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अपडेट 90 बैक इन कंपनी ऑफ़ सान्वी
जब दोनों के किश एन्ड hi नहीं हो रहे थे तो दीप्ति और वेट नहीं कर पायी तो कहा, “दादू, मम्मी, आप किसी कर रहे हो?” दीप्ति की आवाज़ को सुनकर दोनों ने चहूंकते हुए एक दूसरे को चोर्रा दीप्ति के तरफ देखते हुए, और सान्वी अपना मुंह पोंछते हुए दीप्ति के तरफ बढ़ी उस्सको गॉड में उठाने के लिए तो चावला साहब ने सान्वी को धीरे से कहा, “उस्सने सब देखा कहीं वो विवान से तो नहीं कहेगी के दादू और मम्मी किसी कर रहे थे?”
सान्वी ने उनको जवाब दिया, “वो कुछ नहीं समझ रही है अभी, और कब वो विवान से मिलती भी है के उस्सको कुछ बता सके? विवान के पास टाइम hi कहाँ दीप्ति से कभी बात भी करने को, जब दीप्ति सोती है तो वो चले जाते हैं और जब वापस एते हैं तो दीप्ति सोई हुई होती है!”
और तीनों घर के अंदर गए किचन से होकर.
अंदर जाते hi सान्वी ने चावला साहब का टॉवल और कपडे लेकर बाथरूम के पास उंनका वेट करने लगी क्यूंकि उस्सको पता था के वो नहाने आएगा तुरंत क्यूंकि बाहर से आने के बाद सब से पहले वो एहि करता है हमेशा…..
और चावला साहब सच में आये बाथरूम के पास सिर्फ अपने बॉक्सर में, सान्वी उनको देखते हुए मुस्कुरा रही थी और जब वो करीब आये तो सान्वी ने उनके हाथ में टॉवल और कपडे थमाए और चावला साहब ने कपड़ों को लेते हुए सान्वी का हाथ पाकर के बाथरूम के अंदर खिंचा उस्सको. दीप्ति निचे लाउन्ज में टीवी के सामने बैठी एक कार्टून देख रही थी शोर मचाते हुए.
झट से अचानक सान्वी को मौका hi नहीं मिला संभालने को और अंदर चली गयी उनके बाहों में और चावला साहब ने उसस्के गले को छाता, तो सान्वी उनके छाती पर सत् के कहा, “क्यों जी? आज मैं नहीं भरा क्यों संजना के साथ? मुझे क्यों इतना जकरने लगे आते hi?” चावला साहब के बॉक्सर में उंनका लिंग टांके खड़ा हो गया था और सान्वी के पथ के निचे दबा रहे थे चावला साहब कुछ रागढ देते हुए… सान्वी सब महसूस कर रही थी मगर विरोध बिल्कुल भी नहीं कर रही थी बल्कि एन्जॉय किये जा रही थी उनके चैट के बालों में अपने उँगलियों को फरते हुए.
चावला साहब ने कपडे को हेंगर पर लटकाते हुए एक हाथ से सान्वी को थामे हुए कहा, “मुंह तो खोलो नाह तेरे जीब के रस चुस्सना है मुझे….” सान्वी ने कहा, “अरे अभी अभी आते hi तो पीया मेरे जीब का रस आप ने!”
चावला साहब ने कहा, “काफी नहीं था वो अब तो खोलो मुंह को, और जीब बाहर निकालो तो!!” सान्वी मुंह नहीं खोल रही थी और हँस्ते हुए उनके चेहरे में थोड़ी नखरों के साथ उनको सत्ता रही थी जबकि निचे चावला साहब का लिंग सान्वी के जिस्म पर रगड़ते जा रहे थे…. सान्वी के दोनों हाथ उनके छाती पर थे तो चावला साहब ने सान्वी के हाथों को अपने हाथ में लेकर अपने कांधों पर किया और उस से कहा, “मुझको अपने बाहों में कसके जकरो और मेरे जीब को अपने मुंह में लेकर अब तुम चुसो मेरे रस को!”
