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- Dec 5, 2013
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नेछु का नेग और इमरतिया
ननद-भौजाई की नोकझोंक अपने चरम पर पहुँच गई। गाँव की लड़कियाँ तालियाँ पीट-पीटकर हँस रही थीं।
और बीच में खड़ी थीं बड़की ठकुराइन — चेहरे पर संतोष की चमक।
एकलौते बेटे की शादी। आँगन भरा हुआ। गीत, हँसी, ठिठोली, भीड़, चहल-पहल।
यही तो चाहती थीं वे —
कि यह शादी सालों-साल गाँव की चौपाल पर याद की जाए।
आज सिर्फ नेछु नहीं होना था, —
आज आँगन ने हँसकर अपने कुल की नई शुरुआत का स्वागत किया था
आँगन में आज ऐसा लग रहा था जैसे पूरा मेला उतर आया हो।
ढोलक की थाप, कंगनों की छनक, औरतों की खिलखिलाहट — दूल्हा बेचारा बीच में ऐसे बैठा था जैसे पंचायत में फैसला होने वाला हो।
सूरजु की माई तीसरी बार चिल्लाईं—
“अरे इमरतिया! कहाँ मर गई? नेछु का टाइम निकल रहा है?”
कोने से आवाज आई—
“आत हईं ! बिना नेग के नाखून काट देंगे तो लोग कहेंगे — नाउनिया फोकट में सेवा करती है!”
बस, इतना सुनना था कि आँगन हँसी से गूंज उठा।
इमरतिया कटोरी में गुलाबी रंग ऐसे घोर रही थी दुलारी बगल में खड़ी फुसफुसाई—
“देखियो, आज बिना मोटा नेग लिए मत उठना। एकलौता बेटा है, मौका बार-बार नहीं मिलता!”
इमरतिया बोली—
“अरे हम तो आज नहन्नी नहीं, तलवार लेके आए हैं!”जोर का ठहाका मचा,
पूनम ने चिढ़ाया,
" हे भौजी, नाखून की जगह कुछ और मत काट लीजियेगा, नहीं तो हमारी नयकी भौजी क काम कैसे चलेगा "
इमरतिया की ओर से अहिराने की एक भौजाई जोर से बोलीं, " अरे बचपन क यारी हौ तोहार, हमार नयकी देवरान तो हफ्ता भर बाद आएँगी, ये सोच रही हो की तोहार काम कैसे चलेगा,… असल भाई रखनी हो "
" अरे ये अकेले थोड़े, यह गाँव की कुल लड़कियां, पक्की भाई चोद हैं, झांटे बाद में आती हैं भाई का लंड पहले गप करती हैं, "
रीना की माई, चंदौली वाली चाची, अपनी बहुओं का साथ देती बोलीं।
इमरतिया छोटी सी कटोरी में गुलाबी रंग घोर के सब सुहागिनों को एड़ी में रंग लगा रही थी, उसके साथ सूरजु सिंह के ननिहाल की नाउन दुलारी भी थी, इमरतिया की पक्की सहेली, छोट बहन की तरह।
इमरतिया की ओर से वो दुबारा साफ़ साफ़ बड़की ठकुराइन से खुल के बोली,
" अरे इमरतिया यहीं है पहले कुछ नेग कबूला तो नाख़ून कटी, "
" अरे एक बार नाख़ून काटना शुरू तो करे, मुंह खोल के बोले, जउन नेग चार चाहि, जउन वो कही कुल मिली " बड़की ठकुराइन ने खुश हो के कहा।
ठनगन के बिना रस्म रिवाज हो जाए तो मजा का, इमरतिया आपन नहन्नी और सब सामान लेकर पहुंची, पर ननदे क्यों छोड़ें, पूनमिया बोलीं
" हे काकी, इमरतिया भौजी ऊपर वाला मुंह नहीं नीचे वाला मुंह खोल के मांगेगी "
अब रस्म का गाना भाभियों ने शुरू किया, लेकिन सब लड़कियां, बाकी औरतें भी साथ दे रही थी,
एक थाली में नेग सब बड़ी ठकुराइन ने खुद रखा। नाउन का नेग होता है और कितने इन्तजार के बाद इस घर में यह घडी आयी थी, एकलौते बेटे का बियाह, कुल बंश बढ़ेगा, पुरखे खुश होंगे,
दूल्हे का पैर इमरतिया की गोद में रखा गया।
दूल्हा ऐसा सिमटा बैठा था जैसे स्कूल में मास्टर जी डंडा लेकर खड़े हों।
इमरतिया बोली—
“देख ल, हिले तो उँगली आधी रह जाएगी। फिर फोटो में चार ही उँगली दिखेगी!”दूल्हा एकदम सीधा।
इमरतिया ने अपनी गोद में दूल्हे का पैर रख के आराम से नाखून काटना शुरू किया और साथ में गाना भी , ढोलक टनक रही थी,
नोह् काटू नउनिया बचा के उँगरी,नोह् काटू नउनिया बचा के उँगरी
हार भी दूंगी , माला भी दूंगी हार भी दूँगी , माला भी दूँगी
संगवा में दूंगी सोने की मुनरी , नोह् काटू नउनिया बचा के उँगरी
औरतें सुर में, लेकिन बीच-बीच में अपनी लाइन भी जोड़ रही थीं—
“हार भी दूँगी, माला भी दूँगी…”
पीछे से आवाज— “पहिले दिखाओ, खाली मुँह से ना चलेगा!”
