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- Dec 5, 2013
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अब तक आपने ने देखा क अभी न मदालसा क सामने उसके भाइयो और पिता का सच उसके सामने लाया ...साड़ी बातें बताई ..जिसके कारण मदालसा मैं गयी और अभी का उससे विवाह हो गया ...
अब आगे ......
अभी मदालसा को लेकर अपने कक्ष में आगया ......कक्षा में पहुंचकर अभी अपने ककुरता उतर देता है और मदालसा बीएड क किनारे कड़ी बस अभी को hi घूरे जा रही ......
अभी - इस प्रकार एक कोने में कड़ी होकर क्या सोच रही हो ....क्या तुम्हे भय लग रहा है ....
मदालसा - अब में आपकी पत्नी बन चुकी हु तोह अब किस बात का भय ...में तोह बस यर्ह hi सोच रही हु ..क सबकुछ कितना जल्दी जल्दी हो गया .....आज सुबह तक मुज़हे पता नहीं था क मैं आप से मिल भी पाउंगी या नहीं ...और रात में देखो में आपकी पत्नी हु ......
अभी उसके पास जाकर ......उसको आँखों में देखकर ...समय तोह वही है मदालसा .....हमारे मिलान की नीव तोह करशो पहले hi विधाता ने रख दी थी ....जो अब जाकर पूरी hui....inn विकत परिस्तिथि में हमारा विवाह हुआ तुम खुश तोह हो न ....
मदालसा - बहुत बहित खुश ...में जान चुकी हु मेरी ख़ुशी बस आपसे hi है ......इसीलिए जब आप साथ हो तोह दुःख की चाय भी कैसे मज़हर छू सकती है ......
अभी ...उसके एयर पास जाते हुए ....तुम बहुत अच्छी हो मदालसा .....असुरो क बिच रहते हुए तुम तुम्हारे मैं में लेश मात्रा भी पाप या बुराई नहीं है ....
आज तुम्हे पाकर में पूर्ण हो गया ....और उससे अपने गले लगा लेता है ...मदालसा भी इस आलिंगन क लिए कितने वर्षो की प्रतीक्षा कर रही थी ...आज ..उसने इतने विषमताओं को पार करके आखिर अपने प्रियतम को प्राप्त जो कर चुकी है ...
दोनों एक दूसरे क आलिंगन में बढ़ ....एक दूसरे की पीठ सहला रहे थे .....इस आलिंगनकसे दोनों प्रेम क सागर में जैसे डूबता जाते है ......
कुछ देर ऐसे hi आयलिंगं में एक दूसरे के प्रेम का अनुभव करते रहे फिर अलग हो गए ......
अभी ने उसके माथे पर एक किश kiya....Madalsa बस आंखें बंद करके बस अभी क स्पर्श का अनुभव करने लगी .....
अभी अब उसकी आँखों ..गालो को चूमते हुए उसके होंठ तक पहुँच गया था .....मदालसा क लाल कांपते हुए रैसले होंठ ...पर अपने होंठ रख दिए ....जिससे मदालसा जैसे बही की बाहो में पिघलने लगी ....और कसकर अभी को पकड़ लिया ...
अभी अब उसके होंठो को चूमते और धीरे2 चूस रहा था ....
मदालसा क लिए यह नया अनुभव था ...अब वह भी धीरे अभी का साथ देने लगी और अभी क होंठ चूसने लगी ....
दोनों एक दूसरे की जीभ को बारी ..बारी चूसने लगे ...जिससे दिनों और प्यार की गहराई में उतरने लगे ....
दोनों क बदन एक दीसरे से रगड़ रहे थे .....जिसके कारण उनकी ूतिजना और मिलान की प्यास और बढ़ने लगी ....बिच बिच में साँस लेने क लिए थोड़े अलग होते और फिर जुट जाते रसपान करने क लिए .
दोनों अब बिस्तर पर आगये थे ...और ...चूमते हुए कभी मॉडल्स उप्पेर हो जाता तोह कभी ...अभी ..दोनों क हाथ एक दूसरे क शरीर को सहला रहे था .....जिसमें कई बार अभी का हाथ मदालसा क स्तनों तक पहुँच जाता तोह कई बार मदालसा का हाथ कपड़ो क उपाएर से बही क लिंग पर ......
