Angrakshak Parivar Ka .........MAHI - Page 30 - SexBaba
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Angrakshak Parivar Ka .........MAHI

अपडेट 38 (पतलोक)

Part- 2 (बी)

डॉली को अपना बनकर आर्यन भी नींद में चला गया .......

(सपनो वाली यादें आर्यन की जुबानी.....)

में रानी स्वर्णलता के सौंदर्य रूप यौवन का अपनी आँखों से चाक्षुपान करता रहा," यह कितनी सूंदर स्त्री है हर हर अंग जैसे संचय में ढला हुआ".

उनके सरीर से अजीब से माधोसी वाली खुसबू मेरे नाथों में आकर नशा सा कर रही थी. अपने को सँभालने की कोशिश करता में अब हवा में रथ पे सवार पतलोक के सूंदर सूंदर दृश्य को निहारने लगा .

हम 'तळतळा लोक' से अब अटाला लोक जा रहे थे 'पश्चिन नगर' जोह रानी स्वर्णलता की नगरी थी ...... बिच बिच में वह मुझे दुसरे लोकों के बारे में जानकारी दे रही थी.

जब हम 'अटाला लोक' में प्रवेश किये तोह एक अजानी चाहत रानी स्वर्णलता के लिए मेरे मैं में बलवती होने लगी जैसे अभी उनको अपनी बाँहों में समेत लूँ.

तब मुझे अपने पिछली बार के अटाला लोक के भ्रमण की याद आयी जब में दीप्ति के साथ आया था दिव्या तलवार की खोज में की यहाँ की स्त्रीओं के जादू ऐसा था जोह हर पुरुष को अपनी ओरे खींचता था .

जैसे hi हमारी सवारी अटाला लोक में एंटर की निच्चे 2 और युधो वाले रथ हमारे पीछे हो लिए ..... यह स्वर्णलता के hi स्त्री योद्धा के रथ थे. मैंने उनकी तरफ देखा तो सबने हाथ जोड़ के मुझे नमन किया तोह मैंने भी हाथ जोड़कर उनका अभिवादन स्वीकार किया .

रानी स्वर्णलता मेरी तरफ देखकर मुस्करा भर दी पर उनके मैं में अलग hi विचार चल रहे थे ...... देखें वह क्या सोच रही हैं .......

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रानी स्वर्णलता अपने मैं ," िश पर तोह मेरे आकर्षण शक्ति भी पूरी तरह से काम नहीं कर रही है , आखिर इतनी जटिल इच्छाशक्ति किसी साधारण मानव में तो नहीं हो सकती. हर तरह से अद्भुत hi है यह महार्यं . इतना बांका और सजीला मनुष्य मैंने आज तक नहीं देखा. इश्कि सुंदरता तोह देवताओं जैसी है पर इतना शक्तिशाली नौजवान है यह तो पूरे पतलोक में किसी न नहीं सोचा होगा. रानी हेमा ने सही hi कहा था की अगर आर्यन का दिल जीत लिया तो पूर्ण नारी सुख मिलेगा जिसके लिए हम तीनो भेने वंचित hi रही हैं. कोई भी हमारे यौवन को झेल hi नहीं पता ...... ुष पापी धरतीपकड़ ने भी तोह कोशिश की थी पर वह भी हमको स्पर्श करते hi सीरगहपतित हो गया. कहने को तो वह हमको अपनी गुलाम hi समझता था , हम बहेनो ने न सही पर हमारी प्रजा की कितनी हज़ारों स्त्रीओं को उसने जबरदस्ती भोगा था ".

स्वर्णलता ने अपने मैं में विश्वास पक्का करके फैसला कर लिया ," अगर आर्यन हम तीनो बहेनो को संतुस्ट कर दिया तोह में सिर्फ इसी की बनकर रहूंगी. एक बार हमको पूरा कर दो आर्यन हम तीनो तुमको अपनी असली गाजा शक्ति देंगे जोह आजतक किसी पुरुष के पास नहीं है ".

रानी स्वर्णलता की दो बड़ी भेने भी हैं .......

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रानी कामलता ..... यह 'कामनगर' की रानी है , यह स्वर्णलता से बड़ी है..... देखने में थोड़ा ताम्बी रंग है पर सबसे मादक और गरम स्त्री है .

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रानी पुष्पलता ..... सबसे बड़ी भें यह 'स्वर्णगैर' की रानी है जोह अटाला लोक का सबसे बड़ा नगर है . देखने में तीनो बहेनो में सबसे सूंदर पर थोड़ा गुस्से वाली है. यह अभी तक स्वर्णलता से नाराज है की उसने आर्यन को बिना हमसे मिलवाये जाने क्यों दिया.

(* डिटेल्स के लिए पढ़ें अपडेट 34 , part -7 (ा)..... पेज 486 )

आज स्वर्णलता आर्यन को सीधा स्वर्णगैर hi ले जा रही थी जहाँ उसने सुचना भेजवा दी थी की आर्यन को साथ लेकर आएगी .

अब तोह आर्यन से मिलने के लिए दोनों बड़ी भेने भी वैकुल थी आखिर जिसने दो राक्षस धरतीपकड़ और वतासुर के साथ विशाखा जैसी नागलोक की नागिन को मार दिया हो और दिव्या तलवार लेकर भी चला गया पृथ्वीलोक और कोई पतलोक का निवासी उसको रोक नहीं पाया.

ऐसे जानदार और दिलेर मर्द को न पाया तोह क्या पाया िश जीवन में. दरसल जिस स्त्री ने भी आर्यन को पहली बार देखा उसको पाने को भाव विभोर से हो जाती थी एहि हाल पतलोक की माडो का था ......

अब तोह आर्यन के पास रानी हेमा की दी हुयी शक्तियां थी जोह किसी भी स्त्री का सैयाम तोड़ दे .

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मैंने ध्यान दिया की अब हमारी रफ़्तार तेज़ है ...... मेरे और स्वर्णलता के बाल हवा के विहग से ुध रहे थे ......

मैंने अपने हाथ से उनके चेहरे पे परेशां करती लत को उनके कान के पीछे किया तो मेरे उंगलिओं पे उनके मक्खन जैसे चिकने गाल का स्पर्श मिला .

मेरे मुख से न्यास hi निकल गया," आप की सुंदरता के आगे तोह स्वयं भगवन भी नतमस्तक हो जाते होंगे की उन्होंने कितनी रूपवती स्त्री को संसार में भेजा है ".

हलके से मेरे छुवन और तारीफ ने जैसे स्वर्णलता की मुस्कान घेरि कर दी और चेहरे पे आयी लाली उसको शर्माने को मजबूर.

स्वर्णलता ," तुम्हारे सामने तोह हम भी कुछ नहीं आर्यन लेकिन अभी मेरी दोनों बड़ी बहेनो को नहीं देखा है तुमने...... दोनों हमसे भी सूंदर हैं सायद उनसे भेट होने पे हमारी तरफ देखो भी न".

में उनकी बात सुनकर चकित hi रह गया की उनकी दो बड़ी भेने भी हैं और वह िंहसे भी सूंदर है पर अपने को कमतर वाली बात मुझे पसंद नहीं आयी.

मैंने आगे बढ़कर उनके झुके चेहरे को अपने दोनों हाथ में लेकर ऊपर उठाया तोह उनकी झील सी कांजी बड़ी बड़ी आंखें में एक प्रेम का सलभ भरा हुआ पाया ......

मैंने उनका माथा चूम के कहा ," आप का अहसान में कभी नहीं भुला सकता रानी शैब्या फिर जोह मैंने आपके लिए कहा दिल से कहा है...... मैंने आपकी बहेनो को नहीं देखा और वह आपकी तरह खूबसूरत भी होंगी लेकिन में तोह सिर्फ आपको जानता हूँ जिसने पहली बार में hi हमको दिल से मदद की...... कौन रानी एक तुच्छ से मानुस के लिए ऐसा करेगी. आप का नाम hi स्वर्णलता नहीं है बल्कि आपका दिल और रंग रूप भी ख़ालिश सोने जैसा है, आप माने या न माने मुझे भी अपने लाखों चाहने वालों में एक प्रसंशंक hi समझिये ".

मेरे इतना कहते hi रानी स्वर्णलता के मैं में क्या आया की आगे बढ़कर उन्होंने में लबों को चूम लिया ....... पुछःह

मेरे और उनके सरीर में भी उत्तेजना की बिजली दौड़ गयी ...... हम दोनों एक दुसरे की आँखों में खो हुए थे की मैंने अपना सीधा हाथ उनके गाल से हटा के उनकी चिकनी कमर पे रखा और अपने करीब करके उनके गुलाबी निचले हूंठ को चूम लिया ......

दोनों को सिग्नल और स्वीकारती एक दुसरे से मिल गयी थी ...... में अब उनके निछले होंठ को चूस रहा था तो वह मेरे ऊपर वाले होंठ को ....... सहेड की तरह उनके होंठ कितने नरम और रसीले थे , ऐसा लगा जैसे इनसे मीठा दुनिया में कुछ नहीं होगा .

दोनों हाथ उनके मेरी बालों में घूमने लगे और में उनकी चिकनी कमर और उलटे चिकने गाल को सेहला रहा था ...... मेरा लौड़ा तोह जैसे मेरी धोती जैसी पोषक में तन्न के उनकी जाँघों में जा भिड़ा ......

पुछःह पुछठ ...... चुम्म्म्म चुम्म्म्म ...... मुह्हह्ह्ह्हह ...... प्यार से एक दुसरे के लबों को चूसते हुए अब हमारी जीभ एक दुसरे के मुख की घेरे नापने लगी ......

यह अलग की नशा था हमारी आंखें बांध थी पर अब दोनों के हाथ चूमते हुए एक दुसरे के सरीर के पिछले भूभाग को तोलने लगे ......

मैंने उनकी मटकी जैसे दोनों सुडोल चूतड़ मसले तो वह थरथरा के झंडने लगी ...... आह्ह्ह्हह्ह सीईईई ...... पुछःह पुछठ ारयणणणणणण सीईइईसीईई ..... मेंनननननन गईइइइइइ ...... माआआ मुझे सँभाललललललल लोओओओओओ ..... ह्म्म्मम्म्म्म ".

बहोत तीर्व स्खलन हुआ था उनका पूरा सरीर कांप रहा था सांस उखड रही थी ....... में अब अपने से चिपकाये उनकी पीठ और सर सेहला रहा था ......

रानी स्वर्णलता के दिल में तोह जैसे सारे सपने पूरे होते दिखने लगे. एहि है वह साथी जिसकी मुझे कितनो वर्षों से तलाश थी, सिर्फ चूम के मुझे चरमोत्कर्ष तक ले गया.

अब मुझको दुर्र से एक नगरी दिख रही थी, मैंने बाकी दोनों रथ की तरफ देखा तो उन्ह पर सवार स्त्री योद्धा मुस्करा रही थी अपनी रानी को मेरी बाँहों में लिप्त देखकर.

मैंने एक बार स्वर्णलता का सर चूमा ,"आप ठीक तो हैं रानी शैब्या, आप का स्पर्श कितना प्यारा है आपकी तरह ".

रानी स्वर्णलता ने अपने लबों से मेरा सीना कुर्ते जैसी पोषक के ऊपर से चूमा ," इतना ठीक तो में कभी भी नहीं थी आर्यन बस मुझे स्वर्ण कहो तभी मुझे अच्छा लगेगा ".

में भी उनकी मनोदशा समझ के ," ठीक है में आपको स्वर्ण कहूंगा पर अकेले में..... आप मेरे लिए हमेशा रानी स्वर्णलता रहेंगी ".

अपनी गर्दन उठकर मेरी तरफ एक बार देखकी फिर शर्मा के नज़र निच्चे करती बोली ," आर्यन में जानती की तुम दीप्ति और गीता के साथ विवाह करने वालो है. अब राजकुमारी प्रभा से भी जल्दी तुम्हारा विवाह होगा. लेकिन एक वादा मैंने भी लिया था दीप्ति से की में तुमको प्रेम कर सकती हूँ अगर तुम चाहो तो और एहि अपनी दोनों बहेनो के लिए लिया था. तुम सोचोगे की हम तुम पे दूर दाल रहे हैं पर सच्च यह की हम तीनो बहेनो में धरतीपकड़ के अत्याचारों के कारन ये फैसला लिया था की जोह धरतीपकड़ को मारेगा उसको वरन जरूर दिल से करेंगे . करना पिछली बार भी चाहते थे पर तुमको दिव्या तलवार की खोज में जाना था और दीप्ति भी तुम्हारे साथ थी. अब तोह हमको ऋण चुकाने का मौका दो उससे तुमको hi फायदा होगा. मेरी तरह मेरी दोनों बड़ी बहेनो का दिल जीत लिया तो तुमको हमसे कुछ शक्तियां भी मिलेगी जोह नागलोक और पृथ्वीलोक पे भी तुम्हारे काम aayengi"......Swarnlata अब मुझसे 2 फट दूर होकर मेरे जवाब की प्रतीक्षा करने लगी .......

मैंने भी अपनी रानी माँ हेमा को याद किया तो उन्होंने मुझे आगे बढ़ने को कहा, साथ साथ यह भी कहा इन तीनो को हज़ारों साल से तुम्हारे जैसे का hi इंतज़ार था पुत्र और अब समय आ गया है िंह तीनो को अपना लो. यह तीनो साधरण स्त्री नहीं है, इनको अपना के तुम अपने को सबसे भाग्यशाली पयोगे ".

मैंने फिर मुस्करा के कहा स्वर्णलता से पुछा ," क्या आपकी बड़ी भेने मुझे पसंद करेंगी जबकि वह मुझे मिली भी नहीं और न hi मुझे जानती है ".

रानी स्वर्णलता मेरा जवाब सुनकर इतनी प्रसन्न हो गयी की आगे बढ़कर मुझे बेह्तषा चूमने लगी, "..... पुछःह पुछठ ारयणणणणणण ..... तुम बहोत अच्छे हो , आज में बहोत खुश हूँ..... चुम्म्म्म चुम्म्म्म ..... वह दोनों तो मरी जा रही होंगी तुमसे मिलने के लिए बस त्यार हो जाओ हम अटाला लोक की राजधानी स्वर्णगैर में प्रवेश करने वाले हैं ".

मैंने भी स्वर्णलता के लबों को चूमा और उसकी कमर में हाथ दाल के अपने साइड से चिपका के खड़ा होकर देखने लगा ...... स्वर्णलता बस निच्चे देखकर हसे जा रही थी तब अहसास हुआ साला , हरामी, मेरा लुंड खड़ा होकर साइड से धोती से बहार झांक रहा है..... मैंने झट से साइड होकर उसको धोती में दाल के एडजस्ट किया .

पीछे स्वर्णलता हसे जा रही थी आखिर अपने नए प्रेमी यार का औज़ार उसको डरने के साथ दिल भी जीत लिया एक झलक में ....... आर्यन सिर्फ सरीर से भी कहाँ मनुष्य लगता है हाँ बस हट थोड़ी काम है .

आर्यन लगभग 7फट का था पर स्वर्णलता को उसकी हट काम लग रही थी क्योंकि वह खुद 7फट से ऊपर होगी तोह लम्बी भी थी और बड़े बड़े मादक फिगर वाली.

आखिर दानव और एक ऋषि की पुत्री की बेटियां थी ..... उसकी दोनों बड़ी भेने भी उसके हट की थी .

यहाँ नर दानवो की हट hi 8 फट से ऊपर होती थी तोह आर्यन उसको हट में छोटा hi लगा पर बलिस्टः देख चुकी थी उसके हाथों की अपने मटकी जैसे चूतड़ों पे.

चरों और हरयाली और पेड़ दिख रहे थे और उसके आगे एक सोने का बड़ा सेहर था .....

उसकी रौशनी तोह अनमोल रतन बढ़ा hi रहे थे ...... चरों और स्वर्ण की ऊँची चारदीवारी के बिच बिच में बने गुम्बद पे सैनिक भी नज़र आ रहे थे .......

यहाँ तोह बिलकुल दिन की तरह उजाला था जबकि यहाँ कोई सूरज या चाँद की रौशनी नहीं थी बल्कि स्वर्ण और रत्नो की रौशनी hi इतनी ज्यादा थी की दिन hi लग रहा था.

रानी स्वर्णलता ने मुझे स्वर्णगैर और अपनी बहेनो के बारे में जरूरी जानकारी दी ....... जब नगर के प्रवेश द्वार पे पहुंचे तो स्वर्णलता ने रथ निच्चे ले लिया और अब जमीन से सिर्फ 3 फट ऊपर हम आगे बढ़ने लगे जिससे वह घोड़े जैसे जानवर अब पैरों पे दौड़ रहे थे .......

बहार सैनिको की पंकितयां दोनों तरह सर झुका के रानी स्वर्णलता का अभिवादन कर रही थी .......

विशाल द्वार से जब नगर में प्रवेश किये तोह फूलो की वर्षा हो रही थी जोह मैंने आज तक धरती पे नहीं देखे थे. रानी स्वर्णलता की जय जैकार हो रही थी ...... वह हाथ हिला के सबका अभिवादन स्वीकार कर रही थी ......

नगर पूरा नाम के अनुसार स्वर्ण से बना हुआ था ...... अरबों टोंस से ज्यादा गोल्ड लगा होगा बनाने में ..... कहीं कहीं पत्थर का भी इस्तेमाल किया गया था पर उसको भी सोने की प्लेट से जड़ दिया गया था. नगर की भवता और सुंदरता मैं मोहने वाली थी ..... तारीफ के लिए मेरे पास स्तब्ध नहीं हैं , कितनी अच्छी नकाशी और मूर्ति वाली दीवार के बड़े बड़े भवन हैं......

रानी स्वर्णलता मुझे मुख मुख जगह बताती रथ को आगे बढ़ा रही थी ....... रानी के रथ में मुझे दानव पुरुष ,स्त्री और बच्चे अजीब नजरों से देखते पर सर उनको भी झुकना पड़ता था जब मेरे हाथ में रानी का हाथ देखते .

लगभग 10-12 कम की दुरी तय करके जब हम एक बड़े से चौराहे पे पहुंचे तो सीधे हाथ के रस्ते पे 2 कम दूर एक विशाल महल दिखाई देने लगा .....

मेरी तो आंखें पहात की पहात रह गयी ," वव्वव्वव्व it's ब्यूटीफुल ...... कितना सूंदर महल है , यह तो बिलकुल स्वर्ग के जैसी नगरी है और इतना भाव महल मैंने आजतक नहीं देखा. राजा माया का तळतळा लोक का महल भी बहोत सूंदर है पर यह तो अप्रतिम है स्वर्ण ".

स्वर्णलता भी हस्ती हुयी ," हाँ तुम्हारे खुले मुख देखकर hi पता चल गया की तुम कितने ॉश्चारिये चकित हो ..... है है है है है ...... और हाँ यह महल भी राजा माया ने hi हज़ारों साल पहले बांया था अपने बेटे राजा बाला के लिए जोह हमारे पिताश्री हैं फिर उनके बाद अब रानी पुष्पलता यहाँ की रानी हैं मेरी सबसे बड़ी दीदी ".

में तोह अब और विषमय हो गया ," यानी साया और उसकी दोनों भेने आपकी बुआ लगती हैं ?"

स्वर्ण ," नहीं वह दत्तक पुत्री हैं राजा माया की यानी गॉड ली हूँ. हम उनके दत्तक पुत्र राजा बाला की बेटियां हैं यानी खून का रिश्ता हमारा नहीं है फिर पतलोक में पढ़ से श्रेष्ठा देखि जाती है. जोह जितना बलसाली वह उतना महँ और सम्मान पाने वाला होता है ...... हो सकता है तुमको भी शक्ति प्रदशन करना पड़े सबका दिल जीतने के लिए ".

िश रास्ते को सोने की ईंटों से बांया गया था और ुनःपर एक मोरपंखी के जैसे मोहर टाइप सील छपी थी जिसको मैंने नगर की कई इमारतों पे बना देखा था ...... स्वर्णलता ने बतया की यह िश राज्य में उगने वाले फूल का सिंबल है .

जब हम राजमहल के द्वार पे पहुंचे तो रथ घूम के खड़ा हो गया और स्वर्णलता मेरा हाथ पकडे निच्चे उतरी .....

ऊपर 52 सीडीहों के बाद दो सूंदर राजशाही वेशभूसा में अप्सरा hi कहूंगा कड़ी थी..... एक थोड़ी सवाल यानी ताम्बी रंग की थी और दूसरी बिलकुल भूरी भक सफ़ेद (यानी ब्रिटिश वाइट) रंग की ..... दोनों स्वर्णलता की हट की थी पर दोनों के चेहरे से पता चल रहा था की दोनों स्वर्ण की बड़ी भेने hi होंगी.

सीढिआँ चढ़ते हुए ऐसा लग रहा था की स्वर्गलोक के लिए ऐसे hi सीढिआँ जाती होंगी ...... स्वर्ण मेरा हाथ पकड़ के ऐसे चल रही थी की कहीं में वापस न भाग जॉन और में अब दोनों रानियों के अल्वा उनके सैनिक और दासियों को भी देख सकता था ......

रानी पुष्पलता के सामने पहुंचकर स्वर्ण पहले उनके गले लगी फिर रानी कामलता के ......

मैंने दोनों के सामने हाथ जोड़कर झुक कर नमस्कार किया तोह रानी पुष्पलता जोह गोल्डन परिधान पहने , सर पे रतन जड़ित मुकुट लगये थी बोली ," बोहत प्रशंसा सुनाई है महार्यं नाम के मानव की और आज तुम से भेट हो hi गयी ...... स्वागत है तुम्हारा िश स्वर्णगैर में में यहाँ की रानी पुष्पलता हूँ और यह कामनगर की रानी कामलता जोह हमारी छोटी भें है . रानी स्वर्णलता को तुम जानते hi हो ".

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रानी स्वर्णलता

रानी कामलता ने आगे बढ़कर मुझे चरों तरफ से मेरे इर्द गिर्द घूम के कहा ," हुण्णनं..... गंध से तोह मानव hi लग रहे पर क्या तुम इतने शूरवीर हो जितना हमने चर्चा सुना है "......

वह गोल्डन और सिल्वर परिधान में थी और सर पे मुकुट भी स्लिवर का था पर कई रतन जेड हुए ...... उसकी स्किन बहोत चमक रही थी और बदन से निकलती खुसबू मुझे उससे लिपटने को उत्तेजित कर रही थी पर मैंने खुद पे काबू रखते हुए अपना बेस्ट हथियार अपना लिया यानी मौन रहना.

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रानी कामलता

तीनो इतनी बड़ी बड़ी रानियां थी ऊपर से पतलोक निवासी , मेरी इनके सामने क्या बिसात ....... मुझे बस मौन और हाथ जोड़कर ऐसे hi खड़ा देख के जब स्वर्णलता ने कहा ," दीदी एहि hi महार्यं है और प्यार से सब आर्यन कहते है..... आप दोनों से शर्मा रहा है ".

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रानी पुष्पलता

रानी कामलता ," ठीक है फिर इश्कि शर्म तोड़ देते हैं, एक मलह युद्ध हो जाये आर्यन क्या कहते हो हम इनाम भी देंगे और तुम िश महल में मेहमान भी बनोगे ".

स्वर्णलता बिच में बोलती उससे पहले रानी पुष्पलता ने कहा ," तुम पहले मानव होंगे जोह िश स्वर्ण महल के अतिथि बनोगे अगर कामलता की प्रति द्वंद्विंता जीत जाते हो तोह ".

में ने एक बार फिर दोनों के सामने हाथ जोड़कर बोलै ," आप दोनों महँ रानियां है और में तेरा एक आम सा पुरष धरतीलोक का वासी भला में आपके सबसे कमजोर सैनिक को भी कहाँ हरा पाउँगा ".

स्वर्णलता भी अब चकित रह गयी मेरी बात सुनकर पर दोनों रानियां तोह जैसे कुछ ठान hi ली थी ...... उन्होंने में मुझे लालच देते हुए कहा ," अगर जीत गए तो सही कक्ष में सब सुख सुविदा के साथ हम 5 नयी स्त्रीयां भी देंगे ..... "

में फिर भी चुप रहा तोह रानी कामलता ने कहा ," अगर जीत गए तोह स्वर्णलता के कक्ष में रह सकते हो , जैसे की यह तुमको पसंद करने लगी है तो इसका सनिध पाने के लिए भी नहीं लड़ोगे ".

रानी माँ हेमा की आवाज मेरे मैं में गुंजी ," अपनी शर्तों पे hi लड़ना पुत्र क्योंकि िंह तीनो में दानव खून है इतनी जल्दी वश में नहीं आएँगी लेकिन अगर इनका दिल जीत लिया तो गुलामी करेंगी जीवन भर और स्त्री सुख िंहसे ज्यादा तुमको कोई नहीं दे पायेगा ...... तीनो को काम देवी का दूसरा रूप hi समझो ".

रानी पुष्पलता का गुस्सा पल पल बढ़ता जा रहा था तब उसने क्रोध में कहा ," अगर इतने hi डरपोक हो तोह अपने को मर्द की जगह ........ "

में बोलने hi वाला था की स्वर्णलता जोरसे बोली ," आर्यन जरूर मलह युद्ध करेगा पर कोई चल कपट नहीं होगा. यह मर्दों में सर्वशेरस्थ है इतना तो में भी दावे से कह सकती हूँ पर शर्त यह होगी की अगर यह जीता तोह आप दोनों को भी इश्के सामने सर झुकना होगा इतना अपमान करने के बाद ".

अब तो दोनों बड़ी बहेनो को पारा हाई हो गया और में भी डरने लगा यह स्वर्णलता मुझे कहाँ फसा रही है, अगर में किसी तरह जीत भी गया तब भी यह दोनों सुन्दर लेकिन घमंडी रानियां मुझे जीवित छोड़ेंगी .

में ," माफ़ कीजिए रानी शैब्या में तोह आपका नगर देखने आया था और देख भी लिया तो मुझे जाने की आज्ञा दिज्ये. आप के सामने में एक चींटी के सामान हूँ, में चलता हूँ ".

रानी पुष्पलता ने ताली बजे तो 4 दानव सैनिको ने मुझे घेर लिया, चरों 9 फट के दानव hi थे बस योद्धा वाले परिधानों और अस्तर के साथ .......

रानी कामलता गुस्से से ," स्वर्णलता, तुम िश कायर के लिए अपनी दोनों बड़ी बहेनो का अपमान कर रही थी. यह यहाँ से अब जिन्दा नहीं जायेगा अगर यह मलह युद्ध नहीं करेगा ".

रानी पुष्पलता ," आखिर स्वर्ण ने तुम में क्या देखा है जोह तुम इश्कि बात का मान भी नहीं रख रहे हो..... धरतीपकड़ को तुम ने मारा था अब यकीन करना मुश्किल है ".

में भी अब कुछ सोच के बोलै ," में यहाँ किसी का अनादर करने नहीं आया था रानी शैब्या पर अगर आपको लगता है की रानी स्वर्णलता के लिए मुझे लड़ना चाहिए तोह में लड़ सकता हूँ पर आपको मेरी शर्त मंजूर नहीं होगी ".

रानी कामलता ," अच्छा इतना बड़ा दवा कर रहे हो तो बोलो पर अब मलह युद्ध कोई सैनिक नहीं हमारा सबसे बड़े योद्धा लड़ेंगे मंजूर हो तो हमको भी तुम्हारी शर्त मंजूर है ".

आर्यन अब मुस्करा के ," आप शर्त सुन लीजिए अगर आप ने मान ली तोह में अवश्य लडूंगा जितने योद्धा से बोलेंगी ".

रानी कामलता ," बको क्या शर्तें है तुम्हारी ".

आर्यन ," जी छोटी से शर्त है अगर में जीता तोह स्वर्णगैर की राजगद्दी पे रानी स्वर्णलता बैठेंगी और आप सबकी नयी रानी एहि होंगी ".

एक साथ सब शतब्ध रह गए मेरी बात सुनकर तब स्वर्णलता बोली ," यह क्या बोल रहे हो आर्यन भला ऐसा भी कोई शर्त रखता है ...... यह दोनों मेरी बड़ी दीदी हैं तुम कुछ और शर्त रख दो "...... वह मुझे अपने बड़ी बहेनो की तरफ आँखों से इशारा कर रही थी जैसे कह रही हो दोनों का हाथ मांग लो जीतने पे.

मैंने हाथ जोड़कर कहा ," मेरी तो एहि शर्त है अगर नहीं मंजूर तो मुझे जाने दिज्ये ".

रानी कामलता के साथ पुष्पलता भी मुझे गुस्से से देख रही थी साथ में और सब भी ....... आखिर थे तोह सब दानव hi गुस्सा और नफरत कूट कूट के भरी थी .

स्वर्ण मेरा हाथ पकड़ के अपने साथ थोड़ी दुर्र ले जाकर बोली ," आर्यन यह तुम क्या जिद्द लेकर बैठो हो , क्या किसी के घर जाकर कोई ऐसी बातें करता है ".

में ," आप बेकार में डर रही हो स्वर्णलता जी मैंने शर्त सिर्फ इशलिये राखी की वह पर्तिस्पर्धा ताल दें और अगर फिर भी मुझे लड़ना पड़ा तोह यह आप पर होगा की सिंघासन अपनाये या न अपनाये ".

स्वर्णलता भी अब हैरानी से मुझे देखकर समझ गयी ," तुम मेरी दोनों दीदी का घमंड तोडना चाहते हो न पर वह दोनों कमतर नहीं है ".

में भी अपनी बात रखता बोलै ," हाँ अब तोह में भी देखना चाहूंगा की मेरे अंदर कितनी ताकत है आखिर आप hi तोह बोली थी आपकी भेने मुझे पसंद करेंगी, अगर िश तरह करना चाहती है तोह ऐसे hi सही ".

स्वर्ण ने जाकर अपनी बड़ी बहेनो से बात की और हम सब चल दिए राजमहल के उतर दिशा में बने सस्त्रगृह के पास बने युद्ध अभ्यास के मैदान पर .......

साला घंटा स्वागत , किसी ने चाय पानी भी नहीं पुछा सीधा लड़ने की बात करने लगे .

अब तोह भीड़ भी बढ़ने लगी और अपनी 4 सैनिक स्त्री योद्धा मेरा साथ रानी स्वर्णलता ने भेजी की मुझे त्यार करें.

जोह उनकी लीडर थी यह hi मुझे और दीप्ति को तळतळा लोक तक छोड़ के आयी थी स्वर्णमुद्रा के साथ ...... उसने कहा," महार्यं जी आप ने प्रतिद्विंदिता तो स्वीकार कर ली पर मलह युद्ध में मुझे लगता है आपका सामना रानी कामलता या फिर रानी पुष्पलता से भी हो सकता है ".

में भी चौंक के ,"क्या बात कर रही सेनापतीजी, मतलब स्त्री भी भाग ले सकती हैं क्या मलह युद्ध में फिर दोनों रानियां क्यों मुझसे लड़ेंगी ".

योद्धा लीडर ," मुझे सेनापति नहीं , आप हंसिका कह सकते हैं , आप बहोत दिलेर हैं इतना तो मुझे पता है पर दोनों रानियां अस्तर सास्तर से भी लाडे बिना न चुकेंगी ऐसा hi सब बाकी योद्धा के साथ भी है तोह कुछ अस्तर आप भी छुपा लो समय पे काम आएंगे ".

मैंने इंकार कर्कटे हुए अंदर जाकर अपना कुरता उतरा और युद्ध के परिधान फेन लिया फिर निच्चे धोती की जगह एक चमड़े वाला विस्तार जोह मेरे घुटनो के ऊपर तक था फिर निचे शिन कवच और त्यार होकर बहार चल दिया उन्ह स्त्री सैनिकों के साथ .

हंसिका ," आप रानी स्वर्णलता की तरफ से लड़ रहे हो , वह आप को प्रेम भी करने लगी है हम सबने देखा है तोह एक सलाह दूंगी, चल कपट भी युद्ध जीतने का हिस्सा है तो रेहम मत करना जितना हो सके जल्द से जल्द जीतने की कोशिश करना किसी भी कीमत पर ".

आर्यन के खिलाफ रानी पुष्पलता और रानी कामलता की मूर्खता की दुष्टता देखते हुए बाकी लोकों के राजा और महाबली भी उत्सुकः थे पर डर तोह सब रहे थे कहीं आर्यन तभाई न ला दे पर उसकी भें प्रभा यहीं नागलोक में है तोह वो ऐसा नहीं करेगा ऐसा राजा वासुकि ने कहा था .

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में जब ुष युद्ध आभाष वाले प्रांगण में पहुंचा तोह मुझे चरों और का नज़ारा और भीड़ देखकर अहसास हो गया की यह तोह रोमन कोलोसियम की तरह स्टेडियम टाइप है जहाँ गुलाम योद्धा अपना शक्ति प्रदशन कर लोगों का दिल जीत लेते थे ....... यानी यह सब पूरी तयारी करके मेरी hi बंद बजने के चक्कर में.

यह प्रभा को भी यहीं आना था ऊपर से रानी माँ ने मुझे घूमने भेजा था या लड़ने. अब देखो स्वर्णलता को भी वह भी अपनी बहेनो के साथ बैठी है कहीं िंह तीनो की चाल तोह नहीं. चिंता मत करो आज तुम तीनो को अपना गुलाम बनकर न एक बिस्टेर पे चूड़ा तो मेरा नाम भी आर्यन नहीं .

मैंने पहले भगवन भोलेनाथ फिर बड़े गुरूजी का स्मरण करके अपनी रानी माँ हेमा का नाम लेकर त्यार हो गया की देखें कोण योद्धा आता है ...... मैंने कोई अस्तर नहीं लिया बस अपनी सारू मम्मी की लोटस शील्ड अपने ऊपर ले ली , यानी अगर कोई अस्तर गलती से भी मारा तो भेद नहीं पायेगा.

अब अच्छी खासी भीड़ िखथि हो गयी थी जोह बढ़ती जा रही थी तीनो रानी एक कवर्ड पवेलियन टाइप मंच पे ऊँचे आसान पे बैठी थी ......

मुझे माहौल देखकर लगने लगा की इनका लगता है रोज का है यह मलह युद्ध का आयोजन पर आज में बकरा मिल गया..... कोई नहीं आज के बाद किसी को नहीं फसा पयोगी मेरे जैसे .....

वहीँ स्वर्णलता भी अब मुझे दोषी लग रही थी पर गलती उसकी भी नहीं है आखिर वह दोनों उसकी सगी भें हैं तो उनका साथ hi देगी.

रानी कामलता ने खड़े होकर कहा ," यह है महार्यं सिंह जोह पृथ्वीलोक का वासी है और दिव्या तलवार को नागलोक से ले गया था राजकुमारी विशाखा को मार कर. िशने धरतीपकड़ के साथ वतासुर दानव का भी संहार किया था. मगर आज यह यहाँ हमारे अटाला लोक की राजगादी को चुनौती दिया है हमारी रानी पुष्पलता जी के सिंघासन को. अगर यह जीता तोह आप सब िश के गुलाम होंगे और हरा तोह िश के दुस्सहस के लिए मिर्त्युदण्ड मिलेगा ".

पूरी भीड़ में जैसा जोश आ गया और में तोह ठगा सा रह गया की यह कब हुआ जोह कामलता बक रही है ......

तभी रानी पुष्पलता ने खड़े होकर सबको शांत होने के लिए हाथ उठा के कहा," जोह इश्को मलह युद्ध में हरा देगा हम उसको अपना वर चुन लेंगे अगर दानव पुरुष हुआ और अगर दानव स्त्री ने हरा दिया तोह उसको रानी स्वर्णलता की जगह पुश्किन नगर की रानी बना देंगे. जोह भी लड़ना चाहे भाग ले सकता है ".

अब तोह जैसे भीड़ में जोश आ गया और कई दूसरे लोकों के दानव भी एक का एक वहां प्रकट होने लगे ...... एक से एक महाबली यानी साली राइओं ने मेरी अर्थी का इंतज़ाम कर दिया था . देखते hi देखते 70 दानव वहां जमा हो गए ......

स्वर्णलता ने विरोध किया तो रानी कामलता ने कहा ," स्वर्ण अगर तुम्हारा आर्यन जीत गया तोह तुमको मेरी भी राजगादी मिलेगी साथ में में और दीदी भी उसके गुलाम बनने को त्यार हैं".

स्वर्णलता भी थोड़ा हिचक के बोली," तोह आप दोनों तयारी करो वह हरा hi देगा और मुझे पता है आप भी दो दो हाथ आजमाने तो जरूर जायेगी ....... उसको चल से हरा सकते हो आप लोग वार्ना अगर दिव्या तलवार उसने धारण कर ली तोह सारे लोक नष्ट हो जायेंगे ".

रानी कामलता मुस्करा के ," हम भी देखने की आखिर कितना बलसाली है बिना दिव्या तलवार के जोह हमको भी जीत लेगा, चिंता न करो यह पर्किषा उतरीं किया तोह हम दोनों भी वादा निभंगे, आखिर धरतीपकड़ से िशने हमारे लोक को आजाद किया है ".

रानी पुष्पलता ," सामने देखो आज वह दानव भी यहाँ है हम तीनो को पाने के लिए जोह कितनो सालों से ाश लगाए बैठे थे ...... अगर हमारे जीवन में आर्यन का साथ है तोह हम को जरूर जीत लेगा ".

स्वर्णलता ," वैसे िश सब की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि मैंने उसे मन लिया था और वह पूर्ण सच्चं है इतना तोह में भी जान गयी हूँ ".

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मैंने सोचा ऐसे एक एक से लड़कर तोह कोई फैयदा नहीं होने वाला सालों को आपस में hi भिड़ा दूंगा तोह जोरसे से ललकार दिया ," एक साथ आओगे या अकेले अकेले अपनी माँ का पहले दूध पीने जाओगे फिर वापस आकर लड़ने वाले हो .. .. ..... है है है है है ".

अब तोह जोर की फुंकार मार के सब की आंखें गुस्से से उबाल रही थी तभी रानी स्वर्णलता ने एक हाथ आगे करके अपनी शक्ति से सिर्फ युद्ध मदिआं में अदृश्य दिवार बना के कहा ," सिर्फ मलह युद्ध कोई अस्तर सास्तर नहीं ".

मैंने अपने हाथ प्यार हिला दुलकर अपने ऊपर के सरीर का युद्ध वाला चेस्ट गार्ड और विस्तार उतर दिया ताकि पूरी फुर्ती से लड़ सकूँ पर यह क्या वह सब तोह जैसे एक एक करके बस लंगोट जैसे विस्तार नंग धडंग अवस्था में आ गए और हसने लगे ...... बहनचोद काले भूसंद और बदसूरत से जोह सरीर में भी मेरे से दंगे होंगे ..... राक्षशों के डोले और और झाँगिए hi मुझसे 3-4 गुना मोती होंगी ......

साले डरा रहे हैं पर चिंता मत करो आज तुमको ऐसी टक्कर मारूंगा की गांड सूझ जाएगी मैंने दोनों हाथो से मट्टी उठा के हाथ पे रगड़ी और पंजों के बल बैठकर उनकी तरफ मेरे पास आने का इशारा किया .......

उन्ह के झुण्ड से एक सबसे काम साइज का दानव आया मेरी तरह पर वह भी मुझसे एक फुट लम्बा hi था और सरीर से कोई 250 कग का लग रहा था ...... आज दिन था अपने ववे के कौसल का जलवा दिखने का " रॉबिंसन " तो याद hi होगा आप सबको ......

( मुंबई की अंडरग्राउंड फाइट )

मैंने पंजों के बेल बैठे अपनी छाती पीती ," ी ऍम िण्विकिबले "...... "ी ऍम िण्विकिबले "

एक दानव बोलै ," मार दे िश मानव को दुशाल ..... तुझे पहला मौका देते हैं ..... और तू आज जिन्दा नहीं जायेगा ".

मैंने ुष दुशाल नाम के दानव की तरफ दौड़ लगा के पूरी ताकत से बिना उसको मौका दिए उसकी छाती पे टक्कर मारी तोह दानव टक्कर के पररहर से उड़ता हुआ चीख पड़ा और पीछे बानी गोल मोती दिवार से टकरा के ढेर हो गया और में कोड़कर अपनी जगह आ गया फिर पंजों पे बैठकर अपनी चट्टी पीटने laga,"I ऍम िण्विकिबले "---2

पूरा एरीना शांत पद गया और ुष दानव के मोह से खून आने लगा वह हिल भी नहीं पा रहा था ...... मेरी आंखें की चमक बिलकुल गेंदे जैसी हो गयी थी और मुझे बस सबको टक्कर मारने का मैं कर रहा था अपने पाने सींघ से जबकि वहां कहीं सींघ था hi नहीं , टक्कर तोह मैंने सर से hi मारी थी .

(* दोस्तों यहाँ आर्यन की गेंदे की शक्ति जागृत हो गयी थी बस उसने रूप नहीं बदला था ...... आगे आगे आपको पता चलेगा की आर्यन की कोण कोण सी शक्तियां एक्टिवटे होने लगी हैं और किनको कितना कण्ट्रोल कर पता है )

मेरा अठास बाकी सब प्रतिदवंदी को गुस्सा दिला रहा था मुझे तोह बस सबके विशाल सरीर और अपना सींघ का hi अहसास हो रहा था ...... उन्ह की भीड़ से एक 12 फट लम्बा और 5 फट से ज्यादा चौड़ा हवन सा दिखने वाला रखसश जिसके दो दांत भी जंगली सौर की तरह बहार निकले थे ......

ओह्ह तोह साले सौर मेरे से पन्गा और अपनी छाती पीटकर मैंने दूसरी दिशा में दौड़ लगा दी वह दानव मेरे पीछे पीछे ...... दो चक्कर कटवा के मैंने उसकी तरफ दौड़ लगा दी वह भी थम के मेरी टक्कर का इंतज़ार करने लगे पर में ने उछाल के किक उसके उलटे घुटने पे मार के ऊपर की ओरे कोड़ते हुए उसके हाथों से बचते उसकी थोड़ी पे सींघ यानी अपना सर दे मार दिया ...... वह बहन भानता हुआ छीकता पीछे हटा तो में ने जमीन पे दोनों हाथ रखकर उसके दुसरे घुटने पे दोनों पैरों को जोड़ के किक दे मारी ..... वह पीछे भेंसे की तरह दकरता हुआ गिरा ......

उसके गिरते हुए थप्प्प्पप्प की आवाज हुयी और में उछलता कूदता रॉबिंसन के तकिया कलम बोलता अपनी जगह पे फिर आ बैठा ......

2 मं में 2 दानव मैंने बेहोश कर दिए थे पर मारे नहीं थी बस घायल थे ...... वह हील इशलिये नहीं हो रहे थे क्योंकि स्वर्णलता की शील्ड की वजह से पर वह भी जान गयी थी की मैंने कोई अदृश्य कवच जैसा धारण कर रखा है यानी लोटस शील्ड के साथ में चीटिंग कर रहा हूँ. (प्यार हो गया था सच्चा वाला आर्यन से स्वर्णलता को तोह सब जायज़ लगा )

दोनों रानियां भी मेरी फुर्ती और ताकत देखकर इम्प्रेस थी कुछ तो बात है िश मानव में ऐसे hi नहीं सबको बेबस करके दिव्या तलवार ले गया ...... वहीँ स्वर्णलता को विश्वास हो गया था उसका प्यार जरूर जीतेंगे .

अब तोह जोह भी दानव मेरे सामने आता उसको नए स्टाइल में सींघ मतलब सर , घुसने , किक से ...... मार मार के घायल करता पर आखिरी में जब 12 दानवों एक साथ मुझ पे टूट पड़े तोह मुझे उनके वारों से बचाव भी नहीं हुआ .....

जब उन्होंने मुझे फुटबॉल hi बना दिया पीट ते हुए एक दुसरे की तरफ उछाल के तब सारा स्टेडियम का एरीना उनके राजा बलासुर का नाम hi गुजने लगा ..... लोटस शील्ड की वजह से में घायल तोह नहीं हो रहा था क्योंकि कईओं के हाथों के नाख़ून hi 8-10 इंच के होंगे पर मौका नहीं ले पा रहा था में जान बाउज के ...... अगर सालों को एक साथ मार दिया तोह मेरी चीटिंग पकड़ी जाती......

थोड़ी डिअर पीटकर जब उन्होंने मुझे दीवार की तरफ दे मारा तोह में निचे पड़ा बेहोशी की एक्टिंग करने लगा ....... मगर एक मिनट भी न बिता होगा की वह सब आपस में भीड़ गए की मुझे कोण मार के रानी पुष्पलता से शादी करेगा .

उधर रानी पुष्पलता और कामलता के चेहरे देखने वाले थे ...... आखिर अब उनका क्या होगा , इतना सालों बाद एक मर्द मिला था जिसकी तारीफ स्वर्णलता ने भी की , भले मानव सही हमको संतुस्ट कर पायेगा.

लेकिन यह तीनो भेने क्या आर्यन भी नहीं जानता थी सिर्फ रानी माँ हेमा के दूध पीने से आर्यन को कितनी शक्तियां मिली थी की कोई भी स्त्री उसकी मर्जी के बिना उसको स्खलित नहीं करा पायेगी चाहे देवी हो दानवी इशलिये स्वर्णलता के जबरदस्त आकषरण के साथ वह कामलता के बाद पुष्पलता से भी सम्मोहित नहीं हो पाया.

क्या तीनो को िंह बचे हुए 10-12 दानवो में से पति चुनना पड़ेगा ?

तो बे कॉन्टिनोएड......
 
अपडेट 38 (पतलोक)

Part - 2 ©

मुझे जिस मौके की तलाश थी वह मुझे मिल गया अब मैंने उन्ह आपस में भिड़े दानवो की भीड़ में इतनी तेजी से घुसा की जोह कमजोर लग रहे थे और घायल भी हो गए थे लड़ते हुए उनके साथ ताकतवर वालो के हाथ पैरों पे वार करने लगा ...... किसी की कोण्ही या कंधे पे किक मारता तोह किसी के घुटनो पे घूंसे ...... जब तक वह समझ पाते 2 मं में hi 4 जोह सबसे ताकतवर और हट्टे काटते थे उनको भी बाकी जैसा घायल कर दिया .......

अब सब मेरी तरफ लपके तो उनकी स्पीड काम और चाल बदल गयी थी पर थे तोह दानव hi एक से एक शक्तिशाली ...... मुझे जब सबने घेर लिया तोह अब पत्र बदलने की बारी थी.

में अभी कुछ करता एक ने मेरी गर्दन दबोच ली और दो ने दोनों हाथ पकड़ लिए और 4 दानवो ने मेरे पेअर पकड़ लिए और बाकियों ने जमीन पे लिटा के जोह मेरी मार मार के रेल बनायीं है की मुझे लगा अब में नहीं बचूंगा .......

सरीर के हर जोड़ पे वार करके जैसे मुझे अदमरा करने के बाद अब पूरी ताकत से मुझे खींच के मेरे सरीर से वह मेरे हाथों और प्यारों के साथ मेरा सर भी उखाड़ने की फिराक में थे.

अपनी आंखें बंद करके मैंने आखिरी कोशिश के रूप में जिस दानव ने मेरा सर और गर्दन दबा रखा था उसका सीने की तरफ जोर लगा के मैंने अपनी पूरी ताकत से गर्दन पलटा और उसकी चेस्ट को काले बदबूदार निप्पल समेत 6 इंच से ज्यादा गोश्त पे अपने दांत गदा के काटकर नोच डाला ....... मरररररर गयाआ ........ उसकी चीखिआ गूंज गयी और मेरा सर उसकी पकड़ से निकला तो मेरे उलटे हाथ पकड़े वाले दानव के दोनों हाथों पे सर से टक्कर मार के उसकी बाइसेप्स में दांत गदा दिया तोह मेरा उल्टा हाथ आजाद होते hi मैंने सीधे हाथ जकड़े वाले की नाक पे मुक्का जड़ दिया ......

यह देखकर की दो दानवों को मैंने दांतों से काटकर घायल किया था तो मुझे फिर दबाने लगे पर मैंने िशबार कोई मौका न देकर अपने पैरों की ताकत िकाता करके घुटनो तक मोड़ के जोरसे किक एक एक करके चरों प्यार पकडे दानवों की छाती पे मारी किसी के पेट पर ...... दो तीन किक में मेरे प्यार भी आजाद हो गए ...... यह सिर्फ 5 सेक् में किया तो वह सब भी आश्रमात हमले से संभल नहीं पाए ......

पूरी फुर्ती दिखता मैंने बैक साइड सुमरसॉल्टिंग करता बैक फ्लिप्पिंग से हाथ पैरों पे घूमता उनसे 20 फट दुर्र आकर रुका ....... अपने मोह में उन्ह दानवो के गंदे खून और मार्श थूक के में एक घेरि सांस ली और अपने दोनों हाथ जैसे एक शेर के पंजे के बांये और मोह पहाड़ के धाड़ मारी बाबर शेर वाली ......." गरराआउउउउ !!!!!! गरराआउउउउ !!!!!! ....... "

जोह दरसक दानवों एरीना मेरी दुर्दशा देखकर चिल्ला रहा थे है रहे थे वह अब लायन रोर सुनकर शांत पद गए और उधर दानवो में भी सिरहन दौड़ गयी की यह कोई मानव नहीं बल्कि मायावी लगता है.

स्वर्णलता ने खड़े होकर ताली बजाकर जोरसे चिल्ला के कहा ," बहोत खूब आर्यन सबको हरा दो ...... तुमको जीतना hi होगा मेरे लिए ".

उसकी बातें और खुसी देखकर दोनों रानियां भी खुश हुयी पर अंदर अंदर से ......

रानी कामलता ," यह तोह जंगलीपन पे उतर आया है ...... अब तोह सब इश्कि एक एक हड्डी मार्श नोच डालेंगे ".

रानी पुष्पलता ," मगर कुछ भी कहो अकेले लड़ने का दम रखता है, त्यार रहो कामलता अगर वह िंहसे जीत गया तो कहाँ है तुम्हारी 'त्रिवेटा ' पक्का उससे तो भिड़ने वाली हो आर्यन से ".

त्रिवेटा का नाम सुनकर स्वर्णलता भी डर गयी ...... वह चंदैनी तोह सबसे पहले आर्यन के जननांग को खायेगी फिर मारेगी ...... " दीदी यह गलत है आर्यन कभी स्त्री योद्धा से नहीं लड़ेगा और न आप दोनों से ".

रानी कामलता ," फिर तोह और मजा आएगा आखिर किसी को तोह स्वादिस्ट आहार मिलेगा त्रिवेटा या फिर मुझे ...... दीदी का नंबर नहीं आएगा ".

रानी पुष्पलातलाता भी मुस्करा के ," हम भी चाहेंगे की आर्यन हमको मौका दे वैसे स्वर्ण तुम चाहो तोह सबसे पहले मुकाबला कर लो क्या पता तुम hi हरा दो ुष को ...... है है है है है ".

स्वर्णलता थोड़ा खीज के हंसिका को पास बुला के उसके कान में कुछ बोली और वह चली गयी ......

तब रानी पुष्पलता ," तुम को अगर विश्वास है की यह hi जीतेगा तोह फिर हम कोई भी युक्ति इस्तेमाल कर लेंगे होगा वही जोह होना है. मगर एक काम मेरा आर्यन जरूर कर दे िंह सबको हरा देगा तो कमसे काम मुझे िंह में से किसी डरपोक दानव से विवाह नहीं करना पड़ेगा".

स्वर्णलता ," अगर आपको लगता है की जोह अब आप दोनों कर रही हैं ुष के बाद भी आप आर्यन से विवाह कर पाएंगी जीत कर तोह भूल जायो हाँ गुलामी जरूरी आपके हिस्से में आएगी ".

अब कुछ कोई आगे बोलता युद्ध मैदान में सन चेंज हो गया था ..... और दानवो की चीख पुकार hi गूंझ रही थी.

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मैंने ने अपनी तरफ दानवों को बढ़ता देख के अब दोनों हाथो प्यारों पे चौपया बन गया और मैदान में गोल गोल इधर इधर कूद कूद के दौड़ने लगा ....... बिच बिच में धाड़ मारता पर उन्ह 12 दानवो के हाथ नहीं आ रहा था .......

जब मैंने देखा की बाकी दूर हैं ये दो दानव पास हैं तोह जमीन से उछाल के स्पीड से दोनों हाथ पैरों के नाखून से वार कर एक का पेट hi पहाड़ डाला मोह से ..... और जल्दी hi कूदकर दुसरे के कंधे को दांत से कन्धा चीयर दाल के उसका उल्टा हाथ उखाड़ डाला और कूद के फिर धाड़ के तेजी से इधर उधर दौड़ने लगा ......

( अब आर्यन बाबर शेर के स्टाइल में अटैक कर रहा था )

स्वर्णलता ने आर्यन को जानलेवा हमला करता देख शील्ड हटा ली और देखते hi देखते सारे घायल दानव ठीक होने लगे तो में भी सीधा खड़ा होकर स्वर्णलता की तरफ देखा जोह मुझे मजबूर नज़र आयी ...... वहीँ दोनों रानियां भी मुस्करा भर दी .....

अभी में कुछ करता इश्से पहले hi एक दानव ने हुंकार भरते मेरी पीठ में तलवार गदा दी ...... तनननननन की आवाज से तलवार टूट टी चली गयी और मैंने मुड़कर पीछे देखा तोह सब 70 से ज्यादा दानव अब बड़े बड़े अस्तर लिए मेरी तरफ hi लपके थे ......

मैंने जल्दी से जमीन पे झुकार एक ऊँची छलांग लगाई और हवा में कूदकर सीधा स्वर्णलता के सामने ुष पवेलियन में लैंड किया ..... अभी कोई कुछ समझ पाटा मैंने स्वर्णलता की तलवार लेकर वापस ऊपर आते दानवो के ऊपर कूद गया जोह सीडी चढ़कर ऊपर आ रहे थे मुझे मारने ......

