Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 19 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

मेरे थ्रेड पर अपना पहला पोस्ट करने के लिए बहोत बहोत शुक्रिया भाई. हार्दिक स्वागत है तुम्हारा दोस्त. मुझे भी बहोत ख़ुशी हुई तुमको यहाँ देखकर. तुम मेरेक्सप वाले रीडर्स में एक हो और कुछ एकांत ने ज्वाइन किये यहाँ .... बाकी के दोस्तों को ढूंढ hi रहा हूँ, कितनों को ईमेल किये मगर सबके ईमेल चेंज हुए हैं :डोह:

थैंक्स वैरी मच भाई. कहानी पढ़ते हुए रिप्लाई भी करते चलना यारा
 
अपडेट 140 संजना एंड सान्वी टुगेदर

“आरव के साथ भी एन्जॉय करती हो नाह? तुम दोनों में खूब मज़ा होता है नाह भाबी? मुझसे तो मत छुपाना मुझे पता चल चूका है और मुझे कोई ओब्जेक्शन्स नहीं है बुसस इतना बता दो के कब से, हमारी शादी से पहले यह शादी के बाद से?!!

अब आगे….

यह सब कहते हुए संजना के हाथ सान्वी के बूब्स दबा चुके थे और उसस्के होंठ सान्वी के गर्दन पर चूमते हुए फेरर रहे थे जिस से सान्वी के रोवाण रोवाण खड़े हो गए थे. सान्वी के समझ में नहीं ारः था के किआ जवाब दें संजना को, उस्सको सब कुछ सच सच बता दे या बात छुपाये उस से. मगर सान्वी ने सोचा के संजना बहोत तेज़ लड़की है उस से बात छुपाना आसान नहीं और झूट बोलकर सान्वी उसस्के नज़रों में गिरना नहीं पसंद करती थी, वैसे सान्वी ने यह भी सोचा के जब संजना को कोई ऑब्जेक्शन नहीं तो उस्सको बेहतर है सब कुछ सच बताना.

और फिर सान्वी ने यह भी सोचा के उसस्के और संजना के बीच एक सेक्सुअल बॉन्डिंग भी हो चुकी है, दोनों एक दूसरे को बहोत पसंद करते है तो क्यों झूट बोलना उस से! संजना वैसी लड़की नहीं थी के एक सेक्सुअल रिलेशनशिप के लिए कोई तमाशा करे, वो खुद एन्जॉय करती ऐसे रिलेशनशिप को लेकर तो सान्वी ने सब कुछ सच बताने को सोचा संजना को.

सान्वी ने संजना के हाथ पाकर कर उस्सको अपने रूम में लगायी और बिठा कर बात बताना शुरू किया. संजना को सब कुछ डिटेल में समझाया सान्वी ने के कबसे आरव उसस्के साथ इंटरेस्टेड था और यूनिवर्सिटी के दिनों को किश तरह से दोनों में एक टाइप का झगड़ा भी हो गया था और फिर दोनों के बीच एक कोल्ड वॉर जैसा हो गया फिर दूरी हो गयी थी और अब उसस्के शादी के बाद आरव फिर से उसस्के तरफ झुकने लगा और किश तरह से अब पहली बार दोनों के बीच एक सेक्सुअल एनकाउंटर हुआ.

संजना ने कहा,

“धत! और मैं सोच रही थी के बरसों से आप दोनों में यह रिश्ता है, मगर आज पहली बार हुआ आप दोनों के बीच? किआ भाबी? आप इतने सालों से उसस्के साथ एन्जॉय कर सकती थी तो क्यों नहीं किया किश ने रोका था आप को? आप जवान हो वो आप से भी जवान ज़िन्दगी को खूब एन्जॉय करना चाहिए था नाह? जवानी सिर्फ कुछ दिनों के लिए होती है, कब एन्जॉय करोगी बूढी होने के बाद यह सब मौका हाथ से निकल जाता है!”

सान्वी मुस्कुराते हुए संजना को देखती जा रही थी और कहा,

“तुम कैसे इतनी आसानी से यह सब कह गयी ऋ? तुझे कुछ नहीं होता ग़ैर मर्दों के साथ सेक्स करने से?!”

संजना: “क्यों कुछ होना चाहिए भाबी? सब मर्द एक जैसे होते हैं. सब के पास एक लौड़ा होता है और सब उस्सको हमारे अंदर डालना चाहते हैं और हम भी उस्सको अपने अंदर लेना चाहते हैं, बुसस उस्सको फील करना और पसंद करना होता है, कोई पसंद आ जाए तो इस में हर्ज hi किआ है एन्जॉय करने को?! मेरे लिए तो लाइफ एन्जॉय करने के लिए है वो चाहे कैसे भी हो बुसस एन्जॉय करो और मस्त रहो और किआ!”

उस वक़्त दोनों बीएड पर लेते हुए थे और संजना ने सान्वी को ज़ोर से बाहों में भरके किश करने लगी और संवी ने भी संजना को जाकर लिया और दोनों एक दूसरे को चूमने चाटने लगे…. उस में संजना बहोत ज़्यादा हॉर्नी लग रही थी और वो सान्वी के ऊपर चढ़ गयी और उसस्के मुंह के अंदर अपने जीब डाला जिस्सको सान्वी ने ले लिया चुस्सने को और आहिस्ते आहिस्ते संजना ने सान्वी की पल्लू को हत्ता दिया और उसस्के चूचियों को मसलने लगी और हलके से उस्सकी ब्रा को खोल डाला फिर सान्वी के बूब्स चुस्सने लगी और सान्वी कसमसाने लगी संजना के निचे……

कुछ देर उस्सको बूब्स सूचक करने के बाद संजना सान्वी के पथ चाटती गयी और निचे के तरफ उसस्के नबी को लीक करती गयी और उस्सकी पेट्टी कोट को निचे करते हुए उस्सकी पंतय भी निचे करने लगी और उस्सकी छूट को लीक करने लगी संजना जबकि सान्वी अपने ेंखों को मोठे मोटे खोलके चाट देख रही थी गहरी सांसें लेते हुए…. और संजना ने कहा,

“मुझे भी आप से प्यार हो गया है तो आरव और चावला जी को क्यों नहीं होगा? आप को hi सेक्स एन्जॉय करने के काबिलो, इतनी हसीं बॉडी है, आप की अदाएं इतने कमाल की है के कोई भी आप के साथ सेक्स करने के लिए मचल सकता है सान्वी बहजबी… बड़ा मज़ा अत है आप के साथ!!”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए एक नटखटी ऐडा में कहा, “चल कामिनी, तुझे एक लड़का होना चाहिए था तू लड़की कैसे बन गयी!” और उस पर संजना ज़ोर से हंसी और सान्वी की पंतय को पूरा बाहर निकल कर उसस्के टांगों को फैला कर अपने सर को उसस्के जाँघों के बीच दाल कर सान्वी की रस को चाटने चुस्सने लगी!

तो सान्वी की तड़पती आवाज़ निकली, “ओह माय गॉड, किआ कर रही है तू ऋ, मुझको गिला कर दिया उफ़ बुसस कर नाह संजना उफ़ मेरी माँ!”

संजना ने अपने दो उँगलियों को सान्वी के चढ़ के अंदर घुसेड़ते हुए कहा, “आप एक बहोत hi हॉट और सेंसुअल लेडी हो भाबी, कोई भी मर्द आप को ऐसी लेता पसंद करेगा इसी लिए तो चावला जी फ़िदा हुए हैं आप पर तो आरव क्यों नहीं होगा, आप की फिगर, आप की बॉडी आप की अदाएं कमाल के हैं, आप की नज़ायकाट जान लेवा है तो मैं कैसे खुद को सम्भालूंगी? मुझे भी आप से इश्क हो गया है भाबी सान्वी भाबी….. आप बुसस एन्जॉय करो नाह भाबी, ऐसे मौके बार बार थोड़े hi आते हैं!”

सान्वी संजना के सर को अपने हाथों में थामे हुए सिसकारियां लेते हुए तड़पती जा रही थी और संजना उस्सको वो ख़ुशी देने लगी थी जिस्सकी पहचान सान्वी को पहली बार हो रहे थे…. लास्ट बार तो चावला साहब साथ थे तब संजना ने सान्वी के साथ सेक्सुअल एनकाउंटर किया था मतलब थ्रीसम हुआ था मगर आज पहग्ली बार सान्वी अपनी ज़िन्दगी में अकेली एक औरत के साथ थी और एक और एक संजना जैसी जवान और खूबसूरत औरत से उत्तेजित हो रही थी. यह संवी के ज़िन्दगी में कब्जिओ भी नहीं हुआ था इस से पहले.

अपनी तड़पती आवाज़ में hi सान्वी ने कहाँरते हुए कहा,

“तू किआ मेरी जिस्म को पसंद करती है तो मुझे किआ तुमसे प्यार नहीं है संजना? मुझे भी तो तेरी जिस्म बहोत पसंद है, अपने कपडे भी उतार नाह, मुझे भी तेरी जिस्म को चुस्सने चाटने दे अब, मुझे भी तुझे छूने का मैं कर रहा है ri…chal कपडे उतार अपने भी, फटाफट कर नाह….!”

और दोनों ने एक पल में अपने अपने कपडे बहोत hi रफ़्तार से उतारे और दोनों नंगी जवान औरतें बिस्तर पर पाए गए एक दूसरे के जिस्म को मसलते, चूस्ते चाटते हुए!

69 पोज़ किया दोनों ने, सान्वी का मुंह संजना की छूट चाट रही थी और संजना सान्वी की रस निकाल रही थी अपने पतली पतली उँगलियों से उस्सकी छूट को खुरदते हुए…. उस दौरान दोनों की सिसकारियों से कर्मा गूंझ रहा था और उनको ख्याल hi नहीं था के आरव और दीप्ति घर में दाखिल हो चुके थे…..

आरव ने कमरे से कुछ आवाज़ें सुनते हुए दीप्ति को गॉड में लिए आहिस्ते आहिस्ते कमरे के तरफ बढ़ने लगे दीप्ति को खामोश रहने का इशारा karke…donon बिल्कुल चोरों की तरह कमरे के तरफ ऊपर चढ़ रहे थे…..

कमरे के पास आकर आरव ने कमरे के दरवाज़े से कान लगाया और एक नॉक किया बिना कोई आवाज़ किये तो धडपडाते हुए संजना झट से बिस्तर से निकल के अपने कपडे लेने लगे और आरव ने दरवाज़ा खोलने की कोशिश किया तो अंदर से लॉक्ड पाया दरवाज़े को और दीप्ति ने ज़ोर से आवाज़ दिया, “मम्मी, चाची आप ने दरवाज़ा क्यों लॉक किया है? आप लोग किआ कर रहे हो अंदर?!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……..
 
डिअर फ्रेंड्स, फंस, रीडर्स, ी सिंकेरेली अपोलोगइसे फॉर थे इनकन्वेनियंसेस कौसड़ बी थिस लॉन्ग डिले.

ी नेवर विशद थिस तो हैपन, बूत हु कैन हैवे कण्ट्रोल ओवर nature's हिट.

ा फॅमिली मेंबर देकैसेड, (माय एल्डर बरोथेर) एंड आफ्टर हिम, ी बीइंग थे एल्डर नाउ गोत तो बेयर ा लोट फ्रॉम फॅमिली मेंबर्स तो ुन्देरगो थे रितेश एंड ऋतुअल्स फॉर 40 कोनसेक्युटिवे डेज एंड नाइट्स व्हिच हद बीन तू time-consuming एंड स्ट्रेस्फुल.

बूत थैंक्स गॉड नाउ आल अरे ओवर एंड हेरे ऍम ी बैक तो व्रिठे एंड कम्पलीट थे रनिंग स्टोरीज हेरे.

