ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 16 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

अपडेट - 117



अब तक आपने देखा तलातल लोक में कनक और गोलू क द्वारा क षड़यंत्र पर काम हो रहा है ..

कस का कन्फूसिओं ...और अभी क घर पर हुम्ला .....

अब आगे ........

कनक अपने सिंघासन पर बैठा ...aane..wale सुनहरे दिनों क सपने संजो रहा था .......तभी उसका खास सेवक ....पहुंतरु .....दौड़ता हुआ आया .......

पहुंतरु - महाराज ...महाराज ......गज़ब हो गया महाराज .........

कनक - अपने खयालो से बहार आते हुए ......क्या हुआ क्यों शोर मचा रहा है .....कम्बख्त .......

पहुंतरु - महाराज .....वह ....वह ....असुरो ..की laashe......Ab .....

कनक - कौन सी लाशें ....क्या हुआ ैव्हे से बता ......

पहुंतरु - महाराज ....नगर क बीचो बिच ....20 असुरो की कटी हुई लाशें है .......

कनक - क्या .....लगता है ...नशा ..करके आपस में hi लड़ भीड़ मार्गए होंगे .....

यहाँ और किसकी हिम्मत जो हमारे विरुद्ध षड़यंत्र कर सके .....और कोई बाहरी यहाँ आनहि सकता ..और उन् असुरो की मौत पर तू क्यों घबराया हुआ है .......

पहुंतरु - महाराज घबराने की hi बात है ...क्यों क वह असुर ...सब ...KS....k ...गुप्तचर थे जो इस नगर की निगरानी करते थे .......

कनक - क्या फिर तोह गंभीर बात है इससे कस का दखल हमारे यहाँ और बढ़ जाएगा .....

और कनक उसके साथ नगर क उस जगह पहुँच जाते है ....जहा ..20 असुरो की कटी हुई लाशें पड़ी हुई थी .......

वह बहुत सारे जीव उस जगह को घेरे हुए थे ....उनको रोके हुए कनक क सिपाही भी वह खड़े थे .......कनक ने वह पहुँच कर देखा .....

कनक - सैनिक से - कुछ पता चला किसने किया है यह ..........

सैनिक - महाराज लगता है यह विमलाक्ष का काम है .......हमे खबर मिली है क उससे यहाँ देखा गया है .......कुछ दिनों से विमलाक्ष क पक्ष वालो में कुछ गतिविधिया तेज़ होगयी है ..

कनक - लेकिन विमलाक्ष अचानक उस्में इतनी हिम्मत कहा से आगयी .......भूल गया हमने उसका क्या हाल किया था.........

विमलाक्ष पहले इन् सभी जीवो का मुखिया था .....यहाँ क सभी जीवो का सञ्चालन उसके hi द्वारा होता था ......यह यमराज जी की सभा का सदस्य था........

विमलाक्ष की एक कन्या थी वैशाली .......कनक विमलाक्षा का सेवक था .....वह किसी भी तरह अपने मालिक की जगह लेना चाहता था ........

इसके लिए उस्सने गुप्त रूप से अपनी शक्ति बढ़ाने क लिए इब्लीस की उपासना शुरू कर दी ........और यमराज को प्रासना करने क लिए उनके मंत्र का भी जाप करने लगा ..........

यमराज ने प्रसन्ना होकरजब उससे उसकी इच्छा पूछी तोह उसने विमलाक्ष का शतं माँगा ....तुम यमराज जी ने कोई दूसरा वर मांगने को कहा ....

क्यों की उन्होने स्वयं विमलाक्ष को उन् जीवो का अधिपति चुना tha........toh वह कैसे उससे हटाकर किसी और को उसका स्थान दे सकते है .....

तोह कनक ने उन्हें कहा क इस्सके एक मार्ग है ...क ..उसके और विमलाक्ष में युद्ध होगा और उस्में आप हस्तक्षेप नहीं करेंगे .....जो विजयी होगा वही यहाँ जा आधी पति बनेगा ......

और दूसरी और उस्सने इब्लीस की पूजा करके कुछ काली शक्तिया भी हासिल कर ली थी .....अपनी विजय क लिए उसने कस से हाथ मिला लिया .......

और जब कनक का विमलाकक्ष (वः) क साथ युद्ध हुआ तोह उसने असुरो की और काली शक्तियों की सहयता से बंदी बना लिया और बहुत ज्यादा प्रताड़ना दी ..........

वह तोह उससे मार hi डालता .....परन्तु यमराज जी क कहने पर कनक ने विमलाक्ष को प्राणदान दे दिया .....अपने दिए हुए वचन क कारण वह और जयादा कुछ कर नहीं सकते थे ...

इसीलिए किसी को भी कोई वचन देना हो तोह सोच समक्ष कर देना चाहिए ....और वैसे भी आजकल वचन को पालन करता ...है ........

हर राजय में पक्ष और विपक्ष तोह होते hi थे ...... वः क पक्ष क जो थे वह अपने मुहैया की हार क कारण विद्रोह करने लगे थे जिनका दमन कनक ने कस क असुरो की सहयता से किया था ......

अब ऐसे अचानक वः का सामने आना और जगह जगह फिर विद्रोह की स्थिति उत्पन्न होना ...कनक ..क लिए चिंता का कारण थी .....

उससे गोलार्क की साधना पूरी होने का इंतजार था ....जिसमें अभी 2 दिन और बाकी थे ........

यहाँ पटल लोक में जब कस को पता चला क उसके गुप्तचरों को किसी ने मार दिया है है ....तोह उस्सने वः क देखे जाने क बारे में बताया .....

इतने वर्षो क बाद वः का यु सामने आना .....कस क मैं में शंका उत्पन्न कर रहा tha.......Talatal लोक में कुछ तोह ऐसा चल रहा था जो उससे समज़ह नहीं आरहा था .....

कस ने कनक को गोलार्क क बारे में सतर्क रहने को कहा और शंका जताई क हो सकता है क वह असली गोलातक न हो ......और वह वह ऐसा कौन सा काम कर रहा है जो कनक ने उससे अपनी साधना स्थली दे दी ....ऐसे क्या करने वाले है दोनों मिलकर

कनक ने कहा क गोलरक ने खुद उससे मानसिक संपर्क करके अपने आने की सुचना दी थी .....हर व्यक्ति की मानसिक तरंगे अलग होती है .......गोलार्क ने जब कनक से संपर्क किया था ...तोह वह मानसिक तरंगे गोलार्क की hi थी .....

लेकिन उनसे अपनी और गोलार्क क बिच छुपी हुई बातें छिपा ली ....वह किसी भी हाल में अपनी योजना को कस तक नहीं पहुँचने देना चाहता था

कस ने उससे अपने बाकी असुरो की रक्षा का ध्यान रखने को कहा ......और सतर्क रहने को कहा ..

यहाँ तलातल लोक में hi एक गुप्त जगह वः अपने समर्थको की सेना एकत्रित करने लगा था ....वैशाली भी अपने पिता क कार्य में पूरी तरह सहयोग कर रही थी ......

वः - साथियो ...अब समय आगया है .....कनक से मुक्ति पाने का हमे और साथी एकत्रित करने होंगे ......अब और असुरो का और कनक क द्वारा अत्याचारों को हम सहन नहीं कर सकते .......

क्या आप सब तैयार हो .......

सब एक स्वर से ....हां ...haa...hum सब तैयार है.......

वः - तोह तैयार रहना साथियो ......दो दिन बाद हमे एक साथ हुम्ला करना होगा .......

अब वह दिन भी आगया जिसका कनक को इंतजार था ....कनक सही समय पर अपनी साधना स्थली तक पहुँच चूका था .........

थोड़ी hi देर में गोलार्क बहार आया ....और कनक को भीतर ले गया ...कनक ने वह का नज़ारा देखा तोह उसकी आंखें खुली की खुली रह गयी ......

वही दूसरी तरफ वः ने अपने साथियो क द्वारा पूरे नगर को घेर लिया था ...और सब एक साथ आगे बढ़ रहे थे ......

आज वः की सेना क आगे कोई भी असुर टिक नहीं पा रहा था ......असुरो में चारो तरफ भगदड़ मच गयी थी ....वह जहा जगह मिली वह छुपने लगे .....

लेकिन वः क सातियो ने उन्हें ढूंढ ढूंढ कर निकला ...

कनक क जीवो ने वः की सेना क शरीरो को अपने कब्ज़े में लेना चाहा ....लेकिन किसी पावर फूल ऊर्जा क कारण सफल नहीं हुए ......

यहाँ गुफा में ....जब कनक पहुंचा तोह उससे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था ......

कनक ने देखा क अभी उदास आ धरती पर घुटनो क बल बैठा है .......और सामने hi अभी का परिवार गोलार्क की ऊर्जा में बंधा हुआ था .......गोलार्क का बंदन उनपर कास रहा था .....

रवस ...नैना ...Addu...aur ...ऋतू ....पाश में बंधे रो तहे थे ....और बार बार ....बचने क लिए अभी को पुकार रहे थे .....

गोलार्क - तुम अपने आपको बड़ा रक्षक समजह्ते हो ...आज तुम नहीं बच पाओगे .......

यदि तुमने कुछ भी चालाकी करने की कोशिश की तोह मेरा यह पाश इन् पर कसता चला जाएगा और सब की एक साथ मृत्यु हो जायेगी .....

अभी - नहीं गोलू तुम आईएस नहीं कर सकते ...छोड़ दो सब को .....मैंने तुम्हे अपना भाई माना और तुमने मेरे साथ विश्वास घाट किया .....

गोलार्क - विश्वास घाट तोह तुमने किया था मेरे पिता क साथ ....उनकी हत्या करने पर ......अब या तोह तुम अपने प्राण दो ...या अपने परिवार की मौत देखो अपनी असंख्य क सामने .....

अभी - मुज़हे सब स्वीकार है ...तुम मुज़हे मारना चाहते hi न तोह ठीक है .....परन्तु मेरे परिवार को छोड़ दो ........

गोलार्क - मैं जानता हु मेरा कोई अस्त्र तुम पर कोई काम नहीं करेगा इसीलिए तुम्हे स्वयं अपने प्राण त्यागने होंगे......

अभी - ठीक है तुम यही व्हाहते हो तोह यही सही ......

और अभी अपने हाथ में तलवार ले लेता है और अपनी गार्डन पर रखता है ....

गोलार्क - कनक से ...तैयार हो जाइए महामहिम ...जैसे hi इस्सकी गार्डन इसके धड़ से अलग होगी इस्सकी ऊर्जा इसके शरीर क बंधन से मुक्त हो जायेगी उसी समय आपको वह शक्ति अपने भीतर सोख लेना है ...फिर आप बजाओ गए इस संसार में सर्व शक्तिशाली .....

लेकिन इसके लिए पहले आपको एक काम करना है ....अस्प्को अपनी साड़ी ऊर्जा ...मेरे इस कुंड में समर्पित करनी हो ....जब इसकी मृत्यु जो जायेगी तोह इस्सकी ऊर्जा भी कुंड में समां जायेगी ......

तब दोनों उर्जाये मिलकर एक महा शक्ति बनेगी ...और उससे आपको अपने भीतर देखना

कनक गोलार्क की साड़ी बात समाज गया ..........लेकिन यह उसके लिए एक बहुत बड़ा फैसला था कनक ने एक बार पूरी स्थिति का जायजा लिया ......

गोलार्क ,- जल्दी कीजिये महाराज हमारे पास जयादा समय नहीं है ........

कनक ने अपनी ऊर्जा निकालनी शुरू की, लगभग आदि ऊर्जा वह उस कूबड़ क हवाले कर चूका था ...क बहार शोर बढ़ने लगा ......

कनक को कस की बात याद आयी उससे कुछ षडयंत्र की आशंका होने लगी .......

उसने तुरंत अपनी ऊर्जा को रोकने का प्रयास किया लेखों तब तक आधी ऊर्जा कुंड में समां गयी थी गोलार्क ने कुंड को शील्ड से कवर कर दिया ....जिससे कनक की शक्ति अब आधी रह गयी थी .......

कनक ने तुरंत तलवार उठाकर घुटनो क बल बैठे हुए अभी क गार्डन पर वार किया .......लेकिन यह क्यों अभी और उसका सारा परिवार पल भर में hi धुआँ बनकर उड़ गया.......

कनक - इतना बड़ा षड़यंत्र .....अब में तुज़हे जीवित नहीं छोडूंगा गोलार्क .......और तलवार लेकर गोलार्क पर लपका .....जैसा hi उसने गोलू पर तलवार से गर्दन पर किया ........

गोलार्क ने एक हाथ से पहले तोह तलवार पकड़कर तोड़ दी ......और एक जोरदार किक कनक क पेट पर पड़ी जिससे वह पीछे की तरफ जोर से गिर पड़ा .......

जमीन पर पड़े पड़े कनक का मुँह और आश्चर्य से खुला रह गया जब उसने गोलार्क क जगह अभी को खड़े देखा .........

आज क लिए इतना hi .....


अगला अपडेट जल्द hi .....
 
