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अपडेट 38 (पतलोक)
Part- 2 (बी)
डॉली को अपना बनकर आर्यन भी नींद में चला गया .......
(सपनो वाली यादें आर्यन की जुबानी.....)
में रानी स्वर्णलता के सौंदर्य रूप यौवन का अपनी आँखों से चाक्षुपान करता रहा," यह कितनी सूंदर स्त्री है हर हर अंग जैसे संचय में ढला हुआ".
उनके सरीर से अजीब से माधोसी वाली खुसबू मेरे नाथों में आकर नशा सा कर रही थी. अपने को सँभालने की कोशिश करता में अब हवा में रथ पे सवार पतलोक के सूंदर सूंदर दृश्य को निहारने लगा .
हम 'तळतळा लोक' से अब अटाला लोक जा रहे थे 'पश्चिन नगर' जोह रानी स्वर्णलता की नगरी थी ...... बिच बिच में वह मुझे दुसरे लोकों के बारे में जानकारी दे रही थी.
जब हम 'अटाला लोक' में प्रवेश किये तोह एक अजानी चाहत रानी स्वर्णलता के लिए मेरे मैं में बलवती होने लगी जैसे अभी उनको अपनी बाँहों में समेत लूँ.
तब मुझे अपने पिछली बार के अटाला लोक के भ्रमण की याद आयी जब में दीप्ति के साथ आया था दिव्या तलवार की खोज में की यहाँ की स्त्रीओं के जादू ऐसा था जोह हर पुरुष को अपनी ओरे खींचता था .
जैसे hi हमारी सवारी अटाला लोक में एंटर की निच्चे 2 और युधो वाले रथ हमारे पीछे हो लिए ..... यह स्वर्णलता के hi स्त्री योद्धा के रथ थे. मैंने उनकी तरफ देखा तो सबने हाथ जोड़ के मुझे नमन किया तोह मैंने भी हाथ जोड़कर उनका अभिवादन स्वीकार किया .
रानी स्वर्णलता मेरी तरफ देखकर मुस्करा भर दी पर उनके मैं में अलग hi विचार चल रहे थे ...... देखें वह क्या सोच रही हैं .......
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रानी स्वर्णलता अपने मैं ," िश पर तोह मेरे आकर्षण शक्ति भी पूरी तरह से काम नहीं कर रही है , आखिर इतनी जटिल इच्छाशक्ति किसी साधारण मानव में तो नहीं हो सकती. हर तरह से अद्भुत hi है यह महार्यं . इतना बांका और सजीला मनुष्य मैंने आज तक नहीं देखा. इश्कि सुंदरता तोह देवताओं जैसी है पर इतना शक्तिशाली नौजवान है यह तो पूरे पतलोक में किसी न नहीं सोचा होगा. रानी हेमा ने सही hi कहा था की अगर आर्यन का दिल जीत लिया तो पूर्ण नारी सुख मिलेगा जिसके लिए हम तीनो भेने वंचित hi रही हैं. कोई भी हमारे यौवन को झेल hi नहीं पता ...... ुष पापी धरतीपकड़ ने भी तोह कोशिश की थी पर वह भी हमको स्पर्श करते hi सीरगहपतित हो गया. कहने को तो वह हमको अपनी गुलाम hi समझता था , हम बहेनो ने न सही पर हमारी प्रजा की कितनी हज़ारों स्त्रीओं को उसने जबरदस्ती भोगा था ".
स्वर्णलता ने अपने मैं में विश्वास पक्का करके फैसला कर लिया ," अगर आर्यन हम तीनो बहेनो को संतुस्ट कर दिया तोह में सिर्फ इसी की बनकर रहूंगी. एक बार हमको पूरा कर दो आर्यन हम तीनो तुमको अपनी असली गाजा शक्ति देंगे जोह आजतक किसी पुरुष के पास नहीं है ".
रानी स्वर्णलता की दो बड़ी भेने भी हैं .......
रानी कामलता ..... यह 'कामनगर' की रानी है , यह स्वर्णलता से बड़ी है..... देखने में थोड़ा ताम्बी रंग है पर सबसे मादक और गरम स्त्री है .
रानी पुष्पलता ..... सबसे बड़ी भें यह 'स्वर्णगैर' की रानी है जोह अटाला लोक का सबसे बड़ा नगर है . देखने में तीनो बहेनो में सबसे सूंदर पर थोड़ा गुस्से वाली है. यह अभी तक स्वर्णलता से नाराज है की उसने आर्यन को बिना हमसे मिलवाये जाने क्यों दिया.
(* डिटेल्स के लिए पढ़ें अपडेट 34 , part -7 (ा)..... पेज 486 )
आज स्वर्णलता आर्यन को सीधा स्वर्णगैर hi ले जा रही थी जहाँ उसने सुचना भेजवा दी थी की आर्यन को साथ लेकर आएगी .
अब तोह आर्यन से मिलने के लिए दोनों बड़ी भेने भी वैकुल थी आखिर जिसने दो राक्षस धरतीपकड़ और वतासुर के साथ विशाखा जैसी नागलोक की नागिन को मार दिया हो और दिव्या तलवार लेकर भी चला गया पृथ्वीलोक और कोई पतलोक का निवासी उसको रोक नहीं पाया.
ऐसे जानदार और दिलेर मर्द को न पाया तोह क्या पाया िश जीवन में. दरसल जिस स्त्री ने भी आर्यन को पहली बार देखा उसको पाने को भाव विभोर से हो जाती थी एहि हाल पतलोक की माडो का था ......
अब तोह आर्यन के पास रानी हेमा की दी हुयी शक्तियां थी जोह किसी भी स्त्री का सैयाम तोड़ दे .
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मैंने ध्यान दिया की अब हमारी रफ़्तार तेज़ है ...... मेरे और स्वर्णलता के बाल हवा के विहग से ुध रहे थे ......
मैंने अपने हाथ से उनके चेहरे पे परेशां करती लत को उनके कान के पीछे किया तो मेरे उंगलिओं पे उनके मक्खन जैसे चिकने गाल का स्पर्श मिला .
मेरे मुख से न्यास hi निकल गया," आप की सुंदरता के आगे तोह स्वयं भगवन भी नतमस्तक हो जाते होंगे की उन्होंने कितनी रूपवती स्त्री को संसार में भेजा है ".
हलके से मेरे छुवन और तारीफ ने जैसे स्वर्णलता की मुस्कान घेरि कर दी और चेहरे पे आयी लाली उसको शर्माने को मजबूर.
स्वर्णलता ," तुम्हारे सामने तोह हम भी कुछ नहीं आर्यन लेकिन अभी मेरी दोनों बड़ी बहेनो को नहीं देखा है तुमने...... दोनों हमसे भी सूंदर हैं सायद उनसे भेट होने पे हमारी तरफ देखो भी न".
में उनकी बात सुनकर चकित hi रह गया की उनकी दो बड़ी भेने भी हैं और वह िंहसे भी सूंदर है पर अपने को कमतर वाली बात मुझे पसंद नहीं आयी.
मैंने आगे बढ़कर उनके झुके चेहरे को अपने दोनों हाथ में लेकर ऊपर उठाया तोह उनकी झील सी कांजी बड़ी बड़ी आंखें में एक प्रेम का सलभ भरा हुआ पाया ......
मैंने उनका माथा चूम के कहा ," आप का अहसान में कभी नहीं भुला सकता रानी शैब्या फिर जोह मैंने आपके लिए कहा दिल से कहा है...... मैंने आपकी बहेनो को नहीं देखा और वह आपकी तरह खूबसूरत भी होंगी लेकिन में तोह सिर्फ आपको जानता हूँ जिसने पहली बार में hi हमको दिल से मदद की...... कौन रानी एक तुच्छ से मानुस के लिए ऐसा करेगी. आप का नाम hi स्वर्णलता नहीं है बल्कि आपका दिल और रंग रूप भी ख़ालिश सोने जैसा है, आप माने या न माने मुझे भी अपने लाखों चाहने वालों में एक प्रसंशंक hi समझिये ".
मेरे इतना कहते hi रानी स्वर्णलता के मैं में क्या आया की आगे बढ़कर उन्होंने में लबों को चूम लिया ....... पुछःह
मेरे और उनके सरीर में भी उत्तेजना की बिजली दौड़ गयी ...... हम दोनों एक दुसरे की आँखों में खो हुए थे की मैंने अपना सीधा हाथ उनके गाल से हटा के उनकी चिकनी कमर पे रखा और अपने करीब करके उनके गुलाबी निचले हूंठ को चूम लिया ......
दोनों को सिग्नल और स्वीकारती एक दुसरे से मिल गयी थी ...... में अब उनके निछले होंठ को चूस रहा था तो वह मेरे ऊपर वाले होंठ को ....... सहेड की तरह उनके होंठ कितने नरम और रसीले थे , ऐसा लगा जैसे इनसे मीठा दुनिया में कुछ नहीं होगा .
दोनों हाथ उनके मेरी बालों में घूमने लगे और में उनकी चिकनी कमर और उलटे चिकने गाल को सेहला रहा था ...... मेरा लौड़ा तोह जैसे मेरी धोती जैसी पोषक में तन्न के उनकी जाँघों में जा भिड़ा ......
पुछःह पुछठ ...... चुम्म्म्म चुम्म्म्म ...... मुह्हह्ह्ह्हह ...... प्यार से एक दुसरे के लबों को चूसते हुए अब हमारी जीभ एक दुसरे के मुख की घेरे नापने लगी ......
यह अलग की नशा था हमारी आंखें बांध थी पर अब दोनों के हाथ चूमते हुए एक दुसरे के सरीर के पिछले भूभाग को तोलने लगे ......
मैंने उनकी मटकी जैसे दोनों सुडोल चूतड़ मसले तो वह थरथरा के झंडने लगी ...... आह्ह्ह्हह्ह सीईईई ...... पुछःह पुछठ ारयणणणणणण सीईइईसीईई ..... मेंनननननन गईइइइइइ ...... माआआ मुझे सँभाललललललल लोओओओओओ ..... ह्म्म्मम्म्म्म ".
बहोत तीर्व स्खलन हुआ था उनका पूरा सरीर कांप रहा था सांस उखड रही थी ....... में अब अपने से चिपकाये उनकी पीठ और सर सेहला रहा था ......
रानी स्वर्णलता के दिल में तोह जैसे सारे सपने पूरे होते दिखने लगे. एहि है वह साथी जिसकी मुझे कितनो वर्षों से तलाश थी, सिर्फ चूम के मुझे चरमोत्कर्ष तक ले गया.
अब मुझको दुर्र से एक नगरी दिख रही थी, मैंने बाकी दोनों रथ की तरफ देखा तो उन्ह पर सवार स्त्री योद्धा मुस्करा रही थी अपनी रानी को मेरी बाँहों में लिप्त देखकर.
मैंने एक बार स्वर्णलता का सर चूमा ,"आप ठीक तो हैं रानी शैब्या, आप का स्पर्श कितना प्यारा है आपकी तरह ".
रानी स्वर्णलता ने अपने लबों से मेरा सीना कुर्ते जैसी पोषक के ऊपर से चूमा ," इतना ठीक तो में कभी भी नहीं थी आर्यन बस मुझे स्वर्ण कहो तभी मुझे अच्छा लगेगा ".
में भी उनकी मनोदशा समझ के ," ठीक है में आपको स्वर्ण कहूंगा पर अकेले में..... आप मेरे लिए हमेशा रानी स्वर्णलता रहेंगी ".
