डाइनिंग टेबल के पास की खिड़की से रेणुका ने देखा.. वैशाली थी.. !!! अच्छा हुआ जो तुरंत दरवाजा नहीं खोल दिया.. वरना मुसीबत हो जाती.. !!!
रेणुका ने घबराकर मदन से कहा "मदन, वैशाली बाहर खड़ी है.. !! अब क्या करेंगे?"
मदन भी चोंक गया.. वैशाली तो शाम को आने वाली थी.. अभी कैसे टपक पड़ी?? अब क्या करें?
मदन: "रेणुका, तू पीछे के दरवाजे से निकल.. मैं दरवाजा खोलता हूँ.. और सुन.. बाहर जाकर शीला को फोन कर.. और उसे कहना की वो जल्दी यहाँ आ जाए.. और ये भी कहना की वैशाली उससे पूछे की कहाँ गई थी तो बताए की बाजार गई थी.. मैं भी वैशाली से यही कहूँगा.. "
जाने से पहले रेणुका ने मदन को किस कर बाहों मे भरते हुए उसका लंड दबा दिया.. और किचन के रास्ते, कंपाउंड से निकलकर वैशाली के अंदर जाने का इंतज़ार करने लगी.. जैसे ही वैशाली अंदर गई.. रेणुका ने चुपके से लोहे का दरवाजा खोला और बाहर निकली तब उसे याद आया.. गाड़ी की चाबी तो अंदर ही रह गई.. अब क्या होगा?
रेणुका ने शीला को फोन लगाया
रेणुका: "यार जल्दी आजा.. वैशाली आ चुकी है"
शीला: "कोई बात नहीं.. वैशाली को बोल दे की आज से तू ही उसकी मम्मी है"
परेशान होते हुए रेणुका ने कहा "मज़ाक का टाइम नहीं है अभी शीला.. !!"
शीला: "अरे, टेंशन मत ले.. मैं ऑलरेडी राजेश के साथ घर पहुँच ही रही हूँ.. देख पलट कर.. हमारी गाड़ी गली के अंदर आ चुकी है"
रेणुका ने मुड़कर देखा.. राजेश ने गाड़ी रेणुका के पास लाकर खड़ी कर दी..
रेणुका दौड़कर गाड़ी के पास आई.. शीला उतर गई और रेणुका तुरंत अंदर बैठ गई..
रेणुका: "शीला सुन.. मेरी गाड़ी की चाबी तेरे घर के अंदर ही छूट गई है.. मदन से बोलकर गाड़ी मेरे घर भिजवा देना.. ओके.. !! चल राजेश.. गाड़ी चला, जल्दी.. !!"
राजेश ने गाड़ी दौड़ा दी और वो लोग तुरंत ही शीला की सोसायटी के बाहर निकल गए
रेणुका राजेश से नजरें नहीं मिला पा रही थी.. दूर रहकर जो जो गुलछर्रे उड़ाये थे.. जो गंदी बातें की थी.. वो याद आते ही वो बेहद झिझकने लगी थी..
राजेश ने भी रेणुका के साथ कुछ बात नहीं की और उसे घर के पास उतारकर ऑफिस चला गया
इस तरफ शीला घर के अंदर आई
वैशाली और मदन ब्रेकफ़ास्ट करते हुए बातें कर रहे थे..
शीला: "अरे वैशाली बेटा.. तू आ गई?? कैसी रही तुम लोगों की पार्टी?"
मदन के साथ शीला न तो नजर मिला रही थी और ना ही बात कर रही थी
वैशाली: "ओह मम्मी, बहोत मज़ा आया.. कविता और पीयूष तो खुश हो गए मुझे देखकर.. और पापा को पीयूष ने एक ऑफर दी ही"
शीला ने चोंककर पूछा "कैसी ऑफर?"