यानी अब कोई नियम hi नहीं है तो मैंने जोरसे सबसे आगे बढ़ते दो के सर एक साथ काटे तलवार से और उनके पीछे वाले दो दानवो के सीने पे लात जामा के गिरा दिया ...... उनके अस्तर वाले हाथ काट के मैदान में कूड़ा तोह एक साथ 25 अस्तर भाले , तलवार , गदा , हथोड़ा , तीर , खड़से..... मेरी तरफ हवा में आये तोह उछाल के सबको एक बवंडर बांका के गोल गोल तेजी से घुमा के वापिस उनके मालिकों पे दे मारा .....

में चिल्ला के दादा ,"अब बहोत हो चूका सालूऊओ ..... तुम दानव कभी नहीं सुधर सकते" ....... और मैंने आखें बांध की और एक मंतर पढ़ा तोह मेरी एक तरफ सुनहरी बाबर शेर और दूसरी तरफ सुनहरी हिंसक गेंदा खड़ा था जोह अपने सरीर से 10 गुना ज्यादा विशाल थे...... यह वही थे जोह दीप्ति के स्वयंवर में मुझसे भिड़ने के बाद मेरे गुलाम बन गए थे ......

अपनी लोटस शील्ड को फैला के मैंने सारे दानवों को खींच के अंदर ले लिया ," अब जोह हथियार चलना हो चला लो पर अब तुम से किसी को जिन्दा में बहार जाने नहीं दूंगा ...... वह तीनो रानियां अब मेरी हैं और आज hi में तीनो को ुशी स्वर्ण महल में भोगूँगा , अगर माँ का दूध पिया है तोह लगाओ दम जितना लगा सकते हो ".

सारे दानवों की भी पहात चुकी थी पर शक्तिशाली होने का घमंड तोह था hi उनको ....... ऊपर से पतलोक में उनको हराना मुश्किल था पर मेरी लोटस शील्ड hi उनकी दुश्मन बन गयी और मैंने बाबर शेर और हिंसक गेंदे को वायु शक्ति के कवच पहना दिया ......

( यह मुझे भी नहीं पता थी की वतासुर को हारने में मुझमे भी वायु शक्ति है )

अब हुआ खुनी खेल शुरू ...... दोनों ने दानवो को मार मार के खाने भी शुरू कर दिए ...... मेरी तरह वह जिसको भेजते में उसको स्वर्णलता की तलवार से काट काट के टुकड़े कर रहा था ....... अब तो स्वर्णलता से लेकर दोनों रानियों ने भी कोशिश कर ली पर अगले 10 मं सबने अपनी आँखों से भीषण कुरूर मंजर देखा .....

हर दानव को मैंने अपने शिकारी हिंसक गेंदे और बाबर शेर के साथ ुष 180 मीटर डीएमटीर वाले युद्ध आभास वाले मैदान में शिकार करके खिला दिया हर तरफ खून hi खून भिकारा पड़ा था ".

आधी से ज्यादा दानव जनता नगर की तरह भाग गयी ...... और आज तीनो रानियां फिर से ऐसे hi मजबूर नज़र आयी जैसे धरतीपकड़ के सामने थी ...... जब चाहे जितनी स्त्रीओं को उठवा के ले जाता और चूड चूड के मार के कहा जाता जोह जिन्दा बचती उसको उसके सैनिक भोगते जबतक मर्डर न जाये .

तभी दोनों रानियां और उनकी योद्धा 11 फट लम्बी चौड़ी दरवानी 'त्रिवेटा' युद्ध मैदान में घुसने की कोशिश करने लगी पर लोटस शील्ड की वजह से नहीं सफल हुयी ......

*** सारू की लोटस शील्ड सबसे स्ट्रांग डिफेंसिव शील्ड है उसकी जल शक्ति के कारन इशलिये हमले से बचाव करती है. दूसरा अदृश्य रूप में भी शील्ड बचाव करती है अगर हुम्ला हो तोह शील्ड रहेगी पर अंदर कोण सुरकषित है दिखाई देगा अगर सारू साथ न हो तो.

जब मैंने तीनो को अपनी तरफ गुस्से से आते देखा और स्वर्णलता को वहीँ पोडियम पर तोह अपने बाबर शेर और हिंसक गेंदे को दानवों की एक एक आखिरी बूटी खिलने के बाद सर और पीठ सेहला के चूम के वापस मंतर पढ़कर भेज दिया ......

अब समय आ गया था िंह दोनों रानियों को सबक सीखने का...... जिस लड़ाई झगडे से में बच्च रहा था वह फिर हुआ सिर्फ िंह दोनों रानियों की मूर्खता के कारन ......

मैंने लोटस शील्ड हटाकर तलवार को फ़ेंक के स्वर्णलता के कदमो की तरफ फ़ेंक के मारा जोह उसके प्यारों के आगे गाड़ गयी एक बार को वह भी डर गयी थी और कड़ी हो गयी पर मैंने इशारा से गर्दन हिला के मन किया की वह दुर्र रहे .......

जब तीनो अपने अस्तर लेकर मुझे घेर ली शील्ड हटने के बाद तोह मैंने कहा ," अब तोह आप हार चुकी हो मेरी रानी शैब्या ".

रानी कामलता ," तुम एक चलिए हो जोह कपट से इतनी दुरदिता से सब योद्धा को मार के अपने पालतू जानवरो को खिला दिए ...... तुमने ऐसा करके अपनी मौत को दावत दी है ".

वह बोल तोह रही थी पर उसकी टांगें कांप रही थी ..... वहीँ रानी पुष्पलता अभी भी अश्मंजश की सिटीथी में थी पर सबसे बुरा हाल ुष त्रिवेटा नाम की दानवी का था ......

ुष पहाड़ सी दिखती त्रिवेटा को देखकर न जाने क्यों मुझे दया आ गयी अगर औरशन को भी में मारने और उनसे लड़ने लगा तोह फिर क्या फरक है उन्ह दानवो और मुझमे.

में अभी सबसे निच्चे झुकार माफ़ी मांगने की सोच hi रहा था तभी मेरे मैं में रानी माँ हेमा की आवाज आयी," ऐसा कदापि मत करना पुत्र यह दानव कन्याँ हैं ऐसे हार नहीं मानेगी. इनको बगैर लाडे जीतकर दिखाओ तब सब सिर्फ तुम्हारी होंगी ".

अभी में कुछ सोचता उसे पहले कामलता ने अपनी खडग़ से मुझ पे वार कर दिया तोह मैंने झुकार हाथ बढ़ा के उसकी तलवार पकड़ के अपनी तरफ खींच के उसका ताम्बी गाल चूम के दुसरे हाथ से कमर थम के ऊपर उठा के जमीन पे पटक दिया ..... धपपपपपपप ..... आह्ह्ह्हह्ह बच्चु ..... उसके मोह से चीख निकली ...... मेरा गुस्सा अब बढ़ता जा रहा था .......

अपनी मालकिन रानी कामलता की दुर्दशा देखकर त्रिवेटा जैसी विशाल कए 11 फट ऊँची दानवी ने मेरे पे हुम्ला किया तोह में उछाल के उसके ऊपर से कूदकर एक लात उसके मोटे पिछवाड़े पे जोर से दिया तोह उड़ती हुयी सीढ़ी दीवार में जा धंसी ......

अब रानी पुष्पलता ने अपनी शक्ति से अपना साइज बढ़ना शुरू किया और 25 फट ऊँची 4 हाथ धारण किये बिलकुल डरावनी सकल के साथ सब हाथ में अस्तर लिए हसने लगी .......

में अभी कुछ करता उससे पहले कामलता ने मेरे घुटने पे लात मारी खड़े होते हुए पर जब अपनी तलवार से वार किया वह टूट गयी मुझसे टकरा के ...... वहीँ ुष दानवी त्रिवेटा ने पीछे से मेरे सर पे उछाल के घूंसा मारा तोह तन्न की आवाज से ॉश्चारिये चकित रह गयी ......

में भी गुस्से से बोलै ," हो गया या अभी लड़ना है ....... अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह "

मेरी बात भी पूरी नहीं हुयी थी की इतनी जोरसे लात पुष्पलता ने मारी में उड़ता hi चला गया ...... ना जाने कितनी दुर्र और कहाँ आकर गिरता रगड़ता चला गया जमीन पे hi 10-12 कम िश सुनसान सुखी जगह पे .......

मतलब यहाँ रौशनी काम है इश्क ार्थ में ुष युद्ध मैदान से बहोत दुर्र hi नहीं नगर से भी बहोत दुर्र हूँ.......

वह सब स्वर्णलता को नहीं कभी माफ़ नहीं करेंगे मेरी वजह से और में अभी तक स्वर्णलता की वजह से चुप्प था ...... बहोत हो गया आज साला यह स्वर्णगैर को में बर्बाद करके जाऊंगा ......

में अभी खड़ा hi हुआ था की पुष्पलता के साथ कामलता और त्रिवेटा भी मेरे सामने आ गयी ...... "ओह्ह्ह तो यह तोह अच्छा hi हुआ आज के बाद तुम मुझे नहीं भूल पयोगी "

अब वह दोनों भी विशाल रूप धारण किये हुयी थी ....... और उनके चेहरे की हसी और कुरुरता उनके दानव होने का सबूत दे रही थी ........ मैंने सोचा पहले इनको खेल लेने दूँ तभी इनकी छूट और गांड पहाड़ के मजा आएगा ......

में जोर से चिल्ला के ," तुम रूप अच्छा धारण करके आज भी दानव hi हो और तुम्हारी छोटी भें स्वर्णलता दानव होने के बाद भी एक देवी है जिसने मेरी मदद की ुष समय जब मुझे सबसे ज्यादा जरुरत थी. आज तुमको इतना पेलुँगा की िश महकाये रूप को लेने की सोचोगे भी नहीं"...... और उछाल के त्रिवेटा की नाक पे घूंसा जड़कर उसकी ड्रेस फाड़ता निच्चे कूद गया ...... फिर उसके उलटे प्यार पे किक मार के उसको झुकने को मजबूर कर उसका निचला विस्तार भी पहाड़ दिया ......

अब दूसरी साइड कोड़कर मैंने आंखें बांध की और मंतर पढता अपना साइज बढ़ता चला गया ...... जब में 60 फट ऊँचा और 25 फट चौड़ा हो गया तोह आँख खुल गयी ...... तीनो 25 फट ऊँची दानवी बिलकुल छोटी बच्ची की तरह लग रही थी ......

में उनके चेहरे के उड़े रंग को देखकर बोलै ," मजा आया...... अब और आएगा जब में िश त्रिवेटा से सम्भोग करूँगा इसी रूप में "...... है है है है है है ......

अब तोह तीनो की पहात के चार हो गयी क्योंकि मेरा नंगा लिंग विस्तार फटने के कारन अभी लटका हुआ hi 5 फट लम्बा और 2 फट मोटा एक पैंडुलम की तरह झूम रहा था ......मेरा हिंसक रूप देखकर जब मेरे पूरे लिंग को डबल साइज का खड़ा होते देखा तो मैंने तीनो की चीखिआ सुनकर फिर से लोटस शील्ड अदृश्य कर अपने चरों तरफ लगा ली ......

अगले 3 घंटे त्रिवेटा के साथ क्या हुआ वह उसको भी नहीं पता क्योंकि वह मर्डर चुकी थी और पुष्पलता के साथ कामलता बस डरते डरते रोटी जा रही थी कांपते हुए आज उनकी साड़ी शकितयाँ काम न आयी जिश्को वह देख रही थी वह न मानव था न दानव बल्कि मौत का फरिस्ता hi था ......

स्वर्णगैर से दररर दररर तक हम चरों को खोजा जा रहा था पर हमारा 6 घंटे तक आता पता नहीं लगा ......

जब में नार्मल रूप में आया तोह बाकी तीनो अपने रूप में आ गयी वहां महाराज बलि प्रकट हुए और दानवी त्रिवेटा नार्मल रूप में बदल गयी पर पहले से सूंदर और आकर्षक ......

हम तीनो चकित थे तब राजा बलि महाराज बोले ," यह मेरी hi पुत्री है और इश्को सबसे विशाल दानव से संसर्ग करना था पर आज 12 हज़ार साल बाद इश्कि इच्छा पूरी हुयी ..... चिंता मत करो महार्यं यह हमको भी नहीं पता था पर सायद नियति hi तुमको यहाँ तक ले आयी और तुम दोनों जिसको ढून्ढ रही थी वही तुम्हारे सामने है कितनो की बलि और चडोयगी अपनी हटधर्मिता के लिए..... यह तुम्हारा साथी हो ऐसा तोह िशने भी नहीं सोचा होगा ...... रही बात इश्को हारने की तोह पूरे पतलोक के योद्धा को बुलाते रहो यह मारता जायेगा पर थकेगा नहीं जब इश्को तुम्हारी रानी हेमावती ने अपना ढूढ़ पिलाया हो ".

त्रिवेटा एंटी सूंदर रूप में आ गयी थी मेरे चरण छूकर बोली," स्वामी में जल्दी hi आपके पास आउंगी आपकी बेटी की सुरक्षा रूप में ".

अब मुझे भी बुरा लगने लगा की बदले के चक्कर में मैंने एक मासूम सी श्रापित औरत के साथ ऐसा किया पर महाराज बलि ने कहा ," अपनी जीत का श्रेया जरूर लेना महार्यं तभी अटाला लोक का भी कल्याण होगा ".

मैंने घुटनो पे बैठकर उनके सामने हाथ जोड़कर सर झुका दिया ," सदैव विजयी भाव ".

वह गायब हो गए तब मुझे याद आया की मैंने चरमोत्कर्ष पाकर शील्ड हटा दी थी तभी वह यहाँ हमारे सामने थे ...... मैंने ऐसे hi घुटनो पे बैठकर पलट के दोनों रानियों के सामने हाथ जोड़कर कहा ," माफ़ कर देना रानी शैब्या में अपनी मगरूरी में बहोत गलत कर गया ..... आप कोई भी सजा दे दो मंजूर है ".

में सर झुका hi रहा था की जोरसे आवाज आयी ," ारयणणणणणण ...... तुम ठीक हो ..... महा बलि महाराज आपका लाख लाख सुकर है की आपने ने मेरे आर्यन को सही सलामत रखा ".

मेरे पास आकर स्वर्णलता रोटी हुयी मुझे चूमती लिपट गयी ...... मेरी कोहली भर के अदृश्य होकर हमको अपने पुश्किन नगर ले गयी ...... में ढंग से दोनों रानियों से माफ़ी भी नहीं मांग पाया.

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पश्चिन नगर के सही कक्ष में किसी ने हमको बुला लिया था अदृश्य करके .......

में हैरान होते हुए स्वर्णलता से बोलै ," मुझसे बहोत बड़ी भूल हो गयी स्वर्ण जोह में अटाला लोक में आया ...... आज पता नहीं मुझे क्या हो गया था की खुद भी दानवों की तरह वाहवार करने लगा? ुष बिचारि त्रिवेटा को कितना प्रताड़ित किया में कैसे औरों से नज़रिए मिला पाउँगा ?"

"तुमने वही किया जोह तुमको करना चाहिए था और अधूरे कार्य को पूरा करने hi मैंने तुमको वहां भेजा था. तुम तोह हम सबकी सोच से भी कई गुना समझदार और संतुलित लगे वार्ना कोई भी अब तक मारा जा चूका होता उन्मांद में "...... मैंने पलट के ुष मीठी आवाज वाली रानी माँ हेमा की तरफ पलटा तोह वह मुस्करा रही थी पर तभी स्वर्णलता ने एक कपडा मेरे निच्चे निर्वस्त्र सरीर पे धक् दिया तोह मैंने भी झट से लपेट लिया ......

मैंने कमर पलट के कहा ," चमा चाहूंगा माते ..... में अभी भी समझ नहीं पा रहा हूँ "

रानी माँ हेमा ने बड़े स्नेह से कहा," माता के सामने पुत्र को शर्मिंदा नहीं होना चाहिए फिर अब जब जीत चुके हो तोह वापस स्वर्णगैर पौंचो ...... फिर राजा बलि महाराज ने तुमको आशीर्वाद दिया उनका कार्य पूरा करने के लिए ....... हाँ अब विस्तार पूरे पहनकर जाना स्त्रीयां ज्यादा होगी संख्या में तोह तुमको देखकर ज्यादा hi लालायित न हो जाये तुमको पाने के लिए "..... hi hi hi hi.hi .....

मेरे पास आकर उन्होंने मेरे माथा चूम के कान में कहा ," तीनो रानियों को प्यार देना और यह स्वर्णलता तुम्हारे विशेष रानी रहेगी "...... उनका मेरे सर पे हाथ फेरना hi मेरे दुखी मैं को शांत करने लगा .....

हम दोनों ने उनका आशीर्वाद लिया और हमको मेरे प्रश्नो के उतर देकर मुझे नार्मल कर दिया ......

मैंने स्वर्णलता के दिए विस्तार पहने और दोनों फिर से रानी माँ हेमा द्वारा अदृश्य होकर ुशी युद्ध के मैदान में प्रकट हुए ......

जितने भी दानव लोग थे और दोनों रानियां जैसे हमारी hi प्रतीक्षा कर रहे थे.

स्वर्णलता ने मेरा सीधा हाथ पकड़ के ऊपर किया और चरों तरह घुमा के जोरसे बोली ," यह है महार्यं जिसने रानी पुष्पलता द्वारा करवाई गयी मलह युद्ध से लेकर सब प्रतिद्वंदिता जीती हैं और अगर अभी भी किसी को लगता है की वह इश्को हरा सकता है तोह मुकाबले के लिए आगे आये चाहे मलह युद्ध करना हो शास्त्र युद्ध ".

सब रानी पुष्पलता की तरफ देखने लगे तोह उसने एक बार कामलता की तरह देखा जिसने हाँ में सर हिला दिया ......

तोह उन्हों ने खड़े होकर कहा ," में महार्यं को विजेता घोसित करती हूँ और इनाम के तौर पे स्वर्णगैर की राजगादी सौंपती हूँ ".

में आगे बढ़कर कहा हाथ जोड़कर बोलै," नहीं रानी शैब्या मुझे सिंघासन नहीं चाहिए, में तोह बस अटाला लोक घूमने आया था और वापस चला जाऊंगा. आप िश पूरे लोक की रानी हैं ऐसे खेल खेल में अपना सिंघासन डाव पर मत लगया करिये वार्ना गलत व्यक्ति आपकी जगह बैठा तोह आपकी प्रजा और लोक को नुक्सान hi पहुंचा देगा ..... बस मुझे जाने की आज्ञा दिज्ये"....... सब शांत होकर मेरी बात सुनकर सोचने लगे की बात तो मैंने बिलकुल ठीक hi कही है .....

तभी हंसिका ने आकर कहा मैदान में जोरसे नारा लगया ," महार्यं की जय ..... रानी पुष्पलता की जय ..... रानी कामलता की जय ..... रानी स्वर्णलता की जय ....... " . वह सब लोगों से जय जय कार के नारे लगवा रही थी ...... वहां त्रिवेटा भी आ गयी और मुझे प्यार भरी दृस्टि से देखती हुयी प्यार छूने लगी .

मैंने उसको उठा के गले लगा लिया तोह वह भी मेरा धन्यवाद् देती बोली," आप का अहसान रहेगा मुझ पर . आज आपने साबित कर दिया की मनुष्य भी भगवन जैसे दयालु होते हैं और चमत्कारी भी ".

मैंने उसका हाथ पकड़ के कहा ," मुझे आपने माफ़ किया एहि बहोत है फिर भी ुष कृत्या को भूल जाईये में ुष समय अपने वश में नहीं था ".

त्रिवेटा शर्मा करके ," ऐसा कृत्या जोह मुझे hi मेरे वजूद से मिला दे कभी घृणित नहीं हो सकता ..... और अब हम आपको ऐसे तो नहीं जाने देंगे क्यों रानी कामलता ".

दोनों बड़ी रानियां भी हमारे पास आ गयी थी ...... तब कामलता ने कहा," आर्यन हम शर्मिंदा है जोह तुम पर साख करने लगे और हमारा घमंड तुमको गुस्सा दिलता चला गया ".

पुष्पलता ," आज तुम ने साबित कर दिया, महँ होने के लिए आपकी पद्वी या प्रजाति मायने नहीं रखती बल्कि कर्मो का उचित होना चाहिए ..... में रानी पुष्पलता आज घोसित करती हूँ की महार्यं हमेशा अटाला लोक का संरक्ष रहेगा और चाहिए तोह राज सिंघासन पे कभी भी अपना दावा कर सकता है ".

मैंने हाथ जोड़कर इंकार करना चाहा तोह स्वर्णलता ने मेरे हाथ पकड़ के गर्दन न में हिला दी , मैंने उससे पूछना चाहा तोह उसने मेरे कान कहा ," बाद में बाटूंगी अभी चुप रहो".

अटाला लोक hi नहीं सारे पतलोक में खबर फेल गयी की रानी स्वर्णलता ने महार्यं को अपने लोक का संरक्ष मान लिया है.

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स्वर्ण महल में मेरा भाव स्वागत हुआ ....... बहार से जितना सूंदर था अंदर से और ज्यादा भाव और आलीशान भी ...... सपनो का महल hi कहूंगा ...... मुझे पूरे राजदरबार के सामने एक रतन जड़ित मुकुट पहनाया गया और खूब सारे इनाम के रूप में बहुमूल्य रतन के साथ कई अद्भुत सास्टर्स भी दिए गए.

स्वर्णलता बहोत खुश थी और मेरे साथ hi कड़ी थी ...... जब विश्राम की बात आयी तोह मुझे स्वर्णलता के कक्ष भेज दिया गया और आज रात मेरे सम्मान में सही भोज रखा गया .......

स्वर्णलता के कक्ष को देखकर में हैरान hi हुआ क्योंकि वह भी एक छोटा महल hi लग रहा था जिसमे 4 कक्ष थे और प्रमुख कक्ष में मुझे ले जाया गया ....... दासियाँ तोह बस ाश की नज़रों से मुझे देख रही थी ..... सबकी अंगिया और कमर के निचे का विस्तार बोहत छोटे थे, आधे से ज्यादा आंग दिख रहे थे .......

मुझे हंसिका ने आकर एक बड़े पात्र में शीतल पेय दिया की यह मेरी साड़ी थकावट दूर कर देगा ...... सच्च में बहोत hi स्वादिस्ट था मेरे अंदर िष्फुर्ति का संचार होने लगा ..... मैंने और माँगा तोह उसने मुझे स्नान करने को कहा ......

में सही ग़ुसलख़ाने में खूब रगड़ रगड़ नहाया ...... साला बादभूदार उन्ह दानव योद्धों की दुर्गन्ध आ रही थी ऊपर से मोह से तोह 100 बार कुल्ला किया और एक लुंगी जैसा विस्तार कमर पे लपेट के एक आधी आगे से खुली जैकेट पहनकर बहार आया तोह स्वर्णलता के अल्वा कोई वहां न था .

मेरी तरफ देखकर मुस्करा भर दी ," आप आराम करो आर्यन में थोड़ी डिअर में आती हूँ "...... उसकी आँखों और बातिओं मेरे लिए सम्मान था .

में भी उसकी बात सुनकर ुष शयनकक्ष की भवता और सुसज्जित देखना लगा ...... हुन्न्न्नन्नन्न यह बिस्टेर कितना मखमली और नरम है ..... में बिस्टेर पे लेटकर पूरे घटनाक्रम को सोचने लगा की क्या क्या हुआ था फिर कैसे अब में िश स्वर्ण महल के रानी के कक्ष में हूँ .

अपने विचारों में मगन जब मेरे कान में कंगन और घुँघरू की खंननं खंननं और चन्नण चन्नण पड़ी तो पलट के देखा की एक गीले बालों में अप्सरा सी काय लिए सफ़ेद पारदर्शी विस्तार कंधो की बगल के निचे से झंघों तक लपेटे एक युवती कड़ी है जोह दर्पण में देखकर अपने बाल सूखती सुलझा रही है .......

ुष बिस्टेर से खड़ा होकर में उसकी तरफ खुद hi चलता चला गया..... ीतरह से भी तेज मदहोशी वाली गांध मेरे नथुनों को पार कर मेरी आँखों की काम पिपासा में वृद्धि कर दी .....

जब दर्पण के आकाश से मेरी नज़रों का टकराव हुआ तोह उन्ह कांजी नशीली बड़ी बड़ी आंखें तो में अपने सपनो में भी न भूलूँ " स्वर्णाआआ आप हो "...... मेरी आवाज कांप रही थी ...... जी हाँ वह मेरी स्वर्ण hi थी सबसे मादक सुंदरी ......

स्वर्णलता तुनक के बोली," क्यों किसी और की प्रतीक्षा थी आपको, बोलो उसको बुला देती हूँ ".

में हड़बड़ा hi गया और वह झटके से अपने बाल में तेजी से कंघी की तोह उसके मादक दोनों चूतड़ की थिरकन और नागिन सी बलखाती कमर जानलेवा थी ...... एक बार दोनों प्यार आगे पीछे रखने पर में मटकी के साइज की उसके दोनों चूतड़ के आपस में घरसँ की आवाज भी जैसे सुनने लगा ......

मैंने अपनी जीभ से अपने लबों को गीला करता बोलै ," आपके अल्वा में जानता hi कहाँ हूँ यहाँ भला किसको जोह इंतज़ार करूँगा ?"

स्वर्णलता इत्र के ," अच्छा गले तोह सबसे ऐसे मिल रहे थे जैसे वर्षों से जानते हो सबको ".

यह 7फट लम्बी हुस्नपरी एक तोह मेरा बम्बू ( लौड़ा) को फ्लैगपोले जैसा खड़ा कर दी थी फिर इश्के टॉन्ट और नखरे जैसे मुझे बेकाबू कर दिए ...... अभी नहीं तोह कभी नहीं प्रिये , ऐसा सोच के मैंने उसको पीछे से अपनी आगोश में ले लिया ......

दोनों के मोह से शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकल गयी ...... बहनचोद क्या मस्त मखमली सी पुष्ट गांड है इश्को तोह नहीं छोड़ने वाला में और कितनी मस्त खुसबू आ रही सरीर से .......

मेरा लौड़ा अपने चूतड़ों पे स्पर्श महसूस कर स्वर्णलता तड़प hi तोह गयी पर अब वह भी रुकना नहीं चाहती थी ," शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरे ारयणणणणणण मुझे पूरा कर दो ...... अह्ह्ह्हह्हह में तुम्हारे लिए तराश रही हूँ ".......

में ने उसको घुमाकर अपनी गॉड में उठाकर उसके लबों पे टूट पड़ा ..... पुछःह पुछठ तुम कितनी मीठी हो मेरी स्वर्णाआआ ........ उसके गीले बालों ने हम दोनों के चेहरे धक् लिए पर गर्मी hi इतनी बढ़ गयी थी हम दोनों के बदन में की खून पूरी रफ़्तार से दौड़ रहा था ....... जबकि दोनों थोड़ी डिअर पहले hi नहाये थे ......

दोनों बिस्टेर पे पहुंचते पहुंचते नंगे हो गए ........ उसका हर अंग बड़ा बड़ा और बिलकुल गोरा सुडोल था..... उसके रंग में एक सुन्हेरीपन था तभी उसका नाम स्वर्णलता होगा .......

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**दोस्तों यहाँ दानव स्त्रीओं की हट और विड्थ दोनों मानव स्त्री से बहोत ज्यादा होती हैं तोह फिगर का सिज़ेस लिखना बेमानी होगी हाँ....... अंदाजे से तीनो रानियां आर्यन से 2-3 इंच लम्बी hi होंगी और चूचियां भी 44-48 दद hi होंगी और पिछवाड़ा भी 50-56 से काम न होगा और कमर 37-38 की ....... मगर सरीर के हिसाब से सब अनुपात में था ......

देखा जाए तोह आर्यन को अपने को टक्कर देती स्त्री मिली थी और एक खासियत थी िंह दानव स्त्रियों में की लिंग कितना भी बड़ा हो यह झेल शक्ति थी क्योंकि योनि ुशी हिसाब से सिकुड़ और फैल सकती थी ......

***दानव और नाग स्त्रियों को मानव पुरुष बहोत पसंद थे वह पृथ्वीलोक पे जाकर उनको अपने रूप जाल में फसा के यहाँ लाती थी और उनके साथ शीतल पेय पीला पीला के सम्भोग करती फिर आखिरी में मार कर उनके स्वादिस्ट मार्श की दवात उड़ाती ...... उनके सबसे प्रिये घोस्ट उनका लिंग और विरए भरे टट्टे होते हैं.

****तोह मलेस दोस्तों कभी रात में अकेली सुनसान जगह पर अनजान सूंदर स्त्री के जाल में मत फँस जाना, कहीं आप उनका शिकार न बन जाओ ( यह चेतवानी जनहित में जारी है) [img=22x0]

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रानी स्वर्णलता

मैंने उसके लबों को चूमते हुए कहा ," तुम्हारा असली रूप कोनसा है जब पिछली बार मिली थी एक आम स्त्री के साइज की थी और अब बिलकुल सुनहरी काया वाली विशाल आकर की जवान स्त्री ?"

दोनों बड़ी बड़ी चूचियां भी मेरे हाथ में नहीं आ रही थी ...... मेरे गाल को चूमते हुए सिसक कर बोली," पहले मुझे अपने लिंग से मीठा मीठा रास पीला दो तब सब उत्तर दूंगी मेरे ारयणणणण ".

में भी जोर जोर से उसकी चूचियां दबाता अब उन्ह पे टूट पड़ा ," कितनी मस्त और मीठी है..... पुछःह पुछठ सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप ...... सच्च में इन्हे से यह मीठा मीठा क्या निकल रहा है ...... दूध तोह नहीं है पर बहोत स्वादिस्ट है "....... उसके निप्पल भी 2 इंच लम्बे और एक इंच मोठे होंगे और चूचक का घेरा 8 इंच से ज्यादा का ...... एक एक चूची hi 8-8 कग की होगी ..... फिर उसका पूरा बॉडी वट hi मुझे 150 कग से काम नहीं लग रहा था ......

स्वर्ण तड़पते हुए मेरे खड़े लुंड का गरहसन अपनी योनि चेत्रे में पाकर ," Ufffffffffffff मेंनननन समझा दूंगी ाभीईई मुझे मत तदापोऊ मेरे स्वामीईई ....... मेरे ारयणणणण ".

मुझे भी ुष्पर तराश आ गया पर अपने लुंड के टोपी पे उसकी कटी प्रदेश की गर्मी जैसे आग सी लगी हो .......

मैंने फुर्ती से उसके ऊपर से उठकर साइड में सीधा लेटकर उसको कमर से घुमा के अपने सीने पे उल्टा बिठा के उसके चूतड़ों को ऊपर उठा के अपने जीभ से बड़ी बड़ी चिकनी मटकी सी पुष्ट गांड चाटने लगे .....

वह तोह बस मेरे खड़े लौड़े को विषमित से देखती रह गयी ," हाय कितना सूंदर है "...... और किसी शिकार बाज की तरह दोनों हाथों में दबोच के उसकी शकटाई और विशालता नापने लगी ......

स्वर्णलता ," ऐसा लिंग मैंने किसी मानव का नहीं देखा ...... कितना गोरा और लालम लाल है ...... यह ऊपर मोटा तुम्बा लाल सा खाने में कितना मीठा होगा ...... पुछःह पुछठ सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप ...... "

मैंने ने उसकी बात सुनी तोह उसके उलटे चूतड़ पे काट लिया ," अगर खाने की सोची भी तोह उठ मेरे ऊपर से...... तू मोती भैंस मेरे लौड़े को खाने के चक्कर में है ".......

स्वर्ण ," सीईईई काट क्यों रहे हो ..... में बस बता रही थी ..... हाय कितना प्यारा है इसे तोह में जीवन भर प्यार करुँगी ...... तुम्हारे अंडे भी स्वादिस्ट होंगे "..... उसने मेरे दोनों ाँद एक हाथ से उठा के तोलने लगी कितना वजन होगा .

अब मुझे साया ,चाय और माया की बात याद आयी बहनचोद िश में भी दानव खून है उनकी तरह और ऊपर से वह मानव मार के उसके तटों और लुंड खाकर खुश हो जाती थी ......

मैंने एक दम से उसको पलट के अपने निचे लिया और जबतक वह कुछ समझती मैंने अपना लुंड अपने हाथ में लिया और उसकी मोती मोती चूची पे अपने चूतड़ टिका बेथ के बोलै ," देख स्वर्ण तुम रानी हो अपने राज्य की पर िश बिस्टेर पे मेरे साथ एक स्त्री हो और में एक पुरुष तोह हम काम क्रिद्या दिल से एक दुसरे को पसंद करते हैं और प्रेम भी इशलिये करेंगे. मगर अगर तुम सोच रही हो की काम क्रिद्या के दौरान या उसके बाद तुम मेरे लिंग और ांडो को खाओगी तो भूल जाओ की में तुमको प्रेम करूँगा ".

मैंने यह कहकर उठने लगा तोह उसने मेरा लौड़ा पकड़ के बोलै ," ारीयीय में बस मैं के विचार बोल रही थी और मुझे पता है आपकी कितनी पत्निया होगी उनका क्या होगा ...... बस हम मानव की गंध ,उनके वीरशण और लिंग के दीवाने हैं तोह ऐसे विचार मान में आते है. आप बेफिक्र रहो में बस िश सूंदर लिंग से पहले स्वादिस्ट विरए पीना चाहती हूँ ".

मुझे अभी भी विश्वास नहीं हुआ तोह बोलै ," पहले अपनी दोनों बड़ी बहेनो की कसम खाओ ".

स्वर्ण मुस्करा के ," दोनों दीदी और िश सुन्दर लिंग की कसम"....... और मोह में लेकर टोपा चूसने लगी ..... सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप ".

साली का मोह था या आग की भाटी बहनचोद बहोत गरम गरम जीभ थी पर चूमते हुए तो नहीं लगी ...... मैंने उसको रोका और पलट के उसके ऊपर आकर अब उसकी योनि को पहली बार देखा ..... वह बड़े मजे से मेरे लौड़ा चूसने लगी और ांडो से खेले लगी ...... अह्ह्ह्हह मजा आ रहा था..... ऐसे लुंड तो किसी ने नहीं चूसा आज तक जैसे वैक्यूम क्लीनर की तरह उसका मोह मेरे लुंड की डीप सकिंग कर रहा था ......

मैंने ुश्कि योनि देखि तोह पूरी चिकनी थी पर कलर से थोड़ी सुनहरी या स्किन कलर की टिन्ज लिए हुए ...... ऊपर फूली हुयी फेंकूदि और लम्बा बांध 8 इंची का चीरा बता रहा था की यह घेरि भी होगी ...... उसके अंदर से तरल रास निकल रहा था जोह लाश लसदार हल्का ग्रेइश टिंच कलर का बहोत hi तीर्व माधोसी चढ़ने वाली गांध उक्त था ...... मैंने जैसे hi योनि पे अपनी ऊँगली फिरा के उसकी घेरि नाभि छाती तो कंपकापति अपनी मसल झाँगिए उठाने लगी गऊओऊ गऊओऊ करती क्योंकि मेरा लौड़ा उसके मोह में था ......

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2 मं तक नाभि चाट के मुझे लगा की यह झड़ने वाली है तोह सीधा उसकी योनि के होंठ अपने होंठो से सर घूमा के पकड़ ली और जीभ से कुरेदने लगा .......

अपनी कमर हिला हिला के उसका मुखछोडन करता दोनों भरी चूतड़ थाम के उसके चरम उत्कर्ष पाते hi फुवारे को सीधा अपने घेंट के अंदर पाकर चटकारा मार मार के पीना लगा ...... 2-3 मिनट्स तक खूब योनि का जूस पीकर मैंने मोह हत्या और अपनी कमर उठाई तोह उसने फिर सकिंग स्टार्ट कर दी ...... कमाल की औरत है यह तो ......

स्वर्णलता अपने मैं ," कितना जोशीला और कड़क लिंग है आर्यन का , कितना मजा दिया मेरी योनि को चूस कर , सही कहा था रानी हेमा ने पूर्ण नर hi मुझे संतुस्ट कर सकता है और आर्यन वही है मेरे सच्चा साथी ..... बहोत स्वादिस्ट है लिंग कितनी डिअर होगयी पर अभी तक मीठा मीठा विरए नहीं निकला अब तोह मेरा मोह भी दुखने लगा ...... इश्के अंडे चूसती हूँ ...... "

मेरे ांडो की मोती बड़े बड़े अमरुद के साइज की गूटी भी जब पूरा मोह में लेकर चूसने लगी तोह मेरे मुख से भी मस्ती की घुरहाट निकली," अह्हह्ह्ह्ह मेरी रानीईई क्या जादू है तेरे मोह में"....... और लपक के उसकी योनि की खुदाई अपनी जीभ और लबों से करने लगा ...... मेरे आँखों में मस्ती की दूर बढ़ रहे थे और दिल खुसी से बालियान उछाल रहा था ...... थिस इस थे बेस्ट ब्लोजॉब ी म गेटिंग उप तो नाउ ...... मेरा एक फट से लम्बा आज लौड़ा हो गया था और साइज में 6 इंची मोटा होगा पर पूरा हलक तक लेकर पूरी सिध्दयत तक स्वर्णलता चूस रही थी .......

(*****यह ुष शीतल पेय का कमाल था जोह मुझे बाद में पता चला ...... ुश्मे कैनाबिस के साथ कई जड़ी बूटी मिलायी जाती हैं मानव को माधोसी में झूमने के लिए )

करीब आधे घंटे बाद तक हमने िश 69 पोजीशन में ऊपर निच्चे पलट पलट के एक दुसरे के जननांग चूस चाट के पूरे गरम कर डाले तबतक 4 बार ुश्कि योनि का रास में पी चूका था.

मैंने अपने तटों का उबाल देखकर उसको साइड में किया और घुटनो के बल सीधा स्वर्णलता को बिठाकर खुद खड़े होकर उसका सर थामे अपने फूलते लौड़े से उसका मोह पेलने लगा ," हूंणंन्न त्यार हो जा रानी ....... तुझे जूस पिलाता हूँ बस अपने दांत दुर्र रख पूरा मुख खोल दे ...... यह ले गुरररररररर यह ले स्वर्णाआआआ पीई जाआआ ".

एक के बाद एक 3 पिचकारी उसके गले से निच्चे उतरने के बाद मैंने लुंड टोपी तक खींचा और उसके मोह को भरने लगा ..... साला यह लुंड आज कितना बड़ा और मोटा हो गया है ?...... भेनचोद मेरी बीवियों और लवर्स क्या होगा? ...... वह सब कहीं मर्डर hi न जाए ?......

स्वर्ण खुसी में आँखों से आंसूं भाति मेरे ांडून को सेहलती रास चूसे जा रही .....

जब मुझे लगा की खली हो गया तोह बिस्टेर पे बेथ गया फिर लेट गया ...... स्वर्ण ने अपनी थोड़ी और गर्दन से ऊँगली पे विरए को लेकर चाट लिया......

अब पलट के निच्चे झुकी और फिर से मेरे लौड़ा को अपनी जीभ निकाल के चाट चाट के साफ़ करने लगी और ांडो को सेहला के एक एक बूँद किसी खनन मजदूर की तरह निकले लगी ...... मुझे लगा यह तो मेरे लुंड का पीछा hi नहीं छोड़ रही है इतनी डिअर से मोह में था फिर भी इसको और चाहिए ......

मैंने कहा ," स्वर्ण रानी मुझे वह शीतल पेय पिलाओ जोह हंसिका ने पिलाया था ".

स्वर्णलता ने मोह हटा के कहा ," वह हम मांश को फैलने के लिए पिलाते हैं उसकी आपको जरुरत नहीं है मेरे स्वामी ".

मैंने उसका ध्यान लुंड से हटने के लिए अपने ऊपर खींच के लिटा लिया सच्च में वह भारी भरकम थी पर उतनी hi अच्छी भी ," कोई बात नहीं पर स्वामी और आप तोह मत कहो में अपनी औरत को tu-tadak करके hi प्यार करता हूँ चाहे कितनी बड़ी उम्र की हो फिर तुम तो रानी हो ".

स्वर्ण मेरे गाल पे चूम के अपनी कड़क छातियां मेरे सीने पे रगड़ती बोली," अब आपसे विवाह हो जायेगा तोह आपकी औरत बन जाउंगी. आप को आदर से बोलूंगी हाँ बिस्टेर में tu-tadaak मुझे भी पसंद आएगी जैसे हम बहोत पुराने प्रेमी हो ".

मैंने उसकी शादी की बात पे पुछा तो मेरे लुंड पे अपनी योनि रगड़ती बोली," हमारे यहाँ शादी पंडित या राजा नहीं करते बल्कि हम खुद अपना वर चुन के उसके साथ प्रेमभाग करके बताते हैं सबको की हम पति पत्नी है. या फिर किसी औरत को कोई नर युद्ध में जीत ले तब भी हम उसकी औरत बन जाते हैं ...... फिर आप ने तोह जीता भी है हम तीनो बहेनो को और मुझे तोह प्रेम भी किया है ".

मेरे मैं में कई विचार थे पर मैंने अपनी रानी माँ की बात सोचकर अपनी बात राखी ," अच्छा फिर त्यार हो जा स्वर्ण रानी िश महल का सबसे बड़े आलीशान कक्ष में तुझे तेरी दोनों बहेनो के सामने प्यार करूँगा बोल मंजूर है मेरी रानी ".

स्वर्णलता की आंखें ख़ुशी से खुली रह गयी ," आप उन्दोनो के सामने प्यार करोगे तो मुझे बहोत खुसी होगी ".

एक दुसरे को थोड़ी डिअर चूम के हमने अपने विस्तार डाले और हाथो में हाथ लिए चल दिया िश अटाला लोक की रानी पुष्पलता के राजशाही कक्ष में ......

हमको जोह दास दासी दीखते वह झुकार प्रणाम करते पर हम कहाँ किसी पे ध्यान दे रहे थे ...... थोड़ी डिअर में हम एक विशाल द्वार से अंदर प्रवेश कर गए बहार खड़े सैनिकों ने भी नहीं हमको रोका स्वर्ण की वजह से.

एक के बाद एक 4 आलीशान कक्ष के बाद हम वहां पहुंचे जोह विशाल , सर्वशेरस्थ और ऐश्वर्ये से भरपूर था ...... वहां िश समय कोई नहीं था तोह स्वर्णलता मुझसे लिपट गयी और बोली ," हम यहीं प्रेम करेंगे जल्दी hi दोनों दीदी भी आ जाएँगी पर उनके आने से पहले मुझे प्यार कर लो कहीं वह मेरा हक़ न मार लें ".

मैंने उसकी बात सुनकर हँसा ," है है है है ...... ऐसे कोई मुझे मजबूर नहीं कर सकती हाँ अगर तुम्हारी मर्जी हुयी तोह उनको भी तुम्हारे साथ इसी बिस्टेर पे पटक पटक के ऐसा रगड़ दूंगा की एक महीने तक बिस्टेर से उठ न पाएं ...... में जिसको प्यार करता हूँ स्वर्ण रानी उसको जान से ज्यादा प्यार करता हूँ और जिसको पसंद नहीं करता उसको पास भी नहीं फटकने देता ".

हम दोनों बिना देरी किये नंगे हुए और 2 मिनट एक दुसरे के अंग चूस के गीले किये ......

मैंने जब गॉड में उठा के खड़े खड़े hi स्वर्णलता को अपने खड़े लौड़े पे बिठाया के एक जोर्का धक्का मारा तोह आधा लौड़ा उसकी योनि में घुस गया ...... "मररररररर गईइइइइइइ ारयणणणणणण ...... रुक जा...... दीदी बचाऊऊऊ ...... मररररररर जाउंगी ...... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ुर्घह्ह्ह्हह्ह "

में भी हैरान था जब ऊँगली डाली थी छूट घेरि थी पर अब इतनी टाइट कैसे है ...... और यह इतनी तंदरुस्त और बड़ी औरत होकर कुंवारी की तरह रू hi नहीं चीख रही है ......

मैंने तेज़ कदमो की आहात सुनी तोह अपनी अदृश्य लोटस शील्ड लगा दी ," हरामज़ादी तू क्या कुवारी है जोह ऐसे चीख रही है ..... "

स्वर्णलता रूट हुए मेरे गले में बाहिएँ डाले बोली ," हाँ यह पहला लिंग है जोह मेरी योनि में गया है बहोत दर्द हो रहा है ...... आप परवा मत करो मर्द का काम hi औरत की चीखिआ निकवाला देना सीईइईसीईई अह्ह्ह्हह ...... अब जोरसे धक्का मारना ारयणणणण ..... आगे रास्ता संकरा होगा तुमको भी थोड़ा दर्द होगा बहूऊऊऊह्ह्हह्ह ...... माररररररओओओओओ पूरीइइइइइइइ ताकाटट्ट्ट्ट से".

मैंने भी अपनी पूरी ताकत अपने गांड तक जोर लगया और थोड़ा लुंड खींच के पेल दिया ...... घचाकककक घचाककककक ..... "अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कट्ट्ट्ट गया मेरा लौदाआआआ ....... हरामजादी कुटिया छूट में क्या आरा मशीन लगा राखी ...... भें की लौड़ी अपनी छूट ढीली छोड़ ...... अह्हह्ह्ह्ह कुट्टियाआआअ...... रनडीईईईई की पिल्लीइइइइइइइइ " ....... मेरी हालत ख़राब थी जोह अनाप सनाप उसको गालियां बक रहा था और स्वर्ण की बेजान बॉडी देखकर पता चला कामिनी बेहोश हो गयी है......

उधर अदृश्य शील्ड के बहार दोनों रानियां वार पे वार कर रही थी तोह शील्ड ट्रांसपेरेंट होती उनके वार पे पर सेक् भर में hi अदृश्य हो जाती ...... उनको पता तोह चल गया हम सम्भोग कर रहे हैं तोह बाकी सबको भार कर दी ......

मैंने गुस्से से कहा ," ुल्ली की पत्तियों यहाँ मेरा लौड़ा काटता जा रहा है तुम हरामजादी हुम्ला कर रही हो ...... सामने बैठकर तमशा देखो वर्ण तुम्हारी भी कहिअर नहीं ".

तब सिटीथी समझते हुए रानी पुष्पलता ने जवाब दिया ," हम कुछ नहीं करेंगे मगर स्वर्ण कुवारी है ुष की योनि तुम्हारे लिंग पे पहली बार संकुचन से वार करेगी , इश्को होश में लाओ और जोश दिला के सम्भोग करो सब ठीक होगा ".

उन्ह दोनों के लिए एहि hi ख़ुशी की बात थी की मैंने उनकी छोटी भें की सील खोल दी थी जोह हज़रों साल में हुआ और ऊपर से मूर्छित यानी तगड़ा मर्द मिला है .....

मैंने शील्ड हटा के स्वर्णलता को ुष राजशाही बिस्टेर पे लिटाकर उसकी चूचियां चूसते हुए दे दाना 4-5 थप्पड़ मारे उसके गाल पर और लौड़ा दर्द के बावजूद और अंदर पेलना लगा .......

साला आज िश स्वर्णलता की पहाड़ न दी तोह मेरा नाम आर्यन नहीं ....... थोड़ी डिअर में उसको होश आया तोह ुश्कि योनि भी जकड़न खोलती चली गयी ...... रास भी बहाने लगी पर उसका रूना काम नहीं हुआ मगर अब मुझे अपना काम रूप दिखाना था की दोनों भेने देखो कैसे इसको अपना गुलाम बनता हूँ......

लुंड निकाल के उसकी चूचियां चूसी फिर लौड़ा दाल के धापा धपपपपपपप पेलने लगा ..... 2 बार झंडने के बाद उसका रूना बंद हुआ तोह उसको कुटिया बनकर उसकी दोनों बहेनो की आँखों में घूरता उसको पेलने लगा ," ले मेरी रानी ..... बता सबको तुझे मजा आए रहा है न ..... तुझे अपने साथ पृथ्वीलोक ले चलूँगा....... पूरे पृथ्वीलोक के सामने नंगी करके छोडूंगा ..... बहोत मस्त छूट है तेरी ...... "

दोनों रानियां नंगी होकर अपने अंग अंग मुझे दिखा के अपने पास आने को उकसाती रही पर मैंने सिर्फ स्वर्ण को प्यार कर उन्ह दोनों सजा देना था की तड़पना कैसा होता है ......

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दोनों सुन्दर स्त्रीयां महारानी के िश गोल्डन आलीशान कक्ष में दुर्र कुटिया पोज़ में नंगी हमको देख के ललचा रही थी और मैंने स्वर्णलता की योनि पूरी उधेड़ के अपना बीज भर दिया था ...... दो घंटों में स्वर्ण को बिलकुल पष्ट कर दिया .....

मैंने ुष मखमली बिस्टेर से उठकर दोनों रानियों की तरफ बढ़ा तोह दोनों के चेहरे पे चमक आ गयी ..... मैंने इशारे से दोनों को निच्चे बैठने को कहा फिर दोनों के मोह सामने अपने खून और virye-choot रास से साणे लुंड को उनके चेहरे के पास लेकर उनको सुंघा के वापस बिस्टेर पे स्वर्णलता के सर के पास बेथ गया और उसका लबों पे लुंड का टोपा टच किया तो वह आंखें खोल के खुसी से चूसने लगी ......

स्वर्णलता ," आर्यन मेरे मालिक क्या मेरी दीदी को प्यार नहीं करोगे? क्या उनको हक़ नहीं डोज जिन्होंने अपना सबकुछ तुम पे वार दिया है अब ? "

में ," नहीं इनकी सजा अभी ख़तम नहीं हुयी है, इन्होने ने मेरा अपमान किया मुझे बुरा नहीं लगा पर मेरी इतनी प्रिये हमदर्द दिल की रानी स्वर्ण का अपमान किया वह मुझे बर्दास्त नहीं ".

स्वर्ण ने पूरा लौड़ा चूस चाट के साफ़ करते हुए कहा ," अगर मुझे अपने दिल की रानी मानते हो तो मेरी बहेनो को वही दर्जा दे दो स्वामी हम हज़ारों वर्षो से तड़पे हैं ...... बस इतनी सी इल्तजा है "...... उसकी आँखों के आंसूं जैसे मेरे लिए hi ाहसीन थे ......

उसकी आंखें चूम के बोलै ," जोह तुम कहोगी प्रिये वही होगा पर मेरी भी एक गुजारिश है मैंने तुम तीनो भेने से बराबर एक साथ प्यार करूँगा इसी कक्ष और बिस्टेर पे ".

स्वर्ण ने जब दोनों की तरफ देखा तोह दोनों रूट हुए नंगी बिस्टेर पे आकर मेरे प्यार पकड़ने लगी ......

मैंने उनको पीछे करते हुए कहा ," क्या रानी साहिबा अपनी बेबसी और लाचारी कैसी लगी ?...... सच्च यह है में आप दोनों का वही सम्मान करता हूँ पर बिस्टेर पर नहीं कर पाउँगा और न कोई वादा करूँगा ..... हाँ स्वर्ण को जरूर अपने साथ ले जाऊंगा ".

स्वर्ण ने हिम्मत दिखा के दर्द के बावजूद भी मुझे अपने ऊपर खींच के कहा ," दीदी आज िश मानव को दिखा देते हैं क्यों हमारे पास आने से देवता भी डरते हैं फिर दानवों की क्या बिसात "........?????

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तभी मेरी सपनो की यादों को टूटने से आँख खुली ...... डॉली मेरे कान की lol काट के मेरे लुंड की सवारी कर रही थी मानेसर के िश फार्महाउस के बैडरूम में ....... उसके चेहरे पे दुनिया जहां की ख़ुशी थी दर्द होने के बावजूद ......

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डॉली

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अपडेट 38

Part - 3 (ा)

डॉली की आँख खुली तोह खुद को अपने बड़े भाई की आगोश में पाकर मैं hi मैं मुस्कराने लगी," हाय!!!! ..... काश हर दिन और हर बार में ऐसे hi भाई की बाँहों में सूने के उठूं.

आर्यन के लबों पे थोड़ा ऊपर खिसक के किश की तोह अपनी ताज़ी काली बानी छूट के दर्द से hi सिसकी निकल गयी......" सीईईई भाई ने कहाँ तक घायल कर दिया है मेरी कमसिन मुनिया को" .

अलग hi मज़ा था िश दर्द का भी जोह डॉली को जवानी आने के बाद आर्यन से चाहिए था..... अपना मैं कड़ा करती बीएड से उत्तरी क्यूंकि बहोत जोरसे सुसु आयी थी. बदली चाल के साथ बिस्टेर पे पड़ा टॉवल लपेट बाथरूम से फ्रेश होकर 15 मं बाद बहार आयी.

डॉली जवानी से लबरेज लड़की थी पर अब उसको ऐसा अहसास हो रहा था जैसे की अब आर्यन उसका पति है और आज उसका सुहागरात की जगह सुहागदिन हुआ कुछ घंटो पहले. लेकिन फिर सर झटक के यह तोह बस डेट थी जिस दिन सुहागरात होगी 24 घंटे भाई को मुनिया के अंदर hi रखूंगी.

सही गाना आया था मेरे लिए ," शादी तुझी से हो मेरी चाहिए शादी के दिन मर्डर जॉन ....... hi hi hi hi ...... चुद चुद कर ...... hi hi hi hi ...... यह लिखना भूल गए ".

कोई सोच सकता था यह मासूम सी दिखने वाली डॉली इतना कामुक लिए सोचती होगी.