अपनी गर्दन उठकर मेरी तरफ एक बार देखकी फिर शर्मा के नज़र निच्चे करती बोली ," आर्यन में जानती की तुम दीप्ति और गीता के साथ विवाह करने वालो है. अब राजकुमारी प्रभा से भी जल्दी तुम्हारा विवाह होगा. लेकिन एक वादा मैंने भी लिया था दीप्ति से की में तुमको प्रेम कर सकती हूँ अगर तुम चाहो तो और एहि अपनी दोनों बहेनो के लिए लिया था. तुम सोचोगे की हम तुम पे दूर दाल रहे हैं पर सच्च यह की हम तीनो बहेनो में धरतीपकड़ के अत्याचारों के कारन ये फैसला लिया था की जोह धरतीपकड़ को मारेगा उसको वरन जरूर दिल से करेंगे . करना पिछली बार भी चाहते थे पर तुमको दिव्या तलवार की खोज में जाना था और दीप्ति भी तुम्हारे साथ थी. अब तोह हमको ऋण चुकाने का मौका दो उससे तुमको hi फायदा होगा. मेरी तरह मेरी दोनों बड़ी बहेनो का दिल जीत लिया तो तुमको हमसे कुछ शक्तियां भी मिलेगी जोह नागलोक और पृथ्वीलोक पे भी तुम्हारे काम aayengi"......Swarnlata अब मुझसे 2 फट दूर होकर मेरे जवाब की प्रतीक्षा करने लगी .......
मैंने भी अपनी रानी माँ हेमा को याद किया तो उन्होंने मुझे आगे बढ़ने को कहा, साथ साथ यह भी कहा इन तीनो को हज़ारों साल से तुम्हारे जैसे का hi इंतज़ार था पुत्र और अब समय आ गया है िंह तीनो को अपना लो. यह तीनो साधरण स्त्री नहीं है, इनको अपना के तुम अपने को सबसे भाग्यशाली पयोगे ".
मैंने फिर मुस्करा के कहा स्वर्णलता से पुछा ," क्या आपकी बड़ी भेने मुझे पसंद करेंगी जबकि वह मुझे मिली भी नहीं और न hi मुझे जानती है ".
रानी स्वर्णलता मेरा जवाब सुनकर इतनी प्रसन्न हो गयी की आगे बढ़कर मुझे बेह्तषा चूमने लगी, "..... पुछःह पुछठ ारयणणणणणण ..... तुम बहोत अच्छे हो , आज में बहोत खुश हूँ..... चुम्म्म्म चुम्म्म्म ..... वह दोनों तो मरी जा रही होंगी तुमसे मिलने के लिए बस त्यार हो जाओ हम अटाला लोक की राजधानी स्वर्णगैर में प्रवेश करने वाले हैं ".
मैंने भी स्वर्णलता के लबों को चूमा और उसकी कमर में हाथ दाल के अपने साइड से चिपका के खड़ा होकर देखने लगा ...... स्वर्णलता बस निच्चे देखकर हसे जा रही थी तब अहसास हुआ साला , हरामी, मेरा लुंड खड़ा होकर साइड से धोती से बहार झांक रहा है..... मैंने झट से साइड होकर उसको धोती में दाल के एडजस्ट किया .
पीछे स्वर्णलता हसे जा रही थी आखिर अपने नए प्रेमी यार का औज़ार उसको डरने के साथ दिल भी जीत लिया एक झलक में ....... आर्यन सिर्फ सरीर से भी कहाँ मनुष्य लगता है हाँ बस हट थोड़ी काम है .
आर्यन लगभग 7फट का था पर स्वर्णलता को उसकी हट काम लग रही थी क्योंकि वह खुद 7फट से ऊपर होगी तोह लम्बी भी थी और बड़े बड़े मादक फिगर वाली.
आखिर दानव और एक ऋषि की पुत्री की बेटियां थी ..... उसकी दोनों बड़ी भेने भी उसके हट की थी .
यहाँ नर दानवो की हट hi 8 फट से ऊपर होती थी तोह आर्यन उसको हट में छोटा hi लगा पर बलिस्टः देख चुकी थी उसके हाथों की अपने मटकी जैसे चूतड़ों पे.
चरों और हरयाली और पेड़ दिख रहे थे और उसके आगे एक सोने का बड़ा सेहर था .....
उसकी रौशनी तोह अनमोल रतन बढ़ा hi रहे थे ...... चरों और स्वर्ण की ऊँची चारदीवारी के बिच बिच में बने गुम्बद पे सैनिक भी नज़र आ रहे थे .......
यहाँ तोह बिलकुल दिन की तरह उजाला था जबकि यहाँ कोई सूरज या चाँद की रौशनी नहीं थी बल्कि स्वर्ण और रत्नो की रौशनी hi इतनी ज्यादा थी की दिन hi लग रहा था.
रानी स्वर्णलता ने मुझे स्वर्णगैर और अपनी बहेनो के बारे में जरूरी जानकारी दी ....... जब नगर के प्रवेश द्वार पे पहुंचे तो स्वर्णलता ने रथ निच्चे ले लिया और अब जमीन से सिर्फ 3 फट ऊपर हम आगे बढ़ने लगे जिससे वह घोड़े जैसे जानवर अब पैरों पे दौड़ रहे थे .......
बहार सैनिको की पंकितयां दोनों तरह सर झुका के रानी स्वर्णलता का अभिवादन कर रही थी .......
विशाल द्वार से जब नगर में प्रवेश किये तोह फूलो की वर्षा हो रही थी जोह मैंने आज तक धरती पे नहीं देखे थे. रानी स्वर्णलता की जय जैकार हो रही थी ...... वह हाथ हिला के सबका अभिवादन स्वीकार कर रही थी ......
नगर पूरा नाम के अनुसार स्वर्ण से बना हुआ था ...... अरबों टोंस से ज्यादा गोल्ड लगा होगा बनाने में ..... कहीं कहीं पत्थर का भी इस्तेमाल किया गया था पर उसको भी सोने की प्लेट से जड़ दिया गया था. नगर की भवता और सुंदरता मैं मोहने वाली थी ..... तारीफ के लिए मेरे पास स्तब्ध नहीं हैं , कितनी अच्छी नकाशी और मूर्ति वाली दीवार के बड़े बड़े भवन हैं......
रानी स्वर्णलता मुझे मुख मुख जगह बताती रथ को आगे बढ़ा रही थी ....... रानी के रथ में मुझे दानव पुरुष ,स्त्री और बच्चे अजीब नजरों से देखते पर सर उनको भी झुकना पड़ता था जब मेरे हाथ में रानी का हाथ देखते .
लगभग 10-12 कम की दुरी तय करके जब हम एक बड़े से चौराहे पे पहुंचे तो सीधे हाथ के रस्ते पे 2 कम दूर एक विशाल महल दिखाई देने लगा .....
मेरी तो आंखें पहात की पहात रह गयी ," वव्वव्वव्व it's ब्यूटीफुल ...... कितना सूंदर महल है , यह तो बिलकुल स्वर्ग के जैसी नगरी है और इतना भाव महल मैंने आजतक नहीं देखा. राजा माया का तळतळा लोक का महल भी बहोत सूंदर है पर यह तो अप्रतिम है स्वर्ण ".
स्वर्णलता भी हस्ती हुयी ," हाँ तुम्हारे खुले मुख देखकर hi पता चल गया की तुम कितने ॉश्चारिये चकित हो ..... है है है है है ...... और हाँ यह महल भी राजा माया ने hi हज़ारों साल पहले बांया था अपने बेटे राजा बाला के लिए जोह हमारे पिताश्री हैं फिर उनके बाद अब रानी पुष्पलता यहाँ की रानी हैं मेरी सबसे बड़ी दीदी ".
में तोह अब और विषमय हो गया ," यानी साया और उसकी दोनों भेने आपकी बुआ लगती हैं ?"
स्वर्ण ," नहीं वह दत्तक पुत्री हैं राजा माया की यानी गॉड ली हूँ. हम उनके दत्तक पुत्र राजा बाला की बेटियां हैं यानी खून का रिश्ता हमारा नहीं है फिर पतलोक में पढ़ से श्रेष्ठा देखि जाती है. जोह जितना बलसाली वह उतना महँ और सम्मान पाने वाला होता है ...... हो सकता है तुमको भी शक्ति प्रदशन करना पड़े सबका दिल जीतने के लिए ".
िश रास्ते को सोने की ईंटों से बांया गया था और ुनःपर एक मोरपंखी के जैसे मोहर टाइप सील छपी थी जिसको मैंने नगर की कई इमारतों पे बना देखा था ...... स्वर्णलता ने बतया की यह िश राज्य में उगने वाले फूल का सिंबल है .
जब हम राजमहल के द्वार पे पहुंचे तो रथ घूम के खड़ा हो गया और स्वर्णलता मेरा हाथ पकडे निच्चे उतरी .....
ऊपर 52 सीडीहों के बाद दो सूंदर राजशाही वेशभूसा में अप्सरा hi कहूंगा कड़ी थी..... एक थोड़ी सवाल यानी ताम्बी रंग की थी और दूसरी बिलकुल भूरी भक सफ़ेद (यानी ब्रिटिश वाइट) रंग की ..... दोनों स्वर्णलता की हट की थी पर दोनों के चेहरे से पता चल रहा था की दोनों स्वर्ण की बड़ी भेने hi होंगी.
सीढिआँ चढ़ते हुए ऐसा लग रहा था की स्वर्गलोक के लिए ऐसे hi सीढिआँ जाती होंगी ...... स्वर्ण मेरा हाथ पकड़ के ऐसे चल रही थी की कहीं में वापस न भाग जॉन और में अब दोनों रानियों के अल्वा उनके सैनिक और दासियों को भी देख सकता था ......
रानी पुष्पलता के सामने पहुंचकर स्वर्ण पहले उनके गले लगी फिर रानी कामलता के ......
मैंने दोनों के सामने हाथ जोड़कर झुक कर नमस्कार किया तोह रानी पुष्पलता जोह गोल्डन परिधान पहने , सर पे रतन जड़ित मुकुट लगये थी बोली ," बोहत प्रशंसा सुनाई है महार्यं नाम के मानव की और आज तुम से भेट हो hi गयी ...... स्वागत है तुम्हारा िश स्वर्णगैर में में यहाँ की रानी पुष्पलता हूँ और यह कामनगर की रानी कामलता जोह हमारी छोटी भें है . रानी स्वर्णलता को तुम जानते hi हो ".
रानी स्वर्णलता
रानी कामलता ने आगे बढ़कर मुझे चरों तरफ से मेरे इर्द गिर्द घूम के कहा ," हुण्णनं..... गंध से तोह मानव hi लग रहे पर क्या तुम इतने शूरवीर हो जितना हमने चर्चा सुना है "......
वह गोल्डन और सिल्वर परिधान में थी और सर पे मुकुट भी स्लिवर का था पर कई रतन जेड हुए ...... उसकी स्किन बहोत चमक रही थी और बदन से निकलती खुसबू मुझे उससे लिपटने को उत्तेजित कर रही थी पर मैंने खुद पे काबू रखते हुए अपना बेस्ट हथियार अपना लिया यानी मौन रहना.
रानी कामलता
तीनो इतनी बड़ी बड़ी रानियां थी ऊपर से पतलोक निवासी , मेरी इनके सामने क्या बिसात ....... मुझे बस मौन और हाथ जोड़कर ऐसे hi खड़ा देख के जब स्वर्णलता ने कहा ," दीदी एहि hi महार्यं है और प्यार से सब आर्यन कहते है..... आप दोनों से शर्मा रहा है ".
