Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 14 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

क्या देख रहे हो

तब आरती का गुस्सेवाला चेहरा देख के नवाज़ बात बदल देता है

कुछ नहीं… वो सोच रहा था.. वह का सामान कहा रखे..

और आरती के दूसरे साइड मई.. बाजु मई पड़ा हुआ सामान देख रहा है ऐसे दिखता है..

आरती पलट के देखते है तो वह सामान था.. वो सोचने लगते है.. गुस्से मई..

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साला सचमुच यही सोच रहा था या मेरे बूब्स को देख रहा था.. कमीने का कुछ बता नहीं सकते..

यही सोचते हुई जैसे हे आरती की नज़र नवाज़ के चेस्ट पर पड़ती हैं वो खो सी जाती है उसका बदन देख के.. उसके चौरे छाती और मांसल पेट , मजबूत बांहे और कंडे को देख कर.. वो लेन्टाइन से छोटे छोटे बॉक्स निकल रहा था.. अब इस वक़्त उसके एक हाथ मई एक बॉक्स था इस वजह उसके बाइसेप्स फूल गए थे.. .आरती जैसे हे उसके बाइसेप्स को देखती है तो वो उसके हाथ के ताक़त का अंदाज़ा लगाती है और मन में कहती है:

इतनी बड़ी बाइसेप्स.. कितना मज़बूत हाथ है (तभी उसके मन में नीता की बात याद आती है..

" दीदी जी नवाज़ के हाथ हे मेरे ये बड़े बड़े दूध को एक हाथ से दबोच सकते है और मेरे मटके जैसे गांड की नसे ढीली कर देते है .. दीदी जी उसका हाथ इतना बड़ा है उतना बड़ा hi उसका हत्यार है जिस से मेरे आगे का दरया और पीछे का समुन्दर पार कर देता है ")

तभी नवाज़ के आवाज़ से आरती अपनी सोच से बहार आती है

मेमसाब आप कहा खो गयी

कही नहीं.. बताओ क्या करना है..

उसके तरफ देखते हुई कहते है..





वो पीछे वाले बॉक्स है न

अभी भी आरती नवाज़ को देख रही थी.. उसके नंगे जिस्म को.. वो देखते हुई कहती है

कोनसे बॉक्स

मुझे मत देखो.. उस बॉक्स को देखो.. मेरे को ऐसे क्या देख रहे हो . .

नवाज़ ने ऐसे कहते hi आरती शर्म से आपने बाल संवारते हुई दूसरी और देखने लगे... और नीचे देखते हुई कहने लगी..





मई तेरे को क्यों देखूंगी भला.. कुछ भी बोलते हो..

अच्छा.. आप मुझे नहीं देख रही थी ..

वो जाने दो.. कह क्या रहे थे ये बताओ

वो जो बॉक्स है

कोनसे वाले

तब इशारा करते हुई नवाज़ कहता है

वो पीछे वाले

उन निचे लेना है

तो ले लो न.. मुझे क्यों बता रहे हो..





नखरा करते हुई आरती कहती है

मेरे हाथ वह तक नहीं जा रहा है

तो मेरा कैसे जायेगा

वो मुझे पता है पर मेरे पास एक आईडिया है

कोनसे आईडिया

अगर आपको कोई प्रॉब्लम नहीं है तो

बताओ पहले आईडिया क्या है

मई आप को पीछे से उठा लेता हु.. फिर आप बॉक्स निचे उतर लो

क्या??

ऐसा कह के जोर से चिल्लाते है... और फिर उसकी और देखते हुई कहती है..





नहीं .. मई ये नहीं कर सकती..

फिर दोनों कुछ देर शांत रहते है.. नवाज़ सोच रहा था इसको कैसे तैयार करू और आरती सोचती है ये करना सही नहीं है .. उसको अगर मेरे बॉडी को चुने दिया तो ये मेरे साथ कुछ न कुछ गलत हरकत करेगा.. मेरे को इधर उधर छुएगा.. ये सब ठीक नहीं है.. और नीता के सामने तो कदापि सही नहीं है.. मई ये कभी नहीं कर सकती.. नीता के होते हुई या नहीं होते हुई..

तभी नवाज़ कहता है..

मान जाओ न मेमसाब..

मई ये नहीं कर सकती.. तुम्हारे पास इसके सिवाय कोई अच्छा आईडिया नहीं है क्या..

उसकी और देखते हुई कहते है..





नहीं है

तो रहने दो बॉक्स वह

मालिक घटेंगे..

तब वो सोचती है.. बात तो सही कह रहा है.. पापा जी को आधा अधूरा काम पसंद नहीं है..

फिर कोई अच्छा दूसरा वाला आईडिया सोच लो

है पर आप कर नहीं पाओगे

कोई उटपटांग आईडिया होगा तो नहीं कर पाउंगी

उटपटांग नहीं है.. अच्छा वाला है . .

उसकी और अड्डा के साथ देखते हुई कहती है..





पक्का

हाँ मेमसाब

बको
 
है पर आप कर नहीं पाओगे

कोई उटपटांग आईडिया होगा तो नहीं कर पाउंगी

उटपटांग नहीं है.. अच्छा वाला है

उसकी और अड्डा के साथ देखते हुई कहती है..

पक्का

हाँ मेमसाब

बको

ये जो विंडो है न

उसका क्या

उसपे पाँव रख के आप उप्पर जड़ जाओ.. ऐसा लेन्टाइन को हाट पकड़ के ऊपर चढ़ जाओ..

नहीं नहीं मुझसे नहीं होगा ये

तरय तो कर लो मेमसाब

नवाज़ मई नहीं कर पाऊँगी ये

आप नहीं कर पाओगे तो ठीक है पर एक बार तरय तो कर लो

नवाज़ तुम समाज क्यों नहीं रहे हो.. मैंने इस वक़्त साडी पहनी है.. और साडी पहन के एक पाँव इस विंडो पाई और दूसरी विंडो पाई नहीं रख सकती और न hi उप्पर चढ़ सकती हु

हाँ वो बात भी सही है

मई तुम्हारी यहाँ हेल्प करने आयी हु.. और तुम हर काम मुझसे hi करवाना चाहते हो

नहीं नहीं ऐसे कोई बात नहीं है

तो फिर तुम या तुम्हारी छमकछल्लो क्यों नहीं करते

मेरा वजन ये विंडो नहीं लेगा..

