागुरु ने उसे आवाज़ देकर रोक दिया.

महागुरु: ठहरो मई उसे हरा नहीं सकता इसका ये मतलब नहीं की मई तुम्हारी मदद नहीं कर सकता.

अजय: पर बिना उसे हरे मई आप मेरी मदद कैसे कर सकते है.

महागुरु: वो कोई अलौकिक शक्ति है और अलौकिक शक्ति hi उसका सामना कर सकती है. और हम लोग तो आम इंसान है.

अजय: पर ऐसी अलौकिक शक्ति मुझे कहा मिलेगी.

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महागुरु: चिरंजीवी मान्यता है की दुनिया में सात चिरंजीवी है जो दुनिया के सात अलग अलग महाद्वीपों में निवास करते है और जो विष्णु के दसवे अवतार कल्कि के सरंक्षक बनेगे. पर वो सात चिरंजीवी अपने वास्तविक स्वरुप में इस दुनिया के सामने नहीं आ सकते इसलिए भगवान् शिवा के सात गंडो के अंश धरती पर उनके सेवक की भूमिका ऐडा करते है. उन सात चिरंजीवियों में एशिया महास्वीप का सरक्षण करने वाले चिरंजीवी हमारे भारत देश में hi कही है वो कौन है और कहा है ये तो हम नहीं जानते पर जो गदष यहाँ उनके सेवक की भूमिका ऐडा करता है उसके बारे में हम जानते है. वो गंडाश भी एक दिव्या पुरुष है अलौकिक शक्तियों से युक्त.

अजय: कौन है वो

महागुरु: भगवान् शिव के सबसे शक्तिशाली गड वीरभद्र का अंश है वो.

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भगवान् शिव के त्रिशूल का अंश उसके हाथो में समाया है. सिर्फ वही है जो अब उस अभय रायचंद का सामना कर सकता है.

अजय: कहा मिलेगा वो

महागुरु: असम, असम के जंगल में निवास है उसका.

अजय: तो अब मुझे असम जाना होगा और वह मई उसे ढूंढूंगा कैसे.

महागुरु: तुम एक आत्मा हो वह पहुंचने में तुम्हे ज्यादा समय नहीं लगेगा और रही बात उसे ढूंढ़ने की तो तुम्हे उसे ढूंढ़ना नहीं पड़ेगा वो खुद वह अपनी मौजूदगी का एहसास करा देगा. बस देखना ये है की तुम उस एहसास को पहचान पते हो की नहीं. और उसे अपने साथ आने के लिए मन पते हो की नहीं.

अजय: अगर उसे लड़की को बचने के लिए वो ज़रूरी है तो कुछ भी हो जाए मई उसे अपने साथ लेकर आऊंगा.

महागुरु: ईशवर तुम्हे सफलता प्रदान करे.

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अजय वह से चल दिया पर अचानक दरवाज़े पर जाकर वो रुक गया.

अजय: वैसे नाम क्या है उसका.

महागुरु: उसका नाम है

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हवेली में

रात में जहा हवेली का बहार इतना कुछ हो चूका था या हो रहा था तो हवेली के अंदर भी काफी कुछ नया घटित होने वाला था. 5 सहेलिया गरिमा विनीता शबाना नीतू आरती अलग अलग जगहों पर किसी न किसी तरह अपनी अपनी कहानी को आगे बड़ा रही थी तो हवेली में बची बस दो सहेलियों की कहानियो भी आज रात एक अजीब सा ट्विस्ट आने वाला था. शोभा आज रात खुद को नेहा की तरह मॉडर्न लुक में तैयार कर रहो थी उसके कमरे से लेकर आए कपड़ो को तरय कर रही थी ताकि आज अपने पति के दिमाग से नेहा की इमेज को हमेशा हमेशा के लिए ख़तम करके खुद को उससे ज्यादा बेटर और हॉट साबित करदे ताकि फिर कभी ये नेहा का chapter उसकी ज़िन्दगी में कोई प्रॉब्लम न लाए.

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वही वो नेहा इतने दिनों से मास्टर स्लेव का जो खेल खेल रही थी और कल रात के हाहाकारी बड़सम सेशन का बाद जिससे उसने खुद को आज अलग भी कर लिया था पर स्ट्रेंजर की असलियत जान्ने की इच्छा ने उसे एक बार फिर इस खेल में शामिल होने को मजबूर कर दिया था. वो एक बार फिर उस सतरंगेर की बात मानने को तैयार हो गई थी उससे मिलने जाने को तैयार हो गई थी वो भी फुल नुदे सिर्फ इस शर्त पर की आज वो स्ट्रेंजर बिना नक़ाब के उसके सामने आएगा उसे अपनी पहचान दिखाएगा. पर ये सब क्या इतनी आसानी से हो जाने वाला था ये एक नै फंतासी उस फंतासी गर्ल का इंतज़ार कर रही थी. कौन होगा उस नक़ाब के पीछे ये भी अपने आप में एक सवाल था जिसे नेहा के साथ रीडर्स भी जानने को उत्सुक थे.

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पर नेहा शोभा की कहने के अलावा एक और कहानी भी जो एक खौफनाक मंज़िल की तरफ बाद रही थी. रात के अँधेरे में चार हट्टे काटते साए हवेली के गेट से बहार आ रहे थे और हवेली के बहार कड़ी अपनी सुव की तरफ बाद रहे थे. अँधेरे में उनकी शक्ल तो नहीं दिख रही थी पर शायद कहानी के रीडर्स को भी पता था की वो चारो कौन है और इतनी रात में कहा जा रहे है. सुव की लाइट्स ों हुई और बड़ी hi ख़ामोशी से सुव वह से निकल गई.

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वो ब्लैक सुव उस रात के अँधेरे पथरीले आड़े टेड़े रास्तो से होते हुए अपनी मंज़िल की तरफ बड़ी जा रही थी, पर कहा थी उसकी मंज़िल. कुछ घंटो के सफर के बाद उसकी मंज़िल आ गई वो फार्महाउस जहा सुबह वो नाचने वाली चांदनी शबाना खान को लेकर आई थी जहा उसे स्ट्रिप मुजरे की ट्रेनिंग दी गई थी, यानि इस सुव में वो चारो थे. सुव के चारो गेट खुले और लालू, देव, कुंदन और प्रताप एक साथ नीचे उतरे और फार्महाउस के अंदर दाखिल हो गए. अंदर घुसते hi उन दोनों बुड्ढे नेक्रो ने उसने सलाम ठोका.

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लालू: शम्भू कैसा है.

शम्भू: ठीक हु मालिक.

लालू: सुबह दो मेमसाब लोग आई होगी.

शम्भू: है अंदर है एक तो वो पुराणी वाली मेमसाब थी और उनके साथ एक नै मेमसाब भी थी.

लालू नज़रे तिरछी करके: नै वाली मेमसाब कैसी लगी तुम लोग को.

बंसी: मक्खन है साब मक्खन. इत्ती गोरी आवर्त तो आस पास की कई गावो में भी नहीं है. कहा से ढूढ़ कर लाए हो ये सफ़ेद कबूतरी.

लालू: हम तो जंगल के बाज़ है बंसी और ऐसी नै नै कबूतरियो का शिकार करना तो हमारा शौक है. लगता है उसे देख कर तुंहरे बुड्ढे लुंड में भी जवानी आ गई.

दोनों बुड्ढे नौकर डाट निकल देते है.

लालू: चलो अभी इंतज़ाम में लग जाओ जो तुम लोग हर बार करते हो. और है मेरी अलमारी से वो नया माल निकल लाना जो ऐसे hi किसी खास मौके के लिए थाईलैंड से मगाया है.

वो दोनों नौकर वह से चले गए और वो चारो उस बड़े से हॉल नुमा कर्म में दाखिल हुए जहा शबाना ने मुजरे की ट्रेनिंग ली थी. हॉल में पहुंच कर देव ने चांदनी को आवाज़ लगाई. आवाज़ सुनते hi चांदनी उस कमरे से बहार आई जहा शबाना तैयार हुई थी.

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देव ने बिना कुछ बोले आँख के इशारे से चांदनी से पुछा की सब कैसे है और चांदनी ने भी पलके झपका कर इशारे से hi बता दिया की सब रेडी है.