(हाँ एक और थी इश्कि टक्कर की ठकुरियन सुचित्रा सिंह की इकलौती बेटी रूबी सिंह कामुक फंतासी वाली पर अभी वह आर्यन से दुर्र hi रहती थी शर्मिंदगी के कारन )

आर्यन नींद में जब बड़बड़ता "स्वर्णाआआ !!!!!! " बोलै तोह डॉली का ध्यान चादर में खड़े तोपची पे गया जोह झटका मार के चादर को तम्बू बना के हिला रहा था.

डॉली हस्ते हुए पहले तम्बू फिर आर्यन के सूंदर चेहरे पे दिलकश मुस्कान देखकर सोची ," ओह्ह्ह्ह भाई मेरी जगह किसी स्वर्ण नाम की लड़की के बारे में सोच रहा है ....... साली ,कुटिया मेरे प्यार पे नींद में कब्ज़ा जमाने की कोशिश कर रही है. अभी भाई को अपना प्यार देकर ुष कलमुही स्वर्ण की यादें तक मिटा दूंगी पर हरामजादी है कौन ?"

आर्यन ुष समय पतलोक की यादों के सपनो में hi स्वर्णलता को उसकी बड़ी बहेनो की आँखों में देखते हुए कुटिया पोज़ में चूड रहा था.

डॉली ने पहले अपना टॉवल उतरा और फिर आर्यन की बदन से चादर उठाकर उसके कड़क लौड़े को चूस के गीला की फिर अपनी छूट में ऊँगली करती रास छोड़ने के कगार पे लाकर ुष फौलादी तोपची पे छूट में लेकर दर्द होने के बाद भी बैठती चली गयी.

आधे लुंड पे 10 मं कूदने और एक बार डॉली के झंडे के बाद आर्यन की आंखें खुली.

वह अब अपनी पतलोक की यादों से बहार आ चूका था और डॉली को अपने लुंड की सवारी करता देखकर खुश हो गया.

आर्यन ने उसकी दोनों कातिल चूचियां दबाते हुए अपने ऊपर झुकार चूमने लगा ," पुछःह पुछठ ..... तेरा मैं नहीं भरा क्या डॉली बेबी ...... चुम्म्म चुम्म मुहह्ह्ह्ह...... ?"

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डॉली अपनी छूट को आर्यन के तोपची पे पटकते हुए ," अह्हह्ह्ह्ह सीईई bhaiiiiiiiiiii ाराममममम से ....... िश दर्द का भी अपना मजा है, आप मुझे प्यार करने दो फिर जितनी तेजी से करोगे मन नहीं करुँगी ...... ी लव यू भाई ....... "

आर्यन ने डॉली को लबों को चूमते हुए अपने एक हाथ से उसको गांड उछालने में मदद करता लुंड की सवारी करा रहा था ....... " ी लव यू तू डॉली बेबी , यू अरे सो सेक्सी एंड हॉट...... फ़क में बेबी फ़क में निकलय "...... डॉली अब दर्द भूल के अपना जोश दिखने लगी.

फिर बड़े प्यार से अगले 3 घंटे में आर्यन ने डॉली को 2 बार और चूड़ा इवनिंग तक.

डॉली की हालत बिगड़ गयी थी 3रद राउंड में पर दम था िश लड़की में और गजब का सात्मिना जिसका लोहा आर्यन भी मान गया ...... यह आर्यन की साड़ी होने वाली बीवियों में सबसे ज्यादा सहन्सक्ति वाली थी आखिर थी तो सबसे गरम औरत कविता मामी की सगी बेटी.

डॉली अपने िंह सुखद पल में जोह दर्द भी लिए थे पर प्रेम से सरोवर को स्वर्ण क्या किसी और लड़की या औरत का जीकर तक नहीं किया आर्यन से. वह बस अपने प्रेमसुख में hi डूबा रहना चाहती थी न की किसी ओरे कुलमुहि के नाम से जलना.

डॉली का मैं नहीं था आज वापस जाने का पर आर्यन ने उसको समझाया की वापस चलेंगे वार्ना सब परेशां हो जायेंगे.

डॉली थोड़ी उदास होकर ," काश िश जगह हम रोज रोज आते तोह कितना प्यार आप को देती".

आर्यन हसकर ," तेरा प्यार कोई जगह या समय का मोहताज़ नहीं है मेरी डॉली बेबी बस थोड़ा रुकना और कण्ट्रोल करना पड़ेगा शादी तक. चिंता मत कर हम फिर प्यार करेंगे पर जल्दबाजी नहीं अपने माहौल के साथ समय देखते हुए. ok अब मुस्करा दे "....... डॉली भी मान गयी अपने भाई की एडवाइस .

डॉली की आधे घंटे बॉडी मस्सगे और सूजी हुयी छूट की मरमत करके उसको एक घंटे का रेस्ट करने का बोल के आर्यन चला गया अपने दोस्त अजय से मिलने.

दोस्तों आपको याद होगा अजय ..... यह वही उसका सीनियर दोस्त है जिसने आर्यन को गुज्जर भाई नाम के गुंडे से मिलवाया था जब आर्यन अमेरिका से वापस आया था.

दोनों दोस्त गरम जोशी से गले मिले एक रेस्ट्रॉबर में तब आर्यन ने बात राखी ," यार मुझे वह तेरा फार्महाउस खरीदना पड़ेगा मेरी छोटी भें डॉली को पसंद आ गया है तोह बस रिक्वेस्ट hi कर सकता हूँ तुझसे ".

अजय ने एक धप्प आर्यन की पीठ पे मारा गुस्से से ," हरामी मुझे कोई बात hi नहीं करनी तुझसे. साले दोस्त न मानता तोह यहीं गोली मार देता. भाग जा यहाँ से वार्ना मेरा भेजा सटका न तेरी खेर नहीं ".

आर्यन को भी अपनी गलती का अहसास हुआ तोह उसको सर सर बोलते मानाने लगा लेकिन पक्का राजपूत था अजय 2-3 घूंसे मार के आर्यन की नौटाकणी बंद करवाया अपनी कड़ी नाराजगी जाता के कमीने कभी पैसा था hi कहाँ हमारी दोस्ती के बिच .

दोनों दोश्त जाम तकरते फिर बातों में मशगूल हो गए. अजय के लिए आर्यन छोटे भाई जैसा था, उसको आज भी याद है दिल्ली ीत इंजीनियरिंग के वह 6तह सेमेस्टर में था तब िश हैंडसम सांड जैसे आर्यन से पहली बार फेस तो फेस मिला कॉलेज कैंटीन में जब 8 सीनियर्स को पीटकर मुर्गा बना हुआ था .....

अजय बहोत रेस्पेक्टेड और गरम दिमाग़ का स्टूडेंट फ्रेंडली सीनियर था. गुस्से में आव न देखा ताव जाकर आर्यन का गिरेवान पकड़ के घुमा के एक थप्पड़ जड़ दिया उसके गाल ," तू फ्रेशर होकर अपने सीनियर्स पे अपनी ताकत का धौंस जमा रहा है ...... तेरा बाप का कॉलेज नहीं चाहिए तू कितना बड़े बाप की औलाद हो, याद रख अजय ठाकुर जबतक जिन्दा है किसी भी सीनियर्स या जूनियर पे अत्याचार नहीं सहेगा ...... घूर क्या रहा है निकल यहाँ से नहीं तू यहीं गांड तोड़ दूंगा. भाग यहाँ से दिखना मत मुझे जोह सीनियर्स का रेस्पेक्ट नहीं करता उसको में कॉलेज में नहीं रहने देता ".

आर्यन बस गाल पे हाथ रखकर उसको और बाकी सबको देखता रहा फिर अपना बैग टेबल से उठाकर कैंटीन से बहार निकल गया चुपचाप. सब हैरान थे की आर्यन ने अजय को कुछ नहीं कहा जबकि उन्ह सीनियर्स की बंद बजा दी जोह उसकी बैचमेट्स लड़कियों की रैगिंग के नाम पे बेइज्जती कर रहे थे.

ुष दिन अजय के बैचमेट्स ने डरते डरते कैंटीन के इंसिडेंट और आर्यन के बारे में अजय को बतया तोह उसकी भी गांड पहात के चार हो गयी .

साला किस से पन्गा ले लिया वह भी बिना सोचे समझे ...... इश्कि माँ इतनी बड़ी बिज़नेस टाइकून है और यह कंपनी का मालिक है इतनी सी उम्र में.

एक महीने तक आर्यन से डरता रहा अजय जब भी वह उसके सामने पड़ता पर आर्यन ने कुछ नहीं कहा और न hi कुछ किया.

8 महीने बाद एक कॉलेज के काण्ड ने अजय की जिंदगी बदल दी ...... ुष समय सिर्फ आर्यन ने उसकी मदद की पर एक महीने बाद 8तह सेमेस्टर में अजय ने इंजीनियरिंग छोड़ दी और अपने डैडी का बिज़नेस संभाल लिया. वह चाहता तोह बाद में भी 8तह सेमेस्टर कम्पलीट कर लेता लेकिन उसको ड्रॉपआउट का तमगा हमेशा अपनी क्वालिफिकेशन पे चाहिए था.

ात प्रेजेंट ..... आर्यन के मानाने पे अजय मान गया की यह प्रॉपर्टी गिफ्ट करेगा डॉली के नाम पर आर्यन ने उसको ऐसा hi एक फार्महाउस अपनी तरफ से वहीँ ुष एरिया में खरीद के गिफ्ट देने का वादा लेकर hi उसको जाने दिया.

अजय को आज भी याद है आर्यन की वह नीली आंखें उसके सामने रेस्पेक्ट में झुकी हुयी थी जबकि वह एक सेक् में उसको धुल छठा सकता था.

( *दोस्तों आर्यन के कॉलेज के किस्से भी आएंगे जब जाने हॉल इंडिया आकर ीत दिल्ली में रिसर्च प्रोजेक्ट ज्वाइन करेगी )

डॉली को वापस जाते हुए उसके गिफ्ट, Ajay's फार्महाउस खरीदने की बात बताई तोह उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा ...... उसके भाई ने उसकी फार्महाउस से दुखी मैं से जाते हुए देखकर ये बात केहि .

डॉली दर्द होने के बावजूद आर्यन की गॉड में चढ़कर बेथ गयी कार में और उसका गाल चूम के बोली ," भाई में ुष फार्महाउस को अपनी खवाबगा बानगी जहाँ सिर्फ हम दोनों प्यार करने आया करेंगे ".

अजय को ड्राइविंग करते कॉल आया ," पेपर्स डॉली के नाम बनाने हैं तोह कल मेरा अधिवक्ता आएगा उसके िदश और सिग्नेचर्स की जरुरत होगी ".

आर्यन ने अजय को एक बार और थैंक्स कहा फिर कॉल कट किया तोह डॉली पूछी ," भाई बहोत कीमत देनी पद रही है तोह रहने दो ".

आर्यन ने ड्राइव करते हुए उसका सर चूम के कहा ," मेरा दोस्त है न अजय उसकी प्रॉपर्टी है और तुझे फ्री गिफ्ट ुशी ने दिया है बस एक्सचेंज में एक हमारी प्रॉपर्टी उसको दे दूंगा. हाँ पर रख प्यारी डॉली बेबी के लिए प्रिस्लेस है सो don't थिंक अबाउट कॉस्ट ".

डॉली को प्रॉपर्टी के रेट्स का कुछ भी आईडिया नहीं था पर बिना को आर्यन ने जब अजय के पास था तभी कॉल कर दिया ..... 40 क्रोर्स ुष पॉश फार्महाउस की वैल्यू होगी और ुशी के जैसे फार्महाउस वहीँ आस पास खरीदने को बोल दिया अजय के लिए .

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सुबह 9 बजे ......

अनीता सिंह (अणि) के साथ उसकी लंदन की टीम बैठी थी िश फाइव स्टार होटल के कांफ्रेंस हॉल में जोह आज अर्ली मॉर्निंग hi दिल्ली पहुंची थी और जापान में प्रोजेक्ट पे फाइनल प्लानिंग के लिए आज ऑफिस में मीटिंग को फिनॉइज़ किया गया.

आज रात इसी होटल में सक्सेस पार्टी भी राखी गयी थी और इंडियन विप्स को भी गेस्ट्स बुला गया था.

अनीसा कंपनी की मालकिन मिस अनीता सिंह ने अपनी कोर टीम को बोलै जिस भी नए प्रोजेक्ट्स पे रतिदेवी की कंपनी वेंचर करेगी हम उनको चल्लेंजिंग बिड करेंगे इंडिया में हो या फॉरेन में.

तब कंपनी के पुराने सीईओ ने कहा ," मैडम थे अरे वैरी स्ट्रांग इंडियन रेसोर्स्फुल कनेक्शंस हेरे एंड आर्यन सर इस थेइर हेयर सो आईटी विल नॉट गोइंग तो बे इजी ".

अणि ," Don't वोर्री सर (सीनियर पर्सन) ी विल हैंडल हिम बूत यू आल don't फ़ैल इन योर part. आर्यन इस थे ओनली ओने व्हिच रेस्क्यू थिस वैरी कंपनी एंड एम्प्लाइज आल्सो ोथेरविसे इन्क्लूडिंग यू थिस 40 यरस ओल्ड ब्रिटिश कंपनी वास् हिस्ट्री. नई नाम एंड नई वेंचर्स विल हेल्प इन माय गाइडेंस तो रीच मोरे टुवर्ड्स it's जेनिथ ".

सब ने ब्रिटिश अंदाज़ में क्लैपिंग की िश इंडियन ओरिजिन युवा ओनर को जोह कहीं भी थिंकिंग और ऐटिटूड से इंडियन नहीं लगती थी.

अणि की टीम क्या यहाँ तक की लोअर से लोअर पोस्ट तक सब ब्रिटिश hi थे कंपनी में. ओउटसौर्सेड कंपनी प्रोजेक्ट्स इतर कंट्री की कंपनी करे पर अनीसा सिर्फ पुरे ब्रिटिश कंपनी hi रहेगी चाहिए कुछ भी हो जाये.

पिछले एक साल में कंपनी की प्रोग्रेस और प्रोजेक्ट्स वेंचर देखकर तोह ुक गवर्नमेंट भी बहोत खुश थी ..... अणि ब्रिटिश सिटीजन है और लंदन में मेडिकल की एजुकेशन के साथ उसने कंपनी को लोस्स से निकाल प्रॉफिट में पहुंचा दिया और उसके रॉयल ऐटिटूड वाली पालिसी के अँगरेज़ फैन hi थे.

उनको अपनी महारानी से ऊपर कोई नहीं लगता था पर जिसकी तारीफ के अब कसीदे पढ़ रहे थे वह खुद 5000 साल उम्र की पृथ्वीलोक की सबसे शक्तिशाली महारानी है कौन जानता था.

मगर खेल खेलना अणि को hi अच्छा लगता था. ब्रेकफास्ट और ब्रीफिंग के बाद सबको टाइम पे ऑफिस मीटिंग में आने का बोल के निकल गयी.

अणि करीब 11 बजे अपने नए बंगलो में सारू और नेहा के साथ पहुंची ...... जोह फॉर्मलिटीज बाकी थी वह उसकी सिक्योरिटी और सपोर्ट टीम पूरी कर रही थी, आज इवनिंग तक यह बंगलो वाइट हाउस से ज्यादा सुरकषित बनकर रेडी हो जाने वाला था. यहाँ तक की मैड्स से लेकर सर्वेंट भी ब्रिटिश थे. आखिर अपना पहला बेस भी इंडिया में अणि ने अंग्रेजों वाले स्टाइल में बांया...... नेहा को पूरी अथॉरिटी मिली थी इसी बंगलो की सिक्योरिटी की जोह खुद अणि की पिछले जनम में सेनापति थी.

11 बजे तीनो उसके ऑफिस के लिए निकल गए तब सारू ने कहा कुछ शॉपिंग करनी पड़ेगी नए बंगलो के लिए फिर कल पंडितजी को बुलवाना पड़ेगा पूजा के लिए .

अणि ," माँ यह मेरा मेन्शन रहेगा और यहाँ आज इवनिंग में चर्च से पादरी आएगा उसके बाद आप कल पूजा करवाना. हाँ बस आप नेहा के साथ अटेंड कर लेना यू क्नोव ी हैवे थे रेपुटेशन ".

सारू अभी कुछ बोलती तोह नेहा ने कहा," Don't वोर्री अणि वे विल हैंडल आईटी, यू फोकस ों योर वर्क. मुम्मा मुझे भी कुछ ड्रेसेस चाहिए आप मेरे साथ चलो ".

सारू थोड़ा सोचकर ," अणि तू उन्ह गोरों को उल्ला बना रही है न सिर्फ अपने को ब्रिटिश दिखा के ?"

अणि हसकर ," नहीं मां वह रोयलिस्ट हैं तोह उनको वही दिखा रही हूँ फिर यह मेरा मेन्शन है मेरा घर नहीं. मुझे वह घर अपने नाम चाहिए जहाँ में पैदा हुयी थी और भाई मान गया है मेरे नाम करने के लिए ".

सारू हैरान होते हुए ," यानी तू अपने डैडी के गाओं की हवेली की बात कर रही है अपने नाम करने की ".

अणि भी सारू के गाल पे किश की ," यस मुम्मा पर वहां आपकी चलेगी में कुछ अपना फैसला नहीं थोपूंगी ".

सारू कुछ बोलने लगी तोह नेहा ने उसके कंधे पे हाथ रखकर ना में गर्दन हिला के मन किया कुछ भी बोलने से .

अणि अपने ऑफिस उतर के सारू और नेहा को अपना क्रेडिट कार्ड देकर भेज दी शॉपिंग के लिए.

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नेहा को शॉपिंग के दौरान उसके पापा ैप देवेंद्र सिंह का कॉल आया लखनऊ से की वह होस्पिटलिज़्ड हैं और उनको दौरे पड़ते हैं..... " एक बार आकर मिल ले मुझे तुमको एक बड़ा सच्च बताना है किसी को मत इन्फॉर्म करना यहाँ तक की अपनी सारू मम्मी और आर्यन को भी नहीं. बेटी इश्से पहले कोई मुझे मार दे प्लीज एक बार आखिरी बार मिल जा सायद में न बचूं".

नेहा भी अपने पापा के लिए कंसर्न होकर अणि को फ़ोन करके लखनऊ जाने के लिए बोली तोह उसने मन किया पर अपनी दोस्ती का वास्ता देकर मन ली की मेरे साथ सिक्योरिटी भेज दे बाकी कोई मुझे जाने नहीं देगा.

अणि को पता था की नेहा का जाना भाई को गुस्सा दिला देगा वह जरूर लखनऊ जायेगा िहसके पीछे पर उसको पता था सांप भी मर्डर जाये और लाठी भी न टूटे कैसे प्लान करना है.

उधर सच्च में देवेंदर सिंह मौत और जीवन के बिच झूल रहा था उसको पतलोक की उन्ह दानव कन्यों का डरावना चेहरा बार बार याद आता जिन्होंने उसके हिताशिओं को उसके सामने मार मार के खा डाला वही मंजर हमेशा देखता था और डर कर बेहोश हो जाता.

सिक्योरिटी अफसर से सस्पेंडेड होने का दंश झेलता सिक्योरिटी अफसर हेड ऑफिस से हॉस्पिटल तक पहुंच गया बिगड़ी तबियत की वजह से. न कोई दवा असर करती न दारु hi.... हर पल उसको अपने पास उन्ह तीन दरवानी दानव कन्याँ नज़र आती जोह उसका शिकार करने भर की देरी में थी.

आशा की एक किरण अपनी बेटी नेहा दिखी जिसको वह हमेशा बेटी मानता था उसके जनम का राज जान्ने से पहले फिर नियत भी ख़राब किया था आर्यन और मंजू से बदला लेने की वजह से पर पिछली बार जब नेहा लखनऊ उससे मिलने आयी थी, इतनी स्ट्रांग स्लीपिंग दोसे देकर भी नेहा को जूस में पिलाकर उसको हवस का शिकार नहीं कर पाया था अणि के शक्ति कवच की वजह से...... यह बात आज तक अणि और मीणा के अल्वा कोई नहीं जानता था यहाँ तक नेहा भी नहीं.

नेहा को अपने पापा पे दया hi आयी की वह उनकी बेटी नहीं है पर मेरे पापा किसी औरत यानी डॉ सलोनी मौसी के साथ गलत नहीं करेंगे. अब नेहा की टेस्टिंग का टाइम था जोह अणि चाहती की नेहा खुद फेस करे .

अणि ने कहा ," आज रात मेरी पार्टी अटेंड करने के बाद सुबह जल्दी निकल जा में चार्टेड प्लेन से भेज देती हूँ. इतना नहीं करेगी मेरे लिए ? ...... आज रात हमला होगा उन्ही लोगों का जिन्होंने में मुझे किडनैप किया था जापान से. आज तुझे hi सब संभालना होगा मेरी प्यारी भें मगर अदृश्य hi रखना िश हमले को और कोई जिन्दा न बचे".

अणि चाहती थी नेहा खुद सच्च जाने, उसकी पावर अणि ने खोल दी थी पर पूरी तरह नहीं..... मगर अब टाइम आ गया था की नेहा जैसी पावरफुल योद्धा उसके साथ हो न की रति के क्योंकि नेहा को अणि की तरह रति बहोत प्यार करती थी.

अणि जानती थी प्रभा ुष की साइड नहीं आएगी वह रति और आर्यन के साथ रहेगी चाहे वह अणि को अपनी फेवरेट क्यों न मानती हो.

फिर रति के पास Dimple-Payal जैसी पगलेट तातकवर लड़कियां थी जोह आर्यन को एक सेक् में मुर्गा बना के कण्ट्रोल करें. मीणा वहीँ रहेगी जहाँ आर्यन है उसको किसी की हार जीत से मतलब नहीं.

सारू मम्मी और मंजू माँ मेरे साथ hi रहेंगी. यानी अब खानदान के बचे मर्दों को भी अपनी तरफ करना होगा पर भाई की वजह से भाई की कोई मम्मी मेरी तरफ तोह बिलकुल नहीं आएगी .

नेहा भी उसकी बात मान गयी की कल सुबह निकल जाउंगी और देवेंदर सिंह को कॉल करके बता दी. अब नेहा लग गयी आज रात की प्लानिंग और सुरक्षा कवच त्यार करने. उसने आश्मान hi युद्ध चेत्रे बनाने का फैसला किया.

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रात 10 बजे ......

िश ग्रैंड 5 स्टार होटल में आर्यन दो दिल्ली की जानी मानी बिज़नेस वीमेन के साथ एंटर किया. एक तरफ रति और दूसरी तरफ डॉ अंजू थी, दोनों डेसिंगेर साड़ी में क़यामत लग रही थी वहीँ आर्यन एक ब्लैक टुक्सेडो सूट में सबकी छूट और मोह गीला करवा रहा था अपने चरम से. सारे फोरेइग्नेर्स गेस्ट भी उसकी हॅंडसमेनेस्स के आगे फीके लग रहे थे .

अणि सब कुछ छोड़कर ुष बैकलेस सिंगल स्ट्राप गाउन में उनके पास आकर रति के प्यार छूने लगी तोह उसने गले लगा के कोंग्रटुलतिओन्स कहा गाल चूम के. वैसे hi डॉ अंजू ने भी किया पर आर्यन के गले लगकर उसका गाल चूम के हाथ पकड़कर अंदर ले गयी.

आर्यन भी अपनी छोटी भें की ख़ुशी में शामिल होता सब विप गेस्ट्स से मिलने के बाद ुष की तरफ चल दिया जोह पिछले आधे घंटे से उसका चैन और होश उड़ाए हुए एक इंग्लिश गाउन में थी .....सारू

आर्यन जब फ्री होकर उसके पास पहुंचा तोह कसकर बाँहों में लेकर उसके गालों पे किश hi नहीं की बल्कि पल भर के लिए चूस के बता दिया की वह तड़प रहा है अपनी मम्मी के लिए.

सारू को अब डर लगने लगा की कहीं यह मेरी ड्रेस पहाड़ के सबके सामने शुरू न हो जाए. क्या डॉली भी इश्को शांत नहीं कर पायी जबकि ुष मासूम सी लड़की को अंडर तक उधेड़ दिया होगा .

सारू की छूट कल रात इसी होटल में छुड़वा के अभी भी हल्का दर्द कर रही थी पर गीली होने से कौन रोके जब आर्यन सामने हो..... एक बार आपने घर की लड़कियों और औरशन पे नज़र मार के आर्यन के कान बोली ," 10 मं बाद ुशी सुईठे में आ जाना जहाँ कल रात थे जा बाकी सो मिल ले".

आर्यन खुसी से अपनी मम्मी सारू का गाल चूम लिया ..... " थैंक्स, यू ओनली लव में माँ ".

अणि फिर आर्यन को पकड़ के अब सब ब्रिटिश एम्बेसी वालों से मिलवाने लगी यह कहकर ," कोई भी इंडिया में काम हो कॉल माय बरोथेर हे विल दो फॉर क्राउन".

आर्यन के बारे में जोह जानते थे की यह किसी के बाप नहीं सुनेगा पर अणि बोल रही है तोह ब्रिटिश इंटेलिजेंस के लिए वफादार बना रहेगा .

उधर िश पार्टी की लंदन में लाइव फूटगे चल रही थी और इंटेलिजेंस वाले भी बोल रहे थे हमको अनीता सिंह को फुल सपोर्ट देना चाहिए आर्यन कभी हमारे बहार नहीं जायेगा.

वहीँ अमेरिकन्स से लेकर बाकी दूसरी एजेंसीज को आर्यन का इतना प्रो ब्रिटिश होना पसंद नहीं आ रहा था सिर्फ अनीता सिंह के लिए.

अभी तक इंडियन इंटेलिजेंस के अल्वा अनीता के बारे में कोई कंट्री नहीं जानती थी की वह जोह कर सकती है आर्यन कभी नहीं कर सकता. मर मालिक के हिसाब से आर्यन परफेक्ट है 10 नंबर देता हूँ पर अनीता के लिए 10 का स्केल hi बेमानी है. यह लड़की खुद चलती फिरती फौज है. उसकी सुंदरता देखकर सब दीवाने हो जाते हैं और प्यार करने लगते पर 4फट की दूरी से hi उसको मिलना पड़ता हाथ मिलाने के लिए और अगर मीठा बोलने लगी तोह तुमसे खुद तुम्हारी गर्दन तक कटवा देगी.

यहाँ होटल में पार्टी चल रही थी और उधर होटल से 2 कम ऊपर आसमान में नेहा पूरे सुनहरी कवच के साथ तलवार और ढाल लिए अपने 50 सुनहरी योद्धा की टोली के साथ चीन, ेगीपत और ग्रीस के अन्सिएंट वर्ल्ड से आये 3000 हज़ार साल पुराने 250 दुश्मनों के अटैक को विफल करती एक एक को परलोक पहुंचा रही थी.

एहि hi नेहा का असली रूप था अपनी बड़ी भें महारानी विजयलक्ष्मी और राजा को प्रोटेक्ट करना. वह पूर्ण सेनापति के अवतार में थी अगर कोई आम आदमी उसको और उसके सैनिको को देख ले तोह वहीँ डर के मूट दे .

दिल्ली सेहर के लिए आज गंगूर बारिश होने वाली थी आखिर आश्मान में बिजली कड़क रही थी..... सिर्फ पानी की बारिश क्योंकि नेहा ने सबका खून बहा कर भी एक बूँद नहीं गिरनी दी गोल्डन शील्ड के कारन .

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पुराण जंगल ........

निशांक गुरूजी हाथ जोड़कर पूछे ," गुरूजी आर्यन तोह पतलोक से भी इतनी शक्तियां पाकर अनभिग hi लग रहा है?"

बड़े गुरूजी ( विशाल पेड़ ) मुस्करा भर दिए ," तुम ने पतलोक की ुष की स्त्रीओं का नहीं पुछा ?"

निशांक थोड़ा सीरियस होकर बोले," वह सक्षम है किसी भी लोक की स्त्रीओं को नियंत्रण (पटाने में) करने में..... वहां दानव क्या ुष ने नागिन तक नहीं ठुकराई अपनी वासना मिटने के लिए ".

बड़े गुरूजी मुस्करा के ," तुम जितना उसको घिरना की दृष्टी से देखते हो उतना hi उसके लिए चिंतित भी होते हो. फिर जब तुम्हारे साथ था कभी किसी मादा के लिए लालायित रहा हो? नहीं न ?"

अब निशांक भी थोड़ा व्यंग से ," पर राक्षस और नागों की स्त्रीयां सिर्फ शक्ति पाने के लिए चाहिए तभी सम्भोग किया होगा पर ुष से अच्छा महारानी विजयलक्ष्मी के सनिध में आ जाये उसको किसी की और से शक्तियों की जरुरत नहीं होगी".

बड़े गुरूजी ," फिर यह कार्य तुम hi करो".

निशांक भी चिढ़कर ," गुरूजी मुझसे ज्यादा प्यार तोह आर्यन की कोई माँ भी नहीं करती होगी उसको. मेरा गुरु भाई था पर मैंने हमेशा उसको गलत माना पर अब दुबारा गलत होते hi देख रहा हूँ. पिछली बार नहीं मांग पाया की उसकी मौत न देखूं पर िश बार बोलता हूँ वह नरक में भी होगा तोह वहीँ मिल आऊंगा पर उसको मरते नहीं देख पाउँगा िश दिव्या पुंज रूप में भी नहीं ".

बड़े गुरूजी ने जोह बोलै उसके बाद निशांक जैसे शांत hi हो गया ," वह तब न गलत था जब उसके साथ दुरवहावर हुआ सोचो वह 4 साल का बालक था फिर न तब गलत था जब तुम्हारे आशाराम में अपनी सगी माँ लक्ष्मी ( महारानी मिरदुला) को फ़ेंक के चला गया तुमको बोल के मौज ले ?"

"िश जनम तुम तो सबसे बड़े साक्षी हो तुम्हारी मिर्त्यु के समय मैंने hi बुलाया था पर वह लेट हो गया..... याद हे जब पहली बार ुष ने अकेले तुम्हारे सरीर को सिर्फ 16 साल की उम्र में प्रोटेक्ट करते हुए कितनी बुरी आत्मा से लेकर पिशाच, चुडिअल , नरभक्षी , चांडाल और बहरूपिया धारण कर लेते ..... याद करो गिनती करोगे तो 40 लाख से जाड़े होंगे पर देखो सब उसके गुलाम हैं उसके अंदर, बहार तभी आएंगे जब वह चाहिए ".

निशांक थोड़ा खुश होता ," फिर गुरूजी वह पक्का ुष 6तह आत्मा अंश की वजह से होगा, आपने आजतक नहीं बतया उसके अंदर कौन है ?"

बड़े गुरूजी के प्रीतिबिम्ब ने आंखें बांध करके कहा," वह जान्ने का हक़ अभी तुमको नहीं है पर एक बार जरूर बाटूंगा ".

निशांक बस सोचता रह गया की अब महारानी को क्या जवाब दूंगा में अभी तक गुरूजी से पता नहीं लगा पाया...... ????

बड़े गुरूजी ने आज अपनी शक्ति की नीली किरण दाल के अस्टधातु बक्सा खोल दिया और ुश्मे से निकला काला धुन सा एक दरवानी आकर्ति लेकर बोलै ," धन्यवाद् गुरूजी मुझे आशीर्वाद दिज्ये में ुष महार्यं को मार सकूँ ".

बड़े गुरूजी ने हाथ दिखा के कहा ," में सिर्फ लड़ने का अवसर देता हूँ जीतना तुमको खुद होगा. अपनी शकितयाँ बढ़ो जल्दी hi तुम्हारा समय आएगा जीतने का ".

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आर्यन का हाथ अपने हाथ में लिए अणि बड़े प्राउड से सबसे मिलवाकर जाता रही थी देखो भाई मैंने आपकी दी कंपनी कितनी आगे बढ़ा दी. अणि की क़ाबलियत या जिगशा आर्यन के लिए कभी विषय hi नहीं था क्योंकि उसको अणि हमेशा अपने से ज्यादा काबिल लगती थी.

पुराणी बात है ( आज से 8 साल पहले).......

एक बार आर्यन ने अपने नानाजी राजवीर सिंह से उनके साथ खेतों में काम करते हुए बोलै था ," नानजी में क्यों सबका वारिस बन गया जबकि अणि तो मुझसे भी अच्छी है हर चीज में? में नहीं बनना चाहता यह महापंचयत या अपने तीनो खानदान का वारिस".

राजवीर सिंह ने सहतूत (मलबरी) के छोटे पेड़ को जड़ दो हिस्से में काटा और एक गन्ने की खेत की मुंडेर पे दूसरा सरसू के खेत की मुंडेर में गद्दा खुद के गाड़ दिया...... " जिस दिन िंहपर सहतूत लगये खुद खाकर जान जायेगा बीटा की तुम दोनों एक hi तरह हो पर क्यों अलग ?".

आर्यन बोलै ," िश में तोह 7-8 साल लग जायेंगे जबतक पूरा पेड़ विक्षित होकर असली सहतूत दे ".

राजवीर सिंह ," फिर ुशी दिन जवाब मिलेगा तुझे ..... अणि हमेशा hi तुझसे ऊपर रहेगी पर उसको वह दर्जा कभी किसी से नहीं मिलेगा जोह तुम पा सकते हो".

आर्यन हैरान होकर ," ऐसे कैसे कोई मेरी छोटी भें को दर्जा नहीं देगा, में ऐसा होने hi नहीं दूंगा ".

राजवीर सिंह ," फिर जब उसको अपने जैसा बनाना चाहता है फिर एक और उसकी दूसरी माँ भी बनवा दे ..... वह सारू के अल्वा किसी को अपनी माँ नहीं मानेगी".

आर्यन ने अपने हाथ से राजवीर के फॉले को मेध बनाते हुए रोक के बोलै ," आप मेरी किसी भी माँ को ऐसा नहीं बोल सकते चाहिए आप मेरे नानजी hi क्यों न हो वह सब अच्छी हैं".

राजवीर सिंह अपने नाती का अपने माओ और परिवार के लिए लगाव को देखकर बहोत खुस हुए पर कड़क आवाज में बोले ," इशलिये में अणि को तुझसे ज्यादा प्यार करता हूँ वह कितनी अच्छी है ".

एहि बात ुष समय खेत पे आती रति, सारू और गीता ने भो सुनी थी जोह राजवीर ने आखिरी लाइन बोली की वह अणि से सबसे ज्यादा प्यार करता है ...... तीनो के लिए अलग hi अहसास था .....

रति ..... मेरे से ज्यादा आर्यन को कोई प्यार नहीं करता

सारू ...... आर्यन को तोह सब प्यार करेंगे पर अणि की केयर में hi ज्यादा करुँगी कभी भी.

गीता ..... यह बहोत अच्छा है बापू के लिए की आर्यन बाद में है अणि से और अब में अपनी माँ ( रति) को पूरा पता लुंगी तोह आर्यन माँ के लिए सेकेंडरी हो जायेगा .

लेकिन सबसे ज्यादा खुश तोह आर्यन था की उसकी छोटी नटखट भें को भी बहोत लोग प्यार करते हैं जबकि उसको पहले दिखावा लगता था...... कहने को सच्च आज भी नहीं बदला था, आर्यन से सब दिल से प्यार करते थे पर अणि से आज भी जरुरत वाला प्यार.

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होटल लक्ज़री सुईठे .......

आर्यन ुशी कल रात वाले सारू के सुईठे में अपनी मम्मी को बीएड के किनारे खड़ा करके झुका दिया और उसकी ड्रेस कमर तक उठा के उसकी थोंग को झांघो तक करके पीछे बैठकर छूट को चाटने लगा .

दोनों जानते थे की अभी टाइम काम है पर सारू ने सिषक्ति हुए कहा ," सीईईई अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण ...... ड्रेस ख़राब हो जाएगी अणि भी हमारे साथ डिनर करेगी..... मान जा रईईईई बाद में कर लेना अब चल वापस ".

आर्यन ने सारू के चूतड़ थपथपा के कहा ," बस 10 मं मुझे तेरी छूट की नमी अहसास करने दो नहीं तो मेरा लुंड पहात जायेगा ".

एक बार सारू की पीछे चूतड़ों के बिच से झांकती छूट को चूम के थूक दिया ...... िश से पहले की थूक निच्चे गिरता खड़े होकर अपनी पेण्ट की खुली चैन से बहार निकले लुंड का मोटा टोपा छूट के िरिद गिर्द पहले थूक को मलकर एक धक्के में आधा अंदर उतर दिया ......." अह्हह्ह्ह्ह मार hi डालेगा किसी दिन मुझे तू ह्म्मम्म्म्म रुक्खककक जरा "

सारू की खुली पीठ को झुकार चूमा तोह बोली ," No मोरे किसिंग ..... अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण ड्रेस hi नहीं मेरा गेटउप भी ख़राब हो जायेगा ..... "

आर्यन कहाँ सुनता 3 तगड़ा धक्के मार लगभग पूरा लुंड सारू की छूट में उतर के झुका हुआ उसका लेफ्ट कान चूसने लगा ," तेरी छूट hi इतनी मक्खन है साला लुंड फिसल जाता है मम्मी ...... ी लव यू माय डार्लिंग स्वीट हार्ट ..... पुछःह पुछठ ".

सारू की चीखिआ और सिसकियाँ गूँज रही थी ठप्प्प ठप्प्प फट्ट्ट्ट फट्ट्ट्ट की आवाज के बिच ...... क्या खाकर उसने घोड़े के साइज का लुंड वाला बीटा पैदा किया है ...... "हाय माआआआआ मरररररर gayiiiiiiiiii ...... ढेरी कररररररर ..... हॉँण्णन और तेजजजजजजज ..... "

दोनों माँ बेटे की मस्ती और चीख पुकार जैसे अब सब भुला दी की दोनों कहाँ हैं ......

दूर पे नॉक ने दोनों को चेत्या," मैडम, अणि मैडम आप दोनों को बुला रही हैं ".

बिना की बैडरूम के दूर के अंदर से आवाज सुन्न आर्यन को बहोत गुस्सा आया पर सारू का शर्म से जोश ठंडा हो गया ," अब बहार निकाल ले बाद में कर लेना बीटा तुझे कभी मैंने रोका है ".

आर्यन ने दो जोरदार धक्के मार के लुंड छूट से बहार निकला तोह सारू ने पहले hi निचे अपना रुमाल लगा दिया छूट पे की उसका रास निचे झांघो पे न बहे.

आर्यन का 15 मं में कुछ नहीं हुआ था पर सारू 2 बार झाड़ गयी थी ..... निचे बैठकर उसने सारू का रुमाल हटा के खुद छूट चाट के साफ़ किया ," सब मेरी ख़ुशी के दुश्मन है ..... मेरी जान को ठीक से प्यार भी नहीं करने देते ".

आर्यन ने सारू के रूमाल से अपना लुंड पहुंचा और पेण्ट के अंदर जैसे तैसे एडजस्ट कर लिया ...... सारू भी अपनी ड्रेस दुरुस्त करके रेडी हो गयी. आर्यन को किश करके बोली ," पार्टी के बाद नए बंगलो चलना पूरी रात प्यार करना ".

आर्यन ने कहा ," में सुबह आऊंगा आप परेशां न हो में ठीक हूँ ".

अपने लिप्स पे लिपस्टिक लगाती हुयी सारू ने कहा ," तुझे बुरा तोह नहीं लगा की में अणि के साथ रह रही हूँ ".

आर्यन मुस्करा के उसको पीछे से हुग किया ," यू अरे सू ब्यूटीफुल सारू , ी लव यू वैरी मच डार्लिंग ".

सारू ने आँखों में मिरर में देखते हुए काजल लगते हुए इशारे से पुछा तोह आर्यन ने जवाब दिया ," आप अणि के साथ नहीं रहती तोह बुरा लगता ".

सारू भी मुस्करा भर दी और दोनों बहार निकले तोह बिना बहार hi कड़ी थी तब सारू ने बोलै ," में जाती हूँ तुम 5 मं बाद आना ".

बिना बस मुस्करा रही थी, उसके लिए पहला अवसर था सेज बेटे से उसकी माँ चुड़ते देखना मगर जोह मजा और रोमांच उसको आज आया ऐसा रति को चुड़ते देखकर भी नहीं आया था. वह बहार भी कड़ी होकर बोल सकती थी पर जानकार अंदर का नजारा देखना चाहती थी की किसी सगी माँ को कितना मजा आता है जब उसका सागा बीटा छोड़ता है और खासकर आर्यन जैसा बीटा हो तोह ...... सारू को आगे झुके छूट में लुंड लिए मदहोश देकर उसकी छूट भी पनिया गयी, अच्छा था आज पद पहनी थी .

आर्यन ने बिना के लेफ्ट चूतड़ पे पेण्ट के ऊपर से एक थप्पड़ मारा तब होश में आयी ," ोुछहहह क्या कर रहा है कोई देख लेगा ".

आर्यन ने वही चूतड़ मसल दिया ," अंदर आने की क्या जरुरत थी कॉल नहीं कर सकती थी कामिनी मैं कर रहा है तुझे पूरी पार्टी में नंगी करके सबके सामने गांड मारुं ".

बिना भी समझ गयी आर्यन को बुरा लगा की वह अंदर आकर उसको और सारू मैडम को ऐम्बर्रेस्सेड की ...... " सॉरी यार में बस एक बार देखना चाहती थी तू नाराज मत हो में मैडम से माफ़ी मांग लुंगी ".

आर्यन ने बिना का सीरियस और साद टोन सुना तोह शांत होते हुए बोलै," सजा तुझे में दूंगा बस मम्मी से भूल के भी कभी जीकर नहीं करना. यू don't क्नोव हाउ मच पियस शी इस ?"

आर्यन ने सारू, रति और डॉ अंजू को ज्वाइन किया जहाँ अणि आकर उनको साथ लेजाकर अपने स्पेशल गेस्ट्स के साथ डिनर करवाई..... वह इंग्लिश रॉयल जोक्स एंड स्टोरीज जिश्मे सारू तोह निपुण थी hi पर रति और डॉ अंजू भी पीछे नहीं थी. आर्यन तोह अपनी डीपली इंग्लिश एनरिचेड टंग से अंग्रेजों की कुछ भूली हिस्टोरिकल स्टोरी सुना के सबको चुप करवा दिया. यानी मोस्ट बोरिंग डिनर पर अणि के लिए सब माहौल में ढल गए.

अणि से इजाजत लेकर आर्यन अपनी दोनों माँ के साथ 1 बजे फार्महाउस के लिए निकल गया...... डॉ अंजू की वजह से रति ने डॉली के बारे में कुछ नहीं पुछा जब उष्ण आर्यन को डॉ अंजू के साथ वक़त बिताने के कहा तोह उसने कहा की वह महिमा को बहोत मिस कर रहा है आज रात ुशी के साथ सोयेगा.

दोनों समझ गयी की बबिता की अर्जी लगी हुयी है पर उनको भी ऐतराज नहीं था आखिर इतनी प्यारी पूर्ति महिमा की माँ है उसका हक़ ज्यादा है. पता नहीं क्यों उम्रदार औरशन बच्चे होने के बाद अपनी बहुओं को कुछ रेस्पेक्ट जरूर करने लगती हैं.

आर्यन फार्महाउस पहुंचकर सीधा बबिता के रूम में पहुंचा जहाँ वह अकेली hi उसका इंतज़ार कर रही थी..... 2 बार चुदाई करके बबिता को बेहाल करके दोनों सू गए. आज बबिता बहोत खुश थी आखिर लेट hi सही आर्यन उसके पास आकर पूरा प्यार दिया.

डॉली के पास मीणा थी जोह उसकी केयर करती सुला दी. मीणा ने बोलै ," यह दर्द अपनी पावर उसे करके भी हील कर सकती है ".

डॉली मुस्करा कर ," में दर्द होने के बाद भी जिस सुख की अनुभूति कर रही हूँ न दीदी वह बस आपकी वजह से मिला वार्ना मुझे तोह मेरे maa-baap भोज hi समझते थे. भाई ने पेनकिलर दी थी मैंने थूक दी पर उसकी मालिश अच्छी लगी ".

मीणा ने उसका सर सेहला के चूम लिया," तू ने किसी के बहकावे में आकर तोह आर्यन को फाॅर्स नहीं किया न ? देख डॉली तू है सीढ़ी और सच्ची पर दुनिया बहोत टेडी है. ले देकर हमारा एक hi भाई है ".

डॉली ," नहीं दीदी राहुल और वसु भी हमारे छोटे भाई हैं न ".

मीणा हसकर ," तेरे भाई हैं पर मेरे लिए मेरे दोनों बेटे हैं आर्यन का खून".

डॉली कुछ सोचकर ," फिर मेरे भी बेटे हैं पर राहुल को अपना छोटा भाई hi मांगूंगी सबके सामने ".

मीणा िश नादान सी लड़की को देख रही थी खूबसूरत तोह पहले से hi थी पर अब बिलकुल खिली हुयी गुलाबो लग रही थी..... " उसको सुलाकर अपनी डायरी में मीणा ने डॉली के नाम पे टिक मारा 100 ..... ???

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दोस्तों नेक्स्ट अपडेट कल रात आएगा.

कीप रीडिंग एंड पोस्टिंग योर व्यूज एंड कमैंट्स ों थे स्टोरी.
 
अपडेट 38 (पतलोक)

Part - 3 (बी)

इंट्रोडक्शन.....

राजा बलासुर और रानी भार्या की तीन पुत्रियां थी ......

1) रानी पुष्पलता - अटाला लोक की महारानी और स्वर्णगैर की रानी.

2) रानी कामलता - अटाला लोक की सेनापति, कामनगर की रानी. पुष्पलता की छोटी भें.

3) रानी स्वर्णलता* - अटाला लोक के पश्चिन नगर की रानी . पुष्पलता और कामलता की सबसे छोटी भें.

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राजा माया - तळतळा लोक के राजा

रानी हेमा - तळतळा लोक की रानी और अब आर्यन की रानी माँ हेमा .

इनकी 3 दत्तक पुत्रियां हैं ......

1) साया - यह सबसे खूंखार और गुस्से वाली है.

2) चाय - यह सबसे कुरूर और घमंडी है.

3) माया* - यह सबसे प्यारी और कामुक है.

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राजा वासुकि - नागलोक के राजा

रानी नागमती - राजा वासुकि की पटरानी . विशाखा और प्रभा की माँ

राजकुमारी प्रभा* - नागलोक की शक्तिशाली नागिन क्योंकि इश्के अंदर अब इश्कि बड़ी भें विशाखा की आत्मा और शक्ति भी है.

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अब आगे........

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स्वर्णलता- पुष्पलता- कामलता

स्वर्णलता के साथ उसकी तरह नंगी दोनों बड़ी भेने, रानी पुष्पलता और कामलता ने आर्यन को ुष मखमली बिस्टेर पे वापस गिरा कर अभी थोड़ी देर पहले विरए निकले से सामान्य होते लिंग पे टूट पड़ी, यानी ......

स्वर्णलता अब आर्यन का चेहरा बेहताशा चूमने लगी उसकी कमर के दोनों तरफ अपनी झांघो को किये हुए उसके ऊपर अधलेटी हुयी ...... जबकि उसकी ek-ek झंघों पे बैठी ुष की बड़ी भेने अपने दोनों हाथो से उनके थोड़े ढीले पड़े लिंग को मसलते हुए पूरा खड़ा करने की कोशिश करने लगी जिसके लिए आर्यन ने भी मन नहीं किया.

आखिर कई घंटों से दोनों रानियों को लाइव शो दिखा के तरसा रहा था उनकी छोटी भें स्वर्णलता को छोड़ते हुए. आर्यन चाहता तोह उन्ह दोनों को भी साथ चूड लेता पर उसे रानी माँ हेमा की बात याद थी की तीनो रानियां सबसे स्पेशल और अलग किसम की स्त्रीयां हैं यानी अगर में इनको भी सब की तरह प्यार करूँगा तोह क्या फर्क रहेगा िंह तीनो का स्पेशल होने में.

स्वर्ण तोह बहोत प्यारी है पर यह दोनों इश्कि बड़ी बहेनो को अलग अलग hi कुछ अनोखी तरकीब से प्यार करूँगा......

आर्यन अपने में में प्लान करता अभी तीनो को रोक नहीं रहा था.

हज़ारों लिंग स्पर्श किये होंगे और न जाने कितने लिंग और ांडो को दोनों चबा चबा के शिकार करके खा भी चुकी थी पर यह लिंग तोह कोई अजूबा hi तीनो रानियों के हाथ लग गया था.

फिर रानी माँ हेमा की दूध पीला के दी सम्मोहन शक्ति के कारन तीनो उसके लिंग की वशीभूत होती जा रही थी. आखिर थी तोह अतिकामुक और पुरुष मार स्त्रीयां hi, उनके बदन को सिर्फ वस्त्रों में देखकर hi शीर्घपतन हो जाये, छु लिया तोह लुंड हर सेक् खड़ा होकर बेथ जाये.

रानी हेमा का आशीर्वाद hi था जिस वजह से आर्यन अभी तक टिका hi नहीं हुआ था बल्कि अभी तक सिर्फ एक बार hi विरए छोड़ा था वह भी स्वर्ण की योनि में. आखिर वह उन्ह तीनो को अपनी उंगलिओं पे नाचने का दम रखता था और हो भी कुछ ऐसा hi रहा था.

अपनी छोटी भें स्वर्ण की चुदाई और संतुस्ती देखकर दोनों रानियों को विश्वास हो गया की जिसको वह हज़रों सालों से पूर्ण संसर्ग के लिए ढूंढ रही थी वह नर (मेल) आर्यन hi है.

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देखने में सुंदरता के मामले में देवतों जैसा, काम क्रिद्या में कामदेव का परिपकव शिस्य और बलिस्टता में महाबली दानवो का भी बाप था .

जिस आसानी से आर्यन ने दानवो को मारा और भीषण कुरूरता से त्रिवेटा को चूड़ा था विशाल रूप धार के िंह सबसे एक भी बात साबित होती है यह महार्यं नाम का असधारण नौजवान सिर्फ मानव रूप में hi प्यारा है और इसका लिंग कितना सूंदर और लम्बा मोटा है जोह आम मानवों की नहीं होते .

आर्यन के चिकने बड़े ांडो को देखकर जैसे दोनों रानियों के मोह में पानी आ गया कितने स्वादिस्ट होंगे इश्के बड़े बड़े वर्सन (टेस्टिस) पर स्वर्ण ने उन्ह दोनों की मनोदशा समझते हुए गर्दन घूमा के चेतवानी देते हुए कहा ," दीदी आप दोनों भूल मत जाना आर्यन कौन है बस इश्को प्यार करो बदले में आप को चार गुना प्यार देगा परन्तु अपनी हवस को नियंतरण करते हुए वार्ना प्यासी न रह जायो"....... यह दानवो की प्राचीन भासा थी जोह आर्यन को समझ में नहीं तो स्वर्ण ने उसको भी बतया की में प्रेम करने सीखा रही थी दोनों दीदी को.

दोनों ने मुस्करा के एक दुसरे की आँखों में देखा फिर बारी बारी आर्यन के मोठे अमरूद से वरसानो को चाटने चूसने लगी ....... फिर दोनों ने उसके लिंग चूस चाट के बिलकुल पत्थर जैसा कड़क कर दिया बिना अपनी छोटी भें को कोई जवाब दिए...... दोनों की मोह और जुबान सच्च में जादू था.

स्वर्णगैर के िश स्वर्ण महल की रानी, पुष्पलता के राजशाही आलीशान कक्ष में आर्यन अपने को जैसे सबसे खुश किस्मत समझ रहा था पर ुष ने भी मैं hi मैं सोच लिया की तीनो बहेनो को दिल से प्यार दूंगा बगैर किसी अंतर और पक्ष पात के जबकि मुझे स्वर्ण सबसे प्यारी लगी और दिल की बहोत कोमल भी है .

स्वर्णलता को अपने ऊपर से उतर के बिस्टेर पे लिटा दिया. फिर कुछ डिअर और दोनों रानियों को अपने लुंड से खेलता देख रहा था. दोनों का रूप रंग hi नहीं बल्कि बदन भी किसी अप्सरा जैसा उसको अपनी और खींच रहा था.

दोनों की 5-5 किलो की बड़ी बड़ी चूचियां लटक के उसकी झांघो पे रगड़ रही थी लुंड चूसने से और दोनों अपनी गर्म गर्म योनि उसकी घुटनो पे रगड़ के मजे भी ले रही थी .......

स्वर्ण ने पास में रखे एक जग जैसे पात्र में आर्यन को वही तरल पेय पीला दिया जोह पहले हंसिका ने पीला था बहोत hi स्वादिस्ट और आतमसकून देने वाला. उसको तोह बाद में पता चला की यह किसी पुरुष को पीला के अपने वश में रखने और उसके अंदर शक्ति बढ़ा के चुदाई करने में मदद करता था. इश्को "गाजा शक्ति" मदिरा कहते हैं और मनुष्य इश्को पीकर अपने अंदर 100 हाथिओं से भी ज्यादा शक्ति महसूस करता है और दानव औरशन की खूब चुदाई करता करता मर्डर जाता है जिसको बाद में अपना भोजन बना लेती हैं वह दानवी.

मगर रानी माँ हेमा की दी शक्तियों के कारन सायद आर्यन पर ज्यादा असर नहीं किया.

(*आर्यन को अभी कहाँ पता था की उसके अंदर लाखों हाथिओं से ज्यादा पहले से hi ताकत है)

आर्यन ने दोनों के नंगन सरीर का पहले hi अवलोकन किया था तो पहले ुष ताम्बी रंग वाली रानी कामलता की बगलों में हाथ दाल के अपने ऊपर खींच लिया जोह उसकी बायीं झांग पे बैठी तोपची का स्वाद ले रही थी.

कामलता जोह सरीर और लम्बाई में सबसे तगड़ी और बाहरी भरकम थी उसको ऐसे अपने लिंग से अलग करने पे आर्यन को तरसै नज़रों से देखि .

