ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 20 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

अपडेट - 137



अब तक आपने ने देखा क अभी न मदालसा क सामने उसके भाइयो और पिता का सच उसके सामने लाया ...साड़ी बातें बताई ..जिसके कारण मदालसा मैं गयी और अभी का उससे विवाह हो गया ...

अब आगे ......

अभी मदालसा को लेकर अपने कक्ष में आगया ......कक्षा में पहुंचकर अभी अपने ककुरता उतर देता है और मदालसा बीएड क किनारे कड़ी बस अभी को hi घूरे जा रही ......

अभी - इस प्रकार एक कोने में कड़ी होकर क्या सोच रही हो ....क्या तुम्हे भय लग रहा है ....

मदालसा - अब में आपकी पत्नी बन चुकी हु तोह अब किस बात का भय ...में तोह बस यर्ह hi सोच रही हु ..क सबकुछ कितना जल्दी जल्दी हो गया .....आज सुबह तक मुज़हे पता नहीं था क मैं आप से मिल भी पाउंगी या नहीं ...और रात में देखो में आपकी पत्नी हु ......

अभी उसके पास जाकर ......उसको आँखों में देखकर ...समय तोह वही है मदालसा .....हमारे मिलान की नीव तोह करशो पहले hi विधाता ने रख दी थी ....जो अब जाकर पूरी hui....inn विकत परिस्तिथि में हमारा विवाह हुआ तुम खुश तोह हो न ....

मदालसा - बहुत बहित खुश ...में जान चुकी हु मेरी ख़ुशी बस आपसे hi है ......इसीलिए जब आप साथ हो तोह दुःख की चाय भी कैसे मज़हर छू सकती है ......

अभी ...उसके एयर पास जाते हुए ....तुम बहुत अच्छी हो मदालसा .....असुरो क बिच रहते हुए तुम तुम्हारे मैं में लेश मात्रा भी पाप या बुराई नहीं है ....

आज तुम्हे पाकर में पूर्ण हो गया ....और उससे अपने गले लगा लेता है ...मदालसा भी इस आलिंगन क लिए कितने वर्षो की प्रतीक्षा कर रही थी ...आज ..उसने इतने विषमताओं को पार करके आखिर अपने प्रियतम को प्राप्त जो कर चुकी है ...

दोनों एक दूसरे क आलिंगन में बढ़ ....एक दूसरे की पीठ सहला रहे थे .....इस आलिंगनकसे दोनों प्रेम क सागर में जैसे डूबता जाते है ......

कुछ देर ऐसे hi आयलिंगं में एक दूसरे के प्रेम का अनुभव करते रहे फिर अलग हो गए ......

अभी ने उसके माथे पर एक किश kiya....Madalsa बस आंखें बंद करके बस अभी क स्पर्श का अनुभव करने लगी .....

अभी अब उसकी आँखों ..गालो को चूमते हुए उसके होंठ तक पहुँच गया था .....मदालसा क लाल कांपते हुए रैसले होंठ ...पर अपने होंठ रख दिए ....जिससे मदालसा जैसे बही की बाहो में पिघलने लगी ....और कसकर अभी को पकड़ लिया ...

अभी अब उसके होंठो को चूमते और धीरे2 चूस रहा था ....

मदालसा क लिए यह नया अनुभव था ...अब वह भी धीरे अभी का साथ देने लगी और अभी क होंठ चूसने लगी ....

दोनों एक दूसरे की जीभ को बारी ..बारी चूसने लगे ...जिससे दिनों और प्यार की गहराई में उतरने लगे ....

दोनों क बदन एक दीसरे से रगड़ रहे थे .....जिसके कारण उनकी ूतिजना और मिलान की प्यास और बढ़ने लगी ....बिच बिच में साँस लेने क लिए थोड़े अलग होते और फिर जुट जाते रसपान करने क लिए .

दोनों अब बिस्तर पर आगये थे ...और ...चूमते हुए कभी मॉडल्स उप्पेर हो जाता तोह कभी ...अभी ..दोनों क हाथ एक दूसरे क शरीर को सहला रहे था .....जिसमें कई बार अभी का हाथ मदालसा क स्तनों तक पहुँच जाता तोह कई बार मदालसा का हाथ कपड़ो क उपाएर से बही क लिंग पर ......

जिसके कारन उनके गुप्तांगो में सरसरी सी होने लगी ....कपड़ो क उप्पेर से अभी का लिंग कई बार मदालसा की योनि पर डाब चूका था ....उड़के हर चुभन पर दोनों की सिसकारी निकल जाती ....

दोनों को अब अपने बिच यह वस्त्रो का आवरण स्वीकार नहीं था .....इसीलिए dono....mein एक दूसरे को निर्वस्त्र करने में जैसे होड़ सी लग गयी थी ......

और कुछ hi पालो में दोनों एक दूसरे क सामने पूरी तरह निर्वस्त्र होगये थे .......मदालसा बिस्ते पर लेती अभी को देखा रही थी ...और अभी उसके क रूप यौवन की सुंदरता को अपनी आँखों से पी रहा था ....

मदालसा की साँसों क ताल पर नाचते हुए स्तन उससे जैसे निमंत्रण दे रहे थे ......अभी अब मदालसा क उप्पेर आकर उसके स्तनों को दबा रहा था ...चूस रहा था चाट रहा था ....अभी का पूरी तरह खड़ा लिंग उसकी जांघो में चुभ रहा था ......

जिससे दोनों की उत्तेजना और बढ़ने लगी ......मदालसा का हाथ अभी क लिंग पर गया ....तोह वह उससे पकड़ कर सहलाने lagi.......Abhi उसके स्तनों को चूस रहा था और एक हाथसे उसकी योनि को सहला रहा था ...जो पूरी तरह गरम हो चुकी थी और कॉमर्स छोड़ रही थी ....

अब मदालसा उप्पेर आयी और अभी क अंगो को सहलाने लगी और चूमने लगी .....

दोनों एक दूसरे क अंगो और गुप्तांगो को चूमते चाटते हुए अपनी ूतिजना क चरम पर पहुँचने लगे .......

कुछ देर ऐसे hi दोनों करते रहे ...और मिलान की और बढ़ने लगे ...दोनों को अब यह कामाग्नि सहन करना कठिन हो गया था ......

अभी ने जब अपना लिंग मदालसा की योनि पर रखा तोह दोनों क भीतर से ऊर्जा निकलने लगी और एक प्रकाश पुंज में बदलने लगी ......

मदालसा ने भी कमर उप्पेर उठाकर अभी को संकेत दिया ....और अभी ने अपना लिंग ..उसकी योनि में प्रवेश करा दिया ......मदालसा का कौमार्य टूट गया और उसके मुँह से चरक निकल गयी ....

अभी ने उसके होंठो पर अपने होंठ रखे कुछ देर चूमने और सहलाने क बाद मदालसा का दर्द थोड़ा काम हुआ ....और ...शुरू हुए ...कामलीला का खेल ........

दोनों की साँसों और आवाजों से वह कक्ष गूंजने लगा ......धीरे 2 फोनो की गति बढ़ती गयी ....अभी भी पूरी तेज़ी से अंदर बहार करने में लगा था ...और मदालसा भी निचे से कमर उठाकर उसका साथ दे रही थी ....ऐसे hi दोनों साथ साथ अपने चरम पर पहुंचे .....और ...साथ साथ स्खलित हो गए ....

दोनों क शरीर से निकली ऊर्जा द्वारा बना प्रकाश पुंज दोनों क भीतर समां गया ....और अभी को प्राप्त हुई .....ईशित्व सिद्धि ......

ईशित्व सिडफी अपने भीतर क परमात्मा क अंश से एकाकार करती है ......और व्यक्ति को परमात्मा का hi प्रतिरूप बना देती है ......

अभी त्रिदेवो का अंश होते हुए भी कई बार भावनाओ में कमजोर पड़ा है ....वह तोह शिवली थी जो ुस्सर बार बार संभालती थी ...इसका कारण एहि था क वह अपने भीतर क त्रिदेवो क अंश को नहीं जान पाया था .....

अब िसित्व सिद्धि क प्राप्त होने क कारण जैसे hi वह शक्ति उसके सारे चक्रो में समाकर एक हो जायेगी ....वह अपने भीतर क त्रिदेवो क अंश से एकाकार हो जाएगा ......

और स्वयं इस्वर का hi एक रूप हो जाएगा .....

इसी ईशित्व सिद्धि क hi कारण ....भगवन क असंह अवतार ....और कई संत महात्मा .....उसके जाने क हज़ारो वर्ष बाद आज भी लोगो द्वारा पूजे जाते है ....

यदि कस मदालसा की बलि चढ़ा देता तोह यह hi सिद्धि उससे प्राप्त हो जाती .....जिसके कारण वह अपने भीतर क इब्लीस क अंश से एकाकार हो jaata.....aur जो ेबिल्स बिना शरीर क बस एक ऊर्जा क रूप में ब्रह्माण्ड में विचरण करता है ...उससे एक शरीर मिल जाता ....और ...कस .पूरी तरह इब्लीस में बदल जाता और ....amar...ho जाता ....और देवी निकुम्बाला भी साक्षात् रूप में उससे प्राप्त हो जाती ...

फिर संसार में उससे कोई भी उससे रोक नहीं पाटा .......

क्यों की पराशक्ति क कथन अनुसार इब्लीस की मृत्यु संभव नहीं ...

यह मिलान समाप्त होते होते रात क करीब 3 बज चुके थे ......

दोनों अब एक दूसरे की बाहों में सो गए ......

कैरब 2 घंटे विश्राम क बाद ....अभी उठ गया .......

प्रथा कर्म करने क बाद ध्यान करने बैठ गया .....

आज ध्यान में बैठते hi उसके सारे चक्र जागृत हो गए ....प्रत्येक चक्र से उनके बीज मंत्रो की आवाज आने लगी ......भीतर का अंतर्नाद ..स्पष्ट सुनाई दे रहा था ....

