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- Dec 5, 2013
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अब तक आपने देखा कस ने स्वर्ग पर आक्रमण करने क लिए अपने मायावी आंतक नाम क असुर को चुना .......
शिवली ने अभी की अगली यात्रा क बारे में बताया..........
और अगली शक्ति कोई गंधर्व काया क बारे में भी
अब आगे........
भुवा लोक क यक्ष भूमि से ऊपर है सौहा लोक ........जिसका विस्तार पृथ्वी से कोई तीन गुना है......
इस लोक में प्रवेश करने क लिए 7 द्वार है ......जहा देव सैनिक हमेशा पहरा देते रहते है.....
स्वः लोक का मुख्या आकर्षण स्वर्ग है जहा का आकर्षण , हैट व्यक्ति को है ........कई कवी और लेकिन भी किसी जगह की सुंदरता की उपमा स्वर्ग क नाम से hi देते है...
स्वर्ग लोक मैं देवताओ का वस् है जो त्रिदेवो को आगया अंसार इस श्रिस्ति का संचालन करते है .....
स्वर्ग चारो तरफ से अलकनंदा जो गंगा की hi रूप है उससे गीता हुआ hai.....yaha हर प्रकार की सिद्धिया साक्षात् वस् करती hai......Swarg.... रोग... व्याडि ..Vridhawastha....Bhuk प्यास आदि से रहित hai........Yaha क बगीचे में कल्पवृक्ष है जो हर प्रकार की समृद्धि देने वाला है.....
यहाँ देवताओ क राजा इंद्रा का शासन है.........
स्वर्ग क अधिकार में दो नगर और है जो इस लोक क दूसरे हिस्से में है ....एक है गंधर्व nagar......jaha देवताओ की सभा में गाने वाले और सृष्टि में संगीत विद्या फ़ैलाने वाले गन्धर्वो का वास है .......इनका राजा रंजन गंधर्व hai.....inki पत्नी संध्या और बेटी शामली है......
वही दूसरी और किन्नर नगर है जो निर्त्य कला में निपुण है......
देवराज अपनी सभा में बैठकर देवगुरु बृहस्पति और बाकि देवताओ क साथ किसी विषय पर मंत्रणा कर रहे थे.......
तभी स्वर्ग में जोरो से कम्पन हुआ ...यह था संकेत क किसी ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया है........
देवराज तुरंत अपनी देव सेना लेकर स्वर्ग क प्रताम द्वार पर पहुँच गए और देखा तोह वह द्वार टुटा हुआ पड़ा है .....और सैनिक मारे जा चुके है........
और सामने देखा तोह एक विशालकाय दैत्य दोनों हाथ कमर पर रख कर जोर जोट से हसरहा tha........yeh था आंतक.....
आंतक - ha....ha....ha....Aayiye देवराज .......मुज़हे तुम्हारी hi प्रतीक्षा thi.......yeh बेचारे सैनिक तोह ऐसे hi मारे गए........
देवराज - तुम्हारा इतना दुःसाहस क तुमने यहाँ प्रवेश करने का प्रयत्न किया .......
आंतक - दुःसाहस तोह आपने किया है ...जो हमरे असुर सम्राट क पुत्र को बंदी बना लिया है.......
देवराज - हमने ऐसा कुछ नहीं किया है........
आंतक - देवता होकर असत्य वचन ....ha...ha...ha....
सीधे से मारकेश को लौटा दो ...नहीं तोह तुम्हारे स्वर्ग की ऐसी दशा होगी की फिर कोई स्वर्ग की सुंदरता की उपमा नहीं देगा .......
देवराज - अपनी वाणी को विराम दो asur....tum शायद इंद्रा के कोप को नहीं जानते तभी यहाँ अकेले आगये हो ...........
आंतक - वैसे तोह में अकेला hi काफी हु ....परन्तु मेरा नाम आंतक है .....शत्रु का अंत करने से पहले उसकी आखरी इच्छा तोह पूरी कर hi सालता हु .......
और उसने मंत्र पढ़कर दोनों हाथ ऊपर उठा दिए.......
और वह लाखो दिव्या असुरो की सेना प्रगट हो गयी.....
आंतक - लो देवराज अब सेना भी आगयी.........
