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अपडेट 99 बोथ ात लास्ट रेलिएवेद
तो कैसे आरव शाम के 5 बजे घर के अंदर था और उस्सने किआ देखा?
हुआ यह के आरव संजना को सरप्राइज करना चाहता था अर्ली ऑफिस वापस आकर. तो उस्सने कार को घर के बाहर जान बूझकर पार्क किया और आहिस्ते से गेराज वाले दूर से किचन में गया और किचन से लाउन्ज में, किचन का दूर दिन में अनलॉक रहता है हमेशा.
अब किचन से लाउन्ज जॉइंट था, मगर एक लशप था और अक्सर सान्वी किचन से चावला साहब को अपने व्हिस्की सिप करते हुए देखते थे पहले सबको याद होगा, मगर वो हिस्सा जहाँ इस वक़्त यह दोनों बैठर हुए थे किचन से पीठ करता था, मतलब जब आरव किचन से लाउन्ज के तरफ बढे तो कुछ तो देखा उस्सने वो किआ था?
जो आरव को नज़र आया वो था काउच पीछे के तरफ से और ऊपर दो सर, एक चावला साहब के एक सान्वी के, और दोनों सर एक दूसरे से सट्टे हुए थे, तो वो आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता गया तो एक चीज़ जो उस्सको बहोत ताजुब लगा वो यह थी के सान्वी की ड्रेस काफी ऊपर तक उठी हुई थी और उस्सकी जाँघों को देखा आरव ने तभी उस्सने फुकरा था “भाबी” मगर उस्सने नाह सान्वी को किश करते देखा, नाह सान्वी को अपने बाप के बाहों में देखा, और नाह उस वक़्त चावला साहब के हाथ सान्वी के जाँघों पर tha..luckily उस वक़्त चावला साहब टेबल से अपना व्हिस्की का गिलास उठा रहे थे थोड़ा झुक कर, सान्वी का एक पाऊँ मुद्दे हुए थे काउच पर और एक पाऊँ जो निचे ज़मीन पर थी वो वाला आरव को दिखा जिस पर ड्रेस ऊपर उठे हुए थे, और वो उठे इस लिए थे क्यूंकि उस्सको कुछ देर पहले चावला साहब ने उठाया था अपने हाथ से सान्वी के जांघ को सहलाते हुए…..
जिस वक़्त आरव की आवाज़ इन् दोनों के कान में आये झट से सान्वी उठ कड़ी हुई दाएं के तरफ मूढ़ते हुए और चावला साहब के हाथ से व्हिस्की का गिलास करीबन छूटने को थे…. वो भी खड़ा हो गया और दोनों बिल्कुल हकबका गए आरव को घर के अंदर देख kar….Aarav को उन् दोनों के चेहरे के रंग को बदलते हुए देख कर अजीब लगा, और सान्वी कड़ी होकर अपनी ड्रेस को सीधा करने लगी उसस्के चेहरे में देखते हुए फिर अपने बाल को सवार और पूछा, “अरे आरव तुम कब आये और कार कहाँ है तुम्हारा?” आरव ने मुस्कुराते हुए, उस्सको और अपने पापा को देखते हुए कहा, “नहीं बुसस ऐसे hi मैं संजना को सरप्राइज करना चाहता था तो कार को रास्ते पर hi चोरर कर आया हूँ अभी वापस अंदर करूँगा, कहाँ है वो?” आरव बात करते वक़्त कभी अपने बाप को तो कभी सान्वी के चेहरे में देख रहा था और उस्सको लग रहा था जैसे दोनों उस से कुछ छुपा रहे थे या डर गए थे उसस्के अचानक आने से….
