ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 19 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

अपडेट - 132



अब तक आपने देखा अभी ने काले ड्रैगन को इब्लीस क प्रभाव से मुक्त कर दिया जिसके कारण निचे क 7 लोको पर उसका प्रभाव ख़तम हुआ ...और सब पहले की तरह नार्मल हो गया ....

अब आगी .....

यहाँ पटल लोक में जब कस को जब अपनी और इब्लीस की हार का पता चला तोह उसका क्रोध और बढ़ गया .....उसने अपने सभी असुर जो करोड़ो की तादात में थे उन्हें पटल लोक में संघठित होने का आदेश दिया ....अब ...वह आमने सामने का युद्ध करना चाहता था .......

जनलोक क समय में और पटल क समय में बहुत अंतर था ..अभी ने जनलोक में सवा दिन बिताया था जो यहाँ क हिसाब से 13 दिन क बराबर था ........

कस को अपनी आखरी बलि देने में अब 2 दिन बाकी थे .....उसने मदालसा की बलि क बारे में किसी को नहीं बताया था......

मदालसा की बलि क लिए उससे दुर्मुखासुर को अपने विश्वास में लेना था ......

कस ने अपने दोनों बेटे दुर्मुखासुर और भयाक्षा .....को अपने कसख में बुलाया ....

दोनों भाई कस क कसख में आते hi कस को प्रणाम किया ......

कस - आओ पुत्रो बैठो ......

डॉ - पिताश्री क्या आदेश है आपने हमे किस कारण बुलाया है .....

कस - पुत्र सबसे पहले क्या तुम्हे पता चला क रक्षक और उसका परिवार जीवित है .....

डॉ - हां पिताश्री परन्तु यह समाज नहीं आरहा यह कैसे संभव हुआ .........

कस - पुत्र तुम अभी रक्षक की शक्तियों को नहीं जानते .....तुम क्या सोचते हो क इतनी शक्तिया और आसुरी माया का स्वामी होने पर भी मैं क्यों इतने वर्षो से साधना में बैठा हु .....

डॉ - आपका कथन सत्य है पिताश्री .....त्रिदेवो की मारक शक्ति से मेरे भरपूर वार से उसका सारा परिवार समाप्त हो गया था ......parantu...na जाने किस शक्ति क द्वारा उसने अपने आपको और अपने परिवार को bachaya.....muzhe अब लगता है ....क मैंने व्यर्थ hi इतनी तपस्या करके शक्ति को प्राप्त किया ......

कस - पुत्र तपस्या से प्राप्त हुई शक्ति कभी व्यर्त नहीं होती .......जहा तक में जानता हु तुम्हारी शक्ति ..अमोघ है .....तुम्हे उसका सटीक प्रयोग करना होगा ...अभी भी दो अवसर है तुम्हारे पास.....

अभी इस्सके लिए दो दिन और शेष है कल रात्रि को मेरी 14 बलि पूर्ण होगी और मुज़हे प्राप्त होजायेगी वह शक्ति जिससे रक्षक का अंत हो जाएगा और उसकी साड़ी शक्ति भी मुज़हे प्राप्त हो जायेगी और में बन जाऊँगा सर्व शक्तिमान .......

यहाँ तुम्हे बुलाने का कारण एक यह भी है क कल होने वाली बलि क बारे में तुमसे विचार विमर्श करना है....

डॉ - पिताश्री आपने आज तक तोह किसी बलि क बारे में हमसे विचार विमर्श नहीं किया ....और आपको इसकी आवश्यकता भी क्या है ....आप असुर सम्राट हो ...सर्व समर्थ हो .......बलि क लिए हमसे पूछने की बात hi कहा से आयी .....

कस - पुत्र सर्वप्रथम यह बताओ क तुम असुर साम्राज्य क प्रति कितने निष्ठां वन हो .....

डॉ - पिताश्री आज यह प्रश्न क्यों ......क्या आपको मेरी निष्ठां पर कोई शंका है .......पिताश्री में आपको यह वचन देता हु क असुरो क उत्थान क लिए और आपकी विजय क लिए में अपने प्राणो क त्याग करने क लिए भी तैयार हु .....

कस - अपने प्राणो को नहीं पुत्र परन्तु क्या किसी अपने प्रिय व्यक्ति क प्राणो को न्योछावर करने क लिए तैयार हो ......

डॉ - आप क्या और किसीकी बात कर रहे है पिताश्री ...स्पष्ट कहिये ......

कस - मदालसा की ....

डॉ - मदालसा की ....वह िंब सब क बिच में कहा आगयी ...उसका इस सब से क्या लेना देना ....

कस - लेना देना है पुत्र ....लेना देना है ....क्यों की जिसकी मुज़हे अंतिम बलि नहीं देनी है वह मदालसा hi है .....

डॉ - पिताश्री .....नहीं .....आप ऐसा नहीं करेंगे ....मदालसा तोह आपकी सबसे प्रिय पुत्री है ...और हम जानते है क संसार में यदि आप किसी से सबसे अधिक प्रेम करते है तोह वह है मदालसा ..आप किसी और की भी बलि दे सकते hai....phir मदालसा hi क्यों....

कस - इसके अलावा और कोई मार्ग नहीं है पुत्र ....हमे भी इस बात का बहुत दुःख है ...परन्तु हमारे असुर साम्राज्य स्थापित करने क उद्देश्य क लिया यह आवश्यक है ......मदालसा को हम संसार में सबसे ज्यादा प्रेम करते है .....हमारा वही प्रेम उसकी बलि का कारण बन गया है पुत्र .......

डॉ - पिताश्री आप यह सब रक्षक क अंत क लिए hi कर रहे हो न ....यदि में उस रक्षक को hi समाप्त कर दू तोह ......आपको फिर इस बलि की कोई आवश्यकता नहीं होगी .....कल क सूर्यो डे से पूर्व ..रक्षक का मृतदेह आपके सन्मुख होगा ...यह मेरा वचन है ......

हीर आपको मदालसा की बलि देने की कोई आवश्यकता नहीं होगी .....

मुज़हे आज्ञा दे ......

भयाक्षा - हां पिताश्री ....मुज़हे भी भाई की बात सही लग रही है .......मैं भी अपने दोनों भाइयो का बदला ...रक्षक से लेने क लिए तड़प रहा हु ...मुज़हे भी भैया क साथ जाने की आज्ञा दे ......

कस मैं में - ( ऐसे कैसे इतने वर्षो की साधना को में अधूरा छोड़ दू शक्तिया पर्पट करने क लिए तोह मदालसा को अब मरना hi होगा )

यहाँ जब यह तीनो बात कर रहे थे ..तब बहार ...मदालसा की माँ मदनसा सब सुन रही thi......usse इस बात का बहुत धक्का लगा ..क ..कैसी एक पिता ...अपने स्वार्थ क लिए अपनी hi मासूम पूर्ति की हत्या का निर्णय ले सकता है ....उस घिन होने लगी अपने पति से .....

कस - ठीक है पुत्रो हमारा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है ......

डॉ ..और भयाक्ष अपने पिता को प्रणाम करके वह से निकल गए ....

मदनसा ने जब देखा क दोनों बहार hi आरहे है ...तोह वह तुरंत वह से चली गयी लेकिन कस की नज़रो से बच ना सकीय ......

मदनसा अपनी पुत्री क प्राणो की रक्षा करना चाहती थी ....इसीलिए वह मदालसा को कस की हकीकत बताकर वह से निकलना चाहती थी .....

मदनसा जब मदालसा क कक्ष में पहुंची ...तब वह अपने बिस्टेर पर बैठी गुमसुम सी अभी क hi खयालो में थी ....बार बार वह अभी को अपने दिल से निकलने का प्रयत्न करती थी ....लेकिन उसका पर्म और गहरा होता जाता था ....

मदनसा अपनी पुत्री को ऐसे खयालो में खोये देखकर ....उसके पास जाकर उसके सर पर हाथ फेरा ....

अभी क बारे में सोचते हुए उसकी आँखों में बार बार आंसू आजाते थे ....जब मदालसा ने अपनी माँ को अपने निकट देखा तोह तुरंत अपने आंसू पॉच दिए ......

मदालसा - माँ आप ...अच्छा हुआ आप आई मेरा बड़ा मैं था आप से मिलने का ......

मदनसा - तोह पुत्री आई क्यों नहीं ...अपनी माँ से मिलने क लिए भी इतना विचार करना पड़ता hai.......kuch दिन से देख रही हु तुम बहुत उदास सी खोयी खोयी सी रहती हो ....सही से अपना दयँ भी नहीं रक्ति हो ......तुम्हारे चेहरे की वह चमक कहा गयी पुत्री .....क्या बात है ...अपने माँ को नहीं बताओगी ....

मदालसा - कुछ नहीं माँ बस ऐसे hi ......

मदनासा ने प्यार से इसके सर पर हाथ फेरा ......बीटा देख में तेरी माँ हु ...और तेरी सखी भी ....क्या बात है बीटा ....इस प्रकार तुम्हे अंदर hi अंदर घुटते हुए देखकर मुज़हे बहुत दुःख होता है ........

