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अपडेट - 132
अब तक आपने देखा अभी ने काले ड्रैगन को इब्लीस क प्रभाव से मुक्त कर दिया जिसके कारण निचे क 7 लोको पर उसका प्रभाव ख़तम हुआ ...और सब पहले की तरह नार्मल हो गया ....
अब आगी .....
यहाँ पटल लोक में जब कस को जब अपनी और इब्लीस की हार का पता चला तोह उसका क्रोध और बढ़ गया .....उसने अपने सभी असुर जो करोड़ो की तादात में थे उन्हें पटल लोक में संघठित होने का आदेश दिया ....अब ...वह आमने सामने का युद्ध करना चाहता था .......
जनलोक क समय में और पटल क समय में बहुत अंतर था ..अभी ने जनलोक में सवा दिन बिताया था जो यहाँ क हिसाब से 13 दिन क बराबर था ........
कस को अपनी आखरी बलि देने में अब 2 दिन बाकी थे .....उसने मदालसा की बलि क बारे में किसी को नहीं बताया था......
मदालसा की बलि क लिए उससे दुर्मुखासुर को अपने विश्वास में लेना था ......
कस ने अपने दोनों बेटे दुर्मुखासुर और भयाक्षा .....को अपने कसख में बुलाया ....
दोनों भाई कस क कसख में आते hi कस को प्रणाम किया ......
कस - आओ पुत्रो बैठो ......
डॉ - पिताश्री क्या आदेश है आपने हमे किस कारण बुलाया है .....
कस - पुत्र सबसे पहले क्या तुम्हे पता चला क रक्षक और उसका परिवार जीवित है .....
डॉ - हां पिताश्री परन्तु यह समाज नहीं आरहा यह कैसे संभव हुआ .........
कस - पुत्र तुम अभी रक्षक की शक्तियों को नहीं जानते .....तुम क्या सोचते हो क इतनी शक्तिया और आसुरी माया का स्वामी होने पर भी मैं क्यों इतने वर्षो से साधना में बैठा हु .....
डॉ - आपका कथन सत्य है पिताश्री .....त्रिदेवो की मारक शक्ति से मेरे भरपूर वार से उसका सारा परिवार समाप्त हो गया था ......parantu...na जाने किस शक्ति क द्वारा उसने अपने आपको और अपने परिवार को bachaya.....muzhe अब लगता है ....क मैंने व्यर्थ hi इतनी तपस्या करके शक्ति को प्राप्त किया ......
कस - पुत्र तपस्या से प्राप्त हुई शक्ति कभी व्यर्त नहीं होती .......जहा तक में जानता हु तुम्हारी शक्ति ..अमोघ है .....तुम्हे उसका सटीक प्रयोग करना होगा ...अभी भी दो अवसर है तुम्हारे पास.....
अभी इस्सके लिए दो दिन और शेष है कल रात्रि को मेरी 14 बलि पूर्ण होगी और मुज़हे प्राप्त होजायेगी वह शक्ति जिससे रक्षक का अंत हो जाएगा और उसकी साड़ी शक्ति भी मुज़हे प्राप्त हो जायेगी और में बन जाऊँगा सर्व शक्तिमान .......
यहाँ तुम्हे बुलाने का कारण एक यह भी है क कल होने वाली बलि क बारे में तुमसे विचार विमर्श करना है....
डॉ - पिताश्री आपने आज तक तोह किसी बलि क बारे में हमसे विचार विमर्श नहीं किया ....और आपको इसकी आवश्यकता भी क्या है ....आप असुर सम्राट हो ...सर्व समर्थ हो .......बलि क लिए हमसे पूछने की बात hi कहा से आयी .....
कस - पुत्र सर्वप्रथम यह बताओ क तुम असुर साम्राज्य क प्रति कितने निष्ठां वन हो .....
डॉ - पिताश्री आज यह प्रश्न क्यों ......क्या आपको मेरी निष्ठां पर कोई शंका है .......पिताश्री में आपको यह वचन देता हु क असुरो क उत्थान क लिए और आपकी विजय क लिए में अपने प्राणो क त्याग करने क लिए भी तैयार हु .....
कस - अपने प्राणो को नहीं पुत्र परन्तु क्या किसी अपने प्रिय व्यक्ति क प्राणो को न्योछावर करने क लिए तैयार हो ......
