Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम) - Page 2 - SexBaba
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Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम)

भाई जल्दी ही मैं मेरी जंग के नऐ अपडेट पोस्ट करूंगा। शायद 1-2 दिन में ही मैं उस कहानी को फिर से रीस्टार्ट कर दूँ।
 
Update 005 -

अपने रूम में जाकर मैं सीधा बाधरूम में घुस गई और अपने सारे कपडे निकाल कर बाथटब के गर्म पानी में जाकर लेट गई। करीब 1 घण्टे के बाद जब मैं बाहर निकली। तो मैं पहले से काफी अच्छा महसूस कर रही थी। इसके बाद मैंने रूम सर्विस को कॉल करके अपने लिए काफी और नास्ता आर्डर कर दिया और फिर अपने कपडे पहनकर तैयार होने लगी। मैंने इस वक्त मात्र एक टैंक टॉप और प्लाजो पहना था। क्योंकि मैं काफी थकी हुई थी और सारी रात धुँआधार चुदाई के कारण मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा था। इसलिए ब्रा और पेंटी पहनने का मेरा कोई इरादा नहीं था।

मेरे तैयार होते ही नाश्ता भी आ गया था। इसलिए फटाफट अपना नाश्ता खत्म करने के बाद मैं एक पेन किलर खाकर सो गई। दोपहर जब मेरी आँख खुली। तो मैं काफी अच्छा और हल्का महसूस कर रही थी। मैंने मोबाईल में समय देखा तो दोपहर का एक बज रहा था। मैं अपने सर पर चपत लगाते हुए खुद से बोली

निशा- अरे बेबकूफ कितनी देर से सो रही है... बापिस घर नहीं जाना क्या। चल जल्दी से टिकिट बुक कर

इतना बोलकर मैं अपने मोबाईल में ऑनलाईन ही दिल्ली के लिए टिकिट बुक करने लगी। पर अगले 4-5 दिन तक भोपाल से दिल्ली के लिए कोई भी सीट खाली नहीं थी। मैंने सभी क्लास की ट्रेन चैक कर ली थीं। आखिरकार मैंने गुस्से में अपना मोबाईल पलंग पर फेंक दिया और बाथरूम में फ्रेस होने के लिए घुस गई। बाथरूम से बाहर आकर मैंने रूप सर्विस को कॉल करके अपने लिए कॉफी का ऑडर कर दी और बापिस बिस्तर पर लेट कर कल रात के बारे में सोचने लगी।

रात के बारे में सोचते ही मेरे चेहरा शर्म से लाल हो गया था और मेरे होंठों पर अपने आप ही मुस्कान आ गई। क्योंकि सारी रात मेरी जबरदस्त तरीके से चुदाई हुई थी। जिसमें मुझे पहली बार इतना मजा आया था। मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब अपने कपडों के ऊपर से अपनी चूत को सहलाना शुरू कर चुकी थी। जिसमें अब भी मीठा मीठा दर्द हो रहा था। मुझे होश तब आया जब डोर बैल की आवाज सुनाई दी।

डोर बैल की आवाज सुनते ही मैंने जैसे ही अपने रूम का गेट ओपन किया तो दरवाजे पर खडा बेटर मुझे हैरानी से आँखे फाड कर देखने लगा। मैंने इस वक्त महरून कलर का टैंक टॉप और ब्लैक कलर का प्लाजो पहना हुआ था। जिसके अंदर मैंने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी। चूंकि मेरा टॉप थोडा डीप नेक था। जिस कारण मेरी क्लीवेज साफ साफ दिखाई दे रही थी। ऊपर से कल रात के बारे में सोच कर मैं पहले से ही उत्तेजित थी। जिस कारण मेरे बूब्स फूलकर थोडे और बडे हो गये थे और मेरे निप्पलस भी एक दम कडक हो गए थे। जो मेरे टॉप के ऊपर से भी साफ साफ दिखाई दे रहे थे।

मैंने उस बेटर की आँखों में वासना साफ साफ देख ली थी। पर फिलहार मेरा उसमें कोई इंट्रेस्ट नहीं था। इसलिए मैंने चुपचाप उसे कमरे के अंदर जाने की जगह दे दी। उस बेटर ने कॉफी टेविल पर रखी और जैसे ही पलट कर जाने लगा तो इस बार उसकी नजर मेरी गाँड पर अटक गई। प्लाजो मेरी दोनों गाँड के अँदर चला गया था। जिस कारण मेरी दोनों बडी वडी गाँड उसके सामने थी। जब मुझे लगा कि उसे कॉफी टेविल पर रखने में कुछ ज्यादा ही समय लग गया तो मैंने पलट कर देखा। उस बेटर की नजरें अब भी मेरी बडी बडी गाँड पर टिकी थीं। एक पल के लिए मेरे चेहरी पर मुस्कान आ गई पर अगले ही पल मैंने कहा

निशा- हो गया तुम्हारा

मेरी बात सुनकर वो बेटर होश में आते ही हडबडा कर बोला

वेटर- ज जी मैम हो गया

इतन बोलकर वो रूम से ऐसे भागा जैसे मैंने उसकी चोरी पकड ली हो। उसके जाते ही मैंने दरवाजा लॉक किया और जोर जोर से हंसने लगी। जब मैं नॉर्मल हुई तो मैंने मिरर के सामने खडे होकर अच्छी तरह से अपने आप को निहारा। मैं इस वक्त बाकई में कॉफी ज्यादा हॉट लग रही थी। अपने आप को आगे पीछे अच्छी तरह से निहारने के बाद मैं सोफे पर बैठ कर कॉफी सिप करते हुए सोचने लगी। मैंने मन ही मन अपने आप से कहा

“अरे यार अब 4-5 दिन यहाँ क्या करूँगी... ट्रेन में तो सीट मिल ही नहीं रही”

“एक काम करती हूँ यहीं रूकती हूँ। बैसे भी मेरा ऑफिस टूर एक हफ्ते का है और होटल भी मेरे ही नाम से बुक है। बैसे भी दिल्ली जाकर मैं क्या कर लूँगी... अमन तो है नहीं फालतू में बोर हो जाऊँगी। क्यों ना यहीँ घूम फिर कर थोडी मस्ती कर लेती हूँ और अगर कल की तरह मौका मिला तो मजे भी ले ही लूँगी। दिल्ली में तो ये सब पॉसिबल नहीं है। किसी ना किसी जान पहचान बाले के मिलने का डर रहेगा। यहाँ मुझे कोई जानता भी नहीं है, और बैसे भी मैंने आज तक ऑफिस से कोई छुट्टी नहीं ली है। मेरी 1 महिने की छुट्टियाँ अभी तक पेंडिंग है। जो अगले महिने लैप्स हो जाऐंगी। अब जब कम्पनी की तरफ से मौका मिला है, तो क्यों ना पूरा हफ्ता छुट्टी मना लूँ”

“पर अब यहाँ क्या करूँ किसी को जानती भी तो नहीं हूँ। क्यों ना मार्केट जाकर थोडी बहुत शॉपिंग कर ली जाए... और उस शोरूम में जाकर भी देख लूँगी कि बुड्डा सही बोल रहा था या केवल लम्बी लम्बी ढींगे हाँक रहा था। अगर सही बोल रहा होगा, तो फोकट का गिफ्ट लेने में क्या बुराई है... बैसे भी अब जब एक हफ्ता यहाँ रूकना ही है तो एक आध बार तो उससे फिर मुलाकात तो होगी ही। साले बुड्डों में बड़ा दम था। काश अमन भी इतना जोशीला होता तो मजा ही आ जाता।”

यही सब सोचते सोचते मैंने अपनी कॉफी खत्म की और फिर तैयार होकर मार्केट के लिए निकल गई। करीब 2 बजे मैं भोपाल के सबसे बडे मॉल के अंदर मौजूद थी। जिसमें उस बुड्डे का शोरूम भी था। वहाँ जाकर मैंने मैनेजर से कहा

निशा- मुझे शैलेन्द्र यादव जी ने यहाँ बुलाया था

मैनेजर- जी मैम आपका नाम क्या है

मैंने थोडा सोचकर जबाब दिया

निशा- सपना

मेरा नाम सुनकर वो थोडा हैरान होते हुे बोला

मैनेजर- ओह सॉरी मैम… मैंने आपको पहचाना नहीं। आज सुबह सुबह ही सर का मेरे पास कॉल आ गया था।

इतना बोलकर मैनेजर ने एक सैल्स मैन को आवाज लगाकर कहा

मैनेजर- रमेश मैम को सबसे लेटेस्ट बाले स्मार्ट फोन दिखा दो

मैनेजर की बात सुनकर रमेश मुझे एक तरफ ले गया और लेटेस्ट स्मार्ट फोन दिखाने लगा। जो कि सारे के सारे बहुत ज्यादा मंहगे थे। मैंने उनमें से एक फोन सिलेक्ट कर लिया। मैं काफी समय से उस फोन को खरीदने के बारे में सोच रही थी। जैसे ही मैंने फोन सिलेक्ट किया, तो उस सेल्स मैन ने एक नया सिमकार्ड किसी और व्यक्ति के नाम से एक्टीवेट करके उस फोन में डाल दिया। इसके बाद उसने मोबाईल पर स्कीन गार्ड और बैक कवर लगाकर वो फोन मुझे दे दिया।

जब मैं उस फोन को लेकर शोरूम के मैनेजर के पास गई तो उसने मुझे उस फोन के बिल के साथ साथ शैलेन्द्र यादव का विजिटिंग कार्ड थमा दिया। मैंने एक नजर विजिटिंग कार्ड पर डाली फिर बिल को देखने लगी। वो वाकई में काफी मंहगा स्मार्ट फोन था। जिस पर कस्टमर के नाम बाली जगह खाली थी और नीचे की तरफ एडवांस पेड लिखा हुआ था। मुझे उस बिल को इतना गौर से देखते हुए पाकर मैनेजर बोला

मैनेजर- मैम बिल पहले से ही एडवांस में पे हो चुका है और कस्टमर नेम खाली छोडने के लिए सर ने ही मुझसे कहा था और हाँ मैम सर ने कहा है कि आपको बता दूँ कि यादव एण्ड सन्स् के नाम से इस मॉल में जितनी भी दुकानें हैं वहाँ जाकर आपको जो कुछ भी लेना हो, वो आप ले सकती हैं। इसके लिए आपको कुछ भी पे करने की जरूरत नहीं है। बस आपको यह विजिटिंग कार्ड उस शोरूम के मैनेजर को दिखाना होगा।

मैनेजर की बात सुनकर मैंने जैसे ही उस विजीटिंग कार्ड को पलटकर उसके पिछली साईड में देखा, तो उसपर लिखा हुआ था। “ऑल बिलस् आर एडवांस पेड़।” नीचे यादव एण्ड सन्स् की शील और सिग्नेचर भी थे। मैंने हैरानी से उस मैनेजर को देखा और फिर उससे पूछा

निशा- यहाँ शैलेन्द्र सर के कितने शोरूम हैं

मैनेजर- 12 शोरूम हैं मैम और टॉप फ्लोर पर ब्यूटी एण्ड पर्सनल केयर जोन भी उनके ही हैं।

निशा- क्या ये सब उनका अपना है

मैनेजर- ओह नहीं मैम, असल में वो तीन पार्टनर्स हैं। तीनों एक ही फैमली के हैं पर फैमली मेम्बर कम दोस्त ज्यादा हैं। आप निश्चिंत रहिए आपको जो भी खरीदना है आप खरीद सकतीं हैं। इस कार्ड को दिखाने के बाद कोई भी आपसे पैसे नहीं माँगेगा।

मैंनेजर की बात सुनकर मैंने मुस्कुराकर उसे देखा और फिर उस शोरूम से बाहर निकल कर सबसे पहले अपने नये फोन से शैलेन्द्र यादव जी को कॉल करके उन्हें थैंक्स कहा। फिर उनका नम्बर उस मोबाईल में सेव करके मॉल में घूमने लगी। मैंने उस माँल में से कुछ अच्छे ब्रांड के हॉट और रिवीलिंग कपडे और कुछ अच्छे ब्रांड की सेक्सी ब्रा-पेंटी भी खरीद लीं। उसके बाद टॉप फ्लोर पर जाकर अपनी बॉडी पर कुछ टैटू बनवाये और एक नेवल रिंग भी लगवा ली। जिसके बारे में मैं काफी लम्बे समय से सोच रही थी। इन सब में सबसे अच्छी बात यह थी की मुझे एक पैसा भी खर्च नहीं करना पडा था।

शाम के करीब 6 बज रहे थे। जैसे ही मैं उस मॉल से बाहर निकल रही थी, तो मेरे पीछे आ रहे किसी लडके ने मेरी गाँड को सहला दिया। अगर मेरे साथ ये दो दिन पहले हुआ होता तो पक्का मैंने पलटकर उस लडके को एक थप्पड मार दिया होता। क्योंकि उस वक्त तक मैं एक पतिव्रता शरीफ औरत थी। पर अब बात अलग थी, इसलिए अब मुझे ऐसी हरकतों का बुरा नहीं लग रहा था। बल्कि मुझे तो इसमें बहुत मजा आ रहा था। जब मैंने पलटकर उस लडके से कुछ भी नहीं कहा, तो उसकी हिम्मत बड गई और उसने मेरी गाँड पर एक बार फिर से थप्पड मारा।

इस बार मैंने पलट कर देखा तो वो एक 21-22 साल का हैंडसम लड़का था। मेरे यूँ अचानक पलटने से बो बुरी तरह से हडबडा गया। पर इस बार भी मैंने उससे कुछ भी नहीं कहा और मुस्कुराकर मॉल से बाहर निकल आई और ऑटो का इंतजार करने लगी। शायद मेरे कुछ ना कहने और मुस्कुराने से उसे “हँसी तो फंसी” बाला फिल्मी डायलॉग याद आ गया था। जिस कराण वो भी मेरे पीछे पीछे मॉल के बाहर आकर मेरे पास खड़ा हो गया और बोला

लड़का- कहो तो मैं छोड दूँ

वो लडका बुरी तरह से मेरे पीछे पड गया था। जिस कारण अब मुझे उससे चिढ होने लगी थी। इसलिए मैं उससे थोडा गुस्से में बोली

निशा- जी नहीं….. कोई जरूरत नहीं है मुझे कही भी छोडने की

लड़का- इतना क्यों भाव खा रही हो... प्यार से ही तो पूछ रहा हूँ

उस लडके की बात सुनकर मेरा मन अपना सर दीवार में मारने का कर रहा था। लेकिन फिर भी मैंने अपने इमोशंस को जैसे तैसे कंट्रोल करते हुए उससे कहा

निशा- लुक मिस्टर…. पहली बात तो यह कि मैं तुम्हें जानती नहीं हूँ और दूसरी बात मैं तुम जैसे बदतमीज लडके से हेल्प लेना तो दूर, बात करना भी पसंद नहीं करती हूँ।

मेरी बात सुनकर वो लडका बेफिक्री से बोला

लड़का- जानने का क्या है, मेरा नाम रवि सक्सेना है और मैं 21 साल का हूँ। फिलहाल मैं इंजीनियरिंग कर रहा हूँ। मेरे पापा संजय सक्सेना यहाँ के एक जाने माने कांट्रेक्टर हैं। लो हो गया परिचय।

उसकी बात सुनकर मुझे हंसी आ रही थी। इसलिए मैं मुस्कुरा कर बोली

निशा- और बदतमीजी का क्या….. जो तुम मॉल के अंदर मेरे साथ कर रहे थे।

मेरी बात सुनकर वो थोडा झेंपते हुए बोला

रवि- वो वो वो तो बस यूँ ही गलती से हो गया। मैं ऐसा बैसा लड़का नहीं हूँ। एक दम शरीफ हूँ

निशा- ओह मिस्टर रवि…. तुम्हारी शराफत तो देख ली है मैंने। बैसे यह बताओ कि तुम अक्सर यूँ ही मॉल में या किसी भी पब्लिक प्लेश पर ऐसे ही लडकियों को परेशान करते हो।

मेरी बात सुनकर रवि अपनी गर्दन को पिंच करते हुए बोला

रवि- माँ कसम मैंने आज से पहले कभी भी ऐसा नहीं किया है।

निशा- तो फिर आज यह सब कैसे मिस्टर रवि

मुझे अब उससे बातें करने में मजा आ रहा था। मेरे सबाल पर वो अपनी बगलें झाँकने हुए बोला

रवि- वो वो असल में तुम पीछे से बहुत सुंदर लग रही थी। जिस कारण मेरा अपने ऊपर कंट्रोल नहीं रहा

निशा- अच्छा जी… मतलब कि तुम यह कहना चाहते हो कि मैं सामने से बिल्कुल भी सुन्दर नहीं दिखती हूँ।

रवि- नहीं नहीं…. तुम तो सामने से बहुत ज्यादा खूबसूरत दिखाई देती हो। बिल्कुल किसी फिल्म की एक्ट्रेश की तरह

निशा- तो अब मैं क्या करूँ… क्या तुम मुझे अब प्रपोज करोगे

रवि- नहीं नहीं ये बात नहीं है

निशा- तो फिर यहाँ क्यों खडे हो। जाओ जाकर अपना काम करो ना

रवि- वो वो मुझे तुमने दोस्ती करना है। क्या हम दोस्त बन सकते हैं

रवि की बात सुनकर मैंने अपनी एक आईब्रो ऊपर करते हुए सबाल किया

निशा- क्यों करनी है दोस्ती… क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है

रवि- नहीं है.... मतलब है.... नहीं नहीं थी ओफ.. मेरा मतलब कि मेरा 2 दिन पहले ही अपनी गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया है। अब मैं एकदम सिंगल हूँ।

निशा- ओह तो ये बात है। मतलब कि दो दिन हुए नहीं ब्रेकअप को और जनाब किसी और पर लाईन मारने लगे।

रवि- नहीं ये बात नहीं है। मैं तो बस तुमसे फ्रेंडशिप करना चाहता हूँ

निशा- अच्छा मान लो कि मैंने फ्रेंडशिप कर ली, तो फिर उसके बाद क्या होगा

रवि- कुछ नहीं बस साथ घूमेंगे फिरेंगे, खाऐंगे पियेंगे और क्या

निशा- तो ये सब लडकों के साथ करो ना... मेरे पीछे क्यों पडे हो

रवि- अरे नहीं मैं तो ये कहना चाहता हूँ कि अभी हम दोस्ती करते हैं। साथ में कुछ समय बिताऐंगे। अगर उसके बाद तुम्हें ठीक लगे तो हम दोस्ती को आगे भी तो बड़ा सकते हैं ना।

मैं उसका इशारा समझ सही थी। पर फिर भी मजे लेने के लिए अंजान बनते हुए बोली

निशा- मतलब

रवि- मतलब कुछ समय बाद, अगर तुम अगर कंफर्टेबल हो और तुम्हें मैं ठीक ठाक इंसान लगूँ, तो हम गर्लफ्रेंड बॉय फ्रेंड भी तो बन सकते हैं।

निशा- अच्छा तो ये बात है, पहले दोस्ती फिर सेंटिंग…. हूँम्म्म्म् यही ना….