अपनी माँ का प्यार पाकर मदालसा अपनी माँ क गले लग जाती है और ..अपने दिल का बोझ आंसू द्वारा बहार निकलती है ....

मदनसा भी उसकी पीठ थपथपाकर उससे सांत्वना देती है .....

अपनी माँ क गले लगकर उससे अब थोड़ा ाचा लगने लगा था ......मदनसा ने अपने हाथो से उसके आंसू पोंछे ......

मदालसा ने अब अपनी माँ को पूरी बात बताई की कैसे अभी कई वर्षो से उसके सपने में आता था .....किस प्रकार वह उससे घायल अवस्था में मिला और उसके उसका उपचार किया .....वह अभी को अपना सर्वस्वा मैं चुकी थी ...अपना पति मैं चुका थी ....

लेकिन जब उससे पता चल क जिससे वह अपना सबकुछ मान चुकी है वह hi उसके भाइयो का हत्यारा है और असुर वंश का सबसे बड़ा शत्रु ....तोह उस्सने अभी को भूलने का बहुत प्रयत्न किया लेकिन ऐसा कर नहीं सकीय ......

मदालसा की बात सुनकर मदनसा बहुत खुश हुई .......पुत्री अभी तुम अपने पिता और भाइयो क सत्य से अवगत नहीं हो ....उनके लिए तुम अपने प्रेम को ठुकराओ मत ......

तुम्हे पता है तुम्हारे जन्म क समय माँ भगवती ने स्वप्ना में मुज़हे यह संकेत दिया था क यह कन्या मेरी अमानत है ....मेरा स्वामी क अंश से hi उत्पना वीर होगा इस्सके पति जो दमे पर इससे लेने आएगा ...

पुत्री इतने वर्षो से में इसकी प्रतीक्षा कर रही थी ...अब जब तुमने बताया तोह ....पता चला जिसकी में प्रतीक्षा कर रही थी वह तुमसे मिल चूका है ....हां पुत्री यह रक्षक hi है ....तुम अपने पिता की चिंता मत करो....

मदालसा - परन्तु maa....Woh तोह पिताश्री क सबसे बड़े शत्रु है .....और हमारे भाइयो क हत्यार भी ....

मदनसा - पुत्री तुम अभी अपने पिता और भाइयो क कर्मो क बारे में नहीं जानती हो ...तुम्हे अब शीग्र hi यहाँ से निकलना होगा ....उसी गुप्त रास्ते से जो तुम्हे पहले से hi पता है ....क्युकी कल तुम्हारे पिता ......

अभी मदनसा आगे कुछ बोल पाती क तभी वह कस आगया .......

कस - क्या बातें हो रही है माँ बेटी में .....जरा हमे भी तोह पता चले ....

मदनसा - कुछ नहीं जी ....बहुत दिनों से हमारी पुत्री यहाँ महल में hi बंद है ....तोह सोचा .थोड़ा कही बहार भी निकले यही बात हो रही थी ....

कस मदालसा क सर पर हाथ फेरते हुए ....कल तक यह कही नहीं जायेगी ....पुत्री कल महा पूजा है .और तुम्हर होना वह बहुत जरुरी है ......क्या तुम नहीं साथ डौगी अपने पिता का ......कल मेरी साधना पूरी हो रही है ....उसके बाद तुम मुक्त हो .....

मदालसा - क्यों नहीं पिताश्री ...में कही नहीं जा रही हु ....मुज़हे तोह बहुत ख़ुशी है क कल आपकी इतने वर्ष की तपस्या पूर्ण हो रही है ....जिसके कारण आप मुजह्से भी नहीं मिल पाते थे ..

मदालसा क सर पर प्यार से हाथ फेरते हुई ......अच्छा अब में चलता हु पुत्री ....और हां तुम्हारी माता से अभी मुज़हे कुछ काम है ......चलो ...मदनसा .....मुज़हे तुमसे कुछ बात करनी है ..

और कस मदनसा को वह से लेजाने लगता है ....जाते जाते मदनसा ...मदालसा को कुछ इशारा करती है लेकिन वह समाज hi नहीं पाती है ....

कस मदनसा को अपने कक्ष में लेजाकर धरती पर पटक डेरा है ......

कस - मेरी बेटी को मेरे hi विरुद्ध भड़का रही थी .....तुम्हे दर भी नहीं लगा यु छिपकर हमारी बाते सुनते हुई ......

मदनसा - तोह क्या करू ...एक बेटी को पिता क hi हातो मरने दू ....

कस - हां ...वह ..मेरी ..संपत्ति है ....मेरे hi द्वारा उसका जन्म हुआ है ...में कुछ भी कर सकता हु ....तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी ...मदनसा हमारे बिच आकर ...

मैं तोह कर रहा है क अभी तुम्हे समाप्त कर दू .....

परतु तुमसे मैंने प्रेम किया था वह hi मुज़हे रोक रहा है.... और फिर कस ने मदनसा को अपने गुप्त तहखाने में कैद कर लिया ....

कस को पता था क अभी अपनी आखरी शक्ति प्राप्त करने पटल लोक में जरूर aayega.......usne मदालसा और मदनसा की साड़ी बातें सुन ले थी .......

अब उसके मदालसा क कक्ष को भी पूरी तरह एक कैद में बदल दिया ......और ऐसी व्यस्था की क वह की हर गतविधि पर उसकी नज़र बानी रहे ....

कस ने पटल लोक की सुरक्षा और बड़ा दी अपने मायावी असुर भी गुप्त रूप से पटल लोक की सीमा पर तैनात कर दिए ........

उसने पटल लोक की सीमा को देवी निकुंबला की शक्ति से बांध दिए जिसके कारण ...sirf...asur hi उसमें प्रवेश पा सकता था .......

अभी क लिए इतना hi ....


अगला अपडेट जल्द hi ....
 
भाई आप ठीक कह रहे है ...अभी क बारे में .......लेकिन 100% कोई परफेक्ट नहीं होता ... कमिया है तभी तोह इंसान है .........

मैं कहानी पहले से सोचकर या कही से पढ़कर नहीं लिखता .......जैसे जैसे कहानी क पात्र लिखा रहे है वैसे 2 लिख रहा हु ....

भाई मुज़हे भी अभी केयरलेस लगता है .....लेकिन एक आदमी का ध्यान कई जगह बता हो तोह शायद ऐसा हो सकता है .......

भाई अपडेट लिखते समय मुज़हे भी नहीं पता होता क आगे क्या होने वाला है....


अब आगे देखते है यह पात्र कहानी में और क्या मोड़ लाते है....
 
अपडेट - 133



अब तक आपने देखा कस की अपने पुत्रो से मंत्रणा......

दुर्मुख और भयाक्षा का अभी क साथ युद्ध क लिए निकलना .......

मदनसा को मदालसा की बलि क बारे में पता चलना ....

अब आगी ......

अभी जनलोक से ऋतू को लेकर रसातल में पहुँच गया ......शिवली और सुलेखा ने दोनों का वह स्वागत किया ........

शिवली तोह आख़िरकार हो गयी आपकी ऋतू से शादी ......

अभी - जानता हु तुम्हे पहले hi पता था .....पहले सोचता था क जब तुम्हे मेरी हर बात का पता चलता है तोह क्या ऋतू क बारे में नहीं पता चलता होगा ....

फिर सोचता क तुम इस बारे में कोई जीकर क्यों नहीं कर रही हो .

लेकिन अब सारे जवाब जान गया हु ....क्यों तुम पहले hi सब कुछ जान लेती थी .........

शिवली - शुक्र है अब बार बार तोह मुज़हे समज़हाना नहीं पड़ेगा ..........

ऋतू ने शिवली क पेट पर चुटकी काटी ....

ऋतू - बड़ी आयी समज़हाने वाली ...

ज्यादा बड़ी बनाने की कोशिश न कर ...

शिवली - अह्ह्ह दी ..क्या कर रही हो ...दर्द होता है...

थोड़ी देर सभी में ऐसी hi बातें थोड़ी मस्ती चली ....

अभी - अच्छा अब यह सब छोड़ो शिवू और ध्यान से मेरी बात सुनो ....वह समय आ गया है शिवू .....तुम हमारे सभी साथियो को यहाँ एकत्रित करो ......और सुलेखा तुम भी अपने सारे सेनापतियों और मंत्रियो को सज्ज रहने क लिए कहो ......और साथ में जनता की सुरक्षा का भी पूरो तरह प्रबंध करो....

कुछ hi देर में साड़ी रक्षक सेना ....रिंकू और गोलू ....और अभी की साड़ी पत्निया ......वह रसातल में इक्कठा हो गए .......

अभी - साथियो जोस महा युद्ध की हम प्रतीक्षा में इतने दिनों से थे वह अब आगया hai.....hume युद्ध पूरी सहस और शक्ति से लड़ना होगा .......यह असुर उयध में चल करने में बड़े माहिर है .....

हमे चल करने वालो क साथ छल से बल वालो क साथ बल से सामना करना होगा .......और सब को एक दूसरे क संपर्क में रहना होगा ....