डॉ - आप क्या और किसीकी बात कर रहे है पिताश्री ...स्पष्ट कहिये ......
कस - मदालसा की ....
डॉ - मदालसा की ....वह िंब सब क बिच में कहा आगयी ...उसका इस सब से क्या लेना देना ....
कस - लेना देना है पुत्र ....लेना देना है ....क्यों की जिसकी मुज़हे अंतिम बलि नहीं देनी है वह मदालसा hi है .....
डॉ - पिताश्री .....नहीं .....आप ऐसा नहीं करेंगे ....मदालसा तोह आपकी सबसे प्रिय पुत्री है ...और हम जानते है क संसार में यदि आप किसी से सबसे अधिक प्रेम करते है तोह वह है मदालसा ..आप किसी और की भी बलि दे सकते hai....phir मदालसा hi क्यों....
कस - इसके अलावा और कोई मार्ग नहीं है पुत्र ....हमे भी इस बात का बहुत दुःख है ...परन्तु हमारे असुर साम्राज्य स्थापित करने क उद्देश्य क लिया यह आवश्यक है ......मदालसा को हम संसार में सबसे ज्यादा प्रेम करते है .....हमारा वही प्रेम उसकी बलि का कारण बन गया है पुत्र .......
डॉ - पिताश्री आप यह सब रक्षक क अंत क लिए hi कर रहे हो न ....यदि में उस रक्षक को hi समाप्त कर दू तोह ......आपको फिर इस बलि की कोई आवश्यकता नहीं होगी .....कल क सूर्यो डे से पूर्व ..रक्षक का मृतदेह आपके सन्मुख होगा ...यह मेरा वचन है ......
हीर आपको मदालसा की बलि देने की कोई आवश्यकता नहीं होगी .....
मुज़हे आज्ञा दे ......
भयाक्षा - हां पिताश्री ....मुज़हे भी भाई की बात सही लग रही है .......मैं भी अपने दोनों भाइयो का बदला ...रक्षक से लेने क लिए तड़प रहा हु ...मुज़हे भी भैया क साथ जाने की आज्ञा दे ......
कस मैं में - ( ऐसे कैसे इतने वर्षो की साधना को में अधूरा छोड़ दू शक्तिया पर्पट करने क लिए तोह मदालसा को अब मरना hi होगा )
यहाँ जब यह तीनो बात कर रहे थे ..तब बहार ...मदालसा की माँ मदनसा सब सुन रही thi......usse इस बात का बहुत धक्का लगा ..क ..कैसी एक पिता ...अपने स्वार्थ क लिए अपनी hi मासूम पूर्ति की हत्या का निर्णय ले सकता है ....उस घिन होने लगी अपने पति से .....
कस - ठीक है पुत्रो हमारा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है ......
डॉ ..और भयाक्ष अपने पिता को प्रणाम करके वह से निकल गए ....
मदनसा ने जब देखा क दोनों बहार hi आरहे है ...तोह वह तुरंत वह से चली गयी लेकिन कस की नज़रो से बच ना सकीय ......
मदनसा अपनी पुत्री क प्राणो की रक्षा करना चाहती थी ....इसीलिए वह मदालसा को कस की हकीकत बताकर वह से निकलना चाहती थी .....
मदनसा जब मदालसा क कक्ष में पहुंची ...तब वह अपने बिस्टेर पर बैठी गुमसुम सी अभी क hi खयालो में थी ....बार बार वह अभी को अपने दिल से निकलने का प्रयत्न करती थी ....लेकिन उसका पर्म और गहरा होता जाता था ....
मदनसा अपनी पुत्री को ऐसे खयालो में खोये देखकर ....उसके पास जाकर उसके सर पर हाथ फेरा ....
अभी क बारे में सोचते हुए उसकी आँखों में बार बार आंसू आजाते थे ....जब मदालसा ने अपनी माँ को अपने निकट देखा तोह तुरंत अपने आंसू पॉच दिए ......
मदालसा - माँ आप ...अच्छा हुआ आप आई मेरा बड़ा मैं था आप से मिलने का ......
मदनसा - तोह पुत्री आई क्यों नहीं ...अपनी माँ से मिलने क लिए भी इतना विचार करना पड़ता hai.......kuch दिन से देख रही हु तुम बहुत उदास सी खोयी खोयी सी रहती हो ....सही से अपना दयँ भी नहीं रक्ति हो ......तुम्हारे चेहरे की वह चमक कहा गयी पुत्री .....क्या बात है ...अपने माँ को नहीं बताओगी ....