संपूर्ण शरीर का एक एक कण दिव्या हो गया था ......

अभी अब अपने भीतर त्रिदेवो क अंश से एकाकार हो चूका था ......उसकी साड़ी शक्तिया जागृत हो गयी थी अब वह अपने पूर्ण रूप में आगया था ...

उस अपने hi भीतर त्रिदेवो क दर्शन हो गए .....और उनके ास्त्रो का ज्ञान भी उसके भीतर स्वयं hi प्रगट हो गया ......

यहाँ कस चलवा क रूप में अभी ने जो सुचना दी थी उसके कारण रात भर सोया नहीं था ...उसका ध्यान मदालसा क कक्षा पर hi था ....जिसका द्वार बंद था .....

बड़ी देर से चलवा की तरफ से उससे कोई सुचना नहीं प्राप्त हुई ....जिसके कारण उसका मैं आशंकाओं से भर गयी ...क ..कही रक्षक अपने कार्य में सफल तोह नहीं हुआ ....

वह मदालसा क कक्ष की और बड़ा ...तोह द्वार भीतर से बंद था ...तोह वह द्वार को एक प्रहार से hi तोड़कर भीतर गया तोह देखा क ना तोह वह मदालसा है और ना hi वह चलवा......

कस क आखरी आशा भिवचत गयी ....अब उसका क्रोध ...सातवे आसमान तक पहुँच गया था .....

कस - रक्षक तुमने फिर मेरे साथ छल किया है ...इसका दंड तुम्हे आवस्य hi में दूंगा ....तुम क्या सोचते हो सड़ना पूरी न होने पर कस कमजोर हो जाएगा ...कभी ...नहीं .....अब तक तोह में अपनी साधना क बंधन में था जिसके कारण में यहाँ से बहार नहीं जा पा रहा था ...

अब तिम्हरा सामना होगा मुहज़्ज़ ......तैयार रहना रक्षक ....अपने भक्षक का स्वागत करने ...

कस ने संसार में फैले हुए अपने करोड़ो असुरो का आवाहन किया .....

उसके बाद उसने 13 बलियो क बाद देवी निकुम्बाला द्वारा प्राप्त 13 महा असुरो को प्रगट किया जो ....उससे देवी की और से उपहार रूप में प्राप्त हुआ था ....

यह 13 महासुर 13 लोक की ऊर्जा क अंश से परिपूर्ण थे ......

कल देखेंगे क किस प्रकार कस ने किन कन्याओ का बलिदान किया जिसके कारण उससे यह भयंकर असुर प्राप्त हुए थे ......और dekhenge...Abhi की रक्षक सेना और शक्तिया...

आज क लिए इतना hi ....


अगला अपडेट कल.....
 
अपडेट - 138

अब तक आपने देखा मदालसा से मिलान क फलस्वरूप अभी को ईशित्व सिद्धि प्राप्त हो गयी ...है ...

अपनी इतने वर्षो की तपस्या क अधूरे रह जाने से कस का क्रोध बढ़ गया ...और उसने अब अंतिम युद्ध करने का निर्णय लिया ...और समस्था असुर वीरो को पतलोक में एकत्रित किया ....

अब आगी ...

कस को अपनी साधना क अंतिम चरण क लिए ...हर महीने की अमावस्या को ऐसी एक कन्या की बलि देनी थी जिसका जन्म अभी की hi तरह रोहिणी नक्षत्र में हुआ हो ....इस प्रकार उससे 14 बलि 14 लोको की कन्याओ की देनी थी .....

कस ने यह काम मारकेश को सौंपा था .....और ..मारकेश ने .....रसातल से लेकर स्वर्ग लोक तक की कन्याओ की वयस्था कर दी थी .....

इसी कारण जब मारकेश गायब हुआ था ...तोह ...कस ..को सर्वप्रथम देवराज इंद्रा पर शंका हुई थी ....और उसने इस बात का पता लगाने क लिए ....आंतक को भेजा था ....जिसका वध शामली की संगीत विद्या क प्रयोग क द्वारा हुआ था ......

स्वर्ग लोक से उप्पेर क जो 4 लोक है उनमें असुर प्रवेश नहीं कर सकते थे ......कस को लगने लगा क उसकी इतने वर्षो की साधना व्यर्थ हो जायेगी .....तब ..वह ..दैत्य गुरु शुक्राचार्य जी की शरण में गया .....और उन्हें अपनी समस्या बताई ......

पहले तोह उन्होंने इस साधना क लिए कस को मन किया ... उससे बहुत समज़हाए पतंतु कस नहीं मन .....उसने दैत्य गुरु को उन्हें उनके कर्तव्य की शपथ दी ......शुक्राचार्य ने भी ...विधि क विवश होकर उससे मार्ग बताया ......और उसी 14 बलि क रहस्य को बताया .....

शुक्राचार्य - पुत्र .कस .....जिस महा शक्ति क साथ तुम्हारा सामना होने वाला है ...उसमें 14 लोको की शक्ति होगी ...इसी कारण ....उससे समाप्त करने क लिए ...तुम जो अनष्ठान कर रहे हो ...उसमें इन् 14 बलियो की आवश्यकता है......

इन बलियो में उनका जन्म और उनका शरीर विशेष नहीं है .....

अब तक जो तुमने स्वर्ग लोक की कन्याओ की बलि तुमने दी ...उनमें मुख्या थी उनमें स्थित उस लोक की ऊर्जा का अंश जहा उनका जन्म हुआ था .

शुक्राचार्य एक महामुनि थे और नवग्रहों में उनका स्थान भी है ....

इसी कारण ....महार लोक ...

तपलोक ...और सत्य लोक की ऊर्जा का कुछ अंश उनके पास था ....जो उन्होंने कस को दिया और बताया क इन् तीन उर्जाओ को किसी भी तीन ऐसी कन्या में प्रवेश करना ....जिनका जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ हो ......तोह तुम्हारा कार्य सिद्ध हो जाए गए ....

और जनलोक की ऊर्जा भी प्राप्त करने का मार्ग बता दिया ....जिसके कारण कस ने काले ड्रैगन को जगाया था ....और उसके hi द्वारा जनलोक की ऊर्जा को भी प्राप्त किया .....

इन् चारो उर्जाओ को उसने पृथ्वी लोक की 4 कन्याओ में प्रवेश कराया ....और ......इस प्रकार उसने अपनी 13 बलिया पूर्ण की ......

अंतिम बलि उससे पाताललोक की अपनी सबसे पिरया कन्या मदालसा की देनी थी ....जिसके बाद उससे ईशित्व सिद्धि प्राप्त हो जाती ....

हर बलि क फलस्वरूप उससे उपहार में एक देवी निकुम्बाला क द्वारा एक महासुर की प्राप्ति होती ....और इस प्रकार उससे प्राप्त हुए 13 महासुर जिनमें 13 लोको की शक्तियों क अंश थे ......

1 - नागसूर - रसातल की ऊर्जा ...-

2 - यूमाक्षा - तलातल की ऊर्जा - जिसके ..netro.ki किरणे ..यमपाश की तरह थी

3 - महाबली - सुतल लोक ....जिसमे 100 दानवो क बराबर बल था...

4 - विकटासुर - वाइटल लोक - यह एक महा प्रेत रूप में था

5 - कैटभ - यह एक विशाल पशु क रूप मैं था और इच्छा अंसार किसी भी पशु का रूप धारण कर सकता था...

6 - भावमासुर - tallok....yeh पृत्वी क कणो में परिवर्तित हो जाता था ...और फिर से उन्ही कानो से प्रगट हो जाता था ......

7 - लव्यं - पृथ्वी लोक.... इसमें 1000 मानवो का बल ...और प्रचन तेज़

8 - प्रहेति - भौंए lok.......Mayavi विद्या

9 - देवक - Swarglok.....Indra क वज्रा की तरह प्रचंड

10 - प्रवास्थिक .....महर्लोक ...तंत्र विद्या में निपुण

11 - तेजक - Tapolok....mantra vidya...aur षट्कर्म...

12 - लोहेंद्र - जनलोक - एक विशाल ड्रैगन का रूप धार सकता था

13 - सत्यंत - Satyalok.....kisi भी हिरदय में बुराई और पाप का संचार.....

इसके अलावा

Krodhasur....Madaasur ...matsarasur......jaise और भी कई असुर वीर थे...

अब देखते है अभी की सेना .....

अभी की रक्षक सेना क बारे में पहले hi बता दिया है .....इसीलिए केवल उसके मुख्या सेना पतियों क नाम ....

1- चंद्रकांत (कट).....

2- वज्रबाहु....3 - उदय .....

4 - कार्तिक .... 5 - साहू ....

6 - कंटक

इनके साथ प्रत्येक की सेना जो लाखो में थी

और अभी को प्राप्त हुए 14 रूप ....और उसकी 14 पत्निया

1 - सत्य , 2 - विभक्त , 3 - ऋतू ,

4 - रेनू , 5 - शामली , 6 - शिवली ,

7 - रिम्पी , 8 - शालू , 9 - दक्ष ,

10 - भद्रा , 11 - चैताली ,

12 - वैशाली , 13 - सुलेखा ,

14 - मदालसा ....

अब आते है ात प्रेजेंट जब अभी ध्यान कर रहा था....

अभी को ध्यान में बैठे हुए काफी देर हो गया था ......

सूर्योदय हो गया था ...

मदालसा भी अपने नित्य कर्म कर चुकी . थी ...

अभी को ढूंढ़ते हुए धयान कक्षा को और बढ़ी...

अभी की सभी पत्निया सब अभी जहा ध्यान में बैठा था वह खींची चली गयी .....ऐसा लगा क जैसी कोई ऊर्जा उन्हें अपनी और खिंच रही है ....

सभी जब वह पहुंची तोह देखा अभी इस समय अपने पूर्ण रूप में है ......इस समय अभी क इस समय तीन सर प्रगट हो गए थे ...जो त्रिदेवो क hi प्रतिरूप थे ....और उसके शरीर से अद्भुत प्रकाश निकल रहा था ...अभी को आत्मसाक्षात्कार हो चूका था ....

