ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 15 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

सुपर फैंटास्टिक & शानदार रिव्यु नैना जी

:अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे:

एंड ठंकु सो मच फॉर योर सपोर्ट & फैंटास्टिक कमेंट

:थैंक्स: :thanks::thanks:

बहुत दिनों बाद आपका कमेंट पढ़कर अच्छा लगा .....आपका कमेंट हमेशा मेरे लिए प्रेरणा दायक होते है ....

प्लस स्टे कनेक्टेड...??




लेटेस्ट अपडेट 108 पोस्टेड.....
 
अपडेट - 109



अब तक आपने देहका अभी और रिम्पी का मिलान हो गया है ....

अड्डी किसी जगह 10 खैफनाक साये से घिरी हुई थी



अब आगे .......

वह साया ाद्दु की तरफ बढ़ने लगा ......दीपू किऔत क बारे में सुकर .....और उसकी मुतवका जिम्मेदार अपने सामने देखकर .....ाद्दु को पहले तोह दर लगा .....लेकिन फिर उसका वह दर गुस्से में बगलने लगा .....

और ाद्दु की आंखें चमकने लगी .....उसकी आँखों से वाइट रौशनी निकलने लगी अब उसके शरीर से बहुत अधिक मात्र में ऊर्जा निकल ने लगी .....अब वह ऊर्जा सामने वाले साये पर एक बीम बनकर पड़ने लगी जिससे वह तड़पकर चीखने लगा ......

वाइट रौशनी में अब वह साया पूरी तरह दिखने लगा .....वह न तोह कोई इंसान था न hi कोई जानवर .....यह जीव कुछ अलग hi प्रजाति क थे ...जिनका शरीर .....ठोस नहीं था .....यह एक पैरासाइट की तरह किसी क भी शरीर को कब्ज़ा कर लेते थे ....और उसकी प्राण शक्ति सोख लेते थे ...aur...uska दिल खा लेते थे .......जब उनका काम हो जाता था तोह उस शरीर को छोड़ देते थे ....

.शायद ...दीपू क साथ भी ऐसा hi कुछ हुआ था ..

लेकिन ाद्दु की ऊर्जा से वह जीव तड़पने लगा और देखते hi देखते वह ख़तम हो गया ....और उसको साड़ी प्राणशक्ति की ऊर्जा ाद्दु में समां gayi.....aur वह धुआँ बनकर उड़ गया ......

अपने साथी की ऐसी हालत देखकर वह 10 साये ाद्दु की तरफ बड़े .....और तेज़ी से बढ़ने लगे ......तब तक ाद्दु की आँखों से निकलने वाली बीम एक और पर पड़ी ...और उसका भी वही हाल होने लगा था ......लेखों बाकी साये अब ाद्दु क पास पहुँचने hi वाले थे ........क कही से आकर उन्हें एक भयंकर एनर्जी बीम लगी .......

यह यह गोलार्क .....वह लगातार एनर्जी बीम उन् जीवो पर छोड़ रहा था .....

यहाँ ाद्दु अब तक 8 और सायो को ख़तम कर चुकी थी .........बचे 2 अभी गोलू क सामने the....Golu अपनी ऊर्जा का वार ुनपत कर रहा था ...और उनकी अजीब सी चीखे वह गूंज रही थी ......उनका भी काम ख़तम कर दिया .......और जब ाद्दु ने गोलू को देखा तोह ......तोह शांत हो गयी और ......बेहोश होगयी ......

यह थी प्राण शक्ति की ऊर्जा ....जो चाहे तोह किसी मरते हुए में नए प्राण भर दे .....और यदि क्रोधित हो जाए तोह किसी की भी प्राण शक्ति सोख ले .........

गोलार्क जब ाद्दु क पास पहुंचा तोह अभी भी ाद्दु क शरीर से ऊर्जा निकल रही थी ...जिसके कारण गोलार्क उससे चुने में असमर्थ था ......

उसने अपना हाथ आगे करके कुछ ऊर्जा निकली और ाद्दु को टेलिपोर्ट कर दिया और खुद भी तेलुपोर्ट होकर निकल गया ......

यहाँ अभी की आँख अपने समय पर सुबह 4 बजे खुली ....दोनों अभी भी निर्वस्त्र एक दूसरे की बाहो में पड़े थे .....

अभी ने एक नज़र रिम्पी पर डाली और उसके माथे पर किश किया ......लेकिन अचानक जाने क्यों अभी का मैं घबराने लगा ......

यह वही समय था जब ाद्दु की एनर्जी बीम उन सायो को कहातम कर रही थी ....अभी ने तुरंत रिम्पी को गॉड में उठाया ...और टेलिपोर्ट होकर घर अपने रूम में आगया .........

लेकिन वह पहुँच कर उसकी घबराहट और ज्यादा बढ़ने लगी ...तोह उस्सने रिम्पी को उठाया और कपडे पहनकर बहार आगया .......

उसके मैं में पहला ख्याल आया दीपू का ...और वह उसके रूम की और बढ़ gaya...toh देखा क दीपू अपने रूम में नहीं था ......अब ...उस्का दिल ...किसी अनहोनी की आशंका से और घबराने लगा .....अब ...वह ...से वह ....ाद्दु ....क रूम की ...और बड़ा .........तोह देखा क ाद्दु क रूम में पारी और सोना सोई थी .........ाद्दु ....रूम में नहीं थी ......

अभी का मैं चीख चीख कर कह रहा था क कुछ तोह बुरा हुआ है ...

अभी वह से nikalkar....Ritu क रूम में देखा तोह ऋतू सोई हुई ...thi....Abhi वह से निकलर ...ाद्दु को खोजते हुए निचे आया .....तोह माँ उससे किचन से बहार आती हुई दिखी .......

माँ - बीटा क्या बात है ...इतना परेशां क्यों है सब ठीक तोह है न ........

अभी क इस तरह रूम से जाने से रिम्पी को भी कुछ गड़बड़ होने का अहसास हो गया .....लेकिन रात क मिलान क बाद उसकी हालत ऐसी नहीं थी .....वह बिना फ्रेश हुए निकल सके ...इसिलए वह फ्रेश होकर अभी को ढूंढ़ते हुए निचे आगयी .......

माँ - देखो रिम्पी भी आगयी .....क्या हुआ बीटा सब ठीक है न ....यह बेतु इतना क्यों परेशां लग रहा है ....

अभी की आंखें लाल थी और आँसू रोके हुए थे ....लेकिन ....यह आंसू भी ....माँ को देखर ...कुछ ांसो चालक hi आये बहार ....

अभी मुँह घुमाकर अपने आंसू छुपाते हुए ....

अभी - सब ठीक है माँ .....और में क्यों परेशां होऊंगा ...में तोह बस पानी लेने आया था .....

नैना पास आते हुए अभी को कह्दे से पकड़कर घूमती है और उसकी आँखों में आंसू देखकर ....

माँ - अगर सब ठीक है तोह यह क्या है बेतु .....कुछ तोह हुआ है .....मेरी भी आँख ..किसी बुरे सपने क कारण खुली .....मुज़हे भी बहुत घबराहट होरही है बेतु जाने क्यों रोने का मैं कर रहा है.......

रिम्पी तू बता न क्या हुआ है ....और माँ की आंखें भी भर आयी ....

रिम्पी - मुज़हे तोह कुछ नहीं पता माजी ........

उसी समय अभी को हॉल में कुछ हलचल महसूस हुई ......तोह वह दौड़कर हॉल में पहुंचा .तोह देखा क ....

ाद्दु बेहोश हालत में सोफे पर पड़ी है .....और ...वही गोलार्क भी उसी समय प्रगट हो गया .

अभी ...रिम्पी ..और ....नैना .....तुरंत ाद्दु क पास पहुंचे ........

अभी - गुड़िया ......गद्य उठ बीटा ....क्या हुआ .....तुज़हे ...और ाद्दु क गाल को टच किया जो इस समय बहुत गरम था .....अभी की आँखों में आंसू आगये ......वह उससे हिलाकर उठाने लगा ........

माँ - रट हुए ाद्दु को हिलती हुई ......गुड़िया उठा जा बच्चा .....और जब माँ ने ाद्दु क सर पर हाथ रखा तोह उसका माथा बहुत गरम था ...

माँ - देख न बेतु क्या हुआ है गुड़िया को ....इतना bukhar....aur उसको पुकारती हुई रोने लगी....

अभी का ध्यान गोलार्क पर पड़ा तोह वह उस्सकी तरफ बढ़ा ....वह अभी कुछ बोल hi पाटा की अभी ने उसका गिरेबान पकड़ लिया ......

अभी - क्या किया तूने मेरी ाद्दु क साथ .....बोल .....मैंने ...तुज़हे अपना भाई समज़ह और ......मैं नहीं छोडूंगा ...तुज़हे ...

उसी समय ाद्दु को भी होश आगया .....और उसके मुँह से निकला ....भाई .....बहई.....

ाद्दु को होश आया देखकर माँ ने फिर उसके सर पर हाथ फेरा ...toh..ab...garam नहीं था .....

माँ - मेरी bacchi...kya हो गया था तुज़हे ...और तू यहाँ कैसे आयी .......

ाद्दु अभी क तरफ देखते हुए बस उससे पुकार रही थी.... jo...Golark की गिरेबान पकडे ...उससे ...पूछ रहा था .......

ाद्दु की आवाज सुनकर अभी गोलू को छोड़कर उसके पास आगया .....

.अभी - गुड़िया तू ठीक तोह है न ........क्या हुआ था तुज़हे ....तूने तोह मुज़हे डरा hi दिया था ....

और ाद्दु को उठाकर गले लगा लिया .......ाद्दु को गले लगाकर अभी को अपने मैं में एक शांति सी महसूस हुई .....

ाद्दु - भाई आप गोलू भैया को क्यों मार रहे थे यह तोह मुज़हे वह बचने आये थे .....यह बहुत अच्छे है भैया ......

अभी - लेकिन गुड़िया हुआ क्या था .......किस्से बचने ..और कहा ....

तब तक रवस भी वह हो रही आवाजे सुनकर वह आगये .....इतनी सुबह यहाँ यह सब क्या हो रहा था उन्हें समाज नहीं आरहा था ....तोह रिम्पी को अब तक जो कुछ समाज आया था वह उसने बता दिया ......

जिस सुनकर उनके चेहरे पर भी चिंता की लकीर खिंच गयी

ाद्दु - वह बही रात को दीपू ने मुज़हे बोलै क आपने हम दोनों को चाट पर बुलाया है तोह में उसके साथ gayi....muzhe वह अजीब सी स्मेल आयी ....फिर जब मेरी आँख खुली तोह ....मेरे सामने बहुत से भूत थे ......

उन्होने ने बताया क उन्होंने दीपू को मार दिया ...फिर मुज़हे पता नहीं क्या हुआ ....बस इतना याद है क गोलू भैया मुज़हे वह लेने आये थे......

अभी - लेकिन यह कैसे पॉसिबल है ....मैंने घर को शैल्फ से कवर कर रखा था ....

कोई बहार से इस शील्ड को तोड़कर अंदर नहीं आसक्त था ....

और ाद्दु और दीपू मेरे सुरक्षा क घेरे में थे ...तोह कोई बुरी ताकत कैसे उन्हें कैसे टच कर सकती थी .....

और गुड़िया तू यह क्या बोल रही रही दीपू को ..क्या हुआ दीपू को कहा है वह ........गोलू कौन थे वह लोग .....

गोलार्क - भाई रात को शिवली दी क जाने क बाद ....जब में भी जाने लगा तोह ...

मुज़हे कुछ अजीब सी ऊर्जा का आभास हुआ तोह में उसका पीछा करता हुआ चाट की तरफ गया ....तोह मैंने देखा दीपू निचे गिरा हुआ है और कोई साया ....ाद्दु को लेकर वह से टेलिपोर्ट हो गया ....

मैं उस ऊर्जा का पीछा करते हुए उस जगह पहुंचा ......तोह वह कुछ अजीब से जीव थे .......और फिर गोलू ने वह का सारा हाल अभी को बताया .......

दीपू का ख्याल आते hi अभी चाट की तरफ भगा .......बाकि पीछे भी उसके पीछे हो लिए ......

ाद्दु को अभी भी कीच कमजोरी फील हो रही थी ....लेकिन वह भी दीपू को लेकर टेंस थी ....इसीलिए उठने की कोशिश करने लगी .....तोह ...नैना ने उससे आराम करने का बोलै .....लेकिन वह नहीं मान रही थी .....वह दीपू को देखना चाहती थी .......और रोने लगी ....

रवस से उसके आंसू देखे नहीं गए लेकिन उन्हें भी दीपू क साथ कुछ गलत होने की आशंका थी .....तोह बड़ी मुश्किल से इससे समज़हाए क हम दीपू को यही लेकर आते hai.......aur नैना को ाद्दु क पास छोड़कर वह भी चाट पर चला गया.....

यहाँ जब अभी और बाकी सब चाट पर पहुंचे तोह देखा ....क दीपू चाट पर पड़ा था ...और ......उसकी आँखों की पुतलिया ऊपर की तरफ ..थी ....उसकी खुली आंखें और उसका खुला मुँह इस बात की गवाही दे रहे थे क अब वह मासूम दुनिया छोड़ कर जा चूका था .......

अभी उसके पास पहुंचकर उससे जोर से आवाज लगायी .....Deepuuu....aur उसकी पल्स चेक की ...तोह पता चला क उससे मरे हुए ...कोई 6 या 7 घंटे हो चुके थे यानि क जब अभी की शादी हो रही थी तब ......

अभी जोर से रोने लगा ......मुज़हे माफ़ कर दे दीपू मैं तेरा ख्याल नहीं रख पाया .....तेरा गुन्हेगार हु मैं ......दीपू........

रिम्पी तोह एकदम शॉक में कड़ी thi.....usse....kuch समाज नहीं आरहा था .....कल तक क शादी की खुसियो से भरा घर ....आज मातम में बदल रहा tha........RVS भी ंचे बैठ कर अभी क कंधे पर हाथ रखकर उससे शांत होने को कह रहे थे ...........

यहाँ ाद्दु क बहुत ज़ीद करने पर नैना उससे चाट तक ले आयी .......और चाट का हाल देखकर ......उसके दिल में एक दर्द उठा और वह वही दरवाजे पर बैठ गयी ....उस्सकी आँखों से लगातार आंसू बाह चले थे ......

ाद्दु दीपू को ऐसे जमीं पर पड़े हुए देखकर उसके पास आयी ......और उससे हिलाकर उठाने लगी .

ाद्दु - दीपू उठ न ....तू कुछ बोलता क्यों नहीं ....है .....देखो न भाई ...क्या होगया दीपू को .........और रोने लगी ....अभी ने ाद्दु को रट हुए देक्ग तोह उससे सीने से लगा लिया .....और चुप करने लगा ......

ाद्दु एक दम से अलग हुई ...और दीपू क पास पहुंचकर उसके सर पर हाथ रखकर समें अपनी प्राण शक्ति की ऊर्जा देने लगी .....क्यों की उससे याद था इसी तरह .....करने से उसने मरते हुए सुलेखा को भी ठीक किया था.....

लेकिन दीपू मर चूका था ....अभी ने जब देखा क ाद्दु दीपू को ठीक करने की कोशिश कर रही है .....तोह वह भी रिम्पी से प्राप्त हुई प्रकृति की ऊर्जा से उसमें नव जीवन भरने की कोशिह करने लगा ....

तभी वह शिवली और विभक्त आयी .....और अभी को रोक दिया .......

अभी - शिवू तुम्हे तोह हर बात पहले से hi पता होती है तोह क्या यह पता नहीं था ....कई नहीं मुज़हे पहले बताया .........

नहीं में ऐसा नहीं होने दूंगा .......चाहे मेरी साड़ी ऊर्जा लग जाए में इससे जिन्दा करके ुइ रहूँगा .....

शिवली - आप ऐसा नहीं कर सकते ......विधि क विधान में हस्तक्षेप नहीं कर सकते .....जन्म और मृत्यु पहले से hi निर्धारित होती है ......

और मैंने पहले hi कहा था मुज़हे प्रारभ्ध क बारे में पता है भविस्य क बारे में नहीं......

