Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी) - Page 21 - SexBaba
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Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)

सुबोधकांत ने यू-टर्न लिया और वापिस पेट्रोल पंप के पास आकर गाड़ी रोक दी.. गाड़ी से उतरकर.. बगैर पीछे देखे.. रेणुका अपना एक्टिवा लेकर घर भागी.. घर पहुंचकर उसने सब से पहला काम.. सुबोधकांत की दी हुई घड़ी को छुपाने का किया.. और फिर बेडरूम मे जाकर लेट गई.. और बड़े ही आराम से, सुबोधकांत के तगड़े लंड को याद करते हुए.. उंगली करते करते झड़ गई.. !!





झड़ने के बाद रेणुका की धड़कनें कुछ शांत हुई.. उसने शीला को फोन लगाया और सारी बात बताई.. सिवाय उस घड़ी वाली गिफ्ट के.. शीला और रेणुका के बीच काफी घनिष्ठ मित्रता हो गई थी.. राजेश और मदन की तरह..

कुछ दिनों बाद.. राजेश को एक काम के सिलसिले में मुंबई जाना हुआ.. तीन दिनों के लिए.. इस बार तो रेणुका ने उसे अपने सर की कसम खिलाकर तसल्ली कर ली थी.. की वो वाकई बिजनेस के सिलसिले में ही जा रहा था.. वैसे उस रात पार्टी में जो हुआ.. उसके बाद रेणुका को यकीन था की राजेश अब उसे बिना बताए ऐसा कुछ नहीं करेगा..

राजेश के जाने के बाद.. खुला मैदान मिलते ही रेणुका खुश हो गई.. उसने सुबह सुबह ही सुबोधकांत को फोन करके बुला लिया.. सुबोधकांत ने दोपहर ढाई बजे पहुँचने का वादा किया..

फिर रेणुका ने अब सुबोधकांत को फोन किया और अपने घर बुला लिया.. सुबोधकांत ने कहा की वो अभी निकल रहा है और कुछ ही घंटों में पहुँच जाएगा.. अब रेणुका ने शीला को फोन करके यह कहा की एक नया मुर्गा फसाया है चुदाई करने के लिए... पर सुबोधकांत का नाम नहीं बताया..!!

नया लंड लेने के विचार मात्र से शीला के पूरे शरीर में खलबली सी मच गई.. पर प्रश्न यह था की वो मदन को क्या बोलकर घर से निकलें?? आखिर वह बिना कुछ कहें बाहर निकल गई.. और थोड़ी देर बाद मदन को फोन किया और बताया की उसे अपनी कोई पुरानी सहेली मिल गई है और वो उसके घर जा रही है.. आने में देर हो जाएगी

शीला सीधे रेणुका के घर पहुँच गई..

शीला: "क्या बात है मेरी जान.. आज तो तूने मेरे भोसड़े को तृप्त करने का प्लान बना लिया..!! बता तो सही, आखिर किस लंड को पटाया है तूने.. !!"

रेणुका ने मुस्कुराकर कहा "थोड़ा सा धीरज धरो शीला रानी.. आज तुम्हें ऐसे लंड से चुदने का मौका मिलेगा जिसकी प्रतीक्षा तुम्हें कब से थी.. !! मिलकर मजे करेंगे.. मैं चाहती तो अकेले ही मजे कर सकती थी.. पर मैंने ऐसा नहीं किया.. ये तू भी याद रखना.. !!!"

दोनों बेडरूम मे जा पहुंची.. बड़ा सा बेड देखते ही शीला ने एक ही पल मे अपनी साड़ी उतार फेंकी.. और अपना घाघरा उठाकर बेड पर लेट गई.. उसकी नरम गोरी गुंदाज जांघों को देखकर रेणुका सिसक पड़ी..

