Angrakshak Parivar Ka .........MAHI - Page 36 - SexBaba
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Angrakshak Parivar Ka .........MAHI

गीता

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दीप्ति
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अपडेट 46 (डी)

अब तक .....

पर नर हठी का गुस्सा बढ़ने लगा और आर्यन की तरफ आगे आने लगा तोह उलटी कार से आगे खुद कर आगे भाड़ा..... नर के सामने वह घुटने के बल बैठा के सर झुका दिया......

दोनों औरतें दर हुयी थी पर आर्यन पे विश्वास था लेकिन हाथियों के सामने वह ऐसे खड़ा था की जंगल का टार्ज़न हो...... नीला भी सीट बेल्ट खोल के बोली," मैडम हिलना मत न आवाज करना ..... आर्यन सर इनको डरा दिए हैं ".

लीला अपना थूक जातक के डरते हुए बोली," पर इनके आगे सर झुका के क्यों खड़ा हो गया है..... यह मेल हठी है, पक्का मार देगा हमको...... उसका लिंग ज़मीन की धुल साफ़ कर रहा है ".

नीला की नज़र भी हठी के लिंग पे पड़ी तोह वह सोचते हुए बोली," यह दो बलसाली नारों की लड़ाई है..... जोह अपनी अपनी मादा पे हक़ जैम रखने हैं...... आगे क्यों जीतेगा यह भी पता चल जायेगा ".

लीला ," क्योनंन्नं ...... ?"

नीला ने लीला की तरफ देखा..... वह अभी भी नंगी hi थी...... " नर हठी जीतेगा पर ..... " .

लीला की प्राण सुख गए...... " ऐसा मत बोल..... मेरे आर्यन को बचा नहीं सकती तोह बाद दुआ तो मत दे...... भगवन आर्यन की रक्षा करना"......

तभी नर हठी ने आर्यन की झुके सर को अपनी सूंड से सूंघने लगा...... और पीछे हैट गया......

अब आगे......

एक गोरिया से आर्यन पक्षी की भाषा में बात किया तोह नर हठी भी चौंक गया....

आर्यन ( पक्षी की आवाज में) ," आप ने सही कहा माता गोरिया, हम किसी को नुकसान पहुंचा नहीं आये हैं...... बस िश रहा से गुजर रहे थे अपनी मोटर यान में ".

देखते hi देखते कुछ पक्षी भी आ गए और नर हठी को समझना लगे..... नर हठी धीरे से अपनी सूंढ़ उटाह के आर्यन के सुंघा और तब पीछे हैट गया...... उसका लगा गया की यह कोई हानि नहीं पहुंचा रहा है.

नर हठी ने एक चिनगाड़ा लगी..... अपने हथिनियों और उनके छोटे बच्चे हाथियों को सिग्नल दिया आगे बढ़ने के लिए......

धीरे धीरे सब हाथी दूसरी तरफ रास्ता पर करते हुए गन्ने के खेत में चले गए, नर हठी सबसे लास्ट में गया और एक बार और चिनगाड़ा खेत में घुसने से पहले......

आर्यन भी उठ गया और पक्षियों का धन्यवाद् किया...... नीला भी कार से जैसे ताशे निकली पर लीला नंगी थी वह अपने कपडे ढूंढने लगी.

आर्यन भी कार के नजदीक आके ," नीला तुम ठीक हो न ? लीला डार्लिंग तुमको कोई चोट तोह नहीं लगी ?"

आर्यन ने लीला की साइड का दूर खोला तोह वह रो रही थी...... " ारयणणणणण ..... ारयणनन "..... उसके मोह से शब्द नहीं निकल रहे थे, वह इतनी ज्यादा दर गयी थी.

इतने जंगली हाथियों ने उनको घेर लिए थे पर आर्यन की सूझ बुझ से वह किसी को बिना हानि पहुंचे वापस चले गए.

आर्यन ने हाथ देकर रोटी हुयी लीला को कार से बहार निकला और अपनी बाँहों में ले लिया...... "पुछठ रट नहीं है.... पुछहःछः वह चले गए ..... चम्म्म्म don't वोर्री ...... चम्म्म्म में हूँ न तुम्हारे पास" ..... आर्यन उसके लिप्स को चूसने लगा.....

नीला उसके पास आकर ," हमको यहाँ से चलने चाहिए..... कहीं वह हठी फिर से न आ जाएँ..... आप दोनों भी कपडे पहन लो, यह आशिकी का टाइम नहीं है "...... बात यह थी की नीला भी दर गयी थी, उसको पता था की जंगली जानवर से दूर रहने में भली है या दूर भागने में..... उसके पास गन भी थी जोह उसने हाथ में पकड़ी हुयी थी, वह फायर करने का भी सोच रही थी पर आर्यन के बारे में बिना से बहोत सुना था...... " आर्यन ओने मन आर्मी है", छोटे मोठे देश की आर्मी से अपने साथियों के साथ भीड़ के उनको हरा भी सकता है.

उसका भी लगता था की आर्यन के पास कोई सुपरनैचरल पावर है, एक तोह वह इतना स्ट्रांग और कॉम्बैट स्किल्स में एक्सपर्ट था, दूसरा उसको देखकर लगता था की यह कोई ओरे hi हाई रेस (गेन्स) का है यानि सुपरहमन..... चाहिए हॅंडसमेनेस्स हो, चाहे उसकी नीली शार्प आईज हो चाहे उसके गेनिटल्स हो...... इतना बड़ा लुंड और टट्टे उसने आज तक नहीं देखे थे.

नीला भी जानने लगी थी की आर्यन के कई सेक्सुअल रिलेशन्स इन्सेस्ट भी हैं पर वह भी कहाँ नार्मल इंसान वाले मर्द का स्टैमिना रखता है पूरा का पूरा सेक्स मशीन है..... लेकिन उसने अपनी आँखों और कैमरा में देखा है की आर्यन सिर्फ प्यार hi नहीं करता अपनी औरतों से बल्कि दिलों जाना से उनकी सेवा भी करता है. आर्यन की औरतों होने अपने में hi एक सुख है..... एक खुसी है..... में भी चाहती हूँ की आर्यन को औरत बनु पर न जाने वह बोलता है सही समय पे प्यार करेंगे..... नीला कार चलते हुए कार एक्सीडेंट के पहले एहि सोच रही थी.

लीला का भी यह नया सेक्स एडवेंचर था..... पहले तोह वह आर्यन से नाराज़ सी हो गयी थी की में यहाँ क्यों आयी, उसको आर्यन के साथ अकेले टाइम स्पेंड करना था जोह सब के होने से मुमकिन नहीं होते दिख रहा था पर आर्यन को पता था की लीला जितना तडपेगी उतना hi वह खुश भी होगी जब आर्यन उसकी लेगा.

लीला ने कभी नहीं सोचा था की वापसी आधे रस्ते में जब आर्यन उसको नीला की कार में बिठाया बच्चो के सोने के बाद..... हमर कार गुल ड्राइव कर रही थी और अदिति बच्चों के साथ बबिता पिछली सीट पे बैठी थी. आर्यन यह बोले कर हम सीधे फार्महाउस होकर हवेली आएंगे...... दो कार में गीता की दादी और उनके रिश्ते दार थे सिक्योरिटी और सिक्योरिटी अफसर उनको एस्कॉर्ट करते रति की हवेली वाले गाओं की तरफ बढ़ गयी.

नीला को आँख मार के आर्यन बोलै ," चककरोड की रस्ते वाले थ्रू लेना जोह गाने के खेतों से गुजरता है..... कोई हमको डिस्टर्ब न करे ".

लीला को भी आर्यन ने चौंका दिया जब वह पिछले सीट पे अपना हाथ लीला की कमर में डाला...... नीला हस्ते हुए," यस बॉस " बोली और कार ड्राइव करने लगी, टिंटेड विंडो चढ़ के......

लीला ने आर्यन को रोकने के कोशिश की हमको दिएर हो जाएगी पर वह कहाँ सुनता, 30 मं तक लीला को अपने ऊपर लेता के फिर उसके ऊपर लेट के ऐसा छोड़ा दोनों की टांगें मुद हुयी थी हट ज्यादा होने पे..... लीला भी समर्पण करते हुए उसका जोश के साथ देने लगी..... मादकता की सीमा चरम पे थी.

(नाउ प्रेजेंट में) ...... नीला ने जल्दी से कार से आर्यन और लीला के कपडे ढूंढने...... आर्यन भी लीला को खुद कपडे दे के पहनाया और नीला ने उसको अंडरवियर देते हुए कहा," सुखार है किसी से तोह छोटा (लुंड) दीखता है ( आर्यन ) "...... वह नर हठी और आर्यन के लुंड की तुलना कर रही थी.....

आर्यन भी उसको तंज़ कैसा ," बेअसतालित्य की सोच अपने दिमाग़ से परे कर...... अभी तू अपनी विर्जिनिटी को एन्जॉय करती रहे ".

लीला को किश करके ," डार्लिंग don't वोर्री अब कोई नहीं आएगा, मैंने नर हठी को समझा दिया था की मेरी ब्यूटीफुल क्वीन से दूर रहो वार्ना अच्छा नहीं होगा".

आर्यन पहले चरों तरफ देखा दूर तक कोई नहीं था..... वह लीला और नीला को थोड़ी दूर रहने के बोल कर कार को उठा के पहले लेफ्ट साइड किया और फिर धीरे से सीधे कर दिया...... 1600 कग की ओल्ड बंव कार आर्यन को सीधा करना कहाँ मुश्किल था, वह इतनी आसानी से कार को अपने चरों टायर पे वापस रखा जैसे खिलौना हो...... आर्यन की ताकत दोनों खूब अच्छी तरह से जानती थी, स्वयंवर में सब योद्धा को धूल छठा दिया था.

आर्यन कार चेक किया तोह एक बार में स्टार्ट हो गयी ..... दोनों लड़कियों को बिठा के कार सरपट दौड़ दी.

________________

महापंचायत के प्रांगण में.....

सुबह मुहूर्त निकल जा रहा था, सब आर्यन का वेट कर रहे थे...... अणि ने जब महापंचायत के माइक के स्पीकर पर अन्नोउंसेड किया की आर्यन भैया 10 मं ने पहुँचाने वाले हैं.

तब लोगों की भीड़ में आर्यन की जय जय कर होने लगी..... जोह राजकुमार दीप्ति के रिस्तेदार थे वह भी आर्यन का सपोर्ट देख कर आश्चर्यचकित थे...... आर्यन के गाओं की महापंचायत थी, उसकी उम्र भी कितनी थी यानि वह 21 साल का भी नहीं हुआ था लेकिन उसकी जनता में पॉपुलैरिटी बता रही थी की यह खरीदी वाले लोग नहीं है अपितु उसको प्रेम करने वाले लोग है

2 साल पहले आर्यन जब अमेरिका गया तोह महापंचायत के गाओं हो या उसके दादा का गाओं हो खुशियां जैसे उन्ह से रूठ गयी हो...... आर्यन एक विलक्षण प्रतिभा का धनि नौजवान लड़का था, जिससे सब प्यार करते थे खासकर महिलाएं, बच्चे और बूढ़े...... जवान लड़के उसको दोस्त हुआ करते थे अब वही उसके प्रशंसक बन गए थे. उनसे इन्हे दो साल में आर्यन का कद और विरासत बहोत बढ़ा गयी थी...... लेकिन आर्यन का ऐटिटूड वह दोस्ती वाला था पर टाइम की कमी भी आ गयी थी उससे मिलने में.

आज पहले गीता की जिम्मेदारी थी वह सरोज ( आर्यन की बड़ी बुआ की बेटी) और इंस्पेक्टर राजपूत की इंगेजमेंट करवा. पर 11 बजे तक आर्यन का कुछ आता पता नहीं था की वह कहाँ है..... गीता का पारा चढ़ने लगा, अगर वह अकेली होती तोह एक मं में आर्यन की साड़ी अय्याशी निकल देती.

तभी भीड़ चीरते हुए 20 स्कार्पियो गड्डियां एक विशेष दाल की महापंचायत के बहार रुकी और 200 से ज्यादा की भीड़ का समूह जोह ऑर्थोडॉक्स राजपूत समाज को बिलोंग करता था अंदर आने लगा...... उनका राष्ट्रीय लीडर को सब जानते थे.

बिना को पहले सूचना मिली तोह उसने सिक्योरिटी गार्ड्स और सिक्योरिटी अफसर को रोक दिया लेकिन उनको हथियार सबमिट करने को कहा. बिना का आदर्श यानी आर्यन की भी सहमति होगी की 200 लोग महापंचायत की चौखट पे काले झंडे लेकर आये थे..... " यह रिश्ता नहीं हो सकता, हम होने नहीं देंगे..... वार्ना खून के नदियां बह जाएँगी "..... उनका लीडर ने धमकी दी.

राजा त्रिभुवन सिंह आगे आये तोह लीडर ने हाथ जोड़ कर कहा ," महाराज आप का हम सब सम्मान करते हैं परन्तु यह हमारे समाज की परंपरा का उल्लंघन है, आप िश में न पड़े ".

राजा त्रिभुवन सिंह तोह खुद अपनी बेटी राजकुमारी दीप्ति का साइड नहीं ले पाए..... भला हो आर्यन का वह स्वयंवर जीत लिया अपनी दीप्ति के लिए..... पर आईएनएस. राजपूत अपने समाज को नहीं समझा पाया, आर्यन का हाथ उसके सर पे था तोह कोई रोक नहीं सकता था िश शादी होने से पर वह गलत साबित हुआ.

उनकी मंशा देख कर चंडी देवी उर्फ़ गीता जोह आर्यन के न आने से गुस्सा थी उसका क्रोध चरम पे था..... अपना लेहंगा दोनों हाथो से संभल के मंडप की सीधी से उतरने लगी तब रति ने उसका हाथ पकड़ के रोका," सब बड़े लोग यहाँ हैं तुझे मेरी कसम है अगर कुछ भी बोली ".

गीता का गुस्सा अपनी माँ रति पे फटा," सगाई तोह हो के रहेगी, मेरा मुँह तोह तू ने बंद कर दिया पर मेरे हाथ पेअर अभी सही सलामत हैं. आर्यन को आने दो उसकी भें की शादी है, उसके सामने यह बोले कर दिखना".

प्रज्ञा भी गीता का हाथ पकड़ के कान में बोली," दीदी यह कुत्ते कुछ ज्यादा नहीं भोक रहे हैं क्या, आर्यन जीजू कब आएंगे ".

रति और बिना ने राजपूत समाज के लीडर से बात करने लगी पर वह भी अदा हुआ था की यह शादी नहीं हो सकती..... ठाकुर बलदेव सिंह ने भीमा और राजवीर सिंह को एक तरफ बुलाया ," यह कट्टर राजपूत समाज का लीडर मनवीर सिंह राजपूत है, इसकी पूरे प्रदेश में घरी पकड़ है. मुझसे भी 2 बार भीड़ चूका है पर इसको किसने सुचना दी की हम सरोज और आईएनएस. राजपूत का रिश्ता पक्का कर रहें हैं पक्का राजपूत के घर का कोई सदस्य होगा".

राजवीर सिंह चिंतित होकर," गीता और आर्यन की सगाई भी तोह हो रही हैं न, आर्यन कहाँ रह गया? "

भीमा ," यहाँ कमसे काम 75 हज़ार लोग हैं और यह करीब 200 लोग..... काट देते हैं किसी को पता नहीं चलेगा कहाँ गए ".

राजवीर गुस्सा से ," भीमा काका खून खराबा की बात मत करो, सिक्योरिटी अफसर यहाँ मौजूद है, सप विक्रम भी आता hi होगा.... ठाकुर साहब इनको कुछ समझो ".

राजवीर सिंह भी रति के पास गया जोह बिना से बात कर रही थी..... आईएनएस. राजपूत एक शेरवानी फेन कर अपनी फॅमिली से बात किया फिर मनवीर सिंह से बात करने लगा, दोनों में भैंस होने लगी.

महापंचायत का प्रांगण आज दुल्हन की तरह सजा हुआ था...... मैं गेट पे हैवी सिक्योरिटी और सिक्योरिटी अफसर का इंतज़ाम था. 2 एग्जिट गेट पे no एंट्री बनायीं गयी थी आर्यन के फॅमिली मेम्बर्स को hi परमिशन थी तककि सबको आसानी हो.

सब को पता था की आज दोनों टाइम का शाही भोजन मिलेगा, आखिर रति देवी के एकलौता बेटे की सगाई हो रही थी पर कुछ लोग तोह सुभे से hi डेरा जाम लिए थे. पैसे और दान दक्षिण के साथ मदिरा भी मिलेगी. आर्यन महापंचायत का मालिक बनेगा यह अनाउंसमेंट की दावत पब्लिक अभी तक नहीं भोली थी, पैसा भी मिला था.

महापंचायत के ऑफिस में 6 रूम थे, एक रूम से सरोज और आर्यन की सभी भेने आर्यन का वेट कर रही थी...... 4 रूम under-construction थे पर उनको भी सजा दिया गया था. एक तरफ बड़ा शामियाना लगा था दूसरी तरफ 2 छोटे टेंट में खाना त्यार हो रहा था...... भीड़ बढ़ती hi जा रही थी, सब बच्चे , बुड्ढे 9 बजे से hi त्यार होकर आ गए थे, औरतों और लड़कियां साजि धजी दाहिने हाथ तरफ मंडप के साइड थी और पुरष बहिना हाथ की तरफ थे. आगे रौ में कुर्सियों लगी थी कुर्सियों से पीछे दरिया बिछा दी थी.

शरबत और कोला सर्वे हो रहा था, सुबह पकोड़ी और कलाकंद के साथ नास्ता था जोह अभी भी सर्वे किया जा रहा था पर चाय सुबह hi मिली था अब शीतल पाए का इंतज़ाम था.

पानी का इंतजाम एक कार्नर में था..... स्टेज पे चुनिंदा मेहमानों के स्वागत के लिए सोफे और कुशिओं चेयर लगी हुयी थी. विप सेक्शन हवेली के साइड में था, जिसको पार्टीशन करके वाइट कलर का स्पेशल बुलेटप्रूफ टेंट से बना दिया था. काफी बुसिनेस्स्में और पॉलिटिशियन आने वाले थे लेकिन रति को कोई सरप्राइज नहीं हुआ जब स्टेट के चीफ मिन्स्टर और डिप्टी चीफ मिनिस्टर आने वाले हैं इसकी इनफार्मेशन 8 ऍम को जब मिली..... उसने भी फॉर्मेलिटी दिखा के कहा की आप का स्वागत है...... आर्यन की वैल्यू दोनों बड़े लीडर जानते थे, कुछ दिन पहले रतिदेवी और आर्यन के खिलाफ वारंट निकल दिया था स्टेट गवर्नमेंट ने लेकिन रतिदेवी तोह स्टेट गवर्नमेंट hi गिरने वाली थी पर आर्यन ने रोक दिया.

राजस्थान की गवर्नमेंट से भी कई मिनिस्टर्स और कम 7 बजे शाम को आने वाले थे राजकुमारी दीप्ति को बधाई देने..... लेकिन यह सब वास्तविकता में आर्यन से मिलने आने वाले थे, उनको अच्छी तरह पता चल गया था की सेंटर ऑफ़ पावर कहाँ है. अनीता सिंह, आर्यन की सगी छोटी भें है, यह bhai-bhen किसी को बर्बाद और आबाद कर सकते हैं..... सारू की दोनों संतान इतनी काम उम्र में जीनियस और कामयाब हैं यह बात सबकी जुबान पे थी...... पर कुछ चुनिंदा महानुभावों को hi यह पता था की दोनों bhai-bhen एक hi शक्ति का पूरक हैं. आर्यन जितना शांत और सहनशील था वहीँ अणि उग्र और अग्नि ?का रूप थी.

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दूसरी तरफ .......

आर्यन अपने फार्महाउस पहुंचा तोह 1 कम पहले दूर तक फार्महाउस की सजावट देखे कर उसको भी आश्चर्ये हुआ..... गेट पे उतर कर कार को अंदर भेजा कर अपना मोबाइल एक्टिव मोड़ में करके मैं बिल्डिंग में एंटर किया..... सब अपनी घडी देखते हुए उसको जय हिन्द बोल रहा थे. आर्यन भी सिक्योरिटी अफसर वाले और सिक्योरिटी गार्ड्स का अभिवादन स्वीकार करते हुए रानी मिरदुला को कॉल किया.

फार्महाउस दुल्हन की तरह सजाया गए थे, आखिर राजकुमारी दीप्ति सिंह की इंगेजमेंट का फंक्शन होने था. "सुबह प्रभात मैया ..... तू रेडी हो गयी क्या? हम लेट हो रहें हैं ".

आर्यन की आवाज सुनकर रानी मिरदुला भावबिभोर होक बोली ," अब तुझे याद आयी है अपनी मैया की वैसे में तेरी क्यों लगती हूँ जोह याद करेगा ?" ...... उसके सुबकने की आवाज सुनकर आर्यन भी अपनी गलती को महसूस कर रहा था. मिरदुला उसके पिछले जनम की माँ है, यह तोह आर्यन भी एक्सेप्ट कर चूका था पर माँ के दिल को क्यों समझे जोह अपने बेटे को याद कर रही थी उसकी रह देखते हुए.

फार्महाउस आज दीप्ति के रिश्तेदारों का अदा बना हुआ था...... राजा त्रिभुवन सिंह उनके मंत्री, अपने बोडीगार्ड्स के साथ महापंचायत के फंक्शन में शामिल थे. उन्होंने भी राजपूत समाज के लीडर को समझने की कोशिश की पर वह कुछ सुनने को त्यार नहीं हुआ तब रानी मिरदुला को फ़ोन करने को कहा अपने मुख्यमंत्री से. रानी मिरदुला के नाम से छोटे मोठे नेताओं की पतलून गीली हो जाती थी डर के मारे पर यह बात 21 साल पहले की थी जब रानी की मृत्यु (अचेत होने) से.

21वि सदी में जहाँ सोशल मीडिया नेटवर्क इतना पहला हो, राजा और रजवाड़ों को बीते दिन की बात सब करने लगा थे पर रानी मिरदुला सिंह का नाम अभी भी जनता सम्मान से लेते थी..... वह कट्टर ***** समर्थन की सबसे बड़ा चेहरा मानी जाती थी. अगर कोई दुष्टता दीखता तोह ऐसे सांप का पहन कुचलने में दिएर नहीं लगतीं थी.

आर्यन को कल hi खबर लग गयी थी की राजपूत समाज कुछ बड़ा करने वाला है, उसको भी पता था रानी मिरदुला का नाम राजपुताना और पूरे देश में क्या महत्त्व रखता है. यह पोलटिक्स बहोत कुट्टी चीज़ है और आर्यन की चाल तोह मनवीर सिंह भी नहीं समझ सका, उसको पक्का विश्वास था की हम लोगों के सामने यह घुटने तक देंगे और गीता की शादी भी आर्यन से नहीं होगी. लेकिन वह भूल गया था आर्यन का पराभव उसके प्रदेश के साथ राजस्थान में भी हुआ था, दिल्ली स्टेट को वह अपना घर hi समझता था. रतिदेवी का बिज़नेस का साम्राज्य इन्ही 3 स्टेट्स में ज्यादा था. तीनो स्टेट में वह क्रोर्स में पार्टी चंदा फण्ड के नाम से देती थी. आर्यन भी एहि पॉइंट उठा रहा था तककि 4 सीट ंप की वह जीत जाये, हलकी कैंडिडेट उसकी रिलेटिव hi थी.

दीप्ति ने अपनी माँ के हाथ से फ़ोन लिया ," महीईई आप कहाँ हो? सब आपका इंतज़ार कर रहे हैं, फ़ोन क्यों नहीं लग रहा था आपका?" ( दीप्ति ने तना मारा)

आर्यन ," सॉरी स्वीट हार्ट, ी ऍम लेट. तुम मैया को हेलिपैड पे भेज दो..... में भी वहीँ आ रहा हूँ ".

आर्यन अपने ऑफिस में गया और सीक्रेट दूर से सीक्रेट रूम गया तोह दीप्ति और रानी मिरदुला वहां मिली......

आर्यन," रोने की प्रैक्टिस हो रही है..... मैया तुझे में कितना प्यार करता हूँ तब भी तू रोटी है"..... आर्यन की आवाज सुनकर दोनों आश्चर्य से उसको देखने लगी तब ......

दीप्ति ," महीईई ! "

मिरदुला ," ारयणणणण ! "

आर्यन को सामने देखकर माँ बेटी खुद को रोक नहीं पायी और भागते हुए उसको गले लगा ली...... दीप्ति को उम्मीद नहीं थी की आर्यन यहाँ फार्महाउस आएगा..... रानी मिरदुला रट हुए आर्यन की चुम्मियाँ लेने लगी ," अपनी मैया को छोड़ कर कहाँ चल गया था ".....

दीप्ति को भी कोई सरम नहीं लगी आर्यन को हुग करने में अपनी माँ के सामने, वह उसका पति था भले hi उनकी सुहागरात अभी अधूरी थी. दीप्ति उसकी गर्दन चूमती हुए बोली ," माहि ी मिस यू "..... पुछठ

मिरदुला कितनी तदपि थी आर्यन के लिए, वह रट हुए बैएँ कर रही थी...... सारू को आर्यन का प्यार निर्विरोध मिलने लगा था पर में भी तोह महार्यं की माँ हूँ, मुझे भी हक़ है अपने बेटे का प्यार पाने का.

दीप्ति एक ब्लू फ्रॉक सूट पहनी हुयी थी और मिरदुला बनारसी साड़ी में थी..... दोनों अपारा लगी रही थी.

आर्यन खुश होकर दोनों को कमर में हाथ दाल के उठा लिया," मुझे प्यार करने का हक़ कबसे मांगने लगी तुम दोनों...... पुछठ( मिरदुला को) ..... पुछःह ( दीप्ति को) ..... मेरे रोम रोम में मैया और दीप्ति का नाम छापा हुआ है..... मैया ी ऍम एक्सट्रेमेली सॉरी, में अकेला hi गाओं चला आया था.... आज माफ़ करदे आगे ऐसी गलती नहीं होगी "....... पुछठ पुछहःछः ...... मिरदुला के आंसू चाटने लगा.