रानी पुष्पलता
रानी कामलता ," ठीक है फिर इश्कि शर्म तोड़ देते हैं, एक मलह युद्ध हो जाये आर्यन क्या कहते हो हम इनाम भी देंगे और तुम िश महल में मेहमान भी बनोगे ".
स्वर्णलता बिच में बोलती उससे पहले रानी पुष्पलता ने कहा ," तुम पहले मानव होंगे जोह िश स्वर्ण महल के अतिथि बनोगे अगर कामलता की प्रति द्वंद्विंता जीत जाते हो तोह ".
में ने एक बार फिर दोनों के सामने हाथ जोड़कर बोलै ," आप दोनों महँ रानियां है और में तेरा एक आम सा पुरष धरतीलोक का वासी भला में आपके सबसे कमजोर सैनिक को भी कहाँ हरा पाउँगा ".
स्वर्णलता भी अब चकित रह गयी मेरी बात सुनकर पर दोनों रानियां तोह जैसे कुछ ठान hi ली थी ...... उन्होंने में मुझे लालच देते हुए कहा ," अगर जीत गए तो सही कक्ष में सब सुख सुविदा के साथ हम 5 नयी स्त्रीयां भी देंगे ..... "
में फिर भी चुप रहा तोह रानी कामलता ने कहा ," अगर जीत गए तोह स्वर्णलता के कक्ष में रह सकते हो , जैसे की यह तुमको पसंद करने लगी है तो इसका सनिध पाने के लिए भी नहीं लड़ोगे ".
रानी माँ हेमा की आवाज मेरे मैं में गुंजी ," अपनी शर्तों पे hi लड़ना पुत्र क्योंकि िंह तीनो में दानव खून है इतनी जल्दी वश में नहीं आएँगी लेकिन अगर इनका दिल जीत लिया तो गुलामी करेंगी जीवन भर और स्त्री सुख िंहसे ज्यादा तुमको कोई नहीं दे पायेगा ...... तीनो को काम देवी का दूसरा रूप hi समझो ".
रानी पुष्पलता का गुस्सा पल पल बढ़ता जा रहा था तब उसने क्रोध में कहा ," अगर इतने hi डरपोक हो तोह अपने को मर्द की जगह ........ "
में बोलने hi वाला था की स्वर्णलता जोरसे बोली ," आर्यन जरूर मलह युद्ध करेगा पर कोई चल कपट नहीं होगा. यह मर्दों में सर्वशेरस्थ है इतना तो में भी दावे से कह सकती हूँ पर शर्त यह होगी की अगर यह जीता तोह आप दोनों को भी इश्के सामने सर झुकना होगा इतना अपमान करने के बाद ".
अब तो दोनों बड़ी बहेनो को पारा हाई हो गया और में भी डरने लगा यह स्वर्णलता मुझे कहाँ फसा रही है, अगर में किसी तरह जीत भी गया तब भी यह दोनों सुन्दर लेकिन घमंडी रानियां मुझे जीवित छोड़ेंगी .
में ," माफ़ कीजिए रानी शैब्या में तोह आपका नगर देखने आया था और देख भी लिया तो मुझे जाने की आज्ञा दिज्ये. आप के सामने में एक चींटी के सामान हूँ, में चलता हूँ ".
रानी पुष्पलता ने ताली बजे तो 4 दानव सैनिको ने मुझे घेर लिया, चरों 9 फट के दानव hi थे बस योद्धा वाले परिधानों और अस्तर के साथ .......
रानी कामलता गुस्से से ," स्वर्णलता, तुम िश कायर के लिए अपनी दोनों बड़ी बहेनो का अपमान कर रही थी. यह यहाँ से अब जिन्दा नहीं जायेगा अगर यह मलह युद्ध नहीं करेगा ".
रानी पुष्पलता ," आखिर स्वर्ण ने तुम में क्या देखा है जोह तुम इश्कि बात का मान भी नहीं रख रहे हो..... धरतीपकड़ को तुम ने मारा था अब यकीन करना मुश्किल है ".
में भी अब कुछ सोच के बोलै ," में यहाँ किसी का अनादर करने नहीं आया था रानी शैब्या पर अगर आपको लगता है की रानी स्वर्णलता के लिए मुझे लड़ना चाहिए तोह में लड़ सकता हूँ पर आपको मेरी शर्त मंजूर नहीं होगी ".
रानी कामलता ," अच्छा इतना बड़ा दवा कर रहे हो तो बोलो पर अब मलह युद्ध कोई सैनिक नहीं हमारा सबसे बड़े योद्धा लड़ेंगे मंजूर हो तो हमको भी तुम्हारी शर्त मंजूर है ".
आर्यन अब मुस्करा के ," आप शर्त सुन लीजिए अगर आप ने मान ली तोह में अवश्य लडूंगा जितने योद्धा से बोलेंगी ".
रानी कामलता ," बको क्या शर्तें है तुम्हारी ".
आर्यन ," जी छोटी से शर्त है अगर में जीता तोह स्वर्णगैर की राजगद्दी पे रानी स्वर्णलता बैठेंगी और आप सबकी नयी रानी एहि होंगी ".
एक साथ सब शतब्ध रह गए मेरी बात सुनकर तब स्वर्णलता बोली ," यह क्या बोल रहे हो आर्यन भला ऐसा भी कोई शर्त रखता है ...... यह दोनों मेरी बड़ी दीदी हैं तुम कुछ और शर्त रख दो "...... वह मुझे अपने बड़ी बहेनो की तरफ आँखों से इशारा कर रही थी जैसे कह रही हो दोनों का हाथ मांग लो जीतने पे.
मैंने हाथ जोड़कर कहा ," मेरी तो एहि शर्त है अगर नहीं मंजूर तो मुझे जाने दिज्ये ".
रानी कामलता के साथ पुष्पलता भी मुझे गुस्से से देख रही थी साथ में और सब भी ....... आखिर थे तोह सब दानव hi गुस्सा और नफरत कूट कूट के भरी थी .
स्वर्ण मेरा हाथ पकड़ के अपने साथ थोड़ी दुर्र ले जाकर बोली ," आर्यन यह तुम क्या जिद्द लेकर बैठो हो , क्या किसी के घर जाकर कोई ऐसी बातें करता है ".
में ," आप बेकार में डर रही हो स्वर्णलता जी मैंने शर्त सिर्फ इशलिये राखी की वह पर्तिस्पर्धा ताल दें और अगर फिर भी मुझे लड़ना पड़ा तोह यह आप पर होगा की सिंघासन अपनाये या न अपनाये ".
स्वर्णलता भी अब हैरानी से मुझे देखकर समझ गयी ," तुम मेरी दोनों दीदी का घमंड तोडना चाहते हो न पर वह दोनों कमतर नहीं है ".
में भी अपनी बात रखता बोलै ," हाँ अब तोह में भी देखना चाहूंगा की मेरे अंदर कितनी ताकत है आखिर आप hi तोह बोली थी आपकी भेने मुझे पसंद करेंगी, अगर िश तरह करना चाहती है तोह ऐसे hi सही ".
स्वर्ण ने जाकर अपनी बड़ी बहेनो से बात की और हम सब चल दिए राजमहल के उतर दिशा में बने सस्त्रगृह के पास बने युद्ध अभ्यास के मैदान पर .......
साला घंटा स्वागत , किसी ने चाय पानी भी नहीं पुछा सीधा लड़ने की बात करने लगे .
अब तोह भीड़ भी बढ़ने लगी और अपनी 4 सैनिक स्त्री योद्धा मेरा साथ रानी स्वर्णलता ने भेजी की मुझे त्यार करें.
जोह उनकी लीडर थी यह hi मुझे और दीप्ति को तळतळा लोक तक छोड़ के आयी थी स्वर्णमुद्रा के साथ ...... उसने कहा," महार्यं जी आप ने प्रतिद्विंदिता तो स्वीकार कर ली पर मलह युद्ध में मुझे लगता है आपका सामना रानी कामलता या फिर रानी पुष्पलता से भी हो सकता है ".
में भी चौंक के ,"क्या बात कर रही सेनापतीजी, मतलब स्त्री भी भाग ले सकती हैं क्या मलह युद्ध में फिर दोनों रानियां क्यों मुझसे लड़ेंगी ".
योद्धा लीडर ," मुझे सेनापति नहीं , आप हंसिका कह सकते हैं , आप बहोत दिलेर हैं इतना तो मुझे पता है पर दोनों रानियां अस्तर सास्तर से भी लाडे बिना न चुकेंगी ऐसा hi सब बाकी योद्धा के साथ भी है तोह कुछ अस्तर आप भी छुपा लो समय पे काम आएंगे ".
मैंने इंकार कर्कटे हुए अंदर जाकर अपना कुरता उतरा और युद्ध के परिधान फेन लिया फिर निच्चे धोती की जगह एक चमड़े वाला विस्तार जोह मेरे घुटनो के ऊपर तक था फिर निचे शिन कवच और त्यार होकर बहार चल दिया उन्ह स्त्री सैनिकों के साथ .
हंसिका ," आप रानी स्वर्णलता की तरफ से लड़ रहे हो , वह आप को प्रेम भी करने लगी है हम सबने देखा है तोह एक सलाह दूंगी, चल कपट भी युद्ध जीतने का हिस्सा है तो रेहम मत करना जितना हो सके जल्द से जल्द जीतने की कोशिश करना किसी भी कीमत पर ".
आर्यन के खिलाफ रानी पुष्पलता और रानी कामलता की मूर्खता की दुष्टता देखते हुए बाकी लोकों के राजा और महाबली भी उत्सुकः थे पर डर तोह सब रहे थे कहीं आर्यन तभाई न ला दे पर उसकी भें प्रभा यहीं नागलोक में है तोह वो ऐसा नहीं करेगा ऐसा राजा वासुकि ने कहा था .
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में जब ुष युद्ध आभाष वाले प्रांगण में पहुंचा तोह मुझे चरों और का नज़ारा और भीड़ देखकर अहसास हो गया की यह तोह रोमन कोलोसियम की तरह स्टेडियम टाइप है जहाँ गुलाम योद्धा अपना शक्ति प्रदशन कर लोगों का दिल जीत लेते थे ....... यानी यह सब पूरी तयारी करके मेरी hi बंद बजने के चक्कर में.
यह प्रभा को भी यहीं आना था ऊपर से रानी माँ ने मुझे घूमने भेजा था या लड़ने. अब देखो स्वर्णलता को भी वह भी अपनी बहेनो के साथ बैठी है कहीं िंह तीनो की चाल तोह नहीं. चिंता मत करो आज तुम तीनो को अपना गुलाम बनकर न एक बिस्टेर पे चूड़ा तो मेरा नाम भी आर्यन नहीं .
मैंने पहले भगवन भोलेनाथ फिर बड़े गुरूजी का स्मरण करके अपनी रानी माँ हेमा का नाम लेकर त्यार हो गया की देखें कोण योद्धा आता है ...... मैंने कोई अस्तर नहीं लिया बस अपनी सारू मम्मी की लोटस शील्ड अपने ऊपर ले ली , यानी अगर कोई अस्तर गलती से भी मारा तो भेद नहीं पायेगा.
अब अच्छी खासी भीड़ िखथि हो गयी थी जोह बढ़ती जा रही थी तीनो रानी एक कवर्ड पवेलियन टाइप मंच पे ऊँचे आसान पे बैठी थी ......
मुझे माहौल देखकर लगने लगा की इनका लगता है रोज का है यह मलह युद्ध का आयोजन पर आज में बकरा मिल गया..... कोई नहीं आज के बाद किसी को नहीं फसा पयोगी मेरे जैसे .....
