Angrakshak Parivar Ka .........MAHI - Page 3 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Angrakshak Parivar Ka .........MAHI

दूसरा डॉक्टर बोलै आज तेरे बाद तेरे कसमसीन बेटी का माज़ा लेगये , अंजू हाथ जोर के सबके सामने बोली मेरी इज़्ज़त लूट लो मेरी बेटी को छोड़ दो में किसी को नहीं बोलूंगी , पैर ड्राइवर बोलै सिरजी ये तो चूड़ी हुयी है इसकी बेटी कवारी है और उसकी छूट हम छोडेगये तो जवान रहगये इसको छोड़ कर मार डेंग्ये और इसकी बेटी को आपने कैद में रख आपने लुंड की धार पानी करते रहगये . तभी तीसरा डॉक्टर बोलै यार इसको छोड़लेते हैं इसकी बेटी कोर चोरो . तभी अंजू धरड़कर चिल्लाई अगर मुझको और मेरी बेटी को तुम्ह में सो कोई टच भी किया तो तुमसब का खंडन और एक एक रिस्तेदार जमीन से 6 फ़ीट निचे दफ़न होगा . आज hi चौदर्य माधव सिंह ने सबके सामने मुझे अपनी दूसरी बेटी बोले और नयी कार और िश कुत्ते ड्राइवर को नयी वर्दी दी. अंजू की बात सुन जहां रूम में कुछ दिएर ख़ामोशी चा गयी . सब डॉ जानते थे की 3 दिन पहले अंजू को डॉ विकास ने चौदर्य शभ के आर्डर पैर भेजा था. पुरे प्रदेश में चौदर्य माधव सिंह के नाम का सिक्का चलता था .

ड्राइवर को सारा प्लान फ़ैल होता दिखा तो बोलै सर अभी इसकी बेटी को लेकर आयोग न तो अप्प सब के लुंड पैर कुटिया की तरह कूद रही होगी फिर हम सब मिलकर इसकी बेटी का माज़ा लेंगे सर . तीनो डॉक्टर्स सोच में पढ़ गए. एक तरफ गदराये बदन की अंजू और कहाँ जवानी में कदम राखी वाली सलोनी सिर्फ ****** साल की. सबके मोह में पानी आने लगा .तभी अंजू बोली अगर मेरे पिताजी को पता चला तो एक एक बूटी कुत्ते के सामने पड़ी होगी और तुम्हारे खंडन की हर नेसल रंडी के खोते पैर मिलेगी . चारू के जिस्म में झुरझुरी दौर गयी डर की एक बार . ड्राइवर सबसे ज्यादा कमीना था उसे लगा अगर ये फिर धमकी देती रही तो सारा प्लान ये डॉक्टर्स की गांड फटने से चौपट हो जायेगा . ड्राइवर चीख कर बोलै रंडी लगा अपने बाप को आवाज आज साले चौदर्य की सगी बेटी को भी हम छोड़ देते और आगे बढ़कर जैसे hi डॉ अंजू के मोह पैर थप्पड़ मरने वाला था . अंजू चिल्लाई पीताजिजिजीजजिजी......

phatakkkkkkkkkk धमधुममममममम ...........................ड्राइवर थप्पड़ मरता इतने में धड़ाम के साथ दरवाजा टूट ज़मीन पैर था और 5 सेकंड बाद विंडो टूटकर रूम के अंदर गिरे बाकि जो दूर और विंडो के पास थे डाब hi जाते बाल बाल बचे . रूम में धूल गुबार फाल गया कुछ 10 सेकंड बाद सबकी निघा टूटे हुए दरवाजे पैर खड़े चौदर्य माधव सिंह और उनके फीचे खड़े भीमा नाम के गुंडे पैर पड़ी ( भीमा की मदद बहुत बार चौदर्य ने की थी, भीमा उनको अपना बघवान मंटा था) चारू को साप सुंग गया और भीमा को उनके साथ देख कर मरने की रही सही कसार भी पूरी होगयी .

डॉ अंजू दौर कर पिताजी पिताजी आप आगये जा कर चौदर्य माधव सिंह के सिनने से लिपटकर रू पड़ी पैर जल्दी hi बोली पिताजी सलोनी मेरी बेटी इनके कब्ज़े में हैं .उसको भी बचा लीजिए पिताजी वह मेरी जान है ... तभी पीछे से आवाज आयी मम्मी मम्मी ....अंजू अपनी बेटी से लिप्त गयी . और उसको खूब चूमि . बीटा तुझे चोट तो नहीं लगी . सलोनी बोली में नानाजी के साथ अपनी बहुत बड़ी कार में थी. नानाजी बहुत ाचे हैं और मुझको और आपको अपने साथ hi रखेंगे . चौदर्य बोले भीमा अब क्या करना है तुम जानते हो. चौदर्य शभ डॉ अंजू और सलोनी के साथ अपनी हवेली आ गए. सलोनी सारू से जल्दी गुहलमिल गयी . डॉ अंजू ने चौदर्य को साड़ी बात बताई . पैर पिताजी आप उस टाइम न आते तो पता नहीं कमीने इंसान क्या करते मेरे और मेरी बेटी के साथ. चौदर्य बोलै बीटा मुझे तुम्हारी नर्स ने जब तुम यहाँ से गयी तो उन तीनो के बारे में बाट्या की वह बड़े कमीने है उनकी गन्दी नज़र तुम पैर है. में भीमा का अपने साथ उनको वार्निंग देने ले गया था और उसने अपने आदमी भेज कर उनका प्लान का पता लगा लिया, पहले सलोनी को अपने पास उसकी आया के साथ अपने पास सेफ किया बाद में तुम्हे ढूंढा और टाइम पैर उनको पकड़ लिया. अब तुम आराम से कुछ दिन यहीं रहो और आगे का प्लान बानो के क्या करना है . में छाता हूँ की तुम्हारे लिए एक हॉस्पिटल खोलूँगा अपने सिटी में और तुम उसकी मालकिन होगी क्या कहती हो .अंजू बोली पिताजी जैसा आप कहें . तुमको शायद पता नहीं तुम्हारे दादा मेरी पिताजी के ाचे मित्र थे और फिर मैंने तुम्हारे बारे में सबकुछ पाटा किया.
 
सबकुछ जाने के बाद मैंने तुमको अपनी बेटी बनाने का फैसला किया . तुम मेरी कानूनन दूसरी बेटी बनोगी और सलोनी मेरी नवासी बनेगी . जैसे आप बोले पिताजी में बहुत भाग्यशाली हूँ जो भगवन ने मुझको आपकी बेटी बनने का अवसर दिया . वह बात कर रहे थे की माइड बोली भीमा आया है. चौदर्य बोले में आता हूँ, अंजू बोली पिताजी में भी आपके साथ चलूँ ??? चौदर्य कुछ सोचकर बोले चलो. फिर वह हवेली के फिछले हिस्से में बनने दो कमरों में से एक कमरे में पहोचे तो भीमा एक कुर्सी पैर बैठा था. चौदर्य और डॉ अंजू को देख कर कुर्सी से खड़ा होगया और दोनों को प्रणाम किया. चौदर्य अपनी कुर्सी पैर बैठे और अंजू को सोफे पैर बैठने को कहा और भीमा को बोले दूर बांड कर टेबल के दूसरी तरफ पड़ी कुर्सी पैर बैठने को खा. अंजू इस रूम में चारू तरफ देख रही थी उसको ये चौदर्य माधव का ऑफिस लग रहा था . चौदरीशभ ने भीमा से पहुंचा काम हो गया . जी चौदरीशाब . भीमा किसी को सक नहीं होना चाइये और हम पैर और हमारी बेटी पैर आंच नहीं चाइये . डॉ अंजू कुछ झिझक कर बोली क्या में कुछ पूछ सकती हूँ पिताजी?? चौदर्य ने उसको देखा बोलो क्या जानना है. अंजू बोली हीराजी आप उन 4 कमीनो के साथ क्या करोगे . भीमा उसको देखा फिर चौदर्य की तरफ तो चौदर्य बोले की अंजू अब मेरी दूसरी बेटी है रति के तरह और अब उसके हमारे घर के हर काम और राज जान्ने का पूरा हक़ है. भीमा बोलै जी चौदरीशाब फिर अंजू की तरफ देखकर बोलै डॉक्टर साहिबा अब वह चारू िश दुनिया में नहीं हैं उनको उनके किये की साझा मिल चुकी है. रूम में शांति चा गयी जब कोई कुछ न बोलै तो चौदर्य बोले भीमा जरा 3 चाय का बोल दो . भीमा रूम के भर चला गया . चौदर्य अपनी चेयर से उठ अंजू के साथ सोफे पैर बैठकर बोले क्या हुआ बेटी. अंजू बोली पिताजी मैंने नहीं सोचा था की मेरी वजह से किसी जान जायेगी. चौदर्य बोले मुझे एक बात बोलो अगर वो तुम्हारी और तुम्हारी बेटी की जान बेगार किसी वजह के लेले.??? तब क्या कहोगी. अंजू बेटी कभी कभी हमको ज़िन्दगी में कड़वे फैसले लेने पड़ते हैं. तुम को मैंने बाचा लिया , तुम्हारे बाद वह फिर कितनी लेडीज और गर्ल्स के साथ करते. अंजू कुछ देर बाद घेरि सांस लेकर बोली आप ठीक hi बोले ुंजाईसे कमीनो की यही साझा थी मुझे और मेरी बेटी को खुश हो जाता तो में कुड्को माफ़ नहीं कर पति. चौदर्य बोले अंजू आज से ये जानलो तुम मेरी बेटी हो और सभ भूल जायो अब तुमको अपना ये परविअर ये कारोबार और नया हॉस्पिटल संभालना हैं . अंजू बोली में आपको निराश नहीं करूंगी . तभी भीमा चाय ले आता है , चौदर्य बोले किसी को बोल देता , कोई नहीं आप लोग को भी बात करनी थी. चाय पीते हुए चौदर्य ने भीमा और अंजू को इंस्ट्रक्शंस दी हॉस्पिटल और कारोबार सँभालने की. चौदर्य बोले भीमा तुम मोस्ट ट्रस्टेड लोग अंजू की सिक्योरिटी के लिए रखो और जब अंजू को कोई परेशानी होगी वह तुम को कॉल करेगी. अंजू और रति कभी भी तुमको जो बोले तुमको करना होगा. फिर दोनों भीमा को विदा कर अंदर हवेली में आ गए . डॉ अंजू और सलोनी अब चौदर्य माधव सिंह के परिवार का हिस्सा थी और उन्दोनो को लीगली अपनी बेटी और ग्रांडडॉह्टर अडॉप्ट किया.