ुष की बड़ी बड़ी घेरि कठै रंग वाली आँखों में देखते हुए आर्यन ने उसके लबों को चूम लिया," कामलता तुम बहोत नशीली हो...... पहले बोल नहीं पाया पर तुम्हारे बदन की खुसबू मुझे हर पल तुम्हारी तरफ खींचती है जैसे में सब कुछ भूल के तुमसे लिपट जॉन".

कामलता आर्यन की नीली आँखों में देखती हुयी बस रुदासी ( Roona+Chudasi) होती हुयी बोली ," तुम सच्च कह रहे हो न आर्यन या मुझे बेहला रहे हो जबकि मैंने तुम्हारे साथ कितना बुरा वाहवार किया फिर मारने की कोशिश भी की थी ".

आर्यन उसकी आँखों से बहते हुए आंसूं को उसके सावले गालों से चाटने के बाद पुछा ," मेरी आँखों में देखकर और मेरे दिल की बढ़ी धड़कनो को महसूस करके तुम्हे क्या लगता है प्रिये? ........ बस वही मानो जोह तुम्हारी अंतर आवाज कहे पर इतना जरूर कहूंगा तुम बहोत सूंदर होने के साथ सबसे मादक सुंदरी होगी पूरे पतलोक की ".

कामलता उसकी आँखों में सच्चाई देखती अपने लबों को उसके लबों से जोड़कर एक घेरा चुम्बन लेने के बाद बोली ," आप आज से मेरे स्वामी हो आर्यन जब तक जियूँगी तुम्हारी बनकर रहूंगी, मुझसे कोई प्यार नहीं करता बस आज अपना प्रेम देकर मुझे पूरा होने का अहसास दो की मुझे भी कोई प्यार करने वाला मिल गया है जिसकी नज़रों में में भी सूंदर हूँ ".

बेहताशा चूमती कामलता अब यह भी भूल गयी की उसकी दोनों भेने भी वहीँ ुशी बिस्टेर पर साथ हैं.

आर्यन का कामलता के लिए प्रेम भाव देखकर दोनों भेने अब साइड में हो गयी पर आर्यन के लिए उनके दिल में भी इज्जत बढ़ गयी .

तीनो नंगी छोड़ने hi तोह बैठी हैं आर्यन से पर पहले स्वर्णलता को खूब प्यार किया दिलोजान से और अब कामलता को भी देगा पर क्या कोई इतना प्यार कर सकता है यह बात हज़म नहीं हुयी......

लेकिन आर्यन का एक एक स्तब्ध तीनो को विश्वास दिला रहा था की वह झूट नहीं बोल रहा है. तीनो शक्तिशाली रानियां थी और झूट फरेब एक पल में पकड़ ले पर आर्यन झूट बोलता hi कहाँ था और प्यार तोह हर जीव से करता था जबकि औरशन लड़कियों को तोह सर माथे लगता था..... वह बात अलग है हर कोई उसके प्यार में पद जाती थी चाहिए सगी हो या दुर्र की.

कामलता के सख्त और मसल एक एक तरबूज से भी बड़े नंगे चूतड़ों को अपने दोनों हाथो से मसलते हुए आर्यन ने उसको पलट के अपने निच्चे लेकर उसकी बड़ी पहाड़ सी उठी सख्त और जालिम विशाल चूचियों पे पूरा मोह खोल के टूट पड़ा ...... जी कर रहा था चूस चूस के बभुन्ड डेल पर मैं बना लिया नहीं पहले मजे से चूसूंगा "सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह ..... बहोत मीठी चूची है तेरी 'कामु' पर बिच बिच में खटपन का रास निकलता है "....... उसकी चूची के मोठे मोठे निप्पल से खता मीठा सा रास निकल रहा था जबकि स्वर्ण की चूची से मीठा मीठा निकला था.

साला कुछ तो जादू hi है िंह पतलोक की रानियों की चूचियों में जोह बिना माँ बने hi रास छोड़ती हैं. काश धरती पर भी ऐसी hi औरशन होती कितना मजा आता.

कामलता सिसकते हुए अब उसके सर के बालों और पीठ को सेहलती उसकी कमर पे अपनी तगड़ी मसल टांगें लपेट ली जैसे कहीं भाग न जाये ...... लौड़ा उसकी गरम भट्टी जैसी योनि पे रगड़ रहा था , सही जगह मिली थी उसको भी अपनी ारामघा .

कामलता की सिसकारी बदस्तूर जारी हो गयी ," हाँ स्वामी ऐसे hi चूसो मेरे स्तनों को और मेरा मिश्रित सतांन द्रव्य बहोत स्वादिस्ट होता है ..... सीईईई काट काट के कहा जाओ ...... ऐसे hi मेरे स्वामीईई ...."

कमलता दिल से आर्यन को अपना ली, आखिर उसके सवालेपन यानि ताम्बी रंग और ताकत से सब बहभीत होते थे पर आज एक नर मिला जोह उसको दिलसे प्यार कर रहा था उसके ुशी रंग रूप के साथ.

मगर वह कहाँ जानती थी यह तोह आर्यन की दादी देवी से भी डबल साइज की होगी पर ऐसी औरशन आर्यन की बहोत बड़ी कमजोरी होती थी??? रूप रंग तोह उसको बचपन से एक सामान hi लगता था सबका.

आर्यन ने उसकी दूसरी सीढ़ी चूची पे थप्पड़ मारा और कठोरता से बोलै ," अब के फिर से स्वामी बोली तेरी गांड पहाड़ दूंगा, मेरे तेरा स्वामी नहीं तेरा यार हूँ मेरी चिकनी लुगाई...... बस प्यार से आर्यन बोल मुझे अच्छा लगेगा मेरी कामु रानी...... िश बिस्टेर पर न तू पतलोक की रानी है और न में पृथ्वीलोक का मानव हूँ..... बस आज हम दोनों प्रेमी हैं और खुलकर प्यार करेंगे क्यों स्वर्ण डार्लिंग ? "

आर्यन अपने मैं में ," मेरे लिए यह ईशा 'स्वामी' स्तब्ध जोश घटा रहा था पर यहाँ हम चुदाई करने वाले हैं और यह कामलता बस मुझे भगवन बनाये जा रही है. मुझे उसको एक गरम और बिंदास औरत की तरह छोड़ना था तोह ताकि वह एक बिस्टेर पे लण्डी कुटिया की तरह चूड़े न की एक '. औरत की तरह. साला पतलोक की सबसे कामुक औरत मुझे स्वामी स्वामी बोलेगी तोह चुदाई तोह ख़ाक कर पाउँगा बस इसकी पूजा न करने लागूं".

स्वर्णलता जोह हम दोनों को अभी देखती हुयी बिस्टेर पे अपने बदन पे एक मखमली कम्बल जैसे विस्तार में ढके थी बोली ," हाँ आर्यन तुम सही कहते हो, दीदी आप प्रेमिका बनकर अपने प्रेमी आर्यन के नाम से सम्भोदित करो आपको पूरा आनंद आएगा वैसे यह कामु कौन है आर्यन ?"

स्वर्ण के वयुंग में hi जवाब छिपा था तो आँख मार के उसकी बड़ी भें की चूची पे पूरा मोह खोल के दांत गदा दिया और चूसने लगा .

कामलता भी उसकी कमर पे अपनी भरी भरकम झाँगिए कस्ती अपनी चूतड़ों की ताकत लगा योनि को उसके मोठे खम्बे की तरह सख्त लिंग पे रगड़ती सिसकते हुए चिल्लाने लगी ," सीईईई अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण कहा जाओ मेरे सतनननननननुवू कूऊऊओ ..... ह्म्मम्म्म्म "

आर्यन ने कुछ डिअर और पूरी चूचियों को चूस चाट और काट कर निच्चे होते हुए कामलता की घेरि नाभि वाला सपाट पेट चाटने लगा ," पुछहःछः सलरपपपपपपप ..... यह है मेरी नशीली कामु सिर्फ मेरी कामलता, कितनी स्वादिस्ट है तू ...... आज तोह पूरा बदन hi चाटने के बाद भी जी नहीं भरेगा पुछःह पुछठ ...... सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप....... "

आर्यन के सर के बालों में हाथ फिरते कामलता ने अपनी भरी भरकम झागों में आर्यन का धड़ कसने की कोशिश करने लगी क्योंकि उसकी कमर और पेट बहोत संवेदनशील ( सेंसिटिव ) थे जिससे उसकी योनि तरल सा दर्व्य बहा रही थी आर्यन के चूमने से ......

कामलता उन्मांद में शिक्षक पड़ी ," आह्ह्ह्हह्ह मेरे स्वामीईई ..... ( आर्यन ने होंठ उठा के उसको घूरा ) ...... माफ़ करना ार्यानंन्न में झेल नहीं पाऊँगी अब मेरी योनि के अंदर अपना लिंग दाल दो ..... अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण सीईइईसीईई उईईईईई माआआआआ मेंनननन गईइइइइइ .... "

उसने अपनी जीभ अपना नाम लेते hi उसकी नाभि में रही ( ढाई बिलोने वाली) की तरह घुमाई और दोनों बड़े बड़े शाक्त खड़े चूचक पकड़ के ऐंठ दिए ......

कामलता अपनी योनि उसके बलिष्ट सीने पे रगड़ते हुए झड़ने लगी 2 तरफा हमले से ...... झड़ी क्या आर्यन को लगा की उसके सीने पे किसी ने बहोत गरम सा तारकोल दाल दिया हो ......

"अह्हह्ह्ह्ह ारयणणणणणण तुम hi असली नर ( मर्द) हो ..... अह्हह्ह्ह्ह सीईई ...... आज से में तुम्हारी दासी हो गयी ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआआआ ...... hassssssssss ahhhhhhhhhhh hmmmmmmm".....Bister से कुछ पलों अपना पिछवाड़ा उठाये हुए जब वह निढाल सी होकर अपनी जाँघों की पकड़ खोली तोह आर्यन सीधा अपने घुटनो पे बैठकर अपने सीने से उसका गाढ़ा गूंद सा चिपचिपा रास अपनी उंगलिओं में चिपड़ के पहले सूंघा जोह किसी नशीली कस्तूरी जैसा था और जब छाता तो लगा की तीर्व गांध वाला न खट्टा न मीठा पर अलग hi टास्ते था.

ऐसा योनि रास उसने कभी नहीं चखा था. स्वर्ण का रास भी स्वादिस्ट था पर स्मेल इतनी तेज़ नहीं थी जबकि पूरे कामलता की कक्ष में अब योनि रास की खुसबू hi थी जबकि बाकी दोनों को बधबू hi लगी.

आर्यन रास अपने सीने से दुसरे हाथ पे लेकर चाटने लगा यहाँ तक की अपनी उंगलियन तक चाट गया मगर मैं नहीं भरा.

स्वर्णलता जहाँ खुसी से अपने नए पति आर्यन को ऐसा करता देख रही थी वहीँ कुछ hi फट की दुरी पर बिस्टेर के दूसरी साइड अभी भी नंगन अवस्था में सबसे बड़ी भें अटाला लोक की रानी पुष्पलता हैरत में थी की आर्यन कैसे िश कामलता का योनि रास बिना किसी घिन के मजे से चूस चाट रहा है पर आर्यन का अगला कीर्त्यै उसकी सोच hi तोड़ डाला ......

आर्यन झुकार कामलता की बड़े बड़े होंठो वाली 6 इंच चीरे के साइज की योनि कुंड से अपने मोह लगा उसकी दोनों झाँगिए उठा के ,चूचियों से उसके घुटने टच कर दिया और दोनों बड़े बड़े तरबूज के साइज के सवाल नितम्बो पे भी रिश्ते हुए आ पहुंचे योनि रास को चाटने लगा ....... सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप .......

आर्यन ने इतना लम्बा चीरा नहीं देखा था पर ना जाने कितनी योनि खोली और चौड़ी करि थी अपने लुंड से सायद 382 से ऊपर hi संख्या होगी जबकि चूसी छाती और सेहली मिलकर 800 से ऊपर होंगी.

ऐसी योनि को देखकर खुश होता आज वह पूरे वाइल्ड स्टाइल में प्यार करने की सोच लिया फिर जितनी ताकतवर उसको यह अपनी नयी कामु डार्लिंग लग रही थी झेल लेगी पर आज की गांड भी पहाड़नी है. मुझे इसके सरीर के हिस्से पे अपना नाम छापा चाहिए ताकि सिर्फ में इश्कि लूँ और यह चिल्ला चिल्ला के चूड़े और चीखिआ सबके कान पहाड़ दे .

कामलता की गर्मी फिर से भड़ने लगी आर्यन के उसकी योनि चाटने से..... उसके मैं की किसी कोने में मजूद संसय को आर्यन के िश तरह उसके योनि रास चाटने और डायरेक्ट योनि कुंड से रास निकलने के प्रयाश ने ख़तम कर दिया ......

इतना प्रेम तोह कोई दिल से hi कर सकता है जिसको योनि रास अच्छा लगता हो. मगर तीनो भेने नहीं जानती थी की आर्यन कलर ब्लाइंड है उसको स्त्री का प्रेम मिल जाये, दिल से पसंद आने के बाद तोह फर्क नहीं करता था चाहिए रानी हो या नौकरानी उसके नज़र में सब एक सामान होती हैं.

कामलता की आँखों में सिसकते हुए ख़ुशी की आंसूं थे तोह स्वर्णलता आगे बढ़ने लगी उसको चुप करवाने पर आर्यन एक बार मोह हटा के कहा ," नहीं स्वर्ण आज कोई बिच में नहीं आएगा मेरी कामु को खूब रोने दो ...... जितना रोटी है उतना मीठा रास यह अपनी योनि से छोड़ती है ..... सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप ..... "

अब उसकी दोनों भेने हसने लगी तो पहली बार जिंदगी में कामलता को शर्म आयी ....... उसने आंखें बंद की और मंतर पढ़ा ताकि वह अकेले आर्यन के साथ वक़त बिता सके पर आर्यन ने उसकी योनि के दाने को काटा तो आखिरी वर्ड मंतर का नहीं बोल पायी " उईईईईई माआआआआ मरररररर gayiiiiiiiiii ..... ारयणणणणणणण रुक्खक्क्क्क जाआ ...... "

आर्यन ने उसको मंतर पढ़ते महसूस किया तो पहले काटा फिर दाने को चाट लिया ," सलरपपपपपपप.... नहीं कामु हम यही प्यार करेंगे, मैंने अपने से वादा किया है की तुम तीनो रानी बहेनो को एक hi बिस्टेर पे िश स्वर्ण महल में अपना प्यार बनूँगा ".

पहली बार पुष्पलता बोली ," तुम को क्यों लगा में भी मान जाउंगी ?"

आर्यन कटहल से डांटा ," अपने मालिक से सवाल कभी मत पूछना जबतक इजाजत न हो बस इंतज़ार करो पुष्पलता ...... सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप...... तुम खट्टा रास कैसे बनती हो कामु जान पर है पूरी चाट की दूकान तुम्हारी योनि ..... पुछःह पुछठ ..... सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह......"

रानी पुष्पलता की तरह स्वर्ण ने देखा तोह आज पहले बार अटाला लोक की रानी की आंखें झुक गयी आर्यन की झिड़की सुनकर अपनी सबसे छोटी भें से नज़र मिलते हुए.

रानी माँ हेमा की सही आज्ञा का पालन आर्यन कर रहा था की तीनो को उनके अनुसार नियंतरण करना. स्वर्ण को आत्मसमर्पण करके, कामलता का गुलाम बनकर और पुष्पलता का स्वामी बनकर यह आर्यन ने सोचा था पर क्या यह उसका सोचना सही साबित होगा यह तोह वक़त hi बटेगा .

कामलता ने फिर से एक बार चरमोत्कर्ष पा कर योनि रास छोड़ा तोह आर्यन ने भी ek-ek बूँद सूखने तक नहीं होने दिया ुष से पहले hi हज़म कर गया ...... उसका सायद इतना जल्दी चरमोत्कर्ष होगा यह आर्यन को भी अंदाज़ा नहीं था .......

आर्यन ने अब बेजान सी बिस्टेर पे पड़ी विश्वे सुंदरी कामलता को पलट दिया जिससे उसका भारी भरकम पिछवाड़ा और पुष्ट कंधे के साथ पतली बलखाती सी दिखने वाली कमर ने आर्यन को लालायित hi कर दिए की आ मुझे चाट ले ......

अब शुरू हुआ खेल जिसके लिए आर्यन का कामलता की तरह आकर्षण पहले से था जबसे उसकी पहली झलक देखि थी ...... प्यार के पंजों से लेकर उसकी झंघों के जोड़ तक अपनी जीभ से चाटता चूसता काटता कमर पर पहुंचा फिर पूरी कमर और पीठ के बाद उसके मोठे पुष्ट कंधे पर दांत गदा गदा के चूसा ......

कामलता के उत्तेजक शब्दों से आर्यन का मैं उसका हर हर अंग और हिस्से को चूसने काटने का कर रहा था.

कमलता चिल्लाती हुयी बोले जा रही थी , "अह्हह्ह्ह्ह ारयणणणणणण तुममममम महान हो..... मेरे देवताआए ..... मेरा स्वमंम्मीईई ..... मेरे ारयणणणण ..... मेरे भगवाननननन ..... हॉँण्णन ऐसे...... पयररररररर करूऊऊ मुझे स्वामीईई मुझे पूराआआ कर दोओओओओओ ....... यह आपकी दासीइइइइइइ मारररररररर jayegiiiiiiiiiii ...... बच्चाआआ लोओओओओओ ारयणणणण ..... मेंनननननन नहीं jhelllllllllll पाऊँगी ....... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह "

पिछले एक घंटे से कामलता सिसकती रही तड़पती रही, उसका बदन बिस्टेर से उछलता पर आर्यन ने उसको कहीं हिलने भी नहीं दिया ..... लास्ट में उसके दो मोटे मोटे चूतड़ पे धावा बोल दिया ," पुछःह पुछःह सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप ......" ऐसा विशाल और मटके के साइज की गोलाई लिए चूतड़ उसने सच्च में आज तक नहीं देखे, अपने मैं में सोचता," सच्च कहता हूँ पतलोक में स्त्रीयां नहीं बल्कि काम की देवियां रहती हैं काश में हमेशा यहीं रहूं पर पॉसिबल नहीं था".

दोनों बहेनो ने देखा की एक घंटे से ज्यादा टाइम बाद आर्यन जब हटा ..... कामलता 7-8 बार झाड़ चुकी थी पर आर्यन बहोत चालाक था जब वह झड़ने पे आती फिर से हर बार उसकी फूली योनि पे मोह लगा के रास पि जाता.

िंह दोनों को देखकर स्वर्ण भी खुद 3 बार झाड़ गयी थी पर अब उसको भी अपनी मंझली भें से इर्षा हुयी की आर्यन मुझे खूब प्यार किया पर ऐसे हर हिस्सा नहीं चूमा चूसा ......

वहीँ बड़ी पुष्पलता को विश्वास हो गया की यह प्यार देने के लिए hi बना है पर इश्के अंदर के सैतान को नियतरं में रखना होगा..... में तुमको िश अटाला लोक का राजा जरूर बनूँगी आर्यन बस मुझे कब प्यार करोगे ?

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वहीँ रानी हेमा मैं hi मैं हस्ती हुयी की आर्यन को भी अनजाने में पता नहीं है की कामलता की शक्ति ुश्कि त्वचा और योनि में है जोह खुद hi मेरे बेटे आर्यन को दे रही है..... ???? बस िश पुष्पलता को खुश कर देना मेरा लाल यह बहोत ख़ास शक्ति रखती है जोह िश ने सबसे छुपा के राखी है.... ????

आर्यन जब आखिरी बार कामलता का योनि रास पूरा चाटने के बाद हटा तोह उसकी दोनों बहेनो को लगा की थक गया होगा आखिर है तोह मानव hi पर जल्दी hi उनकी संसय दुर्र हो गयी जब आर्यन ने बिस्टेर से उतर के दोनों अपने हाथों से कामलता के प्यार पकड़ के खींच के उसको निचे सीधा बिठा के अपना ऊपर निच्चे झूलता खतरनाक झटका खाता विशाल लिंग उसके मोह में उतर के मुख छोडन करने लगा .

कामलता भी खुद को सँभालते अपना सर गर्दन से 45° एंगल बना पूरा खोल दी चेहरे पे मुस्कान लिए .....जूउउउउउउह जूउउउउह...... की आवाज के साथ िश सुपर्णखा की तरह मोह बाए छुडासी स्त्री के मोह में पक्का पक्क अपना लौड़ा पेलते हुए ..... तोपची झाग के साथ थूक से लिपटा हो गया था अब कुछ समय में ......

आर्यन के ांडों को सेहलते हुए अब कामलता भी उसकी उलटी झंघ के गिर्द अपना सीधा हाथ लपेट के अपने नए प्रीतम जैसे मालिक को पूरी ताकत से धक्का मारने के लिए उकसा रही थी ......

आर्यन गुरर्ता हुआ ," अह्हह्ह्ह्ह मेरी रानीईई कामु तू बेमिसाल है ..... पूरा गिला कर दे ....... स्वर्ण वह दो तकियाबंद बिस्टेर के किनारे लगाना ...... "

बड़े से चकोर से मॉटे मॉटे 4 बीएड रेस्ट से लगे तकिये स्वर्ण ने बिस्टेर के किनारे रख दिए..... उसको पता था अब आर्यन ुष पे कामलता की गांड टिका के छोड़ेगा ......

मगर आर्यन ने अपना एक फट से भी ज्यादा लम्बा लौड़ा आखिरी एक बार पूरा कामलता के मोह में दाल के रोक दिया और जब बहार निकला तोह पूरा थूक टपका रहा था चासनी सा चिपडा चमकता हुआ ......

आर्यन ने कामलता जैसी सांडनी को दोनों बगल में हाथ दाल के सीधा खड़ा किया अपने से चिपटा के और उसके दोनों चूतड़ों के निच्चे हाथ दाल के उसको उठा लिया चूमते हुए ...... आर्यन ुष से हट में 6 इंच से ज्यादा छोटा होगा पर उसको एक फूलों की टोकरी सा उठा लिया .....

कामलता भी गिरने के डर से उसकी गर्दन में बाहिएँ लपेट ली और उसकी कमर पे प्यार बस अब पोजीशन तोह आर्यन ने खुद बना ली ......

दोनों चूतड़ उठा के योनि के छेद पे अपने तोपची का लिंग मुंड लगा दिया तोह कामलता से लेकर दोनों भेने भी समझ गयी की गलती कर रहा है आर्यन ...... ????

मगर तीनो को डरा hi डाला और कामलता का सारा कामुकता घुणियो के खेत में गया ......

धप्प्प ..... पहला धक्का

धप्पा धप्प्प ..... दूसरा धक्का

धप्प्प धप्प्प धप्पा धप्प्प .... तीरसरा भीषण धक्का ......

"मररररररर गईइइइइइइ ारयणणणणणण सीईइईसीईई ारयणणणणणण मुझपे रेहम करूऊऊ .....

didiiiiiiiiiii बचाऊऊऊ.....

स्वर्णाआआ बचाएआ लेईईईई ....... तुमममममम हवान्नन्नन्न हूऊऊऊ...... "

तीनो धक्कों ने पूरी योनि hi चीयर पहाड़ के तोपची ने फ़तेह कर ली कामलता की , स्वर्ण का तरल पेय उसकी बड़ी भें की छूट उदधवा दिया आर्यन जे तोपची से.

योनि पहाड़ दी थी कामलता की....... बिचारि अब चीख भी नहीं पा रही थी क्योंकि अब उसके लबों को चूस रहा था आर्यन और पूरा लिंग योनि में जड़ तक पेले हुए आगे बढ़कर उन्ह दोनों मॉटे तकिये पे कामलता की भारी भरकम गांड टिका उसके अपने साथ ऐसे hi जकड़े हुए अपने निच्चे लिए लेट गया ......

दोनों तकिये गायब hi हो गए दोनों के वजन से पर दोनों भेने भी हैरान थी की आर्यन की पीठ और गर्दन खुरच डाली कामलता ने पर कहाँ ुष की हैवानियत पर असर हुआ.

आर्यन अब जोरसे dhaka-dhak लगभग पूरा लिंग बहार खींच के योनि में जड़ तक पेले hi जा रहा था कामलता को छोड़ते हुए यानी उसका लिंग सलामत है अभी तक..... यह कैसे संभव है , कामलता की योनि hi ारी की तरह है अंदर से लिंग काट देती ....... पर आज योनि ने अपने यार यानि लिंग को बस खून भाते हुए भी बिलकुल कसने या पीसने के बजाये बस हल्का हल्का टाइट आवरण लिंग मुंड पे चढ़ये रखा था ..... मोती सील hi नहीं बच्चेदानी तक पूरा रास्ता बना दिया था लिंग ने और योनि ने अपना hi लिया लिंग को जैसे कामलता ने दिल से आर्यन को अपना लिया था.

आर्यन के टोपी पे एक जिल्द hi छड़ी सक्शन कर रही थी जब पूरा अंदर होता पर आधी लम्बाई तक ...... बहनचोद छूट के अंदर छूट भी होगी ऐसा तोह न सोचा था आर्यन ..... लुंड के शाफ़्ट पे बहार के होंठ टाइट लिपटे थे और टोपे पर अंदर के ...... गैस्स्क्कछहःछककककक गैस्स्क्कछहःछःकककककक ...... पाचाआँ पछ्ह्ह्हह्ह्ह्ह की आवाजें अब योनि रास के सर्व होने के बाद आने लगी.

जब आर्यन ने कामलता के लैब आजाद किये तोह उसने तुरंत फिर से आर्यन के लबों को चूसना शुरू कर दिया और झड़ने लगी पर न दोनों की स्पीड काम हो हुयी न जोश.....

स्वर्ण आर्यन को परिपूर्ण स्त्री लगी पर अब कामलता को भुगते हुए उसको लग रहा था की इतना सुख चुदाई में कभी नहीं मिल सकता या तोह में जन्नत में हूँ या छोड़ते छोड़ते मर्डर चूका हूँ ...... 3 बार झाड़कर लगभग एक घंटे बाद अब घमासान दूसरी तरफ पलट गया.

पोजीशन चेंज करती अपनी ताकत दिखती यह सादे 7 फट की सांडनी ने आर्यन को पलट के अपने निच्चे लिया और चूमती हुयी बोली ," Ufffffffffffff मेंनननन गुलाममममम हूँ तुम्हारी ार्यानंन्न ..... अब में तुमको पूरा सुख दूंगी मेरे दिल के प्यारे प्रीतम ओह मेरे राजा मुझे प्यार करूऊओ ...... ारयणणणणणणण रुक्खककककनाआ मत्तत्तट्ठ ाआजजज्जजज ........"

पहछहः पहछहः पहछहः पहछहः..... की आवाजें आती रहे और आर्यन के दोनों निप्पल्स अपनी ऊँगली से सेहलती उसके ऊपर झुकी गर्दन चाटती फट्ट्ट्ट फट्ट्ट्ट की आवाज से चूतड़ों को इतनी तेज गति से हिला रही थी की सच्च में आर्यन उसकी योनि से दिए जा रहे सुख से मदहोश हो गया ...... आज लगा बस ऐसा hi सुख हर पल चाहिए .......

न जाने कितनी बार कामलता झड़ती गयी पर जैसे आज िश चुदाई में जोह सुख मिल रहा था वह कोई औरत नहीं दे पायेगी ...... अंदाज़न 3 घंटे बाद जब वह झाड़ा तोह कुटिया पोजीशन में पूरा विरए अपने अंदर लेने के बाद hi आर्यन के लुंड को अपनी योनि से आजाद की ....... आर्यन उसके गद्दीदार बदन के ऊपर लेता ना जाने किस दुनिया में पहुंच गया था.

दोनों बहेनो भी Aryan-Kaamlata की पूर्ण हिंसक सी काम क्रीड़ा देखकर उनकी तरह 6-7 बार खुद भी झड़ती अब सुस्ता रही थी......

मगर एक आखिरी और बेहद ताकतवर किल्ला धवस्त होना बाकी था पुष्पलता के रूप में जोह अपना सबकुछ आर्यन के साथ एक पूरे मिलान पे लुटाने के त्यार थी ......?

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रानी पुष्पलता , अटाला लोक की महारानी थी अपने पिता राजा बलासुर के मारे जाने के बाद. तीनो बहेनो की माँ रानी भार्या की मिर्त्यु स्वर्णलता के जनम होने के बाद हो गयी. इशलिये दोनों बड़ी भेने उसको अपनी बेटी की तरह मानती थी.

दानवो की आपस में इर्षा और एक दुसरे से शक्तिशाली होने के गामान्ड के कारन दानव गुरूजी ने रानी पुष्पलता को बाकी दोनों छोटी बहेनो को भी उनको काम नगर और पश्चिन नगर की रानी बनने को कहा ताकि उसको अटाला लोक में निर्विरोध सहसं करने में कोई अड़चन न आये और समय पे दोनों भेने उसके साथ किसी भी अकर्मण को विफल करने में उसकी सहयता hi करेंगी.

हज़ारों सालों से तीनो बहेनो का एक चतर राज्य था अटाला लोक में और कई अकर्मण को अपने पराक्रम से धवस्त कर युद्ध जीता. पर तीनो असाधारण रानियां सरीर से हमेशा जवान और सम्भोग के लिए तरसी थी. तीनो की कामुकता और सौंदर्य से hi कोई भी दानव या देवता भी चाँद समय में बदन छूटे hi झाड़ जाते और उनका लिंग दुबारा खड़ा hi नहीं होता था फिर मनुष्य नर की उनके सामने बिसात क्या. हज़ारों मनुष्य भी इनकी रति क्रिद्या के लालच में सहीद हो गए. यहाँ तक यक्षों क्या पिशाचों ने भी तीनो के सामने खड़े होते hi डैम तोड़ दिया.

आज तक कोई भी याग या युक्ति काम hi नहीं की न किसी के पास इनकी समस्या का हल था.

जब आर्यन का पतलोक आना हुआ दिव्या तलवार की प्राप्ति के लिए तब रानी माँ हेमा को आर्यन के अंदर विलक्षण शक्ति का अहसास हुआ की यह सिर्फ प्रेम hi के लिए बना है और आर्यन से संसर्ग करके कोई औरत दुसरे को हाथ तक न लगाने देगी न संतुस्ट होती होगी.

आर्यन के अंदर कामकला और एक दिव्या शक्ति का वास उसको सबसे अलग बना देता था. राजा माया तोह न पहचान पाए पर रानी माँ हेमा ने आर्यन को मैं से अपना सीसीए और बाद में पुत्र मान कर के उसके अंदर संसर्ग करने की शक्ति और बढ़ा दी ताकि कोई भी स्त्री इश्के आगे कितनी भी कामुक क्यों न वह आर्यन के आगे नहीं टिकेगी उसकी बंधी हुयी शक्तियों के बावजूद पर कैसे? एक माँ का प्यार देकर यह शक्तियां दूध के रूप में दी जिसके लिए आर्यन कभी मन नहीं कर सकता था.

(गीता ने आर्यन का सही नाम रखा था चूचिचोर और चूचीधार )

आर्यन पहली बार जब रानी हेमा से मिला था तब hi उन्होंने ने कहा था की उसको पतलोक से कई 3-4 स्त्रीयां अपने साथ ले जानी चाहिए पर आर्यन भी हसकर बात ताल गया.

रानी हेमा को गायत था स्वर्णलता और उनकी बेटी सबसे छोटी बेटी माया भी आर्यन की पत्नियां जरूर बनेगी राजकुमारी प्रभा की तरह. यह तीनो अपनी बड़ी बहेनो से भी अपने पति आर्यन बटेंगी बगैर इर्षा के और यह रिश्ते आर्यन को और ज्यादा शक्तिशाली बना देंगे पतलोक का क्या सब लोकों का सबसे बड़ा महायोद्धा.

पतलोक का कोई वासी ऐसा कभी नहीं चाहेगा पर होगा तोह यह जरूर लेकिन आर्यन के अंदर जैसे कहीं भी न राजा बनने के इच्छा थी न महाशक्तिसाली. वह बस अपने परिवार वालों के साथ खुश रहना चाहता था. यह hi गुण उसका रानी माँ हेमा को अपने बेटे के रूप में अपना के दिखा की यह असली अंगरक्षक बनेगा चाहिए पृथ्वीलोक पे हो ,पतलोक पे हो या किसी और लोक में.

राजा बलि महाराज भी अब आर्यन को पतलोक का सच्चा संरक्ष के रूप में देखने लगे वहीँ राजा वासुकि के साथ राजा माया और रानी पुष्पलता ने भी मैं बना लिया की अगर आर्यन को अपना रिस्तेदार बना लिया जाए तोह कोई नुक्सान नहीं है जबकि दोनों राजा की छोटी बेटियां तोह आर्यन से विवाह करना hi चाहती थी वही स्वर्णलता तोह आर्यन के बिना अब अपना जीवन सोच hi नहीं रही थी.

रानी पुष्पलता ने पहले दानवी त्रिवेटा को फिर अपनी दोनों छोटी बहेनो स्वर्णलता और कामलता के साथ आर्यन को खुला सम्भोग करते देखा था यह पुरुष हमेशा हमारा साथी बनकर रहेगा पर स्वर्णलता से पक्का रिश्ता इश्को यहाँ बार बार लाएगा. मतलब हमको भी आर्यन के साथ पूर्ण सम्भोग का सुख मिलेगा. आर्यन को हम तीनो को "गाजा शक्ति" देनी होगी ताकि वह बार बार हमारे पास आता रहे.

रानी पुष्पलता को गायत था की में अटाला लोक की महारानी हूँ और कामलता मेरी सेनापति है हम दोनों यहाँ से कभी नहीं जा सकते क्योंकि सारे लोक की जिम्मेदारी हम दोनों की है पर स्वर्ण जा सकती है पृथ्वीलोक आर्यन से विवाह करके.

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पुष्पलता अपनी युक्ति बनती तब होश में आयी जब कामलता की चीखिआ सुनाई दी वह भी स्नानगृह के भीतर से ......

पुष्पलता ने देखा की अपने स्यान कक्ष में बिस्टेर पे वह अकेली है और बाकी तीनो गायब हैं. फिर चीखिआ सुनी तोह बस एक गाउन सा विस्तार अपने कंधो पे दाल के जब स्नानगृह में पहुंची तोह अलग hi नज़ारा था जैसे की तीनो उन्माद में पागल हो गया हों ......

कामलता को सावरणरस से भरे एक बड़े हौज में कुटिया पोज़ में उसके ऊपर पंजों के बल झुका आर्यन उसकी गुदा में अपना प्रचंड लिंग पेले जा रहा था और हौज के किनारे अपने दोनों टांगें खोली स्वर्ण अपनी योनि आर्यन से चटवा रही थी ........

स्वर्ण ," अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण सीईइईसीईई ारयणणणणणण ऐसे hi चाटो ..... "

कामलता रोटी हुयी ," ाजजज्जज मुझीऐ मारररररररर डालोगे क्या ारयणणणणणण सीईइईसीईई उईईईईई माआआआआ भीषण डरडडडडडडड हो राहाआआआ ...... अभी बहार निकालललललललल लो ....... बछूऊऊओ ".

पुष्पलता की तोह योनि गुदा के साथ मोह से भी डाउन निकलने लगा...... यह इंसान खाता क्या है ? और यह स्वर्ण के साथ कामलता मुर्ख है की गुदा में इश्क लिंग ले ली ....... यह अगर विशाल रूप धारण कर लिया तोह दोनों मर्डर hi जाएगी, इनको तोह श्राप भी कोई नहीं मिला है की राजा बलि महाराज ुष त्रिवेटा की तरह जीवट कर दें ......

वह तीनो को रूकने के लिए आगे बढ़ती तभी आर्यन की आवाज आयी ," बहोत मस्त गांड है तेरी, हथनी के साइज के चूतड़ हिला हिला के चलती है आज पहाड़ दूंगा तेरी कातिल गांड गुरररररररर यह ले मेरी कुटिया ".

फट्ट्ट्ट फट्ट्ट्ट थप्प्प्प थप्प्प्प ..... तड़कककककक तड़कककककक ...... इतनी तेज धक्कों से ढोलक की तरह कामलता के चूतड़ आवाजें करते थे ..... और थप्पड़ मार मार के उसको दर्द दे रहा था .......

स्वर्ण को आर्यन का अपनी योनि से मोह हटाना अच्छा न लगा तोह उसके सर के बल पकड़ के फिर से उसका मोह अपने योनि से चिपकती बोली," ारयणणणणणण मेरी योनि चाट ते रहो हनननननन ऐसी हीईई "......

कामलता रट और सिसकती हुयी," पहाड़ड़ड़ड़ड़ दूऊऊ ारयणणणणणण परररररर इतनी तेजी से नाहीइइइइइइइ अंदर से चिरररररररर गईइइइइइइइ haiiiiiiiiii ..... अह्हह्ह्ह्ह ार्यानंन्न पहाड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ दो में तुम्हारीइइइइइइ कामु रानी तुम्हारीयी कुट्टियाआआअ हुन्न्न्नन्नन्न हॉँण्णन ...... डरडडडडडड दूऊऊ अपनीईई कुट्टियाआआअ को ......"

रानी पुष्पलता ने वासना का ऐसा नंगा नाच कई बार देखा था पर दोनों बहेनो की ख़ुशी और आर्यन का उनके लिए लगाव यह भी बता रहा था की सब मर्जी से एक दुसरे को पूर्ण संतुस्ट करने में लगे हैं.

अपनी गीली योनि को पहुंचती खुद से बोली," मेरा समय जल्दी नहीं आने वाला, आर्यन से राजशी भोज बाद के सिर्फ अकेली सम्भोग करुँगी ".

अपने कक्ष में वापस आकर उसने अपने सही विस्तार पहने और त्यार होकर सीधा रानी हेमा के सामने प्रकट हुयी .......

वहां दोनों की वार्ता में रानी पुष्पलता ने शरत राखी की वह आर्यन को अपनी शक्ति से उन्मुक्त कर देगी अगर स्वर्ण का आर्यन से पुत्र पैदा होगा???

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तळतळा लोक राजमहल......

राजा माया के साथ राजा बलि महाराज , राजा वासुकि भी बैठे थे उनके राजदरबार में और दुसरे लोकों के पुराने बड़े बुजुर्ग भी पर आज दानवो के गुरूजी भी वहां थे.

राजा माया ," गुरूजी हमको तोह हमारी भार्या (बीवी) रानी हेमा ने hi निश्तेज करवा दिया".

राजा वासुकि ने शीर्घ hi उनके वक्तव का खंडन किया ," नहीं राजन माया आपके विचार से में सहमत नहीं हूँ. रानी हेमा ने आर्यन को अपना पुत्र बना के हम सबके ऊपर से बहोत बड़ी विपदा ताली है ".

गुरूजी जोह अभी भी पुराने साक्षो का अवलोकन कर रहे थे अपना मत दिए ," कभी कभी दूसरे को बैरी (दुश्मन) समझने से पहले ुष की शकितयाँ और समर्थ जान लेना चाहिए. फिर ुष धरतीपकड़ से हर पतलोक वासी डरता था यहाँ तक तुम भी महँ राजा माया जबकि दानवों में शक्तिशाली होने के साथ सबसे तेज़ मस्तिक्ष वाले और मायावी भी तुम hi हो ".

अब तोह शर्मिंदा hi होना पड़ा राजा माया को आखिर सच्च hi तोह कहा था गुरूजी ने पर उनका अगला प्रहरार जैसे सबके बिछ उनकी इज्जत तार तार कर दिया.....

गुरूजी बोले ," जितनी ाशिवार्ये से पूरे पतलोक वाशियों को अपनी दत्तक सबसे छोटी पुत्री माया से महार्यं के साथ विवाह में आमंत्रित कियो हो उसका श्रेया भी ुष महार्यं यानी तुम्हारे पुत्र सामान आर्यन को hi जाता था वार्ना कितनो सालों से तुम्हारी तीनो दत्तक पुत्रियां ुष शक्तिशाली दानव वतासुर की गुलाम hi थी और तुम अपने hi लोक में उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाए. यह hi विचारो तुम्हारे सामने तीनो पुत्रियों का चीरहरण हर रोज होता था पर इतने शक्तिशाली और मायावी होकर भी अहसाये थे आखिर तुम्हारा वरदान hi उसको सेह दे रहा था. आर्यन नहीं आया होता तो खुशियों के हकदार hi कहाँ थे तुम महँ राजा माया ?"

राजा माया रूट हुए हाथ जोड़कर गुरूजी के सामने नतमस्तक हो गए पर उनका हर कड़वा लवज सत्य था. बाकी सब सभागंन भी निरुत्तर hi थे.

राजा वासुकि ने अपना पक्ष रखा ,"चमा चौंगा गुरूजी अगर में कहूं की राजा माया भी कहीं गलत नहीं हैं उन्होंने वही किया जोह उनको ठीक लगा ".

गुरूजी ने अठास करते हुए अपना सर हिलाते हुए कहा," तुम सब मूर्खो को मैंने राजा बांया hi क्यों है और राजा बलि महाराज आप तोह पूरे पतलोक के महाराज हैं, क्यों आर्यन को बहार नहीं निकाल देते जिससे सब सुख से चैन से रह पाए जबकि हमारी दुविधा क्या काम है ".

राजा बलि महाराज अब खुद को मुस्कराने से रोक न सके और बोले," मेरे ऊपर तोह अहसान hi है ुष शिव शम्भू भकत आर्यन का...... उसने मेरी दत्तक पुत्री त्रिवेटा का घमंड इतने सालों बाद तोडा फिर कहाँ गलत है वह? पिछली बार सिर्फ अपनी दिव्या तलवार लेना आया और लेकर चला गया...... हाँ इतना तोह हम सब जानते हैं अगर वह तलवार हम में से किसी के हाथ लगती तोह सबसे पहले तो वह दानव या नाग पतलोक का स्वामी बनता सबको मार के फिर अपनी हिंसक पारवती सब लोकों में दीखता. आर्यन ने किसी से कुछ नहीं माँगा न धोष दिखाई वार्ना ुष दिव्या तलवार से तुम सबमे से कोई पाने के बाद मेरा गाला hi काट ता ".

अब आर्यन की इतनी तारीफ सुनकर पतलोक के द्वार का नया पररहि (चौकीदार) नागदंश बोलै ," आप सबके िश आर्यन को में नाग युद्ध में हरा दूंगा क्या बल्कि मार दूंगा तब कोई भी बाद में िश पतलोक क्या िश भरमांड में उसका कोई नाम नहीं लेगा".

राजा वासुकि ने नागदंश को चुप करा के बहार भेज दिया ..... और सबसे उसकी ुधंता की चमा मांगी .

तब गुरूजी ने कहा ," तुम सब अभी भी नहीं समझे वह हमारे पतलोक का अंगरक्षक hi होगा, जैसे hi वह रानी स्वर्णलता , राजकुमारी माया और राजकुमारी Prabha-Visakha से विवाह करता है. उसके यहाँ पतलोक में आने से अच्छा hi हुआ है इतना जरूर सोचना वार्ना दिव्या तलवार का मालिक क्या कर गुजरेगा अपने क्रोध में वह मूल्य हम कभी चूका न पाएंगे फिर उसकी नयी रानी माँ हेमा को क्रोध दिला के देखो वह अब उसको इतना मानती है की पतलोक उजाड़ के धरतीलोक चली जाएगी अपने वत्सला प्रेम में. उनसे भी गलती हुयी है जिसने उसको पुत्र बांया जिसको हर माँ बीटा मानती है बस उसको स्तनपान करवा दो".

राजा बलि महाराज ," गुरूजी, आर्यन कभी यहाँ हमेशा नहीं रहने वाला पर उसका आना hi हम सबके लिए आशीर्वाद hi है फिर इतनी शक्तिशाली वर तोह हम भी नहीं ढूंढ पाते. आप चिंता मत कीजिए ुष के अंदर एक दिव्या तलवार की तरह एक दिव्या शक्ति भी है जोह उसको सब लालच से दुर्र रखती है. बस उसको ललकार हम अपना नुक्सान न करें तोह भला होगा..... में विष्णु भगवन की कसम खाता हूँ आर्यन के खिलाफ में कुछ नहीं करूँगा ".

फिर राजा वासुकि और राजा माया के साथ वहां सब लोकों के राजा के साथ रानी पुष्पलता भी आकर कह देती की वह आर्यन को अपने लोक का राजा तक बना देगी.

गुरूजी अनंत में बोलते हैं," कोशिश करो वह यहाँ की ज्यादा से ज्यादा स्त्रीओं से विवाह करे ताकि कभी पृथ्वीलोक नहीं जाये वर्ण जोह ुष से विवाह करें वह उसके साथ पृथ्वीलोक hi चली जाएँ और उसको पतलोक आने से किसी विध्वंश करि युक्ति को अंजाम देने से रोकें..... तुम सायद जानते नहीं हो उसकी होने वाली 2 बीवियां देवताओं के आशीर्वाद प्राप्त्य हैं और 2 देवताओं की बेटियां हैं जिनको श्राप के कारन धरतीलोक जाना पड़ा ........ ???"

मगर दानव गुरूजी भी कहाँ जानते थे की रति को महादेव से वरदान मिला हुआ पर अभी तक उसने इस्तेमाल hi नहीं किया क्यों ????

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स्वर्ण महल.....

पुष्पलता जब वापस अपने कक्ष में पहुंची तोह चीख निकलती निकलती बच्ची क्योंकि अब आर्यन एक हाथ से ुष स्वर्ण और रतन से जड़ित झूमर पे उल्टा घुटनो के बल लटका था और कामलता भी उलटी उसकी तरह मोह किये चूम छाती में लगी उलटी लटकी थी अपने चूतड़ हिलाते हुए आर्यन की कमर पे अपनी जांघें कैसे हुए.....

झूमर इधर से उधर फर्श से 25 फट ऊपर झूल के कभी भी गिर सकता था पर जब बिस्टेर पे निघा पड़ी तोह इतनी चीख पुकार के बिच स्वर्ण का सूना उसको समझ में न आया......

आर्यन और कामलता की हालत देखकर पुष्पलता समझ गयी िशने आर्यन को भी भोले की बत्ती पीला दी है..... लेकिन आर्यन जिन्दा है यह hi बड़ी बात है पर कामलता क्या बावली हो गयी है ?

उसको िंह दोनों की चीख पुकार से पहले स्वर्ण की चिंता हुयी तोह उसके सर पे हाथ रखकर उठाई तोह उसने मुस्करा के आँख खोली तोह खुश हुयी ," चलो यह तोह ठीक अवस्था में है ".

पर तभी ऊपर ऊँगली धिकाती स्वर्ण चीखी ," ारयणणणणणण didiiiiiiiiiii ...... "

उन्ह दोनों का भी धयान गया तोह आर्यन ने अपनी टांगें उठा ली जोह मोड़कर ऊपर उन्दोनो का वजन झेल रही थी और दोनों जब फर्श की तरफ गिरने लगे तोह पुष्पलता ने उठकर अपना हाथ आगे दिखा के उनकी गति रोकी पर उसे पहले hi आर्यन सीधा होता अपने से चिपटा कामलता को अपने लुंड पे उठाये फर्श पे लैंड किया......

बस कामलता के मोह से ," ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआआआ ाराममममम से ारयणणणणणण ..... जल्दी जल्दी करूऊऊ में फिर से आने वाली हूंणणन्न ..... "

आर्यन उसके लबों को चूसने लगा ," पुछःह पुछःह .... चुम्म्म्म्म चुम्म्म्म्म .... कामु तुम बहोत नशीली हो में तेरा गुलाम होता जा रहा हूंणणन्न...... मेरी कामु रानी ".

स्वर्ण उन्ह दोनों का साथ देती थक के सू गयी थी पर आर्यन और कामलता तोह कोई इतहास hi रचने में लगे थे..... ना कभी दानव स्त्री और मनुष्य इतने समय सम्भोग कर सकते हैं पर स्वर्ण अभी भी हैरान थी पर पुष्पलता ने दोनों के पास जाकर प्यार से बोलै दोनों का सर और गाल सेहलते हुए," चलो अब जल्दी एक दूसरे को संतुस्ट करके आराम करो फिर सही भोज पर आर्यन तुम्हारी माँ रानी हेमा भी आएँगी बहोत सारे पतलोक के राजा और रानियों के साथ..... बस जल्दी समापत करो ".

आर्यन जहाँ हैरान था की पुष्पलता इतनी चुदाई देखने के बाद भी अपनी को कण्ट्रोल करे थी ?????

वहीँ स्वर्ण और कामु अपनी बड़ी भें को क्रूड में न देखकर खुस थी पर अभी कहाँ पता था की यह तुफ़ाओं के आने से पहले की शान्ति थी.......

आर्यन और कामलता कामक्रीड़ा की 7थ्वी दहलीज लांग दिए थे िंह 10-11 घंटो में पर रोक कौन पायेगा ?

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रानी पुष्पलता

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अपडेट 38 (पतलोक)

Part - 3©

अटाला लोक में जश्न का आयोजन था हर तरफ पूरी स्वर्णगैर को सज्य जा रहा था पर अद्भुत रतन और मणि से..... कुछ अटाला लोक के पुष्पों से भी यह नगर का द्वार सजाया गया था.

आर्यन जब त्यार होकर जश्न के बड़े से प्रांगण में स्वर्ण के साथ पहुंचा तोह सब की आंखें उसके गोल्डन लिबास जोह एक गेट्स गाउन सा था..... यानी औरतों की कंधे पे तानी वाली निघ्त्य हे कहना होगा क्योंकि सिर्फ उसकी आधी झांगों तक आ रहा था. कमर पे एक रेड कलर की 4 बार लिपटी रेसम सी दूरी सी थी जिशपार सामने एक बड़ा नीले रंग का रतन था जड़ित था. गले और कलाई में स्वर्ण हार और कड़े पहने थे. माथे पे स्वर्ण का पत्ता था ...... यानि कुल मिला के गोल्डन मन लग रहा था .

स्वर्ण ने एक महरूम रंग के अंगिया और मिनी स्कर्ट साइज का निच्चे लपेट के विस्तार पहना था, ुष्पर उसके आभूसन और ाची तरह सजे सव्रे बालों को एक मोती छूती बना ली थी जोह नागिन सी उसकी मोठे चूतड़ों को चलते हुए चूम सी रही थी.

आर्यन ने अपना लुंड बिना अंडरवियर के अपनी सीढ़ी जांघ पे एक पतली रस्सी से बाँध लिया था की खड़ा होने पे भी उठे नहीं क्योंकि जैसे में स्त्रीयां वह भी अध्नंगी hi उसकी हालत ख़राब कर देंगी.

आर्यन पे नज़र पड़ते hi प्रभा जोह मानव रूप में थे दौड़ के उसकी तरफ भागी ," भइईईई !!!!!! "

उसकी तेज पुकार सुनकर आर्यन ने स्वर्ण का हाथ छोड़ दिया और आगे बढ़कर अपनी लाड़ली प्रभा को एक बच्ची की तरह गॉड में उठा के उसका पूरा चेहरा चूमता रहा ," आये मेरा बेबी .... तू भी आयी है ..... कुछ खाया की नहीं ...... तू इतनी साद क्यों लग रही है ?????"

अपने बड़े भाई की गॉड में hi तोह जन्नत लगती है प्रभा को और उसकी केयर और फ़िक्र जैसे उसको खुश कर दी ," hi hi hi hi..... भाई पूरा चेहरा गीला कर दिया कीसीई करके ...... hi hi hi hi ...... आप को तोह मेरी याद भी आयी ".

आर्यन भी अपनी छोटी भें की कजरी आंखें को चूमते हुए ," नहीं बेबी बस यहाँ आ गया था फिर तुझे भी अपने माँ बाप से मिलना था वार्ना में तेरी hi चिंता में था क्या कर रही होगी वहां ".

िंह दोनों को आकर सब घेर के खड़े थे पर दोनों भाई बहेनो का धयान hi कहाँ था किसी पर .......

तभी किसी ने आर्यन के कंधे पे हाथ रखा ," सिर्फ अपनी भें से hi मिलाए हम सब भी आये हैं".

इतनी मधुर और ममता भरी आवाज सुनकर आर्यन जैसे खुश होता अपनी गॉड में लिए हुयी प्रभा पलटा और उसको अपनी पीठ पे घुमा के बिठा लिया जैसे बंदिरया अपने बच्चे को अपनी पीठ पे टांग लेती है छाती से हटा के.

आगे झुकार अपनी नयी देवी माँ सी रानी माँ हेमा के गले लगकर उनके गाल चूम के बाँहों में भरता बोलै," आप कब आयी माँ ? में आपको बहोत मिस कर रहा था ".

आर्यन को अपने सीने से लगा के रानी माँ हेमा को भी चैन मिला फिर प्रभा का भी गाल उन्होंने चूम के कहा," अब जश्न मेरे पुत्र के लिए है तोह क्यों नहीं आयूंगी चलो सभी तुमसे hi भेट करने के लिए उत्सुकः हैं ".

आर्यन कई अनजाने चेहरे और तीनो दानव कन्या साया, चाय और माया के साथ स्वर्ण, कामलता और पुष्पलता को देखकर खुश हुआ फिर भी सबकी तरह हाथ जोड़कर सर झुकता नमन करने लगे.

रानी माँ हेमा ने सबसे उसका तारूफ अपना पुत्र के रूप में करवाया पर सब हैरान तोह राजकुमारी प्रभा को देखकर थे की वह अभी भी एक बच्ची की तरह आर्यन की पीठ पे गर्दन में बाहिएँ डाली लड़ी हुयी है मगर जैसे िंह दोनों का रोज का काम हो.