मदालसा - कुछ नहीं माँ बस ऐसे hi ......
मदनासा ने प्यार से इसके सर पर हाथ फेरा ......बीटा देख में तेरी माँ हु ...और तेरी सखी भी ....क्या बात है बीटा ....इस प्रकार तुम्हे अंदर hi अंदर घुटते हुए देखकर मुज़हे बहुत दुःख होता है ........
अपनी माँ का प्यार पाकर मदालसा अपनी माँ क गले लग जाती है और ..अपने दिल का बोझ आंसू द्वारा बहार निकलती है ....
मदनसा भी उसकी पीठ थपथपाकर उससे सांत्वना देती है .....
अपनी माँ क गले लगकर उससे अब थोड़ा ाचा लगने लगा था ......मदनसा ने अपने हाथो से उसके आंसू पोंछे ......
मदालसा ने अब अपनी माँ को पूरी बात बताई की कैसे अभी कई वर्षो से उसके सपने में आता था .....किस प्रकार वह उससे घायल अवस्था में मिला और उसके उसका उपचार किया .....वह अभी को अपना सर्वस्वा मैं चुकी थी ...अपना पति मैं चुका थी ....
लेकिन जब उससे पता चल क जिससे वह अपना सबकुछ मान चुकी है वह hi उसके भाइयो का हत्यारा है और असुर वंश का सबसे बड़ा शत्रु ....तोह उस्सने अभी को भूलने का बहुत प्रयत्न किया लेकिन ऐसा कर नहीं सकीय ......
मदालसा की बात सुनकर मदनसा बहुत खुश हुई .......पुत्री अभी तुम अपने पिता और भाइयो क सत्य से अवगत नहीं हो ....उनके लिए तुम अपने प्रेम को ठुकराओ मत ......
तुम्हे पता है तुम्हारे जन्म क समय माँ भगवती ने स्वप्ना में मुज़हे यह संकेत दिया था क यह कन्या मेरी अमानत है ....मेरा स्वामी क अंश से hi उत्पना वीर होगा इस्सके पति जो दमे पर इससे लेने आएगा ...
पुत्री इतने वर्षो से में इसकी प्रतीक्षा कर रही थी ...अब जब तुमने बताया तोह ....पता चला जिसकी में प्रतीक्षा कर रही थी वह तुमसे मिल चूका है ....हां पुत्री यह रक्षक hi है ....तुम अपने पिता की चिंता मत करो....
मदालसा - परन्तु maa....Woh तोह पिताश्री क सबसे बड़े शत्रु है .....और हमारे भाइयो क हत्यार भी ....
मदनसा - पुत्री तुम अभी अपने पिता और भाइयो क कर्मो क बारे में नहीं जानती हो ...तुम्हे अब शीग्र hi यहाँ से निकलना होगा ....उसी गुप्त रास्ते से जो तुम्हे पहले से hi पता है ....क्युकी कल तुम्हारे पिता ......
अभी मदनसा आगे कुछ बोल पाती क तभी वह कस आगया .......
कस - क्या बातें हो रही है माँ बेटी में .....जरा हमे भी तोह पता चले ....
मदनसा - कुछ नहीं जी ....बहुत दिनों से हमारी पुत्री यहाँ महल में hi बंद है ....तोह सोचा .थोड़ा कही बहार भी निकले यही बात हो रही थी ....
कस मदालसा क सर पर हाथ फेरते हुए ....कल तक यह कही नहीं जायेगी ....पुत्री कल महा पूजा है .और तुम्हर होना वह बहुत जरुरी है ......क्या तुम नहीं साथ डौगी अपने पिता का ......कल मेरी साधना पूरी हो रही है ....उसके बाद तुम मुक्त हो .....
मदालसा - क्यों नहीं पिताश्री ...में कही नहीं जा रही हु ....मुज़हे तोह बहुत ख़ुशी है क कल आपकी इतने वर्ष की तपस्या पूर्ण हो रही है ....जिसके कारण आप मुजह्से भी नहीं मिल पाते थे ..