वैशाली ने हंसकर कहा "तुझे नहीं.. पापा को दी है ऑफर.. पीयूष को एक अमरीकन कंपनी का ऑर्डर मिला है.. और उसी सिलसिले मे वह चाहता है की पापा उसे कन्सल्टन्सी दे.. जल्द से जल्द उसने मिलने के लिए कहा है"
"वैसे पीयूष ने सुबोधकांत का बिजनेस बड़े ही अच्छे से संभाल लिया है, वाकई बड़ा होनहार लड़का है " पीयूष की तारीफ करते हुए मदन ने कहा
शीला: "हाँ, बड़ा ही मेहनती लड़का है" कहते हुए शीला को वो दिन याद आ गया जब सिनेमा हॉल मे पीयूष ने उसके स्तनों को मसला था.. !!
वैशाली: "हाँ पापा.. वो तो है" वैशाली भी उस दिन की याद आ गई.. जब उस बन रहे मकान के अंदर.. रेत के ढेर पर पीयूष ने उसे रगड़कर चोद दिया था.. !!
वैशाली: "बाकी सब तो ठीक है मम्मी.. पर कविता बहोत ही बोर हो रही है.. पीयूष के पास टाइम ही नहीं होता उसे देने के लिए.. पूरा दिन बिजनेस मे उलझा रहता है.. कविता पुराने दिनों को बहोत मिस कर रही थी.. खास कर तुम्हें वो बहोत ही मिस कर रही थी, मम्मी"
शीला: "पीयूष को समझना चाहिए.. पैसा ही सब कुछ नहीं होता.. पुरुषों को अपने काम और गृहस्थी.. दोनों के बीच संतुलन बनाकर रखना आना चाहिए.. अब मेरी ही बात कर.. तेरे पापा विदेश थे तब मैं भी यहाँ कितना बोर होती रहती थी अकेले अकेले.. !! और कविता का बोर होना भी जायज है.. घर की चार दीवारों के बीच पूरा दिन बैठकर कोई भी तंग आ जाएगा.. !! और जब पति को तुम्हारे सामने देखने का भी टाइम न हो तो पत्नी बेचारी क्या करेगी??"
मदन: "बात तो तेरी सही है शीला.. पर आज कल की पत्नियाँ और बच्चों की जरूरतें इतनी बढ़ चुकी है की उनके खर्चों को पूरा करने के लिए मर्दों को अपनी क्षमता से भी दोगुना काम करना पड़ता है.. उसके ऊपर भी चौबीस घंटों मे अड़तालीस घंटों का काम खत्म करने का दबाव हरपल रहता है.. ये भी हमें भूलना नहीं चाहिए.. मैं तेरी उस बात से सहमत हूँ की पुरुष को दोनों तरफ ठीक से बेलेन्स बनाना आना चाहिए.. पर कहना बड़ा ही आसान है.. अगर पीयूष अपना आधा ध्यान कविता को देता. तो हो सकता है की अब तक सुबोधकांत का पूरा बिजनेस ही ठप्प हो चुका होता.. क्यों की अगर किसी काम को करने मे आप अपना १०० प्रतिशत ध्यान और प्रयास नहीं देते है.. तो आप कभी भी सफल नहीं हो पाएंगे" मदन ने पुरुषों का पक्ष रखते हुए कहा
वैशाली: "फिर तो पापा.. मर्दों को अपना १०० प्रतिशत ध्यान अपनी पत्नी को ही देना चाहिए.. क्योंकि अगर व्यापार मे घाटा हो तो उसकी भरपाई हो सकती है.. लेकिन अगर पत्नी छोड़कर भाग गई तो कभी वापिस लौटकर नहीं आएगी" अपनी बात पर खुद ही ठहाका लगाकर हंसने लगी वैशाली
खिलखिलाकर हंस रही वैशाली को देखकर.. मदन और शीला को बहोत अच्छा लगा.. पिंटू के संसर्ग मे आकर वैशाली कितना खुश लग रही थी..
वैशाली का साथ देते हुए उसकी बात पर शीला भी हंसने लगी..
वैशाली उठकर अपने कमरे मे चली गई..
शीला ने मदन के करीब आकर उसके कान मे कहा "एक रात के लिए बीवी भी छोड़कर भाग जा सकती है.. अगर उसका ध्यान ठीक से ना रखो तो.. समझे मिस्टर बेवकूफ.. !!"
