ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 18 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

अपडेट - 128



अब तक आपने देखा ......रक्षक का Janalok.....Aur उसकी तीन मुख्या शक्तिया जो त्रिदेवियों क अंश से प्रगट hui.......Ritu क जन्म का रहस्य ......

और अभी का वापस पृथ्वी पर आना .......

अभी जब वापस अपने शरीर में आया ...तोह उससे यहाँ क सभी घटना क्रम क बारे में अपनी दिव्या दृष्टि से पता चला .......

अभी को पता था क कस उससे मारा हुआ समज़कर निश्चिंत हो गया ...और इसी अवसर का वह लाभ उठाना चाहता था .....इसीलिए वह प्रत्यक्ष रूप में सब क सामने प्रगट नहीं होना चाहता था.......

उससे त्रिदेवो क वरदान क अनुसार रवस ...नैना ...और ..ाद्दु ...को ..भी ...जीवन देना था ....लेकिन उसके लिए उससे उसकी समृद्धि शक्ति का होना भी जरुरी था ......

अब अभी क पास केवल 15 दिन थे अपनी पूर्णता को प्राप्त करने में......

अभी सबसे पहले वह से अदृश्य रूप में अपने घर क स्थान पर गया था ....जहा सिर्फ घर क कुछ टूटे फूटे अवशेष ...और एक गहरा गद्दा था ......वह जगह पुलिस क द्वारा सील कर दी गयी थी .

उसके बाद अभी तलातल लोक में भी अदृस्य रूप में गया ..और वह रिम्पी ....शालू ...और शामली से मिला .......

सभी अभी क परिवार को लेकर परेशां थी ...रिम्पी पर इसका जयादा असर था .....क्यों की नैना से उसने बचपन से hi एक माँ का प्यार पाया था ....और जब उनपर हुम्ला हुआ था वह कीच नहीं कर पायी थी ...इस बात की ग्लानि उसको चैन से नहीं जीने दे रही थी ...और इसी क कारण उसके स्वस्थ पर भी असर पद रहा था .......

अभी को पता था क यदि वह अपने आपको प्रगट करता है ...तोह किसी न किसी तरह कस सतर्क हो जाएगा ......

अभी कस का मैं गेम प्लान जान चूका था ...वह काले ड्रैगन को अपने मंत्र शक्ति और अनुष्ठान क द्वारा वश में कर रहा था ......जिस्सके hi कारण पृथ्वी से लेकर पटल तक बुराइया फैलने लगी थी ....

इस बात को अभी अपने दिव्या दृष्टि से देख चूका था .......यदि कस को अभी क जीवित होने का पता चल जाएगा तोह उससे यह भी पता चल जाएगा क अभी का नेक्स्ट टारगेट जनलोक hi है ....और अगर अभी वह तक पहुँच गया ..तोह उसका काले ड्रैगन को पूरी तरह अपने वश में करके ....14 मानियो को प्राप्त करके ब्रह्माण्ड पर राज करने का सपना अधूरा रह जाए गए....

और हड़बड़ी में वह कुछ ऐसा करेगा क काले ड्रैगन की ऊर्जा से पृथ्वी से लेकर पटल लोक तक भयंकर विनाश फैल जाए गए .....

इसीलिए अभी गुप्त hi रहना चाहता था .....लेकिन रिम्पी अभी गर्भवती थी और उसकी ऐसी अवस्था उसके गर्भ पर भी असर कर सकती थी ...इसीलिए अभी ने रिम्पी से मानसिक संपर्क किया ....और उससे साड़ी बात बताई ....

विभक्त और रेनू भी रिम्पी क पास पहुँच गयी तोह उन्होंने भी रिम्पी को सब कुछ बता दिया ....रिम्पी अब बहुत खुश हो गयी क उसका परिवार अब उससे वापस मिल जाएगा .....फिर से माँ क आँचल की चाय ...और ाद्दु जैसी छोटी बहन का साथ ......

अभी ने रिम्पी को अपना ध्यान रखने क लिए kaha......Shivali और अपनी बाकी पत्नियों से भी मानसिक संपर्क किया ....और उन्हें अभी शांत रहने क लिए कहा .......

वह से अभी अपने गाओं राणा महल पहुंचा ......यहाँ ...RVS..Naina...Abhi...Ritu...Addu...aur Rimpy..ki आत्मा की शांति क लिए मासिक हवन और पूजन और श्राद्ध का अनुष्ठान चल रहा था ...जो अभी क चाचा कर तहे थे ......वह अभी की bua.....massiya ....Mama....poori फॅमिली आई थी ......

अभी ने वह दादा ..दादी को नहीं देखा .......

तोह वह उनके रूम में चला गया ...जहा उसने देखा ..क उसकी दादी सदमें क कॉटन कोमा में चली गयी थी ....

और दादा जी ..जैसे किसी प्राणहीन मूर्ति की तरह चेयर पर बैठे थे ......

अभी ने सबसे पहले दादी क सर पर हाथ रखा और दादी क अंतरण क साथ कनेक्ट हुआ ....वह अभी ने यह बात बिठा दी ...क उनके परिवार को कुछ नहीं हुआ है ....और अपनी हीलिंग पावर और प्राणशक्ति की ऊर्जा से ...उनके मन मस्तिष्क को ठीक करके कोमा से बहार ले आया.....

दादी ने आंखें खोली और इधर उधर देखने लगी ...उन्हें वह अभी क होने का अहसास हो रहा था ....इसीलिए वह बार बार अभी को पुकार रही थी .....

दादा जी को तोह कोई होश hi नहीं था ....इसीलिए वह दादी की पुकार भी नहीं सुन पारहे थे .........

अभी ने सबसे पहले कमरे को शैलद से कवर कर दिया ....फिर दादी क सामने अपने आपको प्रगट कर दिया ....

दादी अभी को अपने सामने देखकर उठ गयी और अभी को कसकर गले लगा ली उनकी आँखों से लगातार आंसू बाह रहे थे ......

दादी - मैं जानती थी बीटा क तू जरूर आएगा ....मेरा भगवन इतना निष्ठुर नहीं हो सकता क वह हम से पहले हमारे बच्चो को अपने पास बुला ले .....

और अभी क पूरे चेहरे को चूमने लगती है ....

अभी - दादी मुज़हे कुछ नहीं हुआ देखो में बिलकुल ठीक हु .....आपका आशर्वाद हो तोह मुज़हे क्या हो सकता है .....

दादी - लेकिन बीटा यह सब क्या कह रहे है ......विक्रम ..नैना ...ऋतू ..ाद्दु ....और मेरी बहु ...सब कहा है .......

अभी - दादी सब ठीक है और सुरक्षित है ....बहुत जल्द आपसे मिलने आएंगे .......

अभी की आवाज आरएसएस क कानो में पहुंची तोह वह सदमे से बहार आगये ....और जब उन्होंने अभी को अपनी दादी से बात करते हुए देखा तोह ......उन्होंने अभी को जोर से आवाज लगायी .....अभी ने जब देक्ग क दादा जी सदमें से बहार आगये है .......तोह उनके पास आया ...और उनके चरण छू लिए .....