यह युद्ध निर्णायक होगा ....हमे एक बार फिर इन् असुरो को बताना होगा ....क बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो जाए वह अच्छाई से कभी जीत नहीं sakti...,...Adharm की कभी धरम पर विजय नहीं होती......

क्या आप सब तैयार है .....

सभी ने हर हर मदेव का नारा देकर अपना समर्थन दिया .....अब अभी ने उन् से मिलकर युद्ध निति और व्यू रचना ...और ....कौन किस मोर्चे पर तैनात होगा ... इन सब बातो की चर्चा की .....

यहाँ पटल लोक में कस का प्रमुख गुप्तचर ...Chalawa....jo हर प्रकार और स्थान का रूप धारण कर क उस्में ऐसा ेक्काकर हो जाता था और बिना किसी की नज़रो में आये वह की साड़ी गुप्त सूचनाएं ले आता था ....

कस ने चलवा को गुप्तचर विभाग का प्रमुख बनाया था और उससे पटल लोक में सुरक्षा व्यवस्था पर नज़र बनाये रखने क लिए कही भी आने जाने की छूट थी .......

कस क कहने पर चलावे ने अपने गुप्तचरों का जाल फैला दिया था ...जिसके द्वारा उससे पता चला क रसातल में साड़ी रक्षक सेना एकत्रित हो रही है .....ऐसा लग रहा है क वह किसी भी समय पटल लोक पर आक्रमण कर सकते है .....

चलावे को पता था क अभी ...पटल पर आक्रमण करने की पहल कभी नहीं करेगा ....फिर साड़ी सेना रसातल में एकत्रित करने का क्या कारण है .....

चलवा को जब तक अपने किसी प्रश्न का उत्तर नहीं प्राप्त होता ...तब तक उससे चैन नहीं आता था .....अपने ...वह ...खुद रसातल में चल रही अभी की योजनाओ क बाते में पता करने वह गुप्त रूप में गया ....

यहाँ दुर्मुखासुर अब अभी से आमने सामने युद्ध कर चाहता था .........उसने चलवा को बुलावा भेजा ........लेकिन उसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं था ......की वह कहा है ......

करीब 2 घंटे क बाद चलवा ने पतलोक में फिर प्रवेश किया ......और कस क कैशा की और जा hi रहा था .......क तभी उस्सने भयाक्षा को देखा ....

भयाक्षा ने जा देखा तोह वह चलवा को अपने साथ ले गया ....जहा डॉ बैठा उसकी प्रतीक्षा कर रहा था ..

चलवा ने डॉ को प्रणाम किया ...

चलवा - प्रणाम युराज ....कहिये आपने आज हमे क्यों याद किया ...

डॉ - हम आपसे उस अभिनव ..क बारे में जानना चाहते है ...क वह इस समय कहा पर है

चलवा - युराज में भी इसी काम में लगा हुआ था ....तोह पता चला क इस समय वह नागलोक में है और किसी बहुत बड़े युद्ध की तैयारी कर रहा है ......मुज़हे तोह ऐसा लग रहा है क कही उनकी पता लोक पर आक्रमण की योजना तोह नहीं ...हिमे सावधान रहना होगा ......

डॉ - क्या तुम्हे पूर्ण विश्वास है क नागलोक में तुमने जिससे देखा ....वह उसका कोई अंश तोह नहीं ....

चलवा - मैंने खुद उनकी योजनाओ क बारे में सुना जिससे सुनकर तोह ऐसा hi लगता है वह इस समय रसातल अपने पूरे रूप में hi है ....और वह चल रही गतिविधियों ....ऐसा लगता है क वह पटल लोक पर आक्रमण करने वाले है ...इसीलिए महाराज को सावधान काटने जा रहा था....

अभी - सावधान तोह अभी उससे होना होगा .....इस बार अब मुजह्से नहीं बच सकता रकलशक.....

और चलवा वह से कस क कक्ष की और चला जाता है .........

कस ने जब से अपना क्रिस्टल तोडा था तब से उससे हर बात की जानकारी पाने क लिए गुप्तचर विभाग को सक्रिय कर दिया था........

वह अपनी शक्तियों से जल में केवल वह क कुछ दृश्य देख सकता था ....

कस - कहो चलवा क्या समाचार लाये हो .....रक्षक की अगली योजना क्या है ......रसातल में चल रही सभा में क्या हुआ ....सब बताओ .......

चलवा - असुर सम्राट ...उनकी अगली योजना अब आपकी पुत्री का अपहरण करने की है .....

कस - मुज़हे लगा hi था क ऐसे hi कुछ होगा .....तुम ..मदालसा क कक्ष पर पूरी तरह अपनी दृष्टि रखो .......कोई भी संदिग्ध गतिविधि होते hi तुरंत हम से संपर्क करे .......

इस बार हम उस रक्षक को सफल नहीं होने दे सकते .....

कुछ देर दोनों में बातें चली ....फिर चलवा ...मदालसा क कक्षा की तरफ चल पड़ा .....वह मदालसा गुमसुम सी बैठी हुई थी ......उस अंदाजा हो रहा था क कुछ तोह बुरा है या होने वाला है ....क्युकी उसकी माँ कुछ बताना छह रही थी लेकिन उसी समय उसके पिता उसकी माँ को ले गए और अब तक उनका कोई पता नहीं ....

और अब तोह मदालसा को भी कक्ष क बहार जसने की अनुमति नहीं थी ...उससे समाज नहीं ारः था ..क क्यों उसके पिता ने उससे ऐसे कैद कर रखा है...

चलवा गुप्त रूप से मदालसा को देख रहा था .........थोड़ी देर ऐसे hi देखता रहा फिर सैनिको को कहकर ....वह से निकल गया ....

यहाँ डॉ और ज्यादा देर नहीं करना चाहता था ...इससे पहले अभी कोई चल चले वह उससे समाप्त करना चाहता था ....

दुर्मुकासुर को अपने वरदान की शक्ति पर पूरा विश्वास था इसिलए वह अब अभी से सीधे टक्कर चाहता था .....

और भयाक्षा को भी अपने आँखों की शक्ति पर पूरा विस्वास था .....बहायाक्षा अपनी ाअंखो की शक्ति से किसी क भी मैं में भय उत्पन्न करके ...उससे कमजोर करता..... फिर उसका वध .....

डॉ असुरो की एक बड़ी सेना और भयाक्ष क साथ ...रसातल क सीमा क पास पहुंचा .......

अभी वह आगे बढे hi थे क उस और से .......रक्षक सेना की एक छोटी सी टुकड़ी ... ....जिसका नेत्तृत्व अभी कर कर रहा था ......उनके सामने आकर रुकी ......

दोनों सेना आमने सामने थी ......

डॉ ने अभी को जब देखा ......क्या बात है लगता है आज पहले की समर्पण का इरादा लेकर आये हो ऐसा लगता है ....जो इतनी छोटी सी सेना लेकर ...युद्ध करने आये हो .....

अभी - दुर्मुख युद्ध बातों और संख्याओं से नहीं जीते जाते ...यहाँ शास्त्र hi प्रश्न होते है और शास्त्र hi उत्तर...

.......और अभी युद्ध की घोषणा शंक ध्वनि से कर देता है .........

दुर्मुख अपना पहला प्रहार करता है ......अभी पर अपने दिव्यास्रो से ......अभी भी अपना दिव्या धनुष से उसके हर वार का प्रतिउत्तर दे रहा था .....

उसके वार अभी क द्वारा रोके जाने से उससे और क्रोध आने लगता और वह बिच बिच में ...अपने दिव्या ास्त्रो से रक्षक सेना पर कर देता था ......

कार्तिक और साहू उसके हर वार को विफल कर क अपनी सेना की रक्षा कर रहे थे .......

वज्रा बाहु अपने बाहुबली से हाथ में गदा लेकर तोह कंटक अपने शरीर से निकलने वाले kàanto क द्वारा असुरो से लड़ तहा था ........

कट और उदय असुर सेना क मायावी असुरो क साथ युद्ध कर रहे थे .......

यहाँ अभी और दुर्मुख का युद्ध जोरो पर था .....तोह वह भयाक्षा ने रक्षक सेना में तबाही मचा दी थी ......

जो भी उसके सामने आता ....भयाक्षा की आँखों में देखते hi उसके मैं में भय व्याप्त हो जाता जिसके कारण सामने वाला लड़ना भूल कर दर क मारे कांपने लगता था ....और ....भयाक्षा उसका वध कर देता था ......

यहाँ डॉ अब अपनी ऊर्जा क गोले से अभी पर वार कर रहा था .....जिससे अभी अपनी पांच तत्त्व की ऊर्जा क वार से रोक भी रहा था और साथ साथ में डॉ पर वार भी कर रहा था .......

जिससे डॉ थोड़ा विचलित हो जाता लेकिन उन् वारो से उसपर कुछ खास प्रभाव नहीं पद रहा था ....