भाई बहुत अच्छा लगा जानकार क आपको स्टोरी पसंद आरही है....

स्टोरी का यह कैरक्टर मेरे मन में कई समाया से था लेकिन समय न मिलने से लिख नहीं पा रहा था....

लॉक डाउन में नेट पर इस साइट का पता चला कुछ डोरिस पढ़ी लेकिन वह अधूरी रह गयी थी .....

सोचा यह एक अच्छा प्लेटफार्म है ....तोह अपनी इमेजिनेशन यहाँ उतर दी ....

आप किस थ्रेड क बारे में कह रहे हो मुज़हे नहीं पता क्यों क में इस साइट पर नया हु ......

हो सकता है कुछ समानता ho......kyu की सिद्धिया और पावर्स तोह चाहे पुराण हो या कोई फंतासी मैजिकल स्टोरी एक जैसी होती है...

बस यह 14 लोको का कांसेप्ट मैंने पुराणों से लिया ...बक्की मेरी इमेजिनेशन.....

:थैंक्स: :थैंक्स: :थैंक्स:
 
अपडेट - 118

अब तक आपने देखा क कनक जिससे अमृत समाज रहा था वह विष nikla......jisse वह गोलार्क समाज रहा था वह अभी निकला ....

अब आगी .....

अब जानते है अभी ने यह खेल कैसे रचाया ............

रसातल में गोलार्क क जाने क बाद अभी ने तलातल लोक में प्रव्रश करने का विचार kiya...Abhi ने तलातल लोक की पूरी सीमा का चक्कर लगा कर देखा लेकिन कही से भी भीतर प्रवेश नहीं कर पाया ....

अभी को अपने आस पास गोलार्क की ऊर्जा का आभास हुआ ....जो अदृश्य रूप ...में अभी क hi आसपास था ....तब अभी ने गोलू क साथ टेलिपाथी क जरिये कनेक्ट किया ....और उससे इस तरह अदृस्य रह कर पीछा कर का कारण पूछा .........

की चेतावनी देने क बाद भी ....वह क्यों ऐसे छिपकर उसका पीछा का रहा है ......

तोह गोलू ने एक ाहृ मौका माँगा ...प्रायश्चित करने क लिए .....और साथ में बताया क अभी इस तरह तळतळ लोक में प्रवेश नहीं कर सकता .....वह प्रवेश करने क लिए वह मदत कर सकता है .........

इस समय अभी ने उसकी उपयोगिता समज़कर ...गोलू को एक अवसर देने का सोचा ......

गोलू ने बताया क कस क दृष्टि से बचने क लिए उसका अदृश्य रहना जरुरी है ...इसीलिए वह ऐसे छिपकर अभी का पीछा कर रहा था .....

गोलू क कहे अनुसार ....अभी ने अपने यक्ष रूप को अपने भीतर जागृत किया ....जिससे उसके शरीर से निकलने वाली ऊर्जा ( ौर्रा) यक्षों की तरह हो gaya.......Aur उसने गोलार्क का रूप ले लिया ........गोलार्क का रूप ...अभी ने ...नाग्शक्ति .....प्रकृति की ऊर्जा ....यक्ष विद्या तीनो मिलकर गोलार्क का रूप का रूप धरा था ....

अभी को पता था क कस जरूर यह जाने को कोशिश करेगा क असली अभी कहा है ....तोह इसदबार उसने ....विभक्त विद्या क द्वारा ा1 को घर पर भेज दिया ....

अभी क इस रूप क पास hi वह पांच तत्त्व से जुड़े हुए अस्त्र थे ....जो महागुरुकि आज्ञा से उसने पाए थे .....

और फिर गोलू ने कनक को अपने यहाँ आने का मानसिक सन्देश भेजा था ......और जब उसने देखा क अभी को लेने कनक का सेवक आया है ....और उससे गोलार्क समज़कर तलातल लोक क भीतर ले गया ...

तोह गोलू वह से चला गया

कस क असुरो का सामना .ा1 से हुआ था ....

यहाँ अभी जब गोलू बनकर कनक से मिलने पहुंचा तोह कनक ने भी उससे नहीं पहचाना ....अभी को पता था ...क कनक शक्तिया प्राप्त करने का लालची है....

तोह उसने उससे अपने hi रूप रक्षक की साड़ी शक्ति पाने का लालच देकर अपनी योजना ओर काम किया ........

इसकेलिए उससे कोई गुप्त स्थान चाहिए था .......कनक अभी की चल में फास्ट चला गया और उससे 4 दिन क लिए अपनी साधना स्थली दे दी .....

.अभी जब कनक की गुफा में आया ...तोह दिन भर पूजा और हवन का नाटक kiya.....aur फिर रात को उस्सने यमराज जी को संपर्क किया ....और उसने अपने यहाँ आने का कारण बताया.........

यमराज जी ने अभी को इसी लोक क पश्चिमी भाग में गुप्त रूप से रह रहे विमलाक्ष (वः) क पास जाने को कहा .......और वह से hi अपनी योजना आगे बढ़ाने को कहा...

यमराज जी भी कनक क धोके क कारण उससे वह से हटाना चाहते थे ....परन्तु अपने वचन में बंधे होने क कारण .....वह सीधे तौर पर उसके विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते थे ......

अभी टेलिपोर्ट होकर ....वह पहुंचा .....वह उससे बड़े बड़े चट्टानों क सिवा कुछ नहीं डीह रहा था .........वह अभी वह उन् चट्टानों को देख hi रहा था .......

वह उन चट्टानों में कुछ आगे बड़ा hi था ......क कही से उसपर बड़े बड़े पत्थरो की वर्षा होने लगी ......अभी ने जांभोज कर कुछ नहीं किया .......

अभी को चट्टानों में दबा हुआ देखकर .....वह चिप्पे हुए ...4 साये जो वः क साथी थे आये ..

और उस तरफ देखने लगे जहा अभी दबा पड़ा था .....और अभी पहुँच गया था उनके पीछे .....

अभी - वह क्या देख रहे हो ....में यहाँ हु .....

वह चारो पीछे मुड़े ....तोह अभी को सम्मन देखकर सर खुजाने lage.....kyuki अभी उनके सामने hi चट्टानों में डाब गया था .....

वह चारो अभी की तरफ बड़े .......

अभी - रुको ...में तुम्हारा शत्रु नहीं .....मित्र हु ....मुज़हे वः से मिलना है .........

वः का नाम अभी क मुँह से सुनका एक पल तोह वह ठिठक गए ........लेखों उन्हें अभी की बातो पर यकीं नहीं था .....

वह चारो एक साथ अभी की तरफ लपके और एक साथ हुम्ला कर दिया .....अभी बड़ी तेज़ी से वह से हैट गया ...जिससे वह चारो आपस में टकरा गए .......

अभी - देखो में फिर कहता हु में तुम्हे हानि पहुँचाने नहीं आया हु ...

लेकिन वह जीव फिर आगे बड़े तोह अभी ने अपनी ऊर्जा का प्रयोग करते हुए एक पाश में बांध दिया ........

अभी - मैं फिर कहता हु मैं तुम्हे हानि नहीं पहुँचाना चाहत

ा ...मुज़हे सिर्फ वः ..से मिलना है ....

तभी पीछे से आवाज आयी .....कौन हो तुम यदि शत्रु नहीं हो तोह इस तरह आधी रात को यहाँ क्या कर रहे हो ......

अभी ने जब पलटकर देखा तोह काले कपडे पहने कोई हाथ में मशाल लिए खड़ा था दिखने में वह कोई यमदूत जैसा hi डरवाना लग रहा थी ...करीब 7 फट ऊँचा ...अच्छी डीलडौल वाला चेहरे पर बड़ी मुचे ....बड़ी बड़ी लाल आंखें .....मशाल की लौ में और भयानक दिख रहा था ......

अभी - क्या आप hi वः हो ......

वः - हां ...कहो ..कौन हो तुम क्यों की दिखने में तुम कोई मानव लगते हो

....परन्तु किसी मानव का जीवित इस लोक में होना आश्चर्य है .....

अभी - बस इतना जान लो मुज़हे यमराज जी ने आपसे संपर्क करने क लिए कहा है .....बक्की बातें ....आपके निवास पर करे तोह बेहतर होगा .......

वः को पता था ...इस जगह क बारे में उसस्के समर्थक या तोह स्वयं युराज जी hi जानते थे

वः - ठीक है चलो ...

अभी ने चलने से पहले उन् चारो को अपने बंधन से मुक्त कर दिया .....

.वः अभी को एक चट्टान क पास ले गया .....उस चट्टान पर एक छोटा से गोल पत्थर जैसा हिस्सा उभरा हुआ था .....वः ने उससे पकड़कर घुमाया ....और वह चट्टान अपने जगह से हैट गयी ......निचे जाने क लिए सिडिया बानी हुई थी ...

वः क साथ सिडिया उतरते हुए अभी निचे एक विशाल कक्ष में पहुँच गया ......उस कक्ष से जुड़े हुए और भी बहुत से कक्ष थे जो पत्थर को काटकर बनाये गए थे ......

एक आसन पर बैठते हुए ...वः .- अब कहो ...क्यों मिलना चाहते थे मुजह्से ....परन्तु पहले अपना परिचय दो ....

अभी ने वः को अपने बारे में सब बता दिया ...और उसका यहाँ आने का उद्देस्य क्या है यह भी बता दिया ......

अभी की बात सुनकर वः क चेहरे पर एक चमक सी आगयी ....उसस्के अपने अँधेरे जीवन में एक प्रकाश की किरण सी नज़र आने लगी ....

कनक से हारने क बाद ...और विद्रोह में अपने बहुत से साथी खोने क बाद वः उम्मीद हर चूका था ....आज अभी से मिलकर और उसकी बातें सुनकर एक नया उत्साह उसके भीतर समां गया था .....

वः - आप यहाँ हमारी सहयत क लिए आये ....और हमने आपको शत्रु समज़कर आप पर hi हमला किया ...इसके लिए मैं आपका क्षमा प्रार्थी हु .......परन्तु आप कनक से सावधान रहने उसके उसके पास ....काली शक्तियों की कई ऐसी सिद्धिया है जो शायद कस क पास भी नहीं है...

अभी - आपकी सलाह क लिए धन्यवाद् .......अब हमे कनक से इस लोक को मुक्त करने क लिए अपनी योजा पर काम करना होगा .......

सबसे पहले आप यह बताये क नगर में आपके कुछ सहायक अभी भी hai...aur है तोह क्या वह सब आपके सम्पर्क में है .......

हमे उनसब का विशवास फिर से जगाना होगा .......और उनकी सहयता से कनक का विरोध करने वाले या उसके अत्याचारों से पीड़ितों को गुप्त रूप से करना होगा ....

और चौथे दिन दोपहर ठीक 12 बजे आप मेरी रक्षक सेना जो ताल्लुक की सीमा पर आपको मिलेगी उहने भीतर लाना होगा ....और मेरा संकेत मिलते hi चारो तरफ से हुम्ला करते हुए कनक क भवन की और बढ़ना होगा .....

वः की कन्या वैशाली सभी बातो को दूर कड़ी सुन रही थी .......उससे भी अब अपने पिता क कष्टों का अंत नज़र आने लगा था.......

वैशाली .....का रंग सावला था ....ओर उसके तीखे नैन नक्श .....में एक अलग सा hi आकर्षण था .....जो उससे और जयादा सुन्दर बनता था .......

वह युद्ध कला में पारंगत थी ....अपने पिता को उनका खोया हुआ सम्मान पुनः प्राप्त हो यही उसका सपना था .......आज अभी की बातें सुनकर उससे भी अब विश्वास हो चला था ....क समय दूर नहीं जब उसका पिता को पुनः अपनी प्रतिष्ठा प्राप्त हो जायेगी ....

अपनी बात पूरी करके अभी ने वैशाली की तरफ देखा ....जो उससे hi देख रही थी .......जब वः ने अभी को वैशाली की तरफ देखते हुए देखा .....

वः - यह मेरी पुत्री वैशाली है .....इसीके क कारण कनक क द्वारा इतना अपमानित होने पर भी अब तक जीवित हु .....

अभी - आपकी पत्नी तोह होगी ....

अभी के यह पूछने पर ....वैशाली की आँखों से दो बून्द आंसू की वहलाक जाती है....

वः - एक आह भरते हुए .- युद्ध में जब कनक ने अपनी काली शक्ति का वार मुज़ह पर किया ...तोह मेरी रक्षा क लिए मेरी पत्नी बिच में आगयी थी जिससे मेरी hi आँखों क सामने उसकी दर्दनाक मृत्यु हो गयी ........और में कुछ नहीं कर सका .....

वैशाली को देखकर अभी को एक आकषण सा महसूस हो रहा था ......और उससे दिल में छिपे दुःख का भी अभाव उससे हो रहा था ......

थोड़ी देर योजना पर और बात हुई ...और अभी वह से निकल गया ........

दूसरे दिन फिर अभी वः क पास पहुंचा और गुप्त रूप से वः को लेकर उसके समर्थको से मिला ....जहा कस क कुछ गुप्तचर असुरो ने वः को देख लिया ...और वह उसका पीछा करने लगे ...