जिसके कारन उनके गुप्तांगो में सरसरी सी होने लगी ....कपड़ो क उप्पेर से अभी का लिंग कई बार मदालसा की योनि पर डाब चूका था ....उड़के हर चुभन पर दोनों की सिसकारी निकल जाती ....
दोनों को अब अपने बिच यह वस्त्रो का आवरण स्वीकार नहीं था .....इसीलिए dono....mein एक दूसरे को निर्वस्त्र करने में जैसे होड़ सी लग गयी थी ......
और कुछ hi पालो में दोनों एक दूसरे क सामने पूरी तरह निर्वस्त्र होगये थे .......मदालसा बिस्ते पर लेती अभी को देखा रही थी ...और अभी उसके क रूप यौवन की सुंदरता को अपनी आँखों से पी रहा था ....
मदालसा की साँसों क ताल पर नाचते हुए स्तन उससे जैसे निमंत्रण दे रहे थे ......अभी अब मदालसा क उप्पेर आकर उसके स्तनों को दबा रहा था ...चूस रहा था चाट रहा था ....अभी का पूरी तरह खड़ा लिंग उसकी जांघो में चुभ रहा था ......
जिससे दोनों की उत्तेजना और बढ़ने लगी ......मदालसा का हाथ अभी क लिंग पर गया ....तोह वह उससे पकड़ कर सहलाने lagi.......Abhi उसके स्तनों को चूस रहा था और एक हाथसे उसकी योनि को सहला रहा था ...जो पूरी तरह गरम हो चुकी थी और कॉमर्स छोड़ रही थी ....
अब मदालसा उप्पेर आयी और अभी क अंगो को सहलाने लगी और चूमने लगी .....
दोनों एक दूसरे क अंगो और गुप्तांगो को चूमते चाटते हुए अपनी ूतिजना क चरम पर पहुँचने लगे .......
कुछ देर ऐसे hi दोनों करते रहे ...और मिलान की और बढ़ने लगे ...दोनों को अब यह कामाग्नि सहन करना कठिन हो गया था ......
अभी ने जब अपना लिंग मदालसा की योनि पर रखा तोह दोनों क भीतर से ऊर्जा निकलने लगी और एक प्रकाश पुंज में बदलने लगी ......
मदालसा ने भी कमर उप्पेर उठाकर अभी को संकेत दिया ....और अभी ने अपना लिंग ..उसकी योनि में प्रवेश करा दिया ......मदालसा का कौमार्य टूट गया और उसके मुँह से चरक निकल गयी ....
अभी ने उसके होंठो पर अपने होंठ रखे कुछ देर चूमने और सहलाने क बाद मदालसा का दर्द थोड़ा काम हुआ ....और ...शुरू हुए ...कामलीला का खेल ........
दोनों की साँसों और आवाजों से वह कक्ष गूंजने लगा ......धीरे 2 फोनो की गति बढ़ती गयी ....अभी भी पूरी तेज़ी से अंदर बहार करने में लगा था ...और मदालसा भी निचे से कमर उठाकर उसका साथ दे रही थी ....ऐसे hi दोनों साथ साथ अपने चरम पर पहुंचे .....और ...साथ साथ स्खलित हो गए ....
दोनों क शरीर से निकली ऊर्जा द्वारा बना प्रकाश पुंज दोनों क भीतर समां गया ....और अभी को प्राप्त हुई .....ईशित्व सिद्धि ......
ईशित्व सिडफी अपने भीतर क परमात्मा क अंश से एकाकार करती है ......और व्यक्ति को परमात्मा का hi प्रतिरूप बना देती है ......
अभी त्रिदेवो का अंश होते हुए भी कई बार भावनाओ में कमजोर पड़ा है ....वह तोह शिवली थी जो ुस्सर बार बार संभालती थी ...इसका कारण एहि था क वह अपने भीतर क त्रिदेवो क अंश को नहीं जान पाया था .....
अब िसित्व सिद्धि क प्राप्त होने क कारण जैसे hi वह शक्ति उसके सारे चक्रो में समाकर एक हो जायेगी ....वह अपने भीतर क त्रिदेवो क अंश से एकाकार हो जाएगा ......
और स्वयं इस्वर का hi एक रूप हो जाएगा .....