और नीता का

उसका हाट वह लेन्टाइन तक नहीं जायेगा

नवाज़ की बात सुनकर आरती कहती है

तुम्हारी बात तो सही है

अभी हमारी पास वही एक ऑप्शन बचा है

मई नहीं कर सकती.. तुम्हारे छमकछल्लो से करवा लो

वही बात फिर से मेमसाब.. मई तो कह रहा हु.. उसका हाट वह तक नहीं जायेगा

तुमने उतने के बाद भी

हां मेमसाब

थोड़ा और उप्पर उठाते है.. चाहे तो इसमे मई तुम्हारी हेल्प कर लुंगी..

जिस मई हेल्प करने को बोलता हु वह आप हेल्प नहीं कर रही हो.. और यहाँ आप के हेल्प की जरुरत नहीं है वह हेल्प कर रही हो..

नहीं मेरे कहने का मतलब है हम दोनों मिलके उसे और उप्पर उठा सकते है ताकि उसका हाट पहुँच जाये बॉक्स तक

उसको कितना भी उप्पर उठा लो उसका हाट बॉक्स तक नहीं जाता.. आप hi हो जो मेरे हेल्प कर सकती हो नहीं तो मुझे बड़े साहब की दांत खाने पड़ेगे..

तुम कोई दांत खाने की नौबत नहीं आएंगे

मतलब आप तैयार है

मैंने ऐसा नहीं कहा

फिर

हम एक बार नीता को उतके देखते है

नहीं मेमसाब कुछ फायदा नहीं है उसका हाट नहीं पहूँच पायेगा

मई नहीं मानती

आप की मानाने या न मानाने से काम नहीं बनेगा. .

तब नवाज़ की तरफ देखते हुई आँखों से इशारा करते हुई कहते है..





वैसे चामरि कामचोर छमकछल्लो कहा है.. कही दिख नहीं रहे है..

ऐसा कह के आरती रूम मई चारो और देखते है

वो कचरा डालने बहार गयी है..

मतलब भाग गयी.. कामचोर..

तभी नीता बहार से अंदर आते हुई कहती है..

मई कैसे भाग सकती हु.. आपने दीदी को अकेला चोर के

फिर कहा मरने गयी थी

कचरा डस्टबिन मई डालने गयी थी.. बोलिये बात क्या है..

आपने यार से पूछ न.. देख वो क्या बोल रहा है

तब नीता नवाज़ के तरफ देखती है.. नवाज़ कुछ नहीं बोलता.. वो सोचता है.. गयी भैंस पानी मई .. मई इसको कन्विंस करने की कोशिश कर रहा था और ये मान नहीं रही है.. अब नीता के सामने तो ये कभी रेडी नहीं होंगे.. अब मई कैसे मनौ इससे.. मान जाती तो इसके बदन को चुने का मौका मिलता.. उसके गांड पाई आपने लौड़ा रगड़ देता.. इसको सडके करता.. पर अब कुछ फायदा नहीं है.. नवाज़ यही सब सोच रहा था.. उसका नीता के बात कोई ध्यान नहीं था..

और दूसरी और नवाज़ जो शांत था उसको आरती देख रही थी.. बड़ी अड्डा के साथ..

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उसे लग रहा था नीता के होते हुई नवाज़ उसे कुछ नहीं कहेगा.. फास गया अब

बात क्या है दीदी जी

तेरा यार मुझसे कुछ कह रहा था

क्या कह रहे थे नवाज़ तुम दीदी जी को

कुछ नहीं कह रहा था.. तुम वो छोटा मोठा सामान वह से हटा दो पहले

कुछ नहीं.. क्या.. नवाज़ .. अभी तो कह रहे थे...
 
कुछ नहीं कह रहा था.. तुम वो छोटा मोठा सामान वह से हटा दो पहले

कुछ नहीं.. क्या.. नवाज़ .. अभी तो कह रहे थे...

आरती नखरा करते हुई कहते है..

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नीता के आने से चुप को गए..

मई क्यों चुप होंगे

डर गए शयद नीता से

अब आरती नवाज़ का मज़ा ले रही थी

मई किसी से नहीं डरता

नवाज़ गुस्से मई बोलै

नहीं डरते तो क्यों नहीं बताते

आप hi बोल दो

दोनों के ऐसे कहने से नीता कंफ्यूज हो गयी थी..

दीदी जी सही सही से बताओ न नवाज़ क्या कह रहा था

उससे hi पूछ न

नवाज़ बताओ न

नवाज़ कुछ नहीं बोलता.. और काम करने लगा .. तब आरती उसके और देखते हुई कहते है..





अब बताओ न आपने माशूका को

आप दोनों का क्या चल रहा.. मुझे तो कुछ समाज नहीं आ रहा है..

अच्छा तो मई बताती हु.. तेरा यार कह रहा था की मई आप को उठा लेता हु.. पीछे से.. फिर आप वो बॉक्स निकल लो

अच्छा

क्या अच्छा.. तू मतलब समाज रही है न

फिर आपने क्या कहा

मई कैसे मान सकती हु.. मैंने कहा हम दोनों नीता को उठाते है

तब उसने क्या कहा

उसने कहा उसका हाट नहीं पहुंचेगा

सही कहा

सही के बच्ची.. ..

हम मतलब कोण

यहाँ और कोई है क्या.. मई और तेरा यार

हाँ.. आप और नवाज़

मई और नवाज़ तुजे उठाएंगे तो तेरा हाथ पहुँच जायेगा न

नहीं दीदी जी नहीं पहुंचेगा... हम लोग तरय कर चुकी है..

ये सुनकर आरती शॉक हो गयी.. उसे लगा शयद नीता को इसका कुछ पता नहीं और इस वजह से नवाज़ शहत है.. लेकिन नीता को सब पता था... ये जानकार आरती शॉक हो गयी.. मायूस हो गयी..

दीदी जी मुझे सब पता है.. मेरा हाथ नहीं पहुंचेगा और आप मान गयी तो उप्पर के सब बॉक्स हम निचे उतर सकते है..

लेकिन नीता ऐसे कैसे मई.. और वो भी तेरे यार के साथ... अरविन्द क्या कहेंगे.. पापा जी क्या कहेंगे..

क्या दीदी जी.. आप तो ऐसे रियेक्ट कर रही हो जैसे मई आप को आपने यार के सात सोने को बोल रही हु..

क्या??? गन्दी कही की.. कुछ भी बोलते है क्या.. बोलने से पहले सोचा कर..

नीता के इस बात पर नवाज़ स्माइल करता है.. उसी वक़्त आरती नवाज़ को देख लेते है..





वो मैं मई कहते है..

साला कमीना.. लगता है नीता के बात से इसकी मैं की मुराद पूरी हो गयी है ऐसा लग रहा है.. इसी लिए स्माइल कर रहा है..