अभी अदृश्य रूप में था ...

यही तोह अभी चाहता था .......वः क समर्थको में कुछ एक नया जोश भरने क लिए ....उन्हें कुछ करना था .....और कस क असुरो की मृत्यु से बढ़कर और क्या हो सकता है ...

अभी ने अपनी तलवार से उन असुरो को मौत क घाट उतर दिया ....और कुछ को जान भुजकर जाने दिया ..उन् असुरो ने वह सिर्फ वः को देखा था ....

तोह दूसरे दिन यह बात नगर में फैल गयी क वः ने कस क असुरो को मारकर नगर क बीचोबीच फ़ेंक दिया .....

जिससे वः क समर्थको को अब याकों हो गया क अब उनका नायक साक़िया हो गया है और उनमें एक जोश सा भर गया......

अगले दो दिन तक सारे समर्थक गुप्त रूप से अलग अलग टुकड़ियों में एकत्रित होगये .......

अभी की सहयता से कुछ कनक क कुछ सैनिको को हटाकर उनका स्थान ले चुके थे ......

कनक क सेवक डिम्बक को षड़यंत्र का आभास भी होने लगा .....और उसने कनक को सचेत करने का भी प्रयत्न किया ....

लेकिन कनक गोलार्क क रूप धरे हुए ....अभी क दिखाए हुए सब्ज बाघ ...और अपने आतंक क अहंकार में मस्त था......

चौथे दिन ...कनक क सैनिको का स्थान ले चुके वः क समर्थक .......रक्षक सेना को भीतर ले आये .......जिसमें वज्रा बहु ....कंटक .....भद्रा ...... ....प्रेतराज अभी ....और दानव अभी ...चैताली ..अपनी अपनी टुकड़ियों क साथ प्रवेश कर चुके थे ......

अभी का मानसिक संकेत मिलते hi उन्होंने अपना कार्य शुरू कर दिया.......

यह वही समय था जब अभी ने कनक की तलवार तोड़ दी और उसको एक किक मारी .....

और कनक ने जब देखा तोह उससे गोलू की जगह अभी नज़र आया ...उसके सारे सपने चूर चूर हो गए .......

दोस्तों इसीलिए सपने उतने hi देखने चाहिए जो हम पूरे कर सके ....

नहीं तोह वही होगा ...मुंगेरीलाल क हसीं सपने....

आज क लिए इतना hi .....


अगला अपडेट ...कल .....
 
ठंकु सू मच ृतिमा जी आपके शानदार ..एक्सीलेंट और मंद ब्लोइंग रिव्यु क लिए

?????

:थैंक्स: :थैंक्स: :थैंक्स:

ृतिमा जी हीरो को काम समय में अपनी साड़ी शक्तिया पानी है जो कस क अंत क लिए बहुत जरुरी है ...इसीलिए उसकी पहली प्रायोरिटी वही है ....

बड़ा लक्स्य कई बलिदान मांगता hai....yaha भी वही हो रहा है ....

महाभारत युद्ध में कृष्णा क साथ होने पर भी पांडवो ने Ghatotkach....Abhimanyu....Aur पांडवो क पांच पुत्र को खोया .....

कृष्णा चाहते तोह वह यह सब रोक सकते थे .......परन्तु उन्होंने ऐसा नहीं किया ...

ऐसे hi साथ बनाये रखे...

लेटेस्ट अपडेट 118 पोस्टेड....
 
ठंकु सू मच ृतिमा जी आपके शानदार & आउटस्टैंडिंग रिव्यु क लिए ?????

:थैंक्स: :थैंक्स: :थैंक्स:

गोलार्क में गक की भी ऊर्जा समायी है ...जिससे अभी को उसमें अपने मित्र की छवि दीहक्ति है ...इसीलिए शायद उससे अपने मित्र का hi प्रतिरूप मानकर हीरो उसपर विश्वास करने लगा है ..

ऐसे hi साथ बनाये रखे...

लेटेस्ट अपडेट 118 पोस्टेड....
 
अपडेट - 119

अब तक आपने देखा क कैसे अभी वः और वैशाली तक पहुंचा ....

और किस तरह कनक क विरुद्ध योजना बनायीं ......

अब आगी ......

कनक ने देखा क गोलू की जगह वह अभी है .....

कनक - ओह्ह तोह रक्षक तुम ....यह छल है मेरे साथ .....िस्प्रकर किसी और का भेष धारण कर मुज़हे छाला है ......

अभी - वह देखो तोह छल क बारे में कौन बात कर रहा है ....जिसने छल क द्वारा hi सत्ता पायी .....और छल क द्वारा hi और शक्ति प्राप्त करने की योजना बना रहा था.......

और अभी ने ऊर्जा का गोला बनाकर उसपर वार किया ....लेकिन कनक अब अब सतर्क था ....वह बिजली की सी गति से वह से हैट गया .......और वह वार गुफा की दीवार को लगी ....वह पूरी गति से अभी क चारो और घूम रहा था और अभी पर अपनी ऊर्जा से वार कर रहा था ....उसके सारे वार अभी क शरीर से टकराकर गुफा की दीवारों पर लगे ........

अब अभी ने आज्ञा चक्र की ऊर्जा को जागृत किया ....जिससे उसकी बिजली जैसी तेज़ी भी एक दम स्लो मोशन में दिखने लगी ....अभी ...ने तुरंत उसपर छलांग लगाकर उससे गिरा दिया और उसकी छाती पर चढ़कर ....गार्डन पकड़कर तोड़ने ने कोशिश की ......लेकिन तोड़ नहीं पाया........

तोह उसने कनक पैरो को पकड़कर गोल गोल घुमाकर गुफा क देवर पर फ़ेंक कर maara.......gufa पहले की एनर्जी बॉल्स क वार से कमजोर हो गयी थी अब वह भरभरा का गिर गयी .......

दोनों उस गुफा क मलबे में डाब गए .....अभी ने एक जहटके से अपने ऊपर का सारा मलबा हटाया और बहार आगया .....

बहार एक अच्छा खासा संग्राम चीड़ गया था .....जहा कनक की साथी लाखो की तादाद में थे ...वही वः और अभी क साथी कुछ हज़ारो को .........

जहा वज्रा बहु ...कंटक ...दानव अभी ..और चैताली .....की tukdiya....asuro का सामना कर रहे थे ...

वही प्रेतराज अभी और भद्रा की टुकड़ी ..और वः और वैशाली क सैनिक ...

उन जीवो का सामना कर रहे थे जो पैरासाइट की तरह किसी क भी शरीर में प्रवेश कर ....उसकी

साड़ी ऊर्जा को सोख लेते थे .......

वज्रा बहु अपने महा दांव रूप में (हल्क जैसा ) था जो असुरो को ढूंढ दंड कर उनका कचूमर निकल रहा था ......

उसके दर से असुरो में भगदड़ मच गयी ..थी ....जहा उन्हें वज्रा बहु दिखाई देता ....वह तुरंत चिप जाते थे .......

कंटक की सूंघने की शक्ति बड़ी पटबाल थी ......वह छुपे हुए असुरो की गंध से उनकी स्थिति का पता लगा सकता था .........

वज्रा बहु क दर से चिप्पे असुरो ...की गंध का पीछा करते हुए वह अपने शरीर से निकल ने वाले विषैले कांटे उनपर छोड़ ने लगा जैसे hi वह कांटे उन्हें लगते वह चिल्लाते हुए बहार आजाते .....और वज्रबाहु क होते चढ़ जाते

और उनकी सेना भी असुरो का मुकाबला कर रही थी ......

यहाँ प्रेताज अभी और भद्रा क क पास यहाँ प्रेत दंड ...जो प्रेतराज ने अपने प्रेत दंड जो वाइटल लोक क नार्को में अपने कर्मो का दंड भोग रहे प्रेतों को दंड देने क काम आता था ...उसके अंश से hi उन्हें प्रदान किये थे .....

दोनों प्रेतदंद से विद्युत् ऊर्जा क पाश निकल कर जीवो को बंद देते थे जैसे जैसे वह पाश कसता जाता था .....वह पाश उनकी साड़ी ऊर्जा को सोखकर उनका अंत कर देता था ....

वः और वैशाली भी यमपाश जैसे hi किसी पाश से जीवो का मुकाबला कर रहे थे .....

कोई अदृस्य रूप में भी अभी की रक्षक सेना क साथ अंदर घुस आया था ......कनक की सेना पर वह अपनी रजा क गोले बरसा रहा था .....जिसे उनकी मृत्यु तोह नहीं हो रही थी लेकिन उस ऊर्जा क लगने से उनको बहुत पीड़ा होती और वह कमजोर पद जाते ....जिसका फायदा उठाकर ...वः क समर्थक योद्धा उनका खत्म कर देते थे .....

यहाँ अभी ने देखा क अब कनक भी मलबे से बहार आगये है .......

अभी की चल क कारण उसकी शक्तिया आधी हो गयी थी ...लेकिन अभी भी बहुत सी सिद्धिया उसके पास थी ......

उसने अपनी काली शक्ति क कई वार अभी पर किये ...परन्तु दिया कवच क कारण .......अभी को वह कोई क्षति नहीं पहुंचा पा रहा था .......

पांच तत्वों की ऊर्जा ...और उससे सम्बंधित अस्त्र इस समय ा1 क पास थे और वह इस समय घर पर था ......

अभी ने अपने दिव्या धनुष से भी कई अस्त्र कनक पर चोदे लेकिन जैसे hi वह अस्त्र कनक को लगने वाला होता है .....वह एक पारदर्शी रूप में बदल जाता ...और वह अस्त्र उससे बिना कोई नुकसान पहुंचाए उसके पार हो जाता ......और अभी पर फिर अपनी ऊर्जा और काली विद्या से वार करने लग जाता .......

अपने किसी वार का अभी पर कोई असर न होता देखकर ...कनक निहथा hi अभी पर दौड़ा ...कनक ने अपने दोनों हाथो का प्रहार अभी क सर पर किया ...अभी ने उसके परहर को रोक का उससे पीछे धकेला ......

जिसे वह पीछे की तरफ लड़खड़ा कर ....निचे गिरा ......अभी भी तुरंत उसके छाती पर सवार हो गया .....और उसके मुँह पर ताबड़ तोड़ मुक्के बरसाना शुरू कर दिया .....

इतने जबरदस्त मुक्के उसके मुँह पर पड़ते हुए भी वह एक तक अभी की आँखों में hi देख रहा था .......

अभी का शरीर दिव्या कवच से भले hi सुरक्षित था ...परन्तु उस्सकी आँखों पर कोई कवच नहीं था .....

अभी को ऐसे लगने लगा क कनक आँखों क जरिये उसके भीतर प्रवेश करने की कोशिश कर रहा है .......अभी क सर में हलकी सी पीड़ा का अनुभव होने लगा ....

तोह अभी तुरंत वह से हैट गया ....और एक जोरदार ...ठोकर कनक को maari.....jiske प्रहार से कनक दूर जा गिरा ....

अभी क वार से भी कनक थोड़ा बहुत जख्मी हो गया था ........अब अभी ने अपने चक्रो की ऊर्जा को जागृत कर के उससे अपने आज्ञा चक्र में एकत्रित किया .....और शिव क तीसरे नेत्र की भांति उस ऊर्जा की एक बीम बनाकर अपनी तरफ बढ़ रहे कनक पर किया .......

जिससे कनक बड़ी जोर का चीखता हुआ ....पीछे जा गिरा और तड़पने लगा .......

अभी ने अब उसको समाप्त करने का थान लिया था ........और उससे ख़तम करने क लिए आगे बड़ा ....hi था ....क कनक ने बड़ी मुश्किल से अपने आपको संभाला ....और गले में पड़ा एक बड़ा सा ताबीज निकलकर धरती पर पटक दिया .....

उस ताबीज क धरती पर पड़ते hi एक भयंकर धमक हुआ ....और वह धुए और धुल का एक बहुत बड़ा गबार उठा ....आकाश का रंग बदल गया ......भयंकर बिजलिया कड़कने का शोर और अजीब सी डरावनी आवाजे छर्रो तरफ फैलने लगी ...

वह अब किसी को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था ........सब तरफ बस चीखे गूंजने लगी ....

अभी ने अपने अंतर मैं की दृष्टि से देखा तोह पता चला यह कोई माया नहीं है ....

यह सब जो हो रहा है वास्तविक ता में हो रहा है .......

अभी क सामने का धुल का गुबार छठा और वह था एक बड़ी सी खड़क लिए एक महा दैत्य कहद था ...

.उसका खड़क इतना बड़ा था क उसके एक hi वार से सैकड़ो सैनिक समाप्त हो जाए .....वह बहुत विशाल काये था ......

वह महा दैत्य अभी क तरफ देखकर भयंकर हस्सी है रहा था ........

कनक ने इसदि क सहारे वः को हराया था और यहाँ का राज चीन था .......कनक अब अपने उस दैत्य को देखकर प्रसन्ना हो गया .....