देव: तो जा ले आ उसे सुबह से इंतज़ार कर रहे थे अब सबर नहीं होता जा ले आ उसे.

चांदनी: जी मई अभी उसे तैयार करके लाइ.

चांदनी कमरे में वापिस चली गई. कुंदन फ्रिज से चार बेयर चैने और एक बूटले शराब ले आया और और चारो सोफे पर बैठ कर बेयर पीने लगे. चैने खली करने के बाद कुंदन ने वो बोतल पीना शुरू कर दिया.

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लालू: इतनी मत पी लेना की कुछ करने लायक hi न रहे.

कुंदन: अबे ये तो मेरा जोश बढ़ाने की दवा है इतनी शराब से तो मई सुबह कुल्ला करता हु. इसे पीकर hi तो मेरे अंदर का हैवान जागेगा.

लालू: सही है आज रात मुझे तुम तीनो में हैवान hi चाहिए. जितनी ज़ोर से उस वक़्त लोग मुझ पर हसे थे जब उसने मुझे झापड़ मारा था उससे ज़ादा ज़ोर से आज उसकी चीखे निकालनी चाहिए.

देव: तू चिंता न कर आज उसकी वो हालत करेंगे की मरने की दुआ मांगेगी.

लालू: बढ़िया है, सबके सामने झापड़ मारा था न साली ने उस रात लोगो की हसी नश्तर की तरह मेरे कानो में चुभ रही थी अब तो उसकी चीखे hi मेरे कानो को सुकून देगी.

देव: ऐसा hi होगा.

तब तक वो दोनों नौकर वह आ गए उनके हाथ में एक पैकेट था.

शम्भू: मालिक ये रहा आपका माल.

प्रताप: ये क्या है

लालू: हैवान बनने की दवा जिसने मैंने स्पेशलय थाईलैंड सर मंगाया है.

लालू ने उस पैकेट में से एक शीशी निकली जिसमे एक सफ़ेद पाउडर भरा था.

लालू: ये थाईलैंड की सबसे पॉवरफुल ड्रग है इसका एक जॉइंट इणां के अंदर का हैवान जगाने को काफी है ये लेने के 5 मं के अंदर इंसान के दिमाग पर असर करती है. उस मुसल्ली पर चढ़ने से पहले इसका एक एक जॉइंट ले लेना फिर उसके बाद अंदर का जो हैवान बहार आएगा कसम से मज़ा आ जाएगा. छोड़ने का मज़ा दुगना हो जाएगा.

लालू ने उस शीशी में से थोड़े थोड़े पाउडर की तीन पुड़िया बनाकर तीनो को थमा दी.

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लालू ने शबाना के लिए एक बेहद हैवानियत भरा प्लान बनाया था. तीनो ने वो पुड़िया अपनी अपनी जेब में रख ली.

देव: तू नहीं लेगा ये ड्रग तू नहीं चढ़ेगा आज उस पर.

लालू: नहीं शेर अकेला खता है झुण्ड के साथ नहीं और वैसे भी ये ड्रग लेने के बाद तुम लोग पता नहीं उसके साथ क्या क्या कर डालो. ध्यान रखना कही जान hi लेलो उसकी और कही ऐसी नौबत आ गई तो कोई तो होना चाहिए होश में तुम्हे रोकने के लिए. तुम लोग भी थोड़ा ध्यान रखना और काबू रखना खुद पर कही मार वार मत डालना उसे.

चारो ठहाके मार कर हसने लगे अपनी घटिया सोच पर जो एक औरत को बस उपभोग की चीज़ समझती थी और बेचारी शबाना को तो इस बात का कोई अंदाज़ा भी नहीं था की अगले कुछ घंटे उसके साथ क्या क्या होने वाला है.

देव ने हॉल से ज़ोर आवाज़ लगाई: अरे और कितनी देर इंतज़ार करवाऊंगी मेरी जान बहार आओ. अरे ो चांदनी कितना समय लगेगा रे उसे मुजरे के लिए तैयार कर रही है या सुहागरात के लिए.

कुछ hi देर बाद हॉल का दरवाज़ा खुला उसमे से पहले चांदनी बहार आई और उसके पीछे पीछे शबाना.

देव: बड़ी देर करदी सनम आते आते.

कुंदन: अंदर क्या अपनी झांटे साफ़ कर रही थी.

चांदनी: माफ़ी हुज़ूर आप लोगो को खुश करने के लिए अच्छे से तैयार कर रही थी इसे. एक नज़र देखे तो इसे कुछ कुमी तो नहीं रह गई.

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देव कुंदन प्रताप ने शबाना को ऊपर से नीचे तक घूर कर देखा तवायफों जैसे लाल लिबास में शबाना सच में एक नाचने वाली लग रही थी और उसका मेकअप भी कुछ इसी तरह करा गया था. गाडी लाल लिपस्टिक गालो पर रोज आँखों में लम्बा काजल खुले बाल शबाना ने खुद कभी इतना तड़क भड़क वाला मेकअप नहीं करा था जैसा आज उसका चांदनी ने करा था. देव कुंदन प्रताप उसे बड़ी ललचाई नज़रो से घूर रहे थे शबाना को वह उनके सामने बेहद शर्मिंदगी सी महसूस हो रही थी. उसने चोर नज़रो से लालू की तरफ देखा वो सर झुकाए बैठे जैसे शबाना की हालत पर बड़ा शर्मिंदा हो. शबाना को तो अंदाज़ा भी नहीं था की उसकी इस हालत का असली ज़िम्मेदार तो वही है.

कुंदन: वाह चांदनी बाई वाह सच में तैयार तो बड़ा ज़बरदस्त करा है तूने इस रुंडी को. इसका मेकअप देखकर hi मेरा खड़ा हो गया.

कुंदन ने शबाना को देख कर हस्ते हुए जीन्स के ऊपर से अपना लुंड मसल दिया. शबाना को खुद पर घिन आ रही थी की उसके एक गलत फैसले ने उसे किस हालत में लेकर खड़ा कर दिया है. पर फिलहाल उसके पास दूसरा कोई चारा भी नहीं था.

प्रताप: चलो अब ये तैयार हो गई है तो हम जिस काम के लिए आए है वो शुरू करा जाए. मुजरा शुरू करा जाए.

प्रताप उठकर वही कमरे में रखे म्यूजिक सिस्टम के पास गया और उस पर वो गण प्ले करा जिस पर इस अपडेट का नाम रखा गया था. म्यूजिक सिस्टम पर गण बजना चालू हुआ और चांदनी ने नाचना शुरू hi किया था की परतप ने गण रोक दिया.

परतप: ऐ साली कुटिया आज हम तुझे और तेरा डांस देखने नहीं आए है आज तो हम इस नै रुंडी का मुजरा देखना आए है तो हैट सामने से और इसे बोल नाचने को. ऐ साली तू नाचेगी की नहीं.

चांदनी वह से हैट गई और लालू के पास आकर कड़ी हो गई. पर शबाना अब भी सर झुकाए चुप कड़ी थी.

परताप: साली ये तो चुपचाप कड़ी है सारा मूड ख़राब कर रही है. ऐ देव तो अपलोड करदे इसकी फोटो.

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देव ने अपनी जेब से अपना मोबाइल निकला भर था की शबाना की सांस हलक में आ गई.

शबाना: नहीं प्लीज....

शबाना ने आंसू भरी आँखों से लालू को देखा उसने भी इशारे से शबाना को आश्वस्त करा की वो घबराए नहीं वो है न और बिना संकोच और दर के नाचना शुरू करे.

देव: क्या नहीं नाचेगी की नहीं जल्दी बोल इतनी देर इंरेजार करने की आदत नहीं हमे एक बार हमारा मूड ऑफ हो गया फिर तू नंगी भी नाचेगी तो भी कोई फायदा नहीं होगा तो जल्दी डीडे कर नाचेगी की नहीं.

शबाना ने चुपचाप हां में सर हिला दिया.

कुंदन: और बढ़िया नाच दिखाना जैसा उस रात पार्टी में दिखाया था अगर मज़ा नहीं आया तो समझ ले फिर तू हम दुबारा नहीं बोलेंगे.