मेरी बात सुनकर वो नजरें झुकाकर खड़ा रहा। उसे यूँ झेंपते हुए देखकर मैंने मन ही मन सोचा

“मुझे बैसे भी यहाँ 1 हफ्ता रुकना है। तो दोस्ती करने में कोई बुराई नहीं है। कहीं भी आने जाने और घूमने फिरने में आसानी रहेगी और अगर इसके इरादे गलत भी हुए तो बहुत से बहुत क्या करेगा कहीं अकेले में ले जाकर चोदेगा। अब जब मजे लेने के लिए यहाँ रूकी हूँ, तो इसमें क्या बुराई है। बैसे भी रात में 6 अलग अलग मर्दों से चुद चुकी हूँ और इस पूरे हफ्ते पता नहीं कितने लोगों से और कितनी बार चदूँगी, तो फिर एक बार इससे चुदने में क्या बुराई है। बैसे भी देखने में अच्छा खासा स्मार्ट है और पैसे बाला भी लगता है। अगर शरीफ निकला तो इससे लॉग टाईम फ्रेंडशिप करने में भी कोई बुराई नहीं है।”

कहानी जारी है.........
 
Update 006 -

कुछ देर सोचने के बाद मैंने रवि से कहा

निशा- देखो रवि मुझे तुमसे दोस्ती करने में कोई दिक्कत नहीं है, पर मेरी कुछ कंडीशन हैं। पहली तो यह कि मैं दूसरी लडकियों जैसी नहीं हूँ, उनसे थोडा अलग हूँ। यानि मैं काफी ओपन माईँडेड हूँ और मुझे अपनी लाईफ में स्पेस चाहिए होता है। मुझे चिपकू टाईप के लोग या अपना हक जमाने बाले लोग बिल्कुल भी पसंद नहीं। इसलिए कभी बात करने का मन हो तो मैसेज कर देना। मैं फ्री होकर खुद ही तुम्हें कॉल कर लूँगी पर तुम मुझे कभी कॉल नहीं करोगे।

मेरी बात सुनकर रवि तुरंत बोला

रवि- मुझे मंजूर है

निशा- अरे बाबा पहले पूरी बात तो सुन लो

रवि- हाँ हाँ तो कहो ना मुझे तुम्हारी सारी शर्तें एडवांस में मंजूर है।

रवि की बात सुनकर मैंने उसे घूरा और फिर मुस्कुराकर बोली

निसा- दूसरी बात यह है कि मेरी जिंदगी के कुछ गोल हैं। जिन्हें मैं पूरा करना चाहती हूँ। आई होप तुम्हारे भी होंगे ही या फिर तुम्हारे माता-पिता के तुम्हारे लिए कुछ सपने देखें होंगे। तो दोस्ती या प्यार व्यार तक तो ठीक है। जिंदगी में थोडी बहुत मौज मस्ती और एक्साईटमेंट हो जाता है। पर दोस्ती या प्यार के चक्कर में अपने गोल और अपने माता-पिता के सपनों को तोडने बाले लोग मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है।

मेरी बात सुनकर रवि मुझसे इम्प्रेश होते हुए बोला

रवि- ऑफकोर्स मैं इस बात का पूरा ध्यान रखूँगा….

निशा- हूम्म्म्म ठीक है। लेकिन इनके अलावा तीसरी और सबसे जरूरी बात यह है कि दोस्ती तक तो ठीक है पर कभी हमारे बीच यदि इससे आगे भी कुछ होता है, तो फिर तुम मुझे कभी किसी बात के लिए फोर्स नहीं करोगे और अगर आगे बढने के बाद हम दोनों में से कोई पीछे हटता है, तो भी हमारी फ्रेंडशिप खत्म नहीं होनी चाहिए। अब अगर तुम्हें मेरी सारी कंडीशन मंजूर हैं, तो मैं तुमसे दोस्ती करने के बारे में सोच सकती हूँ। बर्ना मिस्टर रवि आप जा सकते हैं।

मेरी बात सुनकर रवि खुश होते हुए बोला

रवि- मुझे कोई प्राब्लम नहीं है। यानि मुझे तुम्हारी सारी की सारी कंडीशनस् मंजूर हैं। तो फिर क्या अब हम दोस्त बन सकते हैं।

रवि की बात सुनकर मैं सोचते हुए बोली

निशा- अरे हाँ एक बात तो रह ही गई और वो यह कि तुम मेरे फैमली बैकग्राऊंड के बारे में मुझसे कभी नहीं पूछोगे और ना ही खुद से कुछ जानने की या फिर मेरे फैमली बालों से मिलने की कभी कोई कोशिश करोगे। मुझे जब कंफर्टेबल होगा या सही लगेगा तो मैं खुद ही तुम्हें बता दूँगी। बोलो मंजूर है या नहीं

इस बार भी रवि मुस्कुराते हुए बोला

रवि- हाँ मेरी माँ मुझे मंजूर है।

निशा- हाँ एक बात और

रवि- अरे यार अब क्या और रह गया

निशा- बस छोटी सी बात है। वो यह कि मैं यहाँ यानि भोपाल की नहीं हूँ, मैं दिल्ली की रहने बाली हूँ और किसी पर्सनल काम से यहाँ आई हूँ। तो ये उम्मीद मत रखना कि तुम्हारी हर रोज मुझसे मुलाकात होती रहेगी। बैसे तो यहाँ मेरा कोई रिलेटिव नहीं है। इसलिए शायद ही मैं यहाँ कभी वापिस आती। पर अगर मेरी तुमसे दोस्ती होती है, तो फिर यहाँ आते रहने का मेरे पास एक बहाना जरूर होगा। इसलिए अगर डिस्टेंश फ्रेंडशिप मंजूर हो तो ही हाँ करना।

मेरी बात सुनकर रवि थोडा निराश होते हुए बोला

रवि- अरे यार…. यह तो तुमने KLPD कर दिया मेरे साथ

रवि की बात सुनकर मैंने फिर से अपनी एक आईब्रो ऊपर करते हुए कहा

निशा- KLPD

मेरे एक्सप्रेशन देखकर रवि को तुरंत ही अपनी गलती का एहसाश हो गया और वो झेंपते हुए बोला।

रवि- अरे तुम नहीं समझोगी… ये लडकों का सीक्रेट कोड है।

रवि की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- ज्यादा ओबर स्मार्ट बनने की जरूरत नहीं है, मैं जानती हूँ इसका क्या मतलब है।

रवि- ये हो ही नहीं सकता

निशा- तुम लडके लोग हम लडकियों को आखिर समझते क्या हो। हम लडकियों को तुम लडकों के सारे सीक्रेट कोड पता होते हैं और वो सारी गालियाँ भी आती हैं जो तुम लडके लोग एक दूसरे को देते रहते हो। बस ज्यादातर लडकियाँ इनके बारे में बात नहीं करती। लेकिन मैं ओपन माईँडेड हूँ, तो मुझे यह सब बोलने या कहने में को प्रॉब्लम नहीं होती है। तो तुम्हारे KLPD का मतलब है कि खडे L... पर धोखा। चाहो तो मैं L... का मतलब भी तुम्हें बता सकती हूँ।

मेरी बात सुनकर रवि हैरान होते हुए बोला

रवि- अरे नहीं नहीं देवी जी…. मैं समझ गया कि आप सब जानती हैं

निशा- तो बोलो मंजूर है या नहीं

रवि- मंजूर करने के अलावा कोई चारा है क्या मेरे पास

निशा- हाँ है ना…. तुम मना कर सकते हो

रवि- जी नहीं…. मुझे तुम्हारी सारी कंडीशन मंजूर है। पर मेरी भी एक कंडीशन है।

निशा- क्या

रवि- अगर मेरा कभी मन हुआ तुमसे मिलने का, तो क्या मैं तुमसे मिलने दिल्ली आ सकता हूँ।

निशा- हाँ आ सकते हो पर केवल हॉलीडे के समय और आने से 1-2 दिन पहले तुम्हें मुझे इस बारे में बताना होगा। ताकि मैं अपनी फैमिली को मैनेज कर सकूँ। वर्ना मैं तो आऊँगी ही ना यहाँ पर।

रवि- ठीक है मुझे मंजूर है। तो क्या अब फाईनली हम दोस्त बन सकते हैं।

मैंने मुस्कुराते हुए अपना हाथ आगे बडाते हुए कहा

निशा- हाँ... बैसे मेरा नाम सपना है। सपना गुप्ता फ्राम दिल्ली

रवि ने भी मेरी तरफ हाथ बडाया और हैंडसेक करते हुए

रवि- हाय सपना। मेरा नाम रवि है। रवि सक्सेना... नाम तो सुना ही होगा

रवि की बात पर मेरी हंसी छूट गई। जिस कारण मेरे साथ साथ रवि भी हंसने लगा। और फिर बोला

रवि- तो फिर सपना जी कहाँ जाना है आपको, मैं अपनी बाईक पर छोड देता हूँ। बैसे भी शाम हो गई है और अंधेरा भी होने बाला है।

रवि की बात सुनकर मैंने उसे अपने होटल का नाम और एड्रेश बता दिया। जिसके बाद रवि ने पार्किंग से अपनी बाईक लेने चला गया। करीब 5 मिनट बाद ही रवि अपनी बाईक लेकर मेरे सामने आकर खड़ा हो गया। जिसके बाद मैं चुपचाप उसकी बाईक पर दोनों तरफ अपने पैर डालकर बैठ गई। इस वक्त मेरे दोनों हाथों में शॉपिंग बैगस् थे और रवि के पास स्पोर्ट बाईक थी। जिसकी सीट पीछे की तरफ से कुछ ज्यादा ही उठी हुई थी। जिस कारण बैठने पर मैं थोडा आगे की तरफ झुक गई और मेरे बूब्स उसकी पीठ से चिपक गए। इसलिए मैं उससे बोली

निशा- तुम लडके लोग कोई मौका नहीं छोडते हो.. है ना

रवि ने गाडी आगे बडाते हुए कहा

रवि- क्यों क्या हुआ

निशा- कुछ नहीं तुम गाडी चलाओ

रवि- पर अब तो हम दोस्त हैं ना, तो फिर मुझसे क्या छिपाना

निशा- तुम्हारी गाडी की सीट लडकियों का एडवांटेज लेने के लिए ही है ना।

रवि मेरे कहने का मतलब समझ गया था। इसलिए बोला

रवि- अब इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। ये तो गाडी बनाने बाली कम्पनी का काम है। हाँ अगर इससे हम लडकों को कुछ फायदा हो जाए तो कोई बुराई भी नहीं है।

निशा- हाँ ठीक है ठीक है… अब गाडी पर ध्यान देना, मेरे एडवांटेज पर नहीं। बैसे एक बात पूँछूँ

रवि- हाँ

निशा- तुमने मॉल में बो हरकत आखिर क्यों की थी

रवि- वो वो बस यूँ ही गलती से हो गया था।

इस बार मैं रवि का डायलॉग उसपर ही चिपकाते हुए बोली

निशा- रवि तो अब हम दोस्त हैं ना, तो फिर मुझसे क्या छिपाना.. जो सच है वो बोल दो, मैं बुरा नहीं मानूँगी

मेरी बात सुनकर रवि थोडा हिचकिचाते हुए बोला

रवि- वो वो तुम पीछे से कुछ ज्यादा हॉट एण्ड सेक्सी लग रही थी। तो मेरा अपने ऊपर कंट्रोल ही रहा।

निशा- पीछे से मतलब क्या... मेरे कंधे मेरे बाल मेरी बैक

रवि- वो वो वो त तुम्हारी ग गाँड बहुत सेक्सी है

मैं जानती थी कि रवि ऐसा ही कुछ कहेगा। क्योंकि ज्यादातर मर्दों को औरतों की गाँड ही सबसे ज्यादा पसंद आती है। मैं बस कंफर्म करने और उसे थोडा खोलने के लिए यह सब पूछ रही थी। ताकि वो मेरे साथ कुछ करने के बारे में चांस ले। लेकिन तभी रवि बोला

रवि- अच्छा क्या अब मैं तुमसे कुछ पूछूँ

निशा- हाँ हाँ पूछो

रवि- जब मैंने मॉल में बो हरकत की तो तुमने कुछ कहा क्यों नहीं

निशा- मतलब... मुझे क्या करना चाहिए था

रवि- मलतब यह कि अगर तुम्हारी जगह कोई दूसरी लड़की होती तो पक्का मेरे गाल पर उसकी उंगलियाँ छप चुकीं होती

उसकी बात सुनकर मैं उसके मजे लेते हुए बोली

निशा- मैंने तुम्हें थप्पड नहीं मारा तो तुम्हें इस बात का दुख हो रहा है।

रवि- नहीं नहीं वो तो बस यूँ ही

निशा- देखो रवि मैं जानती हूँ कि मैं ठीक ठाक दिखती हूँ

मेरी बात पूरी होने से पहले रवि मेरी बात काटते हुए बोला

रवि- ठीक ठाक... क्या बात कर रही हो। तुम तो एक दम बबाल हो बबाल। बिल्कुल किसी एक्ट्रेश की तरह टंच माल दिखती हो।

निशा- हाँ हाँ जो भी है। तो मैं यह कह रही थी कि मैं जानती हूँ कि मैं ठीक ठाक दिखती हूँ। जिस कारण कभी कभी लडके या यह कहूँ कि मर्द लोग अपना कंट्रोल नहीं रख पाते हैं और मुझे छूने की कोशिश करते रहते हैं। तो अब मैं हर किसी से तो लड नहीं सकती हूँ ना। हाँ पहले पहले मुझे बहुत गुस्सा आता था और कईयों के गाल भी मैंने लाल किये हैं। पर फिर बाद में मुझे एहसास हुआ कि शायद मैं आस पास मौजूद दूसरी लडकियों से ज्यादा सुंदर हूँ। इसलिए उस लडके ने या आदमी ने मुझे इस तरह छूने की कोशिश की है, और तुम्हें तो यह पाता ही होगा कि हम लडकियाँ अपनी खूबसूरती के लिए कितनी पागल होती हैं।

मेरी बात सुनकर रवि कुछ सोचते हुए बोला

रवि- मतलब मेरा मॉल में तुम्हें उस तरह छूना, तुम्हें बुरा नहीं लगा।

निशा- निशा बिल्कुल भी नहीं

रवि- तो फिर बाहर इतना बड़ा लेक्चर क्यों दिया

निशा- वो तो बस यूँ ही बाहर तुम्हारे मजे ले रही थी। अब जब तुम मेरे मजे ले सकते हो, तो क्या मैं थोडी सी मस्ती नहीं कर सकती।

मेरी बात सुनकर रवि एक गहरी साँस छोडते हुए बोला

रवि- हुम्म….. तो इसका मतलब यह है कि अगर अगली बार मैं फिर से तुम्हें उस तरह से छूने की कोशिश करूं, तो तुम बुरा नहीं मानोगी

निशा- पता नहीं... मूड है मेरा, हो सकता है मैं उसे नॉर्मल लूँ, या यह भी हो सकता है कि मैं तुम्हारा गाल लाल कर दूँ

मेरी बात सुनकर रवि थोडा कन्फ्यूज होते हुए बोला

रवि- अब यह क्या बात हुई

निशा- देखो जब तुमने पहले वो सब किया था, तो मुझे लगा कि मैं वहीँ मौजूद दूसरी लडकियों से ज्यादा खूबसूरत हूँ। इसलिए एक्साईटमेंट में तुमने वो सब कर दिया। लेकिन अगली बार जब तुम वो सब करोगे, और उस वक्त अगर मुझे तुम्हारे आँखों में अपनी खूबसूरती की तारीफ के स्थान पर वासना यानि हवस दिखाई दी। तो फिर उस समय जैसा मेरा मूड होगा, मैं बैसे रियेक्ट करूँगी। समझे मिस्टर रवि

रवि- जी नहीं सपना जी, मैं अभी तक नहीं समझा हूँ कि आप मुझे धमकी दे रहीं है, या मैं अगली बार ऐसा कुछ ना करूँ उसके लिए मुझे बहला रहीं है।

निशा- अब ये तो तभी पता चलेगा जब तुम दोबारा ऐसा कुछ करोगे। खैर छोडो ये सब और ये बताओ कि तुम्हें अपने से बडी उम्र की लड़कियों के साथ दोस्ती करने या फ्लर्ट करने में कुछ अजीब नहीं लगता।

मेरी बात सुनकर रवि थोडा हैरान होते हुए बोला

रवि- ओह हलो मैम छोटा किसे बोल रही हो। मैं पूरा 21 साल का हो गया हूँ और तुम भी कोई दादी अम्मा नहीं हो, बहुत से बहुत 22 साल की होगी। तो 4 महिने बाद मैं भी 22 का हो जाऊँगा। इतना अंतर कोई मायने नहीं रखता, और बैसे भी जरूरी तो नहीं कि हर रिलेशन में लड़का बड़ा और लड़की छोटी हो। अब अंजली मैम और सचिन तेंदुलकर को ही देख लो या फिर ऐशवर्या राय और अभिषेक बच्चन को देख लो। दोनों के रिलेशन में लड़की बडी और लड़का छोटा है। तो फिर हमारे बीच तो बहुत से बहुत 5-6 महिने या फिर ज्यादा से ज्यादा 1 साल का ही अंतर होगा।

निशा- ये तुमसे किसने कहा कि मैं 22 की हूँ। अगर मैं कहूँ कि मैं तुमसे बहुत बडी हूँ। मान लो मैं कहूँ कि मैं 25 साल की हूँ और 4 महिने बाद मैं 26 साल की हो जाऊँगी यानी तुमसे पूरे 4 साल बडी, तो फिर भी तुम्हारी यही सोच रहेगी।

रवि- तो मैं तुम्हारी बात मानूँगा ही नहीं। क्योंकि तुम किसी भी ऐँगल से 21-22 से ज्यादा की लग ही नहीं रही हो। इसलिए मुझे बहलाना बंद करो, और बैसे भी मैंने ना तो तुम्हारी उम्र पूछी है और ना ही मुझे तुम्हारी उम्र जानने में कोई इंट्रेस्ट है।

रवि की बात खत्म होते होते हम दोनों मेरे होटल के बाहर पहूँच चुके थे। जिसके बाद मैं रवि की गाडी से उतर गई और रवि से बोली

निशा- थैंक्यू मिस्टर रवि, मुझे यहाँ तक ड्राप करने के लिए।

रवि- तो फिर… अब क्या प्लान है

निशा- कुछ नहीं…. फिलहाल तो मैं अपने रूम में जाकर शापिंग का सामन अनपैक करके बैग में सेट करूँगी, और फिर कुछ खाकर एक लम्बी नींद लेने का प्लान है।

रवि- तो फिर एक काम करते हैं। मैं यहीं वेट करता हूँ, तुम अपना सामन रूम में रख कर आ जाओ। उसके बाद मैं तुम्हें किसी अच्छे से रेस्टोरेंट में ले चलता हूँ। शॉपिंग का सामन बाद में अनपैक कर लेना।

निशा- जी नहीं.. आज कि पहली मुलाकात और दोस्ती कि शुरूआत के लिए आज हमने एक साथ पर्याप्त टाईम स्पेंड कर लिया है। इसलिए रेस्टोरेंट हम फिर कभी चलेंगे

मेरी बात सुनकर रवि बोला

रवि- तो फिर कल का क्या प्लान है

रवि का सबाल सुनकर मैं कुछ सोचते हुए बोली

निशा- हूँम्म्मम्… फिलहाल तो कुछ सोचा नहीं है। कल सुभय तो मैं बिजी रहूँगी, पर दोपहर में शायद भोपाल में ही कहीं घूमने जाऊँ। बैसे मैं पहली बार यहाँ आई हूँ, तो कुछ पता नहीं है कि किस जगह जाना चाहिए।

मेरी बात सुनकर रवि खुश होते हुए तुरंत बोला

रवि- अरे तो चिंता क्यों कर ही हो….. मैं हूँ ना। कल मैं भी बिल्कुल फ्री हूँ। इसलिए मैं तुम्हें भोपाल घुमा सकता हूँ।

रवि की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- ओके कोई प्राब्लम नहीं… तो फिर कल चलते हैं। बताओ कहाँ मिलना है

रवि- अरे नहीं तुम्हें कहीँ आने की जरूरत नहीं है, मैं यहीँ आ जाऊँगा तुम्हें लेने के लिए। तुम अपना रूम नम्बर और मोबाइल नम्बर मुझे दे दो। ताकि आने से पहले मैं तुम्हें कॉल कर लूँगा।

रवि की बात सुनकर मैंने कुछ देर सोचते के बाद उसे अपना रूम नम्बर और नया मोबाईल नम्बर दे लिया। रवि ने मेरा नम्बर अपने फोन में सेब कर लिया और मुझे एक रिटर्न कॉल कर दी। जिस कारण मेरे पास भी उसका नम्बर आ गया था। उसके बाद मैं अपने होटल के अंदर आ गई और रवि भी अपने घर के लिए निकल गया।

कहानी जारी है................
 