और कुछ सोचने लगते है ... एआरटी वहां से हटाना चाहती थी, लेकिन उसके पेअर उसका साथ hi नहीं दे रहे the..woh जैसे नवाज़ के मस्कुलर जिस्म के अक्करशन में खो गयी थी. उसे ये भी दर नहीं था की अगर उसके ससुर अचानक यहाँ आ गए और उनोने आरती को नवाज़ को देखते हुई देख लिया तो क्या होगा... वो कुछ सोचते हुई नीता को कहती है..

ये कामचोर

जी दीदी जी

एक काम कर

बोलिये दीदी जी

अन्दर घर मई जेक सीडी और टेबल फैन लेके आ..

जी लेट हु

कहकर नीता जाने लगते है

थोड़ा जल्दी aana..hamesha की तरह टाइमपास करते मत बैठना...

नहीं दीदी जी जल्दी आ जाउंगी..

हाँ और बड़ा वाला टेबल फैन ला.. वो हाइट वाला.. जिसमे हम हाइट काम ज्यादा कर सकते है.. हम यहाँ हाइट पाई खड़े होंगे तो हमे हवा लगने चाहिए… हमें!!!!

आरती के ऐसे कहने से नीता को आशर्यचकित हो गए..

हाँ हमें… क्या तुम्हारे नवाज़ को गर्मी नहीं लगते क्या.. उसे फैन की जरुरत नहीं है क्या..

है न दीदी जी… उसे तो बहुत गर्मी होते है..

फिर मैंने जब हमें कहा तब तू फिरसे हमें क्यों खा..

वो आपने पहली बार कहा न इसलिए.. मई थोड़े कंफ्यूज हो गए थे…

अब ज्यादा बाते मत बना और जल्दी आ जा

और फिर आरती मुस्कुराते हुए फ़ौरन सीधा पीछे हो जाती हैं........ रूम के दूसरे साइड ..

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और वह कड़ी हो जाती है .. वहीँ नवाज़ उसी को hi देख रहा tha..Nawaz एक तुक आरती के तरफ अजीब नज़रियों से देखने लगता हैं........... और आरती भी उसे देख रही थी.. उसकी बॉडी को घूरते हुई आरती अंदर हे अंदर शर्म से गारी जा रही थी ... कही न कही मन में सोचती है की नीता सही कहती है की नवाज़ का आकर्षक शरीर hi उसके शरीर को भोग कर के तृप्त कर सकता है..

अब पहली बार आरती के देखने के बाद भी नवाज़ की नज़रें झुकने के बजाये उठी हुई थी.......... मालकिन की ऐसे देखने का डर उसे नहीं था.. इस वजह से उसके लुंड में हलचल सी हो रही थी........

पहले तो वो आरती के चेहरे की तरफ देखता hain.....fir उसकी नज़र आरती के बड़े बड़े चूचियों पर जाती हैं...





उसके साड़ी का पल्लू थोड़ा बाजु मई सरक गया था इस वजह से उसके गोर गिरे चूचियों का उसे दर्शन हो गया था..

कुछ देर तक वो आरती के चूचियों को hi घूरता रहता hain.......mano वो उसकी गोलाई नाप रहा ho.........fir उसकी नज़र जैसे जैसे नीचे की तरफ जाती हैं उसके लुंड में प्रेशर धीरे धीरे बढ़ने लगता hain........kuch देर तक वो उसकी नैवेल को घूरता हैं फिर नीचे की तरफ....... यानि कमर से लेकर पवन tak........wahin आरती की नज़रें भी नवाज़ के नज़र को परख रही thi......aisa पहली बार था जब नवाज़ उसे ऐसी नज़र से इतने देर टेक देख रहा था ........ वहीँ आरती के चेहरे पर शर्म की लखरें साफ़ नज़र आने लगी थी......





आरती के मैं मई आया.. नवाज़ को कहु

" नवाज़ .......!!!!! तुम ऐसे क्या देख रहे हो......."

पर अगले hi पल आरती का कलेजा ज़ोरों से धड़क उठता हैं....... डर के मरे.. अगले hi पल वो सोचने लगती है ...





अगर मैंने उसे कुछ कह दिया और उसने कुछ गन्दा बोल दिया तो मतलब वो कहा देख रहा था वो बोल दिया तो.. तब उसे एहसास होता हैं की शायद ये बहुत बड़ी गलती हो जाती .......... वहीँ नवाज़ धीरे धीरे आरती के तरफ देखते हुए मुस्कुरा रहा tha.......aarti यही सोच रही थी मई उसको कहु या न कहु तभी उसके कान मई आवाज़ पड़ती है...

क्या हुआ क्या सोच रहे हो आप..

तब आरती आपने सोच से बहार आ जाती है.. और शर्मा जाती है..





उसकी और देखते हुए कहती है..

कुछ नहीं ...

अब नवाज़ आगे कुछ बोले इस से पहले दूर से आवाज आता है..

बहु.. तुम यहाँ हो.. मई कब से तुम ढूंढ रहा हु ..
 
ये आवाज़ सुनते hi दोनों दूर की तरफ देखते है.. दूर पर आपने ससुर को देख कर आरती अपनी साडी ठीक करती है और कहती है..

वो नवाज़ और नीता ने कहा था उनको बॉक्स नीचे उतरने के लिए मेरे हेल्प चाहिए इसलिए उनके साथ यहाँ आ गयी थी.. नीता को सीडी लेन को बहार भेजा है..

हाँ वो मिली बहार उसने hi बोलै तुम यहाँ हो

अच्छा ...

शयद दोनों अब मैं मई नीता को गालिया दे रहे थे..

अब आरती आपने ससुर के साथ अपनी गांड मटकते हुए जाने लगी जिस पैर नवाज़ की नज़र पद hi गयी और उसे देखने लगा.. और मैं मई कहने लगा..

क्या गांड है साली की..

अंदर जेक उसके ससुर ने जो काम बोलै था वो करके आरती ने आपने बैडरूम अन्दर से लॉक की और अपनी साडी निकल फेकि और निघ्त्य पहन कर फ्रेश hui..tab तक बहार हाल मई नवाज़ आ जाता है.. नवाज़ को देखते हुई शेठ जी कहते है

हाँ बोलो नवाज़ क्या काम है...

वो मेमसाब के पास कुछ काम था..

हाँ बुलाता हु रुको यहाँ

ऐसा कह के शेठ जी अन्दर रूम मई जाते है..

आरती बीटा

हाँ पापाजी

वो नवाज़ आया है

पापाजी ने ऐसे कहने के बाद आरती पापा जी के तरफ देखने लगती है.. पर कहते कुछ नहीं है..

वो कह रहा है तुम्हारे पास उसका कुछ काम है..

तब आरती कहती है..

