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- Dec 5, 2013
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जैसे hi वो स्टूल पाई बैठ गया वैसे hi आरती निचे जुख के पानी लेके उसके पिट पर डालती है.. और वह साबुन लगाने लगते है..
पहले हाथ से आराम से साबुन लगा रही थी तब नवाज़ उसे वह सहलाओ ऐसे बोल रहा था तब आरती उसे कहते है..
हाँ करुँगी पहले साबुन तो लगाने दो बोलती है और साबुन लगाने के बाद वह हाट से सहलाने lagi..tab वो उसका हाथ पकड़ के ऐसा सहलाओ बता रहा था वैसा आरती कर रही थी.. अब वो पानी लेने के लिए जब निचे जूक तब नवाज़ शावर ों करता है तब आरती कहते है..
ये क्या कर रहे हो
तब वो कहता है
पानी लेने को आपको बार बार जुकना पद रहा था तो सोचा आप को मेरे वजह से तकलीफ क्यों हो
अच्छा ये सोचा या मुझे भीगने का इरादा था
नहीं नहीं आप को भीगने का कोई इरादा नहीं था
मई तुम्हारे सब इरादे अच्छे से जानती हु
तब नवाज़ उतके घूम जाता hai..aur उसे देखने लगता है.. उसकी निघ्त्य पूरी तरीके से भीग कर उसके बदन से चिपक गयी थी …… आरती के नज़रें नवाज़ के भरी भरकम बॉडी पर अटकी हुई thee….aur नवाज़ की नज़र उसके आम par..uske निघ्त्य गीली होकर उसकी चुच्यों से चिपकी हुई थी… उस वजह से उसके निप्पल्स उसके निघ्त्य मैं से साफ़ दिखाई दी रहे थी….. ये नज़ारा देख नवाज़ के बदन मैं मनो जैसे आग लग गए हो …….वो जानती थी की, नवाज़ उसकी तरफ ही देख रहा है ….. शयद इस बात से आरती को कोई फरक नहीं पढ़ रहा tha…..wo जानती थी, की उसके आम के पूरे गोल्याई नवाज़ को दिखाई दी रही होंगे…
इधर नवाज़ का लुंड एक बार फिर से अपनी ाकुआत पर आ चूका था …….जब आरती की नज़र उसके लुंड के तरफ गयी तो उसका मुँह खुला का खुला रह gaya……uski गीली ुंदरपनत से उसके 8 इंच के लुंड के ऊपर चिपकी हुई है, जिससे देख कर आरती का कलेजा मुँह को आ गया tha…….aarti हरिअत भरी नज़रों से नवाज़ के विशाल
और मोठे लुंड को देख रही थी …….नवाज़ के मुंसल लुंड के एक झलक देखने के बाद आरती के छूट के फांकें फुदकें लगी …… उसके चहरे पर कामुक मुस्कान आ गयी .. जब नवाज़ को इस बात का अहसास हुआ तो वो खुश हो गया.. पर जब आरती को जब ये अहसास हुआ की नवाज़ जान गया है की वो क्या देख रही तो वो शर्मा गयी और वो पलट गयी..
अब आरती के पीठ नवाज़ के तरफ थी ……. आरती की पिंक निघ्त्य उसके चूतड़ों पर चिपकी हुई थी ….. पतले से निघ्त्य मैं से आरती के चूतड़ों का पूरा भूगोल दिखाई दी रहा था ……. यहाँ तक के उसके गांड के दरार भी नवाज़ के आँखों से छुपी नहीं the….itne ठाड़े पानी
मैं भी जैसे उसके उसके ुंदरपनत के अंदर आग लग गए ho….uska लुंड ुंदरपनत के अंदर
हलचल करने laga…….wo चाह कर भी आरती के चूतड़ों पर सी नज़र नहीं हटा पा रहा था….
तब अचानक से आरती पलट गयी और उसकी और देखते हुई कहने लगी..
हो गया क्या.. मई जाऊ क्या
नवाज़ को इस बात का बिकुल अंदाजा नहीं था की आरती अचानक ऐसा कुछ kahege..wo एक दम से झेंप गया……. उसने हड़बड़ाहट हुए बोलै.
क्या क्या… क्या कह रहे हो आप
मैं कह रहे हु तुम्हारा हो गया तो मई जाऊ क्या..
अब तक आपने साबुन पुरे शरीर को लगाया भी नहीं न मालकिन साहिबा..
तो ठीक से बैठो न
ऐसा उसे देखते हुई कहते है

पता नहीं उसके दिमाग मैं आज क्या चल रहा tha…kya सोच कर उसने ये कहा..
