भाई बहिन

छुटकी को उन्होंने मुंह साफ़ भी नहीं करने दिया, बस खींच के अपनी गोद में बैठा के, जीजा साली दोनों खिड़की के पास बैठे , और जीजा कभी उसे अपने गाँव की आसपास की चीजें दिखाते कभी कुछ,
हलकी हलकी सुबह हो रही थी, खेत में औरतें, लड़कियां, ... रात में जो बाग़ बगीचे बँसवाड़ी सिर्फ परछाई की तरह दिख रहे थे अब साफ़ साफ़ नजर आ रहे थे,...
ट्रेन चली जा रही थी, इन्हे देखकर मुझे अपनी दोनों ननदों की याद आ रही थी और इनकी एक पड़ोस की भाभी, मेरी जेठानी की, मुझसे उम्र में दो चार साल ही बड़ी होंगी,

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उन्होंने मजेदार किस्सा सुनाया की उन्होंने अपने मरद को बहनचोद कैसे बनाया, कजरी नाम था उनका लेकिन थी एकदम गोरी चिट्ठी, एकदम खुल के बोलती थीं, कहने लगीं,
अरे मैंने थोड़े ही कुछ किया,... तेरे जेठ हैं ही बहनचोद, इस गाँव के सारे मरद,...
मैंने कितनी बार देखा था अपने मर्द को कैसे मेरी ननद की बस आ रही चूँची को कैसे ललचा ललचा के देख रहे हैं, और असल में उस उमर की लड़कियों को देख के सब मरदों का टनटनाने लगता है तो उन्ही को क्यों दोस दूँ,

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ननद मेरी कच्ची उमर की लेकिन वैसे बड़ी हो गयी थी, जब कभी बैठती और फ्राक उसकी जाँघों के बीच में फ्राक दब जाती तो बस उसकी निगाह वहीँ चिपक जाती,... और मैं तो अपनी ननद के सामने ही उनके ऊपर चढ़ गयी,...
" क्यों सोच रहे हो जाँघे इतनी गोरी हैं तो सोन चिरैया कैसी होगी, अरे बोलो न अभी खोल के दिखा देगी,... क्यों बिन्नो , दिखा दो न तेरे भैया इतना ललचा रहे हैं,... " और दोनों झेंप जाते।
रात में किसी दिन भी नागा नहीं जाता था , तीन चार बार,... लेकिन तीसरे चौथे बार अगर थोड़ा थके या ढीला पड़े तो बस मैं अपनी ननद का नाम ले के,.. और लोहे का खम्भा हो जाता, समझ तो मैं भी रही थी बेचारे का बहुत मन कर रहा है , तड़प रहा है अपनी बहन को चोदने के लिए बस एक तो झिझक रहा है, दूसरे गाँव में सास भी और लोग भी तो मौका नहीं मिल रहा है , और ननद भी नखड़े जितना करे, थोड़ा बहुत मन तो उसका भी कर रहा था
बस मैं अपनी छोटी ननद को अपने साथ ले आयी, सास को बोल के की यहाँ कहाँ गाँव के स्कूल में , वहां शहर में पढाई भी अच्छी होगी,... मैं इतना तो जानती ही थी हर मरद अपनी बहन को देख के सोच के जरूर मुट्ठ मारता है , मन उसका खूब करता है पटक के पेलने का बस मौका और हिम्मत की बात है
तो मौका इनको दिलाने के लिए मैं उसे अपने साथ ले आयी , शहर में तो बस ये और मैं और वो ,
और शहर पहुँच के ये और मौका देख के, कई बार मैंने पकड़ा इनको, लेकिन टोकती नहीं थी, कभी छोटे छोटे टिकोरे

कभी चिकनी जाँघे, और पता तो उसको भी चलता होगा,... लेकिन तांका झांकी से तो उनका मन भरने वाला नहीं था जब तक पटक के उसकी फाड़ते नहीं,... उनका क्या हर मरद चाहता यही है ,
राखी बंधवाते भी निगाह छोटी छोटी चूँचियों पर रहती है,...

