Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 19 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

ऐसा कह के बीएड के पास गया और हाट मई का प्लेट बीएड पाई रख दिया और वह पड़ा उस लड़की का फोटो उठा लिया..

मेमसाब ये मेरा पहला प्यार.. यही मेरा सबसे बड़ा दर्द है.. दारू तो बहाना है ये दर्द बुलाने का..

तब आरती उसके पास जेक उसके हाट से फोटो लेते है और फोटो देखते है..

काफी खूबसूरत लड़की थी वो ..

उस लड़की को देखते हुई कहती है ..





कोण है ये

तन्वी

और उठ खड़ा hua..tab आरती उसे देखने लगी..





“मेमसाब .…मुझे उसकी यद् आती है…..”

कुछ होश और कुछ बेहोशी के आलम में नवाज़ ने कहा और आरती के गले से लगकर बेतहाशा रोने laga…use तो ये भी खबर नहीं थी की आरती को तन्वी के बारे में पता है भी या नहीं ……

नवाज़ के गले लगने से आरती के शरीर में जैसे झुरझुरी सी दौड़ gyi…….wo मनो बहुत बन गयी… फिर भी उसने कहा..

“क्या कर रहे हो तुम ”

आरती ने धीरे से बोलै पर मनो नवाज़ ने सुना hi nahi..usne आरती को नहीं छोरा..

आरती को समझ में नहीं आ रहा था की वो नवाज़ से क्या बोले …….वो उससे दूर हेट या वैसे hi कड़ी रहे उसे कुछ समाज मई नहीं आ रहा tha..uske छथि पर नवाज़ के छथि का प्रेशर बाद रहा था..

नवाज़ प्ल्ज़ …रुको

आरती अब कुछ नहीं कर पा रही थी…..

नवाज़ प्ल्ज़ .. रुको..

पर नवाज़ ने रोना नहीं छोरा.. तब उसने नवाज़ को रोने diya…..wo चाहती थी की वो रो ले और इस वजह से उसके दिल का दर्द शायद कुछ काम हो जाये,………..

कुछ पल वो वैसे hi कड़ी रही और फिर चुप चाप उसे अपने कंधे पर टिकाये हुई hi उसके सर पर हाथ रखती है …..

“नवाज़ चुप हो जाओ तुम …plz…..tumko बहुत मजबूत बनाना hai….bahut आगे बढ़ना है …..और वैसे भी तुम बहुत मज़बूत हो ”

“नहीं हु मई मजबूत …….. मुझे कुछ नहीं चाहिए …………मुझे नहीं बढ़ाना है आगे.. …मुझे बस मेरी तन्वी chaiye…mujhe मेरी तन्वी ला दो memsaab…plz…..bolo न उसे की वो आ जाये ….. मेरे पास.. प्ल्ज़….”

आरती के कंधो से चिपक के वो किसी बच्चे की तरह बिलख रहा था…..

तब हस्ते हुई आरती कहते है

मई भला तुम्हारी आरती.. सॉरी सॉरी.. तन्वी को कैसे ला सकती हु

क्यों

मई तो उसे जानती भी नहीं वो कहा रहते है वो तो मुझे पता भी नहीं

मई एड्रेस दे देता हु उसका

तब नवाज़ के चहरे को उप्पर उतके उसे कहते है.. थोड़ा स्माइल करते हुई

एड्रेस देने से क्या होगा नवाज़.. अगर मई उससे मिलाने गयी और मैंने उससे कहा की तुम तुम्हारा नवाज़ याद कर रहा hai..tum चलो उसके पास तो क्या वो आएगी क्या

हाँ

क्यों

क्यों की वो आप जैसे hi सुन्दर है..

तब हस्ते हुई आरती कहती है

इसमे मेरे या उसके सुंदरता कहा आ गयी..

ये सुन्दर लड़की दूसरे सुन्दर लड़की की बात कैसे ताल सकती है

तब जरा शर्माके कहती है





कुछ भी नवाज़.. ऐसा भी कब होता है क्या..

तब फिर से बुरा मू करके नवाज़ कहता है

फिर कैसे होगा

एक बात मुझे बताओ

पूछिए

तुम उसे प्यार करते हो वो तो पता है पर क्या वो भी करती है क्या प्यार तुमसे

हाँ पर लगता है अब नहीं लगता

और वो भला तुम क्यों लगता है

जबसे उसकी शादी हो गयी है तब से उसे क्या हो गया है पता नहीं मेमसाब.. वो पूरी बदल गयी है.. अब न वो मुझसे मिलते है और न hi कॉल करती है और न मैसेज.. और मई करता हु तो रिप्लाई भी नहीं देती

नवाज़ तुम मर्द लोग समजते नहीं पर औरत की जिंदगी बदल जाते है शादी के बाद

वो मई जनता हु पर

तब उसको देखते हुई कहते है





पर भीड़ कुछ नहीं तुम उसे भूलना पड़ेगा जैसे उसने तुम भुलाया

पर मेमसाब मई उसे भूल नहीं सकता न मेमसाब

मई समाज सकती हु पर तुम उसे भूलना होगा

कोशिश कर रहा हु .. सिर्फ यही सहारा है बोल के दारू के बोतल को हाथ मई लेता है.. जो वह नीचे राखी थी

कोशिश करो नवाज़ पर इसका मतलब ये तो नहीं की आपने प्यार भुलाने के लिए तुम रोज दारू पिओगे..

तो क्या करू मेमसाब

तब थोड़ा स्माइल करते हुई उसके पास गयी और उसको कहने लगी..

नवाज़ दुनिया बहुत खूबसूरत है और ज़िनदगी उस से भी ख़ूबसूरत ………ज़िन्दगी में हर रंग होना चाहिए और तुम्हारे ज़िन्दगी में अब काळा रंगो का वक़्त ख़त्म हो gya…….nawaz तुम बहुत अच्छे हो और तुम्हारे लिए खुदा ने कुछ बहुत अच्छा सोचा होगा ……….. तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई ऐसा आएगा जो इतनी खुसी देगा की तुम अपने सरे ग़म भूल jaoge…dekh लेना….

ये आरती ने कहा.. ….और आखिरी बात पर न चाहते हुए भी वो शर्मा गयी और उसके लाल गाल गुलाबी हो गए.

आप बहुत अच्छी हो.. इसलिए आप ऐसा सोच रही हो.. सब लोग ऐसा नहीं सोचते..

तब नखरे से कहती है..





फिर तुम भी ऐसे लोंगो के बारे मई मत सोचो

ऐसा कहके उसके हाट से दारू की बोतल लेते है..

अब दारू नहीं खाना खाओ

थोड़ा पिने दो न

ऐसा कह के उसके हाथ से दारू की बोतल छीनने की कोशिश करता है

अभी दारू नहीं खाना खाओ

मेरा मैं नहीं है

मन नहीं हुआ तो भी खाना पड़ेगा

ऐसा बोल के दारू की बोतल साइड मई रख के बीएड पाई प्लेट जो थी खाने की वो आपने हाट मई लेते है और पलट के उसके और देखती हुई स्माइल करते हुई कहती है..





अब खिलाना भी पड़ेगा क्या मुझे तुमको

ऐसा कहते हुई आरती ने अपने हाथ में एक निवाला उठाया और उसके होठो की और बढ़ा दिया …….. नवाज़ ने मुँह नहीं खोला….

“plzzzzzzzzzzz”

आरती ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा. तब नवाज़ ने चुपचाप मू खोला और उसके हाथ से निवाला खा लिया .तब बुरा सा मू करता है..

तब आरती कहती है

क्या हुआ ...सब्जी तीखी बानी है क्या ..

नहीं तो

तो फिर बुरा मू क्यों बनाया

नहीं वो तो ऐसे hi हुआ

तब दूसरा निवाला उसको खिलते है.. तब वो इस बार पहले से बुरा मू बनता है..

क्या हुआ मेरा खाना पसंद नहीं आया क्या तुम

नहीं न मेमसाब.. आप का खाना तो आप के जैसे hi मस्त होता है.

अच्छा फिर मू थेड़ा क्यों कर रहे हो

वो न इस बार लगता है नमक ज्यादा हो गया है

अच्छा नमक ज्यादा हुआ.. अरविन्द ने तो कुछ नहीं खाया

क्या साहब ने यही खाना खाया क्या

हाँ.. नहीं तो क्या मई क्या तुम्हारे लिए अलग थोड़ा hi बनाउंगी.. मुझे क्या ऐसा समझ रखा है क्या

नहीं न मेमसाब.. मुझे पता है आप मालिक और नौकर मई फरक नहीं करते हो

पता है तो बोलै क्यों

आप ने कहा न साहब ने कुछ नहीं कहा

हाँ उनोने कुछ नहीं कहा पर तुम कह रहे हो नमक ज्यादा हुआ है

तो क्या साहब जी को आपने आपने हटो से खिलाया क्या

नहीं तो

कभी भी

कभी भी नहीं ..

तब नवाज़ खुश होता है

क्यों

लगता है ये मौका मुझे hi मिला है

हाँ

साहब जी को नमक नहीं लगा और मुझे लगा तो लग रहा है फरक आपके हटो मई है

तब उसके सर पाई मरते है और बड़े अड्डा के साथ कहते है





चल हटो बदमाश

आप को जूथ लग रहा है

नहीं तो

फिर मुज पर विश्वास नहीं है क्या

नहीं ये बात नहीं है

तो टेस्ट कर लो

नहीं कर सकती

क्यों

मेरा फ़ास्ट है

तो क्या आपने खाना नहीं खाया क्या आज

नहीं

अब तो 12 बज गए है.. दिन ख़तम हुआ.. अब दूसरा दिन सुरु हुआ है..

तो

फ़ास्ट चोर दो

ऐसा कह के एक निवाला उसके मू के पास नवाज़ ले जाने लगता है.. तब घूम के कहती है..





नहीं नवाज़ मई ये नहीं कर सकती

फिर मुझे तो खिलाओ

तब घूम के कहती है





क्या तुम नमक का खाना खाओगे

तो वो बोलै

अब हमारी प्यारी मेमसाब ने बनाया है तो हमें खाना पड़ेगा hi न ..

आरती ब्लश करने लगी "प्यारी मेमसाब" सुनकर और फिर कहती है

सॉरी..

किस बात के लिए…………

वो नमक के लिए

कुछ नहीं होगा खिलाओ मुझे .. आप के लिए हम ज़हर hi खा लेंगे नमक क्या चीज़ है

तब उसे आरती खाना खिलने लगी.. कुछ निवाले hi खाये थे उसने की उसे जोर की हिचकी आयी और आरती ने पानी का गिलास उठाकर उसके होठो से लगा दिया ………….

नवाज़ ने दो घूँट पानी पिया और उतने hi आंसू उसकी आँखों से निकल गया………

तब आरती कहती है

अब क्या हुआ

मुझे तन्वी की यद् आ गयी …इतनी केयर तो केवल तन्वी hi करती थी मेरी …………….

तब स्माइल करते हुई कहते है





वैसे ये तन्वी तुम मिली कहा

शहर मई

शहर मई तुम क्या कर रहे थे..