इधर रति और सारू को नन्ही बाची गीता से फुरसत नहीं थी सारू को लगता था जैसे गीता उसकी बेटी है भले जनाम न दिया हो. गीता तोड़े व्हेअतिश कलर की थी बूत उसके नान नक्श बहुत शार्प थे चेरे पैर एक तेज था जो सबको उसकी तरफ अत्त्रक्ट करता था. राजवीर करीब गीता के जनाम के 10 दिन बाद अपने बाकि के तीनो बच्चे आशुतोष , मंजू और सतीश को लेकर आया . वह अपने बहनोई के केस के सिलसले में ,.'आबाद गया हुआ था . ये रति और राजवीर की फली संतान थी जो नांहिहाल में हुई बाकी बाचे राजवीर के गोअन में हुए. सब बाचे और राजवीर गीता को देख कर बहुत खुश थे.

चौदर्य माधव सिंह ने राजवीर को सब सुरु से आखरी तक साड़ी बात और गीता का सच भी बता दिया. राजवीर को अपनी संतान खोने का दुःख हुआ पैर उसने मान लिया ये भगवन की दया है रति को गीता के रूप में अपनी बेटी मिल गयी. राजवीर डॉ अंजू के रूप में एक साली के तरह एक्सेप्ट कर लिया और थैंक्स बोलै की उसने जितनी मदद की रति की.
 
परिवार में राजवीर के अल्वा गीता का सच सिर्फ 3 और लोग चौदर्य , डॉ अंजू और सारू hi जानते थे. सब में मिलकर रति को ना बताना का फैसला किया . वह अभी माँ बानी थी उसकी अभी मेन्टल पोजीशन कोई सदमा नहीं सह सकती थी और गीता को पाकर वह बहुत खुश थी.

2 दिन बाद राजवीर रति और बाचो को लेकर अपने गोअन आ गया और गीता के जनम के दो साल बाद जब रति अपने मायके आयी तो चौदर्य ने अपनी बेटी को गीता का राज बता दिया , रति काफी दुखी हुई की उसके बाप ने इतना बड़ा राज उससे छुपाया . चौदर्य ने जब ये बता की डॉ अंजू , राजवीर और सारू भी जानते हैं तो वह और ज्यादा दुखी हो गयी और वहां से उठकर चुपचाप अपने रूम में चली गयी. वह बीएड पर लेत कर रू रही थी . चौदर्य जानते थे रति बहुत गुस्से वाली है उसको नार्मल होने में टाइम लगेगा . थोड़ी देर बाद सारू गीता को गोदी में लेकर रति के रूम में आयी तो अपनी माँ को बीएड के सिरहाने से पीठ लगये गहरी सोच में देखा वह बीएड की पास आयी तो गीता उसकी गोदी से उतार रति की गॉड में लेत गयी और उसका ब्लाउज ऊपर करने लगी , सारू रति को एकदम गुमसुम देख कर बोली माँ क्या हुआ तुझे ऐसे चुप क्यों है , बोलना. रति ने कुछ नहीं बोली एक बार सारू को देखा फिर अपनी गॉड में गीता को देखा जो उसका ब्लाउज ऊपर कर रही थी पैर कर नहीं पा रही थी और बोल रही दूदू दूदू माँ दूदू . रति का सीधा हाथ अपने आप उसके ब्लाउज पैर गया उसने नीचे के तीन बटन और राइट ब्रैस्ट भर निकला बस गीता को इसी का इंतज़ार था वह झट से अपने नन्हे हाथो से चूची पकड़ी और निप्पल पैर मुँह लगा दूध पिने लगी . रति का हाथ उसके सर पैर चल गया उसको पुचकारी और साड़ी से उसको देख कर दूध पिल्ला रही थी. उसका सारा गुस्सा और दुःख उड़ गया . सारू फिर बोली क्या हुआ. कुछ नहीं हुआ यहाँ बेथ मेरे पास . सारू वहीँ उसके के पास बेथ गयी उसने देखा उसकी छोटी बेहेन माँ की गॉड में लेती दूध पि रही है और अपनी राइट लेग कनी से नीचे हिला रही है बार बार . सारू बोली माँ यह पेअर क्यों हिला रही रति बोली जब बहुत खुश होकर दूध पीती है तो लेफ्ट लेग पैर राइट लेग रख हिलती रहती मस्ती में और मुझे कई बार काट भी लेती हैं जैसे बहुत बड़ी कहीं की रानी हो . सारू घुसकर हैं रानी तो हैं हम सबके दिल की. और मुस्कराते हुए अपने होठ पैर ऊँगली रख अपनी माँ को चुप रहने का इशारा करती है और गीता की पेअर पैर गुलगुली कर देती है इधर रति के मुँह से सीईईई की आवाज निकलती है और हलकी चपत गीता के पीठ पैर लगती है . सारू फिर गुलगुली करती है रति गीता को ढंकार बोली काटेगी तो दूध नहीं पीलूँगी . सारू रुक जाती है और कुछ देर बाद गीता उठकर फिर गोदी के दूसरी तरफ लेट लेफ्ट ब्रैस्ट से दूध पीने लगती है फिर राइट पैर लेफ्ट लेग चढ़ा हिलने लगती . तभी सारू बोली माँ तुम ठीक hi कहती हो ये तो खुद को महारानी हमको अपनी दासी समझ रही हैं hi hi hi ... और हसने लगती हैं. रति बोली सारू गीता का राज किसी को पता नहीं चलना चाइये ये मुझको वादा कर . सारू " में वादा करती हूँ की किसी को नहीं बाटूंगी अपने पति को भी नहीं".. रति सारू को अपने से लगते हुए के बात है पति की बहुत याद आ रही मेरी बेटी को , अभी बस दो महीने है शादी को फिर खूब सेवा करना पति की . है है है. सारू शर्मा के भाग जाती है .रति गीता को साइड में लिटा खुद भी उसके पास लेत कर गीता के सर पैर हाथ फेर रही थी . उसके चेरे और तेज़ को देख कर उसके डिंपल चीक्स पैर किश करती है उसकी नोज फॉर आईज और फ़ोरेहेअद पैर. उसके छोटे हाथ को अपने हाथ में लेकर चूमती है और उसके उठा कर अपने ऊपर लिटा उसका सर अपने ब्रैस्ट पैर रख कर उसकी पीठ हलके थपथपति रहती है . रति बोली क्यों कहता ये मेरी बेटी नहीं है येह मेरी जान है िशने मुझे एक माँ की तरह प्यार किया जबसे पैदा हुई सिर्फ मेरा hi दूध पिया मेरा सारा लाड लिया , मैंने भी तो इसको अपनी जी जान से पाला है दुनिया चाइये कुछ कहे ये मेरी बेटी है मेरी बेटी hi रहेगी और किसी ने मेरे या मेरी बेटी के खिलाफ बोलै तो उसकी खाल में भूसा भरवा दूंगी. गीता सिर्फ मेरी बेटी है और में कुछ नहीं सुन्ना छाती . बाद में उसने अपने बाप और भें अंजू को भी यही समझा दिया.
 
लास्ट part ऑफ़ अपडेट 02

सारू को उसकी माँ पहले hi समझा दी थी. िश तरह गीता रति और राजवीर की बेटी hi रही . सारू अपनी माँ के रूम से दौर कर अपने रूम में आकर बीएड पैर लेत गयी और हल्का हल्का मुस्करा के मैं में बोली मुझको जल्दी अपने पास बुला लो राज ..........