दादा जी ने उसस्के कंधे पकड़कर उससे उठाया और कसकर ...गले लगा लिए ......उनकीकाँखों से भी अश्रुधारा बाह रही थी .....

दादा - में जानता था क मेरा शेर जरूर आएगा दुनिया की कोई ताकत उसका कुछ नहीं बिगड़ सकती ....

अभी - जब आप जानते थे तोह आपने अपनी ऐसी हालत क्यों बना राखी थी ....राणा संग्राम ....सिंह को यह शोभा देता है कुआ batao.....aapko तोह दादी को संभालना चाहिए था .....

दादा - बीटा मुज़हे विश्वास तोह था ...लेकिन यह मीडिया ..और सब लोगो की बातों ने मुज़पर असर किया ....फिर हम सब ने वह जाकर भी देखा ......

और पिछले 1 महीने से तुम लोगो का भी कुछ पता नहीं चला ......

इसीलिए लोगो की बातों में बाह गया...

अच्छा विक्रम और नैना कहा है ....ऋतू ..ाद्दु और हमारी बहु का भी कुछ पता नहीं है ...कहा ..है सब ठीक तोह है.....

अभी - दादू आप बिलकुल चिंता न करे सब ठीक है और बहुत जल्द सब आपके सामने होंगे .....

अभी मुज़हे जाना होगा ...

दादा - रुको बीटा यह बहार जो हो रहा है हमे उससे रोकना होगा ..मुज़हे पता था मेरे बच्चो को कुछ नहीं हो सकता था इसीलिए में उनके साथ नहीं शामिल हुए .

अभी - नहीं दादू अभी आप किसी को कुछ नहीं बताएँगे .....क्यों क असुर इस गाओं तक आ चुके है ....उन्हें अभी हमारे बारे में पता नहीं चलना चाहिए .....

आपको और दादी दोनों को कुछ दिन वायदे hi रहना है जैसे पहले रहते थे ....

आरएसएस - कैसे बीटा ....यह तोह बहुत मुश्किल है ...लेकिन तुम्हरे अब यह नौटंकी भी कर hi लेंगे ..

दादी - लेकिन अब मुजह्से और सोया नहीं जाएगा ......

अभी - दादी आपको बस उनके सामने होश में आने का नाटक karna...isase आपकी भी परेशानी का हाल हो जाएगा ....

अच्छा अब में चलता हु और दोनों का आश्रीवाद लेकर .....

अभी वह से महल क गुप्त शिवालय में जाता है ....वह उससे बड़ी शांति मिलती है ..एक नयी ऊर्जा का उससे आभास होता है .......

बहगवां भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर के वह वह से नीलाल कर सीधा .....नदी क किनारे वाले ड्रैगन मंदिर की और अदृश्य रूप में जाता है ........

उसने दूर से hi उस जगह को देखा तोह उससे वह बहुत अधिक मात्रा में तामसिक शक्ति का आभास हुआ ....अभी ने अपने दिव्या दृष्टि से देखा तोह वह उससे एक काले रंग क प्रोटाल जैसे चक्र दिखा ....मंदिर का ताला टुटा हुआ है ....और उसके द्वार खुले हुए है ......वह पोर्टल ठीक उस द्वार क मध्य में बना हुआ था ....

तभी उसने देखा क दो असुर सैनिको ने 5 लोगो को बंदी बनाया हुआ है ....और उन्हें जबरदस्ती ...उस पोर्टल की तरफ खींच कर ले जा रहे है .....

एक असुर जो उन् दोनों का मुखिया लग रहा tha......woh उन्हें आर्डर कर रहा था...

म - जल्दी करो उनके भोजन का समय हो गया है ...यदि उन्हें समय पर भोजन नहीं मिला तोह वह हम सब को खा जाएंगे ....

अभी समाज गया क इन् असुरो को किस काम क लिए चुना है.......

बिना उनके सामने प्रगट हुए उन् 5 को मुक्त करना था ....

पहले अभी ने वह हलकी सी धुल भरी आंधी को उस तरफ छोड़ा ...जससे वह मौजूद असुरो और उन् 5 की आँखों में धूल जाने से उन्हें वह दिखाई नहीं दे रहा था ....अभी ने इसका फायदा उठाकर उन पांचो को उन असुरो से मुक्त किया और और वह से हटा दिया ....और अपनी माया का प्रयोग करके बिलकुल वैसे hi 5 लोग वह पर प्रगट कर दिए ....

यह सब अभी ने इतने तेज़ी से किया क ..उन् असुरो को इस बारे में पता hi नहीं चला ....

असुर जब खींचकर ...उन 5 मायावी मनुष्यो को उस पोर्टल क निकट ले गए तब उस पोर्टल में उन् मनुष्यो की जगह वह दो औसर की साड़ी ऊर्जा चली गयी और वह प्राणहीन होका जमीन पर गिर गए .....

उन् दो असुरो का जो मुखिया था ..उसने जब वह देखा ....तोह वह अपने प्राण बचने क लिए वह से भाग गया......

थोड़ी देर वह पोर्टक खुला रहा फिर वह बंद होने लगा .....उसके बंद होने से पहले अभी सुक्ष्म रूप से उसमें प्रवेश कर गया.....

यह पोर्टल खुलता था जनलोक क उस स्थान क पास जहा 14 मनिया रहकहि थी ......और वही निकट था काला ड्रैगन ...जिसने अभी अभी दो असुरो की साड़ी ऊर्जा का नास्ता किया था .......

वह इतना विशाल कए था .....क .उसके सामने अभी एक खरगोश से भी छोटा लग रहा था.......

अभी इस समय भी अदृश्य रूप में था परन्तु वह ड्रैगन अभी की ऊर्जा को महसूस कर सकता था ......हज़ारो वर्षो क बाद जानी पहचानी ऊर्जा का आभास होते hi उस ड्रैगन ने एक जजोर दर आवाज निकली ....

अभी ने इस समय यहाँ से निकल जाना hi उचित समज़ह ......अभी वह से टेलिपोर्ट होकर तुरंत ...जनलोक में स्थित ...अपने महल क द्वार पर पहुंचा ......

वह पर कदम रखते hi अभी क वस्त्र बदल गए अब वह पूरी तरह .....महा रक्षक अभिनव क रूप में था .....सर पर बहुमूल्य रत्नो का मुकुट ...और ....आभूषण ...राजसी वेश .....और हाथ में दिव्या तलवार .....

जैसे hi महल क द्वार तक पहुंचा .....उसका स्वागत करने ....जो पहुंची थी उसकी आँखों की चमक और मुस्कराहट वह बखूबी जानता था...

आज वह भी राजसी वस्त्रो में पहले से ज्यादा और भी सूंदर लग रही थी ...अभी की नज़रे तोह बस ताहेर सी गयी थी ....

अभी क लिए इतना hi ....