दोनों शर्माने लगी यह सिचुएशन ओड लगी दोनों को..... बेटी के बजाय आर्यन माँ को प्यार कर रहा था. सायद दीप्ति को आर्यन की कमी लगी होगी पर वह यहीं नहीं रुका, मिरदुला के लबों को चूमने लगा.

दीप्ति ने चेहरा आर्यन की गर्दन में छुपा लिया, मिरदुला को भी कुछ समझ नहीं आया पर दिएर हो गयी थी यह समझे में...... आर्यन ने दीप्ति की कमर से हाथ का दवाब काम किया तोह उसके पंजे फर्श पे टिक गए और चेहरा आर्यन के कंधे से टिका.

आर्यन ने मिरदुला के लबों को छोड़कर गर्दन दीप्ति के तरफ झुके और उसकी कमर पे हाथ दाल के अपने से पूरी तरह चिपका लिया..... दीप्ति आर्यन की मनसा समझ गयी.

" महीईई नाहीईई "..... उसकी बात बिच में रहे गयी तब तक आर्यन अपने लबों को दीप्ति के लबों से जोड़ दिया और उसके सुराख़ गुलाबी होंठो को चूसने लगा...... चुम्म्म्म ुंहःहःहः ममममममम ......

मिरदुला की स्थिति विचित्र थी, आर्यन खुलम खुला पहले उसको चूमा अब उसकी सगी बेटी दीप्ति को लबों पे टूट पड़ा और वह कुछ नहीं कर पा रही थी बस हवा में 1.5 फट तंगी आर्यन की बाँहों में रहने को मजबूर थी...... उसने भी अपनी चेहरा आर्यन की गर्दन में छुप लिया.

दीप्ति अभी भी अपना मुँह नहीं खोल रही थी 30 सेक् तक आर्यन उसके लिप्स चूसता रहा...... लेकिन अपनी औरतों को प्यार करना आर्यन खूब ाचे से जानता था...... वह फिर से दीप्ति को कमर पे हाथ डालकर उठा लिया...... किश न टूटे और दीप्ति भी अपना मुँह खोल के उसका साथ दे यहीं तोह वह चाहता था और दीप्ति को भी मन्ना पड़ा आखिर उसका पति क्या चाहता है...... वह आर्यन को जीभ चूसने लगी हम्म्म ुंहःहःहः ुंहःहःहः ममममममम ममममममम.....

आर्यन दोनों को वजन उठे के बीएड की तरफ बढ़ने लगा...... " ारयणणणण गिरा मत देना"...... मिरदुला ने उसके कान में कहा.

दीप्ति को किसिंग करते हुए वह आगे बढ़ने लगा तोह भी आर्यन से पूरी तरह से चिपक गयी...... वह जानती थी आर्यन दीप्ति से विवाह कर चूका है प्रचीन शिव मंदिर में गीता के सामने पर अपना कुंवारेपन दीप्ति ने अभी तक आर्यन को नहीं दिया है..... चाहती तोह वह दे भी सकती थी पर गीता और जाने के साथ उन्होंने डीडे किया था गीता की शादी के बाद hi अपना हक़ लेंगी आर्यन से.

मिरदुला 21 साल तक अचेत अवस्था में थी, आर्यन hi वह शक्श था जिसने उसको पुनर जीवन दिया. आर्यन को सब का प्यार मिला रहा था यह बात उसको सारू ने बताई थी ...... ख़ास कर सारू! सबसे ज्यादा प्यार तोह उसको hi मिल रहा था आर्यन का...... अब लीला भी यदा कड़ा अपना प्यार लेने लगी थी. शायद रानी मिरदुला को भी समझ में आ रहा था ऐसे नखरे करेगी तोह आर्यन के लिए साड़ी उम्र तडपेगी..... आखिर वह मेरा बीटा है और में उससे दूर नहीं रह सकती.

अपनी सोच से मिरदुला तभी निकली जब आर्यन ने उसका गाल चूमा..... आर्यन और दीप्ति का किश 2 मं चला," क्या सोच रही है मैया ? दीप्ति को में पूरा प्यार नहीं दे पा रहा हूँ उसकी आँखों में प्यार देख के में खुद को रोक नहीं सका. फिर से माफ़ कर देने अगर मैंने गलत किया हो".

दीप्ति जोह आर्यन के सीधे जांघ पे बैठी थी उसने आर्यन के हाथ को चूमा," माँ को बुरा नहीं लगा पर माहि अब आप अपनी मैया से दूर रहने लगे हो. क्यों माँ यह सच्च है न ?"

मिरदुला जोह आर्यन की उलटी जांघ पे बैठी थी अपने मैं में सोची ,' समय फिर से डराया जा रहा है, में महार्यं की पिछले जनम में माँ थी और िश जनम में भी रहूगी पर महार्यं की गलती आर्यन को नहीं करने दूंगी...... रति को भूलना पड़ेगा आर्यन को कुछ दिन के लिए, सारू और में पूरा प्यार देंगी अपने आर्यन को'.

मिरदुला दूसरी तरफ ध्यान दिलाई ," तू त्यार क्यों नहीं हुआ? यह हेलीकाप्टर से क्यों जाना है ?"

"बताता हूँ, डार्लिंग ( दीप्ति से ) तुम वाइट अलमारी से मेरा 3 पीेछे डार्क ग्रे कलर का सूट निकल दो और मैचिंग टाई, शूज भी दे देना. में फ्रेश होता हूँ बस 2 मं में आया "...... दीप्ति के गाल पे किश दिया.

दीप्ति भी शर्म के ," जी में अभी निकलती हूँ".

मिरदुला भी दीप्ति को देख रही थी, उसका शर्मा देखकर वह भी स्माइल देने लगी...... आर्यन ने अपनी मैया को अपनी गॉड से उतरा ," तू भी कितना रोटी है.... पुछहःहःहः (किश कर के ) ..... touch-up ( मेकअप को ठीक करना) कर ले किसी की बंद बजने जा रहे हैं". उसके फ़ोन पे बिना का मैसेज आया था.

आर्यन अपना कपडे उतार कर सिर्फ अंडर वियर में बाथरूम का दूर खोल के अंदर चल गया..... दोनों औरतों की नजर आर्यन पे पड़ी जोह कपडे उतर रहा था उनको दर लगा की आर्यन कहीं नंगा न हो जाए लेकिन वह अंडरवियर पहने हुए बाथरूम में चला गया.

दूर बंद होने आवाज आयी और दोनों माँ बेटी की नज़र मिली तोह थके मार के हसने लगी ?????... . हां हां हां ..... हां हां हां ......

दीप्ति ने अलमारी से आर्यन का सूट, शूज और तय निकली...... मिरदुला अपने वैनिटी बैग से मेकअप का सामान निकली और मिरर के सामने touch-up करने लगी. मिरदुला ने पोछा ," आर्यन किसका बंद बजने की बात कर रहा है ?"

दीप्ति उसका थ्री पीेछे बीएड पे रखते हुए बोली ," माहि को में अब समझने लगी हूँ..... वह जल्दी में हैं और यह मैसेज इनके मोबाइल पे आया है कोई मनवीर सिंह राजपूत है "...... और आर्यन का फ़ोन चेक करने लगी, उसने तय सूट के पा राखी और शूज भी बीएड के किनारे रखे. सॉक्स अलमारी से ढूंढी एक वाइट पेअर सेलेक्ट की.

मिरदुला भी मिरर से दीप्ति को देख रही थी अपना मेकअप करते हुए वह आर्यन के मोबाइल में बिजी थी और दुसरे हाथ से यहाँ वहां बीएड पे अलमारी से आर्यन की एक वाच सेलेक्ट की फिर हैंकि..... " हुन्न्न तुम तोह आर्यन की अच्छी बीवी बनने की कोशिश कर रही हो..... देख कर अच्छा लगा "...... मिरदुला ने कॉम्पलिमेंट दिया.

दीप्ति स्माइल देकर," हाँ प्रैक्टिस कर रही हूँ यह राजकुमारी के गेट उप को बहार रखने की कोशिश कर रही हूँ..... माहि को सिम्प्लेनेस्स अच्छी लगती है ".

मिरदुला अपनी लिपस्टिक लगते हुए बोली," राजकुमारी के बाद आपको महारानी डीप्थी सिंह बनना है..... सिम्प्लेनेस्स सुनने में अच्छी लगती हैं पर क्या आपको एक हाइनेस की तरह बढ़ा नहीं किया गया है ".

दीप्ति भी आर्यन का मोबाइल बीएड पे रखकर अपनी माँ के गले में हाथ दाल कर बोली ," हाँ आप ठीक कह रही हैं पर मुझे माहि की दीप्ति बनाना हैं ".

मिरदुला हाथ पीछे करती हुयी दीप्ति के गाल टच की," राजधर्म कहता है एक चतुर रानी वही होती है जिसको अपनी पावर का सही बढ़ हो..... में आपको सितारों की ऊंचाई तक आपका यश हो यह देखना चाहती हूँ...... प्रेम अपनी जगह हैं और कर्त्तव्य दूसरी तरफ है. आप जैसी महारानी हज़ारों सालों में कोई एक पैदा होती है..... गुणवान, साहसी और शक्तिशाली हो पर तुमको चालक भी बनना होगा मेरी बेटी..... तककि तुम दुनियां से 3 चल आगे की सोच रखो "..... और प्यार से दीप्ति का गाल थपथपाया.

दीप्ति भी मिरदुला का सीधा गाल को चुम के बोली," थैंक्यू माँ में याद रखूंगी...... ी लव यू माँ ल".

मिरदुला ने प्यार से रिप्लाई किया ," ी लव यू माय स्वीट प्रिंसेस ".

आर्यन 5 मं बाद नाहा के आये, लीला को प्यार करने के बाद वह फ्रेश भी नहीं हुआ था...... आर्यन ," तो माँ बेटी कोनसा संयंत्र बन रही हो मेरी खिलाफ ?" ..... वह कमर पे टावर लपेट के आये था.

नाहा के उसकी बॉडी दोनों को मंत्रमुग्ध कर रही थी..... जैसे उनका बस चले तोह उससे लिपटी रहे.

मिरदुला," राजकुमारी तुम्हारी चुगली कर रही थी "...... hi hi hi .....

आर्यन हसकर," एक बार को में मान भी लूँ की सूरज पश्चिम से ऊगा सकता है पर दीप्ति मेरी चुगली करे में मान नहीं सकता..... योर हाइनेस! " ..... सर झुका के आगे बढ़कर एक अलमीरा खोला.

दीप्ति स्माइल देने लगी तोह मिरदुला फिर आर्यन को चेदि ," प्यार में अंधे को सब हरा hi दीखता है..... मान लो की दीप्ति मुझे कभी तुम्हारी चुगली की तोह क्या करोगे ?"

आर्यन," में तोह चाहता हूँ की यह मेरी चुगली करे पर यह भी तोह आपको बताना होगा की कैसे करते हैं..... मेरी दीप्ति डार्लिंग चुगली करने की लिए नहीं बानी है वह तोह प्यार करने के लिए बानी है क्यों स्वीटहार्ट ? मैंने सही कहा न ".

Mirdula,"Hunn सुनलो राजकुमारी यह सिर्फ प्यार का भूका है".

आर्यन," मेरी भूक कभी नहीं मिट टी और ज्यादा प्यार की भूक मुझे जिन्दा रखती है ".

मिरदुला ," सुनले यह बस एक लुस्टि आदमी है में न कहती थी तुझे बेटी..... सो मिस्टर यह साबित होता है ".

आर्यन अपना अंडरवियर पहनते हुए," लुस्टि और ठरकी में कोई फरक नहीं है..... हम तोह प्यार बाटने आये हैं प्यार hi बाटेंगे आप हमको ऐसा छिछोरा मत समझो हम हर दिल में प्यार की झोट जलने आये हैं...... वह एक गण है न

" ज्योत से ज्योत जलाते चलो .....

प्रेम की गंगा बहते चलो..... "

दोनों आर्यन की बात सुनकर हसने लगी, आर्यन के फ़ोन पे मीणा का कॉल आया तोह वह कॉल पिक करके दूसरी अलमारी से एक नवी ब्लू कलर की शर्ट निकल कर बात करने लगा...... दीप्ति उसको बनियान पहने लगी तोह मिरदुला मुस्करा रही थी. आर्यन कॉल करते हुए 5 मं में रेडी होकर कॉल कट करने से पहले बोलै," हम 15 मं में लैंड करेंगे, don't वोर्री जान".

मिरदुला ने दीप्ति की तरफ देखा, वह बोली," मीणा से बात कर रहे हैं".

आर्यन ने क्लैप किया तोह साड़ी ऑटोमेटिकली अलमारी और वॉरड्रोबेस खुल गयी, उसने आगे जाकर एक आटोमेटिक जर्मन पिस्तौल और उसकी मैगज़ीन चेक करके अपनी पंत में राखी.

मिरदुला और दीप्ति फार्महाउस के सीक्रेट रूम की खुली अलमारी ,वॉरड्रोबेस और ओपन शटर को देख रहे थे...... बहोत सारा रुपये, गोल्ड, हिरा, जेवरात, सब टाइप के हथियार (गन्स, ामुनाशन, मास्क्स और स्पेशल फाइटर ड्रेस ेट्स... ) तलवार, स्पीयर्स. आर्यन के कपडे 4 अलमारी में सलीके से रखे हुए थे और 2 अलमारी में उसकी जुड़वा बहेनो की ड्रेस थे.

मिरदुला इम्प्रेस्सेड होती हुयी बोली," नॉट थे बाद आईडिया ! क्या सिर्फ इतना hi अम्मुनिशंस और वेपन्स तुम्हारे पास ? में ज्यादा एक्सपेक्ट कर रही थी..... एनीवे हमको क्या डिअर नहीं हो रही है?"

दीप्ति गर्व से बोली," महार्यं hi काफी है, युद्ध में हथियार कुशलता से उपयोग करना माहि अच्छी तरह से जानता है..... क्या आपको उसकी काबिलियत पे शक हो रहा है ?"

मिरदुला अपने वैनिटी बैग से एक रिवाल्वर ? निकल के चेक करने लगी," एक माँ को अपने बेटे की काबिलियत पे कोई शक नहीं है लेकिन उसके खोने से जरूर डर्टी हूँ". रिवाल्वर चेक कर के उसको बैग में दाल के जीप बांड की.

आर्यन एक बैग निकल के अपने दोनों कंधे पे चढ़ लिए और बैग की वैस्ट बेल्ट भी बांध लिया..... दीप्ति को किश करके ," तुम आती तोह अच्छा था पर मैया से काम चल लूंगा "..... उसको आँख मार के बोलै.

दीप्ति उसकी कंधे पे चपत लगा के हसी ," hi hi hi hi ..... माँ जी ने मन किया है, 2 घंटे की तोह बात है..... माँ का ख्याल रखना..... आल था बेस्ट"?

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पब्लिक दावत खुलने का वेट कर रही थे, समय तोह 11 बजे का था पर आर्यन अभी तक नहीं आया था...... आधा जानता बिट गया था लीडर मनवीर सिंह का सबर जवाब दे गया ," यह आर्यन क्या विप है जोह इतना टाइम लगा रहा है...... हमको किसी आर्यन ब्र्याँ से मतलब नहीं है, यह रिश्ता नहीं हो सकता आईएनएस. राजपूत प्यार से बोल रहा हूँ मान जा और अपनी बारादरी में रिश्ता कर वार्ना हम अपनी पे आ गए तोह नौकरी भी जागेगी आगे तुम समझदार हो ".

आईएनएस. राजपूत को विश्वास था की आर्यन आएगा तोह सब ठीक हो जायेगा..... उसने अणि को भी रिक्वेस्ट की थी पर वह भी रति और आर्यन का नाम ली..... " अगर में िश लफड़े में हाथ डालूंगी तोह बहुत खून खराबा होगा और भाई के साथ नानीजी भी मुझे hi दोष देंगे. इनको बातों में उलझनों आर्यन भैया आता hi होंगे".

बात तोह ठीक hi कही थी अणि ने..... राजपूत को भी वह मंजर याद आ गया कैसे अणि अकेली सबको गाजर मूली की तरह काट दी थी कैसे उसके कपडे पूरा खून से रेंज हुए थे...... यह कोई साधारण लड़की नहीं थी अपितु कोई देवी तुल्ये नारी थी ऐसा वह मानता था.

अभी तक Aryan-Geeta के रिश्ते का कोई विरोध नहीं कर रहा था, रति भी हैरान थी यह कैसे राजपूत हैं ? क्या गीता को यह राजपूत नहीं मानते? क्या राजकुमारी दीप्ति राजपूत नहीं है ?

पर उसको जवाब नहीं मिल रहा था शायद कोई और भी था जोह टेम्पररी विवेक लीडर और उसके साथी के दिमाग़ से निकल दिया था ? पहचान तोह गए होंगे आप सब ? (पातळ लोक वालियां भी मेहमान थी िश सुबह घडी में )

आईएनएस राजपूत," बस आर्यन सर को आने दीजिये में भी वडा करता हूँ जोह तुम बोलेंगे वही होगा "..... उसने हाथ जोड़कर कहा और अपनी माँ बहेनो के पास चला गया.

गीता की असली फॅमिली मेंबर्स भी आ चुके थे...... नैनादेवी, गीता के चाचा और मां दूर कुर्सी पे बैठे थे, बाकि सब गीता के पास उसको घेरे खड़े हुए थे.

सारू पिंक बनारसी साड़ी में अप्सरा लग रही थे, अणि के पास जाकर वह बोली," तू देख जरा आर्यन कहाँ रह गया ?"

अणि स्माइल देते हुए बोली," भाई ने बोलै तोह आ hi जायेगे, आप डैडी से मिली ?"

सारू उसका हाथ पकड़ के कान में बोली," अब तेरे डैडी राज सिंह नहीं है, मैंने तुम्हारा लिए नया डैडी ढून्ढ लिया है "......

दोनों के लिए अणि की सेक्रेटरी शरबत लेके आयी ," सारू ma'am, अनीता ma'am वोउल्ड यू लिखे सम ड्रिंक्स ?"

अणि ," थैंक्यू एंजेला, सीट विथ उस ".

एंजेला ,30 यरस, एक ब्रिटिश लड़की थी..... पहले तोह उसको इंडिया में एडजस्ट करने में दिएर लगी पर अब इतने सारे लोगों के बिच वह कम्फर्टेबले महसूस कर रही थी. उसकी बॉस उसको फुल्ली सपोर्ट करती थी, वह भी शिकायत का मौका नहीं देती थी.

4 ब्रिटिश बॉडीगार्ड सिविल ड्रेस में उससे कुछ दुरी पर खड़े थे, स्टेज के पास. नेहा, डॉली से बात करने रूम में गयी थी.....

अणि हिंदी में," जीवन देने वाला एक hi बाप होता है वह सिर्फ मेरे डैडी हैं मर राजसिंघ ".

सारू ने तंज मारा," जोह तुम्हारा ख्याल रखे, बड़ा भाई भी तोह बाप के दर्जे का होता है. में चाहती हूँ आर्यन को वह दर्जा मिले".

आर्यन का नाम सुनते हुए एंजेला के कान खड़े हो गए," आर्यन सर इस वैरी स्वीट पर्सन, वेयर हे इस ? ी ऍम तू एक्ससिटेड तो वाच हिज इंगेजमेंट."

दोनों ने ऐसे एंजेला को घुरा जैसे उसको कच्चा चबा जाएगी..... उसको भी लगा की आर्यन का जीकर उसने गलत समय पे छेद दिया..... " एक्सक्यूज़ में, ी नीड तो उसे वाशरूम "....... उसके जाने के बाद दोनों की हसी चुत गयी .....

अणि," भाई मुझे आप से ज्यादा प्यार करता है और न में पीछे जनम का कोई पाप अपनी आत्मा पे धो रही हूँ जिसका प्रायश्चित करना हो. मेरा प्रेम निस्चल है अपने भाई के लिए और वह मुझे अपनी जान से ज्यादा प्यार करता है. कभी सोचा है आपने में उसको hi क्यों चुना? अगर आप को जवाब मिल जाये तोह में और इन्तजार करने के लिए त्यार हूँ".

अणि का जवाब सुनकर सारू विचलित हो गयी, उसने कभी नहीं सोचा था की आर्यन का प्यार उसको अणि से बाटने पड़ेगा..... विकलप hi कहाँ था सारू के पास, कहाँ तोह वह आर्यन को अणि का बाप बनाने पे अदि हुयी थी कहाँ अणि उसको क्लीन बोल्ड कर दी थी.

सारू सब से आर्यन का प्यार बाँट सकती थी पर अणि के लिए वह राजी नहीं थी...... आर्यन उससे सबसे ज्यादा प्यार करता था, शायद रति से भी ज्यादा. लेकिन एक और थी यानी अणि जिसको आर्यन बचपन से अपनी बेटी जैसा प्यार करता था..... सारू को दर हकीकत में बदलने वाला था. अणि को जब आर्यन अपना पूरा प्यार देगा जिसको सारू कल्पना भी नहीं कर सकती थी सोच तोह दूर की बात है.

सारू िश बार गलत थी, अणि को भी हक़ है आर्यन का प्यार पाने का...... भले वह थोड़ी ज़िद्दी हो थोड़ी मूडी हो पर प्यार तोह वह भी अपने भाई से करती थी अटूट प्यार. हाँ पहले उसको अपनी सब बहेनो पे हसी आती थी आर्यन के लिए वह सब मरी जाती थी पर जब उसको विश्वास हुआ है की आर्यन वह कर सकता है जोह कोई और नहीं जैसे उसने पातळ लोक जाके अपनी दिव्या तलवार पायी, दीप्ति की जान बची, विशाखा को जिन्दा किया, पिछले जनम का महार्यं कभी नहीं कर सकता था.

तलवार महार्यं के हाथ से छिटक गयी थी महारानी विजयलक्ष्मी ने स्वयं देखा था और उसकी मौत भी देखि थी. वह इतना कला और कुरूप था कैसे उसको कोई प्यार कर सकता था, हाँ बलसाली और मर्दन की मिसाल जरूर था.

लेकिन किसी हाल में महारानी उसको चुहने भी देती, उतार है 'न'..... भले hi उसको हज़ारों साल इंतज़ार करना पड़े. आर्यन अपने नए अवतार में िश जनम में कितना सुन्दर, कितना मनमोहक और अत्यधिक पुरस्थ से लबरेज़ है.

बड़े गुरूजी और महारानी ने भी कल्पना नहीं की थी आर्यन के समर्थ की...... लेकिन क्या महारानी विजयलक्मी ज्यादा प्रभावित नहीं हुई विशाखा को हारते देख कर..... यह भी एक कारन था पर जिस तरह आर्यन ने उसको जिन्दा किया यह कमल था ( 6तह अंश का ). मारने वाले से बचने वाले का नाम सदैव ऊपर होता है.

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हेलीकाप्टर की आवाज जोर शोर से आने लगी तभी एक साया हेलीकाप्टर से छलांगः लगा दिया ..... सब हेलीकाप्टर को देख रही थे...... एक आदमी जोह हवा में तैरता उनकी तरफ गिर रहा था अच्चानक पैराशूट खुला और 25 सेक् में वह लैंड किया.....

यह तोह आर्यन है और यह औरत क्यों थी जोह सटीक महापंचायत की स्टेज पे लैंड किये ...... देखने में तोह किसी राज्य की महारानी सी लग रही थी सब उसको hi देख रखे थे..... सुन्दर इतनी जैसा अपसरा हो पर आर्यन की साथ है तोह बड़ी हस्ती होगी.

औरत आगे बढ़ी और जोर से बोली ," मनवीर सिंह राजपूत क्यों हैं?"

भीड़ हटने लगी, वह आदमी आगे आने लगा," में हूँ तू क्यों है ?"

औरत उसके पास पहुँच कर एक चांटा जोरसे मारी ' चटककक ' ..... " में राजपुताना की महारानी मिरदुला सिंह हूँ ..... जवाब मिल गया ".

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एन्ड ऑफ़ अपडेट 46
 
अपडेट 47 (ा)

आर्यन जब हेलीकाप्टर में आया मिरदुला के साथ तोह पायलट की सीट लीला ने संभल राखी थी..... नीला साइड की सीट पे सीटबेल्ट हेलमेट mic-earphone दिवस पहने बैठी थी.

आर्यन मुस्कुरा की बोलै," रेडी हो लीला मैडम.... यह हमारा आखिरी सफर होगा अगर कोई चूक हो गयी".

नीला तोह पहले से hi दरी हुयी थी और लीला का नाम सुनकर मिरदुला भी दर गयी ," तुम यहाँ क्या कर रही हो लीला बेटी ? आर्यन तुम इसको रोको यह क्या मजाक है ?"

आर्यन ने गेट बंद कर दिया," रिलैक्स मैया..... लीला जी को 700 हरष से ज्यादा फ्लाइट एक्सपीरियंस है और यह चॉपर भी इनका hi है "...... लीला राजस्थान में दूर दूर तक सफर करती थी अपने hi हेलीकाप्टर में.

नीला हैरान सी जवाब दी ," मुझे तोह लीला मैडम बता रही थी की यह इनकी मेडेन (1सत) वॉयेज है ".

इंजन स्टार्ट करते हुए लीला मिछ पे बोली," तुम्हारी सकल देखने वाली थी जब मैंने यह कहा था, Don't वोर्री गन्ने के खेतों की सफारी तुमने करि थी अब फ्लाइट का मजा लो "..... hi hi hi .....

लैंड ऑफ का सिग्नल मिलते hi लीला ने चॉपर को हवा में उड़ने लगी..... मिरदुला को आर्यन ने अपनी गॉड में बिठा लिया ," में हूँ न मैया..... तुझे डरने की जरूरत नहीं..... मैंने पैराशूट पहना है ".

आर्यन से अपने को चिपका के मिरदुला उसके कान में बोली," डर तोह मुझे अपनी मौत का कभी नहीं लगा है पर तुझसे बिछड़ना नहीं चाहती "..... आर्यन के गाल पे किश कर दी उसके गले में बहन दाल कर.