सान्वी नाह में सर हिल्ला रही थी, और जिस दम उसस्के बाज़ू उठे चावला साहब के काँधे पर होने को तो चावला साहब ने सान्वी के ब्लाउज के निचे उस्सकी पसीने से भीगे हुए आर्मपिट के निचे देखा तो अपने नाक वहां लगाकर एक लम्बी सांस लिया उसस्के पसीने को सूंघते हुए और याद किया किश तरह से उसस्के ब्लाउज में पिछली बार उन्हों ने मुठ मारे थे… जब वह वैसे सान्वी के आर्मपिट के निचे सूंघ रहे थे तो सान्वी उनके चेहरे में देखते हुए पूछा, “यह भी कोई सूंघने की जगह है किआ कर रहे हो आप मेरे पसीने की बादभु है चीइह!!”
चावला साहब ने कहा, “तुझे किआ पता के यह बादभु है या तेरी खुशभु है इस में, मेरे लिए तो यह बहोत hi स्पेशल वाला खुशभु है जिस में से तेरी महक आती है और मुझको उत्तेजित करता है बहोत बहोत एक्साइट होता हूँ इस्को सूंघ कर main…tumhe पता है के मैं चोरी चोरी तेरे कपड़ों को ऐसे hi लेकर सुघट हूँ कई सालों से?!... जब तू निघ्त्य भी निकलती है तो मैं तेरे कमरे में जाकर तेरे निघ्त्य को सूंघता हूँ, तेरे पंतय को भी सुंघा है कई बार धोने से पहले जब तू उस्सको टब में रखती है तब… यह सब पता है तुम्हें हम्म?”
सान्वी बहुत हैरानी से उनको देखते हुए पूछा, "किआ? नहीं मुझको बिल्कुल भी नहीं पता था? आप कब यह सब करते हो? मैं कहाँ रहती हूँ जब आप यह सब करते हो तो? हम्म्म? इतना प्यार करते हो आप मुझसे? क्यों? बताइये मुझे!”
चावला साहब ने तब अपने लिंग को अंडरवियर से बाहर करते हुए सान्वी का एक हाथ पाकर के वहां किया और कहा, "इस्को अपने हाथ से सेहलावो नाह प्लीज!”
सान्वी का एक हाथ उनके काँधे पर था और दूसरा हाथ उनके लिंग पर कर दिया चावला साहब ने तो सान्वी ने इंकार नहीं किया होल्ड कर लिया उनके लिंग को अपने हाथ में और हौले हौले हाथ से सहलाने लगी उनके लिंग को उनके चेहरे में देखते हुए फिर अचानक से लिंग को चोररटे हुए कहा, “हम्म्म नहीं आप ने इससे संजना के अंदर डाला था नाह? तो पहले धोइये इससे तब मैं हाथ में लुंगी…..!”
चावला साहब ने कहा, “चलो तुम्ही धो डालो इस्को अब तब हाथ से नहीं अपने मुंह में ले लेना प्लीज!”
चावला साहब दो कदम शावर के पास गए और सान्वी ने साबुन से अपने हाथ भिगोया और शावर को चावला साहब के लिंग पर डाला, उस्सको वाश किया और अपने साबुन वाले हाथ से उनके लिंग को धोने लगी निचे बैठ कर ऊपर सर उठाकर उनके चेहरे का एक्सप्रेशन देखते हुए अपने दांतों में अपने होंठों को दबाये हुए… हलके हलके अपने मुठी को बांध करके सान्वी उनके लिंग पर हाथ रगड़ती गयी और चावला साहब ऊपर छत देखते हुए एक तड़पती आवाज़ में “आघ्घ्घ्घ स्सश्श्श्शहहस्सस बहुत मज़ा ारः है सान्वी ज़रा अपनी मुठी को और टाइट करो नाह मेरी जान!!”
सान्वी ने मुस्कुराते हुए अपनी मुठी को और टाइट करके साबुन से फिसलती हुए अपने हाथ को चावला साहब को जैसे मुठ मारने लगी…. और चावला साहब अपने कमर को आगे करके जैसे ढाका देने लगे सान्वी के मुठी के अंदर…..
तब चावला साहब ने एक हाथ से शावर को अपने लिंग पर करके उस्सको धोने को कहा और धो दिया तो सान्वी से कहा, “अब मुंह में लेलो नाह स्वीटहार्ट स्स्स्सस्शह्ह्ह बहुत मैं है के तुम इस्को chusso…le लो नाह पलेआएएससससीईए!!”