मदालसा क सर पर प्यार से हाथ फेरते हुई ......अच्छा अब में चलता हु पुत्री ....और हां तुम्हारी माता से अभी मुज़हे कुछ काम है ......चलो ...मदनसा .....मुज़हे तुमसे कुछ बात करनी है ..
और कस मदनसा को वह से लेजाने लगता है ....जाते जाते मदनसा ...मदालसा को कुछ इशारा करती है लेकिन वह समाज hi नहीं पाती है ....
कस मदनसा को अपने कक्ष में लेजाकर धरती पर पटक डेरा है ......
कस - मेरी बेटी को मेरे hi विरुद्ध भड़का रही थी .....तुम्हे दर भी नहीं लगा यु छिपकर हमारी बाते सुनते हुई ......
मदनसा - तोह क्या करू ...एक बेटी को पिता क hi हातो मरने दू ....
कस - हां ...वह ..मेरी ..संपत्ति है ....मेरे hi द्वारा उसका जन्म हुआ है ...में कुछ भी कर सकता हु ....तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी ...मदनसा हमारे बिच आकर ...
मैं तोह कर रहा है क अभी तुम्हे समाप्त कर दू .....
परतु तुमसे मैंने प्रेम किया था वह hi मुज़हे रोक रहा है.... और फिर कस ने मदनसा को अपने गुप्त तहखाने में कैद कर लिया ....
कस को पता था क अभी अपनी आखरी शक्ति प्राप्त करने पटल लोक में जरूर aayega.......usne मदालसा और मदनसा की साड़ी बातें सुन ले थी .......
अब उसके मदालसा क कक्ष को भी पूरी तरह एक कैद में बदल दिया ......और ऐसी व्यस्था की क वह की हर गतविधि पर उसकी नज़र बानी रहे ....
कस ने पटल लोक की सुरक्षा और बड़ा दी अपने मायावी असुर भी गुप्त रूप से पटल लोक की सीमा पर तैनात कर दिए ........
उसने पटल लोक की सीमा को देवी निकुंबला की शक्ति से बांध दिए जिसके कारण ...sirf...asur hi उसमें प्रवेश पा सकता था .......
अभी क लिए इतना hi ....
अगला अपडेट जल्द hi ....
अब तक आपने देखा अभी ने काले ड्रैगन को इब्लीस क प्रभाव से मुक्त कर दिया जिसके कारण निचे क 7 लोको पर उसका प्रभाव ख़तम हुआ ...और सब पहले की तरह नार्मल हो गया ....
अब आगी .....
यहाँ पटल लोक में जब कस को जब अपनी और इब्लीस की हार का पता चला तोह उसका क्रोध और बढ़ गया .....उसने अपने सभी असुर जो करोड़ो की तादात में थे उन्हें पटल लोक में संघठित होने का आदेश दिया ....अब ...वह आमने सामने का युद्ध करना चाहता था .......
जनलोक क समय में और पटल क समय में बहुत अंतर था ..अभी ने जनलोक में सवा दिन बिताया था जो यहाँ क हिसाब से 13 दिन क बराबर था ........
कस को अपनी आखरी बलि देने में अब 2 दिन बाकी थे .....उसने मदालसा की बलि क बारे में किसी को नहीं बताया था......
मदालसा की बलि क लिए उससे दुर्मुखासुर को अपने विश्वास में लेना था ......
कस ने अपने दोनों बेटे दुर्मुखासुर और भयाक्षा .....को अपने कसख में बुलाया ....
दोनों भाई कस क कसख में आते hi कस को प्रणाम किया ......
कस - आओ पुत्रो बैठो ......
डॉ - पिताश्री क्या आदेश है आपने हमे किस कारण बुलाया है .....
कस - पुत्र सबसे पहले क्या तुम्हे पता चला क रक्षक और उसका परिवार जीवित है .....
डॉ - हां पिताश्री परन्तु यह समाज नहीं आरहा यह कैसे संभव हुआ .........
कस - पुत्र तुम अभी रक्षक की शक्तियों को नहीं जानते .....तुम क्या सोचते हो क इतनी शक्तिया और आसुरी माया का स्वामी होने पर भी मैं क्यों इतने वर्षो से साधना में बैठा हु .....