उस महा दैत्य ने पूरी ताकत क साथ अभी क सर पर प्रहार कर दिया ...

इससे पहले क वह वार अभी तक पहुंचे अभी ने महिमा सिद्धि का प्रयोग करके अपना भी रूप उस दानव जितना बड़ा कर लिया .......

कनक की आंखें यह देखकर आश्चर्य से बड़ी हो गयी .....

दैत्य ने फिर अभी पर अपने खड़क का वार किया तोह अभी ने बड़ी फुर्ती से साइड होकर उसका हाथ पकड़ लिया और मरोड़ दिया .....जिससे उसके हाथ से खड़क छूट गैस ....

उस दैत्य ने भी पीछे हाथ ले जाकर ...अभी को गर्दन से पकड़कर आगे की और पटक दिया .....

जब युद्ध भूमि से धूल हटी थो दोनों तरफ की सेना ने दो पर्वतो को आपस में भिड़ते हुए देखा तोह .........जैसे सब भूल गए ...सब अपना अपना युद्ध छोड़कर खड़े ...बस अभी और उस दैत्य का युद्ध देखने लगा......

निचे गिर्री अभी पर वार करने जैसे hi वह ज़्हुका अभी ने एक जोरदार लात उसके पसलियों में मारी ....जससे वह पीछे जा गिरा ...तब तक अभी खाद हो गया ...था .....वह दैत्य ...भी संभल चूका था.....

अब दोनों किसी पहलवानो की तरह आपस में गुत्थम गुत्था हो रहे थे .......साड़ी सेना दूर कड़ी बस इस नज़ारे को देख रही थी ......

कनक को लगने लगा की उसका यह दैत्य ...अभी का वध करने में सफल नहीं होगा ...तोह उस्सने वह से खिसकने का सोचा ....और धीरे से ....वह से निकल कर तलातल लोक की सीमा की तरफ बड़ा ..

जैसे hi वह बढ़ने लगा क किसी अदृश्य शक्ति ने उससे रोक लिया ....

एक तोह उसकी शक्ति आधी रह गयी थी ...और अभी की ऊर्जा क वार से उसकी हालत ख़राब हो गयी थी ....इसीलिए ...इस ऊर्जा से वह मुक्त होना चाहता था लेकिन जैसे वह उस जगह बांधकर रह गया हो...

यहाँ अभी ने उस दैत्य को थका दिया था .....उसस्के बलशाली प्रहार ने अभी क भी जबड़े हिला दिए थे ........उस दैत्य की स्पीड अब बहुत काम हो गयी थी ...

.तोह अभी एक छलांग लगाकर उसके पीछे पहुंचा ....और ...अपने ...बाहों का घेरा उसके गार्डन पर बनाया .....एक ...काआदायक ....की आवाज क साथ ....उस दैत्य क गार्डन की हड्डी टूटने क आवाज आयी और वह धराशायी होकर जमीन पर गिर पड़ा .....

अभी अब कनक को तुरंत समाप्त करना चाहता था ......इसिलए अपनी साड़ी ऊर्जा को एकत्रित करके आज्ञा चक्र से एक बीम क जरिये कनक पर वार किया ......जिससे कनक की चीखे गूंजने लगी...

और देखते hi देखते उसका शरीर धुए क रूप में परिवर्तित हो गया .......

अभी ने सोच क कनक का अंत हो गया ..है ....

तभी वः की आवाज आयी सावधान रक्षक.......

अभी कुछ समाज पाटा क वह धुआँ तेज़ गति से उसकी और बड़ा ....

और गूंज उठी एक जोरदार चीख.....

अभी क लिए इतना hi....


अगला अपडेट रात को.....
 
अपडेट - 120

अब तक आपने देखा अभी की रक्षक सेना और कनक की सेना का युद्ध शुरू हो गया है ....

अभी ने कनक को मारने क लिए अपनी ऊर्जा का प्रयोग किया ...जिससे कनक ...धुए में परवर्तित होगया ...और अभी की तरफ बड़ी तेज़ी से बड़ा .....वः ने चेतावनी भी दी लेकिन अभी कुछ समाज पाटा क एक चीख वातावरण में गुंजी ...

अब आगी ......

अभी का ध्यान चीख की दिशा में गया तोह वह गोलू जमीन पर पड़ा तड़प रहा था .....

गोलू अपने किये हुए कृत्या से बहुत दुखी था .......अभी को दिए धोके क कारण उससे बार बार उसकी अंतर आत्मा धिक्कार रही थी .....इसीलिए उसने अभी को हर संभव मदत करने की थान ली थी ...

जब वः क समर्थक सैनिक रक्षक सेना को तलातल लोक में भीतर प्रवेश करने आयी थी ...तोह गोलू भी उनके साथ भीतर अदृश्य रूप में प्रवेश कर गया था .......

और अदृश्य रह कर hi अपनी ऊर्जा और सिद्धियों क वार से कनक क सैनिको की शक्ति काम करने लगा ....जिससे वः और उसके समर्थंक उन कमजोर पड़े हुए कनक क योद्धाओ को आसानी से मार सके...

गोलू कनक और उसके सिद्धियों क बारे में जानता था .....इसीलिए वह अपनी नज़र कनक पर बनाये रख रहा था ......लेकिन अभी क वह होने क कारण उसने अपने आपको अब एक प्रगट नहीं होने दिया .....

और अभी का सारा ध्यान कनक पर था इसीलिए उससे भी अदृस्य रूप में युद्ध कर रहे गोलू की स्थिति का ज्ञान नहीं हुआ ....

कनक क प्रगट किये हुए दैत्य क साथ अभी का युद्ध देखकर एक बार तोह कनक दर गया ...उससे अभी क हाथो अपनी मौत नज़र आने लगी .....इसीलिए उसने वह से भागने में hi अपनी भलाई समज़ही .....

.लेकिन गोलू ने उससे अपनी शक्तियों द्वारा रोक लिया था .....अब वह वह से हिल भी नहीं पा रहा था ..

जब अभी ने उससे समाप्त करने क लिए अपना अंतिम वार करने आरहा था ....तब उससे अपनी अंतिम शक्ति का भान हुआ ..जिसके वार से वह अभी को समाप्त कर सकता था ....

युद्ध क दौरान कनक यह जान चूका था क उसका कोई भी वार बहार से अभी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता .......क्यों की कुछ तोह ऐसा है जो अभी क बाहरी शरीर की हर वार से रक्षा कर रहा था ....

परन्तु अभी की आंखें किसी कवच से सुरक्षित नहीं थी ....उसकी आखरी शक्ति यह hi थी क वह किसी क भी नेत्रों द्वारा उसके भीतर प्रवेश कर क उससे समाप्त कर सकता था ....

वः पर भी युद्ध क दौरान उसने इसी शक्ति का प्रयोग किया था ......लेकिन अपने पति की रक्षा करते हुए उस वार का शिकार वः की जगह उसकी पत्नी हो गयी थी .......

जब गोलू ने देखा क कनक अपना अचूक वार करने वाला है ...तोह वह अभी क सामने आगया ......और कनक उसमें प्रवेश कर गया ....

कनक क प्रवेश करते hi गोलू का अदृश्य रूप प्रगट हो गया ....और वह तड़पने लगा ......

अभी ने जब गोलू को तड़पते हुए देखा तोह वह साड़ी बात समाज गया की गोलू ने उसपर होनेवाला प्राणघातक वार अपने ऊपर ले लिया ........

ासाहनक गोलू का तड़पना बंद हो गया और वह एक जहटके से खड़ा हो गया ......अभी ...उसके पास जा हो रहा था क वः ने फिर चेतावनी दी ...

वः - सावधान ...रक्षक ...अब ...कनक ..इसके भीतर प्रवेश कर चूका है .......

गोलू की आंखें पूरी तरह सफ़ेद होने लगी ..

गक को खोने क बाद अभी किसी भी हालत में अब गोलू को नहीं खोना चाहता था .......साड़ी श्तितियो को समज़कर उसने अपने प्रेतराज क रूप को अपने भीतर समां लिया .....और लघिमा सिद्धि का पटयोग करके एक अनु (एटम) जितना सूक्षम रूप बनाकर वह भी गोलू क भीतर प्रवेश कर गया

यह इतना आसान नहीं था ...अभी जानता था क इसमें गोलू क प्राणो को संकट हो सकता था ....परन्तु अब उसके पास एहि एक रास्ता था ......

अभी का परेटरेज का रूप सुक्ष्म था ...जो किसी भी निर्जीव या सजीव वास्तु क पार हो सकता था ....परन्तु किसी क भीतर स्थिर नहीं हो सकता था ....क्यों की प्रेतों में पांच कोष में से केवल एक hi कोष होता है ...प्राणमय कोष ....इसिलए अभी प्रेत शक्ति को अपने भीतर समां लिया ...जिससे अब ...प्रेत शक्ति और अभी की योग शक्ति दोनों एक होकर गोलू क भीतर स्थिर हो गयी ......

अभी अब गोलू क भीतर प्रवेश कर चूका था .....वह उससे अहसास हुआ क गोलू की समस्त ऊर्जा उसके हृदय में समां रही है ......तोह वह समाज गया ....क ....कनक ..इस समय गोलू क ह्रदय में स्थित है ......

कनक को गोलू क हृदय और शरीर से अलग करने क लिए ...अभी ..ने विभक्त सिध्दिहि का प्रयोग किये .....इस समय अभी और कनक दोनों hi गोलू का हिस्सा बन चुके थे ....इसिलए विभक्त सिद्दीका प्रयोग करते hi ...अभी और कनक दोनों hi एक पल में गोलू क शरीर से बहार आगये .......

अभी ने तुरंत अपनी यक्ष ऊर्जा ...प्रेत ऊर्जा और अपने चक्रो की ऊर्जा का सम्मिलित वार कनक पर किया ....जिससे कनक की चीखे गूंजने लगी ....वह भयंकर पीड़ा से तड़प उठा ....जैसे नरक की आग में जीवात्मा जलती है ...वैसे hi तड़पते हुए उसका अंत हो गया .......

कनक का अंत होते hi अभी गोलू की तरफ लपका ....गोलू इस समय भूमि पर पड़ा था ....उससे होश नहीं था ......

अभी गोलू क पास घुटने पर बैठ गया और उससे पुकाने लगा ....

कनक बहुत अधिक मात्रा में उसकी ऊर्जा शोएक चूका था .......

अभी - Golu.....uth जा ....उठ jaa....na मेरे भाई ....देख अपने मित्र गक को तोह खो hi चूका हु ....अब तुज़हे नहीं खोना चाहता ......

अभी उससे हिलने लगा ....आवाज ...देने लगा ....अभी ने उसके सर पर हाथ रखकर उससे हील करने का पतयातना किया .....लेकिन हीलिंग पावर केवल शरीर क ज़ख्मो पर या रोगो पर काम करती है ..गोलू का श्री तोह ठीक था परन्तु उसकी ऊर्जा इस समय बहुत काम थी ....

अभी ने गोलू को गोवध में उठाया और वः और अपने साथियो को यहाँ की स्थिति सँभालने का कहकर ....गोलू को रसातल क नागलोक में शिवली क पास ले गया ....उस समय शिवली उसी की प्रतीक्षा कर रही थी .....शिवली क साथ सुलेखा ....और विभक्त भी वही थी ...

शिवली सब जानती थी परन्तु तलातल लोक में बिना भीतर की सहयता क वह प्रवेश नहीं कर सकती थी ...अभी जब गोलू को हील नहीं कर पाया तोह शिवली ने hi मानसिक सन्देश अभी को भेजकर यहाँ बुलाया....

शिवली ने तुरंत गोलू को एक शय्या पर लिटाया और ....और वह उपस्थित सभी को दूर किया .....और केवल अभी को अपने पास रहने दिया ....

शिवली ने अपना महा यक्षिणी का रूप प्रगट किया .......वह हवा में स्थिर हो गयी और उसका शरीर का प्रकाश बढ़ने लगा ...वह इतना तेज़ प्रकाश फैलने लगा ......क सबकी आंखें बंद होने लगी ....अभी भी बड़ी मुश्किल से शिवली क उस महायक्षिणी क रूप को देख पारहा tha...Aaj पहली बार अभी ने शिवली क उस रूप को देखा था .....

शिवली क और कितने राशस्य है वह समाज नहीं पा रहा था .....

शिवली क शरीर से प्रकाश गोलू क भीतर जाने लगा .....थोड़ी hi देर में शिवली ..का वह महा यक्षिणी रूप शांत हो गया ...और शिवली पहले की तरह हो गयी ..

शिवली - अब गोलू बिलकुल ठीक है ....बस एक दिन और उसकी मूर्छा रहेगी उसके बाद उससे होश आजायेगा ....

अभी - शिवू यह सब क्या है .....तुम्हारा यह रूप आज मैंने पहली बार देखा है ...वास्तविक में तुम क्या हो ....अब तक मेरे लिए यह एक राशस्य hi बना हुआ है ......

शिवली - समय आने पर आप को सबकुछ ज्ञात हो जाएगा ....अभी तोह सिर्फ इतना hi क में आपकी पत्नी हु ....