अगला अपडेट रात को .......
 
अपडेट - 129



अभी की नज़रे जैसे ताहेर सी गयी थी ......

वह थी ऋतू जिससे यहाँ आने क बाद अपनी सत्यता का ज्ञान हो गया था ......

आज उससे यह पता था क वह अभी क जन्मजन्मान्तर की संगिनी है ...वह हाथ में थाली लेकर ...अभी का स्वागत करने आयी थी ....और साथ में थे राजगुरु सत्यानंदा (रस) और जाना लोक क मुख्या अधिकारी ...

ऋतू आगे बड़ी और अभी क माथे पर तिलक लगाया ......दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे ......एक दूसरे को गले लगाना चाहते थे .....बहुत कुछ कहना चाहते थे ...लेकिन .....मर्यादा की डोर में बंधे हुए थे......

रस - स्वागत है रक्षक आपका अपने लोक में ......

अभी - प्रणाम राजगुरु .....आपके इस स्वागत क लिए आपका आभार ....

फिर अभी उनके साथ महल क भीतर गया ......यह महल ...स्वयं प्रकाशित था ....जो अभी ने अपनी निर्माण शक्ति क द्वारा बनाया था .....सफ़ेद रौशनी में जैसे नहाया हुआ हो .....

यहाँ क हर कक्ष दिव्या फूलो से सजे हुए थे जो कभी मुरजहाँते नहीं थे ...उनकी सुगंध .....मंत्र मुग्ध कर देने वाली थी....

सब वह की सभा में पहुंचे ....जो इंद्रा सभा से कोई काम नहीं थी ......राजगुरु ने पूरे विधि विधान से अभी को सिंघासन पर बिठाया.....

रस - आज जनलोक को फिर से उसका राजा मिल गया है .......महाराज अभिनव ...आपको पुनः इस सिंघासन पर विरजमान देखकर हमे बड़ी खुसी हो रही है ......अब मुज़हे पूरी आशा है क पुनः 14 लोको में एक संतुलन स्थापित हो जाएगा .....

अभी - राजगुरु ...सबसे पहले तोह आपने बड़े सुचारु ढंग से मेरी अनुपस्थि में इस लोक की जिम्मेदारी संभाली .....इसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ....

और दूसरे हमे इस राज्य क महाराज कहना ठीक नहीं होगा ....हम तोह बस तिदेवो की आज्ञा का पालन करते है ...और उन्ही क द्वारा दी हुई शक्तियों से और आप जैसे गुरु क मार्गदर्शन से हम इन् 14 लोको में संतुलन बनाये रखने में सफल होते है....

रस - आपका कहना सत्य है ....

यही तोह आपकी उदारता है .....

नहीं तोह पद क अहंकार में स्वयं देवराज का भी कई बार पतन हुआ है .....

और रही बात आपके ाउपस्थिति में सञ्चालन करने की ... तोह हमने भी बस अपना कर्तया का निर्वाह किया ......परन्तु कस क कारण अब स्थिति हमारे हाथ से निकलती जा रही...

काले ड्रैगन क भीतर में अब इब्लीस की तमोगुणी ऊर्जा जो सुप्त पड़ी थी वह अब जाग रही है .....और इसी कारण .....उससे सम्बंधित लोको में बुराई और पाप बढ़ते जा रहे है ...जिससे बुराई की तकते और प्रबल होती जा रही है .....

हमे शीघ्र hi उससे रोकना होगा .....

अभी - आप सत्य कह रहे है ...राजगुरु ....पृत्वी से लेका ..पटल तक ...लोगो क मैं में पाप करने की प्रवृति दिन पर दिन बढ़ती जा रही है ......यदि ऐसे hi रहा तोह स्तिथि नियंत्रण से बहार हो जायेगी ......आप बातये अब हमे क्या करना होगा ......

रस - आप तोह सब कुछ जानते hi है .....इसके लिए आपको सत्य की ऊर्जा क साथ साथ सफ़ेद ड्रैगन की भी ऊर्जा का प्रयोग करना होगा ....

अभी - हमे पता है ..परन्तु अभी हमारे पास जनलोक की ऊर्जा नहीं है ...और उसके बिना ..हम सफ़ेद ड्रैगन को नियंत्रित नहीं कर सकते ........

रस - इस्सके बहुत सरल मार्ग है ....आपको शीग्र hi अब जाना लोक की शक्ति से विवाह करना होगा ....

जिससे आपको इस लोक की ऊर्जा ...और आपकी शक्ति पुनः प्राप्त हो जायेगी ......

उसके बाद सभा में और चर्चा चली ....अभी ने बाकी सभा सादो को पृत्वी से ऊपर क 7 लोको क प्रतिक मानियो की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी एक ..एक ..सभासद को दी ....जिससे ..काली ऊर्जा ....की शक्ति से इब्लीस उन मानियो को भी दूषित करने में सफल न हो jaaye....jo ऊपर क 7 लोको क प्रतिक थे

और सभा स्थगित हो गयी ....

सभा में राजगुरु क द्वारा .....

अभी और ऋतू क विवाह का आयोजन कल अभिजीत मुहूर्त में रखा गया .......

अभी ऋतू क साथ अपने भवन आया ......अपने कक्षा में पेअर रखते hi उसकी पुरानी यादें ताज़ा हो गयी क कैसे वह अपनी तीनो पत्नियों क साथ ....इस काश में रहा करता था ....

ऋतू ने अभी को किन्ही यादो में खोये हुए देखा ...तोह ....

ऋतू - ऐसे क्या विचार कर रहे हो ...

अभी - समय क बदलते हुए रूप क बारे में ...एक समय था ...जब हम ...यहाँ अपनी तीनो पत्नियों क साथ रमन करते थे ....

फिर समय की गति ने हमे अलग कर दिया ......और आज अपनी पूर्णता क बहुत निकट हु ......

यह समय का चक्र hi था जिसने पहले तोह तुम्हे मेरी बड़ी बहन बनाया ..और ..जब मुज़हे सत्य ज्ञात हुआ तोह वास्तविकता पता चली ....

ऋतू - अब भूतकाल को छोड़कर वर्त्तमान में आईये ....आज क लिए यही सत्य है क अब हम फिर एक होने वाले है ....लेकिन इस अवसर पर ...जिन्होंने हमे माता पिता का प्रेम दिया ...इतने वर्ष जिस परिवार क संग रहे .....उनकी ाउपस्थिति मुज़हे खाल रही है .......यही दुःख है क में उनके लिए कुछ कर नहीं पायी....

अभी - वह कही नहीं गए ऋतू यही है मेरे पास ......मेरे भीतर....

फिर अभी ने ऋतू को पूरी बात बताई ......

ऋतू - बड़ी प्रसन्नता क साथ .....तोह इतनी देर क्यों कर रहे हो ....त्रिदेवो क वरदान को फलित करो ...में उन्हें देखना चाहती हु ....यदि हमारे विवाह क अवसर पर वह उपस्थित हुए तोह इससे जयादा प्रसन्नता की बात और क्या होगी .....