आर्यन भी अपनी माँ का प्यार देखकर फुला न समां और वह भी मिरदुला के चेहरे को पापियों से बहार दिया..... मिरदुला बहोत खुश हुयी अपने बीटा का लाड पाते हुए...... मिरदुला का नया रूप और सुंदरता देखते hi बनती थी, आज आर्यन को अपने पास देखकर उसको कुछ नहीं चाहिए था बस मेरा बीटा और में.

नीला की हेलीकाप्टर की सवारी करते हुए पू पू हो रही थी, लीला का एक्सपीरियंस दिखा रहा था की वह एक त्रिनेड पायलट है...... हैं चॉपर भी उसने अपना खुद माँगा था यहाँ फार्महाउस में तककि आर्यन से मिलने को कोई बाधा न आये.

10 मिनट में 10000 फट से ज्यादा का अलटीटुडे हेलीकाप्टर ने प् लिया था, आर्यन की नज़र बहोत पेनी थी उसने हाथ उठा के चक्कर लगने का इशारा भर किया.... लीला ने thumbs-up किया और आर्यन ने बैक दूर खोल दिया, मिरदुला का वैनिटी बैग अपनी गर्दन में पहना और दोनों बेल्ट उसकी कमर और शोल्डर पे बांध दी.

महापंचायत के ऊपर महरूम कलर का टेंट दूर से छोटा सा दिख गया.... मिरदुला के कान में बोलै ," डर मत तुझे को छोड़ के मैंने भी नहीं जीना हैं.... जब तक जिन्दा हैं तब तक हमेशा साथ रहेंगे".

मिरदुला बहोत बहादुर और निर्भीक महारानी थी..... दर कोनसी चिडया का नाम है उसको नहीं पता था, लेकिन जबसे 21 साल लगभग मूर्छित होकर होश में आयी थी उसको सब याद आ गया पिछले जनम का. तबसे आर्यन को खोने की कल्पना से hi डर जाती थी...... उसको आर्यन पे विश्वास था पर अपनी तकदीर पे नहीं. बेटी तोह उसकी िश जनम में 2 थी पर पिछले जनम के अपने बेटे यानि आर्यन को वह अपने से अलग नहीं की जब तक लैंड नहीं की.....

आर्यन ," मैया हम पहुँच गए"..... और उसकी बेल्ट खोल दी..... मिरदुला ने अपनी आँखें बांध कर ली थी फ्री फॉलिंग के समय जब पैराशूट खुला आर्यन दोनों पैरों के बिच उसकी साड़ी को दबाये लैंड अपने शूज पर लैंड किया.

पैराशूट की डोरी खोल के बेल्ट भी खोली 5 सेक् लगये मिरदुला को वास्तविकता में आने के लिए, सब आर्यन को देखकर खुश थे.

मिरदुला गरज से पूछी ," मनवीर सिंह राजपूत क्यों है ?" ...... उसकी आवाज़ से लगा वह इसी आदमी को ढूंढ़ने आयी है..... आर्यन इसके साथ है पर है क्यों?

स्टेज के आगे की भीड़ से निकलता जोह खुद को बतया की में मनवीर हूँ तोह आगे बढ़ के उसके गाल पे अपनी 5 उँगलियों चाप दी चटककक !!!! ...... " में राजपुताना की महारानी मिरदुला सिंह हूँ..... जवाब मिल गया ".

आर्यन को ऐसी hi उम्मीद थी वह मिरदुला के साथ खड़ा था...... कुछ लोग और आर्यन के घरवाले उसका नाम पुकारे उससे पहले hi मिरदुला ने अपना काम कर दिया.

7 फट हट के इतने हैंडसम डैशिंग सूट में नीली आँखों वाले लड़के को देखकर सब उससे इम्प्रेस्सेड भी हुए hi थे की उसकी सो कॉल्ड मैया ने लीडर को प्रसाद दे दिया था तमाचे के रूप में.

समाज के लोग िश औरत का परिचय सुनकर दांग रहे गए वहीँ आर्यन के गाओं वाले भी मिरदुला को देखते हुए तोह यह महारानी है...... आईएनएस. राजपूत और उसके परिवार में हर्ष की लहर दौड़ गयी की यह तोह महारानी है इनको क्यों विरोध करेगा.

मनवीर सिंह के कान में एक बुजुर्ग आदमी बोलै ," यह तोह मर चुकी थी लेकिन यह जिन्दा कैसे हो गयी, लगती तोह है वही है ".

मनवीर सिंह हकला के बोलै ," हम .... हम.... कैसे मान ले?"

मिरदुला ने उसका दुसरे गाल भी सीख दिया," नमकहराम जब तक तुझे यकीं नहीं आता...... आर्यन बीटा इसको इतने थप्पड़ मार की हम क्यों हैं याद आ जाये ".

आर्यन ने मिरदुला का वैनिटी बैग देकर ," जी माँ जोह आएगा "...... और खुद मनवीर सिंह के सामने खड़ा हो गया.

सब भीड़ से दूर खड़े हो गए मनवीर सिंह के आदमी बिच में रह गए..... बात तोह महारानी की थी और राजा त्रिभुवन सिंह भी यहीं थे अब क्या करें उनको समझ नहीं आ रहा था.

आर्यन आगे आकर," तुझे तोह राजा शब् की बातें पे भी विस्वास नहीं हुआ होगा..... मेरी बात तोह दूर की हैं ...... जब सच्चाई सामने हो तब भी तुझे विश्वास नहीं होगा ".

कुछ लोग दम दबा बहार जाने के लिए निकले तोह बिना और उसके गार्ड ने रोक लिया..... बिना गन दिखा के ," कोई चालाकी नहीं ".

गीता भी आगे आकर," यह कुत्ते की तरह एक hi बात भोंक रहा था की यह शादी नहीं हो सकती..... अब भोंक यह महारानी मिरदुला सिंह हैं और तू जाती से क्या कर्म से भी कुत्ता hi है..... इनके सामने तेरी औकात क्या है जोह खुद को असली राजपूत कहे में होती तोह तुझे एहि गोली मार देती".

आर्यन अपना सूट की स्लीव ऊपर चढ़ा रहा था उसको देखकर कुछ लोग ने थोड़ी हिम्मत की पर मनवीर सिंह का हाथ उसने पकड़ लिए बाकी उसके साथी भी दर गए थे..... हट तोह कुछ की आर्यन के बर्बर थी पर हीरो hi कहना सबसे ज्यादा उचित होगा, आर्यन का नाम सब लोग ले रहे थे यानि हम जिन्दा बच जाएँ एहि गनीमत है...... मनवीर सिंह को सब उसके समाज के आदमी मैं hi मैं कोष रहे थे ' मरवाने का इंतजाम करवा है मनवीर ने '.

मिरदुला ने अपने बैग से पिस्तौल निकल के गीता को दी ," पहले इसकी खोपड़ी खोल गीता बेटी, बाकी सबको खुद याद आ जायेगा".

आर्यन उसका हाथ छोड़ के पिस्तौल पकड़ ली मिरदुला के हाथ से और मनवीर सिंह को जोर से थप्पड़ मार दिया ...... वह एक hi झापड़ में बेहोश हो गया और टेंट की दरी पे धुल चाटने लगा ...... आर्यन जोर से चीखा ,"और किसको कुछ पूछना है..... राजपूत समाज की सबसे बड़ी महारानी जी यहाँ हैं अब वह hi फैसला करेगी..... समझ में आया तुम सब को".

आर्यन ने सोचा था की मैया को देखकर सब की बोलती बंद हो जाएगी..... पर जब मिरदुला ने पिस्तौल गीता को देनी चाही तोह खुद सामने से कण्ट्रोल करने आगे आया. गीता दांत काट कटती रह गयी .....

एक राजपूत बुजुर्ग ," बीटा हम शांति से भी तोह बात कर सकते हैं..... मार पीट से मसले का हल नहीं हो सकता".

आर्यन आगे बढ़ा ," चाचा जी आप तोह समझ दार हैं..... यह लोग अपने राजा और महारानी की बात भी नहीं सुनते तोह मुझे hi फैसला करना पड़ेगा यह बस बेहोश हुआ है मारा नहीं है..... मेरी भें का रिश्ता आईएनएस राजपूत से होगा अगर कोई बिच में आया तोह में भूल जाऊंगा की जिस राजपूत समाज को हम ने बड़े भाइयों का प्यार और सम्मान दिया वह hi चौदर्य माधव सिंह के खानदान से टकराया रहा है. मैया तू hi फैसला कर हम सब उसको मान न होगा ".

राजा त्रिभुवन भी आगये आये ," यह महारानी मिरदुला सिंह जी 21 साल से मूर्छित थी राजकुमारी दीप्ति सिंह के जनम के बाद से..... कुछ hi समय से यह हमारी सामने लम्भी बेहोशी से वापस आयी और जितनी खुसी हमको राजस्थान में इनको देखकर हुयी उतनी खुसी िश प्रदेश में होगी जब यह बात सामने आयी की महारानी जीवित हैं और हमारे परिवार ने यह बात छुपाई. कुंवर महार्यं सिंह इनको अपनी माँ समझते हैं...., अरे आप लोगों को खुश होना चाहिए की गीता बेटी का रिश्ता इतनी तेजस्वी नौजवान से हो रहा है. राजकुमारी दीप्ति सिंह भविष्य में राजपुताना की नयी महारानी घोसित हैं और आर्यन बेटे ने यह स्वयंवर जोह अलवर में हुआ था जीत लिया था..... राजकुमारी दीप्ति, आर्यन की दूसरी पत्नी बनेगी गीता बेटी से शादी के बाद"..... त्रिभुवन ने एक एक बात विराम लेके सब समझे.

धीरे धीरे राजपूत समाज के लोगों को समझ में आ गया की वह किसका विरोध कर रहे थे..... महारानी मिरदुला के सामने सब विरोधी हाथ जोड़कर माफ़ी मांगने लगे ," माफ़ कर दीजिये Maharani-sa ...... आप जोह साजा देंगी हम को मंजूर होगी..... हम अपने कृत्या पे शर्मिंदा है "...... सब घुटनो के बेथ कर कान पकड़ लिए.

आर्यन भी मनवीर सिंह के पास गया और उसके कान के निचे की नस दबा दी....

वह होश में आ गया, आर्यन ने पानी की बोतल उसको दी..... " माफ़ करदे आर्यन हम से गलती हो गयी ".

मिरदुला की तरफ देखकर आर्यन हँसा," पहले पानी पि लो ".

आर्यन ," सरोज दीदी कहाँ है..... आप सब को बहोत इन्तजार करना पड़ा, में अपनी मैया को लेने गया था..... आप सब को विश्वास नहीं होगा यह मेरी पिछले जनम की माँ लगती हैं ".

सप विक्रम एंटर करते हुए ," िश मनवीर सिंह राजपूत को में अरेस्ट करता हूँ..... इसके ऊपर 5 मुक़दमे आलरेडी हैं..... आईएनएस. राजपूत को धमकी देने और माहौल ख़राब करने के लिए यह लम्बे समय तक अंदर जायेगा ".

आईएनएस. राजपूत जोह सब देख रहा था, आर्यन की एंट्री से खुश होते हुए वह इतना हर्षित था की सरोज से शादी तोह पक्की होगी ऊपर से कोई मोह खोलने के लायक नहीं होगा...... महारानी मिरदुला, राजा त्रिभुवन सिंह और सप विक्रम सिंह ने स्टाम्प लगा दी थी और यह सब आर्यन की वजह से हो रहा था.

आईएनएस. राजपूत ," थैंक्स आर्यन ...... आप सही समय पे आये हो "...... आर्यन के गले लगकर वह रो hi दिया.

आर्यन उसको छुप करते हुए ," अरे जीजा जी हमारा भी कर्त्तव्य है की नहीं..... आप यूँ hi रूट रहोगे तोह अपनी भें की शादी कहीं और ...... "

आईएनएस. राजपूत जल्दी से आसूं साफ़ करके," बस ख़ुशी के आंसू हैं, आप ने दिल जीत लिया हमारा ".

आर्यन ," सप शभ, गिरफतार आप इनको बाद में करना, हमारी भें को आशीर्वाद देना दोनों हंसा खुश रहें ".

गीता को बोल कर सरोज दीदी को लेन को कहा. आर्यन की जय के नारे लगने लगे....

आर्यन को देखकर सब जोश से भर गए थे जब वह पैराशूट से किसी सुन्दर औरत के साथ मंच पर लैंड किया. कई को पता था की यह कोई साधारण औरत नहीं है. हाँ लोगो को िश का इतिहास याद है 21 साल पहले का जब वह राजपुताना की महारानी थी. तेवर तोह उसके आज भी काम नहीं थे अभी भी लेकिन ज्यादा तर लोग उसको दीप्ति की माँ मानते थे.

हक़ीक़त में एक और सच्च था मिरदुला का वह पिछले जनम में महार्यं की सगी माँ भी थी..... और वह यहाँ इसी हक़ से आर्यन के साथ आयी थी. यहाँ जोह पॉलिटिक्स हो रही थी आर्यन ने मिरदुला को सब के सामने ला के साबित कर दिया था की उसकी हैसियत बहोत ुचि है. कोई दुबारा मोह नहीं खोल पाएंगे महारानी मिरदुला सिंह के सामने...... अपनी मैया (माँ) बोल के उसका बीटा भी बन गया था जोह हक़ीक़त में वह थी.

रति को अच्छा नहीं लगा मिरदुला के यहाँ देखकर..... गीता भी मिरदुला का साथ देती दिखी रति ने उसको कसम देकर छुप करवा दिया था. लेकिन गीता तोह गीता है वह कहाँ रुकने वाली थी. रति को छिड़ने के लिए मिरदुला का गन गान करने लगी.

सारू और डॉ अंजू को कोई हरिणी नहीं हुयी, वह दोनों माँ बेटे का रिश्ता जानती थी पर रति को अच्छा नहीं लगेंगे Mirdula-Aryan की नजदीकी देखकर..... गीता के रिश्तेदार भी हैरान थे मिरदुला को देखकर, उन्होंने पहले उसको देखा नहीं था पर उसका परिचय पाकर सभी इम्प्रेस्सेड थी. आर्यन उनको मैया कह रहा था तोह क्लोज रिलेशन होगा.

राजवीर सिंह, ठाकुर बलदेव, भीमा और नवाब सिंह भी आर्यन को मान गए..... ऐसी एंट्री ली है सबको छुप कर दिया एक hi बार में.

सप विकर्म ने आर्यन के पास जाकर उसके कान में कुछ कहा तोह आर्यन वाच देखकर उनको रिप्लाई किया..... गीता ने आर्यन को फ़ोन किया ," सरोज तुझसे बात करना चाहती है...... तू फात फैट पंचयत ऑफिस में आजा ".

आर्यन उसको बोलै की आता हूँ फिर सबको सम्बोधित करके कहा ," आप सब भोजन का वेट कर रहे होंगे...... हवं और रस्में तोह बाद में हो जायेगी लेकिन ठाकुर शब् भोजन सुरु करवा दीजिये..... क्यों माँ तू क्या कहती हैं ?"

रति ने जब देखा की आर्यन उसकी तरफ देख रहा है तोह वह निशंक गुरूजी की तरफ देखि जोह आसान पे एक तरफ बैठे थे. गुरूजी ने कहा ," समय तोह भोजन का हो गया है, हमको यह नहीं भूलने चाहिए छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी समारोह में आएं हैं..... पुत्री रसोई पूजा करके भोजन आरम्भ करवा दो..... समय का भी धयान रखना ".

रति ," जोह आज्ञा गुरूजी" आर्यन के पास जाकर ,"आर्यन अपने नानाजी के साथ ठाकुर साहब को भी बुला लो रसोई पूजा के बाद खाना खुलवा दो "...... रति के चेहरे पे फीकी मुस्कान थी.

आर्यन ने अपने नानाजी को ठाकुर के साथ भेजा और सब बड़ों को हाथ जोड़कर नमस्ते करते हुए पंचयत ऑफिस की तरफ भड़ने लगा..... सब घर की औरशन उसके पीछे लग गयी, सारू को साथ लेकर वह सभी महिलाओं के साथ जब पंचयत ऑफिस में गया तोह वहां उसकी साड़ी भेने और सभी मम्मी भी थी.

आर्यन िश सूट में बहोत हैंडसम लग रहा था..... आर्यन को उसकी मुम्मों बहेनो ने घेर लिया वह बोलै ," मेरी सभी मातों और बहेनो एक रिक्वेस्ट है...... सरोज दीदी आप कहाँ हो ?"

पर कोई उसकी सुन hi नहीं रही थी..... एक के बाद के उसके गले लगती और गाल पे किश भी करती..... आज ख़ास दिन था उनके आर्यन के लिए, वह दूर कैसे रह सकती थी गले मिलने से उसको आशीष और प्यार देने से. आर्यन भी जानता था की वह किसी को माना नहीं कर सकता था आखिर उनका हक़ सबसे पहले है.

मिरदुला से त्रिभुवन सिंह ने मिलवाया जोह उनको जानते नहीं थे..... मिरदुला भी सबसे हाथ जोड़ के मिलने लगी. इतनी बड़ी रानी जोह आर्यन की माँ भी लगती थी सब उसके सामने हाथ जोड़ देते सर झुका के.

गीता ने आर्यन को आवाज दी ," लत साहब अगर सबसे मिलने हो गया हो तोह अपनी भें सरोज से भी मिल ले"...... सब लड़कियां और औरतें हसने लगी..... " एक तोह इतनी दिएर से आता है फिर ऐसे मिल रहा है जैसे बहोत टाइम हो".

कविता मामी ," हम तोह चले hi जायेगे तब तू अपने मिया से gutar-gu करती रहना"...... आर्यन के साथ सभी हसने लगे.

गीता भी कहाँ काम थी सब के बिच फैसे आर्यन को हाथ पकड़ के औरतें की भीड़ से निकली ," बस बहोत हो गया..... यह यहीं रहेगा जरा सरोज को मिलने दो".

डॉली जोह आर्यन की एक बहन पकड़ के बैठी थी ," भाई के साथ में भी जाउंगी ".

गीता उसको आँखें दिखाई," डॉली 5 मं बाद यहीं तेरे पास आ जायेगा ".

सारू ," आर्यन देखना सरोज को कोई दिक्कत तोह नहीं "..... वह भी आर्यन को भेजने में गीता की मदद कर रही थी.

सरोज दीदी दुसरे रूम में थी जोह छोटा था बस मीणा और आर्यन की बुआ वीरा hi उसके पास थे. जब गीता के साथ आर्यन सरोज दीदी के रूम में गया तोह गीता ने दरवाजा बंद कर लिया.

कमरा में पुराणी फाइल्स दो बड़े बक्से में पड़ी थी जिनको साइड कर दिया था..... एक पुराणी मेज और 3 कुर्सी भी साइड कर दी थी. रूम में पुराण सीलिंग फैन टेंगा हुआ था दादा बाबा अलाम के ज़माने का..... एक नई स्टैंडिंग फैन भी था जोह ज्यादा हवा दे रहा था. कमरे में पुराण रंग रोगन था, कड़ी और ईंट की रूफ थी और गोबर लीप के फर्श बना हुआ था.

आर्यन को देखकर सरोज दीदी की रोने की आवाज आने लगी जोह उठकर अपने छोटे भाई से लिपट गयी. वीरा बुआ ने उसको याद दिलाया ," अरे कम्बख्त इतनी जोरसे से मत रो वार्ना सबको पता चल जाएगा".

आर्यन अपनी बड़ी दीदी को गले लगा के अपनी बुआ से पुछा ," हुआ क्या है ? कोई मुझे भी बटेगे क्या ? दीदी क्यों रो रही है ?"

मीणा कड़ी होकर बोली ," सरोज दीदी यह शादी नहीं करना चाहती हैं".

वीरा बुआ गुस्सा दबा के बैठी थी वह भड़क गयी ," मैंने तोह पहले hi बोलै था..... िश पर तोह इश्क़ का जानूं चढ़ा था.... अब आई अकाल ठिकाने हमारी नाक कटवा दी िश लड़की ने".

आर्यन प्यार से दीदी के सर पे हाथ फेरते बोलै," मुझे दीदी से पोछने दो और मम्मी (बुआ) ऐसी जाली कटी मत कहो दीदी को".

वीरा बुआ ," तू hi संभल इसको में िश लड़की से टांग आ चुकी हूँ..... यह अपने भाई को भी लोगों से पिटवागी देख लेना".

आर्यन ," मुझे पूरी बात बातो यह सगाई क्यों नहीं करनी है आपको ? सुबह तो आप बहोत खुश थी..... चंदा रानी तू दीदी को संभल में मम्मी ( वीरा) से बात करता हूँ ".

आर्यन ने वीरा बुआ के पास गया और साडी बात सुनी तब वीरा के माथा पे किश करके बोलै," जब तक में जिन्दा हूँ मेरे भें को अधिकार है की वह किस्से अपना वर चुने.... दीदी यह जोह लोग आये थे विरोध में यह समाज के लिए पिस्सू हैं..... आईएनएस. राजपूत ाचा लड़का है वह आपको हमेशा खुश रखेगा. मीणा जरा बहार जा और मम्मी के साथ चंदा रानी को भी ले जा में और दीदी 5 मं में आ रहें हैं".

मीणा हसकर ," सरोज दीदी अभी तोह सगाई हो रही है शादी में टाइम हैं..... भाई तू इनको ठीक से समझ"..... आँख मार के मीणा िश्रा की.

तीनो कमरे से बहार गए तोह आर्यन ने दरवाजा मिला दिया और पॉकेट से रुमाल निकल के सरोज दीदी के आंसुओं को साफ़ करने लगा. सरोज ने एक डिज़ाइनर लाइट पिंक लंहगा और लाल मैच की चुनरी पहनी हुयी थी. हैवी ज्वेलरी के साथ मेहँदी और मेकअप उसको किसी पारी से काम नहीं दिखा रहे थे.

वेरा बुआ की साड़ी बेटियां एक से एक सूंदर थी, खासकर पायल और सरोज ज्यादा सुन्दर दिखती थी...... उनकी हट भी ज्यादा थी और गाल दोनों के टमाटर की तरह लाल लाल थे. आर्यन अपनी दोनों बुआ को मम्मी hi कहते था, वीरा बुआ की सकल आर्यन से बहोत मिलती थी..... पायल भी आर्यन जैसी लगती थी पर सरोज के भी नैन नक्श आर्यन से मिलते थे. सरोज काम उम्र में विधवा हो गयी थी उसका पति फौजी था जोह वीरगति को प्राप्त हुआ.

आईएनएस. राजपूत ने जब सरोज को देखा तोह उससे पहली नज़र में प्यार हो गया...... सरोज भी इंस्पेक्टर को पसंद करने लगी थी पर अपने भाई आर्यन की इज़्ज़त वह सबसे ज्यादा करती थी. आर्यन के कान में भी यह बात सुनाई दी पर उसने ज्यादा रियेक्ट नहीं किया, वह जानता था उसकी भें ऐसा कोई काम नहीं करेगी जोह लोग उसकी तरफ ऊँगली उठें.

आर्यन ने मेज का सहारा लिया और अपनी दीदी सरोज को अपनी गॉड में बिठा लिया. सरोज भी अपने छोटे भाई का प्यार देखकर उसके गाल को सहलाने लगी और उसके कंधे पे सर टिका के बोली ," माहि मेरे भाई िश रिश्ते से लोग खुश नहीं हैं. में कभी बर्दास्त नहीं करुँगी की मेरे भाई का सर किसी के सामने झुके...... तू ने सारे परिवार की स्त्रियों को अपनी चतर चाय में रखा है, में भी खुश रहूंगी तेरे साथ. शादी की बात अभी रोक दे कहीं दिएर न हो जाये ".

आर्यन भी समझ रहा था की सरोज क्या कहना चाहा रही है...... आर्यन ने अपनी साड़ी स्त्रियों को हमेशा प्रोटेक्ट किया है वह बात अलग है की उनको प्यार भी देना पड़ा और सब खुश रहती हैं आर्यन के साथ...... लेकिन सरोज भी एक भें थी आर्यन की अगर उसको कोई अच्छा जीवन साथी मिल जाये तोह बुराई क्या हैं.

आज िश घमासान के बाद सरोज के रिश्ते से सबको प्रॉब्लम थी और उसने खिड़की से देखा भी था की राजपूत समाज के कई आदमी काले झंडे लेकर विरोध में सामने आये. मीणा ने खिड़की तोह बांध कर ली पर िश बात का प्रभाव घेरा था सरोज के दिल पे और कहीं न कहीं वह खुद को कसूरवार मान रही थी.

आर्यन अपनी दीदी के सर को चूमा ," दीदी तू एक बात जान ले..... जब कुछ नया होता है तोह अधिकतर वह लोगों को पसंद नहीं आता..... लेकिन समय के साथ यह बदलाव हम भी महसूस करने लगते हैं...... इंस्पेक्टर की आगे बिलकुल परफेक्ट है शादी के लिए अगर 5-7 साल बाद अगर ुशी को hi चुनना हैं तोह आज क्यों नहीं".

आर्यन के तय से खेलती हुयी सरोज कुछ सेकंड चुप रही फिर हिमत करके बोली," छोटू (आर्यन) मीणा की तरह अगर में..... (10 सेक् पॉज)...... मतलब डॉली ..... तू समझ रहा हैं न में क्या बोल रही हूँ "....... आर्यन के तरफ नज़र उठा के देखि उसकी नीली आँखों में झाँकने की कोशिश करने लगी.

आर्यन भी अपनी दीदी की मनसा समझ के पुछा ," में समझ रहा हूँ, तुझे से में हमेशा प्यार करता रहूँगा चाहे तू राजपूत को चुने या किश और को...... तू मेरी भें है..... महार्यं की भें..... और मेरी सब बहेनो की तरह तेरा भी हक़ है परन्तु ..... परन्तु..... परन्तु में चाहता हूँ की इंस्पेक्टर को एक मौका मिलना चाहिए और वह तेरे प्यार के लिए कुछ भी कर सकता है..... ाजमलेना वह देगा नहीं करेगा".

सरोज ने पहले भी अपनी छोटे भाई के लिप्स पे किश किया था लेकिन अब जोह हो रहा था वह उसको लालची कहना सही होगा..... यानि आईएनएस. राजपूत उसको अपनी दुलहनिए बनाना चाहता था और सरोज अपनी छोटे भाई आर्यन के लिप्स ? बिंदास होकर चूस रही थी ...... पुछहःहःहः चम्म्म्म ममममममम ममममममम ुहम्म्म्म मममममम......