अभी - उफ्फ्फ यह समय भी ....न ...जाने कब आएंगे .....

शिवली - हर घटना का एक समय पूर्व निर्धारित होता है ....वह समय भी शीग्र आजायेगा ...अब आप जाइये और अपनर कार्य पूरा कीजिये ..

अभी ने एक नज़र गोलू पर डाली और वह से चल दिया टटळटळ लोक की सीमा पर ........

वह उसकी प्रतीक्षा वैशाली कर रही थी .....आज उसकी आँखों में चमक थी और चेहरे पर प्रसन्नता ....जो ...अभी को उस समय दिखाई नहीं दी थी जब अभी ने उससे पहली बार देखा था

और क्यों न हो आज उसके पिता क कष्टों का अंत जो होगया था .....और इस सबके जिम्मेदार और उसकी माता क हत्यारे कनक का अंत हो चूका था ......

अभी ने जब उसकी आँखों में देखा तोह अब उसकी आँखों में अभी क लिए प्रेम और आदर ला भाव था .....आँखों hi आँखों में दोनों ने एक दूसरे का अभिवादन किया ....और वैशलि आगे हुई उसके तलातल लोक की सीमा का स्पर्श करते hi द्वार खुल गया और अभी उसके साथ वापस भीतर पहुंचा....

यहाँ पटल लोक में कस क बारवी बलि का दिन था ....अब केवल 2 महीने और बाकी थे उसकी साधना पूरी होने में .....

जब वह अपना कार्य पूरा करके अपने क्रिस्टल पर देखने आया ...तब तक बहुत देर हो चुकी थी कनक मारा जा चूका था .......

कस जानता था क बिना भीतर की सहयता क उसकी सेना वह नहीं जा सकती ......उसके हर षड़यंत्र पर अभी पानी फेरता आया था ......

अपने इस षड़यंत्र को भी विफल हुआ देखकर ....उसका क्रोध बहुत बढ़ गया और उसने ....क्रोध में अपने hi क्रिस्टल को उठाकर पटक दिया .......और क्रिस्टल चूर चूर हो गया ....

बिलकुल जैसे कोई क्रिकेट का दीवाना अपनी टीम क हारने का गुस्सा बसाहरी टीवी पर उतर देता है ....आप सब बखूबी जानते हो ऐसा कौन करता है .......

यहाँ अभी तलातल लोक में वः क पास पहुँच चूका था .....

कनक क बच्चे कुछे सैनिक अपने स्वामी का दर्दनाक अंत देखकर आत्मसमर्पण कर चुके the....aur जो असुर थे वह सब वज्रबाहु ..Kantak....Danav अभी ...और चैताली क द्वारा मारे जा चुके थे .......युद्ध का फैसला हो चूका था ......

अभी ने वह की रीती रिवाजो क अनुसार वः को पुनः वह क प्रधान क रूप में स्थापित किया .......वह वहारो तरफ अब हर्षो उल्हास का वातावरण था ....

सारा दिन बस उत्सव में निकल गया ......रात क समय वः ..वैशाली क साथ अभी क कक्ष में आया ..

वः - आपका बहुत बहुत धन्यवाद ..रक्षक .......हिम तोह पूरी तरह निरुत्साहित हो गए थे .....हिमे लगने लगा था क अब कभी हम .......कनक क कुशासन को समाप्त नहीं कर पाएंगे ......

परन्तु आपने हमे एक नए उत्तदाहा का संचार कराया ...और असंभव से दिखने वाले कार्य को पूर्ण करने की हिम्मत दी ....और कनक का नाश किया ..

धन्यवाद तोह एक छोटा सा शब्द है .......बस इतना कहसकते है ......हम सदा आपके ऋणी रहेंगे .....

अभी - मैंने कोई ऐसा विशेह कार्य नहीं किया .....बस आपके टूटे हुए विश्वास को फिर से जागृत kiya.....yeh आपकी और आपके लोगो की जीत है ......माइनर तोह बस थोड़ा बहुत सहयोग लिया ...

वः - यह तोह आपकी विनम्रता है .....आपके इस सहयता क बदले में आपको कुछ दे नहीं सकता ...बस इतना कह सकता हु ...क अब आप ..जब चाहे इस लोक में आजा सकते ho....yadi और भी कोई सेवा कर सका तोह में अपने आपको भाग्यशाली समज़हुँगा ..

अभी - आप कुछ नहीं कहेंगी वैशाली .....वैसे युद्ध में देखा मैंने क्या वीरता से तुम शत्रु का सामना किया सच में बहुत प्रशंसनीय है ...अद्भुत.....

वैशाली - पहले अभी की तरफ देखती है ...फिर अभी को अपनी तरफ देखता पाकर ..शर्म सर अपनी गार्डन निचे कहकर कहती है ....

वैशाली - मैं क्या कह सकती हु .....किस प्रकार आपका धन्यवाद करू कुछ समाज hi नहीं आरहा .....और आगे कुछ कहते कहते रुक जाती है ...

अभी - कुछ तोह है जो तुम कहना चाहती हो परन्तु कह नहीं पा रही हो ......कहो निसंकोच कहो ....

वैशाली एक बार अपने पिता की तरफ देखती है और फिर गार्डन निचे ज़्हुककर खड़े रहती है.....

वः - यह स्वयं नहीं बताएगी .......वह बात ऐसी है ....मेरी पुत्री ने संकल्प किया था क यदि िस्ड युद्ध में हमारी विजय होती है ...तोह यह आपसे hi विवाह करेगी ....और जब हमारी जीत हुई यह इसने अपने मन की बात मुज़हे बताई ....क्या आप मेरी पुत्री का हाथ थामोगे ...

अभी - आप मुज़हे क्षमा करे .....विवाह का बंधन केवल प्रेम की धरातल पर hi सफल होता है .....जिस बंधन क मूल में यदि कड़ी हो स्वार्थ हो वह कभी सफल नहीं हो पाटा....

अभी की बात सुनकर वैशाली को एक झटका सा लगा ..और वह अश्रु पूर्ण नेत्रों से बिना कुछ बोले वह से निकल गयी ....

अभी क लिए इतना hi ....

अगला अपडेट कल ....


.
 
अपडेट - 121

अब तक आपने देखा क कनक क अभी पर किये गए प्राणघातक वार को गोलू ने अपने ऊपर ले लिया ..

अभी ने अपनी बुद्धि और शक्ति से उसके प्राणो की रक्षा की और कनक का वध किया .....

अभी को बात से वैशाली आहात होकर चली गयी ...

अब आगी ....

वैशाली क जाने क बाद .....वः को भी ऐसा लगने लगा क अभी अब वैशाली से विवाह नहीं करेगा .......अपनी बेटी क दुःख से वः दुखी तोह हुआ ....लेकिन अभी को कुछ बोल नहीं सका ......

वः - आप सही कह रहे hai.....shayad मेरी बेटी क भाग्य में आपका साथ नहीं लिखा है .......

ठीक है आप विश्राम कीजिये मैं चलता हु .......

अभी ने वः को रोक दिया

अभी - आप इस तरह चिंता न करे .....क्युकी मेरा यहाँ आने का एक उद्देस्य आपकी पुत्री भी है .....

वैशाली मेरी चिर संगनियो में से एक है ....और उसका मुजह्से विवाह तोह विधि द्वारा पहले hi लिखा जा चूका है ......

वः - तोह फिर आपने ऐसे मन क्यों किया .......

अभी - वैशाली ने अभी केवल मेरे आपकी सहयता करने से प्रभावित होकर यह निर्णय लिया है ....जो उचित नहीं है ......और विवाह क बंधन की नीव प्रेम है....

जो विवाह केवल समज़्हुटे पर या गुणों से प्रभावित होकर किया जाता है वह कभी सफल नहीं हो सकता ......

वः - तोह अब आप क्या करेंगे ....

अभी - आप निश्चिंत रहिये ......में वचन देता हु क कल मेरा आपकी पुत्री से विवाह होगा .......और वह भी केवल प्रेम क आधार पर ......

वैशाली यहाँ अपने कक्षा में आँखों में आंसू लिए हुए बैठी थी .....अभी क इस तरह मन करने क बाद ....उससे अपना सब कुछ ख़तम होते हुए नज़र आने लगा था ........

उसके हृदय में अभी क लिए चिप्पा हुआ प्रेम बहार आने लगा था .......अब उससे अपनी भूल का अहसास होने लगा ....

वैशाली ..मैं में - सत्य hi तोह कहा उन्होंने ......में hi प्रेम का महत्व समाज नहीं paayi.....yadi युद्ध में विजय हुई तोह मिलान नहीं हुई तोह नहीं .....यह तोह कोई प्रेम से लिया गया निर्णय नहीं है .......

यदि युद्ध हार जाते तोह अपने वचन क अनुसार क्या में उन्हें प्रेम नहीं करती ....नहीं यह प्रेम नहीं .....लेकिन फिर क्यों उनके मन करने पर मेरे ह्रदय में असहनीय पीड़ा हो रही है ......

अभी - क्यों की अब तुम्हारे ह्रदय में छिपा प्रेम बहार आरहा है ......

उसने सम्मन देखा तोह अभी दिखाई देने laga....Abhi को अपने सामने यु अचानक देखकर वह कड़ी हो गयी...... .......

अभी - अरे क्यों क्या हुआ अब ऐसे क्यों घबरा रही हो .....

और अभी उसकी और बढ़ने लगा ......वह बस उससे एक तक देख रही थी जब अभी उसके पास तक पहुंचा तोह उस्सने उसका स्पर्श करने क लिए हाथ आगे बढ़ाया .....तोह वह अभी वह से अदृश्य हो गया .....

वैशाली को पता चला क यह तोह उसका भ्रम था .....वह बार बार अभी क बारे में सोचती ....और बार बार उससे अभी दिखाई देने लगता .....

अभी वह कुछ सोच hi रही थी क उसने सामने से अभी को आते हुए देखा ......उससे लगा क यह भी उस्का भरम है ....अभी यहाँ उसस्के पास क्यों आएगा .....

और यही सोचकर वह निराश हो गयी ......सामने आते हुए अभी को देखकर उससे समाज नहीं आरहा था क यह असली अभी है या उस्का वहां

वैशाली - देखो मुज़हे पता है क आप इस समय यहाँ नहीं हो .....लेकिन फिर भी मैं आपसे कहती हु .....क यह आपने कैसे सोचा क में स्वार्थ वश आपसे विवाह कर रही हु .......वह तोह जब मैंने आपको पहली बार देखा था .....उसी समय न जाने क्यों ऐसा लग रहा था क आपसे मेरा जन्मजमांतर का कोई सम्बन्ध ....है ....

मैं किया आपसे बात करू .....परन्तु कर नहीं पायी .....उस समय केवल मुज़हे अपने पिता क बारे में hi चिंता थी ....इसीलिए शायद अपने प्रेम को पिता क जीत और हार की कसूती पर बाँध दिया ......

आप चाहे मुजह्से कितना भी दूर रहे ......परन्तु अब में आपसे और दूर नहीं रह सकती ........मेरा प्रेम स्वार्थ नहीं ....बस अपने पिता क प्रेम में मैं उससे समाज नहीं पायी .....

इतना कहकर वह अपनी बड़ी बड़ी ाश्रीपुरित नेत्रों से अभी की तरफ देखने लगी .......

अभी उसकी तरफ बड़ा ....वह बस एक तक अभी को देख रही थी उससे लग रहा था क यह भी भरम है ......

वैशाली - क्यों ऐसे बार बार मुज़हे दिखकर तंग करते हो ...मुज़हे पता है आप यहाँ नहीं हो यह मेरा भरम है .......

रुको में बताती हु ....अभी में स्पर्श करुँगी तोह आप गायब हो जाएंगे ......पहले अभी क तरफ हाथ बढ़ाने लगी ....फिर जाने क्या सोचकर ...हाथ हटाकर उसने अपने होंठ अभी क होंठो पर रख दिया.....

अभी को अंदाजा नहीं था क वैशाली ऐसा करेगी ....ऐसे अचानक किश से एक पल क लिए वह भी सन्न रहा गया ....लेकिन फिर उसका हाथ अपने आप वैशाली क कमर पर कास गया ...और दूसरा हाथ उसके सर क पीछे ....और उसको चूमने लगा .....

अभी क होंठो का स्पर्श पाते hi वैशाली को अहसास हो गया था ...यह उसका भ्रम नहीं यहाँ सच में अभी उसके सामने खड़ा है ......

अब इस स्थिति का सामना कैसे करे उससे समाज नहीं आरहा था ......और अभी बस उससे चूमे जा रहा था ....

वह अभी से एक जहटके से अलग हो गयी .....

अभी - अरे यह क्या बात हुई भला पहले खुद चुम्बन लेती हो और जवाब में मैं भी चूमने लगा तोह ऐसे जहटके से अलग हो गयी ......

लगता है तुम्हे मेरा चूमना अच्छा नहीं लगा .....में यहाँ तुमसे विवाह क लिए हां कहने आया था ..लेकिन शायद में hi तुम्हे पसंद नहीं ....