सान्वी ने अपने जीब से उनके लिंग को पहले छाता और धीरे से मुंह खोलके उनको अंदर लिया जबकि चावला साहब ने सान्वी के सर पर एक हाथ रख कर अपने कमर को हिलाते हुए उसस्के मुंह के अंदर ढाका देने लगे…. सान्वी अपने घुटनों पर गयी और एक हाथ उनके कमर पर रखा सपोर्ट के लिए और एक हाथ से लिंग को संभालते हुए अपने मुंह में उनके लिंग को लेती गयी ऊपर उनके चेहरे में देखते हुए….. चावला साहब के टांगें कांपने लगे थे और वो बेहाल होने लगे थे सान्वी के मुंह के अंदर अपने लिंग को महसूस करते हुए…… सान्वी चूस hi रही थी के लाउन्ज में से दीप्ति ज़ोर से चिल्लाई - “मममममिययययययय!!!”
सान्वी ने झट से उनके लिंग को चोर्रा और धडपडाते हुए बाहर निकली लाउन्ज के तरफ देखने के दीप्ति क्यों इतने ज़ोर से चिलायी…. देखा तो कार्टून्स में एक बड़ा सा जानवर डरावनी चेहरे में स्क्रीन पर फ्रीज हुआ था जिस से दीप्ति डर गयी थी!!”
शावर के अंदर से चावला साहब ने ज़ोर से पूछा, “किआ हुआ दीप्ति को?” तो सान्वी ने कहा, “कुछ भी नहीं कार्टून से डर गयी!”
तो चावला साहब ने सान्वी को वापस अंदर आने को कहा मगर सान्वी ने कहा, “नहीं आप नाहा कर वापस आइये तब बाद में करेंगे जो करना है आप फ्रेश हो जाइये हमारे पास अभी बहोत वक़्त है!” चावला साहब को मजबूरन अकेले नहाना पड़ा……
सान्वी लाउन्ज में बैठी सोचने लगी के कब चावला साहब उसस्के कपड़ों को सूंघते हैं, किश वक़्त वो सब करते हैं वो के पिछले 5 सालों में शो एक बार भी पता बिल्कुल नहीं चला…. और सोचने लगी के कब से वो वैसा करते हैं? सोचा के वो बाहर निकले तो पूछेगी के कब से वो वैसा करता है और कब से उस से प्यार करते हैं जनाब!!
तो बे कॉन्टिनोएड……………. (2700 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
जब दोनों के किश एन्ड hi नहीं हो रहे थे तो दीप्ति और वेट नहीं कर पायी तो कहा, “दादू, मम्मी, आप किसी कर रहे हो?” दीप्ति की आवाज़ को सुनकर दोनों ने चहूंकते हुए एक दूसरे को चोर्रा दीप्ति के तरफ देखते हुए, और सान्वी अपना मुंह पोंछते हुए दीप्ति के तरफ बढ़ी उस्सको गॉड में उठाने के लिए तो चावला साहब ने सान्वी को धीरे से कहा, “उस्सने सब देखा कहीं वो विवान से तो नहीं कहेगी के दादू और मम्मी किसी कर रहे थे?”
सान्वी ने उनको जवाब दिया, “वो कुछ नहीं समझ रही है अभी, और कब वो विवान से मिलती भी है के उस्सको कुछ बता सके? विवान के पास टाइम hi कहाँ दीप्ति से कभी बात भी करने को, जब दीप्ति सोती है तो वो चले जाते हैं और जब वापस एते हैं तो दीप्ति सोई हुई होती है!”
और तीनों घर के अंदर गए किचन से होकर.
अंदर जाते hi सान्वी ने चावला साहब का टॉवल और कपडे लेकर बाथरूम के पास उंनका वेट करने लगी क्यूंकि उस्सको पता था के वो नहाने आएगा तुरंत क्यूंकि बाहर से आने के बाद सब से पहले वो एहि करता है हमेशा…..
और चावला साहब सच में आये बाथरूम के पास सिर्फ अपने बॉक्सर में, सान्वी उनको देखते हुए मुस्कुरा रही थी और जब वो करीब आये तो सान्वी ने उनके हाथ में टॉवल और कपडे थमाए और चावला साहब ने कपड़ों को लेते हुए सान्वी का हाथ पाकर के बाथरूम के अंदर खिंचा उस्सको. दीप्ति निचे लाउन्ज में टीवी के सामने बैठी एक कार्टून देख रही थी शोर मचाते हुए.