तो मैंने उनको हड़का लिया , और साफ़ साफ बोल दिया,...
" सुन साफ़ बोल चोदना है तुझे अपनी बहिनिया को की नहीं, देख , कुछ दिन के बाद जब मेरा पेट फूल जाएगा, ... तो डाक्टरनी मना कर देगी,... पास भी नहीं आने देगी , तीन महीने तो ये लमका झुनझुना झुलाते रहना, फिर हर महीना पांच दिन क छुट्टी, मुंह लटकाये रहते हो,... एक बार इसको चोद दोगे तो एक माल हरदम तेरे पास, मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता तू साफ़ बोल, क्या मन करता है तेरा,... "

" मन तो करता है,... " उनकी निगाह अपनी बहन की अमीया पे अटकी थी, वो बरामदे में बैठी टीवी देख रही थी,...
" साफ साफ़ बोल,.. " मैंने हड़काया तो उन्होंने कबूल दिया,
" उसे चोदने का, अपनी बहिनिया को चोदने का बहुत मन करता है,... " खूंटा उनका तना था। बस उसको पकड़ के मसलते हुए मैं बोली,
" तो चोदता क्यों नहीं, लायी काहें हूँ उसको, चल आज से ठीक दस दिन बाद संडे को फाड़ना उसकी लेकिन दो शर्ते हैं मेरी , पहली अभी से उसको एकदम माल की तरह , जब मन करे उसकी चूँची मीज दो, गाल रगड़ दो, चूतड़ सहला दी, और जब उसे देखो तो सोचो चोदने में कितना मजा देगी,... दूसरे जब फाड़ना उसकी तो खूब दर्द दे दे के, खूब रोये चीखे, और पानी हर बार उसकी चूत में,... "

बस उस दिन रात से मैंने उसे अपने इनके बीच में सुलाना शुरू कर दिया , उसके कमरे की बत्ती का तार बिगाड़ दिया, और नाइट लैप तो जलता ही था, बस खुद में उनका लंड खोल के पहले खूब चूसती, फिर ये हचक के मुझे चोदते, सेकेण्ड राउंड में हर बार मैं ही उपर चढ़ के, ...एक दो दिन के बाद तो अगर वो सोने के बहाना करती तो चिकोटी काट काट के , और कई बार उसका हाथ पकड़ के इनके खड़े लंड पे और इनका हाथ उसकी चूँची पे,... कुछ दिन तो वो सहला के फिर वो भी कस कस के मसलने लगे चोदते मुझे थे और चूँची उसकी मसलते थे,...
बस पांच दिन इसी तरह, और उसकी पांच दिन की छुट्टी शुरू हुयी तो मैंने उसको बोला, ... अपने भैया से बोल पैड के लिए
और उन्होंने भी उससे सब पूछ लिया , पीरियड कब शरू होंगे , कब ख़तम होंगे,... कित्ते साल हुए शुरू हुए,...
और उन पांच दिनों में तो उन्होंने मुझे इतना चोदा रात में भी दिन में भी , और दिन में भी जब वो अक्सर आस आपस रहती थी,...

जिस दिन उसकी छुट्टी ख़तम हो गयी उसकी चूत में आग लगी थी,... बस मैंने ही उसे चिढ़ाना शुरू किया ,
" हे अपने भैया का नाम ले ले कर ऊँगली कर रही है , लेना है तो असल लंड ले ना,... "
और ये तो पागल हो रहे थे अपनी बहन चोदने को, बस मैंने दोनों हाथ कस इनकी बहन के पकडे और दिन दहाड़े इन्होने उसकी मेरे सामने फाड़ दी ,... खूब रोई चूतड़ पटके, ... खूब खून खच्चर,...

आधे एक घंटे बाद दुबारा , और शाम को फिर, ...