गोलार्क - हां भाई .....आप का जनम बहुत बड़े उदेस्य क लिए हुआ है .....आप इस श्रिस्ति क रक्षक हो ....आप ऐसे कमजोर नहीं पद सकते .....और दीपू को देखने से hi लगता है क इससे मरे हुए बहुत समय हो गया है ......इसीलिए आप इससे जीवित नहीं कर सकते .....व्यर्त hi आपकी साड़ी शक्तिया नष्ट हो जायेगी .....

अभी अब दोनों हाथ घुटने पर रखकर रोने लगा .......

अभी - कैसा रक्षक मेरे भाई ....जो अपने परिवार की रक्षा नहीं कर सकता ....वह क्या किसी की रक्षा करेगा .......

तब तक घर में बहुत लोग उठ चुके थे .......और यह बात पूरे घर में फैल गयी थी .....पूरे घर में इस घटना से दुःख का माहौल फैल गया ....

ऋतू को भी दीपू की मौत का बहुत दुःख था ....लेकिन अभी की ऐसी दशा उससे देखे नहीं जा रही थी ....वह बार बार अभी को गले लगाकर ....समज़हाकार उससे शांत करने की कोशिश करने लगी.......

निआना और ाद्दु का तोह बुरा हाल tha....dono को चची और बुआई संभल रही थी शिवलु विभक्त रिम्पी को संभल रही थी ...और गोलार्क रवस क साथ मिलकर अंतिम संस्कार को तैयारी कर रहा था.....

यही तोह दुनिया का खेल है कब एक पल में खुशिया दुःख में बदल जास्ये कोई कह नहीं सकता ....

अंतिम संस्कार पूरी विधि विधान से सम्पन्न हुए .....

धीरे 2 सभी रिश्तेदार एक एक करके निकल गए .....अभी बस अपने रूम में 3 दिन तक शांत बैठा था ...न किसी से बात करता था ....

रिम्पी ने बहुत कोशिस की लेकिन बेकार ......ाद्दु भी इस दुःख से उभर नहीं पा रही थी .....

शिवली ...विभक्त ...पूरे घर का ध्यान रख रहे थे ..शामली और शालू भी आगयी थी और उनको मदत कर रही थी .....

यहाँ दूर किसी वीराने में .....काले कपडे में चेहरा ढाका हुआ ...और कुछ साये उसके आस पास.....

अनजान - ha....ha...ha.....Abhi तोह यह शुरुवात है रक्षक ....धीरे 2 इतने जखम तेरे दिल पर दूंगा क तू खुद जीना छोड़ देगा ....ha...ha...ha....

कहता तोह तेरी बहन को मार सकता था ....लेकिन इतने जल्दी नहीं ....उस्का भी नंबर आएगा ....ha...ha...ha...

साया - लेकिन बॉस हमरे इतने साथो मारे गए ...

अनजान - जुंग में तोह इतनी कुर्बानिया चलती hi है....

आज क लिए इतना hi .......


अगला अपडेट कल......
 
अपडेट - 110



अब तक आपने देखा ाद्दु की प्राणशक्ति ने विनाश का रूप धरा और उन सायो क प्राण सोख लिए ...गोलार्क ाद्दु को लेकर घर आया ........

ाद्दु पर हुए हमले और दीपू की मौत क कारण घर में सब दुखी hai....aur अभी टूट सा गया ...

अब आगे........

दीपू की मौत को 3 दिन हुए थे ......इन 3 दिनों में अभी ने किसी से भी बात नहीं की थी .....इस समय भी अभी रूम में hi बैठा था .....क वह शिवली और विभक्त आयी..

शिवली - कब तक आप ऐसे hi बैठे रहोगे ....बहुत हो गया अब .....आपको इन् भावनावो से ऊपर उठना होगा ....आप ऐसे साधारण लोगो जोसे हारकर नहीं बैठ सकते ......आप एक रक्षक है ....आपको यह समाज न hi होगा ....

अभी - रक्षक ....कैसा रक्षक ..जो अपने परिवार की रक्षा नहीं कर सकता वह संसार की क्या रक्षा करेगा ......

शिवली - और कितनी बार आप भावनाओ क अधीन बार बार अपने कर्म पथ से अलग होते रहेंगे .......मैंने पहले hi कहा था क हमारे पास समय बहुत काम है .....और चुनौती जयादा ......

यु बार बार आपको समज़हाना मुज़हे अच्छा नहीं लगता .......

विभक्त - आप दीपू को लेकर परेशां है na......Vidhi ने इस जनम में उसका इतना hi साथ लिखा था ......... लीजिये आप उसी से बात कर लीजिये .....और विभक्त ने आगे हाथ बढ़ाकर कुछ मंत्र उच्चारण किये .....तोह वह एक श्वेत प्रकाश क साथ दीपू की आत्मा प्रगट हो गयी ........

अभी अपने दामने दीपू को देखकर हैरान रह गया .......

अभी - दीपू .....तुम

दीपू आत्मा - हां ... भाई ...आप मेरे बारे में इतना न सोचे .......में जहा भी हु बहुत खुश हु .....बस आपको इस तरह देखकर मुज़हे अच्छा नहीं लग रहा है....

अभी - दीपू ...मुज़हे माफ़ करदे में तेरे लिए कुछ नहीं कर पाया ......

दीपू - भाई क्षमा तोह मुज़हे मांगनी चाहिए .....आपने तोह मुज़हे इतना प्यार दिया ........पर भाई इस जनम में विधि ने मेरा इतना hi साथ लिखा था .....औरबहूत जल्द ....में आपके घर वापस आऊंगा .......

इतना कह कर वह वह से अदृश्य हो हो गया ....

अभी का मैं शांत हुआ ...और अब उससे अपनी भूल का अहसास हुआ ....क ध्यान में महागुरु क कहने पर ...शिवली क भी बार बार समज़हाने पर वह बार बार भावनाओ क आवेग में बाह जाता है ........

अभी - शिवू मुज़हे क्षमा कर दो ....तुमने कितनी बार समज़हाए lekin...mein hi बार बार भावनावो में बाह जाता हु ......

शिवली - शायद इसीलिए क्यों क आपमें प्रेम की अधिकता hai......aur प्रेम को मोह में बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता .......आपको अपने आपको और सुदृढ़ बनाना होगा .......

अभी - तुम ठीक कहती हो ...शिवू......

शिवली - अब आपको अपनी अगली यात्रा पर निकलना चाहिए .......क्यों की समय भी बहुत काम है .........अभी सिर्फ करीब ढाई महीनो में आपको 5 और शक्तिया प्राप्त करनी है......

कुछ देर ऐसी hi बातें चलती रही .......शालू ..शामली ..और रिम्पी से भी अभी मिला ......

अभी - अपने दोनों कान पकड़ते हुए .......मुज़हे माफ़ कर दो जान ....कहा मुज़हे तुम्हे संभालना था .....लेकिन अपने मोह और दुःख क चलते मैंने यह भी नहीं जाने की कोशिश की क तुमपर क्या बीत रही होगी .......

रिम्पी आगे बढ़कर अभी का हाथ उसके कानो से हटाकर ...खड़े होने का इशारा करती है और अभी जब खड़े हो जाता है ....यह जोर से उसके गले लगकर रोने लगती है .....इन् 3 दिनों का दुःख का गुबार जो वह अंदर दबाये बैठी थी ....उसकी आंको से बाह चला .......

अभी ने उसके चेहरे को पकड़कर उसके आंसू ponche.....Aur उसके होंठो पर अपने होंठो को रहकर किश करने लगा ......बड़ी डेट तक दोनों ऐसे hi प्रेम आलिंगन में बंधे रहे फिर अलग हो गए ......

अभी ने आड़ू को भी samzhaya......aur माँ क रूम की और बढ़ गया .....माँ बैठी किसी सोच में गम थी ...अभी जाकर माँ की गॉड में सर रखकर लेट गया ......माँ इतने गहरी सोच में थी क उन्हें अभी क आने का पता hi नहीं चला ...लेकिन जब अपनी गॉड में उन्हें किसी का आभास हुआ ...तोह वह अपनी सोच से बहार आयी ....

माँ - अरे बेतु tu......aaj तुज़हे अपनी माँ का ख्याल आया है .....एक तरफ तोह जिससे मैंने अपना बीटा माना उससे खो दिया ........और दूसरी तरफ तू जिसने अपने आपको बंद करके रख दिया ......तुम सोचा क मेरे दिल पर क्या बीत रही होगी ........और उसकी आँखों से आंसू की कुछ बुँदे अभी क चेहरे पर आ गिरी ....अभी ने अपने हातो से ....माँ क आंसू पोंछे .....

और लेते हुए hi अपने दोनों कण पकड़कर... माँ की आँखों में देखने लगा ......माँ ने भी हल्का सा थप्पड़ उसके गाल में maara.....toh अभी अपना गाल पकड़कर ऐसा दिखता है जैसे उससे बहुत जोर से लगी हो......

तोह माँ ने प्यार से एक और थप्पड़ उसके गाल पर टिका diya.....bada आया नौटंकी कही का ...और ज़्हुकहकार उसके मत्थे पर किश कर दिया......

दोनों माँ बेटे ऐसे hi बातें करते रहे ....और साथ2 में माँ अभी क बालो को भी सहलाये जा रही थी.....

अपनी माँ का वात्सल्य भरे स्पर्श क कारण 3 दिन से जगे होने क कारण अभी ...बात करते करते सो गया.....3 घंटे की गहरी नींद क बाद अभी की आँखें खुल गयी तोह देखा ...माँ भी अभी क सर पर हाथ रखे रखे सो गयी थी.......

अपने बेटे को अब ठीक देखकर उसके भी दिल को सुकून पहुंचा था.......

मैं वह से धीरे से उठकर अपने रूम में आगया ....रूम में इस समय कोई नहीं tha.....Toh चल दिया फ्रेश होने ....शाम हो गयी थी .....गैलरी से थोड़ी ठंडी गन्दी हवा आरही थी ....तोह मैं गैलेरी में खड़ा हो गया और आगे क बारे में सोचने लगा ....

अब उससे अपनी अगली यात्रा पर निकलना था लेकिन .....उससे अंदेशा था ......क दीदार भी उसके घर और परिवार पर हुम्ला हो सकता है ......तोह उससे गोलार्क का ध्यान आया ........तोह अभी ने टेलिपाथी क जरिये उससे संपर्क किया और बुला लिया ........और पल भर में गोलू वह प्रगट हो गया .......

अभी - गोलू ...मुज़हे क्षमा कर देना .......उस दिन तुमने ाद्दु की सहयता की थी ....लेकिन भावनाओ क आवेग में मैं तुम्हे hi दोषी मान बैठा ....

गोलू - कोई बात नहीं भाई ....वह ....परिस्थिति hi ऐसी थी ...कोई भी ऐसा hi करता .......

आप कहे आपने मुज़हे क्यों याद किया .....

अभी - तुम बिलकुल अपने पिता की तरह बहुत अच्छे हो ........मुज़हे अपने अगले लक्स्य की तरफ जाना है .........और अभी हम इस घटना क जिम्मेदार शत्रुओ तक नहीं पहुँच पाए hai.......issiliye में तुम्हपार यहाँ की रक्षा का भर सौंपना चाहता हु .....

गोलू - भाई यह तोह मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी आप निश्चिंत रहे ........

अभी - यहाँ मेरा मनोमय रूप होगा जो भावना प्रधान है .......उससे युद्ध कला और पावर्स से कुछ लेना देना नहीं है ......तुम्हे कुछ सहयता की जरुरत होगी तोह तुम शिवली या ...रिंकू से संपर्क कर सकते हो.....

गोलू - आप निश्चिंत रहे भाई ....यह परिवार अब मेरा परिवार है ....में इस्सकी अपने जान से ज्यादा ध्यान रखूँगा .....

थोड़ी देर गोलू से बात हुई फिर वह चला गया ......

बहार मौसम अच्छा हो रहा था ....जो मैं में एक नया उत्साह भर रहा था

मैं में आया कई दिनों से ध्यान नहीं कर पाया .....तोह बैठ गया दयँ में ......पहले प्राणायाम करके अपने प्राणो को नियंत्रित किया ...और मूलाधार चक्र से उप्पेर होते हुए ....एक ..एक चक्र में ध्यान करते हुए ...आज्ञा चक्र में पहुंचा ...........जहा एक दिव्या प्रकाश ....में मुज़हे कुछ ऋषियों की छवि दिखाई देने लगी .......जो ध्यान में बैठे .......और वेद मंत्रो की भी आवाजे सुनाई देने लगी ........

बड़ी देर तक ध्यान क पश्चात जब अभी ने आंखें kholi.......toh सामने देखा ......वह किसी अलग hi दुनिया में है .......जहा ......7 ऋषि ध्यान मुद्रा में उसके सामने बैठे थे .......उसने चारो और घूमकर देखा ....उस जगह की धरती पूरी श्वेत है ....,....वह जहा इस समय ऋषियों क सामने बैठा था ........वह किसी गुरुकुल क सामन है..........

तभी सामने बैठे हुए एक ऋषि की आवाज से अभी का ध्यान उस तरफ गया ......

ऋषि 1 - ऐसे चारो तरफ क्या देख रहे हो ....अभिनव........

अभी - ऋषिवर में यहाँ कैसे में तोह घर पर था ....और यह जगह कौनसी है.......

ऋषि 1 - पुत्र यह महेर लोक है .....यह ब्रह्माण्ड क हर सौरमंडल क सप्तऋषियों का लोक है .....

अभी - क्या आप विस्तार से बता सकते है ऋषिवर

पुत्र .....इस ब्रह्माण्ड में कोटि आकाश गंगाये (गैलेक्सी) है .....और हर आकाश गंगा में कई सौर मंडल होते (सोलर सिस्टम) है ....हर सौर मंडल में ज्ञान क प्रसार क लिए त्रिदेवो द्वारा सतपरिशी (7 ऋषि) नियुक्त किये जाते है ......जो हर ......देवराज ...इंद्रा क साथ बदल जाते है....

इस समय क हमारे सोलर सिस्टम क 7 सप्त ऋषि है -

Kashyap....Atri....Vashisht....Vishwamitra.......Gautam ...

जमदग्नि .......और भरद्वाज ....है....

पुत्र तुम्हे यहाँ योग द्वारा अपनी शक्तियों और भावनावो पर नियंत्रण क लिए ....लाया गया hai......aur साथ hi तुम्हारी अगली शक्ति ....को इस लोक में ढूंढ़ना है ....इस्सके लिए तुम्हारे पास केवल 3 दिन है .....

अभी - परतु ऋषिवर मेरे घर पर ......

ऋषि - उसकी चिंता तुम मत करो हमने तुम्हारा प्रतिरूप वह छोड़ दिया है.......

इतना कहकर वह रिसीहि वह बानी हुई अपनी अपनी कुटिया में चले गए......

अभी उस लोक में घूमकर देखने लगा .....तोह उससे .....7 - 7... ऋषियों क कई समूह जो अलग अलग सोलर सिस्टम क थे ........

अब इतने बड़े लोक में अपनी शक्ति को कैसे ढूंढे .....

दो दिन 7 ऋषियों क निरक्षण में अभी ने ध्यान की कई कलए सीखी .....जिसमें समाधी अवस्था और ब्रह्मरन्ध्रा में स्थित चीड़ शक्ति में ध्यान .....सीखा ......जससे हर चक्र में स्थित अपनी शक्ति को पूरी तरह नियंत्रित करने की कला सीखी .......

दो दिन बिट चुके थे अब बस केवल एक hi दिन बाकी tha........Sandhya क दयँ में ...अभी .....और गहरे ध्यान में उतर गया ....जिससे ....उसस्के 5 तत्वों का पूरी तरह इस लोक क 5 तत्वों से संपर्क हो गया .....अब वह ध्यान में इस लोक की हर जगह को देख पा रहा था .....

जब अभी ने अपनी अगली शक्ति का संकल्प किया ....तोह ध्यान में ...उससे एक सरोवर क किनारे अपनी कुटिया क समीप एक ऋषि कन्या dihki......usne एक साध्वी जैसे वासीरा धारण कर रखे थे .......उसके चेहरे पर एक आलोकिक तेज़ tha....aur वह बैठी हुई माला पिरो रही थी ......

अभी जब ध्यान से उठा तोह उस कन्या तक पहुँचने क लिए ...टेलिपोर्ट होने की कोशिश की .....लेकिन सब व्यर्थ ....क्यों की यहाँ ज्ञान शक्ति ...और योग सिद्धि क सिवा कोई शक्ति काम नहीं कर सकती थी .....