मदन ने हँसते हँसते कहा "असन्तुष्ट पत्नी.. घर पर बैठे बैठे रोज नए लंडों से चुदवाये.. उससे तो यही बेहतर होगा की वो किसी एक के साथ.. एक रात के लिए भाग जाए.. हाहाहाहाहा.. पति विदेश गया हो तब.. कभी दूध वाले के साथ तो कभी सब्जी वाले के साथ.. घर पर रंगरेलियाँ मना रही पत्नी से तो अच्छा है की वो किसी के साथ कहीं भाग जाए.. !! कम से कम जिसके साथ भागी है उसे तो वफादार रहेगी.. !!!"
शीला: "अगर पत्नी की इतनी ही चिंता हो तो या तो उसे साथ ले जाना चाहिए.. या फिर घर पर ही गांड चिपकाकर बैठना चाहिए.. मदन, जब हम अपनी मकान मालकिन के बबलों का दूध चूस रहे हो ना तब अपनी बीवी के बबले याद आने चाहिए.. पत्नी बेचारी पति के याद मे उँगलियाँ डाल डालकर दिन गुजार रही हो और पति वहाँ विदेश मे.. गोरी राँडों के बबलों से दूध चूस रहा हो.. ठीक तो ये भी नहीं है.. !!"
मदन ने आखिर हथियार डाल दीये.. शीला से बहस मे जीतना नामुमकिन था
मदन: "बस भी कर शीला.. अब मैं तुझे छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला.. !!"
तब तक वैशाली कपड़े बदल कर अपने कमरे से बाहर आ गई थी
शीला: "आज ऑफिस नहीं जाना है बेटा?"
"नहीं मम्मी.. पिंटू एक दिन के लिए अपने घर ही रुक गया है.. उसके बगैर ऑफिस मे दिल नहीं लगेगा.. सोचा मैं भी आज छुट्टी इन्जॉय कर लू"
"ठीक है बेटा.. ये बता.. पिंटू के साथ तेरा कैसा चल रहा है? मेरा मतलब है कितना आगे बढ़े हो?? शादी करने के बारे मे कुछ सोचा भी है या नहीं?" मदन के अंदर का जिम्मेदारी भरा पिता बोल पड़ा
वैशाली: "दरअसल, पिंटू वही बात करने के लिए घर पर रुक गया है.. पिंटू का परिवार थोड़ा सा रूढ़िवादी है.. उसका कहना है की एक तलाकशुदा लड़की से शादी करने के लिए उसके परिवार को मनाना कठिन होगा "कहते हुए वैशाली गंभीर हो गई
शीला के चेहरे पर भी चिंता की शिकन आ गई.. मदन ने खड़े होकर वैशाली के कंधे पर हाथ रख दिया और बोला "देख बेटा.. अगर पिंटू के परिवार वाले नहीं माने.. तो तुझे वास्तविकता का स्वीकार करना ही होगा.. तेरा तलाक हो चुका है और पिंटू अभी कुंवारा है.. कोई भी माँ बाप अपने कुँवारे बेटे की शादी किसी तलाकशुदा लड़की से नहीं करना चाहेंगे.. अगर पिंटू का प्यार सच्चा होगा तो वो अपने परिवार के सामने अड़ग रहकर अपना पक्ष रखेगा तो मुझे लगता है की उसके परिवार वालों को मानना ही होगा.. हम तो बस ईश्वर से प्रार्थना कर सकते है की वो सब को सद्बुद्धि दे और तुझे अपनी पसंद का जीवनसाथी मिल जाए.. मान लो की अगर ऐसा नहीं भी होता.. तो हमें किसी और की तलाश करनी होगी.. पर तुम निराश मत होना बेटा.. याद रखना.. कुछ भी हो.. तेरे ये माँ-बाप हमेशा तेरे साथ खड़े रहेंगे" कहते हुए मदन की आँखें नम हो गई
अपनी बेटी को वास्तविकता का ज्ञान देना हर पिता का फर्ज होता है..