वहीँ स्वर्णलता भी अब मुझे दोषी लग रही थी पर गलती उसकी भी नहीं है आखिर वह दोनों उसकी सगी भें हैं तो उनका साथ hi देगी.
रानी कामलता ने खड़े होकर कहा ," यह है महार्यं सिंह जोह पृथ्वीलोक का वासी है और दिव्या तलवार को नागलोक से ले गया था राजकुमारी विशाखा को मार कर. िशने धरतीपकड़ के साथ वतासुर दानव का भी संहार किया था. मगर आज यह यहाँ हमारे अटाला लोक की राजगादी को चुनौती दिया है हमारी रानी पुष्पलता जी के सिंघासन को. अगर यह जीता तोह आप सब िश के गुलाम होंगे और हरा तोह िश के दुस्सहस के लिए मिर्त्युदण्ड मिलेगा ".
पूरी भीड़ में जैसा जोश आ गया और में तोह ठगा सा रह गया की यह कब हुआ जोह कामलता बक रही है ......
तभी रानी पुष्पलता ने खड़े होकर सबको शांत होने के लिए हाथ उठा के कहा," जोह इश्को मलह युद्ध में हरा देगा हम उसको अपना वर चुन लेंगे अगर दानव पुरुष हुआ और अगर दानव स्त्री ने हरा दिया तोह उसको रानी स्वर्णलता की जगह पुश्किन नगर की रानी बना देंगे. जोह भी लड़ना चाहे भाग ले सकता है ".
अब तोह जैसे भीड़ में जोश आ गया और कई दूसरे लोकों के दानव भी एक का एक वहां प्रकट होने लगे ...... एक से एक महाबली यानी साली राइओं ने मेरी अर्थी का इंतज़ाम कर दिया था . देखते hi देखते 70 दानव वहां जमा हो गए ......
स्वर्णलता ने विरोध किया तो रानी कामलता ने कहा ," स्वर्ण अगर तुम्हारा आर्यन जीत गया तोह तुमको मेरी भी राजगादी मिलेगी साथ में में और दीदी भी उसके गुलाम बनने को त्यार हैं".
स्वर्णलता भी थोड़ा हिचक के बोली," तोह आप दोनों तयारी करो वह हरा hi देगा और मुझे पता है आप भी दो दो हाथ आजमाने तो जरूर जायेगी ....... उसको चल से हरा सकते हो आप लोग वार्ना अगर दिव्या तलवार उसने धारण कर ली तोह सारे लोक नष्ट हो जायेंगे ".
रानी कामलता मुस्करा के ," हम भी देखने की आखिर कितना बलसाली है बिना दिव्या तलवार के जोह हमको भी जीत लेगा, चिंता न करो यह पर्किषा उतरीं किया तोह हम दोनों भी वादा निभंगे, आखिर धरतीपकड़ से िशने हमारे लोक को आजाद किया है ".
रानी पुष्पलता ," सामने देखो आज वह दानव भी यहाँ है हम तीनो को पाने के लिए जोह कितनो सालों से ाश लगाए बैठे थे ...... अगर हमारे जीवन में आर्यन का साथ है तोह हम को जरूर जीत लेगा ".
स्वर्णलता ," वैसे िश सब की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि मैंने उसे मन लिया था और वह पूर्ण सच्चं है इतना तोह में भी जान गयी हूँ ".
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मैंने सोचा ऐसे एक एक से लड़कर तोह कोई फैयदा नहीं होने वाला सालों को आपस में hi भिड़ा दूंगा तोह जोरसे से ललकार दिया ," एक साथ आओगे या अकेले अकेले अपनी माँ का पहले दूध पीने जाओगे फिर वापस आकर लड़ने वाले हो .. .. ..... है है है है है ".
अब तोह जोर की फुंकार मार के सब की आंखें गुस्से से उबाल रही थी तभी रानी स्वर्णलता ने एक हाथ आगे करके अपनी शक्ति से सिर्फ युद्ध मदिआं में अदृश्य दिवार बना के कहा ," सिर्फ मलह युद्ध कोई अस्तर सास्तर नहीं ".
मैंने अपने हाथ प्यार हिला दुलकर अपने ऊपर के सरीर का युद्ध वाला चेस्ट गार्ड और विस्तार उतर दिया ताकि पूरी फुर्ती से लड़ सकूँ पर यह क्या वह सब तोह जैसे एक एक करके बस लंगोट जैसे विस्तार नंग धडंग अवस्था में आ गए और हसने लगे ...... बहनचोद काले भूसंद और बदसूरत से जोह सरीर में भी मेरे से दंगे होंगे ..... राक्षशों के डोले और और झाँगिए hi मुझसे 3-4 गुना मोती होंगी ......
साले डरा रहे हैं पर चिंता मत करो आज तुमको ऐसी टक्कर मारूंगा की गांड सूझ जाएगी मैंने दोनों हाथो से मट्टी उठा के हाथ पे रगड़ी और पंजों के बल बैठकर उनकी तरफ मेरे पास आने का इशारा किया .......
उन्ह के झुण्ड से एक सबसे काम साइज का दानव आया मेरी तरह पर वह भी मुझसे एक फुट लम्बा hi था और सरीर से कोई 250 कग का लग रहा था ...... आज दिन था अपने ववे के कौसल का जलवा दिखने का " रॉबिंसन " तो याद hi होगा आप सबको ......
( मुंबई की अंडरग्राउंड फाइट )
मैंने पंजों के बेल बैठे अपनी छाती पीती ," ी ऍम िण्विकिबले "...... "ी ऍम िण्विकिबले "
एक दानव बोलै ," मार दे िश मानव को दुशाल ..... तुझे पहला मौका देते हैं ..... और तू आज जिन्दा नहीं जायेगा ".
मैंने ुष दुशाल नाम के दानव की तरफ दौड़ लगा के पूरी ताकत से बिना उसको मौका दिए उसकी छाती पे टक्कर मारी तोह दानव टक्कर के पररहर से उड़ता हुआ चीख पड़ा और पीछे बानी गोल मोती दिवार से टकरा के ढेर हो गया और में कोड़कर अपनी जगह आ गया फिर पंजों पे बैठकर अपनी चट्टी पीटने laga,"I ऍम िण्विकिबले "---2
पूरा एरीना शांत पद गया और ुष दानव के मोह से खून आने लगा वह हिल भी नहीं पा रहा था ...... मेरी आंखें की चमक बिलकुल गेंदे जैसी हो गयी थी और मुझे बस सबको टक्कर मारने का मैं कर रहा था अपने पाने सींघ से जबकि वहां कहीं सींघ था hi नहीं , टक्कर तोह मैंने सर से hi मारी थी .
(* दोस्तों यहाँ आर्यन की गेंदे की शक्ति जागृत हो गयी थी बस उसने रूप नहीं बदला था ...... आगे आगे आपको पता चलेगा की आर्यन की कोण कोण सी शक्तियां एक्टिवटे होने लगी हैं और किनको कितना कण्ट्रोल कर पता है )
मेरा अठास बाकी सब प्रतिदवंदी को गुस्सा दिला रहा था मुझे तोह बस सबके विशाल सरीर और अपना सींघ का hi अहसास हो रहा था ...... उन्ह की भीड़ से एक 12 फट लम्बा और 5 फट से ज्यादा चौड़ा हवन सा दिखने वाला रखसश जिसके दो दांत भी जंगली सौर की तरह बहार निकले थे ......
ओह्ह तोह साले सौर मेरे से पन्गा और अपनी छाती पीटकर मैंने दूसरी दिशा में दौड़ लगा दी वह दानव मेरे पीछे पीछे ...... दो चक्कर कटवा के मैंने उसकी तरफ दौड़ लगा दी वह भी थम के मेरी टक्कर का इंतज़ार करने लगे पर में ने उछाल के किक उसके उलटे घुटने पे मार के ऊपर की ओरे कोड़ते हुए उसके हाथों से बचते उसकी थोड़ी पे सींघ यानी अपना सर दे मार दिया ...... वह बहन भानता हुआ छीकता पीछे हटा तो में ने जमीन पे दोनों हाथ रखकर उसके दुसरे घुटने पे दोनों पैरों को जोड़ के किक दे मारी ..... वह पीछे भेंसे की तरह दकरता हुआ गिरा ......
उसके गिरते हुए थप्प्प्पप्प की आवाज हुयी और में उछलता कूदता रॉबिंसन के तकिया कलम बोलता अपनी जगह पे फिर आ बैठा ......
2 मं में 2 दानव मैंने बेहोश कर दिए थे पर मारे नहीं थी बस घायल थे ...... वह हील इशलिये नहीं हो रहे थे क्योंकि स्वर्णलता की शील्ड की वजह से पर वह भी जान गयी थी की मैंने कोई अदृश्य कवच जैसा धारण कर रखा है यानी लोटस शील्ड के साथ में चीटिंग कर रहा हूँ. (प्यार हो गया था सच्चा वाला आर्यन से स्वर्णलता को तोह सब जायज़ लगा )
दोनों रानियां भी मेरी फुर्ती और ताकत देखकर इम्प्रेस थी कुछ तो बात है िश मानव में ऐसे hi नहीं सबको बेबस करके दिव्या तलवार ले गया ...... वहीँ स्वर्णलता को विश्वास हो गया था उसका प्यार जरूर जीतेंगे .
अब तोह जोह भी दानव मेरे सामने आता उसको नए स्टाइल में सींघ मतलब सर , घुसने , किक से ...... मार मार के घायल करता पर आखिरी में जब 12 दानवों एक साथ मुझ पे टूट पड़े तोह मुझे उनके वारों से बचाव भी नहीं हुआ .....
जब उन्होंने मुझे फुटबॉल hi बना दिया पीट ते हुए एक दुसरे की तरफ उछाल के तब सारा स्टेडियम का एरीना उनके राजा बलासुर का नाम hi गुजने लगा ..... लोटस शील्ड की वजह से में घायल तोह नहीं हो रहा था क्योंकि कईओं के हाथों के नाख़ून hi 8-10 इंच के होंगे पर मौका नहीं ले पा रहा था में जान बाउज के ...... अगर सालों को एक साथ मार दिया तोह मेरी चीटिंग पकड़ी जाती......
थोड़ी डिअर पीटकर जब उन्होंने मुझे दीवार की तरफ दे मारा तोह में निचे पड़ा बेहोशी की एक्टिंग करने लगा ....... मगर एक मिनट भी न बिता होगा की वह सब आपस में भीड़ गए की मुझे कोण मार के रानी पुष्पलता से शादी करेगा .
उधर रानी पुष्पलता और कामलता के चेहरे देखने वाले थे ...... आखिर अब उनका क्या होगा , इतना सालों बाद एक मर्द मिला था जिसकी तारीफ स्वर्णलता ने भी की , भले मानव सही हमको संतुस्ट कर पायेगा.
लेकिन यह तीनो भेने क्या आर्यन भी नहीं जानता थी सिर्फ रानी माँ हेमा के दूध पीने से आर्यन को कितनी शक्तियां मिली थी की कोई भी स्त्री उसकी मर्जी के बिना उसको स्खलित नहीं करा पायेगी चाहे देवी हो दानवी इशलिये स्वर्णलता के जबरदस्त आकषरण के साथ वह कामलता के बाद पुष्पलता से भी सम्मोहित नहीं हो पाया.
क्या तीनो को िंह बचे हुए 10-12 दानवो में से पति चुनना पड़ेगा ?