उसको खाना खिलते हुई कहा

दोस्तों के साथ शादी मई गया था

वैसे कितने दिनों तक चला ये तुम्हारा

2-2. 5 साल

फिर तो सब कुछ किया होगा उसके साथ

हाँ वो भी क्या पूछने की बात है क्या मेमसाब

फिर उसके बाद नीता या वंदना

वंदना

और फिर नीता न

हाँ ..

तुम्हारे तो मज़े है

हाँ

नीता के बाद और कोई है

नीता के बाद न

कह के चुप हो गया..

आरती ने भी कुछ नहीं कहा और प्लेट ली और दरवाज़े की और बढ़ी …

मेमसाब

नवाज़ की आवाज़ उसके कानो में padi..wo फिर पीछे मुड़ी नवाज़ की और देखने लगी ………….





फिर नवाज़ उसके पास जाते है.. उसके गले लग के कहती है

मेमसाब आप बहुत अच्छी हो

आरती मुस्कुरा देते है.. पर कहते कुछ नहीं

थैंक यू मेरी प्यारी मेमसाब

तब स्माइल करते हुई कहती है

“सुबह बात करेंगे””

उस ने ये कहा और बहार निकल गयी………
 
फिर वो नवाज़ से वापिस आती है मैं दूर के पास तब उसे लगता है कोई तो आया है नवाज़ के पास . . उसके रूम के पास.. नवाज़ के रूम में .. इसलिए वो पीछे मुद के देखते है





तो उसे दिख जाता है की कोई लड़की नवाज़ के रूम के अंदर जा रही है.. उसे समाज नहीं आ रहा था की इस वक़्त कोण लड़की नवाज़ को मिलाने आ सकती है और वो भी उसके खुद के बंगला मई.. वो पूरी तरह से कन्फ्यूज्ड हो गयी थी.. ये कोण है ये सोचकर..

इसलिए वो फिर से नवाज़ के रूम के पास जाते है .. वह पाई जब वो गयी तब दूर अंदर से बंद था .. उसे कुछ दिख नहीं रहा था .. कोई विंडो नहीं था उस रूम को .. इसलिए उसे सिर्फ आवाज़ सुनाई दे रही थी .. उसे कोई समाज मई नहीं आ रहा था की वो क्या करे क्या न करे . . फिर वो आवाज़ सुनाने लगी तब थोड़ी देर बाद उसे पता चला की वो वंदना है .. उसके आवाज़ se..aur उनके बातचीत से..

ायंदर से उसे वंदना और नवाज़ का डायलाग सुनाये दे रहा था

मैंने बोलै तह न दारू मत पिऊ .. आज मई आने वाली हु

ारे पिने नहीं वाला था पर क्या करू दोस्तों ने जबरदस्ती पिलाये

ऐसे भी क्या दोस्त है जो मेरे से ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है

तेरे से ज्यादा कोई इम्पोर्टेन्ट नहीं है मेरी रानी

ऐसा बोल के उसको जबरदस्ती किश करने लगा





दारू की बदबू आ रही है किश मत karo..kiss मत करो

तब ये सुन के आरती को हसी आने लगी..

फिर आरती सोकहने लगी .. इनका शो तो दिख भी नहीं रहा है.. विंडो है hi नहीं यहाँ

फिर चेहरे पर स्माइल लेट हुई कहते है

ये तो अच्छा hi है फ्यूचर के लिए

और शर्मा गयी

अंदर नवाज़ वंदना को किश करने लगा..





अब किश मत करो.. चिकेन बटर लाये हु वो पहले खा लो

तब आरती कहते है

की काया गन्दा खाना कहते है ये लोग

अंदर नवाज़ वंदना के कपडे जोर से निकलने लगा..

कपडे फैट जायेगे.. धीरे से निकल न .. कपडे फैट जायेगे तो घर कैसे जाउंगी

नंगी जा

नंगी जाउंगी तो पापा आने hi नहीं देंगे .. अभी कैसे तो आती हु मम्मी पापा पहले hi परमिशन नहीं देते कैसे तो बताके आये हु. .

तब एआरटी कहते है.. विंडो नहीं है तो क्या दूर मई से देखु क्या.. 2 दूर मई गैप होगा क्या.. यही सोचकर वो दूर के पास चली गयी और अंदर झांकने की उसने कोशिश की..





पर उसे कुछ नहीं दिखा.. सिर्फ उन्दोनो की कन्वर्सेशन उसे सुनाई दे रहा तह.. उनकी बातचीत सुनके आरती को मज़ा आ रहा था.. और उसी वजह से अंदर जो चल रहा था वो देखने का उसका मैं हो रहा था पर अब उसके पास कोई ऑप्शन नहीं था..
 
वंदना- अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह.....

उसके छूट के अंदर नवाज़ का लुंड जाते hi वंदना की सिसक निकली..

आहहहआ.. धीरे न बाबा.. मई कहा भागे जा रही हु..

फिर कहते हो पापा डांटेंगे.. मुझे जाना है..

नहीं जाउंगी मेरे राजा.. तुम चोर कर.. तुम्हारी वंदु.. रात भर यही तुम्हारे पास रहेंगे.. खूब मज़े कर लो..

ये सुन के आरती चहरे पर स्माइल लेट हुई कहती है..





वंदु… बड़ा प्यारा नाम रखा है इसने इस छिपकली का

अंदर नवाज़ वंदना को छोड़ रहा tha....wo दोनों बीएड पाई थे.. वंदना निचे लेती हुवी थी और नवाज़ उसपर हावी tha...aur फुल फाॅर्स मैं उसकी चुदाई कर रहा tha....thap थप थप थप की मधुर आवाज़े आ रही थी..

अंदर से आने वाली थप थप थप ठप्प की आवाज़ें सुनकर आरती मैं मई कहती है

लगता है इस छिपकली और नवाज़ का सेक्स सुरु हो गया है.. बीएड का भी आवाज़ आ रहा है और ये थप थप का आवाज़ भी आ रहा है.. कितने जोर जोर से सेक्स कर रहा !! ो भी इतने दारू पिने के बाद भी … ये तो बोल रही की दारू की बॉस आ रही है किश मत करो और अब बड़ी बड़ी आवाज़े निकल रही है.. इस छिपकली की आवाज़ों से तो लग रहा है जैसे इससे बहुत मज़ा ारः है....

आआह्ह्ह्हह्ह एआईसीई हीई ऑर्डर जोर से छोड़ मेरे राजा... ओह्ह्ह्हह्हू माआआ तेज़ आअह्ह्ह मेरे राजा तेरी वंदु तुजसे यही चाहती है.. उउउउउफफ्फ्फ्फ़ ाऐसे hi जोरर जोरर से छोड़ड़ड़ मुझीऐ..

aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh .. वाँदूऊ... मीररी रायअन्नीई

तीरररईईई छुट्ट्ट्ट्ट आआअह्ह्ह्हह रणीय बहुत मास्स्सत्तत हअआइई

एई मुझे क्या होऊ रहा हाइइइइ uuuuuuffffffffffffffaahhh ाआईएससीई खास के दबाए मीररिई चुकी कोऊ आआह्ह्ह्हह्ह

आआआउउउउउउउइइइइइइइइमममममाऊऊह्ह्हह्ह्ह्हम्मम्मअअअअअअ कीइतततंत्रा मजा ाअरहा है आआह्ह्ह्हह अआइईसीई hhhhmmmmmmmmmm

आआअह्हह्ह्ह्हह नवाज़ मीररी राजा मीटीए आआआईएए wwwaaallliiiiiiiiii हुउउउउउउ uuuuffffffffff

करते हुई वंदना झाड़ गयी..

गाढा है तेरा रास और गरम भी

तभी नवाज़ भी झाड़ गया और झड़ते हुई कहता है

ोुह्ह्हह्ह्ह्ह आआह्ह्ह आज तूने दिल खुश कर दिया वंदु मेरा .. आज से जब भी तेरे मैं करे छुड़ाने को आ जाना..

तब उसके सर को मरते है

पागल कही के

क्यों मैंने ऐसे क्या कह दिया

तब वंदना शरमाते हुई कहते है..

कुछ नहीं

फिर

फिर कुछ नहीं आज से में तेरी हुई ... तुम्हारा जब भी मैं करे बुला लेना

आएंगे क्या

आज नहीं आये क्या??

हाँ आये तो सही पर ऐसे रोज आएंगे क्या

तब उसके सर को मरते है..

मई क्या कोई सेक्स तोय हु क्या जो रोज करोगे

ये सब सुन के आरती का दिल ज़ोरों से धड़कने लगता है…

आज तक अरविन्द और उसने जितने बार भी सेक्स किया था उसने कभी वंदना की तरह आवाजे नहीं निकली थी .. ये सोचते hi आरती को अपनी पंतय में गीलापन महसूस होने लगता है.... वो हैरान थी खुद पर के सिर्फ सोचने पर ऐसे कैसे होरहा tha....arvind के साथ सेक्स करते वक़्त भी मुश्किल से ऐसा होता hai......phir उसका हाथ उसके साड़ी के उप्पर पहुँच जाता है.. तब उसे बड़ा झटका लगता है.. और वो खुद को कहती है..

हे भगवन मेरी तो पेंटी गीली हो gayi..ye भी उस कमीने के बारे मई सोचते और सुनाने के कारन.. देखा तो कुछ भी नहीं पर ये हुआ क्यों..

उसकी दिल की धड़कने तेज़ थी इस waqt....jo भी उसने इस वक़्त सुना था और अब जो वो सोच रही थी उसके बाद उसकी जिस्म में एक अजीब सा नशा चढ़ गया था....

तभी वंदना कहती है

लगता है नवाज़ मेरा पर्स रूम के बहार hi रह गया है

तब आरती दूर के साइड मई देखती है तो वह पर्स था

रहने दो न इस वक़्त कोण लेगा और वैसे भी इस हवेली मई मेरे चीज़ को कोई हाट नहीं लगता

तब आरती कहती है

कह तो ऐसा रहा है जैसे ये हवेली इस के बाप की hi है..

तब वंदना कहते है

तुम क्या इस हवेली के मालिक हो क्या

ऐसा hi संजो

मतलब

मतलब कुछ नहीं रानी

नवाज़ के ऐसे कहने से आरती स्माइल करती है





मई लेके आती हु

रहने दो न

नहीं बाबा पापा और मम्मी का कॉल आया तो

तब आरती सोचती है

लगता है ये छिपकली बहार आ रही है

ऐसा कहते हुई आरती झट से अंदर भाग जाती hai....aur सीधा बैडरूम में जाकर दूर बंद करके उसके पीछे रुक कर अपनी फूली हुवी सांसों पर काबू पाने लगती है....





आरती का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था.. ऐसा उसके साथ पहली बार हो रहा था उसके पूरी ज़िन्दगी men…wo दूर से सात के कड़ी थी.. वो भागते हुई आ रही थी.. उस वजह से उसकी साँसे जोर जोर से चल रही थी. तभी उसकी नज़र सामने गयी.. सामने उसका पति सो रहा था.





आपने पति को सोते हुई देखकर कहती है..