ी ऍम एक्सट्रेमेली सॉरी फॉर थे लाटेनेस्स डिअर फ्रेंड्स.

ी नेवर वांटेड थिस तो हैपन, ी हद थॉट तो कीप ों गोइंग non-stop टिल ी एन्ड थिस स्टोरी, बूत फाटे वांटेड आईटी तो हैवे ा ब्रेक व्हिच हप्पेनेड उनेक्सपेक्टेद्ली.

सो हेरे यू जो गाइस, ी जस्ट स्टार्टेड विथ थे राइटिंग ऑफ़ थे नेक्स्ट अपडेट ऑफ़ थिस थ्रेड व्हिच विल बे हेरे आफ्टर ा फ्यू हॉर्स.

विल थें व्रिठे एंड पोस्ट उपदटेस ों सरजू एंड इनोसेंट वाइफ व्हिच इस किंग तो इतस एन्ड सून.

थैंक्स आल ऑफ़ यू फॉर योर सपोर्ट एंड पेशेंस एंड लव माय डिअर फ्रेंड्स.
 
अपडेट 141 आरव टैक्स सान्वी अगेन

उस दिन आरव को कुछ पता नहीं चला क्यूंकि, जल्दी से दोनों महिलाएं कपडे पेहेन कर उसस्के सामने आये यह बहाना करते हुए के सान्वी के कमर में दर्द था तो संजना उस्सकी मस्सगे कर रही थी.

उसस्के बाद कुछ ख़ास नहीं हुआ. सब घर पर hi थे मगर संजना और आरव अपने कमरे में थे और सान्वी दीप्ति के साथ किचन में चली गयी थी. सान्वी के मैं में सिर्फ वो मंज़र घूम रहा था जो उस ने संजना के साथ गुज़ारे थे कमरे के अंदर और वो उत्तेजित हो रही थी और उस्सको अपने शरीर की प्यास बुझाने की ज़रुरत पड़ने लगी थी. मगर उस वक़्त वो लाचार थी. कुछ भी नहीं था उस वक़्त खुद की प्यास बुझाने के लिए, आरव बिजी था और चावला साहब ग़ायब.

संजना आरव के साथ अपने कमरे में बीएड पर लेते हुए बातें कर रहे थे और संजना ने आरव से कहा,

“आज पापा ने एक अजीब बात कहे हैं मुझे!”

आरव ने हैरानी से पूछा, “ऐसा किआ कह दिया तुम्हारे पापा ने भला?”

“उस्सने तुम्हारे पापा को ुरगेंटली बुलाया है और मुझे भी मगर तुमको नहीं, कुछ ख़ास बातें करनी है उससे हम दोनों से उस ने कहा!”

आरव: “तो इस में किआ है? चली जाना उस से मिलने पापा के साथ कल!”

संजना अपने मैं में यह सोचते हुए के दोनों ससुर और बाप मिलकर उस्सको छोड़ना चाहैंगुए शायद इसी लिए उसस्के पापा ने बुलाया है दोनों को एक साथ मगर यह तो वो आरव को नहीं बता सकती थी और मैं hi मैं वो गरम होने लगी थी दोनों मर्दों के बीच अपनी शरीर को पाते हुए ख्यालों में. और यह बात संजना ने सान्वी को भी बताना भूल गयी थी.

सान्वी कुछ देर बाद लाउन्ज में काउच पर बैठी, दीप्ति को गेम्स देकर सोच में डूबे सोचने लगी खुद से बड़बड़ाते हुए;

“कमाल है, आरव के साथ भी मैं ने सेक्स कर लिया, और हैरानी की बात है के उस्सकी पत्नी के साथ भी बाप रे, मैं किआ बन गयी हूँ अब?! ससुर के साथ, देवर के साथ अब उसस्के पत्नी के साथ भी!! मैं तो ऐसी बिल्कुल नहीं थी….. ये सब कैसे और क्यों हो गया?! यह सब इस संजना की वजह से हुआ है, बहोत हॉट और सेंसुअल है वो, सब उस्सको पसंद करते हैं….. इतने सालों से आरव चाहते हुए भी मुझसे कुछ नहीं कर पाया था और जबसे यह संजना उस्सकी लाइफ में आयी आरव का भी हौसला बढ़ गया मेरे ज़्यादा करीब आने का और मेरे साथ सोने का, चावला जी ने सही कहा था उस दिन!… संजना में कोई मैगनेट है किआ जो कोई भी उसस्के पास जाती है तो दूसरी औरतों को भी पा लेते हैं?! ससुर ने भी तो संजना से सेक्स करने के बाद hi मुझसे किया! वार्ना सिर्फ झपटा झपटी थे उनके साथ!! मगर एक बात है, विवान क्यों संजना के तरफ नहीं आकर्षित होता? किआ विवान ने कभी संजना को उस नज़र से देखा है कभी? आज विवान से बात करुँगी, पूछूँगी के उस्सको संजना किसी लगती है और उस्का किआ ख्याल है संजना के बारे में!”

यह सब सोचते हुए सान्वी की ेंख लग गयी, और आरव निचे आया जब संजना शावर ले रही थी तो देखा सान्वी कितनी प्यारी लग रही है काउच पर लेती हुई. उस्सने दीप्ति को इशारे से छुप रहने को कहा और धीरे से सान्वी की गर्दन पर अपना जीब चलाया जिस से चिहुंक कर सान्वी झपट कर उठ बैठी. और झट से आरव को बाहों में भरके चूमने लगी दीप्ति के सामने और दीप्ति खीखीखी हंससने लगी नज़रें चुरा कर देखते हुए दोनों को. – ऐसा दीप्ति के सामने बहोत बार हुआ है जब सान्वी और आरव एक दूसरे को किश या प्यार कर रहे हों…. इस लिए तो संजना ने दीप्ति को बेहला फुसला कर सब कुछ पता लगा लिया था इन् दोनों के बारे में.

आरव ने सान्वी का हाथ पाकर कर उस्सको खींचते हुए चावला साहब के कमरे में लगाया और खड़े पोजीशन में उस्सको दीवार से चिपका कर किश करने लगा उस्सकी साडी की पल्लू को निचे करके हाथ से उसस्के बूब्स को मसलते हुए. सान्वी बार बार फुसफुसा रही थी, “ोफो संजना आजायेगी, चोर्रो किआ कर रहे हो, चोर्रो नाह आरव!” मगर आरव ने उस्सकी ब्लाउज के कुछ बटन्स खोल दिया था और सान्वी का एक बूब उसस्के मुंह में था जिस्सको आरव चुस्सने लगा था दूसरे बूब को दबाते हुए. और अपना कमर को सान्वी के पथ की निचे दबाते जा रहा था कस्सके अपने तन्ने हुए लुंड को रगड़ते हुए कपडे के अंदर से hi….. सान्वी बाहर झांके की कोशिश कर रही थी के कहीं दीप्ति या संजना नज़र ना आये, और तब तक आरव ने झुक कर सान्वी की साडी और लंहगे को ऊपर उठाया और उसस्के जाँघों पर अपना एक हाथ फरते हुए ऊपर उस्सकी पंतय तक किया जिस से सान्वी सिमट गयी और उस्सकी आह निकली.

आरव ने जल्दी से अपनी प्यारी भाबी की पंतय को निचे किया उस्सकी घुटनों तक और झट से अपने ज़िप को निचे करके अपने लुंड को बाहर किया अउ कमर मोड़ कर झुक गया और अपने लुंड को अपनी भाबी की गीली छूट के अंदर थुश दिया. सान्वी की आह निकली और उस्सने आरव को अपने बाहों में भरते हुए दर्री हुई आवाज़ में सिसकारियों के साथ कुछ हांफते हुए कहा,

“उफ़ मेरी माँ! किआ होगा अगर संजना अचानक निचे आगयी तो? तुम कितने बेसब्र हो गए हो आरव!”

उस्सकी छूट के अंदर ढाका देते हुए और कहाणररते हुए आरव ने कहा, “अरे मेरी सेक्सी भाबी, वो नाहा रही है इसी लिए तो एक क्विकी मारने चला आया आप के साथ… मज़ा तो लेलो माय सेक्सी bhabi…aaaaah…. मुझको अपने अंदर गहरायी में फील तो करो नाह bhabi…aah कितना मज़ा ारः है वाओ….. यू अरे सो हॉट भाबी ह्म्म्मम्म्म्म!”

सान्वी उस्सको सुनकर, उसस्के गर्दन को चाटने लगी और उसस्के लुंड को अपने गहराई में फील करते हुए कहा, “और सब मेरे को दे रहे हो तो किआ संजना के साथ कुछ नहीं करेगा तू हँ?!”

धक्कों को तेज़ करते, हांफते हुए आरव ने कहा, “उस्का मूड नहीं है आज कह दिया उस्सने, इसी लिए तो प्यास बुझाने तुम्हारे पा चला आया स्वीटहार्ट….”

और अपने टांगों पर और ज़ोर लगाते हुए आरव ने तड़पती आवाज़ से अपने लुंड को ज़बरदस्त तरीके से और ठुस्सा सान्वी के अंदर जिस से सान्वी की आह ज़ोर से निकली और खुद अपने हाथ को अपने मुंह पर रखते हुए सान्वी ने एक नज़र फिर से बाहर किया तो देखा दीप्ति ने उस्सकी आवाज़ सुनली और उस तरफ देख रही थी अपने गेम खेलते हुए, और आरव झड़ने को आया तो झट से लुंड को बाहर निकाल कर सान्वी के छूट के ऊपर दबाया अपने वीर्य को उस्सकी पथ और जाँघों पर बहाते हुए, और तेज़ी से हांफते हुए सान्वी के जीब को चुस्सने लगा यूँही खड़े हुए पोजीशन में hi सान्वी को दीवार से चिपकाए हुए!! उस वक़्त सान्वी का एक तंग ऊपर था जिस को आरव ने एक हाथ से संभाला हुआ था, मतलब सान्वी एक तंग पर थी जिस दौरान आरव उस्सको छोड़ रहा था उस दीवार से चिपकाये हुए.

सान्वी ने हांफते हुए धीरे से कहा, “अब मेरा तंग चोर्रो मेरा दूसरा तंग दुखने लगा है उफ़!” जब आरव ने तंग को चोर्रा तो सान्वी वहीँ बैठ गयी निचे और आरव ने अपने लुंड को उस्सने मुंह के पास किया जिस्सको सान्वी ने ख़ुशी से अपने मुंह में ले लिया और एक नज़र बाहर दौड़ा कर अपने प्यारे देवर के बचे हुए वीर्य को चुस्सने, चाटने लगी आरव को खुश करते हुए अपने नज़रों को ऊपर उठाकर उसस्के चेहरे में ख़ुशी और सुकून देखते हुए……

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 142 Sanjana’s डैड एक्सप्लोडेस ा बम ों थम!!

दूसरे दिन संजना और चावला साहब तैयार हुए संजना के पापा से मिलने जाने के लिए और वहां पहुंचे.

मोबाइल से संजना ने अपने डैड से कांटेक्ट करके बता दिया था के वह दोनों उस से मिलने को निकला चुके हैं तो वो घर पर वेट कर रहा था.

संजना बहोत hi सेक्सिली ड्रेस्ड थी क्यूंकि वो सोच रही थी के दोनों मिलकर उस से खूब एन्जॉय करेंगे. और जाते वक़्त ड्राइविंग के दौरान चावला साहब और वो एहि बातें करते हुए जा रहे थे, चावला साहब का हाथ पुरे रास्ते संजना के जाँघों को सहलाते रगड़ते हुए गए.

एक दो पेग पीन ेके बाद चावला और आनंद लाउन्ज में बैठे बातें किये जा रहे थे और संजना किचन से आती जाती हुई दिखाई दे रही थी हर बार. कोई दो ःघंटे के बात चीत के बाद आनंद ने संजना को पास बुलाया और चावला साहब से कहा,

“तो अब मैं असली मुद्दे पर राटा हूँ. मालिक मुझे 10 करोड़ रूपए चाहिए और आप को मुझे वो देना hi पड़ेगा!”