दोनों अब तलवार लेकर एक दूसरे क आमने सामने थे .....जहा अभी क पास देववो की ऊर्जा से संपूर्ण दिव्या तलवार थी वही डॉ क पास ...शुक्राचार्य जी क तपोबल से स्वयं महादेव द्वारा प्राप्त तलवार थी .....जो शुक्राचार्य द्वारा डॉ को दी गयी थी

दोनों तलवारे आपस में टकराई .........डॉ ने पहला वार अभी क गार्डन पर किया ...जिससे अभी ने ज़्हुक कर उससे बेकार किया इससे पहले दूसरा वार ुस्तक पहिंच ता अभी ने उससे अपनी तलवार से ब्लॉक किया ...और एक जोर दर धक्का दिया ....जिससे ..डॉ पीछे गिरते गिरते बचा .......

अभी ने इस्सके फायदा उठाते हुए एक छलांग लगाकर ुस्तक पहुंचा और एक किक उसके सीने पर मारकर उससे निचे गिरा दिया .....और अपनी तलवार का वार उसपर किया .......डॉ ने भी बड़ी फुर्ती से अभी क वार को ब्लॉक किया और अपने घुटनो से अभी क पेट पर जोरदार प्रहार करके पीछे की और धकेल दिया .....

दोनों क एक दूसरे पर वार और तेज़ हो गए .....जिसके कारण दोनों ..क शरीर जख्मी होने लगे ......

अभी का कवच त्रिदेवो क ास्त्रो क वार को नहीं रोक सकता था ....और डॉ का शरीर अभी क दिव्या तलवार और अभी क वार की तीव्रता को नहीं सह पा रहा tha......Dono hi रक्तरंजित हो रहे थे ....

तलवार क वार से घाव तोह होते थे लेकि अभी की हीलिंग पावर और डॉ में त्रिदेव की शक्ति क कारण वह घाव भी जल्द hi भर जाते थे ...

डॉ ने सीधा अभी क पेट को निशाना बनाकर अभी की तरफ दौड़ा ....जिससे अभी ने साइड होकर उस वॉर को एक जोर दर साइड वार से ब्लॉक किया और डॉ को एक साइड ढाका दिया ..लेकिन गिरते 2 डॉ ने भी बड़ी फुर्ती से अभी क हाथ पर अपनी तलवार पूरी ताकत क साथ फ़ेंक कर मारी ....

जिससे ज्यादा कुछ तोह नहीं बस एक कट का निशान लग गया और अभी की तलवार भी हाथसे छिटक गयी ......

अब दोनों गदा लेकर ...युद्ध करने लगे ....

यहाँ भयाक्षा युद्ध करते हुए अब वज्रबाहु क सामने आगया .....वज्रबाहु ....पर उसके आँखों का प्रभाव होने लगा था जिसके कारण वह अपनी शक्ति और साड़ी युद्ध कला भूल चूका था और दर क मारे थार थार कांपने लगा था ...

इस बात का फायदा उठाकर उसने अपनी तलवार का वार वज्रबाहु की गार्डन पर कर दिया ...

वह वार वज्रबाहु तक पहुँचता ....क एक तीर सीधा भयाक्षा क पिछवाड़े घुस गया ......उसकी चमड़ी थोड़ी मोती थी इसीलिए ज्यादा तोह नहीं लेकिन थोड़ा बहुत तोह घुस hi चूका था ....जो उसकी चीख निकलने क लिए बहुत था ....

इस तरह से अजीब तरीके से लड़ने का तरीका किसका है आप तोह समाज hi गए होंगे ....

अभी क लिए इतना hi ....


अगला अपडेट जल्द hi ....
 
अपडेट - 134

अब तक आपने देखा क दुर्मुखासुर और अभी का युद्ध शुरू हो गया है ....

अब आगी ....

भयाक्षा का वार जैसे hi वज्रा बहु को समाप्त करने क लिए उसकी गर्दन तक बढ़ा .....तभी एक तीर उसके पिछवाड़े में आकर लगा .....और भयाक्षा की एक चीख निकल गयी ...और वह औंधे मुँह जमीं पर गिर गया ....और युद्ध में एंट्री हुई रिंकू की ....

रिंकू - क्या मामू यह आंखें दिखाकर ...डरा डरा कर बाचे की जान लेगा क्या .....जरा अपुन को भी डरा कर दिखा न ....

भयाक्षा बड़े मुश्किल से एयर निकलकर खड़ा हुआ ...और रिंकू की तरफ घूरकर देखने लगा .....लेकिन को पता चल गया था क इसकी शक्ति इसकी आँखों में है ......

रिंकू उसकी नज़रे बचाकर जम्प लगाकर उसके पीछे पहुंचा और एक जोरदार लात उसके उसी जगह मारी जहा तीर लगा हुआ था ....

भयाक्ष गिरते हुए बचा .........अब उसका क्रोध और बढ़ गया ...था ...और ...अब वह अपने ऊर्जा क गोलों से रिंकू पर हुम्ला कर रहा था ........

तब तक वज्रा बहु संभल चूका था ...तोह ..फिर से असुरो से लड़ने लगा ........

यहाँ यह युद्ध अभी घमासान चल रहा था ........क ....एक महाबली असुर दूषण ...असुर सेना की एक टुकड़ी क साथ ...नाग लोक क नगर क भीतर प्रवेश करने hi वाला था ......क एक शूल आकर उसके सामने चेतावनी क रूप में जमीन में घुस गया ......

दूषण ने जब देखा तोह सामने शिवली और सुलेखा ....नागलोक की सेना क साथ कड़ी है .......

दूषण - तुम्हारा इतना साहस क स्त्री होकर मेरा मार्ग रोक रही हो ......हैट जाओ मेरे रास्ते से में स्त्रियों से नहीं लड़ता .....

शिवली - क्यों दर लगता है स्त्रियों की शक्ति से ....यदि अपने प्राणो का जरा सा भी मोह है तोह पीछे हैट जा .....अन्यथा ....काल क गाल में समां जाएगा .....

दूषण - तुम जैसे कोमलांगी स्त्रियों से मुज़हे दर लगेगा .....ha..ha...ha...ha....wah क्या बात कही है ......अरे तुम तोह सिर्फ भोगने क लिए हो ......लड़ने क लिए नहीं .....

बस यही गलती कर दी ....

शिवली ने एक शूल का प्रहार सीधा उसके रथ क पहिया पर किया ..जिससे वह रथ टूट गया ...और दूषण सीधा धरती पर धुल चाटने लगा ...

सुलेखा ने भी अपनी भयंकर विषाक्त ऊर्जा क गोले उस असुर क साथ आयी असुर टुकड़ी पर बरसाने लगी .......लेकिन उन् असुरो को कुछ खास फरक नहीं पड़ा कई की असुरो की यह टुकड़ी खुद विषाक्त थी ...

दूषण निचे गिरते hi फिर संभलकर खड़ा होगया ....शिवली द्वारा रथ तोड़ने से अब उस्का क्रोध बहुत बाद गया था ....और ...वह भी अब ...विष से भरे हुए गोले शिवली पर बरसाने लगा ..

परन्तु शिवली भी एक महायक्षिणी थी ..वह इन् छोटे मोठे वार से विचलित होने वाली नहीं थी ...

शिवली ने भी अनेक ास्त्रो से उस असुर पर वार करना शुरू किया .....

सुलेखा जान गयी थी ....इन् असुरो पर उसके विष का प्रभाव नहीं होगा ....तोह वह और उसके नाग सैनिक ...अब आमने सामने की लड़ाई लड़ने लगे ...

सुलेखा बड़ी तेज़ी से तलवार .....घूमते हुए ..असुरो ..का विनाश करने लगी ......

चारो तरफ से उससे करीब 10 असुर घेरे हुए थे .........सुलेखा बड़ी तेज़ी से घूमते हुए उनके हर एक वार को ब्लॉक कर रही थी ....उन् सबने एक साथ सुलैख़ा पर वार किया ....इससे पहले वह वार सुलेखा तक पहुँचता सुलेखा जम्प करके उनके घेरे से बहार आगयी ....जिसके कारण वह आपस में टकरा गए ...कुछ तोह एक दूसरे क वार से समाप्त हो गए ...और जो बचे थे वह सुलेखा क तलवार की भेंट चढ़ गए ......

सुर्यस्था का समय हो रहा था ......असुरो की शक्ति रात में hi ज्यादा बढ़ती है ...इसीलिए तोह उन्हें निशाचर कहते है ....यानि रात में विचरण करने वाला ......

यहाँ अभी और डॉ का युद्ध बड़ा भयंकर चल रहा ...था ....सुर्यस्था होते हुए देखकर अभी रुक गया ...

अभी - दुर्मुख सुर्यस्था हो गया है जाओ ....आज ..क लिए युद्ध विराम .....

डॉ - अब तोह यह युद्ध विराम तुम्हारी सांसो क विराम क बाद hi होगा ....और ...तेज़ी से गदा का एक प्रहार अभी की छत्तो पर किया .....जिससे अभी ने पीछे हटकर अपनी गदा से ब्लॉक किया ......और बड़ी फुर्ती से घुमाकर एक गदा ...डॉ क मुँह पर दे मारी ....जिससे डॉ खून थूकता हुआ जमरन पर गिरगया ...

जैसे hi सूर्य आस्था हुआ चारो तरफ अँधेरा होने लगा .....असुर और प्रबल हो गए ...और रक्षक सेना पर भरी पड़ने लगे .......