इसी ईशित्व सिद्धि क hi कारण ....भगवन क असंह अवतार ....और कई संत महात्मा .....उसके जाने क हज़ारो वर्ष बाद आज भी लोगो द्वारा पूजे जाते है ....
यदि कस मदालसा की बलि चढ़ा देता तोह यह hi सिद्धि उससे प्राप्त हो जाती .....जिसके कारण वह अपने भीतर क इब्लीस क अंश से एकाकार हो jaata.....aur जो ेबिल्स बिना शरीर क बस एक ऊर्जा क रूप में ब्रह्माण्ड में विचरण करता है ...उससे एक शरीर मिल जाता ....और ...कस .पूरी तरह इब्लीस में बदल जाता और ....amar...ho जाता ....और देवी निकुम्बाला भी साक्षात् रूप में उससे प्राप्त हो जाती ...
फिर संसार में उससे कोई भी उससे रोक नहीं पाटा .......
क्यों की पराशक्ति क कथन अनुसार इब्लीस की मृत्यु संभव नहीं ...
यह मिलान समाप्त होते होते रात क करीब 3 बज चुके थे ......
दोनों अब एक दूसरे की बाहों में सो गए ......
कैरब 2 घंटे विश्राम क बाद ....अभी उठ गया .......
प्रथा कर्म करने क बाद ध्यान करने बैठ गया .....
आज ध्यान में बैठते hi उसके सारे चक्र जागृत हो गए ....प्रत्येक चक्र से उनके बीज मंत्रो की आवाज आने लगी ......भीतर का अंतर्नाद ..स्पष्ट सुनाई दे रहा था ....
संपूर्ण शरीर का एक एक कण दिव्या हो गया था ......
अभी अब अपने भीतर त्रिदेवो क अंश से एकाकार हो चूका था ......उसकी साड़ी शक्तिया जागृत हो गयी थी अब वह अपने पूर्ण रूप में आगया था ...
उस अपने hi भीतर त्रिदेवो क दर्शन हो गए .....और उनके ास्त्रो का ज्ञान भी उसके भीतर स्वयं hi प्रगट हो गया ......
यहाँ कस चलवा क रूप में अभी ने जो सुचना दी थी उसके कारण रात भर सोया नहीं था ...उसका ध्यान मदालसा क कक्षा पर hi था ....जिसका द्वार बंद था .....
बड़ी देर से चलवा की तरफ से उससे कोई सुचना नहीं प्राप्त हुई ....जिसके कारण उसका मैं आशंकाओं से भर गयी ...क ..कही रक्षक अपने कार्य में सफल तोह नहीं हुआ ....
वह मदालसा क कक्ष की और बड़ा ...तोह द्वार भीतर से बंद था ...तोह वह द्वार को एक प्रहार से hi तोड़कर भीतर गया तोह देखा क ना तोह वह मदालसा है और ना hi वह चलवा......
कस क आखरी आशा भिवचत गयी ....अब उसका क्रोध ...सातवे आसमान तक पहुँच गया था .....
कस - रक्षक तुमने फिर मेरे साथ छल किया है ...इसका दंड तुम्हे आवस्य hi में दूंगा ....तुम क्या सोचते हो सड़ना पूरी न होने पर कस कमजोर हो जाएगा ...कभी ...नहीं .....अब तक तोह में अपनी साधना क बंधन में था जिसके कारण में यहाँ से बहार नहीं जा पा रहा था ...
अब तिम्हरा सामना होगा मुहज़्ज़ ......तैयार रहना रक्षक ....अपने भक्षक का स्वागत करने ...
कस ने संसार में फैले हुए अपने करोड़ो असुरो का आवाहन किया .....
उसके बाद उसने 13 बलियो क बाद देवी निकुम्बाला द्वारा प्राप्त 13 महा असुरो को प्रगट किया जो ....उससे देवी की और से उपहार रूप में प्राप्त हुआ था ....
यह 13 महासुर 13 लोक की ऊर्जा क अंश से परिपूर्ण थे ......
कल देखेंगे क किस प्रकार कस ने किन कन्याओ का बलिदान किया जिसके कारण उससे यह भयंकर असुर प्राप्त हुए थे ......और dekhenge...Abhi की रक्षक सेना और शक्तिया...
आज क लिए इतना hi ....