Update 007 -

रूम में आकर मैंने कुछ देर अपने पति अमन से बात की। उसके बाद मैंने शॉपिंग किये गये सारे कपडों को अनपैक किया और उन्हें बैग में सेट कर लिया। सारा सामान बैग में सेट करने के बाद मैं बाथरूम में फ्रेस होने चली गई। रात करीब 9 बजे में अपने होटल के पास ही एक रेस्टोरेंट में बैठी हुई थी। आज मैंने डार्क व्लू कलर का स्किन टाईट जींस और ब्लैक कलर का टैंक टॉप पहना हुआ था।

मेरे जींस में से मेरी पेंटी लाईन साफ दिखाई दे रही थी, साथ ही साथ मेरे टॉप भी कॉफी डीप नेक था और उसमें से मेरी क्लीवेज बाहर झाँक रहीं थी। टॉप के अंदर मैंने ब्रा नहीं पहनी थी। जिस कारण मेरे निप्पलस शेप भी टॉप के बाहर से ही दिखाई दे रहे थे। साथ ही मैंने एक लैदर लैदर जैकेट भी पहनी हुई थी। रेस्टोरेंट में मैंने अपने लिए चिकिन सूप के साथ एक बर्गर आर्डर कर दिया और अपने खाने का बेट करने लगी।

मैंने चारों तरफ नजर डाली तो वहाँ बैठे लगभग सभी मर्दों की नजर मेरे ऊपर टिकी हुई थी और वे अपनी आँखों से ही मुझे नंगा कर चोदने के सपने देख रहे थे। जिसे महसूस कर मुझे काफी मजा आ रहा था। कुछ ही देर बाद बेटर मेरा आर्डर सर्व करके चला गया। मैंने जैसे ही खाना शूरू किया, तो एक आदमी ठीक मेरे पास आकर बैठ गया और बोला

आदमी- तुम यहाँ खाने में व्यस्त हो और मैं कब से बाहर तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ। मंत्री जी आने बाले हैं। अब जल्दी से खाना खत्म करो और चलो।

मैंने हैरान होते हुए एक नजर उस आदमी पर डाली और फिर अपना खाना खाने लगी। मैं समझ गई थी कि ये आदमी मुझे कोई और समझ रहा है। इसलिए मैंने फिलहाल उसे इग्नोर करना ही ठीक समझा। जैसे ही मेरा खाना खत्म हुआ तो उस आदमी ने 500-500 की दो गड्डियाँ मेरे सामने रखीं और बोला

आदमी- लो जितना तय हुआ था पूरे हैं, इन्हें रखो और चलो जल्दी। मैंने तुम्हारा बिल पहले ही पे कर दिया है।

उन पैसों को देखकर मैंने हैरानी से उस आदमी को देखा, तो वो बोला

आदमी- ऐसे क्या देख रही हो। तुम्हारे ऐजेंट से इतने मैं ही डील हुई थी। इसलिए चुपचाप रखो और चलो। अगर आज मंत्री जी को रेस्ट हाऊस पहुँच कर चोदने के लिए कोई लड़की नहीं मिली तो फिर मेरी नौकरी गई समझो।

उस आदमी के बात सुनकर मैं समझ गई कि ये किसी मंत्री का खास आदमी है। जिसने मंत्री जी की अय्यासी के लिए किसी बडी कॉलगर्ल को बुक किया था। जो शायद समय पर नहीं आ पाई होगी और ये आदमी मुझे वही कॉलगर्ल समझ रहा है। मैं तो बैसे भी कल रात की तरह रेलवे स्टेशन के पास जाकर मजे लेने के लिए कोई कस्टमर तलास करने की सोच रही थी। लेकिन अब बैठे बैठे ही ऑफर आ गया तो लेने में क्या बुराई है। बैसे भी 1 लाख रूपये एक रात के लिए बहुत ज्यादा कीमत है। इसलिए मैंने चुपचाप वो पैसे अपने बैग में रखे और उस आदमी के साथ रेस्टोरेंट से बाहर निकल गई।

वो आदमी अपनी खुद की कार से आया था। उसने पीछे का दरवाजा खोला तो मैं चुपचाप उसमें जाकर बैठ गई। फिर वो आदमी ड्रायवर सीट पर बैठा और कार आगे बड़ा दी। मैंने कार के अंदर से ही बाहर लगे साईन बोर्ड पर नजर डाली तो वहाँ मंत्रालय रोड लिखा हुआ था। रात का समय था जिस कारण वो रोड पूरी तरह से खाली था। इसलिए वो आदमी काफी तेज गाडी चला रहा था। बैसे भी वहाँ से कोई इक्का दुक्का गाडी ही गुजर रहीं थी। शायद इस तरफ मंत्रियों के बंगले और रेस्ट हाऊस बने हुए थे।

उस रास्ते पर से अब तक हम 3 सिक्योरिटी गेट को क्राश कर चुके थे। करीब आधे घंटे बाद उस आदमी ने एक रेस्ट हाऊस के बाहर गाडी रोक दी। रेस्ट हाऊस के बाहर काफी ज्यादा सिक्योरिटी थी। लेकिन अंदर कोई भी सिक्योरिटी गार्ड मौजूद नहीं था। गाडी जैसे ही बंद हुई तो वो आदमी जल्दी से बाहर निकला और मेरी तरफ का गेट ओपन कर दिया। जिसके बाद मैं चुपचाप कार से बाहर आकर उस आदमी के पीछे पीछे रेस्ट हाऊस के अंदर चली गई। वो आदमी मुझे एक आलीशान कमरे में ले गया और बोला।

आदमी- तुम यहाँ वेट करो, मंत्री जी बस आने ही बाले हैं।

इतना बोलकर वो आदमी कमरे से बाहर निकल गया और मैं वहीं पलंग पर बैठ कर इंतजार करने लगी। करीब 10-15 मिनट बाद उस कमरे का गेट एक बार फिर ओपन हुआ और एक 40-45 साल का आदमी जिसने सफेद कुर्ता पायजामा पहना हुआ था अंदर आया। उसे देखकर मैं हैरान रह गई। क्योंकि वो और कोई नहीं सेंट्रल मिनिस्टर संजय गौतम जी थे। जो देश के सबसे ज्यादा ईमानदार और लोकप्रिय नेताओं में से एक है।

कुछ लोग तो उन्हें अगले पी.एम. के रूप में भी देखते हैं। इतने बडे आदमी का यह रूप मैं आज पहली बार देख रही थी। कमरे के अंदर आते ही मंत्री जी ने अपना कुर्ता ऊतार कर एक तरफ रख दिया और सीधा सोफे पर जाकर बैठ गए। जहाँ एक मंहगी शराब की बोतल और बाकी सामन रखा हुआ था। उन्होंने बोतल उठाई और एक गिलास में डालते हुऐ बोले

संजय- तुम पीती हो क्या

मैं अभी भी सदमे की हालत में थी। मंत्री जी की आबाज सुनकर मैं जैसे होश में आई और बोली

निशा- ज ज जी… कभी कभी

संजय- तो आओ मेरे पास आकर बैठो, एक दो जाम साथ हो जाऐं। बैसे भी बाकी के कामों के लिए सारी रात पडी है।

उस कमरे में रूम हीटर चल रहा था। जिस कारण मुझे हल्की सी गर्मी लगने लगी थी। इसलिए मैंने भी अपनी जैकेट उतार कर एक तरफ रख दी और चलती हुई मंत्री जी के पास जाकर बैठ गई। तब तक मंत्री जी हम दोनों के लिए पैग तैयार कर चुके थे। मंत्री जी ने एक पैग मेरी तरफ बड़ा दिया। मैंने चुपचाप अपना गिलास उनसे ले लिया और शिप करने लगी। मंत्री जी भी अपना पैग शिप करते हुए बोले

संजय- क्या नाम है तुम्हारा

निशा- जी सपना

संजय- कब से हो इस धंधे में

मैंने मंत्री जी पर एक नजर डाली और फिर नजरें झूका कर सोचने लगी। असल में मैं यह बात उनसे छिपाना नहीं चाहती थी कि यहाँ मैं एक गलत फहमी के कारण आ गई हूँ और अपने बारे में सच भी नहीं बताना चाहती थी। इसलिए मैंने मन ही मन एक कहानी बनाई और नजरें झुकाये हुए ही उनसे बोली

निशा- ज ज जी व वो वो मैं आज पहली बार आई हूँ

मेरी बात सुनकर मंत्री जी हैरान होते हुए बोले

संजय- यानि वर्जिन हो

निशा- नहीं नहीं… वो वो मैंने 1-2 बार अपने बॉयफ्रेंड के साथ किया है।

मेरी बात सुनकर मंत्री जी कुछ देर खामोश रहे। अब तक हम दोनों के ही पैग खत्म हो चुके थे। इसलिए इस बार मैंने दोनों के लिए पैग तैयार किऐ और एक गिलास मंत्री जी की तरफ बड़ा दिया। मंत्री जी मेरे इस काम से खुश हो गए और फिर बोले

संजय- हूम्मम… तो क्या काम करती हो तुम और कहाँ रहती हो

निशा- वो वो सर में कॉलेज स्टूडेंट हूँ और दिल्ली की रहने बाली हूँ

संजय- तो फिर यहाँ कैसे आई

निशा- वो मेरे पिता की तबियत बहुत खराब है। हमें उनके ऑपरेशन के लिए पैसे चाहिए थे। इसलिए मैं यहाँ अपने एक रिलेटिव से कुछ पैसे उधार लेने आई थी। पर उन्होंने मना कर दिया। मुझे आज रात की ट्रेन से बापिस दिल्ली जाना था। इसलिए स्टेशन के लॉकर में अपना सामन रख कर मैं एक रेस्टोरेंट में खाना खा रही थी। तभी आपके आदमी ने मुझे गलती से दूसरी लड़की समझ लिया। मुझे अपने पिता के इलाज के लिए पैसे चाहिए थे। इसलिए मैंने उनसे कुछ नहीं कहा और चुपचाप यहाँ आ गई। सोचा जब बॉयफ्रेंड की खुशी के लिए वो सब कर सकती हूँ, तो फिर अपने पिता के इलाज के लिए करने में क्या बुराई है।

मंत्री जी को देखकर दो बातें मेरे मन में आई थी। एक तो यह कि मंत्री जी बहुत ज्यादा लोकप्रिय और पॉवरफुल हैं। इसलिए अगर इन्हें खुश कर दिया तो भविष्य में भी ये मेरे संपर्क में रहेंगे। जिससे मुझे मजे के साथ साथ आगे चलकर काफी ज्यादा फायदा हो सकता है। दूसरी बात यह कि ऐसे लोगों को बेचारी और शरीफ लडकियों के साथ चुदाई करने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है। इसलिए अगर मैंने मंत्री जो के सामने अपने आप को बेचारी और शरीफ लड़की सावित कर दिया, तो मंत्री जी को ना केबल मुझ पर यकीन हो जाऐगा, बल्की अपने कांटेक्ट बाले दूसरे पॉवरफुल लोगों से भी मेरी सिफारिस करवा सकते हैं। मंत्री जी मेरी बात सुनकर कुछ देर खामोश रहे और फिर बोले

संजय- मतलब मेरा अंदाजा सही निकला कि तुम बो लड़की नहीं हो जो आने बाली थी

निशा- जी नहीं

संजय- देखो अगर तुम ये सब नहीं करना चाहती तो कोई बात नहीं, तुम वो पैसे अपने पास ऱख लो, अगर जरूरत हो तो मैं तुम्हें और पैसे भी दे सकता हूँ। रही बात मेरी तो मैं आज रात के लिए अपना कोई दूसरा इंतजाम कर लूँगा

निशा- नहीं नहीं सर….. उसकी जरूरत नहीं है। मैंने यहाँ आने से पहले इस बारे में अच्छी तरह से सोचा था। थोडा बहुत डर था कि कहीं किसी को मेरे इस काम के बारे में पता चल गया तो क्या होगा। पर आपको देखकर मेरा बो डर भी अब खत्म हो गया

संजय- मतलब तुम मुझे पहचानती हो।

मैं अब तक दो पैग पी चुकी थी और मुझे हल्का फुल्का नशा भी हो गया था। जिस कारण मेरी झिझक भी अब लगभग खत्म हो चुकी थी। इसलिए मैंने तीसरा पैग तैयार किया और बोली

निशा- आपको कौन नहीं जानता सर... काफी लोगों का मानना है कि आप हमारे अलगे पी.एम. हैं। बैसे मैं भी ऐसा ही मानती हूँ। आपके साथ तो मैं खुशी खुशी यह सब करने के लिए तैयार हूँ

संजय- तो इसका मतलब मैं तुम पर यकीन कर सकता हूँ कि मेरा यह चेहरा दुनिया से छिपा रहेगा

निशा- जी सर…. मैं एक शरीफ और आम लड़की हूँ। अगर मेरे बारे में किसी को कुछ ऐसा बैसा पता चला तो मेरा और मेरे परिवार का जीना मुश्किल हो जाऐगा और आप तो जानते ही हैं कि हमारे समाज में लडकियों की क्या हालत है। इसलिए मेरी तरफ से आप निश्चिंत रहिये कि मैं इस बारे में कभी भी अपना मूँह खोलूँगी।

संजय- तो फिर ठीक है, जरा मुझे अपने हुस्न का दीदार तो कराओ। मैं भी तो देखूँ इन कपडों के अंदर तुमने कौन सा खजाना छिपा रखा है।

अब तक मैं अपना तीसरा पैग भी खत्म कर चुकी थी। मैं अब और ज्यादा ड्रिंक नहीं करना चाहती थी। इसलिए मंत्री जी की बात सुनने के बाद मैं तुरंत खडी हो गई और एक एक कर अपने सारे कपडे निकाल दिए फिर नजाकत से अपनी कमर मटकाते हुए विस्तर पर जाकर लेट गई। तब तक मंत्री जी अपना चौथा पैग भी खत्म कर चुके थे। उन्होंने फटाफट अपने सारे कपडे उतारे और मेरे पास आकर लेट गए और मुझे गौर से देखते हुए बोले

संजय- आज तक जितनी लडकियों के साथ सोया हूँ, वो सब तुम्हारे आगे फीकी हैं। कई मॉडल और फिल्म एक्ट्रेश के साथ भी सोया हूँ, पर उनका बदन भी तुम्हारी तरह सेक्सी और कसा हुआ नहीं था। तुम खुद नहीं जानती कि तुम क्या चीज हो।

मंत्री जी की बात सुनकर मैं समझ गई कि मंत्री जी पूरी तरह से वासना की आग में जलकर बेकाबू हो चुके हैं और अब बस मेरी चुदाई होने ही बाली है। इसलिए मैंने अपनी आंखें बंद कर ली और काँपते होंठों से बोली

निशा- सर क्या एक रिक्वेस्ट कर सकती हूँ आपसे

संजय- हाँ कहो

निशा- सर मैं एक दम नई हूँ इस खेल में, इसलिए प्लीज थोडा जेंटल रहने की कोशिश करना। मेरे बॉयफ्रेंड के साथ मेरा एक्सपीरियंस बिल्कुल भी अच्छा नहीं रहा। मैं आज की रात अपनी जिंदगी की सबसे यादगार रात बनाना चाहती हूँ।

मेरी बात सुनकर मंत्री जी खुश होते हुए बोले

संजय- ऐसा ही होगा सपना डार्लिंग... तुम आज की रात कभी नहीं भूल पाओगी... आज तुम्हें पता चलेगा कि असली चुदाई किसे कहते हैं।

इतना बोलकर मंत्री जी मेरे होंठों को किस करने लगे और अपने हाथों से मेरे बूब्स को सहलाने लगे। जिस कारण थोडी ही देर में मैं भी उत्तेजित हो गई और मंत्री जी का साथ देने लगी। मेरे होंठों को भऱपूर तरीके से चुमने के बाद वो मेरे सारे बदन को चुमने और सहलाने लगे। जिस कारण मेरे शरीर में एक अलग सा नशा चढने लगा था। मुझे इस सब में काफी मजा आ रहा था और मेरी चूत भी गीली होने लगी थी।

मंत्री जी ने मेरे बूब्स को काफी देर तक चूमा और मेरे निप्पलस् को तब तक चूसा जब तक वो एकदम लाल नहीं हो गए। मेरी तो उत्तेजना के कारण हालत ही खराब हो गई थी। आज तक किसी ने मेरे बूब्स और निप्पल्स के साथ ऐसा नहीं किया था। मुझे लगा कि अगर मंत्री जी ने मेरे निप्पल्स को कुछ देर और चूसा तो मैं पक्का झर जाऊँगी।

निशा- आआआआहहहहह सर आपने तो मेरी जान ही निकाल दी। अगर कुछ देर और ऐसा किया तो मेरा पानी निकल जाऐगा

मैं लगातर अपने मूँह से कामुक आवाजें निकाल रही थी। जिस कराण मंत्री जी भी जोश में आकर मेरे पूरे बदन के हर हिस्से को चुमने लगे। कुछ देर बाद मंत्री जी मेरे पेट और नाभी को चूमना शूरू कर दिया, खासकर मेरी कमर के टैटू को साथ साथ मेरी नेविल रिंग के साथ अपनी जीभ से छेडखानी कर रहे थे। मैंने आज ही नेविल रिंग और टैटू बनबाऐ थे। जिस कारण मंत्री जी के उन्हें चूमने और सहलाने से मुझे वहाँ पर हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था जो मेरी उत्तेजना को बड़ा रहा था।

कहानी जारी है ......
 
