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- Dec 5, 2013
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काफी देर तक आरती ऐसे hi खुद से सवाल जवाब करती रही. .. सोचते रहे.. सोफे पाई बैठ कर..
वो फिर कहने लगे.. इन् दोनों को जाकर बहुत टाइम हुआ है अब.. ऐसा कहते हुई वो घडी की और देखने लगे.. इन् लोगो को भूक नहीं लगे होंगे क्या..
फिर वो कहने लगे..
उस कमीने को भूख नहीं लगे होंगे.. पर नीता को तो भूख लगे होंगे न.. उस कमीने के भूख मई अच्छे से जानते हु.. पर आरती वो तो लव बर्ड है.. तू तो जानती है न लव बर्ड को प्यार मई भूख प्यास कुछ नहीं लगती.. तू hi जेक उनको बुलाना चाहिए.. पर ऐसा बुलाना ठीक रहेगा क्या..
इधर एक का चलना न चलना एक बराबर था. क्यों की एक मई भी उसे पसीना आ रहा था.. नवाज़ और नीता के बारे मई सोच कर..
फिर वो खुद को कहने लगे..
मुझे जाना hi चाहिए.. पर……. कही वो रूम मई या बहार अकेला hi हुआ तो ? और वह नीता नहीं हुई थो.. और मुझे अकेला पाकर कही उसने मेरे साथ कुछ गन्दा काम करना चाहा तो..
नहीं….. नहीं .. नीता होंगे वह.. वो कहा जायेगे.. वो उसे इतने जल्दी अकेले नहीं छोड़ेगे ..आरती ने अपने आप hi सवाल किया और अपने आप hi उसका जवाब दे दिया. पर फिर भी एक बार कन्फर्म कर लेना ठीक है. पर कही उसने ये सब हरकत दोबारा शुरू कर दी तो ?
नहीं नहीं वो शयद नहीं करेगा.. मुझे लगता है वो लोग भहर नहीं होंगे.. रूम मई hi होंगे ..
आखिर कर वो कुछ सोचकर हॉल से निकली और वो दोनों जहा थे उस रूम की और चल पड़े ..जिस रूम मई सफाये करने थी उस रूम के मैं दूर पर आरती पहुँच गए.. कुछ देर वही ruki..aur सोचने लगे..
आगे जाऊ या नहीं.. या आवाज दू.. आख़िरकार आरती से रहा नहीं गया और उसने बोहोत hi धीरे से थोड़ा सा दरवाजा खोला और सर निकल कर इधर उधर देखा .. उसने चारो तरफ देख लिया और उसे विश्वास हो गया की वो कही भी नहीं है. .. तब उसने पूरा दरवाजा खोल दिया और सामने के कमरे की तरफ चलने लगे .
सामने 3 रूम थे.. पहले उसने लेफ्ट वाली रूम देखे.. वह कोई नहीं था.. फिर राइट वाली रूम देखे.. वह भी कोई नहीं था.. फिर वो सेंट्रल वाली रूम की तरफ देखने लगे.. वो रूम का दूर अन्दर से बांध था..
वो रूम देख कर वो खुद को कहते है..
लगता है वो दोनों इस कमरे मई होंगे क्यों की इस कमरे का दरवाजा बंद है..
फिर वो उस कमरे के पास जाती है.. फिर कुछ सोचकर वो कहती है. .
इस का मतलब वो इस कमरे में hi है… और… माय गोड़.. कुछ गन्दा काम कर रहे है..
रूम के दूर पर जाकर वो बहुत नज़दीक जाकर खड़े हो जाती है..
आअह्ह्ह्ह…. इसको भी चुसो न… एक hi चुकी को कितनी देर तक चुसोगे .. uuiiii….maaaa….
बहार खड़े आरती ये सुनकर काँप गए.. उसकी इस कामुकता से भरी लस्करी को sunkar…wo समाज गए थी की अन्दर जरूर कुछ और हो रहा hai..wo सोचने लगे.. क्या मई देखु उनको ये सब करते हुई..
