ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 4 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

अपडेट - 29

अब तक आपने देखा .....ा1 ने

मानसरोवर झील से अपनी तलवार

.....और वरुणस्रता प्राप्त किया ...

गक क शक्तियों द्वारा आश्रम में अपने मित्रो को देखा .....

और शालू से भी संपर्क किया

अब आगे......


गक - अब बताये आपको किस और जाना है

में - मित्र अब मुज़हे ज्वालामुखी पर्वत जाना है......

गक - आप यदि मेरी बात मानोगे तोह कुछ कहु.....

में - हां ..है क्यों नहीं इस्स्में संकोच kaisa......kaho

गक - मित्र आज आप यही आराम कर ले तोह अच्छा है .....जिस जहा आप जा रहे हो वह तोह आपको अपनी बहुत ऊर्जा लगनी padegi.......isiliye आप यही पर

अपनी ऊर्जा को और नियंत्रित और सटीक उपयोग करने का अभ्यास ..


और अपने प्राप्त हुए ास्त्रो क सञ्चालन का अभ्यास कीजिये है.....

में - बिलकुल सही कहा है मित्र....

इस सफर में मेरी बहुत ऊर्जा का प्रय्ग हुआ है .....और मुज़हे भी थकन सी महसूस हो रही है....

फिर गक ने अपनी शाक्यों द्वारा एक सूंदर कुटिया का निर्माण किया ...उसस्के अंदर .....भोजन जल और आरामदायक शैया का प्रबंध....

में - वह मित्र बहुत अच्छा प्रबध किया hai......abhi तोह सुबह क सिर्फ 9 बज रहे है....

थोड़ा युद्ध कला का अभ्यास हो जाए

पीहर में वही गक क साथ युद्ध कला का अभ्यास करने laga....talwar बाजी

kushti.....aadi ....लेकिन इस बात का भी ध्यान रहक रहे थे क किसी को चोट न

आये ....

आज में पहले से बहुत बहुत बेहतर और तककटवार अपने आपको महसूस कर रहा था .....शायद मेरे भीतर सम्माए इन् ास्त्रो क कारण हो...

गक - बस ...अब मुजह्से आपका सामना नहीं होगा .....आप तोह मेरे जैसे कइयों को बिना शक्तियों क सिर्फ युद्ध कला में परास्त कर सकते हो....

फिर - हमने साथ में खाना खाया

और आराम काने लगा...

गक भी कल आने का कहकर चला गया था .....में अब रक् क अपने सफर क बारे में सोचते सोचते सो गया

मेरी नींद जब खुली तब देखा की सूर्य अस्त होनेवाला है ....में फिर सतलज नदी क किनारे जाकर स्नान किया और ध्यान करने लगा.....

ध्यान में अपने भीतर मुज़हे आपने शास्त्र दिखने ... lage.....aur उनकी ऊर्जा

तभी मुज़हे मेरे भीतर से आवाज आयी

अरे क्यों इतना ध्यान साधना और शक्तियों क पीछे पड़ा है......

क्या करना तुज़हे िंनशक्तियों का

जीवन बार बार नहीं मिलता ...खूब मज़े करो आपनो का प्रेम पाओ ...और संसार क भोगो का खूब आनंद उठावो एहि जीवन है...

तभी दूसरी आवाज -- अरे ..अरे यह क्या कह रहा है ....तुम इस्सकी बातें बिलकुल मत सुंनना यह सब गलत बोल रहा hai......bina उद्देस्य क जीवन भी कोई जीवन hai......aur मानव जीवन की सार्थकता तोह तभी है जब वह लोककल्याण और आत्मकल्याण करे....

पहली आवाज - नहीं यह गलत है ....ऐसा जीवन किस काम का जिसमे हम hi आनंद न उठा सके

दूसरी आवाज -- तुम इस्सकी बातें बिकुल न sunnana.....shaktiya सभी को प्राप्त नहीं hoti......tumhe हो रही है िस्डका अर्थ है की स्वयं परमात्मा ने तुम्हे चुना है .....

कितने भाग्यशाली हो तुम

दोनों का शोर सुनकर में बड़ा हैरान था की अब यह क्या बाला है..

में - कौन हो तुम दोनों ..और मेरे भीतर क्या कर रहे हो....

दूसरी आवाज - हम आपके hi अंतकरण का हिस्सा है.....

आपका मनोमय कोष पूरी तरह जागृत हो गया hai....jiske दो रूप है में अंतर्मनन हु और यर्ह बहिरमसं है

अंतर्मन व्यक्ति को अच्छे कार्य क लिए प्रेरित करता है ......और बाहिर मैं व्यक्तल को वासना और भोगो की तरफ ले जाता है.....

पहली आवाज - तुम क्यों इससे सारे भेद बता रहे हो मेरा दम घुट रहा है मुज़हे bachao......mein अंदर गम हो रहा हु.......

तभी में ध्यान में और गहरा उतरा तोह मुज़हे अपने भीतर एक दिव्या श्वेत प्रकाश का अनुभव हुआ ...और असीम आनंद की अनुभूति हुई...

फिर अंतर्मनन से आवाज आयी...

धन्य हो तुम ...आज तुमने अपने बाहिर मन पर विजय प्राप्त ki....jisse बड़े बड़े योगी भी वश में नहीं कर paate......ab से तुम्हे संसार की कोई बुराई छू भी नहीं पाएंगे...

अब हर प्रकार की माया की वास्तविक ता तुम अंतर्मन में ध्यान लगाकर देख सकते हो...

रात को फिर थोड़ा इधर उधर प्रकृति का आनंद लिया ...और सुबह फिर चल दिया गक क साथ ज्वाला मुखी पर्वत

गक मुज़हे जहा लेकर गया वह से थोड़ी दूर मुज़हे बड़ा hi सूंदर बर्फ से ढाका हुआ चंडी की तरह चमकता

हुआ एक पर्वत दिखाई दिया.....

में और गक हैरान हो गया

में - यह कहा लाये हो मित्र यहाँ तोह चारो तरफ बर्फ क पर्वत है ....जवालामुखी पर्वत कहा है...

गक -मुज़हे खुद पता नहीं काल रहा है ...मैंने तोह अपनी भ्रमण शक्ति

को ज्वालामुखी पर्वत का hi आदेश दिया tha.....phir हम यहाँ कैसे आकर पहुंचे....

मुज़हे कुछ संशय हुआ की हो न हो यह किसी की माया है....... में आगे बड़ा थोड़ी hi दूर जाकर मुज़हे बहुत ज्यादा गरम हवाओ का ाशस हुआ ..जैसे की चारो तरफ आग लगी हो ...

तब मैंने अपने अंतर्मन का सहारा लेने का सोचा और भीतर ध्यान लगाया.

अंतर्मनन का ध्यान करते hi उसकी ऊर्जा मेरे नेत्रों में समां गयी और मैंने अस्प्ने असंकें खोली तोह सामने बड़ा hi हैरान कर देने वाला दृश्य देखा

जहा में खड़ा हु उससे थोड़ा hi आगे पिग्ले हुए लाल लावे का जैसे बहुत बड़ा कोई सरोवर हो ...और उससे आगे सरोवर क अंत में एक धधकता हुआ ज्वालामुखी पर्वत

आश्चर्य की बात यह थी की इस गरम लावे क पास यह बर्फीली जगह कैसे

गक को कुछ समाज में नहीं आरहा था में क्या देख रहा हु....

अब प्रश्न यह था की सत्य तोह मुज़हे दिख रहा है अब इस माया का आंत कैसे करू.....

तभी मुज़हे कुछ सुज़हा और मैंने अपनी पृथ्वी तत्त्व की ऊर्जा को एकत्रित किया और आगे लावा की तरफ फेंकी

और देख देखते वह की माया समाप्त हो गयी ...चारो तरफ बहता लावा ..

गक - देखो मित्र यह रहा ज्वालामुखी पर्वत

में - हां मित्र

अब प्रश्न यह था की कैसे इस भयंकर जवालामुखी क सरोवर को पार करके उस पर्वत पर पहुंचा जाए......

अभी क लिए इतना hi.....

अगला अपडेट रात को ......
 
अपडेट - 30

अब तक आपने देखा ा1 ज्वालामुखी पर्वत पहुंच चूका है.......

अब आगे.......


में और गक वह खड़े धधकते हुए लावा और पर्वत की और देख रहे थे जिसमे से निरन्तर विस्फोट हो रहा था और हर विस्फोट क साथ निकल रहा था लाल लाल लावा , मैंने पास hi पड़ा एक पत्थर उठाकर उसमें फ़ेंक कर देखा तोह , वह पत्थर उस लावा को छूटे hi पिघल गया......

तब मैंने सोचा की अग्नि हुई अग्नि को केवल जल hi शांत कर सकता है.

तब मैंने अपनी जल तत्त्व की ऊर्जा को एकत्रित करके एक बड़ा सा जल का गोला सा बनाया और सामने लावा क सरोवर मरीन छोड़ diya......jal लावा पर गिरते hi बड़ी मात्रा में धुआँ उत्पन्न हुआ

गक - वह मित्र यह युक्ति काम कर सकती है......

उसके पास भी जल और वायु तत्त्व की पावर थी तोह वह भी मेरे साथ उस लावा पर जल की वर्षा करने लगा

हम दोनों ने इतनी मात्रा में जल बरसाया की उतने जल से एक तालाब भर जाए.......

चारो तरफ दुआ hi धुआँ हो गया....

तब हमने वायु तत्त्व का प्रयोग करके उस धुवे को उदा दिया और देखा की लावा ऊपर से ठंडा हो गया है और काले पत्थर मैदान क जैसा लग रहा है........

हमने सोचा की हमारी युक्ति कामयाब हो गयी....

जैसे hi कदम आगे बढ़ाया तोह हुआ एक बड़ा सा dhamaka....aur सरोवर का जमे हुए लावे की जमीं हिलने लगी और फिर वह लावा वैसे hi हो गया जैसे पहले था.....

अब हम सोच hi रहे थे की क्या किया जाए .....तभी उस लावे की झील से प्रगट हुए भयंकर अग्नि दानव

उनका शरीर धधडकते हुए लावे से बना हुआ था जिनमे से आग की लपटे निकल रही thi....unki संख्या लगभग 100 क करीब hogi...saare 50 फट क आसपास hi होगी

प्रगट होते hi सभी अग्नि दानव जोर से गरजने लगे .....

उनको इतने संख्या में देखकर में और गक भी सावधान होने लगे

हम फिर जल तत्त्व का उपयोग करके वह मूसलाधार जल की वर्षा करने लगे.....