Update 008-

कुछ देर तक मेरी कमर और नेविल को चूमने के बाद मंत्री जी थोडा और नीचे आये और मेरी चूत को चूमने और चाटने लगे। मैं पहले से ही बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी। इसलिए बोली

निशा- उउउउममममम आआआहहहह सर वहाँ रहने दीजिए मैं झरने बाली हूँ

पर मंत्री ने मुझे नहीं छोडा और मेरी चुत को चाटते रहे। जिस कारण मैं अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पाई और झर गई। लेकिन मंत्री जी ने मेरी चूत को चाटना फिर भी बंद नहीं किया। मेरी चूत किसी कचौडी की तरफ फूली हुई थी। जिसे मंत्री जी ने चाट चाट कर लाल कर दिया था। जिस कारण कुछ देर बाद ही मैं दोबारा गर्म होने लगी। फिर मंत्री जी ने मेरी जाघों को प्यार से चूमा और सहलाया।

जिस कारण मेरे तो पूरे शरीर में ऐंठन होने लगी थी। कुछ देर मेरी जाँघो को चूमने और सहलाने के बाद वो धीरे धीरे मेरे पंजों तक पहुँच गये। फिर उन्होंने मुझे पलट दिया और वापिस ऊपर की तरफ चूमते और सहलाते हुए बडने लगे और मेरी गाँड पर जाकर रुक गए। फिर वो अपने दोनो हाथों से मेरी गांड को मसलने और सहलाने लगे। इसमें मुझे इसमें बहुत मजा आ रहा था।

आज तक ना तो मेरे पति ने कभी इस तरफ फोरप्ले किया था और ना ही कल रात मेरे किसी क्लाईंट ने मेरे साथ ऐसा फोर प्ले किया था। मैं तो मंत्री जी के प्यार करने के इस अंदाज की दीवानी हो गई थी। मंत्री जी मेरी गाँड को सहलाने के साथ साथ उसे चूमना भी शुरू कर दिया था। मैं पूरी तरह से उत्तेजना के चरम पर पहूँच चुकी थी। इसलिए मैंने अपने पूरे शरीर को ढीला छोड दिया था और बस मजा ले रही थी।

मेरी गाँड को चूमने और सहलाने के बाद मंत्री जी ने मेरी पीठ और गर्दन को भी जी भरकर चूमा और सहलाया। अब यह सब मेरे बर्दास्त करने की झमता से बाहर हो चुका था। पता नहीं मंत्री जी यह खेल कितनी देर और जारी रखने बाले थे। इसलिए मैं उठ कर बैठ गई और मंत्री जी को नीचे लेटाकर खुद ही उन्हें चूमने और सहलाने लगी। मंत्री जी के होँठों से होते हुए मैंने उनके पूरे बदन को चूमा और फिर उनके लण्ड पर जाकर रूक गई और बिना किसी झिझक के उनके लण्ड को चूमने लगी।

मंत्री जी का लण्ड भी अच्छा खासा बड़ा और मोटा था। जो एकदम कडक था और काफी गर्म भी था। कुछ देर मंत्री जी के लण्ड को चूमने के बाद मैंने उसे अपने मूँह में ले लिया और किसी लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। असल में मंत्री जी ने जो फोरप्ले किया था, उससे मेरी चूत में आग लग चुकी थी। मैं बस किसी भी तरह चुदना चाहती थी। इसलिए में मंत्री जी को एक्साईटेड कर रही थी।

ताकि वो मेरी चूत की गर्मी को शांत कर सकें। करीब 10 मिनट तक अपना लण्ड चुसवाने के बाद ही मंत्री जी ने मुझे अपने लण्ड से हटा दिया और नीचे पीठ के बल लिटा दिया। इसके बाद उन्होंने मेरी गाँड के नीचे एक तकिया भी लगा दिया। जिस कारण मेरी चूत थोडी ऊपर की तरफ ऊठ गई। शायद मंत्री जी मेरे लण्ड चूसने से कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो गए थे। इसलिए वो बिना देर किए मेरे ऊपर चढ गए।

मैं समझ गई कि अब बस मेरी चूत में लण्ड जाने की ही देर है। फिर मैं अपने चरम सुख को अनुभव करूँगी। इसलिए मैंने अपनी आँखें बंद कर ली। जैसा मैंने सोचा था, मंत्री जी ने भी बिना देर किये अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया। हालाँकि कल रात मेरी चूत की जम कर चूदाई हुई थी। लेकिन फिर भी वो काफी टाईट थी। ऊपर से मंत्री जी का लण्ड भी काफी ज्यादा मोटा था। जिस कारण जैसे ही उनका लण्ड मेरी चूत में जाने लगा तो मेरी चूत में तेज दर्द हुआ और मेरी चीख निकल गई

निशा- आआआआहहहह माँ मर गई आआआहहहहह.. उउमममममम

इससे पहले मैं और ज्यादा चीखती मंत्री जी ने मेरे होंठों को अपने होंठों के आगोस में ले लिया और उन्हें चूसने लगे। जिस कारण मेरी चीख अंदर ही घुट कर रह गई। करीब 4-5 जोरदार धक्कों के बाद मंत्री जी का पूरा लण्ड मेरी चूत के अंदर था। जैसे ही उनका पूरा लण्ड अंदर गया तो उन्होंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिया। हालाँकि मुझे दर्द हो रहा था। पर में चाहकर भी चीख नहीं पा रही थी।

करीब 2-3 मिनट की चुदाई के बाद ही मेरी चूत पानी छोडने लगी। जिससे मेरा दर्द कम होने लगा और मुझे मजा आने लगा। जिस कारण मैं भी नीचे से अपनी कमर हिलाकर उनका साथ देने लगी और अपने हथों को मंत्री जी की पीठ पर रगडने लगी। जिसके बाद मंत्री जी ने मेरे होंठों को छोड दिया और मेरी गर्दन और गालों को किस करने लगे। मैं भी उनका पूरा साथ देर रही थी और लगातार सिसकियाँ भर रही थी।

उउउउममममम

अअअहहहह

ओहहहह

आआआहहहहह

इइशशशश़

उउउमममममम

उउईईईई माँ

कुछ देर यूँ ही चुदाई करने के बाद हम पलट गए। अब मैं मंत्री जी के ऊपर थी और मंत्री जी मेरे नीचे। कुछ देर इसी पोजीशन में चुदाई करने के बाद हम लोग एक बार फिर पलट गए। इसी तरह हम दोनों करीब 40 मिनट तक चुदाई करते रहे। इस दौरान मैं 4 बार झर चुकी थी। पर मंत्री जी अब भी पूरे जोश में थे। अचानक मंत्री जी ने चुदाई करते करते अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकला लिया और बोले

संजय- जानेमन अब मुझे अपनी प्यारी कुतिया को चोदने का मन कर रहा है। जल्दी से मेरी पालतू कुतिया बन जाओ

मंत्री जी की बात सुन कर मैं बिना देर किए किसी कुतिया की तरह खडी हो गई। जिसके बाद मंत्री जी ने मजबूती से मेरी कमर को पकडा और एक ही झटके में मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा कर मेरी चुदाई शूरू कर दी और साथ साथ मेरी दोनों गाँड पर बारी बारी थप्पड भी मार रहे थे। मुझे इस पोजीशन में चुदने में बड़ा मजा आ रहा था। जिस कारण मैं अपने मूँह से कामुक आवाजें निकाल रही थी।

उउउउममममम

अअअहहहह

ओहहहह मेरा राजा ऐसे ही

आआआहहहहह मजा आ गया

इइशशशश़

उउउमममममम

करीब 10-15 मिनट इसी पोजीशन में चुदाई करने के बाद मंत्री जी ने अचानक से अपनी स्पीड बड़ा दी और मेरी चूत को अपने पानी से भर दिया। मंत्री जी के साथ साथ एक बार फिर मैं भी झर गई। जब मंत्री जी का सारा पानी मेरी चूत में समा गया तो मंत्री जी मेरे बगल में लेट कर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगे, जिसके बाद मैं भी लेटकर अपने आप को नॉर्मल करने लगी। करीब 10-15 मिनट के बाद जब हम दोनों नॉर्मल हुए तो मंत्री जी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मुझे किस करते हुए बोले

संजय- सपना मेरी जान आज जिंदगी में पहली बार मुझे किसी लड़की के साथ इतना मजा आया है। तुम तो बाकई में कमाल हो।

निशा- सर आज सच में पहली बार मुझे यह सब इतना अच्छा लगा है। मुझे तो पता ही नहीं था कि इसमें इतना मजा भी आता है।

मेरी बात सुनकर मंत्री जी खुश हो गए और फिर से मेरे बूब्स को सहलाने लगे। कुछ देर मेरे बूब्स को सहलाने के बाद वो मुझसे अलग होकर सोफा पर जाकर बैठ गए और अपने लिए एक पैग बनाकर पीने लगे और मैं अब भी विस्तर पर लेटी हुई उन्हें कामुक नजरों से निहार रही थी। अपना पैग खत्म करने के बाद एक बार फिर मंत्री जी ने मुझे अपने आगोस में ले लिया और मेरे पूरे बदन को सहलाने और चूमने लगे। मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी। कुछ ही देर में हम दोनों एकबार फिर से गर्म हो गए थे।

जिसके बाद एक बार फिर मेरी चुदाई शुरू हो गई। इस बार भी मंत्री जी ने करीब 40-50 मिनट तक जम मुझे रगड रगड कर चोदा और फिर मेरी चूत के अंदर ठण्डे होकर मुझे अपनी बाहों में भर कर लेट गए। हम दोनों काफी ज्यादा थक गए थे, इसलिए यूँ ही कंबल ओड कर सो गए। रात करीब 3 बजे के आस पास नींद में मुझे एहसास हुआ कि कोई मेरे बदन को सहला रहा है और मेरे हाथ में कोई लम्बी मोटी चीज है। जिस कारण अचानक मेरी आँख खुल गई।

मैंने देखा मंत्री जी जाग गए थे और मुझे अपनी बाहों में भर कर अपने एक हाथ से मेरी पीठ और गाँड सहला रहे थे। जवकि दूसरे हाथ से मेरे एक हाथ को पकडकर अपने लण्ड पर रखकर उसे ऊपर नीचे कर रहे थे। जागने के कारण जब मुझे पूरी स्थिती आ आभास हुआ तो मैंने खुद ही मंत्री जी के लण्ड को मजबूती से अपनी मुठ्टी में पकडने की कोशिश की पर वो मेरी मुठ्ठी में समा ही नहीं रहा था। फिर मैं अपने हाथ को उनके लण्ड पर ऊपर नीचे करते हुए उन्हें मजे देने लगी।

शायद मंत्री जी को भी मेरे जागने का एहसास हो गया था। इसलिए उन्होंने मेरे सर को अपने लण्ड की तरफ दबाया। मैं उनका इशारा तुरंत समझ गई और चुपचाप कम्बल के अंदर घुस कर उनके लण्ड को चूसने लगी। रात में दो बार धूँआ धार चुदाई से मेरी चूत में हल्का हल्का दर्द होने लगा था। इसलिए मैं फिलहाल अपनी चूत में फिर से उनका लण्ड लेने का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। इसलिए मैंने उनके लण्ड को पूरे मन से चूसने के साथ साथ उनकी बॉल को की सहलाना शूरू कर दिया था।

शायद मंत्री जी ने ऐसा अनुभव पहले नहीं किया था। इसलिए मेरी इस हरकत पर उनका शरीर अकडने लगा था। जिसे देखकर मैं समझ गई की अगर मैंने कुछ देर और उनकी बॉलस् को सहलाया तो पक्का बो अपना पानी छोड देंगे। मैंने उन्हें और भी ज्यादा एक्साईटेड करने के लिए उनका लण्ड अपने मूँह से निकाला और उनकी बॉलस् को बारी बारी मूँह में लेकर चूसने लगी। अब तो मंत्री जी की हालत और भी ज्यादा खराब होने लगी थी। उन्होंने मेरे सर को अपने दोनो हाथों से मजबूती से पकडा हुआ था।

कुछ देर उनकी बॉलस को चूसने के बाद मैं फिर से उनके लण्ड को चूसने लगी और अपने हाथों से उनकी बालस् को सहलाने लगी। जिस कारण मंत्री जी ज्यादा देर तक अपने आप पर कंट्रोल नहीं रख पाए और मेरे मूँह के अंदर ही अपना पानी छोड दिया। मंत्री जी ने अपने दोनों हाथों से मेरे सर को मजबूती के साथ पकडा हुआ था। जिस कारण मैं चाह कर भी उनका पानी अपने मूँह से नहीं निकाल सकती थी।

ऊपसे से मैं खुद भी ऐसा कुछ करके मंत्री जो नाराज करने का रिस्क नहीं लेना चाहती थी और फिर एक दिन पहले भी तो मैं उन बड्डों का पानी अपने मूँह में ले ही चुकी थी तो दोबारा लेने में कोई बुराई नहीं थी। इसलिए मैं चुपचाप मंत्री जी का सारा पानी निगल गई और चाट चाट कर उनका लण्ड साफ कर दिया। मंत्री जी मेरी इस हरकत से काफी खुश हुए और दोवारा मुझे अपनी बाहों में भर कर सो गए। कुछ देर बाद मुझे भी नींद आ गई और मैं भी उनकी बाहों में सो गई।

सुबह जब मेरी आँख खुली तो मैं मंत्री जी की बाहों में थी। मंत्री जी अब भी सो रहे थे। इसलिए मैं अहिस्ता से उनसे अलग हुई और अपने बैग में से मोबाईल निकाल कर समय देखा तो सुबह के 5 बज रहे थे। इसलिए मैंने मोबाईल बापिस अपने बैग में रखा और फ्रैस होने के लिए बाथरूम में घुस गई। फ्रेस होने के बाद मैंने गीजर ऑन किया और शॉबर के नीचे खडी होकर नहाने लगी।

गर्म गर्म पानी से मुझे काफी अच्छा महसूस हो रहा था। थोडी देर बाद अचानक से बाथरूम का गेट खुला और मंत्री जी अंदर आकर मुझे नहाते हुए देखने लगे। उस कमरे में मेरे और मंत्री जी के अलाबा कोई और नहीं था। अब जब सारी रात मैंने मंत्री जी के साथ अपना मूँह काला किया ही है तो फिर उनसे छिपाने के लिए मेरे पास कुछ भी नहीं था। शायद यही सोचकर मैंने बाथरूम का दरवाजा अंदर से लॉक नहीं किया था। मैंने मंत्री जो को मुस्कुराकर देखा और अपना काम जारी रखा।

कुछ देर मुझे यूँ ही नहात देखने के बाद मंत्री जी मेरे पास आ गए और मुझे अपनी बाहों में भरकर चूमने लगे। शायद मेरा गीला बदन देखकर वो फिर से एक्साईटेड हो गए थे। इसलिए मैं भी चुप चाप उनके साथ नहाने का मजा लेने लगी। मंत्री जी मल मल कर मेरे पूरे बदन को साफ कर रहे थे। जिस कारण मुझे बड़ा मजा आ रहा था। जिसके बाद मैंने भी मंत्री जी के शरीर पर साबुन लगाकर उनके बदन को मलना शुरू कर दिया।

कुछ देर एक दूसरे के साथ मस्ती करने के बाद मंत्री जी ने मुझे दीवार के सहारे पलट दिया और पीछे से मेरी गांड पर अपना लण्ड रगडने लगे। पहले तो मुझे लगा कि वो मुझे इसी तरह खडा करके चोदना चाहते हैं। लेकिन मेरी सोच से उलट उन्होंने अपना लण्ड मेरी गाँड के छेद पर टिका दिया। जिससे मैं तुरंत समझ गई कि अब वो मेरी गाँड मारना चाहते हैं। हांलाकि में अपनी गांड पहले ही मरवा चुकी हूँ। लेकिन फिर भी मैंने उनसे झूठ बोलते हुए कहा

निशा- सर प्लीज वहाँ मत करो... वहाँ मैंने कभी नहीं किया है। बैसे भी मेरा वह छेद वहुत छोटा है और आपका वो इतना बड़ा है….. कैसे अंदर जाऐगा। नहीं नहीं सर वहाँ मत करो प्लीज……

मेरी बात सुनकर मंत्री जी अपने लण्ड का दबाब मेरी गाँड पर बडाते हुए बोले

संजय- सपना डार्लिंग अब मत रोको मुझे। मैंने तुम्हारी जैसी मस्त गाँड आज तक नहीं देखी है। मैं तो रात को ही तुम्हारी गाँड मारने बाला था। पर तुमने चूस चूस कर मेरा पानी निकाल दिया था। इसलिए अब मत रोको मुझे

निशा- प्लीज सर बहुत दर्द होगा

संजय- कुछ नहीं होगा मेरी जान…. यकीन करो मेरा... बस थोडा दर्द होगा फिर बहुत मजा आयेगा

ये सब बोलते ही मंत्री जी ने अपने लण्ड का एक जोरदार धक्का मेरी गाँड पर मारा, तो उनका लण्ड स्लिप हो गया। पर मुझे अपनी गाँड पर एक तेज दर्द की लहर महसूस हुई। इसलिए मैं बोली

निशा- आआआआआहहहहह सर…. अगर आप करना ही चाहते हैं, तो प्लीज कुछ लगा लो बर्ना मेरी फट ही जाऐगी।

मंत्री जो को भी मेरी बात ठीक लगी, इसलिए उन्होंने वहीं बाथरूम में रखी एक ऑईल की बोतल में से ढेर सारा तेल लेकर अपने लण्ड पर लगाया और फिर मेरी गाँड के छेद पर भी लगा दिया। जिसके बाद मैंने भी थोडा झूक कर अपनी गाँड पीछे की तरफ कर दी। जिस कारण मेरी गाँड का उन्हें छेद साफ साफ दिखाई देने लगा था। जिसे देखकर मंत्री जी ने दोबारा से अपने लण्ड की पोजीशन सेट की और फिर से धक्का मारा। इस बार उनका लण्ड थोडा अंदर चला गया पर मेरी चीख निकल गई।

आआआहहहहह माँ

पर अब मंत्री जी नहीं रुके और एक के बाद एक धक्के मारकर अपना पूरा लण्ड मेरी गाँड के अंदर घुसा दिया। मैं उनके हर धक्के पर चीख रही थी। जब उनका पूरा लण्ड अंदर चला गया तो वो कुछ देर रुक गए और मेरी गर्दन पर पीछे से किस करने लगे और आगे हाथ करके मेरे बूब्स को सहलाने लगे। जिससे मुझे अपना दर्द थोडा कम होता हुआ महसूस हुआ। फिर कुछ देर रुकने के बाद मंत्री जी ने धीरे धीरे अपनी कमर हिलाकर मेरी गाँड मारनी शुरू कर दी। कुछ देर तक तो मुझे दर्द हुआ पर फिर मुझे भी मजा आने लगा। इसलिए मैं भी अपनी कमर हिलाकर उनका साथ देने लगी।

जिसके बाद तो मंत्री जी पूरे जोश में आकर मेरी गाँड मारने लगे। काफी देर तक मेरी गाँड मारने के बाद मंत्री जी ने अपना पानी मेरी गाँड में ही छोड दिया और मुझे अपनी बाहों में लेकर चूमने लगे। कुछ देर मुझे चूमने के बाद उन्होंने दोबारा मेरे पूरे बदन को अच्छे से साफ किया और फिर अपने आप को भी साफ करने लगे।

कहानी जारी है ............
 