अब उससे अपने घ्यान और बुद्धि द्वारा hi उस तक पहुंचना था ......

इस समय संध्या का समय हो गया था ........और ध्यान में अभी ने जिस सरोवर क निकट उस ऋषि कन्या को देखा उस सर्वर क निकट घने पेड़ थे ........

अभी को यह पता था क सरोवर क निकट पेड़ो पर बहुत से पंछियो का वास होता है .......और सभी पंछी शाम क समय अपने घोसलो में वापस आते है उस समय उनका शोर बहुत होता है .......

अभी ने योग शक्ति द्वारा अपनी इन्द्रियों की ऊर्जा (सेन्सेस) को और तीव्र किय और आस पास आने वाली आवाजों का पीछा करते हुए चलने लगा ......

कई सरोवर उसने देख लिए ....अभी अँधेरा होने लगा था और पाँवहियो क स्वर भी बहुत धीमे हो गए थे ......क ...ाहकीर ...वह उस सरोवर क निकट पहुँच hi गया .....

उसने देखा क सरोवर क निकट ...hi ..7 कुटिया बानी हुई है ........

लेकिन अब रात हो चुकी थी ......इन 7 में से किस कुटिया में उसकी मंज़िल है यह तोह अब उससे सुबह hi पता चलने वाला tha.....isiliye ....वह उस सरोवर क hi निकट एक साफ़ जगह देखकर ......लेट गया.

नींद तोह पूरी रात आयी नहीं .....सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उस्सने सरोवर में स्नान किया ....और वापस आकर अपनी जगह पर ध्यान करने लगा ........

क कुछ आवाजों क कारण उस्का ध्यान टुटा ........तोह उसने देखा सूर्योदय होने वाला है ..आकाश में लालिमा आगयी है

और सरोवर क निकट एक विशाल दैत्य ने एक बाळक को पकड़ रखा है ......और एक महिला उस दैत्य क सामने हाथ जोड़कर बार बार ...उस बालक को छोड़ने क लिए कह रही है.....

उस महिला क hi निकट एक कन्या कड़ी है .....अभी ने देक्ग यह तोह वही ऋषि कन्या है ...जिससे उसने ध्यान में देखा था .....

अभी क लिए इतना hi......


अगला अपडेट रात को .......
 
अपडेट - 111

अब तक आपने देखा अभी अब भावनाओ से उबार चूका है ....

धायण की अवस्था में hi महेर लोक पहुँच गया हुए सप्तऋषियों से मिला ....

अपनी अगली शक्ति की खोज में एक सरोवर क निकट पहुंचा .....

अब आगे ....

अभी ने देखा क वह भयंकर दैत्य एक बालक को पकडे हुए है ...और ...एक महिला उससे उसको छोड़ने की प्रार्थना करती है ......वही उससे वह ऋषि कन्या भी दिखती है जिससे उसने ध्यान में देखा था ......

महिला - छोड़ दो मेरे पुत्र को ......में आपके हाथ जोड़ती हु ....यही मेरे जीवन का एक सहारा है ......

दैत्य - नहीं मैं इससे अब नहीं छोड़ सकता ...यह ..मेरा भोजन है........

महिला - इससे खाकर आपको क्या प्रपात होगा ....आप इस्सके बदले मुज़हे खा लो ........परन्तु इससे छोड़ दो ....यह तोह एक अबोध बालक है ....यदि तुमने इससे खा लिया तोह में भी अपने प्राणो का त्याग कर दूंगी......

दैत्य - मैं किसी स्त्री को नहीं खता .....और वह दैत्य उस बालक को खाने क लिए जैसे hi मुँह खोलता है .......उसी समय समय अभी उसके सामने आजाता है .......

अभी - रुक जाओ .....तुम इससे नहीं खा सकते ......छोड़ दो इससे .......

दैत्य - कौन हो तुम जो मेरे कार्य में बढ़ा पहुंचा रहे हो ....जाओ yaha...se ......

अभी - मैंने कहा न छोड़ दो इससे .....

दैत्य - तुम होते कौन हो मुज़हे आदेश देने वाले .......और वह उस बालक को खाने क लिए फिर मुँह खोलता है ....

उससे देखकर अभी ने उस दैत्य क तरफ छलांग लगा दी ....और अपनी पूरी ताकत से उस दैत्य क सीने पर किक मारी .....

अभी क इस हमले से वह दैत्य थोड़ा हिला .....लेकिन खास फरक नहीं पड़ा ........

वह दैत्य इतना बड़ा था क अभी उसके सामने ऐसे लग रहा था .....जैसे हाथी क सामने खरगोश...

अभी क ऐसा करने पर वफ दैत्य क्रोधित हो गया .....

दैत्य - लगता है तुम्हे अपने जीवन का मोह नहीं है .....पहले तुम्हे hi देखता हु .....और उस्सने उस बालक को निचे उतरा .....और एक ऊर्जा क गोले में कैद कर दिया ......

अभी की कोई भी पावर यहाँ काम नहीं कर रही थी ...सिर्फ ...शारीरिक बल ...बुद्धि ....और योगशक्ति hi थी .....जिसका वह प्रयोग कर सकता था .......उस दैत्य ने अभी को पकड़ने क लिए हाथ बढ़ाया .....तोह अभी ने फुर्ती से फिर जम्प लगायी और इस बार उसके ज़्हुके होने क कारण ......उसके जबड़े पर एक किक मारी ......

जिससे वह और क्रोध में भर गया ......

अभी फिर से उसकी तरफ उछाला तोह उस दैत्य ने उससे पकड़कर निचे पटक दिया ......इतने जोर से निचे गिरने क कारण अभी को जबरदस्त दर्द हिउअ ....अपने दर्द को काबू में कर के वह फिर खड़ा हुआ .....

दैत्य ने अभी को खड़े होते हुए देखा ...तोह ...उसने अपना विशालकाय पेअर से अभी को कुचलने की कोशिश की .......वह बार बार अभी को निशाना बनाकर पेअर पटकता और अभी अपनी फुर्ती से उस जगह से हैट जाता......

लेकिन एक बार पेअर अभी को कुचलने hi वाला था .....क अभी ने अपनी पूरी ताकत लगाकर दोनों हाथो से उसके पेअर को पकड़ लिए .....और उससे गिराने क लिए जोर का जहतका दिया ...

लेकिन उससे वह दैत्य बस थोड़ा hi पीछे हुए ....

अभी को समाज नहीं आरहा था क कैसे इस का सामना करे .......

वह पूरी कोशिश करने लगा .....

वह दैत्य अब अपने ऊर्जा क गोले अभी पर छोड़ने लगा ....जिससे बचते हुए अभी उस दैत्य पर बिच बिच में लात और घुसे से वार करने लगा.......

ऊर्जा क कई वार अभी को लगे थे जिससे वह बुरी तरह जख्मी गया था ....उस्सकी शक्ति क्षीण होने लगी .......लेकिन जब उस्का दयँ ऊर्जा क गोले में कैद ...उस बालक ....और उस महिला पर पड़ा .........तोह वह फिर अपनी पूरी ताकत लगाकर खड़ा हुआ .....

अब अभी ने अपनी योग शक्ति ...को जगाने क लिए चक्रो क बीजमंत्रों का उच्चारण शुरू किया ...जिससे उसस्के चक्रो की ऊर्जा आज्ञा चक्र की और आनेलगी ....अब अभी ने अपने नेत्र खोल दिए .....अब ...वह ऊर्जा एक बीम बनकर ...बहार निकलने लगी ......

अभी ने उसको नियंत्रित करके .....उस दैत्य पर वार करना शुरू कर दिया .....अभी की ऊर्जा से उस दैत्य को लगने से दैत्य पीछे हटने लगा ....उस प्रहार से उसके शरीर पर घाव बनने लगे ....लेकिन वह घाव तुरंत hi ठीक हो जाते......

अब उस दैत्य ने फिर से अभी को पकड़कर ....जम्में पर पटक दिया .....जससे अभी की हालत बहुत बुरी हो गयी ......

और उस दैत्य ने फिर उस बालक को उठा लिया ........

अभी फिर ताकत जूता कर बड़ी मुश्किल से खड़ा हुआ .....

अभी - रुक जाओ ......इस बालक को मत खाओ .......तुम्हे क्या मिलेगा इस नन्हे से बालक को खाकर ...इससे तोह तुम्हारा पेट भी नहीं भरेगा.........

तुमसे युद्ध करके इतना तोह में जान गया हु क तुम कोई साधारण दैत्य नहीं ....हो ....

दैत्य - तुम एक वीर योद्धा हो जिसस्ने इतनी देर तक मेरा सामना किया .....इसीलिए मैं तुम्हे बताता हु .....मैं एक ब्रह्मा राक्षश हु .....

ब्रह्मा जी ने मेरे लिए दिन का एक प्राणी भोजन क लिए निर्धारित किया है ....मैं उसी को पकड़ता हु जिसके जीवन का समय समाप्त हो चूका है ....

इस बालक का जीवन समाप्त हो गया है .....इस्सलिये अब यह मेरा भोजन है ...यदि मैं इससे छोड़ भी दू तोह यह नहीं बचेगा .....

अभी - कोई तोह उपाय होगा इसके प्राणो की रक्षा का ....

दैत्य - हां है ....यदि कोई युवा ...इसके बदले अपने प्राण सौप दे ....तोह में इसके ऊपर आनेवाली मिर्त्यु को बदल सकता हु .....

अभी - मैं तैयार हु ....आप ...मेरे प्राण ले लीजिये ......परन्तु ...इस ..बालक को छोड़ दीजिये ....

दैत्य - एक बार फिर सोच लो युवक .....फिर तुम अपना निर्णय बदल नहीं सकते.........

अभी - मैंने सोच लिया है ....मैं आपके सामने प्रस्तुत हु .....और अभी सके सामने खड़ा हो गया ......

दैत्य ने उस बालक को छोड़ दिया ......

महिला - नहीं पुत्र तुम हमारे लिए अपने प्राणो की आहुति मत दो ....तुम्हारी भी माता होगी परिवार होगा ...वह कैसे तुम्हरी ...मृत्यु का दुःख सह पाएंगे ......हमे मर जाने दो .....

ऋषि कन्या - हां ....आपको भी कोई प्रेम करने वाला होगा ...आप क बिना उनका क्या हाल होगा .......आप जाइये यहाँ से ....

लेकिन अब अभी ने सारे मोह त्याग कर उससे बालक की रक्षा का निर्णय ले लिया था ....

अभी - अप्प सब क्यों व्यर्थ चिंता कर रहे हो .....किसी क आने से यह संसार भरता नहीं और किसी क जाने से इसका कार्य रुकता नहीं ....यहाँ न कोई अपना है न कोई पराया ....सब ....उस ...इस्वर ....क hi रूप है ...और उसीके खेल क पात्र है .....जो अपने अपने हिस्से ....का कार्य कर रहे है .....और सबका नियंता वह इस्वर अपने इस खेल का सञ्चालन कर रहा है .....यदि इस समय विधि ने मेरी मृत्यु लिखी है तोह उससे कोई नहीं ताल सकता .......

हे ब्रह्मराक्षस में आपके सामने प्रस्तुत हु ....आप अपना भोजन स्वीकार करे .......

उसी समय उस ने अभी को उठा लिया और खाने क लिए अपने मुँह की और ले जाने लगा ....

अभी क चेहरे पर इस समय न कोई दुःख तजा ..न ...कोई dar...tha ...और न hi कोई चिंता थी ......थी तोह बस प्रसन्नता की अंतिम समय में भी किसी क काम आरहा है .......

उसी समय वह एक प्रकाश हुआ .....अब न वह कोई दैत्य था न कोई बालक और न hi कोई महिला ...वह केवल वह ऋषि कन्या थी .....अभी ने अपने आपको सरोवर क किनारे खड़े पाया ....

और उस प्रकाश से प्रगट हुए ....ऋषि विश्वामित्र जी.....

अभी चारो और देखने लगा की यह सब क्या माया है ....

विश्वामित्र जी - इस तरह चारो तरफ क्या देख रहे हो पुत्र .....

अभी - (विश्वामित्र जी को प्रणाम करता है ...)...प्रणाम Rishivar.....yeh सब क्या माया है रिश्वर ....वह ब्रह्मराक्षस ....वह बालक ...वह महिला ....सब कहा है ....

विश्वामित्र जी - यह सब मेरी माया थी ...पुत्र और तुम्हारी परीक्षा .......और तुम उस परीक्षा में सफल हो गए ...

यह परीक्षा थी तुम्हरे बल ...बुद्धि और गुणों की ....

बिना शक्तियों क कैसे विकत से विकत परिस्थियि का सामना करना .....और सही समय पर सही निर्णय लेना .......

तुमने उस बालक की रक्षा क लिए अपने प्राणो की परवाह नहीं की ....और बार बार परिवार का मोह दिलाने पर भी तुम्हारा निर्णय नहीं बदला ....इससे ये सिद्ध होजाता है ...क अब तुम मोह से उप्पर उठ चुके हो ....और अपने कर्तव्य को सही समाज गए हो....

तुम्हारा कल्याण हो पुत्र .....और यह है मेरी मानस पुत्री रेणुका तुम्हारी अगली शक्ति ........

अभी ने रेणुका की तरफ देखा तोह वह उसी क तरफ मुस्कुराते हुए देख रही थी .......

इतना कहकर विश्व मित्र जी वह से चले गए ..

अभी रेणुका क पास जाकर .....अच्छी परीक्षा ली है मेरी ....वैसे ाचा अभिनय कर लेती हो ....

रेणुका - इस्स्में मेरा कोई दोष नहीं है ....यह सब पिताश्री ....ने hi किया है ....मुज़हे ...तोह ापर पूरा विश्वास था .....

अभी - अच्छा जी .....पर आपने तोह मुज़हे कभी देखा hi नहीं ....तोह विश्वास इतना विश्वास कैसे हो गया .......बिना देखे ...बिना ...जाने किसी पर इतना विश्वास ठीक नहीं है...

रेणुका - आपको किसने कह दिया क हमने आपको देखा नहीं ....

हम तोह कई वर्षो से रोज आपको अपने स्वप्ना में देखते है .....

अभी - अच्छा जी .....परन्तु कभी कभी स्वप्ना में देखा हुआ ..सत्य नहीं होता ....

रेणुका - यदि सत्य न होता तोह आप हमारे सामने न होते .....हमे अपने स्वापो पर पूरा विश्वास है ....

अभी उसके और करीब जाते हुए उसकी आँखों में देखकर ....और मुज़ह पर....

रेणुका अभी की आँखों में देखकर खो सी जाती है .....

जिसके सवपना वह बरसो से देखती आरही थी आज वह उसके इतने पास था ....उसके हृदय जोरो से धड़कने लगता है .......शर्म क मारे उसकी गार्डन निचे हो जाती है

अभी उसकी ठुड्डी पकड़कर धीरे से उसका चेहरा ऊपर करता है ....और उसकी आँखों में देखने लगता है .....

अभी - तुमने मेरे प्रश्न का उतार नहीं दिया ......

रेणुका - आप स्वयं समाज जाएये ...यदि आपपर विश्वास न होता तोह इस समय में आपके साथ थोड़े hi होती ......

अभी - अच्छा तोह चलो मान लिया विश्वास है ...परन्तु प्रेम .....

प्रेम क नाम से hi रेणुका की शर्म से आंखें बंद हो गयी ......

अभी अभी भी उसकी सुंदरता में खोता चला गया ......और उसके माथे पर एक किश कर दिया ....अभी क होंठो का अपने माथे पर अहसास होते hi उसने अपनी आंखें खोल दी ....और अभी को तरफ देखने लगी ......

अभी - रेनू तिमने बताया नहीं ....विश्वास तोह तुम करती हो पर क्या प्रेम ...करती हो

रेणुका - अभी से अलग होते हुए ....मुड़कर जाने लगती hai........lekin फिर पलटकर ....अभी की तरफ मुस्कुराते हुए ......आप न बिकुल अनादि हो .....अभी भी प्रेम क बारे में पूछ रहे हो .......और मुड़कर जाने लगती है .....