तो बे कॉन्टिनोएड......
Part- 2 (बी)
डॉली को अपना बनकर आर्यन भी नींद में चला गया .......
(सपनो वाली यादें आर्यन की जुबानी.....)
में रानी स्वर्णलता के सौंदर्य रूप यौवन का अपनी आँखों से चाक्षुपान करता रहा," यह कितनी सूंदर स्त्री है हर हर अंग जैसे संचय में ढला हुआ".
उनके सरीर से अजीब से माधोसी वाली खुसबू मेरे नाथों में आकर नशा सा कर रही थी. अपने को सँभालने की कोशिश करता में अब हवा में रथ पे सवार पतलोक के सूंदर सूंदर दृश्य को निहारने लगा .
हम 'तळतळा लोक' से अब अटाला लोक जा रहे थे 'पश्चिन नगर' जोह रानी स्वर्णलता की नगरी थी ...... बिच बिच में वह मुझे दुसरे लोकों के बारे में जानकारी दे रही थी.
जब हम 'अटाला लोक' में प्रवेश किये तोह एक अजानी चाहत रानी स्वर्णलता के लिए मेरे मैं में बलवती होने लगी जैसे अभी उनको अपनी बाँहों में समेत लूँ.
तब मुझे अपने पिछली बार के अटाला लोक के भ्रमण की याद आयी जब में दीप्ति के साथ आया था दिव्या तलवार की खोज में की यहाँ की स्त्रीओं के जादू ऐसा था जोह हर पुरुष को अपनी ओरे खींचता था .
जैसे hi हमारी सवारी अटाला लोक में एंटर की निच्चे 2 और युधो वाले रथ हमारे पीछे हो लिए ..... यह स्वर्णलता के hi स्त्री योद्धा के रथ थे. मैंने उनकी तरफ देखा तो सबने हाथ जोड़ के मुझे नमन किया तोह मैंने भी हाथ जोड़कर उनका अभिवादन स्वीकार किया .
रानी स्वर्णलता मेरी तरफ देखकर मुस्करा भर दी पर उनके मैं में अलग hi विचार चल रहे थे ...... देखें वह क्या सोच रही हैं .......
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रानी स्वर्णलता अपने मैं ," िश पर तोह मेरे आकर्षण शक्ति भी पूरी तरह से काम नहीं कर रही है , आखिर इतनी जटिल इच्छाशक्ति किसी साधारण मानव में तो नहीं हो सकती. हर तरह से अद्भुत hi है यह महार्यं . इतना बांका और सजीला मनुष्य मैंने आज तक नहीं देखा. इश्कि सुंदरता तोह देवताओं जैसी है पर इतना शक्तिशाली नौजवान है यह तो पूरे पतलोक में किसी न नहीं सोचा होगा. रानी हेमा ने सही hi कहा था की अगर आर्यन का दिल जीत लिया तो पूर्ण नारी सुख मिलेगा जिसके लिए हम तीनो भेने वंचित hi रही हैं. कोई भी हमारे यौवन को झेल hi नहीं पता ...... ुष पापी धरतीपकड़ ने भी तोह कोशिश की थी पर वह भी हमको स्पर्श करते hi सीरगहपतित हो गया. कहने को तो वह हमको अपनी गुलाम hi समझता था , हम बहेनो ने न सही पर हमारी प्रजा की कितनी हज़ारों स्त्रीओं को उसने जबरदस्ती भोगा था ".
स्वर्णलता ने अपने मैं में विश्वास पक्का करके फैसला कर लिया ," अगर आर्यन हम तीनो बहेनो को संतुस्ट कर दिया तोह में सिर्फ इसी की बनकर रहूंगी. एक बार हमको पूरा कर दो आर्यन हम तीनो तुमको अपनी असली गाजा शक्ति देंगे जोह आजतक किसी पुरुष के पास नहीं है ".
रानी स्वर्णलता की दो बड़ी भेने भी हैं .......
रानी कामलता ..... यह 'कामनगर' की रानी है , यह स्वर्णलता से बड़ी है..... देखने में थोड़ा ताम्बी रंग है पर सबसे मादक और गरम स्त्री है .
रानी पुष्पलता ..... सबसे बड़ी भें यह 'स्वर्णगैर' की रानी है जोह अटाला लोक का सबसे बड़ा नगर है . देखने में तीनो बहेनो में सबसे सूंदर पर थोड़ा गुस्से वाली है. यह अभी तक स्वर्णलता से नाराज है की उसने आर्यन को बिना हमसे मिलवाये जाने क्यों दिया.
(* डिटेल्स के लिए पढ़ें अपडेट 34 , part -7 (ा)..... पेज 486 )
आज स्वर्णलता आर्यन को सीधा स्वर्णगैर hi ले जा रही थी जहाँ उसने सुचना भेजवा दी थी की आर्यन को साथ लेकर आएगी .
अब तोह आर्यन से मिलने के लिए दोनों बड़ी भेने भी वैकुल थी आखिर जिसने दो राक्षस धरतीपकड़ और वतासुर के साथ विशाखा जैसी नागलोक की नागिन को मार दिया हो और दिव्या तलवार लेकर भी चला गया पृथ्वीलोक और कोई पतलोक का निवासी उसको रोक नहीं पाया.
ऐसे जानदार और दिलेर मर्द को न पाया तोह क्या पाया िश जीवन में. दरसल जिस स्त्री ने भी आर्यन को पहली बार देखा उसको पाने को भाव विभोर से हो जाती थी एहि हाल पतलोक की माडो का था ......
अब तोह आर्यन के पास रानी हेमा की दी हुयी शक्तियां थी जोह किसी भी स्त्री का सैयाम तोड़ दे .
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मैंने ध्यान दिया की अब हमारी रफ़्तार तेज़ है ...... मेरे और स्वर्णलता के बाल हवा के विहग से ुध रहे थे ......
मैंने अपने हाथ से उनके चेहरे पे परेशां करती लत को उनके कान के पीछे किया तो मेरे उंगलिओं पे उनके मक्खन जैसे चिकने गाल का स्पर्श मिला .
मेरे मुख से न्यास hi निकल गया," आप की सुंदरता के आगे तोह स्वयं भगवन भी नतमस्तक हो जाते होंगे की उन्होंने कितनी रूपवती स्त्री को संसार में भेजा है ".
हलके से मेरे छुवन और तारीफ ने जैसे स्वर्णलता की मुस्कान घेरि कर दी और चेहरे पे आयी लाली उसको शर्माने को मजबूर.
स्वर्णलता ," तुम्हारे सामने तोह हम भी कुछ नहीं आर्यन लेकिन अभी मेरी दोनों बड़ी बहेनो को नहीं देखा है तुमने...... दोनों हमसे भी सूंदर हैं सायद उनसे भेट होने पे हमारी तरफ देखो भी न".
में उनकी बात सुनकर चकित hi रह गया की उनकी दो बड़ी भेने भी हैं और वह िंहसे भी सूंदर है पर अपने को कमतर वाली बात मुझे पसंद नहीं आयी.
मैंने आगे बढ़कर उनके झुके चेहरे को अपने दोनों हाथ में लेकर ऊपर उठाया तोह उनकी झील सी कांजी बड़ी बड़ी आंखें में एक प्रेम का सलभ भरा हुआ पाया ......
मैंने उनका माथा चूम के कहा ," आप का अहसान में कभी नहीं भुला सकता रानी शैब्या फिर जोह मैंने आपके लिए कहा दिल से कहा है...... मैंने आपकी बहेनो को नहीं देखा और वह आपकी तरह खूबसूरत भी होंगी लेकिन में तोह सिर्फ आपको जानता हूँ जिसने पहली बार में hi हमको दिल से मदद की...... कौन रानी एक तुच्छ से मानुस के लिए ऐसा करेगी. आप का नाम hi स्वर्णलता नहीं है बल्कि आपका दिल और रंग रूप भी ख़ालिश सोने जैसा है, आप माने या न माने मुझे भी अपने लाखों चाहने वालों में एक प्रसंशंक hi समझिये ".
मेरे इतना कहते hi रानी स्वर्णलता के मैं में क्या आया की आगे बढ़कर उन्होंने में लबों को चूम लिया ....... पुछःह
मेरे और उनके सरीर में भी उत्तेजना की बिजली दौड़ गयी ...... हम दोनों एक दुसरे की आँखों में खो हुए थे की मैंने अपना सीधा हाथ उनके गाल से हटा के उनकी चिकनी कमर पे रखा और अपने करीब करके उनके गुलाबी निचले हूंठ को चूम लिया ......
दोनों को सिग्नल और स्वीकारती एक दुसरे से मिल गयी थी ...... में अब उनके निछले होंठ को चूस रहा था तो वह मेरे ऊपर वाले होंठ को ....... सहेड की तरह उनके होंठ कितने नरम और रसीले थे , ऐसा लगा जैसे इनसे मीठा दुनिया में कुछ नहीं होगा .
दोनों हाथ उनके मेरी बालों में घूमने लगे और में उनकी चिकनी कमर और उलटे चिकने गाल को सेहला रहा था ...... मेरा लौड़ा तोह जैसे मेरी धोती जैसी पोषक में तन्न के उनकी जाँघों में जा भिड़ा ......
पुछःह पुछठ ...... चुम्म्म्म चुम्म्म्म ...... मुह्हह्ह्ह्हह ...... प्यार से एक दुसरे के लबों को चूसते हुए अब हमारी जीभ एक दुसरे के मुख की घेरे नापने लगी ......
यह अलग की नशा था हमारी आंखें बांध थी पर अब दोनों के हाथ चूमते हुए एक दुसरे के सरीर के पिछले भूभाग को तोलने लगे ......
मैंने उनकी मटकी जैसे दोनों सुडोल चूतड़ मसले तो वह थरथरा के झंडने लगी ...... आह्ह्ह्हह्ह सीईईई ...... पुछःह पुछठ ारयणणणणणण सीईइईसीईई ..... मेंनननननन गईइइइइइ ...... माआआ मुझे सँभाललललललल लोओओओओओ ..... ह्म्म्मम्म्म्म ".
बहोत तीर्व स्खलन हुआ था उनका पूरा सरीर कांप रहा था सांस उखड रही थी ....... में अब अपने से चिपकाये उनकी पीठ और सर सेहला रहा था ......
रानी स्वर्णलता के दिल में तोह जैसे सारे सपने पूरे होते दिखने लगे. एहि है वह साथी जिसकी मुझे कितनो वर्षों से तलाश थी, सिर्फ चूम के मुझे चरमोत्कर्ष तक ले गया.
अब मुझको दुर्र से एक नगरी दिख रही थी, मैंने बाकी दोनों रथ की तरफ देखा तो उन्ह पर सवार स्त्री योद्धा मुस्करा रही थी अपनी रानी को मेरी बाँहों में लिप्त देखकर.
मैंने एक बार स्वर्णलता का सर चूमा ,"आप ठीक तो हैं रानी शैब्या, आप का स्पर्श कितना प्यारा है आपकी तरह ".
रानी स्वर्णलता ने अपने लबों से मेरा सीना कुर्ते जैसी पोषक के ऊपर से चूमा ," इतना ठीक तो में कभी भी नहीं थी आर्यन बस मुझे स्वर्ण कहो तभी मुझे अच्छा लगेगा ".
में भी उनकी मनोदशा समझ के ," ठीक है में आपको स्वर्ण कहूंगा पर अकेले में..... आप मेरे लिए हमेशा रानी स्वर्णलता रहेंगी ".