मेरे पास.. और उसका काम

हाँ.. ऐसा कह रहा था वो .. बहार खड़ा है वो.. तुम्हारा वेट कह रहा है.. जेक देख लो..

हाँ पापाजी.. जेक देखती हु..

ऐसा कह के बहार हाल मई जाती है... नवाज़ वह खड़ा था.. उसके सामने जेक आपने कमर पर हाथ रखकर खड़े होती है और उसकी और देखते हुई कहते है..





हाँ बोलो क्या काम है..

है है क्या ऐडा है….
 
हाँ बोलो क्या काम है..

है है क्या ऐडा है….

तब वो स्माइल करते hai...aur कहते है..

बोलो क्यों बुलाया मुझे

भूख लगी है

बहार के बाथरूम मई जेक नाहा लो और किचन मई खाना खाने आ जाओ.. मई खाना गरम करती हु तब तक..

पहला बनाया हुआ खाना गरम करके डोज क्या ?? नया फ्रेश खाना बनके नहीं डोज क्या

तब नखरे से कहते है

हां बाबा नया बनके खिलायंगे .. अब तो खुश

हां

फिर नवाज़ बाथरूम मई जेक नाहा लेता है और आरती किचन मई खाना बनाने लगते है.. और हाट धोने के लिए जैसे hi नल को चालू करने लगती है वैसे hi नल से पानी hi नहीं आ रहा था तब परेशां होक कहते है..

इस नल को भी क्या हो जाता है पता hi नहीं चलता

इसलिए तो कह रहा था इसके सलूशन के लिए मेरे पास आईडिया है

तब गर्दन घुमा के नवाज़ को देखते है





आ गए तुम

आप ने बुलाया और हम चले आये

तब स्माइल करते हुई कहते है

नौटंकीबाज़ ..आ जाओ जल्दी और खाना खाओ .. देखते नहीं हो क्या किचन मई कितना सारा काम पड़ा है... मुझे वो पूरा करना है.. तुम्हारे माशूका तो कुछ करती भी नहीं है.. जहा गए वह टाइमपास करती है.. और सारा काम मुझे hi करना पड़ता है..

हाँ मेमसाब वो कामचोर है

कामचोर .....

और आरती हसने लगते hai..nawaz के सामने उसने जो नीता को कल कामचोर कहा था उसकी उसे याद आने लगे..

हाँ मेमसाब... वो बड़े कामचोर है..

हाँ .. तुम दोनों hi कामचोर हो

मई नहीं हु मेमसाब

तुम भी हो. . नहीं तो वो आईडिया मुझे जल्दी बता देते

बताता हु

बताओ फिर

बता दूंगा इतने भी क्या जल्दी है

क्या कहा तुमने क्या जल्दी है..

आरती गुस्से से नवाज़ की तरफ देखते हुई कहती है..

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मुझे क्या दिन भर ऐसे hi यहाँ किचन मई खड़े करने का तुम्हारा इरादा है क्या ..

हाँ.. हो जाओ खड़े ..

और क्या करू यहाँ खड़े होक..

कुछ नहीं

कुछ नहीं ... बस तुमसे बाते करू .. ऐसे hi खड़े हो कर दिनभर न..

हाँ .. उसमे क्या बुराई है ..

हाँ .. कोई बुराई नहीं है .. तुम न एकदम मेन्टल हो..

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मई और मेन्टल

हाँ मेन्टल नहीं तो और क्या

मैंने ऐसा मेन्टल वाला कोनसा काम किया है ..

मुझे दिनभर ऐसे खड़े कर के बाते करने का तुम्हारा इरडा है.. ये मेन्टल लोंगो का काम hi होगा न .. सिंपल आदमी तो नहीं कर सकता न

मैंने तो ऐसे hi कहा था..

ऐसे hi कहा था.. तुम कोनसी बात को सीरियस लेते हो क्या?? या सब चीज़ को ऐसे कहते हो

आप तो गुस्सा हो गए

गुस्सा नहीं तो क्या करू नवाज़..

शांत हो जाओ आप

तब बड़े गौर से नवाज़ को देखते है और कहते है.





मई शांत राहु..

हाँ

रहती हु पर इतना सारा काम कोण करेगा..

हो जायेगा

कैसे हो jayega..Tumare महारानी तो जल्दी आएंगे नहीं.. अब मई क्या करू. . हे भगवान् ..

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आप पहले शांत हो जाओ

वैसे तुम मुझे कुछ बताने वाले थे कल ..

तब नवाज़ आरती के तरफ देखता है और सोचने लगता है की इसको मई क्या बताने वाला था ..

बताया नहीं नवाज़ अब तक...

क्या मेमसाब

तुम्हारे और नीता के बारे मई..

क्या जाना न है आपको

यही की इस महारानी को तुमने कैसे पटाया

इतना hi या और कुछ

और ..

कहके रुक जाती है और कुछ सोचने के बाद कहते है

तुमने पटाया नीता को या उसने तुम

आप को क्या लगता है

मुझे..

हाँ मेमसाब

तब नवाज़ की तरफ अड्डा के साथ देखते हुई कहती है..





मुझे लगता है तुमने hi पटाया होगा

ऐसा क्यों लगता है आपको

ऐसा कहते हुई नवाज़ आरती के नज़दीक आके जो बाल उसके आँखों पर आये थे वो उसके कान के पीछे करता है.. इस वजह से आरती शर्मा जाती है..

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शरमाते हुई वो कहते है

तुम क्या कर रहे हो ..

और आपने बालो मई का नवाज़ का हाट हटते है ..

मई

हाँ

मई ये कह रहा था मेमसाब आप मेरे और नीता के बारे मई जान कर क्या करोगे .. मैंने उसे कैसे पटाया और उसके साथ क्या क्या किया और कहा कहा किया ये जान कर आप क्या hi कर लोगे ..

तब आरती उसकी आँखों मई देखते हुई उसके गाल पर हलकी सी चपत लगते है

बदमाश

या दूसरे की 💕 लवस्टोरी सुनाने मई आप को आनंद आता है ..

बिलकुल नहीं

फिर आप ये जान लो की आप के प्रॉब्लम का हल क्या है

अब आरती को पता नहीं चला की नवाज़ क्या कहना चाहा रहा है इसलिए आरती आचार्य से नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..

कोनसा प्रॉब्लम

आप का प्रॉब्लम

एआरटी को अभी भी समाज नहीं आया ..