Update 009 -

नहाने के बाद मैंने टॉबेल से अपने पूरे बदन को अच्छे से सुखाया और कमरे में आकर अपने कपडे पहनने लगी। कुछ देर बाद मंत्री जी भी बाहर आ गए। जैसे ही मैं वहाँ से जाने लगी तो मंत्री जी ने कहा

संजय- सपना एक मिनट रुको

इतना बोलकर उन्होंने अपने बैग में से 500-500 की दो गड्डियाँ निकालकर मुझे देते हुए कहा

संजय- इन्हें रखो.. तुम्हारे काम आयेंगे और हाँ अगर और पैसों की जरूरत हो तो मुझे कॉल कर देना, मैं महेश के हाथों से तुम्हारे पास पैसे भिजवा दूँगा।

मैंने चुपचाप मंत्री जी से वो पैसे लेकर अपने बैग में रख लिए। जिसके बाद मंत्री जी ने अपना पर्सनल नम्बर मुझे दे दिया और बोले

संजय- महेश तुमको छोड देगा और हाँ अपना नम्बर भी उसे नोट करवा देना, आगे अगर कभी मुझे तुम्हारी जरूरत हुई तो वो तुमसे कॉन्टेक्ट कर लेगा। अगर तुम कम्फर्टेबल हो तो।

निशा- जी सर मैं उन्हें अपना नम्बर दे दूँगी। पर प्लीज जब भी आपका ऐसा कोई भी प्लान हो तो मुझे 1-2 दिन पहले बता देना। क्योंकि मुझे अपने घर पर भी मैंनेज करना पडेगा। आप समझ रहे हैं ना, सारी रात घर से बाहर रहने पर मम्मी पापा को जबाब देना पडता है।

मेरी बात सुनकर मंत्री जी मुस्कुराकर बोले

संजय- चिंता मत करो मैं ध्यान रखूँगा

इतना बोलकर उन्होंने महेश को कॉल करके मुझे छोडने के लिए बोल दिया। जिसके बाद मैं चुपचाप वहाँ से बाहर निकल गई। बाहर महेश मेरा ही इंतजार कर रहा था। जैसे ही मैं गाडी के पास पहूँची तो उसने ड्रायवर के बगल बाली सीट का दरवाजा ओपन कर दिया। मैं चुपचाप ड्रायवर के बगल बाली सीट पर जाकर बैठ गई। जिसके बाद वो ड्रायविंग सीट पर बैठ गया और गाडी रेस्ट हाऊस से बाहर निकाल दी। कुछ दूर जाते ही महेश बोला

महेश- नाम क्या है तुम्हारा

निशा- सपना

महेश- जिस लड़की को कल मैंने बुक किया था। मंत्री जी के आने के बाद उस लडकी का मेरे पास फोन आया था, वो आने में थोडा लेट हो गई थी। लेकिन तुम अंदर मंत्री जी के साथ थी, इसलिए मैंने उसकी बुकिंग कैंसिल कर दी थी।

महेश की बात का मैंने कोई जबाब नहीं दिया। इसलिए कुछ देर की खामोशी के बाद वो फिर बोला

महेश- थैंक्स

इस बार मैं अपने आप को नहीं रोक पाई और हैरान होते हुए बोली

निशा- किस बात के लिए

महेश- तुमने कल मेरी नौकरी बचा ली

इसबार फिर मैंने उसकी किसी बात का जबाब नहीं दिया। तो बो फिर से बोला

महेश- बैसे तुम हो कौन... रण्डियों बाली हरकतें तो तुम्हारी दिखाईं नहीं देती और ना ही तुम किसी ऐंगल से रण्डी दिखती हो।

निशा- अच्छा… तभी तो कल तुमने मुझे एक कॉलगर्ल समझ लिया था

मेरी बात सुनकर वो थोडा हकलाते हुए बोला

महेश- वो वो वो तो असल में मैंन यहाँ के एक बडे दलाल से सबसे सुंदर लड़की को भेजने के लिए कहा था। वहाँ तुम्हारे अलावा और कोई इतनी ज्यादा सुंदर नहीं थी। इसलिए मैंने तुम्हें ही वो लड़की समझ लिया था।

इस बार मैं महेश की बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोली

निशा- कोई बात नहीं, जो हो गया सो हो गया

महेश- पर अब तक तुमने मुझे अपने बारे में कुछ भी नहीं बताया है।

निशा- मैं एक कॉलेज गर्ल हूँ... और दिल्ली में रहती हूँ। मैं अपने पिता के इलाज के लिए यहाँ भोपाल में अपने एक रिलेटिव से पैसे उधार लेने आई थी। पर उन्होंने हमारी कोई भी मदद करने से मना कर दिया था। इसलिए मैं बापिस दिल्ली जाने बाली थी, लेकिन मेरे जाने से पहले ही तुम मुझे मिल गए। मुझे पैसे की जरूरत थी, इसलिए मैं तुम्हें मना नहीं कर पाई।

मैंने एक ही बार में महेश को वही स्टोरी रिपीट कर दी, जो मैंने मंत्री जी को बताई थी। मेरी बात सुनकर वो कुछ देर शांत रहा और फिर बोला

महेश- मंत्री जी को तुमने कुछ ज्यादा ही खुश कर दिया है। इसलिए लगता है कि अब तो तुमसे मुलाकात होती रहेगी।

निशा- अच्छा…. पर तुम्हें ऐसा क्यों लगता है।

महेश- आज तक मंत्री जी ने किसी भी लड़की को एक बार चोदने के बाद अपने पास रुकने नहीं दिया है। पर तुम तो सारी रात उनके ही साथ थी।

महेश की बात सुनकर इसबार फिर मैंने खामोश रहना ही ठीक समझा। कुछ देर बाद महेश ने एक सुनसान जगह पर गाडी रोक दी और बोला

महेश- तुम बाकई में बडी मस्त माल हो। काश एक बार मुझे भी मौका मिल जाए तो जिंदगी बन जाए, बैसे आगे का क्या प्लान है। मतलब अब आगे भी ये काम करोगी या केवल एक दिन में ही मन भऱ गया। इतना बोलकर उसने अपने दोनों हाथों से मेरे बूब्स को दबा दिया

महेश की इस हरकत पर मैंने कोई रियेक्ट नहीं किया और मुस्कुराकर बोली

निशा- तुमने ही तो कहा है कि मुलाकात होती रहेगी। मतलब मंत्री जी मुझे अगली बार फिर से बुला सकते हैं। तो जब एक बार यह सब कर ही चुकी हूँ, तो अगली बार करने में मुझे क्या दिक्कत होगी। बस कीमत सही मिलनी चाहिए।

मेरी बात सुनकर महेश ने थोडा सोचा और फिर बोला

महेश- तो क्या मुझे एक बार करने दोगी

मैंने मन ही मन सोचा कि मंत्री जी से एक ही रात में 2 लाख रूपये कमा लिए है, तो उसके असिस्टेंट को एक बार देने में कोई बुराई नहीं है। आखिर इसे भी तो खुश रखना जरूरी है। क्योंकि ये भी बहुत काम आ सकता है। यह सब सोचते ही मैं मुस्कुराकर बोली

निशा- अब मैं मत्री जी के इतने खास आदमी को मना कैसे कर सकती, और फिर तुम्हारे कारण ही मुझे इतने सारे पैसे मिले हैं। इसलिए तुम्हारे साथ करने में मुझे कोई प्रॉप्लम नहीं है। पर मुझे आज दिल्ली निकलना है। इसलिए अगली बार देखते हैं।

मेरी बात सुनकर महेश बेसब्र होते हुए बोला

महेश- अगली बार किसने देखा जानेमन, बैसे भी मुझे दो घंटे बाद मंत्री जी के साथ मुंबई निकलना है। एक काम करो अभी दे दो

महेश अब भी मेरे बूब्बस सहला रहा था। उसकी बात सुनकर मैंने कहा

निशा- ठीक है अभी कर लेना मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। तो फिर चलो किसी होटल में चलते हैं

महेश- अरे होटल क्यों जाना, यहीं गाडी में कर लेते हैं ना। मैं ज्यादा समय नहीं लूँगा

महेश की बात सुनकर मैंने गाडी के बाहर देखा, तो सुबह का उजाला फैल चुका था। पर चारों तरफ धुंध होने के कारण सड़क पर ज्यादा दूर का दिखाई नहीं दे रहा था। ऊपर से गाडी के अंदर पर्दे भी लगे हुए थे। पर फिर भी गाडी में पकडे जाने का रिस्क तो था ही। इसलिए मैं बोली

निशा- नहीं गाडी में नहीं। गाडी में अगर किसी ने देख लिया तो मेरी बहुत बदनामी होगी।

महेश- अरे कुछ नहीं होगा तुम फिक्र मत करो, मैं गाडी झाडियों के थोडा अंदर लगा देता हूँ। कोहरा होने के कारण हमारी गाडी किसी को भी दिखाई नहीं देगी। बैसे भी यहाँ से बाहर निकलने और होटल बुक करने में हमारा काफी समय खराब होगा।

महेश की बात सुनकर मैंने कुछ देर सोचा और फिर बोली

निशा- ठीक है…. पर जल्दी करना। मंत्री जी ने मुझे सारी रात सोने नहीं दिया है। पूरे बदन में दर्द हो रहा है और थकान के कारण नींद भी आ रही है।

मेरी बात सुनकर महेश खुश हो गया। उसने तुरंत मेरे बुब्स छोड दिये और गाडी स्टार्ट करके थोडा आगे जाकर एक कच्चे रास्ते पर उतार दी। वहाँ से कुछ दूर जाकर एक खाली जगह पर जाकर उसने गाडी बंद कर दी। मैंने चारों तरफ देखा तो वहाँ आस पास कोई भी मकान बगैरह नहीं बना था। बस चारों तरफ पेड़ पौधे और झाडियां थीं। मेरे यूं चारों तरफ देखने से महेश बोला

महेश- चिंता मत करो…. यहाँ पर कोई नहीं आता है। मंत्रालय की सिक्योरिटी के कारण आस पास का ऐरिया गवर्मेंट ने अपने कब्जे में ले लिया था। जिस कारण यहाँ अब तक कोई भी डेवलपमेंट नहीं हुआ और चारों तरफ जंगल खड़ा हो गया। मैं पहले भी यहाँ एक दो बार लडकियाँ ला चुका हूँ। तुम चिंता मत करो।

इतना बोलकर वो गाडी की पिछली सीट पर चला गया और उसे थोडा आगे की तरफ खिसकाकर उसके पीछले हिस्से को सीट के लेवल पर फोल्ड कर दिया। जिस कारण पिछली सीट एक छोटे से बैड की तरह बन गई। इसके बाद महेश ने मुझे भी पीछे आने का इशारा कर दिया। महेश का इशारा मिलते ही मैं भी तुरंत पिछली सीट पर चली गई। जिसके बाद महेश ने गाडी को अंदर से पूरी तरह से लॉक कर लिया और मुझे सीट पर लिटाकर मेरे ऊपर किसी भूखे भेडिये की तरह टूट पडा।

करीब 5 मिनट बाद ही हम दोनें पूरी तरह से नंगे होकर एक दूसरे से लिपटे हुए थे। वो अपने हाथों से मेरी बुब्स को सहलाने के साथ साथ मेरे होंठों पर लगातर किस कर रहा था। करीब 10 मिनट में ही हम दोनों पूरी तरह से गर्म हो गए थे। जिसके बाद उसने मुझे कुतिया बनाया और मेरी कमर पकड कर मेरी चुदाई शुरू कर दी। उसका लण्ड ज्यादा बड़ा नहीं था। जिस कारण मुझे बिल्कुल भी दर्द नहीं हुआ।

मैं चुपचाप सिसकियाँ लेते हुए अपनी कमर हिलाकर उसका साथ देने लगी। उसके साथ चुदाई करवाने में मुझे बहुत मजा आ रहा था। करीब आधा घंटा मेरी चुदाई करने के बाद उसने अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल दिया और मुझे पलटकर अपना लण्ड मेरे मूँह की तरफ कर दिया। मैं समझ गई कि अब वो झरने बाला है और वो अपना पानी मेरे मूँह में निकालना चाहता है। इसलिए मैंने बिना कुछ कहे उसका लण्ड अपने मूँह में ले लिया और उसे चूसने लगी।

करीब 5 मिनट लण्ड चूसने के बाद ही उसने अपना पानी मेरे मूँह में छोड दिया। मैं चुपचाप उसका सारा पानी निगल गई और चाट चाट कर उसका लण्ड साफ कर दिया। इसके बाद हम दोनों कुछ देर तक एक दूसरे से लिपट कर वही लेटे रहे। जब हम दोनों की साँसे कुछ नॉर्मल हुईं तो हमने अपने कपडे पहने और फिर से अपनी अपनी सीट पर बापिस जाकर बैठ गए।

करीब 20 मिनट बाद महेश ने उसी रेस्टोरेंट के बाहर गाडी रोक दी, जहाँ से कल वो मुझे ले गया था। उसके बाद हम दोनों ने एक दूसरे के नम्बर आपस में एक्सचेंज कर लिए और फिर जैसे ही मैं गाडी से उतरने लगी तो उसने अपनी सीट के नीचे से एक छोटा सा बैग उठाया और उसमें से 500 की एक गड्डी निकलाकर मुझे देते हुए कहा

महेश- ये रखो

मैंने चुपचाप महेश से वो पैसे लेकर अपने बैग में रख लिए और उसे एक कातिल मुस्कान देकर गाडी से बाहर निकल गई। मेरे बाहर जाते ही महेश ने अपनी गाडी टर्न की और बापिस चला गया। जिसके बाद मैं भी अपने होटल की तरफ चल पडी। अपने रूम में जाकर मैंने अपने सारे कपडे निकल दिए और एक कैमिसोल और पैंटी पहन कर सो गई। दोपहर करीब 12 बजे जैसे ही मेरी आँख खुली मेरी नजर मोबाईल की स्क्रीन पर गई। जिसकी लाईट बार बार फ्लैस हो रही थी। मैंने जैसे मोबाईल उठा कर चैक किया तो उस पर रवि की कॉल आ रही थी। जिसे देखकर मैंने तुरंत फोन रिसीव किया, तो दूसरे तरफ से आवाज आई

रवि- कहाँ थी तुम... मैं कब से फोन लगा रहा था।

निशा- अरे वो मेरा फोन साईलेंट था। इसलिए पता नहीं चला खैर छोडो ये सब तुम बताओ कैसे कॉल किया

रवि- कैसे कॉल किया से क्या मतलब है। आज हम घूमने जाने बाले थे ना

रवि की बात सुनकर मुझे कल उससे हुई सारी बातें याद आ गईं और फिर मैं अपने सर पर एक हल्कि सी चपत लगाते हुए बोली

निशा- ओह सिट मैं तो भूल ही गई थी। सॉरी सॉरी मैं अभी तैयार होती हूँ… तुम कितने देर में आ रहे है।

रवि- मैडम मैं आ चुका हूँ और तुम्हारे रूम के बाहर ही खड़ा हूँ। अब अगर आप अपने रूम का दरवाजा खोलें तो मैं अंदर आऊँ।

रवि की बात सुनकर मैंने बिना अपने कपडों पर ध्यान दिए, तुरंत दरवाजा खोल दिया। जैसे ही रवि ने मुझे देखा तो उसकी आँखे हैरानी में फैल गई और उसकी नजरें मेरे शरीर का नाप तोल करने लगी। उसके यूँ देखने पर मैंने अपने आप को देखा तो मुझे एहसास हुआ कि मैंने इस वक्त केवल पिंक कलर का कैमिसोल और पैंटी पहनी हुई थी। जिसमें मैं कुछ ज्यादा ही हॉट लग रही थी। मैंने मुस्कुरा कर रवि को देखा और बोली

निशा- अब क्या आँखों से ही खा जाओगी। चलो जल्दी से अंदर आओ वर्ना अगर किसी और ने देख लिया तो मुझे होटल ही चेंज ना करना पडे।

मेरी बात सुनकर रवि होश में आया और झेंपते हुए चुपचाप अंदर आकर विस्तर पर बैठ गया। जिसके बाद मैंने दरवाजा अंदर से लॉक किया और बोली

निशा- तुम 10 मिनट बेट करो, तब तक मैं बाथ लेकर आती हूँ

अब तक रवि अपनी भावनाओं को कंट्रोल कर चुका था। इसलिए बोला

रवि- क्या तुमने अब तक नहाया भी नहीं है। यानि कि तुम अब तक सो रही थी और कल तो कह रही थी कि तुम्हें सुबह बहुत जरूरी काम है।

निशा- हाँ सही तो कहा था मैंने। सोना तो सबसे जरूरी काम है।

रवि- फिर रात को क्या किया

निशा- काम

रवि- काम कैसा काम

निशा- मिस्टर रवि अब हर कोई तुम्हारी तरह मूँह में सोने की चम्मच लेकर तो पैदा होता नहीं है। मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से हूँ। कॉलेज में पढाई करती हूँ और अपनी पढाई और दूसरे खर्चे निकालने के साथ साथ फैमली को सपोर्ट करने के लिए पार्ट टाईम जॉव भी करती हूँ। जिसमें ज्यादतर काम वर्क फ्राम होम करना पडता है। अब दिन में कॉलेज और दूसरे काम होते हैं तो रात में जागकर काम करना पढता है। इसलिए सुबह देर तक सोती रहती हूँ। अब समझे कि मैं सुबह कहाँ विजी रहती हूँ।

मेरे बिस्तर के पास ही मेरा लैपटॉप भी रखा हुआ था। जिसे देखकर रवि को मेरी बातों पर तुरंत यकीन हो गया और वो बोला

रवि- ओह सॉरी मुझे पता नहीं था। प्लीज मेरी बात का बुरा मत मानना

निशा- इसमें सॉरी बोलने की कोई बात नहीं है। जब मैंने तुम्हे कुछ बताया ही नहीं तो तुम्हें पता कैसे होगा। बैसे भी अब जब हम दोस्त हैं, तो कम से कम इतना तो तुम्हें पता होना ही चाहिए। अब तुम यहीं बेट करो। मैं अभी आती हूँ।

इतना बोलकर मैं बाथरूम में घुस गई। करीब 15 मिनट बाद मैं फ्रेश होकर और बाथ लेकर बाहर आई। मैंने जाबूझकर ब्लैक कलर का कैमिसोल और पैंटी पहनी हुई थी। कैमिसोल के अंदर मैंने ब्रा नहीं पहनी थी, जिस कारण उसमें से मेरे निप्पलस की सेप साफ साफ दिखाई दे रही थी। ऊपर से वो थोडा नेक था, जिस कारण मेरी क्लीवेज भी बाहर झाँक रही थी। बाहर आकर मैंने सबसे पहले रूम सर्विस को कॉल करके 2 कॉफी ऑर्डर कर दी और फिर एक व्लैक जींस पहन कर अपने बाल ठीक करने लगी।

उसके बाद मैंने हल्का फुल्का मेकअप भी कर लिया। तब तक हमारी कॉफी भी आ गई थी। इसलिए हम दोनों आपस में बातें करते हुए कॉफी इंजाय करने लगे। इस दौरान एक बार भी रवि की नजरें मुझसे हटीं नहीं थी। मैं उसकी नजरों में अपने लिए वासना साफ साफ देख सकती थी। पर मैं उसकी शराफत देखकर भी काफी हैरान थी। क्योंकि अगर उसकी जगह कोई और होता, तो पक्का वो मुझे अब तक चोद चुका होता। पर उसने सिवाय मुझे देखने के दूसरी कोई गलत हरकत नहीं की थी। जिस कारण मैं अब तक उससे काफी इम्प्रेश भी हो गई थी। कॉफी खत्म करने के बाद मैंने कैमिसोल के ऊपर एक ब्राऊन कलर की लैदर जैकेट पहन ली और फिर अपना रूम अच्छी तरह से लॉक करने के बाद हम दोनों होटल से निकल गए।

कहानी जारी है........................
 