रेणुका: "यार, अपना खजाना दिखाकर मुझे ऐसे ललचा मत.. वरना उस लंड के आने से पहले मैं ही तुझ पर टूट पड़ूँगी"

शीला ने अपने ब्लाउज के हुक खोलते हुए कहा "तो आजा ना मेरी जान.. किसने रोका है.. वैसे वो मज़ा तो नहीं आएगा जो लंड से मिलता है.. अरे हाँ.. मैं तो भूल ही गई.. तेरे पास वो रबर का मूसल जैसा लंड था ना.. वो लेकर आ..!! जब तक वो मेहमान नहीं आ जाता, तब तक उसी से काम चला लेते है.. याद है उस रात.. होटल मे.. वो डिल्डो वाली औरत के साथ हमने कितने मजे किए थे.. !!"

रेणुका एक पल के लिए सोच मे पड़ गई.. वो डिल्डो तो उसने वैशाली को दे दिया था.. पर शीला को कैसे बताती.. !!

रेणुका: "अरे यार.. मेरी उंगली क्या किसी डिल्डो से कम है.. !! तुझे ऐसा मज़ा दूँगी की तू उस रबर के नकली लंड को भूल जाएगी.. "

रेणुका ने टॉप के साथ अपनी ब्रा भी उतार दी.. और फटाफट अपने ट्रैक-पेंट को पेन्टी के साथ उतारते हुए नंगी हो गई.. शीला अब भी ब्रा और पेटीकोट मे थी.. रेणुका बेड पर होते हुए शीला के पास आकर लेट गई.. और शीला की ब्रा के अंदर हाथ डालकर उसके स्तनों से खेलने लगी






रेणुका: "यार सच मे.. तेरे बबलों का कोई मुकाबला ही नहीं है.. कितने बड़े है यार.. !!! मैं एक औरत होकर भी इन्हें छूकर पागल हो जाती हूँ.. तो मर्दों का क्या हाल होता होगा.. !!"

शीला ने अपनी ब्रा उतारकर अपने मदमस्त खरबूजों को आजाद कर दिया.. ताकि रेणुका आसानी से उनके साथ खेल सकें.. रेणुका ने अपना सर शीला की गोद मे रख दिया.. उन बड़े बड़े स्तनों के नीचे उसका चेहरा ऐसे दब गया की उसे शीला का मुंह भी नजर नहीं आ रहा था








शीला के एक स्तन को अपनी दोनों हथेलियों में पकड़कर उसकी एक इंच लंबी निप्पल को मसलते ही शीला कराहने लगी.. शीला ने अपनी निप्पल पकड़ी और उसे जबरन रेणुका के मुंह मे डाल दी.. रेणुका चटकारे लगाते हुए उसकी निप्पल चूसने लगी

रेणुका के मुंह के गरम स्पर्श से शीला सिहरने लगी.. उसने अपना एक हाथ रेणुका की चूत पर रख दिया.. और चूत के होंठों के बीच अपनी उंगली फेरने लगी.. जवाब मे रेणुका अपनी कमर हिलाकर उसके स्पर्श का अभिवादन करने लगी.. कुछ ही पलों मे रेणुका की चूत पूर्णतः गीली हो गई.. उसकी गीली पुच्ची मे उंगली डालकर शीला ने बाहर निकाली और सूंघने लगी.. बड़ी ही मस्त मस्की सी गंध सूंघकर शीला बेहद उत्तेजित हो गई.. !!!














उसने अब रेणुका को अपनी गोद से हटाया और उसे बेड पर लेटा दिया.. शीला बेड पर खड़ी हो गई और अपने पेटीकोट का नाड़ा खोलने लगी.. गांठ खींचते ही उसका पेटीकोट शीला के पैरों के इर्दगिर्द ढेर बनकर गिर गया.. पेन्टी तो आज उसने पहनी ही नहीं थी.. अपनी चरबीदार भोसड़े को हथेली से खुजाते हुए.. अपने दोनों पैर रेणुका के चेहरे के दोनों तरफ जमा लिए.. और अपनी कमर को धीरे धीरे नीचे ले जाकर.. चूत को रेणुका के मुंह के सामने लाकर रख दिया..

शीला का गुफा जैसा भोसड़ा अपने मुंह के सामने देख, रेणुका को और अधिक मार्गदर्शन की जरूरत नहीं पड़ी.. भांप छोड़ रहे उस छेद को ताज्जुब के साथ देखती रही रेणुका.. यह वही भोसड़ा है जिसमे शीला ने अच्छे अच्छे लंडों को समा लिया था.. अपनी दो उंगलियों से चूत के होंठों की परतों को अलग करते ही.. अंदर का गीला गुलाबी हिस्सा नजर आने लगा..








