- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 132,837
अपडेट 34
अभी में लेता हुआ hi था की दीदी मुझे आवाज देने लगी लेकिन में वैसे hi सोने का नाटक करने कागा में देखना चाहता था की मेरी बहन किस हद तक जाती है शायद ये मेरी सबसे बड़ी गलती साबित हुई
जब दीदी आवाज दे रही थी तोह में जरा भी नहीं हिला तोह दीदी को भी यकीं हो गया की में दवाइयों के असर से गहरी नींद में सो रहा हु
अभी में हॉस्पिटल के कपड़ों में hi था जो की एक नार्मल शर्ट और पंत टाइप की थी अब जब दीदी को यकीं हो गया की में सो रहा हु तोह उन्होंने पहले मेरे बालो में उंगलिया फेरने लगी उसके बाद वही हाथ बालों से निचे ले जाते हुए मेरे होंठो पर रगड़ने लगी जिससे हुआ ये की अब मेरे शरीर में भी हलकी हलकी सी मस्ती चढ़ने लगी लेकिन मैंने बड़ी मुश्किल से सब कण्ट्रोल किआ हुआ था
अब दीदी मेरे होंठो से होते हुए धीरे से मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी और धीमे से शर्ट के सरे बटन खोल दिए एयर फिर बड़े प्यार से मेरे साइन को चूमे और चाटने लगे कुछ ऐसे
फिर ऐसे hi थोड़ी देर चूमने के बाद दीदी अब वैसे hi चूमते हुए धीरे धीरे निचे जा रही थी अब वह मेरे साइन से निचे जाते हुए मेरा पेट नाभि मेरे गर्दन के निचे से कमर तक का सारा एरिया चूमकर गिला कर दिया था अब मुझे लगा दीदी यही पर रुक जाएगी लेकिन नहीं उन्होंने अब आगे बढ़ते हुए मेरी पंत उतरनी शुरू कर दी अब मुझे लगा ये ज्यादा हो रहा है ये समय और जगह दोनों भी इस सब के लिए सही नहीं है तोह मेने थोड़ा हिलने का नाटक किया जिससे दीदी को लगे में जग रहा हु और हुआ भी वही जैसे hi मेरे शरीर में हलचल हुई दीदी तुरंत hi साइड होक बैठ गयी लेकिन जब में नहीं उठा तोह वह सबसे पहले किसी कपडे से मेरा शरीर साफ़ करके मेरे कपडे ठीक किये और फिर बात रूम में चली गयी
जब वह बात रूम में घुसी तोह में भी चुपके से देखने लगा जो की मेरी 2ऋ गलती साबित होने वाली थी जब मेने अंदर देखा तोह दीदी बाथरूम में नंगी बैठी हुई अपनी छूट मसल रही थी
दीदी :- आआअह्हह्ह्ह्ह राजज मेरे भाई अपनी बहिन की प्यास बुझा दे देख कितना तड़प रही है ये तेरे लिए ऊऊफफफफ मम्माआआआ जल्दी से आकर इसकी गर्मी को ठंडा कर दे कही ऐसा न हो की इसकी गर्मी मुझे पागल कर दे और में कोई गलत कदम उठा लू
आआह्ह्ह्ह मम्माआमीीेरररीईछूटत ाआयीयईईईईई ( तेज़ तेज़ ऊँगली करते हुए झाड़ ने लगती है)
ये मेरे लिए किसी झटके से काम नहीं था की मेरी बहन मेरा hi नाम लेके अपनी छूट सहला रही थी
लेकिन में कुछ कर पता उससे पहले hi मुझे दादाजी के बोलने की आवाज सुनाई देने लगी तोह में तुरंत अपने बीएड पे लेत गया और ऐसा जताया की अभी अभी मेरी नींद खुली हो
दादाजी (मेरा हाथ पकड़कर) :- अब कैसा है मेरे शेर
में :- एकदम मस्त
दादाजी की आवाज सुनके दीदी भी खुद का हुलिए सुधर के बहार आ गयी
