अपडेट 145 संजना ास्क्स अबाउट हेर मदर
चावला साहब का हाथ संजना के जिस्म पर फरने लगे, लाड टपकने लगे थे दोनों के मुंह से, एक अजीब सी कशिश थी, एक प्यास जैसी थी दोनों के बीच, एक डर भी था, एक खूफ जैसा भी फील हो रहा था, लगता था दोनों उस तरह से किश करते हुए उस डर और खूफ को मिटाने की कोशिश में लगे हुए थे….. उस वक़्त सेक्स की भूक तो नहीं थी मगर दोनों के जिस्म एक दूसरे के जिस्म में घुलना चाहते थे किसी भी तरह, जल्द hi दोनों हांफने लगे और अचानक दोनों के ेंखों से ेंसुओं का धार बहना शुरू हुआ…… दोनों एक दूसरे को बाहों में भर कर ज़ोरों से रोने लगे, कसके पकड़े हुए थे दोनों एक दूसरे को और दो छोटे बच्चों की तरह ज़ोरों से फुट फुट कर रोने लगे…..
और कुछ देर बाद अपने ेंखों को पोंछते हुए संजन ा ने कहा,
“पापा किल तहत बास्टर्ड!! किल हिम नाउ!”
अब आगे…….
जब संजना ने वो बात कही तो चावला साहब हैरान संजना के चेहरे में देखते हुए सोचा के संजना ग़ुस्से में हैं आनंद के व्योहार को लेकर इसी लिए उस्सने ऐसा कहा और उस्सको और भी ज़ोर से बाहों में कसके कहा,
“No स्वीटहार्ट, ऐसा नहीं कहते. उस्सने तुमको पाल पास कर बड़ा किया है. उस्सने दूसरी शादी नहीं की. उस्सने तुम्हारा ख्याल रखा, कैसे भी हो पालने वाला जनम देने वाला से बड़ा होता है, याद rakhna…abhi उस्सको पैसों की ज़रुरत है इसी लिए वो भाउक्ला गया है, मेरे ख्याल से वो पछतायेगा और माफ़ी मांगेगा…. कुछ दिनों उस्सको उस्सकी हालत पर चोरर देते हैं तब सोचेंगे किआ करना है, कैसे इस मामले को निपटना है….. तुम ज़्यादा मत सोचो इस बारे में अभी!”
संजना: “no आप उस्सको नहीं जानते, मैं उस्सको बहोत अछि तरह से पहचानती हूँ आखिर मेरा बाप था नाह वो? उसस्के राग राग से वाकिफ हूँ मैं. वो बहोत लालची है और कुछ भी कर सकता है….. वो सच में आप के ऑफिस या घर आकर सबको सब कुछ बता सकता है वो है वैसा आप मेरा यकीन करो!”
चावला साहब कुछ ख्यालों में फिर गम हो गए थे संजना को वैसे hi बाहों में भरे हुए और संजना ने उसस्के चेहरे में देखते हुए कहा,
“अब किआ हुआ? किश सोच में डूबे हुए हो आप?!”
चावला साहब के ेंखों से बहते हुए ेंसुओं को देख कर संजना ने उससे पोंछते हुए फिर से सवाल किया तो चावला साहब संजना के गाल को चूमते हुए सिसकते आवाज़ में कहा,
“तुम मेरी बेटी हो और किआ किआ किया मैं ने तुम्हारे साथ, धित्कार है मुझ पर!”
संजना ने बड़े आराम से कहा,
“ोफो पापा तो किआ हुआ? हम अपने रिश्ते को वैसा hi रखेंगे…. हम दोनों के बीच कोई चेंज नहीं होने वाला, ी लव यू. ी रियली लव यू…. अब पापा बुला रही हूँ आप को, फिर भी मेरे अंग अंग आप को चाहता है मैं चाहती हूँ के हम दोनों के बीच सब कुछ वैसा hi बना रहे जैसे पहले था……. आप क्यों उल्टा सोचने लगे अब? मुझे कोई फरक नहीं पड़ता रिश्ता पहचान कर, आप प्लीज अब मुझसे कहीं दूर मत होना मैं सेहेन नहीं कर पाऊँगी…….”
चावला साहब हैरानी से संजना के चेहरे में घूर्णे लगे और संजना ने कहा, “चलो हम उस पार्क में चलते हैं जहाँ आप गए थे उस बार जब मैं ड्राइविंग सीखने गयी थी…. वहां आराम से खुली हवा में बात karenge…chaliye नाह पापा!!”