नई चरक्टेर्स इन थिस अपडेट...

1) डॉ अंजू चौदर्य .... अडॉप्टेड डॉटर ऑफ़ चौदर्य माधव सिंह. विडो एंड हैवे ओने डॉटर.

2) सलोनी चौदर्य ... डॉटर ऑफ़ डॉ अंजू

3) भीमा आगे 45 यरस हट 6'3" पहलवान था बाद में परिवेक दुश्मनी में एक साथ 10 लोगो को काट दिया . 14 साल जेल में साझा काट कर आया तो गुंडा बन गया . सारा एरिया उसके नाम से कंपता था. चौदर्य माधव ने इसकी मडाड तब की जब कोई इसके साथ न था . जब जेल में था तो इसके परिवार को चौदर्य ने केयर की. तब से चौदर्य की लिए अपनी जान बे दे सकता है.

हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट
 
सो फ्रेंड्स एन्जॉय रीडिंग 2ंद अपडेट

गिव ुर नीस सुग्गेस्टियन्स एंड कमैंट्स.

अपडेट 03 विल के इन नाईट और तोम्मोरोव .

इन 3रद यू विल मीट सारू एंड ओठेर्स
 
अपडेट 03 हार्ट हार्ट हार्ट

सारू अपने कमरे में बीएड पैर लेते वह पुराने दिन याद की उसकी शादी की बात कैसे आगे भड़ी .....

10297790-338542389631831-1545665307533536193-n.jpg


सारू

आज से 22 साले पहले की बात है

राजवीर सिंह के पिता ,चौदर्य सूरज सिंह ,बहुत बीमार थे , उनको पता था की अब ज्यादा टाइम उनके पास नहीं है वह कुछ hi महीनो के मेमहान हैं तो अपनी ाकिरहि इच्छा राजवीर के सामने रक्खी की अपनी आँखों के सामने सारू की शादी देख कर मौत आये . ये सुनकर रति देवी विचलित हो गयी उसको लगा उसके ससुर के बाजए यमराज ने उसके प्राण मांग लिए . वो छाती तो तभी मन कर देती लिकेन वो चुप रही तभी उसके पति ने उसकी और देखा फिर अपने बाप की तरफ और वो सोच में पद गया . उस टाइम परिवार का हर मेंबर उस हॉल नुमा बैठक में मौजूद था और हर कोई राजवीर और रति के चेरे को hi देख रहा था. राजवीर ने एक बार और अपनी पत्नी को देखा तो उसने पालक झुका के रजामंदी देदी पैर राजवीर आज अपनी पत्नी की बात पैर हरिजन हुआ पैर अपने को संभल कर बोलो बापू जो आप छाते हो वही होगा. सूरज सिंह के साथ साथ सब कुश थे सिर्फ रति और सारू को छोड़कर पैर वो दोनों चुप hi रहे , फिर क्या था जब सारू उस समय """"""" की थी उसके लिए लड़का ढूंढा जाने लगा . दोपहर को मौका मिलते hi रति अपने पति को बोली एक बात बोलों तो राजवीर बोलै क्या बात है , रति अपने बिस्तर पैर बेथ कर सारू को आवाज लगा दी सब काम छोड़कर कमरे मि आ . सारू भी फ़ौरन अपने माँ बाप के कमरे में आकर कड़ी हो गयी रति बोली सारू बहार कोण कोण है उसको पहले hi पता था आज सभ प्रॉविअर वाले उसके ससुर के पास हैं फिर उसने अपने पति को सारू से बुलवाया किसी काम के भन्ने से . सारू बोली कोई नहीं है तो रति उसको अपने आँगन का दरवाजा लॉक करके आने को कहा . अब राजवीर की समझ में कुछ कुछ आ रहा था और उसको पता था वह क्या बोलेगी , सारू के आते hi उसने अपने कमरे का दरवाजा बंद करने को कहा और उसने दरवाजा बंद कर दिया. रति ने एक घेरि सांस ली और बोली देख RAJVEER(wo अपने पति को नाम से बोलती थी) मैंने आजतक िश घर के किसी भी फैसले या बात में कोई टांग अढ़ाई या कोई बात जो तेरे घरके लोगो को बुरी लगी हो कही और बोलकर चुप हो गयी. राजवीर बोलै तूने कभी नहीं किया ऐसा पैर बात क्या है...??

रति बोली अपनी इस बेटी की तरफ देख और बोल तू इसको प्यार करता है की नहीं तो राजवीर बोलै तेरा दिमांग खरभ है जो तूने ऐसा बोलो में सारू को सब बच्चो में सबसे ज्यादा laad(Pyar) करता हूँ और सारू को अपने पास बोलकर उसको अपने सीने से लगा उसको माथे को चूमा , तो सारू भी अपने बाबा से चिपक कर खिल उठी उसको पता था की उसका बाप उसके लिए पूरी दुनिया से लड़ सकता है. रति ने सारू को अपने पति से अलग कर अपने पास बिठा लिया और उसके सर पर हाथ रख कर बोली सारू तू अपने दादा दादी के यहाँ अपने बहन बहियो को लेकर चली जा और जबतक में या तेरा बापू न ए उनको अपने पास वहीँ रखना किसीको भी आने मत देना अगर कोई इधर आये तो उनको मीठे के दुकान से मीठे दिलवा देना. उसने सारू को कुछ पैसे दिए और उसको आँख दिखा कर कहा समाज गयी .सारू बहुत खुश हुई मीठे का सुन कर पैर थोड़ी देर बाद अपनी माँ की बड़ी बड़ी आँख देख कर समझ गयी ये उसकी धमकी है फिर उसने धीरे से गर्दन हिल्ला कर हाँ कहा और चल पड़ी अपने बही बेहेन और दादा की तरफ .

उसके जाते hi रति बहार जा कर गेट बंद की फिर अपने कमरे का गेट बांध किया और फिर बिस्तर पैर अपने पति के पास बेथ गयी टाँगे लटका कर उसको देखने लगी. राजवीर जो बहोत देर से अपनी पत्नी की हरकत देख कर सोच रहा था की ये करना क्या चा रही है और क्यों. वो छुपी तोड़ के बोलै क्या हुआ है चुप क्यों है कुछ बोलेगी भी. रति बोली तुम ने अपने बाप से सारू की शादी की हामी क्यों भर दी . राजवीर बोलो ये तू क्या बोल रही है और पलंग से खड़ा हो गया फिर बोलो टुन्ने भी तो इशारा करके हाँ कही थी तो मैंने भी बोल दिया . रति बात काटके बोली अगर में न करती तो तू भी न कर देता ??? बोल बोल तू भी न कर देता . राजवीर कुछ सोच कर बोलै देख में सारू की शादी इतनी जल्दी नहीं कर सकता अभी उसकी उम्र hi क्या है 10 पास करलेगी तब कोई लड़का देखूंगा ये मैंने सोचा था पैर बापू की जल्दी और तेरी हाँ के आगे में भी चुपचाप रहकर हाँ बोल दिया मगर अब मेरी बात तो कान खोल कर सुन्न में सारू की शादी उसके *बारस्क*** के बाद करूंगा.
 
हार्ट हार्ट हार्ट

और वह भी किसी सरकारी अफसर से समझी , फिर चाइये मेरा बापू या तू कल मरे या आज, मैंने अपनी बेटी को बहुत लाड और सम्मान से पाला है और उसकी ज़िन्दगी में बर्बाद नहीं करूंगा और गुस्सा हो कर दरवाजा खोल कर भर गैलरी में मटके से पानी निकल कर पीने लगा .आज रति देवी को फली बार अपने पति पैर प्यार और नाज़ आया , उसने सपनो में भी नहीं सोचा था की राजवीर अपनी बेटी से इतना प्यार करता है उसे लगा और मर्दो की तरह राजवीर भी बेटे को बेटी से ज्यादा प्यार करता होगा पैर उसका सारा कांसेप्ट भी उलटा हो गया . उनसे सोचा राजवीर अपनी बेटी की शादी अपने जैसे जमींदार से करेगा पैर नहीं उसने रति को बता दिया की उसकी बेटी किसी गोवत अफसर की बीवी बनेगी और मेमसाब खलेगी उसपर सबसे बड़ी बात वो सहर में रहेगी गोअन में nahin.woh बिस्तर से कड़ी हो कर राजवीर के पास दौड़कर पहोची और बोली जारा मेरी एक बात तो सुन ले . राजवीर पानी का लोट्टा नीचे रख उसको गुस्से से घोरता हुआ और धाड़ मर के बोलै अगर तेरे मुँह से एक बोल भी फूटा तो तेरी गर्दन काट के नाली में फ़ेंक डोंगा और उसको ढाका दे कर निकल गया.