उसके बाद से तो रोज बिना बहन चोदे,... सच में कहती हूँ , किसी भी मर्द के मन में झाँक के देखो न, पक्का उसका मन अपनी बहन को चोदने का करता है और अगर एक बार बहन चोदने को मिल जाए तो ज्यादा इधर उधर मुंह नहीं मारेगा
बात मेरी जेठानी की सोलहो आना सही थी और उसी समय मैंने तय कर लिया,
इनके मायके पहुँचते ही इन्हे अपनी ननद के ऊपर जरूर चढ़ाउंगी, वो जो मेरी शादी शुदा ननद है , अरे नन्दोई ने मेरी ली , तो इनका नन्दोई की बीबी को लेने की तो बनती है , लेकिन असली बात है मेरे सामने खुल के , और एक दो बार मेरे सामने अपनी उस शादीशुदा बहन को चोद दिया न , फिर तो इनकी भी झिझक

ख़तम और मेरी ननद की भी , फिर तो भाई बहन मेरे सामने भी खुल के पेलगाडी चलाएंगे,...
गाडी धीमे हो रही थी लेकिन मेरी आँख के सामने इनकी वही तस्वीर, ये अपनी बहना पे चढ़े

सोच सोच कर मुझे इतना मज़ा आ रहा था, इनकी छुटकी बहिनिया ( वही जो मेरी छुटकी की समौरिया है ) की झिल्ली तो दो दिन पहले ऐन होली को मेरे ममेरे भाई ने फाड़ दी, वरना वो भी इन्ही से,
लेकिन और भी तो हैं कच्ची कलियाँ इनके घर में, इनके बुआ की लड़की, एकदम गोरी चिट्ठी, इनकी साली से भी छोटी, टिकोरे आने शुरू हो गएँ हैं, झांटे भी हैं बस नयी नयी छोटी छोटी,...

छह सात कच्ची कलियों को तो मैं जानती ही हूँ, ऐन राखी के दिन , इनसे फड़वाउंगी अपने सामने,...
सच्च में भाई बहन से बढ़ कोई चुदाई नहीं,
मेरे कोई सगा भाई तो है नहीं , लेकिन इसी ट्रेन में आते हुए मेरे ममेरे भाई ने इन के सामने मुझे चोदा,... और इन्होने भी और उकसा के, और उसी दिन होली में अपने भाई को क्या बोलूं , मैंने तो खुद अपनी ननद, जेठानी के सामने उसे चढ़ कर चोदा था, जबरदस्ती, क्या मजा आया था , और ये छुटकी की सहेली जो इनके साथ होली खेलने आयी थी, जिसकी इन्होने छुटकी के सामने गाँड़ मारी थी,... वो कब से अपने भैया से,... किसी दिन उसके मम्मी पापा कही रिश्तेदारी में गए थे और उसी दिन उसके भाई ने पकड़ के पेल दिया,...
सच में, भाई बहन की चुदाई, असली चुदाई,...
कुंवारे में ही मर्द औरत का कुल मजा आ जाता है, और शादी के बाद तो और , मायके में आने पर भी ससुराल वाले मजे में कोई कमी नहीं होती,...
गाडी अब एकदम धीमे हो रही थी , हम लोगो के गाँव की बगल की नदी के ऊपर से ट्रेन पर हो रही थी , ... बस अब कभी भी , ,,,
मैंने पेटीकोट पहना

साडी बस किसी तरह लपेट ली और ब्लाउज भी टांग लिया।
गाडी अब बस रुक रही थी , और छुटकी अभी भी ,...
" अरे यार तुझे तो अभी खाली फ्राक के अंदर घुसना है , कौन सा ब्रा चड्ढी पहनना है , बस घुस जाना " ये उसे चिढ़ाते और अपनी शर्ट पहनते बोले , और छुटकी की फ्राक उसे पकड़ा दी ,
( हाँ उसी के साथ एक बटन भी उन्होंने तोड़ दी ऊपर वाली जिससे उसकी छोटी छोटी गोलाइयाँ साफ़ साफ़ दिखतीं )
जब तक छुटकी फ्राक पहनती , ट्रेन खड़ी हो गयी थी , ...