कुंदन ने प्रताप को इशारा करा और म्यूजिक सिस्टम पर एक बार फिर गण बजना चालू हो गया.

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में तेरे आखों का साहिल

में तेरे Hi दिल के काबिल

तू मुसाफिर में तेरी मंज़िल

इश्क़ का दरिया है बेहटा दुब जा

तुझसे है कहता

आए… मेरी बाहो में आँखे मिल

गण बजने के साथ hi शबाना ने अपनी कमर हिला कर नाचना शुरू कर दिया.

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शबाना पूरी शिद्दत से नाच रही थी ताकि उन तीनो को गुस्सा होने का मौका न मिले पर अचानक एक बार फिर गाना रुक गया.

देव: आए साला ये तो यहाँ डांस दिखा रही है हम यहाँ डांस नहीं मुजरा देखने आए थे. आए चांदनी की बच्ची तूने इसे बताया नहीं मुजरा कैसे करा जाता है.

चांदनी: जी बताया था सब बताया था.

देव: फिर ये तो यहाँ ऐसे नाच रही है जैसे डांस इंडिया डांस में परफॉरमेंस दे रही हो और हम शो के जज है. साला मुजरे वाली फील hi नहीं आ रही. साला एक रुंडी की तरह मुजरे जैसा डांस कर रही और कपडे क्या इसकी अम्मा उतारेगी और शराब क्या इसका अब्बा लाएगा.

चांदनी: माफ़ कर दीजिये हुज़ूर इसका पहली बार है इसिलए थोड़ा नर्वस है.

चांदनी ने शबाना को शराब के काउंटर की तरफ इशारा करा. गण एक बार फिर बजना चालू हुआ और इस बार शबाना ने ज्यादा कामुक अंदाज़ में नाचना शुरू कर दिया.

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वह शराबी क्या शराबी

दिल में जिसके गम्म न हो….

लूट गया वह शराबी पास जिसके

हम न हो..

Saake…Saaki…Saaki….

ो सकीय साकी रे साकी साकी

Aa..paas aa..rehna जाये कोई

ख्वाइश बाकी!!

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अब शबाना अपने स्तनों को हिलाते हुए और गांड को गोल गोल घूमते हुए चांदनी ने जैसे जैसे सिखाया था वैसे नाच रही थी. नाचते नाचते वो शराब के काउंटर की तरफ चल दी. शबाना ने वह से एक शराब की बोतल ली और नाचते नाचते hi बोतल लेकर बलखाते इठलाते उन तीनो की तरफ जाने लगी. अब तक लालू ने भी शबाना का शर्मा हाय वाला बुर्के और हिजाब में ढाका हुआ रूप hi देखा था, शबाना का ये नया रूप देख उसका भी लुंड झटके खाने लगा. उन तीनो के सामने राखी टेबल के करीब पहुंच कर शबाना ने देव के गिलास में शराब दाल कर बड़ी अदाओ के साथ उसका गिलास उसे थमा दिया फिर वो कुंदन के गिलास में शराब डालने को झुकी पर कुंदन ने उसका हाथ बीच में hi पकड़ लिया.

कुंदन: गिलास से नहीं जानेमन गिलास से तो बच्चे पीते है मर्द सीधा बोतल से पीते है. अपने नाज़ुक कोमल हाथो से हमे सीधा बोतल से पीला.

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कुंदन ने झटका देकर शबाना को अपने करीब खींच लिया और शराब पीने के लिए अपना मुँह खोल दिया. शबाना को अंदर hi अंदर अब थोड़ा दर भी लग रहा था उसने एक बार फिर थोड़ी दूर बैठे लालू को देखा. और लालू ने उसे टेंशन न लेने का इशारा करा और शबाना ने एक बार उसका भरोसा कर लिया. पर चांदनी जानती थी की आगे शबाना के साथ क्या क्या होने वाला है पर वो भी मजबूर थी.

शबाना ने शराब की बोतल कुंदन के मुँह की तरफ कर दी और कुंदन सीधा बोतल से शराब पीने लगा. शराब पीते पीते कुंदन ने अपने हाथ शबाना की मखमली दूधिया कमर पर रख दिए और शबाना की कमर को सहलाने लगा. चारो दोस्तों में कुंदन सबसे कला था और उसके काले हाथ शबबा की गोरी कमर पर अलग से चमक रहे थे. शबाना की कमर को सहलाते सहलाते कुंदन अपने हाथ शबाना की पीठ तक ले गया और वह शबाना की चोली के हुको को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा. कुंदन को शराब पिलाते हुए शबाना पूरी तरह उसके ऊपर झुकी हुई थी और कुंदन भी मौके का पूरा फायदा उठाते हुए उसके बदन अच्छे से सेहला रहा था. बगल में बैठे देव का तो ये देख देख कर hi खून गरम हो रहा था. उसे अफ़सोस हो रहा था की उसने शराब का गिलास क्यों ले लिया उसे भी आइए hi डायरेक्ट बोतल से पीना चाहिए था. म्यूजिक सिस्टम के पास खड़ा प्रताप तो अपनी बरी का इंतज़ार hi कर रहा था. पर कुंदन तो रुकने का नाम नहीं ले रहा था वो आधी से ज्यादा बोतल खली कर चूका था. शबाना की चोली के हुक से खेलते खेलते उसने उन्हें खोलना शुरू कर दिया. शबाना की चोली का एक एक हुक खुलता जा रहा था और हर हुक के साथ उसकी इज़्ज़त बेपर्दा होती जा रही थी, पर शबाना मजबूर थी क्युकी उसे पता था की स्ट्रिप मुजरा के दौरान उसे अपने ये कपडे उतरने hi होंगे. शबाना की चोली का आखिरी हुक तक खुल गया और बोतल की शराब भी ख़तम हो गई.

कुंदन: उतर इसे

कुंदन के कहने पर शबाना अपने हाथ पीछे ले गई और अपनी चोली को अपनी बहो से निकलने लगी. शबाना अपनी चोली उतर hi पाई थी की कुंदन ने उसकी डोर वाली ब्रा की गाँठ खींच कर खोल दी.

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शबाना को अचानक से इसकी उम्मीद नहीं थी क्युकी लालू न वडा करा था की वो उसकी ब्रा पंतय नहीं उतरेंगे उसे पूरा नंगा नहीं करेंगे. शबाना बोतल वही छोड़ कर सीढ़ी कड़ी हो गई और ब्रा नीचे गिरने से पहले उसने उसे अपने हाथो से थाम लिया और अपने हाथ पीछे ले जाकर वापस उसकी गाँठ बाँध ली. शबाना ने कुंदन की इस हरकत पर लालू की तरफ देखा जिस पर लालू भी गुस्से में कुंदन पर बरस पड़ा.

लालू: आए कुंदन ये क्या हरकत है ये तै नहीं हुआ था. जितना तै हुआ था उतना hi कर.

कुंदन ने शबाना को देखकर मुस्कुराते अपने दोनों हाथो से अपने कान पकड़ लिए: सॉरी, सॉरी लालू भाई वो क्या है इतना कांटास माल इतने करीब था की इसके बदन की महक से हाथ थोड़ा फिसल गया. सॉरी शबाना जी दुबारा ऐसा नहीं होगा.

शबाना ने दुबारा लालू की तरफ देखा और लालू ने उसे हाथ के इशारे से रिलैक्स करा और भरोसा दिलाया की वो है. चोली उतरने के बाद भी शबाना को इस बात की तसल्ली मिली की लालू उसके लिए बोलै और आगे भी बोलेगा. सामने वो गन्दी हरकत करने के बावजूद कुंदन शबाना को घूरते हुए बेशर्मो की तरह दांत निकल कर है रहा था और अपनी हाथो में दबी उसकी चोली को अपने चेहरे के करीब ले जाकर उसकी महक को सूंघ रहा था. शबाना वह से हटने को हुई पर पीछे से किसी ने उसका घाघरा पकड़ लिया. शबाना ने गर्दन घुमा कर देखा तो वो देव था जो शबाना का घाघरा पकडे हुआ था और है रहा था.