लेकिन क्या जल उनतक पहुँचने से पहले hi भाफ बनकर उड़ने लगा अब वह दानव हमारी तरफ बढ़ने लगे

में और गक अपनी अपनी ऊर्जा से उननपर वॉर करने लगे लेकिन हमारे वॉर का उन् क ऊपर कोई असर न होते देखकर अब हम सोचने लगे कैसे इनका सामना किया जाए

तभी एक दानव ने मुझपर हमला कर diya.....usska एक प्रहार सीधा मेरे चट्टी पर पड़ा और में दूर जाकर गिरा...

गक ने अपनी अपने भीतर से वैसा hi एक दानव प्रगट किया .....जिस्सके साथ में लढा था जब मेरा सामना उससे पहली बार हुआ था...

गक और उसका दानव से तलवार से उन अग्नि दानव का सामना कर रहे थे तोह मैंने भी अपनी दिव्या तलवार को याद किया और भीड़ गया उनसे...

वह दानव लगातार आग से हुम्ला कर रहे the....hum बचे हुए अपना वॉर कर रहे थे ....मैंने तभी एक जोरदार वॉर सामने आरहे 10 दानवो पर वायु की गति से अपनी तलवार से वॉर किया....

और वह दानव काट कर वापस लावे में गिर गए...

अपने वॉर को सफल होते देखकर में बड़ा प्रासना हुआ की तभी वह कटे हुए 10 दानव वापस उस लावे से प्रगट हो गए..

तभी एक अग्नि दानव क वॉर से गक का दानव जलकर भस्म हो गया .....

यह देखकर गक न जाने क्यों

मुस्कुराने लगा ...

तभी मैंने देखा की वह गक क बसम हुए दानव की राख से 4 दानव और प्रगट हो गए ...वह चार दांव जैसे hi आगे बढे तोह अग्नि दानव क प्रहार से वह भी भस्म हो गए और उनकी भस्म से 8 दानव प्रगट हो गए

में - यह क्या माया है मित्र...

गक - यह मुज़हे मिला हुआ वरदान है मित्र इसीलिए मेरा नाम गुणक है

जब तक मुज़हे कोई क्षति नहीं पहुँचती यह ऐसे hi बढ़ते रहेंगे

ऐसे hi गक क दानवो की संख्या 60 क करीब हो गयी थी हम सब अपने वॉर से उन् अग्नि दानवो को अपनी टॉवर क वॉर से समाप्त काने का प्रत्न करने lage.......tabhi एक आग का गोला गक को आकर लगा और वह दूर जाकर गिरा

और उसके सारे दानव जाने कहा गायब हो गाये....

हम तोह अभी लावे क सरोवर में भी प्रवेश नहीं कर पारहे थे और....

और वह दानव वह से निकल निकल कर

हमारी और बढ़ रहे थे.....

मैंने सोचा की ऐसे तोह हम कभी उस पर्वत पर पहुंच नहीं पाएंगे

की किया जाए .....तभी मेरे हाथ की अंगूठी चमकने लगी और महागुरु की आवाज आयी...

महागुरु - इस विपत्ति का समाधान तुम्हारे hi पास है पुत्र बस अपने बुद्धि से काम लो ..विचार कर

तभी में विचार करने लगा कुछ कुछ उपाय नज़र आने लगा .

में - गक तुम जल और वायु की ऊर्जा से एक शीट लहार का निर्माण करके एक एक दानव पर छोड़ो......

तब मैंने अपनी गदा को अपने भीतर से परगट किया ...

जैसे hi गक ने शीट लहार लावा से निकलते हुए दानव पर छोड़ी वह दानव पाथेर की तरह जमने लगे और में गदा से उन्हें नष्ट कर रहा था

उनका शेर मेरी गदा क प्रहार से पत्थर क टुकड़ो में बदलने लगे

लावा hi उनकी जीवन शक्ति थी उससे उनका संपर्क टूटते hi उनका नाश होने लगा....

और इसी तरह सभी अग्नि दानव समाप्त हुए ......

अब सिर्फ उस झील को पार करके पर्वत तक पहुँच न था..

तोह हमने शीट लहार का प्रयोग करके उस झील को जम्ने का प्रयत्न kiya..........toh फिर महागुरु की आवाज आयी......

पुत्र ध्यान रहे जिस अस्त्र को तुम प्राप्त करने आये हो वह अग्नि तत्व की ऊर्जा क है ....तुम्हें उन्हें इस गरम लावा का सामना करते हुए प्राप्त करना होगा.....

अब क्या किया जाए....

तभी विचार आया की अग्नि ...अग्नि को जला नहीं सकती...

फिर मैंने मणिपूरक चक्र को जागृत कर क उस की सम्प्राणा ऊर्जा ...

से अपने शरीर को अग्नि रूप में बदलने लगा ...अब मेरे श्री से भी भयंकर अलग की लपटे निकलने लगी

और में तीव्र गति से लावे पर चल कर पहुंच गया ज्वालामुखी पर्वत

और उस पर्वत क शिखर पर जाकर कूद गया गरम लावे क भीतर

तैरते हुए मुज़हे एक शूल दिखा..

इस पिघले गरम लावे में भी वह शूल अपने स्वरुप में था ...

में समाज गया की यही अग्नि शूल hai..usse लेकर में बहार निकला ..

मुज़हे अपनी ऊर्जा काम होती हुई लगी..

में उस शूल को लेकर अपनी पूरी ऊर्जा को लगाकर उस ज्वालमुखी पर्वत से बहार आया ...वह आकर देखा की न तोह अब कोई लावा वह था और न hi उस पर्वत से कोई जवालामुखी....

मेरी बहुत सी ऊर्जा इस कार्य में लग गयी थी इसीलिए मेरी असंखें बंद होने लगी और में बेहोश हो गया...

बेहोशी की हालत में hi मुज़हे जहटके लगने लगे ( अग्नि शूल क अपनी भयंकर ऊर्जा क साथ भीतर प्रवेश करने क कारण) और मुज़हे ऐसा लगने लगा जैसे में भयंकर अग्नि में जलरहा hu....muzhe बड़ी जलन होने lagi....tabhi अचानक वह साड़ी अग्नि लुप्त हो gayi.......muzhe ऐसे लगा की मेरे चेहरे पर पानी की बुँदे पद रही है ...और मेरी आंखें खुली

जैसे मैंने देखा तोह पाया की दो बड़ी बड़ी आंखों से आंसू की बुँदे मेरे चेहरे पर पद रही थी...

मेरा सर अपनी गॉड लेकर मुज़हे पुकार रही थी ...अब में पूरी तरह होश में tha.......muzhe होश में आया हुआ देखकर उन् आंखों में ख़ुशी चालक उठी .....अपने लिए अथाह प्रेम उन् आँखों में देखकर में खो gaya.....hum एक दूसरे को बस देखे जा रहे थे......

तभी गक क आवाज से हमारा ध्यान हटा......

गक - शिवली जी अभी हमारा कार्य अधूरा है.........

जी हां वह यक्षा कन्या शिवली थी जो कुबेर जी क अलकापुरी में मिली थी

हम दोनों खड़े हो gaye....tabhi अग्निदेव प्रगट हो गए....

अग्निदेव - पुत्र आज तुम्हारे सहस और वीरता देखकर में प्रसन्ना हुआ ....में तुम्हे वरदान देता हु की मेरी अग्नि तुम्हे कभी को हानि नहीं पहुंचाएगी......

और उपहार क रूप में यह लो..

आग्नेयास्त्र......

अग्नि शूल और अस्त्र पाकर यह पड़ाव भी अब पूरा हो गया था

में शिवली क तरफ देखकर ...

में - आप यहाँ कैसे ...

तभी गक ने कहा -- मित्र जब तुम बेहोश हो गए थे मैंने तुम्हे बहुत उठाने का प्रयत्न किया पर सफल नहीं हो पाया...

तभी मुज़हे इन् आवाज बार बार सुनाई दे रही thi....aisa लग रहा था जैसे यह मुज़हे hi पुकार रही हो...

मैंने सोचा की इनके पास तुम्हे स्वस्थ करने को कोई उपाय होगा .

तोह में इन्हे यहाँ ले आया...

शिवली - मुज़हे न जाने क्यों कुछ अनिष्ट होने की आशंका हो रही थी

मेरा मैं भी न जिसने क्यों घबरा रहा था...

जब में ध्यान में बैठी तोह मुज़हे यहाँ का दृस्य दिखाई दिया

इसीलिए में यहाँ आगयी

में विचार करने लगा की यह कैसे अद्भुत सम्बन्ध है जो दूसरे लोक में होने क पश्च्यात भी इससे मेरी पीड़ा का अनुभव हुआ....

अभी क लिए इतना hi ....

अदला अपडेट कल....
 
अपडेट - 31

अब तक आपने देखा ा1 ने अपना

तीसरा अस्त्र पर्याप्त कर लिया है

अब आगे ....


शिवली को यु अपने तरफ देखते हुए देखते हुए देखकर ....में

में - शिवि ऐसे क्या देख रही हु

शिवली - क्या कहा आपने शिवि.......

आपको किऐसे पता चल की में अपने लिए आपके मुँह से यह hi नाम सुंनना चाहती हु....

में - कुछ बातें अपनों की अपने आप दिल तक पहुँच hi जाती है.....

शिवि - अच्छा जी आप सच में मुज़हे अपना मानते है....

में - क्यों तुम नहीं maanti....kya तुम्हे मुजह्से प्रेम नहीं है...

शिवि - कुछ शरमाते हुए .....बात को बदलते hue......accha आप वह सब बातें छोड़िये और जल्दी से अपने लक्ष्य को प्राप्त कीजिये......

और एक लॉकेट देते हुए ....यह लीजिये लॉकेट इससे हमेशा धारण करके rahiye........isske जरिये आप जब चाहे मुजह्से संपर्क बना सकते हो....

यह लॉकेट आपकी अगली यात्रा में बहुत सहायक होगा....


मुज़हे लॉकेट पहना कर ...उस्सने एक बार नज़र भर कर मुज़हे देखा और अदृश्य हो गयी.....

अब आगे की यात्रा कहा करनी hai.......isska पता तोह गुरुदेव ने नहीं बताया था .........

में और गक वही बैठ कर विचार करने लगे की आगे क्या किया जाए

इन्हे ताहि पर छोड़ते है और देखते है वह रूपनगर में क्या हो रहा है

यहाँ मयासुर अब अपने पाओ धीरे धीरे पूरे अंडरवर्ल्ड में फ़ैलाने लगा और रीसर्च लैब क जरिये उसस्के एक्सपेरिमेंट्स भी शुरू थे......