ये कितने शांति से सो रहे है.. दुनिया से बेखबर.. और मई उनकी पत्नी होते हुई उस कमीने नौकर से मिलाने गयी. उस पक्कड़ को मैंने खाना खिलाया.. कभी अरविन्द जी आप को आपने हटो से मैंने खाना नहीं खिलाया और उस कमीने को खिलाया.. उसदिन वो कमीना मुझे नहलाने को कह रहा था .. अच्छा हुआ मैंने नहीं नहलाया.. आप को न कभी मैंने आपने हटो से न खाना खिलाया और न hi नहलाया.. पर आप ने भी तो कभी नहीं कहा न.. कहते तो मई करती न.. और आप ने क्यों नहीं कहा की खाने मई नमक है.. वो तो कह रहा था .. जाने दो मुझे क्या करना है.. मैंने तो इतना अच्छा खाना बनाया और उसको भी वो अच्छा नहीं कह रहा है तो आगे से इसके लिए खाना नहीं बनाउंगी..

पर खाना तो बनाना पड़ेगा hi न.. नहीं तो पापाजी को क्या कहूँगी..

हाँ वो बात तो है hi..

बूत कमीना कितना चालू है.. अभी 10 मिनट पहले कह रहा था तन्वी मेरा पहला प्यार है.. मई उसके बगैर रह नहीं सकता और अब उस छिपकली के साथ सेक्स कर रहा था..

जाने दो मुझे क्या करना है.. इस कमीने के वजह से अब मुझे रात के इस वक़्त नहाना पड़ेगा..





ऐसा कहते hi उसके चहरे पर स्माइल आ जाती है
 
जाने दो मुझे क्या करना है.. इस कमीने के वजह से अब मुझे रात के इस वक़्त नहाना पड़ेगा..

ऐसा कहते hi उसके चहरे पर स्माइल आ जाती hai..Wo फिर बाथरूम मई चली गयी..

बाथरूम मई जाने के बाद वो मिरर के सामने कड़ी हो जाती hai..aur मिरर मई देखते हुई कुछ सोचते है..





और नहाने के लिए आपने साड़ी निकलने लगती है तब उसे नवाज़ जब वंदना की चुदाई कर रहा थे तबका सन याद अत hai...kaise वंदना चिल्ला रही थी.. उसकी आवाज़े आरती को सुनाये देने लगी .. तब वो कहती है..

...चाहे कितना भी पिया क्यों न हो पर उस छिपकली को नवाज़ पूरा मज़ा दे रहा था.....

वो सोचने लगी.. वो कितने जोर से सेक्स कर रहा था उस छिपकली के साथ.. उस बीएड की आवाज़े मुझे सुनाये दे रही थी..

ये सोच के वो हैरान थी.. क्यूंकि अरविन्द ने कभी इतने जोर से उसके साथ सेक्स नहीं किया tha..aarti इतना एक्साइट अपनी पूरी शादीशुदा ज़िन्दगी में सेक्स करने पर भी नहीं हुवी थी जितना वो इस वक़्त सिर्फ नवाज़ ने वंदना ने किए हुई चुदाई सुन कर हुई थी....

ऐसा सोचते हुई वो खुद से कहती है..





की मई ये क्या सोच रही हु.. मई भला उस कमीने और अरविन्द जी की कपरिसों कैसे कर सकती हु..

ये कहते हुई वो खुद पर शर्मिंदा होती है..

अरविन्द जी उस कमीने जैसे बिलकुल नहीं है और मई उस छिपकली जैसे बिलकुल नहीं हु..

ये सब सोचते हुई उसे अहसास हो जाता है की उसकी छूट बोहत गीली होचुकी hai.....par उसपर वो ध्यान नहीं देती है और बाथ कर लेती hai.wo बाथ कर के बहार अति है और अलमारी से एक पंतय निकल कर पहन लेती है और फिर एक निघ्त्य भी पहन लेते है और बीएड पर आकर आपने हस्बैंड के बगल मई लेट जाती hai...lekin उसकी नींद कोसों दूर थी बार बार उसकी आँखों के सामने और कानो मई नवाज़ और वंदना की चुदाई का सन ारः था....

वो खुद पर चाहे जितना कण्ट्रोल कर ले लेकिन उसका हाथ गाउन के ऊपर से अपनी पंतय पर पोहंच hi जाता hai....aur वो हल्का हल्का सहलाने लगती hai...pata नहीं क्यों लेकिन उसके अंदर एक नशा सा था इस waqt....aisa उसके साथ इससे पहले कबि नहीं हुवा था....

तब वो आपने हस्बैंड से चिपक जाती है..

अरविन्द.. अरविन्द जी..

हूउउ

अरविन्द नींद मई था..

उठिये न..

सोने दो न आरती.. मुझे सुबह अर्ली मॉर्निंग दिल्ली जाना है..

तब वो गुस्से से आपने हस्बैंड को देखने लगी





आप को मेरे फ़िक्र hi नहीं है..

पर अरविन्द नींद मई था उसने कुछ जवाब नहीं दिया.. तब वो सोचने लगती है..

वो वंदना.. नहीं नहीं छिपकली कितने लकी है .. कितनी खुशनसीब है … उसे प्यार करनेवाला पार्टनर मिला है …और नीता भी .. ऐसा प्यार करने वाला पार्टनर उन मिला है..

तब स्माइल करते हुई कहती है..





चाहे दोनों का पार्टनर एक hi क्यों न हो .. क्या उन पता होगा क्या.. दोनों का पार्टनर एक hi है.. नहीं नहीं नवाज़ बहुत स्मार्ट है.. वो उन्दोनो को कभी पता नहीं लगाने देगा.. एक नौकरानी और एक मुखिया की बेटी.. कमल है.. नवाज़ मिया आप का.. एक hi साथ दो दो को पटाया और साथ मई मुझे कह रहे हो रट रट की मेरा सच्चा प्यार तन्वी है.. फिर इन् दोनों के साथ क्या है तुम्हारा नवाज़ मिया.. सिर्फ सेक्स और हवस.. यही न..

और ये मुझे क्यों बता रहा था और मेरे गले क्यों लग रहा था.. क्या तुम्हारा.. नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता..

आरती होने को तो कुछ भी हो सकता है??

क्या मई उस कमीने का अगला टारगेट हु??

नहीं नहीं मई ऐसा होने नहीं दंगे..

ऐसा कह के आपने हस्बैंड के गाल को किश करते हुई कहते है

मई मेरे इतने प्यारे हस्बैंड को कभी धोका नहीं दे सकती ..

फिर आपने हस्बैंड को गले लग कर कहते है..

अरविन्द जी मई आप को कभी धोका नहीं दूंगी.. और वो भला क्यों दूंगी.. और वो भी उस लौंड़ीभाज के लिए.. हरगिज़ नहीं.. ऐसा क्या है तुम मई नवाज़ मिया जो मेरे हस्बैंड मई नहीं है .. दिखने मई अरविन्द जी आप hi स्मार्ट हो उस नवाज़ से.. हां कहने को थोड़ी बॉडी बनाये है उसने पर उसकी कितने साडी लड़की से अफेयर है.. तन्वी.. वंदना.. नीता.. और भी होगी.. जो मुझे पता नहीं.. ऐसे आदमी को भला मई क्यों चहु.. और दूसरी तरफ मेरे प्यारे पतिदेव.. जो मुझे बताशा प्यार करते है.. कंचन दीदी कह रही थी अरविन्द जी आप का कभी अफेयर नहीं रहा है.. आप का पहला प्यार मई hi हु.. फिर मई ऐसे प्यारे पति को चोर के उस लौंड़ीभाज के पीछे क्यों जाऊ..

पर अरविन्द जी वो नवाज़ है न मुझे भ गया है.. नहीं नहीं भ नहीं गया है पर क्या है न मेरे प्यारे पतिदेव वो जब भी मेरे पास आता है या…

स्माइल करते हुई कहते है..





या मई उसके पास जाती hu..Tab मुझे क्या हो जाता है पता hi नहीं चलता.. वो जो चाहेगा वैसे मई करती हु.. मई खुद को पूरा कण्ट्रोल करने की कोशिश करती हु पर हर बार सक्सेस नहीं हो पति हु.. मेरे प्यारे पतिदेव मई क्या करू अब..

फिर वो कुछ सोच कर कहती है..

मेरे प्यारे पतिदेव इसकी इतनी साडी गर्लफ्रेंड है और हर गर्लफ्रेंड को ये कुश रखता है.. आज का hi देखो न.. आज इसने इअतने साडी दारू पि थी की वो ठीक तरीके से चल भी नहीं प् रहा था.. इसने इतनी पि राखी थी की वो आपने खाना आपने हातो से खा नहीं पा रहा था इस वजह से मैंने उसे खाना खिलाया.. उसके बाद भी इसने कितने जोश मई उस छिपकली के साथ सेक्स किया और वो भी कितनी देर..

और वो शरमाते हुई कहते है..





उसकी तो इसने पूरी तरीके से बजाये आज .. पूछो hi मत आप…

आप ने कभी मुझे.. मेरे नहीं bajaye…yahi मेरे शिकायत ये आप से मेरे प्यारे husband....Kitana जोश है उस कमीने मई पूछो hi मत आप मेरे प्यारे पतिदेव.. आप तो मेरे साथ 2 मिनट भी मुश्किल से करते हैं और कितना धीरे se.....kyun आप मेरे नवाज़ इतने जोश मई मेरे साथ नहीं करते ...अगर करते तो आप की ये प्यारे पत्नी कभी बहकती hi नहीं…

आरती का यूँ अपने पति और नवाज़ को कपड़े करना पहली दरार था उनके रिश्ते मई … जिसका परिणाम ये होनेवाला था की वो धीरे धीरे आपने पति से दूर हो रही थी और नवाज़ के करीब जा रही थी.. आरती अरविन्द और नवाज़ का स्टैमिना कपड़े कर रही थी बिना ये जानेका के इसका असर आगे चलकर कितना बुरा होसकता है....

इतनी नशे मई मेरे प्यारे पतिदेव उसने उस छिपकली की हालत बुरी कर दी तो मनो बिना नशे मई वो क्या कर सकता है.

आरती को पता hi नहीं चलता के ये सब कहते हुई कब उसका हाथ निघ्त्य के ऊपर से अपने पंतय वाले हिस्से पर चला gaya....aarti पांतीके ऊपर से hi अपनी छूट सहलाने लगती है....

फिर वो कहते है

ऐसा पार्टनर जिस औरत को मिले उसके साथ तोह वो औरत झोंपड़ी में भी खुश रह सकती hai…Daulat शोहरत कुछ भी न होने के बावजूद कितनी अमीर हैं वो कामचोर …और सब कुछ होने के बावजूद मैं कितनी गरीब हु…

हाय भगवान्!! वो छिपकली कैसे सेह लेती होंगी.. उसका तो कितना बड़ा होगा .....

छूट मसलते हुई कहती है

उसको तो बहुत दर्द हुआ होगा न.. इसलिए तो कमीने इतने जोर से चिल्ला रही थी.. पर कमीने को अच्छा भी लग रहा था .. इसलिए तो नवाज़ को कह रही थी.. मेरे राजा.. और करो कह रही थी.. कहेगे hi न अगर नवाज़ जैसा पार्टनर होगा तो.. उसका तो बहुत बड़ा होगा न.. एकबार पंत के उप्पर से देखा था मैंने.. क्या अरविन्द से बड़ा होगा न.. हाँ अरविन्द से बड़ा hi है.. अरविन्द जी से जरूर दो गुनाह से भी ज़्यादा बड़ा है उसका ..उस दिन जब वो मेरे पीछे खड़ा था तब शायद उसका यही मेरे पीछे लगा था.....

uuufffff….kitana बड़ा था उसका वो..