देव: उसे तो बड़े प्यार से दारू पिलाई ऊपर से अपनी चोली भी देकर जा रही हो और हमारे लिए कुछ नहीं क्यों हमसे ऐसी क्या नाराज़गी.

शबाना ने अपने दिल को कर्रा करा और अपने घाघरे को खोल दिया. वो घाघरा देव के हाथ में रह गया और शबाना बस एक पंतय और ब्रा वह से वापस डांस वाली जगह पर आ गई.

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शबाना का गदराया गोरा चिट्टा बदन अब बस एक कासी हुई पंतय और ब्रा में कैद था. देव और कुंदन उसे यु इस तरह पंतय ब्रा में देख कर बेकाबू हो रहे थे और अपने अपने लुंड को अपनी जीन्स के ऊपर से मसल रहे थे. यु अधनंगी हालत में होने की वजह से शबाना के कदम hi रुक गए थे और कुंदन देव भी कुछ ज्यादा गरम हो गए. पर प्रताप ने शबाना को नाचना जारी रखने को कहा और शबाना ने अपनी शर्म को दरकिनार करते हुए चांदनी के सिखाए अनुसार उस पंतय ब्रा में hi गाने के बोल के साथ आगे नाचना शुरू कर दिया.

ो सकीय साकी रे साकी साकी

Aa..paas aa..rehna जाये कोई

ख्वाइश बाकी!!

शबाना नाच hi रही थी की तभी उसे अपने चूतड़ों पर दो हाथ की छुअन महसूस हुई शबाना ेकडूक हड़बड़ा कर पीछे पलटी पीछे प्रताप उसके पीछे खड़ा दांत निकल रहा था.

प्रताप: एक को चोली एक को घाघरा हमारा भी तो ख्याल रखो जानेमन.

प्रताप ने शबाना की कमर में हाथ डालकर उसे अपनी गोड़ में उठा लिया और गाने के अल्फाज़ो के साथ शबाना को अपनी गोड़ में लेकर नाचने लगा.

तेरी जैसे माशूका ,मुझे यार चाहिए

न पैसा चाहिए न इकरार चाहिए

यह हुसैन का है खुमार मेरा

तुझपे है छाया जोह

कुर्बान हुआ मुझ पे जोह

खुश नसीब बड़ा है वह

Haan…Woh शराबी क्या शराबी

दिल में जिसके गम्म न हो….

लूट गया वह शराबी पास जिसके

हम न हो..

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प्रताप वैसे भी थोड़ा बॉडी बिल्डर टाइप था और वो शबाना को मनचाहे तरीके से अपनी बहो में झूला रहा था. शबाना को बड़ा उनकंफर्टबले लग रहा था पर वो कुछ करने की हालत में नहीं थी. उसे बस कुंदन और देव के हसने की आवाज़े आ रही थी. परतप के लगातार हिलने की वजह से वो लालू को तो देख भी नहीं प् रही थी. शबाना को काफी देर घूमने के बाद प्रताप ने उसे अपनी बहो से उतरा लगातार घूमने की वजह से शबाना का सर चक्र सा रहा था. वो गिरने को हुई पर चार हाथो ने उसे थाम लिया. देव और कुंदन भी सोफे से उठ कर उसके करीब आ चुके थे और उसे अपने सीने से लगाकर नाचने लगे. पीछे से प्रताप भी आ गया शबाना उन तीनो के बीच डाब गई थी. वो तीनो शराब के नशे में धुत्त गाने के साथ अपनी बेसुरी आवाज़ में गेट हुए शबाना के जिस्म को जगह जगह छू रहे थे उसे बरी बरी अपनी तरफ खींच रहे थे. शबाना को दबाए दबाए कुंदन ने अपने होंठ शबाना के होंठो पर रख दिए और उसके होंठो को अपने होंठो में दबा लिया, पीछे से प्रताप ने शबाना की कमर को सहलाते सहलाते अपना हाथ शबाना की पंतय के अंदर दाल दिया और अपनी उंगलियों से शबाना की छूट को सहलाने लगा, और देव ने शबाना की ब्रा को अपनी मुट्ठी की गिरफ्त में भर लिया और एक झटके में शबाना को ब्रा को दो टुकड़ो में पहाड़ कर उसके बदन से अलग कर दिया.

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Saake…Saaki…Saaki….

ो सकीय साकी रे साकी साकी

Aa..paas aa..rehna जाये कोई

ख्वाइश बाकी!!

शबाना उन तीनो की हरकते देख शॉकेड थी वो लालू के बीच में आकर उन्हें रोकने का इंतज़ार कर रही थी पर न लालू को आना था न वो आया. गाना अपने अंतिम पड़ाव पर था और तीनो बेतहाशा शबाना पर टूट पड़े थे. कुंदन की जुंगलियो की तरह चूमने से शबाना के होंठ में दर्द होने लगा था हल्का हल्का खून भी आ गया है. वही देव भी बहुत ज़ोर से शबाना के स्तनों को अपनी मुट्ठी में भर कर मसल रहा था और प्रताप ने तो अपनी दो उंगलिया hi शबाना की छूट में दाल दी थी.

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ो सकीय साकी रे साकी साकी

Aa..paas aa..rehna जाये कोई

ख्वाइश बाकी!!

गाने के आखिरी अल्फाज़ो के साथ शबाना अपनी साडी ताकत को बटोर कर तीनो को धक्का दिया और उनकी पकड़ से छूट गई और लालू की तरफ दौड़ पड़ी. पर सामने लालू ने चांदनी को अपनी गोड़ में बिठा रखा था और सिगरेट के काश भर रहा था. शबाना लालू के पैरो में आकर गीत पड़ी और उससे खुद को बचा लेने की भीक मांगने लगी.

शबाना: लालू लालू बचालो मुझे ये देखो ये लोग क्या कर रहे हो तुमने कहा था न तुम यहाँ मेरे साथ रहोगे और इन्हे कुछ गलत नहीं करने डोज. देखने न देखो ये लोग क्या कर रहे है. बचा लो मुझे प्लीज बचा लो. रोको इन्हे

लालू गुस्से में उन तीनो को देखता और उनपर बरस पड़ता है.

लालू: सेल कुत्तो कमीनो हरामजादो

शबाना के मन में एक सुरक्षा की उम्मीद जाएगी पर..... अचानक लालू ने शाबान को पैरो से धकेल कर पीछे फ़ेंक दिया.

लालू: सालो इसके दूध नंगे कर दिए इसकी छूट को नंगा करने क्या तुम सबके बाप आएँगे. पूरा नंगा करो साली रुंडी को और है कुछ करने से पहले वो जादू की पुड़िया ज़रूर सूंघ लेना.

लालू का ये बदला हुआ रूप देख शबाना की आँखे फटी की फटी रह गई. उसे समझ आ गया की उसे किस तरह जाल में फसाया गया है. कही न कही उसका दिमाग उसे इस बात के लिए अग्गह कर भी रहा था पर शायद उसने अपने दिल पर और लालू पर कुछ ज्यादा hi भरोसा कर लिया था.

लालू: क्या हुआ साली ऐसे क्या देख रही है. शॉक लगा शॉक लगा शॉक लगा लगाआआआ.....

शबाना: तुमने वडा करा था.

लालू: अबे तूने क्या मुझे बाहुबली का प्रभास समझ रखा है जो मई कहु ये मेरा वचन मेरा वचन hi है शाशन जय महिष्मति. साली झापड़ नहीं मारना चाहिए था वो भी सबके सामने.