प्रभा की बचपन से दो hi जगह रही हैं एक आर्यन की गॉड में सीने से लगे हुए या उसकी पीठ पे लड़े हुए...... दोनों जवान हो गए पर भला कौन बिच में बोले की अब तोह बड़े हो गए हो, अगर किसी ने टोका तोह आर्यन गुस्सा हो जाता था की मुझे बोलो मेरी भें प्रभा को कुछ मत बोलना.

सब बड़े बड़े राजाओं और महाबलियों से मिलकर आर्यन ने स्वर्ण से पुछा भोजन का क्या प्रभंध है , प्रभा को भूक लगी होगी ...... ?

साड़ी स्त्रीयां और जवान लड़कियां प्रभा को ऐसे आर्यन की पीठ पे लढा देखकर hi चिढ़े जा रही थी..... मगर प्रभा को किसी की परवा न थी वहीँ अटाला लोक की तीनो रानियों और तीनो दानव कन्याँ समझ गयी थी की आर्यन की जिंदगी में यह शक्तिशाली राजकुमारी बहोत एहम है. पहली रिश्ते से दोनों मानव भाई भें हैं और अब दोनों का विवाह भी होने वाला है.

पतलोक में शक्तिशाली दानव या नाग अनगिनत मादा रख सकते थे पर जिससे विवाह किया वह किसी दुसरे नर को नहीं भोग सकती थी यदि नियम टूटा तो उसका पति उसको कुछ भी सजा या मौत दे दे.

अगर स्त्री शक्तिशाली हो तोह वह भी अपने पति को अपनी मर्जी के बगैर कहीं मोह मारने नहीं देती थी चाहे वह राजा hi क्यों न हो. मगर होता उल्टा hi था यानी सब अपनी ताकत का hi इस्तेमाल करके मैं मानी करते थे.

आर्यन जब अपनी गॉड में बिठा के अपने हाथ से प्रभा को भोजन करा रहा था एक सिंघासन पे बैठे के ...... दासियों की जगह आर्यन को सब चाहने वाली भी उसके ीर्ध गिर्द कड़ी होकर अपने हाथ से उसको व्यंजन दे रही थी .

साही दावत का जश्न बहोत hi बोर लगा आर्यन को पर वह सबके साथ हसी खुसी मिला. थोड़ी डिअर बाद प्रभा यह बोल के चली गयी की कल वह आर्यन से मिलने तळतळा लोक आएगी.

प्रभा के जाने के बाद सबसे छोटी भें, दानव कन्या, माया ने झट से आर्यन की गॉड कब्ज़ा ली और उसको खुद अपने हाथों से ख़ास शीतल पेय पिलाने लगी भोजन के साथ.

स्वर्ण भी आर्यन के उलटी बाजू पकड़ के बेथ गयी तब साया और चाय उसके सीधे बाजू बेथ गयी....... बहोत से दानव और नाग गुस्से से आर्यन को घूर रहे थे इतनी हसीनाओ के साथ बैठे हुए.

माया सबसे चुलबुली थी और सूंदर भी, उसको आर्यन भी पसंद करता था बिलकुल उसकी छोटी भें डॉली की तरह थी. अब उसका स्वभाव के साथ सबके लिए वर्ताव भी बदल गया था. हर एक से आदर और सम्मान से बात करती थी और मानव की तरह बड़ो का बहोत रेस्पेक्ट करना सीख गयी थी. उसने हमेशा एक अच्छा पति मिले ऐसी कामना की थी पर श्रापित मुक्त होने के बाद वह आर्यन से hi विवाह करना चाहती थी चाहिए पहले से hi उसकी कितनी बीवियां होंगी उसको फरक नहीं पड़ता.

रानी हेमा ने उसको आर्यन के साथ धरतीलोक इशलिये भेजा था की वह आर्यन को अच्छी तरह जान ले. अपनी माँ से जिद्द की वह बस आर्यन से hi शादी करेगी चाहिए वह उसको साथ न रखे फिर भी.

रानी हेमा ने अपनी पुत्री मोह में आश्वासन दिया की उसको आर्यन जरूर मिलेगा पर समय आने दो जब प्रभा उशसे विवाह करने के लिए त्यार होगी तब एक दिन पहले तुम्हारा विवाह होगा आर्यन से पर तुम को अपनी बहेनो और दूसरी स्त्रियों से आर्यन को बाटना पड़ेगा.

माया अपनी माँ के गले लग कर खुश होते हुए तभी बोल दी ," बस कुछ पलों का प्यार भी मेरे लिए काफी है आर्यन के साथ विवाह के बाद. में उनको बाँध के नहीं रखूंगी न hi किसी से इर्षा करुँगी".

आज आर्यन की गॉड में बैठी माया को जब वह अपने हाथ से जाम पिलाता तोह खुश होती खिल खिलाती सबसे नज़र बचकर छोटा सा सिप पीती फिर उसका गाल भी चूम लेती...... जैसे किसीको दिखा नहीं हो पर हर औरत या लड़की ुश्कि किस्मत से रंज कर रही थी.......

आर्यन बहादुर था और देखने में बहोत सूंदर नौजवान क्यों उसको न पसंद कर पाए ...... फिर आज की वेशभूसा में तोह सबसे सूंदर दानव जैसा hi लग रहा था बॉडी से.

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ऊपर बने सिंघासन पे बैठी रानी पुष्पलता ने घोसना की ," आप सबको गायत होगा की हमारे राज्य में दिव्या तलवार का महाबली महार्यं सिंह आया हुआ है और ुशी के सम्मान में यह जश्न और भोज रखा गया है..... में चाहूंगी की आप सब उसका स्वागत और अभिवादन करें ".

रानी कामलता ने अपनी सेनापति वाली वेशभूसा में कहा ," महाबली महार्यं कृपा मंच पे पधारे. रानी पुष्पलता आपको सम्मानित करना चाहती हैं".

आर्यन ने माया का गाल चूम के उसको अपनी गॉड से उठाकर अपनी जगह बिठाकर कहा ," में अभी आया माया ".

माया ने भी प्यार से गर्दन हिला दी की जल्दी जाओ जल्दी आओ......

साया ने कहा," यह क्या छोटी तू हम दोनों को hi भूल गयी आर्यन की गॉड में बैठकर".

स्वर्ण ने बिच में टोका," आर्यन है hi इतना प्यारा कोई भी उसकी गॉड में बैठकर भूल hi जाएगी दुनिया जहाँ को ".

साया हसकर," तभी इतनी सूंदर लग रही हो स्वर्ण दीदी "....... वह तीनो से उम्र और पढ़ में बड़ी थी .

स्वर्ण ," माया से ज्यादा कोई सूंदर नहीं हो सकती क्योंकि आर्यन इश्क बहोत धयान रखता है ".

चाय ," यह भी आपकी तरह आर्यन से विवाह करेगी कल पर मिलान के लिए तड़प रही है ".

माया बिचारि बस सर झुका के सबकी छेद चाँद पे शर्मा रही थी .....

उसने राजकुमारी दीप्ति को बहोत करीब से फॉलो किया था तो उसके जैसा बनना चाहती थी..... सही hi कहा गया है गुण आपके अंदर होते हैं जनम किसी भी जाती या योनि में क्यों न हो आपकी संगती का असर ज्यादा होता है. जहाँ यह, माया, दानव कन्या होकर भी अच्छी मानव पारवती की बनने की कोशिश कर रही थी अपने प्यारे आर्यन के लिए.

आर्यन को ऊपर मंच पे रानी पुष्पलता ने एक मुक्त पहनाया और सबको सम्भोदित करती बोली," महाबली, दिव्या तलवार के मालिक, महार्यं को में रानी पुष्पलता आज से हमारे अटाला लोक का अंगरक्षक नुक्त करती हूँ ".

सब जैसे स्तब्ध hi हो गए पर तभी दानव गुरूजी ने खड़े होकर कहा ," इश्से शक्तिशाली अंगरक्षक पूरे पतलोक में नहीं है. बोलो महाबली महार्यं की जय ".

सब अपनी जगह से गुरूजी के कहने पे जय जैकार करने लगे आर्यन की..... आर्यन ने गुरूजी के प्यार चुहये और बाकी बड़ों के भी तोह आर्यन का सिस्टचार सबको पसंद आया.

अब आये हुए मेहमान वापस जाने लगे आर्यन भी सबसे मिलकर अब वापस रानी पुष्पलता के कक्ष में आ गया था स्वर्ण और कामु के साथ.

गुरूजी और बाकी राजाओं से भी मंतार्ण करके रानी पुष्पलता भी अपने साही कक्ष में पहुंची. सब दासियों को दुर्र रखा गया था यहाँ से ताकि आर्यन पे दूर न डालें.

आर्यन ने एक राउंड में पहले स्वर्ण की छूट मारी फिर दुसरे राउंड में कामलता की गांड पहाड़ी......

दोनों को संतुस्ट करके अब ुष ने अपना हाथ अटाला लोक की महारानी पुष्पलता की तरफ बढ़ा के अपने पास आने का इशारा किया ....... जोह अभी भी महारानी के सही वस्त्रों को पहने दूर से एक कुशिओं लगे बड़े से सवर्ण तखत पे बैठी पिछले दो घंटों से जाम पे जाम पि रही थी शीतल पेय का .

आर्यन का यह पहला इशारा था उसके लिए की अब तेरी बारी पर रानी पुष्पलता ने कुछ और hi सोच रखा था की में अपनी शर्तों पे आर्यन से मिलान करुँगी ?

वहीँ आर्यन सोचे बैठा था िश सूंदर, मगरूर, अटाला लोक की रानी को अपनी लौंडी बनुगा ? ( मतलब रखीअल एक पालतू कुटिया जैसी )

वह खुद आर्यन की तरफ हाथ का इशारे कर अपनी तरफ बुलाई तोह उसने मुस्करा के गर्दन न में हिला के अपने घुटनो के बल बिस्टेर पे बेथ कर अपनी सीढ़ी झांग पे थपकी दी की तुम यहाँ आकर िश पर बैठो और अपने ढीले पड़े लौड़े को हिलता हुआ उसको तरसने लगे......

पुष्पलता भी तक ताकि लगये हैरत से देख रही थी कुछ hi पलों में करीब 15 इंच लम्बा और 6 इंच मोटा लिंग अभी भी उसकी दोनों छोटी बहेनो को थका कर उनके रास लगे होने के बाद जरा भी बेथ नहीं रहा था फिर से त्यार था ...... दिक्कत सबसे बड़ी यह थी की आर्यन सिर्फ 4 बार hi झाड़ा था पर चुदाई करता उनको करीब 20 घंटे से ऊपर हो गया था.....

(*यहाँ का समय और पृथ्वीलोक का समय में काफी अंतर था बस आर्यन अपनी बॉडी सिरकाडियन साइकिल से समय का अंदाज़ लगा रहा था. यहाँ वक़त तेज़ बीतता था पृथ्वीलोक के मुकाबले यानी वहां का एक घंटा पतलोक के 24-36 घंटे के बराबर था अलग अलग लोक में यानी अटाला सबसे ऊपर लोक था और नागलोक सबसे निच्चे यानी वहां 36 घंटे धरती पे बिताये 1 घंटे के बर्बर..... यह सायद 14 लोकों को ऊपर से निमिन होने के अनुसार था यानी स्वर्गलोक में समय मायने नहीं रखता वहीँ नरकलोक में समय कभी ख़तम नहीं होता.)

पुष्पलता के लिए अपमान की बात थी की कोई मानव उसको ऐसे आमंत्रित करे पर आर्यन को मुस्कारते देख के वह भी अपनी गर्दन झटकी जैसे उसको यह कतई मंजूर नहीं. आर्यन को लगा अंगरक्षक बना के कुछ तोह पिघली होगी पुष्पलता पर नहीं.

आर्यन ने अपनी बड़ी बड़ी नीली आंखें दिखा के उसको घूर के चिल्ला के बोलै," तुझे समझ में नहीं आ रहा है की मैंने क्या आदेश दिया है. अगर तू अगले दस पलों में नंगी होकर मेरी जंघा पे नहीं बैठी तोह कभी नजदीक भी नहीं फटकने दूंगा ".

इतनी तेज आवाज में गुस्से से ज्यादा आदेश था और तीनो भेने जैसे डर hi गयी..... स्वर्ण और कामु भी निढाल सी बिस्टेर पे सीढ़ी बैठकर कुछ बोलती ुष से पहले आर्यन ने गिनती शुरू कर दी दोनों को आँखों से अपना क्रोध दिखा के ," प्रथम ...... दुवतिया ...... तृतीया ..... "

उसकी हर गिनती के साथ आवाज और सुर ज्यादा hi कर्कश होता जा रहा था पर पुष्पलता का भी दर बढ़ने लगा की आर्यन मजाक नहीं कर रहा है ......

डर क्या होता है तीनो बहेनो को आज पहली बार पता चल रहा था.... दोनों छोटी बहेनो को आर्यन की अपनी बड़ी भें के कारन भविष्य में होने वाली बेरुखी का डर और पुष्पलता को अपने भविष्य के सारे आराम ख़तम होने का डर.....

दोनों छोटी भेने जानती थी उनकी बड़ी दीदी कितनी जिद्दी है पर अगले hi पल आर्यन के "चतुर्थी" बोलने पर पुष्पलता का खड़ा होकर अपने दोनों सही विस्तार फाड़ना और अपना मुकुट , आभूषण ुष स्वर्ण तखत पे रखना चकित कर गया. 'आशम्भव' ...... दीदी को भी कोई अपनी ऊँगली पे नच्चा सकता है क्या? यहाँ पतलोक में तोह कोई नहीं पर आर्यन ने कर दिखाया .

दशमी बोलने से पहले hi वह सफ़ेद रंग की , सबसे सूंदर, नंगी होकर ,अटाला लोक की रानी, पुष्पलता, आर्यन की सीढ़ी जंघा पे अपने चूतड़ टिका के आर्यन की खोली भरी बैठी थी गहरी सांस लेते हुए..... न जाने कितनी म्हणत की हो पर उष्ण अपने दिल की आवाज सुन्न के यह किया ...... ऐसा कोई मुझे फिर खभी नहीं मिलेगा.

पुष्पलता जानती थी कुछ hi दिन उसके पास हैं फिर सायद आर्यन जिन्दा hi न रहे पर िंह लम्हो को भी खो दिया तोह क्या रह गया अपने िश निराश जीवन में.

आर्यन ने मुस्कान लिए अपनी दोनों पहले से जीती हुयी रानियां ( स्वर्ण और कामु) की तरफ देखा और पुष्पलता की चिकनी गोरी कमर में सीधा हाथ दाल के दुसरे हाथ की उंगलिओं से उसके सुनहरी बालों में पेहराता आँख मार्के उनकी तरफ पुष्पलता का सर चूम के बोलै," ाची प्रेमिका अपने प्रेमी का हर आदेश मानती है और तुम ने साबित किया की तुम अच्छी प्रेमिका के सब गुण रखती हो. जब भी मेरे साथ हो अपनी रानी वाली अकड़ और घमंड दुनिया के लिए बचा के रखो मेरे साथ अपने दिल की गहराई में छुपा प्यार दिखना हमेशा वह भी दिलसे, तुम बहोत सूंदर हो पुष्पलता ".

पुष्पलता ने भीगी आँखों से अपना चेहरा आर्यन के सीने में रगड़ के कहा," क्या करूँ कभी प्रेम किया hi नहीं और अब आप मिलो हो तोह सीख लुंगी ".

आर्यन ने उसकी पीठ पे हाथ फिरा के दुसरे हाथ से उसका चेहरा ऊपर उठा के उसके आंसूं चाट ते हुए बोलै," तुम वाकिये बहोत अच्छी हो मेरी पुष्पु बस प्यार करना सीख जाओ तुमसे ाचा कोई नहीं होगा क्यों स्वर्ण , कामु?"

दोनों छोटी भेने भी आर्यन से लिपट गयी, कामलता बोली ," तुम महँ हो आर्यन, तुम ने दीदी का दिल भी जीत लिया जबकि सब इनकी गुलामी करते हैं ".

आर्यन की दूसरी झांग पे कामु बेथ गयी और पीछे से स्वर्ण उसकी पीठ पे चढ़ गर्दन में हाथ लपेटे चिपक गयी..... तीनो आर्यन से साइज और हट में बड़ी थी पर 250 kg-kg की तीनो रानियों को अपने से साठ्ये आर्यन जैसे चिप hi गया था......

(**दोस्तों यहाँ ग्रेविटी भी ज्यादा होती है तोह करीब 100 कग ज्यादा वट होगा पृथ्वीलोक से )

आर्यन ने पुष्पलता के हलके गुलाबी लबों को चूम डाला तो वह भी प्रश्न होती अपना अधरों का रसपान करने में दिल से साथ देनी लगी ......

आज पहली बार था तीनो भेने आर्यन से लिपटी अपना अगला सरीर का हिस्सा जहाँ जगह मिल रही थी रगड़ रही थी पर इर्षा का मैं में एक भी भाव न था तीनो में. सायद प्रेम की बुलंदियां यह तीनो भी छूने लगी थी आर्यन को पाकर.

आर्यन प्यार hi इतना देता है हर किसी को कोई नफरत कहाँ से रहेगी फिर रानी माँ हेमा ने पिछली बार hi आशीर्वाद दे दिया था की आर्यन की स्त्रीयां आपस में कभी दुवेश नहीं रखेंगी चाहिए पास हो या दुर्र.

( रति और अणि के अल्वा किसी में दुवेश था भी नहीं पर जहाँ रति अभी आर्यन की सबकुछ थी वहीँ अणि आगे आर्यन के लिए सबकुछ बनने वाली थी..... यानी आर्यन सिर्फ ुशी का होगा मेरी शर्तों पे और उसकी हर औरत मेरे आगे सर झुकायेगी )

आर्यन ने पहले स्वर्ण को अपनी पीठ से उतरने को कहा तो उसको सायद अच्छा नहीं लगा पर बेमान से हैट गयी तब आर्यन पुष्पु और कामु को लिए सीधा बिस्टेर पे पीठ के बल लेट गया और उन्ह दोनों को अपने दायें बायें अपने दोनों कन्धों पे सर रखकर के लिटा लिया. दोनों ने झट से अपनी झांघैं और हाथ आर्यन के ऊपर रख के लिपित गयी और चूमने लगी.

स्वर्ण को पहली बार बुरा लगा जब से यहाँ आर्यन आया था..... दोनों दीदी को मुझसे ज्यादा प्यार करेंगे ऐसा सोचा न था पर अगले hi पल आर्यन की इल्तजा ने जैसे पूरे जहाँ भर की खुसी दे दी हो उसको ," स्वर्ण तू अपनी पसंदीदा जगह आ जा जोह मेरा सीना है जिसके अंदर तेरे लिए मेरी हर धड़कन आती है दिल की गहराई से".

स्वर्ण ने इतना सुनते hi झट से ख़ुशी में चल्लंघ मार दी कहीं उसकी कोई सी बड़ी भें आर्यन के सीने से न लिपट जाए मुझसे पहले ...... hi hi hi hi hi hi .....

आर्यन उसकी बेताबी और खुसी देखकर बोलै," अह्हह्ह्ह्ह आराम से स्वर्णो..... अब तोह खुश है इशलिये बोलै था पीछे से नहीं आगे से लिपटे रहना है तुम तीनो को ...... पुछःह पुछठ मेरी प्यारी स्वर्ण ".

स्वर्ण की फुर्ती देखकर और आर्यन की बातें सुनकर दोनों बड़ी भेने भी उसको चूमने लगी सर सहलाते हुए.....

कामु ," आर्यन तुम सच्च में कोई भगवन हो जोह यहाँ पतलोक में आकर हम तीनो को इतना प्रेम और स्नेह दिया जितना आज तक हमको नहीं मिला ".

पुष्पु," हाँ सच्च में जितना सकूं तुम्हारी बाँहों में मुझे अपनी बहेनो और तुम्हारे साथ अभी मिला रहा है कभी नहीं मिला था ".

स्वर्ण ने आर्यन के सीने पे लेते हुए आर्यन की थोड़ी को चूम के कहा," प्रेम इतना सुख देता है यह अहसास कभी नहीं हुआ था हमको आर्यन. तुम हमेशा हमारे साथ hi रह जाओ न ".

आर्यन ने प्यार से अपनी िश छोटी 7 फट से ज्यादा लम्बी तगड़ी लवर को समझते हुए कहा ," जैसे तुम तीनो भेने हो न ऐसी hi मेरी प्यारी सी तीन बड़ी जुड़वाँ भेने हैं पृथ्वीलोक पर और हम चरों ऐसे hi एक साथ सूट हैं तोह प्यार करना मुझे उन्होंने hi सिखाया है. फिर मुझे माँ और साड़ी मुम्मियाँ इतना प्यार करते हैं की में भी प्यार करना सीख गया हूँ ..... पुछःह पुछठ ....... हाँ एक बात जरूर कहूंगा तुम तीनो भी उनके जैसी बहोत प्यारी हो, देखो ऐसे अकेला जीवन नहीं कटेगा फिर में अपनी माँ ( रति) से कभी दुर्र नहीं रह सकता यह जीवन उसके नाम लिखा है. हाँ कोई तुमको पसंद आये तोह विवाह कर लेना मेरे ऊपर पहले से बहोत जिम्मेदारी हैं".

आर्यन की बात सुनकर तीनो को गुस्सा आया पर पहले स्वर्ण hi पहात पड़ी," आज बोलै है आगे कभी मत बोलना, तुम hi मेरे प्रेमी, स्वामी और सबकुछ हो चाहिए अपनायो न पर ऐसे दुत्कार अपमान मत करो मेरे प्रेम का".

पुष्पु," हाँ आर्यन आप साचे पुरुष हैं, चाहिए हम दो बड़ी बहेनो को मत अपनायो बस थोड़ा प्यार दे देना वही काफी है पर स्वर्ण तुमको अपनी पति सच्चे दिल से मानती है. बस हम दोनों की विनती मान लो स्वर्ण को तोह अपनी पत्नी का दर्जा दे दो".

कामु जोह उठ बैठी थी अपनी भी बात करने के लिए पर पुष्पलता की आँखों ने उसको इशारा कर दिया की यह हम बहेनो के ठीक रहेगा. पिछले 15-16 घंटों से छुड़वा कर इतना प्रेम करने वाला प्रेमी पाकर भी कामलता के दिल को ठेस पहुंची की आर्यन से उसका विवाह नहीं हो सकता.

कामु ने आर्यन के गाल पे प्यार से हाथ फेरते हुए कहा," देखो आर्यन मुझे तुम बहोत पसंद आये और में सच्चा प्यार करती हूँ पर स्वर्ण से विवाह करके तुम उसको जोह खुसी डोज वह हम तीनो के लिए काफी होगी पर मेरी शरत है में विवाह होने के बाद भी तुमसे ऐसा hi प्यार करुँगी क्यों स्वर्ण तुझे ऐतराज है तो अभी बोल दे ".

स्वर्ण झट से ," नहीं दीदी मुझे किसी से भी ऐतराज नहीं चाहिए कितनी hi प्रेमिका या पत्नियों को प्रेम करें बस मुझे अपनी जीवन संगनी मान ले तोह मुझसे खुसनसीब कोण होगा ".

आर्यन ऊपर से बस मुस्करा रहा था तीनो का प्यार देखकर पर अंदर से उसकी गांड फटी पड़ी थी..... वह एक बार को रति के साथ बाकी सबको मन लेगा पर गीता उसको जान से मार देगी की मैंने किसी दानव लड़की से शादी की तोह.....

पुष्पु बोली," तुम परेशां न हो आर्यन रानी हेमा तुम्हारी पत्नी गीता देवी से खुद बात करके मन ली हैं उसको कोई ऐतराज नहीं और तुम्हारी नयी रानी माँ भी एहि चाहती हैं की तुम स्वर्ण से विवाह अवश्य करो ".

स्वर्ण जोह इतनी डिअर से आर्यन के खड़े लुंड पे अपनी योनि रगड़ रही थी की अपनी दोनों बहेनो का अपने hi साथ देखकर लुंड हाथ में लेकर अपनी छूट में उतरती एक धक्का अपने चूतड़ को पूरी ताकत लगा के जड़ तक लील ली ," आह्ह्ह्हह्ह स्वामीईई अब तोह अपना लो में भी आपकी अच्छी भार्या (वाइफ) बनकर दिखाउंगी. आपसे ज्यादा तोह आपका लिंग मुझे प्यार करता है ".

आर्यन ने स्वर्ण के लबों को चूमते हुए अपनी आंखें बंद की तोह बड़े गुरूजी से संपर्क हुआ मस्तिक्ष से तोह उनका जवाब था ," स्वर्ण के बाद, माया और प्रभा से विवाह करके लौटना वॉश यह तीनो hi सिर्फ तुम्हारी रह देख रही थी हज़रों सालों से ".

आर्यन ( मैं में) ," गुरूजी इनकी बड़ी बहेनो के साथ फिर तोह ना इंसाफ़ी होगी न? "

बड़े गुरूजी मुस्करा," मुझे तोह नहीं लग रहा किसी के साथ तुम ना इंसाफ़ी करोगे..... वॉश तुम किस्मत वाले हो जोह तुमको वहां भी इतना प्यार करने वाले मिले वार्ना मौत hi मिलती है किसी बहार की दुनिया वाले को. अपनी रानी माँ हेमा का आशीर्वाद लेना वही hi तुमको सही रह दिखाएंगी ".

आर्यन के दोनों गालों को काटने के साथ दोनों बड़ी बहेनो ने नाख़ून से उसके निप्पल्स भी खुरच डाले थे.....

आर्यन ," सीईईई अह्ह्ह्हह कहा जायेगी क्या और तू साली जोर जोर से गांड पटक अगर मेरी लुगाई बनना है. जिस दिन स्वर्ण तू ने किसी भी मेरी िंह दोनों प्यारी औरत से जलन की तोह मुझे भूल जाईये. में तुझे अलग कर सकता हूँ पर इन्हे नहीं ".

सच्चे आंसूं आ गए पुष्पु और कामु की आँखों में सायद दानवो में इतना प्रेम भोग या अपनापन नहीं होता था पर आर्यन के मोह से निकली हर बात उनके दिल को अंदर तक झंझोर देती थी.

क्या नियति थी जोह प्रेमी मिला वह भी कुछ hi दिन साथ होगा और उसके साथ अपनी छोटी भें को भी हारना padega...?Pushplata सब जानते हुए भी यह प्रेम वाले पल दुखदायी नहीं सुखमयी बनाना चाहती थी .....

एक बार स्वर्ण के झड़ते hi उसके सर को सहलाते हुए बोली," कामु तू भी एक बार खुस हो ले फिर मुझे मत टोकना मेरी बारी पर ".

कामु इतनी खुश हुयी खुद निढाल पड़ी स्वर्ण को उठा के आर्यन से अलग कर अपनी जगह लिटा खुद उसके लिंग को अपनी योनि में दाल जबतक कूदती रही जबतक 2 बार उसको चरमोत्कर्ष प्रपात न हो गया.

________________

पुष्पलता पहले शीतल पेय स्वर्ण को पीला दी उसके बाद कामु को भी पीला के अब आर्यन को पिलाने के लिए पात्र की तोह उसने न में गर्दन हिला के उठ गया फिर दोनों बेसुध सी स्वर्ण और कामु को गोदी में उठकर स्नानगृह ले गया

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स्वर्ण & कामु

दोनों को साफ़ कर फ्रेश करा के वापस लेकर बिस्टेर पे एक साइड दोनों को लिटा के एक कम्बल जैसा परिधान दाल के ुधा दिया. दोनों का माथा चूम के सुला दिया .

पुष्पलता अब वापस वहीँ तखत पे नंगी आर्यन को सब करता देख रही थी पर उसकी निघा उसके तोपची पे थी जोह अभी भी वैसे hi खड़ा झूल रहा था...... डिंग डाँग डिंग स्टाइल में ......

दानवो को लिंग आर्यन के जैसे hi लम्बे मोठे होते हैं पर काले और बधबू दार पर आर्यन का लुंड बहोत सूंदर और गोरा चिट्टा होने के साथ उसका बड़े कश्मीरी सेब जैसा लाल टोपा बहोत आकर्ष बनता था.

शीतल पेय पीती हुयी पुष्पलता की तरफ आर्यन जब बढ़ने लगा तोह जो लिंग ांडों से 45° निच्चे कोन पे था अब पूरा तन्न कर 45° पेट से ऊपर था ..... हाथ में पात्र लिए उसका मोह खुला hi रह गया की सिर्फ छान भर में लिंग में इतना तनाव.

आर्यन उसके बगल में बैठकर उसके हाथ से पात्र लिया और उसकी कमर में हाथ दाल के अपनी गॉड में खींच लिया. पुष्पलता को समझ में नहीं आया की आर्यन उसको अपने लिंग योनि में लेने के लिए बिठा रहा है तोह जैसे hi उसने ुष मोठे पुष्ट कड़क लिंग को पकड़ा तोह आर्यन बोलै," पहले अपने दिल की बात बोल लो पुष्पु में तुमको किसी बात के लिए मन नहीं करूँगा फिर अब हम दोनों hi बचे हैं तोह ज़िंदगी भर प्रेम करेंगे".

बहोत hi शर्मनाक पल था हाथ में लिंग लिए आर्यन की गोदी में अपनी योनि से लिंग भिड़ा अंदर लेने वाली थी.... रानी थी पर आज दासी से बुरी सिथिति थी उसकी पर कुछ सोचकर बोली," हाँ जोह तुम कहो आर्यन ".

वह साइड होकर बैठने लगी पर आर्यन ने उसको पलट दिया तोह उसका बल देखकर हैरान होती हुयी अब अपनी योनि का चीरा उसके लिंग पे उसकी तरफ मोह किये बैठी थी , उसके मोह से सिसकी निकली ," अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण सीईइईसीईई ..... बहोत गरमममममम है..... "

आर्यन के लिए भी पहला मौका था की इतनी सूंदर और गरम औरत उसके साथ है पर चाहकर भी चूड नहीं पा रहा है. कुछ तोह खाश है िश औरत में .

वहीँ पुष्पलता को अब गायत हो गया की रानी हेमा सच्च hi बोल रही थी यह मुझे पसंद करके भी मुझे तरशा रहा है, ऐसा तोह कोई दुनिया में पैदा नहीं हुआ पर इतना संकोच करके क्यों मुझे तड़पा रहा है.

आर्यन," रानी पुष्पलता आपके साथ प्रेम करना मेरी खुश किस्मती होगी लेकिन फिर भी मेरी हिम्मत नहीं हो रही है की में आपको प्रेम करूँ ".

पुष्पलता का तोह मूड hi ख़राब हो गया की ( मैं hi मैं बड बड़े) ," डरपोक , नपुंसक है क्या जबकि प्रचंड लिंग धारी और महापुरुष होकर ऐसी बातें कर रहा है ".

वह सर उठकर कुछ बोलती ुष से पहले आर्यन ुष पात्र से सारा शीतल पेय पिया और फिर ुष बड़े से टोकनी नुमा बर्तन को उठा के अपने मोह से लगा के पूरा पि गया ......

पुष्पलता अभी भी उसके कड़क लिंग पे अपनी योनि टिकाये बैठे हुयी बस देख रही थी पर तभी आर्यन ने उसकी पीठ और सर के पीछे हाथ लगा अपनी तरफ खींच के अपने लैब जोड़ दिए ......

उसकी किसिंग से मजा तोह पुष्पलता को भी आ रहा था पर अब शुरू हुआ उसके मोह में भरे शीतल पेय का आदान प्रदान ..... आर्यन उसके हलक में 3 लीटर से ज्यादा वह पेय दाल दिया और वही पेय पीकर आर्यन के लबों को चूसते हुए फिर से वापस दाल दी......

पुछःह पुछठ पुछःह पुछठ..... की आवाज आ रही थी पर िश प्यारे लम्हों में डूब के पुष्पलता को लगा आज पहली बार कोई मेरा समय भी रोक दिया ......

आर्यन उसको उतार के सामने खड़ा होकर अपना लिंग उसको दे दिया ," सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह...... ारयणणणण यह मुझे बहोत पसंद है ..... अब तोह प्यार करो ...... "

आर्यन ने उसके बगल में हाथ देकर उठा लिया और उसके सीधे कान को चूमते कान में झीभ घूमते हुए अपनी गोदी चढ़ा के बोलै," मेरी हेमा माँ और प्रभा के लिए कुछ भी बुरा सोची या किया तोह पुष्पलता नाम पतलोक में कभी कोई लेने वाला नहीं रहेगा और कामु मेरी प्रेमिकत है वह मेरे खिलाफ कभी नहीं जाएगी".

पुष्पलता की तोह गांड क्या मोह भी फटा रह गया पर अगले पल ुशी बिस्टेर पे लिटाकर आर्यन पहले उसकी चूची पे टूट पड़ा ....... बिलकुल मीठा मीठा सहेड सा रास था .....

आर्यन ने उसकी दोनों चूची अपने हाथों से मरोड़ी तोह होश में आयी," अह्हह्ह्ह्ह सीईई ारयणणणणणण इतनी जोर से नहीं....... काट मत , में तुम्हारे लायक नहीं हूँ माफ़ कर दो ".

आर्यन मुस्करा के उसके निप्पल चूसते हुए बोलै," पुष्पु तुम योजना गलत कर सकती पर अच्छी रानी हो..... आखिर पतलोक की महारानी हो कुछ भी कर सकती हो ".

अब पुष्पलता थोड़ा डरते हुए," तुम अभी भी नाराज नहीं हो ".

आर्यन ने हसकर उसके लबों को चूमा," पूरा विश्व देख रहा होगा पूरा पतलोक देख रहा होगा तेरी यह दोनों भेने देख रही हैं तू कब छुड़ेगी पर नहीं तू हमेशा अपनी शक्ति से रोक ".

आर्यन ने उसको बिस्टेर पे लिटा के दोनों झाँगिए खोली और योनि की उभरे होंठों को चीभ से चाटने लगा पूरे लम्बे गुलाबी चीरे के ...... "अह्हह्ह्ह्ह ारयणणणणणण सीईइईसीईई हम्मम्मम्मम्म hassssssssss ahhhhhhhhhhh ह्म्म्मम्म्म्म "

धरती की साड़ी वाइट रेस की लड़कियां और औरत फ़ैल होंगी िश पतलोक की गोरी रानी के आगे पर आर्यन उसको जीतना चाहता था क्योंकि उसके अंदर का दिल उसको बहोत प्यारा लगा अपनी रानी माँ हेमा के बाद की यह दोनों पतलोक को भी अच्छा बांये रखेंगी.

उसके योनि से रिस्ता मीठा मीठा रास आर्यन को बावला hi कर दिया ...... दोनों चूची दबाते हुए दो बार झड़ने के बाद पूरा योनि रास चाट के बिस्टेर पे चाँद के उसके मोह में अपना कड़क लिंग ठूस दिया जिसपर निढाल पड़ी पुष्पलता अपनी योनि का भी स्वाद लेने लगी .....

( ***आर्यन का लिंग भरी भरकम सिर्फ पतलोक में रहेगा रानी हेमा के दिए आशीर्वाद के कारन ताकि यहाँ की स्त्रीओं को पूर्ण संतुस्ती दे पर पृथ्वीलोक वह उतने hi साइज का रहेगा )

पल भर में hi सँभालते हुए पुष्पलता उठिति हुयी आर्यन का प्रचंड लिंग चूसते हुए बिस्टेर पे उसको पीठ के बल गिरा ली और फिर अपनी कमर मोड़ के अपनी योनि 69 की पोजीशन बनती हुयी बोली," एक बार और चूस दे आर्यन बहोत मजा आया था ..... चाहिए मेरी भी गुदा पहाड़ लेना ".....

आर्यन था बहोत तेज ुष ने कमान संभल ली ...... अब इतनी मीठी योनि को चूसते हुए उसकी पूरे चूतड़ पहला के गांड का छेद भी गीला करता अपने जीभ से चाटने लगा ..... एक बार और मीठा योनि रास चाटने के बाद चरमोत्कर्ष पाकर निढाल अब सीढ़ी लेती पुष्पलता की झाँगिए पहला दिया पोजीशन बनाते हुए.

पुष्पलता का एक एक हाथ अपनी छोटी बहेनो के सर पर था दोनों हाथों से उसकी योनि को खोल के राखी थी स्वर्ण और कामु ताकि आर्यन का टोपा योनि के 6 इंची खुले चीरे पे सही से लग सके .....

आर्यन ," क्या तुम तैयार हो पुष्पु अभी भी सोच लो ?"

पुष्पलता ," गजाशक्ति अधरम पुष्पलतिया दानं !!!!!!!!!!!!!!! "....... अपनी टांगें आर्यन के चूतड़ पे कांची की तरह कसकर बोली और आर्यन ने प्रचंड प्रहार किया ......

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इसी के साथ पूरी योनि भेदता आर्यन का लिंग पुष्पलता की योनि में घरभासा के अंदर तक समां गया था..... उसके मंतर उचार से स्वर्ण का सारा सरीर स्वर्ण का होकर वहीँ कामु का टंगस्टीन के रंग का होकर एक दुसरे से तीनो बहेनो में ज्योति पुंज का चाकर बनकर आर्यन के अंदर सामने लगा ......

( यह आर्यन को नहीं दिखा पर उसको महसूस हुआ की बहोत बड़ा शक्तिपुंज है जोह पुष्पु की योनि के अंदर उसका लौड़ा खींच रहा है )

धप्पा धप्प्प .... पहछहः पहछहः .. ..

" कितनी मस्त छूट है तेरी पुष्पु अंदर भी मोह लगा रहा रखा क्या ..... पुछःह पुछठ ..... पुष्पु अब में तेरे पास hi रहूँगा , डेली तुझे पेलुँगा ..... "

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पुष्पलता ने आर्यन को अपने टांगों और हाथों में जकड़ा हुआ था , उसको कमजोरी भी लग रही थी पर आर्यन को रोकी नहीं थी ...... उसके प्रचंड दाहककों को सहते हुए रूट हुए भी चूम रही थी.

आर्यन अब बेदर्दी पे उतर आया था उसको काट रहा था थप्पड़ मार था .... वह उसको और उकसा रही थी , पलट के अपने निचे लिए फिर घुसने और थप्पड़ मार रहा था ..... और लास्ट में तोह हद कर दी छोड़ते हुए आर्यन ने पुष्पलता का मार्श नोच नोच के कहा रहा था .....

लेकिन सबसे बड़ी बात उसकी दोनों बहने अपनी बड़ी भें की दुर्गति देख सकती थी पर कर कुछ नहीं कर पा रही थी वहीँ आर्यन अब पुष्पलता की गांड मारता हुआ उसके दोनों हाथ उखाड़ के हड्डियां भी खा चूका .....

अब तोह पृथ्वीलोक से Deepti-Geeta भी पहुंच गयी थी वहीँ रानी हेमा के साथ 3no दानव कन्याँ भी, सबने ुष शील्ड को तोड़ने की कोशिश की तब भी कुछ नहीं .....

त्रिवेटा ने अंदर आते हुए कहा आप सबसे कुछ नहीं होगा ," हमको अष्ट प्रणाम देना होगा तभी महारानी बचेंगी ".

अभी कोई ुष सांडनी को रोकता वह अंदर चली गयी मंतर पढ़ते हुए यानी अपनी बलि देने के लिए और आर्यन का मोह पुष्पलता के सरीर से हटाकर अपने वक्ष से लगा के बोली ," पूरा कहा जा ..... भक्षणं तृप्ति भोजनम .... "

अगला दृश्य बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है दोस्तों पर बहोत भी घिर्णित दृश्य था .....

आर्यन उसकी हर बूटी बूटी तक तोड़ते हुए चूस चूस के कहा गया .... वहीँ सिर्फ अर्ध सरीर की सबसे सूंदर रानी पुष्पलता ुष अर्ध घेरे से बहार तोह आ गयी ऊपर सिर्फ कंकाल और निच्चे धड़ था.

तभी जैसे ुष गोले में आर्यन का रूप hi बदलने लग्न पहले एक बाबर शेर में आया धाड़ मारा .......

फिर विशाल गेंदे की तरह फुंकारा....

अगला रूप महार्यं का पूरा "काला योद्धा" ......

तभी एक छूटे सा बोन्न रूप में था सिर्फ 3-4 फट का एक पूँछ वाला बच्चे के साइज का .....

अगला एक बहोत hi महारथी राजा मुकत पहने राजशे वस्त्रों में था .....

फिर एक अंग्रेजों वाली तलवार लिए अपने घोड़े के साथ ......

तभी जोह अगला रूप लिया ...... ?????

उसको देखकर सबकी आंखें चौंधि गयी पर ुष शक्तिपुंज से रूप बहार नहीं आया ?????

तभी वहां भगवन शेषनाग प्रकट हुए और आर्यन पे अपने 100 पहन की मणि जड़ित शक्ति छोड़ी तब वह वापस अपने मानव रूप में आया ......

उनको देखकर hi सब सर जमीन में टच किये हुए थे ......

शेषनाग जोरसे फटकारते हुए बोले ," तुम सब मुर्ख हो जो अपना लोक hi खुद उजाड़ने चले हो? यह बालक अबोध है समझ में आता है और तुम क्या शक्तियां इश्को देने की कोशिश कर रहे हो जबकि उनको घेरन करने में hi िशने कितनी छथि पहुंचा दी है".

राजा वासुकि के साथ राजा बलि महाराज हाथ जोड़े खड़े थे.....

राजा बलि महाराज," भगवन गलती हो गयी बस हम भी इश्को अपना दामाद बनाने का प्रयास किये".

शेषनाग थोड़ा नरम पड़ते बोले ," अच्छा फिर लालच दुर्र रखो यह लड़का कभी भी देवतों के खिलाफ नहीं जायेगा..... हाँ इश्से होने वाला पुत्र जरूर तुम्हारा पलड़ा भरी करेगा..... पतलोक स्वामी इतना याद रखो इश्से अपने भविष्य बनवा सकता हो पर इश्को यहाँ मत बांधो ..... प्रभा धरती पे रह सकती है और तुम रानी हेमा दो और बच्चिओं को अपनी शक्ति देकर खुद भी जा सकती हैं पर ना आगे कभी यहाँ इश्को आजमाना न पृथ्वीलोक पर".

उनके अंतर्लीन होते hi आर्यन मजे से सू रहा था और तीनो रानियां उसकी बाँहों में सू रही थी पर उशसे पहले .....

(आर्यन के मस्तिक्ष तक यह भीषण शक्ति मिलने वाला पल गायब था शेषनाग भगवन के जाने के बाद रति के द्वारा बाँधी शक्तियों की वजह से और उसने फिर से नार्मल हो चुकी रानी पुष्पलता को फिर से दो बार और स्वर्ण कामु को एक एक बार छोड़कर थका के सोया .

मगर आर्यन के अंदर आयी "गाजा शक्ति" उसको कहाँ रुकने देती सिर्फ दो घंटे बाद वह साही कक्ष से निकल बहार कड़ी दो पहरेदारों को चूड़ा पर वहां फिर से जीवित की गयी त्रिवेटा और स्वर्ण की सेनापति, हंसिका आ गयी आर्यन को रोकने पर उसने उन्ह दोनों को 3 घंटे रगड़ा पटक पटक फिर वापस आकर तीनो बहनो को अपने से चिपटा के सूया.

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पुराण जंगल.......

बड़े गुरूजी के प्रीतिबिम्ब को परेशां देखकर निशांक गुरूजी ने पुछा," क्या दिक्कत है गुरूजी आप परेशां हो?"

बड़े गुरूजी," अब मुझे भी डर लगने लगा है निशांक, आर्यन अपने मैं की करने लगा है ".

निशांक ," वह तोह है hi ऐसा गुरूजी , जब में उसके नामकरण में गया तोह मेरी लम्बी दाढ़ी पे लात मार रहा था पर मुझे बहोत अच्छा लगा महार्यं ुष बल रूप में ..... मैंने किसी से कहा नहीं गुरूजी पर िश जनम में मेरे गुरु भाई आर्यन को कोई हरा नहीं पायेगा चाहिए आप ने पिटारे से ुष शैतान सिंह को आजाद कर दियो हो ..... उसको तोह सबसे बुरा सरीर ढूंढ़ना होगा जोह यहाँ आसानी से मिलने वाला नहीं. आप भी एक बात भूल रहे हैं जब तक रति जिन्दा है आर्यन को कोई मार नहीं पायेगा और आप कितनी भी पट्टी रानी विजयलक्ष्मी को पढ़ा लो वह कभी उसको नहीं मारेंगी. फिर आपका क्या स्वार्थ है गुरूजी मुझे भी बता सकते हो, में भी अब निम् मटर hi हूँ और भगवन भोलेनाथ की वजह से अपने अधूरे दिए वचन की वजह से आपके सामने हूँ".

बड़े गुरूजी थोड़ा तंज लिहाज में बोले ," एक बार और इश्से अच्छी अपनी कहानी सुनकर मुझे मजबूर करना. तुम महारानी विजयलक्ष्मी के सेवक हो सकते हो पर में नहीं और जोह तुमने देखा उसको अपने तक रखो. सेहतान सिंह इशलिये आजाद किया की वह आर्यन को नियंतरण में रखेगा पर उसको आर्यन नहीं रोक सकता क्योंकि महार्यं ने अपने मित्र की प्रेमिका रति को स्वयंवर से लूट लिया था बगैर जीते और ुष ने कसम कहाई थी उश्के घर की हर औरत की इज्जत लूटूँगा पूरा वंश मिटा के और वह भी रति के सामने जिसने निच्च जाती के काले योद्धा के लिए मेरा भी अपमान करवाया था. रति भले hi महार्यं को पसंद करती थी क्योंकि उसके पिता को फिर से सिंघासन दिलवाया था पर महार्यं वचन तोडा था सब जानते हुए भी ".

निशांक गुरूजी," यह तोह वही बात हुयी न गुरूजी जैसे रावण ने सीताजी से प्रेम किया पर धनुष नहीं तोड़ पाया. कारन ने द्रौपदी को अपने दोश्त दुर्योद्यान के लिए जीतने की कोशिश की. मगर महार्यं ने ऐसा कुछ नहीं किया था, उसको रति ने हमारे गुरुकुल की दोस्ती का वादा देकर बुलाया था क्योंकि वह जानती थी महार्यं हिंसक योद्धा है. उसको अपने प्रेम का वास्ता देकर भाग गयी पर क्या नहीं किया रति ने की वह महार्यं को राजा बना पायी. 40 वर्षों तक राज किया था महार्यं पर रति की एक गलती की वजह से हार हुयी".

बड़े गुरूजी ," ुशी गलती ने महार्यं को मरवाया निशांक लेकिन तुम भी आज तक महार्यं को जितना के लिए hi बंधे हुए हो ".

निशांक गुरूजी," इतना तोह मुझे भी पता है मेरे गुरु भाई महार्यं ( आर्यन) को आपकी वजह से इतनी शक्ति मिली है पर गुरूजी अब तोह दिव्या तलवार उसके पास है उसको कौन हरा लेगा..... लगता है मेरा वरदान hi रति के साथ जायेगा ".

बड़े गुरूजी मुस्करा कर ," तुमको एक समय मिलेगा जब तुम खुद भी आर्यन को बचने की कोशिश करोगे. फिर अभी तक तुमको नहीं पता कौन सेहतान सिंह की पुत्री आर्यन के सबसे करीब है वह समय पे अपना पाला जरूर बदलेगी ".

बड़े गुरूजी से कुछ भी पता न चलने पे निशांक को और उलझ गया की शैतान सिंह की बेटी कौन है जोह पुनर जनम ुषको नहीं मिलनी चाहिए जोह आर्यन के करीब है. आर्यन दुश्मनों से तोह लड़ लेगा पर अपनों के हाथ से सर झुका के कटवा लेगा उनकी खुसी के लिए. "मुझे महारानी विजयलक्ष्मी से मिलना होगा ....... "

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अपडेट 38

Part - 4(ा)

आर्यन की आँख सुबह 4:45 पे खुली तोह फ्रेश होकर बबिता ने जोह रात में अपने रूम में रखा था ,उसका ट्रेक सुईठे और शूज आर्यन डालकर रनिंग करता निकल गया, अणि के बंगलो जो की लगभग 5 कम दुर्र था.....10 मं में आर्यन पहुंच गया.

बंगलो की hi फि सिक्योरिटी देखकर आर्यन भी इम्प्रेस हुआ बड़ी जल्दी अणि ने काय कलाप कर दिया , एक हमारी कोठी है बस बने जा रही है न जाने कब कम्पलीट होगी .

आर्यन ने अपना थंब प्रिंट बड़े से गेट के बहार लगे स्क्रीन बॉक्स पे लगया तो वह बड़ा सा स्टील का आटोमेटिक गेट एक तरफ को स्लइड होता खुलता चला गया..... अंदर साइड में बॉडी स्कैनर से पूरी बॉडी स्कैन हो गयी और एक आगे लगा बार उठ गया.

तभी 8 सिक्योरिटी गार्ड्स उसको आकर सलूट किये " गुड मॉर्निंग सर " तोह आर्यन ने हाथ उठकर उनको गम का जवाब दिया और सीधा चलता हुआ जब मैं बिल्डिंग की तरफ बढ़ा तोह गार्डन नेहा और अणि अपनी गयम टॉप्स और शॉर्ट्स में गार्डन के बिच घास पर अपनी मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिस कर रही थी ......

आर्यन झाड़ लाँघ के दोनों के पास पहुंचा तोह दोनों उसको देख ुष्पर किक और चोप से अटैक करने लगी .... वह भी त्यार था, आर्यन उनको प्रैक्टिस के सारे मूव्स देता हर वार को ब्लॉक करता रहा .

बस हां हु .... फाए फूउ .... के साथ ठप्प धप्प और तक्क की आवाजें आती जब आर्यन दोनों का तगड़ा प्रहार ब्लॉक करता. एक दो वार अणि के आर्यन को लगे भी पर तीनो जानते थे अणि उन सब में सबसे ज्यादा फुर्तीली है.

10 मं बाद तीनो रुके और झुकार एक दुसरे को हाथ जोड़कर प्रणाम किये.... फिर तो दोनों लड़कियों ने आर्यन को घास पर गिरा लिया और गुड मॉर्निंग किसी लेने लगी...... दोनों अपना अपना सर आर्यन के सीने से लगा के ुष से चिपट के लेती थी.

आर्यन उनके पीठ थपथपाता बोलै," तुम दोनों के पास इतनी साड़ी पावर्स हैं फिर भी देसी स्टाइल में रॉ प्रैक्टिस करती हो, मुझे बहोत अच्छा लगा क्योंकि हो सकता एक दिन यह पावर्स तुम्हारे साथ न हो पर अपनी छमता हमेशा बानी रेहनी चाहिए..... ी म सू प्राउड ऑफ़ यू, माय लवली प्रिंसेसेस ".

दोनों बहोत खुस हुयी उसको सुबह सुबह यहाँ देखकर. आर्यन ने पुछा," मम्मी का रूम कोनसा है वह उठी नहीं अभी तक क्या ?"

अणि थोड़ा इत्र के," आप से नाराज हैं, आप पार्टी के बाद उनके साथ रात में यहाँ नहीं आये वहां फार्महाउस चले गए थे न ".

आर्यन चिंता करते बोलै ," ओह्ह्ह्ह , चलो में उनको सॉरी बोल देता हूँ तुम दोनों प्रैक्टिस करो ब्रेकफास्ट पर मिलते हैं".

आर्यन उठकर दोनों के गाल चूम के निकल गया सारू की नाराजगी दुर्र करने.....

नेहा ने अणि का कान पकड़ा ," तू नहीं सुधेरगी, मम्मी कभी भाई से नाराज होती हैं क्या?"

अणि अपना कान छोड़ती हुयी बोली ," अह्हह्ह्ह्ह अरे यार मेरा कान तोह छोड़, वैसे भी मम्मी को अच्छा लगेगा जब भाई उनको मानेगा ..... hi hi hi hi hi ..... चल गयम करते हैं फिर तू लखनऊ निकल जाना ".

नेहा ," ारीयीय नहीं यार में अभी निकल जाती हूँ वार्ना भाई को पता चला जाने नहीं देगा, तू गयम कर इवनिंग तक वापस आ जाउंगी ".

नेहा के जाने के बाद अणि गयम की तरफ जाने लगी मैं hi मैं खुश होते हुए ," भाई के अंदर पतलोक की शक्तियां तालमेल बैठा रही हैं. नानी माँ अगर मीणा दीदी तेरे पास हुकम का इक्का है तोह मेरे पास भी सारू मम्मी है. भाई मुझसे या नेहा से दूर रह भी ले पर अपनी मम्मी की चूची पीने जरूर आएगा जब वह साथ होगी एक hi सेहर में".

सच्च में िश बंगलो की एक एक जगह हाई सिक्योरिटी कमरे और लेटेस्ट प्रोटेक्शन देवीकेस से कवर थी .....

मैं बिल्डिंग के हैवी वुडेन दूर को एक गार्ड ने सलूट करते हुए आर्यन के लिए खोला तोह एक ब्रिटिश लड़की जोह गवर्नेस की यूनिफार्म में थी विश की. आर्यन के पूछने पर उसको सारू के बैडरूम के सामने छोड़ के चली गयी जोह 1सत फ्लोर पे था.

आर्यन अभी तक हैरान था बहनचोद वह दिल्ली में hi है या इंग्लैंड की किसी रॉयल फॅमिली के रॉयल मेन्शन में आ गया है.... ज्यादातर सब रेड और ब्लू कलर में था, टिपिकल ब्रिटिश स्टाइल.

आर्यन (मैं में) अंग्रेज चले गए इन्हे छोड़ गए ताकि हमको हमारी 200 साल की गुलामी की याद दिलाते रहे.