अगला अपडेट कल.....
अब तक आपने ने देखा क अभी न मदालसा क सामने उसके भाइयो और पिता का सच उसके सामने लाया ...साड़ी बातें बताई ..जिसके कारण मदालसा मैं गयी और अभी का उससे विवाह हो गया ...
अब आगे ......
अभी मदालसा को लेकर अपने कक्ष में आगया ......कक्षा में पहुंचकर अभी अपने ककुरता उतर देता है और मदालसा बीएड क किनारे कड़ी बस अभी को hi घूरे जा रही ......
अभी - इस प्रकार एक कोने में कड़ी होकर क्या सोच रही हो ....क्या तुम्हे भय लग रहा है ....
मदालसा - अब में आपकी पत्नी बन चुकी हु तोह अब किस बात का भय ...में तोह बस यर्ह hi सोच रही हु ..क सबकुछ कितना जल्दी जल्दी हो गया .....आज सुबह तक मुज़हे पता नहीं था क मैं आप से मिल भी पाउंगी या नहीं ...और रात में देखो में आपकी पत्नी हु ......
अभी उसके पास जाकर ......उसको आँखों में देखकर ...समय तोह वही है मदालसा .....हमारे मिलान की नीव तोह करशो पहले hi विधाता ने रख दी थी ....जो अब जाकर पूरी hui....inn विकत परिस्तिथि में हमारा विवाह हुआ तुम खुश तोह हो न ....
मदालसा - बहुत बहित खुश ...में जान चुकी हु मेरी ख़ुशी बस आपसे hi है ......इसीलिए जब आप साथ हो तोह दुःख की चाय भी कैसे मज़हर छू सकती है ......
अभी ...उसके एयर पास जाते हुए ....तुम बहुत अच्छी हो मदालसा .....असुरो क बिच रहते हुए तुम तुम्हारे मैं में लेश मात्रा भी पाप या बुराई नहीं है ....
आज तुम्हे पाकर में पूर्ण हो गया ....और उससे अपने गले लगा लेता है ...मदालसा भी इस आलिंगन क लिए कितने वर्षो की प्रतीक्षा कर रही थी ...आज ..उसने इतने विषमताओं को पार करके आखिर अपने प्रियतम को प्राप्त जो कर चुकी है ...
दोनों एक दूसरे क आलिंगन में बढ़ ....एक दूसरे की पीठ सहला रहे थे .....इस आलिंगनकसे दोनों प्रेम क सागर में जैसे डूबता जाते है ......
कुछ देर ऐसे hi आयलिंगं में एक दूसरे के प्रेम का अनुभव करते रहे फिर अलग हो गए ......
अभी ने उसके माथे पर एक किश kiya....Madalsa बस आंखें बंद करके बस अभी क स्पर्श का अनुभव करने लगी .....
अभी अब उसकी आँखों ..गालो को चूमते हुए उसके होंठ तक पहुँच गया था .....मदालसा क लाल कांपते हुए रैसले होंठ ...पर अपने होंठ रख दिए ....जिससे मदालसा जैसे बही की बाहो में पिघलने लगी ....और कसकर अभी को पकड़ लिया ...
अभी अब उसके होंठो को चूमते और धीरे2 चूस रहा था ....
मदालसा क लिए यह नया अनुभव था ...अब वह भी धीरे अभी का साथ देने लगी और अभी क होंठ चूसने लगी ....
दोनों एक दूसरे की जीभ को बारी ..बारी चूसने लगे ...जिससे दिनों और प्यार की गहराई में उतरने लगे ....
दोनों क बदन एक दीसरे से रगड़ रहे थे .....जिसके कारण उनकी ूतिजना और मिलान की प्यास और बढ़ने लगी ....बिच बिच में साँस लेने क लिए थोड़े अलग होते और फिर जुट जाते रसपान करने क लिए .
दोनों अब बिस्तर पर आगये थे ...और ...चूमते हुए कभी मॉडल्स उप्पेर हो जाता तोह कभी ...अभी ..दोनों क हाथ एक दूसरे क शरीर को सहला रहे था .....जिसमें कई बार अभी का हाथ मदालसा क स्तनों तक पहुँच जाता तोह कई बार मदालसा का हाथ कपड़ो क उपाएर से बही क लिंग पर ......