देवराज - आकर्मण ....Har.har.mahadev....
और दोनों और की सेना आपस में भीड़ गयी.......
तीन तत्वों क देवता अपनी तत्वों की ऊर्जा से असुर को समाप्त कर रहे थे ......
तोह आंतक ने अपने भीतर से पांच असुर प्रगट किये .....जो उन्ही पांच तत्त्व की ऊर्जा से बने हुए थे......
अग्नि देवता क साथ ज्वलासुर ......वरुण देवता क साथ .....jalasur........Aur वायु देव क साथ पावणासुर ........
यह तीनो असुर उन तीन देवताओ क hi प्रतिरूप दिखाई दे रहे थे .........
तीनो देवता अपनी पूरी ऊर्जा क साथ युद्ध कर रहे थे परन्तु उन तीन असुरो को कुछ होने की बजाये वह देवताओ की ऊर्जा को अपने भीतर सोख रहे थे.......
यहाँ यमराज जी भी अपने यौम पाश से असुरो को यमलोक भेज रहे the........lekin जितने असुर माते जाते उतने hi फिर प्रगट हो jaate......Antak ने और एक असुर प्रगट किया कालनिधि ...जो यमराज से भीड़ गया......
यहाँ देवराज ने देखा क आंतक बार बार दिव्या असुरो को अपने भीतर से प्रगट कर रहा hai.....toh वह स्वयं युद्ध में उतर आये ......
देवराज ने आंतक पर अनेको दिव्यास्त्रों से वार किया जिससे आंतक एक hi हाथ से रोकता और उसका मुख स्वर्ग की और मोड़ deta......isse स्वर्ग को बड़ी हन्नी हो रही थी..........
आंतक ने अब तक सर्फ देवताओ की ऊर्जा को उनके hi विरुद्ध करके लड़ रहा था.........
देवराज ने अब अपने वज्रा क प्रयोग करना शुरू किया और भयंकर विद्युत् ऊर्जा से आंतक पर वार किया ........लेकिन वह भी व्यर्थ .........
सभी देवता कमजोर पद रहे the......Aur असुरो का कुछ भी अहित नहीं हो रहा था.......
देवराज विवश होकर नारायण अस्त्र का प्रयोग करने hi वाले थे ...क देवगुरु ने उन्हें रोक दिया .....
सावधान देवराज .......यह असुर वरदान की शक्ति से बलवान हो रहा है ...इससे और इसके शरीर से प्रगट हुए असुरो को कोई किसी भी अस्त्र से नहीं मार सकते hai........isliye जब तुम त्रिदेवो क अस्त्र चलोगे को क तोह वरदान क कारण इस असुर को तोह कुछ नहीं होगा .....
जिससे िन्नस्रो की विनाशकारी शांति इस लोक को नष्ट कर देगी.....
अब आंतक ने सभी देवताओ को अपने पाश में बंद दिया जो एक दिव्या पाश tha.........phir कुछ सोचकर ...देवराज वह से निकलकर अभी क रूम में प्रगट हुए .....
अभी बीएड पर बैठा कुछ सोच रहा tha......k अचानक देवराज को अपने सामने देखकर समझ गया क अब समय आगया है अगली शक्ति हासिल करने का .......
अभी - प्रणाम देवराज ......
देवराज - विजयी भाव पुत्र........
अभी - आप यहाँ स्वयं आये हो कोई विशेष बात .......
देवराज - तुम्हे शीग्र hi हमारे साथ चलना होगा vats....abhi और बातो का समय नहीं है....
तब मैंने अपना एक प्रतिरूप वह छोड़ा और देवराज क साथ तुरंत युद्धस्थल क लिए निकल पड़ा ......
जब हम वह पहुंचे तोह उस समय देव सैनिको की स्थिति बड़ी विकत thi......Jine असुर मारे जा रहे थे उतने hi और प्रगट हो रहे थे.......
और तत्वों क देवता आंतक क पाश में बंधे the...........Jaise hi आंतक ने मुज़हे और देवराज को देखा ......
आंतक - आगये देवराज .....और यह किस्से साथ लाये हो ........