जब आरव ने उतना कहा तो सान्वी ने सिचुएशन को संभालते हुए उसस्के तरफ बढ़ते हुए कहा, “ोफो आरव तुमको नहीं पता के वो अपने पापा के यहाँ गयी हुई है, दीप्ति को भी साथ लगाई है! चलो कार को अंदर करो मैं तुम्हारे लिए कुछ फ्रेश पिने के लिए सर्वे करती हूँ…” और सान्वी मुड़कर चावला साहब को देखते हुए दांतों में जीब दबाती है…..
आरव ने कहा, “okay तो फिर मैं भी चला जाता हूँ उस्सको वही सरप्राइज देने….” तब संवी ने कहा, “अरे तो वो तो अपनी कार में गयी है और तुम अपने कार में जाओगे, वो थोड़ी देर में आने hi वाली है वापस, हो सकता है जब तुम वहां पहुंचो तो वो निकल गयी होगी, यहीं वेट करो नाह उस्का!” तब आरव ने कहा “okay तो फिर ठीक है मैं कार अंदर करता हूँ भाबी!” और वो चला गया कार को गेराज में अंदर करने को.
तब सान्वी ने धीरे से चावला साहब के तरफ बढ़ते हुए कहा, “ओह माय गॉड पता नहीं उस्सने किआ देखा और कैसे देखा हम दोनों को! पता नहीं कब से आया हुआ था?! मुझे घबराहट हो रही है!”
चावला साहब ने सान्वी को समझाते हुए और हौसला देते हुए कहा, “उसस्के बातों से बिल्कुल नहीं लगता के उस्सने कुछ ऐसा वैसा देखा, उल्टा हम दोनों उस्सको शक कराएंगे अगर हम ऐसे घबराये तो, उसस्के साथ बिल्कुल नार्मल बेहवे करो जैसे कुछ एब्नार्मल नहीं हुआ, उस से बातें करो मामूली तौर से और अगर कुछ देखा है तो खुद तुमसे कोई नाह कोई वैसा सवाल करेगा…. मैं भी घबरा गया अचानक उस्सकी आवाज़ पीछे सुनके, और मेरी समझ में नहीं आया के मैं उस्सको किआ कहूं…. हम सोच रहे थे हम घर में अकेले हैं इस लिए हम बिल्कुल खुलके एक दूसरे के साथ थे, ऐसा आज पहली बार हुआ, लगता के आज के बाद उस किचन के दरवाज़े को दिन में भी लॉक करना पड़ेगा नहीं तो एक दिन हम फंस सकते हैं!!”
तब सान्वी ने पूछा, “अगर उस्सने कुछ ज़्यादा देखा होगा जब मैं आप को चुम रही थी या जब आप मेरे जिस्म पर हाथ फेरर रहे थे और वो मुझसे कहे के उस्सने मुझको आप को किश करते हुए देखा तो किआ जवाब दूंगी आप बताइये?!”
चावला साहब ने कहा, “ऐसा कुछ नहीं पूछेगा वो मेरा यकीन करो, पूछना होता तो अभी इसी वक़्त पूछता, हैरान होता, उसस्के चेहरे का रंग बदल गया होता, या वो छुप कर और ज़्यादा देखने की कोशिश करता… उस्सने कुछ भी नहीं देखा मेरा यकीन करो तुम… और अगर उस्सने ऐसा कुछ कहा भी तब मेरे पास आना तुरंत उस्सको जवाब दिए बिना, तब मैं उस से बात करूँगा!”
सान्वी ने पूछा, “किआ बात करोगे तब आप उस से? बोलिये? उस्सको बताओगे के हमारे बीच ऐसा सम्बन्ध है? किआ सोचेगा वो मेरे बारे में तब के मैं एक गन्दी बहु हूँ आप की? हैं? बोलिये नाह!”
चावला साहब ने कहा, “आरी तुम इतना फ़िक्र क्यों कर रही हो जब कुछ हुआ hi नहीं? उस्सने तो कुछ नहीं पूछा अभी नाह? अगर वो पूछेगा तबकी तब देखेंगे अभी फ़िक्र करना बांध करो, देखो वो कार गेराज के अंदर कर चूका है अब अंदर आएगा जाओ तुम उस्सको कुछ खाने पिने को दो और पूछना कैसे आज इतना जल्दी आगया और विवान कब आएगा पूछो उस से!! जाओ जाओ!!”