एक बहुत बड़े से हॉल में बहुत बड़ा एक राउंड टेबल था और उसके चारो तरफ करीब 20 चेयर लगी हुई थी

उन् पर पूरे अंडरवर्ल्ड क मैं मैं हिस्ट्रीशीटर बैठे हुए थे

सब आपस में खुसुर फुसुर कर रहे थे .......क उनको यहाँ क्यों लाया गया है ....कौन है यहाँ ........

की तभी एक भरी सी आवाज गुंजी .........

चुप हो जाओ सारे क्यों शोर मचा रहे हो........

तभी एक कुर्सी से गुंडा टाइप 6.5 फट का पप्पू भाई खड़ा हुआ ---

साला एक तोह अपुन को इधर ऐसइच उठकर लेलेला hai......aur बस खली फोकट हमको दम दे राहिला है

....तेरी माँ ki.....tabhi वह क्रोधासुर को देखर (जो दिखने में एक दम काला और भयंकर शरीर)

और जैसे hi क्रोध सुर को देखा ....

की पूजा करू ....अरे भिड़ु लोग भाई ागेले है ....

और वह बैठ ......

कस - अभी बॉस आरहे है तुम सब को जवाब मिल जाएगा की क्यों लाये गए हो तब तक चुप बिलकुल आवाज नहीं...

तभी मयासुर एक अलग रूप में ब्लैक ओवरकोट आखों पर ब्लैक गॉगल्स हाथ में सिगार और दोनों तरफ अपने जिस्म का नुमाईश करती हुई मिनी स्कर्ट में दो लड़किया.....

बिकुल जैसे पुराने फिल्मो में विल्लन की एंट्री होती थी वैसे hi.....shayed इसने भी कोई वैसी फिल्म से आईडिया लिया हो ....

उस्सको आता हुआ देख कर कुछ लोग खड़े हो गए

मयासुर (मस) - आप सभी को यहाँ हमने hi बुलाया है .....

आप सभी अपने अपने जगह क डॉन हो ..

लेकिन कुछ दिनों से अंडरवर्ल्ड खौफ में जी रहा है जब से कोई नकाब पॉश तुम्हारे अड्डों को तबाह कर रहा है ....

इसीलिए हमने फैसला लिया है क अब इस पूरे अंडर वर्ल्ड को हम हैंडल करेंगे.....

तभी एक कला अफ्रीका डॉन - हे हाउ डरे यू तो दो थिस .....हु अरे यू तो आर्डर us.......i ऍम नॉट अफ्रेड ऑफ़ यू....

यू क्नोव ..ी ऍम jack....Jack ..थे किलर

तभी कस पल भर में वह पहुंचा और जैक की गार्डन पकड़कर घुमा di.....Jack हो गया पैक.....

कस - किसी को कुछ और बोलना है...

जैक hi ऐसी हालत देखकर कोई क्या कहे.......

पप्पू बही - नहीं भाई इस साले क जैक क साथ ऐसइच होना मांगता था...

अब तोह तुम्हीच अपुन का माइबबप hai.......bole तोह गाड़फाथेर..

सभी ने अपना सर झुका कर मस को अपना हेड मान लिया

मस - तोह साथियो आज से इस अपराध जगत क हर काम पर मेरी नज़र होगी..

अगर तुम सब मेरे अंडर काम करोगे तोह मौज करोगे ...नहीं तोह मिलेगी मौत.....

हमे सबसे पहले लोगो की रगो में खून की जगह नशा भरना होगा .....

सभी स्कूल कॉलेज और कैफ़े में हमारी ड्रग्स पहुँचने चाहिए..

तभी इंडिया में ड्रग्स का सबसे बड़ा डीलर लाला

सर आजकल ड्रग्स ...सुप्पी करना आसान नहीं है .....पता नहीं कैसे जब भी नाय माल हम सप्लाई करने की सोचते है तोह सारा माल पकड़ा जाता है

मस - अब ऐसा नहीं होगा ...क्यों की हमारे बनाये ड्रग्स को कोई भी पकड़ नहीं पायेगा - हमारा यह नया ड्रग्स का फार्मूला किसी भी खाने पिने की चीजों में मिलकर सप्लाई कर सकते है.......

बस तुम सब लोग तैयार हो जाओ और देखो कैसे चारो तरफ बर्बादी होती है

है ..है ....है...

मीटिंग ख़तम हुई ...

यहाँ पप्पू भाई अपने साथियो से

- साला बहुत hi खतरनाक है वह भाई लोग...

हम लोग आज तक चोरी ...लूट... और छोटी मोती स्मगलिंग करते आये है

लेकिन यह बस तोह ...पूरी दुनिया की वाट लगाना चाहता है.....

तभी एक - लेकिन भाई हमे भी उंनका साथ देना hoga......aur इसमें हम भी फायदा भी बहुत है...

पप्पू - अरे छोटू जब चारो तरफ बर्बादी फैलेगी तोह ..प्सिसा क्या करेंगे

हम सब की हमारी फॅमिली भी है...

इस ड्रग्स से उनको भी नुकसान हो सकता है...

देख भाई हम आज तक लोगो को लूट लूट कर कहते थे.....

लेकिन ऐसी बारबाड़ू का हिस्सा हम नहीं कर सकते...

तोह भाई हम क्या करेंगे ....

पप्पू - ऐसा है अभी हमारा चुप रहना hi ठीक है .....अगर पुलिस को बताते है तोह पता नहीं साला कौन कुआँ सिस्टम में बिक चूका है

कुछ hi दिनों में मस क भेजी हुई ड्रग्स ...इंडिया क कुछ स्कूलों क कैंटीन तक पहुंच गए......

एयर अब उंनका असर शुरू हो गाय

उस दुर्गस्य क असर से बच्चे पागल से होने लगे.....

उनका क्रोध बाद गया छोटी छोटी बातो पर वह बच्चे कतल करने लगे ...

पहले पहले इस ड्रग्स क असर में आनेवाला दुसरो क खून का प्यासा हो जाता है और धीरे धीरे जब असर बढ़ जाता है तोह अपने hi शेर को दातो से काटने लगे थे

चारो तरफ लूट ..रपे ..और मर्डर की वारदाते बढ़ने लगी थी .....

सभी डेप बड़े परेशां थे ...

क्राइम रेट बढ़ गया था ...

यहाँ मस अपने केबिन में - ha....ha.

है ......अब रोक क दिखाओ संघारक मेरे इस वार को......

अभी तोह सिर्फ स्कूल और कॉलेजेस में hi ड्रग्स पहुंची है

बस 10 दिन और उसके बाद तोह फिर तुम मानवो की तबाही...

है ...ha..ha...

यहाँ रॉ की मीटिंग में

यह सब क्या हो रहा है संघारक यह पढ़नेवाले बच्चे अचानक इतने क्रिमिनल हो गए है....

कुछ तोह पागल हो कर अपने आप को hi ख़तम करने पर तुले हुए है.....

रवस- सर में पूरी कोशिश कर रहा हु

इस्सके कारन जानने की ....

कई स्टूडेंट्स को मैंने अपनी पावर्स से ठीक करने की कोशिस की....

वह शांत तोह हो गए लेकिन उनका मंद ब्लेंक हो गया .....

में इतना जान पाया की यह किसी ड्रग का असर है.......

हमारी रीसर्च लैब लेकिन इसको डिटेक्ट नहीं का पा रही है.....

हर न्यूज़ कहंनेल में यही सब चल रहस्य था........

देखते है रवस कैसे इस मुसीबत का हाल निकलते है.... इन्हे सोचने दो थोड़ा

अब चलते है ा1 क पास

ा1 बैठे बैठे सोच रहा था की क्या किया जाए कैसे व्यासतरा और चक्र तक पंहुचा जाए ....

क्या यह चक्र वही तोह नहीं जो भगवन विष्णु क हाथ में है...

में ऐसे hi सोचने लगा की तभी वह ठंडी ठंडी हवा चलने लगी

गक - वह मित्र देखो कितने ठंडी ठंडी सुगन्धित वायु चल रही है

में - हां मित्र ऐसे hi हमारे आश्रम में भी सुगन्धित हवा चल टी थी...

तभी मुज़हे ख्याल aaya....ki वायु का कोई एक स्थान तोह है नहीं वह तोह अचल नहीं चल शक्ति है ....

अब मुज़हे मार्ग पता चल गया था ..

हर जगह बल नहीं कही कही बुद्धि क प्रयोग से hi समस्या हल हो जाती है

में ध्यान मैं बैठ गया और अपनी ऊर्जा को वायु तत्त्व की ऊर्जा का स्थान

अनहद चक्र एकत्रित किया

जैसे जैसे ध्यान गहरा होता गया मेरे चारो तरफ चक्र क रूप में हवा चलने लगी और धीरे धीरे उसने एक चक्र वैट का रूप ले लिए

में भी उस चक्रवात में गोल गोल घूमने laga.....usska वेग इतना था की आस पास की चीजे उस में प्रवेश करने लगे जो मुजह्से टकराने लगी

और मेरे ध्यान में बढ़ा पहुँचाने लगी ...दो बार मेरा ध्यान टुटा ...अपने आप को चक्र वैट में घूमते हुए देखकर भी फिर होने मैं को एकाग्रचित जार क अनाहत चक्र में ध्यान lagaya....toh मेरे शरीर चमकने लगा और भीतर से अनहद नाद ॐ की ध्वनि प्रगट होने लगी जैसे hi अनहद नाड मुज़हे सुनाई देने लगा वैसे वैसे hi वह चक्रवात शांत होने लगा ...

अब विह पूरी तरह शांत हो गया और मुज़हे आवाज आयी

उठो पुत्र हम बहुत प्रस्नन्ना है

जब में देखा तोह सामने वायु देव थे

वायु देव - पुत्र विषम परिस्थितियों में भी तुमने आत्मसंयम का परिचय दिया ..में प्रसन्ना हु

यह लो व्यवस्त्र उपहार मेरी तरफ से

में - परन्तु हे देव गुरुदेव ने चक्र भी कहा था

वायुदेव - मेरा जो अस्त्र है वही चक्र क रूप में है.....

वायुदेव अपना वर और आशीर्वाद देकर अंतर्ध्यान हो गए ....

अब रह गयी थी आकाश तवा क अस्त्र की खोज .....

अभी क लिए इतना hi ...

अगला अपडेट जल्द hi.....
 
अपडेट - 32

अब तक आपने देखा की मस धरती पर अपने बनाये ड्रग्स से चारो तरफ ha-hakar मचा रहा है.....

और यहाँ ा1 4 तह अस्त्र प्राप्त कर चूका है...

अब आगे ......

में गक क साथ बैठा अपने अगले पड़ाव क बारे में विचार कर रहा था .........की अब व्योमास्त्र और त्रिशूल कैसे प्राप्त किया जाए ......इतना तोह पता था क यह आकाश तत्त्व की शक्तियां है.......