रति को पता था की अगर अब कुछ बोली तो जो उसका पति कभी उसपर गुस्सा नहीं करता सच में उसकी गर्दन काट देगा और चुप अपने कमरे में आ कर बीएड पैर रेस्ट करने लगी. करीब एक घंटे बाद सारू अपनी माँ के कमरे में आकर बोली माँ जलेबी खायेगी . रति बिस्तर पैर hi मुड़कर उसको देख कर बोली कोण लाया है , सारू ,"बापू ने दिलवाई हैं सब को और में तेरे लिए भी ले आई और ये पैसे जो टुन्ने दिए". रति समाज गयी और हल्का मुस्करा के बोली ला इधर आजा बिस्तर पैर खाते हैं फिर दोनों जलेबी खाते हुए बात करने लगी और सारू से उसको अंदाजा हो गया की राजवीर अब गुस्सा नहीं hai.Phir सारू बोली ,"बापू उसको खुद अपनी बुलेट पैर बिठा कर लगाया था और 5 कग जलेबी और समोसे पुरे परविअर के लिए दिलवाये ". रति हस्ते हुए बोली," तेरा बापू तेरी शादी की बात होने की ख़ुशी में लाया होगा" . सारू तुनक गयी और बोली ,"में शादी नहीं करूंगी और बापू भी मुझको बोलो है वो मेरी शादी मेरी पाढ़ी के बाद मेरी मर्जी से करेगा और उसने बोलै अगर किसने मेरी शादी की बात तो उसकी गर्दन काट कर गोअन की चौपाल पैर टांग देगा चाइये वो छाए तुम हो या दादाजी" . है है है है है और सारू अपनी माँ को देख कर हसने लगी पैर जलधि उसकी हस्सी पैर ब्रेक उसकी माँ के गुस्से वाले चेरे और घूरती निगाह ने लगा दी और वह सहम गयी . जो जलेबी का टुकड़ा उसके हाथ में था वह नीचे प्लेट में रखकर गर्दन झुका के थोड़ी कापने लगी . फिर बिस्तर पैर से उठकर धीरे से भार जाने लगी तो एक आवाज सुन कर रूककर कड़ी हो गयी और आवाज थी रति देवी की जिसे सुनकर उसके चारो बाचे खड़े खड़े hi मूट दें . रति अपने बाचों से जितना जी जान से प्यार करती थी उतना hi डिसिप्लिन में भी रखती थी , उसके बच्चे अपनी माँ की बात किसी के सामने नहीं काट सकते ये वह जानती थी और उसकी एक घूरती नज़र उनके लिए काफी thi.Rati अपने बाप की भले एकलौती संतान थी बहुत अमीर और सम्मान वाली पैर अपने ससुराल में उसकी सखत्ती और डिसिप्लिन सिर्फ अपने बच्चो तक सीमित था . वह उनकी माँ , गुरु और प्रोटेक्टर थी उसके लिए दुसरे के बच्चे कुछ भी करें पैर उसके सभ बाचे एक आदर्श और डिस्कॉपलीनेड लाइफ जीएँग्ये .

!!! सारूऊऊऊ अपनी जगह से हिल्ली तो तेरी दोनों टांग तोड़ दूंगी !!!!

बस इतना सुनते hi सारू के भाई भें और कौसिन्स जो भर माज़े और मस्ती मारते हुए जलेबी और समोसे खा रहे ठये वो अपनी अपनी प्लेट लेकर सरपट दौर पड़े , उनको मालूम था रति सबसे ज्यादा प्यार सारू को करती है अगर आज सारू को मार पड़ी तो कोई नहीं बचेगा . सारू गलती करती hi नहीं थी और कभी एक या दो बार की तो उसको एक दो थप्पड़ मार कर रति खुद भी 2 दिन भूकी रहकर खुदको साझा दी सबको झूट बोलकर उसका फ़ास्ट है और खूब रोइ भी पैर सारू को अपनी माँ से लगाव था उसने खाना सिर्फ सारू के जिद करने पैर खाया. आखरी बार जब उसने सारू पैर हाथ उठा था तो उसने भगवन से बोलो था की वो कभी सारू पैर हाथ नहीं उठाएगी . जब सारू को अपनी माँ की धमकी सुनाई पड़ी उसके सारे टूटे उद्गाये और थार थार कपङे लगी और उसको लगा उसका पिशाभ निकल गया हो.

रति देवी कड़ी हुई और उसके पास आई और बोली अगर तू िश जगह सी हिल्ली और रूई तो आज मुझसे बुरा कोई नहीं होगा . फिर रति किचन से चिमटा (ुसेड फॉर रोटी) उठा के लायी और कमर के फीचे छुपा कर अंदर आकर बोली चल बिस्तर पैर बेथ और जलेबी खा पैर सारू हिली भी नहीं तो दोबारा अपनी माँ का आर्डर सुनकर दौर केर बिस्तर पैर बैठकर जल्दी जल्दी जलेबी खाने लगी बगैर कुछ सोचकर. उसकी स्पीड इतनी थी की एक ***** लगता है 2कग जलेबी खा जाएगी .उसकी हालत देख कर रति ठाका लगा की हस्सी हाहाहा होहोहो ः अपनी माँ को पागल की तरह हस्ता देखेर सारू रुक गयी और मुँह में जलेबी भरे उसको आँख फर फर कर देख रही थी . रति थोड़ी देर बाद खुद को नार्मल कर उसके सामने बिस्तर पैर बेथ कर बोली इतने में दर गयी अभी तो मेरी गर्दन कटवा कर अपने बाप से चौपाल पैर टंगवा रही थी . सारू थोड़ा खीज कर मोह की जलेबी सत्कार अपना सर झुका कर बोली तू मुझको माफ़ कर दे माँ मुझको ये नहीं बोलना चाइये था और रोने लग गयी इतने पैर hi रति का दिल पसीज गया और आगये बढ़कर अपनी बेटी को अपने गले लगा लिया और खुद भी रूट हुए बोली में बस तुझको छेद रही थी . चल चुप होजा नहीं तो ठंडी जलेबी कहानी पड़ेगी और दोनों माँ बेटी हसने लगी . इतने में भर आगाँ में चारपाई की निचे छिपा सतीश ( रति देवी का छोटा बीटा ) बोलै माँ जीजी को मत मरना . िश पैर दोनों माँ बेटी अलग हुई फिर रति चिमटा उसको दिखा की बोली पैर तेरी आज खेर नहीं बस ीनता सुनते hi वो सरपट दौर पड़ा और दोनों माँ बेटी फिर से जलेबी खाने लगे और बात करने लगे . रति बोली तेरा बापू मुझसे नाराज़ है तो सारू बोली नहीं तो वो तो खुद जलेबी और समोसे दिलवाया था माँ. चल छोड़ ये सब और एक बात गांठ बंद ले में और तेरा बापू तुझे पढ़ा लिखा hi तेरी शादी एक राजकुमार जैसे सूंदर लड़के से करेंगे . तुझे पाटा हैना की हम दोनों की लाड़ली बेटी है और मेरी तो तू जान है समझ गयी .उसके बाद बाकी परिवार और रिस्तेदार सारू के लिए लड़का ढूँढ़ते रहे और रति और राजवीर कुछ न नुक्श या कमी निकल देते . इसी दौरान सारू के दादा की डेथ होगयी और वह स्वर्गवासी हो गए. उसके बाद धीरे धीरे टाइम बीतने लगा और रति फिर से प्रेग्नेंट हो gayi.uska 7तह मंथ चल रहा था उस टाइम सारू ***** की हुई तो राजवीर और रति अपने साथ सिर्फ सारू को लेके हरिद्वार गए गंगा नाहने . उनलोगो को एक फेमस धर्मशाला जो गंगाजी के किनारे थी उसमे स्टे करना था . वहीँ राजवीर को दूसरे गोअन का पुराण दोश्त ठाकुर गोविन्द मिल गया जो की उसी धर्मशाला में रुका हुआ था और बहुत दुखी था पैर अपने फेस को नार्मल करने की कोशिश कर रहा था . सबकी आपस में नमस्ते हुई फिर उनलोगो ने गोविन्द से पहुंचा तो बोलो में भी गंगा ष्णन के लिए आया हूँ. राजवीर ने उसको बाद में मिलने का बोल कर रति और सारू को ले के अपने क्वाटर जो की धर्मशाला में परमानेंट मेंबर्स ने बनवाये हुए हैं ,रति के बापू ने बोथ सारा डोनेशन दे कर बनवा था ये राजवीर को पता था (पैर असल में ये पूरी धर्मशाला इन मालकिन रति देवी थी) उस तरफ चल दिया उनके फीचे धर्मशाला का नौकर जो लगेज लेकर चल रहा था और ड्राइवर एक बॉक्स लेकर चल रहा था सूटकेस टाइप .उस धर्मशाला में ऐसे कुछ 7 - 8 क्वाटर्स बनवाये हुए ठये जो बड़े बड़े बिजनेसमैन और ज़मींदारो के ठये . वह हिस्सा थोड़ा धर्मशाला के बैकयार्ड में था . पहले गार्डन था फिर उसके पहिचे क्वाटर्स और करीब 300 मेट्रेस की दूरी पैर पहिचे गंगा का किनारा था . चारू तरफ बाउंड्री थी और गंगा की तरह जाने के लिए गेट था.