वैशाली - मैंने ऐसे तोह नहीं कहा ....

अभी ने उससे अपनी तरफ खींचते हुए ...तोह फिर कैसा कहा ......और वैशाली क होंठो पर अपने होंठ रख दिए ....और चूसने लगा ......

वैशाली अभी को द्गक्का मार कर उससे अलग हो गयी ...और दरवाजे की तरफ दौड़ gayi.......thodi आगे जाकर फिर पीछे पलटकर देखते हुए ....

वैशाली - अब तोह आप पिताश्री से बात करेंगे न .....

अभी ने आँखों hi आँखों में इशारा किया और फिर वह वह से चली गयी .....

वः भी अब खुश था ....अपने पुत्री क मैं चाहे वर की उससे प्रॉपटी हो रही है और उसकी पत्नी की मृत्यु क बाद आज पहली बार उसने अपने बेटी क बहुत खुश देख रहा था ... इससे बढ़कर एक पिता क लिए और क्या हो सकता है...

वह रात बीत गयी और तलातल लोक की धरती पर एक नया सवेरा हुआ .......

इस लोक में विवाह की कोई ऐसी कोई खास पद्धति नहीं थी .....

तोह अभी ने अपने नित्य क्रम से निवृत होकर वः से बात की ...तोह उन्होंने बताया की इस लोक क भगवन यमराज जी है .....और यहाँ सम्बन्ध उनकी प्रतिमा के पूजन क बाद प्रतिज्ञा क बाद पूरी हो जाती है ....

वैशाली को वह क पारम्परिक वस्त्र पहना कर तैयार किया गया ....अभी और वैशाली ने साथ में यमराज की प्रतिमा का पूजन किया ..और विवाह क बंधन की शपथ ली ....और उनके चरणों में प्रणाम किया .......

विवाह की विधि सम्पन्न होते hi स्वयं वह यमराज जी प्रगट हो गए .........जो अपने सौम्य धर्मराज जी क रूप में प्रगट हुए थे ....

वः और वैशाली अपने इष्ट क दर्शन कर क बड़े प्रसन्ना थे ...अभी भी धर्मराज जी का दर्शन करके उनके आगे नतमस्तक हो गया ....

धर्मराज - पुत्र हम बहुत प्रसन्ना है क आपने इस लोक की वव्यस्था को पुनः स्थापित किया और कनक क अत्याचारों से मुक्त किया .....समर्थ होकर भी ह वचन में बंधे होने क कारण हम कुछ न कर सके ...

हम तुम्हे वरदान देते है क टीम एक बार युद्ध में मेरे यमदण्ड और यौम पाश का प्रयोग कर सकते हो ......

और वरदान और आशीर्वाद देकर ...धर्मराज जी वह से चले गए ........

अभी और वैशाली ने वः का आशीर्वाद लिया और वह से विदा हो गए ......

अभी वैशाली को लेकर नागलोक पहुंचा .......वह शिवली ...सुलेखा ...और .....विभक्त ने दोनों का स्वागत किया ....

अभी सब से पहले गोलू क पास पहुंचा ....गोलू को होश आचुका था ...परन्तु अभी भी कुछ कमजोरी क कारण विश्राम कर रहा था .....

अभी को आता हुआ देखकर वह उठकर बैठने का प्रयत्न करता है ...

अभी - बस ...बस ...लेते रहो ......और उसके पास पहुंचकर उसके सर पर हाथ रखते हुए ......ab..kaise हो .....

गोलू - अब पहले से अच्छा लग रहा है .....लग रहा है क मेरा नया जन्म हुआ है .......

अभी - उसके गाल पर एक चांटा मार देता है .....लेखों हलके से ......

अभी - तुम्हे मैंने दूर रहने को कहा था न ...फिर तुम क्यों इस युद्ध में शामिल हुए .......मेरी मृत्यु अपने ऊपर लेने से पहले अपनी माँ क बारे में तोह सोचा होता ....जो पह्रले hi अपने पति को खो चुकी है .....

और यदि तुम्हे कुछ हो जाता तोह क्या उत्तर देता ......में उन्हें ..

क मेरी मदत करने क बदले मैंने पहले तुम्हारे पति की जान ली ...और ...अब तुम्हारे पुत्र की ......

गोलू - आप ऐसा न कहे इस्स्में आपकी कोई गलती नहीं थी वह परिस्थि hi ऐसी थी .......कस की बातों में आकर मैंने आपके साथ जो धोका किया था वह मुज़हे चैन से रहने नहीं देरहा था ....मुज़हे अपना जीवन भरी लगने लगा था ....इसीलिए जब आपकी रक्षा में प्राण देने का अवसर जान मैंने यह कदम उठाया था .......

अभी ने एक बार उसके गाल पर फिर तहापड मारा ...

अभी - अब कभी दुबारा ऐसा मत कर ....संजू .....

गोलू - ठीक है भाई ...जैसे आप कहे .....

अभी को गोलू क रूप में फिर अपना मित्र गक प्राप्त हो गया था .....

थोड़ी देर ऐसे hi बातें कर्म क बाद अभी .....वैशाली क पास आया जो ...सुहाग सेज़ पर अभी का इंतजार कर रही थी ......

अभी क साथ अपने मिलान क बारे में सोचते हुए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था .....और वह कमरे में

इन बस इधर से उधर चक्कर लगा रही थी ...

अभी टेलिपोर्ट होकर रूम में पहुंचा .....वैशाली ...रूम में चक्कर लगा रही थी ...अभी क यु अचानक रूम मरीन आने क कारण उसकी ताकर हो जाती है जैसे hi वह गिरने वाली होती है ...अभी उससे कमर से थम लेता है .....और अपनी और खींचता है ..जिससिद्धा अभी क सीने से टकरा जाती है ........और अभी उससे अपनी बाहों क घेरे में कास लेता है ......

यह सब इतना जल्दी हुआ क वैशाली को एक पल क लिए तोह कुछ दामाज़ नहीं आया क क्या हुआ ......

दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे .......

अभी - ऐसे क्या देख रही हो ..कल जैसे आज नहीं मुँह मीठा कराओगी ......

वैशाली - वह मैंने कल जान बूझकर थोड़े hi किया था .....वह तोह बस ऐसे hi .....

अभी - कोई बात नहीं मैं खुद कर लेता हु .........और एक हाथ उसके सर क पिसवहे लेजाकर उसके होंठो को अपने होंठो में भर क चूसने लगता है .....

दोनों की साँसे एक दूसरे की ताल से ताल मिलकर चल रही थी ....होंठ बस एक दूसरे क रास का पान कर रहे थे ...बदन ऐसे चिपके हुए थे क बिच से हवा भी न जाए ......

वैशाली क हाथ अभी क पीठ पर व्हाल रहे थे ...और अभी क हाथ उसके नितम्बो पर कैसे हुए थे ....

वैशाली क कठोर स्तन मनो अभी की छाती में छेद करना चाहती हो ...

दोनों प्यार क सागर में गहरे उतारते चले गए ......एक दूसरे से मिलान की उत्कंतजा में दोनों निर्वस्त्र हो गए .....

एक दूसरे क बदन को चूमते सहलाते हुए दोनों कामाग्नि में जलने लगे और उत्तेजित होकर ...अपने मिलान की और अग्रसर होने लगे .......

ऐसे hi एक दूसरे पर अपना प्रेम लुटाते हुए दोनों कामसुख क इस चरम आनंद पर पहुंचे ...जहा हर कामाग्नि में जलता हुआ जोड़ा पहुंचना चाहता है .....

अभी का लिंग वैशाली क योनि में परवेज़ः कर चूका था ....

हर ढके क साथ दोनों अपने लक्ष्य की और अग्रसर होने lage...aur ऐसे ..साथ साथ सफर करते हुए दोनों अपने लक्ष्य तक पहुंचे और सकहलित हो गए....

काम सुख क अंतिम चरण और स्खलन क साथ hi अभी को प्राप्त होती है परकाया प्रवेश की सिद्धि और तलातल लोक की ऊर्जा से परिपूर्ण एक और रूप ...

यहाँ पृथ्वी क एक कोने में पिछले 11 महीनो से कोई भगवन भोले नाथ की बड़ी भयंकर तपस्या कर रहा था .....

इन् 11 महीनो में न तोह उसने कुछ खाया था और न hi कुछ पिया था .....इन् 11 महीनो में वह बस एक hi स्थान पर बैठक वह तप कर रहा था .......

उसकी तपस्या से प्रसन्ना होकर भगवन भोलेनाथ वह प्रगट होगये...

आज क लिए इतना hi ......


अगला अपडेट कल.......
 
अपडेट - 122



अब तक आपने देखा अभी का वैशाली से मिलान हो गया और उससे तलतललोक की शक्ति प्राप्त हो गयी ...

किसी को तपस्या करते हुए देखा जो भगवन शिव की कठिन तपस्या कर रहा है ........

अब आगे .......

यह तपस्या करने वाला था दुर्मुख जो कस क द्वारा भयाक्षा को राज्य की जिम्मेदारी सौंपने क बाद पटल लोक से निकला था ......

दुर्मुख की कठिन तपस्या से प्रासना होकर भोलेनाथ स्वयं वह प्रगट हो गए .......

शिव जी - उठो वत्स दुर्मुख ...में तुम्हारी तपस्या से प्रसन्ना हु ...अपना इच्छित वर मांगो.....

भोलेनाथ की आवाज सुनकर दुर्मुख ने आंखें खोली .....अपने इष्ट को अपने सामने देखकर वह बड़ा हो खुश हुआ ....और भगवन क चरणों में लोट गया ........

दुर्मुख - धन्य हो गया में प्रभु आप आज मेरे समक्ष खड़े हु ....अपने भक्त की प्रार्थना आपने सुन ली प्रभु .....

11 महीनो से बिना अन्न और जल क तप करने क कारण वह बहुत दुर्बल हो गया था ...केवल हड्डियों का ढांचा सा रह गया था ......

बागवान भोलेनाथ ने सर्व प्रथम उस्का शरीर स्वस्थ कर दिया .......

शिव जी - कहो पुत्र क्या वरदान चाहिए ...जिसके लिए तुमने ऐसी कठिन तपस्या की ...

दुर्मुख - प्रभु ...मुज़हे वह मारक शक्ति चाहिए जिसका कोई सामना न कर सके ....na...dev ..na..danav ...और ..na...manav.....jiske तेज़ को ...संसार में कोई रोक न सके .....

शिव जी - ऐसी ऊर्जा तोह केवल हम त्रिदेवो क ास्त्रो में होती है...

दुर्मुख - प्रभु आप तोह सर्वज्ञ है .....आप त्रिदेवो क भी ास्त्रो का संसार में तोड़ है ....

ब्रह्मा अस्त्र का वार ब्रह्मा अस्त्र रोक सकता है

नारायण अस्त्र ..समर्पण से शांत होता है ...

और आपका पशुपता अस्त्र .....आपके मृत्युंजय मंत्र क जाप से

मुज़हे संसार में ऐसी शक्ति चाहिए जिसका कोई तोड़ न हो ......जिसमें त्रिदेवो क ास्त्रो की प्रचंड ऊर्जा निहित हो

शिव जी - इस प्रकार की शक्ति तोह संपूर्ण ब्रह्माण्ड को समाप्त कर सकती है पुत्र ...कुछ और मांग लो ......

दुर्मुख - प्रभु मुज़हे तोह बस एहि वरदान चाहिए ...और इस बात का वचन में देता हु क इसका प्रयोग में केवल युद्ध में अपने शत्रु पर करूँगा और वह भी तब जब मेरे पास और कोई मार्ग शेष न बच्चे .....

शिव जी - ठीक है पुत्र में तुम्हे त्रिदेवो क ास्त्रो की सम्मिलित मारक ऊर्जा प्रदान करता हु जिसका संसार में कोई तोड़ नहीं ....परन्तु पुत्र तुम केवल 3 बार hi इसका प्रयोग कर सकोगे ....

और ध्यान रहे इसका प्रयोग उसी समय करना जब तुम्हे प्राणो का संकट हो .......

दुर्मुख - जैसी आपकी आज्ञा प्रभु ......

और भोले नाथ उसको उसका िस्व्हिट वर देकर अंतर्ध्यान हो गए .....

उस महा मारक ऊर्जा क कारण उसका तेज़ और बल भी पहले से कई गुना बढ़ गया था ....

पटल लोक में कस अपनी बार बार होने वाली हार क कारण अपनी राजसभा में अकेला इधर से उधर कुछ सोचते हुए घूम रहा था .......क्रोध में उसने क्रिस्टल भी तोड़ दिया था ...बार बार हाथ पर हाथ मारता ...हुआ वह कुछ सोच रहा था .......

तभी उससे किसी का काना पहचाना स्वर सुनाई दिया ......तोह उसने द्वार की तरफ देखा तोह ...दुर्मुख आता हुआ दिखाई दिया .....त्रिदेवो की मारक ऊर्जा क कारण उसका बल और तेज़ कई गुना बढ़ गया था ........

दुर्मुख - प्रणाम पिताश्री ....आप इतने उद्विग्न क्यों लग रहे हो ......