अंदर से आ रही आवाजे आरती को बैचैन करने लगी.. उन आवाजों को सुन कर आरती के दोनों पेअर कपङे lage..aarti को समझ नहीं आरहा था की यहाँ पर रुक कर ये सब सुनु या आवाज लगा कर उनको रोकू.. या फिर बिना कुछ कहे अपने कमरे में वापस जाऊ.. एक अजीब सी बेचैन कर देने वाली इस्थिति ने आरती को घेर लिया था.. कुछ भी समझना उसके लिए बोहोत मुश्किल होता जा रहा था..
आरती अभी अपनी hi सोच में डूबी थी की अंदर से आ रही आवाज ने उसका ध्यान तोड़ दिया..
नीता तेरी मेमसाब एक डैम मस्त माल है.. अरविन्द साहब तो जैम कर मजे लेते होंगे..?
नवाज़ ने नीता से पूछा..
आईई…. धीरे धीरे दबाओ न .. दर्द होता है..
हाँ ये बात तो है.. मेमसाब बोहोत सूंदर है.. एक दो बार मैंने उनके कमरे की सफाई करते हुए जब उनके बीएड की चादर देखि तो समझ गयी थी की रात को साहब ने मेमसाब की जैम कर चुदाई की है.. पूरी की पूरी चादर पर लैंड छूट के पानी के निशाँ थे.. और कई बार तो सफाई करते हुए मुझे वो रबर के गुब्बारे क्या बोलते है उन्हें कंडोम भी मिले थे.. बड़ा gil-gila सा होता है..
तूने कभी देखा है उनको चुदाई करते हुए ?
नहीं ऐसा मौका कभी नहीं मिला.. हाँ पर जब साहब की छूती होती है तो साहिब मेमसाब को एक दूसरे से lipat’te हुए जरूर देखा है..
अच्छा तुझे क्या लगता है साहब मेमसाब की छूट hi मरते होंगे या गांड भी..?
हे भगवान् ये क्या हो रहा है.. ये लड़का मेरे बारे में सब पूछता जा रहा है.. और ये हरामखोर नीता भी उसे मजे ले कर सब कुछ बताये जा रही है..
वो फिर कहने लगे.. इन् दोनों को जाकर बहुत टाइम हुआ है अब.. ऐसा कहते हुई वो घडी की और देखने लगे.. इन् लोगो को भूक नहीं लगे होंगे क्या..
फिर वो कहने लगे..
उस कमीने को भूख नहीं लगे होंगे.. पर नीता को तो भूख लगे होंगे न.. उस कमीने के भूख मई अच्छे से जानते हु.. पर आरती वो तो लव बर्ड है.. तू तो जानती है न लव बर्ड को प्यार मई भूख प्यास कुछ नहीं लगती.. तू hi जेक उनको बुलाना चाहिए.. पर ऐसा बुलाना ठीक रहेगा क्या..
इधर एक का चलना न चलना एक बराबर था. क्यों की एक मई भी उसे पसीना आ रहा था.. नवाज़ और नीता के बारे मई सोच कर..
फिर वो खुद को कहने लगे..
मुझे जाना hi चाहिए.. पर……. कही वो रूम मई या बहार अकेला hi हुआ तो ? और वह नीता नहीं हुई थो.. और मुझे अकेला पाकर कही उसने मेरे साथ कुछ गन्दा काम करना चाहा तो..
नहीं….. नहीं .. नीता होंगे वह.. वो कहा जायेगे.. वो उसे इतने जल्दी अकेले नहीं छोड़ेगे ..आरती ने अपने आप hi सवाल किया और अपने आप hi उसका जवाब दे दिया. पर फिर भी एक बार कन्फर्म कर लेना ठीक है. पर कही उसने ये सब हरकत दोबारा शुरू कर दी तो ?
नहीं नहीं वो शयद नहीं करेगा.. मुझे लगता है वो लोग भहर नहीं होंगे.. रूम मई hi होंगे ..
आखिर कर वो कुछ सोचकर हॉल से निकली और वो दोनों जहा थे उस रूम की और चल पड़े ..जिस रूम मई सफाये करने थी उस रूम के मैं दूर पर आरती पहुँच गए.. कुछ देर वही ruki..aur सोचने लगे..