चोली भी दूँगी लहंगा दूंगी, चोली भी दूँगी लहंगा भी दूंगी,
संगवा में दूंगी लाली लाली चुनरी, , नोह् काटू नउनिया बचा के उँगरी
बड़ी मामी की बेटी रमा और उसकी सहेली निशा ने गाना रोक के तड़का लगाया," अरे इमरतिया भौजी, चोली क नाप कौन दरजी लिया, केतना सिलवाई लिया "
" अरे जोबन क सब रस ले लिया हमार भौजी क, अब सिलवाई भी लेगा का ? " अब लीला भी बोलने लगी थी।
नथिया भी दूंगी, पायल भी दूंगी, नथिया भी दूंगी, पायल भी दूंगी,
संगवा में दूंगी गले की सिकड़ी, नोह् काटू नउनिया बचा के उँगरी
इमरतिया के सूप में पहले सूरजु सिंह की माई , फिर उनकी बूआ, मामी, घर की, रिश्ते की सब औरते नौछावर कर रही थीं,
माई ने सोने की मुंदरिया डाली।
बूआ ने रूपया। मामी ने कपड़ा।
पूनमिया ने सूप में झाँक कर कहा—
“अरे अभी तो आधा भी नहीं भरा! इमरतिया भौजी उठने मत देना!”
चननिया बोली—
“भौजी! अगर नेग कम मिला तो नाखून आधा काट के छोड़ देना!”
" हे बहुत बोल रही हो, भैया की बहिनी, पूनम को चिढ़ाते हुए मुन्ना बहू बोली और जोड़ा, दूल्हे क बहनिया कौन नेग देंगी,
" वो सब आपन आपन जोबन लुटायेंगी "
मंजू भाभी हँसते हुए बोलीं,
अहिराने वाली रीना, वही चंदौली वाली चाची की बेटी जो हल्दी के बाद अभी अभी अभी आयी थी, बुच्ची से भी साल भर छोटी, उसके कच्चे टिकोरों को उसके टॉप के ऊपर से सहलाते पूछ बैठी,
" और जिन बहनों की कच्ची अमिया अभी आ रही है,.... वो का लुटायेंगी ? "
" अरे हम भौजाइयों के भाई हैं न , वो कुतर भी लेंगे कच्ची अमिया, और दबा दबा के बड़ा भी कर देंगे , ऐसे माल की तो बहुत कीमत है बाजार में " रीना की ओर देख के चिढ़ाते हुए रामपुर वाली भाभी बोलीं।
मुन्ना बहू और मंजू भाभी गा रही थी और साथ में बाकी लड़कियां औरते भी,
घर घर फिरइ नउनिया त गोतिन बुलायी
सखिया आज राम जी के नेछु, सब सखी आयहु हो , सब केहू आओ रे।
गोतिन सब आवे हो , आंगन सब बैठे हों,
केहू डारे सोने क मुंदरिया तो कोई डारे रूप कोई डारे रतन पदारथ
भर गए सूप
माई डाले सोने क मुंदरिया, बहिनी डारे रूप
बूआ डारे रतन पदारथ भर गए सूप
एक गाना ख़तम होता नहीं था दूसरा शरू हो जाता था और अब इमरतिया दूल्हे के एड़ी में गुलाबी रंग लगा रही थी और गाना फिर बदला,
अबकी बड़ी उमर की औरतों की ढोलक टनक रही थी, बाकी सब लोग साथ दे रहे,
आयी है आज शुभ मंगल घड़ी, अरे आयी है आज शुभ मंगल घड़ी
अरे नउनिया को दूंगी सोने की नहन्नी और नउआ को दूंगी सोने की छड़ी