अभी में कुछ और बोलता की तभी नाना और उनका परिवार अंदर आ गया
नानाजी को देख कर फिर से मेरे साथ वही होने लगा लेकिन मेने उन सब भावनाओ पर जल्द hi काबू प् लिया और एकदम नोर्मल्ली उनसे बेहवे करने लगा लेकिन जब वह मेरे सामने आये थे तब जो दर और गुस्से की जो भावना मेरे मन में आई थी उसके चलते मेरी हाथ की मुठी अपने आप कास गयी और ये भले hi 2 पल के लिए था लेकिन दादाजी ने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था जिससे दादाजी ने वह महसूस कर लिया और वह समझ गए की मेरी हसी जो है वह नकली है और उन्होंने इशारे से नाना को बहार बुलाया
ात आउटसाइड ऑफ़ वार्ड
नानाजी :- क्या हुआ समशेर बहार क्यों बुलाया कितने सालो के बाद में अपने नवासे के साथ इतने अचे से बात कर रहा था
दादाजी :- में समझ सकता हु surya(nanaji) लेकिन मेरी बात ध्यान से सुन्ना
नानाजी :- बोल
दादाजी :- देख राज भले hi अचे से बात कर रहा है है रहा है लेकिन मेने महसूस किआ है की उसे फिलहाल कुछ समय की जरुरत है समझ तू
नानाजी :- है ये तोह मेने भी महसूस किआ की राज बात तोह कर रहा है लेकिन थोड़ी झिझक है उसे थोड़ा समय चाहिए
लेकिन तू भी समझ में कितने सैलून बाद मिल रहा हु अब दूर मत कर
दादाजी :- अरे में दूर थोड़ी कर रहा हु या मिलने से मन भी नहीं कर रहा में बस कह रहा हु एकदम से इतने सालो का प्यार मत दे धीरे धीरे पहले उसे खुलने दे फिर जब उससे तेरे साथ तेरे परिवार के साथ कम्फर्टेबले महसूस करे तब भले hi उसे पुरे साल के लिए अपने साथ ले जा लेकिन अभी थोड़ा अपने भावनाओ पर कण्ट्रोल कर और उसे थोड़ा खुलने दे ताकि तुम दोनों की बॉन्डिंग अछि हो उससे मिलने से ाचा फ़ोन पे बाटे कर लेकिन फिलहाल उसे कुछ समय दे
नानाजी :- ठीक है तू भी सही कह रहा है
दादाजी :- एक और बात जिसे तुम उसकी झिझक कह रहे हो वह उसकी झिझक नहीं दर और गुस्सा है इसलिए जो भी करियो सोच समझ कर करियो समझा
नानाजी :- है समझ गया
दादाजी :- ठीक है तू जा राज से बात कर में डिस्चार्ज की फॉर्मेलिटी कम्पलीट करके आता हूँ
तोह वही सुजय की हवेली में
इस वक़्त सुजय बेहद गुस्से में था और उसके सामने एक आदमी दर से काँप रहा था सुजय इतने गुस्से में था की उसने अपने hi घर का कच का शोपीस को तोड़ दिया जिसका पता आस पास बिखरे हुए कच के टुकड़े बता रहे थे लेकिन वह इतने गुस्से में क्यों था क्यूंकि उसका प्लान फ़ैल जो हो गया था ऊपर से राणा भी मारा गया
सुजय :- बहुत बोल रहा था न मेरे निशाना कभी नहीं चुकता तोह आज कैसे चूक गया बोल
आदमी :- पता नहीं बॉस मेने निशाना सही लगाया था लेकिन गोली उस तक पहुंची hi नहीं
स :- अगर चलायी थी तोह गयी कहा धरती खा गयी या आसमान निगल गया
ा :- पता नहीं सुई कैसे हवा में hi गायब हो गयी
स :- है जादू हो गया न की तेरी वह जहारली सुई हवा में hi गम हो गयी
ा :- ऐसा hi हुआ होगा बॉस
धड़ाम…..