यह सुनकर दोनों संजना और चावला को झटका लगा. कुछ देर ख़ामोशी चाह गयी लाउन्ज में, और संजना कभी चावला साहब को तो कभी अपने पापा को देखती. फिर संजना ने उस खामोसी को तोड़ते हुए कहा,

“पापा आप को चढ़ गया है पता नहीं किआ बकने लगे हो आप!”

मगर आनंद ने खड़े होते हुए कहा,

“बिल्कुल नहीं चढ़ा है अभी और मैं जानता हूँ के मैं किआ कह रहा हूँ. – चलो समझाता हूँ बात मैं आप दोनों सुनिए और तुम संजना कुछ मत बोलो चावला साहब को डीडे करने दो!”

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “okay ठीक है बताओ किआ बात है, आराम से बोलो!”

आनंद के कहा, “मेरी कंपनी रेसीवेर्शिप में चला गया है, मुझे फुल तजुर्बा है, आयरन से अल्लिमिनियम में सब तब्दील करना है, मार्किट की पहचान भी है मुझे, सभी क्लाइंट्स, कस्टमर्स के नाम के लिस्ट है मेरे पास, और मैं बहोत बाध्य तरीके से चला पाउँगा, मैं कंपनी को खरीदना चाहता हूँ, मैं भी अब मालिक बनना चाहता हूँ, यह स्टील कंपनी अब मेरी होगी – 100 कोर की कंपनी है 10 कोर में मिल रहा है दिलवाडो मुझे यह कंपनी मालिक! आप के लिए तो 10 करोड़ एक मामूली सी रकम होगी है नाह?!”

यह सुनकर संजना चावला साहब के चेहरे में गंभीरता से देख रही थी मगर सर हिलाते हुए नाह कह रही थी चावला साहब को.

तो चावला साहब ने आनंद से कहा, “अरे तो मैं खुद क्यों नाह खरीद लूँ इस कंपनी को? तुम को मैनेजर बना दूंगा तुमको मैनेजर की तनख्वा मिलेगी, तुम hi चलना, मैं खुद खरीद लेता हूँ नाह इस में कौन सी बड़ी बात है?!”

मगर आनंद ने कहा,

“नहीं मैनेजर नहीं मुझे मालिक बनना है, ी वांट तो बे थे ओनर ऑफ़ थे कंपनी. आप मालिक हो, क्यों और मालिक बनना है आप को? मुझे भी मालिक बनने दो नाह!”

चावला साहब ने कहा,

“ऐसी बात है तो तुम बैंक से लोन अप्पी करो ज़रूर मिलेगा, मैं गारंटी दूंगा!”

आनंद ने थोड़े ग़ुस्से में होते हुए कहा, “साला यह अमीरज़ादे अपने पैसों के बारे में अत है तो क्यों इतनी कंजूसी दिखाने लगते हैं हम्म? किआ आप के पास 10 करोड़ नहीं है? 100 करोड़ से ज़्यादा टर्नओवर है आप की बिज़नेस की और उस में से 10 कोर मुझको नहीं दे सकते? मैं ने तुमको संजना दिया, मज़ा कर वाया इस्सके साथ, बाप बेटे दोनों ने मजा किया मेरी बेटी के साथ, खुद हम दोनों ने भी मजा किया इस्सके साथ इस के बदले एक कंपनी नहीं खरीद सकते मेरे लिए? शरीर शेयर करना मंज़ूर है पैसा नहीं? हैं?!”

यह सुनकर संजना बिच में ज़ोर से बोली, “पापा यह किआ बात कर रहे हो आप? इस में हमारा रिश्ता कहा से आगया भला?!”

आनंद वापस चलकर मेज़ के पास आया, एक पेग बनाया और गिलास हाथ में लिए सिप करते हुए, एक बॉस वाले स्टाइल में कहा, “अली मिली प्याली संजू बेबी, सब रिश्तों के बारे में hi है स्वीटहार्ट. सब लस्ट और सेक्स से hi जुडी हुई है….. अभी अगर चावला साहब ने मुझे 10 करोड़ नहीं दिया तो वो बम फोड़ूंगा के सबके सिटी पित्ती गुल हो jaegi…mujhe अपने प्लान बी पर मत आने दो तुम दोनों…. मुझे बुसस 10 कोर चाहिए बुसस!!”

संजना ने फिर से चावला साहब को देखते हुए कहा,

“पापा शट उप विल यू किआ बक रहे हो आप!! आप को सच में चढ़ गया है!” और संजना चावला साहब के पास बैठ कर उनके बाहों को थाम कर अपने सर को उनके सीने पर रख देती है.! चावला साहब बहोत हैरान आनंद को गिलास सिप करते हुए देख रहे थे. और वो भी खड़े हो गए और कहा,

“अब तुम मुझे ग़ुस्सा दिला रहे हो आनंद, और हाँ बीच में संजना को लेन की कोई ज़रुरत नहीं, हमारे बीच जो कुछ हुआ वो सब हमारे मंज़ूरी से हुई थी, और जो रिश्ता बना है वो हमारे बीच हैं किसी और को नहीं पता और नाह कभी पता होगा. तुम इतना निचे मत गिरो के खुद नाह उठ पाओ! सोचो किआ बकवास कर रहे हो 1करोड़ पाने के लिए. मैं तुमको कोई पैसा नहीं देने वाला. अगर चाहो तो कंपनी मैं खरीद लेता हूँ. मैं बिज़नेस मन हूँ. मुझे पता है कहाँ पैसा लगाना है और किआ करना है…. तुमसे नहीं होगा, सब लुटा डोज तुम!”

आनंद यह सुनकर ज़ोरों से हंससने लगा, काफी देर तक हंस्ता गया और दोनों चावला साहब और संजना उस्सको घुररते रहे.

और काफी हंससने के बाद एक दरिंदे का लुक देते हुए आनंद झुक कर चावला साहब के ेंखों में देखते हुए, होंठ से टपकते हुए लाड में कहा,

“अबे ो मालिक के बचे किआ समझता है तू? सिर्फ तू मालिक बन सकता है? चल अब तेरे खोपड़ी के अंदर की वासना का पर्दा फाष्ट करता हूँ बे चावला!”

संजना ग़ुस्से से लाल होते हुए ज़ोर से चिल्लाई अपने पापा पर यह कहते हुए, “पापा व्हाट थे हेलल इस थिस? आप चावला जी से बदतमीज़ी से पेश आ रहे हो!!”

आनंद ने संजना के गालों पर अपने उँगलियों को फरते हुए कहा, “हाहाहाहा अल्ले मिली प्याली संजू हाहाहाहा सुन अब तुझे भी बहोत मजा आने वाली है मेरे आगे के बातों को सुनकर….. ग़ौर से सुन मिली संजू बेबी!”

और आनंद चावला साहब के तरफ बढ़ते हुए कहा:

“तू किआ समझ रहा था इतने दिनों से मैं अपनी बेटी को छोड़ता था? हैं? अरे चावला साले में तेरी बेटी को छोड़ता था बाली उम्र से, और तुझको खुद अपनी बेटी को छोड़ने को दिया और उसस्के भाई से भी छुड़वाया मैं ने हाहाहाःहाहा भाई बेहेन की शादी करवाई मैं ने हाहाहाहाहा दोनों बाप और बीटा इस्को छोड़ते हैं और यह चुदवाती है हाहाहाःहाहा!!!”

संजना बहोत ज़ोर से चिल्लाई “सस्शह्ह्हूँउउत्तत्तत्त उउउउउउउपपपपपपप पाआपपणायआ!!!”

आनंद ने और भी ज़ोर से हँस्ते हुए कहा, “कौन सा पापा कैसा पापा? तेरा असली पापा यह है मैं नहीं! मैं ने तो तुझको पाल पास कर बड़ा किया और खूब छोड़ा भी हहहहहहहह!!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………
 
अपडेट 143 आनंद डिस्क्लोसेस आल सीक्रेट्स

संजना बहोत ज़ोर से चिल्लाई “सस्शह्ह्हूँउउत्तत्तत्त उउउउउउउपपपपपपप पाआपपणायआ!!!”

आनंद ने और भी ज़ोर से हँस्ते हुए कहा, “कौन सा पापा कैसा पापा? तेरा असली पापा यह है मैं नहीं! मैं ने तो तुझको पाल पास कर बड़ा किया और खूब छोड़ा भी हहहहहहहह!!!”

अब आगे…….

संजना का लाल चेहरा देखने लायक था उस वक़्त आनंद के बातों को सुनकर. उस्का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था और उस्सको सांसें लेने में तकलीफ होने लगी थी, वो कभी चावला साहब के चेहरे में देखती तो कभी आनंद की और उस ने रोना शुरू कर दिया. चावला साहब संजना को सीने से लगाकर हौसला देने में लगा हुआ था के आनंद ने अपने उसी शैतानी हंसी में कहा,

“किआ हुआ? झटका लगा दोनों बाप बेटी को? हम्म? जिस्म थरथराने लगे अब?”

तो संजना ने उसस्के तरफ देखते हुए रोकर पूछा, “पापा आप सब झूट बोल रहे हो नाह सिर्फ पैसा पाने के लिए? केहदो के सब झूट बोल रहे हो आप ऐसा नहीं हो सकता मैं आप की बेटी हूँ है नाह पापा??”

आनंद ने ज़्यादा ज़ोर से हँस्ते हुए कहा,

“अरे तो किआ फड़क परता है मैं तेरा पापा हूँ या यह? दोनों से शरीर बाँट चुकी हो, दोनों के साथ सोती हो, तो किआ फरक पड़ता है भला? हम्म? एन्जॉय तो दोनों से hi करती हो नाह? हाँ मुझसे बाली उम्र से रगड़ते हुए शुरू किया था और इस्को डायरेक्ट होल दे दिया है नाह हाहाहाहा!”

वैसे hi रट हुए संजना ने कहा, “आप को शर्म अणि चाहिए अपनी बेटी के साथ ऐसे बातें करते हुए पापा!”

आनंद ने वैसे hi शैतानी हंसी हँस्ते हुए कहा, “कैसी शर्म? तुझको शर्म आयी है कभी किसी भी मर्द के साथ जिस्म सेंखते वक़्त? बता तो ज़रा? कौन सी शर्म तुझसे? तेरी समझ में कुछ नहीं आरही है नाह तो सुन सब डिटेल्स में समझाता हूँ, और तू भी सुन चावला मालिक हाहाहाहा मालिक, बहोत मालिक मालिक भोंक चूका हूँ और अब कोई और मुझको मालिक बुलाएगा, अब वो वक़्त आगया है के मुझको मालिक बुलाया जाए!....

तो ग़ौर से सुनों तुम दोनों……

और आनंद चलते हुए चावला साहब के पास गया जो उस वक़्त एक पुतले की तरह सोफे पर बैठा हुआ था जैसे उस्सको एक शॉक लगा हुआ है, उस्का हालत बहोत खराब था उस वक़्त वो कुछ बीते हुए दिनों में खोया हुआ था और आनंद ने बयां जारी रखा…..