अभी - अच्छा जी हम अनादि है ...अभी दिखता हु ...रुक ...और उससे पकड़ने क लिए दौड़ता है ....रेणुका भी आगे दौड़ जाती है .....लेकिन अभी उससे पकड़ लेता है ....और उससे पलटकर बाहून में भर लेता है ...

रेणुका - छोड़िये न ...क्या कर रहे हो .....कोई देख लेगा ......

अभी - अभी पता चला क हम अनादि है या खिलाडी ......

रेणुका - हां मान गयी ...आप बड़े खिलाडी भी हो और वह भी हो ......

अभी - क्या वह ....

रेणुका - अरे देखो पिताश्री आरहे रहे है .....

अभी ने सोचा क सच में विश्वामित्र जी आये है ...तोह तुरंत रेणुका से अलग होते हुए ....पीछे मुड़कर देखा तोह वह कोई नहीं था .....

और जब आगे देखा तोह रेणुका वह से कुटिया की और निकल गयी ......और अभी की तरफ हॉट्ज हिलाते हुए कुटिया में चली गयी......

अभी उसकी इस ादपर बस मुस्कुराकर रह गया .....

यहाँ धरती पर अभी क जाने क बाद गोलार्क पूरे घर पैट नज़र बनाये रख रहा था ......अभी का पार्टी रूप ( अभी m)ka अभी क मनोमय कोष से निर्माण हुआ था इसीलिए उस्में सिर्फ भावनाये थी ....वह एक सदाहरण युवक की hi तरह था .....

लेकिन अभी क मैं से जुड़े होने क कारण ..

उसकी देखि हुई और महसूस की हुई हर चीज़ या घटना अभी तक या उसके बाकी रूपों तक पहुंचती थी ....

अभी क जाने क बाद गोलू की निकता रवस से ज्यादा बढ़ने लगी .........

ऍम और ऋतू रात क डिनर क बाद चाट पर टहल रहा था क तभी कुछ 6 साये चाट पर मंडराने लगे ......लेकिन अभी की बनायीं शील्ड क कारण वह निचे नहीं आ पा रहे थे ......

ऍम और ऋतू का ध्यान उस तरफ गया ........

उसी समय कहो से एक रेड बीम अभी की बनायीं हुई शील्ड पर लगी जिससे वह शील्ड टूट गयी और वह 6 साये चाट पर उतर आये....

अभी क लिए इतना hi ....


अगला अपडेट कल .....
 
अपडेट - 112



अब तक आपने देखा अभी अपनी दसवीं शक्ति रेणुका तक पहुँच चूका है ...

यहाँ अभी क जाने क बाद रात को चाट पर टहलते हुए ऋतू और अभी म को 6 साये चाट पैट उतारते हुए दिखे

अब आगे .....

ऍम और ऋतू ने साये चाट पर उतारते हुए देखे .....

वह साये दोनों की तरफ बढे .......ऍम ने जब देखा क एक साया ऋतू की तरफ तेज़ी से बड़ा तोह ऍम उसके और ऋतू क बिच में आगया ....

ऍम ने बढ़ते हुए साये को हाट से रोकने की कोशिश की लेकिन उसने अपने हाथ से निकलती हुई ऊर्जा से ऍम को दूर फ़ेंक दिया और ऋतू की तरफ बड़ा ....

अभी को ऐसे गिरते देखकर ऋतू को हैरानी हुई की अभी कैसे इतने आसानी से उसके वॉर से गिर सकता है .......वह साया ऋतू तक पहुँच चूका था ......ऋतू का क्रोध उसको अपने सामने देखकर बढ़ने लगा ......

उस साये ने जैसे hi ऋतू को छुआ उससे एक तेज़ जहतका लगा ...और वह अजीब सी आवाज निकलते हुए पीछे जा गिरा ........बाकिओ अपनी साथी की ऐसी हालत देखकर अपनी ऊर्जा की बीम से ऋतू और ऍम पर एक साथ हुम्ला किया ......

वह हुम्ला उन तक पहुँचता क ऋतू और ऍम क बिच ऊर्जा की एक दीवार कड़ी हो गयी .....जिससे वह बीम टकराकर वापस उन सायो की तरफ मुद गयी .......और उनमें से कुछ को लगी ........

इससे उनको कुछ ज्यादा फरक नहीं पड़ा लेकिन वह चटककर दूर जा गिरे ........

यहाँ दो आंखें छुपकर चाट पर चल रहे इस खेल को देख रहे थे तभी ...वह आंखें चाट पर देखते हुए हैरत से फैल गयी .....

ऍम और ऋतू ने देखा चाट पर एक नीला पोर्टल खुला और उसमें से अभी का प्रेत रूप

प्रेतराज अभी (आप) और उसकी शक्ति भद्रा प्रेत रूप में प्रगट होगयी ........

आप और भद्रा दोनों उन सायो पर प्रेत रूप से मंडरा रहे the....aur उनकी ऊर्जा उन् सायो को बंद रही थी ...वह बंधन उनकी साड़ी ऊर्जा सोख रही थी ....जिससे उनका अजीब से जीवो का रूप प्रगट हो गया .....और उनके मुँह से अजीब सी दर्दनाक चीखे निकलने लगी ..........

उनकी वह चीखे अल्ट्रा सोनिक साउंड वेव्स की तरह थी .....ऋतू और ऍम ने अपने कान बंद कर दिए ....

वह आवाजे घर क अंदर पहुंची .....

ऐसी अजीब सी आवाजे चाट से आती हुई देखकर ....सब चाट की तरफ दौड़े ....Rimpy....Naina ...RVS....Addu.....

चाट का दतवाजा खुला हुआ था .......लेकिन किसी अंजनी ऊर्जा की दीवार क कारण कोई भी चाट पर प्रवेश नहीं कर पा रहा था .....वह से आरही अजीब सी आवाज क कारण सबने अपने कान बंद कर दिए .......

नैना - रिम्पी अभी कहा है ....और ऋतू भी दिखाई नहीं दे रही ........हे भगवन अब यह क्या बाला है .......

रिम्पी - वह तोह डिनर क बाद चाट पर चले गए थे .....(रिम्पी जानती थी क जो अभी घर पर है वह प्रतिरूप है ...और उसके पास कोई पोएट्स भी नहीं है)

रवस - लेकिन गोलू कहा है ......

नैना - हो सकता है वह चाट पर अभी की मदत कर रहा हो .......लेकिन यह क्या है दरवाजा खुला होनेपर भी हम कुछ नज़र क्यों नहीं आरहा ......

ाद्दु - माँ आप टेंशन मत लो ....भाई का सामने कोई भी नहीं कर सकता ...और गोलू भैया भी तोह उनके साथ है .........

यहाँ आप और भद्रा क बंधन में वह जीव तड़प तड़प कर मरने लगे थे ..थे ......तभी उन्हें अपने पीछे से ऊर्जा क बहुत से गोले आते हुए महसूस हुए .........

तिह उन्होंने देखा ......सैकड़ो वीएस hi जीव उनकी तरफ आरहे है .......और अपने ऊर्जा से उनपर हुम्ला कर रहे थे .......

प्रेतराज अभी ने अपना शूल प्रगट किया ...जिससे वाइटल लोक में स्थित नार्को में प्रेतों को दंड दिया जाता है .......

वैसा hi शूल अब भद्रा क हाथ में भी था ........उन दोनों शूल से भयंकर ऊर्जा बिजली क रूप में प्रगट हो रही थी ......

आप और भद्रा उन जीवो पर अपने शूल से वार करते हुए ऋतू और ऍम को कवर किये हुए थे ........

वह चाट अब एक छोटी सी संग्राम भूमि बन गयी थी ...

उन की संख्या बढ़ने लगी थी .......ऋतू ने भी अपनी ऊर्जा का वार उनपर करना शुरू किया .......लेकिन उस ऊर्जा से उन जीवो पर कुछ फरक नहीं पद रहा था .......

क्यों की ऋतू क पाद थी अभी की समृद्धि शक्ति .....लेकिन यह जीव तोह भूत की तरह थे इनके पास कोई समृद्धि थी नहीं ....लेकिन जब ऋतू को याद आया क उसके चुने बार सर एक जीव की कैसी हालत हो गयी थी .....तोह अब वह उनका सामना अपने हाथो और पैरो से करने लगी ....

जिस जिस का भी ऋतू से स्पर्श होता वह जीव निचे गिरकर तड़पने लगता ....लेकिन थोड़ी देर में फिर संभल कर फिर लड़ने जुट जाता .......

आप और भद्रा क ऊपर का आकाश .अब ूंजीवो से भर गया था ........वह दोनों अपनी पूरी शक्ति लगाकर उनके द्वारा हो रहे हमले को रोक रहे थे ....और अपने शूल की ऊर्जा का वार कर रहे थे ....जिस भी जीव को वह लगती वह वही समाप्त हो जाता और धुवा बनकर उड़ जाता .........

कुछ जीव जो चाट तक पहुंचे ऋतू उनका सामना कर रही थी ....अब ऋतू भी चारो तरफ से घिर चुकी थी ......

आप और भद्रा ने देखा की आकाश में ाचक एक जीर्ण लाइट प्रगट हुई जो उन् जीवो पर पड़ने लगी .....जिससे ....उनका अजीब सा शरीर से साड़ी ऊर्जा उस प्रकाश में सामने लगी .....

वह दो आंखें अभी भी छुपकर इस नज़ारे को देख रही थी .......

आप और भद्रा ने देखा की उस हरे प्रकाश से रिम्पी प्रगट हो गयी और चाट पर आगयी .......रिम्पी की प्रकृति की ऊर्जा .....उन् जीवो क शरीर से प्रकृति क सारे अंश सोख रही थी जिससे उनकी संख्या काम होने लगी ....

तभी चाट क दरवाजे की शील्ड तोड़ते हुए नैना क पीछे पीछे ाद्दु और रवस आगये ......इस समय नैना का शरीर ....गोल्डन ऊर्जा से चमक रहा था .....और उसके हाथो से गोल्डन रेज़ निकल रही थी ........

उनका देखकर वह छुपी हुई आंखें जो यह सब देख रही थी और उस अँधेरी जगह से बहार आगयी .......अरे यह तोह गोलू था.......

गोलू छुपकर क्यों सब कुछ देख रहा था .......

ऋतू की तरफ बढ़ते हुए सायो की तरफ गोलू लपका और अपने ऊर्जा क गोले से वार करने लगा......

ऍम - चुप चाप एक कोने में खड़ा था .......

चाट पर चलरहे संग्राम क कारण कई जगह से चाट में दरारे आगयी थी .....जो ननिअ ने देखि .....

नैना क अंदर निर्माण शक्ति थी जो निर्माण भी कर सकती थी और विनाश भी ......

नैना क देखने भर से चाट पर आरही दरारे भर गयी ........

अपने प्यारे घर को संग्राम भूमि में बदला हुआ देखकर ....और उन् सायो को देखकर नैना का क्रोध बढ़ने लगा .....उसके सामने दीपू का मासूम चेहरा आने ...लगा .....

नैन - ( जोर से चिल्लाकर ) .......रुक जाओ तुम सब .......

नैना की आवाज इतनी ज्यादा गूंज रही थी क सभी की रूह तक कैंप गयी ....और सभी अपनी अपनी जगह स्थिर हो गए .........

नैना एक बड़े से पाश का निर्माण किया और उन् जीवो पर फेंका ......जिससे करीब2 आधे जीव नैना क पाश में बांध गए .....और वह पाश और जयादा कसता हुआ उन् जीवो को आकाश की और ले गया .....और एक धमाके हुआ .... जैसे कोई भयंकर बदल गरजा हो

ऐसी अव्वज क साथ विस्फोट हो गया ...और वह सारे जीव समाप्त हो गए

जो कुछ बचे कूचे थे वह अब चारो तरफ से घिर गए .....एक तरफ आप और भद्रा ....तोह एक तरफ ऋतू और रिम्पी .....एक तरफ नैना और ाद्दु .....

ाद्दु बस ऍम क पास कड़ी यह सब देख रही थी .....किसी भी जीव की ाद्दु क पास जाने को हिम्मत नहीं थी ............कोई की वह उसकी विनाशकारी ऊर्जा को जानते थे ......

बचे कूचे जीव अब वह से अदृश्य हो गए .......

अब चाट पर सब शांत हो गया था.....

नैना ने अपनी निर्माण शक्ति का प्रयोग करते हुए .....घर पर एक शील्ड का निर्माण किया .........जो ना तोह सात्विक थी न थी तामसिक ....यह शील्ड रजो गन की ऊर्जा से बानी थी......

अब वह से सभी निचे हॉल में आगये .....

सब चुप थे ......अब निचे हॉल में दो अभी थे .....

रिम्पी ....आप ...Am...aur भद्रा को छोड़कर सभी हैरान थे ......

नैना - रिम्पी क्या है यह सब .....यह दो ..do...Abhi ......

तब रिम्पी विभक्त से मिलान द्वारा अभी की विभक्त सिद्धि क बारे में और उसके अलग अलग रूपों क बारे में बताती है .......

नैना - तोह इस समय अभी कहा hai......aur यह ...जीव ....क्या ..है ...कहा से आये है ....

ऍम - इस समय वह अपनी अगली दसवीं शक्ति को प्राप्त करने गए है ..........

नैना - यानि की अब एक और बहु आनेवाली है .........लेकिन यह जीव कौन है .......

ाद्दु - में जानती हु माँ यह वही है जो मुज़हे ले गए थे.........

रवस - गोलू कौन है यह क्या तुम जानते हो ......क्या यह कस क भेजे हुए है .....और तुम कहा थे ....क्यों की हमने देखा जब हम चाट पर पहुंचे उसी समय तुम आये .....

गोलू - में किसी काम से थोड़ी देर क लिए अपने लोक गया था .....लेकिन जब वापस आया तोह यहाँ यह सब देखा .....और ऐसे जीव मैंने आज तक नहीं देखे है ....हो सकता है ....यह ..कस ने भेजे हो ....

रवस - हां यह हो सकता है .....हमे और सतर्क रहना होगा ........

आप - लेकिन अभी ने तोह घर को ऊर्जा की शील्ड को कवर कर रखा था ........जो बहार से तोडा जाना ...असंभव है ......फिर कैसे वह जीव इससे तोड़कर यहाँ प्रवेश कर गए ...

नैना - लगता है यह किसी भेदी का काम है जो हमारे सारे भेद जानता है .....लेकिन बहुत जल्द वह हमारे सामने होगा .......

नैना की बात सुनकर गोलू अंदर hi अंदर घबरा उठा .......क्यों की वह नैना की शक्ति फेख चूका था ...

आप लोग सोवह रहे होंगे क शिवली कहा है ...उससे गोलू क बारे में क्यों नहीं पता चला .......

तोह चलिए शिवली क्या कर रही है ....

इस समय शिवली रसातल क नागलोक में सुलेखा नागराज अभी (ान ) और यक्ष अभी (आय) क साथ तलातल लोक से लगातार नागलोक में अजीब से सायो की घुसपैठ रोकने में व्यस्था थे......

यह जीव अलग अलग प्रकार क थे .......जो सायो क रूप में आकर .....यहाँ क नागो क शरीर में प्रवेश कर जाते थे ......और फिर उसको अंदर से ख़तम करके ......दूसरे शरीर की तलाश करते थे ....यह सब एक पैरासाइट की तरह थे .......

शिवली ...आय .....सुलेखा ...ान ....दो टीम में बटकर नागलोक क दोनों तरफ से ....उनको पकड़ रहे थे ....और उनको समाप्त कर रहे थे .......यह काम बड़ा hi कठिन थे अब इतने बड़े नाग लोक में वह किस श्री में प्रवेश कर चुके hai...yeh उन्हें पता नहीं था....

इसीलिए शिवली का ध्यान अभी क घर की तरफ नहीं था .....और उससे गोलू पर पूरा विश्वास था ....और अभी गोलू को घर की सुरक्षा सौप गया है ...यह वह जानती थी ....इसीलिए निश्चिंत ...थी...

और गोलू की कुछ पावर्स में से एक यह भी थी .....क कोई भी उसके मैं को पढ़ नहीं सकता था .....

वज्रा बहु ...क साथ दानव अभी (अड़) और उसकी शक्ति चैताली क साथ ....तलातल लोक से रसातल में प्रवेश करने वाले जीवो को रोक रहे थे ......लेकिन फिर भी किसी न किसी तरह ....कुछ वह से निकल कर रसातल में प्रवेश कर रहे थे .......