शीला से अब और बर्दाश्त नहीं हुआ.. उसने अपना गरम छेद रेणुका के होंठों पर दबा दिया.. एक पल के लिए रेणुका का दम घुटने लगा.. उसने शीला की जांघों को अपनी हथेली से थोड़ा सा ऊपर उठा दिया ताकि उसे चाटने मे आसानी हो..

शीला का भोसड़ा अपना रस बहा रहा था.. उस रस को बड़े ही चाव से चाटते हुए रेणुका ने अपनी जीभ अंदर तक डाल दी.. एक पल के लिए उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसने गरम अंगारे पर अपनी जीभ रख दी हो.. !! शीला अपने चूतड़ों को आगे पीछे करते हुए.. रेणुका की जीभ का घर्षण मजे लेते हुए महसूस कर रही थी..

रेणुका की तंग चूचियों की तीखी नोक पर अपनी गांड रगड़ते हुए.. शीला बदहवास होकर अपना भोसड़ा चटवा रही थी.. अपने स्तनों को खुद ही मसलते हुए वह इतनी उत्तेजित हो गई की पागलों की तरह अपनी निप्पल खींचने लगी.. रेणुका ने शीला की जामुन जैसी क्लिटोरिस को अपनी जीभ से कुरेदकर उसे स्खलित करने की कगार पर ले गई..






पगलाई हुई घोड़ी की तरह शीला रेणुका के चेहरे पर सवार होकर ऐसे हिल रही थी जैसे उसके प्राण निकल जाने वाले हो.. !! रेणुका के सर को बालों से पकड़कर शीला ने अपने सुराख को उसके मुंह पर जोर से दबा दिया और चीखकर झड़ गई.. उसकी योनि का शहद रेणुका के पूरे चेहरे पर लिप्त था.. कुछ देर तक उसी स्थिति मे रहने के बाद.. शीला रेणुका के चेहरे के ऊपर से उतरी और उसे अपनी गिरफ्त से मुक्त किया..

थक कर शीला बेड पर लेट गई.. अब रेणुका की बारी थी.. वो शीला के जिस्म पर सवार हो गई.. और उसकी छाती पर सर रखकर उसके मम्मों को चूसने-चाटने लगी.. इस दौरान वो अपनी चूत को शीला के चरबीदार पेट पर रगड़ रही थी..

शीला ने अपनी टांगें फैलाई और रेणुका उसकी जांघों के बीच ऐसे सेट हो गई की दोनों की चूतें आराम से छु सकें.. अब वो अपनी कमर हिलाते हुए अपनी चूत को शीला के भोसड़े के साथ रगड़ने लगी.. कुछ ही पलों मे रेणुका का ऑर्गजम आ गया.. और वो शीला के बड़े बड़े स्तनों के ऊपर ढेर होकर गिर गई














काफी देर तक उसी अवस्था में दोनों पड़े रहे.. और अपनी साँसे नॉर्मल होने का इंतज़ार करते रहे..

कुछ देर बाद.. शीला उठी.. और नंगे बदन ही किचन मे चली गई.. दोनों के लिए कॉफी बनाने..

थोड़ी देर मे कॉफी के दो मग लेकर वो बेडरूम मे आई तब रेणुका प्लास्टिक के हेर-ब्रश को अपनी गीली चूत में घुसेड़ रही थी..






शीला: "मेरे आने का तो इंतज़ार करती.. !! चल अब छोड़ वो सब.. और कॉफी पी" शीला रेणुका के करीब आई उसे मग देने के लिए..

रेणुका ने एक के बदले दोनों मग शीला के हाथों से ले लिए.. और बगल वाले टेबल पर रख दिए.. शीला को समझ नहीं आया की उसने ऐसा क्यों किया.. वो और कुछ सोच पाएं उससे पहले रेणुका ने उसे खींचकर अपने शरीर के ऊपर ले लिया..

शीला: "अरे क्या कर रही है पागल.. !!"