यहाँ रिंकू ने भयाक्षा की हालत बहुत बुरी करदी थी ........रिंकू भयाक्षा क वार को ब्लॉक भी कर रहा था और साथ में लात घुसे भी बरसा रहा था .....रिंकू की तेज़ी क आगे भयाक्षा टिक नहीं पा रहा था ....और रिंकू ने मौका देखकर एक किक उसके सीने पर मारी जिससे वह चित धरती पर गिर गया ....

रात का अँधेरा फलिते hi ...भयाक्षा का रूप बफल्ने लगा और वह बदल गया एक विशालकाय महा दानव क रूप में ......

रिंकू कुछ समज़ता क उससे पहले hi ...भयाक्षा ने रिंकू को किसी खिलोने की तरह उठाकर धरती पर पटक दिया .....

इस तरह क वार से रिंकू की हालत बहुत ख़राब हो गयी थी ....

यहाँ भयाक्षा ने किसी गोरिल्ला की तरह चट्टी पीटते हुए गर्जना की .....जिससे वह धरती में कम्पन होने लगा ....और वह अपना पेअर .....धरती पर पटकने लगा ....

दूषण की भी शक्तियां सुर्यस्था होने क कारण और बलवती हो गयी थी ......और एक विशाल सर्प में बदल गया था .....

दूषण ....अपना विशाल मुख खोलकर ....अब नाग सैनिको को अपने मुँह की और खेंच रहा था ....कई ...नाग सैनिक उसके मुँह में समां गए थे ......

शिवली और सुलेखा निरन्तर प्रयास कर रही थी अपनी सेना को सुरक्षित करने क लिए ......

अँधेरे क कारण रक्षक सेना को युद्ध करने में बहुत कठिनाई हो रही थी ......

डॉ क भी सारे घाव ठीक हो चुके थे ....अभी ..ने शक्ति त्रिशूल क द्वारा आकाश में विद्युत् का आवाहन किया ...जिससे भयंकर गर्जना क साथ बिजली चमकी ....यह एक गुप्त सन्देश था ...ऐसी किसी परिस्थिति क लिए .....

रक्षक सेना पीछे हैट गयी ...अभी ने ...अब प्रगट किये अपने तामसिक रूप जिनकी शक्यिया असुरो जैसे hi रात में और बलवती होती थी ....

प्रेतराज अभी अपनी शक्ति ...भद्रा ....k..saath.....

महा भेड़िया ..अभी ...दक्ष क साथ

दानव अभी ...चैटाइली क साथ ....

और नाग राज अभी ....सुलेखा क साथ ....

अभी क यह चारो रूप अब असुर सेना पर कहर बनकर टुटपाडे ......असुर सेना में भगदड़ और चीख पुकार मच गयी ......

अभी क दानव रूप भयाक्षा क सामने आगया .....और महिमा सिध्दिहि का प्रयोग करके अपने रूप को उससे भी विशाल बना लिया .....बिना भयाक्षा की आँखों में देखे ....भयाक्षा ...उससे बार बार उठाकर धरती पर पटक दिया ....जिससे ...उसकी हालत बहुत ख़राब हो गयी .....

भयाक्षा क भी प्रहार बिच बिच में अभी को लगते लेकिन उसके वार से अभी क दानव रूप कुछ असर नहीं हुआ ......भयाक्षा ने अब अपनी संपूर्ण ऊर्जा को इकट्ठा किया ..और ...अपने निट्रो द्वारा एक ऊर्जा किरण (बीम) का प्रहार दानव अभी पर किया .....

यह नेत्रों की ऊर्जा भयाक्षा को मिले हुए वार क कारण था ...इसका प्रभाव महा विनाश कारी था ......यदि यह प्रकाश किरण किसी लगती टफ वह एक पल में रख क ढेर में बदल जाता ......

दानव अभी ने एक ढल को उस किरण क आगे किया लेकिन वह भी पिघल गयी ......उस ऊर्जा किरण को रोकने क लिए ...दानव अभी तेज़ गति से भयाक्षा क पीछे पहुंचा ...और उसकी गार्डन और कमर पकड़कर ...उल्टा उठा दिया .....जिससे उसकी आंखें ऊपर की और हो गयी ...

और अपने कंधे पर गार्डन क पीछे रखकर ....गन्ने की तरह बिच से तोड़ दिया ....और आयी दो आवाज एक भयाक्षा क चीखने की ...और दूसरी उसके कमर की हड्डी टूटने की .....

दानव अभी ने भयाक्षा को बिच से चीरकर उसके टुकड़े रणभूमि में इधर उधर फ़ेंक दिए .

असुर सेना ऐसा भयानक दृश्य देखकर दर गयी ....और कुछ तोह अपने प्राण बचने क लिए भागने का प्रयत्न करने लगी ...लेकिन Abhi...ka महा भेड़िया रूप और दक्ष जो एक बेड़िया क रूप में .थी ....और उनके साथ आयी हुई मानव भेडियो की सेना ....असुरो का काल बनाने लगी .....असुर उनका निवाला बनाने लगे .....

कुछ बलवान और मायावी असुर hi उनका सामना कर के अपने प्राणो की रक्षा कर पारहे थे ........

दूसरी और अभी का प्रेतराज रूप और भद्रा महा प्रेत बनकर असुर सेना क हृदय में भय उत्पन्न कर रही थी .....जिसके कारण असुर सेना की शक्ति क्षीण होने लगी थी .....और चैताली और उसकी दानव सेना उनका अंत कर रही थी ......

यहाँ नागराज अभी भी एक विशाल नाग क रूप में दूषण क सामने था ...जो उसके हर वार से अपनी सेना की रक्षा कर रहा था ...दोनों ...और से विष भरी ऊर्जा का प्रहार होने लगा था ......सुलेखा भी अपने नागिन रूप में आगयी थी ......और अपने नाग सैनिको क साथ विषैले असुरो का सामना कर रही थी ....

दूषण को वरदान था ...क जब तक वह स्वयं अपने सर सर किसी अस्त्र पर नहीं मारता तब तक कोई भी अस्त्र उसका वध नहीं कर सकता ....

अभी ने जब देखा क उसके वार का कुछ खास प्रभाव दूषण पर नहीं पद रहा है ....तोह उस्सने दिव्या दृष्टि क द्वारा उसकी मृत्यु का कारण खोजने का प्रयत्न किया ...तोह उससे दूषण की मौत का राज़ पता चल गया ......

शिवली भी अपने माया क प्रयोग से असुरो को भ्रमित कर रही थी ...हुए अवसर प्राप्त होते hi उनका अंत कर रही थी ...

अब नागराज अभी ने अपने पाश से दूषण का मुँह कसकर बांध कर दिया ...और अपने भयंकर विष क प्रभाव से उससे अँधा कर दिया ...

दूषण कुछ न दिखने क कारण ...और पाश से मुँह बंद होने क kaaran......bas अपना सर ीदार उधर पटक रहा था .....

नागराज अभी ने बस अपना शूल उसके आगे कर दिए ....दूषण ने जब अपना सर आगे किया तोह अभी का शूल उसके मस्तक क आर पार हो गया .....

और दूषण का अंत हो गया .....

यहाँ जब डॉ को अपने भाई भयाक्षा की मृत्यु क बारे में पता चला ......तोह उसका क्रोध बढ़ गया ......उसने हर तरह क शास्त्रों और ास्त्रो का प्रयोग कर के देख लिया था .....लाखो की संख्या की उसकी असुर सेना बस अब कुछ hi संख्या में बावहि हुई थी ....चारो तरफ बस laashe.aur खून ....की गंध से आकाश में गिद्ध जमा होने लगे ....

अब उससे त्रिदेवो की शक्ति क प्रयोग क सिवा कोई मार्ग शेष नहीं था .....डॉ ने अब आंखें बंद करके त्रिदेवो का ध्यान किया .....

उसी समय अभी ने धूल से भरे हुए एक भयंकर बवंडर को उसके तरफ भेज दिया ....जिसके कारण डॉ उस बवंडर में फँस गया था वह उस बवंडर में गोल घूमता रहा ...लेकिन उसने अपना ध्यान नहीं तोडा और महाशक्ति का अनुसन्धान किया ......

जैसे hi वह महा विनाशकारी महाशक्ति उसके हाथो में प्रगट हुई .....उसके प्रभाव से बवंडर शांत हो गया .....

जब डॉ ने सामने देखा तोह अभी कमर पर हाथ रहकर ...उसको तरफ देखकर है रहा था.......

डॉ ने कोर्ध में भरकर उस शक्ति का वार अभी पर कर दिया वह शक्ति ...अभी की तरफ बड़े तेज़ी से बड़ी और कोई कुछ समाज पाटा क एक जोरदार धमाका हुआ...

और वह सामने अभी की जगह था एक गहरा धुआँ निकलता हुआ गद्दा ....

अभी क लिए इतना hi ....


अगला अपडेट जल्द hi ....
 