जिसके कारन उनके गुप्तांगो में सरसरी सी होने लगी ....कपड़ो क उप्पेर से अभी का लिंग कई बार मदालसा की योनि पर डाब चूका था ....उड़के हर चुभन पर दोनों की सिसकारी निकल जाती ....
दोनों को अब अपने बिच यह वस्त्रो का आवरण स्वीकार नहीं था .....इसीलिए dono....mein एक दूसरे को निर्वस्त्र करने में जैसे होड़ सी लग गयी थी ......
और कुछ hi पालो में दोनों एक दूसरे क सामने पूरी तरह निर्वस्त्र होगये थे .......मदालसा बिस्ते पर लेती अभी को देखा रही थी ...और अभी उसके क रूप यौवन की सुंदरता को अपनी आँखों से पी रहा था ....
मदालसा की साँसों क ताल पर नाचते हुए स्तन उससे जैसे निमंत्रण दे रहे थे ......अभी अब मदालसा क उप्पेर आकर उसके स्तनों को दबा रहा था ...चूस रहा था चाट रहा था ....अभी का पूरी तरह खड़ा लिंग उसकी जांघो में चुभ रहा था ......
जिससे दोनों की उत्तेजना और बढ़ने लगी ......मदालसा का हाथ अभी क लिंग पर गया ....तोह वह उससे पकड़ कर सहलाने lagi.......Abhi उसके स्तनों को चूस रहा था और एक हाथसे उसकी योनि को सहला रहा था ...जो पूरी तरह गरम हो चुकी थी और कॉमर्स छोड़ रही थी ....
अब मदालसा उप्पेर आयी और अभी क अंगो को सहलाने लगी और चूमने लगी .....
दोनों एक दूसरे क अंगो और गुप्तांगो को चूमते चाटते हुए अपनी ूतिजना क चरम पर पहुँचने लगे .......
कुछ देर ऐसे hi दोनों करते रहे ...और मिलान की और बढ़ने लगे ...दोनों को अब यह कामाग्नि सहन करना कठिन हो गया था ......
अभी ने जब अपना लिंग मदालसा की योनि पर रखा तोह दोनों क भीतर से ऊर्जा निकलने लगी और एक प्रकाश पुंज में बदलने लगी ......
मदालसा ने भी कमर उप्पेर उठाकर अभी को संकेत दिया ....और अभी ने अपना लिंग ..उसकी योनि में प्रवेश करा दिया ......मदालसा का कौमार्य टूट गया और उसके मुँह से चरक निकल गयी ....
अभी ने उसके होंठो पर अपने होंठ रखे कुछ देर चूमने और सहलाने क बाद मदालसा का दर्द थोड़ा काम हुआ ....और ...शुरू हुए ...कामलीला का खेल ........
दोनों की साँसों और आवाजों से वह कक्ष गूंजने लगा ......धीरे 2 फोनो की गति बढ़ती गयी ....अभी भी पूरी तेज़ी से अंदर बहार करने में लगा था ...और मदालसा भी निचे से कमर उठाकर उसका साथ दे रही थी ....ऐसे hi दोनों साथ साथ अपने चरम पर पहुंचे .....और ...साथ साथ स्खलित हो गए ....
दोनों क शरीर से निकली ऊर्जा द्वारा बना प्रकाश पुंज दोनों क भीतर समां गया ....और अभी को प्राप्त हुई .....ईशित्व सिद्धि ......
ईशित्व सिडफी अपने भीतर क परमात्मा क अंश से एकाकार करती है ......और व्यक्ति को परमात्मा का hi प्रतिरूप बना देती है ......
अभी त्रिदेवो का अंश होते हुए भी कई बार भावनाओ में कमजोर पड़ा है ....वह तोह शिवली थी जो ुस्सर बार बार संभालती थी ...इसका कारण एहि था क वह अपने भीतर क त्रिदेवो क अंश को नहीं जान पाया था .....
अब िसित्व सिद्धि क प्राप्त होने क कारण जैसे hi वह शक्ति उसके सारे चक्रो में समाकर एक हो जायेगी ....वह अपने भीतर क त्रिदेवो क अंश से एकाकार हो जाएगा ......
और स्वयं इस्वर का hi एक रूप हो जाएगा .....