Update 010 -

सबसे पहले हमने एक रेस्टोरेंट में जाकर लंच किया। उसके बाद रवि मुझे भोपाल की कुछ फेमस जगह घुमाने ले गया। इस दौरान हमारी काफी अच्छी बाऊंडिंग हो गई थी। फिर लास्ट में हम लोग भोपाल के बड़ा तालाब पर पहुँचे। वहाँ काफी सारे लोग घुमने आये हुए थे, खासकर कपल्स। मुझे वो जगह काफी अच्छी लगी, वहाँ बड़ा तालाब पर वोटिंग की सुबिधा भी थी। पर चूँकि शाम हो गई थी, इसलिए हमने अगले दिन बोटिंग करने के बारे में डिसाईड किया था। हम अभी वहाँ यूँ ही टहल रहे थे कि अचानक रवि ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और अपने एक हाथ से मेरी कमर को मजबूती से पकडकर दूसरे हाथ से मेरी गाँड को सहलाने लगा।

इससे पहले मैं कोई रियेक्ट करती उसने मेरे होँठों पर अपने होंठ रख दिए और मुझे किस करने लगा। हालाँकि रवि का ऐसा करना मुझे अच्छा ही लगा था, पर अब तक हमारा रिलेशन मात्र फ्रेंडशिप बाला था। इसके अलावा दोपहर में जब वो मुझे लेने होटल आया था, तब भी उसने मेरे साथ कोई गलत हरकत नहीं की थी। जिस कारण मेरी नजर में वो अब तक एक अच्छा लड़का ही था। पर अचानक से उसकी इस हरकत से मैं बुरी तरह से हैरान थी। मैं इस बारे में सोच ही रही थी कि तभी उसने मुझे किस करना बंद कर दिया और मेरे कान में धीरे से बोला।

रवि- सॉरी…… प्लीज बुरा मत मानना.... वो मेरी एक्स गर्लफ्रेंड अपने नये बॉयफ्रेंड के साथ यहाँ पर है और वो मुझे देखकर अपने बॉयफ्रेंड को हग कर रही थी। इसलिए मैंने भी उसे जलाने के लिए ऐसा कर दिया। प्लीज प्लीज मुझे माफ कर दो

रवि की बात सुनकर मैं सारा मामला समझ गई थी। लेकिन फिर भी मैं उसे थोडा गुस्से में धूरते हुए बोली

निशा- ठीक है मैं समझ गई कि तुमने अपनी एक्स को जलाने के लिए मुझे हग किया था, लेकिन फिर तुमने मुझे किस क्यों किया????

मेेरी बात सुनकर रवि थोडा हकलाते हुए बोला

रवि- वो वो तो बस मैंने अपना रिलेशनशिप रियाल दिखाने के लिए किया था…

निशा- या फिर मौके का फायदा उठाने के लिए

रवि- माँ कसम ऐसा कुछ नहीं है, और सॉरी तो बोला है ना मैंने

निशा- तो अब छोडो मुझे…. क्या पूरे भोपाल को बताना है कि मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूँ और एक बात बताओ, तुम्हारा हाथ हर बार मेरे पिछबाडे पर ही क्यों जाकर अटक जाता है। अपनी एक्स को जलाने के लिए हग किया और किस भी किया चलो ठीक है, मेरी कमर पर पर हाथ रख लिया ये भी ठीक है और ये भी मान लिया की मेरे पिछबाडे पर गलती से हाथ रख दिया, पर उसे सहलाने का क्या मतलब था मिस्टर रवि

मेरी बात सुनकर रवि ने मुझे तुरंत छोड दिया और बोला

रवि- वो वो वो तो बस हीट ऑफ मूवमेंट में हो गया। बैसे भी तुम पीछे से इतनी हॉट और सेक्सी लगती हो कि कोई आदमी कंट्रोल कर ही नहीं पाता है। मैंने भी अब तक अपने आप को कैसे कंट्रोल किया हुआ है, यह तो बस मैं ही जानता हूँ।

निशा- सच बोल रहे हो ना... कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम गे हो और तुम्हें बस लडके लडकियों के पिछबाडे ही पसंद आते हों। देखा अगर ऐसी कोई बात है तो अभी बता दो। बैसे मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नहीं है। पर मैं अगली बार अपनी सेफ्टी का ध्यान रखूंगी खासकर पिछबाडे का।

रवि- कैसी बात कर रही हो... मेरे ऐसे बैसे कोई शौक नहीं है। मैं एक स्ट्रेट लड़का हूँ और मुझे केवल लडकियों में ही इंट्रेस्ट है.. बस। हाँ यह बात अलग है कि लडकियों का पिछबाडा मुझे कुछ ज्यादा ही एक्साईटेड करता है, पर लडकों का नहीं समझी। इसलिए अगली बार मुझे गे मत कहना।

निशा- अच्छा तो यह बात है, तो फिर बताओ कहाँ है तुम्हारी एक्स। सच में यहाँ है या फिर मुझसे झूठ बोलकर मेरा एडवांटेज ले रहे थे।

मेरी बात सुनकर रवि ने एक लड़का और लड़की की तरफ इशारा किया। हाँलाकि वो लड़की काफी खूबसूरत थी, पर मुझसे ज्यादा तो बिल्कुल भी नहीं थी और उसके साथ जो लड़का था वो भी एवरेज ही था। रवि तो उस लडके से कई गुना ज्यादा हैंडसम दिखता था। मुझे उस लड़की की च्वाईस पर हैरानी हुई की उसने रवि जैसे हैंडसम लडके को छोडकर, उस लडके को सिलेक्ट किया है। मैं उन दोनों को देखकर बोली

निशा- आखिर तुम लोगों का ब्रेकअप क्यों हुआ था

रवि- कोई खास बजह नहीं थी। बस बो लड़का शायद मुझसे ज्यादा पैसे बाला है। असल में मेरी एक्स के बर्थडे पर मैंने उसे एक गोल्ड चैन गिफ्ट की थी औऱ उस लडके ने डायमंड रिंग गिफ्ट कर दी। मैंने अपनी एक्स से कहा कि उसे वो डायमंड रिंग बापिस कर देनी चाहिए। क्योंकि वो लड़का केवल उसका दोस्त है और अपने दोस्त से इतना मंहगा गिफ्ट लेना ठीक नहीं है। खासकर तब जब हम किसी को इतना मंहगा रिटर्न गिफ्ट ना दे सकते हों। अगर तुम्हें डायमंड रिंग पसंद है तो मैं तुम्हें इससे अच्छी डायमंड रिंग लाकर दे दूँगा। पर उसने मना कर दिया और मेरे साथ साथ उस लडके से भी फोन पर बातें करने लगी। जब मुझे इस बारे में पता चला, तो मैंने अपनी एक्स से इस बारे में बात की। लेकिन उसने सफाई देने के स्थान पर सीधा ब्रेकअप कर लिया।

निशा- पर तुमने गिफ्ट बापिस करने के लिए कहा ही क्यों और तुमने भी तो उसे गोल्ड चैन दी थी और डायमंड रिंग देने की बात कह रहे थे।

रवि- हम लोग ऑफीसियल गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड थे, और बारे में सारे कॉलेज को पता था। मैं उसे काफी पसंद करता था, इसलिए यह बात भी पक्की थी कि मैं आगे चलकर उससे शादी जरूर करूँगा। इसलिए मैंने जो भी गिफ्ट उसे दिया वो अपनी होने बाली बाईफ के लिए दिया था। पर वो लडका तो मात्र उसका दोस्त था। बैसे भी मेरी एक्स की फैमली मिडिल क्लास फैमिली है। एक बॉयफ्रेण्ड होने के बाबजूद किसी दूसरे लडके से दोस्ती रखना या उससे कोई गिफ्ट लेना गलत नहीं है। पर अगर हम अपने किसी दोस्त से कोई मंहगा गिफ्ट लेते हैं, तो वो भी हमसे यही उम्मीद रखता है कि हम भी उसे भी रिटर्न में कोई महंगा गिफ्ट दें। पर ना तो मेरी एक्स कोई मंहगा गिफ्ट देना अफोर्ड कर सकती है और ना ही उसकी फैमली। बस इसीलिए मैंने उसे गिफ्ट लेने से रोका था।

रवि अब तक मुझे काफी समझदार और सुलझा हुआ लडका लग रहा था और उसकी बातों और पर्सनेलिटी में मैं अब तक काफी इम्प्रेश हो चुकी थी। इसलिए रवि की बात सुनकर मैं उसे समझाते हुए बोली

निशा- हूँ तो ये बात है... चलो कोई नहीं…. जो हो गया सो हो गया। तुम यह सोचो की वो लडकी तुम्हारे लायक ही नहीं थी।

रवि- मैं उसे भूल चुका हूँ। वस बो यूँ अचानक सामने आ गई, इसलिए मुझे थोडा गुस्सा आ गया था।

निशा- अच्छा एक बात पूछूँ थोडा पर्सनल है। अगर ना बताना चाहो तो कोई बात नहीं

रवि- अरे बाबा पूछो ना…. मैं तुम्हें अपना अच्छा दोस्त मानता हूँ। इसलिए तुमसे कुछ भी नहीं छिपाना चाहता। तुम्हें जो भी पूछना है वो बिंदास होकर पूछो।

रवि की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

निशा- नहीं नहीं रहने दो… मुझे नहीं पूछना कुछ

रवि- अरे मेरी माँ पूछो ना…. आखिर क्या जानना चाहती हो…..

निशा- कहीं ऐसा तो नहीं है कि वो तुम्हारे साथ फिजीकल होना चाहती हो, पर तुमने मना कर दिया हो या तुममें कोई कमी हो। इसलिए उसने दूसरा रास्ता अपनाया हो

मेरी बात सुनकर रवि ने अजीब सा मूँह बनाया और बोला

रवि- सच में तुम लड़की ही हो ना.... यह तो हद हो गई.... देखो मैडम मुझमें कोई कमी नहीं है। मैं एक परफेक्ट मैन हूँ और हाँ हम पहले कई बार फिजीकल भी हुए हैं।

निशा- तो कहीं टाईमिंग या साईज की तो कोई प्राब्लम.....

मैं अपनी बात पूरी करते करते रह गई थी। क्योंकि रवि ने मुझे गुस्से से घूरा पर फिर बेचारा सा मूँह बना कर बोला

रवि- यार ऐसा कुछ भी नहीं है, जो तुम सोच रही हो... मेरे साथ सब कुछ नार्मल है। अब मैं यहाँ अपनी पेंट खोलकर तो दिखा नहीं सकता।

निशा- अच्छा अच्छा ठीक है मैं समझ गई। पर इतना गुस्सा क्यों हो रहे हो। मैं तो बस तुम्हारे मजे ले रही थी। चलो चलकर तुम्हारी एक्स को थोडा तंग करते हैं।

रवि- नहीं मुझे नहीं जाना उसके पास

निशा- मतलब तुम अब भी उसे पसंद करते हो। अगर तुम कहो तो मैं उन दोनों का ब्रेकअप भी करवा सकती हूँ। फिर तुम्हारा रास्ता क्लीयर हो जाऐगा

रवि- नहीं अब मैं उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं करता हूँ।

निशा- तो फिर चलो ना... दोनों को जलाते हैं

रवि- तुम अभी ब्रेकअप के बारे में क्या कह रही थी

निशा- अगर तुम कहो तो मैं उन दोनों का ब्रेकअप भी करवा सकती हूँ।

रवि- पर कैसे

निशा- कुछ खास नहीं वस मुझे अपने थोडे जलबे उस लडके को दिखाने पडेंगे। जिसके बाद वो मुझसे मेरा नम्बर जरूर माँगेगा और फिर वो पक्का मुझे कही मिलने के लिए भी बुलाऐगा। बस तुम्हें उसी वक्त अपनी एक्स को वहाँ भेजना है, और फिर हो गया उन दोनों का ब्रेकअप। जो उसने तुम्हारे साथ किया, वही उसका नया बॉयफ्रेंड उसके साथ करेगा।

रवि- लेकिन उस लडके ने कोई ऐसी बैसी हरकत की तुम्हारे साथ तो

निशा- तुम उसकी चिंता मत करो... बैसे भी तुम हो ना मेरी सेफ्टी के लिए

रवि- ठीक है हम यही करेंगे। पर मैं यह सब अपनी एक्स को सबक सिखाने के लिए कर रहा हूँ, ना कि उसे फिर से पाने के लिए। इसलिए कुछ भी ऐसा बैसा मत सोचना

निशा- क्या फर्क पडता है

रवि- मुझे पडता है। मैं नहीं चाहता कि तुम मेरे बारे में कुछ गलत सोचो

निशा- क्यों

रवि- पता नहीं... शायद मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूँ

निशा- इतनी जल्दी मेरे बारे में ऐसे ख्याल लाना ठीक नहीं है। बैसे भी तुम मेरे बारे में कुछ भी नहीं जानते।

रवि- मुझे कोई फर्क नहीं पडता

निशा- ठीक है तुम्हारी मर्जी पर इतना याद रखना कि आगे जाकर हमारा कोई भविष्य नहीं है। हम दोनों अच्छे दोस्त बनकर तो रह सकते हैं या हो सकता है कि थोडा उससे भी आगे कुछ हो जाऐ। पर हम सारी जिंदगी एक साथ नहीं रह सकते है और मैं नहीं चाहती कि तुम एक बार फिर आज बाली स्थिती में फंसो। इसलिए फ्यूचर में अगर तुम्हें कोई अच्छी लड़की मिले, तो उसे अपने से दूर मत जाने देना।

रवि- हाँ हाँ ठीक है ठीक है तब की तब से देखेंगे पर कल के चक्कर में अपना आज क्यों खराब करें।

निशा- ये भी ठीक है तो चलो

इसके बाद हम दोनों एक साथ रवि की एक्स की तरफ जाने लगे। चलते हुए रवि ने अपना एक हाथ मेरी कमर पर रखने के बहाने मेरी गाँड के ऊपर रख दिया और उसे हल्के से सहलाने लगा। तो मैंने उसे एक गुस्से बाला लुक दिया। पहले तो उसने ध्यान नहीं दिया पर जब उसे लगा की मैं उसे गुस्से से घूर रहीं हूँ तो वो समझ गया कि क्या बात है। इसलिए उसने अपना हाथ थोडा ऊपर कर के कमर पर रख दिया। उसकी इस हरकत से मैं मुस्कुराकर बोली

निशा- मतलब तुम नहीं सुधरोगे...

रवि- सॉरी वो गलती से वहाँ हाथ चला गया था

निशा- हाँ हाँ पता है तुम्हारी सॉरी का मतलब। तुम्हें तो बस मौका चाहिए होता है। कम से कम यह तो देख लो कि कितने लोग हैं यहाँ पर। क्या सोचेंगे हमारे बारे में, कही भी हाथ रख देते हो

रवि- मतलब

निशा- मतलब कुछ नहीं

रवि- यानि तुम गुस्सा नहीं हो

निशा- अब क्या कर सकती हूँ, जब दोस्त के इतने अजीब अजीब शौक हैं तो, बार बार झगडा तो कर नहीं सकती

रवि- मतलब अगर मैं फिर से वहीँ हाथ रखूँ, तो तुम बिल्कुल भी गुस्सा नहीं करोगी

रवि की बात सुनकर मैंने उसे फिर से गुस्से में देखा तो वो बोला

रवि- अभी अभी तो तुमने कहा कि तुम झगडा नहीं करोगी

निशा- हाँ… तो क्या तुम हर बार मेरा एडवांटेज लेने की कोशिश करोगे

रवि- नहीं वो तो बस जब ज्यादा एक्साईटमेंट हो, तो उसे कम करने के लिए

निशा- मिस्टर रवि यहाँ वहाँ हाथ रखने से या ऐसी बैसी कोई हरकत करने से एक्साईटमेंट कम नहीं होता है, बल्कि और भी ज्यादा बड जाता है। बैसे भी मैं एक ओपन माईंडेड लड़की हूँ, इसलिए मैं ऐसी बातें खुल कर कर लेती हूँ। जैसे लडके एक्साईटेड होते हैं, बैसे ही लडकियाँ भी होती हैं और ऐसा बैसा करने से जितना मजा तुम लडकों को आता है। उतना ही मजा हम लडकियों को भी आता है।

रवि- मतलब मेरे वहाँ हाथ रखने और सहलाने से तुम्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है और तुम्हे भी यह सब अच्छा लगता है।

निशा- हाँ लगता है…. पर अगर हम लड़कियाँ इसका विरोध ना करे और बस मजे लें, तो तुम लडके उसे गलत समझने लगते हैं।

रवि- ऐसा नहीं है… पक्का मैं तुम्हारे बारे में कुछ भी गलत नहीं सोचूँगा… माँ कसम

निशा- तो अब क्या करूँ मैं,,,,

रवि- कुछ खास नहीं बस मुझे तुम्हारे पिछबाडे पर हाथ रखने और सहलाने की परमीशन दे दो... मैं भी थोडा इंजाय कर लूँगा और तुम भी कर लेना

निशा- अरे पागल हो क्या... सिचुऐशन तो देखो, कितने लोग है यहाँ पर.... कहीं अकेले में कर लेना मैं नहीं रोकूँगी। लेकिन केवल उतना ही उससे आगे बढने की कोशिश मत करना।

रवि- हाँ पक्का... जब तक तुम नहीं कहोगी आगे नहीं बडूँगा

इतना बोलकर उसने फिर से मेरी गाँड पर हाथ रख दिया और सहलाने लगा। मैंने उसे फिर से गुस्से में घूरा तो बो बोला

रवि- तुमने ही तो कहा था कि सिचूऐशन देखकर करना है। देखो हम मेरी एक्स गर्लफ्रेंड के पास जा रहे हैं, तो उसे भी तो लगना चाहिए कि हम दोनों कितने पास आ गए हैं।

इतना बोलकर उसने मेरे गाल पर जल्दी से एक किस भी कर दिया। अब तक हम रवि की एक्स के एकदम पास आ गए थे। इसलिए मैं अब उससे कुछ कह भी नहीं सकती थी। बैसे भी उसकी इन हरकतों से मुझे बहुत मजा आ रहा था। इसलिए मैं बस मुस्कुराकर रह गई। रवि के साथ एक बार फिर मैं अपनी कॉलेज लाईफ को इंजॉय कर रही थी। कितने हसीन दिन थे वो, पर शादी के बाद सब बदल गया था। इसलिए मैं उसके साथ एक बार फिर वही पुरानी जिंदगी जीकर बहुत खुश थी।

हालाँकि यह सब बस कुछ दिनों का ही था। क्योंकि उसके बाद मुझे फिर से अपनी पुरानी जिंदगी मैं लौटना था। पर फिलहाल मैं अपनी पुरानी जिंदगी के बारे में बिल्कुल भी सोचना नहीं चाहती थी। मैं अपना यह पूरा हफ्ता इंजॉय करना चाहती थी।

कहानी जारी है..........
 