सान्वी चली गयी किचन में और आरव का वेट किया और जब वो वापस अंदर आया तो सान्वी ने एक गहरी सांस लेते हुए, चावला साहब के तरफ एक बार देख कर आरव से कहा, “तो साहब आज इतनी जल्दी कैसे आगये हम्म? तुम्हारा भैया कब आएगा आज? वो भी आ रहे हैं?”
आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, “आरी भाबी शादी जो कर लिया है अब तो जल्दी आना पढता है नाह? भैया भी तो ऐसे hi जल्दी आया करता था जब आप की नयी नयी शादी हुई थी याद है? हम्म मुझे तो सब याद है हेहेहे!” तब सान्वी को तस्सली हुई के शायद आरव ने उस्सको चावला साहब के ज़्यादा करीब नहीं देखा और कहा, “चल झूटा, तेरे भैया तो सिर्फ शादी के पहले हफ्ते अर्ली आये थे बाकी तो वो हमेशा देर रात को hi आते हैं!”
आरव जल्दी से ऊपर अपने कमरे में गया चेंज किया और एक टीशर्ट और शार्ट में वापस निचे आया और सान्वी के पास बैठ कर गप्पे मारने लगा अपने भाबी के साथ. चावला साहब लाउन्ज में व्हिस्की पिटे हुए दोनों के तरफ देख रहे थे और कभी कभी सान्वी उनके तरफ देखते हुए आरव से बातें किये जा रही थी. चावला साहब को सुनाई तो नहीं दे रहा था के किआ बातें हो रहे थे दोनों में मगर उस्सको दिख गया के सब नार्मल है आरव ने कुछ नहीं देखा था उन् दोनों के बीच.
तो बे कॉन्टिनोएड…………….
तो कैसे आरव शाम के 5 बजे घर के अंदर था और उस्सने किआ देखा?
हुआ यह के आरव संजना को सरप्राइज करना चाहता था अर्ली ऑफिस वापस आकर. तो उस्सने कार को घर के बाहर जान बूझकर पार्क किया और आहिस्ते से गेराज वाले दूर से किचन में गया और किचन से लाउन्ज में, किचन का दूर दिन में अनलॉक रहता है हमेशा.
अब किचन से लाउन्ज जॉइंट था, मगर एक लशप था और अक्सर सान्वी किचन से चावला साहब को अपने व्हिस्की सिप करते हुए देखते थे पहले सबको याद होगा, मगर वो हिस्सा जहाँ इस वक़्त यह दोनों बैठर हुए थे किचन से पीठ करता था, मतलब जब आरव किचन से लाउन्ज के तरफ बढे तो कुछ तो देखा उस्सने वो किआ था?
जो आरव को नज़र आया वो था काउच पीछे के तरफ से और ऊपर दो सर, एक चावला साहब के एक सान्वी के, और दोनों सर एक दूसरे से सट्टे हुए थे, तो वो आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता गया तो एक चीज़ जो उस्सको बहोत ताजुब लगा वो यह थी के सान्वी की ड्रेस काफी ऊपर तक उठी हुई थी और उस्सकी जाँघों को देखा आरव ने तभी उस्सने फुकरा था “भाबी” मगर उस्सने नाह सान्वी को किश करते देखा, नाह सान्वी को अपने बाप के बाहों में देखा, और नाह उस वक़्त चावला साहब के हाथ सान्वी के जाँघों पर tha..luckily उस वक़्त चावला साहब टेबल से अपना व्हिस्की का गिलास उठा रहे थे थोड़ा झुक कर, सान्वी का एक पाऊँ मुद्दे हुए थे काउच पर और एक पाऊँ जो निचे ज़मीन पर थी वो वाला आरव को दिखा जिस पर ड्रेस ऊपर उठे हुए थे, और वो उठे इस लिए थे क्यूंकि उस्सको कुछ देर पहले चावला साहब ने उठाया था अपने हाथ से सान्वी के जांघ को सहलाते हुए…..