नल का प्रॉब्लम

हा वो क्या

हां मेमसाब
 
उसका क्या

आप हमरे लव स्टोरी के बारे मई जानने से अच्छा ये है की आप का प्रॉब्लम सोल्वे जल्दी से जल्दी हो

हां .. पर तुम बता नहीं रहे हो न

वैसे मेमसाब... मई आप का प्रॉब्लम सोल्वे करूँगा तो मुझे क्या मिलेगा

तब बड़ी अड्डा के साथ कहते है





और क्या चाहिए तुम .. इतने बड़े घर की इतनी खूबसूरत मालकिन तुम आपने हातो से गरमा गरम खाना बनके खिला जो रही है

आपने हातो से कहा खिला रही है

तब स्माइल करते हुई कहते है





अच्छा जी .. अब तुम मेरे हातो से खाना खाना है ..

खिला देते तो बढ़िया हो जाता

गरमा गरम खाना बना के परोस रही हु वो काफी नहीं है क्या

वैसे वो भी काफी है ..पर ..

पर क्या

वो तो आप वैसे भी देनेवाले हो

आरती गुस्से से नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..





क्या

खाना ...अगर मई आपको आईडिया नहीं दूंगा तो वैसे भी आप मुझे खाना बनाने परोस डोज .है न ..

हाँ बाबा दंगे.. पर फरक है ..

कैसा फरक

ये जो गरमा गरम खाना मिल रहा है न नवाज़ ..वो नहीं मिलेगा तब ..

उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद् जी

तब स्माइल करते हुई कहते है





वेलकम जी

फिर वो शरमाते हुई नीचे गर्दन करके कहते है..

आईडिया क्या है

आईडिया बता दूंगा पर आईडिया अछि नहीं हुई तो आप बुरा मान जाओगी ..

तब चहरे पर स्माइल लेट हुई कहते है





वैसे मई बुरा मान जाउंगी तो तुम्हारे पास तुम्हारे नीता है न

हाँ वो तो है पर

पर क्या

नौकरानी के साथ अगर मालकिन भी आ जाये तो

तो क्या

तो मज़ा दिहिगुणा हो जायेगा

अच्छा जी.. अब तुम नौकरानी के साथ मालकिन भी चाहिए

बात करने को

मई भी वही बोल रही हु ..बात करने के लिए

तो उसमे क्या बुराई है

बुराई तो नहीं है नवाज़ मियाँ.. पर अच्छे भी नहीं है..

अच्छा जी

हाँ नवाज़.. एक नौकरनी से आप का समाधान नहीं होगा क्या

होगा .. पर काम करते हुई.. आप के बंगलो मई.. थोड़ा टाइमपास ..

टाइमपास.. मई क्या कोई टाइमपास की चीज़ हु क्या..

आप बहुत मस्त चीज़ हो

क्या कहा तुमने

कुछ नहीं

मई टाइमपास के लिए नहीं हु

मई ने वैसा नहीं कहा.. काम करने के साथ बात करने के लिए कोई मिल जय इस लिए मैंने कहा

तब नखरा करते हुई आरती कहते है..





हाँ मई सब समजते hu..lag रहा है तुम बहुत चालू हो

ऐसा क्यों लगा आप को

तब फिर से नखरा करते हुई आरती कहते है...

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मुझे नहीं पता .. अब पहले मुझे ये कॉक ठीक करना है..

तो कर दो

कैसे कर दू

कैसे मतलब.. जो सब लोग करते है उसी तरह

हाँ वो मुझे पता है .. तुम आईडिया देने वाले थे न.. वो जल्दी से डोज तो कॉक ठीक कर लुंगी.. ..

वो तो मई देने वाला hi हु

दे दो न फिर जल्दी ..

ठीक है

तब उसकी और देखते हुई कहते है





वैसे तुम्हारे लिए मेरे पास एक चीज़े है

क्या

खाओगे क्या

अब चीज़ क्या है उसपर देपेंद करता है

तब उसकी और देखते हुई कहते है

रसमलाई

और फिर वह राखी रसमलाई निकल के बड़े आड़ के साथ खाने लगती है





वाओ .. क्या टास्ते है ये रसमलाई

अकेल अकेल टास्ते का मज़ा ले रहे हो

तुम भी खाओ न

ऐसा बोल के उसके पास आके उसे रसमलाई देने लगे तब नवाज़ कहता है

खिलाओ न

तब शरमाते हुई बड़े ऐड के साथ कहते है





हेतु जी

प्ल्ज़ एक बार

बिलकुल नहीं

प्ल्ज़ मेरे प्यारे मेमसाब एक बार आपके इस गोर गोर .. कोमल से मस्त खूबसूरत हातो से खिला दो न

उसकी इस बात से वो खुश हो गयी पर उसे नाराजगी दिखते हुई कहते है

सिर्फ एक बार
 
हेतु जी

प्ल्ज़ एक बार

बिलकुल नहीं

प्ल्ज़ मेरे प्यारे मेमसाब एक बार आपके इस गोर गोर .. कोमल से मस्त खूबसूरत हातो से खिला दो न

उसकी इस बात से वो खुश हो गयी पर उसे नाराजगी दिखते हुई कहते है

सिर्फ एक बार

हां एक बार खिला दो

फिर वो थोड़ा आगे हुई और रसमलाई हाट मई लेके आपने हाट उसके मू के पास ले गयी और उसकी आँखों मई देखते हुई कहते है

मू जरा उप्पर करो

तब नवाज़ मू थोड़ा उप्पर करता है तो उसके मू मई आरती रसमलाई दाल देते है तब हल्का सा उसके उंगली को नवाज़ टच करता है .. टच क्या करता है आरती की ऊँगली चूस लेता है.. आरती तुरंत अपनी उंगली पीछे ले लेती है

बदमाश!!

कहके नवाज़ की तरफ स्माइल करते हुई देखते है





और कहते है..

मुझे पता था तुम ऐसा hi कुछ गुस्ताखी करोगे इसलिए मई तुम खिलने के लिए मन कर रही थी.... एक नंबर के चालू और बदमाश इंसान हो तुम ..

वो तो हु memsaab..par फिर भी आपने आपने प्यारे से नाज़ुक से हातो से ये रसगुल्ले मुझे खिलाये .. उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद् जी

वेलकम जी

आप मुझे आपने हटो से नहीं खिलाना चाहती थी फिर भी खिलाया क्यों

अब इतने प्यार से और बार बार रिक्वेस्ट करोगे तो मन कैसे कर सकते है

फिर एक बार और खिला दो

बिलकुल नहीं

प्ल्ज़ न

नहीं

सॉरी.. अब नहीं चूसूंगा

मुझे पता है तुम चुसोगे

तब नवाज़ आरती की तरफ देखता है और फिर उसका एक हाट पकड़ लेता है

ये आरती के लिए बड़ा झटका था .. जैसे hi नवाज़ उसका हाट पकड़ लेता है वैसे hi आरती शर्मा जाती है.. और निचे देखने लगती है





अभी नवाज़ के हाट मई आरती का हाट था और इस वजह से आरती शर्मा के निचे देख रही थी .. और नवाज़ आरती के मदमस्त रसभरी चूचियों को और उसके गुलाभी लिपस्टिक वाले सेक्सी होंटो का देदार कर रहा था ..