Update 011 -

अपनी एक्स के पास पहुँचकर रवि बोला

रवि- हाय रश्मि कैसी हो

रश्मि- मैं तो बडिया ही हूँ, इन्फेक्ट पहले से ज्यादा खुश भी हूँ, तुम बताओ तुम कुछ बदले बदले लग रहे हो।

रवि ने रश्मि के सबाल का जबाब नहीं दिया और उसके नये बॉयफ्रेंड की तरफ हाथ बडाते हुए बोला

रवि- और गगन तुम्हारे क्या हालचाल हैं

मैं इस वक्त कुछ इस तरह खडी हुई थी कि मेरी बैक गगन की साईड थी। इस कारण वो ठीक से मेरा चेहरा तो नहीं देख पाया था। पर रवि जो मेरी गाँड पर हरकत कर रहा था। उसपर जरूर उसकी नजर थी। मैंने तिरछी नजर से गगन की इस हरकत को देख लिया था। पर इससे मुझे कोई फर्क नहीं पडा। बैसे भी मैं अब तक अपने पति के अलाबा 8 अनजान मर्दों के सामने एकदम नंगी हो चुकी हूँ और उनसे चुद भी चुकी हूँ। तो अगर कोई लड़का कपडों के ऊपर से मेरी गाँड को घूरे उससे मुझे क्या ही फर्क पडेगा। मैंने एक नजर रश्मि पर डाली तो वो जलन भरी नजर से मुझे और रवि को देख रही थी। रवि के पूछने पर और हाथ बडाने पर गगन का ध्यान रवि की तरफ गया और वो भी अपना हाथ बडाते हुए बोला

गगन- बडिया हूँ रवि… तुम बताओ तुम कैसे हो और ये साथ मैं कौन है

गगन की बात सुनकर मैं रवि की दूसरी तरफ जाकर खडी हो गई। अब मेरा चेहरा गगन की तरफ था और मेरी गाँड रश्मि की तरफ थी। मेरे दूसरी तरफ जाते ही रवि ने अपना दूसरा हाथ बापिस से मेरी गाँड पर रख दिया और उसे सहलाने लगा, तो मैंने मुस्कुराकर एक नजर रवि को देखा और फिर गगन की तरफ हाथ बडाते हुए बोली

निशा- हाय आय एम सपना... सपना गुप्ता फ्रॉम दिल्ली और रवि की गर्लफ्रेंड

मेरे आखरी शब्द सुनकर रश्मि और गगन दोनों ही थोडा हैरानी से मुझे देखने लगे। अब तक रश्मि की नजर रवि की हरकतों पर पड चुकी थी। जिसे देखकर उसे थोडा गुस्सा भी आ रहा था। पर बो कर भी क्या सकती थी। जबकि गगन मुझ जैसी पटाखा को रवि की बाहों में देखकर जलन के मारे मरा जा रहा था। उसने रवि को ताना मारते हुए कहा

गगन- गर्लफ्रेंड.... वाह रवि तेरी तो ऐश है.... 4 दिन हुए नहीं ब्रेकअप को और नई गर्लफ्रेंड... ओह सॉरी सॉरी गलती से निकल गया। लगता है तुमने अपनी गर्लफ्रेंड को इसके बारे में बताया नहीं है।

गगन की बात सुनकर रवि को काफी ज्यादा गुस्सा आ रहा था। पर मैं नहीं चाहती थी कि रवि कुछ भी कहकर हमारा प्लान खराब करे। इसलिए मैं बोली

निशा- ओह ऐसा कुछ भी नहीं हैं मिस्टर गगन। रवि ने मुझे पहले ही सब कुछ बता दिया था। बैसे भी हम दोनों काफी पुराने दोस्त हैं। मेरे रिलेटिव रवि के घर के पास ही रहते हैं। इसलिए मैं बहुत पहले से ही उसके लव रिलेशन के बारे में जानती थी।

रश्मि- मतलब तुम्हें रवि के पुराने अफेयर के बारे में सब पता है

निशा- ज्यादा तो नहीं बस इतना कि रवि के किसी वास्टर्ड दोस्त ने उसके साथ धोखा किया और उसकी ही गर्लफ्रेंड के साथ रिलेशन बना लिए। वो दोस्त और लड़की कौन है यह मैं नहीं जानती हूँ। बैसे भी पैसों की लालची उस कमीनी लड़की, जो थोडे से पैसों के लालच में इतने अच्छे इंसान को छोड दे, ऐसी घटिया कैरेक्टरलैश विच के बारे में और उस कमीने बास्टर्ड दोस्त के बारे में जानने का मुझे कोई शौक नहीं है। बैसे तुम दोनों भी शायद रवि के दोस्त हो, तो मैं तुम दोंनों को सलाह दूँगी कि तुम दोनों भी उस कॉलगर्ल और उसके ब्रोकर से दूर रहना। बर्ना क्या पता कब दोस्ती की आड में पीठ में छुरा भोंक दे।

मैने जानबूझकर उन दोनों को गालियाँ दी थीं और यह भी दिखाने की कोशिश की थी कि मैं उन दोनों को पहचानती नहीं हूँ। इसलिए यह सब बोल दिया। यानि गगन के तरीके का ही इस्तेमाल मैंने उन दोनों के खिलाफ किया था। मेरी बात सुनकर दोनों का चेहरा शर्म से लाल हो गया था। उन दोनों से कुछ कहते नहीं बन रहा था। पर फिर भी हिम्मत करके रश्मि बोली

रश्मि- तुम कौन होती हो किसी के बारे में कुछ कहने बाली... बैसे भी तुम कौन सी दूध की धुली हो। चार दिन हुए नहीं ब्रेकअप को और चिपक गई रवि के साथ

निशा- ओह हैलो मिस एक्स बाई जेडययय वॉट ऐवर जो भी नाम है तुम्हारा। मैं रवि को बहुत पहले से पसंद करती हूँ। पर वो पहले से ही रिलेशनशिप में था, तो मैंने उससे कभी कहा नहीं, बस फ्रेंडसिप रखी। पर ब्रेकअप के बाद किसी और लडकी को रवि के पास आने का कोई भी मौका भला क्यों दूँ। बैसे भी रवि की एक्स तो पहले से ही किसी और के साथ मजे कर रही है ना। तो फिर यह सब उससे जाकर कहो और बैसे भी तुम्हें क्यों बुरा लग रहा है उस चुडैल के बारे में सुनकर

रश्मि- रवि को पहले से ही पसंद करती थी, या रवि के पिता के पैसे देखकर लार टपकती थी

निशा- उस कॉलगर्ल और उसके ब्रोकर दोनों के पास जितना पैसा है, उससे कहीं ज्यादा पैसा है मेरे बाप के पास। इण्डिया की टॉप आई.टी. कम्पनी के मालिक हैं मेरे पिता और मैं उनकी इकलौती औलाद। अरबों खरबों की प्रापर्टी है मेरे पास। तो फिर पैसों की तो बात तुम मुझसे करो ही मत। मैं तो वस एक नेकदिल और वफादार इंसान की तलास में थी। रवि में वो सारी खासियत हैं जो एक लड़की को चाहिए। मुझसे शादी के बाद मेरे पिता के अरवों के बिजनेश को अब रवि को ही तो संभालना है।

मेरी बात सानकर गगन और रश्मि के साथ साथ रवि भी मेरी तरफ हैरानी से देखने लगा। मैंने रवि की आँखों मैं हैरानी देखी तो उसके कान के एकदम पास जाकर बहुत धीरे से बोली

निशा- मुझे घूरना बंद करो बर्ना इन्हें हम पर शक हो जाऐगा। पापा के बारे में तो झूठ बस गगन को फंसाने के लिए बोला है। इतने पैसों के लालच में पक्का वो मुझ पर लाईन मारेगा।

इतना बोलकर मैंने रवि के गालों पर किस कर दिया। ताकि गगन और रश्मि को मुझ पर कोई शक ना हो। रवि भी मेरी किस से हैरान था, पर जल्द ही उसने अपने आपको संभाल लिया और नॉर्मल हो गया। अब उसे मेरा पूरा प्लान समझ में आ गया था। जबकि रश्मि और गगन दोनों अब भी गुस्से में घूरकर मुझे देख रहे थे। पर जल्द ही वो दोनों भी संभल गए। गगन पहले से ही मेरे हुस्न पर लट्टू हो चुका था। ऊपर से मेरे इतने अमीर होने की बात सुनकर तो उसके मूँह में लार आने लगी थी। इसलिए उसने बात को संभालते हुए कहा

गगन- अरे छोडो भी यार…. हम उस विच और उसके नये बॉयफ्रेंड के बारे में बातें करके अपना मूड क्यों खराब कर रहे हैं। बैसे भी हम तो रवि के अच्छे दोस्त हैं।

गगन ने अनजाने में या जानबूझकर रश्मि को बिच कह दिया था। जो रश्मि को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया था। पर फिलहाल वो कुछ कहने या करने की स्थिती मैं नहीं थी। इसलिए वो केवल गगन को और मुझे गुस्से से देखती रही। पर गगन ने उसके गुस्से की परवाह नहीं की और बोला

गगन- तो मिस सपना क्या आप यहाँ भोपाल में किसी काम से आईं हैं

निशा- नहीं तो…. मैं तो यहाँ वस रवि से मिलने आई थी। ब्रेकअप से वो काफी उदास था। इसलिए मैं उसे कंपनी देने के लिए, अपने पर्सनल चॉपर से यहाँ आ गई। एक दो दिन में बापिस चली जाऊँगी।

मेरी बात सुनकर रवि हैरान होते हुए बोला

गगन- पर्सनल चॉपर... ओह माय गॉड तुम अमीर लोग भी ना... कितने बडे बडे शौक होते हैं ना तुम लोगों के

गगन की बात सुनकर मैं हंसते हुए बोली

निशा- अरे नहीं मिस्टर… मेरे ऐसे कोई खास शौक नहीं है। मेरे डैड को अपने बिजनेश के काम से अक्सर फॉरेन ट्रिप पर जाना पडता है और इण्डिया में भी एक ही दिन में अलग अलग शहरों में जाना पडता है। इसलिए 3-4 चॉपर ले रखें हैं उन्होंने। मुझे तो बस सिंपिल लाईफ जीना ही पसंद है। जैसे बाईक पर घूमना, किसी फाईब स्टार होटल की जगह किसी छोटे मोटे रेस्टोरेंट या ढाने पर खाना, कहीं दूर जाना हो तो ट्रेन से जाना, नो मेकअप, नो ज्वैलरी। सच कहूँ तो अमीरों बाला एक भी गुण और शौक नहीं है मुझमें। मुझे तो मिडिल क्लास लोगों की लाईफ ज्यादा पसंद है। वो तो वस रवि के लिए पहली बार चॉपर से आई थी। पर वापिस ट्रेन से ही जाऊँगी।

अब तक रश्मि भी काफी हद तक अपने आपको कंट्रोल कर चुकी थी। गगन को मुझमें इंट्रेस्ट लेता देख वो बोली

रश्मि- भगवान भी कितना अजीब है ना, जिसे पैसे देता है उसे ना तो उनकी जरूरत होती है और ना ही कोई शौक, और जिसे कुछ भी नहीं देता, उसे पैसों की जरूरत के साथ साथ शौक भी होता है।

निशा- अपनी अपनी सोच है। अच्छा चलो फिर कभी मिलते हैं अब मैं रवि के साथ क्वालिटी टाईम स्पेंड करना चाहती हूँ।

इतना बोलकर मैंने रवि को देखकर कहा

निशा- चलो ना जान… थोडा आगे तक घूम के आते हैं। यहाँ कुछ ज्यादा ही भीड भाड हो गई है।

रवि जो अब भी पूरे मन से मेरी गाँड सहला रहा था और जिसे हमारी बातों से जैसे कोई मतलब ही नहीं था, वो मेरी बात सुनकर होश में आया और बोला

रवि- हाँ हाँ चलो

इतना बोलकर जैसे ही हम जाने लगे तो गगन बोला

गगन- अरे ऐसे कैसे... हम लोग गगन के बेस्ट फ्रेंड हैं। गगन की नई गर्लफ्रेंड के लिए हमारी तरफ से एक ट्रीट तो बनती है।

निशा- फिर कभी मिस्टर....

गगन- गगन... गगन वर्मा नाम है मेरा

निशा- ओह सॉरी गगन हम फिर किसी दिन आपसे ट्रीट ले लेंगे

गगन- फिर कब… 2-3 दिन में तो तुम जाने ही बाली हो

मैंने कुछ सोचने का नाटक करते हुए कहा

निशा- कल.... कल ठीक रहेगा है ना रवि

मेरी बात सुनकर रवि सोचने का नाटक करते हुए बोला

रवि- कल... कल तो हम....

मैने रवि की बात काटते हुए कहा

निशा- अरे कुछ देर की ही तो बात है, इनसे मिल लेते है ना। गगन तुम एक काम करना रवि को कॉल करके समय और जगह बता देना हम वहाँ आ जाऐंगे

गगन- अरे नहीं… मैं अच्छी तरह से जानता हूँ रवि को, बड़ा कमीना है। वो मेरा फोन ही नहीं उठाऐगा और उठा भी लिया तो आने से मना कर देगा और तुमसे भी झूठ बोल देगा। तुम एक काम करो अपना नम्बर मुझे देदो। मैं सीधा तुम्हें कॉल कर दूँगा।

गगन की बात सुनकर मैं गुस्सा होने का नाटक करते हुए बोली

निशा- यह तो गलत बात है गगन। तुम्हें रवि को यूँ गाली नहीं देनी चाहिए। मुझे अपना नम्बर देने में कोई प्राब्लम नहीं है, पर पहले रवि से कान पकडकर सॉरी बोलो। बर्ना रवि भले ही आ जाऐ मैं नहीं आऊँगी।

इतना बोलकर मैने रवि को अपनी बहों में भर लिया। गगन ने एक नजर मेरे बूब्स और क्लीवेज पर डाली और फिर रवि की तरफ देखकर दोनो कान पकडकर बोला

गगन- सॉरी रवि भाई…. गलती हो गई। प्लीज मुझे माफ कर दे, तू तो मेरा भाई है ना

गगन की इस हरकत से रश्मि को बहुत गुस्सा आया, पर वो कुछ कर नहीं सकती थी। जबकि रवि के चेहरे पर एक सुकून था। इसलिए वो मुस्कुराते हुए बोला

रवि- कोई बात नहीं गगन... बैसे भी मेरी किस्मत बदलने में तुमने मेरा साथ दिया है। इसलिए तुम्हें माफी माँगने की कोई जरूरत नहीं है। बैसे तुम्हारी और रश्मि की जोडी काफी अच्छी है। आई होप तुम दोनों अपनी शादी में भी हमें जरूर बुलाओगे।

गगन- शादी... अरे शादी का हमारा कोई इरादा नहीं है। बैसे भी रश्मि तो मेरी वस एक अच्छी फ्रेंड है।

रवि- ओह अच्छा ऐसा है क्या... ओह सॉरी गगन... खैर छोडो यह सब, तुम मुझे कल कॉल कर देना मैं पक्का आऊँगा

गगन- नहीं भाई मुझे तुम पर बिल्कुल भी यकीन नहीं है।

निशा- चलो ठीक है अब बात खत्म करते हैं, तुम मेरा नम्बर नोट कर लो और रिंग भी कर देना ताकि मैं भी तुम्हारा नम्बर अपने फोन में सेव कर लूं।

इतना बोलकर मैंने उसे अपना नम्बर बता दिया। जिसे उसने अपने फोन पर सेव कर लिया और मुझे रिंग कर दी। जिसके बाद मैंने भी उसका नम्बर अपने फोन में सेब कर लिया। उसके बाद हम दोनों वहाँ से आगे बड गए। हमारे कुछ दूर जाते ही हमें गगन और रश्मि की आपस में झगडने का आबाजें सुनाई दीं, जिन्हें सुनकर हम दोनों की एकसाथ हंसी छूट गई। कुछ दूर चलकर मुझे एक तरफ पहाडी के पास कुछ लडकियाँ खडीं दिखाईं दीं। जो आते जाते लडकों को देखकर मुस्कुरा रहीं थीं। मैं उनकी तरफ देखने लगी तो रवि बोला

रवि- वो सभी कॉलगर्ल हैं

निशा- कॉलगर्ल…. और वो भी यहाँ पब्लिक प्लेस पर

रवि- हाँ… असल में यहाँ ज्यादा पैसे देने बाले कस्टमर आसानी से मिल जाते हैं। पर पुलिस का रिस्क भी रहता है।

निशा- तो क्या भोपाल में और भी जगह हैं जहाँ कॉलगर्ल मिल जातीं हैं

रवि- हाँ कई सारी हैं। पर तुम क्यों पूछ रही हो

निशा- वस ऐसे ही, असल में मुझे अपने कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए कॉलगर्लस् पर एक थीसिस लिखनी है। दिल्ली में थोडा रिस्क रहता है ऐसी जगह पर जाने में, तो सोच रही थी कि क्यों ना यहीँ पर इन लोगों से मिलकर अपना काम कर लूँ

रवि- तुम भी ना बिल्कुल पागल हो। यह भी कोई टॉपिक है कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए थीसिस लिखने का।

निशा- यार मुझे क्या पता था कि इसमें इतना रिस्क होगा

मेरी बात सुनकर रवि में मुझे भोपाल की कुछ ऐसी जगह के नाम बता दिए जहाँ अक्सर शाम को कॉलगर्ल मिल जाया करती हैं। अब आप लोग तो जानते हीं है कि मुझे कहाँ थीसिस लिखवानी है, मैं तो वस मौका मिलने पर मजे लेने चक्कर में थी। भोपाल के सभी रेड लाईट ऐरिया के बारे में बताने के बाद रवि बोला

रवि- देखो अगर थोडी बहुत पूछताछ करनी हो मेरे पास एक दलाल का नम्बर है। तुम अगर चाहो तो उसका नम्बर मैं तुम्हें दे सकता हूँ। उसका बहुत बड़ा रैकेट है, कई सारी हाऊस वाईफ और कॉलेज गर्ल भी उसके लिए काम करतीं हैं और भोपाल के अलावा दूसरे शहरों की कॉलगर्ल और दलालों से भी उसके अच्छे कान्टेक्ट हैं। आदमी ठीक है और भरोसे का भी है। वस एक ही कमी है कि वो हर लड़की को पैसे छापने की मशीन के रूप में ही देखता है। इसलिए हो सकता है तुम्हें भी वो बहलाने की कोशिश करे या कुछ उल्टी पुल्टी बात करे। बस उसकी बातों का बुरा मत मानना, तो वो पक्का तुम्हें अकेले में किसी ना किसी कॉलगर्ल से मिलवा देगा। वर्ना यहाँ इस तरह से कॉलगर्ल से खडे होकर बात करोगी, तो एक तो वो तुम्हें भाव नहीं देंगी और दूसरे लोग उल्टा तुम्हें ही कॉलगर्ल समझेंगे।

रवि की बात सुनकर मैं खुश होते हुए बोली

निशा- ठीक है सर जी…. आप उसका नम्बर दे दो, मैं यहाँ से जाने से पहले एक बार उससे बात कर लूँगी। अगर तैयार हो गया तो ठीक वर्ना उससे दिल्ली के किसी दलाल का नम्बर लेकर दिल्ली में ट्राय करूँगी।

इसके बाद कुछ और देर वहाँ घूमने के बाद हमने एक रेस्टोरेंट में डिनर किया, डिनर के बाद रवि मुझे वापिस मेरे होटल छोडकर अपने घर चला गया।

कहानी जारी है .............
 
मेरी इस कहानी को सपोर्ट करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.............
 