अपनी गर्दन उठकर मेरी तरफ एक बार देखकी फिर शर्मा के नज़र निच्चे करती बोली ," आर्यन में जानती की तुम दीप्ति और गीता के साथ विवाह करने वालो है. अब राजकुमारी प्रभा से भी जल्दी तुम्हारा विवाह होगा. लेकिन एक वादा मैंने भी लिया था दीप्ति से की में तुमको प्रेम कर सकती हूँ अगर तुम चाहो तो और एहि अपनी दोनों बहेनो के लिए लिया था. तुम सोचोगे की हम तुम पे दूर दाल रहे हैं पर सच्च यह की हम तीनो बहेनो में धरतीपकड़ के अत्याचारों के कारन ये फैसला लिया था की जोह धरतीपकड़ को मारेगा उसको वरन जरूर दिल से करेंगे . करना पिछली बार भी चाहते थे पर तुमको दिव्या तलवार की खोज में जाना था और दीप्ति भी तुम्हारे साथ थी. अब तोह हमको ऋण चुकाने का मौका दो उससे तुमको hi फायदा होगा. मेरी तरह मेरी दोनों बड़ी बहेनो का दिल जीत लिया तो तुमको हमसे कुछ शक्तियां भी मिलेगी जोह नागलोक और पृथ्वीलोक पे भी तुम्हारे काम aayengi"......Swarnlata अब मुझसे 2 फट दूर होकर मेरे जवाब की प्रतीक्षा करने लगी .......
मैंने भी अपनी रानी माँ हेमा को याद किया तो उन्होंने मुझे आगे बढ़ने को कहा, साथ साथ यह भी कहा इन तीनो को हज़ारों साल से तुम्हारे जैसे का hi इंतज़ार था पुत्र और अब समय आ गया है िंह तीनो को अपना लो. यह तीनो साधरण स्त्री नहीं है, इनको अपना के तुम अपने को सबसे भाग्यशाली पयोगे ".
मैंने फिर मुस्करा के कहा स्वर्णलता से पुछा ," क्या आपकी बड़ी भेने मुझे पसंद करेंगी जबकि वह मुझे मिली भी नहीं और न hi मुझे जानती है ".
रानी स्वर्णलता मेरा जवाब सुनकर इतनी प्रसन्न हो गयी की आगे बढ़कर मुझे बेह्तषा चूमने लगी, "..... पुछःह पुछठ ारयणणणणणण ..... तुम बहोत अच्छे हो , आज में बहोत खुश हूँ..... चुम्म्म्म चुम्म्म्म ..... वह दोनों तो मरी जा रही होंगी तुमसे मिलने के लिए बस त्यार हो जाओ हम अटाला लोक की राजधानी स्वर्णगैर में प्रवेश करने वाले हैं ".
मैंने भी स्वर्णलता के लबों को चूमा और उसकी कमर में हाथ दाल के अपने साइड से चिपका के खड़ा होकर देखने लगा ...... स्वर्णलता बस निच्चे देखकर हसे जा रही थी तब अहसास हुआ साला , हरामी, मेरा लुंड खड़ा होकर साइड से धोती से बहार झांक रहा है..... मैंने झट से साइड होकर उसको धोती में दाल के एडजस्ट किया .
पीछे स्वर्णलता हसे जा रही थी आखिर अपने नए प्रेमी यार का औज़ार उसको डरने के साथ दिल भी जीत लिया एक झलक में ....... आर्यन सिर्फ सरीर से भी कहाँ मनुष्य लगता है हाँ बस हट थोड़ी काम है .
आर्यन लगभग 7फट का था पर स्वर्णलता को उसकी हट काम लग रही थी क्योंकि वह खुद 7फट से ऊपर होगी तोह लम्बी भी थी और बड़े बड़े मादक फिगर वाली.
आखिर दानव और एक ऋषि की पुत्री की बेटियां थी ..... उसकी दोनों बड़ी भेने भी उसके हट की थी .
यहाँ नर दानवो की हट hi 8 फट से ऊपर होती थी तोह आर्यन उसको हट में छोटा hi लगा पर बलिस्टः देख चुकी थी उसके हाथों की अपने मटकी जैसे चूतड़ों पे.
चरों और हरयाली और पेड़ दिख रहे थे और उसके आगे एक सोने का बड़ा सेहर था .....
उसकी रौशनी तोह अनमोल रतन बढ़ा hi रहे थे ...... चरों और स्वर्ण की ऊँची चारदीवारी के बिच बिच में बने गुम्बद पे सैनिक भी नज़र आ रहे थे .......
यहाँ तोह बिलकुल दिन की तरह उजाला था जबकि यहाँ कोई सूरज या चाँद की रौशनी नहीं थी बल्कि स्वर्ण और रत्नो की रौशनी hi इतनी ज्यादा थी की दिन hi लग रहा था.
रानी स्वर्णलता ने मुझे स्वर्णगैर और अपनी बहेनो के बारे में जरूरी जानकारी दी ....... जब नगर के प्रवेश द्वार पे पहुंचे तो स्वर्णलता ने रथ निच्चे ले लिया और अब जमीन से सिर्फ 3 फट ऊपर हम आगे बढ़ने लगे जिससे वह घोड़े जैसे जानवर अब पैरों पे दौड़ रहे थे .......
बहार सैनिको की पंकितयां दोनों तरह सर झुका के रानी स्वर्णलता का अभिवादन कर रही थी .......
विशाल द्वार से जब नगर में प्रवेश किये तोह फूलो की वर्षा हो रही थी जोह मैंने आज तक धरती पे नहीं देखे थे. रानी स्वर्णलता की जय जैकार हो रही थी ...... वह हाथ हिला के सबका अभिवादन स्वीकार कर रही थी ......
नगर पूरा नाम के अनुसार स्वर्ण से बना हुआ था ...... अरबों टोंस से ज्यादा गोल्ड लगा होगा बनाने में ..... कहीं कहीं पत्थर का भी इस्तेमाल किया गया था पर उसको भी सोने की प्लेट से जड़ दिया गया था. नगर की भवता और सुंदरता मैं मोहने वाली थी ..... तारीफ के लिए मेरे पास स्तब्ध नहीं हैं , कितनी अच्छी नकाशी और मूर्ति वाली दीवार के बड़े बड़े भवन हैं......
रानी स्वर्णलता मुझे मुख मुख जगह बताती रथ को आगे बढ़ा रही थी ....... रानी के रथ में मुझे दानव पुरुष ,स्त्री और बच्चे अजीब नजरों से देखते पर सर उनको भी झुकना पड़ता था जब मेरे हाथ में रानी का हाथ देखते .
लगभग 10-12 कम की दुरी तय करके जब हम एक बड़े से चौराहे पे पहुंचे तो सीधे हाथ के रस्ते पे 2 कम दूर एक विशाल महल दिखाई देने लगा .....
मेरी तो आंखें पहात की पहात रह गयी ," वव्वव्वव्व it's ब्यूटीफुल ...... कितना सूंदर महल है , यह तो बिलकुल स्वर्ग के जैसी नगरी है और इतना भाव महल मैंने आजतक नहीं देखा. राजा माया का तळतळा लोक का महल भी बहोत सूंदर है पर यह तो अप्रतिम है स्वर्ण ".
स्वर्णलता भी हस्ती हुयी ," हाँ तुम्हारे खुले मुख देखकर hi पता चल गया की तुम कितने ॉश्चारिये चकित हो ..... है है है है है ...... और हाँ यह महल भी राजा माया ने hi हज़ारों साल पहले बांया था अपने बेटे राजा बाला के लिए जोह हमारे पिताश्री हैं फिर उनके बाद अब रानी पुष्पलता यहाँ की रानी हैं मेरी सबसे बड़ी दीदी ".
में तोह अब और विषमय हो गया ," यानी साया और उसकी दोनों भेने आपकी बुआ लगती हैं ?"
स्वर्ण ," नहीं वह दत्तक पुत्री हैं राजा माया की यानी गॉड ली हूँ. हम उनके दत्तक पुत्र राजा बाला की बेटियां हैं यानी खून का रिश्ता हमारा नहीं है फिर पतलोक में पढ़ से श्रेष्ठा देखि जाती है. जोह जितना बलसाली वह उतना महँ और सम्मान पाने वाला होता है ...... हो सकता है तुमको भी शक्ति प्रदशन करना पड़े सबका दिल जीतने के लिए ".
िश रास्ते को सोने की ईंटों से बांया गया था और ुनःपर एक मोरपंखी के जैसे मोहर टाइप सील छपी थी जिसको मैंने नगर की कई इमारतों पे बना देखा था ...... स्वर्णलता ने बतया की यह िश राज्य में उगने वाले फूल का सिंबल है .
जब हम राजमहल के द्वार पे पहुंचे तो रथ घूम के खड़ा हो गया और स्वर्णलता मेरा हाथ पकडे निच्चे उतरी .....
ऊपर 52 सीडीहों के बाद दो सूंदर राजशाही वेशभूसा में अप्सरा hi कहूंगा कड़ी थी..... एक थोड़ी सवाल यानी ताम्बी रंग की थी और दूसरी बिलकुल भूरी भक सफ़ेद (यानी ब्रिटिश वाइट) रंग की ..... दोनों स्वर्णलता की हट की थी पर दोनों के चेहरे से पता चल रहा था की दोनों स्वर्ण की बड़ी भेने hi होंगी.
सीढिआँ चढ़ते हुए ऐसा लग रहा था की स्वर्गलोक के लिए ऐसे hi सीढिआँ जाती होंगी ...... स्वर्ण मेरा हाथ पकड़ के ऐसे चल रही थी की कहीं में वापस न भाग जॉन और में अब दोनों रानियों के अल्वा उनके सैनिक और दासियों को भी देख सकता था ......
रानी पुष्पलता के सामने पहुंचकर स्वर्ण पहले उनके गले लगी फिर रानी कामलता के ......
मैंने दोनों के सामने हाथ जोड़कर झुक कर नमस्कार किया तोह रानी पुष्पलता जोह गोल्डन परिधान पहने , सर पे रतन जड़ित मुकुट लगये थी बोली ," बोहत प्रशंसा सुनाई है महार्यं नाम के मानव की और आज तुम से भेट हो hi गयी ...... स्वागत है तुम्हारा िश स्वर्णगैर में में यहाँ की रानी पुष्पलता हूँ और यह कामनगर की रानी कामलता जोह हमारी छोटी भें है . रानी स्वर्णलता को तुम जानते hi हो ".
रानी स्वर्णलता
रानी कामलता ने आगे बढ़कर मुझे चरों तरफ से मेरे इर्द गिर्द घूम के कहा ," हुण्णनं..... गंध से तोह मानव hi लग रहे पर क्या तुम इतने शूरवीर हो जितना हमने चर्चा सुना है "......
वह गोल्डन और सिल्वर परिधान में थी और सर पे मुकुट भी स्लिवर का था पर कई रतन जेड हुए ...... उसकी स्किन बहोत चमक रही थी और बदन से निकलती खुसबू मुझे उससे लिपटने को उत्तेजित कर रही थी पर मैंने खुद पे काबू रखते हुए अपना बेस्ट हथियार अपना लिया यानी मौन रहना.
रानी कामलता
तीनो इतनी बड़ी बड़ी रानियां थी ऊपर से पतलोक निवासी , मेरी इनके सामने क्या बिसात ....... मुझे बस मौन और हाथ जोड़कर ऐसे hi खड़ा देख के जब स्वर्णलता ने कहा ," दीदी एहि hi महार्यं है और प्यार से सब आर्यन कहते है..... आप दोनों से शर्मा रहा है ".