ऐसा कह के वो अपनी छूट की मालिश करती है.. कुछ देर तक ऐसे hi वो आपने पति को चिपक के लेते हुई नवाज़ के याद मई आपने छूट को मस्सगे दे रही थी..

यही सब सोच के उसका रोम रोम कम्प उठता है ....... उसके मन में तरह तरह के ख्याल आने लगते hain…yahi सब सोचते सोचते उसे कब नींद आजाती है पता hi नहीं चलता....

subha....subah 4:30 - 5 बजे उसका पति उसे ुआतता है .. सुबह सुबह उसे दिल्ली जाना था कुछ ओफ्फिकल काम के लिए.. कुछ डाक्यूमेंट्स उसे नहीं मिल रहे थे.. आरती गहरी नींद मई थी.. क्यों की वो लेट सोई थी.. अरविन्द 2-3 बार उतने के बाद आरती उठाती है .. जब अरविन्द उसे कहता है की वो डाक्यूमेंट्स नहीं मिल रहे है.. जरा ढूंढ के दो.. तब उसे आपने पति पाई बहुत गुस्सा आता hai..wo उसे गुस्से से देखती है..





अरविन्द जी.. आप भी न.. आप के फाइल और डाक्यूमेंट्स मुझे क्या पता कहा रखे है आपने..

ारे बाबा मैंने नहीं रखे पापा जी ने रखे है .. उनको इस वक़्त उतना ठीक नहीं है..

फिर मुझे कैसे पता होगा.. पापाजी ने मुझे थोड़े hi बताया है कहा रखे है बोल के

वो पता है.. तुम ढूंढोगे तो तुम मिलेंगे..

मई क्या भगवान् हु क्या

नहीं देवी हो.. मेरे घर की..

तब नाराज़गी दिखते हुई कहते है..





मस्का मत लगाओ आप

मस्का नहीं सही कह रहा हु..

पहले मेरे नींद ख़राब की और अब बोर कर रहे हो ..

मई कहा बोर कर रहा हु

मुझे दिन भर नींद नहीं मिलती.. और सोने के टाइम आपने जगा दिया

सॉरी बाबा.. पर दोपहर को सोया करो

मई सोऊंगी तो काम कोण करेगा और घर की तरफ कोण देखेगा..

नीता है न

नीता.. आप की नीता वो ..

ऐसा कह के आपने पति की और गुस्से से देखते है..





वो कामचोर काम करेंगे.. पापा जी उसे सही hi कहते है.. कामचोर..

तब अरविन्द हँसाने लगता है..

फिर जल्दी सोया करो

जल्दी सोना च रही थी पर नवाज़ ने कहा सोने दिया

नवाज़ ने नहीं सोने दिया.. मतलब

तब खुद को संभालते हुई उसने कहा

वो कही बहार गया था .. खाना भी नहीं खाया तह.. रात को देर से आया.. उसके आने के बाद उसे खाना देके सो गए..

तुम उसकी नौकर हो या वो तुम्हारा..

नहीं उसने खाना नहीं खाया था

नहीं खाया तो नहीं खाया.. बहार गया तो जाने देते.. आपने काम ख़तम होते hi सो जाना..

हाँ अब ऐसे hi करुँगी..

ऐसा कह के उठ जाती है और अरविन्द के डाक्यूमेंट्स ढूडने लगते है..

कुछ देर बाद डाक्यूमेंट्स ढूडने के बाद उसे याद आता है की ये डाक्यूमेंट्स तो उप्पर वाले रूम मई है इसलिए वो उप्पर वाले रूम जाते है.. तब उसे वंदना रूम से बहार आते हुई दिख जाती है .. उसको देख के उसको बहुत गुस्सा आ जाता है और गुस्से मई कहते है

रातभर ये कमीने यहाँ hi थी क्या.. और इस सेल को हर बार कोई न कोई लड़की या औरत चाहिए.. नीता चाहिए.. वंदना चाहिए.. तन्वी भी थी . . फिर वो दोनों लड़की थी क्या नाम था उन दोनों का और अब मेरे पीछे पड़ा है .. कुछ सोच कर कहते है..

अब ये वंदना रातभर यहाँ कैसे रह गए इसका बाप तो कितना स्ट्रिक्ट है .. उस दिन क्या बोल रहा था पापजी को औरत ने या लड़की ने 7 बजे के बाद घर से बहार निकलना नहीं चाहिए और खुद की लड़की बहार है.. किसी दूसरे के पास फिर भी इसका इसको कुछ नहीं दुसरो को hi नियम बता रहा था खुद को खुद के लड़के को कुछ नियम नहीं ..

तभी उसके हस्बैंड उसे आवाज़ देता है

आरती मिली क्या फाइल

नहीं जी

शायद उप्पर नहीं hoga..neeche hi होगा

हाँ आती हु नीचे

ऐसा कह के वो डाक्यूमेंट्स ढूंढने के लिए निचे जाने लगते है तब उसे क्या सुजा वो विंडो से फिर से देखने लगी तभी नवाज़ उसको देखता है वो ुंदरपनतस पाई था.. वो भी नवाज़ को देखने लगी..





अब इस वक़्त नवाज़ उसके रूम के दूर के बहार खड़ा था और वंदना जाने लिए रेडी होक जाने लगी.. जैसे hi नवाज़ को आरती दिखते है तब वो वंदना को रुकने को कहता है..
 
अब इस वक़्त नवाज़ उसके रूम के दूर के बहार खड़ा था और वंदना जाने के लिए रेडी होक जाने लगी.. जैसे hi नवाज़ को आरती दिखते है तब वो वंदना को रुकने को कहता hai..Nawaz के कहने से वंदना रुख जाती है और पीछे घूम जाते है..

नवाज़ को देखते हुई वंदना कहती है





नवाज़ मई जानती हु तुम थोड़े नाराज़ हो पर मई भी क्या कर सकती हु.. मेरे मज़बूरी भी संजो न.. मई अब इससे ज्यादा यहाँ रुक नहीं सकती.. मई रात भर तुम्हारे पास रुक गयी क्यों की मम्मी और पापा कल अचानक दूसरे गाँव चले गए .. हमारे किसी रिलेटिव की डेथ हो गयी थी.. वो अब सुबह आने वाले है.. उनके आने से पहले मई घर नहीं गयी तो बनवल हो जायेगा..

नवाज़ मैं मैं सोच रहा था ये सब मुझे क्यों सुना रही है पर मुझे क्या..

नवाज़ उसके करीब जाकर उसने उसका हाथ पकड़ा .. और अपनी और जोर से खिंचा..

ोूछह.. धीरे से न नवाज़

जैसे hi वंदना उससे चिपक गयी वैसे hi नवाज़ उसके होंटो को जोरो से चूसने लगा..





एक लम्बी सी किश देकर वंदना ने किश तोडा..

आराम से.. मेरे होंटो को काटो मत.. मम्मी पूछेंगे तो मई क्या कहु उन

तब नवाज़ कुछ नहीं कहता और उसे अपनी बहो मई लेके चूमना शुरू करता है .. वंदना भी उसे चूमने लगी.. दोनों एक दूसरे को बुरी तरह से चूस रहे थे अब ..





नवाज़ किसी प्यासे के जैसे वंदना के होंठो को चूस रहा था और उसके होंटो को कान्त भी रहा था..

और इधर आरती बड़े इतेमाम से ये सन देख रही थी.. इस तरह आपने घर मई बैठ कर किश देखने से उसे मज़ा आ रहा था.. तभी आरती देखते है की वो किश करते हुई उसके ब्रैस्ट दबाने लगा..

आह्ह्ह्हह

करके वंदना सिसक उठी..

अब वंदना के आम को वो जोर जोर से दबाने लगा.. उसके मम्मी को दबाते हुई जैसे hi वो आरती को देखता है वैसे hi वो शरमाते हुई नीचे देखने लगे..





फिर उसने वंदना का टॉप पकड़ा और नीचे से उप्पर करने लगा.. तब वंदना ने नखरा करते हुई कहा..

ये क्या कर रहे हो

तेरा टॉप निकल रहा हु

यहाँ ऐसे ओपन जगह पाई

अब इस वक़्त कोण आ सकता है.. अभी तो सुबह भी नहीं हुई है..

कोई आ गया तो

तब उसका चेहरा आपने हाट मई लेके उसके चहरे के करीब आपने चेहरा लेट हुई कहता है





कोई नहीं आएगा.. और नवाज़ के होते हुई तू क्यों दर रही है..

नहीं मुझे दर लगा रहा है

दर मत सिर्फ उप्पर करूँगा पर निकलूंगा नहीं..

मुझे नहीं तुम पाई भरोसा

क्यों रानी आपने राजा पाई भरोसा नहीं है क्या

मेरा राजा न हमेसा hi ऐसे प्यारे प्यारे चिकनी चोपड़ी बाते करके आपने रानी को फसता है

तब हस्ते हुई खता है

इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा

इनकी ये बातचीत आरती को सुनाये नहीं दे रही थी.. बस वो ये जानती थी की नवाज़ वंदना को कन्विंस करने की कोशिश कर रहा है और अब उसने कुछ कहा होगा इस वजह से नवाज़ है रहा है..

नहीं

नवाज़ आपने काळा हाथो से उसकी गोरी कमर को घेर लेता hain...aur उसे अपनी तरफ खिंच लेता है ...





और गर्दन पर किश करने लगता है....

आह्ह्ह्हह नवाज़ नाहीई प्लीसीईए ahhhhhhhhhh ....

सिर्फ ऊपर से देखूंगा ी प्रॉमिस

नहीं भाभी आयी तो

तब उप्पर विंडो की तरफ देखते हुई कहता है

नहीं अब तक वो उठी नहीं होगी

अगर उठ गयी तो

इतने जल्दी नहीं उठाते वो

तुम भला पता है

इस घर मई रहता हु तो सब पता रहता है मुझे

और आरती को देखते हुई उस की गर्दन par..uske गाल पर बेतहाशा चुम रहा था जैसे बरसों का प्यासा हो....





नवाज़ के काळा होंटो का अहसास अपनी पतली कोमल गोर गाल पर पाकर वंदना की सिसकारी निकलती है....

आआअह्हह्ह्ह्ह

तब वो उसे घुमा देता है और पीछे से उसको पकड़ लेता है.. उसका कला लौड़ा तो बस फुदक रहा था वंदना की बड़ी गांड का अहसास खुद पर pake....vandana का जिस्म उसका साथ नहीं दे रहा था अब....

रानी तेरे लिए बोहत तरसता हूँ मैं

आजभी तो रात भर थी न तेरे पास

मैं नहीं भरा न

तुम्हारा मैं तो कभी नहीं भरेगा मई जानती हु.. तुम हर पल मई hi चाहती हु और उस हर पल तुम मेरे सात सेक्स करना होता है

इसमे बुराई क्या है

मई क्या सेक्स तोय हु जो हमेशा तुम्हारा इअतना मोटा लुंड आपने छूट मई लू ..

इधर आरती कहती है..