उनके आशीर्वाद क बिना हमारा विवाह अधूरा है ....

अभी - उन्हें जीवित तोह में भी करना चाहता हु ...परन्तु उसके लिए मुज़हे समृद्धि शक्ति की भी आवश्यकता है ....जो हमारे मिलान क बाद hi मुज़हे प्राप्त हो सकती है ......

ऋतू - एक मार्ग और है ...इस ऊर्जा को में बहार से hi ... आपकी ऊर्जा से मिला सकती हु ....

अभी को अब मार्ग मिल गया था ....वह तुरंत आसान लगाकर ध्यान में बैठ gaya......Aur 5 कोशो का ध्यान करते हुए आनंदमय कोष में पहुंचा ....वह रवस ...नैना ...और ऋतू की आत्माओ को देखा ....

अभी अभी ने ...प्राणशक्ति ....निर्माण shakti....Prakriti shakti...teeno की ऊर्जा को एक करके ..तीनो की आत्माओ को उस ऊर्जा से परिपूर्ण किया ....ऋतू भी अपनी समृद्धि शक्ति की ऊर्जा अभी क भीतर प्रवेश करा रही थी .......

अब वह तीनो आत्माये ....,पांच कोष से परिपूर्ण होगयी थी .....तोह अभी अब विभक्त सिद्धि का प्रयोग करके उन्हें अपने शरीर से अलग किया ....

अब तीनो को तेदेव क वरदान और अभी की उर्जाओ क द्वारा अपना शरीर प्राप्त हो गया था ....और सामने खड़े थे ...रवस ...नैना ..और ..ाद्दु ..अपने पूर्ण रूप में ......

ऋतू और अभी उन् तीनो को देखकर बहुत खुश हुए ......

ऋतू तोह नैना क गले लग गयी ......दोनों की आँखों में ख़ुशी क आंसू थे ......

रवस ...बस खड़े दोनों का मिलाप देख रहे थे .....और ाद्दु ने जब अपने भाई को सामने देखा ...तोह ..वह ...भी भैया पुकारते हुए अभी क गले लग गयी ....अभी क भी आँखों में अपनी प्यारी गद्य को मिलकर आंसू चालक उठे ......और ाद्दु बस अभी क गले लगकर रोये जारही थी ....

अभी - बस कर गुड़िया ....देख ऐसे रट नहीं है .....

अब सब ठीक हो गया है na....aur तू तोह मेरी बहादुर गुड़िया है .....देख ऐसे रोयेगी तोह मुज़हे भी रोना आजायेगा ....

अभी ने ाद्दु क आंसू पोंछे ......

ाद्दु - भाई . ....मुज़हे लगा था क अब में आपसे कभी नहीं मिल पाउंगी ....जब उस बुरे राक्षस ने वार किया था .....आपको पता है मुज़हे बहुत तकलीफ हुई थी .....सब जगह दर्द होरहा था ....फिर पता नहीं हम सब कहा चले गए थे ......अब हम यहाँ कैसे आगये .....

रवस नैना और ाद्दु को अपनी मृत्यु क बाद से अब तक का सफर कुछ याद नहीं था ....

तीनो अपने आपको और ऋतू को यहाँ देखकर हैरान थे ....और वह भी राजसी वस्त्रो में .....

ाद्दु से मिलकर अभी रवस और नैना क चरण छुए .....दोनों ने अभी को गले लगा लिया ......

ाद्दु - भाई आप यहाँ क राजा हो .......आप इस ड्रेस में बिलकुल एक राजा की तरह लग रहे हो ...और दी भी कितनी ब्यूटीफुल लग रही है ....हम कहा पर है ....यह .महल किसका है .....

अभी - अरे गुड़िया बस ..bas...itne सवाल एक साथ ....

रवस - हां बीटा यह सब क्या है ...और हम यहाँ कैसे आगये ...जहा तक हमे याद है क ...हम पर उस असुर क द्वारा प्राणघातक वार हुआ था तोह हम बच कैसे गए.....

निआना - और बेतु यह ऋतू यहाँ इन् कपड़ो में कैसे ....यह कौनसी जगह है ....अब मुज़हे अपने अंदर कोई पावर भी दिखाई नहीं दे रही है......

अब अभी उन्हें कैसे बताये क ऋतू और उसकी शादी हो रही है ....तभी राजगुरु वह आते है ......

रस - आपके सारे प्रश्नो का उत्तर ...हिम आपको देते है .....और उन्होंने ऋतू क जन्म से लेकर अब तक की साड़ी बास्टियन बताई है .....

नैना - ओह्ह तोह ऋतू मेरी बेटी नहीं ...मेरी बहु है ....और इस लोक की रानी है ...और बेतु तू यहाँ का राजा .....यह कैसा समय का चक्र है ......

ऋतू - आपके लिए तोह में बेटी hi ठीक हु ....

ाद्दु - वाओ ...भाई तोह यह आपका महल है कितना सूंदर है और बड़ा भी ....... और ऋतू दी में तोह आपको हमेशा की तरह दी hi बुलाऊंगी ......

ऋतू ने ाद्दु को गले लगा लिया ...बिलकुल मेरी गुड़िया टी तोह मेरी चुटकी है ....

सबका मेल मिलाप हुआ कुछ देर बातें चली ......रवस और नैना को अभी और ऋतू क विवाह क बारे में सुनकर कुछ अटपटा लगा ...जिनको ...बचपन से भाई बहन की दृष्टि से देखा उनका विवाह .....लेकिन ऋतू अभी की जन्मजन्मान्तर की पत्नी है इस सत्य को भी जान गए थे .......इसीलिए उन्हें इस रिश्ते को स्वीकार करना hi पड़ा ......

वह दिन ऐसे hi मेल मिलाप और बातों में बिट गया....

दूसरे दिन विवाह की तैयारी हो रही थी ...ऋतू का सपना आज पूरा हो रहा था ....वह अपने माता पिता क आशर्वाद से hi अभी से विवाह करना चाहती थी ...लेकिन पृथ्वी ..पर उससे यह असंभव लग रहा था .......आज उससे हो संभव होते देखकर उससे ख़ुशी हो रही थी ....

नैना ने खुद ऋतू को तैयार किया .....ाद्दु तोह अभी क साथ hi बानी हुई थी ...और रवस दोनों तरफ .....

पृत्वी लोक की विधि क अनुसार hi विवाह सम्पन्न हुआ ......रवस ने कन्यादान किया ....

दोनों hi ने रवस और नैना का आशीर्वाद लिया ....

विवाह क बाद रवस ...नैना ...और ाद्दु का एक सूंदर और विशाल भवन में रहने का प्रबंध किया गया......

ऋतू सुहाग सेज पर घूँघट ओढ़े अभी की आतुरता से प्रतीक्षा कर रही थी ....हर आहात पर उसकी धड़कनें तेज़ हो जाती ...है .लगता क अभी आगया ....