झट से अचानक सान्वी को मौका hi नहीं मिला संभालने को और अंदर चली गयी उनके बाहों में और चावला साहब ने उसस्के गले को छाता, तो सान्वी उनके छाती पर सत् के कहा, “क्यों जी? आज मैं नहीं भरा क्यों संजना के साथ? मुझे क्यों इतना जकरने लगे आते hi?” चावला साहब के बॉक्सर में उंनका लिंग टांके खड़ा हो गया था और सान्वी के पथ के निचे दबा रहे थे चावला साहब कुछ रागढ देते हुए… सान्वी सब महसूस कर रही थी मगर विरोध बिल्कुल भी नहीं कर रही थी बल्कि एन्जॉय किये जा रही थी उनके चैट के बालों में अपने उँगलियों को फरते हुए.
चावला साहब ने कपडे को हेंगर पर लटकाते हुए एक हाथ से सान्वी को थामे हुए कहा, “मुंह तो खोलो नाह तेरे जीब के रस चुस्सना है मुझे….” सान्वी ने कहा, “अरे अभी अभी आते hi तो पीया मेरे जीब का रस आप ने!”
चावला साहब ने कहा, “काफी नहीं था वो अब तो खोलो मुंह को, और जीब बाहर निकालो तो!!” सान्वी मुंह नहीं खोल रही थी और हँस्ते हुए उनके चेहरे में थोड़ी नखरों के साथ उनको सत्ता रही थी जबकि निचे चावला साहब का लिंग सान्वी के जिस्म पर रगड़ते जा रहे थे…. सान्वी के दोनों हाथ उनके छाती पर थे तो चावला साहब ने सान्वी के हाथों को अपने हाथ में लेकर अपने कांधों पर किया और उस से कहा, “मुझको अपने बाहों में कसके जकरो और मेरे जीब को अपने मुंह में लेकर अब तुम चुसो मेरे रस को!”
सान्वी नाह में सर हिल्ला रही थी, और जिस दम उसस्के बाज़ू उठे चावला साहब के काँधे पर होने को तो चावला साहब ने सान्वी के ब्लाउज के निचे उस्सकी पसीने से भीगे हुए आर्मपिट के निचे देखा तो अपने नाक वहां लगाकर एक लम्बी सांस लिया उसस्के पसीने को सूंघते हुए और याद किया किश तरह से उसस्के ब्लाउज में पिछली बार उन्हों ने मुठ मारे थे… जब वह वैसे सान्वी के आर्मपिट के निचे सूंघ रहे थे तो सान्वी उनके चेहरे में देखते हुए पूछा, “यह भी कोई सूंघने की जगह है किआ कर रहे हो आप मेरे पसीने की बादभु है चीइह!!”
चावला साहब ने कहा, “तुझे किआ पता के यह बादभु है या तेरी खुशभु है इस में, मेरे लिए तो यह बहोत hi स्पेशल वाला खुशभु है जिस में से तेरी महक आती है और मुझको उत्तेजित करता है बहोत बहोत एक्साइट होता हूँ इस्को सूंघ कर main…tumhe पता है के मैं चोरी चोरी तेरे कपड़ों को ऐसे hi लेकर सुघट हूँ कई सालों से?!... जब तू निघ्त्य भी निकलती है तो मैं तेरे कमरे में जाकर तेरे निघ्त्य को सूंघता हूँ, तेरे पंतय को भी सुंघा है कई बार धोने से पहले जब तू उस्सको टब में रखती है तब… यह सब पता है तुम्हें हम्म?”
सान्वी बहुत हैरानी से उनको देखते हुए पूछा, "किआ? नहीं मुझको बिल्कुल भी नहीं पता था? आप कब यह सब करते हो? मैं कहाँ रहती हूँ जब आप यह सब करते हो तो? हम्म्म? इतना प्यार करते हो आप मुझसे? क्यों? बताइये मुझे!”
चावला साहब ने तब अपने लिंग को अंडरवियर से बाहर करते हुए सान्वी का एक हाथ पाकर के वहां किया और कहा, "इस्को अपने हाथ से सेहलावो नाह प्लीज!”
सान्वी का एक हाथ उनके काँधे पर था और दूसरा हाथ उनके लिंग पर कर दिया चावला साहब ने तो सान्वी ने इंकार नहीं किया होल्ड कर लिया उनके लिंग को अपने हाथ में और हौले हौले हाथ से सहलाने लगी उनके लिंग को उनके चेहरे में देखते हुए फिर अचानक से लिंग को चोररटे हुए कहा, “हम्म्म नहीं आप ने इससे संजना के अंदर डाला था नाह? तो पहले धोइये इससे तब मैं हाथ में लुंगी…..!”