ये क्या खुसुरपुसुर कर रहे है.. कुछ सुनाई नहीं दे रहा है..

तब उसकी गर्दन घुमाके उसके गाल को किश करने लगता है..





रानी मेरा मैं है.. ऐसे ओपन जगह पाई एक बार हम प्रेमी योंका मिलान होना चाहिये .....

ये सुनकर वंदना की हालत ख़राब हो जाती hai....uski सांसें तेज़ चलने लगती hain....nawaz ने कही हुवी इस बात उसे अंदर तक हिला देती है …

तुम क्या पागल हो गए हो क्या??

नहीं

मई ये नहीं कर सकती

अब उसके पीछे खड़े होक उसके गाल को किश करते हुई नवाज़ के हाथ वंदना के बड़े चुचों पर जाने लगते hain....tabhi घर के अंदर से आवाज़ आती है ...

आरती कहा हो तुम .....???

अरविन्द की आवाज़ सुनकर वंदना जैसे होश में अति है .. झट से नवाज़ की पकड़ से निकल कर बाजु कड़ी हो जाती है और आपने टॉप ठीक करती है..

लगता है भैय्या उठ गए है और भाभी को आवाज़ दे रहे है..

हाँ लग रहा है.. आज ये लोग जल्दी कैसे उठ गए..

वो तुम देखो.. मई चली.. मुझे भैय्या या भाभी ने देखा तो बड़ा प्रॉब्लम हो जायेगा..

ऐसा कह के लगभग भाग के बहार चली जाती है ....नवाज़ बस गुस्से से आरती की और देखते हुई अपना कला लौड़ा मसलता रह जाता है…
 
वो चाहे तो कुछ भी कर सकता है

इसलिए कह रही हु आप बच के रहो

मुझे कुछ नहीं होगा.. अब मई रखती हु..

ठीक है भाभी पर आप याद से कॉल करना

ok ककरति हु..

ऐसा कह के आरती कॉल कट कर देते है

बीएड पर लेती हुवी आरती अब कुछ सोच रही थी ....





जैसे hi नीता घर के अन्दर आकर आरती के बैडरूम मई आ जाती hai..wo देखते है आरती बीएड पर लेती कुछ गंभीर सोच में डूबी हुई है ...आरती को ये भी पता नहीं चल पाया की नीता घर के अन्दर आ गयी है .. बहार का मैं दरवाजा खोल के ....दरवाजा खुलने का उसे आवाज़ भी नहीं आया tha..aur बाद मई उसके बैडरूम मई आयी हुई है..

नीता अब आरती के पास आती हैं और आकर उसके बाजु में बैठ जाती hain......aarti अभी भी कुछ सोच रही थी.....

क्या हुआ मेमसाब आप इतनी गुमसुम क्यों हो…

अरे तू कब आये .. मेने तो देखा hi नहीं…

ऐस बोल के उठ के बैठ गयी

क्या हुआ आप को क्या हो गया..

आरती कुछ सोच रही थी पर कुछ सोचने के बाद कहती है ..

तुम से एक बात कहु …

नीता को लगता है की आरती अब नवाज़ के बारे में बात करेगी..

हाँ कहिये न मेमसाब

तब आरती से नज़र चुराके कहती है

तुम लोंगो का कुछ प्लान है क्या

हम लोंगो का मतलब

तू और तेरे यार का

आज तो कुछ नहीं है

पक्का

हाँ दीदी

तेरे यार का आज बर्थडे है न

जरा शरमाते हुई कहते है

हाँ है पर आप को कैसे पता

मई क्या घर के बहार रहती हु क्या

नहीं पर

कुछ सोच के नीता कहते है

क्या उसने बताया क्या आपको

हाँ

कब

कल रात

क्या रात को !!! दीदी.. मई समजे नहीं

हाँ रात को.. वो रात को खाने को नहीं आया था.. जब वो घर रात 11-12 बजे आया तो मुझे लगा उसे खाने को बुलाओ तो उसको देख के मुझे लगा इसने पि है तो मैंने उसे पूछा तो कहने लगा..

उसकी एक्टिंग करते हुई आरती कहती है..





मेमसाब आज मेरा बर्थडे है इस वजह से पार्टी दी थी.. तब दोस्तों के फाॅर्स की वजह से मुझे पीना पड़ा . ..

मेमसाब मैंने उसे पहले hi कहा था पाइक बंगलो मई मत आया करो पर क्या करू मेमसाब और आप जानती हो कभी किसी की बात नहीं सुनाता है

हाँ वो तो है hi वैसा

पर अब बड़े साहब ने देखा होगा तो

पापाजी सोये हुई थे

नीता रहत की सांस लेती है

अच्छा हुआ शेठ जी सोये हुई थे

और छोटे मालिक

वो भी

अच्छा हुआ फिर

दारू उसने पि और दर तू क्यों रही है

आप भी न दीदी एक नंबर की बुद्धू हो

तब आरती नखरे से उसके सर को मरती है..

मई और बुद्धू.. और तू बहुत शाहनी ऐसे hi न

नहीं तो क्या.. अगर नवाज़ को पिटे हुई मालिक ने देखा तो उसे यहाँ रहने देंगे क्या

तब आरती हस्ते हुई कहते है





तो ये बात है..

हाँ दीदी

वैसे तुम दोनों ने वैसे कुछ प्लान नहीं बनाया है क्या आज के दिन लिए

क्यों

तब शरमाते हुई नीता कहती है

अब प्लान दिन का क्या बनाये दीदी.. प्लान तो रात का hi बनेगा न दीदी

तब एआरटी कहते है

धत बेशर्म कही की

ऐसे कह बीएड पाई सोने लग जाती है..





तब नीता झट से बीएड से उतरती है और कहती है

आज क्या किचन मई आने का आपका प्लान नहीं है क्या दीदी..

है न

दिनभर सोने का प्लान लग रहा है आप को देख के

ऐसा क्यों लगा तुम

फिर से आप सोने लगे न इस वजह से

हाँ तेरे यार ने और मेरे यार ने मुझे रात मई सोने नहीं दिया इस वजह से अब मुझे तखन और थकन की वजह से सोने का मैं कर रहा है

मेरे यार ने आप को सोने नहीं दिया मतलब

बोलै न वो रात को कितना लेत आया.. उस के आने के बाद hi सो पायी

क्यों जगी आप रात भर उसकी रह देख कर

तब नखरे से आरती कहती है

फिर तू hi कहती दीदी आपने मेरे नवाज़ को रात मई खाना नहीं दिया.. भूका hi सुलाया

तब नीता हस्ते हुई कहते है...

वो तो मई कहती अगर आपने नवाज़ को भूका सुलाया होता तो

हाँ मई जानती थी तू ऐसा hi कहती और पापाजी अलग से मुझे डाँटते

तब नीता हस्ते हुई कहते है

हाँ पापाजी बहुत प्यार करते है नवाज़ से

हाँ

और नवाज़ भी बहुत प्यार करता है पापाजी से.. वो उनके कोनसे भी बात को टालता नहीं है

तब चहरे पर स्माइल लेट हुई आरती कहते है..





हाँ मई जानती हु और मैंने ये देखा भी है.. एक बार पापा जी अरविन्द जी ने कहा हुआ काम टलेंगे पर नवाज़ का नहीं टलेंगे

एक दम सही कहा आपने दीदी. . वैसे नवाज़ के वजह से लेट हुआ पर आपने कहा आपने यार ने नहीं सोने दिया

मेरे यार कोई तेरे जैसा यार नहीं है.. मेरा हस्बैंड hi मेरा यार है.. और कोई नहीं

मई भी सोचु दीदी को अब कोण पसंद आ गया

पगली मुझे क्या आपने जैसा समाज के रखा है क्या

नहीं दीदी..

उन सुबह जल्दी जाना था तो उनोने मुझे जल्दी उठाया और नवाज़ की वजह से लेत सो गयी..

तो आप सो जाओ.. मई अच्छे से किचन का काम कर लेते हु..

ठीक है

और नीता किचन मई जाती है और इधर आरती चाट की और देखकर फिर से सोच मई दुभ गयी..





वो कमीना मेरे गर्दन मई खड़े होक उस छिपकली को किश कर रहा था और उसे पता था मई देख रही हु.. उसे पता था फिर भी ये सब कर रहा tha..wo तो कमीना है hi पर मई भी.. उफ़ मैंने ऐसे कैसे किया.. उसको किश करते हुई मई देख रही थी .. मुझे पता था वो देखा रहा है फिर भी. ...मेरी hi गलती है मैं विंडो मई gyi....aur वह से उसका वो गन्दा खेल देखा.. पता नहीं मेरे बारे क्या सोच रहा होंगे.. कमीने ने इस वजह से मुझे बम कहा.. बम मतलब सेक्स बम.. कमीने अब तक इतने डेरिंग नहीं की थी अब कैसे की.. शयद मेरे ऐसे गंदे हरकत देखने की वजह से. शयद मुझे वो उस तरह की औरत तो नहीं समज रहा है.. नहीं नहीं ऐसा कैसे वो मेरे बारे मई सोच सकता है..

अपनी ऑंखें बंद किये हुई अब वो आपने बीएड पर पड़ी हुई थी.. पर उसकी आँखों मई तो कोई और hi पिक्चर चल रही थी .....उस वक़्त नवाज़ की नंगी छथि उसके आँखों के सामने आने लगी . .. पता नहीं क्यों पर ये सन देख के उसका हाथ ऑटोमेटिकली आपने एक ब्रैस्ट पर चला गया.. शायद आरती के लिए ये पहला मौका था जब किसी मर्द को याद करके.. इमेजिन करके उसका हाथ उसके ब्रैस्ट पर पहुँच गया था.. और वो भी पराये मर्द के लिए.. ऐसा तो कभी उसके साथ आपने प्यारे हैंडसम पतिदेव के लिए भी नहीं हुआ तह..

फिर अचानक उसके आँखों के सामने का चित्र चेंज हुआ.. वो नंगे hi पेट के बल लेती हुई थी और उसके नंगी पिट को नवाज़ चूमने लगा..





ये चित्र सामने आते hi आरती ने झट से अपनी आँखे खोली.. और आपने आप से कहने लगी..

ओह्ह गॉड.. ऐसे कैसे मेरे साथ हो सकता है.. थिस इस नॉट फेयर. मई अरविन्द को ऐसा धोखा नहीं दे सकती और उस कमीने के साथ आपने मू कला नहीं कर सकती और फिर वो झट से बीएड पाई से उठ के बाथरूम मई चली जाती है..

नाहा दोख के वो बहार आती है.. मिरर के सामने आकर वो हल्का सा मेकअप करती hai..wo अब मिरर के सामने कड़ी होकर आपने बाल संवर रही थी .. जैसे hi उसने बहार नवाज़ का आवाज़ सुना वैसे hi उसके दिल की धड़कन और तेज़ होजाती hai....aur उसकी ऑंखें बड़ी होजाती है.... उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा tha....pata नहीं क्यों उसे लगा नवाज़ क्या कर रहा है देखती हु.. ये सोचते हुई वो आपने बैडरूम के दूर तक पौह्चती है और बहार जनक के देखती है.. नवाज़ क्या कर रहा है ये जानने के लिए.. पर उसे वो दिखता नहीं है सिर्फ उसका आवाज़ आ रहा तह. तब वो जरा गुस्से से खुद को कहती है..