बस एहि रति और सारू को आर्यन की बुरी आदत लगती थी कभी अणि को किसी बात के लिए न टोकता था न रोकता था. जरुरत पड़ी तोह खुद उसका फैसला सही बातयेगा. उसका कारन था अणि का एक डैम परफेक्ट और स्ट्रैट फॉरवर्ड होना. आर्यन के लिए उसकी छोटी भें कभी कुछ गलत नहीं कर सकती अगर हो गया तो गलती से हो गया होगा.

अणि दिल्ली में रहकर एक तरह से यहाँ ब्रिटिश गवर्नमेंट के इंडियन गवर्नमेंट से रिश्ते फिर से मजबूत कर रही थी.

आर्यन ने सारू के रूम के दूर पे नॉक किया तोह अंदर से आवाज आयी ," आर्यन बीटा ,अंदर आ जा ".

अब आर्यन भी हैरान होने लगा की मेरी मम्मी के अंदर कहाँ से शारुख खान की माँ जाया बच्चन की आत्मा आ गयी.... पक्का अंदर कैमरा स्क्रीन लगा होगा ुष से देखि होगी. पर वह पावर्स भी रखती है ुशी से पता चल गया होगा.

आर्यन का दूसरी बार का पतलोक जाना बहोत से बदलाव उसके अंदर लाया था पर वह वैसा hi रहना चाहता था जैसा पहले था...... देखते हैं कितनी कोशिश लगेगी ?????

अपनी सोच को झटक के मैं में बोलै," सारे गार्ड्स से लेकर मैड्स, केयरटेकर भी ब्रिटिश हिरे किये अणि ने. वह खुद को कही इंग्लैंड की महारानी की पूर्ति तोह नहीं समझने लगी है जबकि हमारी दादी देवी सिंह अभी भी गाओं जाएगी तोह गाये भैंस के गोबर से उपलये बनाने जरूर जाएगी.

आर्यन दूर खोल के अंदर गया तोह बस मोह से निकाला," ववववव सो बेऔतिफुल्ली डेकोरेटेड रूम्म्म्म ..... लिखे रॉयल इंग्लिश बैडरूम ".

रूम के बीचों बिच एक मेटालिक रॉयल देसिग्नेड बड़े से बीएड पर उसकी मम्मी बस एक डार्क ब्लू सेक्सी डिज़ाइनर ब्रा पेंटी में बीएड पे रेड सेक्सी गाउन का फ्रंट खोले लेती थी .......

अपना थूक निगल के आर्यन सोचा माँ छुड़ाए ये ब्रिटिश और सब रॉयल्स मेरी मम्मी से सूंदर कोई नहीं .

वह तेजी से बीएड की तरफ कुटिल मुस्कान लिए हुआ बढ़ा ," गुड मॉर्निंग मम्मी ..... यू अरे थे मोस्ट ब्यूटीफुल वुमन इन थिस वर्ल्ड".

और अपना ट्रेक सुईठे के साथ शूज भी उतर के सिर्फ अंडरवियर में बीएड पे चढ़ गया..... सारू बस मुस्करा रही थी अपने बेटे को कामातुर प्रेमी की तरह सुबह सुबह अपने पास देखकर.

सारू मैं में सोचती ," आर्यन में सबसे खुश किस्मत औरत हूँ जिसको तुम इतना मान सामनां देते हो हमारे जिस्मानी समभंद होने के बाद भी. सच्चा प्यार देना कोई तुमसे सीखे और अणि की बच्ची को बाद में देखती हूँ बोल रही थी भाई अब वहीँ रहेगा अपनी सो कॉल्ड माँ के पास. मुझे पता था आर्यन जरूर आएगा मेरे पास ".

आर्यन अपनी मम्मी सारू के ऊपर झुकार पहले गाल चूम के बोलै," वन्स अगेन गुड मॉर्निंग मम्मी ..... यू अरे थे मोस्ट प्रेसियस थिंग इन माय लाइफ ..... पुछःह पुछठ ".

सारू ने उसके सर के बालों में हाथ फेरते हुए उसका माथा चूमा फिर दोनों गाल ," वैरी गुड मॉर्निंग आर्यन पर तू तोह वैसे hi बेहवे कर..... अणि ने तो जैसे हमको इंग्लैंड के किसी महल में रखवा दिए हो. काम से काम तू तोह हिंदी में बात कर ".

आर्यन भी मुस्करा के ," ओह्ह्ह यानी आप अभी भी इंडियन हो...... है है है है है ..... में तोह बस आपको रेड गाउन और ब्लू उन्देर्गर्मेन्ट्स में इंग्लिश लेडी hi समझ रहा था ".

आर्यन के लबों को चूमते हुए सारू ने पूरा जोर लगा के उसको साइड में पलट के सीधा लिटा के उसके ऊपर चढ़ गयी.

अपना गाउन उतर के आर्यन के सीने पे लेट उसकी आँखों में देखकर बोली ," रात वाला अधूरा काम पूरा कर तब hi कुछ जवाब दूंगी. में अभी तक अपने को दोषी मान रही हूँ की कल रात तुझे संतुस्ट नहीं कर पायी पार्टी में उत्तेजित करके ".

आर्यन मुस्करा के ," चलो यह तोह ाची बात है न मुझे सबसे सूंदर लड़की सुबह सुबह प्यार करेगी ".

सारू ने आंखें दिखा के ," बीटा उम्र में भली ज्यादा हूँ पर तेरी किसी भी लुगाई को पानी भरवा दूँ अपने सामने ".

आर्यन ने उसकी ब्रा उतर के नंगी चूचियां मसली और निप्पल्स को प्यार से सहलाता हुआ बोलै," यह तोह मेरा लुंड hi आपको बता सकता है आप मेरे लिए क्या हो और आपका हुस्न बेमिसाल है ...... पुछःह पुछठ सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप "......

दोनों चूचियों को बारी बारी जबतक आर्यन चूसा उतनी डिअर में सारू ने अपनी पेंटी और उसका अंडरवियर उतर के खड़े तोपची को अपने छूट रास से गीला किया और होओओओओ अह्हह्ह्ह्ह हूंणंन्न करती अपने छूट में लिए ुष्पर बैठती चली गयी ......

अब दोनों को पूर्ण संतुस्ती थी जिसके लिए तड़प रहे थे ....... डेढ़ घंटे दोनों ने दो बार खूब घमसान मच्या तब शांत हुए . सारू करीब 10 बार और आर्यन दो बार झाड़ा.

7 बजे रेडी होकर दोनों निचे पहुंचे तोह अणि अकेले ब्रेकफास्ट कर रही थी एक बड़ी दिंनिंग टेबल पर ...... आर्यन ने ुष से मुस्कारते हुए पुछा ," नेहा कहाँ है ?"...... सच्च में सुबह सुबह सारू को प्यार करके आर्यन बहोत चहक रहा था.

अणि नेवसपपेर पढ़ते हुए अपने टोस्ट पे जैम लगती बोली," उसको लखनऊ में कुछ काम है अभी फ्लाइट में होगी, इवनिंग तक आ जाएगी ".

आर्यन के लखनऊ का नाम सुनकर hi कान खड़े हो गए उसने अणि के पास जाकर उसके माथे पे किश किया और स ु लेटर बोलै .

सारू के गाल पे किश करके बोलै ," आप अपनी पूजा करवा लेना वार्ना यह हमको क्रिस्चियन hi बना देगी..... Bye ".

सारू ने ब्रेकफास्ट के लिए बोलै पर आर्यन ने मन कर दिया..... वहीँ आर्यन के जाने के बाद अणि बोली," आप अपनी पूजा करवा लेना में शामिल नहीं हो पाऊँगी और मंदिर में चंदा देने के लिए मैंने चेक काट के दे दिया है आप रोज ( गवर्नेस ) से ले लेना. इवनिंग में मिलते हैं ी म गेटिंग लेट फॉर ऑफिस".

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आर्यन ने बहार दौड़ते हुए नेहा को कॉल मिलाया तोह उसका सेलफोन ऑफ था..... यानी वह जान भुझ के मुझे नहीं बताना चाहती थी क्योंकि में उसको लखनऊ नहीं जाने देता .

आर्यन समझ गया था उसको क्या करना है, उसने बिना को कॉल लगया और प्राइवेट प्लेन लखनऊ को बुक करने के लिए बोलै यह भी नेहा लखनऊ जा रही है उसको एयरपोर्ट पर hi रोक के रखो.

आर्यन जानता था की उसकी भेने और कुछ होने वाली बीवियां वैरी स्पेशल हैं और पावर्स वाली भी हैं पर अणि का किडनैप वह नहीं भुला था. यानी अणि कमजोर नहीं है ,वह सच्च में काबू कर ली गयी थी जबकि उसके गुस्से और पावर्स के आगे कोई नहीं टिकेगा फिर किसी भी अनजान दुश्मन को नज़र अंदाज़ करना बेवकूफी होगी.

वह जब फार्महाउस पहुंचा तोह सब घरवाले ब्रेकफास्ट करते मिले. सब को गुड मॉर्निंग किश देकर ब्रेकफास्ट करने लगा.

जब धीरे धीरे चाल से आती बबिता ने आर्यन को कॉफ़ी दी तोह समझने वाले समझ गए की बबिता की रात के अफ़साने की आर्यन ने उसकी खूब सर्विसिंग की है.

राहुल, आर्यन की गॉड में बैठा था और महिमा सामने टेबल के ऊपर..... दोनों को अपने हाथ से नास्ता करवाता वह मीणा को अपनी प्लेट से खिला रहा था......

लेफ्ट साइड पड़ी खली चेयर पे बबिता के हाथ से कॉफ़ी लेकर टेबल पे रखा और उसको बिठाता हुआ बोलै," काम करना जरूरी था, यहाँ इतने लोग हैं. बस बच्चों और अपने सेहत का ध्यान रखो समझी ".

बबिता ने सर झुका के कहा ," जी आगे से धयान रखूंगी ".

आर्यन ने एक प्लेट में मीणा को ब्रेकफास्ट डालने को बोलै जोह उसने किया. आर्यन ने प्लेट बबिता के सामने रखकर बोलै," अच्छे से ब्रेकफास्ट करो फिर रेस्ट करना अगर मैं न करे ऑफिस मत जाना, कविता मामी के साथ घूम आना ok ".

एक आलू के परांठे का ढाई से बाईट उसको सबके सामने खिलाया तोह शर्मा के खा ली ......

महिमा ," डैडी में भी खाउंगी परांठा ".

राहुल ," डैडी में भी ".

आर्यन ने दोनों को एक एक बाईट कहिल्या तोह दोनों और और बोलने लगे ..... तब बबिता खड़े होने लगी परांठा लाने के लिए तब आर्यन ने उसको दांत के बिठा दिया ," तू चुपचाप अपनी प्लेट फिनिश कर इनको में खिला दूंगा ".

गीता की तरफ जब बबिता ने देखा तोह मुस्करा के बोली," खा ले यार इतने प्यार से खिला रहा है हम को तोह देखो सुखी ब्रेड विथ डाइट जूस से खानी पद रही है".

कविता भी कहाँ चुप्प रहती.... किचन से आते हुए 2 और आलू के परांठे लाकर आर्यन की प्लेट में रखकर बोली," मौका मिलेगा ननद रानी जी जब सईआं के साथ रात रात भर 20-20 मैच खेलोगी एक के बाद एक तोह सुबह ब्रेकफास्ट भी घी वाला मिलेगा. और बबिता तू उम्र में इससे बड़ी होकर भी जवाब नहीं दे सकती ख़ाक इंग्लिश की प्रोफेसर थी ".

समझने वाले हंस रहे थे पर आर्यन जान भुझ के बच्चों और मीणा में लगा था .......

तब रति ने टोका जोह मीणा के साइड मैं चेयर पे बैठी थी ," चलो सब ब्रेकफास्ट ख़तम करो और आर्यन तू मेरे और अंजू के साथ हॉस्पिटल चल रहा है. जा तैयार हो जा हम एक घंटे बाद निकलेंगे".

आर्यन ने दूर कड़ी बिना की तरफ देखकर कहा ," बिना बेथ जाओ पहले ब्रेकफास्ट करो फिर माँ के साथ चलना है".

बिना ने आँख के इशारे से बता दिया काम हो गया है..... यानी नेहा को अटका दिया है पर आर्यन को डर था वह पावर जरूर उसे करेगी. लेकिन उसके लिए उसने पहले hi अपनी चाहती दानव कन्या चाय (2ंद no.) को याद करके बुला लिया था की ुष कमीने मौसाजी देवेंद्र सिंह को और डरा जब तक नेहा वहां पहुंचे वह उसका फ़ोन न उठाये.

तू उसके पहुंचते hi चली जाना कोई भी अंश तेरा वहां न बचे नहीं तोह नेहा एहि समझेगी की देवेंद्र सिंह को में मारना चाहता हूँ.

चाय ने बोलै ," इतना क्यों सोच रहे हो, वैसे भी बदजात है वह देवेंद्र, कुत्ते की दम को में मार देती हूँ"..... लेकिन आर्यन ने मन किया क्योंकि उसको नेहा से काम अणि से डर ज्यादा था वह पक्का यह काण्ड नेहा को उसको खिलाफ करने में उसे करेगी जो वह नहीं चाहता था.

जिस आसानी से नेहा के निकलते hi आर्यन को अणि ने उसका लखनऊ जाना बतया वह जाता रहा था की जाओ भाई अपनी दिलरुबा भें को सेफ करो...... दोनों भाई भें एक दुसरे को अच्छे से जानते थे.

बस आर्यन के लिए अणि हमेशा से उसकी छोटी भें एक क्यूट बेबी hi थी और अणि के लिए आर्यन प्यारा बड़ा भाई जोह मेरे लिए दुनिया जीत के मेरे कदमो में दाल देगा.

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मॉर्निंग , 9 ऍम .....

आर्यन आज 2 साल से ज्यादा टाइम बाद दिल्ली के "अपेक्षा हॉस्पिटल" में एंटर किया जोह पहले से ज्यादा हीफी और 5 स्टोरी से 8 स्टोरी हो गया था ...... डॉ अंजू बड़े प्रॉडली सबसे आर्यन को मिलवा रही थी ..... बड़े बड़े डॉक्टर्स और कंसल्टेंट्स भी आर्यन से मिलकर अपना इम्प्रैशन जमाना चाहते थे ..... किसी को उसने निराश नहीं किया बड़ो से हाथ जोड़कर यंग से हाथ मिलकर आदर भाव से मिला...... सब उसकी हट और पर्सनालिटी के आगे hi नतमस्तक हो गए थे यह तोह सुपर ह्यूमन लगता है.

एक घंटे पूरा हॉस्पिटल दिखकर सबसे मिलवाकर डॉ अंजू जब रति और आर्यन को अपने डायरेक्टर रूम में ले गयी और चेयर पे बेथ कर बोली," तोह क्या कहते हो आर्यन, तुमको हमारा हॉस्पिटल पसंद आया.

यहाँ मैंने बाकी बड़े बड़े हॉस्पिटल्स से भी एडवांस्ड मचिनेस के साथ बेस्ट प्रोफेशनल डॉक्टर्स टीम भी हिरे की हुयी है बस हम भी टॉप 5 हॉस्पिटल्स में से एक हैं ".

आर्यन ने आगे बढ़कर डॉ अंजू का गाल चूमकर कहा ," यू अरे थे बेस्ट डॉक्टर मम्मीजी पर मुझसे झूट बोलकर अपने से झूट क्यों बोल रही है. दो साल पहले यह टॉप 4तह हॉस्पिटल्स था अब टॉप 10 में भी नहीं है. हाँ आपका इंफ्रास्ट्रक्टर्स और बिल्डिंग्स जबरदस्त है कमसे काम साल में 10 फिल्मो की शूटिंग जरूर होती है".

डॉ अंजू का चेहरा उतर गया वह फिर से अपनी पुराणी टीम्स ऑफ़ डॉक्टर लाने की कोशिश कर रही थी जोह डॉ कुलदीप ने बेइज्जत करके निकाल दिए थे ......

िश हॉस्पिटल की ओनर रति थी पर स्टाफ से लेकर सारा मैनेजमेंट अंजू का था. यानी रति की इनकम और हॉस्पिटल वैल्यू तोह बढ़ी थी पर डॉ अंजू लोस्स में चला रही थी मैनेजमेंट सँभालते हुए.

आर्यन ने रति की तरफ देखा और बोलै," वैसे माँ तुम यह हॉस्पिटल मम्मीजी को गिफ्ट क्यों नहीं कर देती अगर तेरा टेस्ट पॉजिटिव आया तोह..... तब यह बेहतर कर पाएंगी रही टीम की बात तोह मम्मीजी आप अणि से बात करो वह ुक में थी और ब्रिलियंट स्टूडेंट भी है. वह पक्का वहां कुछ अच्छे इंडियन स्पेशलिस्ट्स को जानती होगी जोह इंडिया वापस आना चाहते हैं पर उनको ाचे ऑफर्स या पेमेंट्स नहीं मिलती स्किल्स के हिसाब से. ऐसे hi में अमेरिका में जाने से भी बात करता हूँ सिर्फ 4-5 फॉरेन रेतुर्न बेस्ट कंसल्टेंट्स हॉस्पिटल का लेवल उठा देंगे ".

डॉ अंजू की आँखों में चमक आ गयी की ऐसा हो सकता है क्या पर रति की तरफ देखा तोह उसने कहा," भूल जा, में सिंगापुर से कई डॉक्टर्स बुलवा दूंगी और अमेरिका से भी पर अणि को मत बोलना".

आर्यन ने डॉ अंजू को बोलै ," क्या शिफ्टिंग अल्ट्रासाउंड मस्कीन हैं जोह यहाँ आपके ऑफिस में ला स्कैन कर सके..... में खुद अपने हाथ से करूँगा ".

डॉ अंजू ," हाँ अभी 5 मं में आ जाएगी, ऐसा करो दीदी को मेरे रेस्ट चैम्बर में ले जाओ ".

आर्यन हसकर ," चल माँ जल्दी से नंगी हो जा तुझे एक बार चूड लेता हूँ फिर ुसग स्कैन करेंगे ".

रति चिढ़ती हुयी ," तू पागल है क्या में अल्ट्रासाउंड करवाने आयी हूँ पहले उसकी रिपोर्ट आने दे फिर चूड लियो ".

आर्यन ने अपनी बात राखी," अगर पॉजिटिव आयी तोह यह हॉस्पिटल तू मम्मीजी को गिफ्ट करेगी कसम खा ".

रति अब फँस गयी क्योंकि इश्कि वैल्यू कमसे काम 350 करोड़ होगी उसको 500 क्रोर्स तक के ऑफर्स आ चूका थे पर उसने नहीं बेचा.....

तब रति ने जोह बोलै उसको सुनकर दोनों हैरान hi रह गए ," अगर मेरे पेट में होने वाला बच्चा बीटा है तोह हॉस्पिटल अभी अंजू के नाम कर दूंगी ".

आर्यन को गुस्सा आ गया और उसकी टोन से पता चला ," अगर बेटी हुयी तोह ?"

रति ने भी झट से पला बदला ,"तोह दूसरा हॉस्पिटल गरिमा के नाम कर दूंगी इश्को अंजू को देने के साथ साथ अब खुश" ....... और अपने पेट पे हाथ फिराई .....

साला एक महीना भी नहीं हुआ था आर्यन को इंडिया आये हुए रति अपने फ्लैट पेट पे एक 8 महीने के गर्भ वाली माँ की तरह हाथ फिरा रही थी.....

( यह फीलिंग उसको पिछले जनम की यादें से आती थी जोह सपनो में और ज्यादा दिखाई देती की उसने बेटे को जनम दिया है )

हकीकत में वह एक सुबह संकेत समझ के जान गयी थी की बीटा hi होगा.

आर्यन ने फ़ोन निकाल बिना को कॉल करके बोलै," बिना यह अपेक्षा हॉस्पिटल की फाइल प्रॉपर्टी समेत डॉ अंजू के नाम बनवा और हेक्सा के फाइल गरिमा के नाम और टरेसा की नेहा और अणि के नाम".

रति की आंखें फटी की फटी रह गयी पर अगले पल चौकने की बारी डॉ अंजू की थी ...... " हाँ डॉ अंजू मम्मीजी के सारे हॉस्पिटल्स गीता के नाम कर बस मैं हॉस्पिटल छोड़कर , माधव हॉस्पिटल , इनका hi रहेगा और साड़ी फार्मसिटिकल्स कंपनी सारू मम्मी और डॉ सलोनी मम्मी के नाम करवाना है. में अपनी दोनों माँ का थोड़ा बाउज काम करना चाहता हूँ "........ और दोनों को मुस्करा के आँख मार दी.

दोनों बहेनो को लग गया उनकी पावर काम की गयी और उनकी बेटियों और नाशन की बढ़ा दी गयी है. डबल हुम्ला भी प्यार से किया था आर्यन ने.

अब तोह उन्हको भी डर लगने लगा कहीं सिर्फ हमारी बातों को सीरियसली न लेने लगे की , हमारे लिए पूरे दुनिया जहाँ की दौलत बेकार है बस आर्यन बीटा तू हमारा सबकुछ है.

आर्यन ने जब अल्ट्रासाउंड मशीन का स्कैनर रति के पेट पे फिराया तोह डॉ अंजू और आर्यन भी शॉक रह गए.....

रति के गर्भ थेर गया था और आर्यन ने अपनी पावर से जान लिया आँख बांध करके की यह बीज उसने पहली रात अमेरिका से वापस आते hi डाला था वह काम कर गया है .

रति अब दोनों को चुप देखकर परेशां थी तोह डॉ अंजू ने अपनी बड़ी भें की हालत समझते हुए कहा ," दीदी अब इतना hi पता चल रहा की आपके उतेरुस में पॉजिटिव चंगेस हैं पर कुछ hi वीक्स में पूरा स्कैन पिक्चर में क्लियर दिखेगा ..... कोंग्रटुलतिओन्स तब बोलेंगी जब यह स्ट्रिप टेस्ट +वे और िश छोटी वीकल्स में आपका यूरिन सैंपल मिलेगा ".

आर्यन ने झुकार रति के लबों को चूम के कहा," तू खुश हो जा माँ, हमारे प्यार की निशानी अब तेरे अंदर है. बस कभी यह मत जानने की कोशिश करना की बीटा है या बेटी ".

रति की आँखों में आंसूं की धरा बह रही थी उसके डेली आते पिछले जनम के सपने याद नहीं हकीकत लगने लगे. आर्यन ने उसके आसूं पहुंचे और बीएड से उठा के वाशरूम में ले गया. वहां खुद उसका यूरिन सैंपल विकल में सील करके प्रेगनेंसी स्ट्रिप टेस्ट किया जोह पॉजिटिव था.

रति ख़ुशी में रोटी जा रही थी और आर्यन उसको चूमे..... दोनों के सारे कपडे उतर के रति को गॉड में लेकर आया तोह डॉ अंजू भी मुस्करा के देख रही थी ...... आर्यन ने पास जा स्ट्रिप दिखाई तोह ख़ुशी से गड गड होकर अपनी नंगी भें का पूरा चेहरा चूम के बधाई दी.

स्ट्रिप और विकल साइड में रखकर आर्यन ने डॉ अंजू को भी नंगा होने को बोलै फिर अगले एक घंटे दोनों को बहोत सेंसुअल रोमांटिक तरीके से चूड के रति की छूट में झाड़ा.

रति ने आंखें बांध करके महादेव और निशांक गुरूजी को याद करके धन्यवाद् दिया.

रति के लिए सबसे ख़ुशी का दिन था वहीँ अणि के लिए यह बुरी खबर होने वाली थी क्योंकि वह यह रोकना चाहती थी पर बगैर वरदान के रति माँ बनने वाली थी अपने ुष पुत्र की जिसका गाला अपने भगवन महादेव के चरणों में चढ़ा दी और उसके बाद अपना भी.

िश जनम उसका मार्ग सबसे दुर्गम था पर सायद किस्मत में ऐसा hi लिखा था की महार्यं उसका नाती पैदा होगा. लेकिन उसने भी दिल टूट के अपने माहि को प्यार दिया , एक माँ का ,एक दोस्त का, एक प्रेमिका का और अब बीवी बनकर औलाद देना का भी.

समय आ गया था की रति की पिछली जनम की यादास्त वापस आएगी और वही दूसरी तरफ सेहतान सिंह की आत्मा को उसको पहला सरीर मिल गया था आर्यन को नुक्सान पहुंचने के लिए.

आर्यन आज बहोत खुश था क्योंकि उसकी प्यारी माँ उसको बाप बना दी थी. उसने अपने बापू चौदर्य माधव सिंह को याद करते हुए कहा ," बापू आपकी नटखट बेटी को अब मैंने पूरा कर दिया है. बस आप भी आशीर्वाद देना की अब तोह यह बदल जाये, कभी कभी मुझे महिमा इश्से ज्यादा समझदार नज़र आती है".

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पुराण जंगल .....

िश समय एक गंभीर सभा लगी हुयी थी 5 सख्सियत उसमे शामिल थी ....... तीनो अपने असली रूप में और दोनों गुरूजी दिव्या पुंज के रूप में अपने अपने सिंघासन पे विराजमान थे.

(* महारानी विजयलक्ष्मी= अणि

**राजकुमारी मीनालोचनि= मीणा

***रानी पद्मदेवी = सारू

यह तीनो के पिछले जनम के नाम और पद हैं. )

रानी विजयलक्ष्मी के साथ दिव्यलोक की राजकुमारी मीनालोचनि और महार्यं की सबसे छोटी रानी पद्मदेवी भी अपने अपने सिंघासन पे बैठी थी. बड़े गुरूजी के सामने अब निशांक गुरूजी हाथ जोड़े खड़े थे.

निशांक गुरूजी ," आपको खुश होना चाहिए महारानी जी, रति ने बलि दी थी अपने एक मात्र पुत्र की फिर सबसे कठिन मार्ग उसको hi मिला महादेव के आशीर्वाद से यानी कौन नानी अपने नाती से वही औलाद फिर से पैदा कर सकती है ? उसका मार्ग और उदेश सिर्फ महार्यं को जीतना है ".

महारानी विजयलक्ष्मी ,"अच्छा फिर तोह उसको तुम्हारी अवसक्ता भी कहाँ पड़ेगी निशांक जब वरदान भोलेनाथ से hi मिलेगा. एक बात मत भूलो तुम्हारा मित्र महार्यं सिर्फ ुष औरत की गलती से हरा था और मारा गया वार्ना िश जनम की अवसक्ता hi कहाँ होती. अब उसको पुत्र चाहिए होगा तोह अब तुम्हारा लक्ष्य यही होना चाहिए की वह अपने पुत्र के लिए वरदान मांग ले. आर्यन को हमेशा के लिए रति के मोह से दुर्र करना होगा वार्ना उसको अपनी माँ के अल्वा कुछ नजर hi आ रहा है. राजकुमारी मीनालोचनि उसको कितनी औरशन की और जरुरत होगी तुम्हारे हिसाब से ".

राजकुमारी मीनालोचनि ," महारानी जी, वह हर किसी को अपने अंतर्मनन में नहीं उतरने देता. हाँ जोह ख़ास हैं वह hi उसका दिल जीत पाती हैं. डॉली ? थी और अभी भी जितनी ज्यादा उतना hi सुरक्षित होगा आर्यन अपने 21वे जन्मदिन पर जब उसकी पूरी शक्तियां मंतर हट्टे hi खुल जाएगी".

रानी पद्मदेवी ," महारानी जी रति दीदी ने बहोत त्याग दिया है तोह में हाथ जोड़कर विनती करुँगी की उनको और उनके बच्चे को कमसे काम हम में से कोई नुक्सान न पहुंचाए ".

महारानी विजयलक्ष्मी अब जोरसे हसने लगी ," है है है है है ......पद्मा , तुम अभी हमको समझती नहीं हो. में ुष समय भी यहीं िश सिंघासन वह सब देखि थी और कुछ नहीं कर पायी क्योंकि महार्यं इतना ताकतवर नहीं था. बड़े गुरूजी के साथ निशांक ने भी ढाई हज़ार साल बस इंतज़ार किया है. हम सब चाहकर भी बुरा नहीं कर सकते पर रति के कारन िशबार हारे तोह कितने हज़ारों साल फिर से इंतज़ार करना पड़ेगा ".

रानी पद्मदेवी अपने सिंघासन से कड़ी होकर महारानी के आगे घुटनो के बल बैठकर दोनों हाथ जोड़कर बोली," आप बोलिये मुझे क्या करना होगा जिससे सब सही सलामत हो ".

राजकुमारी मीणा के साथ आज निशांक गुरूजी भी असह्य नज़र आये पर महारानी विजयलक्ष्मी ने कहा," रति से आर्यन को दुर्र करना होगा तुम्हे पद्मा कुछ वर्षो के लिए जब समय आएगा. जानती हूँ मुश्किल है पर तुम hi एक ऐसी हो जोह उसको प्रेम में बांध के ऐसा कर सकती हो. ुशी में हम सबकी भलाई है, यह वाचां सिर्फ तुम hi आर्यन से ले सकती हो आखिर वह तुम्हारी कूख से पैदा हुआ है ".

रानी पद्मदेवी की आँखों में आंसूं आ गए और भरए गले से बोली," यह तोह आत्मा को जिस्म से अलग करने वाली बात आप ने बोल दी है. आर्यन कभी अपनी माँ रति से दुर्र नहीं हो सकता चाहिए दुनिया इधर से उधर हो जाये ".

राजकुमारी मीनालोचनि भी अपने सिंघासन से कड़ी हुयी जोह 15 फट लम्बी अपने असली दिव्या रूप में थी, बोली ," महारानी जी , आप ऐसा करके आर्यन को कमजोर करने की कोशिश कर रही हो. वह दुश्मनों से कमजोर होकर लड़ेगा फिर अपने िश जीवन का असली लक्ष्य कैसे पूरा करेगा".

बड़े गुरूजी जोह बहोत डिअर से सुन्न रहे थे बोले," महारानी के तारक से में भी सहमत हूँ, आर्यन को मिली पतलोक की शक्तियां भी उसको मदद करेंगी और उसकी तीनो भार्या ( पत्नियां) भी. बस रानी हेमा ुष समय अगर धरतीलोक आ गयी तोह आर्यन पक्का अपनी शक्तियां पूरी तरह से धारण कर पायेगा..... और रति कभी अपनी जगह किसी को नहीं देगी.... क्यों पद्मा तुमसे बेहतर कौन जानता है. लेकिन अब हमको नहीं भूलना चाहिए की रति की यादास्त वापस आ रही है. निशांक को वह आर्यन के साथ देखकर झेल भी लेगी पर बाकी हम तीनो hi नहीं मीणा , वह जाने , Dimple-Payal को भी महार्यं से बाटने नहीं देगी. में भी कोशिश करूँगा की आर्यन हमेशा तुम्हारे साथ रहे यानी अपनी सब बीवियों और परिवार के साथ. राजकुमारी मीनालोचनि समय आ गया है तुमको आर्यन को जल्दी hi दिव्यलोक लेकर जाना होगा वार्ना कहीं डिअर न जाये ".

राजकुमारी मीनालोचनि ने अपनी आँखों में आये आसूं साफ़ किये और बोली," जल्दी hi जाउंगी गुरूजी , मुझे बेसब्री ुष पल का इंतज़ार है. मेरा भाई न तब डरपोक था न आज है बस ुष समय इतना शक्तिशाली नहीं था".

निशांक गुरूजी ने अपनी भी राये रख दी, " आप सब एक बात भूल रहे हैं की रति की यादास्त उसको वरदान मांगने मदद करेगी और वह गलती से सिर्फ अपने लिए आर्यन को भगवन से न मांग ले तोह ????? "

अब तोह सब चुप्प हो गए क्योंकि सबसे पास शक्तियां थी एक से बढ़कर एक पर रति के पास शक्तियां न होकर भी भगवन भोलेनाथ का आशीर्वाद सरूप वरदान था जोह उससे कोई जबरदस्ती नहीं मंगवा सकता था. यानी साड़ी लीला भगवन की थी और यह भी सब ईंटे शक्तिशाली होकर भी उनकी रची लीलस के आगे कठपुतली. इतना लोगों का पूर्ण जनम अपने पिछले जनम के अधूरे कर्मो को पूरा करने के लिए कुछ तोह समय भी बलि या त्याग लेगा hi.

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ुसग स्कैन में रति के गर्भसे में हलके से चेंज थे और यूरिन स्ट्रिप प्रेगनेंसी +वे दिखा दी ...... आर्यन ने दोनों बहेनो को नंगा किया और एक एक ऊपर एक लेता के दोनों छोड़ने लगा.....

दोनों खुश थी, लास्ट में रति की बुर अपने वीर्ये से भरते हुए आर्यन ने कहा ," तुझे बीटा hi होगा माँ और डॉ अंजू उसकी दूसरी माँ होगी. मगर साथ रहना सीखो और अणि भी हमारे परिवार की है वह मुझसे भी अच्छी तरह परिवार को संभल सकती है. फिर जब मेरी माँ, तू hi उसके खिलाफ होगी तो कोई ुष्पर विश्वास कैसे करेगा".

रति ने आर्यन की खोली भर ली और चूमते हुए बोली," बस मुझे मेरा बीटा दे दे में सब छोड़ के दुर्र चली जाउंगी अपनी भें के साथ".

आर्यन हसकर ," उसकी परमिशन भी अणि से लेना और मैंने उसको तेरा केयरटेकर बनाने वाला हूँ....... hi hi hi hi ..... अगर कल को तू बूढी होने की वजह से मर्डर गयी बीटा पैदा करते हुए तब तेरे बच्चे को अणि अपना कर उसकी मम्मी बनकर पालेगी ".

रति ने गुस्से से आर्यन को पीछे धकेला" आज के बाद मुझसे बात मत करना ..... तू इतना बुरा भी सोच सकता है मेरे लिए मैंने कभी नहीं सोचा था".

रति अपने कपडे उठा रोटी हुयी पहने बाथरूम में चली गयी ..... तब डॉ अंजू भी अपने कपडे पहनते हुए बोली," तू पागल है किसी प्रेग्नेंट औरत को बोलेगा की तेरा बच्चा तेरे मरने के बाद कोई और पालेगी".

आर्यन भी गुस्से से," पर एक लड़की से वचन लेकर आप दोनों को सही बात लगेगी की तेरा बीटा में पालूंगी और मुझे hi माँ बोलेगा ".

अपने कपडे समेत आर्यन ने पहने और सीधा एयरपोर्ट निकल गया ..... आर्यन कभी अपनों पे गलत गुस्सा नहीं होता था पर जब से "गाजा शक्ति" उसके अंदर आयी थी वह कभी गुस्सा कभी बहोत शांत हो जाता था. पर कोई तोह आर्यन के मैं को उथल पथल कर रहा था .....???

रति ने बाथरूम में hi आर्यन का तना सुना तोह बिफर गयी, पूरी दुनिया बोले पर आर्यन को नहीं बोलना चाहिए था ...... उसने तोह आज तक आर्यन के अल्वा कुछ नहीं चाहया.

लेकिन तभी उसके मैं में आवाज सुनाई दी ," पुत्री कभी अपने आर्यन के बारे में गलत मत सोचना वह तुमसे बहोत प्यार करता है बस उसको बाँध के रखो वार्ना अनर्थ हो जायेगा ".

रति ने आंखें बांध करके हाथ जोड़कर कहा ," जो आज्ञा गुरूजी ".

रति बहार आयी तोह डॉ अंजू ने रूट हुए कहा ," सॉरी दीदी मेरी बेवकूफी की वजह से हमारा बीटा नाराज हो गया. अब कैसे उसको मानूं ".

रति मुस्कारते हुए डॉ अंजू का माथा चूमि ," चिंता मत कर अंजू हम ने इतना प्यार दिया है अपने बेटे आर्यन को, वह कभी हमसे ज्यादा डिअर गुस्सा हो hi नहीं सकता बस सायद हम उसपर बोझ ज्यादा दाल रहे हैं. कल झोडपुर से लीला आ रही है रौशनी बिटिया को साथ लेकर देखना खुश हो जायेगा ".

डॉ अंजू को तोह रति ने समझा दिया पर एक फाँस जरूर दिल में आ गयी थी जिसको सायद सारू hi निकल सकती थी की उसने आर्यन को उससे मांग कर गलत नहीं किया था ..... ????

पर क्या सारू अब भी रति को सही कहेगी जोह मुश्किल लग रहा था..... ????

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लखनऊ ......

देवेंद्र सिंह का मैं hi दिल भी बहोत विचलित था ...... एक पल वह नेहा को हाय (गलत निघा) की दृष्टि से देखता था फिर बचपन से आज तक ुष की मासूमियत को याद करता की कितना प्यार करती है वह ुष से और वह भी कितना नाज करता था नेहा जैसी बेटी पर.

मैं का अंतर्द्वंद्व उसको तोड़ रहा था पर एक नकर्मकता सायद भरी थी तोह पूरी फील्डिंग के साथ नेहा को आर्यन के खिलाफ भड़का कर नेहा का शिकार करना चाहता था.

मगर दिल के चिप्पे एक कोने में उसके अंदर नेहा नाम की बेटी की जगह ज्यादा बलवती थी तो आज सुबह सुबह अपने दोस्त ैप कारन सिंह को फ़ोन मिलकर बोलै," कारन माफ़ करना भाई में पाप करने जा रहा था बस अब सब प्लान कैंसिल है में सिर्फ अपनी बेटी से मिल कर उसको वापस भेज दूंगा ".

ैप कारन सिंह भी अच्छा आदमी था एक बच्ची की क्या गलती है फिर नेहा को सजा देकर देवेंद्र को कुछ नहीं मिलेगा.

इधर अदृश्य रूप में कड़ी चाय को भी आर्यन से पतलोक में मिला प्यार प्रवर्तित कर दिया था की प्रेम की जीत होती है और नफरत की हमेशा हार.

चाय ने देवेंद्र सिंह के अंदर से डर खींच लिया और वापस लौट गयी पतलोक. उसके हिसाब से अब देवेंद्र सिंह की मानुस पारवती hi उसको सही रह दिखयेगी.

मगर तभी वहां एक अदृश्य काली अकीर्ति ने सीधा देवेंद्र सिंह के अंदर प्रवेश किया तो वह बेहोश हो गया लेकिन कुछ पलों के लिए पर अगले hi पल जलती हुयी लाल आँखों खोले अकड़ में उठकर अपना हॉस्पिटल का गाउन उतर सिक्योरिटी अफसर यूनिफार्म पहन लिया और एयरपोर्ट के लिए निकल गया.

नेहा का चार्टेड प्लेन बहोत डिअर तोह रनवे क्लियर न होने के बाद लैंड किया फिर सिक्योरिटी क्लीयरेंस ने दो घंटे से ज्यादा लगा दिया. अब दोपहर के 1 बजने वाला था और अभी भी वह एयरपोर्ट सिक्योरिटी वालों के एक रूम में बैठी थी.

गुस्सा तोह बहोत आ रहा था पर नेहा की एहि क्वालिटी थी वह सिस्टम के बहार कभी नहीं सोचती थी. वर्ण पल में गायब हो जाती फिर उसकी भें अणि और भाई आर्यन पे बात आती.

वह आर्यन की तरह सोचती थी पर उसको भी लग रहा था कोई उसको अपने पापा से मिलने से रोक रहा है.

तभी गेट खुला और देवेंदर सिंह खुद मुस्कारते हुए सिक्योरिटी अफसर यूनिफार्म में अंदर एंटर हुआ. नेहा अपने पापा को सही सलामत देखकर खुश हो गयी.

अभी वह अपने पापा के गले लगती तभी गेट से आर्यन एंटर किया..... एक गोल्डन प्रकाश पुंज ने रूम को चौंधिया दिया और जल्दी hi आकर्ति ले लिया. समय जैसे रुक गया था कुछ पलों के लिए.......????

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अपडेट 38

Part - 4(बी)

प्रकाश काम होते hi ुष गोल्डन रौशनी से महारानी विजयलक्ष्मी अपने पूर्ण रूप महारानी स्वरुप में प्रकट हुयी और क्रोधित होती एक लात देवेंद्र सिंह की पीठ पे जड़ दी जोह अभी नेहा को बस छूने hi वाला था.

हवा में उछाल के देवेंद्र सिंह साइड की दीवार से टकरा के बेहोश हो गया और शैतान सिंह का काला साया उसके सरीर से निकला.

आर्यन ुष काले द्यूं की परछाई के पीछे पड़ता जोह गायब होने लगी बड़ा बुरा अठास लगते हुए उशसे पहले महारानी विजयलक्ष्मी ने आर्यन की काल्यै पकड़ ली ," नहीं आर्यन अपनी भें नेहा और मौसाजी को सम्भालो. उसके पीछे मत जाओ तुमको अपनी माँ की कसम. उसको में देख लुंगी की वह तुम्हारे परिवार के किसी सदस्य को नुक्सान न पहुंचा पाए".

आर्यन जोह गुस्से में आ गया था अपनी शक्ति से ुष काले साये को देखकर पकड़ने वाला था, अपनी माँ और नेहा का नाम सुनकर शांत हो गया. महारानी विजयलक्ष्मी उसको आशीर्वाद देती अब गायब हो गयी जोह समय रुका हुआ था वह चालू हो गया.

आर्यन ने नेहा को आगे बढ़कर गले लगया और देवेंदर सिंह के पास जाकर उसके सर पर हाथ रखकर मंतर पढ़ा तोह वह होश में आ गया.....

नेहा और आर्यन को देखकर देवेंद्र सिंह रू दिया हाथ जोड़कर तब चाय की आवाज आर्यन के मैं में सुनाई दी..... " यह अभी भी सच्चा है दिल से आर्यन लेकिन क्यों में इश्क पक्ष ले रही हूँ की यह सुधर सकता है, नहीं जानती ".

आर्यन ने जब अपने प्यार पकडे देवेंद्र सिंह को रूट हुए देखा तोह उसको उठा के अपने गले लगा के बोलै," बस सब पुराण भूलने की कोशिश करिये तोह आगे सब कुछ अच्छा लगेगा मौसाजी ".

एयरपोर्ट से आर्यन अपनी सिक्योरिटी के साथ िश गुप्त काण्ड के बाद महारानी विजयलक्ष्मी का मैं hi मैं धन्यवाद् कर दिया.

आज उसको नेहा के लिए चिंता और बढ़ गयी पर अब उसको देवेंद्र सिंह पर भी तराश आ रहा था...... एक बार आदमी गलत रह पकड़ ले तोह सब बुरे लोग उसका hi फायदा उठाते हैं. वह कभी उनको मंजू माँ के लिए माफ़ नहीं करेगा पर नेहा के लिए उनको एक मौका और देगा पर अपनी निगरानी में.

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दोपहर 2 बजे .......

नेहा और देवेंदर सिंह को लेकर आर्यन कम आवास पहुंच गया तोह उन्होंने तहये दिल से उसका स्वागत किया..... बिना ने पहले hi मीटिंग फिक्स कर दी थी.

एक पंथ दो काज आर्यन करना चाहता था, कम शभ की नाराजगी भी दुर्र कर दूंगा और नेहा को सिक्योर करना था hi.

फ्लाइट में उसको बिना ने बतया की रघु का एनकाउंटर करने का स्टेट गवर्नमेंट ठान ली है. आर्यन अपने ताकतवर मोहरे रघु को ऐसे आसानी से कैसे मरने दे सकता था. फिर अपनी दीदी (रघु की वाइफ) के आंसूं उसको चैन से न रहने देते.

रघु जब डेढ़ साल जेल में था वह मायके से वापस न आयी जब तक वह आजाद न हो गया ...... वहीँ दीदी के दोनों बच्चों को आर्यन बहोत प्यार करता था. रघु ज्यादा नहीं जीएगा यह भी वह जानता था पर ंप एलेक्शंस होने तक दीदी भी समझ जाएगी की उसके बच्चों का भविष्य रघु के साथ कभी नहीं बनेगा और दूसरा गवर्नमेंट भी प्रेशर में रहेगी.

आर्यन ने कम शभ के प्यार छुए तोह िश पहाड़ से हैंडसम नौजवान को गले लगाकर अंदर ले गए. वहां सबसे उसका तरफ करवाया.

कम की वाइफ व्हील चेयर पे बैठी थी तोह आर्यन ने उनके पास जाकर उनके प्यार छुए फिर घुटनो के बल बैठकर उनके घुटने चेक करने लगा ......

कम वाइफ बड़ी ावकवर्डनेस्स फील करती हुयी बोली ," जीते रहो बीटा ..... पर यह क्या कर रहे हो".

आर्यन अपनी दिलकश ममता वाली मीठी आवाज में बोलै ," कम सर , माजी बिलकुल ठीक हो जाएँगी बस में आज hi दवाई भेजवा देता हूँ, इनको रिएक्टिव आर्थराइटिस है, एक जड़ी बूटी का मुझे गायन है तो इस्तेमाल करके दोनों घुटने ठीक हो जायेंगे ...... 1 वीक में कमसे काम आधे से ज्यादा सुधर दिखने लगेगा . लेकिन माजी आपको भी वादा करना होगा, दवाई थोड़ी कड़वी होगी और तेल जलन शील पर आप रेगुलरली मेरी विधि आपनोगी . फिर देखना एक वीक में आप जॉगिंग और 2ंद में रनिंग करती अपने ऑफिस भी जाएँगी ".

आर्यन को देखकर hi कम की वाइफ और उनका एक beta-bahu और बेटी के साथ उनके भी 3 बच्चे वैसे hi हैरानी से देख रहे थे की यह आदमी hi है न पर जब उसने कहा की माजी ठीक हो जाएँगी न जानते हुए भी कम की वाइफ ने अपना बीटा सा मानकर उसका माथा चूम के बोली," अब न भी ठीक हूँ तब भी खुश हूँ की तुम भी चाहते हो में ठीक हूँ ".

आर्यन हसकर ," फिर एक हफ्ते बाद मेरे घर आना दिल्ली में hi माजी मेरे परिवार के साथ ब्रेकफास्ट करेंगे..... अपनी ख़ास मित्र नीला को बुला रहा हूँ देखना आप जितनी भी महिला यहाँ है उनसे तेज दौड़ पाएंगी ".

सब जैसे आर्यन की बातों पे विश्वास करते लग रहे थे तब देवेंद्र सिंह ने कम शभ से कहा ," कम शभ माफ़ करना छोटा मोह बड़ी बात यह हड्डियां खोल सकता है तोह जोड़ भी सकता है. आज में भी गर्व से कहता हूँ मेरा एक hi बीटा है आर्यन ".

नेहा चिढ़कर ," में तोह आपकी बेटी हूँ hi नहीं और गुस्से से मोह घुमा ली".

देवेंद्र सिंह हाथ जोड़कर ," तू तोह मेरी दादी माँ है मेरी लाड़ली बेटी ..... माफ़ कर दे िश भूदे बाप को".

कम शभ भी हसकर ," ठीक है आर्यन एक वीक तुम्हारा नुस्खा जरूर अपनीज वार्ना तुमको मालुम नहीं परसों बीवीजी की कनी रिप्लेसमेंट सर्जरी है लेफ्ट प्यार की वह भी फॉरेन डॉक्टर्स की टीम करेगी ".

कम वाइफ ," में क्या कहती हूँ जब आर्यन बीटा बोलै है तोह एक वीक और सही ".

आर्यन और नेहा से मिलकर कम शभ की फॅमिली बहोत खुश हुयी पर उनके जाने के बाद जब उन्हों ने बतया आर्यन और उसकी फॅमिली के बारे में तोह सब मोह फाड़े hi रह गए.

तब सावत्री देवी ( कम वाइफ) बोली ," वह सच्च है की जाने हॉल भी आर्यन से शादी करेगी. मुझे नहीं लगता गीता या दीप्ति होने देंगी".

कम शाब ," सच्च में इतना हैंडसम हुनक और सुपर टैलेंटेड लड़का हो कौन मन करेगी..... अभी तोह और भी चुप्पा राखी होंगी ...... है है है है है ..... "

सावत्री देवी भी उनको छिड़कर ," ऐसे लड़के से में भी शादी करना चाहती अगर जवानी में मिलता बस अब भुड्डी हो गयी हूँ ..... है है है है है ".

उसके मजाक ने बहु और बेटी ने भी साथ दिया ......

तब कम शभ बोले ," पर इश्कि माँ रतिदेवी बहोत घमंडी है, हमारी गवर्नमेंट hi गिरवा दी थी िश बार ..... बस यह लड़का मुझे वहां मिला और बोलै की हेल्प करेगा गवर्नमेंट बच्च गयी ".

सावत्री देवी ," आप ने ुष टेररिस्ट को पकड़ने वाले इंसिडेंट का जीकर नहीं किया फिर इश्कि छोटी बहेनो को पुस्कृत भी किये थे".

अब बारी थी उनके झेंपने की ," हाँ हाँ सीमा- रीमा नाम है दोनों बाछियों के, आर्यन की छोटी भेने भी बहोत बहादुर लड़कियां हैं".

सावत्री देवी ,"में प्रदेश के महिला आयोग की समिति की मेंबर हूँ मुझे भी पता है और रही बात रति देवी की तोह पिछले 15 साल से सबसे ज्यादा चंदा उनसे hi आता है. क्या कड़क औरत है कौन कहेगा वह नानी है आर्यन की वह सच्च में उसकी माँ लगती है और आर्यन की मम्मी सारू की बड़ी दीदी ".

अब बारी थी कम की बेटी सुभारती की ," आपको पता है पापा हमारी कंपनी को सुपरवाइज़ आर्यन की छोटी मामी रीता मैडम की कंपनी करती है ..... पिछले 6 मोनथस में हमको कितने प्रोजेक्ट्स मिले हैं और प्रॉफिट भी डबल हो गया है. आप एक बार ुहं से मिलना वह आपकी पॉलिटिक्स में आ गयी न सब उसके सामने फ़ैल हैं".

अब कम शभ बोले ," अच्छा अच्छा में मान गया आर्यन और उसकी फॅमिली हम सबकी खाश हितेषी है पर हमारी श्रीमतीजी दौड़कर पार्क जाएँगी तब में खुद रतिदेवी के साथ उनके सपूत आर्यन के भी प्यार पकड़ के धन्यवाद् दूंगा अब खुश ".

आर्यन ने नेहा को कम सर के आवास लंच करने के बाद, बिना के साथ वापस भेज दिया उसके पापा देवेंद्र सिंह को भी साथ में ..... उनका ध्यान रखते हुए दुसरे फार्महाउस पर रुकवा देना का बोलकर बिना किसी को बातये कल अपने गाओं नवाब ताऊजी के पास भेजने का अरेंजमेंट करवाया बिना से. नेहा को बोलै की अब मौसाजी की तेरी जिम्मेदारी हैं, इनको रिटायरमेंट दिलवा रहा हूँ और अपने गोअन ( देवेंदर का गाओं) जाकर खेती बाड़ी देखें वार्ना दुश्मनों की निगाह इन्ही पर है.

आर्यन को देवेंद्र सिंह से नफरत थी अपनी माँ मंजू पे किये अत्याचारों के कारन पर नेहा का अपने पापा के लिए लगाव और मंजू माँ को विधवा न करने की वजह के कारन, उनके अंदर सच्चा पछतवा नज़र आया भी था उसको .

दूसरा अब अणि भी उनकी विशेष निगरानी करेगी मगर वह बुरा काला साया कौन था? आर्यन अभी कुछ आगे करने की सोचता तभी बड़े गुरूजी की आवाज मैं में सुनाई दी ," उसको ढूंढने के बजाये अपने परिवार को इकठा रखो, कमजोर कड़ी उसको फिर मौका दे सकती है वॉश ...... ??????"

गुरूजी ने आर्यन की चिंता बढ़ा और बढ़ा दी खासकर रति और उसके पेट में पेलने वाले बच्चे के लिए .....

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उधर दीप्ती कम की अपनी अलग hi समस्या थी.....

डिप्टी कम ," रघु तोह जेल चला गया है कोर्ट में सरेंडर करके पर सब उसके एनकाउंटर का बोल रहे हैं ".

आर्यन हसकर ," अरे सर आप इतना सोच भी रहे तोह फिर कुछ और प्लान किया होगा वार्ना अब तक कर देते ".

शाम के 4 बजे आर्यन िश समय ,डिप्टी कम के साथ लखनऊ के सबसे आलीशान 5 स्टार होटल हयात के प्लैटिनम सुईठे में बैठा अपने सेलफोन से कॉल मिला के बोलै," अंदर आ जा और हाँ दो विंटेज बोतल भी ले आना डिप्टी कम शभ आये हुए हैं".

डिप्टी कम भी खुश होते हुए अपने साथ आयी दो सेक्रेटरी में से एक को बोले," प्रिय, आर्यन सर तुमको पसंद नहीं आये क्या ?"

प्रिय एक मॉडल वाली फिगर लिए 5'7" लम्बी जवान लड़की थी फिर आर्यन को देखकर तोह उनकी दोनों पर्सनल सेक्रेटरी तक गीली हुयी पड़ी थी......

प्रिय जोह आज शर्ट कोट के निच्चे पेण्ट की जगह घुटनो तक की स्कर्ट पहने थी आगे बढ़कर बोली ," सर में प्रिय हूँ..... में आपको रिलैक्स करवाने की एक कोशिश करूँ".

आर्यन स्माइल के साथ ," प्रिय क्या तुम लखनऊ की हो ?"

प्रिय भी खुश होती हुयी ," हाँ सर आपको कैसे पता और आपसे हैंडसम एंड स्ट्रांग मर्द मैंने नहीं देखा ".

आर्यन उसको अपनी तरफ बढ़ता देखकर बोलै," मुझे लड़कियां नहीं लड़कों का सहुक है तोह तेरा कोई बॉयफ्रेंड, भाई या बाप हो उसको बुला ले ...... तेरी तो मेरी सेक्रेटरी hi ले लेगी ".