नवाज़ ने उसका हाट पकड़ा उस वजह से उसका हाट कांपने लगा था .. उसका कंपता हुआ हाट अभी भी नवाज़ ने पकड़ रख था … और वो कहता है..

आप की कसम मेमसाब नहीं चूसूंगा

तब आरती अपनी प्यार भरी मुस्कराहट के साथ सर उठा कर नवाज़ के चेहरे की और देखती है…

मेरे झूठे कसम मत खाओ .. मुझे पता है तुम चुसोगे

ऐसे बोल के आरती नवाज़ की तरफ देख कर मुस्कुराती है ..

माँ कसम नहीं चूसूंगा

झूठे

तब नवाज़ आरती की और देखता है और उसके गालो को प्यार से सहलाता है.. आज पहली बार आरती को प्यार का अलग hi एहसास होता है पर झट से उसका हाट हटा देते है..

तब उसका हाट थोड़ा खिंच देता है तब आरती कहती है

ऐसा जबरदस्ती करोगे तो नहीं खिलाऊंगी

मतलब जबरदस्ती नहीं करूँगा तो खिला डौगी ..

तब आरती शर्मा जाती है ..
 
तब नवाज़ आरती की और देखता है और उसके गालो को प्यार से सहलाता है.. आज पहली बार आरती को प्यार का अलग hi एहसास होता है पर झट से उसका हाट हटा देते है..

तब उसका हाट थोड़ा खिंच देता है तब आरती कहती है

ऐसा जबरदस्ती करोगे तो नहीं खिलाऊंगी

मतलब जबरदस्ती नहीं करूँगा तो खिला डौगी न ..

तब आरती शर्मा जाती है..





और आपने बालो से खेलने लगती है ..

बताओ न मेमसाब

पता नहीं आरती को क्या हो गया था वो न चाहते हुई भी बोल गयी

क्या

ऐसा बोलके वो उसे थोड़ा हल्का सा खींचता है तो आरती नवाज़ से भीड़ जाती है.. जिस कारन नवाज़ के छथि को हलके से आरती के मम्मी टच करते hai..us वजह से उसके साँसे हलकी हलकी भरी होने लगी थी .. उसके टच से आरती के अंदर एक अजीब सी बेचैनी पैदा कर रही थी थी .. वो उसने जो हाट पकड़ा था वो पकड़ चुराना चाहा रही थी और थोड़ा पीछे हटाना चाहा रही थी . पर पता नहीं क्यों वो उसने जो हाट पकड़ा था वो हटा नहीं प् रही थी और उसके मू से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था.. पता नहीं उसे क्या हो रहा था .. उसे कुछ भी समाज नहीं आ रहा था ..

फिर वो आपने आप को कण्ट्रोल करते हुई आरती आपने चेहरा बुरा से करते हुई उसे गुस्सा दिखते हुई आरती कहती है





ऐसा फिर किया न ..

तो

तब आरती उसे थोड़ा डालते हुई कहती है ..

अरविन्द को आने दो मैं अरविन्द से तुम्हारी शिकायत करुँगी.

आरती ने उसे थोड़ा डरते हुए कहा.

ऐसा मैंने क्या कर दिया जो साहब को आप मेरे शिकायत करोगे

तब आरती नाराजगी दिखते हुई कहते है..

ये अच्छा है .. तुम मेरा हाट पकड़ो .. मुझे आपने और जोर से खींचो और मई अपनी पति को बोलू भी न ..

तब नवाज़ हास्के कहता है

जोर से कब खिंचा .. धीरे से तो खिंचा

ये धीरे से था क्या

हां..

तब आरती ने उसकी तरफ घूरते हुई देखा और फिर उसने मुस्कुराते हुई कहा





नीता सही hi कहती है...

क्या कहती है नीता

तुम न एक नंबर के जानवर हो

मई और जानवर

हां नहीं तो क्या

तब नवाज़ एक अजीब तरह से अपनी नज़ारे आरती के पुरे बदन पर चलाये जिसे देख कर आरती के नज़ारे खुद बा खुद शर्म से निचे की तरफ जुख गयी ..

वो जाने दो .. पहले रसगुल्ला तो खिलायेगा

आरती चाहे लाख कोशिश करे इंकार करने की पर न जाने नवाज़ के बातो मई क्या जादू था वो तुरंत राज़ी हो जाती थी ..

पता नहीं आरती को क्या हो गया था

हाट चोरो गए तभी तो खिला पाऊँगी न ..

ये आपकी बात भी सही है

ऐसा बोल के वो हाट चोर देता है

तब आरती उसको दूसरा रसगुल्ला खिलाती है ..

कैसा है रसगुल्ला ..

एकदम मस्त .. आप के जैसे

तब आरती शर्मा जाती है..

और खिलाओ न

हमारी एक की hi बात हुई थी फिर भी मैंने दो खिलाये

और भी खिलाओ न .. आप के रसगुल्ले बहुत मस्त है..

ऐसा बोल के उसके मम्मी को देखने लगता है

तब उसकी और देखते हुई कहते है





इतने पसंद आये क्या रसगुल्ले

हां .. रसगुल्ले भी मस्त है और खिलने वाले भी ..

तब आरती शर्माके कहते है

धत्त बेशरम!!!

खिलाओ खिलाओ अब मत नखरे करो

तब नखरे से आरती कहती है

मई कहा नखरे कर रही हु .. खिला तो रही हु न

ऐसा बोल के एक रसगुल्ला खिलते है

और एक खिलाओ

अब क्या रसगुल्ले का पूरा डिब्बा hi ख़तम करने का इरादा है क्या

ख़तम किया तो आप को कोई प्रॉब्लम है क्या

नहीं नहीं मुझे क्या प्रॉब्लम है

ऐसा बोल के एक रसगुल्ला खिलते है

वैसे रसगुल्ले से ज्यादा खिलने वाले खाने को मिले तो और मज़ा आ जायेगा

धत्त बेशरम!! मई क्या खाने की चीज़ हु क्या

नवाज़ के कहने का मतलब उसे समाज नहीं आया तह

क्या साहब ने आप को कभी खाया नहीं क्या

वो..