अब लड़कियों से नहीं रहा गया, पूनमिया बोली,
अरे भौजी का काम नहन्नी से नहीं चलेगा, उन्हें तो मैं बांस दूँगी, तब भौजी का सही नेग होगा।"
" अरे वो भी एक नहीं दो दो, एक आगे से एक पीछे , हमरे भौजी को समझती का हो " चननिया ने जोड़ा।
' अरे हम तो इमरतिया भौजी के लिए मोटका गदहा का इंतजाम किये हैं, हमरे ओर से वही नेग है " हंसती हुयी पूनम बोली।
नेछु खतम हो गया था।
सूप भर गया था नेग से। और अब इमरतिया भौजी के बोलने का नंबर था, उनसे और मुन्ना बहू से कोई ननद पार नहीं पा सकती थी, चाहे कुँवारी हो या ब्याहता। वो सीधे पूनम, अपनी अहिराने वाली ब्याहता ननद से हँसते हुए छेड़ के बोलीं,
" अरे मोटका गदहवा तो हमार ननदोई है "
" अरे भौजी, ननदोई और सलहज का तो जबरदस्त रिश्ता है, कहते हैं न साली से सलहज अधिक प्यारी"
पूनम कौन चुप रहने वाली थी, और चननिया और पूनमिया दोनों की जोड़ी के आने से अब ननदो का पलड़ा भी भारी हो गया था, गाँव की लड़कियां खूब चहक रही थीं।
लेकिन सबसे ज्यादा खुस बड़की ठकुराइन थीं, दूल्हे की माई।
वैसे भी हंसी मजाक में उनका कोई जोड़ नहीं था, और यही वो चाहती थीं, आँगन में खूब भीड़ हो, सब लोग खूब खुस रहें, हंसी मजाक, हल्ला गुल्ला, बड़के घर के एकलौते लड़के की शादी पड़ी थी, सालों साल पूरे गाँव को याद रहे,
ननद-भौजाई की नोकझोंक अपने चरम पर पहुँच गई। गाँव की लड़कियाँ तालियाँ पीट-पीटकर हँस रही थीं।
और बीच में खड़ी थीं बड़की ठकुराइन — चेहरे पर संतोष की चमक।
एकलौते बेटे की शादी। आँगन भरा हुआ। गीत, हँसी, ठिठोली, भीड़, चहल-पहल।
यही तो चाहती थीं वे —
कि यह शादी सालों-साल गाँव की चौपाल पर याद की जाए।
आज सिर्फ नेछु नहीं होना था, —
आज आँगन ने हँसकर अपने कुल की नई शुरुआत का स्वागत किया था
आँगन में आज ऐसा लग रहा था जैसे पूरा मेला उतर आया हो।
ढोलक की थाप, कंगनों की छनक, औरतों की खिलखिलाहट — दूल्हा बेचारा बीच में ऐसे बैठा था जैसे पंचायत में फैसला होने वाला हो।
सूरजु की माई तीसरी बार चिल्लाईं—
“अरे इमरतिया! कहाँ मर गई? नेछु का टाइम निकल रहा है?”
कोने से आवाज आई—
“आत हईं ! बिना नेग के नाखून काट देंगे तो लोग कहेंगे — नाउनिया फोकट में सेवा करती है!”
बस, इतना सुनना था कि आँगन हँसी से गूंज उठा।
इमरतिया कटोरी में गुलाबी रंग ऐसे घोर रही थी दुलारी बगल में खड़ी फुसफुसाई—
“देखियो, आज बिना मोटा नेग लिए मत उठना। एकलौता बेटा है, मौका बार-बार नहीं मिलता!”