और चावला साहब ने फिर कार स्टार्ट किया और दोनों उस पार्क में पहुंचे और एक बेंच पर बैठकर एक दूसरे को बाहों में लिए, संजना ने चावला साहब के गालों पर हलके से हाथ फरते हुए कहा,
“देखिये, मैं इतने दिनों से उस्सको अपने पापा समझ कर अपने साथ सेक्स करने दे रही थी है नाह? तो मतलब मैं अपने पापा के साथ शारीरिक सम्बन्ध रखती थी okay? तो बिल्कुल वैसे hi आप के साथ वही रिलेशनशिप क्यों नहीं रख सकती? आईटी इस थे शामे नाह? आप मेरे ससुर भी हो और पापा भी तवो इन ओने हीहीहीहीहीही!!”
चावला साहब ने संजना को अपने सीने पर दबाते हुए सोचा के संजना कितनी स्ट्रांग है के ऐसे मुश्किल हालात में भी वो कितनी आसानी से यह बातें कह गयी….
अस्सल में बात यह थी के संजना का प्यार इतना स्ट्रांग था चावला साहब के लिए के वो उस प्यार को खोना नहीं चाहती थी, चाहे ग़लत हो मगर उसस्के लिए चावला साहब के करीब रहना, उसस्के आग़ोश में रहना, उस से प्यार करना और उंनका प्यार पाना बहोत ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट था, तो संजना इस लिए उस रिश्ते को वैसा hi कायम रखना चाहती थी हमेशा के लिए. वो नहीं चाहती थी के अब बाप बेटी बन कर सिर्फ बाप बेटी की तरह रहे, वो चाहती थी के शारीरिक सम्बन्ध वैसे hi बरकरार रहे जैसे शुरू से थी दोनों में… क्यूंकि उन् दोनों में शुरुवात तो आकर्षित होने से hi हुआ था, दोनों एक दूसरे के तरफ सेक्सुअली hi अत्त्रक्ट हुए थे, और संजना की जिस्म को यह मंज़ूर नहीं था के वो चावला साहब के जिस्म से अलग रहे….. क्यूंकि शुरुवात हो चुकी थी अब उस्सको रोकना नामुमकिन था संजना के लिए…… फिर संजना ने कहा,
“अभी अभी हम दोनों ने कार में कितने पशनातेली किश किया नाह? हम्म किया के नहीं? तो वो किआ था? सब कुछ जान्ने के बावजूद हम ने क्यों और कैसे एक दूसरे को उस तरह से इतना पशनातेली किश किया? हालां के हमको पता चल गया के हम बाप बेटी हैं फिर भी हम ने एक दूसरे को क्यों वैसे किश किया मुंह में जीब चूस्ते हुए? यह हम दोनों की बॉडी की मांग थी नाह पापा? हम अब इस्को रोक नहीं सकते हैं…. यह अपने आप होता रहेगा, वे फील अत्त्रक्टेड तो एच इतर, आवर बॉडी नीड तो गेट मेल्टेड ईंटो एच इतर इतस आवर नीड, हमारी ज़रुरत बन चुकी है यह….. मैं तो नहीं रोक पाऊँगी खुद को, किआ आप रह पाओगे मुझसे सेक्स किये बिना?”
इतना कहा और दोनों फिर एक दूसरे को पशनातेली किश करने लगे एक दूसरे को ज़ोर से बाहों में भर कर…. तो साबित हो गया के यह दोनों तो जुड़ा नहीं हो सकते हालां के दोनों को पता चल गया के दोनों बाप बेटी हैं!
किश के दौरान चावला साहब का हाथ संजना के बूब्स को प्रेस किया तो संजना ने उनके हाथ को अपने बूब पर दबाते हुए किश रोकते हुए कहा, “हम्म्म देखा नाह? आप को भी चाहिए नाह पापा? आप का हाथ मेरे बूब पर क्यों गए अपने आप? बाप कभी बेटी की बूब दबाता है किआ? हीहीहीही!!! यह हम नहीं रोक सकते अब पापा, इस्को ऐसे hi चालू रखेंगे हम okay?!!” चावला साहब मुस्कुराया और कहा, “तुम बहोत स्ट्रांग हो के ऐसे हालत में भी सब कुछ इतना ैसिलय ले लेते हो, ी ऍम प्राउड ऑफ़ यू! हालात का ऐसे hi सामना करते हैं डार्लिंग, ी ऍम रियली प्राउड ऑफ़ यू माय लव.”
और संजना ने अपने सर को उनके सीने पर रख कर आराम से पूछा, तो किआ आप डीएनए टेस्ट करवाओगे?” तो चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “उस्सकी ज़रुरत नहीं क्यूंकि वो सच कह रहा था…” तो संजना ने उनके सीने पर अपने उँगलियों को फरते हुए पूछा,
“आप मम्मी से प्यार करते थे? अब मुझे आप के और उन् के बारे में बताओ…. वो भी बहोत हॉट और सेक्सी थी नाह? वो आप से बहोत एन्जॉय करती होगी नाह? मेरी तरह? मैं उसी पर गयी हूँ किआ सच में? वो कह रहा था कुछ देर pehle…ab आप बताओ अपना वर्शन मुझे प्लीज, ी वांट तो हेअर!”