अब वह समय भी आया जब अभी ने अपने कक्ष में प्रवेश किया ....और ऋतू की तरफ बड़ा ....

आज क लिए इतना hi....


अगला अपडेट कल.....
 
ठंकु सू मच भाई आपके कमेंट क लिए



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लेटेस्ट अपडेट 129 पोस्टेड....
 
ठंकु सू मच भाई अस्प्के शानदार साथ क लिए

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आपका बहुत बहुत धन्यवाद भाई शानदार साथ और कमेंट क लिए

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हां भाई आपने सही जाना वह ऋतू hi है...

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ठंकु सो मच भाई आपके शानदार साथ और सुपर्ब कमेंट क लिए

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आपका अंदाजा बिकुल सही है भाई....

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ठंकु सो मच तो आल रीडर्स आपके अब तक क साथ क लिए ....



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लेटेस्ट अपडेट 129 posted....waiting फॉर योर कमेंट & रिव्यु ...
 
अपडेट - 130



अभी तक आपने देखा ...रवस ..नैना ..और ..ाद्दु को पुनः जीवन प्राप्त हो गया है .......

अभी और ऋतू का विवाह हो गया है .......

अब आगी ........

ऋतू घूँघट में सुहाग सेज पर बैठी thi....aur अभी धीरे 2 बढ़ते हुए उस तक पहुंचा ........दोनों जाने क्यों अब भी हिचकिचा रहे थे .......कहना करना बहुत कुछ चाहते थे लेकिन कहा से शुरू करे और कैसे शुरू करे समाज में नहीं आरहा था .....

ऋतू ने देखा क बड़ी देर होगयी .....अब इस चुप्पी को उससे hi तोडना होगा ....

ऋतू - क्या सोच रहे है ....के अभी भी आपके मन में कोई शंका है ........जो उस तरह सिर्फ खड़े है ....

अभी - नहीं अब कैसी शंका ....वह तोह बस एक बार इस नए रिश्ते में प्रवेश करने से पहले बचपन से लेकर अब तक की साड़ी यादें संजो रहा था .......

(और बीएड पर ऋतू क पास बैठ जाता है) लगता है .....रानी साहिबा को सबर नहीं हो रहा है......

ऋतू - अब सबर कैसे होगा ...इतने साल जो इंतजार किया है ....एक जनम क बाद आज हमारे पुनर मिलान की घडी आयी है .....

अभी - अच्छा जी ..तोह रानी साहिबा ...यह घूंघट क्यों ....हम कोई आपके लिए नए तोह नहीं जो हमसे भी पर्दा कर रहे हो .....

ऋतू - यह तोह परंपरा है घूँघट तिह आपको hi उठाना होगा .....तभी बात आगे बढ़ेगी......

अभी - जो आज्ञा रानी साहिबा की .....( और ऋतू का घूँघट अपने हाथो से उठा देता है )

आज ऋतू का सौंदर्य मिलान की आस में और बढ़ गया था .....अभी बस उसकी सुंदरता और उसकी आँखों में खो सा गया .....

ऋतू - लो फिर खो गए जनाब .......और अभी क चेहरे क आगे चुटकी बजती है......

अभी - अब यह दिल बेचारा क्या करे जोर हुस्न वाले अपने नैनो क तीर से इससे घायल किये जा रहे है ...सँभालने में कुछ वक्त तोह लगेगा hi न....

ऋतू - लगता है शरुवात मज़हे hi करनी पड़ेगी .......

अब ऋतू अभी को बीएड पर धक्का देती है ....और उसके ऊपर ज़्हुक जाती है ....कमर से निचे का हिस्सा बीएड पर तोह ऊपर का अभी क सीने पर ......

ऋतू अभी क होंठो तक ज़्हुकति है ...और रुक जाती है ......उसको अपने स्तन अभी क सीने में दबने का अहसास होता hai....Aur अभी की गर्म साँसे ......

जोश में तोह अभी को धक्का देकर ऊपर आगयी थी ...लेकिन अभी उससे शर्म आरही थी.....

अभी ने अपने हाथ ऋतू क पीठ पर कास लिए ...

अभी - अब क्या हुआ रानीसहिबा को ....आप तोह शुरुवात करने वाली थी न ...तोह करो न मेरे होंठ इससे प्रतीक्षा में सुख रहे है ....

अभी की बात सुनकर ऋतू ने एक छोटा सा किश कर दिया ...

अभी - यह क्या tha.....isse किश कहते है......

ऋतू - तोह किस्से कहते है .....

अभी - अच्छा जी ासबकुछ जानते समज़ते हुए ...हमसे hi नौटंकी ....अभी बताते है किश किसे कहते है ......

और अभी ने एक हाथ उसके सर क पीछे ले जाकर अपनी तरफ khincha.....aur ऋतू क होंठो को अपने होंठो में भरकर ...चूसने लगा....

अभी ने पहले उसके उप्पेर लिप को चूसना शुरू किया .......और ऋतू को अपने निचे करके अब उसके ऊपर aagaya........aur थोड़ी देर ऐसे hi होंठ चुने क बाद उससे अलग हुआ .......

इससे कहते है किश .......अब समज़ही ....जानेमन .......

ऋतू की साँसे अभी क जबरदस्त किश से फूलने लगी थी .......जैसे हाफ रही हो ...

ऋतू - तुमने तोह मेरी साँसे hi बंद कर दी थी ........यह भी कोई किश था .......किश होना चाहिए सेंसुअल ....देखो ऐसे .....और ......ऋतू न .धीरे से अभी क होंठो पर अपने होंठ रख दिए ..और सहलाने लगी फिर धीरे 2 अभी क होंठो को चूसने लगी .....ऋतू का धीमे गति से चूमना ....अभी ...क अंदर एक आनंद की लहर सी पैदा कर रहा था....

ऐसे hi धीमे गति से कभी उप्पेर लिप कभी लोअर लिप कभी एक दूसरे की जुबान दोनों चूसे जा रहे the......Saans लेने क लिए दोनों अलग हुए ....और फिर शुरू होगये .....

दोनों अब मदहोश हो रहे थे ...एक दूसरे की जुबान को चूसते हुए ...एक दूसरे क बंदन को सहला रहे थे... .....अब अभी का हाथ ऋतू क स्तनों तक पहुँच गया था .....पहले तोह ...सहलाकर उसके स्तनों को महसूस करने लगा .....फिर धीरे 2 से ऋतू क बड़े स्तनों को दबाना शुरू किया ....

अभी क ऐसा करने से ऋतू की सिसकारी निकल ने लगी ....उसके मुँह से निकलने वाली आवाजे अभी को और जोश दिला रही थी ..... .

ऋतू की चोली में कैसे हुए स्तन और गले मरीन पहने हुए दिव्या हार अभी की छाती में चुभ रहे थे ......

ऋतू की सांस फूलती हुई देखकर अभी थोड़ा हटा और ...ऋतू को निहारने लगा ...

अभी बस एक तक ऋतू क सुंदरता को अपनी आँखों से पि रहा था ....