"फूलों तारों का ..... सबका कहना है.

लाखों हज़ारों में मेरी भेना है....

साड़ी उम्र हमे सांग रहना है .... "

मीणा कब कमरे में आयी दोनों भाई भें को पता नहीं चला यानि आर्यन भी सरोज के साथ मदहोश हो गया किश करते हुए..... मीणा ने ये गाना दोनों के लिए गया था.....

__________

कुछ समय बाद .......

आर्यन के साथ उसकी सरोज दीदी उसका हाथ पकड़ के मंडप की पास आने लगी..... 6 बड़े बड़े एलसीडी स्क्रीन पे यह लाइव टेलीकास्ट चल रहा था. पीछे पीछे आर्यन की सभी मम्मियां, साड़ी बहने भी आती जा रही थी साथ में रति के कुनबे की लेडीज भी थी.

महापंचायत प्रांगण के सारे हिस्सों में अलग अलग स्क्रीन पे यह hi नज़ारा दिख रहा था..... फंक्शन की भीड़ तोह इतनी सुन्दर सुन्दर औरतें और लड़कियां को एक साथ देखकर एहि सोच रही थी की जैसे इतनी साड़ी अप्सराओं का मेला सा लगा हो. ठरकी लोग भी अपने लिंग को मसलने से बाज न आये.

दज की धुन में प्यारी भेना का संगीत बज रहा था..... आईएनएस. राजपूत एक डबल सोफे पे बैठा था शेरवानी और पगड़ी पहने और एक तलवार उसको हाथ में थी..... उसकी माँ और 2 बहेनो 2 जीजा और 3 बच्चों भी थे, दोनों बहेनो ने आगे बढ़कर सरोज का हाथ पकड़ा और उसको लेकर खली जगह सोफे पर उसको आईएनएस. राजपूत के साथ बिठा दिया.

सारू और मिरदुला के साथ आर्यन और मीणा 14 फट की दुरी पर पूजा की बेदी के सामने बैठे थे..... एक थल पूजा की सारा सामान लिए पंडितजी के अस्सिस्टेंट ने आर्यन के सामने राखी..... दूसरी तरफ 2 पंडितजी और रति व् राजवीर बैठे थे. गीता और आर्यन की साड़ी मम्मी और भेने एक तरह बेदी के नार्थ साइड बैठे थे. साउथ साइड आर्यन के फॅमिली मेल मेंबर्स ( कुछ नखलि) बैठे थे. गीता के रिश्तेदार औरतें और लड़कियां भी उसके पीछे बैठी थी.

आर्यन ने चरों तरफ देखा तोह अणि स्टेज पे अपनी सेक्रेटरी के साथ बैठी थी...... आर्यन ने खड़े होकर सीटी मारी और अणि को आने का इशारा किया..... अणि ने उसको हाथ दिखाया की आती हूँ.

आर्यन निच्चे बैठा और मीणा के कान में बोलै ," बाचे कहाँ रह गए ".

मीणा ने मुस्करा के हाथ का इसारा किया ," गुल और बबिता को एंटी जल्दी भूल गया".

आर्यन ," बच्चों को पूछने का मतलब उनकी मम्मी और बच्चे भी हैं"...... हमर आके रुकी तोह आर्यन की बीवी गुल और बबिता दोनों सुन्दर सुन्दर लहंगा में अलग hi चमक रही थी..... साथ में महिमा , राहुल और रौशनी गाड़ी से निकले...... सुन्दर सुन्दर बच्चे आकर्षण का केंद्र बने हुए नए नए सूंदर परिधान में सजा हुए किसी देश के राजकुमार और राजकुमारी लग रहे थे.

आर्यन फिर से खड़ा हो गया तोह एक पंडितजी ने टोका ," आर्यन बीटा तुम बार बार खड़े मत हो...... पहले तुम्हारा hi तिलक करना है और संकलप भी लेना हैं".

राजवीर सिंह ," बच्चे यहीं आएंगे आर्यन..... तुम बैठो जायो ".

कैमरा बच्चो पे फोकस हुआ तोह एक से एक बढ़कर सुन्दर बच्चों ने जनता का दिल जीत लिया..... खासकर महिमा जोह ताली बजा के अपनी मम्मी की गॉड से छिटक आर्यन के पास आने लगी...... लीला और नीला दूसरी कार में पहुंची.

अब तोह सब यहीं आ गए थे...... आर्यन की गॉड में महिमा बैठी थी, राहुल अपनी मम्मी कविता ममी की गॉड में बैठा था जोह गीता के साथ बैठी थी. रौशनी को आर्यन ने अपने पास बुलाया तोह लीला ने कहा ," में इसको संभालती हूँ Kuwar-sa आप रीती रिवाज भी ध्यान दें".

लीला को आर्यन ने साथ बैठने को कहा तोह वह भी उसके पीछे बेथ गयी रौशनी को गॉड में बैठा के..... अणि को आर्यन ने सारू की साथ बिठाया. सारू और रति को यह ाचा नहीं लगा पर अणि अपनी रहस्मयी मुस्कान लिए अपने भाई का प्यार देखकर अत्यंत खुश थी.

वहीँ राजवीर सिंह भी थोड़ा बेचैन लगा, अणि के यूँ आर्यन के साथ बैठे देखकर..... अभी तक उसके कान में अणि के स्तब्ध गूँज रहे थे. वह आर्यन से प्यार करती है और आर्यन को पाने के लिए वह कुछ भी कर सकती है यह बात भी राजवीर को पता थी...... जिद्दी तोह अणि थी hi पर राजवीर को एक दर और सत्ता रहा था की बाकियों का क्या होगा जोह आर्यन की बीवियां बनना चाहती है या बन गयी हैं...... उसकी चिंता जायज थी.

निर्मला के साथ प्रभा और पातळ लोक की रानियां भी गोल्डन कलर की आलीशान कार से उतरी जिसपर कोई लोगो नहीं लगा था. वास्तविकता में यह पातळ लोक का एक यान था जिसको कार का रूप दिया था.

जब वह सब बहार निकली एक एक करके तोह आर्यन अपनी बेटी महिमा को उनकी तरफ देखकर किश कर देता..... " साला मुझे मारने का इंतजाम करके आयी हैं सब की सब..... फोकस यार फोकस तेरी बेटी तेरी गॉड में बैठी है." आर्यन सच मच कण्ट्रोल कर रहा था की उन्ह सब की हुस्न का जादू न चले.

अणि ने कहा ," भाई आप महिमा को मुझे दे दो आप रिलैक्स से बैठो "...... माहि को अणि ने अपनी गॉड में ले लिया.

अभी आयी प्रभा और सब गीता के गले मिलकर बधाई दी और उसके पास बेथ गयी.

म्यूजिक रोक के दो पंडितजी के आगे माइक कर दिया गया..... वैदिक श्लोकों के उच्चारण के साथ आर्यन को टिका लगाया गया फिर हाथ में कलवा बांध कर आर्यन ने भी दोनों पंडितों को टिका लगा के कलवा बांध.

डॉ अंजू के साथ नीला और मोना 2 नए बड़े बड़े सूटकेस लेकर आयी जोह सारू के साइड में रख दी...... मंतर के शोर में आर्यन का हाथ दोनों सूट केस पे लगवा के सरोज का नाम लिया.

गीता को भी आगे आने को कहा और उसके माथे पे बिंदी और कलवा बांध के उसके हाथों से दोनों सूटकेस को खुलवा दिया...... एक में सरोज के लिए सारे उपहार थे दुसरे में आईएनएस. राजपूत और उसकी फॅमिली के लिए उपहार थे.

गीता ने एक पंडितजी के कान में कुछ कहा तोह दुसरे पंडितजी ने उनको कहा तोह वह हाँ बोले जरूर कीजिये. गीता ने पंडितों की परमिशन मांगी... रिंग सेरेमनी के लिए.

रति ने कहा ," एक मं में महाराज से पूछती हूँ वार्ना देवी माजी ( आर्यन की दादी) नाराज होंगी ".

राजवीर सिंह ," वह भी मन नहीं करेंगे लेकिन आर्यन को सब विधि वैट करना होगा ".

रति ने निशंक गुरूजी के पास जाकर पुछा तोह उन्होंने आएगा दे दी पहले सरोज पुत्री की रीती के साथ फिर वर राजपूत की रीती के साथ..... अंगूठियां आदान प्रदान आखिरी में करना. रति को बोले की आर्यन जनेऊ और सफ़ेद धोती में हवं करना होगा.

पहले आईएनएस. राजपूत की दोनों बहेनो ने सरोज का सिंगार किया चूड़ियां, बिंदी, लिपस्टिक, 5 साड़ी और बाकी कपडे दिए. 3 सेट ज्वेलरी और 2 सेट बिछवाये , 4 सोने के कंगन दिए. सिन्दूर लगाने को बहस हुयी तोह मिरदुला ने कहा की सिन्दूर लगाने से लड़की पूरी तरह से अपनी जाती है..... सिन्दूर लड़के की भें भी लग सकती है.

सरोज की मांग आईएनएस. राजपूत की बड़ी भें भर दी..... मीणा ने आर्यन के कान में कहा ," अपनी सरोज दीदी को खली पेट मत भेजना..... अगर वह तेरे पास खुद चल के आये कभी मन मत करना ".

आर्यन हसकर ," दीदी ऐसी नहीं है..... किसी को तोह छोड़ दे, हमेशा साख करती है".

मीणा तांज मारते हुए धीरे से कान में केहि ," हाँ भाई किश तू करे, दीदी के बूब्स तू दबा और वह भी अपना पिछवाड़ा रगड़े तेरे हथियार पर..... हम को क्या पर सोचना जरूर ".

आर्यन ने जब सरोज को देखा तोह वह भी उसको देखकर शर्माने लगी पर उसके चेहरे पे मुस्कान थी. शायद आज से ज्यादा वह इतनी खुश कभी नहीं हुयी वजह भी थी एक इतना प्यार करने वाला भाई था..... दूसरा आईएनएस. राजपूत वह जोह खुद दिल हार गया हो सरोज के सामने..... चॉइस थी उसके पास पर वह अपने भाई आर्यन को चुन ली थी लेकिन अभी किसी को बताई नहीं थी पर जाने वाली भी समझ गयी थी की सरोज डबल नव की सवारी करना चाहती है..... मीणा सही थी जब आर्यन की चोरी पकड़ी गयी थी.

आर्यन चाहता तोह सरोज को मन भी कर सकता था...... लेकिन अपनी भें सरोज को दुखी नहीं देख सकता था. उसको जोह चाहिए था वही मिल भी रहा था, अपने भाई के साथ पति का प्यार भी.

मीणा जानती थी की सरोज दीदी पक्का आर्यन से यह वडा चाहेगी की वह हमेशा खुश रहे. इसका मतलब यह तोह नहीं एक साथ एक मुफ्त..... मुफ्त से याद आया सरला दीदी भी हैं मेरी लिस्ट में पर एक और है जोह गीता की फवौरीते है.

मीणा को हिलाया आर्यन ने ," कहाँ खोई हुयी है पक्का कुछ प्लान बना रही है ?"

मीणा आर्यन के माथे पे किश करके बोली," बाद में बताउंगी..... आल था बेस्ट" ? हसकर वह कड़ी हो गयी .....

आर्यन को जब सारू ने आकर कान में कुछ कहा तोह वह निशंक गुरूजी की तरफ घर के देखा जोह मुस्कुरा रहे थे...... फिर अपनी माँ रतिदेवी की तरफ दोनों हाथ उठा के इशारे से पुछा तब रति ने उसको इग्नोर करते हुए गीता की तरफ मुँह घुमा के बात करने लगी.

आर्यन को रति के ऐसा व्यवहार की अपेक्षा कदापि नहीं थी, वह रति की तरफ जाने के लिए उठता इससे पहले उसकी मैया मिरदुला ने उसके कंधे पे हाथ रखकर कहा," आर्यन बीटा तुम परेशां हो ? क्या बात है ? मुझे नहीं बताओगे?"...... पंडितजी हवं की त्यार करने लगे.....

आर्यन फिर से रति की तरफ देखा उसके दिमाग़ में कोंढा ,' मेरी एक और माँ ( मैया) भी है कोई नहीं उसको बताता हूँ ' ...... " मैया कुछ परेशानी नहीं है तू मेरे साथ आ "...... मिरदुला का हाथ पकड़ के आर्यन 10 मं बोलकर पंडितजी को पंचयत के ऑफिस में ले गया.

सब लेडीज में होड़ लगी थी नई ेंगगड़ कपल्स के साथ सेल्फी और फोटो लेने की, आर्यन पे भी सबकी निघा थी पर वह अपनी मैया के साथ वहां से चल गया. पता तोह सबको चल गया था की रानी मिरदुला आर्यन की मुँह बोली एक और माँ है पर क्यों पूछे कहाँ जा रहे हो? आखिर वह महारानी तेरी..... रति ने भी देखा था दोनों को जाते हुए लेकिन उसकी जलन इतनी थी की मेरी अल्वा आर्यन कैसे ुष 2 दिन पहले आयी हुयी मिरदुला को माँ कहने लगा...... मुझे तोह कभी पैराशूट में नहीं सफर नहीं करवा.

मिरदुला हमेशा रति के लिए कॉम्पिटिटर थी जब से वह आयी थी...... रति को इसका अहसास दिएर से हुआ पर वह इग्नोर करती थी. ' जब मेरी सगी बेटी सारू बोलती है की में आर्यन की एकलौती माँ हूँ भले मैंने अपनी कोख से जनम नहीं दिया हो फिर मिरदुला क्या चीज़े है. 2-4 दिन यह लगवा रहेगा फिर मेरे पास hi मेरा बीटा सोयेगा'...... लेकिन सारू के साथ आर्यन ज्यादा सोने भी लगा और सारू भी अपने बेटे के लिए हमेशा प्यासी रहने लगी.

सारू की जरुरत आर्यन पूरा प्यार देकर कर रहा था..... उसकी ख़ुशी में सारू अपनी ख़ुशी मानती थी परन्तु अणि का क्या करे...... सारू की सोच से रति ने उसको जगाया ," सारू देख आर्यन कहाँ गया है ?"

सारू हड़बड़ा के ," देखती हूँ "...... उसको अणि hi अणि नज़र आ रही थी जबसे अणि ने एलान किया था. अणि हमेशा से बिंदास थी और अभी भी वह बेफिक्र दिखी. सारू ने एक नज़र मार के अपनी बेटी के हुस्न की मैं hi मैं तारीफ की और आर्यन के पास चली गयी...... "मेरी बेटी मुझसे सुन्दर है".

2 रूम छोड़कर आर्यन उसको under-constructed रूम में मिला..... मिरदुला आर्यन के कपडे यानि सूट खोलकर शर्ट खोल रही थी वहीँ आर्यन उसको गाल पे किश करते गुल गुली करता......

सारू को देखकर आर्यन ने अपने होंठों पे जीभ फेरी और आँख मार दिया...... मिरदुला उसके शर्ट के बटन खोल रही थी. आर्यन को जब पता चला की सिर्फ धोती में hi हवन करना है तोह रति से पूछता उससे पहले उसने मुँह फेर लिया. मिरदुला ने आर्यन को समझाया," यह एक पवित्र रिस्ते की नीव राखी जा रही है. गीता तेरी pat-rani यानि सबसे ऊँचा ौधा लेगी तेरे जीवन में".

आर्यन ," मेरी मैया से ऊँचा मेरे लिए कोई नहीं है "...... रति का नाम लेने वाला था परन्तु अब दिएर हो गयी थी.... मिरदुला का नाम लेकर आर्यन ने उसकी आत्मा भी जीत ली हो ऐसी ख़ुशी उसके जीवन में न आयी थी. "आर्यन के लिए में हूँ सबसे अच्छी माँ जोह उसको बेशुमार प्यार करती है और वह मुझसे. मैंने पिछले जनम की गलती सुधर ली है"....... " मेरा सबसे ाचा बीटा आर्यन "..... पुछहःहःहः पुछठ पुछहःछः चम्म्म्म चममम.....

आर्यन की दूसरी माँ का बुलावा आया तोह मिरदुला को हटा के सारू की तरफ बढ़ा क्योंकि उसने फ्लाइंग किश आर्यन पे उछाल कर आँख मार दी थी...... सारू दो कदम पीछे हटी hi थी आर्यन फुर्ती से आगे बढ़ा और सारू को दोनों हाथों में उठा लिया...... " नहीं आर्यन मेकअप ख़राब हो जायेगा..... प्लीज ी साइड no "..... सारू बोलती रही पर आर्यन तोह आर्यन था वह अपनी मम्मी को दूर दूर से देखता रहा फंक्शन में लेकिन यह मौका कैसे गवा देता..... "पुछहःहःहः पुछठ ..... चम्म्म्म चममम ..... ुहममममम ुहम्म्म्म मममममम ममममममम ममममममम ...... "

मिरदुला भी मूक दर्शक बानी माँ बेटों को ...... नहीं नहीं दो प्रेमी कहना सही होगा..... जोह चोंच से चोंच मिलते बेशर्मो की तरह अब एक दुसरे के होंठों पे पिल गए थे...... ऐसा लग रहा था की जनम जनम के प्यासे हों....... मिरदुला भी कुछ कह नहीं पायी पर उसकी साड़ी पेटीकोट के निचे पंतय में नमी जरूर आ गयी थी. सारू एक अप्सरा जैसी सुन्दर थी वहीँ आर्यन एक देव तुले, पुरस्थ से भरपूर मनमोहक नौजवान था. दोनों की उम्र एक सी लगती थी यानी 25 साल.

( वास्तविक आगे ....आर्यन 21 साल का था सारू 38 साल की थी)

सारू पूरा साथ दे रही थी किसी की फ़िक्र न करके, शायद वह जुर्रत से ज्यादा सोच ली थी...... उसका बीटा उसको अच्छी तरह से समझता था, उसको लग गया था की मम्मी बेचैन लग रही है. रानी मिरदुला को सबसे प्यार करना सीखना होगा मेरे साथ यह आर्यन सोच रहा था पर मिरदुला उसकी पिछले जनम की माँ थी यानि महार्यं की जिसको एक बाजारों औरत की तरह पेलता था, सामूहिक चुदाई करते हुए जहाँ उसकी कई बीवी और सेज खून वाली भी शामिल होती थी.

मिरदुला को आर्यन काम आंक रहा था हकीकत में शरीर बदला था आत्मा नहीं. Maharani-sa थी वह राजपुताना की और अपने बेटे की रखीअल भी थी. दोनों जनम का मिश्रण क्या क्या रंग लाएगा यह तोह बाद में पता चलेगा फिलहाल आगे बढ़कर बोली," मैं भी तोह तेरी माँ हूँ सिर्फ सारू का हक़ है तेरे प्यार पर मेरा नहीं ".

सारू ने आर्यन के लिप्स छोड़े, आर्यन भी गर्दन हिला के दुसरे हाथ से मिरदुला को उठा लिया...... एक पुराणी बाण की चारपाई िश कमरे में पड़ी थी, अभी प्लास्टर नहीं हुआ था तोह दिवार खुरदुरी थी. आर्यन दोनों को ऐसे उठा के लाया जैसे कोई वजन न हो दोनों का....... मिरदुला अपने को रोक नहीं पायी आर्यन को किश करने लगी.... पुछहःहःहः पुछठ पुछहःछः.....

चारपाई पे बैठकर दोनों को अपनी गॉड में लेफ्ट राइट एडजस्ट किया ," तेरा हक़ सबसे ज्यादा है, मुझे पिछले जनम का कुछ याद नहीं पर अपनी मैया को प्यार करने का हक़ मुझे िश जनम में है "..... पुछहःहःहः पुछठ चम्म्म्म चममम ुहममममम.....

सारू जोह आर्यन का सीधा कान चाट रही थी वह तुरंत बोली ," तू पिछले जनम में भी मादरचोद था िश जनम में भी..... hi hi hi hi.... क्यों मिरदुला माँ जी में ठीक कहा न ..... hi hi hi hi ".

आर्यन किश तोड़कर बोलै," में सिर्फ प्यार करता हूँ क्यों मैया..... पुछहःहःहः ..... बहोत प्यार ..... सच्चा प्यार ..... पुछहःहःहः ..... गलियों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, सच्ची तोह नहीं बदल जाएगी...... हाँ मुझे प्यार है मेरी बहेनो से मेरी मुम्मों से कोई मेरा जोह उखाड़ना है उखड ले में किसी के बाप से नहीं डरता ".

मिरदुला ने आर्यन के मुँह पे हाथ रखा," इतना शोर क्यों मचा रहा है, सब को सुन्ना है क्या ?"

कमरे के बहार से आवाज आयी ," जिसको सुन्ना था उसने सुन लिया है" ...... hi hi hi hi hi hi ...... यह मीणा की आवाज थी.

पर कमरे में 4 और लडकियां देखकर आर्यन भी 1 को देखकर चौंक गया..... अपने मैं में बोलै "अब्बे यह लेडी टार्जन क्या कर रही है यहाँ, मीणा को क्या जरुरत थी इसको लेन की "...... Dimple-Payal भी हस्ते हुए कमरे में आयी ......

मिरदुला को लगा यह लड़की नयी hai....."Ae लड़की तेरी हिम्मत कैसे हुयी हमारी इजाजत के बगैर यहाँ आने की "...... उसने अपने वैनिटी बैग से पिस्तौल निकल के 4तह लड़की पे तान दी.

बात तोह सही थी यह लड़की दुसरे खानदान की थी पर वह बिलकुल दरी नहीं अपितु गन के आगे जाकर अपने माथे पे एआईएम लग के बोली ," मैं भी अपने दीदी और जीजाजी की तरह किसी से नहीं डर्टी, Maharani-sa बेहिचक गोली मार दो".

मिरदुला सोची ,"यानि गीता की भें लगती है पर है क्यों" ????

आर्यन सोच रहा था मीणा की तरफ देखकर ..... वह हाँ में गर्दन हिला रही थी और आर्यन न न में .....

तो बे कॉन्टिनोएड.....

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अपडेट 47 (बी)

मीणा के साथ Dimple-Payal भी मंद मंद मुस्कारने लगी जब प्रज्ञा की बोल्डनेस से आर्यन और मृदुला इम्प्रेस थे ..... पिस्तौल के सामने अपने माथे पे एआईएम सत्ता के वह जारा सी भयभीत नहीं हुई. सारू को लगा की प्रज्ञा ने उनका सारा वार्तालाप सुना परन्तु मीणा को आर्यन का इशारा यह साबित कर रहा था की वह प्रज्ञा को पानी में उतर चुकी है.

आर्यन का मुड़ी न में हिलना और उसकी तीनो जुड़वाँ भें शरारती हसी हसना उसको फसा दिया. आर्यन को प्रज्ञा पसंद थी उसमे अपनी चंदा रानी (गीता) का अक्ष दीखता था उसमे लेकिन गीता को वह नाराज नहीं करना चाहता था..... गीता भी जानती थी प्रज्ञा सिंह जैसी शेरनी आर्यन को पसंद आएगी तभी तोह वह प्रज्ञा को इशारों इशारों में सन्देश भी दे चुकी थी. आर्यन को यह नहीं पता था इसी का फ़ायदा उसकी भेने उठा रही थी.

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प्रज्ञा सिंह

मृदुला रौब से ," क्या नाम है तेरा छोरी, गीता की भें हैं इसलिए तेरा खून ज्यादा hi उछाल मार रहा है..... (गन हटा कर) ...... मेरे बेटे के लिए यह दिन बहोत बड़ा है, जोह यहाँ की बात सुनी है उससे एक कान से दुसरे से निकल देना इसी में तेरी भलाई है ".

प्रज्ञा ने पीछे हैट कर मृदुला की संदेल बारी बारी से अपने माथे पे लगये ," Maharani-sa आप के साक्षात् दरसन से में धन्य हो गयी..... मैंने आप के वीरता की गाथा के कई किस्से सुने हैं, राम***** का किस्सा सबकी जुबान पे है हम भूले नहीं हैं आपको".

सारू कुछ सोच के बोली ," राम***** में क्या हुआ था ?"

मृदुला की पारखी नज़र में यह लड़की पूरी तरह से जाँच गयी, कुछ बात है िश लड़की में, उसका सम्मान तोह सब करते थे पर यह बहोत पुराणी बात है ुष समय तो यह पैदा भी नहीं हुई होगी.

"ठीक है मेरी तारीफ बहोत हो गयी, हम यहाँ आर्यन बेटे की सगाई के लिए तयारी करने आये हैं. तुम बहार देखो क्या हो रहा है हम आर्यन के साथ आते हैं ".

प्रज्ञा ," जी Maharani-sa जोह हुकुम " ..... सर झुका के वह कमरे से बहार चली गयी.

आर्यन आराम से बोलै," यह किसी को बता तोह नहीं देंगी ? चंदा रानी की कजिन भें है उसको पक्का बोलेगी hi ".

मिरदुला आर्यन के बालों में ऊँगली फेरती हुई बोली ," तू चिंता मत कर में उसको देख लुंगी..... सारू तू हमारे बेटे को धोती पहन दे में अभी आयी ".

Dimple-Payal एक साथ बोली," छोटू को हम त्यार करते हैं".

मीणा ," मैंने धोती भी ले ली है.... भाई जल्दी से अपने सारा कपडे उतर".

सारू कुछ बोलती उससे पहले तीनो एक साथ आर्यन के कपडे उतरने लगी..... आर्यन बोल रहा था की में कर लूंगा पर वह कहाँ मानती..... वह न नुकुर करता रहा एयर तीनो ने 1 मं में आर्यन को पूरा नंगा कर दिया इवन डिंपल ने उसका अंडरवियर भी जबरदस्ती उतर दिया. चरों हसने लगी hi hi hi hi ..... तोपची अभी सुप्त अवस्था में था पर अभी भी सारे मर्दों से आकर में बड़ा था.

कहाँ तोह सुइटेड बूटेड त्यार हुआ था पर अब देखो बड़ा लुंड धरी अपनी मम्मी और सिस्टर्स के बिच नंगा खड़ा था...... मिरदुला जब 2 मं बाद वापस लौटी तोह आर्यन ने शर्म से आगे हाथ लगा लिया.