रानी पुष्पलता
रानी कामलता ," ठीक है फिर इश्कि शर्म तोड़ देते हैं, एक मलह युद्ध हो जाये आर्यन क्या कहते हो हम इनाम भी देंगे और तुम िश महल में मेहमान भी बनोगे ".
स्वर्णलता बिच में बोलती उससे पहले रानी पुष्पलता ने कहा ," तुम पहले मानव होंगे जोह िश स्वर्ण महल के अतिथि बनोगे अगर कामलता की प्रति द्वंद्विंता जीत जाते हो तोह ".
में ने एक बार फिर दोनों के सामने हाथ जोड़कर बोलै ," आप दोनों महँ रानियां है और में तेरा एक आम सा पुरष धरतीलोक का वासी भला में आपके सबसे कमजोर सैनिक को भी कहाँ हरा पाउँगा ".
स्वर्णलता भी अब चकित रह गयी मेरी बात सुनकर पर दोनों रानियां तोह जैसे कुछ ठान hi ली थी ...... उन्होंने में मुझे लालच देते हुए कहा ," अगर जीत गए तो सही कक्ष में सब सुख सुविदा के साथ हम 5 नयी स्त्रीयां भी देंगे ..... "
में फिर भी चुप रहा तोह रानी कामलता ने कहा ," अगर जीत गए तोह स्वर्णलता के कक्ष में रह सकते हो , जैसे की यह तुमको पसंद करने लगी है तो इसका सनिध पाने के लिए भी नहीं लड़ोगे ".
रानी माँ हेमा की आवाज मेरे मैं में गुंजी ," अपनी शर्तों पे hi लड़ना पुत्र क्योंकि िंह तीनो में दानव खून है इतनी जल्दी वश में नहीं आएँगी लेकिन अगर इनका दिल जीत लिया तो गुलामी करेंगी जीवन भर और स्त्री सुख िंहसे ज्यादा तुमको कोई नहीं दे पायेगा ...... तीनो को काम देवी का दूसरा रूप hi समझो ".
रानी पुष्पलता का गुस्सा पल पल बढ़ता जा रहा था तब उसने क्रोध में कहा ," अगर इतने hi डरपोक हो तोह अपने को मर्द की जगह ........ "
में बोलने hi वाला था की स्वर्णलता जोरसे बोली ," आर्यन जरूर मलह युद्ध करेगा पर कोई चल कपट नहीं होगा. यह मर्दों में सर्वशेरस्थ है इतना तो में भी दावे से कह सकती हूँ पर शर्त यह होगी की अगर यह जीता तोह आप दोनों को भी इश्के सामने सर झुकना होगा इतना अपमान करने के बाद ".
अब तो दोनों बड़ी बहेनो को पारा हाई हो गया और में भी डरने लगा यह स्वर्णलता मुझे कहाँ फसा रही है, अगर में किसी तरह जीत भी गया तब भी यह दोनों सुन्दर लेकिन घमंडी रानियां मुझे जीवित छोड़ेंगी .
में ," माफ़ कीजिए रानी शैब्या में तोह आपका नगर देखने आया था और देख भी लिया तो मुझे जाने की आज्ञा दिज्ये. आप के सामने में एक चींटी के सामान हूँ, में चलता हूँ ".
रानी पुष्पलता ने ताली बजे तो 4 दानव सैनिको ने मुझे घेर लिया, चरों 9 फट के दानव hi थे बस योद्धा वाले परिधानों और अस्तर के साथ .......
रानी कामलता गुस्से से ," स्वर्णलता, तुम िश कायर के लिए अपनी दोनों बड़ी बहेनो का अपमान कर रही थी. यह यहाँ से अब जिन्दा नहीं जायेगा अगर यह मलह युद्ध नहीं करेगा ".
रानी पुष्पलता ," आखिर स्वर्ण ने तुम में क्या देखा है जोह तुम इश्कि बात का मान भी नहीं रख रहे हो..... धरतीपकड़ को तुम ने मारा था अब यकीन करना मुश्किल है ".
में भी अब कुछ सोच के बोलै ," में यहाँ किसी का अनादर करने नहीं आया था रानी शैब्या पर अगर आपको लगता है की रानी स्वर्णलता के लिए मुझे लड़ना चाहिए तोह में लड़ सकता हूँ पर आपको मेरी शर्त मंजूर नहीं होगी ".
रानी कामलता ," अच्छा इतना बड़ा दवा कर रहे हो तो बोलो पर अब मलह युद्ध कोई सैनिक नहीं हमारा सबसे बड़े योद्धा लड़ेंगे मंजूर हो तो हमको भी तुम्हारी शर्त मंजूर है ".
आर्यन अब मुस्करा के ," आप शर्त सुन लीजिए अगर आप ने मान ली तोह में अवश्य लडूंगा जितने योद्धा से बोलेंगी ".
रानी कामलता ," बको क्या शर्तें है तुम्हारी ".
आर्यन ," जी छोटी से शर्त है अगर में जीता तोह स्वर्णगैर की राजगद्दी पे रानी स्वर्णलता बैठेंगी और आप सबकी नयी रानी एहि होंगी ".
एक साथ सब शतब्ध रह गए मेरी बात सुनकर तब स्वर्णलता बोली ," यह क्या बोल रहे हो आर्यन भला ऐसा भी कोई शर्त रखता है ...... यह दोनों मेरी बड़ी दीदी हैं तुम कुछ और शर्त रख दो "...... वह मुझे अपने बड़ी बहेनो की तरफ आँखों से इशारा कर रही थी जैसे कह रही हो दोनों का हाथ मांग लो जीतने पे.
मैंने हाथ जोड़कर कहा ," मेरी तो एहि शर्त है अगर नहीं मंजूर तो मुझे जाने दिज्ये ".
रानी कामलता के साथ पुष्पलता भी मुझे गुस्से से देख रही थी साथ में और सब भी ....... आखिर थे तोह सब दानव hi गुस्सा और नफरत कूट कूट के भरी थी .
स्वर्ण मेरा हाथ पकड़ के अपने साथ थोड़ी दुर्र ले जाकर बोली ," आर्यन यह तुम क्या जिद्द लेकर बैठो हो , क्या किसी के घर जाकर कोई ऐसी बातें करता है ".
में ," आप बेकार में डर रही हो स्वर्णलता जी मैंने शर्त सिर्फ इशलिये राखी की वह पर्तिस्पर्धा ताल दें और अगर फिर भी मुझे लड़ना पड़ा तोह यह आप पर होगा की सिंघासन अपनाये या न अपनाये ".
स्वर्णलता भी अब हैरानी से मुझे देखकर समझ गयी ," तुम मेरी दोनों दीदी का घमंड तोडना चाहते हो न पर वह दोनों कमतर नहीं है ".
में भी अपनी बात रखता बोलै ," हाँ अब तोह में भी देखना चाहूंगा की मेरे अंदर कितनी ताकत है आखिर आप hi तोह बोली थी आपकी भेने मुझे पसंद करेंगी, अगर िश तरह करना चाहती है तोह ऐसे hi सही ".
स्वर्ण ने जाकर अपनी बड़ी बहेनो से बात की और हम सब चल दिए राजमहल के उतर दिशा में बने सस्त्रगृह के पास बने युद्ध अभ्यास के मैदान पर .......
साला घंटा स्वागत , किसी ने चाय पानी भी नहीं पुछा सीधा लड़ने की बात करने लगे .
अब तोह भीड़ भी बढ़ने लगी और अपनी 4 सैनिक स्त्री योद्धा मेरा साथ रानी स्वर्णलता ने भेजी की मुझे त्यार करें.
जोह उनकी लीडर थी यह hi मुझे और दीप्ति को तळतळा लोक तक छोड़ के आयी थी स्वर्णमुद्रा के साथ ...... उसने कहा," महार्यं जी आप ने प्रतिद्विंदिता तो स्वीकार कर ली पर मलह युद्ध में मुझे लगता है आपका सामना रानी कामलता या फिर रानी पुष्पलता से भी हो सकता है ".
में भी चौंक के ,"क्या बात कर रही सेनापतीजी, मतलब स्त्री भी भाग ले सकती हैं क्या मलह युद्ध में फिर दोनों रानियां क्यों मुझसे लड़ेंगी ".
योद्धा लीडर ," मुझे सेनापति नहीं , आप हंसिका कह सकते हैं , आप बहोत दिलेर हैं इतना तो मुझे पता है पर दोनों रानियां अस्तर सास्तर से भी लाडे बिना न चुकेंगी ऐसा hi सब बाकी योद्धा के साथ भी है तोह कुछ अस्तर आप भी छुपा लो समय पे काम आएंगे ".
मैंने इंकार कर्कटे हुए अंदर जाकर अपना कुरता उतरा और युद्ध के परिधान फेन लिया फिर निच्चे धोती की जगह एक चमड़े वाला विस्तार जोह मेरे घुटनो के ऊपर तक था फिर निचे शिन कवच और त्यार होकर बहार चल दिया उन्ह स्त्री सैनिकों के साथ .
हंसिका ," आप रानी स्वर्णलता की तरफ से लड़ रहे हो , वह आप को प्रेम भी करने लगी है हम सबने देखा है तोह एक सलाह दूंगी, चल कपट भी युद्ध जीतने का हिस्सा है तो रेहम मत करना जितना हो सके जल्द से जल्द जीतने की कोशिश करना किसी भी कीमत पर ".
आर्यन के खिलाफ रानी पुष्पलता और रानी कामलता की मूर्खता की दुष्टता देखते हुए बाकी लोकों के राजा और महाबली भी उत्सुकः थे पर डर तोह सब रहे थे कहीं आर्यन तभाई न ला दे पर उसकी भें प्रभा यहीं नागलोक में है तोह वो ऐसा नहीं करेगा ऐसा राजा वासुकि ने कहा था .
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में जब ुष युद्ध आभाष वाले प्रांगण में पहुंचा तोह मुझे चरों और का नज़ारा और भीड़ देखकर अहसास हो गया की यह तोह रोमन कोलोसियम की तरह स्टेडियम टाइप है जहाँ गुलाम योद्धा अपना शक्ति प्रदशन कर लोगों का दिल जीत लेते थे ....... यानी यह सब पूरी तयारी करके मेरी hi बंद बजने के चक्कर में.
यह प्रभा को भी यहीं आना था ऊपर से रानी माँ ने मुझे घूमने भेजा था या लड़ने. अब देखो स्वर्णलता को भी वह भी अपनी बहेनो के साथ बैठी है कहीं िंह तीनो की चाल तोह नहीं. चिंता मत करो आज तुम तीनो को अपना गुलाम बनकर न एक बिस्टेर पे चूड़ा तो मेरा नाम भी आर्यन नहीं .
मैंने पहले भगवन भोलेनाथ फिर बड़े गुरूजी का स्मरण करके अपनी रानी माँ हेमा का नाम लेकर त्यार हो गया की देखें कोण योद्धा आता है ...... मैंने कोई अस्तर नहीं लिया बस अपनी सारू मम्मी की लोटस शील्ड अपने ऊपर ले ली , यानी अगर कोई अस्तर गलती से भी मारा तो भेद नहीं पायेगा.
अब अच्छी खासी भीड़ िखथि हो गयी थी जोह बढ़ती जा रही थी तीनो रानी एक कवर्ड पवेलियन टाइप मंच पे ऊँचे आसान पे बैठी थी ......
मुझे माहौल देखकर लगने लगा की इनका लगता है रोज का है यह मलह युद्ध का आयोजन पर आज में बकरा मिल गया..... कोई नहीं आज के बाद किसी को नहीं फसा पयोगी मेरे जैसे .....