इसी ईशित्व सिद्धि क hi कारण ....भगवन क असंह अवतार ....और कई संत महात्मा .....उसके जाने क हज़ारो वर्ष बाद आज भी लोगो द्वारा पूजे जाते है ....
यदि कस मदालसा की बलि चढ़ा देता तोह यह hi सिद्धि उससे प्राप्त हो जाती .....जिसके कारण वह अपने भीतर क इब्लीस क अंश से एकाकार हो jaata.....aur जो ेबिल्स बिना शरीर क बस एक ऊर्जा क रूप में ब्रह्माण्ड में विचरण करता है ...उससे एक शरीर मिल जाता ....और ...कस .पूरी तरह इब्लीस में बदल जाता और ....amar...ho जाता ....और देवी निकुम्बाला भी साक्षात् रूप में उससे प्राप्त हो जाती ...
फिर संसार में उससे कोई भी उससे रोक नहीं पाटा .......
क्यों की पराशक्ति क कथन अनुसार इब्लीस की मृत्यु संभव नहीं ...
यह मिलान समाप्त होते होते रात क करीब 3 बज चुके थे ......
दोनों अब एक दूसरे की बाहों में सो गए ......
कैरब 2 घंटे विश्राम क बाद ....अभी उठ गया .......
प्रथा कर्म करने क बाद ध्यान करने बैठ गया .....
आज ध्यान में बैठते hi उसके सारे चक्र जागृत हो गए ....प्रत्येक चक्र से उनके बीज मंत्रो की आवाज आने लगी ......भीतर का अंतर्नाद ..स्पष्ट सुनाई दे रहा था ....
संपूर्ण शरीर का एक एक कण दिव्या हो गया था ......
अभी अब अपने भीतर त्रिदेवो क अंश से एकाकार हो चूका था ......उसकी साड़ी शक्तिया जागृत हो गयी थी अब वह अपने पूर्ण रूप में आगया था ...
उस अपने hi भीतर त्रिदेवो क दर्शन हो गए .....और उनके ास्त्रो का ज्ञान भी उसके भीतर स्वयं hi प्रगट हो गया ......
यहाँ कस चलवा क रूप में अभी ने जो सुचना दी थी उसके कारण रात भर सोया नहीं था ...उसका ध्यान मदालसा क कक्षा पर hi था ....जिसका द्वार बंद था .....
बड़ी देर से चलवा की तरफ से उससे कोई सुचना नहीं प्राप्त हुई ....जिसके कारण उसका मैं आशंकाओं से भर गयी ...क ..कही रक्षक अपने कार्य में सफल तोह नहीं हुआ ....
वह मदालसा क कक्ष की और बड़ा ...तोह द्वार भीतर से बंद था ...तोह वह द्वार को एक प्रहार से hi तोड़कर भीतर गया तोह देखा क ना तोह वह मदालसा है और ना hi वह चलवा......
कस क आखरी आशा भिवचत गयी ....अब उसका क्रोध ...सातवे आसमान तक पहुँच गया था .....
कस - रक्षक तुमने फिर मेरे साथ छल किया है ...इसका दंड तुम्हे आवस्य hi में दूंगा ....तुम क्या सोचते हो सड़ना पूरी न होने पर कस कमजोर हो जाएगा ...कभी ...नहीं .....अब तक तोह में अपनी साधना क बंधन में था जिसके कारण में यहाँ से बहार नहीं जा पा रहा था ...
अब तिम्हरा सामना होगा मुहज़्ज़ ......तैयार रहना रक्षक ....अपने भक्षक का स्वागत करने ...
कस ने संसार में फैले हुए अपने करोड़ो असुरो का आवाहन किया .....
उसके बाद उसने 13 बलियो क बाद देवी निकुम्बाला द्वारा प्राप्त 13 महा असुरो को प्रगट किया जो ....उससे देवी की और से उपहार रूप में प्राप्त हुआ था ....
यह 13 महासुर 13 लोक की ऊर्जा क अंश से परिपूर्ण थे ......
कल देखेंगे क किस प्रकार कस ने किन कन्याओ का बलिदान किया जिसके कारण उससे यह भयंकर असुर प्राप्त हुए थे ......और dekhenge...Abhi की रक्षक सेना और शक्तिया...
आज क लिए इतना hi ....
अगला अपडेट कल.....