ऋतू ऐसी लगरही थी ...जैसे कादेव सर मिलान क लिए लालायित ..रति .....

ऋतू - अभी की तरफ देखने लगी ....जैसे ..कह रही हो ......की क्या हुआ अलग क्यों हो गए

अभी - ऋतू ...तुम्हारे सिवा और क्या देख सकता हु ..,..सच में तुम आज बहुत सूंदर लग रही हो

अब अभी फिर उसकी आँखिन में देखते हुए ...उसके उप्पेर आजाता है

फिर से ऋतू क होंठो को चूमते हुए ...सारे चेहरे को चूमने लगता है ....ऋतू क हाथ अभी क पीठ को सहलरहे थे ......और अभी का हाथ उसके क दोनों स्तनों को दबा रहे .....

ऐसे hi प्रेमलीला में मगन दोनों आगे बढ़ते हुए निर्वस्त्र हो जाते है .....अभी एक एक करके ऋतू क सारे गहने उतर देता है ....फिर उसके एक एक करके वस्त्र...

ऋतू भी इस मिलान क लिए तड़प रही थी इसीलिए उसने भी अभी को नहीं रोका..

दोनों नग्न अवस्था में बीएड पर एक दूसरे क आलिंगन में बांध gaye....Abhi ऋतू क स्तनों को मसल रहा था ....और चूमते हुए उसके स्तनों की और बढ़ रहा था.... और एक मिप्प्ले को मुँह में लेकर चूसने लगा ....और दूसरे क निप्पल को अंगूठे से मसलने लगा ......

अभी क ऐसे करने से ऋतू की तड़प और बढ़ गयी और उसके मुँह से सिसकारियां तेज़ होने लगी ...

.. योनि कॉमर्स छोड़ने लगी .......

ऋतू क हाथ अभी क सीने पर चल रहे थे और वह भी अभी क निप्पल को खिंच रही थी ....जिससे अभी की उत्तेजना भी बढ़ती जारही थी .....

अभी का लिंग पूरा तन कर अकड़ रहा था ......अभी एक ..एक करके ऋतू क स्तनों को मसलते हुए चूस रहा था ......अब निचे आते हुए ऋतू क पेट को चूमते हुए.... अपनी जुबान उसकी नाभि में डालकर कुरेदने लगा .......

ऋतू ने भी अब अभी का लिंग पकड़ लिया ......और सहलाने लगी ....

जिससे अब अभी की सिसकारियां निकलने लगी

ऋतू अब अभी क उप्पेर आगयी और अभी क हिलते लम्बे मोठे मुसल जैसे लिंग को आंखें फाडे देखने लगी ........

ऋतू ने हाथ बढ़ाते हुए ....अभी क लिंग को पकड़ लिया ...और सहलाने lagi....dono क बदन में जैसे वासना की आग भड़क उठी thi.....aur अभी क पेट पर चूमने lagi....aur चूमते हुए लिंग की जड़ तक पहुँच गयी.......

अभी क तने लिंग की खुशबू उससे और पागल करने लगी थी .....Ab...woh चूमते हुए अभी क लिंग तक आगयी ....

अभी क लाल और बड़े टोपे को देखकर ऋतू ने उसपर किश कर दिया .....जिससे अभी क जिस्म में सिरहन सी दौड़ गयी और उसका लिंग जहटके मारने लगा ..

ऋतू अभी क लिंग को चुम रही थी चाट रही थी .....थोड़ी देर क बाद अब अभी से सबर नहीं हो रहा था

अब अभी ने ऋतू को बीएड पर लिटाकर उसके सकते बदन को चूमना शुरू किया

ऋतू की आंखें मदहोशी में बंद होने लगी .....

अभी अब चूमते हुए ऋतू की जांघो से होते हुए ...उसकी गोरी चिकनी फूली हुई योनि तक पहुँचता है और उसपर एक किश कर देता है

ऋतू - अह्ह्ह्हह ....shhhhhh......ufff.....jaaaan...... कुछ करूओ ...करते हुए अजीब सी आवाजे निकल रही थी

अभी ने अब ऋतू की गुलाबी कमसिन कुवारी योनि को देखा ....जिसके लिप्स वासना की अधिकता क कारण फड़फड़ा रहे the...aur उस्में से कॉमर्स बहरहा था ....जिसकी भीनी भीनी खुशबु ....अभी क अंदर वासना को और बड़ा रही थी ....

अभी अब उसकी योनि पर टूट पड़ा .....और चूसने ...चाटने लगा .....ऋतू ...भी कमर उठाकर एक हाथ से अभी का सर अपनी योनि पर दबा रही थी .......

दोनों अब और देर नहीं करना चाहते the...aur जल्द hi अपनी मन्ज़हील तक पहुंचना चाहते थे

अभी ऋतू दोनों टैंगो क बिच आकर ..अपने तने लिंग को उसकी गरम योनि पर रगड़ने लगा .....

अभी ने निचे ज़्हुक कर पहले ऋतू क होंठ अपने होंठो में भर लिए ....

और एक जहतका मारा ......इससे पहले तो ऋतू को बहुत पीड़ा हुई ......लेकिन जैसे जैसे उनकी काम लीला आगे बढ़ी ......ऋतू को आनंद आने लगा और वह भी कमर उठाकर अभी का साथ देने लगी

अब दोनों क शरीर से सफ़ेद कलर की लाइट निकलकर वह एक प्रकाश पुंज में बदलने लगी ..

धीरे 2 दोनों की गति बढ़ने लगी .......और हर धक्के से होने वाली आवाजे टेबल की थप की तरह कमरे में गूंज रही थी ...और साथ में गूंज रही थी दोनों की वासनामयी आवाजे....

दोनों की गति और तेज़ होने lagi....dono को ऐसा लग रहा था क दोनों की ऊर्जा एक दूसरे में सामने क लिए आतुर हो .....

ऐसे hi दोनों अपने चरम पर पहुंचे ...और जोरो से आवाज करते हुए स्खलित हो गए...

और वह प्रकाश पुंज दोनों क शरीर में समां गया ...जिससे अभी को मिली समृद्धि शक्ति और ...और जनलोक की ऊर्जा क अंश का एक रूप

दोनों थक कर एक दूसरे की बाहो में सो गए....

अभी क लिए इतना hi ....


अगला अपडेट जल्द hi .....
 
अपडेट - 131



अब तक आपने देखा अभी और ऋतू का मिलान हो गया है ...और उससे समृद्धि शक्ति .....aur......Janalok की ऊर्जा प्राप्त हो गयी है ...

अब आगी......

अभी ब्रह्मा मुहूर्त में अपने समय पर उठा .........ऋतू अभी को पकड़ कर सोई हुई थी ...जाने क्या सपने में देख रही थी ...जो उसके चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कराहट थी .....अभी ने उसके माथे पर किश किया .......और धीरे से उठकर ....कक्ष की गैलरी में आगया .....