कहके वो रुक गयी ..वो आगे कुछ बोलती उसकी नज़र नवाज़ के शर्ट के जेब मई के पैकेट पाई गयी .. वो फिर रसगुल्ले का डिब्बा बाजु मई रख के पैकेट की और हाट बढ़ाते हुई कहते है..

क्या है ये

तब नवाज़ उसका हाट पकड़ लेता है और बोलता कुछ नहीं है तब आरती कहती है

देखने दो न ..

आरती के तरफ देखते हुई कहता है

नहीं कोई जरुरत नहीं है

मतलब को इम्पोर्टेन्ट चीज़ होगी तुम्हारे जेब मई इसलिए तो तुम मुझे देखने नहीं दे रहे हो

हां

पर मुझे देखना है क्या है तुम्हारे जेब मई

ऐसा बोल के आरती झट से उसके जेब मई हाट दाल के वो पैकेट लेते है और उसे देखने लगती है..

वो था ी - पिल का पैकेट
 
तब नवाज़ उसका हाट पकड़ लेता है और बोलता कुछ नहीं है तब आरती कहती है

देखने दो न ..

आरती के तरफ देखते हुई कहता है

नहीं कोई जरुरत नहीं है

मतलब को इम्पोर्टेन्ट चीज़ होगी तुम्हारे जेब मई इसलिए तो तुम मुझे देखने नहीं दे रहे हो

हां

पर मुझे देखना है क्या है तुम्हारे जेब मई

ऐसा बोल के आरती झट से उसके जेब मई हाट दाल के वो पैकेट लेते है और उसे देखने लगती है..

वो था ी - पिल का पैकेट

तब नवाज़ की तरफ देख कर कहती है





अच्छा ये था क्या .. इसलिए तुम मुझे देखने को मन कर रहे न ..

फिर नखरे से कहते है





वैसे ये चीज़ तुम्हारे लिए भोत इम्पोर्टेन्ट है ..

आप तो जानती hi होंगे न ये चीज़ कितनी इम्पोर्टेन्ट है

हाँ जानती हु

आप भी लेती है क्या

धत बेशरम!!

फिर नवाज़ को देख के कहते है

वंदना या नीता

उसने आरती की तरफ देखा और कहा

जिस के लिए भी होगा मुझे दे दीजिये .. जिसको भी देना होगा मई दे दूंगा ..

ऐसा कह के नवाज़ वो पैकेट लेने के लिए हाट आगे बड़ा देता है तब वो पैकेट हाट मई पकड़ के आरती आपने दोनों हाट पीछे कर लेती है

नहीं दूंगी जब तक तुम बताओगे नहीं

आरती कमर के निचे साडी बंदति थी और स्लीवलेस ब्लाउज पहनती थी .. आज भी उसने ऐसा hi किया था ..इस वक़्त वो इस साड़ी में मस्त आइटम लग रही थी जिसे देख कर किसी का भी लौड़ा खड़ा हो जाये…

इस बड़े घर की एकलौती जवान खूबसूरत बहु ..एक नौकर के शर्ट के जेब से ी पिल का पैकेट निकल ले चुकी थी ...और वो नौकर वो पैकेट मांग रहा था तब वो खूबसूरत बहु वो पैकेट नहीं दे रही थी.. और वो जानती थी वो पैकेट उसने आपने जेब मई क्यों रखा है .. उसे पता था ये पैकेट प्रेग्नेंसी रोकने के लिए होता है .. मतलब उसके नौकर ने उसके जो 2 गर्लफ्रेंड थी वंदना या उसकी बेस्ट फ्रेंड नीता दोनों मई से एक के साथ भरपूर सेक्स किया था .. अब प्रेजेंट न हो इसलिए वो ये टेबलेट उसको देने वाला था .. ये सब आरती जानती थी.. आरती सिर्फ इतना जानना चहातीति की वो कोण है .. उसकी बेस्ट फ्रेंड नीता है या वंदना .. और ये बात नवाज़ बता नहीं रहा था इसलिए वो पैकेट ये इतने बड़े घर की खूबसूरत बहु उस काळा नौकर को नहीं दे रही थी.

तब नवाज़ कहता है..

पैकेट दे दो मेमसाब

तब आरती आपने कान पाई के बाल पीछे करते हुई बड़ी अड्डा के साथ कहते है..





बिलकुल नहीं ..

तब नवाज़ हल्का सा थोड़ा आगे आता है ..आरती उसको hi देख रही थी और नवाज़ उसको ..आरती इस साडी मई किसी पारी की तरह लग रही थी दूसरी तरफ खड़ा हुआ हैवान जो इस हर पारी का शिकार करने के लिए तैयार खड़ा tha....idhar आरती उसे देख रही थी.. उसे पता था नवाज़ उसके नज़दीक आएगा पैकेट लेने पर ज्यादा क्लोज आने की हिमायत नहीं करेगा .. और चुने की तो बिलकुल हिम्मत नहीं करेगा और वो भी ओपनली किचन मई .. पापा बहार है इसलिए वो ज्यादा डेरिंग नहीं करेगा ...इसलिए वो डेरिंग करते हुई उसे उसका वो पैकेट नहीं दे रही थी .

अब नवाज़ आरती के करीब जाने लगता है.... जैसे जैसे नवाज़ उसके करीब जाने लगता है वैसे वैसे आरती उसे आपने करीब आता देख उस की धड़कन बढ़ रही थी .. अब नवाज़ उसके बहुत करीब आकर रुक जाता है और आरती को ऊपर से लेकर निचे तक एक बार देखता है… तब आरती सेहमी हुई सी अपनी नज़ारे झुका लेती है....





नवाज़ अपने इतने करीब आते hi आरती की सांसें फूली हुई थी और नवाज़ की मरदाना खुशबु उसे साफ़ आ रही थी जो उसे मदहोश करने के लिए काफी thi…isliye वो शर्माके निचे देखने लगी थी.. अब उसका दिल ज़ोरों से धड़कने लगता है और उसके शरीर में एक्सकिटमेंट की लहर सी गुज़रने लगती है...

तभी उसके कानों में नवाज़ की आवाज़ आती है...

पैकेट

तब आरती अपना चेहरा उठा कर नवाज़ के तरफ देखती है





आरती बड़ी हरिआनी से उसे देखती है …. क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी की नवाज़ उसके इतने पास आएगा .. अब नवाज़ आरती को घर के देखने लगता है .... जैसे उसके बॉडी के हर हिस्से को नाप रहा ho…aarti भी वही कड़ी रही .. वो हिल भी नहीं रही थी वहां se...jaise की उसे अपनी बॉडी दिखा रही हो .. पता नहीं क्यों उसे अजीब सी एक्सकिटमेंट हो रही थी … शयद उसे लग रहा नवाज़ उसके और आगे नहीं आएगा और उसने आपने हातो मई पीछे जो पैकेट पकड़ रखा है वो उससे नहीं छिनेगा.. ये उसकी एक्सपेक्टेशंस थी..