अभी क इस रूप क कारण hi उसकी साड़ी शक्तियां उसकी और खींची चली आयी ......और अब उन् सबकी भी ऊर्जा पूर्ण रूप से जागृत हो गयी ...और वह भी एक दिव्या आलौकिक आभा से परपूर्ण हो गए...

थोड़ी देर में सब नार्मल हो गए ...और अभी ध्यान से उठ गया ......सभी अपनी शकियो की पुराना क कारण बड़े प्रसन्ना थे ......

अभी की सभी पत्नियों ने उसका आलिंगन किया .....अभी ने सबको ..युद्ध क बारे में बताया और सचेत ..सत्रक और तैयार रहने क लिए कहा ......

रिम्पी इस समय गर्भवती थी .....उसके चेहरे से लग रहा था जैसे कई दिनों से ठीक से आराम नहीं किया ..hai....issikaarn रिम्पी को चक्कर सा आगया ...तोह अभी ने उससे गोद में उठाकर ...अपने बिस्तर पर लिटा दिया .....और उसके सर पर हाथ रखकर ...हील किया ......

अभी - यह क्या है जान क्यों ऐसा कर रही हो ....तुम्हे पता है तुम्हारे इस प्रकार करने से तुम्हरे स्वस्थ पर और गर्भ पर भी असर पड़सकता है ....

रिम्पी - बहुत दिनों से माँ बाबा और ाद्दु की याद आरही है ....और इस अवस्था में तोह माँ का साथ और ज्यादा जरुरी होता है .....और आप भी अपने कार्यो में वेष्ट हो ......में साज़ सकती हु आपपर बहुत बड़ी जिमेदारी है ....लेकिन इस मैं का क्या करू ....हो जाता है ऐसा .....बस इसीलिए मुज़हे रात रास्त भट नींद नहीं आती....

अभी उससे अपनी बाहों में भर लेता है ....

अभी - बस जान बहुत जल्द हम सब साथ रहेंगे ....तब तक अपना स्वस्थ का ध्यान रखो ....आज यह अंतिम युद्ध शुरू हो जाए गए ....

कुछ देर अभी रिम्पी क साथ रहा फिर चल पड़ा अपनी सेना की और....

यहाँ पटल लोक से कस अपनी सेना क साथ निकल पड़ा था ....

लाखो की संख्या में असुर रसातल की और बढ़ रहे थे ......उनकी पदचाप से भूमि हिलने लगी ...चारो और धूल उड़ने लागि ....हाथी ..ghodo...aur राठो की गग्गडाहट ....और असुरो की भयंकर गर्जना से सारा वातावरण गुंजायमान हो रहा था .......

यहाँ अभी भी अपने रक्षक सेना का नेतृत्व करते हुए ...युद्ध भूमि की और बढ़ने लगा ......

देवता .. त्रिदेव ...सिद्ध मुनि ...यक्ष ..gandharva....sabhi ..इस महा युद्ध जो महाभारत क युद्ध से भी भीषण होनेवाला था बड़ी उत्सुकता से इस होनेवाला युद्ध क देखने क लिए सज्ज हो गए ......

संसार को दो महाशक्तियां टकराने वाली थी......

अभी की सेना में भी लाखो योद्धा अलग अलग लोक से थे .....गोलू और रिंकू भी ....सेना का सञ्चालन कर रहे थे .....

दोनों और की सेना पटल और रसातल क मध्य आमने सामने एकत्रित हो गयी ......सब एक दूसरे क खून क प्यासे गर्जना करने लगे .......

अब बातचीत का समय नहीं था ....दोनों और से युद्ध की शुरुवात क लिए शंख फूके गए .....और आरम्भ हुआ बहुत से वीरो क अंत का ....

अभी क लिए इतना hi......

अगला अपडेट रात को.... .....
 
ठंकु सू मच तो आल रीडर्स ....अब तक साथ बनाये रखने क लिए

:थैंक्स: :थैंक्स: :थैंक्स:

दोस्तों कहानी अंतिम चरण तक पहुँच चुकी है ....बस और 2या 3 अपडेट में स्टोरी समाप्त हो जायेगी .....

आपके रिव्यु और कमैंट्स का अभिलाषी ....आपका ...मित्र ...अभिनव.

ऐसे hi साथ बनाये रखे ...



लेटेस्ट अपडेट 138 पोस्टेड....
 
अपडेट - 139



अब तक आपने दोनों तरफ की सेनाओ क मुख्या योद्धाओ को देखा ....

दोनों सेना युद्ध क लिए आमने सामने थी ..

अब आगी......

युद्ध का शंखनाद होते hi दोनों तरफ की सेना भीड़ गयी .......

रक्षक सेना क सेनापतियों ने अपनी अपनी टुकड़ियों क साथ आगे बढ़ते हुए असुर सेना पर प्रहार कर न शुरू किया .....

असुर सेना का भी मुख्य योद्धा भी एक एक टुकड़ी लेकर रक्षक सेना पर टूट पड़े थे ......

कट का सामना क्रोध सुर से ......वज्रा बहु ..का ...मदासुर से ......उदय ..का ...matsarasur...se.....Kartik ..का ....दुष्कर से ....साहू का लोभासुर से .....

कंटक ....पीड़क से

रिंकू और गोलार्क अभी क साथ मिलकर व्यू रचना और सेना को निर्देश देने का काम संभल रहे थे......

दोनों और क लाखो योद्धा भीड़ गए थे ...चीख पुकार ...और रक्त बहने लगा था ...

क्रोध ...aur...CT.....

क्रोधासुर - तू माचर करधा का सामना करेगा ...हैट जा ..ha..ha...ha...tuzhe तोह चुटकियो में मसल दूंगा में .....और ...एक शूल कट की तरफ फेंका है ......

कट - अपनी तलवार से उसके शूल को अपने तक पहुँचने से पहले hi .....काट देता है...

मुज़हे मच्चर कहने वाले मुर्ख असुर ...कभी कभी मछेर भी भरी पड़जाता है ....ले संभल ...और ....जल तत्त्व से. एक बड़ा सा जल का गोला उसपर छोड़ देता है .......जो क्रोध को जाकर लगता है जिससे वह पीछे गिर जाता है और पूरी तरह भीग जाता है .....

जिस कारण क्रोध का क्रोध बहुत बढ़ जाता है .....और वह अपनी तलवार लेकर कट की तरफ डॉटा है ....कट भी तैयार था ....क्रोध उस तक पहुंचता क कट अपनी जगह से हैट गया .....जिसके कारण ...क्रोध ...निचे ...गिर गया ...

कट - तुम्हे नहलाने की मेरी म्हणत बेकार गयी ...तुम तोह फिर मिटटी में hi लोट गया......

कट की बातों से क्रोध का क्रोध और बढ़ गया .....और उसने अपनी ऊर्जा का प्रहार कट पर किया ....कट ने भी वायु तत्त्व की ऊर्जा से उस वार को रोका परन्तु उसका कुछ अंश कट तक पहुंचा जो उसके पेअर में लगा ...और वह गिर गया ....लेकिन फिर बड़ी फुर्ती से खड़ा हो गया ......

क्रोध की शक्ति थी सामने वाले का क्रोध ...उससे अपने से लड़ने वाले क क्रोध से ऊर्जा प्राप्त होती थी ...परन्तु कट शांत मन से युद्ध लड़ रहा था ....इसीलिए उसके वार का कट पर कुछ असर नहीं हो रहा था .....

दोनों अब हाथ में शूल लेकर ...लड़ने लगे ......कट बखूबी क्रोध क वार को ब्लॉक कर रहा था .

क्रोध ने कट को क्रोध दिलाने क लिए उससे अपशब्द बोलना और गालिया देना शुरू किया ......

क्रोध - तुम मानव हम से मुकाबला करोगे ...अरे तुम तोह हमारा आहार हो ......और तुम्हारे वंश का रक्त थो मैं पहले भी चख चूका हु ...वह बड़ा hi स्वादिष्ट था .......

कट - क्या बात कर रहे हो .....अपने बातों से मुज़हे भरमाने का प्रयत्न न कर ......युद्ध कर ...और ...तेज़ी से शूल का प्रहार ....क्रोध पर करता है ....क्रोध बचे का प्रयत्न करता है परन्तु कट का शूल उसके एक बाजू को जख्मी कर hi देता है ....फिर भी ..अपने ..आप को संभलकर ....

क्रोध - क्यों महागुरु ने नहीं बताया ....क कैसे हमने तुम्हारे माता पिता को खाया था .....बड़ा मज़ा आया था उनको खाने में ....ha..ha...ha...kaise पुत्र हो जो अपने माता पिता क बारे में नहीं जानते ....धिकार है तुमपर ....

क्रोध की इस बात से कट का क्रोध बढ़ने लगा ...और वह निरन्तर उसपर ...अपनी शक्तियों से वार करने लगा .....और क्रोध और ऐसी बातो से उसके क्रोध को और बड़ा रहा था ...जिसके कारण ....क्रोध को और ऊर्जा प्राप्त हो रही थी और उसका आकर बड़ा हो रहा था .....

कट अब उसके आगे कमजोर पद रहा था ....इसका लाभ उठाते हुए ...क्रोध ने कट पर छलांग लगा कर उसके सीने पर प्रहार किया जिससे कट दूर जाकर ..गिरा ...कट की हालत बहुत बूटी हो गयी थी ...