आर्यन कुछ खोजते हुए ," धोती कहाँ हैं ? ुष पाखंडी को में नहीं छोडूंगा, यह सब उसकी वजह से हो रहा है"...... वह खीज hi गया था यह बोलते हुए.

मीणा ने मजे लेते हुए कहा," भाई तू ऐसे क्यों शर्मा रहा है जैसे हम तुझे पहली बार ऐसी अवस्था में देख हैं".... hi hi hi ......उसके गाल पे किश करके आगे बोली ,"जिसने की शर्म उसके फूटे करम" ..... है है है है

बात यह थी की आर्यन का लौड़ा सर उठाने लगा था..... सारू चारपाई पे बैठी आर्यन के मस्कुलर चिकने चुत्तड़ सेहला रही थी..... वह इतना गोरा, सुन्दर और बलिष्ठ था सब उसको प्रशंसा की दृष्टि से देख रही थी. ( रानी हेमा का आशीर्वाद था उसपर वह ज्यादा hi आकर्षक दिखने लगा था.)

मिरदुला ने आगे आकर बोलै ," हाथ तोह हटा में भी तोह देखु की मेरा पुत्र कितना सोना है "...... आर्यन की मैया भी खुद को रोक नहीं पा रही थी, 4 के सामने वह नंगा खड़ा हुआ था उसकी भी उत्सुकता जगाने लगी में भी तोह आर्यन की माँ हूँ.... सबसे ाची माँ.

आर्यन सब की शर्म कर रहा था या देखावा कर रहा था.... असलियत में था तो वह निखत बेशर्मो का भी बाप था. मिरदुला भी जब मजे लेने लगी तोह आर्यन ने दोनों हाथ हटा लिया......

"तोपची " सर उठाने लगा और 10 सेक् में उसका आकर मोठे खूंटे की तरह लगभग पूरा उत्तेजित होकर विशाल सुन्दर लौड़े के रूप में 5 लेडीज के सामने था..... नसें पूरी तरह उभरने लगी, इतना सुन्दर इतना मैं लुबना वाला 'तोपची' का टोपा कश्मीरी सेब की तरह पूरा लालूम लाल रंगत लिए हुए कोहिनूर की तरह नायब दिखने लगा..... सबकी लालची नज़र उसको चूमने की होड़ लगा गयी.

सारू ने दूसरा हाथ आगे करके ुष विशाल लौड़े को जड़ से थम लिए..... उसने खुद नहीं चूमा बल्कि मीणा की तरह इशारा किया..... मीणा भी सबकी तरह निघा की Dimple-Payal गर्दन हिला के हाँ किये ..... जब मिरदुला की तरफ मीणा में देखा तोह वह भी हाँ में मुंडी हिला दी ( मिरदुला जानती थी बाकी सब कुछ भी बोले आर्यन की आतम िश मीणा नाम की उसकी जुड़वा भें में बस्ती है). चाहती तोह वह खुद पहले लिंगमुण्ड चुम सकती थी पर यह खेल उसको पिछले जनम की यादें दिला रहा था..... एक और थी जिसका हक़ पहले नहीं था पर कल वह अपना हक़ का एलान कर दी थी. ( अणि )

मीणा झुक के लिंगमुण्ड को चुम ली पुछहःहःहः ...... " मीठा है .... hi hi hi hi.....slurpppp .....सलरपपपप..... ".

सारू ने अपनी सास के कहा," माजी आपका नंबर है "..... आर्यन सोच रहा था की यह बनछोड़ हो क्या रहा है, क्या मेरा नंगा करके जलूस निकला जा रहा है...... हम्म मीणा के लिप्स कितने सॉफ्ट और ठन्डे हैं .....

वैनिटी बैग चारपाई पे रख कर आर्यन की मैया अपनी साड़ी का पल्लू कमर में ठूंस कर निचे बैठकर बिना किसी झिझक के पहले दिल लगा के निहारी फिर लिंगमुण्ड छाती और घेरा चुम्बन लेकर पीछे हैट गयी. उसके बाद सारू और डिंपल, पायल भी टोपे को चुम ली.

मीणा किश करके बहार चली गयी और प्रज्ञा को खिंच कर कमरे में लाती है..... उसने जब डिंपल और पायल को चूमते हुए आर्यन का हलबी लौड़ा देखकर बेहोश होने से बची गयी......

मीणा ने उसको कान में कहा," ऐसा चांस नहीं मिलेगा, थम ले इश्को और अपना प्यार दे".... पर वह "ना" बोल रही थी लेकिन न चाहते हुए भी आर्यन की तरफ आगे बढ़ने लगी मीणा के साथ.

आर्यन का भन्दा पहले hi फूट चूका था, अब वह भी देखना चाहता था की प्रज्ञा क्या करती है?..... प्रज्ञा की स्थिति अजीब सी थी, आर्यन की नज़र से उसकी नज़र मिली, उसकी नीली आँखों में खो भी रही थी साथ hi साथ अपने मुँह पे हाथ रख कर इतने सुन्दर विशाल लिंग से दर भी रही थी. आर्यन अपने दोनों हाथ अपने ढुङ्गे पे रखकर ऐसे पोज़ दे रहा था की वह जैसे कामदेव हो और कमरे में उपस्थित उसकी सभी प्रेमिकाएं हैं.

इन्ही 16-17 घंटों में प्रज्ञा की मनोस्थिति िश देव पुरष जैसे आर्यन को देखकर u-turn सी हो गयी थी. एक मर्द उसके जीवन में इतना बड़ा बदलाव कर सकता है यह कल्पना से परे है..... क्या में आर्यन को चाहने लगी हूँ?...... "यह गलत है .... प्रज्ञा रुक जा..... कहीं दिएर न हो जाये".....

प्रज्ञा सिंह जिसको मर्दों से नफरत थी सिर्फ यही एक मर्द था जिसके आगे वह बेबस होने लगती थी..... आर्यन से 3 फट दूर वह बूथ बानी कड़ी होकर कभी उसके सूंदर चेहरे और बॉडी को, कभी उसके विशाल लिंग को hi देखे जा रही थी. कभी कभी हमारे जीवन में ऐसा समय भी आता है की हम सही फैसला करने की स्थिति में नहीं होते हैं यह फैसला करने की घडी हैं.

मिरदुला और सारू का एक hi मत था की यह लड़की हम सबके राज दुनिया को बता देगी, सारू ने निर्णय लिया की उसकी यादास्त मिटानी पड़ेगी लेकिन मीणा सोच समझ की hi इसको लायी होगी.....

आर्यन अपनी मीठी आवाज में बोलै," प्रज्ञा ज्यादा मत सोचो, जोह हुआ है उसको भूलना hi सबसे अच्छा उपाए होगा, यह सोच लो की तुम से कमरे में आयी hi नहीं "..... प्रज्ञा के गाल टच करके उसको सांत्वना दिया और चारपाई से सफेद धोती उठा के लुंगी की तरह कमर पे लपेटा.

प्रज्ञा को कहाँ से यह हिम्मत आयी की वह बोली ," क्या में आपको धोती पहना सकती हूँ? अगर कोई ऐतराज न हो ?"

बात थी िश लड़की में, उसकी निडरता उसका खुल भाव यह वक्त कर रहा था की वह कितनी सुलझी लड़की है...... आर्यन ने मीणा की तरफ देखा उसको सब समझ आ गया की यह इसकी hi करतूत है धोती प्रज्ञा के हाथो पहनाने की. ( मतलब मीणा ने बोलै था की धोती आर्यन को उसकी साली पहनेगी )

आर्यन अपने कंधे उचका के कहा ," तुम कम्फर्टेबले नहीं होगी..... ी ऍम फुल्ली नेकेड एंड यू don't नीड तो दो तहत ".

प्रज्ञा कॉन्फिडेंस से बोली ," में कम्फर्टेबले हूँ, मैंने कई फंक्शन में मर्दों की धोती पहनकर स्टेज पे प्ले में पार्टिसिपेट किया है. में एक्सपर्ट हूँ धोती बांधने में.... 1 मं आप मुझे अपनी धोती दिखो "...... आगे बढ़कर आर्यन के कमर से धोती खोल दी एक बार और उसका प्रचंड लौड़ा फिर से बेपर्दा हो गया था.

प्रज्ञा थान ली थी उसको क्या करना है..... उसने पहले धोती की लेंथ अपने हाथ पे लगा के नपी कितनी लम्बी है और चौड़ी भी..... आर्यन भी पूरा बेशर्म था यही नंगा खड़ा रहा जैसे उसको अंग प्रदर्शन का कोई लाइसेंस मिल गया हो, अपना झंडा खड़े की हुए.

पहले उसने धोती कमर पे बांध कर एक गांठ लगी फिर एक सिरा पे घूम बना के आर्यन के कंधे पे धोती को घरी किया और सिरा रख दिया...... तोपची धोती में टेंट बांके खड़ा था..... प्रज्ञा के चेहरे पे पहली बार मुस्कान आ गयी ," जीजू आप बहोत हैंडसम हो और हमको आप ने डरा भी दिया था "..... प्रज्ञा की एक्सपर्टनेस देखने वाली थी...... एक लड़की दादाजी के जामने की धोती बांध सकती है आर्यन को भी विश्वास नहीं हो रहा था.

प्रज्ञा की छूट भी गीली होने लगी जब जब वो आर्यन को टच करती थी धोती बांधने के लिए...... लौड़ा अभी भी टेंट बने हुए था मीणा हस्ते हुए," कोई ज्यादा hi एक्ससिटेड हो रहा है तेरी बातों से ..... धोती तोह प्रज्ञा बांड hi देगी लेकिन भाई तू कुछ कण्ट्रोल कर िश बिचारि को क्यों डरा रहा है "...... hi hi hi hi hi .....

प्रज्ञा भी निचे बैठकर धोती आर्यन के तखनो के पास इकसार करती स्माइल दे रही थी. आर्यन झींकते हुए ," में तोह कण्ट्रोल करने की बहोत कोशिश कर रहा हूँ लेकिन यह मेरी कभी सुनता hi नहीं "......

जितनी सब ुष कमरे में थी उनकी हसी छूट गयी..... हां हां हां हां ...... आर्यन का पोपट हो गया..... धोती के साइड से उसका प्रचंड लौड़ा फिर से दिखने लगा.

मीणा ने आगे बढाकर लुंड थम कर उसको किश कर दी..... ुहममममम ........ प्रज्ञा भी देखि उसने डिंपल और पायल को आर्यन के लुंड को चूमते हुए देखा था अभी मीणा ने वही दोराहा था.

" वैसे इसको अपनी फवौरीते साली का प्यार तोह मिला hi नहीं" ...... मीणा ने यह कहा तब पायल बोली ," साली तोह आधी घरवाली होती है क्यों डिंपल ".

डिंपल तंज़ कासी ," साली तोह एक से एक सुन्दर है अपने छोटू की..... छोटू को यह साली पसंद नहीं आयी".

मिरदुला भी चारपाई भी बेथ गयी और सारू की तरफ देखि, उसने आश्वासन दिया मीणा की तरफ देख कर की मीणा सब संभल लेगी..... प्रज्ञा ने आर्यन को घूरा तोह आर्यन मिमयाने लगा ," अरे ...... मैंने ..... मैंने कब बोलै ...... प्रज्ञा सबसे अच्छी है "...... प्रज्ञा के चेहरे पे फिर से जहाँ भर की स्माइल आ गयी वह अपने काम फिर करने लगी.....

डिंपल ," सारू मम्मी देख लो अपने बेटे को इतनी ख़ुशी मिल रही है तब भी इसका पेट नहीं भरता अब इसको प्रज्ञा भी चाहिए "..... उसने आर्यन का लेफ्ट कान मरोड़ दिया..... "अह्हह्ह्ह्ह दीदी क्या कर रही हो ".....

मीणा ने प्रज्ञा को देखा और उसको लुंड को चूमने का इशारा किया होंठ गोल बनकर..... प्रज्ञा भी अपने को रोक नहीं पायी और ऊपर उठा कर तोपची की सूंदर टोपे पे चुम्बन जड़ दिया "ुंहःहःहःमा".....

सब देखते रह गए..... " इतना लाल है तोह मुझे भी किश करने की इच्छा हुयी.... सॉरी अगर आप सबको बुरा लगा हो तोह"..... बाकी सब हसने लगे..... मीणा ने अपना काम कर दिया था.

प्रज्ञा तोह जैसे खो hi गयी थी एक बार के लिए ..... " उसका होने वाला जीजा किसी देश का राजकुमार लगता था उससे..... अगर उसकी कजिन सिस्टर्स उनके पेनिस को किश कर सकती है तोह में क्यों नहीं..... आर्यन जीजू के कई इन्सेस्ट रिलेशन्स भी हैं, मीणा ने बतया था. वह सबको प्यार करते हैं और मुझे भी सबसे ज्यादा पसंद करते है ......ही ही ही ही".

आर्यन मैं hi मैं खुश हो रहा था, मीणा ने कहा ," तुम भाई को जल्दी से धोती पहना दो...... हम टिक्का लगने का इंतज़ाम करते है. मम्मी और दीदी आप मेरे साथ आयो..... महारानी जी आप यहीं बैठे या हमारे साथ चलो"..... मिरदुला को इशारा कर दी..... मीणा ने जोह तिकड़म भिड़ा थी वह सफल होने लगी थी इसलिए आर्यन और प्रज्ञा को अकेला छोड़ दिया िश under-constructed कमरे में.

डिंपल बहार आकर मीणा को अफ्रीकन लोकल डायलेक्ट में पूछी ," यह करना जरूरी था क्या छूती? ( राजकुमारी)"

पायल भी पूछ दी," तेरी चाल उलटी न पद जाये..... छोटू (आर्यन) को प्रज्ञा सौप दी गीता की सगाई से पहले ?"

मृदुला के सर से ऊपर इनकी भाषा निकल रही थी, सारू को कुछ कुछ समझ में आ रहा था पर अपनी पावर उससे कर के वह भी यह कन्वर्सेशन सुनने लगी.....

(*** आर्यन और उसकी तीनो भें अन्सिएंट अफ्रीकन लैंग्वेज में बात करते थे जब उनको प्राइवेट रखना हो वार्तालाप को.... यह लैंग्वेज आर्यन ने hi ईजाद की थी)

मीणा ने दुसरे रूम की एक चारपाई पे बेथ गयी..... उसकी दोनों बड़ी भें भी साथ में बेथ गयी. मीणा ," हम अपनी भाषा में बात कर रहे हैं..... आप दोनों भी दूसरी चारपाई पे बेथ जाओ. कोई हमको डिस्टर्ब नहीं करेगा मैंने इंतज़ाम कर दिया है "...... आँखें बांध करके उसने अपना पावर से इनविजिबल शील्ड लगा दी.

मृदुला को भी सबका पास्ट पता था और अब उसकी पावर्स के बारे में बहोत कुछ जानती थी...... आर्यन सबसे पावरफुल बन जायेगा 21सत बर्थडे के बाद, में उसके साथ हमेशा दूंगी. सारू ने उसको दूसरी चारपाई पे बैठा के कान में कहा ," में आपके मैं में साड़ी बातें भेजने का प्रयास करूँ गई, बस आप यह दिखो की हमको कुछ समझ नहीं आ रहा है "...... एक बार को मृदुला भी चौंक गयी पर खुद को नियंत्रित करके वह भी हाँ का इशारा की.

मीणा और उसकी बड़ी दीदी की वार्तालाप आप भी सुने में हिंगलिश में लिखुगा..... सारू ऑटोमेटिकली अपना मस्तिष्क मृदुला से जोड़ चुकी थी..... दोनों को सब समझ आने लगा......

मीणा सीरियस होकर बोली," हम को कुछ और स्ट्रांग लड़कियों की जरुरत हैं दुश्मन को हारने में सहायता मिलेगी..... गीता की कजिन सिस्टर्स मेरी लिस्ट में पहले से hi थी. प्रज्ञा को क्यों चुना यह भी जवाब मेरे पास है ?"

डिंपल ," वह छोटू की सबसे बड़ी साली तोह नहीं है, दमदार तो लगती है फिर भी गीता की तरह नकचढ़ी है तू क्या बोलती है ?" ...... वह पायल की तरफ इशारा की.

पायल हमेशा आर्यन की तरफदारी करती थी उसने तारक दिया ," हम को देखना होगा की कितनी और आती हैं वार्ना भीड़ बढ़ेगी..... हमारा टाइम छोटू किसी और को दे मुझे यह मंजूर नहीं है. गीता अच्छी बन रही है शादी तक, उसका असली रूप अभी हमने देखा नहीं है. दीप्ति स्वाभाव की अच्छी है, गुल और बबिता भी अडजस्टेबले हैं. जाने बहोत क्यूट और इनोसेंट है उसके अलावा छोटू की कई छोटी भेने भी इंतज़ार करने वाली हैं. हमारा टाइम हमरा है और छोटू को उससे कोम्प्रोमाईज़ नहीं करने करने दूंगी".

मीणा हसने लगी और डिंपल ने अपना माथा पिट लिया ," यह बात कहाँ ले जा रही है ? छोटी तू बोल यह तोह छोटू की चमचे है "...... पायल ने डिंपल के कंधे पे मारा.

पायल ," छोटू मुझे ज्यादा प्यार करता है तू बस जलती रहे..... में जा रही हूँ उसके पास ".

मीणा और डिंपल ने पायल को रोका चारपाई से उठने से. मीणा बोली," दीदी मेरी बात तोह पूरी करना दो..... आपका छोटू कही नहीं जा रहा है वह बस धोती बांधवा कर यही वापस आएगा".

मीणा उठकर अपने छोटे बैग से ट्रे निकली और 4 छोटी छोटी पुड़िया भी सारू को दे कर बोली ," आप दोनों टिक्का त्यार करो आर्यन के माथे पे लगाना है, छोटे गुरूजी ने बोलै था रति नानीजी को ".

दोनों ने ुशी चारपाई पे ट्रे राखी और सारू को पता था की टिक्का कैसे त्यार करना है और लग्न भी है. पुड़िया खोल के सारा सामान भर निकल ली.

मीणा दोनों बड़ी भें के पास बैठकर दूसरी भाषा में बोली," प्रज्ञा का यह 3रा जनम है..... पहले जनम में वह राक्षसी थी, दुसरे जनम में यक्षिणी थी और िश जनम में वह मानुस जाती में जनम ली है. उसमे तीनो के गुना है पर सुप्त अवस्था में हैं, वह आर्यन से काफी प्रभावित हुयी है अगर उसको चांस मिल तोह वह ाचा डाव होगी हमारे लिए".

Dimple-Payal हैरान थी वहीँ सारू और मृदुला भी शॉकेड थी राक्षसी , यक्षिणी सुने के..... सारू ने मृदुला को चुनती काटी हाथ पे की पहले पूरी बात सुने और खुद को बिजी दिखये.

डिंपल नफरत से ," मुझे तोह वह पहले hi नजर में खटक रही थी, यह लड़की लायक नहीं है की छोटू के पास जाए..... उसको रोकना होगा ".

पायल सोच के बोली ," यक्षिणी वाली पावर होगी तोह छोटू के कुछ काम आ सकती है पर राक्षसी पावर को कैसे कण्ट्रोल करेगी...... आर्यन को चुनने दो वह प्रज्ञा को अपने या पिछवाड़े पे लात मार के भगा दे..... हाहाहाहा ".

मिरदुला मैं में सोच रही थी की यह तीनो भें कितनी आसानी से कह दी की प्रज्ञा एक राक्षसी एक यक्षिणी है..... क्या इनको दर नहीं लग रहा है की वह मेरे बेटे के साथ क्या कर सकती है.

सारू को पता था की आर्यन को कोई रोक नहीं सकता प्रज्ञा को छोड़ने से अगर उसने ुष पसंद कर लिया है तोह. प्रज्ञा तोह मुझे रेडी hi लगती है लेकिन यह देखना होगा यह मुहरत कब आएगा. पातळ लोक वाली उसकी बीवियां बाण गयी तोह यह प्रज्ञा क्या चीज़ है.

मीणा डिंपल के गले लगकर बोली ," समय आ गया है हम अपने छोटू पर पाबन्दी नहीं लगनी है बस उसको खुला छोड़ देना हैं..... वह खुद हमारा काम आसान कर देगा "...... हाहाहाहा.....

Dimple-Payal दोनों अपनी िश छोटी भें के गाल पे किश करके उसको बिच में डाब ली डिंपल हस्ते हुए बोली," और कितनी छूट देगी अपने छोटू को, लाइन में भीड़ बढाती जा रही है और वह रुकने का नाम नहीं ले रहा है...... धीरे धीरे सब पेट से हो जाएगी तभी नहीं रुकेगा यह चाहती है तू "..... hi hi hi hi .....

पायल लिप किश करके मीणा को कही ," देखना जब हर घर से हर गली से आवाज आएगी अब्बाजान..... अब्बाजान .... है है है है है ...... यह चमत्कार 1 साल में होने वाला है, मुझे तोह गीता पे तरस आ रहा है वह कहीं यह देख कर सन्यास न ले ले..... हां हां हां हां ".

सारू भी तीनो की बात सुनकर हसे जा रही थी टिक्का त्यार करते हुए..... मृदुला भी आर्यन के बारे में सोच रही थी और आर्यन का लुंड उसको अपनी विशालता की याद दिल रहा था. चाकर तोह शुरू हो गया था जब मृदुला ने लिंगमुण्ड चाट के चूमा था अब किसका नंबर आएगा यह तोह आर्यन hi डीडे करगे पर मृदुला का नंबर सबसे ऊपर था. आर्यन अपनी मैया को ज्यादा डिअर तरसने वाला नहीं था.

वहीँ दुसरे में क्या हो रहा था यह भी पता करते हैं......

प्रज्ञा अब ट्रेडिशनल ड्रेस की बजाये एक ब्लू जीन्स और स्लीवलेस ऑरेंज कुर्ती में थी. बूट की जगह स्टाइलिश चप्पल में थी, एक गुरुद्वारे कड़ा लेफ्ट हैंड में था और दुसरे हाथ में ब्रेसलेट वाच थी. मेकअप के नाम पर लाइट महरूम कलर की लिपस्टिक लगी थी, उसको ज्वेलरी और मेकअप करने का शौक नहीं था. छोटे बालों में यह लड़की कुछ मर्दन स्टाइल वाली अपने होने वाले जीजा ( आर्यन) को नेचुरल ब्यूटी लगी रही थी. सुन्दर तोह वह थी hi वेल बिल्ट की मालकिन उसके बूब्स आज ज्यादा hi उभर लिए दिख रहा थे.

धोती पहनते हुए आर्यन का मैं था की वह अपनी िश साली को चुम ले..... मौका भी था लेकिन आर्यन कुछ नहीं कर रहा था बस हलकी मुस्कान लिए प्रज्ञा को देख रहा था. प्रज्ञा भी खूब समझा रही थी, आर्यन की भें और दो माँ उसको आर्यन के साथ अकेली छोड़ दी हैं..... अवसर था पर वह भी इंतज़ार कर रही थी की आर्यन कुछ ऐसी वैसी हरकत करे तोह वह उसका जवाब भी देगी.

दोनों एक दुसरे के निगाहों में hi टोल रहे थे..... आर्यन सोच रहा था की उसको सबर से काम लेना होगा प्रज्ञा एक जंगली बिल्ली है पंजा भी मार सकती है भले hi उसने आर्यन का खड़ा हथियार चुम ली हो पर काट खा भी सकती है. मीणा और दुसरे के सामने वह अच्छी बन रही है यह कोई चाल भी हो सकती.

प्रज्ञा ने आर्यन की कमर में धोती का सिरा अंदर खास दिया..... आर्यन अपना तोपची को धोती के अंदर एडजस्ट कर लिया दोनों हाथों से. प्रज्ञा उसकी मस्कुलर पीठ देखकर सोच रही थी," दीदी ने ऐसा वर चुन है जोह हर तरह से बेमिसाल मर्द है, इतनी लड़कियों और औरतों ऐसी hi नहीं मरती जीजू पे..... माय गॉड इतना बड़ा पेनिस में आज तक नहीं देखा, दीदी अभी भी वर्जिन है नहीं तोह मर चुकी होती..... उसको अंदर लेना अपनी मौत को इन्विते करना. वैसे किनता सुन्दर है" ...... जब वह आर्यन के आगे आयी तोह धोती में छिपा लिया था.... " इतना बड़ा कहाँ गया ?"

प्रज्ञा के चेहरे पे निरशा दिखी..... आर्यन भी समझ गया ( हम्म्म एक्टिंग अच्छी करती हो ) ......

आर्यन ," हो गया या कुछ बाकी है ".

प्रज्ञा ," बस फोल्ड सही करने हैं, आप जुटी पहन कर स्टाइलिश लगोगे ".

आर्यन ," अरे यार इतना सब मेरे साथ किया तुम सबने अब क्या मेरी परेड निकलोगए...... ाचा भला सूट पहन कर त्यार हुआ था अब देखो बगैर अंडरवियर के खड़ा हूँ "..... वह अपनी बेचारगी की हालत का बखान करने लगा.

प्रज्ञा ," यह तोह पहले सोचना था न..... आप इतने सीधे भी नहीं हो, चेहरा से धोका हो जाता है और अब मासूम बनकर जस्टिफाई भी करना कोई आप से सीखे" ..... वह धोती के अंदर ुष उभर को देखने की चेष्टा कर रही थी जोह पहले से काम था.

आर्यन ने हाथ बढ़ा के प्रज्ञा की कमर दोनों साइड से पकड़ी और अपनी तरफ उसको खिंचा तोह वह भी दोनों हाथ उसके कंधे को धकेल ने लगी ," तुझे तोह बहोत पता है की में एक्टिंग कर रहा हूँ की नहीं..... सोच ले झूटी एक्टिंग भी आती है हमको फिर दोष नहीं देना".

प्रज्ञा विरोध करती हुयी बोली," यह आप क्या रहें हैं ..... दीदी को सब बता दूंगी ..... छोडो मुझे ".