बहुत बहुत धन्यवाद भाई ...आपके प्यार वंडरफुल सपोर्ट और कंसर्न क लिए

:थैंक्स: :थैंक्स: :थैंक्स:

भाई थोड़ा आराम है अभी , ...स्टोरी भी एन्ड की तरफ जा रही है बस कुछ उपदटेस और ....इसीलिए अपनी पूरी कोशिश कर रहा हु रोज अपडेट देने की .....ताकि अपना रिकॉर्ड कायम रहे ....और आप सबका साथ बना रहे .....

ऐसे hi साथ बनाये रखे ....

लेटेस्ट अपडेट 134 पोस्टेड......
 
भाई कस पटल लोक से बहार गया hi नहीं यही तोह उसका बंधन था .....



उस्सने अब तक की 13 बलिया पटल लोक में hi दी थी .....

उसने किस प्रकार इनको चुना और प्राप्त किया और उनकी बलि से उससे क्या प्राप्त हुआ यह सब आगे कहानी में पता चलेगा

ठंकु भाई सवाल करने क लिए ...


ऐसे hi साथ बनाये रखे....
 
अपडेट - 135



अब तक आपने देखा ...भयाक्षा ..अभी क दानव रूप क हाथो मारा गया ...

और अभी क नागराज रूप क द्वारा दूषण का संघार हुआ .......

शिवली ...सुलेखा ....भी युद्ध में दानवो का संग हर कर रही है ....

डॉ ने अभी पर अपना अमोघ वार किया ......

अब आगी .....

जहा डॉ का अमोघ वार लगा था वह अब एक गहरा गधा था ....अभी पर किया गया अपना वार सफल हुआ देखकर डॉ बहुत खुश हुआ ....लेकिन ये खुसी जयादा देर तक नहीं रही ......क्यों की डॉ क पीठ पर एक जोर दर कीच पड़ी जिसके लारन वह औंधे मुँह धरती पर गिर गया .....प्रहार इतना जोरदार था ......क डॉ की चीख निकल गयी ....

निचे गिरने पर इसने पलटकर देखा तोह उससे विश्वास नहीं हुआ ....सामने अभी खड़ा था ....

डॉ - नहीं यह असंभव है .....मेरा वार इस प्रकार व्यर्थ नहीं जा सकता ....महादेव का वरदान है .....जिसपर भी इसका अनसंधान किया जाए ....यह अमोघ शक्ति उसका वध कर के hi लौट टी है ....

फिर तुम इस वार से कैसे बच गए ....यह त्रिदेवो ने मेरे साथ छल किया है ......

अभी - मुर्ख असुर छल तोह तुम असुरो ने किया है हमेशा से ...त्रिदेवो क साथ ....पहले उन्हें विवश करके वरदान प्राप्त करते हो फिर ..उन्ही की सृष्टि को उनके hi दिए हुए vardan...k द्वारा ..क्षति पहुंचते हो .... ......कोई भी वरदान जनकल्याण क लिए होता ....िस्प्रकर पाप और बुराई का साथ देने क लिए नहीं होता .....

तुमसे पहले भी कितने असुरो ने ऐसे वरदान त्रिदेवो से पाए है ...parantu.....Jab भी धरम क विरुद्ध उनका उपयोग हुआ है .....तोह वह सारे वरदान धरे क धरे रह गए है ......और उन् सबका अंत हो गया .....

अन्याय और अधर्म का साथ देने वालो क लिए कोई भी देविक शक्ति फलित नहीं होती ......

इसीलिए तुम्हारा अमोघ अस्त्र भी बेकार होगया है .....यह तुम्हारे साथ होकर भी अब प्रभाव हिन् हो गया है ...

डॉ - महादेव ...छल किया है आपने मेरे साथ जब यह शक्ति मेरे किसी उपयोग की hi नहीं रही ....तोह क्यों में इससे धारण करू .....नहीं चाहिए मुज़हे ऐसी शक्ति ...मेरा बल hi पर्याप्त है ...

और वह शक्ति का एक बार फिर दानधन करता है और उससे आकाश की और छोड़ देता है ......

महादेव ने पहले hi चेतावनी दी थी ...क इसका प्रयोग केवल जब प्राणो पर संकट आया हो तब अपने शत्रुओ पर करे ...लेकिन अभी की बातों में आकर ...उस्सने ...उस अमोघ शक्ति को ....अंतरिक्ष में ऐसे hi छोड़ दिया ......जिसके कारण ...वह और प्रलयंकारी ...बनकर ...वापस उसी की और आयी .....

अभी जानता था क अब क्या होने वाला है ...तोह वह तुरंत वह से हैट गया ....और वह ढकती सीधे ...दुर्मुखासुर ...पर जाकर ...giri.....aur पल भर में वह असुर रख का ढेर बनगया ...

अब देखते है क डॉ की शक्ति का प्रभाव अभी पर क्यों नहीं हुआ .....

जब डॉ अपनी शक्ति का दानधन कर रहा था ...उस समय अभी ने एक धूल भरे बवंडर का निर्माण किया था ....

उसी का फायदा उठाकर अभी अपनी जगह से हैट गया था ....और उसने माया का प्रयोग करके एक अभी वह खड़ा किया ....

डॉ अभी को समाप्त करने की धुन में यह समाज नहीं पाया ...

और उस माया को hi अभी समज़कर शक्ति का संधान कर दिया ......

जो कुछ बचे कूचे असुर थे ...डॉ और भयाक्षा की ऐसी मृत्यु क कारण वह से भाग गए .....

अर्ध रात्रि तक आज का यह युद्ध समाप्त हो गया था ......

अभी अपने साथियो क साथ वापस नागलोक क भवन पहुंचा ...और एक कक्ष में बंद हो गया ....और किसी को भी वह व्यवधान डालने क लिए मन किया ....

यहाँ पटल लोक ..में ...कस को अपनी शक्ति द्वारा कुछ दृस्य दिखाई दिए ..जिसके कारण उससे कुछ अनिष्ट होने की आशंका होने लगी ......तभी उसने चलवा को बुलावा भेजा ......

उस समाया चलवा ..मदालसा क कक्षा की और hi जा रहा था .....क सैनिको ने उससे महाराज का सन्देश दिया ......तोह वह कस क कक्षा की तरफ चला गया...

.अंदर आकर ...उसने.. ..कस को प्रणाम किया ...

कस - कहो चलवा युद्ध का क्या समाचार है .....

चलवा चुपचाप खड़ा रहता है .....

कस - तुम बोलते क्यों नहीं ...बताओ ..क्या हुआ है ...वह ....

चलवा - यदि आप मुज़हे प्राणदान दे तोह में बताऊ...

कस - जाओ तुम्हे प्रँफान दिया ....क्यों क मुज़हे कुछ तोह आभास हुआ है ......पूरी बात बताओ...

चलवा - महाराज ...दुखद समाचार है .....और फिर युद्ध में जो हुआ वह साड़ी बात बता दी ..

कस - यह दुर्मुख भी मुर्ख निकला जो उस अभी की बातो में आगया ...ऐसी मुर्ख का मरना hi उचित है ....

रक्षक बस अब कल का दिन है तुम्हारे पास ......उसके बाद ...

तुम्हारे रक्त से hi में अपने असुर वीरो और पुत्रो का तरपान करूँगा .....

चलवा - महाराज यह भी समाचार है क अभी किसी भी समय आपकी पुत्री का अपहरण कर सकता है ....

कस - तुम तुरंत जाओ और उसके कक्ष क भीतर hi गुप्त रूप से रहकर अपनी पूरी दृष्टि बनाये रखो .....

चलवा चला जाता है मदालसा क कक्षा में ......

और यहाँ कस भी गुप्त रूप से पूरी सतर्कता से उसके कक्ष पर अपनी दृष्टि बनाये रखता है ......

क्यों की अब मदालसा hi उसके उद्देश्य को पूर्ण कर सकती थी ......

यहाँ चलवा गुप्त रूप से मदालसा क कक्ष में प्रवेश कर जाता है ......

मदालसा ...बीएड पर बैठी हुई अपने मनो भावो से hi जुज़ रही थी ......तभी उससे ऐसा लगा क किसी ने उसका हाथ पकड़ रखा है ....जब तक वह कुछ समज़ती वह किसी और hi जगह पर किसी अलग हो कक्ष में थी .......

मदालसा - कौन हो तुम ....और मुज़हे यहाँ क्यों लाये हो....

तभी उसके सामने चलवा प्रगट हो गया ........

मदालसा - तुम्हारा साहस कैसे हुआ मुज़हे यहाँ लाने का ......और क्यों लाये हो मुज़हे ....

अभी तुरंत मुज़हे वापस ले चलो ...अन्यथा ....तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा ......

चलवा - शांत ..राजकुमारी जी शांत .....जरा अपने पीछे देखो ...आपको कारण समाज आजायेगा ...

जब मदालसा ने पीछे मुड़कर देखा तोह वह अभी ध्यान मुद्रा में बैठा .था ...अभी वह कुछ और बोलती ...तोह उससे कुछ गिरने की आवाज आयी ....

जब उसने उस दिशा में देखा तोह वह चलवा का निर्जीव शरीर पड़ा हुआ है .....वह कुछ समाज पाती क उससे अभी की आवाज आयी ....सवागत है राजकुमारी जी ....