रेणुका: "यार.. मैंने तेरी चाटकर ठंडी कर दी.. अब तू मेरी चाट दे.. "

शीला बिना एक पल गँवाए.. अपने जिस्म को थोड़ा सा नीचे ले गई.. और रेणुका की जांघें फैलाकर उसकी गोरी-गुलाबी मुनिया के होंठ खोलकर सूंघने लगी.. उसे रेणुका की चूत की गंध बड़ी पसंद थी..

अलग अलग औरतों की योनियों की भिन्न भिन्न गंध होती है.. यह गंध उस औरत की स्वास्थ्य स्थिति, हॉर्मोनल बदलाव, साफ-सफाई और खानपान पर निर्भर करती है। यह गंध उत्तेजित भी कर सकती है और अगर तेज या दुर्गंधमय हो तो संभोग साथी को परेशान भी कर सकती है.. आम तौर पर एक स्वस्थ योनि से हल्की और प्राकृतिक गंध आती है.. कुछ औरतों की योनियाँ मछली जैसी या फिर बड़ी दुर्गंध वाली भी होती है.. जो किसी इन्फेक्शन के कारण या योग्य साफ-सफाई न रखने के कारण हो सकती है.. कुछ औरतों की योनियाँ मिठास भरी.. फलों जैसी गंध वाली भी होती है..!!

रेणुका आँखें बंद कर शीला की जीभ अपनी चूत मे अंदर बाहर होते हुए महसूस कर रही थी.. उसे इतना मज़ा आ रहा था की वो अपने पैर पटक रही थी.. शीला ने दो उंगलियों से जैसे ही चुटकी मे लेकर उसकी क्लिटोरिस दबाई.. रेणुका की चूत ने पानी छोड़ दिया.. वो बुरी तरह हांफने लगी.. और कुछ ही पलों मे शांत हो गई.. लेकिन शीला अंत तक उसका सारा रस चाटती ही रही.. जब तक रेणुका की चूत को पूरी तरह साफ नहीं कर दिया.. शीला ने चाटना बंद नहीं किया..








आखिर शीला मुस्कुराकर खड़ी हुई.. और रेणुका के बगल मे लेट गई.. पास पड़े टेबल से उसने अपनी कॉफी का मग उठाकर एक घूंट पिया

शीला: "साली, तेरे चक्कर मे ये कॉफी ठंडी हो गई"

रेणुका: "भाड़ मे गई तेरी कॉफी.. मेरी चूत को ठंडा करना ज्यादा जरूरी था.. !!"

दोनों सहेलियाँ हँसते हुए एक दूसरे के जिस्म से खेलती रही..

अब नए लंड से चुदवाने के लिए दोनों ही उतावली हो रही थी..

जिस्म की आग थोड़ी ठंडी करने के बाद.. दोंनो निर्वस्त्र अवस्था में रेणुका के बेड पर लेटी हुई थी..

शीला: "यार बता तो सही की आखिर वो है कौन? और कितने बजे आने वाला है?"

रेणुका: "लगता है वो ट्राफिक में फंस गया है.. उसने कहा था की ढाई बजे तक आ जाएगा.. अभी तीन बज रहे है.. "

शीला: "क्या यार.. !! जो आदमी चोदने के लिए समय पर नहीं पहुँच सकता.. वो किसी काम का ही नहीं.. !! मुझे नहीं लगता की वो आएगा.. !!"

रेणुका: "आएगा.. जरूर आएगा"

शीला: "तूने उसका लंड देखा क्या??"

रेणुका: "देखा भी है और चूसा भी है"

शीला: "चूसा है मतलब अंदर भी डलवाया ही होगा.. मुझे खिलाने से पहले तू खुद चख चुकी है.. एक नंबर की चुदैल है तू.. !!"

रेणुका ने हँसते हँसते शीला के मादक बबलों को दबाते हुए कहा "नहीं डलवाया है यार.. भरी दोपहर में.. गाड़ी के अंदर खुली सड़क पर कैसे चुदवाती?? ऊपर ऊपर से ही किया था सब.. उसने मेरे मुंह के अंदर पिचकारी भी मारी थी"

शीला: "तो आज पहले मैं उसका मुंह में लूँगी.. तू उसे छूना भी मत.. तुझे सिर्फ देखना है"

रेणुका: "अरे हाँ मेरी माँ.. पहले उसे आ तो जाने दे.. पता नहीं कहाँ रह गया.. !! फोन कर के पूछूँ?"