वज्रबाहु और मदासुर -

वज्रबाहु और मदासुर आमने सामने थे .......मदासुर क हाथ में एक बड़ा से मुद्गर था ....वज्रा बहु अपने दानव रूप में था ......मदासुर ..दौड़ते हुए आया और अपने मुद्गर का प्रहार ....वज्रा बहु क सर पर किया ...लेकिन उसने अपने एक हाथ से hi उसके वार को रोकते हुए ...एक पंच उसके जबड़े पर मारा ...जिससे ...मदासुर ....पीछे की और जाकर गिरा ....मदासुर .....तुरंत ..खड़ा हुआ ...एक तेज़ी से अपना मुद्गर .....वज्रा बहु पर फेंककर वार किया ....जो उसके सीने पैट लगा .....लेकिन वज्रबाहु क सीने से टकराकर उसका मुद्गर टूट गया ...वज्रा बाहु भी उस प्रहार की तीव्रता से पीछे गिरते 2 बचा .....

वज्रा बहु ने पास में पड़े हुए तीते हुए रथ का पहिया उठाकर मदासुर पर फ़ेंक कर मारा जो उसके सीने पर पड़ा ....और वह चीखते हुए ...पीछे गिर पड़ा ....लेकिन अपने आपको संभलकर वह फिर वज्रा बहु की और दौड़ा ...

अब दोनों बिना ास्त्रो क लड़ रहे था ...एक दूसरे पर लात घुसे बरसा रहे थे ......मददर भी महाबली था ....उसने वज्रा बहु को उठाकर जमीन पर पटक दिया ......जिससे उसका क्रोध बाद गया ....और उसने खड़े होकर बड़ी तेज़ी से ...एक हाथ से मदासुर की गर्दन पकड़ी और उसके जबड़े पर ताबड़तोड़ मुक्के बरसाने लगा .....

वज्रा बहु ने मदासुर की गर्दन उखाड़ने का प्रयत्न किया लेकिन सफल नहीं हुआ तोह एक लात जैसे उसके सीने पर मारी ...मदासुर खून की उल्टिया करता हुआ पीछे की और गिर पड़ा ....लेकिन अब उसने अपनी पूरी ऊर्जा का गोला बनाकर वज्रबाहु पर किया ...जो ..उसके सीने पर जा लगा जिसके कारण वज्रा बहु घायल होकर ...पीछे गिर पड़ा ....

मदासुर ..वज्रा बहु को समाप्त करने क लिए एक खड़क लेकर उसके पास पहुँच ...लेकिन वह वार करता ..उसके पहले ...hi ...वज्रा बहु ने उसके फोनो पेअर खिंच लिया ..और खड़ा होकर उससे बिच से चिर दिया और मदासुर का अंत हो गया ....

उदय और मत्सरासुर

उदय और मेसरसुर दोनोवांने सामने थे ...मत्सरासुर ने एक बड़ी सी चट्टान का वार वार उदय पर किया ...जिसे उदय ने अपनी गदा क वार से चकनाचूर कर दिया ......और पृत्वी तत्त्व की ऊर्जा से उसपर भी एक बड़ी सी चेतन से उसपर वार किया ....जो उससे जाकर लगा ...लेकिन उससे उसका कुछ असर नहीं हुआ ....

मत्सरासुर अब उदय पर लगातार पाथेर बरसाने लगा ...और उदय भी उसे वार से बचता हुआ उसपर वार करने लगा ....

उदय ने पृथ्वी तत्त्व की ऊर्जा का वार उस असुर क पैरो क पास जमीं पर किया ...असुर को लगा की उदय का वार ऐसे hi बेकार गया ..

लेकिन तभी जमीं से कुछ बेले निकली और मत्सरासुर क पैरो को जकड़ने लगी ....जिसके कारण वह असुर मुँह क बल धरती पर गिर गया .....लेकिन उसने भी अपना पूरा जोर लगाया ...और उन् बेलो की पकड़ से आज़ाद हो गया .....उदय ने फिर अपनी ऊर्जा का वार किया ...लेकिन उससे पहले hi वह असुर एक छलांग लगाकर ..उदय को गिराकर उसकी चट्टी पर सवार हो गया ...और ..अपनी मजबूत गिरफ्त उदय क गार्डन पर बनायीं और उसका गाला दबाने लगा ....

उदय की साँसे रुकने लगी थी ...लेको फिर भी उसने ...अपनी संपूर्ण ऊर्जा को एकत्रित करके ...जमीं पर प्रहार किया ....जिसके प्रभाव से जमीं से बेले निकली और मत्सरा सुर की गर्दन में लिपट गयी ....जिसके कारण उसकी उदय की गार्डन से पकड़ ढीली हो गयी ....और उदय उसकी पकड़ से छूट गया .

उस असुर ने बड़ी कोशिश की उन् बेलो से मुक्त होने की .....लेकिन वह बेले मत्सरासुर को लेकर जमीं में समां गयी ....और उसका अंत हो गया ...

उदय अधिक ऊर्जा क प्रयोग क कारण बेहोश हों

इ लगा ..क तभी गोलू ने आकर उससे संभल लिया ....और उससे युद्ध भूमि क एक कोने में सुरक्षित स्थान पर ले आया....

कार्तिक और दुष्कर ....

कार्तिक और दुष्कर दोनों hi धनुष लेकर आमने सामने थे ....

दुष्कर ने अग्नि बन चलाया ...जिसका उत्तेर कार्तिक ने वरुणास्त्र से दिया .....और साथ में एक्स गति से उस असुर क रथ क पहिये पर अपनी तीरो से प्रहार किया जिसके कारण रथ का पहिया टूट गया और वह असुर निचे गिर पड़ा ......

कार्तिक - अब ठीक है .....रथ पर से क्या प्रहार कर रहा था ....मैं पैदल और तुम रथ पर सवार ....अब बराबर है .....

दुष्कर - बिना रथ क भी में तुम्हरे लिए पर्याप्त हु ...देखे तोह क्या सीखा है तुमने अपने गुरु से ...और .....विष से भरा हुआ अस्त्र छोड़ देता है ....

कार्तिक बी अपनी ऊर्जा का वार उस अस्त्र को रोकने क लिए करता .है ...लेकिन जैसे हो उसकी ऊर्जा उस विष भरे अस्त्र से टकराई ...वह विष वह वातावरण में फैलने लगा ...और उसके संपर्क में जो भी आता वह मृत्यु को प्राप्त होने लगा ...

कार्तिक पर भी विष का प्रभाव होने laga...parantu उसने संभलकर ..वरुणास्त्र का प्रयोग करके जल बरसाया जिससे विष भरा धुआँ छत गया .....दोनों में कई प्रकार क ास्त्रो का प्रयोग होने लगा .....

कार्तिक अब तेज़ गति से ुसस्पर अपने तीरो से वार करने लगा, जिसके कारण .....उस असुर का धनुष टूट गया ....

अब वो असुर अपनी तलवार लेकर कार्तिक पर प्रहार करने क लिए बड़ा ....और गर्दन की तरफ वार किया ...कार्तिक ज़्हुककर उसके वार से बचा ...और उसपर वार किया ...कार्तिक की तलवार क वार से उस असुर की बाजू ज़ख़्मी हो गयी ....

दोनों कभी तलवार से कभी गदा से ....लड़ रहे थे ....दोनों में से कोई भी काम नहीं था ......दोनों hi जख्मी हो गए थे

दुष्कर ने जब देखा क कार्तिक का सामना करने बहुत कठिन है ......तोह उसने आसपास लड़ रहे सैनिको को मारना शुरू कर दिया ....

कार्तिक - दुष्ट असुर युद्ध बर्बर वसलो क साथ करना चाहिए इन सैनिको से क्या लड़ रहा है ....और उसने इन्द्रासरा का संधान किया और दुष्कर पर छोड़ दिया ...जिसका प्रभाव इंद्रा क वज्रा की तरह था .....दुष्कर मारा गया....

साहू और लोभासुर ...

लोभासुर सुर और साहू का युद्ध भी चल रहा था ...दोनों एक दूसरे पर अपनी ऊर्जा से प्रहार कर रहे थे .....लोभासुर ....छिपने में माहिर था ....वह बार बार बड़ी तेज़ी से स्थान बदल बदलकर साहू पर प्रहार करता फिर सामने प्रगट होकर ...उससे चुनौती देता ...

साहू उसपर अपनी ऊर्जा का प्रहार करता परन्तु उसका प्रहार लोभासुर तक पहुँचता उससे पहले वह अपना स्थान बदल लेता .....और साहू पर वार करता ...

अब साहू ने अपनी ऊर्जा का वार तेज़ी से उसपर करने लगा ....ुएँ से कीच वार लोभासुर को लगे ....और वह थोड़ा ज़ख़्मी भी हो गया .....

लेकिन साहू की भी हालत बुरी थी ...एक तोह लोभासुर क प्रहार उससे बहुत लगे थे ...और दूसरा ...ऊर्जा क अधिक प्रयोग क कारण अब उसकी शक्ति काम पड़ने लगी थी ...लोभासुर अपना अगला प्रहार करने hi वाला यह ...क तभी ....गोलू ....लोभासुर क सामने आगया..

कंटक और पीड़क...

पीड़क क सारे शरीर पर बड़े 2 विषैले कांटे थे ....वह उन्ही कांटो से रक्षक सेना पर प्रहार कर रहा था ...जिससे भी वह कॉंटे लगते वह तुरंत मृत्यु को प्राप्त हो जाता ...उससे रक्षणक सेना पर प्रहार करते हुए देखकर कंटक उसके सामने आगया ....

कंटक क शरीर से भी बड़े विषैले कांटे निकलते थे ....कंटक भी उन्ही कांटो क प्रयोग पीड़क पर करने लगा ....दोनों क कॉंटे एक दूसरे को लग रहे थे .....लेकिन दोनों पर भी एक दूसरे क विष का कोई प्रभाव नहीं पद रहा था ....

कंटक अब कांटो क साथ साथ तलवार से भी वार करने लगा ...जिसके कारण ..पीड़क बहुत जहकँइ हो गया और उसके शरीर में पीड़ा होने लगी ....

कंटक ने अपनी तलवार उसके ह्रदय में उतारकर उससे पीड़ा से मुक्ति प्रदान की ......