मैंने सोचा क जिस तरह वायु तत्त्व क अस्त्र तक पहुंचा उसी तरह आकाश तत्त्व तक भी पहुंचा जाए

तोह मैंने आकाश तत्व का अपने शरीर में केंद्र विशुद्धि चक्र पर ध्यान लगाया ........जैसे जैसे ध्यान गहरा होता गया मुज़हे अलग अलग नाद सुनाई देने लगे .....कभी संगीत की ध्वनि .....कभी ॐ की dhwani.....bas बड़ी देर तक ध्यान करने पर भी किसी निष्कर्ष पर न पहुँच सका......

विचार करने लगा की अब क्या किया जाए.

तभी मुज़हे शिवली क द्वारा दिए गए लॉकेट का ध्यान आया....

तोह गले में पड़े उस लॉकेट को हाथ में लेकर में उससे hi पूछने लगा ........

में - लॉकेट को शिवली समज़कर....

मेरी प्यारी शिवि में तोह भूल hi गया था की तुम लॉकेट क जरिये मेरे साथ हो....... इतने काम समय में तुम्हे मुजह्से कितना गहरा प्रेम हो गया

की इतने दूर से तुम मेरा दर्द महसूस करती हो

और में हु की तुम्हे भूल जाता हु ..

तभी उस लॉकेट से 2 बूँद पानी क गिरे और उसका रंग लाल hogaya.....muzhe ऐसे लगा जैसे वह मेरी बाते सुन रहा हो.... और रो रहा हो

में - अरे शिवि तुम क्यों रो रही हो...

ऐसे नाराज तोह न हो ....और में उस लाकेट को चुम liya....toh वह गुलाबी रंग का हो गया और इधर उधर उछलने लगा......

मुज़हे यह देखकर बड़ी हैरानी हुई

की देखो कैसे यह ख़ुशी से उछाल रहा hai.........yeh मेरी साड़ी बात समाज रहा है.....

में - अरे तुम तोह देखो शर्माकर कैसे गुलाबी हो गयी ho......ab ऐसे उछलना बंद karo......aur बताओ क्या तुम मेरी सहयता कर सकती हो..

मुज़हे आकाश तत्त्व क त्रिशूल की खोज है ..परन्तु वह किस दिशा में प्राप्त होगा इसका पता नहीं चल रहा है....

तभी वह लॉकेट शीटर हो गया और चमकने लगा उसमे से एक चित्र प्रगट hua.........usko देककर..

अरे यह तोह हमारे आश्रम क शिवालय का चित्र है......

परन्तु मुज़हे अभी गुरुदेव का दिया हुआ लक्ष्य पूरा करना है...

तुम मुज़हे यह बताओ क मुस्हे वह त्रिशूल कहा प्राप्त होगा...

तोह फिर वही चित्र ......तब मुज़हे उस सिवाकया में रखे हुए एक पुराने त्रिशूल का स्मरण हो आया.......

िदस्का अर्थ यह है की यह अंतिम अस्त्र मुज़हे वही प्राप्त hoga......lekin इससे पहले गुरुदेव से आज्ञा मांगनी होगी

तभी मेरा ध्यान अपने हाथ में स्थित गुरुदेव क अंगूठी का ध्यान आया

मैंने श्रद्धा से उसको प्रणाम किया

और मन में --- हे गुरुदेव आपके बताये हुए ास्त्रो में से अंतिम अस्त्र आश्रम में hi स्थित है उससे प्राप्त करने क लिए मुज़हे वह आश्रम में आना padega......ab मुज़हे वह आने की स्वीकृति दीजिये गुरुदेव ....

में अभी यह बोल hi रहा था क अचानक वह का सब दृश्य बदल गया और अब में आश्रम में ....उसी शिवालय में गुरुदेव क सामने बैठा था........

ऐसे अचानक से यहाँ अपने आपको देखकर हैरान हो गया

गुरुदेव मुज़हे देखकर मुस्कुरा रहे the.....swagat है पुत्र आखिर तुमने उन् ास्त्रो को पा hi लिया...

परन्तु अभी त्रिशूल बाकी है ...

में - गुरु देव यह सब आपके hi आशीर्वाद का प्रताप है ....आप जैसे समर्थ गुरु का आशीर्वाद जिस्सके साथ हो वह असफल कैसे हो सकता है............

त्रिशूल तोह यही शिवालय में है गुरुदेव है ....तोह उस्सको प्राप्त करने में कैसी कठिनाई...

गुरुदेव - पुत्र बिना आत्मा क शरीर जैसे व्यर्थ होता है वैसे hi इस त्रिशूल की साड़ी शक्तिया कही और बंधी हुई है जहा पहुँच ने का मार्ग इसी शिवालय से होकर जाता है उससे तुम्हे खोजना होगा....

अब तुम जसो अपने मित्रो को मिल लो और कल प्रथा आरती क बाद तुम अपने लक्ष्य की और अग्रसर हो जाना....

और में गुरुदेव को प्रणाम करके चल दिया अपने मित्रो को मिलने....

जब तक ा1 अपने मित्रो को मिलता है हम देखते है दूसरी और रूपनगर में

यहाँ रवस बहुत परेशानी में बेसमेंट में ट्रेनिंग हॉल में इधर से उधर घूम रहा था तभी अभी और नैना भी वह पहुँच जाते है

निआना - ऐसे परेशां न होईये कोई न कोई हाल निकल आएगा

रवस- कैसे नैना ...कैसे ....क्या फायदा है इन् शक्तियों का जब हम किसी को बचा नहीं पा रहे है

छोटे छोटे बच्चे स्टूडेंट्स सब जैसे पागल से हुए है अभी तोह सिर्फ महानगरों और कुछ सहरो तक hi यह hi ः है ऐसे hi चलता रहा तोह

पूरा देश hi इस्सकी चपेट में आजायेगा

में नहीं देख सकता यह sab.......apni पूरी पावर्स लगाने पर भी में इस तक नहीं पहुँच पा रहा हु जिसने यह सब किया है....

और न hi में उन् बच्चो को ठीक कर पा रहा हु.......

नैना - ऐसे हौसला हारने से क्या होगा

आपने अब तक कितनो की जिन्दगिया बचाई है .........जब जब भी बुराई बढ़ती है तोह उसस्के दमन क लिए परमात्मा भी कोई न कोई उपाय ढूंढ़ता है.....

अभी - हां डैड आप परेशां न हो

तभी कन्ट्रो रूम से मश्ग आया

सर रॉ चीफ आपसे बात करना कहते है ......फिर रवस अपने सेल से रॉ चीफ से बात करता है

यस ...हां सर ....कोई बात नहीं में अभी वह पहुँचता hu.....aisi मौत दूंगा उससे क बुराई करने वालो की रूह काँप जायेगी.....

में - क्या हुआ डैड...

रवस - बेटे लगता है क अभी सब ठीक हो जाएगा

रॉ चीफ क पास मेरे लिए एक मश्ग आया था ....की .......उस्में कस्सी जगह कोड बताकर मुज़हे वह आने का चैलेंज किया गया है

चीफ उस कोड कोवडेकडे नहु कर पाए ...लेकिन में उस एड्रेस को समाज गया हु

यह लाट्टीटुडे और लोंगीटुडे मिलकर जगह का कोड बनाया गया है....

नाउ लेटस थे हंट बेगिंस....

में - डैड में भी चलता हु...

डैड फिर अपने 5 एजेंट्स मुज़हे लेकर टेलिपोर्ट हो गया हम सब मास्क में the........jab हम वह पहुंचे तोह देखा एक छोटा सा कमरा है जिसमे हलकी सी रौशनी आरही है ....वह एक आदमी बड़ा परेशां होकर ड्रिंक कर रहा था.......

हम सब को अचानक अपने सामने देखकर वह अपनी चेयर से उछलकर गिरा...

आदमी - अरे तेरी तोह साला बस टूट गयी रे kamar......phir हमारी तरर्फ देखकर जोर से चिल्लाता हुआ

ारी बाप रे बहुत ...बहुत ..भूत

साला बस तू भूत लोग अपुन को मारने आएले हो क्या ....कही तुम यौम दूत तोह नहीं .....साल पप्पू तू तोह गया रे आज ......माँ ..अपुन को बोलती थी क गलत धंदा मत कर ...लेकिन नै ...अपुन को तोह सुनने कैच नै था ...

तुम 7 यमदूत लोग अकेले अपुन को लेने आये ho....lekin अपुन को मरने का नहीं गई रे ....

कहकर इधर उध्धार भाग रहा था..

तभी डैड..... हम्म तोह तू hi है वह जिसस्ने मुज़हे चैलेंज किया था

पप्पू - अरे संघारक भाई ...वह अपुन तोह तुमकोईच ढूंढ रहेला था

डैड - यह सब ड्रग्स फैलाकर अब नाटक कर रहा है...

पप्पू - अरे नहीं नहीं भाई मन की में हरामी हु लेकिन इतना बड़ा हरामी नहीं हु भाई ....की छोटे छोटे बच्चे लोगो को ऐसी तकलीफ पहुँचाउ

वह तोह में तुमको यह सब करने वाले का नाम बताना चाहता था...

डैड - तोह तुमने पुलिस को क्यों नहीं बताया

पप्पू - भाई यह एक बहुत बड़ा जहॉ है पता नहीं कौन कौन साला बिक गया है....

फिर पप्पू मस क साथ हुई मीटिंग से लेकर अब तक की साड़ी jaankari.....RVS को देता है.....

और रट हुए बही छोड़ना नहीं उस हराम क पिल्लै को , मेरा बच्चा भी उस ड्रग का शिकार हो गया है भाई..

घर पर बांधकर रखा है उस्सको भाई

डैड - वह दुर्ग कौनसा है क्या तुम वता सकते हो...

पप्पू - नाम तोह नहीं पता लेकिन अपुन क पास वह ड्रग पड़ा है

अपुन को भी यह कसम दिया गयेला था मगर अपुन का दिल hi नहीं मन.....

सारा ड्रग्स अपुन क गोडाउन में है

अपुन उनको ज़हूत बोलटकर की ड्रग्स सप्लाई हो रहा है .बचता रहा

फिर डैड ने उससे ड्रग का सैंपल लेकर बाकी ड्रग्स को डिस्ट्रॉय कर दिया

और पहुँच गए रीसर्च लैब

उस ड्रग का ांतिदोड बनाने की कोशिश जारी हुई......

यहाँ रवस ने मस तक पहुँच ने का बड़ा प्रयत्न किया लेकिन उनकी टेलेपोर्टेशन की पावर भी उन्हें वह नहीं ले जा रही थी....