शीला: "नहीं यार.. वो किसी तकलीफ में होगा वरना वही सामने से फोन कर देता ना तुझे.. !! थोड़ा इंतज़ार करते है.. अगर और थोड़ी देर में नहीं आया तो मुझे वापिस घर जाना होगा.. मदन से झूठ बोलकर आई हूँ.. वो कब आएगा.. कब हम दोनों करवाएंगे और कब मैं घर पहोचुंगी.. और यार.. तुझे तो पता है.. मुझे जल्दबाजी में करवाने में मज़ा ही नहीं आता.. अगर वो थोड़ी देर में आ गया तो मैं पहली करवा लूँगी और घर के लिए निकल जाऊँगी.. फिर तू आराम से पैर फैलाकर चुदवाना.. !!"

रेणुका: "एक काम करते है.. तेरे फोन से उसे फोन लगाते है.. पता तो चले क्या प्रॉब्लेम है.. !! पता चला तो ठीक वरना रोंग नंबर कहकर फोन कट कर देंगे"

शीला: "ठीक है.. !!" कहते हुए उसने अपने पर्स से फोन निकाला.. स्क्रीन पर नजर जाते ही उसके होश उड़ गए.. २० मिसकॉल थे मदन के.. अरे बाप रे.. !! इसे अचानक कौनसी मौत आ गई.. !! पहले तो कभी उसने इतने मिसकॉल नहीं किए.. !! शीला बहोत ही घबरा गई

रेणुका: "अरे फोन लगाकर पूछ ले.. जो भी होगा पता चल जाएगा"

शीला: "यार.. मुझे बहोत डर लग रहा है.. वो बहोत गुस्सा करेगा.. एक काम कर.. तू अपने फोन से कॉल लगाकर पूछ.. ये मत बताना की हम दोनों साथ है"

रेणुका उठकर बेडरूम गई अपना फोन लेने.. फोन उठाते ही वो चकित रह गई.. राजेश के आठ मिसकॉल थे..!! अपनी हवस बुझाने के चक्कर में दोनों ने फोन साइलन्ट मोड पर रखे हुए थे..

मदन को फोन लगाने से पहले रेणुका ने राजेश को फोन लगाया

रेणुका को अपेक्षा थी की फोन उठाते ही राजेश उस पर बुरी तरह भड़केगा.. पर राजेश ने ऐसा कुछ नहीं कहा.. राजेश ने जो कहा वो सुनकर रेणुका के चेहरे का रंग उड़ गया.. होश उड़ गए.. थर थर कांपने लगी वो... !!!

देखकर ही शीला को अंदाज लग गया की कुछ बहोत बड़ी गड़बड़ हुई थी.. !!

शीला: "क्या हुआ रेणुका?"

रेणुका स्तब्ध खड़ी रही.. जैसे उसकी आवाज ही छीन गई थी.. थोड़ी देर तक आँखें बंद कर वो नॉर्मल होने की कोशिश करती रही.. और फिर तुरंत उठकर कपड़े पहनने लगी..

शीला: "क्या कर रही है यार.. !!! कुछ बताएगी भी की क्या हुआ??? और मदन को फोन कर तो मुझे आगे दिमाग चलाने का पता चले"

घबराई हुई रेणुका ने कहा "शीला, तू अभी घर जाने के लिए निकल.. हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है.. राजेश कभी भी घर पहुँच सकता है.. आता ही होगा.. जल्दी निकल वरना हमारा सारा भांडा फुट जाएगा.. !!"

शीला: "अरे यार.. फिर वो तेरा नया लंड आ गया तो क्या करेगी??"

रेणुका ने शीला को लगभग धकेलते हुए कहा "वो अब नहीं आएगा.. तू जा यहाँ से.. !!"