चावला साहब ऊपर आसमान को देखते हुए, थोड़ा मुस्कुराते हुए बीते दिनों को याद करते हुए कहा,
“हम्म्म प्यार हो गया था तेरी मम्मी से उन् दिनों…. बेबी मैं वैसा बिल्कुल नहीं था, मेरा बहोत इज़त था गाओं में, मैं किसी के तरफ देखता भी नहीं था, लोग मेरा इज़त करते थे, हमारा बड़ा नाम था, मेरे दादा पर दादा के ज़माने से हम ज़मींदार थे और सेंकरों लोगों के घर चलता था हमारे यहाँ काम करके….. तेरी मम्मी सच में बेहद खूबसूरत और अच्छी थी…. उन् दिनों तेरे पापा, मतलब आनंद का एक ऑपरेशन होने वाला था और वो अपने फुफु के यहाँ गया हुआ था किसी दूर के शहर में क्यूंकि इस शहर में तब हॉस्पिटल नहीं था, वो दूर के शहर गया हुआ था कोई 3 या 4 महीनों के लिए. वहीँ से ट्रीटमेंट करता था और हॉस्पिटल में एडमिट हुआ था. तब वह लोग हमारे गाओं में एक छोटी सी झौंपड़ी जैसे मकान में रहते थे. जब आनंद की शादी हुई थी तभी मैं ने कहा था के उस्सकी पत्नी इतनी खूबसूरत है के लगता था कोमल के फूल कीचड़ में आ गयी है, तेरा पापा उसस्के लायक बिल्कुल भी नहीं था, पता नहीं किश ने उन् दोनों की बात चलाई थी के आनंद को वो मिल गयी थी….”
संजना बहोत ध्यान से सुन रही थी और पूछा, “तो किआ आप तभी से मम्मी को चाहने लगे थे जब वो शादी करके आयी थी आप के गाओं में?”
चावला साहब ने रिप्लाई किया, “अरे नहीं बिल्कुल भी नहीं – वो तो हर किसी के जुबां पर एहि बात थी के इस लंगूर के हाथ कैसे चाँद का टुकड़ा लग गया….. बात तो तब शुरू हुई जब आनंद ने उस्सको अकेला चोर्रा और अपने फुफु के शहर चला गया उस ऑपरेशन के लिए…. तो मुझे उस्का तनख्वा देने जाना पड़ा तेरी मम्मी को नाह! तब हमारी पहली मुलाक़ात हुई और बात चित…. गाओं के औरतें उन् दिनों गाओं के ट्रेडिशनल ड्रेस पेहेनते थे जो केवल एक टॉप और एक स्कर्ट जैसा होता था और उस में तेरी मम्मी इतनी खूबसूरत दिखती थी के किआ बताऊँ मैं तुमको….. वो बहोत hi गोरी थी, उस्सकी कमर का रंग और टांगों और जाँघों के रंग सीधे मेरे ेंखों में समा गए जिस वक़्त मैं ने उस्सको अपने आँगन में देखा उस रोज़…. अब क्यूंकि आनंद गाओं में नहीं था और वो अकेली थी तो कुछ जवान मर्द उसस्के घर के इर्द गिर्द घुमा करते थे मौके के तलाश में थे उस्सको पाने के liye….wo भी जवान अकेली औरत थी और इतनी हॉट थी के कोई भी उसस्के तरफ आकर्षित हो जाता tha….mujhko बाद में पता चला के कुछ लोग और उसस्के पीछे लगे हुए थे उन् दिनों मगर जब मेरा आना जाना हुआ वहां तो सब ग़ायब हो गए….”
संजना की इंटरेस्ट और ज़्यादा बढ़ने लगी अपनी मम्मी के बारे में सुनकर और दिलचस्पी से कहा चावला साहब के चेहरे को चूमते हुए, “हीहीहीहीही, आप मुझे मम्मी से अपनी पहली रोमांटिक एनकाउंटर बताओ नाह, आप कैसे उसस्के करीब गए, उस्सने कैसे आप को करीब आने दिया सब कुछ डिटेल में बताओ नाह मुझे प्लीज, किआ वो भी आप से मेरी तरह प्यार करने लगी थी? किआ वो हिचकिचाई थी या आसानी से आप के बाहों में आगयी थी, सब बताओ नाह मुझे ी वांट तो क्नोव आल इन डिटेल्स….. आप दोनों ने खूब मज़े लुटे होंगे नाह?”
तो बे कॉन्टिनोएड…….