Update 012 -

रात करीब 10 बजे मैं रवि के द्वारा बताए गए एक सीक्रेट रेड लाईट ऐरिया में खडी थी। मेरे अलावा वहाँ और भी कई लडकियाँ थीं। मुझे वहाँ आऐ अभी ज्यादा देर नहीं कि तभी एक स्पोर्ट कार मेरे सामने आकर रुकी। जिसमें से 18-19 साल के 3 लड़के बाहर निकले, और मेरे पास आकर मेरे बूब्स और गाँड को सहलाने लगे। उन लडकों की ठीक से ढाडी मूँछ भी नहीं आईं थीं। लेकिन उनकी जबानी अपने पूरे उफान पर थी। अपने से 6-7 साल छोटे लडकों के द्वारा अपने शरीर को यूँ सहलाने से मुझे बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी। इससे पहले मैं कुछ कहती उनमें से एक बोला

लडका1- क्या मस्त माल है यार…. लगता है आज तो मजा ही आ जाएगा

लड़का2- बिल्कुल किसी मॉडल जैसी दिख रही है। गाँड तो देखो क्या मस्त है

लडक3- अरे तू तो गाँड में ही घुस जा। साली के बूब्स तो देख क्या मस्त हैं, एक दम टाईट, लगता है ज्यादा लोगों ने अब तक बजाया नहीं है इसे।

लडका1- तो हम बाजा देंगे आज इसकी पुंगी

लडका3- पहले रेट तो पूछ ले

लडका1- क्यों मैडम चलोगी क्या

उन लडकों की बातें सुनकर मैं थोडा चिढते हुए बोली

निशा- तुम लोगों की अभी यह सब करने की उम्र नहीं है। इसलिए घर जाकर पढाई करो

मेरी बात सुनकर एक लडका बोला

लडका2- पढाई तो रोज ही करते हैं। बस कभी कभी ही तो मजे करते हैं। बैसे भी हम पुरे 18 के हो चुके हैं, तो यह सब करने में कुछ भी गलत नहीं है और अगर इस उम्र में मजे नहीं करेंगे तो क्या बुडापे में करेंगे। तुम तो बस इतना बताओ कि हमारे साथ चलोगी क्या

उस लडके की बात सुनकर मुझे लगा कि अगर मैं मना भी कर दूँगी, तो भी ये लोग मानने बाले नहीं हैं, मेरी जगह किसी और लडकी को अपने साथ ले जाऐंगे। इससे अच्छा तो यही है कि मैं ही चली जाती हूँ। बैसे भी मैं तो यहाँ मजे करने आई हूँ। दूसरों को सुधारने का काम क्यों करूँ। इसलिए मैं बोली

निशा- अब जाने के लिए ही तो यहाँ खडीं हो

लडका1- कितना लोगी

निशा- 10 हजार सिंगल शॉट दूसरी बार घुसाया तो पैसे डबल

लडका1- पूरी रात का बोलो मैडम... बैसे भी हमारे कुछ और दोस्त भी हैं, जो पार्टी में हमारा बेट कर रहे हैं। असल में हमारे एक दोस्त का वर्थडे है आज। इसलिए पार्टी में फुल मस्ती करने का प्रोग्राम है।

उस लडके की बात सुनकर मैं थोडा सोचते हुए बोली

निशा- 2 लाख दे देना

मेरी बात सुनकर वो लडका थोडा हैरान होते हुए बोला

लडका2- 2 लाख…. यह तो बहुत ज्यादा हैं।

निशा- अब मुझे क्या पता कि तुम कितने दोस्त हो और पता नहीं सारी रात कितनी बार करोगे।

लड़का1- 50 हजार देंगे मंजूर हो तो बोलो

निशा- मुझे नहीं जाना…. किसी और को देख लो

लडका2- अरे मेरी जान… तेरे जैसी मस्त माल हमें कहीं नहीं मिल रही है

निशा- मस्त माल चाहिए तो पैसे भी ढीले करने पडेंगे

मेरी बात सुनकर वो लडका एक बार फिर बारगेनिंग करते हुए बोला

लडका1- चल ठीक है 70 ले लेना

निशा- पूरे 1 लाख दोगे तो सोचूँगी

लड़का2- ठीक है 1 लाख देंगे। पर पूरे मजे लेंगे हम लोग

निशा- हाँ हाँ ठीक है.. कर लेना जो करना है

लडका2- मूँह में लेने में और गाँड मरवाने में नखरे तो नहीं करोगी ना

निशा- अरे नहीं करूँगी… मैंने पहले ही तो बोल दिया है कि “कर लेना जो करना है”।

लडका1- नाम तो बता दो अपना

निशा- सपना

मेरा नाम पूछकर उन लडकों ने 500-500 की दो गडडियाँ मुझे दे दीं, जो मैंने चुपचाप अपने बैग में ऱख लीं और फिर उनकी गाडी में जाकर बैठ गई। जिसके बाद वो लोग मुझे शहर से बाहर एक फार्म हाऊस पर ले गए। जहाँ पार्टी चल रही था। वहाँ करीब 15-16 लडके और थे जो कि सारे के सारे 18 से 20 की उम्र के ही थे। इतने सारे लडकों को देखकर मेरी बुरी तरह से गाँड फट गई। मैंने तो सोचा था कि 3 लडके यहाँ हैं और पार्टी में बहुत से बहुत 4-5 और होंगे।

कम उम्र के हैं तो ज्यादा टाईम भी नहीं लेंगे। जिस कारण आसानी से 7-8 लडकों से तो करवा ही लूँगी। बैसे भी पहले दिन मैंने एक ही रात में 6 लोगो को सेटिस्फाई किया था। पर इतने सारे लडकों को सेटिसफाई करने में तो मेरी चूत की चटनी ही बन जाऐगी। लेकिन अब बापिस लौटने का मेरे पास कोई रास्ता नहीं था। इसलिए जो भी हो मुझे मैनेज करना ही था।

फार्म हाऊस के अंदर जाकर उन लोगों ने मुझे ड्रिंक ऑफऱ की तो मैं चुपचाप ड्रिंक लेकर शिप करने लगी। इस दौरान वहाँ मौजूद बाकी सभी लडके भी मेरे पास आ गए और बारी बारी से मुझे चूमने और सहलाते हुए मेरे बारे में गंदी गंदी बातें करने लगे। जिन्हें सुनकर मुझे बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी। ऐसा करते करते उन लोगों ने मुझे 3 पैग पिला दिए थे। जिस कारण मुझे पर्याप्त नशा हो गया था, फिर उनमें से एक लड़का जो शायद वर्थडे बॉय था, वो मेरे पास आया और मुझे अपने कंधे पर उठाकर डी.जे. के पास ले जाकर मेरे साथ डांस करने लगा।

पहले तो मुझे काफी शर्म आई और डांस करने की हिम्मत भी नहीं हुई, पर फिर उस लडके के बार बार उक्साने पर में उसके साथ डांस करने लगी। मेरा डाँस देखकर वहाँ मौजूद सारे लडके मुझ पर गंदे गंदे कमेंटस कर रहे थे और हूटिंग करने के साथ साथ सीटियाँ भी बजा रहे थे। कुछ देर तक तो मुझे इस सब में काफी ह्यूमिलेशन महसूस हुआ, पर फिर मजा आने लगा। जिस कारण में और भी ज्यादा कमर मटका मटका कर और डाँस करने लगी।

काफी देर तक डांस करने के बाद जब मैं थक गई तो मैंने डाँस करना बंद कर दिया। जिसके बाद वर्थडे बॉय मुझे अपने कंधे पर उठाकर सीधा एक हॉल में ले गया। जहाँ हॉल के बीचों बीच एक छोटा सा बेड लगा हुआ था और उसके चारों तरफ सोफे रखे हुए थे। साथ ही साथ वहाँ पर खाने पीने की भरपूर इंतजाम था। उस लडके ने मुझे उस बेड के पास लेजाकर खड़ा कर दिया और फिर एक एक करके मेरे कपडे उतारने लगा। बैसे तो मैं पिछले 2 दिनों से गैर मर्दों के समाने नंगा होकर चुद रही थी, पर इतने सारे लोगों के सामने नंगा होने में मुझे काफी शर्म आ रही थी।

लेकिन अब कुछ भी नहीं किया जा सकता था। क्योंकि उस लडके ने मेरी ब्रा और पेंटी भी उतार दी थी। उस हॉल में रूम हीटर चल रहे थे जिस कारण मुझे बिल्कुल भी ठण्ड का एहसास नहीं हो रहा था। मेरे सारे कपडे उतारने के बाद उस लडके ने भी अपने सारे कपडे उतार दिए और मुझे नीचे बैठने का इशारा किया। मैं उसका इशारा तुरंत समझ गई और चुपचाप नीचे घुटनों के बल बैठ गई। तभी मुझे सुनाई दिया कि एक लड़का बोल रहा है।

”ऐ लडकी ऋषभ का पूरा मूँह में नहीं ले पायेगी”

उसकी बात सुनकर दूसरा लड़का बोला

”अरे यार कैसी बात कर रहे हो, रण्डी है साली… पक्का पूरा ले लेगी”

तभी फिर से पहले बाला लड़का बोला

”अरे यार ऋषभ का देख कितना बड़ा है। कैसे जायेगा उसके मूँह में”

”चला जाऐगा... इनको एक्सपीरियंस होता है”

”मुझे नहीं लगता”

”तो एक काम कर शर्त लगा ले”

”कैसी शर्त”

”अगर इस लड़की ने ऋषभ का पूरा लण्ड अपने मूँह में ले लिया तो तू पूरे 1 हजार रूपये इस लड़की को देगा और अगर यह नहीं ले पाई, तो मैं 1 हजार रूपये उसे दूँगा। बोल क्या कहता है”

”मुझे मंजूर है, पर इसमें हमारा क्या फायदा... शर्त के पैसे तो उस रण्डी को मिलेंगे”

”हम देख कर मजा करेंगे”

मैं चुपचाप उन लडकों की बातें सुन रही थी। जिसे सुनकर मुझे बहुत शर्म आ रही थी। और मन ही मन सोच रही थी कि

”अरे चूतियों यह भी कोई शर्त लगाने की बात है। बैसे भी इसका इतना बड़ा भी नहीं है। हाँ नॉर्मल साईज से थोडा बड़ा है, पर इतना बाडा और मोटा नहीं की मैं मूँह में ले ही नहीं पाऊं। खैर जो भी हो फायदा तो मेरा ही है। चाहे कोई भी जीते मुझे क्या”

इतना सोचकर मैंने चुपचाप ऋषभ का लण्ड अपने मूँह में ले लिया और चुपचाप उसका लण्ड चूसने लगी। धीरे धीरे करके मैंने उसका पूरा लण्ड अपने मूँह में ले लिया था। जिस कारण पहला बाला लड़का शर्त हार गया और उसने चुपचाप अपने पर्स से पैसे निकाल कर मेरे पास रखी एक टेविल पर रख दिए। करीब 5 मिनट तक अपना लण्ड चुसवाने के बाद ऋषभ ने मुझे रोक कर बेड पर लिटा दिया। जिसे देखकर मैं समझ गई कि या तो इसने पहले केवल 1-2 बार ही सेक्स किया है, या फिर किया ही नहीं है। जिस कारण यह ज्यादा देर तक टिक नहीं पाऐगा।

यह भी मेरे लिए अच्छा ही था क्योंकि इतने सारे लडकों को देखकर मेरी पहले से ही फटी पडी थी कि कैसे इन सब का लूँगी। मैं ये सब सोच ही रही थी कि तभी ऋषभ मेरे ऊपर सवार होकर मेरे जिस्म पर भूखे भेडिए की तरह टूट पडा और मेरे शरीर को चूमने और चाटने लगा। जी भर कर मेरे शरीर को चुमने और सहलाने के बाद उसने मेरी चूत में एक ही झटके में अपना लण्ड घुसा दिया, जिस कारण मेरे मूँह से एक चीख निकली

निशा- आआआआहहहहहह

पर ऋषभ ने मेरी चीख पर कोई ध्यान नहीं दिया और मेरी चूदाई शुरू कर दी। कुछ देर की चुदाई के बाद ही मेरी चूत पानी छोडने लगी, जिस कारण मेरा दर्द लगभग खत्म हो गया और मुझे मजा आने लगा, इसलिए मैं भी अपनी कमर हिलाकर उसका साथ देने लगी और अपने हाथों से उसके सर को और पीठ को सहलाने लगी। सारे लडके उस छोटे से बेड के चारों तरफ बैठकर ड्रिंक के मजे लेने के साथ साथ मेरी और ऋषभ की लाईव पोर्न मूवी देख रहे थे और ऋषभ को उक्साने के लिए मेरे बारे में गंदे गंदे कमेंटस भी कर रहे थे।

जिन्हें सुनकर पहले तो मुझे बहुत बुरा लग रहा था और शर्म भी आ रही थी। क्योंकि अब तक मैंने किसी दूसरे इंशान के सामने सैक्स नहीं किया था और ना ही किसी ने मेरे बारे में आज तक इतनी गंदी बातें कहीं थी। लेकिन कुछ देर बाद मुझे उन सबकी बातें सुनने में मजा आने लगा और मैं पूरे मजे लेते हुए अपनी चुदाई करवाने लगी साथ ही साथ मैं अपने मूँह से लगातार सिस्कियाँ और कामुक आवाजें भी निकाल रही थीं। जिसे सुनकर ऋषभ के साथ साथ बाकी लडके भी मजे ले रहे थे।

उउउउममममम

अअआहहहह

ओहहहह मेरे राजा ऐसे ही

आआआहहहहह मजा आ गया

इइशशशश़

अभी हमारी चुदाई चल ही रही थी कि तभी मुझे एक लडके की आबाज सुनाई दी

”लगता है साली को बड़ा मजा आ रहा है। देख कैसे अपनी गाँड हिला हिला कर चुदवा रही है”

तभी दूसरा लड़का भी बोल पडा

”हाँ यार लगता है ऋषभ का जल्दी ही पानी निकाल देगी”

”अरे नहीं यार अपना ऋषभ कम थोडे ही है। पहले वो इस राण्ड का पानी निकालेगा फिर अपना”

”मुझे नहीं लगता”

”तो शर्त लगा लो”

”हाँ लगी शर्त अगर ऋषभ पहले ठण्डा हुआ तो तू 2 हजार इस राण्ड को देगा वर्ना मैं 2 हजार दूँगा”

”हाँ मंजूर है... कम ऑन ऋषभ और जोर लगा निकाल दे इस साली रण्डी का पानी”

मैं उन लोगों की बातें सुन कर शर्म के मारे लाल हो रही थी। ऋषभ का तो पता नहीं पर पता नहीं क्यों मेरे अंदर जरूर जोश बड गया था। उसलिए मैं ऋषभ का साथ देते देते खुद से उसे चूमने भी लगी थी और तभी अचानक से ऋषभ की स्पीड बड गई और मैं समझ गई कि इसका काम तो हो गया। ऋषभ मेरे पति अमन की ही तरह 10-15 मिनट में ही ठण्डा हो गया था। जिस कारण मेरा काम नहीं हो पाया था। पर मुझे किसी बात की कोई फिक्र नहीं थी। क्योंकि मैं जानती थी, कि ऋषभ के अलग होते ही दूसरा लड़का मेरे ऊपर होगा और अगर उसने भी इतना ही समय लिया तो पक्का मेरा पानी निकल जायेगा।

जैसे ही ऋषभ मुझसे अलग हुआ तो शर्त हारने बाले लडके ने चुपचाप पैसे निकाल कर टेबिल पर रख दिए। तब तक दूसरे लड़का अपने कपडे उतार कर बेड पर चढ गया था और उसने मुझे कुतिया बनने के लिए कहा, तो मैं चुपचाप कुतिया बन गई। जिसके बाद एक बार फिर मेरी चुदाई का सिलसिला चालू हो गया।

इसबार फिर से दूसरे लडकों ने शर्त लगाई, पर इस बार मेरा पानी पहले निकल गया था। इसलिए जैसे ही दूसरा लड़का मुझसे अलग हुआ तो तीसरे लडके ने पीछे से मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया। उस लडके ने तो अपने कपडे भी नहीं उतारे थे। उसने तो बस अपने पैंट की जिप खोलकर लण्ड बाहर निकाला और मेरी चूत में एक ही बार में घुसा दिया। अभी उसे कुछ देर ही हुई थी कि तभी चौथा लड़का भी बेड पर आ गया और उसने अपना लण्ड मेरे मूँह में घुसा दिया। अब एक साथ मेरे मूँह में और चूत में लण्ड थे और मैं मजे लेकर लण्ड चूसने के साथ साथ अपनी चूत मरवा रही थी।

इसबार फिर उन लडकों ने आपस में शर्त लगाई, लेकिन इस बार मेरे ऊपर नहीं बल्कि उन दोनों लडकों पर शर्त लागाई गई थी, जो इस वक्त मुझे चोद रहे थे और शर्त यह थी कि किसका पानी पहले निकलेगा। इस बार कुछ और लडके भी शर्त में सामिल हो गए थे। वहाँ पर मेरी चुदाई का तमाशा देखने बाले लडकों के आपस में दो ग्रुप बन गए थे और इस बार कुल मिलाकर 15-16 हजार रूपये दांव पर थे। पर मुझे उनकी शर्त की कोई परवाह नहीं थी। क्योंकि किसी के भी हारने जीतने से मेरा कुछ नहीं जाने बाला था। मुझे तो बस उनकी शर्त से फायदा ही हो रहा था। ऊपर से शर्त के चक्कर में ये लडके कुछ ज्यादा ही जोश में थे। जिससे वो जल्दी जल्दी पानी छोड रहे थे।

जिस लडके ने मेरे मूँह में अपना लण्ड दिया था, वो ज्यादा देर तक मेरी चुसाई बरदास्त नहीं कर पाया और सारा पानी मेरे मूंह में छोड दिया। मैं पहले भी लडकों का बीर्य अपने मूँह में ले चुकी थी। इसलिए मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं हुई और मैं सारा बीर्य निगल गई, साथ ही साथ उस लडके का लण्ड भी चाट कर साफ कर दिया। जैसे ही वो लड़का हटा तो किसी दूसरे लडके ने मेरे मूँह में अपना लण्ड घुसा दिया। तब तक मेरी चूत मारने बाला लड़का भी ठण्डा हो गया था और उसके हटते ही अगले लडके ने मेरी गाँड में उंगली करना शुरू कर दी, तो मैं समझ गई कि वो लडका अब मेरी गाँड मारने बाला है। इसलिए मैंने उपने मूंह से लडके का लण्ड निकाला और बोली

निशा- अगर गाँड मारनी है तो मार लो मैं नहीं रोकूंगी, पर पहले मेरी गांड में और अपने लण्ड पर अच्छे से ऑयल या बैसलीन बगैरह लगा लो। वर्ना मुझे और तुम्हें दोनों को बहुत ज्यादा दर्द होगा और चोट भी लग सकती है। जिस कारण इंफेक्सन होने का डर भी है।

उस लडके को मेरी बात तुरंत समझ में आ गई, इसलिए वो बेड से उतर गया और बैसलीन की डिब्बी ले आया। फिर उसने मेरी गाँड के अंदर तक और अपने लण्ड पर ढेर सारी बैसलीन लगाई और फिर मेरी गाँड में अपना लण्ड घुसा कर मेरी गाँड मारने लगा। तब तक में फिर से अपने मूंह में लण्ड लेकर चूसना शुरू कर चुकी थी। जिस कारण जब उस लडके का लण्ड मेरी गाँड में घुसा, तो मैं चाह कर भी चीख नहीं पाई, लेकिन इस बार भी सोफे पर बैठे दूसरे लडकों ने शर्त लगाई थी। पर अब मैने उनकी शर्तों पर और बातों पर ध्यान देना बिल्कुल बंद कर दिया था और बस अपनी चुदाई इंजॉय कर रही थी।

कहानी जारी है..............
 
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