अभी - मेरा परिचय तोह तुम्हे मिल hi जाएगा .......और अग्नि शूल से आंतक पर वार किया ........लेकिन वह वार उसका कुछ नहीं बिगड़ सका ......आंतक ने उस वार को वापस अभी पर किया लेकिन अभी को लगते hi वह ठंडा हो गया....
अभी ने देखा क देव सैनिक कमजोर पड़रहे है ....तोह उस्सने पृथ्वी तत्त्व और वायु तत्त्व मिलकर भयंकर धूल से बवंडर बनाया जिसमें सारे ासुर तिनके की भाटी ुद्रहि थे और एक दूसरे से टकराकर समाप्त होने लगे .....
धुल भरु आदि चलने क वजह से वह कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था ..........
तभी आकाश में मेघ गरजने लगे और बारिश होने लगी और बवंडर और आंधी शांत हो गयी.......
आंतक - ओह्हो तोह तुम मायावी भी हो ......लेखों आंतक क पास तुम्हारी हर माया का जवाब है .....
जो असुर बवंडर में मारे गए वह जमीं पर गिर gaye....Abhi ने ध्यान दिया क असुरो क शव जमीं पर गिरने क बाद गायब हो रहे है और फिर जीवित होकर लौट रहे है.......
अभी ने फिर ऐसी माया की रचना की की जितने असुर थे उतने hi अभी हर असुरो क सामने आगये .....असुर अपने हतियारो से हुम्ला तोह कर रहे थे .....लेकिन कोई भी माया प्रकाश क सात रंगो से निर्मित होती है .....दिखने में यह स्थूल दिखती है लेकिन वह चाय से जतदा कुछ नहीं होती....
असुरो को माया में उल्ज़हाकार अभी ने अपने शक्ति त्रिशूल को प्रगट कर क आकाश में एक घेरा सा बनाया और अग्नि तत्त्व की भयका ज्वालाओ को आकाश में स्थित कर दिया.... और अपने दिव्या धनुष से एक ऐसा अस्त्र चल्या जिसमें से निरन्तर तीर निकलकर असुर सैनिको को लगने लगे और और वह ऊपर उस घेरे में पहुंचकर जलकर राख हो जाता था ....
इस तरह असुरो की संख्या काम होने लगी ....यह सब करने में अभी को कुछ hi ..पल लगे .......
आंतक अभी की माया को समाज चूका था .....और उसने अपनी ऊर्जा से उस माया को समाप्त कर दिया .....
लेकिन तब तक असुरो की आड़े से अधिक सेना मारी जा चुकी थी ........
आंतक ने क्रोध में भरकर एक दिव्या शूल का वार अभी पर किया .....यह शूल उससे पारा शक्ति द्वारा प्राप्त हुआ tha.......Abhi ने उस प्रहार को अपने शक्ति त्रिशूल पर रोका ......जब दो शक्तिया आपस में टकराई तोह भयंकर ऊर्जा प्रगट हुई ........
प्रारशक्ति क मारक ऊर्जा क कारण अभी का कवच कमजोर पड़ा और इससे अभी जख्मी हुआ ........क्यों क अभी का कवच उससे देविक और आसुरी ास्त्रो से बचा सकता था .....लेकिन पराशक्ति और त्रिदेवो क ास्त्रो को कोई कवच नहीं रोक सकता था...
आंतक अभी आउट वार करता उसी समय सूर्य अस्त हो गया .....और आंतक ने आज क लिए युद्ध समाप्ति की घोषणा की .....
आंतक - आज तोह तुम बच गए ....जाओ और कल पूरी तैयारी कर क आना ......में भी देखु कितना बल है तुममे......
और वह वह से चला जाता है ...........
अभी शक्ति क प्रहार से घायल होने क कारण मूर्छित हो जाता है .......जिससे देवराज स्वर्ग में अपने महल ले जाते है..........
पराशक्ति की ऊर्जा क कारण दक्ष से मिलान क बाद मिली हुई हीलिंग पावर धीरे धीरे काम कर रही थी ........
देवराज ने भी स्वर्ग क वैद अश्विनी कुमार से औषदि तैयार की और अभी क लिए भेज दी........
यहाँ अभी की आंखें खुली तोह अपने सामने एक लड़की हाथ में औषदि का कटोरा लिए अभी की तरफ आश्चर्य से देख रही थी......