यहाँ करोडासुर प्रबल हो रहा था .....और कट बहुत घायल हो गया था ...क्रोध सुर कट पर अंतिम प्रहार करने hi वाला था .....क पीछे से किसीने उसके बाल पकड़कर निचे जहतका दिया .....और वह धड़ाम से धरती पर गिरा ....उसके सर क बालो का एक गोस्वः ुख़फ़ चूका था .....

जमीं पर पड़ा हुआ उसने अपनी आंखें उप्पेर उठाकर देखा तोह वह रिंकू खड़ा था ...अपने हाथ में पकडे हुए क्रोध क बालों का गुच्छा उसके मुँह पर फेंकते हुए ..

रिंकू - क्या मामू यह क्या इतने गंदे बाल ...ची ..कभी धोया नहीं क्या ....और अजीब सा मुँह बनाने लगा ....

क्रोध को उसके ऐसे करने पर और क्रोध आगया और वह झटके से खड़ा हुआ .....और रिंकू को पकड़ने क लिए आगे बढ़ा ....लेकिन रिंकू भी उसकी टांगो से निकलकर पीछे आया और उसके अंडकोष पकड़कर जोर से दबा दिए......

जिससे उसकी जोर सीख निकल गयी .

और दोनों हाथो से अपने गुप्त अंग को पकड़ लिया ....

रिंकू - ओह्ह्ह ...sorry...sorry ..मामू ....लड़ता है तुम्हारे अंडे पूत गए ....

और उसके सामने अजीब सी हरकते करने लगा ....

क्रोध को समाज नहीं आरहा था क कैसे इस अजीब से मानव का सामना करे ....उसने बड़ी मुश्किल से अपनी पीड़ा को काबू में किया ...और ...एक खड़क रिंकू की तरफ लेकर दौड़ा ....रिंकू भी बड़ी फुर्ती से उसके पीछे जाकर उसके पिछवाड़े में जोरदार किक मार दी ....क्रोध मुँह क बल गिर गया ....

रिंकू ने आसपास देखा तोह उससे एक मुद्गर वह पड़ा नज़र आया ....तोह उसने बड़ी तेज़ी से लगातार उस मुद्गर का प्रहार ....क्रोध क पिछवाड़े का कचूमर निकल दिया ......

क्रोधासुर को सामने वाले क क्रोध से ऊर्जा मिलती थी ...लेकिन रिंकू क लड़ने का तरीका कुछ अलग hi था ....इस कारण वह अब बहुत कमजोर हो गया था .....और इसी का फायदा उठाकर ...रिंकू ने अपना आखरी वार उसकी गार्डन पर किया और उससे समाप्त कर दिया ....

यहाँ लोभासुर क आगे गोलू आगया था और साहू क प्राण बचाये .......

लोभासुर ने गोलू पर प्रहार करना शुरू किया ...और गोलू ने भी अपनी ऊर्जा से प्रहार करना शुरू किया ....लोभासुर बड़ी तेज़ी से जगह बदलकर बदलकर वार कर रहा था ...तोह गोलू ने अपनी यक्ष माया का प्रयोग किया ...और लोभासुर क चारो तरर्फ अपने प्रतिरूप खड़े करदिये ....

अपने आपको घिरा हुआ देखकर लोभासुर की गति रुक गयी ....अब गोलू अपनी और अपने पिता से प्राप्त ऊर्जा का वार लोभपर करने लगा ...जिससे लोभा ज्यादा देर तक नहीं सह सका और मारा गया ....

रक्षक सेना भी असुर सेना का संघार कर रही थी .....

अपने सारे सेनापति मारे जा चुके देखकर ...कस ...ने अब ....अपने 13 महासुर प्रगट किये ....

अभी क लिए इतना hi ...


अगला अपडेट कल.....
 
अपडेट - 140



अब तक आपने देखा ...कस क मुख्या सेनापतियों का अंत रक्षक सेना द्वारा हो गया है .......

अब आगे ......

कस ने जब देखा क उसके सारे सेनापति मारे जा चुके है ...और असुर सेना का भी बड़ी तेज़ी से अंत हो रहा है ...तोह उसने अपने 13 महा असुर प्रगट किये ....

निकुंबला देवी से प्राप्त 13 महा असुर जब युद्ध भूमि में आये तोह ..रक्षक सेना में हाहाकार मच गया ....

नागसूर अपने भयंकर विश्से ....यूमाक्षा अपने निरतो की ऊर्जा से रक्षक सेना का भक्षण करने लगे ...

महाबली अपने बल से उन्हें मसलने लगा ...और विकटासुर ...रक्षक सेना क मैं में भय उत्पन्न करने लगा ...

कैटभ ...पशु रूप में उन्हें रंदने लगा ...तोह बावमासुर और लव्यं उन्हें पृथिवी में सामने लगे ....

प्रहेति अपनी माया से और देवक दिव्यास्त्रों से लड़ने लगा ...

प्रवास्थिक और तेजक - अपने तंत्र और मंत्रो से .....और लोहेंद्र एक बफे ड्रैगन का रूप धार क रक्षक सेना का विनाश करने लगे ...

सत्यंत अपने प्रभाव से रक्षक सेना क मैं में बुराई का संचार करने लगा जिसके कारण वह युद्ध से विमुख होने लगे ....

कट ..उदय ...Vajrabahu...Kantak...Sahu...Kartik ....रिंकू ..और गोलू बड़ी वीरता से उन्हें रोकने का प्रयास करने लगे और इसी कोशिश में बहुत घायल हो गए ......

उन् असुरो को प्रगट हुए अभी कुछ की पल हुआ था ...और युद्ध की स्थिति hi बदलने लगी थी ....

अभी ने भी अपने पूर्ण रूप को अब जागृत कर दिया .....और अपने 14 रूप प्रगट किये .....

अभी क पूर्ण रूप को प्राप्त करने क कारण उसकी मारक शक्ति यानि क राकेश भी पुनः अपने काल रूप से प्रगट हो गया था....

अभी राकेश को पुनः देखकर बड़ा खुश हुआ और उससे गले से लगा लिया ..... राकेश भी अब काल बनकर युद्ध भूमि में उतर गया .....और असुरो पर मौत बनकर बरसने लगा .....जहा से भी वह गुजरता वह बस असुरो क शरीर क टुकड़े भखार जाते .....और खून का दरिया बहने लग जाता .

काल क भयानक रूप में उन् असुरो को अपनी मृत्यु दिखाई देने लगी ......उनमें बाग्दाद् मच गयी .....यदि भागे तोह कस जीवित नहीं छोड़ेगा ...और यदि लाडे तोह काल बुरी तरह से मार देगा ....कई असुर तोह काल क हाथो मरने से बेहतर खुद को hi समाप्त करने लगे...

नागसूर का सामना ...नागराज अभी (ान) और सुलेखा से हुआ ....

दोनों भयंकर नाग रूप में आमने सामने थे .......नागसूर का बल उसके विष में था ......ान ने उसके सारे विष को अपने भीतर सोख लिया ......बिना विष क नागसूर किसी केचुए की बहती हो गया ...और मारा गया ....

यूमाक्षा का सामना हुआ ...अभी क मृत्युदूत रूप और वैशाली से ....जहा यूमाक्षा क नेत्रों से यौम पाश की तरह मारक ऊर्जा थे ..वही ..वैशाली और ऍम क हाथो में में यमपाश की ऊर्जा क शूल थे ....

यूमाक्षा ने अपनी नेत्रों की ऊर्जा के द्वारा उन्हें यमलोक पहुँचाने का प्रयत्न किया ....परन्तु अभी क इस रूप और वैशाली में पहले hi यमलोक की ऊर्जा थी तोह यमपाश भी उनका कुछ बिगड़ नहीं सकते थे .....

दोनों ने अपने शूल का प्रहार यूमाक्षा ने नेत्रों पर किया .....उस असुर क नेत्रों में वह शूल प्रवेश कर गए और उसका भी अंत हो गया ....

महाबली का सामना हुआ ...दानव अभी और चैताली से से ....दानव अभी और मबलि में बिना ास्त्रो क युद्ध हुआ ....दोनों एक दूसरे पर लात घुसे बरसाने लगे .....

जहा दानव अभी धोबी पछाड़ देव से बार बार उससे जमीं पर पटक रहा था ..वही वह भी अपने बल से अभी को उठकर जमीं पर पटक देता था ....

महाबली ने पीछे से अभी की गर्दन अपने बाजू में कास ली ..तोह अभी ने भी उसके पसलियों में जोरदार वार करके उसकी पकड़ से छूट गया ......चैताली भी उस मबलि क साथी दानवो क लिए काल बनगयी थी और अपने दानव रूप में वह उन्हें चिर फाड् रही थी ....

महाबली ने दानव अभी की छाती पर किक मारी लेकिन अभी ने उसके पेअर पकड़ कर निचे गिरा दिया ....और महाबली को बिच से चिर दिया ....

विकता सुर और उसके प्रेतों का सामना ....प्रेतराज अभी और भद्रा से हुआ .......विकटासुर पिशाच रूप धारण लार के सामने आया और अपनी ऊर्जा से प्रेतराज अभी पर प्रहार किया ....लेकिन वह प्रहार अभी क आरपार चला गया ....अपना वार बेकार जाते हुए देखकर ...विकटासुर ने लगातार प्रेराज अभी पर प्रहार करना जारी रखा ....

यहाँ भद्रा भी ...अपने प्रेतदंद से विकटासुर क साथी प्रेतों को प्रताड़ित करके सीधा नरक भेज रही थी ....

विकटासुर अब पूरी तेज़ी से प्रेतराज अभी क चारो और घूमकर अपनी ऊर्जा में कैद करने laga......Jab उसने देखा की अभी उसकी ऊर्जा में बांध चूका है तोह वह एक जगह स्थिर हो गया और अपनी पूरी ऊर्जा को अभी पर वार करने क लिए एकत्रित करने लगा ....

लेकिन तभी उसके बंधे हुए ऊर्जा से प्रेतराज अभी बहार आया ...इससे पहले क विकटासुर कोई वार करता अभीबने अपने प्रेतदंद की भयकर ऊर्जा का वार उसपर कर दिया ...निरन्तर परतदंद से अनेक वार होने क कारण विकटासुर का भी अंत होगया ....