सारू बहुत खुश थी उसको गार्डन और नदी को देख कर बहुत ाचा लग रहा था और हरिद्वार का मौसम और स्वच्छ हवा उसका मान मोह रही थी. गार्डन क्रॉस केर के उसकी नज़र सारे क्वाटर्स से हटकर एक डबल मंज़िल नुमा घर के तरह था पैर पड़ी जो बाकि क्वाटर्स से सबसे पहिचे और गंगा के किनारे नज़दीक पड़ता था . उसकी सेपरेट बाउंड्री वाल थी और उसके आगे गार्ड एक कुर्सी पैर बैठा था . सारू को लगा ये तो किसी भौत बड़े आदमी का या धर्मशाला के मालिक का होगा . वह चारो और सब देखते हुए चल रही थी . जब नौकर और ड्राइवर सारे क्वाटर्स को छोड़ कर उस बांग्ला नुमा क्वाटर्स के आगये रूककर ुष गार्ड से कुछ बोले वह दौर कर उसकी माँ के आगे झुक कर प्रणाम किया उसके बाद उसके बापू को फिर लास्ट में उसको आगे झुक कर बोलै प्रणाम छोटी मंशाएभ . सारू एकदम चौंक गयी और अपने पहिचे मुरकर देखा कोई नहीं था बस वह अकेली थी उसके माँ बाप आगये गेट पैर पहोच गए तो उसकी माँ गार्ड को बहादुर पुकार के बोले चाभी ला कर गेट खोलो वो एकदम दौर गया और मैंगते का लॉक खोल कर अंदर जाकर बंगले का गेट खोला . सारू जल्दी से दौर कर अपनी माँ का हाथ पाकर ली तो वह गार्ड फिर से उसको बोलै प्रणाम मंशाएभ वह फिर उसको देख कर चौंक के देखने लगी और अपनी माँ का हाथ कास के पकड़ लिया. िश बार रति ने सारू को फिर बहादुर को देखा और मुस्करा के अपनी बेटी के सर पे हाथ फेर के बोली बहादुर ये मेरी सबसे बड़ी बेटी सारू है और सारू ये तुम्हारे बहादुर काका उनको नमस्ते करो . सारू बोली प्रणाम काका उसकी आवाज सुन कर बोलो जीती रहो बेटी बहुत प्यारा नाम है आपका और भौत सूंदर हो . सारू ने उसके थैंक्स का और अपनी माँ से पहुंची ये किसका क्वार्टर है , उसकी माँ बोली तुम्हारे नाना का और अब से तुम्हारा और ये क्वाटर नहीं गेस्ट हाउस hai.Saroo बोली माँ हम यहीं रूक्केगीए तो उसकी माँ बोली हाँ . बस फिर क्या था सारू ने गेस्टहाउसे के अंदर दौर लगा दी और हर चीज़ देखने लगी . जब ग्राउंड फ्लोर देकने के बाद उसको स्टैर्स नज़र आयी वो ऊपर दौर पड़ी ऊपर दो रूम और गंगाजी की तरफ पूरा ओपन टेरेस था वह वहसे गंगाजी , पहाड़ और हरयाली देखने में खो गयी पैर जब उसको अपने कंधे पैर एक हाथ चूहा तो एकदम दर के पलटी और बोली माँ तूने तो मरी जान निकल दी में कितना दर गयी उसकी माँ उसके गुलाबी गाल पैर हाथ फेर के कैसा लग रहा है . वह बोली बहुत सूंदर एंड शानदार यहाँ से कितना ाचा नज़ारा है तो उसकी माँ बोली इश्से अच्छा नज़ारा वाहन से दिखेगा और अपनी ऊँगली 2 रूम के ऊपर बानी टेरेस की तरफ कर दी . फिर एक बार उसने ऊपर दौर लगाडी और अब उसको चारू तरफ का नज़र आ रहा था . बस वह 1 घंटा वहीँ घूमती रही लास्ट में एक 30 साल की औरत उसको बोली मंशाभ आप को बड़ी मंशाभ बुला रही हैं .सारू नीचे पहुंची तो उसके नानाजी दिखाई दिए उनके साथ दो आदमी और भी ठये पैर सारू को कोई भी नहीं देखा शिव अपने नानाजी वह दौर पड़ी चिक्तये हुए ननजीईई ननजीईई और जा उनकी गॉड में बेथ कर लिप्त गयी और उसके नाना उसके सर पैर हाथ फेर केर पहुचकरते रहे . नानाजी बोले कैसी है हमारी मुन्नी रानी (सारू निक नाम इस मुन्नी ) . वह बोली नानाजी ये गेस्टहाउसे आपका है तो वह बोले हाँ अपना हैं फिर बोली नानाजी ये भौत अच्छा है . फिर नानाजी बाकि दोनों लोगो के लिए बोले नमस्ते करो उसने दोनों को नमस्ते किया फिर नाना से बोली माँ नई बुलाया था मैं उनसे मिलकर आती हूँ . सारू फिर उठकर ुष औरत के साथ एक रूम में चली गयी जहां उसकी माँ आराम कर रही थी बीएड पैर लेत कर और एक औरत उसकी माँ के पेअर दबा रही थी . वह चीखते हुए बोली माँ नानाजी आये हैं . रति देवी ने नौकरानी की तरफ देखा और बोली ये वहां गयी थी तो नौकरानी ने सर झुका कर कहा मंशाभ जब तक में कुछ बोलती छोटी मंशाभ दौर कर बड़े शभ की गॉड में जाकर बेथ गयी में कुछ बोल hi नहीं पायी. बस रति का पारा चार गया और वह दूसरी नौकरानी को दूर देखेल कड़ी हो गयी पैर तभी च. माधव सिंह रूम आकर सारू को बोले हमरी मुन्नी तैयार नहीं हुई . सारू कभी अपने नाना कभी अपनी माँ को देख रही थी . रति चुप होगयी पैर गुस्सा उसकी नाक और आँख से टपक रहा था . चौदर्य माधव सिंह सारा माजरा समझ गया और हश कर बोलै रति तुझे याद है तू अपने टाइम पैर पिस्तौल तान दी थी . अब हडबडाने की बरी रति की थी वो जो उसका गुस्सा था वह फर होकर शर्म में बदल गया और वापिस अपने बीएड पैर लेत कर नौकरानी की तरफ देखा तो वो उसके पेअर दबाने लगी . फिर रति प्यार से सारू को बोली जा काकी के साथ और तैयार हो जा और जो मैंने नया सूट और जेवर दिए हैं उनको पेहेन कर आजा फिर घूम ने चलेंगे गंगाजी , जा जल्दी त्यार होकर आ मेरी लाडो रानी . सारू को कुछ समझ नहीं आया पहले माँ का गुस्सा फिर प्यार .
 