यह लड़की थी शामली जो गन्धर्व राज की कन्या thi.....aur यही थी अभी की अगली शक्ति........
अभी बस उससे एकटक देखने लगा .....किसी असपारा जैसा सौंदर्य ...और चेहरे पर masumiyat....Aankhe जैसे हिरणी की तरह बड़ी बड़ी ......अभी बस उस रूप सौंदर्य को देखकर जैसे खो सा गया था......
ध्यान में कई दिनों से जिस कन्या को अभी देख रहा था आज वह सामने थी
तभी अश्विनी कुमार अंदर आते हुए .....अरे शामली तुमने अभी तक यह औषदि इन्हे लगायी नहीं.....
शामली - गुरुदेव ....औषदि तोह है परन्तु कहा लागू इनको तोह कोई घाव hi नहीं है ......तब तक हीलिंग पावर अपना काम कर चुकी थी....
अश्विनी औषधि वापस लेते हुए ...कोई बात नहीं तुम इनका ख्याल रखो ....ध्यान रहे यह देवराज का आदेश hai.....aur वह चले जाते है...
अभी - तुमने ऐसा क्यों कहा की कोई घाव नहीं है ,
शामली - सत्य hi तोह कहा ....कहा है मुज़हे तोह दिखाई नहीं दे रहा
अभी - अपना हाथ इधर लाओ .....
शामली - क्यों...
अभी - तुम्हे अपने घाव दिखाना है.....
और अभी उस्का एक हाथ पकड़कर अपने दिल पर रख देता है........
अभी - तुम्हारी इन आँखों क बाण ने मेरे हृदय पर घाव कर दिया है .....देखो तोह कैसा जोरो से धड़क रहा है.......
पहले तोह वह समाज नहीं पायी पर जब समाज आया तोह वह शर्माकर हाथ छुड़ाकर भागने लगी ......
अभी - देखो ...देवराज ने आदेश दिया है तुम ऐसे नहीं जा सकती ......
अभी की बात सुनकर वह वापस मुद जाती है....
आज क लिए इतना hi.....
अगला अपडेट कल.......
अब तक आपने देखा कस ने स्वर्ग पर आक्रमण करने क लिए अपने मायावी आंतक नाम क असुर को चुना .......
शिवली ने अभी की अगली यात्रा क बारे में बताया..........
और अगली शक्ति कोई गंधर्व काया क बारे में भी
अब आगे........
भुवा लोक क यक्ष भूमि से ऊपर है सौहा लोक ........जिसका विस्तार पृथ्वी से कोई तीन गुना है......
इस लोक में प्रवेश करने क लिए 7 द्वार है ......जहा देव सैनिक हमेशा पहरा देते रहते है.....
स्वः लोक का मुख्या आकर्षण स्वर्ग है जहा का आकर्षण , हैट व्यक्ति को है ........कई कवी और लेकिन भी किसी जगह की सुंदरता की उपमा स्वर्ग क नाम से hi देते है...
स्वर्ग लोक मैं देवताओ का वस् है जो त्रिदेवो को आगया अंसार इस श्रिस्ति का संचालन करते है .....
स्वर्ग चारो तरफ से अलकनंदा जो गंगा की hi रूप है उससे गीता हुआ hai.....yaha हर प्रकार की सिद्धिया साक्षात् वस् करती hai......Swarg.... रोग... व्याडि ..Vridhawastha....Bhuk प्यास आदि से रहित hai........Yaha क बगीचे में कल्पवृक्ष है जो हर प्रकार की समृद्धि देने वाला है.....
यहाँ देवताओ क राजा इंद्रा का शासन है.........
स्वर्ग क अधिकार में दो नगर और है जो इस लोक क दूसरे हिस्से में है ....एक है गंधर्व nagar......jaha देवताओ की सभा में गाने वाले और सृष्टि में संगीत विद्या फ़ैलाने वाले गन्धर्वो का वास है .......इनका राजा रंजन गंधर्व hai.....inki पत्नी संध्या और बेटी शामली है......
वही दूसरी और किन्नर नगर है जो निर्त्य कला में निपुण है......