इमरतिया बोली—
“अरे हम तो आज नहन्नी नहीं, तलवार लेके आए हैं!”जोर का ठहाका मचा,
पूनम ने चिढ़ाया,
" हे भौजी, नाखून की जगह कुछ और मत काट लीजियेगा, नहीं तो हमारी नयकी भौजी क काम कैसे चलेगा "
इमरतिया की ओर से अहिराने की एक भौजाई जोर से बोलीं, " अरे बचपन क यारी हौ तोहार, हमार नयकी देवरान तो हफ्ता भर बाद आएँगी, ये सोच रही हो की तोहार काम कैसे चलेगा,… असल भाई रखनी हो "
" अरे ये अकेले थोड़े, यह गाँव की कुल लड़कियां, पक्की भाई चोद हैं, झांटे बाद में आती हैं भाई का लंड पहले गप करती हैं, "
रीना की माई, चंदौली वाली चाची, अपनी बहुओं का साथ देती बोलीं।
इमरतिया छोटी सी कटोरी में गुलाबी रंग घोर के सब सुहागिनों को एड़ी में रंग लगा रही थी, उसके साथ सूरजु सिंह के ननिहाल की नाउन दुलारी भी थी, इमरतिया की पक्की सहेली, छोट बहन की तरह।
इमरतिया की ओर से वो दुबारा साफ़ साफ़ बड़की ठकुराइन से खुल के बोली,
" अरे इमरतिया यहीं है पहले कुछ नेग कबूला तो नाख़ून कटी, "
" अरे एक बार नाख़ून काटना शुरू तो करे, मुंह खोल के बोले, जउन नेग चार चाहि, जउन वो कही कुल मिली " बड़की ठकुराइन ने खुश हो के कहा।
ठनगन के बिना रस्म रिवाज हो जाए तो मजा का, इमरतिया आपन नहन्नी और सब सामान लेकर पहुंची, पर ननदे क्यों छोड़ें, पूनमिया बोलीं
" हे काकी, इमरतिया भौजी ऊपर वाला मुंह नहीं नीचे वाला मुंह खोल के मांगेगी "
अब रस्म का गाना भाभियों ने शुरू किया, लेकिन सब लड़कियां, बाकी औरतें भी साथ दे रही थी,
एक थाली में नेग सब बड़ी ठकुराइन ने खुद रखा। नाउन का नेग होता है और कितने इन्तजार के बाद इस घर में यह घडी आयी थी, एकलौते बेटे का बियाह, कुल बंश बढ़ेगा, पुरखे खुश होंगे,
दूल्हे का पैर इमरतिया की गोद में रखा गया।
दूल्हा ऐसा सिमटा बैठा था जैसे स्कूल में मास्टर जी डंडा लेकर खड़े हों।
इमरतिया बोली—
“देख ल, हिले तो उँगली आधी रह जाएगी। फिर फोटो में चार ही उँगली दिखेगी!”दूल्हा एकदम सीधा।
इमरतिया ने अपनी गोद में दूल्हे का पैर रख के आराम से नाखून काटना शुरू किया और साथ में गाना भी , ढोलक टनक रही थी,
नोह् काटू नउनिया बचा के उँगरी,नोह् काटू नउनिया बचा के उँगरी
हार भी दूंगी , माला भी दूंगी हार भी दूँगी , माला भी दूँगी
संगवा में दूंगी सोने की मुनरी , नोह् काटू नउनिया बचा के उँगरी
औरतें सुर में, लेकिन बीच-बीच में अपनी लाइन भी जोड़ रही थीं—
“हार भी दूँगी, माला भी दूँगी…”
पीछे से आवाज— “पहिले दिखाओ, खाली मुँह से ना चलेगा!”
चोली भी दूँगी लहंगा दूंगी, चोली भी दूँगी लहंगा भी दूंगी,
संगवा में दूंगी लाली लाली चुनरी, , नोह् काटू नउनिया बचा के उँगरी
बड़ी मामी की बेटी रमा और उसकी सहेली निशा ने गाना रोक के तड़का लगाया," अरे इमरतिया भौजी, चोली क नाप कौन दरजी लिया, केतना सिलवाई लिया "
" अरे जोबन क सब रस ले लिया हमार भौजी क, अब सिलवाई भी लेगा का ? " अब लीला भी बोलने लगी थी।
नथिया भी दूंगी, पायल भी दूंगी, नथिया भी दूंगी, पायल भी दूंगी,
संगवा में दूंगी गले की सिकड़ी, नोह् काटू नउनिया बचा के उँगरी
इमरतिया के सूप में पहले सूरजु सिंह की माई , फिर उनकी बूआ, मामी, घर की, रिश्ते की सब औरते नौछावर कर रही थीं,
माई ने सोने की मुंदरिया डाली।
बूआ ने रूपया। मामी ने कपड़ा।
पूनमिया ने सूप में झाँक कर कहा—
“अरे अभी तो आधा भी नहीं भरा! इमरतिया भौजी उठने मत देना!”