ठीक है करके नवाज़ स्टूल पाई बैठ जाता है..
पहले हाथ से आराम से साबुन लगा रही थी तब नवाज़ उसे वह सहलाओ ऐसे बोल रहा था तब आरती उसे कहते है..
हाँ करुँगी पहले साबुन तो लगाने दो बोलती है और साबुन लगाने के बाद वह हाट से सहलाने lagi..tab वो उसका हाथ पकड़ के ऐसा सहलाओ बता रहा था वैसा आरती कर रही थी.. अब वो पानी लेने के लिए जब निचे जूक तब नवाज़ शावर ों करता है तब आरती कहते है..
ये क्या कर रहे हो
तब वो कहता है
पानी लेने को आपको बार बार जुकना पद रहा था तो सोचा आप को मेरे वजह से तकलीफ क्यों हो
अच्छा ये सोचा या मुझे भीगने का इरादा था
नहीं नहीं आप को भीगने का कोई इरादा नहीं था
मई तुम्हारे सब इरादे अच्छे से जानती हु
तब नवाज़ उतके घूम जाता hai..aur उसे देखने लगता है.. उसकी निघ्त्य पूरी तरीके से भीग कर उसके बदन से चिपक गयी थी …… आरती के नज़रें नवाज़ के भरी भरकम बॉडी पर अटकी हुई thee….aur नवाज़ की नज़र उसके आम par..uske निघ्त्य गीली होकर उसकी चुच्यों से चिपकी हुई थी… उस वजह से उसके निप्पल्स उसके निघ्त्य मैं से साफ़ दिखाई दी रहे थी….. ये नज़ारा देख नवाज़ के बदन मैं मनो जैसे आग लग गए हो …….वो जानती थी की, नवाज़ उसकी तरफ ही देख रहा है ….. शयद इस बात से आरती को कोई फरक नहीं पढ़ रहा tha…..wo जानती थी, की उसके आम के पूरे गोल्याई नवाज़ को दिखाई दी रही होंगे…
इधर नवाज़ का लुंड एक बार फिर से अपनी ाकुआत पर आ चूका था …….जब आरती की नज़र उसके लुंड के तरफ गयी तो उसका मुँह खुला का खुला रह gaya……uski गीली ुंदरपनत से उसके 8 इंच के लुंड के ऊपर चिपकी हुई है, जिससे देख कर आरती का कलेजा मुँह को आ गया tha…….aarti हरिअत भरी नज़रों से नवाज़ के विशाल
और मोठे लुंड को देख रही थी …….नवाज़ के मुंसल लुंड के एक झलक देखने के बाद आरती के छूट के फांकें फुदकें लगी …… उसके चहरे पर कामुक मुस्कान आ गयी .. जब नवाज़ को इस बात का अहसास हुआ तो वो खुश हो गया.. पर जब आरती को जब ये अहसास हुआ की नवाज़ जान गया है की वो क्या देख रही तो वो शर्मा गयी और वो पलट गयी..
अब आरती के पीठ नवाज़ के तरफ थी ……. आरती की पिंक निघ्त्य उसके चूतड़ों पर चिपकी हुई थी ….. पतले से निघ्त्य मैं से आरती के चूतड़ों का पूरा भूगोल दिखाई दी रहा था ……. यहाँ तक के उसके गांड के दरार भी नवाज़ के आँखों से छुपी नहीं the….itne ठाड़े पानी
मैं भी जैसे उसके उसके ुंदरपनत के अंदर आग लग गए ho….uska लुंड ुंदरपनत के अंदर
हलचल करने laga…….wo चाह कर भी आरती के चूतड़ों पर सी नज़र नहीं हटा पा रहा था….
तब अचानक से आरती पलट गयी और उसकी और देखते हुई कहने लगी..
हो गया क्या.. मई जाऊ क्या
नवाज़ को इस बात का बिकुल अंदाजा नहीं था की आरती अचानक ऐसा कुछ kahege..wo एक दम से झेंप गया……. उसने हड़बड़ाहट हुए बोलै.
क्या क्या… क्या कह रहे हो आप
मैं कह रहे हु तुम्हारा हो गया तो मई जाऊ क्या..
अब तक आपने साबुन पुरे शरीर को लगाया भी नहीं न मालकिन साहिबा..
तो ठीक से बैठो न
ऐसा उसे देखते हुई कहते है

पता नहीं उसके दिमाग मैं आज क्या चल रहा tha…kya सोच कर उसने ये कहा..
ठीक है करके नवाज़ स्टूल पाई बैठ जाता है..





