शीला आगे कुछ पूछती उससे पहले रेणुका बाथरूम मे चली गई.. शीला को भी महसूस हुआ की कुछ बहोत बड़ा कांड हो गया था.. शीला ने तुरंत कपड़े पहने और दरवाजे की ओर जा ही रही थी की तभी डोरबेल बजी..

घबराकर शीला बाथरूम के दरवाजे के पास आकर रेणुका से बोली "यार लगता है राजेश आ गया.. अब क्या करें?"

रेणुका तुरंत बाहर निकली.. और शीला को हाथ से खींचते हुए किचन के रास्ते पीछे वाले दरवाजे पर ले गई.. शीला को रवाना कर वो भागी भागी मुख्य दरवाजे पर आई.. दरवाजा खोलते ही अपना बेग लेकर राजेश ने प्रवेश किया.. और धम्म से सोफ़े पर बैठ गया.. और सर पर हाथ रखकर सोचने लगा..

राजेश के अंदर जाने के बाद.. शीला चुपके से पीछे के रास्ते बाहर निकली.. और लगभग भागते हुए मुख्य सड़क पर आ गई.. तुरंत ऑटो में बैठकर उसने अपने घर का पता दिया.. ऑटो चल पड़ी और साथ ही साथ शीला के दिमाग में विचार भी चलने लगे.. क्या करू? मदन को क्या कहूँगी?? कैसे समझाऊँगी?? इतने मिसकॉल के बाद भी क्यों उसने फोन नहीं किया उसकी क्या सफाई देगी?? क्या हुआ होगा?? रेणुका इतनी घबराई हुई सी क्यों थी? मदन ने इतने सारे मिसकॉल क्यों किए होंगे?

देखते ही देखते ऑटो शीला के घर के बाहर पहुँच गई.. पैसे चुकाने के बाद शीला ने सब से पहले अपना मोबाइल स्विचऑफ कर पर्स में रख दिया.. और बेफ़िकर होकर घर में ऐसे घुसी जैसे उसे कुछ पता ही न हो.. !!

उसे देखते ही मदन उस पर टूट पड़ा..

मदन: "दिमाग नाम की कोई चीज है भी या नहीं.. !! कब से तुझे फोन कर रहा हूँ.. उठाया क्यों नहीं?? कोई ईमर्जन्सी हो तब फोन ही न उठाओ तो फोन रखने का क्या मतलब?? अब सुन.. सुबोधकांत का एक्सीडेंट हुआ है.. मैं और राजेश वहाँ जा रहे है.. बाद मैं फोन पर बात करेंगे.. अगर तू उठाएगी तो.. !!"

शीला: "इतना गुस्सा करने से पहले मेरी बात तो सुन ले.. मेरा फोन रास्ते में कहीं गिर गया है.. मैं पिछले एक घंटे से अपना फोन ही ढूंढ रही थी.. वरना तेरा फोन मैं क्यों नहीं उठाती? और सुबोधकांत जी के साथ अचानक ये क्या हो गया?? अभी थोड़े दिन पहले ही तो गए थे यहाँ से.. !!"

मदन: "मुझे क्या पता यार.. वहाँ जाकर पता चलेगा.. मैं और राजेश अभी निकल रहे है.. वो बस आता ही होगा.. वहाँ जाकर पता चलेगा की क्या हुआ, क्यों हुआ.. कितनी चोट आई है.. वगैरह वगैरह.. !!"

शीला: "मदन, कविता और मौसम को अभी बताना है या थोड़ा इंतज़ार करें?"

मदन: "अभी नहीं.. पहले वहाँ जाकर देख तो लें की क्या हाल है.. !!"

तभी बाहर गाड़ी का हॉर्न बजा.. मदन तुरंत बाहर निकला और गाड़ी में बैठ गया.. राजेस ने तेजी से गाड़ी दौड़ा दी

मदन: "तुझे किसने बताया इसके बारे में?"