कस ...को अब दुर्मुख वह नहीं लग रहा था जो हमेशा निराश रहता था ....आज उससे दुर्मुख में एक अलग ऊर्जा और शक्ति का अहसास हो रहा था ....उसके चेहरे का तेज़ hi बता रहा था क उसने कुछ अद्भुत शक्तिया प्राप्त की है .....

कस - आओ पुत्र ...इतने दिनों से कहा थे .......क्या इस तरह अपने पिता से कोई नाराज़ होकर जाता है .....

तुम्हारे जाने क बाद ...मुज़हे अपनी भूल का अहसास हुआ .....भयाक्षा .....सर्वथा ......asur....samrajya सँभालने में अयोग्य सिद्ध हुआ ......

दुर्मुख - पिता श्री आप तोह मेरे आदर्श है ...में बहला आपके किसी निर्णय से कैसे कुपित हो सकता हु ......बार बार मिल रही हार क कारण मुज़हे अपनी अयोग्यता का बहन हो गया था ...इसीलिए में शक्ति प्राप्त करने गया था ......

फिर दुर्मुख ने कस को महादेव द्वारा प्राप्त वरदान क बारे में बताया ...जिससे सुनकर कस बहुत प्रसन्ना हुआ .....अब उससे दुर्मुख क रूप में अपनी जीत नज़र आने लगी थी ......

दुर्मुख वह से अपनी प्यारी बहन मदालसा से मिलने गया था .......संसार में यदि किसी क प्रति उसको मोह था तोह वह थी मदालसा...

मदालसा ...अपने भवन में उदास सी अपने भीतर चल रहे द्वंद्व से जुज़्ह रही थी ......

जब अभी क हाथो गक की मृत्यि हुई थी और वह कस क हाथो बुरी यारह घायल हो गया था .....तब मदालसा hi थी किसने उसके प्राणो की रक्षा की थी.......

और ठीक होने क बाद अटल लोक को असुरो से मुक्त करने में अभी क हाथो रक्तासुर की मृत्यु हुई थी ....तब कस को अपने यहाँ किसी भेदी की होने की शंका होने लगी ..जिसकी मदत से अभी क प्राण बचे थे ....और वह असुर सभा में उसी भेदी क बारे में बता रहा था .....उस समय मदालसा सब सुन रहे थी......

अपने पिता की बातों से उससे ऐसे लगने लगा था क वह hi अपने भाई की म्रुत्यु की जिम्मेदार hai.....yadi वह अभी की सहायता नहीं करती तोह शायद आज उसका भाई जीवित होता ......

एक तरफ तोह दिल क हाथो मजबूर थी ......जिसके सपने उसने वर्षो से देखे थे .....हर सांस में जो बसा था ...वह hi उसके परिवार का सबसे बड़ा शत्रु निकला ....

वह अभी क प्रेम को दिल से निकलना चाहती थी ..लेकिन हर पल उसकी मिलने की तड़प और बढ़ती hi जाती थी........

एक तरफ उसका परिवार था और दूसरी तरफ उसका प्रेम ....इस द्वन्द में वह उलज़ही अपने खयालो में खोयी थी .......

दुर्मुखासुर ( डॉ) ने जब देखा क उसकी प्यारी बहिन को उसके आने की खबर भी नहीं है .....

डॉ - किसके खयालो में खोयी हो मेरी गुड़िया ....जो अपने इतने दिनों बाद अपने भाई क आने का भी पता नहीं चला

मदालसा ...ने जब डॉ की आवाज सुनी ....तोह उसका ध्यान टुटा .....और जब उसने देखा इतने दिनों बाद उसका प्यारा भाई उसके सामने खड़ा है ...तोह वह ज़हत से अपने भाई क गले लग गयी ......

डॉ ने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा .........

डॉ - कैसे हो गुड़िया .....

मदालसा - भाई इतने दिन आप कहा थे ....पता है आप क बिना में कितना अकेली हो गयी थी ......मैंने सब से पूछा लेकिन किसी को कुछ पता नहीं था ......

आप मुजह्से मिलकर भी नहीं गए थे ......

डॉ - गलती हो गयी गुड़िया क्षमा करना ...लेकिन वह परिस्थिति hi कुछ ऐसी थी ....वह सब छोड़ा ...तुम्हे क्या हुआ है ...हमेशा खिली खिली रहने वाली मेरी गुड़िया ....ऐसी मुरज़्हेइ हुई क्यों है ....

कौन है वह जिसने मेरी गुड़िया को दुःख पहुँचाया ...

मदालसा - ऐसा कुछ नहीं है भाई ....बस अकेली हो गयी थी ......पिताश्री भी आजकल मिलने नहीं आते ...और आप भी नहीं थे ...बस इसीलिए अब आप आगये हो तोह सब ठीक हो जाएगा .....

भाई बहन में कुछ देर बातें होती रही ...

डॉ को अभी रक्तासुर और मारकेश क बारे में पता नहीं था ......कस ने भी अभी उचित समय नहीं जाना उससे यह बताने क लिए ....कस ..सही समय पर उसकी शक्ति का प्रयोग करना चाहता था ..

यहाँ अभी का मिलान वैशाली से हो चूका था .....और उससे अपनी शक्ति प्राप्त हो गयी थी .....

अभी का हर लोक में शक्ति प्राप्त करना एक जरयीए था ...उसके 14 रूपों क लक्ष्य को प्राप्त करने का ...हर मिलान से उससे शक्ति तोह प्राप्त होती थी .....और साथ hi उस लोक की ऊर्जा से परिपूर्ण उससे एक रूप भी प्राप्त हो जाता था .....

अब तक हुई 11 विवाह से उससे 11 शक्तियों क साथ साथ 11 रूप भी प्राप्त हो चुके थे .......ा1 का रूप अलग था जो महागुरु की दें था .....

अभी की 11 पत्निया ....

1 - महेर लोक - Renuka.....Divya दृष्टि

2 - तपः लोक - विभक्त .....विभक्त सिद्धि

3 - स्वर्लोक - शामली .....संगीत विद्या ...अदृश्य होने की शक्ति..

4 - भुआ लोक - Shivali......Mayavi विद्या

5 - पृथ्वी लोक - रिम्पी ....प्रकृति शक्ति

6 - ताल लोक - Shalu......Divya कवच

7 - अटल लोक - दक्ष .......दूरश्रवण....

8 - वाइटल लोक - भद्रा ....प्रेतसिद्धि ..एनिमा सिद्धि

9 - सुतल लोक - Chaitali....Mahima सिद्धि

10 - तलातल - Vaishali...Parkaya प्रवेश

11 रसातल - सुलेखा ...रूप बदल ने की सिद्धि

इन सभी शक्तियों क साथ अभी को उस लोक की ऊर्जा से बने हुए 11 रूप प्राप्त हो चुके थे.....

वैशाली से मिलान क बाद भद्रा वैशाली को अपने साथ वाइटल लोक ले गयी और अभी ..चल पड़ा अपने अगले सफर पर ....लेकिन पहले वह घर वालो से मिलना छह रहा था

अभी घर की चाट पर टेलिपोर्ट हो गया और उसने वह ा1 को बुलाया.....

अभी क सारे रूपों में केवल ा1 की सोच और बिद्धि स्वतंत्र थी .......

ा1 - अच्छा हुआ भाई तुम आगये ...यहाँ ऋतू दी ने मुज़हे परेशां कर दिया है .......बड़ी मुश्किल से बचा हु में उनसे अब तू hi संभल ......और वह वह से चला गया ...

अभी वह से उतारकर .......निचे आजाता है ......रात में सबका डिनर हो चूका था और सब अपने अपने रूम में थे......

रिम्पी अभी क रूम में थी और रेनू को अलग रूम दे दिया गया था.......

अभी सबसे पहले ऋतू क रूम में गया .....ऋतू बाथ्रीओम गयी थी ....तोह अभी बीएड पर बैठकर इंतज़ार करने लगा ......

थोड़ी hi देर में ऋतू आयी .....ऋतू इस समय एक पतले से सिल्क क नाईट गाउन में थी ....

अभी बस उससे देखता रह जाता hai....na..jaane क्यों अभी का आकर्षण ऋतू क प्रति दिन पर दिन बढ़ता जा रहा था .......

वह जानता था क उसका मिलान सिर्फ उसके पत्नियों क साथ hi हो सकता है ......लेकिन फिर भी वह ऋतू की और आकर्षित होता जा रहा था....

ऋतू अभी को अपनी तरफ ऐसे घूरते हुए देखकर ....मुस्कुराने लगती है ....उसने अभी को आवाज भी लगायी ...लेकिन अभी तोह अपने hi खयालो में मगन था....

ऋतू अभी क पास जाती है और उसके आँखों क आगे चुटकी बजती है ....तोह अभी को होश आजाता है ......

ऋतू - क्या बात है ...ऐसे क्या देखे जा रहे थे जो अपने होश खो बैठे .....

अभी - आप सच में बहुत खूबसूरत हो दी .......

ऋतू - शुक्र है आज काम से काम तुम्हारा इस और ध्यान तोह गया ......

अभी - ध्यान तोह बहुत बार जाता है लेकिन क्या करू ....

ऋतू अभी को ढाका देकर बीएड पर लिटा देती है .....और खुद उसके उप्पेर आजाती है ......

मैं बताती हु की क्या करना है ...और अभी क होंठो पर अपने होंठ रख देती है और पसिनटेली किश करने लग जाती है ......अभी भी ऋतू को किश करने लगता ...hai....Ritu क साथ भी उससे वैसा hi अनुभव होता था जैसे उससे अपनी पत्नियों क साथ होता था ......

इस बात को वह समाज नहीं पाटा था क ऐसा क्यों होता है ....

ऋतू उसके होंठ चूसे जा रही थी अभी भी पूरा साथ देते हुए ऋतू क होंठ चूसे जारहा था ..ऋतू की जुबान अब अभी क मुँह में उसकी जुबान पर टच करने लगी .....

दोनों बस एक दूसरे को महसूस कर रहे थे ....दोनों की साँसे ुकादरहि थी ....एक पल क लिए सांस लेने क लिए दोनों अलग हुए फिर ...जुट गए किश करने ....दोनों एक दूसरे की जुबान को चूस रहे थे ......

अभी का लिंग अकड़ कर ...ऋतू की योनि पर रगड़ रहा था ...जिससे ऋतू और मदहोश सी हो गयी थी ...उसका हाथ अपने आप अभी क लिंग पर चला गया ...और पायजामे क ऊपर से पकड़ लिया ....

ऋतू का हाथ अपने लिंग पर महसूस करते hi .....अभी को होश आया .....

अभी - बस करो दी ....नहीं तोह में कण्ट्रोल नहीं कर पाऊंगा .....

ऋतू - तोह मत करो न कण्ट्रोल .....आज होजाने दो को होरहा है .......

अभी - नहीं दी ....इस समय यह ठीक नहीं है .....अगर यह होगया तोह सब समाप्त हो जाएगा ......कुछ दिन और इंतजार करना होगा .......जब तक में अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लेता .....

ऋतू - न जाने और कितना इंतज़ार करना होगा ..अब ....

थोड़ी देर दोनों शांत एक दूसरे की बाहों में अपने आपको शांत करने की कोशिश करते है ......

फिर अभी ऋतू को गुड नाईट बोलकर ....

ाद्दु से मिलने चला जा ता है ..थोड़ी देर ाद्दु से बातें करके .....अपने रूम में आजाता है ....

वह रिम्पी अभी का इंतजार कर रही थी .....अभी को आया देखकर वह अभी क गले लग जाती है ........

अभी थोड़ी देर रिम्पी को प्यार करता है ...रेनू को भी अपने रूम में बुलाता है ...और दोनों पत्नियों क साथ थोड़े प्यार भरे पल बिताकर सो जाता है ....

अभी क लिए इतना hi ....

अगला अपडेट कल.....
 
अपडेट - 123

अब तक आपने देखा दुर्मुखासुर की वर प्राप्ति ...

मदालसा क मैं में चल रहा संघर्ष.....

अब आगे....

लगभग आधी रात क करीब अभी को नींद खुल गयी ....उससे बेचैनी सी महसूस हो रही थी .....एक घबराहट सी मैं में आ रही थी जैसे कुछ बहुत बुरा होने वाला है .....कोई उसका अपना दूर जा रहा है .......लेकिन क्या यह वह समाज नहीं पा रहा था .......

रिम्पी और रेनू को बीएड पर hi छोड़कर अभी चाट पर चला गया .........और बेचैनी में चाट पर चक्कर लगाने लगा ......

थोड़ी देर ऐसे hi चक्कर लगाने क बाद भी उसकी घबराहट वैसी hi थी .......तोह वही ध्यान लगाने बैठ गया सोचा इससे मन शांत हो जाएगा .......

लेकिन आज उसका ध्यान नहीं लग रहा था ....और लगता भी कैसे ...विचलित मैं से ध्यान कैसे लगेगा .......