जिस वक़्त आरव की आवाज़ इन् दोनों के कान में आये झट से सान्वी उठ कड़ी हुई दाएं के तरफ मूढ़ते हुए और चावला साहब के हाथ से व्हिस्की का गिलास करीबन छूटने को थे…. वो भी खड़ा हो गया और दोनों बिल्कुल हकबका गए आरव को घर के अंदर देख kar….Aarav को उन् दोनों के चेहरे के रंग को बदलते हुए देख कर अजीब लगा, और सान्वी कड़ी होकर अपनी ड्रेस को सीधा करने लगी उसस्के चेहरे में देखते हुए फिर अपने बाल को सवार और पूछा, “अरे आरव तुम कब आये और कार कहाँ है तुम्हारा?” आरव ने मुस्कुराते हुए, उस्सको और अपने पापा को देखते हुए कहा, “नहीं बुसस ऐसे hi मैं संजना को सरप्राइज करना चाहता था तो कार को रास्ते पर hi चोरर कर आया हूँ अभी वापस अंदर करूँगा, कहाँ है वो?” आरव बात करते वक़्त कभी अपने बाप को तो कभी सान्वी के चेहरे में देख रहा था और उस्सको लग रहा था जैसे दोनों उस से कुछ छुपा रहे थे या डर गए थे उसस्के अचानक आने से….
जब आरव ने उतना कहा तो सान्वी ने सिचुएशन को संभालते हुए उसस्के तरफ बढ़ते हुए कहा, “ोफो आरव तुमको नहीं पता के वो अपने पापा के यहाँ गयी हुई है, दीप्ति को भी साथ लगाई है! चलो कार को अंदर करो मैं तुम्हारे लिए कुछ फ्रेश पिने के लिए सर्वे करती हूँ…” और सान्वी मुड़कर चावला साहब को देखते हुए दांतों में जीब दबाती है…..
आरव ने कहा, “okay तो फिर मैं भी चला जाता हूँ उस्सको वही सरप्राइज देने….” तब संवी ने कहा, “अरे तो वो तो अपनी कार में गयी है और तुम अपने कार में जाओगे, वो थोड़ी देर में आने hi वाली है वापस, हो सकता है जब तुम वहां पहुंचो तो वो निकल गयी होगी, यहीं वेट करो नाह उस्का!” तब आरव ने कहा “okay तो फिर ठीक है मैं कार अंदर करता हूँ भाबी!” और वो चला गया कार को गेराज में अंदर करने को.
तब सान्वी ने धीरे से चावला साहब के तरफ बढ़ते हुए कहा, “ओह माय गॉड पता नहीं उस्सने किआ देखा और कैसे देखा हम दोनों को! पता नहीं कब से आया हुआ था?! मुझे घबराहट हो रही है!”
चावला साहब ने सान्वी को समझाते हुए और हौसला देते हुए कहा, “उसस्के बातों से बिल्कुल नहीं लगता के उस्सने कुछ ऐसा वैसा देखा, उल्टा हम दोनों उस्सको शक कराएंगे अगर हम ऐसे घबराये तो, उसस्के साथ बिल्कुल नार्मल बेहवे करो जैसे कुछ एब्नार्मल नहीं हुआ, उस से बातें करो मामूली तौर से और अगर कुछ देखा है तो खुद तुमसे कोई नाह कोई वैसा सवाल करेगा…. मैं भी घबरा गया अचानक उस्सकी आवाज़ पीछे सुनके, और मेरी समझ में नहीं आया के मैं उस्सको किआ कहूं…. हम सोच रहे थे हम घर में अकेले हैं इस लिए हम बिल्कुल खुलके एक दूसरे के साथ थे, ऐसा आज पहली बार हुआ, लगता के आज के बाद उस किचन के दरवाज़े को दिन में भी लॉक करना पड़ेगा नहीं तो एक दिन हम फंस सकते हैं!!”