उन्होंने तलातल में प्रवेश करने का बहुत प्रयत्न किया ....लेकिन किसी विशेष ऊर्जा क कारण वह वह प्रवेश नहीं कर पा रहे थे .....

यहाँ महेर लोक में अभी का बाहरी दुनिया से कोई संपर्क न होने क कारण उससे इन् सब बातो क बारे में पता नहीं था ......वह रेणुका क साथ उसके विवाह की तैयारी चल रही थी .......

दूसरे दिन वेद मंत्रो क साथ हवन करते हुए स्वयं सप्तऋषियों द्वारा अभी का विवाह रेणुका से हुआ ........

महेर लोक में वासना का लेश मात्रा भी नहीं था ....तोह यहाँ यह मिलान संभव नहीं था

.....अभी ने सभी ऋषियों का आशीर्वाद लिया ......

विश्वामित्र जी क पास संसार के हर प्रकार क अस्त्र थे ....उन्होंने केवल त्रिदेवो क ास्त्रो को छोड़कर ....सभी प्रकार क दिव्या ास्त्रो क अज्ञान अभी को दिया .....

अभी रेणुका को लेकर वह से निकल गया ....

अभी क लिए इतना hi .....


अगला अपडेट रात को .....
 
अपडेट - 113

अब तक आपने देखा क आप ....भद्रा ..रिम्पी और नैना क कारा उन सायो की हार हुई ....

तलातल लोक से आने वाले कुछ अजीब से जीवो की रसातल में गतिविधिया तेज़ होने लगी ....

गोलार्क का भी असली चेहता रीडर्स क सामने आया ....

अब आगे ...

अभी को महेर लोक आये हुए 4 दिन हो गए थे .......चौथे दिन ..अभी ...वह सप्तऋषियों का आशीर्वाद लेकर ......वह दे निकल गया .......

मेहर लोक से निकलते hi अभी का संपर्क अपने अंशो क साथ दुबारा हो गया ......और उससे घर पर हुए हमलो क बारे में पता चल गया .....तोह इसने पहले घर जाना hi उचित समज़ह

अभी जब टेलिपोर्ट होकर रेणुका को लेकर घर पहुंचा ......उस समय रात हो गयी थी .......सभी डिनर करके हॉल में hi बैठे थे ........गोलू भी उनके साथ था ....

अभी इस समय घर क मैं दूर क बहार खड़ा tha.....Abhi क वह आते hi ..उसके प्रतिरूप को अभी क आने का पता चल गया ........तोह उस्सने सबको बताया .......

अभी क आने की बात सुनकर सब घर क मैं दूर तक पहुंचे ........सबने देखा क अभी वह किसी लड़की क साथ खड़ा है तोह सब समाज गए क यह अभी की नयी पत्नी है ......

अभी असमंजस की स्थिति में रेणुका क साथ hi खड़ा था .........

सभी रेणुका को hi देख रहे थे ........रवस और नैना ने रिम्पी की और देखा ....क अपने पति क साथ उसकी नयी पत्नी को देखकर उसका कैसा रिएक्शन है ......उनके मैं में था क क्या रिम्पी इससे स्वीकारेगी .......

गोलू ने आगे आकर अभी को विवाह की शुभलामनाये दी और उसके गले लग गया ......

ऋतू को न जाने क्यों अंदर hi अंदर ग़ुस्सा आरहा था ......ाद्दु को तोह अपने भाई से hi मतलब था ....तोह वह आगे आई .......और कमर पर हाथ रखकर अभी क सामने कड़ी हो गयी ......

अभी ने जब ाद्दु को ऐसे खड़े देखा ....तोह उसने दोनों कान पकड़कर इशारे से माफ़ी मांगी ..

ाद्दु ने फिर आंखें बड़ी करते हुए रेणुका को देखर तोह उस्सने भी अभी की देखा देखि अपने कान पकड़ लिए ........

दोनों को ऐसे देखकर ाद्दु की हँसी निकल गयी ........

ाद्दु - क्या भाई मैंने आपको कितने बार बोलै क आप मुज़हे सॉरी मत बोलै करो .....

अभी - सॉरी गुड़िया .....

ाद्दु - देखा फिर से सॉरी .....आप भी न भाई ......

अभी ने ाद्दु को आगे बढ़कर गले लगा लिया ......

ाद्दु - भाई कॉंग्रट्स ....वैसे नयी भाबी बड़ी क्यूट है ....

ाद्दु अब रेणुका क सामने गयी .....अच्छा तोह आप हो मेरी नयी भाबी ......लेकिन ध्यान रखा यहाँ मेरा हुकुम चलता है ......मुज़हे जानती हो आप ......में हु

रेणुका - हां तुम ाद्दु हो न ..इन्होने मुज्जे सबके बारे में बताया है

ाद्दु - ाद्दु नहीं आप मुज़हे आदिरा जी कहेंगी .....

रेणुका - जी सर्कार जैसे आप कहे ...

रेनू ने ऐसे अदब से कहा क ाद्दु की हँसी निकल गयी और वह रेनू क गले लग गयी .....

दीपू की मौत क बाद आज सब ाद्दु को खुश देखकर सब खुश हो गए .....लेकिन ऋतू और नैना वह से चली गयी .......

अभी ने देखा ...तोह ...उससे ऋतू का तोह समाज में आगया लेकिन ..

माँ का इस तरह से बिना कुछ बोले जाना .....उससे ऐसे लगा क शायद माँ उसके ऐसे बिना बताये जाने से नाराज़ हो गयी...

रिम्पी भी आगे आकर रेनू से मिली .........

रवस - अब अंदर भी आजाओ ...

कब तक बहु को ऐसे hi खड़ा रखोगे .......

डैड क बात सुनकर अभी अंदर आने लगा ....घर क अंदर कदम रखने hi वाला था ....क नैना की आवाज आयी ....रुक जाओ..

सब उधर देखने लगे की नैना को अचानक क्या हुआ ....तोह देखा क नैना .....पूजा की थाली और चावल से भरा लोटा लेकर आरही है .....

नैना - इस तरह से लाते है नयी बहु को घर में .......

और लोटा घर की देहलीज पर रख दया और ....दोनों की आरती उतरी .....

दोनों ने माँ और डैड का आशीर्वाद लिया .....और घर में प्रवेश किया .....

थोड़ी देर हॉल में बातें हुई की कैसे अभी रेनू तक पहुंचा .....ाद्दु बड़ी इंट्रेस्ट से कहानी सुन रही थी ......

रिम्पी ने तुरत खीर बनाकर सब का मुँह मीठा किया ......

अब आयी सोने की बारी .....ाद्दु तोह नयी भाबी को छोड़ hi नहीं रही थी .....वह जिद पकडे बैठी थी क आज वह भाबी क साथ hi सोयेंगी ......

लेकिन रिम्पी ने बड़ी मुश्किल से उससे मनाया .......क आज वह ाद्दु क साथ सोयेंगी .......

रेनू अभी क रूम में चली गयी और अभी का इंतजार करने लगी ......

अभी रिम्पी से अकेले में मिलना चाहता था ...

इसीलिए रूम क बहार hi खड़ा हो गया .....देखा जब रिम्पी दूध का गिलास रूम में पहुँचाने आयी है ...तोह अभी रिम्पी का हाथ पकड़कर चाट पर टेलिपोर्ट हो गया ....

रिम्पी - यह क्या है जी ....इस समय आपको रेनू क साथ होना चाहिए ....अभी ने उसके हाथ से गिलास लेकर चाट की दीवार पर रखा और उससे बाहों में लेकर उसकी आँखों में देखने लगा ....

अभी - जान ...तुम्हे सच में बुरा नहीं लगा ....क ..में रेनू को यहाँ लेकर आगया ......

रिम्पी - आपको मेरी आँखों में क्या दीखता है ......

अभी - प्यार ....

रिम्पी - और प्यार विश्वास से hi होता है ....में यह जानती हु क हम सब आपकी hi शक्तियों क अंश है ...तोह इस नाते हम अलग होते हुए भी एक है ......तोह मुज़हे क्यों बुरा लगेगा ....

और बाकी तोह अलग अलग लोक में रहती है ....मुज़हे भी छोटी बहिन क रूप में रेनू का साथ मिल जाएगा .....

अभी - तुम सचमे स्वीटू बहुत अच्छी हो ...लव यू जान ....और अभी ने अपने होंठ रिम्पी क होंठ पर रख दिए ...और उसके होंठो को धीरे 2 चूसते हुए किश करने लगा ......

रिम्पी भी अभी का साथ देने लगी ....दोनों एक दूसरे क दिल में अपनर लिए अथाह प्रेम का अनुभव करते हुए चुम रहे थे ......जब दोनों की सांस फूलने लगी ...तोह दोनों अलग हो गए ....

रिम्पी - बस करो अब ...रेनू आपका इंतजार कर रही होगी .....

अभी - तुम भी चलो न साथ ....

रिम्पी अलग होते हुए ....हातो जी ....आज तोह आप रेनू क hi साथ करो जो करना है .......अब देर होरही रही ....वह क्या सोच रही होगी ......

फिर दोनों निचे आजाते है ....पहले रिम्पी दूध का गिलास लेकर अंदर जाती है ...और रेणुका से मिलकर उससे कुछ बातें बताकर ...बहार ...आजाती है ....

अब अभी अंदर ..चले जाता है .......रेनू बीएड पर बैठी हुई थी ....लेकिन वह मेहर लोक क hi साधारण मुनियो वाले कपड़ो में थी ......

लेकिन साधारण कपड़ो में भी वह किसी अप्सरा से काम नहीं लग रही थी ....

अभी उसके पास जाकर उससे देखने लगा ....वह गार्डन निचे करके बैठी हुई थी .......

अभी - रेनू आज कुछ नहीं बोलोगी .....जब से यहाँ आयी हो तुमने तोह मुज़से बात hi नहीं किया ......नाराज हो ....

रेनू ने सर हिलाकर ना में जवाब दिया ......

अभी - उसके पास बैठते हुए उसका चेहरा अपनी और घूमता है और ुड़की आँख में देखते हुए

अभी - तोह तुम इतनी चुप क्यों हो ......

रेनू - मैं जानती हु क आपके पहले भी विवाह हुए है और आगे भी honge....yeh कक्ष तोह रिम्पी दीदी और आप का है .....इसीलिए मुज़हे कुछ संकोच होरहा है......

अभी - रेनू अब जब हमारा विवाह हो गया है ..अब मेरा तुम्हारा नहीं ....अब हमारा hai.......kya रिम्पी ने कुछ कहा ....

रेनू - नहीं रिम्पी दी तोह बहुत अच्छी है ......मुज़हे वह बहुत अच्छी लगी ......

अभी - तोह फिर ...अब इतना मत सोचो .....और ...अभी बैठे बैठे hi उसको अपनी बाहो में भर लेता है .......

रेनू क लिए यह नया अहसास था ....अभी क इस तरह गले लगकर .....उसकी दिल जोरो से धड़कने लगा ....

वह भी अभी क बाहो में जैसे खो सी गयी .......और पर्म का अनुभव करने लगी ....

अब अभी ने अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए और चूमने लगा ....जिससे रेनू का शहर जहांजहांना गया .....वह बस स्थिर सी हो गयी ....

अभी ने उसके होंठो को चूमना जारी रखा .......लेकिन रेनू का कोई रिस्पांस न मिलता देखकर अलग हो गया .....

अभी - क्या बात है रेनू ....तुम्हे यह सब अच्छा नहीं लग रहा ......तोह रहने देते है ....

रेनू - नहीं मैंने तोह ऐसा नहीं कहा .....लेकिन मुज़हे इस बारे में कुछ नहीं पता है .......में क्या करू ...

अभी - तुम बस वैसे hi करो जैसे में करता हु .....धीरे धीरे अपने आप सब कुछ आजायेगा ...

अभी ने फिर उससे किश करना शुरू किया ..और ... हलके 2 उसके होंठो को चूसना शुरू kiya...uska हाथ रेनू की पीठ को सहला रहा था .... .......अब रेनू भी उस्का साथ दे रही थी ......जैसे 2 अभी किश करता ...रेनू भी बिलकुल वैसे hi अभी को किश करने लगी ...... .........

अभी ने उससे बीएड पर लिटा दिया और उसके बगल में लेटकर फिर उसके होंठो को चूमने लगा.... और अपना हाथ उसके पेट पर सहलाने लगा ...

अभी क इस तरह किश करने से रेनू मदहोश होने लगी ...........दोनों एक दूसरे क होंठो को चूसे जा रहे the....aur अमृत पान कर रहे थे

सांस भरी होने से दोनों अलग हुए ....और फिर शुरू होगये ....अभी अब उसके होंठो को चूसते हुए अपनी जुबान भी इसके मुँह में दाल रहा था ....

रेनू भी वैसे hi करने लगी ...दोनों की जीभ एक दूसरे को सहलाने लगी थी ...जिससे दोनों क जिस्म में एक आनद की लहर दौड़ने लगी .....

रेनू अब अभी की जुबान को चूस रही थी ..... अभी का एक हाथ धीरे 2 रेनू क स्तनों तक पहुँच गया था ....जिससे रेनू का शरीर एकदम से काँप गया ....और उसने अभी क हाथ पर अपने हस्त रख दिया ....

लेकिन अभी ने धीरे धीरे दबाना जारी रखा ...

जिससे रेनू क मुँह से सिसकारियां निकलने लगी लेकिन अभी क किश करने की वजह से उसकी सिसकारियां अभी क मुँह में hi दबकर रह गयी ...लेकिन बिच बिच में आव्जे आ रही थी ....

..

अब अभी उसके ऊपर आगया .....दोनों क बदन एक दूसरे से रगड़ रहे थे........

रेनू मदहोश सी हो गयी thi...uski आंखें बंद हो गयी थी ....उससे कुछ होश hi नहीं था

अभी ने उसकी चोली से उसकी सदी का पल्लू हटाया ..... और सतानो को चोली क उप्पेर से ..

किश करने लगा .....

अभी क होंठो का स्पर्श चोली क उप्पेर से अपने स्तनों पर महसूस करके रेनू क मिलान की उत्कंठा बढ़ने लगी ....उसके हाथ अभी क सर को अपने स्तनों पर दबाने लगे ...

रेनू चिकना ...मुलायम ...सपाट पेट और गहरी नाभि ....और पतली कमर ....पर अभी क हाथ चलने लगे .....

अभी ने अब रेनू को थोड़ा उठाया और उसके चोली की डोरी को खोल दिया निकल

रेनू को इसका अहसास होते hi दोनों हाथो से अपनी चोली को पकड़ लिए....

लेकिन अभी ने पेट क निचे से हाट डालकर हाथ समेत उसकी चोली को उप्पेर कर दिया ....जिससे उसके नंगे स्तन अभी क सामने आगये ....

रेनू ने अपने दोनों हाथ से अपने शैतान chupa....liye .....इस समय उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया था ......दोनों की आँखों में वासना और मिलान क डोरे घिरने लगे थे ....

अभी ने उसकी आँखों में देखते हुए स्तनों पर से हाथ हटाए और अपने हाथ स्तन पर रख दिए ....और स्तन पर ज़्हुकता चला गया और निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा ....और साथ साथ दूसरे क निप्पल को मसलने लगा ......

जिससे रेनू क मिलान की तड़प और बढ़ने लगी और उसके मुँह से सिसकारियां तेज़ होने लगी .......अब उसकी योनि में जैसे चीटिया सी रेंगने लगी ...जिससे उसकी योनि कॉमर्स छोड़ने लगी.....

अभी की उत्तेजना भी बढ़ती जारही थी .....उसका लिंग भी एकदम अकड़ सा गया था ......

ऐसे hi एक दूसरे को प्यार करते 2 दोनों निर्वस्त्र हो गए ......और ...मिलान की और बढ़ने लगे ......जब दोनों क कामांग का एक दूसरे से स्पर्श हुआ तोह ...दोनों क शरीर से एक अदृश्य ऊर्जा निकलकर एक जगह एकाथि होने लगी ...

कामाग्नि में दुबे दोनों ...काम ..सुख की और बढ़ने लगे ....अभी का लिंग रेनू की योनि में समां गे tha.....aur दोनों ....अपने चरम सुख की और बढ़ने लगे ......दोनों की सिसकारियों से कमरा गूंज उठा था .......