चावला साहब ने कहा, “चलो तुम्ही धो डालो इस्को अब तब हाथ से नहीं अपने मुंह में ले लेना प्लीज!”
चावला साहब दो कदम शावर के पास गए और सान्वी ने साबुन से अपने हाथ भिगोया और शावर को चावला साहब के लिंग पर डाला, उस्सको वाश किया और अपने साबुन वाले हाथ से उनके लिंग को धोने लगी निचे बैठ कर ऊपर सर उठाकर उनके चेहरे का एक्सप्रेशन देखते हुए अपने दांतों में अपने होंठों को दबाये हुए… हलके हलके अपने मुठी को बांध करके सान्वी उनके लिंग पर हाथ रगड़ती गयी और चावला साहब ऊपर छत देखते हुए एक तड़पती आवाज़ में “आघ्घ्घ्घ स्सश्श्श्शहहस्सस बहुत मज़ा ारः है सान्वी ज़रा अपनी मुठी को और टाइट करो नाह मेरी जान!!”
सान्वी ने मुस्कुराते हुए अपनी मुठी को और टाइट करके साबुन से फिसलती हुए अपने हाथ को चावला साहब को जैसे मुठ मारने लगी…. और चावला साहब अपने कमर को आगे करके जैसे ढाका देने लगे सान्वी के मुठी के अंदर…..
तब चावला साहब ने एक हाथ से शावर को अपने लिंग पर करके उस्सको धोने को कहा और धो दिया तो सान्वी से कहा, “अब मुंह में लेलो नाह स्वीटहार्ट स्स्स्सस्शह्ह्ह बहुत मैं है के तुम इस्को chusso…le लो नाह पलेआएएससससीईए!!”
सान्वी ने अपने जीब से उनके लिंग को पहले छाता और धीरे से मुंह खोलके उनको अंदर लिया जबकि चावला साहब ने सान्वी के सर पर एक हाथ रख कर अपने कमर को हिलाते हुए उसस्के मुंह के अंदर ढाका देने लगे…. सान्वी अपने घुटनों पर गयी और एक हाथ उनके कमर पर रखा सपोर्ट के लिए और एक हाथ से लिंग को संभालते हुए अपने मुंह में उनके लिंग को लेती गयी ऊपर उनके चेहरे में देखते हुए….. चावला साहब के टांगें कांपने लगे थे और वो बेहाल होने लगे थे सान्वी के मुंह के अंदर अपने लिंग को महसूस करते हुए…… सान्वी चूस hi रही थी के लाउन्ज में से दीप्ति ज़ोर से चिल्लाई - “मममममिययययययय!!!”
सान्वी ने झट से उनके लिंग को चोर्रा और धडपडाते हुए बाहर निकली लाउन्ज के तरफ देखने के दीप्ति क्यों इतने ज़ोर से चिलायी…. देखा तो कार्टून्स में एक बड़ा सा जानवर डरावनी चेहरे में स्क्रीन पर फ्रीज हुआ था जिस से दीप्ति डर गयी थी!!”
शावर के अंदर से चावला साहब ने ज़ोर से पूछा, “किआ हुआ दीप्ति को?” तो सान्वी ने कहा, “कुछ भी नहीं कार्टून से डर गयी!”
तो चावला साहब ने सान्वी को वापस अंदर आने को कहा मगर सान्वी ने कहा, “नहीं आप नाहा कर वापस आइये तब बाद में करेंगे जो करना है आप फ्रेश हो जाइये हमारे पास अभी बहोत वक़्त है!” चावला साहब को मजबूरन अकेले नहाना पड़ा……
सान्वी लाउन्ज में बैठी सोचने लगी के कब चावला साहब उसस्के कपड़ों को सूंघते हैं, किश वक़्त वो सब करते हैं वो के पिछले 5 सालों में शो एक बार भी पता बिल्कुल नहीं चला…. और सोचने लगी के कब से वो वैसा करते हैं? सोचा के वो बाहर निकले तो पूछेगी के कब से वो वैसा करता है और कब से उस से प्यार करते हैं जनाब!!
तो बे कॉन्टिनोएड……………. (2700 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)