ड्रग्स क वजह से स्कूल बंद थे

की मैंने सोचा की क्यों बा आज रिम्पी को सरप्राइज दिया जाए ....तोह पहुँच गया में उनके ghar.....bahut बार उनके घर जा चूका था फिर भी पहले अंदर रिम्पी क डैड क प् को इन्फॉर्म किया गया और प् ने हम अंकल खर परमिशन मिल hi गयी...

अंदर गया तोह अंकल प् से किसी बात को डिसकस कर रहे the....muzhe देखकर......

अरे बीटा आओ .....सॉरी ..तकलीफ क लिए

लेकिन तुम समझ सकते हो ास्जकाल हालत hi ऐसे है

जाओ बीटा रिम्पी अंदर है ...

में रिम्पी क रूम में पहुंचा तोह देखा दूर खुला है ...रूम में एंटर किया तोह देखा रिम्पी नहीं है

मैंने सोचा शतड बाथरूम गयी होगी .

में रूम में इधर उधर घूमने लगा तोह मेरी नज़र अलमारी क दूर पर पड़ी तभी देखा क वह दूर खुला और उसमें से निकली रिम्पी ...

में सोचने लगा की यह अंदर क्या कर रही थी ...मुज़हे अचानक सामने देखकर वो हड़बड़ा गयी....

अभी क लिए इतना hi ....

अगला अपडेट रात को ......
 
अपडेट - 33

अब तक आपने देखा ा1 त्रिशूल की खोज में आश्रम आया

और पप्पू भाई क द्वारा रवस को मस क बारे में पता चला और ड्रग्स सैंपल मिला...

अभी रिम्पी क घर में गया

उससे रिम्पी वार्डरॉब से निकलते दिहकी....

अब आगे......,.......


अभी में रिम्पी क रूम को देख hi रहा था की मैंने वार्डरॉब क दरवाजे से रिम्पी को डेझ जो मुज़हे ऐसे आपने सामने देखकर हड़बड़ा रही थी

में - अरे स्वीटू तुम वार्डरॉब में क्या कर रही थी .....वार्डरॉब कपडे रखने क लिए होता है.......

इंसानो क रहने क लिए नहीं.....

रिम्पी - वह .....w....oh ......में ..

ककककककुछ nahi.....baas ाआईसे hi

में उसस्के पास गया - तोह इतना घबरा क्यों रही ho.....usske माथे पर आया पडिना पोछते हुए ......

और देखो तोह a/c चालू होते हुए भी कितना पसीना आरही है......

और मैंने उससे अपने गले लगा लिया

रिम्पी - बाबू तुम जानते हो की मैं रीसर्च का काम करती हु

में - हां जानता हु .....तोह इस्स्में क्या है...

रिम्पी - आओ में तुम्हे कुछ दिखती हु

और मेरा हाथ पकड़कर वार्डरॉब क अंदर ले जाने लगी

में - अरे... अरे यह क्या कर रही हो मुज़हे इस्सके अंदर क्यों ले जारही हो

तभी उस्सने वार्डरॉब का दरवाजा खोला ....तोह उस्में मुज़हे एक स्क्रीन धिकायी दी ....वह जब उसके आगे कड़ी हुई तोह उस्में से एक रे निकली और उसके चेहरे पर पड़ी और वह एक दूर ओपन हुआ ...में हैरान था यह देख कर .......की क्या हो रहा है ....

एक सीक्रेट चैम्बर मेरे घर क नीची और एक यहाँ भी ...

जब में अंदर गया तोह वह एक लैब दिखाई दी जहा तरह क तरह क चेमिकल्स थे और दिहाई दिए बहुत सारे गैजेट्स ....तभी हमारे सामने एक छोटी बची आयी ....

वेलकम माँ में आपके लिए क्या कर सकती हु

में - यह सब क्या है रिम्पी ..और यह प्यारी सी बच्ची कौन hai....lekin यह कुछ अलग तरीके से बात क्यों कर रही है ....और तुम्हे माँ क्यों कह रही है....

रिम्पी -- अरे अरे बाबू एक साथ कितने sawal....thik है तोह सुनो

यह है मेरी पर्सनल पृवत लैब जहा में अपने एक्सपेरिमेंट्स करती हु ...

और यह है गुड्डी मेरी बनायीं हुई हुमानोइड रोबोट....

लेकिन अभी इन् सब बातो को छोड़ो और


इधर देखो.......

वह मुज़हे एक स्क्रीन क आगे ले गयी

देखो आजकल जो बीमारी स्कूल क बच्चो में फ़ैल रही है जिससे सब जगह तभी मच रही है.

में उसपर रीसर्च कर रही हु

यहाँ देखो मैंने ऐसे hi एक बच्चे का ब्लड सैंपल एक हॉस्पिटल से बड़ी मुश्किल से हासिल किया ...

और जब मैंने ऊपर रीसर्च किया तोह पाया क यह कोई बीमारी नहीं है

कुछ और है यह कोई ऐसा सीरम या ड्रग है जिससे वच्चो क डीएनए में चेंज आरहा है......

इतस तू डेंजरस..... लेकिन आम ह्यूमन बॉडी इस चेंज को एक्सेप्ट नहीं कर पा रही इसीलिए वह सब पागल हो रहे है और अपने को hi ख़तम कर रहे है......

अगर किसी की बॉडी इस डीएनए चेंज को एक्सेप्ट करती है तोह ह्यूमन से बदल कर कुछ और हो जाएगा....

शायद कोई अजीब सा जीव या कुछ और

क्यों की जैसा चेंज इनके डीएनए में आरहा है वैसा डीएनए इस धरती पर किसी का भी नहीं हो सकता...

में - ओह्ह गॉड अगर यह बिलकुल ऐसा hi है जैसे तुम कह रही हो तोह सच में बहुत डेंजरस है यह ...

इस्को रोकने का कोई उपाय

रिम्पी - साइंस में कुछ भी इम्पॉसिबल नहीं है .....अगर इस दुनिया में कोई सवाल पैदा होता है तोह साथ साथ उसका जवाब भी पैदा हो जाता है.....

जहा तक मैंने रीसर्च की है ....

तोह इस्सके ांतिदोड उसी ड्रग से बन सकता है जिससे यह डीएनए में चेंज आरहा है.....

में - रिम्पी इसमें हमारी कोई मदद कर सकता hai......tum कहो तोह उन्हें यहाँ बुला सकता हु....

रिम्पी - हां लेकिन इस जगह की प्राइवेसी बरक़रार रहनी चाहिए....

में - अभी यहाँ इतनी बड़ी प्रॉब्लम है और तुम्हे प्राइवेसी की पड़ी है

रिम्पी - तुम मुज़हे गलत मत समझो

यहाँ तुम देख रहे हो कितने सारे गैजेट्स hai.....agar यह किसी ऐसे क हाथ लगे जो देश का दुश्मन हो तोह और नयी प्रॉब्लम आजायेगी

में - तुमने ऐसे गैजेट्स बनाये hi क्यों जो विनाश का कारन बने...

रिम्पी -- विनाश तोह वेपन्स और

एटॉमिक वेपन भी करते है लेकिन वह देश की सुरक्षा क लिए जरुरी है

इसीलिए .....

में - तुम इस बात की छँटा मत करो क्यों की जिन्हे में बुलाने वाला हु वह देश क गद्द्रो क लिए चलती फिरती मौत है....

फिर मैंने डैड को कॉल लगायी.....

में - एजेंट सर शायद आप कजिस सलूशन को ढूंढ रहे हो वह मिल गया hai.....jaldi से आप हम सर क घर क अंदर एक सीक्रेट चैम्बर है वह आजाओ....

डैड समाज गए की उन्हें यहाँ संघारक क रूप में आना है..

तभी वह वह टेलिपोर्ट होकर आगये

उनको संघारक क रूप में ासाहनक अपने सामने प्रगट होते देख kar.....rimpy घबरा गयी ..और मेरे तरफ देखने लगी...

डैड - आवाज चेंज करके - घबराओ मत बेटी ........

रिम्पी - सीयर ...यदि में गलत नहीं हु तोह क्या ...वह hi ....रॉ क फेमस एजेंट है जिसके नाम से hi अंडरवर्ल्ड खांप्त है...

डैड - बिलकुल ठीक बेटी में वह hi हु

फिर मैंने डैड को साड़ी बातें बताई

जिससे सुनकर उन्हें एक आशा की किरण दिखाई दी

डैड - वेलडोने बीटा ...अगर यह सफल रहा तोह साड़ी प्रॉब्लम सोल्वे हो जायेगी... ...क्या तुम हमारी रीसर्च लैब चलोगी.....

रिम्पी सर - में अभी सबके सामने आना नहीं चाहती ....यदि आप मुज़हे वह ड्रग ला दे तोह.....

अगर ांतिदोड बन गया तोह उस फार्मूला से आप अपने लैब में भी उस्सको बना सकते हो...

फिर डैड वह से टेलिपोर्ट होकर चले गए और वापस उस ड्रग क साथ आगये.

रिम्पी उस ड्रग क सैंपल को डिकोड करने की कोशीध करने लगी ..

करीब 2 हर हो गए उस्सको तरय करते हुए.

रिम्पी - सर यह ड्रग होम्योपैथिक मेडिने बनाने क तरीके से बना हुआ है ......जिसमे अलकोहल क जरिये किसी भी चीज की पावर निकल कर मदर टिंचर बनाया जाता है ...

जैसे पाइजन क असर को रोकने क लिए पाइजन से hi मेडिसिन बनती है उसी तरह.....

फिर रिम्पी ने एक तुबे में उस ड्रग को मिलाया फिर कोई केमिकल

और उस तुबे क चारो तरफ 4 छोटे गैजेट्स रख diye.....jis में से रेज़ निकल कर उस तुबे पर पद रहा था

रिम्पी इस प्रोसेस में 8 हर लगेंगे

और आपका एंटीडोडे तैयार..

डैड - हमे बहुत मात्रा में इससे बनाना होगा....

तोह इसकेलिए तिह हमे बहुत मात्रा में ड्रग्स लगेगी

रिम्पी - no सर ...एक बार यह मेडिसिन तैयार हो जाए तोह होम्योपैथिक फॉर्मूले से इसी से हम बहुत मात्रा में एंटीडोडे वन सकते है...

अब हमे 8 घंटे इंतजार करना था..

अब देखते है ा1 क्या कर रहा है...

गुरु जी से मिलकर जैसे hi में वह पंहुचा कहा मेरे सारे मित्र युद्ध कला का अभ्यास कर रहे थे

मुज़हे जब उन्होंने आते देखा तोह सारे बहुत खुश हो गए सब मेरे गले मिले .....