कमीना कहा है की.. कहा मर रहा है क्या पता?? आवाज़ तो आ रहा है पर दिख नहीं रहा hai..shyad किसी से फ़ोन पाई बात कर रहा है.. किसी से क्या.. किसी लड़के से hi कर रहा होगा.. मुझे क्या.. भाड़ मई जाये वो और उसकी गिर्ल्फ्रेंड्स..

ऐसा कह के वो अंदर आके साड़ी पहनने लगते है.. साड़ी पहन के वो एक बार फिर से मिरर मई खुद को देखती है





खुद के ब्यूटी को देख के बहुत कुश हो जाती hai..aur आपने बाल ठीक करके सीधा किचन मई चली जाती है..

किचन मई जाते hi नीता कहते है

आप सोये नहीं दी

नहीं

क्यों

तब स्माइल करते हुई कहते है

अब आज का बर्थडे बॉय नवाज़ की माशूका काम करे और हम सोये हमें थोड़ा hi शोभा देगा

तब शरमाते हुई नीता कहती है

दीदी आप भी न

वैसे मैंने एक बात नोटिस की है

क्या दीदी

आज कल तू बहुत ज्यादा शर्माने लगी है

धत!! दीदी अब आप मेरे तंग खेंच रही है

तब आरती हँसाने लगी

नींद नहीं आ रही थी..

अच्छा!! एक बात बोले

एक क्या दो बोलो

आज तो आप बहुत कुश लग रही हो.. लगता है साहब दिल्ली जाने से आपको दुःख नहीं हुआ है

तो क्या रोटी बैठु.. मेरा पति कब आएगा ऐसा बोल के

वो भी सही बात है .. दीदी पर ऐसा लग रहा है मेरा नहीं आपके यार का hi आज बर्थडे है.. इतना आप आज कुश हो..

धत बेशर्म

कह के उसके सर को मरती है

कुछ भी बोलती है तू

दीदी पर मुझे पता था

क्या

आप न नवाज़ को भूका सोने नहीं डोज

अच्छा!! वो भला क्यों

आप न दिल की न बहुत अच्छी है

तब शेठ जी किचन मई आते है

तू न कामचोर सिर्फ अपनी दीदी को मस्का मर.. काम कुछ मत कर

तब एआरटी हँसाने लगी..

नहीं पापाजी मई अब कामचोर नहीं हु.. बहुत काम करने लगी हु..

अच्छा

हाँ शेठ जी

आरती बीटा वो स्टोर रूम के सब बॉक्स और सामान निकला क्या इन् दोनों ने

आधे निकले है पापा जी

आधे hi क्यों

आरती कुछ बोलती उससे पहले नीता कहती है..

आप की वजह से

मेरे वजह से क्यों कामचोर

वो हम लोग पूरा सामान निकल रहे थे तब आप ने दीदी को बुलाके लेके गए..

तो तुम दोनों निकल सकते थे न

नहीं न शेठ जी.. दीदी के सिवाय वो नहीं होगा..

क्यों

वह कोई हिघटेड़ बाँदा चाहिए..

तभी नवाज़ आता है..

नवाज़ भी तो हिघटेड़ है न कामचोर.. लगभग आरती के हाइट का है न..

है मेरे हिघ्त का है वो पापाजी पर

नवाज़ की तरफ देखते हुई आरती कहते है





पर क्या बीटा..

नीता - पर शेठ जी नवाज़ का वेट अपनी सीडी नहीं लेगी

अच्छा

हाँ पापा सीडी पुराने हो गए है

पर क्या तुम कामचोर आपने मालकिन से काम करवाओगे

नवाज़ - अब कर क्या सकते है शेठ जी..

तब नवाज़ की तरफ देखते हुई आरती कहते है





आप चिंता न करे पापाजी.. आज हम कुछ न कुछ कर के वह का पूरा सामान निकल लेंगे..

ठीक है बीटा ..
 
आप चिंता न करे पापाजी.. आज हम कुछ न कुछ कर के वह का पूरा सामान निकल लेंगे..

ठीक है बीटा ..

ऐसा कह के पापाजी बहार निकल जाते है.. तब नीता नवाज़ की तरफ देखते हुई कहती है..

दीदी आप से एक काम है

बोलो क्या काम है

पिक्चर जाना है

तो जाओ न.. तेरा आशिक़ सामने खड़ा है.. जा उसके साथ..

नहीं न सेठ जी परमिशन नहीं देंगे

तब नवाज़ की और देखते हुई कहते है

थोड़े देर पहले तो कह रही थी न नवाज़ की कोई बात पापाजी नहीं टालते

तब नवाज़ कहता है

हाँ पर काम की बात

वैसे भी पापाजी को कैसे बताये दीदी की हम दोनों पिक्चर को जाना चाहते है..

तो तुम दोनों क्या चाहते हो मई पापाजी को बोल दू की ये दोनों आज पिक्चर देखना चाहते है

नहीं

तब आरती बड़े आँखे करके दोनों को देखते है

तो

आप भी साथ चलो

क्या??

लगभग छीलते हुई आरती कहती है

पागल हो गयी है kya..khud को बचने के लिए मेरे जान लेना चाहती है क्या

आरती गुस्से से नीता की तरफ देखती है

तब नीता कहती है

ऐसा नवाज़ कह रहा है

तब आरती गुस्से से नवाज़ की तरफ देखने लगती है

ये नयी क्या नौटंकी है तुम दोनों की

तब नवाज़ कहता है

मैडम जी आप आओगे तो hi शेठ जी हम पर शक नहीं करेंगे

नहीं..

क्या नहीं मेमसाब

तुम जो कह रहे हो वो सही नहीं है.. ये सही है की पापाजी तुम दोनों पाई शक नहीं करेंगे पर मुज पाई शक करेंगे

नहीं करेंगे

वो भला कैसे

हम कोई काम का बहाना बना के यहाँ से निकल जायेंगे

बहाना

कोनसा बहाना

कोई भी

कोई भी मतलब

वो मई सोच लूंगा आप सिर्फ रेडी हो जाओ

मई भला क्यों

आप के बिना नहीं हो पायेगा

तब नखरा करते हुई कहते है..

मई नहीं आ सकती

तब नीता कहती है

चलो न दीदी.. ऐसा क्यों कर रहे हो..

तब एआरटी कहते है

पापा को संजना मुश्किल है और इनको मई कैसे बताऊ

तब नवाज़ कहता है

किनको

तब नीता झट से कहती है

छोटे मालिक

वो तो यहाँ नहीं है न नीता

तब नखरे से आरती कहती है

यहाँ नहीं है तो क्या उन बिना पूछे मई कहा भी जाऊ

दीदी की बात सही है

तुम दोनों को जाना है तो जाओ

पर काम ख़तम खर के

नवाज़ - वो तो कर लेंगे मेमसाब

नीता - पर आप साथ मई चलिए

ठीक है वो देख लेंगे बाद मई.. पहले स्टोर रूम मई चलो.. वो काम पहले ख़तम करते है..

ठीक है मेमसाब..

और फिर वो तीनो स्टोर रूम की तरफ चलते है..
 
तुम दोनों को जाना है तो जाओ

पर काम ख़तम खर के

नवाज़ - वो तो कर लेंगे मेमसाब

नीता - पर आप साथ मई चलिए

ठीक है वो देख लेंगे बाद मई.. पहले स्टोर रूम मई चलो.. वो काम पहले ख़तम करते है..

ठीक है मेमसाब..

और फिर वो तीनो स्टोर रूम की तरफ चलते है..

नवाज़ ने बड़े सीडी साथ मई लिए थी .. साथ मई बड़ा वाला फैन भी ..फैन नीता ने लिया था और झाड़ू और साफ़ सफाई का सामान आरती ने लिया था .. अब वो तीनो स्टोर रूम मई पहुँच जाते है..

तो अब सुरु करे काम

हाँ दीदी

तो चङो उप्पर सीडी पर

आरती ने ऐसे कहते hi बड़े आचार्य से नीता आरती की तरफ देखने लगी ..तब आरती कहती है ..

ऐसे क्या देख रही है मुझे जैसे बहुत देख लिया है

बहुत नहीं पर आप बहुत से काम नहीं लग रही हो मुझे

तब आरती उसका कान पकड़ के कहती है

मई क्या तुम बहुत लग रही हु क्या

इतना डरा दिया तो बहुत hi लगोगे hi न आप दीदी ..

मैंने कब डराया तुजे

अभी कहा न .चङो साइड पाई बोल के

तो क्या मई चदु साइड पाई

बात तो हमारी यही तय हुई थी न दीदी

ऐसा कुछ तै नहीं हुआ था महारानी .. मई यहाँ तुम दोनों लैला मजनू की हेल्प करनी आयी हु नाकि सब काम मई करने

पर दीदी मई सीडी पाई कैसे चदु .. आप हिघटेड़ हो तो

पापाजी को जो कहा वो मुझे मत सुना

पर दीदी ये सीडी बहुत पुराणी है

तो

टूट सकते है

दर मत टूट भी गयी तो मई और तेरा यार तुजे निचे नहीं गिराने देंगे..

और हँसाने लगे..

नीता बुरा सा मू करती है..

है न नवाज़

ऐसा ननवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..





आरती ने ऐसे कहते hi नवाज़ हाँ कहता है. तब गुस्से मई नीता नवाज़ को कहते है

तुम भी दीदी की साइड ले रहे हो नवाज़

साइड की बात नहीं है नीता

तो बात क्या है

अब बॉक्स निचे उतरने के लिए कुछ न कुछ करना पड़ेगा न और आरती मेमसाब अपनी मालकिन है तो उनकी बात हम दोनों को मानाने पड़ेगे hi न

हाँ वो बात तो है

हमें कुछ जुगाड़ करके सामान नीचे उतरना होगा

ा - सही बात है नवाज़.. और अब का ये जुगाड़ है की सीडी के टॉप मई नीता चरेगे.. वह से वो बॉक्स ुटेगे.. 2-3 स्टेप पाई नवाज़ खड़ा होगा.. नवाज़ को बॉक्स नीता देंगे और नवाज़ मुझे और मई निचे रखूंगी..

अब आप कह रही हो तो करना पड़ेगा दीदी

गुड गर्ल

नीता सीडी पाई चढ़ जाती है और वह से बॉक्स देते है.. नच्चे दो स्टेप पाई नवाज़ खड़ा था वो नीता से बॉक्स लेके पीछे आरती को देता और आरती निचे रखती.. ये काम कुछ देर चला.. मतलब कुछ 3-4 बॉक्स निचे उतरी की नीता सीडी के जिस पैरो पाई खड़े थी वो झट से टूट गए.. वो झट से निचे गिराने वाले थी तब नवाज़ और आरती ने उसे पकड़ लिया. और उसे गिराने से बचा लिया.. दोनों ने उसके कमर मई हाथ डाला था इस वजह से बच gayi..tab आरती और नवाज़ हँसाने लगे और इधर नीता दर गयी थी ..वो बड़े बड़े साँसे लेने लगी तब आरती ने कहा

कहा था न नीता तुजे ..सीडी टूट भी गए तो तुजे गिराने नहीं दंगे .. तेरे यार के साथ मिलकर तुजे बचाया न ..