वैशाली की आँखों से आँसू बहने लगे.. पिंटू को खो देने का डर उसकी आँखों से साफ झलक रहा था.. उसे इस हाल मे देख शीला और मदन दोनों बेचैन हो गए.. जब खुद पर कंट्रोल न रहा तब वैशाली दौड़कर अपने कमरे मे चली गई और दरवाजा बंद कर दिया.. शीला और मदन दोनों समझ गए की अपने माँ-बाप से अपने आंसुओं को छुपाने के लिए वो अंदर चली गई थी.. वैसे सेंकड़ों किलोमीटर का अंतर भी क्यों न हो.. बेटी के आँसू तो माँ और बाप कहीं भी बैठे बैठे भांप लेते है.. मदन सब कुछ बर्दाश्त कर सकता था पर अपनी बेटी को रोते हुए नहीं देख सकता था.. और अब तक वैशाली ने बहोत दुख सहे थे.. और वो जरा भी नहीं चाहता था की वैशाली और दुखी हो.. !! सख्त और कठोर बापों को भी मैंने अपनी बेटी की जुदाई के गम मे छोटे बच्चों की तरह रोते हुए देखा है..
जब मदन से और बर्दाश्त नहीं हुआ तब उसने शीला से कहा "मैं थोड़ी देर मे आ रहा हूँ"
कहते हुए वो घर से बाहर निकल गया.. और फिर एक कोने मे खड़े रहकर बहोत रोया.. कुछ देर तक रोने के बाद दिल हल्का हो गया.. पास की दुकान से बिसलेरी की बोतल लेकर उसने अपना चेहरा धोया और ठंडा पानी पिया..
थोड़ा सा सामान्य होने के बाद, मदन ने पिंटू को फोन लगाया.. और पिंटू से उसके पिता के बारे मे.. उनके स्वभाव.. उनके कामकाज के बारे मे सारी जानकारी ले ली.. पिंटू ने भी बड़े उत्साह से उसे सब कुछ बताया..
पिंटू के पापा एक शिक्षक थे.. पिंटू ने कहा की उसने वैशाली के बारे मे घर पर बता दिया था.. उसकी मम्मी तो तैयार थी पर उसके पापा को समाज का डर सता रहा था..
पिंटू: "मुझे लगता है की मैं और मम्मी मिलकर पापा को मना लेंगे.. क्योंकी घर मे चलती तो आखिर मेरी मम्मी की ही है"
मदन: "ये तो कहानी घर घर की है.. दुनिया भर के अधिकतर घरों मे यही होता है.. पिंटू.. बेटा अगर तुझे एतराज न हो तो क्या मैं तेरे पापा से एक बार बात कर सकता हूँ?"
पिंटू: "मुझे क्यूँ एतराज होगा भला.. !! पर मैं चाहता हूँ की एक बार पापा को मना लूँ.. फिर आप बात कीजिए.. मैं नहीं चाहता की वो बेवजह आपका कोई इंसल्ट कर दे.. !!"
पिंटू की समझदारी देखकर मदन को बहुत ही अच्छा लगा.. उसने कहा "ओके बेटा.. जैसा तुम कहो.. वैसे कब तक फैसला आने की संभावना है?"
पिंटू: "अंकल, मम्मी ने कहा ही की वो आज रात को ही पापा से बात करेगी.. सुबह तक तो पता चला जाएगा.. और मुझे आशा है की फैसला हमारे पक्ष मे ही आएगा"
मदन ने फोन रख दिया.. उस पूरे दिन मदन वैशाली के भविष्य के बारे मे चिंता करता रहा.. पिंटू के साथ फोन पर हुई बातचीत के बारे मे मदन ने शीला या वैशाली को कुछ नहीं बताया.. होता कुछ नहीं और बेकार मे वह दोनों भी पूरा दिन टेंशन लेकर घूमती रहती..
दूसरी सुबह उठाते ही मदन ने पिंटू को फोन किया
पिंटू: "सॉरी अंकल.. पापा नहीं मान रहे.. उनका कहना है की एक तलाकशुदा लड़की उनकी बहु बनकर आई तो उनकी नाक कट जाएगी.. लोग कहेंगे की इकलौते लड़के के लिए एक कुंवारी लड़की भी नहीं ढूंढ पाए"
शीला और वैशाली सुन न ले इसलिए मदन ने तभी फोन काट दिया..