उसके नानाजी बोले जल्दी जा त्यार हो जा मुन्नी फिर नयी कार में घूम ने चलेंगे बस नयी कार और घूमना सुन कर दौर पड़ी अपने रूम की तरफ नौकरानी काकी के साथ. उसको देख के पहले च. माधव खूब हुस्सा फिर रति . थोड़ी देर बाद रति बोली बापू ये उनलोगो के सामने पागल के तरह दौर कर आपकी गॉड में बेथ गयी. च. माधव बोले राजवीर को मैंने काम से भेजा है और रही मुन्नी की बात वह बहुत निस्चल है और उसमे कोई भी कमी नहीं है उसके जस्सी लाखो का क्रोरो में एक लड़की होती है , सबकुछ अपने परिवार पैर लूटने वाली , सबको प्यार करने वाली और साफ़ मैं . ऐसी लड़की जिसको मिलेगी उसका hi नहीं उसके सारे परविवार और खंडन खुश नसीब होगा . अपनी बेटी की तारीफ सुनकर रति मैं hi मैं भौत कुश हुई फिर अपने बाप को चरते हुई बोली बापू में भी आपकी मुन्नी जैसी हूँ मेरी तारीफ तो कभी तूने नहीं की . Ch.MADHAV बोलै नहीं तू मुन्नी जैसी नहीं है इतना सुनकर रति का चेरा लटक गया और नौकरानी जो उसके पेअर दबा रही थी है पड़ी बस अगले पल वो ज़मीन पैर पड़ी थी और अपनी कमर पकड़ कर दर्द से बिल्बा रही थी रति की उलटी लात खा कर. अभी वह सीढ़ी होकर खरी होती रति बोली कुटिया आज के बाद मेरे सामने आ गयी तो गांड में गोली मार डोंगी भाग यहाँ से माछुड़ानी , हिज्रे की पादिश तेरे पूरे खंडन की माँ न चूड़ी मेरा नाम रति देवी नहीं. इतने में hi राजवीर कमरे में एंटर हुआ और सारू गेट के फीचे खरे होकर देख रही थी और वह नौकरानी तो लगता था अपनी गांड में जेट प्लेन का इंजन लगाके टेक ऑफ करगयी इन जस्ट ा फ्यू seconds.RATI हाफ रही थी च. माधव ने उसको बीएड पैर लेटने के लिया कहा तो वह उनको घूरने लगी , फिर राजवीर बोलै आराम करले और दिमांग ठंडा रख baalkh(foetus) है तेरे पेट में फिर वह उसको घूरने लगी . अब कोई कुछ नहीं बोल रहा था पैर रति बहुत घेरे सांस और बड़ी बड़ी आँखों खोले पुरे रूम में बिस्तर पैर कड़ी दूनो को बरी बरी देख रही थी तभी एक नज़र उसकी रूम के गेट की फीचे छुपी अपनी बेटी सारू पैर पड़ी तभी दोनों की आँख मिली और सारू झट से चुप गयी वह थार थार कांप रही थी . तभी उसके कानो में आवाज पड़ी जैसे किसीने उसका नाम गुस्से से लिया हो वह बूत बन गयी तभी फिर आवाज आयी सारूऊऊऊ बस फिर क्या था वह दौर पड़ी और अपनी माँ के सामने बिस्तर के सामने खड़े होकर थार थार कापने लगी. लेकिन उसको देख कर रति के चेरे की रंगत hi बदल गयी उसके सामने एक ****** लड़की नीले कलर के घाघरे चोली में पूरे जेवेलरी पहने सालिके से अपनी दो कहती किये लिप्स पैर लाल कलर की लिपस्टिक लागए और माथे पैर एक छोटी रेड कलर की बिंदी लागए और दूनो हाथो में नीले कलर की चोरी जो उसकी खोनी से सिर्फ 4 इंच के गैप तक थी पहने हुए खरी थी और उसके लिपस्टिक लगे होठ कपकपा रहे ठये . रति एकदम से बिस्तर पैर घंटो के बल बैठगयी और अपनी दोनों हाथ खोल के बोली मेरे गले लग जा मेरी लाडो बस लगता था सारू को भी किसी सेफ जगह का इंतज़ार था और दौर के अपनी माँ के गले लग कर सुभकाने लगी और रति भी . ये सन देख कर ch.madav और राजवीर अपनी आँख साफ़ करते हुए भर चले गए. थोड़ी देर बाद दोनों नार्मल हुई और रति अपनी बेटी के चेरे से लेके उसके हाथ उसकी गार्डन उसका सर सब चूमती जा रही थी . फिर अपनी आँख से निकल के काजल उसके कान के फीचे लगा कर उसकी बाला लेकर खूब हसी . आज उसको अपने पैर घुमन हो रहा था की उसने अपने से भी खूबसूरत ये बेटी अपनी कूख से पैदा की . अब उसको अपने बापू की बात याद आई की तू मुन्नी जैसी नहीं है और मैं hi मैं खुश होकर पैर बेटी तो लाखो में एक . अचानक उसको याद आया की 7 महीने के पेट साथ वह यहाँ क्यों आयी है . वह प्यार से बोली अपने नाना और बापू को बुला कर ला लेकिन झांक के देख लेना कोई और हो तो नौकरानी काकी को बोल देना. सारू बोली माँ तू बहुत अछि है .कुछ देर बाद च. माधव , राजवीर और रति देवी बांध कमरे में कुछ बातें कर रहे ठये .

च. माधव बोले अब तेरा गुस्सा और तबियत ठीक है रति बोली बापू में ठीक हूँ मैंने तुझसे जरूरी बात करनी है. उसकी बात काट के राजवीर बोलै तू अपना मोह जब खोल कर बात कर जब तुझे गुस्सा न आये .

रति अभी कुछ बोलती की ch.madav बोल पड़े की ये अब गुस्सा नहीं करेगी क्योंकि अब में इश्को इसकी जान से प्यारी चीज़ की कसम लेने वाल्ला हूँ. राजवीर हुस दिया इसके लिए तो जान से प्यारी एक है सारू उसकी कसम ये कभी नहीं लयेगी क्योंकि सबसे ज्यादा गुस्सा और प्यार सारो से करती है . कद. माधव सिंह मुस्करा कर बोले नहीं सारू नहीं कोई और है . अब राजवीर सोच में पर गया तभी उसका ससुर बोलै वह तुम्हारा भी अजीज है वक़्त आने पैर रति तुम को बात देगी लेकिन में रति से अकेले बात करूंगा थोड़ी देर . राजवीर रति और ससुर पैर एक निघा डालकर चला गया रूम से भार . च. माधव उठकर रूम बंद किया और रति का हाथ पाकर के बिस्तर पैर बेथ गए . बापू में कसम नहीं दूंगी चाइये मुझे तू छाए गोली मारदे . अगर तुझे गोली मार्डी तो उसको प्यार कोण करेगा उसको अपनी गॉड में क्यों खिलाकर बड़ा करेगा क्यों उसको तेरा अंगरक्षक बानेगा बोल , बोलती क्यों नहीं . रति बोली जब वह िश दुनिया में hi नहीं है आया अबतक में उसके बारे में सोच कर गभरा जाती हूँ जब वह आएगा तो क्या करूंगी , बापू तू सारू और उसके अल्वा किसी भी कसम देदेगा में खा लुंगी मगर उसकी नहीं . च. माधव बोले में आज गुरूजी से मिलकर आया हूँ . उन्हने उसका नाम बाट्या है जो में तुझे जभी बाटूंगा जब तू उसकी कसम उसका नाम ले कर खयञी अब फैसला तुझे करना है. रति को अपने बाप से ये सुनकर की उसका नाम पता चलेगा वह बहुत खुश हुई पैर कसम का नाम सुन्न उसने अपनी मुंडी हिला दी. चल फिर तेरे पास आज 12 बजे तक का वक़्त है और अभी साम के 5 बजे हैं तो सोच ले क्योंकि 12 के बाद में भी नाम भूल जायूँगा . अब दूसरी बात जो इन्क्वायरी तुझे करनी है कर ले . रति पहेली बात से नहीं उभरी थी अब उसकी जान से प्यारी बेटी सारू की ज़िन्दगी के फैसले की थी . रति बहुत तेज़्ज़ तरार्र और दिमाग वाली औरत थी उसने अपने बापू से पहला सवाल दागा आप मेरी सारू का रिश्ता अभी क्यों करना चातये हैं अभी तो सिर्फ ****** साल की मासूम लड़की है अभी उसको 2 या 3 साल पढ़ लेने दिज्ये फिर रिश्ता कर डेंग्ये . सारू के रिश्ते की बात भी गुरूजी ने कही है और लड़के का भी बता दिया है रति के बापू उसको देख के बोले . रति जैसे किलास गयी और बोली गुरूजी ने ये तो नहीं बोलै की में लड़के को नहीं देख सकती तो उसके बापू बोले तुम खुद लड़का देख कर हाँ करोगी . रति बोली मुझे लड़का अभी देखना हैं .उसके पिताजी बोले थोड़ी देर में लड़के की माँ , उसका सबसे बड़ा भाई , उसकी बीवी और बाचे , दूसरा बड़ा भाई जो अभी मिलने आया था अपने चाचा के साथ नवाब (सारू का होनेवाला jeth)naam है उसका . रति बोली वो काला सा सांड जैसा में नहीं करूंगी अपनी बेटी की शादी ऐसा घर में जिसका भाई इतना काला वह तो उल्टा तावा होगा नहीं मुझे नहीं पसंद ये रिश्ता . च. माधव सिंह एक दम कुर्सी से खरे हो गए बेवकूफ लड़की अपनी जबान को लागम दे नहीं तो भूल जायेंगा तू मेरी बेटी है तुझे मैंने दोनों बाप और माँ का प्यार दिया है तो भूल मत और जाकर मुन्नी को त्यार कर उसको सिर्फ इतना बाटना की ुको हम नयी कार में घूमने लेजेगे समझी और एक और बात राजवीर लड़का देख चूका है उनसे देकते hi हाँ करदी . दूसरी बात के लिए 12 बजह तक का वक़्त है .रति अपने रूम में अकेली बैठी घेरि सोच में एक तरफ देख रही थी की दरवाजा खुला और सारू दौर के जाकर बोली माँ मुझे ये जगह बहुत ाची लगी हम कुछ दिन यहीं रुकजाते हैं और ये बात कहते हुए सारू के मैं का चोर बहुत डरा रहा था . रति अपनी बेटी को पहोचकरते हुए बोली क्या हुआ तुम को जो चाइये वो मिलेगा . पैर वह अपनी माँ की मनसा वह नहीं समजह पायी और बोली अगर में नानाजी से गेस्टहाउसे मांगू तो तू गुस्सा नहीं करेगी फिर रति बोली ये गेस्टहाउसे उनका नहीं है इतनेपर सारू का चेहरा लटक गया वह सोच रही थी जिस लड़के को गंगा किनारे मिली थी उसको उसने अपने नाना का गेस्टहाउसे बता दिया. वह अपनी सोच में गम थी अगर तुमको ये गेस्टहाउसे इतना पसंद है तो में तुम को देती हूँ . वह अपने माँ की बात सुन उसके के गले लग कर बोली माँ तू साबसे अछि माँ है आज तूने मुझको उसकी नज़र से गिरने से बचा लिए कल उसको बोलेगी की ये गेस्टहाउसे मेरी माँ ने मुझको खरीद के दिया . रति बोली किसको बोलेगी सारू नज़र झुका के बोली वह गार्ड काका हैना उनको .