राकेश - अभिनन्दन मित्र जो तूने प्राप्त किता है उसस्के उपलक्ष्य में और मेरे गले लग गया...

कट - यार तू तोह बिलकुल बदल hi गया

यह तेरा श्री पहले से बहुत मज़बूत hogaya......baajuon को छूटे हुए

अरे यह तोह किसी वज्रा क सामान कठोर हो गए है ....ऐसे क्या खा क आया बहार से.....

सब मुज़हे बहार की दुनिया क बारे में पूछने lage...toh मैंने मंदा गाओं की बात बताई तोह सब हसने लगे

उदय - तू जितना मर्जी शक्तिशाली बन जा लेकिन रहेगा लंगूर का लंगूर hi

अरे बहार की दुनिया में धन की आवस्यकता होती है...

शालू सही कहती है तुज़हे लंगूर

तभी में - ाचा मित्र मुज़हे कुछ काम है, संध्या की आरती में मिलते है

कट - खूब जानता हु तेरे कसम को

जा सरोवर पर ...वही पर मिलेगी

मैं भी मुस्कुराते हुए निकल फाय सरोवर की तरफ

वह जाकर मैंने देखा शालू गुमसुम सी किनारे पर बैठी थी एक तक

जल में देखते हुई...

जो शालू हमेशा शरारती और खुश रहती थी उस्सको ऐसे उदास देखकत मुज़हे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था

तभी मेरे गले का लॉकेट गरम होने लगा तोह मुज़हे अजीब लगा...

में लॉकेट से - ओह्हो तोह मेरी शिवि को शालू से जलन हो रही है...

तभी मैंने उस लॉकेट को चूमा तोह फिर वह गुलाबी हो गया और शीतल हो गया.

में - देखो शिवि मेरे प्रेम पर भरोसा रखो.....

फिर में एक पेड़ क पीछे छुपकर

शालू.... मेरी प्यारी शालू ...तू ..बड़ी चालू

फिर मेइब अपनी गति से स्थान बदलकर दूसरी तरफ चला गया और वह से भी उससे पुकारा...

मेरी आवाज सुनकर वह चारो तरफ देखने लगी ....लेकिन में उससे कही पर भी नज़र नहीं आया ..

तोह फिर वह वही बैठ गयी ...

शालू - देखो न आज मुज़हे क्या हो गया अब तुम मुज़हे चारो तरफ से तुम्हारी hi आवाज आरही है...

मेरे कान बजने lage.....hai जल्दी आजाओ न अभी देखो तुम्हारे बिना तुम्हारी शालू क्या हाल हो गया है

तभी में अचानक उसस्के सामने आ

गया....

अब मुज़हे देखकर ....

शालू - में जानती हु की तुम यहाँ नहीं ho....abhi में तुम्हे हाथ लगाउंगी तुम गायब हो जाओगे ...और वह रोने लगी....

में उसस्के पास जाकर उसके आंसू पोंछते हुए - अरे मेरी शालू की आँखों में यह आंसू बिकुल भी अच्छे नहीं लगते ...

जब ुस्सबए मुज़हे देखा की ने सच में उसके सामने खड़ा हु...

तोह उस्सने जोर से मुज़हे गले लगाया

मुज़हे गले लगाए वह रोटी रही ..

जब थोड़ी देर बाद वह चुप हुई तोह बहुत साड़ी बातें हमारे बिच हुई

समय कैसे बीत गया पता hi नहीं chala.......sandhya की आरती ...मित्रो क साथ भोजन और राकेश क साथ ध्यान.....

दूसरे दिन सुबह क नित्यकर्म और ध्यान क पश्च्यात में मंदिर गया

आरती ख़तम होने क बाद में जहा वह त्रिशूल रहा था वह गया ...इस त्रिशूल कौवध्यान से देखा तोह उसके एक तरफ सूर्य बना हुआ था तोह दूसरी तरफ चन्द्रमा का....

अब उस त्रिशूल की ऊर्जा को खोजने क लिए उस मंदिर क एक एक कोने को बड़े ध्यान से देखने लगाई तभी एक जगह मंदिर की पराक्रम में पीछे की और मुज़हे वही नीसाण दिखाई दिए जो त्रिशूल पर अंकित थे

मैंने उन् निशानों दबाकर देखा तोह निचे एक छोटा सा रास्ता खुल गया ..

तोह में भी उस्में चला गया तोह देखा एक गलियारा है ....में चलते जा रहा था की गलियारा था की ख़तम होने का नाम नहीं ले रहा था

तभी मेरी दृष्टि वह क दीवार पर वने हुए चित्रों पर पड़ी.....

आज क लिए इतना hi ......

अगला अपडेट कल........
 
अपडेट - 34

अब तक आपने रिम्पी को एंटीडोट बनाते हुए देखा....

ा1 त्रिशूल की खोज में निकल चूका है....

अब आगे......


8 घंटे क इंतज़ार क बाद , जब डैड और मैं रिम्पी की लैब में पहुंचे..

डैड - बीटा क्या तुम्हारा एंटीडोडे पूरा होगया...

रिम्पी - हां अंकल हो तोह गया लेकिन हमे पहले इस का किसी पर प्रयोग करना पड़ेगा तभी इस्सके रिजल्ट पता चलेगा....

डैड - लेकिन बीटा ऐसे hi किसी पर इस्सके एक्सपेरिमेंट करना क्या ठीक रहेगा

रिम्पी - करना तोह पड़ेगा सर...

में - क्या मुज़ह पर हो सकता है इस्सके एक्सपेरिमेंट

रिम्पी - नहीं यह एक्सपेरिमेंट उसी पर हो सकता है जो उस ड्रग से अफेक्टेड ho.....kisi नार्मल पर नहीं

डैड - देखते है काया कर सकते है

लेकिन प्रॉब्लम तोह यह भी है इस ड्रग का असर कई सहरो में फैल चूका है..

हमे कैसे पता चलेगा की कौन इन्फेक्टेड है और कौन नहीं.....

रिम्पी - सर एक बात और है जिनकी बॉडी ने इस डीएनए चेंज को एक्सेप्ट कर लिया है उनका हम इस मेडिसिन से कोई इलाज नहीं कर सकते....

अभी यहाँ यह बातें hi चल रही थी....

की डैड का पह बजा....

कुछ बातें हुई पह पर....

डैड - लगता है हमे एक्सपेरिमेंट क लिए कोई मिल गया है...

में - कौन..

डैड - पप्पू भाई का पह था ....बोल रहा था क उस्का बीटा बंधा हुआ बहुत तड़फ रहा है .....वह इस्सकी ऐसी हालत नहीं देख sakta......toh मैंने मेडिसिन क बारे में बताया तोह वह राज़ी हो गया...

डैड हम को लेकर पहुंच गए एक रूम में वह हमने देखा की 7 साल का एक लड़का एक बीएड से बंधा हुआ है जो अजीब तरह की आवाजे निकल रहा था और गुर्रा रहा था....

उसस्के एक हाथ पर पाती बंधी थी..

हमको आया देखकर वह पप्पू भाई उठकर हमारे पास आगया...

पप्पू - देख रहेले हो बाप यह अपुन की एकलौता जीने का सहारा कैसे तड़फ रैला hai......isska माँ अपुन की गॉड में इस्को देकर ..पहिलिच चला गया अब यह भी .....इतना कहकर वह रोनेलगा....

में - यह हाथ में लगी पाती की तरफ बार बार मुँह क्यों ले जारहा है

शायद पट्टी खोलना चाहता है....

पप्पू - यह इसी ने अपना हाथ खाया hai......baara बार यह अपना hi बॉडी का मास्स नोचकर खाने की कोशिश कर रहा था इसीलिए इससे बांधकर रखा गया...

रिम्पी अब रेडी उस्सने पप्पू भाई की तरफ एक बार देखा ...तोह उस्सने अपना सर हिलाकर हां में इशारा किया...

और वह दवा का एक ड्राप उस्सको इंजेक्ट कर दिया ....अभी कोई 30 सेक् hi हुए honge....ki वह बच्चा तड़पने लगा

चिल्लाने लगा की ...मार दो मुज़हे...

उसका दर्द बढ़ता जारहा था...

एक छोटे से बच्चे को ऐसे तड़पते हुए देखना कितना तकलीफ देह था ...

पप्पू - साहब यह क्या हो गया लगता है मेरे मन्नू को अब कोई नहीं बचा सकता में और बही देख सकता साहब इस्को तड़पते हुए और ुसड़ने गन nikali...abhi वह फायर करता इसके पहले

डैड ने उसका गाठ पकड़ लिया

डैड - पागल हो गया है अपने hi बच्चे को मारेगा...

पप्पू - तोह और क्या करू सब में इससे ऐसे नहीं देख सकता ....

तभी हमने देखा की उस बकव्हे मन्नू का तड़पना बंद हो गया और उसका हिलना डुलना बंद हो दया

उस्सको ऐसे शांत देखकर हमको लगा की बहुत देर हो गयी है...

तभी रिम्पी आकर उसकी पल्स चेक करती है....

रिम्पी - सर हे इस ऑलराइट नाउ......

यह अभी बेहोश हो गया hai......itna पैन सहने क बाद इसके बॉडी को रेस्ट चाहिए.....24 हर क बाद hi uthega..ab

पप्पू भाई - सर अगर मेरा बीटा बच गया तोह आज से यह पापो भाई तुम्हारा गुलाम बन gaya......tumahare वास्ते अपुन जान भी देने को पीछे नहीं हटेगा...

डैड - देख पापु अपने बेटे को देख आज तक तू जिनको लूटता आया है उनकी भी फॅमिली होगी .....जिनको तुमने मारा होगा उनके भी बच्चे होंगे जो यतीम हो गए होंगे...

पप्पू - साहब मुज़हे अपनी गलती का अहसास हो गया है में अपने सारे गुनाहो की सजा भुगतने क लिए तैयार hu....bas एस्प मेरे बच्चे को संभल लेना...

डैड - अभी सजा भुगतने का नहीं सजा देने का वक्त hai.....kya तुम नहीं चाहते जिनके ड्रग से तुम्हारे बेटे की ऐसी हालत हुए इन्हे सजा हो...

क्या तुम बता सकते हो की विह कौन है

पापो - साहब में बस इतना जानता हु

कोई मस नाम का आदमी है जो डीके रीसर्च सेंटर का मद है और वर्ल्ड क सारे अंडरवर्ल्ड डॉन उस क लिए काम करते है और इंडिया में लाला जो फेमस ड्रग डीलर है वही यहाँ का सप्लायर है...