डॉ - आपका कथन सत्य है पिताश्री .....त्रिदेवो की मारक शक्ति से मेरे भरपूर वार से उसका सारा परिवार समाप्त हो गया था ......parantu...na जाने किस शक्ति क द्वारा उसने अपने आपको और अपने परिवार को bachaya.....muzhe अब लगता है ....क मैंने व्यर्थ hi इतनी तपस्या करके शक्ति को प्राप्त किया ......
कस - पुत्र तपस्या से प्राप्त हुई शक्ति कभी व्यर्त नहीं होती .......जहा तक में जानता हु तुम्हारी शक्ति ..अमोघ है .....तुम्हे उसका सटीक प्रयोग करना होगा ...अभी भी दो अवसर है तुम्हारे पास.....
अभी इस्सके लिए दो दिन और शेष है कल रात्रि को मेरी 14 बलि पूर्ण होगी और मुज़हे प्राप्त होजायेगी वह शक्ति जिससे रक्षक का अंत हो जाएगा और उसकी साड़ी शक्ति भी मुज़हे प्राप्त हो जायेगी और में बन जाऊँगा सर्व शक्तिमान .......
यहाँ तुम्हे बुलाने का कारण एक यह भी है क कल होने वाली बलि क बारे में तुमसे विचार विमर्श करना है....
डॉ - पिताश्री आपने आज तक तोह किसी बलि क बारे में हमसे विचार विमर्श नहीं किया ....और आपको इसकी आवश्यकता भी क्या है ....आप असुर सम्राट हो ...सर्व समर्थ हो .......बलि क लिए हमसे पूछने की बात hi कहा से आयी .....
कस - पुत्र सर्वप्रथम यह बताओ क तुम असुर साम्राज्य क प्रति कितने निष्ठां वन हो .....
डॉ - पिताश्री आज यह प्रश्न क्यों ......क्या आपको मेरी निष्ठां पर कोई शंका है .......पिताश्री में आपको यह वचन देता हु क असुरो क उत्थान क लिए और आपकी विजय क लिए में अपने प्राणो क त्याग करने क लिए भी तैयार हु .....
कस - अपने प्राणो को नहीं पुत्र परन्तु क्या किसी अपने प्रिय व्यक्ति क प्राणो को न्योछावर करने क लिए तैयार हो ......
डॉ - आप क्या और किसीकी बात कर रहे है पिताश्री ...स्पष्ट कहिये ......
कस - मदालसा की ....
डॉ - मदालसा की ....वह िंब सब क बिच में कहा आगयी ...उसका इस सब से क्या लेना देना ....
कस - लेना देना है पुत्र ....लेना देना है ....क्यों की जिसकी मुज़हे अंतिम बलि नहीं देनी है वह मदालसा hi है .....
डॉ - पिताश्री .....नहीं .....आप ऐसा नहीं करेंगे ....मदालसा तोह आपकी सबसे प्रिय पुत्री है ...और हम जानते है क संसार में यदि आप किसी से सबसे अधिक प्रेम करते है तोह वह है मदालसा ..आप किसी और की भी बलि दे सकते hai....phir मदालसा hi क्यों....
कस - इसके अलावा और कोई मार्ग नहीं है पुत्र ....हमे भी इस बात का बहुत दुःख है ...परन्तु हमारे असुर साम्राज्य स्थापित करने क उद्देश्य क लिया यह आवश्यक है ......मदालसा को हम संसार में सबसे ज्यादा प्रेम करते है .....हमारा वही प्रेम उसकी बलि का कारण बन गया है पुत्र .......
डॉ - पिताश्री आप यह सब रक्षक क अंत क लिए hi कर रहे हो न ....यदि में उस रक्षक को hi समाप्त कर दू तोह ......आपको फिर इस बलि की कोई आवश्यकता नहीं होगी .....कल क सूर्यो डे से पूर्व ..रक्षक का मृतदेह आपके सन्मुख होगा ...यह मेरा वचन है ......
हीर आपको मदालसा की बलि देने की कोई आवश्यकता नहीं होगी .....
मुज़हे आज्ञा दे ......
भयाक्षा - हां पिताश्री ....मुज़हे भी भाई की बात सही लग रही है .......मैं भी अपने दोनों भाइयो का बदला ...रक्षक से लेने क लिए तड़प रहा हु ...मुज़हे भी भैया क साथ जाने की आज्ञा दे ......