तब आपने साँसे रोकते हुई नीता कहते है ..

थैंक यू बूत बहुत दर गयी थी मई .. अभी भी मुझे दर लग रहा है ..

दर मत अब कुछ नहीं होगा तुजे ..और मई होने भी नहीं दूंगी .. वैसे तेरा यार मेरे साथ है तो तुजे हम दोनों कैसे कुछ होने देंगे ..है न नवाज़

हाँ मेमसाब आप का साथ मुझे मिल जाये तो मई बड़ा से बड़ा काम कर लूंगा ..नीता को बचाना तो छोटा काम था ..

ऐसा कह के आरती मेमसाब को ताली देता है ..हाट ऊपर करके ..आरती भी उसको तुरंत रिस्पांस देती है ..स्माइल करते हुई .. जैसे hi नवाज़ उसको देखता है मतलब उसके नंगे बहे को तो वो हाथ नीचे करके शर्मा जाती है.. श्रम की वजह से वो नीचे देखने लगी..





नवाज़ ने जब उसकी नंगी बहे देखि तब आरती शर्मा जाती है लेकिन वो अपने चेहरे से ज़ाहिर नहीं करती और अपनी गर्दन निचे कर लेती hai....aarti को समझ नहीं आ रहा था के वो अब क्या kare....wo अपने आपको थोड़ा कूल करते हुई थोड़ा बाजु चली जाती hai....udr नवाज़ आरती के बाजु चले जाने से अपना लौड़ा पकड़ कर थोड़ा हिलता hai…tab आरती पलट जाती है और नवाज़ के ऐसे करने से पहले से ज्यादा शर्मा जाती है और फिर से एक बार पलट के सोचने लगती है..





उसे कुछ नहीं सज़ा तो वो अपना मोबाइल उसे करके टाइमपास करने लगी.. तभी नीता कहते है..

मेमसाब मुझे बहुत डर लग रहा है.. मई क्या करू.. मेरे दिल की धड़कने रुकने का नाम नहीं ले रही है..

पगली धड़कने रुक गयी तो मर जायेगे..

उन्दोनो को देखते हुई आरती कहते है

मतलब बहुत फ़ास्ट चल रही है..

तब आरती मज़ाक मई कहती है..

तो तेरे ाआशिक से लिपट जा.. फिर तेरे धड़कने शांत हो जायेगे

तब नीता वैसे hi करती है तब आरती हस्ते हुई कहते है..

तू तो सच मई लिपट गयी.. मेरे सामने ये गंदे हरकत करने को शर्म नहीं आयी क्या तुजे

आप ने कहा न

मैंने तो मज़ाक मई कहा तह

मुझे कुछ समाज मई नहीं आ रहा hai..aap hi बताओ मुझे.. लग रहा है मेरे तबियत बिगड़ jayege..Bukar न आ जाये मुझे

कुछ नहीं होगा aisa..tu उप्पर जाकर आराम कर ..

और यहाँ का काम

तब नवाज़ कहता है

तू काम की चिंता न कर मैं करता हु .... ये सब काम.. वैसे हेल्प के लिए मेमसाब है hi न

नवाज़ के ऐसे कहने के बाद वो नवाज़ को बड़ी अड्डा के साथ देखने लगी ..





नवाज़ के साथ अकेला स्टोर रूम रहने के बात सोचकर आरती की धड़कने ज़ोर से उप्पर नीचे होने लगी..

वो आपने आप से कहने लगी..

इसका मतलब ये है के अब नवाज़ के साथ यहाँ रहना पड़ेगा

तभी नीता कहते है

नहीं दीदी मैं कर लुंगीय....

आरती इसबार न चाहते हुई बोल पड़ी …

कोई बात नहीं नीता तुम आराम कर लो ऊपर jakar....mai नवाज़ के साथ मिलकर यहाँ का काम पूरा कर लुंगी…

ठीक है दीदी ....

तब नवाज़ कहता है..

मेमसाब ये बॉक्स उतने पड़ेगे

हाँ उठाते है

ऐसा बोल के उस बॉक्स के पास जाती है .. अब दोनों मिल के बॉक्स हटाने लगे.. कुछ बॉक्स हटाने के बाद नवाज़ पिट पाई हाट डालते हुई खुजली करने लगा..

बहुत खुजली हो रही है

तब आरती उसके और देखते हुई हँसाने लगी..

लगता है अभी नहाना hi पड़ेगा

आरती फिर से हँसाने लगी

नीता - हाँ नाहा लो न फिर

हाँ वही सोच रहा हु

आरती के तरफ देखते हुई कहता है..

मेमसाब का सोप बहुत अच्छा है.. सब खुजली मिटा देता है

इस बात पर आरती शर्मा जाती है





न - मेमसाब ने तुम सोप दिया था क्या

तब नवाज़ आरती को देखता है तब नीता आरती को देखते है..

मेमसाब आप ने आपने सोप दिया था क्या नवाज़ को

तब निचे गर्दन करके शर्माते हुई आरती हाँ मई गर्दन हिलाते है

थैंक यू❤ मेमसाब आप कितनी अच्छी है..

ऐसा कह के नीता आरती के पास आके उसके गले लग जाती hai..aab नवाज़ और आरती का चेहरा आमने सामने आ जाता है..

नवाज़ आरती को देखते हुई कहता है

आज तो प्ल्ज़

वो कहना चाहा रहा था आज प्ल्ज़ नहला दो मेमसाब.. क्यों की उसदिन उसने आरती को रिक्वेस्ट की थी पर आरती ने सिर्फ सोप दिया पर नहलाया नहीं

आरती न मई गर्दन हिलाते है और स्माइल करती है

प्ल्ज़ न मेमसाब

तब नवाज़ को चिढ़ाते हुई आपने जीभ बहार निकल के ना कहती है..





चलो नीता

दीदी ये बाकि के बॉक्स

सीडी टूट गयी अब कैसे करेंगे

हाँ दीदी

ऐसा कह के नीता और आरती वह से जाने लगी.. नवाज़ उसके पीछे पीछे जाने लगा.. आरती ने एक बार पलट के देखा tha..Jab दोनों की नज़र मिली तो दोनों ने एक दूसरे को देख के स्माइल की.. ाअब नीता उप्पर रूम मई जाती है.. नवाज़ उसके साथ जाता है.. वो वह जेक आराम करने लगी.. तब नवाज़ नीचे आता है और सीधा आरती के बैडरूम मई जाता है..

नवाज़ जब उसके बैडरूम मई जाता है तब आरती उसके हाथ मई नया टॉवल और नया ड्रेस देती है उसे पहने को.. बिना उसको देखे..





मतलब निचे देखते हुई..

नवाज़ भी कुछ बोले बिना टॉवल और ड्रेस लेके बाथरूम जाता है .. आरती वही कड़ी रहती है.. नवाज़ बाथरूम मई आके पलट के उसकी और देखते हुई कहता है

आप नहीं आओगे
 
नवाज़ जब उसके बैडरूम मई जाता है तब आरती उसके हाथ मई नया टॉवल और नया ड्रेस देती है उसे पहने को.. बिना उसको देखे.. नवाज़ भी कुछ बोले बिना टॉवल और ड्रेस लेके बाथरूम जाता है .. आरती वही कड़ी रहती hai..Nawaz बाथरूम मई आके पलट के उसकी और देखते हुई कहता है

आप नहीं आओगे

तब आरती शर्मा जाती है और फिर स्माइल करते बाथरूम की और निकलती है..





जैसे hi वो बाथरूम मई आती है तब नवाज़ उसे hi निहार रहा था.. अभी भी आरती के चहरे पर स्माइल थी.. स्माइल करते हुई आरती उसके हाथ से टॉवल और बाकि के कपडे लेती है और बाथरूम मई जो हेंगर था उसपे लटका देती hai..aur नवाज़ को देखने लगती hai..aur सोचने लगती है..





मुझे इसके पास आते hi पता नहीं क्या हो जाता है.. मेरा मैं हो या न हो इसके मई हर बात मानती हु.. मुझे ऐसा लगता है मेरा जिस्म, दिल और दिमाख बिलकुल मेरा साथ नहीं deta.....nawaz के इतने करीब खड़े रहने के बाद मुझे पता नहीं क्यों ऐसा महसूस होरहा है जैसे मुझे अलग hi टाइप की कमज़ोरी हो रही है ...

तभी नवाज़ अपने दोनों हाथों को जोड़ता हुई ...... अपने पीले काळा दांत आरती को दिखता hui........aarti के दोनों चूचियों पर अपनी नज़र गड़ता हुई ........ उसके चेहरे की तरफ देखकर हौले से हंस पड़ता हैं और कहता है..

आप मालिश करोगे

nautanki..pahle क्या किसी नाटक मंडली मई थे क्या

क्यों

सीधा सीधा बोल नहीं सकते kya...ye नौटंकी करने की क्या जरुरत है

लो जी हम कहे भी तो कैसे अब..

सीधा सीधा बिना किसी नौटंकी के

..ठीक hai..memsaab जी क्या आप हमारी मालिश करोगे

तब आरती अपनी नज़ारे नीचे झुकाती हुई कहती है

उसदिन नहलाने को मन किया तो आज मालिश करो बोल रहे हो

वो वाली नहीं

फिर

तेल से मालिश

तुम क्या मई मालिशवाली लग रही हु क्या

नहीं

फिर गर्दन उप्पर करती हुई कहते है क्या

तुम क्या मई तुम्हारे नौकर लग रही हु क्या.. कभी मालिश करो .. कभी नहलाओ

नहीं बदन बहुत दर्द कर रहा है

हाँ करेगा hi न रात मई बहुत हार्डवर्क किया था न.. वंदना के साथ

नहीं उसके साथ तो ज्यादा हार्डवर्क नहीं किया था

तो क्या दूसरी आयी थी क्या

नहीं न मेमसाब

ऐसा कहते हुई नवाज़ थोड़ा आगे आया और खड़े खड़े hi उसके हाथ को आपने हाथ मई पकड़ कर कहने लगा..

कर दो न मालिश एक बार आप के कोमल हाथो से.. एटलीस्ट.. नहला तो दो न .. उसदिन भी मन किया था आप ने

आज भी मन करूंगी

एक बार आप के कोमल हाथो से

तब उसके हाथ से आपने हाथ को चुराकर पीछे मुद जाती है

मेरे हाथो से मालिश और नहलाना तो तुम्हारे साहब को भी नसीब नहीं हुआ अब तक

तो मेरे नसीब में है .. मई जनता हु

तब बैडरूम मई जेक बीएड पाई पड़ा हुआ सामान उठा के नखरे से कहती है..





No वे..

हातो से इशारा करते हुई कहते है.. तब नवाज़ उसको देखते हुई बाथरूम के दूर पाई खड़े होकर कहता है

मेमसाब जी क्या आप पानी ला सकती हैं क्या एक गिलास .... बहुत प्यास लगी है..

तब बड़ी अदा के साथ आरती नवाज़ को देखती है..





तुम न एक नंबर के कमीने हो.. मुझे इधर उधर भागते रहते हो और मुझसे काम निकलवाते रहते हो..

नहीं मेमसाब.. सच मई मुझे प्यास लगी है.. मेमसाहेब ...... अगर इस प्यासे को पानी मिल जाये तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी...............