वहीँ स्वर्णलता भी अब मुझे दोषी लग रही थी पर गलती उसकी भी नहीं है आखिर वह दोनों उसकी सगी भें हैं तो उनका साथ hi देगी.
रानी कामलता ने खड़े होकर कहा ," यह है महार्यं सिंह जोह पृथ्वीलोक का वासी है और दिव्या तलवार को नागलोक से ले गया था राजकुमारी विशाखा को मार कर. िशने धरतीपकड़ के साथ वतासुर दानव का भी संहार किया था. मगर आज यह यहाँ हमारे अटाला लोक की राजगादी को चुनौती दिया है हमारी रानी पुष्पलता जी के सिंघासन को. अगर यह जीता तोह आप सब िश के गुलाम होंगे और हरा तोह िश के दुस्सहस के लिए मिर्त्युदण्ड मिलेगा ".
पूरी भीड़ में जैसा जोश आ गया और में तोह ठगा सा रह गया की यह कब हुआ जोह कामलता बक रही है ......
तभी रानी पुष्पलता ने खड़े होकर सबको शांत होने के लिए हाथ उठा के कहा," जोह इश्को मलह युद्ध में हरा देगा हम उसको अपना वर चुन लेंगे अगर दानव पुरुष हुआ और अगर दानव स्त्री ने हरा दिया तोह उसको रानी स्वर्णलता की जगह पुश्किन नगर की रानी बना देंगे. जोह भी लड़ना चाहे भाग ले सकता है ".
अब तोह जैसे भीड़ में जोश आ गया और कई दूसरे लोकों के दानव भी एक का एक वहां प्रकट होने लगे ...... एक से एक महाबली यानी साली राइओं ने मेरी अर्थी का इंतज़ाम कर दिया था . देखते hi देखते 70 दानव वहां जमा हो गए ......
स्वर्णलता ने विरोध किया तो रानी कामलता ने कहा ," स्वर्ण अगर तुम्हारा आर्यन जीत गया तोह तुमको मेरी भी राजगादी मिलेगी साथ में में और दीदी भी उसके गुलाम बनने को त्यार हैं".
स्वर्णलता भी थोड़ा हिचक के बोली," तोह आप दोनों तयारी करो वह हरा hi देगा और मुझे पता है आप भी दो दो हाथ आजमाने तो जरूर जायेगी ....... उसको चल से हरा सकते हो आप लोग वार्ना अगर दिव्या तलवार उसने धारण कर ली तोह सारे लोक नष्ट हो जायेंगे ".
रानी कामलता मुस्करा के ," हम भी देखने की आखिर कितना बलसाली है बिना दिव्या तलवार के जोह हमको भी जीत लेगा, चिंता न करो यह पर्किषा उतरीं किया तोह हम दोनों भी वादा निभंगे, आखिर धरतीपकड़ से िशने हमारे लोक को आजाद किया है ".
रानी पुष्पलता ," सामने देखो आज वह दानव भी यहाँ है हम तीनो को पाने के लिए जोह कितनो सालों से ाश लगाए बैठे थे ...... अगर हमारे जीवन में आर्यन का साथ है तोह हम को जरूर जीत लेगा ".
स्वर्णलता ," वैसे िश सब की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि मैंने उसे मन लिया था और वह पूर्ण सच्चं है इतना तोह में भी जान गयी हूँ ".
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मैंने सोचा ऐसे एक एक से लड़कर तोह कोई फैयदा नहीं होने वाला सालों को आपस में hi भिड़ा दूंगा तोह जोरसे से ललकार दिया ," एक साथ आओगे या अकेले अकेले अपनी माँ का पहले दूध पीने जाओगे फिर वापस आकर लड़ने वाले हो .. .. ..... है है है है है ".
अब तोह जोर की फुंकार मार के सब की आंखें गुस्से से उबाल रही थी तभी रानी स्वर्णलता ने एक हाथ आगे करके अपनी शक्ति से सिर्फ युद्ध मदिआं में अदृश्य दिवार बना के कहा ," सिर्फ मलह युद्ध कोई अस्तर सास्तर नहीं ".
मैंने अपने हाथ प्यार हिला दुलकर अपने ऊपर के सरीर का युद्ध वाला चेस्ट गार्ड और विस्तार उतर दिया ताकि पूरी फुर्ती से लड़ सकूँ पर यह क्या वह सब तोह जैसे एक एक करके बस लंगोट जैसे विस्तार नंग धडंग अवस्था में आ गए और हसने लगे ...... बहनचोद काले भूसंद और बदसूरत से जोह सरीर में भी मेरे से दंगे होंगे ..... राक्षशों के डोले और और झाँगिए hi मुझसे 3-4 गुना मोती होंगी ......
साले डरा रहे हैं पर चिंता मत करो आज तुमको ऐसी टक्कर मारूंगा की गांड सूझ जाएगी मैंने दोनों हाथो से मट्टी उठा के हाथ पे रगड़ी और पंजों के बल बैठकर उनकी तरफ मेरे पास आने का इशारा किया .......
उन्ह के झुण्ड से एक सबसे काम साइज का दानव आया मेरी तरह पर वह भी मुझसे एक फुट लम्बा hi था और सरीर से कोई 250 कग का लग रहा था ...... आज दिन था अपने ववे के कौसल का जलवा दिखने का " रॉबिंसन " तो याद hi होगा आप सबको ......
( मुंबई की अंडरग्राउंड फाइट )
मैंने पंजों के बेल बैठे अपनी छाती पीती ," ी ऍम िण्विकिबले "...... "ी ऍम िण्विकिबले "
एक दानव बोलै ," मार दे िश मानव को दुशाल ..... तुझे पहला मौका देते हैं ..... और तू आज जिन्दा नहीं जायेगा ".
मैंने ुष दुशाल नाम के दानव की तरफ दौड़ लगा के पूरी ताकत से बिना उसको मौका दिए उसकी छाती पे टक्कर मारी तोह दानव टक्कर के पररहर से उड़ता हुआ चीख पड़ा और पीछे बानी गोल मोती दिवार से टकरा के ढेर हो गया और में कोड़कर अपनी जगह आ गया फिर पंजों पे बैठकर अपनी चट्टी पीटने laga,"I ऍम िण्विकिबले "---2
पूरा एरीना शांत पद गया और ुष दानव के मोह से खून आने लगा वह हिल भी नहीं पा रहा था ...... मेरी आंखें की चमक बिलकुल गेंदे जैसी हो गयी थी और मुझे बस सबको टक्कर मारने का मैं कर रहा था अपने पाने सींघ से जबकि वहां कहीं सींघ था hi नहीं , टक्कर तोह मैंने सर से hi मारी थी .
(* दोस्तों यहाँ आर्यन की गेंदे की शक्ति जागृत हो गयी थी बस उसने रूप नहीं बदला था ...... आगे आगे आपको पता चलेगा की आर्यन की कोण कोण सी शक्तियां एक्टिवटे होने लगी हैं और किनको कितना कण्ट्रोल कर पता है )
मेरा अठास बाकी सब प्रतिदवंदी को गुस्सा दिला रहा था मुझे तोह बस सबके विशाल सरीर और अपना सींघ का hi अहसास हो रहा था ...... उन्ह की भीड़ से एक 12 फट लम्बा और 5 फट से ज्यादा चौड़ा हवन सा दिखने वाला रखसश जिसके दो दांत भी जंगली सौर की तरह बहार निकले थे ......
ओह्ह तोह साले सौर मेरे से पन्गा और अपनी छाती पीटकर मैंने दूसरी दिशा में दौड़ लगा दी वह दानव मेरे पीछे पीछे ...... दो चक्कर कटवा के मैंने उसकी तरफ दौड़ लगा दी वह भी थम के मेरी टक्कर का इंतज़ार करने लगे पर में ने उछाल के किक उसके उलटे घुटने पे मार के ऊपर की ओरे कोड़ते हुए उसके हाथों से बचते उसकी थोड़ी पे सींघ यानी अपना सर दे मार दिया ...... वह बहन भानता हुआ छीकता पीछे हटा तो में ने जमीन पे दोनों हाथ रखकर उसके दुसरे घुटने पे दोनों पैरों को जोड़ के किक दे मारी ..... वह पीछे भेंसे की तरह दकरता हुआ गिरा ......
उसके गिरते हुए थप्प्प्पप्प की आवाज हुयी और में उछलता कूदता रॉबिंसन के तकिया कलम बोलता अपनी जगह पे फिर आ बैठा ......
2 मं में 2 दानव मैंने बेहोश कर दिए थे पर मारे नहीं थी बस घायल थे ...... वह हील इशलिये नहीं हो रहे थे क्योंकि स्वर्णलता की शील्ड की वजह से पर वह भी जान गयी थी की मैंने कोई अदृश्य कवच जैसा धारण कर रखा है यानी लोटस शील्ड के साथ में चीटिंग कर रहा हूँ. (प्यार हो गया था सच्चा वाला आर्यन से स्वर्णलता को तोह सब जायज़ लगा )
दोनों रानियां भी मेरी फुर्ती और ताकत देखकर इम्प्रेस थी कुछ तो बात है िश मानव में ऐसे hi नहीं सबको बेबस करके दिव्या तलवार ले गया ...... वहीँ स्वर्णलता को विश्वास हो गया था उसका प्यार जरूर जीतेंगे .
अब तोह जोह भी दानव मेरे सामने आता उसको नए स्टाइल में सींघ मतलब सर , घुसने , किक से ...... मार मार के घायल करता पर आखिरी में जब 12 दानवों एक साथ मुझ पे टूट पड़े तोह मुझे उनके वारों से बचाव भी नहीं हुआ .....
जब उन्होंने मुझे फुटबॉल hi बना दिया पीट ते हुए एक दुसरे की तरफ उछाल के तब सारा स्टेडियम का एरीना उनके राजा बलासुर का नाम hi गुजने लगा ..... लोटस शील्ड की वजह से में घायल तोह नहीं हो रहा था क्योंकि कईओं के हाथों के नाख़ून hi 8-10 इंच के होंगे पर मौका नहीं ले पा रहा था में जान बाउज के ...... अगर सालों को एक साथ मार दिया तोह मेरी चीटिंग पकड़ी जाती......
थोड़ी डिअर पीटकर जब उन्होंने मुझे दीवार की तरफ दे मारा तोह में निचे पड़ा बेहोशी की एक्टिंग करने लगा ....... मगर एक मिनट भी न बिता होगा की वह सब आपस में भीड़ गए की मुझे कोण मार के रानी पुष्पलता से शादी करेगा .
उधर रानी पुष्पलता और कामलता के चेहरे देखने वाले थे ...... आखिर अब उनका क्या होगा , इतना सालों बाद एक मर्द मिला था जिसकी तारीफ स्वर्णलता ने भी की , भले मानव सही हमको संतुस्ट कर पायेगा.
लेकिन यह तीनो भेने क्या आर्यन भी नहीं जानता थी सिर्फ रानी माँ हेमा के दूध पीने से आर्यन को कितनी शक्तियां मिली थी की कोई भी स्त्री उसकी मर्जी के बिना उसको स्खलित नहीं करा पायेगी चाहे देवी हो दानवी इशलिये स्वर्णलता के जबरदस्त आकषरण के साथ वह कामलता के बाद पुष्पलता से भी सम्मोहित नहीं हो पाया.
क्या तीनो को िंह बचे हुए 10-12 दानवो में से पति चुनना पड़ेगा ?
तो बे कॉन्टिनोएड......