कस मैं में - ( ऐसे कैसे इतने वर्षो की साधना को में अधूरा छोड़ दू शक्तिया पर्पट करने क लिए तोह मदालसा को अब मरना hi होगा )
यहाँ जब यह तीनो बात कर रहे थे ..तब बहार ...मदालसा की माँ मदनसा सब सुन रही thi......usse इस बात का बहुत धक्का लगा ..क ..कैसी एक पिता ...अपने स्वार्थ क लिए अपनी hi मासूम पूर्ति की हत्या का निर्णय ले सकता है ....उस घिन होने लगी अपने पति से .....
कस - ठीक है पुत्रो हमारा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है ......
डॉ ..और भयाक्ष अपने पिता को प्रणाम करके वह से निकल गए ....
मदनसा ने जब देखा क दोनों बहार hi आरहे है ...तोह वह तुरंत वह से चली गयी लेकिन कस की नज़रो से बच ना सकीय ......
मदनसा अपनी पुत्री क प्राणो की रक्षा करना चाहती थी ....इसीलिए वह मदालसा को कस की हकीकत बताकर वह से निकलना चाहती थी .....
मदनसा जब मदालसा क कक्ष में पहुंची ...तब वह अपने बिस्टेर पर बैठी गुमसुम सी अभी क hi खयालो में थी ....बार बार वह अभी को अपने दिल से निकलने का प्रयत्न करती थी ....लेकिन उसका पर्म और गहरा होता जाता था ....
मदनसा अपनी पुत्री को ऐसे खयालो में खोये देखकर ....उसके पास जाकर उसके सर पर हाथ फेरा ....
अभी क बारे में सोचते हुए उसकी आँखों में बार बार आंसू आजाते थे ....जब मदालसा ने अपनी माँ को अपने निकट देखा तोह तुरंत अपने आंसू पॉच दिए ......
मदालसा - माँ आप ...अच्छा हुआ आप आई मेरा बड़ा मैं था आप से मिलने का ......
मदनसा - तोह पुत्री आई क्यों नहीं ...अपनी माँ से मिलने क लिए भी इतना विचार करना पड़ता hai.......kuch दिन से देख रही हु तुम बहुत उदास सी खोयी खोयी सी रहती हो ....सही से अपना दयँ भी नहीं रक्ति हो ......तुम्हारे चेहरे की वह चमक कहा गयी पुत्री .....क्या बात है ...अपने माँ को नहीं बताओगी ....
मदालसा - कुछ नहीं माँ बस ऐसे hi ......
मदनासा ने प्यार से इसके सर पर हाथ फेरा ......बीटा देख में तेरी माँ हु ...और तेरी सखी भी ....क्या बात है बीटा ....इस प्रकार तुम्हे अंदर hi अंदर घुटते हुए देखकर मुज़हे बहुत दुःख होता है ........
अपनी माँ का प्यार पाकर मदालसा अपनी माँ क गले लग जाती है और ..अपने दिल का बोझ आंसू द्वारा बहार निकलती है ....
मदनसा भी उसकी पीठ थपथपाकर उससे सांत्वना देती है .....
अपनी माँ क गले लगकर उससे अब थोड़ा ाचा लगने लगा था ......मदनसा ने अपने हाथो से उसके आंसू पोंछे ......
मदालसा ने अब अपनी माँ को पूरी बात बताई की कैसे अभी कई वर्षो से उसके सपने में आता था .....किस प्रकार वह उससे घायल अवस्था में मिला और उसके उसका उपचार किया .....वह अभी को अपना सर्वस्वा मैं चुकी थी ...अपना पति मैं चुका थी ....
लेकिन जब उससे पता चल क जिससे वह अपना सबकुछ मान चुकी है वह hi उसके भाइयो का हत्यारा है और असुर वंश का सबसे बड़ा शत्रु ....तोह उस्सने अभी को भूलने का बहुत प्रयत्न किया लेकिन ऐसा कर नहीं सकीय ......
मदालसा की बात सुनकर मदनसा बहुत खुश हुई .......पुत्री अभी तुम अपने पिता और भाइयो क सत्य से अवगत नहीं हो ....उनके लिए तुम अपने प्रेम को ठुकराओ मत ......
तुम्हे पता है तुम्हारे जन्म क समय माँ भगवती ने स्वप्ना में मुज़हे यह संकेत दिया था क यह कन्या मेरी अमानत है ....मेरा स्वामी क अंश से hi उत्पना वीर होगा इस्सके पति जो दमे पर इससे लेने आएगा ...