“याद है चावला? वो दिन याद है जब मैं तेरा नौकर हुआ करता था हम्म? 19 साल पहले की बात है….. अरे ोये संजू डार्लिंग, यह तेरी माँ को छोड़ता था मेरी ग़ैर हाज़िरी में…. मेरी पत्नी के साथ इस्सके अफेयर था, अपने नौकर की बीवी को छोड़ता था यह…. तेरी माँ बहोत hi खूबसूरत, हॉट और सेक्सी थी, तुझसे भी बहोत ज़्यादा हॉट और सेक्सी थी, फोटो में देखा है नाह? तो उन् दिनों की बात है जब मेरे सेक्स की ऑपरेशन हुआ था. डॉक्टर ने मुझको 15 महीनों के लिए सेक्स करने से मन किया था नहीं तो लुंड की नस पहात जाती meri…to मैं तेरी माँ के साथ शारीरक सम्बद्ध नहीं रख पाटा था उन् दिनों, और यह चावला तेरी माँ की प्यास बुझाता था मगर मुझे कुछ नहीं पता था, मैं तो इस के नौकरी में लगा रहता था और यह तेरी माँ के साथ गुलछर्रे उडाता था…. सिर्फ यह नहीं तेरी माँ ने कई औरों के साथ भी मज़े किये हैं…. मुझको सब बहोत बाद में पता चला था… तू भी बिल्कुल अपनी माँ पर hi गयी है इसी लिए सब के साथ तू भी आसानी से सो जाती hai…kia तू समझती है के मुझे नहीं पता के तू रघु और कितनों के साथ मजा किये हैं? सब पता है मुझे तेरी माँ की खून भी तेरे अंदर बराबर है… एहि सोचकर तो मैं ने तेरे साथ बाली उम्र में hi शुरू किया था, मुझे पता था के अगर तुझ में तेरी माँ जैसी हॉटनेस हैं तो तू भी ज़रूर छुडवाएगी उसी की तरह… इसी का फायदा तो उठाया था मैं ने तुझे पाने को…. और हाँ चावला साहब, उन् दिनों तू अपने ज़मीन बेच बाच कर शहर जाने के तैयारी में लगे हुए थे जब मुझे पता चला के इस्सकी माँ, सावित्री प्रेग्नेंट है. वो 3 महीने की प्रेग्नेंट थी तेरे लिए और मई ने तो उसस्के साथ उस से 10 महीने पहले से सेक्स नहीं किया था तो वो प्रेग्नेंट कैसे हुई? मेरा उस्का झगड़ा हुआ और मैं ने एकांत झापड़ लगाया उससे तो उस्सने सब बक दिया के तू छोड़ता था उसे मेरे पीठ पीछे, और उसस्के पथ में तेरा hi बचा है और वो तुझको बताना चाहती थी, मगर तभी मेरे खोपड़ी में यह सब शैतानी खयालात आगये थे. पता तो नहीं था बेटी होगा या बीटा मगर मैं ने उसी वक़्त सोच लिया था के बचे को पालूंगा मगर आखिर में इस्सके जायदात का हिस्सा तुझसे लेने आऊंगा किसी दिन….

अफ़सोस के इस्को जनम देने के बाद सावित्री मर गयी, अच्छा भी हुआ नहीं तो वो तुझे बता देती के बची तेरी है. मगर मैं ने राज़ छुपाया. इस दिन के लिए. और फिर मैं तेरे एहसानों के टेल डब्बा जो हुआ था, कैसे तुझसे उन् दिनों को बेहेज़ करता? कैसे तुझसे लड़ता, तू ताकतवर था, आमिर था, मालिक था ज़मींदार था, सबके नज़रों में तेरी बड़ी इज़त थी, मैं एक मामूली नौकर था, कोई भी मेरे बातों का यकीन नहीं करता, सब यह समझते के मैं तेरे प्रॉपर्टी में से हिस्सा चाहता हूँ इसी लिए नौटंकी कर रहा हूँ… तो मैं छुप रहा उस वक़्त…..

फिर जब तुमने मुझको यह फार्महाउस गिफ्ट किया और संजना के पैदा होने पर उस्सको वो कीमती नेकलेस देने आया तो मुझे लगा के कहीं तुझको पता नहीं के वो तेरी बची है इसी लिए तू उस्सको इतनी कीमती नेकलेस दे रहा है और यह फार्महाउस दे रहा है… मैं तब डर गया था… मैं सोच रहा था के तुझे पता है के संजना तेरी औलाद है…..

मगर बाद में सोचा के सावित्री फड़फड़ा रही थी तुझे बताने के लिए के वो तेरी औलाद है, मगर मैं ने उस्सको मन kiya…tab सोचा के अगर तुझको पता होता तो सावित्री उतना नहीं तड़पती मरने से पहले तुझे बताने के लिए….. तो मुझे यकीन हुआ के नहीं तुझे कुछ भी नहीं पता क्यूंकि , 3 महीने की प्रेगनेंसी तो नज़र नहीं आती और तबसे लेकर 9तह महीने तक तू बहोत बिजी हो गया था अपने ज़मीन वग़ैरा बेचने और शहर शिफ्ट होने में तो तू उस से बिल्कुल मिला hi नहीं था और मैं नज़र रख रहा tha…to मुझे यकीन था के तुझको कुछ भी नहीं पता… मगर बाद में पूरा यकीन हुआ जब तू यान से चला गया…..”

मैं संजना को अपनी बेटी समझ कर पालने में लग गया…. इस को बहोत प्यार दिया, अफेक्शन दिए, नाज़ों से पाला…. मगर जब यह कोई 11 साल की हुई तो इस में सावित्री की चाबी उभरने लगी और मेरे साथ सोती थी तो मुझको दिखने लगा के इस में भी वही गर्मी है जो इस्सकी माँ में थी….. जिस्म की छुवन, बदन की रागढ बिस्तर पर रातों में उस प्यार को हवस में बदल दिया इस्सके जिस्म से सावित्री की खुशभु आने लगी थी mujhe…aur हमारे बीच तभी से सेक्सुअल सम्बन्ध शुरू हुआ….. हाय कितनी मुलायम थी इस्सकी जिस्म हाय हाय ोये बहोत hi मजेदार बची पैदा किया है तुमने रे चावला!! ाहः! खुद चख कर देख लिया नाह तुमने भी? है नाह बिल्कुल सावित्री की लाजत इस में भी? अरे हाँ तुझको कभी सावित्री नहीं दिखा किआ इस में रे चावला? कभी नहीं बताया इस्को के इस में सावित्री महेक्ति है? हम्म नहीं बताया तुमने? कैसे बताता? तू इस्को यह तो नहीं बता सकता नाह के तू इस्सकी माँ को छोड़ता था! हाहाहाहा!!”

आनंद के इस बयां को सुनते वक़्त संजना ने कई बार अपने कानों को बांध कर लिए अपने हाथों से और चावला के पेशानी से पसीने की बूँदें टपकने लगे जिस्सको उस्सने अपने जेब से रुमाल निकल कर poncha….aur संजना ने टिश्यू लाकर उस्सको दिया….

संजना ने रोना बांध कर दिया था और आनंद को ग़ौर से सुनने लगी थी, और सब सुनते हुए संजना ग़ौर से चावला साहब के चेहरे में देख रही थी, फिर भी उसस्के दिल में चावला साहब के लिए और भी प्यार उभर रहा था और चावला साहब सोच रहा था के वो उस से नफरत करने लगेगी. मगर संजना ने बड़े ज़ोर से अपने बाहों को चावला साहब के गले में डालकर उस्सको अपने बाहों में भरा और उसस्के गालों को चूमा. और कहा, “आप मेरे असली पापा हो हम्म बोलो किआ यह सच है? मेरे पापा?!” और वो ज़ोर से रोने लगी चावला साहब को वैसे hi बाहों में भर कर.

आनंद ने देखते हुए कहा,

“अरे वह बेटी के दिल में अब बाप का प्यार उभरने लगा वाओ!! छुड़वाने के बाद बाप का प्यार जागने लगा? और तेरा किआ हाल है चावला? तेरा खड़ा तो नहीं हो रहा उस तरह से संजना को अपने जिस्म से सत्ता कर? हैं हाहाहाहाहा!!...... अब आगे के बातों को सुनों तुम दोनों……..

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
अपडेट 144 आनंद कॉन्टिनुएस विथ हिज टेल

आनंद ने देखते हुए कहा,

“अरे वह बेटी के दिल में अब बाप का प्यार उभरने लगा वाओ!! छुड़वाने के बाद बाप का प्यार जागने लगा? और तेरा किआ हाल है चावला? तेरा खड़ा तो नहीं हो रहा उस तरह से संजना को अपने जिस्म से सत्ता कर? हैं हाहाहाहाहा!!...... अब आगे के बातों को सुनों तुम दोनों……..

अब आगे……

आनंद ने संजना को गुरर्ते हुए कहा;

“तुझे कुछ हो रहा है या नहीं चावला मुझे तो इससे छोड़ने का बड़ा मैं करने लगा अभी अभी…. साला किआ तुझे पता है के मैं इस्सकी माँ को छोड़ hi नहीं पाया था उन दिनों जब वो प्रेग्नेंट थी? नाह! कुछ नहीं कर पाया साला डॉक्टर ने मन किया हुआ था नाह! डर का के मेरे लुंड का नस पहात जाए और ज़िन्दगी भर के लिए कुछ नाह कर पाउँगा, इस लिए मुझे कण्ट्रोल करना पड़ा था उन् दिनों, हालां के उससे छोड़ने को बड़ा मैं कर रहा था…. सिर्फ 6 महीने बाकी थे मेरे ऑपरेशन के बाद उस के साथ सेक्स करने की और 6 महीने बाद संजना जन्मी और वो मर्डर गयी…. नहीं छोड़ पाया मैं उससे, बिल्कुल भी नहीं छोड़ा उस्सको तेरे छोड़ने के बाद रे!! ….. जब मुझे पता चला के कितने दिनों से मेरे पीठ पीछे तू उस्सको छोड़ने अत था तब तुझे पता है मेरा लुंड खड़ा हो गया था तुझको उसस्के साथ बिस्तर पर सोचकर, मुझे उस्सको तेरे साथ देखने का मैं करने लगा था, मेरे लुंड को खड़ा होना मन था उस वक़्त, मैं डर गया, कहीं मेरा नस नाह पहात jaaye…aur तेरी वजह से मेरा लुंड ाबाहिज हो सकता tha…mahinon तक मेरा लुंड खड़ा होता रहा तुझे इस्सकी माँ के साथ सोच सोच कर…. साला डॉक्टर ने पोर्नहरफिक मूवीज देखने से मन किया था ताके लुंड खड़ा नाह हॉवे, मैं में सेक्स का ख्याल लाने के लिए स्ट्रिक्टली मन किया था डॉक्टर लोगों ने क्यूंकि बिल्कुल प्रेशर नहीं होना चाहिए था लुंड के नसों पर…., मगर तुम ने वो कारनामा किया सावित्री के साथ साथ के मेरा लुंड खड़ा होने लगा था, तेरी वजह से मुझे या मेरे लुंड को कुछ हो सकता था पता है तुझे?! मगर साथ साथ एहसान भी किया था तुमने, के मुझे पता तो चला के मैं फिर से खड़ा हो सकता हूँ उसी वक़्त…. संजना की माँ किआ औरत थी नाह रे चावला? उस्सकी बॉडी 100% संजना जैसे थी नाह? किआ तुमने नोट किया है कभी के संजना की जांघ और गांड पर एक्साक्ट्ली उसी जगह पर कला टिल है जहाँ सावित्री की थी? हम्म? कभी ख्याल किया है तुमने? मैं तो जब संजना बेबी थी उस्सको नहलाता था तभी देख लिया tha…Savitri ने अपना ट्रेड मार्क चोरर दिया था अपने शरीर के टुकड़े पर…. क्यों स्वीटहार्ट सही कह रहा हूँ नाह डार्लिंग, दिखा तो ज़रा वो जांघ पर तेरा कला टिल, दिखा, दिखा नाह पापा को!!....”

और आनंद ने संजना को बाँहों में भर्र के किश किया और उस्सकी ड्रेस को ऊपर करना चाहा मगर संजना ने उस्सको पुश किया और वापस चावला साहब के गॉड में जा बैठी. और चावला ने संजना को अपने बाहों में भरते हुए उस्सकी पेशानी को चूमा और खामोश किया. तब संजना ने आनंद से पूछा,

“मगर जीन दिनों चावला जी हमारे यहाँ आये थे पहली बार तब तो आप को नहीं पता था के वो यहाँ आने वाले हैं?? और फिर……??”