आकाश में यहाँ यहाँ तारो की जगह ब्रह्माण्ड क हर आकाश गंगा का प्रतिबिम्ब था ......उन् आकाश गंगाओ को देखते हुए अभी की नज़र हुमहरे आकाश गंगा पर पड़ा ......जिससे हम मिल्की वे गैलेक्सी क नाम से जानते है .....

जो हमे आकाश में कभी कभी सफ़ेद पट्टी की यारह नज़र आती है .....इस गैलेक्सी में 200 बिलियन से भी जयादा तारे है .......जो सूर्य से को 2000 बिल्लों लाइट ईयर पुराने है.......

अभी की नज़र हमारी आकाश गंगा में स्थित सौर मंडल पर पड़ी .......अभी ने उस प्रतिबिम्ब में देखा क कोई काला साया सौर मंडल की ......ऊर्जा को सोख रहा है और उसमें बुराई की काली चाय फैला रहा है .......

यह देखकर अभी समाज गया क अब और देर करना ठीक नहीं .....इससे पहले क इब्लीस ...काले द्रोगण की ऊर्जा से ...अपना काला साम्राज्य फैलाये ...उससे रोकना होगा.....

अभी महल में स्थित साननगर में gaya.....aur फ्रेश हुआ ........और महल क मध्य hi ध्यान योग साधना क लिए बने उपवन ...में बैठकर ध्यान करने लगा .....

ध्यान में अभी क सभी चक्र जागृत होगये थे .....सभी चक्रो में स्थित अपनी ऊर्जा और शक्तियों को नियनिरित किया ......

ध्यान करते हुआ अभी ...ब्रह्मा रन्ध्रा में पहुंचा ..जहा क प्रकाश में ....उससे सत्य को शक्ति क साथ ...सत्य दिखी .....अभी ...ने ...सत्य की ऊर्जा को अपने भीतर जागृत किया ....

ध्यान करने क बाद अभी ने देखा ....क परकाश हो चूका है ......ऋतू भी उठकर स्नान कर चुकी थी ....अभी ऋतू क साथ ...रवस ...और नैना ..क कक्ष में गया और उनका आशीर्वाद लिया .......

ाद्दु तोह कंफ्यूज थी क ऋतू को दी कहे या भाबी .....लेकिन खुश भी थी क्यों की अब वह ऋतू का सच जानती थी.....

अभी अब ऋतू क साथ उस जगह गया जहा 14 लोको की ऊर्जा से परिपूर्ण 14 मणि स्थापित की हुई थी ......

यह स्थान 7 .....7...मानियो क दो भागो में बता हुआ था .....

7 मणि जो उप्पेर क लोको क प्रतीक थे वह ...एक ...एक दिव्या प्रकाश फैला हुआ था ......वह 7 मणि दिव्या आभा से चमक रहे थे .......

और 7 मणि जो निचे क 7 लोको क प्रतिक थे ......वह जगह काली पद गयी थी ...वह क वातावरण में इब्लीस क प्रभाव क कारण नकारात्मक ऊर्जा फैली हुई थी .....और मानियो की भी चमक काम पड़ती जा रही थी.......

अभी और ऋतू क वह कदम रखते hi .........वह जो अदृश्य रूप में सफ़ेद ड्रैगन था वह परगट हुआ .......वह अभी कमजोर लग रहा था ......ेबिल्स क काले ड्रैगन पर प्रभाव क कारण ुसस्पर भी थोड़ा असर हो रहा था ...जिससे उसकी ऊर्जा काम हो रही थी .......

अभी और ऋतू उस ड्रैगन क समीप गए ......वह विशालकाय ड्रैगन ....अपना ...सर ...जमीन पर टिकाये लेता हुआ था ......अभी और ऋतू क वह पहुँचने पर उसने हलकी सी आंखें खोलकर देखा .

तोह उसने उठने का प्रयत्न किया ...लेकिन सफल नहीं हुआ ....वह बस थोड़ी सी आंखें खोलकर ...दोनों को देख रहा ....था .....उस ड्रैगन ने हलकी सी आवाज निकली ...जैसे दोनों का अभिवादन कर रहा हो ......

अभी ने अपना हाथ ..ड्रैगन क सर पर रखा ....कर प्यार से सहलाने लगा .....अभी ने सत्य का स्मरण किया तोह सत्य प्रगट हुई .....अभी ....क साथ साथ उसने भी ड्रैगन क सर पर हाथ रखा जिससे एक सत्य की सात्विक ऊर्जा उस ड्रैगन क भीतर प्रवेश करने लगी और देखते hi देखते वह ड्रैगन स्वस्थ हो गया .....और सत्य वापस अभी में समां गयी .......

ड्रैगन अभी को देखकर बहुत प्रसन्ना हुआ .....अपने स्वामी को इतने वर्षो बाद देखकर ख़ुशी से उछलने लगा .....उस विसजलकाये ड्रैगन क ऐसा उछलने क कारण वह की भूमि हिलने लगी ...

उसने अब आकाश में एक ऊँची उड़न भरी ......और गोल गोल घूमते हुए ..अभी पर पुष्पों की वर्षा करने लगा ......फीर निचे आकर अभी और ऋतू क सामने सीर ज़्हुका कर खड़ा हो गया ...

ऋतू और अभी ने फिर इसके सर पर प्यार से हाथ फेरा ...

और उस पर सवार हो गए .....उनके सवार होते hi उस ड्रैगन ने एक बार फिर आकाश में उड़न भरी .....अब अभी और ऋतू ....उस ड्रैगन पर बैठे हुए ...काले ड्रैगन क क्षेत्र की तरफ बड़े ......

जैसे hi वह उस क्षेत्र में पहुंचे ...एक भयंकर आगका गोला उनकी तरफ आया .......जिससे अभी ने अपने पास पहुँचने से पहले .....जलतत्व की ऊर्जा से ठंडा कर दिया .......

अभी ने देक्ग क सामने अपने पंख पहोलाये एक विशालकाय काला ड्रैगन खड़ा था .....अब उस ड्रैगन ने भी आकाश में उड़न भरी .......और निरन्तर उनपर आग क गोले बरसाने लगा

अभी अपनी ऊर्जा से उसके हर वार को विफल कर रहा था .......अभी को उस काले ड्रैगन को बिना नुकसान पहुंचाए उसपर काबू पाना था .......

ाक्ष में उड़ते हुए वह ड्रैगन अब अभी पर तेज़ गरम हवा की आंधी का वार करने लगा .....ऋतू अब सफ़ेद ड्रैगन का सञ्चालन करने लगी ...ताकि काले ड्रैगन का तामसिक ऊर्जा से भरा कोई भी वार उस सफ़ेद ड्रैगन पर न लगे ....

और अभी ड्रैगन क हर वार को रोक रहा था ......अब उस ड्रैगन ने काली शक्ति से भरा बैंगनी रंग की ऊर्जा का वार करना शुरू किया .......ऋतू बख़बी उस वार से अपने ड्रैगन को बचने लगी ..