तब सान्वी ने पूछा, “अगर उस्सने कुछ ज़्यादा देखा होगा जब मैं आप को चुम रही थी या जब आप मेरे जिस्म पर हाथ फेरर रहे थे और वो मुझसे कहे के उस्सने मुझको आप को किश करते हुए देखा तो किआ जवाब दूंगी आप बताइये?!”
चावला साहब ने कहा, “ऐसा कुछ नहीं पूछेगा वो मेरा यकीन करो, पूछना होता तो अभी इसी वक़्त पूछता, हैरान होता, उसस्के चेहरे का रंग बदल गया होता, या वो छुप कर और ज़्यादा देखने की कोशिश करता… उस्सने कुछ भी नहीं देखा मेरा यकीन करो तुम… और अगर उस्सने ऐसा कुछ कहा भी तब मेरे पास आना तुरंत उस्सको जवाब दिए बिना, तब मैं उस से बात करूँगा!”
सान्वी ने पूछा, “किआ बात करोगे तब आप उस से? बोलिये? उस्सको बताओगे के हमारे बीच ऐसा सम्बन्ध है? किआ सोचेगा वो मेरे बारे में तब के मैं एक गन्दी बहु हूँ आप की? हैं? बोलिये नाह!”
चावला साहब ने कहा, “आरी तुम इतना फ़िक्र क्यों कर रही हो जब कुछ हुआ hi नहीं? उस्सने तो कुछ नहीं पूछा अभी नाह? अगर वो पूछेगा तबकी तब देखेंगे अभी फ़िक्र करना बांध करो, देखो वो कार गेराज के अंदर कर चूका है अब अंदर आएगा जाओ तुम उस्सको कुछ खाने पिने को दो और पूछना कैसे आज इतना जल्दी आगया और विवान कब आएगा पूछो उस से!! जाओ जाओ!!”
सान्वी चली गयी किचन में और आरव का वेट किया और जब वो वापस अंदर आया तो सान्वी ने एक गहरी सांस लेते हुए, चावला साहब के तरफ एक बार देख कर आरव से कहा, “तो साहब आज इतनी जल्दी कैसे आगये हम्म? तुम्हारा भैया कब आएगा आज? वो भी आ रहे हैं?”
आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, “आरी भाबी शादी जो कर लिया है अब तो जल्दी आना पढता है नाह? भैया भी तो ऐसे hi जल्दी आया करता था जब आप की नयी नयी शादी हुई थी याद है? हम्म मुझे तो सब याद है हेहेहे!” तब सान्वी को तस्सली हुई के शायद आरव ने उस्सको चावला साहब के ज़्यादा करीब नहीं देखा और कहा, “चल झूटा, तेरे भैया तो सिर्फ शादी के पहले हफ्ते अर्ली आये थे बाकी तो वो हमेशा देर रात को hi आते हैं!”
आरव जल्दी से ऊपर अपने कमरे में गया चेंज किया और एक टीशर्ट और शार्ट में वापस निचे आया और सान्वी के पास बैठ कर गप्पे मारने लगा अपने भाबी के साथ. चावला साहब लाउन्ज में व्हिस्की पिटे हुए दोनों के तरफ देख रहे थे और कभी कभी सान्वी उनके तरफ देखते हुए आरव से बातें किये जा रही थी. चावला साहब को सुनाई तो नहीं दे रहा था के किआ बातें हो रहे थे दोनों में मगर उस्सको दिख गया के सब नार्मल है आरव ने कुछ नहीं देखा था उन् दोनों के बीच.
तो बे कॉन्टिनोएड…………….