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शबाना को अब अपनी गलती का एहसास हो रहा था एक गलती को छुपाने के चक्कर में वो पूरी तरह उनके जाल में फस चुकी थी. एक छोटी सी पंतय में शबाना वह उन भेडियो के बीच बेबस लाचार सी पड़ी थी और वो भेडियो उसे नोच खाने को तैयार हो रहे थे. देव कुंदन प्रताप ने अपनी अपनी जेब से वो ड्रग्स की पुड़िया निकली उसका पाउडर अपनी हथेली में लिया और अपनी नाक उसके करीब लेकर उसका एक ज़ोरदार काश भरा. वो ड्रग्स वाकई इतनी ज़ोरदार थी की एक काश में hi उनके दिमाग में अंदर तक उतर गई. उस ड्रग्स का असर उनकी आँखों में भी साफ़ नज़र आ रहा था उनकी आंखर खून सी सुर्ख लाल हो गई थी. शबाना उनके सामने हाथ जोड़े बैठी थी की शायद उनमे से किसी को तो उस पर रेहम आ जाए. पर ड्रग्स के नशे में चूर वो तीनो आहिस्ता आहिस्ता शबाना की तरफ बाद रहे थे और लालू शबाना की बर्बादी हर पल का पूरा लुत्फ़ ले रहा था एक झापड़ का न जाने कितना बदला लेने वाला था वो. वह अगर किसी को शबाना पर तरस आ रहा था तो वो चांदनी थी पर वो भी बेबस थी वो चाहते हुए भी शबाना को बचने के लिए कुछ नहीं कर सकती थी. न जाने वो तीनो शबाना के साथ क्या करने वाले थे पर जो भी था वो बेहद बर्बर और खौफनाक होने वाला था.
 
समय की कुमी और कुछ निजी व्यस्तताओं की वजह से अपडेट देने में वक़्त लगा. अपडेट का फर्स्ट part दे दिया है और अब अगला part बनने में कुछ वक़्त लगेगा. पर उस अपडेट को बनाने से पहले थोड़ा विचलित हु और अपनी इनर फीलिंग अपने रीडर्स से बाटना चाहता हु.

दो दिन पहले हैदराबाद में जो हुआ वो बेहद घटिया और विकृत मानसिकता का परिचायक है और शबाना का अपडेट बनाते वक़्त न जाने क्यों मुझे लालू और उसके दोस्तों में वही मानसिकता नज़र अति है. ये स्टोरी पूरी तरह फिक्शनल है और यहाँ लिखी हर स्टोरी फिक्शनल है बस मज़े के लिए. पर इस स्टोरी को पड़ने वाले या यहाँ की स्टोरी को पड़ने वाले इनसे इतना ज्यादा कनेक्ट न हो की उसे अपने दिमाग में बिठा ले.

इस स्टोरी में कई लोग लालू के किरदार को पसंद करते होंगे पसंद करे पर उसके जैसी मानसिकता न लाए. लालू को पसंद करते करते खुद लालू न बन जाए क्युकी लालू एक घटिया आदमी है और वो वही रहेगा. क्या कहु मई उस इंसिडेंट के बारे में कैसे लोग ऐसा कर जाते है. शेम ों थम भगवान् उस बेहेन की आत्मा को शांति दे.

मेरी यहाँ के विज़िबल नॉन विज़िबल रीडर्स से रिक्वेस्ट है यहाँ की कहानियो को यही पड़े यही छोड़ दे उसे अपनी मानसिकता न बनने दे. थॉट्स आल ी वांट तो से.
 
वह लालू के फार्महाउस पर शबाना बेबस सी उन हैवानो के चंगुल में फस चुकी थी और इधर उस हवेली में रह गई दो सहेलियों शोभा और नेहा की कहानी एक अजीब संयोग की गवाह बनने वाली थी. एक ऐसा संयोग जो उन दोनों के आने वाले जीवन पर ऐसा असर डालने वाला था जिससे वापसी का कोई रास्ता नहीं था. संयोग कोइंसिडेन्स एक ऐसा शब्द जो अपने आप पूरी कहानी समेटे होता है. हम अपने जीवन में कई काम करने का सोचते है जिनमे से कुछ हम कर लेते है और कुछ नहीं पर कई बार हमारे जीवन में कुछ ऐसी घटनाए भी हो जाती है जिनके बारे में हमने सोचा भी नहीं था जिन्हे करने का हमारा कोई इरादा hi नहीं था हमने करने कुछ जाते है और हो कुछ जाता है और उसे hi नाम देते संयोग का. और वो संयोग हमारे जीवन पर बहुत बड़ा असर दाल देता है. कुछ ऐसा hi संयोग आज शोभा और नेहा का इंतज़ार कर रहा था.

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नेहा जो आज उस स्ट्रेंजर की पहचान जानने को उत्सुक थी और उसकी शर्त के अनुसार नंगी उसके पास जाने को भी तैयार हो गई थी वही शोभा उसी नेहा के कमरे से उसके कपडे चुरा कर लाइ थी नेहा की तरह तैयार होकर अपने पति विक्रम को ये दिखाना चाहती थी की नेहा सिर्फ अपने कपड़ो की वजह से हॉट लगती है और यदि वो भी नेहा जैसे कपडे पेहेन ले तो नेहा से भी ज्यादा बोल्ड और हॉट लग सकती है. अपनी ननद आशा की बात मानते हुए शोभा ने अपने पति के दिमाग से नेहा का फितूर उतरने के लिए नेहा की तरह बोल्ड और हॉट बनकर उसके सामने जाने का फैसला कर लिया था. पर क्या होता वही है जैसा हम सोचते है क्या इस रात में नेहा और शोभा अपने अपने टास्क में सफल होने वाली थी या इस रात ने उनके लिए कुछ और hi सोच रखा था.

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शोभा ने नेहा के कमरे से लाए हुए कपड़ो में एक छोटी सी शार्ट मिनी स्कर्ट जिसकी लम्बाई बमुश्किल हिप्स से थोड़ा नीचे तक hi थी और एक टाइट टॉप जिसकी चैन पीछे तरफ से खुलती थी और जो बस शोभा के स्तनों को hi कवर करता था जिसमे शोभा की कमर और शोल्डर खुले hi रहते थे आज रात के लिए सेलेक्ट करा और अंदर पेहेन्ने के लिए वो सेक्सी जालीदार पंतय ब्रा निकल लिए. शोभा जीवन में पहली बार इस तरह के कपडे पेहेन्ने जा रही थी पर सिर्फ अपने पति के लिए. और अपने पति की ख़ुशी के लिए उसे ये पेहेनना भी पड़ा तो उसे अब कोई तकलीफ नहीं थी.

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शोभा ने अपने बदन से साड़ी उतर कर फर्श पर गिरा दी. साड़ी के बाद शोभा के ब्लाउज और पेटीकोट भी ज़मीन की शोभा बड़ा रहे थे. उसके बाद शोभा ने अपनी वो नोरमल पंतय ब्रा भी उतर दी. एक बहु अपना देसी अवतार छोड़ कर एक बेब का रूप लेने को तैयार थी. और वो भी उस बेब का जिसने कई दिन से हवेली के हर मर्द और हर औरत की रातो की नींद उदा दी थी थे हॉट बोम्ब्शेल नेहा. मर्दो की नींद उड़ने की वजह तो साफ़ थी और औरतो की इसलिए क्युकी हर मर्द अपनी बीवी से नेहा जैसा बनने की डिमांड कर रहा था और कुछ हालत शोभा की थी. और शोभा ने तो जस चैलेंज को एक्सेप्ट भी कर लिया था. शोभा ने वीट क्रीम लगाकर अपने छूट के बालो एकदम साफ़ कर दिया फिर उसने वो सेक्सी सेमि ट्रांसपेरेंट पंतय ब्रा पहली. सिर्फ पंतय ब्रा पेहेनते hi शोभा की हॉटनेस में चार चाँद लग गए थे. उन ट्रांसपेरेंट इनर गारमेंट्स में शोभा के स्तन और छूट की दरार साफ़ नज़र आ रहे थे.

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इसके बाद शोभा ने वो शार्ट स्कर्ट और मिनी टॉप भी पेहेन लिया इन कपड़ो में शोभा बाला की खूबसूरत लग रही थी. अब तक सबने शोभा का केवल साडी सलवार सूट वाला रूप hi देखा था यदि गाँव के मर्द शोभा के ये रूप देख लेते तो नेहा को भूल जाते. वैसे भी शोभा और विनीता एकदम परफेक्ट बॉडी वाली महिलाए थी न कही चर्बी ज्यादा थी न ज्यादा स्लिम ऐसे में इन कपड़ो ने उसकी हॉटनेस को हज़ार गुना बड़ा दिया था. कपडे पेहेन्ने के बाद शोभा ने बेहद हॉट और सेडक्टिव मेकअप भी करा आँखों में गदा काला काजल बालो में हल्का कर्ल नेहा जैसा, और होंठो पे नेहा जैसी लाल सुर्ख लिपस्टिक. शोभा का ये रूप अगर उसका बाप मलखान सिंह भी देख लेता तो शायद वो भी शोभा को पहचान न पता और इतने हॉट अवतार में एक औरत को देख उसका लुंड भी खड़ा हो जाता एक बार पहले भी अपनी बेटी को छोड़ चुके मलखान की नियत दुबारा अपनी बेटी पर ख़राब हो जाती.