संजना ने इतना hi कहा था के बीच में आनंद ने शैतानी हंसी हँस्ते हुए कहा;

“हाहाहाहाहा तुम किआ समझती हो के तेरा पापा यहाँ खुद आया था? अरे नहीं वो सब मेरा प्लान किया हुआ था उस्सको यहाँ तक लाने को और तुझसे मिलने के liye…sab मेरा बनाया हुआ प्लान था…. मेरा प्लान काम कर गया और वो तुम से मिल गया…. जानना चाहती हो वो सब कैसे हुआ था? हम्म तो सुनों! चावला जी तुमको सुजय याद है? वही तेरा एक्स सेक्रेटरी? हैं? याद आया? हाहाहाहा!! उस्सको मैं ने भेजा था तेरे यहाँ नौकरी करने के लिए और तेरे सभी इनफार्मेशन मुझ तक पहुंचाने के लिए. सुजय हमारे कंपनी में मुलाज़िम थी, वही सेक्रेटरी का hi काम करती थी जब मैं ने तेरी कंपनी में सेक्रेटरी के लिए अर्ज़ी पढ़ा. तब मैं ने उस्सको तेरे यहाँ अप्लाई करने को कहा ज़्यादा पैसे की लालच देकर…. उस्सको मेरा एक प्यादा बनाया मैं ने… और तुमने आरव के लिए लड़की तलाशना शुरू किया जो तुमने सुजय को बता दिया और उस्सने मुझे बताया, तब मैं समझ गया के तुमको यहाँ तक लाना होगा ताके तू संजना को देखे क्यों के मुझे पक्का यकीन था के इस्को देखते hi तू इस्को आरव के लिए चोसे करेगा क्यूंकि तुझको इस में सावित्री की चाबी दिखेगा और तू खुद इस्को पाना चाहेगा….. तेरे राग राग से वाकिफ जो था मैं हाहाहाहा और बिल्कुल वही हुआ….. हाँ मैं ने सुजय को सिर्फ तुम्हें हमारे शहर तक लाने को कहा था क्यूंकि मुझे पक्का यकीन था के अगर तू इस शहर तक आया तो अपना फार्महाउस तक तो कैसे भी करके आएगा, और संजना को ज़रूर देखेगा इस्सके ज़िम्मा मेरा था…. और तू इधर आया और बाकी मैं ने चाल चली संजना को तेरे सामने भेज कर…. क्यों संजू डार्लिंग प्लान एहि था नाह के तू इस से मिले, इस्को पहचाने और बाकी जो हुआ सब सही हुआ…..! वो सब मेरा मुकरना इस्सकी शादी से शुरू में इंकार करना वग़ैरा सब मेरा नाटक था ताके तू इस्को किसी भी कीमत पर अपनाये…. हाँ मैं ने जान बुझ कर छूठ दे रखा था संजना को तेरे साथ, तू इस्को छोड़ने लगेगा आरव से पहले यह नहीं सोचा था मैं ne…mujhe पता था के खून की फुंकार एक दूसरे को अपने तरफ ज़रूर खींचेगा, मुझे पक्का यहकीन था के तुम दोनों एक दूसरे के तरफ एक चुम्बक की तरह चिपकोगे, इस्सके मुझे पूरा यकीन था क्यूंकि मैं ने पढ़ा हुआ था इस बारे में…. इस्को इंग्लिश में ग्स कहते हैं, मतलब जेनेटिक सेक्सुअल अट्रैक्शन. तबू है….. बहोत सारे ऐसे रिलेशनशिप हैं दुन्या में जहाँ भाई बेहेन बचपन से बिछड़े हुए होते हैं और जब जवानी में मिलते हैं एक दूसरे से तो सेक्सुअली अत्त्रक्ट होते हैं एक दूसरे से और सेक्स कर बैठते hein…maa और बेटे के साथ और बाप और बेटियों के साथ भी ऐसा बहोत हुआ है, गूगल पर सर्च करके देख लेना हज़ारों की तादात में ऐसे केसेस भरे हुए हैं दुन्या भर में.. मैं ने एक बाप बेटी की कहानी पढ़ी जो रियल हैं. दोनों ने अपने देश में एक साथ जीने की, शादी करने की और बचे पैदा करने की अर्ज़ी दिए हुए हैं कोर्ट में में क्यूंकि इन्सेस्ट रिलेशनशिप मन है उस देश में…. तो उस देश को चोरर कर वह दोनों उस देश में गए जहाँ इन्सेस्ट पर कोई रुकावट नहीं है…. वहां ग्स एंटर होता है और कोर्ट उन् दोनों को साथ रहने की मंज़ूरी देती है…. दोनों बात बेटी चुदाई करते हैं….. बचपन में दोनों बिचार गए थे, माँ, बेटी को लेकर कहीं और जीने चली गयी थी, और बाप किसी और के साथ कहीं और रहने लगा था. मगर 20 साल बाद बाप बेटी मिले और एक दूसरे के तरफ आकर्षित हुए और चुदाई शुरू हो गयी दोनों के बीच और बिचारणा मुश्किल हो gaya…donon एक दूसरे को इतना पसंद करते थे के एक दूसरे के बिना जीना ना मुमकिन हो गया tha…aaj दोनों एक साथ रहते हैं दोनों के बचे भी हैं एक या दो नहीं 5 बचे हैं बाप बेटी के!!! हाहाहाहा!!! यह सब पढ़ कर मुझे यकीन हो गया के जब तू संजना से मिलेगा तो वो खून की फुंकार ग्स तुम दोनों को एक दूसरे के तरफ खींचेगा और तुम दोनों ज़रूर मिलोगे….. मगर मैं ने सोचा था के शायद जब यह तेरी बहु बन जायेगी तब अपने घर में बाद में तू अपनी बहु को छोड़ना शुरू करेगा यह नहीं पता था के आरव से शादी करवाने से पहले खुद इस्को छोड़ने lagega…khoon की फुंकार बहोत जबरदस्त था के तुम दोनों से इंतज़ार hi नहीं हुआ और चुदाई शुरू कर दिए पहले hi तुम दोनों ने वूऊऊ!! बिल्कुल सही लिखा है साइकोलोजिस्ट वालों ने जिनको इस रिश्ते के बारे में बेहतर मालूमात हैं!

चावला साहब और संजना बिल्कुल खामोश सुन रहे थे आनंद को. दोनों के बोलती बिल्कुल बांध थे. शॉक में थे दोनों मगर सही बात यह थी के दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे चुम्बक की तरह और दोनों के दिल में एक दूसरे के लिए बहोत प्यार था, बल्कि अब प्यार बहोत ज़्यादा स्ट्रांग था और एक दूसरे से दूर होने का बिल्कुल मैं नहीं था…. संजना का तो मैं कर रहा था के चावला साहब के जिस्म के अंदर घुस कर कहीं छुप जाए, और वही फीलिंग उस वक़्त चावला साहब को हो रहा था के वो संजना को अपने दिल की गहराई में कहीं छुपा ले और आनंद के सामने नहीं आने दे…..

चावला साहब खड़ा हुआ, संजना को अपने सीने से लगाए हुए, संजना ने उस्का एक बाज़ू थमा हुआ था जिस वक़्त वो खड़ा हुआ और खुद अपने सर को उनके काँधे पर रखा हुआ था आनंद के तरफ देखते हुए, और चावला ने कहा, “आनंद अब तुझको जो उखाड़ना है तू उखाड़ ले, हम चलते हैं… एक पैसा नहीं मिलेगा तुझे बता देता हूँ और कभी भी मैं यहाँ नहीं आने वाला अब और नाह hi संजना को तेरे पास आने दूंगा…. और वैसे जो कुछ भी तुमने मुझे बताया इस्सके किआ सबूत है तेरे पास? तू कैसे साबित करेगा के संजना मेरी बेटी है? हो सकता है के जो कुछ तुमने अभी कहा सब झूट भी हो!! हो सकता है संजना खुद तेरी बेटी है मगर तू यह सब मेरे पैसे ऐठने के लिए कह रहा है….. मैं चलता हूँ और फिर कभी मिलने की कोशिश मत करना मुझसे या संजना से!”

आनंद उन् दोनों के बीच खड़ा होते हुए और रोकते हुए कहा,

“रुको साहब इतनी जल्दी भी किआ है, प्रूफ चाहिए आप को? अरे आज की दौर में सब कुछ सही मिल जाता है, आप अपना डीएनए टेस्ट करवा लो….. पैसे वाले हो झट से रिजल्ट मिल जाएगा के तेरा डीएनए और संजना की डीएनए एक है यह नहीं? रिजल्ट खुद कहेगा के तुम बाप बेटी हो….. है हिमत? तो डीएनए टेस्ट करवा के देखलो तब कहना के किस्को प्रूफ चाहिए मुझे या तुझे….”

चावला साहब आनंद को धक्का देते हुए घर से निकलने लगा संजना को अपने बाहों में भरे हुए पर आनंद बोलता गया उनके कार तक चलते हुए,

“अगर आप ने मुझको 10 करोड़ नहीं दिल वाया तो मैं आप की ऑफिस में आकर सबको बता दूंगा के संजना आप की खून है, आप की बेटी है, मैं आप के घर आकर आरव को भी बता दूंगा, विवान और आप के बहु को भी बता दूंगा…. सुना आप ने मुझे 10 करोड़ देदो मैं किसी को ज़िन्दगी भर कुछ नहीं बाटूंगा…. 8 दिन का वक़्त देता हूँ आप को मुझे 10 करोड़ देना hi पड़ेगा, आप को सोच लो, बेइज़त होना है सोसाइटी में या 10 करोड़ देकर आराम से और मज़े से जीना है संजना के साथ? अगर यह बात फेल गयी तो आप की खदान तीतर बितर हो जाएगी, आप पर लोग थूकेंगे, आप का बड़ा बीटा, आप की बड़ी बहु, आप की पोती सब आप से नफरत करने लगेंगे, संजना को भी धित्कारेंगे सब, आप दोनों सुसाइड करने की काबिल हो जाओगे सोच लो चावला साहब, संजना तुम्ही कुछ समझाओ अपने बाप को, केहदो दिमाग़ से काम लें…..”

आनंद चिल्लाता रहा मगर संजना और चावला कार में बैठ गए और चावला साहब ने कार स्टार्ट की और वहां से ड्राइव करते हुए निकल पड़े……..

चावला साहब ड्राइव कर रहे थे, बिल्कुल खामोश ख्यालों में डूबे और संजना ने अपना सर उनके गॉड में रख दिया और अपने बाहों को उनके कमर में कस लिया…. चावला साहब ने एक हाथ संजना के सर के बाल पर फर्र्ना शुरू किया, और कुछ दूर जाकर, एक सुनसान जगह पर ब्रेक लगाया…..

संजना उठी और उनको अपने बाहों में भर लिया, और अपने मुंह को संजना ने चावला साहब के मुंह में दिया और दोनों पागलों की तरह किश करने लगे जैसे पुअरना आशिक थे दोनों….. चावला साहब का हाथ संजना के जिस्म पर फरने लगे, लाड टपकने लगे थे दोनों के मुंह से, एक अजीब सी कशिश थी, एक प्यास जैसी थी दोनों के बीच, एक डर भी था, एक खौफ्फ़ जैसा भी फील हो रहा था, लगता था दोनों उस तरह से किश करते हुए उस डर और खौफ्फ़ को मिटाने की कोशिश में लगे हुए थे….. उस वक़्त सेक्स की भूक तो नहीं थी मगर दोनों के जिस्म एक दूसरे के जिस्म में घुलना चाहते थे किसी भी तरह, जल्द hi दोनों हांफने लगे और अचानक दोनों के ेंखों से ेंसुओं का धार बहना शुरू हुआ…… दोनों एक दूसरे को बाहों में भर कर ज़ोरों से रोने लगे, कसके पकड़े हुए थे दोनों एक दूसरे को और दो छोटे बच्चों की तरह ज़ोरों से फुट फुट कर रोने लगे…..