आगे जाऊ या नहीं.. या आवाज दू.. आख़िरकार आरती से रहा नहीं गया और उसने बोहोत hi धीरे से थोड़ा सा दरवाजा खोला और सर निकल कर इधर उधर देखा .. उसने चारो तरफ देख लिया और उसे विश्वास हो गया की वो कही भी नहीं है. .. तब उसने पूरा दरवाजा खोल दिया और सामने के कमरे की तरफ चलने लगे .
सामने 3 रूम थे.. पहले उसने लेफ्ट वाली रूम देखे.. वह कोई नहीं था.. फिर राइट वाली रूम देखे.. वह भी कोई नहीं था.. फिर वो सेंट्रल वाली रूम की तरफ देखने लगे.. वो रूम का दूर अन्दर से बांध था..
वो रूम देख कर वो खुद को कहते है..
लगता है वो दोनों इस कमरे मई होंगे क्यों की इस कमरे का दरवाजा बंद है..
फिर वो उस कमरे के पास जाती है.. फिर कुछ सोचकर वो कहती है. .
इस का मतलब वो इस कमरे में hi है… और… माय गोड़.. कुछ गन्दा काम कर रहे है..
रूम के दूर पर जाकर वो बहुत नज़दीक जाकर खड़े हो जाती है..
आअह्ह्ह्ह…. इसको भी चुसो न… एक hi चुकी को कितनी देर तक चुसोगे .. uuiiii….maaaa….
बहार खड़े आरती ये सुनकर काँप गए.. उसकी इस कामुकता से भरी लस्करी को sunkar…wo समाज गए थी की अन्दर जरूर कुछ और हो रहा hai..wo सोचने लगे.. क्या मई देखु उनको ये सब करते हुई..
अंदर से आ रही आवाजे आरती को बैचैन करने लगी.. उन आवाजों को सुन कर आरती के दोनों पेअर कपङे lage..aarti को समझ नहीं आरहा था की यहाँ पर रुक कर ये सब सुनु या आवाज लगा कर उनको रोकू.. या फिर बिना कुछ कहे अपने कमरे में वापस जाऊ.. एक अजीब सी बेचैन कर देने वाली इस्थिति ने आरती को घेर लिया था.. कुछ भी समझना उसके लिए बोहोत मुश्किल होता जा रहा था..
आरती अभी अपनी hi सोच में डूबी थी की अंदर से आ रही आवाज ने उसका ध्यान तोड़ दिया..
नीता तेरी मेमसाब एक डैम मस्त माल है.. अरविन्द साहब तो जैम कर मजे लेते होंगे..?
नवाज़ ने नीता से पूछा..
आईई…. धीरे धीरे दबाओ न .. दर्द होता है..
हाँ ये बात तो है.. मेमसाब बोहोत सूंदर है.. एक दो बार मैंने उनके कमरे की सफाई करते हुए जब उनके बीएड की चादर देखि तो समझ गयी थी की रात को साहब ने मेमसाब की जैम कर चुदाई की है.. पूरी की पूरी चादर पर लैंड छूट के पानी के निशाँ थे.. और कई बार तो सफाई करते हुए मुझे वो रबर के गुब्बारे क्या बोलते है उन्हें कंडोम भी मिले थे.. बड़ा gil-gila सा होता है..
तूने कभी देखा है उनको चुदाई करते हुए ?
नहीं ऐसा मौका कभी नहीं मिला.. हाँ पर जब साहब की छूती होती है तो साहिब मेमसाब को एक दूसरे से lipat’te हुए जरूर देखा है..
अच्छा तुझे क्या लगता है साहब मेमसाब की छूट hi मरते होंगे या गांड भी..?
हे भगवान् ये क्या हो रहा है.. ये लड़का मेरे बारे में सब पूछता जा रहा है.. और ये हरामखोर नीता भी उसे मजे ले कर सब कुछ बताये जा रही है..





