मदालसा - एक पल तोह अभी को देखकर और उसकी आवाज सुनकर खुश हो गयी ...और वह अभी की और बढ़ी ..लेकिन तभी उससे कस की बात याद आयी ....तोह वह रुक गयी...

मदालसा - तोह आप हो मुज़हे यहाँ लेन वाले ....लेकिन यह चलवा तोह पिताश्री का विश्वसनीय था ..फिर इसने तुम्हारे कहने से मुज़हे यहाँ क्यों laaya......aur अब इससे क्या हो गया .....मुज़हे कुछ समाज नहीं आरहा है .....

तोह आईये देखते है क आखिर क्या माजरा है ....

अभी जब नागलोक में अपने सभी साथियो ल साथ युद्ध निति पर चर्चा कर रहा था ......

तब उसका ध्यान एक गमले में लगे हुए पौधे पर गया ....

अभी यहाँ क सभागार में कई बार आया था , उससे यहाँ की हर वास्तु क बारे में पता था ....

यह गुमला उसने पहले यहाँ नहीं देखा था .....तोह सोचा शायद कोई रख गया होगा ......

परन्तु उसका ध्यान बार बार उसी गमले की तरफ जा रहा था ...तब उसने दिव्या दृस्टि क द्वारा देखा तोह पता चला यह तोह कस का कोई गुप्तचर है ....जो रूप बदलकर यहाँ छिपा हुआ है ....

तोह अभी ने उससे अपनी ऊर्जा से बांध दिया जिससे वह यहाँ से भाग न सके ...

सभा समाप्त होते hi अभी ने तुरंत वह गुमला अपने काश में ले आया और उससे जमीं पर पटक दिया ....और ...अपने मंत्र शक्ति क प्रयोग से उससे उसके असली रूप में ले आया .....

चलवा अभी को अपने सामने देखकर ....वह से टेलिपोर्ट होने का प्रयत्न करने लगा ...लेकिन अभी की ऊर्जा में बंधा होने क कारण वह ऐसा कर नहीं पाया.....

अभी उससे उसके स्वामी क सारे भेद निकलने क लिए उससे प्रताड़ित करेगा ...इसी विचार से उसने गले में पड़ा हुआ लॉकेट चबा लिया जिसमें विष था ......और मर गया ...

अभी ने उससे बचने का प्रयत्न किया लेकिन वह मर चूका था ......


तब ..अभी ..न अपने ..कक्ष क द्वार बढ़ किये ...और ......

परकाय प्रवेश की सिद्धि क द्वारा अपना शरीर छोड़कर उसके शरीर में प्रवेश कर गया .....और पहुँच गया पटल लोक ....

पटल लोक का रक्षा कवच कस ने ऐसा बनाया था क असुरो क सिवा यदि कोई और प्रवेश नहीं लार सकता था ...फिर भी ...यदि कोई उस सुरक्षा घेरे को तोड़कर ..अंदर आता तोह इसकी सुचना सीधे कस तक पहुँच जाती ....

इस समय अभी चलवा क शरीर में था तोह वह आसानी से पटल लोक में प्रवेश कर गया ....डॉ से भी वही मिला था ...और कस क मैं में अभी द्वारा मदालसा क अपहरण की योजना क बाते में भी उसी ने बीज बोया ...

जिसके लारन मदालसा क कक्ष तक उसका रास्ता आसान हो गया ....

उसके बाद वह वह से युद्ध क समय रसातल पहुँच गया ...और युद्ध क बाद ...फिर चलवा क शरीर में प्रवेश करके ....मदालसा को यहाँ ले आया ....

ात प्रेजेंट....

मदालसा - आप हमे यहाँ क्यों लाये हो ....हमे वापस अपने महल में छोड़ आओ..

अभी - क्या सच में तुम जाना चाहती हो .....

मदालसा - haa.....ab मुज़हे आपकी सचाई पता चल गयी है ......मुज़हे जाना है ...मैं आपको देखना भी नहीं चाहती ...

अभी - क्यों ज़हूत बोल रही हो ....मदालसा ...तुम्हारी आअंखें कुछ और कह रही है ......क्यों अपनी भावनाओ को छुपा रही हो ......

मदालसा - ऐसा कुछ नहीं है ....मेरी आपके प्रति कोई भावनाये नहीं है ......मैं आपसे प्रेम नहीं करती ......

अभी - प्रेम क बारे में तोह अभी मैंने कुछ कहा hi नहीं .....

देखो मदालसा तुम्हारे ह्रदय की भावनाये शब्दों क द्वारा बहार आरही है ....उससे मत रोको

मुज़हे पता है तुम मुज़से प्रेम करती हो ...

मदालसा - में नहीं कर सकती आपसे प्रेम ...आपका हमारा कोई ...सम्बन्ध नहीं हो सकता ....

अभी मदालसा क पास जाकर उसकी आँखों में देखता है ......अभी की आँखों में देखकर वह खो सी जाती है ......

उससे वह अपने लिए अतः प्रेम दिखाई पड़ता है .....

अभी उसके और पास जाता है ....दोनों एक दूसरे की साँसों .....को महसूस कर रहे थे ....

अभी को अपने इतने करीब पाकर उसका दिल जोरो से धड़कने लगता है ......लेखों फिर वह अभी को धक्का देकर पीछे हैट जाती है ...

मदालसा - नहीं यह नहीं हो सकता ....हमारा मिलान नहीं होसकता .....आप हमारे भाई क हत्यारे है .......मैं कैसे अपने hi परिवार क सबसे बड़े शत्रु से प्रेम कर सकती हु......

या तोह मुज़हे भी मार दीजिये ...या ...वापस छोड़ आईये ....एयर घुटनो पर निचे बैठकर रोने लगी .....

अभी क लिए इतना hi .....

अगला अपडेट कल....


 
भाई जब से स्टोरी स्टार्ट की है मैंने रोज रेगुलर अपडेट दिया है



लेकिन कभी कभी लाइफ में कुछ पर्सनल प्रोब्लेम्स और हेल्थ इश्यूज भी होते है ..

फिर भी मैंने रीडर्स की भावनाओ को ध्यान में रखकर पूरी कोशिश की है रोज़ अपडेट देने की ....

अभी तोह 3 या 4 अपडेट में स्टोरी भी ख़तम होने वाली है......

आप मेरी भी प्रॉब्लम संजू ....

खैर आज का दूसरा अपडेट दे दिया है



 
अपडेट - 136



अब तक आपने देखा दुर्मुखासुर अपने hi शक्ति द्वारा मारा गया ...

अभी ने चलवा क रूप में पटल लपक में प्रवेश किया और मदालसा को ले आया ....

अब आगी........

मदालसा - नहीं यह नहीं हो सकता ....हमारा मिलान नहीं होसकता .....आप हमारे भाई क हत्यारे है .......मैं कैसे अपने hi परिवार क सबसे बड़े शत्रु से प्रेम कर सकती हु......

या तोह मुज़हे भी मार दीजिये ...या ...वापस छोड़ आईये ....एयर घुटनो पर निचे बैठकर रोने लगी .....

अभी - मदालसा पहले तोह शांत हो जाओ .....और मेरी पूरी बात सुनो और देखो जो मैं दिखाना चाहता हु ....फिर तुम्हे जो उचित लगे ...वह निर्णय लेने क लिए तुम स्वतंत्र हो .......

तुम क्या समज़ती हो तुम्हरे पिता बहुत बड़े तपस्वी है ...जो संसार क कल्याण क लिए तपस्या कर रहे है .......

मदालसा - में जानती हु की वह असुर जाती क उठान क लिए सड़ना कर रहे है ......और अपने उठान का अधिकार तोह सब प्राणियों को hai...ismein बुराई कहा है .....

अभी - अपना और अपने समाज का उठान चाहने में कोई बुराई नहीं है ....परन्तु उसके लिए अनगिनत निरपराध लोगो की हत्या कैसा जघन्य कर्म सर्वथा अनुचित है ....

क्या अपने समाज और जाती क उठान क लिए संपूर्ण संसार का नाश उचित है ....

मदालसा - नहीं ....यह सर्वथा अनुचित है ....परन्तु इससे मेरे पिता और भाइयो का सम्बन्ध .....

अभी - सम्बन्ध है मदालसा ...तुम स्वयं देखो ....

और अभी उसके सामने वह सब दृस्य दिखता है .....जिसमें कस और उसके पुत्र क अपराधों की पूरी दास्ताँ मदालसा को दिखाई देती hai.....k कैसे वह निर्हिया लोगो की हत्या करते है ....अपने भय का शाशन चलते है .......

अभी - तुम कहती हो ने क तुम्हरे पिता साधना में रत है ...तोह यह देखो किस प्रकार की साधना करते है वह .....

तब अभी मदालसा क आगे वह दृश्य प्रगट का देता है .....जिसमें कस ने 13 कन्याओ की बलि दी थी और उनके मॉस से हवन किया ...था ....

मदालसा यह दृस्य देख नहीं पाती और उल्टिया करने लग जाती है .....

मदालसा - नहीं यह सब झूट है ...आपने अपनी माया का प्रयोग करके मुस्हे यह सब दिखाया है ....