कैटभ एक बड़े से हाथी का रूप धार के रक्षक सेना को कुचलने क लिए आगे बड़ा क उसका रास्ता महाभेदिया अभी और दक्ष ने रोका ......जहा अभी ने भेड़िया रूप में उसपर छलांग लगायी और अपने पंजो और दांतो से हुम्ला करने लगा ....

वही दक्ष भी अपने भेड़िया रूप में कैटभ क साथी असुर जो अलग अलग पशु रूप में थे उनको अपनी पंजो से चिर फाड् रही थी ....

अभी क हुम्ला करते hi कैटभी ने एक बड़े से शेर का रूप धार लिया और अभी पर आक्रमण कर दिया .....दोनों एक दूसरे पर अपने पंजो से और दांतो से हुम्ला करने लगे .....

उसने अभी क गर्दन पर अपने दांत गाड़ने चाहे ...लेकिन अभी बड़ी फुर्ती से उसके निचे से निकल गया और उसकी पीठ पर सवार होकर उसकी गर्दन पर पीछे से अपने दांत गदा दिए .....जिससे रक्तकी धरा उसके गर्दन से बहने लगी ....उसने पूरी ताकत लगाकर अभी को अपने ऊपर से जहातक diya.....Aur अब वह खुद भी एक बड़े से भेड़िये क रूप में आया .......

अभी ने अब भेड़िया मानव का रूप धार लिया ....और एक हाथ में शूल भी धार liya.....dono में खूब जबरदस्त मुकाबला हुआ .....

कैटभी रूप बदल बदलकर अभी पर हुम्ला कर ने लगा .....इतने देर उसके साथ लड़कर अभी को उसकी मृत्यु का भेद पता चल गया ......

कब वह असुर एक रूप से दूसरे रूप में बदलने लगता तभी उसकी मृत्यु हो सकती थी .....और जैसी hi कैटभ अपना रूप बदलने लगा तोह अभी ने अपने शूल का जोर दर प्रहार उसके नाभि पर किया जिससे उसके प्राण पखेरू उड़ गए ....

भावमासुर और उसके साथी असुरो का मुकाबला ा1 और शालू से हुआ .....ताल्लुक की ऊर्जा से अभी को जो रूप प्ऱप्त हुआ था ....वह और ा1 का रूप विभक्त शक्ति क द्वारा अब एक हो चुके थे ....

भावमासुर ने वह क मिटटी क कण सोख कर अपना रूप विशाल बना लिया था .....और रक्षक सेना की और उन्हें कुचलने क लिए आगे बड़ा ......क ा1 ने अपने अग्नि शूल क ताबतोड़ वार से उससे रोक लिया ....

ा1 क वार से बाह्वमासुर का शरीर टूट कर भखार गया और मिटटी में समां गया ......परन्तु देखते hi देखते वह फिर मिटटी क कानो से प्रगट हुआ .....और ा1 पर मिटटी और बड़ी बड़ी चट्टानों से प्रहार करने लगा .....

शालू भी दोनों हातो में तलवार लेकर भावमासुर क साथी असुरो पर टूट पड़ी थी ......

वह एक चक्र की भांति गोल गोल घूमकर उन् असुरो का नाश करने लगी .......

ा1 बार बार बावमासुर पर अपने घातक वार कर रहा था ...लेकिन जैसे hi वो वार करता भावमासुर धरती में समां जाता और कही से भी प्रगट होकर ा1 पर प्रहार करता ......

वह असुर ा1 क वार से फिर धरती में समां गया था .....ा1 उसको समाप्त करने का तरीका सोच hi रहा था ....क धरती से एक बड़ा सा मिटटी का हाथ निकला ..और उससे जकड लिया ......

ा1 पर उस हाथ की पकड़ कस्ती चली जा रही थी ...जससे उसका दम घुटने लगा था ....तभी ा1 ने जल तत्त्व की ऊर्जा से वह बड़ी मात्रा में जल प्रगट किया .......जिससे उस हाथ की मिटटी गलने लगी और ा1 उसकी पकड़ से आज़ाद हो गया ......

उस असुर ने अब बहुत अधिक मात्रा में ....मिटटी सोखकर एक बड़ा सा रूप बना लिया ......

ा1 को उसके अंत का रास्ता मिल गया था .....ा1 ने वायु तत्त्व ...और .....जलतत्व को मिलकर एक बड़ा सा बवंडर निर्माण किया .....और उस असुर पर छोड़ा .....

भावमासुर उस बवंडर में फस गया ....बवंडर क शांत होते hi वह अब एक बड़ा सा मिटटी का पिंड था ....जो शालू ने भी देखा ...तोह समाज गयी क अब क्या करना है ......शालू ने अपनी ऊर्जा और ा1 ने अपनी पांच तत्त्व की ऊर्जा से उस मिटटी क पिंड को पत्थर की एक बड़ी सी चट्टान में बदल दिया .......फिर अपने अग्नि शूल से उससे गरम लावा में बदलकर धरती क गर्भी में भेज दिया और भावमासुर का भी अंत हो गया

लोयम का सामना हुआ राकेश यानि क काल से ...

लोयम सूर्य की किरणों जैसी तेज वाली तलवार लेकर काल की और बड़ा ....और बड़ी तेज़ी से उसने उसपर वार किया ....जिसे काल ने अपनी तलवार से ब्लॉक किया और उससे पीछे धकेल दिया .....अब ..काल ने उसकी गर्दन का निशाना बनाकर अपनी तलवार का भरपूर वार किया ....लेकिन लोयम ने उससे केवल अपने हाथो से ब्लॉक कर दिया .....और काल क सीने पर जोरदार किक मारी ......जिससे काल गिरते गिरते बचा .......

लोयम अपने नाम क अनुकूल सूर्य क तेज़ से परिपूर्ण था .....उसने अपना तेज बढ़ाना शुरू किया .....तोह काल भी अपने पूर्ण तेज़ में आगया ....

दोनों अपनी तलवार क डाव पेंच बदल बदल कर एक दूसरे पर वार कर रहे थे ....

जहा लव्यं में 1000 मानवो का बल और सूर्य जैसा तेज़ था ...तोह दूसरी और काल भी महाकाल का अंश था .....

काल क कई वार लोयम को लगे लेकिन एक भी वार उसके शरीर पर एक खरोच भी न ला सका .......

तोह काल ने अब तलवार छोड़कर अपनी मारक ऊर्जा से प्रहार करना शुरू कर दिया ....और लोयम भी अपनी ऊर्जा का वार उसपर करने लगा .......

वह असुर अपनी पूरी ऊर्जा और बल एकत्रित करके बिजली की सी गति से काल की और बड़ा और उसके छाती से टकराया ....जिसके वार से काल ....पीछे गिर gaya...ab काल का क्रोध चरम पर पहंच गया था .....

काल अब विशाल शेर क रूप में परिवर्तित होगया ...और एक छलांग लगाकर लव्यं क जबड़े पर अपने पंजो से जोरदार प्रहार किया .....जिससे वह असुर छीकता हुआ पीछे जा गिरा ......

काल ने अब उससे और सँभालने का मौका नहीं दिया ....और उसके गर्दन पर अपने दन्त गड़ाकर एक जहटके से उस असुर का सर hi उखड दिया .....और चबा गया ..

काल असुर का रक्त चखने क कारण कारण और भी रौद्र रूप में आगया और असुर सेना पर तित पड़ा ....अपने पंजो और जबड़े से उनके चिर फाड़ने लगा .....

प्रहेति का सामना अभी क यक्ष रूप और शिवली से हुआ .......

प्रहेति अपनी माया से रक्षक सेना को भ्रम में डालकर निष्क्रिय कर देता था और फिर उनकी हत्या .....

शिवली और यक्ष अभी ने उसकी माया को अपनी माया से काट दिया .....शिवली प्रहेति क साथी असुरो को अपनी ऊर्जा से मृत्यु क मुख तक पहुंचने लगी .....

और यक्ष अभी प्रहेति की हर माया को काटने लगा और साथ साथ में अपनी ऊर्जा से प्रहार भी करने लगा .......

प्रहेति की कोई माया काम नहीं आरही थी तोह वह अदृस्य होकर अब ...अनेक ास्त्रो से और ऊर्जा क गोलों से चारो तरफ से अभी और शिवली पर वार करने लगा ......

चारो तरफ से वार करने क कारण उसकी असली स्थिति का पता नहीं चल रहा था क वह कहा है ......

अभी हर वार की दिशा में प्रहार कर रहा था ......लेकिन कोई भी वार प्रहेति तक नहीं पहुँच रहा था .......

तब अभी और शिवली भी अदृस्य हो गए ....प्रहेति ने जब देखा क दोनों अब वह नहीं है तोह उसने अपने प्रहार रोक दिए ....और प्रगट होकर चारो और देखने लगा ......शो समय एक ऊर्जा क पाश में वह जकड गया जिसने कीचकर उससे हमीं पर लाकर पटक दिया ......

और यक्ष अभी और शिवली उसके सामने प्रगट हो गए ........

प्रहेति पाश में जकड़ा हुआ तड़पने लगा ...वह पाश उसकी साड़ी ऊर्जा सोख रहा था .......

धीरे2 उस असुर की साड़ी ऊर्जा उस पाश ने सोख ली और वह असुर मृत्यु को प्राप्त हुआ ....

देवक का सामना हुआ स्वर्ग लोक क अंश बहुत गन्धर्व अभी और शामली से ......जहा संलि ने अपनी संगीत विद्या क प्रयोग से ...अग्नि ...मेग ...vayu.....Devak क साथी असुर पर बरसा रही थी ....

वही अभी देवक से दिव्यास्त्रों से लड़ रहा था ....देवराज इंद्रा द्वारा प्राप्त वज्रा क द्वारा डववक का अंत हुआ ......