राजेश: "मुझे रमिलाबहन का फोन आया था.. मैं तो एयरपोर्ट पर अपनी फ्लाइट का इंतज़ार कर रहा था तभी फोन आया.. उन्हों ने सब से पहले पीयूष को फोन किया पर उसका लगा नहीं.. कविता के घर पर किसी ने उठाया नहीं.. !! वो कह रही थी की पुलिस वालों ने सुबोधकांत की डायरी से घर का नंबर लेकर फोन किया और बताया की हमारे शहर के बाहर वाली हाइवे पर एक्सिडन्ट हुआ है.. !!"

फूल स्पीड से राजेश की गाड़ी बाहर हाइवे पर निकल गई.. थोड़ा आगे जाते ही रोड पर उलटी पड़ी हुई गाड़ी नजर आई.. गाड़ी का रंग देखकर दोनों समझ गए की वह सुबोधकांत की ही गाड़ी थी.. पास ही में पुलिस की पी.सी.आर गाड़ी खड़ी थी और दो पुलिसवाले वहाँ खड़े रहकर ट्राफिक का नियमन कर रहे थे.. एक्सीडेंट में तहस नहस होकर उलटी पड़ी गाड़ी को देखने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी..

भीड़ को चीरते हुए राजेश और मदन अंदर घुसे और गाड़ी के पास जाकर, वहाँ खड़े पुलिस वाले से कहा "साहब, ये जिसका एक्सीडेंट हुआ है, हम उनके रिश्तेदार है.. उन्हें कौन सी अस्पताल ले गए है?? कितनी चोट आई है उनको?"

"बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी अस्पताल ले गए है" बड़ी ही रूखी आवाज में उस पुलिस वाले ने कहा

यह सुनते ही.. राजेश और मदन दोनों के पैर ठंडे पड़ गए..!!!!

राजेश ने सब से पहला काम यह किया की गाड़ी के अंदर जो भी कीमती और जरूरी चीजें थी उन्हें ढूंढ कर बाहर निकाला.. एक फ़ाइल थी.. कार स्प्रे की बोतल, सुबोधकांत का मोबाइल.. सबकुछ अपने साथ ले लिया.. गनीमत थी की उस पुलिस वाले की नजर ट्राफिक पर थी इसलिए उसे किसी ने रोका नहीं

मदन का चेहरा फीका पड़ गया था, उसने कहा "यार, रमिलाबहन को कैसे यह समाचार देंगे?? मुझसे तो कहा ही नहीं जाएगा"

राजेश: "पीयूष और कविता को भी यह बताना पड़ेगा"

तभी राजेश के मोबाइल पर पीयूष का फोन आया

पीयूष: "सर, मेरे ससुरजी का एक्सीडेंट हुआ है.. अभी मेरी सास का फोन आया था.. मुझे वहाँ जाना होगा.. !!"

राजेश: "पीयूष, अब मैं जो कहने जा रहा हूँ, उसे ध्यान से सुन.. हम एक्सीडेंट वाली जगह पर पहुँच चुके है.. बड़े ही दुख के साथ कहना पड़ रहा है की सुबोधकांत जी अब इस दुनिया में नहीं रहे.. उनकी बॉडी पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी अस्पताल ले गए है.. तू एक काम कर.. अपने ससुराल पहुँचने का बंदोबस्त कर.. और हाँ.. कविता और मौसम को भी साथ ले जाना.. यहाँ की चिंता मत कर.. और पैसों की जरूरत हो तो हमारे एकाउंटेंट से ले लेना.. !! हम अस्पताल से बॉडी लाने की कार्यवाही संभाल लेंगे"

मदन ने घर की लेंडलाइन पर शीला को फोन किया.. यह समाचार देने के लिए.. पर शीला ने पहले ही मौसम और कविता की जोर जोर से रोने की आवाज सुनकर अंदाज लगा ही लिया था..

राजेश: "हमे जल्दी अस्पताल पहुँच जाना चाहिए.. इन सरकारी कामों में बहोत वक्त लग जाता है..!!

सिविल अस्पताल के पी.एम. रूम के बाहर, राजेश और मदन बॉडी मिलने का इंतज़ार कर रहे थे.. अभी बॉडी मिलने में आधे घंटे की देर थी..