चननिया बोली—
“भौजी! अगर नेग कम मिला तो नाखून आधा काट के छोड़ देना!”
" हे बहुत बोल रही हो, भैया की बहिनी, पूनम को चिढ़ाते हुए मुन्ना बहू बोली और जोड़ा, दूल्हे क बहनिया कौन नेग देंगी,
" वो सब आपन आपन जोबन लुटायेंगी "
मंजू भाभी हँसते हुए बोलीं,
अहिराने वाली रीना, वही चंदौली वाली चाची की बेटी जो हल्दी के बाद अभी अभी अभी आयी थी, बुच्ची से भी साल भर छोटी, उसके कच्चे टिकोरों को उसके टॉप के ऊपर से सहलाते पूछ बैठी,
" और जिन बहनों की कच्ची अमिया अभी आ रही है,.... वो का लुटायेंगी ? "
" अरे हम भौजाइयों के भाई हैं न , वो कुतर भी लेंगे कच्ची अमिया, और दबा दबा के बड़ा भी कर देंगे , ऐसे माल की तो बहुत कीमत है बाजार में " रीना की ओर देख के चिढ़ाते हुए रामपुर वाली भाभी बोलीं।
मुन्ना बहू और मंजू भाभी गा रही थी और साथ में बाकी लड़कियां औरते भी,
घर घर फिरइ नउनिया त गोतिन बुलायी
सखिया आज राम जी के नेछु, सब सखी आयहु हो , सब केहू आओ रे।
गोतिन सब आवे हो , आंगन सब बैठे हों,
केहू डारे सोने क मुंदरिया तो कोई डारे रूप कोई डारे रतन पदारथ
भर गए सूप
माई डाले सोने क मुंदरिया, बहिनी डारे रूप
बूआ डारे रतन पदारथ भर गए सूप
एक गाना ख़तम होता नहीं था दूसरा शरू हो जाता था और अब इमरतिया दूल्हे के एड़ी में गुलाबी रंग लगा रही थी और गाना फिर बदला,
अबकी बड़ी उमर की औरतों की ढोलक टनक रही थी, बाकी सब लोग साथ दे रहे,
आयी है आज शुभ मंगल घड़ी, अरे आयी है आज शुभ मंगल घड़ी
अरे नउनिया को दूंगी सोने की नहन्नी और नउआ को दूंगी सोने की छड़ी
अब लड़कियों से नहीं रहा गया, पूनमिया बोली,
अरे भौजी का काम नहन्नी से नहीं चलेगा, उन्हें तो मैं बांस दूँगी, तब भौजी का सही नेग होगा।"
" अरे वो भी एक नहीं दो दो, एक आगे से एक पीछे , हमरे भौजी को समझती का हो " चननिया ने जोड़ा।
' अरे हम तो इमरतिया भौजी के लिए मोटका गदहा का इंतजाम किये हैं, हमरे ओर से वही नेग है " हंसती हुयी पूनम बोली।
नेछु खतम हो गया था।
सूप भर गया था नेग से। और अब इमरतिया भौजी के बोलने का नंबर था, उनसे और मुन्ना बहू से कोई ननद पार नहीं पा सकती थी, चाहे कुँवारी हो या ब्याहता। वो सीधे पूनम, अपनी अहिराने वाली ब्याहता ननद से हँसते हुए छेड़ के बोलीं,
" अरे मोटका गदहवा तो हमार ननदोई है "
" अरे भौजी, ननदोई और सलहज का तो जबरदस्त रिश्ता है, कहते हैं न साली से सलहज अधिक प्यारी"
पूनम कौन चुप रहने वाली थी, और चननिया और पूनमिया दोनों की जोड़ी के आने से अब ननदो का पलड़ा भी भारी हो गया था, गाँव की लड़कियां खूब चहक रही थीं।
लेकिन सबसे ज्यादा खुस बड़की ठकुराइन थीं, दूल्हे की माई।
वैसे भी हंसी मजाक में उनका कोई जोड़ नहीं था, और यही वो चाहती थीं, आँगन में खूब भीड़ हो, सब लोग खूब खुस रहें, हंसी मजाक, हल्ला गुल्ला, बड़के घर के एकलौते लड़के की शादी पड़ी थी, सालों साल पूरे गाँव को याद रहे,