देवराज अपनी सभा में बैठकर देवगुरु बृहस्पति और बाकि देवताओ क साथ किसी विषय पर मंत्रणा कर रहे थे.......
तभी स्वर्ग में जोरो से कम्पन हुआ ...यह था संकेत क किसी ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया है........
देवराज तुरंत अपनी देव सेना लेकर स्वर्ग क प्रताम द्वार पर पहुँच गए और देखा तोह वह द्वार टुटा हुआ पड़ा है .....और सैनिक मारे जा चुके है........
और सामने देखा तोह एक विशालकाय दैत्य दोनों हाथ कमर पर रख कर जोर जोट से हसरहा tha........yeh था आंतक.....
आंतक - ha....ha....ha....Aayiye देवराज .......मुज़हे तुम्हारी hi प्रतीक्षा thi.......yeh बेचारे सैनिक तोह ऐसे hi मारे गए........
देवराज - तुम्हारा इतना दुःसाहस क तुमने यहाँ प्रवेश करने का प्रयत्न किया .......
आंतक - दुःसाहस तोह आपने किया है ...जो हमरे असुर सम्राट क पुत्र को बंदी बना लिया है.......
देवराज - हमने ऐसा कुछ नहीं किया है........
आंतक - देवता होकर असत्य वचन ....ha...ha...ha....
सीधे से मारकेश को लौटा दो ...नहीं तोह तुम्हारे स्वर्ग की ऐसी दशा होगी की फिर कोई स्वर्ग की सुंदरता की उपमा नहीं देगा .......
देवराज - अपनी वाणी को विराम दो asur....tum शायद इंद्रा के कोप को नहीं जानते तभी यहाँ अकेले आगये हो ...........
आंतक - वैसे तोह में अकेला hi काफी हु ....परन्तु मेरा नाम आंतक है .....शत्रु का अंत करने से पहले उसकी आखरी इच्छा तोह पूरी कर hi सालता हु .......
और उसने मंत्र पढ़कर दोनों हाथ ऊपर उठा दिए.......
और वह लाखो दिव्या असुरो की सेना प्रगट हो गयी.....
आंतक - लो देवराज अब सेना भी आगयी.........
देवराज - आकर्मण ....Har.har.mahadev....
और दोनों और की सेना आपस में भीड़ गयी.......
तीन तत्वों क देवता अपनी तत्वों की ऊर्जा से असुर को समाप्त कर रहे थे ......
तोह आंतक ने अपने भीतर से पांच असुर प्रगट किये .....जो उन्ही पांच तत्त्व की ऊर्जा से बने हुए थे......
अग्नि देवता क साथ ज्वलासुर ......वरुण देवता क साथ .....jalasur........Aur वायु देव क साथ पावणासुर ........
यह तीनो असुर उन तीन देवताओ क hi प्रतिरूप दिखाई दे रहे थे .........
तीनो देवता अपनी पूरी ऊर्जा क साथ युद्ध कर रहे थे परन्तु उन तीन असुरो को कुछ होने की बजाये वह देवताओ की ऊर्जा को अपने भीतर सोख रहे थे.......
यहाँ यमराज जी भी अपने यौम पाश से असुरो को यमलोक भेज रहे the........lekin जितने असुर माते जाते उतने hi फिर प्रगट हो jaate......Antak ने और एक असुर प्रगट किया कालनिधि ...जो यमराज से भीड़ गया......
यहाँ देवराज ने देखा क आंतक बार बार दिव्या असुरो को अपने भीतर से प्रगट कर रहा hai.....toh वह स्वयं युद्ध में उतर आये ......
देवराज ने आंतक पर अनेको दिव्यास्त्रों से वार किया जिससे आंतक एक hi हाथ से रोकता और उसका मुख स्वर्ग की और मोड़ deta......isse स्वर्ग को बड़ी हन्नी हो रही थी..........
आंतक ने अब तक सर्फ देवताओ की ऊर्जा को उनके hi विरुद्ध करके लड़ रहा था.........
देवराज ने अब अपने वज्रा क प्रयोग करना शुरू किया और भयंकर विद्युत् ऊर्जा से आंतक पर वार किया ........लेकिन वह भी व्यर्थ .........
सभी देवता कमजोर पद रहे the......Aur असुरो का कुछ भी अहित नहीं हो रहा था.......