वह तोह अभी का रूम साउंड प्रूफ था ...नहीं तोह उनकी आवाजों से सारा घर जग गया होता...

दोनों साथ साथ अपने चरम पर पहुंचे .....और स्खलित हो गए .....

और दोनों क शरीर में वह ऊर्जा एक प्रकाश बनकर समां गयी ......

और अभी और रेनू को मिली दिव्या दृष्टि .....अब अभी किसी भी जगह या व्यक्ति का ध्यान करते hi वह का सब हाल देख सकता tha......Renu को भी यह सिद्धि मिली....

दोनों अब एक दूसरे की बाहों में सो गए...

यहाँ किसी वीरान सी जगह जो तळतळ में शहित है .......

गोलार्क किसी क साथ बातें कर रहा था जो आधा दानव और आधा अजीब सा जीव था जिसके सर पर सींग थे और इसकी तीन आंखें जलते हुए अंगारे जैसी थी .... एक लम्बी सी नुकीली पंच .....लम्बे से हाथ कोई 10 फट का वह जीव बड़ा भयानक लग रहा था....

जीव - तुम्हारी सहायता करते हुए हमारे किते साथी मारे गए .....अब हम और तुम्हारी मदत नहीं कर सकते ......

गोलू - युद्ध में तिह यह सब चलता hi है ......पर आप यह मत भूलो क यदि हम अपनी योजना में सफल हुए तोह ......तोह उस रक्षक की साड़ी शक्तिया आपको प्राप्त जो जायेगी .....और एस्प बन जाएंगे इस ब्रह्माण्ड में सबसे शक्तिशाली .......

जीव - तुम्हे कितने मौके मिले ....लेकिन सब व्यर्थ ......

गोलू - मैंने अपना पुअर प्रयास kiya......pahle तोह उस्सकी छोटी बहिन को उठवाया लेकिन उसकी शक्ति इतनी जयादा है क हम उससे छू भी नहीं पाए .....इसीलिए मुज़हे उसकी मदद का ढोंग करना पड़ा क रक्षक को मिक्सः पर पूरा विश्वद हो जाए और हुआ भी वही ...

फिर हमने उसके प्रति रूप को मारने का सोच .....यदि हम उससे हानि पहुंचा देते तोह रक्षक का भी अंत हो jaata......lekin उसके प्रेत रूप ने उस हमले को भी विफल कर दिया ......

उस्सकी बहनो को और उसकी माता को हम छू भी नहीं सकते .....लेकिन एक रास्ता है उसका पिता जिसके जरिये हम अपने उद्देश्य तक पहुँच सकते है .......

जीव - ठीक है हम तुम्हे एक और अवसर देते है .....नहीं तोह तुम जानते हो .....अंतिम अवसर का लाभ नहीं उठाया तोह क्या दंड मिलसकता है .....

अभी क लिए इतना hi ....

अगला अपडेट कल.....
 
अपडेट - 114



अब तक आपने देखा अभी का रेणुका क साथ मिलान होगया और उससे ...दिव्या दृष्टि प्राप्त हो गयी....

और देखा क गोलार्क तलातल लोक क किसी जीव क साथ अभी क विरुद्ध अपने षड़यंत्र की योजना बना रहा है........



अब आगी.........

गोलार्क किस तरह तलातल तक पहुंचा .....देखते है......

बात तब की है जब वाइटल लोक से असुरो को मुक्त कराकर अभी अटल लोक जा रहा था .....तब कस क भेजे मोहक ने ....अपनी विद्वेषण विद्या का प्रयोग करके अभी को मोहित किया ...और अभी क हाथो गक की मृत्यु हो गयी......

जिस दमे गक की मृत्यु हुई उस समय भुआ लोक में रात थी .....और वह स्थित यक्ष भूमि क अलकापुरी में स्थित गक की पत्नी काव्य गोलू और अपनी बेटी विका क साथ सोई थी क साथ सोई हुई थी ......

दोनों बाचो की उम्र तोह हज़ार वर्षो से भी ज्यादा थी लेकिन यक्ष लोक क समय अनुसार अभी दोनों दिखने में कोई 5 या 6 वर्ष क बच्चो क सामान hi थे......

यहाँ जैसी hi गक की मृत्यु हुई ....काव्य को सवप्न में गक का शरीर जलता हुआ दिखा ......और वह ांसो भरी आँखों से उसके और उसके बच्चो की तरफ देख रहा था .......

उसकी आँखों क सामने उसका पति राख क ढेर में बदल गया ....और वह जोर से चीखते हुए उठी .....नाहीईई ...आपने मुज़हे वचन दिया था ...आप इस तरह मुज़हे छोड़ क नहीं जा सकतेऔर जोर जोर से रोने लगी .. ....

यक्षों को हिम मनुस्य जैसे नीड में स्वप्ना नहीं आते .......यदि किसी को ऐसे किसी दृश्य का सपना आता है तोह वह किसी का सन्देश होता है.....

काव्य जान चुकी थी क अब उसका सुहाग नहीं रहा ....जो उसने सपना देखा वह सपना नहीं गक का सन्देश था उनके लिए .....जिसमें वह आश्रु भरी आंखों से साथ छोड़ने क लिए क्षमा मांग रहा था ......

उससे बार बार वह दृश्य यद् आरहा और वह बस गक को पुकारती हुई रोये जा रही थी .....

काव्य की आवाज सुनकर उसके दोनों बच्चे भी उठ गए और अपनी माँ को रोटा देखकर ... ..दोनों बच्चे भी रोने लगे .....

गोलू - रट हुए - क्या हुआ माँ .....आप रो क्यों रही है .....और बार बार पिता श्री का नाम क्यों ले रही है ........

लेकिन काव्य बस रोये जा रही थी ........

गोलू - बाताओ न maa......kya हुआ ......इस प्रकार क्यों रो रहे हो ....और वह अपनी माँ क पास जाकर उससे पुकाते हुए हिलने लगता है .....

गोलू क ऐसा करने पर काव्य को कुछ होश आया ...और उसने अपने बच्चो को रट हुए देखा ...अपने बच्चो को रोटा देखकर उसने अपना दुःख अंदर दबा दिया .....

और अपने बच्चो को अपनी गोदी में लेकर सीने से लगा लिया ......गोलू ने भी अपने नन्हे हातो से अपनी माँ क आंसू पोंछे ....

काव्य अपने बाचो को गले लगाकर उन्हें यह अहसास दिला रही थी क सब ठीक है .....

क तभी गोलू क शरीर में अचानक जहटके लगने lage.......aur वह उसके गोदी से दूर छिटक गया ..और तड़पने लगा ......

अपने पति की मृत्यु को अभी एक घडी भी नहीं हुई क ुअपने पुत्र को इस तरह तड़पते हुए देखकर वह और घबरा गयी ......

विका भी अपने भाई को इस तरह देखकर घबरा गयी ......

काव्य गोलू क पास आयी और उससे आवाज देने लगी ....उसके हाथ पैरो ...सीने को रगड़ने लगी .....अपने बेटे की ऐसे हालत देखकर उसका दिल तड़प उठा .....वह कुछ नहीं कर पा रही थी .....उससे समाज नहीं आरहा था क कैसे वह अपने बेटे की इस तड़प को ख़तम करे ....

तोह उस्सने गोलू को अपने गले लगाया और इसके सर पर हाथ फेरने lagi.....Golu अब बेहोश हो चूका tha.......toh काव्य ने उससे बीएड पर लिटा दिया .......

उसने देखा क गोलू क शरीर में बदलाव आरहे है ....उसका शरीर अब धीरे धीरे बढ़ने लगा था ...

काव्य ने अपनी बेटी को वही छोड़ा और वैद जी को लेकर आगयी ......

वैद जी ने जब गोलू को देखा तोह उन्हें बस इतना hi पता चला क कोई शक्तिशाली ऊर्ज उसस्के अंदर प्रवेश कर गयी है ......जिससे उसके शरीर में बदलाव आरही है ....

वैद जी ने काव्य को कुछ बताया और कुछ अवषधि दी .....

वैद जी - इसके प्राणो को कोई संकट नहीं है .....अभी 3 दिन और लगेंगे इससे होश में आने में .......

ऐसा तभी होना है जब किसी यक्ष की मृत्यु असमय होजाती है ....और उसकी साड़ी ऊर्जा अपने पुत्र या निकटवर्ती किसी में समां जाती है....

क्या गुणक अभी नहीं रहे ......

काव्य कुछ नहीं बोलती बस ांसो बहाने लगती hai.......Vaid जी देखकर समाज जाते है .......

वैद - धैर्य रखो पुत्री .....विधि क लेख को कोई मिटा नहीं सकता .......इन् तीन दिनों में जब भी इससे दर्द होने लगे तोह मेरी यह ावषधि इससे पीला देना ....जिससे इसका दर्द कुछ काम हो जाएगा ......

और वैद जी वह चले गए ....गोलार्क तीन दिनों तक बेहोश पड़ा रहा ....और इन् तीन दिन में अब वह पूरी तरह जवान हो गया था ....और उसकी साड़ी शक्तिया जागृत हो गयी थी .......

गोलू को जब होश आया तोह उसने आपने आपको बदला हुआ पाया ........काव्य ने उससे साड़ी बात बताई ......

गोलू को अब अपने पिता की मृत्यु क बारे जानना था ......उसने कुछ दिनों तक अपनी माँ और बहन को संभाला ...और साथ 2 अपनी ऊर्जा क प्रयोग को सीखा ......

और निकल पड़ा खोज में ....काव्य ने बहुत रोका k.....apne पति को तोह खो hi चुकी हु अब अपने पुत्र को खोना नहीं chahti.......lekin गोलू नहीं माना .....

उससे इतना पता था क गक अभी क साथ मिलकर असुरो क साथ किसी युद्ध पर निकले थे जो उससे अपनी माँ से पता चला ....

उसने अभी को खोजने की कोशिश की लेकिन अभी उस समय कस क साथ संघर्ष में बुरी तरह घायल हो चूका था ......और अपनी साड़ी शक्ति खो चूका था .....

तोह गोलू ...वापस यक्ष लोक आगया ....यहाँ शिवली अपने पिता क पास थी ....

गोलू शिवली को मिला ...लेकिन शिवली उसके बदले हुए रूप को देखकर पहचान नहीं पायी ....तोह उस्सने अपना परिचय दिया ...शिवली गोलू को मिलकर बाहत खुश हुई ......

गोलू ने अपने पिता क बारे में पूछा ....तोह शिवली ने बस इतना कहा क असुरो से संघर्ष में उनको वीरगति प्राप्त हुई .....वह अभी क द्वारा गक की मृत्यु क बारे में नहीं बताना चाहती थी .....

जब गोलू ने अभी क बारे में पूछा ....तोह शिवली की आँखों से आंसू बैग निकले ...क्यों की शिवली क बहुत समज़हाने पर भी अभी कस से भिड़ने चला गया था ......और तब से उससे भी अभी का पता नहीं चला ....शक्तिया खोने से उस्का संपर्क अभी से टूट चूका था ...उस्सने भी बहुत खोजने की कोशिश की लेकिन अभी का कोई पता नहीं कर पायी......

शिवली की चुप्पी को गोलू ने कस द्वारा hi अपने पिता और अभी की मृत्यु क बारे में मान लिया था ..

उस्का क्रोध बढ़ने लगा .....वह यहा से सीधा ...पटल लोक पहुंचा और कस को ललकारा ......कस की प्रचंड शक्ति क आगे वह टिक नहीं पाया ...और बुरी तरह घायल हो गया ....

कस - आखिर तुम हो कौन और क्यों इस तरह अपनी मृत्यु को ललकारा ....तुम्हारी मुजह्से क्या शत्रुता है.....

तब गोलार्क ने उससे अपने पिता गक और अभी की मृत्यु का दोषी ठहराया .......

कस - क्या ..तुम गुणक क पुत्र हो .....तुम्हारे पुत्र की हत्या मैंने नहीं की ...उसी रक्षक ने की जिसका साथ तुम्हारे पिता ने पग पग पर निभाया है.....

और अब वह रक्षक भी अपना दंड पा चका है ....मी हाथो से मृत्यु paakar.......lo देखो ...

और कस ने अपनी माया से वह दृश्य दिखाया जिसमे अभी क हाथो गक की मृत्यु हुई थी ....लेकिन इस दृस्य में वह माया नहीं थी जिससे दोनों प्रभावित थे .....

गोलू ने साफ़ साफ़ देखा अभी को गक की हत्या कटे हुए .......

बहुत अधिक घायल होने क कारण गोलार्क वही बेहोश हो गया.......

कस ने उससे पटल लोक से बहार फिकवा दिया .........

गोलू जख्मी हालत में बेहोश पड़ा था क वह तलातल लोक का एक जीव जो प्रसिते की तरह की प्रजाति है और दुसरो क शरीर में प्रवेश करके hi ऊर्जा प्राप्त कर सकती है .......जब उसनी गोलू को देखा तोह वह उसके शरीर में प्रवेश करने आगे बड़ा ....

लेकिन गोलू को स्पर्श करते hi उससे एक जोरदार झटका लगा ....और वह दूर जाकर गिरा .....तब उससे गोलू की शक्तियों का अनुमान हो गया ....वह जीव अपने मुखिया कनक क पास गया ......जिस्सके भीतर तलातल लोक की ऊर्जा का एक भाग था .....उससे बताया ......

कनक एक आधा जीव और आधा दानव tha.....woh इस संसार का सबसे शक्तिशाली बनाना चाहता था .......वह कस से भी आगे निकलना चाहता था .......गोलू को देखकर कनक को उस्सकी अंदर छुपी हुई ऊर्जा और पावर्स का पता चल गया .....तोह उसने सोचा क यह उसके उद्देश्य को पूर्ण करने क बहुत काम आसक्त है .

उसने गोलू को उठाया .....और तलातल लोक में अपने कबीले ले आया और गोलू का उपचार करने लगा ....जिससे ...गोलू अब पूरी तरह ठीक हो गया ........

होश में आने क बाद गोलू को कस की बातें और उसके द्वारा दिखाए हुए दृश्य याद आगया ..

उसस्के इस बात का दुःख था क वह अपने पिता क हत्यारे को दंड नहीं दे सका ....इससे पहले क वह उस तक पहुँचता ....वह कस क हाथो मारा गया ......

अपने प्राणो की रक्षा करने क कारण गोलू ने कनक को उसको सहयता का वचन दिया .......

लेकिन जब उससे पता चला क अभी जीवित है तोह वह अपने पिता क हत्यारे को दंड देने तड़प उठा .

उसने कई बार अभी तक पहुँचने का परायणता किय लेकिन सफल नहीं हो पाया .....लेकिन जब अभी तपः लोक गया था ....उस समय ..शिवली को देखकर गोलू अभी तक तोह पहुँच गया .....

लेकिनकुछ कर पाटा उससे पहले hi अभी को होश आगया था ......

तब उस्सने अभी क घर में hi घुस कर उसको उसके अपनों से hi दूर करने की योजना बनायीं और .....शक्तियों का लालच देकर ...कनक को मदत करने क लिए मनाया ......

फ़्लैश बैक एंड्स .....

यहाँ अभी रेनू से हुए रात क मिलान क बाद अपने समय पर उठा ......रेनू एक हाथ और एक पेअर से अभी को पकड़कर सोई हुई थी ...अभी ने जीरो बल्ब की हलकी सी रौशनी में रेनू को देखा ....और उससे धीरे से अलग हुआ .....उसके माते पर हल्का सा किश करके ...उठने hi वाला था क उस्सने नींद में hi अभी का हाथ पकड़ लिया ......

अभी फिर उसके बगल में लेट गया और उसके बालों में हाथ फेरते हुए देखने लगा .......अपने बालो में अभी क हाथ का स्पार्ह महसूस करते hi रेनू की आंखें खुल गयी ......

वह एक तक अभी की आँखों में देखने लगी ......और उससे इस तरह प्यार से अपनी तरफ देखते हुए देखकर ..अभी निचे ज़्हुकता चला गया .....और उसके होंठो पर किश कर दिया .....

रेनू भी अभी को किश करने लगी ...थोड़ी देर ऐसे hi प्यार करते रहे फिर अभी उठ गया और फ्रेश होने चला गया .......फ्रेश होकर अभी रूमें आया तोह रेनू भी चली गयी .........