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तैयार होकर शोभा ने अपनी ननद और विक्रम की बेहेन आशा को कॉल करा.

शोभा: दीदी मई तैयार हु.

आशा: बहुत अच्छे मेरी लड़ो आज मेरे भाई के दिलो दिमाग पर छ जाना पर ध्यान रखना बहनका नहीं अभी आपस में कुछ गलत मत करना.

शोभा: जी दीदी मई ख्याल रखूंगी पर....

आशा: पर क्या

शोभा: वो बहार किसी ने मुझे इन कपड़ो में देख लिया तो क्या सोचेगा.

आशा: उसकी तू चिंता मत कर वो मई देख लुंगी मई विक्रम के कमरे के पास hi रहूंगी और जब पूरी गैलरी खली हो जाएगी सब सो जाएंगे हवेली में एकदम सन्नाटा हो जाएगा तब मई थोड़ा वेट करके सब सो गए है पूरी तरह कन्फर्म करके तुझे कॉल कर दूंगी तू तब hi कमरे से बहार आना इससे कोई तुम्हे देख hi नहीं पाएगा.

शोभा: है दीदी ये ठीक रहेगा, दीदी एक बात कहु आप बहुत अच्छी हो आपसे बात करके लगता hi नहीं की मई आपसे नै नै बात कर रही हु आपमें मुझे ननद वाली नहीं सहेली वाली फीलिंग आती है.

आशा: तो ननद भाभी बनना भी नहीं है हमे, हमे तो सहेली बनकर रहना है ताकि दुनिया भी कहे की ननद भाभी में तो केवल झगड़ा होता है पर ये ननद भाभी तो एकदम सहेली जैसी है.

शोभा: जी बिलकुल

आशा: अब तू अपने कमरे में तैयार रहना बहार एकदम सन्नाटा हो जाने पर मई तुझे कॉल करुँगी.

शोभा: जी

एक तरफ शोभा ने आज की रात के मुताबिक कपडे पेहेन लिए थे और दूसरी तरफ नेहा आज की रात के टास्क के मुताबिक अपने बदन का एक एक कपडा उतर कर अपने कमरे में पूरी तरह नंगी हो चुकी थी.

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क्युकी स्ट्रेंजर ने आज उसे इसी रूप में अपने पास आने को कहा था और स्ट्रेंजर की पहचान जानने को उतावली नेहा ने कल की ज़बरदस्त चुदाई के बावजूद ये टास्क एक्सेप्ट कर लिया था. और अब स्ट्रेंजर के मश्ग का वेट कर रही थी और कुछ hi पल में वो मश्ग आ गया.

स्ट्रेंजर: मई तालाब के पास पहुंच गया हु और इस बार बिना नक़ाब के अब समय हो गया है तेरे आने का. बहार सब सो गए है अब जैसे तुझे बताया है उसी रूप में आजा. और ध्यान रखना NO रिएक्शन NO टॉक जस्ट सडके में एंड सेक्स विथ में एंड के नुदे टोटली नुदे. ी ऍम वेटिंग फॉर ु.

नेहा: Ok ी ऍम किंग

नेहा ने दरवाज़ा खोल कर कमरे के बहार झाका बहार रात गहरी हो चुकी थी चारो तरफ एकदम सन्नाटा था. नेहा बहार निकलने को हुई पर अचानक उसे कुछ याद आया और उसने अपने कदम पीछे खींच लिए.

नेहा मन में: अरे यार एक बात तो मई भूल hi गई तालाब के रस्ते में तो उस जमादार भीमा की झोपडी पड़ेगी और कल रात के बाद तो वो आज हवेली के दरवाज़े पर नज़रे गड़ाए मेरा hi इंतज़ार कर रहा होगा अगर इस हालत में मई उसके पास गई तो आज रात वो मुझे नहीं छोड़ेगा और मई एक संडास साफ़ करने वाले के साथ वो सब कभी नहीं करुँगी डिसगस्टिंग. पर क्या करू कैसे जाए तालाब तक.

नेहा सोच में पद गई, अचानक हवा का एक तेज़ झोका चला और कमरे के पीछे की खिड़की हवा के झटके से खुल गई. नेहा उस खिड़की को बंद करने उसके नज़दीक आई और उसने बहार देखा बहार एकदम अँधा घुप्प अँधेरा था. नेहा की नज़र खिड़की की ग्रिल पर पड़ी जिनमे बीच की सरिया टूटी हुई थी और इतना गैप था जिसमे से नेहा जैसी दुबली पतली लड़की आसानी से बहार जा सकती थी. और नेहा का कमरा ग्राउंड फ्लोर पर होने से उसे बहार कूदने में भी दिक्कत नहीं आने वाली थी. इन्हे देख कर नेहा के दिमाग में एक आईडिया आया.

नेहा मन में: अगर मई इस खिड़की से बहार निकल कर हवेली के पीछे की तरफ से घूम कर तालाब की तरफ जाऊ तो मुझे भीमा की झोपडी की तरफ जाना hi नहीं पड़ेगा और उसे मेरे जाने का पता hi नहीं चलेगा वो यही समझेगा की मई आज रात आई hi नहीं. हम्म यही सही रहेगा.

आईडिया पर अमल करते हुए नेहा खिड़की की सरियो के बीच बने गैप से बहार सरक आई और हवेली के पीछे से घुमते हुए नंगी हालत में तालाब की तरफ बाद चली.

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नेहा नंगी hi अपनी मंज़िल की तरफ चल दी थी पर बहु से बेब बानी शोभा अब भी अपनी ननद कम सहेली आशा की कॉल का इंतज़ार कर रही थी. और कुछ hi देर में शोभा का फ़ोन रिंग हो उठा. फ़ोन अस एक्सेप्टेड आशा का hi था

आशा: शोभा तू तैयार है क्या.

शोभा: है दीदी मई तैयार हु बहार सन्नाटा हो गया क्या.

आशा: है सन्नाटा तो हो गया मगर एक गड़बड़ हो गई.

शोभा: गड़बड़ कैसी गड़बड़ दीदी.

आशा: विक्रम

शोभा: विक्रम, विक्रम का क्या दीदी

आशा: विक्रम अपने कमरे में नहीं है, मैंने अभी अभी विक्रम को बगीचे के पीछे बने तालाब की तरफ जाते देखा वो भी केवल एक लुंगी पहने और एक शराब की बोतल लेकर. मैंने उसे रोककर पुछा भी तो वो बोलै की उसे नींद नहीं आ रही तालाब में तैरने जा रहा है.

शोभा: फिर दीदी ये तो गड़बड़ हो गई.

आशा: वैसे सच कहु तो गड़बड़ नहीं अच्छा hi हुआ है.

शोभा: वो कैसे

आशा: देख अगर तू इन कपड़ो में वह उसके सामने एकदम से पहुंच जाए तो वो तुझे इस रूप में देखकर शॉक रह जाएगा. और चांदनी रात में तालाब के किनारे हाथो में वाइन लेकर आपस में रोमांस करने की बात hi अलग है. वह का रोमांटिक माहौल तुम्हारे रोमांस में चार चाँद लगा देगा और वह सन्नाटा भी रहता है तो कोई डिस्टर्बेंस भी नहीं होगा. बस एकांत पाकर बहक न जाना.

शोभा: पर दीदी मई विकर्म से क्या कहूँगी की मई अचानक से वह कैसे पहुंच गई.

आशा: तो तू उसे मेरा नाम बता देना की मैंने बताया वैसे भी सुबह मेरी विक्रम से बात हुई थी और मैंने उसे सब कुछ तो नहीं बताया था पर इतना कहा था की आज रात तेरी बीवी तुझे एक सुररीज़े देने वाली है जिसे देख कर तू शॉक रह जाएगा. वो पूछने लगा कैसा सुर्प्रीज़े तो मैंने कह दिया वो तो तुझे रात में hi पता चलेगा.