उसस्के बाद डैड ने रॉ और भी गोवत सिक्योरिटी एजेंसीज पुलिस ...और अपने एजेंट्स को डीके रीसर्च लैब पर चप्पे मरना शुरू किया ....लाला क गोडाउन में चप्पे मारे गए जहा पर वह ड्रग बड़ी मात्रा में पायी गयी थी ........

में रिम्पी क साथ मिलकर और ज्यादा मात्रा में एंटीडोट बनाने में लगा था ......

और धीरे वह दवाई भी असर करने लगी

लाला क एक ठिकाने पर उसका एक लैपटॉप बर्नाड हुआ ...जिससे उन् स्कूल कॉलेजेस की लिस्ट सामने आयी जहा यह ड्रग्स पहुंचाई गई....

इससे अफेक्टेड बच्चो को ढूंढ़ने में आसानी होगी.....

उन् सभी स्कूल ..कॉलेजेस क स्टूडेंट्स और टीचर्स की लिस्ट और एड्रेस निकले gaye.....aur उन् का इलाज चालू हो गया.....

यहाँ एक बड़े से गोडाउन में ......

मयासुर - है ...ha..ha...dhundo ढूंढो ...मयासुर एक मायाजाल हैइससे पकड़ना आसान नहीं है

असली रीसर्च तोह यहाँ चल रही है

वह एक साइड में बहुत बड़े पिंजरे से थे जिस्में कुछ अजीब से जीव कैद थे ....जिंनका आधा श्री इंसानो का और आधा किसी अजीब से जीव का

मस - कितनो को ठीक करोगे संघारक

तुम ठीक करते जाओ हम बिगड़ते जाएंगे .....देखते है कौन सफल होता है .....है ha......ha

मज़ा aayega...iss खेल में


इनको यही छोड़ते है और देखते है A1kya कर रहा

मंदिर क निचे गलियारे में ा1 चलता जारहा था लेकिन वह गलियारा था की ख़तम होने का नाम hi नहीं ले रहा था......

तभी मेरा ध्यान गलियारे की दीवारों पर बने हुए चित्र पर गया ....तोह पता चला बार बार वह hi चिटा आरहा है अब में संजगाया की में इस गलियारे में ऐसे hi गोल गोल चक्कर लगा रहा hu.......ab में उस्सगलियारे को ध्यान से देखने लगा

तब मुज़हे ध्यान आया की वह क दीवारों पर बने सभी चित्रों में एक चीज की समानता है....

उन चित्रों में एक व्यक्ति हाथ में उल्टा कमल लेकर निचे की और देखरहा tha.....ab में गलियारे क फर्श पर कुछ निशान देखने लगा तो मुझे एक जगह पर वैसे hi कमल का निशान दिखाई दिया.....

मैंने सोचा की हो न हो यही से कोई मार्ग hoga......maine अपनी 5 तत्वों की शक्ति का उपयोग कर के देखा लेकिन यह दहककर बड़ा हैरान हुआ की मेरी कोई भी शक्ति यहाँ काम नहीं कर रही है.......

मैं क्या करू कुछ समाज में नहीं आरहा .... था .....तोह मैंने गक को याद किया लेकिन वह भी नहीं आया

अपने गले में पड़े हुए शिवली क लॉकेट को पूछा लेकिन उस में भी कोई हलचल नहीं hui........ab में गुरुदेव से सम्पर्क करने का प्रयत्न करने लगा लेकिन वह भी व्यर्थ

अब में अपने आपको इस गलियारे में फसा हुआ महसूस कर रहा था....

मेरा दम घुटने लगा था....


तोह सोचा ज्ञान से हर समस्या का हाल प्राप्त हो जाता है.....

मैं गुरुदेव क सिखाये हुए वेद और उपनिषद् क ज्ञान को याद कर रहा था

तोह उपनिषद् का एक सूत्र मुज़हे याद आया

आत्मानं ब्रह्मा

जिस शक्ति की में खोज कर रहा हु वह आकाश तत्त्व से जुडी हुई है

और आकाश तत्त्व क देवता है परब्रह्मा और हमारे भीतर आत्मा hi ब्रह्मा का स्वरुप है

हो न हो यह मार्ग केवल आत्मशक्ति से खुलेगा और आत्मा शक्ति तक पहुँचने का मार्ग है अनहद नाद

ॐ

तब मैंने ॐ का ध्यान करके अपनी आत्मशक्ति को जगाने का प्रयास किया बड़ी देर तक प्रयास क बाद में भीतर हृदय गुफा तक पंहुचा वह मैंने एक प्रकाश पुंज का दर्शन हुआ

उसी प्रकाश क केंद्र में को ध्यान करते हुए जब मैंने उस कमल क निशान पर पाऊँ रखा तोह वह एक तेज रौशनी हुई और जब मैंने आँखें खोल कर आपने सामने देखा तोह मेरी आँखें खुली की खुली रहा गयी वह दृश्य देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए....

अभी क लिए यहाँ तक....

अगला अपडेट जल्द hi......
 
अपडेट - 35

आपने देखा कैसे ा1 अपने लक्ष्य की और बाद रहा है

अब आगे......


जैसे hi मैंने सामने देखा तोह मुज़हे वह दिर्श्य देखकर अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ

मैंने सामने देखा की वह एक विशाल ब्रह्मा राक्षस बैठा हुआ है और उसके पास hi मेरे मित्र और शालू बढे हुए है......

वह एक बड़े चले पर एक हांड़ी छड़ी हुई है ...और वह राक्षस अपने एक खडग को पत्थर पर घिस कर धार तेज़ कर रहा है.....

में - कौन हो तुम और मेरे सभी मित्रो को ऐसे बांधकर क्यों रखा है

Bhramharakshas(BS) - में एक ब्रह्मः राक्षस हु और यह तुम्हारे सारे मित्र आज मेरा भोजन banenge.........aaj hi अनेक वर्षो क बाद में जगा hu......aur मुज़हे अभी बहुत भूक भी लगी है.....

में - छोड़ दो मेरे सभी मित्र की ान्यतः मुज़हे तुम्हे दंड देना होगा...

बीएस -- ha....ha....ha तुम डोज मुज़हे दंड ....क्या तुम इस श्रिस्ति क नयायधीश हो ......जाओ और मुज़हे भोजन तैयार करने दो..

में - तुम ऐसे नहीं maanoge....aise कहकर मैंने अपनी शक्तियों से उसपर वार करना chaha.......parantu मेरी कोई भी शक्ति वह काम नहीं कर रही थी.....

शालू - अभी ....बचालो अभी हमको ..

देखो यस राक्षस हमे कहने की तैयारी कर रहा hai..........Abhi जल्दी कुछ करो ......बही तोह यह हमे खा जाए गए और सभी फ्रेंड्स मेरा नाम पुकार ने लगे.....

उनकी वह दातु आवाजे सुनकर मेरे मैं में खलबली सी मचने लगी..

क्या करू कुछ समाज में नहीं आरहा tha....ek दर भी लग रहा था की अगर आज में इनको नहीं बचा पाया तोह इस बात का कलंक मुज़हे जीवन भर rahega......aur शालू को कुछ हो गया toh.......nahi.......nahi मेइब ऐसा नहीं होने दूंगा......

में उस बीएस की तरफ मारने क लिए dauda........toh उस्सने मुज़हे धजका मारा और में दूर जास्कर गिरा...

शालू रोने lagi....ussko रोटा देखकर मेरी ासनकों में भी आंसू आगया

बीएस - क्यों बॉस निकल गया दम ..इतना hi था.....

उस्सने मेरी तरफ एक तलवार बड़ा दी और

यह लो इससे प्रयत्न करो फिर में तलवार से वार करने उसकी और दौड़ा

तोह उस्सने अपने खडग क एक hi वार से तलवार क टुकड़े कर दिए.....

मैं अपने आपको असहाय महसूस कर ने लगा तभी उस्सने अपना खडग शालू को मारने क लिए उठाया

तोह में अपनी पूरी ताकत एकत्रित कर के जोर से चीखा nahiiiiiiiii....ruk जाओ

मेरे ऐसे पुकारने से वह रुक गया

और मेरी तरफ देखकर...

बीएस - क्षमा करना युवक ...परन्तु में इन्हे नहीं छोड़ ....में भूका हु मुज़हे भोजन चाहिए...

में - इन्हे छोड़ दो यह इस क बदले तुम कुछ और खालो .....

बीएस - में एक राक्षस हु और मेरा भोजन मॉस है यदि इनके बदले तुम मुज़हे उत्तम मास्स लाकर दे देते हो तोह मैं इन्हे छोड़ दूंगा

में - कहासे लाकर दू में

बीएस - कही और से लाने की आवश्यकता नहीं hai....jo मुज़हे चाहिए वह है तुम्हारा मॉस ...,..

में - ठीक है मेरे प्राण देकर भी यदि में किसी क जीवन की रक्षा होती है तोह मुज़हे स्वीकार है....

शालू - नहीं अभी हमे मर जाने दो तुम्हारे प्राण मूल्यवान है .....

में - जो व्यक्ति किसी क प्राण न बचा पाए वह मूल्यवान कैसे हो सकता है ...

में बीएस क सामने अपनी गर्दन ज़्हुका कर....

में अपने आपको अपनी इच्छा से आपने आपको आपके सुपुर्द करता हु ....कृपया अब मेरे मित्र को छोड़ दीजिये..

तभी बीएस ने अपना चमचमाता हुआ कगदाग उठाया ....और मैंने आंखें बंद कर ली .......

जब बड़ी देर तक कुछ नहीं हुआ तोह मैंने अपनी आंखें खोलकर देखा

तोह एकदम चकित सा हो गया .....

क्युकी में अभी आश्रम क उसी शिवालय में ...उस शक्ति त्रिशूल क आगे खड़ा tha........na वह बीएस था

न मेरे कोई मित्र बंधे हुए थे

और न hi शालू ...

विह त्रिशूल अद्भुत प्रकाश से चमक रहा tha......aur उसजे ऊपर एक प्रकाश पुंज .....

तभी उस प्रकाश पुंज से आवाज आयी

धिनया हो पुत्र तुमने यह सिद्ध कर दिया की तुम इन् शक्तियों को प्राप्त करने क योग्य हो ......हम तुमपर बहुत प्रस्सना है...

जो किसी की रक्षा क लिए अपने प्राणो क बलि दान क लिए भी तैयार रहे ....वह hi रक्षक बनने क योग्य है

ाक्ष तत्त्व का गुण त्याग है ...

और तुम त्याग की उस परीक्षा में सफल hue.......yeh लो धारण करो पुत्र ...आकाश तत्त्व की अनंत शक्तियों से परिपूर्ण शक्ति त्रिशूल

तुम इस्सकी सहायता से ब्रह्माण्ड में किसी भी जगह जा सकते हो

( पावर ऑफ़ टेलिपोर्ट)

और वह त्रिशूल प्रकाश रूप से मेरे भीतर समां गया ........उसस्के मेरे भीतर सम्मति hi अपना रूप आकाश सामान व्यापक लगने लगा....