अभी फिर चाट पर चला गया ....और ध्यान में बैठ गया ......आज उससे ध्यान में चक्रो की ऊर्जा क साथ साथ उन् दिव्यास्त्रों की भी ऊर्जा दिखाई दी जो विश्वामित्र जी ने उससे दिए थे .......

आज वह ध्यान में अपनी प्रत्येक ऊर्जा को अच्छे से देख पारहा था ...और उनकी शक्ति को अपने भीतर महसूस कर पारहा था .....

बड़े देर तक ध्यान कर ने बाद ....उससे अपने आज्ञा चक्र में वह शक्ति दिखाई देने लगी ....जो उससे रेनू से मिलान में प्राप्त हुई .......

तोह उसने उस शक्ति का उपयोग करके कई अपनी पत्निया और अपने सारे अंश इस समय क्या कर रहे है ...उसका लाइव टेलीकास्ट देखे लगा ......

जिससे उससे रसातल में बढ़ती हुई अजीब से जीवो क गतिविधिया देखि .....और फिर उन जीवो क मूल को जाने क लिए उनके उत्पत्ति स्तन को खोजते हुए ...उसके सामने तलातल लोक का दृश्य आया .......

जहा उसने एक अजीब से कबीले में .....हड्डियों से बने हुए सिंघासन पर बैठे हुए किसी अजीब से जीव को देखा .....यह था कनक ......वह से गायब होते हुए अभी ने किसी को देखा तोह उससे विश्वास नहीं हुआ ......

यह वही समय था जब गोलू कनक से बात करने क बाद वह से टेलिपोर्ट होकर घर आगया .....लेकिन अभी ने उससे वह से टेलिपोर्ट होते हुए देख लिया था......

धयान करते हुए अभी को बड़ा समय हो गया था ........सूर्योदय हो गया था ......अभी ....वह से निचे आगया ......तोह ऋतू भी उसी समय रूम से निकलकर निचे आरही थी .......

ऋतू अभी को देखकर रुक गयी ......

अभी - गम दी .....

ऋतू ने उससे कोई जवाब नहीं दिया ......

अभी - क्या बात है दी नाराज हो मुजह्से .......

ऋतू - मैं होती hi कौन हु जो नाराज़ हो....

अभी ने ऋतू को मन्नने क लिए उसके हाथ पकड़ना चाहा ...तोह ऋतू ने उसका हाथ जहातक दिया ..

तोह अभी उससे लेकर चाट पर चला गया......

अभी - आखिर आपकी प्रॉब्लम क्या है दी .....

ऋतू - मेरी प्रॉब्लम है तू ....सबको अपना प्यार बात्ता फिरता है और मुज़हे डांटता है .....

अभी - अपने कान पकड़ते हुए ...सॉरी मेरी क्यूट ..स्वीट दी ....लेकिन आप तोह जानती हो क कितना बिजी होता हु .....

ऋतू - अच्छा ...लेकिन अपनी पत्नियों क लिए कैसे टाइम मिल जाता है .......लेकिन एक मैं hi हु जिस्सके लिए तेरे पास टाइम नहीं है .........

अभी - दी आप जानती हो क में आपको सुख नहीं दे सकता क्यों क में सिर्फ 14 विवाह hi कर सकता हु ..

अब आप बताओ क में क्या करू ...

ऋतू - ओह्ह तोह यह बात है ...लेकिन बेतु सिर्फ शारीरिक सुख hi प्यार नहीं है .....वासना प्रेम का एक अंग होसकती है लेकिन प्रेम नहीं होसकती.....

में तुज़हे कभी इस बारे में नहीं बोलूंगी ....लेकिन प्रेम तोह कर सकती हु न ......

और ऋतू आगे बढ़कर अभी को गले लगाती है ......और हलके से उसके होंठो पर किश कर देती है ....अभी भी एक हल्का किश उसके होंठो पर कर देता है ....

ऋतू - खुश होते हुए ...बस ऐसा तोह प्यार कर सकता है न .....चल अब ब्रेकफास्ट करने नहीं तोह कोई ढूंढ़ते हुए आजायेगा ......

और फिर दोनों निचे आने लगते है .....अभी आगे ..और ..ऋतू पीछे ......ऋतू मैं में कुछ सोचकर मुस्कुराने लगती है.....

अभी क लिए इतना hi .....


अगला अपडेट रात को.....
 
अपडेट - 115



अब तक आपने देखा क कैसे गोलार्क कस की चल में आकर अभी क विरुद्ध हुआ....

अभी ने दिव्या दृष्टि से रसातल में चल रही जीवो की गतिविद्या देखि और उन् जीवो का मूल ताल्लुक भी देखा ...जहा उसने गोअर्क की एक ज़हालक देखि ......

अब आगे.....

अभी ऋतू क साथ निचे आजाता है ....आज का ब्रेक फ़ास्ट दोनों बहु मिलकर बना रही थी और अपने हाथो से सर्वे कर रही थी ........

अभी और ऋतू भी पहुँच गए .......और अपनी अपनी जगह बैठ गए.......

नैना - कहा रह गया था बेतु आज बड़ी देर लगा दी ........और ऋतू तू भी कहा thi....hamara तोह बर्फ ख़तम होने को आया ......

ऋतू अभी की तरफ मुस्कुराते हुए - माँ वह आज बेतु कुछ जयादा hi डयम कर रहा था ....तोह मैं इससे बुलाने hi गयी थी .......वह आज तोह खाने की बड़ी अच्छी खुशबु आरही है ......

माँ - आज का नास्ता दोनों बहु ने बनाया है ..........

रिम्पी - माँ जी ...मैंने तोह बस थोड़ी हेल्प की है ..सारा बर्फ ..आज छोटी ने बनाया है......

ऋतू - वह मेरी छोटी भाबी ....तोह गज़ब की कुक है ....

अभी को ऋतू में आया चेंज समाज आरहा था .....लेकिन अभी क थोड़े प्यार से वह खुश थी अभी क लिए इतना hi बहुत था.......

बर्फ क बाद अभी रूम में चला गया .....और रिंकू को मानसिक सन्देश भेजा .......और उसके आने का इंतजार करने लगा .......

थोड़ी hi देर में रिंकू आगया .....अभी ने रिंकू को घर पर और परिवार पर गुप्त रूप से पूरी तरह नज़र रखने क लिए कहा ........

रिंकू - मुज़हे तोह पहली hi नज़र में यह गोलू कुछ गड़बड़ लगा ....लेकिन तुम्हे कुछ ज्यादा hi िस्सपर विश्वास था इसीलिए मैं कुछ नहीं बोलै .......

अभी - बस ध्यान रखा ,गोलू को नहीं पता चलना चाहिए क तुम और तुम्हारी टीम ुसस्पर नज़र रख रही है ........और यदि कोई खतरा महसूस हुए तोह तुरंत मुजह्से संपर्क करना .....अभी पहले मुज़हे रसातल की प्रॉब्लम देखनी है ...और उसकी जड़ तक पहँचना है ....

रिंकू - तू बिना किसी चिंता क जा मैं हु यहाँ...

रिम्पी अंदर आते हुए - अब कहा जाने की बातें हो रही है ....अरे वह रिंकू .....अच्छा तोह रिंकू भी है ......कहा थे इतने दिन ....

रिंकू - बस भाबी ....कुछ समय कॉलेज ....कुछ ....अभी ...क दिए कामो में और कुछ बचा कुछ ...लिमा ..क साथ .....

रिम्पी - अच्छा शादी वादी का क्या प्लान है ......कब कर रहे हो ....

रिंकू - कॉलेज क बाद hi सोच रहा हु .....

तभी रेनू भी रूम में आजाती है .....उससे देखकर रिंकू ......

रिंकू - यार यह नयी एंट्री कौन है इनसे तोह मिलाया hi नहीं ...कही यह नयी भाबी तोह नहीं ....

अभी - हां यर ...यह है रेनू तेरी नयी भाभी .......

रिम्पी - ैव्हा आपने बताया नहीं कहा जाने की बात हो रही थी...

रिम्पी क पूछने पर अभी उससे रसातल में चल रही परेशानियों क बारे में बताता है ......

रिम्पी - ओह्ह ...तभी मैं कहु क इतना कुछ यहाँ हो रहा है और शिवली दी का कुछ पता नहीं ...हम भी आपके साथ चलेंगे .....और रेनू भी सबसे मिल लेगी .....

अभी - लेकिन यहाँ भी तोह तुम्हारी जरुरत होगी .....

रिम्पी आप चिंता न करो हम बस ...उनसे मिलकर वापस आजायेंगे .......

ठीक है तुम पहुंचो में किसी को लेकर वह पहुँचता हु .......

रिंकू और अभी वह से निकल गए .......रिंकू अभी क दिए हुए अपने काम में लग गयी उस्सने अपनी टीम को .....रवस ....ऋतू ...ाद्दु और नैना की सेफ्टी में लगा दिए जो उनसे एक दुरी बनाकर .....पूरी तरह सतर्क थे ....और रिंकू ने घर पर नज़र रखने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली .....

अभी वह से नीलकर गोलू क पास पहुंचा .....यशा भूमि उसके घर ......

अब्जी को इस तरह अपने घर आया हुआ देखकर पहले तोह गोलू हड़बड़ा गया .......

गोलू - अरे भाई आप ....आईये2 अंदर ....कितने दिनों क बाद आप आये है अच्छा लगा ......

अभी - क्या करे भाई इतने कामो में वेस्ट रहने क कारण समय hi नहीं मिल पाटा .....

तभी अंदर से काव्य आते हुए ...अरे बीटा कौन है ..जब अभी को देखा तोह उसके चेहरे पर खुसी आगयी .....गोलू ने अब तक अपनी माँ को कुछ नहीं बताया था ....

काव्य - अरे बीटा ...आओ आओ ...आज याद आई है तुम्हे हमारी ....इनके जाने क बाद एक बार भी हमारी खबर लेने नहीं आया ...

अभी - मुज़हे क्षमा करे चची कहकर भी नयी आ पाया ....अपनी व्यस्तता क कारण .....

काव्य - कोई बास्त नहीं बीटा में समाज सकती हु ......लेकिन कभी कभी आया कर अच्छा लगता है ......तू बैठ में कुछ खाने क लिए कुछ लाती हु ...

और वह अंदर चली गयी ......

.अभी - गोलू मुज़हे तुम्हारे साथ कुछ बात करनी है ...लेकिन यहाँ नहीं कर सकते

गोलू - ऐसी क्या बात है भाई ..जो यहाँ नहीं हो सकती..

अभी - है कूंच बात

इतने देर में काव्य ने खाने का कुछ ले आयी ....

नास्ते क बाद अभी गोलू को लेकर नाग लोक निकल गया ......

इस समय नाग राज अभी (ान )...सुलहका ...शिवली ....बैठे हुए ...इन् जीवो से कैसे निजात पायी जाए वह सोच रहे the.....Rimpy और रेनू भी वह बैठी थी

अभी को गोलू क साथ आया देखकर .......सभी खड़े हो गए .....

गोलू का सच अभी क जाने क बाद ...अभी क अंतर्मन से कनेक्टेड होने क कारण ..सिवली सब कुछ जान गयी थी ....अभी क साथ गोलू को देखकर ...शिवली ...कुछ बोलने क लिए आगे hi बड़ी थी क अभी ने उससे शांत रहने का इशारा किया ......

गोलार्क को कुछ तोह अंदेशा हो गया था क अभी उसके सच को जान गया है ......

गोलू - भाई तुम मुज़हे यहाँ क्यों लाये हो ......

अभी - शायद तुम जानते हो .....लेकिन कुछ भी कहने और करने से पहले ......तुम्हारे लिए एक सच को जानना बहुत जरुरी है .......

अभी ने गोलू को एक जगह बिठाया ....और अपने हाथ आगे करके माया से हवा में एक स्क्रीन से बना दिया ...और अपनी दिव्या दृष्टि का प्रयोग करके सब क सामने वही दृश्य चलाया जब अभी क हातो गक की मृत्यु हुई थी .....

जैसे जैसे दृश्य आगे बढ़ा .....ग्लौ की आँखों से आंसू बाह निकले .......अब वह सच जान चूका था क किन हालातो में ......अभी क हाथो गक की मौत हुई थी ..

अभी - गोलू मैंने तुम्हे अपना भाई माना ...और तुमने मेरे hi साथ विस्वास घाट किया ......कुछ करने से पहले ...एक बार तोह मुजह्से पूछ लेते .....

शिवली तोह तुम्हे अपना छोटा भाई मानती थी या उससे hi पूछ लेते ......

गोलू - मैं जानता हु भाई मुजह्से बहुत बड़ी गलती हो gayi.......Lekin में क्या करता .....उस समय मैंने दी से पूछा था ...लेकिन उन्होंने भी मुज़हे कुछ साफ़ साफ़ नहीं बताया ....और आपका भी कोई पता नहीं था .....कस ...ने उसके हाथो आपकी मृत्यु क बारे में बताया ....और वह दृश्य दिखाया ......तोह में किस्से पूछता ....

अभी - बाद में भी तोह पूछ सकते थे जब में तुमसे मिला था ......तुम्हारी इस भूल क कारण एक मासूम दीपू ने अपने पॉर्न गवाए .......क्या तुम उससे लौटा सकते हो ....

तुम्हे पता है गक मेरा मित्र से भी बढ़कर था .......जब कस क षड़यंरा ने उसकी जान ली तोह में आवेग में बिना कुछ सोचे कस का मुकाबला करने पहुँच गया .......तभी मैं बुरी तरह घायल होगया था......

गोलू - में जानता हु मेरी गलती क्षमा योग्य नहीं है .....आप इसके लिए मुज़हे जो सजा देना चाहते हो मुज़हे स्वीकार है .......

अभी -तुम्हारे जगह कोई और होता तोह अब तक में उससे मौत क घाट उतर चूका होता ......लेकिन तुम गक की निशानी हो इसीलिए अभी तक जीवित हो .......इससबार तोह में तुम्हे छोड़रहा हु ....ताकि तुम्हारी माता ..निपूती न hi जाए .....परन्तु यदि फिर तुम मेरे रास्ते में आये ....तोह दिन तुम्हारे जीवन का आखरी दिन हो .....

चले जाओ यहाँ से ..इस पहले ...क में कुछ कर दू न...

.तुम्हारा चेहरा देकता हु तोह नुज़ू उसमें दीपू का कातिल नज़र आता है .......चले जाओ यहाँ से ......

गोलू - मैं इतना बोज्ज अपने ह्रदय पर नहीं सह सकता .......विश्वास घाट का एक hi दंड होता है मृत्यु .....मुज़हे मार दो भाई ......

अभी - तुम्हे अपनी माता और बहन क लिए जीना होगा यही तुम्हारी सजा है .......

गोलू - ठीक है ....लेकिन जाने से पहले में अपने बिगड़े हुए कुछ काम सुधारना चाहता हु .....

फिर गोलू ने अपनी साड़ी ऊर्जा एकत्रित की ...और नागलोक की धरती पर छोड़ी ......गोलू की ऊर्जा नालोक का चक्कर काटने लगी .....और जहा जहा भी वह जीव चिप्पे हुए थे उनको जाकर lagi.....jisse वह टडसपणे लगे और ....वापस तलातल लोक में वापस चले गए ...

गोलार्क अब वह से जा चूका था ......

गोलार्क क जाने क बाद अभी सबसे मिला ......

शिवली गोलार्क का सच jaankar...dukhi थी ....अभी शिवली क दिल की हालत जानता था ....

अभी - तुम क्यों उसके बारे में सोचकर ...दुखी हो रही हो .....शिवू ......

शिवली - जब मैं उससे मिली तोह मुज़हे लगा एक प्यारा सा भाई मिल gaya.....mein उसके मनो भाव को पकड़ hi नहीं पायी ......

अभी - बीती हुई बातो को छोड़ो शिवू ...जो हो गया सो हो गया ...अब हमे आगे और सतर्क होना होगा ....क्यों की अब हम ....महा युद्ध क बहुत निकट है .......चुनौतियां और बढ़ने वाली है ......

अभी मुज़हे अपनी अगली यात्रा पर निकलना होगा .......तलातल लोक ...