मदन: "यार, सुबह से चाय नहीं पी है.. सर फटा जा रहा है.. मैं जाकर चाय लेकर आता हूँ"

राजेश: "ओके.. "

मदन के जाने के बाद, राजेश ने अपनी जेब से सुबोधकांत का मोबाइल निकाल.. और जिज्ञासावश देखने लगा.. अंदर देखते ही सब से पहला झटका उसे तब लगा जब उसने देखा की सुबोधकांत को आखिरी बार रेणुका ने फोन किया था.. !!!!! रेणुका को क्या जरूरत पड़ी होगी सुबोधकांत को फोन करने की?? और उनकी गाड़ी की दिशा देखते हुए लग रहा था की वो इसी शहर में आ रहे थे.. !! कहीं सुबोधकांत और रेणुका के बीच... नहीं नहीं.. ऐसा नहीं हो सकता.. !!

दिमाग से खराब विचारों को झटकते हुए राजेश ने व्हाट्सप्प के मेसेज पढ़ना शुरू किया.. जितना वो पढ़ता गया, उतना ही उसका आश्चर्य और सदमा बढ़ता गया.. फाल्गुनी के साथ सुबोधकांत की चैट के मेसेज पढ़कर उसके पैरों तले से धरती खिसक गई.. !! मेसेज में सुबोधकांत द्वारा की गई चूत चटाई की तारीफ.. उनके लंड के गुण-गान.. और काफी अन्य सारे मेसेज थे.. उतना ही नहीं.. एक मेसेज में तो फाल्गुनी ने सुबोधकांत को यह पूछा था की उन्हें उसके साथ ज्यादा मज़ा आता है या वैशाली के साथ.. !! मतलब साफ था.. सुबोधकांत के काम-संबंध फाल्गुनी और वैशाली दोनों के साथ थे.. और वो भी काफी लंबे अरसे से.. !!

तभी सामने से मदन हाथ में चाय के दो कप लेकर आता नजर आया.. राजेश ने तुरंत व्हाट्सप्प चेट डिलीट कर दी और कॉल-लॉग भी साफ कर दीये.. कितने भी चौंकाने वाले सच क्यों न बाहर आ जाए.. अब क्या फ़र्क पड़ेगा.. !!! जब गुनहगार ही इस दुनिया को छोड़कर जा चुका हो.. फिर उन हकीकतों को उजागर करके.. अन्य लोगों को जीवन में नाहक का भूकंप लाने का क्या मतलब.. !!

राजेश को सुबोधकांत के मृत्यु से जितना सदमा नहीं लगा था.. उसे ज्यादा धक्का उस बात से लगा था की रेणुका और सुबोधकांत के बीच.. उनके एक्सीडेंट से पहले दो तीन बार बातचीत हुई थी.. राजेश की जानकारी अनुसार, रेणुका और सुबोधकांत की ऐसी कोई खास जान-पहचान थी नहीं की वो इतनी बातें करते.. ना ही रेणुका ने सुबोधकांत से बात होने के बारे में कोई जिक्र किया था.. !! साथ ही साथ.. सुबोधकांत के वैशाली और फाल्गुनी के साथ जिस्मानी संबंधों के बारे में जानकर राजेश को इतना तो यकीन हो गया था की सुबोधकांत कितने रंगीन मिजाज थे.. !!

राजेश के विचार रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.. फाल्गुनी ने खुलेआम वैशाली के साथ सुबोधकांत के संबंधों का उल्लेख किया था.. तो क्या फाल्गुनी की नज़रों के सामने ही सुबोधकांत ने वैशाली को चोदा होगा.. ?? हो सकता है की सुबोधकांत और वैशाली को फाल्गुनी ने रंगेहाथों पकड़ लिया हो.. और फिर वो भी शामिल हो गई हो.. !!

राजेश ने मोबाइल वापिस अपनी जेब में रख दिया..

दो घंटों के बाद उन्हें सुबोधकांत की बॉडी मिली.. एम्बुलेंस में बॉडी रखकर मदन आगे की सीट पर बैठ गया.. और राजेश बॉडी के साथ पीछे बैठा था.. पूरे रास्ते मे उसने सुबोधकांत के फोन का पोस्टमॉर्टम जारी रखा और जो जानने मिला वो बेहद चौंकाने वाला था.. !!


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