देवराज विवश होकर नारायण अस्त्र का प्रयोग करने hi वाले थे ...क देवगुरु ने उन्हें रोक दिया .....
सावधान देवराज .......यह असुर वरदान की शक्ति से बलवान हो रहा है ...इससे और इसके शरीर से प्रगट हुए असुरो को कोई किसी भी अस्त्र से नहीं मार सकते hai........isliye जब तुम त्रिदेवो क अस्त्र चलोगे को क तोह वरदान क कारण इस असुर को तोह कुछ नहीं होगा .....
जिससे िन्नस्रो की विनाशकारी शांति इस लोक को नष्ट कर देगी.....
अब आंतक ने सभी देवताओ को अपने पाश में बंद दिया जो एक दिव्या पाश tha.........phir कुछ सोचकर ...देवराज वह से निकलकर अभी क रूम में प्रगट हुए .....
अभी बीएड पर बैठा कुछ सोच रहा tha......k अचानक देवराज को अपने सामने देखकर समझ गया क अब समय आगया है अगली शक्ति हासिल करने का .......
अभी - प्रणाम देवराज ......
देवराज - विजयी भाव पुत्र........
अभी - आप यहाँ स्वयं आये हो कोई विशेष बात .......
देवराज - तुम्हे शीग्र hi हमारे साथ चलना होगा vats....abhi और बातो का समय नहीं है....
तब मैंने अपना एक प्रतिरूप वह छोड़ा और देवराज क साथ तुरंत युद्धस्थल क लिए निकल पड़ा ......
जब हम वह पहुंचे तोह उस समय देव सैनिको की स्थिति बड़ी विकत thi......Jine असुर मारे जा रहे थे उतने hi और प्रगट हो रहे थे.......
और तत्वों क देवता आंतक क पाश में बंधे the...........Jaise hi आंतक ने मुज़हे और देवराज को देखा ......
आंतक - आगये देवराज .....और यह किस्से साथ लाये हो ........
अभी - मेरा परिचय तोह तुम्हे मिल hi जाएगा .......और अग्नि शूल से आंतक पर वार किया ........लेकिन वह वार उसका कुछ नहीं बिगड़ सका ......आंतक ने उस वार को वापस अभी पर किया लेकिन अभी को लगते hi वह ठंडा हो गया....
अभी ने देखा क देव सैनिक कमजोर पड़रहे है ....तोह उस्सने पृथ्वी तत्त्व और वायु तत्त्व मिलकर भयंकर धूल से बवंडर बनाया जिसमें सारे ासुर तिनके की भाटी ुद्रहि थे और एक दूसरे से टकराकर समाप्त होने लगे .....
धुल भरु आदि चलने क वजह से वह कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था ..........
तभी आकाश में मेघ गरजने लगे और बारिश होने लगी और बवंडर और आंधी शांत हो गयी.......
आंतक - ओह्हो तोह तुम मायावी भी हो ......लेखों आंतक क पास तुम्हारी हर माया का जवाब है .....
जो असुर बवंडर में मारे गए वह जमीं पर गिर gaye....Abhi ने ध्यान दिया क असुरो क शव जमीं पर गिरने क बाद गायब हो रहे है और फिर जीवित होकर लौट रहे है.......
अभी ने फिर ऐसी माया की रचना की की जितने असुर थे उतने hi अभी हर असुरो क सामने आगये .....असुर अपने हतियारो से हुम्ला तोह कर रहे थे .....लेकिन कोई भी माया प्रकाश क सात रंगो से निर्मित होती है .....दिखने में यह स्थूल दिखती है लेकिन वह चाय से जतदा कुछ नहीं होती....
असुरो को माया में उल्ज़हाकार अभी ने अपने शक्ति त्रिशूल को प्रगट कर क आकाश में एक घेरा सा बनाया और अग्नि तत्त्व की भयका ज्वालाओ को आकाश में स्थित कर दिया.... और अपने दिव्या धनुष से एक ऐसा अस्त्र चल्या जिसमें से निरन्तर तीर निकलकर असुर सैनिको को लगने लगे और और वह ऊपर उस घेरे में पहुंचकर जलकर राख हो जाता था ....