पुत्री इतने वर्षो से में इसकी प्रतीक्षा कर रही थी ...अब जब तुमने बताया तोह ....पता चला जिसकी में प्रतीक्षा कर रही थी वह तुमसे मिल चूका है ....हां पुत्री यह रक्षक hi है ....तुम अपने पिता की चिंता मत करो....
मदालसा - परन्तु maa....Woh तोह पिताश्री क सबसे बड़े शत्रु है .....और हमारे भाइयो क हत्यार भी ....
मदनसा - पुत्री तुम अभी अपने पिता और भाइयो क कर्मो क बारे में नहीं जानती हो ...तुम्हे अब शीग्र hi यहाँ से निकलना होगा ....उसी गुप्त रास्ते से जो तुम्हे पहले से hi पता है ....क्युकी कल तुम्हारे पिता ......
अभी मदनसा आगे कुछ बोल पाती क तभी वह कस आगया .......
कस - क्या बातें हो रही है माँ बेटी में .....जरा हमे भी तोह पता चले ....
मदनसा - कुछ नहीं जी ....बहुत दिनों से हमारी पुत्री यहाँ महल में hi बंद है ....तोह सोचा .थोड़ा कही बहार भी निकले यही बात हो रही थी ....
कस मदालसा क सर पर हाथ फेरते हुए ....कल तक यह कही नहीं जायेगी ....पुत्री कल महा पूजा है .और तुम्हर होना वह बहुत जरुरी है ......क्या तुम नहीं साथ डौगी अपने पिता का ......कल मेरी साधना पूरी हो रही है ....उसके बाद तुम मुक्त हो .....
मदालसा - क्यों नहीं पिताश्री ...में कही नहीं जा रही हु ....मुज़हे तोह बहुत ख़ुशी है क कल आपकी इतने वर्ष की तपस्या पूर्ण हो रही है ....जिसके कारण आप मुजह्से भी नहीं मिल पाते थे ..
मदालसा क सर पर प्यार से हाथ फेरते हुई ......अच्छा अब में चलता हु पुत्री ....और हां तुम्हारी माता से अभी मुज़हे कुछ काम है ......चलो ...मदनसा .....मुज़हे तुमसे कुछ बात करनी है ..
और कस मदनसा को वह से लेजाने लगता है ....जाते जाते मदनसा ...मदालसा को कुछ इशारा करती है लेकिन वह समाज hi नहीं पाती है ....
कस मदनसा को अपने कक्ष में लेजाकर धरती पर पटक डेरा है ......
कस - मेरी बेटी को मेरे hi विरुद्ध भड़का रही थी .....तुम्हे दर भी नहीं लगा यु छिपकर हमारी बाते सुनते हुई ......
मदनसा - तोह क्या करू ...एक बेटी को पिता क hi हातो मरने दू ....
कस - हां ...वह ..मेरी ..संपत्ति है ....मेरे hi द्वारा उसका जन्म हुआ है ...में कुछ भी कर सकता हु ....तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी ...मदनसा हमारे बिच आकर ...
मैं तोह कर रहा है क अभी तुम्हे समाप्त कर दू .....
परतु तुमसे मैंने प्रेम किया था वह hi मुज़हे रोक रहा है.... और फिर कस ने मदनसा को अपने गुप्त तहखाने में कैद कर लिया ....
कस को पता था क अभी अपनी आखरी शक्ति प्राप्त करने पटल लोक में जरूर aayega.......usne मदालसा और मदनसा की साड़ी बातें सुन ले थी .......
अब उसके मदालसा क कक्ष को भी पूरी तरह एक कैद में बदल दिया ......और ऐसी व्यस्था की क वह की हर गतविधि पर उसकी नज़र बानी रहे ....
कस ने पटल लोक की सुरक्षा और बड़ा दी अपने मायावी असुर भी गुप्त रूप से पटल लोक की सीमा पर तैनात कर दिए ........
उसने पटल लोक की सीमा को देवी निकुंबला की शक्ति से बांध दिए जिसके कारण ...sirf...asur hi उसमें प्रवेश पा सकता था .......
अभी क लिए इतना hi ....
अगला अपडेट जल्द hi ....