और कुछ देर बाद अपने ेंखों को पोंछते हुए संजन ा ने कहा,

“पापा किल तहत बास्टर्ड!! किल हिम नाउ!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………. (2220 वर्ड्स)
 
अपडेट 145 संजना ास्क्स अबाउट हेर मदर

चावला साहब का हाथ संजना के जिस्म पर फरने लगे, लाड टपकने लगे थे दोनों के मुंह से, एक अजीब सी कशिश थी, एक प्यास जैसी थी दोनों के बीच, एक डर भी था, एक खूफ जैसा भी फील हो रहा था, लगता था दोनों उस तरह से किश करते हुए उस डर और खूफ को मिटाने की कोशिश में लगे हुए थे….. उस वक़्त सेक्स की भूक तो नहीं थी मगर दोनों के जिस्म एक दूसरे के जिस्म में घुलना चाहते थे किसी भी तरह, जल्द hi दोनों हांफने लगे और अचानक दोनों के ेंखों से ेंसुओं का धार बहना शुरू हुआ…… दोनों एक दूसरे को बाहों में भर कर ज़ोरों से रोने लगे, कसके पकड़े हुए थे दोनों एक दूसरे को और दो छोटे बच्चों की तरह ज़ोरों से फुट फुट कर रोने लगे…..

और कुछ देर बाद अपने ेंखों को पोंछते हुए संजन ा ने कहा,

“पापा किल तहत बास्टर्ड!! किल हिम नाउ!”

अब आगे…….

जब संजना ने वो बात कही तो चावला साहब हैरान संजना के चेहरे में देखते हुए सोचा के संजना ग़ुस्से में हैं आनंद के व्योहार को लेकर इसी लिए उस्सने ऐसा कहा और उस्सको और भी ज़ोर से बाहों में कसके कहा,

“No स्वीटहार्ट, ऐसा नहीं कहते. उस्सने तुमको पाल पास कर बड़ा किया है. उस्सने दूसरी शादी नहीं की. उस्सने तुम्हारा ख्याल रखा, कैसे भी हो पालने वाला जनम देने वाला से बड़ा होता है, याद rakhna…abhi उस्सको पैसों की ज़रुरत है इसी लिए वो भाउक्ला गया है, मेरे ख्याल से वो पछतायेगा और माफ़ी मांगेगा…. कुछ दिनों उस्सको उस्सकी हालत पर चोरर देते हैं तब सोचेंगे किआ करना है, कैसे इस मामले को निपटना है….. तुम ज़्यादा मत सोचो इस बारे में अभी!”

संजना: “no आप उस्सको नहीं जानते, मैं उस्सको बहोत अछि तरह से पहचानती हूँ आखिर मेरा बाप था नाह वो? उसस्के राग राग से वाकिफ हूँ मैं. वो बहोत लालची है और कुछ भी कर सकता है….. वो सच में आप के ऑफिस या घर आकर सबको सब कुछ बता सकता है वो है वैसा आप मेरा यकीन करो!”

चावला साहब कुछ ख्यालों में फिर गम हो गए थे संजना को वैसे hi बाहों में भरे हुए और संजना ने उसस्के चेहरे में देखते हुए कहा,

“अब किआ हुआ? किश सोच में डूबे हुए हो आप?!”

चावला साहब के ेंखों से बहते हुए ेंसुओं को देख कर संजना ने उससे पोंछते हुए फिर से सवाल किया तो चावला साहब संजना के गाल को चूमते हुए सिसकते आवाज़ में कहा,

“तुम मेरी बेटी हो और किआ किआ किया मैं ने तुम्हारे साथ, धित्कार है मुझ पर!”

संजना ने बड़े आराम से कहा,

“ोफो पापा तो किआ हुआ? हम अपने रिश्ते को वैसा hi रखेंगे…. हम दोनों के बीच कोई चेंज नहीं होने वाला, ी लव यू. ी रियली लव यू…. अब पापा बुला रही हूँ आप को, फिर भी मेरे अंग अंग आप को चाहता है मैं चाहती हूँ के हम दोनों के बीच सब कुछ वैसा hi बना रहे जैसे पहले था……. आप क्यों उल्टा सोचने लगे अब? मुझे कोई फरक नहीं पड़ता रिश्ता पहचान कर, आप प्लीज अब मुझसे कहीं दूर मत होना मैं सेहेन नहीं कर पाऊँगी…….”

चावला साहब हैरानी से संजना के चेहरे में घूर्णे लगे और संजना ने कहा, “चलो हम उस पार्क में चलते हैं जहाँ आप गए थे उस बार जब मैं ड्राइविंग सीखने गयी थी…. वहां आराम से खुली हवा में बात karenge…chaliye नाह पापा!!”

और चावला साहब ने फिर कार स्टार्ट किया और दोनों उस पार्क में पहुंचे और एक बेंच पर बैठकर एक दूसरे को बाहों में लिए, संजना ने चावला साहब के गालों पर हलके से हाथ फरते हुए कहा,

“देखिये, मैं इतने दिनों से उस्सको अपने पापा समझ कर अपने साथ सेक्स करने दे रही थी है नाह? तो मतलब मैं अपने पापा के साथ शारीरिक सम्बन्ध रखती थी okay? तो बिल्कुल वैसे hi आप के साथ वही रिलेशनशिप क्यों नहीं रख सकती? आईटी इस थे शामे नाह? आप मेरे ससुर भी हो और पापा भी तवो इन ओने हीहीहीहीहीही!!”

चावला साहब ने संजना को अपने सीने पर दबाते हुए सोचा के संजना कितनी स्ट्रांग है के ऐसे मुश्किल हालात में भी वो कितनी आसानी से यह बातें कह गयी….

अस्सल में बात यह थी के संजना का प्यार इतना स्ट्रांग था चावला साहब के लिए के वो उस प्यार को खोना नहीं चाहती थी, चाहे ग़लत हो मगर उसस्के लिए चावला साहब के करीब रहना, उसस्के आग़ोश में रहना, उस से प्यार करना और उंनका प्यार पाना बहोत ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट था, तो संजना इस लिए उस रिश्ते को वैसा hi कायम रखना चाहती थी हमेशा के लिए. वो नहीं चाहती थी के अब बाप बेटी बन कर सिर्फ बाप बेटी की तरह रहे, वो चाहती थी के शारीरिक सम्बन्ध वैसे hi बरकरार रहे जैसे शुरू से थी दोनों में… क्यूंकि उन् दोनों में शुरुवात तो आकर्षित होने से hi हुआ था, दोनों एक दूसरे के तरफ सेक्सुअली hi अत्त्रक्ट हुए थे, और संजना की जिस्म को यह मंज़ूर नहीं था के वो चावला साहब के जिस्म से अलग रहे….. क्यूंकि शुरुवात हो चुकी थी अब उस्सको रोकना नामुमकिन था संजना के लिए…… फिर संजना ने कहा,

“अभी अभी हम दोनों ने कार में कितने पशनातेली किश किया नाह? हम्म किया के नहीं? तो वो किआ था? सब कुछ जान्ने के बावजूद हम ने क्यों और कैसे एक दूसरे को उस तरह से इतना पशनातेली किश किया? हालां के हमको पता चल गया के हम बाप बेटी हैं फिर भी हम ने एक दूसरे को क्यों वैसे किश किया मुंह में जीब चूस्ते हुए? यह हम दोनों की बॉडी की मांग थी नाह पापा? हम अब इस्को रोक नहीं सकते हैं…. यह अपने आप होता रहेगा, वे फील अत्त्रक्टेड तो एच इतर, आवर बॉडी नीड तो गेट मेल्टेड ईंटो एच इतर इतस आवर नीड, हमारी ज़रुरत बन चुकी है यह….. मैं तो नहीं रोक पाऊँगी खुद को, किआ आप रह पाओगे मुझसे सेक्स किये बिना?”

इतना कहा और दोनों फिर एक दूसरे को पशनातेली किश करने लगे एक दूसरे को ज़ोर से बाहों में भर कर…. तो साबित हो गया के यह दोनों तो जुड़ा नहीं हो सकते हालां के दोनों को पता चल गया के दोनों बाप बेटी हैं!

किश के दौरान चावला साहब का हाथ संजना के बूब्स को प्रेस किया तो संजना ने उनके हाथ को अपने बूब पर दबाते हुए किश रोकते हुए कहा, “हम्म्म देखा नाह? आप को भी चाहिए नाह पापा? आप का हाथ मेरे बूब पर क्यों गए अपने आप? बाप कभी बेटी की बूब दबाता है किआ? हीहीहीही!!! यह हम नहीं रोक सकते अब पापा, इस्को ऐसे hi चालू रखेंगे हम okay?!!” चावला साहब मुस्कुराया और कहा, “तुम बहोत स्ट्रांग हो के ऐसे हालत में भी सब कुछ इतना ैसिलय ले लेते हो, ी ऍम प्राउड ऑफ़ यू! हालात का ऐसे hi सामना करते हैं डार्लिंग, ी ऍम रियली प्राउड ऑफ़ यू माय लव.”

और संजना ने अपने सर को उनके सीने पर रख कर आराम से पूछा, तो किआ आप डीएनए टेस्ट करवाओगे?” तो चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “उस्सकी ज़रुरत नहीं क्यूंकि वो सच कह रहा था…” तो संजना ने उनके सीने पर अपने उँगलियों को फरते हुए पूछा,

“आप मम्मी से प्यार करते थे? अब मुझे आप के और उन् के बारे में बताओ…. वो भी बहोत हॉट और सेक्सी थी नाह? वो आप से बहोत एन्जॉय करती होगी नाह? मेरी तरह? मैं उसी पर गयी हूँ किआ सच में? वो कह रहा था कुछ देर pehle…ab आप बताओ अपना वर्शन मुझे प्लीज, ी वांट तो हेअर!”

चावला साहब ऊपर आसमान को देखते हुए, थोड़ा मुस्कुराते हुए बीते दिनों को याद करते हुए कहा,

“हम्म्म प्यार हो गया था तेरी मम्मी से उन् दिनों…. बेबी मैं वैसा बिल्कुल नहीं था, मेरा बहोत इज़त था गाओं में, मैं किसी के तरफ देखता भी नहीं था, लोग मेरा इज़त करते थे, हमारा बड़ा नाम था, मेरे दादा पर दादा के ज़माने से हम ज़मींदार थे और सेंकरों लोगों के घर चलता था हमारे यहाँ काम करके….. तेरी मम्मी सच में बेहद खूबसूरत और अच्छी थी…. उन् दिनों तेरे पापा, मतलब आनंद का एक ऑपरेशन होने वाला था और वो अपने फुफु के यहाँ गया हुआ था किसी दूर के शहर में क्यूंकि इस शहर में तब हॉस्पिटल नहीं था, वो दूर के शहर गया हुआ था कोई 3 या 4 महीनों के लिए. वहीँ से ट्रीटमेंट करता था और हॉस्पिटल में एडमिट हुआ था. तब वह लोग हमारे गाओं में एक छोटी सी झौंपड़ी जैसे मकान में रहते थे. जब आनंद की शादी हुई थी तभी मैं ने कहा था के उस्सकी पत्नी इतनी खूबसूरत है के लगता था कोमल के फूल कीचड़ में आ गयी है, तेरा पापा उसस्के लायक बिल्कुल भी नहीं था, पता नहीं किश ने उन् दोनों की बात चलाई थी के आनंद को वो मिल गयी थी….”