फिर थोड़ी और कोशिश से उसने अपने अआप पर नियंत्रण पाया .....अपने ांफेर की उर्जाओ और शक्तियों को एक एक करके देखने लगा ......

सारे चक्रो में ध्यान करते हुए ....वह अपने अन्तःकरण तक पहुँच गया ....वह उससे कुछ ...अलग अलग दृश्य नज़र आने लगे .......

एक दृस्य में उसने ाद्दु ..माँ और डैड को ....सफ़ेद कपड़ो में किसी ऐसे लोक में देखा ....जहा चारो तरफ ...श्वेत प्रकाश ....और दिव्यता .....फैली हुए थी .......और वह तीनो ...एक ऐसे जगह खड़े थे जहा से ....तीन ..

मार्ग ..किसी ..और लोक को जाते थे .....अभी उनको बस जाते हुए देख रहा था ....

दूसरे दृश्य में उससे गाओं का वह सुनसान पड़ा हुआ ड्रैगन वाला मंदिर दिखा ....और... दिखा ...क ऋतू ...किसी सफ़ेद ड्रैगन पर बैठी हुई ....है......

ध्यान करते हुए उससे बहुत समय हो गया था ......वह सारे दृस्य देखने क बाद .......उसके ध्यान आज्ञा चक्र से होते हुए ....ब्रम्हरन्ध्रा ....क शुक्ष्मा मार्ग ...से होते हुए सहत्रार में पहुँवः ....उसने डेल्हा क अभी ...सहत्रार पूरी तरह जागृत नहीं है .......

तभी एक अद्भुत प्रकाश उससे दिखा ...और उसके बाद ...अभी ने देखा क वह अपने श्री से बहार आगया है .......अपने शरीर को वह चाट पर देख रहा था .......उसे अब दूर दूर तक सब कुछ स्पष्ट दिखाई दे रहा था ......

अभी अपने शरीर को देख रहा था ....कैसे वह अपने शरीर से बहार आया उससे समाज नहीं आरहा था ....अब वह भीतर प्रवेश भी कर पायेगा या नहीं ...क्या उसकी मृत्यु हो गयी ..है .....

तभी उससे अपने सामने महागुरु दिव्या आत्मा क रूप में प्रगट हुए ........

महागुरु - पुत्र ऐसे क्या देख रहे हो ......तुम अभी जीवित हो .....तुमहरे अगले सफर में इसी आत्मा रूप में तुम्हे निकलना होगा .......यह सिद्धि तुम्हे वैशाली क मिलान से प्राप्त हुई है ....

अब तुम जब चाहे अपने शरीर से निकलकर ....वापस अपने ..या ...किसी और क शरीर में प्रवेश कर सकते हो .......इससे आत्मा सिद्धि कहते है .......

अब तुम्हे सब प्रकार क सांसारिक भावनाओ से मुक्त होकर एक कर्म योगी की तरह अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करना होगा .....

साड़ी चिंताओं को त्यागकर सत्य की खोज करो पुत्र .......

में हमेशा तुम्हारे साथ हु .....यशःवी भाव पुत्र ....

और महागुरु इतना कहकर अंतर ध्यान हो गए ......अभी वापस अपने शरीर में आगया........

ध्यान से उठने क बाद अभी देखा क ध्यान करते हुए उससे कोई 4 घंटे हो गए the....abhi 5 बज रहे थे ......उसके बाद वह अपने रूम में गया ...तोह देखा क रिम्पी और रेनू उठ चुकी थो रेनू अपने रूम में चली गयी ..थी ..और रिम्पी फ्रेश हो रही थी ....

अभी बीएड पर बैठकर ध्यान में दिखे हुए दृश्य क बारे में सोच रहा था .....क आखिर वह दृश्य दिखने का अर्थ क्या है .......

तभी उसकी तन्द्रा चेहरे पर पानी की कुछ बुँदे गिरने से tuti......toh देखा क रिम्पी नहाकर आगयी है और अभी को ऐसे खोये हुए देखकर ...उसके सामने अपने गीले बालो को जहातक कर पीछे की तरफ किये जिससे पानी क छींटे अभी क चेहरे पर पड़े .....

रिम्पी - कहा खोये हो जनाब सुबह सुबह .....आज तोह लगता है आप अभी तक फ्रेश भी नहीं हुए .....

..अभी अपनी परेशानी छुपाते हुए ....और कहा खो सकता हु ...बस तुम्हारे खयालो में खोया था .....

रिम्पी - अच्छा जी .....आपपको पता है क आप मुजह्से ज़हूत नहीं बोल सकते हो ...फिर क्यों बोलते हो .....जरूर कोई बात आपको परेशां कर रही है.....

अभी - कुछ खास नहीं जान ...अगर कोई ...ऐसे बात होगी तोह तुमसे क्यों छुपता ..बस अपने अगले सफर क बारे में सोच रहा था ......

वैसे भीगे बदन में एक दम कमल लग रही हो .......और उससे पकड़ने क लिए हाथ बढ़ाता है .

रिम्पी - सुबह सुबह बड़ा प्यार आरहा है .....जनाब को ....आज ...दयँ नहीं करना है क्या ......

अभी - खड़ा होकर उससे बाहों में भर लेता है ध्यान hi तोह कर रहा हु ...रिम्पी देवी ...का ...

और रिम्पी को एक किश कर देता है ....

रिम्पी - चलो छोड़ो अब अच्छे बच्चे की तरह ...फ्रेश हो जाओ ...नहीं तोह ..यह ..रिम्पी देवी कुपित होजायेगी ......

अभी - कुपित हो जायेगी तोह में ऐसे मन लूंगा ....एक और किश कर देता है ......और चला जाता है बाथरूम...

रिम्पी भी अपने सुबह की पूजा ..और ध्यान में लग जाती है ...

फ्रेश होने क बाद अभी .....रूम की गैलरी में खड़ा हो गया ....सूर्योदय हो रहा था ....आकाश में अँधेरा चाट रहा था .....चिडियो का कलरव कही दूर से सुनाई दे रहा था ....

अभी ने उन् पंछियो की आवाजे सुनाने क लिए ...अपनी दूरश्रवण शक्ति को जागृत किया .......तोह उससे उन् पंछियो की आवाज क साथ ..साथ ....दो आवाजे और सुनाई देने लगी थी ...यह ..आवाज thi......RVS और नैना की ........

पहले तोह अभी ने सोचा क इस तरह अपने माता पिता की प्राइवेट बात सुनना ैवहि बात नहीं लेकि कुछ ऐसा सुना क उसने अपनी दूरश्रवण की सिद्धि उस और hi लगा ली ....

रवस - नैना अब समय आगया है ....जो महा गुरु ने हमे बताया था ......अब तुम तीनो की शक्ति अभी को वापस प्राप्त होगी .....

नैना - क्या वह यह सब सह पायेगा .....वह बहुत भावुक है ..मुज़हे दर है क.

...इससे कही वह टूट कर बिखेर ja...agar ऐसा हुआ ....तोह ....सब कुछ नष्ट हो जाएगा ..

रवस - उससे इसका सामना करना hi होगा ....इसके सिवा और कोई मार्ग नहीं है ......यह बात हमे उसके जनम से hi पता है ........

कर्तया पथ पर व्यक्ति को कई बलिदान देने होते है .......इस भूमि पर जब भगवन भी आये थे तोह उन्हें भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा .......

अभी को अपनी भावनाओ से ऊपर उठना होगा .....

नैना - आप ठीक कह रहे है ....लेकिन क्या और कोई मार्ग नहीं है .....

रवस - नहीं ...विधि का एहि लेख है .....महागुरु ने जब उसके जनम क समय अभी को शक्तियों को विभक्त किया था ...तभी उन्होंने मुज़हे यह बताया था ......

मानता हु अभी क लिए यह बहुत कठिन होगा .....अब तुम जाओ ....अभी निचे आता hi होगा ......

दोनों की बात सुनकर अभी को फिर किसी अनहोनी क घटने का अहसास होने लगा ....कि है वह जो उसके माँ और डैड जानते है और वह नहीं.......

और किस परीक्षा और कठिन घडी की बात कर रहे थे .......अभी अपने बीएड पर इन्ही सोचो में गम था ...उसकी आँखों में ...अचानक आंसू बाह निकले ....क तभी उससे किसी का हाथ अपने कंधे पर महसूस हुआ ......तोह देखा ...वह शिवली कड़ी थी .....

शिवली - अपने आपको सम्भालो जान ......आपको अभी बहुत कठिन परिस्थितियों का सामना करना hai.....Maha गुरु ने आपको जो बात बताई .....उसपर ध्यान दीजिये .....

अभी - शिवू ...तुम तोह मेरे दिल का सब हाल जानती हो ......आज ...पहले से hi मेरा मैं बड़ा उद्विग्न था .....फिर ध्यान में दिखाई दिए वह दृश्य ......

और अब माँ और डैड की यह बाते ....कुछ तोह ऐसा होनेवाला है जो .....नहीं होना चाहिए .....

शिवली - सनासर में वह कभी घटित नहीं होता जो नहीं होना चाहिए ...सब ....विधि लिखित ....हमे बस अपना कर्म करना चाहिए .....

महा गुरु क कहे अनुसार आप सत्य की खोज कीजिये ....आपको आपके सारे प्रश्नो का उतार मिल जाएगा ......

अभी - सत्य की खोज ...परन्तु कैसे .....और कहा ....

शिवली - सत्य लोक में .....जहा आप केवल आत्मा रूप से वह जा सकते हो .......अपने संपूर्ण रूप और ऊर्जा क साथ आपको जाना होगा .....

अभी - परन्तु ....माँ डैड की बातो से कुछ अनहोनी की आशंका हो रही है ....इस परिस्थिति में ....कैसे अपने संपूर्ण रूप क साथ जा सकता हु ....

मेरा यहाँ होना ज्यादा जरुरी है ....

शिवली - देखो अभी हमारे पास सिर्फ डेड महीना शेष है ...और आपको अपने संपूर्ण रूप को प्राप्त करना है .....यहाँ ...आपकी रक्षक सेना है ....हम सब है ....यदि कोई संकट आया तोह हम सब सामना करेंगे .....

आप इस तरह यदि अपने कर्म से विमुख हो गए तोह फिर कस अपने उद्देश्य में सफल हो जाएगा ......और यदि ऐसा हुआ तोह ....संपूर्ण ब्रह्माण्ड संकट में आजायेगा ........

यहाँ आनेवाले संकेत की आशंका से यदि आप नहीं गए ...और कस सफल हुआ ...तोह ...यहाँ कोई सुरक्षित नहीं रहेगा .....

अभी को भी शिवली की बातें जांचने लगी ....और उसने अपनी अगली येरा पर जाने का मैं बना लिया ......

कुछ देर शिवली और अभी की बातें हुई फिर वह वापस चली गयी .......

उसके बाद अभी निचे आगया ....आज रवस और नैना हॉल में बैठे हुए थे ....ऋतू और ाद्दु भी साथ बैठी थी .......रिम्पी और रेनू नाश्ता तैयार करने में लगी थी .......

अभी हॉल में जाकर माँ और डैड क पेअर छूटा है .......और गम विश करता है ......

रवस - आओ बीटा ....baitho....kaise चल रहा है तुम्हारा सफर......

अभी - बस आप दोनों का आशीर्वाद है ....में अब अपने लक्ष्य क बहुत निकट हु ...

रवस - ी ऍम प्राउड ऑफ़ यू माय सोन ....एक बात हमेशा याद रखना ....परिदतीतिया कैसी भी आये ....अपना ..कर्म कभी मत त्यागना ....और अपने लक्ष्य की और बढ़ते रहना ......हमेशा ध्यान रखना क हमारा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है ......

अभी - जी ...में ..अपना पूरा प्रयत्न करूँगा ......डैड आज आप और दी ऑफिस क लिए तैयार नहीं हुए ...और ाद्दु भी स्कूल क लिए तैयार नहीं हुई ...क्या बात है ....

ाद्दु - भाई आज डैड का साथ में पिकनिक जाने का प्रोग्रमम है ...इसीलिए आज चुटी....

रवस - हां बीटा ....कान क सिलसिले में कुछ ऐसा ुलाज़ गया क अपने परिवार क साथ वक्त बिताने का समय hi नहीं मिला ...aaj....bas अपने परिवार क साथ समय बिताना चाहता हु .......फिर पता नहीं ...

अच्छा ...छोड़ो वह सब ....बताओ कहा जाने का प्रोग्राम बनाये ......

कुछ देर डिस्कशन क बाद सिटी से बहार उसी तालाब और जहरने पर जाने का प्रोग्राम बना ...जहा ..अभी को पहली बार सुलेखा मिली थी .....

अभी अपने डैड से अकेले में बात करना चाहता था .....लेखों उससे मौका hi नहीं मिल रहा था ...उसने एक दो बार डैड को बोलकर तरय किया ...लेकिन रवस ने ताल दिया ....

कुछ देर बाद बर्फ करके सब निकल गए प्रकृति की हस्सें वादियों में ....और पहुँच गए .....सिटी से बहार ....

अभी क लिए इतना hi ....


अगला अपडेट कल....
 
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