आर्यन हसकर ," बता दे फिर में भी बता दूंगा तूने मुझे कहाँ किश किया था..... वैसे आधी घरवाली को प्यार करना कोई जुर्म नहीं है"..... है है है है

प्रज्ञा कमर भी नहीं हिला प् रही थी और नाख़ून आर्यन के कंधे पे गाड़ने की कोशिश की फिर उसका ट्रेडिशनल स्टाइल जांघों के बिच वर करना उसके साथ अपना सर आर्यन के सर पे मरना..... सब वार विफल हो गए. आर्यन ने घुटने का वार अपने सीधे घुटने से रोका, पिछले सर हटा के सीधे कंधे पे सर का वार झेला..... हाँ नाख़ून उसके कंधे पे चुभ रहे थे और वह स्माइल कर रहा था.

प्रज्ञा भी हैरान थी पर आर्यन की स्माइल देखकर खीज गयी..... प्रज्ञा स्ट्रांग लड़की थी पर आर्यन के सामने छुईमुई एक बार और साबित हुयी, उसको कोई टक्कर देता तोह वह उससे भीड़ जाती थी. आर्यन उसको हुग करना चाहा रहा था पर वह ताव में आ गयी. आर्यन ने अपने लिप्स आगे बढे पर कुछ सोच कर रुक गया और प्रज्ञा को छोड़ दिया.

सीरियस टोन में बोलै ," ी ऍम सॉरी ,धोती के फोल्ड बन दो..... हम लेट हो रहे हैं".

प्रज्ञा का गुस्सा एक डैम रफू चाकर हो गया शायद वे भी सॉरी बोलना चाहती थी पर बोल न सकीय..... " मेरे जीजू हैं बस मजाक कर रहे थे और मैंने क्या किया उनके साथ "...... बिचारि धोती के फोल्ड दोनों साइड झुक कर बनने लगी उसकी स्पीड भी तेज हो गयी थी.

आर्यन मैं hi मैं है रहा था यह भी गीता की तरह है उसका भी मूड ऐसा hi रहता है..... एक बार प्यार कारगी दूसरी बार मुझे hi पेल देगी. प्रज्ञा को सीरियस देख कर उसको भी अच्छा नहीं लग रहा था. सब तरफ से धोती सेट करके वह जाने लगी तोह आर्यन ने उसको पुकारा," प्रज्ञा थैंक्यू...... क्या मुझे एक हुग मिलेगी ?"

प्रज्ञा बहार जाने वाली थी पर वह न चाहा कर भी आर्यन की तरफ पलटी ," के हेरे बेबी..... ी वांट तो थैंक्स यू "..... और अपनी दोनों बाँहों फैला दिया..... चेहरे पे बड़ी से स्माइल लिए वह उसका इंतज़ार कर रहा था.

प्रज्ञा की आँखों में आंसू आ गए वह खुद hi अपने जीजू को आगे बढ़कर बाँहों में साम गयी..... आर्यन ने प्यार से उसको गले लगा लिया ," में बहोत बुरा हूँ न तुमको रुला दिया...... माफ़ कर देना अपने फ्रेंड को..... हाँ हम फ्रेंड्स तोह बन hi सकते हैं ".

प्रज्ञा इमोशनल होकर आर्यन की बाँहों में चिपक से गयी..... यह लम्हा उसको इतनी ख़ुशी दे रहा था की पूछो मत..... बस आर्यन के सीधे कंधे से सत्कार गर्दन hi हिला पा रही थी आर्यन के जवाब में. वह उसके बालों को चुम कर बोलै ," तुमने धोती बहोत ाची बंधी है, मुझे भी सीखना होगा".

सर पीछे कर के प्रज्ञा के आंसू साफ़ किये और दोनों हाथो से उसके बॉय कट बाल सही करते हुए उसके माथे पे चुम्बन लिया..... " प्रज्ञा तुम िश जहाँ की सबसे स्वीट लड़की हो..... हम सब तुमसे बहोत प्यार करते हैं ".

प्रज्ञा के चेहरे पे स्माइल आ गयी ," सॉरी मैंने भी आपके साथ मिस्बेहावे किया..... डायरेक्ट लव यू कहने में शर्म आती है "... .hi hi hi hi

आर्यन को प्रज्ञा पे इतना प्यार आया की उसको "ी लव यू माय स्वीटी" बोलकर लिप्स पे किश करने लगा...... वह भी अपने जीजू के सामने समर्पण कर चुकी थी..... "ी लव यू आर्यन..... ी लव यू "......

प्यार तोह उसको आर्यन से पहली नज़र में हो गया था पर बात दिल की होठों पे अभी आयी..... बेचारी को किश करना भी नहीं आता था पर अब वह सही हाथों के मालिक आर्यन की बाँहों में थी जोह प्यार करने के लिए hi बना था. कुछ डिअर लगी पर देखि तोह पहले भी थी दुसरे कपल्स और लवर्स को..... लिप खोल के जीभ आर्यन के मुँह में डालने की कोशिश की तोह वह लाजत से उसका स्वागत किया ...... ुंहःहःहःमा ुंहःहःहः ममममममम ममममममम ......

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4 मं में hi प्रज्ञा के लिप्स थक गए.... अब आर्यन उसको हलके हलके चुम रहा था.

दोनों किश के बाद एक दुसरे की नाक से नाक रगड़ने लगे.....

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आर्यन ने प्रज्ञा को उठा के अपनी पीठ पर चढ़ लिया वह भी उसकी मस्कुलर बॉडी पे चढ़ के ज्यादा hi खुश हो गयी ' ी लव यू आर्यन' और उसकी गर्दन पे किश कर दी......

बॉडी झुका के आर्यन ने अपने 2 मोबाइल और गन लिया और कमरे से बहार आ गए..... प्रज्ञा को देखकर मीणा की ख़ुशी देखती hi बनती थी लेकिन बाकी को पता चल गया की आर्यन ने िश लड़की का जीत लिया है.

________________

आधे घंटे बाद ......

अणि अभी स्टेट के चीफ मिनिस्टर और डिप्टी चीफ मिनिस्टर के साथ स्टेज के सोफे पे बैठी थी. आर्यन और उसकी सगी छोटी भें से दोनों मिलने आये थे और सगाई के फंक्शन में शामिल होने भी. रतिदेवी भी स्टेज की दूसरी साइड बैठी थी अपने भाई मर मालिक के साथ, डॉ अंजू भी साथ थी, उनके अल्वा राजा त्रिभुवन सिंह और 3 सेंट्रल मिन्स्टर भी स्टेज पे बैठे थे...... अचानक स्टेज विप से सुसज्जित हो गया था. आम गाओं वाले को साइड या बाजु के घरों में सरन लेनी पड़ी..... सिक्योरिटी अफसर के hi 250 लोग महापंचायत के प्रांगण में थे.

कुर्सियों नेता के सुप्पोर्टर ने घेर ली थी, कुछ पब्लिक दरी या जमीन पे बैठी थी. आर्यन की फॅमिली भी मंडप और टेंट में सिमट गए थे...... सुखार हैं आईएनएस. राजपूत और सरोज का सोफे स्टेज की साइड में सिफत कर दिया गया था जिसपर वह डरे हुए विराजमान थे. Make-sift 2 एक स्टेज पे लगेए गए थे..... जब अन्नोउंसेड हुई की भीड़ न लगें आगे बढ़ाते रहें.

एक सफ़ेद रंग की धोती में लगभग 7 फट ऊँची का एक पहलवान जिसकी बॉडी ऐसी लग रही थी की एक एक कट तराश के बांया हो...... आप समझ hi गए होंगे.... उसने दसप से माइक चीन लिया..... एक बार को वह सिक्योरिटी अफसर वाला अफसर भी नहीं पहचान पाया लेकिन जल्दी उसको अहसास हो गया यह माथे पे लम्भा, चौड़ा टिक्का लगे, गले में रुद्राक्ष की माला.... यह तोह आर्यन है. वह अफसर भी दांत निपोरते हुए एक कान पकड़ा लिया सॉरी बोलते हुए.

आर्यन माइक से सब गाओं वालों को सम्बोधित करते हुए बोलै ," मेरे गाओं की वासियों और महापंचायत के सारे गाओं वालों को में आपका आर्यन चमा पार्थी हूँ जोह दिएर लगी है सो लगी...... आप से मेरा हाथ जोड़ के निवेदन है अब 5 मं. बाद मेरी सगाई की रेशम शुरू होगी..... आप सब वापस अपना अपना स्थान घरां करें..... भोजन का लाभ भी उठें, मेरे बापू का सपना था की जब में गीता देवी का हाथ थंऊ आप सब उसके साक्षी बने..... आप का बीटा और भाई आर्यन..... सप विकर्म सर सिक्योरिटी ओफ्फिसरवालों को हटा लें सारे विप की सेफ्टी की में गर्रंटी लेता हूँ..... कम से कम सिक्योरिटी अफसर वाले प्रांगण की सिक्योरिटी करे और हम गाओं वालो को भी सगाई के फंक्शन का लुत्फ़ उठाने दें".

आर्यन ने माइक दसप की तरफ उछला और स्टेज पे बैठे सबके सामने हाथ जोड़ के सर झुका दिया...... आर्यन को सब खोज रहे थे इसलिए खड़े भी हो गए पर अपनी बात पूरी करके वह सामने सर झुका के खड़ा था. सब को हसी भी आ रही थी और उसको सम्मान करने का मान सब का था.

जहाँ हम अपने रीती रिवाज भूल गए हैं वहीँ आर्यन अपनी माँ रतिदेवी की अनुसार सारे विधि विधान से गीता से सगाई करने वाले था...... उसका तिलक ललाट पे दिखा रहा था की वह धार्मिक रीती रिवाज को कितना महावत देता है. (हालांकि उसका दूसरा रूप भी है लेकिन सबकी नज़र में वह एक अंगरक्षक है जोह अपने परिवार की रक्षा करता रहता है )

गीता सबसे ज्यादा हसी आर्यन के get-up पे पर माइक की आवाज में उसकी हसी डाब गयी...... लेकिन सब लोग आर्यन की िश रूप में प्यार करने से नहीं चूका..... उसकी बॉडी दिन के उजाले में सबको उसकी ताकत का बहन करवा रही थी. रति को भी अपने बेटे पे नाज़ था उसकी ख़ुशी देखते hi बनती थी, आर्यन उसकी हर बात मानता है वह उससे बात भी नहीं की पर उसको पता है की मेरी माँ को क्या अच्छा लगेगा.

धीरे धीरे आर्यन के नारे लोग लगने लग और भीड़ भेदने लगी नारो की आवाज तेज़ होने लगी...... सप विकर्म ने सिक्योरिटी स्टेज के इर्दगिर्द कर दी थी...... पब्लिक यथा स्थान जगह लेने लगी..... " आर्यन की जय " ये सिर्फ नारा hi नहीं था यह जीत आम पब्लिक की थी जिनको विप लोगों ने दूर धकेल दिया था..... कुछ लोग नाच भी रहे थे..... लेडीज जोह मंडप में hi सिमट गयी थी वह भी रेहत की सांस लेती उससे पहले आर्यन को सिर्फ धोती में देखर इतनी इम्प्रेस्सेड थी की कोई उसको शिव से तुलना करती कोई सीधे राम जी से और तीसरा वर्गः भी था जोह दोनों का मिश्रित लग रहा था. औरतें की आवाज मर्दों की कान में भी पड़ी उनको भी लगने लगा "कोई कुछ भी बोले हमारा आर्यन जैसे कोई नहीं हमरे लिए तोह एहि राम है एहि शिव".

गीता की साड़ी रिस्तेदार आर्यन की पर्सनालिटी पे पहले से hi मैं मुग्धा थी उसको कमर से ऊपर इतने चौड़े सीने को चूमने उसको अपनी बाहुपाश में लेने को जी कर रहा था..... आर्यन की मम्मियां उसकी बलियन लेने लगी.

अदिति व्हील चेयर पे बैठी आर्यन को देखकर हाथ हिला ने लगी और बच्चे भी उसकी देखि देख अपने डैडी को देखकर हाथ हिला रहे थे...... आर्यन सबको हाथ जोड़ के बार बार सर झुकता आगे बढ़ने लगा.....

जब मंडप पे चढ़ने लगा नंगे पेअर उसको अपने दोस्त भी दुश्मन से दिखने लगा जोह उसके देखकर हस्ते हुए लोट पॉट हो रहे थे......

रति भी मंडप पर पहुँच गयी, एक गलती उससे हो गयी थी आर्यन गुरूजी का उपहास कर दिया था पर और नहीं, आर्यन को जब तक दीखता रहेगा की में उससे नाराज हूँ वह कोई कोशिश नहीं करेगा गुरूजी के साथ बदतमीज़ी करे..... बस िश दस्ता ( मिरदुला) से बचले भगवा मेरे आर्यन को..... तू कभी सफल नहीं होगी.

हकीकत कुछ और हो गयी थी..... मिरदुला पूरा हक़ जाता रही थी आर्यन पे और अणि तोह घोसित कर चुकी थी की भाई सिर्फ मेरा है मनो या मनो. मीणा एहि चाहती थी उसने अणि को उकसाने की काफी कोशिश की पर आखिर कर वह सफल हुई. एक तोह नानी की कंपनी मेरे सर से ताली दूसरा अणि बैलेंस लाएगी वह छोटू को अपनी तरफ खींची गई और बाकी सब अपनी तरफ. जल्दी hi मुझे दिव्या लोक जाना पड़ेगा भाई के साथ. मीणा अपने भाई से बहोत प्यार करती है और आर्यन भी उसके बिना जी नहीं सकता लेकिन एक और सच्च है दोनों का पिछले जनम का......

चेयर पे बेथ कर अणि चीफ मिनिस्टर से बात करने लगी. डिप्टी कम की भी झांट सुलगने लगी, वह भी थोड़ी दिएर में अणि के साथ दूसरी चेयर पे बेथ गए.... अणि ने 15 मं दोनों से बात की डिप्टी कम अपनी कुर्सी छोड़कर स्टेज से उतर गए और आर्यन को देखने लगे जोह दुबे घास की अंगूठियां साड़ी उँगलियों में पहना था..... निशंक गुरूजी हवं की अग्नि में आहुति दे रहे थे...... आर्यन और निशंक गुरूजी पुरानतन संस्कृत में श्लोक पढ़ रहे थे जोह हज़ारों साल पुराणी क्लिष्ट संस्कृत में थे. मीणा, मिरदुला और सारू, आर्यन के साथ बैठे थे.

अब गीता की बरी थी उसको हवं अग्नि के राइट साइड बिठाया और दो मंतर पढ़कर जिनको गीता ने सही उच्चारण किया..... यह संकल्प के मंतर थे..... अब गीता को आर्यन के साथ बिठया. राजवीर और रति को गीता के साइड बैठने को कहा और नवाब सिंह ( आर्यन के बड़े पापा ) आर्यन के पीछे बैठा. दोनों पंडितजी के चेहरे पे सिकन थी, गुरूजी सिद्ध योगी थे लेकिन आर्यन और गीता भी प्राचीन संस्कृत प्रवाह में बोल रहे थे. पब्लिक Geeta-Aryan की सगाई देखने लगी..... जब गुरूजी के मंतर समाप्त हुए तोह रति को बोलै तब उसने एक हीरे की अंगूठी अपने हाथ की ऊँगली से निकली.

गुरूजी ने आर्यन को सीधा पंजा और हथेली पूरा फैला के हवं कुंड के सामने रखने को कहा...... गीता को सीधा हाथ आर्यन के हाथ पे रखने को कहा..... रति को वह अंगूठी गीता के हाथ पे रखने को कहा..... रति जोह रिंग गीता और आर्यन को दी वह उसके पूर्वजों की अंगूठी थी जोह कई सदियों से उनके खंडन के वारिस को मिलती थी पीढ़ी दर पीढ़ी.....

अंगूठी 99.99 % सोने की बानी थी, एक बड़ा हीरा उसमे जड़ित था, हीरे के दोनों साइड डमरू का सिग्न छापा था जोह भोलेनाथ का डमरू को दिखा रहा था, बाकी बाघ में छोटे छोटे 7 नाग भी लगे हुए थे बराबर दूरी पे. मार्किट वैल्यू क्रोर्स में थी पर रति के खंडन की वह धरोहर अमूल्य थी.

चूँकि आर्यन वरिष्ठ था चौधरी माधव सिंह का और गीता उसकी होने वाली बीवी थी तोह अंगूठी लड़के को राजवीर सिंह या रति देवी hi पहना सकते थे. आर्यन ने गीता की मुठी अपने हाथ की मुठी में ले ली थी और गुरूजी के बोले श्लोक को रिपीट किया था..... ( यह श्लोक सबकी समझ में आये).

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गीता

सगाई की रसम पूरी हो गयी थी, रति देवी, गीता की माँ भी थी उसने यह अंगूठी और अपनी बेटी गीता देवी को आर्यन सौप दी थी.

गीता उत्साहित होकर बोली ," गुरूजी अगर आप की आएगा हो अब तोह में आर्यन को अंगूठी पहना सकती हूँ ".

रति ने दांते के कहा ," अंगूठी तेरे बापू पहना देंगे..... हमरे रिवाज में लड़का को लड़की के पिताजी या भाई hi अंगूठी पहना सकते हैं..... अंजू देख यह क्या बोल रही हैं ".

निशंक गुरूजी मुस्कारने लगे, गीता का मुँह उतर गया ," जब मेरी जरुरत नहीं थी तोह बुलाया hi क्यों मुझे ..... तुम दोनों माँ बेटे hi साड़ी रस्में आपस में कर लेते "...... वह आर्यन से हाथ छुड़ा के कड़ी हो गयी..... और अंगूठी हवं कुंड फ़ेंक दी.

आर्यन तोह इतना खुश था की मत पूछो बस सीरियस होकर सबको दिख रहा था की वह बस सो सो है...... जब गीता ने अंगूठी अग्नि में फ़ेंक दी आर्यन झट से आग में ढूंढ कर अंगूठी वापस ले आकर अपनी धोती से साफ़ करने लगा.

रति भी उठ कर गीता को झापड़ मारने वाली थी तब सारू ने उसका हाथ पकड़ लिया...... सबको कुछ समझ में hi नहीं आया की हुआ क्या सब इतनी जल्दी जल्दी हुआ.

महारानी मिरदुला ने गीता का हाथ पकड़ के कहा ," गीता बेटी मेरी बात सुन, तू जोह चाहेगी वही होगा...... तुझे रिंग खुद पहननी हैं आर्यन को तोह पहना दे िश में क्या बड़ी बात है..... भाई साहब ( राजवीर सिंह को) आप सिर्फ हाथ लगा दो एक बार फिर गीता hi रिंग पहना देगी ".

सारू ," यह ठीक है क्यों बापू ?"

राजवीर सिंह खड़ा होकर बोलै," रस्में तोह पूरी हो गयी हैं, अंगूठी की hi बात है न..... ला आर्यन बीटा मुझे दे, तेरा हाथ तोह नहीं जला ना ".

आर्यन हसकर ," गीता मैडम सगाई तोह हो चुकी है, रही बात अंगूठी की तोह तुम खुश हो लो रिंग पहना कर...... यह मेरे बापू की रिंग है जोह वह ख़ास समय पे पहनते थे, इसका इतिहास इतना पुराण है जोह तुम्हे पता नहीं होगा..... में िश धरोहर को बचा रहा था इसलिए माँ भी गुस्सा हो गयी थी..... कोई नहीं मीणा वह अंगूठी देना जोह मैंने चंदा रानी की लिए खरीदी थी ".

आर्यन ने अंगूठी राजवीर सिंह को दी और उसने गीता का हाथ पकड़ के बोलै," बीटा तू सबसे खुशकिस्मत है जोह ऐसा पति मिला जोह तेरी बात हमेशा आगे रखता है ".

गीता सपाट लहजे में ," पता है मुझे, बापू तू माँ को समझ दे आर्यन ने सगाई की है मेरे साथ न की मुझे खरीद लिया है..... गीता देवी अपनी शरत पे जिंदगी जीती है न किसके रहें पर "...... और राजवीर से अंगूठी ले ली.

आर्यन भी है रहा था और बाकी सब लोग भी हसने लगे....... गीता को अपना डार्क काला गॉगल्स प्रज्ञा ने दिया ," दीदी सनलाइट भी बहोत है और कैमरा का फ़्लैश की लाइट भी आप को सूट करेगा".

राजवीर भी अपनी बीवी के पास बेथ गया ," यह तेरी बेटी किसी को छोड़ देगी या सबका बंद hi बाजति रहेगी ".

रति ," करने दो इसको मननमाणि यह सेह तोह कोई और hi दे रहा है इसको "...... वह आर्यन की बात कर रही थी.

आर्यन को गीता ने वापस बैठकर हवं के सामने उसके हाथ की हार्ट वाली ऊँगली में रिंग पहनी..... सब ताली बजने लगे और नारे लगने लगे " आर्यन भैया की जय" और गाओं में दूर दूर तक हर्ष फायरिंग होने लगी..... सिक्योरिटी अफसर वालों को बता दिया गया था, सप विक्रम ने पटाखे की परमिशन दी थी और गाओं के भर 2 कम दूर फायरिंग की.

मीणा ने एक सुन्दर प्लैटिनम और डायमंड ? की रिंग बॉक्स से निकली और सारू को दी, सारू ने सबको दिखा के रिंग आर्यन की दी..... आर्यन की साड़ी साली ेखथि हो गयी थी..... आर्यन ने गीता का माथा चूमा और उसको रिंग पहन दी. ताली बजने लगी और पठाखे फूटने लगे और फायरिंग की आवाज आने लगी..... विप सेक्शन में थोड़ा सा दर का माहौल था..... गीता देवी की जय के नारे लगने लगे.

Aryan-Geeta की सगाई हो चुकी थी..... सब तरफ जश्न का माहौल था..... बधाइयों का ताँता लगा हुआ था..... पहले गीता और आर्यन ने निशंक गुरूजी से पेअर चुकार आशीर्वाद लिए, मीणा एक शर्ट लेकर आर्यन को दी तोह वह धोती और कुर्ते में स्मार्ट लग रहा था.

कम का छोटा भाषण हुआ और उन्होंने दोनों को आशीर्वाद और गिफ्ट के साथ 40 गाओं को 40 क्रोर्स देने का एलान किया और 50 लाख का एडवांस चेक भी दिया..... आर्यन ने कम साहब की जय के नारे लगे तोह जनता भी कम के जय जय कर करने लगे.

कम ने 2 मं आर्यन से साइड में लेकर बात की और आर्यन का वडा याद करवाया..... आर्यन ने भी असुरे किया वह बिज़नेस समिट में हेल्प करेगा. रति देवी को बधाई दी बेटे की सगाई की.

कम साहब के बार और पेअर चूहे आर्यन ने उनको कार तक बैठना गया..... नेता के जाने से सिक्योरिटी अफसर भी काम हो गयी थी. डिप्टी कम रिंग सेरेमनी के बाद hi चले गए थे. अणि ने उनकी औकात दिखा दी थी जिसको वह पचा नहीं पा रहे थे.

तो बे कॉन्टिनोएड......

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अपडेट 47 ©

महापंचायत का सगाई समारोह...

रति देवी की अनुपस्थिति में डॉ अंजू ने सगाई समारोह का दयिता संभाला. रति और राजवीर दोनों निशंक गुरूजी के साथ हवेली को लौट गए थे...... जहाँ आर्यन और गीता की कुंडली और सारे गहरा का समय से मिलान गुरूजी और राजवीर कर रहे थे हवेली के एक खाली कमरे में जोह पूरब दिशा में था. थोड़ा ध्वनि का शोर काम था यहाँ, कमरे में एक चटाई और 4 सूती आसान भी लगे हुए थे.

रति ने गुरूजी से विनती की तब वह माने कमरे में विश्राम करने के लिए, राजवीर भी उनसे प्राथना किया की आप भोजन के उपरांत विश्राम करें, सायंकाल उपरांत प्रस्थान करें..... रति दोनों के लिए भोजन बनाने लगी वह खुद अपने हाथों से बने कच्चे चले पे पकाई पांच दाल, चावल की खिचड़ी और छाछ (माथा)..... आधे घंटा लगा वह दो पत्तल उनके सामने राखी. खिचड़ी पत्तल पे दाल के दो कुल्हड़ में छाछ दाल के आसान पे बेथ कर हाथ का पंखे से हवा करने लगी.

गुरूजी के चेहरे पे मुस्कान आ गयी और रति की तरफ देखकर बोले ," भोलेनाथ की कृपा है गीता पुत्री इतनी प्रतापी है की तुम्हरे सुपुत्र महार्यं के भाग्ये खुल गए...... गीता की कुंडली में 32 गुण ऐसे हैं जोह महार्यं की कुंडली से मेल कहते हैं, भोलेनाथ की कृपा दोनों के ऊपर सदैव रहेगी किन्तु विवाह के पहले बड़े गुरूजी ने एक अनुष्ठान रखा है पुराने जंगल में, में भी वहां रहुगा उसको पूर्ण करना तुम्हारा hi दावित्ये है.

राजवीर सिंह धयान से साड़ी तिथि का अध्धयन करके और कुंडली मिला रहा था जब सुना बड़े गुरूजी और अनुष्ठान करना वाले हैं तोह पूछ लिया..... रति ने बिच में टोका ," भोजन ठंडा हो रहा है गुरूजी..... में आप को बाद में बता दूंगी आप भी भोजन ग्रहण करें".

राजवीर ने रति को ऐसे देखा की जैसे उसकी दोनों आँखें उसने मांग ली हो..... रति सर झुका के पंखा करने लगी. दोनों अन्न ग्रहण करने से पहले प्रभु को याद किये और शांति से भोजन करने लगे.

भोजन उपरांत जब गुरूजी विश्राम करने लगे तोह दोनों pati-patni उनके पेअर दबने लगे..... निशंक गुरूजी उनकी सेवा से बहोत प्रसन हुए. बड़े गुरूजी ने निशंक से मानसिक संपर्क किया ," वॉयस मैं को भी साधना ..... महारानी विजयलक्मी से विदा लेकर आर्यन को मेरा सन्देश पहुंचा देना की मुझे आकर मिले कल रात्रि में".

निशंक हाथ जोड़कर उत्तर दिए," जी गुरूजी परन्तु उसकी सगाई हो गयी है 3-4 दिन तोह अपने विनोद और क्रियाकल्प में व्यस्था रहेगा "......