अब तो रति को बिलकुल साख होगया पैर उसने इसके बारे में बात न करके उसको बोलै देख आज गेस्ट आ रहे हैं तो उनको चाय पानी का जिम्मा तेरा और अपने हाथ का स्पेशल बसन और बादाम का हलवा भी बना ले नहीं तो में सब करती अगर प्रेग्नेंट नहीं होती और उसके बाद में तुझको त्यार करूंगी जिससे मेरी बेटी सबके सामने मेरी तरह खूबसूरत लगये समझी आज मेरी सारे काम तू करेगयी बस बात वह में करूंगी समझी और और जोलोग बड़े होगये उनके पेअर छु लेना मेरी तरफ से क्योंकि में झुक नहीं पायेंगी समझ गयी. सारू हस्ती हुई बोली माँ में समझ गयी में तेरा सर कहीं झुकने नहीं दूँगी और तू आराम कर में काकी के साथ सब कर लूंगी . रति बोल चल काकी को भेज मेरे पास और तू लग जा काम पैर . उसके बाद 6:30 बजे तक सब रेडी होगया प्लान के मुताबिक . वह लोग हॉल में सोफे पैर बैठकर रति के बापू , राजवीर और ठाकुर गोविन्द उसके पति का दोश्त बैठकर बात कर रहे ठये जब रति हॉल में एंटर की तभी उसको चकार सा आज्ञा क्योंकि उसको सामने सारे मेहमान औरत हो या आदमी सब या तो काले या सवाल कोई भी उसको पसंद आना तो दूर समाज hi नहीं आया पैर एकदम से संभल कर वह अपने बाप और पति की मर्यादा का ख्याल कर उनको हाथ जोर प्रणाम करते हुए एक सबसे उम्र की औरत की तरफ बढ़ कर उसके दोनों लेग्स मैसेज करने लगी ( ट्रेडिशन तहत आल in-laws लिखे मदर इन लॉ , सिस्टर इन लॉ , जेठानी , daughter's मदर इन लॉ एंड शामे फॉर daughter's अन्य इन लॉ,, फॉर daughter's मदर आल्सो,, फॉलो शामे ट्रेडिशन हु र एल्डर फॉर हेर अन्य वुमन इन थेइर सोसाइटी शी हैवे मैसेज हेर लोअर लेग्स मिनिमम थ्री टाइम्स स्टार्टिंग बिलो हेर कनी तो एंकल एंड थें टच हेर फ़ीट तो टेक हेर ब्लेस्सिंग्स. कांसेप्ट इस तहत एल्डर लेडी के तो मीट हेर फ्रॉम अन्य डिस्टेंस नियर और फरदर इतस यंगर ओने ड्यूटी तो रेलिएवे हेर तिरेदनेस एंड टेक हेर लव्स एंड ब्लेस्सिंग्स. ) आफ्टर तहत तहत ओल्ड लेडी गाइड हेर ानोथेर वीमेन शी इस सिस्टर ऑफ़ ग्रूम एंड अगेन शी मस्सगे हेर लेग्स 3 टाइम्स वर्ष हेर साड़ी एंड टच हेर फ़ीट नेक्स्ट शी मूव टुवर्ड्स थे लास्ट वुमन हु हैवे ओने चाइल्ड इन हेर लैप एंड शी आल्सो सिम्स प्रेग्नेंट बिकॉज़ ऑफ़ बेल्ली शेप बूत शी नोटिसद तहत शी लुक्स लिखे सिटी मंशाभ टाइप वुमन लुकिंग ब्यूटीफुल इवन हेर डार्क काम्प्लेक्स . वह उसकी तरफ बढ़ी तो वह उठके अपनी बेटी को साइड में सोफे पैर रख केर कड़ी होगयी और आप तो मेरी माँ सम्मान है में लड़के की भाभी हूँ ये मेरी दो बेतिया हैं आप मेरे पास बेथ जाइये . फिर उसने पुछा आप का कोनसा महीना है रति ने बुला 7 पुरे होगये और अप्पके वह बोली मेरा नाम विमला है मेरा 5 मोनथस है. कुछ समय बाद कद. माधव सिंह बोले हमने अभी तक सारू को नहीं बतया है की उसके रिश्ते के लिए आप यहाँ आये है हम ने उसको ये बाट्या है आप हमारे मेहमान है और उसकी माँ की जगह आज उसने रसोई और आप को ख्याल रखना है बुसस उसके ये न पाटा चले तो महरबानी होगी . एक आवाज आई ,"कद. शभ अप्प बेफिक्र रहिये " और उसने अपनी बीवी तरफ देख कर उसको इशारा कर दिया .रति ने उसका पहेली बार उसका डार्क कलर और इतनी कॉन्फिडेंस आवाज़ देख कर इम्प्रेस होगयी क्योंकि वह सूट पहना था और कोई बड़ी पोस्ट पैर है लग रहा था और उसकी बीवी जिसकी साथ वह बैठी थी उसको एक बड़े अफसर की बीवी उनके पहनावे से लग रहा था उसने दोनों बाची को देख कर उसको यकीन हो गया ये बहुत ऊँची पोस्ट पैर है . तभी उसके कणो में आवाज गुंजी मुन्नीई नास्ता लेकर आओ बीटा . तभी सारू अपने हाथ में चाइये की ट्रे लिए ब्लू लांघा चोली में सर दुप्पटे से देख कर आगे आगे और तीन नौकरानी पीछे फीचे आकर टेबल पैर लगा दी . सारू ने सबको प्रणाम किया फिर सब बड़ो का आशीर्वाद लिया सबके पैर छु कर . सब मेमहानो की बोलती बंद वह उसके िश तरह देख रहे ठये उनके सामने कोई अप्सरा उनको सर्वे कर रही हो . वह बेचारे तो जब वह उनके पैरर को रही थी तो सिर्फ उसको सर चोक बगैर होठ खुले आशीर्वाद मैं में दे पा रहए थे. तभी छोटी बच्ची जो सोफे पैर सो रही थी रोने लगी तभी सारू आगये बढ़ी और उसको गॉड में उठा के अंदर ले गयी चुप कराते हुए सभ बस उसके देखते रह गए इतने में किसी का धान नहीं गया की बड़ी लड़की सारू की ऊँगली पकड़ कर चली गयी जब 2 मं बाद सब मेहमान नार्मल हुए...

हार्ट हार्ट हार्ट हार्ट
 
लास्ट part ऑफ़ अपडेट 03 हार्ट हार्ट हार्ट

मेहमानो ने सारू की जबरदस्त तारीफ की और उसको अपनी बहु के रूप में रिश्ते के लिए हाँ कर दी ..... उनके जाने के बाद रति ने सारू से उस लड़के की पूरी स्टोरी पता कर्ली जो सारू को मिला था . फिर जब सारू उदास मैं से बोली नहीं नाना जिस से कहेंगे शादी कर लूंगी . रति मुस्करा बोली तू कहे तो में तेरे बापू और नाना को मन लुंगी . सारू उदास मैं से रहे दे माँ तुम सब जिसको पसंद करोगो वह ाचा hi होगा . रति बोली," ाचा वह सबसे ाचा और लाखो में एक है .उसके साथ शादी करने को 500 गोअन की लड़कियां मर रही है अपने एरिया की ,पैर वह तुझसे शादी करेगा हैं न ख़ुशी की baat".Saroo चुप रही रति को लगा अब ज्यादा बोली तो बेचारी रू न दे. अपनी बेटी के सर पैर हाथ फेरकर बोली," तुझे पाटा हैं जिस लड़के से रिश्ता करने आये हैं वह लड़का राज सिंह hi हैं और उसके गढवाले तुझे पसंद भी कर गए समझी". सारू एकदम अपनी माँ को देख कर सच तो उसकी माँ ने हाँ कहा तो वह लिप्त गयी अपनी माँ से लिपटी और सुभकाने लगी और बोली ,"तू बहुत गन्दी है". रति बोली ,"ठीक है में मन करवा देती हूँ" . तो सारू बोली ,"नहीं नहीं तू बोहत ाची है" . रति बोली वह तुझे पसंद हैना सारू धीरे से बोली ,"हाँ" . "लेकिन अब तो उसको शादी के बाद hi मिल सकती हैं समझी ". सारू बोली "ठीक है."

उसके बाद सारू और राज सिंह का रिश्ता पक्का हुआ और दो साल शादी . शादी के 3 महीनो बाद सारू ने सबको प्रेग्नेंट होनी की खुसखबरी दी और शादी के एक साल बाद उसने एक बेटे को जनम दिया जो अपने साथ 3 भेने भी लाया ???

डिअर रीडर एंड फ्रेंड्स ी कैन फ़ास्ट फॉरवर्ड स्टोरी तहत मच ओनली एंड वे लूसे एटलीस्ट 2 उपदटेस , इन व्हिच प्लाट फॉर HERO's फ्रेंड्स एंड रिलेटिव्स हॉटेर्डनेस्स वे मिस .