अभी - अच्छा यह सब ज़हूत है ...तोह बताओ .....इस समय तुम्हारी माता कहा है .....

मदालसा - पिताश्री को उनसे कुछ काम था तोह वह उनके साथ गयी थी ....

अभी - और जाते जाते उन्होंने तुम्हे कुछ कहने का प्रयत्न नहीं किया था ...जिससे तुम समाज नहीं सकीय थी ....

मदालसा - यह सब आप कैसे जाते हो ......हां वह कुछ कहना चहरहि थी ...परन्तु मेरी समाज में नहीं आया ....

अभी - जानना चाहती हो की वह तुम्हे क्या बताना छह रही थी और उनके साथ क्या हुआ ...तोह देखो .

फिर अभी ने मदालसा क आगे वह दृश्य प्रगट किया ...जब कस ...डॉ और भयाक्षा से मदालसा क बलि क बारे में चर्चा कर रहा था .....मदनसा चुप कर देख रही थी .....

उसके बाद मदनसा और कस की बातें और कस क द्वारा उससे कैद में डालना .....

यह सब देखकर मदालसा बुरी तरह टूट गयी ...उससे समाज नहीं आरहा था क किस पर विश्वास करे ....जो देख रही है उसपर ...

या .. जो उसने अब तक अपने पिता का अपने प्रति स्नेह देखा उसपर .......

दिल कह रहा है क अभी उससे कभी असत्य नहीं बोल सकता .....

और दिमाग कह रहा है ...शायद जो वह यह सब देख रही है वह ज़हूत हो ....

यदि अब भी मेरी बातो पर विश्वास नहीं है ....तोह ले लो तुम्हारी माता का पत्र ....और उनके गले का हार और वस्त्र का टुकड़ा इससे तोह तुम पहचानती हो ......

मदालसा ने जब अभी क हाथो में अपनी माँ क गले का वह हार देखा जो वह हमेशा पहनती थी ....और उस वस्त्र का टुकड़ा देखा जब उसने अंतिम बार अपनी माँ को देखा था .......

मदालसा - यह आपको कहा मिला क्या आप माँ से मिले हो ...यदि वह कैद में है तोह कैसे आप वह तक पहुंचे ....

अभी - जैसे में तुम तक पहुंचा ..वैसे..

hi यह ..लो ..पढ़ो इस पत्र को .......

मदालसा ने अभी क हाथो से वह पत्र लेकर पढ़ा ...जैसे जैसे वह पड़ती जा रही थी उसकी आँखों में आंसू बह रहे थे ....उससे आज अपने पिता की सच्चाई जानकार बहुत दुःख हुआ ....और वह फफककर रोने लगी .......

एक बेटी क लिए उसका पिता उसका रक्षक होता है उसका आदर्श होता है .....और जब उससे पता चले क वह रक्षक नहीं भक्षक है तोह उसके दिल पर क्या बीतेगी...

मदालसा इस बात को सहन नहीं कर पारहि थी ....

अभी उसके पास बैठ जाता है और उसके कंधे पर हाथ रखकर उससे सांत्वना देता है .......अभी क सहनुभूति और प्रेम पूर्वक स्पर्श से मदालसा पिघल जाती है है और अभी क गले लगकर रोटी है ...अभी भी उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उससे सांत्वना देता है .....और उससे रोने देता है ...जिससे उसस्के दिल का सारा दर्द आंसुओ क द्वारा बहार निकल जाए .......

ऐसे hi कुछ देर वह अभी क गले लगकर रट रहती है ......

कुछ देर सांत्वना देने क बाद अभी मदालसा से अलग होता ...है..

अभी - मदालसा अभी यह समय आंसू बहाने का नहीं है .....निर्णय लेने का है......

मदालसा - निर्णय ..कैसे ...

अभी - पहले तुम यह बताओ क्या वास्तव में तुम्हारे मैं में मेरे लिए कुछ भावनाये नहीं है .....सच बताना ....क्यों क ..में सब जानता हु ....क ...कितने वर्षो से में तुम्हे स्वप्न दिखाई देता रहा हु ....और किस प्रकार तुम्हे मुजह्से प्रेम हुआ ....सब कुछ......

मदालसा - क्या यह सब माँ ने बताया ...जब आप माँ से मिले थे तोह उन्हें भी मेरी hi तरह यहाँ क्यों नहीं लाये .......

अभी - पहले तुम्हारा निकलना जरुरी था .......पहले मेरे प्रश्न का उत्तर दो ....तुम्हारी माँ को कुछ नहीं होगा ...यह मेरा वचन है ..

क्या तुमने कभी सोचा क जिसको कभी देखा नहीं जाना नहीं वह इस तरह स्वप्न में क्यों आता है ....और बिना देखे तुम्हे उससे प्रेम भी हो जाता है ........

मदालसा - बहुत बार सोचा लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला ......बहुत बार आपको भूलना चाहा परन्तु भुला नहीं पायी ......और एक भय भी था ..क क्या आपकी भी मेरे प्रति वही भावनाये है ....जो मेरी है .....

अभी - हां ....जिस दिन मैंने तुम्हे पहली बार देखा था ....उसी दिन से तुम भी मेरे मैं में बस गयी हो .......

फिर अभी ने अपना सब रहस्य और 14 विवाह का रहस्य मदालसा को बता दिया ......

मदालसा यह जानकार बहुत खुश हुई क वह अभी की जन्मजन्मान्तर की संगिनी है ......

अभी - अब तुम अपना निर्णय बताओ क्या तुम ..इसी समय मुजह्से विवाह काटने क लिए तैयार हो .....

मदालसा - परन्तु इस समय ऐसी परिस्थिति में ....कैसी आप समाज सकते हो ....मेरे मैं की इस समय की स्थिति को .....

अभी - मदालसा हमारे पास अब समय नहीं है .....ज्यादा विचार करने क लिए ....क्यों क सुबह तक तुम्हारे पिता को पता चल जाएगा .....तुम्हारे वह नहीं होने का ......जिसके कारण वह महा विनाश फैलाएंगे ...और उन्हें रोकने क लिए हमारा मिलान होना जरुरी है ....

परन्तु यदि तुम नहीं चाहती हो तोह में तुमपर ज्यादा दबाओ नहीं बनाऊंगा .....क्योकि विवाह ....दबाओ से नहीं विश्वास और प्रेम से hi सफल होते है ......

मदालसा - आप सत्य कह रहे है ....परन्तु मेरा मैं माँ क लिए बहुत चिंतित है ...क्या आप उन्हें यहाँ ला सकते हो .....

अभी मदालसा क मैं का हाल समज़कर ...फिर से चलवा क शरीर में प्रवेश कर जाता है ...और पहुँच जाता है जहा मदनसा कैद थी ......और उससे टेलिपोर्ट होकर ..यहाँ ले आता है .....

मदालसा अपनी माँ को अपने सामने देखकर बहुत खुश हो जाती है ....और गले लग जाती है ....दोनों माँ बेटी की आँखों में आंसू थे ...दोनों एक दूसरे क आंसू पोंछते है ....और सांत्वना देते है .....कुछ देर दोनी की बात होती है ....

अभी भी शिवली को अंदर बुला लेता है ....और उससे साड़ी स्थिति समज़ह देता है .....शिवली भी मदालसा को देखकर बहुत खुश हो जाती है ...क्यों की मदालसा भी ..शिवली का hi एक रूप थी ...

अभी वह सर चलवा क शव को हटवा देता है है ...और ...अपनी सभी पत्नियों को वह बुलाता है .

और सबके सामने आसुरी पड़ती से मदालसा की मांग में होने रक्त भर देता है .....अभी और मदालसा दोनों ..मदनसा का आशीर्वाद लेते है ....

मदनसा एक तरफ तोह बहुत खुद तिह अपनी पुत्री क लिए ...और दूसरी तरफ अपने सुहाग क लिए थोड़ी दुखी भी थी ....क वह अपने पति को कभी भी दुष्कर्म करने से रोक नहीं पायी ..अपना पत्नी धरम चाहकर भी निभा नहीं paayi.....aur आज वही दुष्कर्म उसके पति को मृत्यु क मुख तक ले आयी .

वह जानती थी की संसार की रक्षा क लिए कस की मृत्यु आवश्यक भी है ....वह अपने प्रारब्ध को स्वीकार कर चुकी थी ......

अभी मदालसा को लेकर ..अपने कक्ष में पहुंचा ........

अपनी अंतिम पत्नी क साथ मिलान क लिए .....

अभी क लिए इतना hi ....


अगला अपडेट रात को ....
 
बहुत बहुत धन्यवाद नैना जी आपके और सुपर अवेसमे फैंटास्टिक ...और ब्रिलियंट रिव्यु क लिए

:थैंक्स: :थैंक्स: :थैंक्स:

आपका कमेंट पढ़कर अच्छा लगा ...हमेशा की तरह प्रेरणादायक ...

जो और अच्छा लिखने की प्रेरणा देता है ..

:थैंक्यू: :थैंक्यू: :थैंक्यू: :थैंक्यू:

ऐसे hi साथ बनाये रखे ....



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