प्रवास्थिक जहा तंत्र शक्ति क द्वारा मारक और स्तम्भन का प्रयोग रक्षक सेना पर कर रहा था ....

वही तेजक अपने मंत्र शक्ति क द्वारा अनेको घटक वार रक्षक सेना पर कर रहा था ......दोनों को रोक ने क लिए .....विभक्त और रेनू ....उस लोक क अभी क अंश क साथ साथ उनके सामने आगयी ....

महर्षि रूप अभी और रेनू सप्तऋषियों से प्राप्त ज्ञान क द्वारा ....प्रवास्थिक क तनरा को रोक रहे थे .....उन्होंने श्री विद्या क द्वारा उसके काले तंत्र की ऊर्जा को समाप्त कर दिया ....फिर हादी और कादि जो श्री विद्या क hi अंग है उसकी दिव्या ऊर्जा द्वारा उस असुर का अंत कर दिया .....

तेजक का सारा तेज़ तपोलोक क अंशभूत अभी क रूप और विभक्त ने अपने तप सिद्धि क द्वारा हर लिया .....उसकी साड़ी मंत्र शक्ति और ज्ञान हर लिया और उससे समापत कर दिया ...

लोहेंद्र जो विशाल ड्रैगन क रूप में आकाश से रक्षक सेना पर आग क गोले बरसा रहा था उसका सामना ...अभी क जनलोक क अंश ने एक सफ़ेद ड्रैगन का रूप धरा ...और उसपर विराजमान हुई हुई ऋतू ....

ऋतू क हाथ में एक दंड था जो जनलोक क ड्रैगन्स को वश मैं राहकता था ......अभी क ड्रैगन रूप से सफ़ेद ऊर्जा की किरणे उस काले ड्रैगन पर पड़ने लगी ...और ऋतू ..भी अपने दंड से ऊर्जा का प्रहार ...उस ड्रैगन पर करने लगी ....

उनके वार से विचलित होकर लोहद्रा उनपर बड़ी तेज़ी से जहापता ...लेकिन अभी ने आकाश में एक ऊँची उड़न भर दी .....लोहेंद्र भी अपनी काली ऊर्जा का वार उनपर कर रहा था .....लेकिन अभी बड़ी तेज़ी से उस वार से बचकर निकल जाता ....और ऋतू अपने दंड की ऊर्जा का सटीक प्रहार उसपर कर देती .

अभी युद्ध भूमि से अपने पीछे उस ड्रैगन को दूर ले गया ....लोहेंद्र को लगा क वे उससे डरकर भाग रहे है ......

इसिलए वह बड़ी तेज़ गति से उनके पीछे गया ..

लेकिन अचानक अभी रुक गया और मुद गया .....लोहेंद्र पूर्ण गति से उस तरफ आरहा था ....तभी ऋतू ने भी पूरी शक्ति क साथ ...उस दंड को लोहेंद्र की दिशा में छोड़ा .....

भयंकर ऊर्जा से परिपूर्ण वह दंड और लोहेंद्र जब आपस में टकराये ....तोह वह असुर किसी पर कटे पंछी की तरह जमीं पर गिर पड़ा ....और मारा गया...

सत्यंत अपनी काली ताकत क साथ रक्षक सेना क मैं में बुराई और पाप का संचार करने लगा .......जिस कारण वह युद्ध से विमुख होने लगे ......और कस की hi जय जैकार बोलने लगे ....

सत्य लोक की ऊर्जा से प्राप्त अभी का रूप सत्य क साथ उससे रोकने क लिए प्रगट हो गया .....उन्होंने ने अपने सत्य क प्रकाश से उस असुर की काली चाय को मिटा दिया .....जिसके कारण अब रक्षक सेना भी उसके प्रभाव से मुक्त होने लगे ....

वह असुर ज्यादा देर सत्य की ऊर्जा को सह नहीं पाया और समाप्त हो गया......

कस क सारे असुर मारे जा चुके थे चारो तरफ लाखो योद्धाओ क शवों क टुकड़े और खून की नदी .....एक तरफ बचा था कस अकेला ....और दूसरी तरफ था ...अभी उसकी पत्निया और उसके प्रति रूप ..रक्षक सेना क अभी क मित्र सेनापति और बची हुई रक्षक सेना .....

अभी क लिए इतना hi ....


अगला अंतिम अपडेट रात को ....
 
अपडेट - 141



अब तक आपने देखा कस क सभी दिव्या असुर अभी क प्रतिरूप और उसकी शक्तियों द्वारा मारे जा छूके है ....

कास अब अकेला युद्ध क मैदान में खड़ा है ......

अब आगे -

अभी क सभी मित्र और पत्निया .....एक और खड़े थे ......अभी ने चारो और देखा और युद्ध की विभीषिका को देखकर उससे दुःख हुआ ...चारो और योद्धाओ क कटे हुए शव ...और रख से लाल हुई dharti.......parantu श्रिस्ति की स्थापना क लिए यह संघार जरुरी था ....

अभी - मुर्ख कलासुर देखो अपने चारो तरफ ...आज तुम अकेले खड़े हो .....अपनी महत्वकांशा क लिए तुमने युद्ध की अग्नि में अपने पुत्रो की और इन् असुरो की बलि चढ़ा दी ....

कस - तुम व्यर्थ का प्रवचन न दो रक्षक यह युद्ध भूमि है यहाँ मुँह नहीं अस्त्र बातें करते है .....तुम क्या समज़ते हो ....k...muzh अकेले को ..अपनी इतनी सेना क साथ परस्थ कर सकोगे ....यह तुम्हारा भ्रम है ....तुम सब क लिए में अकेला hi पर्याप्त हु ...

और कस ने एक रथ प्रगट किया ..और अपना धनुष लेकर उसपर चढ़ gaya....aur अभी की तरफ बढ़ने लगा ....

अभी - इतना सबकुछ होने क बाद अभी भी तुम्हारी युद्ध की इच्छा मिटी नहीं ....ठीक है ...पर तुम चिंता न करो तुमसे केवल में hi युद्ध करूँगा मेरी सेना नहीं ......

और अभी ने अपने सारे प्रतिरूप अपने भीतर समां लिए .....अभी अब अपने महा रक्षक क रूप में आगया था ....उसकी साड़ी पत्निया शक्ति क रूप में उसके पीछे कड़ी थी और काल शेर का रूप धार कर अभी क पास खड़ा था ......अभी क शरीर से एक दिव्या प्रकाश निकल रहा था ....

एक बार तोह कस अभी का रूप देखकर दर गया ....लेकिन फिर उसके अहंकार ने उससे पीछे हटने नहीं दिया ......

कस अपना रथ लेकर अभी क सामने आया और अपने धनुष की प्रत्यंचा खींचकर एक टैंकर उत्पन्न करके युद्ध की घोषणा की

अभी भी अपना दिव्या धनुष लेकर सज्ज हो गया .....

और देखते hi देखते दोनों में भयंकर युद्ध चीड़ गया ....दोनों और से तीरो की और दिव्यास्त्रों की वर्षा होने लगी .....उनके टकराव से ....धरती कांपने लगी ...

अभी ने सैकड़ो दिव्या अस्त्र कस पर चोदे लें कस ने भी उनके प्रतिउत्तर ास्त्रो से काट दिया .....

कस ने अनेक प्रकार क दिव्यास्त्र चलाये परन्तु आज सारे देवता और त्रिदेव भी अभी क साथ थे ...एक भी दिव्या अस्त्र अभी को छू भी नहीं पाया ...अभी ने सहज hi उन सबको काट दिया .....

कस ने अब इब्लीस की काली ऊर्जा से व्याप्त सैकड़ो तीर अभी पर चोदे ....एक भयंकर काला साया सा अभी की और बढ़ने लगा ....तोह अभी ने भी सत्य लोक की सत्य से प्राप्त ऊर्जा से उस काले साये को नष्ट कर दिया ......

अभी ने अब अपने तीरो से कस क धनुष को काट डाला ......धनुष क काटने पर कस ने पांच तत्वों की ऊर्जा से परिपूर्ण एक तेजोमय शूल अभी की क तरफ दे मारा .....

अभी ने अपने शक्ति त्रिशूल का प्रयोग करके उस शूल की साड़ी ऊर्जा सोख ली और उससे निष्क्रिय कर दिया....

और साथ hi उस त्रिशूल की भयंकर ऊर्जा से कस क रथ पर वार किया जिससे उसका रथ टूट गया ....और वह निचे आगरा .....

कस तुरंत एक ढल और तलवार लेकर अभी की और दौड़ा ......लेकिन अभी ने तुरंत अपनी दिव्या तलवार क प्रहार से उसकी ढल को काट दिया .....

कस ने भी अपनी तलवार का वार अभी पर किया जो उसके बाजू पर लगा ...लेकिन कस क वार से अभी को एक खरोच भी नहीं आयी ....और अभी ने एक कीकर कस की छाती पर मारी जिससे विह पीछे की तरफ जा गिरा ......

कस अब फिर संभलकर अपनी तलवार लेकर अभी की तरफ तेज़ी से दौड़ा ...अभी ने भी अपने तलवार का भपुर वार करके कस की तलवार को काट दिया ....और एक मुक्का उसके मुँह पर दे मारा ....जिससे कस क मुँह से खून निकलने लगा .....

लेकिन कस भी बड़ा जीवट था उसने उसकी कोई परवाह नहीं की ......

अब वह एक बड़ा से कंटीला मुद्गर लेकर अभी पर वार करने लगा ....अभी भी अपनी दिव्या गदा क प्रहार से कस क वार को ब्लॉक करने लगा ...और साथ साथ कस पर प्रहार भी करने लगा ....

अभी की गदा से कस आहात होने लगा ....आज उसकी कोई शक्ति कोई बल काम नहीं आरहा था ......उसने अपने मुद्गर का जोरदार प्रहार अभी क सर पर करना चाहा लेकिन अभी ने अपनी गदा क जोरदार प्रहार से उसका मिद्गार भी चकनाचूर कर दिया...