पर ऐसा कुछ हुआ नहीं .. नवाज़ था ूनप्रेडिक्टेबले.. अब नवाज़ उसके और करीब आता hai....aarti वह वैसे hi रुकी रहती hai...aur नवाज़ को देखने लगी ..





और आपने बालो से खेलने लगी .. तब नवाज़ आरती के पास आ गया और आपने दोनों हाट उसके पीछे ले जेक उसके दोनों हातो को वो पकड़ लेता है





ये तो उसने एक्सपेक्ट hi नहीं किया था .. उसे उम्मीद नहीं थी नवाज़ उसको ऐसा पकड़ लेगा पैकेट लेने के लिए .. नवाज़ ने जो कुछ किया पैकेट लेने के लिए ये देख के आरती को भोत हरिआनी हुई.. उसे समाज मैं नहीं आ रहा था की वो अब क्या करे …….

तब वो नवाज़ को देखते है.. उसको देखते hi दोनों की नज़र आपस में मिल जाती

hain...nawaz को देख कर सेहम सी जाती hai...wo उसके हाट को पकड़ के रखा था और आरती किसी कटपुतली की तरह ख्यालों में खोयी हुई बिना कुछ बोले वैसे hi कड़ी रही ..

उसे ख्याल hi नहीं था के वो और नवाज़ इस वक़्त उसके किचन में हैं ...अगर कोई यहाँ आज्ञा तो क्या sochega....uska ससुर आ गया तो नवाज़ की सहमत तो आएगी hi आएगी लेकिन आरती की बेइज़्ज़ती भी पक्की थी....

सोचते हुई आरती आपने आप से कहने लगी

मुझे समाज मई नहीं आ रहा है की मई क्या करू .. क्या नवाज़ को मई दन्तु क्या .. नवाज़ की डांटना सही रहेगा क्या .. मई बोलू क्या वो जो ये कर रहा है ये गलत है..

और जैसे उसने सोचा वैसे उसने नवाज़ को कहा तब नवाज़ कहता है

आप ने पैकेट लिया इस वजह से तो मैंने आप को पकड़ा है .. गलती आप की है memsaab..mere नहीं है

ऐसे कहते हुई उसने आरती के दोनों हातो को और कास के पकड़ लिया .. इस वजह से आरती को दर्द होने लगा ..

अह्ह्ह्ह … मममममम … यययय

धीरे से पकड़ो न ..

दर्द हो रहा है क्या

इतने जोर से पकड़ोगे तो दर्द होगा hi न..

अच्छा

तब जरा नखरे करते हुई कहते है..

मई न थोड़ी hi तुम्हारी नीता हु और न तुम्हारी वंदना

वो पता है इसलिए तो तुम ..

फिर रुख के उसके आँखों मई देखते हुई कहता है

आप को धीरे से पकड़ा है

ऐसा बोल के उसके हाट की कलाई जोर से दबा देता है..

आह्ह्ह्हह्ह.. जानवर कही के

तन नवाज़ आपने चेहरा थोड़ा आगे करते hi आरती घूम जाती है और हँसाने लगती है ..

कुछ भी करो नहीं दूंगी ..
 
तब जरा नखरे करते हुई कहते है..

मई न थोड़ी hi तुम्हारी नीता हु और न तुम्हारी वंदना

वो पता है इसलिए तो तुम ..

फिर रुख के उसके आँखों मई देखते हुई कहता है

आप को धीरे से पकड़ा है

ऐसा बोल के उसके हाट की कलाई जोर से दबा देता है..

आह्ह्ह्हह्ह.. जानवर कही के

तन नवाज़ आपने चेहरा थोड़ा आगे करते hi आरती घूम जाती है और हँसाने लगती है ..

कुछ भी करो नहीं दूंगी ..

तब उसको पीछे से नवाज़ पकड़ लेता है





आरती अग्रवाल .. दीपक अग्रवाल की बहु .. गाँव के सबसे बड़े खंडन की एकलौती जवान बहु आपने hi किचन मई उसके hi एक छोटे और काळा .. गंदे .. नौकर से लिपटी थी ..

लिपटी hi कह सकते थे .. क्यों की वो उसको चिपक के खड़ा था .. फरक इतना था की उसकी बहे नवाज़ के खंड पर लिपटी नहीं थे बल्कि नवाज़ ने उसे उसके hi पीछे से पकड़ के रखा था .. अग्रवाल खंडन की खूबसूरत बहु बिना कुछ सोचे इसी हालत मई नवाज़ से चिपक के कड़ी थी ..

आरती के पलटने का कोई फायदा नहीं हुआ था ....अब सन ये था के नवाज़ ने आरती को पीछे से पकड़ के उसको चिपक के खड़ा था .. नवाज़ डायरेक्ट बाथरूम से नहाके आया था इस वजह से उसके बदन का हलके से पानी से उसका शर्ट थोड़ा भीगा हुआ था … और इस हालत में इस वक़्त आरती का गरम बदन नवाज़ से लिप्त हुआ था…. उसके चिपकने से आरती की साड़ी हलकी सी भीग जाती है …इतनी जवान खूबसूरत ाव्रत को चिपकने की वजह से नवाज़ का लौड़ा टाइट होने लगा था ....

आरती ने हसी मज़ाक मई वो पैकेट नवाज़ से लिया था और उसे नहीं दे रही थी और वो लेने के चक्कर मई नवाज़ आरती से लिपट गया था और आरती ने लिपटने भी दिया तह .. लेकिन उसने गलती कर दी थी.... अब इसे आरती की बदकिस्मती कहे या नवाज़ की किस्मत .... पर जो होना था वो हो गया था ..

नवाज़ का लौड़ा अब पीछे से आरती की गांड पर साड़ी के ऊपर से दस्तक दे रहा था जैसे कह

रहा हो जल्दी दरवाज़ा खोल मुझे अंदर आना है.... नवाज़ के दोनों हाथ आरती की कमर के इर्द गिर्द से आगे होक उसके हाथ को वो पकड़ लेता hai..uske बदन को चिपक के मन में कहता है

अस्स्सस्स्स्स क्या बदन है आरती रन्नीई teraaaa....ab जाकर

हाथ लगी है तू mere....kabse तेरे जवान जिस्म पर मेरी नज़र थी और मेरे लौड़े को बोहत तड़पाया है तेरी छूट ने.... लगता है उसका बदला लेने का वक़्त आ गया है

….
 
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