ी विल इन्फॉर्म आल ऑफ़ 3 पॉइंट्स

1) हीरो इस अल्फ़ा मेल

2) थे डेस्क्रिप्शन्स एंड रिलेशनशिप्स ऑफ़ चरक्टेर्स इन स्टार्टिंग ऑफ़ 0फ 3 4 उपदटेस प्ले मैं रोले विथ हीरो . That's व्हाई ी वास् सेटिंग थेइर रोल्स.

3) हीरो विल नॉट डिसअप्पोइंट यू इन एक्सपेक्टेशंस सो बे पेशेंट एंड एन्जॉय स्टोरी

हार्ट हार्ट हार्ट
 
अपडेट 04 हार्ट हार्ट

जून 01

एक प्रॉविअर के लिए उनका वारिस आने वाला था जो उनके खानदान से लेकर सबकी ीचा का वरदान था . वह परिवार था हरी सिंह का जो अपने कुटुम्भ के साथ एक गाओं में रहता था . हरी सिंह ज़मीदार hi नहीं था गाओं का बल्कि अपने गोअन वालो को अपने बाचे की तरह प्यार करता था . उसका एक तो ( फादर्स एल्डर बरोथेर ) था जो ुनमर्रिएद था उसका नाम प्रजा सिंह था , उसकी कोई औलाद न थी क्योंकि उसकी बीवी जवानी में hi मार गयी उसने फिर न शादी की न जमीन से लेकर घर में अपना हिस्सा लिया . जब वह 60 साल का था तो उस समय एक ज़मीन का मुकदमा था उसीके सिलसिले में डेली सहर जाना , फिर जहाँ कोर्ट की तारिख होती थी वहीँ उसकी मुलाकात एक बणिये की लड़की से 2 -3 बार हुई जो 38 साल की विद्वाह थी उसके दो बेटे एक लड़की थी, प्रजा सिंह से जब उसकी मुलाकात भड़ने लगी तो उसने बोलै डेली 40 कम आते हो यहीं मेरा माकन है वहीँ रुकर अगले दिन कोर्ट का काम कर लिया करो में बछेरी विद्वाह कैसे अकेली अपना परिवार पाल रही हूँ बड़ी मुश्किल होती है और मर्द जाट को तो आप जानते hi हैं. पहले तो प्रजा सिंह ताल मटोल करता रहा फिर एक दिन मान गया .उसने घर में अपने पुराने मित्र के माकन का बाट्या . प्रजा सिंह अब सेहर में हफ्ते में 3-4 दिन बीतता और उसका बणिये की लड़की के साथ सेक्स से लेकर 2 बाचे भी हो गए ....

जब बात खुली तो देर हो चुकी थी NAWAB(MAHI छोटे तौजी) **s*k**jawan हो चूका था उसका जिस लड़की से ताका भिड़ा ता वो उसके ताऊजी की रखेल की बेटी थी . वह लड़की पेट से हो गयी तो उसके सब भाइयो ने उसका गाला काट कर, नवाब के ऊपर मुंडेर और बंग का चार्ज लगा वह लगभग 3 साल जेल में रहा और उसकी जमानत नयी हो रही थी . एक दिन उसका बड़ा भाई (राम सिंह ) उसको जेल में आकर बोलै तेरी जमानत हमे ,.'आबाद हाई कोर्ट से मिल गयी है और राज सिंह के लिए रिश्ता आया है तू का बोलता है पिताजी भी यही पूछ रहे है की पहले नवाब का करेंगे फिर राज का रिस्ता होगा. नवाब बोलै भैया आपको मेरा पता नहीं ज़मानत होगी की नहीं पैर राज का रिश्ता मेरी रिहाई का कारण बनेगा. राम बोलै क्या मतलब ...फिर नवाब बोलै यहाँ जेल में एक गुरु है वह किसी को घास नहीं डालते पैर में उनको चेला बन गया हूँ वह कितनी ऐसी बात बोले की वह मेरे और मेरे परिवार से जुडी हैं और हम सबका वारिस आकर साड़ी एक से लेकर एक मुसीबत ख़तम करता चला जायेगा. नवाब की बात सुन राम को लगा ये जेल में रहकर ऐसा हो गया है .

तभी नवाब बोलै," मेरी जमानत ुष लड़की का नाना करवा रहा हैं न"????

राम सिंह एक माइनिंग कंपनी में सीनियर इंजीनियर था उसके लिए अपने भाई की बात समाज से परे लग रही थी ( राम सिंह को अपने परिवार के िश समय माली हालत का पता था , ज़मीन पैर स्टे और बाकी प्रॉपर्टी से लेकर अपनी हवेली कोर्ट में गिरवी पड़ी थी जो उसके बाप के तौजी की रखेल ने उनके मरने के बाद वारिसयाना केस थोक रखा था , उसकी 3/4तह सैलरी सिर्फ अपने छोटे भाई नवाब के केस पैर जा रही थी पैर उसने हार नहीं मानी . उसको विश्वास था मेरा भाई के बुरे शोक सही पैर किसीका मर्डर नहीं करेगा .)

राम सिंह बोलै "तुझे किसने बोलै" नवाब बोलै भैया मेरी बात बिना काटे सुन्ना ," मुझे आज hi गुरूजी बोले तेरी जमानत जल्दी हो जायेगी , तेरे छोटे भाई की बीवी लक्ष्मी की तरह तुम्हारे घर आएगी और उसका होने वाला Betaa(MAHI) सारे दुश्मन का नाश करदेगा . मेरी बात का सबूत तेरा बड़ा भाई लेकर आएगा . उसके बाद गुरूजी बोले अपने बड़े भाई के अल्वा किसी को न बताना और उसको भी रूक देना किसी को बाटने के लिए नहीं तुम दोनों भाई प्रणाम भुगतो गए"

राम सिंह कुछ थोड़ी देर नवाब से बात कर चला गया , 3 दीं बाद जब सारू के नानाजी और राज सिंह के पिताजी ने ुशी दिन आपुस में वादा किया की राज और सारू की शादी सारू के ***** बरस होते hi करेंगे ...

उसके बाद चौदर्य माधव सिंह ने पूरी ताकत और रिस्वत दम पर नवाब की जमानत करवाई और हरी सिंह की ज़मीन और जायदाद की खिलाफ ज़र्रोरी अमाउंट भर , उनको खिलाफ जो केस थे उनके ख़तम होने तक सारे अधिकार खेती से लेकर व्यापार तक और अपने घर रहने से लेकर ोप्पसीते पार्टी का हर आदिकार ख़तम करवाने तक में पूरी मदद की .

नवाब आज बहुत खुश था आज उसकी जमानत होगयी और जेल से रिहा हो अपने घर जा रहा था 3 साल बाद . नवाब जेल में कई हुनर शीका जैसे साप का ज़हर उतरना , जॉइंट्स का ट्रीटमेंट , टूटी हड्डी को जुड़ना और पल्मिस्ट्री. उसके जेल वाले गुरूजी ने उसको बता दिया की उसके खंडन में शार्प की वजह से पारिवारिक दोष है जिस वजह से प्रेजेंट पीढ़ी में तुम सब भाई भें को बेटे का सुख नहीं होगा सिर्फ एक को छोड़कर राज सिंह को ( वह भी उसकी बीवी और उसकी सास की वजह से तुम्हारे खंडन को कुलदीपक मिलेगा ). तुम खंडन के उस वारिस को अपने बेटे की तरह प्यार करना. जब सब उसको परिवार वाले अपने बेटे की तरह प्यार करोगे तो सफलता तुम सबके कदम चूमेगी .. गोअन पहुंचकर उसको फिसले 3 साल के साडी सीटुएशन्स और डेवलपमेंट का पता चला और उसका विश्वास और पक्का होगा अपने जेल वाले गुरूजी की बातो पैर उसके मैं चौदर्य माधव सिंह और उनके परिवार के लिए सम्मान और बढ़ गया क्योंकि उनके बुरे टाइम में न सिर्फ अपनी नवासी का रिश्ता उसके भाई से पक्का किया बल्कि उनके सारे संकट जैसे ख़तम hi कर दिए .

नवाब को विश्वास हो गया जैसे सारू कोई आम लड़की नहीं है जरूर उसके ऊपर किसी देवी माता का हाथ और आशीर्वाद है , ये लड़की मेरे परिवार की हर समस्या का निदान करेगी.

जब नवाब अपने परिवार के साथ हरिद्वार में सारू को पहेली बार देखे तो उसकी खूबसूरती और संस्कार के आगे उनकी आंखें पालक जपकने भूल गयी और जबान हलक से चिपक गयी. नवाब का विश्वास पक्का होता जा रहा था वाकिये उनके घर कोई देवी आ रही है जो उनके परिवार को तरह से खुशाल कर देगी .

हुआ भी वैसे hi सारू और राज की शादी के दो दिन बाद वह अपनी ज़मीन का केस ,.'आबाद हाई कोर्ट से जीत गए और एक हफ्ते बाद नवाब तो दिल्ली हाई कोर्ट ने निर्दोष बरी कर दिया . इसके अगले मंथ नवाब सिंह का रिस्ता आया तो घर वालो ने तुरंत उसकी शादी कर दी .
 
Back
Top