जिससे वह वार निचे आकर टकराता .....अभी ने देखा क जहा भी उस ऊर्जा का वार गिरता वह की जगह पूरी तरह काली हो जाती .......

ड्रैगन क इस वार का उत्तर था अभी क पास ..

लेकिन उसका पटयोग करते hi वह निचे जमीं पर गिरता .....जिससे उससे सम्बंधित 7 लोक में भयंकर विनाश होता .....इसीलिए उस ड्रैगन को निचे लाना आवश्यक था .......

अभी ने उसके लिए नाग्शक्ति का प्रयोग किया ......और विशाल नाग पाश में उस ड्रैगन ....को बांध दिया ...इससे पहले वह नाग पाश में बंदकर ...धरती पर गिरता ....अभी ...ने आकाश तत्त्व और वायु तवा ...की ऊर्जा का प्रयोग करके उससे आकाश में स्थिर कर दिया .....

और धीरे धीरे निचे ले aaya.....usmein स्थित इब्लीस की ऊर्जा क कारण नाग पाश क विष का उस ड्रैगन पर असर नहीं हुआ वह बस पाश में बंधा हुआ जमीन पर आया .....

जमीं पर आकर भी काला ड्रैगन पाश से मुक्त होने क लिए चटपटा रहा था .....उसके अंदर की इब्लीस की चाय और प्रबल रूप धारण करने लगी .....

और उस ड्रैगन से बहुत अधिक मात्रा में कस्ले रंग की ऊर्जा निकलकर एक गोले का रूप धारण करने लगी .....

ड्रैगन क अंदर इब्लीस की चाय अपनी हार बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था .....वह अब उस कस्ले ड्रैगन क अधीन उन् 7 मानियो पर अपनी काली ऊर्जा का प्रहार करना वाला था ....

अभी ने जब उस कसली ऊर्जा क गोले को देखा तोह सब समाज गया.......

यदि यह ऊर्जा उन् साथ मानियो पर पड़ती तोह फिर निचे 7 लोक पूरी तरह इब्लीस क अधिकार में हो jaate.......phir उन् लोको का मुक्त करना बहुत कठिन होता ......

जैसे hi वह काली ऊर्जा का गोला उन् 7 मानियो तरफ बड़ा .......अभी ने अपनी सात्विक ऊर्जा .....और सफ़ेद ड्रैगन की दिव्या ऊर्जा ....से उस गोले को ेओक दिया .....सफ़ेद ड्रैगन और सत्य की ऊर्जा से वह काला गोला निष्प्रभाव होगया........

अभी और ऋतू भी अब अपने ड्रैगन क साथ निचे आये ......अभी को पता था क अपना वार विफल होते देखकर .....इब्लीस अब काली ड्रैगन को hi नुकसान पहुंचा सकता है .......

इसीलिए उसने अब अपनी सत्य की ऊर्जा ......और उस सफ़ेद ड्रैगन की ऊर्जा .....दोनों मिलकर ...एक प्रकाश किरण ( लाइट बीम ) काले ड्रैगन पर छोड़ी .....जिसके कारन उस ड्रैगन में ष्टित इब्लीस की चाय तड़पने लगी ...और इसके कारण वह ड्रैगन भी तड़पने लगा......

इसका प्रभाव ..पृत्वी से लेकर पटल तक हुआ ...उन् सातो लोको में कई जगह भूकंप क जहटके महसूस हुए ....

नाग पाश में बन्दे होने क कारण इब्लीस की चाय मुक्त नहीं हो पा रही थी ....अभी ने तिरन्त उस ड्रैगन को नागपाश से मुक्त किया ......

जिससे उसके अंदर की इब्लीस की चाय बहार निकली और भयंकर आवाज करते हुए जाना लोक स्व बहार चली गयी ......

इब्लीस उस काले ड्रैगन की बहुत सी ऊर्जा को सोख चूका था जिससे वह ड्रैगन कमजोर होकर निचे गिर पड़ा.....

जिसका प्रभाव उससे सम्बंधित लोको में होने लगा ......वह ....क सारे जीवो का श्वास रुकने लगा सबकी सकती शिथिल पड़ने लगी .....वह क सारे ऐश्वर्या लुप्त होने लगे ...

अभी ..और ..ऋतू ...ने समृद्धि शक्ति ...की ...urja...ka प्रयोग ....उस काले ड्रैगन ....पर करने लगे जिससे उसकी शक्ति उससे पुनः प्राप्त हुई ........और सातो लोको ऊर्जा और ऐश्वर्या से एक बार फिर परिपूर्ण हो गए.......

अब वह सात मणि भी जिनकी ेबिल्स क प्रभाव क कारण चमक चली गयी थी ...दुबारा चमकने लगे.......

काला ड्रैगन अब शांत हो गया था..... अभी और ऋतू क सामने वह भी अब सर ज़्हुकाये खड़ा tha.......Dono ने उसके सर पर हाथ फेरा .....अब अभी उस ड्रैगन पर सवार होगया .....और आकाश में उड़न भरने लगा.....

दोनों थोड़ी देर उन् ड्रैगन्स क साथ hi रहे .....

अभी ने अब वह से गाओं क ड्रैगन वाले मंदिर तक बनाया हुआ इब्लीस का पोर्टल बांध कर दिया और सत्य की ऊर्जा का कवच निर्माण करके उस जहा को कसली शक्तियों क प्रवेश से सुरक्षित कर दिया....

जनलोक की अस्थिरता को पुनः अभी ने स्थिर कर दिया ...जिससे 14 लोको में संतुलन बनाये रखे ..

यहाँ का काम अभी क लिए समाप्त हो गया था अभी को अब पतलोक की और जाना था......

अभी रवस ..नैना ...और ाद्दु को सुरक्षित रखना चाहता था ...इसीलिए जब तक कस का खत्म न हो जाए ....वह उन्हें इसी लोक में रखने का फैसला लेता है ......

तीनो अब पृत्वी लोक जाना चाहते थे ...अपने पैवर से मिलना चाहते थे ...लेकिन अभी क समज़हाने पर उन्हें उसकी बाद माननी पड़ी .......

अभी अब उन्हें वही छोड़कर ऋतू क साथ .....निकल गया रसातल ....क नागलोक में ......

यहाँ सातो लोको में फैली बुराई फिर ख़तम होने लगी ....पूजा पाठ ...हवन यज्ञ ...दान ....सब फिर शुरू होगये .....लोगो क मनोभाव ैव्हे होने लगे ....

जिसके कारण कस को अपनी जनलोक की योजना की हार और अभी क जीवित होने का पता चला .......

परन्तु इस बात की पुष्टि क लिए वह पूजा में बैठा और इब्लीस से संपर्क किये .....लेकिन कोई संपर्क नहीं हो पाया ...

जिससे उससे अपनी इस मोर्चे पर भी हार का पता चल गया ...अब उसका क्रोध सातवे आसमान तक पहुँच गया था....

अभी क लिए इतना hi .....


अगला अपडेट कल.....
 
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