तब नवाज़ को देखते हुई मैं मई कहते है

कमीना कहीं का ....... .मैं ाचे से जानती हूँ की ये किस प्यास की बात कर रहा hain.............jitna गन्दा ये दीखता हैं उतनी hi गन्दी इसकी नियत भी हैं...............

ला रहे हो न पानी फिर मेमसाब

तब नखरे से कहती है..





जी जी क्यों नहीं.. लाना hi पड़ेगा न अब तुमने मुझे मालकिन से अपनी नौकरानी जो बनके रखा है.. कभी कहते हो मुझे नहलाओ .. कभी कहते हो मेरे तेल से मालिश करो. तुम्हारे लिए खाना बनाओ.. तुम खाना खिलाओ .. उसके लिए आपने नींद ख़राब करके रात रात तक तुम्हारी रह देखो.. और रह देखकर क्या होता है.. तो क्या हमारे मालिक रात 12 बजे आएंगे.. वो भी फूल नशे मई.. फिर क्या उनके लिए उनके रूम मई खाना लेके जाओ और उन आपने हटो से खाना khilao..aur अब हमारे मालिक का मूड पानी पिने का हुआ है.. अभी कहोगे आप के मालिश से मुझे प्यास लगी है मुझे पानी लाओ.. अभी मत कहो की मुझे पानी पिलाओ

ख्याल अच्छा है

ऐसा कहते हुई हँसाने लगा.. .

कहा जा रही हो आप..

जहनुम मई आना है ..

आप के साथ तो कहा भी मज़ा hi आएगा..

तब हस्ते हुई कहते है..

तुम्हारा भी मुझे कुछ समाज नहीं aata..Khud कहते हो पानी लाओ मुझे पानी पीना है और जब पानी लेन जा रही हु तो कहते हो कहा जा रही हो.. वो नीता कैसे झेलते होंगे तुम भगवान् hi जाने..

आप भी झेल लो आप को भी आदत पद जायेगे..

तब नखरे से उसे देखती हुई कहती है





नहीं बाबा मेरे अरविन्द जी hi ठीक hai..wo तुम्हारे जैसे मुझसे काम नहीं करवाते..

सॉरी मेमसाब पर सच मई मुझे बहुत प्यास लगी है..

अभी लायी.....

उतना बोलकर वो जल्दी से किचन में चली जाती है और थोड़ी देर में पानी लेकर आती है .. आते टाइम वो आपने साडी चेंज कर के निघ्त्य पहन के आती है .. वो देख के नवाज़ कहता है..

ये अच्छा किया आपने .. मालिश से और मुझे पानी से नहलाने से साडी ख़राब हो सकती थी ..

तब बैडरूम का दूर बंद करते हुई गर्दन घुमा के उसे घर के देखते हुई मैं में कहती है..





और फिर नवाज़ के पास आकर पानी नवाज़ को दे देती है.... आते टाइम वो आपने साडी चेंज कर के निघ्त्य पहन के आती है

पर पानी का बोतल का कैप नवाज़ से नहीं खुल रहा था.. तब हस्ते हुई उसके हाट से बोतल लेते हुई कहती है..

अब तुम्हारे लिए बोतल भी मुझे खोलने पड़ेगे क्या..

और बोतल खोलते है..





आरती ने खोली हुई पानी की बोतल पर नवाज़ अपना मुँह लगता hai..aur वो पानी पिने लगता है.. एक hi झटके में करीब 1/2 बोतल ख़तम करता hai..aur फिर hi रुकता हैं .....आरती को देखते हुई कहता है..

" शुक्रिया मेमसाहेब ................... आप बहुत ाची हैं ........ ."

तब आरती की नज़र उस बोतल पाई जाती है.. जो पानी अभी कुछ देर पहले चमक रहा था ........ जो पुरी तरह से साफ़ था .... अब उस पानी के अंदर नवाज़ के मुँह से निकलने वाली गन्दगी......... पान और तंबाकू के कुछ अंश गए थे.. अब आरती को ये सब चीज़ें उस पानी के अंदर और ऊपर की तरफ साफ़ तैरते हुए अब नज़र आ रहे they.........jo कुछ छोटे छोटे टुकड़ों में थे ....... देखा जाये तो वो पानी अब थोड़ा सा गन्दा भी नज़र आ रहा था ...... बिलकुल उसी के रंग का..........

आरती बड़े गौर से उस पानी के बोतल को देखने लगती है ....... तब नवाज़ मुस्कुराते हुई कहता है ............

" आप पियेंगी मेमसाहेब .........."

तब आरती कहती है..

की गंदे कही के.. तुम्हारा गन्दा पानी मई क्यों पिऊ..

ऐसा कह के आरती नवाज़ को देखने लगी .. और सोचने लगी ..

इसकी हिम्मत की दाद देनी padegi................khud तो ये कितना गन्दा हैं और अपना जत्था पानी मुझे पीने की ऑफर कर रहा हैं ....... सच में ये बहुत अजीब सा इंसान है ..

तब नवाज़ कहता है ..

आप के हातो से पानी पिने मई अलग hi टेस्ट है..

ज्यादा मस्का लगाने की कोई जरुरत नहीं hai..mai नहला रही हु न तुम ...

और मालिश

ज्यादा ऊधो मत .. सिर्फ नहालुंगी .. मालिश नहीं करुँगी ..

पर क्यों

एक बार सिर्फ एक hi

फिर मालिश कल क्या

ज्यादा स्मार्ट मत बनो

ऐसा कह के उसे वो शैम्पू की बोतल दिखते है.. जो उसने किचन से आते टाइम साथ मई लायी थी जिसपर अब तक नवाज़ की नज़र नहीं थी..
 
ये कह कर आरती अपनी गांड मटकते हुए थोड़ा अग्गे आकर रुकी.. मतलब बाथरूम के अन्दर .. और एक बार गर्दन उप्पर उतके 1-2 फुट सामने खड़े नवाज़ के तरफ देखा .. बड़ी ऐड के साथ..





और फिर अपने निघ्त्य को थोड़ा ोप्पेर ुहताने लगी …तब नवाज़ उसके और करीब आया.. ये देख कर सामने खड़े आरती के हाथ पाऊँ कनापने lagee…aur वो झेनापते हुए इधर उधर देखने लगी … हलाकि चारो तरफ कोई नहीं था .. उन्दोनो के अलावा.. और अँधेरा hi अँधेरा था..… पर वो इधर उधर देखने लगी.. और उसे वो चीज़ मिल गयी जिसे वो ढूंढ रही थी.. मतलब लाइट का स्विच.. स्विच ों करते hi कुछ रोशनी चारो तरफ फैलाने लगी ….

उस रौशनी मई नवाज़ ने उसे कहा..

थोड़ा और ऊपर उठाओ..

तब डरते डरते आरती कहती है..

क्या

तुम्हारे निघ्त्य

भला क्यों

बहुत धीरे से बोली आरती मनो जैसे उस के हलक मैं कुछ अटक गया हो..

पानी से भीग जायेगा..

जैसे नवाज़ ने कहा वैसे आरती ने आपने निघ्त्य को थोड़ा उप्पर उठाया.. ..उसने अपने निघ्त्य को झांगों के आधे हिस्से तक ऊपर उठा लिया था…… वैसे hi नवाज़ की ऑंखें आरती के मांसल झांगों पाई गए .. इतने गोर गोर झांगों को आपने इतने नज़दीक पा कर नवाज़ हरैं रह gaya…..usne सर उप्पर उठाकर आरती को देखा.. सामने आरती

होंटो पर लाल रंग के लिपस्टिक लगाए हुए कड़ी थी .. उसका फेस उस बाथरूम के धीमे लाइट के रोशनी मैं ऐसे चमक रहा tha…mano जैसे हीरे के ऊपर रोशनी पढ़ने से हीरा चमकता hai……..wo एक निघ्त्य पहनकर उसके सामने कड़ी थी…. जैसे अभी अभी सवर्ग से कोई अप्सरा नीचे उतर ए हो.

ऐसा क्या देख रहा ये मुझे.. इसकी बुरी नज़र तो नहीं हुई न मुझपर.. ये सोच कर आरती के हाथ पेअर कनाप रहे thee……..par वो छह कर भी तो नवाज़ को अब मन नहीं कर सकती थी… क्यों की उसने पहले hi हाँ किया था..

क्या देख रहे हो ऐसे मुझे

आरती ने घबराते हुए नवाज़ से पुछा. और पीछे हो गए.. पीछे अब बाथरूम की वाल थी.. तब नवाज़ लड़खड़ाती हुई आवाज़ मैं कहता है..

नहीं .. नहीं.. वो हाँ दरसल मई..

क्या मई मई..

वो उसे देखते हुई कहता है..

बदन बहुत दर्द कर रहा है.. लगता है आज काम बहुत हो गया..

और फिर नवाज़ ने अपनी बाँहों को सर के ऊपर लेजाकर अगंदी ली…

मुझे क्या अपनी बॉडी दिखा रहे हो क्या..

पसंद आया क्या..

वैसे बॉडी ठीक है..

आप को पसंद आयी क्या??

उतनी भी अच्छी नहीं जो मुझे पसंद आ जाये..

तब वो उसके निघ्त्य को देखते हुई कहता है

और थोड़ा उप्पर

नहीं.. मई नहीं कर सकती..

भीग जायेगा

भीग जाने दो

तब नवाज़ घूम गया .. और उसके सामने खड़ा हो gaya..uske सामने पिट karke..Aarti ने फिर बाथरूम का दूर लॉक किया … और नवाज़ के पीछे कड़ी हो गए ….. और उसके पिट को देखने lagi..aur फिर उसने आपने हाट मई सोप ले लिया..

अब आरती ने निचे जुख के पानी लिया और नवाज़ के बदन पाई दाल diya..aur फिर उसने उसके पिट पर सोप लगाने लगी.. …..अब वो उसके कन्धों को धीरे-2 साबुन लगाके धीरे धीरे सहलाने लगी …. आरती के उंगलयां नवाज़ के कन्धों से नीचे उस के खुले हुए गले तक जा रहा थी……

आरती के मुलयम हाथों ने अपना जादू दिखाया ….. नवाज़ के ऑंखें इतनी मस्त साबुन लगाने की वजह से और सहलाने की वजह से बंद होने लगी…

तब वो उसे कहते है..

स्टूल पाई बैठ जाओ.. ठीक से सोप नहीं लगा पाउंगी अगर तुम ऐसे hi खड़े रहे तो ..

ठीक है.. पर यहाँ स्टूल कहा है..

तब वो कहती है..

ओह्हो बाबा.. वो भी मुझे hi देना पड़ेगा क्या?? सामने वाला स्टूल नहीं दिख रहा है क्या तुम..

वो हो.. वो वाला क्या??

ऐसा कह के उस स्टूल को लेने के लिए आगे झुकने लगा तब आरती कहती है..

रहने दो.. मई hi देते हु..

ऐसा कह के सामने वाले स्टूल की तरफ जाती है और वो स्टूल उतके नवाज़ के पीछे रखते है और कहती है..

बैठ जाओ इस पाई..

ठीक है कहके नवाज़ उस पाई बैठ जाता है.. अब आरती उसके पीछे कड़ी हो जाती है..
 
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