अपने लक्ष्य को प्राप्त कर के में बड़ा hi ानादित था....

तभी वह महागुरु आये और उन्होंने भी मेरे अभिनन्दन kiya....mandir से बहार निकला तोह देखा रात हो चुकी थी ...तिह में भी चल पड़ा अपनी कुटिया की aur.....mere मैं में नितन्तर चल रहा था वह मेरी कोई भी शाकीय कसम क्यों नहीं कर रही थी...

फिर सोचा गुरुदेव से पूछ लूंगा और अपनी कुटिया में आकर बैठ गया


ा1 को कुटिया में रहने देते है और देखते है रवस क्या कर रहा है

स्कूल और कॉलेज की लिस्ट से स्टूडेंट्स और टीचर्स का इलाज शुरू हो गया था

कुछ तोह पहले hi अपने आपको मार चुके थे और कुछ ऐसे भी थे जिनकी बॉडी ने डीएनए चेंज को एक्सेप्ट कर लिया था ..उनको मस अपने सीक्रेट अड्डों पर ले जा चूका था वह कुछ अलग जीव में बदल चुके था जिनका आधा शरीर मानव का tha....aur उनको थी तोह सिर्फ खून की प्यास......

बाकी जो बच्चे थे वह ठीक हो रहे the.......RVS ने सोचा की अब तोह यह प्रॉब्लम सोल्वे हो गयी

लेकिन फिर अब दूसरे शहरो और अलग अलग देशो में में यह ड्रग्स फैलने लगा......

गोवत सिक्योरिटी एजेंसीज की एक कंबाइन मीटिंग चल ताहि thi......jisse खुद हम सर हैंडल कर रहे थे

हम - ऑफिसर्स हम ने सोचा था की प्रॉब्लम ख़तम हो रही है...

लेकिन हम गलत थे ..मेडिसिन होने क बाद भी हम इस ड्रग से लोगो को बचा नहीं पारहे है

रॉ चीफ - सुर पहले जिन सिटीज में यह ड्रग्स फ़ैल रही थी वह की कण्डीश तोह अंडर कण्ट्रोल है....

लेकिन अब नयी सिटीज इस से अफेक्टेड हो रही है....

हम - आप क्या कहते हो एजेंट संघारक आप क पास तोह स्पेशल पावर्स है...

रवस - सर अब तक जहा यह ड्रग्स फ़ैल रहा था वह क सभी छोटे मॉटे डीलर्स का सफाया हो गया है ......

इन् सब डीलर्स को सप्लाई करने वाला लाला को हम ढूंढ रहे है...

सीबीआई चीफ - सर हमने शक क बिनाह पर डीके साइंस एंड रीसर्च की साड़ी लैब सील कर सदी गयी है...

उसके मद को भी हम ढूंढ रहे है...

हम - जल्दी से कुछ करो नहीं तोह चारो तरफ ऐसी तबाही मचेगी की कोई भी सुरक्षित नहीं होगा...

रवस - सर जब तक हम इस्सके रुट तक नहीं पहुँचते तब तक ऐसे hi चलता रहेगा ...हम ठीक करते रहेंगे और वह फिर हमें चैलेंज करता रहेगा

हम - दो व्हाटएवर यू वांट ..बूत ी वांट ाल थे क्रिमिनल्स डेड और बिहाइंड थे बार्स......


रवस - मेरे इनफॉर्मर (पप्पू भाई) ने

जो बताया है उस में अभी सिर्फ 3 दिन और है उसस्के बाद पूरे वर्ल्ड में गर सिटी में यह ड्रग फ़ैल जाएगा तोह

हम फिर कुछ नहीं कर पाएंगे..

में अपनी पूरी कोशिश करूँगा और आप सब ऑफिसर्स भी डबल एक्टिव हो jaaiye.......its टाइम तो हंट थे ब्लडी क्रिमिनल्स....

अभी क लिए इतना hi....

अगला अपडेट रात को....
 
अपडेट - 36

अभी तक आपने देखा रवस रिम्पी क बनाये एंटीडोट द्वारा मस क फैलाये विनाश को ठीक करने का प्रयत्न कर रहा है.....

साड़ी गोवन फैलते हुए ड्रग क प्रभाव से परेशां है

रवस बहुत कोशिश करके भी मस तक नहीं पहुंच पाटा

यहाँ ा1 5 शास्त्रों को प्राप्त कर चूका है...

अब आगे......

ा1 अपने लाक्षा को प्राप्त करके बड़ा प्रसन्ना था ...गुरुदेव से मिलकर अपनी कुटिया में पहुंचा hi था क देखा वह राकेश बैठा हुआ था...

मैं अपने परम मित्र को देखकर बड़ा प्रसन्ना हुआ और उस्सको गले लगाया .....

राकेश - मुज़हे क्षमा करो मित्र में आपकी इस यात्रा में कोई सहायता नहीं कर पाया.....

जब आप ज्वालामुखी पर्वत पर संकट में घिर गए थे तब भी नहीं आ पाया........

एक सच्च मित्र वही होता है जो अपने मित्र की विपत्ति में सहायता करे

परन्तु में चाहते हुए भी सहायता नहीं कर paaya......gurudev ने मुज़हे रोक रखा tha.....mitra

में - परन्तु मित्र मैंने तोह तुम्हे कुछ नहीं बताया ....फिर भी तुम्हे मेरी साड़ी यात्रा का पता hai....yeh कैसे ........तुम बहुत रहस्यमयी हो

लगता है तुम सब कुछ जानते हो मित्र ....मैं कौन हु ...मित्र ...मेरा परिचय क्या hai.....muzhe कुछ भी याद नहीं hai........muzhe लगता है क तुम सब जानते ho......muzhe बताओ मित्र....

राकेश - क्षमा करना मित्र ......अभी उचित समय नहीं आया hai........abhi आप विश्राम करो .....कल मिलते है..

में - उफ़ यह उचित समय ...भी न जाने कब आएगा ......

राकेश क जाने क बाद मैंने कुछ देर लॉकेट क साथ बात की.......

और सो गया .....

यहाँ रवस ....रिम्पी ....और अभी अपना पूरा समय ड्रग्स से अफेक्टेड लोगो को ठीक करने लगे....

और साथ साथ में रवस अपने 5 एजेंट्स और अभी को लेकर ड्रग्स डीलर्स का सफाया कर रहे थे.......

जिस जिस देश क जिस सिटी में ड्रग्स एफेक्ट कर रहा था रवस टेलिपोर्ट होकर वह क ड्रग डीलर्स का सफाया कर रहा था

ुंवरल्ड क लोग बुरे फास गए थे ड्रग सप्लाई करते है ...तोह संघारक की तलवार का सामने मतलब मौत...

अगर सप्लाई नहीं करते है तिह मस क असुरो द्वारा मौत ......

हर देश में संघारक क नाम की दशहत गुंडों में फैलने लगी

लेकिन इससे मस को कोई फरक नहीं पद रहा था अब वह अपना कसम माया क सहारे और अपने असुरो द्वारा करने laga......ab तक अपने ड्रग्स से उसने करीब 1000 लोगो को अपने गुलाम जीवो में बदल चूका था......

रवस ने स्थिति को अपने हाथ से निकलता देख ........ध्यान में बैठकर महागुरु को याद किया....

थोड़ी hi देर में महागुरु वह प्रगट हो गए....

रवस - प्रणाम महागुरु...

महागुरु - कहो वत्स ...क्यों याद किया हमे...

रवस - गुरुदेव आपसे क्या छिपा है ....

आज साड़ी मानव जाती संकट में है

और जो इस विनाश का कारन है उस तक में होनी पूरी ऊर्जा लगा कर भी नहीं पहुँच पारहा हु.......

अब आप hi कोई मार्ग बताइए...

महागुरु - पुत्र तुम जिसको ढूंढ रहे हो ....वह कोई साधारण मानव नहीं hai........woh असुर सेनापति मयासुर है जो आसुरी माया का स्वामी

है

तुम उस तक नहीं पहुंच सकते....

तुम्हारी भ्रमण शक्ति

( टेलेपोर्टेशन) केवल इस पृथ्वी लोक टस्क सिमित है ......

और वह ासुर पृथ्वी लोक क निचे ताल्लुक में बैठकर यह विनाश फैला रहा है....

रवस - तोह क्या करे गुरुदेव कैसे उस तक पहुंचे......

महागुरु - उस तक पहुंचे से पहले उसस्के बनाये हुए विष से दूषित हुए लोगो का उपचार आवश्यक है..

रवस - परन्तु गुरु देव यह ड्रग पूरे विश्व में अलग अलग देशो क कई शारो क लोगो को प्रभावित कर चूका hai.....hum किस प्रकार उन् लोगो तक pahunche......yeh समाज में नहीं आरहा है .......

महागुरु - पुत्र केवल विज्ञानं से इस समस्या का हाल नहीं निकलसकता...

तुम्हे विज्ञानं क साथ साथ देविक शक्ति का भी प्रयोग करना होगा...

रवस - किस प्रकार की देविक शक्ति गुरुदेव....

महागुरु - पुत्र निआना क पास जो निर्माण शक्ति है और रिम्पी क पास जो आधुनिक विज्ञानं की शक्ति है दोनों को मिलकर प्रयोग करना होगा.

शास्त्र भी कहते है पुत्र

उदयमें कार्याणि सिध्यन्ति


उद्यम hi हर कार्य को सिद्ध करने की कुंजी है.....

अभी तुम्हारे पास केवल 2 दिन है

तीसरे दिन होगा एक महायुद्ध जो इस समस्या को समाप्त कर देगा...

इतना कहकर महागुरु चले गए...

और रवस सोचे लगा क किस प्रकार क विज्ञानं और शक्ति क मेल से इस समस्या का हॉल निकला जा सकता है...

आज क लिए इतना hi...

अगला अपडेट कल....
 
थैंक यू सो मच भाई आपके साथ और सपोर्ट क लिए

:थैंक्यू: :thankyou::thankyou::thankyou:

बस ऐसे hi अपना साथ बनाये रखे....

पोस्टेड...
 
थैंक यू सो मच भाई फॉर योर सपोर्ट ????

पास्ट भी जरुरी है भाई ...एहि तोह कहानी की नीव है......

अभी 4 अपडेट और .उसके बाद कहानी प्रेजेंट टाइम लाइन पर चलेगी...

बस अपना साथ बनाये रखे..

पोस्टेड
 
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