तभी डिंग डाँग के आवाज सुनकर दूसरी सेक्रेटरी ने दूर खोला और जोह अंदर आयी उसको देखकर तोह दीप्ती कम की भी गांड पहात गयी , भेनचोद औरत है या सांडनी ..... नीला को देखकर तीनो भौंचक्के थे पर उसके पीछे दो लम्बी और सेक्सी विदेशी मॉडल्स छोटी रेवेलिंग ड्रेसेस में ट्राली धकेलती हुयी आयी.

आर्यन पूरा मंद गेम खेल रहा था दीप्ती कम से क्योंकि उनको उसकी जरुरत नहीं तोह मेरे पास बहोत ऑप्शन हैं.

छोटे छोटे कपड़ों में सोफे के बिच ट्राली लगा के गिलास टेबल पर सब रखने लगी पर सबसे बड़ी बात तोह तब हुयी जब आर्यन ने एक की स्कर्ट उठा के उसकी पेंटी निच्चे सरका के पीछे से चूतड़ों में मोह देकर सूंघ के बोलै," जिसपर नीस फ्रेशनेस ..... बूत व्हाई यू अरे लॉकिंग डार्लिंग ".

आर्यन ने उसकी पेंटी वापस चढ़ा के उसकी स्कर्ट सही करते पुछा था तोह उसने जवाब दिया ," बिकॉज़ ऑफ़ यू सर ".

आर्यन हसकर ," रोमानियाई गर्ल्स अरे सो फ्रेश.... मीट माय स्पेशल फ्रेंड एंड यू बोथ हैवे तो ट्रीट हिम स्पेशल ..... सर नाम नहीं बताते आप अपनी सेसट्री को भेज दो नहीं तोह भाभीजी को बता देंगी".

अब 58 साल के दीप्ती कम को 21 साल का आर्यन बराबर पे ला रहा था..... डिप्टी कम की भन्छे तोह महंगी शराब और शबाब से खिल गयी थी पर उन्होंने अपनी दोनों सेक्रेटरी को बहार भेजा ," आर्यन भाई कमरे बहोत काम आते हैं ".

आर्यन भी हसकर," गर्ल्स, सर वांट्स यू बोथ ऑफ़ तोए तो हेड नुदे एंड हे लाइक्स रॉ ...... बूत किसी ने भी कोई कैमरा छुपा है तो निकाल दो वर्ण यहीं मार दूंगा ".

आर्यन की धमकी से नीला एक्शन में आयी दोनों की छोटी पकड़ के बोली," सर आप ड्रिंक्स स्टार्ट करो में यहीं फ्रिस्क करती हूँ".

आर्यन हसकर ," फिर तुझे कौन फ्रिस्क करेगा नीला डार्लिंग ?..... hi hi hi ..... "

डिप्टी कम थोड़ा खिस्या कर ," अरे आर्यन ,नीला पर तुमको विश्वास नहीं यह सच्ची देश भकत लड़की है बस हम जैसों के लिए काम नहीं करती ".

आर्यन मुस्करा भर दिया और नीला को उन्ह दोनों की तरफ इशारा किया ..... नीला ने दोनों को देखकर," गेट नेकेड बूत सलौली no आईएफएस एंड बूत ...... सर मेरी सैलरी देश सेवा की 10 करोड़ इयरली है ".

अब तोह डिप्टी कम की भी गांड पहात गयी यह लड़की को इतना पैसा आर्यन नहीं देता है पर जवाब नीला ने दिया ," सर में हाई रिस्क टारगेट hi कवर करती हूँ बस मेरा खर्चा इंडियन गवर्नमेंट की सैलरी और आर्यन सर के पास एक सेफ हाउस की तरह इनकी तरफ से दी हुयी सैलरी एक्स्ट्रा है".

डिप्टी कम ," तुम आर्यन के लिए कोई काम नहीं करती फिर रहती क्यों हो इनफार्मेशन लीक भी होती होगी ".

नीला ने नयी विंटेज बोतल खोल पहले बारी बारी दोनों को सुंघा के पेग बनाते हुए बोलै," सर में थी ब्लैक कमांडो 5 साल कई मिशंस की फिर इंटेलिजेंस में आ गयी तब आर्यन ने मुझे माँगा की इश्क खर्चा में उठा लूंगा ".

आइस क्यूब दाल के वह कड़ी हुयी और बोली," ड्राप योर आल क्लोथ्स ".....

दोनों लड़कियां नंगी हो गयी अपनी ब्रा और पेंटी ड्राप करके और सोफे पे बैठे दीप्ती कम की एक एक एआरएम रेस्ट पर सॉफ्ट सॉफ्ट गूरे गुलाबी चूतड़ टिका के बैठी ...... वहीँ जीन्स और वाइट शर्ट्स में नीला पेग उठकर आर्यन की गोदी में बैठी.

डिप्टी कम भी अब पूरे गरम थे पर नीला को जब आर्यन की गोदी में बैठे देखे की यह सांड जैसी लड़की भी आर्यन से काम hi है पर अपने हाथ में लिया जाम ," तुरस्त कर रहा हूँ आर्यन ..... चियर्स ...... "

आर्यन ने नीला का गाल चूमा ," सर आपको क्या लगता है िश लखनऊ के सबसे महंगे होटल के पेंटहाउस में बैठकर दगाबाजी भी आपसे कर रहा हूँ ताकि आप कम बन सको ".

एक बार और कम वर्ड सुनकर वह अपना हाथ रोक के बोले ," आर्यन िंह सबको बहार भेज दो तब बात करते हैं".

नीला ने दोनों की तरफ इशारा किया तोह दोनों ने दीप्ती कम को गाल पर किश कर नीला के साथ बैडरूम में चली गयी.

आर्यन अपना पेग पीते मोबाइल पे बिजी दिखता अपना काम करने लगा ......

डिप्टी कम ने उसको काफी देर ऑब्सेर्वे किया फिर गिलास ख़तम करते हुए बोले ," में चलता हूँ आर्यन "...... उनको एक मैसेज आया था .

आर्यन ने बगैर नजर उठाये बोलै," जय श्री राम दीप्ती कम शभ ".

कुंबाते हुए वह चला गए पर नीला अंदर आकर अड़ गयी पेलने नहीं वाले बाकी ओरल मजा मुझे दो मुझे ..... सच्च में वह अच्छा सीख रही थी पर क्यों आर्यन उसके साथ सेक्स से भाग रहा था.

नीला ने अपना बड़ा पिछवाड़ा उसकी गॉड में बैठकर पेग पीते हुए बोलै," कानपूर जेल पहुंचने से पहले रघु भाग गया है ".

आर्यन ," बस उसको अंडरग्राउंड कर अगर वह दिखा न तुझे मार दूंगा ".

नीला ," मेरी मार दो तब मर्द मानूगी यार , अब आग बढ़ती जा रही है ".

आर्यन ने उसका गाल चूमा ," में चक्का hi सही पर देखना जिसको अभी अप्सब्द कह रही थी नेक्स्ट कम एहि होंगे".

नीला चौंक कर ," उसको कोण पसंद करता है ..... ?"

आर्यन हसकर ," उन्ही को सब पसंद करते हैं और प्रेजेंट कम पुराने नेता थे तोह बस इनको रोक के रखें हैं. मगर यह भी सच में बहोत अच्छे आदमी हैं ".

नीला थोड़ा सीरियस होकर ," मगर मुझे तोह बिलकुल घटिया आदमी लगा ".

आर्यन ने नीला का शर्ट उतर दिया तोह उसकी स्लिवर कलर की ब्रा में 38 के साइज की ठूस चूचियां एक दुसरे से लड़ी हुयी घेरि खायी लिए दिखी ..... अपनी जीभ से उसकी 2 मं तक घाटी चाट के उसके चेहरे को देखने लगे .

नीला ने बांध आंखें खोली और तो बोलै," वह मुझे तोलने आये थे न की आयेशी करने. हाँ एक बार नंगी लड़कियां उनको कमजोर जरूर करने लगी थी पर हे इस ओने वुमन मन. अपनी बीवी बच्चों से बहोत प्यार करते हैं. इनकी वाइफ से अपने ज़माने में इन्होने लव मैरिज की थी. बस दिक्कत यह है गंदगी साफ़ करने के लिए गटर में उतरना पड़ता है तोह यह काम यह कर रहे हैं. तू दिल्ली में नहीं थी तब भी गवर्नमेंट बचने में जी जान लगा दिए इन्होने ने क्योंकि एक बार कम बनकर यह अच्छा hi करना चाहते हैं स्टेट के लिए. राजनीती बहोत खुश चीन लेती है हमसे, सबसे बड़ा आपका खुद के लिए रेस्पेक्ट. रघु की खबर िंह तक पहुंच गयी है. चल पहले तुझे खुश करता हूँ फिर मुझे किसी से मिलना है तू एयरपोर्ट पर मिलना ".

नीला को आर्यन की बातें अच्छी लग रही थी पर अपना जिस्म की आग उसको िश मर्द के आगे कमजोर कर देती थी..... खुद अपनी चूचियां बेपर्दा करती बिना कुछ बोले उसके मोह में अपना लेफ्ट निप्पल ठूस दी .

नीला को दो बार जाम पीते हुए आर्यन ने झाड़ा छूट चूस के और 2 बार जकूज़ी में नहाते हुए. आज ाचा मौका था नीला की सील खोलने का पर आर्यन का एक आदमी से मिलना जरूरी था फिर नीला को अभी कम अवश्य जाना था कम की वाइफ का दिल्ली से लायी आर्यन के रूम से स्पेशल काढ़ा और ख़ास जड़ी बत्ती वाला तेल लेकर.

आर्यन ने नीला को समझा के भेजा और खुद निकल गया हज़रतगंज के लिए अपनी सिक्योरिटी को अपने से कुछ दूर रहने की हिदायत देते हुए ..... वहां एक पान की शॉप पे जाकर बोलै ," भैयाजी एक 720 पैन बना दिज्ये ".

एक बनारसी 55 साल का आदमी आर्यन को देखकर hi खुश हो गया जब निघा उठा के देखा ," आये बबुआ कैसे हो ..... कितना बर्ष हो गइया ..... अब तोह ताड़ का पेड़ भी तोहरे से काम होगा ..... है है है है है ...."

उसकी आंखें गीली होकर बर्षने लगी ..... ुष ने अपने गले की गमछे से आंसूं पहुंच के आवाज लगाई ," एहहहहह बिरजू पान लगवा हम आती तनिक ".

एक 5'7" फट का पजामा और हाफ बाजु का सफ़ेद बनियान पहने बिरजू नाम का लड़का जोह साइड में पान धो रहा था खड़ा होकर खोके में गुश्ता हुआ बोलै," पान भी हुये साफ़ करें, झाड़ू भी हुये करें अब पान भी हमसे बनाओ ..... "

बिरजू ने देखा उसका बाप एक 7 फट लम्बे किसी विदेशी लड़के की खोली भरे मिल रहा है ..... पर वह अकेला नहीं था उसकी दूकान पे खड़े घरक और आस पास के लोग भी िश हैंडसम हुनक आर्यन को देख रहे थे जोह एक वाइट T-shirt और स्टोन ब्लैक जीन्स में था. पर बॉडी से hi रेसलर लग रहा था.

आर्यन अब ुष राधेशयाम नाम के काका के साथ खोके से दुर्र फुटपाथ पे बैठा उनका हाल चाल पूछ रहा था..... िश आदमी से आर्यन ढाई साल पहले मिला था जब लखनऊ आया था रति के साथ.

वह मीटिंग में थी आर्यन यहाँ हज़रतगंज शॉपिंग करने चला आया. तब देखा एक पान वाले को 4-5 आदमी पीट रहे हैं तब आर्यन ने उन्ह सब की ऐसी हज़ामत बना दी. उसके बाद एक महीने बाद काका दिल्ली आया था आर्यन के कहने पे दिल्ली ीत फेस्टिवल में और पान का स्टाल लगया था.

आर्यन के लिए काका पास की मशहूर दूकान से अल्लू टिक्की चाट का पता लेकर आये तोह आर्यन और वह दोनों एक hi पत्ते से चाट खा रहे थे.......

आर्यन की पर्सनालिटी देखकर किसी की हिमनत नहीं थी उनके पास आये वहीँ काका ने उसको दो और पत्ता चाट का खिलते हुए काफी इनफार्मेशन दी.

दोस्तों यह काका ुशी गाओं के पास का था जहाँ का डिप्टी कम था ..... यानी छोरा गंगा किनारे वाला.

तभी दोनों को कुछ शोरगुल सुना तोह पलट के देखे की अपने खोके की तरफ से आ रही है गलियों की आवाज. दोनों धयान hi नहीं रहा की वह पिछले एक घंटे से ज्यादा अपनी बातों में मशगूल हैं.

खोके के आस पास भीड़ देखकर और एक चीख सुनकर अब काका और आर्यन भी डर गए....... " मर्डर गवा बापू बचई ले ...... अह्हह्ह्ह्ह मत्तट मारूओ मर्डरर गया मोरी मैया ..... "

काका छोटा सा हट में फटाफट भीड़ में घुस गया पर बिरजू की तेज सुनकर अब आर्यन ने जोर लगा के बाकी दुसरे को धकेलते हुए अंदर पहुंचा तोह एक 6 फट का बॉडी बिल्डर 300 मूवी के लेओनीदास की तरह धड़ी रखे और लम्बे बाल की पीछे चुटिया बांये बिरजू को जमीन पड़े लात मार रहा बूट पहने हुए और उसके हाथ में एक गन थी.

काका को उसके दो मुस्टंडे सांडो ने पकड़ लिया था ..... पर चार सिक्योरिटी ओफ्फिसरवाले भी खड़े है रहे थे. अभी वह फिर से अपने बूट की लात मरता तभी किसी ने पीछे से उसकी गर्दन पकड़ के हवा में 6 फट सड़क से ऊपर उठा पटक निच्चे पटक दिया पीठ के बल और उसकी गन हाथ में लेकर एक किक उसके पेट मारी थी उसके मोह से खून निकल आया.

आर्यन का कहर और साइज देखकर hi साड़ी भीड़ क्या ुष दादी वाले के साथ बन्दों की भी गांड पहात गयी , इश्को कैसे हैंडल करें पर जैसे 4 बॉडी बिल्डर से लड़के आर्यन तक पहुंचते ुष से पहले उसने ुष दादी वाले की गर्दन पर पेअर रख दिया .

और पास पहुंचे दो को चोप सीने पर मारा और बाकी दोनों को हवा में उछाल के किक जड़ दी..... चरों उठ hi नहीं पाए पर अब 5 मुस्टंडे दादी वाले तलवार लेकर आर्यन को घेर लिए और भीड़ पीछे हैट गयी.

आर्यन ने पांचो को देखा तोह उनकी दादी और पहना देखकर बोलै," क़ासिम बेग के आदमी हो तोह भाग जाओ नहीं तोह तुम्हरी वजह से आज उसको उसके घर में घुसकर मरूंगा ....... "

आर्यन की पूरी बात भी ख़तम न हुयी थी की पीछे से जिसने तलवार से हमला किया वह बैक किक की वजह से उड़ता हुआ 10 फट दुर्र जाकर गिरा पर फिर उठ न पाया.

आर्यन ने अपने राइट साइड वाले के तलवार के प्रहार को डॉज किया और उसके हाथ से तलवार चीन 2 सेक् में इतनी तेजी से वार किये उसके सरीर पर बस कतरन थी कपड़ों की और एक थप्पड़ पड़ते hi वह जमीन पर गिराकर बेहोश हो लेकिन बिलकुल नंगा....... उसका सामने का पूरा बदन नंगा था लेकिन एक भी कट नहीं लगा था सरीर पर.

आर्यन को लग गया यह ऐसे नहीं मानेगे और उसने उनके बेहोश लीडर की जांघों के बिच तलवार और अपनी कमर से अपनी गन उसके सर को एआईएम करके जोरसे चिल्लाया ," रुक जाओ गटर की पदिशों नहीं तोह इसको बिच से चीयर दूंगा खोपड़ी उदा के , कोई चालाकी नहीं ".

इतनी तेज आवाज का गर्जन hi काफी था सबकी फाड़ने के लिए और यह आदमी कोई आम लड़का तोह कहीं से नहीं लग रहा था िंह 15-20 सेक् में , सिक्योरिटी अफसर के सैरयां की आवाज आयी उशसे पहले काका ने आर्यन के प्यार पकड़ लिए ," क़ासिम शभ का बीटा है यह ..... माफ़ कर दे बीटा, बस यही आखिरी बचा है".

अब तोह आर्यन भी हैरान था आखिर उसके 6 बेटों में 5 का क्या हुआ ...... ?

आर्यन ने जोरसे चिल्ला के बोलै," सब 20 फट दूरी पर रहो नहीं तोह गोली सीढ़ी भेजे में मरूंगा ".

आर्यन ने आवाज दी ," बिरजू ोये बिरजू.... पानी लेकर आ ".

बिरजू को भी चोट लगी थी पर आर्यन को देखकर उसको माशिया नहीं भगवन hi लगा Aryan......m वह पानी लाया तब आर्यन ने ुष दादी वाले लड़के के चेहरे पे पानी की बोतल ओपन करके पूरे उड़ेल उसकी नाश दबाई तोह वह होश में आ गया. आर्यन ने उसकी गर्दन पर रखकर उसको बेहोस कर दिया था जोह अभी होश में आया.

अपने सामने आर्यन को देखकर वह कुछ बोलता उशसे पहले आर्यन ने उसके मोह में गन की नाली दाल दी ," कोई सयंपन्ति नहीं, आज तुझे तेरे बाप के सामने मरूंगा..... बहनचोद सारे हिजड़े hi पैदा किये हैं उसने जोह गरीबों पर hi जुल्म करते हैं ".

मक़बूल नाम का यह 25 साल का लड़का आज डर जान गया था पर आर्यन ने फिर नाश दबा के बेहोश किया..... और अपनी जेब से सेलफोन निकल कॉल मिला के बोलै," कहाँ हैं तू चल गंदगी साफ़ कर ".

मगर सबसे बड़ी बात सिक्योरिटी अफसर की 6 गाडी बहार कड़ी थी हज़रतगंज की मैं रोड लेकिन काण्ड जोह अंदर जाती गली पर हुआ था वहां नहीं जा पायी. सबसे बड़ी बात आर्यन की सिक्योरिटी वालों न कोई *****- '. जगधा बहार िक्ति हुयी संख्या में '. भीड़ को न करने दिया.

पिछली बार लखनऊ में आर्यन जब था तब देखा था ***** '. पर वह फिर कभी...... ुष समय 8 '. के हाथ और 6 ***** के प्यार काट दिया था. दंगे एक दम रुक गए की सिक्योरिटी अफसर वाले नहीं स्पेशल फाॅर्स वाले बस हथियार हाथ में देखकर मार रहें हैं न की धरम देखकर.

आर्यन ने उठाकर मक़बूल को अपने कंधे पे डाला और काका को बोलै तुम साथ चलो आज इश्क भी खेल ख़तम करते हैं.

आर्यन ने एक सीटी बजायी तोह 4 लाल बत्ती वाली एक से एक इम्पोर्टेड गाड़ियां 10 सेक् में वहां आ गयी जैसे इंतज़ार में कड़ी थी ..... अब तोह भीड़ को भी विश्वास हो गया यह दिल्ली से स्पेशल ब्रांच वाले होंगे तभी सिक्योरिटी अफसर भी कुछ नहीं की.

भीड़ को दुर्र देखेलते सिक्योरिटी गार्ड्स ने आर्यन से मक़बूल को लिया ...... एक सुव में दाल लिया तब आर्यन बोलै," काका तेरा पान नहीं खा पाया ".

पर तभी बिरजू लगंडे हुए आया," बहिया हम तुहार पहचान नहीं पायी एहि लो 720 कबसे बना के रखे रही ".

उसकी आँखों में आसूं देखकर आर्यन उसके हाथ से पान लिया और मोह में दाल के उसको गॉड में उठा लिया ," चलो काका ससुरा मर्ज hi ख़तम कर दिए आज माँ ".

रेंज रोवर की पिछली सीट पे प्यार की खिसकी हड्डी एक बार में बिरजू की चढ़ा के आर्यन ने गाडी रुकवा के खुद स्टीयरिंग संभाली और ड्राइव करता बढ़ गया क़ासिम की पुश्तैनी नवाबों वाली हवेली जोह लालगंज में थी.

आर्यन वहीँ जाने वाला था काका से फारिग होकर पर काण्ड हो गया जिसकी वजह से अब बात hi दूसरी हो गयी वहां जाने की.

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आगे 4 सिक्योरिटी अफसर की गाड़ियां और पीछे 6 आर्यन के काफिला को एस्कॉर्ट करती जब 15 मं बाद क़ासिम बेग के पुस्तैनी हवेली में एंटर की तोह वह भी दौड़ा दौड़ा बहार आया यह 58 साल का गोरा चिट्टा साढ़े 6 फट लम्बा, हलकी आधी सफ़ेद पठानी दादी, ..ी टोपी और सफ़ेद पत्नी सूट पेजमा पहने , हाथों और गले में सूने की अंगूठियां और कड़ा , 3 बड़ी बड़ी मोती चैन पहने था.

शेर आदमी था क़ासिम बेग पर आर्यन ने पिछली बार उसकी औकात दिखा दी थी सिर्फ एक पान वाले को बचने के लिए. वह इतने राशूक़ वाला होकर आर्यन का झांट नहीं उखाड़ पाया ऊपर से अपने 10 आदमी दुनिया से रुक्सत और 20 से ज्यादा अफेज करवा लिया था. हाथ पेअर तोह उसके भी तोड़ दिया था पर ुष समय उसको उसकी भांजी ने बचा लिया जोह आर्यन को जानती थी.

आर्यन अपनी कार से बहार निकला भीड़ को सिक्योरिटी अफसर कण्ट्रोल कर रही थी पर उन्ह भूरी सुरमयी आँखों में उसको देखकर जैसा रूना hi आ गया. वह ढाई साल पहले सही hi बोल के गया था छोड़ दे यह गलत काम क़ासिम वार्ना आवारा बेटे क्या तेरा नाम लेने वाला नहीं रहेगा िश दुनिया में.

मक़बूल को जब उतरा गया तब उसको बेजान देखकर क़ासिम बेग रोने लगा .....

आर्यन अपनी कर्कश गुस्से वाली आवाज में ," अभी जिन्दा है, पता नहीं आज काका ने रोक लिया वार्ना मारने hi वाला था तेरे िश आखिरी चमसे चिराग को. हाजी तू है, ..ी तू है पर काम तेरा एक अभी भी अच्छा नहीं है क़ासिम...... ुष दिन एहि काका थे आज भी एहि थे जिनको पहले तू मारना चाहता था और आज तेरा बीटा इनके बेटे को. एहि आखिरी मौका था अबकी बार कोई रेहम नहीं करूँगा न करवाने दूंगा ".

तभी एक बुरखा नाशी ने आगे आकर कहा ," तू अंदर नहीं आगे क्या ".

आर्यन हैरान ," माफ़ करना मगर मैडम मैंने आप को पेह्चा नहीं ".

बुरखानाशी ," चुपचाप अंदर चल नहीं तोह यहीं टांगें तोड़ दूंगी "....... और आर्यन का हाथ पकड़ के अंदर ले जाने लगी पर वह भी हस्ता हुए," आये यह क्या कर रही हैं सब देख रहे हैं..... ऐसा मत कर में सरीफ आदमी हूँ मोहतरमा ".

क़ासिम को काका ने सब वाकया बतया तोह कान पकड़ के आँख बांध करके बोलै," फरिश्ता hi है वह कोई, जोह मदद करने आ गया राधेशयाम भाई ".

काका," क़ासिम भाई वह है hi इतना दयावान किसी मजलूम पर नैशाफ़ी बर्दास्त नहीं करता. बस मेरी दूकान पर आकर बोलै 720 पान बना दो..... हम बात hi कर रहे थे मक़बूल भैया को झगड़ा करते देखा. एक बार लगा मार देगा आर्यन पर नहीं खुद उसको बचा के लाया. रस्ते में उसने बतया उसको सिक्योरिटी अफसर वाले hi मारने वाले थे ".

अब क़ासिम बेग रूट हुए काका को पूरी स्टोरी बतया तोह काका ने जोह कहा तोह उसको सुनकर वह भी हैरानी से पुछा," आपके चरण जिंदगी भर निगाह करके देखूंगा बस हमारे ., में सर झुकना मन है ".

काका ," क़ासिम भाई आपकी तरफ से भगवन के आगे में सर झुका दूंगा पर आप मालिक हो , हज़रतगंज में आधी दूकान आपकी hi तोह थी. धरम ने कहाँ से हमको अलग किया है. कमा के खाना है चाहिए में हूँ या आप. धरम से कहा हमारे पेट भरे हैं, हाँ टैक्स जरूर वसूलते हैं ".

तभी मक़बूल की आवाज आयी ," मेरी गन कहाँ है उसको साले को में खुद मरूंगा ".

चटककककक चटककककक चटककककक चटककककक ..... 4 थप्पड़ पड़ते hi अब मक़बूल भी चुप्प हो गया अपने अब्बा के सामने..... " सुकर मान राधेशयाम भाई थे वहां से ुष पहाड़ जैसे आदमी की वजह से बचा लाये वार्ना सिक्योरिटी अफसर वहीँ मारने वाली थी तुझे.

लेकिन अपनी hi हवेली में उष्ण इतनी सिक्योरिटी अफसर देखि तोह डरने लगा और सिक्योरिटी अफसर वाले ुशी को घूर रहे थे..... तभी वहां हाजी सादिक़ सुलेमानी पहुंचे अपने काफिले के साथ...... लखनऊ के सियासत और '. कौम में इनकी सबसे ज्यादा पकड़ थी.

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आर्यन को अंदर वह खातून हाथ पकड़ के ले गयी पर वह खुद उसको रोक नहीं रहा था ...... वह इसी से मिलने के लिए hi तोह रुका हुआ था लखनऊ पर मुलाकात ऐसे होगी यह तोह रब्ब भी नहीं जानता था.

आर्यन को वह दिन याद आ गया जब एक बार वह 6 मोनथस अपने पेरेंट्स के साथ लखनऊ में था 8 साल का तोह एक सीट पे उससे पहली बार मुलाकात हुयी थी वह भी गलत रिवायत में. वह लड़की बाद में उसकी सबसे अच्छी दोस्त बन गयी. ख्याल उसका गर्लफ्रेंड की तरह रखती थी अपने पूरे '. लिबास और हिजाब में पर दोनों जानते थे ुशी समय से उनके बिच एक स्पेशल बांड है.

*** जी हाँ दोस्तों यह वही लड़की और यह खातून गुलक खान है ..... यानी आर्यन की गुल जिसको पाकिस्तान से बचा के लाया था.

हवेली के अंदर पर्दानशीनों की रहिस्यों में घुसते हुए आर्यन से लिपट के फफक फफकर के रोने लगी ......

सायद आर्यन के जज्बात उसके लिए इतना सम्मान लिए थे की वह चाहा के भी उसको बाँहों में नहीं भर पा रहा था ऊपर से पीछे कड़ी करीब 25-30 से ज्यादा खातून यह नजारा देख रही थी .....

इतने सूंदर मर्द कईओं ने दूसरी बार देखा था ढाई साल बाद.... पहली बार तो क़ासिम बेग को जिन्दा छोड़ के चला गया जब सबने रूकर उसके प्यार पकड़ लिए थे.

आखिर आर्यन को बोलना पड़ा," सब देख रहे हैं गुल क्यों खुद को रुस्वा करवा रही है सबकी नज़रों में ".

गुल ने उसके सीने से अपना सर उठाकर के हिजाब निकाल के कहा," क्योंकि मुझे अब फर्क नहीं पड़ता आर्यन. सायद मेरी तेरे लिए चाहत की नापाकी मुझसे सबकुछ चीन ली. में दिलसे कहती हूँ ी लव यू आर्यन, सायद तबसे जब हम पहली बार कॉलेज में मिले थे. आज तक सिर्फ अपने धरम की चद्दर मैंने आंखों पे भी ओढ़ ली थी ".

आर्यन की आँखों में भी आंसूं आ गए और रूट हुए बोलै," नहीं गुल तुझसे पाकीजा खातून िश पूरी कायनात में मिलनी मुश्किल है बस मेरी पैडिश hi मुझे देगा दे गयी. तू न तब गलत थी न आज गलत है बस हमारी जिंदगी के सबब hi अलग हैं ".

तभी किसी ने पीछे से आर्यन की पीठ में तलवार घुसेड़ी तोह तन्न की आवाज से टूट गयी ...... सब औरशन और कुछ ुष हमलावर के मोह से हाय ******** निकला.

तभी ुष हमलावर को बाकी मर्दों ने पकड़ लिया और आर्यन से अलग होकर गुल ने ुष हमलावर मक़बूल को आगे बढ़कर थप्पड़ जड़ दिए चटककककक चटककककक और गुस्से से दादी ," तेरी हिम्मत कैसे हुयी मेरे आर्यन पर हमला करने की ..... चटककककक चटककककक ..... "

मक़बूल ," तू ने मुझे िश गैर मजभी के कारन हाथ उठाया बदजा**** ....... "

आर्यन ने आगे बढ़कर गुस्से से उसको सबसे खींच के सामने दीवार पर बानी 7 फट ऊँची खूंटी पे गाड़ दिया ," हरामजादे तेरी हिम्मत कैसे हुयी मेरी गुल को गाली देने की ...... कुत्ते मैंने सिर्फ क़ासिम के आखिर बीटा जिन्दा होने की वजह से तुझे छोड़ा था वार्ना वहीँ मार देता".

आर्यन ने गन निकाल के उसके मोह में ठूस दी जिसको देखकर गुल के साथ सबकी पहात गयी ......

गुल ने झट से आर्यन का गन वाला हाथ पकड़ लिया ," नहीं आर्यन इश्को मार के क्यों अपने हाथ नापाकक करते हो. यह तुम्हारी नफरत के भी काबिल नहीं है..... और तू मुझे गाली देने से पहले 10 बार सोच लियो. यह hi वह फरिस्ता है जोह अकेला मुझे पाकिस्तान से उन्ह तेरे जैसे घटिया लोगों से बचा के लाया था गैर मजभी होने के बावजूद भी. में hi गलत थी जोह अपनी छोटी बहेनो की बताओ में आ गयी और यहाँ चली आयी. चलो आर्यन यहाँ से अब में किसी से वास्ता नहीं रखना चाहती. बस आखिरी बार मामू के लिए इश्को छोड़ दो, वैसे भी कोई न कोई गली का कुत्ता भी िश जाहिल को मार hi देगा ".

आर्यन को गुल की आँखों के आंसूं देखे न गए और गुल का हाथ थामे वह वहां से जाने लगा.

तब क़ासिम की सबसे बड़ी बीवी बोली ," रुक जा गुल और तुम भी रुक जाओ आर्यन जिसने हम पर इतने अहसान किये हैं. अगर कोई घर से बहार जायेगा तोह यह नालायक औलाद. आप मार भी डोज न तोह एक आंसूं नहीं निकलूंगी पर िश बेगैरत को अब अपनी कूख की खिली नहीं उड़ने दूंगी"......

सुबकते हुए आर्यन और गुल के सामने हाथ जोड़े तोह गुल भी रूट हुए उनसे लिपट गयी ," नहीं मामी जान में hi मनहूस मेरा साया hi गमजदा है. मुझे जाने दो आपका परिवार सलामत रहेगा".

मामी ," नहीं मेरी बच्ची, तुझपर हम सबको नाज है. तेरी जैसी जहाँ नशीन औलाद ******* सबको दे ".

आर्यन को अब लग रहा था उसको यहाँ नहीं आना चाहिए था पर किस्मत खुद hi खींच लायी.

आर्यन ने आगे बढ़कर ुष कील पे लटके मक़बूल को उतरा जोह फिर से बेहोश हो गया था. तब क़ासिम बोलै ," जुबैर , असीम , रेहान इश्को हॉस्पिटल लेकर जाओ ".

आर्यन ," जरुरत नहीं है क़ासिम भाई, बस कोई एकांत कमरा दे दो में जखम अभी ठीक कर देता हूँ बस मेरा बैग मंगवा दो 2 टाँके मारने होंगे. मैंने मांशपेशी के बिच से तांगा था तोह इंजरी ज्यादा नहीं हुयी होगी ".

गुल और उसकी मामी आर्यन को मन की उसको कोई जरुरत नहीं पर आर्यन एक बात समझ गया की क़ासिम के घर में औरतें बहोत हैं और मर्द काम..... काम से काम उसका यह बीटा 4-5 साल जिन्दा रहा तोह बाकी जवान होते बड़े मारे गए बेटों के लड़के उसकी जगह ले सकेंगे.

आधे घंटे बाद जब आर्यन ने उसकी पीठ के घाव को स्टिचेस लगा के पट्टी कर दी तब क़ासिम भी अपने को बोलने से न रोक पाया ," आर्यन भाई तुम तोह कोई पेशवर डॉक्टर लगते हो..... इतनी नजाकत से तुम ने िश पागल लड़के का इलाज किया है".

आर्यन हसकर ," क़ासिम भाई मैंने अपनी डॉ मम्मीजी ( डॉ अंजू) से सीखा है की वही काम आ जाता है.... बस यह लेप के साथ 2-3 पट्टी करना यह ठीक हो जायेगा. एक सलाह दूंगा इश्को कुछ महीनो के लिए बहार देश मलयसिअ भेज दो इश्के पीछे गवर्नमेंट से लेकर आपके दुश्मन तक लगे हैं बस किसी को खबर न हो, आगे आप समजह दार हो".

आर्यन की बात सुनकर फिर से क़ासिम उसके हाथ पकड़ के चूमने लगा और गले लग गया ," क्या करूँ भाई बस अपने किये की कीमत मेरे बच्चे चूका रहे हैं".

आर्यन ने उसकी पीठ ठप्ताप्ते हुए कहा," होंसला रखो आप , बस कुछ महीने जेल भी गुजार आयो तब आपको भी अच्छा लगेगा और प्रेशर भी काम होगा".

तभी एक लड़की वहां आयी और बोली," आर्यन भाईजान को अम्मी और गुल आपि बुला रही हैं अब्बू ".

क़ासिम हसकर बोलै ," यह निखत है आर्यन मेरी सबसे छोटी बेगम की सबसे छोटी बेटी. चलो खाने का वक़त हो गया, हम पानी भी न पूछ पाए अब तक ".

आर्यन हसकर ," थैंक्स निखत और नवाब शभ इजाजत दिज्ये मेरी दिल्ली की फ्लाइट है फिर कभी मेहमान नवाजी का मौका जरूर दूंगा ".

तभी क़ासिम की बड़ी बेगम ने रूम में एंटर किया," अगर मुझे अपनी अम्मी की तरह मानते हो तोह आज डिनर यहीं करना होगा और तुम गुल से पूछ लो वापस जाने का में नहीं रोकूंगी ".

आर्यन अभी कुछ बोलता की गुल भी अंदर आ गयी ," यह कहीं नहीं जायेगा आप मेहमान खाने में रूम त्यार करवा दो मामी. आप भी खाना खा कर जाना काका आज रात यह यहीं रुकेगा".

आर्यन की बोलती बांध हो गयी तब उसने काका की तरफ देखा तोह हसकर बोले," बीटा हमारे क़ासिम शभ के यहाँ रुकना फकर की बात हैं फिर बीत्यां इतना बोल रही हैं रुक जाओ, जानता हूँ तुम्हारे पास समय नहीं होता ".

आर्यन ," अच्छा मेरी माँ में नहीं जा रहा पर मुझे कुछ कॉल करने पड़ेंगे और सबको बताना होगा ".

गुल ," नीला को मीणा ने बता दिया है तुम यहीं रुकोगे, चलो आज तुम्हारे लिए मामी ने पाया बांया है ".

रूम के बहार आर्यन को क़ासिम के जवान होते 3-4 पोतों भी घेर लिया की उन्होंने उसके बारे में बहोत सुना है.....

डिनर में इतना अच्छा सवादिस्ट नॉनवेज आर्यन ने कभी नहीं खाया था पर सब हैरान थे आर्यन की खुराक देखकर. काम से काम 10-12 आदमीओ का खाना अकेला डकार गया. गुल ने पहले hi बता दिया था की एक बार शुरू हो गया तोह मन नहीं करेगा तोह 3-4 औरतें सिर्फ रोटियों पर लगाओ .

निखत ने डिनर के बाद बोलै ," अब्बू सब आर्यन भाईजान से गुफ्तगू करना चाहती हैं अगर आपकी परमिशन हो तोह".

क़ासिम को क्या ऐतराज होता, उसकी हवेली पर आज कई सालों बाद असली मेहमान आया था. लड़कियां उसको जबरदस्ती उठा के ले गयी तब क़ासिम को उसकी बेगम ने बतया ," आप को सायद पता नहीं है न hi गुल जानती है पर आपकी छोटी भें ने फ़ोन पे बतया था की गुल के यहाँ इंडिया में डाक्यूमेंट्स से लेकर सब जगह सौहार का नाम आर्यन लिखा हुआ है. वह चाहिए उसने गुल की जान बचने के लिए किया पर आज तक उसने दोस्ती निभाई है. गुल अगर आर्यन से शादी कर लेती तोह कितनी खुश किस्मत होती".

क़ासिम ," बेगम हमारे चाहने से क्या होता है, लेकिन अपनी औकात मत भूलो, वह मुल्क की इतनी बड़ी कारोबारी रतिदेवी का एकलौता वररिस है. यहाँ स्टेट की नहीं सेंट्रल गवर्नमेंट तक वह पहुंच रखती है. कट्टर ***** है, हम सबको कबरिस्तान भी नसीब नहीं होगा. में भी जानता हूँ सब लड़कियां और औरतें ुष पर फ़िदा हो रही होंगी. कोई भी गलती होने से पहले बस गुल को hi उसके साथ रखना, वह उसकी बचपन की दोस्त है सब दुर्र रहेंगी".

वह भी हस्ती चली गयी वहीँ काका भी डिनर करके चले गए, क़ासिम ने उसको आदर के साथ भेजा िश वाडे से की उसको एक छोटी परमानेंट शॉप देगा.

अभी तक किसी को भी समझ में नहीं आ रहा था क़ासिम भाई जोह नवाबों के खानदान से था इतना आर्यन से डाब क्यों रहा है. जबकि वह भी जानता था की उसकी भांजी गुल सही टाइम पे मिलने आयी है. वह आर्यन की मदद से अपना पुराण विश्वास स्टेट गवर्नमेंट में बना सकता है. आज वह पीछे और अहसहए सिर्फ दुश्मनों और गवर्नमेंट के उसके खिलाफ होने की वजह से है.

आर्यन से सब खातून बातें करती उसको गुल के नाम से छेड़ते हुए खुश हो रही थी. आर्यन के लिए गुल ने बता दिया की उसकी शादी तय हो चुकी है गीता के साथ सो कोई लड़की दूर न डाले.

लास्ट में मक़बूल की बीवी ने आकर आर्यन का अपने सौहार को माफ़ करने के लिए सहक्रिया कहा. तब आर्यन ने बोलै त्यार रहो भाभीजाण जल्दी आपको नए देश की सैर करनी पड़ेगी.

आर्यन को लग गया था की अगर मक़बूल उसके बारे में 10% भी जानता तोह डर के hi उसकी पहात जाती पर एक मौका बनता है. गुल को यहाँ इतना खिला खिला देखकर वह भी खुश था आखिर इतना परदैत और जिल्लत होने के बाद वह एक जिन्दा लाश जैसी हो गयी थी. मगर उसको अंदजा भी ना था की गुल उसके आने की वजह से खुश हुयी है. आर्यन बस एक बार उसको देखकर वापस जाना चाहता था, इसी बिच काण्ड हो गया. नेहा ने लखनऊ आकर दो पुराने दोस्तों को मिलवा दिया.

रात 11 बजे वह मेहमान वाले हवेली के 2ंद फ्लोर पर सबसे आलीशान रूम में एक पठानी कुर्ते पजामा में बैठा क़ासिम से बात कर रहा था. 11:30 बजे गुल ने दरवाजा खत खता दिया तोह क़ासिम उसको देखकर उठता हुआ बोलै," आजा बेटी, में भी सूने जा रहा हूँ. गुड नाईट आर्यन कल सुबह नास्ते पर मिलते हैं. िश गरीब खाने को अपना hi समझो बीटा".

गुल के सर पर हाथ फेर के निकल गए, उनको अपनी बीवी की बात सही लगी..... आखिर गुल अब बेवा है और उसको आर्यन जैसा सौहार कहाँ मिलेगा फिर अनजाने hi बनने की कोशिश कर रहे हैं यह दोनों जोह इतनी पाक एक दुसरे के लिए चाहत को नाम न दे पाए.

गुल ने दूर लॉक किया और अपना दुपटा उतर के दरवाजे के पास की खूंटी पे टांग दिया. वह एक थाल में एक मोरडाबड़ी पीतल का नक्शी वाला बड़ा सा जग और एक बड़ा गिलास लेकर आर्यन के पास राखी और झट से उसके गले लग गयी.

आर्यन भी िश सूंदर लड़की को ना चाहते हुए अपनी बाँहों में कास लिया .....

गुल तड़पते हुए बोली," मुझे अपनी बाँहों में कास लो आर्यन, में तुमको महसूस करना चाहती हूँ ".

आर्यन ने उसके सिल्की सुनहरी बाल चूमे," क्या बात है आज बात बात पर लिपट रही है जैसे किसी की शर्म hi न हो".

गुल ने उसकी पीठ पर हाथ कस्ते हुए कहा," मुझे गॉड में लेना यार, अब तेरे अल्वा मुझे में कुछ भी नहीं रह गया. बस अपने में फना कर ले मुझे तेरी धड़कन सुन्न नई है ".

आर्यन भी उसको दिल को मरहम देता हुआ बोलै," कोई आया तोह अब में रुस्वा न हो जायो यार तेरे चक्कर में".

गुल ने अपनी हिम्मत जूता के सर उसके सीने से लगये हुए अपनी समुंदरी हरे रंग की सुरमयी आंख्यों को ऊपर करते हुए कहा," बस समझ ले की में हक़ मांग रही हूँ अगर दे सके तोह ".

आर्यन ने उसके रोधी होती आवाज को आंसूं न बनने दिया," तेरा हक़ हमेशा से था बस तू ली hi नहीं, आखिरी आजमाइश तोह चाँद की भी होती है की एक बार अँधेरे से बहार कब आएगा. तुजसे तो चाँद भी जलता होगा ..... hi hi hi hi ".

गुल ने उसकी पीठ पर दो गूथ मारे ," तू हमेशा से दिल फ़ेंक आशिके था अभी तक नहीं सुधारा ".

आर्यन उसको बाँहों में लिए बीएड पे लिए पीछे को लुढ़क गया..... 5'10" की यह खूबसूरत युवती उसके सीने पर अपनी छाती का भोज डालती उसके ऊपर पसर गयी.

गुल बचपन से जानती थी आर्यन उसको पसंद करता है एक गर्लफ्रेंड की तरह और केयर करने के साथ बहोत प्यार भी करता है. मगर अपने धरम के छाडे चश्मे को उतर न पायी आर्यन की मोहब्बत के सामने.

मगर कोई तोह था जोह मुंबई में आर्यन की कंपनी ज्वाइन करने के बाद उसके धरम करम का चस्मा hi नहीं उतरी बल्कि उसको यकीन दिला दी की आर्यन hi उसके वीराने जवान में खुशियां ला सकता है.

हर एक दिन आर्यन के बारे में सोचना और उसके साथ बिताये हर लम्हो को याद करना गुल की सोच बदलता जा रहा था जबकि वह जानती थी उसका अब कोई अधिकार कैसे हो सकता है आर्यन पर जब उसने उसको खुद नहीं दिया.

आर्यन की तरफ दिल जोड़ने में उसकी अम्मी ने भी बहोत मदद की एक बार ****** के वास्ते हिम्मत तोह कर, वह कभी न नहीं करेगा बेटी. गुल का तारक था की वह उसके काबिल नहीं है.

उसकी अम्मी ने जवाब दिया, तब तोह उसको पाकिस्तान नहीं जाना चाहिए था तुझे वापस लाने के लिए. तुझे नहीं पता मैंने उसकी आँखों में कितनी उदासी देखि है तेरी हालत देख के. अब तू hi डीडे कर वार्ना सबके लिए तू मर्डर चुकी है. हाँ पर तेरा नया नाम और नए डाक्यूमेंट्स में वह तेरा सौहार है और में उसकी माँ हूँ. सोचना बेटी वह फरिस्ता hi है जोह तेरी जिंदगी में बार बार आया पर ुष बदनसीब को तेरी मोहब्बत की इनायत न हुयी.

आर्यन की नीली आँखों में देखती गुल बोली," में जानती हूँ में सुन्दर हूँ पर आज तुझे पास से देखकर मुझे तुझसे जलन हो रही है की तू भी कितना हैंडसम है आर्यन".

आर्यन मुस्करा के ," क्या बात है आज परियों की रानी हमको भी थोड़ी तवज्जो दे रही है उतना hi काफी है".

गुल ने नजरे झुका के साद टोन में कहा," यह तेरी पारी को अब एक बाजारू औरत की तरह नूच डाला गया है आर्यन ज़माने ने और अब बस दागदार जिस्म और बाजार...... "

आर्यन ने उसके मोह को हाथ से धक् के कहा," गुल लोग हमसे हमारा जिस्म चीन सकते हैं दिल या रूह नहीं. फिर तुजसे बेकार तोह में हूँ यार बस न जाने कहाँ कहाँ बस इस्तेमाल होने के लिए बनाया गया हूँ. बस तू औरत होकर अपने को लुटा हुआ कह सकती है जबकि में मर्द होकर भी अपने को लुटा हुआ नहीं बोल रहा हूँ. सायद किस्मत हम को एक hi तराजू में टोल तो रही है पर जमाने का नहीं पता है हमको कितने निच्चे ले जाकर रखेगा".

आर्यन की बात सुनकर उसका अपने मोह से हाथ हटा के बोली ," मेरी वजह से तेरे साथ ऐसा हुआ ?"

आर्यन ," नहीं मैंने hi यह रह चुन ली अपनों के लिए बस इतना समझ ले की में तुझसे भी ज्यादा घिनोना दिखूंगा तुझे अगर एक नज़र से टलेगी. वार्ना इतनी सूंदर तू मुझे पहले भी कभी नहीं लगी जितनी अभी लग रही है".

गुल भी हसकर," तभी बीटा मुझे बस नाम की इंडिया में बीवी बनाकर बहार गुलछर्रे मार रहा है. गीता दीदी को बाटूंगी तेरी सब हरकतें ".

आर्यन ने बात का रुख मोड़ते हुए बोलै," ुष जग में क्या लायी थी ? सब तुझे ढूंढ रहे होंगे न? जा अब सू जा".

गुल उठकर आर्यन के पेट पर बैठकर बोली," Don't वोर्री तुझे खा नहीं जाउंगी, फिर मामी को पता है में तेरी पेपर वाली बीवी हूँ कोई कुछ नहीं बोलेगा. हाँ दूध पिलाने भेजा था मामी ने".

आर्यन उसकी अदाओं को देखता हुआ गुलाबी चेहरे पे आयी लत को उसके कान के पीछे करते बोलै," वैसे दूध में कुछ मिलकर तोह नहीं लायी ...... hi hi hi hi "..... और आँख मार दी

गुल ने चपत उसके गाल पर लगाई ," चल पी ले फिर मुझे तेरी बाँहों में सूना है बस ".

आर्यन ने उसकी 34 की साइज की तानी चूचियों को घूरते हुए बोलै," चल जल्दी से पीला दे ना यार भूख लगी है".

गुल उसको आँख दिखती ," कमीने तू तोह सच्च में मुझे अपनी लुगाई समझ रहा है...... जा रात बहार अकेले सू ".

वह उठने लगी तोह आर्यन भी बैठकर उसको गॉड में लिए अपनी बाँहों में कस्ते हुए बोलै ," देखने पर नाराज है मैंने कभी हाथ भी नहीं लगया आजतक ".

गुल ," तेरे हाथ काट के लूला कर दूंगी अगर कुछ गलत सोचा भी तोह".

आर्यन ने उसको सॉरी बोलै तब गुल जग से दूध का गिलास भरके उसको दिया तोह आर्यन एक सांस में पी गया. उसने फिर भरा फिर पी गया .

गुल (मैं में) ," िश दुफर को समझ में नहीं आ रहा में इश्कि गॉड में छड़ी हुयी हूँ और 3-4 बाल्टी गोश्त का खाकर दूध भी पिए जा रहा कुम्भकरण कहीं का ".

आर्यन सच्च में 2 गिलास और पी गया तब लास्ट गिलास पर गुल ने उसका हाथ पकड़ा ," मामी ने मेरे लिए भी दूध भेजा था तू पूछ hi नहीं रहा है".

आर्यन सीरियस होकर ," यह तेरे लिए hi भरा था आखिर इतनी डिअर से ललचाई आँखों से देख रही है ".

अपना चेहरा दूसरी तरफ फेर के बिना बोले गुस्से का नाटक करती गुल को देखते हुए आर्यन ने वह गिलास दूध का भी आवाज बनाते पी गया ...... गुल ने पलट के देखा तोह उसको सच्च में गुस्सा आने लगा. फिर उसके सेब जैसे गलों की रंगत बदलते देख आर्यन ने आज पहली बार वह हिमाकत की .

गुल के चेहरे को पकड़ उसके लिप्स को चूमने लगा तोह वह उसको परे धकेल ने लगी पर कुछ hi पलों के छटपटाहट के बाद मोह खोली तोह अपने मोह में दूध का स्वाद महसूस हुआ फिर और फिर और दूध ...... आर्यन ने आखिरी घूँट तक बारे पूरा दूध उसके हलक में उतर दिया किश करते हुए.

किश टूटने के बाद गुल ने उसको एक झाप्पड़ जड़ दिया ," हाउ डरे यू ?"

आर्यन डरता हुआ ," तुझे दूध पीला रहा था ".

गुल उसको डरा देखकर ," बुद्धू पहले नहीं पीला सकता था ...... पुछःह पुछठ "

आर्यन के लबों को चूमते हुए बोली," तू आज भी डरपोक है..... पहले मुझे क्यों नहीं प्यार दिखा दिया यार ..... पुछःह पुछठ ..... ी लव यू आर्यन ..... पुछःह पुछठ ..... सॉरी फॉर स्लैपिंग ".

आर्यन भी मुस्करा के ," तेरा पूरा हक़ है यार 2-4 और मार ले ..... hi hi hi hi .... तू तोह बहोत मीठी है "....... और अपने लिप्स पे जीभ फिरने लगा.

उसकी कमर में हाथ दाल आर्यन खड़ा हो अपनी गॉड में लिए तोह डरते हुए उसकी गर्दन में बाहिएँ और कमर में टांगें लपेट गुल बोली," अह्हह्ह्ह्ह गिरा मत देना यार ".

आर्यन उसकी आँखों में देखकर," अब भी यार हूँ, मामी ने एहि शिकाय है क्या तुझे ".

गुल ," तुझे कैसे पता मामी ने भेजा है मुझे ".

आर्यन हसकर ," अपनी अम्मी की नहीं कभी सुनी तू ने, वह हमेशा मुझे पसंद करती थी".

गुल," हाँ गलती हो गयी पर क्या ऐसे hi हवा में टाँगे खड़ा रहेगा क्या?"

आर्यन ने उसकी सूंदर नाक से अपनी नाक रगड़ी और बोलै," आगे बढ़ा तोह तुझे बुरा न लगे".

गुल ," में चाहती हूँ तू आगे बढे".

आर्यन ने उसकी आँखों में देखकर," सोच ले फिर गुस्सा मत होना ".

गुल भी सीरियस होकर," जानती हूँ तेरे लायक नहीं हूँ पर पूरा साथ दूंगी जोह तू चाहेगा".

आर्यन ने उसका एक कान ऐंठ दिया "ोुछहहह क्या करा है ".

आर्यन ," कभी दुबारा ऐसा मत बोलना, बस तू मेरे लिए हमेशा पाक थी और रहेगी, तेरे दिलसे साड़ी बुरी यादें मिटा के नयी यादें चाप दूंगा बस मुझपर भरोषा करना ".

गुल ने उसका गाल चूम लिया ," तुझसे ज्यादा मुझे किसी पर विश्वास नहीं. पर मुझे तेरे साथ कोई सुहागरात वाली फीलिंग नहीं आ रही है".

आर्यन हसकर ," है है है है है..... मुझे भी पर गर्लफ्रेंड वाली आ रही है ".

गुल ," मुझे भी तू बॉयफ्रेंड जैसे लग रहा है जिससे में कुछ भी बात कर लेती वार्ना ी म साइलेंट पार्टनर "..... और बोलकर उसने नजरे झुका ली.

आर्यन उसको छेड़ते हुए बोलै," ओह्ह साइलेंट फिल्म, मुझे फ्रेश होना है तुझे उतार दूँ या तू भी चलेगी ..... "

गुल भी हसकर ," पहले मुझे फ्रेश होने दे , ी थिंक ी आलरेडी क्लीमाक्सेड बिकॉज़ ऑफ़ एक्ससिटेमेंट ".

दोनों बचपन के दोस्त थे और परदे जैसा कुछ था hi नहीं दोनों के बिच पर एक दुसरे से प्यार की तड़प होते हुए भी शर्म या झिझक नहीं आ रही थी दोनों में. जबकि झिझक होनी चाहिए खासकर गुल में पर नहीं थी. सायद दोनों का प्यार hi नयी परिभासा लिख रहा था.

देखा जाये तोह गुल hi आर्यन का फर्स्ट क्रश होगी क्योंकि गीता से तोह वह दादी करना चाहता था जब तक उसको शादी का मतलब भी पता नहीं था तब से. बाद में गीता की उसके लिए नफरत और आर्यन का उसके लिए प्यार बढ़ता गया.