संजना बहोत ध्यान से सुन रही थी और पूछा, “तो किआ आप तभी से मम्मी को चाहने लगे थे जब वो शादी करके आयी थी आप के गाओं में?”

चावला साहब ने रिप्लाई किया, “अरे नहीं बिल्कुल भी नहीं – वो तो हर किसी के जुबां पर एहि बात थी के इस लंगूर के हाथ कैसे चाँद का टुकड़ा लग गया….. बात तो तब शुरू हुई जब आनंद ने उस्सको अकेला चोर्रा और अपने फुफु के शहर चला गया उस ऑपरेशन के लिए…. तो मुझे उस्का तनख्वा देने जाना पड़ा तेरी मम्मी को नाह! तब हमारी पहली मुलाक़ात हुई और बात चित…. गाओं के औरतें उन् दिनों गाओं के ट्रेडिशनल ड्रेस पेहेनते थे जो केवल एक टॉप और एक स्कर्ट जैसा होता था और उस में तेरी मम्मी इतनी खूबसूरत दिखती थी के किआ बताऊँ मैं तुमको….. वो बहोत hi गोरी थी, उस्सकी कमर का रंग और टांगों और जाँघों के रंग सीधे मेरे ेंखों में समा गए जिस वक़्त मैं ने उस्सको अपने आँगन में देखा उस रोज़…. अब क्यूंकि आनंद गाओं में नहीं था और वो अकेली थी तो कुछ जवान मर्द उसस्के घर के इर्द गिर्द घुमा करते थे मौके के तलाश में थे उस्सको पाने के liye….wo भी जवान अकेली औरत थी और इतनी हॉट थी के कोई भी उसस्के तरफ आकर्षित हो जाता tha….mujhko बाद में पता चला के कुछ लोग और उसस्के पीछे लगे हुए थे उन् दिनों मगर जब मेरा आना जाना हुआ वहां तो सब ग़ायब हो गए….”

संजना की इंटरेस्ट और ज़्यादा बढ़ने लगी अपनी मम्मी के बारे में सुनकर और दिलचस्पी से कहा चावला साहब के चेहरे को चूमते हुए, “हीहीहीहीही, आप मुझे मम्मी से अपनी पहली रोमांटिक एनकाउंटर बताओ नाह, आप कैसे उसस्के करीब गए, उस्सने कैसे आप को करीब आने दिया सब कुछ डिटेल में बताओ नाह मुझे प्लीज, किआ वो भी आप से मेरी तरह प्यार करने लगी थी? किआ वो हिचकिचाई थी या आसानी से आप के बाहों में आगयी थी, सब बताओ नाह मुझे ी वांट तो क्नोव आल इन डिटेल्स….. आप दोनों ने खूब मज़े लुटे होंगे नाह?”

तो बे कॉन्टिनोएड…….
 
अपडेट 146 संजना वरीड एंड स्ट्रेस्ड

संजना की इंटरेस्ट और ज़्यादा बढ़ने लगी अपनी मम्मी के बारे में सुनकर और दिलचस्पी से कहा चावला साहब के चेहरे को चूमते हुए, “हीहीहीहीही, आप मुझे मम्मी से अपनी पहली रोमांटिक एनकाउंटर बताओ नाह, आप कैसे उसस्के करीब गए, उस्सने कैसे आप को करीब आने दिया सब कुछ डिटेल में बताओ नाह मुझे प्लीज, किआ वो भी आप से मेरी तरह प्यार करने लगी थी? किआ वो हिचकिचाई थी या आसानी से आप के बाहों में आगयी थी, सब बताओ नाह मुझे ी वांट तो क्नोव आल इन डिटेल्स….. आप दोनों ने खूब मज़े लुटे होंगे नाह?”

अब आगे…..

चावला साहब ने संजना को अपने और उस्सकी माँ के बारे में सब कुछ बताया के किश तरह से वो उसस्के करीब हुए थे और कैसे सेक्स हुआ दोनों के बीच और कितने महीनों तक दोनों सेक्सुअल रिलेशनशिप में बंधे रहे.

फिर चावला साहब ने समझाया के क्यूंकि उन्ही दिनों को वो ज़मीन बेचने और शहर में नए ज़मीन और घर बनाने में लग गए थे तो धीरे धीरे उस्सकी माँ से दूर होता गया और तब तक आनंद वापस भी आगया था दूसरे शहर से तो चावला साहब ने सावित्री से मिलना बांध कर दिया. और हाँ वो फार्महाउस उस्सने सावित्री के लिए hi दिया था आनंद को. चावला साहब नहीं चाहते थे के सावित्री वैसे झौंपड़े में रहे इसी लिए अपने फार्महाउस को आनंद के नाम कर दिया था ताके सावित्री को अच्छा घर मिले रहने के लिए……

संजना सब कुछ आराम से सुन रही थी के उस्सकी मोबाइल पर एक मैसेज आया. मैसेज आनंद ने भेजा था और उस में लिखा था, “तेरी माँ बहोत सारे आदमियों के साथ छुड़वाई थी उन् में से वो रघु भी है… यकीन नहीं तो पूछ लेना रघु से और रघु के दोस्त भी हैं साथ में…… रंडी थी तेरी माँ, चावला उस से दूर हुआ तो दूसरों के साथ ेश करने लगी थी, और चावला से मिलने से पहले भी कई से छुड़वाई थी समझ ले किसी थी, तू भी वैसा hi है बिल्कुल, बिल्कुल अपनी माँ पर hi गयी है तू, सब से चुदवाती फिरती है तू भी, रंडी की औलाद रंडी कहीं की!! अपने बाप से बोल के मुझे 10 करोड़ देदे वार्ना तेरा जीना मुश्किल कर दूंगा उस घर में याद रखना तू! आरव को पता चला के तू अपने बाप से भी चुदवाती है और मुझसे भी तो वो तुझे चोरर देगा, घर से बाहर निकल देगा, अगर मुझे पैसा नहीं मिला तो मैं आरव और विवान को सब कुछ बता दूंगा, सुना तुमने!”

चावला साहब ने पूछा, “किस्सका मैसेज है स्वीटहार्ट?! तो संजना मोबाइल को चावला साहब को देते हुए रोने लगी!”

चावला ने मैसेज पढ़ा और कहा, “यह तो कमीनेपन पर उतर आया है आनंद, साला इतना कमीना होगा मैं ने नहीं सोचा था पैसे के लिए इतना गिर्र सकता है आदमी? पागल हो गया है वो…”

संजना ने ेंसू पोंछते हुए कहा,

“मैं ने आप से कहा नाह के वो बहोत लालची है और मुझे अच्छी तरह से पता है के वो कितना कमीना है…. मैं उस्सको बहोत अछि तरह से जानती हूँ पापा, एक hi रास्ता है उस्सको मारना hi पड़ेगा नहीं तो वो सच में मेरा और आप का जीना मुश्किल कर देगा….. किल हिम पापा किल हिम!!”

चावला साहब: “ओह no तुम क्यों ऐसा सोच रही हो? इस बात को अपने दिमाग़ से nikaalo…zaroorat पड़ी तो मैं उस्सको 10 करोड़ दे दूंगा, खरीद लूंगा उस कंपनी को उसके लिए, तुम फ़िक्र मत करो वो ऐसा कुछ नहीं करेगा…. प्लीज टेक आईटी इजी नाह!”

और दोनों वहां से निकले और घर वापस पहुंचे. यह तय हुआ दोनों में के यह बात घर में किसी को भी नहीं पता चलना चाहिए, नाह आरव को नाह सान्वी को. मगर संजना ने कहा के वो सान्वी के बहोत क्लोज हैं तो वो समझ जाएगी के कोई परेशानी है और हो सकता है के वो सान्वी से कह दें… मगर चावला साहब ने उस्सको सख्त मन किया यह बात बताने के लिए.

घर के अंदर दाखिल होते hi सान्वी ने डायरेक्ट पूछा, “किआ हुआ क्यों बुलाया था तेरे पापा ने दोनों को एक साथ? कोई मसला हुआ है किआ?” संजना मुड़कर वापस चावला साहब को देखते हुए कहा, “आप hi बतादो, मैं फ्रेश होने जा रही हूँ…..” तो चावला साहब ने कहा, “अरे कोई मसला नहीं वो आनंद के कंपनी में कुछ प्रॉब्लम चल रहे हैं कंपनी बंद होने वाला है इसी के बारे में बात करनी थी उससे…..”

संजना ऊपर चली गयी अपने कमरे में और चावला साहब काउच पर बैठ गए और सान्वी उनके पास बैठ कर उनके सर के बालों में अपनी उँगलियाँ फरते हुए कहा, “आप और संजना दोनों परेशां दिख रहे हैं इसी लिए पूछ रही हूँ मुझसे तो आप नहीं छुपाइये, अगर कोई बात है तो शेयर कीजिये मुझसे!” मगर संजना ऊपर अपने कमरे के दरवाज़े को थोड़ा सा खोल कर निचे दोनों के बातों को सुन रही थी….. उस्सको पता था के सान्वी से बात छुपाना मुश्किल है…..

चावला साहब ने सान्वी का हाथ थामते हुए कहा, “बड़ी थकान महसूस हो रही है ऐसे hi सर पर हाथ फेरती रहो नाह मेरी जान!” तो सान्वी रोमांटिक होते हुए उनके सीने से लग कर कहती है,

“हम्म्म अच्छा जी, अभी अभी अपनी संजना के साथ घूम कर आरहे हो, उसस्के साथ रोमांस नहीं किया किआ जो मेरे साथ करने का मूड बन गया हम्म? क्यों जी?!”

चावला साहब ने सान्वी को अपने गॉड में बिठाते हुए कहा, “ऐसी बात नहीं है डिअर, सच में थकान फील हो रहा है…..” और दोनों एक लम्बे किश में खो गए काउच पर बैठे हुए, और ऊपर से संजना ने झांक कर देखा और मुस्कुराते हुए वापस अपने कमरे में घुस गयी.

संजना बहोत परेशान थी आनंद के बातों और मैसेज को लेकर. वो खुद से बड़बड़ाने lagi….”kamaal है जिस ने भी मेरे मम्मी के साथ सेक्स किया उन्ही लोगों ने मेरे साथ भी सेक्स किया, पापा, दूसरा पापा, रघु और पता नहीं कौन कौन….. जिस जिस ने भी मम्मी के साथ सोया मेरे साथ भी soya….kia यह सब प्लांड था? किआ उस पापा ने जान बुझ कर बदला लिया था? किआ उस्सने जान बुझ कर मुझको रघु के साथ करवाया था और इस पापा से भी? अगर हाँ तब तो बहोत बड़ा शैतान है आनंद… मेरे ख्याल से तो उस्सको मारना hi चाहिए मगर साहब जी क्यों नहीं मारना चाहते उसे?!”

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उस रात को संजना आरव से दूर दूर रह रही थी. आरव के लाख पूछने पर संजना ने आरव को बुसस कहा के उसस्के सर में दर्द है….. और एक बार रात के कोई बारह बजे संजना अपनी कमरे से निकली और चावला साहब के कमरे में गयी. उस वक़्त विवान वापस नहीं आये थे ऑफिस से. सान्वी अपने कमरे में थी मगर सोई नहीं थी और उस्सको पता चला जब संजना चावला साहब के कमरे में गयी तो. सान्वी ने सोचा के दोनों एन्जॉय कर रहे होंगे इसी लिए संजना उनके पास गयी. मगर सान्वी सोचने लगी के आरव के घर में मौजूद होने की बावजूद संजना की इतनी हिम्मत थी के आरव को कमरे में चोरर कर चावला साहब के साथ सेक्स करने चली गयी….!!