शोभा: आपने उसे पूरी बात तो नहीं बताई.

आशा: नहीं अगर पूरी बात बता देती तो सरप्राइज ख़तम हो जाता. अभी जाते हुए भी पूछ रहा की रात तो हो गई वो सरप्राइज कहा है तो मैंने बात बना दी की शायद भूल गई होगी या सो गई होगी.

शोभा: अच्छा तब तो मई वह जा सकती हु.

आशा: है मई भी यही कहती की अब तू पीछे मत हैट वो तालाब की तरफ गया है तो तू भी उसके पीछे जा और वह इस चांदनी रात उसे अपने इस हॉट अवतार के दर्शन करा कर हमेशा हमेशा के लिए अपना दीवाना बना ले.

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अपनी ननद से बात करके शोभा अपने कमरे के बहार आ गई. बहार उसकी ननद आशा कमरे के सामने hi कड़ी थी. उन्हें एकदम से अपने सामने खड़ा देख और खुद के ऐसे कपड़ो में होने की वजह से शोभा एकदम से झेप गई और अपने हाथो से खुद को ढकने लगी जिसे देख आशा की हसी छूट गई.

आशा: अरे इतना क्या शर्मा रही हो मई भी एक औरत हु कोई मर्द नहीं. वैसे अगर मर्द होती आज तुम्हे इन कपड़ो में देख कर फ्लैट हो जाती. आज मेरे छोटे भाई के लिए तो खुद पर काबू रखना मुश्किल होगा.

शोभा: क्या दीदी आप भी

आशा: अब तू लग hi इतनी हॉट रही है पर वो भले हो काबू न रख पाए पर तू खुद पर काबू रखना.

शोभा: जी दीदी

आशा: चल अब जा और झंडे गाड़ के आ बेस्ट ऑफ़ लक.

आशा को वही छोड़ शोभा हवेली के गेट की तरफ चल दी उसने आशा से तो कह दिया की वो खुद पर काबू रखेगी पर वो क्या बताती की वो तो पहले hi अपने पति के साथ सुहागरात मन चुकी है वो भी शराब के नशे में जो असलियत में कौन था वो सरे रीडर्स जानते है. और फिर उसका इरादा वही था और वो भी अब पुरे होशोहवास में वो भी आज खुले आकाश के नीचे. इन तहत सेंस अपने होशोहवास में ये उसकी फर्स्ट नाईट थी. इस वेडिंग सेरेमनी की दुल्हन की पहली सुहागरात.

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शोभा अपनी पति विक्रम पर अपनी हॉटनेस का जादू चलने के लिए बगीचे के पीछे बने तालाब की तरफ आ रही थी और नेहा भी उस स्ट्रेंजर की पहचान जानने के लिए नंगी हालत बस एक कपडा लपेटे हवेली के पीछे वाले दुसरे रास्ते से उसी तालाब की तरफ जा रही थी. दोनों hi अलग अलग रास्तो से अपनी अपनी मंज़िल की तरफ जा रही थी और दोनों की hi मंज़िल एक hi जगह जाकर ख़तम होती थी. और विक्रम वह क्यों था नाहा जिसकी तरफ अट्रैक्ट थी और शोभा का जो पति था क्या होगा जब वो इनदोनो के सामने होगा. और बेचारा भीमा जो शायद बेसब्री से नेहा का इंतज़ार कर रहा होगा उस बेचारे का क्या होगा क्या आज भी वो इंतज़ार hi करता रह जाएगा क्युकी नेहा तो दुसरे रास्ते से जा रही थी. और वो स्ट्रेंजर वो कौन था क्या आज उसकी असलियत सामने आने वाली थी या नहीं. क्या अजीब संयोग घटने वाला था इन सबकी ज़िंदगियों में और क्या परिणाम होने वाला था इसका यो तो आने वाला वक़्त hi जनता था. पर जो भी था कुछ रोमांचक घटित होने वाला था.

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हवेली में एक अजब संयोग घटने जा रहा था कई दिनों से जो कहानिया धीमे धीमे बाद रही थी वो अपने मुकाम पर पहुंचने वाली थी. शोभा विक्रम को बेइंतिहा प्यार करती थी और वो जानती थी की मर्द की फितरत होती है की एक बार उसकी नज़र में कोई बस गया तो वो उसकी अपनी पत्नी उसके सामने फीकी लगने लगती है और शोभा ऐसा नहीं चाहती थी इसलिए अपने पति को पाने के लिए वो हवेली से बहार उस तालाब की तरफ जा रही थी जिधर विक्रम गया था जैसा की उसकी ननद आशा ने बताया.

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वही नेहा हवेली के पीछे के रस्ते से उसी तालाब की तरफ जा रही थी उस स्ट्रेंजर का चेहरा देखने जिसने पिछले कई दिनों से उसके साथ बड़सम का गेम खेला और आज अपना चेहरा दिखने का वादा करा था. पर एक वादा नेहा ने भी करा था भीमा जमादार से की आज रात वो उसके पास आएगी इसलिए उससे बचने के लिए hi वो हवेली के पीछे वाले रस्ते से जा रही थी.

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शोभा अभी हवेली के गेट के बहार आई hi थी की अचानक शार्ट सर्किट की वजह से हवेली की लाइट्स चली गई. हवेली के बहार लगा बल्ब भी बंद हो गया जिस वजह से चाँद की रौशनी hi वह प्रकाश का एक मात्रा जरिया रह गई. अचानक बत्ती जाने से सर्वेंट क्वार्टर और हवेली के अंदर थोड़ी चेहेल पहल हुई जिस वजह से शोभा तेज़ कदमो से भीमा की झोपडी के पीछे बानी झाड़ियों की तरफ बाद चली ताकि कही कोई उसे देख न ले. बाग़ में पेड़ो के पीछे कोई आज बड़ा बेचैन सा इधर उधर टहल रहा था. डील डॉल से वो हत्ता कट्टा मर्द था, अरे ये तो अपना भीमा है हवेली का गूंगा जमादार और शायद इसकी बेचैनी की वजह थी नेहा जिसने आज उसे आने का वादा करा था और कई दिन से उसकी पंतय में अपना माल निकल निकल कर आज उसे छोड़ने के ख्याल ने hi उसे बेचैन काट दिया था. वो बेसब्र सा नेहा का आने का इंतज़ार कर रहा था.

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पर नेहा कहा थी, नेहा उस तालाब के पास उसके एक छोर पर पहुंच चुकी थी. चाँद की रौशनी में नेहा ने दुआरे छोर पर देखा तो वह कोई था जिसके हाथ में एक शराब की बोतल थी और हाथ मर गिलास. पर उस शिक्षा की पीठ नेहा की तरफ थी जिस वजह से उसका चेहरा नहीं दिख रहा था. पर उसका ऊपरी बदन पर कोई कपडा था सिर्फ कमर के नीचे एक लुंगी बंधी थी और पीछे के डील डॉल में वो बेहद मजबूत शरीर का बाँदा था एकदम किसी पहलवान जैसा. वैसे जब पहली बार वो दुल्हन के लिबास में स्ट्रेंजर के पास आई थी और उसने उसे उल्टा उठाया था तभी वो समझ गई थी की वो एक बेहद मजबूत शरीर का बाँदा है. और कुछ वैसी hi पर्सनालिटी इस वक़्त उसके सामने थी. यानि वो स्ट्रेंजर इस वक़्त उसके सामने तालाब के दुसरे छोर पर था और वो भी बिना नक़ाब के बस देर थी तो नेहा के उस तरफ जाकर उसे अपनी तरफ घूमने की. और नेहा ने बिना देर किये नंगी hi तालाब में छलांग लगा दी. नेहा एक अच्छी स्वीम्मर थी और एक जलपरी की तरह बिना कपड़ो के तैरते हुए वो कुछ hi पल में तालाब के दुसरे छोर पर पहुंच गई. अब तक उस शिक्षा को अंदेशा भी नहीं था की कोई उसके पीछे पहुंच गया. जिस शिक्षा ने पिछले कई दिनों से नेहा को अपनी उंगलियों पर नचाया वो बस उससे कुछ कदम के फासले पर था.