गुल ने साफ़ आर्यन को कह दिया उसको कोई प्यार के चक्कर में नहीं पड़ना जबकि अगर प्यार करती तोह आर्यन से करती. अगर रिलिजन बैरियर नहीं होते तो शादी भी करती. लेकिन गीता के लिए आर्यन की फीलिंग को पूरी रेस्पेक्ट देती और कभी कभी मजाक में बोलती," यार तू ***** है अपनी रिश्ते की मौसी से कैसे शादी करेगा? हाँ इस्लाम में कुछ शार्टिओं पर कर सकते हैं".

आर्यन ने उसको बतया था ,"गीता मेरी माँ( रति) के पेट से थोड़ी पैदा हुयी है बस वह ठाकुर है हम चौदर्य एहि पन्गा होगा. कोई ने भगवन भोलेनाथ रास्ता दिखेंगे की गीता मेरी बीवी बने".

गुल को ुष समय भी गीता से जलन होती पर वह अपनी बंदिशें जानती थी..... उसकी अम्मी तोह बहोत पहले समझ गयी थी आर्यन को देखकर की वह गुल को बहोत पसंद करता और बेस्ट फ्रेंड से ज्यादा.

आर्यन का ***** होना भी उनको बुरा नहीं लगा पर जब आर्यन की आइडेंटिफिकेशन पता चली की वह अकेला इतना रहीस है और खानदान का वारिस भी तोह गुल को बोली भी इश्से अच्छा लड़का तुझे मिलने से रहा फिर उसकी Maa(Rati) के आगे कौन बिच में आएगा.

गुल ने ताल दिया की वह अपने डैडी( जोह पाकिस्तानी थे) के चुने हुए लड़के से hi निकाह करेगी. आर्यन मुझे अच्छा लगता है क्योंकि उसके बिलीफ स्ट्रांग हैं. आप उसका रेलिंगों छोड़ो उसका सब कुछ बाद उसकी माँ यानी नानी माँ है और अपनी सगी मम्मी से तोह साल भर में मिलता है.

गुल की मम्मी ने कहा था," पर क्या किसी को शिकायत है. वह हमेशा टॉप करता है, फिर उसको वररिस बना दिया तोह क्या ुष में कोई टैलेंट नहीं. मेरी तरह गलती मत करना गुल वार्ना पच्टयेगी".

लेकिन गुल और आर्यन हमेशा दोस्त hi रहे और आर्यन ने भी कभी उसके सामने अपनी चाहत का ीझरार नहीं किया क्योंकि वह थे hi नदी के दो किनारे जोह सिर्फ अपने परिवार को बुलंदियों पर पहुंचा चाहते है. आर्यन तोह कामयाब हो गया पर गुल को उसके धरम की दकनुषी बातों ने जकड के एक लड़की होने के ताने के साथ घर ग्रस्ति में धकेल पाकिस्तान पहुंचा दिया और उसके बाद गर्त में.

क्या फिर से गुल को अपना मान सम्मान मिलेगा ? अब वह चाहती भी नहीं थी पर एक मीणा hi थी जोह हमेशा चाहती थी की गुल सिर्फ आर्यन की हो..... ?

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गुल

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अपडेट 38

Part - 4©

2&1/2 इयर्स पहले.......

( आर्यन और गुल की इंडिया में आखिरी मुलाकात )

आर्यन जब अपने दोस्तों के साथ दिल्ली ीत के कैंपस की कैंटीन में बैठा था तोह उसको गुल का मोबाइल पर कॉल आया ," तू कहाँ है अभी ? में तेरा ीत कैंपस मैं गेट पे वेट कर रही हूँ जल्दी आ ".

आर्यन तोह खुश होता बिना किसी को जवाब दिए अपना बैग पीठ पे लटका भागता हुआ बुलेट में किक मार के दौड़ा दिया मैं गेट की तरफ ...... उसको बुलेट कैंपस में मर मालिक की वजह से स्पेशल परमिशन पे अल्लोव थी वार्ना कैंपस में ओनली साइकल्स, हॉस्टल में काम hi रुकता था यानी डे स्कॉलर्स की तरह था.

(और पूरा ीत समझता था उसकी माँ रतिदेवी के पैसा और रुतबा की वजह से. बहोत से ुष से चिढ़ते भी थे अमीर माँ की औलाद है पर आर्यन का सुपर इंटेलीजेंट और टैलेंट के साथ 'तो थे ग्राउंड ऐटिटूड' hi सब की राये अपने प्रति बदलने के काफी होता था, जबकि उसकी पर्सनालिटी और हॅंडसमेनेस्स तोह पहले hi लौंडो और जवान फैकल्टीज को इन्फेरियरीत्य काम्प्लेक्स डेवेलोप करवा देता था. लड़कियां तोह दिलोजान से आर्यन पर मरती थी और वह भी सबसे प्यार से बात करता लेकिन फ्रेंडशिप से आगे बात नहीं बढ़ने देता था.

उसका रिकॉर्ड था अगर किसी कमजोर स्टूडेंट को पीटा या तंग किया तोह सीनियर्स लौंडों को भी अच्छा सबक सीखा देता पर कभी अपनी अमीरी या पावर से किसी पर रॉब नहीं झाड़ा. कैंपस के बहार की लड़ाई हो तोह आर्यन को बुलवा लिया तोह फिर तोह ीत वाले धूम मचा डालते.

अपने 2 साल में वह 12 से ज्यादा दुसरे कोर्सेज भी कम्पलीट कर चूका था ...... फिर एक दिन वह गायब हो गया कभी वापस नहीं लौटा, पता चला उसने मिट, अमेरिका में एडमिशन मिल गया स्टूडेंट एक्सचेंज स्कीम में)

गुल को एक बुरखा पहने विसिटोर्स रूम के बहार खड़ा देखा, वह बुलेट स्टैंड पर लगता उसकी तरह मुस्कारते हुआ लपका ," हे गुल व्हाट ा सरप्राइज यार ..... " वह भी तमीज से उसको हैंडशेक करके मिली, दोनों विस्टर्स रूम में पहुंचे तोह अभी आफ्टरनून था वहां कोई नहीं था .

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गुलुक खान (गुल)

चत्ताकककक ...... एक थप्पड़ जड़ दिया गुल ने पहली बार उसके गाल पर और गुस्से से बोली ," तू एक कॉल करके नहीं पूछ सकता है की में तुझसे कभी निकाह नहीं करुँगी ..... क्यों मारा मेरे मामू और भाइयों को लखनऊ जाकर और धमकी दी तेरे घर की हर औरत को अपनी रखैल बनाओगे..... चीटीए है तुझपर और अम्मी को तू पहले भी पट्टी पढ़ा रहा था न तोह कान खोल के सुन्न ले में जा रही हूँ पाकिस्तान जहाँ तेरे जैसे जल्लाद नहीं रहते होंगे..... तू ने मुझे नफरत करने के काबिल नहीं छोड़ा ".

तभी आर्यन का सेलफोन रिंग हुआ तोह बस शॉक से गुल को देखते हुए अपना मोबाइल देखा तो गीता का कॉल था ," तू कहाँ है यहाँ गाओं आ मुझे कुछ डाक्यूमेंट्स चाहिए, अभी निकल और 3 घंटे में मेरे सामने होना चाहिए ".

आर्यन ने गीता को हाँ बोलकर गुल की तरफ देखकर कहा ," तू अभी घर जा गुल कल मिलते हैं तब आराम से तुझे सब बता दूंगा " ....... गुल भी गुस्से में उससे और कोई बात नहीं करना चाहती थी, वह वापस चली गयी यह बोलकर की मुझे अब तेरी सकल भी नहीं देखनी.

और वह कल फिर कभी नहीं आया ....... क्योंकि गुल दो दिन बाद पाकिस्तान और एक वीक बाद आर्यन अमेरिका निकल गया.

आर्यन से ीत में लड़ने के बाद गुल अपने पेरेंट्स के साथ पाकिस्तान चली गयी, आर्यन एयरपोर्ट भी मिलने गया पर गुल ने बस उसको bye और आल थे बेस्ट फॉर फ्यूचर बोलै जबकि उसका भाई और पेरेंट्स अच्छे से मिले आर्यन से.

( गुल 3-4 बार बचपन से अब तक पहले भी अपने मुल्क पाकिस्तान में स्टडीज कर चुकी थी, उसके फादर पाकिस्तान एम्बेसी में थे और 2 बार 1 साल के लखनऊ भी पोस्टेड थे. तोह उसकी कलगेंग दोनों मुल्कों में हुयी थी. लेकिन वह फकर से खुद को पाकिस्तानी hi कहती थी जबकि उसकी अम्मी लखनऊ की थी.)

आर्यन को भी लगा गुस्सा काम होगा तोह खुद बात करेगी..... आर्यन के लिए ुष समय गुल अपनी गीता से भी स्ट्रांग लगती थी क्योंकि वह निडर, जेहनी तौर पर क्लियर और स्ट्रांग थी.

बस एहि से दोनों की किस्मत hi पलट गयी, आर्यन को गाँव वाले काण्ड के बाद अमेरिका भेज दिया गया सजा काटने वहीँ गुल ने निकाह कर लिया पाकिस्तान जाकर 1 साल बाद एक इंजीनियर लड़के से जोह सच्च में बहोत हैंडसम और खानदानी था..... दोनों खुश थे ..... फिर जोह हुआ ********** वह आप सब पढ़ चुके हुए शार्ट में.

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ात प्रेजेंट में ..........

लखनऊ की नवाबों की हवेली के िश मेहमान कक्ष में, आर्यन को देखकर गुल को यह हैंडसम मर्द अभी भी अपना सौहार नहीं लग रहा था बल्कि एक पुराण दोस्त, अपनी बहोत केयर करने वाला लग रहा था. उसकी शर्म हाय जैसे उसके अस्सपस्स hi थी.

लेकिन अब उसके झेन और दिल पर सिर्फ आर्यन का नाम छापा हुआ था की में अब सिर्फ आर्यन की hi औरत हूँ जबतक जिन्दा हूँ, बीवी का दर्जा न मिलये मुझे कोई सिहकवा नहीं.

फ्लश की आवाज के साथ गुल का ध्यान टूटा , एक मं बाद आर्यन बाथरूम से बहार आया तोह उसको एक बार घेरि निघा से देखकर अपनी पलके झुकाती बाथरूम में फ्रेश होने चली गयी.

आर्यन भी उसकी िश अदा पर फ़िदा होता सोचा, यह कभी नहीं सुधरेगी कहीं सच्च में तोह मुझे अपना सौहार नहीं समझने लगी. इश्को समझना मुश्किल hi नहीं नामुकिन है. आज गुल बिलकुल वासी hi खुश है जैसी पहली बार मिली थी. तब भी दुनिया की सबसे हसीं और मासूम लड़की थी आज भी है. काश में '. होता तोह गुल से निकाह कर लेता और हमारे 10-12 बाचे होते, मुझे अब्बू और उसको अम्मी बोलते. खुद hi miya-mithu बना सोच रहा था.

आर्यन अपने hi पुराणी यादों में खो गया जबकि हकीकत में गुल उसको हमेशा hi यह अहसास दिला के राखी थी की हम बस दोस्त हैं जबकि उसकी पहली चाहत आर्यन hi था.

मीणा हमेशा बोलती थी आर्यन से की तुझे गुल से शादी करनी चाहिए पर आर्यन बोलता की में गीता से प्यार करता हूँ ुशी से शादी करूँगा.

दोस्तों इमेजिन करो कहाँ वह साडू सी सावली से गरम दिमाग़ वाली गीता कहाँ परिस्तान की सूंदर पारी जैसी मासूम और नेक दिल गुल ...... [img=22x0] आप किसको चुनोगे ?

आर्यन की तीनो जुड़वाँ भेने बोलती गुल से शादी करना, यह बात आर्यन ने 5तह क्लास में गुल को बोली तोह उसने पहले हाँ कह दिया पर अगले दिन बोली की हम गैर मजभी हैं, हम दोस्त रह सकते हैं पर निकाह नहीं कर सकते. आर्यन भी मान गया की गुल सही कह रही है.

दोनों दोस्त बनकर भी खुश थे, तब आर्यन ने गुल को कहा की वह तो गीता से hi शादी करेगा, बचपन जवानी तक ले आया.....

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आर्यन बीएड पे बैठा था उसको प्रेजेंट में गुल उसका गाल चूम के लायी ," किसके खवाबो में मशगूल हौले हौले मुस्करा रहे हो".

आर्यन ने सामने कड़ी गुल की कमर में हाथ दाल के सीरियसली बोलै," गुल तुमको यहाँ लखनऊ नहीं आना चाहिए था, अब िंह सबकी भी जिंदगी भी खतरे में आएगी ".

गुल ने आर्यन के गाल पे अपना मखमली हाथ रखकर सहलाते हुए अपनी समुंदरी आँखों को इधर उधर मटका के कहा," तेरे आने से hi यहाँ नरमी का माहौल आएगा आर्यन वर्ण देख ले िश हवेली में बेवाय और जवान लड़कियां hi बची हैं. हकूमत की नाइंसाफी से लेकर गद्दारी तक मेरे अम्मी के खानदान पर दाग लगा दिया गया है ".

आर्यन हसकर उसके गुलाबी रंगत वाली नाक पर अपनी नाक रगड़ते हुए बोलै," यानी तू जानती थी में यहाँ आऊंगा तेरे लिए इशलिये आयी ?"

गुल ने सर हाँ में हिला के उसके लबों को चूम के कहा," हाँ में भी देखना चाहती थी मेरे लिए तेरा प्यार अभी भी उतना hi जोश रखता है जितना मेरे साथ 2ंद क्लास में तेरी जगह सीट पर मेरे पास बैठे लड़के को देख गुस्से में उसके हाथ में तू ने प्रकार घुसा दी थी ".

आर्यन ," हाँ उसकी हिम्मत कैसे हुयी मेरी गुल के पास बैठने की ".

गुल दुखी टोन में," बस यार में अपने मजहब से आगे कुछ सोच नहीं पायी पर तू पक्का बेशर्म था हमेशा लाइन फिर भी मरता था मुझपर ".

आर्यन हसकर उसके गुलाबी गाल को चूम के बोलै," फ्लिर्टिंग हेअल्थी होती है , बाकी सब लड़कियों के बैग में कौन लेटर डालता था ी हेट यू मेरे नाम से ..... है है है है है ".

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गुल हसकर ," बस गीता के लिए करती थी तेरी उनकी पाकीजा मोहब्बत देखकर".

आर्यन ," छू छू छू ..... चंदा रानी ( गीता) ुष समय मुझसे नफरत करती थी पर गलत मैसेज तू पैसेज करती थी झूट मत बोल".

गुल हसकर," यार मुझे बुरा लगता था हर कोई तुझे पसंद करती थी तो और तुझे गन्दी नज़र से ताड़ती थी ?"

आर्यन भी मुस्करा के," मुझे भी बुरा लगता था कोई तुझे देखे भी तोह, इशलिये पीट देता था कोई तेरे नजदीक भी न आये. अपनी बेस्ट फ्रेंड के लिए इतना तोह कर hi सकता हूँ में ".

दोनों हसने लगे फिर रूम की लाइट भुजा के आर्यन को बीएड पर सीधा लेता देखा तोह गुल को उसकी बेरुखी अच्छी नहीं लगी, उसको मीणा की फ़ोन पर बात याद आयी जब वह मुंबई में थी ," गुल वह तुमको इतना चाहता है तुम उसकी गर्दन भी अपने हाथ से काट डौगी तब भी मुस्कारते रहेगा. अब तुम उसकी कागजी बेगम बन गयी हो इंडिया में तोह ुष पर हक़ रखना वार्ना फिर से तुम्हारा पहला प्यार दूर न हो जाये".

गुल ने रूट हुए जवाब दिया था ," लेकिन मीणा में कभी आर्यन के काबिल नहीं थी उसका प्यार गीता hi है".

मीणा ने उसको समझते हुए कहा," काम से काम अपने से झूट बोलना छोड़ दो गुल और गीता से पहले हक़ था तुम्हारा बचपन से...... अब पेपर्स के हिसाब से भी, गीता उसकी आगे बीवी बनेगी पर तुम आलरेडी बेगम चाहे गलती से या मजबूरी में हुआ हो. तुम गीता का हक़ नहीं मारना चाहोगी पर अपना हक़ ले लो. गुल सब दाग और दर्द मिट जायेंगे तुम से ज्यादा प्यार उसको कोई लड़की नहीं करती होगी बस अब अपना दकनुषी चस्मा उतर फेंकना वार्ना यहाँ भीड़ इतनी है तेरा त्याग किसको याद भी नहीं रहेगा. तेरा ****** भी तुझे वापस आर्यन के पास लाया है कुछ तोह उसकी मर्जी भी होगी. फिर तेरे अपने फैसले ने दुःख hi दिलवाया है अब उपरवाले को अपनी किस्मत लिखने देना".

गुल ने हिम्मत की, 6 इंच आगे खिसक के आर्यन और अपने बिच की दुरी बिस्टेर पर काम करके जाता दी में तेरे पास आने वाली हूँ..... मगर आर्यन की धड़कन अब बढ़ने लगी क्योंकि अब वह अँधेरे में अपना कुत्र उतर तकिये के बगल में रख कर सिर्फ एक वाइट ब्रा और सलवार में सीढ़ी बिस्तर पर लेट गयी और अपने को होंसला दे रही थी.

आर्यन को अँधेरे में भी सब दिख रहा था तोह अपनी आंखें बांध कर लिया, ऐसा तोह उसने दीप्ति के लिए भी नहीं किया था जयपुर में नाव पर उसको गीली ब्रा पेंटी में देखकर .......

मगर कहते हैं बचपन का प्यार और दोस्ती बहोत पवित्र होती है. गुल और आर्यन के प्यार को सिर्फ गीता का प्यार टक्कर देता था और दोनों लड़कियां साउथ पोल और नार्थ पोल थी, बस एक hi समानता थी दोनों में ..... दोनों आर्यन से 3 साल बड़ी थी ..... इशलिये ुष पर पूरा रॉब झड़ती थी. गुल की कलगेंग लेट शुरू हुयी थी.

अपने दिल को कड़ा करके गुल ने आर्यन के लेफ्ट हाथ पर अपना हाथ रखा जोह उसके पेट पर रखा था और बोली ," सू गया क्या, मुझे अकेले डर लग रहा है ".

उसका जवाब सुने बिना वह हाथ ऊपर उठा उसके लेफ्ट साइड से चिपट के बोली," गर्मी भी लग रही है तू भी कपडे उतर दे".

आर्यन बिस्टेर पर बैठकर पठानी सुईठे उतर दिया तोह गुल ने कहा ," बनियान भी उतर दे मर्दों को पसीना ज्यादा आता है".

दिक्कत यह थी की आर्यन की फटी पड़ी थी, वह बहोत औरशन लड़कियों से संसर्ग कर चूका था पर गुल अलग थी गीता की तरह या ुष से भी ज्यादा जोह उसको कण्ट्रोल करती थी.

आज सवा शेर को असली शेरनी मिली थी ..... आर्यन की तीनो भेने गुल को बहोत पसंद करती थी पर गीता को नहीं अगर आप सबको याद हो ?..... लेकिन आज वह तीनो बहोत खुश होती अगर यह सन देख पति तोह आर्यन को भीगी बिल्ली देखकर.

गुल और पास खिसकर बोली," आर्यन तू ने मुझे अपनी बेगम लिखा है पेपर पर निकाह से पहले यह नहीं पुछा मुझे कबूल है की नहीं ".

आर्यन थोड़ा कांपता हुआ," कबूल है ?"

गुल और पास आती आर्यन का हाथ उठा ुष्पर अपना सर रख कर उसकी हथेली चूम के बोली" कबूल है ".

आर्यन अपना वही हाथ उसके बालों को सहलाते हुए ," सबको हाज़िर नज़ीर जान के कबूल है ?"

गुल और आगे खीष्टे हुए उसकी कमर के साइड अपना पेट टच करती उसका गाल चूमती बोली," कबूल है ".

आर्यन ने अपना दूसरा हाथ उसके गाल पर रखकर पुछा ," तेरे लिए अपने को भी कुर्बान कर दूंगा ..... कबूल है ".

अपना चिकनी सीधी झंघ को आर्यन की उलटी झांग पर रगड़ती ऊपर उठकर उसके लबों को चूम के बोली ," कबूल है मेरे सरताज ".

निकाह अब पेपर के बाद रूह का भी हो चूका था, चाहिए गुल का तीसरा था और आर्यन की लिस्ट विवाह की बहोत लम्बी थी. सच्च में आर्यन की जिंदगी में आज एक सबसे अच्छी परीजाद लड़की ने उसको पूरा सा कर दिया था. बहोत खुश किस्मत होते हैं वह लोग जिनको अपना बचपन का प्यार जिंदगी भर के लिए मिल जाये. आर्यन आज डबल खुश किस्मत था, गीता उसका पहला नादानी वाली प्यार थी और गुल उसकी दोस्त काम माशूका का hi कह लो जिसको दोनों झुटला रहे थे आजतक. लेकिन किस्मत से ज्यादा और समय से पहले कब किसी को रब मिला है एक दुसरे में. मगर आज दोनों को एक दुसरे में रब दिख रहा था.

गुल अपने लबों को आर्यन के लबों से जोड़ दी ...... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म ...... आर्यन ने अब उसको अपने ऊपर खींच लिया ..... और गुल की पुराणी बुरी यादें अंदर सोख्ता चला गया ....

2 मं बाद जब किश टूटी तोह गुल अँधेरे में hi अपने को इतना हल्का दिल महसूस करती बस आर्यन को दिलोजान से प्यार करना चाहती थी..... अभी वह कुछ करती आर्यन बिस्टेर पर घुटनो के बल बैठकर उसको गॉड में लिए फिर से उसके मधुरस भरे पतले पतले गुलाबी लबों को चूसता उसकी ब्रा का हुक खुल के उतर दिया....

गुल तोह उसकी गर्दन में बाहिएँ डाले झूल सी रही थी गॉड में बैठे हुए..... आर्यन था hi इतना लम्बा चौड़ा और वह नाजुक सी फूल जैसी लड़की ...... आर्यन ने जब कमर से फिसला के हाथ उसके सलवार में कैसे नितम्बो को मसला तोह कस्मा के चुम्बन तोड़ती शिक्षक पड़ी ," सीईई ार्यानंन्न रेहमममममम कररररररर इत्नाहा जोरसीईए नाहीईई ".

आर्यन ने अपना हाथ ले जाकर साइड में बीएड लैंप जला दिया ," सौहार को अच्छी बीवी नहीं रोकती बेगम ".

हलकी लाइट होने से अभी तक नंगी छाती जोह आर्यन से दूर राखी थी सटक से छिपाते हुए आर्यन के सीने में दबा दी ," यह ******** कुछ तोह सरम करो लाइट क्यों जलाई ".

आर्यन ने उसके दोनों रूई से चूतड़ दबा के कहा ," कायनात की हूर को रौशनी में hi मुकमल करना चाहता हूँ उसके हुस्न का दीदार करते हुए".

गुल को अपने जिस्म पर इतना प्राउड फील हुआ की जैसे वह आज भी विर्जिन लड़की hi है ...... आर्यन के सीने पर किश करती बोली," मान जाओ न मेरे सरताज पहला प्यार अँधेरे में मुकमल करो फिर रोशिनी की परवा में कभी नहीं करुँगी ".

आर्यन खुश होता हुआ ," प्रॉमिस करो ".

गुल ने एक बार और उसके सीने में चूमा," गॉड प्रॉमिस".

आर्यन ने हाथ बढ़ा के नाईट लैंप ऑफ कर दिया पर गुल ने बहोत बड़ी गलती कर दी क्योंकि उसको अंदजा भी न था वह किसको अपनी फुद्दी में लेने वाली है..... आर्यन तोह ख़ुशी के मारे मदमस्त अवस्था में था की उसका सबसे पहला प्यार आज मुकमल होगा.

एक दुसरे को अँधेरे में बेहताशा चूमते दोनों कुछ hi मिनटों में नंगे हो गए...... बिस्टेर पर पीठ के बल गुल को लिटा कर चेहरे से लेकर गर्दन चूमता चाट के जब उन्ह मस्त सुडोल अकार की रूई से सॉफ्ट चूचियों को दबा दबा के चूसा तोह गुल का बुरा हाल हो गया.....

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आर्यन निच्चे पेट की तरफ बढ़ा तोह गुल ने उसके सर के बाल पकड़ के अपने ऊपर खींचा ," बस अब सहन नहीं होगा, आगे बढ़कर मुझे पूरा कर दे मेरी जान".

आर्यन भी ," थोड़ा दर्द होगा पर ज्यादा हो तोह बता देना ".

गुल अपनी झांघैं फैलती अपनी पानी बहती फुद्दी को उसके प्रचंड मुसल पर कमर उठा उठा के रगड़ रही थी...... आर्यन घुटने के बल बैठकर उसकी चिकनी फुद्दी के छेद पर अपना टोपा थूक से गीला करता लगा दिया.

झुकार गुल को किश करके थोड़ी डिअर उसको डीप स्मूचिंग करता एक तगड़ा झटका मारा तोह दर्द की इंतिहा hi हो गयी...... गुल बस ुम्हह ुंहःहः करती तड़पती आर्यन को दूर देखेलने की कोशिश की पर कहाँ उसकी ग्रिफ्ट से चोट पति.

आर्यन ने अपना 1/3ै लुंड उसकी फुद्दी में फसाये लबों को सील किये चूसे जा रहा था और उसकी दोनों मखमली चूचियां सेहला रहा था ...... 2 मं बाद जब लबों को आजाद किया ," अह्हह्ह्ह्ह अम्मीईईई ....... मारररररररर हीईई डेगाआआआ ...... निकालललललललल ले बहरररररर ...... आआआआ ********* ...... ारयणणणणणणण बहोत्तत्तत्त डरडडडडडड हो रहा है कसम से मररररर जौंगीीी ".

आर्यन अपनी दोस्त गुल की आँखों से दर्द वाले अश्कों को पीटा तसली दे रहा था," अब और दर्द नहीं होगा मेरी जान गुल बस तू होंसला रख ..... पुछःह पुछठ ..... तू तोह सबसे स्ट्रांग लड़की है न मेरी बेगम ".

गुल अभी भी दर्द से कराहते हुए," आर्यन मेरा दर्द से बहोत तर्जुबा रहा है बस तुम बहोत बड़े हो, मेरी परवाह न करो जैसे चाहे मुझे हासिल कर लो अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बस जल्दी िश दर्द से रिहा करो ".

आर्यन ने उसके गाल चूम के अपना लुंड बहार की तरफ खींचा तोह गुल को अँधेरे में लगा की वह बुरा मान गया, अपनी उठी झंघों को क्रॉस करके टांगें आर्यन के पिछवाड़े पर कस्ती और हाथ से उसकी पीठ सहलाती बोली," अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण तुम करो बस मुझे पूरा मुकमल करो. बीवी का दर्जा न देना पर जिस्मानी हक़ तोह रहने दो".

आर्यन ने उसको कांपते वर्ड्स को लबों से चूम के कहा ," में कोई काम अधूरा नहीं करता, तुझे बेगम बांया है तोह पूरा हक़ भी दूंगा और प्यारे प्यारे बच्चे भी...... बस रेडी हो जा अब और दर्द होगा ".

अब तोह सच्च में गुल की नाजुक फुद्दी को आर्यन ने सिर्फ दो तगड़े शॉट में पूरा नाप दिया. अपने हथली पर खुद दांत काटा फिर उससे निकलता खून बेहोस हो चुकी गुल के मोह में दाल दिया.....

कुछ hi पलों में गुल को होश आया तोह उसकी हथेली चूसती बोली ," यह तोह खून है.... अह्ह्ह्हह्हह ारयणणणणणण ..... क्या मेरे अंदर दाल दिया तुमने ...... Siiiiiiiiii बहोत बड़ा है ".

आर्यन ने उसके बाल सेहलते हुए माथा चूम के कहा ," क्या बड़ा है ?"

गुल शरमाते हुए उसका हाथ अपने मोह से निकली ," पूरा सांड hi है तू अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हिलललल मत्तत्ततत्तत ".

आर्यन ने उसके पूरे चेहरे पर चुम्बन की बारिश कर दी ...... ," पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म...... बातें काम और काम ज्यादा करते हैं...... आज के बाद तू सिर्फ मेरी रहेगी और तुझे पूरा हक़ दूंगा बस प्यार कर बेगम अब दर्द नहीं होगा ".

गुल भी अब पूरी सिध्दयत से उसको चूमती हुयी खुद कमर हिला रही थी ," हाँ मेरे सौहार यह तेरी गुल हमेशा तेरी खिदमत करेगी..... मुझे तू hi प्यार करता है आर्यन बाकी सब ने मुझे नोच है ......हाँ मेरी रूह के मालिक ..... मेरे सरताज और जोरसे ...... "

गुल का सिग्नल मिलते hi आर्यन अब पूरी तेजी से उसकी फुद्दी को रुई की तरह धुनता धक्के मार रहा था जिसमे वह पूरा साथ देते 20 मं में 3 बार चिल्ला चिल्ला के झड़ी ....... हवेली में गुल की चीखिआ सुनाई दे रही थी कमरे से बहार बहोत दूर तक..... और कुछ घर की औरशन और लड़कियों को पता चल गया की आर्यन को अपना लिया गुल ने अपने सौहार मान कर ....... सबसे ज्यादा गुल की मामी खुश थी उसने तभी गुल की अम्मी को कॉल मिला के खुशखबरी दी की गुल को उसका प्यार मिल गया है आप अब दुआ करिये.

3 बार गुल के झंडने के बाद बिना उसकी फुद्दी से लुंड निकले पोजीशन चेंज करके अपने ऊपर लिटा के निच्चे से धक्के लगा के छोड़ने लगा ......

गुल मदहोशी ," तू कब मुकमल होगा ..... याआ ********* यह इंसान है या कोई जीन ..... अह्हह्ह्ह्ह सीईई ारयणणणणणण बहोत मजाआ आए रहा है ...... और जोरसे से मेरे सौहार पुछःह पुछःह ......"

िश पोजीशन में जब 2 बार जब गुल झाड़ गयी तब आर्यन ने उसको अपने निच्चे लिया और ताबड़ तोड़ चुदाई के बाद छीकते हुए उसकी पूरी फुद्दी भर दी जैसे बढ़ आ गयी हो विरए. हर शॉट गुल को तेज गरम जेट की पिचकरी सा लगा..... कमसे काम 14 पिचकरी तोह मारी होगी.

पूरे 2 घंटे की रासलीला जब ख़तम हुयी तोह आवाज आयी दरवाजा थपथपते हुए ," गुल अब हमको भी सूने दो "...... hi hi है है hi hi ...... 4-5 लड़कियां और जवान औरशन जोह रूम के बहार उसकी चीखिआ सुन्न रही थी उनके कदमो की भागने की आवाज आयी.

गुल तोह पहले hi पस्त थी ऊपर से अपनी कौसिन्स और भाभियों का ताना सुनकर और शर्मा गयी ," ******** बस एहि होना बाकी था ...... "

आर्यन ने जब लुंड फुद्दी से बहार निकला तोह पुकककक की आवाज के साथ अह्ह्ह्हह्हह की कररह के साथ गुल की आंखें भी चौड़ी हो गयी...... बहोत बड़ा औजार उसकी फुद्दी को नेस्ता नाबूत जोह कर दिया था.

आर्यन बीएड से उतर उसकी गर्दन और टांगें में हाथ दाल के उठा लिया पर वह विरोध करती रही. उसको बाथरूम में लेजाकर अच्छे से साफ़ किया जबकि उसने शर्म से आंखें बांध कर राखी थी.

बहोत खून भय था उसकी फुद्दी ने और हल्का दर्द अभी भी था पर आर्यन के झूलते लुंड पर निघा पड़ी तोह डर से एक बार आंखें बंद करके फिर से आर्यन को लुंड पानी से साफ़ करता देखि. यह मेरे अंदर गया था पर अभी वह तो सिर्फ 8 इंच लम्बा 3 इंच मोटा hi था.

आर्यन बाथरूम से बहार आता उसको फ्रेश होने को बोलै और बैडरूम में लाइट जला के देखा तोह बेडशीट खून और उनके मिले जुले रास से गीली थी..... बेडशीट उतार के उन्ह गद्दों को पलट दिया, अलमारी खोल के ब्लैंकेट निकल के बीएड पर दाल दिया और अपने बैग से एक दर्द निवारक जड़ी बूटी निकला और बाथरूम में टॉवल लपेटे बैठी गुल को खिला के फिर से बैडरूम में लाया.....

गुल को अब बेडलैम्प की लाइट में फिर से नंगा कर पहले उसकी गुलाबी फुद्दी चाट चाट के अपने थूक का मरहम लगा के फिर एक बार चूड़ा पर बड़े प्यार से पुराणी बातें याद करते, पूरा बदन सेहलते, चूमते हुए...... गुल को दर्द का नामो निशाँ नहीं था तोह खूब खुल के उचक उचक के लिपट लिपट के अपनी फुद्दी मरवाई.

आज पहली बार उसको चरमउत्कर्षो की गिनती भी याद नहीं थी क्योंकि वह तोह अपने पहले सौहार के साथ कभी नहीं हुआ. न उसके बाद जब बधालात में थी पर आज सिर्फ दिल दरिया hi नहीं उसकी फुद्दी चौड़ी होकर दरिया बन गयी.

आर्यन का पूरा खड़ा लुंड देखकर वह दुनिया का अथवा अजूबा देख ली थी..... इतना बड़ा और मोटा मेरे अंदर गया कैसे पर कितना मजा देता है जैसे जन्नत में हूँ. एक दो बदमाश सहेलियों के साथ पोर्न देखि थी पर दूसरी बार फ्रेश होकर उसने थोड़ी डिअर तोपची से कहलते हुए एक दो बार चूमा छाता तो उसको बहोत मजा आया. बात यह थी आर्यन की तरह उसका लुंड भी गोरा चिट्टा था पर लाल कश्मीरी सेब जैसा टोपा सबसे आकर्सक और मोहित कर देता था. फिर रानी माँ हेमा की दी आकर्षण शक्ति से कहाँ बच पाती. गुल को आज उसकी जिंदगी मिल गयी थी जिसकी वह बहोत पहले से हकदार थी.

आर्यन उसको अपने ऊपर सीने पे थपकी देता करीब 4 बजे सुला लिया..... आज से अच्छी नींद तोह गुल क्या आर्यन को भी कभी नहीं आयी होगी. आर्यन हमेशा गुल के चिंतित रहता चाहे पहले या अब भी जब मुंबई में थी की क्या करेगी. मगर उसको अपने ईंटे पास आर्यन ने पूरी दुनिया से महफूज रख लिया.

आर्यन फिर से पतलोक की यादों के सपनो में खो गया गुल को बाँहों में लिए.( पतलोक का सपना नेक्स्ट अपडेट में आएगा )

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सुबह दूर पर नॉक हुआ तोह गुल की आंखें खुली और अपने को आर्यन के सीने पे नंगी पाकर हाय की लाली उसके गुलाबी गाल पर पहल गयी. आर्यन का पूरा चेहरा उसकी खुली सुनहरी झुल्फों से धक्का था जिसको उसने ऊपर उठकर एक जुड़ा सा बांया के बंधा. आर्यन के हैंडसम चेहरे को गहरी नींद में सूट हुए देखकर खुद hi बड़बड़ा दी ," हाय कितना प्यारा लगता है सूट हुए बिलकुल छोटा बच्चा. में खुश किस्मत हूँ जोह मुझे आखिरकार इस ज़िंदगी में आर्यन की मोहब्बत मिली".

धीरे से निच्चे झुकार आर्यन के गुलाबी लबों पर अपने गुलाबी लैब का स्पर्श करके हलके से चूम ली ," उठ जाओ मेरे सरताज, आर्यन सुबह हो गयी है ".

आर्यन की आंखें सपना टूट कर मुस्कान लिए खुली, वाओ कितना हसीं ख्वाब था और यह ुष से भी कितनी हसीं सुबह है हक़ीक़त वाली," गुड मॉर्निंग गुल, नींद पूरी हुयी तुम्हारी , दर्द तोह नहीं है जान".

गुल ने उसकी नीली आँखों में देखकर," गुड मॉर्निंग आर्यन, इतनी अच्छी नींद कभी नहीं आयी होगी. थैंक्स फॉर एवरीथिंग माय लव ".

आर्यन अब सीधा होकर बेडरेस्ट से कमर टिका लिया पीछे सरक के. गुल के चूतड़ों के बिच पर लुंड की सुबह की सकते फील हुयी तोह शर्माती आगे खिसक के उसके सीने में चेहरा छुपा ली ," अभी भी मैं नहीं भरा जोह सुबह सुबह फिर त्यार हो ".

आर्यन ने उसकी दूध सी गोरी सिल्की कमर पर अपना सीधा हाथ फेर के कहा," जब जन्नत की हूर मेरे पहलु में होगी तोह कौन खम्भाकत शांत रह सकता है....... है है है है है "....... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म ..... उसके दोनों गाल पकड़ के उसको चूमने लगा चेहरा उठा के.

फिर दूर पर नॉक हुआ तोह गुल हड़बड़ाने लगी लेकिन आर्यन ने उसको कमर से ऐसे पकडे hi उसकी आँखों में तसली से देखते हुए कड़क आवाज में पुछा ," कौन है जोह सुबह सुबह डिसट्रब कर रहा है ".

उसकी कड़क आवाज से दूर पर नॉक करने वाली साक्ष बोली," बाजी को अम्मी बुला रही हैं भाईजान".

आर्यन ने गुल की तरफ देखकर कहा ," हाँ आधे घंटे में रेडी होकर आते हैं ".

फिर कुछ आवाज न आयी पर गुल ने आंखें बड़ी बड़ी करके कहा ," ऐसा क्यों बोलै वह सब क्या सोचेंगी मेरे बारे में ".

आर्यन ने प्यार से उसकी उजली उजली दोनों 36 के साइज चूचियां हलके से मसली और एक गुलाबी अंगूर जैसे निप्पल को चूम लिया ," सब जानते हैं तुम्हारे मेरे रिश्ते के बारे में, हम भी एक दुसरे के हो गए हैं तोह क्यों ज़माने की फ़िक्र करें. आधा घंटा पहले मुझे प्यार करने दो फिर बातें करेंगे ..... अह्ह्ह्हह तुम्हारी चूचियां बिलकुल रूई की तरफ सॉफ्ट हैं और कितनी सूंदर निप्पल्स हैं ...... सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप ..... ी लिखे थम पुछःह पुछःह मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह ....... "

गुल भी मदहोश होने लगी और एक घंटे फिर से प्यार करने के बाद दोनों निच्चे त्यार होकर पहुंचे तोह आर्यन ने गुल से पैकिंग करने को बोलै की हम ब्रेकफास्ट के बाद दिल्ली जा रहे हैं.

आर्यन मरदाना हिस्से में चला गया तोह क़ासिम बेग के साथ और भी कई बड़े बुजुर्ग और उनकी जान्ने वाले बड़ी सी बैठक में बैठे थे, करीब 30 से ज्यादा लोग होंगे.

आर्यन ने हाथ जोड़कर सबको नमस्ते कहा तोह सबकी तरह जोह पहली बार िश 7 फट लम्बे चौड़े लड़के को देख रहे थे वह भी उपरवाले के िश जानदार मर्द को हैरानी से देख रहे थे..... क्या पर्सनालिटी है और काले पठानी सुईठे में आर्यन जाँच भी खूब रहा था जैसे कोई कश्मीरी युवक हो. गोरा चिट्टा , नीली बड़ी बड़ी आकर्सक आंखें, लम्बे वेवी बाल और ऊँचा माथा. सरीर तोह किसी ववे फाइटर जैसा लग रहा था.

क़ासिम बेग अपनी गद्दी से खड़े होकर बोले ," आये उठ गए आर्यन भाई आयो आयो ...... आप सबको तरफ करा दूँ यह है श्री महार्यं सिंह उर्फ़ आर्यन, बहोत बड़ी बिज़नेस एम्पायर की मालकिन रतिदेवी मैडम का इकलौते चश्मे चिराग. यह और हमारी गुल पुराने दोस्त है, बचपन में साथ पढ़े थे..... आज फकर की बात है जिसके आगे सेंट्रल गवर्नमेंट क्या स्टेट गवर्नमेंट भी झुकती हो आज हमको मेहमान ..ी का मौका दिया. यह अमेरिका से इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी डिग्री लेकर आये हैं और खुद वहां के प्रेजिडेंट ने इनको मैडल से नवाजा है. वतन परास्त है तोह वापस आ गए नहीं तोह अमेरिका वाले इनको आने hi नहीं दे रहे थे ".

आर्यन का इतना बड़ा इंट्रोडक्शन बाकी सबको भी सोच में दाल दिया तभी सिक्योरिटी अफसर की 12 गड्डियां और पूरा एरिया छावनी बना हुआ है. फिर 5 महंगी महंगी कारों के साथ इश्के hi इतने सारे बॉडीगार्ड हैं. पैसा और ताकत के आगे तोह अच्छे अच्छे झुक जाते हैं फिर अब तोह आर्यन सच्च में उन्ह सबकी नज़रों में शंसः hi लग रहा था.

आर्यन ने आगे बढ़कर क़ासिम बेग के प्यार चुहये तोह वह भी गड गड होता उसको गले लगा लिया ," अरे बरखुरदार ऐसा मत करो. हमारे प्यार छूकर क्यों दोझक में भेजना चाहते हो ".

आर्यन भी बड़ी शालीनता से बोलै," ऐसा ने कहे क़ासिम बेग शभ, बड़ों के प्यारों में तोह जन्नत होती है. बड़ों के आशीर्वाद से hi बच्चे तरक्की करते हैं. में आप सबको भी बता दूँ में इतना बड़ा आदमी भी नहीं जितना क़ासिम शाब बता रहे हैं. में अपनी माँ का बीटा हूँ तोह सब मुझे भी रुतबा वाले समझते हैं. जबकि हकीकत यह है में जोह कुछ भी हूँ अपनी माँ के आशीर्वाद की वजह से हूँ. क्यों मक़बूल भाई आप तोह सहमत होंगे मेरी बात से आखिर माँ बाप की वजह से hi तोह लोग हमारी इज़्ज़त करते हैं वार्ना हमको तोह 20-25 साल लगेंगे अपना नाम उन्ह जैसा बनाने में जोह काम hi पड़ें".

मक़बूल को क़ासिम बेग ने सुबह सुबह hi सब समझा दिया था की यह कोई मामूली लड़का नहीं है. तू और में ज़िंदा सिर्फ गुल की वजह से हैं फिर साड़ी आर्यन की कहानी समझे तोह वह भी डरने लगा था. सबूत तोह उसने खुद झेला था सब फिर भी जिन्दा है. मक़बूल की बीवी ने भी समझाया की समय के साथ सफर करने वाले कायर नहीं बहादुर होते हैं फिर आर्यन क्या खो देगा कुछ नहीं पर हमारा कोई भी सलामत नहीं बचेगा.

मक़बूल जोह अब आर्यन से डरा हुआ एक तरफ बैठा देख रहा था झेंप गया और हाँ में सर हिला दिया.

क़ासिम ने आर्यन को खाश लोगों से मिलवाया जोह उम्र में बुजुर्ग थे उनके प्यार छूकर मिला और काम उम्र से हाथ मिला कर गले.

आर्यन ने जब अकेले में बात करने को कहा तोह क़ासिम उसको बैठक से 2 रूम छोड़कर ऑफिस में ले गया.

आर्यन अब क़ासिम के सामने टेबल पे बैठा चाय पीटा हुआ बोलै ," में बात घुमा फिरकर नहीं कहूंगा क़ासिम शाब, गुल को यहाँ नहीं आना चाहिए था मैंने अम्मी ( गुल की अम्मी) को भी समझाया था की गुल सबके लिए मर्डर चुकी थी. यह खबर पक्का पाकिस्तान तक जाएगी फिर 4 जासूस तोह आपने बहार मुझसे से hi मिलवाने बुला रखें हैं".

क़ासिम तोह अपनी सीट से ऐसा उछला जैसे उसकी गांड में किसी ने जलती फूलजड़ी घुसा दी हो ," क्याआ क्याआ मतलब जासूस से ारयणणणणणण , कौन है वह लोग ".

आर्यन मुस्करा के ," उन्होंने यह नहीं बतया में अमेरिकन इंटेलिजेंस के लिए काम करता हूँ..... आप को एक मौका मिलेगा क्योंकि आप और आपके परिवार वाले नहीं जानते. मेरे जाने के 2 दिन बाद आप को गिरफ्तार होना है और मक़बूल को आज रात की फ्लाइट से बहार गाओं भेज दो कुछ महीनो के लिए. 3-4 महीने बाद आप को बैल मिल जाएगी फिर अगला ंप एलेक्शंस आएगा उसको आप या आंटी लड़ो. आपके पैसे और रुतबे का फायदा अपने लोगों के लिए लगाओ इश्से आणि वाली पुश्तें भी सही सलामत रहेंगी ".

आर्यन खड़ा होकर बहार जाने लगा पर दूर पर रूककर डरे हुए क़ासिम की तरफ पलट के बोलै," में अपने परिवार के लिए कुछ भी बलिदान दे सकता हूँ क़ासिम शाब और कभी कभी छोटी छोटी कुर्बानी बड़ा फायदा लॉन्ग टर्म में पॉँचहति हैं. दोस्त चाहिए एक hi हो पर फिजूल के हिम्मती सिर्फ मौका परसत होते हैं. अपने खानदान के उन्ह पुरखो को धयान में रखकर मेरी बात गहरी से सोचना की उन्होंने राशूक़ बदमासी या गद्दारी से नहीं अवाम की मोहब्बत से कायम रखा था. फिर काका जैसे न जाने कितने अनजान लोग आज भी आपको अपना रहनुमा मानते हैं बगैर मजहब देखे ".

आर्यन गेस्ट रूम में अपनी ड्रेस चेंज किया और 15 मं बाद वह निच्चे पहुंचा तोह जवान लड़कों ने उसको घेर लिया की भाईजान नाश्ते पर सब आपका hi इंतज़ार कर रहे हैं.

आर्यन को नीला भी नाश्ते की टेबल पर गुल की मामी के साथ मिली तोह कड़ी होकर आर्यन को गुड मॉर्निंग बोली. आर्यन ने उसको रिप्लाई करके पुछा ," सब रेडी है नीला हम सीधा एयरपोर्ट जायेंगे वर्ण माँ की बहोत दांत पड़ेगी".

नाश्ते पर क़ासिम बेग और मक़बूल भी थे दोनों शर्मिंदा महसूस कर रहे थे पर आर्यन ने उनसे नार्मल बात hi की.

जाते हुए गुल की मामी ने कहा ," आर्यन बीटा, एक दो दिन और रुक जाते तोह अच्छा लगता पर आपको भी जरूरी काम हैं नीला बेटी ने बतया. गुल का धयान रखना अब वह तुम्हारी अमानत है ".

आर्यन और गुल के साथ उन्होंने नीला को भी टोफू दिए...... गुल सबसे रोटी हुयी गले मिलकर आर्यन की कार में बैठकर निकल गयी हमेशा के लिए. सायद वह कभी वापस लखनऊ नहीं आ पायेगी.

गुल की मामा मामी समझ गए थे की गुल को कोई प्रोटेक्शन दे सकता है तोह वह आर्यन hi है. बस जहाँ रहे खुश रहे फिर वह कभी भी उशसे छुपकर मिल सकते हैं पर गुल अब यहाँ मिलने नहीं आएगी.

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कम और दीप्ती कम तक खबर थी की आर्यन क़ासिम बेग की हवेली में रात गुजरा है पर 3 दिन उनको आर्यन की नियत का साफ़ पता चला..... जब 4 एनकाउंटर स्टफ ने कानपूर में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले के किये. क़ासिम बेग को कई घरों में गिरफ्तार कर लिया गया एक्सटॉरशन, मनी लॉन्डरिंग इवन मुंडेर केसेस में भी धरा लगाई गयी थी...... उसका बीटा मक़बूल बच गया पर वह वतन से बहार चला गया हमेशा के लिए ऐसी खबर थी की वह अपने बाप के कुकर्मो से दुर्र रहना चाहता था.

आर्यन दोनों पॉलिटिशंस की सोच से 5 कदम आगे निकला पर उनको यह अभी नहीं पता की दोनों की जासूसी भी अब वह करवा रहा था. क्योंकि जैसी पॉलिटिक्स चल रही थी और रघु को गायब करना दोनों की ऊँगली आर्यन की तरफ थी.

पर दिक्कत यह थी आर्यन को दोस्त रखने में फायदा लग रहा था दुश्मन बनाने की बजाये. फिर रतिदेवी की पावर दोनों झेल चुके थे, सर्कार गिरते गिरते बची थी.

रघु को अब कोई काम नहीं था वह नेपाल में एक कैसिनो में 4 विदेशी लड़कियों को साथ लिए जय खेल रहा था अंग्रेजी शराब पीते हुए. वह फिर भी खुश था की रति मालकिन मुझे हमेशा प्रोटेक्ट करती हैं, िशबार साले सिक्योरिटी अफसर के भड़वे मेरा एनकाउंटर hi करने वाले थे.

रघु था काला भूसंद तोह उसका गेटउप एक करीबीएन बिजनेसमैन का करवा गया था. लेकिन नीला की जान पहचान की वजह से नेपाल वाले रघु का उसे करने वाले थे उसको डिस्गाइज़ रखते हुए. नीला उनको वारं भी की यह बहोत खतरनाक आदमी है, डरता किसी से नहीं है पर करता अपने मैं की है कहीं तुम्हारी hi नहीं पेल दे. मगर उनको भी पगलेट आदमी hi चाहिए था.

राधेशयाम काका को एक छोटी 8×6 फट की परमानेंट पक्की शॉप मिल गयी थी उनके नाम पर ..... खुद्दार आदमी था 3 लाख एडवांस पेमेंट कर बाकी बैंक लोन ले लिया था....... गुल की मामी खुद दक्कन के ुधगतं करने आयी थी.

क़ासिम ने सिसयास्त में अपनी बीवी को उतरना बेहतर समझा फिर वह इंग्लिश में M-phil की डिग्री लिए हुयी बहोत सुलझी औरत थी. एक मकसद और था की आर्यन जरूर उसकी बेगम को जीतने में मदद करेगा.

लखनऊ की सियासत hi नहीं एक हफ्ते में माहौल अपनी तरफ मोड़कर गया था आर्यन और उसका असर बहोत दूरगामी था.

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देखें गुल का क्या हुआ लखनऊ से जाने के बाद ....... ???

कार में आर्यन के बाजु बैठी गुल अभी भी सभक रही थी तोह आर्यन ने अपना रुमाल निकाल उसकी तरफ बाध्य तोह आँखों में अश्क लिए उशसे लिपट गयी. आर्यन भी उसको हुग करता पुचकारने लगा . थोड़ी डिअर बाद उनकी कार होटल हयात में रुकी और नीला 15 मं में गुल की भारी भरकम ड्रेस चेंज करवा उसको एक जीन्स t-shirt में लेकर आयी डार्क गूगल्स और कैप लगये तोह अब नार्मल थी.

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आर्यन मुस्करा कर ," कैसा लग रहा अब हमारी िराम बेगम को? ( गुल का नाम िराम था और आर्यन का अकरम, निकाहनामे में ) वैसे िश ड्रेस में तोह और क़हर धा रही हो बेगम ..... है है है है है ".

गुल चिढ़ती हुयी उसकी गॉड में चढ़कर उसके सीने में चपत मारने लगी ," बेशर्म , बेहया , एक नंबर का कमीना इंसान है तू ".

दोनों की थोड़ी डिअर की नोकझोंक अब चूमा छाती में बदल गयी , एयरपोर्ट से अपने चार्टेड प्लेन से आर्यन दिल्ली निकल गया और वहां से गुल की मुंबई की फ्लाइट थी. उसको फ्लाइट के लिए टी-3 टर्मिनल पे विदा किया की वीकेंड्स को वापस यहीं आ जाना, हमको यह रिश्ता गीता से शादी तक छिपाना होगा बस मेरी तीनो जुड़वाँ भेने जानती हैं आज माँ को भी बता दूंगा".

गुल ने आर्यन को यह कहकर भेज दिया की उसके परिवार वाले वेट कर रहे होंगे तोह में चली जाउंगी फिर मेरी पर्सनल लेडी गार्ड मेरे साथ है, no प्रॉब्लम.

गुल को हुग और माथा चूम के आर्यन विदा लेकर नीला के साथ निकल गया क्योंकि उसकी 2 शेरनीओ के साथ एक शेर गुस्से से वेट कर रहे थे फार्महाउस पर ....... ?????

वहीँ गुल को मुंबई की फ्लाइट पकड़ने से पहले दो बहेनो ने उठवा लिया अपने आदमीओ के साथ सिक्योरिटी को चकमा देते हुए ...... ??????

आर्यन इतनी म्हणत से गुल को बचा के लाया पर अपने परिवार वालों की पर्व से उसकी लापरवाही गुल किडनैप कर ली गयी ?????

उधर तीन लोग चल कदमी करते आर्यन के आगे ाजर घुटनो पर बैठने के बाद हाथ जोड़कर माफ़ी मांगने के बाद भी उसको गुस्से से देख रहे थे...... ?????

रति की आंखें चमक रही थी मैं में सोचते हुए ," जोह काम में नहीं कर सकती वह मेरे बच्चे कर सकते हैं, क्यों आर्यन बीटा मजा आया ".

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आर्यन कैसे सबसे पार पायेगा यह अगले से अगले अपडेट में. दोस्तों अपना और अपने परिवार का ख्याल रखें. धन्यवाद् नमस्कार
 
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