निशंक का संपर्क टूट गया गुरूजी से या वह उनकी बकवास सुना नहीं चाहते थे...... उन्होंने डायरेक्टली बोल दिया की अपनी जबान सोच समझ के खोले यानि कोई बड़ी बात होगी जोह बड़े गुरूजी ने आर्यन को बुलाया है पर क्या बात हो सकती है ???

रति और राजवीर, निशंक गुरूजी से विदा लेकर जब महापंचायत पहुंचे तोह आर्यन नए hi ड्रेस गेटउप में था..... सर पे पगड़ी, डिज़ाइनर sherwani-pajami, काली चमड़े की जुटी और हाथ में एक तलवार बिलकुल चौधरी महार्यं सिंह लग रहा था..... गीता एक डिज़ाइनर साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज, साड़ी ज्वेल्लेरी में सेक्सी मॉडल की तरह लग रही थी.

(1 घंटे पहले ....... )

सारे सोफे और कुर्सियों को स्टेज के एक साइड रख दिया गया, दरिओं के ऊपर सफ़ेद चादरों को बिछा के एक चौकी पे आर्यन को बिठा गया. आर्यन नयी शेरवानी में दूल्हा लग रहा था, नवाब सिंह और नखलि राज सिंह, ठाकुर बलदेव सिंह, नवाब के गाओं के रिश्ते के बड़े बुजुर्ग, रिश्ते के ताऊ, चाचा, बच्चे आर्यन के पीछे बैठे थे.

मुखिया काका, 4 कौंसिल के पांच और 40 गाँव के मुखिया के साथ आशुतोष सिंह ( आर्यन के बड़े मां), गीता के मामी जी और उनके भाई, चची जी , मौसी के साथ प्रज्ञा और जानवी भी दूसरी साइड बैठे थे.

ममी जी के बड़े भाई बहोत पैसे वाले और रजवाड़ों के खानदान से थे..... वह सब भी गीता की तरफ से शामिल थे.

आशुतोष, गीता का बड़ा भाई था िश नाते (रति और राजवीर की अनुपस्थिति) में साड़ी रीती रिवाज उसको hi निभानी थी.

डॉ अंजू ने माइक पे कहा ," इससे पहले में कुछ खून उससे पहले महारानी मृदुला सिंह और राजा त्रिभुवन सिंह ने गीता बेटी को उपहार देना चाहते हैं".

सब की नज़र गीता की तरफ गयी जोह मंडप में साड़ी लेडीज के साथ बैठी थी......

महापंचायत प्रांगण के मुख द्वार पे एक शाही ड्रेस पहने सैनिकों का बंद सबसे आगे खड़ा था जिसमे 40 सैनिक थे और उनका लीडर एक बंद स्टिक लिए उनकी अगुवाई कर रहा था..... सब लोग चकित होकर ुशी बंद को देखने लगे, जब 20 घोड़ों की सैनिक टुकड़ी गेट पे आकर पीछे कड़ी हो गयी और झंडो को देखकर कुछ लोग समझ गए यह तोह महाराजा अलवर का झंडा है. गीता देवी के सम्मान में बंद ने अलवर राज्य की स्वागत धुन सुनाई देने लगी..... धुन ख़तम होते hi सब ने तालियों से उनका स्वागत किया.... फिर गेट के अंदर दूसरी धुन बजा के बंद प्रवेश करने लगा उसके पीछे सैनिक टुकड़ी घोड़े पे सवार प्रवेश थी..... गीता मंदा के भार कड़ी होकर ताली बजा रहा थी.

एक नई ब्रांड लक्ज़री कनवर्टिबल कार फूलों से सजी, जिसमे महारानी मृदुला और राजा त्रिभुवन सिंह पिच्छी सीट पे बैठे थे और शाही ड्रेसेस में स्लो स्पीड में ड्राइवर कार ड्राइव करते आ रहा था.

शाही गार्ड्स कार के साथ पैदल चलते हुए आ रहे थे...... 2 बग्गी 4-4 शाही घोड़ों की जिसपर ek-ek बहोत बड़ा गिफ्ट बॉक्स रखा था..... घोड़ों को भी बड़ी म्हणत लग रही थी दोनों बग्गी खींचने में...... लगता था की दोनों गिफ्ट का वजन बहोत ज्यादा है, शाही ड्रेस में हथिआर लिए 20-20 सैनिक की टुकड़ी 2 बग्गी की सुरक्षा करती आगे बढ़ रही थी.....

बग्गी के पीछे 7 नयी लक्ज़री कार, सुव, जीप, डिफरेंट मॉडल की अंदर आयी..... मिरदुला और त्रिभुवन की कार मंडप के नज़दीक रुकी दोनों कार से निकले..... गीता ने आगे बढाकर मिरदुला को गले लगाया और राजा त्रिभुवन सिंह को नमस्कार किया.

राजा त्रिभुवन सिंह ने गीता के सर पे हाथ रखा और बोले ," महारानी जी ने कहा था हमसे की अपनी बड़ी बेटी को िश सुबह अवसर पर अपना वादा पूरा करने के लिए...... हम को विश्वास है आप अपना पुरखों की अमानत स्वीकार करेंगी".

गीता भी मुस्करा के ," आपने तोह हमको फसा दिया राजा साहब..... में भी यह तोफह स्वीकार करती हूँ आप ने अपना वादा निभाया उसके लिए में और मेरे पूर्वज आप के ऋणी रहेंगे "...... उसने हाथ जोड़ के पहली बार दिल से उनको परनाम किया.

गीता ," आप सब भी बोलेन मेरे साथ.... महारानी मृदुला जी की जय ..... राजा त्रिभुवन सिंह जी जय..... "

पब्लिक को क्या पता वह जब देखे की आर्यन सबसे पहले जय का नारा लगा तोह सब भी उसको फॉलो करके महारानी और राजा की जय के नारे लगने लगे.

गीता के लिए यह बहोत बड़ी बात थी, उसका परिवार भी उसको प्यार करता है और जोह राजशाही सम्मान उसके पुरखों को मिल रहा था..... स्वयं रानी मिरदुला और राजा त्रिभुवन सिंह उसके दवार पे खुद उसका हक़ देने आये थे..... महा मंत्री ने माइक पे जा कर सबका इंट्रोडक्शन फिर से दिया और गीता के लिए कितने बेह्थ हैं उनकी लिस्ट पढ़ दी.

गीता को 8 नई लक्ज़री कार, 11000 बीघा खेत और बाघ, अलवर के एक हवेली, एक होटल , एक फार्महाउस, दिल्ली में एक कोठी और होटल, जयपुर में एक फार्महाउस और पॉश एरिया 2000 सक यार्ड का प्लाट भी गीता को गिफ्ट किया...... राजा साहब के प् ने एक रेड फाइल दी जिसको मृदुला ने अपने हाथ से गीता को दी. वह मन करने लगी तोह अपनी कसम देकर उन्होंने गीता को राजी कर लिया.

गीता ने रेड फाइल सबको हाथ उठा के दिखाई...... सब गीता की लिए ताली बजने लगे..... आर्यन की तरफ देखकर गीता ने फाइल को दिखा कर उसको जीभ चिड़ा दी..... सब उसकी हरकत देखकर हसने लगे. गीता को मृदुला जी ने कहा की हाथ रख कर सब उपहार स्वीकार करे.

गीता ने बरी बरी सब कार छूकर जब बग्गी के गिफ्ट बॉक्स खोले तोह दो शामे तो शामे बड़े बड़े संदूक देख कर उसने उनके कान में पुछा ," खजाना का एक संदूक तोह हमरा है लेकिन दूसरा संदूक किसका है ?"

मृदुला हसने लगी तब राजा त्रिभुवन ने कहा ," यह भी आपका है, Maharani-sa ने प्रेम से आपको तोफा के रूप में लिया है ".

गीता हैरानी से ," में तोह दीप्ति से मांग लेती आखिर मेरी छोटी भें हैं...... वैसे आर्यन को कुछ नहीं दिया आप ने बेचारा रोने न लगे "...... है है है .....

मृदुला अपने साथ लगा के गीता का हाथ दोनों बग्गी पे लगवाई और प्यार से बोली ," आर्यन को तुम अपने से अलग समझती हो क्या..... उसको साम को गिफ्ट देने पड़ेगा. यह सब सिर्फ तुम्हारा है और अब तोह नया परिवार भी मिल गया है तुमको..... चाहे तोह उनको भी दे सकती हो"...... जब उन्होंने ने रति के बारे में पोछा.

गीता ," माँ, गुरूजी को भोजन करने हवेली गयी हैं..... गुरूजी किसी के हाथ का पानी भी नहीं पिटे सिर्फ माँ के हाथ का प्रसाद रूपी सादा भोजन hi करते हैं जब यहाँ आते हैं".

मुखिया काका ने महार्यं सिंह को महापंचायत का उत्तराधिकारी घोषित किया और आर्यन के हस्ताक्षर कुछ डॉक्यूमेंट पे लिए और पढ़कर सब को सुनाया..... सब आर्यन की जय जय कार करने लगे.

मुखिया काका," अरे अभी क़ानूनी कार्यवाही होनी है..... आर्यन के जनम दिन पे गीता बेटी से विवाह होगा तब तक पेपर्स भी रेडी हो जायेगा. हाँ अब जय बोल सकते हो में पूरी बात बता दी "..... सब हसने लगे .....

आर्यन को एक सोने के सिक्के से रोका गया..... पूजा तोह पहले hi हो चुकी थी बस, कुछ नए कपडे और मिले की रस्में होनी थी. बारी बारी सब पांचों ने तिलक किया आर्यन का भेंट भी दी ( आर्यन महापंचायत का दामाद भी था रिश्तों से देखा जाए तो ). आशुतोष ने आर्यन को तिलक किया तोह वह डॉली को देखने लगा, डॉली भी आर्यन को मंडप से देख रही थी

आशुतोष ने एक नया बड़ा सा टोलिया आर्यन के गॉधी में रखा और एक सिरा उसके कंधे पे..... दोनों पंडितजी मंतर पढ़ने लगे और वह आर्यन की गोदी में नए कपडे, मिठाई और फल की टोकरी रखने लगा.... आर्यन ने मुस्करा के डॉली को आँख मार दी जिसको देखर डॉली हसने लगी, उसकी सभी भेने जोह पास बैठी थी वह डॉली को छेड़ने लगी.

आशुतोष ने पीछे देखा मंडप में तोह वह भी समझ गया डॉली को हस्ते देखकर.... " आर्यन तुम्हारा धयान कहाँ है ?"

आशुतोष ने कमेंट किया तोह आर्यन सीरियस होकर, " बस पंडितजी के मन्त्रों को सुन रहा था".

पंडितजी भी चंक गए ," आर्यन बीटा मंतर पढ़ने में कोई त्रुटि हुयी है क्या ? वैसे हम तुम्हारे सामने बहोत छोटे हैं जितना ज्ञान तुम्हे है इतनी काम आयु में हम तोह तुम्हारे पेअर की धुल भी नहीं हैं".

आर्यन हाथ जोड़कर दोनों पंडितों के पेअर बारी बारी चूहा ," ज्ञान का प्रकाश तोह मुझे आप दोनों पंडितों से hi मिला है..... आप से कोई त्रुटि नहीं हुयी है बस िश श्लोक का उच्चारण ऐसे करना है ".

आर्यन ने दोनों को श्लोक का उच्चारण करके सुन्ना दिया ...... ऐसे लग रहा था की श्लोक कोई ग्यानी पढ़ रहा हो...... फिर तोह श्लोक की प्रतिस्पर्धा से हो गयी तीनो में, आर्यन उनका जवाब श्लोक से दे रहा था..... आशुतोष जोह एक नयी गले की चैन का बॉक्स लिए खड़ा था वह झुंझुला के बोलै ," एक मं. पंडित जी ..... एक मं .... "

आर्यन चुप हो गया तब बड़े पंडितजी बोले," मुर्ख इंसान जब बड़े तीनो पंडित वाद विवाद कर रहें हो उनको बिच में टोकना नहीं चाहिए ".

आर्यन ," क्षमा करना गुरुवार, आप बड़े हैं आप जीत गए..... मामाजी आप आपने कर्त्तव्य करें यानि रीती रिवाज ".

आशुतोष तोह मैं hi मैं आर्यन और दोनों पंडितों को गाली देने लगा और बड़े पंडितजी ने भी मुस्करा के कहा ," गुरु के लिए इतनी निष्ठ हमें काम देखने को मिलती है, क्या हम उनका परिचय जान सकते हैं ?''

आर्यन हाथ जोड़कर अपनी दोनों आँखें बांध करके बड़े गुरूजी को स्मरण किया..... दोनों पंडितों की आँखें स्वता hi बांध हो गयी और बड़े गुरूजी के अलौकिक प्रकाश पुंज को अपने अंतर्मन में देखना जैसे उनका जीवन भी ध्यान हो गया हो. आँखें खुली तोह दोनों हाथ जोड़कर आर्यन को परनाम किये. दोनों पंडितजी पर्याप्त ज्ञानी थे, उनको आर्यन की दिव्या आत्मा का बोध हो गया था..... अहसास तोह उनको पहले से था पर अब दोनों के चक्षु वह देख रहे थे जोह समयँ मनुष्य नहीं देख सकते थे. आर्यन का दिव्या तेज़, उसकी साड़ी भार्या और बच्चे भी दिखाई दे रहे थे यहाँ तक की पातळ लोक की उसकी बीवियां भी आराम से दिख रहीं थी. यह अद्भुत नज़ारा देख कर दोनों इतने परसंचित हुए की एक बार और आर्यन को सर झुका के प्रणाम किये.

आशुतोष ने नयी सोने की चैन आर्यन को पहनी..... फिर नयी वृस्त वाच और 11,110,01 कॅश उसके टॉवल में रखा..... थल में नारियल और कुमकुम, चावल थे उसमे पंडितजी को 51,001 हज़ार की दक्षिण दिया.

ठाकुर साहब बोले ," आशुतोष पंडित जी पेअर छु और आर्यन के भी, यह दामाद बन गया है राजवीर सिंह का क्यों भीमा भाई ?"

बीमा ने भी आशुतोष को आँखें दिखाई तोह दोनों पंडित जी के पेअर छुआ वह भी आशीर्वाद दिए पर आर्यन के पेअर छूने की बारी आयी तब आर्यन हसने लगा और टॉवल का सारा सामान उठा के मंडप के तरफ चल दिया..... सारू को सारा सामान दे कर उसके पेअर चुकार फिर अपनी साड़ी मम्मियों के पेअर छूकर आशीर्वाद लिया. मिरदुला और डॉ अंजू के पेअर छूकर वह मीणा को बुलाया. डॉली, उसकी तीनो जुड़वाँ भें और अणि को साथ लेकर वापस आकर बेथ गया.....

आशुतोष ने सबकी मिले की 2000 रुपये के नोटों से..... फिर गीता के रिश्तेदार भी आर्यन को उपहार दिए, गीता की मामी ने अपने बड़े भैया से कहकर एक नयी टोयोटा फोर्टनेर बुक करवाई थी अर्जेंट बोल कर.... आर्यन को चाबी मामीजी ने hi दी...... आर्यन उनके पेअर छूने को झुका तोह मेघा मामी ने उसके अपने गले लगा लिया..... " दामाद पेअर नहीं छूटे "...... और उसके माथे को चुम कर गले लग ली.

आर्यन उनके कान में बोलै ," फिर क्या छूटे हैं दामाद मामीजी ?" ..... मेघा को झुक कर उसकी कमर में हाथ दाल के 2 फट ऊपर उठा लिया स्टेज से......

मेघा ," आर्यन नहीं बीटा ...... में गिर जाउंगी छोड़ दे बीटा "..... वह इतनी पब्लिक देखकर शर्म सार हो रही थी.

आर्यन ने एक बार जोरसे उनको अपनी मजबूत बाँहों में दबा लिया..... बड़ी बड़ी चूचियां उसके सीने में डाब गयी थी. आर्यन उनको निचे उतर दिया सब लोग है रहे थे..... काफी औरतें िश औरत यानि मेघा से जल रही थी.

ठाकुर बलदेव सिंह ," मामी पे तोह सबसे ज्यादा हक़ होता है दामाद का, सालियों से भी ज्यादा क्यों भीमा"..... हां हां हां हां .....

आर्यन भी ताड़ लिया था की ठाकुर लार टपका रहा है मेघा पे वहीँ कई लोगों की निघा मामीजी पे थी...... आर्यन ने फोर्टनेर कार की चाबी दिखा के कहा ," मेरी मामी जी मुझे अपना बीटा hi मानती हैं, तभी इतनी सूंदर कार मुझे गिफ्ट की है..... ठाकुर साहब आप की दाल यहाँ नहीं गलने वाली, मामी जी भी मेरी मम्मी हैं और रूपा माजी भी मेरी मम्मी हैं ".

ठाकुर भी बस किलास के हसने लगे..... फिर आर्यन ने मामीजी की कान में कुछ कहा तोह वह भी हसने लगी ( आप के सामने सब फीकी लग रही हैं मामीजी इसलिए मेरे हाथों में आप को देखकर सब मर्द हमसे जल रहे है )

प्रज्ञा एक पड़गी किये अपने गॉड में लिए बैठी थी, वह पगड़ी लेकर आर्यन के पास आयी...... आर्यन अपने घुटने के बल बेथ गया और मामी ने उसके माथे पे किश करके पगड़ी पहन दी.

आर्यन जब खड़ा हुआ तोह सच में दुलहा लग रहा था, रैना चचीज्ज ने एक तलवार आर्यन को गिफ्ट की...... आर्यन तलवार मियां से निकल के हाथ में ऊपर उठाया तोह सब ताली बजने लगे..... तलवार मियां में वापस डालकर वह डॉली को दिया और पगड़ी मीणा को.

मेघा मामी का हाथ पकड़ के नयी फोर्टनेर की रिमोट के प्रेस किया.... गाड़ी महापंचायत के गेट के बहार कड़ी थी ," मामीजी नयी गाड़ी की पहली सवारी करते हैं और सब लोगों को जलते हैं..... यह मेरी ममी जी का प्यार है मेरे लिए गीता देवी अब जलने की बारी तेरी हैं, मुझे चिड़ा रही थी"...... हां हां हां

आर्यन स्टेज से निचे उतरा और जुटी पहनकर मामी को अपनी पीठ पे लड़ लिया, मेघा भी अब अपनी किस्मत पे गर्व कर रही थी...... आर्यन ने जोरसे सिटी मारी, अपने बच्चों की माँ को सिग्नल दिया था की मेरे साथ आयो.....

महापंचायत के गेट के बहार एक ब्लैक फोर्टनेर कड़ी थी, मामी को दूर खोल कर अंदर बिठया..... बच्चों के साथ उनकी चार चार माँ भी उनको गॉड में बिठा के लायी. आर्यन ने अपने 4 बच्चों को अपनी गॉड में ले लिया..... चारदीवारी सिर्फ 3.5 फट उच्ची थी महापंचायत की तोह सब साफ़ दूर से दीखता था.

भीमा ने ठाकुर को कान में कहा," आर्यन की िश ममी को आप भूल hi जाओ, उसने अपना दवा थोक दिया था िश औरत पे ".

ठाकुर भी बगले झांकने लगा ," अरे भीमा ऐसा नहीं है..... पसंद तोह आ गयी थी पर आर्यन बेटे की बात खुश और hi है "..... अपने पाजामे में लुंड एडजस्ट करते हुए बोले.....

भीमा धीरे से ," आर्यन की या उसके हथ्यार की "...... hi hi hi hi ......

दोपहर के 2:00 बजे थे, स्टेज पे भीड़ लगी थी और चरों तरफ भी दरी पे लोग स्टेज को घेर के बैठे थे. एक तरफ जानता की लाइन थी जोह Aryan-Geeta के लिए उपहार लाये थे. पहले परिवार का नाम एक रजिस्टर में लिख जा रहा था जोह उपहार लाये थे, ज्यादा तर कॅश hi लाये थे 10 रुपया से 2000 तक के नोट एक बड़ी पति में दाल रहे थे..... साड़ी, सूट का कपडा गीता को स्टेज पे दे चढ़ के दे रहे थे और आर्यन के लिए कोई चादर, कुरता पजामा का कपडा या पंत शर्ट का कपडा उपहार में दे रहे थे. शाही भोजन लगभग सब कर चुके थे, गिफ्ट देकर गाओं वालों की लाइन महापंचायत के ऑफिस में चले जा रहे थे जहाँ सब 40 गाँव वालों को एक 2000 हज़ार का नोट और चंडी का सिक्का जिसपे गीता और आर्यन का नाम छापा था दिया जा रहा था...... साथ में 2 किलो लाडू भी दी जा रहा थी. पब्लिक ख़ुशी ख़ुशी पंचायत के ऑफिस से दुसरे गेट से निकल रही थी.

पहली दावत hi उतनी जबर्दश्त थी की पेट फटने लगा कुछ आदमी का खा कर अभी तोह दूसरी दावत भी साम के बाकी थी..... गीता को इतना सब मिला ुष महारानी से पर दो बड़े बड़े बक्से में क्या होगा..... कुछ लोग बोल रहे थे पैसे होंगे, कुछ हिरा मोती होंगे, कुछ कपडे और सोने की ईंट.... जितने लोग उतनी बातें.

एक बड़े ट्रक में दोनों संदूक को एक करने की मदद से रखा और सिक्योरिटी गार्ड्स उसको लेकर हवेली चले गए..... नीला ने खुद ट्रक चला के हवेली की बेसमेंट में एक केबिन में पार्क कर दी. केबिन को लॉक कर के अपनी पॉकेट में चाभी दाल दी.

गीता और आर्यन सब गाओं वालों के उपहार अपने हाथों से ले रहे थे..... यह उनका गाओं वालों के प्रति सम्मान और प्रेम दिखा रहा था जोह रति और राजवीर को अच्छा लगा. आर्यन बड़ों के पेअर भी बारबार चूहे रहा था, जोह उम्र में काम हो हाथ जोड़कर नमस्ते भी करता.

अब प्रेजेंट में ......

रति ने चैन की साँसे ली और राजवीर से बोली," किसी की नज़र न लगे मेरे बेटे को "..... वह बलाइन लेने लगी.

राजवीर सिंह मुस्कान लिए कहा ," बात तोह तू ने सही कही है अब किसी की नज़र नहीं लगेगी िश सगाई के बाद..... काली मैया ( गीता ) उसके सर पे विराजमान है अब उसको अपनी ऊँगली पर नाचेगी ".

रति भी कटाक्ष की ," तू बस अपनी लाड़ली (अणि) को मन की वह मेरे बेटे से दूर रह..... गीता थोड़ी गुस्सैल जरूर है पर वह आर्यन की पर्व करती है जबकि अणि सबकी कमजोरी का फायदा उठती है, उसको कण्ट्रोल कर वार्ना यह लड़की हमारी खानदान की एकता तार तार कर देगी ".

राजवीर सिंह के चेहरे पे अणि का नाम सुनकर दुःख के भाव आ गए थे जोह रति की पारखी नज़र से छुपे नहीं थे बल्कि राजवीर इधर उधर देखकर अपने को सामान्य दिखे का प्रयास करता हुआ नज़र आया.

रति ने पुछा ," क्या बात है ? तू मुझसे कुछ छुपा रहा है.... बोल क्या हुआ ?"

राजवीर सिंह," कुछ भी नहीं हुआ है, में ठाकुर को मिलकर आता हूँ ".

रति ने अणि और नेहा को खोजै उसको दोनों नहीं दिखी..... तब बिना को कॉल की उनके बारे में पूछी तोह उसने कहा 2 मं दे उसको नेहा तोह बहोत दिएर से नहीं दिखी, अणि मैडम 10 मं पहले यहीं थी.

रति स्टेज पे चढ़के मुखिया काका से बात की, डॉ अंजू बहोत खुश थी उन्होंने रति को कहा ," दीदी आप आ गयी हो, अब खाना के प्लेट लगवा दूँ, आप नहीं थी तोह आर्यन और गीता ने भी खाना नहीं खाया ?"

रति ," आर्यन और गीता को खाना खाने भेज दे और गाओं वालों के साथ बेथ कर खाना खाये...... राजा, पोषक से नहीं अपनी जनता के साथ उसके दुःख और सुख में शामिल होकर बनता है..... वैसे फार्महाउस की साड़ी तयारी हो गयी जोह कुछ भी कमी रहा तू खुद देख लेना ".

डॉ अंजू हसकर रति के गले लगकर," ओह हो दीदी सब रेडी हो जायेगा, आप बस अपने लादले बेटे को स्पून फीडिंग करवा..... लो गीता भी आ गयी ".

गीता ," माँ कितनी दिएर लगा दी..... आर्यन ने सुबह का नास्ता किया फिर हवेली में भी खा पि लिया...... तू मेरा ावइ hi वार्ता रखवा रही है..... कैसी माँ है तू, मुझे भूखा रख कर तुझे खुसी मिल रही है क्या ?"

गीता उसके पास जाकर उसकी गॉड में बेथ गयी, जैसे झूट मुठ रूठने का डर्मा कर रही हो...... बात यह थी जब गीता को कोई भाव ना दे रहा हो तोह वह अक्सर रति की गॉड में बेथ जाती थी. आर्यन के ऊपर सब रिश्तेदार और औरतें गुड़ की तरह चिपक गए थे यानि सब उसको पूछ रहे थे ..... रानी मिरदुला जा चुकी थी 5 मं पहले, उनको दीप्ति के साथ भी रहना था.

सरोज के साथ वीरा बुआ और उसकी बड़ी भें हवेली चले गए थे..... आईएनएस. राजपूत और उसकी फॅमिली भी रेस्ट करने हवेली आ गए थे. रति ने डॉ अंजू को बोलकर उनको रेस्ट करने भेज दिया था हवेली. रति भी चाहती थी Aryan-Geeta की सगाई की चर्चा में Rajpoot-Saroj की सगाई की बात डाब जाये. बिना को बोलै था की आर्यन जब त्यार हो जाये तभी विप लोग स्टेज पे आने देना..... फोकस आर्यन और गीता पे रहे, आर्यन के सामने कोई कुछ नहीं बोलेगा वह रहेगा तोह गीता को भी संभल लेगा.