इस तरह असुरो की संख्या काम होने लगी ....यह सब करने में अभी को कुछ hi ..पल लगे .......
आंतक अभी की माया को समाज चूका था .....और उसने अपनी ऊर्जा से उस माया को समाप्त कर दिया .....
लेकिन तब तक असुरो की आड़े से अधिक सेना मारी जा चुकी थी ........
आंतक ने क्रोध में भरकर एक दिव्या शूल का वार अभी पर किया .....यह शूल उससे पारा शक्ति द्वारा प्राप्त हुआ tha.......Abhi ने उस प्रहार को अपने शक्ति त्रिशूल पर रोका ......जब दो शक्तिया आपस में टकराई तोह भयंकर ऊर्जा प्रगट हुई ........
प्रारशक्ति क मारक ऊर्जा क कारण अभी का कवच कमजोर पड़ा और इससे अभी जख्मी हुआ ........क्यों क अभी का कवच उससे देविक और आसुरी ास्त्रो से बचा सकता था .....लेकिन पराशक्ति और त्रिदेवो क ास्त्रो को कोई कवच नहीं रोक सकता था...
आंतक अभी आउट वार करता उसी समय सूर्य अस्त हो गया .....और आंतक ने आज क लिए युद्ध समाप्ति की घोषणा की .....
आंतक - आज तोह तुम बच गए ....जाओ और कल पूरी तैयारी कर क आना ......में भी देखु कितना बल है तुममे......
और वह वह से चला जाता है ...........
अभी शक्ति क प्रहार से घायल होने क कारण मूर्छित हो जाता है .......जिससे देवराज स्वर्ग में अपने महल ले जाते है..........
पराशक्ति की ऊर्जा क कारण दक्ष से मिलान क बाद मिली हुई हीलिंग पावर धीरे धीरे काम कर रही थी ........
देवराज ने भी स्वर्ग क वैद अश्विनी कुमार से औषदि तैयार की और अभी क लिए भेज दी........
यहाँ अभी की आंखें खुली तोह अपने सामने एक लड़की हाथ में औषदि का कटोरा लिए अभी की तरफ आश्चर्य से देख रही थी......
यह लड़की थी शामली जो गन्धर्व राज की कन्या thi.....aur यही थी अभी की अगली शक्ति........
अभी बस उससे एकटक देखने लगा .....किसी असपारा जैसा सौंदर्य ...और चेहरे पर masumiyat....Aankhe जैसे हिरणी की तरह बड़ी बड़ी ......अभी बस उस रूप सौंदर्य को देखकर जैसे खो सा गया था......
ध्यान में कई दिनों से जिस कन्या को अभी देख रहा था आज वह सामने थी
तभी अश्विनी कुमार अंदर आते हुए .....अरे शामली तुमने अभी तक यह औषदि इन्हे लगायी नहीं.....
शामली - गुरुदेव ....औषदि तोह है परन्तु कहा लागू इनको तोह कोई घाव hi नहीं है ......तब तक हीलिंग पावर अपना काम कर चुकी थी....
अश्विनी औषधि वापस लेते हुए ...कोई बात नहीं तुम इनका ख्याल रखो ....ध्यान रहे यह देवराज का आदेश hai.....aur वह चले जाते है...
अभी - तुमने ऐसा क्यों कहा की कोई घाव नहीं है ,
शामली - सत्य hi तोह कहा ....कहा है मुज़हे तोह दिखाई नहीं दे रहा
अभी - अपना हाथ इधर लाओ .....
शामली - क्यों...
अभी - तुम्हे अपने घाव दिखाना है.....
और अभी उस्का एक हाथ पकड़कर अपने दिल पर रख देता है........
अभी - तुम्हारी इन आँखों क बाण ने मेरे हृदय पर घाव कर दिया है .....देखो तोह कैसा जोरो से धड़क रहा है.......
पहले तोह वह समाज नहीं पायी पर जब समाज आया तोह वह शर्माकर हाथ छुड़ाकर भागने लगी ......
अभी - देखो ...देवराज ने आदेश दिया है तुम ऐसे नहीं जा सकती ......
अभी की बात सुनकर वह वापस मुद जाती है....
आज क लिए इतना hi.....
अगला अपडेट कल.......