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इधर भीमा बेचैन सा उस आम के बाघ में टहल रहा था अचानक उसकी नज़र बाघ के बहार हवेली की तरफ पड़ी, कोई बड़े बड़े तेज़ कदमो से उसी तरफ आ रहा था और चाल ढाल से साफ़ था की आने वाली कोई औरत थी. पर लाइट चली जाने की वजह से चाँद की रौशनी में उसका चेहरा साफ़ नज़र नहीं आ रहा था. पर वो क्या पहने है ये तो समझ आ hi रहा था भीमा ने उसके कपड़ो को ध्यान से देखा. एक कैसा हुआ टॉप जिनमे उसके स्तनों का कैसा हुआ अकार साफ़ नज़र आ रहा था और नीचे एक शार्ट मिनी स्कर्ट जो शायद उसके घुटनो से कुछ ऊपर hi ख़तम हो जाती थी. पूरी हवेली में इस वक़्त सिर्फ एक hi लड़की थी जो इस तरह के कपडे पहनती थी और वो थी नेहा. और भीमा को अपनी और नेहा की कल रात वाली मुलाकात भी याद आ गई जब उसने अपनी गूंगी भाषा में नेहा से रिक्वेस्ट करि थी की वो ऐसे hi छोटे छोटे कपडे पेहेन कर आए. यानि कोई बच्चा भी बता सकता था की सामने से आ रही वो औरत और कोई नहीं नेहा है. नेहा को इस तरफ आता देख भीमा एक पेड़ के पीछे छुप गया.

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पर क्या वाकई आने वाली औरत नेहा थी क्युकी नेहा तो इस वक़्त तालाब के पास उस शराब पी रहे शिक्षा के पीछे कड़ी थी. फिर वो औरत कौन थी जो भीमा की तरफ आ रही थी. वो शोभा थी जो इस वक़्त नेहा के जैसे कपडे पहने थी और अपने पति विक्रम को रिझाने तालाब की तरफ जा रही थी. पर उसे क्या पता था की अगले कुछ पल में उसके साथ क्या होने वाला है. शोभा उस आम के पेड़ो के बाघ के पास पहुंच चुकी थी घने पेड़ो की वजह से वह और भी ज्यादा अँधेरा था ढंग से रास्ता भी नज़र नहीं आ रहा था पर शोभा यहाँ कोई पहली बार नहीं आई थी ये हवेली उसके बाप की hi थी तो उसे रास्ता ढूंढ़ने की ज़रूरत भी नहीं थी. शोभा बाघ के अंदर दाखिल हो गई.

शोभा अभी कुछ आगे बड़ी भर थी की अचानक किसी ने पीछे उसकी कमर में हाथ दाल कर उसे पीछे से अपनी बहो में भर लिया. शोभा अचानक से हुई हरकत से हड़बड़ा गई और चीखने को हुई पर उस शिक्षा ने अपने हथेली से उसका मुँह बंद कर दिया. और अपने होंठ शोभा की गर्दन पर रख दिए.

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शोभा ने अपने हाथ पीछे करके अपने पीछे खड़े उस मर्द को छुआ वो एक हत्ता कट्टा मर्द था और उसके ऊपरी बदन पर कोई कपडा नहीं था और कमर के नीचे एक धोती बंधी थी. शोभा को अपनी ननद आशा की बात याद आई की विक्रम एक लुंगी पेहेन कर इस तरफ आया है यानि ये शिक्षा विक्रम है. ये एहसास होते hi की वो इस वक़्त विक्रम की बहो में है शोभा ने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया और खुद को उसके हवाले कर दिया.

इधर नेहा उस शिक्षा के पीछे थी और धीमे धीमे आहिस्ता आहिस्ता उस शिक्षा की तरफ बाद रही थी उसने उस स्ट्रेंजर का चलेंगे याद करा की No रियेक्ट No टॉक जस्ट सडके एंड सेक्स यानि उस शिक्षा का चेहरा देखकर उसे शॉक लगने वाला था. उसने आहिस्ता से अपने हाथ उस शिक्षा के कंधे पर रखा, अपने कंधे पर एक स्पर्श महसूस होते hi वो शखस उठकर खड़ा हो गया बिना घूमे बोल पड़ा.

" आ गए बहुत देर कर दी मैंने तो आधी बोतल खली भी करदी."

वो शिक्षा धीमे धीमे नेहा की तरफ घूम रहा था और नेहा ने अपने चेहरे को रिलैक्स कर लिया ताकि उसका रिएक्शन ज़ाहिर न हो जाए और वो ये चैलेंज हार न जाए. वो शिक्षा पुर तरह नेहा की तरफ पलट चूका था और कई दिनों से नक़ाब के पीछे छुपा चेहरा अब नेहा की आँखे के सामने था. उसका चेहरा देख शॉक तो नेहा को ज़बरदस्त लगा था पर चैलेंज के मुताबिक उसने वो ज़ाहिर नहीं करा. पर उसका नाम लेने से वो खुद को रोक न पाई और जो नाम उसने लिया वो था. " विक्रम "

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है वो शिक्षा विक्रम था जो नेहा के सामने था और नेहा जिसके सामने भीगे बदन के साथ पूरी तरह नंगी कड़ी थी. पर अगर विक्रम नेहा के सामने था तो शोभा के पीछे उसे अपनी बहो में भरे वो कौन था. भीमा वो भीमा था जो शोभा को उसके पहनावे की वजह से नेहा समझ बैठा था. उस हवेली का जमादार उस हवेली की मालकिन को अपनों बहो में भरकर उसकी गर्दन को चूम रही थी और शोभा को लग रहा था की जिसने उसे अपनी बहो में भर रखा है वो उसका पति विक्रम है जो उसे इन हॉट कपड़ो में देख कर कुछ ज्यादा hi उत्तेजित हो चूका है और जबकि उसका पति विक्रम यहाँ तालाब के पास नेहा को अपने सामने नंगा खड़ा देख अवाक सा खड़ा था. और नेहा जिस स्ट्रेंजर का चेहरा देखने को उत्सुक थी वो चेहरा उसने देख लिया था. तो क्या विक्रम hi वो स्ट्रेंजर था क्या ये संयोग केवल चार किरदारों का था या कोई पांचवा भी था. कोई था जो नेहा और विक्रम पर लगातार नज़रे गड़ाए हुए था. और उस शिक्षा के चेहरे पर था वही नक़ाब जो स्ट्रेंजर के के चेहरे पर रहता था. तो स्ट्रेंजर यहाँ था यानि नेहा जिसे स्ट्रेंजर समझ रही थी वो विक्रम स्ट्रेंजर नहीं था.

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भीमा शोभा को नेहा समझ रहा था.

शोभा भीमा को विक्रम समझ रही थी.

नेहा विकमार को स्ट्रेंजर समझ रही थी.

विक्रम नेहा को यु नंगा खड़ा देख अवाक था.

वो स्ट्रेंजर उनकी नज़रो दूर उन्हें देख रहा था.

क्या अजीब संयोग और घटनाक्रम घाट रहा था यहाँ पर क्या वाकई ये केवल एक संयोग भर था या एक गहरी साज़िश का हिस्सा. पर जो भी था इस वेडिंग सेरेमनी के ब्राइड और ग्रूम इस वक़्त अलग अलग जिस सीटुएशन्स में थे उनसे ये तय था की ये रात बहुत कामुक होने वाली थी. उनकी सुहागरात ज़रूर होने वाली थी आपस में नहीं तो अलग अलग पर सुहागरात तो थी hi.

वो नक़ाब वाला स्ट्रेंजर क्या केवल एक बड़सम का शौक़ीन मर्द भर था और उसे कही ज्यादा बड़ा मास्टरमाइंड जो एक नक़ाब के सहारे एक बड़ी साज़िश रच रहा था.

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नक़ाब : " ी ऍम थे स्ट्रेंजर. एंड ा स्ट्रेंज गेम इस अबाउट तो बिगिन. एंड बिलीव में इतस सो सो सो डेंजरस. "
 
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