अब वो असुर निहथा hi बड़ी तेज़ी से अभी की और बड़ा तोह अभी ने भी शास्त्र त्याग दिए .....कस ने दोनों हाथो का एक जोरदार मुक्का अभी की छाती पर मारा जिससे अभी कुछ पीछे हटा ....

अब अभी ने भी एक मुक्का कस क पेट में दे मारा ..जिससे वह पेट पकड़कर पीछे की और गिरा ....अपनी दर्द को सहन कर के वह असुर फिर खड़ा हुआ .....

और उछलका अभी क तरफ लपका और अभी को आकाश में ले उदा .....अभी अपने वहां वायु की शक्ति क कारण आकाश में भी स्थिर होकर युद्ध कर रहा था ......दोनों एक दूसरे पर प्रहार कर रहे थे ...

कस ने ताबड़तोड़ कई मुक्के अभी क पेट में मारे .....अभी ने अब कस की गर्दन पकड़कर उठा लिया ..और उससे आकाश से जोर से धरती पर पटक दिया ...

निचे गिरते hi उसके मुँह से जोरदार चीख निकली ......लेकिन फिर भी अब अपनी साड़ी ऊर्जा एकत्रित करके एक बड़ा सा गोला बनाया .......और अभी की तरफ ....दौड़ा ......

कस की वह ऊर्जा पूरी नकारात्मकता से भरी हुई थी ...यदि अभी उस गोले को नष्ट करता ..तोह उसको नकारत्मक ऊर्जा चारो और फैल जाती ...हर तरह की नकारात्मकता को सोखने की शक्ति प्रकृति में होती है ....

अभी ने भी रिम्पी की और देखा जो उसकी प्रकृति की ऊर्जा का स्रोत थी ...फिर उस ऊर्जा का प्रयोग कर क एक बड़ा सा घेरा बनाया ...जिसने कस की साड़ी ऊर्जा सोख ली ....

साड़ी ऊर्जा समाप्त होने क बाद और बहुत घायल अवस्था ...में होने क कारण कस ..धरती पर ..गिर गया ....उसकी हालत बहुत दयनीय हो गयी थी ....

कस ने अभी की तरफ देखकर हाथ जोड़े ...फिर अपनी बेटी मदालसा की तरफ ......कस की आँखों में आंसू थे .....

अभी - देखा कस क्या पाया तुमने ....अपने अहंकार की पूर्ती में ....तुमने अपने साथी ...अपने पुत्र ..अपना ..परिवार ...तप ..शक्ति ..सब कीच खो दिया ..है ...क्या ..पाया तुमने ...बुराई और पाप क रास्ते पर चलकर ......

बुराई क रास्ते में तुम इतने अंधे हो गए थे क शक्ति प्राप्त करने क लिए अपनी hi बेटी की बलि तक देने की सोच बैठे थे ...देखो अपने चारो तरफ तुम्हारे इस पाप का परिणाम ...

अभी भी समय है ...सच्चे मैं से प्रायश्चित कर lo...aur अपने पटल लोक को सम्भालो...

कस - मुज़हे क्षमा कर दो रक्षक में बहुत hi पापी नीच ..हु ...तुमने सही कहा ...क्या पाया मैंने .....अब मुज़हे मर जाना चाहिए ....मुज़हे समाप्त कर दो ....अपने साथियो और बच्चो की मृत्यु को बोहज अब में इन् कंधो पर

बेटी मदालसा मुज़हे क्षमा कर दो ..में तुम्हारा अपराधी ...हु ....में अपने पिता होने का कर्तव्य नहीं निभा पाया ......

परन्तु मुज़हे ख़ुशी है ...क ..तुम्हे तुम्हारे hi अंकुल एक अच्छा जीवन साथी mila....ab में और नहीं जीना कहता ......

और एक कट्टर अपने आपको मारने क लिए उठा लेता है .....

मदालसा कस को ऐसे करते हुए देखकर तुरंत आगे आयी और कस क हाथ से कट्टर लेकर चीन ली ...और कस क सामने निचे बैठ गयी .....

मदालसा - नहीं पिताश्री आपको अपने किये हुए कर्मो का पश्चाताप है ....अब आपको अपने प्राण लेने की कोई आवश्यक ता नहीं है .....

कस - सही कहा पुत्री मिज़ू अपने प्राण देने की क्या आवश्यकता है ......प्राण तोह अब तेरे लिंगा में .....और मदालसा का गाला पकड़ लेता है ......

तू hi मेरी इस हार का कारण है ...आज ..यदि तू ...इस रक्षक से न मिली होती तोह में अमर हो जाता ....में तोह मरूंगा पर अब तुज़हे मारकर hi मरूंगा ....

मदालसा को एक बार फिर अपने पिता से धोका मिला था ....उसकी आँखों से आंसू बहने लगे ...

मदालसा ...अभी ..और पटल लोक की ऊर्जा से बना हुआ अभी का असुर रूप वह प्रगट हुआ ......और उसने अभी की मारक ऊर्जा को पुकारा ...KAAL.....aur काल ..एक बड़े से खड़क का रूप धारण करके उसके हाथ में आगया ...और

अभी क असुर रूप ने अपने खड़क क
एक hi प्रहार से कस का सर धड़ से अलग कर दिया ....और कस का धड़ एक तरफ लुढ़क गया ....



िस्प्रकर अंत हुआ कलासुर का ......

अभी का असुर रूप और काल वापस अभी में समां गए .......

अभी ने मदालसा को गले से लगाकर ... सांत्वना दी .....

कस क अंत पर देवताओ ने भी अभी और उसकी पत्नियों पर फूल बरसाए

साड़ी रक्षक सेना में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी ........जिस युद्ध की तैयारी इतने दिनों से चल रही थी आज वह समाप्त हुआ ..और एक बार फिर धरम की विजय हुई ......

उसके बाद अभी रवस ..नैना ..Aur..Addu को जनलोक से पृथ्वी लोक ले आया ....और अपने गाओं में अपने दादी दादी से मिलवाया ....अभी ने अपने सारे परिवार को उनके और अपने जीवित होने की सुचना दी .....और अपनी निर्माण शक्ति क प्रयोग से ...फिर से अपने घर का निर्माण किया .......

अभी ने 14 लोको में अपने 14 रूप स्थापित कर दिए .....और ...साधारण रूप में अब पृत्वी पर अपने परिवार और 14 पत्नियों क साथ रहने लगा ....

ऋतू क साथ कभी कभी जनलोक जाकर ...वह की स्थिति और 14 मानियो का भी निरिक्षण करता .....

पृत्वी पर अब भी संघारक क रूप में ..अपराधियों और अंडर वर्ल्ड पर नज़र बनाये rakhta...aur समय समय पर उनका दमन भी करता ...और साधारण रूप से अपने पिता की बिज़नेस में भी मदत करता ......

रिम्पी ने भी एक सुन्दर से बालक को जन्म दिया .अभी ने उसका नाम ठाकुर दीपक सिंह (दीपू) रखा ....

अभी क दादा दादी ...रवस ..और नैना ...अपना जीवन काल पूरा करके मोक्ष को प्राप्त हो गए ......

अभी की रिम्पी बाकी पत्नियों से भी संताने हुई ....

गोलू और अभी क द्वारा उन सबका भी प्रशिक्षण हुआ ......

जब बच्चे बड़े हुए तोह अभी ने दीपू को अपनी संघारक की शक्तिया और दाइत्व दिया ...

अब दीपू संघारक बनकर बखूबी अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करने लगा ......

नाती ....pote...bahuye अभी का पूरा भरा पूरा परिवार हुआ

अपना जीवन काल पृत्वी पर पूरा करके अभी ने पृत्वी लोक का शरीर त्याग दिया ...

और दिव्या शरीर धारण करके ...फिर जनलोक क सिंघासन पर विराजमान हुआ ...

अभी की सभी पत्नियां भी अपने मूल तीन रूपों में समां गयी .....शिवली ...ऋतुजा ....और विभक्त ..

और वह भी अभी क साथ दिव्या शरीर धारण कर के .....

जनलोक ...में अभी क साथ स्थित हो गयी .......



थे एन्ड
 
सभी रीडर्स को मेरा बहुत बहुत धन्यवाद ....अब तक साथ निभाने क लिए ....

:thanks::thanks::thanks:

दोस्तों यह मेरी पहली कहानी थी .कहानी का यह पात्र कई वर्षो से मेरे मन में था ....परन्तु लिखने का मौका hi नहीं मिला ...

लोखड़ौन में नेट पर सर्फिंग करते हुए मुज़हे इस साइट का पता चला ...यहाँ ...मैंने कई कहानिया देखि ....उनमें से मुज़हे जो पसंद आयी वह साड़ी अधूरी छूट गयी थी ....

मुज़हे अपनी कहानी लिखने का यह अच्छा प्लेटफार्म लगा ...और मैंने पहली बार कोई कहानी लिखना शुरू किया ...

कहानी क पारत्र जैसे जैसे मुज़हे ले जाते में लिखता रहा ..और आज कहानी पूरी हुई...

यह मेरी पहली कहानी है ....इसीलिए गलतियां तोह हुई होगी ..

पर आपसब ने मेरी गलतियों को नज़रअंदाज़ करके ..मेरे लिखने क उद्देस्य को सफल बनाया इसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ....

बहुत जल्द फिर लौटूंगा एक नयी कहानी क साथ ....
 
आपका बहुत बहुत धन्यवाद मित्र, आपने हर अपडेट पर अतुलनीय अद्भुत और सूंदर शब्दावली क द्वारा प्रशंसा भरी समीक्षा की है जो अवर्णनीय है..

आपका हर शब्द प्रेरणादायक है .....

जिनको पढ़कर और नै कहानी लिखने की प्रेरणा मिली है

बहुत जल्द एक और नै कहानी क साथ आरहा हु..


फिर मिलेंगे ...

. :थैंक्स: :थैंक्स: :थैंक्स:
 
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