वैशाली के ऑफिस जाने के बाद.. मदन ने पिंटू के पापा को कॉल किया.. और वैशाली के भूतकाल.. उसकी निर्दोषता की अच्छी वकालत करते हुए.. उन्हें सारी हकीकत बता दी.. काफी समझाने के बाद पिंटू के पापा मान गए.. और बच्चों की खुशी के खातिर हाँ कह दी.. !! पिंटू की मम्मी का भी यही मानना था की उनके बेटे को उसी से ब्याह करना चाहिए जिससे वो प्यार करता हो.. !!
वैशाली और पिंटू के जीवन मे खुशी का एक स्थायी रंग जुडने वाला था.. जो आखिरी समस्या थी वह अब हल होती नजर आ रही थी
पर पिंटू के पापा ने एक शर्त रखी थी.. वह चाहते थे की रिश्ता तय करने से पहले, वैशाली एक महीने के लिए उनके घर आकर रहें.. जिससे को उनके परिवार के लोग वैशाली के स्वभाव, आदतों और चारित्र से भलीभाँति परिचित हो सके.. साथ ही वैशाली भी उनके परिवार के सदस्यों को अच्छी तरह पहचान ले..
उनकी यह शर्त शीला और मदन को बड़ी अटपटी सी लगी.. लेकिन आखिर वो भी इस बात के लिए मान ही गए..
इस शर्त को पूरा करने के लिए अब वैशाली को राजेश सर की ऑफिस वाली नौकरी छोड़नी पड़ेगी.. एक ही निर्णय से कितने सारे बदलाव आने लगे थे.. !! जीवन के कुछ परिवर्तन ऐसे होते है जिन्हें स्वीकार करने के अलावा कोई चारा नहीं होता.. !! वैशाली ने बड़े ही दुख के साथ राजेश को अपना त्यागपत्र सौंप दिया और कुछ दिनों के बाद पिंटू के घर जाने की घड़ी आ गई
शीला और मदन के लिए तो एक ही जनम मे.. एक बेटी को दूसरी बार विदा करने का मौका आया था.. जब पिंटू वैशाली को लेने आया तब वैशाली शीला से लिपट कर खूब रोई.. मदन के कंधे पर आँसू बहाए.. पिंटू के काफी प्रयासों के बाद वैशाली आखिर शांत हुई और उसके साथ चली गई
वैशाली के जाते ही.. शीला और मदन का घर एक अजीब से खलिश से भर गया.. जैसे उनके बागीचे की इकलौती चिड़िया जा चुकी हो.. !!
बेटी को विदा करने के बाद.. घर शमशान सा प्रतीत होता है.. जन्म से लेकर जवानी तक.. जिस घर मे उस लड़की की परवरिश हुई हो.. जिसके चहकने से पूरा घर हर पल गूँजता रहता हो.. वह बेटी जब घर से चली जाए.. तब घर के सदस्यों के साथ साथ घर की दीवारें भी रो पड़ती है.. !! यह दर्द तो वही जानता है जिसने महसूस किया हो.. !!
मदन और शीला बिल्कुल अकेले हो गए.. उन्हें सामान्य होने मे कई दिन लग गए..
कविता दिन मे एक-दो बार वैशाली को फोन करती और उसके हाल पूछती.. पीयूष और कविता हफ्ते मे एक बार पिंटू के घर आते.. और दोनों जोड़ें मिलकर साथ मे बहोत मजे करते.. वैशाली के आने से कविता के जीवन का खालीपन थोड़ा सा कम होने लगा था.. पीयूष पूरा दिन ऑफिस रहता.. हाँ मौसम और फाल्गुनी की कंपनी मिलती.. पर वो दोनों भी अपनी कॉलेज के आखिरी साल मे काफी बीजी रहते थे.. वैशाली के आने से कविता को एक साथ मिल गया
पीयूष को आखिर उस अमरीकन कंपनी का ऑर्डर मिल ही गया.. पर उसके कारण तो पीयूष की व्यस्तता और बढ़ गई.. !!
अगला अपडेट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें