Apne Pyaare rishte - Page 6 - SexBaba
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Apne Pyaare rishte

अपडेट 44



जब में निचे खाना खाने के लिए पंहुचा तोह स. चाचा को छोड़के सब निचे hi थे मेरा खाने पे इंतज़ार कर रहे थे

जब में डाइनिंग टेबल पे पंहुचा तोह दादाजी ने बोलना शुरू किया

दादाजी :- क्या हुआ राज नाराज़ हो क्या हम से

में :- नहीं दादाजी में समझता हु मेरे हर दिन के झगडे से आप सब को भी परेशानी होती होगी इसीलिए आपने ये फैसला लिया होगा

दादी :- राज ऐसा कभी मत सोचना की हमे तुमसे कोई परेशानी होती है बल्कि हमे तोह ये जान कर ख़ुशी होती है की तुम इतने से उम्र में अपने ऊपर की जिम्मेदारियों को इतने अचे समझने और सम्हालने लगे जब भी कोई गांव वाला हमे ठाकुर कहता है तोह हमे उनके दिल में हमारे प्रति जो सम्मान है सिर्फ वह दीखता है और जब वही लोग आपको छोटे मालिक कहते है तोह हमे उनके दिल में छुपी हुई उम्मीद और तुम्हारे प्रति उनका प्रेम दीखता है गांव के हर इंसान जनता है जब भगवन भी उनका साथ देने से मन कर दे तब भी आप उनके साथ हमेशा खड़े रहेंगे

दादी के मेरे तारीफ करने से मेरे चेहरे पर एक ख़ुशी सी आ गयी थी जो की शायद हर एक के चेहरे पर आती है जब कोई उनका अपना अपना उनकी तारीफ करे लेकिन शायद दादी को कुछ और hi मंजूर था

दादी :- खुश होने की जरुरत नहीं है राज ये हम आपकी तारीफ नहीं कर रहे है आपको ये बता रहे है की आपके सर पे कितनी बड़ी जिम्मेदारियां है आप केवल शेरगढ़ के वरिष्ठ hi नहीं बल्कि लोगों की आखरी उम्मीद भी हो इसीलिए आपको अगर कुछ हुआ तोह लोगों की उम्मीदे भी ख़तम हो जाएँगी इसलिए कुछ भी करने से पहले इस बात का ख्याल रखना

में :- जी दादी इस बात का मुझे ख्याल है मुझे

दादी :- अछि बात है तोह चलिए आप खाना ख़तम कीजिये

में :- जी दादी

उसके बाद कोई भी खास बात नहीं हुई हम सब ने खाना ख़तम कर के अपने अपने कमरों में सोने चले गए अभी में ज्यादा एक्ससिटेड था की आज दीदी कोनसा तरीका चुनती है मुझे अपनी तरफ आकर्षित करने का जब से मेने वह साडी स्टोरीज पढ़ी थी सेक्स के बारे में बहुत कुछ जान गया था और बची कुछ कसार वीडियोस ने पूरी कर दी थी अलग अलग स्टोरीज पढ़के में भी अब इन्सेस्ट रिलेशनशिप के तरफ अत्त्रक्ट होने लगा था अब जब भी में दीदी के बारे में सोचता मेरे मन में अजीब सी भावनाये जन्म लेने लगती में अपनी hi बहन के तरफ hi अत्त्रक्ट होने लगा था अभी मेरा मन मुझे धुत्कार रहा था लेकिन दिमाग ने जब दीदी के भी व्यव्हार को भी ध्यान में लायतोह दिल भी दिमाग के दलीलों के आगे टिक नहीं पाया

में ऐसे hi दिल और दिमाग के बिच हो रहे ध्वन्ध में फसा था की तभी मेरे रूम के दरवाजे और खिड़की अपने आप लॉक हो जाते है और लॉकेट चमकने लगता है

अभी में कुछ सोचता की तभी मेरे कानो में गाइड की आवाज आयी जो की मेरे hi बीएड पे बैठा था

में :- तुम फिर से बीएड पे चढ़ गए उतरो निचे

ग :- राज कभी तोह प्यार से बात करो में तोह तुम्हारी मदद करने hi आया हु

में :- और वह कैसे

ग :- वह तोह तुम बताओगे

में :- मतलब

ग :- में बस तुम्हारे इमोशंस को महसूस कर सकता हु जैसे अभी मुझे तुम टेंशन में हो ऐसा महसूस हो रहा है लेकिन उसके पीछे की वजह तुम नहीं बताओगे तब तक पता नहीं चलेगी.

में :- कोई इतनी भी बड़ी चिंता नहीं है जिसका हल जानने के लिए तुम्हारे रे की जरुरत पड़े लेकिन तुम्हारे साथ के लिए धन्यवाद लेकिन कुछ समस्या तोह मुझे बिना जादू के या किसी दूसरे के सहारे के बिना अकेले hi सोल्वे करने होंगे तभी तोह जीने में मजा आएगा

ग :- बड़ी गहरी बात कह दी वैसे तुम्हारी एक समस्या का हल तोह बता सकता हु

में :- कोनसी

ग :- यही की मुकाबले में तुम पर गोली किसने चलायी

में :- किसने

ग :- ये नहीं बता सकता लेकिन ये जान लो की जिसने तुम पे गोली चालयी वह मारा गया है

में :- तुमने मारा

ग :- नहीं जिसने उसे हुकुम दिया था उसी ने मारा

में ;- क्यों

ग :- क्यूंकि वह असफल हुआ था

में :- ये तुम्हे कैसे पता

ग :- ध्यान लगाओ तुम्हे भी पता चल जायेगा

में :- ठीक है

अभी में और गाइड और ज्यादा बाते करते उससे पहले hi किसी ने दूर नॉक किआ दूर नॉक होते hi गाइड भी वापस गायब हो गया

में :- कोण है

दीदी :- में हूँ सो गया क्या राज

में (दरवाजा खोलते हुए) :- नहीं दीदी बस सोने जा रहा था

दीदी :- तोह दरवाजा क्यों बंद किआ पता है न में आने वाली हूँ

में :- वह…. वह

दीदी :- चल छोड़ ये साडी बाटे और सो जा

में :- ठीक है दीदी

वही दूसरी तरफ एक सुनसान रोड जिसे पार करने के लिए भयानक जंगल के बिच से होक गुजरना पड़ता जिस वजह से यहाँ कोई भी आता जाता नहीं

ऐसे सुनसान रोड पे एक ट्रक जा रहा था जो की पूरा पैक था इस के अंदर क्या है किसी को पता नहीं चल सकता था

वह ट्रक सीधा जेक किसी पुराने गोडावण के पास जेक रुक गया उस ट्रक के रुकते hi उस गोडावण से 4 आदमी हाथों में आटोमेटिक गन्स लिए बहार निकले जो सीधा ट्रक के तरफ बढ़ने लगे

1ला आदमी :- (ट्रक ड्राइवर से) क्या काम है

ड्राइवर :- वही जो आप हुकुम करे सर्कार

1ला आदमी :- हम्म चलो अंदर

फिर वह ट्रक ड्राइवर और वह चारो बन्दे फिर से गोडावण के अंदर चल पड़े

जब वह पांचो लोग अंदर गए तोह वह का नज़ारा hi अलग था वह चारो तरफ उन चारो आदमियों के तरह hi और बहुत से आदमी गन लिए खड़े थे और एक जगह पे कुछ आदमी हाथों में बंदूकों के साथ उनके पीठ में 2 तलवारे भी लगी थे और साथ hi उनके कस्टम्स में और भी छोटे चाकू और पिस्तौल को रखने के लिए जगह थी और उनका चेहरा भी ढाका था जैसे इन गुंडों की सेना के खास सिपाही हो

ये सब देखके तोह उस ड्राइवर का तोह मुँह खुला का खुला hi रह गया जब वह ड्राइवर अंदर आया तोह उन चरों में से 3 वापस अपने जगह चले गए लेकिन एक आदमी अभी भी उस ड्राइवर के साथ जा रहा था वह दोनों चलते हुए एक दरवाजे के पास आ गए

1ला आदमी :- अंदर चले जाओ तुम्हे तुम्हारा काम समझा दिया जाये गए

ड्राइवर :- जी

फिर ड्राइवर उस दरवाजे को खोल के अंदर की और चल पड़ा और वह आदमी उसी दरवाजे के बहार खड़ा हो गया

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 45



नेक्स्ट मॉर्निंग

में सुबह जल्दी उठ कर जब देखा तोह दीदी नहीं थी शायद वह अपने रूम में चली गयी थी तोह में अपने कमरे का दरवाजा बंद करके पहले फ्रेश होने बाथरूम में गया जब फ्रेश होक आया तोह में हर दिन के तरह ध्यान लगा रहा था लेकिन आज कुछ अलग था आज में अपने आप को शांत नहीं कर प् रहा था जब भी में अपने आप को शांत करने का प्रयास करता मेरे मन में साक्षी की hi बाटे चलने लगती आज दुपहर को उसने बुलाया था क्या होगा में क्या करू कुछ समझ नहीं आ रहा था तोह में उन सभी विचारों को झटक कर फिर से ध्यान लगाने लगा जब में ध्यान लगा रहा था तब मेरे दिमाग में मेरी साडी पुराणी यदि जो मेने साक्षी के साथ बिताये थे वह सब आने लगे जिससे मेरे चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान सी आ गयी अभी वह साडी यादे मेरे दिमाग में चल hi रही थी की मेरे दिमाग में वह मंडी वाले बाबा के साथ जो मेरी बातचीत हुई थी वह दिखने लगी मेरे दिमाग में अब उनके hi शब्द घूम रहे थे

जो कह रहे थे की मेरा जन्म प्यार बाँटने के लिए हुआ है यही बात मेरे दिमाग में घूम रही थी जब में ध्यान से उठा तोह हर बार की तरह आज भी मेरे दिमाग बहुत जोर से दर्द करने लगा जैसे कोई दिमाग मेरे दिमाग को 2 हिस्सों में बात रहा हो जब में सर दर्द सहन नहीं कर प् रहा था तोह में तुरंत अपने सर को पकड़ लिया मेने जैसे hi अपने सर को छुआ तोह मुझे ऐसा लगा की मेने जलते हुए कोयला को हाथ लगाया हो जैसे मेरे हाथ को अग्नि के तापमान का एहसास हुआ तोह में तुरंत hi पहले बाथरूम में चला गया जब में बाथरूम में घुसते hi मेरी नज़र सामने के मिरर पे गयी जहा मुझे मेरे प्रतिबिम्ब में मेरे सर पे जहा मुझे अग्नि के तापमान का अहसास हुआ था वह एक अनार के डेन जितना बड़ा एक बिंदु था जिसमे से तेज अग्नि के बराबर तापमान निकल रहा था उसे देखते hi मुझे गाइड की बताई हुई बात याद आ गयी जिससे में समझ गया की ये मेरे hi अनियंत्रित शक्ति है जो त्रि नेत्र के रस्ते से बहार निकलना चाहती है

इस बात का पता चलते hi में तुरंत फिर से ध्यान में बैठ कर उस ताकत को नियंत्रित करने लगा उस ताकत को नियंत्रित करके में अपने खेतों की और निकल पड़ा आज स. चाचा नहीं थे तोह मुझे खेतों में जाना पद रहा था वैसे मुझे वह जाने की कोई जरुरत तोह नहीं थी लेकिन फिर भी काम कैसे चल रहा है ये देखने जाना पड़ता था

खेतों में पहुंच कर में कुछ देर वह का हल चाल देख ने के बाद जब सूरज सर पे चढ़ गया तोह में भी खेतों से निकल के साक्षी के घर की तरफ चल पड़ा

दुपहर के समय कोई भी गांव वाला ज्यादा तर घर में hi रहते थे और फिर इसी समय सरे मेरे बोडीगार्ड्स भी खाना खाने जाते थे इसीलिए यही समय सबसे बेस्ट था

अभी में साक्षी के घर के बहार hi खड़ा था मेने अब सोच लिया था की एक बार साक्षी से बात करूँगा अगर वह मन गयी तोह ठीक नहीं तोह उसका प्रेम मुझे कबूल होगा

जब में साक्षी के घर का दरवाजे पर नॉक किआ तोह उसके थोड़े देर बाद hi साक्षी ने दरवाजा खोला उसने एक टाइट T-shirt और शार्ट स्कर्ट पहन राखी थी.

साक्षी की टी- शर्ट में उसके निप्पल्स साफ पता चल रहे थे मतलब साक्षी ने अंडर ब्रा नहीं पहन राखी थी.

साक्षी ने भी शायद मेरा उसे ऐसे घूरते वक़्त देख लिया था जिससे वह शर्मा रही थी

साक्षी (शरमाते हुए) :- ऐसे क्या देख रहे हो सब तोह आपका hi है पहले अंदर तोह आ जाइये

में (हड़बड़ा के) :- है…. ः चलो अंदर

फिर में और साक्षी घर के अंदर आ गए में अभी सोफे पे बैठा था तोह साक्षी मेरे सामने कड़ी थी

में :- साक्षी मेरी बात ध्यान से सुनो

मेरे ऐसा कहते hi साक्षी जो अब तक शर्मा रही थी वह एक डैम से साद हो गयी और लगभग रोने की टोन में बोलने लगी

साक्षी :- कोई बात नहीं छोटे मालिक अगर आप मुझसे प्यार नहीं कर सकते तोह कोई बात नहीं शायद मुझ में hi कोई कमी होगी या मेने hi अपने किस्मत से कुछ ज्यादा मांग लिया था

साक्षी न जाने क्या क्या बोले जा रही थी जो उसके मन में आ रहा था वह बोले जा रही थी उससे बात करने के लिए पहले उसे शांत करना जरूरी था जिसका बस एक hi रास्ता मुझे दिख रहा था

मेने साक्षी का हाथ पकड़ कर अपनी और खींच लेता हु जिससे साक्षी सीधे आके मेरी गॉधी में गिर जाती hai.sakshi कुछ समझ पाती या कुछ कह पाती उससे पहले hi

में साक्षी की गार्डन को पकड़ कर आपने होंटो को साक्षी के होंटो से मिला देता हु फिर साक्षी के निचे बाले होंठ को अपने मुँह में भर के धीरे धीरे चूसने लगता

हु . पर साक्षी फिर भी जटपटा रही थी वो मुझ को आपने से अलग करना चाहती थी

साक्षी अपनी पूरी तगत से मुझ को धक्का दे रही थी. पर मेने मजबूती से साक्षी को पकड़ रखा था.

जब साक्षी का कोई जोर नहीं चला तो वो संत हो गई पर में अभी भी संत नहीं हुआ

अब साक्षी कोई विरोठ नहीं कर रही थी बस मेरी आखो में देख रही थी और में साक्षी की आखो में देखते हुए साक्षी की नाज़ुक से पिंक होंटो को चूस रहा था अब धीरे धीरे साक्षी को भी मेरे होंटो का अहसास आपने होंटो पर होने लगा था अब साक्षी को आपने होंठ चूसे जाने पर एक

अलग एक अनूठा एक अजीब सा एहसास होने लगा था जिससे धीरे धीरे साक्षी की आखे

बंद होने लगी और कब वो भी मेरे होंटो को चूसने लगी उसे खुद भी एहसास नहीं हुआ.

मेरे होंटो को चूसते चूसते कब साक्षी मेरी कमर के दोनों तरफ पेअर करके अपनी छूट और गांड मेरे लुंड के थी ऊपर करके बैठ गई ये न तो साक्षी को पता चला और न hi मुझ को. अब मेने साक्षी को छोड़ दिया था अब साक्षी मेरे सर को पकड़ कर उसके निचे के होंठ को चूस

रही थी और में साक्षी के उप्पेर के होंठ को. जिससे साक्षी की छूट गीली हो रही थी और बहुत ज्यादा पानी छोड़ रही थी साक्षी की पंतय भी गीली हो चुकी थी.

अब दोनों को सास लेने में परेशानी हो रही थी तो साक्षी ने किश तोड़ hi दिया और सर झुका कर मेरे कंडे पर आपने सर रख कर लम्बी लम्बी ससे ले रही थी. करीब 5 मं तक अपनी ससो को कण्ट्रोल करने के बाद

साक्षी ने आपने सर उदा कर मेरे सामने किया और मेरी आखो में देखने लगी.

मुझे उसकी आखों में बे इन्तहा मोहब्बत दिख रही थी जिसके आगे मेने भी अब घुटने तक दिए थे

में :- (साक्षी का सर सहलाते हुए) मेरी बात तोह पहले सुन लेती में कह रहा था की मुझे तुम्हारा प्यार कबूल है लेकिन में उसे इन्साफ नहीं दे सकता में तुमसे शादी नहीं कर सकता इसीलिए एक बार और सोच लेना

साक्षी :- (मेरे कंधे पे सर रखते हुए) ये बात मुझे भी पता है छोटे मालिक और मुझे बस आपका साथ चाहिए और कुछ नहीं चाहिए

में :- (उसके कानो के एकदम पास जेक) अगर मेरा साथ चाहिए तोह मुझे नाम से बुलाओ अगर मुझ से प्रेम करती हो तोह मुझे छोटे मालिक नहीं राज बोलो

मेरे ऐसे बोलने से साक्षी की आखे मदहोशी में धीरे धीरे बंद होने लगी थी

साक्षी अपनी आखे बंद किये मेरे होंटो पर टूट पड़ी और बहुत hi वाइल्ड तरीके से मेरे होंटो को चूस रही थी में भी पूरा साथ दे रहा था लेकिन ये वाइल्ड किश ज्यादा देर टिक नहीं पाया और जल्दी hi ख़तम हो गया

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 46



साक्षी अपनी आखे बंद किये मेरे होंटो पर टूट पड़ी और बहुत hi वाइल्ड तरीके से मेरे होंटो को चूस रही थी में भी पूरा साथ दे रहा था लेकिन ये वाइल्ड किश ज्यादा देर टिक नहीं पाया और जल्दी hi ख़तम हो गया थोड़ी देर आराम कर ने के बाद हमारी ससे जब हमारे काबू में आयी तोह

साक्षी आपने होंठ मेरे होंटो की तरफ ले जाने लगती है तो में भी निचे झुक कर आपने होंठ साक्षी के होंटो से मिला देता हु. साक्षी बड़ी सिदद से मेरा निचे का होंठ चूस रही थी और में भी साक्षी का उप्पेर का होंठ चूस रहा था साक्षी का प्यार मुझ को आपने दिल में उतरता हुआ

महसूस हो रहा था. मेरे इस किश के हर लम्हे के साथ साक्षी के प्यार में डूबता जा रहा था. पता नहीं ऐसा क्या था साक्षी के किश में अब मुझ को एक अलग hi एहसास हो रहा था.

जब दोनों को सास लेने में परेशि हुई तब वो एक दूसरे से अलग हुए.

साक्षी मेरा हाथ पकड़ कर सीढ़ियों की तरफ ले जाने लगी.

साक्षी :- मेरे कमरे में चलो राज यहाँ हॉल में बहार से कोई भी आ सकता है

साक्षी की बात सुनकर में भी चुप चाप साक्षी के साथ उसके रूम में आ

गया. रूम में आते hi साक्षी ने रूम अंडर से लॉक कर दिया और मेरे सामने कड़ी होक आपने सरे कपडे उदार दिए.

साक्षी अब मेरे सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी में साक्षी को देख कर शॉकेड हो गया मुझे ये तो पता था की आज साक्षी मेरे साथ मस्ती करेगी पर साक्षी ऐसा करेगी इसकी बिलकुल उम्मीद नहीं थी.

साक्षी :- मुझे पता है आप क्या सोच रहे हो लेकिन में आपके प्यार के लिए बचपन से तदपि हु अब और इंतज़ार नहीं कर सकती अब आप चाहे कुछ भी सोचे लेकिन अब में अपने हिस्से का प्यार लेके रहूंगी

में कुछ देर कुछ सोचता रहा और साक्षी को देखता रहता है. साक्षी भी मुझ को देख रही थी ऐसा लग रहा था की सोच रही है की राज क्या सोच रहा होगा.

कुछ देर बाद में आगे बढ़ता हु और साक्षी को किश करने लगता हु और साक्षी भी पुरे जोश में मेरा साथ दे रही थी. किश धीरे धीरे वाइल्ड होती जा रही थी साक्षी मेरे होंटो को चूसते हुए काट रही थी और जब मुझ से और बर्दास्त नहीं हुआ तो मेने अपनी जीभ साक्षी के मुँह में दाल दी. साक्षी भी मेरी जीभ को चूसने लगी साक्षी तो मेरी जीभ को ऐसे चूस रही थी जैसे वो जीभ न हो बल्कि ice-cream हो जब मेरी जीभ में दर्द होने लगा तो मेने अपनी जीभ वापस आपने मुँह में खींच ली पर सायद

साक्षी को ये अच्छा नहीं लगा तो साक्षी ने अपनी जीभ मेरे मुँह में दाल दी.

फिर में भी दीवानो की तरह साक्षी की जीभ चूस रहा था और धीरे धीरे साक्षी को बीएड पर लेजा कर लिटा diya.kuch देर बाद साक्षी ने खुद अपनी जीभ वापस खींच ली और किश भी तोड़ दी और लम्बी लम्बी ससे लेने लगी. में भी साक्षी के उप्पेर hi लेट गया और रिलैक्स करने लगा. कुछ देर बाद में थोड़ा निचे हो गया और साक्षी के एक निप्पल के ऊपर अपनी जीभ पिराने लगा.

साक्षी तो पागल हुए जा रही थी उसकी छूट बहुत ज्यादा पानी छोड़ रही थी ऐसा लग रहा था जैसे अभी झाड़ जाएगी. में अब धीरे धीरे निप्पल को चूसने लगा और दूसरे चुके को दबाने लगा. में बदल बदल कर निप्पल चूस रहा था और दबा रहा था. साक्षी के लिए ये सब एक सपने या फिर सपने से भी ज्यादा था जिसे शब्दों में बांया नहीं किया जा सकता. साक्षी

तो अपनी hi दुनिया में खोई हुई थी और सिसकिया ले रही थी. ये मेर लिए भी कुछ अलग था

चुचो को अच्छी तरह निचोड़ कर उनका सारा दूध पी कर उनको लाल करके में साक्षी के पेट को किश करते हुए नाभि को चूमते हुए साक्षी की जांघो के बिच आ गया. जहा साक्षी की छोटी सी क्यूट सी छूट उसी के रास से भीगी हुई थी. उसे देख कर मेरे से रहा न गया और मेने साक्षी की छूट पर एक किश कर दिया.

साक्षी :- आआह्ह्हह्ह्ह्ह

सिसकी लेते hi साक्षी का पूरा बदन काँप गया. मेने साक्षी की छूट के होंटो के बिच और होंटो पर अपनी जीभ फिर कर रास

चाटने लगा तो साक्षी काँप रही थी.

साक्षी - आआह्ह्ह्हह इस्सस इस्सस ओह्ह्ह राज मुझे क्या हो रहा है. OMG........

इतना बोलते हुए साक्षी ने मेरे सर पर आपने दोनों हाथो से अपनी छूट पर दबा दिया और झड़ने लगी.

साक्षी - यह यह ाः आखहह ाःह आअह्ह्ह आआह्ह्ह्ह

aaaqqqqqqqaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh

साक्षी मेरे मुँह में झड़ने लगी में भी साक्षी के छूट रास को पिने लगा जब साक्षी पूरी तरह झाड़ गई तो उसने मुझ को छोड़ दिया और अपनी आखे बंद किया अपनी ससो को कण्ट्रोल करते हुए अपनी परम सुख को

महसूस करने लगी. तब तक मेने आपने लोअर उतर दिया और साक्षी की जांघो के बिच आके आपने लुंड हाथ में पकड़ कर साक्षी नाज़ुक सी छूट पर रगड़ने लगा. साक्षी को जैसे hi अपनी छूट पर कुछ शाक्त और गर्म गर्म महसूस हुआ तो वो समझ गई की ये मेरा लुंड है. साक्षी

ने एक बार मेरे लुंड को देखा तो वो बहुत खुश हो गई पर जब उसने

अपनी छूट को देखा तो वो एक वार तो दर के मरे काँप गई क्युकी उसकी छूट से बड़ा लुंड का सूपड़ा था पर पता नहीं साक्षी को क्या हुआ डरते हुए भी उसके चेहरे पर स्माइल आ गई.

मेने साक्षी को स्माइल करते देख उस पर झुक गया और उसके होंटो को चूसने लगा साक्षी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी मेने मौका देखा एक जोरदार धक्का साक्षी की छूट पर लगा दिया. साक्षी की एक जोरदार चीख निकल गई पर वह चीख मेरे मुँह में गायब हो गई पर साक्षी मेरे निचे लेती हुई तड़प रही थी और उसकी बंद आखो से आँशु निकल रहे थे दर्द साक्षी के चेहरे से साफ पता चल रहा tha.kyuki मेरा आधा लुंड साक्षी की छूट में घुस चूका था.

में साक्षी का दर्द काम करने के लिए उसके निप्पल्स को मरोड़ने लगा और कुछ देर बाद साक्षी का दर्द काम होने भी लगा और धीरे धीरे तेज दर्द अब मीठे मीठे दर्द में बदल गया. अब मुझ को भी आपने लुंड पर बहुत कसाव महसूस हो रहा था. जब साक्षी का दर्द काम हो गया तो वो अपनी गांड को निचे से हिलने लगी जिसके बाद मेने तुरंत hi साक्षी के होंटो को छोड़ दिया तो साक्षी लम्बी लम्बी ससे लेने लगी.

साक्षी :- जान अगर तुम एक सेकंड और मुझे किश करते तो मेरा दम घुट

जाता.

में ( मुस्कुराते हुए ) :- अब तो ज्यादा दर्द नहीं हो रहा.

साक्षी ने न में सर हिला दिया तो में भी धीरे धीरे लुंड को अंडर बहार करने लगा.

साक्षी - आआह aaàh जान दर्द हो रहा hai...issss

में :- जानू बस अभी ठीक हो जायेगा तुम थोड़ा सहन करो..

मेरे धीरे धीरे लुंड को अंदर बैनर करता रहा और साक्षी दर्द से आहे भर्ती रही लेकिन कुछ hi देर में साक्षी गर्म होने लगी और साक्षी की छूट पानी छोड़ने लगी और छूट चिकनी होने लगी जिससे मुझे भी फायदा हुआ और अब लुंड आसानी से अंदर बहार हो रहा था और साक्षी की भी

दर्द भरी ाआहे अब मस्ती की आहे और सिसकियों में बदल गई. अब साक्षी फुल मस्ती मई आके मेरे हर धक्के का जबाब दुगनी तगत से दे रही थी.

साक्षी - आह अहा आह आह आ इस्सस ओह्ह्ह और तेज जान omg और तेज यह यह यह यह

में भी साक्षी की बातो को सुनकर जोश में आके जोर जोर से धक्के मर रहा था. में फिर से साक्षी को किश करते हुए धक्के मरने लगा और एक डैम से जोरदार धक्का मर दिया और रुक गया. साक्षी की तो जान hi निकल गई. वो मेरे निचे काँप रही थी उसका सरीर थरथरा रहा था आखो से अंशु निकल रहे थे क्युकी मेरा लुंड साक्षी की छूट को चीरता हुआ जड़ तक पहुंच गया था. में साक्षी के दर्द को काम करने के लिए उसके होंठ चूसते हुए एक हाथ से उसका निप्पल मरोड़ने लगा और दूसरे हाथ को

निचे लेजा कर छूट के दाने को मसलने लगा. कुछ hi देर में साक्षी संत हो गई तो मेने साक्षी के होंटो को आज़ाद कर दिया पर अब दोनों हाथो से दोनों निप्पल्स मसलना स्टार्ट कर दिया. इसका असर ये हुआ की साक्षी गर्म हो गई और निचे से गांड हिला हिला कर धक्के मरने लगी.

साक्षी के धक्के स्टार्ट होते hi में भी स्टार्ट हो गया. अभी मेने 8 या 10 धक्के hi मरे थे की साक्षी ने मुझ को कास कर पकड़ लिया और झड़ने लगी. पर में नहीं रुका और धक्के मरता था और कुछ hi देर में साक्षी फिर से धक्के मरते हुए मेरा साथ देने लगी.

में :- जानू कैसा लग रहा है.

साक्षी - यह ओह ओह ओह जान पहले तो ऐसा लगा था की जान hi निकल गई ओह ओह ओह और मई मरने यह यह ह बलि हूँ पर अब अभूत OMG बहुत मज़ा आ रहा है.

में :- मुझे भी.

साक्षी - यस यस जान फ़क में फ़क में फ़क में फास्टर यह यह यह लिखे थिस या या या ी म किंग..

इतना बोलते hi साक्षी फिर से झड़ने लगी साक्षी ने मुझ को कास कर पकड़ कर झाड़ गई और झड़े के बाद मुझ को छोड़ दिया. मेने फिर जो रेल गाड़ी चलाई वो फिर नहीं रुकी साक्षी ाआहे भर्ती रही सिसकिया लेती रही और 4 बार

और झाड़ गई पर में नहीं रुका नॉन स्टॉप 20 मं की चुदाई के बाद साक्षी की

छूट में आपने पानी छोड़ कर hi रुका. अपनी छूट में मेरा गर्म वीर्य महसूस करके साक्षी एक बार और झाड़ गई. अब साक्षी के चेहरे पर संतुस्ती और होतो पर मुस्कराहट थी.

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 47



अब तक आपने देखा की कैसे साक्षी ने अपने प्यार को आज पूरी तरीके से प् लिया था जिसके बदले में उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी जैसे उसने आज अपने जीवन में सब कुछ प् लिया हो

अब आगे

मेने जैसे hi आपने लुंड साक्षी की छूट से बहार निकला तो साक्षी ने आखे खोल कर मेरे लुंड को देखा.

साक्षी - ुइ माआ ये क्या है. हे भगवन इतना बड़ा क्या तुमने अभी

मेरे अंदर यही दाल रखा था.

साक्षी की बात और रिएक्शन देख कर मेरे होंटो पर स्माइल आ जाती है और जब साक्षी अपनी छूट को देखती है तो फिर से साक्षी की चीख निकल जाती है क्युकी साक्षी की छूट के होंठ पुरे खुले हुए थे और छूट का छेड़ बहुत छोटा खुला हुआ था जहा आज तक एक उंगली नहीं जा पाती थी वह

आज 3 उंगली भी आसानी से जा सकती थी. और छूट के छेड़ से वीर का और साक्षी का पानी निकल रहा था छूट के होंठ सूज चुके थे और बीएड पर बहुत सारा खून था. फिर कुछ देर साक्षी अपनी छूट को देखती रहती है और फिर मुस्कुराने लगती है जब उसकी नज़र मेरी नज़रो से मिलती है तो

साक्षी सरमने लगती है.

फिर जब साक्षी उठ कर जाने की कोशिश करती है तो उसके सरीर में एक दर्द की लहार

दौड़ जाती है और साक्षी बही बैदि रहती है. मेने रात में जितनी भी कहानिया पढ़ी थी उससे मुझे चुदाई का बहुत सारा ज्ञान मिल गया था जिस वजह से में तुरंत समझ जाता हु और साक्षी को गॉड में उठा कर बाथरूम में ले जाता है और गर्म पानी से

छूट को साफ़ करके सिकाई करने लगता hai.kuch देर सिखाई करने के बाद में भी आपने लुंड साफ़ कर लेता हु और तोलिये से छूट और लुंड पाउच कर में साक्षी को गाथ में उठा लेता हु तो मेरी नज़र साक्षी के चेहरे पर पड़ती है जो मुझ को hi देखे जा रही थी.

में :- ऐसे क्या देख रही हो.

साक्षी (मुस्कुराते हुए) :- जिस प्यार को में बचपन से सिर्फ सपनो और ख्वाबों में hi देखा वह आज सच हो गया और वह भी इतनी दुमदार तरीके से की जीवन भर भूल नहीं सकती ी लव यू राज ी लव यू अलॉट माय जान

में :- ी लिखे ु.

फिर में साक्षी को बीएड पर लिटा देता है .

में :- तुम्हारे कपडे कहा है.

साक्षी ( रोनी सी सकल बना कर अपनी छूट की तरफ इशारा करते हुए ) :- यहाँ बहुत दर्द और जलन हो रही है.

में ( मुस्कुराते हुए ) - मई सब टिक कर दूंगा पहले ये बताओ तुम्हारे

कपडे कहा है.

साक्षी एक एलमिरा की तरफ इशारा कर देता है. में एक स्कर्ट और एक T-shirt लेक साक्षी को पहना देता हु फिर आपने भी कपडे पहन लेता हु फिर अपने जेब से

एक िपिल्ल और 2 पैन किलर निकल कर पानी के साथ साक्षी को देता है. जिसके बारे में मुझे नेट और स्टोरीज से पता चला था

में :- ये दबाई खा लो दर्द थोड़ी देर में चला जायेगा.

साक्षी :- बहुत जलन हो रही है.

में :- मुझ पर विस्वास करो सब टिक कर दूंगा.

साक्षी - तुम पर तो अपनी जान से भी ज्यादा बिस्वास है.

में साक्षी की बात सुनकर मुस्कुरा देता हु और फिर अपनी जेब से लेप निकल

कर साक्षी की स्कर्ट उप्पेर करके छूट पर अच्छे से लेप लगा देता अंदर भी और बहार भी इस लेप के बारे में मुझे मीरा माँ ने hi बताया था जब मेरे और उनके बिच पहली बार शारीरिक सम्बन्ध बने थे

लेप लगने से साक्षी को बहुत रहत मिलती है. और वो आखे बंद करके लेट जाती है फिर में किचन से पानी की बोतल को गर्म पानी से भर लता हु और साक्षी की छूट पर रख देता है तो साक्षी समझ जाती है.

साक्षी मेरा हाथ पकड़ कर आपने पास लिटा लेती है और मेरे साइन पर

आपने सर रख कर लेट जाती है.

में :- कैसा लग रहा है अब.

साक्षी :- सुकून सा लग रहा है और थकन भी बहुत हो रही है

में :- एक दिन में hi ये हाल हो गया तुम तोह पुरे महीने का बोल रही थी

साक्षी :- मुझे अभी भी पूरा महीना तुम्हारा साथ चाहिए

में :- लेकिन तुम्हारी हालत सही नहीं है

साक्षी :- क्या तुम्हारे लिए साथ देने का मतलब सेक्स करना hi है हम लोग 2 प्रेमियों की तरह भी तोह एक दूसरे का साथ दे सकते है ोुछः

जब साक्षी बोल रही थी तब hi मेने उसके निप्पल पे काट लिया था

साक्षी :- ोुछ क्या करते हो तुम अब बड़ी शैतानी कर रहे हो

में :- ाचा पहले घर बुलाके मुझे बिना ब्रा के टी शर्ट पहन के सडके करती हो फिर जब मुझसे चुदवाती भी हो और अब ज्ञान भी छोड़ रही हो और अब मुझे शैतान बोल रही हो

मेरे बोलके होने के बाद में फिर एक बार साक्षी के निप्पल को काट लेता हु

साक्षी जहा राज के मुँह से ऐसे शब्द सुन के शर्मा रही थी

साक्षी :- (शरमाते हुए) ये कैसी बाते कर रहे हो आप पहले तोह ऐसे नहीं थे

में :- में तोह ऐसा hi हु अगर मेरा साथ चाहिए तोह मेरे हर रूप को अपनाना होगा अगर तुम सिर्फ मेरे एक रूप से प्यार करोगी तोह जल्द hi तुम्हे मेरे तरफ से सिर्फ निराशा मिलेगी

साक्षी :- (मेरे अंडो को हलके सा दबाते हुए) अब कोण ज्ञान छोड़ रहा है

में :- मेने तुम्हे hi छोड़ दिया तोह ज्ञान की क्या मजाल जो वह बच जाये

फिर में और साक्षी एक साथ हसने लगे यही सब में शाम हो गयी थी फिर मेने साक्षी की छूट पर लगाए हुए लेप को अचे से पॉच दिया और अब उसकी हालत थोड़ी बेहतर थी तोह में उसे आराम करने का बोल कर वापस घर आ गया

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 48



जब में घर पंहुचा तोह सभी घर में hi थे स. चाचा भी आ गए थे सहर से फिर जब में आया तोह सब मस्त पकोड़ों का लुफ्त उठा रहे थे

में :- आज पकोड़े क्या बात है बहुत दिनों बाद पकोड़े बने है

इतना बोल के में उस मेसे एक पकोड़ा उठाने hi वाला था की तभी मेरे हाथ पे वार हुआ जो की माँ ने किआ था

माँ :- पहले हाथ मुँह धोके आ फिर hi तुझे कुछ मिलेगा

में (हाथ दिखते हुए) :- ये देखो हाथ तोह साफ़ hi है और कितने साफ़ करू

माँ (अपने हाथ दिखते हुए) :- जाता है या मार लागू

में :- ठीक है माँ जा रहा हु

फिर में अपने कमरे में जेक फ्रेश हो जाता हु फिर वापस निचे आके सब के साथ बैठ कर पकोड़े का लुफ्त उठाने लगता हु

में :-अब तोह बताओ की आज किस ख़ुशी में पकोड़े बने है

माँ :- क्यों कुछ खास खाने के लिए किसी कहुएहि की जरुरत होती है क्या

में :- नहीं लेकिन आप hi तोह कहती हो की ये मत खा वह मत खा

माँ :- वह तोह में तुम लोगों के hi भले के लिए कहती हु

फिर ऐसे hi मस्ती करते हुए हम लोगों ने पकोड़े ख़तम हो गए फिर हम सब अपने कमरों में चले गए

जब में अपने रूम में पहुंचा तोह मेने अपने रूम के सरे दरवाजे बंद कर दिए और फिर ध्यान लगाने बैठ गया अब मेरा पूरा ध्यान अपने त्रि नेत्र पर hi एकाग्र किया था जिससे जल्द hi मेरा त्रि नेत्र खुल गया अभी में आखे बंद किये ध्यान लगा hi रहा था की तभी मुझे मेरे आस पास अत्यंत शीतल वातावरण का एहसास हुआ जब वातावरण की शीतल ता हद से ज्यादा बढ़ गयी तोह मेने अपनी आखे खोल ली और अपने सामने का नज़ारा देख के मेरा मुँह खुला hi रह गया में जहा अपने कमरे में बैठा था में अभी वह नहीं था बल्कि में अभी जहा था वह जगह पूरी सफ़ेद थी किसी और कलर का नमो निशान भी नहीं था

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अभी में अपने आस पास का नज़ारा देख hi रहा था की तभी मेरे सामने एक बहुत बड़ी आँख बनाने लगी थी जो की लाल रंग की थी ऐसा लग रहा था की पूरी आकृति आग में जुलुस रही हो

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जहा थोड़ी देर पहले शीतलता छायी हुई थी वही अब उषणता का आभास बढ़ता जा रहा था जैसे hi उस आँख की आकृति पूर्ण हो गयी में फिर खड़े खड़े hi आँखे बंद करके उस आकृति पे ध्यान लगाने लगा देखते hi देखते में कब आसमान की तरफ बढ़ने लगा था की जैसे जैसे में उस आँख के पास बढ़ रहा था वैसे hi वैसे मुझे अत्यंत भर का आभास हो रहा था जैसे गुरुत्वाकर्षण ताकत पूरी जोर से मुझे अपनी और खेच रही थी लेकिन फिर भी में आखे बंद करके उस आकृति की तरफ बढे hi जा रहा था

अब तक में उस आकृति के एकदम समीप पहुंच गया था की तभी मेरे शरीर पे जितना भी भर मुझे महसूस हो रहा था वह एकाएक ख़तम हो गया जब मेने आखे खोली तोह में हवा में उड़ रहा था और वह आकृति अब बिलकुल मेरे सामने थी अब में उस आकृति को hi देख रहा था तोह मेरे कानो में किसी की आवाज आने लगी जब में उस आवाज को ध्यान से सुनने लगा तोह वह मुझे अब साफ़ साफ़ सुनाई दे रही थी

आवाज :- राज में तुम्हारा त्रि नेत्र हु आज तुमने मुझे सम्पूर्ण तरीके से अपना लिया है अब मेरे इस भौतिक आकृति को भी आने अंदर सामने की आज्ञा देदो

उसके बाद में अपने दोनों हाथों को जोड़ कर सबसे पहले उसे प्रणाम किया फिर मेने जैसे hi अपनी आखे बंद की वैसे hi उस आकृति के चारो तरफ से लाल रंग की किरणे निकल के मेरे शरीर में जाने लगी जिससे मुझे मेरे शरीर में अत्यधिक तापमान का अनुभव होने लगा में मुझे ऐसा लग रहा था की में किसी ज्वालामुखी के अंदर कूद गया हु

फिर जैसे hi मेने अपनी आखे खोली में पसीने से पूरी तरह भीगा हुआ था और मेने जो कपडे पहने हुए थे वह भी जल चुके थे अभी में कुछ करता की तभी मेरे रूम के दरवाजे पे नॉक हुआ

दीदी :- राज कितना सोयेगा उठ 10 बज गए है खाना नहीं खाना क्या

में :- है आया दीदी 2 मिनट

उसके बाद दीदी का कोई जवाब नहीं आया शायद वह निचे चली गयी थी

जब मैंने घडी में समय देखा तोह सच्ची में रत के 10 बज गए थे याने ध्यान में बैठे बैठे 5 घंटे बिट चुके थे

फिर में जल्दी से फ्रेश हुआ कमरे में जो कपड़ों के जले हुए टुकड़े थे उन्हें समेत कर पुरे कमरे को अचे से सेट कर के में निचे आ गया जहा सब मेरा hi इंतज़ार कर रहे थे

माँ (चिंता से) :- क्या हुआ राज तेरी तब्येत तोह ठीक है इतनी देर तक तोह कभी नहीं सोता तू

में :- है माँ तबियत सही है वह तोह बस जब बीएड पे लेता तोह समझा hi नहीं कब आँख लग गयी

दादी :- ठीक है आओ बैठो राज

फिर में भी उनके साथ खाना खाने बैठ गए अभी हम खाना खा hi रहे थे की तभी दादाजी ने बोलना शुरू किआ

दादा जी :- (स. चाचा से) वीर कल तुम हमारे साथ चल रहे हो

स. चाचा :- कहा पिताजी

दादाजी :- हम ने तुम्हारे लिए एक लड़की पसंद की है उसे देखने के लिए कल हम जा रहे है

में :- में भी आऊंगा

माँ :- नहीं तुम नहीं जा रहे हो वह सिर्फ माँ पिताजी और देवर जी जा रहे है

में :- क्यों

दीदी (मुस्कुराते हुए) :- माँ को दर है कही लड़की चाचा को छोड़कर तुम्हे hi पसंद न कर ले

माँ (दीदी के सर पे तपली मरते हुए) :- जब देखो मस्ती सूझती है तुझे

ऐसे hi बाटे करते हुए सब तय हो गया की कल दादा दादी और स. चाचा बस ये तीनो जा रहे है

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 49



वही कुछ घंटे पहले जब वह ड्राइवर (अपडेट 44) जब उस दरवाजे के अंदर गया तब वह अंदर कोई नहीं था वह सिर्फ एक टेबल था जीके समने एक चेयर राखी हुई थी जो की किसी सिंहासन काम नहीं थी

अभी वह ड्राइवर अंदर बढ़ hi रहा था की तभी उसी चेयर के पीछे से सामने आता एक आदमी उस ड्राइवर को दिखा जिसने सूट बीत पहना हुआ था वह आदमी ड्राइवर के सामने आके उस सिंहासन जैसे चेयर पे बैठ जाता है और उस ड्राइवर को भी सामने वाले चेयर पे बैठने का इशारा किया

आदमी :- तोह तुम हो वसीम जो दवा करता है की किसी भी चीज को सही सलामत अपने मंजिल पे पंहुचा सकता है

वसीम (ड्राइवर) :- जी में पहले hi बता दू काम जितना रिस्की उतना बड़ा दाम

आदमी :- काम जो में बोलू दाम जो तुम बोलो अब बताओ मंजूर है

वसीम :- हर आदमी आपके तरह क्यों नहीं होता वैसे सामान क्या है

आदमी :- वह जानना तुम्हारा काम नहीं है

तुम्हारा काम है मेरे सामन को बिना किसी के नज़र में आये (एक कार्ड बढ़ाते हुए) इस पते पर पहुंचना

वसीम :- ठीक है लेकिन 50 लाख देने होंगे

आदमी :- काम सही से किया तोह 1 कर दूंगा

1कर का नाम सुनके hi वसीम के आखों में चमक आ गयी जिसे देख के उस आदमी के भी होतो पे मुस्कान की लकीर आ गयी

वसीम :- इतने पैसे ऐसा क्या सामन है जिसके लिए इतने पैसे भी देने को तैयार हो

आदमी :- बोलै न वह जानना तुम्हारे लिए जरूरी नहीं है बल्कि तुम ये जानो की इस काम को अगर तुम नहीं कर पाए तोह इसका अंजाम अपनी जान देकर भुगतना होगा

वसीम :- जी ऐसा कोई काम नहीं जो में न कर सकू

आदमी :- ब्रिलियंट चलो मेरे साथ

उसके बाद वह आदमी और वसीम उस कमरे से बहार निकल गए

फिर कहा गए ये तोह नहीं पता लेकिन कुछ आधे घंटे बाद दोनों फिर से उसी केबिन में आ गए

आदमी :- बोलो वसीम क्या बोलते हो

वसीम :- काम हो जायेगा लेकिन तयारी के लिए मुझे 1 महीने का समय लगेगा

आदमी :- दिया 1 महीने का समाया दिया लेकिन उसके बाद काम में किसी भी तरह की देरी नहीं आणि चाहिए

वसीम :- जी ऐसा hi होगा

वही हीरो के घर में

अभी में खाना खाके अपने कमरे में आया hi था की तभी मेरे रूम के दरवाजे और खिड़किया अपने आप लॉक हो गयी और गाइड मेरे सामने आ गया

ग :- शाबाश राज आखिर तुमने अपने त्रि नेत्र पर काबू प् लिया अब से तुम्हे अपने क्रोध पर काबू रखना होगा क्यूंकि अगर तुम्हारा क्रोध तुम्हारे काबू से बहार गया तोह महा विनाश भी हो सकता है

में :- ठीक है में समझ गया

ग :- और एक बात अब से तुम जब भी ध्यान लगाओगे तुम्हे तुम्हारे त्रि नेत्र के दर्शन होंगे जिसके बाद अगर तुम त्रि नेत्र पर ध्यान लगाओ तोह तुम्हे त्रि नेत्र के खासियत के बारे में पता चलेगा

में :- ाचा

अभी हम बाटे कर hi रहे थे की तभी दीदी ने मेरे दरजे पर नॉक किया

जब मेने दरवाजा खोला तोह दीदी तुरंत अंदर आ गयी और बीएड पर बैठ गयी

जब मेने दरवाजा बंद कर के बीएड की और मुदा तोह मेरा मुँह खुला का खुला रह गया क्यूंकि दीदी बीएड पर पेट के बल लेती थी जिससे उनकी गांड मेरे आखों के सामने आ गयी थी जो की दीदी के निघ्त्य में अलग से hi उठ कर दिख रही थी

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ये सन देख के मेरा लुंड में भी उठाव आने लगा था

अभी अगर पहले वाला राज होता तोह शायद इग्नोर कर देता लेकिन इन्सेस्ट स्टोरीज पढ़के और मीरा माँ और साक्षी के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनके अब मेरे मन में भी दीदी को लेके बुरे विचार आने लगे थे और में ये भी जनता था की दीदी भी यही छाती है इसीलिए वह विचार और भी मजबूत हो जाते

जब दीदी ने मुझे वही खड़ा देखा तोह उनके चेहरे पर एक शर्माहट भरी मुस्कान आ गयी

दीदी :- ऐसे क्या देख रहा है भाई सोना नहीं है क्या

दीदी के बोलने से में एकदम हड़बड़ा सा गया और जेक दीदी के बगल में लेत गया

में लेता तोह दीदी के बगल में था लेकिन मेरे आखों के सामने बार बार वही नज़ारा मेरे आखों के सामने आ रहा था

अभी में लेता hi था की तभी दीदी मेरे काढ़े पर सर रख के लेत गयी जिसकी वजह से दीदी के सरीर से आ रही कामुक सुगंध मेरे नक् में घुसने लगी जिसकी वजह से मेरा दिमाग ने काम करना बंद कर दिया और दिल बगावत पे उतर आया जिससे मेरे हाथ मेरे काबू में नहीं रहे और जिस कंधे पे दीदी सर रख के सोइ थी वही हाथ दीदी को अपने गिरफ्त में लेने लगा अभी मेरे हाथ ने दीदी को अपने गिरफ्त में लिया hi था की तभी मेरे उँगलियों ने भी अपना विरोध दिखते हुए हलचल करना शुरू कर दिया जिस की वजह से मेरी उँगलियों का स्पर्श दीदी को उनके नरम नरम छाती पर महसूस होने लगा जैसे hi मुझे इस बात का आभास हुआ मैंने तुरंत hi अपना हाथ हटा लिया लेकिन तब तक बहोत देर हो गयी थी वह स्पर्श तोह केवल कुछ पलों के लिए था लेकिन वह कुछ पल भी हमारे जीवन के सबसे हसीं पल बन गए थे जिस वजह से मुझे और दीदी दोनों को भी अत्यंत सुख का अनुभव हो रहा था जहा में अपने विद्रोही दिल दिमाग को अपने काबू में करने का प्रयास कर रहा था की दीदी के शरीर से निकलती मादक सुगंध उन्हें अपने और आकर्षित कर रही थी और उन्हें विद्रोही बनने के लिए उकसा रही थी.

जहा में अपने दिल और दिमाग को अपने काबू में कर रहा था तभी मेरे शरीर में किसी भी तरह की हलचल न होते देख दीदी को यकीं हो गया की में नींद में हु जिसके परिणाम स्वरुप जहा अभी उनका सर मेरे कंधे पे था वही अब वह पूरी तरीके से मेरे से लिपट चुकी थी और अब उनकी छेद कहानिया शुरू हो गयी थी जिसे में अपने सरीर पर अचे से महसूस कर सकता था जैसे उनका अपने छूट का स्पर्श मेरे लुंड पे करना फिर चाहे उनके नरम नरम ुरजों को मेरे साइन में दबाना ऐसे hi छेद कहानियों के साथ दीदी की ससे फूलने लगी जिन्हे में मेरे गलों पे महसूस कर सकता था कुछ देर ऐसे hi पड़े रहने के बाद दीदी उठ कर बाथरूम चली गयी और जब वापस आयी तोह उनके चेहरे पर अलग hi शर्माहट से भरी मुस्कान देखि जा सकती थी

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 50



अगली सुबह जब में उठा तोह दीदी अभी भी मेरे ऊपर hi लेती थी जब में उन्हें निचे उतरने लगा तोह वह कसमसा सी गयी फिर और भी मजबूती से मुझे अपने बाँहों में जकड लिया जिससे में उन्हें फिर उठाने की कोशिश नहीं की लेकिन उनके ऐसे hi रहने से अभी फिर से उनके शरीर की मादक खुशबु मेरे तन बदन में आग लगा रही थी जिससे फिर से मेरा दिल और दिमाग विद्रोही हो रहा था लेकिन कुछ भी हो उससे पहले hi मैंने स्लो मोड को एक्टिव कर के दीदी के चंगुल से बच कर निकलने में कामयाब हो गया और फिर में वह से सीधा चाट पर आ गया और ध्यान लगाने लगा

आज जब में ध्यान लगा रहा था तब मुझे आज अलग hi महसूस हो रहा था जब में पूरी तरह ध्यान मुद्रा में लेअन हो गया तोह में किसी अजीब सी जगह में पहुंच गया था जो की दिखने में किसी अँधेरी गुफा में पहुंच गया था जहा मुझे दो रस्ते दिखाई दे रहे थे जहा एक रस्ते में मुझे ऐसा लग रहा था की वह कुछ है hi नहीं वह रास्ता पूरी तरह अँधेरे में गम हो चूका था जब में उस रस्ते के पास पंहुचा तोह मुझे मेरे मन में अनेको नकारत्मक विचार आते महसूस हुए जैसे मुझे जिसने मुझे मरने का प्रयास किया था उसे सबसे बेरहम मौत देना फिर मुझे मीरा माँ, साक्षी और दीदी के प्रति अपने मन में काम वासना से भरे हुए विचार आने लगे फिर उसके बाद मुझे मेरी hi एक ऊँची मूर्ति दिखने लगी जिसे सब पूज रहे थे और उसके सामने अपने घुटने तक रहे थे. ये सब देख के जहा मुझे अजीब लग रहा था तोह मन में एक ख़ुशी की लहार भी दौड़ रही थी और अंत में मुझे मेरा त्रि नेत्र दिखाई देने लगा जो की पूरी तरह से अग्नि में जुलस रहा था

वही जब में उस रस्ते पे चलने लगा अभी मेने कुछ hi कदम चले थे तोह मुझे बहोत से जानो की रोने की मुझसे मदद मांगने की आवाजे सुनाई देने लगी जिससे मेरे सर में दर्द होने लगा और अगले hi क्षण मुझे फिर से वही मूर्ति वाला सन दिखने लगा लेकिन इस बार उस मूर्ति के सामने में भी खड़ा था और जो भी मेरे सामने नहीं झुका था उसे में अपने शक्ति से मार रहा था ये सन देख के जो कुछ कदम में चला था उतने hi कदम में पीछे हैट गया और जैसे hi में उस अँधेरी गुफा से बहार आ गया मेरा सर दर्द अपने आप ख़तम हो गया और फिर जब भी में उस गुफा में देखता तोह मुझे वह मेरा hi त्रि नेत्र आग में झुलसता दिखाई देता

फिर में वह से हैट के दूसरी गुफा की तरफ जाने लगा जहा हर तरफ उजाला था जब में वह उस गुफा में देखने लगा तोह मुझे वह कुछ दिखाई नहीं दिया बल्कि मेरे मन में एक अजीब सी शांति चने लगी लेकिन जैसे hi मेने उस गुफा में कदम रखा वह पूरा रास्ता टूट गया और जहा रास्ता था वह आग का दरिया बन चूका था जहा हर तरफ मुझे आग hi दिख रही जब मेने पहला कदम बढ़ाया तोह मुझे ऐसा लगा में जलकर रख हो जाऊंगा लेकिन मेरे मन में जो शांतता छायी थी वह अभी भी इस दर्द में भी आनंद दे रही थी में फिर उसी आनंद पर ध्यान एकाग्रित करके उस अग्नि के दरिया पे चलने लगा जैसे जैसे में आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे hi उस अग्नि का ताप बढ़ रहा था धीरे धीरे करके मेरे सरे कपडे जलने लगे जो भी लॉकेट छोड़के सरे आभूषण भी पिघल गए थे परन्तु में उस गुफा की शांतता में ध्यान लगता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था

अभी उस अग्नि को पार करते hi मेरे सरीर पे अचानक hi वस्त्र आ गए जो कुछ ऐसे थे

अभी जहा हड्डिया तक पिघला दे इतना तेज तप था वही अब किसी एक रूम में बैठे हो ऐसी ठंडक थी जब मेने वातावरण में होने वाले बदल को महसूस करके अपनी आखे खोली तोह में अपने वस्त्र देख के hi शॉक हो गया क्यूंकि ये वैसे hi वस्त्र थे जैसे उस मूर्ति वाले सन में उस मूर्ति पे बने हुए थे

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Abhi me apne wastr ko hi dekh ke shock tha ki tabhi mere samne ek bahut bada urja strot taiyar hone laga aur us urja strot ko kisi kale dori se bandha hua tha jis mese dhua nikal raha tha me in dono ghatnaon se abhi tak ubhra bhi nahi tha ki mere kano me kisi ki aawaj aane lagi jabki waha me akela tha

Aawaj :- putra raj

Me :- kon hai yaha saamne aao

Aawaj :- apne man me jhako putra me tumhare samaksh hi hu

Me aawaj ka jawab sunke pahle toh chok gaya lekin phir mene apni aakhe band karke apne man me dhyan kendrit karne laga toh waha mujhe sirf ujala dikhayi diya aur jab mene aakhe kholi toh mere saamne mere hi jaise wastra pahna purush khada tha

Me :- koun ho tum aur ye fancy dress bane kaha ghum rahe ho

Aadmi :- tumne bhi toh yahi pahna hai

Me :- mene ye pahna nahi pahnaya gaya hai

Aadmi :- mera naam kaal hai me dev kunj ka rakshak hu

Me :- ye dev kunj kya hai aur mera isse kya lena dena

Aadmi :- dev kunj woh hai jisme devtaon ke dwara paida ki hui jan kalyan aur vinash kari shaktiyon ko surakshit rakha jata hai me usi dev kunj ka rakshak hu aur mene tumhe apna uttaradhikari (उत्तराधिकारी) chuna hai

Me (shock se) :- kya itne bade kary ke liye aap kisi devdut ko bhi chun sakte ho woh toh mujhse jyada shakti shaali honge

Kaal :- raj shakti ya kul se kabhi bhi kisi ko nahi parkha ja sakta

Me :- ji samjha

Kaal :- aur rahi baat is vastra ki toh is mamuli wastra mat samjho ye mahan sapta rushiyon dwara nirmaan kiye hue panch tatvon ki taakat rakhne wale wastra hai aur is wastra ko khud vishvakarma ne mahan astro shastron se sushobhit kiya hai

Me :- mujhe toh koi astra dikhayi nahi de raha hai

Kaal :- un astron ko pane ke liye tumhe sarv pratham apne shaktiyon pe puri tarah se niyantran pana hoga phir apne sharir me sthit sapta chakron ko apne adhin karna hoga tabhi tum is wastra ko apne marji ke anusar pahan paoge aur uske baad jab tum panch tatvon pe apna kabu pa loge tab hi tum un dev astron ko pane yogya banoge

Me :- ji

Kaal :- ab is baare me jyada mat socho bas apna karm karo

Itna bol ke Phir woh gayab ho gaye

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Aaj ke liye itna hi


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अपडेट 51



जैसे hi वह गायब हुए मेरा ध्यान भी टूट गया और जब में ध्यान से बहार आया तोह देखा की में अभी चाट पर hi था और मेरे कपडे जो जल चुके थे वही कपडे मेने पहने हुए थे और वह सही सलामत थे

में अभी ध्यान से जगा hi था की तभी मेरे सामने गाइड आ गए

ग :- अब कैसा लग रहा है राज

में :- ऐसा लग रहा है की में समझा नहीं शक्ति मेरे दिमाग की मनु तोह में अपने hi कर्मों से बच के भागना चाहता हु जब की अगर में दिल की सुनु तोह में पुरे ब्रम्हांड का सबसे खुश किस्मत इंसान हु जिसे इतना महत्वपूर्ण और महँ कार्यों को करने का मौका मिलेगा

ग :- हम्म्म तुम किस की सुनोगे दिमाग की या दिल की

में :- में खुद इसी बारे में सोच रहा हु क्या तुम मुझे मार्ग दर्शन डोज इस रह पे

ग :- माफ़ करना राज में चाहकर भी कुछ नहीं कर पाउँगा ये फैसला तुम्हारे भविष्य को तुम्हारे कर्मों को और उन कर्मों से होने वाले परिणामों को निर्धारित करेगा इसीलिए ये फैसला तुम्हे खुद के बलबूते लेना होगा इस में न तोह में तुम्हारी सहायता कर पाउँगा न कोई और

में :- तोह मतलब तुम भी किसी काम के नहीं हो

ग :- वैसे में तुम्हारी कोई सहायता तोह नहीं कर सकता लेकिन है कुछ ऐसा जरूर बता सकता हु जिससे तुम्हे आसानी हो

में :- क्या

ग :- देखो जो हमारा दिमाग होता है वह हमेशा हमारे hi फायदे की बाटे बताता है जो लोगिकालय और प्रक्टिकली हो जब की दिल हमे वह बताता है जो हम चाहते है इसमें न कोई लॉजिक होता है न ये हर बार प्रक्टिकली हो सकता है लेकिन फिर भी इस में एक मैजिक होता है जो हमारे लिए फायदेमंद होता है लेकिन ये फायदा तुरंत नहीं दीखता बल्कि धीरे धीरे दीखता है लेकिन जब दीखता है तोह उसके चमक से आखे भी चौंधिया जाती है

गाइड की साडी बाटे मेरे सर के ऊपर से गयी थी जिससे मुझे मेरे सवाल का जवाब तोह नहीं मिला लेकिन मेरा सर जरूर चक्र गया था

में (गुस्से से) :- शुक्रिया तुमने बहुत सहायता की

ग :- अरे में तुम्हारा गाइड हु इस में शुक्रिया की कोई जरुरत नहीं बस में इतना कहूंगा की जब भी फैसला लेना अपने क्रोध पे काबू करके लेना नहीं तोह क्रोध तुम्हारी मति को जला देगा और तुम्हे जवाब के जगह तुम्हे सिर्फ रख मिलेगी

में :- ठीक है अब तुम जा सकते हो

ग :- मेरी बातों को याद रखना नहीं तोह तुम अपने जवाब से और दूर पहुंच जाओगे और इसका परिणाम कितना हानिकारक होगा ये तुम्हे भी नहीं पता

में :- ठीक है में याद रखूँगा अब तुम जाओ

फिर गाइड गायब हो जाता है और में भी कुछ दिएर चाट पे hi टहल ने के बाद में भी निचे आ जटाभु जहा दादा और दादी दोनों तैयार बैठे थे और माँ हमेशा की तरह किस्त्ने में थी और डैड टीवी पे न्यूज़ देख रहे थे

सबसे पहले में जेक दादा और दादी के पेअर छूटा हु फिर जेक डैड के बगल में बैठ जाता हु और टीवी देखने लगता हु जिसमे सहर में बढ़ रहे क्राइम के बारे में hi बता रहे थे की तभी माँ जो दादा दादी को चाय दे रही थी वह टीवी का रिमोट लेके टीवी बंद कर देती है

डैड :- अरे ये क्या में देख रहा था

माँ :- आपको कोई और काम तोह है नहीं बस सुबह सुबह वही मार पिट की खबरे देखनी है ऐसा नहीं की सुबह सुबह कुछ ाचा देखे बस वही खून खराबा देखना है

इतना बोल के माँ रिमोट को वही सोफे पे फेक देती है और फिर से कीकतें में चली जाती है लेकिन न डैड की और न मेरी किसी की भी हिम्मत नहीं हुई की रिमोट लेके टीवी ों करे

फिर कुछ देर ऐसे hi बैठने के बाद में अपना फ़ोन लेके बैठ गया और डैड न्यूज़ पेपर लेके बैठ गए तभी डैड का फ़ोन बजने लगा डैड ने जब फ़ोन देखा तोह उनके चेहरे को एक पल के लिए गुस्सा आ गया लेकिन दादा दादी को देख के वह फ़ोन उठके बहार की तरफ चले गए जिससे किसी को तो कुछ सुनाई न दे लेकिन में फिर भी सब सुन सकता था

डैड :- तुझे मेरे मुँह से गालिया सुनने की आदत हो गयी है क्या जो तू बार बार फ़ोन लगा देता है

सामने से :-.....

डैड :- जा नहीं लेता टेंडर पीछे क्या कर लेगा तू

सामने से :-...

डैड :- में ये गिधड धमकियों से नहीं डरता हु समझा कमीने

सामने से :-....

डैड :- जा गन्दी नाली के कीड़े तू मर्द होता तोह मर्द से भिड़ता परिवार को बिच में नहीं लता

सामने से :-...

डैड :- क्या कर लेगा तू बता मुझे

सामने से : -.....

डैड :- अगर मेरे परिवार को कुछ हुआ तोह तुझे अपनी मौत से कोई नहीं बचा पायेगा

सामने से :-

डैड :- hello hello

फिर फ़ोन कट हो गया और डैड के चेहरे पे टेंशन साफ़ देखा जा सकता था

डैड :- (दादा से) पिताजी क्या लड़की वालों को घर नहीं बुला सकते

दादी :- तेरा दिमाग तोह सही है कही देखा है लड़की लड़का देखने जा रही है तुझे जरा भी समझ नहीं है अगर राज या रीना ये सवाल पूछते तोह भी मान सकती थी लेकिन तुझे तोह सरे रस्मे रिवाज पता है

डैड :- है माँ में जानता हु सब में तोह बस यु hi बोल रहा था

दादी :- चुप रह तू और देख छोटे कहा रह गया

अभी कोई कुछ बोलता की तभी स. चाचा भी आ गए और वह तीनो ने फिर नाश्ता किया और फिर वह तीनो जान गाड़ी में बैठ के चले गए उनके साथ भीमा काका और उनके कुछ आदमी भी गए थे

लेकिन अभी भी डैड के चेहरे पे टेंशन साफ़ देखा जा सकता था जिसे देख के अब मुझे भी टेंशन फील हो रही थी कही न कही कुछ अशुभ होने का अंदाजा हो रहा था

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 52



अब तक आपने देखा की कैसे राज ने अपना त्रि नेत्र पर काबू कर लिया था जिसकी वजह से अब राज को अपने मकसद के बारे में भी पता चल गया था जिसके साथ उसे टास्क भी मिला था अपने सप्त चक्रों को जागृत करने का लेकिन जैसा की हमने देखा राज अभी तक तय नाहिबकार पाया की उसे ये जिम्मेदारी उठाने को तैयार है या नहीं तो इस में गाइड ने भी उसकी सहायता करने से मन कर दिया लेकिन उसे मार्ग दर्शन दिया जिसके वजह से राज की सामने पहेली सुलझने के अलावा और उलझ गयी तोह वही सुबह जब राज अपने परिवार के साथ था तभी उसे इस बात का पता चला की कोई है जो उसके डैड को धमकी दे रहा है और उसी के बाद से राज को कुछ अनिष्ट होने का अंदाजा होने लगा

अब आगे

अभी दादा और बाकि सरे अपने सफर पे निकल चुके थे लेकिन डैड के चेहरे पे अब दर और चिंता साफ़ साफ़ देखि जा सकती थी फिर हम भी घर के अंदर आ गए अंदर आने के 5 मिनट बाद hi में भी खेती का बहाना बनके निकल गया डैड ने मुझे रोकने का प्रयास तोह किआ लेकिन में जैसे तैसे वह से निकल आया और अपनी तेजी का फायदा उठके में फुल स्पीड में भागने लगा जिससे में कुछ 5 मिनट्स में hi दादाजी की गाड़ी के इतने नजदीक आ गया था की वह मुझे न देख पाए लेकिन मुझे वह साफ़ साफ़ दिखे अभी मेने भी अपनी स्पीड काम करनी पड़ी थी जिसके वजह से अभी मुझे आस पास की झाड़ियों में से चुपके जाना पद रहा था जिसके वजह से अब मुझे झाड़ियों में छुपे हुए गुंडे साफ़ दिख रहे थे लेकिन ये ाचा था की उनके पास कोई भी खतरनाक हथियार नहीं था सब लोग सिर्फ रोडस और लाठिया लेके आये थे बस कुछ hi लोग थे जिनके पास बंदूके थी

तोह अब मेने अपना प्लान बना लिया था पहले में बन्दूक वाले आदमियों को मरूंगा उसके बाद बाकि सब को

फिर में बिना किसी देरी के अपने प्लान को अमल में लाना शुरू कर दिया सबसे पहले जो मेरे नजदीक था में बिना किसी आवाज के उसके पास जेक चपके से उसकी गर्दन को मरोड़ दी फिर ऐसे करते करते मेने एक एक कर के सरे आदमी जिनके पास बन्दूक थी उन्हें मार दिया लेकिन इस सब में hi समय थोड़ा ज्यादा लग गे जिससे दादा की गाड़ियों का काफिला भी नजदीक आ गया था जिसे देख मेने तुरंत hi स्लो मोड को एक्टिवटे कर दिया जिससे अब मेरे पास बहुत समय था फिर में उन्ही मेसे एक आदमी की रोड लेके उन सबके गर्दन पर वार करने लगा जिससे सब लोग आराम आराम से स्लो मोशन में मरने लगे ऐसे hi करते करते मेने वह का सारा काम निपटा के मेने स्लो मोड को डीएक्टिवेट कर दिया और फिर से दादाजी के

गाड़ी का पीछा करने लगा. अभी कुछ 25 मिनट के सफर के बाद दादाजी की गाड़ी किसी हवेली के सामने रुकी जिसको बहुत अचे तरीके से सजाया गया था जिसे देख कर में समझ गया की यही मेरे होने वाली चची का घर है फिर में एक बार फिर स्लो मोड एक्टिवटे कर दिया और आस पास के एरिया का राउंड लगाने लगा जब मुझे सब ठीक लगा तोह में तुरंत अपने खेतों की दिशा में दौड़ दिया

में अपनी फुल स्पीड में था और स्लो मोड भी एक्टिव था तोह मुझे पहले जहा पहुँचने में 30 मिनट्स लगे थे वही अब मुझे सिर्फ 30 सेकण्ड्स से भी काम का वक़्त लगा था फिर मेने खेतों में पहुंच कर सबसे पहले स्लो मोड को डीएक्टिवेट किया फिर में वही से साक्षी के घर की तरफ निकल गया

जब में साक्षी के घर की तरफ जा रहा था तोह मेरे दिमाग में वही सवाल चल रहा था की किसकी सुने दिल या दिमाग की

जब में साक्षी के घर पंहुचा तोह साक्षी ने बिना कुछ बोले मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अंदर ले गई आपने रूम में ले जेक साक्षी ने रूम का गेट लॉक कर लिया.

में अंदर आके रूम में रखे एक चेयर पर बैठ गया था मुझे बैठा देख साक्षी मेरे पास आयी और मेरी गोद

में बैठ गयी और मेरी आखो में देखते हए आपने नाजुक होंटो को

मेरे होंटो से मिला diya.sakshi बड़े प्रेम और सिदद से मेरे होंटो को चूसने लगी कभी उप्पेर वाले तो कभी निचे वाले होंठ को में अभी साक्षी के होंटो को नहीं चूस रहा था में तो बस जैसे साक्षी के प्यार को फील कर रहा था जब साक्षी को लगा की में उसका साथ नहीं दे रहा हु तो साक्षी ने आपने सर दूर करके मेरी आखो में देखने लगी. जिसे देख में मुस्कुरा दिया और साक्षी की गर्दन को पीछे से पकड़ कर उसका चेहरा पास लेक उसके नाज़ुक और मुलायम होंटो को आपने होंटो में लेके

चूसने लगा अब साक्षी और में दोनों hi एक दूसरे के होंटो को चूस रहे

थे कुछ देर में hi दोनों की जीभ आपस में लड़ रही थी. कभी मेरी जीभ जीत जाती और साक्षी के मच में कब्ज़ा कर लेती तो कभी साक्षी की जीभ जीत जाती और नेरे मुँह में कब्ज़ा कर लेती. हार या जीत किसी की भी हो मज़ा दोनों को आ रहा था. साक्षी की छूट अब तक बहुत गीली हो चुकी थी उसकी पंतय को गिला करके मेरे लोअर को भी गिला करने लगी थी.

जिस वजह से अब मेरा लुंड ब्बि अपने फुल फॉर्म पे था जो की साक्षी को अपनी छूट पे चुभ रहा था जिससे साक्षी को भी मस्ती चढ़ रही थी जिस की वजह से वह खुद hi अपना टॉप और ब्रा उतरने लगी थी साक्षी के इस हरकत को देख के जहा में मुस्कुरा भी रहा था तोह वही उसके इस मन मोहक शरीर रचना को देख कर में मदहोश भी हो रहा था

जब मेरा बस खुद पर से हैट गया तोह मेने साक्षी को उठके बीएड पे लिटा दिया और अपने कपडे उतरने लगा और साक्षी भी मेरी देखा देखि में अपने शरीर के बाकि बचे कपडे भी निकल ने लगी जिसकी वजह से अभी हम दोनों पूर्ण नग्न अवस्था में थे अब न मेरे से कण्ट्रोल हो रहा था और नहीं साक्षी से

फिर साक्षी तुरंत बीएड से कुड़के मेरे ऊपर आ गयी जिससे मेरा लुंड अब उसकी छूट पे छू रहा था लेकिन इस तरह अचानक आने की वजह से मेरे लुंड की मार उसके छूट पे कुछ ज्यादा hi जोर से पड़ी जिससे वह चीख hi पड़ी जब मेरी नज़र उसके छूट पे पड़ी तोह वह पूरी सूज चुकी थी जिसे देख के में हलके से उसके छूट पे किश करने लगा जिससे साक्षी अपने आप पे कण्ट्रोल न रख पायी और मेरे मुँह पर hi झड़ने लगी जिससे में कोई जूस समझ पिने लगा

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 53



अब तक आपने देखा की जब राज ने अपने डैड को किसी के साथ फ़ोन पे झगड़ते देखा तोह उसे तोह कुछ समझ नहीं आया लेकिन जब इस सब में उसके परिवार को भी इन्वॉल्व करने की कोशिश की तोह अब उसे तोह कुछ समझना भी नहीं था जब दादाजी की गाड़ियों का काफिला घर से निकला तोह अपने डैड के चेहरे पे टेंशन और दर के इम्मोशनस देख के उसे भी किसी अशुभ घटना होने की सम्भावनाये उसके मन में जन्म लेने लगी जिन्होंने उसे मजबूर कर दिया की वह अपने दादाजी का पीछा करे जहा उसे पता चला की उसका दर जायज़ था फिर जो हुआ वह तोह आप सब ने पढ़ा hi फिर वह से निकलने के बाद राज साक्षी के घर गया जहा क्या हुआ वह भी आपको पता है तोह ज्यादा बोआर न करते हुए

अब आगे

जब साक्षी मेरे मुँह पे झड़ने लगी तोह में भी किसी जन्म जन्म से प्यासे की तरह उसके उस झरने से निकलते स्वादिष्ट जूस को पिने लगा जिससे साक्षी को एक अलग hi आनद मिल रहा था फिर में धीरे धीरे उसे चूमते हुए उसकी छूट से लेके उसके कानो तक हर हिस्से को चूमते हुए में उसके कण के एकदम पास आके उसके कान के लोआव को चुम के उसके कान में धीरे से बोलै

में :- अभी तुम्हे और तुम्हारी राम प्यारी दोनों को आराम की जरुरत है तुम आराम करो बाकि का खेल बाद में खेलेंगे

मेरे ऐसे कहने से साक्षी बस मुझे hi देख रही थी जैसे उसे विश्वास hi नहीं हुआ की में क्या बोल रहा हु

फिर मेरा जब बोलके हो गया तोह में बीएड से खड़ा होक अपने कपडे पहनने लगा जिससे साक्षी मुझे hi घर घर के देख रही थी फिर में कीकतें में जेक फिर से एक बॉटल पानी को गरम करने लगा और फिर स्लो मोड की मदद से में मेडिकल से छूट पे लगनी वाली क्रीम भी ले ली

अभी स्लो मोड को एक्टिवटे करने की दो वजह थी पहली साक्षी अगर मुझे ढूंढते हुए निचे आई तोह उसे ये न लगे की में उसे इस हालत में छोड़ गया तोह वही दूसरी वजह ये थी की अगर किसी गांव वाले ने मुझे देख लिया रोह हंगामा होना hi था

तोह जब में क्रीम लेके वापस कीकतें में आया तोह स्लो मोड को डीएक्टिवेट कर दिया थोड़ी देर में पानी भी हल्का गरम हो गया तोह मेने गैस बंद कर के फिर से साक्षी के पास आ गया जब मेने साक्षी को देखा तोह मेरे दिमाग ने hi काम करना बंद कर दिया मेने देखा की वह अपना मुँह घुटनों में छुपा कर रो रही है

में :- (साक्षी के ासु पॉच के) क्या हुआ साक्षी ऐसे क्यों रो रही हो बताओ मुझे

साक्षी ने जब मेरे तरफ देखा तोह मुझे अपने पास देख के मुझे एकदम कास के बहो में भर लिया

साक्षी :- जनन मुझे लगा की आप मुझे अकेला छोड़के चले गए

में :- और तुम्हे ऐसा क्यों लगा

साक्षी :- में आपको खुश नहीं कर पायी इसीलिए

में (उसके सर पे तपली मरते हुए) :- पागल हो तुम में तोह मेरी नन्ही जणू के लिए क्रीम और गरम पानी लेन गया था

साक्षी :- (कफसे होक) कोण नन्ही जान

में :- (साक्षी का चेहरा पकड़ के) ये मेरी जान (फिर एक हाथ को उसकी छूट पर रखते हुए) ये मेरी नन्ही जान

साक्षी ने जब मेरी द्वारा खुदको जान और अपनी छूट को नन्ही जान नाम सुना तोह वह तोह जैसे शर्म से पानी पानी होने लगी

फिर में मेडिकल से लायी हुई क्रीम को उसके छूट पे अंदर और बहार दोनों तरफ अचे से लगा के उसे पंतय पहनाई फिर उसकी पंतय पे वह गरम पानी की बॉटल रख दी जिससे उसकी रहत भरी सिसकी निकल गयी फिर में भी कुछ देर उसके बगल में बैठ गया

जैसे hi मेरा दिमाग थोड़ा रिलैक्स हुआ तोह दिमाग और दिल के बिच में फिर से जुंग चिढ गयी जिसमे एक तरफ दिल बोलता की इतने बड़े पुण्य काम के लिए अगर मुझे चुना गया है तोह ये मेरा सौभाग्य hi है की मेरा जन्म देव कार्य के लिए हुआ है

तोह वही दुसरिवतराफ़ दिमाग बोलता की मेरे जैसे एक मामूली इंसान पे इतनी बड़ी जिम्मेदारियां लेने से पहले मुझे एक बार सोच लेना चाहिए अगर कोई गलती हो गयी तोह कही मेरे वजह से पूरी दुनिया का विनाश न हो जाये

यही सब सोचते हुए मेरे चेहरे पर एक्सप्रेशंस बार बार बदल रहे थे कभी मुझे खुद पे अभिमान होता कभी जिम्मेदारी को ठीक से न निभा पाने का दर लगता इसी सब के बिच में अपने आप में इतना खो गया की मुझे याद hi नहीं रहा की मेरे पास में साक्षी भी बैठी है

जब साक्षी की नज़र मुझ पर पड़ी तोह वह भी समझ गयी की में किसी गहरे सोच में हु तोह उसने भी मुझे बिना डिस्टर्ब किये हलके से उठ के बाथरूम में जेक अपने कपडे पहन लिए और जब वह वापस आयी तब भी में वैसे hi सोच में गम था ये देख के साक्षी से अब सबर नहीं हुआ और मुझे आवाज देने लगी लेकिन जब में कुछ जवाब नहीं दिया तोह वह मेरे बगल में बैठ के आवाज देने लगी लेकिन जब मेरे तरफ से कोई रिस्पांस नहीं आया तोह उसने मुझे कंधे से पकड़ के जोर जोर से हिलने लगी जिससे में होसे में आ गया.

में :- (हड़बड़ाते हुए) क्क्क्य हुआ क्या हुआ

साक्षी :- कब से देख रही हूँ की तुम किसी सोच में खोये हो

में :- बस ऐसे hi एक पहेली है जिसका जवाब बड़ा कठिन सा लग रहा है

साक्षी :- ऐसी क्या पहेली है जिसका जवाब तुम्हे भी नहीं पता

में :- जवाब तोह पता है लेकिन बस रास्ता चुनना है

साक्षी :- (कन्फ्यूज्ड) में कुछ समझी नहीं जरा ठीक से बताओ

में :- जवाब है भविष्य और रस्ते है दिल और दिमाग इससे ज्यादा में नहीं बता सकता

साक्षी :- आगे किसी बात की जरुरत भी नहीं है मुझे पता है तुम अपने आने वाले रिजल्ट को लेके टेंकेड हो न

में :- (मुस्कुराते हुए) है सही पहचाना

साक्षी :- देखा में भी स्मार्टनेस में तुमसे काम नहु हु

में :- है मन गए तुम्हे भी अब पहेली का जवाब दो

साक्षी :- जवाब है दिल का रास्ता

में :- कैसे

साक्षी :- देखो जो हमारा दिमाग होता है वह हमेशा हमारे hi फायदे की बाटे बताता है और दिल हमे वह बताता है जो हम चाहते है दिल की बात में एक मैजिक होता है जैसे की

में :- (बिच में hi टोकते हुए) ये सब तोह मुझे भी पता है कोई और जवाब है तोह बोलो

साक्षी :- रुको में आसान करके बताती हु

में :- प्लीज

साक्षी :- मुझे बताओ की तुम गांव वालों की मदद क्यों करते हो

में :- ये कैसा सवाल है मुझे फील होता है की उन्हें मेरी मदद की जरुरत है तोह में उनकी मदद करता हु

साक्षी :- मेरा मन्ना है की इसमें आपका क्या स्वार्थ आपके दिमाग में क्या चल रहा होता है

में :- साक्षी तुम कहना क्या चाहती हो साफ़ साफ़….

अभी में बोल hi रहा था की तभी मेरे दिमाग में गाइड और साक्षी की कही बात आने लगी जिससे में भी समझ गया की दोनों किस बारे में बोल रहे थे

में (साक्षी को कास के गले लगते हुए) :- थैंक यू जान थैंक यू सो मच तुमने तोह मेरी साडी समस्या hi दूर कर दी

फिर में साक्षी को कबोर्डके अपने खेतों की तरफ निकल पड़ता हु क्यूंकि आज में अकेला था तोह माँ कभी भी घर से खाने का डिब्बा भेज सकती थी. तोह जब में खेत की तरफ जा hi रहा था की तभी….

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आज के लिए इतना hi


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