चावला साहब के कमरे में संजना ने चावला साहब से कहा,

“पापा मैं आरव के साथ नहीं सो पा रही हूँ… उस में मुझे अब मेरा भाई नज़र ारः है….. ी can’t लेट हिम टच में, it’s ा वीयर्ड फीलिंग! अब मैं किआ करूँ?!”

चावला साहब ने लाख समझाया के जैसे उसस्के साथ रहती है वैसे hi आरव के साथ भी रहे, आनंद की बातों को भूल जाए और कोम्प्रोमाईज़ करने की कोशिश करें!!

संजना ने कहा, “पापा आप के साथ बात अलग है, आप के साथ कोई वैसा फीलिंग नहीं होता मुझे आप मुझे कहीं भी छुए, किश करे या सेक्स करे मुझको अच्छा लगता है मगर अब आरव के साथ सेक्स करने के लिए मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं फील होता, मैं hi नहीं करता, दिमाग़ में सिर्फ मेरा भाई अत है…. मैं खुद को उस्सकी बेहेन फील करती हूँ…… ी कन्नोत लेट हिम टच माय बॉडी नाउ… हे इस माय बरोथेर दमन आईटी!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 147 संजना इन मेन्टल तुर्मोइल

उस रात को संजना ने काफी वक़्त चावला साहब के कमरे में उसस्के साथ hi गुज़ारा. घंटों बाद अपने कमरे में गयी जब आरव गहरी नींद में सोया हुआ था. आरव से पीठ कटरके सोई वो सुबह तक और जिस वक़्त आरव ऑफिस जा रहा था तब संजना नार्मल बेहवे कर रहोइ थी उसस्के साथ जैसे कुछ हुआ hi नहीं.

मगर सान्वी यह सोचती रही के रात को वो चावला साहब के साथ हमबिस्तर हुई थी, और आरव के जाने के बाद सान्वी उस्सकी तंग खिंचाई में लग गयी के रात को ससुर के साथ खूब एन्जॉय किया उस्सने. मगर संजना की खामोश और बेरुखी तरह वाली व्योहार से सान्वी को लगा के कुछ गड़बड़ है तो उस्सने सवाल करना शुरू किया संजना से के क्यों वो उस तरह से बेहवे कर रही है उसस्के साथ.

संजना उस्सको सब कुछ बताना चाहती थी, बड़े ज़ोर से उस्सको मैं था सान्वी से सब शेयर करने की मगर क्यूंकि चावला साहब ने बताने से इंकार किया था तो वो बताने से झिझक रही थी और सान्वी से बुसस इतना कहा के उस्का मूड कुछ ठीक नहीं है, बाद में उस्सको बताएगी.

चावला साहब घर से निकले दोनों सान्वी और संजना को यह बता कर के वो किसी नयी कंपनी की डील डिसकस करने के बारे में कहीं जा रहा है, तब संजना ने उनको अलग उनके कमरे में बात करने गयी के किआ वो आनंद से मिलने जा रहे हैं उस्सकी कंपनी के डील के लिए, तो चावला साहब ने उस से कहा के नहीं वो उस से मिलने तो नहीं जा रहा मगर उस कंपनी के बारे में जानकारी के लिए जा रहा है बाद में आकर उस्सको सब कुछ बताएगा.

और दिन के कोई 11 बजे संजना भी घर से निकली. सान्वी ने टोक तक नहीं किया क्यूंकि उस्सकी आदत थी कार लेकर घूमने जाना. हमेशा वो हाईवे पर घूमती थी, दूर दूर तक जाती थी नए रास्तों का पता करने क्यूंकि उस्सको लॉन्ग ड्राइव करना बहोत पसंद था शुरू से hi. 500 से 1000 किलोमीटर्स ड्राइव कर लेती थी दूर तक निकलते हुए अक्सर.

दीप्ति को स्कूल बस में चौररने के बाद सान्वी घर के काम काज में लग गयी थी और आरव का फ़ोन आया दिन के बारह बजे जिस्सको सान्वी ने लिया और दोनों में रोमांटिक बातें चालू हुए. आरव ने बताया सान्वी को के कल रात संजना कुछ बदली बदली सी थी और कुछ नहीं करने दिया उस्सको…… तो दिल hi दिल में सान्वी सोचने लगी के क्यों संजना ने आरव से सेक्स नहीं किया मगर चावला साहब से करने गयी थी उसस्के कमरे में रात को…. सान्वी को भी बात कुछ अटपटा लगा. आरव ने सान्वी से कहा के वो बात चित के दौरान संजना से पता लगाने की कोशिश करे अगर कोई बात है तो, और सान्वी ने खुद आरव से कहा के आज सान्वी खुद संजना की बेहेवियर को बदले हुए देख रही थी और उसस्के बारे में संजना बात नहीं करना चाहती थी यह कहकर के उस्का मूड ठीक नहीं और सान्वी ने आरव को दिलाशा दिलाया के ऐसा होता शायद सच में उस्सकी मूड कुछ ठीक नहीं होगी और सान्वी ने आरव से कहा के सब ठीक हो जाएगा….

आरव फ़्लर्ट करने लगा सान्वी के साथ और कहा के कोई बात नहीं क्यूंकि अगर संजना नहीं तो सान्वी तो है उस्सको खुश करने के लिए. सान्वी उस्सको डांटने लगी के के ऐसे बातें फ़ोन पर नहीं किया करते तो आरव ने कहा के वो घर पर ारः है और सान्वी के साथ लव मेकिंग करेगा….. सान्वी के कहा के नहीं संजना वापस आ सकती है फिर भी आरव ने ज़िद किया और चला गया सान्वी के साथ सेक्स करने…..

दीप्ति स्कूल गयी हुई थी तो आरव ने सान्वी को अकेला पाया घर में क्यों के फ़ोन पर सान्वी ने कह दिया था के चावला साहब भी घर पर नहीं है तो दोनों ने खूब एन्जॉय किया क्यूंकि रात को आरव ने कुछ भी नहीं किया था संजना के saath….donon में एक प्यास सी थी और मैं भरके सेक्स किया दोनों ने और सान्वी ने बहोत आराम और ख़ुशी दिया आरव को.

और आखिर में आरव वापस ऑफिस चला गया सान्वी के साथ खूब एन्जॉय करने के बाद. सान्वी को भी बहोत ख़ुशी और संतुष्टि मिली आरव से सेक्स के बाद…. वो खुद मुस्कुरा रही थी और सोच रही के घर में दो मर्दों की प्रेमिका बन चुकी है, ससुर और देवर की प्रेमिका है और पति की पत्नी…. फिर हँस्ते हुए सान्वी ने खुद से कहा, “अरे संजना भी तो है, उस्सकी किआ हूँ? उस्सकी भी प्रेमिका हूँ या वो मेरी प्रेमिका है? “हे राम कभी भी नहीं सोचा था के एक जवान औरत के साथ भी एक दिन यह सब करुँगी….. ओह माय गॉड!”

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चावला साहब उधर अपने बिज़नेस पार्टनर्स के ऑफिस में आनंद वाले कंपनी की मालूमात लगा रहे थे. काफी डिसकशंस के बाद पता चला के वो कंपनी घाटे पर हैं और उस्का कोई ख़ास प्रॉफिट मेकिंग मार्जिन नहीं दिख रहे थे, जिसस्ने भी उस्सको ख़रीदा घाटे में hi जाएगा वो. तो चावला साहब समझ गया के अगर आनंद को 10 कोर दे भी दिया तब भी वो कंपनी लोस्स hi करेगा. वो चलने वाला नहीं क्यूंकि उस से भी बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट्स लगे हुए हैं ालीमुनियम इंसट्रीज़ में जीन के कारोबार बहोत बेहतर चल रहे हैं, आनंद उन् से कपट नहीं कर पाएगा!

चावला साहब ने सोच लिया के अब आनंद को यह सब समझाना पड़ेगा. उस्सने फाइल्स बनाये, चार्ट्स बनाये आनंद को समझाने के लिए और अपने ऑफिस गए सब पेपर वर्क्स फ़िनलिसे करने के लिए जिस्सको लेकर वो आनंद को दिखाने और समझाने जाने वाले थे.

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और उधर संजना पहुंची आनंद के घर.

आनंद घर पर hi था, क्यूंकि कंपनी तो बंद पड़ा था इन् दिनों वो घर पर hi रहता था और यह संजना को पता था.

जब संजना वहां पहुंची तो आनंद उस्सको देख कर बहोत खुश हुआ और उस्सको बाँहों में भरके प्यार किया. और उस्सको अपने कमरे में लगाया एन्जॉय करने के लिए. थोड़ा सा ड्रिंक लिया हुआ था उस्सने.

संजना हमेशा की तरह एक सेक्सी ड्रेस में थी जिस में उस्सकी क्लीवेज और जांघें दिख रहे थे और आनंद का खड़ा हो गया उस्सको देखते hi. बरसों से आदत तो थी hi दोनों को हमबिस्तर होने की, तो आनंद के लिए यह मामूली बात थी मगर किआ संजना भी वही चाहती थी उस वक़्त?

जब आनंद ने संजना की मुंह को अपने मुंह में लेना चाहा तो संजना ने अपने मुंह हत्ता लिया तो आनंद ने कहा, “क्यों अब सिर्फ अपने बाप का मुंह चाटने में मज़ा अत है? जब पता चल गया के मैं तेरा बाप नहीं तो मैं अजनबी हो गया किआ बेबी?!”

संजना उसस्के बाहों से निकल कर अलग हुई और कहा,

“आप को शर्म नहीं आती ज़रा सा भी? इतने सालों से मेरे जिस्म को नोचते रहे, मैं भी बाप समझ कर सब कुछ करने देती रही, मैं सिर्फ 11 साल की थी जब आप ने सब कुछ शुरू किया था, प्यार करती थी मैं आप se…ab सोचती हूँ के इतने सालों तक आप ने मेरा रपे किया, अभी अगर पुलिस में जाकर रपे की चार्ज लगाऊं आप पर तब किआ कहोगे?!”

आनंद बीएड पर बैठते हुए हंससने लगा और कहा,

“हाहाहाहा पुलिस में किआ कहोगी? के मुझसे चुदवाती थी 11 साल की उम्र से? और फिर पुलिस केस करके चावला फॅमिली को बदनाम करोगी? कोर्ट केस होगा तो आरव को और बाकी सबको पता चलेगा, यह सब भी सोच लिया तू ने हैं? बता!”

संजना बहोत ग़ुस्से में थी और कहा,

“जो मैसेज तुमने भेजा है मैं ने संभल कर रखा हुआ है, मेरी माँ के बारे में इतने गंदे बातें कहे हैं तुमने? वो तुम्हारी पत्नी थी, उसस्के बारे में इतने गंदे शब्द कैसे कहा तुमने बेशरम कहीं का, चुदवाती थी सब से और मैं भी उसी की तरह सब से चुदवाती हूँ एहि कहा नाह तुमने? हाँ चुदवाती हूँ और किश ने मुझे वैसा बनाया? तुम ने कुत्ते, तुमने मुझको वैसा बनाया…. रंडी कहा था मेरी माँ को और मुझे भी अभी दिखाती हूँ तुझे ठहर!!”

आनंद ज़ोरों से हँस्ते हुए बीएड पर आराम से लेट गया और अपने कपडे उतारने लगा संजना को छोड़ने के लिए. तब तक संजना किचन में गयी और एक चाकू लेकर कमरे में वापस आयी, चाकू को अपने पीठ के पीछे करके बीएड पर आनंद के पास गयी, आनंद ने सोचा अब वो बीएड पर लेटने के लिए तैयार हो गयी और आराम से नंगा लेट कर बाहों को फैला दिया संजना को अपने बाहों में लेने के लिए….. मगर संजना एक भूके शेरनी की तरह उसस्के ऊपर झपटी और चाकू को 5 या 6 बार आनंद के सीने में भोंकती गयी…….

तो बे कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन नेक्स्ट अपडेट…..
 
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