डॉ अंजू जब आर्यन को लेकर रति के पास आयी तोह आर्यन अपनी माँ के पेअर छूकर आशीर्वाद लिया..... रति ने अपने बेटे को आशीर्वाद दिया..... गीता ने उसका हाथ उठा लिया ," यह मेरी माँ है, तुझे तोह आशीर्वाद देने वाली बहोत हैं ".

आर्यन हँसा ," हाँ तोह मेरी माँ और सभी मम्मी मुझे ज्यादा प्यार करते हैं...... क्यों मम्मी जी ( डॉ अंजू)..... है है है...... वैसे अब तू मेरी लुगाई है अब तोह मुझसे प्यार से बात करले ".

गीता अपनी जुटी निकल के ," फिर एक बार बोल में तेरी क्यों हूँ ?" ..... वह जुटी हाथ में हिलने लगी.....

आर्यन भी 4 कदम हटा और चादर पे फ्लैट होकर गीता के पेअर पकड़ लिया," सॉरी मेरी अम्मा, तू सब से ऊपर है..... अब से गीता डार्लिंग बोलूंगा, माफ़ कर दे "......

सब शांत थे, कुछ लोग तोह इतने खुश हुए की आया ऊँट फाड़ा के निच्चे..... गीता चरों तरफ बारी बारी सबको देखि....... किया तोह आर्यन ने मजाक में था पर उसके चाहने वालो को अच्छा नहीं लगा और चाहने वाली की औकात दिखा दी थी चंडी देवी ने. आखिर सच्च यह था की गीता की वजह से सब आर्यन पर हक़ जमा पायी अगर गीता किसी से रूठ गयी तब क्या होगा ????? इसका जवाब भी गीता ने hi दिया अपने स्टाइल में.

" आया न लाइन पे..... माँ तू ने hi िश को सर पे चढ़ा रखा है, वार्ना इसकी हिम्मत नहीं होती गुरूजी का अपमान करने की...... वह साधु हैं और यह लम्पट जैसा उनको hi सुविचार दे रहा था तू ने भी तोह सुना था..... चल अपनी नौटंकी बांध कर, हम सब तुझे अच्छी तरह जानते है...... माँ भूक लगी है "...... गीता ने अपनी जुटी पहनकर कर कड़ी हो गयी.

रति भी दिल hi दिल मुस्करा रही थी, वैसे भी चंडी देवी से क्यों बहस करे..... आर्यन भी झट से उठ गया और रति को बोलै ," देख ले माँ यह मुझे कुछ समझती hi नहीं है? कोई नहीं में अपनी माँ के साथ खाना खाऊंगा "...... रति को उठा के आर्यन अपनी गॉड में लेकर स्टेज से उतर गया और उसको अपनी पीठ पे लाड के ुष जगह ले गया जहाँ नीची और पिचि जाती के लोग पटल पे भोजन कर रहे थे...... जी हाँ महापंचायत भी जाती और बिरादरी का भेद भाव करती थी लेकिन आर्यन और रति नहीं.

आर्यन मंटा था की हम सब परम परमेश्वर भगवन की औलाद हैं, धरम तोह हमको जीने की शिक्षा देता है पर हम इंसान उसको अपने स्वार्थ के लिए वर्गों और वर्णो में बाँट देते हैं. (चलो ज्ञान बहोत हो गया अब हकीकत पे आते हैं है ) ......

आर्यन और उसके परिवार वाले भी जोह खाना नहीं कहे थे वह सब भी आम जानता में अपने हाथों से सर्वे करने लगे. जनता भी उसको अपना लीडर चुनती है जोह सबसे ादार और सम्मान से बात करे..... आर्यन उसकी जीती जागती मिसाल था. रति ने भी आर्यन को बचपन से देखा था की वह सब से मिल जुलकर रहता है..... बड़े होते हुए उसने देखना था की वह सबको एक दृष्टि से देखता है..... एहि बात तोह आर्यन की चौदर्य माधव सिंह को भी पसंद थी, तभी तोह उन्होंने अपना उत्तराधिकारी उसको चुना. रति को नाज था आर्यन पे यह पावर उसको अच्छी लगने लगी थी, नाम तोह उसका hi उच्चा कर रहा था आर्यन यहाँ तक की अणि भी इंदिरेक्ट्ली.

जमीन पे दरी भीची थी उनके साथ बेथ के भोजन करके लगे..... रति ने खाना कहते हुए आर्यन से कम और डिप्टी कम का जीकर किया तोह आर्यन ने उसको सब बता दिया..... यहाँ तक की डिप्टी कम नाराज हुए और उसने कैसे उनको मन लिया फार्महाउस की पार्टी का इनविटेशन देकर.

रति भी खुश थी की आर्यन अपनी जिम्मेदारी समझें लगा है, उसने कैसे पावर बैलेंस करना है जान लिया था. अणि की तारीफ करते हुए वह बोलै," जोह काम में नहीं कर सकता वह अणि ने आसानी से कर दिया..... उसको राजनीती की परख है, वैसे भी वह मेरे से ज्यादा इंटेलीजेंट है".

रति ने मजाक में कहा," फिर तोह तू यह भी कहेगा महापंचायत का वारिस अणि को होना चाहिए ?"

आर्यन हसकर रति को अपने हाथ से बाईट खिलते हुए," अगर तू ने सुना हो की लोग क्या कहते है अणि के बारे में..... वह एक देवी है और जोह हमारी रक्षा करने आयी है..... कुछ लोग तोह उसके सम्मान से पेअर भी छूटे हैं. वैसे भी में भी मंटा हूँ की वह किसी महारानी ( विजयलक्ष्मी) का अवतार है "...... यह बात उसने धीरे से बोली जैसे बहोत बड़ा सीक्रेट हो.

गीता ," तुम माँ बेटे क्या कान फुसर कर रहे हो ? पका मेरी बुराई कर रहे होंगे ".

आर्यन और रति हसने लगे..... आर्यन ने गीता को अपने हाथ से एक बाईट दी ," हम अणि की बात कर रहे थे..... मेरी चंदा रानी की कोई बुराई करे में सपने में भी नहीं सोच सकता..... तू मेरे लिया क्या है तुझे में बता नहीं सकता बस मेरी आत्मा hi जानती है की में तेरे साथ कितना खुश हूँ ".

सारू, मीणा, Dimple-Payal भी वहीँ बेथ कर शाही भोजन का लुत्फ़ उठा रहे थे..... भीड़ लगभग ख़तम हो गयी थी, मांगने वाले और भिकारी की लाइन लगी थी उनका नंबर लास्ट में था. सिक्का, 1 सेर लाडू और 2000 का कड़क नोट भी सबको मिला पर किसी से बाटने की हिदायत भी दी जा रही थी..... सयम को भी आना मगर फार्महाउस पे..... 3500 से ज्यादा मांगने वाले आये थे.

_______________

3:30 पं, हवेली ......

आर्यन अपने बैडरूम में एक सोफे पे बैठा था, डॉली उसकी गॉड में और गीता उसके लेफ्ट साइड बैठी थी. मीणा लैपटॉप पे कुछ कर रही थी सायद गेस्ट लिस्ट चेक कर रही थी.

डॉली अपने बड़े भाई की गले की नयी चैन पे हाथ फिर रही थी..... गीता भी अपने होने वाले पति से अकेले में बात करना चाहती थी लेकिन डॉली की जिद थी की मुझे भाई के साथ रहना है, में किसी की नहीं संगी..... मीणा को आर्यन लेकर आया था. गीता जोह अब सूट सलवार में थी वह पूछ hi ली ," जाने को यहाँ होना चाहिए था उसको न लेकर हमसे बड़ी भूल हो गयी ".

मीणा अपना चस्मा उतर के कमेंट की ," फिर तोह दादी और मंजू मौसी को भी लाना पड़ता..... वैसे उन्होंने सब लाइव देखा है कैमरा पे सब बहोत खुश भी हैं. अब तोह 2ंद इन्निंग्स का भी इंतज़ार कर रही होगी, वहां सुबह हो जाएगी ".

आर्यन कुछ सोच रहा था अपने मैं में और कुछ कुछ उसको आईडिया आ गया था. डॉली उसके नए बनियान को थोड़ा खिसका के उसके लेफ्ट निप्पल को चूमने लगी..... "अह्ह्ह्हह सीईई डोललययययय " ......

डॉली निप्पल को काट ली थी और हसने लगी ," Hi hi hi hi ...... दीप्ति के सपने देख रहे हो न...... में और गीता बुआ यहाँ है, आप हमको भूल गए बस याद करवा रही थी ".

आर्यन ने गीता की तरफ देखा तोह वह भी उसको घूरने लगी ..... " में अणि के बारे में सोच रहा था..... उसके पास पावर है जब भी चाहे वह वहां जा सकती है..... मुझे भी पालक झपकते hi अलास्का ले गयी फिर जब पाया तोह हम दोनों रूम में थे. गीता डार्लिंग तू समझ रही है न में क्या कह रहा हूँ ".

डॉली का सर को पकड़ के बोलै," िश चाट, लाल तोह तू ने hi किया है काट के "....... डॉली भी ख़ुशी ख़ुशी उसके बनियान को साइड कर लेफ्ट निप्पल को चाट ने लगी ...... सलरपपपप..... पुछहःहःहः.....

तीनो को पता था की अणि क्या कर सकती है, आर्यन पे अपना दावा थोक के वह अपना हक़ जाम दी है..... मीणा को पता था नेहा भी जल्द से जल्द आर्यन को पूरा प्यार करने के लिए आतुर है, उसने एक तीर से दो निशाने लगा दिए थे...... बस उसको आर्यन को समझाना था पर अभी नहीं सही टाइम पे.

गीता तोह पहले hi फैसला कर ली थी की सारू दीदी और अणि का सबसे ज्यादा हक़ है आर्यन पे...... आखिर उसकी सगी मम्मी और भें थी वह इनके बिच नहीं पड़ना चाहती थी पर दीप्ति और मुझे एक्स प्यार करना होगा आर्यन को साथ में जाने को भी.

गीता एक चपत लगते हुए डॉली के सर पे ," तुम दोनों अभी से शुरू हो गए..... अणि क्या कर सकती है में अच्छी तरह से जानती हूँ, तू बोलेगा तोह जाने और तेरी दादी को वह ले आएगी..... मंजू दीदी को वहीँ रहने दो वार्ना माँ की सहमत आ जाएगी ".

डॉली निप्पल चाट के ऊपर बढ़ने लगी और आर्यन के चेस्ट को चाट के उसकी चीन चूसने लगी...... आर्यन भी अपनी िश भें की यह ठिठोली एन्जॉय कर रहा था..... डॉली ने चीन को छोड़कर उसके लिप्स को चूसना शुरू कर दिया..... पुछहःहःहः पुछठ चम्म्म्म चम्म्म्म ..... चाहते तोह दोनों वह भी थी पर डॉली ने बाजी मार ली..... आर्यन भी रिस्पांस करने लगा तोह डॉली उसको और जोश से किश करने लगी......

आर्यन ने अपना हाथ मीणा और गीता की कमर में घुसा और खींच के दोनों को डॉली के आजु बाजु अपनी गॉड में बिठा लिया..... दोनों ाचे से जानती थी उनको क्या करना है, वह दोनों भी लेफ्ट और राइट से आर्यन पे हमला कर दी..... जिसको जहाँ जगह मिली वहां किश करने लगी. 2 मं तक तीनो उसको किश करती रही पर अब 3ऋ को धकेलने का वक़्त आ गया था..... आर्यन अपने दोनों हाथो से गीता और मीणा की कमर सेहला रहा था .... डॉली खुद बिच में थी उसको दोनों ने हाथों से पुश कर के बिच से निकल दिया और एक एक जांघ पे कब्ज़ा जमके के बारी बारी किश करने लगी ...... आर्यन के मजे की सीमा न थी वह कभी मीणा को चुम रहा था..... पुछठ पुछहःछः चम्म्म्म ममममममम ममममममम...... कभी गीता को ..... ुंहःहःहःमा ुंहःहःहः ममममममम ममममममम.....

डॉली थी तोह कविता की बेटी जब देखा की उसको दोनों ने मिलकर अलग कर दिया है तोह वह सोफे और दिवार के बिच चढ़ कर आर्यन को धकेलने लगी जब थोड़ी झगा बानी तोह आर्यन को पीठ पे अपना अगला हिस्सा लगा के उसकी गर्दन और सर चूमने लगी...... आर्यन भी बिच बिच में सर घुमा के डॉली को किश करने लगा. 15 मं बाद जब तीनो थक गए तब उन्होंने आर्यन को गले लगा लिया..... तीनो खूब हँसा ....... हां हां हां hi hi hi ुहु ुहु ुहु है है है ......

मीणा ," डॉली चल अब तेरा कोटा पूरा हो गया है..... लव बर्ड्स को अकेला छोड़ दे तककि gutar-gu करें ".....

डॉली अपने भाई की खोली भर के ," पहले मुझे भाई का पूरा प्यार करने दो..... भाई ी लव यू "...... उसके कंधे पे किश की..... पुछठ.....

मीणा खड़े होकर ," डॉली नादाँ न बन , जितना प्यार तुझे आर्यन से मिला है उतना मुझे और गीता दीदी को भी नहीं मिला..... फिर मैंने बोलै था न 2 दिन के लिए हम सब सिस्टर्स आर्यन को तंग नहीं करेंगे..... चल बीटा योर अरे गुड गर्ल न".

डॉली ," भाई प्लीज एक बार ".

आर्यन ने डॉली के पिछवाड़े पे चुनती काटी और गीता की तरफ इशारा किया..... जोह गुस्से से डॉली को देख रही थी..... डॉली डरते हुए आर्यन से अलग हुयी और मीणा के पास जाकर कड़ी हो गयी तब आर्यन ने उसको पीछे से हुग किया..... कान पे किश करके धीरे से बोलै ," कॉल करूँगा.... तब आना ".

एक हाथ में लैपटॉप दुसरे में डॉली का हाथ लेकर मीणा दूर लगने की बात बोल कर चली गयी..... आर्यन जानता था की डॉली अपनी माँ की तरह जिद्दी है, उसको प्यार चाहिए तोह चाहिए वह किसी की परवाह नहीं करती थी..... गीता इसलिए डॉली पे गुस्सा हुयी.

आर्यन ने दूर लॉक किया और बोलै," यार अभी वह बच्ची है, उसको ज्यादा समझ नहीं आता..... चल में माफ़ी मांगता हूँ उसकी हरकत के लिए.... अब तोह गुस्सा थूक दे मेरी दिलरुबा ".

चटककक ..... गीता ने आर्यन का सीधा गाल सेक दिया ," तू बस सब औरतें की गांड ग़ुलामी करता रह..... यह छटांकि जैसी लौंडिया मेरे सामने तेरा लौड़ा लेने की बात कर रही है..... जा उसके पास मुझे तेरे से बात नहीं करनी है ".

गीता जब दूसरी बार मरने वाली थी तब आर्यन ने उसका हाथ पकड़ के उसको घुमा दिया और उसकी पीठ से चिपक गया...... उसके दोनों हाथ को पकड़ के उसकी छाती से लगा के उसकी गर्दन पे चूमि देकर बोलै," कितना गुस्सा करती है, एक दिन यह तेरा गुस्सा न काम कर दूँ तोह मेरा नाम आर्यन नहीं"..... उसके पिछवाड़ा पे ड्राई हुम्पिंग करने लगा, लौड़ा तोह उसकी पजामी में तीनो के चूमने से पूरा खड़ा होगया था....

गीता उसकी पकड़ से छूटने का प्रयास कर रही थी पर आर्यन इतना कमजोर नहीं था जोह शिकार एक बार उसकी पकड़ में आ गया वह आसानी से छूट जाये..... " छोड़ मुझे कुत्ते..... वार्ना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.... छोड़ दे हरामी अह्ह्ह्हह ".

आर्यन ने उसकी गर्दन पे जोरसे बाईट किया और थूक लगा के चाटने लगा..... पुछहःहःहः पुछठ पुछहःछः.... " बहोत कड़वी है तू चंदा रानी..... केरल की तरह इतनी कड़वी मत बन चासनी की तरह मीठी बन जा "..... उसने दूसरी साइड काटा फिर से चाहते लगा..... "अह्ह्ह्हह मर जा सूअर कहीं का ......"

आर्यन उसको अपने साथ लगे बीएड पर गिरा लिया और खुद उसके ऊपर गिर गया बगैर कोई ढील दिए..... और गीता की पीठ पे सूट के ऊपर से काट लिया "अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह..... काट के मार देगा क्या siiiiiiiiiii ..... एक बार हाथ छोड़ दे वार्ना इतना मारूंगी की मार जायेगा अह्ह्ह्हह "......

आर्यन ने िश बार जोरसे से काटा था जिससे उसके दांत भी गीता की पीठ पे धंस गए थे और उसकी बून्द पे ताबड़ तोड़ धक्के मरने लगा...... बिच बिच में उसके पिछवाड़ा को अपनी खड़े तोपची को रगड़ भी देता.....

आर्यन ," मजा आ रहा है डार्लिंग...... थोड़ा अपने पेअर फैल दे तककि तेरी सेक्सी बून्द पे अपना लौड़ा घिसने में मजा आ जाये ".....

गीता को अब समझ में आया ," भैंचोड़ यह तोह मेरी गांड मारने के चक्कर में है "..... वह पूरी ताकत लगा दी आर्यन की पकड़ से छूटने में पर वह उसके दोनों पेअर अपने पेअर से खोल के साइड किया और सूट सलवार की दिवार थी पर उसका खड़ा हथियार इतना जबरदस्त था की गीता को ऐसा लग रहा था की उसकी गांड आज नहीं बचेगी.....

गीता का कोई जोर नहीं चल रहा था, आर्यन पे कोई बहुत सवार था ," डार्लिंग आज तेरी सेक्सी गांड हमारी सगाई की ख़ुशी में मुझे दे दे".....

उसके गाल को चाटने लगा..... " कितनी मसल गांड होगी तेरी यह सोच कर मेरा लौड़ा बेकाबू हो रहा है "...... पुछहःहःहः पुछठ पुछहःछः..... गीता का लेफ्ट गाल चूसने लगा.....

गीता थोड़ा नरम पड़ती हुयी ," आर्यन मत कर यार...... में तेरी होने वाली बीवी हूँ ".....

आर्यन गुस्से में ," तभी तोह गांड मांग रहा हूँ मम्मी ने भी नहीं दी मुझे..... कल रात भी गया था..... चल अपना सलवार और पैंटी उतर वार्ना सूखी मार लूंगा..... बीवी है तोह क्या मेरे सर पे मूतने लगेगी, कपडे खोल ".

गीता की साड़ी हवा निकल गयी..... आर्यन की ताकत और हिम्मत उसने देखि थी, उसका लगा की उसने भूल कर दी है आर्यन को झापड़ मार के..... "दीदी तुम कहाँ हो मुझे बचा लो वार्ना यह मुझे मार के hi मानेगा "......

सारू के कान में गीता की आवाज आयी..... वह बबिता और गुल के साथ थी उनके कमरे में. छोटी माहि सू रही वह सब आज के साम के फंक्शन की ड्रेस और साड़ी सेलेक्ट कर रहे थे..... सारू तेज़ी से बाथरूम की तरफ दौड़ के गयी और दूर बंद कर लिया..... दोनों को नज़र एक साथ मिली जब सारू ऐसे हड़बड़ी में बाथरूम में घुस गयी थी..... दोनों थका मार के हसने लगी ..... गुल," मम्मी जी को प्रेशर बहोत तेज़ आया है "...... hi hi hi

बबिता ," सीई यह जाग जाएगी ..... hi hi hi ".

सारू अपनी आँखें बांध करके जल की पावर उसे करके आर्यन की रूम में पहुंची तोह वह गीता के ऊपर चढ़के ढके मार रहा था.....

" यह क्या हो रहा है ?" ..... उसकी कड़क आवाज आयी तब आर्यन भी होश में आया.

उसने पीछे पलट के देखा फिर अपना सर झटके ( दूर तोह लॉक है मम्मी यहाँ कैसे आ गयी ) कोई नहीं मम्मी को पता लेता हूँ उनकी गांड देने के लिए.

सच्च में वह पगला गया था गांड लेने के लिए..... " अरे मम्मी यह गीता ने मुझे थप्पड़ मारा और जब यह नहीं रुकी तोह मुझे उसके पकड़ना पड़ा..... "

गीता को छोड़कर आर्यन बीएड से उतर गया..... सारू ," तुम दोनों कब तक यही कुत्ते बिल्ली की तरह लड़ोगे..... आज तुम्हारी सगाई हुयी है कुछ तोह शर्म करो ".

अब बारी सारू की थी, आर्यन अब उसके पीछे से चिपक गया और अपनी मम्मी को प्यार से किश करके बोलै ," ी लव यू मम्मी, यह गीता को बोलो जोह कभी मुझसे प्यार से बात नहीं करती ".

सारू सब समझा गयी जब लौड़े की चुभन अपनी गांड पे महसूस हुयी, पक्का िश पोजीशन में तोह गीता का डरा चेहरा बता रहा है की आर्यन उसको अपनी ताकत दिखा के डरा रहा था..... " तू पहले बाथरूम करके आ में गीता से बात करती हूँ ".

आर्यन ," पर मम्मी".

सारू कड़क आवाज में ," ारयणणणणण जो तो थे टॉयलेट ात वन्स ".

आर्यन अपनी एक हथेली पे दुसरे हाथ मुक्का बांके मार...... अपनी शेरवानी पहने के बाथ रूम में चला गया..... गीता वैसे hi पड़ी रही बीएड पे जैसे आर्यन उसको छोड़ के गया था.

सारू ने गीता को हिला के पुछा ," गीता क्या हुआ कुछ बोल तोह ?"

गीता साद वौइस् में ," आर्यन ने मेरा बंग करने की कोशिश की ".

सारू अपने मुँह पे हाथ रख के ," यह क्या बोल रही है..... वह मजाक कर रहा होगा ".

गीता ने सारू को हाथ झटक के कहा ," दीदी अगर में तुझे न बुलाती तोह थोड़ी दिएर में वह मेरी गांड फाड़ने वाला hi था..... में सिक्योरिटी अफसर में फिर करुँगी".

सारू ," तेरा दिमाग़ घूम गया है क्या..... तू होश में नहीं है ".

गीता ," होश तोह मुझे अभी आया है "...... खड़े होकर दूर के पास जाकर उसको खोली और बहार चली गयी.

शायद वह इतना गुस्सा हो गयी थी की आर्यन से नफरत करने लगी.....

आर्यन गुस्सा में रूत कर अपने सीक्रेट रूम में चला गया..... िश समय रूम में कोई नहीं था वह बीएड पे अपने कपडे उतर के अंडरवियर और बनियान में लेट गया..... अपने खड़े लुंड को एडजस्ट करते हुए सोच रहा था

" आखिर मैंने गीता से ऐसा क्या मांग लिया था की वह देने से इंकार कर रही थी..... सगाई का अवसर था उसकी वर्जीनित्य तोह नहीं मांगी थी..... उसको अपनी गांड पे इतना घमंड है , कोई न किसी और की ले लूंगा जोह मुझे ख़ुशी ख़ुशी दे देंगी."

आर्यन जल्दी गुस्सा नहीं होता था लेकिन गीता ने उसका सारा मूड ख़राब कर दिया. उधर सारू को समझ नहीं आ रहा था की दोनों में से गलती किसकी है. उसने डीडे किया दोनों को अकेला छोड़ देते हैं, आर्यन ज्यादा दिएर तक गीता से नाराज नहीं रह पायेगा वह उसको मन लेंगे ..... उसने वापस छोटी माहि के पास जाने का फैसला किया.

आर्यन अपनी आँखें मुंड कर सोच रहा था की आखिर माँ (रति) मुझसे क्यों नाराज है? बात तोह मेरे से कर रही थी पर मैं से नहीं..... मम्मी (सारू) को भी मैंने नाराज कर दिया और गीता ऐसे क्यों बर्ताव कर रही थी ?

उसको लगा कोई मेरे साथ बीएड पे लेता हुआ है, महक से उसने पहचान लिया था बस उन्ही लेता रहा की वह क्या करती है ?

उसके होठों पे आने वाली लड़की का स्पर्श हुआ और वह धीरे धीरे उसपर अपना वजन डालने लगी अपनी जीभ आर्यन के लबों के फिरते हुए ,"हुन्न.... में सू नहीं रहा हूँ बस आराम कर रहा हूँ ".

लड़की उसके बॉडी पर पूरा वजन दाल के उसके निचे वाले होंठ को चूमने लगी फिर ऊपर के होंठ को...... पुछहःहःहः पुछठ पुछहःछः...... आर्यन कोई रिस्पांस नहीं दे रहा था पर उसको अपने ऊपर से हटा भी नहीं रहा था लेकिन उसको मजा खूब आ रहा था. जब उसने अपने को थोड़ा आगे किया आर्यन के लुंड पे अपनी योनि को कपडे के ऊपर से रगड़ लगी तब उसका लुंड ज्यादा अकड़ गया..... आर्यन अपने होंठों को खोल के जीभ के भार निकल दिया वह िश इन्तजार में थी और आर्यन की जीभ चूसने लगी..... ुंहःहःहः ुंहःहःहः ममममममम ममममममम......

लड़की ने आर्यन के चेहरे को थाम के अपनी जीभ उसकी की जीभ से बिधा दी...... उसको ाचा लग रहा था पर यह खेल बांध करना होगा और अपनी जीभ मुँह में वापस खिंच के बोलै ," मान जा अणि मेरा मूड नहीं है और यह गलत है ".

जी हाँ दोस्तों वह लड़की अणि थी और आर्यन के फेस पे हर जगह चूमने लगी. वह हसकर पुछा ," इतना प्यार मत कर वार्ना मुझे दिएबेटिस हो जायेगी".... है है है है

अणि लास्ट बार आर्यन को लिप पे किश की और बोली," मेरे भाई का मूड किसने ख़राब किया है बस आप उसका नाम बताओ ".

िश सीक्रेट रूम में कुछ और भी लड़कियां थी जोह इनविजिबल मोड में किसी को दिखा नहीं दे रहे थी ???

तो बे कॉन्टिनोएड......

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