अभी उस आदमी ने इतना बोलै hi था की राणा ने पास पड़े खंजर को सीधा उसके साइन में उतर दिया और वह आदमी खंजर लगने के बाद सीधा जमीं पर जेक गिरा
स :- आज तोह बच गया भीमा लेकिन में आ रहा हु अब कैसे बचेगा तू
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आज के लिए इतना hi
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अभी में लेता हुआ hi था की दीदी मुझे आवाज देने लगी लेकिन में वैसे hi सोने का नाटक करने कागा में देखना चाहता था की मेरी बहन किस हद तक जाती है शायद ये मेरी सबसे बड़ी गलती साबित हुई
जब दीदी आवाज दे रही थी तोह में जरा भी नहीं हिला तोह दीदी को भी यकीं हो गया की में दवाइयों के असर से गहरी नींद में सो रहा हु
अभी में हॉस्पिटल के कपड़ों में hi था जो की एक नार्मल शर्ट और पंत टाइप की थी अब जब दीदी को यकीं हो गया की में सो रहा हु तोह उन्होंने पहले मेरे बालो में उंगलिया फेरने लगी उसके बाद वही हाथ बालों से निचे ले जाते हुए मेरे होंठो पर रगड़ने लगी जिससे हुआ ये की अब मेरे शरीर में भी हलकी हलकी सी मस्ती चढ़ने लगी लेकिन मैंने बड़ी मुश्किल से सब कण्ट्रोल किआ हुआ था
अब दीदी मेरे होंठो से होते हुए धीरे से मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी और धीमे से शर्ट के सरे बटन खोल दिए एयर फिर बड़े प्यार से मेरे साइन को चूमे और चाटने लगे कुछ ऐसे
फिर ऐसे hi थोड़ी देर चूमने के बाद दीदी अब वैसे hi चूमते हुए धीरे धीरे निचे जा रही थी अब वह मेरे साइन से निचे जाते हुए मेरा पेट नाभि मेरे गर्दन के निचे से कमर तक का सारा एरिया चूमकर गिला कर दिया था अब मुझे लगा दीदी यही पर रुक जाएगी लेकिन नहीं उन्होंने अब आगे बढ़ते हुए मेरी पंत उतरनी शुरू कर दी अब मुझे लगा ये ज्यादा हो रहा है ये समय और जगह दोनों भी इस सब के लिए सही नहीं है तोह मेने थोड़ा हिलने का नाटक किया जिससे दीदी को लगे में जग रहा हु और हुआ भी वही जैसे hi मेरे शरीर में हलचल हुई दीदी तुरंत hi साइड होक बैठ गयी लेकिन जब में नहीं उठा तोह वह सबसे पहले किसी कपडे से मेरा शरीर साफ़ करके मेरे कपडे ठीक किये और फिर बात रूम में चली गयी
जब वह बात रूम में घुसी तोह में भी चुपके से देखने लगा जो की मेरी 2ऋ गलती साबित होने वाली थी जब मेने अंदर देखा तोह दीदी बाथरूम में नंगी बैठी हुई अपनी छूट मसल रही थी
दीदी :- आआअह्हह्ह्ह्ह राजज मेरे भाई अपनी बहिन की प्यास बुझा दे देख कितना तड़प रही है ये तेरे लिए ऊऊफफफफ मम्माआआआ जल्दी से आकर इसकी गर्मी को ठंडा कर दे कही ऐसा न हो की इसकी गर्मी मुझे पागल कर दे और में कोई गलत कदम उठा लू
आआह्ह्ह्ह मम्माआमीीेरररीईछूटत ाआयीयईईईईई ( तेज़ तेज़ ऊँगली करते हुए झाड़ ने लगती है)
ये मेरे लिए किसी झटके से काम नहीं था की मेरी बहन मेरा hi नाम लेके अपनी छूट सहला रही थी
लेकिन में कुछ कर पता उससे पहले hi मुझे दादाजी के बोलने की आवाज सुनाई देने लगी तोह में तुरंत अपने बीएड पे लेत गया और ऐसा जताया की अभी अभी मेरी नींद खुली हो
दादाजी (मेरा हाथ पकड़कर) :- अब कैसा है मेरे शेर
में :- एकदम मस्त
दादाजी की आवाज सुनके दीदी भी खुद का हुलिए सुधर के बहार आ गयी