तलातल लोक वैतरणी नदी क कारण दो हिस्सों में बता हुआ है

एक हिस्से में यमराज की नगरी ....सयामिनी पूरी है जहा वह सभी क कर्मो क अनुसार नये करते hai...Vital लोक में 28 में से 10 नरक the...baaki बचे हुए 18 नरक ...यमलोक क दक्षिणी भाग में थे......

और वैतरणी नदी क दूसरी तरफ उनंजीवो का वास है जिन्हे नार्को में लाये गए ....भोग शरीर ...धारण की हुई जीवात्माओ को दंड देने क लिए प्रयोग किया जाता था ......

इन् जीवो का स्वामी था कनक ....

आज क लिए इतना hi ...

अगला अपडेट कल ....

फ्रेंड्स आज मेरी तबियत ठीक नहीं है ....बप बहुत बढ़ गया है ...बड़ी ..मुश्किल से यह छोटा अपडेट लिख पाया हु .....

आपके कमैंट्स का इंतज़ार रहेगा.....
 
अपडेट - 116



अब तक आपने देखा गोलार्क को अपनी भूल का अहसास हो गया है ......

अब आगे ....

तलातल लोक में कोई भी बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर दकता था .....जब तक कोई भीतर का उससे लेने न aaye........kyuki यहाँ यमलोक भी था ...और यमलोक का विधान यही था ....

गोलार्क तलातल लोक क बाहरी हिस्से में खड़ा था .......उससे अपने मानसिक तरंगो से कनक को सन्देश भेजा ........थोड़ी hi देर में कनक का एक सेवक ..जो एक जीव था ...उससे लेने आया ........

और वह गोलार्क को लेकर तलातल लोक क सीमा में बने शील्ड को जैसे hi उस्सने स्पर्श किया वह एक प्रवेश द्वार बन गया .....और वह जीव गोलू को लेकर भीतर प्रवेश कर गया ........

वह जीव वैतरणी नदी से एक दूरी बनाकर ....चल रहा था ......

वैतरणी नदी से भयकर जीवो .....की आवाजे ....और उस्सको पार करते हुए यमलोक की और जाने वाले जीवात्माओ की दर्द भरी चीखे .....उस वातावरण को और भी भयावह बना रही थी......

वह जीव गोलू को लेकर घने जंगल को पार करते हुए ......एक ..कबीले जैसे जगह पहुंचा ....जहा पत्थरो की गुफाओ जैसे लाखो की संख्या में निवास स्थान थे....

उससे कबीले की जगह पत्तरों का नगर hi कहना उचित होगा........

यहाँ एक अज्जेब सी नीरवता और शमसान जैसे ख़ामोशी क बीच ...अजीब से जीवो की अजीब सी आवाजे आ रही थी ......

वह जीव गोलू को लेकर एक भवन ..या कहो पत्तरों से बानी कृत्रिम गुफा में पहुंचा ...जहा ....हड्डियों क सिंघासन पर विराजमान था कनक ........

उस जीव ने और गोलू ने कनक को प्रणाम किया .......

कनक - आओ ..आओ गोलार्क क्या सन्देश है ........इतने शीघ्र दुबारा आने का क्या कारण है ...और हमारा कार्य कहा तक पहुंचा .......

गोलू - महामहिम ....रक्षक की शक्तिया और बढ़ गयी है ....और मुज़हे लगता है .......उससे मुज़ह पर शक हो गया है .......

कनक - यदि यह सच है ..तोह यह तोह बड़ी गंभीर बात है .......

गोलू - गंभीर तोह है परतनु एक मार्ग है ....जिससे हम एक पल में hi उससे ख़तम कर सकते है .उसके कहातम होते hi उसकी शक्तिया आज़ाद हो जायेगी ........फिर आप उन् शक्तियों को सोख कर हो जाएंगे महा शक्तिशाली....

कनक - परन्तु ...इसकेलिए ...उससे यहाँ लाना होगा .....यह कैसे संभव होगा ......

गोलू - उसके लिए भी मैंने मार्ग सोच लिए है मुज़हे यहाँ 4 दिन की विशेष पूजा करनी होगी .......जिससे ऐसी ऊर्जा का निर्माण होगा जो उसके परिवार की शक्तियों को सोख लेगी .....और फिर हम उसी क जरिये .......उस रक्षक को विवश कर देंगे अपने प्र्राणो का समर्पण करने क लिए ...

कनक - वह ...गोलू ...वह ..क्या योजना बनायीं है .....अब मुज़हे पूता विश्वास है क हमारी यह योजना सफल होगी .......

गोलू - लेकिन इन 4 दिनों क लिए मुज़हे गुप्त स्थान चाहिए .....इन् 4 दिनों तक में किसी से नहीं मिल सकता .....

कनक - तुम इस बात की चिंता न करो .......मैं तुम्हे अपने विशेष स्थान ले चलता हु ......जहा किसी और को जहाँकने की भी आज्ञा नहीं है .......

कनक गोलू को एक गुफा में ले गया .......जहा एक आसान ....और एक हवन कुंड था और कुछ बिखरी हुई हड्डिया ....गोलू समाज गया क यह कनक का की कोई पूजास्थली है ......

कनक - ठीक है अब तुम अपने कार्य में लग जाओ मिलते है .......4 दिन बाद ....लेकिन ध्यान रहे यदि इससबार तुम विफल हुए .....तोह ...

गोलू - मुज़हे पता है सर्कार .....मेरा सर होगा और आपका खडग ......

और कनक वह से चला गया ....गोलू ने अपने हाथ से एक ऊर्जा प्रगट की और उससे गुफा में छोड़ दी .....और विह गुफा पल भर में एकदम साफ़ और शव होगयी .......

गोलू ध्यान मुद्रा में बैठ गया .....और किसी से मानसिक सम्पर्क करने लगा .....और थोड़ी देर बाद वह वह से अदृस्य हो गया.......

पूरी रात वह गुफा से गायब था .....सुबह होते hi वह वापस गुफा में प्रगट हो गया .........थोड़ी देर उससे गुफा क बहार ज़हानकर देखा फिर .....गुफा क द्वार को एक शील्ड से कवर कर दिया और कुछ देर कुछ उटपटांग सी पूजा और हवन किया ..और ..सो गया..........

अब चलते है पटल लोक में ......

पटल लोक में कस अपने क्रिस्टल पर गोलार्क की हैट गतिविधियों पर नज़र रख रहा था .........उसने देखा क अभी उसका हाथ पकड़ कर कही ले गया है .......

अभी को अंदाजा था क होना हो कस यह सब देखा रहा है ......तोह उसने माया और मंत्र शक्ति से रसातल क उस कक्ष का दृस्य बाधित कर दिया था ....जिससे कस वह क्या हो रहा है न देख पाए ......

कस को अब वह क्या होरहा है यह दिखना बंद हो गया .........

कुछ देर बाद उससे दिखाई देने लगा क गोलार्क रेस्टल लोक की सीमा पर खड़ा है ........और कस क देखते hi देखते अदृश्य हो gaya........yu अचानक गोलू क अदृश्य होने से कस बेचैन हो गया ..

तब उससे ध्यान आया क गोलार्क तोह एक यक्ष है ....और जीव की अलग अलग ऊर्जा होती है .......

तोह उस्सने अपने डिम्बक नाम क विशेष असुर को उस जगह भेजा.... जहा उसने गोलार्क को आखरी बार देखा ......

डिम्बक जीवो की ऊर्जा सोखने वाला असुर था ....इसीलिए किसी भी प्रजाति की ऊर्जा को बहली भाटी पहचान सकता था ......

डिम्बक जब उस जगह पहुंचा ....तलातल लोक की सीमा यहाँ से निकट hi थी ....गोलू की ऊर्जा को खोजते हुए ...वह तलातल लोक की सीमा पर पहुंचा .......

वह उससे दो यक्षों की ऊर्जा महसूस हुई ......जब वह आगे बड़ा ....तोह ....देखा गोलार्क ताल्लुक ...की सीमा पर खड़ा है ......उसने एक और यक्ष की अदृश्य ऊर्जा थोड़ी देर क लिए वह महसूस की ......

थोड़ी hi देर में उसने कनक क सेवक क साथ गोलार्क को तलातल लोक में प्रवेश करते हुए देखा ......तोह कोह वह से वापस कस क पास आगया और ....सब कुछ बता दिया ........

कस ने क्रिस्टल में अब तलातल लोक में कनक को गोलार्क क साथ बात करते हुए देखा .......

कस क मैं में अभी भी कुछ प्रश्न बाकी थे .......

क अभी और गोलार्क क बिच क्या बात हुई...???

और क्यों अदृस्य हो गया.......

क्या तलातल लोक में प्रवेश करने वाला गोलार्क असली है ?

यदि वह असली है ...तोह वह अदृस्य यक्ष कौन था ...???

कस ने रसातल ...सुतल ....अटल ...Vital......Tallok ...में अभी क अलग रूप देखते ...

उसने एक अभी को घर पर भी देखा .......अब इतने सारे अभी में से असली अभी कहा है उससे यर्ह पता करना था........

इसकी शुरुवात उसने अभी क घर hi करने की ठानी .....

यहाँ घर पर अभी ने अपने फ्रेंड्स क लिए छोटी सी party...Bahut दिनों से वह अपने फ्रेंड्स क साथ नहीं मिला था ...इसीलिए यह एक गेट टुगेदर पार्टी थी ......

रिंकू और संकु अपनी उटपटांग हरकतों से पार्टी में धमाल मचा रहे थे .......रिम्पी और रेनू ...ाद्दु ...पार्टी में शामिल थी .....

कुछ आंखें ऐसी भी थी जो उस पार्टी में हो रही सभी हरकतों पर ध्यान रख रही थी ........

पार्टी ख़तम होते होते रात क 10 बज गए थे और सभी फ्रेंड्स अपने अपने घर चले गए ........

अभी रिम्पी रेनू क साथ लॉन में hi बैठा हुआ था .....क उन्हें अपने चारो तरफ कुछ हलचल सी महसूस हुई ....जब तक वह कुछ समाज पाते लॉन में उन्हें चारो तरफ से असुरो ने घेर लिया ..

यह असुर बाकी असुरो से कुछ अलग थे इनके शरीर से निरन्तर .....बैंगनी रंग की तरंगे निकलकर उनके चारो तरफ एक घेरा सा बना रही थी ......

सभी असुर एक साथ आगे बड़े .....अभी और रिम्पी दोनों सतर्क हो गए .......और रेनू क पास सप्तऋसियो से सीखी हुई मंत्र शक्ति की पावर थी ....तीनो तीन दिशा की तरफ मुँह करके खड़े थे .......

असुर आगे बड़े अभी ने पांच तत्वों की सम्मिलित ऊर्जा से उन् असुरो पर वार करना शुरू कर दिया .

लेकिन अभी क वह वार उन् असुरो सुरक्षा घेरे पर लगते उस्में समां जाते थे .....जिससे उन् असुरो की शक्ति और बढ़ जाती थी ..,....

रिम्पी ने भी अपनी ऊर्जे से उन् असुरो पर वार किया .....लेकिन उन् असुरो का सुरक्षा कवच रिम्पी की ऊर्जा को सोखने लगा था ....इससे रिम्पी कमजोर पड़ने लगी .......

यहाँ रेनू क मंत्र शक्ति ....क वार उन् असुरो को बेचैन करने लगे ........जिससे कई असुरो का सुरक्षा घेरा टूट गया था ......अभी ने रिम्पी को पावर्स का इस्तेमाल करने रोका .....और तलवार लेकर जुट गया उन् असुरो का सामना करने .......

जिन जिन असुरो का सुरक्षा घेरा रेनू अपने मंत्र शक्ति से तोड़ चुकी थी थी ...अभी अपनी तलवार से उनका काल बन रहा था .......

उनकी सह्य बहुत थी ......अब रिमी भी संभल चुकी थी ...और अब अपनी फाइटिंग स्किल्स से उनका मुकाबला कर रही थी .......

बहार हो रहे शोर क कारण ...सब बहार आये तोह देखा ...घर क लॉन में एक संग्राम चिड़ा हुआ है ........

ऋतू और नैना आगे ाही रहे थे क अभी ने उन्हें इशारे से मन कर दिया ......

अब रिंकू भी मैदान में आगया था .......अभी ने उससे किसी ऊर्जा का प्रयोग करने से मन कर दिया .......तोह रिंकू ने एक डंडा उठा लिया ......और भीड़ गया असुरो से .......

यहाँ कस अपने क्रिस्टल पर सब देख रहा था ......

अभी ने जब देखा क उन् असुरो की सांख्य बहुत है .....तोह अब उसने अपने शक्ति त्रिशूल का आवाहन किया ......

यह त्रिशूल आकाश तावता और पराशक्ति की ऊर्जा से परपूर्ण था .......

सारी ऊर्जा आकाश में समां जाती है ...परन्तु आकाश को कोई समां नहीं सकता .....

अभी ने शक्ति त्रिशूल की भयंकर ऊर्जा से असुरो पर वार करना शुरू किया .....जिससे असुरो में हाहाकार मचने लगा ......और सभी असुर वह से अचानक गायब होगये .......

यहाँ कस क्रिस्टलें देखते हुए .....हम्म तोह असील अभी घर पर hi है ......तोह इस्सके अर्थ तलतललोक में जाने वाला गोलार्क hi है ....

अब कस विचार करने लगा ....क आखिर यह कनक गोलार्क क साथ मिलकर क्या करने वाला है .......

कस जानता था क कनक सर्व शक्तिशाली बनाना चाहता है .......उससे कनक पर विस्वास नहीं था ....

कस को पता था क कनक कभी भी अपने फायदे क लिए उसके पीठ में चुरा भौंक सकता है .....इसिलए ..वह कनक से एक दूरी hi बनाये रखता था ....

वैसे तोह कनक की उससे संदी थी .......

कनक कस क असुरो क द्वारा अपना दबदबा तलातल लोक में बनाये रखने क लिए प्रयोग करता था .....जिससे उसकी सत्ता यहाँ क जीवो पर बानी रहे ......

यह असुर गुप्त रूप से यहाँ रहते the.....jo यहाँ की हर खबर कस तक पहुंचते है .......

कस साड़ी बातो पर विचार कर hi रहा था .....क एक सैनिक कोई सन्देश लेकर आता है....

जिससे कस को पता चलता है कनक गोलार्क क साथ मिलकर कुछ ऐसा करने जा रहा है क रक्षक की साड़ी शक्तिया कनक को प्राप्त हो जाएंगी .....

कस विसहर करने लगता है क ऐसा क्या करने वाला है कनक जो रक्षक को समाप्त कर देगा .......

यदि यह सत्य है ...मुज़हे उसके हर षड़यंत्र का पता लगाना होगा ......जिससे कनक की जगह मुज़हे वह साड़ी शक्तिया प्राप्त हो जाए .......

इस समय गोलार्क जिस गुफा में था ....वह जगह ...कनक की साधना स्थली थी .....जिस कारण कस अपने क्रिस्टल में गोलार्क क्या कर रहा है नहीं देख सकता था.......

अगले तीन दिन तक गोलार्क का ताहि नियम बन गया था ......

दिन में कुछ पूजा हवन ...रात में किसी से मानसिक संपर्क .......और गायब होजाना ....फिर सुबह वापस आजाना .....

अभी क लिए इतना hi .......

अगला अपडेट रात को .....
 
फैंटास्टिक ..ब्रिलियंट ...mind.blowing & मजेदार :पीस:

रिव्यु नैना जी ..


:yes1::yourock::yourock::yourock:

अब क्या करे रेनू से जो दिव्या दृष्टि की नयी नयी पावर मिली है ...उस्का कुछ तोह इतेमाल करेगा हीरो....

करक्टेर्स क गन वरिटेरस क आसपास क लोगो से आते है ....हमारे यहाँ भी ब्रेकफास्ट पर कुछ कयदा hi जोर होता है ....इस्सलिये .....कहानी में भी बर्फ जयादा चल रहा है

:डी :डी :डी :डी

आपका रिव्यु पढ़कर बहुत अच्छा लगा ....कहानी और अच्छे से लिखने की प्रेरणा मिली ....

आपके इस शानदार साथ क लिए बहुत बहुत धन्यवाद्

:thanks::thanks::thanks:


बस ऐसे hi साथ बनाये रखे ...



लेटेस्ट अपडेट 116 पोस्टेड .....
 
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