अभी में कुछ और बोलता की तभी नाना और उनका परिवार अंदर आ गया
नानाजी को देख कर फिर से मेरे साथ वही होने लगा लेकिन मेने उन सब भावनाओ पर जल्द hi काबू प् लिया और एकदम नोर्मल्ली उनसे बेहवे करने लगा लेकिन जब वह मेरे सामने आये थे तब जो दर और गुस्से की जो भावना मेरे मन में आई थी उसके चलते मेरी हाथ की मुठी अपने आप कास गयी और ये भले hi 2 पल के लिए था लेकिन दादाजी ने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था जिससे दादाजी ने वह महसूस कर लिया और वह समझ गए की मेरी हसी जो है वह नकली है और उन्होंने इशारे से नाना को बहार बुलाया
ात आउटसाइड ऑफ़ वार्ड
नानाजी :- क्या हुआ समशेर बहार क्यों बुलाया कितने सालो के बाद में अपने नवासे के साथ इतने अचे से बात कर रहा था
दादाजी :- में समझ सकता हु surya(nanaji) लेकिन मेरी बात ध्यान से सुन्ना
नानाजी :- बोल
दादाजी :- देख राज भले hi अचे से बात कर रहा है है रहा है लेकिन मेने महसूस किआ है की उसे फिलहाल कुछ समय की जरुरत है समझ तू
नानाजी :- है ये तोह मेने भी महसूस किआ की राज बात तोह कर रहा है लेकिन थोड़ी झिझक है उसे थोड़ा समय चाहिए
लेकिन तू भी समझ में कितने सैलून बाद मिल रहा हु अब दूर मत कर
दादाजी :- अरे में दूर थोड़ी कर रहा हु या मिलने से मन भी नहीं कर रहा में बस कह रहा हु एकदम से इतने सालो का प्यार मत दे धीरे धीरे पहले उसे खुलने दे फिर जब उससे तेरे साथ तेरे परिवार के साथ कम्फर्टेबले महसूस करे तब भले hi उसे पुरे साल के लिए अपने साथ ले जा लेकिन अभी थोड़ा अपने भावनाओ पर कण्ट्रोल कर और उसे थोड़ा खुलने दे ताकि तुम दोनों की बॉन्डिंग अछि हो उससे मिलने से ाचा फ़ोन पे बाटे कर लेकिन फिलहाल उसे कुछ समय दे
नानाजी :- ठीक है तू भी सही कह रहा है
दादाजी :- एक और बात जिसे तुम उसकी झिझक कह रहे हो वह उसकी झिझक नहीं दर और गुस्सा है इसलिए जो भी करियो सोच समझ कर करियो समझा
नानाजी :- है समझ गया
दादाजी :- ठीक है तू जा राज से बात कर में डिस्चार्ज की फॉर्मेलिटी कम्पलीट करके आता हूँ
तोह वही सुजय की हवेली में
इस वक़्त सुजय बेहद गुस्से में था और उसके सामने एक आदमी दर से काँप रहा था सुजय इतने गुस्से में था की उसने अपने hi घर का कच का शोपीस को तोड़ दिया जिसका पता आस पास बिखरे हुए कच के टुकड़े बता रहे थे लेकिन वह इतने गुस्से में क्यों था क्यूंकि उसका प्लान फ़ैल जो हो गया था ऊपर से राणा भी मारा गया
सुजय :- बहुत बोल रहा था न मेरे निशाना कभी नहीं चुकता तोह आज कैसे चूक गया बोल
आदमी :- पता नहीं बॉस मेने निशाना सही लगाया था लेकिन गोली उस तक पहुंची hi नहीं
स :- अगर चलायी थी तोह गयी कहा धरती खा गयी या आसमान निगल गया
ा :- पता नहीं सुई कैसे हवा में hi गायब हो गयी
स :- है जादू हो गया न की तेरी वह जहारली सुई हवा में hi गम हो गयी
ा :- ऐसा hi हुआ होगा बॉस
धड़ाम…..
अभी उस आदमी ने इतना बोलै hi था की राणा ने पास पड़े खंजर को सीधा उसके साइन में उतर दिया और वह आदमी खंजर लगने के बाद सीधा जमीं पर जेक गिरा
स :- आज तोह बच गया भीमा लेकिन में आ रहा हु अब कैसे बचेगा तू
~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आज के लिए इतना hi
~~~~~~~~~~~~~~~~~~